राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में पिछले कुछ समय से कोविड-19 मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सभी कोविड पाॅजिटिव मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए हल्के लक्षणों वाले मरीजों को घर में ही होम क्वारन्टीन होना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा कि जिनका कोविड-19 परीक्षण पाॅजिटिव पाया जाता है उन्हें अपने आप को घर के अन्य लोगों से अलग होकर साफ-सुथरे और हवादार कमरे में आइसोलेट करना चाहिए और हर समय ट्रिप्पल लेयर या एन-95 मास्क पहनना चाहिए। मास्क को 8 घंटे प्रयोग करने के बाद नष्ट कर देना चाहिए। देखभाल करने वाले व्यक्ति को भी मास्क का प्रयोग करना चाहिए और हर समय डिस्पोजबेल दस्ताने पहनने चाहिए। मरीज के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। कोविड मरीज को घर के अन्य सदस्यों की व्यक्तिगत वस्तुओं को प्रयोग करने से बचना चाहिए। मरीज को नियमित तौर पर अपने बुखार और ऑक्सीजन स्तर की जांच करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीज कोे नियमित तौर पर अपने बुखार की हर 4 घंटे के बाद जांच कर उसे नोट कर लेना चाहिए। सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द होने पर मरीज को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। ऑक्सीजन स्तर 94 प्रतिशत से नीचे चला जाए तो डाॅक्टर को सूचित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से अधिक आयु के मरीज जो उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, लीवर, गुर्दे की बीमारी, सेरेब्रोवास्कुलर रोग आदि से गस्त हो उन्हें चिकित्सा अधिकारी द्वारा जाचं के बाद ही होम क्वारन्टीन होने की अनुमति दी जानी चाहिए। कोमर्बिड मरीज द्वारा नियमित तौर पर ली जाने वाली दवाई को होम क्वारन्टीन के दौरान अपने डाॅक्टर्ज से सलाह लेने के बाद ही जारी रखना चाहिए। कोविड मरीज की देखभाल करने वाले व्यक्ति को मरीज की देखभाल के लिए हर समय उपलब्ध रहना चाहिए और देखभाल करने वाले व्यक्ति को डाॅक्टर से सलाह के बाद हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का प्रोफीलैक्सिस लेना चाहिए। मरीज के होम क्वारन्टीन की समयावधि के दौरान देखभालकर्ता और अस्पताल में निरन्तर संपर्क बना रहना चाहिए।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना महामारी के व्यापक प्रसार को रोकने के लिए टीकाकरण ही एक प्रभावी रणनीति है। स्वास्थ्य विभाग के विश्लेषण के अनुसार राज्य में 14 अप्रैल, 2021 से 30 अप्रैल, 2021 तक कोविड महामारी से 362 लोगों की मृत्यु हुई है, जिनमें से 67 लोग ऐसे है जिन्होंने कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ली थी और केवल मात्र 2 ऐसे लोग है, जिनकी मृत्यु वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद हुई है। उन्होंने कहा कि मौत के इन दोनों मामलों में एक व्यक्ति की मृत्यु वैक्सीन लगवाने के 4 दिन बाद जबकि दूसरे व्यक्ति की मृत्यु वैक्सीन लेने के 16 दिन बाद हुई है। जिससे पता चलता है कि दोनों व्यक्ति टीकाकरण के बाद प्रभावी इम्यूनिटी विकसित होने से पहले ही कोरोना महामारी से संक्रमित हो गए। इससे यह भी पता चलता है कि टीकाकारण सीधे तौर पर कोविड से होने वाली मृत्यु दर को कम करने में मदद करता है। प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में 91.9 प्रतिशत स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं (एचसीडब्ल्यू) को कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक दी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 88.7 प्रतिशत है। प्रदेश में वैक्सीन की दूसरी खुराक 90.3 प्रतिशत स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओ को दी है, जिसका राष्ट्रीय औसत 79.1 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राज्य में 45 वर्ष से अधिक जनसंख्या वर्ग में वैक्सीन की पहली खुराक 78 प्रतिशत लोगों को दी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 30 प्रतिशत है। प्रवक्ता ने कहा कि पात्र लोगों का टीकाकरण की कवरेज को बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को 4 से 6 सप्ताह पहले वेक्सीन की पहली खुराक लगाई जा चुकी है उन्हें वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के लिए आगे आना चाहिए ताकि प्रभावी इम्यूनिटी विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता वाले समूहों जैसे 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोग, स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं और अग्रिम पक्ति कार्यकर्ताओं के लिए वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य को भारत सरकार के माध्यम से आज कोविशिल्ड वैक्सीन की 50 हजार वैक्सीन और प्राप्त हो गई है। प्रवक्ता ने कहा कि 18-45 वर्ष के आयु वर्ग के टीकाकरण को शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार के सिरम संस्थान को कोविशिल्ड वैक्सीन की 107620 खुराकों की आपूर्ति के लिए 3.39 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है, जिसकी आपूर्ति शीघ्र आपेक्षित है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन प्राप्त होते ही 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग में टीकाकरण करवाने की उत्सुकता और भीड़भाड़ की संभावना को मध्यनजर रखते हुए सभी जिलों आम जनता की सुविधा के लिए शहरी कलस्टर में अधिक कोविड टीकाकरण केंद्र संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग शिमला, मंडी और धर्मशाला शहरों में प्राथमिकता वाले समूहों (यानी 45 वर्ष से अधिक आयु, एचसीडब्ल्यू और एफएलडब्ल्यू) के लिए टीकाकरण स्थलों की सूची प्रकाशित करेगा। यह सूची वेबसाइट www.nrhmhp.gov.in पर भी देखी जा सकती है।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक ने राज्य में कोविड-19 स्थिति की समीक्षा की और राज्य में कोविड -19 मामलों की संख्या में तेज वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। इसके दृष्टिगत वायरस श्रृंखला को तोड़ने के लिए कैबिनेट ने पूरे राज्य में कोरोना कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है। सभी सरकारी और निजी कार्यालय / प्रतिष्ठान 7 मई से 16 मई की मध्यरात्रि तक बंद रहेंगे। यह भी तय किया गया था कि सभी आवश्यक सेवाएं जैसे स्वास्थ्य, बिजली, दूरसंचार, जल आपूर्ति, स्वच्छता आदि खुली रहेंगी। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि नागरिक कार्य स्थलों, बागवानी / कृषि और अन्य परियोजना स्थलों पर काम जारी रहेगा। राज्य में शैक्षणिक संस्थान 31 मई तक बंद रहेंगे। सभी सरकारी और निजी परिवहन अधिभोग का 50 प्रतिशत होगा और अंतर-राज्यीय परिवहन जारी रहेगा। औद्योगिक प्रतिष्ठान राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। राज्य में कोरोना के मामलों की तीव्र वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की 10 वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। बोर्ड द्वारा 10 वीं कक्षा के सभी छात्रों को सीबीएसई द्वारा सुझाए गए मानदंडों के अनुसार 11 वीं कक्षा में पदोन्नत किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की 12 वीं कक्षा की परीक्षा और कॉलेजों की वार्षिक परीक्षा भी अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। राजस्व संग्रहण, जो प्रदेश की राजस्व का एक प्रमुख साधन है, से संबंधित कार्यों में आबकारी एवं कराधान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए और प्रदेश में विभिन्न कर कानूनों के बेहतर प्रबंधन एवं विनियमन के लिए बैठक में आबकारी एवं कराधान विभाग में अधिकारियों के वर्तमान पदों के स्थान पर विशेष एवं समर्पित हिमाचल प्रदेश राजस्व (राज्य कर एवं आबकारी) सेवा सृजित करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल अस्पताल सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों के 76 पदों के सृजन के साथ क्षेत्रीय अस्पताल ऊना को 300 बेडेड क्षेत्रीय अस्पताल के रूप में अपग्रेड करने के लिए अपनी स्वीकृति दी। मंत्रिमंडल ने क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए आवश्यक पदों के साथ मंडी जिले के धरमपुर में एक नया जल शक्ति सर्किल बनाने का निर्णय लिया। वहीं, ऊना जिले के कुटलेहर विधानसभा क्षेत्र में थानाकलां में एक नया जल शक्ति प्रभाग खोलने के लिए भी अपनी सहमति दी। तथा डिवीजन के बेहतर प्रशासनिक कामकाज के लिए जल शक्ति सब डिवीजन नंबर 2 ऊना में बेसल को मौजूदा कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे को स्थानांतरित करने की अनुमति दी।
छात्र अभिभावक मंच ने शिक्षा निदेशालय द्वारा दयानंद स्कूल की फीसों के संदर्भ में जारी की गई अधिसूचना के बावजूद अभिभावकों को बार-बार मैसेज भेजकर फीस जमा करवाने के लिए मानसिक दबाव बनाने व जिन बच्चों ने अभी फीस जमा नहीं की है उन्हें ऑनलाइन क्लास से बाहर करने पर दयानंद प्रबंधन की कड़ी निंदा की है व इसे तानाशाही करार दिया है। मंच ने शिक्षा निदेशक से स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। मंच दयानंद स्कूल की तानाशाही के खिलाफ 6 मई को शिक्षा निदेशक से मुलाकात करके इस मसले को उठाएगा व स्कूल पर 5 दिसम्बर 2019 की अधिसूचना में लिखित आदेश के अनुसार कठोर कार्रवाई की मांग करेगा। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, मंच के सदस्य भुवनेश्वर सिंह, कमलेश वर्मा, रमेश शर्मा, राजेश पराशर, अंजना मेहता, राजीव सूद, विक्रम शर्मा, हेमंत शर्मा, मनीष मेहता, विकास सूद, योगेश वर्मा, अमित राठौर, विवेक कश्यप, सोनिया सबरबाल, कपिल नेगी, रजनीश वर्मा, ऋतुराज, यशपाल, पुष्पा वर्मा, संदीप शर्मा, यादविंद्र कुमार, कपिल अग्रवाल, नीरज ठाकुर, रेखा, शोभना सूद, निशा ठाकुर व दलजीत सिंह ने कहा है कि दयानंद स्कूल तानाशाही पर उतर आया है व शिक्षा निदेशालय की हालिया अधिसूचना को ठेंगा दिखाकर अभिभावकों को डराने की कोशिश कर रहा है। शिक्षा निदेशालय ने फीसों के संदर्भ में स्कूल से पांच दिन के भीतर जबाव देने को कहा था परन्तु उसके बजाए अभिभावकों की प्रताड़ना शुरू कर दी गई है जिसे किसी भी तरह सहन नहीं किया जाएगा। स्कूल बार-बार अभिभावकों को मैसेज भेजकर व फोन करके पचास से साठ प्रतिशत बढ़ी हुई फीस को जमा करने के लिए दबाव बना रहा है। जो अभिभावक स्कूल की मनमानी फीसों का विरोध कर रहे हैं उनके बच्चों को ऑनलाइन क्लास से बाहर करके मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। यह न केवल शिक्षा निदेशालय की 5 दिसम्बर 2019 की अधिसूचना का खुला उल्लंघन है अपितु हाल ही के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लंघन है। उच्चतम न्यायालय ने निजी स्कूलों के संदर्भ में दिए गए निर्णय में स्पष्ट लिखा है कि किसी भी बच्चे को ऑनलाइन क्लास से बाहर नहीं किया जा सकता है। दयानंद स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को ऑनलाइन क्लास से बाहर करना माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय की अवमानना है। अभी तक शिक्षा निदेशालय को स्कूल ने फीसों के संदर्भ में दिए गए नोटिस का कोई जबाव नहीं दिया है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को बार-बार मैसेज भेज कर मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहा है जो की तानाशाही है। शिक्षा निदेशालय के 5 दिसम्बर 2019 की अधिसूचना में स्पष्ट अंकित है कि बिना आम सभा के फीस बढ़ोतरी करने पर किसी भी निजी स्कूल पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती जिसमें स्कूल की एनओसी भी रद्द हो सकती है। इसके बावजूद भी इस स्कूल की तानाशाही समझ से परे है।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं हिमाचल सरकार के वित्त आयोग के अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री एवं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर बताएं कि वह किस बात की खुशी मना रहे हैं। कांग्रेस का ममता बनर्जी से क्या लेना देना और अगर कांग्रेस इसी प्रकार की खुशी मनाना चाहती है तो बाकी प्रदेशों में भी कांग्रेस की इसी प्रकार की दुर्गति हो इसके लिए कांग्रेस को बधाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने बारे में बात करें दूसरों की जीत की खुशी ना मनाएं, वर्तमान पांच राज्यों के चुनावों के बारे में बात की जाए तो भाजपा का कुल मिलाकर अच्छा प्रदर्शन रहा है। पश्चिम बंगाल के चुनावों में ममता बनर्जी जो कि मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही थी वह नंदीग्राम से हारी और सूत्रों के हवाले से पता चला है कि ममता बनर्जी ने लगातार सोनिया गांधी और राहुल गांधी से संपर्क साध कर रखा और कई रैलियां भी रद्द हूई थीं। कांग्रेस यहां पर 92 सीटों पर चुनाव लड़ी और खाता भी नहीं खोल पाई। भाजपा 2016 में 3 सीटों पर विजय प्राप्त करके बैठी थी और आज 77 सीटों पर पहुंची है। भाजपा का वोट शेयर लग भग 40 प्रतिशत पहुंच गया है और कांग्रेस का 1 प्रतिशत। 2016 की तुलना में कांग्रेस 44 सीटों पर जीती थी और अब वह शून्य पर है। इसी प्रकार वामपंथी भी पश्चिम बंगाल से समापन की ओर बढ़ रहे हैं। जिस प्रकार से बीजेपी का ग्राफ बढ़ रहा है अगली बार पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत निश्चित है। उन्होंने कहा कि केरला जहां से कांग्रेस के नेता राहुल गांधी स्वयं सांसद के रूप में जीतकर आए हैं वहां से भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। अगर यही परिस्थिति रही तो अगली बार राहुल गांधी भारत में नई सीट पर चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस केरला में केवल 21 सीटों पर सिमट कर रह गई है। उन्होंने कहा कि असम जैसा प्रदेश जो एक समय पर कांग्रेस का गढ़ माना जाता था वहां पर भाजपा को दूसरी बार भारी बहुमत मिला है। 2011 में भाजपा के पास 26 सीटें थी 2016 में यह 60 की बढ़त से 86 पहुंची और इस बार एक बार फिर असम की जनता ने भाजपा को जिताया है। कांग्रेस की लोकप्रियता यहां घटती चली जा रही है। 2011 में कांग्रेस के पास 78 सीटें थी जो कि 2016 में 26 सीटें रह गई। पांडिचेरी में भाजपा ने इतिहास दर्ज किया है। इस बार पहली बार भाजपा की सशक्त सरकार पांडिचेरी में बनी है। भाजपा की इस बार 16 सीटें आई है जो कि 2016 की तुलना में 10 से ज्यादा है। यहां कांग्रेस के पास 2016 में 15 सीटें थी जो अब केवल 2 ही रह गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपनी चिंता करें और भाजपा की चिंता छोड़े। भाजपा एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल है जो अपने आप में बहुत मजबूत है और हर चुनाव में भाजपा का वोट शेयर बढ़ता ही चला जा रहा है।
राज्य वन विभाग, भारती इन्स्टिट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी (बीआईपीपी) की टीम के सहयोग के साथ हिमाचल में वनों पर आधारित अर्थव्यस्था बढ़ाने के लिए समूहों के विकास व वन औषधि मूल्यवर्धन रणनीति बनाएगा। हाल ही में बीआईपीपी की चार सदस्यीय टीम ने इस संदर्भ में प्रधान मुख्य अरण्यपाल, वन डॉ. सविता के साथ बैठक की। डॉ. सविता ने बताया कि प्रदेश में ग्रामीण समुदायों के काफी लोग वनों से प्राप्त औषाधीय पौधों, जड़ी-बूटियों तथा अन्य वन उपजों की बिक्री पर निर्भर रहते हैं। बहुत से वन उत्पादों को वे बहुत कम दामों पर बेच देते हैं जबकि उद्योग उन उपजों का उपयोग हर्बल दवाओं इत्यादि में कच्चे माल के तौर पर उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय सरकारी एजेन्सियों और जिम्मेदार व्यवसायियों के साथ मिल कर अपनी आजीविका को बढ़ाने के साथ-साथ वनों को संरक्षित रखने में सहयोग दे सकते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वन आजीविका सुरक्षा और जैव विविधता संरक्षण आदि लाभ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए वनों द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं में तालमेल तथा व्यापार को सन्तुलित करना महत्वपूर्ण है। बीआईपीपी वन उत्पादों के उत्पादन, सतत् निष्कासन व बिक्री के डेटा को संकलित करेगा तथा वन विभाग के सहयोग से वन्य औषधियों, जड़ी-बूटी के संग्रह, खरीद, मूल्य संवर्धन, विपणन और उद्योगों की स्थापना की विकेन्द्रीकृत प्रणाली के लिए एक प्रारूप तैयार करेगा। बीआईपीपी की टीम इस संदर्भ में सर्वप्रथम पायलट आधार पर प्रमुख उत्पादों के क्षेत्रों की मैपिंग कर रणनीति को वन विभाग के साथ साझा करेगा।
उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने आज आदेश जारी करते हुए बताया कि कोविड-19 रोगी के उपचार और देखभाल के लिए खेल छात्रावास दत्तनगर, रामपुर बुशहर को कोविड देखभाल केंद्र के रूप में अधिसूचित किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी शिमला को इस केंद्र में एक चिकित्सा अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात करने के आदेश दिए गए है ताकि कोविड देखभाल केंद्र के संचालन में सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों का सख्ती से अनुपालन हो सके। यह आदेश तत्काल प्रभाव से आगामी आदेशों तक लागू रहेंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने होम क्वारंटाइन कोविड मरीजों के लिए नए दिशा-निर्देश और उपचार संबंधी प्रोटोकाॅल जारी किया है। इसके अन्तर्गत जिलों को बच्चों और व्यस्क कोविड मरीजों के लिए उपचार संबंधी अलग-अलग व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए है। स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में कोविड मरीजों व उनके सहायकों को कोविड सुरक्षित वातावरण प्रदान करने पर बल दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि कोविड-19 मरीजों के सहायकों के लिए अस्पतालों में अलग क्षेत्र चिन्हित किया जाना चाहिए जहां उनके लिए पेयजल और चिकित्सकों से संपर्क करने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। सभी सहायक प्रतिदिन वरिष्ठ चिकित्सकों से अपने मरीज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और मरीज भी अपने सहायकों से प्रतिदिन कम से कम एक बार वीडीओ काॅल कर बाचतीत कर सकेंगे। राज्य मुख्यालय ने चिकित्सा ऑक्सीजन स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए एक नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं और औद्योगिक ऑक्सीजन के उपयोग के प्रतिबंध के संबंध में भी उचित कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। राज्य में 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 14 लाख 28 हजार लोगों का टीकाकरण किया गया है। इनमें से 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 1,71,812 लोगों को वैक्सीन की दूसरी खुराक भी दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज चम्बा से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कांगड़ा जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिले में कोविड के मामलों में हुई तीव्र वृद्धि के दृष्टिगत कोविड रोगियों की सुविधा के लिए बिस्तरों की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा जिले के परौर में अस्थाई प्रबन्ध किए जाएंगे जिससे अगले दस दिनों में 250 अतिरिक्त बिस्तरों की क्षमता उपलब्ध होगी। आने वाले दिनों में यहां बिस्तरों की क्षमता को लगभग 1000 तक बढ़ा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से बीमार रोगियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए आईसीयू बिस्तरों की क्षमता बढ़ाने के अलावा ऑक्सीजन की सुचारू आपूर्ति की जानी चाहिए। जयराम ठाकुर ने कहा कि आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए निजी प्रयोगशालाओं को भी सूचीबद्ध किया जाना चाहिए ताकि अधिक संख्या में कोविड के लिए जांच की जा सके और रोगियों को जल्द से जल्द जांच की रिपोर्ट उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि रोगियों को अस्पताल ले जाने और उपचार के उपरांत घर वापिस छोड़ने को वाहनों की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने प्रदेश के लिए छह पीएसए ऑक्सीजन प्लांट स्वीकृत किए हैं। इन्हें नागरिक अस्पताल पालमपुर, क्षेत्रीय अस्पताल मण्डी, शिमला जिले के नागरिक अस्पताल रोहड़ू व नागरिक अस्पताल खनेरी, डाॅ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल नाहन और क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में स्थापित किया जाएगा। इससे इन स्वास्थ्य संस्थानों में 1400 बिस्तरों को ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोविड अस्पताल में तैनात विभिन्न श्रेणियों के चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ को 30 जून तक प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। चैथे व पांचवें वर्ष के एमबीबीएस विद्यार्थियों, अनुबंध चिकित्सकों, सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डाॅक्टरों को 3000 रुपये प्रतिमाह का प्रोत्साहन दिया जाएगा। कोविड ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग विद्यार्थियों, जीएनएम तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों और अनुबंध प्रयोगशाला स्टाफ को 1500 रुपये प्रतिमाह का प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। प्रदेश सरकार पूरे राज्य और विशेषकर उन जिलों में बिस्तरों की क्षमता बढ़ाने के हर संभव प्रयास कर रही है जहां कोविड-19 के मामले अधिक हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा परौर में बिस्तरों की क्षमता को 1000 तक बढ़ाया जाएगा। मण्डी के राधास्वामी सत्संग ब्यास परिसर में 200 बिस्तरों की क्षमता और आईजीएमसी शिमला के नए ओपीडी ब्लाॅक में अतिरिक्त 300 बिस्तरों की क्षमता सृजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र में कोविड रोगियों के लिए अतिरिक्त 500 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए उपयुक्त स्थान चयनित कर लिया गया है। इसके साथ उपायुक्त कांगड़ा राकेश प्रजापति ने कहा कि अब तक जिले में कोविड के 359489 सैंपल की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 19570 पाॅजीटिव पाए गए है। वर्तमान में जिले में 5384 सक्रिय मामले हैं और जिले की पाॅजीटिविटी दर 5.44 प्रतिशत जबकि रिकवरी दर 70.34 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जिला में टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है और अभी तक अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं, कोरोना योद्धाओं और 45 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को वैक्सीन की 3,82,851 खुराकें दी जा चुकी हैं। प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार, उपाध्यक्ष हंस राज, सांसद इन्दु गोस्वामी, विधायक मुल्ख राज प्रेमी, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर, पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा, डा. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा के प्रधानाचार्य डाॅ. भानु अवस्थी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज चंबा से वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के सिराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत थुनाग क्षेत्र के लिए लगभग 66.36 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने नई राहें नई मंजिलें के अंतर्गत 3.79 करोड़ रुपये की लागत से ग्राम पंचायत बगश्याड़ के देवनाला में निर्मित होने वाली सड़क किनारे सुविधाओं, 2.75 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सराची के भवन, मण्डी गागल, चैल, जंजैहली सड़क पर थुनाग और लम्बाथाच के मध्य 20.85 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली 165 मीटर लम्बी डबल लेन यातायात सुरंग, 12.61 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले शिल्लीबागी से दियोल जैनशला सड़क मार्ग जिसमें नाबार्ड के अन्तर्गत 30 मीटर लम्बा पुल भी शामिल है, थुनाग में रोपड़ी खड्ड पर 3.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 30 मीटर डबल लेन पुल, 1.11 करोड़ रुपये की लागत से नागरिक अस्पताल गाड़ागुशैणी के लिए कर्मचारी आवास, 13.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली पटीकरी बारा शिल्ली कशमबलीधार सड़क, जिसमें नाबार्ड के अन्तर्गत बाखलीखड्ड पर पुल भी शामिल है, की आधारशिलाएं रखीं। चच्योट तहसील में 1.64 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन, गाड़ागुशैणी में 24 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले ओक बीज भंडार भवन, धरोट की ग्राम पंचायत तरजून में 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाला रेशम पालन साधन केन्द्र, थुनाग में 2.03 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाला बस अड्डा, नेहरा, कंधाल, भजौनी, ग्राम पंचायत ककड़ाधार के चवाग, उप तहसील छतरी के लिए 80 लाख रुपये की लागत से जल आपूर्ति योजना सेरीबागा को पुनः तैयार करने, तहसील थुनाग के अनुसूचित जाति गांवों झुंडी, क्योली और बलेंदा के लिए 87 लाख रुपये की लागत से विभिन्न जलापूर्ति योजनाओं की रिमाॅडलिंग और तहसील थुनाग की ग्राम पंचायत सुनाह लमाथाच के निहरी, मजौन गांव के लिए 2.03 करोड़ रुपये की लागत की उठाऊ जल आपूर्ति योजना की भी आधारशिलाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने निष्पादन एजेंसियों को उन सभी परियोजनाओं का निर्माण कार्य समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिनका उन्होंने आज शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं सिराज क्षेत्र के लोगों को सुविधा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि मंडी गागल-चैल-जंजैहली सड़क पर प्रस्तावित सुरंग के निर्माण से दूरी 2.50 किलोमीटर कम हो जाएगी और इसका निर्माण राज्य लोक निर्माण विभाग द्वारा 20 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि थुनाग में बस अड्डे का निर्माण किया जाएगा जिससे सिराज विधानसभा क्षेत्र में बसों के परिचालन के लिए उचित स्थान सुनिश्चित होगा। जय राम ठाकुर ने कहा कि अधिकारियों को विकास परियोजनाओं को एक वर्ष के भीतर पूर्ण करने के लिए उचित अनुसूची तैयार करनी चाहिए ताकि वह व्यक्तिगत रूप से इन परियोजनाओं को क्षेत्र के लोगों को समर्पित कर सकें। उन्होंने कहा कि सिराज विधानसभा क्षेत्र में उनका दौरा काफी समय से प्रस्तावित है लेकिन कोविड महामारी के कारण वह क्षेत्र का दौरा नहीं कर पा रहे हैं। भाजपा सिराज मण्डलाध्यक्ष भागीरथ शर्मा ने कहा कि पिछले लगभग तीन वर्षों के दौरान सिराज विधानसभा क्षेत्र में विकास की गति तेज हुई है जिसका श्रेय मुख्यमंत्री को जाता है। विधानसभा उपाध्यक्ष हंस राज, विधायक पवन नैयर एवं जिया लाल, भाजपा जिलाध्यक्ष डी.एस. ठाकुर मुख्यमंत्री के साथ चम्बा में और सिराज के भाजपा नेता शेर सिंह, डोले राम, खेम देसी और रजनी थुनाग में इस अवसर पर उपस्थित थीं
हाटकोटी (सरस्वतीनगर) से ज़िला परिषद् सदस्य कौशल मुँगटा ने क्षेत्र में लगातार बढ़ते हुए कोरोना मरीज़ों को देखते हुए जल्द से जल्द सरकार से सरस्वती नगर में कम से कम 100 बेड का कोविड अस्पताल स्थापित करने का आग्रह किया है, जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर व कुछ वेंटिलेटर भी उपलब्ध हो। मुँगटा का कहना है की उनके वार्ड में उत्तराखण्ड की सीमा से लगा हुआ दूर दराज़ का क्षेत्र भी है और ऑक्सीजन की कमी मरीज़ को सामने आई तो हाटकोटी पहुँचना भी बहुत मुश्किल है रोहरू, शिमला तो छोड़िए। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है की अगर उनके क्षेत्र के साथ नाइंसाफ़ी और अनदेखी हुई व एक भी मरीज आकसीजन की कमी या नज़दीक में अस्पताल ना होने के कारण मरा तो वो बर्दाश्त नहीं करेंगे, व सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने का कार्य करेंगे। सरस्वतीनगर 19 पंचायते व 25000 से अधिक जनसंख्या वाला वार्ड है जहाँ वर्तमान में PHC व CHC में 50% से ज़्यादा पद ख़ाली चल रहे है, कोरोना की वर्तमान स्थिति की बात करें तो कई पंचायतो में कंटेनमेंट ज़ोन बना दिए गये है जो की आने वाले ख़तरे के लिए हमें तैयार होने को कह रहे है| मूँगटा का कहना है की सरकार बुरी तरह नाकाम हो चुकी है 28 दिन के बाद लगने वाली दूसरी खुराक अब 40-50 दिन बाद लग रही है जो सरकार की बदिन्तज़ामी को दर्शाता है।18 वर्ष से अधिक लोगों को 1 मई के बाद लगने वाले बयान को भी सरकार की असवेदनशीलता क़रार देते हुए मूँगटा ने इसे देश के साथ धोखा कहा है उनका कहना है कि आज भारत,पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल व भूटान जैसे देशों से भी बदतर हालत में है जिसके लिए चुनावी रैली वाली सरकार व उसकी घटिया नीतियाँ ज़िम्मेवार है। उनका कहना है की वो जल्द SDM के माध्यम से भी सरकार को इस बावत ज्ञापन सौंपेंगे।
शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आज दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि कोविड-19 की दूसरी लहर में कोविड मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसके चलते ऑक्सीजन की आवश्यकता भी बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश में 21 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत है तथा पूरे प्रदेश में 65 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की उपलब्धता है। बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के मद्देनजर ऑक्सीजन की खपत भी बढ़ेगी। इसी दृष्टि से ऑक्सीजन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारत सरकार द्वारा आवंटित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला में ऑक्सीजन प्लांट का कार्य क्रियान्वित किया गया है। यह ऑक्सीजन प्लांट कोरोना महामारी के बाद भी इस अस्पताल में ऑक्सीजन की आवश्यकता को पूरा करेगा। ऑक्सीजन प्लांट को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल शिमला में स्थापित करने के लिए भारत सरकार तथा मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश जयराम ठाकुर का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया की आगामी दिनों में हिमाचल प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि शिमला के अस्पतालों में मरीजों की संख्यां कम करने के लिए रोहड़ू व रामपुर में आक्सीजन का माकूल प्रबंध जा रहा है यदि यह प्लांट उपरी क्षेत्रों में स्थापित होते है तो उनके क्षेत्रों में ही कोविड मरीजों के साथ साथ अन्य बिमारियों से ग्रस्त मरीजों को भी आक्सीजन की सुविधा मिलेगी।
जिला अध्यक्ष आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला दंडाधिकारी आदित्य नेगी के आदेशानुसार कोविड महामारी के बढते संक्रमण तथा जिला में चल रहे टीकाकरण अभियान को मध्यनजर रखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा नगर निगम शिमला के 34 वार्डों के लिए कलस्टर कंटोनमैंट सर्वे टीमें गठित की गई। उन्होंने कहा कि चिकित्सक दल की टीम के सदस्य नगर निगम शिमला के समस्त वार्डों में कोरोना पीड़ित, होम क्वांरटीन नागरिकों को दवाईयों की किट का वितरण, उनके सम्पर्क में आए लोगों की सूची तैयार करना, कोविड सुरक्षा टीकाकरण में सहयोग देना तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिए गए दायित्वों का निर्वहन करेगी। जनता की सुरक्षा को मध्यनजर रखते हुए सम्बन्धित स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगें कि सीसीएसटी के समस्त सदस्यों को उनकी डियूटी के बारे प्रशिक्षण दिया जाए। इन आदेशों का पालन न करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लक्कड़ बाज़ार शिमला में विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई है। विद्यालय में सभी कक्षाओं के लिए सभी विषयों की ऑनलाइन कक्षा की समय सारणी बना दी गई है। अध्यापक अपने घरों से ही गूगल मीट और जूम जैसे ऑनलाइन माध्यम से लाइव कक्षाएं ले रहे हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस संदर्भ में विद्यालय के अध्यापकों के साथ एक वर्चुअल स्टाफ मीटिंग की गई जिसमें यह निर्णय लिया गया की ऑनलाइन कक्षाएं एक निर्धारित समय सारणी के अनुसार नियमित रूप से ली जाएं ताकि विद्यार्थियों के साथ संपर्क बना रहे और उनकी पढ़ाई प्रभावित ना हो। यह सारी प्रक्रिया हर घर पाठशाला के अतिरिक्त रहेगी। विद्यालय प्रबंधन ने विद्यालय के स्टाफ और छात्रों के अभिभावकों के साथ इस बारे में संवाद स्थापित किया जिसमें 100 से अधिक अभिभावक ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। इस मीटिंग में अभिभावकों से सहयोग की अपेक्षा की गई। अभिभावकों ने विद्यालय द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन कक्षाओं का स्वागत किया और आश्वासन दिया कि वह विद्यालय प्रशासन की इस पहल का पूर्ण सहयोग करेंगे।
चौपाल के नेरवा में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। नेरवा से 1 किलोमीटर दूर हडेऊनाला के पास एक कार अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। गाड़ी में तीन लोग स्वार थे। तीनों लोग इस दुर्घटना में जख्मी हुए, घायलों को स्थानीय लोगों व पुलिस द्वारा सिविल अस्पताल नेरवा लाया गया। इस दुर्घटना में घायल हुए व्यक्तियों की पहचान दिनेश चौहान (41) पुत्र किरपा राम गांव व डाकघर बिजमल तहसील नेरवा जिला शिमला, कमलेश (38 ) पत्नी दिनेश चौहान व अक्षय चौहान पुत्र श्याम सिंह ( 27) के रूप में हुई है। गाड़ी के चालक दिनेश चौहान अपनी पत्नी कमलेश व अपने भतीजे अक्षय के साथ अपने घर बिजमल से नेरवा बाजार आ रहें थे। अचानक कार अनियंत्रित होने से यह दुर्घटना हो गई। तीनों घायलों को सिविल अस्पताल नेरवा से प्रार्थमिक उपचार के बाद IGMC शिमला रेफर किया गया है। तहसीलदार नेरवा अरूण शर्मा द्वारा रेफर किए गए घायलों को पांच-पांच हज़ार रूपए की राशि फौरी राहत के तौर पर दी गई।
प्रदेश में कोविड मरीजों को सुविधा प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोविड समर्पित 33 और एम्बुलेंस उपलब्ध करवाई हैं जिनमें 108 एम्बुलेंस सेवा की 13 व 102 एम्बुलैंस सेवा की 20 एम्बुलेंस शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डाॅ.निपुण जिन्दल ने यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में कुल 123 कोविड समर्पित एम्बुलेंस लोगों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवाओं की 47 एम्बुलेंस पहले से ही अपनी सेवाएं उपलब्ध करवा रही हैं जिनमें 13 और एंबुलेंस शामिल की गई हैं। इस प्रकार, 108 एम्बुलेंस सेवा की 60 एम्बुलेंस के माध्यम से लोगों को सेवाएं प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि 102 एम्बुलेंस सेवा की कुल 63 एम्बुलेंस कोविड मरीजों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। 102 एम्बुलेंस सेवा की 22 एम्बुलेंस पहले से ही सेवारत थीं जबकि 20 और एम्बुलेंस शामिल की गई है। उन्होंने कहा कि 21 एम्बुलेंस को सैम्पल एकत्रीकरण के कार्य में लगाया गया है। मिशन निदेशक ने बताया कि 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को कोविड का टीका लगाने के लिए 28 अप्रैल से पंजीकरण कार्य आरम्भ हो गया है। कोविन पोर्टल और आरोग्य सेतू ऐप पर पंजीकरण करवाया जा सकता है। इस आयु वर्ग के लोगों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होते ही टीकाकरण का कार्य आरम्भ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इस आयु वर्ग के सभी पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क टीकाकरण करने का निर्णय लिया गया है।
छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि वह दयानंद पब्लिक स्कूल के मामले में हस्तक्षेप करें व पांच दिसम्बर 2019 की शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना को लागू करवाएं। यह अधिसूचना वर्ष 2019 में जारी हुई थी व इसमें स्पष्ट किया गया था कि वर्ष 2020 व उसके तत्पश्चात कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों के जनरल हाउस के बगैर कोई भी फीस बढ़ोतरी नहीं कर सकता है। इसके बावजूद भी डीपीएस स्कूल ने वर्ष 2020 में फीस बढ़ोतरी की। वर्ष 2021 में इस स्कूल ने सारे नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए टयूशन फीस में भारी-भरकर बढ़ोतरी करके सीधे 55 प्रतिशत तक फीस बढ़ोतरी कर दी है। डीपीएस प्रबंधन ने नर्सरी व केजी कक्षा की फीस को एक हज़ार नौ सौ से बढाकर दो हज़ार आठ सौ पचास रुपये, पहली से पांचवीं कक्षा तक की प्रतिमाह टयूशन फीस दो हज़ार से बढ़ाकर तीन हज़ार रुपये, छठी से आठवीं कक्षा की फीस को दो हज़ार एक सौ से बढ़ाकर तीन हज़ार दो सौ पचास रुपये तथा नौंवीं-दसवीं कक्षा की प्रतिमाह फीस को दो हज़ार दो सौ पचास रुपये से बढ़ाकर तीन हज़ार पांच सौ रुपये कर दिया है। इस तरह वार्षिक बारह हज़ार रुपये से पन्द्रह हज़ार रुपये की टयूशन फीस बढ़ोतरी की गई है। यह पूर्णतः छात्र व अभिभावक विरोधी कदम है व इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने हैरानी व्यक्त की है कि शिक्षा विभाग की नाक तले अंधेरा है व इस से दो सौ मीटर दूर डीपीएस स्कूल में ही शिक्षा विभाग अपने 5 दिसम्बर 2019 के आदेशों को ही लागू नहीं करवा पा रहा है जिसका सीधा मतलब है कि निजी स्कूलों के साथ प्रदेश सरकार की सीधी मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि अगर इस फीस बढ़ोतरी पर अंकुश न लगाया गया तो आंदोलन तेज़ होगा जिसके तहत 28 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय का घेराव होगा।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी जिला के सुंदरनगर में नवनिर्मित मातृ एवं शिशु अस्पताल का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं सेे संबंधित जानकारी प्राप्त की। यह अस्पताल कोविड-19 रोगियों के लिए समर्पित किया गया है। उन्होंने सलापड़ में बीबीएमबी कालोनी के पुराने भवनों का भी दौरा किया ताकि आवश्यकता पड़ने पर कोविड-19 रोगियों के लिए अतिरिक्त सुविधाओं की संभावनाओं का पता लगाया जा सके। मुख्यमंत्री ने श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नेरचैक में कोविड-19 की स्थिति के दृष्टिगत बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश में कोविड-19 मामलों में तीव्र वृद्धि को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रदेश में कोविड रोगियों के लिए बिस्तर की क्षमता को बढ़ाकर लगभग 5000 करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि नेरचैक चिकित्सा महाविद्यालय को कोविड-19 अस्पताल के रूप में समर्पित किया गया है और अस्पताल के निकट परिसर में अतिरिक्त 100 बिस्तरों वाले अस्थायी अस्पताल का कार्य भी अगले चार-पांच दिनों के भीतर पूरा कर दिया जाएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी विपरीत स्थिति का सामना करने के लिए अपनी क्षमता को और अधिक बढ़ाने के प्रयास कर रही है। कांगड़ा जिले के राधास्वामी परिसर, परौर में कोविड रोगियों के लिए एक हजार बिस्तरों तक की क्षमता वाले अस्थायी अस्पताल में परिवर्तित कर इसे क्रियाशील बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंडी में एमसीएच भवन का काम एक माह के भीतर पूरा हो जाएगा, जिसके लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बाहर से प्रदेश में प्रवेश करने वाले लोगों से आरटीपीसीआर परीक्षण की नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाने और दो सप्ताह की अवधि के लिए होम आइसोलेशन में रहने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकािरयों को ऑक्सीजनयुक्त बिस्तरों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और चिकित्सा महाविद्यालय नेरचैक में अधिकतम बिस्तरों में ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रत्ती के अस्पताल में बिस्तरों की क्षमता को 25 से बढ़ाकर 50 किया जाना चाहिए। जयराम ठाकुर ने अधिकारियों को जिले की सभी संस्थाओं/भवनों को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। कोविड-19 मरीजों की संख्या में वृद्धि होने पर इनका उपयोग मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर और हमीरपुर जिलों में स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि चिकित्सा महाविद्यालय नेरचैक पर मरीजों के बोझ को कम किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को इस महामारी से प्रभावशाली तरीके से निपटने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के भी निर्देश दिए। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री ने मंडी जिले के भंगरोटू में निर्माणाधीन प्री-फैब्रिकेटिड अस्पताल का भी निरीक्षण किया। जयराम ठाकुर ने मण्डी में मातृ शिशु स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र का दौरा किया और सम्बन्धित अधिकारियों को इसका निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने खलियारा में राधास्वामी सत्संग व्यास का भी दौरा किया, जहां आवश्यकता पड़ने पर 200 बिस्तरों वाले प्रीफैब्रिकेटिड ढांचे का निर्माण किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डाॅ.राजीव सैजल, विधायक राकेश जम्वाल, इंद्र सिंह गांधी, जवाहर ठाकुर, भाजपा प्रवक्ता अजय राणा, उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर, पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री, मुख्य चिकित्सा अधिकारी देवेंद्र शर्मा और अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट अफ़ेयर्स राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा कोरोना आपदा की दूसरी लहर से निपटने की दिशा में सभी ज़रूरी कदम उठाने व वित्त मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री के सभी निर्देशों का गम्भीरता से पालन करने की बात कही है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कोरोना आपदा से निपटने के लिए हर ज़रूरी कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ऑक्सीजन की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा के लिए बैठक में 3 महीने के लिए ऑक्सीजन से जुड़ी वस्तुओं उपकरणों के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी और हेल्थ सेस नहीं लगाए जाने का निर्देश दिया जोकि कदम स्वागतयोग्य है। मोदी ने देशभर के जिला मुख्यालयों पर सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट बनाने की मंज़ूरी दे दी है। पीएम केअर्स फंड से 551 अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट्स लगाए जाएंगे। जिससे कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय के अधीनस्थ केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने कोविड संबंधी आयात से जुड़े सवालों के समाधान के लिए एक सहायता प्रकोष्ठ बनाया है, ताकि सीमा शुल्क विभाग से ऐसे सामान की त्वरित निकासी हो सके। कोविड-19 मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाला जीवन रक्षक रेमडेसिविर के उत्पादन को 38.80 लाख यूनिट प्रति माह से बढ़ाकर 74 लाख यूनिट प्रति माह करने का निर्णय भी मोदी सरकार ने लिया है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को मई और जून महीने में 26000 करोड़ रुपए खर्च करके मुफ़्त 5 किलो अनाज उपलब्ध कराने का सराहनीय निर्णय लिया है। महामारी के इस समय में गरीबों को भोजन की समस्या से दो-चार न होना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। मोदी सरकार इस आपदा में हर कदम पर देशवासियों के साथ खड़ी है। पिछले साल भी पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को तीन महीने के लिए शुरू किया गया था। पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के इस विस्तार में केंद्र सरकार ने पिछले साल 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया था और अब मोदी सरकार आगामी 2 महीनों में 26000 करोड़ रुपए खर्च करके सुनिश्चित करेगी कि इस आपदा की घड़ी में कोई भूखा ना रहे।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से दूरभाष पर बातचीत कर कोविड-19 को लेकर राज्य की स्थिति और सुविधाओं को लेकर चर्चा की। उन्होंने राज्यपाल से कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में राज्य के पूर्व सैनिकों को शामिल करने और सैन्य व्यवस्था का लाभ लेने का सुझाव दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक हैं और यहां कई प्रकार से सैनिक व्यवस्था भी उपलब्ध है। यह दौर महामारी का है। इसलिए, इस दौरान राज्य को अपने पूर्व सैनिकों की सेवाएं कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सैनिक गेस्ट हाउस, रेस्ट हाउस व अन्य मेडिकल सुविधाओं का भी लाभ लिया जा सकता है। महामारी के खिलाफ प्रदेश स्तर पर किए जा रहे विभिन्न प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मिलकर इस चुनौती का सामना किया जा सकता है। मुश्किल की इस घड़ी में हमें अपने स्तर पर योगदान देना चाहिए। राज्यपाल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री द्वारा हिमाचल के प्रति व्यक्त उनकी चिंता पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में कोरोना महामारी के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्व सैनिकों और सैन्य व्यवस्था के नेटवर्क इस दिशा में पहले से ही क्रियाशील है, जिसका लाभ और प्रभावी तरीके से लिया जाएगा ताकि इस लड़ाई में विजय हासिल की जा सके। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को आश्वस्त किया कि उनके सुझावों पर कार्य योजना बनाकर महामारी के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर पूर्व सैनिकों की अधिक से अधिक सेवाओं को लेकर मजबूती से काम किया जाएगा।
देश में कोरोना वायरस की स्थिति से हाहाकार मचा हुआ है। दिनोंदिन स्थति भयावह होती जा रही है। भारत में कोरोना वायरस के आंकड़े काफी भयानक है। हर दिन देश में 3 लाख से अधिक मामलें दर्ज हो रहे है। वंही, हिमाचल प्रदेश में बीते एक सप्ताह के दौरान कोरोना की जांच के लिए करीब 65486 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 10529 से अधिक लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 अप्रैल को बीते 24 घंटे में कोरोना की जांच के 9071 सैंपल लिए गए। इनमें से 1295 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 21 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार 7615 सैंपल लिए गए और 454 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 22 अप्रैल को 7799 सैंपल लिए और 959 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 23 अप्रैल को 10079 सैंपल व 819 पॉजिटिव, 24 अप्रैल को 9990 सैंपल व 1041 लोग पॉजिटिव, 25 अप्रैल को 6483 और 534 पॉजिटिव केस आए। वहीं, 26 अप्रैल को 7172 सैंपल लिए गए और 1072 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा वर्तमान में 89193 के पार पहुंच गया है। सक्रिय मामले 14326 से ज्यादा हो गए हैं। अब तक से अधिक 73478 संक्रमित ठीक हो चुके हैं और 1350 की मौत हुई है।
युवा कोंग्रेस नेता व सरस्वती नगर से जिला परिषद सदस्य कौशल मुंगटा ने सरकार को चेताया है कि अगर बागवानों को उनके नुक़सान का उचित मुआवज़ा नहीं मिला तो वो आगामी दिनों में धरना प्रदर्शन व हड़ताल से भी गुरेज़ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों में बेमौसमी बर्फ़बारी और ओलावृष्टि से सब कुछ तबाह हो गया है, नुकसान का आंकलन करना मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर पेड़ जड़ से ही उखड़ गए हैं तो कहीं ओलावृष्टि से पूरी फसल तबाह हो गई है। नुकसान का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिसकी 2 हज़ार से अधिक सेब की पेटियाँ होती थी, उस बागवान की फसल इस तरह तबाह हुयी है की इस वर्ष उसकी 50 पेटियाँ होना भी मुश्किल है। ऐसे में जिन लोगों की आर्थिकी सेब की फसल पर निर्भर है वो पुरे साल कैसे गुजर-बसर करेंगे, ये बड़ा सवाल है। वहीं मुंगटा ने सरकार से आग्रह किया है कि जो मुआवज़े की राशि लोगों को मिलनी है उसमें पारदर्शिता हो क्यूँकि जिसका करोड़ों का नुकसान हुआ है उसे कुछ राशि देकर भरपाई नहीं हो सकती है। वहीं, KCC लिमिट पर लगने वाले ब्याज को भी सरकार को इस आपदाकाल में माफ़ कर देना चाहिए ताकि बागवान परेशान ना हों। मुंगटा ने कहा कि उनका पूरा वार्ड सेब बाहुल्य क्षेत्र में आता है, सभी लोग सेब पर ही निर्भर है ऐसे में जब पूरी फसल ही तबाह हो गई हो तो लोग कैसे अपना गुजर बसर करेंगे, सरकार को इस विषय के बारे में सोचना चाहिए और उचित मुआवज़ा और राहत प्रदान करनी चाहिए। अगर बागवानों को मुआवज़ा देने में आनाकानि की गई तो सरकार 2022 में अपना बोरिया बिस्तर भी तैयार रखें।
बेमौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि और भारी बारिश के कारण फसलों और फलों को हुए नुकसान की समीक्षा के लिए बागवानी मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने बागवानी अधिकारियों, फसल बीमा कंपनियों और फल उत्पादक संघ की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सेब व अन्य फसलों को पहुंचे नुकसान के आंकलन के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिमला सहित किन्नौर, मंडी, कुल्लू, चंबा, लाहौल-स्पीती तथा सिरमौर जिला के उद्यान उप-निदेशकों की अध्यक्षता में कमेटियों का गठन किया जाए। इन कमेटियों में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, राजस्व विभाग के अधिकारियों, बागवानों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी सम्मिलित किया जाए। बागवानी मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश सरकार को नुकसान के आंकलन की वीडियोग्राफी सहित विस्तृत रिर्पोट 15 दिनों के भीतर भेजी जाए। संबंधित क्षेत्रों के उपमण्डलाधिकारी इस कार्य की दैनिक समीक्षा रिपोर्ट भी बागवानी मंत्री के कार्यलय में भेजे। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग ने प्रदेश के बागवानों को पौध संरक्षण दवाइयों के अनुदान को सीधे किसानों व बागवानों के बैंक खातों मे वितरित करने का निर्णय लिया है ताकि दवाइयों के वितरण में दक्षता, प्रभावशीलता व जवाबदेही लाई जा सके तथा प्रदेश के अधिक से अधिक लघु एवं सीमांन्त बागवानों को लाभ मिल सके। वर्तमान में विभाग के लगभग 355 पौध संरक्षण केन्द्रों में विभागीय अधिकारी दवाइयों की वितरण प्रक्रिया में शामिल हैं। प्रत्यक्ष लाभा हस्तांतरण (डीबीटी) लागू होने से इन अधिकारियों की सेवा आधुनिक बागवानी तकनीक एवं योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए ली जा सकेगी। डीबीटी लागू होने से समय अवधि समाप्त होने पर खराब होने वाली दवाइयों पर सरकार का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रूपये का नुकसान होता था, जिससे बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसान-बागवान विश्वविद्यालय एवं विभाग द्वारा सुझाई गई पौध संरक्षण दवाइयां बाज़ार से खरीद सकेंगे। विभाग द्वारा विभागीय छिड़काव सारणी मे दर्शाई गई सभी दवाइयों के दाम तय किए जाएंगे ताकि बागवानों को प्रदेश के हर हिस्से मे एक समान दाम पर दवाइयां मिल सके। महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि दवाइयों की गुणवता सुनिश्चित करने के लिए कीटनाशक अधिनियम 1968 के अनुसार, विभागीय अधिकारियों द्वारा नमूने कृषि विभाग शिमला के बालूगंज स्थित प्रयोगशाला मे जांच के लिए भेजे जाते हैं और इनके फेल होने पर अधिनियम के अनुसार कार्रवाई की जाती है। ओला अवरोधक जालियों को लगाने के लिए सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 कृषि उत्पाद संरक्षण (एन्टी हेलनेट) योजना कुशी (केयूएसएचवाई) चलाई जा रही है, जिसमें स्टील की स्थाई संरचना के निर्माण पर बागवानों को 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष कुशी योजना के अन्तर्गत 20 करोड़ धनराशि का प्रावधान किया गया है। इस दौरान बागवानी विभाग के निदेशक डाॅ. जे.पी. शर्मा, अतिरिक्त निदेशक उद्यान डाॅ. डी.पी. सिंह, संयुक्त निदेशक, हिमाचल फल उत्पाक संघ के अध्यक्ष हरीश चैहान सहित अन्य बागवनी अधिकारी तथा फसल बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वर्चुअल माध्यम से मंडी जिले के सुंदरनगर में 12 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मातृ एवं शिशु अस्पताल का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने शिमला से सुंदरनगर के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस अस्पताल को वर्तमान राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष और तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने वर्ष 2017 में राज्य के लिए स्वीकृत किया था और पिछले तीन वर्षो के दौरान इस परियोजना के कार्य में तेज़ी लाने के उपरान्त आज जनता को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण राज्य सरकार इस अस्पताल को वर्चुअल माध्यम से लोगों को समर्पित करने के लिए मजबूर हुई। इस अस्पताल का उपयोग समर्पित कोविड-19 अस्पताल के रूप में किया जाएगा और यह जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करेगा। नेरचैक मेडिकल कालेज को कोविड-19 अस्पताल के रूप में समर्पित किया गया है और अतिरिक्त 100 बिस्तरों की क्षमता वाले प्री-फैब्रिकेटिड अस्पताल का कार्य भी कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा। नागरिक अस्पताल सुंदरनगर को 150 बिस्तर वाले अस्पताल में स्तरोन्नत किया गया है और यह क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहा है। राज्य सरकार अस्पताल में लिफ्ट और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 मामलों की संख्या में वृद्धि चिंता का विषय है। राज्य सरकार ने प्रदेश में आने वाले लोगों से 72 घंटे पहले किए गए आरटीपीसीआर परीक्षण की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से साथ लाने और उन्हें चौदह दिनों की अवधि के लिए अपने निवास स्थान पर होम आईसोलेशन में रहने का आग्रह किया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं और दिशा-निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आरंभ करने का आग्रह किया ताकि इस महामारी को फैलने से रोका जा सके।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश में कोविड-19 मामलों में तीव्र वृद्धि से उत्तपन्न स्थिति के दृष्टिगत वर्चुअल माध्यम से सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्याें व चिकित्सा अधीक्षकों के साथ समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय माईक्रो कन्टेन्मेंट जोन के माध्यम से प्रभावी निगरानी कर कोविड मामलों की टैस्टिंग और ट्रीटमेंट अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने उपायुक्तों को अपने जिलों में कोविड जांच में तेज़ी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम बर्बादी हो क्योंकि देश और प्रदेश को इसकी बहुत आवश्यकता है। प्रदेश सरकार कोविड-19 मरीजों के लिए बिस्तरों की क्षमता में तीन हज़ार तक वृद्धि करने के लक्ष्य को लगभग पूरा कर चुकी है और किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए बिस्तरों की क्षमता को पांच हज़ार तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने एहतियाती तौर पर अतिरिक्त तीन हज़ार डी-टाईप ऑक्सीजन सिलेण्डरों का भण्डारण किया है ताकि खाली सिलेण्डरों की कोई कमी न हो। जयराम ठाकुर ने कहा कि होम आइसोलेशन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना चाहिए और आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला मण्डलों और युवक मण्डलों को होम क्वारंटीन में रखे गए कोविड मरीजों के परिजनों के साथ सम्पर्क में रहने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों पर निगरानी रखने का अनुरोध किया। इन प्रतिनिधियों को बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की गई मानक संचालन प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाने का भी आग्रह किया।
हिमाचल में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले का एनपीएस कर्मचारी संघ सोलन ने समर्थन किया है। संघ का कहना है की सरकार ने जो कर्मचारियों का एक दिन का वेतन कोविड -19 सहायता के लिए काटा है एनपीएस कर्मचारी संघ उसके लिए तैयार है। एनपीएस कर्मचरियों का कहना है की प्रदेश में लगातार कोरोना के मामलों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में सभी कर्मचारियों को सरकार के इस फैसले का समर्थन करना चाहिए। संघ के जिला अध्यक्ष अशोक ठाकुर ने बताया कि एनपीएस कर्मचारी इस संकट के शुरुआत से ही सरकार के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर काम कर रहे हैं। पिछले वर्ष भी एनपीएस कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 25 लाख से अधिक राशी दी थी तथा इसके साथ ही सभी कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन भी दिया था। एनपीएस कर्मचारियों ने कहा कि भविष्य में भी सभी कर्मचारी सरकार का हर संभव साथ देने का वादा करते हैं। उन्होंने कहा की कर्मचारी अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना कोविड-19 से लड़ रहे हैं। कोई अस्पताल में सेवाएँ दे रहा है तो कोई सड़कों पर लोगों को जागरूक कर रहा है। एनपीएस कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर कर्मचारी की मृत्यु या विकलान्गता पर 2009 की अधिसूचना के तहत पुरानी पेंशन की व्यवस्था को प्रदेश में लागु किया जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर एनपीएस कई बार सरकार के समक्ष मांग रख चूका है ,लेकिन अभी तक सरकार कि तरफ से उन्हें कोई भी आश्वासन नहीं मिला है। इसके साथ ही कर्मचरिओं ने मांग रखी है कि भाजपा के चुनावी दृष्टिपत्र के अनुसार पुरानी पेंशन की बहाली के लिए जल्द कमेटी गठन किया जाए।
बेरोजगार कला अध्यापक शिक्षा विभाग व सरकार से खफा है। इनअध्यापकों को प्रशिक्षण देने के बाद भी उन्हें आज तक नियुक्ति ही नहीं मिल पाई है। बेरोजगार कला अध्यापक संघ का कहना है कि सरकार से बार -बार गुहार लगाने के बात भी उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। अब इन बेरोजगार कला अध्यापकों ने सरकार को दो टूक कह दिया है की उनकी अनदेखी का पता सरकार को 2022 में विधानसभा चुनाव में चल जाएगा। बेरोजगार कला अध्यापकों का कहना है की वर्ष 2005 से 2009 तक एससीवीटी के माध्यम से सरकार ने हजारों बच्चों को मैट्रिक आधार पर कला अध्यापक का प्रशिक्षण करवाया ताकि उन सभी को रोजगार प्राप्त हो सके, लेकिन उसके बाद सरकार ने कला अध्यापक बनने के लिए 12वीं में 50 प्रतिशत अंकों के साथ न्यूनतम योग्यता अनिवार्य रख दी गई। इससे पता लगाया जा सकता है कि ना तो सरकार और ना शिक्षा विभाग को इस बात का ज्ञान था कि कला अध्यापक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता क्या होनी चाहिए थी। बेरोजगार कला अध्यापकों संघ के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश भारद्वाज ने कहा कि वह सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि उन्हें सरकारी स्कूलों में चल रहे कला अध्यापकों के खाली पदों में नियुक्ति प्रदान करें, लेकिन सरकार उन्हें हर बार झूठे आश्वासन ही दे रही है। उन्होंने कहा की जहां भी शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री का कोई भी कार्यक्रम होता है वहां पर यह सभी कला अध्यापक यह आस लगाकर पहुंच जाते हैं कि इस बार सरकार हमारी मांगे जरूर पूरा करेगी, लेकिन आज तक कोई भी सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने बताया की अभी हाल ही में कला अध्यापकों के 500 पद भरने की एक फाइल शिक्षा विभाग से वित्त विभाग के पास गई है, इसके साथ ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपना बजट 12 हजार पद शिक्षा विभाग में भरने के लिए कहा था, मगर बेरोजगार कला अध्यापकों को इस बात का भी पता नहीं है कि कला अध्यापक के 500 पद इन पदों में शामिल है भी या नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से मुख्यमंत्री जी हमें आश्वासन पर आश्वासन दिए जा रहे हैं कि कला अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी, लेकिन यह आश्वासन केवल झूठे जुमले साबित हो रहे है। हिमाचल में करीब 1800 कला अध्यापकों के पद खाली बेरोजगार कला अध्यापक संघ के अनुसार मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र मण्डी की बात करें तो इस समय जिला मंडी में ही कला अध्यापक के 284 पद खाली चल रहे हैं। उन स्कूलों में बच्चों को कला विषय तो है, लेकिन उसे पढ़ाने वाला अध्यापक ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी जिला में कई ऐसे स्कूल है जहां पर कला अध्यापक कई सालों से नहीं है। इस समय पूरे हिमाचल में 1800 के आसपास कला अध्यापक के पद खाली चल रहे हैं। बच्चों के माता-पिता को मजबूरन अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजना पड़ रहा है, क्योंकि सरकारी स्कूलों में अध्यापक ही नहीं होंगे तो वहां पर बच्चों का भविष्य कैसा होगा। सभी बेरोजगार कला अध्यापकों ने मांग की है कि हिमाचल के सरकारी स्कूलों को दिल्ली में चल रहे सरकारी स्कूलों की तरह बनाया जाए। सभी को एक समान शिक्षा दी जाए व सभी सरकारी स्कूलों में सभी विषयों के अध्यापकों की नियुक्ति की जाए नहीं तो हिमाचल में भी यही हाल होगा जो दिल्ली में विधानसभा चुनावों में भाजपा सरकार का हुआ था।
लम्बे अर्से बाद हिमाचल कैबिनेट ने प्रदेश के कर्मचारी वर्ग के लिए एक बड़ा राहत भरा फैसला लिया गया है। हालहीं में हुई जयराम मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के हजारों अनुबंध कर्मियों, दैनिक/कंटींजेंट और अंशकालिक कार्यकर्ताओं को सौगात दी गई है। बैठक में विभिन्न विभागों में कार्यरत उन अनुबंध कर्मचारियों के सेवाकाल को नियमित करने का निर्णय लिया गया, जिन्होंने 31 मार्च 2021 को तीन वर्ष का सेवाकाल पूरा किया है या जिनका सेवाकाल 30 सितंबर 2021 को पूरा होने जा रहा है। इसी तरह मंत्रिमंडल ने उन दैनिक/कंटींजेंट कार्यकर्ताओं की सेवाएं भी नियमित करने का निर्णय लिया जो 31 मार्च को अपनी सेवाओं के पांच साल पूरा कर चुके हैं या फिर 30 सितंबर को पूरा करने वाले हैं। इसके साथ ही इन्हें विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों पर नियमित करने का भी फैसला लिया गया है। मंत्रिमंडल ने उन अंशकालिक कार्यकर्ताओं की सेवाओं को विभिन्न विभागों में दैनिक वेतन भोगी के रूप में परिवर्तित करने का भी निर्णय लिया, जिन्होंने 31 मार्च 2021 को 8 वर्ष का निरंतर सेवाकाल पूरा कर लिया है अथवा 30 सितंबर 2021 को पूरा करने जा रहे हैं। इस फैसले से हिमाचल के कर्मचारी बेहद खुश है व हिमाचल के के कर्मचारी वर्ग ने मुख्यमंत्री व सरकार का आभार भी जताया है। कर्मचारियों की और भी कई मांगें लंबित पड़ी है जैसे पुरानी पेंशन बहाली की मांग, जेसीसी की बैठक जल्द बुलाने की मांग, अनुबंध काल को 2 वर्ष करने की मांग, नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग इतियादी। कर्मचारियों ने ये उम्मीद जताई है की सरकार इन मांगों को भी जल्द पूरा करेगी।
हिमाचल प्रदेश में बेकाबू होती कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है। कोरोना की रोकथाम के लिए बढ़ती सख्ती और पाबंदियों से पर्यटन उद्योग की रफ़्तार एक बार फिर धीमी कर दी है। हिमाचल प्रदेश में लगातार दूसरे साल ग्रीष्म पर्यटन सीजन पिट गया है। कोरोना के खतरे और बंदिशों ने देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के कदम जकड़ लिए हैं। प्रदेश के अधिकांश होटलों और होमस्टे में ऑक्यूपेंसी शून्य हो चुकी है। एडवांस बुकिंग भी धड़ाधड़ रद्द होने लगी है। परेशान पर्यटन कारोबारी फिर से अपना काम-धंधा समेटने लग पड़े हैं। लगातार दूसरे साल भी सीजन पिटने से कारोबारी चिंतित हैं। हिमाचल में पर्यटन सीजन शुरू होना ही था की इससे पहले ही बढ़ते कोरोना के चलते सरकार को कई बंदिशों को लेकर फरमान जारी करना पड़ा। इसके बाद अब होटल व्यवसाय पर इसका असर देखने को मिल रहा है। पर्यटन हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी का एक बड़ा हिस्सा है, परन्तु लगातार दूसरे साल स्थिति खराब होने से पर्यटन व्यवसाइयों की चिंता बढ़ गई है। होटल, रेस्टोरेंट ईकाइयों को फिक्स्ड खर्चों का वहन कर पाना असंभव हो गया है। हालाँकि सरकार ने अभी बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों पर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन इसके बावजूद भी प्रदेश के होटलों में कम ही पर्यटक देखने को मिल रहे है। बता दें की हिमाचल की पर्यटन इकाइयों की आमदन का बहुत बड़ा हिसा समर सीजन पर ही निर्भर करता है, लेकिन इस बार भी कोरोना की दूसरी लहर के चलते समर सीजन पर संकट के बादल छाए हुए है। पर्यटन से जुड़ा है राज्य का हर घर और परिवार: सेठ स्टेट टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहेंद्र सेठ का कहना है कि पर्यटन से राज्य का हर घर और परिवार जुड़ा हुआ है। ऐसे में पर्यटन राज्य में पयटकों के आने पर किसी प्रकार का अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। पर्यटक केवल होटलों में नहीं रहता है बल्कि अन्य उद्योग भी इससे जुड़े है। बहुत मुश्किल से प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय पटरी पर लौटने लगा था , लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने अब फिर से चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से जो इंटरेस्ट सुबवेंशन स्कीम के तहत ऋण के रूप में पर्यटन से जुड़े करोबारियों को आर्थिक मदद करने का नोटिफिकेशन जारी की हुई थी, उस स्कीम के अंतर्गत प्रदेश के किसी भी पर्यटन कारोबारी को वर्किंग कैपिटल ऋण बैंकों द्वारा नही दिए गए है। पर्यटन कारोबारियों में इस बात का रोष है कि आर्थिक मदद तो दूर विभागों द्वारा लॉकडाउन अवधि के भी पानी, टैक्स के बिल होटलों को भेजे जा रहे है।
कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने ठियोग,जुब्बल व कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में बर्फबारी और ओलावृष्टि से हुए सेब के बगीचों के नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित बागवानों से बातचीत कर उन्हें प्रदेश सरकार से नुकसान की भरपाई का मामला उठाने का भरोसा भी दिलाया। राठौर ने कडयाली, कैंथलामोड़, नारकंडा, नगरोटा, सिहल, बाघी, कोटखाई, जरोल, करालटी दोजा, मधावली में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर बागवानों से बातचीत की। राठौर ने कहा कि वह इस बारे मुख्यमंत्री से मिल कर बागवानों के इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की पूरी जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी एक बागवान होने के नाते किसानों व बागवान का दर्द भलि भांति समझ सकते है। राठौर ने प्रदेश सरकार से शिमला, किन्नौर, मंडी, कुल्लू,लाहौल स्पीति में बर्फबारी से हुए नुकसान का जायजा लेने को कहा है। उन्होंने बागवानों को मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि सेब की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है। इस भारी बर्फबारी से उनके सेब के पौधे भी नष्ट हो चुके हैं और आने वाले कई सालों तक सेब की पैदावार भी कम होगी। इस दौरान उनके साथ ठियोग ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष कवंर नरेंद्र सिंह, जुब्बल कोटखाई ब्लॉक अध्यक्ष मोतीलाल, महिला कांग्रेस महासचिव पुष्पा शोभटा, रूपेश कंवल,नरेश कैंथला, शेर सिंह के अतिरिक्त पार्टी के कई अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
हिमाचल प्रदेश के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बे-मौसम हुई बर्फ़बारी और ओलावृष्टि से बागवानों और किसानों को ख़ासा नुक़सान हुआ है। प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों की बात करें तो यहाँ के लोग सबसे ज्यादा सेब की पैदावार करते हैं और सभी लोग बाग़वानी पर निर्भर है। ऐसे में बीते दिन हुई बे-मौसम बर्फ़बारी ,ओलावृष्टि से सेब की फसल तबाह हो गई और बागवानों के लिए आपातकाल जैसी स्तिथि उत्पन्न हो गई है। बर्फबारी और भारी ओलावृष्टि से सेब के पेड़ों के टहनियों को तोड़ दिया है। कुछ क्षेत्रों से सेब के पेड़ों के जड़ से उखड जाने की घटनाएं भी सामने आई है। इसी के चलते जिला परिषद मेम्बर और कांग्रेस मीडिया पेनेलिस्ट मोनिता चौहान ने गैर मौसमी बर्फ़बारी से हुए नुक़सान पर प्रदेश सरकार से किसानों को उनके नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा की सरकार को इस बुरे वक़्त में किसानों के साथ खड़ा रहा चाहिए।
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने महावीर जयंती के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने रविवार को राजभवन में भगवान महावीर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धाजंलि दी। अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि उनकी शिक्षाओं ने अहिंसा, करुणा और निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा और प्रगति का मार्ग प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षा आज अधिक प्रासंगिक है और हमें उनका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कोविड महामारी के दृष्टिगत स्वच्छता और कोविड नियमों का पालन करते हुए इस त्यौहार को घर पर ही मनाएं और कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान करें।
राज्य में बे-मौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि और भारी बारिश के कारण फसलों और फलों को हुए भारी नुकसान की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने राज्य के उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिले में फसलों को हुए नुकसान का मूल्यांकन करें ताकि राहत प्राप्त करने के लिए नुकसान की रिपोर्ट केंद्र को भेजी जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लगभग सभी जिलों में बे-मौसमी बर्फबारी, ओलावृष्टि और बारिश से सेब, गेहूं और मटर की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जो चिंता का विषय हैं। उन्होंने उपायुक्तों को यह भी निर्देश दिए कि वे बीमा एजेंसियों को फसल बीमा योजना के अन्तर्गत कवर की गई फसलों के नुकसान का मूल्यांकन करने के लिए अपने एजेंटों को कहें ताकि किसानों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जा सके। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, तकनीकी शिक्षा और जनजातीय विकास मंत्री राम लाल मारकण्डा, स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल, वन मंत्री राकेश पठानिया, मुख्य सचिव अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 551 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के निर्णय कि सरहाना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के उत्थान के लिए जो काम करते हैं, वह सभी भाजपा कार्यकर्ताओं एवं भारत के नागरिकों के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कहते हैं वह कर के दिखाते हैं और जिस प्रकार से वह बीते दिनों से ऑक्सीजन की कमी को दूर करने का कार्य कर रहे थे, उस पर आज ऐतिहासिक निर्णय लेकर उन्होंने दिखा दिया है कि हर समस्या का समाधान नरेंद्र मोदी के पास है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' के अंतर्गत मई और जून माह के लिए देश के 80 करोड़ ज़रूरतमंद लोगों को 5 किलो निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान करने के लिए जो निर्णय लिया है इससे देश और प्रदेश कि गरीबों को बहुत बड़ा फायदा होने जा रहा है। यह गरीब कल्याण के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जिस प्रकार से केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार इस कोविड-19 संकटकाल में जन सेवा के प्रति कटिबद्ध है उसी प्रकार हिमाचल प्रदेश में भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार हिमाचल की जनता की सेवा के लिए हर स्तर पर कार्य कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 1 मई के बाद 18 से 44 वर्ष की आयु वाले तरुण युवा शक्ति को भी कोविड-19 का टीका लगने जा रहा है और यह टीका एक बार फिर निशुल्क प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार एवं संगठन मिलकर कोविड-19 महामारी के खिलाफ एक युद्ध लड़ रही है। लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करना, कोविड-19 से संक्रमित व पूरे परिवार की सेवा करना, महिला मोर्चा द्वारा मास्क बनाना, सैनिटाइजर वितरण, कड़ा वितरण जैसे अनेकों सेवा प्रकल्पों को लेकर भाजपा की सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा की इस महामारी के समय धरातल पर अगर कोई संगठन कार्य कर रहा है तो वह भाजपा है और यह हिमाचल की जनता भलीभांति जानती है। भाजपा कोविड-19 पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं कर रही है केवल जन सेवा का कार्य कर रही है।
स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने राज्य की पात्र व्यक्तियों से कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण करवाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि लोगों को कोरोना की दूसरी लहर को गंभीरता समझने की जरूरत है, जो पहली लहर की अपेक्षा कहीं अधिक भयावह है। इस लहर में अधिक संख्या में लोग इस बीमारी के कारण मृत्यु का ग्रास बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक दूरी, हाथों को बार-बार धोने और मास्क का उपयोग करने जैसी सावधानियों से ही इससे बचा जा सकता है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मीडिया में रिपोर्ट्स आई हैं कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीर रोगियों की संख्या को छुपाया जा रहा है, जो गलत है। इस महामारी की शुरुआत से जिलावार परीक्षणों की संख्या के साथ-साथ लम्बित परिणाम, किए गए परीक्षणों के प्रकार, कोविड पाॅजिटिव व्यक्तियों की संख्या, मौतों की संख्या के साथ दैनिक मीडिया बुलेटिन जारी किया जा रहा है। शुरूआत में यह बुलेटिन दिन में तीन बार और अब दिन में दो बार जारी किया जा रहा था। पारदर्शिता और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से बुलेटिन को तेजी से प्रसार के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से भी दिन में दो बार सांझा किया जा रहा है। इसलिए, यह कहना गलत है कि स्वास्थ्य विभाग किसी भी तथ्य या आंकड़े को छिपा रहा है। विभिन्न स्तरों के संस्थानों में बिस्तरों की उपलब्धता की जानकारी भी संबंधित लिंक पर अपडेट की जा रही है, जो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है।
हिमाचल का पर्यटन उद्योग लगातार चार वर्षों से आर्थिक नुकसान की मार झेलता आ रहा है। 2018 में पानी की भयानक कमी, 2019 में लोक सभा चुनाव के कारण समर सीजन फीका रहा। 2020 में पर्यटन व्यसाय कोरोना की भेंट चढ़ गया था। इस वर्ष सीजन शुरू होने से पहले ही लगातार दूसरे वर्ष कोरोना की दूसरी लहर ने पर्यटन उधोग को खत्म कर दिया है। पर्यटन से जुड़े व्यवसाइयों को आर्थिक तंगी से झूझना पड़ रहा है। पिछले चार वर्षों से मार झेल रहे पर्यटन उधोग की कमर पूरी तरह से टूट गई है। इस स्तिथि में होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी ऑपरेटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स, वाटर स्पोर्ट्स, फोटोग्राफर्स तथा अन्य पर्यटन कारोबारियों को अपने रोजमर्रा के ख़र्चे भी पूरे करना मुश्किल हो गए है। पर्यटन उध्मियों के पास इकाइयों पर लिए लोन की किश्तें, ब्याज देने के लिए भी पैसा नहीं है जिसके चलते उन्हें उनके अकाउंट NPA होने का ख़तरा सता रहा है। होटल, रेस्टोरेंट तथा अन्य पर्यटन इकाइयों से जुड़े व्यवसाइयों को समझ मे नहीं आ रहा कि वह कर्मचारियों को वेतन, बिजली पानी के बिलों का भुगतान तथा अन्य फिक्स्ड ख़र्चों का भुगतान कहा से करें। मौजूदा कोविड नेगेटिव रिपोर्ट की शर्त के चलते बिजनेस ट्रैवलर भी हिमाचल के रुख नही कर रहे हैं। इसका सीधा असर सर्विसेज पर पड़ रहा है क्योंकि कई प्रकार की सर्विसेज बहरी राज्यों से ही प्रोवाइड की जाती है। हम सरकार से आग्रह करते है कि बिजनेस ट्रैवलर को कोविड नेगेटिव रिपोर्ट की एडवाइजरी की शर्त से बाहर रखा जाए। इन मौजूदा हालात में पर्यटन से जुड़े सभी व्यसाईओं की नजर सरकार द्वारा आर्थिक मदद प्रदान करने पर टिकी है। पर्यटन उधोग को वापिस पटरी पर आने तथा पर्यटन इकाइयों को आर्थिक आत्म निर्भर होने में दो से तीन वर्षो का समय लग सकता है। यदि जल्द से जल्द पर्यटन उध्मियों को राहत न दी गई तो पर्यटन इकाइयों को पूर्णता बन्द करने की नौबत आ सकती है तथा इन इकाइयों में कार्यरत सभी कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती है। इतना ही नहीं पर्यटन उद्योग से जुड़े उध्मियों द्वारा लिए गए ऋणों की भरपाई न कर पाने के कारण अपनी इकाइयों को बचा पाना भी मुश्किल हो जाएगा। पर्यटन कारोबारी अपेक्षा करते है कि इस महामारी के चलते सरकार द्वारा जल्द इंटरस्ट सुबवेंशन स्कीम के माध्य्म से सभी पर्यटन इकाइयों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। पर्यटन उधोग पहले भी इस महामारी की लड़ाई में सरकार के साथ खड़ा था और आज भी सरकार के साथ खड़ा है। हम पुनः आग्रह करते है कि पर्यटन उधोग जो कि सबसे अधिक डायरेक्ट तथा इनडायरेक्ट एम्प्लॉयमेंट प्रदान करता है तथा जीडीपी का लगभग 10 % हिस्सा देता है को शीघ्र से शीघ्र सरकार की तरफ से आर्थिक मदद की जाए तथा अन्य रियायते दी जाएं ताकि हिमाचल के सबसे बड़े उद्योग को बचाया जा सके।
लंबे अरसे से बेरोजगार कला अध्यापक संघ बार-बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपने पदों को भरने की गुहार लगा रहे थे। लेकिन उन्हें हर बार निराशा हाथ लग रही थी। अभी हाल ही में 16 मार्च को सभी बेरोजगार कला अध्यापकों ने विधानसभा का घेराव किया था और अपनी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था। बेरोजगार कला अध्यापकों ने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि जो शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग को एक फाइल भेजी है जिसमें 500 कला अध्यापकों को भरने के लिए मंजूरी मांगी है उसे जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए ताकि हमें रोजगार के अवसर प्राप्त हो सके। उसके उपरांत मुख्यमंत्री कार्यालय से वित्त विभाग के मुख्य सचिव को इस बारे में अवगत करवाया है और साथ ही जल्द से जल्द 500 कला अध्यापकों को वित्त विभाग से मंजूरी देने के लिए कहा।
थाना क्षेत्र कुपवी के कुपवी देईया मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। जानकारी के मुताबिक हादसे में ऑल्टो-k10 HP 08c 4800 के ऊपर बडा पत्थर गिरने के कारण गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो गई है। गाड़ी में चार लोग सवार थे। जिनमें से दो व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई व अन्य दो महिलाएं इस दुर्घटना में जख्मी हुई है। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय लोगों की सहायता से सिविल अस्पताल कुपवी भेजा जा चुका है। प्राप्त जानकारी अनुसार मृतको में दोनों व्यक्ति चचेरे भाई बताए गए हैं। मृतकों की पहचान सुनील पुत्र संतराम गांव सनत डाकघर भालू तहसील कुपवी, प्रकाश पुत्र स्व० सही राम गांव सनत डाकघर भालू तहसील कुपवी जिला शिमला के रूप में हुई है। वंही, घायलों की पहचान दोनों मृतकों की पत्नियां सुमन पत्नी सुनिल व गुलाबी देवी पत्नी प्रकाश के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी अनुसार ये लोग देहा में शादी समारोह से घर को वापस लौट रह थे। समय करीब 3:15 बजे अपने घर से कुछ दुरी पर धोताली नामक स्थान पर दुर्घटना के शिकार हुए हैं। थाना प्रभारी कुपवी ने पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच कर आगामी कार्यवाही शुरू कर दी है।
सीटू राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा टीचर यूनियन के नेताओं के खिलाफ जारी किए गए पत्रों व दंडात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सरकार का यह निर्णय पूर्णतः तनाशाहीपूर्वक है तथा संविधान व लोकतंत्र विरोधी है। सीटू ने मांग की है कि टीचर यूनियन के नेताओं को प्रताड़ित करना बंद किया जाए। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि अध्यापक आंदोलन की प्रदेश के ट्रेड यूनियन आंदोलन में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिमाचल के ट्रेड यूनियन आंदोलन में हिमाचल प्रदेश के निर्माण के बाद से ही अध्यापक आंदोलन का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। इसने अध्यापकों, छात्रों व कर्मचारियों की आवाज़ को निरन्तर बुलन्द करने का कार्य किया है। अध्यापक नेताओं के खिलाफ प्रदेश सरकार की कार्रवाई अध्यापक, छात्र व कर्मचारी विरोधी है व ट्रेड यूनियन आंदोलन को दबाने की साज़िश है जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 19 का खुला उल्लंघन है जो किसी भी व्यक्ति को अपनी यूनियन बनाने, भाषण देने, अपनी बात उठाने व बोलने की आज़ादी देता है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन है जो हर व्यक्ति को गरिमामयी जीवन जीने का अधिकार देता है व इस हेतु आवाज़ बुलंद करने का लोकतांत्रिक अधिकार देता है। उन्होंने कहा है कि हिमाचल सरकार के शिक्षा विभाग की टीचर यूनियन के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भारतीय संविधान का घोर उल्लंघन है जो हर नागरिक की अपनी बात रखने का अधिकार देता है। आधुनिक युग में मांग-पत्र देने के साथ ही कोई भी व्यक्ति अपनी मांगों को इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट व सोशल मीडिया पर भी उठा सकता है व सरकारी की कर्मचारी विरोधी नीतियों पर सवाल उठा सकता है।
वैश्विक महामारी कोरोना ने पुरे विश्व में हाहाकार मचाया हुआ है। दो साल से विश्व में इस महामारी का संकट छाया हुआ है। इसी के चलते हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार ने इस महामरी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इतिहास की किसी भी बड़ी से बड़ी विपत्ति के मुकाबले में आज का कोरोना सबसे बड़ा संकट है जिसने पूरे विश्व में हाहाकार मचा रखी है। टी.वी. देखना और अख्बार पढ़ना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा इस प्रकार की भयंकर परिस्थिति में राजनितिक नेताओं की एक-दूसरे पर तीखी कड़वी अलोचना उन्हें कोरोना से भी अधिक दुखी करती है। यह आलोचना का समय नहीं, सहयोग का समय है। गलतियां सबसे होती है परन्तु उन पर कड़वी आलोचना करना बहुत बड़ा पाप है। इससे जनता का मनोबल टूटता है। आज की स्थिति में मनोबल सबसे अधिक आवश्यक है। शान्ता कुमार ने सभी दलों के नेताओं से आग्रहपूर्वक निवेदन किया है कि परस्पर आलोचना बिलकुल बन्द कर दीजिए। यदि सरकार में कोई कमी है तो उसे एक सुझाव के रूप में सरकार को बताएं। उन्होंने कहा कि राजनीति में उनके आदर्श अटल बिहारी वाजपेयी रहे है। वे बार-बार कहते थे कि दलों की दीवारें बहुत छोटी होती है परन्तु राष्ट्र का मन्दिर बहुत ऊँचा होता हैं। बांग्लादेश के युद्ध में भाजपा ने खुल कर सरकार की मदद की। यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी ने इन्दिरा गांधी को दुर्गा तक कह दिया। बाद में पार्टी के भीतर इस पर आलोचना भी हुई थी। शान्ता कुमार ने सभी से आग्रहपूर्वक निवदेन किया है कि कोई किसी की आलोचना न करे तथा सहयोग दें। कोई ऐसा काम न करे कि विपक्ष को आलोचना का मौका मिले। सरकार को गरीब दुखियों की सहायता करनी है। सरकार कर रही है। जयराम ठाकुर बहुत अच्छे तरीके से सरकार का संचालन कर रहे है। सरकार को साधन चाहिए। साथ ही कहा कि, उन्हें विश्वास है प्रदेश के सभी कर्मचारियों ने कटौती पर बिलकुल बुरा नहीं मना होगा।
देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर से हड़कंप मचा हुआ है। यह वायरस पहले से और अधिक प्रभावशाली व भयानक रूप ले रहा है। इसी के चलते नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर, महासचिव भरत शर्मा, महिला विंग अध्यक्षा सुनेश शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सौरभ वैद, कोषाध्यक्ष शशि पाल शर्मा संविधान पर्यवेक्षक श्यामलाल गौतम ने सरकार को कुछ सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक दिन के वेतन को काटने का फरमान जारी किया है। यदि सरकार को सचमुच जरूरत है तो 1 दिन के वेतन कटने से किसी कर्मचारी को कोई एतराज नहीं हो सकता। नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ ने पिछले वर्ष भी सरकार को एक सुझाव दिया था कि यदि सरकार को कोरोना काल में सचमुच आर्थिक रूप से सहायता की जरूरत है या आर्थिक रूप से सरकार थोड़ा खुद को असहज महसूस कर रही है तो सरकार को नई पेंशन में आने वाले कर्मचारियों का जो पैसा काट कर कंपनी को दिया जाता है वह 10% पैसा तथा सरकार द्वारा दिए जाने वाला 14% पैसा कुल कर्मचारी और सरकार का 24% पैसा जो कंपनी को सरकार की तरफ से जा रहा है वह पैसा सरकार को अपने पास रखना चाहिए, जिससे सरकार के पास लगभग हर महीने 90 करोड़ पैसा बचेगा। कर्मचारी इसके बदले सिर्फ अपनी सुरक्षा की गारंटी पुरानी पेंशन चाहते हैं। जिससे सरकार को किसी भी तरह का आर्थिक नुकसान नहीं होगा। सरकार चाहे तो कंपनी में दिया अभी तक हिमाचल के कर्मचारियों का 5 हज़ार करोड़ भी वापस ले सकती है और यह पैसा आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए काफी कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का एक-एक दिन का वेतन इस तरह से काटना समझ से परे है जबकि सरकार के पास इतनी बड़ी रकम इस संकट के दौर में खर्च के लिए एक ऑप्शन है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार को यह सुझाव दिया है और साथ ही कहा है कि इस संबंध में पुनः एक लिखित पत्र सरकार को भेजा जाएगा ताकि सरकार इस संबंध में विचार करें। कोरोना काल में व्यर्थ में जो धन सरकार और कर्मचारियों का कंपनी के खाते में जा रहा है वह देश और प्रदेश के हित में प्रयोग में लाया जा सके।
कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार ने कई नए दिशा निर्देश जारी किए है। प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार बाहर से आने वाला हर हिमाचली सात दिन तक आईसोलेट रहेगा। वहीं इसी बीच कांग्रेस व भाजपा के बीच ज़ुबानी जंग भी लगातार जारी है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री व राष्ट्रीय सचिव सुधीर शर्मा ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने भाजपा सरकार के इस फ़रमान को तुग़लकी फ़रमान करार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकांश लोगों के पास घरों में अलग-अलग कमरे और शौचालय की व्यवस्था नहीं है। सरकार ने लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। शासन और प्रशासन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर में भी अगर सामाजिक संगठन आगे ना आए होते तो आईसोलेशन सेंटर में लोग भूखे मर जाते। सरकार के यह दावे है कि कोरोना के मरीज़ों के लिए अस्पतालों में पूरी सुविधा है पर यह खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अस्पतालों के अंदर CCTV केमरा लगवाए ताकि मरीज़ों के परिजन बाहर से उनका हाल चाल देख सकें और उनको व्यवस्था की पूरी जानकारी रहे। उन्होंने संयुक्त बयान में कहा की अगर बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को रहने की अलग व्यवस्था न हो तो वह उनसे सम्पर्क कर सकते है। सब अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में उचित प्रबंधन के साथ व्यवस्था करेंगे ताकि कोरोना महामारी को फैलने से रोका जा सके, उन्होंने ने कहा कि जो भी साधन उनके पास हैं वह पीड़ित तथा असहाय व्यक्तियों के लिए उपलब्ध करवाए जाएंगे और सारे समाज को मिलकर इस महामारी से लड़ना होगा। उन्होंने सामाजिक संगठनो से भी अपील की है कि वह भी आगे बढ़कर पहले की भाँति अपना योगदान दें। इस मौके पर पूर्व विधायक जगजीवन पाल, यादवेंद्र गोमा, संजय रत्न, किशोरी लाल, एवं कांग्रेस नेता केवल सिंह पठानीया, कमल किशोर, सूरिंदर मनकोटिया व OBC सेल के प्रदेश अध्यक्ष दिलाबर सिंह छोटू उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश में सोमवार से बैंक अब शाम 4 बजे बंद होंगे। बैंक में पब्लिक डीलिंग का समय सुबह 10 बजे दोपहर 2 बजे तक का होगा। कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर देश के कई राज्यों ने बैंकों के समय में बदलाव कर दिया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रदेश की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने मुख्य बैंकों के अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर यह फैसला लिया। प्रदेश के वित्त महकमे ने भी समिति के प्रस्ताव को मंजूर कर दिया है। अभी तक बैंक बंद करने का समय शाम पांच बजे रहता था। इसके अलावा पब्लिक डीलिंग का समय दस से चार बजे तक था। कुछ जिलों में नाइट कर्फ्यू के चलते बैंकों के समय में बदलाव किया गया है। 26 अप्रैल से एक मई तक प्रदेश में यह व्यवस्था लागू होगी। स्थिति की समीक्षा करने के बाद आगामी फैसला होगा। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि बिना मास्क के बैंक शाखाओं में आने वाले लोगों को सेवा नहीं दिन जाएगी। सभी बैंकों को 1 मई तक शाखाओं में रोजाना सिर्फ पचास फीसदी स्टाफ को ही बुलाने को कहा है। सरकार से मांग की गई कि एक मई से 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों के लिए शुरू होने वाले वैक्सीन अभियान में बैंक कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।
हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की अगुवाई में शिमला में मिले शिष्टमंडल द्वारा मुख्यमंत्री से की गई। जिसमें अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पवन मिश्रा, प्रांत अध्यक्ष पवन कुमार, उपाध्यक्ष डॉ मामराज पुंडीर, राज्य महामंत्री विनोद सूद शामिल रहे। इस संबंध में महासंघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी दर्शन लाल ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ की तरफ से शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर 13 सूत्रीय मांग पत्र सरकार को सौंपा गया है। जिसमें मुख्यमंत्री ने सभी मांगों को गौर करके क्रमबद्ध पूरा करने का आश्वासन दिया है। मांग पत्र में प्रमुख रूप से योग्यता पूरी करने वाले भाषा अध्यापकों को आरएंडपी रूल्स में सुधार करके टीजीटी बनाने, 2010 से पहले नियुक्ति टीजीटी को पदोन्नति में मुख्याध्यापक और प्रवक्ता की दोनों ऑप्शन बहाल करने, डाइट में कार्य कर रहे सभी अध्यापकों के प्रवक्ता होने के नाते डाइट का नियंत्रण उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन करने, 2012 से पहले पदोन्नत एचटी को पदोन्नति वेतन वृद्धि प्रदान करने, मार्च 2004 से पहले की पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग शामिल की गई है। इसके साथ वर्तमान में कोरोना के चलते स्कूलों को खोलने और चलाने के लिए पांच सुझाव रखे गए हैं। जिसमें सामान्य स्थिति होने पर बाहरवीं की परीक्षा करवाने, स्कूलों में बच्चों की एडमिशन करवाने के लिए 1 मई के बाद रोटेशन के आधार पर अध्यापकों को स्कूल बुलाने, स्कूलों में टीकाकरण के योग्य अध्यापकों का बिना टीकाकरण के प्रवेश वर्जित करने संबधी सुझाव सरकार के समक्ष रखे गए। शिक्षकों से जुड़ी ज्वलंत मांगों को लेकर मुख्यमंत्री ने महासंघ को पूरा करने का आश्वासन दिया है।
प्रदेश मे लगातार बढ़ रहे कोविड के सक्रमंण के दौरान एक तरफ प्रदेश सरकार ने एक मई तक सभी शिक्षण संस्थानो को बंद कर दिया है, वंही हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी में परिक्षाएं लगातार चल रही है। जिसकी NSUI ने कड़ी निंदा की है। NSUI प्रदेश महासचिव यासीन बट्ट ने कहा कि एक तरफ सरकार कोविड के खिलाफ लडा़ई लड़ने की बात कर रही और सभी शिक्षण संस्थानो को एक मई तक बंद कर रही, वही दूसरी तरफ विवि में ही बिना SOP का पालन करवाए परीक्षांए करवा कर प्रदेश के हजारों विद्यार्थीयों के जीवन को खतरे मे डाला जा रहा। यासीन बट्ट ने कहा कि जब इस वैश्विक महामारी के कारण स्कूलों में बोर्ड परीक्षाएं और कॉलेज परीक्षाएं स्थगित हो सकती है तो विश्वविद्यालय मे भी सभी प्रकार की परीक्षांए स्थगित की जाए। उन्होंने कहा कि जब विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति पर प्रदेश हाई कोर्ट मे मामला चला है। NSUI के साथ-साथ विभिन्न संगठनों द्वारा भी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे है। ऐसे में NSUI की सीधी मांग है कि जब तक कुलपति पर चल रहे मामले मे सुनवाई पूरी नही हो जाती तब तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत देश के निर्धन परिवारों को आगामी मई और जून माह के लिए निःशुल्क पांच-पांच किलो अनाज वितरित करने के निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का यह सराहनीय निर्णय है जिससे प्रदेश के निर्धन परिवार भी लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संकट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के हर वर्ग को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता प्राप्त हो रही है।
हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष नेगी निगम भंडारी ने हिमाचल सरकार तथा स्थानीय प्रशासन से आग्रह करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के कई जिला शिमला, किन्नौर, कुल्लू व लाहौल स्पीति में बर्फबारी व ओलावृष्टि से हुए भारी नुकसान का जायजा लेने के लिए स्थानीय हलका पटवारी को मौके पर जाने के आदेश दें तथा सूची बनाकर हर बागवानों को मुआवजा देने की कृपा करें। उन्होने कहा कि इस भारी बर्फबारी व ओलावृष्टि से उनके सेब के पौधे काफी नष्ट हो चुके हैं। नेगी ने कहा कि जहां अच्छी फलावरिंग को देखकर बागबान खासे उत्साहित नजर आ रहे थे, वहीं मौसम के अप्रैल माह में एकाएक बदलने से सेब की अच्छी फसल होने पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। उन्होने कहा कि इसके साथ-साथ चेरी, नाशपाती व पलम की फसलों को भी खासा नुक्सान पहुंचा है। इस क्षेत्र के लोगों की आर्थिकी इन्ही फसलों पर निरभर करती है और वर्ष भर का अधिकतर खर्चा भी इन फसलों पर निर्भर करता है। नेगी निगम भंडारी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि बागवानों की मजबूरी को समझते हुए बर्फबारी व ओलावृष्टि से हुए भारी नुकसान का आंकलन कर बागबानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर 24 अप्रैल को प्रदेश कांग्रेस के सभी जिलाध्यक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा वर्चुअल माध्य्म से कोविड़ को लेकर एक समीक्षा बैठक करेगें। इस बैठक में प्रदेश में बढ़ते कोरोना के मामलों को लेकर कांग्रेस पार्टी के योगदान, लोगों को सहयोग और सहत्यार्थ के बारे में चर्चा और रणनीति पर आपसी विचार विमर्श किया जाएगा। इसी के साथ पार्टी अध्यक्ष जिलाध्यक्षों को इस बारे आवश्यक दिशा निर्देश भी देंगे। कांग्रेस सचिव हरिकृष्ण हिमराल ने बताया कि प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर कांग्रेस बहुत चिंतित है। उन्होंने कहा कि पिछले साल भी प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने लोगों की सहत्यार्थ उल्लेखनीय योगदान दिया था और वह इस साल भी काँग्रेस पार्टी इसमें कोई कमी नही रहने देगी।कांग्रेस को आम लोगों के स्वाथ्य की चिंता है और इसी के चलते कांग्रेस पार्टी अपने सामर्थ्य से जितना भी सम्भव हो रहा है उसे कर रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल होने के नाते कांग्रेस अपने सामाजिक दायित्व से भी कभी पीछे नही हटी है और न हटेगी। उन्होंने लोगों से इस महामारी के प्रति पूरी तरह सजग रहने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें इस बीमारी के खात्मे के लिए सभी सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। हिमराल ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन शिमला व कांगड़ा में कोविड़ कंट्रोल रूम की स्थापना कर दी है। उन्होंने बताया कि शिमला मुख्यालय के कंट्रोल रूम में डॉक्टर दलीप सिंह, नेरचौक मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य की देख रेख में वालंटियर्स रामिन्दर फोन नम्बर 9418100036, वेद प्रकाश शर्मा 9418010004, मुकल गुप्ता 9218005555, ऊषा मेहता राठौर 7807666777, शशि बहल 8219718267 व किरण धान्टा 9459245592 को प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के परम देव शर्मा, मनीषा मेहता, मान सिंह ठाकुर व भगत राम कोविड़ हेल्पलाइन 0177 2805522 व 0177 2660169 पर किसी भी सहत्यार्थ व सूचना के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसी तरह कांगड़ा कंट्रोल रूम डॉ.राजेश शर्मा की देखरेख में डॉक्टर आदित्य 9736059190, डॉ.शाहील डोगरा 9805377031, डॉ.आस्था 7018705704, इंदिरा उप्पल 9882801180 व रंजना सचन वालंटियर्स से कोरोना से संबंधित किसी भी आपदा सुरक्षा व सहयोग के लिए उनके नाम के आगे दर्शाए गए दूरभाष पर सम्पर्क कर सकतें है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में कोविड-19 टीके की दूसरी खुराक ली। उन्होंने 4 मार्च को कोरोना की पहली खुराक ली थी। इसके उपरान्त, इलैक्ट्राॅनिक मीडिया के साथ बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीका लगवाने के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य में टीकाकरण अभियान सुचारू रूप से चल रहा है और अब तक वैक्सीन की 13.89 लाख खुराकें दी जा चुकी हैं। फेस मास्क का उपयोग, परस्पर दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन और नियमित रूप से हाथ धोना इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान देश में सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया जा रहा है, जो हमारे वैज्ञानिकों तथा डाॅक्टरों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। केंद्र सरकार ने 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों का टीकाकरण करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वीरवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार ने भी 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का निःशुल्क टीकाकरण करवाने का निर्णय लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ.सुरेखा चौपड़ा और चिकित्सा अधीक्षक डाॅ.रविंद्र मोक्टा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर परवाणू-सोलन अनुभाग में फोर लेन परियोजना का 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। वर्तमान में इस परियोजना की कुल लम्बाई 36.139 किलोमीटर में से 35.652 किलोमीटर कार्य पूरा हो चुका है और अनुबंध समझौता के अनुसार परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने पर टोल लगाने के प्रावधान के अनुसार, टोल लगाया गया है। उन्होंने कहा कि अनुबंध समझौता और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार टोल प्लाजा 19 अप्रैल से कार्यशील कर दिया गया है। इस टोल हाईवे पर ठेकेदार द्वारा 19 अप्रैल से 17 एसओएस टेलीफोन बूथ, पैट्रोल, व्हीकल रिकवरी वैन और पैरा मेडिकल स्टाफ सहित एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। टोल प्लाजा में स्थानीय लोगों को भी रोजगार प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों को मासिक पास की सुविधा उपलब्ध है। निजी वाहनों के लिए 285 रुपये प्रतिमाह की दर से टोल प्लाजा भवन से पास खरीदा जा सकता है। प्रवक्ता ने कहा कि सोलन में सपरून ओवर पास, तीन वायाडक्ट और अन्य छोटे कार्य प्रगति पर हैं जो जून 2021 तक पूर्ण कर लिए जाएंगे।


















































