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हिमाचल राज्य चयन आयोग ने राजनीतिक शास्त्र शिक्षक भर्ती परीक्षा परिणाम किया घोषित, 3650 ने किया था आवेदन
हिमाचल राज्य चयन आयोग हमीरपुर ने राजनीतिक शास्त्र शिक्षक के 95 पदों के लिए आयोजित कंप्यूटर आधारित स्क्रीनिंग टेस्ट का परिणाम घोषित कर दिया है। पोस्ट कोड 26028 के तहत शिक्षक राजनीतिक शास्त्र के इन पदों के लिए कुल 3650 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 3002 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 648 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। आयोग ने परीक्षा में प्रदर्शन और निर्धारित अनुपात के आधार पर 239 अभ्यर्थियों को आगामी चयन प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन के लिए अस्थायी रूप से शॉर्टलिस्ट किया है। इन पदों के लिए कंप्यूटर आधारित स्क्रीनिंग टेस्ट 29 जुलाई 2026 को आयोजित किया गया था। 95 पदों में सामान्य वर्ग के 36, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 12, स्वतंत्रता सेनानी वार्ड के एक, अन्य पिछड़ा वर्ग के 16, अन्य पिछड़ा वर्ग बीपीएल के तीन, अनुसूचित जाति के 18, अनुसूचित जाति बीपीएल के तीन, अनुसूचित जाति स्वतंत्रता सेनानी वार्ड का एक, अनुसूचित जनजाति के चार और अनुसूचित जनजाति बीपीएल का एक पद शामिल है।
मंडी में नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर तंज- हिमाचल में काम ठप, दिल्ली में डेरा डाले बैठा पूरा मंत्रिमंडल
मंडी: नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार चलाने के बजाय पूरा मंत्रिमंडल दिल्ली में डेरा डाले हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय सरकार के मंत्री दिल्ली की राजनीति में व्यस्त हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल में आम लोग कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता अपनी समस्याओं को लेकर सरकार की ओर देख रही है, लेकिन मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल के सदस्य दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सरकार की जरूरत है, तब मंत्री दिल्ली में क्यों बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को दिल्ली की राजनीति के बजाय हिमाचल के लोगों और प्रदेश के विकास पर ध्यान देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें शासन चलाने की जिम्मेदारी दी है, न कि लगातार दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने की। उन्होंने सरकार से जनता की समस्याओं का समाधान करने और प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने की मांग की।
बिलासपुर गोलीकांड में बड़ा खुलासा पंजाब से गिरफ्तार मास्टरमाइंड ही निकला 'चिट्टे' का मुख्या सुप्लायर !
बिलासपुर पुलिस ने नशा तस्करी और गोलीकांड से जुड़े मामले में बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने चिट्टे के मुख्य सप्लायर और कई संगीन मामलों में वांछित मलकीयत सिंह उर्फ मल्ली (38) को पंजाब के रोपड़ से गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के अनुसार यही आरोपी जून 2024 में बिलासपुर में हुए चर्चित गोलीकांड में शूटर को हायर करवाने वाला मुख्य व्यक्ति था। मामले की शुरुआत 21 अगस्त को हुई, जब बिलासपुर पुलिस की स्पेशल डिटेक्शन टीम ने फोरलेन पर बाइक सवार अमन और अरुण को रोका। तलाशी के दौरान दोनों के कब्जे से 14.50 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के साथ डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नशे की सप्लाई के स्रोत की जांच शुरू की। जांच में चिट्टे की सप्लाई का मुख्य स्रोत पंजाब के रोपड़ जिले के आनंदपुर साहिब क्षेत्र के मिस्सेवाल निवासी मलकीयत सिंह उर्फ मल्ली तक पहुंचा। इसके बाद बिलासपुर पुलिस की टीम ने पंजाब में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक मल्ली केवल नशा सप्लाई करने वाला आरोपी नहीं है। जांच में सामने आया कि 20 जून 2024 को बिलासपुर में परिधि गृह और जिला न्यायालय के पास सौरभ पटियाल उर्फ फांदी पर हुए जानलेवा हमले के लिए शूटर सन्नी गिल को मलकीयत सिंह ने ही हायर करवाया था! पुलिस के अनुसार आरोपी बिलासपुर और मंडी क्षेत्र में चिट्टे की सप्लाई कर रहा था। उसके खिलाफ हिमाचल और पंजाब में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। बिलासपुर पुलिस अब आरोपी से पूछताछ के आधार पर चिट्टे के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि मल्ली से नशा कौन लेता था और आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाता था। एसपी बिलासपुर अभिषेक धीमान ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
नदियों में जमा मलबे से बढ़ रहा बाढ़ का खतरा, मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उठाया ड्रेजिंग का मुद्दा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण हिमाचल की नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की पानी ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है और आसपास की मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आपदा के जोखिम को कम करने के लिए ऐसे संवेदनशील नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग जरूरी है।
महिला ने लगाए गंभीर आरोप! यौन उत्पीड़न के बाद पति और बच्चों समेत पूरे परिवार को दी धमकी, तीन पर FIR
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र से एक विवाहिता के साथ कथित यौन उत्पीड़न और धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। 28 वर्षीय महिला ने पुलिस को दी शिकायत में एक व्यक्ति पर जबरदस्ती करने और बाद में उसके विरोध करने पर महिला, उसके पति तथा दो छोटे बच्चों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए चौपाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुख्य आरोपी दिला राम शर्मा और उसके दो बेटों संतोष तथा नारायण दत्त के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल में एक ही विभाग के कर्मचारियों को क्यों दिया जा रहा अलग-अलग डा? हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाहीI सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है.
जिला शिमला के रामपुर उपमंडल में बीपीएल श्रेणी के तहत चयनित लोगों को जारी किए गए आय प्रमाण पत्रों की अब दोबारा जांच की जाएगी. उपमंडल अधिकारी (नागरिक) रामपुर बुशहर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. आदेश के अनुसार 50 हजार और 75 हजार तक की वार्षिक आय दर्शाने वाले उन सभी आय प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन किया जाएगा, जो बीपीएल श्रेणी में चयनित व्यक्तियों को जारी किए गए हैं.पुनः सत्यापन के दौरान संबंधित तहसीलदार और नायब तहसीलदार प्रत्येक मामले में जांच करेंगे. यह जांच संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, पटवारी, ग्राम पंचायत प्रधान और संबंधित वार्ड सदस्य की समिति के साथ परामर्श कर की जाएगी. जांच में संबंधित व्यक्ति और परिवार की वास्तविक आय, आर्थिक स्थिति और आय प्रमाण पत्र जारी करने के आधार की पड़ताल की जाएगी. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रमाण पत्र उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के अनुरूप है या नहीं.प्रत्येक आय प्रमाण पत्र की सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि जांच के बाद प्रमाण पत्र सही पाया गया है अथवा नहीं. एसडीएम कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को यह पूरी प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. मामले को अति आवश्यक और समयबद्ध बताया गया है.
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