**पटवारी-कानूनगो को भारी पड़ा सरकार का विरोध प्रदेश में लगातार स्टेट कैडर का विरोध कर रहे पटवारियों और कनूनगो के खिलाफ सरकार ने बड़ा एक्शन लेने की ठान ली है। ऑनलाइन सेवाएं बंद करने और अतरिक्त कार्यभार की चाबियां लौटाने वाले कर्मचारियों अधिकारीयों को सरकार ससपेंड करेगी। इस बार में अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा की तरफ से सभी डीसी को लेटर जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों का इस तरह का रवैया अनुचित है। जो सीसीएस (आचरण) नियम, 1964 का उल्लंघन है। ऐसे में लोगों को सेवाएं न देने वाले पटवारियों और कानूनगो के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ये भी कहा गया है कि यदि उन्हें सरकार के किसी निर्णय के खिलाफ कोई शिकायत है, तो उन्हें बातचीत का सहारा लेना चाहिए न कि लोगों के जरूरी कामों को रोक कर सरकार के आदेशों की अवहेलना करनी चाहिए। राज्य सरकार ने ऑनलाइन काम ठप करने और व्हाट्सऐप ग्रुप छोड़ने के खिलाफ सभी पटवारी और कानूनगो की सर्विस ब्रेक हो सकती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा ने इस बारे में सभी उपायुक्तों को पत्र जारी किया है। ** दो दिनों में सेवाएं करनी होगी शुरू प्रदेश सरकार की तरफ से सभी डीसी को जारी लेटर में पटवारियों और कानूनगो को दो दिनों में सेवाएं शुरू करने को कहा गया है। अगर आदेशों की पालना नहीं होती है तो ऐसे सभी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, डीसी को भी अपने जिलों में उनके नियंत्रण में पटवारियों और कानूनगो को तुरंत प्रभाव से ऑनलाइन काम फिर से शुरू करने के लिए कड़े निर्देश जारी करने को कहा गया है, ताकि प्रदेश भर में लोगों को घर द्वार पर सरकार की सुविधाओं का लाभ मिल सके। ** व्हाट्सएप ग्रुप में भी वापस जुड़ने के दिए निर्देश इसके अलावा पटवारियों और कानूनगो को आधिकारिक "व्हाट्सएप ग्रुप" में वापस शामिल होने और अतिरिक्त प्रभार सहित उन्हें दिए गए अन्य दायित्वों को भी निभाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके लिए पटवारियों और कानूनगो दो दिन का समय दिया गया है। पटवारियों और कानूनगो को चेताया गया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी की ओर से कोई भी कार्रवाई जो हिमाचल प्रदेश की आम जनता के हितों के खिलाफ है, सरकार ये कतई स्वीकार्य नहीं करेगी।
हिमाचल प्रदेश में आवासीय स्कूल चलाने के लिए कई निजी कंपनियों ने हामी भरी है। राज्य सचिवालय में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में आवासीय स्कूलों को पीपीपी मोड पर चलाने के लिए हितधारकों के साथ बैठक हुई। बैठक में डीएवी ग्रुप, भारती एयरटेल, हिम अकेडमी और अभिलाषी ग्रुप सहित कई निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मंडी और ऊना जिले में सरकार ने आवासीय सरकारी स्कूल बनाने की शुरुआत की है। इस योजना को लागू करने के लिए पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर कार्य किया जा रहा है। बुधवार को इस बाबत इच्छुक पार्टियों से व्यापक चर्चा करने के लिए खुले मंच का आयोजन किया गया। मंडी जिले के धर्मपुर और गोहर और ऊना जिला के बंगाणा में इसके तहत आवासीय स्कूल बनने प्रस्तावित हैं। इसके लिए सरकार उन पार्टियों को योजना में शामिल कराने की कोशिश में है जो पहले से ही शैक्षणिक ढांचे को बेहतर करने में योगदान दे चुकी हैं। अगर फार्मूला सफल रहा तो निश्चित तौर से दूसरे जिलों में भी इस तरह के आवासीय स्कूल बनाने की पहल शुरू करेगी। पहले चरण को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने बुधवार को बैठक का आयोजन किया। बैठक में विधायक चंद्रशेखर, शिक्षा सचिव राकेश कंवर सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि सिक्किम और भूटान की तर्ज पर हिमाचल में आने वाले सैलानियों से पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने रखने के लिए टैक्स वसूला जाए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने ये आदेश दिए हैं।उच्च न्यायालय ने कहा कि हिमाचल में आने वाले सैलानियों की गाड़ियों में प्लास्टिक बैग रखे जाएं ताकि सैलानी इन बैगों में अपना सारा कूड़ा डालें। हाईकोर्ट ने अपने 23 मार्च और 9 मई के आदेशों में नगर निगम शिमला को भी ठोस कचरे से निजात दिलाने के लिए सख्त कदम उठाने को कहा था। नगर निगम ने अदालत के आदेशों की पालना करते हुए एक शिकायत नंबर 9805201916 जारी किया है। नगर निगम ने अदालत में कहा कि अगर कहीं भी किसी को जंगल या घरों के आसपास कचरा पड़ा हुआ दिखाई दे तो वह इस नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि शिकायत का जब तक समाधान न किया जाए तब तक उसको डिस्प्ले पर दिखाया जाए। इसके अलावा अदालत ने प्रदेश सरकार को अगली सुनवाई तक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करने के आदेश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी। अदालत ने लाहौल-स्पीति के डीसी को सैलानियों से लिए जाने वाले ग्रीन टैक्स के ऊपर अगली सुनवाई में हलफनामा दायर करने को कहा है। अदालत ने पूछा कि ग्रीन टैक्स जो सैलानियों से वसूला जा रहा है उसका प्रयोग कहां पर किया जा रहा है। अदालत ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए कि हिमाचल में बाहरी राज्यों से आने वाली प्लास्टिक कंपनियों का पंजीकरण करवाया जाए ताकि यह पता चल सके कि प्रदेश में कितनी मात्रा में प्लास्टिक आ रहा है। इसको कहां पर डाला जा रहा है। गैर कानूनी तरीके से अगर कोई प्लास्टिक ला रहा है तो उसे भारी जुर्माना लगाया जाए।
हिमाचल प्रदेश में पर्यटक स्थलों व ट्रैकिंग रूट्स पर भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा बिखरा हुआ नजर आता है। हिमाचल हाईकोर्ट ने प्लास्टिक कचरे के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे असर को देखते हुए हिमाचल सरकार को एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का आदेश जारी किया है। ये फोर्स पहली अगस्त तक गठित करनी होगी। अदालत ने आदेश दिया है कि इस फोर्स में नगर परिषदों, नगर निगमों और नगर पंचायतों के सदस्यों सहित जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों के सचिव, पर्यटन विकास निगम, वन विभाग, गैर सरकारी संगठन और अन्य हितधारक संस्थाओं आदि के सदस्यों को शामिल किया जाए। ये टास्क फोर्स पहाड़ियों के किनारे फैली गंदगी खास तौर पर प्लास्टिक कचरे की सफाई पर ध्यान केंद्रित करेगी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने हर जिले के विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों को मामले में अदालत की तरफ से जारी आदेश के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कोऑर्डिनेटर बनाया है। इन सभी को कहा गया है कि वे विशेष तौर पर स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए दिए हाईकोर्ट के आदेशों के तहत प्लास्टिक कचरे के हॉट-स्पॉट और जलधाराओं की साफ सफाई सहित और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कानूनों के तहत हितधारकों की भूमिकाओं से जुड़ी निगरानी रिपोर्ट तैयार करेंगे। ये रिपोर्ट हर तीन महीने में हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश भी जारी किए गए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वो पर्यटकों द्वारा ट्रैकिंग रूट्स से ले जाए जाने वाले प्लास्टिक के कचरे आदि का आकलन करने के लिए चेक पॉइंट्स स्थापित करें। इसके जरिए ट्रैकिंग रूट्स के साथ सरकार टिकाऊ इको-सिस्टम डेवलप करने पर भी विचार करे। खंडपीठ ने सुझाव के तौर पर राज्य सरकार को सबसे पहले कुछ प्राथमिकता वाले ट्रैकिंग रूट की सफाई पर विचार करने को कहा। हाईकोर्ट ने खीरगंगा, हामटा, बिजली महादेव, साच पास, ब्यास कुंड, श्रीखंड महादेव, मणिमहेश यात्रा मार्ग, चूड़धार, त्रियुंड और चांशल पीक के नाम सुझाए हैं। अदालत ने पाया कि हिमाचल में प्लास्टिक की पुन: खरीद नीति वास्तव में गैर-कार्यात्मक रही है। कोर्ट ने सरकार को प्लास्टिक बायबैक नीति को सप्ताह के सातों दिन पूरी तरह कार्यात्मक बनाने के आदेश दिए. ऐसा करने से नागरिकों, विशेषकर कूड़ा बीनने वालों को सड़कों, जंगलों और नालों आदि में पड़े प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे कूड़ा बीनने वालों की आजीविका का स्रोत भी मजबूत होगा और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगमों के कूड़े-कचरे से जुड़े शिकायत तंत्र को और कारगर बनाने की सख्त जरूरत है। इसके लिए हाईकोर्ट ने राज्य के सभी नगर निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायतों का समाधान होने तक शिकायतों को प्रदर्शित करते रहें। एमसी शिमला को शिकायत नंबर +91 98052 01916 का व्यापक रूप से प्रचार करने को कहा गया है। इसी तरह अन्य नगर निगमों को सुनवाई की अगली तारीख से पहले एक शिकायत तंत्र नंबर जारी करने का निर्देश दिया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक की तरफ से इस विषय में वांछित रुचि न दिखाने पर इसे एक गंभीर मामला बताया। ग्रामीण विकास निदेशक को इस मामले में गहरी दिलचस्पी लेने और अब से सभी बैठकों में प्रभावी ढंग से भाग लेकर अपने बहुमूल्य इनपुट देने का निर्देश भी दिया गया है। वहीं, हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना पर कूड़ा प्रबंधन एजेंसी ईपीआर प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड प्लॉट नंबर 19, न्यू कॉटन, कारकेट लेआउट, गणेशपेठ, नागपुर, सर्वश्री दि शक्ति प्लास्टिक इंडस्ट्रीज, 202/203/204/205, दूसरी मंजिल बिजनेस क्लासिक चिंचोली बंदर रोड, मलाड, मुंबई और सर्वश्री रेकर इनोवेशन लिमिटेड कॉर्पोरेट ऑफिस 2007, सेक्टर-45, गुरुग्राम, को अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत नोटिस जारी करने के आदेश भी दिए गए हैं।
हिमाचल में शिक्षा विभाग में टीचरों के तबादले पर रोक लग सकती है। इस बारे आज सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश में अभी तक शिक्षकों के लिए तैयार की जा रही ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर अभी सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई है। ट्रांसफर पॉलिसी का मामला अभी सरकार के पास ही आपसी सहमति न बनने से लटका पड़ा है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए शिक्षा विभाग ने एकेडमिक सेशन में शिक्षकों के तबादले पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कैबिनेट की बैठक में लाया जा रहा है। अगर इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पास किया जाता है तो प्रदेश भर में विभिन्न स्कूलों में सेवाएं दे रहे जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी, डीपीई, फिजिकल एजुकेशन व अन्य शिक्षकों की सत्र के बीच में कोई ट्रांसफर नहीं होगी। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में पिछली बैठक इसी महीने की 12 जुलाई को आयोजित हुई थी, जिसमें विभिन्न विभागों में 1 हजार से अधिक श्रेणियों के पद भरने सहित इनकम टैक्स भरने वालों को 125 यूनिट फ्री बिजली नहीं दिए जाने का फैसला लिया गया था। इसमें सीएम, डिप्टी सीएम, पूर्व सीएम, विधायक, सीपीएस, सभी बोर्डों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, ओएसडी, एडवाइजर समेत सभी बड़े अधिकारी शामिल थे। ऐसे में आज फिर से कैबिनेट की बैठक होने जा रही है, जिसमें अगस्त महीने में आयोजित होने वाले विधानसभा मानसून सत्र की तारीख फाइनल करने को लेकर चर्चा हो सकती है। इसी तरह से विभिन्न विभागों खाली पड़े पदों को भरने पर मुहर लग सकती है, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में अन्य कई मामलो को लेकर निर्णय लिए जा सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आगामी 26 जुलाई को त्रिलोक ठाकुर अध्यक्ष अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की अध्यक्षता मे होगी। यह बैठक वाईब्रेशन हॉल नजदीक रिपन अस्पताल शिमला ठीक 11:00 बजे शूरू होगी, जिसमें प्रदेश भर के लगभग 250 कर्मचारी नेता भाग लेंगें। जिसमें जिलाध्यक्ष व महासचिव प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारी विभागीय संगठनों के प्रधान एवं महासचिव तथा प्रदेश कार्यकारिणी के तमाम पदाधिकारी सम्मलित होंगें। बैठक के तुरंत बाद प्रदेश कार्यकारिणी त्रिलोक ठाकुर की अध्यक्षता मे माननीय मुख्यमंत्री महोदय व मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार से मुलाकात करेंगें। इस बैठक में प्रदेश सरकार जल्द से जल्द संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन करने बारे में चर्चा होगी और इसी के साथ 2016 संशोधित वेतनमान का लम्बित ऐरियर का भुगतान, मंहगाई भत्तों की किश्तों कों जारी करने, वर्तमान अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को पूर्व की भांति वर्ष मे 02 बार नियमित करने बारे तथा भविष्य में भर्तियों को नियमित आधार पर करने के साथ-साथ विभिन्न विभागों में कई वर्षों से रिक्त पडे पदों को भरने व विभिन्न विभागों मे पदौन्नति समय पर करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यह जानकारी प्रैस को हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ के राज्य महामंत्री राजीव चौहान ने दी है।
हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों की आमद में ज़बरदस्त उछाल देखने में आया है। प्रदेश ने वर्ष 2024 की पहली छमाही में एक करोड़ से अधिक सैलानियों का आतिथ्य सत्कार किया। हिमाचल की मनोहारी वादियों, स्वच्छ वातावरण और प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की जा रही बेहतर सुविधाओं के फलस्वरूप इस साल जून माह के अन्त तक रिकॉर्ड 1,00,87,440 पर्यटक प्रदेश के भ्रमण पर पहुंचे। प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, किन्नौर और लाहौल-स्पीति पर्यटकों से गुलजार हैं। इस अवधि में सर्वाधिक पर्यटक कुल्लू और शिमला ज़िलों में उमड़े। कुल्लू ज़िले की 4,73,737 और शिमला ज़िले की 4,48,392 सैलानियों ने यात्रा की। प्रदेश में जुलाई माह में भी पर्यटकों का आगमन निरन्तर जारी है। प्रदेश की अधिकतर सड़कों पर्यटकों के सुगम आवागमन के लिए खुली हैं और पर्यटक हिमाचल की नैसर्गिक सुन्दरता को निहारने के लिए प्रदेश की ओर रूख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पर्यटकों को आश्वस्त किया है कि प्रदेश के अधिकांश मार्ग यातायात के लिए खुले हैं। खराब मौसम के कारण प्रदेश की कुछ सड़कें प्रभावित हुईं थीं, लेकिन वर्तमान में पर्यटकों और आमजन के लिए अधिकतर सड़कें खोली जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जुलाई महीने में हज़ारों की संख्या में पर्यटकों ने हिमाचल की सैर की और इस वर्ष के अन्त तक पर्यटकों की संख्या दो करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैलानी प्रदेश के विभिन्न स्थलों की यात्रा से संबंधित जानकारी संबंधित ज़िला प्रशासन व पुलिस विभाग के हेल्पलाइन नंबर और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटकों की सुगम एवं सुरक्षित यात्रा तथा उन्हें बेहतर सुविधाएं प्रदान करने को प्राथमिकता प्रदान कर रही है। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सैलानियों की सुरक्षित यात्रा के लिए प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि लोक निर्माण विभाग बाधित सड़कों को बहाल करने के लिए तत्परता से कार्य कर रहा है। पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग पर्यटकों को समय-समय पर विशेष सड़क मार्गों पर यात्रा संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है। ज़िला प्रशासन और हिमाचल पुलिस द्वारा सड़कों की स्थिति संबंधी जानकारी निरन्तर उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आज बचत भवन, सम्मेलन कक्ष में प्रदीप ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में महासंघ के राज्य पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष व उनकी कार्यकारिणी तथा विभिन्न विभागों के अध्यक्षों, सचिवों एवं अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया। सभी ने मांग की कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए जल्द से जल्द से संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक बुलाई जाए । बैठक में विभिन्न विभागों की समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्रमुख मुद्दों में विभिन्न विभागों के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी रिक्त पदों को जल्द भरना, विभिन्न विभागों के विभिन्न वर्गों में वेतन विसंगति, वर्ष 2016 के वेतन आयोग के अनुसार बकया राशि का तुरंत भुगतान, 12% महंगाई भत्ता, दो बार संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, हिमाचल प्रदेश विद्युत निगम, जिला परिषद तथा अन्य छूटे विभागों के लिये पुरानी पेंशन का प्रावधान, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करना, विभिन्न विभाग के विभिन्न वर्गों के पद नाम बदलना, जल रक्षक का अनुबंध में शामिल करने के लिए अवधि 12 वर्ष से घटाकर 8 वर्ष करना, आवास भत्ते में लंबे समय से वृद्धि न होने के कारण विभिन्न कर्मचारी वर्ग का आवास भत्ता बढ़ाने की मांग, विभागीय पदोन्नती समय पर हो, करूनामुल्क आधार पर विभिन्न विभागों में लंबित मामलों का निपटारा कर सभी को वन टाइम रिलैक्सेशन देकर नियुक्ति देना, जिला परिषद कर्मचारियों को विभाग में मर्ज करने, मिड डे मील वर्कर, आंगनवाड़ी सहायिका के लिए स्थाई नीति, आउटसोर्स कर्मचारी के लिए स्थाई नीति, मल्टी टास्क कर्मी के लिए स्थाई नीति, सहित अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। बैठक में उपस्थित विभिन्न विभागों से उपस्थित पदाधिकारियों ने विभागिय समस्याओं बारे अवगत करवाया। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने इन मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त की और राज्य अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर से सरकार के समक्ष इन समस्याओं को रखने तथा शीघ्र समाधान की मांग की। राज्य अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने कहा की कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए शीघ्र ही समाधान निकालने हेतु माननीय मुख्यमंत्री से मिलेगा और विभिन्न विभागों द्वारा सौंपे गए मांगपत्र माननीय मुख्यमंत्री को आगामी कार्यवाहेतु प्रदान किए जाएंगे। इस बैठक में राज्य कार्यकारिणी वरिष्ठ उपाध्यक्ष सौरव वैद, महासचिव भरत शर्मा, उपाध्यक्ष एवं राज्य प्रधान क्लास-4 संगठन आईजीएमसी मोहन लाल कश्यप, मुख्य सलाहकार एवं प्रदेश पटवारी कानूनगो महासंघ अध्यक्ष शमशेर, मुख्य प्रवक्ता कुशाल शर्मा, कार्यालय सचिव देव नेगी, सचिव एवं लैब अटेंडेंट एसोसिएशन स्कूल अध्यक्ष कँवर सिंह तंगराइक, महासचिव, पम्प ऑपरेटर जल शक्ति विभाग डी के शर्मा, ज़िला उपायुक्त कार्यालय एसोसिएशन अध्यक्ष अमित वर्मा, फायर ब्रिगेड यूनियन महासचिव रजिंदर चंदेल, अर्थ एवं सांख्यिकी तकनीकी अध्यक्ष मोहन लाल वर्मा, आई टी आई ट्रेनेड फ़िटर अध्यक्ष तेज राम, हि० प्र० नेत्र चिकित्सा अधिकारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष इन्द्र दत्त शर्मा, वन विभाग मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन अध्यक्ष प्रकाश बादल के साथ-साथ प्रदेश के सभी ज़िला अध्यक्षों मनजीत(सोलन), भरत (शिमला), बलदेव नेगी (किन्नौर), राम चन्द्र (सिरमौर), लेख राज (मंडी), अमर चंद (कुल्लू), विजय (चम्बा), रजिंदर मनहास (काँगड़ा), दर्शोक ठाकुर (हमीरपुर), धरम सिंह (बिलासपुर) एवं रामपाल (लाहौल-स्पीति) ने भाग लिया।
राज्य सरकार ने प्रदेश में मौजूदा सेब सीजन के दौरान बाहरी राज्यों के ट्रक चालकों को विशेष पथ कर (स्पेशल रोड टैक्स) से छूट प्रदान की है। हिमाचल में प्रवेश करने वाले दूसरे राज्यों के ट्रक चालक जो नेशनल परमिट के तहत कवर नहीं हैं, को अन्य राज्यों में आलू और सेब के परिवहन के लिए विशेष पथ कर से तुरंत प्रभाव से छूट प्रदान की गई है। परिवहन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज यहां यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों और किसानों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। परिवहन विभाग द्वारा बागवानों और किसानों के उत्पादों के परिवहन को सुगम बनाने तथा उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेब और आलू के परिवहन के लिए विशेष पथ कर से छूट प्रदान करने से सभी हितधारकों को मदद मिलेगी। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मानसून तथा सेब सीजन के दृष्टिगत परिवहन विभाग द्वारा सभी तैयारियां समयबद्ध पूर्ण की गई हैं। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर सभी एहतियाती उपाय पूर्ण किए गए हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से सड़क सुरक्षा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
**अब और बढ़ सकती है मुश्किलें ** मांगें नहीं मानी तो कार्यालयों की चाबियां सौंपेंगे पटवारी और कानूनगो **जनता परेशान, सरकार नहीं ले रही सुध प्रदेश भर में पिछले 10 दिनों से लोगों के हिमाचली प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र आदि जैसे ज़रूरी प्रमाण ऑनलाइन तो बन ही नहीं रहे थे मगर अब ये सुविधाएं कुछ हद तक ऑफलाइन भी बंद हो सकती है। पहले इन सभी कामों के लिए जनता को सरकारी दफ्तरों में भटकना पड़ रहा था मगर अब दफ्तरों पर भी ये काम मुश्किल हो सकते है और इसका कारण है ग्रामीण राजस्व विभाग के अधिकारियों की सुक्खू सरकार से नाराज़गी। दरअसल राजस्व विभाग में कार्यरत पटवारियों और कानूनगो को स्टेट कैडर का दर्जा दिए जाने के फैसले से ग्रामीण राजस्व विभाग के अधिकारी सुक्खू सरकार के खिलाफ भड़क गए हैं और ये एलान कर दिया है कि अब वो न सिर्फ ऑनलाइन सुविधाएं बल्कि अतिरिक्त कार्यों के कार्यालयों की चाबियां भी वापस सौंप देंगे। महासंघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर स्टेट कॉडर बनाने के फैसले से सरकार पीछे नहीं हटती है तो 25 जुलाई से एडिशनल पटवारी और कानूनगो सर्कल का काम देखना बंद कर दिया जाएगा यानि उन कार्यालयों की चाबियां सरकार को सौंप दी जाएगी जिनका उनके पास अतिरिक्त कार्यभार है, और अगर इसके बाद भी उनकी सुनवाई नहीं हुई और उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो महासंघ पेन डाउन हड़ताल शुरू कर देगा। ज़ाहिर है अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश के लोगों को बहुत ज़्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। नगर निगमों, नगर परिषद, नगर पंचायतों और पंचायतों के तहत लोगो के बोनोफाइड सर्टिफकेट, करेक्टर सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट, ओबीसी सर्टिफिकेट, कास्ट सर्टिफिकेट, एग्रीकल्चर सर्टिफिकेट, अन-इम्पलायमेंट सर्टिफिकेट, लैंड होल्डिंग सर्टिफिकेट, PM किसान सम्मान निधि योजना की ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसे काम बंद हो जाएंगे। यही नहीं प्रदेश सरकार 18 से 59 आयु वर्ग की महिलाओं को 1500 मासिक पेंशन दे रही है, जिसके लिए इन दिनों कल्याण अधिकारी के पास फार्म भरे जा रहे हैं, जिसके लिए हिमाचली बोनोफाइड प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। अब महिलाएं 1500 मासिक पेंशन लेने के लिए भी फॉर्म जमा नहीं कर पाएगी। इतना कुछ होने पर भी सरकार ने अभी तक महासंघ को वार्ता के लिए नहीं बुलाया है। ऐसे में सरकार के अड़ियल रवैये के कारण आम जनता खासी परेशान है। फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया से खास चर्चा करते हुए हिमाचल संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ के अध्यक्ष सतीश चौधरी ने बताया कि 12 जुलाई की कैबिनेट मीटिंग में सरकार ने पटवारी-कानूनगो को स्टेट कॉडर बनाने का फैसला लिया था। अभी पटवारी और कानूनगो दोनों ही जिला कॉडर है। पटवारी और कानूनगों की भर्ती भी जिला कॉडर के हिसाब से हुई है। अब उन्हें अचानक स्टेट कॉडर बना देने से सीनियोरिटी प्रभावित होगी। इससे प्रमोशन में देरी होगी और स्टेट कॉडर में मर्ज होने से सीनियोरिटी में ये लोग पीछे चले जाएंगे। उन्होंने ये भी बताया कि पटवारी क़ानूनंगो को इसलिए जिला कॉडर में रखा गया, क्योंकि अपने जिला में उन्हें लोकल बोल-चाल और एरिया के बारे में जानकारी होती है। यदि उनका दूसरे जिला में ट्रांसफर हो जाता है तो इससे उन्हें बोल-चाल और एरिया समझने में वक्त लगेगा। इससे काम में एफिशिएंसी नहीं आएगी। भर्ती एवं पदोन्नति नियम के हिसाब से उन्हें जिला कॉडर में ही रखा जाना चाहिए। बता दें कि प्रदेश में राजस्व विभाग के अंतर्गत सेवाएं दे रहे पटवारी एवं कानूनगो की संख्या 3350 के करीब है। इसके अलावा सेटलमेंट विभाग में भी इस वर्ग के सैंकड़ों कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कैबिनेट के फैसले के बाद पटवारी कानूनगो सभी ऑफिशियल वॉट्सऐप ग्रुप से भी एग्जिट कर चुके है। हिमाचल में राजस्व विभाग में कार्यरत पटवारी एवं कानूनगो को स्टेट कैडर में डालने का निर्णय पिछली साल 18 नवंबर को भी लिया गया था, लेकिन उसी दिन देर शाम तक हिमाचल प्रदेश संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ के विरोध के बाद सरकार ने फैसला वापस ले लिया था । सरकार का निर्णय 12 घंटे भी नहीं टिक पाया था। लेकिन अब सरकार ने फिर से पटवारी और कानूनगो स्टेट कैडर का दर्जा दे दिया हैं। ।
शिमला में राज्य सचिवालय के समीप बुधवार सुबह दृष्टि बाधित संघ ने मांगों को लेकर चक्का जाम किया। सचिवालय से कुछ दूरी पर सड़क पर बैठकर संघ के सदस्यों ने चक्का जाम कर नारेबाजी की। इस दौरान उनकी पुलिस के साथ धक्का मुक्की भी हुई। पुलिस की ओर से संघ सदस्यों को जबरन सड़क से उठाया गया। कुछ दृष्टि बाधितों की तबीयत भी बिगड़ गई। दृष्टि बाधित संघ बैकलॉग की भर्तियां नहीं होने से गुस्साया हुआ है। संघ के सदस्यों ने बताया कि सरकार ने कई बार मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया, कई बार वार्ता भी हुई लेकिन आज तक समाधान नहीं हुआ। कहा कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो 1 से 15 अगस्त तक लगातार चक्का जाम व प्रदर्शन होगा। इसकी जिम्मेदार सरकार की होगी। दृष्टि बाधित संघ के अनुसार पहले भी कई बार चक्का जाम व अनशन कर चुके हैं, लेकिन मांगों का समाधान नहीं हो पाया है।
हिमाचल प्रदेश में नेशलन हाईवे अथॉरिटी (NHAI) के तहत फोरलेन प्रोजेक्ट्स का निर्माण लगातार जारी है। कालका और शिमला को जोड़ने वाले फोरलेन का काम चल रहा है और अब एनएचआई को बड़ी कामयाबी मिली है। यहां पर ढली-कैथलीघाट फोरलेन पर बन रही शुंगल टनल का ब्रेक-थ्रू हो गया और टनल के दोनों छोर मिल गए हैं। 40 किमी लंबे इस स्ट्रेच पर 2 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कैथलीघाट से ढली फोरलेन में 10 किलोमीटर की 10 टनल्स बनाई जाएंगी। इनमें से एक सुरंग टनल के दोनों छोर मिल गए हैं। शोघी के पास शुंगल में 708 मीटर की लंबी यह टनल बन गई और अब इसका काम अंतिम पड़ाव पर है। हिमाचल प्रदेश में एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित मंगलवार को सुरंग की ब्रेकथू सेरेमनी में शामिल हुए। बता दें कि शुंगल टनल का काम साल 2023 में शुरू हुआ था और फिलहाल, नौ और टनल बननी बाकी हैं, जिनका काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।एनएचआई के क्षेत्रीय प्रमुख अब्दुल बासित ने बताया कि सुरंग के निर्माण में 200 मजदूरों और 50 मशीनों की तैनाती की गई है। 90 करोड़ में बन रही यह सुरंग डबललेन है और इससे यात्रा का समय और ईंधन की बचत होगी। बासित ने बताया कि सुरंग का निर्माण पर्यावरण मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने बताया कि टनल के निर्माण से पहाड़ी की कटिंग बच गई और इस वजह से 5 हजार पेड़ कटान से बच गए। उन्होंने बताया कि पुल में एक पिलर की ऊंचाई तीन कुतुब मीनार(150 मीटर) से भी ज्यादा है। शकराल पुल के पिलर की ऊंचाई 210 मीटर है, जोकि करीब तीन कुतुब मीनार के बराबर है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना चुनौतीपूर्ण कार्य है।
**पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई की शुरू हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के अंतर्गत पुलिस थाना रोहड़ू क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। सुंगरी-समरकोट सड़क पर देर रात एक कार शडेनाली के समीप 150 मीटर गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में कार सवार 5 लोगों में से 2 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 3 व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद रोहड़ू अस्पताल से आईजीएमसी शिमला रैफर किया गया है। बताया जा रहा है कि कार सवार सभी लोग शादी समारोह में कैटरिंग का काम करने आए थे। वहीं पुलिस ने हादसे को लेकर मामला दर्ज कर लिया है तथा आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। हादसे में मर गए लोगों की पहचान 25 वर्षीय लक्की शर्मा निवासी गांव भोजपुर, डाकघर सूई सुराड़, तहसील सदर बिलासपुर और 23 वर्षीय ईशांत निवासी गांव व डाकघर नवगांव, तहसील अर्की, जिला सोलन के रूप में हुई है। वहीं घायलों में 23 वर्षीय राकेश निवासी गांव बिरल व तहसील अर्की, 19 वर्षीय भरत उर्फ कर्ण निवासी गांव जेंडर बसंतपुर, तहसील सुन्नी, जिला शिमला और 19 वर्षीय पंकज निवासी गांव मोहली, डाकघर धनावली ननखड़ी, जिला शिमला शामिल हैं।
शिमला: भाजपा किसान मोर्चा की राज्य सोशल मीडिया सहसंयोजक व पार्षद रचना झीना शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र की भावना के तहत बजट देश के सर्वांगीण विकास का दिया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में भी किसान बागवान को सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है और किसान की तकनीक को बढ़ाने के साथ-साथ अनेक क्रांतिकारी घोषणाएं बजट में की है ,जिससे आने वाले समय में किसान व बागवान को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में किसान व बागवान रहे हैं और लगातार मोदी सरकार कृषि व बागवानी की चिंता कर रही। रचना शर्मा ने कहा कि अन्नदाताओं को लागत पर कम से कम 50% मार्जिन देने का वायदा सभी मुख्य फसलों के लिए उच्चतर न्यूनतम समर्थन मूल्यों की घोषणा करके पूरा कर दिया गया है। अब किसानों को खेती-बाड़ी के लिए कृषि और बागवानी की 32 फसलों के लिए उच्च पैदावार वाली 109 नई किस्में जारी की जाएंगी। वैज्ञानिक संस्थानों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से अगले 2 वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए सहायता प्रदान की जाएगी और मुख्य बाजारों के नजदीक सब्जी उत्पादन क्लस्टर स्थापित करने की घोषणा भी की गई है। कुल मिलाकर यह सभी बजट प्रावधान निश्चित रूप से किसानों की आय को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल में गत वर्ष जो आपदा आई उसको लेकर के विशेष रूप से वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि सरकार बहुउद्देशीय विकास की योजनाओं में सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेगी, इससे पहले भी केंद्र की सरकार ने 1700 करोड़ से अधिक की मदद हिमाचल को की है ।उन्होंने कहा कि यह सराहनीय है , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल को अपना दूसरा घर मानते हैं और यह बात बजट में साबित हुई की हिमाचल के लिए विशेष स्थान प्रधानमंत्री के लिए है।
** हिमाचल में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, तीन जिलों के लिए बाढ़ का जोखिम हिमाचल प्रदेश के कई भागों में आज भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी शिमला में मौसम खराब बना हुआ है। सुबह से शहर व आसपास भागों में रुक-रुककर बारिश जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य के कई भागों में 24 से 27 जुलाई तक भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 29 जुलाई तक कई स्थानों पर बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है। बीती रात कांगड़ा में बारी बारिश हुई। इस बार हिमाचल में मॉनसून की गति प्रवेश के बाद से धीमी पड़ गई है। बार बार अचानक बाढ़ और भरी बारिश की चेतावनी के बावजूद अच्छी बारिश नहीं हो रही हैं। उधर, आईएमडी हाइड्रोमेट डिवीजन नई दिल्ली की ओर से प्रदेश के लिए राष्ट्रीय आकस्मिक बाढ़ मार्गदर्शन बुलेटिन जारी किया गया है। इसके अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, चंबा और शिमला जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बाढ़ का जोखिम होने की संभावना है।
शिमला: हिमाचल में होमस्टे नियम-2024 के नियमों के बदलाव का मामला अब 25 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में जाएगा, जिसमें मंत्रिमंडलीय उप-समिति की होमस्टे नियम-2024 के नियमों में बदलाव को लेकर दिए गए सुझावों को मंजूरी मिल सकती हैं। शिमला में सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में होमस्टे नियमों में बदलाव को लेकर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई। इस दौरान प्रदेश में धारा 118 के नियमों की अवहेलना करके अवैध रूप से चल रहे होमस्टे पर कार्रवाई करने को लेकर चर्चा हुई। हिमाचल में बिना पंजीकरण के होमस्टे चलाने वालों पर भी गाज गिर सकती है। वहीं, पंजीकरण के दौरान जारी किए जाने वाले लाइसेंस की अवधि भी पांच साल से घटाकर दो साल की जा सकती है। इसी तरह से होमस्टे के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण शुल्क में बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है। इस बैठक में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह व नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी, पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली ने भी अपने सुझाव रखे। इस बैठक में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग की निदेशक मानसी सहाय ठाकुर उपस्थित रहीं। बता दें कि सरकार के ध्यान में धारा-118 की अवहेलना कर खोले गए होमस्टे को लेकर शिकायतें मिली हैं। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकल्प के तौर पर होमस्टे खोलने की योजना शुरू की गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए साल 2008 में होमस्टे, बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयां खोले जाने की योजना लागू की गई थी। इसके बाद कुल्लू, लाहौल-स्पीति व शिमला में बड़ी संख्या में होमस्टे खुले हैं। प्रदेश भर में कुल 4289 होम स्टे हैं, जिसमें कुल 17,222 कमरे हैं। इनकी बेड कैपेसिटी 26,727 है। वर्तमान में सबसे अधिक होमस्टे कुल्लू में हैं। यहां 1040 होमस्टे चल रहे हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर शिमला में 805 होमस्टे हैं। इसी तरह से लाहौल-स्पीति में 718 होमस्टे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में होमस्टे की संख्या 431 है। सोलन में कुल 328 होमस्टे स्थापित हो चुके हैं। चंबा में 322, मंडी में 241, किन्नौर में 202, सिरमौर में 123, बिलासपुर में 44, ऊना में 18 और हमीरपुर में होमस्टे की संख्या 17 है। हिमाचल के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बाहरी राज्यों के बहुत से लोगों ने सरकार से धारा-118 के तहत रिहायशी मकानों की अनुमति लेकर होमस्टे खोल दिए हैं।
राजधानी शिमला के पास बालूगंज में स्थित मानसिक रोगी अस्पताल के डॉक्टर की कथित तौर पर लापरवाही को लेकर एक ट्रस्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर संज्ञान लेने की गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने इस पत्र को जनहित याचिका मानते हुए राज्य सरकार व संबंधित डॉक्टर को नोटिस जारी किया है। पत्र में लिखा गया है कि बालूगंज स्थित मानसिक रोगी अस्पताल में तैनात डॉक्टर की लापरवाही के कारण मरीजों की हालत दयनीय है। अदालत ने इस पर सरकार व डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। ये पत्र मेंटल हेल्थ वेलनेस चैरिटेबल ट्रस्ट शिमला के अध्यक्ष की तरफ से लिखा गया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर ही अदालत ने यह जनहित याचिका दर्ज की है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव व न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार के मुख्य सचिव सहित स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य निदेशक, शिमला के डीसी और एसपी को नोटिस जारी किए। मामले पर सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 में दी गई मनोचिकित्सक की योग्यता पूरी न करने के बावजूद आदित्य नामक डॉक्टर पिछले लगभग दो साल से इस अस्पताल में तैनात है। ये डॉक्टर लगभग दस साल से शिमला व आसपास के अस्पतालों में ही सेवाएं दे रहा है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि यह डॉक्टर सप्ताह में एक या दो बार ही अस्पताल आते हैं। ये भी आरोप है कि जब से डॉ. आदित्य ने स्वास्थ्य विभाग में काम करना शुरू किया है तब से उन्हें इस प्रकार ही ड्यूटी करने की आदत है। मानसिक रोग चिकित्सालय में ऐसे लापरवाह एवं अनुपस्थित रहने की आदत रखने वाले चिकित्सक की तैनाती मानसिक रोग से पीड़ित मरीजों के साथ आपराधिक अन्याय है। आरोप है कि इतने महान पेशे के बावजूद, इस डॉक्टर ने सरकारी कर्तव्य का मजाक उड़ाया है और विभाग ने भी उसके इस लापरवाह रवैये पर आंखें मूंद रखी हैं। मानसिक रोगी अस्पताल में गरीब व असहाय मरीज भर्ती हैं। उन्हें विशेष केयर की जरूरत है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में बताया गया है कि डॉ. आदित्य के माता-पिता स्वास्थ्य विभाग से बहुत वरिष्ठ पदों से सेवानिवृत्त हुए हैं। यही मुख्य कारण है कि नौकरी में पूरी तरह से लापरवाही बरतने के बावजूद कोई भी उन्हें कोई भी कुछ कहने की हिम्मत नहीं करता है। आरोप है कि डॉ. आदित्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की मदद से शिमला और उसके आसपास अपने स्थानांतरण और पोस्टिंग में हेरफेर करता रहा है। पत्र के माध्यम से हाईकोर्ट से ये अनुरोध किया गया है कि एडीएम/एडीसी रैंक के किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के माध्यम से मामले की जांच कराई जाए। साथ ही बायोमीट्रिक मशीनों और सीसीटीवी से तथ्यों की जांच करके अस्पताल में उनके प्रदर्शन/उपस्थिति की स्थिति का पता लगाया जाए। पत्र में उपरोक्त डॉक्टर के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मांग भी की गई है और उन्हें तुरंत शिमला से बाहर स्थानांतरित कर किसी दूर-दराज के क्षेत्र में तैनात करने की गुहार लगाई गई है।
**आईजीएमसी में 600 स्टाफ नर्स और 43 ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट की तैनाती जल्द मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज स्वास्थ्य विभाग की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास के साथ-साथ डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों के खाली पदों को भर रही है ताकि लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला में बेहतर चिकित्सा सेवाएं और अटल सुपर स्पैशिएलिटी संस्थान चमियाणा में डॉक्टरों के पदों को भर कर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। प्रदेश सरकार आईजीएमसी शिमला के इमरजेंसी मेडिसन विभाग को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां चिकित्सा अधिकारियों के 30 पद भरे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और सहायक स्टाफ के लिए कार्य स्थल पर बेहतर माहौल उपलब्ध करवाया जा रहा है ताकि वे बिना बाधा अपने दायित्व का निर्वहन कर सकें। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को बहुत ज्यादा प्रचलित बीमारियों पर अध्ययन करने के निर्देश दिए ताकि डॉक्टरों और अन्य सुविधाओं को आवश्यक अनुपात में बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी में 600 स्टाफ नर्स और 43 ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट को शीघ्र ही तैनात किए जाएंगे ताकि मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को आधुनिक और बेहतर तकनीकी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार के पास बजट की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकार आईजीएमसी में आधुनिक उपकरणों और मशीनों की खरीद के लिए 25 करोड़ रुपये देने जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को और ज्यादा सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार पूरा सहयोग प्रदान करेगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, विधायक हरीश जनारथा, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी और अन्य अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सरकार का चाबुक चलते ही ठेकेदारों ने लंबित सड़कों और भवनों के कार्य तेज रफ्तार से शुरू कर दिए हैं। 150 में से 80 ठेकेदारों ने ब्लैकलिस्ट के डर से लंबित कार्य निपटाए हैं। शेष को लोक निर्माण विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब लोक निर्माण विभाग के क्वालिटी कंट्रोल विंग की ओर से सड़कों और भवनों के गुणवत्ता की जांच की जा रही है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) चरण-1 और 2 के तहत हिमाचल प्रदेश में 170 सड़कों, पुलों और भवनों, डंगों का काम पूरा नहीं किया गया था। ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने लापरवाह ठेकेदारों को डिफाल्टर सूची में डाल दिया। अब इन्हें चरण-3 में सड़क निर्माण के कार्य भी नहीं दिए जा रहे थे। वर्ष 2005 से 2023 तक पीएमजीएसवाई के दो चरण पूरे हो गए हैं। इनमें कई सड़कों का कार्य संतोषजनक नहीं रहा है। हिमाचल में चरण-3 के तहत 2,600 करोड़ रुपये की सड़कों का काम हो गया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह पहले ही कह चुके हैं कि नाबार्ड के तहत विधायक प्राथमिकता की कई सड़कें ऐसी हैं, जिनका काम समय पर पूरा नहीं हुआ है या फिर धीमी गति से किया जा रहा है। ऐसे ठेकेदारों पर भी पेनल्टी लगाई जाएगी। ठेकेदारों की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की सख्ता का असर दिखना शुरू हो गया है। कई लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई। अधिकांश ठेकेदारों ने लंबित कार्य निपटाए हैं। सड़कों और भवन निर्माण पूरा करने के लिए समय अवधि तय होती है। उसी अवधि के बीच काम को पूरा करना होता है।
भाजपा युवा नेता आश्रय शर्मा ने आज जारी बयान में कहा कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह हिमाचल की सीमा से बाहर जाते और वापिस हिमाचल आते समय अपने ही बयानों से पलट जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से उन्होंने देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को लेकर बयान दिया कि हिमाचल की जनता ने उन्हें जवाब दिया है, वो शायद यह भूल गए हैं कि हिमाचल की और विशेषकर मंडी लोकसभा क्षेत्र की जनता ने उन्हें अपने जनादेश देकर नकार दिया है। आश्रय ने कहा कि जब लोक निर्माण मंत्री कुछ मांगने दिल्ली जाते हैं तो भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों की तारीफ करते हैं और वापिस आते ही उनको देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों में कमियां दिखाई देने लगती हैं, जिससे उनके पूर्व बयानों का वह स्वयं ही कटाक्ष कर देते हैं। आश्रय ने कहा कि वह उनको याद दिलाना चाहते हैं कि पिछले छह महीनों में वह एक बार इस्तीफा देकर फिर शाम को इस्तीफा वापिस ले चुके हैं और अगर वह इस दौरान अपने बयानों का आकलन करें तो उनमें ही विरोधाभास साफ नजर आता है। आश्रय ने कहा कि देवभूमि की जनता ने भाजपा पर पूरा विश्वास जताया है और चारों लोकसभा सीट भाजपा की झोली में डालकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के विधायकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि कांग्रेस को 61 विधानसभा में जनता ने नकार दिया है, तो बेहतर होगा कि लोक निर्माण मंत्री जिनके अपने विधानसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में लीड नहीं मिल पाई, वो आत्मचिंतन करें।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज संकटमोचन हनुमान मंदिर में धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर व परिवार के अन्य सदस्यों सहित माथा टेका और पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर भोरंज से विधायक सुरेश कुमार और कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) शिमला-किन्नौर के अध्यक्ष देवानंद वर्मा भी उपस्थित रहे।
जिला शिमला के आदर्श केन्द्रीय कारागार कण्डा के एक प्रवक्ता ने आज बताया कि 17 जनवरी से 20 जनवरी, 2024 तक पुलिस लाइन भराड़ी में पुरूष और महिला वार्डर के पदों पर उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा 28 जुलाई, 2024 को दोपहर 12 बजे राजकीय महाविद्यालय, संजौली (शिमला) में निर्धारित की गई है। अभ्यर्थी निर्धारित परीक्षा केन्द्र में लिखित परीक्षा आरम्भ होने से दो घण्टे से पूर्व प्रातः 10 बजे पहुंचना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थी अपने प्रवेश पत्र कारागार की वैबसाइट admins.hp.nic.in//hpprisons से एवं अपने पंजीकृत ई-मेल के माध्यम से 23 जुलाई, 2024 के बाद डाउनलोड कर सकते हैं। प्रवेश पत्र डाउनलोड करना सभी अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा हॉल में किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रानिक उपकरण तथा परीक्षा केन्द्र में अपना वाहन साथ लाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थी अपने साथ कार्ड बोर्ड, काला एवं नीला बॉलपैन लाना सुनिश्चित करें। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नम्बर-0177-2628852 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों कमलेश ठाकुर, हरदीप सिंह बावा और आशीष शर्मा के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया। प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित विधायकों को शुभकामनाएं दीं। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार, मंत्रीगण और विधायकगण भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की जनता ने खरीद-फरोख्त की राजनीति को सिरे से नकार दिया है। भाजपा ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को गिराने का षड़यंत्र रचा जिसके फलस्वरूप प्रदेश में विधानसभा उप-चुनावो की स्थिति उत्पन्न हुई। कांग्रेस पार्टी ने जनता के सामने भाजपा के षड़यंत्र का पर्दाफाश किया जिसके कारण कांग्रेस पार्टी को जनादेश मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों का संख्या बल एक बार फिर 40 हो गया है। भाजपा के षड़यंत्र के कारण प्रदेश में चार माह तक विकासात्मक कार्य बाधित हुए। उन्होंने भाजपा के नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें नकारात्मक राजनीति त्यागकर प्रदेश का समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को सहयोग देना चाहिए। भाजपा नेताओं को प्रदेश और यहां के लोगों के हितों के लिए केंद्रीय सरकार की परियोजनाओं में अड़ंगे नहीं डालने चाहिए। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले साल प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों को राहत पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया। वर्तमान प्रदेश सरकार ने सरकारी क्षेत्र में 28 हजार नौकरी के अवसर सृजित किए हैं, जबकि पिछली भाजपा सरकार ने 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान केवल 20 हजार नौकरियां सृजित की थीं, जिनमें से अधिकतर मामले कानूनी दाव-पेच में फंस गए थे। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार द्वारा अत्याधिक ऋण लेने की आलोचना करते हुुए कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश के विकास कार्यों में निवेश करने की बजाय ऋण लेने का कार्य किया। वर्तमान प्रदेश सरकार विरासत में मिली देनदारियों को पूरा करने के लिए ऋण ले रही है। उन्होंने कहा कि गत एक वर्ष के दौरान प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों के फलस्वरूप राज्य की आर्थिक स्थिति में 20 प्रतिशत सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश और प्रदेश के लोगों के हितों के लिए निरन्तर कार्य कर रही है और हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।
हिमाचल में दूध खरीद मूल्य बढ़ने का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। महिलाएं घर में खेती बाड़ी के काम में पुरुषों का सहयोग करने के साथ दुग्ध कारोबार से जुड़ कर आर्थिक तौर पर भी आत्मनिर्भर हो रही हैं। इसका बड़ा उदाहरण प्रदेश में 1148 ग्राम दुग्ध सहकारी समितियां हैं, जिनके कुल सदस्यों की संख्या 47,905 हैं। इनमें अकेले महिलाओं की संख्या 19,388 तक पहुंच गई है। प्रदेश सरकार ने दूध कारोबार को ऊंचाई देने के लिए राज्य में 11 दुग्ध संयंत्र और 116 बल्क मिल्क कूलर भी स्थापित किए हैं। हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसे बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दूध के खरीद मूल्य में एक मुश्त भारी बढ़ोतरी की है। प्रदेश में गाय के दूध का खरीद मूल्य 45 रुपए और भैंस के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 55 रुपए प्रति लीटर तय किया गया है, जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की पशुपालन में रुचि बढ़ी है। प्रदेश में पशुपालन से जुड़ी महिला घर द्वार पर दूध बेच कर हर महीने औसतन 12 हजार से 15 हजार की कमाई कर रही हैं। इसके अलावा महिलाएं कृषि और बागवानी के क्षेत्र में भी पुरुषों का सहयोग कर रही हैं। प्रदेश सरकार दुग्ध प्रसंस्करण और इसकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जिसके लिए प्रदेश में दुग्ध संयंत्रों का भी चरणबद्ध तरीके से उन्नयन किया जा रहा है। हिम-गंगा योजना के तहत जिला कांगड़ा स्थित ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से विश्व स्तरीय दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस संयंत्र की क्षमता को बढ़ाकर 3 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है। इस संयंत्र में अत्याधुनिक तकनीक से दूध का पाउडर बनाया जाएगा, जिसमें मांग से अधिक दूध को लंबे समय तक संरक्षित किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त दही, खोया, घी, आइसक्रीम, फ्लेवर्ड मिल्क, पनीर और अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। इस संयंत्र में अल्ट्रा हीट तकनीक से पैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश में दूध कारोबार को उद्योग के तौर पर स्थापित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए स्थानीय युवाओं को किसानों व एकत्रीकरण केंद्रों से दूध प्रसंस्करण संयंत्रों तक दूध ले जाने के लिए 200 रेफ्रिजरेटर मिल्क वैन उपलब्ध करवाने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार ने दुग्ध संयंत्र कुल्लू, हमीरपुर, नाहन और दुग्ध संयंत्र ऊना की क्षमता 20-20 हजार लीटर करने की योजना भी बनाई है। दुग्ध विपणन प्रक्रिया और इसके परिवहन का युक्तिकरण भी किया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन समितियों के पंजीकरण कार्य में तेजी लाई है, इसके लिए समितियों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जा रहा है। वहीं मिल्कफेड के ट्रेडमार्क ‘हिम’ का केंद्र सरकार से पंजीकरण करवाया गया है। प्रदेश मिल्कफेड की ओर से राज्य में 102 ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट स्थापित किए गए हैं और दूर-दराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण दूध एकत्र करने के लिए 320 लीटर क्षमता के 55 मिल्क कूलर छोटी समितियों को उपलब्ध करवाए गए हैं।
अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना में सोमवार से यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी चलेगी। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की न्यू ओपीडी में अब पहले की तरह मरीजों को उपचार नहीं मिलेगा। लिहाजा ऊपरी शिमला के अलावा सिरमौर, सोलन, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, चंबा और ऊना जिला से आने वाले मरीजों को न्यू आईएसबीटी से चलने वाली बस सेवा से सीधा भट्ठाकुफर पहुंचना होगा। यहां से चलने वाली बस से मरीज अस्पताल पहुंच सकेंगे। अटल सुपर स्पेशलिटी आर्युविज्ञान संस्थान (चमियाना) में यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी सुबह 9:30 से शाम 4:00 बजे तक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी। हालांकि अस्पताल पहुंचने के लिए मरीजों को परेशानी न झेलनी पड़े इसके लिए मरीज आईजीएमसी से सुबह 9:00 बजे जाने वाले टेंपो ट्रेवलर से चमियाना अस्पताल पहुंच सकते हैं। बताया जा रहा है कि ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से आग्रह किया है कि परिवहन विभाग को निर्देश जारी करवाएं कि अटल सुपर स्पेशलिटी आर्युविज्ञान संस्थान (चमियाना) के लिए आईजीएमसी से नियमित टेंपो ट्रेवलर चलाएं। इसके अलावा निचले क्षेत्रों से जो मरीज भट्ठाकुफर पहुंचते हैं उन्हें यहां से अस्पताल पहुंचने के लिए शटल बस सेवा आरंभ करवाएं। मरीजों को परेशानी पेश न आए इसलिए परिवहन विभाग से टेंपो ट्रेवलर के अतिरिक्त चक्कर लगाने के लिए चिट्ठी के माध्यम से अवगत करवाया गया है।
हिमाचल सरकार ने प्रदेश में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शिमला विकास योजना में संशोधन किया है, जिसका उद्देश्य राज्य की राजधानी में हरित पट्टी क्षेत्र का विस्तार करना है, जिसमें शहर और उसके उपनगर दोनों शामिल हैं। शिमला विकास योजना 2041 के अनुसार, हरित पट्टी क्षेत्र में आवासीय निर्माण को सख्ती से विनियमित किया जाएगा। निर्माण केवल उन भूखंडों पर ही अनुमति दी जाएगी, जिनमें पेड़ नहीं हैं। पेड़ वाले किसी भी भूखंड को, चाहे वह हरा हो या सूखा, हरित भूखंड के रूप में नामित किया जाएगा, जिससे किसी भी निर्माण गतिविधि पर रोक लगेगी। वर्तमान में हरित पट्टी के रूप में नामित क्षेत्रों में बाईपास और कार्ट रोड, नाभा वन, फागली और लालपानी वन, बेमलो वन, हिमलैंड वन, खलिनी और छोटा शिमला वन क्षेत्र और योजना में विस्तृत कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सरकार ने हरित पट्टी पदनाम के तहत नए क्षेत्रों को शामिल करने का निर्णय लिया है। ये क्षेत्र हैं रिट्रीट, मशोबरा बैंड, टुकडा एंड्री, शिव मंदिर एंड्री, ताल और गिरी, डीपीएफ खलिनी, बीसीएस मिस्ट चैंबर और परिमहल, इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा ।
हिमाचल प्रदेश में रोजगार का सपना देख रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। सरदार पटेल विश्वविद्यालय में गेस्ट टीचर के लिए साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे है। यह साक्षात्कार 23 जुलाई से सरदार पटेल विश्वविद्यालय में ही होंगे। एसपीयू में 35 गेस्ट टीचर्स की भर्ती की जानी है। ऐसे युवा जिन्होंने पीएचडी या नेट क्वालीफाई किया है, वह इन पदों के लिए एलिजिबल होंगे। चयनित होने पर इन युवाओं को 35 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जाएगा। उम्मीदवारों का चयन वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से होगा। एसपीयू ने पीएचडी और नेट पास युवाओं के लिए 23, 24 और 25 जुलाई को वॉक इन इंटरव्यू रखे हैं। साक्षात्कार प्रो. कुलपति कार्यालय में होंगे। यूनिवर्सिटी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ, अंग्रेजी, योग, ईवीएस, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, कंप्यूटर साइंस, बॉटनी, जूलॉजी, पर्यावरण विज्ञान मैनेजमेंट, हिस्ट्री और पब्लिक में इन टीचर्स की भर्ती होगी। 23 जुलाई को सुबह 11 बजे केमिस्ट्री, मैथ, अंग्रेजी और योग, ईवीएस गेस्ट फैकल्टी के इंटरव्यू होंगे। 12 बजे केमिस्ट्री, 1 बजे इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री और 3 बजे कंप्यूटर साइंस गेस्ट फैकल्टी के लिए इंटरव्यू होगा। 24 जुलाई को सुबह 11 बजे बॉटनी, 12 बजे जूलॉजी, 1 बजे एनवायर्नमेंटल साइंस गेस्ट फैकल्टी के लिए इंटरव्यू होगा। 25 जुलाई को सुबह 11 बजे मैनेजमेंट, 12 बजे की इतिहास और एक बजे पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के लिए इंटरव्यू में लिया जाएगा। उम्मीदवारों को अपने आवेदन पत्र के साथ मार्कशीट, प्रमाण पत्र, डिग्री और अन्य दस्तावेजों लाने होंगे। गेस्ट टीचर की नियुक्ति पूरी तरह से अस्थायी आधार और एक सुख सेमेस्टर के लिए है। यहां इन्हें किसी भी स्तर पर नियमितीकण, स्थायी पद नहीं दिया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून भले ही 27 जून को दस्तक दे दी हो, लेकिन राज्य में मानसून सीजन में बारिश उम्मीद से काफी कम हुई है। प्रदेश में कम हुई बारिश को देखते हुए मानसून को कमजोर माना जा रहा है। इस मानसून सीजन में 1 जून से अब तक 43 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 27 जून को हिमाचल प्रदेश में पहुंचे दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर और अनिश्चित बने रहने के कारण अब तक प्रदेश में 43 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 1 जून से 21 जुलाई के बीच सामान्य बारिश 266.4 मिमी की के मुकाबले सिर्फ 151.6 मिमी ही बारिश हुई। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश के बावजूद, राज्य के सभी 12 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। जुलाई माह में 21 जुलाई रविवार तक प्रदेश में 36 प्रतिशत बारिश में कमी दर्ज की गई है, जिसमें प्रदेश भर में 165.3 मिमी बारिश के मुकाबले महज 105.1 मिमी बारिश हुई है। मौसम विभाग शिमला कार्यालय ने प्रदेश में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए सोमवार और मंगलवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार और मंगलवार को राज्य के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में अगले 2 से 3 दिनों में मानसून की गतिविधि बढ़ने की संभावना है। इस दौरान प्रदेश में मध्यम तीव्रता की व्यापक वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार इस सोमवार और मंगलवार को बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, चंबा, कुल्लू, सोलन और सिरमौर में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। मौसम विभाग ने स्थानीय लोगों और बागवानों को बागवानी और खड़ी फसलों के नुकसान होने, कमजोर संरचनाओं को आंशिक नुकसान, तेज हवाओं के कारण कच्चे घरों और झोपड़ियों को नुकसान होने की आशंका जताई है। वहीं, मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए यातायात में व्यवधान और निचले इलाकों में जलभराव को लेकर लोगों को आगाह किया गया है। हिमाचल प्रदेश में 27 जून को मानसून के एंट्री से लेकर अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 40 लोगों की मौ*त हो चुकी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार बारिश के कारण राज्य को 329 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
हिमाचल में आज सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर सहित तीन नवनिर्वाचित विधायक आज शपथ लेंगे। विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह रखा गया है। सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर देहरा से चुनाव जीती हैं। इसी तरह से नालागढ़ विधानसभा सीट से हरदीप सिंह चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने हैं। हमीरपुर विधानसभा सीट पर आशीष शर्मा भाजपा टिकट पर चुनाव जीतने के बाद दूसरी बार विधायक पद की शपथ लेंगे। ऐसे में अब विधानसभा सदस्यों की संख्या 68 हो जाएगी। हिमाचल विधानसभा में अब सदस्यों की संख्या 68 हो जाएगी। इसमें कांग्रेस विधायकों की संख्या 40 होगी। प्रदेश में 27 फरवरी को घटे राजनीतक घटनाक्रम से पहले भी कांग्रेस विधायकों की संख्या 40 थी। इसी तरह से भाजपा विधायकों की संख्या अब बढ़कर 28 तक पहुंच गई है। पहले यही संख्या 25 थी। वहीं, अब विधानसभा में एक भी निर्दलीय विधायक नजर नहीं आएगा। इससे पहले तीन निर्दलीय विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन तीनों निर्दलीय विधायकों ने 22 मार्च को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने 3 जून को स्वीकार किया। ऐसे में खाली हुए तीन विधानसभा क्षेत्रों देहरा, नालागढ़ व हमीरपुर में 10 जुलाई को मतदान हुआ, जिसमें देहरा से कांग्रेस के टिकट पर कमलेश ठाकुर और नालागढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी हरदीप सिंह बावा ने चुनाव जीता। वहीं, हमीरपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा चुनाव जीतकर दूसरी बार विधायक बने हैं। हिमाचल विधानसभा के सदन में अब इतिहास बनने जा रहा है। वह ऐसे कि इस बार विधानसभा में पहली बार पति और पत्नी की जोड़ी एक साथ नजर आएगी। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू नादौन से और उनकी धर्म पत्नी कमलेश ठाकुर देहरा से उपचुनाव जीतकर पहली विधायक बनी हैं। ये जोड़ी अब मानसून सत्र में विधानसभा के एक साथ नजर आएगी। इससे पहले सदन में पिता-पुत्र पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह की जोड़ी नजर आ चुकी है। जो वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद सदन में एक साथ दिखे थे। हिमाचल विधानसभा में एक और इतिहास बन गया है। यहां पहली बार ऐसा हुआ है कि पांच साल के कार्यकाल के लिए चुने गए तीन विधायक अलग अलग पार्टी चिन्ह पर चुनाव जीतने के बाद दूसरी बार विधायक विधायक बने हैं। इसमें धर्मशाला से वर्ष 2022 में कांग्रेस टिकट पर सुधीर शर्मा चुनाव जीतकर विधायक बने थे और अब 2024 के उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद फिर से विधायक बने हैं। इसी तरह से बड़सर से इंद्रदत्त लखनपाल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने थे, अब 2024 के उपचुनाव में भाजपा टिकट पर चुनाव जीत कर फिर से विधायक बन गए हैं। इन दोनों ही विधायकों को शपथ दिलाई जा चुकी है। वहीं हमीरपुर सीट से आशीष शर्मा वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़े और पहली बार विधायक बने थे। अब 2024 के उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर फिर से विधायक बने हैं, जो आज विधायक पद की शपथ लेंगे।
हिमाचल के वन आच्छंदित क्षेत्रों को विस्तार प्रदान करने और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत प्रदेश सरकार निरंतर प्राथमिकता से कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार ने शिमला नियोजन क्षेत्र के अंतर्गत शिमला शहर और उप नगरों के लिए शिमला विकास योजना में संशोधन किया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार शिमला के सतत विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। सरकार की इस पहल से भूमि कटाव को कम करने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। शिमला विकास योजना 2041 के अंतर्गत हरित क्षेत्र में आवासीय निर्माण को नियोजित किया जाएगा। इसके तहत वृक्ष रहित भूखंडों पर ही निर्माण कार्यों की अनुमति प्रदान की जाएगी। हरे या सूखे पेड़ों वाली भूमि को हरित भूखंड के रूप में नामित किया जाएगा, जिस पर निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। वर्तमान में ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में बाई-पास और कार्ट रोड़, नाभा वन, फागली और लालपानी वन, बेम्लोई वन, हिमलैंड वन, खलीनी और छोटा शिमला वन क्षेत्र तथा कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ग्रीन बेल्ट के अंतर्गत नए क्षेत्रों में रिट्रीट, मशोबरा बंद, टुकदा आंदरी, शिव मंदिर आंदरी, ताल और गिरी, डीपीएफ खलीनी, बीसीएस मिस्ट चैम्बर और परिमहल को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की इस पहल का लक्ष्य शिमला के नैसर्गिक सौंदर्य को संरक्षित रखना है और आने वाली पीढ़ी के लिए हरा भरा भविष्य सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर सतत विकास को अधिमान दिया जा रहा है। हिमाचल भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इसके दृष्टिगत प्रदेश सरकार अवैध निर्माण पर रोक लगाकर शिमला में नियोजित निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि शिमला का प्राकृतिक सौंदर्य बरकरार रहे और अधिक से अधिक संख्या में पर्यटक शिमला की ओर रूख करें। शिमला का हरित आवरण शिमला शहर सहित उत्तर भारत को प्राण वायु प्रदान करता है। हरे भरे क्षेत्र तापमान को नियंत्रित करने का कार्य करते हैं। शिमला के हरित क्षेत्र में वृद्धि कर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और यहां भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी कार्य कर रही है, ताकि वह यात्रा का अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त कर सकें।
कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार और उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने आज जारी संयुक्त प्रेस बयान में ऊना में हुई भाजपा वर्किंग कमेटी की बैठक को ‘महज गुणगान’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष शायद यह भूल गया है कि लोकसभा निर्वाचन के नतीजों के बाद भाजपा की लोकप्रियता में गिरावट आई है और उसके 400 पार के दावों को जनता ने धूल चटाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी दयनीय हालत में पहुंच गई कि उसे सरकार बनाने के लिए क्षेत्रीय दलों का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पूर्व भाजपा सरकार ने कीटनाशकों पर मिलने वाली सब्सिडी को बंद कर किसानों-बागवानों के हितों के साथ खिलवाड़ किया। यही नहीं कर्मचारियों को दिए जाने वाले वित्तीय लाभ न देकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार से वंचित कर उनका शोषण किया गया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को एरियर का भी भुगतान नहीं किया। पूर्व भाजपा सरकार ने कर्मचारियों को अपमानित करने के लिए कहा कि पेंशन चाहिए, तो कर्मचारी चुनाव लड़ें। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देकर उन्हें सम्मानजनक जीवनयापन करने का अधिकार लौटाया साथ ही लंबित एरियर और अन्य लाभों को भी समय-समय पर भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा कर्मचारी हितैषी होने के दावे कर रही है जबकि सच्चाई यह है कि पुरानी पेंशन के लिए कर्मचारियों को आंदोलन को कुचलने और दमन का काम भी भाजपा ने ही किया है और भाजपा के शासन में यह काला धब्बा है। प्रदेश की जनता को गुमराह करने के लिए पूर्व भाजपा सरकार ने अपने अंतिम छह माह के शासन के दौरान अनावश्यक संस्थान खोले। अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए रैलियों पर बेतहाशा खर्च किया गया। प्रदेश की पटरी से उतरी हुई अर्थव्यवस्था को ट्रैक पर लाने के लिए कांग्रेस सरकार को कुछ कठिन निर्णय लेने पड़े। सत्ता के लोभ में डूबी हुई भाजपा ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को अस्थिर को करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार ने प्रदेश के लाखों युवाओं के साथ धोखा कर कर्मचारी चयन आयोग जैसी संस्थानों में परीक्षा के प्रश्न पत्र पेपर बेचने के व्यापार को संरक्षण दिया। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में कर्मचारी चयन आयोग भ्रष्टाचार का गढ़ था। प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार ने 680 करोड़ की राजीव गांधी स्टार्ट-अप योजना शुरू की है। वहीं प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए 100 से 500 किलोवाट क्षमता की परियोजनाओं पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। वहीं किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्ट-अप योजना शुरू की गई है। इस योजना में रसायन मुक्त खेती करने के लिए हर पंचायत से किसानों को जोड़ा जाएगा। सरकार का 36 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भाजपा कि इलेक्टोरल बॉन्ड योजना का पर्दाफाश हुआ है और सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पूरी तरह असंवैधानिक करार दिया है। भाजपा की इस योजना से पारदर्शिता और जवाबदेही धूमिल हुई व लोगों के हितों के साथ खिलवाड़ किया गया है। वहीं नीट परीक्षा में हुए घोटाले ने प्रदेश के युवा वर्ग के सपनों के साथ खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने कहा कि कांवड यात्रा में भाजपा शासित राज्यों द्वारा दिए जा रहे निर्देशों को लेकर पार्टी को अपने ही सहयोगी दलों ने आड़े हाथ लिया है। भाजपा वसुधैव कुटुम्बकम् की बात करती है लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि उपचुनावों में प्रदेश की जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है और कांग्रेस के विधायकों को संख्या एक बार फिर 40 हो गई है। जबकि आए दिन भाजपा की सरकार बनने के दावे करने वालों को सबक सिखाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को आपदा प्रभावितों से जाकर पूछना चाहिए कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने उनकी कितनी मदद की। उन्होंने कहा कि भाजपा ने दिखावे की राजनीति कर बेतहाशा खर्च किया और प्रदेश के लोगों के हितों को नजरअंदाज कर ठाठबाठ की जीवनशैली अपनाई। वर्तमान कांग्रेस सरकार वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों को वित्तीय स्थिरता, कानून व्यवस्था, किसानों और बागवानों को सब्सिडी और राज्य के विकास और कल्याण के लिए दृढ़ संकल्पित और प्रतिबद्ध है।
प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी योजनाएं व कार्यक्रम सफलतापूर्वक कार्यान्वित किए जा रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थिकी से जुड़े हितधारकों को सशक्त करने पर विशेष अधिमान दे रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि दुग्ध उत्पादन रोजगार सृजन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिला सशक्तिकरण की सम्भावनाओं का रास्ता प्रशस्त करने वाला क्षेत्र है। इस क्षेत्र में सहकारी समितियां भी सराहनीय कार्य कर रही हैं। प्रौद्योगिकी के युग में नवीन तकनीक और नवोन्मेषी पहल अपनाना नितांत अनिवार्य है। प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण और इसकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान केेन्द्रित किया जा रहा है। प्रदेश में दुग्ध संयंत्रों का भी चरणबद्ध तरीके से उन्नयन किया जा रहा है। हिम-गंगा योजना के तहत जिला कांगड़ा स्थित ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से विश्व स्तरीय दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस संयंत्र की क्षमता को बढ़ाकर 3 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है। इस संयंत्र में अत्याधुनिक तकनीक से दूध का पाउडर बनाया जाएगा, जिसमें मांग से अधिक दूध को लम्बे समय तक संरक्षित किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त दही, खोया, घी, आईसक्रीम, फ्लेवर्ड मिल्क, पनीर और अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। इस संयंत्र में अल्ट्रा हीट तकनीक से पैंकिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश सरकार द्वारा स्थानीय युवाओं को किसानों व एकत्रीकरण केंद्रों से दूध प्रसंस्करण संयंत्रों तक दूध ले जाने के लिए 200 रेफ्रिजरेटिड मिल्क वैन उपलब्ध करवाने का बजट में प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार ने दुग्ध संयंत्र कुल्लू, हमीरपुर, नाहन और दुग्ध संयंत्र ऊना की क्षमता 20-20 हजार लीटर करने की योजना भी बनाई है। दुग्ध विपणन प्रक्रिया और इसके परिवहन का युक्तिकरण भी किया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन समितियों के पंजीकरण कार्य में तेजी लाई है इसके लिए समितियों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जा रहा है।सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य दुग्ध उत्पादक प्रसंघ (मिल्कफेड) के सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मिल्कफेड के ट्रेडमार्क ‘हिम’ का केंद्र सरकार से पंजीकरण करवाया गया है। हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड द्वारा राज्य में 102 ऑटोमैटिक मिल्क कलैक्शन यूनिट स्थापित किए गए हैं और दूर-दराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण दूध एकत्र करने के लिए 320 लीटर क्षमता के 55 मिल्क कूलर छोटी समितियों को उपलब्ध करवाए गए हैं। प्रदेश में वर्तमान में 1148 ग्राम दुग्ध सहकारी समितियां हैं, जिनके 47,905 सदस्य हैं। इनमें महिलाओं की संख्या 19,388 है। राज्य में 11 दुग्ध संयंत्र और 116 बल्क मिल्क कूलर भी स्थापित हैं। प्रदेश सरकार दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में 360 डिग्री विकास के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है ताकि ग्रामीण व अन्य क्षेत्रों की आर्थिकी को संबल प्रदान किया जा सके।यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों और पशुपालकों को न केवल दूध उत्पाद का लागत आधारित मूल्य सुनिश्चित हो बल्कि उन्हें गुणवत्ता बोनस भी प्राप्त हो। सरकार इसी ध्येय के साथ निरंतर कार्य कर रही है। पशुपालन तथा दूध उत्पादन को प्राकृतिक खेती से जोड़कर किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है। गाय तथा भैंस के दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाकर क्रमशः 45 और 55 रुपये किया गया है। भारतवर्ष में यह पहल करने वाला हिमाचल प्रदेश एकमात्र राज्य है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि दुग्ध क्षेत्र के विकासोन्मुखी कार्यक्रमों में आधुनिक प्रौद्योगिकी का समावेश कर हिमाचल को इस क्षेत्र में मॉडल राज्य बनाया जाए। सरकार के यह महत्त्वाकांक्षी प्रयास निश्चित तौर पर हिमाचल को आत्मनिर्भर राज्य बनाने की परिकल्पना को साकार करने में संबल प्रदान करेंगे।
** बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड गाड़ियों पर चलेगा नियमों का डंडा शिमला: देश के अन्य राज्य में पंजीकृत वाहनों के हिमाचल में प्रवेश करने पर सरकार सख्त हो गई है। इसके लिए अब सरकार ने हिमाचल प्रदेश मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1972 की धारा 17(4) के प्रावधानों आंशिक संशोधन किया है। हिमाचल प्रदेश परिवहन विभाग ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। इसके मुताबिक बाहरी राज्य में पंजीकृत वाहन बिना टैक्स चुकाए हिमाचल प्रवेश करता है या ऐसा वाहन जो परमिट के विपरीत अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। इस तरह की लापरवाही को लेकर सरकार ने सख्ती बरतते हुए जुर्माना राशि को बढ़ा दिया है। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन मालिकों से तुरंत प्रभाव से वसूली शुरू की जाएगी। बाहरी राज्यों से हिमाचल आने वाले वाहन अगर हिमाचल में देय टैक्स का भुगतान किए बिना या परमिट में निर्धारित शर्तों के अवहेलना करते हुए पाए जाते हैं, तो वाहन मालिक को इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। पहली बार में हल्के वाहन को नियम तोड़ने पर 20 हजार रुपये और अन्य मोटर वाहनों के मामले में 50 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। इसके बाद भी अगर वही वाहन मालिक फिर से लापरवाही बरतता हुआ पाया जाता है तो हिमाचल प्रदेश मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1972 की धारा 17(4) के प्रावधानों के तहत दूसरे अपराध के लिए हल्के मोटर वाहनों पर 40 हजार रुपये और अन्य मोटर वाहनों पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। ये आदेश प्रदेश में तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। देश के बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में कॉमर्शियल वाहन हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में रोजाना प्रवेश करते हैं। इस दौरान परिवहन विभाग के सामने नियमों के उल्लंघन के बहुत से मामले भी सामने आए हैं, जिसमें वाहन मालिक राज्य का देय टैक्स चुकाए बिना प्रदेश की सीमा के अंदर प्रवेश करते हैं। ऐसे में टैक्स का भुगतान न होने से राज्य सरकार को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसके चलते सरकार ने सख्ती बरतते हुए ऐसे लापरवाह चालकों के खिलाफ नियमों का डंडा चलाना शुरू कर दिया है, जिसमें बिना टैक्स भुगतान के परमिट की शर्तों की अवहेलना पाए जाने पर पहले से अधिक जुर्माना वसूला जाएगा। परिवहन विभाग के प्रधान सचिव आरडी नजीम ने इस बारे में आदेश जारी किए हैं।
जिला शिमला में चिट्टे के साथ गिरफ्तार किए गए 3 आरोपियों को एलडी विशेष न्यायाधीश शिमला भूपेश शर्मा की अदालत ने दोषी करार देते हुए 4 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषियों पर 25 हजार रुपए जुर्माना भी ठोका गया। जुर्माना अदा न कर पाने की सूरत में दोषियों को तीन महीने अतिरिक्त साधारण कैद की सजा भुगतनी होगी। सरकार की ओर से मामले की पैरवी जिला न्यायवादी मुक्ता कश्यप और उप जिला न्यायवादी भगवान सिंह नेगी ने की है। मामले के अनुसार 22 जनवरी 2023 को एसआईयू की टीम डेली गश्त और कानून व्यवस्था पर ड्यूटी पर टुटू, घणाहट्टी, सुन्नी आदि की ओर गश्त पर निकली हुई थी। रात करीब 11.50 बजे जब पुलिस टीम मांदरी में मौजूद थी, तभी धामी की ओर से एक गाड़ी (नंबर HP 06B 1203) आई। पुलिस ने गाड़ी तो चेकिंग के लिए रोका। गाड़ी में तीन लोग सवार थे। गाड़ी को सुंदर सिंह चला रहा था, जबकि ओमप्रकाश आगे की सीट पर बैठा था और प्रदीप पीछे की सीट पर बैठा था। तीनों रामपुर उपमंडल के रहने वाले हैं। पुलिस ने जब रूटीन चेकिंग के दौरान गाड़ी की तलाशी ली तो फ्रंट सीट के फुट मैट के नीचे एक प्लास्टिक की थैली पाई गई, जबकि पिछली सीट के फुट मैट के नीचे से भी एक और प्लास्टिक की थैली बरामद हुई। जिन्हें खोलकर देखने पर थैलियों में चिट्टा पाया गया। इसका वजन 30.98 ग्राम था, जिसके बाद पुलिस थाना सुन्नी ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, मामले में जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों से पूछताछ की और वकीलों की दलीलें सुनने के बाद तीनों आरोपियों को एलडी विशेष न्यायाधीश शिमला भूपेश शर्मा की अदालत ने दोषी करार दिया और तीनों आरोपी व्यक्तियों पर धारा 21, 29 के तहत अपराध करने पर 4 साल कठोर कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।
हिमाचल प्रदेश के शिमला और कुल्लू में बने हवाई अड्डों का दृश्य उड़ान नियम यानि विजुअल फ्लाइट रूल्स(वीएफआर) विमानन कंपनियों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। इन हवाई अड्डों पर लैंड करने के लिए पायलटों को 5,000 मीटर की दृश्यता की आवश्यकता होती है, लेकिन खराब मौसम में विजिबिलिटी न मिलने के कारण उड़ानों को रद्द करना पड़ रहा है। इसका खामियाजा विमानन कंपनियों और हवाई जहाज से सफर करने वाले यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में खराब मौसम के कारण शिमला और कुल्लू के लिए एलायंस एयर की ओर से उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। बताया जा रहा है कि ये दोनों ही एयरपोर्ट वीएफआर हवाई अड्डे हैं, जहां पर 5000 मीटर की दृश्यता की आवश्यकता होती है। लेकिन खराब मौसम के बीच पायलटों के लिए यह दृश्यता नहीं मिल पाती। इसके चलते विमानन कंपनियों को अपनी उड़ानों को रद्द करना पड़ रहा है। वहीं इस सदंर्भ में एलायंस एयर विमानन कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि विमानन कंपनी मौसम के आधार पर प्रतिदिन प्लाइट का संचालन और उन्हें रद्द करने की योजना बनाती है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उनके लिए पहले है, जिसके चलते खराब मौसम के बीच उड़ानों को रद्द करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया मौसम साफ होते ही इन हवाई अड्डों के लिए नियमित उड़ानें शुरू हो जाएंगी।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में मशहूर श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान लंगर सेवा के लिए जा रहे एक सेवादार की पहाड़ी में गिरने से मौ*त हो गई। मृत*क की पहचान रामपुर के रहने वाले सिद्धार्थ शर्मा (31) के रूप में हुई है। सिद्धार्थ शर्मा अपने पीछे 5 साल की बेटी, गर्भवती पत्नी, माता-पिता और बहन को छोड़ गए हैं। परिजनों का घर पर रो रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने श*व कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचाया है। बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान सिद्धार्थ शर्मा(31) पुत्र विजय शर्मा, निवासी मुख्य बाजार रामपुर भीमडवारी के समीप बराहटीनाला में गिरने से घाय*ल हो गया। इसके बाद घाय*ल को उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला ले जाया गया। लेकिन आईजीएमसी में डॉक्टर ने उसे मृ*त घोषित कर दिया। स्थानीय पुलिस की ओर से आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। परिवार के मुताबिक सिद्धार्थ शर्मा श्रीखंड यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए लंगर सेवा के लिए घर से निकला था। सामान ले जाते वक्त गुरुवार दोपहर चढ़ाई चढ़ते वक्त बराहटी नाला के समीप पैर फिसलने के बाद करीब 50 मीटर गहरी खाई में जा गिरा, जिससे वह गंभीर रूप से घाय*ल हो गया। इसके बाद सिद्धार्थ को सिंहगाड बेस कैंप तक पहुंचाया गया। यहां से गुरुवार रात करीब ढाई बजे उसे घायल अवस्था में निरमंड अस्पताल लाया गया। हालत खराब होने की वजह से डॉक्टरों ने उसे खनेरी अस्पताल भेज दिया। यहां भी जब सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ तो शिमला IGMC रेफर किया गया। यहां इलाज के दौरान उसकी मृ*त्यु हो गई
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से पास हुए अभ्यर्थियों के लिए राहत की बात है। बोर्ड अपनी स्थापना के समय से लेकर अब तक के सभी सर्टिफिकेटों को डिजी लॉकर पर उपलब्ध करवाएगा। इससे अभ्यर्थियों को पुराने सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए बोर्ड कार्यालय के चक्कर काटने से भी छुटकारा मिलेगा। इस संदर्भ में शिक्षा बोर्ड ने एक प्रपोजल तैयार किया है, अगर यह प्रपोजल सिरे चढ़ता है तो सूबे के अभ्यर्थियों को खासी राहत मिलेगी। प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से 2012 के बाद के सभी सर्टिफिकेटों को डिजी लॉकर पर उपलब्ध करवाया गया है। इससे पहले के कुछ दस्तावेजों की शिक्षा बोर्ड के पास डिजिटल काॅपी है, जबकि अधिकतर दस्ती तौर पर रखे गए हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड 1969 में अस्तित्व में आया। पहले इसका मुख्यालय शिमला में था। जनवरी 1983 में धर्मशाला में स्थानांतरित कर दिया गया। शिक्षा बोर्ड हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम, निर्देशों के पाठ्यक्रम और पाठ्य पुस्तकें निर्धारित करता है और सूचीबद्ध पाठ्यक्रमों के आधार पर परीक्षाएं आयोजित करता है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा बोर्ड 8वीं, 10वीं, 11वीं, 12वीं और डीएलएड के अलावा एसओएस सहित अन्य कई परीक्षाएं करता है। शिक्षा बोर्ड की ओर से करवाई जाने वाली परीक्षाओं में हर वर्ष ढाई से तीन लाख अभ्यर्थी बैठते हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने डिजी लॉकर पर वर्ष 2012 के बाद सभी सर्टिफिकेट अपलोड किए गए हैं। शिक्षा बोर्ड ने योजना बनाई है कि डिजी लॉकर पर स्थापना के समय से पासआउट हुए अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेटों को भी उपलब्ध करवाया जाए, इसके लिए प्रपोजल भेजा गया है। प्रपोजल के मंजूर होते ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
शिमला में लोग अब 12 महीने आइस स्केटिंग का रोमांच उठा पाएंगे। जल्द शिमला में ऑल वेदर अत्याधुनिक आइस स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जाएगा। मौजूदा समय में शिमला में आइस स्केटिंग केवल सर्दियों में 3 महीने ही हो पाती है। इस रिंक में प्राकृतिक तौर पर बर्फ जमाई जाती है। ऐसे में यहां आइस स्केटिंग का होना पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करता है, लेकिन, अत्याधुनिक आइस स्केटिंग के निर्माण से यहां 12 महीने मशीनों के माध्यम से बर्फ जमाई जाएगी और लोग वर्ष में किसी भी समय आइस स्केटिंग का लुत्फ उठा पाएंगे। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, टेंडर भरने की आखरी तिथि 8 अगस्त रखी गई है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि शिमला में अत्याधुनिक आइस स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जाना है। यह निर्माण 42 करोड़ की लागत से होना है। इससे पर्यटक 12 महीने आइस स्केटिंग का लुत्फ उठा पाएंगे। उपायुक्त ने इस संदर्भ में आइस स्केटिंग क्लब के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की। आल वेदर रिंक अत्याधुनिक तकनीक से बनकर तैयार होगा और इसमें बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। रिंक में आईस हाॅकी के अलावा अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। आइस स्केटिंग रिंक पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा आइस स्केटिंग क्लब के आसपास पौधारोपण भी किया जाएगा। वहीं, नई आइस स्केटिंग रिंक में चेंजिंग रूम, रिंक, रोलर रिंक, रेस्तरां, फायर अलार्मिंग सिस्टम, कांफ्रेंस हाॅल, सर्विलांस सिस्टम सहित अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्केटिंग सुविधा मुहैया करवाए जाने की योजना प्रस्तावित है।
शिमला शहर के जिन क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुँच पाती है वहां अब स्ट्रेचर और व्हील चेयर की सुविधा नगर निगम देने जा रहा है। नगर निगम ने 40 स्ट्रेचर और 40 व्हील चेयर खरीदे है जोकि शुक्रवार को नगर निगम महापौर कार्यालय पहुंचे और अब इन्हें हर वार्ड में रखा जाएगा। खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ आपातकाल या मरीजों को सड़क तक लाना मुश्किल होता है। नगर निगम द्वारा एसजेवीएल के माध्यम से इसकी खरीदारी की है। नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने जानकारी देते हुए कहा कि शिमला शहर एक पहाड़ी क्षेत्र है और हर जगह सड़क की सुविधा नहीं है इसको देखते हुए पार्षदों द्वारा स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की डिमांड की गई थी |अभी पहले चरण में 40 स्ट्रेचर और 40 व्हील चेयर खरीदी गई है इसके अलावा भी यदि कहीं से डिमांड आती है तो उस वार्डस में फिर से स्ट्रेचर और व्हील चेयर मुहैया करवाए जाएगें। इसे खासकर मरीजों को सड़क तक लाने के लिए आसानी होगी और यह वार्डों में पार्षद कार्यालय में रखा जाएगा जहां से लोग इन्हें किसी भी समय ले सकते हैं। इसके अलावा शहर में सभी वार्डों में लोगों को नए 350 बेंच की सुविधा मिलने वाली है। इन्हें वार्डों में विभिन्न स्थानों पर लगाया जाएगा। इन बेंचों को ऐसे स्थानों पर लगाया जाएगा जिससे इनकी सुविधा आम लोगों को मिल सके। वार्ड के पार्षदों द्वारा बेंच लगाने के लिए स्थान को चिन्हित किया जाएगा। इससे वार्ड के लोगों को काफी फायदा मिलेगा। जिन वार्डों में बेंच की ज़रुरत नहीं होगी तो वार्डों को ज़्यादा बेंच दिए जाएंगे।
**प्रदेश में 22 और 23 जुलाई को कुछ जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट **अगस्त में मानसून के रफ्तार पकड़ने की संभावना प्रदेश में बरसात की गति धीमी बनी हुई है। बरसात में अभी तक सामान्य से 40 फीसदी तक कम बादल बरसे हैं मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों के दौरान बरसात में बढ़ोतरी के आसार जताए हैं और 22 और 23 जुलाई को कुछ जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उसके बाद जुलाई के अंत तक मानसून में कमी देखने को मिलेगी मौसम विभाग के अनुसार अगस्त माह की शुरुआत में मॉनसून के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया कि अगले तीन से चार दिनों तक प्रदेश में वर्षा में तेजी आने की संभावना है इसके लिए विभाग ने अलर्ट जारी किए हैं। उन्होंने बताया के प्रदेश के चार जिला शिमला, मंडी, कांगड़ा और बिलासपुर मे सामान्य के आसपास वर्षा हुई है जबकि बाकी क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। सबसे कम बारिश लाहौल स्पीति, सिरमौर, सोलन और ऊना मे हुई है। उन्होंने कहा कि जुलाई माह में मानसून कम ही असरदार रहेगा जबकि अगस्त माह की शुरुआत में मानसून के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने और बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं में इस बार कमी पाई गई है जिसके चलते पहाड़ों में बारिश कम हो रही है।
**मानसून में अब तक 186 करोड़ का हुआ नुकसान, 31 लोगों की हुई मौ*त हिमाचल प्रदेश में 27 जून को मानसून की एंट्री हुई थी। मौसम विभाग द्वारा प्रदेश में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना जताई थी, मगर प्रदेश में अभी भी ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से भी कम रही है। मौसम विभाग शिमला द्वारा तीन दिनों तक बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। बुधवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने प्रदेश में 23 जुलाई तक बारिश को लेकर संभावना जताई है। 18, 19 और 20 जुलाई को हिमाचल में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि प्रदेश के अधिकतर हिस्से में बारिश की कमी दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा असर कृषि और बागवानी पर पड़ रहा है। वहीं, कई जगहों पर मानसून तबाही बन कर बरसा है। मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों के लिए प्रदेश में बारिश से बागानों, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान, कमजोर संरचनाओं को आंशिक नुकसान, तेज हवाओं और बारिश के कारण कच्चे घरों और झोपड़ियों को मामूली नुकसान की आशंका जाहिर की है। इसके साथ ही ट्रैफिक जाम की समस्या, निचले इलाकों में पानी भरने को लेकर भी चेतावनी जारी की है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक 27 जून को मानसून की एंट्री से लेकर 17 जुलाई तक प्रदेश को बरसात से 186 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि बारिश से संबंधित घटनाओं में 31 लोगों की अब तक मौ*त हो गई है।
NEET में गड़बड़ी से जुड़ी 38 याचिकाओं पर CJI की बेंच के सामने आज तीसरी सुनवाई होनी है। CJI चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की डिवीजन बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। बेंच ने मामले पर पहली सुनवाई 8 जुलाई को की थी। इसके बाद कोर्ट ने NEET से जुड़े चारों स्टेकहोल्डर्स - NTA, केंद्र सरकार, CBI और रीएग्जाम की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं को हलफनामा दायर करने के लिए 10 जुलाई तक का समय दिया था। NEET पर दूसरी सुनवाई 11 जुलाई को हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने मामले को 18 जुलाई तक के लिए टाल दिया था। CJI की बेंच ने कहा था कि NTA और केंद्र सरकार के हलफनामे सभी लोगों तक नहीं पहुंचे हैं। इस वजह से सुनवाई की डेट बढ़ा दी गई। NTA ने 17 जुलाई को कोर्ट में रिटन सबमिशन में कहा कि याचिकाकर्ताओं की ये दलील कि व्यवस्थागत तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, ये बिल्कुल गलत है।
हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों की कम संख्या वाले स्कूल मर्ज करने के फैसले से जेबीटी नियुक्तियां लटक गई हैं। बीते दिनों 1161 नवनियुक्त शिक्षकों को आवंटित किए गए स्कूल बदलने को प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने सरकार से मंजूरी मांगी है। पांच विद्यार्थियों की संख्या वाले करीब 700 स्कूल प्रदेश में मर्ज किए जाने हैं। कुछ जिलों में बैचवाइज आधार पर चुने शिक्षकों की सूची जारी हो चुकी है। इन सूचियों में ऐसे स्कूलों में भी जेबीटी शिक्षकों को नियुक्तियां दे दी गई हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में विद्यार्थियों की कम संख्या के चलते मर्ज किया जाना है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने आगामी फैसला होने तक अन्य जिलों में बैचवाइज भर्तियों का परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बीते दिनों तैयार की गई नियुक्तियों की सूची को अब नए सिरे से बनाया जाएगा। देखा जा रहा है कि जिन स्कूलों में नियुक्तियां की गई हैं वहां कितने विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन स्कूलों में कितने शिक्षक पहले से नियुक्त हैं। इस जानकारी को जुटाने के बाद बैचवाइज आधार पर चुने गए शिक्षकों को आवंटित किए जाने वाले स्कूलों में फेरबदल किया जाएगा। ऐसे में जेबीटी की नियुक्तियां होने में अभी कुछ और समय लग सकता है। शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्कूलों में भी शिक्षकों की नियुक्ति करने जा रहा है। इन स्कूलों में नए जेबीटी शिक्षक तैनात किए जाएंगे या फिर वरिष्ठ शिक्षकों को बदला जाता है इस पर फैसला किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि जेबीटी शिक्षकों को नियुक्ति देने की फाइल सरकार की मंजूरी के लिए भेजी गई है। जल्द ही नियुक्ति आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
प्रदेशभर में पिछले तीन दिनों से लोगों के हिमाचली प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, कृषक प्रमाण पत्र और ईडब्लूएस सहित कई प्रमाण पत्र ऑनलाइन नहीं बन पा रहे जिसके कारण जनता को सरकारी दफ्तरों में भटकना पड़ रहा है। ये ही नहीं लोगों के अब ऑनलाइन अपडेट होने वाले इंतकाल और लोन से संबंधित कार्य भी नहीं हो रहे है। वहीं, तहसीलदार और एसडीएम की ओर से लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप्स से भी पटवारी और कानूनगो एग्जिट हो गए है। इन सभी असुविधाओं के पीछे कारण है पटवारियों और कानूनगो की सरकार से नाराजगी दरसअल राजस्व विभाग में कार्यरत पटवारियों और कानूनगो को स्टेट कैडर का दर्जा दिए जाने के फैसले से ग्रामीण राजस्व विभाग के अधिकारी सुक्खू सरकार के खिलाफ भड़क गए हैं. इसी नाराज़गी के चलते हिमाचल प्रदेश संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ ने 15 जुलाई से प्रदेश भर में लोगों को ऑनलाइन सेवाएं देने की सुविधा बंद कर दी है। नाराज़गी सरकार से है और जनता को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब सरकार ने ये फैसला लिया हो। पिछले साल 18 नवंबर को भी ये अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन उसी दिन देर शाम तक हिमाचल प्रदेश संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ के विरोध के बाद सरकार ने फैसला वापस ले लिया थ। लेकिन अब सरकार ने फिर से पटवारी और कानूनगो स्टेट कैडर का दर्जा दे दिया है। बता दें कि ऑनलाइन सुविधा बंद किए जाने से महिलाएं 1500 मासिक पेंशन लेने के लिए फॉर्म जमा नहीं कर पा रही है क्यूंकि इसके लिए हिमाचली प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। इस सबसे जनता परेशान है मगर सरकार सुध नहीं ले रही। वहीँ हिमाचल प्रदेश संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ के अध्यक्ष सतीश चौधरी का कहना है कि स्टेट कैडर के फैसले को वापस नहीं लिए जाने तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश महासंघ की बैठक में आगामी रणनीति भी तैयार की जाएगी।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने 1029 टीजीटी को स्कूलों में नियुक्ति दे दी है। विभाग के निदेशक की ओर से इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। नवनियुक्त शिक्षकों को 10 दिन में स्कूलों में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ज्वाइन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने नवनियुक्त शिक्षकों की डाईट में 15 दिन की इंडक्शन ट्रेनिंग को लेकर भी शैड्यूल जारी कर दिया है। इस दौरान टीजीटी आर्ट्स में 416, टीजीटी नॉन-मेडिकल में 300, टीजीटी मेडिकल में 170, स्पोर्ट्स कोटा में 48, वाइफ ऑफ एक्स-सर्विसमैन मेडिकल में 20 और वाइफ ऑफ एक्स-सर्विसमैन नॉन-मेडिकल में 19 और एक्स-सर्विसमैन कोटा में 56 को नियुक्ति दी गई है। शिक्षकों को ज्वाइन करने के बाद शैड्यूल के तहत एलोट किए गए डाईट सैंटर में रिपोर्ट करने को कहा गया है। इस दौरान एक सैंटर को 2 से 3 जिले दिए गए हैं। ट्रेनिंग लेने के बाद ही शिक्षक स्कूलों में छात्रों को पढ़ाएंगे। इस दौरान छात्र संख्या को देखकर शिक्षकों को स्कूलों में तैनाती दी गई है। अधिकतर नवनियुक्त शिक्षकों को दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों में तैनात किया गया है। बता दें कि इसके लिए बीते नवम्बर महीने में काऊंसलिंग की गई थी और अब जाकर इसका रिजल्ट घोषित किया गया है।
हिमाचल प्रदेश में पटवारियों व कानूनगो का विरोध जारी रहा हैं। इससे लोगों को विशेषकर प्रमाण पत्र बनाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदेश के उन सभी उपमंडल क्षेत्रों में पटवारियों ने संबंधित उपायुक्त व एसडीएम के माध्यम से सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपा। राजधानी शिमला में संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ जिला शिमला के बैनर तले पटवारियाें व कानूनगो ने जिला शिमला अध्यक्ष चमन ठाकुर की अध्यक्षता में पहले डीसी शिमला अनुपम कश्यप तथा बाद में एसडीएम ग्रामीण को ज्ञापन सौंपा। अपने ज्ञापन में पटवारियों व कानूनगो ने प्रदेश सरकार के उस निर्णय का विरोध किया है, जिसमें पटवारियों व कानूनगो के जिला काडर को स्टेट काडर बनाया गया है। महासंघ के जिला अध्यक्ष चमन ठाकुर ने कहा कि इस निर्णय से कई तरह की परेशानियां खड़ी होंगी। ऐसे में प्रदेश सरकार अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करे तथा इसे वापस ले। राज्य सरकार द्वारा जिला काडर को स्टेट काडर बनाने के विरोध में उतरे पटवारी व कानूनगो बुधवार यानी 17 जुलाई कुल्लू में रणनीति बनाएंगे। संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ की बैठक कुल्लू में होगी। इस बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा कि भविष्य में किस तरह से विरोध किया जाए, जिससे सरकार पर दबाव डाला जा सके। इसके तहत पटवारी व कानूनगो पैन डाऊन स्ट्राइक भी कर सकते हैं।
**बसों में ई-टिकटिंग मशीनों की सुविधा बन रही हैं सिरदर्द हिमाचल में पथ परिवहन निगम की बसों में ई-टिकटिंग मशीनों की सुविधा सिरदर्द बनती जा रही है। बीते तीन दिनों से यात्रियों को कार्ड के अलावा ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इससे मजबूरी में यात्रियों को नकदी देकर ही यात्रा करनी पड़ रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रदेशभर में ही ई-टिकटिंग का सर्वर बंद हो गया है। निगम की ओर से ई-टिकटिंग मशीनें यात्रियों की सुविधा के लिए बसों में परिचालकों को दी गई हैं, लेकिन तीन दिन से सर्वर न चल पाने से टिकट ही जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण यात्री गुगल-पे, फोन-पे या अन्य एप से पेमेंट की सुविधा नहीं ले पा रहे हैं। यदि कोई यात्री स्कैन कर पैसे अदा भी कर रहा है तो भी उसे टिकट नहीं मिल पा रहा है। स्कैन से भुगतान करने के बाद यात्रियों के पास पैसे तो कट जाते हैं, लेकिन मशीन में भुगतान अपडेट नहीं हो रहा है। ऐसे में टिकट जनरेट नहीं हो पा रहा है। इससे परिचालक भी परेशान हो रहे हैं। निगम ने परिचालकों को कार्ड के अलावा ऑनलाइन भुगतान लेने से आगामी दिनों तक मना कर दिया है ताकि लड़ाई-झगड़े जैसी स्थिति न बने। बीते कुछ दिनों से पथ परिवहन निगम ने बसों में ऑनलाइन टिकट मशीन की सुविधा शुरू कर दी है। इससे यात्री ऑनलाइन माध्यम से भुगतान कर बसों में टिकट ले पा रहे थे। ऑनलाइन पेमेंट से यात्रियों को खुले रुपयों को लेकर भी परेशान नहीं होना पड़ रहा था। इन दिनों फिर से बसों में ऑनलाइन भुगतान जी-का-जंजाल बन गया है। ऑनलाइन भुगतान के बाद टिकट न मिलने पर यात्री परिचालकों से उलझ भी रहे हैं।ऑनलाइन टिकट जनरेट करने के लिए सर्वर में कुछ तकनीकी खराबी आई है। समस्या का निदान करने में टीम लगी हुई है। जल्द सुविधा का लाभ यात्रियों को मिलने लगेगा।
** कृषि के लिहाज से यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं हिमाचल प्रदेश के कई भागों में चार दिन भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। शिमला में भी आज सुबह से धुंध छाई हुई है। वहीं ऊना में दोपहर करीब 12:00 बजे झमाझम बारिश हुई। बारिश से मौसम सुहावना हो गया और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। बुधवार सुबह भारी उमस के बीच जनजीवन प्रभावित रहा। लेकिन दोपहर होते ही बारिश शुरू हुई, जिससे करीब 15 दिन का सूखा खत्म हुआ। लोगों ने भी बाहर निकलकर कई दिन बाद हुई बारिश का आनंद लिया। वहीं कृषि के लिहाज से भी यह बारिश किसी वरदान के कम नहीं मानी जा रही। गैर सिंचित इलाकों में मक्की की बिजाई के बाद से बारिश नहीं हुई। बुधवार को बारिश होने से फसलों की वृद्धि में भी तेजी आएगी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से प्रदेश के कई भागों में 18 से 21 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के अनुसार राज्य के कई भागों में 23 जुलाई तक बारिश जारी रहने की संभावना है। हिमाचल ट्रैफिक टूरिस्ट रेलवे पुलिस शिमला ने बरसात में पर्यटकों को पहाड़ी क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी है। पुलिस के अनुसार बरसात के चलते कुल्लू, मनाली, रोहतांग जाने वाली सड़कों में धुंध, जगह-जगह भूस्खलन से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के जवाहर नवोदय स्कूल ठियोग में रैगिंग का मामला सामने आया है| जवाहर नवोदय स्कूल में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर छात्रों की रैगिंग 5 छात्रों की रैगिंग की गई। बीती 13 जुलाई की रात करीब 11 बजे 12वीं के पांच छात्र हॉस्टल में 10वीं के छात्रों के कमरे में गए और उन्हें कपड़े धोने को कहा और जब छात्रों को कपड़े धोने के लिए कहा और इस दौरान जब 10वीं कक्षा के छात्रों ने कपड़े धोने से इंकार कर दिया तो सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों को पीटना शुरू कर दिया, जिससे उनके कान, आंख व मुंह पर चोटें भी आई हैं। पीड़ित छात्रों ने सीनियर छात्रों पर पैसे मांगने का भी आरोप लगाए है। ये पूरी घटना के दौरान करीब 11 बजे 2 छात्र होस्टल से भाग निकले और स्कूल परिसर में लगे टैलीफोन से एक छात्र ने अपने परिजनों को पूरी घटना से अवगत करवाया। बेटे का फोन काटते ही परिजनों ने इसकी जानकारी हाउस टीचर को दी। मगर हाउस टीचर छुट्टी पर थे।जिसके बाद परिजनो ने इसकी जानकारी स्कूल प्रिंसिपल संजीता शौनिक को दी और फिर प्रिंसिपल ने खुद हॉस्टल पहुंचकर लड़ाई को रोका| रैगिंग और मारपीट की घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं| परिजनों का कहा है कि जब आधी रात को 12वीं के छात्र 10वीं क्लास के हॉस्टल में आए तो हाउस टीचर और हॉस्टल वार्डन कहां थे? अगर किसी छात्र ने रात में अपने पिता को इस बारे में जानकारी नहीं दी होती तो इस मारपीट के परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे।परिजनों की शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। तहसीलदार ठियोग ने खुद स्कूल पहुंचकर प्रबंधन व छात्रों के परिजनों के साथ मीटिंग की और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
** रविवार 21 जुलाई को शिमला के गेयटी कॉन्फ्रेंस हॉल में 2:30 पर होगा आयोजित **वरिष्ठ कवि प्रो. कुमार कृष्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में करेंगे शिरकत प्रदेश के वरिष्ठ कवि कुल राजीव पंत के पहले कविता संग्रह "पृथ्वी किताबें नहीं पढ़ती" का विमोचन समारोह आगामी रविवार 21 जुलाई 2024 को शिमला के गेयटी कॉन्फ्रेंस हॉल में अपराह्न 2:30 पर आयोजित होगा। लोकार्पण समारोह शिमला की सुपरिचित साहित्यिक संस्था कीकली ट्रस्ट के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा है। कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत अधिकारी और वरिष्ठ लेखक श्रीयुत श्रीनिवास जोशी इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करेंगे, जबकि वरिष्ठ कवि /आलोचक प्रो. कुमार कृष्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। लोकार्पित की जा रही पुस्तक पर सुपरिचित साहित्यकार प्रो. मीनाक्षी एफ. पॉल, डॉ. विद्यानिधि छाबड़ा और आत्मा रंजन मुख्य वक्ता के रूप में अपने वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे। हि.प्र. विश्वविद्यालय से पुस्तकालयाध्यक्ष पद से सेवानिवृत कुल राजीव पंत करीब चार दशकों से कविता लेखन में सक्रिय रहे हैं। विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र–पत्रिकाओं में इनकी कविताएं प्रकाशित होती रही हैं। लेकिन पुस्तक रूप में यह उनकी पहली कृति है। यह कविता संग्रह प्रकाशन संस्थान दिल्ली से प्रकाशित हुआ है। कीकली अध्यक्ष ने बताया कि बच्चों की लिखने, पढ़ने, अभिनय आदि की रुचि और प्रतिभा को विकसित करने और उसे पुस्तक रूप में प्रकाशित करने, बाल साहित्योत्सवों और नाट्योत्सवों के लगातार आयोजनों के साथ कीकली वरिष्ठ लेखकों की रचनाओं को भी संकलित प्रकाशित करती रही है। पिछले कुछ समय से कुछ बहुत अच्छी पुस्तकें भी हमारे मंच से लोकार्पित हुई हैं जो आज साहित्य जगत में चर्चित हैं। इनमें रेखा वशिष्ठ की "गुमशुदा", आत्मा रंजन की "जीने के लिए ज़मीन", विद्यानिधि की "बदला मौसम बदल गए हम", रामगोपाल वर्मा की "दूसरी औरत" गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय की "गंतव्य", मीनाक्षी चौधरी की "शिमला इन्वेस्टिगेटर सीरीज", लालित्य ललित की "चुनिंदा व्यंग्य", जगदीश शर्मा की "मां और द्वंद्व" जैसी अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं। इसी क्रम में कुल राजीव पंत का कविता संग्रह "पृथ्वी किताबें नहीं पढ़ती" भी एक महत्वपूर्ण कृति है। जिसका पाठक अवश्य ही स्वागत करेंगे।


















































