हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के उपमंडल रोहडू के तहत स्पैल वैली के कुटाड़ा गांव में सोमवार देर रात आग से एक दो मंजिला घर जलकर राख हो गया। इस घटना में एक 70 वर्षीय बजुर्ग महिला की जिंदा जलकर माैत हो गई। वहीं, दो अन्य घटनाओं में कुमारसैन उपमंडल के अढ़ोथ गांव और ननखड़ी तहसील के अंतर्गत खमाड़ी में आग से दो मकान जल गए हैं। तीनों घटनाओं में लाखों के नुकसान का अनुमान है। पहली घटना में उपमंडल रोहडू के तहत स्पैल वैली के कुटाड़ा गांव में सोमवार करीब नौ बजे श्याम लाल के घर में अचानक आग लग गई। उस समय घर के भीतर बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। घर लकड़ी का बना होने के कारण आग तेजी से फैल गई। गांव के बीच में घर होने के कारण पता चलते ही पूरे गांव के लोग पंप, पावर स्प्रे लेकर आग बुझाने में जुट गए। लोगों ने घरों की टंकियों से पानी निकाल कर आग को काबू पाने की कोशिश की। इसकी सूचना दमकल केंद्र रोहडू को दी गई। सूचना के बाद रोहडू से भी दमकल वाहन मौके के लिए रवाना हो गए। करीब आधे घंटे बाद जब तक दमकल वाहन मौके पर पहुंचे घर पूरा जल चुका था। ग्राम वासी प्रदीप मच्छान ने बताया कि घर से बच्चे व अन्य लोग बाहर निकल चुके थे। अफरातफरी में एक बुजुर्ग महिला का पता नहीं चल पाया। बाद में महिला का जला हुआ शव बरामद हुआ। वहीं ननखड़ी तहसील के अंतर्गत खामड़ी पंचायत के धरूजा गांव में आग लगने से चेत राम का दो मंजिला मकान जलकर राख गया है। जानकारी के अनुसार, रविवार देर रात 9:30 बजे चेत राम. के घर में आग लग गई और पूरा घम जलकर राख हो गया। इस आग की घटना में ऊपर चेत राम का दो मंजिला घर, 3 कमरे और 1 रसोड पूरी तरह से जल गई। मकान में स कपड़े, बिस्तर और अन्य सामान जलकर राख हो गया।
** बिना कोचिंग के राहुल शर्मा ने पास की HAS परीक्षा हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने सोमवार देर शाम 2024 के हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (HAS) परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है, जिसमें राहुल शर्मा ने 6वीं रैंक प्राप्त कर तहसीलदार बनने का गौरव हासिल किया। राहुल, जो चौपाल सराहां पंचायत के जेठल गांव के निवासी हैं, उन्होंने बिना कोचिंग के यह सफलता प्राप्त की। वे तीन बार असफल रहे, लेकिन चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। शिमला में एचएएस की तैयारी करते हुए वे बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाते थे। राहुल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और दोस्तों को दिया और अन्य युवाओं को निराश न होने की सलाह दी।
* प्रदेश के निचले क्षेत्रों में छाया रहेगा घना कोहरा हिमाचल प्रदेश में सोमवार को ऊंचे व मध्यम पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी और बारिश देखने को मिली। वहीं, प्रदेश के निचले क्षेत्रों में बादल छाए रहे जिससे की तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार से मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है। निचले पहाड़ी क्षेत्रों में 7 और 8 जनवरी को अलग-अलग स्थानों पर घना कोहरा छाया रहेगा जिससे लोगों को परेशानी हो सकती है। मौसम विभाग ने 7 जनवरी से 10 जनवरी तक मौसम साफ रहने की संभावना जताई है। इस दौरान प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर धूप खिली रहेगी। हालांकि प्रदेश के निचले पहाड़ी क्षेत्रों में कोहरे के कारण धूप देरी से निकलेगी जिससे लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने 10 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के एक बार फिर सक्रिय होने की संभावना जताई है जिसके कारण 11 जनवरी से एक बार फिर मौसम करवट लेगा. मौसम विभाग ने 11 जनवरी को प्रदेश में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। 6 जनवरी को लाहौल-स्पीति का जिला मुख्यालय केलांग सबसे ठंडा रहा. यहां न्यूनतम तापमान -2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। इसके अलावा सुंदरनगर प्रदेश में सबसे गर्म रहा. यहां अधिकतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और सुंदरनगर में न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री दर्ज किया गया। 6 जनवरी को बिलासपुर में घना कोहरा छाया रहा। इसके अलावा सुंदरनगर और मंडी में भी हल्का कोहरा छाया रहा।
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) ने HAS एग्जाम का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। सोमवार देर शाम को यह रिजल्ट घोषित किया गया, जिसमें मेरिट के आधार पर 20 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इसमें 9 उम्मीदवार एचएएस बने हैं जबकि 3 उम्मीदवार तहसीलदार, 1 अभ्यर्थी जिला पंचायत अधिकारी, 3 जिला वेलफेयर कम प्रोबेशन अधिकारी, 3 असिस्टेंट रजिस्ट्रार और 1 अभ्यर्थी जिला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के पद पर चयनित हुआ है। HAS एग्जाम में इस बार लड़कों का दबदबा रहा। इस बार 15 लड़कों ने बाजी मारी है, जबकि 5 लड़कियां एग्जाम क्लियर करने में सफल रहीं। साल 2024 के HAS एग्जाम में उमेश ने टॉप किया है। बता दें कि बीते 2 से 6 जनवरी तक शिमला में अभ्यर्थियों के पर्सनैलिटी टेस्ट हुए थे, जिसके बाद सोमवार शाम को ही लोक सेवा आयोग ने रिजल्ट घोषित कर दिया। उत्तीर्ण हुए उम्मीदवारों में उमेश (एचएएस), मोहित सिंह (एचएएस), जितेंद्र चंदेल (एचएएस), स्वाति वालिया (तहसीलदार), अनूप शर्मा (तहसीलदार), राहुल शर्मा (तहसीलदार), संजय कुमार (जिला पंचायत अधिकारी), नितिन राणा (जिला कल्याण कम प्रोबेशन अधिकारी), शिवांशी सूद (असिस्टेंट रजिस्ट्रार), अवस पंडित (जिला कल्याण कम प्रोबेशन अधिकारी), राहुल धीमान (एचएएस), साहिल (जिला वेलफेयर कम प्रोबेशन अधिकारी), अरुण कुमार सांख्यान (असिस्टेंट रजिस्ट्रार), आस्था (एचएएस), अखिल सिंह ठाकुर (असिस्टेंट रजिस्ट्रार), तानिया कश्यप (एचएएस), करण (जिला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले), अंकुश कुमार (एचएएस), रजत चौधरी (एचएएस) और प्रियंका (एचएएस) शामिल हैं। HAS का प्री एग्जाम साल 2024 में 30 जून को आयोजित हुआ था। प्री एग्जाम पास करने वाले अभ्यर्थियों का मेन्स एग्जाम बीते साल 3 से 10 अक्टूबर के बीच आयोजित हुआ था। मेन्स एग्जाम पास करने वाले अभ्यर्थियों को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था जो साल 2025 में 2 से 6 जनवरी के बीच हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के ऑफिस शिमला में आयोजित हुए थे। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के लिए 30 पद विज्ञापित किए गए थे लेकिन 20 पदों पर ही योग्य उम्मीदवार मिले।हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की सचिव निवेदिता नेगी ने बताया कि आयोग ने परिणाम घोषित कर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में चल रहे विंटर कार्निवल में कुमारसैन की विभा नेगी को मिस शिमला चुना गया। शिमला के विंटर कार्निवल में मनाली की तर्ज पर पहली बार मिस शिमला के चयन के लिए प्रतियोगिता करवाई गई। इसके अलावा शिमला की गुनगुन पाहवा फर्स्ट और चौपाल की नेहा ठाकुर सेकेंड रनरअप रहीं। प्रतियोगिता में शिमला की 20 युवतियों ने भाग लिया। इनमें से रविवार को अंतिम राउंड के लिए 10 युवतियों का चयन किया गया था। सोमवार शाम के समय मौसम खराब होने के चलते प्रतियोगिता गेयटी थियेटर के बहुउद्देशीय हाल में हुई। शाम 7:00 बजे के बाद शुरू हुए बैंड फिनाले में टॉप 10 युवतियों ने रैंपवॉक कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान तीन राउंड आयोजित किए गए। इसके बाद विजेताओं के नाम घोषित किए गए। निर्णायक मंडल की भूमिका पूर्व पहली बार हो रही मिस शिमला प्रतियोगिता देखने के लिए भी रिज मैदान में काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। लोगों ने कहा कि इस तरह की स्पर्धाओं से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके अलावा शहर के कारोबारियों को भी ऐसे आयोजनों का फायदा होता है। इस अवसर पर बताैर मुख्य अतिथि नगर निगम शिमला महापाैर सुरेंद्र चाैहान, उप महापाैर उमा काैशल व आयुक्त नगर निगम भूपेंद्र अत्री माैजूद रहे। मिस शिमला 1995 दीपाली धौल, पूर्व मिस शिमला 2005 शेरी मेहता और पटकथा लेखक विवेक मोहन ने निभाई। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को ताज पहनाकर सम्मानित किया। सोमवार को बारिश के बाद शहर में ठंड बढ़ गई है बावजूद इसके रिज मैदान पर भारी संख्या में दर्शक विंटर कार्निवल देखने के लिए आए थे।
ठियोग की क्यार और कमाह पंचायत के लिए बनी सिंचाई योजना के पाइप ट्रायल में फटने के मामले में सरकार ने जांच बैठा दी है। सरकार ने जांच का जिम्मा जल शक्ति विभाग के इंजीनियर इन चीफ को सौंपा है और हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। सरकार ने पूछा है कि जब मौके पर सिंचाई के पाइप बिछाए जा रहे थे उस समय अधिकारी कहां थे। विकास कार्यों में क्यों लापरवाही बरती गई। पाइप जमीन के नीचे दबाने के बजाय खुले में क्यों छोड़े गए। इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपने की भी तैयारी चल रही है। अमर उजाला ने 6 जनवरी के अंक में ट्रायल में पाइप फटने का मामला प्रमुखता से उठाया था। सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार ने टेंडर कम रेट पर लिया था, ऐसे में उसने पाइप खुले में छोड़ दिए। पानी के लिए बनाए चेंबर भी फट गए हैं। इनमें भी गुणवत्ता वाला कार्य नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों ने बार-बार काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अधिकारी योजना का स्थानीय लोगों से फीडबैक ले रहे हैं। करीब सवा तीन करोड़ से क्वार खड्ड से बनाई उठाऊ सिंचाई योजना पहले ही सवालों के घेरे में रही है। निम्न गुणवत्ता के पाइप इस्तेमाल करने की शिकायत एक कांग्रेस नेता ने एसडीएम कार्यालय ठियोग में की। एसडीएम ने जांच करने के आदेश दिए थे। पाइपें फटने से पंचायतों के लोगों में रोष व्याप्त है और मांग कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मामले में जांच बिठा दी गई है। जल शक्ति विभाग के इंजीनियर इन चीफ को जांच कर रिपोर्ट एक हफ्ते में देने को कहा है। उसके बाद लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिला शिमला में बीते साल गर्मियों में टैंकर से पानी की आपूर्ति के नाम पर एक करोड़ से ज्यादा के घपले की विजिलेंस ब्यूरो ने तफ्तीश तेज कर दी है। कौन सा टैंकर किस समय कहां था, जीपीएस से इसका पता लगाया जाएगा। टैंकर चालक उस समय कहां थे, इसका भी मोबाइल लोकेशन से खुलासा होगा। साथ ही निलंबित इंजीनियरों और ठेकेदारों के बैंक खाते भी खंगाले जाएंगे। सोमवार को विजिलेंस ने अधिशासी अभियंता को छोड़कर अन्य 7 एसडीओ और जेई से पूछताछ की। करीब दो घंटे की पूछताछ में उन्होंने कई राज उगले हैं। एक ठेकेदार से भी पूछताछ हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए हैं। विजिलेंस ने जल शक्ति विभाग से रिकाॅर्ड जुटाया है। आज फिर इन इंजीनियरों से पूछताछ होगी। उधर, सोमवार को सुबह आठ बजे विजिलेंस ब्यूरो की टीम पानी के उन स्रोतों तक पहुंची, जहां से ठेकेदार ने पानी उठाने की बात कही है। सूत्रों के अनुसार इंजीनियर ही नहीं, कार्यालय के लिपिक भी जांच की जद में हैं। विजिलेंस ब्यूरो की टीम यह देख रही है कि बीते साल जल शक्ति विभाग ने पानी की आपूर्ति का टेंडर किया और इसमें कितने लोगों ने भाग लिया। कहीं चहेतों को लाभ देने के लिए सप्लाई ऑर्डर तो नहीं जारी हुआ है। विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने सोमवार को ठियोग से 20 किलोमीटर दूर गिरि नदी के लेलू पुल का दौरा किया। इसके अलावा टीम क्यार खड्ड भी पहुंची। जल शक्ति विभाग के रिकॉर्ड में बताया गया है कि गिरि नदी और क्यार खड्ड से टैंकरों के माध्यम से पानी प्रभावित क्षेत्रों में ले जाया गया। विजिलेंस हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह घोटाला 1.13 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो सकता है। इस मामले की धीरे-धीरे परतें खुलेंगी। उधर, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री कह चुके हैं कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल शक्ति ओंकार शर्मा ने कहा कि मामले की निष्पक्षता से जांच होगी। बीते साल ठियोग तहसील के कई प्रभावित क्षेत्रों के लिए पानी की सप्लाई का टेंडर किया गया, लेकिन इसमें एक गांव ऐसा है, जो अभी तक सड़क से नहीं जुड़ा है। हैरत की बात है कि वहां भी टैंकर के जरिये पानी पहुंचाने की बात कही गई। जिन टैंकरों से पानी की सप्लाई देने का दावा किया गया, उनमें मोटरसाइकिल और एक अधिकारी की गाड़ी का नंबर भी दे दिया गया। जल शक्ति विभाग के इस कारनामों से हर कोई हैरत में है। ऐसे में सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल शक्ति विभाग के 10 इंजीनियरों को बीते दिनों सस्पेंड किया है।
मिड-डे मील की रोजाना जानकारी नहीं देने पर सात जिलों के 93 स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रभारियों को तय समय में पूरा रिकॉर्ड अपलोड करने के निर्देश जारी किए हैं। सभी स्कूलों को मिड-डे मील योजना के लिए वास्तविक समय रिपोर्टिंग करना भी अनिवार्य किया गया है। चंबा, शिमला, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, सिरमौर और मंडी जिला के 31 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों, 40 मिडल स्कूलों और 22 हाई स्कूलों की ओर से रोजाना मिड-डे मील की जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं की जा रही है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा कि मिड-डे मील योजना के कार्यान्वयन के संबंध में भारत सरकार ने सभी स्कूल अधिकारियों को इस योजना के तहत पात्र छात्रों को दिए जाने वाले भोजन की दैनिक वास्तविक समय रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार विभिन्न सरकारी स्कूलों (जीपीएस, जीएमएस, जीएचएस और जीएसएसएस) के प्रत्येक मिड-डे मील शिक्षक प्रभारी को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबरों का उपयोग करके टोल-फ्री नंबर 15544 पर एसएमएस के माध्यम से दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है। इस रिपोर्टिंग का उद्देश्य नामांकित छात्रों को दिए जाने वाले भोजन पर सटीक डेटा प्रदान करना है। अधिकारियों को भोजन वितरण की स्पष्ट तस्वीर देने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कार्यक्रम को उसके दिशानिर्देशों के अनुसार निष्पादित किया जा रहा है। रिपोर्ट सभी स्कूल कार्य दिवसों पर प्रस्तुत की जानी चाहिए। यह प्रणाली यह निगरानी करने में भी मदद करती है कि आवंटित भोजन इच्छित छात्रों को परोसा जा रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि बीते दिनों सामने आया कि 93 स्कूल नियमित आधार पर रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। इस कारण भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों स्तरों पर विभाग के लिए शर्मनाक स्थिति पैदा हो रही है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस रिपोर्टिंग आवश्यकता का पालन करने में विफलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो स्कूल दैनिक एसएमएस रिपोर्टिंग में चूक करना जारी रखते हैं, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें दंड या अन्य प्रशासनिक परिणाम शामिल हो सकते हैं। उच्च शिक्षा निदेशक ने कहा कि पीएम पोषण योजना की सफलता समय पर और सटीक डेटा संग्रह पर बहुत अधिक निर्भर है। ये रिपोर्ट न केवल भोजन वितरण की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में काम करती है, बल्कि स्कूलों में बाल पोषण आवश्यकताओं को संबोधित करने में कार्यक्रम की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने में भी मदद करती है। उन्होंने डिफॉल्टर स्कूलों को दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सुक्खू ने आज यहां पर्यटन विभाग की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि पर्यटन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी का मुख्य स्तम्भ है। राज्य सरकार विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने को प्राथमिकता दे रही है ताकि पर्यटकों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान की जा सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र मेें अधोसंरचना निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण पर आने वाले समय में 2415 करोड़ रुपये व्यय करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला मंडी में बनने वाले शिवधाम पर 150.27 करोड़ रुपये तथा जिला हमीरपुर के बाबा बालक नाथ मन्दिर के सौन्दर्यीकरण पर 51.70 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इसी प्रकार 78.09 करोड़ रुपये की लागत से जिला कांगड़ा के नगरोटा बगवां तथा पालमपुर नगर का सौन्दर्यीकरण किया जाएगा। प्रदेश सरकार 280.39 करोड़ की लागत से जिला हमीरपुर के नादौन, जिला कांगड़ा के नगरोटा बगवां और जिला कुल्लू के मनाली व कुल्लू में वैलनैस सेन्टर विकसित करेगी। जिला कुल्लू के नग्गर किले के संरक्षण व मरम्मत कार्य पर 8.64 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार साहसिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है और इस कड़ी में नादौन में राफ्टिंग कॉम्पलैक्स और मनाली, धर्मशाला तथा शिमला में रोलर स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जाएगा। इन पर 163.50 करोड़ रुपये व्यय होंगे जिससे पर्यटकों सहित स्थानीय लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेहतर हवाई सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार हेलीपोर्ट का निर्माण कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को इन परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यटन विभाग को डीजीसीए जिला शिमला के संजौली, रामपुर, जिला मंडी के कंगनीधार और जिला सोलन के बद्दी हेलीपोर्ट सहित मौजूदा अन्य हेलीपोर्ट के लिए परिचालन स्वीकृति प्राप्त करने के निर्देश भी दिए, ताकि इन हेलीपोर्ट में हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन सुगम हो सके। सीएम सुक्खू ने कहा कि पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं और सरकार इन क्षेत्रों के विकास और अधिकतम लाभ अर्जित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से प्रदेश में पर्यटकों की आमद बढ़ी है, जो प्रदेश की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण साबित हो रही है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रघुवीर सिंह बाली ने पर्यटन क्षेत्र में सुधार के लिए अपने बहुमूल्य विचार प्रस्तुत किए। प्रधान सचिव पर्यटन देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक पर्यटन विवेक भाटिया, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
** जयराम ठाकुर ने जन्मदिन पर माता-पिता, और देवी-देवताओं का किया आभार व्यक्त हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का आज जन्मदिन है। जयराम ठाकुर आज 60 वर्ष के हो गए हैं। इस खास मौके पर उन्होंने शिमला में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच 60 किलो का केक काटकर अपना जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर जयराम ठाकुर के आधिकारिक आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। कार्यकर्ताओं ने पहाड़ी नाटी डालकर जयराम ठाकुर के जन्मदिन का जश्न मनाया और उन्हें ढेर सारी बधाईयां दीं। जयराम ठाकुर ने जन्मदिन के इस मौके पर कहा कि वह अब सीनियर सिटीजन हो गए हैं और जीवन के इस नए पड़ाव पर पहुंचने के लिए वह ईश्वर, देवी-देवताओं और अपने माता-पिता का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने कठिन संघर्ष भरा जीवन जिया और उन्होंने भी अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा में समर्पित किया है। जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि वह देवी-देवताओं से प्रार्थना करते हैं कि वह अपनी पूरी जिंदगी समाज सेवा में इसी तरह समर्पित रहें। जन्मदिन के मौके पर प्रदेश भर से उन्हें मिल रहे बधाई संदेशों के लिए उन्होंने जनता का धन्यवाद किया। जयराम ठाकुर ने बताया कि रात के 12 बजे से ही प्रदेश भर से लोग उन्हें फोन और मैसेज भेजकर बधाई दे रहे हैं, और वह इसके लिए प्रदेशवासियों के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह कामना है कि प्रदेशवासियों का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहे, ताकि वह देश और समाज की सेवा में इसी तरह निरंतर लगे रहें।
चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) वायरस तेजी से फैल रहा है। यह वायरस खास तौर से बच्चों में देखा जा रहा है। चीन में HMPV वायरस की वजह से एक बार फिर से कोरोना महामारी जैसी स्थिति बन गई है। अस्पतालों में इस वायरस की चपेट में आए मरीजों की भारी भीड़ नजर आ रही है, जिनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं। वहीं, इस वायरस की वजह से बड़ी संख्या में मौते भी हो रही है। इस बीच जो खबर आई है वो हर भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाली है। चीन में कोराना की तरह तेजी से फैलने वाला HMPV वायरस ने अब भारत में भी दस्तक दे दी है। पहला मामला बेंगलुरु में आया है। यहां एक 8 महीने की बच्ची में HMPV वायरस डिटेक्ट किया गया है। शहर के बैपटिस्ट अस्पताल में यह पहला मामला सामने आया है। अस्पताल के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 8 महीने के बच्ची में HMPV वायरस पाया गया है। यह भारत का पहला केस है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी सरकारी लैब में इसका टेस्ट नहीं किया गया है। मगर एक प्राइवेट हॉस्पिटल से यह रिपोर्ट आई है और इस रिपोर्ट पर संदेह नहीं किया जा सकता है। सरकारी लैब में भी इसका टेस्ट कराया जाएगा। US सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, HMPV सभी उम्र के लोगों, खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में ऊपरी और निचले श्वसन रोग का कारण बन सकता है। 2001 में इसका पता लगाया गया था और यह श्वसन सिंकिटियल वायरस (RSV) के साथ न्यूमोविरिडे से संबंधित है। HMPV के लक्ष्णों की बात करें, तो इसमें सामान्य सर्दी या फ्लू जैसे ही लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर मामलों में, यह घरघराहट या सांस की तकलीफ, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया या अस्थमा के बढ़ने का कारण बन सकता है। इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा पांच साल से कम उम्र के बच्चे, खास तौर पर नवजात शिशु, वृद्ध वयस्क, जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक हो और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले या अस्थमा या सीओपीडी जैसी पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियों वाले व्यक्तियों को है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व को 7 जनवरी से पहले अतिक्रमण और बेदखली मामलों के निष्पादन को लेकर सभी विभागों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के एक अक्तूबर के आदेशों का अनुसरण करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व ने हलफनामा दाखिल किया है। इसमें कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम 1954 की धारा 163 के तहत संबंधित सहायक कलेक्टर प्रथम और द्वितीय श्रेणी कलेक्टर के पास 5789 मामले लंबित हैं। भू राजस्व अधिनियम 1954 की धारा 163 के अंतर्गत बेदखली और वारंट के 3746 और अपील के मामले 457 लंबित हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अतिरिक्त सचिव को निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों की सुनवाई का निपटारा जल्द किया जाए। हाईकोर्ट ने वित्त आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 17 के तहत पूर्ण निरीक्षण याचिकाओं और धारा 14 के तहत अपील का 31 जुलाई से पहले निपटारा किया जाए। सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के कलेक्टर के समक्ष धारा 163 के अंतर्गत 5789 मामलों का निष्पादन 30 जून और अपीलों का 30 मई 2025 तक करने को कहा गया। हिमाचल प्रदेश सार्वजनिक परिसर बेदखली और किराया वसूली के तहत बेदखली के वारंटों का निष्पादन 31 मार्च 2025 तक या उससे पहले सुनिश्चित करने की निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट की ओर से ये निर्देश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए हैं। अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी।
अगर आप हवाई जहाज से देहरादून, नोएडा या जयपुर जाना चाहते हैं तो बहुत जल्द गगल हवाई अड्डे से यह सुविधा मिल जाएगी। जल्द ही गगल एयरपोर्ट इन शहरों से भी सीधी उड़ान के जरिये जुड़ जाएगा। 30 मार्च से हवाई उड़ानों के शेड्यूल में होने वाले बदलाव के साथ ही इन शहरों के लिए गगल से सीधी उड़ानें होंगी। मौजूदा समय में गगल एयरपोर्ट से शिमला-दिल्ली और चंडीगढ़ के लिए सीधी उड़ानें होती हैं। जानकारी के अनुसार 30 मार्च से हवाई उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव होगा। इस दौरान जहां राजधानी दिल्ली के लिए होने वाली उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, वहीं देहरादून, नोएडा और जयपुर शहरों को भी गगल एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा। इन शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने के लिए एयरपोर्ट अथारिटी की विमानन कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। अगर प्रयास सफल हुए तो 30 मार्च से इन शहरों के गगल एयरपोर्ट से सीधी उड़ानें होंगी। उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में गगल एयरपोर्ट पर विमानन कंपनी एलायंस एयर, इंडिगो और स्पाइस जेट अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन विमानन कंपनियों की शिमला, दिल्ली और चंडीगढ़ के लिए उड़ानें होती हैं। गगल एयरपोर्ट से अन्य शहरों को जोड़ने के लिए लोग मांग कर रहे हैं। इसी कड़ी में इन शहरों को जोड़ने के लिए विमानन कंपनियों के साथ बात चल रही है। गगल एयरपोर्ट में 30 मार्च से सूर्योदय से सूर्यास्त तक उड़ानें शुरू की जाएंगी। उम्मीद है कि नोएडा, देहरादून और जयपुर के लिए भी सीधी उड़ानें शुरू हो सकेंगी।
नए साल के जश्न के बाद भी पहले वीकेंड पर हिमाचल के पर्यटन स्थल सैलानियों से गुलजार हो गए हैं। हिल्सक्वीन शिमला, मनाली, धर्मशाला, कसौली, चायल और डलहौजी में सैलानियों की भारी भीड़ रही। वीकेंड पर बर्फबारी के पूर्वानुमान के चलते बड़ी संख्या में सैलानियों ने हिमाचल के पर्यटन स्थलों का रुख किया। पर्यटक स्थलों पर पर्यटक वाहनों की भीड़ बढ़ने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी पेश आई। वीकेंड पर शनिवार और रविवार को शिमला में सैलानियों का खूब जमावड़ा लगा। रिज मैदान पर विंटर कार्निवाल का सैलानियों ने आनंद लिया। पर्यटन निगम की लिफ्ट के बाहर सैलानियों की लंबी कतारें लगी रहीं। बर्फ में अठखेलियां करने के लिए सैलानियों ने कुफरी और नारकंडा का रुख किया। कुल्लू-मनाली में भी वीकेंड पर सैलानियों की खूब रौनक रही। औट, बंजार और तीर्थन घाटी में पर्यटक वाहनों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक जाम की समस्या पेश आई। अटल टनल रोहतांग में भी वीकेंड पर सैलानियों की भारी भीड़ रही। कसौली में वीकेंड पर पर्यटक वाहनों की भीड़ बढ़ने से जाम की समस्या पेश आई। धर्मशाला और चायल में भी नए साल के पहले वीकेंड पर ब़ॉी संख्या में सैलानी मौसम का लुत्फ उठाने के लिए पहुंचे।फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि नए साल के जश्न के बाद पहला वीकेंड भी शानदार रहा है। बर्फबारी का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी शिमला, मनाली, धर्मशाला सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर पहुंचे हैं। बर्फबारी होती रही तो सैलानियों के आने का क्रम आगे भी जारी रहेगा।
हिमाचल प्रदेश के मंडी में चिट्टे की तस्करी के झूठे केस में फंसाने की फोन पर धमकी देकर पैसे मांगने और कुल्लू के तोश में घूमने आए हरियाणा के युवक की मौत के मामले में सीबीआई ने केस दर्ज किए हैं। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दोनों मामले सीबीआई को सौंपने के राज्य सरकार को निर्देश दिए थे। रविवार को केस दर्ज कर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। सीबीआई मामलों में की गई अब तक की जांच का सारा रिकॉर्ड पुलिस से लेगी और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की जाएगी। गौर हो कि हरियाणा का वैभव यादव (21) 9 दिसंबर 2023 को चार युवकों के साथ तोश घूमने आया था। सभी युवक सूरज गेस्ट हाउस में रुके। इस बीच वैभव की मौत हो गई। इसके बाद वैभव के पिता बलदेव ने पुलिस महानिदेशक और पुलिस थाना कुल्लू को लिखित शिकायत देकर पुलिस जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट को पत्र लिखा, जिसके आधार पर आपराधिक रिट याचिका दायर की गई और हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच सौंपने के आदेश दिए। वहीं, चिट्टा तस्करी के झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर जबरन वसूली के आरोपों में शिकायत के आधार पर 10 जून 2024 को मंडी के बल्ह थाने में एक केस दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे 31 मार्च 2024 की शाम को एक फोन कॉल आई, जिसमें कहा गया कि उनके बेटे की गाड़ी से चिट्टा पकड़ा गया है। यदि उस बचाना है तो एक पेटी या एक लाख रुपये का प्रबंध करें और अकेले नेरचौक आने को कहा। इस मामले में भी युवक के पिता की शिकायत पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को केस की जांच सौंपने के आदेश दिए थे। अब सीबीआई ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के ठियोग में जल शक्ति विभाग के पानी के घोटाले के बाद विभाग का एक और कारनामा सामने आया है। ठियोग की क्यार और कमाह पंचायत के दर्जनों गांवों के लिए बनाई गई सिंचाई योजना में पानी छोड़ने का ट्रायल किया गया तो फटे पांच इंच के पाइपों से पानी बहने लगा। पंप से पानी उठाते ही फटे पाइपों से जगह-जगह पानी बहने लगा और खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। करीब सवा तीन करोड़ रुपये से क्यार खड़्ड से बनाई गई उठाऊ सिंचाई योजना पहले ही सवालों के घेरे में आ गई थी, क्योंकि निम्न गुणवत्ता के पाइप इस्तेमाल करने की शिकायत एक स्थानीय कांग्रेस नेता अमित मेहता ने एसडीएम कार्यालय ठियोग को दी थी। एसडीएम मुकेश शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 नवंबर, 2024 को कसुम्पटी डिवीजन के अधिशासी अभियंता बसंत सिंह राठौर को यह शिकायत भेजी, जिसमें सिंचाई स्कीम में सरकारी पैसे के दुरुपयोग की जांच के लिए लिखा। बता दें कि ठियोग के इसी क्षेत्र में ही सामने आए पानी सप्लाई के घोटाले के मामले में अधिशासी अभियंता को दो दिन पहले निलंबित किया गया है। ऐसे में यह जांच अब किसी और अधिकारी को दी जा सकती है। सिंचाई योजना के पाइप फटने के सामने आए मामले के बाद अब कसुम्पटी और मतियाना डिवीजन की अन्य योजनाएं भी सरकार के रडार पर हैं। आरोप यह भी है कि अधिकारियों ने क्यार-कमाह सहित क्षेत्र की अन्य पेयजल और सिंचाई योजनाओं के विजिट में ही लाखों रुपये खर्च कर दिए। इस योजना से क्यार और कमाह पंचायतों के लिए हजारों किसानों के खेतों को पानी की सप्लाई होनी है। इसका निर्माण पूर्व जल शक्ति मंत्री विद्या स्टोक्स के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इस मामले में चीफ इंजीनियर जोगेंद्र चौहान ने कहा कि पाइप कैसे फटे, इसकी छानबीन की जाएगी। वह सोमवार को इस मामले का पता करेंगे। मोटरसाइकिल, कारों और अफसर की गाड़ी के नंबर से हुई पानी की सप्लाई का घोटाला और सिंचाई योजना के पाइप फटने का मामला छैला कस्बे के साथ लगते क्यार खड्ड से ही जुड़ा है। क्यार और कमाह पंचायतों के लिए बनी सिंचाई योजना में करोड़ों की मशीनरियां लगी है।
देवभूमि हिमाचल आए दिन बढ़ते आपराधिक मामलों से शर्मसार हो रहा हैं। प्रदेश में महिलाओं के प्रति दुष्कर्म और छेड़खानी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश की राजधानी शिमला से है।शिमला में एक नर्सिंग कॉलेज की छात्रा ने एक युवक पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पीड़ित छात्रा ने अंबाला में जीरो एफआईआर करवाई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। एसपी संजीव गांधी ने बताया कि हरियाणा के पीएस अंबाला से जीरो एफआईआर के रूप में एक शिकायत प्राप्त हुई है, जिसके आधार पर शिमला में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया हैं। पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि साल 2023 में वो जब शिमला के एक नर्सिंग कॉलेज पढ़ रही थी तो उस दौरान वो एक युवक के संपर्क में आई, जिसने उसे झूठी शादी का भरोसा देकर उसके साथ गलत काम किया, जिसके कारण वो गर्भवती हो गई है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि युवक उसे चोट पहुंचाने के इरादे से उसके साथ दुर्व्यवहार करता था और उसके साथ मारपीट भी करता था। साथ में उसने ऐसे भी कई काम किए, जिससे उसका अपमान हुआ है। पीड़िता ने अपनी शिकायत अंबाला के पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई, जहां से केस को शिमला ट्रांसफर किया गया। वहीं, एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस आगामी कार्रवाई में जुट गई है। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बताया, पीड़ित लड़की के शिकायत पर मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।अभी एक जीरो एफआईआर आई है, जिसमें युवती ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार ने पेड़ कटान पर अंकुश लगाने के लिए सख्त फैसले लिए हैं। इसको लेकर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक प्रदेश सरकार ने खैर व तीन प्रजातियों सफेदा, पॉपुलर और बांस को छोड़कर अन्य पेड़ों के कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा कृषि और घरेलू उपयोग के लिए साल भर में तीन पेड़ एक वर्ष के भीतर किसानों द्वारा काटे जा सकते है। इससे ज्यादा पेड़ काटने के लिए किसानों को वन मंडल अधिकारी से लिखित में अनुमति लेनी होगी। वहीं, खैर का कटान पहले की तरह दस वर्ष की अवधि के बाद ही किया जाएगा। इस बारे में वन विभाग ने आदेश जारी किए हैं। जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। प्रदेश में पेड़ कटान के लिए अधिकारियों की अनुमति देने की सीमा को भी निर्धारित किया गया है। प्रदेश में अब एक साल में 200 पेड़ काटने तक की अनुमति देने के लिए डीएफओ को अधिकृत किया गया है। वहीं, एक साल में 300 तक पेड़ काटने के लिए मुख्य अरण्यपाल व अरण्यपाल वन, अनुमति दे सकते है। 400 पेड़ काटने तक के लिए प्रधान मुख्य अरण्यपाल को अनुमति देने का अधिकार होगा। वहीं, 400 से अधिक पेड़ काटने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की अनुमति लेनी होगी। अन्य प्रजातियों के पेड़ों को बेचने व कटान की अनुमति प्रधान मुख्य अरण्यपाल की और से दी जाएगी। पर्यावरण के कारण मौसम में लगातार हो रहे बदलाव को देखते हुए सरकार ने धरती पर हरियाली को बचाने की दिशा में कदम बढ़ाया हैं। प्रदेश सरकार ने घरेलू, कृषि व बेचने के लिए वृक्ष काटने वाले व्यक्ति को तीन पेड़ काटने पर इसके बदले तीन पेड़ों का रोपण करना होगा। सरकार ने ये शर्त पर्यावरण को बचाने के लिए लगाई है, ताकि जितने पेड़ काटे जाएंगे उतने ही पौधों का रोपण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी वन संपदा को बचाकर रखा जा सकेगा। वहीं, अगर फलदार पौधे रोपित किए जाते हैं, तो उसके लिए बागवानी विभाग की तरफ से तय मापदंड का पालन करना होगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला जिले के कोटखाई क्षेत्र में अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान लोगों को बड़ी सौगातें दीं। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कोटखाई सीएचसी का दर्जा बढ़ाकर उसे नागरिक अस्पताल बनाने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने सब-जज कोर्ट, उप-मंडलीय पशु चिकित्सा अस्पताल और अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी संस्थान प्रगति नगर में सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स शुरू करने की बात कही। इसके अलावा, आईटीआई प्रगति नगर में डिप्लोमा इन कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग और सोलर टेक्नीशियन के नए ट्रेड शुरू करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने खलटू नाले और चमशु नाले पर पुल निर्माण के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये और टिक्कर बस स्टैंड के लिए तीन करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ ही, 250 करोड़ रुपये की लागत से छैला-ओच्छघाट-कुमारहट्टी सड़क को डबल लेन बनाने की भी घोषणा की और अधिकारियों को डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। सुक्खू ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले साल आई आपदा के दौरान राज्य सरकार ने बागवानों के सेब और अन्य उत्पादों को सड़ने से बचाया और समय पर मंडी तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान 22 हजार परिवार प्रभावित हुए थे, लेकिन राज्य सरकार ने सभी चुनौतियों का सामना किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को आपदा प्रभावितों के लिए विशेष पैकेज नहीं मिला और पीडीएनए के 9000 करोड़ रुपये भी जारी नहीं किए गए।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 4500 करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज दिया और जुब्बल-कोटखाई की सड़कों के लिए 28 करोड़ रुपये प्रदान किए। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, नाबार्ड और राज्य सरकार के फंड से कुल 286 करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण पर खर्च किए हैं और आने वाले समय में और धन व्यय किया जाएगा। सुक्खू ने राज्य सरकार की ओर से सेब बागवानों के लिए की गई घोषणाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सेब के न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक रूप से डेढ़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है और अब यह 12 रुपये प्रति किलो हो गया है। उन्होंने कहा कि छोटे सेब बागवानों के लिए यूनिवर्सल कार्टन योजना लागू की गई है और अगले वर्ष से यूनिवर्सल कार्टन पर वजन भी लिखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए भी कई कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 3000 शिक्षकों की भर्ती की योजना बनाई है और हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल खोले जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए आईजीएमसी शिमला, टांडा और नेरचौक मेडिकल कॉलेज में 85 करोड़ रुपये की लागत से थ्री टेस्ला एमआरआई मशीनें लगाई जाएंगी और प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में 1500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
स्पैल वैली के दलगांव में देव परंपरा के अनुसार बेड़ा को देवता की पालकी में बिठाकर आयोजन स्थल तक पहुंचाया गया। इससे पहले आरोहण के लिए पालकी से उतारकर जैसे ही उन्हें लकड़ी की काठी पर बिठाया गया, वाद्य यंत्रों में शोक की धुनें बजने लगीं। ऊपर वाले छोर पर बेड़ा सूरत राम थे और नीचे दूसरे छोर में उनका परिवार इंतजार में था। लंबी पूजा-अर्चना के बाद ठीक शाम 5:46 बजे सूरत राम को सकुशल रस्से के सहारे नीचे उतारा गया। नीचे पहुंचते ही उनके माथे पर बंधे पंचरत्न को लेने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई। लोगों ने बेड़ा को देवता की पालकी में बिठाकर नाचते-गाते मंदिर परिसर तक पहुंचाया। लोगों ने उन्हें भेंट के तौर पर नकद राशि दी। अनुष्ठान में रस्से को बांधने के लिए बजरेट कोटी के ठाकुर व वहां तक लाने की भूमिका देवता महेश्वर के साथ पहुंचे खूंदों ने निभाई। बेड़ा आरोहण के लिए रस्सा टूटने के बाद दूरी को कम किया गया। ढलान कम होने के कारण रस्सा झुकने से काठी पर बैठे सूरत राम बीच में फंस गए। उसके बाद दूसरी रस्सी का सहारा देकर उन्हें दूसरे छोर तक पहुंचाया गया। बेड़ा के दूसरे छोर पर पहुंचते ही अनुष्ठान के तीसरे दिन की मुख्य रस्म पूरी की गई। दलगांव में विशेष घास से बने तीन इंच मोटे रस्से (बरूत) पर बेड़ा सूरत राम को खाई पार करते देखने का लोगों में भारी उत्साह रहा। चारों ओर देवताओं के जयकारे लग रहे थे। इस दौरान रस्से को कसते समय अचानक रस्सा टूटा तो नाले के आसपास सन्नाटा पसर गया। यह घटना शनिवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे घटी। उस समय तक आयोजन स्थल तक हजारों लोग पहुंच चुके थे। कोई कहने लगा ओह... यह क्या हो गया। किसी ने कहा-अपशगुन हो गया तो कोई कह रहा था कि यदि बेड़ा के उतरते समय रस्सा टूटा होता तो कुछ भी हो सकता था। इसके बाद तुरंत आयोजन कमेटी के वरिष्ठ लोगों ने फैसला लिया कि अब दूरी को कम करके बेड़ा आरोहण की परंपरा को पूरा करना होगा। उसके बाद पहले से लगाए गए खंभों को उखाड़कर उन्हें नाले के आरपार कम दूरी पर गाड़ना शुरू किया गया। उसके बाद बेड़ा आरोहण की रस्म पूरी हुई।
हिमाचल प्रदेश सरकार और वाइल्ड फ्लॉवर होटल प्रबंधन के बीच बातचीत को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है। ओबरॉय ग्रुप की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जुड़े। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाॅल दुआ की अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है। अगली सुनवाई एक मार्च को होगी। उस दिन अब ईस्ट इंडिया होटल लिमिटेड यानी ओबरॉय समूह की ओर से भी बहस की जाएगी। सरकार की ओर से कहा गया कि होटल प्रबंधन की तरफ से बातचीत के लिए कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को कहा था कि प्रस्ताव पर सहमति बनती है या नहीं, इस पर अदालत में रिपोर्ट प्रस्तुत करें। राजधानी शिमला के नजदीक ऐतिहासिक वाइल्ड फ्लॉवर हॉल होटल के प्रबंधन से सरकार बातचीत करने के लिए तैयार हो गई थी। महाधिवक्ता अनूप रतन ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा था कि अगर ईस्ट इंडिया होटल लिमिटेड यानी ओबरॉय समूह की ओर से कोई प्रस्ताव दिया जाता है तो सरकार के दरवाजे बातचीत के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा था कि अगर कोई भी कंपनी प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहती है तो सरकार स्वागत करती है। राज्य सरकार ने वाइल्ड फ्लावर हॉल को अपने अधीन लेने को लेकर हाईकोर्ट में क्रियान्वयन याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने पहले ही ओबरॉय समूह को मध्यस्थता के आदेशों की पालना करने के आदेश दिए थे। बता दें कि होटल के स्वामित्व की दो दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है। हाईकोर्ट ने वाइल्ड फ्लावर हॉल को सरकार को सौंपने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ ओबरॉय ग्रुप सुप्रीम कोर्ट गया था। सुप्रीम कोर्ट से इन्हें कोई राहत नहीं मिली।
हिमाचल प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में गैर शैक्षणिक वीडियो और रील्स बनाने पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा सोशल मीडिया का अनावश्यक उपयोग नहीं होगा। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों और कॉलेजों के प्रिंसिपलों को इस बाबत नजर रखने के निर्देश जारी किए। निदेशालय ने विद्यार्थियों पर इन गतिविधियों का गलत प्रभाव पड़ने का हवाला दिया है। निर्देशों का पालन न करने वाले शिक्षकों और गैर शिक्षकों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रति भी चेताया गया है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि ध्यान भटकाने वाली गतिविधियों पर लगाम लगाने और शैक्षणिक गतिविधियों पर फोकस बढ़ाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। सोशल मीडिया पर शिक्षकों और कर्मचारियों के गैर शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होने के बढ़ते मामलों की निदेशालय के पास लगातार शिकायतें आ रही हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए निदेशालय ने स्कूलों-कॉलेजों के प्रिंसिपलों और जिला शिक्षा उपनिदेशकों को पत्र जारी किए हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कुछ शिक्षक और कर्मचारी स्कूल समय में ऐसी सामग्री बनाते रहते हैं, जो छात्रों के शैक्षणिक विकास में योगदान नहीं देती। ऐसी वीडियो या रील्स सोशल मीडिया पर डाले जा रहे हैं, जो शैक्षणिक, खेल या पाठयक्रम से संबंधित नहीं होते हैं। ऐसे विकर्षण विद्यार्थियों को उनके शैक्षिक लक्ष्यों से दूर करते हैं और उन्हें सोशल मीडिया के उपयोग में लिप्त होने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं जो उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। स्कूलों-कॉलेजों के प्रिंसिपलों को निर्देश दिया है कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और उन्हें जिम्मेदार और बेहतर नागरिक बनने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
शिमला जिले के ठियोग उपमंडल में टैंकरों से पानी आपूर्ति देने के नाम पर हुए लाखों रुपये के घोटाले की जांच शनिवार को विजिलेंस ने शुरू कर दी। एएसपी नरवीर सिंह राठौर की अगुवाई में गठित जांच टीम ने एसडीएम ठियोग कार्यालय से संबंधित रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। पानी आपूर्ति के घोटाले की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद जल शक्ति विभाग में हड़कंप मच गया था और विभाग के 10 अधिकारियों को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया। इनमें दो अधिशासी, तीन सहायक, चार कनिष्ठ और एक सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। इसके बाद मामला सरकार ने जांच के लिए विजिलेंस को सौंप दिया। शनिवार को घोटाले के तथ्यों की जांच कर विजिलेंस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठियोग का दौरा किया और एसडीएम कार्यालय का पानी की सप्लाई से संबंधित रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया। सूत्रों के अनुसार विजिलेंस मामले में जल्द ही एफआईआर भी दर्ज कर सकती है। इसके बाद निलंबित अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बता दें कि पानी की आपूर्ति के लिए टैंकरों की जगह बाइक, कारों और अफसर की गाड़ी के नंबर देने और जहां सड़क नहीं है, वहां भी टैंकरों से पानी की आपूर्ति दर्शाने की खबर छपने के बाद सरकार हरकत में आई और 10 अफसरों पर कार्रवाई की। निलंबित अफसरों को विभाग के मुख्यालय में अटैच किया गया है। इसके अलावा पानी की सप्लाई करने वाले ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया गया है। वहीं, इस मामले में ठियोग से कांग्रेस के विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। राठाैर ने कहा कि जैसे ही 27 नवंबर को इस मामले की जानकारी मिली, तुरंत उपमुख्यमंत्री एवं जलशक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री से इस घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही आला अधिकारियों के साथ चर्चा कर तत्काल कार्रवाई करने के आदेश दिए। विजिलेंस की टीम को शनिवार शाम को मामले से जुड़े सभी जरूरी कागजात सौंप दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश के रोहडू की स्पैल वैली के दलगांव में चल रहें भुंडा महायज्ञ में आज बेड़े की ओर से भुंड की रस्म निभाई जानी थी। इसे देखने के लिए लाखों की संख्या में दलगांव पहुंचे हैं। जब विधि विधान के साथ एक रस्सी को बांधने का काम किया जा रहा था उसी समय अचानक बीच से ये दिव्य रस्सी टूट गई, जिसके चलते फिलहाल अभी रस्म को कमेटी ने रोक दिया है। मंदिर कमेटी आगे इसपर विचार विमर्श कर रही है। आज लाखों की संख्या की संख्या में लोग भुंड़ा उत्सव में पहुंचे हैं। इस महायज्ञ में तीन देवता और तीन परशुराम पहुंचे हुए हैं। अब मोहतबीन और देवता इस बारे में अगला निर्णय लेंगे। इस रस्सी को पवित्र समझा जाता है और इसका टूटना अपशगुन समझा जाता है। देवता बकरालू महाराज जी तो तहसीलों रोहड़ू व रामपुर के देवता हैं। भुंडा महायज्ञ देवता महेश्वर, देवता बौंद्रा व देवता बकरालू व देवता मोहर्रिश के प्रेम का प्रतीक है। रोहड़ू उपमंडल के नौ गांव के लोग इस यज्ञ में सहयोग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि भुंडा महायज्ञ के लिए एक लाख से अधिक निमंत्रण दिए गए हैं। भुंडा महायज्ञ के दौरान बेड़ा रस्सी के जरिए मौत की घाटी को लांघते हैं। ये रस्सी दिव्य होती है और इसे मूंज कहा जाता है। ये विशेष प्रकार के नर्म घास की बनी होती है। इसे खाई के दो सिरों के बीच बांधा जाता है। भुंडा महायज्ञ की रस्सी को बेड़ा खुद तैयार करते हैं। बेड़ा उस पवित्र शख्स को कहा जाता है, जो रस्सी से खाई को लांघते हैं। बेड़ा जाति के लोग ही इस परंपरा को निभाते हैं। बेड़ा सूरतराम के अनुसार रस्सी तैयार करने में ढाई महीने का समय लगा। इस पवित्र कार्य में उनका साथ चार लोगों ने दिया। रस्सी तैयार करते समय पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना होता हैं। सुबह चार बजे भोजन करने के बाद फिर अगले दिन सुबह चार बजे भोजन किया जाता है। यानी 24 घंटे में केवल एक बार भोजन किया जाता है। इस दौरान अधिकतम मौन व्रत का पालन किया जाता है।
रोहडू के दलगांव में भुंडा महायज्ञ के दूसरे तीन शुक्रवार को तीन महत्त्वपूर्ण रस्में निभाई गईं। इस दौरान रस्मों को देखने के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। दलगांव में बकरालू देवता के मंदिर प्रांगण में तिल धरने को जगह नहीं रही। भुंडा महायज्ञ में दूसरे दिन तक एक लाख से अधिक लोग पहुंच गए हैं। श्रद्धालुओं की इतनी अधिक भीड़ रही कि लोगों के फोन बंद हो गए और नेटर्वक भी फ्रीज हो गया। पहली रस्म के अंतर्गत देवता महेश्वर, देवता बौंद्रा, मेजवान देवता बकरालू के मध्य धूड़ पीटने की रस्म निभाई गई। इस रस्म को देवता महेश्वर ने शिर लगाकर सफलतापूर्क संपन्न किया। इस दौरान तीनों देवताओं के साथ पहुंचे हजारों देवलुओं ने जयकारे लगाए और तलवारों, डंढे व खुखरी की ताल पर नृत्य किया। वहीं दूसरी रस्म के अंतर्गत रंटाडी के मोहरिष महर्षि देवता ने फेर दलगांव मंदिर प्रांगण से शुरू किया। रंटाडी खूंद के हजारों देवलुओं ने अस्त्र शस्त्र, रणसिंगा, करनाल एवं ढोल नगाड़ों के साथ चौंरी के साथ फेर की रस्म शुरू की। दलगांव की परिक्रमा में रंटाडी खूंद को लगभग तीन घंटे का समय लगा। फेर की परिक्रमा पूरी करके तीसरी महत्त्वपूर्ण रस्म शिखा पूजन मेजवान देवता बकरालू ने पूरी की। शिखा पूजन के अंतर्गत दलगांव में बकरालू देवता के तीन मंदिरों की छत पर चढक़र माली गुर व ब्राह्मणों ने चारों दिशाओं में मंत्रोचारण कर रस्म को पूरा किया। आज बेड़ा सूरत राम नौवीं बार बरुत पर चढक़र अपनी परीक्षा पास करेंगे।
एचआरटीसी (हिमाचल पथ परिवहन निगम) के बेड़े में मार्च माह में 24 नई वोल्वो बसें जुड़ जाएंगी। इनकी खरीद के लिए सरकार ने एचआरटीसी को 36 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। नई बसें हिमाचल के विभिन्न रूटों से दिल्ली के लिए चलाई जाएंगी। हाईटेक बसों में यात्री आरामदायक सफर का आनंद ले सकेंगे। आधुनिक सुविधाओं से लैस एक वोल्वो बस की कीमत करीब डेढ़ करोड़ है। एचआरटीसी शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, बीड़, चंबा, हमीरपुर, रिवालसर और चिंतपूर्णी सहित अन्य रूटों से दिल्ली के लिए वोल्वो चलाता है। सामान्य बसों के मुकाबले वोल्वो की कमाई करीब दोगुना है। दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के बाद ग्रैप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) पाबंदियां लगाई गई हैं, जिनके तहत बीएस-6 बसों को ही राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश दिया जा रहा है। निगम की वोल्वो सेवा प्रभावित न हो, इसके लिए नई बसों की खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है। 24 नई वोल्वो खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। मार्च में ये बसें मिलना शुरू हो जाएंगी। नई बसें आधुनिक सुविधाओं से लैस बीएस-6 श्रेणी की होंगी। इन्हें प्रदेश के विभिन्न रूटों से दिल्ली के लिए संचालित किया जाएगा। बीएस-6 तकनीक से लैस प्रदूषण रहित नई वोल्वो में हर सीट पर यात्रियों के लिए थाई रेस्ट, फुट रेस्ट की सुविधा उपलब्ध होगी। लैपटॉप सहित अन्य कीमती सामान चोरी होने की घटनाओं के मद्देनजर सीटों के ऊपर कैरियर में लॉकर की सुविधा होगी। सभी सीटों के साथ यूएसबी मोबाइल चार्जर और पहली दो सीटों पर लैपटॉप चार्जर की सुविधा दी जाएगी। निगम की पुरानी वोल्वो 285 हॉर्स पावर की हैं। नई वोल्वो 300 हॉर्स पॉवर होंगी। नई वोल्वो पैनिक बटन, व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और वाईफाई से लैस होंगी।
हिमाचल प्रदेश में 20 से कम छात्र संख्या वाले हाई और 25 वाले वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों का दर्जा घटेगा। नए शैक्षणिक सत्र से पांच से सात किलोमीटर के नजदीकी स्कूलों में इन स्कूलों के विद्यार्थियों को दाखिले दिलाए जाएंगे। प्रदेश में अब स्कूल मर्ज करने की जगह दर्जा घटाने का प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है। उच्च शिक्षा निदेशालय से जनवरी अंत तक सरकार ने इस बाबत प्रस्ताव मांगा है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का डाटा एकत्र होने के बाद सरकार की मंजूरी लेकर इनका दर्जा कम किया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिन हाई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 20 या उससे कम होगी, ऐसे स्कूलों का दर्जा घटाकर मिडल किया जाएगा। इसी तरह जिन वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में विद्यार्थी संख्या 25 या उससे कम होगी, वहां स्कूलों का दर्जा घटाकर हाई स्कूल किया जाएगा। दर्जा घटने के बाद जो कक्षाएं स्कूलों में बंद हो जाएंगी, उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पांच से सात किलोमीटर के दायरे वाले अन्य स्कूलों में दाखिले दिलाए जाएंगे। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से यह व्यवस्था लागू होगी। उधर, 10 छात्र संख्या से कम वाले प्राइमरी स्कूलों को नजदीकी दो से तीन किलोमीटर के दायरे वाले स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने 300 ऐसे स्कूल चिह्नित किए हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या दस से कम है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अगले चरण में कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों को भी मर्ज किया जाएगा। सभी कॉलेजों से विद्यार्थियों के नामांकन की जानकारी मांगी गई है। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और हर संस्थान में पर्याप्त मात्रा में शिक्षकों की नियुक्तियां करने के लिए कम विद्यार्थियों वाले संस्थानों को मर्ज या दर्जा घटाने का फैसला लिया गया है।
सरकारी स्कूलों में नर्सरी से आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले मिड-डे-मील की जांच में कई खामियां सामने आई हैं। यह खुलासा पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर की ओर से स्कूलों में तैयार होने वाले खाने के सैंपल जांचने पर हुआ। सैंपल जांच में सामने आया कि खाने में ई कोली नाम का बैक्टीरिया है। इससे बच्चों का पेट खराब होने से लेकर आंत को नुकसान तक पहुंच सकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रबंधकों को खाना बनाते समय स्वच्छता मानकों का ख्याल रखने की हिदायत दी है। जानकारी के अनुसार सितंबर 2024 में केंद्र सरकार के निर्देश अनुसार पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर मोहाली की टीम ने ऊना के 10 स्कूलों में जाकर मिड-डे-मील के सैंपल लिए। सैंपल की जांच रिपोर्ट हाल ही में सामने आई है। इसमें कहा गया है कि भोजन में ई कोली बैक्टीरिया है, जो बच्चों की सेहत पर बुरा असर करता है। रिपोर्ट मिलने के बाद शिक्षा विभाग के हरकत में आते हुए स्कूलों को आदेश दिए गए कि भोजन तैयार करने वाले कर्मियों की नियमित स्वास्थ्य जांच हो। खाना बनाते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। स्कूल प्रबंधक पेयजल की नियमित समय अंतराल के बाद क्लोरीनेशन करवाते रहें। खाना बनाने वाले स्थान, इस्तेमाल होने वाले बर्तनों और जहां बच्चों को भोजन खिलाया जाता है, उस स्थान की प्रतिदिन सफाई करवाई जाए। इसके अलावा खाना बनाने से पहले हाथों को साबुन से धोया जाए। बर्तन धोने के बाद व भोजन वितरित करते समय भी हाथों की साफ सफाई रखी जाए। ई कोली बैक्टीरिया के कुछ प्रकार जहरीला पदार्थ बनाते हैं, जो छोटी आंत की परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे पेट में ऐंठन, उल्टी और दस्त (अक्सर खून के साथ) हो सकते हैं। लक्षण आमतौर पर बैक्टीरिया के संपर्क में आने के 3-4 दिन बाद शुरू होते हैं और लगभग एक सप्ताह के भीतर समाप्त हो जाते हैं। संक्रमण कम से कम तब तक संक्रामक रहता है, जब तक व्यक्ति को दस्त रहता है।
हिमाचल प्रदेश के राशनकार्ड उपभोक्ताओं को डिपुओं में इस महीने सरसों और रिफाइंड तेल मिलने की उम्मीद है। खाद्य आपूर्ति निगम ने शुक्रवार को तेल के टेंडर खोल दिए हैं। इसमें तीन कंपनियों ने डिपो में तेल की सप्लाई देने की हामी भरी है। सोमवार को खाद्य आपूर्ति निगम की ओर से फाइनेंशियल बिड खोली जानी है। इनमें से अब जिस कंपनी का रेट सबसे कम होगा, उसे टेंडर दिया जाएगा। हिमाचल में राशनकार्ड उपभोक्ताओं को तीन महीने से सरसों और रिफाइंड तेल नहीं मिला है। हालांकि इससे पहले भी खाद्य आपूर्ति निगम ने तेल की कंपनी फाइनल कर फाइल मंजूरी के लिए सरकार को भेजी थी। लेकिन रेट ज्यादा होने पर इसे रद्द किया गया। इसके चलते निगम की ओर से दोबारा से टेंडर किया जा रहा है। हिमाचल में साढ़े 19 लाख राशनकार्ड परिवार हैं। प्रदेश सरकार लोगों को दो लीटर तेल (एक रिफाइंड और एक लीटर सरसों), चीनी, तीन किलो दालें (मलका, माश और दाल चना) सब्सिडी पर दे रही है। आटा और चावल केंद्र सरकार सब्सिडी पर उपलब्ध करवा रही है। खाद्य आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल का कहना है कि डिपुओं में उपभोक्ताओं को सस्ते दामों में सरसों और रिफाइंड तेल उपलब्ध कराया जाना है। निगम की ओर से औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जिस कंपनी का रेट कम होगा, टेंडर उसे दिया जाएगा। निगम का दावा है कि हिमाचल प्रदेश में 3 महीने तक दालों की कमी नहीं होगी। खाद्य आपूर्ति निगम के गोदाम दालों से भरे हैं। निगम ने डिपो होल्डर को समय रहते गोदामों से सप्लाई उठाने के निर्देश दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक निदेशालय ने पुलिस कांस्टेबल के 123 पदों भरने के लिए साक्षात्कार 24 फरवरी से होंगे। निदेशालय ने शेड्यूल जारी कर दिया है। साक्षात्कार प्रक्रिया 20 मार्च तक चलेगी। सामान्य श्रेणी के 74, अन्य पिछड़ा वर्ग के 16, अनुसूचित जाति के 24 और अनुसूचित जनजाति के 9 पद भरे जाएंगे। निदेशालय ने साफ किया है कि साक्षात्कार प्रक्रिया में वही पूर्व सैनिक भाग ले सकते हैं, जो एक जनवरी 2022 से एक जनवरी 2024 के बीच सेवानिवृत्त हुए हैं। शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास अनिवार्य है। शेड्यूल के अनुसार बिलासपुर के सभी रोजगार कार्यालय में पंजीकृत पूर्व सैनिकों के लिए साक्षात्कार 24 फरवरी को होंगे। चंबा के 25, हमीरपुर और भोरंज में 27 फरवरी, सुजानपुर, बड़सर, नादौन में 28 को साक्षात्कार होंगे। मंडी, जोगिंद्रनगर, धर्मपुर, गोहर, करसोग, सरकाघाट में तीन मार्च, सुंदरनगर, पधर, नेरचौक, बालाचौकी व थुनाग में चार, सिरमौर में पांच, ऊना व हरोली में छह, अंब, बंगाणा में सात, सोलन के रोजगार कार्यालयों में 10 मार्च, धर्मशाला, कांगड़ा, पालमपुर, देहरा, नूरपुर में 11 मार्च को साक्षात्कार होंगे। बरोह, बैजनाथ, ज्वाली, फतेहपुर, नगरोटा सूरियां में 12, नगरोटा बगवां, ज्वालामुखी, कस्बा कोटला, इंदौरा, लंबागांव में 13, शिमला, मशोबरा, ठियोग, रामपुर, सुन्नी, चौपाल में 17, रोहडू, जुब्बल, कुमारसैन, डोडरा क्वार, कुपवी, चिड़गांव में 18, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के सभी रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत पूर्व सैनिकों के लिए साक्षात्कार 19 मार्च को होंगे। सड़कें बंद होने के कारण जो पूर्व सैनिक साक्षात्कार में भाग नहीं ले सकेंगे, उनके लिए 20 मार्च को साक्षात्कार होंगे। इसके लिए उन्हें तहसीलदार या एसडीएम से एक प्रमाणपत्र देना होगा। निदेशालय के निदेशक ब्रिगेडियर मदनशील ने बताया कि अधिसूचना जारी कर दी गई है। पूर्व सैनिक वेबसाइट से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने एक बार फिर राज्य सरकार के खिलाफ तल्खी दिखाई है। शुक्रवार काे राज्यपाल ने कहा कि किसी नेता के चुनावी वादे पूरे करने के लिए राजभवन नहीं है। नौतोड़ विधेयक को मंजूरी नहीं देने के मंत्री जगत सिंह नेगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि नेगी भले राजभवन का अनादर करें, राजभवन उनका पूरा सम्मान करेगा। बातचीत के लिए दरवाजे खुले हैं। राज्यपाल ने कहा कि नौतोड़ मामलों को लेकर राजभवन ने अपना जवाब दे दिया है। कुछ विषयों को लेकर आपत्ति थी। इसे लेकर जवाब मांगा गया है। अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। राजभवन ने यह कभी नहीं कहा कि हम नौतोड़ से अलग हैं, लेकिन राजभवन नियमों की परिधि में रहकर ही काम करेगा। उन्हाेंने कहा कि राजभवन की ओर से राज्य सरकार से पूछा गया है कि इसमें कितने लोग शामिल हैं। राजभवन ने इसे लेकर नामों की भी जानकारी मांगी है। राज्यपाल ने कहा कि अगर कोई नाम गलत तरीके से दिखाए जाएंगे, तो राजभवन इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। वे नियमों के बाहर जाकर काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि राजस्व मंत्री ने पद की शपथ यहीं ली है। राज्यपाल ने कहा कि वह सरकार के मंत्री हैं, ऐसे में जब भी वार्ता के लिए आना चाहें, तो आ सकते हैं। राजभवन में दो साल से संशोधन विधेयक लंबित है। लगता नहीं कि इतने लंबे समय से कोई आपत्ति बची होगी। अगर फिर भी कोई आपत्ति लंबित है तो इसकी जांच की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार से एक बार फिर शिमला विंटर कार्निवाल की शुरुआत होने जा रही है। इस दौरान मशहूर गायक डॉ. सतिंदर सरताज अपनी परफॉर्मेंस देने के लिए शिमला पहुंचेंगे, जिनकी पिछली शिमला समर फेस्टिवल में की गई शानदार प्रस्तुति ने लोगों का दिल जीता था। इस बार विंटर कार्निवाल में लोगों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। शिमला विंटर कार्निवाल की शुरुआत 24 दिसंबर को हुई थी और यह 2 जनवरी तक चलने वाला था, लेकिन 26 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद केंद्र सरकार ने 1 जनवरी तक राजकीय शोक घोषित किया, जिसके चलते कार्निवाल को स्थगित कर दिया गया था। अब यह कार्निवाल 2 जनवरी से लेकर 8 जनवरी तक आयोजित होगा। शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और अन्य कैबिनेट सदस्य भी रिज पर पहुंचकर कार्निवाल में भाग लेंगे। इसके साथ ही बाहरी राज्यों से आए हुए सैलानी भी शिमला में सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
** कहा, रिपोर्ट के बाद नियमों और कानून के तहत की जाएगी कार्रवाई शिमला के ठियोग में करोड़ों के पानी के घोटाले के आरोपों पर ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर का बयान सामने आया हैं। राठौर ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में आया हैं। मामले की जांच की जाएगी। दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की होगी। कुलदीप राठौर ने कहा कि मामला ध्यान में आने के बाद डीसी, एक्सिन और एसडीएम से बात कर मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घोटाले की बात को मानते हुए कहा कि जिस तरह से बताया जा रहा है उससे ये बहुत बड़ा घोटाला लग रहा है लेकिन जांच से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता। ये सरकार भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी जनता के पैसे की बर्बादी और इस तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी। वहीं उन्होंने कहा कि ठियोग हॉस्टल और अस्पताल में भी घोटाले को लेकर जांच चल रही है वहां भी कई तरह की अनियमिताएं पाई गई हैं जिस पर भी कार्यवाही की जा रही है।
युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि जयपुर में आयोजित होने वाली वॉलीबाल (पुरुष) सीनियर नेशनल खेल प्रतियोगिता की टीम के लिए 26 दिसंबर 2024 को इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर शिमला में हुए ट्रायल रद्द कर दिए गए हैं। यह प्रतियोगिता 7 से 13 जनवरी 2025 तक आयोजित की जानी प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि नए ट्रायल एडहॉक कमेटी वॉलीबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा पर्यवेक्षक एवं चयनकर्ता नियुक्त होने के उपरांत करवाए जाएंगे।
** चंडीगढ़, दिल्ली और गोवा का भ्रमण करेंगे 22 अनाथ बच्चे मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां 22 चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के पहले दल को 13 दिवसीय भ्रमण पर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों की वोल्वो बस को हरी झंडी दिखाई और उन्हें इस टूअर के लिए शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश के 6000 अनाथ बच्चों को कानून बनाकर चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाया है। उनका कल्याण सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना लागू की है, जिसके अन्तर्गत अनाथ बच्चों की देखभाल, उन्हें शिक्षा प्रदान करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रावधान किए गए हैं। इन 22 बच्चों को इसी योजना के अन्तर्गत चंडीगढ़, दिल्ली और गोवा के भ्रमण पर भेजा गया। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भ्रमण पर निकले 22 बच्चों में 16 लड़कियां और छह लड़के शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये बच्चे 2 जनवरी से 4 जनवरी तक का चंडीगढ़ भ्रमण करेंगे और हिमाचल भवन चंडीगढ़ में ठहरेंगे। इसके बाद 5 जनवरी को ये शताब्दी टेªन से दिल्ली जाएंगे और 8 जनवरी तक दिल्ली में ठहरेंगे वहां विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि 9 जनवरी को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट हवाई जहाज से गोवा के लिए रवाना होंगे और 13 जनवरी तक गोवा में एक थ्री स्टार होटल में ठहरेंगे और वहां के विभिन्न पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी को ये सभी बच्चे गोवा से हवाई जहाज के माध्यम से चंडीगढ़ पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अनाथ बच्चों का हिमाचल की सम्पदा पर अधिकार है। इन बच्चों की सरकार ही माता है और सरकार ही पिता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम अपने परिवार के सदस्यों के साथ घूमने जाते हैं उसी तरह से राज्य सरकार ने इन्हें भ्रमण पर भेजा है। उन्होंने कहा कि भ्रमण करने से ज्ञान बढ़ता है और इसका लाभ बच्चों को आने वाले समय में मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये बच्चे आने वाले समय में देश सेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि राज्य सरकार की यह सराहनीय पहल है और अनाथ बच्चों की देखभाल राज्य सरकार कर रही है। पहले इन बच्चों की कोई सुनवाई नहीं होती थी, लेकिन अब वर्तमान राज्य सरकार उनकी हर जरूरत का परिवार की तरह ध्यान रख रही है। इस अवसर पर कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, उपायुक्त अनुपम कश्यप और अन्य लोग उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार 22 नई जल विद्युत परियोजनाओं का आबंटन करने जा रही है, जिनकी कुल विद्युत क्षमता 828 मेगावाट है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में 6.5 मेगावाट से लेकर 400 मेगावाट तक की परियोजनाएं शामिल है। उन्होंने कहा कि यह परियोजनाएं प्रदेश के कुल्लू, चम्बा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला जिलों में चिन्हित की गई हैं, जिनमें सबसे अधिक 595 मेगावाट क्षमता की नौ परियोजनाएं चिनाव नदी बेसिन, 169 मेगावाट क्षमता की आठ परियोजनाएं सतलुज नदी बेसिन, 55 मेगावाट की क्षमता की चार परियोजनाएं रावी व एक परियोजना नौ मेगावाट क्षमता की ब्यास बेसिन में लगाना प्रस्तावित है। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पहली बार इन परियोजनाओं को देश के अन्य राज्यों एवं केन्द्र शसित प्रदेशों व अन्य राज्य व केन्द्रीय उपक्रमों को 10 लाख प्रति मेगावाट अपफ्रंट प्रीमियम के आधार पर 40 वर्ष के लिए आबंटित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ऊर्जा निदेशालय द्वारा सभी राज्य के सचिवों व केन्द्रीय उपक्रमों को पत्र भी भेजा गया है। उन्होंने कहा इन परियोजनाओ के आबंटन के लिए अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन भी जारी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के लगने से बिजली की आपूर्ति, मुफ्त बिजली के रूप में राजस्व में बढ़ोतरी, स्थानीय लोगों को रोजगार व स्थानीय क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित होगा। हिमाचल प्रदेश देश के एक समृद्धतम राज्य के रूप में उभरेगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 1988 बैच के आईएफएस अधिकारी समीर रस्तोगी को वन बल प्रमुख (हाफ) के अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। समीर रस्तोगी, जो वर्तमान में सीपीडी जाईका के पद पर तैनात हैं, अब वन विभाग के मुखिया के रूप में कार्य करेंगे। यह पद डॉ. पवनेश के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुआ था, जिनके योगदान को सम्मानित करने के लिए वन विभाग में एक सादे समारोह का आयोजन किया गया। समीर रस्तोगी को यह नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्हें अपेक्स स्केल मिलने की उम्मीद है। उन्होंने पहले भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जैसे कि डीएफओ, सीसीएफ, और अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल के पदों पर। इसके अलावा, वह मिड हिमालयन परियोजना में क्षेत्रीय परियोजना निदेशक बिलासपुर और वन विकास निगम में भी महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दे चुके हैं। समीर रस्तोगी ने फरवरी 2019 से फरवरी 2024 तक केंद्र सरकार की सार्वजनिक उपक्रम, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनसीएफएल), मुंबई में चीफ विजिलेंस अफसर के रूप में कार्य किया। वे छह अप्रैल से जाईका वानिकी परियोजना में मुख्य परियोजना निदेशक के पद पर तैनात हैं। वहीं, डॉ. पवनेश को उनके सेवानिवृत्त होने पर वन विभाग मुख्यालय शिमला में विदाई दी गई। उन्होंने वन बल प्रमुख के साथ-साथ वन निगम के महानिदेशक और आइडीपी प्रोजेक्ट सोलन के मुख्य परियोजना निदेशक के पद पर भी अपनी सेवाएं दी थीं। डॉ. पवनेश की सेवानिवृत्ति पर वन विभाग कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश बादल ने उन्हें बधाई दी और उनके द्वारा कर्मचारियों के लंबित मामलों को सुलझाने की सराहना की।
** कहा, राज्य सरकार ने 6000 अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दिया दर्जा ** इस अवसर पर कर्नल धनी राम शांडिल भी रहे उपस्थित मुख्यमंत्री सुक्खू ने सचिवालय से 22 बच्चों को 13 दिनों के शैक्षिक भ्रमण पर रवाना किया। उन्होंने वोल्वो बस को हरी झंडी दिखाकर बच्चों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने प्रदेश के 6000 अनाथ बच्चों को "चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट" का दर्जा देकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली है।इस भ्रमण दल में 16 लड़कियां और 6 लड़के शामिल हैं। ये बच्चे 2 जनवरी से 4 जनवरी तक चंडीगढ़ में रहेंगे और हिमाचल भवन में ठहरेंगे। इसके बाद 5 जनवरी को शताब्दी ट्रेन से दिल्ली जाएंगे और 8 जनवरी तक वहां रुककर ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करेंगे।कैबिनेट मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि सरकार इन बच्चों के अभिभावक के रूप में उनकी जिम्मेदारी निभा रही है।
नववर्ष के पहले दिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने सरकारी और निजी आवास पर लगे बिजली मीटरों पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने की घोषणा की। सीएम ने कहा, मेरे नाम से बिजली के पांच मीटर हैं। मुझे ही 625 यूनिट बिजली उपदान में मिल रही है। यह उपदान गरीब आदमी को मिलना चाहिए। सीएम ने कहा कि मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और कांग्रेस विधायकों ने भी सब्सिडी छोड़ने पर सहमति जताई है। सीएम ने समर्थ लोगों से स्वेच्छा से बिजली छोड़ने की अपील की है। बोर्ड ने प्रारूप तैयार किया है और इसे भरना होगा। सुक्खू ने सब्सिडी छोड़ने के लिए विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष को एक फार्म भरकर सौंपा। सीएम ने बुधवार को ओकओवर शिमला में प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समर्थ लोग इसे छोड़ें तो 200 करोड़ रुपये की मासिक बचत होगी। सीएम ने कहा कि वर्तमान सरकार ने जब सत्ता संभाली थी तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। उन्होंने फैसले किए, जिसके बाद अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। सभी स्रोतों से प्रदेश की आय 14,000 करोड़ से लेकर 16,000 करोड़ रुपये तक है। वह कब तक कर्ज पर कर्ज लेकर राज्य की अर्थव्यवस्था को चलाते रहेंगे। इसे कमजोर करते रहेंगे। दो साल में हमने 28 हजार करोड़ का कर्ज लिया। कर्ज इसलिए लिया, क्योंकि जो पिछला लोन था, उसमें 10 हजार करोड़ रुपये ब्याज के दिए और 8,000 करोड़ रुपये मूलधन का वापस किया। राज्य की संपदा की बात करें तो बजट पेश करते हुए भी वह अनुमान लगाते हैं कि बजट कितने हजार करोड़ रुपये का होगा, मगर पिछले कई वर्षों से उस बजट में होल चलता रहा है। यानी बजट 58 हजार करोड़ रुपये का प्रस्तुत किया गया है, लेकिन चार हजार करोड़ रुपये तक का जो कर, राजस्व और अनुदान आना चाहिए था, वह नहीं मिला। 4000 करोड़ रुपये का उस बजट में होल चलता रहा है।
हिमाचल प्रदेश में नए साल में उपभोक्ताओं को दालों के महंगे बाजार से राहत मिलेगी। पिछले दो महीने से डिपुओं में दालों का कोटा नहीं मिल रहा था, लेकिन अब हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने उड़द, दाल चना और मलका दाल का सप्लाई ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके बाद, ये दालें डिपुओं में पहुंचने लगी हैं। अब उपभोक्ताओं को इस महीने का कोटा मिलेगा, साथ ही दो महीने का बैकलॉग कोटा भी दिया जाएगा।हालांकि, उपभोक्ताओं को अभी सरसों का तेल मिलना बाकी है। इसके लिए 4 जनवरी को टेंडर खोला जाएगा और सरकार से मंजूरी मिलने के बाद सप्लाई ऑर्डर जारी किया जाएगा। अब, हिमाचल प्रदेश के करीब 4500 डिपुओं में उपभोक्ताओं को उड़द की दाल मिलेगी। एनएफएसए के तहत आने वाले परिवारों को यह दाल 58 रुपए प्रति किलो, एपीएल परिवारों को 68 रुपए किलो और टैक्स पेयर को 93 रुपए प्रति किलो मिलेगी। इसके अलावा, दाल चना भी बैकलॉग कोटे के साथ मिलेगा। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को 65 रुपए प्रति किलो, एपीएल परिवारों को भी 65 रुपए किलो और टैक्स पेयर को 69 रुपए प्रति किलो चना दाल मिलेगी।हिमाचल में इस बार कनाडा से आयातित मलका दाल भी उपलब्ध होगी। बीपीएल परिवारों को मलका की दाल 56 रुपए प्रति किलो, एपीएल परिवारों को 66 रुपए किलो और टैक्स पेयर को 91 रुपए किलो मिलेगी। इस कदम से उपभोक्ताओं को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दालें मिलेंगी और बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रहेगा।
हिमाचल प्रदेश में लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए नए वित्त वर्ष में नई सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। इस दिशा में सरकार ने काम शुरू कर दिया है। लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा, प्रदेश में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिए 2025-26 में 500 नई सड़कों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिसमें 300 किलोमीटर सड़कें नाबार्ड और 200 किलोमीटर सड़कें विशेष कोर विकास कार्यक्रम, ग्रामीण सड़क एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जाएंगी। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि साल 2025-26 में 625 किलोमीटर नई सड़कों पर टायरिंग का काम शुरू किया जाएगा, जिनमें से 425 किलोमीटर सड़कें नाबार्ड और 200 किलोमीटर सड़कें विशेष क्षेत्र विकास, केंद्रीय सड़क और अवसंरचना कोष एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तैयार की जाएंगी। इसके अलावा केंद्रीय सड़क व अवसंरचना कोष योजना के तहत 50 किलोमीटर सड़कों को अपग्रेड किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा, प्रदेश के लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए साल 2025-26 के दौरान 50 पुलों और 35 नए भवनों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसके अलावा वार्षिक मरम्मत योजना के तहत 1800 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत एवं नवीनीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 10 लाख वर्ग मीटर पैक वर्क किया जाएगा, जिससे 3500 किलोमीटर सड़कें गड्ढा मुक्त होंगी। पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पीएमजीएसवाई-3 योजना के तहत 2000 किलोमीटर सड़कों को अपग्रेड किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 679 किलोमीटर सड़कें एफडीआर और 468 किलोमीटर सड़कें सीटीबी के तहत बनाई जाएंगी। इसके अलावा अन्य सड़कें पारंपरिक तकनीक से बनाई जाएंगी। पीएमजीएसवाई-4 योजना के तहत 900 किलोमीटर सड़कों की डीपीआर तैयार की जानी प्रस्तावित है, जिनका निर्माण पीएमजीएसवाई-1 के तहत पहले ही शुरू हो चुका है।
हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे के चलते नए साल की खुशियां मातम में बदल गई हैं। मामला शिमला जिले का है। यहां नए साल के जश्न के दौरान एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई है, जिसके बाद सारी खुशियां मातम में बदल गई। डीएसपी ठियोग सिद्धार्थ शर्मा ने बताया कि शिमला जिले के ठियोग के मतियाना में नए साल की पूर्व संध्या पर मंगलवार रात करीब 11:30 बजे एक पेट्रोल पंप के पास दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। इस हादसे में किन्नौर के तीन युवकों की मौत हो गई है। ये तीनों युवक अपनी कार (नंबर HP 02A-0169) में सवार होकर शिमला से रामपुर की ओर जा रहे थे। इस दौरान मतियाना पहुंचने पर पेट्रोल पंप के पास उनकी गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में कार सवार तीनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। डीएसपी ठियोग ने बताया कि कार ड्राइवर का गाड़ी से अचानक कंट्रोल खो जाने पर ये हादसा हुआ है। वहीं, गाड़ी के गहरी खाई में गिरकर पलटने की आवाजें स्थानीय लोगों को सुनाई दी। स्थानीय लोग आवाज सुनकर घटनास्थल पर पहुंचे, जिसके बाद वहां पर चीख-पुकार मच गई। लोगों ने पुलिस को हादसे की सूचना दी। मगर हादसा इतना भयंकर था कि तीनों युवकों को बचाने का मौका नहीं मिला और तीनों मौके पर ही दम तोड़ चुके थे। डीएसपी ठियोग सिद्धार्थ शर्मा ने बताया, सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत हो गई है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक ये तीन युवक किन्नौर के रहने वाले थे। अभी मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है। ठियोग पुलिस ने पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी है। सड़क दुर्घटना को लेकर एफआईआर दर्ज कर ली गई हैं। पुलिस द्वारा हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
हिमाचल नए साल के जश्न में पूरी तरह डूबा गया। पहाड़ों की दिलकश वादियों में नए साल का इस्तकबाल करने तीन लाख से ज्यादा सैलानी पहुंचे। शिमला, मनाली, डलहौजी और धर्मशाला जैसे पर्यटन स्थलों पर धमाल मचाया। कड़ाके की ठंड में पर्यटकों ने नाच-गाकर साल 2025 का स्वागत किया। शिमला और मनाली में नए साल का जश्न देखते ही बना। मालरोड व रिज मैदान पर आधी रात को आतिशबाजी के साथ लोगों ने जश्न मनाया। शहर में लोग सड़कों पर भी उतर आए। होटलों-रेस्तरां में देर रात तक रंगारंग कार्यक्रम चलते रहे। सैलानियों से पूरी तरह पैक होटलों में नए साल के जश्न के खास इंतजाम रहे। पर्यटन नगरी मनाली, धर्मशाला और चायल में रात 12 बजे के बाद न्यू ईयर क्वीन का चयन किया गया। साथ ही लेमन डांस, कैंडल डांस, बेस्ट कपल और बच्चों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। उधर, शक्तिपीठ छिन्नमस्तिका धाम चिंतपूर्णी और माता नयना देवी के मंदिर के कपाट मंगलवार की देर रात को मात्र एक घंटे बंद रहे। वहीं, शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी, ज्वालाजी और नंदिकेश्वर धाम चामुंडा मंदिर के कपाट बुधवार सुबह 5 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे।
** मैदानों में कल से घने कोहरे का अलर्ट हिमाचल में बारिश-बर्फबारी के बाद पहाड़ ठंड से कांप रहे हैं। मंगलवार को ताबो में पारा रिकॉर्ड माइनस 17 डिग्री पहुंच गया। भले ही साल 2024 के आखिरी दिन शिमला और मनाली के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बर्फबारी वाले इलाकों में पारा शून्य से नीचे चल रहा है। प्रदेश में नए साल के पहले दिन मौसम साफ रहेगा। एक जनवरी को अधिकांश क्षेत्रों में धूप खिली रहने की संभावना है। 2 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ फिर सक्रिय हो रहा है। 5 और 6 को भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी हो गया है। इस दौरान कई जगह बारिश-बर्फबारी का पूर्वानुमान है। मैदानी जिलों ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर और मंडी के कई क्षेत्रों में कोहरा पड़ने का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। 2 जनवरी तक सुबह और शाम के समय घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी हुआ है। जिला कुल्लू और लाहौल में बर्फबारी के बाद से अभी तक 138 सड़कें बंद हैं। इनमें कुल्लू के दो हाईवे के साथ आठ सड़कें और लाहौल की 130 सड़कें शामिल हैं। बर्फबारी के कारण अभी इन मार्गों पर वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो सकी। मनाली में 60 बिजली ट्रांसफार्मर भी बंद पड़े हैं। बुधवार को कुल्लू और लाहौल में सुबह से आसमान में बादल छाए रहे। रोहतांग दर्रा के साथ ऊंची चोटियों पर बर्फ के फाहे गिरे। कड़ाके की ठंड से लाहौल घाटी के साथ जलोड़ी दर्रा और सोलंगनाला में शीतलहर का प्रकोप जारी रहा। राजधानी शिमला में मंगलवार को हल्के बादल छाए रहने के साथ धूप खिली। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी मौसम मिलाजुला बना रहा। मंगलवार को दिन में धर्मशाला में अधिकतम तापमान 19.9, हमीरपुर में 19.4, कांगड़ा में 19.1, बिलासपुर में 17.6, शिमला में 17.5, ऊना में 16.4, नाहन में 12.7, मनाली में 13.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्से मंगलवार को भी कड़ाके की ठंड की चपेट में रहे। पश्चिमी हिमालयी राज्यों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां पारा शून्य या उससे नीचे दर्ज किया गया, वहीं मैदानी इलाकों में भी तापमान में खासी गिरावट दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश के 50 जिलों में अधिकतम तापमान 5 डिग्री तक गिर गया। साल के आखिरी दिन दिल्ली समेत कुछ राज्यों में बादलों के साथ सूरज की आंखमिचौली चलती रही। इससे कंपकंपी बढ़ी। अगले सप्ताह पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं, मैदानों में भी 4 से 6 जनवरी तक बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह तक चंडीगढ़, राजस्थान व छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बहुत घना कोहरा छाया रहा और दृश्यता 50 मीटर से भी कम रही।
हिमाचल प्रदेश वॉलीबॉल टीम के चयन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। खिलाड़ियों ने चयन प्रक्रिया पर भेदभाव और पक्षपात के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की। उनका कहना है कि चयन समिति ने प्रतिभाशाली और अनुभवी खिलाड़ियों को नजरअंदाज कर कोच के बेटे को टीम में शामिल किया। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी टीम से बाहर कर दिया गया। खिलाड़ियों ने ऑन-कैमरा ट्रायल दोबारा करवाने की मांग की है ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खेल विभाग के निदेशक को जांच के आदेश दिए और दोबारा ट्रायल करवाने को कहा। दूसरी ओर, चयन समिति के सदस्य अर्जुन अवार्डी संजय कुमार फोगाट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल में 70 लड़के और 45 लड़कियों ने हिस्सा लिया, और चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही। खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और किसी भी अनियमितता पर सख्त कार्रवाई होगी। यह विवाद 26-27 दिसंबर को शिमला के इंदिरा गांधी खेल परिसर में हुए ट्रायल से जुड़ा है, जो 7-13 जनवरी को जयपुर में होने वाली सीनियर नैशनल वॉलीबॉल प्रतियोगिता के लिए आयोजित किया गया था। खिलाड़ियों की शिकायत और सीएम के हस्तक्षेप से निष्पक्ष चयन की उम्मीद की जा रही है।
** कहा, 100 किसानों से 378 क्विंटल गोबर खरीदा हिमाचल सरकार ने अपनी दस गारंटियों में से गोबर खरीद की गारंटी को पूरा करते हुए दस जिलों में गोबर खरीद शुरू कर दी है। 11 दिसंबर को सरकार के दो साल पूरा होने पर गोबर खरीद को हरी झंडी दिखाई थी। सरकार ने अभी तक 100 किसानों से 378 क्विंटल खाद खरीद ली है। किन्नौर और लाहौल स्पीति दो कबायली जिलों को छोड़कर दस जिलों में खाद खरीद शुरू कर दी है। ये जानकारी कृषि मंत्री ने दी है। उन्होंने कहा कि पांच और दस किलो के पैकेट में गोबर खरीद की जा रही है। ठेकेदार को पांच रुपए किलो के हिसाब से एकत्रित करने और ट्रांस्पोर्ट के दिए जा रहे हैं। आगे सरकार इसको 11 से12 रुपए किलो के हिसाब से बेचेगी। हालांकि सरकार ने दो रुपए किलो के हिसाब से गोबर खरीद की गारंटी दी थी। अब तीन किलो के हिसाब से खरीदे रहें हैं। लेकिन किसान अब 5 से आठ रुपए किलो के हिसाब गोबर बेचने की बात कह रहे हैं। यदि गोबर खरीद का अच्छा रिस्पॉन्स रहा तो रेट बढ़ाने के बारे में सोचेंगे।
शिमला: पर्यटन स्थल कुफरी में स्नो बूट बदलने को लेकर पर्यटकों और स्थानीय दुकानदारों के बीच रविवार को विवाद हो गया। यह विवाद अचानक हाथापाई में बदल गया और पर्यटकों ने चाकू से वार कर तीन लोगों को घायल कर दिया। स्थानीय लोगों से मामले की सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल हुए तीनों लोगों को इलाज के लिए तुरंत प्रभाव से आईजीएमसी शिमला पहुंचाया गया। वहीं, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को कस्टडी में ले लिया है। आरोपियों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। एसपी शिमला संजीव गांधी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया, चारों पर्यटक पंजाब से शिमला के कुफरी में घूमने आए थे। यहां वे एक दुकान में बर्फ में घूमने के लिए स्नो बूट लेने पहुंचे। स्नो बूट को पर्यटकों को किराये पर दिया जाता है। स्नो बूट लेते समय पर्यटकों की दुकानदार से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई जो बाद में मारपीट में बदल गई और पर्यटकों ने चाकू निकालकर हमला कर दिया। इस मामले की जांच ढली पुलिस कर रही है। इस हमले में स्थानीय दुकानदार जगदीश शर्मा, शेखर शर्मा और निखिल सिंगटा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही शिमला में कार्निवल के दौरान रात को आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में मारपीट की एक घटना सामने आई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हुआ था।
प्रदेश में नए साल से उचित मूल्य की दुकानों में दालें मिलना शुरू हो जाएंगी। राज्य आपूर्ति निगम ने गोदामों में दालों की सप्लाई कर दी है। जनवरी से डिपुओं से सस्ती दालें खरीद पाएंगे। दो माह का कोटा एक साथ मिलेगा। दालों के दामों में फिलहाल कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। एक सप्ताह पहले ही उड़द की दाल गोदामों में पहुंच चुकी है। डिपुओं में जल्द दालें पहुंच जाने से प्रदेश के उपभोक्ताओं को बाजारों से दोगुना दामों पर मिलने वाली दालों को खरीदने से राहत मिलेगी। राज्य आपूर्ति निगम की ओर से प्रदेश भर में 1.60 लाख क्विंटल दालों की सप्लाई की गई है, जिसमें 80 हजार क्विंटल केवल चना दाल है। बची 80 हजार क्विंटल दाल मलका मसूर और उड़द की दाल है। निगम ने दालों का बफर स्टॉक भारत सरकार से खरीदा है। निगम की ओर से गुणवत्ता के आधार पर परख कर खरीदी गई दालों का दो माह का कोटा अगले माह से उपभोक्ताओं एक साथ दिया जाएगा, जिसमें सभी उपभोक्ताओं को चना दाल 65 रुपये किलो, मलका मसूर बीपीएल को 56 रुपये, एपीएल को 66 और आयकरदाताओं को 91 रुपये किलो मिल रही है। प्रदेश में खाद्य आपूर्ति विभाग के कुल 5300 डिपो हैं और कुल 19.65 लाख राशन कार्डधारक हैं, जो विभाग की ओर से मिल रहे सस्ते राशन का लाभ ले रहे है। निगम की ओर से प्रदेश में अगले माह से पूरा राशन उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं, तेल का टेंडर भी जनवरी माह में पहले सप्ताह में होने की संभावना है। उड़द दाल हुई सस्ती, पर आयकरदाताओं को मिलेगी महंगी राशन डिपुओं में नए साल से उड़द की दाल राशन कार्ड उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर मिलेगी। हालांकि आयकरदाताओं को महंगी मिलेगी। एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) उपभोक्ताओं को उड़द की दाल 58 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से दी जाएगी। पहले इसका भाव 63 रुपये प्रति किलो था। एपीएल परिवारों के लिए उड़द का मूल्य 68 रुपये किलो तय किया गया है। डिपुओं में पहले इन परिवारों को 73 रुपये किलो की दर से उड़द की दाल दी जा रही थी। आयकरदाताओं को उड़द की दाल अब 93 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलेगी। पहले यह 83 रुपये प्रति किलो थी। सिविल सप्लाई के एरिया प्रबंधक संजीव वर्मा ने कहा कि जिला ऊना और हमीरपुर के लिए 2900 क्विंटल उड़द दाल प्राप्त हुई है। जनवरी माह से सभी दालें उपभोक्ताओं को मिल पाएंगी और दालों के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अगले माह से डिपुओं में दो माह का कोटा एक साथ दिया जाएगा।
शिमला: सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है। सीएम सुक्खू ने कहा, मुझे पूर्ण विश्वास है कि उनका विस्तृत अनुभव और दृष्टिकोण हिमाचल प्रदेश को लाभान्वित करेगा और न्याय की भावना को और ऊंचाई प्रदान करेगा। वहीं, न्यायमूर्ति संधावालिया की न्यायिक सूझ-बूझ राज्य में न्याय के सिद्धांतों को कायम रखने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया ने साल 1986 में चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद साल 1989 में उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद वे पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल में एडवोकेट के रूप में सक्रिय हुए। फिर साल 1983 से 1987 तक उन्होंने पटना में हाईकोर्ट में सेवाएं दीं। न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया के पिता साल 1978 और साल 1983 के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। फिलहाल, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सेवारत न्यायाधीशों की बात करें तो अभी न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान, न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ, न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, न्यायमूर्ति रंजन शर्मा, न्यायमूर्ति बीसी नेगी व न्यायमूर्ति राकेश कैंथला का नाम आता है। न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया के पदभार संभालने के बाद अब हिमाचल हाईकोर्ट में सीजे सहित 12 जज हो गए हैं।
** न्यूनतम तापमान -12.3°C दर्ज, हिमाचल प्रदेश में इन दिनों बर्फबारी का दौर जारी है। प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में हुई जमकर बर्फबारी से हर तरफ चांदी सी सफेदी छाई हुई है। बर्फबारी की वजह से प्रदेश में कड़ाके की ठंड पर रही है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर का प्रकोप हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार नये साल में भी हिमाचल में बर्फबारी होने की संभावना है। प्रदेश में बीते दिन ताबो में सबसे कम -12.3°C तापमान दर्ज किया गया। हिमाचल में बीते 24 घंटे में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी दर्ज की गई। बीते 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में कोई परिवर्तन नहीं देखा गया, जबकि अधिकांश जगहों पर न्यूनतम तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम रहा। वहीं, प्रदेश में सबसे कम तापमान ताबो में दर्ज किया गया, जहां -12.3°C तापमान दर्ज किया गया, जबकि उना में 20.4°C तापमान दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार साल 2025 में 2 और 3 जनवरी को कुछ जगहों पर और 4 जनवरी को राज्य के ऊंचे और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी होने का पूर्वानुमान जताया गया है। सप्ताह के अन्य दिनों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। अगले दो दिनों में राज्य के उच्च तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। इसके बाद कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। अगले 2 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है। इसके बाद कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक सुबह और देर रात के समय निचले पहाड़ी/मैदानी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर शीतलहर चलने की संभावना है। 30, 31 दिसंबर और 1 जनवरी को कुछ स्थानों पर शीतलहर से लेकर गंभीर शीतलहर चलने की आशंका है। वहीं, 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक सुबह के समय निचले पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में अलग-अलग जगहों पर पाला गिरने की संभावना है।


















































