सोहडा में नर्वदेश्वर महाराज मंदिर में पांचवे वार्षिक भंडारे का किया गया आयोजन
.ग्राम पंचायत सोहडा़ में नर्मदेश्वर मन्दिर परिसर में सत्संग का भी आयोजन किया गया।जिसमे ,श्री1008 महंत अमृतलता कुंडे लालोबाल ने अपनी अमृतवाणी द्वारा सत्संग किया।जिसमे उन्होंने गुरु और शिष्य की महिमा बारे बताया कि गुरु अगर नर्क को भी भेजे तो उसमे भी भलाई समझनी चाहिए। जैसे की भगवान राम व उनके भाई लक्ष्मण को जब गुरु विश्वामित्र ने उनको शिक्षा, दीक्षा व मुनियों की रक्षा के लिए अपने साथ ले जाना चाहा , तो राजा दशरथ ने उन्हें तुरंत मना कर दिया,कि मै आपके साथ जा सकता हू। परंतु राम भगवान आपके साथ नहीं जा सकते।क्योंकि इन्होंने अब अयोध्या की राजगद्दी संभालनी है। उसी वक्त राज गुरु वशिष्ट ने राजा दशरथ को राम व लक्ष्मण को उनके साथ भेजने के लिए कहा तो राजा ने उनको विश्वामित्र के साथ भेज दिया , इसलिए उन्होंने कहा कि गुरु आदेश सत्य वचन होना चाहिए और इसे सिरोदार करना चाहिए, इस प्रकार के उन्होंने और भी सुंदर सुंदर प्रवचनों से प्रभु प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया। इसमें हजारों की संख्या में स्थानीय प्रभु प्रेमियों ने लंगर के रूप में प्रसाद ग्रहण किया।
