•   Tuesday Sep 01
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Farmers will not be compelled to buy Nano Urea; Agriculture Minister stated this in the House.
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नैनो यूरिया खरीदने के लिए किसान नहीं होंगे बाध्य, कृषि मंत्री ने सदन में कही ये बात

शिमला: तीन दिन के अवकाश के बाद हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में आज (सोमवार, 31 अगस्त को) एक बार फिर सदन की कार्यवाही शुरू होगी. सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे बाद प्रश्नकाल से शुरू होगी. इस दौरान सता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक देखने को मिल सकती है. शून्यकाल के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सप्ताह की शासकीय कार्यसूची की जानकारी सदन में रखेंगे. साथ ही कुछ कागजात भी पटल पर रखेंगे. किसानों को यूरिया की खरीद के साथ नैनो यूरिया प्लस लेने के लिए कथित तौर पर मजबूर किए जाने के मामले पर सदन मे विपक्ष हंगामा कर सकता है. वहीं, नियम-130 के तहत युवाओं के लिए रोजगार से संबंधित गारंटी के कार्यान्वयन पर भी सदन में विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है. भाजपा विधायक रणधीर शर्मा, सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल, डॉ. हंसराज और जीत राम कटवाल प्रस्ताव करेंगे कि 'युवाओं के लिए रोजगार संदर्भित गारंटी के कार्यान्वयन बारे' सदन विचार करे. सदन में प्रदेश के जल संसाधनों और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े राजस्व का मुद्दा भी उठेगा. विधायक केवल सिंह पठानिया नियम 130 के तहत रॉयल्टी, फ्री पावर और जल उपकर के बकाया भुगतान की वसूली और प्रदेश के राजस्व हितों के संरक्षण पर चर्चा का प्रस्ताव रखेंगे. तीन दिन के अवकाश के बाद लौट रहे सदन में एक ओर प्रश्नकाल के दौरान विधायकों के सवाल सरकार के सामने होंगे. वहीं, नियम 62 और 130 के तहत प्रस्तावित मुद्दे कार्यवाही को खासा महत्वपूर्ण बना सकते हैं.  

300 electric buses arrive in Himachal; Deputy CM says public transport will improve alongside environmental conservation.
In News

हिमाचल में पहुंचीं 300 इलेक्ट्रिक बसें, डिप्टी सीएम बोले—पर्यावरण संरक्षण के साथ बेहतर होगा सार्वजनिक परिवहन

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में करीब 300 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इन बसों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और रूटों पर चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है।  इन इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का मुख्य उद्देश्य डीजल बसों पर निर्भरता कम करना और हिमाचल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना है। जिन रूटों पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हो चुके हैं, वहां इन बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में पुराने डीजल वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों से बदला जाए।  उपमुख्यमंत्री के अनुसार, नई इलेक्ट्रिक बसें स्थानीय रूटों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार लंबी दूरी के रूटों पर भी चलाई जाएंगी। पालमपुर में हाल ही में 10 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। वहीं बिलासपुर, कांगड़ा और शिमला ग्रामीण सहित कई क्षेत्रों को भी नई ई-बसें उपलब्ध करवाई गई हैं।  सरकार ने भविष्य में एचआरटीसी के बेड़े में 1,000 और इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई, एम्स बिलासपुर और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू करने की योजना है। इससे लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

The government will approach the High Court to seek permission to spend temple offerings on social welfare activities.
In News update

मंदिरों के चढ़ावे से सामाजिक कार्यों पर खर्च के लिए होईकोर्ट जायेगी सरकार

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों पर खर्च करने के मामले को लेकर सरकार हाईकोर्ट का रुख करेगी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान उठे मामले का जवाब देते हुए कहा कि हिमाचल में जगह-जगह मंदिर हैं, जिनमें से करीब तीन दर्जन मंदिर सरकार के अधीन हैं। उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी और चामुंडा माता जैसे बड़े मंदिरों में काफी मात्रा में चढ़ावा आता है। इन मंदिरों की आय से पहले सामाजिक कार्यों और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में आर्थिक मदद दी जाती रही है। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से इस तरह चढ़ावे की राशि खर्च करने पर बंदिशें लगाई गई हैं। सरकार फिलहाल पूरे मामले का कानूनी अध्ययन कर रही है। इसके बाद सरकार इस संबंध में हाईकोर्ट में पिटीशन दायर करेगी, ताकि मंदिरों के चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों में इस्तेमाल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

Issue of woman's death after childbirth at hospital raised in Assembly; Jairam questions inquiry report.
In News update

हिमाचल: कुल्लू अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामला विधानसभा में गूंजा, जयराम ने जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में कुल्लू अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला रजनी शर्मा उर्फ मंजू शर्मा की मौत का मामला जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने मामले की जांच और अस्पताल प्रशासन की भूमिका को लेकर सरकार से जवाब मांगा। जयराम ठाकुर ने पूछा कि क्या जांच में चिकित्सीय अथवा प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है? यदि लापरवाही पाई गई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में अलग-अलग जांचों के निष्कर्ष आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमएस की जांच और एसडीएम की जांच रिपोर्ट में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आखिर सही रिपोर्ट कौन सी है और जो जांच अभी विचाराधीन है, वह कब पूरी होगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि मामला गंभीर है और डॉक्टर के व्यवहार को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। उन्होंने ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार अस्पताल प्रशासन ने भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर लोगों में रोष है और मामले में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। स्वास्थ्य  मंत्री बोले- जांच जारी, जिम्मेदार डॉक्टर निलंबित स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने सदन में घटना को दुखद बताते हुए मृतका के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सीय प्रणाली से जुड़ा मामला है और इसकी विवेचना जारी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मामले में दो स्तर पर जांच कराई गई है। एक जांच अस्पताल स्तर पर और दूसरी स्वतंत्र जांच के उद्देश्य से कराई गई, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से पड़ताल हो सके। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार डॉक्टर को निलंबित किया गया है और जांच अभी जारी है। ये भी पढ़ें  

“Pushpa Rana, daughter of Shillai, to lead Team India; named captain of the Indian women's kabaddi team for the Asian Games.”
In The Achievers

शिलाई की बेटी पुष्पा राणा संभालेंगी टीम इंडिया की कमान, एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान बनीं

शिलाई की बेटी पुष्पा राणा संभालेंगी टीम इंडिया की कमान, एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान बनीं हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र की रहने वाली कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा राणा को भारतीय महिला कबड्डी टीम की नई कप्तान बनाया गया है। वह जापान में होने वाले 2026 एशियन गेम्स में टीम इंडिया की अगुवाई करेंगी। पुष्पा राणा ने लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तान रहीं हिमाचल की ही खिलाड़ी ऋतु नेगी की जगह ली है। पुष्पा राणा के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। वह 2022 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा रही थीं। 2022 के फाइनल में भारत ने चीनी ताइपे को 26-25 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। पुष्पा की कप्तानी में अब भारतीय टीम एशियन गेम्स में अपने स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरेगी। 2026 एशियन गेम्स में भारत की महिला कबड्डी टीम में हिमाचल प्रदेश की चार खिलाड़ी—पुष्पा राणा, ऋतु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर—शामिल हैं। पुष्पा राणा का भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान बनना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है। खासतौर पर शिलाई क्षेत्र के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि लगातार दो भारतीय महिला कबड्डी कप्तान इसी क्षेत्र से सामने आई हैं।

Himachal Pradesh: Unidentified body found on the road near Shamlech in Solan; accident or murder? Police investigating.
In crime

हिमाचल प्रदेश: सोलन में शमलेच के पास सड़क पर मिला अज्ञात शव, हादसा या हत्या? पुलिस जांच में जुटी

  सोलन के शमलेच के समीप परमाणु-शिमला एनएच-5 पर सोमवार सुबह सड़क पर एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, मृतक की अभी पहचान नहीं हो पाई है। प्रारंभिक स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि व्यक्ति की मौत सड़क हादसे में हुई, किसी वाहन की टक्कर के बाद चालक मौके से फरार हुआ या मामला किसी अन्य कारण से जुड़ा है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास के क्षेत्र से जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मृतक कौन था और वह शमलेच के पास सड़क तक कैसे पहुंचा। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जाएगा।

Impact of rain in Himachal: 98 roads closed, 107 transformers out of order; 37 drinking water schemes affected.
In Himachal

हिमाचल में बारिश का असर: 98 सड़कें बंद, 107 ट्रांसफार्मर ठप; 37 पेयजल योजनाएं प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में मानसून के बीच बारिश का असर एक बार फिर सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ा है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की 31 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में प्रदेशभर में 98 सड़कें बंद हुई हैं। इसके अलावा 107 बिजली ट्रांसफार्मर (DTR) ठप हुए हैं, जबकि 37 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। जिलेवार आंकड़ों में मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां कुल 43 सड़कें बंद दर्ज की गईं। इसके बाद कुल्लू में 16 और चंबा में 15 सड़कें बंद रहीं। हमीरपुर में 37 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए, जबकि मंडी में 89 डीटीआर बंद रहे।  वही सोलन जिले में चार सड़कें बंद हैं। इनमें कसौली और नालागढ़ उपमंडल की दो-दो सड़कें शामिल हैं। नालागढ़ में पांच बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं। सिरमौर के नाहन उपमंडल में पांच सड़कें बंद हैं। शिमला जिले में रामपुर और सुन्नी उपमंडल में कुल दो सड़कें बंद दर्ज की गई हैं।    

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हाईकमान को रिपोर्ट देने की खबरों का रजनी पाटिल ने किया खंडन

In Politics

   हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में सरकार और संगठन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने हिमाचल कांग्रेस सरकार के कामकाज को लेकर पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट भेजी है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में रजनी पाटिल ने कहा कि उनके नाम से प्रसारित की जा रही ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को हिमाचल प्रदेश की सरकार या संगठन के संबंध में किसी भी प्रकार की रिपोर्ट नहीं सौंपी है।उन्होंने मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि राजनीतिक विषयों पर समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। बिना पुष्टि के प्रसारित खबरें न केवल भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकती हैं।          दरअसल, पिछले कुछ दिनों से प्रदेश कांग्रेस के भीतर सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर चर्चाएं तेज थीं। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पार्टी नेतृत्व ने रजनी पाटिल से प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर फीडबैक मांगा था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है। इन रिपोर्टों में मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन का भी जिक्र होने की बात कही गई थी। इन खबरों के बाद प्रदेश की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थीं और विपक्ष ने भी इन्हें लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, रजनी पाटिल के ताजा बयान ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया है। 

एमएमएमसीएच में राष्ट्रीय एंडोस्कोपी कार्यशाला, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. पियूष वोहरा और डॉ. वाणी शर्मा ने दिखाई लाइव सर्जरी

In Health

एमएमएमसीएच, कुमारहट्टी के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (IAGE) के सहयोग से गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपी पर एक दिवसीय द्वितीय सेंसिटाइजेशन स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को महार्षि मार्कण्डेश्वर ट्रस्ट के अध्यक्ष तरसेम गर्ग और सचिव विशाल गर्ग का संरक्षण प्राप्त रहा। मुख्य अतिथि एमएमयू के कुलपति डॉ. रवि चंद शर्मा तथा सह-अध्यक्ष के रूप में रजिस्ट्रार अजय कुमार सिंगल उपस्थित रहे। इस अवसर पर एमएमएमसीएच के प्राचार्य डॉ. मनप्रीत सिंह नंदा, उप-प्राचार्य डॉ. जसदीप सिंह संधू, एमएमसीओएन की प्राचार्य डॉ. हरप्रीत कौर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किरण कुमार सिंघल और एनएएसी समन्वयक डॉ. जय गोपाल वोहरा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की स्थानीय संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका गुप्ता तथा परियोजना समन्वयक डॉ. पियूष वोहरा रहे। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण ऑपरेशन थियेटर से प्रसारित लाइव सर्जरी रही, जिसमें राष्ट्रीय एंडोस्कोपिक सर्जरी प्रशिक्षक डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. पियूष वोहरा और डॉ. वाणी शर्मा ने लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी, ग्रेड-4 एंडोमेट्रियोसिस में ओवेरियन सिस्टेक्टॉमी, लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी तथा फेलोपियन ट्यूब रिकैनालाइजेशन जैसी जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग, सर्जरी के विभिन्न चरणों और महत्वपूर्ण चिकित्सीय निर्णयों की भी जानकारी दी। कार्यशाला में संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और चिकित्सकों ने भाग लिया तथा एंडोस्कोपिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

सोलन :दयानन्द आदर्श विद्यालय में हुआ सॉन्ग प्रतियोगिता का आयोजन

In Education
Solan: Song competition held at Dayanand Adarsh ​​Vidyalaya.

दयानन्द आदर्श विद्यालय के प्रांगण में कक्षा आठवीं -नौवीं   के विद्यार्थियों के लिए सोलो सॉन्ग और डुएट सॉन्ग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया I  प्रिंसिपल उषा मित्तल ने बताया कि इस तरह के आयोजन द्वारा बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत होता है I  कार्यक्रम का आगाज़ दीप प्रज्वलन एवं मंत्र उच्चारण द्वारा किया गया I इस प्रितियोगिता की मुख्यातिथि प्रिंसिपल उषा मित्तल रही I सोलो व डुएट प्रतियोगिता का आयोजन एक्टिविटी  इंचार्ज संगीता के मार्गदर्शन में करवाया गयाI उन्होंने बताया कि सभी सॉन्ग बड़े ही मनमोहक थे I इस प्रतियोगिता के जज प्रिंसिपल उषा मित्तल , रोमिला कँवर , फुला धर , व समिति चंदेल रहे I वही क्लास आठवीं कक्षा में सोलो सॉन्ग प्रतियोगिता में  पहला स्थान पर रूद्र, दूसरा स्थान  पर अतुल और तीसरा स्थान  पर  ऋषब रहा I वही कक्षा नवमीं में पहला स्थान  पर सार्थक, दूसरा स्थान पर  मृदुल और  तीसरा स्थान पर  तेजस रहा I लड़कियों के बीच में  पहला स्थान पर सनाया ,दूसरा स्थान  पर  महक  और तीसरा स्थान  पर निष्ठां रही I   डुएट सॉन्ग प्रतियोगिता में  एक्स्ट्रा आर्डिनरी- अरमान रूद्र .पहला स्थान पर  प्रोनिमा, प्रज्ञा ,दूसरा स्थान पर वैभव, गरिमा लविश अर्णव और तीसरा स्थान  पर  एंजेल महक , एव शर्मिष्ठा प्रांजल रहे I          

आयरलैंड की हार भुलाने उतरेगा भारत, इंग्लैंड के खिलाफ जीत से करना होगा आगाज़

In Sports
India will look to put the loss against Ireland behind them and kick off with a win against England.

आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज में नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला बुधवार को इंग्लैंड के चेस्टर-ली-स्ट्रीट में खेला जाएगा। टीम इंडिया इस सीरीज में जीत दर्ज कर पिछली हार को भुलाना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह सीरीज काफी अहम होगी। आयरलैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था, ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ वह कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों से अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। इस बीच भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पहले ही टी-20 मुकाबले में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया जाना चाहिए। आयरलैंड दौरे पर वैभव को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी, लेकिन अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू का मौका मिलता है। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम भी हाल के दिनों में शानदार फॉर्म में नहीं रही है। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में उसे हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि वह रेड बॉल क्रिकेट था, लेकिन अपने घर में मिली हार के बाद इंग्लैंड भी वापसी के इरादे से मैदान पर उतरेगा। ऐसे में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टी-20 मैचों के बाद तीन वनडे मुकाबले भी खेले जाएंगे। दोनों टीमों में कई युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण मौजूद है, जिससे इस दौरे के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें पहले मुकाबले पर हैं कि क्या टीम इंडिया जीत के साथ सीरीज का आगाज़ करती है और क्या युवा वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलता है।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

हिमाचल में पहुंचीं 300 इलेक्ट्रिक बसें, डिप्टी सीएम बोले—पर्यावरण संरक्षण के साथ बेहतर होगा सार्वजनिक परिवहन

In News
300 electric buses arrive in Himachal; Deputy CM says public transport will improve alongside environmental conservation.

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में करीब 300 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इन बसों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और रूटों पर चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है।  इन इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का मुख्य उद्देश्य डीजल बसों पर निर्भरता कम करना और हिमाचल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना है। जिन रूटों पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हो चुके हैं, वहां इन बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में पुराने डीजल वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों से बदला जाए।  उपमुख्यमंत्री के अनुसार, नई इलेक्ट्रिक बसें स्थानीय रूटों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार लंबी दूरी के रूटों पर भी चलाई जाएंगी। पालमपुर में हाल ही में 10 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। वहीं बिलासपुर, कांगड़ा और शिमला ग्रामीण सहित कई क्षेत्रों को भी नई ई-बसें उपलब्ध करवाई गई हैं।  सरकार ने भविष्य में एचआरटीसी के बेड़े में 1,000 और इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई, एम्स बिलासपुर और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू करने की योजना है। इससे लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
CONGRESS-APPOINTED-32-DISTRICT-HEADS-IN-HARYANA

बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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