शिमला : सरकार के शिक्षण संस्थानों को बंद करने के फैसले पर SFI राज्य कमेटी ने दी प्रतिक्रिया
हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना के बढ़ते मामलो को देखते हुए प्रदेश में सभी शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया। इस फैसले को लेकर SFI राज्य कमेटी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। SFI राज्य कमेटी ने कहा कि भविष्य को अपाहिज बनाने की कवायद बहुत पहले शुरू हो चुकी थी जब नवउदारवादी नीतियों के तहत 1991 के बाद शिक्षा जैसे बुनियादी अधिकार को निजी हाथों में सौंपते हुए उसे महंगा कर आम जनता की पहुंच से दूर करने की कोशिश की गई थी। आज तो सिर्फ महामारी को इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले शिक्षण संस्थान बंद किये जाते है और नई शिक्षण पद्धति ऑनलाइन माध्यम से शुरू की जाती है। जिसमे पूरा देश जानता है कि कौन कितना उस पढ़ाई से जुड़ पाया। स्मार्टफोन का न होना, नेटवर्क की समस्या, आदि कई कारणों से ऑनलाइन पढ़ाई सम्भव नही हो पाई। लेकिन महामारी के दौरान शिक्षण संस्थानो के बंद होने के कारण यह मजबूरी थी कि अभिभावकों को अपने बच्चों को बैंकों से ऋण लेकर स्मार्टफोन खरीदकर इस जदोजहद से झूझना पड़ा। लेकिन इस नए सत्र में विभिन्न नेटवर्क कम्पनियों द्वारा डेटा टेरिफ में की गई बेतहाशा वृद्धि से अब इस ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ने का सपना भी टूटता नजर आ रहा है। जहां सरकार और प्रशासन को छात्रों व उनके परिवारों की बदहाल आर्थिक स्थिति को समझते हुए मुफ्त शिक्षा, छात्रवृति का समय पर आबंटन कर सभी छात्रों को प्राथमिकता पर वैक्सीन लगाकर बेहतर व सुरक्षित शैक्षणिक माहौल मुहैया कराना चाहिए था वहीं सरकार अपने राजनीतिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता देती नजर आ रही है, परिणामस्वरूप एक बार फिर से शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया गया है । माहमारी का खतरा सबके लिए है लेकिन इसे जिस रूप में परिभाषित करने या इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है वह सरकार की शिक्षा के प्रति दिवालिया समझ को भी दर्शाता है। सरकार के इस फैसले का SFI हर जिला स्तर पर विरोध करेगी।
