दिल्ली मेट्रो में कोच के अंदर रील और वीडियो बनाने पर रोक लगा दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन डीएमआरसी ने मेट्रो ट्रेन के कोच के अंदर इंस्टाग्राम बनाने वाले लोगों को चेतावनी जारी कर कहा है कि यात्री मेट्रो कोच के अंदर वीडियो ना बनाएं। डीएमआरसी ने मेट्रो के अंदर इंस्टा रील्स, डांस वीडियोस बनाने पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि मंगलवार को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने अपने एक ट्वीट में लिखा है कि यात्रा करें, समस्या न पैदा करें। डीएमआरसी ने एक ग्राफिक भी सभी से साझा की है। उसमे लिखा है कि, दिल्ली मेट्रो में लोग यात्री ही बने रहें, उपद्रवी न बनें। इसके अलावा, दिल्ली मेट्रो ने इंस्टा रील्स, डांस वीडियो फिल्माने पर रोक पूरी तरह से रोक लगा दी है।
दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी को लेकर लंबे समय से जद्दोजहद थी। इसको लेकर अब एक नया अपडेट है। दिल्ली सरकार ने ‘पुरानी’ एक्साइज पॉलिसी को ही अगले 6 महीने तक के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द नई पॉलिसी तैयर करें। अगले 6 महीने तक पुरानी एक्साइज पॉलिसी ही चलेगी। इन 6 महीनों पांच दिन ड्राइ डे होंगे। इस दौरान महावीर जयंती, गुड फ्राइडे, बुद्ध पूर्णिमा, ईद उल फितर और ईद उल जुहा को ड्राइ डे रहेगा और दिल्ली में सभी शराब की दुकानें बंद रहेंगी। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी तैयार की थी, जिसको लेकर खूब विवाद हुआ। इसी पॉलिसी से जुड़े कथित घोटाले को लेकर दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इन दिनों सीबीआई की हिरासत में हैं। नई पॉलिसी को लेकर विवाद होने के बाद उस पॉलिसी को वापस लेकर एक बार फिर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू कर दी गई थी। अब एक और नई एक्साइज पॉलिसी तैयार होने तक अगले 6 महीने यही पुरानी पॉलिसी जारी रहेगी।
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर से मौसम करवट बदलेगा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने कल से अगले 2 दिन तक कुछ शहरों में ओलावृष्टि होने का येलो अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर सभी 10 जिलों को दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में आज भी बारिश होने का पूर्वानुमान है।17-18 मार्च को प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि और अंधड़ की चेतावनी दी गई है।इसी के चलते मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि प्रदेश में इन दिनों सेब की फ्लावरिंग हो रही है। फ्लावरिंग पर ओलावृष्टि नुकसानदायक होती है। गौरतलब है कि प्रदेश में इस बार सर्दियों में ही सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बीते साल नवंबर और दिसंबर में भी बहुत काम बारिश हुई है। इस साल एक जनवरी से 28 फरवरी के बीच भी बहुत काम बारिश हुई है, ऐसे में बारिश किसानों के लिए संजीवनी का काम करेगी।
लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती को 'नौकरी के बदले ज़मीन' मामले में सीबीआई कोर्ट से ज़मानत मिल गई है। कोर्ट ने सभी को 50-50 हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर ज़मानत दी है। लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य 14 के खिलाफ सीबीआई ने "नौकरी के बदले जमीन" मामले में आपराधिक षडयंत्र रचने और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। इस मामले में आज लालू प्रसाद के परिवार की दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी हुई। लालू यादव पेशी के लिए व्हीलचेयर पर सीबीआई कोर्ट पहुंचे। यह मामला लालू प्रसाद के परिवार को तोहफे में जमीन देकर या जमीन बेचने के बदले में रेलवे में कथित तौर पर नौकरी पाने से संबंधित है। यह मामला तब का है, जब लालू प्रसाद 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे।
The National Cricket Academy (NCA) is holding a camp for U-16 boys at various venues from April 17 to May 11, 2023, and players must report on April 16, 2023 (afternoon) at the camp location. The Himachal Pradesh Cricket Association (HPCA) has selected six players for the given camps: Naunihaal from Solan distt.: Mumbai venue (Team A), Anush Dhiman from Kangra distt.: Mumbai venue (Team A), Siddhak Dhillon from Bilaspur distt.: Surat venue (Team C), Aditya Kataria from Bilaspur distt.: Vijayawada venue (Team D), Akshay Vashisht from Solan distt.: Vijayawada venue (Team D) and Vaasta Garg from Hamirpur: Anantpur venue (Team E). HPCA will check the physical fitness of the above players before the camp at the HPCA Cricket Stadium in Dharamshala, and then they will be permitted to attend the camp.
हिमाचल विधानसभा का बजट सेशन मंगलवार को शुरू हो गया। सत्र के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ऑल्टो गाड़ी से विधानसभा पहुंचे। इस दौरान गाड़ियों का काफिला हमेशा की तरह उनकी ऑल्टो कार के आगे पीछे रहा। सेशन की शुरुआत के साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने अपने मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों का परिचय कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने करसोग के पूर्व विधायक दिवंगत मनसा राम का शोकोद्गार प्रस्ताव सदन में लाया। वहीं हिमाचल विधानसभा में बजट सत्र के पहले ही दिन सदन में खूब हंगामा बरपा। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने नियम 67 के तहत विधायक क्षेत्र विकास निधि रोकने को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव लाया और इस चर्चा की मांग की। इस प्रस्ताव के बाद सदन में खूब हंगामा हुआ और विपक्ष ने सदन में वॉकआउट किया। विधानसभा स्पीकर ने विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव को निरस्त किया। विपक्ष के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि विपक्ष ने काम रोको का प्रस्ताव लाया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। विधायक क्षेत्र विकास निधि रोकने के लिए काम रोको प्रस्ताव की जरूरत नहीं बल्कि इस पर चर्चा मांगी जा सकती थी।
हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले फिर से बढ़ना शुरू हो गए हैं। बीते कल आईजीएमसी शिमला में कोरोना का मामला सामने आया है जिसमें आईजीएमसी में दाखिल 75 वर्षीय कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत हो गई है। प्रदेश में करीब 100 दिनों के बाद किसी कोरोना संक्रमित की मौत हुई है। मिली जानकारी के अनुसार हमीरपुर जिला के रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग मरीज का कोविड टेस्ट किया गया था। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बताया जा रहा है कि गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया गया और सुबह के वक्त मरीज की मौत हो गई। वही, जिला शिमला में बीते कल एक नया कोरोना केस सामने आया है। इसी के साथ ही अब सक्रिय केसों की संख्या छह हो गई है। कुछ कोरोना संक्रमित के मरीज ठीक भी हुए है बीते कल स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न अस्पतालों में 414 मरीजों के कोरोना सैंपल लिए गए थे , इसमें 19 कोरोना के मामले पॉजिटिव पाए गए हैं। हिमाचल के अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 60 हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार जिला सोलन में 25, कांगड़ा नौ, हमीरपुर आठ, मंडी सात, शिमला छह, ऊना, सिरमौर, कुल्लू, किन्नौर और चंबा में एक-एक कोरोना मरीज उपचाराधीन है। बीते फरवरी महीने में जहां हिमाचल कोरोना मुक्त हो गया था तब लोग भी राहत कि साँस लेने लगे थे वहीं अब प्रदेश में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
राज्य सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा तक के सभी लड़कों व लड़कियों को निःशुल्क स्कूल वर्दी के लिए 600 रुपये प्रति विद्यार्थी प्रदान करने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश के लगभग 5.25 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दी। उन्होंने कहा कि वर्दी की यह राशि विद्यार्थी अथवा उनकी माता के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के माता-पिता का आर्थिक बोझ कम करने के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से राशि सीधे लाभार्थी को भेजने से इसमें पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सदैव तत्पर है और उन्हें लाभान्वित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए कृतसंकल्प है और इसके दृष्टिगत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चरणबद्ध ढंग से राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। इन मॉडर्न स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ ही विद्यार्थियों को उचित शैक्षणिक वातावरण और विभिन्न गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश का बजट सत्र कल से शुरू होगा। प्रदेश की 14वीं विधानसभा का दूसरा सत्र शुरू होने जा रहा है। बजट सत्र में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बतौर वित्त मंत्री 17 मार्च को अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगे। स्तर की शुरुआत मंगलवार को 11:00 बजे पूर्व मंत्री मनसा राम के देहांत पर शोकोद्गार से होगी। इसके बाद प्रश्नकाल होगा। प्रश्नकाल के शुरू होते ही विपक्ष सरकार को घेरने के लिए सारा काम रोककर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा मांगने की रणनीति बना सकता है। वहीं विपक्ष की नज़र इस बार अर्थीक संकट से गुज़र रही प्रदेश सरकार के बजट पर रहेगी। बजट में राजस्व और राजकोषीय घाटा कितना होगा इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। वहीं इसी कड़ी में भाजपा आज विलीज पार्क में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की उपस्थिति में एक बैठक का आयोजन करेगी। भाजपा सत्र के शुरुवाती प्रश्नकाल में ही काम रोको प्रस्ताव पर खड़ी हो सकती है। भाजपा का मुख्य एजेंडा हिमाचल प्रदेश में सैकड़ों संस्थानों को डीनोटिफाई करने के बारे में हो सकता है।
घरेलू शेयर बाजार की चाल आज प्री-ओपनिंग में थोड़ी लड़खड़ाती दिखाई दी थी पर बाजार खुलते समय निफ्टी हरे निशान में लौट आया। सेंसेक्स की गिरावट भी कम हुई और ये 100 अंक गिरकर ही खुला है। अमेरिकी बाजारों में सिलिकॉन वैली बैंक संकट को लेकर जो उथलपुथल मची है वो भारतीय शेयर बाजार पर बहुत ज्यादा नकारात्म असर फिलहाल तो नहीं डाल रही है, बीएसई का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स आज 101.36 अंक या 0.17 फीसदी की गिरावट के बाद 59,033.77 पर खुला है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी 9 अंक की मामूली बढ़त के बाद 17,421.90 पर खुलने में कामयाब रहा है। सेंसेक्स के 30 में से केवल 3 ही शेयर गिरावट के सात कारोबार कर रहे हैं और 27 शेयरों में तेजी देखी जा रही है। वहीं निफ्टी के 50 में से 47 शेयरों में उछाल बना हुआ है और 3 शेयरों में कमजोरी देखी जा रही है।
केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग का विरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि ऐसा करना भारत की सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक व्यवस्था के खिलाफ होगा। इसमें कई तरह की कानूनी अड़चनें भी आएंगी। इस साल 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक शादी के मसले पर केंद्र को नोटिस जारी किया था। साथ ही अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं को अपने पास ट्रांसफर करा लिया था। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (13 मार्च) को होने वाली सुनवाई से पहले केंद्र ने सभी 15 याचिकाओं पर जवाब दाखिल किया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने कहा है कि भारत में परिवार की अवधारणा पति-पत्नी और उन दोनों की संतानें हैं। समलैंगिक विवाह इस सामाजिक धारणा के खिलाफ है। संसद से पारित विवाह कानून और अलग-अलग धर्मों की परंपराएं इस तरह की शादी को स्वीकार नहीं करतीं।
सिक्किम में 900 टूरिस्ट शनिवार शाम को भारी स्नोफॉल के कारण फंस गए। ये सभी नाथुला और त्सोमगो झील से गंगटोक लौट रहे थे। सिक्किम पुलिस ने बताया कि ये टूरिस्ट 89 वाहनों में सवार हैं। इनकी मदद के लिए सेना और पुलिस पहुंच गई है। अभी तक 15 वाहनों को निकाला गया है। जहां ये वाहन फंसे हैं वहां से गंगटोक की दूरी 42 किलोमीटर है। टूरिस्ट को रात में सेना के कैंप में ठहराने की व्यवस्था की जा रही है। बर्फ को धीरे-धीरे साफ किया जा रहा है और सैलानियों को निकाला जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि कुछ सैलानियों को पास के सेना के शिविरों में रखा जा सकता है। पूर्वी सिक्किम में भारी बर्फबारी के चलते प्रशासन ने कुछ दिन पहले ही नाथुला और त्सोमगो झील के लिए पासी जारी करना बंद कर दिया था।
हिमाचल प्रदेश फिर से कोरोना के मामलों में वृद्धि होने लगी है। मौजूदा समय में प्रदेश में कोरोना के 50 एक्टिव केस हैं। इनमें 23 अकेले सोलन जिला के हैं। यह पुरे प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं। वहीं बाकि जिला में अभी एक्टिव केस सिंगल डिजिट में हैं। फ़िलहाल चंबा, बिलासपुर और लाहौल स्पीति में कोरोना का एक भी केस नहीं है। हमीरपुर में 4, कांगड़ा में 6, किन्नौर, उना और कुल्लू में 1-1, मंडी में 5, शिमला में 8 कोरोना के एक्टिव केस हैं। कोरोना वायरस से सोलन जिले में आज तक 314 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले 24 घंटे में भी जिले के धर्मपुर ब्लॉक में 4 नए पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। वहीं अभी जिले में कोरोना टेस्ट के लिए सैंपलिंग भी कम हो रही है। कोरोना से बचाव के लिए लगाई जा रही बूस्टर डोज भी इन दिनों सोलन में खत्म है।
As per the Government of India's (GOI) Ease of Living Reforms, the Himachal government will make various citizen-related services time-bound, with a more transparent systems and procedures. This is a new initiative taken by the newly formed Sukhu-led Congress government in order to make people's lives easier and government processes more efficient. It will simplify the registration process for necessary amenities (ration card, driver's license, electricity, water connection, and so on) and other welfare schemes. The initiative may provide some relief to locals by reducing corruption and making government institutions more trustworthy in the eyes of the general public.
Recent sightings of stubble burning have been reported in Hoshiarpur region of Punjab. Stubble burning is a recurring annual problem in the northern Indian states of Punjab, Haryana and UP, which are major wheat and paddy producers. As per the ICAR data, these three states generate around 23 million tonnes of crop residue every year. This occurrence is not only a major contributor to air pollution and climate change but also has negative impacts on soil health, agriculture productivity, and human health. Moreover, the burning of crop residues reduces soil fertility and microbial activity, and leads to soil erosion. This, in turn, affects agricultural productivity and the livelihoods of farmers. Additionally, the smoke from burning crop residues reduces visibility on roads, leading to accidents and other hazards. To address the problem of stubble burning, the Indian government and state govts has taken several measures such as 'PM-Ash scheme', providing financial incentives to farmers, setting up of 'happy seeders' and educating farmers about the harmful effects of stubble burning. While these measures have helped to some extent in reducing stubble burning, much more is required to be done to address the issue. It is imperative for the government to take more stringent actions and engage in better implementation of policies to curb this dangerous practice and promote sustainable agricultural practices. The health and well-being of millions of Indians depend on it, and the future of the country's agriculture sector is at stake.
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला के परवाणू में ट्रैफिक चेकिंग के दौरान पुलिस ने कसौली के तीन युवकों से 3.32 ग्राम चिट्टा बरामद किया है।वहीं पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस थाना परवाणू की टीम जब ट्रैफिक चैकिंग पर थी तो सूरज, हरप्रीत, गौरव शर्मा कसौली निवासी से कुल 3.32 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। पुलिस के अभियान के दौरान आए दिन चिट्टा, चरस और अवैध शराब के मामले दिन- प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। SP सोलन वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि पुलिस ने जिला में नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया है।वहीं नशे के खिलाफ अभियान में जगह-जगह नाके लगाकर चेकिंग की जा रही है। इसी अभियान के तहत परवाणू में तीन लोगों को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है।पुलिस थाना परवाणू में मादक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
भारत की वो पहली महिला जो समाज की बंदिशों को पीछे छोड़ अपने सपनों को छूने में कामयाब हुई, वो महिला जो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए मिसाल बनी, वो महिला जिन्हे भारत की पहली महिला वकील बनने का गौरव प्राप्त है l आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी महिला की कहानी जिन्हे आज भी महिलाओं के लिए एक आदर्श के तौर पर याद किया जाता है l भारत की पहली महिला वकील,(वास्तव में, किसी भी ब्रिटिश विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रीय) कॉर्नेलिया सोराबजी l कॉर्नेलिया सोराबजी ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद ऑक्सपोर्ड से वकालत की पढ़ाई की थी l खास बात तो ये है कि आजादी के पहले जब कॉर्नेलिया ने वकालत की उस समय भारत में किसी भी महिला का उच्च शिक्षा में पढ़ना इतना आसान नहीं था। लेकिन कॉर्लेनिया ने वकालत की पढ़ाई कर सारे बंधनों को तोड़ा। जन्म व शुरूआती जीवन कार्नेलिया सोराबजी का जन्म 15 नवम्बर 1866 को नासिक के एक पारसी परिवार में हुआ था। सोराबजी समाज सुधारक होने के साथ-साथ एक लेखिका भी थीं। कार्नेलिया के लिए कहा जाता है कि इनकी वजह से देश में महिलाओं को वकालत का अधिकार मिला था। 1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गयीं और 1894 में भारत लौटीं. उस समय समाज में महिलाएं मुखर नहीं थीं और न ही महिलाओं को वकालत का अधिकार था, मगर कॉर्नेलिया में वकील बनने के जूनून को कोई नहीं दबा पाया l सोराबजी के पिता एक मिशनरी थे, कहते है कि बंबई विविद्यालय को एक महिला को डिग्री कार्यक्रम में दाखिला देने के लिए मनाने में उनके पिता की अहम भूमिका थी l सोराबजी की मां एक प्रभावशाली महिला थीं और उन्होंने कई सामाजिक कार्यों में हिस्सा लिया था l उन्होंने पुणे में कई गर्ल्स स्कूल भी खोले l सोराबजी के कई शैक्षिक और करियर संबंधी फैसलों पर उनकी मां का प्रभाव रहा l सोराबजी का छह जुलाई 1954 को देहांत हो गया. अपने अधिकार के लिए किया संघर्ष परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक पाने के बावजूद उन्हें महिला होने के नाते स्कॉलरशिप से दूर रखा गया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके लिए ऑक्सफोर्ड जाकर पढ़ना मुश्किलों भरा था। तब कुछ अंग्रेज महिलाओं की मदद से उनके लिए फंड का इंतजाम किया गया और कॉर्नेलिया वकालत की पढाई के ऑक्सफोर्ड पहुंची। 1892 में कॉर्नेलिया ने बैचलर ऑफ सिविल लॉ की परीक्षा पास करने वाली पहली महिला बनीं। लेकिन कॉलेज ने उन्हें डिग्री देने से मना कर दिया। क्योंकि उस काल में महिलाओं को वकालत के लिए रजिस्टर करने और प्रेक्टिस की इजाजत नहीं थी। लेकिन कॉर्नेलिया ने हार नही मानी। भारत लौटकर वापस आने के बाद वो महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए मदद करने लगीं। काफी अथक परिश्रम के बाद कार्नेलिया को सफलता हाथ लगीं। वकालत के दौरान कार्नेलिया ने 600 से ज्यादा महिलाओं को कानूनी सलाह दी। 1922 में लंदन बार ने महिलाओं को कानून की प्रैक्टिस करने की आज्ञा दी। तब कार्नेलिया को कानून की डिग्री हासिल हुई। कार्नेलिया कलकत्ता हाईकोर्ट में बैरिस्टर बन कानून की प्रैक्टिस करने वाली पहली महिला बनीं। कानूनी करियर 1894 में भारत लौटने पर, सोराबजी ने पर्दानाशीन महिलाओं की ओर से सामाजिक और सलाहकार कार्य में शामिल हो गयीं, जिन्हें बाहर पुरुष दुनिया के साथ संवाद करने से मना किया गया था, कई मामलों में इन महिलाओं की काफी संपत्ति होती थी, लेकिन उनकी रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी विशेषज्ञता तक पहुंच नहीं थी। सोराबजी को काठियावाड़ और इंदौर के शासकों के ब्रिटिश एजेंटों से पर्दानशीन की ओर से अनुरोध करने के लिए विशेष अनुमति दी गई थी, लेकिन वह एक महिला के तौर पर अदालत में उनकी रक्षा करने में असमर्थ थीं, उन्हें भारतीय कानूनी व्यवस्था में पेशेवर ओहदा प्राप्त नहीं था। इस स्थिति का समाधान करने की उम्मीद में, सोराबजी ने 1897 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी की एलएलबी परीक्षा के लिए खुद को प्रस्तुत किया और 1899 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वकील की परीक्षा में भाग लिया। फिर भी, उनकी सफलताओं के बावजूद, सोरबजी को वकील के तौर पर मान्यता नहीं मिली l एक लम्बी जद्दोजहद के बाद 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून को शिथिल कर उनके लिए भी यह पेशा खोल दिया गया। 1929 में कार्नेलिया हाईकोर्ट की वरिष्ठ वकील के तौर पर सेवानिवृत्त हुयीं पर उसके बाद महिलाओं में इतनी जागृति आ चुकी थी कि वे वकालत को एक पेशे के तौर पर अपनाकर अपनी आवाज मुखर करने लगी थीं। यद्यपि 1954 में कार्नेलिया का देहावसान हो गया, पर आज भी उनका नाम वकालत जैसे जटिल और प्रतिष्ठित पेशे में महिलाओं की बुनियाद है। लंदन में है प्रतिमा 2012 में, लंदन के लिंकन इन में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया था l
एक ऐसी राजकुमारी जो देश को आज़ाद करवाने के लिए तपस्वी बन गयी, एक प्रख्यात गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता बनी, महात्मा गाँधी से प्रभावित हो कर आज़ादी के आंदोलन से जुडी, जेल गई। आज़ादी के बाद हिमाचल से सांसद चुनी गई और दस साल तक स्वास्थ्य मंत्री रही। देश की पहली महिला कैबिनेट मंत्री होने का सम्मान भी उन्हें प्राप्त है। वो महिला थी राजकुमारी अमृत कौर। ये बहुत कम लोग जानते है की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने में राजकुमारी अमृत कौर का बड़ा हाथ है। शिमला के समर हिल में एक रेस्ट हाउस है, राजकुमारी अमृत कौर गेस्ट हाउस जो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के स्टाफ के लिए है। देशभर में सेवाएं दे रहे एम्स के डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ यहाँ आकर छुट्टियां बिता सकते है, वो भी निशुल्क। दरअसल, ये ईमारत 'मैनरविल' स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर का पैतृक आवास थी। इसे अमृत कौर ने एम्स को डोनेट किया था। आज निसंदेह एम्स देश का सबसे बड़ा और सबसे विश्वसनीय स्वास्थ्य संस्थान है। इस एम्स की कल्पना को मूर्त रूप देने में राजकुमारी अमृत कौर का बड़ा योगदान रहा रहा है। उनके स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए ही एम्स बना, वे एम्स की पहली अध्यक्ष भी बनाई गई। उस दौर में देश नया - नया आज़ाद हुआ था और आर्थिक तौर पर भी पिछड़ा हुआ था। तब एम्स की स्थापना के लिए राजकुमारी अमृत कौर ने न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम जर्मनी, स्वीडन और अमेरिका जैसे देशों से फंडिंग का इंतजाम भी किया था। एम्स की वेबसाइट पर भी इसके निर्माण का श्रेय तीन लोगों को दिया गया है, पहले जवाहरलाल नेहरू, दूसरी राजकुमारी अमृत कौर और तीसरे एक भारतीय सिविल सेवक सर जोसेफ भोरे। एम्स की ऑफिसियल वेबसाइट पर लिखा है कि भारत को स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक तकनीकों से परिपूर्ण देश बनाना पंडित जवाहरलाल नेहरू का सपना था और आजादी के तुरंत बाद उन्होंने इसे हासिल करने के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया। नेहरू का सपना था दक्षिण पूर्व एशिया में एक ऐसा केंद्र स्थापित किया जाए जो चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को गति प्रदान करे और इस सपने को पूरा करने में उनका साथ दिया उनकी स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने। राजपरिवार में जन्मी, करीब 17 साल रही महात्मा गांधी की सेक्रेटरी लखनऊ, 2 फरवरी 1889, पंजाब के कपूरथला राज्य के राजसी परिवार से ताल्लुख रखने वाले राजा हरनाम सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया, नाम रखा गया अमृत कौर। बचपन से ही बेहद प्रतिभावान, इंग्लैंड के डोरसेट में स्थिति शेरबोर्न स्कूल फॉर गर्ल्स से स्कूली पढ़ाई पूरी की। किताबों के साथ -साथ खेल के मैदान में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। हॉकी से लेकर क्रिकेट तक खेला। स्कूली शिक्षा पूरी हुई तो परिवार ने उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफ़ोर्ड भेज दिया। शिक्षा पूरी कर 1918 में वतन वापस लौटी और इसके बाद हुआ 1919 का जलियांवाला बाग़ हत्याकांड। इस हत्याकांड ने राजकुमारी अमृत कौर को झकझोर कर रख दिया और उन्होंने निश्चय कर लिया कि देश की आज़ादी और उत्थान के लिए कुछ करना है, सो सियासत का रास्ते पर निकल पड़ी। राजकुमारी अमृत कौर महात्मा गाँधी से बेहद प्रभावित थी। उस समय उनके पिता हरनाम सिंह से मिलने गोपालकृष्ण गोखले सहित कई बड़े नेता आते थे। उनके ज़रिए ही राजकुमारी अमृत कौर को महात्मा गांधी के बारे में अधिक जानकारी मिली। हालांकि उनके माता-पिता नहीं चाहते थे कि वो आज़ादी की लड़ाई में भाग लें, राजकुमारी अमृत कौर तो ठान चुकी थी। वे निरंतर महात्मा गांधी को खत लिखती रही। 1927 में मार्गरेट कजिन्स के साथ मिलकर उन्होंने ऑल इंडिया विमेंस कांफ्रेंस की शुरुआत की और बाद में इसकी प्रेसिडेंट भी बनीं। इसी दौरान एक दिन अचानक राजकुमारी अमृत कौर को एक खत मिला, ये खत लिखा था महात्मा गांधी ने। उस खत में महात्मा गांधी ने लिखा,'मैं एक ऐसी महिला की तलाश में हूं जिसे अपने ध्येय का भान हो। क्या तुम वो महिला हो, क्या तुम वो बन सकती हो? ' बस फिर क्या था राजकुमारी अमृत कौर आज़ादी की लड़ाई से जुड़ गईं। इस दौरान दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने की वजह से जेल भी गईं। वे करीब 17 सालों तक महात्मा गांधी की सेक्रेटरी रही। महात्मा गांधी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने भौतिक जीवन की सभी सुख-सुविधाओं को छोड़ दिया और तपस्वी का जीवन अपना लिया। ब्रिटिश हुकूमत ने लगाया था राजद्रोह का आरोप अमृत कौर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रतिनिधि के तौर पर सन् 1937 में पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के बन्नू गईं। ब्रिटिश सरकार को यह बात नागवार गुजरी और राजद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। उन्होंने सभी को मताधिकार दिए जाने की भी वकालत की और भारतीय मताधिकार व संवैधानिक सुधार के लिए गठित ‘लोथियन समिति’ तथा ब्रिटिश पार्लियामेंट की संवैधानिक सुधारों के लिए बनी संयुक्त चयन समिति के सामने भी अपना पक्ष रखा। अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की सह-संस्थापक महिलाओं की दयनीय स्थिति को देखते हुए 1927 में ‘अखिल भारतीय महिला सम्मेलन’ की स्थापना की गई। कौर इसकी सह-संस्थापक थीं। वह 1930 में इसकी सचिव और 1933 में अध्यक्ष बनीं। उन्होंने ‘ऑल इंडिया विमेंस एजुकेशन फंड एसोसिएशन’ के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और नई दिल्ली के ‘लेडी इर्विन कॉलेज’ की कार्यकारी समिति की सदस्य रहीं। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘शिक्षा सलाहकार बोर्ड’ का सदस्य भी बनाया, जिससे उन्होंने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 1945 में लंदन और 1946 में पेरिस के यूनेस्को सम्मेलन में भारतीय सदस्य के रूप में भेजा गया था। वह ‘अखिल भारतीय बुनकर संघ’ के न्यासी बोर्ड की सदस्य भी रहीं। कौर 14 साल तक इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की चेयरपर्सन भी रहीं। देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनी कौर जब देश आज़ाद हुआ, तब उन्होंने हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। राजकुमारी अमृत कौर सिर्फ चुनाव ही नहीं जीतीं, बल्कि आज़ाद भारत की पहली कैबिनेट में हेल्थ मिनिस्टर भी बनीं। वे लगातार दस सालों तक इस पद पर बनी रहीं। वर्ल्ड हेल्थ असेम्बली की प्रेसिडेंट भी बनीं। इससे पहले कोई भी महिला इस पद तक नहीं पहुंची थी। यही नहीं इस पद पर पहुंचने वाली वो एशिया से पहली व्यक्ति थीं। स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई संस्थान शुरू किए, जैसे इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर, ट्यूबरक्लोसिस एसोसियेशन ऑफ इंडिया, राजकुमारी अमृत कौर कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, और सेंट्रल लेप्रोसी एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट। इन सभी के अलावा नई दिल्ली में एम्स की स्थापना में अमृत कौर ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। टाइम मैगज़ीन ने दी वुमन ऑफ द ईयर लिस्ट में जगह दुनिया की मशहूर टाइम मैगज़ीन ने 2020 में बेटे 100 सालों के लिए वुमन ऑफ द ईयर की लिस्ट ज़ारी की थी। भारत से इस लिस्ट में दो नाम हैं, एक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिन्हें साल 1976 के लिए इस लिस्ट में रखा गया। लिस्ट में शामिल दूसरा नाम है राजकुमारी अमृत कौर का, जिन्हें साल 1947 के लिए इस लिस्ट में जगह दी गई है।
A day after the Central Bureau of Investigation questioned former Bihar Chief Minister Rabri Devi at her home in Patna in connection with an alleged land-for-jobs scam, the probe agency today reached her daughter Misa Bharti's Pandara Roadhouse to question former union railway minister Lalu Prasad Yadav in the same case. The CBI case, which names the Yadav couple and their daughters Misa and Hema, among others, is based on accusations that Mr. Yadav and his family members bought land at cheap rates in exchange for jobs during his tenure as Union Railway Minister from 2004 to 2009. Besides the veteran politician, his wife, and his daughters, the FIR, registered in May 2022, names 12 people who allegedly got jobs in exchange for land. In July last year, Mr. Yadav's aide and former Officer on Special Duty (OSD) Bhola Yadav was arrested by the CBI in the case.
Five people were killed and four were injured today after a four-wheeler ran over them in Himachal Pradesh's Solan district. The accident took place near a petrol pump in Dharampur. As per the eyewitnesses, the injured persons were immediately given primary treatment before they were rushed to the hospital. "The four-wheeler rammed into a queue of nine persons, leaving five dead and four injured," Additional Superintendent of Police (ASP) Ashok Kumar Rana said, adding that two persons, gravely injured, have been referred to the Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGIMER) in Chandigarh. "The deceased persons have been identified as Guddu Yadav, Raja, Nippu, Moti Lal Yadav, Sunny Deval," police said.
प्रदेश में भाजपा जिला स्तरीय आक्रोश रैलियों का आयोजन कर रही है। उसी क्रम में ऊना जिला में 11 मार्च को आक्रोश रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रैली में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री प्रो प्रेम कुमार धूमल भाग लेंगे। प्रो प्रेम कुमार धूमल के साथ इस कार्यक्रम में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती, राजेश ठाकुर, राम कुमार, पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर और बलबीर चौधरी भी विशेष रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में सभी 2022 के प्रत्याशी, जिला अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, जिला एवं मंडल के महामंत्री एवं मोर्चे प्रकोष्टो के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता भी भाग लेगें।
सोमवार को राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कैबिनटे की बैठक का आयोजन किया गया। कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह के आलावा सभी मंत्री मौजूद रहे। बैठक में वर्ष 2023-24 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी प्रदान की गयी। नई आबकारी नीति के तहत खुदरा आबकारी दुकानों की नीलामी-सह-निविदा को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसका उद्देश्य सरकारी राजस्व में पर्याप्त वृद्धि, शराब के मूल्य में कमी तथा पड़ोसी राज्यों से इसकी तस्करी पर अंकुश लगाना है। शराब के ठेकों पर 5 लीटर क्षमता की केग बीयर बेची जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा। बागवानों को लाभाविन्त करने के लिए फलों के सम्मिश्रण से शराब की भी एक नई वैरायटी शुरू करने का फैसला लिया गया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एल-3 एल-4 एल-5 लाइसेंस धारक होटल मालिकों को मिनी बार चलाने की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविदर सिंह सुक्खू ने शिमला के पीटरहॉफ में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल समारोह में विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज को दिशा देने में महिलाओं का सदैव ही उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाएं माता, बेटी, पत्नी तथा बहन के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष सरोजनी नायडू से लेकर देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने महिलाओं को नेतृत्व करने की प्रेरणा दी। राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के सशक्त नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभा पाटिल देश की प्रथम राष्ट्रपति बनीं और आज द्रौपदी मुर्मु इस पद को सुशोभित कर रही हैं। यह सभी विभूतियां महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के सशक्तिकरण से आगे बढ़कर उनके भीतर छिपी प्रतिभा को सम्मान देने का अवसर है। किसी भी कालखंड में सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं का सर्वाधिक योगदान रहा है। सीएम सुक्खू ने भारतीय समाज को जीवंत रखने में भी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य में महिलाओं में आत्मसम्मान की भावना विकसित करने पर केंद्रित विभिन्न योजनाएं आरम्भ की जाएंगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है और हमारे समाज में महिलाओं को उचित सम्मान की समृद्ध परम्परा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर हिमाचल प्रदेश महिला विकास प्रोत्साहन पुरस्कार की राशि 21 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपए तथा जिला स्तरीय पुरस्कारों की राशि पांच हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने सुख-आश्रय कोष की वेबसाइट तथा हिम-पूरक पोषाहार पुष्टि एप का विधिवत शुभारंभ भी किया।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के मणिकर्ण में रात को हुए हुड़दंग के बाद अब स्थिति शांतिपूर्ण है और कानून व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। यह बात मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में मणिकर्ण झड़प पर पर कही। ख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा ये मामला धार्मिक व राजनीतिक नही है। बल्कि कुछ युवा साथी आपस में भिड़े उसके बाद सोशल मीडिया में कुछ चीजें वायरल हुई और माहौल तनावपूर्ण बन गया। उन्होंने कहा कि बीती रात को, स्थानीय लोगों एवं श्रद्धालुओं के बीच कहासुनी के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है। सीएम ने कहा कि पंजाब एवं हिमाचल का आपसी भाईचारा है इसलिए सरकार पंजाब के श्रद्धालुओं की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह गंभीर है और हुडदंगियो पर भी सरकार नजर बनाएं हुए हैं। गौरतलब है कि पर्यटन नगरी मनाली के ग्राीन टैक्स बैरियर के बाद रविवार रात करीब 12:00 बजे मणिकर्ण में पंजाब से आए पर्यटकों ने खूब हुड़दंग मचाया है। इन लोगों ने स्थानीय लोगों से मारपीट की और पथराव व डंडों से 10 से अधिक वाहनों को नुकसान पहुंचाया है। गाड़ियों के शीशे और लाइटें तोड़ दी हैं। इसमें कई पर्यटकों के वाहन भी शामिल है। घटना में पांच से छह लोगों को हल्की चोटें आई है। घटना की सूचना के बाद रात को ही अतिरिक्त पुलिस बल मणिकर्ण रवाना हो गया था। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है।
प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में तैनात मुख्य शिक्षकों को पदोन्नति पर दी जाने वाली इंक्रीमेंट शीघ्र बहाल करने के राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने आवाज बुलंद की है। संघ का कहना है कि मुख्य शिक्षकों को पदोन्नति पर दी जाने वाली इंक्रीमेंट जो कि जेबीटी शिक्षक को 25-25 साल की सेवा उपरांत मुख्य शिक्षक बनने पर मिलती थी, जिसे जनवरी 2022 को लागू वेतनमान में छीना गया है, उसको तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाए। इसके अलावा जेबीटी शिक्षकों के वेतनमान में भारी विसंगति है व राइडर पर रहे शिक्षकों पर कोई स्पष्ट निर्देश न होने के कारण 2016 के उपरांत नियमित जेबीटी शिक्षक नए वेतनमान के लाभ से वंचित रह गए हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश शर्मा का कहना है कि शीघ्र ही संघ का प्रतिनिधिमंडल प्राथमिक शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर मंत्री रोहित ठाकुर से मिलेगा व उन्हें अपनी मांगों से अवगत करवाएगा। इसके अलावा शिक्षा निदेशक को भी मांग पत्र प्रदान किया जाएगा। जेबीटी से एलटी की तर्ज पर अन्य सी एंड वी के पदों पर भी योग्यता पूरी करने वाले जेबीटी शिक्षकों को पदोन्नति लाभ प्रदान करने की संघ मांग करता है तथा इन सभी में जेबीटी से तुरंत पदोन्नति की जाए।
हिमाचल प्रदेश के जेबीटी प्रशिक्षुओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।जेबीटी प्रशिक्षु प्रदेश के अलग-अलग कोनों में प्रदर्शन कर रहे है। दरससल प्रदेश के जिन जिलों में पहली बार काउंसिलिंग के दौरान जेबीटी के पद खाली रह गए हैं वहां पर दूसरे राउंड में काउंसिलिंग शुरू कर दी गई है, लेकिन एक बार फिर से इस भर्ती का विरोध शुरू हो गया है। कारण यह है कि हमीरपुर, शिमला सहित अन्य जिलों में भर्ती के लिए जो नोटिफिकेशन जारी हुई है उसके मुताबिक बीएड को भी इसमें पात्र माना गया है।यानी जेबीटी के साथ बीएड वाले अभ्यर्थी भी इस काउंसिलिंग में भाग ले सकते हैं। ऐसे में एक बार फिर पूरे प्रदेश में इसका विरोध शुरू हो गया है और जेबीटी प्रशिक्षु इस नोटिफिकेशन के विरोध में खड़े हो गए हैं। जेबीटी प्रशिक्षुओं का कहना है कि अगर सरकार निर्णय को वापस नहीं लेती है तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा। जेबीटी प्रशिक्षुओं ने बताया कि वर्तमान में चल रही जेबीटी भर्ती में बीएड को शामिल करने का निर्णय सरकार ने गलत तरीके से लिया है। यह निर्णय जेबीटी के अधिकारों का हनन करने के लिए लिया गया है। पिछले पांच साल से जेबीटी प्रशिक्षु शोषण का शिकार हो रहे हैं। प्रदेश में करीब 40 हजार जेबीटी प्रशिक्षित हैं और वर्तमान में 5000 प्रशिक्षु जेबीटी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का नकारात्मक रवैया जेबीटी प्रशिक्षुओं के लिए हानिकारक है। प्रशिक्षुओं का कहना है कि सरकार ने बीएड को जेबीटी के पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र माना है, इस निर्णय को सरकार वापस ले। अगर सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती है तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया जाएगा और साथ ही पूरे प्रदेश में कक्षाओं का बहिष्कार कर प्रशिक्षण संस्थान बंद कर दिए जाएंगे।
हिमाचल में चुनाव के दौरान पुरानी पेंशन बहाली के साथ साथ आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति का मामला खूब गरमाया था। जयराम सरकार ने इन कर्मचारियों की मांग पूरी करने के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया, कई दफा इन कर्मचारियों का डाटा मंगवाया, न जाने कितनी बैठकें की मगर आउटसोर्स कर्मचारियों का दामन खाली ही रहा। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पालिसी बनाने में पूर्व सरकार पूरी तरह नाकामयाब रही थी। अब इन कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई सरकार इनके लिए कुछ करेगी और इनका भविष्य भी कुछ सुरक्षित होगा। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अनुसार नई सरकार के कार्यकाल में अब तक आउटसोर्स कर्मचारियों को सिर्फ निष्कासन ही मिला है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग धर्मपुर मंडल में कार्यरत 169 आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। इन आउटसोर्स कर्मचारियों को पूर्व सरकार ने रखा था। बीते चार पांच साल से सेवाएं दे रहे थे। हैरानी की बात है कि निकालने से पहले उन्हें नोटिस भी नहीं दिए गए हैं। सिर्फ फ़ोन कर बताया गया कि उनका अनुबंध खत्म है और सरकार से कोई आदेश नहीं आए हैं कि उनका एग्रीमेंट आगे बढ़ाना है। ठेकेदार का टेंडर 31 दिसंबर 2022 को समाप्त हो गया है। ऐसा ही कुछ लोक निर्माण विभाग में भी किया गया। अचानक इतने लोगों की नौकरी चले जाने के बाद प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारी घबराए हुए है। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष भी ये मसला उठाया है। आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का इस तरह निष्कासन अन्याय है। उन्होंने कहा कि नीति बनने तक किसी भी कर्मचारी को इस तरह नौकरी से नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग कि है कि इन सभी कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति बनाई जाए। प्रदेश में करीब 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारी: हिमाचल प्रदेश के करीब 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को उम्मीद है कि प्रदेश सरकार उनके लिए कोई सशक्त नीति बनाएगी। प्रदेश के अधिकांश सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इनके लिए आज तक किसी सरकार ने कोई नीति का प्रावधान नहीं किया है। बता दें कि ये आउटसोर्स कर्मचारी वे कर्मचारी हैं जिनको सरकारी विभागों में कॉन्ट्रैक्ट आधार पर रखा जाता है। यानी कि ये सरकारी विभाग में तो हैं पर सरकारी नौकरी में नहीं हैं। इनकी नियुक्तियां या तो ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है या किसी निजी कंपनी के माध्यम से। ये कर्मचारी काम तो सरकार का करते है मगर इन्हें वेतन ठेकेदार या कंपनी द्वारा मिलता है। न तो इन्हें सरकारी कर्मचारी होने का कोई लाभ प्राप्त होता है न ही एक स्थिर नौकरी। इन्हें जब चाहे नौकरी से निकाला जा सकता है। सरकार द्वारा वेतन तो दिया जाता है मगर ठेकेदार की कमिशन के बाद इन तक तक पहुंच पाता है। शोषण कम करने को सरकार बनाए ठोस नीति: महासंघ हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा गया है लेकिन पिछली सरकार द्वारा इनके नियमतिकरण के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई है और न ही इनके शोषण को कम करने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। नामात्र वेतन पे भी इनसे अधिक से अधिक काम लिया जाता हैं।
प्रदेश में अभी नई सरकार को आए कुछ समय ही बीता है मगर अभी से प्रदेश के कर्मचारियों ने सरकार के आगे अपनी मांगो का भंडार लगा दिया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि पिछली सरकार जो न कर पाई वो नई सरकार कर दिखाएगी। आशावान कर्मचारियों की लम्बी फेहरिस्त में एनएचएम कर्मचारी भी शामिल है।राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार एनएचएम कर्मचारी विभिन्न स्वास्थ्य समितियों के तहत 24 वर्ष से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी सरकार द्वारा इन कर्मचारियों के लिए नियमितिकरण की कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है। राज्य स्वास्थ्य समिति (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) अनुबंध कर्मचारी संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष सतीश कुमार एवं प्रदेश प्रेस सचिव राज महाजन ने संयुक्त बयान में बताया कि हाल ही में प्रदेश को स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्तर पर क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम में बेहतर कार्य करने के लिए प्रथम पुरस्कार मिला है। इसके लिए सरकार एवं विभाग दोनों ही बधाई के पात्र हैं, लेकिन इस बेहतर परिणाम के लिए सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग में ब्लाक स्तर, जिला स्तर, प्रदेश स्तर पर एवं हर स्वास्थ्य संस्थान में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करने वाले हर उस कर्मचारी का योगदान है, जो पिछले 24 वर्षों से अनुबंध पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत अपना कार्य पूरी निष्ठा एवं लगन से कर रहा है। सतीश कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत रहे इन कर्मचारियों में से लगभग चार कर्मचारियों की नौकरी के दौरान मौत हो चुकी है तथा लगभग 56 लोग बिना किसी बैनेफिट के लिए रिटायर हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों द्वारा क्षय रोग, एचआईवी एड्स, शिशु स्वास्थ्य, कोविड-19 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के तहत अपना योगदान दिया जा रहा है। किसी सरकार ने न तो आज तक इन कर्मचारियों का नियमितीकरण किया और न ही इन्हें रेगुलर स्केल का लाभ दिया जा रहा है। केंद्र के कर्मचारी है तो सातवां वेतन आयोग क्यों नहीं मिला : राज्य स्वास्थ्य समिति ( नेशनल हेल्थ मिशन ) अनुबंध कर्मचारी महासंघ के उप प्रधान डॉ अनुराग शर्मा का कहना है कि सरकार हमारी मांगें ये कह कर टाल देती है कि हम केंद्र सरकार के कर्मचारी है। पर अगर हम केंद्र सरकार के कर्मचारी है तो हमें सातवां वेतन आयोग मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं है। हमें भले ही केंद्र प्रायोजित स्कीमों के अंतर्गत नियुक्ति दी गई हो मगर इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सिर्फ पैसा देता है। स्वास्थ्य राज्य का मसला होता है। हमें राज्य स्वास्थ्य समिति के तहत रखा गया था जिसके चेयरमैन मुख्य सचिव है। हमें राज्य सरकार के लिए नियुक्त किया गया है और हम काम भी राज्य सरकार का करते है न कि केंद्र सरकार के लिए, तो मसले भी राज्य सरकार को ही हल करने होंगे।
होली से पहले पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में भाजपा ने भगवा लहराया है। त्रिपुरा और नागालैंड में सत्ताधारी गठबंधन ही जीता है और मेघालय में सत्ता के लिए पुराने साथी फिर गठबंधन को साथ आ गए हैं। निसंदेह ये भाजपा के लिए बड़ी जीत है। दरअसल 'पूर्वोत्तर के अंतर्गत आठ राज्य आते हैं। इनमें त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, असम, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। 2014 तक इनमें से ज्यादातर राज्यों में या तो कांग्रेस या फिर लेफ्ट का राज हुआ करता था। एक दौर ऐसा भी था जब बीजेपी को हिंदी भाषी पार्टी बोलकर ही खारिज कर दिया जाता था। इसके बाद कहानी बदलने लगी। एक-एक करके इन आठ में से छह राज्यों में भाजपा ने या तो अकेले दम पर सरकार बनाई या फिर सरकार का हिस्सा बनी। अब ये आंकड़ा सात पहुँच सकता है। सिर्फ मिजोरम में एमएनएफ की सरकार है। भाजपा ने कोशिश तो 2014 से पहले भी की, लेकिन उसे सफलता सिर्फ 2003 में मिली जब अरुणाचल में बीजेपी की सरकार बनी थी। तब कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने पार्टी के अंदर ही बगावत की थी और कई नेता बीजेपी में शामिल हो गए थे। उस वजह से पहली बार किसी पूर्वोत्तर राज्य में बीजेपी की सरकार बनी थी, लेकिन उसके बाद बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में सियासी सूखा ही रहा और जमीन पर समीकरण 2014 के बाद बदलने शुरू हुए। पूर्वोत्तर में बीजेपी की ग्रोथ के कई कारण है जिनमें से एक सरकारी योजनाओं का जमीन पर पहुंचना भी है। बीजेपी ने पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए नॉर्थ-ईस्ट डेवलपमेंट अलायंस यानी नेडा का गठन किया है। इसके संयोजक असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा हैं। साल 2015 में इसका गठन किया गया और इसका मक़सद था कि बीजेपी पूर्वोत्तर राज्यों में उन क्षेत्रीय दलों को एक साथ लाए जो कांग्रेस से खुश नहीं हैं। 2016 में बीजेपी ने 15 साल से चले आ रहे कांग्रेस के शासन को असम में ख़त्म करके अपनी सरकार बनाई। 2018 में 30 साल से काबिज लेफ़्ट सरकार को हटाकर पहली बार बीजेपी ने त्रिपुरा में सरकार बनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद 2017 के बाद से 47 बार नार्थ-ईस्ट जा चुके हैं। चुनाव से पहले उन्होंने त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में 3 बड़ी रैलियां कीं। नार्थ-ईस्ट के 8 राज्यों में हर 15 दिन में कोई न कोई केंद्रीय मंत्री जरूर पहुंचता है। केंद्र सरकार ने 2024-25 के लिए नार्थ ईस्ट का बजट 5892 करोड़ किया है, ये 2022-23 के मुकाबले 113% ज्यादा है। नेडा का गठन ही बताता है कि बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर राज्य कितने अहम रहे हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों की आबादी में आदिवासियों की बहुलता है और ईसाई अल्पसंख्यकों की तादाद यहां ज्यादा है, ऐसे में जब इन राज्यों में बीजेपी जीतती है तो उसके लिए इस नैरेटिव को काउंटर करना और आसान हो जाता है कि वह अल्पसंख्यक विरोधी है। अब जीत के बाद बीजेपी ये कह सकती है कि वह अगर अल्पसंख्यक विरोधी होती, तो उसे ये जीत ना मिलती। साथ ही यहाँ 26 लोकसभा सीटें हैं, जो बाकी भारत के मध्य आकार के एक राज्य के बराबर है। भाजपा ने पूर्वोत्तर के चुनावों को इसलिए इतना ज्यादा महत्व दिया, क्योंकि वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यहां की 26 लोकसभा सीटें उसके लिए बहुत अहम हैं। लोकसभा चुनाव में अगर अन्य राज्यों में उसके खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान हुआ तो पूर्वोत्तर से उसकी भरपाई की जा सकती है। वहीँ दशकों से कांग्रेस के गढ़ रहे पूर्वोत्तर कांग्रेस का सफाया हो गया है। त्रिपुरा में भले ही उसे कुछ सीटें मिली हैं जो कि सांत्वना पुरस्कार से ज्यादा कुछ नहीं है, लेकिन कुल मिलाकर पूर्वोत्तर के इलाके में कांग्रेस लगातार हार रही है। बात ये है कि तीनों ही राज्यों में देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हुई है। तीनों ही राज्यों से कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। वह भी तब जब 2016 तक नॉर्थ ईस्ट के ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस और लेफ्ट का ही कब्जा था। त्रिपुरा कभी वामपंथी दलों का गढ़ रहे त्रिपुरा में भाजपा गठबंधन ने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफलता हासिल की है। गठबंधन को राज्य में 33 सीटों पर जीत मिली है। अकेले भाजपा को त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा में 32 सीटों पर सफलता मिली है। यहाँ कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि लेफ्ट के खाते में 11 सीटें आईं। मतलब गठबंधन करने के बावजूद दोनों को कुछ खास फायदा नहीं मिला। हालांकि, पहली बार चुनाव लड़ रही टिपरा मोथा ने बड़ी कामयाबी हासिल की। इनके 42 में से 13 प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत दर्ज की। त्रिपुरा में भाजपा की सहयोगी आईपीएफटी को टिपरा मोथा पार्टी के कारण भारी नुकसान हुआ है। नतीजों को देखा जाए तो यहाँ भाजपा जीतने में तो कामयाब रही मगर पार्टी का वोट शेयर घटा है। भाजपा को 38.97 फीसदी वोट हासिल हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 43.59 फीसदी वोट शेयर के साथ 36 सीटों पर सफलता मिली थी। नगालैंड इस बार नगालैंड की 59 सीटों पर चुनाव हुए। यहां जुन्हेबोटो की आकुलुटो सीट से भाजपा प्रत्याशी और निर्वतमान विधायक काजहेटो किन्मी निर्विरोध चुनाव जीत चुके थे। ऐसे में इस सीट पर चुनाव नहीं हुए। भारतीय जनता पार्टी और नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) का गठबंधन हुआ। इसके तहत एनडीपीपी ने 40 और भाजपा ने 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके अलावा कांग्रेस और एनपीएफ अलग-अलग चुनाव लड़े। कांग्रेस ने 23 और एनपीएफ ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 19 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव में ताल ठोकी थी। 2018 में यहां विधानसभा के सभी 60 सदस्य सरकार का हिस्सा बन गए थे। मतलब कोई भी विपक्ष में नहीं था। इस बार भी यहां भाजपा गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की। भाजपा के 20 में से 13 उम्मीदवार चुनाव जीत गए। वहीं, एनडीपीपी के 40 में से 25 प्रत्याशी विजयी हुए। कांग्रेस यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई। एनपीपी के पांच उम्मीदवार चुनाव जीत गए। यहां एनसीपी ने भी बड़ा खेल किया। एनसीपी के सात प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं। चार निर्दलीय, दो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और एनपीएफ, आरपीआई के दो-दो उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब रहे। रोचक बात ये भी है कि नगालैंड के इतिहास में आज तक एक भी महिला चुनकर विधानसभा नहीं पहुंची थीं। अब तक नगालैंड से मात्र एक महिला सांसद रानो साइजा चुनी गई थीं। वह 1977 में छठी लोकसभा में चुनकर संसद पहुंची थीं। पर इस बार नागालैंड की जनता ने चार महिला प्रत्याशियों में से दो- दीमापुर तृतीय विधानसभा से हेकानी जखालू और अंगामी सीट से सलहूतुनू क्रुसे को चुनकर विधानसभा में भेजा है। मेघालय सबसे रोमांचक मुकाबला मेघालय में हुआ। यहां 60 में से 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। एक सीट पर एक प्रत्याशी की मौत के चलते चुनाव रद्द हो गया। 59 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने आज सभी को हैरान कर दिया। किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इनके 25 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। दूसरे नंबर पर यूडीपी रही। इनके 11 उम्मीदवार चुनाव जीत गए। भाजपा के तीन, टीएमसी के पांच, कांग्रेस के पांच, एचएसपीडीपी, पीडीएफ के दो-दो उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। दो निर्दलीय विधायक भी चुने गए। वाइस ऑफ द पीपल पार्टी के चार उम्मीदवार चुनाव जीत गए।
3 मार्च साल 2021, हिमाचल प्रदेश के कई कर्मचारी नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के बैनर तले पेंशन व्रत पर बैठे थे। मांग थी पुरानी पेंशन बहाली की। व्रत टूटा मगर पुरानी पेंशन बहाली की मांग पूरी नहीं हुई। संघर्ष जारी रहा और ठीक एक साल बाद 3 मार्च साल 2022 को हिमाचल में कर्मचारियों ने विशाल धरना प्रदर्शन किया, ऐसा धरना जो शायद ही हिमाचल में पहले कभी कर्मचारियों ने किया होगा। तीन मार्च को शिमला के टूटीकंडी में सभी कर्मचारी एकत्रित हुए और आगे बढ़ते हुए 103 टनल के पास एनपीएस कर्मचारियों ने हल्ला बोला। इस दौरान कर्मचारियों द्वारा यातायात बंद किया गया। पुलिस के जवानों ने कर्मचारियों को जब हटाने की कोशिश की तो कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल एनपीएस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई। कर्मचारियों की ये नाराजगी तत्कालीन सरकार को भारी पड़ी और विधानसभा चुनाव में तख़्त और ताज बदल गए। कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में ओपीएस बहाली का वादा किया और कर्मचरियों ने एतबार। अब 3 मार्च ही वो तारीख बन चुकी है जब प्रदेश की सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली संबंधित एसओपी को मंजूरी देकर कर्मचारियों को सबसे बड़ा तोहफा दिया है। आखिरकार एक लम्बे संघर्ष के बाद प्रदेश के कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई। प्रदेश सरकार द्वारा चौथी कैबिनेट की बैठक में पुरानी पेंशन बहाली की एसओपी को मंज़ूरी दे दी गई है। 1 अप्रैल, 2023 से पुरानी पेंशन लागू करने का फैसला लिया गया है। जिस मसले ने प्रदेश की चुनावी हवा का रुख बदल कर रख दिया था, अब वो मसला पूरी तरह हल हो गया है। चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा जनता को दी गई गारंटियों में से पुरानी पेंशन बहाली पहली गारंटी थी, जो अब पूरी हो गई है। प्रदेश की नई सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन की सबसे बड़ी टेंशन को खत्म कर दिया है। हिमाचल में करीब सवा लाख कर्मचारी इस समय एनपीएस के दायरे में आते हैं और इनको इसका लाभ मिलने वाला है। इस फैसले से प्रदेश सरकार पर सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। वहीँ हिमाचल के 1.36 लाख कर्मचारियों का एक अप्रैल से नेशनल पेंशन सिस्टम फंड कटना भी बंद हो जाएगा। इन कर्मचारियों को कैबिनेट ने जीपीएफ के तहत लाने का फैसला लिया है। एनपीएस में रहने के इच्छुक कर्मियों को लिखित में विकल्प देने की पेशकश की गई है। भविष्य में जो नए कर्मचारी सरकारी सेवा में नियुक्त होंगे, वे पुरानी पेंशन व्यवस्था में आएंगे। जिन एनपीएस कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति 15 मई, 2003 के बाद हुई है, उनको भावी तिथि से पुरानी पेंशन दी जाएगी। नियमों में आवश्यक संशोधन के बाद एनपीएस में सरकार और कर्मचारियों द्वारा जारी अंशदान 1 अप्रैल, 2023 से बंद हो जाएगा। कैबिनेट ने वित्त विभाग को इस संबंध में नियमों में बदलाव करने और आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है। कैबिनेट ने केंद्र सरकार से प्रदेश की 8,000 करोड़ रुपये एनपीएस राशि लौटाने का प्रस्ताव भी पारित किया है। सरकार ने लौटाया कर्मचारियों का आत्मसम्मान : प्रदीप ठाकुर पेंशन बहाल करने के लिए हिमाचल प्रदेश नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री व समस्त कैबिनेट का धन्यवाद किया है। संगठन के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर तथा अन्य सभी पदाधिकारियों ने सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि पुरानी पेंशन बहाली का जो वादा कांग्रेस पार्टी ने चुनावों के वक्त कर्मचारियों के साथ किया था, वो अब पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक ने पेंशन बहाली का समर्थन किया था। प्रियंका गांधी, भूपेश बघेल व अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने भी कर्मचारियों की पेंशन बहाली के वादे किये थे। प्रियंका गांधी तो स्वयं कर्मचारियों के धरने पर भी पहुंची थी। कांग्रेस ने कर्मचारियों को विश्वास दिलाया और कर्मचारियों ने भी कांग्रेस का साथ दिया। नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ द्वारा सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा गया कि सरकार ने कर्मचारियों का बुढ़ापा सुरक्षित करके उन्हें जहां आर्थिक रूप से सुरक्षित किया है, वहीँ उनका आत्मसम्मान उन्हें वापस लौटाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी भविष्य में प्रदेश में आने वाली हर चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा सरकार के साथ खड़े रहेंगे और प्रदेश की प्रगति के लिए कर्मचारी हर संभव योगदान देंगे।
हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में अस्सिटेंट प्रोफेसरों के पर्सनैलिटी इंटरव्यू 15 मार्च से शुरू करवाए जाएगे । हिमाचल लोक सेवा आयोग 15 मार्च से लेकर 25 मार्च तक कॉलेज कैडर के अलग-अलग डिपार्टमेंट और सब्जेक्ट के प्रोफेसरों के लिए इंटरव्यू लेगा। इसके लिए आयोग ने शेड्यूल तैयार कर लिया है। सोशोलॉजी सब्जेक्ट में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए 15 से लेकर 17 मार्च तक इंटरव्यू होंगे। म्यूजिक वोकल में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए लिए 15 से लेकर 18 मार्च तक इंटरव्यू होंगे। असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश पद के लिए 15 से 25 मार्च तक इंटरव्यू होंगे। कॉलेजों में जियोग्राफी अस्सिटेंट प्रोफेसर का पद भी भरा जाएगा। इसके लिए भी 20 से 23 मार्च तक इंटरव्यू करवाए जायेंगे । बिजली बोर्ड में अस्सिटेंट इंजीनियर इलेक्ट्रिकल के लिए भी 15 मार्च से 24 मार्च तक इंटरव्यू प्रोसेस चलेगा। ईमेल और SMS के अलावा पात्र उम्मीदवारों को कॉल लेटर भी जारी कर दिए गए हैं। फोन नंबर 0177-2624313 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला आने वाले सैलानियों का सफर अब मंहगा होने वाला है। अब नगर निगम टूरिस्ट गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। मनाली की तर्ज पर यह फीस गाड़ियों से वसूली जाएगी। छोटी गाड़ियों से 200 रुपए, इनोवा से 300 और बस, ट्रक व बड़े वाहनों से 500 रुपए वसूले जाएंगे। दरअसल जब से मुख्यमंत्री सुक्खू ने नगर निगम को आय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, तब से योजनाएं बनाई जा रही हैं। नगर निगम द्वारा पेश किए जाने वाले बजट में ग्रीन फीस का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। प्रदेश सरकार से मंजूरी मिलते ही शिमला में सैलानियों को ग्रीन फीस देनी होगी। वहीँ नगर निगम इस महीने बजट पेश करेगा, जिसमें ग्रीन फीस का प्रस्ताव भी शामिल होगा। सरकार से मंजूरी मिलते ही अप्रैल महीने में यह फीस सैलानियों को देनी पड़ेगी। इस फीस से नगर निगम और सरकार को सलाना करोड़ों रुपए मिलेंगे। शिमला में हर साल 2 से 3 करोड़ टूरिस्ट आते हैं। सबसे ज्यादा टूरिस्ट पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात और यूपी के आते हैं। इन सैलानियों को ही अब एंट्री फीस के तौर पर पैसे देने पड़ेंगे। MC कमिश्नर आशीष कोहली का कहना है कि नगर निगम द्वारा 2013 में भी ग्रीन टैक्स लगाया गया था, लेकिन किसी कारण इसे बंद कर दिया। इस बार फिर से बजट में यह प्रस्ताव रखा जाएगा। शिमला से पहले मनाली में बाहरी राज्यों के वाहनों की एंट्री पर ग्रीन फीस की वसूली की जा रही है। यहां वाहनों में लगे फास्टैग से फीस ली जा रही है। बैरियर लगाकर गाड़ियां रोकने की जरूरत नहीं पड़ती। फास्टैग से चंद सेकेंड में यह फीस कट जाती है। जिनके पास फास्टैग नहीं है, उनसे नकद फीस वसूली जाती है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के नेरचौक व थुनाग के 2 युवकों से गोहर पुलिस ने चिट्टा बरामद किया है। आरोपियों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।वही पुलिस थाना गोहर के प्रभारी निर्मल सिंह ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपियों से 40 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है। जानकारी के अनुसार चैलचौक जासन के भीतर नाके पर ऑल्टो कार नम्बर HP65-8303 को चैकिंग के लिए रोका गया थ।आरोपियों की पहचान साहिल कुमार पुत्र लाल चंद निवासी गांव भंगरोटू तहसील बल्ह जिला मंडी व सूरज मणि पुत्र बेस राम निवासी गांव सेगला तहसील थुनाग जिला मंडी के रूप में हुई।
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार सुबह हरियाणा की टूरिस्ट बस का एक्सीडेंट हो गया।यह हादसा चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर बिलासपुर के पास हुआ।जबली के पास कुनाला में बस बीच सड़क में पलट गई।जानकारी के अनुसार, हरियाणा से मनाली जा टूरिस्ट बस HR38A-B0007 संतुलन बिगड़ने के कारण बस बीच सड़क में पलट गई। इस हादसे में 40 लोगों होने की सूचना है जबकि एक युवती की हादसे के दौरान मौके पर ही मौत हो गई। वहीं राहगीरों ने बचाव अभियान चलाते हुए घायलों को बस से निकाला और बिलासपुर क्षेत्रीय अस्पताल में पहुंचाया। एक यात्री की हालत गंभीर होने के चलते उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है।हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चालक के खिलाफ लापरवाही से ड्राइविंग करने का मामला दर्ज किया है। फिलहाल हादसे की जाँच अभी जारी है।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन यूनिट ने शिमला के कुपवी क्षेत्र के 21 वर्षीय युवक को 6.33 ग्राम चिट्टा के साथ पकड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार , हेड कॉन्स्टेबल दिनेश SIU की टीम के साथ गुरुवार रात को गश्त पर थी गश्त के दौरान देर रात सोलन शहर के शमलेच के पास एक युवक आ रहा था युवक की तलाशी के दौरान उसके बैग से 6.33 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है। पूछताश के दौरान युवक ने अपना नाम संदीप कुमार निवासी गांव डिम्मी, तहसील कुपवी जिला शिमला बताया। वहीं SP सोलन वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि बीती रात गश्त के दौरान SIU की टीम ने शमलेच के पास एक युवक को चिट्टा के साथ पकड़ा है। युवक से पूछताछ की जा रही है। और नशा माफिया की धरपकड़ के लिए पुलिस आगे भी अभियान जारी रखेगी।
हिमाचल प्रदेश में कोरोना एक बार फिर से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। 31 जनवरी को प्रदेश कोरोना मुक्त हो गया था, लेकिन बीते कल शाम तक प्रदेश में कोरोना के 40 नए मामले सामने आए है। बीते 24 घंटे में 12 नए मरीज कोरोना के एक्टिव पाए है। वहीं प्रदेश के बिलासपुर जिले में सबसे ज्यादा 11 एक्टिव मरीज, शिमला जिले में 7 कोरोना , चंबा में 2, हमीरपुर में 4, कांगड़ा में 4, सोलन 9, कुल्लू में 3 एक्टिव मरीज हैं। प्रदेश में अब तक कोरोना से 3,12,774 लोग संक्रमित हुए हैं। राज्य के सबसे बड़े कांगड़ा जिले में सबसे ज्यादा 70,717 लोग कोरोना से संक्रमित हुए। इनमें से 1,266 लोगों की कोरोना से मौत हुई है।
हिमाचल प्रदेश में गर्मी का तापमान बढ़ रहा है। राजधानी शिमला सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रों में वीरवार को मौसम साफ रहा। शुक्रवार और शनिवार को प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान है। बीते दिनों बारिश और बर्फबारी से मौसम में बढ़ी ठंडक में धूप खिलने से कमी दर्ज हुई है। वीरवार को ऊना में अधिकतम तापमान 32.4, बिलासपुर में 29.0, हमीरपुर में 28.5, मंडी में 27.8, सुंदरनगर में 27.0, कांगड़ा में 26.9, सोलन-नाहन में 26.5, धर्मशाला में 25.2, चंबा में 24.9, भुंतर में 22.9, शिमला में 18.2, मनाली में 13.0, कल्पा में 12.4 और केलांग में 5.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। शिमला में जनवरी के बाद फरवरी में भी नहीं हुई बर्फबारी इस वर्ष राजधानी शिमला में जनवरी के बाद फरवरी में भी बर्फबारी नहीं हुई। फरवरी 2022 में शिमला में 59.3, 2021 में 54, 2000 में 5.4 और 2019 में 51.3 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई थी। इस वर्ष मनाली में भी फरवरी के दौरान मात्र चार और पूह में नौ सेंटीमीटर बर्फबारी ही हुई। उधर, फरवरी के दौरान इस वर्ष सामान्य से 71 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई। फरवरी 2022 में सामान्य से 24, 2021 में 81 और 2000 में 87 फीसदी कम बारिश हुई थी। फरवरी 2019 में सामान्य से 91 फीसदी अधिक बादल बरसे थे।
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर कोरोना के मामलों हल्की तेज़ी देखने को मिली है। 31 जनवरी को प्रदेश कोरोना मुक्त हो गया था, लेकिन आज एक बार कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में कोरोना के छह नए मरीज सामने आए हैं। बता दें कि पिछले तीन दिनों यानि 27 फरवरी से 1 मार्च तक 1357 लोगों की कोरोना जांच की गई थी, जिसमें से 25 लोगों में कोरोना पाया गया है। शिमला और सोलन जिला में इस समय सबसे अधिक 7 कोरोना मरीज सक्रिय हैं। बिलासपुर में एक्टिव मरीज पांच हैं; चंबा में 2, हमीरपुर कांगड़ा और कुल्लू में 3 कोरोना के एक्टिव मामलें है। वहीं जिला किन्नौर, लाहौल स्पीति, मंडी और सिरमौर में कोरोना के एक भी मामला नहीं हैं।गौरतलब है कि राज्य में अब तक 3,12,762 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। राज्य के सबसे बड़े जिले कांगड़ा में सबसे ज्यादा 70,717 लोग कोरोना संक्रमित हुए। जिला में संक्रमण से 1,266 लोगों ने जान गंवाई है।
प्रदेश में फरवरी माह में 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 377 करोड़ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह किया गया है। वर्तमान वित्त वर्ष में जीएसटी संग्रह में 21 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। विभाग ने फरवरी, 2023 तक 4933 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्रित किया है। इस बात की जानकारी राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त यूनुस ने दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्त वर्ष में जीएसटी संग्रह में यह वृद्धि सशक्त प्रवर्तन और करदाता अनुपालन में सुधार के परिणामस्वरूप दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि विभाग के कर अधिकारियों की क्षमता निर्माण के लिए उन्हें निरंतर प्रदान किए जा रहे प्रशिक्षणों के फलस्वरूप प्रभावी प्रवर्तन गतिविधियां सुनिश्चित हो रही हैं। विभाग द्वारा हाल ही में 450 कर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। यूनुस ने कहा कि विभाग द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष में 12 लाख ई-वे बिल सत्यापित किए गए हैं और नियमित आधार पर की गई जांचों में ई-वे बिलों की अवमानना पर 8.18 करोड़ रुपये एकत्र किए गए हैं। विभाग स्वैच्छिक अनुपालन में सुधार तथा हितधारकों के विभिन्न मुद्दों के समयबद्ध निवारण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रिटर्न फाइलिंग में निरंतर सुधार, रिटर्न की तीव्र छंटनी, जीएसटी ऑडिट को समयबद्ध पूर्ण करने तथा सशक्त सतर्कता पर विभाग द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग वर्तमान वित्त वर्ष में सरकार द्वारा निर्धारित 5130 करोड़ रुपये के लक्ष्य से अधिक राजस्व अर्जित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
1 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश के बाद भारी बारिश की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 24 घंटों में स्थिति बदलने का अनुमान है। आईएमडी ने भविष्यवाणी की है कि अगले दिन दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में उच्च तीव्रता वाली बारिश होगी। मौसम विभाग ने आगामी समय में उत्तर-पश्चिम दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली और दिल्ली-एनसीआर के सीमावर्ती जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की भविष्यवाणी की है। दिल्ली के आसपास का मौसम सुबह के समय सामान्य रहा है। दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम विज्ञान भवन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, बुधवार (1 मार्च) को दिल्ली-एनसीआर और इसकी सीमा से लगे यूपी और हरियाणा बंद रहेंगे। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली, एनसीआर (हिंडन एएफ स्टेशन, गाजियाबाद, इंदिरापुरम), करनाल, महम, रोहतक, भिवानी (हरियाणा), हस्तिनापुर, चांदपुर, अमरोहा (यूपी) में कुछ ही जगहों पर मध्यम से हल्की बारिश की भविष्यवाणी की गई है। हवा की गति 30 से 50 किमी/घंटा रहने की संभावना है। फरवरी में शहर के तापमान ने 72 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। 1951 से 2023 तक, तीसरे सीज़न के लिए फरवरी सबसे गर्म महीना था, हालांकि बुधवार की बारिश के बाद तापमान कम होने की संभावना है। आईएमडी ने अगले दो महीनों के लिए गर्मी का अनुमान भी तैयार किया है। आईएमडी के अनुसार, मार्च से मई तक पूरे उत्तर-पूर्व, और मध्य भारत के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है।
हिमाचल प्रदेश के एक युवक की हरियाणा में सड़क हादसे में मौत हो गई है। यह हादसा पंचकूला-यमुनानगर नेशनल हाईवे पर मौली गांव के पास बीते कल पेश आया। मृतक की पहचान सिरमौर के पांवटा साहिब निवासी अभिनव परमार के तौर पर हुई है। जानकारी के मुताबिक अभिनव डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 चंडीगढ़ से एमबीए कर रहा था और सुबह करीब 6 बजे पंचकूला आ रहा था। जैसे ही वह मौली गांव के नजदीक स्थित ग्लोबल इंडस्ट्री और सैनी ढाबे के सामने से गुजरा तो उसके आगे जा रहे ट्रक ने अचानक ब्रेक लगा दी। उसकी कार ट्रक के नीचे आ गई और कार ट्रक के पीछे फंसकर काफी दूरी तक घसीटते चली गई। कुछ दूर जाने के बाद चालक ने ट्रक रोका तो देखा कि ट्रक के नीचे कार फंसी हुई है। आसपास के लोगों ने इस हादसे की सूचना तुरंत मौली पुलिस चौकी को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार चलन अभिनव परमार को कड़ी मशक्कत के बाद कार से बाहर निकाला और युवक को अस्पताल पंचकूला पहुँचाया। जहां डॉक्टर्स ने अभिनव को मृत घोषित किया।
हिमाचल में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने के बाद मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। इसके चलते दोपहर के वक्त मशहूर पर्यटन स्थल कुफरी व नारकंडा में हल्की बर्फबारी भी हुई। शिमला में भी आज हल्की बारिश हुई है । इससे तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, मौसम विभाग ने कल अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी होने का पूर्वानुमान किया है। कम ऊंचे व मैदानी इलाकों में आंधी तूफान आने व आसमानी बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने किसानों-बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ओलावृष्टि से किसानों की फसलों और स्टोन फ्रूट व सेब की फ्लावरिंग को नुकसान होने का डर है। किसान और बागवान सूखे की मार से भी त्रस्त है। बेशक प्रदेश के अधिकांश शहरों में अभी भी तापमान सामान्य से ज्यादा चल रहा है, लेकिन बीते 24 घंटे के दौरान कई शहरों के तापमान में एक से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। शिमला का अधिकतम तापमान 2 दिन में 19 डिग्री से गिरकर 16.9 डिग्री तक लुढ़क गया है। इसी तरह कई अन्य शहरों का पारा भी गिरा है।
हिमाचल प्रदेश के रामपुर में एक घर में आग लगने से बुजुर्ग महिला जिंदा जल गई। मिली जानकारी के मुताबिक खलटी गांव में यह घटना हुई है। सराहन उपतहसील की शाहधार पंचायत के खलटी गांव में रविवार देर रात अचानक भीषण आग लग गई। भीषण अग्निकांड में एक बुर्जुग महिला जिंदा जल गई और दो मंजिला मकान भी आग के भेंट चढ़ गया। घटना की सूचना मिलने के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका क्यूंकि यह क्षेत्र सड़क से दूर है, इसलिए फायर इंजन की गाड़ियां भी मौके पर नहीं पहुंच पाई है। आग की इस घटना में लाखों का नुकसान हो गया है। महिला की मौत से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। पूरे गांव में मातम मच गया ह। प्रशासन की टीम मौके की ओर रवाना हो गई है।
ऊना के कांगडा कोओपरेटिव बैंक से लॉन के एक मामले को लेकर जिला पुलिस को आरोपी की लम्बे समय से तलाश थी। जहां सर्तकता विभाग को आरोपी अब तक चकमा देते आ रहा था, वहीं सर्तकता विभाग निरीक्षक हरीश गुलेरिया, मु.आरक्षी सुभाष चंद, आरक्षी मनोज कुमार के द्वारा लगाातार छापेमारी व दबदिश देते हुए इस आरोपी दिनेश डेविड़ सेलजा बिहार तह.व जिला ऊना को मुम्बई में गिरफ्तार कर बडी सफलता हासिल की है। आरोपी को मुम्बई की स्थानीय अदालत में पेश कर चार दिन का ट्रांजिट रिमांड लिया गया है। इस व्यक्ति के खिलाफ पजींकृत संख्यां 4/21 7 अप्रैल 2021 से मुक्कदमा दर्ज था। आरोपी को 24 फरवरी को ऊना सत्र न्यायलय में पेश कर पुलिस हिरासत में लिया जायेगा।
Former Chief Minister Prem Kumar Dhumal urged the government to review its decision to disband the Himachal Pradesh Staff Selection Commission (HPSSC). He said that instead of disbanding the HPSSC, the government should have improved its working. He said that his government had set up the commission in 1998 to decentralise and speed up the selection process for class III and IV public services. He added that dissolving this prestigious institution would cause inconvenience to candidates, who would have to travel longer distances.
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू 17 मार्च को बजट पेश करेंगे। हिमाचल के गवर्नर शिव प्रताप शुक्ल द्वारा सुक्खू सरकार को बजट सत्र बुलाने की मंजूरी देकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री सुक्खू का यह पहला बजट होगा। बता दें कि हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र 14 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा। इसमें कुल 18 सीटिंग होगी। बजट सत्र की शुरुआत 14 मार्च को सुबह 11 बजे विधानसभा के 2 पूर्व सदस्यों के शोकोद्गार से होगी। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 के सप्लीमेंटरी बजट पास होगा। 14 मार्च को 11:00 बजे इस सत्र की शुरुआत प्रदेश विधानसभा के किन्हीं पूर्व सदस्यों के देहांत की स्थिति में शोकोद्गार से होगी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 के अनुपूरक बजट की प्रथम और अंतिम किस्त पारित होगी। 15 मार्च को शासकीय और विधायी कार्यों के अलावा सामान्य चर्चा व विनियोग विधेयक का पारण होगा। 16 मार्च को गैर सरकारी सदस्य दिवस होगा। 17 मार्च को वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट अनुमानों को प्रस्तुत किया जाएगा। दो दिन के अवकाश के बाद फिर 20 मार्च को शासकीय और विधायी कार्यों के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट अनुमानों पर चर्चा शुरू होगी। यह चर्चा 23 मार्च तक चलेगी। 27 और 28 मार्च को 2023-24 की मांगों पर चर्चा और मतदान होगा। 29 मार्च को बजट अनुमानों को पारित किया जाएगा। 30 मार्च को अवकाश रहेगा। 31 मार्च और 1 अप्रैल को शासकीय और विधायी कार्य होंगे। 2 अप्रैल को अवकाश होगा। इसके बाद 6 अप्रैल तक विधायी और शासकीय कार्य चलेंगे।
सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में इनकम टैक्स का छापा पड़ा है। बद्दी में यूफ़्लेक्स कंपनी के ठिकानों पर इनकम टैक्स की टीम ने मंगलवार सुबह दबिश दी। इनकम टैक्स की टीम कंपनी के आय व व्यय से जुड़े दस्तावेज़ों को खंगाल रही है। टीम ने अंदर व बाहर जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया। यह कार्रवाई कंपनी की ओर से टैक्स चोरी के मामले में की गई है। बता दें कि देशभर में कंपनी के ठिकानों पर छापा मारा गया है। आयकर विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल, जम्मू कश्मीर,हरियाणा, तमिलनाडु, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 64 जगहों पर यूफ्लेक्स लिमिटेड कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। एसपी बद्दी मोहित चावला ने बताया कि आयकर विभाग की टीम पुलिस प्रशासन की ओर से सेवाएं दी जा रही हैं। कंपनी पैकेजिंग और कंटेनर्स का काम करती है। यह कंपनी पान मसाला के पैकेट बनाती है।
राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को निलंबन के बाद भंग कर दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में जब तक नई चयन एजेंसी की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन भर्तियों का प्रोसेस शुरू करेगा। मुख्यमंत्री का कहना है की SSC में पिछले तीन साल से पेपर बिक रहे थे। पेपर कुछ लोगों की ही बेचे जा रहे थे। यह धंधा तीन साल से चल रहा था। इस काम में टॉप टू बॉटम तक लोग शामिल थे। इसलिए युवाओं के भविष्य को देखते हुए सरकार ने SSC को भंग किया है। अब SSC ने जो लिखित परीक्षाएं ले ली है, लेकिन अभी रिजल्ट नहीं निकला, उनके पेपर का मूल्यांकन HPPSC करेगा। इसी तरह जिन पेपर के बच्चों को रोल नंबर दे दिए गए थे और जिन परीक्षाओं के डॉक्युमेंट भी चेक होने हैं, यह काम भी HPPSC करेगा।
हिमाचल प्रदेश में मौसम ने फिर करवट बदली है। मंगलवार को अटल टनल रोहतांग सहित ऊंचाई वाले भागों में बर्फबारी दर्ज की गई है। शिमला में भी बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि से कुछ ही मिनटों में राजधानी की सड़कें ओलों से सफेद हो गईं। उधर, लाहौल घाटी के ऊंचाई वाले भागों ने फिर से बर्फ की चादर ओढ़ ली है। बर्फबारी को प्रशासन ने स्थानीय लोगों व पर्यटकों को हिदायत दी है कि खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें। वहीं, मनाली के अटल टनल के साउथ और नॉर्थ पोर्टल के पास कल शाम से ही रुक-रुककर हिमपात हो रहा है। पिछले दिनों हुई बर्फबारी के बाद मनाली में पर्यटक काफी तादाद में आए, लेकिन पिछले तीन दिनों से पर्यटकों की संख्या में काफी कमी दर्ज की गई है।
केंद्रीय दवा नियंत्रक मानक संगठन द्वारा जनवरी माह में देशभर से 1348 दवाओं के सैंपल लिए गए थे, जिसमें से 67 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। फ़ैल हुए सैंपल में हिमाचल प्रदेश में बनी 16 दवाइयां शमिल है, जो मानकों पर खरी नहीं उतर पाई हैं। ये सैंपल हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, नालागढ़, ऊना और जिला सिरमौर के कालाअंब से भरे गए थे। इनमें एलर्जी, कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, विटामिन, कैल्शियम, बदन में सूजन को खत्म करने वाली, दमा समेत एंटीबायोटिक दवा के सैंपल फेल हुए हैं। वहीं, राज्य दवा नियंत्रक द्वारा सभी कंपनियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उद्योगों को मार्केट से दवाओं का पूरा स्टॉक रिकॉल के आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने कहा है कि जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उन संबंधित उद्योगों को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। गौरतलब है कि सोमवार देर शाम को CDSCO की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में हिमाचल के कई उद्योगों ऐसे शामिल रहे, जिनके एक व दो से अधिक दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। वहीं इसके अलावा कई उद्योग ऐसे हैं, जिनके सैंपल बार-बार फेल पाए जा रहे हैं। अब विभाग उन उद्योगों की सूची भी तैयार कर रहा है।


















































