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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए आयोजित लेटरल एंट्री एंट्रेंस टेस्ट (LEET)-2026 का बहुप्रतीक्षित परिणाम घोषित कर दिया है। 14 जून को आयोजित इस परीक्षा में प्रदेशभर के 1,963 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। परिणाम जारी होते ही विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल है और अब उनकी नजरें आगामी काउंसलिंग एवं प्रवेश प्रक्रिया पर टिकी हैं। तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव Ashok Pathak ने बताया कि इस वर्ष शिमला के अमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है। अमन ने 400 में से 370 अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया। वहीं, चंबा के मोहित कपूर 285 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि मंडी की नंदिनी ने 246 अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट सूची में तीसरा स्थान प्राप्त किया। बोर्ड ने परीक्षा परिणाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया है, जहां अभ्यर्थी अपना रिजल्ट और स्कोरकार्ड ऑनलाइन देख सकते हैं। परिणाम जारी होने के बाद सफल उम्मीदवारों के लिए प्रवेश प्रक्रिया का अगला चरण जल्द शुरू किया जाएगा। बोर्ड सचिव ने बताया कि काउंसलिंग और सीट आवंटन से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम शीघ्र जारी किया जाएगा। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं और अपडेट के लिए नियमित रूप से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। LEET-2026 के परिणामों के साथ अब प्रदेश के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग डिप्लोमा संस्थानों में प्रवेश का रास्ता खुल गया है। सफल अभ्यर्थी आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से अपनी पसंद के संस्थानों और शाखाओं में दाखिला प्राप्त कर सकेंगे।
चेन्नई। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भारतीय टीम शनिवार को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जाने वाले तीसरे और अंतिम वनडे में क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान में उतरेगी। सीरीज पर पहले ही कब्जा जमा चुकी टीम इंडिया अब जीत की हैट्रिक लगाकर अफगानिस्तान का पूरी तरह सफाया करने की कोशिश करेगी। इस मुकाबले में विशेष रूप से रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल के प्रदर्शन पर क्रिकेट प्रेमियों की नजरें रहेंगी। युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल के लिए यह मैच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वनडे टीम में वापसी के बाद उन्हें मिले सीमित अवसरों का पूरा फायदा उठाने की चुनौती होगी। पिछले मुकाबले में वह बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके थे, ऐसे में चेन्नई में उनके पास खुद को साबित करने का सुनहरा मौका होगा। दूसरी ओर, रोहित शर्मा की मौजूदगी शीर्ष क्रम को मजबूती देती है और टीम को उनसे एक बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी। इंग्लैंड दौरे के लिए टीम चयन से पहले यह मुकाबला कई खिलाड़ियों के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने का अवसर भी माना जा रहा है। एमए चिदंबरम स्टेडियम की पिच पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार रही है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को कुछ सहायता मिल सकती है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, स्पिनरों का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। ऐसे में दोनों टीमों के स्पिन आक्रमण की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। हालांकि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को चेन्नई में मौसम खराब रह सकता है और बारिश मुकाबले में बाधा डाल सकती है। भारतीय टीम को तेज गेंदबाज हर्षित राणा के रूप में अतिरिक्त मजबूती भी मिली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अनुसार राणा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपना रिहैबिलिटेशन पूरा कर लिया है और वह टीम के साथ जुड़ चुके हैं। फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद उन्हें तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। ऐसे में उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। सीरीज के अंतिम मुकाबले में भारत जहां क्लीन स्वीप के लक्ष्य के साथ उतरेगा, वहीं अफगानिस्तान की टीम सम्मान बचाने और जीत के साथ दौरे का समापन करने की कोशिश करेगी। चेपॉक में होने वाला यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम रहने वाला है और क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मैच देखने को मिल सकता है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने Re-NEET 2026 परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की है। सरकार के निर्णय के तहत 21 जून को आयोजित होने वाली Re-NEET परीक्षा के अभ्यर्थियों को हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की साधारण बसों में परीक्षा केंद्र तक आने-जाने के लिए नि:शुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की यात्रा को सुगम, सुरक्षित और तनावमुक्त बनाना है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के परीक्षा में शामिल हो सकें। HRTC द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह सुविधा केवल निगम की साधारण बसों में ही लागू होगी। लग्जरी, डीलक्स और अन्य विशेष श्रेणी की बसों में यह छूट मान्य नहीं होगी। मुफ्त यात्रा का लाभ उठाने के लिए अभ्यर्थियों को यात्रा के दौरान अपना Re-NEET 2026 एडमिट कार्ड दिखाना होगा। यही दस्तावेज पहचान पत्र, निवास स्थान और परीक्षा केंद्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा अभ्यर्थी के निवास स्थान से परीक्षा केंद्र तक एक बार जाने और परीक्षा के बाद एक बार वापस लौटने के लिए ही मान्य होगी। विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था 20 जून से 22 जून तक प्रभावी रहेगी। किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए बस परिचालकों को एडमिट कार्ड पर यात्रा संबंधी आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, मुफ्त यात्रा करने वाले छात्रों का रिकॉर्ड तैयार कर HRTC मुख्यालय को भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri के निर्देशों के बाद HRTC प्रबंधन ने सभी क्षेत्रीय और यूनिट अधिकारियों को इस सुविधा के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से परीक्षा देने आने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को आर्थिक एवं मानसिक राहत मिलेगी। उपमुख्यमंत्री ने Re-NEET 2026 में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छात्र पूरे आत्मविश्वास और शांत मन से परीक्षा दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी सुविधा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करती रहेगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने NEET परीक्षा से जुड़े विवाद में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को बड़ा झटका देते हुए केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा है। जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने टेलीग्राम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत जारी केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने माना कि मामले की संवेदनशीलता और आपातकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है और उसके फैसले में किसी प्रकार की मनमानी या विचारहीनता नहीं दिखती। कोर्ट ने यह भी कहा कि टेलीग्राम को इस मामले में आईटी अधिनियम के प्रावधानों से बाहर रखने का कोई आधार नहीं है। दरअसल, सरकार का आरोप है कि NEET परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री और कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्रों के प्रसार में इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह प्रतिबंध 22 जून तक जारी रहेगा। इस मामले को देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन माध्यमों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही राज्य सरकार अब 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है। वित्त विभाग ने इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे पहले मई 2026 में सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में अप्रैल माह में 900 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया गया था। यदि यह नया ऋण स्वीकृत हो जाता है तो अप्रैल, मई और जून के दौरान राज्य सरकार की कुल उधारी 2,100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने की प्रतिबद्ध देनदारियों का भुगतान है। राज्य को कर्मचारियों के वेतन के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये, पेंशन भुगतान के लिए 800 करोड़ रुपये, पहले से लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये तथा ऋण के मूलधन की अदायगी के लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। यानी हर महीने लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वित्तीय संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 अप्रैल 2026 को सरकार ने कुछ श्रेणियों के अधिकारियों और माननीयों के वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था। हालांकि अब राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह स्थगित वेतन जून 2026 के वेतन के साथ जारी किया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। लगातार बढ़ती उधारी के बीच हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ अब 1,11,200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां इसे सरकार की वित्तीय विफलता बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने और सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों, पेंशनरों और विकास कार्यों की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए यह कदम आवश्यक है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार बढ़ती उधारी हिमाचल की वित्तीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाएगी, या सरकार राजस्व बढ़ाने के अपने प्रयासों से इस संकट से बाहर निकल पाएगी।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।
हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में अनेक ऐसे देवस्थल हैं, जिनका महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्थानीय इतिहास, संस्कृति और लोकविश्वास का भी अभिन्न हिस्सा हैं। मंडी जिले की करसोग घाटी में स्थित देवता श्री मूल माँहूनाग जी का मंदिर भी ऐसा ही एक पवित्र स्थल है, जो सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। करसोग की बखारी कोठी में समुद्र तल से लगभग 6200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य, लोक परंपराओं और देव संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मूल माँहूनाग जी को महाभारत के महान योद्धा और दानवीर सूर्यपुत्र कर्ण का अवतार माना जाता है। स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद कर्ण ने लोककल्याण के लिए देव रूप धारण किया और हिमालय की इन पर्वत श्रृंखलाओं को अपना निवास बनाया। समय के साथ वे माँहूनाग देवता के रूप में पूजे जाने लगे। आज भी करसोग क्षेत्र में कर्ण और माँहूनाग को एक ही दिव्य शक्ति का स्वरूप माना जाता है। यही कारण है कि देवता को दान, धर्म, पराक्रम और न्याय का प्रतीक माना जाता है। मूल माँहूनाग जी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध लोककथाओं में सुकेत रियासत के राजा श्याम सेन की कथा प्रमुख है। कहा जाता है कि मुगल शासनकाल में राजा श्याम सेन को बंदी बना लिया गया था। संकट की इस घड़ी में राजा ने माँहूनाग देवता का स्मरण किया। लोकविश्वास के अनुसार देव कृपा से राजा को मुक्ति मिली और वे सकुशल अपने राज्य लौट सके। इस घटना के बाद सुकेत राजपरिवार की माँहूनाग देवता के प्रति आस्था और अधिक गहरी हो गई तथा देवता को रियासत का रक्षक माना जाने लगा। मंदिर की एक विशेष पहचान यहां स्थित पवित्र धूना भी है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह धूना सदियों से निरंतर प्रज्वलित है और कभी पूर्ण रूप से शांत नहीं हुआ। श्रद्धालु इसे देव कृपा और दिव्य शक्ति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर परिसर में पहुंचने वाले भक्त इस धूने के दर्शन कर विशेष आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव करते हैं। माँहूनाग देवता की महिमा केवल करसोग तक सीमित नहीं है। सुंदरनगर क्षेत्र में भी देवता की विशेष मान्यता है और वहां स्थित मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। समय-समय पर आयोजित देव यात्राएं और धार्मिक आयोजन इस आस्था को और अधिक सशक्त बनाते हैं। देवता की पालकी जब विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करती है, तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। मूल माँहूनाग जी का जिला स्तरीय मेला करसोग की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मेला प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की एक से पांच प्रविष्टि तक आयोजित किया जाता है। मेले की शुरुआत देवता जी की भव्य जलेब से होती है, जिसमें ढोल, नगाड़े, रणसिंघा और करनाल की गूंज के बीच देवता की शोभायात्रा निकाली जाती है। हजारों श्रद्धालु इस अवसर पर करसोग पहुंचते हैं और देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि हिमाचली लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, लोकसंगीत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। स्थानीय समाज में माँहूनाग देवता को न्यायप्रिय देवता के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। लोगों का विश्वास है कि यदि किसी व्यक्ति को कहीं न्याय नहीं मिलता, तो वह देवता के दरबार में अपनी प्रार्थना रख सकता है। इसी विश्वास को दर्शाती एक प्रसिद्ध स्थानीय कहावत आज भी सुनने को मिलती है— "सीने गोष्ठुए आग"। इसका अर्थ है कि माँहूनाग देवता सब कुछ देखते और सुनते हैं। न्याय भले देर से मिले, लेकिन सत्य और निष्पक्षता के साथ अवश्य मिलता है। ग्रामीण जीवन में भी देवता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसान खेतों में बीज बोने से पहले देवता का आशीर्वाद लेते हैं। विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय या अन्य शुभ कार्यों से पूर्व भी देवता की अनुमति और कृपा को आवश्यक माना जाता है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, "देवता बिना इजाजत कुछ नहीं और देवता की मर्जी से सब संभव है।" यह कथन आज भी क्षेत्र की गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाता है। माँहूनाग देवता से जुड़ा एक और रोचक पक्ष उनकी समृद्ध देव परंपरा है। लोकमान्यताओं के अनुसार श्रद्धालु वर्षों से सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं देवता को अर्पित करते रहे हैं। यही कारण है कि माँहूनाग देवता को हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित और समृद्ध देवस्थलों में गिना जाता है। कुछ लोग उन्हें प्रतीकात्मक रूप से "देवताओं का बैंकर" भी कहते हैं, हालांकि यह लोक परंपरा और जनविश्वास का हिस्सा है। आज मूल माँहूनाग मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हिमाचल की जीवंत देव संस्कृति, लोक इतिहास और सामाजिक मूल्यों का प्रतीक बन चुका है। दानवीर कर्ण की परंपरा से जुड़ी यह आस्था लोगों को सत्य, न्याय, परोपकार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। करसोग की शांत वादियों में स्थित यह देवस्थल आज भी हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है और उन्हें अपनी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ता है। मूल माँहूनाग जी की यह गाथा केवल एक मंदिर की कहानी नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की उस अनूठी देव संस्कृति की कहानी है, जो सदियों से लोगों के जीवन, विश्वास और सामाजिक व्यवस्था का आधार बनी हुई है।
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