हिमाचल प्रदेश की सरकार आम जनता को धीमी गति से लूटने का हर प्रयास कर रही है। पिछले कुछ दिन पहले एक अधिसूचना के माध्यम से राजस्व विभाग में इंतकाल दर्ज करने की फीस में 50 गुणा से ढाई सौ गुणा बढ़ोतरी और छोटे-छोटे कामों के लिए तहसील के फार्मो पर लगने वाला कोर्ट फीस 3 और 6 से ₹20 कर दिया गया है। कांग्रेस सरकार बड़ी-बड़ी वायदे लेकर सत्ता में आई थी पर अभी तक किसी भी महिला को 1500 रुपए की पेंशन नहीं लग पाई है। कांग्रेस जब से सत्ता में आई है तब से लूट तंत्र आम जनता पर हावी हो गया है, यह बात भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री एडवोकेट अभिषेक पाधा ने कही। उन्होंने कहा कि जमीन के इंतकाल दर्ज होने की फीस की बढ़ोतरी इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है, जहां मृतक पिता की विरासत को लेने के लिए भी लोगों को सरकार को 200 रुपए देने पड़ेंगे और जिस आदमी ने जमीन खरीदी होगी वह सरकार को भारी-भरकम रजिस्ट्रेशन फीस स्टांप ड्यूटी अदा करने के बावजूद 500 रुपए तक राशि अदा करेगा और तो और रोजमर्रा के काम में आने वाले छोटे स्टांप पेपर की छपाई बंद कर, ई स्टांपिंग को बढ़ावा देने की बात तो की है परंतु हिमाचल प्रदेश जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी ठीक ना होने की वजह से लोगों की परेशानियां भी बढ़ेगी और स्टांप छपाई के लिए उन्हें अतिरिक्त व्यय भी करना पड़ेगा। यह सारे निर्णय आम जनता के विश्वास के साथ कुठाराघात है और भाजपा हर स्तर पर गलत निर्णयों का विरोध करेगी।
जयसिंहपुर के पूर्व विधायक रविंद्र धीमान ने महाजन संपर्क अभियान के तहत लाहडू के बूथ कूहण, लाहडू ,भूलंदर में लोगों के साथ बैठक की जिसमें रविंद्र धीमान ने केन्द्र सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं के बारे में जानकारी दी। रविंद्र धीमान ने बताया कि आज जो भी प्रदेश में जन कल्याणकारी योजना चल रही है उन सभी योजनाओं में केन्द्र सरकार की अहम भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बैठक में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनाने की अपील की।
केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पूरे देश के विपक्षी दलों के नेता आज पटना में जुट रहे हैं। इस बिच विपक्ष की एकता बैठक से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, 'एकसाथ मिलकर हम बीजेपी को हराने जा रहे है। ' कर्नाटक में हम लोगों ने बीजेपी को हराया है। उन्होंने दावा किया कि तेलगांना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनेगी। राहुल गांधी ने कहा, देश में दो विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है एक हमारी भारत जोड़ो की और एक तरफ भाजपा की भारत तोड़ो विचारधारा की। बीजेपी हिंदुस्तान को तोड़ने का काम कर रही है। नफरत और हिंसा फैलाने का काम कर रही है और कांग्रेस पार्टी जोड़ने का काम कर रही है और मोहब्बत फैलाने का काम करते हैं। नफरत को नफरत से नहीं काटा जा सकता है, नफरत को मोहब्बत से ही काटा जा सकता है। - मल्लिकार्जुन खरगे बोले अगर बिहार जीत गए तो भारत जीत जाएंगे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कांग्रेस कार्यालय पर कहा, इस कांग्रेस ऑफिस से जो भी नेता निकला वे देश के आजादी के लिए लड़ा। हमें गर्व है कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद इसी धरती से थे। अगर हम बिहार जीत गए तो सारे भारत में हम जीत जाएंगे.
पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा पर सियासी वार-पलटवार शुरू हो गया है। कांग्रेस ने पीएम के लोकतंत्र से जुड़े जवाब को निराशाजनक बताया है। वहीं, भाजपा का कहना है कि पीएम मोदी ने एक गिरोह के मकसदों पर पानी फेर दिया। दरअसल अपनी यात्रा के दूसरे दिन पीएम मोदी व्हाइट हाउस पहुंचे, जहां उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की द्विपक्षीय बातचीत हुई। इसके बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान अमेरिकी मीडिया ने भारत में लोकतंत्र, मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल किया। इसका पीएम मोदी ने करारा जवाब दिया। ये था सवाल : पीएम मोदी से एक महिला पत्रकार ने पूछा था कि लोग कहते हैं भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। बहुत सारे मानवाधिकार संगठन हैं जो कहते हैं कि आपकी सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करती है और अपने आलोचकों को चुप कराती है। आप और आपकी सरकार मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और फ्री स्पीच को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाना चाहेगी? पीएम ने दिया ये जवाब इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा " मुझे आश्चर्य हो रहा है कि आप कह रहे हैं कि लोग कहते हैं..लोग कहते ही नहीं, बल्कि भारत लोकतंत्र है। जैसा राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के डीएनए में लोकतंत्र है। लोकतंत्र हमारी आत्मा है.. लोकतंत्र हमारे रगों में है, लोकतंत्र को हम जीते हैं और हमारे पूर्वजों ने उसको संविधान के रूप में शब्दों में ढाला है। हमारी सरकार लोकतंत्र के मूलभूत मूल्यों पर बने हुए संविधान के आधार पर चलती है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा था कि भारत में सरकार के जो लाभ हैं, सभी के लिए उपलब्ध हैं.. जो भी उसके हकदार हैं..सबको मिलते हैं। इसलिए, भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों में धर्म, जाति, उम्र और भू-भाग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।
दिल्ली-लेह रूट पर एचआरटीसी की बस सेवा शुरू होने के बाद अब पर्यटन विकास निगम ने भी बस सेवा शुरू करने की तैयारी कर ली है। मिली जानकारी के अनुसार पर्यटन निगम 1 जुलाई से मनाली से लेह के लिए अपनी बस सेवा शुरू करेगा। महज 14 घंटे में पर्यटक मनाली से लेह पहुंच सकेंगे। डीलक्स बस का किराया 1800 रुपये प्रति यात्री रहेगा। खास यह है कि पर्यटक इस बस में सफर के साथ ही पर्यटन स्थलों की सैर और बर्फ के बीच मस्ती भी कर सकेंगे। यह बस बारालाचा, तंगलांगला, दारचा, सूरज ताल और दीपक ताल जैसे पर्यटन स्थलों में रुकेगी। गौरतलब है कि एचआरटीसी ने दिल्ली-मनाली-केलांग-लेह रूट पर अपनी बस सेवा शुरू कर दी है। वहीं निगम के परिवहन अधिकारी रामपाल ने बताया कि बस का किराया 1800 रुपये प्रति सीट रहेगा। शिकुंला दर्रा के लिए मिलने वाली बस सुविधा के लिए अभी इंतजार करना होगा।
एलआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। विद्यार्थियो और शिक्षको ने इसमे बढ़ चढ़ कर भाग लिया और योग तथा ध्यान किया। योग के असंख्य लाभ हैं जो व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। इस दिन छात्रों को सहज योग और इससे होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी गई। योग आज के तनावपूर्ण जीवन में स्वास्थ्य शक्ति को बेहतर बनाता है और शारिरीक और मानसिक विकार को दूर करता है। इस अवसर पर एलआर के उप निदेशक आदिल हुसैन, हुसैन जैदी और विभिन्न विभागों के प्राचार्य और प्रमुख डॉ निशा शर्मा, डॉ श्वेता अग्ग्र्वाल, कंचन बाला जसवाल, श्वेता गुप्ता, नवीन कुमार अपने स्टाफ के साथ उपस्थित रहे और सभी विद्यार्थियों को योग के लिये प्रोत्साहित किया।
खण्ड विकास कार्यालय इंदौरा के अंतर्गत विभिन्न कर्मचारियों के 10 पद रिक्त चल रहे हैं। जिससे कार्यों के क्रियान्वयन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह विषय विधायक व पंचायती राज विभाग तथा विकास खण्ड इंदौरा के अंतर्गत कनिष्ठ अभियंताओं, तकनीकी सहायकों, पंचायत सचिवों, ग्राम रोजगार सेवकों व कार्यालय स्टाफ की बैठक के दौरान विधायक मलेंद्र राजन के ध्यान में लाया गया। बैठक में एस.डी.एम. इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर, बी.डी.ओ. इंदौरा सुदर्शन सिंह, जिला परिषद परवीन कुमार मिंदा, पूर्व जिला परिषद व कांग्रेस मंडलाध्यक्ष दविंद्र मनकोटिया विशेष रूप से सम्मिलित हुए। इस दौरान विधायक, एस.डी.एम. अथवा मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन के माध्यम से आई शिकायतों का क्या निवारण किया गया है अथवा कारवाई कहाँ तक हुई है, इस बारे में न केवल कर्मचारियों से पूछताछ की गई, बल्कि उन्हें उक्त समस्याओं का एक माह के अंदर - अंदर समाधान करने के निर्देश दिए गए। विकास खण्ड इंदौरा में ग्राम रोजगार सेवक के 6 पद, तीन पद तकनीकी सहायकों के व एक पद सी.ओ. का रिक्त चल रहा है। वहीं विकास खण्ड के अंतर्गत पिछले कई माह से पैसे जमा करवाने के बावजूद भी हिमऊर्जा द्वारा सौर उर्जा चालित लाइट्स उपलब्ध नहीं करवाई जा रहीं, यह विषय भी विधायक के ध्यान में लाया गया। विधायक ने दो टूक कहा कि कर्मचारी रसूखदारों को लाभ दिलाना बंद करें और केवल पात्र लोगों की समस्याओं पर ध्यान दें, यही व्यवस्था परिवर्तन उनकी सरकार का लक्ष्य है।
खंड विकास कार्यालय कुनिहार में कुलवंत सिंह पोटन ने नए (एचए एस) खंड विकास अधिकारी के रूप में अपना पदभार संभाला। इससे पूर्व वे निचार में सेवाएं दे रहे थे। गौर रहे कि कुलवंत सिंह पोटन 2021 बैच के एच ए एस हैं। खंड विकास अधिकारी के तौर पर निचार में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। वे अपने मृदुभाषी व मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। अपनी प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए उन्होने कहा कि वे खंड विकास अधिकारी के तौर पर कुनिहार ब्लॉक में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं को सही तरीके से क्रियान्वयन पर जोर देंगे ताकि इन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को मिल सके। इसके साथ वे सभी कार्यों में पारदर्शिता लाने का प्रयास करेंगे और लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ कम से कम समय में दिलवाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि कुनिहार ब्लॉक को 3 महीने में जिला में नंबर वन व 6 महीने में प्रदेश में नंबर वन लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रधान ,उपप्रधान, बीडीसी सदस्य जिला परिषद सदस्य, वार्ड मेंबर व कार्यालय स्टाफ से सहयोग की अपील करते हुए कहा की सभी मिलजुल कर कार्य करेंगे। जिसके लिए विकास खण्ड की सभी 56 पंचायतों के लोगों का सहयोग चाहिए। जिससे हम कुनिहार ब्लॉक को एक नई दिशा की ओर ले जा सकते हैं। इससे पहले नए खंड विकास अधिकारी का प्रधान परिषद कुनिहार के अध्यक्ष रूप सिंह ठाकुर की अगुवाई में सभी प्रधानों ने शॉल, टोपी व पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। वही इस मौके पर ग्राम पंचायत हाटकोट प्रधान जगदीश अत्री,योगेश गौतम भूमति, हरिराम वर्मा साईं, ओम प्रकाश चईधार, सुनीता गर्ग पलोग, उर्मिला बातल, बलविंदर कौर कोठी, यशवंत ठाकुर पलानिया, प्रेम चोपड़ा हनुमान बड़ोग, अंजू जगोता मेटरनी, उर्मिला चम्याल,पूनम पट्टा,निशा कुंहर ,राकेश ठाकुर कुनिहार, सुरेंद्र मान, सुमित्रा समोग, आशीष बलेरा, उर्मिला मांगल, ललिता बैरल व उपप्रधान हाट कोट रोहित जोशी आदि मौजूद रहे।
सी पी आई एम पछाद कमेटी के सचिव आशीष कुमार ने जारी एक प्रेस ब्यान मे कहा कि दो टैक्सी यूनियनों के बीच चल रहे विवाद को सरकार को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए और सरकार में जिम्मेवार लोगों को बेहूदा ब्यान बाजी से भी बचना चाहिए। सीपीआईएम सचिव पच्छाद आशीष कुमार ने कहा कि दो टैक्सी यूनियनों के बीच विवाद को क्षेत्रवाद का मुद्दा बनाना अत्यंत खेदजनक है। इस मुद्दे को शीघ्र सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा क्षेत्रवाद का नहीं है बल्कि रोजगार का है। बेरोजगारी से जूझ रहे युवा रोजगार की प्रतिस्पर्धा के कारण एक दूसरे से उलझते हैं। युवाओं का आक्रोश और गुस्सा व्यवस्था के खिलाफ उठने के बजाय आपस में एक-दूसरे पर उतरता है। जिसका लाभ राजनैतिक लोग जनता को आपस में लड़ा कर उठाते हैं। ताकि लोग विकास, रोज़गार की बात करने के बजाय या उनसे सवाल पूछने के बजाय आपस में उलझे रहें। यही इस मामले में भी हुआ है। जनता को भड़का कर नेता मौन हो गए हैं और जनता आपस में लड़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन गुरुवार को दोनों देशों के बीच होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता से पहले व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में एकांत वार्ता करेंगे। जानकारी के अनुसार यह बैठक दोनों नेताओं के बीच अधिकारियों की मौजूदगी में होने वाली वार्ता से अलग होगी। दोनों नेता इस बैठक में क्या बात करेंगे उसका एजेंडा फिलहाल साफ नहीं है। दूसरी तरफ द्विपक्षीय बैठक को लेकर व्हाइट हाउस ने एजेंडा साफ कर दिया है। बताया गया है कि उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर बात होगी। इनमें रक्षा, स्पेस, स्वच्छ ऊर्जा और अहम तकनीक को साझा करने पर चर्चा होगी। पीएम मोदी इस बैठक के बाद अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने के लिए रवाना होंगे। यहां वे संसद के साझा सत्र को संबोधित करेंगे, जिसमें सीनेट (उच्च सदन) और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचले सदन) के सांसद मौजूद होंगे। इसके अलावा भारतीय मूल के कई अमेरिकी भी इस संबोधन के गवाह बनेंगे।
जिला के पुलिस थाना ज्वालामुखी के तहत राहगीर को टक्कर मार कर फरार होने का मामला सामने आया है। पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार वार्ड 7 का रहने वाला अभि कपूर वौहण में एक निजी होटल के पास जब सड़क किनारें से जा रहा था तो एक नामालूम कार चालक ने कार को लापरवाही व तेज रफ्तारी से चलाते हुए सड़क किनारे चल रहे अभी कपूर को टक्कर मार घायल कर दिया है। हादसे के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसका उपचार किया जा रहा है। उधर पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 तथा 187 मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला पुलिस थाना ज्वालामुखी में दर्ज किया गया है। मामले की पुष्टि डीएसपी ज्वालामुखी विकास धीमान ने की।
बर्लिन जर्मनी में चल रही स्पेशल ओलोम्पिक समर गेम्स में भारतीय बास्केटबॉल टीम ने सैमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। यह बहुत ही गर्व की बात है कि बास्केटबॉल स्पर्धा में जिला सोलन के डूमेहर अर्की के राज कुमार पाल बतौर हेड कोच भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे है व बॉयज वर्ग में कुनिहार गणपति एजुकेशन सोसायटी का विशेष बच्चा अवनीश कौंडल भारतीय बास्केटबॉल टीम का कैप्टन है। बर्लिन से राज कुमार पाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि गर्ल्स टीम ने क्वाटर फाइनल में स्वीडन की टीम को 6 पॉइंट्स से हरा कर व बॉयज टीम ने पुर्तगाल को 9 पॉइंट्स से हरा कर सेमी फाइनल में प्रवेश कर लिया है।
बाल बालिका आश्रम गरली में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयुष विभाग द्वारा आयोजित योग शिविर में एसडीएम देहरा शिल्पी बेक्टा ने शिरकत की। एसडीएम शिल्पी बेक्टा ने वहां मौजूद बच्चियो और शिविर में उपस्थित लोगों के साथ लगभग एक घण्टे तक विभिन्न योग क्रियाएँ तथा आसान किये। इस अवसर पर एसडीएम शिल्पी बेक्टा ने उपस्थित बच्चों और स्टाफ को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि योग की उत्पत्ति भारतवर्ष से ही हुई तथा योग के रूप में भारत ने पूरी दुनिया को निरोग रहने का एक नायाब तोहफा दिया है। उन्होंने कहा कि योग मनुष्य की मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है, एवं योग के नियमित अभ्यास से इंसान की जीवन शैली में उल्लेखनीय रूप से निखार आता है। उन्होंने कहा कि योग सही तरीके से जीने का विज्ञान है और इसे हर आदमी को दैनिक जीवन में शमिल करना चाहिए। शिल्पी बेक्टा ने कहा कि अन्य चिकित्सा पद्धतियों के अतिरिक्त योग का अपना विशेष महत्व रहा है और अब बड़े- बड़े चिकित्सा संस्थानों ने भी योग अपनाया है। उन्होंने कहा कि आरोग्य रहने के लिये हमें योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिये और आज हम सभी प्रतिदिन योगाभ्यास करने का संकल्प यहां से लेकर जाना चाहिये। इससे पूर्व, एसडीएम शिल्पी बेक्टा ने दीप प्रज्वलित कर योगा शिविर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
हिमाचल के ज़िला सोलन के अटल शिक्षा कुञ्ज स्थित प्रसिद्ध आईईसी यूनिवर्सिटी में बुधवार को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया। इस योग कार्यक्रम में योग प्रशिक्षक, पतंजलि योगपीठ खेमचंद आर्य ने प्रतिभागियों को योग की प्रमुख मुद्राएं एवं आसन करवाए। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, टीचिंग स्टाफ, नॉन-टीचिंग स्टाफ और विद्यार्थियों के उत्साह के साथ भाग लिया। इस अवसर पर खेमचंद आर्य ने कहा कि संकल्प के माध्यम से योग को दिनचर्या में उतारकर हर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद कहते थे कि योग और ध्यान के कई तरीके हैं, लेकिन आमतौर पर इसका मुख्य उद्देश्य है मन पर नियंत्रण और इसे शांत रखना। मन झील की तरह है और विचार उस पत्थर की तरह है जो उसमें तरंगें पैदा करके उसे अशांत कर देते हैं। शांत रहें, तभी हम जान पाएंगे कि हम क्या हैं।
हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि आगामी सेब सीजन-2023 के लिए एचपीएमसी सीए स्टोर में सेब के भंडारण की दरें निर्धारित कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि किसानों और सेब उत्पादकों की सुविधा के लिए, सेब को स्वयं के डिब्बे अथवा क्रेट में 1.60 रुपये प्रति किलोग्राम प्रतिमाह रखने की दर निर्धारित की गई हैं। इसके अतिरिक्त जो सेब उत्पादक एचपीएमसी द्वारा प्रदान किए गए डिब्बे एवं क्रेट्स का उपयोग करना चाहते हैं, उनके लिए दर 1.70 रुपये प्रति किलोग्राम प्रतिमाह की दर सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि निगम का लक्ष्य बेहतर भंडारण सुनिश्चित करते हुए बेहतर विकल्पों के साथ सेब उत्पादकों का समर्थन करना है। सेब व्यापार में बेहतर योगदान के लिए पहचानी जाने वाली निजी कंपनियों और फर्मों को सेब को अपने खुद के डिब्बे या क्रेट्स में रखने की सुविधा 1.90 प्रति किलोग्राम प्रतिमाह की दर पर मिलेगी। इसके अलावा, जो लोग निगम के डिब्बे या क्रेट्स चुनते हैं, उनके लिए यह दर 2.00 रुपये प्रति किलोग्राम प्रतिमाह निर्धारित की गई हैं। उन्होंने कहा कि ये दरें सेब की ताजगी और गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली भंडारण सुविधाओं के मूल्य को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि भंडारण प्रक्रिया को और अधिक कारगर बनाने के लिए यह निर्देश दिए गए हैं कि निगम के सभी सीए स्टोरों में सेब के भंडारण के लिए केवल क्रेट या डिब्बे का उपयोग किया जाए। उन्होंनेे कहा कि निगम के प्रयासों से सेब उत्पादकों को बेहतर भंडारण सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि निगम सेब उत्पादकों, निजी कंपनियों और फर्मों सहित सभी हितधारकों के लिए एक निष्पक्ष और लाभकारी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत है।
बुधवार को कंवर दुर्गा चन्द राजकीय महाविद्यालय जयसिंहपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के स्वयंसेवियो ने अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ प्रदीप कौंडल ने अपने वक्तव्य के माध्यम से वर्तमान अति व्यस्त और भौतिकवादी युग में योग के शाश्वत महत्व और प्रासंगिकता को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि योग करने से शारीरिक और मानसिक स्वस्थता बनी रहती है और विभिन्न प्रकार की व्याधियों और तनाव से मुक्ति मिलती है। योग भक्ति और मुक्ति का सफल माध्यम है। इस मौके पर शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक डॉ० खुशी राम भगत ने विद्यार्थियों को योग दिवस का महत्व बताते हुए कहा कि योग के नियमित अभ्यास से शरीर स्वस्थ तो रहता ही है साथ-साथ हमारी प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। इसके अतिरिक्त योग के द्वारा मानसिक तनाव दूर होता है और कन्स्ट्रेशन बढ़ता है। डॉ० खुशी राम भगत ने उपस्थित छात्रों ओर स्टाफ के सदस्यों को विभिन्न योगासन व प्राणायाम की क्रियाएं करवाई। इस अवसर पर प्रो० औंकार चन्द, डॉ० खुशी राम भगत, संतोष कुमारी, संजय कुमार, गगन दीप आदि स्टाफ के सदस्य उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा श्रम एवं रोज़गार मंत्री डाॅ. कर्नल धनी राम शांडिल ने कहा कि योग भारत की प्राचीन परम्परा का अमूल्य उपहार है जो व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक तौर पर स्वस्थ बनाए रखता है। डाॅ. शांडिल आज यहां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित ज़िला स्तरीय कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। डाॅ. शांडिल ने कहा कि योग स्वास्थ्य एवं ज्ञान प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन है। उन्होंने कहा कि वर्तमान की व्यस्त जीवन शैली में योग करना आवश्यक है ताकि व्यक्ति की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव आ सके। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मूल उद्देश्य लोगों में योग के प्रति जागरूकता लाकर सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर योग ने पूरे विश्व में एक अलग पहचान बनाई है। योग शरीर और दिमाग दोनों का संतुलन करने का सबसे बेहतरीन तरीका माना जाता है। उन्होंने कहा कि योग द्वारा जहां रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है वहीं पर मन को शांत करने के साथ-साथ योग कई तरह की बीमारियों से निज़ात दिला सकता है। इस अवसर पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सोलन, राजकीय वरिष्ठ (छात्र) माध्यमिक पाठशाला, राजकीय वरिष्ठ (छात्रा) माध्यमिक पाठशाला के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इसके उपरांत प्रतिभागियों ने शहर में विभिन्न स्थानों पर माँ शूलिनी स्वच्छता अभियान के तहत स्वच्छ श्रम दान किया। जोगिन्द्रा सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, शहरी कांग्रेस सोलन के उपाध्यक्ष रजत थापा, उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, नगर निगम सोलन के आयुक्त ज़फ़र इकबाल, अतिरिक्त उपायुक्त अजय यादव, उपमण्डलाधिकारी सोलन कविता ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन डाॅ. राजन उप्पल, ज़िला आयुर्वेदिक अधिकारी डाॅ. प्रवीन शर्मा सहित स्कूल के छात्र इस अवसर पर उपस्थित थे।
प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न स्कूलों में राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क) के अन्तर्गत कार्य कर रहे आउटसोर्स व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदाताओं को 20 दिनों का सवैतनिक अवकाश प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हाल ही में आउटसोर्स व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदाता संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उनसे चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन प्रशिक्षकों को राहत प्रदान करने की दिशा में तेजी से कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि संघ की एक मुख्य मांग पूरी करते हुए सरकार ने उन्हें 20 दिनों के सवैतनिक अवकाश प्रदान करने की अधिसूचना जारी कर दी है। उन्हें ‘ऑन जॉब ट्रेनिंग’ से पहले अथवा बाद में इन 20 दिनों के अवकाश का लाभ उठाने का विकल्प दिया गया है। हालांकि, शेष अवकाश अवधि के दौरान, व्यवसायिक प्रशिक्षकों को या तो ‘ऑन जॉब ट्रेनिंग’ करनी होती है या अन्य आवश्यक कार्य करने के लिए स्कूलों में उपस्थित रहना होता है। व्यवसायिक प्रशिक्षकों को देय अवकाश की अन्य पात्रता अप्रभावित रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संघ की अन्य मांगों पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने छह माह के कार्यकाल में सरकारी कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी है और 1 जनवरी, 2022 से तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता भी जारी किया गया है।
बुधवार को एसएफआई की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने छात्रों की समस्याओं को लेकर परीक्षा नियंत्रक को मांग पत्र सौंपा। एसएफआई ने मुख्य रूप से यूजी तथा पीजी के रिजल्ट को जल्द से जल्द घोषित करने की मांग की। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने मार्च माह में पीजी की तथा मई माह में यूजी की परीक्षा कराई थी। इन परीक्षाओं के रिजल्ट को अभी तक घोषित नहीं किया गया है। एसएफआई कैंपस सचिव सुरजीत ने कहा कि रिजल्ट घोषित ना करने से विश्वविद्यालय प्रशासन प्रदेश के हजारों छात्रों के भविष्य को अधर में लटकाए हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीजी एंट्रेंस एग्जाम कराने शुरू कर दिए हैं, कुछ समय के अंदर इसके लिए काउंसलिंग भी होगी। काउंसलिंग के अंदर अभ्यर्थी को अपना फाइनल रिजल्ट सबमिट करना पड़ता है ऐसे में यदि प्रशासन रिजल्ट घोषित नहीं करेगा तो काउंसलिंग कैसे होगी। रिजल्ट का लेट घोषित होना इस बात का इशारा है कि यह सत्र भी पिछले सत्र की तरह लेट ही शुरू होगा। जिससे छात्रों को आने वाले समय में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। एसएफआई कैंपस अध्यक्ष हरीश ने कहा कि कुछ दिन पहले ही हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने पीजी के एग्जामिनेशन फॉर्म भरने की दिनांक निश्चित कर दी है। परंतु अभी तक पीजी के पिछले सत्र के परीक्षा परिणामों को घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में जो छात्र अंतिम सत्र के अन्दर पढ़ाई कर रहा है यदि उसे पिछले सत्र का रिजल्ट क्लियर करने के लिए अभी समय नहीं दिया जाएगा तो उसका आने वाला पुरा साल बर्बाद हो जाएगा। एसएफआई ने चेतावनी देते हुए कहा कि इन मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। अगर जल्द छात्र मांगों को सकारात्मक रूप से सुलझाया नहीं गया तो आने वाले समय के अंदर एसएफआई विश्वविद्यालय में आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी और प्रशासन का उग्र घेराव किया जाएगा।
21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। 9 वें वर्ष के इस संस्करण को ग्राम पंचायत कंगरेडी के प्रांगण में बड़े धूम धाम से मनाया गया। जिसमें योग प्रशिक्षक इंदु बाला व रवि सिंह ने डॉक्टर राजकुमार शर्मा प्रभारी आयुष स्वास्थ्य वैलनेस केंद्र कंगरेडी मंडल और उपमंडल नुरपुर जिला कांगड़ा के दिशा निर्देशों के अनुसार लोगों को योग करवाया। जानकारी देते हुए आयुष विभाग के अधिकारी ने बताया कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सुघ भटोली के प्रांगण में भी योग करवाया गया। इसमें मुख्य रूप से पद्मासन ,प्राणायाम ,अनुलोम विलोम, हलासन ,भुजंगासन, मंडूकासन ,ताड़ासन, सूर्य नमस्कार, आदि करवाए गए। उन्होंने बताया कि योग शरीर को निरोगी बनाता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत कंगरेडी के प्रधान हंसराज शर्मा ने योग दिवस पर योग में भाग लेने आए भारी संख्या में आए हुए लोगों व बच्चों का धन्यवाद किया।
आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर साई इंटरनेशनल स्कूल में योग कार्यशाला का आयोजन किया गया। छात्रों और शिक्षकों द्वारा योग दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। छोटे बच्चों को योग के महत्व के साथ-साथ हमारे जीवन में इसके लाभों के बारे में जागरूक किया गया। बच्चों को ताड़ आसन, पदम आसन, वृक्ष आसन भुजंग आसन, शीर्ष आसन, अनुलोम विलोम, प्राणायाम, कपालभट्टी आदि जैसे विभिन्न योग मुद्राओं का अभ्यास करवाया गया। स्कूल के अध्यक्ष रमिंदर बावा ने छात्रों को फिट रहने और एकाग्रता में सुधार करने के लिए नियमित योग का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का समापन सभी छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा दैनिक जीवन में योग करने की शपथ लेने के साथ हुआ। योग का नियमित अभ्यास निश्चित रूप से हमारे छात्रों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी बेहतर जीवन प्राप्त करने में मदद करेगा।
आयुष विभाग की ओर से अंतराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर स्पीति घाटी में 11,980 फीट की ऊंचाई पर स्थित आइस हॉकी रिंक काजा में योग दिवस मनाया गया। अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने बतौर मुख्यातिथि इस अवसर पर शिरकत की। इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि योग करने से आपका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य ठीक रहता है। रोजाना योग करना आपको कई बीमारियों से भी लड़ने में मदद करता है। योग दिवस का महत्व लोगों के बीच मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए योग को बढ़ावा देना है। आज के जमाने में वृद्ध ही नहीं युवा भी कई तरह की बीमारियों से पीड़ित हैं। इसके चलते लोगों को स्वस्थ रखने के लिए यह एक अच्छा प्रयास है। यही नहीं इससे लोगों का मानसिक और शारीरिक कल्याण भी संभव है। योग की खोज बहुत साल पहले भारत में ही हुई थी। तब ऋषि-मुनियों ने इसकी महत्वता को समझा था और इसका प्रसार किया था। योग करने से न केवल आपको शारीरिक रूप से शांति मिलेगी बल्कि यह आपके स्ट्रेस और घबराहट को भी कम करने में मददगार साबित होगा। योग दिवस मनाने का कारण लोगों को यह भी बताना है कि इसे करने से शरीर को अनेक प्रकार के लाभ होते हैं। योग दिवस पर आयुष विभाग के डा विवेक और प्रशिक्षक डा विनोद ने योग क्रियाएं करवाई। SDAMO डॉ राजेश भारद्वाज ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का आभार वयक्त किया। इस अवसर पर एसडीएम हर्ष अमरेंद्र नेगी, तहसीलदार भूमिका जैन, डीएसपी रोहित मृगपुरी, नायब तहसीलदार प्रेम चंद, बीडीओ पी एल नेगी सहित पुलिस जवान और काजा गर्ल्स हॉस्टल की छात्राएं मौजूद रही।
* 23 जून की बैठक से पहले अरविन्द केजरीवाल ने विपक्षी नेताओं को लिखी चिट्ठी 23 जून को बिहार के पटना में विपक्षी दलों की एक अहम बैठक होनी है। इस बैठक से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को विपक्षी नेताओं को एक चिट्ठी लिखी है। अरविंद केजरीवाल ने आग्रह किया हैं कि विपक्षी दलों की इस मीटिंग में दिल्ली अध्यादेश को संसद में हराने की रणनीति पर सबसे पहले चर्चा हो। केजरीवाल ने इस चिट्ठी में दावा किया है कि दिल्ली अध्यादेश का प्रयोग सफल हुआ तो केंद्र सरकार गैर-बीजेपी शासन वाले राज्यों में भी ऐसे अध्यादेश लाकर राज्य सरकारों के अधिकार छीन लेगी। दिल्ली के सीएम ने दावा किया हैं, ''केंद्र सरकार ने दिल्ली अध्यादेश के सहारे एक प्रयोग किया है। अगर वो इसमें सफल हो जाती है तो फिर एक-एक कर सभी गैर-बीजेपी राज्यों के लिए समवर्ती सूची के तहत आने वाले विषयों पर अध्यादेश जारी कर राज्यों के अधिकार छीन लिए जाएंगे। इसी लिए सभी पार्टियां मिलकर इसे किसी हालत में संसद में पास न होने दें.'' केजरीवाल का कहना हैं कि दिल्ली अध्यादेश लागू होने के बाद राज्य में जनतंत्र खत्म हो जाएगा। इसके बाद दिल्ली की जनता जो भी सरकार चुनेगी, उसके पास कोई ताकत नहीं होगी। गवर्नर के जरिये केंद्र ही सरकार दिल्ली की सरकार चलाएगा। दिल्ली के बाद अन्य राज्यों में भी यही होगा। केजरीवाल का कहना हैं कि वो दिन दूर नहीं जब राज्यपालों के जरिये पीएम सभी राज्य सरकारें चलाएंगे।
ट्विटर के को-फाउंडर जैक डोर्सी ने भारत सरकार पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए थे। डोर्सी ने कहा गया था कि किसान आंदोलन के दौरान ट्विटर से कई पत्रकारों के हैंडल ब्लॉक करने को कहा गया था और ऐसा नहीं करने पर सरकार की तरफ से ट्विटर को बैन करने की धमकी दी गई थी। अब पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान ट्विटर के नए मालिक और टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने इसका जवाब दिया है। अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद एलन मस्क से डोर्सी के आरोपों पर सवाल किया गया, तो मस्क ने कहा कि ट्विटर के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं, उसे सरकार और कानूनों का पालन करना होता है। दोनों के बीच हुई इस मुलाकात के बाद एलन मस्क मीडिया के सामने आए और उन्होंने खुद को मोदी का फैन भी बताया। एलन मस्क ने कहा कि सरकारों के अलग-अलग तरह के अपने नियम और कानून हैं, इन कानूनों के तहत रहते हुए हम फ्री स्पीच को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश कर सकते हैं। ये थे जैक डोर्सी के आरोप: ट्विटर के को-फाउंडर जैक डोर्सी ने एक चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा था कि भारत की तरफ से अधिकारियों के घरों पर एजेंसियों की छापेमारी और ट्विटर को बंद करने की धमकी मिली थी। किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार की तरफ से कुछ ट्विटर अकाउंट्स को बंद करने को कहा गया था, ऐसा नहीं करने पर परिणाम भुगतने की धमकी मिली थी।
पीएम मोदी चार दिवसीय यात्रा के लिए अमेरिका गए हैं जहां वह 21 जून से 24 जून तक रहेंगे। इस दौरान वे अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात समेत विभिन्न कार्यक्रमों में शरीक होंगे।अपनी अमेरिका यात्रा शुरू करने से पहले पीएम मोदी ने ट्वीट करके यूएस कांग्रेस के सदस्यों को उनका स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया है। पीएम मोदी 21 जून से शुरू होने वाली अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ कई मुद्दों पर बातचीत करेंगे और न्यूयॉर्क में योगा दिवस कार्यक्रम में शरीक होंगे। प्रधानमंत्री ने इससे पहले 2016 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था। पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दो बड़े रक्षा सौदों को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इनमें जीई के साथ भारत में युद्धक विमानों के इंजन निर्माण व ड्रोन से जुड़े समझौते शामिल हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दूरसंचार, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर जैसी नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वस्त आपूर्ति शृंखला स्थापित करना है। इस पर बड़ी कामयाबी हासिल हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की राजकीय यात्रा पर जाने वाले तीसरे भारतीय नेता हैं। इससे पहले 1963 में पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्षन और 2009 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह अमेरिकी राजकीय यात्रा पर जा चुके हैं।
एचआरटीसी के निदेशक मंडल की बैठक सोमवार देर शाम डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें एचआरटीसी कर्मचारियों को 3 फीसदी महंगाई भत्ता देने का निर्णय लिया गया। इससे निगम के लगभग 11 हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे। निदेशक मंडल ने एचआरटीसी में ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर मिलने वाली एक्सग्रेशिया ग्रांट को लगभग 3 गुणा बढ़ाने को भी मंजूरी दी। वर्तमान में एचआरटीसी कर्मियों की मृत्यु की सूरत में रेगुलर कर्मचारी को 55 हजार रुपए देने का प्रावधान है। अब इसे बढ़ाकर 1.50 लाख और अनुबंध कर्मचारी के लिए 1 लाख रुपए करने का फैसला लिया गया है। डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि बसों की खरीद के अलावा निगम की आय बढ़ाने और आत्म निर्भर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। निगम की सभी देनदारियां और बकाया जल्द निबटाया जाएगा। एचआरटीसी के बेड़े में जल्द 556 नई इलेक्ट्रिक, वॉल्वो और डीजल बसों को शामिल करने की योजना है। इनमें से 196 बसों को निगम के बेड़े में शामिल कर लिया गया है और 360 बसें जल्द शामिल होंगी।
- सीएम के आश्वासन के बाद प्रशिक्षुओं ने टाली भूख हड़ताल मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जेबीटी प्रशिक्षुओं ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। प्रशिक्षुओं की मांग पर हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जेबीटी शिक्षकों की बैचवाइज नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है। सोमवार को जेबीटी-डीएलएड प्रशिक्षुओं से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने तक नियुक्तियां नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने जिला शिमला और कुल्लू जिला में अपात्रों के चयन को लेकर भी गहनता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। जेबीटी-डीएलएड प्रशिक्षुओं ने रविवार को शिमला के उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। इसके बाद शाम को प्रशिक्षु राज्य सचिवालय के समीप छोटा शिमला बस स्टॉप पर धरने पर बैठ गए थे। सोमवार सुबह प्रशिक्षुओं ने भूख हड़ताल पर बैठने का एलान किया था। आखिरकार सोमवार दोपहर बाद प्रशिक्षुओं की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई। अब मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल वापस ले ली गई है। ये चाहते है जेबीटी-डीएलएड प्रशिक्षु : बीएड करने वाले टीजीटी और पीजीटी के पद के लिए योग्य हैं। जेबीटी करने वाले इन पदों के लिए आवेदन नहीं कर सकते। ऐसे में बीएड वालों को जेबीटी भर्ती में शामिल नहीं किया जाए।
मनाली से रोहतांग के लिए इलेक्ट्रिक बस शुरू हो गई है। मात्र 500 रुपये में पर्यटक इसका लाभ उठा सकते है। मनाली आने वाले पर्यटक बर्फ को देखने के लिए रोहतांग जाते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के आरंभ होने से सैलानियों को परमिट लेने की जरूरत नहीं रहेगी। साथ ही उन्हें टैक्सियों के लिए भी हजारों रुपये नहीं देने पड़ेंगे। निगम की यह बसें मनाली से सुबह 7:30 बजे से लेकर सुबह 10:00 बजे तक रवाना होती हैं। प्रथम चरण में निगम से छह बसों का संचालन शुरू किया है। मांग अनुसार बसों की संख्या को भी बढ़ाया भी जा सकता है। सोमवार को छह बसों को भेजा गया और एक बस में 25 पर्यटक सफर कर सकते हैं। मनाली आने वाले पर्यटक बर्फ को देखने के लिए रोहतांग जाते हैं। 51 किलोमीटर लंबे इस रूट के लिए एनजीटी के आदेश पर सबसे पहले छोटे वाहनों के लिए परमिट लेना जरूरी है। साथ ही टैक्सी से रोहतांग जाना हो तो हजारों रुपये किराया देना होता है। वहीं, एनजीटी के आदेश पर एक दिन में मात्र 1200 वाहन ही रोहतांग जा सकते हैं। पर अब बससेवा शुरू होने से पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है।
-नए भर्ती आयोग के गठन पर चर्चा संभव हिमाचल कैबिनेट की बैठक आज सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू की अध्यक्षता में होगी। बैठक में विभिन्न विभागों में भर्तियों को मंजूरी मिल सकती है। साथ ही निगाहें नए भर्ती आयोग के गठन पर चर्चा पर भी होगी। हिमाचल सरकार ने कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को भंग कर रखा है। इसके स्थान पर नया भर्ती आयोग बनाया जाना प्रस्तावित है। कैबिनेट सब कमेटी ने पहले ही खाली पदों पर भर्ती की मुख्यमंत्री से सिफारिश कर रखी है। ऐसे में उम्मीद है कि बैठक में विभिन्न विभागों में भर्तियों को मंजूरी मिल सकती है।इसके अलावा कैबिनेट में महिलाओं को 1500-1500 रुपए देने के निर्णय को मंजूरी मिल सकती है, क्योंकि राज्य सरकार ने 60 साल से अधिक आयु की सभी महिलाओं और लाहौल घाटी की महिलाओं को 1500 रुपए देने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग की नर्सरी टीचर ट्रेनिंग भर्ती का मामला भी आज कैबिनेट में जा सकता है। दरअसल केंद्र ने राज्य सरकार के आग्रह पर एनटीटी के एक वर्षीय डिप्लोमा धारकों को नियुक्ति देने की सशर्त सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके तहत नौकरी के दौरान एनटीटी को दो वर्ष का डिप्लोमा पूरा करना होगा। संभव है आज कैबिनेट में इसे भी मंजूरी मिल जाएँ।
मणिपुर में एक बार फिर हिंसा देखने को मिली है। इंफाल के कोंगबा में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री आरके रंजन सिंह के घर में कुछ लोगों ने आग लगा दी। गनीमत ये रही कि केंद्रीय मंत्री घटना के समय घर पर नहीं थे। इससे पहले कुछ उपद्रवियों ने बुधवार को इंफाल पश्चिम के लाम्फेल क्षेत्र में एक मंत्री के घर को आग लगा दी थी। इंफाल में कर्फ्यू के बावजूद भीड़ मंत्री के घर तक पहुंच गई। मंत्री के आवास पर तैनात सुरक्षकर्मी भी हिंसा रोकने में नाकामयाब रहे। राजकुमार रंजन सिंह का घटना पर बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा "मेरे गृह राज्य में जो हो रहा है उसे देखकर बहुत दुख होता है। मैं अब भी शांति की अपील करता रहूंगा। इस तरह की हिंसा में लिप्त लोग बिल्कुल अमानवीय हैं। मैं इस समय आधिकारिक काम के लिए केरल में हूं। शुक्र है कि कल रात मेरे इंफाल स्थित घर में कोई घायल नहीं हुआ। बदमाश पेट्रोल बम लेकर आए थे और मेरे घर के निचले और पहली मंजिल को नुकसान पहुंचाया है।"
नकली दवा मामले में करीब सात महीनों से फरार चल रहे रॉ मटीरियल सप्लायर को धर दबोचने में पुलिस को सफलता मिली है। नकली दवाओ की आपूर्ति करने वाले मुख्य आरोपी उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद इदरीश को गिरफ्तार कर लिया गया है। इदरीश देशभर में नकली दवाओं की आपूर्ति करता था। मोहम्मद इदरीश गांव पिपली नायक जिला रामपुर उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। करीब सात महीने से पुलिस को उसकी तलाश थी। नंवबर 2022 में राज्य दवा नियंत्रक विभाग ने ट्राइजल फार्मा बद्दी से बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद की थी। इस मामले में कंपनी के मालिक आगरा निवासी मोहित बंसल को गिरफ्तार किया था। मोहित बंसल के साथ पूरे कारोबार को इदरीश ही नियंत्रित करता था और उसको कच्चा माल भी उपलब्ध करवाता था। वह बद्दी में रहता था। इसके बाद से ही वह फरार चल रहा था। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने इदरीश की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
जिला ऊना के एक कॉलेज की छात्रा ने एक युवक पर उसकी अश्लील वीडियो इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर उसे ब्लैकमेल करने के आरोप लगाया है। पुलिस को दी शिकायत में कॉलेज की छात्रा ने कहा कि वह पिछले साल कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने मंडी गई थी, जहां उसकी दोस्ती चंबा जिला के एक लड़के से हुई। दोनों एक दूसरे से फोन पर बातचीत करने लगे। फिर एक दिन लडके ने उसे वीडियो कॉल की और कहा की मुझे तुम्हें देखना है और साथ ही कपड़े उतारने को कहा और उसने उसके कहने पर कपड़े उतार दिए, जिसकी वीडियो उसने रिकॉर्ड कर ली। लड़की का आरोप है कि उसके बाद वह उसे धमकाने लगा और उसने लड़की के नाम से एक आईडी बनाकर उन अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर उसे वायरल कर दिया। पुलिस ने युवती की शिकायत पर आरोपी युवक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
* बृजभूषण को पॉक्सो केस मामले में राहत, अन्य पहलवानों से जुड़े मामले में चार्जशीट दाखिल Updated : 1:45 AM _______________________ * दिल्ली पुलिस बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह के खिलाफ एक हजार पेज की चार्जशीट लेकर कोर्ट पहुंची Updated : 11:45 AM ________________________________ भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस आज चार्जशीट पेश कर सकती है। दरअसल, खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने पहलवानों को आश्वासन दिया था कि बृजभूषण के खिलाफ यौन शोषण मामले में दिल्ली पुलिस 15 जून तक जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश कर देगी। ऐसे में आज चार्जशीट पेश होने की सम्भावना है। इसके बाद ही तय होगा कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले शीर्ष पहलवान कुश्ती के रिंग में लौटेंगे या धरने पर। पहलवानों की संघर्ष कमेटी के अनुसार, जांच रिपोर्ट उपयुक्त न मिलने पर दोपहर 2:00 बजे आंदोलन आगे बढ़ाने का ऐलान करेंगे। अगर जांच रिपोर्ट से पहलवान संतुष्ट हुए तो आंदोलन स्थगित हो सकता है। वहीँ उम्मीद है कि आज गृह मंत्रालय द्वारा भी 28 मई को पहलवानों और उनके समर्थकों पर दर्ज केस वापसी को लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है।
* कच्छ से लेकर कराची तक, तूफानी तबाही का अलर्ट जारी Updated : 3:24 PM बिपरजॉय का असर गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में सबसे ज्यादा होने का अनुमान है। यहां निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका है। गुजरात के तट से आज चक्रवाती तूफान बिपरजॉय तूफान टकराने वाला है। एहतियात के तौर पर 74 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। जबकि करीब 80 से ज्यादा ट्रेनें रद्द की गई हैं। लोगों को घरों से बाहर ना निकलने की सलाह दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कई टीमें तैनात की गई हैं। राज्य और केंद्र सरकार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। बिपरजॉय की वजह से द्वारकाधीश मंदिर को आज श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया है।
* 40 पैसे प्रति किलो की हुई कटौती HPMC ने बागवानों को बड़ी राहत देते हुए CA स्टोर में सेब रखने के किराए में कटौती की है। HPMC अपने स्टोर में सेब रखने की एवज में 2 रुपए प्रति किलो के हिसाब से चार्ज करता था, पर इस सीजन में बागवानों से 1 रुपए 60 पैसे के हिसाब से किराया लिया जाएगा। इस तरह 20 प्रतिशत की कमी की गई है और प्रति किलो किलो के हिसाब से 40 पैसे की कटौती हुई है। प्रदेश के सेब बहुल क्षेत्रों में HPMC के 6 कोल्ड स्टोर है। दिलचस्प बात ये है कि इन स्टोर में कई चैंबर हर साल खाली रह जाते थे। दरअसल प्राइवेट CA स्टोर की तुलना में HPMC के स्टोर के रेट ज्यादा थे। पर अब HPMC ने भी अपने रेट कम कर दिए है। अगस्त के दूसरे पखवाड़े के बाद अमुमम बाजार में सेब के बाजार भाव गिर जाते हैं। ऐसे में सेब को स्टोर किया जाता है, ताकि ऑफ सीजन में अच्छे दाम पर बेचा जा सके। जाहिर है HPMC के इस कदम का लाभ बागवानों को होगा।
**मुख्यमंत्री ने करार रद्द करने के दिए निर्देश **जुलाई से कंप्यूटर शिक्षकों के वेतन में 2,000 रुपये की बढ़ोतरी हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 1326 कंप्यूटर शिक्षक अब निजी कंपनियों के अधीन नहीं रहेंगे। सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कंपनियों के साथ हुए करार को रद्द करने के निर्देश दिए हैं। साह ही जुलाई से कंप्यूटर शिक्षकों के वेतन में 2,000 रुपये की बढ़ोतरी करने की घोषणा भी की। सीएम ने शिक्षक भर्ती से संबंधित कोर्ट में लंबित मामले को भी जल्द निपटाने में मदद का भी आश्वासन दिया है। अगर कोई व्यवस्था नहीं होती है तो शिक्षकों को पूर्व की तरह नाइलेट कंपनी के अधीन ही किया जाए। पांच निजी कंपनियों को ठेका दिए जाने पर भी मुख्यमंत्री ने आपत्ति जताई। सरकारी स्कूलों में कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों को आउटसोर्स आधार पर नियुक्ति दी गई है। बीते कई वर्षों से नाइलेट कंपनी के अधीन शिक्षक रखे गए हैं। पर कुछ माह पूर्व कंप्यूटर शिक्षकों को इलेक्ट्राॅनिक्स काॅरपोरेशन के माध्यम से नियुक्त करने का फैसला लिया गया था। काॅरपोरेशन स्वयं कोई भी भर्ती नहीं करता है, ऐसे में पांच निजी कंपनियों के तहत शिक्षकों का बंटवारा किया गया। दरअसल शिक्षकों की हाजिरी भी इन्हीं कंपनियों को भेजी गई। कुछ कंपनियों के शिक्षकों के वेतन से 2,000 से 4,000 रुपये तक की कटौती कर दी। शिक्षकों का आरोप है कि ऐसी कंपनियों को काम दिए गए, जिनका इस क्षेत्र में कोई अनुभव ही नहीं था। इसी के चलते मंगलवार को शिक्षकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। शिक्षकों का कहना है कि ऐसी कंपनी को भी शामिल किया गया, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा सदन में भी गूंजा है। इस दौरान कंप्यूटर शिक्षकों ने सीएम के समक्ष शिक्षा विभाग में शामिल करने की मांग भी रखी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने 19 जून को कैबिनेट मीटिंग बुलाई है। इसे लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागीय सचिव और विभागाध्यक्ष को आदेश जारी कर दिए हैं। इसके लिए विभागों से एजेंडा भेजने को कह दिया गया है। बता दें कि पूर्व में यह मीटिंग 18 जून को निर्धारित थी, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है। माना जा रहा है कि कैबिनेट मीटिंग में नए भर्ती आयोग को लेकर कोई निर्णय हो सकता है। दरअसल, कैबिनेट मीटिंग से 2 दिन पहले 17 जून को भर्ती एजेंसी के गठन को रिटायर आईएएस दीपक सानन की अध्यक्षता में गठित कमेटी की भी बैठक होनी है। कमेटी इसी दिन सरकार को नए आयोग के गठन को लेकर अपनी रिपोर्ट सौप सकती है। यदि ऐसा होता है तो संभावित है कि 19 जून की कैबिनेट में नए चयन आयोग को लेकर सरकार निर्णय ले। विदित रहे कि सुक्खू सरकार ने अप्रैल महीने में कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को भंग कर दिया था। लगातार हो रहे पेपर लीक और व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए सुक्खू सरकार ने ये एक्शन लिया था। कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के कई कर्मचारी इसमें लिप्त पाए गए है। कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के भंग होने के बाद से ही नए चयन आयोग के गठन का इन्तजार है।
पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर मिलेगा आनलाइन परमिट परमिट लेने के लिए 550 रुपये शुल्क देना होगा आज से सैलानी रोहतांग की बर्फीली वादियों का दीदार कर सकेंगे। पर्यटकों के लिए रोहतांग दर्रा बहाल हो गया है। परमिट लेकर सैलानी बर्फीली वादियों का दीदार कर सकेंगे। पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर जाकर आनलाइन परमिट लिया जा सकता है जिसके लिए 550 रुपये शुल्क देना होगा। जिला प्रशासन ने मंगलवार से पर्यटकों के लिए रोहतांग दर्रा बहाल कर दिया है। बर्फबारी के कारण इस साल 38 दिन देरी से दर्रा बहाल किया गया है। पिछले वर्ष पांच मई को पर्यटकों के लिए दर्रा खोल दिया गया था जबकि इस वर्ष 13 जून से इसे बहाल किया गया है। 1200 पर्यटक वाहन ही रोज रोहतांग जा सकेंगे। हर रोज 800 पेट्रोल व 400 डीजल इंजन पर्यटक वाहनों को जाने की अनुमति मिलेगी। दर्रा बहाल होने से टूरिस्ट सीजन भी गति पकड़ेगा।
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपनी सादगी के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी सादगी की कहानियां जगहाजिर हैं। प्रधानमंत्री बनने तक उनके पास न ही घर था और न कार। अपने ही बेटे का प्रमोशन तक रुकवा दिया था शास्त्री जी ने। लाल बहादुर शास्त्री इतने साधारण थे कि एक बार गृहमंत्री रहते हुए कार से उतरकर गन्ने का जूस पीने लग गये। पत्रकार कुलदीप नैयर की किताब ‘एक जिंदगी काफी नहीं‘ में जिक्र किया है कि "शास्त्री जी उन दिनों नेहरू मंत्रिमंडल से बाहर हो गए थे। मैं हमेशा की तरह शाम को उनके बंगले में गया, जहां अंधेरा छाया हुआ था। बस ड्राइंग रूम की लाइट जल रही थी। लाल बहादुर शास्त्री ड्राइंग रूम में अकेले बैठे अखबार पढ़ रहे थे। ऐसे में जब मैंने पूछा कि बाहर रोशनी क्यों नहीं थी तो उन्होंने जवाब दिया कि अब बिजली का बिल उन्हें खुद देना पड़ेगा और वे ज्यादा खर्च नहीं उठा सकते। लाल बहादुर शास्त्री जब सरकार से बाहर थे तो आलू महंगा होने के कारण उन्होंने उसे खाना छोड़ दिया था। साल 1965 में लाल बहादुर शास्त्री ने निजी इस्तेमाल के लिए एक फिएट कार खरीदी थी। यह कार उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से 5000 रुपये लोन लेकर खरीदी थी, लेकिन अफसोस, कार खरीदने के अगले साल ही 11 जनवरी 1966 को उनकी मृत्यु ताशकंद में हो गई थी। आज भी यह कार उनके दिल्ली स्थित निवास पर खड़ी है। पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने कार का लोन जल्दी अप्रूव होने पर पंजाब नेशनल बैंक से कहा था कि यही सुविधा इसी तरह आम लोगों को भी मिलनी चाहिए। शास्त्री जी के निधन के बाद बैंक ने उनकी पत्नी को बकाया लोन चुकाने के लिए पत्र लिखा था। इस पर उनकी पत्नी ललिता देवी ने बाद में फैमिली पेंशन की मदद से बैंक का एक-एक रुपया चुकाया था।
गांधीवादी गुलजारी लाल नंदा दो बार भारत के कार्यवाहक-अंतरिम प्रधानमंत्री रहे। एक बार विदेश मंत्री भी बने थे। आजादी की लड़ाई में गांधी के अनन्य समर्थकों में शुमार नंदा को अपना अंतिम जीवन किराये के मकान में गुजारना पड़ा। उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में 500 रुपये की पेंशन स्वीकृत हुई थी। उन्होंने इसे लेने से यह कह कर इनकार कर दिया था कि पेंशन के लिए उन्होंने लड़ाई नहीं लड़ी थी। बाद में मित्रों के समझाने पर कि किराये के मकान में रहते हैं तो किराया कहां से देंगे, उन्होंने पेंशन कबूल की थी। कहते है किराया बाकी रहने के कारण एक बार तो मकान मालिक ने उन्हें घर से निकाल भी दिया था। बाद में इसकी खबर अखबारों में छपी तो सरकारी अमला पहुंचा और मकान मालिक को पता चला कि उसने कितनी बड़ी भूल कर दी है। आज तो ऐसे नेता की कल्पना भी नहीं की जा सकती जो पीएम और केंद्रीय मंत्री रहने के बावजूद अपने लिए एक अदद घर नहीं बना सका और किराये के मकान में अपनी जिंदगी गुजार दी। दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारीलाल नंदा सक्रिय राजनीति को अलविदा करने के बाद दिल्ली में किराए के मकान में रहते थे और उनके पास किराया भी नहीं होता था। जब वे किराया नहीं दे सके तो उनकी बेटी उन्हें अपने साथ अहमदाबाद ले गईं। गुलजारीलाल नंदा मुंबई विधानसभा के दो बार सदस्य रहे थे। पहली बार वह 1937 से 1939 तक और दूसरी बार 1947 से 1950 तक विधायक चुने गये थे। उनके जिम्मे श्रम एवं आवास मंत्रालय का कार्यभार था, तब मुंबई विधानसभा होती थी। 1947 में नंदा की देखरेख में ही इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना हुई। मुंबई सरकार में गुलजारीलाल नंदा के काम से प्रभावित होकर उन्हें कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली बुला लिया। फिर नंदा वह 1950-1951, 1952-1953 और 1960-1963 में भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे। भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में उनका काफी योगदान माना जाता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री भी रहे। गुलजारीलाल नंदा दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री भी रहे। पहली बार पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन पर और दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री के निधन पर उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री का दायित्व सौंपा गया था। उनका पहला कार्यकाल 27 मई 1964 से 9 जून, 1964 तक रहा। दूसरा कार्यकाल 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी 1966 तक रहा। गांधीवादी विचारधारा के नंदा पहले 5 आम चुनावों में लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। सिद्धांतवादी गुलजारीलाल नंदा अपनी ही पार्टी की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के देश में इमरजेंसी लगाने के फैसले से नाराज हो गए थे। तब वो रेलमंत्री थे। उन्होंने आपातकाल के बाद चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। इंदिरा गांधी, राजा कर्ण सिंह समेत कई हस्तियां मनाने आईं, लेकिन वे फैसले पर अटल रहे। इसके बाद कभी चुनाव नहीं लड़ा। गुलजारीलाल नंदा ने कभी प्राइवेट काम में सरकारी गाड़ी प्रयोग नहीं की। वे कुरुक्षेत्र में नाभाहाउस के साधारण कमरों में ठहरते थे। परिवार गुजरात में ही था। सन् 1967 के बाद उनका अधिकांश समय कुरुक्षेत्र में गुजरा। वे गृहमंत्री थे तब एक बार दिल्ली निवास से उनकी बेटी डाॅ. पुष्पा यूनिवर्सिटी में फार्म भरने सरकारी गाड़ी में चली गईं। पता चलने पर नंदा खफा हुए। उन्होंने आठ मील गाड़ी आने-जाने का किराया बेटी की तरफ से खुद भरा। आज के दौर में तो ऐसी कल्पना करना भी बेहद मुश्किल है।
"....विपक्ष बीजेपी के खिलाफ अधिकांश एक उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रहा है। माना जा रहा है कि विपक्ष 475 लोकसभा सीटों पर बीजेपी के खिलाफ एक साझा उम्मीदवार उतारने की कोशिश में है। विपक्ष की मंशा साफ है कि वह अधिकांश सीटों पर एकजुट होकर भाजपा का सामना करें। हालांकि मौजूदा समय में ये ख़याली पुलाव ज्यादा है। दरअसल कांग्रेस के बिना ये संभव है नहीं और आम आदमी पार्टी जैसे दलों के साथ कांग्रेस के आने की सम्भावना कम है। जो दल राज्यों में एक दूसरे के खिलाफ तलवारें खींचे खड़े है वो केंद्र में भी एकसाथ आएं, ये व्यावहारिक नहीं लगता। छोटे दलों को ये भी डर है कि कांग्रेस के साथ आने से उनका वोट बैंक फिर कांग्रेस की तरफ खिसक सकता है, जो मोटे तौर पर उन्होंने कांग्रेस से ही छिटका है..." हर पार्टी के पास चुनाव लड़ने का समान अवसर होना लोकतंत्र की बुनियादी ज़रूरत है, लेकिन मौजूदा समय में साधन और कैडर के मामले में बीजेपी सभी दलों पर भारी दिखती है। इसी अंतर को पाटने की कोशिश में विपक्षी दल एक साथ आने लगे है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत से केंद्र की राजनीति में बीजेपी विरोधी दलों की हैसियत कम हुई है। तब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए को अकेले करीब 45 प्रतिशत वोट मिले थे। तब से अब तक स्थिति में बड़ा बदलाव होता नहीं दिख रहा। ऐसे में जाहिर है विपक्ष भी जानता है कि एकजुट होकर ही भाजपा का सामना किया जा सकता है। आगामी लोकसभा चुनाव में महज़ 10 महीने का वक्त बचा है और भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए इसी विपक्ष के करीब 55 फीसदी वोट को एकजुट करने की बात हो रही है, जिसके लिए विपक्षी दलों की कोशिश जारी है। कर्नाटक के हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी एकता की कोशिशों को नया बल मिला है। इसका ताज़ा उदाहरण नए संसद भवन के उद्घाटन को छिड़े विवाद में दिखा है। इस मुद्दे पर पहली बार विपक्ष एकजुट नज़र आया और ये कवायद अब आगे भी बढ़ती दिख रही है। वहीं प्रशासनिक सेवाओं पर दिल्ली सरकार के अधिकार को नहीं मानने से जुड़े अध्यादेश के खिलाफ विपक्षी दलों को लामबंद करने में भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगे हैं। इन दोनों मुद्दों पर जिस तरह से विपक्षी दल ने नरेंद्र मोदी सरकार को घेरा, उससे सियासी गलियारे में इस पर बहस और तेज हो गई है कि क्या 2024 में चुनाव से पहले बीजेपी के खिलाफ मजबूत विपक्षी गठबंधन बन सकता है। जिस विपक्षी गठबंधन की संभावना है, उसमें ज्यादातर वहीं दल शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने संसद के नए भवन के उदघाटन समारोह का सामूहिक रूप से बहिष्कार करने की घोषणा की थी। इनमें मुख्य तौर पर 19 दल हैं, जिनमें कांग्रेस के साथ ही तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, जेडीयू, आरजेडी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, एनसीपी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), सीपीएम और सीपीआई, राष्ट्रीय लोकदल और नेशनल कांफ्रेंस शामिल हैं। इनके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (मणि), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, विदुथलाई चिरुथिगल काट्ची, मारुमलार्ची द्रविड मुन्नेत्र कड़गम शामिल हैं। निर्विवाद तौर पर इनमें से एकमात्र कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है, जिसका पैन इंडिया जनाधार है और बाकी विपक्षी दलों की पकड़ मौटे तौर पर राज्य विशेष तक ही सीमित है। कांग्रेस के अलावा टीएमसी पश्चिम बंगाल में, डीएमके तमिलनाडु में जेडीयू और आरजेडी बिहार में वहीं झामुमो झारखंड में प्रभावशाली है। समाजवादी पार्टी का प्रभाव उत्तर प्रदेश, एनसीपी और शिवसेना (ठाकरे गुट) का महाराष्ट्र, और नेशनल कांफ्रेंस का जम्मू-कश्मीर और राष्ट्रीय लोकदल का सीमित प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। इनमें से आम आदमी पार्टी दो राज्यों पंजाब और दिल्ली में बेहद मजबूत स्थिति में है, वहीं गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में धीरे-धीरे जनाधार बनाने की कवायद में है। सीपीएम का प्रभाव केरल में सबसे ज्यादा रह गया है, जबकि पश्चिम बंगाल में भी उसके कैडर अभी भी मौजूद हैं। 19 दलों में से बाकी जो दल हैं उनका केरल और तमिलनाडु में छिटपुट प्रभाव है। क्या है विपक्ष का फॉर्मूला? गौरतलब है कि बीते एक माह में दो बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है। कांग्रेस और सीएम नीतीश भी इस फार्मूला पर काम कर रहे हैं। अगले साल होने वाले चुनाव में विपक्ष साल 1974 का बिहार मॉडल लागू करना चाहता है। जिस तरह पूरा विपक्ष 1977 में कांग्रेस के खिलाफ हो गया था, वैसा ही कुछ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में करने की कोशिश है। 1989 में राजीव गांधी की सरकार के खिलाफ वीपी सिंह मॉडल को सभी विपक्षी दलों ने अपनाया था, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। इन दोनों चुनाव के दौरान विपक्ष ने एक सीट पर एक उम्मीदवार को उतारा था और सफलता हासिल हुई थी। हम इस बार के लोकसभा चुनाव में भी इसी रणनीति के तहत काम किया जा सकता है। विपक्ष की रणनीति : जिस सीट पर बीजेपी मजबूत स्थिति में दिखाई देगी, वहां पर सभी विपक्षी दल एक साथ मिलकर उसके (बीजेपी) खिलाफ उम्मीदवार उतारेंगे। अगर विपक्ष ऐसा करने में सफल रहे तो बीजेपी बेहद कम सीटों पर सिमट कर रह सकती है। इस रणनीति के तहत विपक्ष बिहार और महाराष्ट्र में मजबूत दिखाई दे रहा है। बिहार में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस एकजुट है तो वहीं महाराष्ट्र में उद्धव वाली शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस एकजुट है। इन दोनों राज्यों में बीजेपी को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। बिहार और महाराष्ट्र में लोकसभा की क्रमश: 40 और 48 सीटें आती है। ऐसे में यदि विपक्ष यहां पर अपनी स्थिति मजबूत करता है तो इससे यूपी की भरपाई हो सकती है, क्योंकि यूपी में बीजेपी की स्थिति काफी ज्यादा मजबूत है। यहां लोकसभा की कुल 80 सीटें है। पश्चिम बंगाल में भी अगर ममता और कांग्रेस साथ आते है, तो कुछ लाभ स्वाभाविक है। क्या कहते हैं आंकड़े? 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को करीब 38 फ़ीसदी वोट के साथ 303 सीटें मिली थीं। वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस रही थी, जिसे क़रीब 20 फ़ीसदी वोट और महज़ 52 सीटें मिली थी। इसमें ममता बनर्जी की टीएमसी को 4 फीसदी से ज़्यादा वोट मिले थे और उसने 22 सीटें जीती थी। जबकि एनसीपी को देश भर में क़रीब डेढ़ फीसदी वोट मिले थे और उसके 5 सांसद जीते थे। वहीं शिवसेना 18, जेडीयू 16 और समाजवादी पार्टी 5 सीटें जीत सकी थी। इन चुनावों में एनडीए को बिहार की 40 में से 39 सीटें मिली थी, लेकिन अब जेडीयू और बीजेपी के अलग होने के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले नजर आते हैं। इसमें बीजेपी को 24 फीसदी वोट मिले थे, जबकि उसकी प्रमुख सहयोगी जेडीयू को क़रीब 22 फ़ीसदी और एलजेपी को 8 फीसदी वोट मिले थे। इन चुनावों में एलजेपी से दोगुना वोट पाने के बाद भी आरजेडी को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि कांग्रेस को क़रीब 8 फीसदी वोट मिलने के बाद महज़ एक ही सीट मिल पाई थी। इन्हीं आंकड़ों में विपक्षी एकता की ज़रूरत भी छिपी है और इसी में नीतीश कुमार को एक उम्मीद भी दिखती है। बिहार में एलजेपी और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनता दल के अधिकतम वोट एनडीए के पास आने पर ये 35 फीसदी के क़रीब दिखता है। जबकि राज्य में महागठबंधन के पास 45 फीसदी से ज़्यादा वोट हैं। 1. बीजेपी बनाम कांग्रेस (161 सीटें ) 12 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश जिसमें 161 लोकसभा सीटें शामिल हैं, यहाँ बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला देखने को मिला था। 147 सीटें ऐसी जहां दोनों के बीच सीधा मुकाबला था। वहीं 12 सीटों पर क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय दल को चुनौती देते दिखे। 2 सीटों पर क्षेत्रीय दलों के बीच ही मुकाबला था। इसमें मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा राज्य शामिल हैं। यहां बीजेपी को 147 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस को 9 और अन्य के खाते में 5 सीट गई। 2.बीजेपी बनाम क्षेत्रीय दल (198 सीटें) यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, और ओडिशा, इन 5 राज्यों की 198 सीटों पर अधिकांश में बीजेपी और रीजनल पार्टी के बीच ही मुकाबला रहा। 154 सीटों पर सीधा बीजेपी और क्षेत्रीय दलों के बीच मुकाबला था। 25 सीटों पर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच मुकाबला था। 19 सीटों पर क्षेत्रीय दलों के बीच ही मुकाबला था। बंगाल की 42 सीटों में से 39 सीटों पर बीजेपी या तो पहले या दूसरे नंबर पर थी। पिछले चुनाव में बीजेपी को यहां 116 सीटों पर, कांग्रेस 6 और अन्य को 76 सीटों पर जीत मिली। 3.कांग्रेस बनाम क्षेत्रीय दल (25 सीटें ) 2019 के चुनाव में कांग्रेस केरल, लक्षद्वीप, नागालैंड, मेघालय और पुडुचेरी की 25 सीटों में से 20 पर पहले या दूसरे नंबर पर रही। यहां बीजेपी लड़ाई में भी नहीं दिखी। केरल की केवल एक सीट थी जहां बीजेपी को दूसरा स्थान हासिल हुआ था। यहां 17 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली। वहीं अन्य को 8 सीटें मिलीं। 4.यहां कोई भी मार सकता है बाजी (93 सीटें ) 6 राज्य ऐसे हैं जहां की 93 सीटों पर सबके बीच मुकाबला देखा गया। 93 सीटों पर बीजेपी, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल सभी मजबूत नजर आए। महाराष्ट्र इसका उदाहरण है जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों गठबंधन के साथ में हैं। यहां पिछले चुनाव में बीजेपी को 40, अन्य को 41 और कांग्रेस को 12 सीटों पर जीत हासिल हुई। 5.सिर्फ क्षेत्रीय पार्टी का ही दबदबा (66 सीटें ) तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मिजोरम और सिक्किम की 66 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां सिर्फ क्षेत्रीय दलों का ही दबदबा है। तमिलनाडु की 39 सीटों में से सिर्फ 12 सीटों पर ही कांग्रेस या बीजेपी का थोड़ा आधार है, वह भी गठबंधन के सहारे। यहां 58 सीटों पर अन्य और 8 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली। बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था। कई विपक्षी दल एकजुटता से रहेंगे बाहर ऐसे तो विपक्ष में और भी दल हैं, जिनकी पकड़ राज्य विशेष में है। इनमें बीजेडी का ओडिशा में, बसपा का यूपी में, वाईएसआर कांग्रेस का आंध्र प्रदेश में, बीआरएस का तेलंगाना में अच्छा-खासा प्रभाव है। जेडीएस का कर्नाटक के कुछ सीटों पर प्रभाव है। हालांकि नवीन पटनायक, मायावती, जगन मोहन रेड्डी, के. चंद्रशेखर राव, और एच डी कुमारस्वामी का फिलहाल जो रवैया है, उसके मुताबिक इन दलों के कांग्रेस की अगुवाई में बनने वाले किसी भी गठबंधन में शामिल होने की संभावना बेहद क्षीण है। ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटों पर जीत की संभावना के नजरिए से बीजेपी के लिए सबसे निर्णायक राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और असम शामिल हैं।
कभी वीरभद्र सिंह के हनुमान कहे जाने वाले हर्ष महाजन को अब हिमाचल भाजपा ने कोर ग्रुप का सदस्य मनोनीत किया हैं। बीते साल हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हर्ष महाजन भाजपाई हो गए थे। तब माना जा रहा था कि शायद चम्बा सदर सीट से भाजपा महाजन पर दांव खेल सकती है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब बदली सियासी फ़िज़ा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के आदेश पर हर्ष महाजन को भाजपा कोर ग्रुप का सदस्य बनाया गया हैं। ज़ाहिर है इस नियुक्ति के बाद भाजपा में हर्ष का सियासी कद बढ़ा है, साथ ही राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज़ हो चुकी है कि लोकसभा चुनाव में काँगड़ा संसदीय सीट से पार्टी हर्ष महाजन पर दांव खेल सकती है। हर्ष महाजन, स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के विशेष सलाहकार और रणनीतिकार रह चुके है। महाजन वीरभद्र सरकार में पशुपालन मंत्री भी रहे और फिर 2012 से 2017 तक कांग्रेस शासन में राज्य सहकारी बैंक के चेयरमैन भी। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने हर्ष महाजन को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का वर्किंग प्रेसिडेंट नियुक्त किया था। यानी कांग्रेस में रहते महाजन का सियासी कद लगातार बढ़ा ही है, लेकिन महाजन ने 2022 के चुनाव से ठीक पहले सबको चौंकाते हुए भाजपा का दामन थाम लिया था। महाजन के भाजपा में जाने से कयास लगाए जा रहे थे कि ये भाजपा का मास्टरस्ट्रोक हो सकता है, दरअसल महाजन का चम्बा में बेहतर होल्ड माना जाता है, जाहिर है भाजपा को महाजन से कुछ उम्मीद तो ज़रूर रही होगी। हालांकि नतीजे आने के बाद महाजन की चम्बा सदर सीट पर भी कांग्रेस का परचम लहराया। भाजपा को अब भी महाजन की सियासी कुव्वत का अहसास है, इसलिए हर्ष महाजन को अहम् पद दिया गया है। भाजपा की सत्ता से विदाई होने के बाद हर्ष महाजन भी कमोबेश दरकिनार से ही दिखे है, पर अब उन्हें भाजपा कोर ग्रुप का सदस्य बनाया गया हैं। यानी अब भाजपा के अहम निर्णय लेने में उनकी भूमिका भी अहम होने वाली है। लोकसभा चुनाव के लिहाज़ से भाजपा में कई बड़े बदलाव होने की चर्चा तेज़ है। प्रदेश में सत्ता गवाने के बाद भाजपा इस दफा कोई चूक नहीं करना चाहेगी। फिलवक्त प्रदेश की चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्ज़ा है। काँगड़ा संसदीय सीट की बात करे तो यहाँ वर्तमान में किशन कपूर सांसद है, लेकिन विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन फीका रहा था। ऐसे में महाजन की नियुक्ति के बाद कयास लग रहे है कि क्या भाजपा इस दफा कांगड़ा संसदीय सीट पर चेहरा बदलने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है ? महाजन जिला चम्बा से आते है और जिला चंबा के चार निर्वाचन क्षेत्र काँगड़ा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते है। ऐसे में उनकी दावेदारी ख़ारिज नहीं की जा सकती। बहरहाल कयासों का सिलिसला जारी है।
देश में कई मौके ऐसे आएं है जब सरकारों ने अपने पक्ष में माहौल देखकर समय से पहले चुनाव करवा दिए। क्या आगामी लोकसभा चुनाव भी अपने तय वक्त से पहले हो सकते हैं, ये सवाल इन दिनों सियासी गलियारों में खूब गूंज रहा है। दरअसल, इसी साल के अंत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है। क्या मोदी सरकार इन्हीं के साथ लोकसभा चुनाव करवाने पर विचार कर रही है? क्या सरकार का नौ साल की उपलब्धियों के प्रचार में ताकत झोंकना इसका संकेत है? ये अहम सवाल है। 'सेवा सुशासन और गरीब कल्याण' के नारे के साथ भाजपा आक्रामक तरीके से मैदान में उतर चुकी है, मानो चुनाव की घोषणा हो चुकी हो। संभवतः सरकार और पार्टी के शीर्ष स्तर पर लोकसभा चुनावों को लेकर गंभीर मंथन हो रहा है। बीते 6 महीनो में हिमाचल प्रदेश और कर्णाटक में सत्ता से बेदखल हुई भाजपा निश्चित तौर पर आत्ममंथन जरूर कर रही होगी। हालांकि पूर्वोत्तर के नतीजों ने भाजपा को कुछ उत्साहित जरूर किया है। पर पार्टी को इस बात का भी इल्म है कि बीते कुछ समय में कांग्रेस पहले से ज्यादा नियोजित दिख रही है और एंटी इंकम्बैंसी को पूरी तरह खारिज करना भी गलत होगा। ये कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा कुछ असहज है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों को सोचने की जरुरत है। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव इसी साल नवंबर-दिसंबर में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ कराने का विचार हो रहा है। इसके पीछे एक तर्क ये हो सकता हैं कि विपक्ष अपनी तैयारी अगले साल मार्च-अप्रैल के हिसाब से कर रहा है और उसे समय नहीं मिलेगा। एक तर्क ये भी हैं कि अगर विधानसभा चुनावों में भाजपा को अनुकूल नतीजे नहीं मिले तो कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर नहीं होगा, बल्कि अगर दोनों चुनाव साथ हो जाते हैं, तो पीएम मोदी की लोकप्रियता का लाभ राज्यों के चुनावों में भी होगा। मुद्दे भांप रही हैं भाजपा ! कांग्रेस और भाजपा, दोनों तरफ सियासी पैंतरेबाजी तेज हो चुकी है। अगला लोकसभा चुनाव अमीर बनाम गरीब, हिंदुत्व बनाम सामाजिक न्याय और बेतहाशा बढ़ी अमीरी के मुकाबले गरीबी रेखा के नीचे की आबादी में बढ़ोत्तरी जैसे मुद्दों के बीच देखने को मिल सकता हैं। जातीय जनगणना भी बड़ा मुद्दा बन सकती हैं। शायद भाजपा इसे समझ रही हैं और ऐसे में जल्द चुनाव से इंकार नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का फीडबैक भी कारण ! मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से मिलने वाले फीड बैक भाजपा के लिए अच्छा नहीं बताया जा रहा है। राजस्थान में जरूर पार्टी अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट के झगड़े में लाभ तलश रही हैं लेकिन वसुंधरा राजे अगर नहीं साधी गई, तो मुश्किलें शायद भाजपा के लिए अधिक हो। उधर गहलोत सरकार की लोकलुभावन योजनाओं को भी खारिज नहीं किया जा सकता। इसी तरह बिहार, प. बंगाल और महाराष्ट्र में पिछले लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन को न दोहरा पाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
हिमाचल प्रदेश सरकार पन बिजली के ज़रिए हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी को बेहतर करने का हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार के पास पानी से बिजली और इस बिजली से पैसा बनाने को लेकर कई योजनाएं है, जिनपर इन दिनों गहन मंथन जारी है। ये सभी चर्चाएं तब और भी तेज़ हुई जब सीएम सुखविंदर सुक्खू हाल ही में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के साथ किन्नौर का दौरा करने पहुंचे। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के साथ सीएम सुक्खू की मुलाकात कई मायनो में अहम मानी जा रही है। दरअसल हिमाचल बिजली परियोजनाओं पर वाटर सेस लगाकर आमदनी बढ़ाना चाह रहा है। परन्तु हिमाचल के वाटर सैस को पंजाब और हरियाणा ने असंवैधानिक करार दिया है। हालांकि हिमाचल से पहले भाजपा शासित उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर भी वाटर सैस वसूल रहे है। इसके अलावा प्रदेश सरकार राज्य में स्थापित पावर प्रोजेक्ट में हिमाचल की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा पावर प्रोजेक्टों में मिलने वाली 12 फीसदी रायल्टी को बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने की भी मांग है। उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री केंद्र से चर्चा कर इन समस्याओं का हल निकालेंगे और क़र्ज़ में डूबती प्रदेश की आर्थिकी को सहारा मिलेगा। इसी के साथ हिमाचल में शानन पावर प्रोजेक्ट को लेकर भी चर्चाएं तेज़ है। हिमाचल सरकार लीज खत्म होने के बाद शानन प्रोजेक्ट को अपने अधीन लेना चाहती है। लीज़ खत्म होने ही वाली है, मगर ठीक उससे पहले पंजाब को शानन प्रोजेक्ट की याद आ गई है। जोगिंद्रनगर स्थित शानन प्रोजेक्ट में विद्युत उत्पादन को लेकर इसके कायाकल्प के लिए पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड ने 200 करोड़ का बजट जारी किया है। दिलचस्प बात ये है कि 2024 की लीज अवधि समाप्त होने से पहले परियोजना की 2026 की प्रस्तावित योजनाओं के लिए इस बजट को स्वीकृति मिली है। बता दें कि ब्रिटिश राज में मंडी के तत्कालीन राजा जोगिंदर सिंह ने शानन प्रोजेक्ट को 3 मार्च 1925 को 99 साल के लिए पंजाब को लीज पर दिया था। यह प्रोजेक्ट 110 मेगावाट हाईड्रो बिजली पैदा करता है, जो पंजाब को काफी सस्ती पड़ती है। हालाँकि पंजाब सरकार द्वारा इस प्रोजेक्ट के रखरखाव पर सवाल उठते रहे है। अब जब लीज अवधि समाप्त होने के नजदीक है तो पंजाब को इसकी याद आ गई। मिली जानकारी के अनुसार 110 मेगावाट की विद्युत परियोजना में विद्युत उत्पादन बढ़ाने के लिए यह बजट जारी हुआ है। मौजूदा समय में एक घंटे में 110 मेगावाट बिजली पैदा करने वाली इस पन विद्युत परियोजना में हर माह 2600 मेगावाट विद्युत उत्पादन से सालाना तीन से चार सौ करोड़ की आमदनी पंजाब सरकार को हो रही है। हालांकि हिमाचल प्रदेश सरकार पहले ही शानन पावर प्रोजेक्ट से पंजाब से वापस लेने का मन बना चुकी है। सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट कर दिया है कि लीज अवधि समाप्त होने के इसका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज 2 मार्च 2024 को समाप्त हो रही है और इसके बाद हिमाचल सरकार इसे संभालेगी।
एनसीपी के 25 वीन स्थापना दिवस दिवस पर जो हुआ वो पार्टी के इतिहास में दर्ज हो गया । कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करने को शरद पवार माइक पकड़ते है और चंद मिनटों में महाराष्ट्र की राजनीति में उफान आ जाता है। दरअसल शरद पवार पार्टी के दो कार्यकारी अध्यक्षों की घोषणा की गई - बेटी सुप्रिया सुले और छगन भुजबल। कोई जिम्मा देना तो दूर पुरे भाषण में एनसीपी के नंबर दो माने जाने वाले भतीजे अजित पवार का जिक्र तक नहीं करते। ये है शरद पवार और उनकी राजनीति का तरीका। पवार ने एक तीर से दो निशाने लगाने का काम किया है। शरद पवार ने अजित पवार को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि एनसीपी में अब उनकी कोई ख़ास जगह नहीं बची है। दूसरा बेटी सुप्रिया सुले एनसीपी चीफ की अगली उत्तराधिकारी होगी, ये भी लगभग तय हो गया है। फिलहाल, अजित पवार के पास महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी है। एनसीपी में दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की खबर के बाद अजित पवार और उनके समर्थकों का क्या रुख रहता है, ये देखना दिलचस्प होगा। अजित अब एनसीपी में हाशिये पर है और आगे उनके पास अलग राह पकड़ना ही एक मात्र विकल्प दिख रहा है। अजित पवार खुद को कभी शरद पवार के उत्तराधिकारी के तौर पर देखते थे। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं होने की खबरें आ रही थीं। बता दें कि अजित ने 2019 में भाजपा के साथ हाथ मिलाया था और देवेंद्र फडणवीस के साथ सुबह-सुबह शपथ ग्रहण समारोह में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पर चाचा शरद पवार के सियासी तिलिस्म के आगे अजित के अरमान दो दिन में ढह गए थे। अजित को वापस लौटकर चाचा की शरण में आना पड़ा था और इसके बाद एनसीपी -कांग्रेस और शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी। शरद पवार के मन में कुछ चल रहा है इसके संकेत पिछले महीने ही मिल गए थे जब उन्होंने पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। तब उनके अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद जो भूचाल आया था, वह उनके इस्तीफा वापस लेने के बाद ही थमा था। ये एक तरह से सन्देश था कि शरद पवार ही एनसीपी है। माहिर मानते है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि पार्टी में उनकी कुव्वत और पकड़ को लेकर किसी कोई शक ओ शुबा न रहे। दिलचस्प बात ये भी है कि शरद पवार के इस्तीफे के बाद अजित पवार ही एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने शरद पवार के इस्तीफे का समर्थन किया था और पार्टी के अन्य नेताओं को इसका सम्मान करने को कहा था। पर अजित के अरमान पुरे नहीं हुए और शरद पवार ने इस्तीफा वापस ले लिया। इसके बाद अजित पवार के भाजपा में शामिल होने की अटकलें लग रही थीं, हालांकि, अजित ने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते रहे है। बहरहाल पिछले डेढ़ महीने में जिस तरह से एनसीपी में सब घटा है उससे ये तय है कि शरद पवार को सियासत का चाणक्य क्यों कहा जाता है।
हिमाचल प्रदेश में जुलाई माह ने से उपभोक्ताओं को डिपुओं में सस्ता खाद्य तेल उपलब्ध होगा। इस महीने तक डिपुओं में 147 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से सरसों तेल मिल रहा है, लेकिन जुलाई में 110 रुपए लीटर के हिसाब से तेल मिलेगा। इस हेतु खाद्य आपर्ति निगम ने सस्ता तेल मुहैया कराने के लिए तेल कंपनी को सप्लाई ऑर्डर दे दिया है। प्रदेश सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के 19,74,790 राशन कार्ड धारकों को फायदा होगा। हिमाचल प्रदेश में ऐसा पहली बार होगा जब गरीबी रेखा से नीचे और गरीबी रेखा से ऊपर उपभोक्ताओं को डिपुओं में एक ही दाम के हिसाब से सरसों तेल मिलेगा। वहीँ टैक्स पेयर राशन कार्ड धारकों को डिपुओं में 115 रुपए प्रति लीटर की दर से तेल मिलेगा। गौरतलब है कि बीते सप्ताह मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने रोहड़ू के चिड़गांव दौरे के दौरान सरसों तेल की कीमत 37 रुपए कम करने की घोषणा की थी।
खेजड़ी के पेड़ बचाने के लिए 363 बिश्नोइयों ने कटवा दिए थे अपने सिर खेजड़ी बिश्नोई समाज का धार्मिक पेड़ है। हर बिश्नोई के घर के बाहर यह पेड़ देखने को मिलता है। इसके पीछे की कहानी बेहद रोचक हैI दरअसल करीब 300 साल पहले राजा अभय सिंह ने अपने महल के दरवाजे बनवाने के लिए हरे पेड़ों की लकड़ी कटवाने का आदेश दिया था। राजा को ज्ञात हुआ कि बिश्नोई बहुल इलाके में सबसे ज्यादा हरे पेड़ मिलेंगे। आदेशानुसार सेना वहां पेड़ काटने के लिए पहुंच गईI सेना को बिश्नोई समाज का विरोध झेला पड़ाI तब समाज की महिला ‘माता अमृता देवी’ ने इसका विरोध किया और संघर्ष करते हुए अपना शीश कटा दिया। शीश कटवाने से पहले माता अमृता देवी ने उनसे कहा, ‘सिर सांटे रूख रहे, तो भी सस्तो जाणिये।’ मतलब - अगर सिर कटवा देने से एक पेड़ भी बच जाता है तो यह मेरे लिए सस्ता सौदा है। उस वक्त 363 बिश्नोइयों ने भी अपना सिर कटवा दिया था। इसके बाद से खेजड़ी के पेड़ की पूजा शुरू हो गई।
हिमाचल सरकार, पूर्व जयराम सरकार के फाइनेंशियल मिस्मैनेजमेंट को लेकर श्वेत पत्र लाएगी। इसके लिए गठित कैबिनेट सब कमेटी का आज प्रदेश सचिवालय में पहली बैठक है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित सब कमेटी बताएंगी कि हिमाचल के आर्थिक हालात क्यों बिगड़े है। बता दें कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान भी ये वादा किया था कि राज्य के वित्तीय हालात पर श्वेत पत्र जारी किया जाएगा। कैबिनेट सब कमेटी आंकलन करेगी कि जयराम सरकार के कार्यकाल में कितना कर्ज लिया गया है। लिया गया कर्जा कहां खर्च हुआ और कितनी फिजूलखर्ची हुई। कर्ज लेने के कारण और उसके इस्तेमाल को लेकर भी सब कमेटी रिपोर्ट तय करेगी। कैबिनेट सब कमेटी में डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री चेयरमैन है, जबकि कृषि मंत्री चंद्र कुमार और ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह को सदस्य बनाया गया है। जबकि वित्त सचिव को इस कैबिनेट सब-कमेटी का सदस्य सचिव नियुक्त किया है। 75 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज : हिमाचल प्रदेश पर 75 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज है। कर्मचारियों की 10 हजार करोड़ से भी ज्यादा की देनदारी बकाया है। वहीँ वर्तमान में सरकार आर्थिक बदहाली का सामना कर रही है। सीएम सुक्खू शुरू से खराब आर्थिकी पर खुलकर बोलते रहे है और अब सरकार श्वेत पत्र लेकर आ रही है ।
मुंबई में श्रद्धा वालकर मर्डर केस जैसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। दरअसल मुंबई के मीरा रोड इलाके की आकाशगंगा सोसाइटी में एक महिला की निर्मम हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं हत्यारे ने सबूत मिटाने के लिए शव के टुकड़ों को कुकर में उबाल भी दिया। पुलिस को शक है कि उसने उबला हुआ मांस कुत्तों को खिलाया। आरोपी का नाम मनोज साने है। वह पिछले 3 साल से सरस्वती वैद्य नाम की महिला के साथ मीरा रोड इलाके की आकाशगंगा बिल्डिंग के 7वें फ्लोर पर किराए के फ्लैट में रह रहा था। फ्लैट से बदबू आने पर बिल्डिंग के लोगों ने बुधवार को पुलिस को सूचना दी थी, जिसके बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और सोसाइटी की सातवीं मंजिला से महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद किया। पुलिस ने लिव-इन पार्टनर की हत्या और उसके शव के कई टुकड़े करने के आरोप में मृतका के दोस्त को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में महिला की बेरहमी से हत्या किए जाने की बात सामने आई है।
क्या आरबीआई 500 के नोट भी बंद करने वाला है, क्या 1000 रूपए के नोट वापस आएँगे ? 2000 के नोट वापस लेने की घोषणा के बाद आपने भी ये बातें ज़रूर सुनी होंगी। आपको बता दें की ऐसा बिलकुल भी नहीं हो रहा। आरबीआई 500 रुपये के नोटों को वापस लेने या 1,000 रुपये के नोटों को फिर से पेश करने के बारे में नहीं सोच रहा है। आरबीआई गवर्नर ने जनता से ऐसी अटकलें न लगाने का अनुरोध किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एमपीसी की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये बात कही। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि 2000 नोटों को चलन से बाहर करने के फैसले के बाद लगभग 50% दो हजार के नोट बैंकों में वापस आ गए हैं। कुल 3.62 लाख करोड़ के 2000 के नोट 31 मार्च 2023 तक चलन में थे, उनमें से 1.80 लाख करोड़ के नोट बैंकों में वापस आ गए हैं। आने वाले समय में 85% 2000 के नोट बैंकिंग सिस्टम में जमा के जरिए, जबकि बाकी नोट एक्सचेंज के जरिए वापस आने की सम्भावना हैं।


















































