•   Thursday Oct 15
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Roads in Indaura to be improved at a cost of ₹20 crore; stalled projects to gain momentum
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इंदौरा में 20 करोड़ से सुधरेंगी सड़कें, रुके कामों को मिलेगी रफ्तार

इंदौरा, 15 अक्तूबर। विधायक मलेंद्र राजन ने आज वन विश्राम गृह इंदौरा में ग्राम पंचायत भपू और डाहकुलाड़ा के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान पंचायतों में आवश्यक विकास कार्यों, सड़क निर्माण तथा स्थानीय समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की विकास संबंधी आवश्यकताओं और विभिन्न समस्याओं से विधायक को अवगत करवाया। विधायक ने संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए विकास कार्यों को गति देने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकताएं निर्धारित करने पर बल दिया। मलेंद्र राजन ने कहा कि खाड़ी युद्ध के चलते कोलतार के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी से सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। अब इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों के निर्माण एवं सुधार कार्य करवाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क सुविधा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़कों की स्थिति में सुधार होने से लोगों को आवागमन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में भी सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जा रहा है। विधायक ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं और जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं। उनके साथ संवाद से विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देने में सहायता मिलती है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को क्षेत्र की विकास संबंधी जरूरतों और जनसमस्याओं को निरंतर सामने लाने का आग्रह किया, ताकि इनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।  बैठक में ग्राम पंचायत भपू के प्रधान प्रताप सिंह, उपप्रधान धर्मेंद्र, संदन शर्मा, प्रेम कुमार, ग्राम पंचायत डाहकुलाड़ा की प्रधान सोनिया, उपप्रधान देवेंद्र, जोगिंदर, सुभाष कालरा, चंद्रमोहन तथा युद्धवीर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Justice Dharmchand Chaudhary entrusted with responsibility for new districts; find out who he is
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नए जिलों की जिम्मेदारी जस्टिस धर्मचंद चौधरी को, जानिए कौन हैं

हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस धर्मचंद चौधरी करेंगे। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।  आयोग मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा करेगा। इसके बाद नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों को विभाजित करने या जरूरत के अनुसार विलय करने को लेकर सिफारिशें दी जाएंगी। इसमें आबादी, भौगोलिक परिस्थितियां, लोगों की प्रशासन तक पहुंच और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।  कौन हैं जस्टिस धर्मचंद चौधरी? जस्टिस धर्मचंद चौधरी का संबंध मंडी जिले के लोहरा गांव से है। उनका जन्म 12 मार्च 1958 को हुआ। उन्होंने शुरुआती शिक्षा लोहरा में, मैट्रिक हटगढ़ से, स्नातक की पढ़ाई कुल्लू से और एलएलबी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से 1983 में की। इसके बाद उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत की और 1995 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। वर्ष 2012 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 2014 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।  धर्मचंद चौधरी का सीजेआई सूर्यकांत से भी खास पेशेवर कनेक्शन रहा है। जब सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने, तब जस्टिस धर्मचंद चौधरी ने 2019 में हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाला था।  हिमाचल में फिलहाल 12 जिले हैं। देहरा-गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और आनी समेत कई क्षेत्रों से लंबे समय से नए जिले बनाने की मांग उठती रही है। अब आयोग की रिपोर्ट के बाद इस दिशा में सरकार आगे फैसला लेगी।

SSB jawan heading for training and a youth who went to watch Ramlila go missing
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ट्रेनिंग पर जा रहा SSB जवान और रामलीला देखने गया युवक लापता

हिमाचल प्रदेश में दो अलग-अलग मामलों में SSB जवान और एक युवक के लापता होने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है। दोनों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार, SSB का एक जवान ट्रेनिंग के लिए रवाना हुआ था, लेकिन इसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस को सूचित किया गया। वहीं, दूसरा युवक रामलीला देखने के लिए घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने आसपास और संभावित स्थानों पर उसकी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस में गुमशुदगी की सूचना दी गई। पुलिस दोनों मामलों में अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है और लापता लोगों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों के साथ-साथ अन्य माध्यमों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल दोनों के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

Separate mining directorate in Himachal; IAS officer to take charge
In News update

हिमाचल में अलग खनन निदेशालय, IAS अधिकारी संभालेंगे कमान

हिमाचल प्रदेश सरकार ने खनन गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन, निगरानी और नियंत्रण के लिए उद्योग विभाग के तहत अलग खनन निदेशालय स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।  नए निदेशालय की कमान IAS कैडर के अधिकारी को दी जाएगी। इसके लिए ग्रुप-ए स्तर पर निदेशक (खनन) का पद सृजित किया गया है। निदेशक ही निदेशालय के विभागाध्यक्ष होंगे, जबकि इसका समग्र प्रशासनिक नियंत्रण उद्योग विभाग के पास रहेगा।  निदेशालय के संचालन के लिए उद्योग विभाग से 8 पद स्थानांतरित किए गए हैं। इनमें संयुक्त निदेशक, सहायक नियंत्रक (वित्त एवं लेखा), अधीक्षक ग्रेड-1, वरिष्ठ सहायक, तीन जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और एक चपरासी शामिल हैं। इसके अलावा 4 मल्टी टास्क वर्कर आउटसोर्स आधार पर रखने की मंजूरी दी गई है।  सरकार जल्द ही संबंधित वैधानिक नियमों में संशोधन करेगी, ताकि निदेशक को खनन गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक अधिकार और जिम्मेदारियां दी जा सकें। अलग निदेशालय बनने से अवैध खनन पर निगरानी, खनिज संसाधनों के प्रबंधन और राजस्व बढ़ाने के प्रयासों को बेहतर तरीके से संचालित करने की उम्मीद है।

505 grams of charas seized in Panthaghati; youth arrested
In News update

पंथाघाटी में 505 ग्राम चरस बरामद, युवक गिरफ्तार

शिमला: राजधानी शिमला में नशे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना ईस्ट की टीम ने पंथाघाटी में 505 ग्राम चरस के साथ 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, 14 अक्तूबर को टीम पंथाघाटी स्थित हेतविक सुपर मार्ट के पास जांच कर रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति की तलाशी ली गई, जिसमें उसके कब्जे से 505 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विजय बाथा मगर (22) निवासी जिला सल्यान, नेपाल के रूप में हुई है। वर्तमान में वह शिमला जिले की चिड़गांव तहसील में रह रहा था। पुलिस थाना ईस्ट शिमला में 15 अक्तूबर को एफआईआर संख्या 96/2026 दर्ज की गई है। मामला एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत दर्ज हुआ है। आरोपी को आगामी कार्रवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पास चरस कहां से पहुंची और क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या नशा तस्करी का नेटवर्क भी जुड़ा हुआ है। मामले की जांच जारी है।

BJP government in Himachal makes a claim; a major responsibility for Kangra: Bhardwaj
In Politics

हिमाचल में BJP सरकार का दावा, कांगड़ा को बड़ी जिम्मेदारी: भारद्वाज

हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा से भाजपा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना तय है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर कांगड़ा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता मिलेगी। भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए उसके कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और जनता सरकार की नीतियों से परेशान है। भाजपा सांसद ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और जनता के बीच केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ प्रदेश सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दे भी उठाए जाएंगे। गौरतलब है कि हिमाचल भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने प्रदेश के 171 मंडलों में विस्तारकों की नियुक्ति की योजना बनाई है और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। राजीव भारद्वाज कांगड़ा लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं और मौजूदा लोकसभा में उनका पहला कार्यकाल है। हालांकि, भाजपा की सरकार बनने का दावा भारद्वाज का राजनीतिक बयान है। आगामी विधानसभा चुनाव का परिणाम मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।

Follow-up fees at IGMC-Chamiyana increase the burden on patients
In Health

IGMC-चमियाणा में फॉलोअप फीस से मरीजों पर बढ़ा बोझ

शिमला: राजधानी शिमला के IGMC और अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को फॉलोअप के दौरान फीस चुकानी पड़ रही है। बार-बार जांच और डॉक्टर से परामर्श के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि इन शुल्कों से उनके इलाज का खर्च बढ़ रहा है। आईजीएमसी में ओपीडी पंजीकरण के लिए 10 रुपये शुल्क लागू किया गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह पर्ची 14 दिनों तक वैध रहती है। वहीं, चमियाणा अस्पताल में भी ओपीडी पर्ची के लिए पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों से लिए जा रहे यूजर चार्ज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पर्ची के लिए 10 रुपये का शुल्क निर्धारित है, जिसमें शिमला का IGMC और चमियाणा भी शामिल हैं। इसके अलावा IGMC में रोगी कल्याण समिति की बैठकों के बाद कुछ जांच और अन्य सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। स्पेशल वार्ड और विभिन्न जांचों की दरों में बढ़ोतरी की जानकारी भी सामने आई है। मरीजों का कहना है कि गंभीर बीमारियों में एक ही मरीज को कई बार अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में पर्ची, जांच और अन्य शुल्क मिलाकर इलाज का कुल खर्च बढ़ जाता है। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन और सरकार से फॉलोअप मरीजों के लिए शुल्क में राहत देने की मांग की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि ओपीडी पंजीकरण शुल्क व्यवस्था को व्यवस्थित करने और अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

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हिमाचल में BJP सरकार का दावा, कांगड़ा को बड़ी जिम्मेदारी: भारद्वाज

In Politics
BJP government in Himachal makes a claim; a major responsibility for Kangra: Bhardwaj

हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा से भाजपा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना तय है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर कांगड़ा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता मिलेगी। भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए उसके कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और जनता सरकार की नीतियों से परेशान है। भाजपा सांसद ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और जनता के बीच केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ प्रदेश सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दे भी उठाए जाएंगे। गौरतलब है कि हिमाचल भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने प्रदेश के 171 मंडलों में विस्तारकों की नियुक्ति की योजना बनाई है और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। राजीव भारद्वाज कांगड़ा लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं और मौजूदा लोकसभा में उनका पहला कार्यकाल है। हालांकि, भाजपा की सरकार बनने का दावा भारद्वाज का राजनीतिक बयान है। आगामी विधानसभा चुनाव का परिणाम मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।

IGMC-चमियाणा में फॉलोअप फीस से मरीजों पर बढ़ा बोझ

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Follow-up fees at IGMC-Chamiyana increase the burden on patients

शिमला: राजधानी शिमला के IGMC और अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को फॉलोअप के दौरान फीस चुकानी पड़ रही है। बार-बार जांच और डॉक्टर से परामर्श के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि इन शुल्कों से उनके इलाज का खर्च बढ़ रहा है। आईजीएमसी में ओपीडी पंजीकरण के लिए 10 रुपये शुल्क लागू किया गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह पर्ची 14 दिनों तक वैध रहती है। वहीं, चमियाणा अस्पताल में भी ओपीडी पर्ची के लिए पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों से लिए जा रहे यूजर चार्ज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पर्ची के लिए 10 रुपये का शुल्क निर्धारित है, जिसमें शिमला का IGMC और चमियाणा भी शामिल हैं। इसके अलावा IGMC में रोगी कल्याण समिति की बैठकों के बाद कुछ जांच और अन्य सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। स्पेशल वार्ड और विभिन्न जांचों की दरों में बढ़ोतरी की जानकारी भी सामने आई है। मरीजों का कहना है कि गंभीर बीमारियों में एक ही मरीज को कई बार अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में पर्ची, जांच और अन्य शुल्क मिलाकर इलाज का कुल खर्च बढ़ जाता है। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन और सरकार से फॉलोअप मरीजों के लिए शुल्क में राहत देने की मांग की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि ओपीडी पंजीकरण शुल्क व्यवस्था को व्यवस्थित करने और अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

मलबे में जिंदगी खोजेगा छात्रों का ‘प्रहरी रोबोट’

In Education
Students’ ‘Sentry Robot’ to search for life in the debris.

छात्रों ने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य को आसान बनाने के लिए एक खास ‘प्रहरी रोबोट’ तैयार किया है। यह रोबोट मलबे में दबे लोगों की सांसों और हलचल का पता लगाने में मदद करेगा। साथ ही 3D मैपिंग तकनीक के जरिए मलबे के बीच सुरक्षित रास्ता तलाशकर बचाव दल तक जानकारी पहुंचाएगा। रोबोट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उन जगहों पर भी पहुंच सके, जहां इंसानों का जाना जोखिम भरा हो सकता है। मलबे के भीतर फंसे लोगों की मौजूदगी का पता लगाकर यह राहत टीम को संभावित स्थान की जानकारी देगा। 3D मैपिंग की मदद से रोबोट आसपास के क्षेत्र का नक्शा तैयार करेगा, जिससे बचावकर्मियों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। छात्रों का यह नवाचार भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के दौरान जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

बीएल स्कूल कुनिहार में 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता, खेलों के साथ पढ़ाई में भी विद्यार्थी आगे

In Sports
BL School Kunihar organised the 32nd annual sports competition; students excelled in academics and sports.

बी.एल. वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुनिहार में आयोजित 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आज भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया । इस आयोजन  में विद्यालय के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विद्यालय परिवार ने मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया।कार्यक्रम का मंच संचालन शिवानी शर्मा ने किया। विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।विद्यालय के शारीरिक शिक्षक अमर देव एवं शारीरिक शिक्षिका अरुणा शर्मा ने बताया कि वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया था। विद्यार्थियों ने मास पी.टी. की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। शरीक शिक्षिका अरुणा ने बताया की दिनांक 9 अक्तूबर को  नर्सरी से युकेजी कक्षा तक बच्चों  तक के विद्यार्थियों के लिए,  किड्स रेस, रिंग रेस सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। दिनांक 10  अक्तूबर को पहली से पांचवीं कक्षा  के विद्यार्थियों के लिए 100 मीटर दौड़, व् अन्य रेस करवाई गई , सभी बच्चों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बी.एल. स्कूल कुनिहार के विद्यार्थी खेलकूद के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी तथा विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को गोल्ड, सिल्वर एवं ब्रॉन्ज मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। मेडल प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था । पी टी ए अध्यक्ष वी समस्त सदस्यों ने वार्षिक खेल कूद प्रतियोगिता के लिए बधाई दी । कार्यक्रम में विद्यालय के उपप्रधानाचार्य पुरशोत्तम लाल, मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा, समस्त अध्यापक वर्ग तथा विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का समापन विद्यार्थियों में खेल भावना, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करते हुए हुआ।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

नए जिलों की जिम्मेदारी जस्टिस धर्मचंद चौधरी को, जानिए कौन हैं

In News
Justice Dharmchand Chaudhary entrusted with responsibility for new districts; find out who he is

हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस धर्मचंद चौधरी करेंगे। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।  आयोग मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा करेगा। इसके बाद नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों को विभाजित करने या जरूरत के अनुसार विलय करने को लेकर सिफारिशें दी जाएंगी। इसमें आबादी, भौगोलिक परिस्थितियां, लोगों की प्रशासन तक पहुंच और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।  कौन हैं जस्टिस धर्मचंद चौधरी? जस्टिस धर्मचंद चौधरी का संबंध मंडी जिले के लोहरा गांव से है। उनका जन्म 12 मार्च 1958 को हुआ। उन्होंने शुरुआती शिक्षा लोहरा में, मैट्रिक हटगढ़ से, स्नातक की पढ़ाई कुल्लू से और एलएलबी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से 1983 में की। इसके बाद उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत की और 1995 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। वर्ष 2012 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 2014 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।  धर्मचंद चौधरी का सीजेआई सूर्यकांत से भी खास पेशेवर कनेक्शन रहा है। जब सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने, तब जस्टिस धर्मचंद चौधरी ने 2019 में हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाला था।  हिमाचल में फिलहाल 12 जिले हैं। देहरा-गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और आनी समेत कई क्षेत्रों से लंबे समय से नए जिले बनाने की मांग उठती रही है। अब आयोग की रिपोर्ट के बाद इस दिशा में सरकार आगे फैसला लेगी।

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
CONGRESS-APPOINTED-32-DISTRICT-HEADS-IN-HARYANA

बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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