•   Monday Jan 26
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In Himachal

चम्बा: मालिक के श**व के पास 4 दिन तक बैठा रहा पालतू कुत्ता

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने वफादारी की मिसाल पेश की है। प्रसिद्ध भरमाणी माता मंदिर की ऊंची पहाड़ियों में लापता हुए दो युवकों की दुखद मौत हो गई, लेकिन इस त्रासदी के बीच उनके पालतू कुत्ते की वफादारी ने सभी को भावुक कर दिया। जानकारी के अनुसार 23 जनवरी से लापता 19 वर्षीय विकसित राणा और उसका 13 वर्षीय ममेरा भाई पीयूष कुमार भरमाणी माता मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। उनके साथ पीयूष का पालतू कुत्ता और कैंपिंग का सामान भी था। बताया जा रहा है कि मंदिर के ऊपरी इलाकों में वीडियो शूटिंग के दौरान मौसम अचानक बिगड़ गया। भारी बर्फबारी और बर्फीले तूफान के चलते दोनों युवक रास्ता भटक गए और भारी बर्फ़बारी में फंसने के कारण उनकी मौत हो गई। युवकों की तलाश के लिए प्रशासन ने ड्रोन और सेना के दो हेलीकॉप्टरों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन रविवार तक कोई सुराग नहीं मिला। सोमवार को जब रेस्क्यू टीम बर्फ से ढके इलाके में पहुंची, तो देखा गया कि एक कुत्ता ठंड से कांपता हुआ अपने मालिक के शव के पास पहरा दे रहा था। बिना भोजन और पानी के वह बेजुबान चार दिनों तक बर्फ की चादर के बीच अपने मालिक के शव के पास बैठा रहा।  

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दिल्ली के कर्तव्य पथ पर दिखी हिमाचल की संस्कृति की झलक, छह साल बाद आई नजर

भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी विकास यात्रा, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया। वहीं इस बार गणतंत्र दिवस परेड के लिए रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने देश के 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया था, जिसमें हिमाचल प्रदेश की झांकी भी शामिल थी। वहीं, सोमवार को हिमाचल प्रदेश की झांकी ने यह दिखाया कि हिमाचल प्रदेश न सिर्फ देवी-देवताओं की भूमि है, बल्कि निडर देशभक्ति की भी भूमि है और इसने अपने बहादुर बेटों और बेटियों को श्रद्धांजलि दी। यह इस विचार पर आधारित थी कि यह राज्य, जिसे 'देवभूमि' या देवताओं की भूमि के रूप में पूजा जाता है, उतना ही 'वीर भूमि', यानी बहादुरों की भूमि भी है। हिमाचल प्रदेश ने देश को 1,203 वीरता पुरस्कार विजेता दिए हैं, जिनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और 10 महावीर चक्र शामिल हैं, जो भारत के सैन्य इतिहास में वीरता का एक असाधारण रिकॉर्ड है। गणतंत्र दिवस की झांकी ने राज्य की इस अदम्य भावना को श्रद्धांजलि दी। इसने हिमाचल के उन बेटों और बेटियों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने पहाड़ों की सहनशक्ति से प्रेरित होकर, बहादुरी और बलिदान के साथ देश की पुकार का जवाब दिया है। झांकी में यह दिखाया गया कि रक्षा बलों में भारत के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक के रूप में, हिमाचल की विरासत सिर्फ अतीत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके लोगों के चरित्र में गहराई से बसी हुई है। इसका मकसद पवित्रता और वीरता को मिलाना था, जिसमें राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ उसकी गौरवशाली सैन्य परंपरा को भी दिखाया गया। 

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हिमाचल: भरमौर में लाप**ता 2 युवकों में से एक का श**व बरामद, दूसरे की तलाश जारी

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में तीन दिन से लापता दो युवकों में से एक का शव बरामद कर लिया गया है। बर्फ से ढकी चोटियों पर फंसे 13 वर्षीय पीयूष कुमार का पार्थिव शरीर सेना और रेस्क्यू टीम की मदद से बरामद हुआ है। इस खबर की पुष्टि क्षेत्रीय विधायक जनक राज ने की। जानकारी के अनुसार मलकौता निवासी 19 वर्षीय विकसित राणा और उसका 13 वर्षीय ममेरा भाई पीयूष कुमार बीते शुक्रवार को भरमाणी माता मंदिर के दर्शन के बाद आसपास की ऊंची पहाड़ियों की ओर वीडियो बनाने गए थे। इसी दौरान भारी बर्फबारी और फिसलन भरे रास्तों के कारण दोनों युवक लापता हो गए।   घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, पर्वतारोहियों की विशेष टीम और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। दुर्गम परिस्थितियों में ड्रोन और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई। फिलहाल 19 वर्षीय विकसित राणा की तलाश जारी है। प्रशासन ने बताया कि मौसम और बर्फबारी के बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।

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हमीरपुर में नशा तस्करी पर पुलिस का बड़ा प्रहार, चिट्टे का मुख्य सप्लायर गिरफ्तार

नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत हमीरपुर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने चिट्टा तस्करी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए इसके मुख्य सप्लायर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई 20 जनवरी को थाना सदर हमीरपुर क्षेत्र के अंतर्गत कनौल–भोटा मार्ग पर हुई चिट्टा बरामदगी के मामले की कड़ी के रूप में की गई। मामले की गहन जांच के दौरान पुलिस ने अहम सुराग जुटाए, जिसके आधार पर मुख्य आरोपी तक पहुंच बनाई गई। सदर थाना पुलिस के अनुसार, 20 जनवरी को टीम कनौल–भोटा क्षेत्र में नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान एक संदिग्ध मोटरसाइकिल को जांच के लिए रोका गया। तलाशी लेने पर मोटरसाइकिल सवार दो युवकों के कब्जे से 13.83 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और उन्हें पुलिस रिमांड पर भेजा गया। रिमांड के दौरान आरोपियों से गहन पूछताछ की गई और उनके मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण किया गया। जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिनसे चिट्टा तस्करी के नेटवर्क की परतें खुलती चली गई। पूछताछ में सामने आया कि इस नेटवर्क का मुख्य सप्लायर संदीप उर्फ लाडी है, जो ऊना जिले के गोंदपुर क्षेत्र का रहने वाला है। ऐसे में पुख्ता सूचना मिलने के बाद सदर थाना पुलिस की टीम ने गोंदपुर क्षेत्र में दबिश देकर आरोपी संदीप उर्फ लाडी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से युवाओं को चिट्टा सप्लाई कर रहा था। वहीं, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह ने मामले की पुष्टि की उन्होंने कहा कि, "हमीरपुर पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अन्य संभावित तस्करों और संपर्कों की भी गहनता से जांच कर रही है। नशे के इस अवैध कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।"

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सोलन: पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवती की मौ**त, चालक घा**यल

थाना क्षेत्र कुनिहार में रविवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। हादसे में कार में सवार युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने बीएनएस की धारा 281, 125(ए) और 106(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना कुनिहार की टीम गश्त और मोबाइल नाकाबंदी के दौरान नए बस अड्डा चौक से पुराने बस अड्डा की ओर जा रही थी। इसी दौरान सड़क के बाईं ओर एक ग्रे रंग की स्विफ्ट कार (एचपी-11ए-6156) दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में दिखाई दी। वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त था और आसपास लोगों की भीड़ जुटी हुई थी। मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि हादसे में घायल लोगों को राहगीरों की मदद से उपचार के लिए सिविल अस्पताल कुनिहार पहुंचाया गया है। इसके बाद पुलिस टीम तुरंत अस्पताल पहुंची जहां कार चालक आकाश ठाकुर पुत्र कृष्ण चंद ठाकुर निवासी गांव हाटकोट डाकघर कुनिहार तहसील अर्की, जिला सोलन घायल अवस्था में उपचाराधीन पाया गया। वहीं कार में सवार युवती आहना चैटर्जी पुत्री श्याम चैटर्जी, निवासी गांव व डाकघर बनूटी, तहसील व जिला शिमला को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल अर्की के शवगृह भेजा गया है।प्राथमिक जांच में सामने आया है कि चालक आकाश ठाकुर कोठी चौक से पुराने बस अड्डा कुनिहार की ओर युवती के साथ जा रहा था। इस दौरान वाहन की गति अत्यधिक तेज थी और चालक ने वाहन को लापरवाही पूर्वक चलाया, जिससे कार सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। स्थानीय लोगों के अनुसार उक्त मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे हादसों की आशंका बनी रहती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। मामले की पुष्टि डी एस पी सोलन अशोक चौहान ने की है।

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हिमाचल: आज रात से फिर बिगड़ेगा मौसम, 27 को बारिश-बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में हुई भारी बर्फबारी के बाद रविवार को मौसम साफ रहा। लेकिन भारी बर्फ़बारी के कारण आम जन जीवन और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़कें बंद होने से हजारों पर्यटक अलग-अलग जगह फंसे रहे। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार सोमवार रात से मौसम का मिजाज फिर बिगड़ सकता है। 27 जनवरी को चंबा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में भारी बारिश व बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी हुआ है। 31 जनवरी को मौसम फिर से करवट लेगा। राज्य के अधिकांश हिस्सों में 26 जनवरी की रात से 28 जनवरी की सुबह तक भारी वर्षा होने की संभावना है। प्रदेश के कुछ हिस्सों में 27 जनवरी को एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा और बर्फबारी के आसार है।  वहीं प्रदेशभर में ठंड का प्रकोप जारी है। पांच जिलों में तापमान शून्य से नीचे रहा। नारकंडा में -1.1, सराहन में -0.3, किन्नौर में कल्पा का -4.0, रिकांगपिओ का -0.7, लाहौल–स्पीति में कुकुमसेरी का -7.9, ताबो का -10.0, कुल्लू में मनाली का -1.1 और कांगड़ा में धर्मशाला का -0.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। शिमला में न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। ताजा बर्फबारी के बाद हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ी है। शिमला, कुल्लू-मनाली, चायल, कसौली सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। बर्फ में अठखेलियां करने के लिए हिमाचल आए सैलानी रविवार को अपनी गाड़ियों में कैद होकर रह गए। राजधानी शिमला के कार्ट रोड़ पर 4 से 6 घंटे सैलानियों और स्थानीय लोगों को जाम के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। उधर, प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से पर्यटन कारोबारी खासे उत्साहित हैं। आने वाले दिनों में भी प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की आवाजाही जारी रहने की उम्मीद है। वहीं प्रदेश भर में मनाली-लेह, आनी-कुल्लू और शिमला-रामपुर एनएच सहित 832 सड़कें ठप रहीं। प्रदेश में करीब 1,942 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं, जिससे कई इलाकों में अभी भी ब्लैकआउट है। पानी की 245 योजनाएं हांफ गई हैं। रोहतांग दर्रा सहित लाहौल व मनाली की ऊंची चोटियों पर रविवार को हिमपात हुआ। सोमवार को कुल्लू में 2000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर कम खतरे के स्तर वाले हिमस्खलन की संभावना जताई गई। रविवार को पूरा दिन नारकंडा बंद रहा। शिमला से किन्नौर जिला का संपर्क कट गया है। मनाली-केलांग सड़क फोर बाई फोर वाहनों के लिए बहाल हो गई। रविवार को सिस्सू से पर्यटकों को निकालने का क्रम चला रहा। भरमौर में लापता युवक और किशोर की तलाश के लिए सेना के हेलिकाप्टर और एसडीआरफ टीमें पहुंच गईं। अभी तक उन युवाओं का सुराग नहीं मिल पाया है। बीआरओ ने अटल टनल रोहतांग से होकर मनाली-केलांग मार्ग को वाहनों की आवाजाही के लिए सिंगल लेन में बहाल कर दिया। मनाली-केलांग सड़क बहाल होने के बाद केलांग, जिस्पा, सिस्सू, गोंधला में फंसे 200 से अधिक पर्यटकों को रेस्क्यू कर लिया गया। मंडी जिले में 500 से अधिक विद्युत ट्रांसफार्मर ठप पड़े हैं। 102 सड़कों पर अभी भी यातायात प्रभावित हैं। चंबा जिले में 78 सड़कें बंद हैं। 240 ट्रांसफार्मर बंद होने से सैकड़ों गांव में बिजली संकट रहा।

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शिमला: एनजेएचपीएस में 37वां सड़क सुरक्षा सप्ताह संपन्न

एनजेएचपीएस में 37वाँ सड़क सुरक्षा सप्ताह अत्यंत सफल एवं प्रभावशाली ढंग से मनाया गया। इस अवसर पर सड़क एवं औद्योगिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में डिफेंसिव ड्राइवर प्रशिक्षण, क्रेन एवं फोर्कलिफ्ट सुरक्षा प्रशिक्षण, सड़क सुरक्षा कठपुतली शो तथा रोड सेफ्टी क्विज़ शामिल रहे। दिनांक 10 जनवरी 2026 को आयोजित पूरे दिन के डिफेंसिव ड्राइवर प्रशिक्षण में ड्राइवरों को खतरों का पूर्वानुमान, जोखिम में कमी तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम से संबंधित थ्योरी एवं प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया। वहीं 12 जनवरी 2026 को क्रेन और फोर्कलिफ्ट ऑपरेटरों के लिए विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें सुरक्षित संचालन, रिगिंग अभ्यास, संचार तथा आपातकालीन प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अतिरिक्त 14 एवं 15 जनवरी 2026 को झाकड़ी और नाथपा बाँध में सड़क सुरक्षा से संबंधित कठपुतली शो एवं क्विज़ का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों ने कर्मचारियों एवं ठेका श्रमिकों में सुरक्षित सड़क व्यवहार के प्रति जागरूकता बढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया को रोचक एवं यादगार बनाया। यह मुहिम 17 जनवरी को चलाई गई। इस सड़क सुरक्षा सप्ताह का समापन परियोजना प्रमुख राजीव कपूर द्वारा किया गया। उन्होंने सड़क सुरक्षा के प्रति सुरक्षा विभाग द्वारा आयोजित विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की, विशेषकर “कठपुतली शो” की, जिससे सभी ने रोचक तरीके से सीख प्राप्त की। उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही से कितनी जानें खतरे में पड़ जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। हम सभी को नियमों का पालन करना चाहिए और जोखिमों को कम करना चाहिए, चाहे वह कार्यक्षेत्र हो या सड़क पर।

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विधानसभा सत्र: पंचायत चुनाव में देरी पर विपक्ष ने पेश किया स्थगन प्रस्ताव, सरकार ने भरी हामी

In Politics
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हिमाचल की 14वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज धर्मशाला के तपोवन में शुरू हो गया है। 5 दिसंबर तक चलने वाले सत्र के दौरान कई मुद्दों पर तपोवन में चर्चा होगी। इस सत्र में कुल आठ बैठकें होंगी। पहले दिन सदन में प्रश्नकाल में गतिरोध पैदा कर विपक्ष ने पंचायतों के चुनाव में देरी करने पर सारा काम रोककर स्थगन प्रस्ताव लाया। इस पर हंगामा होने की आशंका थी पर सरकार ने चर्चा के लिए हामी भर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की सबसे बड़ी रक्षक कांग्रेस पार्टी है, महिलाओं के लिए पंचायती राज संस्थाओं में कांग्रेस ने आरक्षण का प्रावधान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूं तो यह मामला अर्धन्यायिक रहा है। लेकिन इसके बावजूद विपक्ष ने आज संविधान दिवस होने की बात की है तो सरकार ने इसे मंजूर किया है। उन्होंने कहा कि कानून का यदि सही मायने में कोई संरक्षक है तो वह कांग्रेस पार्टी ही है। जो भी इस संबंध में कार्य हो रहा है वह कानून की परिधि में ही हो रहा है। कानून की परिभाषा को स्पष्ट करने का अधिकार न्यायालय के पास है और मामला कोर्ट में है। इससे पूर्व भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव लाते हुए कहा कि सरकार सांविधानिक संस्थाओं का सम्मान करे। पंचायत चुनाव समय पर होने चाहिए। आज विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन में संविधान की प्रस्तावना भी सभी से पढ़वाई। चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि 1975 में आपातकाल लगाकर भी इसी तरह से चुनाव टाले गए थे। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा प्रबंधन एक्ट लगाकर इसकी आड़ में चुनाव टाले जा रहे हैं। कोविड जैसा संकट होने के बावजूद भाजपा सरकार ने चुनाव करवाए। यह बहुत बड़ा संकट था। उससे बड़ा संकट आज की तिथि में नहीं है। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने भाजपा विधायक रणधीर शर्मा की ओर से स्थगन प्रस्ताव लाने के बाद सीएम को सदन की अगली कार्यसूची के बारे में अवगत करवाने की बात की। इस पर जयराम ठाकुर ने विरोध किया। इस पर स्पीकर ने नियम 72 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा किया जा सकता है। इसके बाद सीएम ने कार्यसूची पढ़ी। सदन के पटल पर राष्ट्रपति और राज्यपाल से मंजूर विधेयक भी रखे गए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मंडी में सरकार के तीन साल पूरा होने पर जश्न नहीं, विजन बताएंगे।

मोदी की स्वास्थ्य गारंटी : आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े 56.67 करोड़ लोग

In Health
guarantee: 56.67 crore people connected to Ayushman Bharat Digital Mission

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की थी। मोदी के नेतृत्व में ही 2021-2022 से 2025-2026 तक 5 वर्षों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया था। इसकी वजह से पीएम मोदी के गारंटी का भी असर देखने को साफ मिला और इस योजना के तहत 29 फरवरी, 2024 तक 56.67 करोड़ लोगों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। 29 फरवरी, 2024 तक, 27.73 करोड़ महिलाएं और 29.11 करोड़ पुरुषों को आभा कार्ड से लाभ हुआ है। वहीं 34.89 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दस्तावेजों को इससे जोड़ा गया है। क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में यूनिफाइड डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की मदद करने के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इससे सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता खोलने के लिए ऑफलाइन मोड को मदद पहुंचती है। इसके अलावा भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा के लिए आभा ऐप और आरोग्य सेतु जैसे विभिन्न एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो आम लोगों को मदद पहुंचाती है। आभा ऐप एक प्रकार का डिजिटल स्टोरेज है, जो किसी भी व्यक्ति के मेडिकल दस्तावेजों का रखने का काम आता है। इस ऐप के जरिए मरीज रजिस्टर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क भी कर सकते हैं।    भारत में बीजेपी की मोदी सरकार ने बीते 10 सालों के अपनी सरकार में कई सारे मील के पत्थर हासिल किया है। इन 10 सालों में पीएम मोदी के विजन ने भारत को अगले 23 साल बाद यानी साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के ओर मजबूती से कदम भी बढ़ा लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने देश के हित में जो भी फैसले लिए है, उनमें से हेल्थ सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।        

देश के 45 शिक्षकों को मिला 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार', राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

In Education
45 teachers of the country received 'National Teacher Award', honored by President Draupadi Murmu

  आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।  आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्‍मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।  पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।    आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।  आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्‍मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।  पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।   

Asia Cup 2025: आज दुबई में भारत-पाक के बीच होने वाले मैच को लेकर देशभर में विरोध

In Sports
 Asia Cup 2025: Protest across the country regarding the match between India and Pakistan in Dubai today

  एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में आज मैच होने वाला है। भारत-पाकिस्तान के बीच मैच का मुकाबला हमेशा से रोमांचक रहा है। इसे देखने के लिए लोगों में बहुत उत्साह देखा जाता था। लेकिन इस बार इस मैच को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोग भी भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर गुस्से में है। सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस मैच का जोरो से बहिष्कार किया जा रहा है। साथ ही पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिवारों ने भी इस मैच पर कड़ा विरोध जताया है। अब तो भाजपा के कई सहयोगी भी इस मैच के विरोध में हैं। हालांकि क्रिकेट फैंस इसे लेकर अलग बंटे हुए हैं। इस मैच का कहीं विरोध किया जा रहा है, तो कहीं टीम इंडिया की जीत के लिए पूजा भी हो रही है।   नई खेल नीति के मुताबिक सरकार की नई खेल नीति के मुताबिक भारत ने फैसला किया है भारत पाकिस्तान के साथ कोई भी द्विपक्षीय मैच नहीं खेलेगा पर बहुपक्षीय टूर्नामेंट जैसे कि एशिया कप या ICC प्रतियोगिता में पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा।   विरोध की वजह  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच यह पहला इंटरनेशनल मैच है। आपको बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों द्वारा पहलगाम हमला हुआ था जिसमें कई भारतीय मरे थे और कहा जा रहा था कि इस हमले के पीछे पकिस्तान का हाथ है। इसके जवाब में भारत ने  7 मई को ऑपरेशन सिंदूर किया। इसी वजह से भारत के लोगों में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर नाराजगी और गुस्सा है।    ओवैसी की पार्टी AIMIM ने किया प्रदर्शन हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से पूछा है कि क्या मैच से कमाया जाने वाला मुनाफ़ा पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों की जान से ज्यादा कीमती है। अहमदाबाद में AIMIM ने भारत-पाकिस्तान मैच के खिलाफ प्रदर्शन किया।    AAP कार्यकर्ताओं ने किया बहिष्कार  चंडीगढ़ में AAP कार्यकर्ताओं ने भी 'BCCI शर्म करो' के नारे लगाए   शिंदे शिवसेना नेता ने किया विरोध शिंदे शिवसेना के नेता संजय निरूपम ने इस मैच के विरोध में कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत को क्षति पहुंचाने वाली नीति अपनाई है, पाकिस्तान ने आतंकियों को पाला पोषा है और इन आतंकियों ने भारत के निर्दोष लोगों पर हमले किए हैं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहिए।    शिवसेना उद्धव गुट ने मैच के विरोध में तोड़ डाले टीवी   पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने किया बहिष्कार पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा कि वे भारत-पाकिस्तान मैच के साथ पूरे एशिया कप का बहिष्कार कर रहे हैं हूं। उन्होंने कहा कि पुलवामा, पहलगाम, पठानकोट जैसे आतंकी हमलों को भुलाया नहीं जा सकता।     पीड़ित परिवारों ने जाहिर किया गुस्सा पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए पुणे के संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने कहा कि यह मैच नहीं होना चाहिए था। यह बहुत ही शर्मनाक है। अभी हाल में पहलगाम हमला हुआ और फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ। तो इसके बाद यह मैच नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा यह भी कहा कि इन्हें परवाह नहीं कि कोई मर गया।    

कौन है चालदा महासू, क्यों उनकी प्रवास यात्रा में जुड़ते है हजारों श्रद्धालु ?

In First Blessing
Who is Chalda Mahasu, why do thousands of devotees join his pilgrimage?

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही देवताओं की भूमि है जहाँ प्रत्येक पर्वत, प्रत्येक घाटी और प्रत्येक गाँव में देवताओं की समृद्ध परंपराएँ आज भी जीवंत हैं। बता दें कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से श्री चालदा महासू सोमवार को हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो चुके है। इतिहास में देवता पहली बार हिमाचल पहुंच रहे है। हिमालयी लोक संस्कृति में महासू देवता न्याय, आस्था और परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं। चालदा महासू देवता जिन्हें न्याय का देवता कहा जाता है, जो एक स्थान पर स्थिर नहीं रहते है। वे भगवान शिव के अंश माने जाते है। चालदा महासू महाराज पालकी में बैठकर पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते है, लोगों की समस्याएं सुनते है, न्याय करते है और अपराधियों को दंड देते है।  विशेषकर जौनसार बावर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और शिमला जिले में चालदा महाराज को लेकर लोगों में असीम आस्था है। चालदा महासू को छत्रधारी भी कहा जाता है। चालदा महासू की यात्रा जौनसार बावर, और सिरमौर में एक पर्व के जैसे मनाई जाती है। उनकी वार्षिक प्रवास यात्रा बरवांश कहलाती है जिसमें विशेष पूजा का आयोजन होता है। यात्रा में फाड़का (तांबे का बर्तन) छत्र और पालकी आगे चलती है जिसके पीछे भक्त चलते हैं।  कौन है चालदा महासू देवता:  चालदा महासू चार महासू भाइयों में सबसे छोटे भाई है अन्य तीन भाई बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू (बौठा महासू)  भी भगवान शिव के ही रूप माने गए हैं। इनमें बासिक महासू सबसे बड़े हैं, जबकि बौठा महासू, पबासिक महासू दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। बौठा महासू का मंदिर हनोल में, बासिक महासू का मैंद्रथ में और पबासिक महासू का मंदिर बंगाण क्षेत्र के ठडियार व देवती-देववन में है। जबकि, चालदा महासू हमेशा जौनसार-बावर, बंगाण, फतह-पर्वत व हिमाचल क्षेत्र के प्रवास पर रहते हैं।  इनकी पालकी को क्षेत्रीय लोग पूजा-अर्चना के लिए नियमित अंतराल पर एक जगह से दूसरी जगह प्रवास पर ले जाते हैं। देवता के प्रवास पर रहने से कई क्षेत्रों में दशकों बाद चालदा महासू के दर्शन नसीब हो पाते हैं। कुछ इलाकों में तो देवता के दर्शन की चाह में पीढ़ियां गुजर जाती हैं। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, और जुब्बल तक महासू देवता को इष्ट देव (कुल देवता) के रूप में पूजा जाता है। इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मंदिर को न्यायालय के रूप में मान्यता मिली हुई है।  कहां स्थित है चारों महासू का मुख्य मंदिर:    उत्तराखंड के हनोल में चारों महासू भाइयों का मुख्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर में मुख्य रूप से बूठिया महासू (बौठा महासू) की पूजा होती है। मैंद्रथ नामक स्थान पर बासिक महासू की पूजा होती है। टोंस नदी के दायें तट पर बंगाण क्षेत्र में स्थित ठडियार (उत्तरकाशी) गांव में पबासिक महासू पूजे जाते हैं। सबसे छोटे भाई चालदा महासू भ्रमणप्रिय देवता हैं, जो कि 12 वर्ष तक उत्तरकाशी और 12 वर्ष तक देहरादून जिले में भ्रमण करते हैं। इनकी एक-एक वर्ष तक अलग-अलग स्थानों पर पूजा होती है, जिनमें हाजा, बिशोई, कोटी कनासर, मशक, उदपाल्टा, मौना आदि पूजा स्थल प्रमुख हैं। महासू के मुख्य धाम हनोल मंदिर में सुबह-शाम नौबत बजती है और दीया-बत्ती की जाती है।  कुछ सप्ताह पहले पहुंच जाता है बकरा:  प्राचीन मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि चालदा महासू का बकरा कुछ सप्ताह पूर्व ही उस स्थान पर पहुंच जाता जाता है जिस स्थान पर महाराज की अगली देव यात्रा होती है। यह बकरा देवता की इच्छा और संकेत का प्रतीक होता है।  हैरानी की बात यह है की ये बकरा बिना किसी मानवीय निर्देश के अपनी यात्रा पूरी करता है और सही स्थान पर पहुंच जाता है।     

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

हिमाचल: आउटसोर्स भर्तियों की याचिका पर होगी अंतिम सुनवाई, जानें पूरी खबर

In News
Himachal: Final hearing will be held on the petition regarding outsourced recruitments, know the full news

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 दिसंबर से इस मामले में अंतिम सुनवाई शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। सरकारी व अर्ध-सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में की जा रही आउटसोर्स भर्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मामले में आंशिक सुनवाई की। खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे सरकार द्वारा लागू की गई आउटसोर्स नीति की वैधता के प्रश्न तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य में आउटसोर्स भर्तियों की आड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। कई गैर-पंजीकृत और अनुभवहीन संस्थाओं को मैनपावर उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि नई टेंडर प्रक्रिया के बावजूद अधिकांश मामलों में आउटसोर्स कर्मचारी वही रहते हैं, केवल ठेकेदार बदल जाते हैं, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कमीशन के लेन-देन तक सीमित होकर रह जाती है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि हजारों नियमित पदों के बावजूद उनके विरुद्ध आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्तियां की गई हैं, जबकि नियमों के अनुसार आउटसोर्स व्यवस्था केवल आपात परिस्थितियों में ही लागू की जानी चाहिए। याचिकाओं में इस पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग की गई थी, हालांकि अदालत ने इसे फिलहाल उचित नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विस्तृत जांच के बजाय अभी आउटसोर्स नीति की वैधता पर ही विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2024 को आउटसोर्स भर्तियों पर पूर्ण रोक लगाई थी और 8 जनवरी 2025 को इस रोक को हटाने से इनकार कर दिया था। राज्य सरकार ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी थी।

जम्मू: श्रीनगर के थाने में धमाका, 9 मौ*तें और 32 घायल

In National News
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जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के नौगाम पुलिस थाने में शुक्रवार रात करीब 11:20 बजे भारी विस्फोट हुआ। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 पुलिसकर्मियों समेत 32 लोग घायल हो गए। धमाके से लगी भीषण आग में वहां खड़े एक दर्जन से अधिक वाहन जल गए। सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल मामले में हाल ही में जब्त किए गए विस्फोटकों के एक बड़े जखीरे की सैंपलिंग करते समय ये धमाका हुआ है। जब्त किया विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट और एनपीएस था।  विस्फोट होने के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया। वहीं, घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्ते भी बंद कर दिए। सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद से सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ. मुजम्मिल गनई के दो ठिकानों से 360 किलो और 2,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट व एनपीएस जब्त किया था। बताया जा रहा है कि विस्फोटक सामग्री को पुलिस नौगाम पुलिस स्टेशन में लाई गई थी। इस मॉड्यूल के मुजम्मिल समेत 9 संदिग्धों को पुलिस अब तक गिरफ्तार कर चुकी है।   विस्फोट के कारणों की जांच अभी जारी है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात ने कहा कि पुलिस थाना नौगाम की एफआईआर संख्या 162/2025 की जांच के दौरान, 9 और 10 नवंबर 2025 को फरीदाबाद से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ, रसायन और रीजेंट बरामद किए गए थे। यह बरामदगी, बाकी बरामदगी की तरह, पुलिस स्टेशन नौगाम के खुले क्षेत्र में सुरक्षित रूप से ले जाकर रखी गई थी। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी है।

नेपाल: अंतरिम PM बनाने के लिए सेना-प्रदर्शनकारियों के बीच शुरू हुई बातचीत, कुलमान घिसिंग व सुशीला कार्की का नाम आगे

In International News
Talks started between army and protesters to make interim PM in Nepal, names of Kulman Ghisingh and Sushila Karki put forward.

  नेपाल में हुए हिंसक आंदोलन के बाद आज गुरुवार को हालात कंट्रोल में है। लेकिन फिर भी सेना ने एहतियातन राजधानी समेत कई इलाकों में  कर्फ्यू लगा रखा है। इस बीच, नेपाल में अंतरिम PM बनाने के लिए सेना-प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार,आर्मी हेडक्वार्टर में सुबह 10:30 बजे बातचीत शुरू हो गई थी। आपको बता दें कि सेना ने सभी पार्टी और नेताओं को भी इसके लिए अपनी अपनी राय देने को कहा है।   मीडिया के कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पद के लिए नेपाल के लाइट मैन कहे जाने वाले कुलमान घिसिंग और सुशीला कार्की का नाम आगे आ रहा है। हालांकि PM की रेस में कुलमान घिसिंग का नाम सुशीला कार्की से भी आगे चल रहा है। अंतिम फैसला देखना काफी दिलचस्प होगा कि किसे PM के नेतृत्व के लिए आगे किया जाता है।    सुशीला कार्की  सुशीला कार्की भ्रष्टाचार विरोधी शख्सियत के तौर पर जानी जाती हैं। इन्होनें भ्रष्टाचार के विरुद्ध कई बार सख्त बयान दिया है। आपको बता दें कि इन्होनें पॉलिटिकल साइंस में BHU से MA किया है। 2016 में वह नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी।    कुलमान घिसिंग  कुलमान घिसिंग को नेपाल के 'लाइट मैन' भी कहा जाता है। उन्होंने जमशेदपुर, झारखण्ड से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की है। 1994 में नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) से जुड़े और इसके बाद घाटे में चल रहे NEA को मुनाफे में बदल दिया। नेपाल की बिजली व्यवस्था, जो कि बहुत खराब थी, उसे भी सुधारने का श्रेय इन्हें ही जाता है।    नेपाल में इस तरह हुई हिंसक आंदोलन की शुरुआत सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफार्म को बैन किया था। ये कहकर कि इन प्लेटफॉर्म्स ने रजिस्ट्रशन नहीं करवाए हैं। इसके बाद 8 सितंबर को सरकार के भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ नेपाल के युवाओं ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन शुरू कर दिए। यह  प्रदर्शन धीरे धीरे हिंसा में प्रवर्तित हो गए और कई लोग इसमें मारे गए व कई ज़ख़्मी हुए। इसी बीच PM समेत कई मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। साथ ही इस दौरान प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सेना के सामने सामाजिक और राजनितिक सुधार को लेकर कई मांगे भी रखीं।    आगे क्या होगा  बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए कहा जायेगा। विशेषज्ञ का मानना है कि 6 महीने में चुनाव कराने के लिए अंतरिम सरकार बन सकती है।   

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

हिमाचल के इस गाँव में है 550 साल पुरानी ममी, आज भी बढ़ते है बाल और नाखून

In Banka Himachal
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हिमाचल प्रदेश एक रहस्यों से भरा राज्य है। यहां ऐसी कई चीज़ें है जिसे समझ पाना वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद मुश्किल है। ऐसे ही कई रहस्यों में से एक है हिमाचल की स्पीति घाटी में मौजूद करीब 550 साल पुरानी 'ममी'। करीब 550 साल पुरानी इस 'ममी' को स्थानीय लोग भगवान समझकर पूजते हैं। भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के लाहौल स्पीति के गयू गांव में मिली इस ममी का रहस्य आज भी बरकरार है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए देश विदेश से यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से करीब 50 किमी दूर गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण  दुनिया से कटा रहता है। कहते हैं कि यहां मिली यह ममी तिब्बत से गयू गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा संघा तेंजिन की है। कहा जाता है कि लामा ने साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 550 वर्ष से अधिक पाई गई है। आम तौर पर जब भी ममी की बात होती है तो जहन में मिस्र में पाए जाने वाली पट्टियों में लिपटी ममी याद आती है। किसी मृत शरीर को संरक्षित करने के लिए एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है, जिससे वह ममी लम्बे समय तक सरंक्षित रहती है। लेकिन इस ममी पर किसी तरह का कोई लेप नहीं लगाया गया है, फिर भी इतने वर्षों से यह ममी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इस तथ्य की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है। इस स्थान पर एक शरीर मौजूद है, जिसके सर बाल है, त्वचा है और नाखून भी पर न तो ये शरीर गलता है और न समय के साथ बदलता है। इसीलिए यहां के स्थानीय लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं। बताया जाता है कि ITBP के जवानों को खुदाई के दौरान इस ममी का पता चला था। सन 1975 में भूकंप के बाद एक पुराने मकबरे में ये भिक्षु का ममीकृत शरीर दब गया था। इसकी खुदाई बहुत बाद में 2004 में की गई थी, और तब से यह पुरातत्वविदों और जिज्ञासु यात्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। खुदाई करते वक्त ममी के सर पर कुदाल लग गया था। ममी के सर पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। देखने वालों की भीड़ देखकर बाद में इस ममी को गाँव में स्थापित किया गया। खास बात यह है कि ममी प्रकृति का प्रकोप झेलने के बावजूद भी सही सलामत है। प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम यह ममी मिस्र के ममीकरण से बिल्कुल अलग है। इसे सोकुशिनबुत्सु नामक एक प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम कहा जाता है, जो शरीर को उसके वसा और तरल पदार्थ से दूर कर देता है। इसका श्रेय जापान के यामागाटा में बौद्ध भिक्षुओं को दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस प्रक्रिया में दस साल तक लग सकते हैं। इसकी शुरुआत साधु के जौ, चावल और फलियों  (शरीर में वसा जोड़ने वाले भोजन) को खाने से रोकने के साथ होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मृत्यु के बाद वसा यानी फैट सड़ जाती है और इसलिए शरीर से वसा को हटाने से इसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह अंगों के आकार को इस हद तक कम करने में भी मदद करता है कि सूखा हुआ शरीर अपघटन का विरोध करता है। शरीर के पास एक निरोधक के साथ-मोमबत्तियां जलाई जाती है ताकि इसे धीरे-धीरे सूखने में मदद मिल सके। शरीर में नमी को खत्म करने और मांस को हड्डी पर संरक्षित करने के लिए एक विशेष आहार भी दिया जाता है। मृत्यु के बाद, भिक्षु को सावधानी से एक भूमिगत कमरे में रखा जाता है। समय के साथ भौतिक रूप सचमुच  में एक मूर्ति बन जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से तीस से भी कम स्व-ममीकृत भिक्षु दुनिया भर में पाए गए हैं। उनमें से अधिकांश जापान के एक द्वीप उत्तरी होंशू में पाए गए हैं। यहां पर भी भिक्षु प्राकृतिक ममीकरण की इस प्रथा का पालन करते हैं। संघा तेनज़िन के शरीर में अवशिष्ट नाइट्रोजन (लंबे समय तक भुखमरी का संकेत) के उच्च स्तर से पता चलता है कि उन्होंने खुद को ममी बनाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया था। दांत और बाल आज भी संरक्षित  इस ममी के दांत और बाल अभी भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं। इस मम्मी को एक छोटे से कमरे में एक कांच के बाड़े में रखा गया है, जो एक लोकप्रिय गोम्पा के करीब स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए इस ममी को एक कमरे में रखा गया है। पर्टयक खिड़की के माध्यम से उसकी एक झलक देख सकते है। इस कमरे को केवल महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान खोला जाता है। गयू आधुनिकीकरण से अछूता एक शांत स्थान है। संघा तेंजिन की ममी आज एक मंदिर में विराजमान है, उसका मुँह खुला है, उसके दाँत दिखाई दे रहे हैं और आँखें खोखली हैं। वसा और नमी से रहित, यह जीवित बुद्ध का प्रतीक माना जाता है। गाँव के अस्तित्व के लिए दिया था बलिदान मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि संघा तेंजिन ने गाँव के अस्तित्व के लिए खुद को बलिदान कर दिया था। कहानी यह है कि उन्होंने अपने अनुयायियों से विनाशकारी बिच्छू के संक्रमण के बाद खुद को ममीकृत करने के लिए कहा। जब उनकी आत्मा ने उनके शरीर को छोड़ दिया, तो ऐसा माना जाता है कि क्षितिज पर एक इंद्रधनुष दिखाई दिया जिसके बाद बिच्छू गायब हो गए और प्लेग समाप्त हो गया। सिर्फ 100 लोग बस्ते है इस गांव में  गयू गांव एक बेहद शांतिपूर्ण और सुंदर गांव है। इस गांव में लगभग 100 लोग हैं। यहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर के स्थानों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस गांव की दूरी काज़ा से लगभग 80 किमी है। जबकि शिमला से लगभग 430 किमी और मनाली से कुंजुम दर्रे के माध्यम से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है। यहां आने का सबसे सही समय गर्मियों के दौरान है।  

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
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बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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