शिमला। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में 22 एवं 23 अक्टूबर, 2026 को ‘जलवायु सहनशीलता, खाद्य सुरक्षा एवं सतत कृषि के लिए अगली पीढ़ी की पादप स्वास्थ्य रणनीतियाँ’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी में देशभर के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, विद्यार्थी एवं कृषि उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग लेकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों, उभरते पादप रोगों तथा जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए नवीन वैज्ञानिक तकनीकों और प्रभावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। संगोष्ठी के संयोजक एवं पादप संरक्षण विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि इस राष्ट्रीय आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी (उत्तरी क्षेत्र), इंडियन पोटैटो एसोसिएशन, शिमला, इंडियन सोसायटी ऑफ प्लांट पैथोलॉजिस्ट्स, लुधियाना, हिमालयन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी, सोलन तथा भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र, शिमला द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान के पूर्व कुलपति डॉ. एस. एस. चाहल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं उत्तर बंग कृषि विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल के पूर्व कुलपति डॉ. स्वरूप कुमार चक्रवर्ती तथा डॉ. वाई. एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन के कुलपति डॉ. एच. एस. बावेजा विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। डॉ. शर्मा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण नए पादप रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे कृषि उत्पादन, फसल उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे समय में यह राष्ट्रीय संगोष्ठी विशेष महत्त्व रखती है। इसमें पर्यावरण-अनुकूल, वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित पादप रोग प्रबंधन रणनीतियों के विकास तथा टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। दो दिवसीय वैज्ञानिक कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य व्याख्यान, आमंत्रित विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी सत्र, मौखिक एवं पोस्टर शोध प्रस्तुतियाँ तथा वैज्ञानिक पुरस्कार सत्र आयोजित किए जाएंगे। संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न पादप रोग, आणविक निदान तकनीक, जीनोमिक्स, जीनोम संपादन, जैविक नियंत्रण, समेकित रोग प्रबंधन, रोग प्रतिरोधी फसल किस्मों के विकास तथा आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल फसल संरक्षण तकनीकों जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। भाकृअनुप-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का एक प्रमुख आकर्षण ‘किसान–उद्योग–शोधकर्ता–नीति निर्माता संवाद’ होगा। इसका मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचारों को किसानों के खेतों तक प्रभावी रूप से पहुँचाना तथा प्रयोगशाला से खेत तक तकनीक हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना है। इस विशेष संवाद मंच के माध्यम से वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, कृषि उद्योग प्रतिनिधियों एवं किसानों के बीच सीधा विचार-विमर्श होगा, जिससे नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने, संस्थागत सहयोग बढ़ाने तथा सतत कृषि विकास के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी। संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. संतोष वाटपाडे ने बताया कि इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों, कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालयों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), अनुसंधान संगठनों तथा प्रमुख कृषि व्यवसाय कंपनियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मेघालय, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न राज्यों से वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता अपने शोध निष्कर्षों तथा नवीन तकनीकी उपलब्धियों को प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि यह संगोष्ठी वैज्ञानिक ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान, बहुविषयक अनुसंधान सहयोग तथा नवीन पादप स्वास्थ्य प्रबंधन तकनीकों के विकास के लिए एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी। साथ ही, इसके माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान के परिणामों को किसानों तक पहुँचाने, फसलों को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा किसानों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने की दिशा में नई संभावनाएँ विकसित होंगी।
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे-5 पर ब्रौनी खड्ड के पास 305 मीटर लंबा थ्री-लेन पुल बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना पर करीब 127.66 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पुल बनने से बरसात के दौरान बार-बार बाधित होने वाले सड़क मार्ग की समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा है। परियोजना को एनएचएआई की वार्षिक योजना में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय की अंतिम मंजूरी और बजट का प्रावधान जरूरी है। ब्रौनी खड्ड के आसपास हर साल बरसात के दौरान भूस्खलन और जमीन धंसने के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई बार सड़क बंद होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस क्षेत्र को भू-वैज्ञानिक दृष्टि से भी असुरक्षित माना गया है। समस्या के समाधान के लिए पहले भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में नए पुल के निर्माण को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है I प्रस्तावित पुल बनने से नेशनल हाईवे की दूरी करीब 700 मीटर कम हो जाएगी। इससे किन्नौर, शिमला जिले और लाहौल-स्पीति के काजा क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पर्यटकों, किसानों और बागवानों को भी राहत मिलेगी। नेशनल हाईवे-5 सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। पुल बनने से भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की आवाजाही को भी सुविधा मिल सकती है। एनएचएआई रामपुर के सहायक अभियंता प्रदीप कौशल के अनुसार, पुल निर्माण की योजना वार्षिक योजना में शामिल है। केंद्रीय स्तर से अंतिम मंजूरी और बजट उपलब्ध होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
काजा में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के नाम पर कथित तौर पर की जा रही वसूली के मामले की जांच होगी। ग्रामसभा, NGO और वन अधिकार समितियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने के बाद प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। मामले में आरोप है कि FRA से जुड़े काम के नाम पर लोगों से पैसे लिए गए। अब यह पता लगाया जाएगा कि वसूली किसके स्तर पर और किस आधार पर की गई। साथ ही, ग्रामसभा, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और वन अधिकार समितियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि जांच में यदि किसी की संलिप्तता या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के खिलाफ किसी भी तरह की वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हमीरपुर जिले के बड़सर उपमंडल की जजरी पंचायत में खेत में ट्रैक्टर पलटने से 58 वर्षीय चालक की मौत हो गई। मृतक की पहचान मदन चंद पुत्र आत्माराम निवासी जजरी के रूप में हुई है। मदन चंद वीरवार शाम खेत में गेहूं की बिजाई करने गए थे। इसी दौरान ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया और वह उसके नीचे दब गए। हादसे का रातभर किसी को पता नहीं चल सका। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। पत्नी ने फोन भी किया, लेकिन मोबाइल वाइब्रेशन मोड पर होने के कारण आवाज नहीं सुनाई दी। शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने खेत में पलटा हुआ ट्रैक्टर देखा, जिसके बाद हादसे का पता चला और पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। मदन चंद अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है।
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस धर्मचंद चौधरी करेंगे। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। आयोग मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा करेगा। इसके बाद नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों को विभाजित करने या जरूरत के अनुसार विलय करने को लेकर सिफारिशें दी जाएंगी। इसमें आबादी, भौगोलिक परिस्थितियां, लोगों की प्रशासन तक पहुंच और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। कौन हैं जस्टिस धर्मचंद चौधरी? जस्टिस धर्मचंद चौधरी का संबंध मंडी जिले के लोहरा गांव से है। उनका जन्म 12 मार्च 1958 को हुआ। उन्होंने शुरुआती शिक्षा लोहरा में, मैट्रिक हटगढ़ से, स्नातक की पढ़ाई कुल्लू से और एलएलबी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से 1983 में की। इसके बाद उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत की और 1995 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। वर्ष 2012 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 2014 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। धर्मचंद चौधरी का सीजेआई सूर्यकांत से भी खास पेशेवर कनेक्शन रहा है। जब सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने, तब जस्टिस धर्मचंद चौधरी ने 2019 में हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाला था। हिमाचल में फिलहाल 12 जिले हैं। देहरा-गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और आनी समेत कई क्षेत्रों से लंबे समय से नए जिले बनाने की मांग उठती रही है। अब आयोग की रिपोर्ट के बाद इस दिशा में सरकार आगे फैसला लेगी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत करवाए गए करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक जमा नहीं हो पाए हैं। केंद्र सरकार ने इन कार्यों का रिकॉर्ड और खर्च का पूरा ब्योरा मांगा है। दरअसल, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंचायतों में किए गए विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाणपत्र के जरिए यह प्रमाणित किया जाता है कि योजना के तहत मिली राशि निर्धारित उद्देश्य पर खर्च की गई है। इसके साथ संबंधित कार्यों का विवरण, बिल और खर्च का रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होता है। बताया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में लगे समय और विकास कार्यों में हुई देरी के कारण बड़ी राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं हो सके। अब पंचायतों को बिलों सहित रिकॉर्ड जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। 15वें वित्त आयोग की राशि का बड़ा हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना था। वहीं, शेष राशि पंचायतों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल की जा सकती थी। पुराने फंड का हिसाब लंबित रहने से अगली वित्त आयोग की किस्तों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर मामले में राशि अपने आप रुकना तय नहीं है; इसका असर संबंधित अनुदान की शर्तों और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पाल रासु ने बताया कि पुराने वित्तीय वर्ष के करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाए जाने हैं और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए
हिमाचल प्रदेश: प्रदेश में बंदरों की बढ़ती समस्या पर नियंत्रण के लिए चलाया जा रहा नसबंदी अभियान अब फंडिंग की चुनौती से जूझ रहा है। वन विभाग के अनुसार, पहले बंदरों की नसबंदी के लिए CAMPA से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब विभाग को इस अभियान को जारी रखने के लिए वैकल्पिक फंडिंग की तलाश करनी पड़ रही है। नसबंदी अभियान बंद होने या इसकी रफ्तार कम होने से भविष्य में बंदरों की आबादी को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बंदरों की संख्या तुरंत बढ़ जाएगी। इसका असर नसबंदी की गति, प्रजनन दर और अन्य आबादी नियंत्रण उपायों पर निर्भर करेगा। हिमाचल में वर्ष 2007 से बंदर नसबंदी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 1.86 लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके चलते प्रदेश में रीसस मकाक की आबादी में लंबे समय में गिरावट दर्ज की गई है। 2004 में अनुमानित आबादी करीब 3.17 लाख थी, जो 2020 में घटकर 1.36 लाख रह गई। हाल के वर्षों में अभियान की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। 2024-25 में 8,800 बंदरों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन केवल 2,284 बंदरों की नसबंदी हो सकी। इसके पीछे फंडिंग के साथ-साथ बंदरों को पकड़ने और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आई हैं। फिलहाल वन एवं वन्यजीव विभाग ने प्रदेश के सभी सात नसबंदी केंद्रों को चालू रखने का फैसला किया है। इन केंद्रों के जरिए बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने और मानव-बंदर संघर्ष को कम करने की कोशिश जारी रखने की बात कही गई है। विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन केंद्रों और नसबंदी अभियान के लिए लगातार फंडिंग, स्टाफ और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना है। 2024 में बंदरों की आबादी का नया सर्वे भी कराया गया था, जिसके आंकड़ों का इस्तेमाल आगे की रणनीति तय करने में किया जाएगा।
ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के दौरान 33 वर्षीय रीना देवी और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में हिमाचल सरकार ने महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रीना देवी को 7 अक्तूबर को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जबकि 9 अक्तूबर को उनकी और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। मामले के बाद परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास चौहान की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान डॉ. प्रियंका शर्मा उपलब्ध नहीं थीं और उनके दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले। ड्यूटी से गैरहाजिरी और जांच में उपलब्ध न होने को देखते हुए सरकार ने निलंबन की कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, शिमला रहेगा और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले मौत के लिए चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
वर्ष 2026 में शिमला पुलिस ने नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को अधिक संगठित, लक्ष्य-आधारित और नेटवर्क-केंद्रित स्वरूप दिया है। कार्रवाई का फोकस केवल मादक पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रखते हुए नशे की सप्लाई चेन के स्रोत तक पहुंचने, मुख्य सप्लायरों एवं सरगनाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने, तस्करों के आर्थिक आधार पर प्रहार करने तथा आदतन तस्करों के विरुद्ध निवारक कानूनों के प्रभावी उपयोग पर रहा है। 1. *NDPS मामले एवं गिरफ्तारियाँ* दिनांक 09 अक्टूबर 2026 तक शिमला पुलिस द्वारा NDPS Act के अंतर्गत कुल 271 मामले दर्ज किए गए हैं तथा 549 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।दर्ज मामलों में 22 वाणिज्यिक मात्रा तथा 177 मध्यवर्ती मात्रा के मामले शामिल हैं। 2. *Backward Linkage एवं मुख्य सप्लायरों के विरुद्ध कार्रवाई* वर्ष 2026 में अब तक शिमला पुलिस ने Backward Linkages के माध्यम से 80 मुख्य सप्लायर्स को गिरफ्तार किया गया तुलनात्मक रूप से वर्ष 2025 में 8 तथा वर्ष 2024 में 14 Backward Linkages दर्ज किए गए थे। इस प्रकार वर्ष 2026 में पिछले दोनों वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।जो पिछले तीन सालों की कुल गिरफ्तारियों से भी ज्यादा है। वर्ष 2026 में अब तक शिमला पुलिस द्वारा 61 ड्रग सप्लाई नेटवर्क ध्वस्त किए गए हैं। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में 4 तथा वर्ष 2024 में 3 नेटवर्क ध्वस्त किए गए थे। इस प्रकार वर्ष 2026 में नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई में उल्लेखनीय तेजी आई है। Backward Linkage आधारित जांच के माध्यम से शिमला में सक्रिय तस्करों के पीछे मौजूद सप्लायरों और संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इससे नशा तस्करी के मामलों में जांच को स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर सप्लाई के स्रोत तक ले जाना संभव हुआ है। 4. *मादक पदार्थों की प्रमुख बरामदगियां* दिनांक 09 अक्टूबर 2026 तक शिमला पुलिस द्वारा विभिन्न NDPS मामलों में निम्नलिखित मादक पदार्थ एवं अन्य सामग्री बरामद की गई है: हेरोइन/चिट्टा: 5.04 किलोग्राम, Meth Crystal: लगभग 58.5 ग्राम; वाणिज्यिक मात्रा में LSD चरस: लगभग 15.5 किलोग्राम; अफीम: लगभग 14 किलोग्राम; पॉपी स्ट्रॉ: लगभग 5 किलोग्राम; कैनाबिस (भांग) के पौधे: 10,00,000; अफीम/पोस्ता के पौधे: लगभग 6,000; इत्यादी। हेरोइन/चिट्टा की एग्रेसिव बरामदगी के लिए किए गए प्रयासों के चलते वर्ष 2026 में सबसे ज्यादा 5.04 किलोग्राम चिट्ठा बरामद किया गया, जबकि वर्ष 2025 में यह लगभग 1.5 किलोग्राम तथा वर्ष 2024 में लगभग 2 किलोग्राम थी। इस प्रकार हेरोइन/चिट्टा की बरामदगी में पिछले दोनों वर्षों की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। 5. *नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई* नशा तस्करी के आर्थिक आधार पर प्रहार करने के लिए शिमला पुलिस द्वारा Financial Investigation को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2026 में अब तक 12 NDPS मामलों में वित्तीय जांच की गई है तथा नशा तस्करी से अर्जित ₹12.61 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गई हैं। *तुलनात्मक रूप से वर्ष 2024 एवं 2025 में इस प्रकार की वित्तीय जांच और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई ही नहीं की गई थी।* इस प्रकार वर्ष 2026 में नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान तथा उनके आर्थिक आधार को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। 6. *आदतन नशा तस्करों के विरुद्ध PITNDPS Act के तहत कार्रवाई* आदतन नशा तस्करों के विरुद्ध निवारक कार्रवाई करते हुए वर्ष 2026 में अब तक 40 तस्करों को PITNDPS Act के तहत निरुद्ध किया गया है। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में 3 तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी, जबकि वर्ष 2024 में इस अधिनियम के तहत कोई निरुद्धीकरण नहीं हुआ था। वर्ष 2026 में इस अधिनियम का प्रभावी उपयोग आदतन नशा तस्करों को निवारक रूप से रोकने तथा उनके द्वारा बार-बार किए जाने वाले अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 7. *अवैध कब्जों एवं अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई* नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों के अवैध ठिकानों को पहली बार चिन्हित कर संबंधित विभागों के समन्वय से उनको डिस्मेंटल करवाया जा रहा है। इसी क्रम में FIR No. 166, धारा 18 NDPS Act, पुलिस थाना रोहड़ू के तहत 108 ग्राम अफीम के साथ गिरफ्तार आरोपी अर्जुन पाल से संबंधित जांच में पाया गया कि उसने पटसारी क्षेत्र में PWD की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर अस्थायी ढाबा/रेस्टोरेंट बनाया था। संबंधित विभाग द्वारा पुलिस बल की सहायता से उक्त अवैध निर्माण को ध्वस्त कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया। यह कार्रवाई शिमला जिला में पहलीबार अमल में लाई गई है जो नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों के विरुद्ध एक एग्रेसिव और मजबूत कार्यवाही करने की रणनीति का हिस्सा है। वर्ष 2023, 2024 एवं 2025 में ऐसी कार्यवाहियां की ही नहीं हैं। शिमला पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य केवल नशा तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशे की सप्लाई के स्रोत को समाप्त करना, इस अवैध कारोबार के आर्थिक आधार को तोड़ना और इसके पूरे नेटवर्क को निष्क्रिय करना है। नशे के विरुद्ध यह कार्रवाई कठोरता, निरंतरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे भी जारी रहेगी।
ऊना के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीरनिगाह में शनिवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां तीन पहिया मॉडिफाइड बाइक रेहड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में पंजाब के कपूरथला निवासी एक बुजुर्ग महिला और तीन साल के बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। जानकारी के अनुसार कपूरथला से करीब आठ लोग बाइक रेहड़ी पर सवार होकर पीरनिगाह आए थे। धार्मिक स्थल पर माथा टेकने के बाद वापस लौटते समय रास्ते में एक तीखे मोड़ पर रेहड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई। वाहन में सवार लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे में बुजुर्ग महिला और तीन वर्षीय बच्चे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं पांच घायलों को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ऊना पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने के साथ घायलों के बयान भी दर्ज कर रही है। पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ ने बताया कि मामले की जांच के लिए सदर पुलिस की टीम मौके पर गई है।
किसानों के लिए राहत की खबर है। बाजार में करीब 200 से 300 रुपये किलो तक बिकने वाला मटर का बीज अब सिर्फ 70 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों को कम लागत में मटर की खेती करने का मौका मिलेगा और खेती का खर्च भी घटेगा। इसके साथ ही गेहूं की बिजाई का सीजन भी शुरू होने वाला है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे खेत की तैयारी समय पर पूरी करें और अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें, ताकि फसल का उत्पादन बेहतर मिल सके। वहीं, किसान ऑफ सीजन सब्जियों की खेती करके भी अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं। बाजार की मांग के अनुसार सब्जियों का चयन, सही समय पर बिजाई और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन करने से किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, किस्म और प्रमाणिकता जरूर जांचनी चाहिए। साथ ही मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही फसल की बिजाई करनी चाहिए।
ऊना अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों में शोक का माहौल है। बताया जा रहा है कि महिला को डिलीवरी के लिए अस्पताल लाया गया था। प्रसव के दौरान महिला और नवजात की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल मौत के सटीक कारणों और पूरे घटनाक्रम की जानकारी सामने आना बाकी है। मामले में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से जानकारी जुटाई जा रही है।
सोलन, 9 अक्टूबर। जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के हेड ऑफिस में आज एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव स्टाफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सांगटी, समरहिल, शिमला द्वारा आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मा एडवोकेट ने किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बैंकिंग कार्यप्रणाली, नियामकीय प्रावधानों तथा ऋण प्रबंधन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्रदान करना है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को केवाईसी (KYC) मानदंडों, जोखिम निगरानी (Risk Monitoring), राजस्व रिकॉर्ड, ऋण दस्तावेजीकरण एवं क्रेडिट अप्रेजल, आय की पहचान (Income Recognition), परिसंपत्ति वर्गीकरण (Asset Classification), प्रावधान संबंधी मानदंडों (Provisioning Norms) तथा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर चेयरमैन मुकेश शर्मा ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में बदलते नियमों, नियामकीय आवश्यकताओं और आधुनिक कार्यप्रणाली के अनुरूप अधिकारियों एवं कर्मचारियों का नियमित प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने, बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा ऋण प्रबंधन और जोखिम नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कर्मचारियों का ज्ञानवर्धन और कौशल विकास निरंतर जारी रहना चाहिए, ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ बैंकिंग कार्यों में निर्धारित नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम में एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव स्टाफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की अधिकारी शिवानी एवं डोला सिंह ने इस सेशन को एड्रेस किया, बैंक के प्रबंध निदेशक पंकज सूद तथा बैंक के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
शिमला के बालूगंज क्षेत्र में सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन सूट खरीदना एक महिला को महंगा पड़ गया। महिला ने सूट के लिए साइबर ठगों को 15 से 20 बार अलग-अलग ट्रांजेक्शन में करीब 46 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद महिला को सूट नहीं मिला। ठगी का एहसास होने पर महिला और उसके पति ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद बालूगंज पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर में शुक्रवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ। सनेई से रामपुर जा रही HRTC की बस HP 06 A 5159 करीब पौने 8 बजे खाई में जा गिरी। बस में चालक-परिचालक समेत करीब 20 लोग सवार थे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को रामपुर अस्पताल पहुंचाया। हादसे में वंश पुत्र सुरंजन, निवासी कराली, की अस्पताल पहुंचने पर मौत हो गई। करीब 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें दो को सिर पर गंभीर चोटें लगी हैं। पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दुर्घटना कैसे हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम के तेवर तल्ख बने हुए हैं। मौसम विभाग ने 8 और 9 अक्तूबर को कई जिलों में बारिश, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है। 8 अक्तूबर को कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में आंधी-तूफान, बिजली चमकने और बारिश का येलो अलर्ट है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। 9 अक्तूबर को सोलन, शिमला और सिरमौर में मौसम खराब रहने का अनुमान है। वहीं, ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ हल्की बर्फबारी भी हो सकती है। मौसम खराब होने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कें फिसलने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। बिजली चमकने और तेज हवाओं के दौरान लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्तूबर के बाद व्यापक चेतावनी नहीं है, जिससे प्रदेश में मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने के आसार हैं।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में शनिवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ। मनाली से पठानकोट जा रही HRTC की बस पुलिस लाइन बाशिंग के पास करीब सुबह 6 बजे सड़क पर पलट गई। हादसे के समय बस में चालक-परिचालक समेत कुल छह लोग सवार थे। हादसे में चार यात्रियों, चालक और परिचालक समेत सभी छह लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचाया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार सभी की हालत सामान्य बताई जा रही है। घायलों की पहचान श्याम लाल (45), कृष्ण थापा (42), छाया देवी (25), राकेश कुमार (31), बस चालक मनमोहन सिंह (42) और परिचालक प्रवीण सिंह (46) के रूप में हुई है। ये लोग कुल्लू, पठानकोट और कांगड़ा क्षेत्र से संबंधित हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। बस नंबर HP-38-9738 मनाली से पठानकोट रूट पर जा रही थी। हादसे के कारणों की पुलिस जांच कर रही है। प्रारंभिक रिपोर्टों में बस के अनियंत्रित होकर पलटने की बात सामने आई है, जबकि एक रिपोर्ट में ब्रेक फेल होने की आशंका बताई गई है; वास्तविक कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा।
हिमाचल प्रदेश में गांधी जयंती के बाद बने लॉन्ग वीकेंड पर पर्यटन कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली है। शनिवार को शिमला और मनाली समेत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचे। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और अन्य मैदानी राज्यों से पर्यटक छुट्टियां मनाने पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। शिमला में शनिवार सुबह से ही सर्कुलर रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ गया, जिससे कई जगह ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। लिफ्ट के पास पार्किंग सुबह करीब 11 बजे तक भर गई और वाहनों की कतारें लिफ्ट से टॉलैंड तक पहुंच गईं। विधानसभा से बालूगंज के बीच भी ट्रैफिक प्रभावित रहा और वाहन धीमी गति से चलते नजर आए। पर्यटकों की बढ़ती संख्या का असर शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी दिखाई दिया। मालरोड और रिज मैदान में दिनभर चहल-पहल रही। होटलों में भी ऑक्यूपेंसी बढ़ी है। शुक्रवार को शिमला में होटल ऑक्यूपेंसी करीब 70 फीसदी रही और शनिवार को इसके और बढ़ने की उम्मीद जताई गई। उधर, मनाली में भी पर्यटकों की भारी आमद के कारण सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। रिपोर्टों के अनुसार शनिवार को मनाली में 4,000 से अधिक पर्यटक वाहन पहुंचने की बात सामने आई है, जिससे कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। शुक्रवार रात मनाली और आसपास के मार्गों पर भी भारी जाम की स्थिति बनी। बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से शहर के होटल भी पैक होने लगे हैं। वहीं परवाणू में भी शुक्रवार को करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लगा था, जिससे हिमाचल आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानी हुई। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती संख्या से होटल, रेस्तरां, टैक्सी और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। लंबे समय बाद पर्यटन स्थलों पर बढ़ी भीड़ को कारोबार के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
नालागढ़। सोलन जिले के नालागढ़ उपमंडल के लूणा गांव निवासी CISF सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह का गुरुवार को पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में ड्यूटी के दौरान गोलीबारी की घटना में उनकी मौत हुई थी। उनका पार्थिव शरीर सुबह करीब छह बजे उनके पैतृक गांव पहुंचा। सुबह करीब 9:30 बजे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे भावुक पल उस समय आया, जब लक्ष्मण सिंह के 10 वर्षीय बेटे श्रेय ठाकुर ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार, ग्रामीणों और पूर्व सैनिकों की आंखें नम हो गईं। अंतिम विदाई के दौरान CISF और हिमाचल पुलिस की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर लक्ष्मण सिंह को अंतिम सलामी दी। बड़ी संख्या में ग्रामीण, पूर्व सैनिक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। लक्ष्मण सिंह कठुआ के बसोहली क्षेत्र के माशका गांव में एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। 29 सितंबर को हुई गोलीबारी की घटना में लक्ष्मण सिंह समेत चार जवानों की मौत हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, क्यूआरटी की बी शिफ्ट में तैनात हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह ने अपनी सर्विस राइफल से फायरिंग की थी। इस घटना में लक्ष्मण सिंह के अलावा असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार की भी मौत हुई थी। घायलों को चंबा के खैरी स्थित एनएचपीसी अस्पताल ले जाया गया था, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लक्ष्मण सिंह अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे गांव में शोक का माहौल रहा।
शिमला। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ शिमला पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए अब तस्करों की आर्थिक गतिविधियों और अवैध कमाई पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने तीन एनडीपीएस मामलों में करीब 40.5 लाख रुपये से अधिक की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की हैं। इनमें वाहन, बैंक खातों की रकम औरन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं। बालूगंज मामले में 23 लाख की संपत्ति सीज बालूगंज थाने में दर्ज मामले में 23 फरवरी 2026 को आईएसबीटी शिमला के पास करीब सात ग्राम चिट्टा बरामद होने के बाद अविनाश चौहान को गिरफ्तार किया गया था। जांच आगे बढ़ने पर विशाल यादव, जय प्रकाश यादव और रवि अहिरवार भी गिरफ्तार किए गए। वित्तीय जांच में पुलिस के अनुसार करीब 22 लाख रुपये की स्कॉर्पियो-एन और बैंक खाते में मौजूद रकम समेत लगभग 23 लाख रुपये की संपत्ति सामने आई, जिसे एनडीपीएस एक्ट के तहत सीज किया गया। पुलिस के मुताबिक विशाल यादव के खाते में जनवरी 2025 से 26 अगस्त 2026 के बीच करीब एक करोड़ रुपये का लेन-देन भी मिला, जिसका स्पष्ट वैध आय स्रोत सामने नहीं आया। रामपुर के दो मामलों में 17.5 लाख की कार्रवाई रामपुर थाने के एक मामले में मई 2025 में किराये के कमरे से करीब 31 ग्राम चिट्टा और 50,400 रुपये नकद बरामद किए गए थे। मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद वित्तीय जांच की गई। पुलिस ने करीब 9.5 लाख रुपये मूल्य की संपत्तियां, जिसमें कार, मोटरसाइकिल और स्कूटी शामिल हैं, सीज की हैं। वहीं रामपुर के दूसरे मामले में 25 जून 2025 को नोगली बाजार के पास मनसा राम उर्फ मनीष को करीब 2.5 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उसके बैंक और डाकघर खातों समेत अन्य वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई। पुलिस के अनुसार करीब 8 लाख रुपये की रकम प्रथम दृष्टया नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी मिली, जिसे सीज किया गया। 2026 में अब तक 12.5 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति सीज शिमला पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक एनडीपीएस मामलों की वित्तीय जांच के आधार पर 12.5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं। पुलिस अब नशा तस्करों तक पहुंचने के साथ-साथ उनके आर्थिक नेटवर्क और नशे से अर्जित कथित अवैध संपत्ति की भी जांच कर रही है।
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अमेरिकी कांग्रेस के पांच सदस्यीय द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ने 30 सितंबर को तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से उनके आवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट ने किया। प्रतिनिधिमंडल में जेम्स गैलाघर, जिमी पैट्रोनिस, हेली स्टीवंस और श्री थानेदार शामिल रहे। मुलाकात के बाद सांसदों ने मीडिया से बातचीत में तिब्बत, मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और चीन की नीतियों को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। ब्रायन मास्ट ने कहा कि अमेरिका तिब्बती लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता के समर्थन में खड़ा है। उन्होंने चीन पर तिब्बतियों और अन्य समुदायों के खिलाफ दमन करने के आरोप भी लगाए। मास्ट ने चीन की ओर से तिब्बती समुदाय पर देश की सीमाओं के बाहर भी निगरानी और दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्वतंत्रता, लोकतंत्र और लोगों के मूल अधिकारों को महत्वपूर्ण मानता है। दलाई लामा के उत्तराधिकारी का मुद्दा भी उठा मुलाकात के दौरान दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर भी चर्चा हुई। ब्रायन मास्ट ने चीन की ओर से भविष्य के दलाई लामा के चयन को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म से जुड़ा निर्णय धार्मिक परंपरा के अनुसार होना चाहिए। ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात पर भी चर्चा अमेरिकी सांसदों से हाल में हुई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर भी सवाल किया गया। मास्ट ने कहा कि दलाई लामा का मानना है कि दुनिया के बड़े देशों के नेताओं के बीच बातचीत होना जरूरी है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी बातचीत से तिब्बतियों और अन्य समुदायों के अधिकारों को लेकर अमेरिका की चिंताएं खत्म नहीं होतीं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बत से जुड़े प्रस्तावित अमेरिकी कानूनों और आगे के सहयोग को लेकर भी सकारात्मक रुख जताया। सांसदों ने कहा कि तिब्बत के मुद्दे पर अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय समर्थन बना हुआ है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यह धर्मशाला यात्रा ऐसे समय हुई है जब तिब्बत और दलाई लामा के उत्तराधिकार को लेकर चीन और तिब्बती पक्ष के बीच मतभेद जारी हैं। धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात के बाद अमेरिकी सांसदों के बयानों ने इस मुद्दे को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।
हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल को करीब 133 दिनों के इंतजार के बाद नया नेतृत्व मिल गया है। बुधवार, 30 सितंबर को बार काउंसिल के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में प्रदेश के प्रतिनिधि के चुनाव हुए। चुनाव में वरिष्ठ अधिवक्ता I.N. मेहता को हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल का चेयरमैन चुना गया। वहीं अधिवक्ता शिवानी शर्मा वाइस चेयरमैन बनीं। इसके अलावा अधिवक्ता विक्रांत चंदेल को बार काउंसिल ऑफ इंडिया में हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 21 सदस्यों ने किया मतदान नए पदाधिकारियों के चुनाव में कुल 21 मत निर्णायक रहे। इनमें बार काउंसिल के 18 निर्वाचित सदस्य, दो मनोनीत सदस्य और हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता शामिल रहे। इन्हीं सदस्यों ने मतदान कर नए नेतृत्व का चुनाव किया। चुनाव में I.N. मेहता को चेयरमैन, शिवानी शर्मा को वाइस चेयरमैन और विक्रांत चंदेल को BCI में हिमाचल के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया। चार महीने बाद पूरा हुआ नेतृत्व का गठन हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के 18 सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया अप्रैल में हुई थी और 20 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए गए थे। इसके बाद नए पदाधिकारियों के चुनाव के लिए करीब 133 दिनों तक इंतजार करना पड़ा। अब चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और BCI प्रतिनिधि के चुनाव के साथ प्रदेश बार काउंसिल के नए नेतृत्व का गठन पूरा हो गया है। बार काउंसिल के इस चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत दो महिला सदस्यों को मनोनीत किया गया है। अब नए नेतृत्व के सामने प्रदेश के अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने और बार काउंसिल के कामकाज को प्रभावी ढंग से संचालित करने की जिम्मेदारी होगी।
60 साल सेवा की मांग पर हाईकोर्ट पहुंचा कर्मचारी, रिटायरमेंट के बाद उसी पद पर दोबारा नियुक्ति के आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 58 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त किए गए कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए उसी पद और उसी स्थान पर दोबारा नियुक्त करने के आदेश दिए हैं। मामला ठाकुरदास बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता को 30 अप्रैल 2026 को 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर रिटायर कर दिया गया था। कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि उसे 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने का अधिकार है और दोबारा उसी पद पर काम करने की अनुमति मांगी। मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया गया था, लेकिन रिट याचिका और स्थगन आवेदन पर जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तहत कर्मचारी को वहीं और उसी पद पर पुन: सेवा में लेने का आदेश दिया, जहां वह सेवानिवृत्ति के समय तैनात था। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश अंतिम फैसला नहीं है और आगे आने वाले आदेशों के अधीन रहेगा। यदि कर्मचारी को कोई सेवानिवृत्ति लाभ मिल चुका है, तो उसे विभाग को वापस करना होगा। इसके लिए कर्मचारी को राशि दो सप्ताह के भीतर जमा करनी होगी, जिसके बाद उसे अदालत के आदेश के अनुसार तत्काल सेवा में लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर 2026 को होगी। आदेश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की खंडपीठ ने पारित किया।
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन उन्हें कांगड़ा के सिटी अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से शाहपुर, कांगड़ा और प्रदेश के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है। मेजर मनकोटिया राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना में अधिकारी रहे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1982 में शाहपुर से निर्दलीय विधायक बनकर राजनीतिक सफर शुरू किया। वह 1985, 1990, 1993 और 2003 में भी शाहपुर से विधायक चुने गए और कुल पांच बार विधानसभा पहुंचे। उन्होंने हिमाचल सरकार में दो बार मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनके पास पर्यटन, नागरिक उड्डयन और कानून जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे। वह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रहे। उनका राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 2007, 2012 और 2017 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ राजनीतिक मतभेद भी लंबे समय तक चर्चा में रहे। 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था I निधन की सूचना के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर समेत कई नेताओं ने शोक जताया। परिवार के सदस्य विदेश में रहते हैं, इसलिए उनके पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की तारीख और समय तय किया जाएगा। मेजर मनकोटिया अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए है I
कांगड़ा में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा, लेंटर गिरने से 25 घायल; 3 गंभीर कांगड़ा जिले में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मैच देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एक लेंटर पर चढ़े हुए थे। इसी दौरान लेंटर अचानक गिर गया, जिससे वहां मौजूद करीब 25 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। घायलों में से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर उपचार के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा रेफर किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लेंटर पर क्षमता से अधिक लोगों के चढ़ने के कारण यह हादसा हुआ। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची और हादसे के कारणों की जांच शुरू की। फिलहाल घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। प्रशासन की ओर से घटना की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और यह भी जांच की जा रही है कि लेंटर की क्षमता कितनी थी और उस पर कितने लोग मौजूद थे।
हिमाचल प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने फिर करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। रविवार को रोहतांग दर्रा, किन्नौर और स्पीति की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी दर्ज की गई। स्पीति घाटी के कुछ इलाकों में भी ताजा हिमपात हुआ, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को सितंबर में ही सर्दी का अहसास होने लगा। मौसम विभाग के अनुसार 28 सितंबर को शिमला, सोलन और सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। बारिश और बर्फबारी के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों व पर्यटकों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करते समय सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 29 सितंबर तक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और प्रदेश के अन्य हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद मौसम में कुछ राहत मिलने की संभावना है, हालांकि 30 सितंबर से 2 अक्तूबर के बीच कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश फिर हो सकती है।
बोहली, 27 सितंबर। जय बृजेश्वर मेला बोहली का आयोजन धार्मिक आस्था, उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ किया गया। मेले में भाजपा सोलन जिला सचिव सुनील कश्यप ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर अमित शर्मा, जिला संयोजक सहकारिता प्रकोष्ठ तथा मोहित शर्मा, अध्यक्ष युवा मोर्चा धर्मपुर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मेला आयोजन समिति की ओर से प्रदीप जी एवं मदन जी ने मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि सुनील कश्यप ने बृजेश्वर महाराज के मंदिर में पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि मेले हमारी समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, एकता और सद्भाव को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि जय बृजेश्वर मेला बोहली क्षेत्र की धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसमें हर वर्ष स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। उन्होंने आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा मेले के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। मेले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में नजर आया। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों का मेले को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।
हिमाचल प्रदेश में 26 सितंबर से मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 26 से 29 सितंबर तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। सबसे ज्यादा असर 27 और 28 सितंबर को देखने को मिल सकता है। सिरमौर में 27 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 26 सितंबर को भी जिले में भारी बारिश की चेतावनी है। शिमला और सोलन में 27 व 28 सितंबर को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मंडी में भी 27 सितंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान कई क्षेत्रों में आंधी, बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी है। 27 सितंबर को कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने बारिश के दौरान फिसलन भरी सड़कों, अचानक बढ़ते जलस्तर और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने को कहा है। खासकर सिरमौर, सोलन, शिमला और मंडी के पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी रहेगी। बारिश के साथ तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे प्रदेश में मौसम ठंडा होने लगेगा। वहीं, हिमाचल में मानसून अब विदाई के चरण में है। इसके बावजूद पश्चिमी विक्षोभ और बदलती मौसम प्रणाली के कारण सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल रहा है।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रक्कड़ निवासी नेक राम और उनके परिवार के नाम करीब 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद का मामला सामने आया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच में परिवार की घोषित आय और जमीन खरीद के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। अब विजिलेंस मामले से जुड़े रिकॉर्ड आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजने की तैयारी कर रहा है। विजिलेंस ने वर्ष 2011 से 2025 के बीच नेक राम, उनकी पत्नी और मां के नाम धर्मशाला और पालमपुर तहसील के अलग-अलग क्षेत्रों में खरीदी गई जमीन का रिकॉर्ड खंगाला। जांच में इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बताई गई है। अब एजेंसी यह पता लगा रही है कि इतनी बड़ी संपत्ति खरीदने के लिए रकम कहां से आई। जांच रिकॉर्ड के अनुसार नेक राम ने वर्ष 2011-12 में 2.08 लाख रुपये, 2012-13 में 2.69 लाख रुपये और 2013-14 में 3.93 लाख रुपये की वार्षिक आय दर्शाई थी। इसके बावजूद वर्ष 2011 में करीब 48.50 लाख रुपये और 2013 में करीब 23.95 लाख रुपये की जमीन खरीद का रिकॉर्ड मिला। वहीं वर्ष 2025-26 में नेक राम ने अपनी आय 12.04 लाख रुपये बताई, जबकि इसी अवधि में उनके, उनकी पत्नी और मां के नाम करीब 48.44 लाख रुपये की जमीन खरीद दर्ज मिली। विजिलेंस ने परिवार के बैंक खातों की भी पड़ताल की है। जांच के अनुसार एक खाते में जनवरी 2013 में करीब एक लाख रुपये थे, जो अप्रैल 2022 तक घटकर 17 रुपये रह गए। दूसरे खाते में अगस्त 2013 में करीब 5 हजार रुपये थे, जबकि फरवरी 2025 में इसमें 2.62 लाख रुपये मिले। विजिलेंस अब यह भी जांच कर रही है कि जमीन खरीद के लिए कहीं किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों ने तो रकम उपलब्ध नहीं कराई। बैंक लेनदेन, आयकर रिटर्न और परिवार के सदस्यों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। इसी वित्तीय पहलू को देखते हुए रिकॉर्ड आयकर विभाग और ED को भेजने की कार्रवाई प्रस्तावित है। मामला सिर्फ जमीन खरीद और आय के अंतर तक सीमित नहीं है। विजिलेंस की FIR में सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी के आरोप भी दर्ज हैं। गलत म्यूटेशन दर्ज करने और सरकारी भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में एक महिला का नाम कब्जे के तौर पर दर्ज करने से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। मामले में तत्कालीन तहसीलदार अमर सिंह, कानूनगो वीरेंद्र कुमार, पटवारी मनीष कुमार, नेक राम, उनकी पत्नी किरण बाला, मंगला देवी समेत आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस का कहना है कि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसे भी आरोपी बनाया जा सकता है। फिलहाल विजिलेंस जमीन के सौदों, पैसों के स्रोत और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी कड़ियों की जांच कर रही है।
सोलन के रबौण क्षेत्र में एक पिकअप वाहन पलटने से हादसा हो गया। हादसे में पिकअप सवार दो लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रबौण के तीखे मोड़ पर पिकअप अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में दो लोगों को चोटें आई हैं। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू की। हादसा किस वजह से हुआ, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार हादसे में बड़ा नुकसान टल गया।
गोपी जैक्स ने आरोप लगाया कि प्रदेश में होने वाले कई बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाहरी राज्यों से कलाकारों को बुलाकर उन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि स्थानीय कलाकारों को नाममात्र का मानदेय दिया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिमाचल की लोक संस्कृति को स्थानीय कलाकार ही अपनी कला के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं तो उन्हें उचित आर्थिक सम्मान क्यों नहीं दिया जाता.
जिला शिमला के रामपुर उपमंडल में बीपीएल श्रेणी के तहत चयनित लोगों को जारी किए गए आय प्रमाण पत्रों की अब दोबारा जांच की जाएगी. उपमंडल अधिकारी (नागरिक) रामपुर बुशहर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. आदेश के अनुसार 50 हजार और 75 हजार तक की वार्षिक आय दर्शाने वाले उन सभी आय प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन किया जाएगा, जो बीपीएल श्रेणी में चयनित व्यक्तियों को जारी किए गए हैं.पुनः सत्यापन के दौरान संबंधित तहसीलदार और नायब तहसीलदार प्रत्येक मामले में जांच करेंगे. यह जांच संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, पटवारी, ग्राम पंचायत प्रधान और संबंधित वार्ड सदस्य की समिति के साथ परामर्श कर की जाएगी. जांच में संबंधित व्यक्ति और परिवार की वास्तविक आय, आर्थिक स्थिति और आय प्रमाण पत्र जारी करने के आधार की पड़ताल की जाएगी. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रमाण पत्र उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के अनुरूप है या नहीं.प्रत्येक आय प्रमाण पत्र की सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि जांच के बाद प्रमाण पत्र सही पाया गया है अथवा नहीं. एसडीएम कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को यह पूरी प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. मामले को अति आवश्यक और समयबद्ध बताया गया है.
धर्मशाला: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की अलग से गणना करवाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने बुधवार को धर्मशाला में जोरदार प्रदर्शन किया। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता डीसी कार्यालय के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन से पहले मोर्चा की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें केंद्र सरकार से OBC की वैज्ञानिक, प्रमाणिक और अलग गणना करवाने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में OBC की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने आना बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि सही आंकड़े मिलने के बाद शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहतर नीतियां तैयार की जा सकेंगी। मोर्चा ने मांग रखी कि जिस तरह SC और ST की जनगणना की जाती है, उसी तर्ज पर OBC की भी अलग से गणना हो। इसके साथ ही प्रत्येक जाति के लिए अलग और विशिष्ट कोड निर्धारित करने तथा ओपन कॉलम की जगह मानकीकृत व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। OBC विशेष वर्ग से महेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि जनगणना में OBC की वास्तविक संख्या दर्ज होना सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जातिवार आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की भी मांग उठाई।
NSP पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रवृत्ति के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पात्र विद्यार्थी एक मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के साथ-साथ पात्रता पूरी करने पर एक से अधिक कल्याणकारी छात्रवृत्तियों का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार ने मौजूदा ‘वन स्टूडेंट-वन स्कॉलरशिप’ व्यवस्था को बदलकर ‘वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप’ करने का फैसला लिया है। यानी अगर कोई विद्यार्थी पहले से कल्याणकारी छात्रवृत्ति ले रहा है और बाद में मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे मेरिट छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह मेरिट छात्रवृत्ति लेने वाला विद्यार्थी पात्रता पूरी करने पर कल्याणकारी छात्रवृत्ति भी ले सकेगा। वहीं विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी आसान की गई है। पहली बार आवेदन करते समय भरी गई सामान्य जानकारी को आगे के आवेदनों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। बाद के आवेदनों में विद्यार्थी को केवल संबंधित योजना की जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अगर आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो विद्यार्थी को योजना से जुड़ी जानकारी में सुधार का मौका दिया जाएगा। वहीं सामान्य शैक्षणिक या संस्थान संबंधी जानकारी में बदलाव करने के लिए पहले जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे। नए प्रावधान के तहत संस्थानों के नोडल अधिकारियों को भी विद्यार्थी के सभी छात्रवृत्ति आवेदनों और उनकी स्थिति दिखाई देगी। इससे आवेदन के सत्यापन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों को इन नए नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थानों से कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, प्रार्थना सभा और जागरूकता अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को जानकारी दी जाए और निर्धारित समय सीमा में आवेदन करवाए जाएं। यानी 2026-27 से विद्यार्थियों को ज्यादा छात्रवृत्ति के अवसर मिलने के साथ-साथ आवेदन प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान होने वाली है।
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में ताल कृषि सहकारी सभा में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच के बाद विजिलेंस ने मामले में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। बताया जा रहा है कि सहकारी सभा में करीब 2 करोड़ 46 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस ने जांच आगे बढ़ाई और अब छह लोगों को FIR में नामजद किया है। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद सहकारी क्षेत्र में भी हड़कंप मच गया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम में गड़बड़ी कैसे हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसे का इस्तेमाल किस तरह किया गया। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में गड़बड़ी से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली और आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने बुधवार को शिमला के चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में बिजली बोर्ड कर्मचारी चौड़ा मैदान में जुटे और रैली निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगें जल्द पूरी करने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सरकार से ठोस फैसला लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और OPS बहाली समेत अन्य लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाए। चौड़ा मैदान में हुए इस प्रदर्शन के चलते काफी देर तक माहौल गरमाया रहा और कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कांगड़ा सहित कई जिलों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। कांगड़ा में कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 4 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और सड़कें प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों और प्रशासन को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। कांगड़ा में बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में करीब 300 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इन बसों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और रूटों पर चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। इन इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का मुख्य उद्देश्य डीजल बसों पर निर्भरता कम करना और हिमाचल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना है। जिन रूटों पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हो चुके हैं, वहां इन बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में पुराने डीजल वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों से बदला जाए। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, नई इलेक्ट्रिक बसें स्थानीय रूटों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार लंबी दूरी के रूटों पर भी चलाई जाएंगी। पालमपुर में हाल ही में 10 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। वहीं बिलासपुर, कांगड़ा और शिमला ग्रामीण सहित कई क्षेत्रों को भी नई ई-बसें उपलब्ध करवाई गई हैं। सरकार ने भविष्य में एचआरटीसी के बेड़े में 1,000 और इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई, एम्स बिलासपुर और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू करने की योजना है। इससे लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सोशल मीडिया पर चर्चित निजी स्कूल के छात्र मौत मामले को लेकर अब पूर्व सैनिक लीग खुंडिया ने तहसीलदार खुंडिया को ज्ञापन सौंप स्कूल प्रशासन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा की देहरा के उक्त निजी स्कूल के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिसकी तारीख का ऐलान भी जल्द कर दिया जाएगा । पूर्व सैनिक लीग के पदाधिकारियों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच सुनिश्चित की जाए। बता दें यह मामला खुंडिया थाना के अंतर्गत का है जहां ठम्बा निवासी 14 वर्षीय कबीर राणा ने घर पर अपनी इहलीला समाप्त कर ली थी। वहीं युवक के पिता ने स्कूल पर बच्चे के साथ होस्टल में प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, जिस पर पुलिस मामले की गम्भीरता से जांच कर रही है। बहरहाल मामले में सत्यता क्या है वो तो पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। प्राथमिक स्थिति में पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस बीच स्कूल प्रबंधन ने पुलिस की जांच में पूर्ण सहयोग करने की बात कही है।
तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी शिमला में पहली बड़ी भू-स्खलन की घटना सामने आई है। मंगलवार दोपहर बाद हुई तेज बारिश के कुछ ही समय बाद शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरियर क्षेत्र में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। देखते ही देखते भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे शिमला-चक्कर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और यातायात ठप हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों, कार्यालय आने-जाने वालों और यात्रियों को घंटों तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का अभियान शुरू किया, जो देर शाम तक जारी रहा। सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही धीमी कर दी गई, जिससे दोनों ओर लंबा जाम लग गया और सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक बालूगंज मार्ग से डायवर्ट किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। मानसून की शुरुआत के साथ ही शिमला समेत प्रदेश के अधिकांश पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
श्री अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ से पहले सोमवार, 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा में विराजमान हिमलिंग की पारंपरिक प्रथम पूजा संपन्न हुई। इसी के साथ वार्षिक अमरनाथ यात्रा की धार्मिक और औपचारिक शुरुआत हो गई। प्रथम पूजा में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा, श्राइन बोर्ड और श्री बाबा अमरनाथ न्यास के पदाधिकारी, संत-महात्मा तथा गुफा के पुजारी शामिल हुए। इस दौरान यात्रा के सफल, सुरक्षित और मंगलमय संचालन की कामना की गई। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पवित्र गुफा में प्रथम पूजा करने का अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बाबा बर्फानी से देशवासियों की शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि 3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा के लिए प्रशासन, श्राइन बोर्ड, सेना, पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय समुदाय, सेवा प्रदाता और स्वयंसेवक पूरी तरह तैयार हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार यात्रा अनुभव देने के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर होने वाली प्रथम पूजा को अमरनाथ यात्रा का आधिकारिक धार्मिक शुभारंभ माना जाता है। इस वर्ष 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त (रक्षाबंधन) तक चलेगी। श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे।
हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों और सरकार के बीच बढ़ते टकराव के बीच सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर संकट गहरा गया है। कर्मचारियों और सरकार के बीच मंगलवार को हुई वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने 24 जून की मध्यरात्रि से ‘काम छोड़ो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस आंदोलन के चलते प्रदेशभर में एचआरटीसी बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अगले छह माह तक एचआरटीसी कर्मचारियों के हड़ताल करने पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन एक आवश्यक सेवा है और इसके बाधित होने से लाखों यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे पारंपरिक हड़ताल नहीं कर रहे हैं, बल्कि ‘काम छोड़ो आंदोलन’ के तहत ड्यूटी पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन बसों का संचालन नहीं करेंगे। यूनियन नेताओं का आरोप है कि लंबे समय से लंबित मांगों और वित्तीय समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है, जिसके कारण कर्मचारियों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एचआरटीसी की करीब 2800 बसें प्रतिदिन प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं देती हैं। ऐसे में यदि आंदोलन जारी रहता है तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजरें आगामी घटनाक्रम और संभावित समाधान पर टिकी हैं।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही राज्य सरकार अब 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है। वित्त विभाग ने इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे पहले मई 2026 में सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में अप्रैल माह में 900 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया गया था। यदि यह नया ऋण स्वीकृत हो जाता है तो अप्रैल, मई और जून के दौरान राज्य सरकार की कुल उधारी 2,100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने की प्रतिबद्ध देनदारियों का भुगतान है। राज्य को कर्मचारियों के वेतन के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये, पेंशन भुगतान के लिए 800 करोड़ रुपये, पहले से लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये तथा ऋण के मूलधन की अदायगी के लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। यानी हर महीने लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वित्तीय संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 अप्रैल 2026 को सरकार ने कुछ श्रेणियों के अधिकारियों और माननीयों के वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था। हालांकि अब राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह स्थगित वेतन जून 2026 के वेतन के साथ जारी किया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। लगातार बढ़ती उधारी के बीच हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ अब 1,11,200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां इसे सरकार की वित्तीय विफलता बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने और सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों, पेंशनरों और विकास कार्यों की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए यह कदम आवश्यक है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार बढ़ती उधारी हिमाचल की वित्तीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाएगी, या सरकार राजस्व बढ़ाने के अपने प्रयासों से इस संकट से बाहर निकल पाएगी।
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए। होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं। कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 दिसंबर से इस मामले में अंतिम सुनवाई शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। सरकारी व अर्ध-सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में की जा रही आउटसोर्स भर्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मामले में आंशिक सुनवाई की। खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे सरकार द्वारा लागू की गई आउटसोर्स नीति की वैधता के प्रश्न तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य में आउटसोर्स भर्तियों की आड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। कई गैर-पंजीकृत और अनुभवहीन संस्थाओं को मैनपावर उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि नई टेंडर प्रक्रिया के बावजूद अधिकांश मामलों में आउटसोर्स कर्मचारी वही रहते हैं, केवल ठेकेदार बदल जाते हैं, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कमीशन के लेन-देन तक सीमित होकर रह जाती है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि हजारों नियमित पदों के बावजूद उनके विरुद्ध आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्तियां की गई हैं, जबकि नियमों के अनुसार आउटसोर्स व्यवस्था केवल आपात परिस्थितियों में ही लागू की जानी चाहिए। याचिकाओं में इस पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग की गई थी, हालांकि अदालत ने इसे फिलहाल उचित नहीं माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विस्तृत जांच के बजाय अभी आउटसोर्स नीति की वैधता पर ही विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2024 को आउटसोर्स भर्तियों पर पूर्ण रोक लगाई थी और 8 जनवरी 2025 को इस रोक को हटाने से इनकार कर दिया था। राज्य सरकार ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी थी।
देहरा विधानसभा उप चुनाव में BJP प्रत्याशी होशियार सिंह की याचिका पर हिमाचल हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। अदालत ने हिमाचल सरकार और कांगड़ा को ऑपरेटिव बैंक को नोटिस जारी किए है। अब अगली सुनवाई में प्रदेश सरकार और KCB बैंक प्रबंधन को याचिकाकर्ता द्वारा लगाए आरोपों का जवाब अदालत में देना होगा। देहरा विधानसभा उप चुनाव में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव जीती हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उप चुनाव में कोड ऑफ कंडक्ट के दौरान KCB प्रबंधन ने 67 महिला मंडलों को 50-50 हजार रुपए और हिमाचल सरकार ने देहरा विधानसभा की करीब 1000 महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना से तीन महीने की राशि अकाउंट में डाली है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सरकार ने चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया है। होशियार सिंह ने हाईकोर्ट से आचार संहिता के दौरान महिला मंडलों को पैसा बांटने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पूर्व विधायक होशियार सिंह के अनुसार, महिला मंडलों और महिलाओं को बांटी राशि की सरकार ने जानकारी छिपाए रखी। विधानसभा में भी इसका जवाब नहीं दिया। आरटीआई में भी जवाब देने से इनकार कर दिया। आरटीआई में अपील करने पर उन्हें इसका जवाब मिल पाया। आरटीआई के तहत डॉक्यूमेंट मिलने के बाद अब हाईकोर्ट में पिटीशन डाली जा रही है। होशियार सिंह ने बताया कि यदि सरकार ने समय पर सूचना दी होती, तो उन्होंने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को भी इसकी शिकायत दे दी होती। मगर ECI में शिकायत 45 दिन के भीतर देना होती है। 45 दिन में सरकार द्वारा सूचना छिपाने की वजह से वह इसकी शिकायत ECI को नहीं कर पाए। बहरहाल अब होशियार सिंह की याचिका पर हिमाचल हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार और केसीसी बैंक को नोटिस जारी किये है। विधानसभा में भी गूंजा मामला देहरा विधानसभा उप चुनाव में कैश फॉर वोट का मामला विधानसभा में भी कई बार गूंज चुका है। इसी मानसून सत्र में भी बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा ने इससे जुड़ा सवाल पूछा था। मगर जवाब नहीं मिल पाया था। इस पर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा किया और सदन के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधीर शर्मा और आशीष शर्मा ने कहा कि जो जानकारी सदन में मांगी गई थी, वही सूचना उन्होंने आरटीआई के तहत ले ली है। अब तक यह मामला विधानसभा और सदन के बाहर गूंजता रहा है। इसी मामले में पूर्व विधायक होशियार सिंह ने हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को पहले ही शिकायत भेजकर सीएम की पत्नी एवं देहरा की MLA कमलेश ठाकुर को 6 साल के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग भी की है। इस्तीफा दिया, भाजपा में गए और उपचुनाव हार गए ! विदित रहे कि हिमाचल में बीते 27 फरवरी 2024 को राज्यसभा चुनाव हुआ। देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डाला। इसके बाद, होशियार सिंह समेत तीन निर्दलीय विधायक और 6 कांग्रेस विधायकों समेत भाजपा में शामिल हुए। तीनों निर्दलीय ने 22 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया। 23 मार्च को दिल्ली में इन्होंने BJP का दामन थाम लिया। इस वजह से देहरा में 10 जुलाई 2024 को उप चुनाव हुए। बीजेपी ने होशियार सिंह को टिकट दिया और कांग्रेस ने सीएम सुखविंदर सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर को प्रत्याशी बनाया। 10 जुलाई को वोटिंग और 14 जुलाई को नतीजे आए। इनमें कमलेश ठाकुर 9399 वोट के अंतर से चुनाव जीत गईं और होशियार सिंह चुनाव हार गए।
छठ पर्व दिवाली के छह दिन बाद कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाने की परंपरा है। यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य तथा चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह त्योहार संपन्न होता है। छठ पर्व 25 अक्टूबर से ही शुरू हो चुका है और आज इसका तीसरा दिन है। बीते कल खरना से ही व्रत रखने वाले लोगों का 36 घंटों का निर्जला उपवास शुरू हो चुका है। कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन होगा। यह खासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश तथा नेपाल के तराई क्षेत्र में मनाया जाने वाला पर्व है। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय विदेशों में भी इसे मनाते हैं। छठ पूजा में मूर्तिपूजा नहीं बल्कि सूर्य तथा जल की पूजा की जाती है यानि प्रकृति की पूजा। छठ को शुद्धता तथा पवित्रता का महापर्व कहा जाता है। क्यों कि इसमें शुद्धता का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखा जाता है। इस पर्व में पूरी श्रद्धा से मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ियों से शुद्ध घी से मिटटी या पीतल के बर्तन में प्रसाद बनाया जाता है। इस व्रत में चार दिनों तक बहुत ही कठोर नियम का पालन करना पड़ता है। इस वजह से इसे भक्ति और कठोर तप अद्भुत संगम कहा गया है। छठ महापर्व में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनके व छठी मां के प्रति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। इस पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है। सूर्य देवता को जीवन, ऊर्जा तथा स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है और वहीं छठी मां को संतान की रक्षा का प्रतीक। छठ पहला दिन इस दिन व्रती सिर्फ एक समय ही शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं। चावल, चना दाल एवं कद्दू की सब्जी का प्रसाद बनाया जाता है। छठ मां और सूर्यदेव को भोग लगाने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसके बाद परिवार के सदस्य इसे ग्रहण करते हैं। दूसरा दिन खरना खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद दूध और गुड़ व चावल की खीर, रोटी तथा फल का प्रसाद छठी मां को अर्पित करते हैं। इसके बाद यह प्रसाद व्रतियों द्वारा ग्रहण किया जाता है। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद से ही 36 घंटे का कठोर निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। तीसरा दिन खरना के बाद से ही इस दिन भर निर्जला उपवास पर रहते हैं व्रती। सूर्य डूबने से पहले व्रती स्नान कर स्वच्छ बिल्कुल नए कपड़े पहनते हैं। इसके बाद बांस की सूप में घी से बना ठेकुआ, चावल और घी से बना लड्डू, नारियल, गन्ना समेत कई फल और साथ ही घी का दीपक इस सूप पर रखते हैं। फिर नदी किनारे घाट पर जाकर पानी में खड़े होकर हाथ में इस सूप को लेकर डूबता हुए सूर्य को देखते हुए परिक्रमा करते हुए आराधना करते हैं। व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य व छठी मां का आभार व्यक्त करते हैं। चौथा दिन सुबह सूर्य देव के उगने से पहले व्रती स्नान कर फिर से बिल्कुल नए स्वच्छ कपड़े पहनते हैं। इसके बाद बांस की सूप में ठेकुआ, चावल और घी से बना लड्डू, नारियल, गन्ना समेत कई फल और साथ ही घी का दीपक इस सूप पर रखते हैं। फिर नदी किनारे घाट पर जाकर पानी में खड़े होकर हाथ में इस सूप को लेकर उगते हुए सूर्य को देखते हुए परिक्रमा करते हुए उपासना करते हैं। व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान सूर्य व छठी मां का आभार व्यक्त करते हैं। खरना के बाद से ही करीब 36 घंटे तक निर्जला उपवास के बाद इस दिन इस पर्व का समापन हो जाता है। इसे मनाने के पीछे पौराणिक कथाएं द्वापर युग में माना जाता है कि पांडव के कठिन वक्त में द्रौपदी ने छठ व्रत कर सूर्य देव से अपने परिवार के लिए प्रार्थना की थी। वहीं, दूसरी तरफ कर्ण रोज स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे और साथ ही सूर्य उपासना करने वाले इन्हें प्रथम साधक कहा जाता है। तब से इसे मनाया जाने लगा। त्रेता युग में श्रीराम जब अयोध्या लौटे उसके बाद छठ व्रत शुरु हुई। रावण का वध करने पर माना जाता है कि श्रीराम को ब्रह्महत्या का पाप लग गया था। इससे मुक्ति पाने के लिए कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन श्रीराम व मां सीता ने छह दिनों तक सूर्य देव की पूजा की। तब से इसे छठ पर्व के रूप में मनाया जाने लगा। मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक़, सृष्टि की रचना के वक्त देवी प्रकृति छह भागों में विभाजित हुए। छठा अंश सबसे बेहद शक्तिशाली माने गए, जिसे छठी मां कहा गया। इन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है।
बिहार विधानसभा चुनाव में 6 नवंबर को पहले फेज का (121 सीट) तथा 11 नवंबर दूसरे फेज का (122 सीट) मतदान होना है। इस बीच गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर काफी खींचतान व बगावत देखने को मिल रही है। गठबंधन ने 243 सीटों पर 254 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। गठबंधन में RJD ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने 61, सीपीआई (एम) ने 20, सीपीआई ने 9, सीपीएम ने 6 तथा मुकेश सहनी की पार्टी ने 15 उम्मीदवार उतारे हैं। हालात ऐसी बन चुकी है कि NDA के खिलाफ चुनाव लड़ने की बातें कहने वाला महागठबंधन अब एक-दूसरे के खिलाफ ही उतर आए हैं। आपको बता दें कि 12 सीटों पर महागठबंधन के घटक दल-एक दूसरे के खिलाफ ही खड़े हो गए हैं। अब राजनीतिक गलियारे में इसकी चर्चा होनी शुरू हो गई है और कि कहां तो महागठबंधन NDA के खिलाफ चुनाव लड़ने की बातें कर रहा था पर अब ये एक-दूसरे के खिलाफ ही खड़े हैं। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा ने महागठबंधन से किनारा कर लिया है। सीएम फेस भी तय नहीं NDA और महागठबंधन ने खुलकर सीएम फेस कि घोषणा नहीं की है। महागठबंधन में सीएम फेस को लेकर खींचतान जारी है। हालांकि NDA नेता कह चुके हैं कि चुनाव में एनडीए का नेतृत्व नीतीश कुमार ही करेंगे। इन 6 सीटों पर कांग्रेस-RJD आमने सामने सिकंदरा - उदय नारायण चौधरी RJD VS विनोद चौधरी कांग्रेस कहलगांव - रजनीश भारती RJD VS प्रवीण कुशवाहा कांग्रेस वैशाली - अजय कुशवाहा RJD VS संजीव कुमार कांग्रेस लालगंज - शिवानी शुक्ला RJD VS आदित्य कुमार कांग्रेस वारिसलीगंज- अनिता देवी RJD VS सतीश कुमार कांग्रेस सुल्तान गंज - चन्दन सिन्हा RJD VS ललन यादव कांग्रेस
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। चूकि इस बार अमावस्या तिथि आज शाम 5 बजकर 54 मिनट तक है। इसके बाद ही शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरु होगी। इसीलिए पंचांग के अनुसार, आज शाम 5 बजकर 54 मिनट तक अमावस्या तिथि के चलते गोवर्धन पूजा आज नहीं बल्कि कल 22 अक्टूबर को की जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 03:13 बजे से शाम 05:49 बजे तक है। इस दिन स्वाति नक्षत्र के साथ प्रीति का भी संयोग रहेगा। इस दिन ग्रहों के राजा यानि सूर्य तुला राशि में रहेंगे और साथ ही यहां चंद्रमा भी गोचर करेंगे। इस वजह से यह समय पूजा के लिए बहुत ही शुभ रहेगा। पूजा विधि गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। इस दिन सुबह उठकर घर को साफ कर लें। गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बना कर, इसपर रोली व अक्षत रख लें। अब फूल, जल, घी, गुड़, दूध व खीर-पूरी का भोग लगाएं। इसके बाद वहां दीप जलाएं। अब गोवर्धन पर्वत के चारों ओर परिक्रमा करें और आखिर में आरती करें।


















































