•   Sunday Sep 06
Fertilizer ‘crisis’ during apple season! CAN fertilizer missing, orchardists in distress; Rohit Thakur raises the issue with Nadda.
In Rural

सेब सीजन में खाद का ‘संकट’! कैन खाद गायब, बागवान बेहाल; रोहित ठाकुर ने नड्डा के दरबार में उठाया मुद्दा

हिमाचल में सेब सीजन के बीच कैन खाद की कमी से बागवान परेशान हैं। कैन खाद से सेब के पौधों को जरूरी पोषण मिलता है। इसका उत्पादन बंद होने के बाद बागवानों को यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट और एनपीके जैसी दूसरी खाद इस्तेमाल करनी पड़ रही है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने यह मामला केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सामने उठाया है। उन्होंने कैन खाद का उत्पादन और सप्लाई जल्द शुरू करने की मांग की है। रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब का कारोबार हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है और इससे हर साल करीब 6 हजार करोड़ रुपये का योगदान होता है। ऐसे में बागवानों को समय पर सस्ती खाद मिलना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक यूरिया इस्तेमाल करने से जमीन की गुणवत्ता और सेब के पेड़ों पर असर पड़ सकता है। जेपी नड्डा ने भरोसा दिया है कि मामले को देखा जा रहा है और बागवानों के हित में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

Bloodshed in Solan! Second major incident in 24 hours; death of a youth from Kalka sparks panic.
In crime

सोलन में खुनी खेल! 24 घंटे में दूसरी बड़ी वारदात, कालका के युवक की मौत से मचा हड़कंप

सोलन शहर में बदमाशो के हौंसले बुलंद होते जा रहे है।  दो दिन में दो बड़ी वारदात सामने आई है। शुक्रवार रात शहर के चौक बाजार में चाकुबाजी में कालका निवासी एक युवक की जान चली गई ,  एक युवक की उंगली कटी है और एक के सिर पर हमला हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और तफ्तीश जारी है।  इससे पहले वीरवार रात शहर में मुख्य बाजार मॉल रोड पर एक शराब के ठेके पर काम करने वाले सेल्समैन पर दो युवकों ने बेलचे से हमला कर दिया था। उक्त सेल्समैन की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। इस पूरे मामले पर एसपी सोलन ने क्या कहा, आपको सुनाते है ..

Education system exposed in the Assembly: 177 schools lack buildings; students—the future—are studying in rest houses and panchayat buildings.
In Education

विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल: 177 स्कूल भवनविहीन, रेस्ट हाउस-पंचायत भवन में पढ़ रहा भविष्य

हिमाचल विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के 177 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। कई जगह बच्चे पंचायत भवन, रेस्ट हाउस, सामुदायिक केंद्र और दूसरे स्कूलों के कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि 12 स्कूलों के भवन प्राकृतिक आपदा के कारण असुरक्षित हो चुके हैं। 28 स्कूलों के नए भवन बन रहे हैं, जबकि 14 के लिए पैसा जारी किया जा चुका है। बाकी स्कूलों के लिए जमीन की समस्या बड़ी अड़चन बनी हुई है। वहीं, पिछले तीन साल में बंद हुए 1,526 स्कूलों में से 1,473 भवन आज भी शिक्षा विभाग के पास हैं। इनमें से 577 भवन दूसरे विभागों और संस्थाओं को इस्तेमाल के लिए दे दिए गए हैं। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर चंबा के कुनरा स्कूल की है, जहां 99 बच्चे फिलहाल रेस्ट हाउस के महज चार कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं

₹558 crore in arrears, but only ₹62 crore recovered! The Excise Department will now attach and auction the defaulters' assets.
In Politics

558 करोड़ बकाया, वसूली सिर्फ 62 करोड़! आबकारी विभाग अब बकायादारों की संपत्ति कुर्क कर करेगा नीलाम

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आबकारी विभाग की बकाया वसूली को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विभाग के 558.50 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में महज 62.11 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। विधायक संजय अवस्थी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में यह आंकड़ा सदन के पटल पर रखा। सरकार अब बकायादारों पर सिर्फ नोटिस नहीं, सीधा शिकंजा कसने की तैयारी में है। बकाया नहीं चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क करने से लेकर जरूरत पड़ने पर नीलामी तक की कार्रवाई होगी। संबंधित तहसीलदारों को कुर्की वारंट भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आबकारी विभाग की NOC के बिना बकायादारों को सरकारी काम न देने और उनका भुगतान रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। कांगड़ा के शाहपुर में एक बकायादार लाइसेंसी की जमीन नीलाम कर 2.51 लाख रुपये वसूले गए, जबकि दो अन्य मामलों में 27 लाख रुपये की वसूली हुई। डीए पर भी सरकार ने खोला पत्ता इसी बीच विधानसभा में सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी। सुखराम चौधरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि डीए की दर कंपनी के हिसाब से नहीं, बल्कि कर्मचारी की पेंशन योजना के आधार पर तय होती है। NPS कर्मचारियों को 60% जबकि OPS और EPF कर्मचारियों को 45% डीए मिल रहा है। यानी विधानसभा में एक तरफ 558 करोड़ की वसूली का बड़ा सवाल गूंजा, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के डीए को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी।

Promotions Galore at Himachal Secretariat! 18 Senior Assistants Promoted to Superintendent Grade-II; Set to Shoulder Major Responsibilities.
In Education

हिमाचल सचिवालय में प्रमोशन की सौगात! 18 सीनियर असिस्टेंट बने सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II, अब संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी

हिमाचल प्रदेश सचिवालय में कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात मिली है। सचिवालय में कार्यरत 18 सीनियर असिस्टेंट को सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के पद पर पदोन्नति दी गई है। इस प्रमोशन के बाद अब ये कर्मचारी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेशों के तहत इन कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे सीनियर असिस्टेंट अब सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के तौर पर विभागीय कामकाज को आगे बढ़ाएंगे। प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों में भी खुशी का माहौल है। नई जिम्मेदारी के तहत पदोन्नत कर्मचारियों को कार्यालयी कार्यों की निगरानी, फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण काम संभालने होंगे। इससे सचिवालय के कामकाज में भी जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा होने की उम्मीद है। प्रमोशन को कर्मचारियों के अनुभव और सेवाओं की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों ने इसे अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।  

Himachal Assembly Monsoon Session: House witnesses 45.30 hours of heated proceedings; adjourned sine die amidst uproar and debate.
In Politics

हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: 45.30 घंटे तक गरजा सदन, हंगामे और बहस के बीच कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को संपन्न हो गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक चला। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर भी सत्र की यही अवधि दर्ज है।  करीब दो सप्ताह चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विभिन्न जनहित के मुद्दे सदन में उठाए गए और सरकार की ओर से कई मामलों पर जवाब दिए गए। सत्र की कुल कार्यवाही 45 घंटे 30 मिनट चली। इस दौरान विधायी कामकाज के साथ प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कई मौकों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के फैसलों और नीतियों का बचाव किया। विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर घमासान सत्र के अंतिम दिन हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन ने पारित किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक को पेश किया। भाजपा विधायकों ने इसका विरोध करते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए।  सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, जबकि शैक्षणिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया जाएगा। विपक्ष ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया।  मानसून सत्र की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई थी। पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी हुई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।  सत्र के दौरान प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा और अन्य संसदीय कार्यवाही के जरिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाए। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर सत्र की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।  45 घंटे 30 मिनट की बहस, हंगामे और विधायी कामकाज के बाद अब विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।  

Torrential rain wreaks havoc in Solan's Jabli! A sudden surge of water crashes into a shop; shopkeeper narrowly escapes by running for his life; video goes viral.
In News update

सोलन के जाबली में बारिश का तांडव! दुकान पर अचानक टूटा पानी का सैलाब, भागकर दुकानदार ने बचाई जान; वीडियो वायरल

धर्मपुर क्षेत्र के जाबली में गुरुवार सुबह तेज बारिश के दौरान अचानक भारी मात्रा में पानी दुकान की ओर आ गया। पानी का तेज बहाव देखकर दुकान में मौजूद दुकानदार ने बिना देर किए बाहर भागकर अपनी जान बचाई! घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दुकानदार जैसे ही दुकान से बाहर निकलता है, उसके कुछ ही सेकंड बाद दुकान के ऊपर से पानी का तेज सैलाब नीचे की ओर आता है। अचानक आए पानी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।  बताया जा रहा है कि सुबह हुई भारी बारिश के बाद जाबली और आसपास के इलाकों में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई। फोरलेन की ओर से बहकर आया बारिश का पानी दुकानों तक पहुंच गया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं।  बारिश के कारण धर्मपुर क्षेत्र में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर पानी और मलबे के कारण आवाजाही बाधित हुई है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।  जाबली की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के दौरान कुछ ही मिनटों में हालात किस तरह खतरनाक हो सकते हैं।

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558 करोड़ बकाया, वसूली सिर्फ 62 करोड़! आबकारी विभाग अब बकायादारों की संपत्ति कुर्क कर करेगा नीलाम

In Politics
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आबकारी विभाग की बकाया वसूली को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विभाग के 558.50 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में महज 62.11 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। विधायक संजय अवस्थी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में यह आंकड़ा सदन के पटल पर रखा। सरकार अब बकायादारों पर सिर्फ नोटिस नहीं, सीधा शिकंजा कसने की तैयारी में है। बकाया नहीं चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क करने से लेकर जरूरत पड़ने पर नीलामी तक की कार्रवाई होगी। संबंधित तहसीलदारों को कुर्की वारंट भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आबकारी विभाग की NOC के बिना बकायादारों को सरकारी काम न देने और उनका भुगतान रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। कांगड़ा के शाहपुर में एक बकायादार लाइसेंसी की जमीन नीलाम कर 2.51 लाख रुपये वसूले गए, जबकि दो अन्य मामलों में 27 लाख रुपये की वसूली हुई। डीए पर भी सरकार ने खोला पत्ता इसी बीच विधानसभा में सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी। सुखराम चौधरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि डीए की दर कंपनी के हिसाब से नहीं, बल्कि कर्मचारी की पेंशन योजना के आधार पर तय होती है। NPS कर्मचारियों को 60% जबकि OPS और EPF कर्मचारियों को 45% डीए मिल रहा है। यानी विधानसभा में एक तरफ 558 करोड़ की वसूली का बड़ा सवाल गूंजा, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के डीए को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी।

हिमाचल में अस्पताल की लापरवाही ? ऑक्सीजन खत्म , 90 साल की वृद्धा 2 घंटे तक तड़पती रही : नर्स पर बदसलूकी का आरोप, अस्पताल में हंगामा

In Health
Hospital negligence in Himachal? Oxygen ran out, 90-year-old woman writhed in agony for two hours; nurse accused of misconduct, uproar at the hospital.

पांवटा साहिब (सिरमौर): सिविल अस्पताल पांवटा साहिब की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है जानकारी के मुताबिक, गिरिपार क्षेत्र के बाईला-गुजोन गांव की मुंगा देवी अस्पताल के फीमेल वार्ड में उपचाराधीन हैं। परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे उनका ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी स्टाफ से नया सिलिंडर लगाने का आग्रह किया, लेकिन करीब 5 बजे तक ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान वृद्धा को सांस लेने में परेशानी होती रही। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने दोबारा ऑक्सीजन लगाने की मांग की तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और पुलिस बुलाने की धमकी दी गई। एक शिकायत में तीमारदारों को वार्ड के दरवाजे से बाहर धक्का देने और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिजनों का दावा है कि कथित बदसलूकी की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उनके पास है। अस्पताल में तत्काल सुनवाई नहीं होने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और ऑक्सीजन सिलिंडर बदलकर वृद्धा को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई गई।  मामले को लेकर परिजनों ने अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नाहन डॉ. राकेश प्रताप ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो इसकी जानकारी जुटाकर तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में ऑक्सीजन उपलब्द करवाने में हुई देरी और नर्स पर लगाए गए बदसलूकी के आरोपों की जांच बाकी है I सम्बंधित  स्टाफ पक्ष सामने आने के बाद ही स्तिथि पूरी तरह स्पष्ट होगी I

विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल: 177 स्कूल भवनविहीन, रेस्ट हाउस-पंचायत भवन में पढ़ रहा भविष्य

In Education
Education system exposed in the Assembly: 177 schools lack buildings; students—the future—are studying in rest houses and panchayat buildings.

हिमाचल विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के 177 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। कई जगह बच्चे पंचायत भवन, रेस्ट हाउस, सामुदायिक केंद्र और दूसरे स्कूलों के कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि 12 स्कूलों के भवन प्राकृतिक आपदा के कारण असुरक्षित हो चुके हैं। 28 स्कूलों के नए भवन बन रहे हैं, जबकि 14 के लिए पैसा जारी किया जा चुका है। बाकी स्कूलों के लिए जमीन की समस्या बड़ी अड़चन बनी हुई है। वहीं, पिछले तीन साल में बंद हुए 1,526 स्कूलों में से 1,473 भवन आज भी शिक्षा विभाग के पास हैं। इनमें से 577 भवन दूसरे विभागों और संस्थाओं को इस्तेमाल के लिए दे दिए गए हैं। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर चंबा के कुनरा स्कूल की है, जहां 99 बच्चे फिलहाल रेस्ट हाउस के महज चार कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं

आयरलैंड की हार भुलाने उतरेगा भारत, इंग्लैंड के खिलाफ जीत से करना होगा आगाज़

In Sports
India will look to put the loss against Ireland behind them and kick off with a win against England.

आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज में नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला बुधवार को इंग्लैंड के चेस्टर-ली-स्ट्रीट में खेला जाएगा। टीम इंडिया इस सीरीज में जीत दर्ज कर पिछली हार को भुलाना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह सीरीज काफी अहम होगी। आयरलैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था, ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ वह कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों से अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। इस बीच भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पहले ही टी-20 मुकाबले में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया जाना चाहिए। आयरलैंड दौरे पर वैभव को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी, लेकिन अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू का मौका मिलता है। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम भी हाल के दिनों में शानदार फॉर्म में नहीं रही है। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में उसे हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि वह रेड बॉल क्रिकेट था, लेकिन अपने घर में मिली हार के बाद इंग्लैंड भी वापसी के इरादे से मैदान पर उतरेगा। ऐसे में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टी-20 मैचों के बाद तीन वनडे मुकाबले भी खेले जाएंगे। दोनों टीमों में कई युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण मौजूद है, जिससे इस दौरे के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें पहले मुकाबले पर हैं कि क्या टीम इंडिया जीत के साथ सीरीज का आगाज़ करती है और क्या युवा वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलता है।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

धर्मशाला में गरजा OBC मोर्चा! जनगणना में अलग गिनती की मांग पर DC ऑफिस के बाहर जोरदार प्रदर्शन

In News
OBC Morcha rallies in Dharamshala! Massive protest outside the DC office demanding a separate headcount in the census.

धर्मशाला: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की अलग से गणना करवाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने बुधवार को धर्मशाला में जोरदार प्रदर्शन किया। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता डीसी कार्यालय के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।  प्रदर्शन से पहले मोर्चा की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें केंद्र सरकार से OBC की वैज्ञानिक, प्रमाणिक और अलग गणना करवाने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में OBC की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने आना बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि सही आंकड़े मिलने के बाद शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहतर नीतियां तैयार की जा सकेंगी।  मोर्चा ने मांग रखी कि जिस तरह SC और ST की जनगणना की जाती है, उसी तर्ज पर OBC की भी अलग से गणना हो। इसके साथ ही प्रत्येक जाति के लिए अलग और विशिष्ट कोड निर्धारित करने तथा ओपन कॉलम की जगह मानकीकृत व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।  OBC विशेष वर्ग से महेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि जनगणना में OBC की वास्तविक संख्या दर्ज होना सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जातिवार आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की भी मांग उठाई। 

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
CONGRESS-APPOINTED-32-DISTRICT-HEADS-IN-HARYANA

बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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