शिमला के दुर्गम काशापाट क्षेत्र में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का पारंपरिक अंदाज में खास स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर काशा और पाट गांव के ग्रामीणों में खासा उत्साह रहा। ग्रामीणों ने स्थानीय रीति-रिवाजों के साथ उनके स्वागत की तैयारियां कीं और उन्हें पहाड़ी संस्कृति व खानपान से रूबरू करवाया। मुख्यमंत्री ने काशा गांव में लंच और डिनर किया। इसके बाद वह पाट गांव में ग्रामीण सुपन दास के घर रात्रि विश्राम के लिए पहुंचे। मुख्यमंत्री के लिए स्थानीय अनाज और पारंपरिक खाद्य सामग्री से तैयार व्यंजन परोसे गए। तीन अक्टूबर की सुबह मुख्यमंत्री को नाश्ते में ओगले और फाफड़े का चिल्टू, कोदा व तुलसी की रोटी, गेहूं व झालरे की मोड़ी, स्थानीय मक्खन-लस्सी, भिथू और गुच्छी की सब्जी समेत कई पारंपरिक व्यंजन परोसे जाने की तैयारी थी। इन व्यंजनों को तैयार करने की जिम्मेदारी क्षेत्र के सात महिला मंडलों को दी गई थी। मुख्यमंत्री के गांव में रात्रि प्रवास को ग्रामीणों ने खास अवसर बताया। इस दौरान सुक्खू ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं और मांगें भी जानेंगे। प्रशासन की ओर से भी दौरे को लेकर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। मुख्यमंत्री का यह दौरा रोहड़ू, चिड़गांव, रामपुर और आसपास के क्षेत्रों के तीन दिवसीय कार्यक्रम का हिस्सा था। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन-शिलान्यास करने के साथ ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से संवाद किया।
हिमाचल प्रदेश में अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ रहने के बाद अब फिर करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 5 अक्टूबर से बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जबकि 6 और 8 अक्टूबर को कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 2 से 4 अक्टूबर तक प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। इसके बाद पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते मौसम में बदलाव आएगा। 5 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। वहीं 6 अक्टूबर को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में बारिश के आसार हैं। किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचे क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी हो सकती है। 6 अक्टूबर को कुछ जिलों में आंधी-बिजली का भी अलर्ट है। ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, शिमला और सिरमौर में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने की संभावना है। वहीं 8 अक्टूबर को भी मौसम खराब रहने के संकेत हैं। कुछ स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। मौसम विभाग ने किसानों और बागवानों को तैयार फसल को सुरक्षित रखने तथा आंधी-बिजली के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। फिलहाल प्रदेश में मौसम साफ बना हुआ है, लेकिन अगले कुछ दिनों में तापमान में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। अधिकतम तापमान में आगामी 3-4 दिनों के दौरान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का अनुमान है।
केलांग। देश के सबसे ऊंचे और चुनौतीपूर्ण बस रूटों में शामिल दिल्ली-केलांग-लेह बस सेवा ने इस सीजन में हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के केलांग डिपो की कमाई बढ़ाई है। केलांग-लेह-केलांग सेक्शन से निगम को करीब 45 लाख रुपये की आय हुई है। दिल्ली-केलांग-लेह के पूरे रूट की आय जोड़ने पर यह रकम और अधिक होने की संभावना है। इस साल 26 मई को बस सेवा शुरू हुई थी और मौसम की स्थिति को देखते हुए 17 सितंबर को इसे बंद कर दिया गया। करीब साढ़े तीन महीने चली इस सेवा में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटकों और अन्य यात्रियों ने करीब 990 किलोमीटर लंबे सफर का आनंद लिया। दिल्ली से लेह के इस रूट पर बस को बारालाचा ला, नकी ला, लाचुंग ला और तंगलंग ला जैसे ऊंचे दर्रों से होकर गुजरना पड़ता है। केलांग से लेह की दूरी करीब 365 किलोमीटर है। ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यह रूट यात्रियों के बीच खासा लोकप्रिय है। HRTC के केलांग डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक अंशित शर्मा के अनुसार, इस सीजन में केलांग-लेह-केलांग रूट से करीब 45 लाख रुपये की आय हुई है। उन्होंने बताया कि मौसम और सड़क की स्थिति अनुकूल रहने पर अगले साल मई में बस सेवा दोबारा शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि दिल्ली-लेह बस सेवा का किराया 1,839 रुपये निर्धारित किया गया था। सर्दियों में भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण यह सेवा हर साल बंद कर दी जाती है और मौसम खुलने के बाद दोबारा शुरू होती है।
बिलासपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 6 अक्तूबर को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर दौरे पर आएंगी। अपने दौरे के दौरान वह श्री नयना देवी मंदिर में दर्शन करेंगी और इसके बाद एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के मंदिर दौरे को देखते हुए 6 अक्तूबर को सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में दर्शन बंद रहेंगे। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे उस दिन दर्शन करना चाहते हैं तो सुबह 7 बजे से पहले मंदिर पहुंच जाएं। दोपहर 1 बजे के बाद दर्शन सामान्य रूप से शुरू कर दिए जाएंगे। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए 500 से अधिक पुलिसकर्मी, अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। नयना देवी मंदिर और एम्स परिसर को सुरक्षा के लिहाज से अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है। दोनों स्थानों को नो-ड्रोन जोन घोषित किया गया है। राष्ट्रपति आनंदपुर साहिब से सड़क मार्ग के जरिए श्री नयना देवी पहुंचेंगी। दर्शन के बाद वह एम्स बिलासपुर जाएंगी, जहां संस्थान के पहले दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। इसके बाद उनके मनाली रवाना होने का कार्यक्रम है। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासन ने यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और आपातकालीन सेवाओं के भी विशेष इंतजाम किए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस भी तैनात रखने की तैयारी है। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों की मरम्मत और अन्य व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रशासन और पुलिस की टीमें पूरे रूट की लगातार निगरानी कर रही हैं।
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को रोहड़ू में नशे के खिलाफ एंटी-चिट्टा रैली को हरी झंडी दिखाई। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और खुद भी रैली में शामिल होकर मार्च किया। इस दौरान युवाओं को नशे से दूर रहने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री के तीन दिवसीय रोहड़ू-रामपुर दौरे की शुरुआत 1 अक्टूबर से हुई है। रोहड़ू में विद्यार्थियों के साथ कार्यक्रम के बाद वह चिड़गांव पहुंचे, जहां विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के साथ जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है। इसके बाद मुख्यमंत्री ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायत दियूदी-मयला के भटवाड़ी गांव पहुंचेंगे। यहां वह ग्रामीणों, महिला मंडलों और युवक मंडलों के साथ संवाद कर स्थानीय समस्याओं को सुनेंगे। मुख्यमंत्री का रात में भटवाड़ी में रात्रि प्रवास भी निर्धारित है। 2 अक्टूबर को मुख्यमंत्री रामपुर क्षेत्र का दौरा करेंगे। शिंगला में विकास योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के बाद नोग वैली के लोगों से संवाद करेंगे। इसके बाद काशा गांव में ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम में ग्रामीणों से बातचीत करेंगे और रात में पाठ गांव में रुकने का कार्यक्रम है। 3 अक्टूबर को रामपुर में भी एंटी-चिट्टा रैली आयोजित होगी। मुख्यमंत्री विद्यार्थियों से संवाद करने के बाद रैली को हरी झंडी दिखाएंगे और इसमें शामिल होंगे। इसके बाद उनका शिमला लौटने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री के इस दौरे में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सीधे सुनना और विकास योजनाओं की समीक्षा प्रमुख रूप से शामिल है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के गरीब और अतिनिर्धन परिवारों को ₹1,500 मासिक आर्थिक सहायता और 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने वाली मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना की 2 अक्टूबर को होने वाली लॉन्चिंग टल गई है। पहले सरकार ने गांधी जयंती के दिन योजना शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन अब इसके लिए नई तारीख तय की जाएगी। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक सहायता देने और पात्र गरीब परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। सरकार की ओर से पहले 2 अक्टूबर से इसका लाभ देने की तैयारी की गई थी। जानकारी के अनुसार योजना की पात्रता में बदलाव किए गए हैं। सरकार ने मनरेगा में कम से कम एक दिन काम करने की अनिवार्य शर्त हटाने और परिवार की आय सीमा को ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹75 हजार करने का फैसला किया है। इन बदलावों के बाद पात्र परिवारों के सर्वे और सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है I पंचायत स्तर पर हुए सर्वे में करीब 1.80 लाख आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली के लिए चिह्नित किया गया है। वहीं करीब 2.50 लाख महिलाओं को ₹1,500 मासिक सहायता देने की तैयारी है। लाभार्थियों का सत्यापन और आंकड़ों के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना लागू की जाएगी। सरकार के अनुसार पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सहायता राशि सीधे भेजने और पात्र परिवारों को बिजली बिल में राहत देने की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल नई लॉन्चिंग तारीख का इंतजार है।
हिमाचल प्रदेश में बारिश के दौर के बाद अब मौसम में सुधार के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार 30 सितंबर से 5 अक्तूबर तक प्रदेश में मौसम के मुख्यतः साफ रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बारिश से राहत मिलेगी और आसमान साफ रहने के साथ धूप खिल सकती है। हालांकि कुछ स्थानों पर स्थानीय मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। बारिश थमने के बाद तापमान में भी हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा सकता है। प्रदेश में बीते दिनों हुई बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ था, ऐसे में मौसम साफ होने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 26 सितंबर की शाम या रात से 29 सितंबर की सुबह तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर सक्रिय रहेगा। इस दौरान दक्षिण-पूर्वी हिमाचल और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है। 27 सितंबर को बारिश का जोर सबसे अधिक रहने का अनुमान है। राजधानी शिमला में शनिवार को सुबह धूप के बाद दोपहर में घने बादल छा गए। शिमला समेत सिरमौर, सोलन, मंडी और बिलासपुर के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों के दौरान व्यापक बारिश होने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। 27 सितंबर को सिरमौर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं बिलासपुर, मंडी, शिमला, सोलन और किन्नौर में येलो अलर्ट है। 28 सितंबर को शिमला, सोलन और सिरमौर में भी भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा। मौसम विभाग ने बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी दी है। 26 से 28 सितंबर के बीच शिमला, सोलन और सिरमौर में तथा 27 सितंबर को किन्नौर, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन, मलबा आने और सड़कें फिसलन भरी होने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बारिश के कारण कृषि-बागवानी गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार 29 सितंबर से 2 अक्तूबर तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश जारी रह सकती है, लेकिन भारी बारिश की गतिविधि में कमी आने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश के करीब 30 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिल भुगतान की प्रक्रिया जल्द और आसान होने वाली है। बिजली बोर्ड अब UPI, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, BBPS, RTGS/NEFT, QR कोड, POS मशीन और WhatsApp पेमेंट जैसे अलग-अलग विकल्पों को एक ही डिजिटल मंच पर लाने की तैयारी कर रहा हैI नई व्यवस्था के लिए बोर्ड ने RBI से अधिकृत पेमेंट एग्रीगेटर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद उपभोक्ताओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाकर भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी। किसी भी माध्यम से किया गया भुगतान एकीकृत डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगा और उसका रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध रहेगा। बोर्ड इसके लिए एक यूनिफाइड वेब-बेस्ड डैशबोर्ड भी तैयार करेगा। इसमें अलग-अलग माध्यमों से आए भुगतानों की निगरानी, मिलान और वित्तीय विश्लेषण एक ही जगह से किया जा सकेगा। इससे भुगतान सफल हुआ या नहीं, पैसा खाते में पहुंचा या किसी तकनीकी दिक्कत के कारण अटका—इसकी जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। बोर्ड ने इस परियोजना के लिए योग्य पेमेंट एग्रीगेटरों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्रस्ताव मांगे हैं। निविदाएं 6 अक्तूबर 2026 शाम 5 बजे तक जमा की जा सकती हैं। तीन महीने में 30 लाख से ज्यादा डिजिटल भुगतान मई से जुलाई 2026 के बीच बिजली बोर्ड को विभिन्न डिजिटल माध्यमों से 30 लाख से अधिक भुगतान मिले, जिनसे करीब 2027 करोड़ रुपये की राशि जमा हुई। इनमें BBPS के जरिए करीब 24.96 लाख लेनदेन हुए और 298.34 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। पेमेंट गेटवे से 4.28 लाख से अधिक लेनदेन हुए, जबकि RTGS/NEFT के जरिए करीब 46,950 लेनदेन में 1004.41 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई। नई व्यवस्था में RTGS और NEFT के भुगतान का उसी दिन सेटलमेंट करने का प्रावधान होगा। वहीं UPI, कार्ड, BBPS और अन्य डिजिटल माध्यमों से प्राप्त राशि अधिकतम अगले कार्य दिवस तक बोर्ड के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था होगी। फिलहाल भी HPSEBL के उपभोक्ता पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए बिजली बिल देखने और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
शिमला के सुन्नी में पिता की मौत के बाद बेटी भी लापता, सतलुज में तलाश जारी; आखिर खाई तक कैसे पहुंची पिकअप? शिमला जिले के सुन्नी के ओगली क्षेत्र से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए पिता-बेटी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। करीब एक सप्ताह बाद पिता कुलदीप का शव सतलुज नदी से बरामद हुआ, जबकि उनकी 18 वर्षीय बेटी स्नेहा की तलाश अभी भी जारी है। जानकारी के अनुसार, 12 सितंबर की शाम कुलदीप अपनी बेटी स्नेहा के साथ पिकअप में कुमारसैन की ओर गए थे। रात करीब 1:30 बजे उन्होंने पत्नी को फोन कर बताया था कि वे पंदोआ पहुंच गए हैं और करीब 10 मिनट में घर पहुंच जाएंगे। इसके बाद दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। परिजनों ने तलाश शुरू की तो ओगली के पास उनकी पिकअप सड़क किनारे लावारिस हालत में मिली। वाहन का कंडक्टर साइड का शीशा टूटा हुआ था। इसी वजह से परिवार ने किसी अनहोनी की आशंका जताई थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आसपास के CCTV फुटेज भी खंगाले। जांच के दौरान CCTV में सुबह करीब 4 बजे पिकअप की आवाजाही कोठी, ओगली और चेबड़ी क्षेत्र में दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों और सतलुज नदी के किनारे सर्च अभियान चलाया। करीब सात-आठ दिन बाद मंडी जिले के करला गांव के पास सतलुज नदी में नाव चलाने वालों ने एक शव देखा। पुलिस और परिजनों ने मौके पर पहुंचकर शव की पहचान कुलदीप के रूप में की। बाजुओं पर बने त्रिशूल और गले पर लिखे 'मां' शब्द से भी पहचान की पुष्टि हुई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुलदीप और उनकी बेटी पिकअप से अलग कैसे हुए और वाहन सड़क से किस तरह वहां पहुंचा? वाहन का शीशा टूटने और पिता का शव सतलुज में मिलने के बाद पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह हादसा था या इसके पीछे कोई दूसरी वजह। फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस स्नेहा की तलाश पर है। सतलुज और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान चलाया जा चुका है और CCTV समेत अन्य सुरागों की जांच की जा रही है।
शिमला जिले के उपमंडल चौपाल के नेरवा क्षेत्र के टेलर गांव में साप के डसने साई दो सगी बहनो की मौत हो गई I मृतकों की पहचान महक (10) और कनक (7) पुत्रियां जितेंद्र निवासी गांव टेलर, डाकघर थंगाड तहसील नेरवा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार 20 सितंबर की रात दोनों बहनें अपने माता-पिता के साथ मकान की धरातल मंजिल के एक कमरे में सोई थीं। अगले दिन सुबह पिता काम से बाहर चले गए, जबकि मां सपना खेतों में काम करने चली गईं। करीब आठ बजे मां घर लौटी तो दोनों बच्चियां कमरे में बेहोशी की हालत में पड़ी थीं। आवाज लगाने और उठाने का प्रयास करने के बावजूद दोनों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उसी समय माँ ने एक साप को कमरे से बहार जाते हुए देखा I परिजनों को आशंका हुई की दोनों बचियों को सांप ने डसा है I परिजनों ने तुरंत दोनों बचियों को उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल त्यूनी उत्तराखंड पहुंचाया I प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रोहड़ू रेफर किया गया। वहां से दोनों को आगामी उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया। 21 सितंबर को रात करीब 2:46 बजे पुलिस पिकेट आईजीएमसी से थाना नेरवा को सूचना मिली कि दोनों बच्चियों को उपचार के लिए आईजीएमसी लाया गया है, जहां उपचार के दौरान महक की मौत हो गई।पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचने के लिए रवाना हुए, इसी दौरान कनक की भी मौत की सूचना मिली। पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम करवाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकों की अंतिम राय अभी प्राप्त होना बाकी है। पुलिस ने धारा 194 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई शुरू की है। प्रारंभिक जांच और परिजनों के बयानों के आधार पर दोनों बहनों की मौत जहरीले सांप के काटने से होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस की ओर से मामले में अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। इस विषय में एसडीएम चौपाल हेमचंद वर्मा ने कहा कि मृतक बच्चों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक नहीं प्राप्त हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि मृत्यु का कारण सर्पदंश बताया जाएगा तो सरकारी राहत मैनुअल के अनुसार परिवार को राहत राशि प्रदान कर दी जाएगी।
सोलन शहर के माल रोड स्थित चिल्ड्रन पार्क में तीन अधेड़ उम्र के लोगों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते कहासुनी बढ़ी और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तीनों के बीच काफी देर तक मारपीट होती दिखाई दे रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान तीनों एक-दूसरे से उलझते रहे। काफी देर तक चले हंगामे के बाद मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। इस दौरान पार्क में मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गया I स्थानीय लोगों के मुताबिक, तीनों व्यक्तियों के शराब के नशे में होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि किसी बात को लेकर हुई कहासुनी के बाद तीनों आपस में भिड़ गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने चिल्ड्रन पार्क और आसपास के क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह का हुड़दंग रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।
सोलन में पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 52.07 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) और 6.16 ग्राम ICE बरामद की है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में पंजाब और जम्मू-कश्मीर से जुड़े आरोपी शामिल हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कश्मीर से ड्रग लेकर हिमाचल में सप्लाई करने का काम करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और नशे की खेप किन-किन जगहों पर पहुंचाई जानी थी। पुलिस ने बरामद नशे को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। तीनों से पूछताछ जारी है और पुलिस पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र की 61 पंचायतों में संवाद कार्यक्रम के दौरान विधायक विवेक शर्मा ने लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर लोगों से मिले सुझावों और मांगों को व्यवस्थित तरीके से सरकार तक पहुंचाया जाएगा। विधायक ने बताया कि पंचायत सचिव के माध्यम से लोगों की समस्याओं और सुझावों को संकलित कर सरकार तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यानी पंचायतों में संवाद के दौरान जो भी महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आएंगे, उन्हें सचिव के स्तर पर दर्ज किया जाएगा और संबंधित विभागों व सरकार के समक्ष रखा जाएगा। इससे गांवों की समस्याएं सीधे सरकार के संज्ञान में पहुंच सकेंगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल लोगों से संवाद करना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान करवाने के लिए उन्हें उचित मंच तक पहुंचाना भी है। पंचायतों में सड़कों, पेयजल, बिजली, विकास कार्यों और अन्य स्थानीय जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर भी लोगों की राय ली जा रही है। विधायक विवेक शर्मा ने BPL परिवारों के चयन को लेकर कहा कि पात्र लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में वास्तविक रूप से पात्र परिवारों को प्राथमिकता मिले और जरूरतमंद लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें, इसका ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि 61 पंचायतों से मिलने वाली जनता की आवाज को सचिवों के माध्यम से सरकार तक पहुंचाकर संबंधित समस्याओं पर कार्रवाई करवाने का प्रयास किया जाएगा।
सिरमौर में एक ट्रक को खाई में गिराकर हादसा दिखाने की कोशिश का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ट्रक में लदा करीब 10 टन सरिया पहले रास्ते में ही बेच दिया गया। इसके बाद ट्रक को खाई में गिरा दिया गया, ताकि पूरा मामला दुर्घटना जैसा लगे। मामले की जांच शुरू होने के बाद पुलिस को घटनाक्रम पर संदेह हुआ। जांच में सामने आए तथ्यों ने कथित साजिश की परतें खोलनी शुरू कर दीं। पुलिस ने ट्रक और सरिए से जुड़े मामले की जांच करते हुए उन परिस्थितियों को खंगाला, जिनमें सरिया गायब हुआ और ट्रक खाई में पहुंचा। पुलिस जांच के चलते साजिश को हादसे का रूप देने की कोशिश नाकाम हो गई। अब मामले में यह पता लगाया जा रहा है कि सरिया किसे बेचा गया, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और ट्रक को खाई में गिराने के पीछे असली मकसद क्या था।
हिमाचल प्रदेश में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नशा तस्करों ने अवैध तरीके से जो संपत्तियां बनाई हैं, उन्हें जब्त किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की आर्थिक ताकत को खत्म करना है। सीएम ने कहा कि नशा तस्करी से कमाई गई संपत्ति को किसी भी सूरत में सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। कानून के तहत ऐसी संपत्तियों की पहचान कर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है कि नशे के काले कारोबार से कमाया गया पैसा आखिरकार जनता के हित में इस्तेमाल हो। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा। पुलिस और संबंधित विभागों को नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उनकी अवैध संपत्तियों का पता लगाने पर भी जोर देने की बात कही गई है। सरकार का मानना है कि केवल तस्करों को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे के पूरे आर्थिक नेटवर्क पर चोट करना जरूरी है। इसी रणनीति के तहत अवैध संपत्तियों को जब्त कर नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की कमर तोड़ने की तैयारी है।
लगातार बारिश के चलते कोतवाली-खनियारा सड़क को नुकसान पहुंचा है। सड़क का करीब 20 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। बारिश जारी रहने पर नुकसान बढ़ने की भी संभावना है। संबंधित विभाग की ओर से सड़क की स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक मरम्मत कार्य किए जाने की जरूरत है।
हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में फर्जी इनवॉइस के जरिए करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और GST रिफंड के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। CGST आयुक्त कार्यालय शिमला के प्रिवेंटिव विंग ने कार्रवाई करते हुए करीब 6.55 करोड़ रुपये के अपात्र ITC का मामला पकड़ा है। इस मामले में त्रिलोकपुर स्थित समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गौरव जैन को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान सामने आया कि समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ड्यूल हेल्थकेयर ने कथित तौर पर कई फर्जी और गैर-मौजूद सप्लायर फर्मों के बिलों के आधार पर ITC का लाभ लिया। जांच में करीब 5.55 करोड़ रुपये का ITC 10 गैर-मौजूद फर्मों से जुड़े इनवॉइस के जरिए लेने की बात सामने आई है। अधिकारियों को ऐसे बिल भी मिले, जिनमें माल की सप्लाई दिखाई गई थी, लेकिन ई-वे बिल और टोल प्लाजा के रिकॉर्ड में उस माल की वास्तविक आवाजाही की पुष्टि नहीं हो सकी। आरोप है कि फर्जी तरीके से हासिल ITC को GST रिफंड के दावों में शामिल कर सरकारी खजाने से नकद रिफंड लेने का प्रयास किया गया शेल कंपनी बनाकर चल रहा था खेल जांच में फर्जी फर्मों, बिना वास्तविक माल की सप्लाई के इनवॉइस, संदिग्ध अकाउंटिंग एंट्री और शेल इकाइयों के इस्तेमाल के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। अधिकारियों ने कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं और डिजिटल साक्ष्यों, व्हाट्सऐप चैट तथा बैंकिंग लेन-देन की भी जांच की गई। जांच एजेंसी के अनुसार ड्यूल हेल्थकेयर का इस्तेमाल कथित तौर पर शेल इकाई के रूप में किया जा रहा था और इसके संचालन में गौरव जैन की सक्रिय भूमिका सामने आई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 69(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है। ITC का मतलब: Input Tax Credit यानी कारोबार में खरीदे गए सामान या सेवाओं पर दिए गए GST का क्रेडिट, जिसे नियमों के तहत टैक्स देनदारी में समायोजित किया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन के बीच बागवानों ने CA (कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर) स्टोरेज) कंपनियों की कार्यप्रणाली और भुगतान व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। बागवानों का कहना है कि सेब की फसल तैयार करने में वे पूरे साल मेहनत और पैसा लगाते हैं, लेकिन फसल बेचने के बाद भुगतान को लेकर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बागवानों ने मांग उठाई है कि CA कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाई जाए और सेब की बिक्री के बाद भुगतान हाथों-हाथ किया जाए। उनका कहना है कि फसल का पैसा समय पर मिलने से वे अगले सीजन की तैयारी और अन्य जरूरी खर्च आसानी से कर सकेंगे। बागवानों का आरोप है कि कुछ मामलों में भुगतान प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती और उन्हें अपनी ही फसल की रकम के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से इस व्यवस्था की निगरानी करने की मांग की है। बागवानों ने साफ कहा कि सेब कारोबार में पारदर्शिता जरूरी है। कंपनियों की शर्तों, सेब की कीमत और भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि बागवानों के हितों से किसी तरह का समझौता न हो। बागवानों की मांग है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और CA कंपनियों के साथ ऐसा नियम तय किया जाए, जिससे सेब की बिक्री और भुगतान की प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और समयबद्ध हो।
हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विजिलेंस टीम ने वन विभाग के एक ब्लॉक अधिकारी (बीओ) को 22 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी पर खैर कटान से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस विभाग को बताया कि खैर के पेड़ों के कटान से संबंधित फाइल पर साइन करने के लिए अधिकारी ने 22 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने मामले की जांच की और रिश्वत की रकम के साथ आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता ने जैसे ही आरोपी अधिकारी को रिश्वत की रकम दी, विजिलेंस टीम ने उसे मौके पर गिरफ्तार कर लिया। टीम ने रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली है। विजिलेंस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों से पूछताछ के साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि खैर कटान से जुड़ी फाइल में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि सिर्फ स्टांप पेपर पर आपसी सहमति से तैयार किया गया तलाकनामा विवाह को कानूनी रूप से खत्म नहीं करता। तलाक को वैध बनाने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत की मंजूरी जरूरी है। कोर्ट ने साफ किया कि पति-पत्नी के बीच समझौता या स्टांप पेपर पर तैयार दस्तावेज अपने आप में तलाक की डिक्री का विकल्प नहीं हो सकता। यानी केवल यह लिख देना कि दोनों पक्ष अलग हो गए हैं, पर्याप्त नहीं है। अदालत की इस टिप्पणी का सीधा मतलब है कि विवाह संबंध खत्म करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। निजी तौर पर तैयार किए गए दस्तावेज के आधार पर कोई व्यक्ति खुद को कानूनी रूप से तलाकशुदा नहीं मान सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में वैवाहिक स्थिति तय करने के लिए सक्षम अदालत की भूमिका अहम है। इसलिए पति-पत्नी को सिर्फ स्टांप पेपर या आपसी समझौते के भरोसे तलाक की कानूनी स्थिति मान लेने से बचना चाहिए।
शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अपने हालिया दिल्ली दौरे को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका दिल्ली जाना व्यक्तिगत कार्यक्रम से जुड़ा था। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात संयोगवश हुई। वहीं, शिमला जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन को लेकर रोहित ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने माना कि चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी को गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है। शिक्षा मंत्री के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस संगठन और नेतृत्व को लेकर समीक्षा और सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और संगठन को अधिक सक्रिय बनाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। रोहित ठाकुर ने दिल्ली दौरे को लेकर लग रही अटकलों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे किसी राजनीतिक बैठक या विशेष रणनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, जिला परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन पर चिंता जाहिर की है।
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 30 जून से 10 सितंबर 2026 तक प्रदेश में 1,63,882.59 लाख रुपये यानी करीब 1,638.83 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी संचयी रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब तक 116 लोगों की मौत हुई है। इनमें भूस्खलन से 18, डूबने से 15, बिजली गिरने से 12 और पेड़ या बड़ी चट्टान गिरने से 40 लोगों की मौत शामिल है। इसके अलावा 10 मौतें सड़क हादसों में दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में 172 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में भी दर्ज होने का उल्लेख है। कांगड़ा में सबसे ज्यादा नुकसान जिला स्तर पर सबसे अधिक नुकसान कांगड़ा में 447.17 लाख रुपये दर्ज किया गया है। इसके बाद मंडी में 297.57 लाख, चंबा में 294.10 लाख, शिमला में 376.65 लाख और सोलन में 164.88 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। 70 सड़कें बंद लगातार बारिश के कारण प्रदेश में 70 सड़कें बंद हैं। इनमें सबसे ज्यादा मंडी में 30 सड़कें, कुल्लू में 11, शिमला में 11, कांगड़ा में 10, सिरमौर में 4, ऊना में 3 और लाहौल-स्पीति में 1 सड़क बंद है। इनमें मंडी के सराज की 25, सुंदरनगर की 1, सरकाघाट की 3 और थलौट की 1 सड़क शामिल है। कुल्लू में कुल्लू उपमंडल की 4, बंजार की 2, आनी की 3 और निरमंड की 2 सड़कें प्रभावित हैं। बिजली-पानी की सप्लाई भी प्रभावित बारिश का असर बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। शिमला जिले में 2 बिजली ट्रांसफार्मर और 2 पेयजल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से बंद मार्गों को खोलने और प्रभावित क्षेत्रों में सुविधाएं बहाल करने के प्रयास जारी हैं। बारिश से बचाव और बहाली की चुनौती लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन बंद मार्गों को खोलने के साथ बिजली और पेयजल व्यवस्था बहाल करने में जुटा है। लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
मंडी हेड पोस्ट ऑफिस में पैसों से जुड़ी गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। मामले में एक महिला कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति की शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की। जांच में पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी सामने आने के बाद महिला कर्मचारी पर कार्रवाई की गई। मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए विभाग ने जांच कमेटी बनाई है। कमेटी यह पता लगाएगी कि कितने रुपये की गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल विभाग ने गबन की सही रकम का खुलासा नहीं किया है। सस्पेंड महिला कर्मचारी की नई तैनाती सुंदरनगर हेड पोस्ट ऑफिस में की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
मंडी: नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार चलाने के बजाय पूरा मंत्रिमंडल दिल्ली में डेरा डाले हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय सरकार के मंत्री दिल्ली की राजनीति में व्यस्त हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल में आम लोग कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता अपनी समस्याओं को लेकर सरकार की ओर देख रही है, लेकिन मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल के सदस्य दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सरकार की जरूरत है, तब मंत्री दिल्ली में क्यों बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को दिल्ली की राजनीति के बजाय हिमाचल के लोगों और प्रदेश के विकास पर ध्यान देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें शासन चलाने की जिम्मेदारी दी है, न कि लगातार दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने की। उन्होंने सरकार से जनता की समस्याओं का समाधान करने और प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने की मांग की।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण हिमाचल की नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की पानी ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है और आसपास की मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आपदा के जोखिम को कम करने के लिए ऐसे संवेदनशील नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल में एक ही विभाग के कर्मचारियों को क्यों दिया जा रहा अलग-अलग डा? हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाहीI सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है.
धूमधाम एवं श्रद्धाभाव से मनाया गया विश्व हिंदू परिषद का स्थापना दिवस एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह
चंडीगढ़, 7 सितंबर को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) चंडीगढ़ महानगर की ओर से विश्व हिंदू परिषद स्थापना दिवस एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह का भव्य आयोजन रविवार को सेक्टर-29 ए स्थित सेवा भारती के प्लॉट नंबर-1 में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में इंद्रप्रस्थ क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री एवं विश्व हिंदू परिषद के माननीय नीरज दौनेरिया मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, धर्म एवं सत्य की स्थापना के संदेश तथा राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्य पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया। समारोह के दौरान विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के उद्देश्य, संगठन की सामाजिक एवं धार्मिक भूमिका तथा हिंदू समाज की एकजुटता पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज को संगठित करने की प्रेरणा देता है। विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ महानगर मंत्री अंकुश गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम में चंडीगढ़ एवं लुधियाना विभाग संगठन मंत्री विकास बिश्नोई, पंजाब प्रांत कार्यकारी सदस्य कर्नल धर्मवीर, चंडीगढ़ विभाग मंत्री प्रदीप शर्मा, सह मंत्री सुरेश राणा, विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ महानगर के अध्यक्ष अरविंद मोदगिल, उपाध्यक्ष राकेश चौधरी, उपाध्यक्ष रेनू रोहिल्ला, सह मंत्री पंकज शर्मा, चंडीगढ़ गौ रक्षा प्रमुख जितेंद्र सनातनी, सह प्रमुख जितेंद्र रावत, बजरंग दल संयोजक राकेश उप्पल, सह संयोजक संयम सहित संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। समारोह के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से ओत-प्रोत वातावरण बना रहा। जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजन ने श्रद्धालुओं में धार्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्व की भावना को भी मजबूत किया। महंत मनोज शर्मा मनु जी महाराज ने कहा कि धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समारोह का संदेश स्पष्ट है कि सनातन संस्कृति की परंपराओं को आगे बढ़ाने तथा राष्ट्रहित में समाज को संगठित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर दयोड़ से हणोगी के बीच बनी टनलों को लेकर बड़ी राहत की खबर है। NHAI अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने टनल का निरीक्षण किया और ट्रायल लिया। NHAI ने एक टनल को अगले कुछ दिनों में ट्रायल बेस पर यातायात के लिए खोलने की तैयारी की है। शुरुआत में इसी एक टनल से दोनों तरफ के वाहन चलाए जाएंगे। दूसरी टनल का काम बाद में पूरा किया जाएगा। हणोगी के पास पहाड़ी खिसकने से टनल के करीब 24 मीटर हिस्से को नुकसान पहुंचा था। इसकी मरम्मत पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। टनल खुलने से कुल्लू-मनाली जाने वाले लोगों को पुराने खतरनाक और भूस्खलन वाले हाईवे से काफी राहत मिलेगी। साथ ही सफर भी आसान और सुरक्षित होने की उम्मीद है। दशहरे से पहले टनल शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कांगड़ा: जसवां-परागपुर के चलाली में सोमवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां HRTC बस और बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में 20 वर्षीय कॉलेज छात्र दीपक भारद्वाज की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दीपक रोज की तरह बाइक पर ढलियारा स्थित शिक्षण संस्थान जा रहा था। चलाली के एक तीखे मोड़ पर उसकी बाइक सामने से आ रही HRTC बस से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक की मौके पर ही जान चली गई। सूचना मिलते ही मोइन पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए देहरा अस्पताल भेजा। पुलिस ने हादसे में शामिल HRTC बस को भी कब्जे में ले लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस जगह पर पहले भी हादसे हो चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से स्पीड ब्रेकर और चेतावनी वाले साइन बोर्ड लगाने की मांग की है, ताकि आगे ऐसे हादसे रोके जा सकें।
शिमला: हिमाचल में कृषि उपकरणों पर सब्सिडी लेने वाले किसानों के लिए व्यवस्था बदल दी गई है। अब सिर्फ आवेदन करने से सब्सिडी मिलना तय नहीं होगा। अगर तय लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं तो कृषि विभाग लॉटरी के जरिए किसानों का चयन करेगा। पहले सब्सिडी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलती थी। नई व्यवस्था से किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि अब सब्सिडी मिलना किस्मत पर निर्भर हो गया है। एक किसान एक साल में अधिकतम दो कृषि उपकरणों के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद पांच साल तक दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा। योजना के तहत ट्रैक्टर, पावर टिलर, पावर वीडर, क्रॉप रीपर और रोटावेटर जैसे उपकरणों पर सब्सिडी दी जाती है। पात्र किसानों को उपकरणों पर 40 से 50 फीसदी तक अनुदान मिलता है। किसान नेताओं ने लॉटरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि सब्सिडी का लाभ आवेदन और जरूरत के आधार पर मिलना चाहिए, लॉटरी के भरोसे नहीं।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय में कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात मिली है। सचिवालय में कार्यरत 18 सीनियर असिस्टेंट को सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के पद पर पदोन्नति दी गई है। इस प्रमोशन के बाद अब ये कर्मचारी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेशों के तहत इन कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे सीनियर असिस्टेंट अब सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के तौर पर विभागीय कामकाज को आगे बढ़ाएंगे। प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों में भी खुशी का माहौल है। नई जिम्मेदारी के तहत पदोन्नत कर्मचारियों को कार्यालयी कार्यों की निगरानी, फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण काम संभालने होंगे। इससे सचिवालय के कामकाज में भी जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा होने की उम्मीद है। प्रमोशन को कर्मचारियों के अनुभव और सेवाओं की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों ने इसे अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।
धर्मपुर क्षेत्र के जाबली में गुरुवार सुबह तेज बारिश के दौरान अचानक भारी मात्रा में पानी दुकान की ओर आ गया। पानी का तेज बहाव देखकर दुकान में मौजूद दुकानदार ने बिना देर किए बाहर भागकर अपनी जान बचाई! घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दुकानदार जैसे ही दुकान से बाहर निकलता है, उसके कुछ ही सेकंड बाद दुकान के ऊपर से पानी का तेज सैलाब नीचे की ओर आता है। अचानक आए पानी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि सुबह हुई भारी बारिश के बाद जाबली और आसपास के इलाकों में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई। फोरलेन की ओर से बहकर आया बारिश का पानी दुकानों तक पहुंच गया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बारिश के कारण धर्मपुर क्षेत्र में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर पानी और मलबे के कारण आवाजाही बाधित हुई है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। जाबली की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के दौरान कुछ ही मिनटों में हालात किस तरह खतरनाक हो सकते हैं।
सोलन: हिमाचल प्रदेश के फार्मा हब बद्दी-नालागढ़ में नशे के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बड़ी कार्रवाई की है। NCB की चंडीगढ़ यूनिट ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 25 लाख नशीली/आदत लगाने वाली दवाओं की गोलियां और 2,000 किलोग्राम से अधिक टैपेंटाडोल बरामद किया है। यह कार्रवाई सोमवार देर रात शुरू हुई और मंगलवार शाम तक जारी रही। NCB टीम ने नालागढ़ के जगातखाना गांव में किराये पर ली गई तीन दुकानों और बद्दी स्थित एक अनधिकृत गोदाम समेत कई स्थानों की तलाशी ली। कार्रवाई में हिमाचल प्रदेश राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन के छह ड्रग इंस्पेक्टर और पंजाब पुलिस के एक विशेषज्ञ ने भी सहयोग किया। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। छापेमारी के बाद NCB ने फार्मा कंपनी के मालिक गौरव अग्रवाल को बद्दी स्थित उसके आवास से हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई के दौरान करीब 25 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए। एजेंसी अब दवाओं के निर्माण, भंडारण और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। NCB को शक है कि वैध चिकित्सा इस्तेमाल के लिए बनाई जाने वाली दवाओं को कथित तौर पर अवैध बाजार में पहुंचाने वाला बहुराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग डायवर्जन नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसी दवाओं की सप्लाई, खरीद-बिक्री, वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल को भी खंगाल रही है। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में नशीली और नकली दवाओं को लेकर पहले भी कई बड़ी कार्रवाई हो चुकी हैं। हाल के दिनों में भी बड़ी मात्रा में नशीली गोलियां और दवाएं बरामद की गई हैं। इससे फार्मा हब में दवाओं के कथित अवैध डायवर्जन को लेकर सुरक्षा और नियामक एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल NCB की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं कहां सप्लाई की जानी थीं और इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पांवटा साहिब (सिरमौर): सिविल अस्पताल पांवटा साहिब की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है जानकारी के मुताबिक, गिरिपार क्षेत्र के बाईला-गुजोन गांव की मुंगा देवी अस्पताल के फीमेल वार्ड में उपचाराधीन हैं। परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे उनका ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी स्टाफ से नया सिलिंडर लगाने का आग्रह किया, लेकिन करीब 5 बजे तक ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान वृद्धा को सांस लेने में परेशानी होती रही। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने दोबारा ऑक्सीजन लगाने की मांग की तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और पुलिस बुलाने की धमकी दी गई। एक शिकायत में तीमारदारों को वार्ड के दरवाजे से बाहर धक्का देने और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिजनों का दावा है कि कथित बदसलूकी की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उनके पास है। अस्पताल में तत्काल सुनवाई नहीं होने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और ऑक्सीजन सिलिंडर बदलकर वृद्धा को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई गई। मामले को लेकर परिजनों ने अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नाहन डॉ. राकेश प्रताप ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो इसकी जानकारी जुटाकर तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में ऑक्सीजन उपलब्द करवाने में हुई देरी और नर्स पर लगाए गए बदसलूकी के आरोपों की जांच बाकी है I सम्बंधित स्टाफ पक्ष सामने आने के बाद ही स्तिथि पूरी तरह स्पष्ट होगी I
धर्मशाला: तिब्बती लोकतंत्र की स्थापना के 66 वर्ष पूरे होने पर धर्मशाला में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में हुए इस कार्यक्रम में तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास और परम पावन दलाई लामा के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से मेधावी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही तिब्बती कलाकारों और बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग भर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद लोगों का खूब ध्यान खींचा। कार्यक्रम के दौरान तिब्बती संस्कृति, परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग पेपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती लोकतंत्र दलाई लामा की दूरदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक लोकतंत्र के इन मूल्यों को पहुंचाना सभी तिब्बतियों की जिम्मेदारी है। बताया गया कि 2 सितंबर 1960 को पहली तिब्बती जनप्रतिनिधि सभा के गठन के साथ तिब्बती लोकतांत्रिक सरकार की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1991 में निर्वासित तिब्बती प्रशासन को लिखित संविधान आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदला गया और वर्ष 2001 से राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के अंत में निर्वासित तिब्बती संसद ने भारत सरकार और भारतीय जनता के सहयोग के लिए आभार जताया और दलाई लामा की दीर्घायु तथा तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की कामना की।
NSP पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रवृत्ति के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पात्र विद्यार्थी एक मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के साथ-साथ पात्रता पूरी करने पर एक से अधिक कल्याणकारी छात्रवृत्तियों का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार ने मौजूदा ‘वन स्टूडेंट-वन स्कॉलरशिप’ व्यवस्था को बदलकर ‘वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप’ करने का फैसला लिया है। यानी अगर कोई विद्यार्थी पहले से कल्याणकारी छात्रवृत्ति ले रहा है और बाद में मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे मेरिट छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह मेरिट छात्रवृत्ति लेने वाला विद्यार्थी पात्रता पूरी करने पर कल्याणकारी छात्रवृत्ति भी ले सकेगा। वहीं विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी आसान की गई है। पहली बार आवेदन करते समय भरी गई सामान्य जानकारी को आगे के आवेदनों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। बाद के आवेदनों में विद्यार्थी को केवल संबंधित योजना की जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अगर आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो विद्यार्थी को योजना से जुड़ी जानकारी में सुधार का मौका दिया जाएगा। वहीं सामान्य शैक्षणिक या संस्थान संबंधी जानकारी में बदलाव करने के लिए पहले जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे। नए प्रावधान के तहत संस्थानों के नोडल अधिकारियों को भी विद्यार्थी के सभी छात्रवृत्ति आवेदनों और उनकी स्थिति दिखाई देगी। इससे आवेदन के सत्यापन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों को इन नए नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थानों से कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, प्रार्थना सभा और जागरूकता अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को जानकारी दी जाए और निर्धारित समय सीमा में आवेदन करवाए जाएं। यानी 2026-27 से विद्यार्थियों को ज्यादा छात्रवृत्ति के अवसर मिलने के साथ-साथ आवेदन प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान होने वाली है।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में मंगलवार को मूसलाधार बारिश के बीच बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. नाहन विकासखंड की बर्मा पापड़ी पंचायत में रूण नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव में फंसे बुजुर्ग बनारसी दास को सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया. वहीं, बुजुर्ग को बचाने के लिए नदी में उतरा युवक अंशुल भी कई घंटे तक नदी के बीच फंसा रहा, जिसे बाद में रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया. सीस मामले में नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से संपर्क किया गया. इसके बाद सेना से सहायता मांगी गई और सहारनपुर से एमआई-17 हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए पहुंचा. विधायक के मुताबिक रेस्क्यू के समय अंधेरा हो चुका था, लेकिन हेलीकॉप्टर रात में भी रेस्क्यू उड़ान भरने में सक्षम था. बुजुर्ग को सुरक्षित निकाल लिया गया है और युवक अंशुल को भी रेस्क्यू टीम की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के माहूंनाग के समीप बुधवार सुबह एक सड़क हादसा हुआ I जिसमे कार पलटने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताएं जा रहे है । हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है। जानकारी के अनुसार कार माहूंनाग के समीप अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसा होते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वाहन में सवार घायलों को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। हादसे में मोहन सिंह मेहरन की मौत हो गई। वहीं विनीत और चुड़ामणी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी। डीएसपी करसोग चांद किशोर ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
माैसम विभाग के अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने कहर बरपाया है। भूस्खलन से कई सड़कें बाधित है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है I सबसे दर्दनाक घटना बिलासपुर से सामने आई है। यहां पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आने से एक गौशाला क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें बंधी गाय की मौत हो गई। भारी बारिश के कारण नेशनल हाईवे-305 को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं नाहन-ददाहू सड़क पर नेहली के पास भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित हुआ है। बारिश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटों में नैना देवी में सबसे ज्यादा 186.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मलरांव में 140, कसौली में 102 और घाघस में 99 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। लगातार बारिश और भूस्खलन को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
खेतों में खड़ी फसल और जंगलों के बीच बढ़ती हाथियों की आवाजाही नई चुनौती बनती जा रही है। उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर पांवटा साहिब से नाहन तक पहुंच रहे जंगली हाथियों को सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाथियों की लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा। सिरमौर में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से यमुना नदी का जलस्तर कम होने के दौरान उत्तराखंड की तरफ से हाथी सिरमौर की सीमा में प्रवेश करते रहे हैं। पहले हाथियों की आवाजाही मुख्य रूप से बातामंडी, बहराल और सतीवाला तक सीमित रहती थी, जहां वे गन्ने और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद लौट जाते थे। अब हाथियों की आवाजाही पांवटा साहिब से लेकर नाहन सीमा तक देखी जा रही है। हाथियों की बदलती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। उनके आने-जाने के पारंपरिक रास्तों, ठहरने वाले स्थानों और पसंदीदा क्षेत्रों का डाटा जीपीएस और आधुनिक मैपिंग टूल्स की मदद से जुटाया जा रहा है। इस डाटा को डिजिटल रूप में तैयार कर हाथियों के वास्तविक मूवमेंट रूट को चिह्नित किया जाएगा। इसी आधार पर प्रस्तावित कॉरिडोर की भौगोलिक सीमाएं तय होंगी। हाथियों के संरक्षण की दिशा में हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2024 में प्रोजेक्ट एलिफेंट में नामित किया जा चुका है। इसके बाद मानव और हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क से सटे सिरमौर के जंगलों में पानी की उपलब्धता, घना वन क्षेत्र और अनुकूल वातावरण हाथियों को आकर्षित कर रहा है। पांवटा साहिब के वन मंडलाधिकारी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि एलिफेंट कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद हाथियों के संरक्षण के लिए केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है। वर्ष 2024 से अब तक हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। कोलर के समीप रात के समय हाथी के हमले में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई थी। वहीं, वर्ष 2024 में पानीवाला खाला-सैनवाला के समीप जंगली हाथी ने शिलाई क्षेत्र के एक भेड़पालक पर हमला किया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। हाथियों की बढ़ती दस्तक का सीधा असर किसानों की खेती पर भी पड़ा है। इस वर्ष बहराल, सतीवाला, बातामंडी और माजरा-सतीवाला में हाथियों द्वारा आम के बगीचों और धान की फसल को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए हैं। बातामंडी, बहराल और पातलियां क्षेत्र में पिछले करीब एक दशक से हाथियों के डर के कारण कई किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ दी है या इसका रकबा काफी कम कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश में जंगली भालुओं के हमलों में तीन साल की अवधि में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस दौरान प्रदेश भर में 93 लोग घायल हुए हैं. सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा व शिमला हैं. ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सामने आई है. ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में भालुओं के हमलों में घायल व जान गंवाने वाले लोगों को लेकर जानकारी मांगी थी. साथ ही वे जानना चाहते थे कि सरकार भालुओं के हमलों को रोकने के लिए क्या उपाय कर रही है? क्या सरकार भालुओं के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने व रोकथाम के उपायों पर विचार कर रही है? कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि तीन साल की अवधि में राज्य में विभिन्न जिलों में 93 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं और छह ने अपनी जान गंवाई है. जिला चंबा में तीन साल की अवधि में 35 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए और दो लोगों की जान चली गई. सिरमौर जिला में केवल दो लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए. कांगड़ा में दो लोगों की भालुओं के हमले में मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं. सिरमौर में इन हमलों में दो व जिला सोलन में एक व्यक्ति घायल हुआ है. जिला शिमला में रामपुर क्षेत्र में भालुओं का काफी आतंक है. शिमला में तीन साल में 34 लोग घायल हुए व दो की इन हमलों में मृत्यु हो गई. बिलासपुर, हमीरपुर व लाहौल-स्पीति जिला में भालुओं का आतंक नहीं है. किन्नौर में भी तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने का मामला दर्ज है. इसके अलावा जिला कुल्लू में 11 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं. सरकार की तरफ से बताया गया कि भालु प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास व उनके भोजन के स्रोतों को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे भोजन की तलाश में बस्तियों में न आएं. संवेदनशील इलाकों में बचाव व क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है. जरूरत के अनुसार इलाकों में कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की तरफ से स्मार्ट स्टिक व बजर उपलब्ध करवाए गए हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को भालुओं के हमलों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं.
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान मंगलवार को पेंशनरों के बड़े प्रदर्शन का गवाह बना। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई आक्रोश रैली के दौरान पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण चौड़ा मैदान के आसपास यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। व्यवस्था संभालने पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों के बीच इस दौरान बहस भी हुई। पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को 40 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का लाभ देने की अधिसूचना जारी करना शामिल है। इसके अलावा पेंशनर 166 माह के पे एरियर्स और पेंशन एरियर्स का भुगतान तथा 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। 31 जुलाई तक अधिसूचना जारी करने का दिया था आश्वासन पेंशनर नेताओं के अनुसार सरकार के साथ 13 मई को हुई बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा हुई थी। नेताओं का कहना है कि बैठक में सरकार की ओर से संबंधित मांगों की अधिसूचना 31 जुलाई तक जारी करने का आश्वासन दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पेंशनरों में नाराजगी बढ़ गई। इसी के विरोध में मंगलवार को चौड़ा मैदान में आक्रोश रैली आयोजित की गई। पेंशनर नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी लंबित देनदारियों का भुगतान नहीं किया जाता और मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनरों की लंबित देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। पेंशनर नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले समय में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव का भी ऐलान किया जा सकता है।
स्मार्ट मिटर लगाने पहुंची बिजली बोर्ड की टीम से विवाद, महिला ने JE को जड़ा थप्पड़ , मौके पर मचा हंगामा
हमीरपुर जिले के उझाण पटेरा गांव में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया, जब बिजली बोर्ड की टीम उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलने पहुंची। स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते बिजली बोर्ड कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बहसबाजी शुरू हो गई। इसी दौरान एक महिला ने बिजली बोर्ड के कनिष्ठ अभियंता (जेई) को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर काफी देर तक तनाव और विवाद की स्थिति बनी रही। जानकारी के मुताबिक बिजली बोर्ड की टीम गांव में पुराने बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित करने के लिए पहुंची थी। इसी दौरान ग्रामीणों के एक वर्ग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। कर्मचारियों ने मीटर बदलने की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत धीरे-धीरे तीखी बहसबाजी में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ने के दौरान एक महिला और बिजली बोर्ड कर्मचारियों के बीच तीखी कहासुनी हुई। इसी बीच महिला ने जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद बिजली बोर्ड कर्मचारियों में भी रोष फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। र्ड के जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर हंगामा हो गया और कर्मचारियों व ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुछ उपभोक्ता मीटर बदलने की प्रक्रिया और बिजली बिल को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर बिजली बोर्ड की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जारी है। उझाण पटेरा गांव में हुई घटना ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। अब मामले में पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई पर लोगों की नजर है। एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
धर्मशाला। बोर्ड परीक्षाओं में शामिल करने के लिए विद्यार्थियों का ‘डमी एडमिशन’ करवाने वाले स्कूल अब हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के रडार पर आ गए हैं। बोर्ड ऐसे निजी व सरकारी संबद्ध स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि छात्रों को नियमित कक्षाओं में पढ़ाए बिना सीधे बोर्ड परीक्षा में बिठाने की व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं होगी। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि डमी एडमिशन की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही साबित होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का सही और अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाजिरी रजिस्टर में किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत जानकारी देने को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि पंजीकृत छात्र वास्तव में कक्षाओं में आकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में डमी दाखिले की बढ़ती प्रवृत्ति पर बोर्ड ने चिंता जताई है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र विकास के लिए नियमित कक्षा-अध्ययन, प्रायोगिक कार्य और शिक्षक मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। केवल कागजी दाखिला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने छात्रों व अभिभावकों से ऐसे संस्थानों के झांसे में न आने की अपील की।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी में विजिलेंस ने एक महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. बरोटीवाला पटवार सर्कल में तैनात महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया. जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि महिला पटवारी लैंड वेल्यू प्रमाण पत्र बनाने की एवज में रिश्वत मांग रही है.इस पर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दे दी. बाद में विजिलेंस ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से महिला पटवारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया, शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच-पड़ताल की और शिकायत को सही पाए जाने पर जाल बिछाया. विजिलेंस थाना बद्दी की टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला पटवारी को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर पकड़ लिया. टीम ने कथित रिश्वत की राशि को भी कब्जे में ले लिया है. विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी गई है. जांच में रिश्वत मांगने के कारणों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है. विजिलेंस के आईजी बिमल गुप्ता ने बताया कि आरोपी महिला से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं. विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. वही तहसीलदार सतेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी महिला पटवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कांगड़ा सहित कई जिलों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। कांगड़ा में कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 4 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और सड़कें प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों और प्रशासन को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। कांगड़ा में बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
शिमला: तीन दिन के अवकाश के बाद हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में आज (सोमवार, 31 अगस्त को) एक बार फिर सदन की कार्यवाही शुरू होगी. सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे बाद प्रश्नकाल से शुरू होगी. इस दौरान सता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक देखने को मिल सकती है. शून्यकाल के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सप्ताह की शासकीय कार्यसूची की जानकारी सदन में रखेंगे. साथ ही कुछ कागजात भी पटल पर रखेंगे. किसानों को यूरिया की खरीद के साथ नैनो यूरिया प्लस लेने के लिए कथित तौर पर मजबूर किए जाने के मामले पर सदन मे विपक्ष हंगामा कर सकता है. वहीं, नियम-130 के तहत युवाओं के लिए रोजगार से संबंधित गारंटी के कार्यान्वयन पर भी सदन में विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है. भाजपा विधायक रणधीर शर्मा, सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल, डॉ. हंसराज और जीत राम कटवाल प्रस्ताव करेंगे कि 'युवाओं के लिए रोजगार संदर्भित गारंटी के कार्यान्वयन बारे' सदन विचार करे. सदन में प्रदेश के जल संसाधनों और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े राजस्व का मुद्दा भी उठेगा. विधायक केवल सिंह पठानिया नियम 130 के तहत रॉयल्टी, फ्री पावर और जल उपकर के बकाया भुगतान की वसूली और प्रदेश के राजस्व हितों के संरक्षण पर चर्चा का प्रस्ताव रखेंगे. तीन दिन के अवकाश के बाद लौट रहे सदन में एक ओर प्रश्नकाल के दौरान विधायकों के सवाल सरकार के सामने होंगे. वहीं, नियम 62 और 130 के तहत प्रस्तावित मुद्दे कार्यवाही को खासा महत्वपूर्ण बना सकते हैं.
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों पर खर्च करने के मामले को लेकर सरकार हाईकोर्ट का रुख करेगी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान उठे मामले का जवाब देते हुए कहा कि हिमाचल में जगह-जगह मंदिर हैं, जिनमें से करीब तीन दर्जन मंदिर सरकार के अधीन हैं। उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी और चामुंडा माता जैसे बड़े मंदिरों में काफी मात्रा में चढ़ावा आता है। इन मंदिरों की आय से पहले सामाजिक कार्यों और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में आर्थिक मदद दी जाती रही है। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से इस तरह चढ़ावे की राशि खर्च करने पर बंदिशें लगाई गई हैं। सरकार फिलहाल पूरे मामले का कानूनी अध्ययन कर रही है। इसके बाद सरकार इस संबंध में हाईकोर्ट में पिटीशन दायर करेगी, ताकि मंदिरों के चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों में इस्तेमाल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में कुल्लू अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला रजनी शर्मा उर्फ मंजू शर्मा की मौत का मामला जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने मामले की जांच और अस्पताल प्रशासन की भूमिका को लेकर सरकार से जवाब मांगा। जयराम ठाकुर ने पूछा कि क्या जांच में चिकित्सीय अथवा प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है? यदि लापरवाही पाई गई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में अलग-अलग जांचों के निष्कर्ष आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमएस की जांच और एसडीएम की जांच रिपोर्ट में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आखिर सही रिपोर्ट कौन सी है और जो जांच अभी विचाराधीन है, वह कब पूरी होगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि मामला गंभीर है और डॉक्टर के व्यवहार को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। उन्होंने ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार अस्पताल प्रशासन ने भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर लोगों में रोष है और मामले में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। स्वास्थ्य मंत्री बोले- जांच जारी, जिम्मेदार डॉक्टर निलंबित स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने सदन में घटना को दुखद बताते हुए मृतका के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सीय प्रणाली से जुड़ा मामला है और इसकी विवेचना जारी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मामले में दो स्तर पर जांच कराई गई है। एक जांच अस्पताल स्तर पर और दूसरी स्वतंत्र जांच के उद्देश्य से कराई गई, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से पड़ताल हो सके। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार डॉक्टर को निलंबित किया गया है और जांच अभी जारी है। ये भी पढ़ें


















































