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Sai International School organised a havan on its 14th foundation day.
In Education

साई इंटरनेशनल स्कूल में 14वें स्थापना दिवस पर हवन का आयोजन

साई इंटरनेशनल स्कूल में 14वें स्थापना दिवस पर हवन का आयोजन सोलन, 19 अक्टूबर: साई इंटरनेशनल स्कूल में आज 14वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर विद्यालय परिसर में हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की सुख-समृद्धि, उन्नति एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आहुतियाँ अर्पित की गईं। हवन समारोह में विद्यालय के चेयरमैन श्री रामिंदर बावा, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के अधिवक्ता श्री विजय शर्मा, डॉ. भाविका बावा तथा विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मीरा गुप्ता उपस्थित रहे। इस पावन अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने भी हवन में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुए हवन से विद्यालय परिसर भक्तिमय एवं सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया। सभी ने विद्यालय की निरंतर प्रगति, सफलता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। हवन के उपरांत सभी उपस्थित लोगों एवं विद्यार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया। विद्यालय का 14वां स्थापना दिवस संस्था की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कारों एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अवसर विद्यालय की अब तक की उपलब्धियों को याद करने तथा भविष्य में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने के संकल्प को दोहराने का भी रहा। कार्यक्रम का समापन सुख, शांति, समृद्धि एवं विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। साई इंटरनेशनल स्कूल में 14वें स्थापना दिवस पर हवन का आयोजन सोलन, 19 अक्टूबर: साई इंटरनेशनल स्कूल में आज 14वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर विद्यालय परिसर में हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की सुख-समृद्धि, उन्नति एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आहुतियाँ अर्पित की गईं। हवन समारोह में विद्यालय के चेयरमैन श्री रामिंदर बावा, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के अधिवक्ता श्री विजय शर्मा, डॉ. भाविका बावा तथा विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मीरा गुप्ता उपस्थित रहे। इस पावन अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने भी हवन में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुए हवन से विद्यालय परिसर भक्तिमय एवं सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया। सभी ने विद्यालय की निरंतर प्रगति, सफलता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। हवन के उपरांत सभी उपस्थित लोगों एवं विद्यार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया। विद्यालय का 14वां स्थापना दिवस संस्था की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कारों एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अवसर विद्यालय की अब तक की उपलब्धियों को याद करने तथा भविष्य में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने के संकल्प को दोहराने का भी रहा। कार्यक्रम का समापन सुख, शांति, समृद्धि एवं विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

Questions raised again over Virbhadra Singh's neglect, public expressed displeasure with MLA Rohru
In Politics

वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर फिर उठे सवाल, MLA रोहड़ू से जनता ने जताई नाराजगी

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की अनदेखी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू दौरे के दौरान कार्यक्रम के बैनर और पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं होने और भाषणों में उनका नाम नहीं लिए जाने को लेकर कांग्रेस के भीतर नाराजगी सामने आई है। इस मामले ने रोहड़ू में उनकी राजनीतिक विरासत और सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रोहड़ू दौरे के बाद बढ़ी नाराजगी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 2 और 3 अक्टूबर को रोहड़ू और रामपुर विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया था। इस दौरान कार्यक्रमों के बैनर और पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं दिखाई दी। साथ ही, कार्यक्रमों में उनके योगदान का उल्लेख नहीं होने पर भी सवाल उठे। इस मामले पर पूर्व सांसद एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी साढ़े चार साल ही हुए हैं, ऐसे में उन्हें इतनी जल्दी कैसे भुलाया जा सकता है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह का हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में उनके योगदान को याद करना और नई पीढ़ी को उनके बारे में बताना पार्टी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्यक्रम के आयोजकों ने वीरभद्र सिंह की तस्वीर वाले बैनर और पोस्टर नहीं लगाए थे, तो स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता स्वयं ऐसा कर सकते थे। उनके अनुसार, कम से कम 20 बैनर और पोस्टर लगाकर भी पूर्व मुख्यमंत्री को सम्मान दिया जा सकता था I वीरभद्र सिंह का रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय तक राजनीतिक जुड़ाव रहा। उन्होंने इस क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व किया था। ऐसे में उनके राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले रोहड़ू में उनकी तस्वीर और नाम का उल्लेख नहीं होना समर्थकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। प्रतिभा सिंह ने हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह प्रदेश में उनके योगदान को याद किया जाता है, उसी तरह वीरभद्र सिंह के योगदान को भी सम्मान मिलना चाहिए। वीरभद्र सिंह की अनदेखी को लेकर उठे सवालों के बाद प्रदेश कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेतृत्व के सम्मान और पार्टी की राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर वीरभद्र सिंह परिवार और वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व के बीच संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है

Rs 6.58 lakh swindled from a Buddhist institution by posing as a donor; 'zero FIR' registered
In crime

फर्जी दानदाता बन बौद्ध संस्थान से 6.58 लाख ठगे, जीरो एफआईआर दर्ज

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में फर्जी दानदाता बनकर एक बौद्ध धार्मिक संस्थान से 6.58 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने संस्थान के प्रतिनिधियों से संपर्क कर खुद को दान देने वाला व्यक्ति बताया और विश्वास में लेकर रकम हड़प ली। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने संस्थान से संपर्क कर धार्मिक कार्यों के लिए बड़ी राशि दान करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग बहानों से संस्थान के प्रतिनिधियों से बैंक खाते में रकम जमा करवाई। जब काफी समय बाद भी दान की राशि संस्थान को नहीं मिली और आरोपियों से संपर्क नहीं हो सका, तब प्रतिनिधियों को ठगी का एहसास हुआ। संस्थान की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से बातचीत कर विश्वास कायम किया और फिर 6.58 लाख रुपये की रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले को जांच और क्षेत्राधिकार के अनुसार संबंधित थाने को भेजा जाएगा। जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए साइबर टीम की मदद ली जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति के दान या आर्थिक मदद के प्रस्ताव पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें और संदिग्ध लेनदेन होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।

Shrikant Sharma to visit Himachal starting tomorrow; will interact with party workers over 9 days.
In Politics

श्रीकांत शर्मा कल से हिमाचल दौरे पर, 9 दिन कार्यकर्ताओं से करेंगे संवाद

शिमला। हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी श्रीकांत शर्मा 19 अक्टूबर से प्रदेश के नौ दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वह पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे और संगठन की जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे। उनके दौरे में जनजातीय क्षेत्रों किन्नौर, लाहौल-स्पीति और पांगी पर विशेष फोकस रहने की बात कही गई है। भाजपा प्रदेश में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में श्रीकांत शर्मा का यह दौरा पार्टी के संगठनात्मक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान श्रीकांत शर्मा पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर संगठन की गतिविधियों, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे। इस संवाद के जरिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सुझावों को समझने पर जोर रहेगा। किन्नौर, लाहौल-स्पीति और पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करना दौरे का अहम हिस्सा होगा। इन इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियों और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच की चुनौतियों को देखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। 2027 के चुनावों की तैयारी भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की सभी 68 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। पार्टी नेतृत्व बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है। श्रीकांत शर्मा को सितंबर 2026 में दोबारा हिमाचल भाजपा का प्रभारी बनाया गया था। उनके साथ राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नौ दिवसीय दौरे के दौरान होने वाली बैठकों और संवाद से प्रदेश में भाजपा की आगामी संगठनात्मक रणनीति को दिशा मिलने की उम्मीद है।

A ₹127 crore bridge to be built over the Brauni ravine; a decades-old demand expected to be met.
In News

ब्रौनी खड्ड पर बनेगा ₹127 करोड़ का पुल, दशकों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद

रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे-5 पर ब्रौनी खड्ड के पास 305 मीटर लंबा थ्री-लेन पुल बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना पर करीब 127.66 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पुल बनने से बरसात के दौरान बार-बार बाधित होने वाले सड़क मार्ग की समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा है। परियोजना को एनएचएआई की वार्षिक योजना में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय की अंतिम मंजूरी और बजट का प्रावधान जरूरी है। ब्रौनी खड्ड के आसपास हर साल बरसात के दौरान भूस्खलन और जमीन धंसने के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई बार सड़क बंद होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस क्षेत्र को भू-वैज्ञानिक दृष्टि से भी असुरक्षित माना गया है। समस्या के समाधान के लिए पहले भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में नए पुल के निर्माण को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है I प्रस्तावित पुल बनने से नेशनल हाईवे की दूरी करीब 700 मीटर कम हो जाएगी। इससे किन्नौर, शिमला जिले और लाहौल-स्पीति के काजा क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पर्यटकों, किसानों और बागवानों को भी राहत मिलेगी। नेशनल हाईवे-5 सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। पुल बनने से भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की आवाजाही को भी सुविधा मिल सकती है। एनएचएआई रामपुर के सहायक अभियंता प्रदीप कौशल के अनुसार, पुल निर्माण की योजना वार्षिक योजना में शामिल है। केंद्रीय स्तर से अंतिम मंजूरी और बजट उपलब्ध होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

Raghuvir Bali said,
In News update

रघुवीर बाली बोले- विक्रमादित्य मेरे छोटे भाई, साथ देना मेरा फर्ज

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में कैबिनेट रैंक प्राप्त विधायक रघुवीर सिंह बाली का विक्रमादित्य सिंह को लेकर बयान चर्चा में है। बाली ने विक्रमादित्य को अपना छोटा भाई बताते हुए उनके साथ खड़े रहने को अपना फर्ज बताया है। रघुवीर सिंह बाली कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं। उन्हें जनवरी 2023 में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के निदेशक मंडल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति के साथ उन्हें कैबिनेट रैंक दिया गया था। विक्रमादित्य से रिश्तों पर पहले भी हुई है चर्चा लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और रघुवीर सिंह बाली के संबंध पहले भी चर्चा में रहे हैं। मई 2023 में अमर उजाला को दिए एक साक्षात्कार में विक्रमादित्य सिंह ने रघुवीर बाली को अपना बड़ा भाई और सम्मानित नेता बताया था। अब बाली के बयान में विक्रमादित्य को छोटा भाई बताने और उनके साथ खड़े रहने की बात सामने आई है। इस बयान को दोनों नेताओं के आपसी संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। कांग्रेस की राजनीति में दोनों नेताओं की भूमिका रघुवीर सिंह बाली पूर्व मंत्री जीएस बाली के बेटे हैं, जबकि विक्रमादित्य सिंह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे हैं। दोनों कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश इकाई के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं।

Public support essential in the fight against 'chitta' (synthetic drugs): Himachal DGP
In News update

चिट्टे के खिलाफ जंग में जनता का साथ जरूरी: हिमाचल DGP

शिमला। हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी ने कहा है कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई पुलिस अकेले नहीं जीत सकती। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए हर घर, स्कूल, अभिभावक और शिक्षक की भागीदारी जरूरी है। डीजीपी अशोक तिवारी ने शनिवार को शिमला के चेल्सी स्थित कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल के वार्षिक समारोह में विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने सभी से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चल रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। डीजीपी ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने की शुरुआत घर और स्कूल से होनी चाहिए। बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करना, उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना और समय रहते जरूरी कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ समय बिताने, उनकी समस्याओं को समझने और ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जिसमें बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी परेशानियां साझा कर सकें। अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों से नकारात्मक दबाव से दूर रहने और सही फैसले लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि असफलताओं को अपने भविष्य पर हावी न होने दें और जीवन में साहस, संवेदनशीलता तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ केवल नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने की सामूहिक मुहिम है इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से आपातकालीन सेवा ईआरएसएस-112 के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए स्कूल परिसर में स्टॉल भी लगाया गया। विद्यार्थियों और अभिभावकों को आपात स्थिति में हेल्पलाइन के इस्तेमाल तथा उपलब्ध सहायता सुविधाओं की जानकारी दी गई। डीजीपी ने संदेश दिया कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस अपनी कार्रवाई जारी रखेगी, लेकिन इस मुहिम को सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग जरूरी है।

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वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर फिर उठे सवाल, MLA रोहड़ू से जनता ने जताई नाराजगी

In Politics
Questions raised again over Virbhadra Singh's neglect, public expressed displeasure with MLA Rohru

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की अनदेखी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू दौरे के दौरान कार्यक्रम के बैनर और पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं होने और भाषणों में उनका नाम नहीं लिए जाने को लेकर कांग्रेस के भीतर नाराजगी सामने आई है। इस मामले ने रोहड़ू में उनकी राजनीतिक विरासत और सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रोहड़ू दौरे के बाद बढ़ी नाराजगी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 2 और 3 अक्टूबर को रोहड़ू और रामपुर विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया था। इस दौरान कार्यक्रमों के बैनर और पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं दिखाई दी। साथ ही, कार्यक्रमों में उनके योगदान का उल्लेख नहीं होने पर भी सवाल उठे। इस मामले पर पूर्व सांसद एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी साढ़े चार साल ही हुए हैं, ऐसे में उन्हें इतनी जल्दी कैसे भुलाया जा सकता है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह का हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में उनके योगदान को याद करना और नई पीढ़ी को उनके बारे में बताना पार्टी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्यक्रम के आयोजकों ने वीरभद्र सिंह की तस्वीर वाले बैनर और पोस्टर नहीं लगाए थे, तो स्थानीय कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता स्वयं ऐसा कर सकते थे। उनके अनुसार, कम से कम 20 बैनर और पोस्टर लगाकर भी पूर्व मुख्यमंत्री को सम्मान दिया जा सकता था I वीरभद्र सिंह का रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से लंबे समय तक राजनीतिक जुड़ाव रहा। उन्होंने इस क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व किया था। ऐसे में उनके राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले रोहड़ू में उनकी तस्वीर और नाम का उल्लेख नहीं होना समर्थकों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। प्रतिभा सिंह ने हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह प्रदेश में उनके योगदान को याद किया जाता है, उसी तरह वीरभद्र सिंह के योगदान को भी सम्मान मिलना चाहिए। वीरभद्र सिंह की अनदेखी को लेकर उठे सवालों के बाद प्रदेश कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेतृत्व के सम्मान और पार्टी की राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर वीरभद्र सिंह परिवार और वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व के बीच संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है

हिमाचल में PGI-AIIMS डॉक्टरों की मेरिट से होगी भर्ती, परीक्षा-इंटरव्यू से छूट

In Health
In Himachal, PGI-AIIMS doctors to be recruited based on merit; exempted from exams and interviews

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने रेजिडेंट डॉक्टर्स नीति-2025 में संशोधन करते हुए पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले डॉक्टरों को भर्ती प्रक्रिया में छूट दी है। अब इन डॉक्टरों को कुछ निर्धारित पदों पर नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू नहीं देना होगा। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इन डॉक्टरों की नियुक्ति एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन में प्राप्त अंकों की मेरिट के आधार पर की जाएगी। इसके तहत प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, ट्यूटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरा जाएगा। डॉक्टरों की कमी दूर करने का प्रयास प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देश पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नीति में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से योग्य डॉक्टरों की नियुक्ति का रास्ता आसान होगा और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी जोर हिमाचल सरकार मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने पर भी काम कर रही है। अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी और थ्री टेस्ला एमआरआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वहीं, पेट स्कैन मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। सरकार का लक्ष्य डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना है।

साई इंटरनेशनल स्कूल में 14वें स्थापना दिवस पर हवन का आयोजन

In Education
Sai International School organised a havan on its 14th foundation day.

साई इंटरनेशनल स्कूल में 14वें स्थापना दिवस पर हवन का आयोजन सोलन, 19 अक्टूबर: साई इंटरनेशनल स्कूल में आज 14वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर विद्यालय परिसर में हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की सुख-समृद्धि, उन्नति एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आहुतियाँ अर्पित की गईं। हवन समारोह में विद्यालय के चेयरमैन श्री रामिंदर बावा, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के अधिवक्ता श्री विजय शर्मा, डॉ. भाविका बावा तथा विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मीरा गुप्ता उपस्थित रहे। इस पावन अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने भी हवन में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुए हवन से विद्यालय परिसर भक्तिमय एवं सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया। सभी ने विद्यालय की निरंतर प्रगति, सफलता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। हवन के उपरांत सभी उपस्थित लोगों एवं विद्यार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया। विद्यालय का 14वां स्थापना दिवस संस्था की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कारों एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अवसर विद्यालय की अब तक की उपलब्धियों को याद करने तथा भविष्य में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने के संकल्प को दोहराने का भी रहा। कार्यक्रम का समापन सुख, शांति, समृद्धि एवं विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। साई इंटरनेशनल स्कूल में 14वें स्थापना दिवस पर हवन का आयोजन सोलन, 19 अक्टूबर: साई इंटरनेशनल स्कूल में आज 14वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर विद्यालय परिसर में हवन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की सुख-समृद्धि, उन्नति एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आहुतियाँ अर्पित की गईं। हवन समारोह में विद्यालय के चेयरमैन श्री रामिंदर बावा, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के अधिवक्ता श्री विजय शर्मा, डॉ. भाविका बावा तथा विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मीरा गुप्ता उपस्थित रहे। इस पावन अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने भी हवन में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुए हवन से विद्यालय परिसर भक्तिमय एवं सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया। सभी ने विद्यालय की निरंतर प्रगति, सफलता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। हवन के उपरांत सभी उपस्थित लोगों एवं विद्यार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया। विद्यालय का 14वां स्थापना दिवस संस्था की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कारों एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अवसर विद्यालय की अब तक की उपलब्धियों को याद करने तथा भविष्य में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने के संकल्प को दोहराने का भी रहा। कार्यक्रम का समापन सुख, शांति, समृद्धि एवं विद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

बीएल स्कूल कुनिहार में 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता, खेलों के साथ पढ़ाई में भी विद्यार्थी आगे

In Sports
BL School Kunihar organised the 32nd annual sports competition; students excelled in academics and sports.

बी.एल. वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुनिहार में आयोजित 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आज भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया । इस आयोजन  में विद्यालय के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विद्यालय परिवार ने मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया।कार्यक्रम का मंच संचालन शिवानी शर्मा ने किया। विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।विद्यालय के शारीरिक शिक्षक अमर देव एवं शारीरिक शिक्षिका अरुणा शर्मा ने बताया कि वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया था। विद्यार्थियों ने मास पी.टी. की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। शरीक शिक्षिका अरुणा ने बताया की दिनांक 9 अक्तूबर को  नर्सरी से युकेजी कक्षा तक बच्चों  तक के विद्यार्थियों के लिए,  किड्स रेस, रिंग रेस सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। दिनांक 10  अक्तूबर को पहली से पांचवीं कक्षा  के विद्यार्थियों के लिए 100 मीटर दौड़, व् अन्य रेस करवाई गई , सभी बच्चों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बी.एल. स्कूल कुनिहार के विद्यार्थी खेलकूद के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी तथा विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को गोल्ड, सिल्वर एवं ब्रॉन्ज मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। मेडल प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था । पी टी ए अध्यक्ष वी समस्त सदस्यों ने वार्षिक खेल कूद प्रतियोगिता के लिए बधाई दी । कार्यक्रम में विद्यालय के उपप्रधानाचार्य पुरशोत्तम लाल, मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा, समस्त अध्यापक वर्ग तथा विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का समापन विद्यार्थियों में खेल भावना, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करते हुए हुआ।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

ब्रौनी खड्ड पर बनेगा ₹127 करोड़ का पुल, दशकों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद

In News
A ₹127 crore bridge to be built over the Brauni ravine; a decades-old demand expected to be met.

रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे-5 पर ब्रौनी खड्ड के पास 305 मीटर लंबा थ्री-लेन पुल बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना पर करीब 127.66 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पुल बनने से बरसात के दौरान बार-बार बाधित होने वाले सड़क मार्ग की समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा है। परियोजना को एनएचएआई की वार्षिक योजना में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय की अंतिम मंजूरी और बजट का प्रावधान जरूरी है। ब्रौनी खड्ड के आसपास हर साल बरसात के दौरान भूस्खलन और जमीन धंसने के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई बार सड़क बंद होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस क्षेत्र को भू-वैज्ञानिक दृष्टि से भी असुरक्षित माना गया है। समस्या के समाधान के लिए पहले भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में नए पुल के निर्माण को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है I प्रस्तावित पुल बनने से नेशनल हाईवे की दूरी करीब 700 मीटर कम हो जाएगी। इससे किन्नौर, शिमला जिले और लाहौल-स्पीति के काजा क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पर्यटकों, किसानों और बागवानों को भी राहत मिलेगी। नेशनल हाईवे-5 सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। पुल बनने से भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की आवाजाही को भी सुविधा मिल सकती है। एनएचएआई रामपुर के सहायक अभियंता प्रदीप कौशल के अनुसार, पुल निर्माण की योजना वार्षिक योजना में शामिल है। केंद्रीय स्तर से अंतिम मंजूरी और बजट उपलब्ध होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
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बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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