शिमला :सीटू जिला कमेटी सोलन का दो दिवसीय 15वां जिला सम्मेलन हुआ संपन्न
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला
सीटू जिला कमेटी सोलन का दो दिवसीय 15वां जिला सम्मेलन जीएस रिजॉर्ट्स अमरावती बद्दी में संपन्न हुआ। सम्मेलन में 29 सदस्यीय जिला कमेटी का गठन किया गया। मोहित वर्मा को अध्यक्ष, एन डी रणौत को महासचिव, दलजीत सिंह को वित्त सचिव, ओमदत्त शर्मा, बलबीर चौहान, अनिल कौशल, महेंद्र सिंह को उपाध्यक्ष, सुरेश कुमार, मनीष कुमार, जोगिंद्र सिंह को सचिव, अमर चंद गजपति, संजय पंवर, राकेश कुमार, निर्मल कौर, संतोष, बिमला, स्वर्चा, निशा, प्रताप, गुरदेव, खेमराज चौहान, मनदीप, प्रमोद, इंद्रपाल व गणपत को कमेटी सदस्य चुना गया। सम्मेलन का उद्घाटन सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व समापन राज्य उपाध्यक्ष जगत राम ने किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार मजदूरों के कानूनों पर हमले कर रही है। इसी कड़ी में मोदी सरकार ने मजदूरों के चबालिस कानूनों को खत्म करके चार लेबर कोड बनाने, सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश व निजीकरण के निर्णय लिए हैं।
उन्होंने ओल्ड पेंशन स्कीम बहाली, आउटसोर्स नीति बनाने,स्कीम वर्करज़ को नियमित कर्मचारी घोषित करने, मनरेगा मजदूरों के लिए 350 रुपए दिहाड़ी लागू करने आदि विषयों पर केंद्र व प्रदेश सरकार की मज़दूर व कर्मचारी विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है व मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। पिछले सौ सालों में बने चौबालिस श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं अथवा लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 26 अक्तूबर 2016 को समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स,ठेका,दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है। केंद्र व राज्य के मजदूरों को एक समान वेतन नहीं दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के मजदूरों के वेतन को महंगाई व उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ नहीं जोड़ा जा रहा है। सातवें वेतन आयोग व 1957 में हुए पन्द्रहवें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार उन्हें इक्कीस हज़ार रुपये वेतन नहीं दिया जा रहा है।
नव निर्वाचित जिलाध्यक्ष मोहित वर्मा व महासचिव एन डी रणौत ने कहा कि 4 सितम्बर को शिमला में होने वाले मिड डे मील राज्य सम्मेलन में सोलन जिला से बीस प्रतिनिधि,10 - 11 सितम्बर को पालमपुर में होने वाले आंगनबाड़ी राज्य सम्मेलन में जिला से पंद्रह व 1 - 2 अक्तूबर को मंडी में होने वाले सीटू राज्य सम्मेलन में जिला से सत्रह प्रतिनिधि भाग लेंगे। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग की है कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन इक्कीस हज़ार रुपये घोषित किया जाए। केंद्र व राज्य का एक समान वेतन घोषित किया जाए। आंगनबाड़ी ,मिड डे मील, आशा व अन्य योजना कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। मनरेगा में दो सौ दिन का रोज़गार दिया जाए व उन्हें राज्य सरकार द्वारा घोषित साढ़े तीन सौ रुपये न्यूनतम दैनिक वेतन लागू किया जाए। श्रमिक कल्याण बोर्ड में मनरेगा व निर्माण मजदूरों का पंजीकरण सरल किया जाए। निर्माण मजदूरों की न्यूनतम पेंशन तीन हज़ार रुपये की जाए व उनके सभी लाभों में बढ़ोतरी की जाए। कॉन्ट्रैक्ट,फिक्स टर्म,आउटसोर्स व ठेका प्रणाली की जगह नियमित रोज़गार दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार समान काम का समान वेतन दिया जाए। सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश व निजीकरण बंद किया जाए। चबालिस श्रम कानून खत्म करके मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड) बनाने का निर्णय वापिस लिया जाए। सभी मजदूरों को ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, नियमतित रोज़गार, पेंशन व दुर्घटना लाभ आदि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। भारी महंगाई पर रोक लगाई जाए। पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस की कीमतें कम की जाएं। रेहड़ी, फड़ी तयबजारी क़े लिए स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए।
