कांगड़ा के मंदिर काठगढ़ में चल रही हैं शिव महापुराण कथा, 14 अगस्त को होगा समापन
मंदिर काठगढ़ में चल रही छठे दिन की शिव महापुराण कथा में आज जोगिंदर शास्त्री महाराज ने अपनी अमृत वाणी से कथा का आरम्भ किया। उन्होंने राजा हिमाचल की दो पुत्रियों एक मां गंगा और दूसरी मां पार्वती के बारे में बताया कि दोनों भगवान शिव की उपासना करती थी और उन्हें पति के रुप में अपनाना चाहती थी। उन्होंने कहा कि मां गंगा का नाम लेने से 100 बार स्नान करने से 1000 पापों का निवारण होता है। इस शिव पुराण में वर्णित है कि मां गंगा के पास जब दुर्भाषा ऋषि का आगमन हुआ तो मां गंगा द्वारा उनका स्वागत नहीं किया गया, जिससे उनके द्वारा उन्हें श्राप दिया गया कि आप एक नदी के रूप में बहती रहोगी और ऋषि को जब पता चला कि इस छल के पीछे का कारण मां पार्वती है तो उन्होंने फिर मां गंगा को वरदान दिया कि गंगा नदी को भगवान शिव अपने सिर पर धारण करेंगे और मां पार्वती को श्राप दिया कि भले ही आपकी शादी शिव से हो पर आपकी संतान शिव के अंश से नही होगी। इसीलिए भोले के अंश से मां गंगा शिव पुत्र कार्तिकेय की उत्पति हुई और इस अंश को अग्निदेव द्वारा कबूतर का रुप धारण करके अपनी चोंच में लेकर गंगा में डाला। इस वजह से मां पार्वती ने कबूतर जाति को भी श्राप दिया। उन्होंने कहा कि सात वर्ष की आयु में ही भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति बनाया गया और इन्होंने सनातन धर्म की रक्षा करते हुए तारकासुर व अन्य राक्षसों को मारा। इसके साथ ही सभा के प्रेस सचिव सुरेंदर शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि कथा रोजाना सुबह 12 से 2:30 बजे तक चलती है और सभा द्वारा भक्तो के लिए प्रसाद व लंगर की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि कथा का समापन 14 अगस्त को होगा।
