**मॉनसून की बारिश अभी सामान्य से 28% कम **ज्यादातर इलाको में 4 दिन से नहीं बरसे बादल हिमाचल प्रदेश में कल से दो दिन के लिए मानसून एक्टिव हो सकता है। मौसम विभाग की माने तो 17 और 18 जुलाई को ज्यादातर भागों में बारिश का पूर्वानुमान है। प्रदेश में बीते एक सप्ताह के दौरान कुछ जगह पर हल्की बारिश हुई है। 8 से 15 जुलाई तक नॉर्मल से 84 प्रतिशत कम बादल बरसे है। इस अवधि में 58.9 मिलीमीटर नॉर्मल बारिश होती है, लेकिन इस बार 9.4 मिलीमीटर बरसात हुई। शिमला, बिलासपुर, ऊना और लाहौल स्पीति जिले में इस दौरान सबसे कम बारिश हुई है। पूरे मानसून सीजन यानि 15 जुलाई तक नॉर्मल से 37 प्रतिशत कम बादल बरसे हैं। इस अवधि में 211.5 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस बार 133.1 मिलीमीटर ही बादल बरसे हैं। इससे कई क्षेत्रों में बरसात में भी सूखे जैसे हालात पनपने लगे हैं। इसकी मार सेब के साथ साथ मक्का, शिमला मिर्च, टमाटर की फसल पर भी पड़ रही है। जिन क्षेत्रों में नमी नहीं है और सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वहां सेब का साइज नहीं बढ़ पा रहा। किसानों की फसलों पर भी सूखे की मार पड़ रही है। बारिश नहीं होने से तापमान में उछाल आ रहा है। कई जगह अधिकतम तापमान नॉर्मल से 5 डिग्री तक ज्यादा हो गया है। हमीरपुर के तापमान में नॉर्मल की तुलना में सबसे ज्यादा 4.7 डिग्री का उछाल आया है। यहां का तापमान 36.1 डिग्री सेल्सियस हो गया है। वहीं ऊना का तापमान सर्वाधिक 37.4 डिग्री सेल्सियस हो गया है। वहीं, बीते 24 घंटे के दौरान मंडी के सुंदरनगर में सबसे ज्यादा 36.8 मिलीमीटर, सिरमौर के राजगढ़ में 19 मिमी, मंडी में 16.6 मिमी, ददाहू में 15.2 मिमी, पंडोह 12 मिमी, नाहन 1.2 मिमी और सोलन में 4.4 मिमी बारिश हुई है। मौसम विभाग की माने तो 17 और 18 जुलाई को अच्छी बारिश हो सकती है, 19 व 20 को मानसून फिर कमजोर पड़ेगा। 21 जुलाई को फिर से इसके दोबारा एक्टिव होने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में अब विद्यार्थियों की हाजिरी अगले महीने से स्मार्ट उपस्थिति एप के जरिए लगाई जाएगी। इसके लिए स्कूली बच्चों का डाटा यू-डाइस पर अपडेट किया जा रहा है। प्रदेश में निजी स्कूलों समेत करीब 14 लाख बच्चों का डाटा इस पर अपलोड किया जाएगा, जिसमें से 9 लाख बच्चों डाटा अपडेट हो चुका है। बाकी बच्चों का डाटा भी इसी माह के अंत तक अपलोड कर दिया जाएगा। सोमवार को समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की स्मार्ट उपस्थिति एप पर रियल टाइम उपस्थिति सुनिश्चित कर बैठक में राजेश शर्मा ने स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की रियल टाइम अटेंडेंस प्रक्रिया पर फीडबैक को लेकर विद्या समीक्षा केंद्र के अधिकारियों के साथ भी एक बैठक ली। इस बैठक में उच्च शिक्षा निदेशक डाॅ. अमरजीत कुमार शर्मा, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा संजीव सूद, अतिरिक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीआर शर्मा सहित जिलों के उपनिदेशक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, समग्र शिक्षा निदेशालय के नोडल अधिकारी भी मौजूद रहे। समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालयों के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सभी स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की रियल टाइम अटेंडेंस लेना जरूरी है। इसके लिए विद्या समीक्षा केंद्र ने स्मार्ट उपस्थिति मोबाइल एप को लॉन्च किया है। इसके लिए विद्या समीक्षा केंद्र ने राज्य, जिला स्तर पर डैश बोर्ड तैयार किए हैं, जिसमें स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति का डाटा राज्य, जिला स्तर पर ऑनलाइन अधिकारी देख सकते हैं। प्रदेश में शिक्षकों की ट्रांसफर और छात्रों की माइग्रेशन का डाटा भी यू-डाइस पर अपडेट होगा। इसके लिए एमआईएस को यू-डाइस से लिंक किया जा रहा है। इससे यू-डाइस और एमआईएस डाटा के अंतर को खत्म किया जा सकेगा। एमआईएस की एक्सेस शिक्षकों के पास रहेगी। इससे वे यह भी देख पाएंगे कि यू-डाइस पर उनके स्कूलों से संबंधित डाटा कितना सही है।बैठक में विद्या समीक्षा केंद्र की ओर से बताया गया कि इन दिनों ग्रीष्म कालीन स्कूलों में छुट्टियां हैं। इस कारण पूरे प्रदेश में शिक्षकों की उपस्थिति डैश बोर्ड पर ज्यादा नहीं दिख रही। इन दिनों शीतकालीन स्कूलों में ही शिक्षक इस एप का इस्तेमाल कर अपनी हाजिरी लगा रहे हैं। विद्या समीक्षा केंद्र की ओर से पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के लर्निंग लेवल का मूल्यांकन संबंधी डाटा अपडेट करने के निर्देश जिला उप निदेशकों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को दिए। केंद्र ने निपुण प्रगति चैट बॉट लॉन्च किए थे, जिनके जरिए बच्चों की लर्निंग लेवल का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जा रहा है। निदेशक ने कहा कि इसमें कोई तकनीकी दिक्कत आ रही है, तो विद्या समीक्षा केंद्र की ओर से इसका समाधान किया जाएगा।
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने 1,109 कर्मियों को नियमितीकरण का तोहफा दिया है। चालक-परिचालकों के अलावा कर्मशाला कर्मियों को भी नियमित किया गया है। दो वर्ष का अनुबंध कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मचारियों को नियमितीकरण के आदेश जारी किए गए हैं। 31 मार्च 2024 को दो वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले कर्मियों को नियमित किया गया है। निगम प्रबंधन ने मंडलीय स्तर पर नियमितीकरण के मामलों पर विचार किया, लंबी प्रक्रिया के दौरान कर्मियों के दस्तावेज खंगाले गए। इसके बाद निगम मुख्यालय स्तर पर 6 कार्य प्रबंधक, एक अधीक्षक भंडार, 10 कनिष्ठ कार्यालय सहायक आईटी, 4 चालक, 457 परिचालक, 534 कनिष्ठ तकनीशियन, 83 कर्मशाला सहायकों को नियमित किया गया है। निगम प्रबंध निदेशक ने बताया कि लंबी प्रक्रिया के बाद पात्र कर्मियों को नियमित किया गया है। एचआरटीसी जेसीसी के सचिव खेमेंद्र गुप्ता ने कर्मियों के नियमितीकरण के लिए प्रबंधन का आभार जताया है।
**घोषणाओं तक ही सीमित रही सरकार, एक साल बीतने पर भी आपदा पीड़ितों को नहीं मिली राहत **अब ठप हो चुकी विकास को रफ़्तार दे सरकार, जनहित के मुद्दों पर दिखाए गंभीरता नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से प्रेस बयान जारी कर कहा कि प्रदेश सरकार डेढ़ साल से प्रदेश का विकास रिवर्स गियर में चल रहा है। डेढ़ साल में सरकार के पास विकास के नाम पर बताने के लिए कुछ भी नहीं हैं। प्रदेश में बारिश की वजह से आई आपदा को एक साल का समय हो चुका है और अभी तक लोग सहायता के लिए भटक रहे हैं। इस आपदा में भूमिहीन हो चुके लोगों को अभी तक ज़मीन नहीं मिली और लोग जंगलों में रहने को मज़बूर हैं। आपदा प्रभावितों के प्रति इस तरह की संवेदनहीनता अत्यंत दुःखद है। सरकार अपने वादों को याद करे और मानवीयता के आधार पर लोगों की प्रभावी तरीक़े से मदद करे। सिर्फ़ ज़ुबानी ज़माखर्च से कुछ नहीं होने वाला है। बेघर हुए लोग एक साल से सरकार से मदद की आस में बैठे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बीते साल आई त्रासदी से प्रदेश में हज़ारों घर पूरी तरह से तहत नहस हो गए। लोगों के घर, बाग,पशुशालाएं, खेत, फसल सबकी भारी तबाही हुई थी। बहुत सारे लोग ऐसे थे जिनकी ज़मीनें तक बह गई थी और लोग घर के साथ ही भूमिहीन भी हो गये थे। ऐसे प्रभावितों को घर बनाने के लिए ज़मीन देने की मांग भाजपा ने मौक़े पर भी की थी और विधानसभा सत्र के दौरान सदन में भी उठाई थी। सरकार ने बाक़ायदा आदेश जारी कर भूमिहीन हुए लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में 3 बिस्वा और शहरी क्षेत्रों में 2 बिस्वा ज़मीन देने की घोषणा की थी। सरकार की इस घोषणा को एक साल हो गया लेकिन अभी तक किसी भी भूमिहीन को एक इंच ज़मीन नहीं मिली है और लोग जंगलों में भी रहने को विवश हैं। यह मुद्दा फ़िलहाल समाचारों में भी खूब उठाया गया है। लेकिन सरकार इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में कोई भी प्रभावी कदम उठाती नहीं दिख रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब लोगों के पास ज़मीन ही नहीं होगी तो वह घर कहां बनाएंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार प्रदेश में विकास के कामों पर पूरी तरह विराम लगा चुकी है लेकिन नियमित रूप से क़र्ज़ लेकर सरकार चला रही है। प्रदेश में अस्पताल से लेकर स्कूलों और अस्पतालों से लेकर सड़कों तथा पुलों के काम रूके हुए हैं। आपदा के समय टूटी हुई सड़कें अभी सही नहीं हो पाई हैं, सड़कों के किनारे पड़ा मलबा भी नहीं हटाया गया है। जो इस बरसात में फिर से लोगों के लिए परेशानी का का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि अब बहुत वक़्त बीत चुका सरकार विकास के कामों को गति दे और जनहित के मुद्दों को गंभीरता से सुलझाए। प्रदेश के युवाओं से किए अपने रोज़गार के वादे को पूरा करे।
मतियाना खंड की 14 वर्ष से कम आयु के छात्र एवं छात्राओं की महोरी में आयोजित खेल कूद प्रतियोगिता में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कथोग ने अंडर- 14 छात्र एवं छात्राओं की खेल कूद प्रतियोगिता में वर्ष 2024- 25 में वॉलीबॉल, बैडमिंटन, जुडो व चैस में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा योगा में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इसमें जूडो वर्ग में उर्वशी ने 36 किलोग्राम भार में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। पूर्वांशी ने 44 किलो भार में भी गोल्ड मेडल प्राप्त किया । सुनिधि कवंर ने 50 किलोग्राम भार में पहला स्थान प्राप्त किया। यशिका ने 36 किलोग्राम भार में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद छात्र वर्ग में बैडमिंटन, चैस व जूडो में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जूडो में हर्षित, अक्षद व विनय ने ब्राउन मेडल प्राप्त किया। नीतीश ने 44 किलोग्राम भार में सिल्वर मेडल प्राप्त किया। इस उपलब्धि के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कथोग को बेस्ट आल ऑलराउंडर की ट्रॉफी से नवाजा गया। जिसके लिए प्रधानाचार्य महोदय डॉक्टर संदीप चौहान, शारीरिक शिक्षक कंवर सिंह, सभी स्टाफ एवं सभी खिलाड़ी छात्र और छात्राओं को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।
**दिल्ली से शिमला पहुंचा आलाकमान, पुनिया-पाटिल लेंगे नेताओं से फीडबैक हिमाचल प्रदेश में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार पर आज और कल शिमला में मंथन होगा। कांग्रेस हाईकमान की ओर से गठित दो सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी शिमला पहुंच गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया और रजनी पाटिल आज हिमाचल के सीएम सुखविंदर सुक्खू, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के साथ पार्टी प्रत्याशियों, विधायकों, 2022 में विधानसभा चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों, दो संसदीय क्षेत्रों के जिला और ब्लॉक अध्यक्षों से मुलाकात करेंगे। मंडी सीट से प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह और हमीरपुर से प्रत्याशी सतपाल रायजादा भी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के समक्ष अपनी हार के कारण बताएंगे। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मंडी-हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के लोकसभा प्रत्याशियों, विधायकों, जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को आज शिमला बुलाया है। कल पहले हाफ में कांगड़ा और शिमला जिले के नेताओं को लंच के बाद राजीव भवन शिमला बुलाया गया है। इस दौरान समिति पार्टी नेताओं से हार के कारण पूछेगी और अपनी रिपोर्ट अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपेगी। दरअसल, प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस चारों सीटों पर लोकसभा चुनाव हारी है, जबकि कांग्रेस हाईकमान और इंडी गठबंधन को हिमाचल में सत्तारूढ़ कांग्रेस से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी। मगर कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई। नतीजा यह हुआ की छह बार के सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह जैसे दिग्गज भी लोकसभा चुनाव हार गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा की भी इन चुनाव में हार हुई है। यही नहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू सहित उनके आठ मंत्री अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से पार्टी प्रत्याशी को लीड नहीं दिला सके। इससे कांग्रेस का हिमाचल में लगातार तीसरी बार क्लीन स्वीप हुआ है।
**टाइडमैन सेब 800 से 1,400 रुपये पेटी बिका हिमाचल प्रदेश में आधिकारिक तौर पर सेब सीजन 15 जुलाई से शुरू हो गया। हर वर्ष इस समय तक फल मंडियों में बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की खेप पहुंचनी शुरू हो जाती थी, लेकिन इस वर्ष अभी तक मंडी में बेहतर गुणवत्ता वाली पैदावार नहीं पहुंची है। भट्ठाकुफर फल मंडी में टाइडमैन, रेड जून और पराला फल मंडी में गाला सेब की खेप पहुंचनी शुरू हो गई है। आढ़तियों के अनुसार गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष सेब सीजन देरी से शुरू हो रहा है, क्योंकि सूखे की वजह से अधिकतर पैदावार प्रभावित हो गई है। इसकी वजह से फसल का आकार और रंग भी सही नहीं बन पाया है। अभी जो सेब आ रहा है उसे बागवान पूरी तरह तैयार होने से पहले ही तोड़कर मंडी में ला रहे हैं, जिसके चलते बागवानों को शुरुआत में ही फसल के बेहतर दाम नहीं मिल रहे हैं। शनिवार को भट्ठाकुफर फल मंडी में 2,986 सेब की पेटियां पहुंची, वहीं रविवार को 1,500 से 1,800 के बीच सेब की पेटियां मंडी में पहुंची। इस दौरान टाइडमैन सेब 800 से 1,400 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से बिका। भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रताप चौहान ने बताया कि गत हफ्ते के मुकाबले इस हफ्ते मंडी में सेब की आवक में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन गुणवत्ता अच्छी नहीं आई है। आने वाले दिनों में यदि मौसम अनुकूल रहता है तो आवक बढ़ने के साथ बागवानों को बेहतर दाम मिलेंगे। पराला फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन के उपप्रधान सुशील ठाकुर ने बताया कि गत वर्ष 15 जुलाई से पहले सेब की स्पर किस्म मंडी में पहुंचनी शुरू हो गई थी, वहीं गाला सेब और टाइडमैन सेब भी अच्छी गुणवत्ता का आ रहा था, लेकिन इस वर्ष तो टाइडमैन ही मंडी में पहुंचा है जिसका आकार छोटा और रंग भी फीका है।
**प्रदेश के कुछेक स्थानों पर अच्छी बारिश का पूर्वानुमान हिमाचल प्रदेश में मॉनसून कमजोर पड़ गया है। मौजूदा मॉनसून सीजन में नॉर्मल से 35 प्रतिशत और बीते एक सप्ताह के दौरान 78 प्रतिशत कम बादल बरसे है। कई क्षेत्रों में मानसून सीजन में भी सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। आज और कल भी कुछेक क्षेत्रों में ही हल्की बारिश का पूर्वानुमान है। ज्यादातर क्षेत्रों में मौसम साफ रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 7 से 14 जुलाई के बीच लाहौल स्पीति जिला में पानी की एक बूंद भी नहीं बरसी। बिलासपुर जिला में भी नॉर्मल से 80 प्रतिशत कम, चंबा में 81 प्रतिशत, हमीरपुर में 69 प्रतिशत, कांगड़ा में 79 प्रतिशत, किन्नौर में 35 प्रतिशत, कुल्लू में 72 प्रतिशत, मंडी में 58 प्रतिशत, सिरमौर में 71 प्रतिशत, सोलन में 70 प्रतिशत और ऊना जिला में भी 97 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस अवधि में प्रदेश में मात्र 12.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि नॉर्मल बारिश 58.5 मिलीमीटर होती है। मानसून सीजन के दौरान 1 जून से 14 जुलाई तक प्रदेश औसत 203 मिलीमीटर नॉर्मल बारिश होती है, लेकिन इस बार 131.9 मिलीमीटर बारिश ही हुई है। मौसम विभाग की माने तो 17 और 18 जुलाई को मानसून थोड़ा एक्टिव हो सकता है। इस दौरान कुछेक स्थानों पर अच्छी बारिश का पूर्वानुमान है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में बारिश नहीं होने के बाद तापमान में उछाल आया है। कई शहरों का पारा नॉर्मल से 5 डिग्री तक ज्यादा हो गया है।
हिमाचल प्रदेश की 5,000 करोड़ की सेब आर्थिकी को ओलों से बचाने के लिए आईआईटी मुंबई की ओर से विकसित स्वदेशी एंटी हेलगन को डॉप्लर रडार से जोड़ा जाएगा। रडार की मदद से ओलों वाले बादलों की स्टीक जानकारी मिलेगी और हेलगन का प्रभाव बढ़ेगा। शिमला जिले के मंढोल में स्थापित स्वदेशी एंटी हेलगन के तीन साल का ट्रायल पूरा होने के बाद आईआईटी मुंबई के इंजीनियरों ने निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया है। डीआरडीओ की पुणे लैब के वैज्ञानिक इसमें तकनीकी सहयोग देंगे। हेलगन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने की भी संभावना तलाशी जाएगी। विदेशों से आयातित एंटी हेलगन की कीमत करीब डेढ़ करोड़ है जबकि आईआईटी मुंबई की ओर से विकसित स्वदेशी एंटी हेलगन की कीमत महज 31 लाख है। विदेशी हेलगन चलाने के लिए एसिटिलीन गैस इस्तेमाल होती है। यह बहुत मंहगी है और आसानी से नहीं मिलती। स्वदेशी हेलगन एलपीजी से चलती है। इसलिए इसके संचालन का खर्चा कम है। रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की एचईएमआरएल पुणे के निदेशक डाॅ. एपी दास ने बताया कि स्वदेशी एंटी हेलगन से पर्यावरण को नुकसान की संभावना नहीं है। हेलगन से नियंत्रित तरीके से तरंगें वायुमंडल में जाती हैं। जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। उनकी टीम ने परीक्षण के दौरान आंकड़ों का अध्ययन किया है, रिपोर्ट आईआईटी मुंबई को जल्द सौंपी जाएगी। डाॅप्लर वेदर रडार स्थापित कर सटीक आंकड़ों से इसका प्रभाव बढ़ाया जा सकता है। सरकार ओलों से बचाव करने वाली जाली पर 80 फीसदी अनुदान दे रही है। इसके स्थान पर स्वदेशी एंटी हेलगन स्थापित करने पर अनुदान दिया जाना चाहिए। इससे छोट-बड़े सभी बागवान लाभान्वित होंगे। बागवानों को बगीचों में नेट चढ़ाने-उतारने का खर्चा भी बचेगा मंढोल में स्थापित स्वदेशी एंटी हेलगन का प्रयोग सफल रहा है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में एंटी हेलगन का ग्रिड नेटवर्क स्थापित कर सेब की फसल ओलों से बचाई जा सकती है। प्रदेश सरकार को भी इसका प्रस्ताव सौंपा जाएगा। डीआरडीओ की एचईएमआरएल लैब के साथ मिलकर डाॅप्लर रडार स्थापित कर इसका प्रभाव बढ़ाने की भी योजना है।
**लंबित पड़े परीक्षा परिणामों को जल्दी जारी करे सरकार **रोज़गार देने के नाम सत्ता में आई कंग्रेस हर दिन रोज़गार के रास्ते बंद कर रही है नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि सुक्खू सरकार की स्टार्टअप योजना का क्या हुआ? सरकार बने डेढ़ साल से ज़्यादा का समय हो गया, अब तक इस योजना से प्रदेश के कितने युवाओं को इसका लाभ मिला? इस योजना का लाभ कब से प्रदेश के युवाओं को मिलना शुरू होगा। चुनाव के समय कांग्रेस ने गारंटी दी थी कि सरकार बनने पर हर विधानसभा क्षेत्र के युवाओं के लिए 10 करोड़ के हिसाब से 680 करोड़ रुपए के स्टार्टअप फण्ड का प्रबंध करेगी। जिससे युवा अपने लिए रोज़गार के साधन जुटाए और अन्य लोगों को रोज़गार भी देंगे। कांग्रेस के नेताओं ने स्टार्टअप के लिए लाभार्थी चुनने के लिए लिए चुनाव से पूर्व ही युवाओं से फॉर्म भी भरवा लिए थे। चुनाव बीते डेढ़ साल से ज़्यादा का समय हो गया है। लेकिन अभी तक इस योजना के तहत एक भी व्यक्ति को एक पाई नहीं दी गई है। उल्टे पहले से चल रही स्वावलंबन योजना को ही बंद कर दिया गया है और उसके अन्तर्गत स्वीकृत किए गए प्रोजैक्ट्स भी रोक दिए गए हैं। जिससे युवाओं को भारी नुक़सान उठाना पड़ा। कुछ ऐसे भी युवा व्यवसाई हैं जिन्हें कुछ किश्तें मिली है लेकिन बाक़ी की किश्तें नहीं दी जा रही हैं। ऐसे में युवाओं को सरकार ने जानबूझकर अधर में लटका दिया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार युवाओं को लाखों की संख्या में रोज़गार देने का वादा करके सत्ता में आई थी लेकिन सरकार न ख़ुद ही लोगों को रोज़गार दे रही है न ही उद्यमशील युवाओं को लोगों को नौकरी देने दे रही है। पूर्व सरकार में स्वावलंबन योजना के तहत प्रदेश में कुल 721 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। सरकार की ओर से इस योजना के तहत 200 करोड़ रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। इसमें कुल 4377 ईकाइयां मंज़ूर हुई। जिनसे 11 हजार 674 लोगों को रोजगार मिला। यदि इस योजना राजनीतिक द्वेष की वजह से बंद नहीं किया गया होता तो प्रदेश में रोज़गार के हज़ारों साधन और राजस्व पैदा होता। लेकिन सूक्खू सरकार की अदूर्रशिता और बदले की भावना से काम करने की वजह से प्रदेश के युवाओं को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा अब बहुत समय हो गया है, सुक्खू सरकार सालों से लंबित पड़े प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम घोषित करें और उन्हें रोज़गार दें। सरकारइस तरह से युवाओं के भविष्य की अनदेखी नहीं कर सकती है। अब तक झूठे वादे बहुत हो गये, इधर-उधर की बातें बहुत हो गई। अब सरकार बने डेढ़ साल से ज़्यादा का समय हो गया है। अब सुक्खू सरकार जल्दी से जल्दी स्टार्टअप फंड का बजट जारी करे।
हिमाचल प्रदेश विवि में दो दिन तक छात्र किसी भी तरह के फॉर्म, फीस जमा करवाने के लिए अप्लाई नहीं कर सकेंगे। एचपीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल ने बताया कि मैंटेनेंस वर्क के चलते 14 जुलाई को वेबसाइट पूरी तरह से बंद रहेगी। इस दौरान किसी भी तरह का ऑनलाइन वर्क नहीं हो सकेगा। सोमवार से वेबसाइट एक्टिव कर दी जाएगी। गौर रहे कि इन दिनों हिमाचल प्रदेश विवि में पीजी कक्षाओं की काउंसिलिंग चली है जिसके लिए छात्र फीस और दस्तोवज ऑनलाइन ही अपलोड कर रहे हैं। ऐसे में दो दिन तक किसी भी तरह का ऑनलाइन वर्क नहीं हो सकेंगे।
शक्तिपीठ ज्वालामुखी में माता ज्वाला का प्रकटोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। रविवार सुबह से ही लंबी लाइनों में श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचे। मंदिर में भजन कीर्तन, चौकी का आयोजन हो रहा है। स्थानीय लोग, पुजारी वर्ग तरह तरह के भंडारे माता ज्वाला के दरबार में लगा रहे हैं। ज्वालामुखी मंदिर गर्भ गृह को सुंगधित रंग बिरंगे पांच लाख फूलों से सजाया गया है। मंदिर में हजारों श्रद्धालु रविवार को पहुंचे और माता ज्वाला की दिव्य ज्योतियों का आशिर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में विशेष पुलिस कर्मी तैनात किए गए, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। शनिवार देर रात भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते मंदिर रात 11 बजे बंद किया गया। मंदिर पुजारी व न्यास सदस्य अविनेद्र शर्मा ने बताया कि सोमवार को गुप्त नवरात्र का समापन होगा और विशाल यज्ञ व पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा और इसी दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। माता ज्वाला के जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर मंदिर में पुजारी वर्ग द्वारा विशेष देसी घी के हलवे के प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। वहीं, देवी भागवत कथा का भी समापन पूर्णाहुति के साथ सिंवर नवमी को किया जाएगा। उन्होंने बताया माता ज्वाला का प्रकटोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है और मंदिर प्रसाशन की तरफ से श्रद्धालुओं के लिए माता के दर्शनों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। माता ज्वाला सभी भक्तों को आशीर्वाद दे और सभी की अभीष्ट मनोकामनाओं को पूर्ण करें। वर्ष में प्रकटोत्सव का यह सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण दिन होता है। इस उपलक्ष्य पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
शिमला: हिमाचल में बाहरी राज्यों के लोगों की ओर से धारा 118 की मंजूरी लेकर खोले गए होम स्टे को बंद करने पर सरकार आने वाले दिनों में बड़ा फैसला ले सकती है। प्रदेश में बेरोजगार युवाओं के लिए सरकार ने विकल्प के तौर पर स्टे खोलने की योजना शुरू की थी, लेकिन हिमाचल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर बाहरी राज्यों के बहुत से लोगों ने सरकार से अनुमति लेकर धारा 118 के नियमों का दुरुपयोग कर होम स्टे खोल दिए हैं। शिमला में हिमाचल प्रदेश होमस्टे नियम-2024 का प्रस्ताव तैयार करने के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिसमें इस तरह कड़े फैसले लिए जाने को लेकर चर्चा की गई। जिस पर अब अगली बैठक में अंतिम निर्णय होना है। प्रदेश में बिना पंजीकरण चल रहे होम स्टे और बीएंडबी को बंद करने पर भी चर्चा हुई। उप-समिति के सदस्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने प्रस्तावित प्रारूप तैयार करने के लिए भी बहुमूल्य सुझाव दिए। इस दौरान पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग प्रारूप नियमों को संशोधित कर आगामी बैठक में उप-समिति के समक्ष लाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश किरायेदारी और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 के तहत हिमाचल के लोगों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष प्रावधान किया गया है। इस एक्ट में धारा 118 के तहत गैर-कृषकों को जमीन ट्रांसफर करने पर प्रतिबंध होगा, यानी हिमाचल का गैर-कृषक भी यहां पर जमीन नहीं खरीद सकता है. हिमाचल में धारा 118 की जरूरत इसलिए पड़ी कि प्रदेश को साल 1971 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। देश के 18वें राज्य के रूप में हिमाचल अस्तित्व में आया तो एक साल बाद ही भूमि सुधार कानून लागू हो गया। कानून की धारा 118 के तहत कोई भी बाहरी व्यक्ति कृषि की जमीन निजी उपयोग के लिए नहीं खरीद सकता है। फिर लैंड सीलिंग एक्ट में कोई भी व्यक्ति 150 बीघा जमीन से अधिक नहीं रख सकता। भौगोलिक दृष्टि से हिमाचल के ज्यादातर क्षेत्र देश के दुर्गम इलाकों में आते हैं। हिमाचल के पास सीमित भूमि है और पहाड़ी पर्यटन राज्य होने के नाते निर्माताओं ने पहले से भविष्य को भांपते हुए हिमाचल के छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा के लिए ये कदम उठाया है। धारा 118 के तहत प्रदेश का कोई भी जमीन मालिक किसी भी गैर कृषक को किसी भी जरिए से जमीन नहीं दे सकता। भूमि सुधार अधिनियम 1972 की धारा 2(2) के मुताबिक जमीन का मालिकाना हक उसका होगा जो हिमाचल प्रदेश में अपनी जमीन पर खेती करता है। जो व्यक्ति किसान नहीं है और हिमाचल में जमीन खरीदना चाहता है उसे प्रदेश सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। सरकार से अनुमति लेने पर मालिकाना हक मिल सकता है। उद्योग या पर्यटन विकास से जुड़े मामलों में ही सरकार हर मसले और जानकारी की पूरी तरह से जांच परख के बाद जमीन पर फैसला लेती है। जमीन का CLU यानी चेंज लैंड यूज भी नहीं किया जा सकता। यानी जमीन जिस उद्देश्य के लिए ली गई, उस पर केवल वही नियम लागू होंगे। इस पर अन्य व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकती हैं, लेकिन बाहरी राज्यों के लोगों ने हिमाचल में धारा 118 के तहत उद्योग और मकान बनाने की अनुमति लेकर होम स्टे खोल दिए हैं। बता दें कि प्रदेश में पर्यटन विभाग के पास 4 हजार से अधिक होम स्टे पंजीकृत हैं। बड़ी संख्या में गैर पंजीकृत होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयां भी प्रदेश में संचालित हो रही हैं। ऐसे में होम स्टे के साथ बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयों को भी पर्यटन विभाग की कार्रवाई के दायरे में लाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
शिमला में स्थित ऐतिहासिक मंदिर तारादेवी में 14 जुलाई रविवार से लंगर हरी पत्तल में श्रद्धालुओं को परोसा जाएगा। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने जानकारी देते हुए कहा कि अपनी संस्कृति और धरोहर को सहेजने की दिशा में संतुलित पर्यावरण के लिए मंदिरों में टौर के पत्तों से तैयार पत्तल में लंगर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण के आधीन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सुन्नी खंड में कार्य कर रहे सक्षम क्लस्टर लेवल फेडरेशन को ये पत्तल बनाने का जिम्मा दिया गया है। उन्हें प्रथम चरण में पांच हजार पत्तल बनाने का ऑर्डर दिया गया है। उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में स्वयं सहायता समूहों को रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से प्रयास कर रहा है । उक्त फेडेरशन में 2900 से अधिक महिलाएं पत्तल बनाने का काम करती है, लेकिन पत्तलों की डिमांड कम होने के कारण उत्पादन अधिक नहीं करते थे। इस दिशा में अब प्रशासन ने फैसला लिया है कि जिला के सभी मंदिरों में हरी पत्तल में लंगर परोसे जाएंगे। ऐसे में प्रथम चरण में तारादेवी मंदिर से शुरूआत की जा रही है। सक्षम कलस्टर लेवल फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त को पत्तलों के उत्पादन के बारे में जानकारी दी और स्वयं बनाए पत्तल भी भेंट किए। फेडरेशन ने कहा कि उक्त क्षेत्र में टौर के पेड़ बहुत कम है। इस विषय पर उपायुक्त ने कहा कि वन विभाग के सहयोग से आगामी होने वाले पौधारोपण अभियान में टौर के पौधे भी लगाए जाएंगे ताकि भविष्य में टौर के पत्तों की कमी न हो पाए। हिमाचल की संस्कृति में निचले हिमाचल में धाम के दौरान लजीज व्यंजन परोसने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली हरी पत्तल का महत्व सबसे ऊपर है। धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास को समेटे देवभूमि हिमाचल के कई इलाकों में यह परंपरा आज भी जारी है। टौर से बनने वाली इस पत्तल में सामाजिक समरसता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। पहाड़ की यह पत्तल टौर नामक बेल के पत्ते से बनती है। यह बेल मध्यम ऊंचाई वाले शिमला, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिले में ही पाई जाती है।
**17 से 19 जुलाई तक कई क्षेत्रों में बारिश होने का पूर्वानुमान हिमाचल प्रदेश में मॉनसून फिर कमजोर हो गया है। रविवार और सोमवार को भी हल्की बारिश होने के आसार हैं। शनिवार को प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में धूप खिली। बारिश नहीं होने से मौसम में उमस बढ़ गई है। 17 से 19 जुलाई के दौरान प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश होने का पूर्वानुमान है। प्रदेश में 12 सड़कें और 6 बिजली ट्रांसफार्मर अभी भी ठप हैं। मंडी जिले में पांच, शिमला में चार और कांगड़ा में तीन सड़कें शनिवार शाम तक बंद रहीं। चंबा जिले में पांच और मंडी में एक बिजली ट्रांसफार्मर बंद है। राजधानी शिमला में कई दिनों के बाद शनिवार को दिनभर धूप खिली रही। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी मौसम साफ रहने के साथ धूप खिली। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश में मानसून कुछ कमजोर हो गया है। आगामी दो-तीन दिनों के दौरान मानसून की सक्रियता कम रहने की संभावना है। 16 जुलाई की रात से बारिश के आसार हैं। 17 से 19 जुलाई तक सभी क्षेत्रों में मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।
**हाजिरी और अवकाश के नियम हुए तय अटल मेडिकल एंड रिसर्च विवि ने हाजिरी और अवकाश के नियम तय कर लिए हैं। आने वाले नए सत्र से विवि समेत इससे संबद्ध छह सरकारी-निजी मेडिकल कॉलेजों में ये नियम लागू कर दिए जाएंगे। नियमों के तहत अब एमडी, एमएस और एमडीएस कोर्स के अभ्यर्थियों के लिए संस्थानों में 80 प्रतिशत हाजिरी जरूरी है। अगर कोई अभ्यर्थी अधिक अवकाश करता है तो उस स्थिति में उतने ही दिन उसके कोर्स की अवधि बढ़ाई जाएगी। तीन साल के कोर्स में 751 दिन और दो साल के कोर्स में 501 दिन संस्थान आना आवश्यक है। अवकाश और न्यूनतम उपस्थिति के नियम लागू करने के लिए विवि के प्रबंधन बोर्ड की बैठक मे मंजूरी मिल गई है। नियमों के मुताबिक अंतिम परीक्षा तक तीन वर्षीय कोर्स में साप्ताहिक एक दिन की छुट्टी की जाएगी, वह भी कार्य की आवश्यकता में ही। 25 दिन की सवेतन आकस्मिक छुट्टियां कर सकते हैं। एक छात्र 52 साप्ताहिक अवकाश का भी हकदार है। इसमें महिला स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को मौजूदा नियमों के अनुसार मातृत्व अवकाश की अनुमति दी जाएगी। सरकारी नियम और कानून के अनुसार पुरुष स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को भी पितृत्व अवकाश मिलेगा। प्रसूति या पितृत्व के लिए प्रशिक्षण को उतने ही दिनों तक बढ़ाया जाएगा जितनी छुट्टियां की गई हो। अटल मेडिकल एंड रिसर्च विवि नेरचौक के परीक्षा नियंत्रक एवं डीन प्रशासनिक मामले डॉ. प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि अवकाश-हाजिरी के नियम तय कर दिए हैं। अधिक अवकाश करने वालों के कोर्स की अवधि उतने ही दिन बढ़ाई जाएगी, जितने दिन छुट्टी पर रहेंगे। तीन साल के कोर्स में कुल दिन 1,095 दिन होंगे। इसमें 939 दिन कार्य दिवस होंगे। इनमें से 751 दिन यानी की 80 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी होगी। वहीं, दो साल के कोर्स में कुल दिन 730 दिन होंगे इनमें कुल कार्य दिवस 626 होंगे। साप्ताहिक अवकाश काटने के बाद 501 दिन यानी 80 प्रतिशत उपस्थिति होना जरूरी होगा। हाजिरी और छुट्टियों के नियम अटल विवि समेत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट कॉलेज कांगड़ा, लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक, डॉ. वाईएस परमार गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नाहन, डॉ. राधाकृष्णन गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हमीरपुर, पंडित जवाहर लाल नेहरू गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज चंबा के अलावा महर्षि मार्कंडेश्वर निजी विश्वविद्यालय कुनिहार सोलन में लागू होंगे।
केंद्र सरकार की ओर से कार्टन पर जीएसटी की दरों में 6 फीसदी कटौती का लाभ बागवानों को नहीं मिल पा रहा है। बाजार में बागवानों से कार्टन पर 18 फीसदी जीएसटी की वसूली हो रही है। प्रदेश सरकार ने इस साल से यूनिवर्सल कार्टन को अनिवार्य तौर पर लागू किया है। बागवानों को उम्मीद थी कि जीएसटी में कटौती के बाद यूनिवर्सल कार्टन की कीमत घट जाएगी, लेकिन कुछ रिटेलर कार्टन पर अब भी 18 फीसदी जीएसटी वसूल रहे हैं। इसको लेकर बागवानों ने सरकार से शिकायत भी की है। जून में जीएसटी परिषद की बैठक में सेब कार्टन बॉक्स पर जीएसटी 18 से घटाकर 12 फीसदी करने का फैसला लिया गया था। परिषद की 53वीं बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने यह मामला उठाया था। बीते साल भी हिमाचल ने कार्टन पर जीएसटी की दर घटाने की मांग उठाई थी, जो सिरे नहीं चढ़ पाई। जीएसटी छह फीसदी कम होने के बाद बागवानों को उम्मीद थी कि अब सेब कार्टन तीन से चार रुपये तक सस्ता मिलेगा। संयुक्त किसान मंच ने कार्टन पर जीएसटी के एवज में हो रही मनमानी वसूली पर कड़ी नाराजगी जताई है। मंच के संयोजक संजय चौहान का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में रिटेलर कार्टन पर 18 फीसदी जीएसटी वसूल रहे हैं। 500 पीस कार्टन खरीदने वाले बागवान को 5,400 रुपये जीएसटी चुकाने पड़ रहे हैं। संयुक्त किसान मंच सभी कृषि लागत वस्तुओं पर जीएसटी खत्म करने की मांग उठाता रहा है और भविष्य में भी बागवानों के हित में यह मांग जोर-शोर से उठाई जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में जल्द ही लोकसेवा आयोग के माध्यम से कंप्यूटर शिक्षा के 769 प्रवक्ता भर्ती होंगे। उच्च शिक्षा निदेशालय ने लोकसेवा आयोग को पत्र लिखकर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है। प्रवक्ता स्कूल न्यू के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत ही कंप्यूटर साइंस प्रवक्ताओं के 769 पद भरे जाएंगे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि लोकसेवा आयोग के सचिव को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के संबंध में पत्र भेजा गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रवक्ता कंप्यूटर साइंस के 985 पदों को भरा जाना है। मार्च 2024 में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इन पदों को भरने की मंजूरी दी गई थी। कुल 985 पदों में से लोकसेवा आयोग के माध्यम 769 पद भरे जाएंगे। शिक्षा विभाग की मांग पर अब लोकसेवा आयोग की ओर से भर्ती से संबंधित विज्ञापन जारी किया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आउटसोर्स आधार पर कार्यरत करीब 1300 कंप्यूटर शिक्षक राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन के तहत काम कर रहे हैं। सरकार ने बीते वर्ष नाइलेट कंपनी से नाता तोड़ लिया था। अब कॉरपोरेशन के माध्यम से चयनित कंपनियों के माध्यम से शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है। अब लोकसेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती होने से कई बेरोजगारों का सरकारी नौकरी पाने का सपना पूरा होगा।
**श्रीखंड महादेव यात्रा आज से शुरू महादेव के पंच कैलाशों में से एक और उत्तर भारत की सबसे कठिनतम धार्मिक यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा आधिकारिक तौर पर आज यानि रविवार से शुरू हो गई है। आज से 27 जुलाई तक चलने वाली इस यात्रा के शुभारंभ के लिए पिछले कल 13 जुलाई को यात्रा ट्रस्ट की अध्यक्ष एवं डीसी कुल्लू तोरुल एस रवीश ने जाओं, बड़ींगचा से 3 किलोमीटर पैदल चलकर बेस कैंप सिंह गाड़ देर शाम पहुंची। बेस कैंप सिंह गाड़ में उन्होंने श्रीखंड सेवा समिति अरसू, रामपुर, हमीरपुर, के पंडाल में शिव भक्तों के साथ संध्याकाल की शिव आरती में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ट उपाध्यक्ष एवं यात्रा ट्रस्ट के संस्थापक बुद्धि सिंह ठाकुर, जिला परिषद अध्यक्ष कुल्लू पंकज परमार, यात्रा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एसडीएम निरमंड मनमोहन सिंह, तहसीलदार निरमंड जयगोपाल शर्मा, डीएसपी चंद्र शेखर कायथ, ट्रस्ट, सदस्य गोविंद शर्मा, जिला परिषद सदस्य पूर्ण ठाकुर, स्थानीय पंचायत की प्रधान सुषमा कटोच उप प्रधान ओम प्रकाश ठाकुर, जुआगी के उप प्रधान रणजीत ठाकुर,मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने लंगर का विधिवत उद्घाटन भी किया और अपने हाथों से शिव भक्तों को लंगर का स्वादिष्ट खाना भी परोसा। आज सुबह करीब 5 बजे डीसी ने महादेव के पवित्र धाम श्रीखंड कैलाश पर्वत के लिए हरी झंडी दिखाकर 70 श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना किया। 8 बजे तक करीब 1100 शिव भक्त श्रीखंड कैलाश पर्वत के लिए रवाना हो गए हैं। डीसी ने बताया कि इस बार की श्रीखंड यात्रा के लिए प्रशासन द्वारा यात्रियों के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। यात्रा से पूर्व श्रीखंड के रास्ते बनकर तैयार किए हैं और रास्ते में पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से तैयार कर दी गई है। यात्रा में पुलिस, रेस्क्यू, एसडीआरएफ, मेडिकल, रेवन्यू, की टीमें हर बेस कैंप पर तैनात की गई है। उन्होंने शिव भक्तों से यात्रा में द्रव्यों मादक पदार्थों का सेवन न करें और साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील भी की है।
शिमला पुलिस ने जिले में नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में लोगों की मदद से बड़ी कामयाबी हासिल की है। पंद्रह महीने में 600 से अधिक केस दर्ज कर 1,000 से अधिक नशा तस्करों को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचाया है। इसमें कई बड़े तस्करी के मामले भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक इससे निपटने के लिए सोशल इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार किया है। लोग, युवा पुलिस को व्हाट्सएप, ईमेल, फोन, पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से सूचनाएं दे रहे हैं। सूचनाएं देने वालों में स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी, टैक्सी चालक, होटल कर्मचारी, महिला मंडल की सदस्य और ऐसे युवा शामिल हैं जोकि पहले किसी कारणवश नशे के आदी हो चुके थे लेकिन अब इसे छोड़ चुके हैं। नेपाल से चल रहे अफीम तस्करी के बड़े रैकेट का भी भंडाफोड़ किया है। इसमें पुलिस ने नारकंडा से तस्करी के सरगना रवि गिरि को गिरफ्तार किया है। मतियाना में नेपाल से लाई डेढ़ किलो अफीम और टुटीकंडी क्रॉसिंग में पुलिस ने 3.50 किलो अफीम पकड़ी है। चलौंठी में पंजाब के चार युवकों से 169 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। एसपी संजीव गांधी ने जब कार्यभार संभाला था तो उन्होंने नशा माफिया के खात्मे के लिए सोशल इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार करने पर जोर दिया था। अब इसके परिणाम सामने आने लगे हैं। नशा तस्करों पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस ने सोशल इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार किया है। इसकी मदद से पुलिस नशा तस्करों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। इस लड़ाई में आम जनता को आगे आने की जरूरत है
गद्दी छात्र कल्याण संघ हिमाचल प्रदेश द्वारा यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के डायरेक्टर ए जे सिंह को ज्ञापन सोपा गया, जिसमें गद्दी छात्र कल्याण संघ हिमाचल प्रदेश के कार्यकारिणी सदस्य एवं यूआईटी हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के सदस्य भी शामिल रहे इस ज्ञापन के माध्यम से हमने यूआईटी डायरेक्टर व प्रशासन का ध्यान उन ट्राइबल छात्रों की और आकर्षित किया जिसमे वह अध्यनरत है। आपको एक बात बता दी जाए कि यूआईटी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का एक अभिन्न अंग है परंतु इस बात से हैरानी है कि यूआईटी में पढ़ रहे छात्रों को हॉस्टल की सुविधा से वंचित रखा जा रहा है । संघ द्वारा इस मुद्दे को कई बार प्रशासन के सामने रखा है और आगे भी गद्दी छात्र कल्याण संघ हिमाचल प्रदेश इसी भांति इन मुद्दों के लिए प्रशासन के खिलाफ लड़ते रहेंगे और इन्हें सुलझाने के लिए हर सार्थक प्रयास करते रहेंगे। अनुसूचित जनजाति के छात्र हिमाचल प्रदेश के उन क्षेत्रों से आते है जो मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित रहते हैं और उनके पास फीस को भरने के लिए भी पैसे नहीं होते हैं वह अपना जीवन यापन अनेक कठिनाइयों से करते हैं परंतु शिमला में पहुंचकर उन्हें भारी भरकम बोझ जिसमें रूम रेंट व पीजी में रह रहे छात्रों को एक आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है जो की उन अनुसूचित जनजाति के छात्रों लिए सम्भव नही दिखता है आपको ये बात भी बता दी जाए की जो विश्वविद्यालय का जो ट्राईबल हॉस्टल है वह ट्राइबल छात्रों के लिए आरक्षित हैं परंतु विश्वविद्यालय यहां सामान्य वर्ग के छात्रों को भी भरने का काम कर रहा है परंतु यह अनुचित है क्योंकि जब तक विश्वविद्यालय में ट्राइबल छात्र किराए के रूम में रह रहे हैं तब तक हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ट्राईबल हॉस्टल को सामान्य वर्ग के छात्रों को नहीं भरना चाहिए। विश्व विद्यालय कई बार इस बात का हवाला देता है की यह सिर्फ पोस्टग्रेजुएट (PG) व उससे ऊपर के छात्रों के लिए है परंतु यहां बीएड डिग्री के छात्र भी रहते है अत: गद्दी छात्र कल्याण संघ हिमाचल प्रदेश सदैव छात्र कल्याण के पक्ष में खड़ा है और इसी भांति छात्र हित कार्य में लगा है और लगा रहेगा ।
** अपनी पत्नी को एक्टिव पॉलिटिक्स में शामिल करने वाले तीसरे मुख्यमंत्री बने सीएम सुक्खू डॉ. यशवंत सिंह परमार और स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की फेहरिस्त में अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी शामिल हो गए। इन दोनों के बाद सुखविंदर सिंह सुक्खू ऐसे तीसरे मुख्यमंत्री है जिनकी पत्नी एक्टिव पॉलिटिक्स शामिल हो गई है। इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश के ऐसे दो मुख्यमंत्री रहे है जिनकी पत्नियां भी राजनीति में ही रही है। हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय डॉ. यशवंत सिंह परमार की पत्नी भी राजनीति में ही थी। हालाँकि उनकी पत्नी शादी से पहले ही राजनीति में आ चुकी थी और शायद ये बात बेहद कम लोग जानते होंगे कि डॉ. यशवंत सिंह परमार की वो दूसरी पत्नी थी। 65 साल के डॉ. परमार को 55 साल की महिला राज्यसभा सांसद सत्यवती डांग से प्यार हो गया था और उन्होंने तब दूसरी शादी की थी। सत्यवती डांग 1964 से 1969 तक हिमाचल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहीं है। दूसरे मुख्यमंत्री थे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह। वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री रहते ही प्रतिभा सिंह भी पॉलिटिक्स में आ गई थी और अभी प्रतिभा सिंह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल रही है। अब सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के सातवें मुख्यमंत्री है और अपनी पत्नी को पोलटिक्स में लाने वाले तीसरे मुख्यमंत्री।
**कांग्रेस के पास 40 का आकड़ा कायम **आखिर उपचुनावों से हासिल हुआ क्या ? 23 मार्च 2024 वो तारिख जब कांग्रेस के 6 विधायक रूठ कर भाजपा के खेमे में शामिल हो गए थे । 13 जुलाई 2024 वो तारिख है जब प्रदेश कांग्रेस के पास उनकी जगह पर 6 नए विधायक है। तीन उपचुनावों के नतीजों के बाद अब हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के कुल 40 और भाजपा के कुल 28 विधायक बैठेंगे। 2022 विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद की तस्वीर भी इससे ज़्यादा इतर नहीं थी, तब भी कांग्रेस के 40 ही विधायक विधानसभा की दहलीज़ तक पहुंचे थे यानि कांग्रेस के 6 विधायक अगर छिटके तो जनता ने 6 अन्य विधायकों को जितवा कर विधानसभा पहुंचा दिया। हां मगर तब भाजपा के महज़ 25 ही विधायक सदन तक पहुंचे थे और अब ये आकड़ा 28 का हो गया है। अब आप पूछेंगे की ये आकड़ा तो भाजपा निर्दलीय विधायकों को अपने साथ मिलाकर भी प्राप्त कर सकती थी फिर 3 विधानसभा सीटों की जनता पर उपचुनाव थोपने का आखिर क्या अर्थ निकला। ये सवाल जनता अब भाजपा से पूछेगी और पूछेगी उन निर्दलीय विधायकों से जिन्होंने विधायक होने के बावजूद भी पद से इस्तीफ़ा दे दिया। पुछा जाएगा की आखिर इन 3 उपचुनावों से भाजपा को हासिल क्या हुआ। सवाल तो भाजपा हाईकमान भी पूछेगा, प्रदेश के उन भाजपा नेताओं से जिनके काँधे पर भाजपा को चुनाव जितवाने की ज़िम्मेएदारी सौंपी गई थी। सवाल जवाब अब चलते रहेंगे मगर फिलवक्त इन चुनावों का लब्बोलुबाब ये है की अभी के लिहाज़ से प्रदेश की 40 विधायकों वाली कांग्रेस सरकार बिलकुल सुरक्षित है। वहीँ प्रदेश की जनता ने ये सन्देश भी सांझा कर दिया है कि हिमचाल प्रदेश की जनता दल-बदल की राजनीति से ज़्यादा इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती।
**सरकार गिराने के दावे फेल **अपनों ने डूबोई भाजपा की नाव कोशिश तो बहुत की मगर हासिल कुछ नहीं हुआ। भाजपा के तथाकथित ऑपरेशन लोटस को हिमाचल प्रदेश में मुँह की खानी पड़ी है। प्रदेश में पांच-छह महीने से सरकार बनाने का दावा कर रही भाजपा के लिए ये नतीजे बड़ा झटका है। पहले छह और अब तीन, कुल नौ उपचुनाव में से भाजपा 6 पर चुनाव हार गई है। न बिंदल का जादू चला न जयराम ठाकुर अपनी साख बचा पाए। हां सांसद अनुराग ठाकुर ज़रूर हमीरपुर में जीत दिलवाने में कामयाब रहे मगर इसका मार्जिन इतना कम है की 'यहाँ कुछ भी हो सकता था। वहीँ इस बार भले ही बाल-बाल जीत गए मगर इससे पहले अनुराग के संसदीय क्षेत्र के तहत हुए 4 में से पार्टी 3 चुनाव हार गई थी। यहां तक की प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के गढ़ में भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र राणा को भी हार मिली। यानि इन नेताओं में से किसी एक के भी रिपोर्टकार्ड पर स्टार नहीं लग पाए। ज़ाहिर है अब भाजपा आलाकमान की कचेहरी में प्रदेश के दिग्गज भाजपा नेताओं की पेशी होगी और इन्हें हार स्वीकारनी भी होगी और जो संभावित नतीजे होंगे उन्हें गले भी लगाना होगा। सूची तो उनकी भी बनेगी जो साथ दिख तो रहे थे मगर साथ दे नहीं रहे थे। इन चुनावों में भाजपा की लुटिया भाजपा के अपने ही नाराज़ नेताओं ने डूबोई है। अब देखना ये होगा कि देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा इस हार पर क्या एक्शन लेती है और क्या सबक ।
** पति मुख्यमंत्री और पत्नी विधायक .... **सीएम सुक्खू की पत्नी कमलेश ने जीता देहरा का उपचुनाव कांग्रेस का एक अनोखा प्रयोग अब सियासी संयोग बन चूका है। देहरा से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव जीत चुकी है। सत्ता की गाड़ी में सवार हो कर अब पति पत्नी दोनों ही विधानसभा में नज़र आएंगे। उपचुनाव के नतीजों के साथ ही ये तो स्पष्ट हो चूका है कि आखिरकार ससुराल वालों ने सीएम सुक्खू को जीत का शगुन दे कर कमलेश ठाकुर को देहरा का विधायक बना ही दिया। अब कमलेश बार-बार अपने मायके वालों से यही गुज़ारिश कर रही थी कि ससुराल में उनका मान रहे इसके लिए देहरा की जनता से उन्हें प्यार मिलना बेहद ज़रूरी है। हुआ भी कुछ ऐसा ही अब मायके वालो ने तो अपना धर्म निभा दिया है अब बारी है देहरा की बेटी की। जो बाते, जो वादे कमलेश और सीएम सुक्खू ने देहरवासियों से किये थे क्या वो पुरे होंगे ये देखना दिलचस्प होगा। राज्यों की राजनीति में पति पत्नी की विधानसभा में एक साथ एंट्री के उदाहरण न के बराबर ही देखने को मिले है, हां सिक्किम में एक बार ऐसा देखने को ज़रूर मिला था जब पति मुख्यमंत्री बने और पत्नी विधायक, लेकिन तब सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग की पत्नी कृष्ण कुमारी राई ने शपथ ग्रहण करने के एक दिन बाद ही विधायक पद से त्याग-पत्र दे दिया था। अब राज्यों की सियासत में ये दूसरा मौका है जब पति प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे और पत्नी विधायक।
मुख्यमंत्री बोले, हिमाचल प्रदेश की जनता ने देश भर की राजनीति को दिया संदेश हिमाचल प्रदेश में तीन विधानसभा क्षेत्रों में हुए उप-चुनाव में दो सीटों पर जीत हासिल करने पर भारी संख्या में जश्न मनाने ओक ओवर पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जनता ने धनबल को हराया है और जनबल की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के मतदाताओं के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के मेहनती कार्यकर्ताओं की जीत है। प्रदेश की जनता ने खरीद-फरोख्त की राजनीति को नकार कर अपना वोट राज्य में राजनीतिक पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए दिया है। उन्होंने कहा कि देहरा में 25 वर्षों के बाद कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई है और नालागढ़ में भी कांग्रेस प्रत्याशी बड़े अंतर से जीते हैं। हिमाचल प्रदेश में अब कोई भी पार्टी आने वाले 50 साल में खरीद-फरोख्त की राजनीति करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगी और प्रदेश से यह संदेश पूरे देश की राजनीति में जाएगा। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि 28 फरवरी, 2024 को प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर चुनी हुई सरकार को गिराने का षडयंत्र रचा गया, लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या एक बार फिर 40 हो गई है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर बार-बार भाजपा की दो सरकारें बनाने की बातें करते थे, लेकिन उनका ऑपरेशन लोट्स विफल हो गया है। जनता से सबक मिलने के बावजूद नेता प्रतिपक्ष प्रदेश के लोगों को ठगने और गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन निर्दलीय विधायकों ने यह उप-चुनाव प्रदेश की जनता पर थोपे, अगर वह प्रदेश सरकार से नाराज थे तो विधानसभा में भाजपा के साथ बैठकर विपक्ष को अपना समर्थन देते। उन्होंने कहा कि निर्दलीय विधायक सरकार को गिराने के षडयंत्र के तहत एक माह तक प्रदेश से बाहर रहे और अपना इस्तीफा स्वीकार करवाने के लिए धरने पर बैठे। उनके इसी रवैये के कारण उप-चुनाव हुए, लेकिन जनता ने अब उन्हें करारा जवाब दिया है। यह जीत उन सभी के लिए भी एक सबक है जिन्होंने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि देश में 13 विधानसभा क्षेत्रों में हुए उप-चुनावों में भाजपा ने केवल दो सीटें बहुत कम मार्जन से जीती हैं, जिससे यह साबित होता है कि देश के लोगों ने भाजपा के एकछत्र राज और उनकी गुमराह करने वाली नीतियों व विचारधारा को पूरी तरह से नकार दिया है।
**इनमे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चम्बा, कागंड़ा, शिमला, सोलन और सिरमौर शामिल **19 जुलाई तक प्रदेश में मौसम रहेगा खराब हिमाचल प्रदेश के कई भागों में आगामी एक सप्ताह तक मानसून की बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से राज्य के कई हिस्सों में 19 जुलाई तक मौसम खराब बने रहने की संभावना जताई गई है। 16 व 17 जुलाई के लिए कुछ भागों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी शिमला में आज हल्की धूप खिलने के साथ बादल छाए हुए हैं।
शिमला में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के विभिन्न विभागों में 1,093 पदों को भरने की मंजूरी दी गई। इनमें शिक्षा विभाग में लेक्चरर शारीरिक शिक्षा के 486 पद और प्रधानाचार्य स्कूल कैडर के 157 अतिरिक्त पद सृजित करने, शिक्षा विभाग में ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए स्पेशल एजूकेटर के 245 पद भरने का भी निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने गृह विभाग में अग्निशमन अधिकारियों व कर्मचारियों के विभिन्न श्रेणियों के 53 पद भरने को स्वीकृति प्रदान की। पुलिस कर्मियों के विभिन्न श्रेणियों के 60 पद सृजित कर इन्हें भरने को स्वीकृति प्रदान की गई, जिन्हें प्रदेश के हेलीपोर्ट पर तैनात किया जाएगा। बैठक में हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग हमीरपुर के सुचारु संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 30 पद भरने को मंजूरी प्रदान की गई। लोक निर्माण विभाग में जूनियर आफिस असिस्टेंट (आईटी) के 30 पद भरने का निर्णय भी लिया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि खंड विकास अधिकारी के 27 अतिरिक्त पद भरे जाएंगे, जिससे कैडर की क्षमता 123 हो जाएगी। डॉ. राधाकृष्णन चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में पृथक कार्डियोलॉजी विभाग स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके सुचारू संचालन के लिए प्रोफेसर, अस्सिटेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजिडेंट चिकित्सकों के तीन पद सृजित कर भरे जाएंगे। बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में जिला नियंत्रक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने की मंजूरी प्रदान की गई। जेओए पोस्ट कोड-903, 939 के परिणामों को घोषित करने का निर्णयबैठक में मंत्रिमंडलीय उप-समिति के सिफारिशों को स्वीकार करते हुए जूनियर ऑफिस अस्सिटेंट के पोस्ट कोड-903 और 939 के लंबित परिणामों को घोषित करने का निर्णय लिया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग, हमीरपुर को दोनों पोस्ट कोड के अंतिम परिणाम घोषित करने का कार्य सौंपा गया है। 18 ग्रामीण विद्या उपासकों को जेबीटी के रूप नियमित करने का निर्णयशिक्षा विभाग में तीन वर्षों का सेवाकाल पूर्ण करने वाले एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मापदंडों को पूरा करने वाले 18 ग्रामीण विद्या उपासकों को जूनियर बेसिक टीचर (जेबीटी) के रूप नियमित करने का निर्णय लिया गया है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला की सुन्नी तहसीन के तहत आने वाले डिमार्केटिड प्रोटेक्टिड फॉरेस्ट एरिया यानी सीमांकित संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ काटने व सड़कें बनाने के मामले में हाईकोर्ट ने हिमाचल एवं केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामले में हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से बनी सड़कों पर वाहनों की आवाजाही रोकने की गुहार लगाई गई है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। तहसील सुन्नी की ग्राम पंचायत हिमरी के तहत ये वन क्षेत्र आता है। याचिका कर्ताओं ने इस वन क्षेत्र को रिजर्व फॉरेस्ट एरिया घोषित करने के आदेश जारी करने की भी हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव व न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ कर रही है। मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने ग्राम पंचायत हिमरी निवासी विजयेंद्र पाल सिंह, देवी राम और देव राज की तरफ से दाखिल की गई जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सभी प्रतिवादियों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। प्रार्थियों ने वन, राजस्व और लोक निर्माण विभाग के सचिव सहित प्रधान मुख्य अरण्यपाल, डीएफओ शिमला, डीसी शिमला, उद्योग विभाग के निदेशक को प्रतिवादी बनाया है। प्रार्थियों का कहना है कि हिमरी ग्राम पंचायत में हिमरी, बागरी, बनुना, गड़ाहू, गढ़ेरी और रियोग गांव आते हैं। इस क्षेत्र में छप्परानी, दबका, फुलगलानी इत्यादि सीमांकित संरक्षित वन क्षेत्र के तहत हैं। वर्ष 2011 से इन वन क्षेत्रों में कई सड़कें अवैध रूप से बनाई गई। इन सड़कों में हिमरी-दोहरा ग्लां-भरैल, दोहरा ग्लां-छप्परानी, दोहरा ग्लां-ग्लाह और हिमरी-रियोग सडक़ें शामिल हैं। ये सभी अवैध रूप से बनाई गई हैं। इस डिमार्केटिड प्रोटेक्टिड फॉरेस्ट यानी डीपीएफ से बाहर भी कुछ सड़कें बिना अनुमति के बनाई गई हैं। उनमें हिमरी-झुटनू, खनेरी बागरी, हिमरी सड़क और कंधारटी सड़क बिना अनुमति बनाई गई है। इन सड़कों के निर्माण के बाद पूरे क्षेत्र में पेड़ों के कटान और तस्करी से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। वन माफिया के सक्रिय होने से पेड़ों का कटान तेज हो गया। अवैध खनन के मामले भी इस क्षेत्र में बढ़ गए हैं। प्रार्थियों ने इन सड़कों में गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग की है। प्रार्थियों ने मांग की है कि हिमरी-नल्लाह सड़क के निर्माण के लिए 657 पेड़ों को काटने की एफसीए (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) दी गई है। इसलिए 657 पेड़ों को कटने से बचाया जा सके। मामले पर सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश की देहरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव जीत गई हैं। देहरा सीट पर उन्होंने बीजेपी के होशियार सिंह को हराया है। देहरा में 10 राउंड की गिनती हुई, जिसमें कमलेश ठाकुर को 32737, होशियार सिंह को 23338 वोट मिले। इस तरह कमलेश ठाकुर 9399 वोटों से जीत गईं। उधर, हमीरपुर से भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा 1433 वोट से चुनाव जीत चुके है जबकि नालागढ़ सीट पर हरदीप बावा 8990 मतों से जीते। बता दें कि आज हिमाचल प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्रों देहरा, नालागढ़, हमीरपुर में हो रहे उपचुनाव के लिए आज मतगणना हुई। 10 जुलाई को हुए मतदान के बाद सभी आज के दिन का इंतजार कर रहे थे। BIG BREAKING : नालागढ़ से हरदीप बावा 8990 मतों से जीते नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 34608 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 25618 हरप्रीत सैनी : 13025 BIG BREAKING : आशीष शर्मा जीते, सीएम के गृह जिला में कांग्रेस को झटका ** सभी 9 राउंड की गिनती के बाद 1433 वोट ज्यादा मिले आशीष शर्मा , बीजेपी: 26617 पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 25184 BIG BREAKING : सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर देहरा से जीती चुनाव ** 9 हजार से अधिक अंतर से होशियार सिंह को हराया ** दो बार के निर्दलीय विधायक होशियार सिंह को भारी पड़ा इस्तीफा देकर फिर चुनाव लड़ना LIVE UPDATE: 12.03 PM (8th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 31298 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 24428 हरप्रीत सैनी : 11614 ( जीत की ओर अग्रसर हरदीप बावा मात्र एक राउंड शेष ) LIVE UPDATE: 11.50 AM (7th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 26785 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 22207 हरप्रीत सैनी : 8663 LIVE UPDATE: 11.30 AM (6th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 23038 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 18901 हरप्रीत सैनी : 7393 UPDATE: 11.25 AM (9th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 28641 (+ 7860) होशियार सिंह, बीजेपी: 20781 LIVE UPDATE: 11.13 AM (6th Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... आशीष शर्मा , बीजेपी: 18319 (+ 743) पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 17576 LIVE UPDATE: 11.00 AM (8th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 24957 (+ 6115) होशियार सिंह, बीजेपी: 18842 LIVE UPDATE: 11.00 AM (5th Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... आशीष शर्मा , बीजेपी: 15120 (+ 67) पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 15053 LIVE UPDATE: 10.42 AM (4th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 15253 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 12275 हरप्रीत सैनी : 5141 LIVE UPDATE: 10.42 AM (7th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 21723 होशियार सिंह, बीजेपी: 16694 LIVE UPDATE: 10.35 AM (3rd Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 10767 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 8573 हरप्रीत सैनी : 3536 नोटा : 157 LIVE UPDATE: 10.30 AM (4th Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 12021 आशीष शर्मा , बीजेपी: 11138 LIVE UPDATE: 10.17 AM (6th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 16984 होशियार सिंह, बीजेपी: 15169 LIVE UPDATE: 10.17 AM (2nd Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... डॉ पुष्पेंद्र वर्मा 6750 आशीष शर्मा 5046 नंद लाल शर्मा 13 LIVE UPDATE: 10.12 AM (2nd Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 7577 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 6006 हरप्रीत सैनी : 2342 डॉ केे एल शर्मा : 132 विजय सिंह : 65 नोटा : 103 LIVE UPDATE: 9.50 AM (5th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 13300 होशियार सिंह, बीजेपी: 12664 LIVE UPDATE: 9.40 AM (1st Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा , कांग्रेस: 3358 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 2712 LIVE UPDATE: 9.40 AM (4th Round) कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 2655 होशियार सिंह, बीजेपी: 2135 LIVE UPDATE: 9.00 AM (1st Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 3004 आशीष शर्मा , बीजेपी: 2804 LIVE UPDATE: 9.00 AM (2nd Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 2530 होशियार सिंह, बीजेपी: 2629 LIVE UPDATE: 8.50 AM (1st Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 2530 होशियार सिंह, बीजेपी: 2629 ❝नालागढ़ सीट से पांच प्रत्याशी मैदान में हैं। कांग्रेस से हरदीप सिंह बावा, भाजपा से केएल ठाकुर, स्वाभिमान पार्टी से किशोरी लाल शर्मा, निर्दलीय हरप्रीत सिंह और विजय सिंह मैदान में हैैं। उधर ,हमीरपुर में तीन प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच में है। हमीरपुर से भाजपा के आशीष शर्मा, कांग्रेस के डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा और निर्दलीय प्रत्याशी नंद लाल शर्मा मैदान में हैं। साल 2022 में भी कांग्रेस के डॉ. पुष्पेंद्र और आशीष शर्मा आमने-सामने थे। आशीष ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीते थे। भाजपा के प्रत्याशी नरेंद्र ठाकुर थे। इस उपचुनाव में सबसे हॉट सीट देहरा सीट है जहाँ से पांच प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें कांग्रेस से कमलेश ठाकुर चुनावी मैदान में है जो सीएम सुक्खू की धर्मपत्नी है जबकि भाजपा से होशियार सिंह चुनावी मैदान में है। इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सुलेखा देवी, अंकेश सायल और एडवोकेट संजय शर्मा किस्मत आजमा रहे हैं। ❞
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां हुई| राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार से प्रभावित होने वाले परिवारों के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की घोषणा को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, ऊना जिले के हरोली विधानसभा क्षेत्र में बल्क ड्रग पार्क के निर्माण के लिए पूंजीगत लागत का राज्य हिस्सा प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया और इसकी निविदा बुलाने को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल ने रिट्रीट, मशोबरा, बैंड टुकड़ा आंद्री, शिव मंडी आंद्री, ताल और गिरी के अतिरिक्त क्षेत्रों को डी.पी.एफ. खलिनी, बी.सी.एस. शिमला विकास योजना में मिस्ट चैंबर और परिमहल ग्रीन एरिया के दायरे में। इसने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट से संबंधित पोस्ट कोड 903 और 939 के लंबित परिणामों पर कैबिनेट उप-समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया और दोनों पोस्ट कोड के लिए अंतिम परिणाम घोषित करने का कार्य एच.पी. को सौंपा। राज्य चयन आयोग हमीरपुर। बैठक में शिक्षा विभाग में लेक्चरर फिजिकल एजुकेशन के 486 पद और प्रिंसिपल स्कूल कैडर के 157 अतिरिक्त पद सृजित करने और भरने को मंजूरी दी गई। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा विभाग में विशेष शिक्षकों के 245 पद भरने का भी निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने राज्य में हेलीपोर्टों पर तैनाती के लिए गृह विभाग में अग्निशमन अधिकारियों और अधिकारियों की विभिन्न श्रेणियों के 53 पद और विभिन्न श्रेणियों के पुलिस कर्मियों के 60 पदों को बनाने और भरने की मंजूरी दी। हिमाचल प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों के 30 पद भरने का निर्णय लिया गया। इसके सुचारू संचालन के लिए राज्य चयन आयोग हमीरपुर। मंत्रिमंडल ने लोक निर्माण विभाग में जेओए (आईटी) के 30 पद भरने को मंजूरी दी। इसमें खंड विकास अधिकारी के 27 अतिरिक्त पद सृजित करने का निर्णय लिया गया, जिससे कुल कैडर की संख्या 123 पदों तक बढ़ जाएगी। कैबिनेट ने शिक्षा विभाग में जूनियर बेसिक शिक्षकों के रूप में 18 ग्रामीण विद्या उपासकों की सेवाओं को नियमित करने का निर्णय लिया, जिन्होंने तीन साल की सेवा पूरी कर ली है और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानदंडों को पूरा करते हैं। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर में कार्डियोलॉजी विभाग बनाने का निर्णय लिया गया और तीन पद सृजित करने और भरने का निर्णय लिया गया। इसके सुचारू संचालन के लिए प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर और वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर। मंत्रिमण्डल ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में जिला नियंत्रक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने की मंजूरी दी। मंत्रि-परिषद ने राजस्व विभाग में पटवारी, कानूनगो के जिला कैडर और नायब तहसीलदार के संभागीय कैडर को राज्य कैडर घोषित करने का निर्णय लिया। हिमाचल विज्ञान प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के तत्वावधान में आर्यभट्ट भू-सूचना विज्ञान और अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र में कार्यरत पदधारियों को तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ परिलब्धियां देने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने 40 प्रतिशत की न्यूनतम विकलांगता के साथ अपने बच्चों की देखभाल के लिए एक महिला सरकारी कर्मचारी को उसकी पूरी सेवा के दौरान अधिकतम 730 दिनों की बाल देखभाल छुट्टी देने का भी निर्णय लिया।
कहा, मैंने पहले आगाह किया था, ओपीएस में भी सरकार करने वाली है खेल चुनावी गारंटियों के नाम पर प्रदेश के लोगों को ठग रही सुक्खू सरकार शिमला : नेता प्रतिपक्ष ने शिमला से वक्तव्य जारी कर हिमाचल सरकार द्वारा मुफ़्त बिजली योजना की सब्सिडी बंद करने की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसी तरह की तानाशाही के लिए जानी जाती है। प्रदेश के लोगों को मुफ़्त मिल रही बिजली को सुक्खू सरकार ने छीन लिया। प्रदेशवासियों के साथ की गई यह तानाशाही दुर्भाग्यपूर्ण हैं। चुनाव में जो पार्टी सरकार बनने पर 300 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा करके सत्ता में आई हो वह सरकार में आने पर पहले से मिल रही 125 यूनिट की सब्सिडी को भी छीन ले। यह प्रदेश के लोगों के सिर्फ़ एक ठगी है। चुनाव के ठीक एक दिन बाद द्वारा यह फ़ैसला लेना सरकार की शातिराना नीयत को दिखाता है। प्रदेश सरकार इसी तरह से फिर काम करेगी। उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस द्वारा जारी की गई गारंटी पर कहा था कि कांग्रेस सरकार दस जन्म में भी यह पूरी नहीं कर पाएगी। वही पहले दिन से ही हो रहा है। झूठ बोलकर सत्ता में आना और झूठ बोलकर सत्ता चलाना ही कांग्रेस की फ़ितरत है और वह वही कर रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मैंने प्रदेश के लोगों को दो हफ़्ते पहले ही आगाह कर दिया था कि सरकार फ्री बिजली की सब्सिडी बंद करने जा रही है। बस उप-चुनाव ख़त्म होने का इंतज़ार है। आगे चलकर यह सरकार ओपीएस पर भी ऐसा ही करने वाली है। सुक्खू सरकार ओपीएस के मूल ढाँचे में बदलाव करके पेंशन के रूप में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत करने वाली है। इसके बारे में भी मैंने पहले ही आगाह किया है। सरकार की इस तानाशाह की क़ीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। भाजपा इस तानाशाही के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेगी और कांग्रेस के मनवाने और झूठ बोलने के रवैये के ख़िलाफ़ जनान्दोलन करेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहले दिन से ही सरकार की योजना विकास करने की नहीं थी। सिर्फ़ झूठ बोलकर प्रदेश के लोगों से ठगी करके उन्हें सत्ता हथियानी थी। जिस तरह से चुनाव में उन्होंने बढ़ चढ़कर प्रदेश के लोगों को 10 गारंटिया दी थी उसी दिन हमने कहा कांग्रेस इसे 10 जन्मों में भी पूरा करने वाली नहीं है। अब एक-एक कर सब कुछ सामने आ रहा है। एक लाख युवाओं को हर साल रोजगार देने की गारंटी थी और सत्ता में आते ही 10 हज़ार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मी को बाहर कर दिया। स्टार्टअप योजना के तहत युवाओं को रोजगार देने की गारंटी दी थी लेकिन पहले से चल रही स्वावलंबन योजना को बंद कर दिया। प्रदेश के विकास का वादा था लेकिन डेढ़ साल में धेले भर का काम सुक्खू सरकार ने नहीं किया। नई संस्थान खोलने के बजाय पहले से चल रहे लगभग डेढ़ हज़ार संस्थानों को बंद कर दिया। हिमाचल में सुक्खू सरकार का मतलब झूठ की सरकार, फ़रेब की सरकार, ठगी की सरकार। प्रदेश में अब ऐसी सरकार की ज़रूरत नहीं रह गई है।
प्रदेश में सेब सीजन शुरू हो चुका है ऐसे में शिमला जिला की कृषि बाग़वानी व उद्योग समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आज शिमला में आयोजित की गई। बैठक में सेब सीजन के दौरान उचित व्यवस्था बनाने और बागवानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार के विभिन्न बागवानी योजनाओं को जमीनी स्तर पर अधिक सफल बनाने , सेब सीजन के दौरान मंडियों और सड़कों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने और बाग़वानों को यूनिवर्सल कार्टन से संबंधित आ रही दिक्कतों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई जिसमें संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखा। कृषि बागवानी व उद्योग समिति के अध्यक्ष कौशल मुंगटा ने बताया कि बागवानों को विभिन्न योजनाओं से लाभ पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर समीक्षा की गई और पेश आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि सेब सीजन के दौरान सेब ढुलाई के लिए यातायात सुचारू बनाए रखना , मंडियों में उचित व्यवस्था और आढ़तियों की रजिस्ट्रेशन व सिक्योरिटी फीस सुनिश्चित करने के साथ ही यूनिवर्सल कार्टन संबंधी परेशानियां को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए हैं। जिन्हें बागवानी मंत्री और सरकार के समक्ष गंभीरता से रखा जाएगा ताकि बागवानों की हर एक समस्या का समाधान जल्द से जल्द सुनिश्चित हो सके।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज बताया कि हिमाचल प्रदेश को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नवोन्मेषी पहल व उल्लेखनीय कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य पुरस्कार-2024 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार ‘एग्रीकल्चर टुडे ग्रुप’ द्वारा आयोजित ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव’ में केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदान किया। हिमाचल प्रदेश की ओर से यह पुरस्कार आवासीय आयुक्त मीरा मोहंती ने प्राप्त किया। उद्योग मंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों व नीतियों के सफल कार्यान्वयन से प्रदेश के लाखों किसानों और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं और उनकी आर्थिकी सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य ने अपने खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया है, जिसमें 23 नामित खाद्य पार्क, एक समर्पित मेगा फूड पार्क, जिला कांगड़ा और सोलन में 2 कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर, 18 कोल्ड चेन परियोजनाएं, जिनमें राज्य खाद्य प्रसंस्करण योजना और प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल है। गत वर्ष भी प्रदेश को भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा आयोजित विश्व खाद्य भारत कार्यक्रम में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकीकरण (पीएमएफएमई) योजना के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में पुरस्कृत किया था। इस योजना के तहत 1320 व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को 30 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्वीकृत और वितरित तथा 13427 स्वयं सहायता समूहों सदस्यों को 50.31 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ाने के लिए राज्य में 3 इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। उद्योग मंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण राज्य के लिए प्रमुख क्षेत्र है, क्योंकि यह मूल्य संवर्द्धन की दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान करता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने स्वास्थ्य विभाग को प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों के लिए आधुनिक मशीनरी और उपकरण खरीदने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के लोगों को घरद्वार के निकट गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके दृष्टिगत आधुनिक तकनीक और उपकरणों के उपयोग पर विशेष अधिमान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मशीनरी और उपकरणों की खरीद में तेजी लाने के लिए खरीद संबंधी तकनीकी वशिष्टताओं को एम्स और पीजीआई की तर्ज पर रखा जाए। इससे खरीद में गुणवत्ता सुनिश्चित होने के अलावा खरीद प्रक्रिया, समय और धन की बचत होगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने यह बात आज यहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की विशेष उच्च स्तरीय क्रय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के लोगों को समय पर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण प्रदान किये जा रहे हैं, ताकि राज्य के लोगों को उपचार के लिए अन्य राज्यों में न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं के लिए बेबी केयर किट खरीदने के दृष्टिगत निविदा जारी करने की मंजूरी दे दी गई है। प्रत्येक किट की लागत लगभग 1500 रुपये होगी। राज्य मेें एक वर्ष में लगभग एक लाख संस्थागत प्रसव होने का अनुमान है और प्रदेश सरकार ने बेबी किट के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि इस किट में 20 वस्तुएं शामिल होंगी, जिनमें डिजिटल थर्मामीटर, नेल कटर, टोपी, सॉफ्ट ब्रिस्टल हेयर ब्रश, बिब, बच्चे के लिए वॉश क्लॉथ और मां के लिए सेनिटरी नैपकिन जैसी आठ नई वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा इसमें बच्चे के लिए वन पीस स्लिप-ऑन आउट फिट, बेबी वेस्ट (दो), बेबी मिटनस, और बुटिस, बच्चों की मालिश का तेल, तौलिया, कपड़े के नेपी, हेंड सेनेटाईजर, मछरदानी, मिंक कम्बल, रेटल टॉय, मलमल/फूलालैन (दो) तथा मां के लिए टूथ ब्रश, पेस्ट, नहाने का साबुन और वैसलीन इत्यादि भी शामिल होंगे। इसके उपरांत स्वास्थ्य मंत्री ने हिमाचल प्रदेश चिकित्सा सेवाएं निगम लिमेटिड (एचपीएमएससीएल) के बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता भी की। बैठक में विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न संस्थानों के लिए मशीनरी, वाहन, अस्पताल के फर्नीचर आदि की खरीद प्रक्रिया शुरू करने को भी मंजूरी दी गई। स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान डॉ. राकेश शर्मा, मिशन निदेशक एनएचएम प्रियंका वर्मा और हिमाचल प्रदेश चिकित्सा सेवाएं निगम के महाप्रबंधक राजीव कुमार भी बैठक में उपस्थित थे।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। यह प्रारंभिक बैठक 16 जुलाई, 2024 को केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पास हिमाचल प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई। लोक निर्माण मंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रगति कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो राष्ट्रीय राजमार्ग क्षतिग्रस्त हैं, उन्हें तुरंत ठीक करवाया जाए। उन्होंने भुभू जोत टनल के निर्माण कार्यों को भी शीघ्र पूर्ण करवाने के निर्देश दिए, ताकि इसे जन कल्याण के लिए शीघ्र समर्पित किया जा सके। भारत सरकार के सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ होने वाली बैठक में प्रदेश के विभिन्न राजमार्गों और परियोजनाओं पर की जाने वाली कार्यवाही एवं उनसे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर प्रधान सचिव देवेश कुमार, विशेष सचिव हरबंस सिंह ब्रसकोन एवं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित एवं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी संजय वाघचुरे एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए आज समय के अनुसार बदलाव की आवश्यकता है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि करीब 2200 शिक्षकों की बैचवाइज भर्ती की जा रही है और जल्द इनकी तैनाती होगी। कहा कि शिक्षकों की तैनाती के लिए भी पैरामीटर तय किए गए हैं। राज्य में बिना शिक्षक 350 स्कूल चल रहे हैं। 3200 स्कूल एक शिक्षक के सहारे हैं और करीब 800 स्कूल ऑफ एक्सीलेंस हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती प्राथमिकता रहेगी। कहा कि सरकार चाहती है कि प्री प्राइमरी स्कूल जल्द शुरू किए जाए। इसके लिए करीब 6100 एनटीटी शिक्षक भर्ती किए जाएंगे। कम संख्या वाले स्कूलों को मर्ज करने के सवाल पर रोहित ने कहा कि वित्त आयोग के हिमाचल दौरे के दौरान पर भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। आयोग से भी सुझाव आया है कि जहां बच्चों की संख्या कम है, ऐसे स्कूलों को मर्ज किया जाना चाहिए। सरकार के ध्यान में यह मामला पहले से ही है। स्कूलों में एनरोलमेंट में भी कमी आई है। बीते वर्ष भी दो या दो से कम विद्यार्थी संख्या वाले स्कूलों को मर्ज किया गया था। जहां बच्चों की संख्या दो या दो से कम है, ऐसे करीब 700-800 स्कूलों को मर्ज किया जाएगा। प्रथम चरण में उन्हीं स्कूलों को चिन्हित करेंगे, जिनकी अधिक बच्चों की संख्या वाले स्कूल से दूरी डेढ़ से दो किलोमीटर है। शिक्षा निदेशालय इस संबंध में प्रारूप तैयार कर रहा है, जल्द निर्णय लेंगे।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय बीएससी द्वितीय वर्ष का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षा परिणाम विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड़ कर दिया गया है। विद्यार्थी अपना लॉगइन आईडी के जरिये परिणाम देख सकते हैं। बीएससी द्वितीय वर्ष का परीक्षा का परिणाम 47.06 फीसदी रहा है। कुल 2533 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 936 ने परीक्षा पास की है। एचपीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल ने कहा कि बीएससी द्वितीय वर्ष का परिणाम घोषित कर दिया है। बीते दिनों ही एचपीयू ने बीकॉम, बीए व बीसीए अंतिम वर्ष का परीक्षा घोषित किया था।
हिमाचल: HRTC कर्मचारियों के वेतन से क्वालिटी ड्रेस बनाने के लिए काटे 748 रुपए, कर्मचारी कर रहे विरोध
राज्य सरकार के उपक्रम हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने अपने कर्मचारियों से 67 लाख रुपये वसूले हैं। निगम के सभी चालकों, परिचालकों और मैकेनिकल स्टाफ के वेतन से 748 रुपये काटे गए हैं। कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। दरअसल, एचआरटीसी अपने कर्मचारियों को हर साल दो वर्दी देता है। इसके एवज में उन्हें 2000 रुपये भत्ता दिया जाता है। लेकिन इस साल वर्दी खरीदने से पहले एचआरटीसी कर्मचारियों ने तर्क दिया कि कपड़ा महंगा हो गया है, इसलिए वर्दी भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए। कर्मचारिओं ने पिछले साल खरीदी गई वर्दी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए थे। इसलिए इस साल वर्दी खरीदने से पहले यूनियन पदाधिकारियो की ड्रेस खरीद समिति के साथ बैठक हुई। इस बैठक की कार्यवाही विधिवत तैयार की गई, जिस पर कर्मचारी नेताओं के हस्ताक्षर हैं। बैठक में लिए गए निर्णय के बाद इस बार एचआरटीसी ने 2000 रुपये की जगह 2748 रुपये की ड्रेस खरीदकर अपने कर्मचारियों को दी। इस बार जब जून महीने का वेतन आया तो सभी कर्मचारियों के वेतन में 748 रुपये कम थे। इसके बाद सभी कर्मचारी परेशान हो गए। जब एचआरटीसी प्रबंधन से इस बारे में पूछा गया तो पता चला कि वर्दी के पैसे काट लिए गए हैं। इससे कर्मचारी भड़क गए हैं। मगर खुलकर बोल भी नहीं पा रहे, क्योंकि इनके कर्मचारी नेताओं ने क्वालिटी ड्रेस खरीदने की बात मीटिंग में कही थी। बोर्ड प्रबंधन ने क्वालिटी ड्रेस तो दे दी, लेकिन इनका वर्दी भत्ता नहीं बढ़ाया गया। HRTC में यह ड्रेस फील्ड स्टाफ को दी जाती है। इनकी संख्या 8500 से ज्यादा है। सभी कर्मचारियों से रिकवरी की गई है। HRTC के प्रबंध निदेशक रोहन चंद ठाकुर ने बताया, निगम ने कर्मचारियों के लिए अच्छी क्वालिटी की ड्रेस खरीदी है। यह कर्मचारियों के साथ हुई मीटिंग में तय हुआ था। इसमें सभी यूनियन के पदाधिकारी मौजूद थे। सभी की सहमति के बाद ही वर्दी खरीदी है।
हिमाचल प्रदेश में पांच विद्यार्थियों की संख्या वाले करीब 700 स्कूल मर्ज करने की तैयारी शुरू हो गई है। मर्ज होने वाले स्कूलों के साथ लगते स्कूलों से दूरी की मैपिंग करने में शिक्षा विभाग जुट गया है। इसी माह इस बाबत प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। बीते दिनों शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विभागीय समीक्षा बैठक में स्कूल मर्ज करने के निर्देश दिए थे। ऐसे स्कूलों को पहले चरण में मर्ज किया जाएगा, जहां आसपास में भी स्कूल स्थित होंगे। इन स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को साथ लगते स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ऐसे स्कूलों को पहले चरण में मर्ज किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों की संख्या पांच से कम है। ऐसे स्कूल करीब 700 हैं। इनमें करीब 80 स्कूल ऐसे भी हैं, जहां एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है। दूसरे चरण में दस विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों को चिह्नित किया जाएगा। वर्ष 2023 में 2022 के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या करीब 50 हजार कम भी हुई है। यू डाइस की वर्ष 2023 की रिपोर्ट में इसका उल्लेख हुआ है। कोरोना संकट के बाद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में यह बहुत बड़ी गिरावट देखी गई है। इसके चलते ही प्रदेश सरकार ने अब ऐसे स्कूलों को मर्ज करने का फैसला लिया है जहां विद्यार्थियों की संख्या नाममात्र है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ऐसे स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों को ऐसे अन्य स्कूलों में भेजा जाएगा, जहां बच्चों की संख्या अधिक है और शिक्षक कम हैं। मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के बच्चों को भी साथ लगते स्कूलों में दाखिले दिलाए जाएंगे। शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए स्कूलों को मर्ज करने का फैसला लिया गया है। विभागीय अधिकारियों से इसी माह में इस संदर्भ में रिपोर्ट देने को कहा गया है। मर्ज होने वाले स्कूलों से विद्यार्थियों को नजदीक के स्कूलों में दाखिले दिए जाएंगे
**तीन दिन प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी **लाहौल स्पीति और किन्नौर में बारिश का अलर्ट नहीं हुआ जारी हिमाचल प्रदेश में मानसून के आज से फिर सक्रिय होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से 11 से 13 जुलाई तक प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कई भागों में 17 जुलाई तक मानसून की बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान है। आज राजधानी शिमला व आसपास भागों में भी मौसम खराब बना हुआ है। उधर, गुरुवार सुबह तक राज्य में 12 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। मानसून सीजन के दौरान अब 17,199 लाख रुपये की संपत्ति नुकसान हो चुका है। इसमें लोक निर्माण विभाग को 10,177 लाख और जल शक्ति विभाग को 6,733 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, शिमला, सोलन व सिरमौर जिले के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। किन्नौर व लाहौल-स्पीति जिले के लिए किसी तरह का अलर्ट नहीं है।
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने नीट यूजी पेपर लीक मामले पर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। अब सुप्रीम कोर्ट आज नीट मामले पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट यूजी के कथित लीक मामले पर अहम फैसला सुना सकती है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें नीट यूजी परीक्षा फिर से कराने की मांग की गई है। बीती 8 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना था कि नीट यूजी परीक्षा की सत्यनिष्ठा से समझौता हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नीट परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए और केंद्र सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा। साथ ही सीबीआई से भी स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जिसे सीबीआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में सौंप दिया गया है। केंद्र सरकार ने 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में बताया कि उन्होंने आईआईटी मद्रास से नीट यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितता की जांच करने की अपील की है। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा कि नीट यूजी का बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने के सबूत नहीं मिले हैं।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग के समक्ष एक टारगेट रखा गया है। ये टारगेट सरकारी स्कूलों में बारहवीं तक शत-प्रतिशत एनरोलमेंट का है। इस संदर्भ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हिमाचल सरकार के शिक्षा सचिव की बैठक में टारगेट पर चर्चा हुई। हालांकि हिमाचल में सरकारी स्कूलों में बारहवीं तक छात्रों की एनरोलमेंट का रिकॉर्ड करीब 95 प्रतिशत है, लेकिन इसे शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य तय किया गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी व हिमाचल सरकार के शिक्षा सचिव आईएएस राकेश कंवर व अन्य अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें हिमाचल को ये लक्ष्य दिया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सभी मंत्रियों को तीसरी टर्म में 100 दिन का रोडमैप पेश करने के लिए कहा है. कैबिनेट मंत्रियों का अपने विभागों में 100 दिन का क्या एजेंडा व रोडमैप है, इस पर पीएम नरेंद्र मोदी सभी से रिपोर्ट लेंगे। इसी के तहत अन्य मंत्रियों के साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी राज्य के शिक्षा विभागों के अधिकारियों व प्रतिनिधियों से बैठकें कर रहे हैं। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि सभी राज्यों में बारहवीं तक शत-प्रतिशत एनरोलमेंट का लक्ष्य पूरा करना चाहिए। शत-प्रतिशत एनरोलमेंट से तात्पर्य ये है कि जो बच्चा प्राइमरी स्कूल में पहली कक्षा में एडमिशन ले, वो बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी करके ही स्कूल से निकले। इससे ड्रॉप आउट की समस्या दूर होगी। शत-प्रतिशत एनरोलमेंट के रास्ते में जो बाधाएं हों, उन्हें राज्य सरकार के अधिकारी मिलकर दूर करें। हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी जिले भी हैं और मैदानी जिले भी हैं। यहां हर जिला की अपनी-अपनी दिक्कतें हैं। ग्रामीण इलाकों में स्कूल दूर होने से कई बार बेटियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। कहीं, अभाव व गरीबी के कारण अभिभावक बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं करवा पाते। कई जगह शिक्षकों की कमी कारण होता है। ऐसे में सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रयास की जरूरत है। कई जगह कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्कूलों की संख्या पर्याप्त से अधिक है। ऐसे में स्कूलों को मर्ज किया जा सकता है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आर्बिट्रेशन अवार्ड की अनुपालना न करने पर लोक निर्माण विभाग के भावानगर, जिला किन्नौर स्थित कड़छम डिवीजन के कार्यकारी अभियंता कार्यालय का फर्नीचर कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं। हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने मैसर्स गर्ग संस एस्टेट प्रमोटर प्राइवेट लिमिटेड की अनुपालना याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किए। कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा समय पर अवार्ड पर अमल ना करने के पीडब्ल्यूडी के इस रवैये को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। इसका कारण यह भी है कि अवार्ड की अनुपालना का जिम्मा सरकारी विभाग हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग का है। अवार्ड का पालन न करने पर ब्याज का भुगतान करना पड़ता है। यह ब्याज स्पष्ट रूप से सामान्य करदाताओं की जेब से भरना होता है क्योंकि संबंधित विभाग के अधिकारी अवार्ड के कार्यान्वयन में देरी के लिए व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह नहीं हैं इसलिए कोर्ट ने अवार्ड की अनुपालना के लिए बार-बार दिए समय के बावजूद फिर से समय की मांग को खारिज करते हुए उपरोक्त आदेश जारी किए। उपरोक्त कार्यालय की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि मामला वित्त विभाग और योजना विभाग के पास धनराशि की मंजूरी के लिए लंबित है। लोक निर्माण विभाग के सम्बन्धित कार्यालय ने अदालत में कहा इसमें कुछ समय लगने की संभावना है और इस कारण से धनराशि जमा नहीं की जा सकी है। कार्यालय की ओर से अधिक समय की प्रार्थना की गई थी। हाई कोर्ट ने इसे नकार दिया और ऑफिस का फर्नीचर कुर्क करने के आदेश जारी किए।
** लंबे समय से सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री मौन क्यों है? **तानाशाही की सीमा लांघ चुके हैं मुख्यमंत्री, प्रतिशोध की भावना के साथ कर रहे हैं काम **विपक्ष के नाते हमारा काम है सरकार की तानाशाही के ख़िलाफ़ आवाज उठाना शिमला: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में खनन से जुड़े कारोबारियों के यहां हुई छपेमारी में घपले की पुष्टि हुई है। लेकिन इन कारोबारियों की मुख्यमंत्री से नज़दीकी की बातें समाने आ रही हैं। मुख्यमंत्री को इस मामले में प्रदेश की जनता को जवाब देना चाहिए कि जांच एजेंसियां जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं। उनका मुख्यमंत्री से क्या संबंध है? कांग्रेस सरकार ने विकास के बजाय घोटालों को तरजीह दी है। जनता के मुद्दे से सरकार को कोई सरोकार नहीं है। सरकार तानाशाही से विपक्ष की आवाज़ को दबाने का काम कर रही है। उपचुनाव जीतने के लिए सरकार ने सत्ता का जितना दुरुपयोग कर सकती थी, वह कर चुकी है। सरकार की तानाशाही के ख़िलाफ़ जनता में रोष है। जयराम ठाकुर ने कहा कि इस समय प्रदेश में भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। घोटालों से प्रदेश की छवि ख़राब हो रही है, माफिया सक्रिय हैं। क़ानून व्यस्था ध्वस्त है लेकिन मुख्यमंत्री अपनी सरकार बचाने में व्यस्त हैं। हाल ही में आयकर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा हिमाचल प्रदेश के कुछ कारोबारियों पर अनियमितता की जाँच के लिए कार्रवाई की गई। समाचारों की मानें तो वहां पर भारी धांधली का मामला सामने आया है। ये जांच खनन कारोबारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर, शिकायतों और फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई है। शुरुआती जांच में ही ईडी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिससे पता चलता है कि ये दोनों सैकड़ों करोड़ के स्कैम में शामिल हैं। इतने गंभीर मामलों के आरोपी की हिमाचल के मुख्यमंत्री के साथ नज़दीकी की बात भी मीडिया के माध्यम से सामने आ रही है। इसके पहले भी अपने चहेतों के लिए नियमों में फेर बदल के आरोप भी उन पर लगते रहे हैं। किसी भी आरोप पर मुख्यमंत्री ने अपनी सफ़ाई नहीं दी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए मित्रों की टोली ही सब कुछ है, वह उन्हीं के हित के लिए काम कर रहे हैं। प्रदेश के लोगों के जनहित के मुद्दे प्राथमिकता में है ही नहीं। जो सरकार जनहित के मुद्दों से हट जाए उसे सत्ता में रहने का हक़ नहीं है। यह सरकार बदलनी चाहिए। हम विपक्ष में हैं, हमारा काम है तानाशाह होती सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना। जनता के हितों के लिए काम न करने वाली सरकार से सवाल पूछना। जनहित के काम करने के लिए सरकार को बाध्य करना। वह हम करते रहेंगे। इस बार प्रदेश के लोग भी घोटाले, भ्रष्टाचार और उसमें मुख्यमंत्री कार्यालय की संबद्धता के बारे में जवाब मांग रहे हैं। मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश राज्य मिल्क फेडरेशन ने देसी घी, मक्खन समेत अन्य उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। अब उपभोक्ताओं को हिम घी प्रति लीटर 50 रुपये और हिम मक्खन प्रति किलो 30 रुपये महंगा मिलेगा। इस तरह अब घी 700 और मक्खन 580 रुपये प्रतिकिलो मिलेगा। दूध के दामों में बढ़ोतरी के बाद प्रबंधन ने अन्य उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। बढ़ी हुई दरें प्रदेशभर में लागू कर दी गई हैं। मिल्क फेडरेशन की ओर से कुल पांच उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। हिम पनीर अब 370 के बजाय 390 रुपये में मिलेगा। खुला पनीर प्रति किलो 340 के बजाय 360 रुपये में मिलेगा। पनीर में 20 रुपये प्रतिकिलो बढ़ोतरी हुई है। खुला दूध प्रति लीटर में दो रुपये बढ़ोतरी के साथ अब दाम 49 रुपये तय किए गए हैं। प्रबंधन की ओर से हिम खोया, बटर मिल्क, हिम दही, खुला दही, दूध पैकेट, फ्लेवर वाला दूध उत्पाद के दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई है। हिम खोया 340 रुपये प्रति किलो, बटर मिल्क 20 रुपये, हिम दही 70 रुपये, खुला दही 65 रुपये, दूध 60 रुपये, फ्लेवर वाला दूध 30 रुपये प्रतिलीटर मिलेगा। बता दें कि प्रदेशभर में मिल्क फेडरेशन के 150 से अधिक बिक्री केंद्र हैं।
हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर से संबंध रखने वाले वर्ष 2014 बैच के आईएएस अधिकारी और पूर्व जिलाधीश कुल्लू आशुतोष गर्ग को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का निजी सचिव नियुक्त किया गया है। आईएएस अधिकारी आशुतोष गर्ग के पास वर्तमान में विशेष सचिव कार्मिक का अतिरिक्त जिम्मा है। कुल्लू के उपायुक्त पद से स्थानांतरण के बाद आशुतोष गर्ग को विशेष सचिव वित्त नियुक्त किया गया था। बाद में कार्मिक विभाग भी दिया गया। इसके अलावा प्रबंध निदेशक सामान्य उद्योग निगम भी नियुक्त किए गए।
यूनिवर्सल कार्टन में वजन के हिसाब से किलो के रेट पर सेब बिकेगा। आढ़तियों को फड़ (ऑक्शन यार्ड) पर अनिवार्य तौर पर इलेक्ट्राॅनिक कांटे लगाकर पेटियों का वजन कर एवरेज के हिसाब से किलो की बोली लगा कर सेब बेचना होगा। बागवान भी बढि़या किस्म के यूनिवर्सल कार्टन में सेब की पैकिंग करें ताकि आढ़तियों और खरीदारों को नुकसान न हो। नियमों का उल्लंघन बागवान करे या आढ़ती सबके लिए कानून एक समान लागू होगा। यूनिवर्सल कार्टन को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति पर मंगलवार को बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने सचिवालय में सभी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट की। नेगी ने कहा कि जिन बागवानों के पास पिछले साल का कार्टन बचा है वह नाशपाती टेलिस्कोपिक कार्टन में पैक कर बेच सकते हैं। नाशपाती पर कोई रोक नही है। सेब के लिए यूनिवर्सल कार्टन की कोई कमी पेश नहीं आने दी जाएगी। एचपीएमसी के बिक्री केंद्रों पर यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध करवाना शुरू कर दिया गया है। निजी कंपनियों का कार्टन भी बाजार में उपलब्ध है। 99 फीसदी बागवान यूनिवर्सल कार्टन से संतुष्ट हैं सिर्फ एक फीसदी परेशान हैं। पिछले सीजन में जब किलो के हिसाब से सेब बिक्री शुरू की थी तब भी कुछ लोगों को समस्या थी, सरकार ने सख्ती की तो व्यवस्था लागू हो गई। बागवानों से ठगी के मामलों में एसआईटी कार्रवाई करती थी लेकिन इस सीजन से एसआईटी के साथ एपीएमसी को सक्रिय किया जाएगा। बागवानों की शिकायत आते ही एपीएमसी पुलिस में मुकद्दमा दर्ज करवाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बागवान भी अगर चैक से फसल का पैसा ले रहे हैं और चैक बाउंस हो जाता है तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करें। सेब सीजन में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एसडीएम और तहसीलदारों को भी कार्रवाई की शक्तियां दी जाएंगी। सेब सीजन के दौरान ग्रामीण और मुख्य सड़कें बंद न होे इसका जिम्मा संबंधित डीसी और एसपी को सौंपा गया है। पराला मंडी की सड़क बन कर तैयार हो गई है। पीडब्ल्यूडी के साथ बैठक कर हर जगह मशीनें रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हरित भारत संकल्प के तहत हिमाचल प्रदेश राजमार्ग प्राधिकरण प्रदेश में 50,000 पौधे रोप रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित के नेतृत्व में शिमला-चंडीगढ़ हाईवे किनारे एक बूटा मां के नाम पौधारोपण अभियान शुरू किया। इस दौरान फोरलेन के किनारे विभिन्न प्रजातियों के पौधे रौपे गए। उल्लेखनीय है कि एनएचएआई ने संपूर्ण पौधरोपण परियोजना के अंतर्गत अपनी फील्ड इकाई के प्रत्येक पौधे के स्थान, उसकी वृद्धि, प्रजातियों के विवरण, रखरखाव गतिविधियां, लक्ष्य और उपलब्धियों की निगरानी के लिए 'हरित पथ' नाम का एक मोबाइल एप विकसित किया है। क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता को बढ़ाने के लिए पौधारोपण अभियान शुरू किया गया है। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए एक पेड़ मां के नाम महिम शुरू की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी राजमार्गों पर पौधे लगाए जा रहे हैं।
**कल- परसों प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी **लाहौल स्पीति और किन्नौर में बारिश न होने की संभावना **प्रदेश के 10 जिलों में येलो अलर्ट जारी हिमाचल प्रदेश के कई भागों में दो दिन भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में 16 जुलाई तक मानसून की बारिश का दौर जारी रहेगा। 11 व 12 जुलाई को कई भागों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। आज राजधानी शिमला व आसपास भागों में मौसम खराब बना हुआ है। उधर, बुधवार सुबह 10:00 बजे तक राज्य में 28 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। इसके अलावा 19 बिजली ट्रांसफार्मर व 16 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हैं। मौसम विभाग ने 11 व 12 जुलाई को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, शिमला, सोलन व सिरमौर जिले के कई भागों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। लाहौल-स्पीति व किन्नौर जिले के लिए किसी तरह का अलर्ट नहीं हैं।


















































