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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना के पात्रता नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग की युवतियां इस योजना के तहत मिलने वाली 1500 रुपये मासिक सहायता राशि की पात्र नहीं रहेंगी। सरकार द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के बाद इस आयु वर्ग की हजारों युवतियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है। बताया जा रहा है कि योजना को अधिक लक्षित और वित्तीय रूप से व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से पात्रता मानदंडों में बदलाव किया गया है। पहले 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी पात्र युवतियों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा था, लेकिन अब लाभार्थियों की श्रेणी को सीमित कर दिया गया है। इसके चलते कई परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद हो जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना का लाभ उन वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। हालांकि, विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार की तैयारी कर रही युवतियों के लिए यह राशि सहारा साबित हो रही थी। नए नियम लागू होने के बाद प्रभावित युवतियों और उनके परिवारों में निराशा देखी जा रही है, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि अन्य पात्र महिलाओं को योजना का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा।
हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2027 का प्रथम चरण मंगलवार, 16 जून से शुरू हो गया है। इस चरण के तहत राज्यभर में हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना का कार्य 15 जुलाई 2026 तक चलाया जाएगा। जनगणना कर्मी घर-घर जाकर मकानों, परिवारों और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। पहली बार इस प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिससे आंकड़ों का संग्रहण और सत्यापन अधिक तेज और पारदर्शी होगा। अधिकारियों के अनुसार इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवार की संरचना, पेयजल, बिजली, शौचालय, रसोई गैस सहित विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पहलुओं से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर में गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। जनगणना विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सर्वेक्षण दलों को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित हो सके। जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। पहला चरण 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा। जनगणना के आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के आवंटन और विभिन्न कल्याणकारी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार साबित होते हैं। इसलिए इसे देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक कवायदों में से एक माना जाता है।
NEET परीक्षा में गड़बड़ियों पर केंद्र सख्त, भारत में टेलीग्राम पर अस्थायी रोक का बड़ा फैसला
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर लगातार सामने आ रहे कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को ऐसे कई डिजिटल नेटवर्क और चैनलों की जानकारी मिली थी, जिनके माध्यम से परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री, प्रश्नपत्र और अन्य संवेदनशील दस्तावेज साझा किए जाने की आशंका जताई गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाया जा सके और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह अस्थायी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। इस बीच लाखों छात्र, अभिभावक और टेलीग्राम उपयोगकर्ता इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
शिमला। बहुप्रतीक्षित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू राज्य का पक्ष रखेंगे। परियोजना से जुड़े बिजली उत्पादन, जल बंटवारे और वित्तीय भागीदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। किशाऊ बांध परियोजना राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देश्यीय योजना है, जिसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब सहित सात राज्यों की हिस्सेदारी है। यमुना नदी पर प्रस्तावित यह बांध मुख्य रूप से पेयजल और सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया जा रहा है। परियोजना से हरियाणा और उत्तर प्रदेश को बड़े पैमाने पर पानी उपलब्ध होगा, जबकि बिजली उत्पादन भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि चूंकि परियोजना का प्रमुख लाभ जल आपूर्ति के रूप में अन्य राज्यों को मिलने वाला है, इसलिए केंद्र सरकार को इसके बिजली और जल दोनों घटकों की लागत का पूर्ण वित्तपोषण करना चाहिए। राज्य सरकार का यह भी आग्रह है कि परियोजना से होने वाले विद्युत उत्पादन का 100 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बीच समान रूप से 50-50 प्रतिशत के अनुपात में बांटा जाए। बैठक में हिमाचल प्रदेश पौंग और भाखड़ा बांध विस्थापितों के लंबित पुनर्वास मामलों को भी उठाएगा। इसके अलावा, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े बकाया भुगतान के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा के साथ चल रहे विवाद के समाधान के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग भी रखी जाएगी। सूत्रों के अनुसार हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान ने परियोजना की विद्युत लागत में हिस्सा वहन करने की इच्छा जताई है। हालांकि इन राज्यों ने इसके बदले हिमाचल प्रदेश के हिस्से के जल में अतिरिक्त भागीदारी की मांग रखी है। दिल्ली और राजस्थान अपने प्रस्ताव जल संसाधन मंत्रालय को लिखित रूप में भेज चुके हैं, जबकि हरियाणा ने अतिरिक्त जल उपलब्धता के मुद्दे के समाधान के बाद इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि 22 मई 2026 को केंद्रीय जल संसाधन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इन मुद्दों पर चर्चा हुई थी। उस बैठक में हिमाचल प्रदेश के रेजिडेंट कमिश्नर और एचपीपीसीएल के अधिकारियों ने राज्य का पक्ष रखा था। अब गृह मंत्री स्तर पर होने वाली बैठक को परियोजना के भविष्य और राज्यों के बीच हितों के संतुलन के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है। किशाऊ बांध परियोजना पर होने वाला फैसला न केवल हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा और जल अधिकारों को प्रभावित करेगा, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास की दिशा भी तय करेगा।
शिमला। हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प को बड़ी पहचान मिली है। राज्य के तीन प्रमुख पारंपरिक उत्पादों—रणसिंघा, काष्ठ कला और हस्तनिर्मित गलीचे को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि नाबार्ड और स्थानीय कारीगरों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जिससे हिमाचल के इन विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है। जीआई टैग मिलने के साथ ही इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को कानूनी संरक्षण मिलेगा और इनके नाम व स्वरूप की नकल पर रोक लगेगी। इससे प्रदेश के हजारों कारीगरों, शिल्पकारों और उत्पादक समूहों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन उत्पादों की अलग पहचान बनेगी, जिससे उनकी मांग और बाजार मूल्य में वृद्धि हो सकती है। रणसिंघा हिमाचल की लोक एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण वाद्य यंत्र है, जबकि काष्ठ कला राज्य के मंदिरों और पारंपरिक स्थापत्य की अनूठी पहचान मानी जाती है। वहीं हस्तनिर्मित गलीचे ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन हैं। जीआई टैग से इन पारंपरिक कलाओं और उत्पादों के संरक्षण तथा संवर्धन को नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मान्यता से न केवल स्थानीय शिल्प को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं को भी पारंपरिक हस्तकलाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के साथ-साथ प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
हिमाचल नगर निकाय चुनाव: सुप्रीम कोर्ट से सरकार को राहत, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में विधायक डाल सकेंगे वोट
हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों—में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें इन चुनावों के दौरान विधायकों के मताधिकार पर रोक लगाई गई थी। शीर्ष अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों के विधायक फिलहाल नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में होने वाले चुनावों में मतदान कर सकेंगे।। मौजूदा स्थिति में प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषदों के साथ-साथ अर्की नगर पंचायत में भाजपा को केवल एक पार्षद की बढ़त हासिल है। वहीं, इन सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कांग्रेस विधायक करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विधायकों को मतदान का अधिकार मिलने से इन निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के समीकरण बदल गए हैं। कई स्थानों पर दोनों दलों के बीच मतों की संख्या बराबर होने की संभावना बन गई है, जिसके चलते चुनाव परिणाम टॉस के जरिए तय होने की नौबत भी आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह रही कि राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि विधायकों के मताधिकार का सीधा असर कई शहरी निकायों में सत्ता के संतुलन पर पड़ सकता है।
प्रदेश के 11 जिलों में आज पंचायत प्रधान-उपप्रधान लेंगे शपथ, कांगड़ा में 18 जून को होगा समारोह
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा को छोड़कर राज्य के अन्य 11 जिलों में नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को आयोजित किया जाएगा। कांगड़ा जिले में यह कार्यक्रम 18 जून को होगा, जहां मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu स्वयं शपथ दिलाएंगे। मुख्यमंत्री 16 जून को दिल्ली में निर्धारित बैठक के चलते सोमवार के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे। प्रदेश सरकार ने पहले सभी 3,754 ग्राम पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों के लिए एक साथ शपथ ग्रहण का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन बाद में कांगड़ा जिले के लिए अलग से 18 जून की तिथि निर्धारित की गई। शेष 11 जिलों में आयोजित होने वाले समारोहों में राज्य सरकार के मंत्री और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। चंबा में विधानसभा अध्यक्ष Kuldeep Singh Pathania शपथ ग्रहण करवाएंगे, जबकि ऊना में उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri यह जिम्मेदारी निभाएंगे। सोलन में स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय मंत्री Dhani Ram Shandil, कुल्लू में कृषि एवं पशुपालन मंत्री Chandra Kumar तथा लाहुल-स्पीति में उप मुख्य सचेतक Keval Singh Pathania नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को शपथ दिलाएंगे। इसी तरह सिरमौर में उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री Harshwardhan Chauhan, किन्नौर में राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री Jagat Singh Negi और शिमला में शिक्षा मंत्री Rohit Thakur शपथ ग्रहण समारोह की अगुवाई करेंगे। शिमला जिले की 441 पंचायतों के प्रधान और उपप्रधान होटल Peterhoff में दोपहर 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में शपथ लेंगे। मंडी में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Anirudh Singh, बिलासपुर में तकनीकी शिक्षा एवं नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री Rajesh Dharmani तथा हमीरपुर में आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री Yadvinder Goma शपथ दिलाएंगे। जिला स्तरीय समारोहों में सांसदों, विधायकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को भी प्रोटोकॉल के तहत आमंत्रित किया गया है। सभी नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। किस जिले में कौन दिलाएगा शपथ? जिला मुख्य अतिथि चंबा कुलदीप सिंह पठानिया ऊना मुकेश अग्निहोत्री सोलन डॉ. धनी राम शांडिल कुल्लू चंद्र कुमार लाहुल-स्पीति केवल सिंह पठानिया सिरमौर हर्षवर्धन चौहान किन्नौर जगत सिंह नेगी शिमला रोहित ठाकुर मंडी अनिरुद्ध सिंह बिलासपुर राजेश धर्माणी हमीरपुर यादविंदर गोमा
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