मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आज हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवाएं (एच.पी.ए.एस.) के 18 परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने भेंट की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश के लोगों के कल्याण के लिए समर्पण भाव से कार्य करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लोगों के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में अधिकारियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक वर्ग को लाभान्वित करने के लिए राज्य सरकार ने नीतियों में सकारात्मक बदलाव किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर इन सकारात्मक बदलावों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने अधिकारियों को समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए सेवा भाव से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान, एच.पी.ए.एस. अधिकारियों ने प्रशिक्षण के अनुभव मुख्यमंत्री के साथ साझा किए और मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि प्रदेश के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क राजीव कुमार इस अवसर पर उपस्थित थे।
**अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक आयोजित उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि हिमकेयर योजना को बंद करने की प्रदेश सरकार की कोई मंशा नहीं है। इस योजना की कुछ कमियों को दूर कर इसे और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके। अग्निहोत्री आज हिमकेयर कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड के संबंध में गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा बतौर सदस्य मौजूद थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष अफवाह फैला रहा है कि प्रदेश सरकार ने हिमकेयर योजना को बंद कर दिया है, जो सरासर गलत है। सच्चाई यह है कि राज्य सरकार ने कुछ अनियमितताएं पाए जाने के बाद केवल निजी अस्पतालों को इस योजना के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया है। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लोगों को सरकारी अस्पतालों में हिमकेयर कार्ड के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा जारी रहेगी। हिमकेयर कार्ड से स्वास्थ्य लाभ लेने पर सरकार द्वारा हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां मेडिकल बिल और उपचार की लागत में बहुत ज्यादा अंतर पाया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा अभी निजी अस्पतालों को 150 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है जबकि सरकारी अस्पतालों को 307 करोड़ की अदायगी की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस योजना के अंतर्गत कुल 457 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सीमा निर्धारित करने के कारण प्रदेश में आयुष्मान भारत कार्ड का लाभ लेने वाले पांच लाख 32 हजार परिवार ही पंजीकृत हैं, जबकि प्रदेश में ऐसे 14 लाख 83 हजार परिवार हैं, जिन्हें आयुष्मान भारत योजना में पंजीकृत किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार आयुष्मान भारत योजना को प्रदेश में संचालित करने के लिए हर वर्ष केवल 50 करोड़ रुपये ही प्रदान करती है। इस वित्त वर्ष के शुरुआती छह माह में ही यह 50 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। शेष बचे महीनों में आयुष्मान के तहत सभी देनदारियों का भुगतान प्रदेश सरकार को करना होगा, जिसकी अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान से जुड़े व्यय के संदर्भ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से बातचीत की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बैरी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा और उप-निदेशक हिमकेयर व आयुष्मान भारत देवेंद्र कुमार भी इस मौके पर उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश की कुछ जगहों पर आज मौसम विभाग ने भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया हैं। शिमला शहर में भारी बारिश से पेड़ गिरने से गाडिय़ों को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में भूस्खलन का खतरा मंडरा गया है। सांगटी, कृष्णानगर व संजौली में बहुमंजिला भवन खतरे की जद में हैं। वहीं, जोगिंद्रनगर उपमंडल में बुधवार को भारी बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। भूस्खलन के कारण सियुरी से छपरोट सडक़ बंद हो गई है। मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई भागों में भारी बारिश दर्ज की गई है। करसोग उपमंडल में भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। कई मार्गों पर आवाजाही ठप है। खराब मौसम के कारण विभिन्न स्थानों पर उत्पन्न स्थितियों और बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत उपमंडल के सभी सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में गुरुवार को एक दिन की छुट्टी घोषित की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य के कई भागों में दस अगस्त तक बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आठ और नौ तथा 11 से 13 अगस्त के लिए यलो अलर्ट जारी हुआ है। प्रदेश भर में बीते 24 घंटे के दौरान हुई बारिश में 748 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। इनमें पीडब्ल्यूडी को 312 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज हुआ है।
** मंडी-कुल्लू-शिमला में बाढ़ में बहे लोगों की तलाश में सर्च आपरेशन जारी बादल फटने की घटना के सात दिन बाद शिमला के सुन्नी में दो शव बरामद हुए हैं। अब तक तीनों जिलों में 21 शव बरामद किए जा चुके हैं। बुधवार को शिमला में मिले दोनों शव महिलाओं के हैं और दोनों की पहचान रितिका और रचना के रूप में हुई है। यह दोनों शव सुन्नी डैम से बरामद किए गए हैं। शिमला में अब तक बरामद शवों की संख्या 11 हो गई है। हालांकि इनमें से अब तक चार की ही पहचान हो सकी है। अन्य बरामद शवों को पहचान के लिए आईजीएमसी शिमला में रखा गया है, जबकि परिजनों के डीएनए सैंपल लैब में भेजे गए हैं। इसके अलावा शिमला में ही बरामद दो शवों का बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया। रेस्क्यू अभियान में मिले शवों को शिनाख्त के बाद परिजनों को सौंप दिया था। इनकी पहचान रचना उम्र 23 वर्ष गांव सूगा नजदीक सरपारा और दूसरे शव की पहना प्रीतिका पुत्री राजकुमार पांडे झारखंड निवासी के तौर पर हुई थी। उधर, कुल्लू और मंडी में बुधवार को चलाए गए सर्च अभियान के दौरान कोई भी शव नहीं मिल पाया है। यहां सर्च अभियान को जारी रखने का फैसला किया गया है। मंडी में अब भी एक और कुल्लू में दस लोग लापता हैं। कुल्लू के तीन लोग शिमला की तरफ बहे हैं। इनकी पहचान के लिए परिजनों के डीएनए सैंपल लिए गए हैं। समेज त्रासदी को लेकर चल रहे सर्च अभियान में अभी तक दस शवों को बरामद किया जा चुका है। सभी शवों का पोस्टमार्टम करवा दिया गया है। सर्च आपरेशन के दौरान बरामद शवों को पोस्टमार्टम करवाने के बाद आईजीएमसी शिमला के शव गृह में रखा जा रहा है। जिन शवों की पहचान नहीं हो पा रही है उनके डीएनए मैच किए जा रहें। शिमला में मंगलवार को मिले एक युवक के शव को लेकर दोबारा संशय बन गया है। इस शव को पहले कांगड़ा के युवक का बताया जा रहा था। हालांकि युवक के अभिभावकों ने शव को पहचानने से इनकार कर दिया है। इसके बाद युवक का शव परिजनों को नहीं सौंपा है। हालांकि पहचान के लिए युवक के परिजनों का डीएनए सैंपल लिया गया है। इसके मिलान के बाद ही पहचान हो पाएगी। गौरतलब है कि शिमला से 33 लोग लापता हो गए थे। इनमें से ज्यादातर बेहद खराब हालत में बरामद हो रहे हैं। इन शवों को पहचानने के लिए डीएनए की मदद ली जा रही है। अब गुरुवार को नौंवे दिन भी शिमला, मंडी और कुल्लू से लापता लोगों की तलाश की जाएगी।
**दिखाने होंगे ये ज़रूरी दस्तावेज, तभी होगा बदलाव ! अब आधार कार्ड में जन्मतिथि और नाम बदलवाना आसान नहीं रहा। अब पहले की तरह आधार कार्ड में डेट ऑफ़ बर्थ या नाम नहीं बदला जाएगा। अब UIDAI यानी यूनीक आईडेंटिटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अब नियमो में कई बलाव किए है। अब आधार कार्ड में डेट ऑफ़ बर्थ चेंज करवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र और हाई स्कूल की मार्कशीट दिखाना ज़रूरी हो गया है। बिना जन्म प्रमाणपत्र के आधार कार्ड में डेट ऑफ़ बर्थ और नाम में कोई भी बदलाव नहीं किए जा सकेंगे। इसके साथ ही जन्मतिथि में बदलाव करने के लिए एक व नाम में कोई बदलाव करने के लिए सिर्फ दो बार ही मौका दिया जाएगा। वही हाईस्कूल पास न करने वाली महिलाएं व पुरुषों के लिए जन्म प्रमाण पत्र दिखाना जरूरी है तभी आपके आधार कार्ड में डेट ऑफ़ बर्थ और नाम में बदलाव किया जा सकेगा।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) ने रैगिंग के मामलों को रोकने के लिए एंटी रैगिंग कमेटी का गठन कर दिया है। बुधवार को एचपीयू ने कमेटी को अधिसूचित कर दिया है और वेबसाइट पर सदस्यों के नंबर और ईमेल एड्रेस जारी कर दिए हैं। छात्र मोबाइल नंबर या फिर ईमेल के माध्यम से सीधे कमेटी सदस्यों से रैगिंग की शिकायत कर सकते हैं। एचपीयू ने कॉलेजों के लिए अलग से कमेटी गठित की है। हालांकि, कॉलेजों में भी एंटी रैगिंग कमेटियों का अलग से गठन किया जाता है। अगर कॉलेज स्तर पर समस्या नहीं निपटती है तो छात्र उक्त कमेटी के पास अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम की अध्यक्षता में बनी एचपीयू की एंटी रैगिंग कमेटी में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ममता मोक्टा, चीफ वार्डन प्रो. आरएल जिंटा, अधिष्ठाता संकाय लाइफ साइंस, काॅमर्स एंड मैनेजमेंट, एआर डीएस कार्यालय, और एससीए अध्यक्ष को शामिल किया गया है। इसके अलावा एंटी रैगिंग कमेटी एचपीयू परिसर में डीएस प्रो. बीके शिवराम, डीन संकाय सोशल साइंस, चीफ वार्डन, निदेशक यूआईटी, निदेशक यूसीबीएस, यूआईएलएस, अतिरिक्त चीफ वार्डन और एआर डीएस बतौर सदस्य शामिल किए हैं। एचपीयू से संबद्ध कॉलेजों के लिए बनाई एंटी रैगिंग कमेटी में डीएन कॉलेज और निदेशक कॉलेज विकास परिषद के अलावा प्रो अर्पणा नेगी और प्राचार्य संजौली कॉलेज सदस्य होंगे। सभी सदस्यों के ई मेल और लैंडलाइन नंबर विवि की वेबसाइट पर अपलोड हैं। छात्र रैगिंग और परिसर में पेश आ रही समस्याओं को ई मेल और कॉल कर दर्ज करवा सकेंगे। विवि के कुलसचिव ने विवि के आम छात्र-छात्राओं की समस्याएं सुनने और निपटारे के लिए छात्र शिकायत निवारण कमेटी का गठन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ममता मोक्टा की अध्यक्षता में किया है। इसमें चीफ वार्डन प्रो. आरएल जिंटा, के अलावा प्रो. नीलिमा कंवर, प्रो. जीता राम, प्रो. मनु सूद और एआर, एसओ डीएसडब्लू कार्यालय सदस्य बनाए गए हैं।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस से पीड़ित (91) मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से इस साल की यह पहली मौत है। आईजीएमसी में पंथाघाटी के रहने वाले 91 साल का पीड़ित मरीज कई दिनों से अस्पताल में उपचाराधीन था। 29 जुलाई को मरीज को मेडिकल आईसीयू में दाखिल किया गया जबकि 2 अगस्त को मरीज का स्क्रब टेस्ट पॉजिटिव आया। मरीज बुखार और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहा था। गंभीर स्थिति में होने के कारण मरीज की बुधवार को मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मरीज उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गुर्दे के रोग समेत अन्य बीमारियों से भी जूझ रहा था। इसके अलावा मरीज ने निजी अस्पताल में भी जांच करवाई थी। लेकिन अब अस्पताल ने स्क्रब से मरीज की मौत के बाद इलाज के लिए आए मरीजो को सचेत करना शुरू कर दिया है। आईजीएमसी का दावा है कि वर्ष 2024 में अब तक कुल 301 स्क्रब टायफस के सैंपल की जांच की है। इसमें 44 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक आज मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में होगी। इस बैठक में कई अहम फैसले होंगे। विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने की कैबिनेट में मंजूरी मिल सकती है। इसमें मानसून के दौरान बादल फटने से हुई घटनाओं के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों से संबंधित चर्चा भी हो सकती है। आपदा में हुए नुकसान को लेकर राहत पैकेज पर सरकार निर्णय ले सकती है।पिछले साल आई आपदा के बाद एक तय अवधि के लिए सरकार ने अपने स्तर पर विशेष पैकेज दिया था। इस बार भी पीड़ितों को आवास सुविधा देने जैसे निर्णय हो सकते हैं। इसके अलावा हिमकेयर योजना में पाई गई अनियमितताओं पर चर्चा और स्वास्थ्य विभाग में ऐसी योजनाओं में विभिन्न सुधारों के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति की रिपोर्ट भी राज्य कैबिनेट की बैठक में रखी जा सकती है।
आउटसोर्स कर्मियों लंबित के वेतन का जल्दी भुगतान करे सरकार सिर्फ़ बयानबाज़ी ही नहीं जनहित के काम भी करे सरकार शिमला : शिमला से जारी वक्तव्य में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार बयानबाजी से ही काम चलाना चाहती है। हर दिन अख़बारों में बयान आते हैं कि जल्दी ही भर्ती के परिणाम घोषित होंगे। नई नौकरियां निकाली जाएगी। लेकिन यह बातें सिर्फ़ ज़ुबानी जमा खर्च से आगे नहीं बढ़ पाते हैं। हर रोज़ मुख्यमंत्री या किसी न किसी मंत्री द्वारा भर्ती परिणामों के जल्दी से जल्दी जारी होने, नई भर्तियां निकाले जाने की खबरें ही आती हैं। लेकिन कभी परिणाम आने की खबर नहीं आई। सरकार बयानबाजी के आगे नहीं बढ़ पाई है। डेढ़ साल से युवा सड़कों पर इंतज़ार कर रहे हैं। आश्वासनों से थककर युवा कर्मचारी चयन आयोग के दफ़्तर के बाहर क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। इतने लंबे समय तक सिर्फ़ आश्वासनों से काम नहीं चल सकता है। अब कोरी बयानबाजी करने के बजाय सरकार को परिणाम जारी करना चाहिए। जयराम ठाकुर ने कहा कि कई विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मियों को लंबे समय से वेतन नहीं मिल रहा है। बहुत से लोग फ़ोन करके बताते हैं कि वेतन नहीं मिल रहा है। जवाबदेह अधिकारी बजट न होने का हवाला देकर टरका देते हैं। कब तक मिलेगा यह भी पता नहीं। घर से बाहर रह कर काम कर रहे लोगों को हर महीनें रहने-खाने का खर्च भी वहन करना पड़ता है। इसके अलावा और भी पारिवारिक ज़िम्मेदारियां होती है। ऐसे में लोगों को यदि चार-चार, छः-छः माह तक वेतन नहीं मिलेगा तो कैसे काम चलेगा। इस तरह से लंबे समय तक वेतन लटका कर रखना संवेदनहीनता है। सरकार लोगों से जुड़े मुद्दों को संवेदनशील होकर सुलझाए। आउटसोर्स कर्मियों के बकाया वेतना के भुगतान के साथ समय पर वेतन देने का प्रावधान करे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि डेढ़ साल से सरकार सिर्फ़ आश्वासन के सहारे चल रही है। अब बयानबाजी से काम नहीं चल सकता है। सरकार अब काम करे और लोगों की समस्याओं का हल निकाले। डेढ़ साल से एक दो हफ़्ते में परीक्षा परिणाम जारी होंगे, जैसे बयान सुन-सुनकर सब थक गए हैं। अब प्रदेश के युवाओं को आश्वासन नहीं भर्ती का परिणाम चाहिए। सरकार जल्दी से जल्दी लंबित पड़ी परीक्षाओं के परिणाम निकाले और नई भर्तियों की घोषणा करे।
327 करोड़ रुपए से की जा रही है ई-बसों की खरीद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां हिमाचल पथ परिवहन निगम की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार निगम को आर्थिक घाटे से उबारने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी और निगम को आत्मनिर्भर बनाएगी। उन्होंने कहा कि बस सेवा सुविधाएं प्रदेश के लोगों के लिए जीवन रेखा का कार्य करती है क्योंकि प्रदेश में परिवहन का यह मुख्य साधन है। हिमाचल पथ परिवहन निगम लोगों को सुलभ और सुविधाजनक परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाता है और निगम के 12 हजार कर्मचारी इस संस्था की नींव हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम को हरित परिवहन प्रणाली में परिवर्तित किया जा रहा है और विश्वसनीय परिवहन सेवा के लिए निगम में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े को शामिल किया गया है। वर्तमान में निगम की 110 ई-बसें और 50 ई-टैक्सियां कार्यशील हैं। इसके अतिरिक्त, निगम को आर्थिक घाटे से उबारने की दिशा में सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 327 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं और अतिरिक्त दो हजार टाइप-2 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया चल रही है। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि निगम धार्मिक स्थानों में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत है। इस कड़ी में पहले चरण में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अयोध्या के लिए छह बसों की सुविधा दी गई है और आवश्यकता पड़ने पर इनकी संख्या में वृद्धि की जा सकती है। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में निगम विश्वसनीय परिवहन सेवाएं उपलब्ध करवा रहा है। उन्होंने कहा कि गत सात माह से निगम के कर्मचारियों और पेंशनरों को हर माह के पहली तारीख को वेतन और पेंशन मिल रहा है, जबकि पिछली भाजपा सरकार के दौरान कर्मचारियों और पेंशनरों को आठ से 10 दिनों के बाद वित्तीय अदायगी की जाती थी।
**जूनियर रेडक्रास स्वयं सेवकों ने भी पौधरोपण अभियान में लिया भाग हिमाचल प्रदेश राज्य रेडक्रास सोसायटी और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पौध रोपण अभियान में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने बतौर मुख्यतिथि भाग लिया। उन्होंने शिमला के अन्नाडेल के निकट ग्लेन में देवदार का पौधा रोपित किया। अभियान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अन्नाडेल स्कूल के जूनियर रेडक्रास स्वयं सेवकों ने 250 पौधे रोपित किए। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि हम सभी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने पौध रोपण अभियानों में सहभागिता सुनिश्चित कर प्रदेश के हरित आवरण को बढ़ाने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ हमें उनका संरक्षण भी सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बढ़ रही प्राकृतिक आपदाएं चिंता का विषय है, जिसके लिए हमें पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास से सितंबर, 2024 तक 80 करोड़ और मार्च, 2025 तक 1.4 अरब पौधे लगाना है। राज्यपाल ने कहा कि इस अभियान में हर व्यक्ति अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण योजना के तहत पौधारोपण के लिए वन विभाग को 150 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया है। इस राशि का उद्देश्य राज्य में हरित आवरण को विस्तार प्रदान कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वन विभाग ने राज्य में नौ हजार हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा, जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी और राज्य रेडक्रास के स्वयं सेवक भी उपस्थित थे।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा में सुधार वर्तमान राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर सात से 83 प्रतिशत पहुंच गई है। प्रदेश के अस्तित्व में आने के समय लगभग 300 शिक्षण संस्थान थे, जो आज बढ़कर 16 हजार से ज्यादा हो गए हैं। सरकार मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसको लेकर शिक्षा विभाग में 7,000 खाली पद भरे जा रहे हैं। राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में मंगलवार को अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में आधारभूत ढांचा मजबूत किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिले। इसके लिए शिक्षा में क्लस्टर सिस्टम लागू किया है। इससे स्कूलों की तस्वीर बदल रही है। बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है। संसाधनों का उचित उपयोग हो रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में भी बेहतर शिक्षा के लिए प्रयास कर रही है। वर्तमान सरकार ने अध्यापकों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रमण कराया है। विदेशों की अच्छी शिक्षा प्रणाली समझकर प्रदेश में लागू करने के प्रयास हो रहे हैं। शिक्षा ढांचा मजबूत करने के लिए विद्यार्थियों की शून्य संख्या वाले 99 स्कूल बंद करने का फैसला लिया है। पांच और पांच से कम विद्यार्थी संख्या वाले स्कूल मर्ज कर रहे हैं। दो से तीन किलोमीटर के दायरे में स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है।
**पुरानी सुविधाएं बंद और खाने-पीने की चीजें महंगी कर रही है सरकार **सरकार सुनिश्चित करे कि आपदा प्रभावितों को न होने पाए कोई परेशानी शिमला से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष ने सरकार द्वारा डिपुओं में मिलने वाले सरसों के तेल के दाम बढ़ाने पर सरकार की आलोचना की है। सरकार के किसी भी फ़ैसले से प्रदेश की जनता को कोई राहत नहीं मिल रही है। प्रदेश में ऐसी सरकार पहली बार आई है, जिसका हर फ़ैसला सरकार के लिए आफ़त बनता है। कभी डीज़ल के दाम तो कभी बिजली-पानी के दाम बढ़ाकर सरकार प्रदेश के लोगों को महंगाई के मुंह में झोंकती है तो कभी सीमेंट, स्टील और गृह निर्माण में आने वाली चीजों के दाम बढ़ाकर। अब सरकार ने सरसों के तेल के दाम में दस परसेंट से ज़्यादा की वृद्धि कर दी है। आपदा से जूझ रहे प्रदेशवासियों के लिए यह फ़ैसला परेशान करने वाला है। सरकार को इस तरह के जनविरोधी फ़ैसलों से बाज आना होगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार सभी को परेशान करने का काम कर रही है। सरकार पुरानी सुविधाएं बंद कर रही है, जिससे लोगों के जेब पर बोझ बढ़ रहा है। जो योजनाएं चल भी रही हैं वहां मिलने वाली सुविधाओं की क़ीमतें बढ़ा रही हैं। डीपुओं में मिलने वाले तेल की क़ीमतें बढ़ाने का असर लाखों लोगों पर पड़ेगा। इसी तरह सरकार द्वारा हिम केयर जैसी योजना को निजी अस्पतालों में बंद कर दिया गया है। प्रदेश भर में लोग परेशान हो रहे हैं, इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर ही उन्हें निर्भर होना पड़ रहा है। सिर्फ़ सरकारी अस्पताल में इलाज होने की वजह से अब वेटिंग का समय बढ़ रहा है, जिससे अनावश्यक देरी हो रही है। इलाज में देरी जोखिम भरी होती है। सरकार इस बात को न जाने क्यों समझना नहीं चाहती है। इसी तरह प्रदेश वासियों को मिलने वाली फ्री बिजली को भी बंद करने की तरकीबें निकाल रही है, जिससे इस योजना को बंद किया जा सके। सरकार का काम जनहित की योजनाएं चलाना है न कि चल रही योजनाओं को बंद करना या उन्हें जटिल बनना।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश भर में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी है। बारिश की वजह से नुक़सान न हो इस दिशा में काम करना चाहिए। हर स्तर पर सतर्कता बरती जानी चाहिए। पहली बारिश में ही भारी नुक़सान हुआ। बड़ी संख्या में लोगों के घर नष्ट हो गए या रहने लायक़ नहीं बचे। बहुत घर ख़तरे के दायरे में भी आए हैं। ऐसे लोगों को हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपदा प्रभावितों को किसी प्रकार की को समस्या न हो, सरकार यह सुनिश्चित करे।
हिमाचल प्रदेश में 31 जुलाई को आधी रात में आई त्रासदी को 5 दिन बीत गए हैं। मगर इस तबाही में लापता हुई जिंदगियों की तलाश अभी भी जारी है। मंडी के तेरंग से लेकर रामपुर के समेज तक, आज 6ठे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। समेज गांव में 5 दिन बीत जाने के बाद भी लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है। समेज में लापता लोगों के परिजनों के डीएनए सैंपल लिए गए हैं, ताकि शव मिलने पर उसकी पहचान की जा सके। वहीं, मंडी के तेरंग में भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। यहां लापता 10 लोगों में से 8 के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि बाकि 2 की तलाश जारी है। मंडी के चौहार घाटी राजबन गांव में सर्च ऑपरेशन के छठे दिन 9वां शव बरामद हुआ है। गौरतलब है कि 31 जुलाई की रात को पद्धर उपमंडल के इस इलाके में बादल फटने के बाद तबाही मच गई थी, जिसमें 10 लोग लापता हो गए थे। मंगलवार को 46 साल की खुडी देवी का शव बरामद हुआ है जबकि 30 वर्षीय हरदेव की तलाश जारी है। सर्च ऑपरेशन में एनडीआरएफ से लेकर एसडीआरएफ, पुलिस और होमगार्ड के 100 जवान लगे हुए हैं। सर्च ऑपरेशन के लिए मशीन भी पहुंच गई है। कुल्लू, रामपुर और मंडी में बादल फटने और फ्लैश फ्लड के बाद मची तबाही के बाद ऑपरेशन लगातार जारी है। छठे दिन भी राहत और बचाव टीमें तीनों स्थानों पर लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। मानसून के सीजन में हिमाचल में बारिश हर साल तबाही मचाती है जिसमें जान और माल का काफी नुकसान होता है। हिमाचल प्रदेश में 27 जून से शुरू हुए मानसून में अब तक 37 बादल फटने या फिर फ्लैश फ्लड की घटनाएं हुई हैं, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई हैं जबकि 46 लोग लापता हैं। ये सभी लोग 31 जुलाई की रात और एक अगस्त की सुबह कुल्लू, मंडी और शिमला के रामपुर में बादल फटने के बाद से लापता हैं। अब तक के मानसून सीजन में 83 मकान, 14 दुकान और 23 गौशालाएं तबाह हो गई हैं। वहीं 38 घरों को नुकसान पहुंचा है और 56 मवेशियों की भी मौत हुई है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक इस बार के मानसून सीजन में 18 लैंडस्लाइड की घटनाएं हुई हैं।
**पोस्टमार्टम के लिए सीएचसी भेजा समेज त्रासदी के बाद से चल रहे सर्च ऑपरेशन के छठे दिन आज सुबह सुन्नी डैम के करीब डोगरी में एक शव बरामद हुआ है। यह शव पुरुष का है। यह जानकारी अतिरित उपायुक्त अभिषेक वर्मा ने दी। उन्होंने कहा कि पुरुष का शव सही हालात में है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सी एच सी सुन्नी के लिए भेज दिया गया है। कुल्लू प्रशासन को भी इसके बारे में सूचना दे दी गई है। उन्होंने कहा सर्च ऑपरेशन तीव्र गति से चला हुआ है। अभी तक छह शव सर्च ऑपरेशन के दौरान बरामद किए जा चुके है।
हिमाचल प्रदेश में 31 जुलाई को आधी रात में आई त्रासदी को 5 दिन बीत गए हैं। मगर इस तबाही में लापता हुई जिंदगियों की तलाश अभी भी जारी है। मंडी के तेरंग से लेकर रामपुर के समेज तक, आज 6ठे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। समेज गांव में 5 दिन बीत जाने के बाद भी लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है। समेज में लापता लोगों के परिजनों के डीएनए सैंपल लिए गए हैं, ताकि शव मिलने पर उसकी पहचान की जा सके। हीं, मंडी के तेरंग में भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। यहां लापता 10 लोगों में से 8 के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि बाकि 2 की तलाश जारी है।
हिमाचल प्रदेश में कई दिनों की भारी बारिश के कारण जल प्रलय की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश में जगह-जगह अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के चलते मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और 87 अन्य सड़कें बंद हो गई हैं। हिमाचल पुलिस ने बताया कि भारी बारिश के चलते चंद्रभाग नदी का जल स्तर बढ़ गया है। लाहौल और स्पीति जिले में दो जगहों पर अचानक बाढ़ आ गई और जिंग जिंगबार के पास मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग 3 पर पानी और मलबा आ गया। वहीं, अगले तीन दिन मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है और मौसम विभाग ने सात और आठ अगस्त के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, उत्तराखंड में केदारनाथ धाम और उसके रास्ते में फंसे लोगों को मौसम साफ होने के बाद सुरक्षित निकालने के काम में तेजी आई है। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने बताया कि भारी बारिश के चलते चंद्रभाग नदी का जल स्तर बढ़ गया है। लाहौल और स्पीति जिले में दो जगहों पर अचानक बाढ़ आ गई और जिंग जिंगबार के पास मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग 3 पर पानी और मलबा आ गया। इसके चलते दारचा और सरचू पुलिस चेक पोस्ट पर अगले आदेश तक यातायात रोक दिया गया। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) राजमार्ग से मलबा हटाने में जुटा है। मौसम विभाग ने पूर प्रदेश, विशेषतौर पर कांगड़ा, हमीरपुर और चांबा जिलों में भारी बारिश के चेतावनी दी है और खराब मौसम को लेकर दो दिन के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राज्य के अन्य भागों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर अतिवृष्टि के बाद अलग-अलग स्थानों पर फंसे यात्रियों और स्थानीय लोगों का रेस्क्यू पांचवें दिन भी जारी रहा। सोमवार को 1,401 लोगों का रेस्क्यू किया गया। एमआई-17, चिनूक सहित अन्य हेलिकॉप्टर से 645, पैदल मार्ग से 584, भीमबली-लिनचोली-चौमासी मार्ग से 172 यात्री व स्थानीय लोगों को निकाला गया। पांच दिन में 11,775 यात्रियों का रेस्क्यू किया जा चुका है।
हिमाचल प्रदेश के राजकीय बहुतकनीकी संस्थानों में लीट और पैट डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थी को अब सीधा प्रवेश मिल जाएगा। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग जल्द ही राजकीय बहुतकनीकी संस्थानों में लीट और पैट डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की रिक्त सीटों के लिए सीधा प्रवेश प्रक्रिया शुरू करेगा। इस दौरान अभ्यर्थियों को संबंधित बहुतकनीकी संस्थानों में मौके पर ही फार्म भरकर मेरिट में आने के बाद सीट कंफर्म करवानी होगी। तकनीकी शिक्षा विभाग जल्द ही संस्थान स्तर पर होने वाली इस स्पॉट काउंसलिंग राउंड के लिए शेड्यूल जारी करेगा। जानकारी के अनुसार, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण हिमाचल प्रदेश की ओर से पहले ऑनलाइन और फिर बाद में सेंटरलाइज्ड स्पॉट काउंसलिंग के जरिए तीन वर्षीय डिप्लोमा (पैट) और दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स (लीट) में सीटें भरी गई हैं, लेकिन अभी भी कई राजकीय और निजी बहुतकनीकी संस्थानों में कई कोर्सों में सीटें रिक्त पड़ी हुई हैं। हालांकि, तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स के लिए सेंटरलाइज्ड स्पॉट काउंसलिंग के जरिए 6 अगस्त को सुंदरनगर में काउंसलिंग प्रक्रिया होगी, लेकिन दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स के लिए 3 अगस्त को सेंटरलाइज्ड स्पॉट काउंसलिंग राउंड संपन्न हो चुका है। उसके बाद भी लीट में कई सीटें रिक्त पड़ी हैं। अब इन सीटों को भरने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग स्पॉट काउंसलिंग राउंड को शुरू करेगा। इस राउंड के तहत जिस संस्थान में किसी कोर्स से संबंधित सीटें रिक्त होंगी, तो उन्हें इस स्पॉट राउंड के जरिए भरा जाएगा। दो वर्षीय डिप्लोमा लीट के किस कोर्स में सिविल इंजी. 5 और मैकेनिकल इंजी.14 , ऑटोमोबाइल इंजी 35 और कंप्यूटर इंजी. 3, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजी. 48,इंस्ट्रुमेंटेशन इजी. 4 और 7 मेकाट्रोनिक्स की। प्रदेश के बहुतकनीकी संस्थानों में विभिन्न कोर्सों की रिक्त सीटें भरने के लिए सुंदरनगर में काउंसलिंग प्रक्रिया हुई थी। अभी भी कुछ कोर्सों में सीटें रिक्त रह गई हैं। इन सीटों को भरने के लिए अब संस्थान स्तर पर काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रभावितों से मुलाकात करने के लिए आ रही हैं| वे मंगलवार को आपदा प्रभावितों के साथ मुलाकात करेंगी| उनका सुबह नौ बजे जिला शिमला और जिला कल्लू के सीमावर्ती गांव समेज में जाकर आपदा प्रभावितों से मुलाकात करने की योजना है| वे यहां समेज गांव में आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगी और पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात करेंगी| इसके बाद में रामपुर से कुल्लू के बागीपुल के लिए रवाना होंगी| बागीपुल में दोपहर 12:30 बजे आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगी और लोगों से मुलाकात भी करेंगी| सके बाद दोपहर 1:40 पर वे निरमंड पहुंचेंगी| आज शाम सात बजे रामपुर आएंगी कंगना रनौत कंगना रनौत के हिमाचल दौरे पर उनके साथ आने के विधायक लोकेंद्र कुमार, रामपुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के प्रत्याशी रहे कौल नेगी, रामपुर बीजेपी मंडल अध्यक्ष कुलवीर खूंद और आनी मंडल अध्यक्ष योगेश भार्गव मौजूद रहेंगे| मंडी की संसद कंगना रनौत सोमवार शाम 7 बजे ही रामपुर पहुंच जाएंगी और उनका ठहराव एसजीवीएन गेस्ट हाउस में होगा|
शिमला: प्रदेश में फिलहाल मानसून सामान्य चल रहा है आने वाले 7 और 8 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है शिमला मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश के तीन जिला चंबा, कांगड़ा और मंडी में कुछ चुनिंदा इलाकों में भारी बारिश हो सकती है. वहीं बीते 24 घंटों में प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून सामान्य रहा है| बीते 24 घंटे के दौरान हिमाचल प्रदेश में सामान्य बारिश रिकार्ड की गई है | इस दौरान बारिश का प्रभाव प्रदेश के उत्तर क्षेत्र में अधिक देखने को मिला है. खास तौर पर लाहौल स्पीति, किन्नौर और कल्लू ज़िला के ऊंचाई वाले इलाकों में अधिक बारिश दर्ज की गई है| उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में भी प्रदेश कि ज्यादातर हिस्सों में सामान्य बारिश होने का अनुमान है. मगर 7 और 8 अगस्त की रात प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है| इस दौरान जिला चंबा, कांगड़ा और मंडी के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है|
शिमला: रामपुर के समेज गांव में बादल फटने से हुई त्रासदी के बाद आज पांचवे दिन सुन्नी डैम के करीब डोगरी से दो डेड बॉडी रिकवर की गई है। एक शव 14 से 17 साल की लड़की और दूसरा शव पुरुष का बताया जा रहा है. बीते कल भी सुन्नी डैम से एक युवती का शव बरामद किया गया था। ये शव समेज गांव में बाढ़ के कारण लापता हुए लोगों के हो सकते हैं, लेकिन अभी तक शवों की पहचान नहीं हो पाई है। अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि लड़की का शव सही हालात में है। वहीं पुरुष की शव क्षत विक्षत है। चेहरे की पहचान नहीं हो पा रही है। कुल्लू प्रशासन को भी इसके बारे में सूचना दे दी गई है. दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सीएचसी सुन्नी के लिए भेज दिया गया है. सर्च ऑपरेशन तीव्र गति से चला हुआ है|
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज चौड़ा मैदान, शिमला से यातायात के सुचारू संचालन और सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत शिमला और नूरपुर पुलिस जिला के लिए हाई विज़िबिलिटी क्षमता की 25 पेट्रोलिंग मोटर साइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए अनेक नवीन कदम उठाए गए हैं। प्रथम चरण के दौरान लगभग 3.72 करोड़ रुपये की लागत से शिमला के लिए 19 और नूरपुर पुलिस जिला के लिए छह पेट्रोलिंग मोटर साइकिलें प्रदान की गई हैं। शिमला जिला में पुलिस के लिए 30 हैंडहेल्ड स्पीड गन, 10 बॉडी वॉर्न कैमरे, 18 एल्को सेंसर, 30 वाहन संचालित गति संकेतों की स्थापना, 80 विस्तार योग्य अवरोध, 225 रिफ्लेक्टिव जैकेट, 115 रिचार्जेबल बैटन, 200 ट्रैफिक कोन, 70 इंटरलॉकिंग प्लास्टिक बैरिकेड और 30 सर्च लाइट उपलब्ध करवाई गई हैं। इसी तरह कांगड़ा और मंडी जिलों में सड़क सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा यातायात प्रवर्तन, निगरानी, बचाव और सड़क दुर्घटनाओं के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया में पुलिस की क्षमता में सुधार के लिए 27 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न प्रकार के उपकरणों की खरीद की जा रही है। उपकरणों में राजमार्ग पेट्रोलिंग के लिए शिमला, कांगड़ा और मंडी के लिए 42 चार पहिया वाहन और कांगड़ा और मंडी के लिए 27 दो पहिया वाहन, क्षेत्र प्रवर्तन के लिए 14 इंटरसेप्टर वाहन, बचाव कार्यों के लिए रेकर वाहन और हैंडहेल्ड स्पीड गन, बचाव कार्यों के लिए हाइड्रोलिक उपकरण, आपातकालीन बैग, वाहन संचालित गति संकेत सहित विभिन्न उपकरण खरीदे जा रहे हैं। इन उपकरणों की खरीद मार्च, 2025 से पहले पूरी कर ली जाएगी और इन्हें शिमला, कांगड़ा और मंडी जिलों के पुलिस स्टेशनों में वितरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के लिए विभिन्न गश्त निगरानी बचाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया उपकरण खरीदने के लिए लगभग 90 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। शिमला में एकीकृत सड़क सुरक्षा प्रवर्तन प्रणाली स्थापित करने के लिए लगभग 61.57 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह प्रणाली शिमला, कांगड़ा, मंडी जिलों में विभिन्न सड़कों पर 214 चिन्हित स्थानों पर एआई सुविधा से लैस 532 कैमरों से जुड़ी होगी। उन्होंने कहा कि सड़क इंजीनियरिंग में सुधार के लिए लोक निर्माण विभाग के लिए दीर्घकालीन कार्य योजना, पुलिस के लिए गश्त, सड़क सुरक्षा प्रवर्तन में सुधार के लिए उपकरणों की खरीद सहित पुलिस और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। कार्यक्रम के दौरान जिम, खाना क्लब मंडी की ओर से अध्यक्ष विकास कपूर और सचिव अचल कपूर ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दो लाख एक हजार रुपये का चेक मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भेंट किया। कार्यक्रम के दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, मुख्य संसदीय सचिव राम कुमार चौधरी, विधायक हरीश जनारथा, उपाध्यक्ष वन विकास निगम केहर सिंह खाची, पुलिस महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा, एडीजीपी अभिषेक त्रिवेदी, निदेशक सूचना एवं जन संपर्क राजीव कुमार, आयुक्त नगर निगम भूपिंदर अत्री, हिमाचल प्रदेश सड़क एवं अवसंरचना विकास निगम के निदेशक पवन कुमार शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज चौड़ा मैदान, शिमला से यातायात के सुचारू संचालन और सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत शिमला और नूरपुर पुलिस जिला के लिए हाई विज़िबिलिटी क्षमता की 25 पेट्रोलिंग मोटर साइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए अनेक नवीन कदम उठाए गए हैं। प्रथम चरण के दौरान लगभग 3.72 करोड़ रुपये की लागत से शिमला के लिए 19 और नूरपुर पुलिस जिला के लिए छह पेट्रोलिंग मोटर साइकिलें प्रदान की गई हैं। शिमला जिला में पुलिस के लिए 30 हैंडहेल्ड स्पीड गन, 10 बॉडी वॉर्न कैमरे, 18 एल्को सेंसर, 30 वाहन संचालित गति संकेतों की स्थापना, 80 विस्तार योग्य अवरोध, 225 रिफ्लेक्टिव जैकेट, 115 रिचार्जेबल बैटन, 200 ट्रैफिक कोन, 70 इंटरलॉकिंग प्लास्टिक बैरिकेड और 30 सर्च लाइट उपलब्ध करवाई गई हैं। इसी तरह कांगड़ा और मंडी जिलों में सड़क सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार यातायात प्रवर्तन, निगरानी, बचाव और सड़क दुर्घटनाओं के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया में पुलिस की क्षमता में सुधार के लिए 27 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न प्रकार के उपकरणों की खरीद की जा रही है। उपकरणों में राजमार्ग पेट्रोलिंग के लिए शिमला, कांगड़ा और मंडी के लिए 42 चार पहिया वाहन और कांगड़ा और मंडी के लिए 27 दो पहिया वाहन, क्षेत्र प्रवर्तन के लिए 14 इंटरसेक्टर वाहन, बचाव कार्यों के लिए रेकर वाहन और हैंडहेल्ड स्पीड गन, बचाव कार्यों के लिए हाइड्रोलिक उपकरण, आपातकालीन बैग, वाहन संचालित गति संकेत सहित विभिन्न उपकरण खरीदे जा रहे हैं। इन उपकरणों की खरीद मार्च, 2025 से पहले पूरी कर ली जाएगी और इन्हें शिमला, कांगड़ा और मंडी जिलों के पुलिस स्टेशनों में वितरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के लिए विभिन्न गश्त निगरानी बचाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया उपकरण खरीदने के लिए लगभग 90 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। शिमला में एकीकृत सड़क सुरक्षा प्रवर्तन प्रणाली स्थापित करने के लिए लगभग 61.57 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह प्रणाली शिमला, कांगड़ा, मंडी जिलों में विभिन्न सड़कों पर 214 चिन्हित स्थानों पर एआई सुविधा से लैस 532 कैमरों से जुड़ी होगी। उन्होंने कहा कि सड़क इंजीनियरिंग में सुधार के लिए लोक निर्माण विभाग के लिए दीर्घकालीन कार्य योजना, पुलिस के लिए गश्त, सड़क सुरक्षा प्रवर्तन में सुधार के लिए उपकरणों की खरीद सहित पुलिस और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। कार्यक्रम के दौरान जिम, खाना क्लब मंडी की ओर से अध्यक्ष विकास कपूर और सचिव अचल कपूर ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दो लाख एक हजार रुपये का चेक मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भेंट किया। कार्यक्रम के दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, मुख्य संसदीय सचिव राम कुमार चौधरी, विधायक हरीश जनारथा, उपाध्यक्ष वन विकास निगम केहर सिंह खाची, पुलिस महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा, एडीजीपी अभिषेक त्रिवेदी, निदेशक सूचना एवं जन संपर्क राजीव कुमार, आयुक्त नगर निगम भूपिंदर अत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
डॉ. परमार का जीवन सभी के लिए प्रेरणास्रोतः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश विधानसभा परिसर शिमला में हिमाचल निर्माता और प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की 118वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉ. परमार एक महान और दूरदर्शी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने प्रदेश के विकास की मजबूत आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार का सम्पूर्ण जीवन हिमाचल प्रदेश के लिए समर्पित रहा है। वर्तमान में प्रदेश विकास की राह पर अग्रसर है, यह डॉ. परमार का सपना था। डॉ. परमार ने प्रदेश का इतिहास ही नहीं, बल्कि भूगोल को भी बदला। उन्होंने प्रदेश की सीमाओं को और बड़ा किया। हिमाचल का अस्तित्व डॉ. परमार की अतुलनीय देन है। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार को हिमाचल की संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षक के रूप में भी जाना जाता है, उन्हें पर्यावरण से बहुत लगाव था। उन्होंने प्रदेश की सबसे बड़ी सम्पदा वनों के संरक्षण को सदैव ही अधिमान दिया। डॉ. परमार ने प्रदेश को हरित राज्य बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हमें डॉ. परमार के सिद्धांतों और उनके दिखाए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार हिमाचल का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से कार्य कर रही है। आर्थिक तंगी के बावजूद प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। सरकार द्वारा हर क्षेत्र में गुणात्मक बदलाव लाए जा रहे हैं। शिक्षा, जल विद्युत, पर्यटन व खाद्य प्रसंस्करण आदि क्षेत्रों में अनेक नवोन्मेषी पहल की जा रही हैं। सरकार द्वारा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ नीतिगत बदलाव लाए जा रहे हैं। बेहतर प्रबन्धन के फलस्वरूप इस वर्ष सरकार ने 2200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। प्रदेश सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डॉ. अंशुक अत्री व डॉ. राजेन्द्र अत्री द्वारा लिखित पुस्तक ‘परमारः हिमाचल के शिल्पकार’ और डॉ. अंशुक अत्री द्वारा अंग्रेजी भाषा में लिखित पुस्तक ‘द क्राफ्टिंग ऑफ हिमाचल प्रदेश’ का विमोचन किया। उन्होंने डॉ. परमार की जीवनी पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने रिज मैदान स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने डॉ. परमार की जीवनी पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने डॉ. परमार को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के स्वरूप में डॉ. परमार का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन के समय राज्य की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन डॉ. यशवंत सिंह परमार ने उन चुनौतियों का मजबूती से सामना किया और प्रदेश को बड़ी-बड़ी बाधाओं से बाहर निकाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने में डॉ. परमार की अहम भूमिका रही है। उनके द्वारा प्रदेश हित में किए गए कार्यों को सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने पुस्तकों के माध्यम से भी प्रदेश को नई दिशा दी। वर्तमान सरकार प्रदेश को आत्मनिर्भर राज्य बनाने की परिकल्पना के साथ दृढ़ इच्छा शक्ति से आगे बढ़ रही है। डॉ. परमार की दूरदर्शी सोच को साकार किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. परमार ने हर क्षेत्र में प्रदेश के सर्वांगीण विकास का लक्ष्य निर्धारित किया था। उन्होंने सदैव ही हिमाचल की संस्कृति का संरक्षण और संवर्द्धन किया तथा प्रदेश को विशेष पहचान दिलाई। विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार के प्रति हर व्यक्ति आदर और श्रद्धा का भाव रखता है। वह सादगी, सच्चाई और ईमानदारी के धनी थे। उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। डॉ. परमार ने विकसित हिमाचल की परिकल्पना की और आज हम निरंतर इस लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस अवसर पर सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग द्वारा डॉ. यशवंत सिंह परमार के जीवन पर आधारित वृतचित्र भी प्रदर्शित किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल बराक्टा व राम कुमार, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक संजय रतन, जीत राम कटवाल, मलेन्द्र राजन, हरीश जनारथा, कैप्टन रंजीत सिंह राणा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, उपाध्यक्ष हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम केहर सिंह खाची, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर व डॉ. राधा रमण शास्त्री, पूर्व विधायक, नगर निगम के पूर्व महापौर, निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क राजीव कुमार, विभिन्न जनप्रतिनिधि, निदेशक भाषा एवं कला संस्कृति विभाग पंकज ललित, सचिव विधानसभा यशपाल शर्मा, नगर निगम के आयुक्त भूपेन्द्र अत्री और अन्य व्यक्तियों ने भी डॉ. परमार को पुष्पांजलि अर्पित की।
शिमला जिले में रामपुर के समेज में आज चौथे दिन भी सर्च ऑपरेशन जारी है। सुबह से ही घटनास्थल पर एनडीआरएफ, सेना, पेरामिलिट्री के जवान सर्च ऑपरेशन जुटे चुके हैं। समेज गांव में आई त्रासदी को 4 दिन हो चुके हैं, लेकिन तबाही के निशान हर ओर फैले हुए हैं। समेज में 5 एलएनटी और 301 जवान सर्च ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। एसडीएम रामपुर निशांत तोमर ने बताया कि आज सुबह से ही सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इस मौके पर एसडीएम रामपुर खुद मौके पर मौजूद रहे। वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी आज समेज क्षेत्र का दौरा करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने समेज के आपदा प्रभावित परिवारों के लिए रामकृष्ण मिशन के सौजन्य से भेजी जा रही राहत सामग्री के वाहन को रामपुर में आज पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रवाना किया। इस दौरान पूर्व सीएम ने कहा कि 'इस आपदा में आम लोग और गैर सरकारी संस्थान आगे आई और बढ़-चढ़कर सहयोग कर रही हैं। इसके लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है। रामपुर से आज लगभग 6 लाख के करीब राहत सामग्री प्रभावित परिवारों के लिए रवाना की गई है। जिन लोगों के परिवार के सदस्य गए हैं हम उनको नहीं लौटा सकते, लेकिन जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास कर सकते हैं। पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि समेज और बागीपुल, मंडी में भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें 50 के करीब अभी भी लोग लापता हैं। यह हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद ही दुखद घटना है। इसको लेकर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा जी से भी बात की गई है। वो भी सहायता करने का प्रयास करेंगे। इस घटना से वो भी चिंतित हैं। आने वाले समय में इस तरह की घटनाएं न हो उसके लिए अध्ययन करने की आवश्यकता है और इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
शिमला: सुन्नी के डैम क्षेत्र में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान रविवार सुबह एक शव बरामद किया गया है। सुबह सात बजे स्थानीय लोगों को डैम के एक किनारे पर एक शव दिखाई था। इसकी सूचना सर्च ऑपरेशन में लगी टीम को दी गई। इसके बाद टीम ने शव को पानी से बाहर निकाला। शव एक महिला का है, जिसकी उम्र 20 से 25 वर्ष के करीब है। महिला की एक टांग शरीर के हिस्से के साथ नहीं थी। इसके साथ ही सिर का ऊपरी हिस्सा भी नहीं है। चेहरे पर काफी चोटें लगी हैं। महिला के कानों में टॉप्स है। रेस्क्यू टीम ने शव को सीएचसी सुन्नी में पोस्टमाटर्म के लिए भेज दिया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि एक शव सुन्नी में चल रहे सर्च अभियान में बरामद हुआ है। अभी इसकी पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन प्रथम दृष्टया से यह शव हाल ही का लगता है। अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है। शव की पहचान का काम तीव्र गति से चला हुआ है। इसके साथ ही कुल्लू प्रशासन को भी शव की पहचान के लिए सूचित कर दिया गया है। गौरतलब है कि रामपुर में 31 जुलाई को बादल फटने के बाद 36 लोग लापता हैं उनका अभी तक कोई पता नहीं चला है। बता दें कि समेज गांव में बादल फटने की घटना के बाद कुछ लोगों सतलुज नदी में बहने की संभावना है। ऐसे में इनकी तलाश के लिए समेज से करीब 120 किलोमीटर दूर सुन्नी-तत्तापानी में सर्च ऑपरेशन चलाया गया है, क्योंकि बादल फटने और बाढ़ आने से जैसी घटना होने पर 90 फीसदी शव कोल डैम साइट में शिमला-मंडी जिले की सीमा पर स्थित दोगरी गांव के आसपास ही मिलते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गुरुवार दोपहर से पुलिस और प्रशासन की टीमें यहां सर्च ऑपरेशन में जुटी हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू 15 अगस्त को देहरा में राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। उनके अलावा जिलास्तरीय कार्यक्रमों में भी मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है। जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्य विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया सोलन, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री शिमला, कर्नल धनीराम शांडिल हमीरपुर, चंद्र कुमार ऊना, हर्षवर्धन चौहान लाहौल स्पीति के केलांग, जगत सिंह नेगी किन्नौर के रिकांगपिओ, रोहित ठाकुर चंबा, अनिरुद्ध सिंह नाहन, विक्रमादित्य सिंह कुल्लू, राजेश धर्माणी मंडी और यादविंद्र गोमा बिलासपुर में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। उधर, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बताया कि 15 अगस्त को सुबह 11 बजे देहरा के शहीद भुवनेश डोगरा स्टेडियम में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत होगी। इस दौरान मुख्य संसदीय सचिव आशीष बुटेल और किशोरी लाल भी समारोह में शिरकत करेंगे। समारोह के लिए पुलिस विभाग, लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति विभाग, भाषा विभाग, नगर परिषद देहरा सहित अन्य सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर उनकी भूमिका से अवगत करवा दिया गया है। राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर देहरा में एसडीएम शिल्पी बेक्टा की अध्यक्षता में बैठक हुई। उपमंडल स्तर के अधिकारियों और नगर परिषद के प्रतिनिधियों के साथ हुई इस बैठक में एसडीएम ने व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के लिए सबको जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि देहरा में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए परेड का पूर्वाभ्यास 12, 13, 14 अगस्त को किया जाएगा।
जवाली विधानसभा क्षेत्र की पंचायत ढोल के दुराना गांव के शुभम धीमान 26 साल की उम्र में शहीद हो गए हैं। शुभम धीमान पुत्र स्वर्गीय रूमाल सिंह जो कि 14 डोगरा रेजीमेंट में थे व वर्तमान में लेह में अपनी सेवाएं दे रहे थे वह शुक्रवार शाम को लेह में अपनी ड्यूटी करते हुए गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के कारण शहीद हो गए। शुभम धीमान अभी अविवाहित थे। वह अपने पीछे माता संतोष देवी उम्र 53 साल और बड़ा भाई पंकज कुमार को छोड़ गए हैं। शुभम धीमान का बड़ा भाई पंकज धीमान लखनऊ में प्राईवेट नौकरी करता है। शुभम धीमान के पिता भी आर्मी से रिटार्यड हुए थे व डेढ़ साल पहले ही उनका देहांत हुआ है। इस परिवार के ज्यादातर सदस्य आर्मी की पृष्ठभूमि से संबंधित रहे हैं। शुभम धीमान डेढ़ महिना पहले ही छुट्टी काट कर गया था। उसके चाचा कैप्टन सतीश धीमान व दूसरे चाचा सूबेदार मेजर रिटायर्ड जोगिंद्र धीमान ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कल रात को सेना की तरफ से दुर्घटना के बारे जानकारी दी थी, लेकिन शनिवार सुबह बेटे के शहीद होने की सूचना दी गई। सेना की तरफ से बताया है कि पार्थिव शरीर रविवार को दोपहर 2 बजे तक गांव में पहुंच जाएगा। वहीं, पंचायत प्रधान शालू, मेजर पीसी आजाद, उपप्रधान साधू राम राणा, कैप्टन दूनी सिंह, सूबेदार मेजर अवतार सिंह पठानिया, रक्षपाल शास्त्री, कैप्टन पवन सिंह, कैप्टन हरवंस सिंह राणा, कैप्टन जगदीश राणा, कैप्टन बलदेव सिंह राणा सहित दुराना गांव के लोगों ने छोटी उम्र में वीर जवान शुभम के इस तरह से जाने पर गहरा दुख प्रकट किया।
रामपुर: शिमला जिले के उपमंडल रामपुर में समेज त्रासदी के तीसरे दिन सर्च ऑपरेशन खत्म होने के बाद देर रात को डीसी शिमला अनुपम कश्यप ने बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई। ये बैठक मोनाल कॉन्फ्रेंस हॉल एसजेवीएनएल रामपुर में आयोजित की गई, जिसमें ये फैसला लिया गया कि रविवार यानी आज से समेज में सर्च ऑपरेशन के लिए 6 एलएनटी मशीनों की मदद ली जाएगी। इसके साथ ही तैनात रेस्क्यू टीम में भी वृद्धि की जाएगी। डीसी शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि लोक निर्माण विभाग को प्रभावित सभी सड़कों को जल्द से जल्द बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। जल शक्ति विभाग को सभी प्रभावित पेयजल आपूर्ति की लाइनें जल्द बिछाने के निर्देश दिए हैं। विद्युत विभाग को तीन दिनों में प्रभावित क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग को 37 प्रभावित परिवारों को एक महीने का मुफ्त राशन मुहैया करवाने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग को टीडी नियमों के मुताबिक प्रभावितों को लकड़ी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। डीसी शिमला ने बताया कि समेज में सर्च ऑपरेशन के दौरान एक मेडिकल टीम नियुक्ति की जाएगी। रविवार से रेस्क्यू और मेडिकल टीम सुबह से लेकर शाम तक घटनास्थल पर ही सक्रिय रहेगी। बैठक के दौरान अभी तक के सर्च ऑपरेशन और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बैठक को संबोधित किया। इस दौरान आर्मी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, होमगार्ड, सीआईएसएफ, अग्निशमन के अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों के बारे में चर्चा की। बैठक में सर्च ऑपरेशन को लेकर आगामी रणनीति भी तैयार की गई। गौरतलब है कि 31 जुलाई की रात को रामपुर में भारी बारिश हुई और समेज गांव की पहाड़ियों में बादल फट गया। जिसके चलते गांव के साथ बहते नाले में बाढ़ आ गई। बादल फटने के चलते फ्लैश फ्लड आया, जिसमें भारी मात्रा में मलबा और बड़ी-बड़ी चट्टानें थी। लोग घरों में सो रहे थे जब ये सैलाब आया और सबको बहा ले गया। 1 अगस्त की सुबह तक समेज गांव का अस्तित्व ही मिट गया। जहां कभी एक भरा-पूरा गांव हुआ करता था, अब वहां हर ओर सिर्फ मलबा ही मलबा है। इस त्रासदी में 36 लोग लापता हैं, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। आज समेज में रेस्क्यू ऑपरेशन का चौथा दिन है, लेकिन किसी का कोई नामोनिशान नहीं है।
हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में पीटीए, पीरियड, एसएमसी और वर्क लोड आधार पर शिक्षकों और गैर शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है। इस बाबत उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों को आदेश जारी कर दिए हैं। पत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसी नियुक्तियों के लिए सरकार से वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी। भविष्य में कानूनी अड़चनें पड़ने पर संबंधित शिक्षण संस्थान प्रमुख ही जिम्मेवार होंगे। ऐसे मामले सामने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरकार के पास लगातार इस प्रकार की नियुक्तियां किए जाने की शिकायतें आई हैं। ऐसी नियुक्तियां होने के बाद संबंधित शिक्षक या गैर शिक्षक की ओर से स्थायी तौर पर रखने को लेकर कोर्ट की शरण ली जा रही है। ऐसे में सरकार ने इस बाबत सख्ती बरतते हुए स्कूल स्तर पर इस प्रकार की नियुक्तियां नहीं करने के आदेश जारी किए हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि स्कूलों में अस्थायी तौर पर किसी भी शिक्षक या गैर शिक्षक को नियुक्त नहीं किया जा सकता है। जिन स्कूलों में इस प्रकार की नियुक्तियां दी गई हैं, वहां की रिपोर्ट तलब की गई है। सरकार की ओर से इन नियुक्तियों के लिए वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी।
** चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रदान की जाएंगी विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज डॉ. राजेंद्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा, जिला कांगड़ा तथा इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों को सशक्त करने के लिए साधन और संसाधनों को व्यापक स्तर पर सृजित और सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और पर्याप्त स्टाफ की समुचित तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों को भविष्य की जरूरतों और तकनीक के आधार पर सुदृढ़ करने तथा संसाधन सृजन पर बल दिया। उन्होंने चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर विषयों की सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कमियों को चिन्हित कर उनका उचित समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणात्मक चिकित्सा देखभाल के लिए छह मरीजों के अनुपात पर एक स्टाफ नर्स तैनात की जाएगी। मुख्यमंत्री ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों से परामर्श के लिए प्रतीक्षा अवधि कम की जाएगी और परामर्श अवधि बढ़ाई जाएगी, जिसके लिए पर्याप्त संख्या में चिकित्सक तैनात किए जाएंगे। मरीजों के पंजीकरण के लिए पंजीकरण कांउटर की संख्या भी बढ़ाई जाएगी ताकि लोगों को चिकित्सक से परामर्श के लिए अधिक इंतजार न करना पड़े। बैठक में बताया गया कि टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में वर्ष 2023 में मेडिसिन विभाग में 72,069 मरीजों, ऑर्थोपेडिक्स में 56,124, जनरल सर्जरी में 25,856 मरीजों सहित सभी विभागों में कुुल 6,05,489 मरीजों ने चिकित्सा सुविधा का लाभ उठाया। मुख्यमंत्री ने टांडा महाविद्यालय में विभिन्न परियोजनाओं के निर्माण कार्य की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में 100 बिस्तर क्षमता का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ विकसित किया जा रहा है जिसे शीघ्र ही कार्यशील कर दिया जाएगा तथा बीएससी नर्सिंग कक्षाएं भी शुरू की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने महाविद्यालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों, पैरा मेडिकल तथा अन्य श्रेणियों के विभिन्न पदों को भरने की स्वीकृति भी दी। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला की समीक्षा करते हुए इसमें विभिन्न श्रेणियों के पदों के सृजन और लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित सभी निर्णय व्यापक स्तर पर जन कल्याण भावना के दृष्टिकोण से लिए जाएं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में विभिन्न भवनों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2023 में इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के मेडिसिन विभाग में 1,43,291 मरीजों, आर्थोपेडिक्स विभाग में 85,161, जनरल सर्जरी विभाग में 77,012 मरीजों सहित सभी विभागों में 8,72,829 मरीजों ने चिकित्सा सुविधा का लाभ उठाया। सुक्खू ने कहा कि अटल सुपर स्पेशिएलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाणा को भी निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, उपाध्यक्ष राज्य योजना बोर्ड भवानी सिंह पठानिया, विधायक संजय रतन, मलेंद्र राजन व हरीश जनारथा, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, टांडा व शिमला चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य व चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री ने किया समेज घटनास्थल का निरीक्षण लोक निर्माण एंव शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने शनिवार को समेज घटना स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रभावित लोगों और पीड़ितों से भी मिले। घटना स्थल पर स्थानीय लोगों ने घटना के बारे में कैबिनेट मंत्री को बताया।कैबिनेट मंत्री ने कहा कि समेज गांव में दो वैली ब्रिज स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए शिमला से वैली ब्रिज का सामान मंगवा लिया गया है। कुछ ही दिनों में वैली ब्रिज सुचारू हो जाएंगे ताकि स्थानीय लोगों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यहां पर अतिरिक्त मशीनरी की तैनाती की जा रही है ताकि खोज एवं बचाव कार्य को और तीव्रता मिल सके। इस बारे में संबंधित विभाग को निर्देश दे दिए गए है। कैबिनेट ने कहा कि यह त्रासदी झकझोरने वाली है। हम पूरी तरह लोगों के साथ खड़े है। प्रदेश सरकार हर संभव सहायता कर रही है। इस हादसे में लापता लोगों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चला हुआ है। लेकिन भारी मलबा होना के कारण सर्च ऑपरेशन में कई चुनौतियां पेश आ रही है। उन्होंने कहा कि 85 किलोमीटर के क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया जा रहा है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आर्मी, पैरा मिलिट्री फोर्स, पुलिस, होमगार्ड, अग्निशमन विभाग के सदस्य रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हुए है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गत दिवस समेज दौरे के दौरान आपदा प्रभावितों को 50 हजार रुपए की फौरी राहत राशि और किराए पर मकान के लिए 5000 रुपये देने की घोषणा की है, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश को आपदा से निपटने के लिए दिल खोल कर आर्थिक सहायता प्रदान करने का भी आग्रह किया। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने इस दौरान कैबिनेट मंत्री को खोज एवं बचाव कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान 7वें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं विधायक रामपुर नंद लाल, पूर्व सांसद एवं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष चंद्र प्रभा नेगी, पुलिस अधीक्षक शिमला संजीव कुमार गांधी, उपमंडल दण्डाधिकारी रामपुर निशांत तोमर सहित कई विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
** केवल जुलाई माह में ही 31,500 राजस्व मामले निपटाए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज कहा कि प्रदेशभर में अक्तूबर, 2023 से जुलाई, 2024 के मध्य राज्य सरकार द्वारा विशेेष राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से 1,63,268 इंतकाल, 9,417 तकसीम, 12,453 निशानदेही और 2,427 राजस्व त्रुटियों के मामलों का निस्तारण किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहली बार किसी प्रदेश सरकार ने वर्षों से पड़े राजस्व मामलों की समस्या का समाधान करने के लिए इस तरह की लोक अदालतों का आयोजन कर मिशन मोड में कार्य किया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इनके माध्यम से प्रदेश में 30 और 31 जुलाई, 2024 को 10,746 इंतकाल, 408 तकसीम और 541 निशानदेही के मामले निपटाने के साथ-साथ 131 राजस्व त्रुटियों को सुधारा गया। इसके अतिरिक्त जुलाई, 2024 में 16,514 इंतकाल, 554 तकसीम और 2,142 निशानदेही तथा 464 राजस्व त्रुटियों के मामलों का निस्तारण किया गया और जुलाई माह में 31,500 राजस्व मामलों का निपटारा किया गया। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के लोगों को इन अदालतों के माध्यम से घर-द्वार पर अपनी समस्याओं का समाधान मिल रहा है और राजस्व लोक अदालतों की सफलता का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि लोग इस सुविधा का बढ़-चढ़ कर लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से वर्षों से लंबित पड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप ही आमजन को राहत मिल रही है और लंबित राजस्व मामलों के समाधान के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अक्तूबर, 2023 से राजस्व लोक अदालतों का आयोजन करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह के अंतिम दो कार्य दिवस में इन लोक अदालतों का आयोजन कर लंबित राजस्व मामलों का समाधान किया जाता है ताकि लोगों को राजस्व कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में पारदर्शी और त्वरित प्रशासन प्रदान करने को अधिमान दे रही है। सरकार द्वारा लिए गए जन हितैषी निर्णयों से लोग उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जन-जन की सरकार है और आमजन की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर उनका समाधान किया जा रहा है।
शिमला के उपनगर न्यू टूटू में दिव्ययोग रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित दिव्य फिजियोथैरेपी सेंटर में रविवार, 4 अगस्त रविवार 11, 2024 तक जांच शिविर लगाया जा रहा है। इस शिविर में गठिया, फालिज, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, कन्धों और घुटनों का जाम होना, सरवाइकल,स्पाॅडिंलोसिज, बच्चों का समय से न चल पाना, इत्यादि की निशुल्क जांच की जाएगी। इस सेंटर में उपरोक्त रोगों का इलाज मैनुअल थेरेपी एवं आधुनिक उपकरणों द्वारा किया जाता है। संस्थान के अध्यक्ष विजय कुमार सूद ने कहा कि फिजियोथेरेपी सेहतमंद रहने के लिए बहुत जरूरी है। फिजियोथेरेपी कराने से मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है उन्होंने कहा कि पुराने दर्द से राहत दिलाने में फिजिकल थेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। फिजियोथेरेपी ने दवाइयों पर लोगों की निर्भरता कम कर दी है क्योंकि शरीर में होने वाले दर्द का इलाज बिना दवाई फिजियोथेरेपी से भी दूर किया जा सकता है। कोई भी अन्य जानकारी संस्थान के हेल्पलाइन 92185-38001 पर संपर्क कर ली जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश विवि (एचपीयू) ने स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स की खाली सीटों को भरने के लिए इस बार प्रवेश प्रक्रिया में ही बदलाव कर दिया है। पहली बार बदली प्रवेश प्रक्रिया के तहत एचपीयू पीजी की खाली सीटों को भरने के लिए कुछ शर्तें लगाकर छात्र-छात्राओं को आवेदन का मौका देने वाला है। इतना ही नहीं, एचपीयू सब्सिडाइज्ड और नॉन सब्सिडाइज्ड श्रेणी की सीटें भरने को प्रवेश परीक्षा आधारित कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 700, मेरिट आधारित कोर्स के लिए 500 रुपये फीस भी वसूल करेगा। फिर चाहे छात्र ने एडमिशन के लिए पहले ही आवेदन फीस चुका ली हो। हालांकि, यह परोक्षरूप से छात्र-छात्राओं पर अतिरिक्त फीस थोपी गई है। एचपीयू के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने सभी शैक्षणिक विभागों को कार्यालय आदेश जारी किए हैं। आदेशों में तय प्रक्रिया के अनुसार ही विभाग खाली सीटों के लिए फिर से आवेदन आमंत्रित करेंगे। अधिष्ठाता अध्ययन ने विभागों से तीन अगस्त तक खाली सीटों का ब्योरा और सीट भरने के लिए आवेदन मंगवाने से संबंधित जानकारी मांगी है। इसी के आधार पर एचपीयू पीजी कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन करने को एडमिशन पोर्टल खोलेगा। बता दें कि यह पहला मौका होगा जब विवि खाली सीटें भरने के लिए फीस की वसूली करेगा। पहले खाली सीटों पर वीसी की मंजूरी पर प्रवेश दिया जाता था। डीएस कार्यालय के सर्कुलर के मुताबिक प्रवेश, आवेदन और सीट आवंटन के लिए तीन नियमों के अनुसार सीटें भरी जानी हैं।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने हिमकेयर योजना को संशोधित किया है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सभी सरकारी सेवारत, सेवानिवृत्त अधिकारियों/कर्मचारियों को मुख्यमंत्री हिमाचल स्वास्थ्य देखभाल योजना (हिमकेयर) से तत्काल प्रभाव से बाहर कर दिया है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों का इंपेनलमेंट 1 सितंबर 2024 से वापस लेने का निर्णय लिया गया है। अब इन अस्पतालों में हिमकेयर योजना के तहत इलाज नहीं होगा। इस संबंध में सचिव स्वास्थ्य एम सुधा देवी की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने सोलन में कहा था कि बहुत से लोग निजी अस्पतालों में इलाज करवाने के लिए जाते हैं। जहां पर इलाज काफी महंगा है। जिस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहता। कुछ निजी अस्पताल मनमर्जी के रेट भी मरीजों को लगाते हैं। बताया जा रहा है कि इसी के चलते निजी अस्पतालों में हिमकेयर योजना के तहत इलाज की सुविधा को बंद करने का फैसला लिया गया है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार 5 अगस्त से तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद केवल सरकारी कर्मचारियों के तबादलों के ऐसे प्रस्तावों पर कार्रवाई और कार्यान्वयन किया जाएगा, जो व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 के पैरा 8 के तहत विशेष रूप से प्रदान की गई परिस्थितियों के अनुरूप होंगे। इस संबंध में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभाध्यक्षों, मंडलायुक्तों व उपायुक्तों को इन निर्देशों की कड़ाई से अनुपालन के लिए सभी संबंधितों के ध्यान में लाने को कहा है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 1 मार्च, 2024 को जारी पत्र के जरिये बताया था कि 1 अप्रैल, 2024 से या आदर्श आचार संहिता लागू होने की तारीख से जो भी पहले हो, कर्मचारियों के सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध फिर से प्रभावी हो जाएगा। इसी के तहत अब तबादलों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 70 आवेदन आ चुके हैं। जिला उपनिदेशकों के माध्यम से आवेदनों की जानकारी निदेशालय को देने का कार्य अभी भी जारी है। 5 अगस्त को इस बाबत शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में पहली बैठक होगी। इस बैठक में आवेदनों की छंटनी की जाएगी। इस बार से साक्षात्कार के आधार पर सामान्य श्रेणी क्षेत्रों के 15 और जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों के 9 शिक्षकों का चयन किया जाएगा। फ्लैगशिप योजनाओं के सफल क्रियान्वयन और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए छह विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे। बेहतर परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों को चयन में प्राथमिकता मिलेगी। चयनित शिक्षकों को पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल सम्मानित करेंगे। उधर, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए 28 आवेदन आए हैं। अब इन आवेदनों की छंटनी कर केंद्र सरकार को कुछ नाम भेजे जाएंगे। गैर शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षक राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्र नहीं होंगे। वार्षिक परीक्षा परिणाम के आधार पर शिक्षकों को अंक दिए जाएंगे। शिक्षा सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी साक्षात्कार भी लेगी। 24 शिक्षकों का आवेदनों के आधार पर चयन होगा। 6 शिक्षकों को उनके कार्यों के आधार पर सरकार खुद चुनेगी। ऐसे शिक्षक जिनके पास कम से कम पांच वर्ष का शिक्षण अनुभव और प्रधानाध्यापक, प्रधानाचार्य के मामले में पांच वर्ष का प्रशासनिक अनुभव होगा, वो ही चयन के लिए पात्र होंगे। सेवानिवृत्त शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्र नहीं होंगे। वे शिक्षक जिन्होंने चालू वर्ष की 31 मार्च तक सेवा की है, वे पात्र होंगे यदि वे अन्य सभी शर्तों को पूरा करते होंगे। विशेष पुरस्कार की श्रेणी में डाइट, एससीईआरटी, एसएसए और आरएमएसए में तैनात शिक्षकों को पुरस्कार दिया जाएगा। जिन शिक्षकों के पिछले पांच सालों की एसीआर गुड ग्रेड से नीचे है, उन्हें भी यह पुरस्कार नहीं मिलेंगे। बोर्ड कक्षाओं में कम से कम 75 फीसदी रिजल्ट हर साल देने वाले शिक्षकों को प्राथमिकता मिलेगी। मुख्य अध्यापकों और प्रधानाचार्यों के लिए 75 फीसदी रिजल्ट की शर्त रखी गई है।
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के चलते पर्यटन कारोबार को बड़ा झटका लगा है। पर्यटन स्थल सूने हैं। हिमाचल में अब तक ढाई हजार सैलानियों ने बुकिंग रद्द या होल्ड कर दी है। इसके अलावा ट्रैकिंग ट्रिप पर जाने का कार्यक्रम भी सैलानियों ने स्थगित कर दिया है। हालांकि बरसात के चलते हिमाचल में इन दिनों ऑफ सीजन चल रहा है, लेकिन इन दिनों में भी होटलों में 30 से 40 फीसदी तक एक्यूपेंसी रहती है। लेकिन प्राकृतिक आपदा के आपदा वीकेंड पर भी ऑक्यूपेंसी 10 फीसदी से कम है। हिमाचल की राजधानी शिमला के अलावा मनाली, धर्मशाला, मैक्लोडगंज, चंबा और डलहौजी में होटलों के कमरे खाली चल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में बीते साल 2023 में प्राकृतिक आपदा के चलते पर्यटन कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ था। उस समय कारोबारियों को करोड़ों की चपत लगी थी। आपदा के चलते कुल्लू-मंडी और मनाली में तबाही के डर से सैलानी पर्यटन नगरी धर्मशाला-मैक्लोडंगज आने से भी कतरा रहे हैं। वीकेंड पर एक आध कमरे की ही बुकिंग हो रही है। धर्मशाला का पर्यटन स्थल मैक्लोडगंज और भागसूनाग भी वीकेंड पर सूना है। हालांकि पर्यटन कारोबारियों को 15 अगस्त की छुट्टियों के दौरान तीन-चार दिन के लिए अच्छे कारोबार की उम्मीद है। होटल एसोसिएशन धर्मशाला के अध्यक्ष अश्विनी बांबा का कहना है कि बरसात में होटलों में एक-दो कमरे ही लग पा रहे हैं। ऑफ सीजन में सैलानियों को होटलों में 30 फीसदी तक छूट भी दी जा रही है, लेकिन फिर भी वीकेंड पर ऑक्यूपेंसी 15 फीसदी भी नहीं पहुंच रही। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के एजीएम नवदीप थापा ने बताया कि बरसात के मौसम में प्रदेश में हो रही तबाही के कारण सैलानियों में डर का माहौल है। पर्यटन कारोबार काफी कम हो गया है। निगम के होटलों में सैलानी बुकिंग रद्द करवा रहे हैं। सैलानी हिमाचल आने से डर रहे हैं। टूरिस्टों ने ट्रैकिंग ट्रिप होल्ड कर दिए हैं। अगर भारी बारिश का क्रम थम जाता है तो करीब 15 दिन बाद स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने कहर बरपाया है। बादल फटने से नालों में आई बाढ़ से कई लोग लापता हुए हैं। वहीं, भारी बारिश के साथ आए तेज तूफान ने किसानों और बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। प्रदेश में सेब की फसल तैयार है। इस बीच तेज तूफान के कारण पेड़ों से झड़ कर सेब के खेतों में ढेर लग गए हैं। ऐसे में सरकार ने बागवानों की पीड़ा को समझते हुए उन्हें राहत पहुंचाने का फैसला लिया है। इसके लिए एपीएमसी ने निर्धारित समय से पहले झड़े हुए सेब को खरीदने का फैसला लिया है, ताकि बागवानों का नुकसान होने से बचाया जा सके। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि दो दिन पहले मौसम बिगड़ने की वजह से सेब की फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में एचपीएमसी को बागवानों से सेब की खरीद करने को कहा गया है, जिसके लिए बागवानी को एचपीएमसी के केंद्र प्रभारियों से लिखित में आवेदन करना होगा। एचपीएमसी ने शुरुआती तौर पर अभी 20 केंद्रों पर सेब की खरीद शुरू कर दी है। इसके अलावा अगले कुछ दिनों में आपदा प्रभावित क्षेत्रों सहित कम ऊंचाई वाले सेब बहुल क्षेत्रों में 40 के करीब क्षेत्रों में सेब खरीद शुरू हो जाएगी।
हिमाचल प्रदेश के तीन जिलों में बादल फटने से आई बाढ़ के बाद लापता हुए 45 से अधिक लोगों का पता लगाने के लिए बचावकर्मियों ने ड्रोन तैनात किये हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी शुक्रवार को दी। बुधवार रात तीन जिलों- कुल्लू, मंडी और शिमला में बादल फटने से अचानक बाढ़ आने के बाद मंडी के राजबन गांव से दो शव और कुल्लू के निरमंड से एक शव बरामद किया गया। जानकारी के अनुसार तीन शवों की बरामदगी के साथ, कुल्लू, मंडी पधर और शिमला के रामपुर उपमंडल के निरमंड, सैंज और मलाणा क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। 45 लोग अभी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने शिमला और कुल्लू जिले की सीमा पर स्थित समेज जाकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि लापता लोगों में 17-18 महिलाएं और 8-9 बच्चे शामिल हैं। उन्होंने पीड़ितों के लिए 50 हजार रुपये की तत्काल राहत और अगले तीन महीने तक 5,000 रुपये प्रति माह किराया देने की भी घोषणा की। इसके अलावा, गैस, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामग्री भी मुहैया कराई जाएगी।
बादल फटने और बाढ़ आने से प्रदेश में 17 पुल ढहे और क्षतिग्रस्त हुए है। प्रदेश सरकार ने जरूरत के मुताबिक इन जगहों पर बेली ब्रिज लगाने के निर्देश दिए हैं। सेब बहुल क्षेत्रों की सड़कें दुरुस्त करने को कहा है। जिन सड़कों को ज्यादा नुकसान हुआ है और समय रहते ठीक नहीं हो सकती हैं, उन क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों के लिए डोजर और जेसीबी लगाए गए हैं। प्रदेश सरकार ने विभाग से प्रतिदिन रिपोर्ट मांगी है। बीते साल आई आपदा से सबक लेते हुए सरकार ने पहले ही बेली ब्रिज खरीद रखे थे। जोन स्तर पर इन ब्रिजों को रखा गया था। अब इन वेली ब्रिज को जिला शिमला, मंडी, कुल्लू के लिए भेजा जाएगा। हालांकि इससे पहले लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर क्षतिग्रस्त पुलों का निरीक्षण करेंगे। अगर कोई पुल रिपेयर करने योग्य होगा तो उसकी मरम्मत होगी। जो पुल ढह गया है, वहां तुरंत बेली ब्रिज लगाने का काम शुरू हो जाएगा। लोक निर्माण विभाग का दावा है कि जिला कुल्लू के निरमंड में सबसे ज्यादा 9 पुल ढहे व क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के चलते 455 सड़कें यातायात के लिए प्रभावित हुई हैं। कई सड़कें ऐसी हैं, जिनका नामोनिशान मिट गया है। हालांकि विभाग का दावा है कि 100 से ज्यादा सड़कें यातायात के लिए बहाल की गई हैं। वहीं, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ नरेंद्र पॉल ने कहा कि विभाग का हर कर्मचारी मुस्तैदी के साथ सड़कों को बहाल करने में डटा है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के चलते विभाग को अब तक 300 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। सड़कें और पुुल टूटने से लोगों की परेशानी बढ़ी है। ऐसे में जहां जहां पुल ढह गए हैं, वहां बेली ब्रिज लगाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज जिला शिमला के रामपुर में बादल फटने के कारण प्रभावित हुए समेज क्षेत्र का दौरा कर राहत और पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। इस दुःखद् घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की और आपदा प्रभावितों के लिए तत्काल राहत पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आपदा प्रभावित परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता के रूप में 50 हजार रुपये और किराए पर आवासीय सुविधा के लिए तीन महीने के लिए प्रतिमाह पांच हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार भोजन, रसोई गैस, कंबल और चूल्हे जैसी मूलभूत वस्तुएं निःशुल्क प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों को आश्वासन दिया कि उनके घरों के पुनर्निर्माण के लिए शीघ्र वित्तीय सहायता की घोषणा की जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन को विस्थापित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए ताकि इन परिवारों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला समेज के विद्यार्थियों से भेंट की, जिनके आठ सहपाठी इस घटना के बाद लापता हैं। आठवीं कक्षा के विद्यार्थी राखी और कार्तिक ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस घटना से वे सदमें में हैं और उनका स्कूल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को ढाढस बंधाते हुए उन्हें हौसला रखने और परिवार का सहयोग करने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बेहतर और बड़ा स्कूल फिर से निर्मित किया जाएगा। समेज की निवासी बिमला देवी ने बादल फटने की घटना वाली भयानक रात को याद करते हुए मुख्यमंत्री से कहा कि गांव के लोग डर के साए में जी रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों के दुःख-दर्द को साझा किया और आश्वासन दिया कि राज्य सरकार आपदा प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। दुःख की इस घड़ी में प्रदेश सरकार प्रभावित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और आपदा प्रभावितों को भरपूर सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आपदा को झेल रहा हर प्रभावित परिवार मेरे परिवार के सदस्य के समान है और प्रभावित परिवारों के लिए शीघ्र ही आपदा राहत की घोषणा की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि समेज में 33 लोग लापता हैं और आपदा में फंसे दस लोगों को सफलतापूर्वक सुरक्षित बचा लिया गया है। इसके अलावा गांव में 38 घर और दो पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। बाद में समेज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला, मंडी और कुल्लू में बादल फटने और भारी बारिश से मानव जीवन और संपत्ति को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इन जिलों में पांच स्थानों पर बादल फटेे हैं जिससे क्षेत्र में हर तरफ तबाही का खौफनाक मंजर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में यातायात और पैदल चलने योग्य 14 पुल, 115 घर, 23 गोशाला, 10 दुकानें और मछली फॉर्म की तीन दुकानें तबाह हो गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युद्ध स्तर पर बचाव और राहत कार्य कर रही है। अब तक आपदा में फंसे 55 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका हैै। लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोक निर्माण विभाग को प्राथमिकता के आधार पर सड़कों को बहाल करने के लिए कहा गया है ताकि लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष नदंलाल, आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार, उपायुक्त शिमला अनुुपम कश्यप, उपायुक्त कुल्लू तोरूल एस. रवीश और अन्य अधिकारी इस दौरान उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश में बारिश के बाद आई भारी तबाही ने सभी को चौंका कर रख दिया। गुरूवार देर रात आई बारिश ने किसी को आपनो से दूर किया तो किसी के आशियानों की उजाड़ कर रख दिया लेकिन बारिश का ये कर्म अभी यही नहीं रखने वाला। मौसम विभाग केंद्र शिमला ने आगामी पांच दिनों के लिए भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। 2 से 7 अगस्त तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना ज़ाहिर की है। जिसमें मंडी , शिमला , सिरमौर ,कांगड़ा, बिलासपुर और हमीरपुर शामिल है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी नालो से दूर रहने की भी अपील की है। मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान के बाद प्रदेश के लोगों डर भी बैठ गया है। अगस्त महीने की शुरुआत के साथ ही प्रदेशभर से ऐसी ऐसी खबरे सामने आई कि लोग अभी भी डरे और सहमे हुए है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जिला मंडी के जोगिन्द्रनगर में 110 मेगावाट की शानन जल विद्युत परियोजना को लेकर जारी कानूनी लड़ाई के संदर्भ में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस परियोजना पर सर्वोच्च न्यायालय में प्रदेश सरकार का मामला मजबूती से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि प्रदेश के लोगों के हितों की रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से प्रदेश के लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार हिमाचल के अधिकारों को वापिस लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल के दौरान शानन जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया गया था। वर्ष 1925 में मंडी के तत्कालीन राजा जोगिन्द्र बहादुर और पंजाब के मुख्य अभियंता के बीच 99 वर्षों के लिए लीज़ समझौता हस्ताक्षरित हुआ था। उस समय से ही इसका प्रशासनिक अधिकार पंजाब के पास है। इस वर्ष 2 मार्च, 2024 को लीज़ समाप्त हो गई है। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के क्षेत्र अधिकार में हैं और पंजाब सरकार को अविलम्ब इस परियोजना को हिमाचल प्रदेश को लौटा देना चाहिए। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के लोगों के हितों को प्राथमिकता प्रदान करते हुए प्रदेश सरकार इस परियोजना से लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कानूनी कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार परियोजना को हासिल करने के लिए एक मजबूत मामला तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता अनूप रतन, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चन्द शर्मा, प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, विशेष सचिव अरिन्दम चौधरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
**प्रदेश में अभी जारी रहेगा बारिश का दौर हिमाचल प्रदेश में बीते 24 घंटे के दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बारिश हुई है, जिसमें कुछ स्थानों पर भारी बारिश से तबाही का मंजर देखने को मिला है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के कुछ भागों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के विज्ञानिक संदीप कुमार ने बताया कि बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश में अधिकांश क्षेत्रों में बारिश हुई है, कुछ जिलों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है। चंबा, कांगड़ा, बिलासपुर हमीरपुर, सोलन शिमला में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हुई है। आज चंबा कांगड़ा कुल्लू मंडी में एक दो स्थानों पर भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी है। 2 से 6 अगस्त तक कुछ स्थानों में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। इस दौरान ऊना, बिलासपुर, सोलन, मंडी, सिरमौर, शिमला, चंबा, कांगड़ा में एक दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में लोगो को नदी नालों के नजदीक न जाने की सलाह है क्योंकि भारी बारिश के बाद फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है।
हिमाचल प्रदेश में बीते 24 घंटे के दौरान भारी बारिश से तबाही हुई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारी बारिश से हुई तबाही को लेकर सचिवालय में आपात बैठक की और सभी जिलों से नुकसान की रिपोर्ट लेने के साथ सभी संबंधित जिलों के उपायुक्तों को रेस्क्यू में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अभी तक की जानकारी के मुताबिक शिमला, कुल्लू और मंडी में 50 लोग बादल फटने की घटनाओं से लापता हैं, जबकि तीन लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं और 3 लोग सुरक्षित निकाले गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भारी बारिश से तीन जिलों ने नुकसान हुआ है। रामपुर के झाखड़ी समेज खड्ड में 36 लोग लापता हैं जिसमें दो लोगों के शव बरामद हो गए हैं, जबकि दो लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इसी तरह मंडी पधर में 9 लोग लापता हैं एक शव बरामद हो गया है एक व्यक्ति को जख्मी हालत में बाहर निकाल लिया है। कुल्लू के मलाणा में पॉवर प्रॉजेक्ट के डैम को भी भारी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री ख़ुद मौके के लिए रवाना हो रहे हैं। मौके पर राहत बचाव कार्य के लिए NDRF,SDRF, ITBP सहित स्थानीय प्रशासन जुटा हुआ है और रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्मी को भी अलर्ट पर रहने को कहा गया है। केन्द्र सरकार में मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा से फोन पर बात हुई और हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है।
रामपुर: श्रीखंड महादेव यात्रा के रास्ते में बीती रात के समय बादल फटने की घटना सामने आई है। बीती रात करीब एक बजे कुर्पन खड्ड में बादल फटने से फ्लैश फ्लड आ गया और खड्ड का जलस्तर बढ़ गया, जिससे श्रीखंड महादेव यात्रा के पहले पड़ाव बेस कैंप सिंह गाड में दर्जनों दुकानें चपेट में आने की सूचना है। वहीं, बागीपुल में बस स्टेंड, करीब 10 मकान और 20 गाड़ियां बाढ़ में बह गई हैं, जबकि केदस और ढरोपा तक जगह-जगह पुल बहने से लोगों के आवागमन का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। तहसीलदार निरमंड जय गोपाल शर्मा ने बताया कि बीती रात को श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग पर कुर्पन खड्ड में बदल फटने से बेस कैंप सिंह गाड में भरी नुकसान हुआ है। वहीं, बागीपुल में निरमंड और बागीपुल को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है और नया पुल भी बह गया है। बाढ़ में छोटे बड़े मकान बह गए हैं। इसमें होटल दुकानें, पटवारखाना भी बह गया है और 7 से 10 लोगों के लापता होने की सूचना है ,जिसमें एक परिवार के 5 लोगों और एक बुजुर्ग महिला, दो नेपाली मूल के लोगों के लापता होने की सूचना है। तहसीलदार जय गोपाल शर्मा ने बताया कि केदस में एक मकान बाढ़ की चपेट में आया है और केदस पुल भी बह गया है। वहीं, कोयल पुल के बहने से निथर का रामपुर निरमंड से संपर्क कट गया है। तहसीलदार ने बताया कि राहत और बचाव कार्य के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और रेस्क्यू टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी है।
हिमाचल प्रदेश में बरसात के दौरान ऊपरी इलाकों में बादल फटने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। ताजा मामला शिमला जिले के रामपुर का है। रामपुर के झाकड़ी में आज समेज खड्ड में बादल फटने की घटना सामने आई है। आज यानी गुरुवार सुबह तड़के समेज खड्ड में हाइड्रो प्रोजेक्ट के नजदीक बादल फटा, जिसने इलाके में भारी तबाही मचाई। वहीं, बादल फटने की सूचना मिलते ही रामपुर उपमंडल प्रशासन, एनडीआरएफ, सीआईएसएफ, होमगार्ड और मेडिकल टीम घटनास्थल पर पहुंच गए। एसडीएम रामपुर निशांत तोमर ने बताया कि अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक बादल फटने के कारण प्रभावित क्षेत्र से 36 लोगों के लापता होने की बात कही जा रही है। वहीं, इस तबाही के चलते सड़कें भी जगह-जगह से टूट गई हैं और बंद हैं, जिसके चलते रेस्क्यू टीम दो किलोमीटर पैदल चल कर उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंची है। रेस्क्यू टीम ने राहत बचाव कार्य शुरू कर दिया है। एसडीएम रामपुर ने बताया कि आईटीबीपी, स्पेशल होम गार्ड की टुकड़ी को भी रेस्क्यू दल में शामिल किया गया है। सारी टीमें एक जुट होकर रेस्क्यू कार्यों में जुटी हुई है। एंबुलेंस समेत सभी आधारभूत सुविधाएं रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तैनात की गई हैं। एसडीएम रामपुर निशांत तोमर ने बताया कि आपदा में लापता लोगों की खोज के लिए रेस्क्यू टीम द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। लोगों को बचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। बादल फटने की सूचना मिलते ही घटनास्थल के लिए डीसी शिमला अनुपम कश्यप और एसपी संजीव गांधी भी रवाना हो गए हैं। डीसी शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम, पुलिस, रेस्क्यू दल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। राहत बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। डीसी शिमला ने बताया कि अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें पुलिस, होमगार्ड, अग्निशमन दल, सुन्नी डैम प्रबंधन सहित अन्य विभागों को शामिल किया गया है।
**अब तक 11 अभ्यर्थियों की बिगड़ी तबियत **1 को हुआ डेंगू सिस्टम के आगे बेबस हो गए है और दो वक्त की रोटी के मोहताज हो गए है, यह कहना है JOA IT पोस्ट कोड 817 के उन अभियर्थियों का जो परिणाम घोषित होने का इंतज़ार कर रहे है और धरने पर बैठे है। इन अभियर्थीओं का कहना है कि उनकी आस अब ख़त्म हो रही है, अभियर्थी बीमार हो रहे है। आपको बता दे कि धरने पर बैठे इन अभ्यर्थियों में से अभी तक 11 अभ्यर्थी बीमार हो चुके हैं, जिनमे से एक अभ्यर्थी तो डेंगू का शिक्कार हो गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि 2020 में विज्ञापित पदों पर JOA IT पोस्ट कोड 817 का अभी तक अंतिम परिणाम जारी नहीं हो पाया। आयोग से बीते सालों से तमाम कानूनी लडाई लड़ने के बाद भी अभ्यर्थी सड़को पर बैठने के लिए मजबूर है। पहले 36 दिन तक कड़ी ठण्ड में शिमला के चौड़ा मैदान में बैठे रहे अब फिर से जब चयन आयोग हमीरपुर ने तारीख पर तारीख दी तो बच्चो को मजबूरी में इस बरसात के मौसम में आयोग के बाहर बैठने के लिए मजबूर कर दिया। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर हम में से किसी को भी कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ सरकार होगी।


















































