शिमला : ट्रैफिक टूरिस्ट एवं रेलवे विभाग विभाग द्वारा तीन दिवसीय ट्रेनिंग संपन्न
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला
हिमाचल प्रदेश के ट्रैफिक टूरिस्ट एवं रेलवे विभाग विभाग द्वारा तीन दिवसीय ट्रेनिंग का आयोजन पुलिस विभाग के अन्वेषण अधिकारियों के लिए करवाया गया। इस प्रशिक्षण में हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों से 35 अन्वेषण अधिकारियों ने भाग लिया। इस ट्रेनिंग का आयोजन 20 से 22 फरवरी तक किया गया। आज इस कोर्स का समापन डीआईजी टीटीआर गुरुदेव शर्मा द्वारा किया गया। इस कोर्स के दौरान भिन्न विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे इस अवसर पर एआईजी संदीप धवल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने भी प्रतिभागियों को विभिन्न विषयाें पर ट्रेनिंग दी।
मुख्यतः इन निम्नलिखित विषयों में दिया प्रशिक्षण
डिजिटल एविडेंस कैसे एकत्र करना है तथा अदालत में कैसे पेश करना है।
आधुनिक उपकरण एल्को सेंसर लेजर स्पीड मीटर लेजर स्पीड गन का उपयोग कैसे करना है।
iRAD एवं e-DAR का उपयोग कैसे करना है।
एमवी एक्ट एवं ट्रैफिक रूल्स एवं रेगुलेशन की भी जानकारी दी गई।
पुलिस अन्वेषण अधिकारी के दायित्व एवं मौका पर एकत्र भीड़ से किस तरह क्या का व्यवहार किया जाए एवं तुरंत रोड को अन्य वाहन के लिए कैसे खोला जाए पर विस्तृत जानकारी दी गई।
सड़क देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह विकास में तभी सहयोग दे सकती है यदि सड़क मार्ग सभी के लिए सुरक्षित हो। विश्व भर में हर वर्ष 1.35 मिलियन से अधिक मौतें होती हैं, जिसमें भारत का 12 प्रतिशत हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश में भी सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा काफी चिंतनीय है। हालांकि भारतवर्ष मैं ट्रैफिक हादसों को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नए मोटर वाहन नियम में जुर्माना जुर्माने की राशि बढ़ाई गई तथा वाहन सुरक्षा के उद्देश्य से नए इंजीनियरिंग मानक लागू किया गया।
हिमाचल प्रदेश का पिछले 5 वर्ष का दुर्घटनाओं का आंकड़ा विश्लेषण करने पर पाया गया कि हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा 12720 दुर्घटनाएं, खुले क्षेत्र में 8570 दुर्घटनाएं हुई। 65 प्रतिशत दुर्घटनाएं 40 वर्ष से कम उम्र के चालकों द्वारा की गई। 26 प्रतिशत दुर्घटनाएं शाम 6.00 से 9.00 बजे के बीच हुई है। पैदल यात्रियों की सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं ऊना, बद्दी एवं पांवटा साहिब में अधिक पाई गई हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस सड़क सुरक्षा को लागू करने के लिए कृतसंकल्प है। सभी जनसाधारण को नियमों की पालना का अनुसरण स्वयं से शुरू करना चाहिए, ताकि अन्य लोगों को निशा मिसाल पेश करें एक जिम्मेदार सड़क सुरक्षा योद्धा बने।
