यूएमबी मिसेज इंडिया की प्रथम रनर-अप अक्षिता शर्मा ने आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भेंट की और प्रतियोगिता के बारे में अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने अक्षिता को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बधाई दी और हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके राज्य को गौरवान्वित कर रही हैं। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं। मूल रूप से शिमला जिले के रोहड़ू की रहने वाली अक्षिता शर्मा वर्तमान में चंडीगढ़ में बैंकर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने शिमला के तारा हॉल स्कूल से अपनी स्कूल की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात पंजाब विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। भेंट के दौरान अक्षिता के साथ उनके पति प्रद्युत सुंटा, उनका बेटा अबीर और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।
** सीएम ने मंडी जिला के वरिष्ठ नेताओं के साथ विकासात्मक मुद्दों पर की चर्चा मुख्यमंत्री सुक्खू ने आज ओक ओवर शिमला में मंडी जिला के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ जिला से संबंधित विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी जिला के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और राज्य सरकार की सभी विकासात्मक योजनाओं का लाभ जिला के लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल नेरचौक में प्राथमिकता के आधार पर सुविधाएं उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करेगी। इस अस्पताल में जल्द ही एमआरआई मशीन स्थापित की जाएगी, ताकि यहां आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी राजकीय डे बोर्डिंग स्कूल का निर्माण चरणबद्ध तरीके से कर रही है और मंडी जिला में इन स्कूलों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों को सुविधा प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और विद्युत बोर्ड के अलग-अलग मंडल बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विधवाओं के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने के लिए मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना शुरू की है तथा सभी नेता अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में ऐसी सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम जन तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। बैठक के दौरान सभी विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्र की प्राथमिकताएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं और उन्हें अगले वित्तीय वर्ष के बजट में इन्हें शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं कार्यन्वित कर रही है और मंडी जिला के नेता इन योजनाओं को लोगों के बीच ले जाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि सभी नेता मजबूती के साथ राज्य सरकार का पक्ष लोगों के बीच में रखेंगे। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मात्र सिराज विधानसभा क्षेत्र के विकास पर ध्यान दिया गया और अन्य सभी विधानसभा क्षेत्रों के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया। बैठक में विधायक चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह एवं प्रकाश चौधरी, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, पूर्व विधायक सोहन सिंह ठाकुर, कांग्रेस नेता चंपा ठाकुर, लाल सिंह कौशल, नरेश चौहान, पवन ठाकुर, एडवोकेट जीवन ठाकुर, चेत राम ठाकुर और महेश राज उपस्थित थेे।
** 'मन की बात' कार्यक्रम ने देशवासियों की अपेक्षाओं को दिया एक नया मंच शिमला: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी बयान में कहा कि 'मन की बात' कार्यक्रम में देश और देशवासियों की अपेक्षाओं को एक नया मंच दिया है, जिसके माध्यम से लोग प्रधानमंत्री से और प्रधानमंत्री लोगों से अपील कर अपनी बातें कहते हैं। इन अपील का समाज पर बहुत व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। देश में स्वच्छता हो या पर्यावरण के प्रति जागरूकता या देश के विकास में सहभागिता प्रधानमंत्री के आह्वान पर पूरा देश उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल पड़ता है। जिसका लाभ यह है कि जो काम हजारों करोड़ों रुपए खर्च करके भी नहीं किए जा सकते वह काम जनजागरण और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से ही संपन्न हो जाते हैं। 'एक पेड़ मां के नाम' का अभियान की पर सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रियता का प्रमाण है। देश भर में मात्र 5 महीने में अब तक 100 करोड़ से ज्यादा पेड़ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत लगाए जा चुके हैं। सबसे सुखद पहलू है कि लोग उन पेड़ों की रखवाली भी स्वयं करते हैं जिन्हें लगाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ही 100 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाना और लोगों द्वारा उनका स्वयं संरक्षण करना पर्यावरण के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है। इसके लिए जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री के इस मार्गदर्शन हेतु मानवता आभारी रहेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ' मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से जितने भी विषय प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए हैं उसमें समस्त देशवासियों का संपूर्ण सहयोग और सहभागिता प्राप्त हुई है, जिसकी वजह से देश में एक के बाद एक बड़े जन भागीदारी के कार्यक्रम प्रारंभ हुए और बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति हुई। स्वच्छता से जुड़े तमाम कार्यक्रम इसके उदाहरण हैं। जब प्रधानमंत्री के आह्वान मात्र से भी देश के करोड़ों लोग आगे आए और असंभव से लगने वाले लक्ष्य आसानी से हासिल हो गए। आज देश में छुपी हुई नायाब प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें मंच प्रदान करने का यह काम प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से हो रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश ही नहीं विदेश में भी भारत- भारतीयता और मानव- मानवता से जुड़े विभिन्न पहलू हर रोज सामने आते रहते हैं। चेन्नई की क्रिएटिव लर्निंग का हब बन चुकी लाइब्रेरी प्रकृति आरिवागम हो, या जैव विविधता को बढ़ाने के लिए गौरैया बचाने के अभियान हो या कतरनों से कपड़ा बनाने के अभिनव और पर्यावरण हितैषी प्रयोग। प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें अपने मंच पर जगह देने से जहां ऐसे लोगों को प्रोत्साहन मिलता है तो ऐसे कार्यकलाप करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आगे आते हैं। 'मन की बात' दुनिया का सेव सफल जन संवाद कार्यक्रम है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश में राजनीति को नई दिशा और दशा देने के लिए युवाओं के अत्यधिक सहभागिता की आवश्यकता है। जिसको ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से भी कहा था कि वह राजनीति में ऐसे सक्षम और प्रतिभावान युवाओं को लाएंगे जिनके परिवार का राजनीति से कोई लेना देना नहीं होगा। उसी के दृष्टिगत अगले साल जब पूरा देश स्वामी विवेकानंद की 162वीं जयंती मना रहा होगा तो प्रधानमंत्री देश की राजनीति में एक लाख से ज्यादा युवाओं को राजनीति में लाने के लिए विशेष अभियान चलाएंगे। उनका यह प्रयास आने वाले समय में भारत की राजनीतिक विरासत को संजोने, संवारने, आगे बढ़ाने और समृद्ध करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज ओक ओवर, शिमला में डॉ. राकेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवनवृत्त’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को सरदार पटेल के व्यक्तित्व, भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान को गहराई से समझने का अवसर प्राप्त होगा। डॉ. राकेश कुमार शर्मा हमीरपुर जिले के निवासी हैं और वर्तमान में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर), नई दिल्ली में शोधार्थी के रूप में कार्यरत रहे डॉ. शर्मा ने सरदार पटेल के जीवन और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेलः जीवन दर्शन और राष्ट्र निर्माण में भूमिका’ (2022), ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय’ (2024), और ‘आयरन मैन सरदार वल्लभभाई पटेलः स्वराज संग्राम और राष्ट्रीय एकीकरण में भूमिका’ (2023) शामिल हैं। इस अवसर पर विधायक चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी, डॉ. राकेश कुमार शर्मा की पत्नी रेखा शर्मा और उनकी बेटियां स्वास्तिका और अर्जिका भी उपस्थित थीं।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने से बड़ी संख्या में सैलानियों ने हिमाचल के पर्यटन स्थलों का रुख करना शुरू कर दिया है। वीकेंड पर प्रदेश के पर्यटन स्थल सैलानियों से गुलजार हो गए हैं। दिल्ली के दफ्तरों में वर्कफ्रॉम होम शुरू होने के बाद कई सैलानियों ने होम स्टे के लिए संपर्क कर लंबे समय के लिए कमरों की बुकिंग को लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वीकेंड पर शिमला, मनाली, कुल्लू और धर्मशाला में सैलानियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। शिमला में 60 से 70, मनाली में 40 से 60 और धर्मशाला में 40 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी पहुंच गई है। शनिवार को लाहौल-स्पीति की चंद्राघाटी और कोकसर में हुई ताजा बर्फबारी के बाद सैलानियों की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद दिल्ली के स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। इसके बाद हिमाचल में फैमिली ट्रिप पर आने वाले सैलानियों की संख्या भी बढ़ गई है। शुक्रवार को ही शिमला में सैलानियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। शनिवार को शहर की पार्किंगों में पर्यटक वाहनों के अलावा बाहरी राज्यों के टेंपो ट्रैवलर पार्क रहे। शहर के अंदर सबसे बड़ी लिफ्ट कार पार्किंग दोपहर एक बजे पैक हो गई और संचालकों ने एंट्री प्वाइंट पर पार्किंग फुल का बोर्ड लगा दिया। रिज मैदान और मालरोड पर पूरे दिन सैलानियों की खूब चहलपहल रही। धर्मशाला के होटलों में ऑक्यूपेंसी सामान्य दिनों में जहां 20 से 25 फीसदी चल रही है, वीकेंड पर 40 फीसदी तक पहुंच रही है। होटल एसोसिएशन धर्मशाला के अध्यक्ष अश्विनी बांबा ने बताया कि मैदानी इलाकों में स्मॉग से राहत के लिए मल्टीनेशनल कंपनियों के कर्मचारी वर्कफ्रॉम होम के लिए धर्मशाला के होम स्टे में पहुंचने शुरू हो गए हैं। कुल्लू के पर्यटन स्थल मनाली, मणिकर्ण, तीर्थन वैली, बंजार के जिभी और सोझा में सैलानियों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। होटलों की आक्यूपेंसी 40 से 60 फीसदी तक पहुंच गई है। सोलंग नाला में पर्यटक पैराग्लाइडिंग, ब्यास में रिवर राफ्टिंग और हॉट बैलून का आनंद ले रहे हैं। चंबा के डलहौजी और खज्जियार में भी पर्यटकों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है।
** मॉडल टेस्ट पेपर के साथ मॉक टेस्ट करवाएगा हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड नीट और जेईई की तैयारी में विद्यार्थियों की निशुल्क मदद करेगा। स्कूल शिक्षा बोर्ड मॉडल टेस्ट पेपर देगा और मॉक टेस्ट करवाएगा। यह मॉक टेस्ट परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भी फायदेमंद होंगे। शिक्षा बोर्ड से पास जिन-जिन स्कूलों ने सबद्धता प्राप्त की है, वहां पर पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए नीट-जेईई सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए मॉडल पेपर तैयार करेगा। इन मॉडल पेपरों से अभ्यर्थी मॉक टेस्ट देकर तैयारी का आकलन स्वयं कर सकेंगे। यह मॉडल पेपर स्कूलों की लॉगिन आईडी पर उपलब्ध करवाए जाएंगे। संबंधित स्कूलों के अभ्यर्थी अपने स्कूल प्रबंधन की लॉगिन आईडी से इन मॉक टेस्टों में हिस्सा लेकर नीट, जेईई सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी तैयारी का आकलन स्वयं कर सकेंगे। निशुल्क मॉडल पेपरों का स्कूलों के अतिरिक्त अन्य अभ्यर्थी प्रयोग नहीं कर सकेंगे। यह पेपर केवल स्कूलों की ही लॉगिन आईडी पर उपलब्ध होंगे। अलग-अलग तैयार किए जाने वाले मॉडल पेपरों में संबंधित विषय के प्रश्नों का ही अभ्यास करवाया जाएगा। अगर कोई अभ्यर्थी लॉगिन आईडी पर नीट का मॉक टेस्ट देना चाहेगा तो उसके लिए नीट के लिए प्रश्नपत्र उपलब्ध होंगे। इसी तरह अन्य विषयों के प्रश्नपत्रों के जरिए मॉक टेस्ट दिए जा सकेंगे। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड नीट और जेईई की तैयारी करने वाले स्कूलों के अभ्यर्थियों को निशुल्क कोचिंग देगा। इसके लिए शिक्षा बोर्ड मॉडल पेपर तैयार करेगा, जिन्हें स्कूलों की लॉगिन आईडी पर अपलोड किया जाएगा, जहां से अभ्यर्थी इन परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।
** विद्यार्थियों को मोबाइल फोन पर भेजे मैसेज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की सोमवार से प्रदेश भर में 46 केंद्रों में स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। इन परीक्षाओं के लिए विवि के दावे के अनुसार पहली बार 99 फीसदी एडमिट कार्ड ऑनलाइन अपलोड कर दिए हैं। छात्रों को एडमिट कार्ड को लॉग इन आईडी से डाउनलोड करने को लेकर उनके दिए नंबर पर मैसेज भी भेज दिए हैं। जिन परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड इंटरनल असेस्मेंट या किन्हीं अन्य कारणों से अपलोड नहीं हुए हैं, उसकी वजह भी मैसेज के माध्यम से भेजी गई है। छात्रों को इन कमियों को दूर करने के लिए परीक्षाएं शुरू होने से पूर्व अपने कॉलेज या विभाग में संपर्क करने को कहा गया है। इस परीक्षा में पूरे प्रदेश भर में बने केंद्रों में 35,500 विद्यार्थी अपीयर होंगे। इनमें 18,000 ऐसे हैं ,जो रेगुलर छात्र हैं। इसके अलावा 17,000 छात्र ऐसे हैं जो बतौर प्राइवेट परीक्षा में बैठेंगे या री अपीयर होंगे। नियमित छात्रों को ही आईए अवार्ड जरूरी होते हैं। इनमें से 99 फीसदी के रोल नंबर जनरेट कर दिए हैं। री अपीयर छात्रों की आईए पहले से एंटर होती है। प्राइवेट छात्रों की परीक्षा सौ अंक की होती है। इसलिए उनके रोलनंबर इंटरनल असेस्मेंट के कारण नहीं अटकते हैं। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल ने कहा कि इस बार ऑनलाइन जनरेट किए परीक्षा एडमिट कार्ड पर ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश मिलेगा। परीक्षा संचालन से संबंधित सभी तरह की समस्याओं के निपटारे के लिए अलग से बनाई निगरानी कमेटी से कॉलेज संपर्क कर सकते हैं, जिससे समस्या को तुरंत निदान हो। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने एमएड और बैचलर इन लाइब्रेरी साइंस और एम लिब कोर्स का परीक्षा शेड्यूल जारी कर दिया है। इसे विवि की वेबसाइट पर छात्रों के लिए अपलोड कर दिया गया है। इसके अनुसार एमएड और एम लिब की परीक्षाएं 10 से 18 दिसंबर तक होंगी। बी लिब की परीक्षाएं 7 से शुरू होकर 16 दिसंबर तक चलेंगी। जिनके एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं हो पाए हैं, उनमें अधिकतर इक्डोल विवि सेंटर फाेर डिस्टेंस एडं ऑनलाइन एजूकेशन (सीडीओई) के छात्र हैं। वे समय से सीडीओई में संपर्क कर शेष औपचारिकता को पूरा करवाएं। इससे परीक्षा से पहले उनके एडमिट कार्ड डाउनलोड हो सकेंगे। विवि में चल रहे पीजी कोर्स की परीक्षाएं जो 18 नवंबर से शुरू हुई थीं , वे संचालित की जा रही हैं। इसमें 13 विभागों के करीब 450 विद्यार्थी तय किए शेड्यूल के अनुसार परीक्षा दे रहे हैं।पीजी की 46 परीक्षा केंद्रों में शुरू हो रही स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स की परीक्षाओं की सभी तैयारियां पूरी कर दी गई हैं। एडमिट कार्ड ऑनलाइन अपलोड किए जाने के साथ ही छात्रों को मैसेज से सूचित कर दिया है। जिनके कोई समस्या है, वे छात्र समय रहते परीक्षा शुरू होने से पहले अपने संस्थान में संपर्क कर कमी को दूर करवाएं ।
हिमाचल प्रदेश में जल शक्ति विभाग की पेयजल स्कीमें ऑटोमेशन (स्वचालन) सुविधा से जुड़ेंगी। हाईटेक तकनीक से कौन से पेयजल टैंक और किस लाइन में कितना पानी सप्लाई हुआ है, यह सब कुछ पंप हाउस में बैठे-बैठे पता लग जाएगा। पानी की मात्रा की टैंक एवं पाइपलाइन में उपलब्धता के लिए चिह्नित की गई स्कीमों पर डिस्चार्ज मीटर लगाए जाएंगे। इससे पानी की मात्रा का पूरा आंकड़ा अधिकारियों के पास आएगा। पानी की कमी की सूरत में इन स्कीमों में पानी की भरपाई दूसरे टैंकों से की जा सकेगी। पेयजल स्कीमों में सिग्नल के आदान-प्रदान के लिए जीएसएम प्रणाली का सहारा लिया जाएगा। हाईटेक सुविधा से स्कीमों को जोड़ने के लिए जल शक्ति विभाग के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक मददगार बनेगा। प्रारंभिक चरण में हरोली क्षेत्र की योजनाओं पर ऑटोमेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है। बड़ी बात यह है कि आने वाले दिनों में टैंकों में ब्लीचिंग पाउडर डालने के झंझट से भी विभाग मुक्त हो जाएगा। इसके विकल्प में गैसेस क्लोरीनेशन के में पेयजल स्कीमों को लाया जाएगा। हालांकि, एडीबी के तहत प्रदेश की अन्य पेयजल योजनाओं को भी इस सुविधा के साथ जोड़ने का लक्ष्य है। शुरुआत में हरोली क्षेत्र में एडीबी के तहत 32.54 करोड़ रुपये से तैयार हुई रोड़ा, बालीवाल, हरोली और नगनोली आदि ग्राम पंचायतों की पेयजल सुविधाओं को इस तकनीक के साथ जोड़ने के मास्टर प्लान पर कार्य चल रहा है। विभिन्न पेयजल स्कीमों को ऑटोमेशन (स्वचालन) तकनीक से जोड़ने की दिशा में कार्य प्रक्रिया में है। हरोली की योजनाओं पर कार्य जारी है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से इस दिशा में चर्चा की गई है ओर उनके मार्गदर्शन में कार्य आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में स्वच्छ एवं सुचारू पेयजल सप्लाई हर गांव और घर तक होगी। सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है। प्रदेश में हाईटेक तकनीक से योजनाओं को जोड़ने का कार्य जारी है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग में नियुक्त करीब 4,800 मल्टी टास्क वर्करों के मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की है। इस संबंध में शनिवार को अतिरिक्त सचिव लोक निर्माण सुरजीत सिंह राठाैर की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। मल्टी टास्क वर्करों को अब 4500 रुपये बजाय 5000 प्रति माह मिलेंगे। सरकार ने लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को निर्देश दिए हैं कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इस संबंध में आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाए। बता दें, बीते दिनों की हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मानदेय बढ़ाने का फैसला लिया गया था।
** बोले, बोर्ड अध्यक्ष को हटा अपने हाथों में निगम की कमान लें मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के 18 होटल को बंद करने के हाइ कोर्ट के आदेश के बाद से प्रदेश में HPTDC के होटलों का मुद्दा लगातार गर्माया हुआ है, हालांकि हिमाचल हाई कोर्ट ने ताजा आदेशों में 18 में से 9 होटलों को 31 मार्च तक खोले रखने के आदेश दिए हैं मगर 9 होटल 25 नवंबर तक बंद करने के आदेश बरकरार हैं। इसको लेकर अब हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ ने सभी 18 होटलों को खुला रखने की अपील उच्च न्यायालय में करने की बात कही है। संघ ने सरकार और पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन आर एस बाली की कार्यप्राणी पर भी सवाल उठाए हैं। पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ ने निगम के के चेयरमैन आर एस बाली को हटाने की मांग करते हुए निगम की कमान मुख्यमंत्री से अपने हाथों में लेने की मांग की है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ का कहना है कि संघ उच्च न्यायालय में सभी 18 होटल को खुला रखने को लेकर याचिका दायर करेगा। उन्होंने कहा कि बंद किए गए होटल में से कई की होटलों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। ऐसे में इन होटलों को खुला रखना चाहिए। पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ का कहना है कि न्यायालय ने केवल ऑक्युपेंसी को आधार बनाकर अपना फैसला सुनाया है प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने सही ढंग से निगम का पक्ष अदालत के सामने नहीं रखा। पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ का कहना है कि बीते 4 से 5 दिनों से प्रदेश में पर्यटन निगम के होटल को लेकर बवाल मचा हुआ है लेकिन निगम के अध्यक्ष अभी तक सामने नहीं आए। कर्मचारी संघ का कहना है कि पर्यटन निगम के होटल जाने की स्थिति में है लेकिन उनकी ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। प्रेस वार्ता के दौरान हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ ने पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष को हटाने की मांग करते हुए निगम की कमान मुख्यमंत्री से अपने हाथों में लेने की मांग की।
हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन सड़क हादसों में लोग दम तोड़ रहे हैं। ताजा मामला शिमला जिले के उपमंडल रोहड़ू से सामने आया। रोहड़ू में शुक्रवार को एक गाड़ी सड़क हादसे का शिकार हो गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मृतक व्यक्ति रोहड़ू क्षेत्र के नासरी गांव का रहने वाला था। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बताया कि पुलिस को सुबह सूचना मिली कि सारी क्वाटर नामक स्थान पर एक गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को स्थानीय व्यक्ति राकेश कुमार ने बताया कि लगभग सुबह 9:30 बजे, जब वो सुंगरी में ढाबे के पास अन्य लोगों से बात कर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि नासरी रोड़ पर सारी क्वार्टर नामक स्थान पर एक गाड़ी सड़क से करीब 200-250 मीटर गहरी खाई में गिरी हुई थी, जिसके बाद वो लोग मौके पर पहुंचे। जहां उन्होंने देखा की एक गाड़ी (नंबर HP 10A 9723) सड़क दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। गाड़ी में एक व्यक्ति सवार था, जो कि गाड़ी से करीब 10 फीट नीचे घायल अवस्था में पड़ा हुआ था। घायल व्यक्ति को इलाज के लिए रोहड़ू अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक व्यक्ति की पहचान नरेश कुमार के रूप में हुई है। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बताया, रोहड़ू में सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। फिलहाल सड़क हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।
** 25 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ी कालका-शिमला विश्व धरोहर रेलवे ट्रैक पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय की टीम ने शनिवार सुबह शिमला रेलवे स्टेशन से पैनोरमिक विस्ताडोम ट्रेन का आखिरी ट्रायल किया गया। शिमला रेलवे स्टेशन से सात कोच वाली पैनोरमिक ट्रेन सुबह करीब 11:50 बजे कालका के लिए रवाना हुई। हालांकि, इसका निर्धारित समय सुबह 11:30 बजे था लेकिन तकनीकी खामी से ट्रेन लेट रवाना हुई। ट्रायल के दौरान ट्रेन की स्पीड भी 25 किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच रही। इस ट्रैक पर अन्य ट्रेनें भी 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार में चलती हैं। ट्रेन में नागरिक उड्डयन मंत्रालय समेत रेल बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि रेल सेक्शन के बीच ट्रेन को रोक कर जांच की जाएगी। इसी जांच पर चीफ कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीसीआरएस) मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। यह ट्रायल 24 नवंबर तक चलेगा। सीसीआरएस की रिपोर्ट आने के बाद ही रेल मंत्रालय पैनारमिक विस्ताडोम कोच को चलाने का निर्णय लेगा।
हिमाचल प्रदेश के पांच जिलों के ऊंचाई वाले भागों में आज बारिश-बर्फबारी का पूर्वानुमान है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से माैसम में यह बदलाव आने के आसार हैं। उधर, राज्य के चार स्थानों पर न्यूनतम तापमान माइनस में दर्ज किया गया है। बिलासपुर में हल्का कोहरा दर्ज किया गया है। माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 23 नवंबर को चंबा, कांगड़ा, किन्नाैर, कुल्लू व लाहाैल-स्पीति जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी की संभावना है। इससे आगामी तीन-चार दिनों में अधिकतम व न्यूनतम तापमान में 1-2 डिग्री की कमी आने की संभावना है। वहीं अन्य भागों में आगामी सात दिनों तक माैसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। शिमला में आज धूप खिली है। विभाग ने बिलासपुर और सुंदरनगर में सुबह और शाम के समय घना कोहरा छाए रहने का येलो अलर्ट जारी किया है। मंडी जिला प्रशासन बर्फबारी के दौरान किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने समस्त विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें बर्फबारी से पहले अपनी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्दियों के दौरान आपदा प्रबंधन के लिए हर विभाग एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। उनका मोबाइल नंबर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ साझा किया जाए। बताया कि बर्फबारी के अलर्ट के दौरान संबंधित क्षेत्र का कोई भी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्य क्षेत्र को छोड़कर न जाए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ऐसे स्थानों को चिह्नित करें, जहां बर्फबारी के दौरान अधिक सड़कें बंद होने की संभावना रहती है। वहां पर समय रहते जरूरी मशीनरी और ऑपरेटर तैनात किए जाएं। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि सर्दियों के दौरान जिले में चौहारघाटी, सराजघाटी, शिकारी देवी, कमरूनाग क्षेत्र, रोहांडा, बरोट, पराशर, थुनाग, जंजैहली और गाड़ागुसैणी इत्यादि क्षेत्रों में अत्यधिक बर्फबारी की संभावना रहती है।
हिमाचल में नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए राहत की खबर है। बिजली बोर्ड में युवाओं को नौकरी मिलने वाली है। सुक्खू सरकार बिजली बोर्ड में दैनिक वेतन पर टी मेट के 1030 पद भरने जा रही है। शिमला स्थित सचिवालय में प्रदेश सरकार, बिजली बोर्ड कर्मचारी एवं बिजली बोर्ड प्रबंधन के साथ बैठक आयोजित हुई, जिसमें जल्द औपचारिकताएं पूरी कर पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करने की निर्देश दिए गए। प्रदेश सचिवालय में आयोजित बैठक में सरकार की तरफ से प्रधान सचिव मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा सचिव राकेश कंवर, विशेष सचिव ऊर्जा अरिंदम चौधरी ने हिस्सा लिया। वहीं, बिजली बोर्ड प्रबंधन की ओर से निदेशक एमजी शर्मा, मनोज उपरेती और कार्यकारी निदेशक ईशा ठाकुर ने भाग लिया। ज्वाइंट फ्रंट की ओर से ई लोकेश ठाकुर, हीरा लाल वर्मा सहित 9 पदाधिकारियों ने भाग लिया। आधे घंटा तक चली इस बैठक में 66 केवी लाइन पूह से काजा का निर्माण कार्य बिजली बोर्ड को देने को लेकर चर्चा की गई। सरकार ने इस कार्य को बिजली बोर्ड से छीनकर संचार निगम को दे दिया है, जिस पर कर्मचारियों के ज्वाइंट फ्रंट ने सरकार से पुनर्विचार किए जाने की मांग की है। वहीं, बैठक में बिजली बोर्ड में समाप्त किए गए इंजीनियरों के 51 पदों के फैसले पर पुनर्विचार कर बहाल करने, बिजली बोर्ड से छंटनी किए 81 आउटसोर्स ड्राइवर के फैसले पर पुनर्विचार करने पर चर्चा हुई। इसको लेकर बोर्ड प्रबंधन को उचित निर्णय लिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त ज्वाइंट फ्रंट ने बिजली बोर्ड में पुरानी पेंशन के फैसले को लागू करने की भी मांग रखी, जिस पर सरकार की तरफ से कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का भरोसा दिया गया है। वहीं, कैबिनेट सब कमेटी की सिफारिशों को ज्वाइंट फ्रंट के साथ चर्चा कर सहमति से ही लागू किए जाने का भी आश्वासन दिया गया है। इसके अतिरिक्त बैठक में बिजली बोर्ड एवं कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दो जैसे उदय योजना, बोर्ड की वित्तीय स्थिति और बोर्ड के कार्य के बारे में फैसला लिए जाने को लेकर भी चर्चा हुई।
हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए हिप्पा शिमला में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने हिमाचल प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए स्कूलों की क्लस्टरिंग करने और अपना विद्यालय योजना जैसे विभिन्न फैसलों के बारे में जानकारी दी। समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल की उपयोगिता पर चर्चा की। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा, हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों की क्लस्टरिंग का फैसला संसाधनों को साझा करने के मकसद से लिया है, जिससे उनका इस्तेमाल बच्चों के हित के लिए किया जा सके। इस फैसले से स्कूलों में न तो किसी की पोस्ट खत्म होगी और न ही किसी की प्रमोशन रुकेगी। क्लस्टर सिस्टम लागू करने का मकसद यही है कि हम बच्चों के लिए कैसे बेहतर कर सकते हैं। हालांकि कई स्कूलों में कुछ शिक्षक पहले से ही ये काम कर रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा लिखित निर्देश जारी करने के पीछे सिर्फ यही मंशा है कि इस तरह के शिक्षकों को ऐसा माहौल मिले कि वे अपना काम बिना किसी बाधा के पूरा कर सकें। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने ये भी साफ कर दिया कि इन निर्देशों में ये कहा गया है कि जहां तक संभव हो, वहां क्लस्टर बनाकर स्कूल अपने संसाधनों को शेयर करें। ऐसा करके प्रदेश सरकार ने एक सिस्टम बनाने की कोशिश की है, ताकि प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों के बीच संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर कोई दिक्कत न हो। समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा, हिमाचल स्कूली शिक्षा में तकनीक का बखूबी इस्तेमाल कर रहा है। तकनीक की मदद से बच्चों के सीखने की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश में पैल लैब (PAL- Personalized Adaptive Learning Lab) स्थापित करने पर विचार कर रहा है। समग्र शिक्षा निदेशक ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पैल लैब स्कूलों में सफलतापूर्वक स्कूलों में लागू की गई है। वहां इसके बेहतर रिजल्ट भी देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में हिमाचल में इस दिशा में कदम उठाने को लेकर विचार किया जा रहा है। स्कूलों में पैल लैब स्थापित करने के लिए प्रपोजल तैयार कर नीति आयोग के सामने रखा जाएगा। हिमाचल में पहले से कई स्कूलों में आईसीटी लैब है, वहां इन पैल लैब को भी स्थापित किया जा सकता है। समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने बताया, पैल लैब एक ऐसा टूल है, जिसके जरिए एक क्लास में हर बच्चे के सीखने की अलग-अलग क्षमता का आकलन किया जा सकता है। किसी भी कक्षा में हर बच्चे के सीखने का स्तर अलग-अलग होता है। आमतौर पर हर बच्चे की कमजोरी और ताकत का पता लगाना शिक्षक के लिए आसान नहीं होता है, जबकि पैल लैब के जरिए ये सब आसानी से किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इसकी मदद से कमजोर बच्चों को सुधारा भी जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश से नशा और नशा कारोबारियों का सफाया करने के लिए पुलिस ने अभियान चलाया हुआ है। शिमला जिले में भी पुलिस मिशन क्लीन के तहत नशेड़ियों का सफाया कर रही है। ताजा मामले में राजधानी शिमला में पुलिस ने चिट्टे के बड़े सप्लायर को पकड़ा हैं। वहीं, चिट्टा तस्करी के इस धंधे में सप्लायर का पूरा परिवार भी संलिप्त है। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बताया कि कुछ दिन पहले सप्लायर की पत्नी के साथ परिवार के 2 अन्य सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिनसे चिट्टा भी बरामद किया गया था। वो पांवटा साहिब से चिट्टे के साथ एक बस में शिमला आ रहे थे, जिन्हें पुलिस ने चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया और इनके जरिए शिमला पुलिस मुख्य सप्लायर को गिरफ्तार करने में सफल हो पाई। एसपी शिमला ने बताया कि शिमला पुलिस की टीम पुराना बस स्टैंड में गश्त पर मौजूद थी। इस दौरान पुलिस को सूचना मिली की डाउनडेल फागली में चिट्टे की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलने के बाद शिमला पुलिस की टीम एएसआई पंकज शर्मा के नेतृत्व में आरोपी के ढारे में पहुंची, जिसके बाद ढारे की तलाशी ली गई। इस दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 12.94 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। आरोपी की पहचान अजीत कुमार के रूप में हुई है। आरोपी शिमला के डाउनडेल फागली का रहने वाला है। शिमला पुलिस के मुताबिक आरोपी अजीत कुमार शिमला शहर में चिट्टा तस्करी का बड़ा सप्लायर है। इस पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं। ऐसे में अब शिमला पुलिस ने आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बताया, मिशन क्लीन के तहत शिमला पुलिस हर नशा तस्कर और नशे का सेवन करने वाले के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। शिमला शहर में चिट्टे का सबसे बड़ा सप्लायर गिरफ्तार कर लिया गया है। उसका परिवार भी तस्करी में शामिल है। किसी भी सूरत में नशेड़ियों को बख्शा नहीं जाएगा। शिमला में चिट्टे का कारोबार इतना फैल चुका है कि कई परिवारों ने इसे अपना पारिवारिक धंधा बना लिया है। पुलिस शिमला में नशेड़ियों को किसी भी हालात में नहीं छोडे़गी और उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाएगी।
** संजय पराशर कर रहे हैं भरपूर प्रयास ** हिमाचली बेटियां समुद्री नाविक बनकर मर्चेंट नेवी में बनाएं करियर: संजय पराशर हाई सैलरी, दुनिया भर में यात्रा करने का मौका और समुद्र के रोमांच का आकर्षण...बेशक मर्चेंट नेवी में नौकरी करने के लिए ये बातें प्रदेश व क्षेत्र के युवाओं को लंबे समय से आकर्षित करती रही हैं। बावजूद इस क्षेत्र में करियर कैसे बनाया जाए, उसे लेकर भी युवा पर्याप्त गांइडेंस न मिलने के कारण असमंजस में रहा। वहीं जिला मंडी के गांव कोटली व विभिन्न स्थानों पर आयोजित मार्गदर्शन शिविर के दौरान इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट संस्थान द्वारा सेमिनार आयोजित किए गए। करियर विशेषज्ञ दलीप ने कहा कि संजय पराशर राेजगार और महिला सशक्तीकरण को लेकर विजन के तहत कार्य कर रहे हैं। अगले वर्ष में युवतियों को मर्चेंट नेवी में अधिक से अधिक राेजगार उपलब्ध हों, इसके लिए रोड़ मैप तैयार किया गया है। इस बारे में युवतियों को अपने क्षेत्र में ही मर्चेंट नेवी के बारे में पर्याप्त जानकारी मिले और इस नौकरी को पाने के लिए बाहर की दौड़ न लगानी पड़े, इसी कारण संजय पराशर के सानिध्य में ऐसे मार्गदर्शन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट , नोएडा में सीसीएमसी का कोर्स कर रही छात्रा पलक ने सेमिनार में आई छात्राओं से अनुभव शेयर किए और कहा कि बेटियों के लिए मर्चेंट नेवी में कैरियर के सुनहरे अवसर हैं लड़कियां खुद को व अपने परिवार को आर्थिक रूप से सदृढ़ बना सकतीं हैं। इस क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाले कैप्टन संजय पराशर प्रदेश में रोजगार सृजन के साधनों को लेकर गंभीर व क्रियाशील हुए तो उन्हाेंने बेटियों के लिए नौकरियों का भंडार लाकर खड़ा कर दिया है। प्रदेश के बेटियों को अब मर्चेंट नेवी में नौकरी हासिल करने के लिए बाहर के प्रदेशों में दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है। उन्हें पराशर द्वारा घर-द्वार पर इस फील्ड के लिए उचित मार्गदर्शन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। वहीं, इस मार्गदर्शन शिविर में ज़िला मंडी के गांव आलग और कोटली के क्षेत्रों की युवतियों ने विशेष रूचि दिखाई। आलग कोटली के स्कूल सर्वोदय इंटरनेशनल स्कूल में 70 के लगभग युवितयों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई ताे कोटली में गवर्मेंट कॉलेज में युवितयों की संख्या का आकंड़ा करीब 70 रहा। व कोटली के आलोक भारती के 70 छात्र छात्राओं ने भाग लिया।सेमीनार में पहुंची कई युवतियों ने मर्चेंट नेवी में करियर को लेकर सवाल किए, जिनका माैके पर ही विशेषज्ञों द्वारा जबाव दिया गया। शिविर में भाग लेने पहुंची लड़कियों सीमा, प्रिया, नेहा, पूजा, शिवानी, निशा, आरती, भारती, ज्योति, दीपिका ,इंदु, सुनिधि ने बताया कि सेमीनार में उन्हें करियर बनाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज वर्चुअल माध्यम से लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न जिलों में चल रहे निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यों के लिए आवंटित किए गए बजट को समयबद्ध खर्च किया जाए, ताकि अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होने पर सरकार के ध्यान में यह मामला लाया जा सके। उन्होंने अधिकरियों को कार्यों की प्रगति रिपोर्ट का विवरण दो दिनों के भीतर अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अनुमति एवं बिना बजट प्रावधान के कोई भी निर्माण कार्य न किया जाए। यदि ऐसा हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों की जबावदेही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि एफआरए के अंतर्गत किसी निर्माण कार्य में बाधा आ रही है तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत अवगत करवाया जाए। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अभिषेक जैन, प्रमुख अभियंता एन.पी. सिंह, मुख्य अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग सुरेश कपूर और सभी जिलों से मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशाषी अभियंता भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने प्रैसवार्ता में कहा कि प्रदेश के भाजपा नेता दूसरे राज्यों में चुनावों के दौरान प्रदेश की छवि को धूमिल करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता अपनी राजनीतिक महत्वकाक्षाओं के चलते बिना तथ्यों के गलत ब्यानबाजी कर प्रदेश के लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता सहित अन्य भाजपा नेता देश में प्रदेश की छवि को बनाने की जगह निरतंर बिगाड़ने का कार्य कर रही ह, जबकि भाजपा नेताओं को प्रदेश हित में आगे आकर सरकार का साथ देना चाहिए ताकि मुख्यमंत्री के राज्य को आत्म निर्भर बनाने के संकल्प को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से एक पुराने मामले में आए आदेशों में दिल्ली स्थित हिमाचल भवन को अटैच करने के संबंध में भाजपा नेता तथ्यों से परे ब्यानबाजी कर रही है उन्होंने कहा कि यह मामला वर्ष 2009 का भाजपा सरकार के कार्याकाल से जुड़ा हुआ है तथा इस संबंध में प्रदेश के लोगों को भ्रमित कर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से इस प्रकार के आदेश पूर्व भाजपा सरकार के कार्याकाल में भी आते रहे है। उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि पूर्व सरकार के कार्याकाल में किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिलने की स्थिति में ऊना रेलवे स्टेशन को अटैच करने के आदेश दिए जा चुके है। उन्होंने कहा कि माननीय हाईकोर्ट द्वारा 64 करोड़ रुपये के अग्रिम प्रीमियम भुगतान मामले के संबंध में दिए गए आदेश भी इसी प्रकार का एक मामला है। उन्होंने इस मामलेे को लेकर विपक्ष के नेता पर तथ्यहीन ब्यानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि हम इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, जिसमें हिमाचल भवन को कुर्क करने का आदेश दिया गया था। सरकार के पास कानूनी कदम उठाने के विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि किन्नौर स्थित 960 मेगावाट की जंगी-थोपन और थोपन-पोवारी जलविद्युत परियोजनाओं के एक मामले में भी, मेसर्ज अडानी पावर लिमिटेड ने 280 करोड़ रुपये का अग्रिम प्रीमियम वापस करने के लिए अदालत का रुख किया था और इस मामले में भी एकल पीठ के फैसले को डबल बेंच ने खारिज कर अग्रिम प्रीमियम जब्त करने को सही करार दिया था। नरेश चौहान ने कहा कि इस मामले में भी सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर रही है और कानूनी रास्ता अपनाएगी। उन्होंने कहा कि एचपीटीडीसी के 18 होटलों को लेकर उच्च न्यायलय के आदेशों का भी राज्य सरकार गहनता से अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि निगम के होटलों की स्थिति को जांचने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा एक सेवानिवृत आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित की गई है। इस कमेटी की रिपोर्ट व सुझावों का भी राज्य सरकार अध्ययन करेगी। प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने पूर्व भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके कार्याकाल के दौरान निगम के होटलों को साजिस के तहत निजी हाथों में लीज पर देने की पूरी तैयारी कर ली गई थी और मामला विधानसभा में भी पहुंच चुका था। उन्होंने कहा कि विधानसभा में विरोध होने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उस, मामले का भी गहनता से अध्ययन करेेगी। उन्होेेंने कहा कि होटलों का यह मामला वर्तमान सरकार के दो वर्षो का नहीं है बल्कि पिछली भाजपा सरकार के कुप्रबंधन का नतीजा है। उन्होंने कहा कि भाजपा देश भर में कांग्रेस की चुनी हुई राज्य सरकारों को निरंतर अस्थिर करने का प्रयास कर रही है लेकिन प्रदेश की जनता इससे भलीभान्ति परिचित है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने जनहित ने अनेक निर्णय लिए है। सुख-आश्रय योजना लाकर प्रदेश के लगभग 6 हजार बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट घोषित किया है और इस संबंध में कानून बनाने वाला हिमाचल प्रदेश, देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष इस मामले में चुप क्यों है? उन्होंने भाजपा से सवाल किया है कि इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान योजना, राजीव गांधी स्टार्ट अप योजना, सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में अंग्रेजी माध्यम शुरू करने जैसे फैसलों और कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भाजपा चुप क्यों है? उन्होंने भाजपा नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि वे लोगों को भ्रमित करने के बजाए प्रदेश हित में राज्य सरकार के पक्ष को दिल्ली में भारत सरकार के समक्ष मजबूती से रखने में सहयोेग करें।
** न्यूनतम फीस की मंजूरी के लिए सरकार को भेजा हैं प्रस्ताव शिमला: आईजीएमसी अस्पताल में बुधवार को कार्यकारी समिति की बैठक का आयोजन हुआ। इस बैठक में फैसला लिया गया कि अस्पताल में जो टेस्ट मरीजों के निशुल्क होते हैं। उन टेस्टों की न्यूनतम फीस लेने का प्रस्ताव बैठक में तैयार किया गया। 133 मेडिकल टेस्ट हैं निशुल्क: IGMC में मरीजों के 133 मेडिकल टेस्ट निशुल्क करवाए जाते हैं। इन टेस्टों की न्यूनतम फीस लेने के प्रस्ताव को अब मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अब डॉक्टरों व कर्मचारियों को पार्किंग शुल्क भी देना होगा। बैठक में इस प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। डॉक्टरों व कर्मचारियों को 250 रुपये पार्किंग का मासिक शुल्क देना होगा। इसके साथ ही डॉक्टरों व कर्मचारियों को अपने दस्तावेज जमा करवाने होंगे. इसके बाद ही वह पार्किंग में अपनी गाड़ी को पार्क कर पाएंगे। बता दें कि इससे पहले किसी भी तरह का कोई भी पार्किंग शुल्क कर्मचारियों व डॉक्टरों से नहीं लिया जाता था। आईजीएमसी में ऑक्सीजन पाइप लाइन बिछाने का काम किसी तकनीकी टीम को दिया जाएगा। लोक निर्माण विभाग ने इस काम को करने से मना कर दिया है। अस्पताल तकनीकी टीम को बुलाएगा। इसके बाद अस्पताल में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हो सकता है। अस्पताल में जो भी कंपनी पहले से सफाई का काम कर रही है। उस कंपनी को ही सफाई का काम फिर से दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश में विधवा महिलाओं को मकान बनाने के लिए चार लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। हिमाचल प्रदेश सरकार ऐसी विधवा महिलाओं के लिए मकान बनाने में मदद करेगी, जो भवन एवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हैं। भवन एवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत सभी पात्र महिलाओं को मकान बनाने के लिए चार लाख रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार विधवाओं, दिव्यांग महिलाओं और एकल नारियों को उनके मकान बनाने के सपने को साकार करने के लिए वित्तीय मदद देने की पहल कर रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड, विवाह के लिए वित्तीय सहायता, मातृत्व लाभ, शिक्षा सहायता, चिकित्सा देखभाल, पेंशन, विकलांगता पेंशन, दाह संस्कार व्यय, आकस्मिक मृत्यु के लिए राहत, छात्रावास सुविधाएं और विधवा पेंशन सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद में घर के लिए तीन लाख रुपए और रसोई, शौचालय और स्नानघर जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए एक लाख रुपए की अतिरिक्त मदद भी शामिल होगी। इसका फायदा उठाने के लिए महिलाओं को बोर्ड में पंजीकृत होना चाहिए। पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 कार्य दिवस पूरे करने चाहिए और उनकी वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए से कम होनी चाहिए। पात्र महिलाओं को जरूरी कागजों समेत श्रम अधिकारी के जरिए इस योजना के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए स्वीकृति मिलने के बाद वित्तीय मदद सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
हिमाचल प्रदेश सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर बिलासपुर में आयोजित होने वाली आभार रैली की तैयारियों के लिए कैबिनेट मंत्रियों की कमेटी बनाई जाएगी। आयोजन के प्रभारी नियुक्त किए गए राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि जल्द कमेटी का गठन कर दिसंबर के पहले सप्ताह में बैठक की जाएगी। दो साल पूरे होने पर कांग्रेस सरकार नई योजनाओं को भी लाॅन्च करेगी। पुरानी योजनाओं से भी अवगत कराया जाएगा। हर विभाग की सफल योजनाओं का प्रदर्शनी के माध्यम से प्रचार भी करेंगे। नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने का समारोह 11 दिसंबर को बिलासपुर में मनाया जाएगा। समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए कैबिनेट मंत्रियों को शामिल कर एक कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी सदस्यों को आयोजन के लिए जिम्मेवारियां सौंपी जाएंगी।
हिमाचल प्रदेश में नशे का कारोबार फैलता जा रहा है। खासकर राजधानी शिमला नशे का गढ़ बनती जा रही है। शिमला जिले में नशा कारोबारियों का खात्मा करने लिए पुलिस द्वारा मिशन क्लीन शुरू किया गया है। इसके तहत शिमला पुलिस आए दिन नशा तस्करों पर शिकंजा कस रही है। ताजा मामले में शिमला पुलिस ने चार आरोपियों को एनडीपीएस के दो मामलों में गिरफ्तार किया है। इसमें दो हरियाणा के तस्कर भी शामिल हैं। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बताया कि पहले मामले में शिमला पुलिस की स्पेशल सेल टीम संकट मोचन बालूगंज में गश्त पर मौजूद था। इस दौरान पुलिस को सूचना मिली कि बधाई में मां तारा आंचल काटेज बीएंडबी में रह रहे 2 युवक चिट्टा बेच रहे हैं, जिसके बाद पुलिस ने बीएंडबी की तलाशी ली और 2 युवकों के पास से 25.880 ग्राम चिट्टा बरामद किया। आरोपियों की पहचान सुखविंद्र और सुमित के रूप में हुई है। दोनों आरोपी हरियाणा के जिला कैथल के मटौर कलयाथ गांव के रहने वाले हैं। वहीं, दूसरे मामला ढली थाना के तहत सामने आया है। ढली थाने के तहत आने वाले फागू और कुफरी के साथ एनएच-5 चीनी बंगलों विभाजन और रेडिसन होटल के पास पुलिस की टीम गश्त पर था। ट्रैफिक चेकिंग के दौरान पुलिस ने यहां दो युवकों की तलाशी ली और उनसे 6.010 ग्राम चिट्टा बरामद किय। आरोपियों की पहचान रोशन सिंह (उम्र 26 साल) और सुरेंद्र कुमार (उम्र 28 साल) के तौर पर हुई है। दोनों ही शिमला जिले के ननखड़ी के रहने वाले हैं। एसपी शिमला संजीव गांधी ने बताया, "दो मामलों के तहत पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। नशा तस्करों से पुलिस पूछताछ कर रही है कि ये चिट्टा वो कहां से लाए और कहां ले जा रहे थे। पुलिस द्वारा आगामी कार्रवाई की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने निगम के 18 होटलों को ‘सफेद हाथी’ करार देते हुए इन्हें बंद करने के आदेश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने एचपीटीडीसी कर्मचारियों द्वारा दायर एक सिविल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया गया है। न्यायाधीश ने कहा कि बार-बार अदालती हस्तक्षेप और विस्तृत निर्देशों के बावजूद निगम इन परिसंपत्तियों को पुनर्जीवित करने या उन्हें लाभकारी बनाने में विफल रहा है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक संसाधनों को ऐसे उपक्रमों पर बर्बाद नहीं किया जा सकता जो लगातार वित्तीय रूप से घाटे में चल रहे हैं। चैल में प्रतिष्ठित पैलेस होटल, धर्मशाला में होटल धौलाधार और मनाली में होटल लॉग हट्स सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों की 18 संपत्तियों में पिछले कुछ वर्षों में आश्चर्यजनक रूप से होटलों के अधिकतर कमरे खाली पड़े रहे। अदालत ने एचपीटीडीसी के प्रबंध निदेशक को 25 नवंबर तक इन इकाइयों को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया, और अनुपालन के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया। इसके अलावा, रखरखाव के लिए केवल आवश्यक कर्मचारियों को ही रखा जाएगा, जबकि बाकी को अन्य कार्यशील इकाइयों में जनशक्ति की कमी को दूर करने के लिए फिर से तैनात किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने एक अलग मामले में दिल्ली में स्थित हिमाचल भवन को भी जब्त करने का आदेश दिया है। जिससे एक बिजली कंपनी को नीलामी के माध्यम से अपना बकाया वसूलने की अनुमति दी गई है। जिन 18 होटलों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं उनमे, द पैलेस होटल चायल, होटल गीतांजलि, डलहौजी, होटल बाघल दाड़लाघाट, होटल धौलाधार धर्मशाला, होटल कुणाल धर्मशाला, होटल कश्मीर हाउस धर्मशाला, होटल एप्पल ब्लॉसम फागू, होटल चंद्रभागा केलोंग, होटल देवदार खजियार,होटल गिरीगंगा खड़ापत्थर,होटल मेघदूत कियारीघाट, होटल सरवरी कुल्लू , होटल लॉग हट्स मनाली, होटल हडिम्बा कॉटेज मनाली, होटल कुंजुम मनाली,होटल भागसू मैक्लोडगंज, होटल द कैसल नग्गर, होटल शिवालिक परवाणू शामिल हैं।
प्रदेश सरकार प्रवक्ता स्कूल न्यू कैडर में अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों के लिए वरिष्ठता लाभ लागू करेगी। सरकार ने भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों में उल्लिखित प्रक्रिया का पालन करते हुए अनुबंध के आधार पर नियुक्त किए गए प्रत्यक्ष भर्ती कर्मचारियों के लिए वरिष्ठता लाभ लागू करने का निर्णय लिया है। उच्च न्यायालय की ओर से ताज मोहम्मद एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य शीर्षक से सीडब्ल्यूपी संख्या 2004/2017 पर आए फैसले के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। फैसले के तहत स्कूल-न्यू कैडर के कर्मचारियों सहित ऐसे कर्मचारियों के लिए वरिष्ठता का दावा स्वीकार किया गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्कूल-न्यू कैडर में कई याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर मामले में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किए गए प्रत्यक्ष भर्ती कर्मचारियों की वरिष्ठता स्थिति पर सवाल उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने अपनी प्रारंभिक अनुबंध नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता को मान्यता देने की मांग की थी। उच्च शिक्षा निदेशालय ने अब एक कार्यालय आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि लेक्चरर (स्कूल-न्यू) कैडर की वरिष्ठता को फैसले के अनुरूप संशोधित किया जाएगा। इसमें 2014 से 2023 के बीच पदोन्नत और सीधी भर्ती वाले दोनों शामिल हैं। शिक्षा निदेशक के अनुसार इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अनुबंध नियुक्तियों और पदोन्नतियों दोनों के लिए नियुक्ति के वर्ष को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठता सूची का अंतराल है। लेक्चरर (स्कूल-न्यू) कैडर जिसे 2019 में पीजीटी (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) कैडर से फिर से नामित किया गया था, अपने 50 फीसदी पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से और अन्य 50 फीसदी टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) कैडर से पदोन्नति के माध्यम से भरता है। लेक्चरर कैडर के लिए वरिष्ठता को पहले 31 दिसंबर 2013 तक अंतिम रूप दिया गया था। लगभग 11,000 प्रवक्ताओं की सूची इस दौरान तैयार हुई थी। अदालत के फैसले के बाद वरिष्ठता सूची को अब 2014 के बाद से सीधी भर्ती वाले लोगों को शामिल करने के लिए संशोधित किया जाएगा। इस कदम से टीजीटी कैडर की वरिष्ठता पर भी असर पड़ने की संभावना है, जो लेक्चरर पदों के लिए फीडर कैडर के रूप में कार्य करता है। टीजीटी की वरिष्ठता न्यायालय के आदेश द्वारा निर्धारित नए दिशा-निर्देशों के साथ संरेखित करने के लिए संशोधनों से गुजर सकती है, जिससे पदोन्नति के क्रम में संभावित परिवर्तन हो सकते हैं। निदेशालय के कार्यालय आदेश के अनुसार वरिष्ठता को समायोजित किया जाएगा, लेकिन अंतिम वरिष्ठता सूची संबंधित पक्षों की उचित आपत्तियों को शामिल करने के बाद ही जारी की जाएगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आज ऐतिहासिक रिज पर भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर उन्हें पुष्पाजंलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में इंदिरा गांधी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी निर्णयों ने भारत को मजबूत आधार प्रदान कर सशक्त बनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि सुधार और बैंकों का राष्ट्रीयकरण इंदिरा गांधी की दूरदर्शी नीतियों का प्रमाण हैं, जिससे आम आदमी लाभान्वित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। इस अवसर पर उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक हरीश जनारथा, रंजीत सिंह राणा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, हिमुडा के उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, पार्षद, उपायुक्त अनुपम कश्यप और अन्य लोग उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश में उद्योगों को सस्ती बिजली का प्रबंध करने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। हालांकि अभी तक यह केवल एक सुझाव है, लेकिन सामने आया है कि उद्योगों को बिजली देने के लिए अलग से नई कंपनी का गठन किया जाए। इसमें बिजली बोर्ड से ही उन पुराने प्रोजेक्टों को वापस लिया जाए, जो 40 साल से ज्यादा समय से उत्पादन में है। क्योंकि एक शर्त राज्य सरकार की निजी कंपनियों के लिए भी है कि 40 साल पुराने प्रोजेक्ट वह सरकार को सौंप देंगी। लिहाजा इसे बिजली बोर्ड पर भी लागू करने की सोच है। सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा बनाई गई कैबिनेट सब-कमेटी के सामने इस तरह का सुझाव आया है और उसने आगे सीएम से भी इस बात पर चर्चा की है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसको नकार दिया है और उनका मानना है कि बोर्ड के ढांचे से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती, परंतु आने वाले समय में इस मामले को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, क्योंकि कुछ अधिकारी भी इस हक में है। अधिकारियों का मानना है कि इससे उद्योगों के लिए सरकार एक अलग व्यवस्था कर सकेगी और जो निवेशक यहां पर बिजली को लेकर अब परेशान हो रहे हैं, उनकी दिक्कत दूर हो सकती है। क्योंकि उद्योगों को अब दूसरे राज्य भी सस्ती बिजली देने लगे हैं और यहां पर बिजली का टैरिफ बढ़ रहा है, जिससे उद्योगपतियों में नाराजगी है। उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए यदि सरकार बिजली क्षेत्र की नई कंपनी उद्योग क्षेत्रों में ही स्थापित कर दे और उसके माध्यम से केवल उद्योगों के लिए बिजली का वितरण करे, तो इससे उद्योगों को सस्ती बिजली का इंतजाम हो सकता है। वैसे यह इतना ज्यादा आसान नहीं है, परंतु फिर भी कैबिनेट सब-कमेटी अपनी ओर से सरकार के सामने इस तरह का सुझाव जरूर रखेगी। इसको लेकर सब-कमेटी ने काफी मंथन भी किया है। मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ रविवार को अभियंताओं व कर्मचारियों के ज्वाइंट फ्रंट की जो बैठक हुई है, उसमें भी यह मुद्दा उठा है, मगर इस पर कोई बात नहीं बन पाई। क्योंकि बिजली बोर्ड में कर्मचारियों पर लगने वाली लागत काफी ज्यादा है और पेंशनरों का बड़ा खर्र्च बोर्ड पर है। उससे यहां बिजली के टैरिफ पर असर पड़ रहा है। बिजली का टैरिफ इससे महंगा हो गया है और अब उद्योगों को सरकार उस कद्र सस्ती बिजली नहीं दे पा रही है जितनी उसे देनी चाहिए। पिछले दिनों एक रूपए सबसिडी इसमें सरकार ने कम की थी, जोकि 100 किलोवॉट से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाले उद्योगों पर लागू हुई थी, मगर इस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी, जिससे भी सरकार फंस गई है। हिमाचल प्रदेश में उद्योगों को भी सस्ती बिजली देना जरूरी है। बिजली बोर्ड के चार ऐसे प्रोजेक्ट बताए जा रहे हैं, जो 40 साल से ऊपर हो चुके हैं और उनसे उत्पादन हो रहा है। उनकी पूरी बिजली का इस्तेमाल बिजली बोर्ड ही करता है और उससे सरकार को कोई लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में अब कैबिनेट सब-कमेटी के सुझावों को सरकार मानती है या नहीं, यह देखना होगा।
शिमला: हिमाचल में पिछले कई महीनों से कमर तोड़ महंगाई की समस्या से जूझ रहे लाखों लोगों को डिपुओं में भी राहत नहीं मिल रही है। हालत ये है कि नवंबर महीना बीतने को है, लेकिन प्रदेश भर के 4500 से ज्यादा डिपुओं में उपभोक्ताओं को इस महीने सरसों के तेल सहित तीन दालों का कोटा उपलब्ध नहीं हुआ है, जिसके चलते बाजार से महंगे रेट पर खाद्य वस्तुएं खरीद कर रसोई चलाने को उपभोक्ता मजबूर हैं। पिछले महीने फेस्टिव सीजन में लोगों का पहले ही जेब खर्च ज्यादा हुआ है। ऐसे में डिपुओं में तेल और दाल का कोटा न मिलने से लोगों की जेब और टाइट हो गई है। वहीं, प्रदेश के अधिकतर डिपुओं में तो उपभोक्ताओं को पिछले महीने भी सरसों का तेल नहीं दिया गया है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। वहीं, डिपुओं में सरसों का तेल और दालों का कोटा कब तक उपलब्ध होगा? इस बात की भी उपभोक्ताओं को कोई जानकारी नहीं मिल रही है। उचित मूल्यों की दुकानों से कोटा गायब होने से लाखों परिवार अब बाजार से 200 रुपए लीटर सरसों का तेल और 100 से 120 रुपए किलो दालें खरीदने के लिए मजबूर है। हालात ये है कि मंडी समेत अन्य जिलों में तो उपभोक्ताओं को पिछले कई महीने भी डिपुओं में सरसों का तेल और दालों का कोटा नहीं मिला है, जिससे उपभोक्ता पिछले दो महीनों से बाजार से महंगे भाव पर सरसों का तेल और दालें खरीदने को विवश हैं। खुले बाजार में सरसों के तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, लेकिन डिपुओं में उपभोक्ताओं को सस्ते रेट पर दिए जाने वाले सरसों के तेल के भाव में पिछले करीब तीन महीने से कोई बदलाव नहीं हुआ हैं। हिमाचल सरकार उपभोक्ताओं को एक राशन कार्ड पर अधिकतम दो लीटर सरसों का तेल दे रही है। इसमें एपीएल और बीपीएल उपभोक्ताओं को 123 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से सरसों का तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, टैक्स पेयर कार्ड धारकों को यही सरसों का तेल 129 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से दिया जा रहा है। पिछले महीने त्योहारी सीजन में सरकार ने उपभोक्ताओं को डिपुओं में जाकर जरूरत के मुताबिक सरसों का तेल खरीदने की सुविधा भी दी थी, लेकिन सरकार का ये दावा कुछ ही दिनों में ही हवा हो गया था। हिमाचल में डिपुओं में उपभोक्ताओं को दालें भी सस्ते भाव पर उपलब्ध करवाई जाती हैं। इसमें बीपीएल परिवारों को उड़द की दाल 58 रुपए किलो के हिसाब से दी जाती है। एपीएल परिवारों को उड़द की दाल 68 रुपए किलो मिलती है। इसके अलावा टैक्स पेयर को डिपुओं में 93 रुपए किलो उड़द की दाल उपलब्ध कराई जाती है। इसी तरह से बीपीएल परिवारों को मलका की दाल 56 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दी जाती है। एपीएल परिवारों को मलका दाल 66 रुपए किलो और टैक्स पेयर के लिए मलका की दाल का भाव अभी 91 रुपए तय किया गया है। डिपुओं में एपीएल परिवारों को चना दाल अभी तक 48 रुपए किलो दी जाती है। वहीं, बाजार में इन तीनों ही दालों का भाव 100 से 120 रुपए प्रति किलो है। हिमाचल प्रदेश में कुल राशन कार्ड धारकों की संख्या 19 लाख 65 हजार 589 है। जो 4500 से ज्यादा डिपुओं के जरिए सस्ते राशन की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। डिपुओं के जरिए उपभोक्ताओं को आटा, चावल, तीन अलग-अलग किस्म की दालें, सरसों का तेल और नमक बाजार से सस्ते रेट पर उपलब्ध करवाया जाता है। महंगाई के कारण डिपुओं में सरसों के तेल की अधिक मांग रहती है। सरसों के तेल के कोटे को कोई भी उपभोक्ता नहीं छोड़ता है। ऐसे में प्रदेश में हर महीने डिपुओं में 34 लाख लीटर तेल की खपत रहती है, जिस पर सरकार सब्सिडी के तौर पर लाखों रुपए खर्च करती है।
** कहा, अब देश भर में एक ही गारंटी है वह है मोदी की गारंटी ** जयराम ठाकुर ने झारखंड और महाराष्ट्र में बेनकाब किया कांग्रेस का झूठ शिमला: महाराष्ट्र और झारखंड में हो रहे विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार करके हिमाचल वापस आए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूरे देश में हिमाचल प्रदेश की ‘सुख की सरकार' के नाकामियों के चर्चे हो रहे हैं। विभिन्न प्रकार के मीडिया के माध्यम से हिमाचल की जो खबरें देश भर में जा रही हैं वह प्रदेश की छवि के खिलाफ रही हैं। पूरे भारत में हिमाचल शांत और प्रगतिशील राज्य के रूप में जाना जाता है। कांग्रेस के दो साल के कार्यकाल ने हिमाचल की इस छवि को भी नुकसान पहुंचाने का काम किया है। कांग्रेस की नीतियों की वजह से हिमाचल प्रदेश विकास की दौड़ में बहुत पीछे रह गया है जिसकी भरपाई आसान नहीं है। जयराम ठाकुर ने कहा कि झारखंड और महाराष्ट्र के लोगों को हिमाचल की कांग्रेस की सरकार की नाकामियों के बारे में पता है। दोनों जगह पर भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के बीच जबर्दस्त माहौल है। झारखंड में लोग भ्रष्टाचार और घुसपैठ को मिल रहे सरकारी समर्थन से लोग तंग आ रहे हैं और अब हिमाचल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में साथ डबल इंजन की सरकार में रहना चाहते हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्व के चुनाव में की गई घोषणाओं के अक्षरश: से पूरा करने की निति ने देश की राजनीति को एक नई दिशा दिखाई है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी अपने हर चुनावी संकल्प को निर्धारित समय में पूरा करती है। जिसके कारण अब देश के लोग सिर्फ और सिर्फ एक ही गारंटी पर भरोसा करते हैं और है मोदी की गारंटी। जो अपने चुनावी घोषणा पत्र को एक पवित्र दस्तावेज की तरह देश में बिना किसी भेदभाव के लागू करती है। आज देशभर का हर बुजुर्ग जिनकी उम्र 70 साल से अधिक है उन्हें बिना किसी शर्त के आयुष्मान जैसी योजना के तहत ₹5 लाख का मुफ्त इलाज मिल रहा है। जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे देश में राजनीति में गारंटी के नाम पर लोगों को धोखा देने की प्रथा कांग्रेस ने शुरू की थी। यहां कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता छोटी बड़ी स्वभाव से लेकर बड़े-बड़े मंचों पर खड़े होकर खुलेआम बड़े-बड़े वादे करते थे और जनता को झांसे में लेकर वोट लेने की पैंतरे आजमाते थे। कांग्रेस द्वारा हिमाचल में इसी धोखे से सत्ता हासिल की गईं। लेकिन सत्ता हासिल करने के बाद सरकार सरोकारों से दूर चली गई और तानाशाही पूर्ण रवैए से शासन करना शुरू कर दिया। सरकारी निरंकुशता का आलम यह रहा कि कांग्रेस अपनी दी हुई गारंटी को पूरा करना तो दूर गारंटियों के विपरीत ही काम करना शुरू कर दिया। प्रदेश के 12000 से ज्यादा युवा नौकरी से निकाले गए और 1200 के लगभग चलते-फिरते संस्थान बंद कर दिए गए। हिमाचल कांग्रेस सरकार का मॉडल सत्ता की असफलता और झूठ बोलकर सत्ता हासिल करने का 'परफेक्ट' मॉडल है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस सरकार की नाकामी और तानाशाही ने कांग्रेस के गारंटी मॉडल की हवा निकाल दी। सबसे सुखद बात यह है कि हिमाचल ही नहीं पूरे देश ने कांग्रेस के झूठे गारंटी मॉडल को नकार दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश भर के अलग अलग चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस द्वारा झूठ प्रचारित किया कि उनके द्वारा दी गई गारंटियां हिमाचल में अक्षरश: पूरी की गई हैं। ऐसे में नेता विपक्ष के कारण यह हमारा धर्म है कि हम प्रदेश के हालात देश के लोगों को बताए और कांग्रेस के झूठी गारंटियों की गाड़ी की हवा निकालें। एक विपक्ष के नेता के नाते यह हमारा दायित्व है कि एक भी देशवासी कांग्रेस की झूठी गारंटियों का शिकार न होने पाए। इसलिए हमने देश भर में सुक्खू सरकार के झूठ को बेनकाब कर उनकी जनविरोधी सोच को देशवासियों के सामने उजागर किया। कांग्रेस का झूठ भाजपा देश में कहीं भी चलने नहीं देगी।
शिमला में पिछले वर्ष पहली बार विंटर कार्निवल का आयोजन किया गया था जो 7 दिन तक चला था, जिससे पर्यटन कारोबार को चार चाँद लगे थे। इसलिए इस बार इसे 10 दिनों का किया जा रहा है ताकि पर्यटन कारोबार को बढ़ावा मिले और देश विदेश से लाखों पर्यटक जो शिमला पहुंचते है उन्हें हिमाचल की संस्कृति का पता चले। इस दृष्टि से शिमला के मेयर ने एसपी DC व अन्य अधिकारियो के साथ बैठक की, जिसमें आगामी कार्यक्रम को लेकर चर्चा की गई। नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान ने कहा कि लोगों और सैलानियों में कार्निवल को लेकर पिछले साल काफी उत्साह दिखा था। इसलिए इस बार भी कार्निवल का आयोजन किया जा रहा है, जिसे अब 7 दिन के बजाय 10 दिन मनाया जाएगा। इसके आयोजन से शहर के कारोबार को भी नई रफ्तार मिलेगी। इस बार क्या नए आयोजन किए जा सकते है इसको लेकर अधिकारी योजना बना रहे है। पूरे 10 दिन के कार्यक्रमों की योजना तैयार कर जल्द ही मुख्यमंत्री से भी मंजूरी ली जाएगी। महापौर ने कहा कि जल्द ही एक और बैठक कर कार्निवल की तैयारियों, कार्यक्रमों को लेकर अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी। नगर निगम इस बार कार्निवल के उपलक्ष्य पर एक सोविनियर भी प्रकाशित करने जा रहा है। इसमें शिमला शहर के इतिहास, नगर निगम के प्रतिनिधियों के बारे में आम जनता को जानकारी मिलेगी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित संजौली मस्जिद विवाद में जिला अदालत में अगली सुनवाई अब 22 नवंबर को होगी। नगर निगम शिमला कमिश्नर कोर्ट के फैसले के खिलाफ ऑल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन ने अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायालय में याचिका दाखिल की हुई है। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति प्रवीण गर्ग की अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। साथ ही वक्फ बोर्ड से एक एफिडेविट भी तलब किया है। सोमवार की सुनवाई में एमसी शिमला की तरफ से भी वकील पेश हुए। संजौली में मस्जिद के ऊपरी 3 फ्लोर को हटाने के लिए नगर निगम शिमला के आयुक्त की अदालत ने आदेश दिए हैं। एमसी अदालत के इसी निर्णय के खिलाफ ऑल हिमाचल मुस्लिम एसोसिएशन ओर से शिमला जिला अदालत में याचिका दी गई थी। कोर्ट में मामले में सुनवाई की और मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी की याचिका पर फैसले को सुरक्षित रखा है। 5 अक्टूबर को शिमला एमसी कोर्ट द्वारा दिए फैसले पर जिला अदालत ने वक्फ बोर्ड से एफिडेविट मांगा हैं। कोर्ट ने पूछा कि संजौली मस्जिद कमेटी प्रधान मोहमद लतीफ मस्जिद प्रधान के तौर पर वक्फ बोर्ड से ऑथराइज्ड था या नहीं? अब मामले में 22 नवंबर को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज की कोर्ट फैसला सुनाएगी। गौरतलब है कि ऑल हिमाचल मुस्लिम ऑर्गेशनाइजेशन के प्रमुख नजाकत अली ने शिमला एमसी आयुक्त द्वारा 5 अक्टूबर को दिए गए फैसले को जिला कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया कि एमसी आयुक्त कोर्ट का फैसला डिफेक्टिड है। उन्होंने यह फैसला संजौली मस्जिद कमेटी द्वारा दिए हलफनामे के आधार पर सुनाया है। आज मामले में हुई बहस मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा पूरे मामले को एमसी कमिश्नर को दोबारा भेजा जाए, ताकि ध्यान से इस मामले को सुना जा सके।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार एक नई करुणामूलक रोजगार नीति बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सेवा के दौरान अपने परिवार के सदस्यों को खोने वाले लोगों को रोजगार देने के लिए प्रदेश सरकार उदार और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवेदकों का विभागवार ब्यौरा संकलित कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अधिक से अधिक आवेदकों को लाभान्वित करने के लिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विधवाओं और अनाथों को अनुकंपा के आधार पर रोजगार प्रदान करने में प्राथमिकता देकर आश्रितों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के कल्याण के लिए अनेक कदम उठाए हैं। पहली कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया है ताकि सेवानिवृत्ति के बाद वह सम्मानजनक जीवन जी सकें। उन्होंने कहा कि सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल के भीतर सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को 11 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया गया है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार सचिव एम. सुधा देवी, राकेश कंवर और सचिव विधि शरद कुमार लग्वाल भी बैठक में उपस्थित रहे।
हिमाचल में अब 70 साल से ज्यादा के बुजुर्गों का घरद्वार पर ही उपचार होगा। स्वास्थ्य विभाग को फोन पर सूचना देने के बाद मोबाइल एंबुलेंस घर जाएगी। इसमें एक डॉक्टर, फार्मासिस्ट और नर्स होंगी। इस एंबुलेंस में दवाइयां, ऑक्सीजन सिलिंडर और अन्य जरूरी उपकरण भी रहेंगे। मौके पर उपचार करने के बाद डॉक्टर को लगे कि मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है तो उन्हें साथ ही लाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक मरीजों के घर-द्वार पर ही टेस्ट भी होंगे। इसकी रिपोर्ट ऑनलाइन घर भेजी जाएगी। इसके लिए मरीज या उनके तीमारदारों का मोबाइल नंबर लिया जाएगा। सीएम सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग को इस योजना को जल्द शुरू करने को कहा है। जिलों में नजदीकी अस्पताल से लोगों के घरों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भेजी जाएंगी। यह सुविधा अभी उन क्षेत्रों व पंचायतों में होगी जहां सड़क सुविधा रहेगी। उपचार और दवाएं निशुल्क दी जाएंगी।मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि सीएम सुक्खू ने विभाग को इस दिशा में काम करने को कहा है।
हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग की पहली पायलट भर्ती की सीबीटी परीक्षा का नतीजा निकालने का पेच सुलझ गया है। अब आयोग को ट्रेजरी से कोड मिलने के बाद एडसिल एजेंसी को करीब 36 लाख के भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। कोष विभाग से नवगठित आयोग के नामित कर्मचारी को ट्रेजरी कोड मिलने के बाद जल्द ही अब एजेंसी को भुगतान होगा। परीक्षा के आयोजन का 36 लाख का बिल कोष विभाग को भेजा गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग को अपना जीएसटी नंबर भी मिल गया है। ऐसे में परीक्षाओं के आयोजन से लेकर तमाम वित्तीय गतिविधियों को पूरा करने में दिक्कत पेश नहीं आएगी। हिमाचल प्रदेश नवगठित आयोग की ओर से ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट (ओटीए) पोस्ट कोड 1073 के 162 पदों की कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) का आयोजन बीते मार्च में किया गया था। सीबीटी के तहत पायलट आधार पर यह पहली भर्ती राज्य आयोग की ओर से एडसिल एजेंसी के जरिये करवाई गई थी। इस भर्ती को करवाने की एवज में एजेंसी ने आयोग को 36 लाख का बिल दिया था। इस बिल के भुगतान को लेकर पिछले सात माह से पेच फंसा हुआ था। आयोग का ट्रेजरी कोड सृजित नहीं होने से बिल नहीं बन पा रहा था। भंग कर्मचारी चयन आयोग में साल 2022 में इस भर्ती को विज्ञाप्ति किया गया था। पेपरलीक के चलते आयोग भंग हो गया था। नवगठित राज्य आयोग ने 30 मार्च 2024 को इसकी सीबीटी परीक्षा करवाई। इस भर्ती को पायलट भर्ती के तौर पर एडसिल एजेंसी के माध्यम से करवाया गया। दो साल बाद अभ्यर्थियों का परिणाम का इंतजार जल्द ही खत्म होगा। प्रदेश सरकार के कोष विभाग से किसी भी विभाग को फंड जारी करने के लिए विभाग अथवा सरकारी संस्था का ट्रेजरी कोड सृजित किया जाता है। उस संस्था के एक कर्मचारी को इस कोड को संचालित करने के लिए नामित किया जाता है। बाकायदा आईडी और पासवर्ड कर्मचारी के बनाए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग में यह औपचारिकताएं अब पूरी कर ली गई है। सीबीटी के परिणाम के बाद होगा दस्तावेजों का मूल्याकंन ओटीए की भर्ती की सीबीटी भर्ती के परीक्षा परिणाम को आउटसोर्स एजेंसी की ओर से घोषित किया जाएगा, लेकिन अंतिम परिणाम हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग की ओर से ही जारी किया जाएगा। आयोग के सचिव विक्रम महाजन ने कहा कि आयोग ने कोष विभाग के समक्ष ओटीए भर्ती के आयोजन का बिल प्रस्तुत कर दिया है। आयोग को अपना जीएसटी नंबर भी मिल गया है।
सिरमौर: कहते हैं कि मां जैसा इस दुनिया में कोई दूसरा नहीं है। एक मां अपने जिगर के टुकड़े के लिए कुछ भी कर सकती है या यूं कहे कि किसी भी हद तक जा सकती है। अपने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए वो खुशी-खुशी मौत को भी गले लगा सकती है। मां की मामता का भावुक कर देने वाला एक मामला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला से सामने आया है। मां का रिश्ता सभी रिश्तों से अनमोल यूं ही नहीं है। कई ऐसे उदाहरण हैं जब मां ने अपने लाल का जीवन बचाने के लिए हंसते-हंसते मौत को गले लगा लिया हो। ऐसा ही उदाहरण जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में सामने आया है। कांडो भटनोल पंचायत के गांव बोहल में शनिवार को रंगड़ों के हमले से मां ने अपने तीन साल के मासूम को बचाते हुए अपनी जान दे दी। जानकारी के अनुसार अनु (28) अपने घर के पास ही घास काटने गई थी। वह बेटे को भी साथ ले गई थी। अचानक घासन में खड़ीक के पेड़ पर बने छत्ते से रंगड़ों ने मां-बेटे पर हमला कर दिया। अनु ने अपने सिर से ढाठू उतारकर बेटे को ढका और अपनी आगोश में ले लिया। इससे बेटा बच गया, लेकिन रंगड़ों ने अनु को बुरी तरह काटा। उसने शिमला में मजदूरी कर रहे अपने पति को फोन के माध्यम से इसकी जानकारी दी। चीखने की आवाजें सुनकर आसपास के लोग पहुंचे महिला के चीखने की आवाजें सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और उपचार के लिए उसे शिलाई अस्पताल ले जाया गया। यहां से महिला व बच्चे को हायर सेंटर रेफर किया गया, लेकिन महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। बच्चे का नाहन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उपचार चल रहा है। वह खतरे से बाहर है।
** महापौर-उपमहापौर सहित अन्य लोगों ने लाला लाजपत राय को किया याद शेर-ए-पंजाब लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि पर शिमला मॉल रोड स्थित लाजपत राय की प्रतिमा पर महापौर नगर निगम शिमला सुरेन्द्र चौहान पुष्पांजलि अर्पित कर देश के प्रति उनके योगदान को याद किया। स्वतंत्रता आंदोलन में महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के साहस की गाथा देश वासियों के लिए सदैव स्मरणीय रहेगी। इस मौके पर नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने बकहा कि लाला लाजपत राय उन महान सपूतों में से एक थे जिनकी बदौलत हम आज आजाद भारत में खुली हवा में सांस ले रहे हैं। इसलिए देश के महान सपूतों को याद करना हमारा कर्तव्य भी है। कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कलाकारों ने देश भक्ति गीतों व भजन गायन की प्रस्तुति दी।इस अवसर पर उप-महापौर नगर निगम शिमला उमा कौशल, पार्षदगण, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप सहित अन्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
** आश्रम को हुआ नुक्सान, पुलिस बल तैनात शिमला के संजौली मस्जिद के बाद अब राम कृष्ण मंदिर पर विवाद हो गया जहां मंदिर पर कब्जा करने में शनिवार देर रात एक बजे को ब्रह्मों समाज और रामकृष्ण मिशन के बीच जम कर मारपीट और तोड़फोड़ हुई। देर रात ब्रह्मों समाज के लोग पूजा और ध्यान करने पहुचे थे वही राम कृष्ण मिशन के लोग भी वहां पहुचे ओर पहले दोनों तरफ से नारेबाजी करने लगे उंसके बाद आंदोलन पर उतर आए। आंदोलनकारियों ने आश्रम के प्रबंधकों पर कब्जा करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हुआ और दोनों तरफ से टकराव शुरू हो गया जिसमें कई लोगो को चोटें आई और आश्रम को भी काफी नुकसान हुआ है।वही भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं दूसरी ओर रामकृष्ण मिशन आश्रम शिमला के सचिव स्वामी तन्महीमानंद का कहना है कि वह पिछले करीब 14 वर्षों से मंदिर की देखरेख कर रहे हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है।उन्होंने बताया कि देर रात मिशन की प्रॉपर्टी में कुछ लोग भक्त बन कर घुसे और आंदोलन करने लगे। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। यह मंदिर होटल लैंडमार्क शिमला के समीप रामकृष्ण मिशन के नाम से प्रसिद्ध है। यह एक संपत्ति विवाद बन रहा है जिसको प्रशासन एवं पुलिस सुलझाने का प्रयास कर रही है। ब्रह्मों समाज और रामकृष्ण मिशन का विवाद धीरे-धीरे बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों इस सम्पति पर अपना हक जमा रहे है। पुलिस प्रशासन की ओर से एएसपी शिमला नवदीप पुलिस टीम के साथ मौके पर हैं।
** सूखे की मार झेल रहे किसानों को मिलेगी राहत पर्यटन भी पकड़ेगा गति लंबे अरसे बाद मौसम ने करवट बदली है। शनिवार को रोहतांग सहित शिंकुला व बारालाचा दर्रे में बर्फ के फाहे गिरे हैं। बादल छा जाने से रोहतांग के निकटवर्ती स्थलों में भी हिमपात की उम्मीद बढ़ गई है। लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे किसानों व पर्यटन कारोबारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। शनिवार को बर्फ की उम्मीद लिए रोहतांग दर्रे में पांच सौ से अधिक पर्यटक वाहनों में लगभग चार हजार पर्यटक पहुंचे। बर्फ न पडऩे से उन्हें निराशा हुई, लेकिन ठंडा मौसम देख पर्यटक खासे उत्साहित हुए। देर शाम को दर्रे में बर्फ के फाहे गिरे। शनिवार को शिंकुला व बारालाचा दर्रे में बर्फ के फाहे गिरे, लेकिन लेह लद्दाख सहित जंस्कार घाटी की ओर वाहनों की आवाजाही सुचारू रही। देश भर के पर्यटक मनाली में हिमपात होने का इंतजार कर रहे हैं।
किन्नौर जिले के शोंग-टोंग प्रोजेक्ट की निमार्णाधीन रली एडिट टनल-2 से पानी लीक हो गया। इसके कारण रिकांगपिओ-रामपुर एनएच पर मलबा आने की सूचना है। बताया जा रहा है कि टनल से बड़ी मात्रा में पानी आने से एनएच पर यातायात बंद कर दिया गया है। इसके कारण एनएच के दोनों ओर गाड़ियों की कतारें लग गईं।एचपीसीएल की शोंग-टोंग टनल का पटेल कंपनी की ओर से निर्माण किया जा रहा है। शनिवार रात करीब 10 बजे प्रोजेक्ट में बड़ी मात्रा में लीकेज हो गया। इस वजह से एडिट टनल से बड़ी मात्रा में पानी एनएच पर आ गया। इसके कारण सड़क पर मलबा गिर गया। सड़क बंद होने के कारण एनएच से आवाजाही बंद है। बताया जा रहा है कि टनल के अंदर काम कर रहे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकल लिया है। पानी लीक होने की सूचना मिलते ही प्रशासन ने एनएच बहाली के लिए मौके पर मशीनें भेज दी हैं। प्रशासन ने टापरी से रिकांगपिओ और रिकांगपिओ से टापरी की ओर आ-जा रहे लोगों को वाया कड़छम-शीलती सड़क से जाने की अपील की है। उधर बताया जा रहा है कि जैसे ही स्थानीय लोगों को इस बात की सूचना मिली तो वे भी मदद के लिए माैके पर पहुंच गए। उन्होंने इस बारे में स्थानीय प्रशासन को भी सूचित किया।
हिमाचल प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों की 7,600 पदों की आउटसोर्स भर्तियों पर ब्रेक लग गई है। राज्य हाईकोर्ट के फैसले के बाद इलेक्ट्राॅनिक्स काॅरपोरेशन ने भर्ती प्रक्रिया बंद कर दी है। शिक्षा विभाग में 6,200 प्री प्राइमरी शिक्षकों सहित एनएचएम में नर्स, ओटी टैक्नीशियन और फार्मासिस्ट सहित अन्य श्रेणियों की 1400 पदों पर भर्तियां होनी हैं। दरअसल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने इन भर्तियों का इलेक्ट्राॅनिक्स काॅरपोरेशन को जिम्मा सौंपा है। अब कोर्ट ने काॅरपोरेशन के माध्यम से भर्तियाें पर रोक लगा दी है।सरकार भर्तियों को शुरू करने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखने की तैयारियों में जुट गई है। 21 नवंबर को इस मामले की सुनवाई होनी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने कॉरपोरेशन के तहत पंजीकृत सभी कंपनियों का डाटा बेवसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। जब तक सभी कंपनियों का डाटा वेबसाइट पर अपलोड नहीं होगा, तब तक आउटसोर्स भर्तियों पर रोक लगाई गई है। इस कारण इन दिनों काॅरपोरेशन के तहत होने वाली भर्तियों को लेकर प्रक्रिया थम गई है। शिक्षा विभाग ने बीते दिनों काॅरपोरेशन को 6200 प्री प्राइमरी शिक्षकों से संबंधित नियम तैयार कर भेजे थे। काॅरपोरेशन ने इन पदों पर भर्ती के लिए आउटसोर्स कंपनियों का चयन शुरू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। इसी बीच हाईकोर्ट की रोक के चलते यह काम बंद हो गया है। वहीं राज्य लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास करने पर शिक्षा विभाग ने हिंदी विषय के 113 और फिजिक्स विषय के 45 नए स्कूल प्रवक्ताओं को नियुक्तियां दे दी हैं। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से नियुुक्ति आदेश जारी किए गए। प्रवक्ताओं को 25,800 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। इनकी नियुक्ति अनुबंध आधार पर की गई है। तय कार्यकाल को पूरा करने के बाद इन्हें नियमित किया जाएगा। सभी नवनियुक्त प्रवक्ताओं को दस दिनों के भीतर पद ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश कंप्यूटर शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने आज अध्यक्ष सुमन ठाकुर के नेतृत्व में यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भेंट की तथा उन्हें अपनी सेवाओं को नियमित करने सहित विभिन्न मांगों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार विधि विभाग की राय लेने के पश्चात उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी तथा उनके हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कार्यवाही की जाएगी। सुमन ठाकुर ने कहा कि वे पिछले 24 वर्षों से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार को उनकी सेवाओं को नियमित करने का आग्रह किया। इस अवसर पर सचिव शिक्षा राकेश कंवर, संघ के राज्य समन्वयक अजीत धीमान तथा संघ के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
शिमला: जिला में कोटखाई तहसील के कल गोहाच गांव में तेंदुआ दिखने से लोग सहमें हुए हैं। तेंदुआ रात के घर के बाहर आंगन में दहाड़ता हुआ नजर आया। तेंदुए को एक व्यक्ति ने अपने फोन के कैमरे में कैद कर लिया। तेंदुआ घर के आंगन में बैठा है और जोर से दहाड़ रहा है। दहाड़ने की आवाज सुनकर आस-पास के लोगों ने खिड़की से झांक कर देखा तो घर के आंगन में तेंदुआ नजर आया। जानकारी के अनुसार घटना शुक्रवार देर रात साढ़े आठ बजे के आस पास कोटखाई क्षेत्र के गोहाच गांव की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि तेंदुए ने गांव में कुत्तों पर भी हमला किया। तेंदुए दिखने के बाद पूरे गांव के लोग दहशत में हैं। लोग सुबह शाम अंधेरे में घर से बाहर निकलने से डर रहे हैं। लोगों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने की गुहार लगाई है। गौरतलब है सर्दियों का मौसम शुरू शिमला शहर और निचले क्षेत्रों में तेंदुए दिखाई देने के मामले सामने आते रहते हैं। शिमला के आस-पास के क्षेत्रों में तेंदुआ कई बार बच्चों, पालतू और आवारा कुत्तों को भी अपना निशाना बना चुका है। अब एक बार फिर कोटखाई क्षेत्र में तेंदुआ दिखने से लोगों में डर का माहौल है।
** 3 दिन में स्कूल ज्वाइन करने के निर्देश शिमला: धरने पर गए वोकेशनल शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। कंपनी की ओर से शिक्षकों को ये नोटिस जारी किए गए हैं, साथ ही इन्हें 3 दिन में स्कूल ज्वाइन करने के भी निर्देश दिए गए हैं। शिक्षकों को लिखित में इसका जवाब देना होगा। नोटिस के जरिये शिक्षकों से पूछा गया है कि वह 11 दिन तक स्कूलों से किसकी परमिशन से गायब रहे। यदि इस दौरान शिक्षकों ने छुट्टी ली थी तो इसका भी कंपनी ने प्रमाण मांगा है। इसके साथ ही स्कूलों से शिक्षकों की अटैंडैंस भी मांगी गई है। शिक्षक 11 दिन से धरने पर थे। सूत्रों की मानें तो एमओयू के मुताबिक यदि वोकेशनल शिक्षक 10 दिन तक बिना बताए स्कूल से गायब रहते हैं तो उनकी सेवाओं को समाप्त किया जा सकता है, ऐसे में सर्विस प्रोवाइडर कंपनी की ओर से शिक्षकों को स्कूलों से गायब रहने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। गौर हो कि शिक्षक सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को बाहर करने व उन्हें विभाग में समायोजित करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे, ऐसे में 11 दिनों से स्कूलों में वोकेशनल शिक्षा ठप्प पड़ी थी। मामले पर आज यानि 16 नवम्बर को प्रदेश वोकेशनल टीचर वैल्फेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक से मिलेंगे। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया था कि शिक्षकों के आंदोलन की अवधि को रैगुलराइज किया जाएगा। ऐसे में एसोसिएशन सरकार से इन 11 दिनों को छुट्टियों को रैगुलराइज करने की मांग करेगी। बताया जा रहा है कि उनके मामले पर शिक्षा मंत्री 18 नवम्बर को बैठक बुला सकते हैं। इस दौरान यदि वोकेशनल शिक्षक बिना परमिशन से छुट्टियों पर पाए गए तो उनका वेतन भी कट सकता है। नियम के अनुसार बिना परमिशन के छुट्टी पर जाने से वेतन काटा जाता है। शिक्षक 11 दिनों से धरने पर थे, ऐसे में शिक्षकों पर यह कार्रवाई हो सकती है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार विपक्ष के दुष्प्रचार से विचलित नहीं होगी और प्रदेश की जनता की भलाई के लिए काम करती रहेगी। रामपुर के दत्तनगर में हिमाचल के सबसे बड़े मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लोकार्पण अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की मदद के बिना प्राकृतिक आपदा से प्रभावित 23 हजार परिवारों का पुनर्वास किया। सीएम ने कहा कि प्रदेश के किसानों से लिए जाने वाले दूध के दाम सरकार अगले साल के बजट में और बढ़ाएगी। अभी सरकार किसानों से गाय का दूध 45 रुपये और भैंस का दूध 55 रुपये प्रतिलीटर के हिसाब से खरीद रही है। पूर्व जयराम सरकार ने बिना बजट और पर्याप्त स्टाफ के शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थान खोले। चुनावी लाभ के लिए 5,000 करोड़ की रेवड़ियां बांटीं। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालन विभाग में 900 पशु फार्मासिस्टों की भर्ती करने जा रही है, ताकि पशुपालकों को घरद्वार पर बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्यों के कारण ही हिमाचल गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं देने में देशभर में पिछड़ गया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार देवी-देवताओं और जनता के आशीर्वाद से हर चुनौती पर विजय प्राप्त कर रही है। राजनीतिक चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करते हुए कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या फिर से 40 हो गई है।
हिमाचल में सैलानियों की संख्या में इजाफा हुआ है। वीकेंड पर एक साथ तीन छुट्टियों के चलते हिमाचल में टूरिस्ट की संख्या बढ़ी हैं। शिमला, कुफरी, कसौली, चायल, नारकंडा, मनाली और धर्मशाला में बड़ी संख्या में टूरिस्ट उमड़े हैं। प्रदेश के होटलों में ऑक्यूपेंसी बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंच गई है। रोहतांग सहित प्रदेश की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी के बाद सैलानियों का आकर्षण बढ़ा है। विंटर टूरिस्ट सीजन से पहले हिमाचल में सैलानियों की संख्या बढ़ने से पर्यटन कारोबारी उत्साहित हैं। रोहतांग में हुई बर्फबारी के बाद बाहरी राज्यों के सैलानियों ने मनाली का रुख करना शुरू कर दिया है। बीते एक सप्ताह में मनाली पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या करीब दोगुनी हो गई है। शिमला, कसौली, चायल, कुफरी और नारकंडा में भी वीकेंड पर टूरिस्टों की आवाजाही बढ़ गई है। शिमला के रिज मैदान और मालरोड पर शुक्रवार को सैलानियों की खूब चहलपहल रही। कुफरी में सैलानियों ने घुड़सवारी का लुत्फ उठाया। नारकंडा की हाटू पीक पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। शुक्रवार को कसौली में सैलानियों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक जाम की समस्या पेश आई। फेडरेशन ऑफ ऑल हिमाचल होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि लांग वीकेंड पर हिमाचल के पर्यटन स्थल सैलानियों से गुलजार हो गए हैं। विंटर टूरिस्ट सीजन से पहले वीकेंड पर टूरिस्टों की संख्या बढ़ने से आने वाले दिनों में अच्छे कारोबार की उम्मीद है। रोहतांग में हुई बर्फबारी के बाद मनाली में सैलानियों की संख्या में इजाफा हुआ है। वीकेंड पर तीन दिन की छुट्टियों के पैकेज के चलते भारी संख्या में सैलानी हिमाचल पहुंचे हैं। होटलों में ऑक्यूऐंसी 50 फीसदी तक पहुंच गई है। अच्छी बर्फबारी हाेने पर सैलानियों की संख्या में बूम आएगा
शिमला: हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हाईकोर्ट में सीपीएस की नियुक्तियां निरस्त होने के बाद प्रदेश मंत्रिमंडल की आज बैठक होगी। शिमला स्थित प्रदेश सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली मंत्रिमंडल की इस बैठक में हाईकोर्ट में सीपीएस की नियुक्तियां निरस्त होने पर चर्चा हो सकती है। वहीं, प्रदेश की सुक्खू सरकार का दो साल का कार्यकाल 11 दिसंबर को पूरा होने जा रहा है। ऐसे में कैबिनेट की मीटिंग में दो साल का कार्यकाल पूरा होने को लेकर मनाए जाने वाले जश्न को लेकर भी चर्चा हो सकती है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में करुणामूलक आधार पर नियुक्ति देने से संबंधित विषय को लेकर गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिशों पर बैठक में चर्चा होने की संभावना है। इसी तरह से विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी होना है, जिस पर भी कैबिनेट की चर्चा हो सकती है। हिमाचल में आगामी बजट को लेकर सरकार ने अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी है। इसको लेकर मुख्यमंत्री पहले ही मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं, जिसमें मंत्रियों से अपने-अपने विभागों से संबंधित प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है, ताकि इसे बजट में शामिल करके आम जनता को फायदा पहुंचाया जा सके। हिमाचल में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। प्रदेश में साल 2022 हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की भी गारंटी दी थी। हर बार कैबिनेट की मीटिंग में सरकार का नए पदों को सृजित कर इन्हें भरे जाने का प्रयास रहता है। ऐसे में आज आयोजित होने वाली कैबिनेट की बैठक में विभिन्न विभागों में और भी नए पद सृजित किए जा सकते हैं। इसको देखते हुए युवाओं को कैबिनेट की मीटिंग से काफी उम्मीदें रहती है। सीएम सुक्खू की अध्यक्षता में पिछली कैबिनेट बैठक 22 अक्टूबर को आयोजित हुई थी, जिसमें मंत्रिमंडल ने वन विभाग में 2,061 वन मित्रों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। इसी तरह से कैबिनेट ने मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के तहत प्रदेश के पशु चिकित्सालय में सालों से सेवाएं दे रहे GPVA को नियमित करने के लिए 964 पद सृजित किए थे। वहीं, कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग में वर्क इंस्पेक्टर के 100 पदों को भरने की भी मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा सुक्खू कैबिनेट ने डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, हमीरपुर में 150 स्टाफ नर्स के पद भरने का भी फैसला लिया था। इसी तरह से मंत्रिमंडल ने चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में सामान्य चिकित्सा, शिशु रोग, सामान्य शल्य चिकित्सा, अस्थि रोग, एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों में छह एसोसिएट प्रोफेसर के पद और 10 सहायक प्रोफेसर पद सृजित कर भरने का भी फैसला लिया गया था।
हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में स्टेट काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) की परीक्षाएं ऑनलाइन करवाने का फैसला लिया है। इसके कारण जहां कागजों की बचत होगी तो वहीं परिणाम भी समय पर निकाला ज सकेगा। बता दें कि तकनीकी शिक्षा बोर्ड की ओर से हर वर्ष औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में एससीवीटी परीक्षा ऑफलाइन मोड पर करवाई जाती है। इस प्रणाली में समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। लिहाजा, अब बोर्ड ने बदलाव करते हुए परीक्षा का संचालन ऑनलाइन मोड पर करवाने का फैसला लिया है। इसके लिए बोर्ड की ओर से पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। इस बार से अब ऑनलाइन ही परीक्षाएं करवाई जाएंगी। एससीवीटी की परीक्षाएं ऑनलाइन करवाने के लिए सितंबर में ट्रायल हुआ था। प्रदेश भर में स्थापित 15 केंद्रों पर ऑनलाइन मोड पर 23 ट्रेडों की परीक्षाएं करवाई गई थीं। ट्रायल सफल रहा था। सिर्फ दो ट्रेडों की परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं हो पाई थीं, क्योंकि उन विषयों का अधिकतर भाग थियोरी पर आधारित था। ऑनलाइन आयोजित हुई परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों से एमसीक्यू प्रश्न पूछे गए थे। ऑनलाइन परीक्षा के दौरान टाइमर कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा, जिसके चलते अभ्यर्थियों को समय का भी साथ-साथ पता चलता रहेगा। ऑनलाइन परीक्षा का एक फायदा यह भी होगा कि अगर परीक्षा के दौरान विद्युत आपूर्ति बाधित होती है तो परीक्षा का समय भी रुक जाएगा। जैसे ही फिर बिजली आएगी, तो परीक्षा का टाइम वहीं से शुरू होगा, जहां से बिजली गुल हुई थी। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने एससीवीटी परीक्षाओं के आयोजन के लिए एक नई पहल की है। इस बार से ट्रेड शुरु होने के दौरान ली जाने वाली एससीवीटी परीक्षाओं का आयोजन कंप्यूटर आधारित परीक्षण (सीबीटी) के तहत लिया गया है। इससे जहां कागज की की बचत हुई है, वहीं अन्य भी कई प्रकार के लाभ मिले हैं हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर ने दिसंबर व जनवरी माह में प्रस्तावित परीक्षाओं के लिए परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि 16 नवंबर तक बढ़ाई है। पूर्व में आवेदन के लिए 12 नवंबर तक का समय प्रदान किया गया था, परंतु कुछेक विद्यार्थी निजी कारणों से आवेदन नहीं कर पाए थे। अब तिथि बढ़ने से स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षा के नियमित सेमेस्टर और रि-अपीयर के विद्यार्थी 16 नवंबर तक बिना विलंब शुल्क के ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं। तकनीकी विवि के परीक्षा नियंत्रक कमल देव सिंह कंवर ने कहा कि दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में प्रस्तावित परीक्षा की संभावित तिथियां भी घोषित कर दी हैं। विद्यार्थी उपरोक्त तिथि तक ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं।
शिमला के रोहड़ू के अन्द्रेव्ठी गांव की रहने वाली शिव्या बालनाटाह ने बनाया विश्व रिकॉर्ड । एक असाधारण उपलब्धि में, रविकांत बालनाटाह की पोती और अभय बालनाटाह और आकांक्षा बालनाटाह की बेटी, बेबी शिव्या बालनाटाह ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। केवल 1 साल, 11 महीने और 20 दिन की छोटी सी उम्र में, उन्होंने 40 देशों के झंडों और उनकी राजधानियों की पहचान सिर्फ 1 मिनट 45 सेकंड में की। यह असाधारण उपलब्धि को आधिकारिक तौर पर विश्व रिकॉर्ड बुक द्वारा मान्यता दी गई है। शिव्या बालनाटाह को 12 नवंबर, 2024 को इंदौर, मध्य प्रदेश में आयोजित विश्व रिकॉर्ड बुक सम्मेलन में सम्मानित किया गया। शिव्या की इस विश्व रिकॉर्ड की यात्रा बहुत जल्दी शुरू हो गई थी। उनके माता-पिता ने उनकी सहज जिज्ञासा और तेज बुद्धि को पहचानते हुए उन्हें झंडों और राजधानियों की दुनिया से परिचित कराया। एक मजेदार सीखने की गतिविधि के रूप में शुरू हुआ, यह जल्द ही एक जुनून में बदल गया, क्योंकि शिव्या ने जानकारी को याद रखने और याद करने की अद्भुत क्षमता प्रदर्शित की। उनके समर्पण और लगातार अभ्यास, साथ ही उनके माता-पिता के अटूट समर्थन ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि को हासिल किया। यह शिव्या की पहली मान्यता नहीं है। इस साल की शुरुआत में, उन्हें आकृतियों, वस्तुओं, जानवरों और मानवीय भावनाओं की पहचान करने सहित असाधारण संज्ञानात्मक क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए प्रतिष्ठित केवल 1 साल 6 महीने की आयु मे 'आईबीआर अचीवर' खिताब से सम्मानित किया गया था। उनका हालिया विश्व रिकॉर्ड उनकी एक बाल प्रतिभा के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है। शिव्या की कहानी माता-पिता और शिक्षकों के लिए एक प्रेरणा है। यह प्रारंभिक बचपन शिक्षा के महत्व और हर बच्चे में निहित क्षमता को उजागर करती है। उनकी जिज्ञासा को पोषित करके और उन्हें उत्तेजक सीखने के अनुभव प्रदान करके, हम उनकी पूरी क्षमता को अनलॉक कर सकते हैं। जैसे-जैसे शिव्या बढ़ती और सीखती जाती है, दुनिया उनकी अगली उपलब्धि का बेसब्री से इंतजार कर रही है। उनकी यात्रा मानव क्षमता की शक्ति और आगे बढ़ने वाली असीम संभावनाओं का प्रमाण है।
हिमाचल में 15 नवंबर से मौसम करवट बदल सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार पश्चिमी हिमालय में 14 नवंबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। हालांकि इस दौरान अधिक वर्षा व हिमपात के आसार नहीं हैं। कांगड़ा व कुल्लू में हल्की वर्षा, लाहुल स्पीति, चंबा व कुल्लू के ऊपरी क्षेत्रों में बर्फ के हल्के फाहे गिर सकते हैं। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में वर्षा व हिमपात की संभावना नहीं है। प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में सुबह कोहरा पड़ना जारी है। ऊना जिला में 10 दिन तक घना कोहरा पड़ने की संभावना है। मंडी, कांगड़ा व हमीरपुर जिले शिमला से अधिक ठंडे है। बुधवार को शिमला का न्यूनतम तापमान 10.6, मंडी का 9.3 और कागंडा व हमीरपुर का 9.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया है। मौसम विभाग ने हमीरपुर, मंडी व बिलासपुर के कई क्षेत्रों में 17 नवंबर तक कोहरे को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। कोहरे के कारण प्रदेश में सुबह और शाम ठंड काफी बढ़ गई है। दोपहर को धूप लोगों को परेशान कर रही है। करीब डेढ़ माह से वर्षा न होने से किसान व बागवान परेशान हैं। आने वाले दिनों में वर्षा नहीं हुई तो किसानों व बागवानों की मुश्किल बढ़ सकती है। प्रदेश में शुष्क ठंड से फिलहाल राहत नहीं मिलने वाली है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले चार दिन तक मंडी, बिलासपुर, ऊना और कुछ अन्य स्थानों पर सुबह व शाम घना कोहरा छाया रहेगा। इससे यातायात सेवाएं प्रभावित होंगी। 15 व 16 नवंबर को एक-दो ऊंचे क्षेत्रों में हिमपात और वर्षा की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्य संसदीय सचिवों के सचिवालय में कार्यालय खाली कराने के आदेश जारी कर दिए गए हैं और कुछ दफ्तर खाली भी कर दिए गए हैं। सीपीएस के साथ लगाया गया स्टाफ भी वापस बुला दिया गया है। गाड़ियां इनसे वापस ले ली गई हैं। प्रदेश सरकार ने बुधवार शाम को ही यह आदेश जारी किए। यहीं नहीं इन सीपीएस को सरकार की ओर से दी गई सभी सुख सुविधाएं भी हट जाएंगी। सरकारी कोठियां भी खाली करनी होंगी। बुधवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद सचिवालय में सीपीएस के कमरों में सन्नाटा पसरा रहा। कई भी सीपीएस सचिवालय में नहीं देखे गए। सात मंत्रियों के साथ ही इन सीपीएस ने गोपनीयता की शपथ ली थी। सक्खू सरकार में मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल ब्राक्टा को विधि विभाग, संसदीय कार्य विभाग और बागवानी विभाग, रामकुमार को नगर नियोजन विभाग, उद्योग विभाग और राजस्व, आशीष बुटेल को शहरी विकास विभाग के साथ शिक्षा विभाग में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के साथ अटैच किया गया। वहीं, मुख्य संसदीय सचिव किशोरी लाल को पशुपालन विभाग, ग्रामीण विकास के साथ पंचायती राज विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गई। संजय अवस्थी को स्वास्थ्य जनसंपर्क और लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर को ऊर्जा, वन, परिवहन और पर्यटन विभाग विभाग का जिम्मा सौंपा गया। यह छह मुख्य संसदीय सचिव अलग-अलग विभागों के मंत्रियों की काम में मदद करने का जिम्मा दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने मुख्य संसदीय सचिव से स्टाफ हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। वरिष्ठ निजी सचिव भूरी सिंह राणा, तहमीना बेगम और विशेष निजी सचिव सत्येंद्र कुमार सहित अन्य स्टाफ को वापस बुलाया गया है। अब कार्मिक विभाग की ओर से इनकी अलग से नियुक्ति के आदेश जारी किए जाएंगे। राज्यपाल से मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने सीपीएस के स्टाफ के कर्मचारी यानकी देवी, सुनीता ठाकुर, उत्तम चंद, चेतन, संदीप, चंद्र, धर्मपाल, रविंद्र, नेत्र सिंह, मोहिंद्र, विनोद, टिक्कम राम, नीरज और भूपिंद्र को वापस बुलाने के आदेश जारी किए हैं।हिमाचल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि प्रदेश में सीपीएस/पीएस की नियुक्ति का कानून फैसला आने तक लागू था। अयोग्यता अधिनियम 1971 के तहत सीपीएस/ पीएस की नियुक्तियों को संरक्षण दिया गया था, लेकिन इस फैसले के बाद मुख्य संसदीय सचिवों व संसदीय सचिवों की नियुक्ति को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट माना जाएगा। एेसे में यदि अब सीपीएस नियुक्त होते हैं, तो उनकी विधायकी भी जाएगी।


















































