विधानसभा में कांग्रेस द्वारा राज्यपाल की गाड़ी रोकने व धक्का मुक्की करने पर भाजपा अर्की मंडल ने भराड़ीघाट में मुकेश अग्निहोत्री का पुतला फूंका। इस घटना पर अर्की मंडल अध्यक्ष डीके उपाध्याय ने इसका विरोध करते हुए कहा कि कांग्रेस ज्यादा न उछले अपनी हद में रहे। इस तरह की हरकतों का अंजाम बुरा होगा। इस मौके पर अर्की मंडल के समस्त पदाधिकारी व युवा मोर्चा अर्की के अध्यक्ष सहित अन्य सहयोगी मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुरक्षा कर्मियों सहित मंत्रियों के साथ बैठक आयोजित की और दोबारा से सदन बुलाया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि सदन के स्थगित होने के बाद सदन बुलाया गया हो। इस सदन का गौरवमयी इतिहास रहा है। लेकिन आज की घटना इतिहास में कभी नहीं हुई। सीएम ने कहा कि नेतृत्व विफल हुआ इसी वजह से लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत लड़ने की क्षमता नहीं है। राज्यपाल के साथ ऐसा व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जमीन पर रहिये वरना जमीन में गाड़ देती है जनता।
शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू होते ही को विपक्ष ने हंगामा कर दिया। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने 11 बजे अभिभाषण पढ़ना शुरू किया और 11:14 पर कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। राज्यपाल ने 11:16 पर अभिभाषण को खत्म कर दिया। इस बीच नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने महंगाई का सवाल उठाया साथ ही अभिभाषण को भी जूठा करार दिया। बजट सत्र में पहली बार ऐसा हुआ है कि अभिभाषण के दौरान इतना बड़ा हंगामा हुआ हो। वहीं जब राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय राजभवन जाने लगे तो इस दौरान विधानसभा के काउंसिल चैंबर गेट पर राज्यपाल की गाड़ी के आगे खड़े होकर कांग्रेस दल ने नारेबाजी की। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज और कांग्रेस विधायकों के बीच धक्कामुकी हो गई। कांग्रेस के पांच विधायको को पूरे सत्र के लिए बर्खास्त कर दिया गया है। जिनमें नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, सतपाल रायज़ादा, हर्षवर्दन, विनय कुमार, सुंदर सिंह शामिल है
हिमाचल प्रदेश में नगर निगम चुनाव का बिगुल बज चुका है, सभी पार्टिओं ने आगामी चुनाव के लिए कमर कस ली है। कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर हिमाचल के प्रभारी राजीव शुक्ला ने भी चार नगर निगमों के पर्यवेक्षक तैनात कर दिए हैं। इनके साथ सदस्य भी लगाए गए हैं। राजेंद्र राणा को सोलन नगर निगम का पर्यवेक्षक तैनात किया गया है। हर्षवर्धन चौहान और केवल सिंह पठानिया सदस्य बनाए गए है । जीएस बाली को मंडी नगर निगम का पर्यवेक्षक तैनात किया गया है। विक्रमादित्य सिंह, सुंदर सिंह और विनोद सुल्तानपुरी सदस्य लगाए गए हैं। कौल सिंह को पालमपुर नगर निगम का पर्यवेक्षक तैनात किया गया है। रामलाल ठाकुर, इंद्र दत्त लखनपाल और जगत सिंह सदस्य लगाए गए हैं। सुखविंद्र सिंह सुक्खू को धर्मशाला नगर निगम का पर्यवेक्षक तैनात किया गया है। कुलदीप कुमार, चंद्र कुमार और राजेश धर्माणी सदस्य लगाए गए हैं। ये पर्यवेक्षक नगर निगम चुनाव को लेकर लगाए हैं। इन्हें लोकल कमेटियां बनाने का अधिकार भी दिया गया है।
बजट की खबर ...... -चुनावी साल का बजट देखना, अभी क्यों निराश होना ! -अभी चुनावी राज्यों को मिला है, अगले साल हिमाचल को भी मिलेगा -बेवजह हंगामा कर रहा नादान विपक्ष ! बजट आखिर आज आ ही गया. वित्त मंत्री का बजट भाषण खत्म होते ही हिमाचल में कांग्रेस का सरकार पर अटैक शुरू हो गया. विपक्ष कह रहा है कि हिमाचल प्रदेश को इस बजट से कुछ नहीं मिला. बजट में न बागवानों के लिए कुछ खास है और न ही पर्यटन के लिए. विपक्ष डबल इंजन की सरकार को लेकर खूब चुटकी ले रहा है. उनके अनुसार हिमाचल प्रदेश इस बजट के बाद ठगा सा महसूस कर रहा है. कितना नादान है हमारा विपक्ष. भाई जब चुनाव 2022 में है तो हिमाचल को 2021 के बजट में कुछ खास क्यों मिलेगा. न जाने क्यों विपक्ष बेवजह सरकार को घेरने पर लगा है. तो क्या हुआ कोरोना ने बागवानी और पर्यटन की भी कमर तोड़ी है, तो क्या हुआ कोल्ड चेन बागवानों के लिए अति महत्वपूर्ण है, तो क्या हुआ फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करने की सख्त दरकार है, तो क्या हुआ पर्यटन को पंख लगने के लिए आधरभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए, ये सब तभी मिलेगा न जब चुनाव नजदीक आएंगे. अब केंद्र सरकार अभी कैसे दे देती ये सब. पिछले चुनाव से पहले भी तो दिए थे 69 एनएच, ये अलग मसला है बाद में कैंसिल कर दिए. हम तो यही कहेंगे जरा एक साल इंतजार कीजिये जनाब अगले बजट में जरूर हिमाचल की सुध ली जाएगी. दरअसल राजनैतिक परंपरा ही कुछ ऐसी है. कोई भी पार्टी सत्ता में हो ऐसा ही करती है. अब इसी बजट को देख लीजिये. पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु में जल्द विधानसभा चुनाव है, देखिये इन्हें कितना कुछ मिला है. बाकी इतना भी निराशावादी नहीं होना चाहिए. बजट सरकारी कंपनियों की सेल भी लाया है. पुरे पौने दो लाख करोड़ का विनिवेश होगा. बहुत कुछ बिकने वाला है भाई. आप भी बतौर निवेशक खरीद सकते है. आपको बताते है क्या-क्या बिकने वाला है? BPCL, एअर इंडिया, कॉनकोर और SCI के विनिवेश पर जल्द मुहर लग सकती है. सरकार LIC का आईपीओ भी लाने वाली है. इसके अलावा IDBI में भी विनिवेश होगा. अब इन बड़ी सरकारी कंपनियों के हिस्सेदार तो हिमाचल वासी भी बन सकते हैं. हैं ना बहुत कुछ हिमाचल के लिए !
हिमाचल पूर्ण राज्यत्व की स्वर्ण जयन्ति पर प्रदेश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं
पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस विधायक वीरभद्र सिंह ने गुरुवार को सोलन में अगला विधानसभा चुनाव न लड़ने का एलान किया था जिसे सुन सभी दंग रह गए थे, लेकिन इसके कुछ देर बाद ही उन्होंने अपना बयान बदलते हुए चुनाव लड़ने की बात कही थी। वीरभद्र के बयानों का दौर अब भी बरक़रार है और आज उन्होंने कुठाड़ में कहा कि आज वो अगला चुनाव भी लड़ेंगे और कांग्रेस को जिताएंगे भी। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कुठाड़ में हो रही पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि वो कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते रहेंगे और वो 2022 का चुनाव लड़ेंगे भी और कांग्रेस को जिताएंगे भी और यदि जनता का साथ रहा तो अगली बार मुख्यमंत्री बन हिमाचल की बागडोर भी संभालेंगे। वीरभद्र सिंह इन दिनों सोलन जिला के कुठाड़ स्थित अपने ससुराल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। गुरुवार को वीरभद्र सिंह कुनिहार में पंचायत प्रतिनिधियों के शपथ समारोह में शिरकत करने आए थे। उन्होंने जिप चुनाव में डुमैहर और दाड़ला से पार्टी प्रत्याशियों की कम मतों से हार पर कहा कि पार्टी में गद्दार घुस आए हैं, उनका पर्दाफाश किया जाए। यहां वीरभद्र सिंह के चुनाव न लड़ने का एलान करने के बाद एक बार तो प्रदेशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया, लेकिन इसके बाद वीरभद्र सिंह के कुठाड़ राजमहल लौटते ही जिला सोलन सहित शिमला, रोहड़ू और रामपुर से सैकड़ों समर्थक भी वहां पहुंच गए। समर्थकों ने उनसे मुलाकात कर अगला विधानसभा चुनाव लड़कर जनता की सेवा करने का आग्रह किया। अपने समर्थकों की जिद के बाद वीरभद्र सिंह ने थोड़ा समय पहले चुनाव न लड़ने के अपने बयान से पलटते हुए कहा कि अगर जनता ने चाहा तो वह अपना फैसला बदलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
वीरभद्र सिंह ने 2022 विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। कुनिहार दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा की वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे पर उन्हें कांग्रेस पार्टी से प्यार है। वह कांग्रेसी हैं और मरते दम तक कांग्रेसी रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी में गद्दारी को बर्दाश्त मत करो। गद्दार पार्टी में रहते हुए पार्टी को कमजोर करते हैं। गद्दारों को बाहर का रास्ता दिखाना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कांग्रेसी बनते हैं और अपने स्वार्थ के लिए कांग्रेस को हराते हैं। एक गद्दार आगे चल कर गद्दारों की फौज पैदा करेगा। इसलिए गद्दारों से प्रार्थना है कि आपको कांग्रेस में नहीं रहना है तो छोड़कर चले जाएं। कांग्रेस में रहकर जो पार्टी की पीठ पर छूरा मार रहे हैं, उनका कांग्रेस में कोई स्थान नहीं है। इससे अच्छा नए लोग आएं। वीरभद्र सिंह आज कुनिहार में नवनिर्वाचित कांग्रेस समर्थित प्रधानों, उपप्रधानों व बीडीसी सदस्यों को शपथ ग्रहण समारोह के उपरांत आशीर्वाद देने पहुचे थे। कुनिहार पहुंचने पर कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेंद्र ठाकुर व अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा विधायक वीरभद्र सिंह का जोरदार स्वागत किया गया।
आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि पार्टी हिमाचल उतराखंड समेत छः राज्यों में चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी आगामी दो वर्षों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी लगातार देश भर में कदम बढ़ा रही है। इसी के चलते पार्टी दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ने की तैयारी में लग गई है।
औरों के ख़यालात की लेते हैं तलाशी और अपने गिरेबान में झाँका नहीं जाता मुज़फ्फर वारसी का ये शेर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप के मौजूदा हालत पर बिलकुल सटीक बैठता है। बात-बात पर अन्य पार्टियों को आइना दिखने वाले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को जिला परिषद् चुनाव में जनता ने आइना दिखा दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप के अपने ही गृह क्षेत्र की दो जिला परिषद् सीटों परे भाजपा हार गई है। यूँ तो कश्यप के गृहक्षेत्र पच्छाद में 15 वार्ड सदस्यों वाली पंचायत समिति में भाजपा ने सबसे अधिक सीटें जीतने का दावा किया है लेकिन, जिला परिषद के दो वार्डों में भाजपा बुरी तरह हारी है। यहां एक वार्ड में कांग्रेस ने परचम लहराया, जबकि दूसरे में निर्दलीय ने बाजी मारी। सुरेश कश्यप के अपने वार्ड बागपशोग में भाजपा समर्थित उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रही जबकि नारग के जिला परिषद् वार्ड पर प्रदेश निर्माता यशवंत सिंह परमार के पोते आनंद परमार की जीत हुइ है। दोनों ही जिला परिषद् वार्डस में भाजपा समर्थितों उम्मीदवारों को मुँह की खानी पड़ी। इससे साफ़ होता है की भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप की अपने गढ़ में कितनी पकड़ है। गौरतलब है कि भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को जीताने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, स्थानीय विधायक रीना कश्यप और विपणन बोर्ड के अध्यक्ष बलदेव भंडारी स्वयं मैदान में उतरे थे लेकिन तीन नेताओं की रणनीति भी काम नहीं आई।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे देर रात को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। जिला परिषद परिणाम सिरमौर बनकला निर्मला देवी (भाजपा) कालाअंब पुष्पा देवी (भाजपा) ददाहू सुरेंद्र सिंह (भाजपा) बाग पशोग नीलम शर्मा (निर्दलीय) नारग आनंद परमार (कांग्रेस) शिलांजी सतीश ठाकुर (भाजपा) देवठी मझगांव विनय भगनाल (कांग्रेस) संगड़ाह सीमा कनियाल (भाजपा) नौहराधार पृथ्वीराज (कांग्रेस) कांडो भटनोल विद्या देवी (कांग्रेस) गवाली चमेली देवी (कांग्रेस)
जिला परिषद् बिलासपुर सहित जिला की 4 पंचायत विकास समितियों के चुनाव के बाद मतगणना सुबह 8 बजे शुरू हो गई थी। बैलेट पेपर पर मतों की गणना का कार्य काफी मुश्किल भरा रहा। जिसके चलते देर रात तक आधे नतीजे ही घोषित किए गए थे। सदर बीडीसी के वार्ड नंबर-9 छकोह व वार्ड नंबर-12 घ्याल में जीत का अंतर मात्र 16 वोटों का रहा, जिसके चलते दोनों वार्डों में गिनती को लेकर खूब गर्मा-गर्मी देखने को मिली। वंही सबसे कड़ा व रोचक मुकाबला में देखने को मिला। यहाँ हार जीत का अंतर मात्र 4 वोटों का रहा। विजेता संतोष चंदेल को 542 वोट मिले वंही उपविजेता रहे जगदीश को 538 मत मिले।
हिमाचल के रामपुर ब्लॉक से जिला परिषद् के वार्ड नंबर-2 झाकड़ी वार्ड से CPI समर्थित कविता कंटु ने जीत हासिल की है। कविता कंटु अभी महज 25 साल की है। उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस और भाजपा संबंधी थे। वह कई सालों से राजनीती करते आ रहे है, और उनमें से कुछ प्रत्याशी प्रधान भी रहे है। पहली बार राजनीती में उत्तरी कविता ने इन सभी प्रत्याशियों को हार का मुँह दिखाया है। कविता ने 4561 मत लेकर 13 वोटों से जीत हासिल की। बता दें की कविता कंटू अपने माता पिता की इकलौती संतान है। उन्होंने इतिहास विषय में एमफील की हुई है, और साथ ही यूजीसी की नेट की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। पढ़ाई के साथ-साथ वे छात्र राजनीती में भी सक्रीय रही है।
पिहड बेहडलु पंचायत से बीडीसी सदस्य के लिए ग्रामीणो ने क्षेत्र की बागडोर युवा प्रत्याशी के हाथों में दी है। इन दोनों पंचायतों से बीडीसी सदस्य के लिए करसल गांव निवासी मधु देवी ने जीत हासिल की है। मधु मात्र 22 वर्ष की है और एमकॉम की पढ़ाई कर रही है। वह लडभड़ोल पंचायत में सबसे काम उम्र की बीडीसी सदस्य बनी है।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे देर रात को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। जिला परिषद परिणाम कांगड़ा वार्ड विजयी 1 डमटाल राहुल पठानिया(भाजपा) 2 लोहारपुरा अपर्णा (भाजपा) 3 पुंदर वार्ड हरदीप सिंह (कांग्रेस ) 4 भली वार्ड नर्मदा ठाकुर 5 भत्तला रितिका शर्मा 6 तलाडा जगदीश सिंह 10 खोली वार्ड कुलभाष चंद बीजेपी 11 हलेडकलां वार्ड अंजना कुमारी बीजेपी 12 बाघणी रविंदर कुमार 14 कबाड़ी चंचला देवी 15 झिकला मंगला देवी (भाजपा) 17 अवैरी नीलम देवी 18 कुदैल अनिल कुमार 19 गुनेहड़ पवन देवी 22 चौबीन अंकुश ठाकुर 25 बारी ध्रुव सिंह 28 नौरा संतोष कुमार 29 सुलह रूप रेखा 30 उस्तेहड़ विनय 33 कुल्थी सुषमा देवी 34 तियारा वार्ड रमेश सिंह बराड (बीजेपी) 43 नगरोटा सुरिया बिना धीमान 47 स्थान संजीव कुमार 48 मैरा वार्ड लक्ष्य ठाकुर 49 भरमाड सुखविंदर कुमार 50 नेरना शेर सिंह 52 बडूखर नैंसी धधोच 54 इंदौरा प्रवीण कुमार फतेहपुर के मैरा वार्ड से जवाली विधायक अर्जुन ठाकुर के बेटे लक्ष्य ठाकुर ने तीन पूर्व कांग्रेसियों की तिगड़ी का खेल बिगाड़कर जीत दर्ज की है। नूरपुर विकास खंड जिला परिषद वार्ड पुंदर में कांग्रेस समर्थित हरदीप सिंह ने अपने प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी रविंद्र चौधरी को 1054 मतों के अंतर से हराया है। हरदीप सिंह 8231 वोट मिले, जबकि रविंद्र चौधरी 7177 प्राप्त हुए।
पंचायत चुनावो में सबसे बड़ी सीट मानी जाने वाली जिला विकास परिषद् में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है, वही भाजपा ने शानदार जीत हासिल की है। मंडी जिला की 36 सीटों में से 30 पर भाजपा ने अपना कब्ज़ा किया है, जबकि कांग्रेस प्रतय्क्ष रूप से एक ही सीट जीत पाई है। वंही माकपा और भाकपा के तीन प्रत्याशी ने जिला परिषद के चुनाव में सफलता प्राप्त की। इसके आलावा 12 आज़ाद प्रत्याशी भी अपनी जीत सुनिश्चित कर पाए है, इनमें 3 भाजपा समर्थित और 2 कांग्रेस समर्थित बताये जा रहे है। इन आंकड़ों को भी अगर देखा जाये तो कांग्रेस की झोली में सर्फ 4 ही सीटें आ रही है।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे देर रात को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। कुल्लू जिला परिषद परिणाम धाउगी विभा सिंह चायल पूर्ण ठाकुर मौहल गुलाब सिंह बाड़ी देविंद्र सिंह जरड़ भुटी आशा दलाश पंकज वशिष्ठ मीना डुघीलग दीपिका बरशैणी रेखा ज्येष्ठा रुकमणि लराकेलो अरुणा नसोगी बीर सिंह कोठीचैहणी मान सिंह लझेरी जीवन
हिमाचल निर्माता डॉ वाईएस परमार के पोते ने नारग वार्ड से जिला परिषद् का चुनाव जीत लिया है। परमार ने शानदार जीत दर्ज करते हुए सुभाष शर्मा को हरा दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी आनंद परमार को 7395 मत हासिल हुए। लम्बे समय तक परमार के परिवार से कोई भी राजनीती में सक्रिय नहीं था। इस बात पर सबकी नज़रे टिकी हुई थी कि तीसरी पीढ़ीआनंद परमार जीत हासिल करते है या नहीं।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। जिला परिषद ऊना के 17 वार्डों के नतीजे घोषित हो गए हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने बताया कि जिप वार्ड 1 मुबारिकपुर से कुलदीप कुमार विजयी रहे, उन्हें 6870 वोट मिले, सुनीश को 5006 वोट व अमन कुमार को 4479 वोट प्राप्त हुए हैं। जिप वार्ड 2 कुठेहड़ा खैरला से रजनी कुमारी 7669 मत लेकर विजयी रहीं जबकि ऊषा कालिया को 7026 मत प्राप्त हुए। जिप वार्ड 3 ठठल से सतीश कुमार विजय रहे, उन्हें 7292 मत मिले और सरवन सिंह को 4022 मत प्राप्त हुए। जिप वार्ड 4 दियाड़ा से नरेश कुमारी 10846 वोट लेकर विजय रही, जबकि सीमा को 10680 वोट प्राप्त हुए। जिप वार्ड 5 मुच्छाली से सत्या देवी विजय रही हैं, उन्हें 11326 वोट मिले और उर्मिला देवी को 7860 वोट प्राप्त हुए। वार्ड 6 मोमन्यार से कृष्ण पाल विजय रहे, उन्हें 10069 वोट मिले जबकि रणबीर सिंह को 5137 वोट प्राप्त हुए। बसाल अप्पर जिप वार्ड 7 से 9,211 मत लेकर उर्मिला देवी चुनाव जीत गई जबकि मोनिका को 6,286 व अंजना रानी को 1,817 वोट प्राप्त हुए हैं। वार्ड 8 टब्बा से अशोक कुमार विजय रहे, उन्हें 9483 वोट मिले व अभिनव कुमार को 8494 वोट प्राप्त हुए। जिप वार्ड 9 बहडाला से गुलजार सिंह विजय रहे, उन्हें 6675 वोट मिले, मनजीत पाल को 5490 तथा राजिंद्र कुमार को 5205 वोट प्राप्त हुए। वार्ड 10 रायपुर सहोड़ा से नीलम कुमारी विजय रही, उन्हें 10300 वोट मिले तथा रानो देवी को 7910 वोट प्राप्त हुए। जिप वार्ड 11 ललड़ी से कमल किशोर विजय रहे, उन्हें 8364 वोट मिले जबकि अनीता रानी को 5209 वोट प्राप्त हुए। जिप वार्ड 12 पालकवाह से नरेश कुमारी विजय रही हैं, उन्हें 9806 मत मिले तथा रानो देवी को 6915 मत प्राप्त हुए। हरोली वार्ड 13 से रमा कुमारी विजयी रही, उन्हें 9039 वोट मिले तथा शशि को 7615 वोट प्राप्त हुए। पंडोगा वार्ड 14 से ओंकार को 8040 वोट लेकर जीत मिली जबकि अमितपाल को 4500 वोट प्राप्त हुए। अम्बोटा वार्ड 15 से रजनी बाला विजयी रही हैं, उन्हें 9,661 मत मिले जबकि पिंकी देवी को 7,363 वोट मिले। जिप वार्ड 16 संघनेई से संगीता देवी ने चुनाव में जीत दर्ज की उन्हें 6281 वोट मिले, रेखा ठाकुर को 4745 वोट तथ रजनी देवी को 3162 वोट प्राप्त हुए। भंजाल लोअर वार्ड 17 से चैतन्य शर्मा विजय रहे, उन्हें 14789 वोट मिले जबकि विश्वदीप सिंह को 2806 वोट प्राप्त हुए।
कांग्रेस के दिग्गज नेता कौल सिंह ठाकुर की बेटी ने लगातार चौथी बार जीत हासिल कर रिकॉर्ड कायम किया है। चम्पा ठाकुर ने अभी तक जितने भी जिला परिषद् के चुनाव लड़े है वो सभी अलग अलग क्षेत्र से लड़े है, और किसी भी चुनाव में उन्हें हर का मुँह नहीं देखना पड़ा। इस बार चम्पा ठाकुर ने स्योग वार्ड से जिला परिषद का चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला यहां दया देवी से हुआ। चम्पा ठाकुर ने 2389 मतों से जीत दर्ज की। चम्पा देवी ने स्योग वार्ड जनता का आभार व्यक्त किया, वंही पिता कौल सिंह ने अपनी बेटी की जीत के लिए बधाई दी। बता दें कि मंडी जिला से अभी तक चम्पा ठाकुर को छोड़ कर किसी भी प्रत्याशी ने लगातार अलग-अलग वार्ड से जीत दर्ज नहीं की है। इसी के आधार पर ये मना जा रहा की उन्होंने पंचायत चुनावों में रिकॉर्ड कायम किया है।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। शिमला में कांग्रेस का दबदबा 1. त्यावल ज्यूरी से चंद्र प्रभा (कांग्रेस) 2. झाकड़ी से कविता 13 वोट से जीती (माकपा) 3. नरैण से त्रिलोक चंद (कांग्रेस) 4. बगलती से हुकुम चंद (कांग्रेस) 5. सीमा रणटाडी से उर्मिला(भाजपा) 6. खशधार से मोनिता चौहान(कांग्रेस) 7. अढ़ाल से सुरेंद्र सिंह (कांग्रेस) 8. टिक्कर से भारती जनारथा (निर्दलीय) 9. सरस्वती नगर से कौशल मुंगटा (कांग्रेस) 10. बढ़ाल से विशाल (माकपा) 11. कलबोग अनिल काल्टा (भाजपा) 12. सरांह-परिणाम आना बाकी 13. मझौली-परिणाम आना बाकी 14. पौड़िया-परिणाम आना बाकी 15. घोड़ना-परिणाम आना बाकी 16. देवरी-वोटिंग जारी 17. केलवी-वोटिंग जारी 18. बल्देआं से रीना (कांग्रेस) 19. बसंतपुर से चुन्नी लाल (माकपा) 20. कुमारसैन से उज्जवल सेन (कांग्रेस) 21. भुट्टी से सुभाष (आजाद) 22. चमियाणा से लता वर्मा (कांग्रेस) 23. जुन्गा से संतोष शर्मा (कांग्रेस) 24. हलोग धामी से प्रभा वर्मा (कांग्रेस)
- स्थानीय भाजपा में मंथन शुरू सिराज में जिला परिषद के चुनाव में 4 वार्डों में भाजपा मात्र 2 पर ही जीत हासिल कर पाई है। भाजपा की हार से हड़कंप की स्थिति है। दरअसल जयराम के गृह क्षेत्र में भाजपा समर्थित 2 प्रत्याशि ही जीत हासिल कर पाए है। - जिला परिषद के मझोठी वार्ड से भाजपा समर्थित रजनी ने करीब 5 हजार मतों से जीत हासिल की। - रोड वार्ड से सराज भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्षा खिम दासी ने 7 हजार से भी ज्यादा मतों से जीत हासिल की। - सिराज भाजपा को थाची वार्ड में झटका लगा है। यहां लगातार दूसरी बार भाजपा समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है. यहाँ जिला परिषद सदस्य व भाकपा नेता संतराम की धर्म पत्नी हिमा देवी ने 2577 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। - ब्रेउगी वार्ड से निर्दलीय मीरा चौहान ने भी भाजपा समर्थित रीता देवी को 144 मतों से हराया।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के विकास खंड के टिक्करी डुहकी वार्ड से 23 वर्षीय युवा मीनाक्षी ने 31 मतों से जीत हासिल कर बीडीसी पद पर कब्जा किया है। मीनाक्षी के परिवार में आज दिन तक किसी भी सदस्य ने राजनीतिक तौर पर कोई भी चुनाव नहीं लड़ा है और न ही किसी को इस क्षेत्र में रुचि है। मीनाक्षी प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं। गांव में लोगों की समस्याओं व उनके रहन-सहन को देखते हुए उन्होंने राजनीति में आकर लोगों के लिए कुछ करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा व कांग्रेस में जाने का कोई विचार नहीं है और यह सब भविष्य में देखा जाएगा। उन्होंने बताया कि बीडीसी की भूमिका में सफलता मिलने पर आगे की राजनीति पर वो विचार करेंगी।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। जिला सोलन के जिला परिषद वार्ड वार्ड 1 दाड़लाघाट हीरा कौशल वार्ड 2 धुन्धन भुवनेश्वरी वार्ड 3 डुमैहर आशा परिहार वार्ड 4 कुनिहार अमरसिंह ठाकुर वार्ड 5 सिरिनगर लीला देवी वार्ड 6 सलोगड़ा मनोज वर्मा वार्ड 7 सपरून राजेन्द्र सिंह रंजू वार्ड 8 धर्मपुर दर्पणा ठाकुर वार्ड 9 कसौली (गड़खल) रीना देवी वार्ड 10 दड़वा वार्ड 11 बरोटीवाला वार्ड 12 खेड़ा शांति देवी वार्ड 13 मंझोली सरबजीत कौर वार्ड 14 दभोटा सुमन वार्ड 15 बवासनी राहुल शर्मा वार्ड 16 रतवाड़ी कमलेश पंवर वार्ड 17 कुण्डलु जुखडी मुख्तयार कौर
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पंचायत समिति के वार्ड-15 पीणी तलपीणी से ओमप्रकाश 22 साल की उम्र में बीडीसी सदस्य का चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने बतौर आजाद उम्मीदवार चार दिग्गज प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दी। ओमप्रकाश ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 182 मतों से हराया। ओम प्रकाश तलपीणी पंचायत के फलाटी गांव से संबंध रखते हैं। उन्होंने वर्ष 2017 से 2019 तक आईटीआई शमशी में ड्राफ्ट्समैन सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा किया है। आईटीआई डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने नौकरी नहीं की, लेकिन अब राजनीति में उतरकर अपने क्षेत्र का विकास करना चाहते हैं। पीणी व तलपीणी पंचायत के कई गांव अभी भी सड़क से महरूम हैं। क्षेत्र में कई सुविधाओं का अभाव है। तलपीणी और पीणी पंचायत के रास्तों की हालत भी सुधारी जाएगी। जीत के बाद उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा है।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। जिला परिषद मंडी के निर्वाचित सदस्यों की सूची : जिप वार्ड विजेता हारा प्रत्याशी जीत का अंतर ढेलू लीला देवी(कांग्रेस) कल्पना देवी(आजाद) 804 बथेरी शारदा(भाजपा नेरघरवासड़ा विजय कुमार(कांग्रेस) तेज सिंह(बीजेपी) 525 डलाह रविकांत(माकपा) भराडू कुशाल भारद्वाज( माकपा) भागीरथ(भाजपा) 7000 नगवाईं रीता(कांग्रेस) रेखा(भाजपा) 251 सयोग चंपा ठाकुर कटौला इंद्रा देवी थाची हीमा देवी(माकपा) सुशीला(भाजपा) 2597 बासा मुकेश चंदेल(भाजपा) ज्ञान चंद(भाजपा) 734 मझोठी द्रोमपति देवी(भाजपा) लीला देवी 5569 रोड़ खेम दासी(भाजपा) गीता देवी(कांग्रेस) 7383 ब्रयोगी मीरा देवी(निर्दलीय) रीता देवी(भाजपा) 144 नौण हुकम सिंह चुराग चेतन सिंह(भाजपा) कीतिश कुमार(निर्दलीय) 4388 ममेल बिहारी लाल शर्मा सराहन किशोरी लाल सांविधार सीमा डैहर कर्म चंद(भाजपा) देवराज(निर्दलीय) 472 सलापड़ अंजु देवी(भाजपा) लता देवी(कांग्रेस) 406 खिलड़ा भूपेंद्र ठाकुर( भाजपा ) हेम सिंह ठाकुर(निर्दलीय) 2462 महादेव जसवीर सिंह(निर्दलीय) नंद लाल ठाकुर(भाजपा) 7180 कोट(ब्लह) ज्ञान चंद(भाजपा) मनोज कुमार(कांग्रेस) 3867 भडयाल पाल वर्मा बैहल मनीषा ठाकुर लोअर रिवालसर प्रियंता शर्मा कोट(गोपालपुर) ज्ञान चंद बलद्वाड़ा ऊषा(भाजपा) कल्पना(कांग्रेस) 418 थौना चंद्रमोहन(भाजपा) पृथ्वी राज(भाजपा-बागी) 9464 जनेड वेद प्रकाश कोटली कमलेश कुमारी लौंगणी जगदीश चंद(भाजपा) रोशन लाल(आजाद) 4005 नवाही मुनीष(निर्दलीय) जयकुमार(कांग्रेस) 4548 ग्रियोह वंदना गुलेरिया(भाजपा) भूपेंद्र सिंह(माकपा) 724 लांगणा ममता भाटिया(भाजपा) निर्मला देवी(कांग्रेस) 2789 दतवाड़ मीना कुमारी(भाजपा) निशा देवी(कांग्रेस) 583 पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर ने जिला परिषद के चुनावों में लगातार चौथी बार जीत दर्ज करके नया रिकार्ड कायम किया है। रिकार्ड इस बात को लेकर भी बन रहा है कि चंपा ठाकुर ने अब तक जिला परिषद के जीतने भी चुनाव लड़े वह सभी सदर क्षेत्र के अलग-अलग वार्डों से लड़े और किसी में भी हार का मुहं नहीं देखना पड़ा। जिला परिषद में कांग्रेस की करारी हार, भाजपा की प्रचंड जीत 20 सीटों पर भाजपा का प्रत्यक्ष रूप से हुआ कब्जा कम्युनिस्टों के खाते में गई 3 सीटें जबकि 12 आजाद उम्मीदवार जीते 12 आजाद विजेताओं में से 3 कांग्रेस और 3 भाजपा समर्थित मंडी में भाजपा के नाम हुई जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी सीएम के घर सिराज में जिला परिषद के चुनाव में 4 वार्डों में भाजपा मात्र 2 पर ही जीत हासिल कर पाई है। भाजपा की हार से हड़कंप की स्थिति है। दरअसल जयराम के गृह क्षेत्र में भाजपा समर्थित 2 प्रत्याशि ही जीत हासिल कर पाए है। जिला परिषद के मझोठी वार्ड से भाजपा समर्थित रजनी ने करीब 5 हजार मतों से जीत हासिल की। रोड वार्ड से सराज भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्षा खिम दासी ने 7 हजार से भी ज्यादा मतों से जीत हासिल की। सिराज भाजपा को थाची वार्ड में झटका लगा है। यहां लगातार दूसरी बार भाजपा समर्थित उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है।यहाँ जिला परिषद सदस्य व भाकपा नेता संतराम की धर्म पत्नी हिमा देवी ने 2577 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। ब्रेउगी वार्ड से निर्दलीय मीरा चौहान ने भी भाजपा समर्थित रीता देवी को 144 मतों से हराया।
हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद और पंचायत समिति वार्ड सदस्यों का चुनाव नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए। प्रदेश भर के कुल 80 ब्लाक मुख्यालयों में सुबह आठ बजे से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। कई जगह मतगणना शनिवार सुबह करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश को जिप के 239 और बीडीसी के 1638 नए सदस्य मिलेंगे। जिला परिषद हमीरपुर के निर्वाचित सदस्यों की सूची : वार्ड 1 बगेहड़ा रणजीत सिंह राणा वार्ड 2 करोट सुमना देवी वार्ड 3 दरोगण पति कोट बबली वार्ड 4 धलोट मोहिंद्र सिंह वार्ड 5 जंगलरोपा नरेश कुमार दर्जी वार्ड 6 अणु आशा देवी वार्ड 7 धीरड़ पवन कुमार वार्ड 8 जाहू राजकुमारी वार्ड 9 खरवाड़ रमन वर्मा वार्ड 10 भोरंज मनु बाला वार्ड 11 करेर राजेश कुमार वार्ड 12 बिझड़ी मीना कुमारी वार्ड 13 बड़सर बीना देवी वार्ड 14 दांदड़ू संजीव कुमार वार्ड 15 लहड़ा संजीव कुमार वार्ड 16 मालग संजय कुमार वार्ड 17 बेला इंदु बाला वार्ड 18 नौहंगी आशीष कुमार जिला परिषद की अणु वार्ड से कांग्रेस समर्थित आशा कुमारी ने भाजपा समर्थित बीना देवी को दी शिकस्त। 2024 मतों से भाजपा उम्मीदवार बीना देवी को हराया। जिला परिषद जंगल रोपा वार्ड आजाद उम्मीदवार नरेश कुमार दर्जी जीते। आजाद उम्मीदवार ने भाजपा और कांग्रेस दोनों उम्मीदवारों को हराया 810 मतों से जीत की हासिल। जिला परिषद के करेर वार्ड से भाजपा समर्थित उम्मीदवार राजेश कुमार उर्फ मानंगा ने जीत की हासिल अपने प्रतिनिधियों को दी करारी शिकस्त।
राहुल गांधी ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि कृषि क्षेत्र पर तीन-चार पूंजीपतियों का एकाधिकार हो जाएगा जिसकी कीमत मध्यम वर्ग और युवाओं को चुकानी होगी। मैं युवाओं से कहना चाहता हूँ की उनसे उनकी आज़ादी छीनी जा रही है। मुट्ठीभर लोगों का देश की अर्थव्यवस्था पर कब्जा हो रहा है और ये सभी लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोस्त हैं। राहुल गांधी ने कहा कि आज देश के सामने एक त्रासदी आ गई है, सरकार देश की समस्या नजरअंदाज करना चाहती है और गलत सूचना दे रही है। मैं अकेले किसानों के बारे में बोलने वाला नहीं हूं। किसानों का संकट इस त्रासदी का एक हिस्सा मात्र है। यह वर्तमान के बारे में नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के बारे में है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की कोशिशों के बावजूद किसान थकने वाले नहीं हैं क्योंकि 'वे प्रधानमंत्री से ज्यादा समझदार हैं।'
देश में कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होते ही सियासी बयानबाज़ी का दौर भी शुरू हो गया हैl एक तरफ जहां भारत ने पहले दिन दो लाख से अधिक लोगों को टीका लगाकर रिकॉर्ड बनाया। वहीं, दूसरी तरफ राजनीती में बड़े कद के नेता वेक्सिनेशन पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने से बाज़ नहीं आ रहे जिसकी झलक राजधानीं दिल्ली में देखने को मिल रही है। दरअसल, टीकाकरण के पहले दिन दिल्ली में लक्ष्य से आधे लोगों को ही वैक्सीन दी जा सकी जिस पर काफी विवाद हो रहा है l हर राज्य में एक दिन में वैक्सीनेशन को लेकर कुछ टारगेट रखे गए हैंl 16 जनवरी को वैक्सीनेशन के पहले दिन दिल्ली में कुल 8100 लोगों को टीका लगना था लेकिन ये लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका। इस बात को मुद्दा बना कर कांग्रेस ने प्रश्न उठाया है कि केंद्र और दिल्ली की तीनों एमसीडी में बीजेपी सत्ता में है, फिर भी इतना कम वैक्सीनेशन क्यों हुआ है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गाँधी ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर किसानों की पूंजी हड़पने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि अपने सूट-बूट वाले दोस्तों का 8,75,000 करोड़ का कर्ज माफ करने वाली मोदी सरकार अन्नदाताओं की पूंजी साफ करने में लगी है। किसान आंदोलन को लेकर राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर हमलावर हैं। इससे पहले राहुल गांधी यह तक कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री देश के किसानों की इज्जत नहीं करते और बार-बार बातचीत कर सिर्फ किसानों को थकाना चाहते हैं। राहुल गांधी ने यह दावा किया था कि नरेंद्र मोदी भले ही देश के प्रधानमंत्री हो लेकिन उनका रिमोट कंट्रोल कुछ पूंजीपतियों के हाथ में ही है। राहुल गांधी और प्रियंका कृषि कानूनों के खिलाफ उप राज्यपाल के निवास के निकट आयोजित कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को ‘किसान अधिकार दिवस’ मनाया।
उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अपने दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर है। इस दौरान उन्होंने कल अमितशाह और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की थी। आज योगी प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी से मुलाकात करंगे। यह मुलाकात दोपहर के समय होगी। मुलाकात के दौरान मंत्री मंडल में विस्तार से कोरोना वैक्सीन को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके आलावा वो प्रधानमंत्री मोदी को उनके ड्रीम प्रोजेक्ट काशी कॉरिडोर की प्रगति रिपोर्ट भी देंगे। मुखयमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूपी में होने वाले विधान परिषद और पंचायत चुनाव की तैयारियों पर बात करने के साथ-साथ मकर सक्रांति के बाद यूपी के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी बातचीत कर सकते है।
सोलन विधायक डॉ कर्नल धनीराम शांडिल के बदले तेवरों से सोलन कांग्रेस का कलेवर बदलता दिख रहा हैं. मिस्टर कूल शांडिल ने अब कर्नल वाले तेवर इख्तियार किये हैं जिससे कांग्रेस ज्यादा अनुशासित दिख रही हैं, बेशक उनकी दखल सिर्फ सोलन निर्वाचन क्षेत्र के मामलों तक ही सिमित हैं, लेकिन असर साथ लगते क्षेत्रों में भी दिख रहा हैं. हालांकि जिला अध्यक्ष के साथ उनकी खींचतान भी जगजाहिर हो चुकी हैं लेकिन लगता हैं कर्नल शांडिल के आगे जिला अध्यक्ष की चल नहीं रही. इसका ताजा प्रमाण हैं जिला परिषद् चुनाव के लिए शांडिल द्वारा अपने तीन प्रत्याशी घोषित करना. पहली बार शांडिल ने इस तरह खुलकर आये हैं जिससे कांग्रेस में एक आस जगी हैं और विश्वास भी. वैसे भी जिला कांग्रेस की सक्रियता बंद कमरों तक सिमटी हैं, सरकार के खिलाफ मैदानी जंग में जिला कांग्रेस संगठन कही नहीं दिखा रहा. सरकार की बड़ी नाकामियां भी कांग्रेस मजबूती से उठाने में विफल रही हैं. ऐसे में कांग्रेस में जिस आक्रामकता की कमी दिख रही हैं उसकी भरपाई अब शांडिल करते दिख रहे हैं. न सिर्फ शांडिल के फैसलों में आक्रमता हैं बल्कि मैदान में भी उनकी बढ़ती मौजूदगी कांग्रेस में नया जोश भर रही हैं. उधर जिला अध्यक्ष शिवकुमार को भी कुछ बड़े नेताओं का साथ मिला हुआ हैं, पर उनकी राह जरा भी आसान नहीं हैं. खासतौर से सोलन निर्वाचन क्षेत्र में कण्ट्रोल पूरी तरह कर्नल शांडिल के हाथ में हैं. शहरी कांग्रेस सोलन और ब्लॉक कांग्रेस पर भी शांडिल का ही पकड़ दिख रही हैं. ऐसे में कांग्रेस में कब जिला संगठन के खिलाफ मुख़ालफ़त देखने को मिल जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता. सुल्तानपुरी की बढ़ती सक्रियता का चर्चा आम: एक और बात जिसकी चर्चा इन दिनों सोलन के राजनैतिक गलियारों में हैं वो हैं विनोद सुल्तानपुरी की सोलन में बढ़ती सक्रियता. सुल्तानपुरी बेहद कड़े मुकाबले में बीते दो चुनाव कसौली निर्वाचन क्षेत्र से हार चुके हैं. उनकी हार का कारण भीतरघात को माना जाता रहा हैं. अब सुल्तानपुरी अचानक सोलन में क्यों इतने सक्रीय हो गए, इसे लेकर खूब चर्चा हैं. अब इसके क्या कारण हो सकते हैं इसे लेकर सब अपने हिसाब से अनुमान लगा रहे हैं. 2022 की तैयारी में शांडिल: बहरहाल, 2022 के चुनाव में बेशक शांडिल की उम्र 82 वर्ष होगी लेकिन फिलवक्त वे ही सोलन निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा हैं और उनका विकलप कांग्रेस के पास नहीं दिख रहा हैं. उनके ताजा फैसलों को भी 2022 की चुनावी रणनीति के तौर पर ही देखा जा रहा हैं. दरअसल शांडिल संगठन में अपनी ब्रिगेड तैयार करना चाहते हैं ताकि 2022 में उनकी राह आसान हो. अब कर्नल के तेवर ज़ारी रहते हैं या कोई नया ट्विस्ट आता हैं, ये देखना रोचक होगा. आखिर राजनीति में कुछ भी मुमकिन हैं.
हिमाचल प्रदेश में होने वाले शहरी निकाय चुनाव के लिए वीरवार को नामांकन वापिस लेने की आखरी तारीक तय की गयी थी। राज्य चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक वीरवार शाम 6 बजे तक कुल 310 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। हिमाचल के पचास शहरी निकाय के चुनाव में अब 1191 उम्मीदवारों ने चुनाव मैदान में रह गए है । नाम वापस लेने वाले प्रत्याशी चुनाव मैदान छोड़ गए हैं। इसके साथ ही उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिए गए हैं। बता दें की शहरी निकाय चुनाव के लिए 10 जनवरी को मतदान होगा। मतदान के बाद मतों की गणना होगी और इसी दिन चुनाव नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे। 12 जनवरी को चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उधर, राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार अब शहरी निकाय चुनाव में 1191 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमाएंगे। जिला नामांकन वापस कुल मैदान में कुल्लू 27 82 मंडी 28 152 सिरमौर 02 92 बिलासपुर 11 76 चंबा 43 94 ऊना 73 125 कांगड़ा 31 230 हमीरपुर 09 118 सोलन 46 93 शिमला 40 129
नगर पंचायत अर्की के 07 वार्डों के निर्वाचन के लिए नामांकन वापसी के उपरान्त अब कुल 19 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इन सभी को आज चुनाव पर्यवेक्षक हेमिस नेगी की उपस्थिति में नियमानुसार चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए गए। यह जानकारी उपमण्डलाधिकारी एवं निर्वाचन अधिकारी विकास शुक्ला ने दी। नगर पंचायत अर्की के वार्ड संख्या-1 में कान्ता देवी तथा निर्मला देवी चुनाव मैदान में है। कान्ता देवी को चुनाव चिन्ह के रूप में कुर्सी तथा निर्मला देवी को चुनाव चिन्ह के रूप में ताला-चाबी आवंटित किया गया है। नगर पंचायत अर्की के वार्ड संख्या-2 में गौरव ठाकुर, दीवान चन्द, लक्ष्मी सिंह तथा सुरेन्द्र कुमार चुनाव मैदान में हैं। चुनाव चिन्ह के रूप में गौरव ठाकुर को कुर्सी, दीवान चन्द को ताला-चाबी, लक्ष्मी सिंह को सिलाई मशीन तथा सुरेन्द्र कुमार को हवाई जहाज आवंटित किया गया है। नगर पंचायत अर्की के वार्ड संख्या-3 में भारती वर्मा तथा श्यामा मैदान में हैं। भारती वर्मा को कुर्सी तथा श्यामा को ताला-चाबी चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। नगर पंचायत अर्की के वार्ड संख्या-4 में अनुज गुप्ता, नरेन्द्र कुमार तथा राजीव कुमार चुनाव मैदान में हैं। चुनाव चिन्ह के रूप में अनुज गुप्ता को कुर्सी, नरेन्द्र कुमार को ताला-चाबी तथा राजीव कुमार को सिलाई मशीन आवंटित किया गया है। नगर पंचायत अर्की के वार्ड संख्या-5 में कमलेश गुप्ता तथा हेमेन्द्र कुमार चुनाव मैदान में हैं। कमलेश गुप्ता को कुर्सी चुनाव चिन्ह तथा हेमेन्द्र कुमार को ताला-चाबी चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। नगर पंचायत अर्की के वार्ड संख्या-6 में अंकुश शर्मा, गौरव गुप्ता तथा धर्मपाल चुनाव मैदान में हैं। अंकुश शर्मा को कुर्सी चुनाव चिन्ह, गौरव गुप्ता को ताला-चाबी चुनाव चिन्ह तथा धर्मपाल को सिलाई मशीन चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। नगर पंचायत अर्की के वार्ड संख्या-7 में भावना, रूचिका गुप्ता तथा संतोष चुनाव मैदान में हैं। भावना को कुर्सी चुनाव चिन्ह, रूचिका गुप्ता को ताला-चाबी चुनाव चिन्ह तथा संतोष को सिलाई मशीन चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। नगर पंचायत अर्की के लिए मतदान 10 जनवरी, 2021 को प्रातः 8.00 बजे से सांय 4.00 बजे तक होगा।
तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सुपरस्टार रजनीकांत ने बड़ा ऐलान किया है। रजनीकांत ने मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि वो कोई राजनीतिक दल नहीं बनाने जा रहे हैं। हालांकि, तमिलनाडु के लोगों के लिए काम करते रहेंगे। रजनीकांत ने अपने बयान में कहा कि बीते दिनों उनकी तबीयत में जो गिरावट हुई है, वो इसे भगवान की चेतावनी मानते हैं और राजनीतिक पार्टी नहीं बनाने का फैसला करते हैं। रजनीकांत ने कहा है कि वो ऐसा नहीं चाहते हैं कि लोग ये समझें कि उन्हें बलि का बकरा बना दिया गया है। बता दें, इससे पहले रजनीकांत की ने ऐलान किया था कि वह 31 दिसंबर को अपने राजनीतिक दल का ऐलान करेंगे जिसके बाद तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव में उनका लड़ना तय होगा और रजनीकांत मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बन सकते हैं। लेकिन कुछ समय पहले जब रजनीकांत हैदराबाद में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, तब उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। रजनीकांत को इसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बीते दिन ही उन्हें छुट्टी मिली थी।
बिहार में चुनाव भले ही ख़त्म हो गए हो मगर सियासी घमासान जारी है, अब RJD (राष्ट्रीय जनता दल) के वरिष्ठ नेता और पू्र्व विधानसभा स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बड़ा ऑफर दे दिया है। उदय नारायण चौधरी ने कहा है कि 'अगर नीतीश कुमार तेजस्वी को मुख्यमंत्री बना दें तो उनको 2024 में प्रधानमंत्री के लिए विपक्षी पार्टियां समर्थन कर सकती हैं। यानी आरजेडी ने सरकार में आने की उम्मीद अब भी नहीं छोड़ी है और वो एक बार फिर से नीतीश कुमार के साथ जाने के लिए तैयार नजर आ रही है और इसके लिए नीतीश कुमार को दिल्ली भेजने का ऑफर तक दे दिया है। हालांकि, इसकी वजह बीजेपी और जेडीयू के बीच बढ़ रही खींचतान ही है। बिहार में नई सरकार बनने के बाद अब तक कैबिनेट का विस्तार नहीं हुआ है, सत्ता मिले अभी कुछ ही दिन हुए है कि सत्ताधारी एनडीए में अंतर्कलह की सुगबुगाहट नज़र आ रही है । ज्यादा सीटें जीतने वाली बीजेपी ने भले ही वादे के मुताबिक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बना दिया हो लेकिन भाजपा को अब उनकी मौजूदगी खेलने लगी है। वहीं अरुणाचल में जेडीयू विधायकों का बीजेपी में जाना बिहार की सियासत को सुलगा गया है । एनडीए की इस खलबली पर विपक्ष पैनी नजर बनाए हुए है और जीत की दहलीज तक पहुंचने वाली RJD को इस आपसी मतभेद में संभावनाएं नजर आने लगी हैं। बीजेपी को मिलीं ज्यादा सीटें दरअसल, 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए को 125 सीटों पर जीत मिली थी। इनमें 74 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी जबकि जेडीयू 43 पर सिमट गई थी। यानी बीजेपी को जेडीयू से काफी ज्यादा सीटें मिली थीं। बावजूद इसके बीजेपी ने नीतीश कुमार का नेतृत्व ही स्वीकार किया क्योंकि उनके चेहरे पर ही पूरा चुनाव लड़ा गया था। लेकिन नीतीश कैबिनेट में बीजेपी अपनी सीटों के हिसाब से ज्यादा भागीदारी चाहती है। इस बात पर विवाद भी गहरा रहा है। जवाब में जेडीयू ने बीजेपी को 2010 के चुनाव की याद दिलाई है।
- नगर परिषद् परवाणु चुनाव को 37 ने भरा नामांकन - नामंकन वापसी के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर नगर परिषद् परवाणु चुनाव में कुल 37 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए है। सोमवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी और 10 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए। इससे पहले शनिवार तक कुल 27 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए थे। कुल 9 वार्डों के लिए ये 37 नामांकन दाखिल हुए है। इनमे से 9 - 9 प्रत्याशियों को कांग्रेस व भाजपा का समर्थन प्राप्त है जबकि 19 बिना किसी राजैनतिक दल के समर्थन के मैदान में है। अब इन 19 प्रत्याशियों में से कितने मैदान में डटे रहते है ये तो नामांकन वापसी की अंतिम तिथि यानी 30 दिसंबर के बाद ही स्पष्ट होगा। भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की बात करें तो वार्ड एक से खुद महिला आयोग अध्यक्ष डेज़ी ठाकुर मैदान में उतरी है। वहीँ वार्ड 2 से रजनी सिंगला प्रत्याशी है। वार्ड नम्बर 3,4,5 महिला आरक्षित है जहाँ किरन चौहान, गायत्री देवी व रचना रानी उम्मीदवार है। वहीँ वार्ड 6 में अनीता शर्मा, वार्ड 7 में रंजीत ठाकुर, वार्ड 8 से शकुंतला पांटा और वार्ड 9 से पूजा गोयल प्रत्याशी हैं। वहीँ कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों की बात करे तो वार्ड एक से काजल उम्मीदवार है जो पिछले चुनावों में भी डेज़ी ठाकुर को कड़ी टककर दे चुकी हैं। वार्ड 2 से लखविंदर सिंह उम्मीदवार है जो चुनावी दंगल में नया पर मजबूत चेहरा माना जा रहा हैं। वहीँ वार्ड 3, 4 व 5 से शशि गर्ग, चंद्रावती व सोनिया शर्मा उम्मीदवार है. वहीँ वार्ड 6 से निवर्तमान नगर परिषद् अध्यक्ष ठाकुरदास शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि वार्ड 7 से प्रेमलता व वार्ड 8 से मोनिशा उम्मीदवार हैं। वार्ड नंबर 9 से कांग्रेस ने निशा शर्मा का समर्थन करने का फैसला लिया हैं। वहीँ निर्दलीय उम्मीदवारों की बात करें तो सबसे ज्यादा चर्चा राकेश भाटिया की है, जो वार्ड 1 से उम्मीदवार हैं. भाटिया की एंट्री से इस वार्ड के समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में उन पर सबकी निगाहें होगी।
-डेजी ठाकुर और ठाकुरदास शर्मा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है ये चुनाव नगर परिषद् परवाणु के चुनाव 10 जनवरी को होने है. सभी 9 वार्डों में इस मर्तबा रोचक टक्कर देखने को मिल सकती है. बेशक चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं हो रहे पर अध्यक्ष पद पर कब्ज़ा ज़माने के लिए दोनों पार्टी के दिग्गजों की नज़र टिकी है. अध्यक्ष पद कब्जाने के लिए इन दिग्गजों को खुद तो चुनाव जीतना ही होगा, साथ ही उनके समर्थित कम से कम 4 अन्य पार्षद भी चुनाव जीतने चाहिए. आज चर्चा करते है उन दो चेहरों के बारे में जो अध्यक्ष पद के बड़े दावेदार है. प्रदेश महिला आयोग अध्यक्ष डेजी ठाकुर की एंट्री ने इस चुनाव को रोचक बना दिया है. वह वार्ड 1 से भाजपा समर्थित प्रत्याशी है, वर्तमान में पार्षद भी है और पहले नगर परिषद् की अध्यक्ष भी रह चुकी है. उनका निकाय चुनाव में फिर उतरने के मतलब है स्पष्ट है की अध्यक्ष पद पर उनकी नज़र टिकी है. डेजी ठाकुर एक बड़ा नाम है, स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक डॉ राजीव सैजल का समर्थन भी उन्हें प्राप्त है और भाजपा का मजबूत संगठन भी उनके पक्ष में जाता है. पर उनकी राह इतनी आसान भी नहीं है. कांग्रेस के समर्थन से इस बार फिर वार्ड 1 से काजल मैदान में है जिन्होंने पिछले चुनाव में डेजी ठाकुर को जमकर टक्कर दी थी. काजल की सादगी और जमीनी जुड़ाव उनके पक्ष में जाता है. बेशक कांग्रेस का संगठन भाजपा के मुकाबले कमजोर है, लेकिन परवाणु में स्थानीय कांग्रेस को कम आंकना भाजपा की भूल हो सकती है. वहीँ सोमवार को निर्दलीय उम्मीदवार राकेश भाटिया ने भी ताल ठोक दी है, जो इस मुकाबले का समीकरण बदल सकते है. बहरहाल नाम वापसी की तिथि के बाद ही असल तस्वीर स्पष्ट होगी. उधर राज्य महिला आयोग अध्यक्ष का नगर परिषद् चुनाव लड़ना विरोधियों को उनका डिमोशन लग रहा है . वहीँ समर्थक इसे डेजी ठाकुर का परवाणु से प्यार और जुड़ाव करार दे रहे है. पर इतना तय है की ये नतीजा सीधे तौर पर भविष्य में डेजी ठाकुर का राजनैतिक कद तय कर सकता है. कांग्रेस की बात करें तो वार्ड 6 से ठाकुरदास शर्मा मैदान में है जो निवर्तमान अध्यक्ष भी है . इस चुनाव में ठाकुरदास शर्मा फ्रंट से कांग्रेस की तरफ से लीड कर रहे है. मकसद साफ़ है की कैसे भी कम से कम 5 वार्डों में पार्टी समर्थित लोग जीते और दोबारा अध्यक्ष पद कब्जाया जा सके. कई वार्डों में कांग्रेस ने बाहरी उम्मीदवारों को भी समर्थन दिया है जो ठाकुरदास की रणनीति का ही हिस्सा है. ठाकुरदास अपने पांच साल के कामकाज पर वोट मांग रहे है. पिछले चुनाव में ठाकुरदास वार्ड 8 से चुनाव जीते थे किन्तु इस मर्तबा वार्ड 8 महिला आरक्षित है ऐसे में ठाकुरदास ने वार्ड 6 का रुख किया है जहाँ भाजपा समर्थित अनीता शर्मा से उनका सीधा मुकाबला है. आज़ाद उम्मीदवार भी इस वार्ड से मैदान में है किन्तु फिलहाल टक्कर ठाकुरदास शर्मा और अनीता शर्मा के बीच ही दिख रही है. ठाकुरदास शर्मा कसौली ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष भी है और पिछले चुनाव रिकॉर्ड मार्जिन से जीते थे. ऐसे में इस बार उनके सामने खुद को फिर साबित करने की चुनौती तो है ही , अन्य वार्डों में भी पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को अच्छा करवाने का ज़िम्मा भी है . इस दोहरी चुनौती में ठाकुरदास शर्मा कितना खरा उतारते है ये तो 10 जनवरी को ही पता चलेगा. बहरहाल इतना तय है की परवाणु नगर परिषद् का मुकाबला बराबरी का है जहाँ कुछ भी संभव है.
- जिला अध्यक्ष को साइडलाइन कर शांडिल घोषित कर चुके हैं तीन उम्मीदवार - जिला अध्यक्ष ने घोषित किये 12 समर्थित उम्मीदवार, एक शांडिल की पसंद - 12 में शामिल नहीं कुनिहार और सिरिनगर से उम्मीदवार जिला परिषद् प्रत्याशियों को लेकर कांग्रेस के जिला संगठन और सोलन विधायक कर्नल डॉ धनीराम शांडिल की तकरार खुल कर सामने आ गई है। संगठन दो फाड़ हैं, कुछ शांडिल के साथ हैं तो कुछ जिला अध्यक्ष के साथ. शांडिल जिला परिषद् के तीन प्रत्याशी घोषित कर एलान कर चुके हैं कि उनके द्वारा घोषित प्रत्याशी ही कांग्रेस द्वारा समर्थित प्रत्याशी हैं और इनमें कोई बदलाव नहीं होगा। शांडिल के तेवरों ने कांग्रेस के कई खेमों की नींद उड़ा दी हैं। हालात ये हैं कि धुरविरोधी भी अब एक मंच पर आ रहे हैं। दरअसल, शांडिल ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के ख़ास माने जाने वालों के टिकट काट दिए हैं, ऐसे में हंगामा बरपना तो लाज़मी हैं। माना जा रहा हैं कि वीरभद्र सिंह निकाय चुनाव जैसे मसले पर शायद ही सीधे तौर पर दखल दें, वहीँ बतौर शांडिल आलाकमान सम्बंधित विधायकों को उम्मीदवार चुनने की आज़ादी दें चूका हैं, साथ ही शांडिल कांग्रेस की इलेक्शन स्ट्रेटेजी कमेटी के सदस्य भी हैं। ऐसे में इस मर्तबा शांडिल की चाल ने कई दिग्गजों को बेहाल कर दिया हैं। गौरतलब हैं कि जिला सोलन में 17 जिला परिषद् वार्ड है जिनमें से 4 पूर्ण या आंशिक तौर पर सोलन निर्वाचन क्षेत्र के तहत आते है। इनमें सपरून, सलोगड़ा, कुनिहार और सिरिनगर वार्ड शामिल है। कर्नल शांडिल इनमें से सलोगड़ा, कुनिहार और सिरिनगर के प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं और दो टूक कह चुके हैं कि ये ही चेहरे मैदान में होंगे। वहीँ जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने भी सोमवार को 12 नामों का एलान किया हैं। इनमें से शांडिल द्वारा घोषित 3 में से सिर्फ सलोगड़ा से उम्मीदवार बलदेव ठाकुर को स्थान मिला हैं। बाकी कुनिहार और सिरिनगर से फिलहाल उम्मीदवार घोषित नहीं किये हैं। यानी शांडिल द्वारा घोषित उम्मीदवारों की काट नहीं की गई हैं। स्वाभाविक हैं कि इस मसले को लेकर शांडिल पर दबाब जरूर होगा, पर जो तेवर शांडिल ने इख्तियार किए हैं इसे देख लगता नहीं हैं कि वे झुकेंगे। बाकी राजनीती में कभी भी कुछ भी संभव हैं। उधर संगठन और विधायक के बीच की ये रार और पार्टी में हावी गुटबाज़ी निकाय चुनाव में कांग्रेस की मुश्किलों में और इजाफा कर सकती हैं। संगठन कई खेमों में बंटा हुआ हैं। शहरी कांग्रेस और सोलन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शांडिल की छत्रछाया में हैं, तो शिवकुमार को भी कुछ नेताओं का साथ मिला हुआ हैं। जानकार मानते हैं की शांडिल की नज़र 2022 पर टिकी हैं और ऐसे में वे हर उस गुट को सेटल करना चाहते हैं जो उनकी लाइन से बाहर जा सकता हैं।
- युवा विवेकानंद परिहार का मुकाबला अनुभवी रविंद्र परिहार से - बागियों की भूमिका हो सकती है निर्णायक सोलन जिला परिषद् के वार्ड नंबर 4 कुनिहार में इस मर्तबा काफी रोचक जंग देखने को मिल सकती है. इस जिला परिषद् वार्ड में कुल 15 पंचायतें आती है जिनमें से 6 सोलन निर्वाचन क्षेत्र में, 6 कसौली निर्वाचन क्षेत्र में और 3 अर्की निर्वाचन क्षेत्र के तहत आती है. यानी ये जिला परिषद् वार्ड तीन विधानसभा क्षेत्रों से सीधे तौर पर जुड़ा है. कसौली स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजीव सैजल का क्षेत्र है तो अर्की पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का और सोलन पूर्व मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल का. ऐसे में जाहिर है इस हाई प्रोफाइल वार्ड में जंग भी उतनी ही रोचक देखने को मिलेगी. भाजपा ने यहाँ से अनुभवी रविंद्र परिहार को समर्थन देकर मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने उनके मुकाबले एक युवा को मौका दिया है. कांग्रेस ने विवेकानंद परिहार पर दांव खेला है जो एक मजबूत राजनैतिक परिवार से आते है, काफी वक्त से कांग्रेस सेवादल में काम कर रहे है और उनका सरल व्यक्तित्व उनकी सबसे बड़ी ताकत है. हैवी वेट रविंद्र परिहार और युवा विवेकानंद की इस जंग को बागियों की एंट्री और अधिक रोचक बना सकती है. बहरहाल अभी रूठने मनाने का दौर ज़ारी है और नामांकन दाखिल होने के बाद ही सही आंकलन किया जा सकता है. नतीजा जो भी रहे भाजपा के अनुभवी परिहार बनाम कांग्रेस के युवा परिहार के बीच का ये मुकाबला दिलचस्प होना तय है.
-कुनिहार से विवेकानंद चौहान, सीरिनगर से निर्मला ठाकुर और सलोगड़ा से बलदेव ठाकुर प्रत्याशी -कहा पार्टी विरोधी काम करने वालो के खिलाफ होगी कार्रवाई सोलन जिला परिषद् के वार्ड नंबर 4 कुनिहार से विवेकानंद चौहान, वार्ड नंबर 5 सीरिनगर से निर्मला ठाकुर और वार्ड नंबर 6 सलोगड़ा से बलदेव सिंह ठाकुर ही कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी होंगे. सोलन विधायक और पूर्व मंत्री डॉ कर्नल धनीराम शांडिल ने रविवार को मीडिया के सामने ये एलान कर दिया. उनके साथ तीनो प्रत्याशी भी मौजूद रहे. शांडिल ने कहा की आम कार्यकर्ताओं के बातचीत करने के बाद ही बहुमत की राय को तवज्जो देते हुए तीनो प्रत्याशियों का एलान किया गया है. बतौर विधायक उनके निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाले जिला परिषद् वार्डों में उम्मीदवार तय करने का हक़ उन्हें है. शांडिल ने दो टूक कहा की हर कार्यकर्ता को पार्टी के साथ चलना चाहिए, और जो लोग इस चुनाव में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ काम करेंगे उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. सीरिनगर व कुनिहार वार्ड में असंतोष के विषय पर उन्होंने स्पष्ट कहा की हर कार्यकर्ता को टिकट नहीं मिल सकता. ऐसे में ये सामान्य बात है. सभी रुष्ट लोगों को साथ लेकर चलने का प्रयास होगा. उन्होंने कहा कि राजनीति में कई तरह के दबाब होते है लेकिन पार्टी का हित उनके लिए सर्वोपरी है. सभी घोषित तीन उम्मीदवारों के नाम फाइनल है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा.
After Rahul Gandhi claimed “lack of democracy in India” PM Modi on Saturday hit back at him and said some people in Delhi "are trying to teach me lessons in democracy". Congress leader Rahul Gandhi in his recent attack on the government and PM Modi said there was “no democracy in India ” and that those who stood up against the PM were labeled terrorists "even if it were Mohan Bhagwat" (RSS chief). Retorting to this PM said "there are people in Delhi who always taunt and insult me. They want to teach me lessons in democracy. I want to show them Jammu and Kashmir DDC (District Development Council) polls as an example of democracy," PM Modi said after launching the Ayushman Bharat scheme for health insurance coverage to all residents of the union territory. PM Modi said that even after the Supreme Court has directed that Panchayati and municipal elections should be conducted in Puducherry, the state is not conducting it. “Despite SC order, panchayat and municipal polls are not being held in Puducherry. Those in power in Puducherry not carrying out local polls and are giving me lessons in democracy. Those who keep on teaching me lessons on democracy are the ones who are running their government there,” he said. He said the recent local body election in Jammu and Kashmir "strengthened roots of democracy" and congratulated voters for exercising their franchise in the eight-phase election.
- इस मर्तबा निकाय चुनाव में सोशल मीडिया बेहद महत्वपूर्ण इस बार के निकाय चुनाव में सोशल और वेब मीडिया निर्णायक भूमिका निभा सकता हैं। पांच साल पहले हुए चुनाव के मुकाबले लोगों का रुझान सोशल और वेब मीडिया की तरफ बहुत अधिक बढ़ चूका हैं, जिससे मतदाता का निर्णय प्रभावित हो सकता हैं। चुनाव प्रचार में इस मर्तबा सोशल मीडिया की एंट्री तमाम समीकरण बदल सकती है, खासतौर से न्यूट्रल मतदाता पर इसका काफी असर देखने को मिल सकता हैं। यही कारण हैं कि चुनाव की जंग जितनी जमीन पर लड़ी जा रही है उतनी ही सोशल मीडिया के अखाड़े में। हर उम्मीदवार सोशल मीडिया और वेब मीडिया का इस्तेमाल कर वोटर्स को साधने की जुगत में हैं। अब कोरोना काल में इसे मौके की नजाकत समझें या फिर तकनीक का स्मार्ट इस्तेमाल, लेकिन इस मर्तबा निकाय चुनाव के प्रत्याशी सोशल और वेब मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने से जरा भी पीछे नहीं हैं। वहीँ पार्टी स्तर पर यदि सोशल मीडिया पर जंग की बात करें तो निसंदेह इसमें भाजपा का कोई मुकाबला नहीं हैं। बेशक चुनाव बिना पार्टी सिंबल के लड़े जा रहे हैं लेकिन भाजपा का आईटी सेल पूरी तरह सक्रीय दिख रहा हैं। सोशल मीडिया पर, खासतौर से फेसबुक पर भाजपा के पास सैकड़ों आधिकारिक एक्टिव पेज हैं। इसके अतिरक्त पार्टी ने आईटी व सोशल मीडिया के लिए कई पदाधिकारी नियुक्त किये हुए हैं जिनके कौशल और अनुभव का लाभ भी पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को मिलेगा। मतदाता के साथ संवाद साधने में ये बेहद कारगर सिद्ध होगा। सुनियोजित तरीके से भाजपा ने सोशल मीडिया पर अपनी दमदार उपस्तिथि बनाई हुई हैं जो उसे लाभ दे सकती हैं। उधर, कांग्रेस जमीनी संगठन की तरह ही सोशल मीडिया पर भी दिशाहीन दिख रही हैं। औपचारिकता के लिए पार्टी का सोशल मीडिया सेल तो हैं, पदाधिकारी भी हैं पर उनका काम असरदार नहीं दिख रहा। कुछ नेता सोशल मीडिया पर एक्टिव भी हैं तो अपने बुते पर, पार्टी की तरफ से न कोई आवश्यक दिशा निर्देश हैं और न ही मार्गदर्शन। खासतौर से जब कोरोना के चलते डोर टू डोर प्रचार भी सिमित रहने वाला हैं, सोशल मीडिया पर पार्टी की ये कमजोरी इस निकाय चुनाव में भारी पड़ सकती हैं।
हिमाचल के 50 शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले दिन प्रदेश के 10 जिलों में कुल 254 प्रत्याशियों ने नामांकन भरे। प्रदेश की 29 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों के लिए सदस्य चुने जाने हैं। राज्य चुनाव आयोग ने पहली बार ऑनलाइन व्यवस्था की है कि वोटर प्रत्याशियों की शैक्षणिक योग्यता और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकेंगे। पहले दिन कई चिकित्सक, वकील, सिविल इंजीनियर, एमएससी पास चुनाव में उतरे हैं। जिला शहरी निकायों के लिए सोलन में 50 नामांकन भरे गए जबकि मंडी व कांगड़ा में 35-35 नामांकन भरे गए। वहीं, सिरमौर में 25, कुल्लू व हमीरपुर में 21-21, चंबा में 19, शिमला में १७ नामांकन भरे गए। उधर ऊना में 16 व बिलासपुर में 15 नामांकन भरे गए।
आज पूरा भारत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है। एक सुलझे राजनेता, प्रखर वक्ता और बेहतरीन कवि अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। वह तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। भारत के दसवें प्रधानमंत्री रहे अटल को भारत रत्न भी दिया जा चुका है। साल 1996 में वे पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने थे, हालांकि इस दौरान उनका कार्यकाल काफी छोटा यानी सिर्फ 13 दिनों का था। इसके बाद उनका दूसरा कार्यकाल 13 महीने का था और फिर 1999 में जब वह पीएम बने तो उन्होंने 2004 तक पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया। अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक रहे हैं, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी नाम से राजनैतिक पार्टी बनी। अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता बनने से पहले एक पत्रकार थे। वह देश-समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा से पत्रकारिता में आए थे। देश की स्थिति समझने को बने पत्रकार अटल बिहारी राजनीति में कैसे आए, इसके पीछे एक प्रेरणादायक कहानी है। अटल बिहारी वाजपेयी के पिता पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश में आगरा जिले के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी थे। एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए अटल बिहारी वाजपेयी के लिए जीवन का शुरुआती सफर आसान नहीं था। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई थी। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर कि। एम० ए० के बाद उन्होंने कानपुर में ही एल०एल०बी० की पढ़ाई भी शुरू की लेकिन उसे बीच में ही छोड़कर पूरी निष्ठा से संघ-कार्य में जुट गए। फिर पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया तथा, राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन जैसे अखबारों-पत्रिकाओं का संपादन किया। जब राजनीती में आने का लिआ निर्णय वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे और इस संगठन की विचारधारा (राष्ट्रवाद या दक्षिणपंथ) के असर से ही उनमें देश के प्रति कुछ करने, सामाजिक कार्य करने की भावना मजबूत हुई। उनके पत्रकार से राजनेता बनने का जो जीवन में मोड़ आया, वह एक महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा है। इसके बारे में खुद अटल बिहारी ने एक इंटरव्यू में बताया था वे बतौर पत्रकारिता अपना काम बखूबी कर रहे थे। 1953 की बात है, भारतीय जनसंघ के नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर को विशेष दर्जा देने के खिलाफ थे। जम्मू-कश्मीर में लागू परमिट सिस्टम का विरोध करने के लिए डॉ. मुखर्जी श्रीनगर चले गए। परमिट सिस्टम के मुताबिक किसी भी भारतीय को जम्मू-कश्मीर राज्य में बसने की इजाजत नहीं थी। यही नहीं, दूसरे राज्य के किसी भी व्यक्ति को जम्मू-कश्मीर में जाने के लिए अपने साथ एक पहचान पत्र लेकर जाना अनिवार्य था। डॉ. मुखर्जी इसका विरोध कर रहे थे। वे परमिट सिस्टम को तोड़कर श्रीनगर पहुंच गए थे। इस घटना को एक पत्रकार के रूप में कवर करने के लिए वाजपेयी भी उनके साथ गए। वाजपेयी इंटरव्यू में बताते हैं, ‘पत्रकार के रूप में मैं उनके साथ था। वे गिरफ्तार कर लिए गए। लेकिन हम लोग वापस आ गए।' डॉ. मुखर्जी ने मुझसे कहा कि वाजपेयी जाओ और दुनिया को बता दो कि मैं कश्मीर में आ गया हूं, बिना किसी परमिट के।’ इस घटना के कुछ दिनों बाद ही नजरबंदी में रहने वाले डॉ. मुखर्जी की बीमारी की वजह से मौत हो गई। इस घटना से वाजपेयी काफी आहत हुए। वह इंटरव्यू में कहते हैं, ‘मुझे लगा कि डॉ. मुखर्जी के काम को आगे बढ़ाना चाहिए।’ इसके बाद वाजपेयी राजनीति में आ गए। सन 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, पर सफलता नहीं मिली पर हिम्मत नहीं हारी और 1959 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुंच कर ही दम लिया। 1957 से 1977 जनता पार्टी की स्थापना तक अटल जी बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। बस 13 दिन चली सरकार मोरारजी देसाई की सरकार में वह 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनाई। न्यूयोर्क में संयुक्त राष्ट्र संहघ के 32 वीन अधिवेशन में हिन्द में दिया गया उनका भाषण आज भी याद किआ जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी जब पहली बार संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में बोले तो पुरे विश्व ने उनकी आवाज़ सुनी। 1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6 अप्रैल, 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी जी को सौंपा गया। अटल बिहारी वाजपेयी दो बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए। अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् 1996 में प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। पहली बार 16 से 31 मई, 1996 तक वे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे। पोखरण में परमाणु परिक्षण करवा देश को दी अलग पहचान 19 मार्च, 1998 को फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 13 दलों की गठबंधन सरकार ने देश के अंदर प्रगति के अनेक आयाम छुए। सन 1998 में पोखरण में परमाणु परिक्षण करके उन्होंने देश को दुनिया के कुछ गिने-चुने परमाणु संपन्न देशों में शुमार करवा दिया। पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण कराया और उन्होंने अमेरिका की सीआईए को भनक तक नहीं लगने दी। पोखरण की परमाणु परिक्षण के बाद भारत को अमेरिका और जापान के कई प्रतिबन्ध झेलने पड़े , देश की विरोधी पार्टियों ने भी आलोचना की, लेकिन वाजपेयी सरकार ने तमाम पाबंदियों का मज़बूती से सामना किआ। पोखरण परमाणु परिक्षण के बाद वाजपेयी के नेतृत्व में देश की तर्रक्की की रफ़्तार में कमी नहीं आई। वाजपेयी पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पुरे 5 साल सरकार चलाई, जब उनपर सत्ता का लोभी होने का आरोप लगा तो उन्होंने विरोधियों को इसका करारा जवाब दिया। वाजपेयी ने खरीद फरोख्त कर मिलने वाली सत्ता को चिमटे से भी छुने से मना कर दिया। अटल के भाषणों की गूँज आज भी सुनाई देती है अटल ने विवाह नहीं किया था। उन्होंने अपना जीवन देश की भलाई के लिए एक राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प किया था। वो एक तेजस्वी नेता होने के साथ एक प्रभावी कवी भी थे। वीर रस में लिखी उनकी कविताएं देश के लिए मर मिटने को प्रेरित करती है। वे एक अद्बुध वक्त थे उनके दिए भाषण आज भी याद किए जाते है। उनके दिए भाषणों ने ही बीजेपी की वर्तमान वर्चस्व को दिशा दी।
- दोहरी चुनौती: एक तो बलदेव मजबूत प्रत्याशी, दूसरा भाजपा में अंतर्कलह हावी जिला परिषद् सोलन के वार्ड 6 का मुकाबला सोलन भाजपा के राजनैतिक भविष्य की चाल निर्धारित कर सकता है। इस वार्ड से कुमारी शीला भाजपा समर्थित उम्मीदवार है जो यूँ तो बेहद मजबूत प्रत्याशी है पर इस मर्तबा कांग्रेस ने एक सशक्त उम्मीदवार देकर उनकी डगर कठिन कर दी है। दरअसल कांग्रेस ने बलदेव सिंह ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है जिनकी ग्राम पंचायत नौणी अन्य पंचायतों के लिए एक रोल मॉडल है। मुकाबला बराबरी का है और बेहद रोचक होने की उम्मीद है। इस चुनाव से न सिर्फ कुमारी शीला का राजनैतिक भविष्य तय होगा बल्कि सोलन भाजपा के एक गुट विशेष के लिए भी शीला की जीत बेहद मायने रखती है। विदित रहे की शीला 2012 में सोलन निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रही है। 2017 में उनका टिकट काट कर डॉ राजेश कश्यप को टिकट दिया गया था जिसके बाद से ही सोलन भाजपा में घमासान आम है। अब यदि शीला ये चुनाव हार जाती है तो जाहिर है 2022 के लिए उनका दावा भी कमजोर पड़ जाएगा। साथ ही उनका समर्थन करने वाले गुट विशेष की उम्मीदों के लिए भी ये बड़ा झटका साबित हो सकता है। भाजपा के उक्त गुट पर ये आरोप लगते रहे है की उन्होंने 2017 में डॉ राजेश कश्यप के लिए पूरी क्षमता से काम नहीं किया अन्यथा नतीजा कुछ और होता। ऐसे में इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा का अंतर्कलह कांग्रेस के लिए संजीवनी सिद्ध हो सकती है।
वो तारीख थी 27 फरवरी 1994, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (OIC) के जरिए एक प्रस्ताव सामने रखा। पाकिस्तान कश्मीर में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भारत की निंदा कर रहा था। भारत के लिए एक बड़ा संकट उजागर हो गया, संकट यह था कि अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता तो भारत को UNSC के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता। उस समय केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार थी। चौतरफा चुनौतियों का सामना कर रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने इस मसले को खुद अपने हाथों में लिया और जीनेवा (Geneva) में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सावधानीपूर्वक एक टीम बनाई। इस प्रतिनिधि मंडल में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद, ई. अहमद, नैशनल कॉन्फ़्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और हामिद अंसारी तो थे ही, इनके साथ अटल बिहारी वाजपेयी भी शामिल थे। वाजपेयी उस समय विपक्ष के नेता थे और उन्हें इस टीम में शामिल करना मामूली बात नहीं थी। यही वह समय था जब देश के बचाव में सभी पार्टियों और धर्म के नेता एकसाथ खड़े हो गए थे। शायद राव का यही अंदाज़ उन्हें भारतीय राजनीति का चाणक्य बनाता है। अटल का स्वभाव अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा से ही एक ऐसे नेता थे जिन्हें न सिर्फ अपनी पार्टी में बल्कि विपक्षी पार्टियों में भी मान-सम्मान मिला। इसका सटीक उदाहरण था साल 1994 में उन्हें पि.वि नरसिम्हा राव द्वारा, एक विपक्ष के नेता होने के बावजूद उन्हें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग भेजा गया। कैसे मिली जीत? इस फैसले के बाद नरसिम्हा राव और वाजपेयी ने उदार इस्लामिक देशों से संपर्क शुरू किया। राव और वाजपेयी ने ही OIC के प्रभावशाली 6 सदस्य देशों और अन्य पश्चिमी देशों के राजदूतों को नई दिल्ली बुलाने का प्रबंध किया। दूसरी तरफ, अटल बिहारी वाजपेयी ने जीनेवा (Geneva) में भारतीय मूल के व्यापारी हिंदूजा बंधुओं को तेहरान से बातचीत के लिए तैयार किया। वाजपेयी इसमें सफल हुए। प्रस्ताव पर मतदान वाले दिन जिन देशों के पाकिस्तान के समर्थन में रहने की उम्मीद थी उन्होंने अपने हाथ पीछे खींच लिए। इंडोनेशिया और लीबिया ने OIC द्वारा पारित प्रस्ताव से खुद को अलग कर लिया। सीरिया ने भी यह कहकर पाकिस्तान के प्रस्ताव से दूरी बना ली कि वह इसके रिवाइज्ड ड्राफ्ट पर गौर करेगा। 9 मार्च 1994 को ईरान ने सलाह-मशवरे के बाद संशोधित प्रस्ताव पास करने की मांग की। चीन ने भी भारत का साथ दिया। अपने दो महत्पूर्ण समर्थकों चीन और ईरान को खोने के बाद पाकिस्तान ने शाम 5 बजे प्रस्ताव वापस ले लिया और भारत की जीत हुई। आखिर राव ने अटल को क्यों चुना? भारत की जीत हुई, अटल की जीत हुई, राव की जीत हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है की राव द्वारा अटल को संयुक्त राष्ट्र भेजा जाना किसी बड़े राजनीतिक दाव से कम नहीं था। अटल की बात करें तो उनकी आम लोगों में लोकप्रियता पर कभी कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा। उनकी छवि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में बेदाग रही है। अटल अगर इस प्रस्ताव को रुकवा कर वापिस आते तो इसमें साफ़ तौर पर अटल के साथ-साथ राव की वाह-वाही होती कि, राव का दिल इतना बड़ा है की किसी विपक्ष के नेता को वो इतना सम्मान दे रहे है। लेकिन अगर इस कार्य में अटल सफल नहीं होते तो राव पूरा का पूरा भन्दा अटल के सर फोड़ते। इन दोनों ही स्थितियों में राव कि जीत होती। यानि चित भी उनकी और पट्ट भी उनकी। जब संसद में बोले थे अटल इस तथ्य कि जानकारी खुद वाजपेयी ने एक बार सदन में दी थी। उनका कहना था कि जब वह संयुक्तत राष्ट्र में पहुंचे तो हर किसी की ज़ुबान खासतौर पर पाकिस्तान के नेताओं में यह चर्चा खासा जोर पकड़ रही थी कि आखिर भारत सरकार ने नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात रखने के लिए क्यों चुना। उन्होंने इस बात पर यह कहते हुए चुटकी भी ली कि कई नेताओं ने उनसे यहां तक कहा कि एक राजनीतिक साजिश के तहत ही उन्हें संयुक्त राष्ट्र भेजा गया है। यदि वहां पर सफलता मिली तो नरसिम्हा अपनी पीठ थपथपाएंगे और यदि हार मिली तो इसका ठीकरा उनके ऊपर फोड़ देंगे। हालांकि उन्होंने कभी इन विचारों को नहीं माना। उनका कहना था कि पाकिस्तान के नेता इस बात को लेकर भी हैरान थे कि उनके यहां पर विपक्ष के नेता का वजूद कुछ नहीं होता है और भारत का नेता प्रतिपक्ष सरकार का पक्ष रखता है।
अटल बिहारी वाजपेयी वो महान हस्ती जिन्हें एक बार नहीं बल्कि तीन बार भारत के प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त हुआ। अटल का साहित्य से लगाव जग ज़ाहिर था, वे उन विरले नेताओं में से थे, जिनका महज साहित्य में झुकाव भर नहीं था, बल्कि वे खुद लिखते भी थे। उनकी कविताएं आज भी पढ़ी जाती है। अटल विविध मंचों से और यहां तक कि संसद में भी अपनी कविताओं का सस्वर पाठ करते थे। एक बार जब अटल अपने मनाली वाले घर में छुट्टियां मनाने आए तो ख़राब सड़कें देख उन्हें बहुत निराशा हुई। उन्हें मनाली पहुँचने में खासी दिक्क्तों का सामना भी करना पड़ा, साथ ही मनाली में उस समय बिजली और नेटवर्क को लेकर भी बहुत सी समस्याएं थी। उस समय हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह की सरकार थी। तो मनाली के खस्ता हालात को देख अटल ने वीरभद्र पर तंज कस्ते हुए बड़े हलके फुल्के अंदाज़ में एक कविता लिख डाली और इसी कविता के माध्यम से खालिस्तानियों का ज़िक्र भी कर डाला। पढ़िए वो कविता : मनाली मत जइयो मनाली मत जइयो, गोरी राजा के राज में। जइयो तो जइयो, उड़िके मत जइयो, अधर में लटकीहौ, वायुदूत के जहाज़ में। जइयो तो जइयो, सन्देसा न पइयो, टेलिफोन बिगड़े हैं, मिर्धा महाराज में। जइयो तो जइयो, मशाल ले के जइयो, बिजुरी भइ बैरिन अंधेरिया रात में। जइयो तो जइयो, त्रिशूल बांध जइयो, मिलेंगे ख़ालिस्तानी, राजीव के राज में। मनाली तो जइहो। सुरग सुख पइहों। दुख नीको लागे, मोहे राजा के राज में।
बंद कमरों में चर्चा और ज़ीरो कोर्डिनेशन, जिला सोलन कांग्रेस की कार्यशैली की इससे बेहतर व्याख्या नहीं हो सकती। निकाय चुनाव की जंग शुरू हो चुकी है पर कांग्रेस संगठन के हाल देखकर लगता नहीं है की पार्टी की मौजूदा ब्रिगेड बेडा पार लगा पाएगी। जिला संगठन की सक्रियता मीटिंग्स तक ही सिमित दिख रही है। जिला अध्यक्ष से पार्टी की अपेक्षा मैदान में उतर कर लीड करने की होती है। खासतौर से जब पार्टी विपक्ष में है तो अपेक्षा ये ही है की संगठन सड़क पर उतर सरकार की नाकामियां उजागर करे, पर जिला कांग्रेस अब तक ऐसा करने में पूरी तरह विफल रही है। जिला मुख्यालय सोलन की बात करें तो यहाँ कांग्रेस की शहरी इकाई ही कुछ हद तक सक्रीय दिखती है। जिला मुख्यालय होने के बावजूद यहाँ कांग्रेस की जिला इकाई का होना न होना एक ही बात है। जिला कांग्रेस कभी कभार पत्रकार वार्ता कर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने का प्रयास करती है, पर दिलचस्प बात तो ये है की अकसर इस बारे में उनकी शहरी इकाई को भी जानकारी नहीं होती। अब आप तालमेल का अंदाजा खुद लगा सकते हैं। जो मुद्दे सड़क पर उतर कर उठाए जाने चाहिए उन्हें जिला कांग्रेस का बंद कमरे से उठाने का प्रयास महज खानापूर्ति से ज्यादा नहीं है। अमूमन जिला के सभी क्षेत्रों में कांग्रेस का ऐसा ही हाल है। एकाध अपवाद है, पर वहां स्थानीय नेता जिला संगठन के भरोसे नहीं है बल्कि खुद मोर्चा संभाले हुए है। मौजूदा जिला अध्यक्ष की पार्टी कार्यकर्ताओं में कितनी स्वीकार्यता है, इसे लेकर भी सबकी अपनी-अपनी राय है। पर एक बात तय है की यदि कांग्रेस को वापसी करनी है तो संगठन में लगे जंग को अतिशीघ्र हटाना अनिवार्य है। साथ ही संगठन में ऐसे लोगों को लाने की आवश्यकता है जिनकी कार्यशैली में आक्रामकता भी हो और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर फ्रंट फुट से पार्टी को लीड कर सके।
ये चुनाव नहीं आसान। कांग्रेस इस बात से भलीभांति वाकिफ है। जयराम ठाकुर को एक्सीडेंटल मुख्यमंत्री कहने वाली कांग्रेस पर स्थानीय निकाय चुनाव में खुद को साबित करने का दबाव है ताकि 2022 में जनता उसे गंभीरता से ले। प्रदेश के नव नियुक्त प्रभारी राजीव शुक्ला का भी ये पहला इम्तिहान है। इस इम्तिहान में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है पार्टी के तमाम गुटों को एकसाथ लेकर चलना। कांग्रेस के दिग्गज साथ चले तो मंजिल शायद आसां रहे पर खींचतान ज़ारी रहती है और नतीजे मनमुताबिक नहीं आते तो कांग्रेस का बैकफुट पर आना तय है। इसी बीच बुधवार को कांग्रेस ने अपनी इलेक्शन स्ट्रेटेजी कमेटी का एलान कर दिया है जो राजीव शुक्ला की सरदारी में काम करेगी। इस 14 सदस्यीय कमेटी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, विप्लव ठाकुर, कर्नल धनीराम शांडिल, सुखविंदर सिंह सुक्खू, आशा कुमारी, सुधीर शर्मा, जीएस बाली, हर्षवर्धन चौहान, रामलाल ठाकुर, राजेंदर राणा, जगत सिंह नेगी और पवन काजल को स्थान मिला है। इसमें मुख्यमंत्री के गृह जिला मंडी के किसी नेता को स्थान नहीं मिला है। सीधे तौर पर कहे तो इलेक्शन स्ट्रेटेजी कमेटी में कौल सिंह ठाकुर को स्थान नहीं मिला है। एक और खासबात इस लिस्ट में है। इन 14 में से तीन नेता ऐसे है जिन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। पर पार्टी के लिए मंडी से चुनाव लड़ने वाले आश्रय शर्मा को इस लिस्ट में स्थान नहीं मिला है। हालाँकि इन दोनों नेताओं को अन्य कमेटियों में शामिल कर संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है, किन्तु मंडी जिला के किसी नेता का इलेक्शन स्ट्रेटेजी कमेटी में न होना फिलवक्त चर्चा का विषय जरूर है। जाहिर है किसी स्थानीय नेता का कमेटी में होना रणनीतिक तौर पर ज्यादा असरदार होता। वैसे एक तर्क ये भी है की जब मंडी से सांसद रह चुके पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद इस कमेटी में शामिल है तो बाकी नेताओं की शायद कोई जरुरत नहीं है। लिस्ट से कौल सिंह ठाकुर की गैरमौजूदगी को कुछ राजनैतिक माहिर राजा गुट की तरफ आलाकमान के झुकाव के तौर पर देख रहे है तो कुछ चिट्ठी बम के साइड इफ़ेक्ट के तौर पर। बहरहाल लकवाग्रस्त संगठन के बावजूद अगर कांग्रेस को निकाय चुनाव में अच्छा करना है तो पार्टी के दिग्गजों को आपसी रंज भुलाकर एक साथ आना होगा।


















































