टिक्कर क्षेत्र से संबंध रखने वाले स्टैटिस्टिकल असिस्टेंट के पद से सेवानिवृत्त तपेन्दर टेगटा पूर्व संसदीय सचिव एवं विधायक रोहित ठाकुर के नेतृत्व पर विश्वास जताया हैं। शराचली क्षेत्र की मांदल पंचायत से सम्बंध रखने वाले अनिल शर्मा ने भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ़ भाजपा छोड़कर कांग्रेस पार्टी में परिवार सहित घर वापसी की हैं। तपेंदर टेगटा और अनिल शर्मा पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रोहित ठाकुर की उपस्थिति में विधिवत रूप से कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जुब्बल-नावर-कोटखाई के अध्यक्ष मोतीलाल डेरटा ने पार्टी कार्यालय जुब्बल में तपेन्दर तेगटा और अनिल शर्मा का कांग्रेस पार्टी में शामिल होने पर स्वागत किया।
#Shimla देखिये पंडित सुखराम की तारीफ में क्या बोले डॉ राम लाल मार्कंडेय ... मार्कंडेय बोले हिमाचल में खाता भी नहीं खोल पाएंगे राजन सुशांत... #FirstVerdict #RamLalMarkande #SamikshaRana #Himachal Rajan Sushant
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत किसानों को हर वर्ग से समर्थन मिल रहा है। किसानों के आंदोलन के समर्थन में पंजाब और अन्य राज्यों के कई मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों ने अपने अवार्ड लौटाने का निर्णय लिया है। इसी के चलते सोमवार को 30 पूर्व और मौजूदा खिलाड़ी कृषि कानूनों का विरोध में अपना अवार्ड वापस लौटाने राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने निकले। हालांकि पुलिस ने इन्हें रास्ते में ही रोक लिया। बता दें कृषि कानूनों के विरोध में कुछ दिन पहले ही अवार्ड वापस करने की शुरुआत हुई थी। सबसे पहले पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्म विभूषण लौटाया था, इसके बाद कई लेखकों ने साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाए थे। पहलवान करतार सिंह के मुताबिक, अभी 30 खिलाड़ी मार्च कर राष्ट्रपति को अपना सम्मान लौटाने जा रहे हैं, लेकिन पंजाब और अन्य इलाकों से कुछ और खिलाड़ी भी ऐसा करना चाहते हैं। बीते दिन बॉक्सर विजेंद्र सिंह भी किसानों का समर्थन करने सिंधु बॉर्डर पहुंचे थे। यहां विजेंद्र सिंह ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार ये कानून वापस नहीं लेती है तो वो अपना खेल रत्न वापस लौटा देंगे। विजेंद्र सिंह से पहले रेसलर द ग्रेट खली ने भी किसानों का समर्थन किया था और दिल्ली में प्रदर्शन करने की बात कही थी।
Before the Cabinet expansion in Rajasthan, political uproar was again highlighted. Congress leader and state Chief Minister Ashok Gehlot has alleged that the game of toppling the government is about to begin again. There are also talks of toppling the government in Maharashtra. Gehlot said that Congress leader Ajay Maken has been a witness to the false attempt made by BJP for toppling the government. He said that Ajay Maken, the Congress in-charge in Rajasthan, was also involved in this program. During this incident, Maken stayed with our MLAs in the hotel for 34 days. Ashok Gehlot accused the home minister of the country, Amit Shah that he was sitting with our MLAs, feeding them tea and snacks and was telling them that five have dropped the government, the sixth is about to fall. Dharmendra Pradhan was talking to the judges to raise their morale. said that Amit Shah had met our MLAs for one hour and after declining five governments, Shah had said that the sixth was also dropped. Gehlot said that Congress leaders Ajay Maken, Randeep Surjewala, Avinash Pandey sat here during this development. He decided to sack the leaders, then the government survived. He said that the people of the entire Rajasthan wanted that the government should not fall.
केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 10वें दिन भी जारी है। आज किसानों और सरकार के बीच 5वें दौर की बातचीत होनी है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया की ये बैठक दोपहर 2 बजे होगी। उन्होंने कहा की मुझे बहुत उम्मीद है कि किसान सकारात्मक सोचेंगे और अपना आंदोलन समाप्त करेंगे। वहीं, इस मुद्दे को लेकर गृहमंत्री अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे। आज किसान संगठनों से होने वाली बैठक से पहले ये अहम बैठक हो रही है। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल होने पहुंचे हैं। 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान इस बीच, किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री का पुतला फूंकने की घोषणा की है। साथ ही 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान भी किया है। किसान चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली-नोएडा लिंक रोड) पर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर सरकार के साथ बातचीत में आज कोई नतीजा नहीं निकला तो फिर वह संसद का घेराव करेंगे।
तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनितिक पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। सुपरस्टार ने 2021 में विधानसभा चुनावों में उतरने की भी घोषणा की है। रजनीकांत ने ट्वीट कर अपने इस फैसले के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा की पार्टी के बारे में औपचारिक घोषणा 31 दिसंबर को की जाएगी। रजनीकांत की यह घोषणा करीब तीन साल बाद आई है, जब उन्होंने 31 दिसंबर 2017 को राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि हम कड़ी महनत करेंगे और जीतेंगे। रजनीकांत ने तीन साल पहले यह भी एलान किया था कि अगर सत्ता में आने के तीन साल के भीतर उन्होंने अपने वादे पूरे नहीं किए तो वह राजनीतिक पार्टी छोड़ देंगे। ऐसा नहीं है कि दक्षिण भारतीय फिल्मों के महानायक रजनीकांत पहली बार राजनीति में दिख रहे है। पिछले कई महीनो से रजनीकांत राजनीती में सक्रिय हैं, हालांकि यह पहली बार है कि उन्होंने सियासी पारी को लेकर अपने पत्ते खोले है।
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का विरोध लगातार जारी है। आज किसानों के विरोध का आठवां दिन है। किसानों व सरकार के बीच लगातार बातचीत का सिलसिला भी जारी है। इसी बीच अब पंजाब के पूर्व सीएम और अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल किसानों के समर्थन में उतरे हैं। बादल ने उन्हें 2015 में मिला पद्म विभूषण सम्मान लौटा दिया है। बादल की पार्टी शिरोमणि अकाली दल 22 साल से NDA के साथ थी, लेकिन कृषि कानों के विरोध में सितंबर में संगठन से अलग हो गई थी। इससे पहले हरसिमरत कौर ने भी मोदी कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे दिया था। उधर, विरोध में शामिल 40 किसान नेताओं की सरकार के साथ विज्ञानं भवन में बातचीत हो रही है। सरकार की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर आज जयराम कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। बैठक दोपहर 2 बजे प्रदेश सचिवालय में होगी। कैबिनेट की बैठक में फ़ैसला लिया जाएगा कि सत्र शिमला में बुलाया जाए या धर्मशाला में या फ़िर सत्र को टाल दिया जाए। प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण शीतकालीन सत्र को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सर्वदलीय बैठक में सत्र को लेकर कोई नतीजा नहीं निकल पाया था। विपक्ष के नेता सत्र करवाने के पक्ष में थे तो वहीं विपक्ष के कई विधायक सत्र को टालने की मांग भी कर रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सत्र को शिमला में ही करवाने की बात कही है। बता दे कि हिमाचल में कोरोना के बढ़ते मामले लगातार चिंता का कारण बने हुए हैं। ऐसे में सत्र को धर्मशाला में करवाने के बजाए शिमला में भी करवाया जा सकता है ताकि कोरोना काल में अतिरिक्त प्रबंधन न करना पड़े।
हिन्दुस्तान के इतिहास में पहले शायद ही किसी स्थानीय निकाय चुनाव की इतनी चर्चा हुई हो, जितना ख़ास ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव बन चुका है। ये चुनाव ख़ास इसलिए हैं क्योंकि विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने इसमें सारी ताकत झोंक दी है। पहले शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हैदराबाद में रोड शो करते है, फिर शनिवार को फायर ब्रांड नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रचार के लिए पहुंचते है और हैदराबाद बनाम भाग्यनगर की जंग शुरू करते है। वहीं रविवार को खुद गृह मंत्री अमित शाह प्रचार में उतरे और विवादों में रहे भाग्य लक्ष्मी मंदिर में पूजा अर्चना कर एक और नया संदेश देने की कोशिश की। स्पष्ट है भाजपा की नजर ध्रुवीकरण के रथ पर सवार होकर हैदराबाद के रास्ते पूरा दक्षिण भारत जीतने पर टिकी है। बीजेपी और एआईएमआईएम आमने सामने हैदराबाद में सीधा मुकाबला दिख रहा है बीजेपी ओवैसी की AIMIM में। ओवैसी वर्तमान में सबसे बड़े मुस्लिम नेताओं में है तो बीजेपी खुद को हिन्दुओं की सबसे बड़ी हमदर्द बताने से नहीं चूकती। ऐसे में ध्रुवीकरण तो होना ही है। पहली बार है जब किसी ने हैदराबाद में ओवैसी को खुलकर इस तरह चुनौती दी हो। देश के अन्य क्षेत्रों में भी ओवैसी की पार्टी मजबूत हो रही है। हाल ही में हुए बिहार चुनाव में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है । यही कारण है कि भाजपा ने सीधे उनके घर में घुसकर उन्हें घेरने की रणनीति बनाई है। हालांकि यदि भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो उसकी खूब किरकिरी होना तय है पर यदि भाजपा ठीक ठाक भी कर ले तो पूरे दक्षिण भारत की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। वैसे इस चुनाव में यदि किसी का नुकसान होना तय है तो वो है केसीआर और बात करें कांग्रेस कि तो होना न होना ज्यादा मायने नहीं रखता। आखिर क्यों इतना महत्वपूर्ण है ये चुनाव ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम देश के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक है l यह नगर निगम 4 जिलों में है, जिनमें हैदराबाद, रंगारेड्डी, मेडचल-मलकजगिरी और संगारेड्डी आते हैं. इस पूरे इलाके में 24 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं और तेलंगाना के 5 लोकससभा सीटें आती हैं l यही वजह है कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में केसीआर से लेकर बीजेपी, कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी तक ने ताकत झोंक दी है. इसके अलावा इस नगर निगम का सालाना बजट लगभग साढ़े पांच हजार करोड़ का है l तेलंगाना की जीडीपी का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है l यहां की आबादी लगभग 82 लाख लोगों की है l तो ऐसे में बीजेपी के ये तेवर लाज़मी है l दरअसल ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव को 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है l यहीं कारण है कि बीजेपी ने केसीआर और असदुद्दीन ओवैसी के मजबूत दुर्ग में अपने दिग्गज नेताओं की फौज उतार दी है l दक्षिण में अपनी पकड़ तेज़ करने का मौका इससे बेहतर कोई और नहीं हो सकताऔर बीजेपी ये बात बखूबी समझती है l पिछले चुनाव में ये थी स्थिति ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम कि 150 पिछले चुनाव में 99 सीटें तेलंगाना राष्ट्र समिति को मिली थी l असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी l बीजेपी को महज चार सीटों से संतोष करना पड़ा था मगर इस बार के प्रचार ने गेम को पूरी तरह पलट दिया है l बीजेपी ओवैसी के गड में अपनी पैठ बनाने में कामयाब होती नज़र आ रही है l
बिहार विधानसभा के अंदर राज्यपाल फागू चौहान के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर आग बबूला हो गए और उन्हें खूब लताड़ लगायी l नीतीश कुमार का ये रवैया आज से पहले शायद ही किसी ने देखा हो l तेजस्वी यादव पर हमला करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वो उनके भाई जैसे दोस्त (लालू प्रसाद) का बेटा है इसी वजह से वह उनको सुनते रहते हैं l दरअसल, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सदन में बोलते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा और उन पर आरोप लगाया कि वह 1991 में हुई एक हत्या के मामले में शामिल हैं. साथ ही तेजस्वी ने नीतीश के ऊपर कंटेंट चोरी के मामले में उन पर लगे 25 हजार रुपये जुर्माने का भी जिक्र करते हुए हमला बोला l जिसके तुरंत बाद संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि सीएम के ऊपर हत्या का जो मामला चल रहा था उसे सुप्रीम कोर्ट ने समाप्त कर दिया है और इसी कारण से इस मुद्दे को सदन में उठाना ठीक नहीं है l इसपर नितीश कुमार आग बबूला हो गए और बोले की, “जो बात ये बोल रहा है उसकी जांच होनी चाहिए और इसके खिलाफ कार्रवाई होगी l ये झूठ बोल रहा है l मेरे भाई समान दोस्त का बेटा है, इसीलिए मैं सुनता रहता हूं l इसके पिता को विधायक दल का नेता किसने बनाया था क्या उसको पता है? इसको उपमुख्यमंत्री किसने बनाया था इसको पता है ? इसके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो हमने उससे कहा कि जवाब दो, मगर जब जवाब नहीं दिया तो हम अलग हो गए l हम कुछ नहीं बोलते हैं l तेजस्वी पर चार्जशीट है l 2017 में क्यों नहीं स्थिति स्पष्ट किया था ?” नीतीश कुमार आग बबूला होकर बोले इसके बाद सदन के अंदर जमकर हंगामा मचा और स्पीकर ने विधानसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया l
जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव को धार देने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दो दिवसीय दौरे पर हैं। उनका दौर आज 11 बजे से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पहले जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के मछेड़ी में जनसभा को सम्भोदित करेंगे। फिर वह बिलावर के लिए रवाना होन्हे। वहां वह 1:45 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे। दोपहर का भोजन भी मुख्यमंत्री यहीं पर करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री मंडली के लिए रवाना होंगे। वह वहां 4:45 बजे के बाद जनसभा को संबोधित करेंगे। उसके बाद वह कठुआ जिला के बिलावर में रात्रि विश्राम करेंगे। 26 नवंबर को मुख्यमंत्री मंडली में जनसभा को संबोधित करेंगे। फिर वह करीब 1:30 बजे मंडली से महानपुर के लिए रवाना होंगे, जहां वह दोपहर 2:00 बजे जनसभा को संबोधित करेंगे। जनसभा संबोधित करने के बाद वह महानपुर से धानकोट रणजीत सागर डैम पहुंचेंगे। रणजीत सागर डैम में वह हेलीकॉप्टर से 5:15 के करीब शिमला के लिए वापस लौटेंगे।
बिहार विधानसभा में स्पीकर पद को लेकर सियासी हलचल जारी है। आज होने वाली वोटिंग से पहले राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का एक ऑडियो वायरल हो रहा है। यह ऑडियो खुद भाजपा ने जारी किया है। इस ऑडियो में लालू, भाजपा विधायक ललन पासवान से बात कर रहे हैं। लालू कहते हैं कि विधानसभा में स्पीकर के चुनाव की वोटिंग से एब्सेंट हो जाओ। यह बात वह 3 बार कहते हैं। साथ ही वह कहते हैं कि तुम्हें आगे बढ़ाएंगे। पूरी बातचीत… सबसे पहले लालू का सहायक : हैलो, प्रणाम सर, विधायक जी बोल रहे हैं… नहीं, उनका पीए बोल रहा हूं लालू का सहायक : दीजिए तो, साहब बात करेंगे माननीय लालू प्रसाद यादव… विधायक का पीए : हैलो, कहां से सर… लालू का सहायक : रांची से..साहब बात करेंगे.. लालू : हां, पासवान जी, बधाई.. पासवान : प्रणाम, चरण स्पर्श… लालू : हां, सुनो, हम तुमको आगे भी बढ़ाएंगे वहां…कल (25 नवंबर) जो स्पीकर का चुनाव है…हम तुमको मंत्री बनाएंगे…कल इनको (जदयू-भाजपा सरकार) गिरा देंगे… पासवान : हम तो पार्टी में हैं न सर… लालू : पार्टी में हो तो एबसेंट हो जाओ…कोरोना हो गया था, स्पीकर (यहां बात साफ सुनाई नहीं दी)…फिर हम लोग देख लेंगे न.. पासवान : पार्टी में हैं सर, थोड़ा सा…(हिचकिचाते हुए) ठीक है सर… लालू : एबसेंट हो जाओ तुम पासवान जी… पासवान : आपके संज्ञान में हो गए हैं हम सर…बात करेंगे..ठीक है.. लालू : ठीक है..एबसेंट हो जाओ स्पीकर पद के लिए वोटिंग को लेकर बिहार की राजनीति में 24 घंटे पहले खासी हलचल रही। महागठबंधन अपने उम्मीदवार के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखकर और सत्ता पक्ष के विधायकों से अंतरात्मा की आवाज पर वोटिंग करने की अपील कर चुका है। इस बीच पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने एक ट्वीट कर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रांची में सजा काट रहे लालू यादव NDA विधायकों को फोन करके लालच दे रहे हैं। इस पर सत्ता और विपक्ष, दोनों तरफ से बयानबाजी भी हो रही है। सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में एक नंबर जारी किया है। उन्होंने कहा की जब इस नंबर पर फ़ोन घुमाए सीधा लालू प्रसाद रिसीव करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है की लालू इस नंबर से विधायकों को भड़काने का काम कर रहे हैं।
30 अक्टूबर 1984, हत्या के एक दिन पहले इंदिरा गांधी ओडिशा के दौरे पर थीं। वहां उन्होंने तत्कालीन ओडिशा सचिवालय के सामने परेड ग्राउंड में अपना आखिरी भाषण दिया था। उस भाषण में उन्होंने कुछ ऐसा कहा था जिसे आज भी लोग उनकी आसन्न मृत्यु का पूर्वानुमान मानते हैं। उन्होंने कहा था : "मैं आज जीवित हूं, शायद में कल न रहूं। मैं तब तक देश की सेवा करती रहूंगी जब तक मेरी अंतिम सांस है और जब मैं मर जाउंगी, तो मैं कह सकती हूं कि मेरे खून की हर बूंद भारत को सबल बनाएगी और इसे मजबूत करेगी। यहां तक कि अगर मैं राष्ट्र की सेवा में मर गई, तो मुझे इस पर गर्व होगा। मेरा खून, इस राष्ट्र की वृद्धि और इसे मजबूत और गतिशील बनाने में योगदान देगा।" शायद उस समय कोई नहीं जनता था ये इंदिरा गाँधी का आखिरी भाषण होगा या शायद इंदिरा को भी इसका पूर्णभास हो गया था। ये कहा नहीं जा सकता। 31 अक्टूबर 1984, की सुबह भी इंदिरा के लिए अन्य दिनों की तरह थी। वह रोज़ की तरह इस दिन भी जल्दी उठीं। आज का दिन उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण था। आज उनका एक विदेशी टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू था इसलिए वह आज खासतौर से तैयार हो रहीं थी। पर वो जानती नहीं थी आज का ये दिन उनकी ज़िन्दगी का आखिरी दिन होगा। उस सुबह एक और आदमी था जो खास तौर से तैयार हो रहा था। पर वह जनता था शायद यह दिन उसकी ज़िंदगी का आखिरी दिन होगा। उसका नाम था बेअंत सिंह। वह इंदिरा के अंगरक्षकों में से एक था। 1 सफदरजंग रोड के अंदर इंदिरा जल्दी में थी और बाहर उनके कातिल भी उनके इंतज़ार में बैठे थे। इंदिरा के दूसरे कातिल सतवंत सिंह ने उस रोज़ बीमारी का बहाना बना कर अपनी ड्यूटी बेअंत सिंह के साथ करवा ली थी। इंदिरा के दोनों कातिल अब एक साथ एक ही जगह घात लगाए बैठे थे। समय : 9 बजकर 15 मिनट, इंदिरा अपने इंटरव्यू के स्थान के लिए निकल पड़ी या यूँ कहें की उनके आखिरी रास्ते पर। तेज़ क़दमों से इंदिरा उस गेट के पास पहुँच गई जो 1 सफदरजंग और 1 अकबर मार्ग को जोड़ता है। ठीक इसी जगह उनके दोनों कातिल भी खड़े थे। बेअंत सिंह के हाथ में रिवाल्वर थी तो सतवंत सिंह के हाथ में एक मशीन गन। जब इंदिरा गेट के करीब पहुंची, उन्होंने बेअंत को देखा और बेअंत ने उन्हें नमस्ते कहा। इसके बाद बेअंत ने अचानक अपनी सरकारी रिवाल्वर निकली और इंदिरा पर गोली दाग दी। उस समय इंदिरा केवल इतना ही कह पाईं "ये क्या कर रहे हो?", लेकिन तब तक बेअंत ने कई और गोलियां इंदिरा पर चला दी। बेअंत को देख सतवंत सिंह ने भी मशीन गन से इंदिरा पर गोलियां दागना शुरू कर दिया। इस घटना के तत्काल बाद, उपलब्ध सूचना के अनुसार, बेअंत सिंह ने उनपर तीन बार गोली चलाई और सतवंत सिंह ने उन पर 22 गोली दागी। इसके बाद उन्होंने अपने हथियार गिरा दिए और आत्मसमर्पण कर दिया। बाद में उन्हें अन्य गार्डों द्वारा एक बंद कमरे में ले जाया गया, जहां बेअंत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आस पास मौजूद लोगों ने शोरगुल मचाया जल्द एम्बुलेंस को बुलाने में लग गए, लेकिन उस समय तक काफी देर हो गई थी। इंदिरा लहूलुहान होकर ज़मीन पर गिर गईं। समय था 9 बजकर 17 मिनट। इन चंद पलों में देश की तक़दीर बदल गई। इंदिरा को उनके सरकारी कार में अस्पताल ले जाया गया पर वहां पहुंचाते पहुँचाते उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया। उस वक्त के सरकारी हिसाब 29 प्रवेश और निकास घावों को दर्शाती है, तथा कुछ बयाने 31 बुलेटों के उनके शरीर से निकाला जाना बताती है। जानकारी के मुताबिक 23 गोलियां उनके शरीर से होकर गुज़री थीं जबकि 7 गोलियां उनके शरीर के अंदर ही थीं। उनका अंतिम संस्कार 3 नवंबर को राज घाट के समीप हुआ और यह जगह शक्ति स्थल के रूप में जानी गई। उनके अंतिम संस्कार को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्टेशनों पर लाइव प्रसारित किया गया। उनके मौत के बाद, दिल्ली में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे हुए और साथ भारत के कई अन्य शहरों, जिनमे कानपुर, आसनसोल और इंदौर में सांप्रदायिक अशांति घिर गई और हजारों सिखों के मौत दर्ज किए गए। एक लाइव टीवी शो में राजीव गांधी ने इस नरसंहार के बारे में कहा था, "जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तो पृथ्वी हिलती है।"
आज हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक दोपहर तीन बजे आयोजित होगी। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर फैसले लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री स्कूलों को लेकर फैसला सुना सकते हैं। बता दें प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षक और विद्यार्थी संक्रमित पाए गए जिस के बाद अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। ऐसे में दिवाली से दो-तीन पहले और दो-तीन बाद स्कूलों को बंद रखने को लेकर मंत्रिमंडल के समक्ष विकल्प रखा जा सकता है। हालाँकि स्कूल बंद होंगे या नहीं इसका अंतिम फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में ही होगा। इस के साथ नारकंडा से हाटु पीक के लिए रोपवे को लेकर भी फैसला हो सकता है। जिला शिमला के नारकंडा का हाटु पीक क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से विकसित होगा। नारकंडा से हाटु पीक के लिए सरकार रोप-वे बनाएगी। रोप-वे एंड रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कारपोरेशन ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इस बैठक में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह और परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर बैठक में शामिल नहीं होंगे। आखिरी ऑफ लाइन बैठक आज की यह बैठक मंत्रिमंडल की अंतिम ऑफलाइन बैठक होगी। इसके बाद आगामी सभी बैठकें ई-कैबिनेट सॉफ्टवेयर की मदद से आयोजित की जाएंगी। इसमें बैठक का एजेंडा ऑनलाइन ही मंत्रियों के पास पहुंचेगा। बुधवार को सचिव स्तर के अधिकारियों को इस सॉफ्टवेयर की आखिरी ट्रेनिंग दी जाएगी।
हिमाचल की राजनीति में जल्द ही कुछ नए फेर बदल होने की सुगबुगाहट तेज़ हो रही है। ज्वालामुखी प्रकरण के बाद संगठन में उठे बवाल के बीच मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को हाईकमान ने दिल्ली तलब किया है। मुख्यमंत्री शनिवार को दिल्ली रवाना होंगे। यहाँ केंद्रीय नेतृत्व के नेताओं के साथ मुख्यमंत्री बैठक करेंगे। आशंका जताई जा रही है कि इस बैठक के बाद मंत्रिमंडल में कई मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं, तो साथ ही कइयों की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है। बता दें कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप ने हाईकमान से चर्चा के बाद ज्वालामुखी मंडल को भंग किया था, जिसके बाद धवाला मुख्यमंत्री से मिले थे। वहीं हिमाचल मंत्रिमंडल के कुछ मंत्रियों की परफारमेंस से हाईकमान अभी भी संतुष्ट नहीं कर पाई है। इन्ही चुनिंदा मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा की जा रही है। हाल ही में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे एक मंत्री कि कुर्सी पर भी खतरा मंडरा सकता है। मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा तय होते ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप और तीन महासचिव त्रिलोक कपूर, त्रिलोक जम्वाल और राकेश जम्वाल उनसे मिलने उनके आवास पर ओकओवर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की।
अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे से सटे शाही बाग में इतिहास के कुछ धूल खाते पन्ने आज भी अपना अस्तित्व बनाए रखने का संघर्ष लड़ रहे हैं। जहाँ आज की आधुनिक दुनिया में लोग अपना इतिहास और मूल्यों को भूल गए हैं वहीं कुछ ऐसे समारक हमारे इतिहास को संजोए बैठे हैं। मोती शाही महल 1618-1622 के बीच मुग़ल शासक शाहजहाँ के द्वारा बनवाया गया था। यह अब सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय स्मारक की मेजबानी करता है। हरे-भरे बाग़ से घिरा शाही बाग, वल्लभभाई पटेल को समर्पित एक संग्रहालय और प्रदर्शनी केंद्र है। पटेल का जन्म खेड़ा जिले के एक छोटे से शहर नडियाद में हुआ था। वह एक किसान परिवार से थे। अपने शुरुआती वर्षों में, पटेल को कई लोगों ने एक आम आदमी की नौकरी के लिए किस्मत वाला माना था। हालाँकि, पटेल ने उन्हें गलत साबित कर दिया। उन्होंने कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। वह अक्सर उधार की पुस्तकों से पढ़ा करते थे। पटेल ने बार परीक्षा पास करने के बाद गुजरात के गोधरा, बोरसद और आनंद में कानून का अभ्यास किया। उन्होंने एक उग्र और कुशल वकील होने की प्रतिष्ठा अर्जित की। पटेल हमेशा से इंग्लैंड जा कर कानून का अध्ययन करने का सपना रखते थे। अपनी मेहनत से बचाए गए पैसों से उन्होंने इंग्लैंड जाने के लिए एक पास और टिकट प्राप्त करने में भी कामयाबी हासिल की। हालांकि वह टिकट वि.जे पटेल को सम्बोधित किया गया था। विट्ठलभाई, वल्लभभाई के बड़े भाई भी, अपना नाम भी उनकी तरह वि.जे लिखा करते थे। सरदार पटेल को जब पता चला की उनके भाई भी इंग्लैंड जा कर पढ़ाई करने का सपना संजोए हुए हैं, उन्होंने छोटे भाई का कर्तव्य निभाते हुए, अपनी जगह बड़े भाई को इंग्लैंड जानें दिया। 1909, उनकी पत्नी झावेरबा का निधन हो गया जब वह केवल 33 वर्ष की थीं, लेकिन उन्होंने उनसे गहरा प्यार किया और इसलिए कभी पुनर्विवाह नहीं किया। उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश अपनी परिवार की मदद से की और उन्हें बॉम्बे के एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में भेज दिया। 1911, पत्नी के निधन के दो साल बाद, करीब 36 साल की उम्र में पटेल ने अपना इंग्लैंड जा कर पढ़ने का सपना पूरा किया। उन्होंने लंदन में मिडल टेंपल इन में दाखिला लिया और 36 महीने का कोर्स 30 महीने में पूरा किया। भारत लौटकर, पटेल अहमदाबाद में बस गए और शहर के सबसे सफल बैरिस्टर बन गए। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती चरणों में, पटेल न तो सक्रिय राजनीति के लिए उत्सुक थे और न ही महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर। हालांकि, गोधरा (1917) में गांधी के साथ बैठक ने पटेल के जीवन को मूल रूप से बदल दिया। गांधी के आह्वान पर, पटेल ने अपनी नौकरी छोड़ दी और प्लेग और अकाल (1918) के समय खेड़ा में करों में छूट के लिए संघर्ष करने के लिए आंदोलन में शामिल हो गए। पटेल ने 1920 में गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हुए और 3 लाख सदस्यों की भर्ती के लिए पश्चिम भारत की यात्रा की। उन्होंने पार्टी फंड के लिए 15 लाख रुपये से अधिक एकत्र किए। 1923, जब महात्मा गांधी को कैद किया गया था, तो यह पटेल ही थे जिन्होंने नागपुर में ब्रिटिश कानून के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व किया था। यह 1928 का बारदोली सत्याग्रह था जिसने वल्लभभाई पटेल को 'सरदार’ की उपाधि दी और उन्हें पूरे देश में लोकप्रिय बना दिया। उनका प्रभाव इतना गहरा था कि पंडित मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस की अध्यक्षता के लिए वल्लभभाई का नाम गांधी को सुझाया। 1930 में, अंग्रेजों ने नमक सत्याग्रह के दौरान सरदार पटेल को गिरफ्तार किया और उन्हें बिना गवाहों के मुकदमे में डाल दिया। फिर 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, अंग्रेजों ने पटेल को गिरफ्तार किया। वह 1942 से 1945 तक अहमदनगर के किले में पूरी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के साथ कैद रहे। जब 1945 में पटेल को रिहा किया गया तो उन्हें एहसास हुआ कि ब्रिटिश भारत को सत्ता हस्तांतरित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहे थे। 16 मई 1946, ब्रिटिश मिशन ने सत्ता हस्तांतरण के लिए दो योजनाओं का प्रस्ताव रखा, तो कांग्रेस के भीतर दोनों का ही काफी विरोध हुआ। इस योजना ने भारत की धार्मिक सीमाओं पर विभाजन का प्रस्ताव रखा। वल्लभभाई पटेल भारत के विभाजन को स्वीकार करने वाले पहले कांग्रेस नेताओं में से एक थे। जब लीग ने 16 मई की योजना को मंजूरी दे दी, तो वायसराय लॉर्ड वेवेल ने कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। अब प्रश्न ये था की आखिर भारत का नेतृत्व किसके हाथ में होगा। सबकी नज़रे कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर थी। ज़ाहिर था की जो अध्यक्ष पद पर बैठेगा वो ही देश का अगला प्रधानमंत्री बनेगा। हालांकि गांधी ने पहले ही अपनी पसंद जाहिर कर दी थी, इसके बावजूद 15 में से 12 प्रदेश कांग्रेस समितियों ने पटेल को पार्टी अध्यक्ष मनोनीत कर दिया। बाकी के भी तीन राज्यों ने भी कोई एक नाम भेजने की बजाए बहुमत का सम्मान किए जाने का संदेश भेजा। इसके बाद नेहरू के पक्ष में अपना नाम वापस लेने के लिए पटेल को राजी करने की कवायद शुरू हो गई। जब गांधी को बताया गया की नेहरू नंबर दो नहीं बनना चाहते, तो उन्होंने पटेल को अपना नाम वापस लेने का दबाव डाला। कहा जाता है की गांधी को नेहरू ने इस बात के लिए मजबूर किया था। साथ उन्होंने गांधी पर दबाव डालने के लिए कांग्रेस को तोड़ देने की भी धमकी दी थी। गांधी को यह भी आशंका थी की इस आपसी झगडे का फायदा उठाकर अंग्रेज़ भारत को आज़ाद करने से मना न कर दे। हालांकि पटेल जानते थे की गांधी इन आशंकाओं की आढ़ में नेहरू को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं, पर उनके अंदर का देशभक्त नहीं चाहता था की वह देश की आज़ादी में वह रोहड़ा बने और उन्होंने गांधी की बात मान ली। कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नेहरू को ब्रिटिश वाइसरॉय ने अंतरिम सरकार के गठन के लिए आमंत्रित किया। इस प्रकार यदि घटनाक्रम सामान्य रहता तो सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री होते। सरदार पटेल का निधन 15 दिसम्बर 1950 को मुम्बई में हुआ था। सरदार पटेल को उनकी मृत्यु के 41 साल बाद 1991 में मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया जो उन्हें बहुत पहले मिलना चाहिये था। वर्ष 2014 में केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयन्ती (31 अक्टूबर) को देश भर में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाना शुरू कर उनको सम्मानित किया है।
शिमला। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में आज राज्य मंत्रिमंडल की बैठक राज्य सचिवालय में हुई। जिसमें मंडी, सोलन और पालमपुर को नगर निगमों में अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया। इसमें छह नई नगर पंचायतों को बनाने का भी निर्णय लिया जिसमें सोलन जिले के कंडाघाट, ऊना जिले के अंब, कुल्लू जिले के आनी और निरमंड,शिमला जिले के चिरगांव और नेरवा शामिल है। इसने इन अर्बन लोकल बॉडीज (ULBs) के री-ऑर्गनाइजेशन के लिए भी अपनी मंजूरी दी है। इसमें जिला मंडी में नेर चौक और करसोग और कांगड़ा जिले में नगर पंचायत ज्वाली भी शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने इन शहरी स्थानीय निकायों के नए शामिल क्षेत्रों में भूमि और भवनों को तीन साल की अवधि के लिए सामान्य कर के भुगतान से छूट देने और वजीब-उल-उरज़ में प्रदान किए गए प्रथा गत अधिकारों को बनाए रखने का निर्णय भी लिया है। इसमें यह भी निर्णय लिया गया है कि राज्य में ULB (नवगठित नगर पंचायतों सहित) और मंडी, सोलन और पालमपुर के नए बनाए गए नगर निगमों का चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श के बाद जनवरी, 2021 में किया जाएगा। नगर निगम धर्मशाला के चुनाव भी जनवरी 2021 में सभी यूएलबी के साथ किए जाएंगे, दोहराए जाने वाले चुनाव और संबंधित व्यय से बचने के लिए। 2022 में शिमला नगर निगम के लिए चुनाव का आयोजन किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने इस साल 8 नवंबर से जनमंच कार्यक्रम को बहाल करने का फैसला किया गया, ताकि उनके घरों के पास जनता की शिकायतों का त्वरित निवारण हो सके। इसी के साथ मंत्रिमंडल ने 2 नवंबर, 2020 से राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में 9 वीं से 12 वीं कक्षा तक नियमित कक्षाएं आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा राज्य के कॉलेज गृह मंत्रालय, भारत सरकार के एसओपी / दिशानिर्देशों का पालन करके कक्षाएं फिर से शुरू कर सकेंगे। मंत्रिमंडल ने कांस्टेबलों के 1334 रिक्त पदों को भरने के लिए अपनी मंजूरी दी है। जिसमें 976 पुरुष और 267 महिलाएं शामिल हैं और सीधी भर्ती के माध्यम से 91 ड्राइवर शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने 1 अप्रैल, 2020 से शिक्षा विभाग में आउटसोर्स आधार पर लगे आईटी शिक्षकों के मानदेय को 10 प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे 1345 आईटी शिक्षकों को लाभ होगा। इसमें शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए प्राथमिक और उच्च शिक्षा विभागों में विभिन्न श्रेणियों के पहले से ही कार्यरत एसएमसी शिक्षकों की सेवाओं में विस्तार प्रदान करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है साथ ही अंतिम सत्र के परिणाम के लिए उनके शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए उन्हें पारिश्रमिक भी वितरित किया जा सकता है। कैबिनेट ने अग्रणी फायरमैन के 32 पदों को भरने के लिए अपनी सहमति दी, कांगड़ा जिले के संसारपुर टेरेस में किन्नौर जिले के संसारपुर टेरेस और कुल्लू जिले के पतलीकुहल में ड्राइवर के 12 पद भरे। इसमें नियमित आधार पर राज्य के 22 अधीनस्थ न्यायालयों में प्रतिलिपि के 22 पदों को बनाने और भरने का निर्णय लिया। मंत्रिमंडल ने अपनी सुचारू कार्यप्रणाली के लिए राज्य खाद्य आयोग में विभिन्न श्रेणियों के 9 पदों को भरने के लिए अपनी अनुमति दी। मंत्रिमंडल में कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए यूजी दिशानिर्देशों के आधार पर शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए प्रथम और द्वितीय वर्ष के यूजी पाठ्यक्रमों में नामांकित छात्रों को प्रमोट करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। कांगड़ा जिले के सरकारी कॉलेज टाकीपुर का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी गवर्नमेंट कॉलेज, टाकीपुर कर दिया। कैबिनेट ने कांगड़ा जिले में हेल्थ सब सेंटर टोडा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने और विभिन्न श्रेणियों के तीन पदों को भरने के लिए अपनी मंजूरी दी। इसने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला में सुपर स्पेशियलिटी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी सेल में सहायक प्रोफेसर के एक पद को बनाने और भरने के लिए अपनी सहमति भी दी। मंत्रिमंडल ने औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के लिए मेसर्स कालाअंब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी को 19-13 बीघा जमीन विशेष प्रयोजन वाहन के रूप में 95 रुपये प्रति वर्ग मीटर के पट्टे पर प्रति वर्ष प्रदान करने का निर्णय लिया। इसने मेसर्स काला अंब डिस्टिलरी एंड ब्रेवरी प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में सोलन जिले के तहसील नालागढ़ के ग्राम भंगला में डिस्टिलरी स्थापित करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) की वैधता अवधि में विस्तार के लिए अपनी मंजूरी दे दी।
आज सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हिमाचल कैबिनेट की बैठक की जाएगी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। कैबिनेट स्कूल पूरी तरह खोलने और कॉलेज के फर्स्ट और सेकेंड ईयर के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा अगली कक्षाओं में प्रमोट करने को लेकर भी फैसला कर सकता है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को घर-द्वार पर सस्ता राशन मुहैया कराने के लिए 50 राशनकार्डों पर भी डिपो खोलने और प्याज की आसमान छूतीं कीमतों पर मंथन किया जाएगा। सरकार ने उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे प्याज के भाव पर नजर रखें। प्रतिदिन प्याज के दाम सरकार को भेजने के लिए कहा गया है। सरकार डिपो में भी आलू और प्याज बेचने पर विचार कर रही है। हालांकि, पूर्व में भी प्याज के दाम बढ़ने से सरकार ने डिपो में प्याज भेजा था, लेकिन सप्ताह बाद दाम गिरने से यह प्याज डिपो में ही खराब हो गया था। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड कक्षाओं के लिए नवंबर से नियमित कक्षाएं शुरू हो सकती हैं। शिक्षा विभाग ने दो विकल्पों सहित इस बारे में सरकार को प्रस्ताव भेजा है। पहले विकल्प के तहत दसवीं और बारहवीं, दूसरे विकल्प के तहत नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं को खोलने की योजना है। पहली से आठवीं तक की कक्षाओं को शुरू करने को लेकर अभी सरकार का कोई विचार नहीं है।
अभी 10 -12 दिन पुरानी ही बात होगी जब लोकसभा में पीएम केयर्स पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सदन में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी अनुराग ठाकुर को हिमाचल का छोकरा बोल गए थे। उनके इस बात पर सड़क से संसद तक हंगामा खड़ा हो गया था और बात इतनी बढ़ी की अधीर रंजन को इस पर सफ़ाई देनी पड़ गई थी। हालाँकि अनुराग ने इसे सकारात्मक तौर पर लिया व खुद पर चिपके हिमाचल का छोकरा टैगलाइन पर गर्व होने की बात कही और हिमाचल प्रदेश में भी इसका व्यापक असर देखने को मिला जहां युवाओं ने खुद को इस स्लोगन से जोड़ लिया। आज अटल टनल के उद्घाटन के लिए मनाली पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के शुरुआत में अनुराग ठाकुर को हिमाचल नू छोकरो कह के सम्बोधित किया और मुस्कुरा कर उनकी तरफ़ देख पड़े। लोग प्रधानमंत्री के इस सम्बोधन के कई मायने निकाल रहे हैं। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी के नवरत्नों में शामिल अनुराग ठाकुर के ऊपर उनका गहरा विश्वास है और मानो हिमाचल नू छोकरो कह के मोदी विपक्ष को संदेश दे रहे हैं कि आप मेरे अपनों का अपमान करोगे तो मैं आपको बख्शुंगा नहीं। मोदी का यह कहना उनके और अनुराग ठाकुर के बीच की अतरंगता दिखाता है। बहरहाल एक बात तो साफ़ है मोदी कभी कुछ भूलते नहीं और उन्हें किसे कब कहां और कैसे जवाब देना है यह भली भांति मालूम है।
कांग्रेस पार्टी के के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आज फिर हाथरस जाएंगे। बता दें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दो दिन पहले ही पीड़िता के परिजनों से मिलने हाथरस के लिए निकले थे पर तब पुलिस ने दोनों को ग्रेटर नोएडा के परी चौक में रोक लिया था और वापस दिल्ली भेज दिया था। पर राहुल गांधी आज फिर हाथरस जा सकते हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है की उन्हें इस दुखी परिवार से मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘दुनिया की कोई भी ताक़त मुझे हाथरस के इस दुखी परिवार से मिलकर उनका दर्द बांटने से नहीं रोक सकती।’’ बताया जा रहा है कि वे दोपहर के समय हाथरस के लिए निकलेंगे। उनके साथ कांग्रेस सांसदों का एक दल भी जाएगा। राहुल गांधी के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल पीड़िता के परिजनों से मुलाकात कर उनका दर्द साझा करेगा।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिमाचल आने पर स्वागत है, लेकिन इस बार प्रदेश प्रेम भाषणों में नहीं हकीकत में दिखा कर जाएं। यह बात राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रेस बयान में कही है। राणा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हों या इंदिरा गांधी हो, जब-जब हिमाचल आए हैं, तब-तब उन्होंने हिमाचल के प्रति अपना स्नेह प्रदर्शित करते हुए हिमाचल को बड़े-बड़े पैकेज व बड़ी-बड़ी विकास योजनाएं समर्पित की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस रोहतांग टनल का उद्घाटन करने आज हिमाचल पहुंचे हैं। वह रोहतांग टनल भी कांग्रेस के हिमाचल के स्नेह व सम्मान की देन है, जो अब देश और प्रदेश के विकास के बड़े सपने को साकार कर रही है। हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने वाली पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने सपना देखा था। रोहतांग टनल का सपना 1983 में इंदिरा गांधी द्वारा जनजातीय जिला की पहली महिला विधायक स्वर्गीय लता ठाकुर के आग्रह पर देखा था। 1984 में इसका जियोलॉजिक्ल सर्वे किया गया। 2005 यूपीए वन में इस प्रोजेक्ट को कैबिनेट क्लीयरेंस मिली जबकि 2009 में यूपीए टू ने इस प्रोजेक्ट को बजट के प्रावधान के सहित पूर्व पीएम मनमोहन सिंह द्वारा क्लीयर किया गया। 28 जनू 2010 को रोहतांग टनल का शिलान्यास कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी द्वारा किया गया। जिसका उद्घाटन करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब हिमाचल पहुंचे हैं। राणा ने कहा कि सरकारें आती है, जाती हैं। विकास सतत क्रिया है, जो कि सरकारों के दम पर आगे बढ़ता है, लेकिन इसमें यह कह देना कि रोहतांग टनल बीजेपी ने बनाई है, तो यह गलत होगा जबकि असलियत यह है कि कांग्रेस के काम को बीजेपी ने आगे बढ़ाकर अब उद्घाटन तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री रहते हुए संभवत यह तीसरा दौरा है जबकि प्रधानमंत्री बनने से पहले वह सुजानपुर भी आए थे। प्रधानमंत्री के हर दौरे में जन संवाद के दौरान हिमाचल प्रेम खूब छलका है, लेकिन यह प्रेम अब तक सिर्फ भाषणों तक ही सीमित रहा है। उन्होंने कहा, मेरा प्रधानमंत्री से निवेदन है कि अगर बकौल मोदी वह हिमाचल को अपना दूसरा घर मानते हैं व सच में हिमाचल की देवभूमि व वीरभूमि से प्रेम करते हैं तो महंगाई, बेरोजगारी व महामारी के साथ कर्जे के पहाड़ के नीचे दबे प्रदेश को इस दौरे में कोई बड़ा पैकेज देकर राहत देकर जाएं। राणा ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी के हिमाचल से दूसरे घर जैसे रिश्ते हैं तो रिश्ते दिखाने के लिए नहीं निभाने के लिए होते हैं? और इस बार वह बड़े पैकेज की घोषणा करके इन रिश्तों को निभाकर जाएं।
President Ram Nath Kovind has given his consent to the bills related to farmers and farming passed by Parliament in the Monsoon session on Sunday, amid the continuous protests from farmers and political parties. Farmers and political parties were demanding withdrawal of this bill, but their appeal did not work. The Farmers Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020, the Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Agricultural Services Bill, 2020 and the Essential Commodities (Amendment) Bill, 2020 were brought in the Monsoon Session of Parliament before both the Houses of Parliament and has been approved both. Now the President's seal has also been approved on this. These three bills will replace the three ordinances announced on June 5 in the Corona period.
Bihar assembly election dates have been announced. Election results will come on 10 November. The parties have claimed their victory with electoral preparation. On the one hand, the Bharatiya Janata Party (BJP) -Janta Dal United (JDU) alliance has spoken of a return to power, on the other hand Rashtriya Janata Dal (RJD) leader Tejashwi Yadav has reiterated the change in Bihar. Before the election, Tejashwi Yadav said in a claim that if his government is formed then in the very first cabinet meeting, 10 lakh jobs would be provided to the youth of Bihar. Tejashwi Yadav said, there are already 4 lakh 50 thousand vacancies in Bihar. According to the national average standards in education, health, home department and other departments, there is a great need of 5 lakh 50 thousand appointments in Bihar. Tejashwi Yadav wrote in his tweet, with the first pen in the first cabinet,I will give jobs to 10 lakh youth of Bihar. Tejashwi Yadav has been besieging the Nitish government since long on the issue of employment. They also accused the Central Government of cheating the youth in the name of giving jobs. On the previous day, Tejashwi Yadav said, Bihar is at number 26 in industry promotion and internal trade. Bihar is the worst state in investment and industry. Why do the Chief Minister Nitish Kumar and the NDA government, which has been in power for 15 years since liberalization, do not discuss these figures?
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा कि जबकि कांग्रेस की हार भारत में चर्चा का विषय रही है। वर्तमान स्थिति से बदलाव की आवश्यकता है और जिसे प्रियंका गांधी चुपचाप ला रही हैं। गलतियों और सुधार को स्वीकार करने के लिए बदलाव का यह पहला कदम है। आजादी के बाद कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर में चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के कई नेता अपने भाषणों में कांग्रेस मुक्त देश की बात अक्सर करते ही रहते हैं। लेकिन पार्टी का आलाकमान अपने स्तर पर कांग्रेस की चमक फिर से लौटाने की कोशिशों में जुटा हुआ है। इस बीच कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने दावा किया है कि प्रियंका गांधी चुपचाप तरीके से काम करते हुए एक बदलाव ला रही हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज 88 साल के हो गए है। डॉ मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक दो बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके है और वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा सदस्य है। भारत के तेरवें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह विचारक और विद्वान के रूप में प्रसिद्ध है। वह अपनी नम्रता, कर्मठता और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। डॉ मनमोहन सिंह जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी के बाद सबसे ज़्यादा समय तक देश के प्रधानमंत्री रहे है सिर्फ ये ही नहीं मनमोहन सिंह को भारत के सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्रियों में से एक भी माना जाता है। मनमोहन का शुरुआती जीवन मनमोहन का जनम 26 सितम्बर 1932 में अविभाजित भारत के पंजाब प्रान्त में हुआ था, जो की बटवारे के बाद अब पाकिस्तान का हिस्सा है। कहा जाता है की मनमोहन सिंह के पिता चाहते थे की वो डॉक्टर बने और इसीलिए उन्होंने 1948 में अमृतसर के खालसा कॉलेज के प्री मेडिकल कोर्स में दाखिला भी ले लिए था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़ दी जिसके बाद उन्होंने हिन्दू कॉलेज में एडमिशन लिया और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। उसके बाद उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से प्राप्त की। 1957 में उन्होंने अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी से ऑनर्स की डिग्री अर्जित की। 1962 में उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के नूफिल्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी.फिल भी किया। मनमोहन की कैसे हुई राजनीति में एंट्री साल था 1991 का। देश में राजनैतिक अस्थिरता का माहौल था। बीते दो वर्ष में देश तीन प्रधानमंत्री देख चूका था। सबसे बड़े राजनैतिक दल कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे राजीव गाँधी की हत्या हो चुकी थी। एक बार फिर सरकार बनाने का ज़िम्मा कांग्रेस पर था। पर सवाल ये था कि प्रधानमंत्री बनेगा कौन। कई नाम सामने आये, कयास लगे, प्रयास भी हुए पर आखिरकार सहमति बनी पीवी नरसिम्हा राव के नाम पर। वहीं पीवी नरसिम्हा राव जो एक किस्म से रिटायरमेंट मोड में चले गए थे, दिल्ली छोड़ने का फैसला भी ले चुके थे मगर दिल्ली उन्हें छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी। राव जो हर विभाग के विशेषयज्ञ माने जाते थे, जो सवास्थ्य, शिक्षा और विदेश मंत्रालय पहले ही संभाल चुके थे, देश के प्रधान मंत्री बन गए। मगर एक विभाग ऐसा भी था जो राव के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता था, ये था वित्त मंत्रालय। नरसिम्हा राव ये अच्छे से जानते थे की देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है ऐसे में कोई ऐसा व्यक्ति ही देश की आर्थिकता को संभाल सकता है जो अर्थशास्त्र के कौशल्य में परिपूर्ण हो। तभी राव के सलहाकार पि सी ऐलेक्सेंडर ने राव को डॉ. मनमोहन सिंह का नाम सुझाया और शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले मनमोहन सिंह के सामने ये प्रस्ताव रखा गया। बतौर वित्त मंत्री किए गए काम अपना पहला बजट प्रस्तुत करते हुए डॉ. सिंह ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी का नाम बार बार ज़रूर लिया मगर वो इनकी आर्थिक नीतियों को बदलते हुए ज़रा भी नहीं हिचकिचाए। मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के कार्यकाल के दौरान विदेश व्यापार उदारीकरण, वित्तीय उदारीकरण, कर सुधार और विदेशी निवेश का रास्ते जैसे अहम फैसले लिए। उनके इन फैसलों ने अर्थव्यवस्था को ना सिर्फ नई गति दी बल्कि मजबूती भी प्रदान की। वित्त मंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह ने कई अहम फैसले लिए। खास तौर पर ऐसे निमयों में बदलाव लाए जिनकी वजह से अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ रही थी, उन्हें तेजी मिले। इसके साथ ही उन्होंने भारत को दुनिया के बाजार के लिए भी खोला और देश में आर्थिक क्रांति और ग्लोबलाइजेशन की शुरुआत की। जब मनमोहन प्रधानमंत्री बने जब डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें तो उन्हें एक्सीडेंटल प्राइममिनिस्टर कहा गया। बात है 18 मई 2004 की, इलेक्शन के बाद जश्न का माहौल था, कांग्रेस की अगुवाई वाली UPA ने नई संसद में 335 सीटों पर जीत दर्ज की थी और NDA को काफी अंतर से हराया था। सोनिआ गाँधी जीती ज़रूर थी मगर बीजेपी अब भी ये नहीं चाहती थी की कोई विदेशी प्रधान मंत्री बने, मगर निष्ठावान कोंग्रेसियों की निष्ठां सिर्फ और सिर्फ सोनिया गांधी में थी। 18 मई को कांग्रेस हाई कमान का दफ्तर खचा खच भरा था। सोनिया गांधी आई और प्रंधानमंत्री पद स्वीकार करने से इंकार कर दिया। सियासी महकमा और पुरे देश की जनता अब असमंजस में थी की आखिर कौन होगा उनका प्रधान मंत्री। जब तमाम कांग्रेसी चमचे प्रधान मंत्री बनने की चाह में पालक पावड़े बिछाये बैठे थे तब सोनिया गांधी ने नाम लिया डॉ मनमोहन सिंह का। उन्होंने कहा की उनसे अच्छा प्रधान मंत्री भारत को नहीं मिल सकता। सियासी दिग्गजों का मानना है की अगर सोनिया गांधी सत्ता से मुँह न मोड़ती तो मनमोहन को ये सौभाग्य प्राप्त न होता पर इस वाक्य से कहीं भी ये तो साबित नहीं किया जा सकता की मनमोहन की काबिलियत में कोई कमी थी। बतौर प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने रोजगार के क्षेत्र में बड़ा फैलसा लिया और मनरेगा के जरिए ऐतिहासिक कदम उठाया। हर हाथ को काम देने की उनकी सोच ने लोगों के घरों में चूल्हे जलाने में बड़ी अहम भूमिका निभाई जिससे देश अंदर से सशक्त हो सके।
The Himachal Pradesh Cabinet in a meeting held today under the chairmanship of Chief Minister Jai Ram Thakur gave its approval to restore Vidhayak Kshetra Vikas Nidhi Yojana fund of Rs. 50 lakh for the year 2020-21. The first instalment of Rs. 25 lakh per legislative constituency would be released in October, 2020 and second instalment of Rs. 25 lakh would be released after the elections to the Panchayati Raj Institutions. A presentation was made before the Cabinet on the proposed visit of Prime Minister Narendra Modi to the State. The Cabinet decided to set up a statue of former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee at The Ridge Shimla. It also decided to allot this work to famous sculptors Padam Shri and Padam Vibhushan Awardee Ram V. Sutar and Anil Sutar under Himachal Pradesh Finance Rule-104 as proposed by Language, Art and Culture Department. The Cabinet gave its nod to resume training activities in Industrial Training Institutes of the State with effect from 1st October, 2020 by strictly following the guidelines of the Ministry of Home Affairs, Ministry of Health and Family Welfare and Ministry of Skill Development and Entrepreneurship (MSDE). The Cabinet gave its nod to the Draft of Memorandum of Understanding to be executed and entered between the State Government and Temple Trust Chamunda with regard to transfer of land for Lower Terminal Point of Himani-Chamunda Ropeway Project in Kangra district. It also gave its approval to fill up seven posts of Deputy Director in Sainik Welfare Department on Contract basis. The Cabinet gave its consent to create and fill up 35 posts of panchkarma masseur in Ayurveda department on a daily wage basis to provide better Ayurveda medical service to the people. It also decided to rename Ayurveda Department as Ayush Vibhag, Himachal Pradesh. The Cabinet gave its approval to signing of MoU between Director Ayurveda and M/s HLL Lifecare Limited, a Government of India Enterprises for upgradation of Ayurvedic Health Centre to Ayush Health and Wellness Centres. It gave its approval to fill up eight posts of different categories in the Planning Department through direct recruitment.
शनिवार, हिमाचल कैबिनेट की बैठक मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हो रही है। इस बैठक में प्रधानमंत्री के दौरे के साथ साथ पर्यटन विकास, कोरोना व ऐसे कई अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। आज की इस बैठक में बाहरी राज्यों के लिए बसें चलाने और डिपुओं में पॉस मशीनों से राशन देने पर भी फैसला हो सकता है। बैठक में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर, मंत्री सरवीण चौधरी व अन्य नेतागण शामिल हुए है। हालांकि बैठक से सरकार के दो मंत्री नदारद रहे। उद्योग एवं परिवहन मंत्री बिक्रम ठाकुर और पंचायती राज एवं पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर अनुपस्थित रहे। बिक्रम ठाकुर स्टाफ सदस्य के संक्रमित पाए जाने के बाद क्वारंटाइन हैं।
Rahul Gandhi on Saturday wished the former Prime Minister on his birthday by a tweet and wrote “India feels the absence of a PM with the depth of Manmohan Singh, Congress leader”. Singh, who headed the UPA coalition government between 2004 and 2014, turned 88 on Saturday. "India feels the absence of a PM with the depth of Dr. Manmohan Singh. His honesty, decency, and dedication are a source of inspiration for us all. Wishing him a very happy birthday and a lovely year ahead”. Rahul Gandhi has completely tried to target the leadership in the Modi led government amid the protests going on against the three contentious Farm bills passed by the parliament earlier.
कवि जब बात करे तो बातों से फूल ही झड़ें ये ज़रूरी तो नहीं, कभी-कभी मन से उमड़ते क्रोध भाव की वर्षा भी तो हो सकती है एक कविता। ऐसा ही क्रोध एक बार रामधारी सिंह दिनकर को भी आया। राष्ट्रकवि दिनकर ने खुद कहा "एक राष्ट्रकवि को शायद इतना क्रोध शोभा न दे मगर, इतिहास में याद रखा जाएगा कि एक ऐसी स्थिति आई थी जब राष्ट्रकवि को भी इतना क्रोध आया था।" आखिर ऐसी क्या स्तिथि थी भला कि इतने सुलझे हुए कवि दिनकर, इतना उलझ गए कि उन्होंने इस पर पूरा कविता संग्रह लिख दिया। बात है 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध की, और बात है टूटते भरोसे और हौंसले की। चीन भारत की पीठ पर छुरा घोंपने का कार्य भारत तब भी कर रहा था और आज भी कर रहा है। भारत को चीन की ओर से हमला होने की आशंका भी नहीं थी जब यह हमला हुआ, और युद्ध के लिए तैयार न होने के कारण भारत यह युद्ध हार गया। इसी बात से क्रोधित राष्ट्रकवि दिनकर ने कविता संग्रह "परशुराम की प्रतीक्षा" लिखा। यह संग्रह 1963 में प्रकाशित हुआ। दिनकर भारत चीन के बीच हुए समझौते व भारत के झुकने पर आहत थे। उनका मानना था कि इस हार से जन जन का खून खुलना चाहिए। दिनकर ने इस काव्य संग्रह के माध्यम से जन-जन तक आक्रोश का संकेत पहुंचाया। दिनकर यूँ तो जवाहरलाल नेहरू के करीब माने जाते थे परंतु उन्होंने कवि धर्म निभाते हुए उन पर भी तंज कस डाले। उन्होंने कहा- "घातक है, जो देवता-सदृश दिखता है, लेकिन, कमरे में गलत हुक्म लिखता है। जिस पापी को गुण नहीं; गोत्र प्यारा है, समझो, उसने ही हमें यहां मारा है। जो सत्य जान कर भी न सत्य कहता है, या किसी लोभ के विवश मूक रहता है।" दिनकर को साहित्य के साथ-साथ देशप्रेम के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने 1957 से पहले कई विद्रोही कविताएं लिखी जिन्होंने आम जनता में आज़ादी के प्रति आक्रोश पैदा किया। ब्रिटिश शासन के दौरान उन्हें जेल भी हुई व उनके इसी देश प्रेम को देखते हुए उन्हें आज़ादी के बाद राष्ट्रकवि घोषित किया गया। भारत चीन के युद्ध में भारत की हार पर दिनकर बेहद क्रोधित हुए। दिनकर को जन जन का कवि कहा जाता है क्योंकि उन्हें हर युग में हर वर्ग के लोगों ने पढ़ा। साफ स्पष्ट शब्दों में आम आदमी की आवाज़ को बड़े तख्तों तक पहुंचाने वाले राष्ट्रकवि दिनकर ने जनता कानून का भी समर्थन किया। उन्होंने इस पर एक विद्रोही कविता लिखी जिसने समय के साथ नारे का रूप ले लिया व आज भी उसकी गूंज सुनाई पड़ती है। उन्होंने लिखा- "सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है; दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।" हिंदुस्तान के सिंहासनों व उनपर विराजमान शासकों पर प्रश्नचिन्ह तो अक़्सर उठते ही आए हैं, खैर वर्तमान स्थिति को देखते हुए दिनकर याद आ ही जाते हैं। दुनिया से विदा लेने के सालों बाद भी दिनकर ज़िंदा हैं चाहने वालों के दिलों में, साहित्य प्रेमियों की स्मृतियों में।
The Delhi health minister, Satyendar Jain, has said that there is no shortage of oxygen in Delhi for treatment of COVID-19 patients but some suppliers have been told that they will supply first in Rajasthan. He said this problem is being resolved by negotiation. The supply of oxygen to Delhi comes from Uttar Pradesh and Rajasthan. Health Minister Satyendra Jain said that at present there is no problem of oxygen in Delhi. Delhi government hospitals have a stock of 6 to 7 days of oxygen. On monday the Health Minister said, there are around 1,000 ICU beds available inDelhi , and 30 percent of the COVID-19 patients admitted to delhi hospitals are from other states.
राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने भाजपा पर तीखा हमला किया है। जारी प्रेस बयान में राणा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा की बीजेपी जनादेश से विश्वासघात कर रही है व जनादेश के बहुमत का भी लगातार दुरुपयोग कर रही है। राणा ने खुलासा किया है कि केंद्र की तर्ज पर सत्ता को कारोबार का जरिया मान चुकी बीजेपी प्रदेश के संसाधनों को भी दोनों हाथों से लूटने में लगी है। राणा ने कहा कि केंद्रीय कांगड़ा बैंक में हुए खुलासे के मुताबिक बैंक के चेयरमैन को नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कागजों के हेरफेर के तिकड़मों के चलते लाखों रुपए का लाभ दिया जा रहा है। राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश कॉर्पोरेशन एक्ट 1968 तथा नियम 1971 की धारा 41एफ के चलते किसी ऐसे व्यक्ति को बैंक का निदेशक नहीं बनाया जा सकता है, जो कि बैंक से कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ ले रहा हो। यही प्रावधान बैंक के उपनियमों की धारा 29सी में भी रखा गया है, लेकिन केंद्रीय कांगड़ा बैंक की कलाकारी का नमूना यह रहा कि बैंक के चेयरमैन को लाखों का लाभ देने के लिए 1 मार्च 2018 को एफिडेविट दायर करवाया गया कि वह अपने पारिवारिक जसूर स्थित भवन के अपने हिस्से का किराया नहीं लेंगे। यह भवन केंद्रीय कांगड़ा बैंक को किराए पर दिया गया है। इतना ही नहीं परोक्ष लाभ की इस जुगाड़बंदी में किराया न लेने व अन्य कार्य करने का अधिकार बैंक के चेयरमैन ने अपने चाचा को दे दिया। 3890 रुपए से शुरू हुए इस बैंक के किराए को यकायक बढ़ाकर 1 मार्च 2019 को 28 हजार रुपए कर दिया और गजब यह रहा कि किराए की बढ़ोतरी का फैसला बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में किया गया। जिसके चेयरमैन खुद केंद्रीय कांगड़ा बैंक के चेयरमैन रहे, तथा बैंक के प्रबंधक निदेशक भी इस बैठक में मौजूद रहे। इतना ही नहीं 1 मई 2007 से 30 अप्रैल 2012 तक 32280 रुपए किराए की बढ़ोतरी 22 मार्च 2019 को की गई। फिर 1 मई 2012 से लेकर 28 फरवरी 2019 तक फिर से किराए की बढ़ोतरी करके 48544 कर दी, जिसका भुगतान भी आनन-फानन में 22 अप्रैल 2019 को बैंक द्वारा कर दिया गया। राणा ने कहा कि बीजेपी का यह कारनामा यह बताने के लिए काफी है कि लोग इस पार्टी में सत्ता का कारोबार करने के लिए पद हासिल करते हैं व संसाधनों की लूट के लिए नियमों को ताक पर रखते हैं। वहीं, आम आदमी को महंगाई व बेरोजगारी की सौगात देते हैं।
मॉनसून सत्र के नौवें दिन सभी निलंबित आठ सांसदों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया और इसके साथ ही कांग्रेस ने पूरे मानसून सत्र के बहिष्कार का ऐलान किया। कांग्रेस राजयसभा सदस्यों ने आज सदन से वाक आउट किया है। कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया है। 20 सितम्बर को इन सांसदों द्वारा किसान बिल पर हंगामे के बाद इन्हे एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया गया था जिसके बाद सभी सांसद, संसद परिसर में ही धरने पर बैठ गए थे। सभी सांसद गांधी प्रतिमा के पास धरने पर थे और पूरी रात संसद परिसर में गुजार दी। मंगलवार सुबह जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस ने यह मसला उठाया। कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जब तक हमारे सांसदों के संस्पेंशन को वापस नहीं लिया जाता और किसान के बिलों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता विपक्ष सत्र से बायकॉट करती है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि मैंने न केवल सांसदों की सदन वापसी की मांग की बल्कि मैंने विपक्ष की तरफ से माफी भी मांगी, लेकिन मेरी माफी के बदले कोई रिस्पांस नहीं दिया गया। इससे मुझे बहुत कष्ट हुआ। इसलिए मैं और मेरी पूरी पार्टी संसद के इस पूरे सत्र का बहिष्कार करती है।
Showering praise on the deputy chairman of Rajya Sabha Harivansh Narayan Singh, Prime Minister Narendra Modi said that deputy chairman’s inspiring and statesman like conduct will make every democracy lover proud. PM Modi took to his twitter handle to praise the Chairman. “To personally serve tea to those who attacked and insulted him a few days ago as well as those sitting on Dharna shows that Shri Harivansh Ji has been blessed with a humble mind and a big heart. It shows his greatness. I join the people of India in congratulating Harivansh Ji”, he tweeted. PM Modi further said that this act showed Harivansh's greatness. "For centuries, the great land of Bihar has been teaching us the values of democracy. In line with that wonderful ethos, MP from Bihar and Rajya Sabha Deputy Chairperson Shri Harivansh Ji’s inspiring and statesman like conduct this morning will make every democracy lover proud," PM said in another tweet. One of the suspended MPs and AAP leader Sanjay Singh was quick to respond to PM Modi’s tweet. “Modi ji we are not fighting over tea. We are fighting for the welfare of farmers”, he tweeted. Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh arrived this morning with tea for the eight opposition members who had spent the night on the lawns of Parliament to protest the passage of two contentious farm bills without a division of votes on Sunday in the Upper House. However, the suspended MPs refused to take tea from Harivansh.
After the suspension of eight rajya sabha MPs on monday the opposition parties hit out at the government and are holding a protest outside the Parliament premises. Opposition parties like the Congress, CPI(M), Shiv Sena, JDS, TMC, CPI, and the Samajwadi Party are holding a protest on the Parliament premises with placards that read "Murder of Democracy", "Death of Parliament" and "Shame, shame". Eight members from the Congress, CPI(M), Trinamool Congress and the AAP were suspended for the remaining part of the monsoon session over their "unruly behaviour" during the passage of farm bills in the Upper House of Parliament. CPI(M) MP Elamaram Kareem, who is among those suspended said, "Suspension won't silence us. We will stand with farmers in their fight. Deputy chairman throttled parliamentary procedures yesterday. Suspension of MPs exposed the cowardly face of the BJP. People will see through the attempt to divert attention from their undemocratic actions." "Wake up crores of farmers of the country, the BJP government has mortgaged your life to Adani-Ambani, wake up and oppose this black law. We are on agitation in Parliament, you should agitate outside. The BJP government has passed a black law against farmers. We were terminated for opposing the bill," said AAP MP Sanjay Singh. "That is why we are sitting on dharna and will keep sitting till the BJP government explains why this black law was passed by strangling democracy," he added. A number of non-NDA parties have also written to President Ram Nath Kovid over the manner in which the government “pushed through its agenda” and urged him not to grant his assent to the proposed legislation.
भाजपा की तेज़तर्रार नेता व पूर्व मंत्री श्यामा शर्मा ने सोमवार को पंचकूला के एक निजी अस्पताल में आखिरी सासें लीं। उनके आकस्मिक निधन से पुरे हिमाचल प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। बता दें श्यामा पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। सोमवार को अचानक उनकी तबियत बिगड़ी और उन्हें नाहन स्थित मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ से उन्हें चंडीगढ़ PGI रेफेर कर दिया गया पर श्यामा ने बीच रस्ते में ही दम तोड़ दिया। पूर्व मंत्री श्यामा ने 16 सितम्बर को ही प्रधानमंत्री मोदी को फेसबुक पर शुभकामनाएं प्रेषित की थीं, पर उस समय कौन जनता था वह चंद रोज़ में दुनिया को अलविदा कह देंगी। श्यामा अपनी आखिरी समय तक राजनीती व समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहीं। उनका राजनितिक करियर 42 सालों का रहा। वह तीन बार विधायक और एक बार मंत्री भी रहीं। उन्होंने भाजपा को जिला सिरमौर में पहचान दिलाई व संगठन के लिए कई बड़े कार्य किए। उन्होंने छात्र राजनीती से अपना करियर शुरू किया। उन्होंने पहली बार 1977 में नाहन विधानसभा से चुनाव लड़ा था और जीत भी हासिल की। श्यामा शर्मा नाहन से तीन बार विधायक 1977, 1982 व 1990 में रही। 1977 में वह तात्कालीन सरकार मेें पंचायती राज, खाद्य एवं आपूर्ति तथा विधि मंत्री रही। इसके बाद प्रेम कुमार धूमल की सरकार में राज्य योजना बोर्ड की उपाध्यक्ष भी रही। मुख्यमंत्री ने जताया शोक हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूर्व मंत्री श्यामा शर्मा के निधन पर शोक जताया है। सीएम ने कहा श्यामा शर्मा ने पार्टी और जनता की निस्वार्थ एवं समर्पण भाव से सेवा की है। भगवान उनकी दिवंगत आत्मा काे शांति प्रदान करे व परिवार को यह दुख सहने की शक्ति दे।
किसान बिल को विरोध के बीच ध्वनि मत से पास कर दिया गया, जिसके बाद बीते कल विपक्ष के नेताओं ने हंगामा किया। आज मानसून सत्र के आठवें दिन, विपक्ष के हंगामे का मुद्दा उठाते हुए 8 विपक्षी सांसदों को राज्य सभा से निलंबित कर दिया गया। एक हफ्ते तक यह सांसद राज्य सभा की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। सांसदों पर उपसभापति के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप है। इन सांसदों के नाम- डेरेक ओ ब्रायन, संजय सिंह, राजू सातव, केके रागेश, रिपुन बोरा, डोला सेन, सैयद नजीर हुसैन और एलमरन करीम हैं। सांसद इसके बाद भी हंगामा करने से पीछे नहीं हैं, सभी निलंबित सांसद सदन में पहुंच गए और हंगामा करना शुरू कर दिया जिसके बाद उपसभापति ने सत्र की कार्यवाही को 10:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
बिहार में इस साल विधानसभा के लिए चुनाव होने है। चुनाव नजदीक आते ही बिहार की राजनीती में सियासी हलचल तेज हो गई है। शनिवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की. मुलाकात के बाद आत्मनिर्भर बिहार कार्यक्रम में बोलते हुए नड्डा ने साफ कर दिया कि भाजपा और एलजेपी, नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. बताया जा रहा है कि नीतीश व जेपी नड्डा के बीच चुनाव में सीटों को लेकर चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी एनडीए में रार चल रही है. एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. चिराग के तेवर अलग ही संकेत दे रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि एनडीए के सभी घटक दल साथ मिलकर बिहार के चुनावी रण में उतरेंगे.
Maharashtra's ruling power Shiv Sena, allegedly attacked an ex-navy officer for forwarding Uddhav Thakarey’s ridiculing cartoon on social media. The 65-year-old Madan Sharma was attacked near his home in Kandivali East, Mumbai. The retired Navy Officer filed a complaint against Shiv Sena workers where he said that he forwarded Uddhav Thakeray’s funny cartoon in his residential society’s WhatsApp group. Later that day he got a call from Kamlesh Kadam, who called him outside his building where he was attacked by a group of masked men. Society’s CCTV footage is being widely shared on social media where Madan Sharma is seen thrashed by masked men. In the footage, Madan walked outside his building towards the main gate and after a few moments he’s seen running back and a group of men chasing him. One of them punched him on his face. Several BJP leaders, including former Chief Minister Devendra Fadnavis, posted a photo of an injured Madan Sharma. "The ruling Shiv Sena which showed its masculinity by demolishing the office of actor Kangana Ranaut has now beaten a retired Navy officer and has injured his eye. The Chief Minister is running dictatorship from his house," Atul Bhatkhalkar, BJP MLA from Mumbai's Kandivali East constituency, tweeted In the following matter, six people including Kamlesh Kadam are arrested by the police and the investigation is under process.
विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शोकोदगार के खत्म होते ही विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने नियम 67 के स्थगन प्रस्ताव तहत चर्चा की मांग की। विपक्ष के नेता सदन में कहा कि कोरोना काल मे सरकार पूरी तरह असफल रही है पहले इस पर चर्चा हो। इस पर मुख्यमंत्री बोलने के लिए उठे लेकिन विपक्ष ने शोर शराबा शुरू कर दिया। विपक्ष के नेता ने कहा कोरोना काल मे भ्रष्टाचार हुआ, लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाला गया, यहां तक कि सरकार की पूरी मशीनरी फ़ेल हो गई है इसलिए मुख्यमंत्री और मंत्री अपने पद से इस्तीफ़ा दें। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष नियमों पर धज्जियां उड़ा रहा है ओर जो प्रस्ताव दिया है उस पर बोलें। इस बीच सत्ता पक्ष की तरफ से भी विपक्ष के रवैये का विरोध हुआ। दोनों ही दलों के नेता अपनी-अपनी कुर्सियों से खड़े हो गए औऱ शोर शराबा शुरू कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने फ़िर कहा कि जो प्रस्ताव दिया गया है विपक्ष उस पर बोले। इस बीच मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर उठे लेकिन विपक्ष ने उन्हें बोलने नहीं दिया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को 67 स्थगन प्रस्ताव के तहत बोलने को कहा ओर विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को चर्चा के लिए इजाज़त दे दी। विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने कहा कि विपक्ष ने कोरोना काल को लेकर 67 के तहत प्रस्ताव लाया। इसी विषय पर अन्य सदस्यों ने भी चर्चा मांगी है। इस पर 130 पर भी चर्चा दी गई है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को बोलने की इजाज़त दी। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि कोरोना को लेकर व्यक्तव्य देना ही था। सरकार हर चर्चा के लिए तैयार है। आजतक ऐसा कभी नहीं हुआ कि नियम 67 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव लाया गया औऱ उसे स्वीकार किया हो। बावजूद इसके सरकार हर चर्चा के लिए तैयार है। लेकिन विपक्ष कोरोना जैसी वैश्विक बीमारी को गंभीरता से नहीं ले रही है। फिर भी सरकार 67 के तहत चर्चा को तैयार है। इस पर एक बार फ़िर दोनों पक्षों में सदन के अंदर नारेबाजी शुरू हो गई। सत्ता पक्ष कहने लगा कि विपक्ष अपने जाल में फंस गया। उधर विपक्ष "चोर मचाए शोर" की नारेबाज़ी करने लगा। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष ने 67 नियम के तहत ही चर्चा की इजाज़त दे दी गई। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने 3 नए मंत्रियों राकेश पठानियां, सुखराम चौधरी औऱ राजेन्द्र गर्ग का भी सदन में परिचय दिया। इसी के साथ इतिहास में पहली बार नियम 67 स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा शुरू हुई जो अभी चल रही है।
The State Cabinet in its meeting held here today under the Chairmanship of Chief Minister Jai Ram Thakur decided to continue with registration for people entering the State till 15th September, 2020. It also decided to open big temples/religious places of the State by 10th September, 2020. Language, Art and Culture Department will prepare SOP in this regard. It was decided that the quarantine requirement be reduced from 14 days to 10 days. The District Administration would strictly enforce use of masks and social distancing in the field. The Cabinet decided to provide wheat flour and rice to the income tax payee APL Consumers under Public Distribution System as was being provided to them earlier on APL rates and provide them pulses, edible oil, salt and sugar on zero subsidy on actual rates. To address the vision of 'Aatma Nirbhar Bharat Abhiyan' significantly by creating a sustainable ecosystem of affordable rental housing solutions for urban migrants/poor and to achieve overall objective of 'Housing for All', the State Cabinet decided to request Ministry of Housing and Urban affairs, Government of India to sign Memorandum of Agreement (MoA) related to Affordable Rental Housing Complexes Scheme with the State Government. The Cabinet gave its approval to open Sub Treasury at Nagrota Bagwan in Kangra district alongwith creation of five posts of different categories to manage this Sub Treasury. It gave its consent to open Sub Tehsil at Bagachanogi in Tehsil Thunag of Mandi district alongwith creation of 12 posts of different categories. The newly created Sub Tehsil will have six patwar circles viz. Shawa, Kalhani, Kalipar, Shilhibagi, Shiwakhad and Jainshla. The Cabinet also gave its nod to open Patwar circle Jainshla under Tehsil Thunag of Mandi district keeping in view the tough geographic conditions of the area. It decided to fill up 10 posts of class IV employees in Panchayati Raj Department. It gave its approval to transfer Gram Panchayat Kot from Police Station Shimla East (Chhota Shimla) to Police Station West (Boileauganj) in district Shimla to facilitate the people. Presentations were also made by the Industries department before the Cabinet regarding proposed 'Bulk Drug Pharma Park', 'Energy Charges in the State' and on 'Brick Kiln and their related issues'.
पूर्व राष्ट्रपति प्रणभ मुख़र्जी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक। उन्होंने उनके दिल्ली स्थित घर पहुँच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रणभ मुख़र्जी के साथ अपनी तस्वीर ट्विटर पर डाली और लिखा "दशकों तक चले अपने राजनीतिक जीवन के दौरान, श्री प्रणब मुखर्जी ने प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक मंत्रालयों में लंबे समय तक योगदान दिया। वह एक उत्कृष्ट सांसद थे, हमेशा अच्छी तरह से तैयार, बेहद मुखर और साथ ही मजाकिया। "
भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणभ मुख़र्जी को अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में किया गया। टयुमर के कारण उन्हें अस्पताल लाए जाने पर वह कोरोना संक्रमित पाए गए थे। जिसके चलते अंतिम संस्कार के दौरान भी ज़्यादा लोगों की मौजूदगी नहीं रही। कोरोना के चलते सभी ज़रूरी एहतियात के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
राजीव गाँधी (20 अगस्त 1944 - 21 मई 1991) भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के जीवन की कहानी किसी हिंदी नाटकीय फिल्म से कम नहीं रही। वैसे तो सत्य यह भी है कि राजनैतिक दुनिया किसी नाटक से कम नहीं है, और राजीव गाँधी की ज़िन्दगी इसका जीता जागता उदहारण रही। राजीव की राजनीति में आने की कहानी राजनीती में आने से पहले राजीव गाँधी इंडियन एयरलाइन्स में बतौर पायलट तैनात थे। राजीव की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। पर पारिवारिक हालत और परिस्तिथि ऐसे बने कि राजीव कि न सिर्फ राजनीति में एंट्री हुई बल्कि वे देश के प्रधानमंत्री भी बन गए। दरअसल , इंदिरा गाँधी की राजनैतिक विरासत उनके छोटे पुत्र संजय गाँधी संभल रहे थे। इंदिरा के बाद वे ही नंबर दो थे और ये तय था कि वे ही इंदिरा की राजनैतिक विरासत को संभालेंगे। पर पहले एक हादसे में संजय गाँधी का निधन हुआ और फिर 1984 में इंदिरा की एक आतंकवादी हमले में हत्या कर दी गई। इंदिरा की हत्या के बाद सभी निगाहें राजीव गाँधी पर टिक गई। आखिरकार, हालात के चलते वे रातो-रात विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बन गए।विरासत में मिला कार्यकाल पूरा कर 1 साल बाद फिर से चुनाव लड़ कर राजीव प्रचंड बहुमत से प्रधानमंत्री बने। राजीव का राजनैतिक कार्यकाल दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री, राजीव पढ़े लिखे और सुलझे विचारों के थे, व जिस 21 वीं सदी में हम रहते हैं, इसका सपना राजीव ने ही संजोया था। जानते है बतौर प्रधानमंत्री राजीव गाँधी द्वारा लिए गए उन तीन बड़े फैसलों के बारे में जिन्होंने हिंदुस्तान को एक नई दिशा दी। - राजीव भारत में कंप्यूटर क्रान्ति लेकर आये जिसके चलते, भारत में विकास की गति बढ़ी व लोगों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी आसान हुई।हालंकि शुरूआती दौर में विपक्ष ने उनके इस निर्णय का जमकर विरोध किया पर आगे चलकर पूरा हिंदुस्तान उन्ही के बताये रास्ते पर चला। आज की सरकारें भी डिजिटल इंडिया का नारा देती है जिसका आगाज़ बतौर प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने किया था। - देश में मतदान करनी की वेध आयु 21 वर्ष हुआ करती थी जिसे राजीव गाँधी ने घटाकर 18 वर्ष किया। - वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था भी राजीव गाँधी की सोच का ही नतीजा है। राजीव चाहते थे कि लोकतंत्र कि मजबूती के लिए सबसे निचले स्तर यानी पंचायत स्तर पर भी चुनाव हो। आगे चलकर पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में उनकी सोच को अमलीजामा पहनाया गया। भारतीय राजनीति की सबसे खूबसूरत लव स्टोरी के नायक थे राजीव राजीव गाँधी की प्रेम कहानी एक खूबसूरत कल्पना की तरह शुरू हुई और एक दुखद मोड़ पर इसका अंत हुआ। राजीव जब इंग्लैंड में थे तो इटली की रहने वाली युवती, सोनिया मैनो को पहली नज़र में दिल दे बैठे। सोनिया, राजीव के ही कॉलेज में पढ़ती थी व राजीव ने उन्हें पहली बार कॉलेज की कैंटीन में देखा था। दोनों की जल्द ही दोस्ती हुई और दोस्ती एक खूबसूरत सपने की तरह प्यार में बदल गई। दोनो एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में चुन चुके थे व जल्द ही अपने परिवारों को भी इसके बारे में बता दिया। कहते है कि मां इंदिरा चाहती थी कि राजीव की शादी बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर की बेटी से हो। पर राजीव तो अपना दिल सोनिया को दे बैठे थे। राजीव के कहने पर इंदिरा सोनिया से मिली व दोनो के फैसले का खुले मन से स्वागत किया। दोनो की शादी 1968 में हुई। राजीव से हुई इस पहली मुलाक़ात के बारे में सोनिया ने उनकी मृत्यु के बाद लिखे एक पत्र में कहा था "मैं भूल जाना चाहती हूँ उनका आखिरी चेहरा , और रेस्टोरेंट में हुई वो पहली मुलाक़ात , वो मुस्कान याद रखना चाहती हूँ।"
31 अक्टूबर 1984 । ये वो दिन है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री और हिंदुस्तान की राजनीति की आयरन लेडी इंदिरा गाँधी की उन्ही के अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई। इंदिरा की हत्या से पुरे देश में मातम का माहौल था। दुःख और अवसाद के बीच कांग्रेस थिंक टैंक के सामने देश को अगला प्रधानमंत्री देने की चुनौती भी थी। चुनौती इसलिए भी विकट थी क्यों कि कुछ समय पहले ही संजय गाँधी भी दुनिया से रुक्सत कर चुके थे। कई नाम रेस में थे और कई नेता इस उम्मीद में थे कि वरिष्ठता और परफॉरमेंस के आधार पर उन्हें पार्टी देश का नेतृत्व करने का ज़िम्मा देगी। पर जैसा कांग्रेस में रिवाज़ है, पीएम की कुर्सी पर ताजपोशी हुई राजीव गाँधी की। कई नेताओं ने इसका आंतरिक विरोध किया और कई बगावत पर उतर आए। इन्ही बगावत करने वालों में से एक थे प्रणब मुखर्जी। वही प्रणब मुखर्जी जो इंदिरा गाँधी की सरकार में वित्त मंत्री थे। वही प्रणब मुखर्जी गांधी के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट कहा जाता था। वही प्रणब मुखर्जी जिनके लिए इंदिरा गाँधी कहती थी 'प्रणब मुखर्जी के मुँह से सिर्फ पाइप का धुआं निकल सकता है, मेरा या कांग्रेस का राज़ नहीं।' मुखर्जी को राजनीति में टिकट तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था, पर उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे राजीव गाँधी ने प्रणब के पॉलिटिकल ग्राफ पर ब्रेक लगा दी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव के बाद राजीव गांधी की समर्थक मण्डली ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने दिया। कुछ समय के लिए उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया। प्रणब को उस समय समझ नहीं आया क्या प्रतिक्रिया दें। उस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक दल राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का गठन किया। शुरुआत में लगा की शायद कांग्रेस का ये धड़ा मजबूत होगा पर मार्च 1987 में हुए बंगाल के चुनाव में प्रणव को मुँह की खानी पड़ी। राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का इन चुनावों में खाता ही नहीं खुला। यहाँ से ही प्रणव का सबसे बुरा वक्त शुरू हो गया। जो अच्छे वक्त में परछाई हुआ करते थे, वो भी अब दूर दूर रहने लगे। कहते है की उस दौरान प्रणब दा अपने कार्यालय में अकेले बैठे फाइलों के पन्ने पलटते रहते व पाइप पीते रहते। प्रणब भी शायद समझ चुके थे कि पार्टी से राह अलग करना उनका गलत फैसला था। उस वक्त उन्हें याद आए अपने पुराने मित्र संतोष मोहन देव। कई महीनो की जद्दोजहद के बाद संतोष मोहन देव व शीला दीक्षित, राजीव गाँधी को समझाने में सफल हुए की प्रणब को विरोधी खेमे में रख कर कोई फायदा नहीं है। कुछ इस तरह प्रणव की कांग्रेस में वापसी प्रशस्त हुई। हालाँकि राजीव के रहते उनकी किसी बड़े पद पर नियुक्ति नहीं हुई। 1989 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव हार गई। दो साल बाद 1991 में राजीव गांधी की हत्या हो गई। राजनीति करवट ले चुकी थी, समय बदला, कांग्रेस का वनवास खत्म हुआ और सत्ता में वापसी हुई। प्रधानमंत्री बने पीवी नरसिम्हा राव। वही नरसिम्हा राव जो कभी प्रणब के जोड़ीदार हुआ करते थे। प्रणब को लगा शायद उन्हें कैबिनेट में जगह मिल जाए, पर किस्मत को कुछ और ही मज़ूर था। प्रणब को खली हाथ, हताश ही लौटना पड़। पर कुछ ही दिनों के बाद उन्हें नरसिम्हा राव का फ़ोन आया और उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। अपने पूरे कार्यकाल में प्रणब ने ध्यान रखा कि वह राव के विश्वासपात्र तो बने रहे पर इतने करीबी न दिखें कि गाँधी परिवार उन्हें फिर शक की निगाहों से देखने लगे। राव का दौरा सम्पत हुआ और करीब 8 साल कांग्रेस फिर सत्ता से दूर रही। इस दरमियान कांग्रेस की भागदौड़ एक बार फिर गाँधी परिवार के हाथ में जा चुकी थी। अब कांग्रेस के सारे दरवाजे सोनिया गाँधी के बंगले 10 जनपथ पर जाकर खुलते थे। 2004 में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सत्ता में आया, तो लगा इंदिरा की बहु सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री होगी। किन्तु सोनिया ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया। ये वो पहला मौका था जब शायद प्रणव मुखर्जी प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए। सोनिया गाँधी ने मनमोहन सिंह पर भरोसा जताया। वही मनमोहन सिंह जिन्हे भारत के आर्थिक सुधारों का जनक कहा जाता है। खैर प्रणब दा प्रधानमंत्री नहीं बन सके लेकिन यूपीए शासन में वे एक ताकतवर मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं देते रहे। फिर साल आया 2012 का। कांग्रेस को राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करना था। 2012 आते-आते वैसे भी जनता का कांग्रेस शासित सरकार से मोह भंग हो चूका था। पार्टी को भी इस बात का एहसास था। मनमोहन सिंह के नाम पर एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर का ठप्पा लग चूका था। बताया जाता है की उस दौरान कांग्रेस का एक गट चाहता था की मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति भवन भेज दिया जाए और बचे और वक्त में सत्ता भी बागदौड प्रणव दा को सौप दी जाए। पर हुआ वही जो 10 जनपथ का फरमान था। प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बने। इसके साथ ही न सिर्फ उनका प्रधानमंत्री बनने का स्वप्न अधूरा रह गया बल्कि उनकी सक्रीय राजनीति से सदा के लिए विदाई भी हो गई। प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक अनुभव उनका राजनितिक करियर 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरू हुआ था। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए। 1982 -1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे। 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने। 1991 योजना आयोग का उपाध्यक्ष बने। 1995 -1996 तक विदेश मन्त्री के रूप में कार्य किया। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया। 2004 में लोकसभा में सदन का नेता बनाया गया। 2009 में देश का वित्त मंत्री चुने गए। 2012 में देश के राष्ट्रपति बने।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आशा वर्कर्स के हड़ताल का मुदा उठा कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक ट्वीट किया और कहा 'आशा कार्यकर्ता सही मायने में हेल्थ वॉरियर्स हैं, लेकिन वे आज अपने हक के लिए हड़ताल करने पर मजबूर हैं।' राहुल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि "सरकार गूंगी तो थी ही, अब शायद अंधी-बहरी भी है।" देश की करीब 6 लाख आशा वर्कर्स विभिन्न मांगों को लेकर 7 अगस्त से दो दिवसीय हड़ताल पर हैं। 7 अगस्त से दो दिवसीय हड़ताल पर आशा वर्कर्स देशभर की करीब 6 लाख आशा वर्करों 7 अगस्त से दो दिवसीय हड़ताल पर हैं। उन्होंने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगे रखी हैं। उनकी सबसे पहली मांग है कि उनकी सैलरी उन्हें टाइम से मुहैया करवाई जाए, तथा उन्होंने सैलरी बढ़ाने की डिमांड भी रखी है ताकि वे कोरोना महामारी के समय जिस तरह से मदद कर रही हैं, वो जारी रख सकें। साथ ही उन्होंने सरकार से बीमा और जोखिम भत्ते जैसी सुविधाएं मुहैया करवाने कि भी मांग कि हैं। आशा वर्कर्स को इस में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन्स भी सप्पोर्ट कर रही हैं।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने एक बार फिर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश में बढ़ रहे खुदकुशी के मामलों को लेकर प्रदेश सरकार को घेरने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कोरोना के कहर से खुदकुशी का तांडव मचा हुआ है और प्रदेश सरकार के मंत्री जश्न मना रहे है। रिकोर्ड तोड़ खुदकुशियों से बेपरवाह जयराम सरकार के मंत्री अपने स्वागतों में डटे हैं। लोग मर रहे हैं और भाजपा के लोग मंत्रीयों को को कंधो पर उठा कर झूम रहे हैं। मुक़ेश अग्निहोत्री ने सवाल किया कि क्या कोरोना का कानून सिर्फ़ विपक्ष के लिए ही है? क्या सत्ता में विराजमान लोगों को उसे में छूट दे रखी है। विपक्ष विरोध प्रदर्शन करे तो मामले दर्ज, मगर सरकार सारे में नाचती रहे। यह दोहरा कानून नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री भी सारे प्रदेश में पट्टिकाएं लगा कर दिल बहला रहे है। उन्होंने कहा, सरकारी आंकड़े गवाह हैं कि जयराम सरकार के कार्यकाल में 2000 खुदकुशी के मामले आ चुके हैं। किसी सरकार के समय में भी इतना कहर नहीं बरपा। 2018 में 780 और 2019 में 710 लोगों ने खुदकुशी की, मगर कोरोना में 466 खुदकुशियाँ चिंताजनक है और सरकार के दावों की पोल खोलता है। देव भूमि में जुलाई में 101 और जून में 112 व मई में 89 खुदकुशी के मामले आए हैं। ऐसे में यह सरकार विकास के लिए नहीं खुदकुशियों के लिए जानी जाएगी। उन्होंने कहा कि हर वार सरकारी आंकड़ों को सरकार यह कह कर नाकार देती है कि न जाने मुकेश अग्निहोत्री आंकड़े कहाँ से लाए? अबकी बार तो पुलिस ने बाकायदा पत्रकार सम्मेलन कर जारी किए हैं। उन्होंने कहा लोगों कि नौकरियाँ छिन गई, बेरोजगारी बढ़ गई मगर सरकार आलोकप्रिय निर्णय लेती जा रही। अब बिजली के दाम भी बढ़ा दिए। राशन और सफर भी महँगा कर दिया है। जनता में हाहाकार से बेपरवाह सरकार राजनीति में डटी है जबकि खुदकुशियों के अलावा बलात्कार के आँकड़े भी चौंकाने वाले हैं।
राम मंदिर का शिलान्यास हो गया है। भारत का अधिकतर वर्ग गौरवान्वित महसूस कर रहा होगा परन्तु क्या जिस प्रकार या जिस उद्देश्य से और जिस तरह से शिलान्यास करवाया गया यदि चार मठों के मठाधीशों, शंकराचार्य या फिर अन्य मठाधीशों को बुलाया जाता तो कितना अच्छा रहता। यह बात पूर्व प्रदेश कांग्रेस सचिव एवं सह संयोजक पंचायती राज संगठन हीरा पाल सिंह ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि यह भूमि पूजन राष्ट्र के मुखिया राष्ट्रपति से करवाया जाता या फिर इस कार्यक्रम में उन्हें भागीदार बनाया जाता तो कितना बेहतर होता। हीरा पाल सिंह ने कहा कि इनको संघ के मुखिया चाहिए थे क्योंकि संघ के बगैर इनकी कुर्सी कभी भी डगमगा जाती है परन्तु वर्तमान सरकार के मुखिया को इस शिलान्यास की जल्दी क्यों थी, क्या इस कार्यक्रम के बहाने बिहार और बेस्ट बंगाल का चुनाव भी जीतना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आज कोरोना का आंकड़ा 19 लाख से अधिक हो गया है। रोजाना हजारो लोग मर रहे हैं। अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग राष्ट्र में मौत के ग्रास बन गए हैं परंतु केंद्र सरकार राज्य सरकार के कानों में जूं तक नही रेंग रही है। हर दिन 50 हजार के लगभग नए कोरोना संक्रमित लोग आ रहे हैं। आज भारत विश्व में प्रथम पायदान पर आ गया है लेकिन केंद्र सरकार सिर्फ मन्दिर मूर्ति स्थापना तक सीमित है।
कोरोना संकट के बीच के बीच और लंबे इंतजार के बाद हिमाचल प्रदेश में जयराम कैबिनेट का विस्तार हो गया है। कैबिनेट में पांवटा साहिब से सुखराम चौधरी, नूरपुर से राकेश पठानिया व घुमारवीं से राजेंद्र गर्ग को शामिल किया गया है। ये तीनों ही पहली मर्तबा कैबिनेट में शामिल किए गए हैं, इनमें राजेंद्र गर्ग तो विधायक भी पहली ही मर्तबा बने थे। राजभवन में आयोजित हुए शपथ ग्रहण समारोह को सादे तौर पर आयोजित किया गया, कोविड-19 के चलते इसमें कुछ लोगों को ही आने का निमंत्रण था। तीनों को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने शपथ दिलवाई। तीनों ने शपथ लेने के बाद सीएम जयराम ठाकुर का अभिवादन किया। याद रहे कि कैबिनेट में तीनों पद खाली चल रहे थे। सिरमौर जिला कांग्रेस का गढ़ रहा है लेकिन कांग्रेस की परंपरागत सीट पांवटा साहिबसीट को पहली बार बीजेपी की झोली में वर्ष 2003 में डालने वाले सुखराम चौधरी का दावा कैबिनेट के लिए पहले भी मजबूत था, लेकिन सिरमौर जिले से डाॅ राजीव बिंदल के विधानसभा अध्यक्ष बनते ही सुखराम को जगह नहीं मिल पाई। डॉ. बिंदल के इस्तीफा देने के बाद अब जब कैबिनेट विस्तार हुआ तो सिरमौर के हिस्से से कैबिनेट की खाली जगह पर सुखराम की ताजपोशी पहले से ही तय मानी जाने लगी थी। सुखराम सिरमौर जिले में पुरुल्ला तहसील के निवासी हैं। सुखराम ने 12 वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। 2012 के हिमाचल प्रदेश के चुनाव में सुखराम निर्दलीय उम्मीदवार किरणेश जंग से 790 के मामूली अंतर से हार गए थे। सत्ता के संतुलन का केंद्र कहे जाने वाले कांगड़ा जिले से राकेश पठानिया का ताल्लुक और जयराम कैबिनेट में इस जिले से खाली हुई किशन कपूर व विपिन परमार की जगह भरने को शुरू से ही नूरपुर के पठानिया सबसे परफेक्ट दावेदार माने जा रहे थे। पठानिया बीजेपी की राजनीति में हमेशा तेज-तर्रार नेताओं में से एक है और सदन के अंदर और बाहर भी पार्टी और सरकार के समर्थन में हमेशा फ्रंट पर खडे दिखे हैं। राकेश पठानिया के पिता का नाम कहन सिंह सिंह पठानिया है। उन्होंने अपनी इंटरमीडियट की पढ़ाई 1981 में पूरी की। वह पेशे से कृषक और खेती उनका व्यवसाय है। राकेश पठानिया नूरपुर विधानसभा के काफी अनुभवी राजनेता रहे हैं। इसके पहले वह एक बार निर्दलाीय जबकि दो बार बीजेपी से चुनाव लड़ चुके हैं। वह 2007 में तो जीते थे लेकिन 2012 में निर्दलीय चुनाव लड़ने की वजह से हार का मुंह देखना पड़ा था। 1998 में विधानसभा चुनाव जीता जबकि 2003 के चुनाव में हार गए थे। उन्हें चुनाव में 23179 वोट मिले थे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र गर्ग ने ना सिर्फ टिकट लेकर सबको चौंका दिया बल्कि कांग्रेस में मुखर रहने वाले राजेश धर्माणी को भी अपने पहले ही चुनावी समर में परास्त कर दिया था। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के गह जिला बिलासपुर से ताल्लुक रखने वाले धर्माणी को अपने विधानसभा क्षेत्र घुमारवीं में मिलनसार माना जाता है। राजेंद्र गर्ग का बिलासपुर जिले में लोगों से जुड़ाव और संगठन के अंदर लंबी पारी कैबिनेट तक पहुंचाने में मददगार रही है। राजेंद्र गर्ग स्नातकोत्तर है, उन्होंने जिवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से 1990 में एमएससी की डिग्री ली है।
सीएम जयराम ठाकुर की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आ गई है। इस बात की जानकारी उन्होंने स्वयं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नाहन विधानसभा के विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ व शिलान्यास करते हुए दी। उन्होंने कहा कि अभी-अभी जो रिपोर्ट आई है, उसमें बताया गया है कि ये नेगिटिव है। सेल्फ क्वारंटाइन चल रहे सीएम जयराम ठाकुर का सप्ताहभर के भीतर दूसरी मर्तबा कोरोना टेस्ट हुआ है। इससे पहले बुधवार को सीएम जयराम ठाकुर व परिजनों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई थी। सीएम ऑफिस के कोरोना की चपेट में आने के बाद ही उनका व परिजनों का कोरोना टेस्ट करवाया गया था। याद रहे कि बीते बुधवार को मंडी में पॉजिटिव पाया गया बीजेपी का युवा नेता शिमला में सीएम जयराम ठाकुर से मिलने के साथ-साथ उनके दफ्तर व आवास में भी गया था। उसके बाद से ही सीएम जयराम ने स्वयं को सेल्फ क्वारंटाइन कर लिया था। इस बीच, हिमाचल प्रदेश सचिवालय में सीएम कार्यालय के उप सचिव के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद शिमला के ब्रॉकहास्ट में चार सरकारी कॉलोनियां सील कर दी गई हैं। यहां सीएम के कोरोना पॉजिटिव पाए गए उप सचिव और अन्य अफसरों के सरकारी आवास हैं। सचिवालय के पुराने भवन में किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं है। अधिकारी भी नए भवन से कामकाज निपटा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यह जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि उन्हें कोविड-19 के लक्षण आ रहे थे और उनका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। उन्होंने अपील की कि उनके सम्पर्क में आए सभी लोग कोरोना का टेस्ट करवा लें और साथ ही उनके निकट सम्पर्क वाले क्वारंटाइन में चले जाएं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने शिवराज सिंह चौहान के ट्वीट पर ट्वीट करते हुए कहा कि हमारे साथी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर चिंताजनक है। उन्होंने ईश्वर से शिवराज सिंह चौहान के जल्द स्वस्थ होने के कामना की है।


















































