मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रदेश में स्वचालित मौसम केंद्र ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) की संख्या बढ़ाने के लिए उपयुक्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वह बुधवार सायं यहां आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि एडब्ल्यूएस स्थापित करने से मौसम से संबंधित अद्यतन (रियल टाइम) डाटा उपलब्ध होगा, जिससे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में समय पर उचित कदम उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रदेश में ऑब्जर्वेटरी सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) को और सशक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को भी कहा। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ को आपात स्थिति से निपटने के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए जाएंगे। इन उपकरणों से गिरे हुए लेंटर व स्लैब उठाने और भारी स्टील की कटिंग सुविधा उपलब्ध होने से आपदा की स्थिति में बचाव कार्यों में अत्यधिक मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश के कारण प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में काफी संख्या में पेड़ गिरे हैं। इन पेड़ों की कटाई व निपटान वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि गिरे हुए पेड़ों के स्थान पर पौधरोपण करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं ।उन्होंने अधिकारियों को कहा कि कुल्लू जिला में सड़कें बाधित होने के दृष्टिगत गंभीर मरीजों को आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए अतिरिक्त (स्टैंड बाई) हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रदेश के विभिन्न भागों में चलाए जा रहे राहत व बचाव कार्य की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने आपदा प्रभावितों को हर संभव मदद प्रदान करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, प्रधान सचिव, सचिव व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सुक्खू सरकार ने 22 अगस्त को कैबिनेट मीटिंग बुलाई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक आपदा के कारण प्रदेश में उपजे ताजा हालात, मंडी, मध्यस्थता योजना, डिजास्टर मिटिगेशन और विधानसभा के प्रस्तावित मानसून सत्र को लेकर चर्चा होगी। बता दें कि प्रदेश में भारी बारिश ने कहर बरपाया है। कैबिनेट में राहत एवं पुनर्वास कार्य को लेकर चर्चा की जाएगी। इसमें सरकार भविष्य में बरसात के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बनाई जा रही योजना पर चर्चा करेगी। दरअसल, राज्य सरकार 800 करोड़ की योजना तैयार कर रही है। कैबिनेट से पहले इसकी गाइडलाइन फाइनल करने के दावे किए जा रहे हैं। इन्हें कैबिनेट में चर्चा को लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर एमएसआई योजना के तहत सेब खरीद का मूल्य 1.50 प्रति किलो बढ़ाकर 12 रुपए करने की घोषणा की है। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी अनिवार्य है। कैबिनेट की हरी झंडी के बाद ही बागवानी विभाग इसे नोटिफाई करेगा। हालांकि सरकारी उपक्रम एचपीएमसी और हिमफैड ने एमएसआइ के तहत सेब की खरीद शुरू कर दी है। मगर, इसके लिए बागवानों से अंडरटेकिंग ली जा रही है।
हवाई सर्वेक्षण के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का लिया जायजा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज हवाई सर्वेक्षण के माध्यम से जिला कांगड़ा के फतेहपुर और इंदौरा विधानसभा के क्षेत्रों में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने पौंग जलाश्य से आगे की तरफ बाढ़ के कारण फंसे लोगों को निकालने के लिए चलाए गए राहत अभियान का जायजा भी लिया। इसके पश्चात वह डमटाल और शेखपुरा पहुंचे जहां जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत की। उन्होंने खाद्य पदार्थों, चिकित्सा सुविधा, अन्य आवश्यक दवाओं सहित एंटी-वेनम दवाई पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राधा स्वामी सत्संग भवन शेखपुरा में स्थापित राहत शिविर में प्रभावितों के साथ भोजन किया। मुख्यमंत्री ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए कहा कि पौंग जलाशय के बहाव क्षेत्र में बाढ़ के कारण इंदौरा और फतेहपुर क्षेत्र की 27 पंचायतें प्रभावित हुई हैं, जिनमें से 22 पंचायतें अधिक प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों से अब तक लगभग 1150 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना, सेना, राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस और होमगार्ड को बचाव अभियान में लगाया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन प्रभावित लोगों के लिए मुफ्त आवास और भोजन के अलावा चिकित्सा सहायता की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों में यह राज्य की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है और इससे घरों और फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत और मुआवजे के तौर पर इन क्षेत्रों के लिए एक विशेष पैकेज प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस आपदा के समय प्रभावितों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है और इसके तहत इस क्षेत्र के बाढ़ प्रभावितों को भी बढ़ा हुआ मुआवजा प्रदान किया जाएगा। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी और मकानों के पुनर्निर्माण के लिए भी हरसंभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जिन छात्रों की पढ़ाई प्राकृतिक आपदा के कारण प्रभावित हुई है उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री स्थानीय हेलीपैड पर भी गए और आपदा से सुरक्षित निकाले गए प्रवासी मज़दूरों से भेंट कर उन्हें विश्वास दिलाया कि प्रदेश सरकार उनकी सहायता के लिए सभी व्यवस्थाएं करेगी और यदि वे अपने राज्य वापस जाना चाहते हैं तो उसके अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने प्रशासन को इन सभी प्रवासी मज़दूरों को रोज़मर्रा का सामान उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए। विधानसभा मानसून सत्र के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश भर में इस आपदा के समय सरकार की प्राथमिकता बचाव और राहत उपाय कर स्थिति को सामान्य करना है। उन्होंने कहा कि यदि इस समय सत्र बुलाया जाता है तो बचाव और राहत अभियान में लगे सुरक्षाकर्मियों को विधानसभा से संबंधित कर्त्तव्यों के लिए तैनात करना होगा, जिससे राहत प्रक्रिया में बाधा आएगी। काठगढ़ शिव मंदिर समिति के अध्यक्ष ओपी कटोच ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक लाख रुपये का चेक भेंट किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार, विधायक भवानी सिंह पठानिया और मलेंदर राजन, राज्य औद्योगिक विकास निगम के उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अजय महाजन, उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल, पुलिस जिला नूरपुर के पुलिस अधीक्षक अशोक रतन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
एमआईएस के तहत सेब खरीद मूल्य 1.50 रुपये प्रति किलो की वृद्धि प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने करार दिया ऐतिहासिक निर्णय आपदा से सेब को भारी नुकसान हुआ है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एमआईएस के तहत सेब खरीद मूल्य में 1.50 रुपए बढ़ौतरी का ऐलान किया। यानी एमआईएस का सेब अब 12 रुपए प्रति किलो के हिसाब से लिया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सौरव चौहान ने सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि आपदा के इस दौर में विपक्ष यानी बीजेपी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से हज़ारों करोड़ों का नुक़सान हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी टीम के साथ ग्राउंड जीरो से काम कर रही है। यानी प्रदेश को रीस्टोर करने के लिए सीएम सुक्खू पहले दिन से काम कर रहे है। सुक्खू सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों की सम्मान राशि में 20 हज़ार रुपये की वृद्धि पर प्रदेश कांग्रेस ने जमकर स्वागत किया है। पीसीसी प्रवक्ता सौरव चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा लिये गए निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हैं तो सब कुछ मुमकिन हैं। सौरव चौहान ने कहा कि सीएम सुक्खू ने ठीक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों को मिलने वाली सम्मान राशि 15000 से बढ़ाकर 25000 तथा स्वतंत्रता सेनानियों की विधवाओं को मिलने वाली राशि 15,000 से 20,000 करने का की घोषणा की। यह अपने आप में। व्यवस्था परिवर्तन है। उन्होंने मानव कि स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को दी जाने वाली पेंशन में भी 50 फीसदी बढ़ौतरी की घोषणा की। शहीदों को अब 20 लाख की जगह अब 30 लाख दिए जाएंगे। मनरेगा की दिहाड़ी 224 से 240 रुपए तथा ट्राइबल एरिया में इसे 280 से 294 करने की बात कही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी शिशु मातृ योजना की शुरुआत तथा इसके लिए 50 करोड़ के बजट का प्रावधान करने की ऐलान किया।
उप मुख्यमंत्री ने पेयजल योजनाओं के नुकसान का लिया जायज़ा सभी स्कीमों से 48 घंटे के भीतर पेयजल आपूर्ति बहाल करने के दिए निर्देश उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बारिश और बाढ़ से पेयजल को हुए नुकसान का जायज़ा लेने के लिए जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की। बैठक में जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता संजीव कौल, धर्मेेंद्र गिल, मुख्य अभियंताओं सहित प्रदेश के सभी अधीक्षण अभियंता व अधिशाषी अभियंता शामिल रहे। बैठक में प्रमुख अभियंता ई. संजीव कौल ने जानकारी दी कि पिछले महीने हुई बरसात में क्षतिग्रस्त हुई स्कीमों में से विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की दिन-रात मेहनत से लगभग सभी स्कीमों को आंशिक और पूर्णरूप से बहाल कर दिया था परन्तु हाल ही में हुई बारिश और बाढ़ में पेयजल योजनाओं को पुन: भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि अभी तक बारिश और बाढ़ के कारण 9508 पेयजल स्कीमें क्षतिग्रस्त हो गई हैं जिनमें से 8273 को आंशिक और पूर्णरूप से बहाल कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक विभाग को 1842 करोड़ का नुकसान हो चुका है। पिछले 4 दिनों के भीतर हुई बारिश में ही विभाग को 212 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जिलावार व वृतवार हुए नुकसान और प्रगति रिपोर्ट की जानकारी ली। उन्होंने विभाग के कर्मचारियों और फील्ड अधिकारियों के काम पर संतुष्टि जताते हुए कहा कि विभाग बरसात, भूस्खलन और उफनते नदी-नालों के बावजूद स्कीमों को ठीक करने और बहाल करने में जुटा हुआ है। उन्होंने माना कि हालांकि इस बार मुश्किलें ज्यादा हैं। रोड़ टूटे हुए हैं। स्कीमों तक पहुंचने में भी कठिनाई आ रही है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उम्मीद जताई कि विभाग जल्दी ही स्कीमों को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम हो पाएगा। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां अधिक नुकसान की वजह से देरी से स्कीमों की बहाली की संभावना है वहां 48 घंटे के भीतर पेयजल की वैकल्पक व्यवस्था की जाए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाफ दिन-रात काम करके लोगों को पेयजल मुहैया करवाने की कोशिश करें मगर साथ ही ध्यान दें कि किसी कर्मचारी या अधिकारी का जीवन जोखिम में न पड़े। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों उनकी टीम केंद्रीय मंत्री से भी मिली थी। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रदेश में हो रहे नुकसान के मद्देनज़र केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। उन्होंने पेयजल स्कीमों की बहाली के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। उप मुख्यमंत्री ने विभाग की स्कीमों को हुए नुकसान के बारे में केन्द्र को अवगत करवाने के निर्देश भी दिये। उप मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि स्कीमों की बहाली के लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने स्कीमों की मरम्मत के लिए विभाग को तुरंत 50 करोड़ रुपये की राशि जारी करने का आश्वासन दिया। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पेयजल की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न करें। पानी के सैंपल नियमित तौर पर लिए जाएं और पानी में उचित मात्रा में क्लोरिनेशन भी की जाए। उन्होंने सभी मुख्य अभियंताओं से व्यक्तिगत तौर पर इसकी निगरानी करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज शिमला के कृष्णा नगर का दौरा कर, भूस्खलन के कारण प्रभावित हुए परिवारों से भेंट की। प्रभावितों को रहने के लिए सामुदायिक हाल में वैकल्पिक स्थान प्रदान किया गया है। उन्होंने प्रभावितों के साथ संवाद भी किया। राज्यपाल ने प्रभावितों को राज्य रेडक्रॉस के माध्यम से राहत सामग्री भी वितरित की। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और राष्ट्रीय रेडक्रॉस प्रबंधन समिति की सदस्य डॉ. साधना ठाकुर भी उपस्थित थीं। प्रदेश सहित शिमला शहर में लगातार हो रही भारी बारिश के दौरान कई जगहों पर भू-स्खलन के कारण जान-माल की क्षति हुई है। शहर के कृष्णा नगर में कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और कुछ अन्य खतरे की जद में हैं। इस अवसर पर स्थानीय निवासियों द्वारा राज्यपाल को अवगत करवाया गया कि यहां पर लगभग 250 से 300 परिवार प्रभावित हुए हैं। शुक्ल ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में हर व्यक्ति को मदद के लिए आगे आना चाहिए। राज्य सरकार हर स्तर पर प्रभावितों को राहत पहुंचा रही है। उन्होंने जिला प्रशासन को घरों के लिए खतरा बने पेड़ों को हटाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्होंने यहां रहने वाले प्रभावित परिवारों के लिए बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
शिमला के गेयटी थियेटर में जारी दो दिवसीय चित्र प्रदर्शनी बुधवार, 16 अगस्त को संपन्न हुई । प्रदर्शनी भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के केंद्रीय संचार ब्यूरो की शिमला इकाई द्वारा आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में भारत सरकार के 9 वर्षों के कार्यकाल की उलब्धियों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। देश के विकास की झलक दिखलाती प्रदर्शनी को देखने में आम जनता ने ख़ासी रुचि दिखाई। एक तरफ़ जहां गरीब, किसानों, महिलाओं के लिए शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, शहरी विकास इत्यादि के क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति की झलक भी चित्रों के माध्यम से दिखाई गई। प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश से देश के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के बलिदान की गाथा भी प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी के इस हिस्से ने भी लोगों को बहुत आकर्षित किया। केंद्रीय संचार ब्यूरो शिमला के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी प्रकाश पंत ने कहा कि इस दो दिवसीय चित्र प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य चित्रों के माध्यम से केंद्र सरकार की 9 वर्षों में किये गए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और वीरों की गाथाओं को जनता तक पहुंचाना है। चित्र प्रदर्शनी के दौरान एनसीसी कैडेट्स के लिये विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। पहले दिन 15 अगस्त को राष्ट्र निर्माण के विभिन्न विकासात्मक विषयों पर चित्रकला एवं संदेश लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। संदेश लेखन में कैडेट प्रत्युष ने प्रथम, कैडेट अंजलि सोनी ने द्वितीय एवं कैडेट शीतल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया वहीं चित्रकला में कैडेट गुड्डू ने प्रथम, कैडेट धनंजय ने द्वितीय एवं तीसरा स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन 16 अगस्त को एन सी सी कैडेट्स के लिये एक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रश्नोत्तरी में कैडेट मोहित , आयुष , जीत सिंह , अक्षिता , शगुन , सुदीक्षा, रजत , यामिनी , स्नेहा और सुनीता विजेता रहे । सभी विजेताओं को विभाग की तरफ से पुरस्कृत किया गया। दो दिवसीय चित्र प्रदर्शनी के दौरान संभागीय आयुक्त, शिमला, संदीप कदम विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रदर्शित चित्रों की सराहना की। प्रदर्शनी को भारी संख्या में स्थानीय लोगों देखा और पिछले 9 वर्षों में केंद्र सरकार की योजनाओं की अभूतपूर्व प्रगति की जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री ने शिमला में आपदा प्रभावित लालपानी क्षेत्र का किया दौरा प्रदेश में शहरी जल निकासी प्रणालियों को मजबूत करने और पहाड़ी अस्थिरता को रोकने के लिए उचित जल प्रबंधन की आवश्यकता है। राज्य सरकार जल निकासी प्रणालियों को मजबूत करने और निर्माण के लिए ठोस संरचनात्मक डिजाइन सिद्धांतों को एकीकृत करने के लिए एक व्यापक योजना विकसित की जाएगी। यह बात मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार देर शाम भूस्खलन प्रभावित शिमला के लालपानी क्षेत्र का दौरा करने के पश्चात कही। उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्र में नुकसान का जायजा लिया और जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की समय पर प्रतिक्रिया से नुकसान काफी कम हो गया है क्योंकि इन घरों में रहने वाले लोगों को आसन्न खतरे के कारण पहले ही खाली करा लिया गया था। उन्होंने कहा कि इन उपायों के अलावा राज्य सरकार एक व्यापक, दीर्घकालिक आपदा योजना तैयार कर रही है। इसके कार्यान्वयन के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भविष्य की आपदाओं के प्रभाव को कम करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश के कारण सोमवार को 60 से अधिक लोगों की जान चली गई और यह संख्या बढ़ने की संभावना है। इसका प्रभाव शिमला में सबसे गंभीर रहा, जबकि कांगड़ा जिला के फतेहपुर में किसानों को फसल का नुकसान हुआ। पौंग बांध से पानी छोड़े जाने के कारण लगभग 300 लोगों के फंस जाने के बाद बचाव अभियान चलाया गया और सभी व्यक्तियों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया। उन्होंने कहा कि लगातार भारी बारिश के कारण मंडी जिले में भी काफी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री ने आपदा के समय में नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर द्वारा केवल राजनीति करने पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार राहत और बचाव कार्यों पर दृढ़ता से ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने विपक्ष द्वारा इस संकट की स्थिति में विधानसभा के विशेष सत्र की मांग की उपयुक्तता पर सवाल उठाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार दस दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पुलिस कर्मियों की आपदा प्रतिक्रिया प्रयासों के लिए उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने अपने सुरक्षा कवर को भी कम किया है। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक दिखावे में उलझने के बजाय मौजूदा स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रदेश हित को प्राथमिकता देने को कहा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, ओएसडी रितेश कपरेट, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उपायुक्त आदित्य नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर ने आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को वर्ष 2022-23 के लिए आयोग की 52वीं वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर आयोग के सदस्य डॉ. रचना गुप्ता, राकेश शर्मा, कर्नल राजेश कुमार शर्मा और डॉ. नैन सिंह तथा आयोग के सचिव डीके रतन भी उपस्थित थे। राज्यपाल ने आयोग द्वारा इस वर्ष के दौरान विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करने में सभी सदस्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर ने राज्यपाल को अवगत करवाया कि राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) की सहायता से वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) और ऑनलाइन भर्ती आवेदन (ओआरए) सहित ऑनलाइन भर्ती प्रणाली (ओआरएस) को बेहतर बनाने और इसे उपयोगकर्ताओं के अधिक अनुकूल और त्रुटि रहित बनाने के लिए बेहतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षाओं का आयोजन केवल सीसीटीवी युक्त संस्थानों में ही सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रणाली को सुदृढ़ किया गया है। अभ्यर्थियों की मांग और बदलते परिदृश्य के दृष्टिगत व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एचपीपीएससी-आईसीटी परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोग को परियोजना श्रेणी में 'राज्य सरकार 20वें एसआईजी ई-गवर्नेंस पुरस्कार-2022Ó से भी सम्मानित किया गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्य तिथि पर आज यहां रिज पर स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी एक कुशल वक्ता और स्पष्टवादी नेता थे। सभी राजनीतिक दलों के नेता उनका आदर करते थे। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्श सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप महापौर उमा कौशल, पार्षदगण, उपायुक्त आदित्य नेगी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अभी और लोगों के होने की आशंका, तलाशी अभियान जारी राजधानी शिमला के समरहिल में 14 अगस्त को हुए भारी भूस्खलन के बाद शिव मंदिर में दबे लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, स्थानीय पुलिस और होम गार्ड द्वारा बचाव अभियान जारी है। एसडीएम शिमला (शहरी) भानु गुप्ता ने बताया कि अब तक 13 शव बरामद निकाल लिए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक 21 शव हो सकते हैं, जिनमें से पिछले दो दिनों में 14 शव बरामद किए हैं। एसडीएम ने कहा कि खोज अभियान जारी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, स्थानीय पुलिस और होम गार्ड अभियान में लगे हुए हैं। अगर हमें कुछ लोगों के जीवित होने की कोई सकारात्मक खबर मिलती है, तो हम उन्हें ठीक से बचा लेंगे। समरहिल में एक ही परिवार के सात लोग भी लापता हैं। अपनों का अभी तक पता नहीं चलने से परिजन परेशान हैं। ये वो लोग हैं जो शिव मंदिर में थे। लेकिन इसके अलावा रास्ते से निकल रहे कितने लोग भूस्खलन की चपेट में आए उसकी जानकारी नहीं है। स्थानीय पार्षद ने यह जानकारी दी है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार जब भूस्खलन हुआ तो मंदिर में पूजा का कार्य चल रहा था। अधिकतर लोग मलबे के साथ नीचे बह गए। इसको देखते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व स्थानीय प्रशासन की एक टीम को नीचे नाले में भेजकर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वहीं, शिमला पुलिस ने अपील की है कि यदि शिवबाड़ी मंदिर हादसे के बाद शिमला व समरहिल के आसपास के क्षेत्र से यदि कोई व्यक्ति गुमशुदा है तो कि उसका नाम, पता, मोबाइल नंबर व संपूर्ण जानकारी साझा करें। इसके लिए पुलिस स्टेशन बालूगंज 01772830193, पुलिस कंट्रोल रूम शिमला 01772800100 व 112 पर सूचित करें। दरअसल, सावन का सोमवार होने के कारण सुबह से ही समरहिल के शिवमंदिर में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। भारी बारिश के चलते सुबह करीब 7:15 बजे धमाके के साथ भारी मलबा पेड़ों समेत मंदिर पर जा गिरा। इससे यह मंदिर पूरी तरह से मलबे में दब गया। जो लोग मंदिर पहुंचे थे, उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला।
कांगड़ा में 6, शिमला में 2 और मंडी व सिरमौर में 1-1 टीम कर रही बचाव कार्य हिमाचल प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में बादल फटने और लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़, भूस्खलन और इमारत ढहने की घटनाएं हो रही हैं। इस आपदा की घड़ी में मानसून सीजन के शुरुआत से ही 14 वाहिनी एनडीआरएफ की टीमें दिन-रात हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थान पर राहत एवं बचाव कार्य कर रही हैं। पिछले 3 दिनों से हो रही लगातार बारिश से ब्यास नदी का जलस्तर भी बहुत बढ़ गया है, जिसके कारण पौंंग डैम का पानी खतरे के निशान पर पहुंच गया है तथा पौंग डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है पौंंग डैम से पानी छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बन गया है। लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ की 6 टीमें बलजिंदर सिंह, सेनानी के मार्गदर्शन में कांगड़ा जिले के विभिन्न स्थानों पर दिन-रात राहत एवं बचाव कार्य कर रही हैं। कांगड़ा जिले में 3 टीमें इंदौरा, 1 टीम ज्वालामुखी और 2 टीमें फतेहपुर में, जबकि जिला शिमला में समर हिल में 2 टीमें, सिरमौर जिला के काला कालाअंब में 1 और जिला मंडी के धर्मपुर में 1 टीम राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई है। एनडीआरएफ द्वारा अभी तक ज्वालामुखी क्षेत्र से 67 लोगों को, इंदौरा से 138 लोगों को एवं फतेहपुर से 7 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और वाहिनी की 2 अन्य टीमों द्वारा समर हिल शिमला से भूस्खलन रेस्क्यू ऑपस के दौरान अभी तक 4 मृत देह को मलबे से बाहर निकाला गया है। ऑप्स के दौरान सभी रेसस्क्यूर्स का मोराल बहुत उच्च दर्जे का है और सभी रेसस्क्यूर्स पूरे जोश के साथ रेस्क्यू ऑप्स में तैनात हैं। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।
हिमाचल प्रदेश में पिछले 72 घंटों से लगातार जारी रही बारिश ने तबाही मचा दी है। शिमला के कृष्णानगर विष्णु मंदिर क्षेत्र में बड़ा भूस्खलन हुआ है। करीब छह भवनों के ढहने की सूचना है। दो से तीन और मकानों को खतरा पैदा हो गया है। भूस्खलन में नगर निगम का इकलौता स्लॉटर हाउस भी जमींदोज हो गया है। पार्षद बिट्टू कुमार के अनुसार दो-तीन लोग मलबे में दबे हुए हैं। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पहले ही यहां दरारें शुरू हो गई थीं। ऐसे में लोग अपना सामान भी निकल रहे थे। चार नेशनल हाईवे और 857 सड़कें बंद सूबे में चार नेशनल हाईवे और 857 सड़कें बंद हैं। इसके अतिरिक्त 4285 बिजली ट्रांसफार्मर और 889 जलापूर्ति योजनाएं भी बंद पड़ी हैं। मंडी जिले में सबसे अधिक 323 और शिमला 234 सड़कें बाधित हैं। मंडी जिले में 2610 और शिमला में 808 बिजली ट्रांसफार्मर ठप पड़े हैं। मंगलवार को किरतपुर-नेरचौक फोरलेन को घुमारवीं के पनोह के पास भारी नुकसान हुआ है। फोरलेन एक तरफ से धंस गया है। मानसून में अब तक 83 लोगों की मौत राज्य में इस मानसून सीजन के दौरान 24 जून से 14 अगस्त तक 83 लोगों की मौत हो चुकी है। 304 घायल हुए हैं। अब तक 1442 घर ढह गए हैं। 8160 घरों को नुकसान पहुंचा है। 272 दुकानों व 2997 गोशालाओं को भी नुकसान हुआ है। मानसून में अभी तक 7170.85 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। राज्य में भूस्खलन की 112 और अचानक बाढ़ की 58 घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में आज स्वतंत्रता दिवस समारोह गरिमामय व सादगी पूर्ण तरीके से मनाया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान, न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ, न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, न्यायमूर्ति रंजन शर्मा, न्यायमूर्ति बी.सी. नेगी और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला उपस्थित थे। अध्यक्ष, हि.प्र. राज्य मानवाधिकार आयोग के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एस. राणा, लोकायुक्त हिमाचल प्रदेश न्यायमूर्ति सी.बी. बरोवालिया, पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी.के. शर्मा, महाधिवक्ता अनूप रतन, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकुश दास सूद, भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल बलराम शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता और उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सदस्य, रजिस्ट्रार, न्यायिक अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भीइस अवसर पर उपस्थित थे। उच्च न्यायालय रजिस्ट्री, जिला न्यायालय शिमला, महाधिवक्ता कार्यालय, भारत के सहायक सॉलिसिटर जनरल, हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी व हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया।
आम जनता के लिए शनिवार और रविवार को दोपहर 2 से सायं5 बजे तक खुला रहेगा राजभवन राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज हिमाचल प्रदेश राजभवन को औपचारिक रूप से आम जनता को समर्पित किया। लेडी गवर्नर जानकी शुक्ल भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं। हिमाचल प्रदेश राजभवन आम जनता के लिए प्रत्येक शनिवार और रविवार को दोपहर २ बजे से शाम ५ बजे तक खुला रहेगा। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि बार्नस कोर्ट, जो अब राजभवन है, १८३२ में निर्मित ब्रिटिश समय का एक विरासत भवन है। इसके निर्माण में भारतीय कुशल कारीगरों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस इमारत का विशेष महत्व है क्योंकि यह कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। उन्होंने कहा कि यह भवन महज राजकीय महत्व के कार्यक्रमों के लिए सीमित नहीं होना चाहिए, इसी सोच के साथ अमृत काल में उन्होंने इसे आम जनता के लिए खोला है ताकि वे भी इस ऐतिहासिक भवन का अवलोकन कर सकें और इसके इतिहास के बारे में जानकारी ले सकें।े राज्य के स्कूली छात्रों और दस वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों के लिए राजभवन में प्रवेश निःशुल्क होगा, जिसके लिए उन्हें प्रवेश के समय अपना वैध पहचान-पत्र दिखाना होगा। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों, राज्य और बाहरी राज्यों के आगंतुकों को राजभवन में प्रवेश के लिए ३० रुपये शुल्क अदा करना होगा। विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ६० रुपये होगा। दिव्यांग व्यक्यिों और राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार विजेताओं के लिए प्रवेश निःशुल्क होगा। प्रवेश शुल्क के तहत ६ छायाचित्र की सॉफ्ट कॉपी एवं राजभवन ब्रोशर निःशुल्क उपलब्ध करवाये जायेंगे। राजभवन में प्रवेश से पहले आगंतुकों को बार्नस कोर्ट के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का वर्णन करने वाली एक लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी। एक समय में किसी भी समूह से १५ व्यक्ति राजभवन में प्रवेश कर सकेंगे तथा स्कूली विद्यार्थियों के समूह में ३० विद्यार्थी शामिल होंगे। .०.
इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना आरंभ करने की घोषणा स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय समारोह आज ऐतिहासिक रिज मैदान, शिमला में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और मार्च पास्ट की सलामी ली। परेड में पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट्स एंड गाइड की टुकड़ियां शामिल हुईं, जिसका नेतृत्व पुलिस उप-अधीक्षक प्रणव चौहान ने किया। भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश में आई आपदा के बीच आज प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम सादगी के साथ आयोजित किए गए। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी और कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए जश्न मनाने का यह सही समय नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में प्रदेश पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। कई स्थानों पर बादल फटने और पहाड़ खिसकने की प्रलयंकारी घटनाएं सामने आई हैं। लोगों द्वारा तिनका-तिनका जोड़कर बनाए गए घर इस आपदा के दौरान मलबे में दब गए हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं और रोते बिलखते लोगों को देखकर उनका मन अत्यंत दुखी है। उन्होंने कहा कि पिछले चौबीस घंटे में हमने 50 बहुमूल्य जीवन खोए हैं। हिमाचल प्रदेश में मानसून आने के बाद से 300 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। उन्होंने इस अवसर पर सभी मृतकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रभावित परिवारों के लिए यह मुश्किल की घड़ी है लेकिन राज्य सरकार, प्रदेश के लोगों के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रभावितों के घाव पैसे से नहीं भरे जा सकते हैं, लेकिन राज्य सरकार एक-एक पैसा जोड़ कर सभी प्रभावितों का घर बसायेगी। उन्होंने कहा कि पूरी सरकार एकजुटता के साथ हिमाचल प्रदेश को संकट से निकालने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रासदी को देखते हुए इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम सेरेमोनियल रूप से मनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपदा से भारी तबाही हो रही है तथा यह पिछले 50 साल की सबसे बड़ी आपदा है। जगह-जगह घर और सड़कें टूट रही हैं। किसानों के खेत व फसलें तबाह हो रही हैं और पूरे प्रदेश में आपदा से भारी नुकसान हो रहा है। इस त्रासदी का हिमाचल प्रदेश के सभी लोग बड़ी मजबूती के साथ सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिला लाहौल-स्पिति के चंद्रताल में फंसे 303 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला। अपनी जान की परवाह न करते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी ने ये मुश्किल मिशन पूरा किया और सभी मेहमानों को सुरक्षित निकाला। उन्होंने कहा कि इस आपदा में राहत कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विश्व बैंक ने भी प्रदेश सरकार की सराहना की है। उन्होंने किसानों और बागवानों को विश्वास दिलाया कि उनके उत्पादों को हर हाल में मण्डियों तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पंचायत स्तर तक सभी सम्पर्क मार्गों को खोलने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाई है और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समयबद्ध सभी सड़कों को खोला जाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे छोटे से राज्य में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान है। आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहे हिमाचल को राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए केन्द्र सरकार से आर्थिक मदद की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद व्यक्त की कि जल्द ही केन्द्र सरकार प्रदेश को अंतरिम राहत की पहली किस्त जारी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष जुलाई माह में आपदा के दौरान गम्भीर संकट की स्थिति को देखते हुए सरकार ने राहत का एक विशेष पैकेज घोषित किया है। इससे पूर्व घर को आंशिक नुकसान होने पर 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती थी। लेकिन राज्य सरकार ने इस सहायता राशि को दस गुना बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि दुकानों और ढाबों को नुकसान होने पर, सामान के एवज में, पहले सिर्फ 10 हजार रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। किरायेदार के सामान को नुकसान होने पर, पहले 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलती थी जिसे बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कृषि और बागवानी भूमि में सिल्ट आने पर पहले लगभग 1400 रुपये प्रति बीघा मुआवजा दिया जाता था, जिसे बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रति बीघा किया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि और बागवानी योग्य भूमि को नुकसान पर, पहले 3 हजार 600 रूपये प्रति बीघा की आर्थिक सहायता दी जाती थी, जिसे राज्य सरकार ने 10 हजार रुपये प्रति बीघा कर दिया है। उन्होंने कहा कि आपदा में गाय-भैंस की मृत्यु पर मिलने वाले मुआवजे को 37.50 हजार रुपये से बढ़ाकर 55 हजार रुपये किया गया है। इसके अतिरिक्त भेड़ और बकरी की मौत पर मिलने वाली 4 हजार रुपये की मदद को बढ़ाकर 6 हजार रुपये कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के मन्त्री, विधायक और प्रशासन आम जनता को तुरन्त राहत प्रदान करने के लिए मौके पर पहुंच रहे हैं और प्रदेश सरकार विशेष पैकेज के तहत प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए 100 करोड़ रूपये खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त राज्य सरकार ने आपदा की तैयारी के लिए एक दीर्घकालीन योजना तैयार की है, जिस पर लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च किये जायेगें, ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं के दुष्प्रभाव को कम किया जा सके। प्रदेश मेंकृ कृषि, बागवानी, वन और जल क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रत्येक जिले में भूस्खलन, हिमस्खलन, बाढ़ और भूकम्प सम्बंधी उच्च स्तरीय वैज्ञानिक डेटाबेस का विकास एवं आपदा प्रबन्धन को मजबूत किया जायेगा, जिससे इन आपदाओं से होने वाले नुकसान को रोका जा सके। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि विधवाओं के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमन्त्री विधवा एवं एकल नारी आवास योजना शुरू की है। इसके तहत इस वर्ष, 7 हजार ऐसी महिलाओं को मकान बनाने के लिए, प्रति महिला डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों के सहयोग से आने वाले चार वर्षों में हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर राज्य बनाया जाएगा और आने वाले दस वर्षों में हिमाचल प्रदेश, देश का सबसे समृद्धशाली राज्य बनेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों को प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाली सम्मान राशि को 15000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 25000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की तथा जिन स्वतंत्रता सेनानियों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी पत्नियों को प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही सम्मान राशि को भी 15,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की। उन्होंने शत्रु सेना के विरुद्ध सैन्य अभियान के दौरान युद्ध के दौरान शहीद होने अथवा घायल या गुम होने वाले सैनिकों के आश्रितों को प्रदेश सरकार द्वारा अनुग्रह अनुदान राशि में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि युद्ध या युद्ध जैसी परिस्थितियों में शहीद सैनिक के आश्रितों को 20 लाख रुपये के स्थान पर अब 30 लाख रुपये प्रदान किये जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉन ऑपरेशनल क्षेत्रों में अथवा ऐसे ऑपरेशनल क्षेत्रों, जहां युद्ध न हो, में शहीद होने वाले सैनिक के आश्रितों को 5 लाख रुपये के स्थान पर अब 7 लाख 50 हजार रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियान के दौरान 50 प्रतिशत से अधिक अपंगता वाले सैनिकों को 3.75 लाख रुपये तथा 50 प्रतिशत से कम की अपंगता वाले सैनिकों को 1.50 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने विधवा पुनर्विवाह योजना के अन्तर्गत दी जानी वाली सहायता राशि को 65 हजार रुपये को बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की घोषणा भी की। उन्होंने मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी को सामान्य क्षेत्र में 224 से 240 रुपये तथा जनजातीय क्षेत्र में 280 से 294 रुपये करने की घोषणा की। इस घोषणा से मनरेगा में काम करने वाले 9 लाख परिवार लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पूरक पोषण के रूप में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं तथा 6 माह से 6 वर्ष के बच्चों व कुपोषित बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य सम्बंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना को आरम्भ करने की घोषणा करते हुए कहा कि इस योजना के लिए 50 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रावधान किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों में शिशु और माता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि आपदा में बागवानों को काफी नुकसान पहुँचा है, जिसे उन्होंने स्वयं देखा है। उन्होंने सेब, आम और लीची फलों के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत वर्ष 2023 में बढ़ौतरी की घोषणा की। उन्होंने सेब के समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक डेढ़ रूपये की बढ़ौतरी कर इसे 10.50 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये करने की भी घोषणा की। रिज तक पैदल पहुंचे मुख्यमंत्री इससे पूर्व राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास ओक ओवर से पैदल रिज तक पहुँचे। रास्ते में उन्होंने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के बाद ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू पैदल ही रिज से ओक ओवर पहुंचे। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल ब्राक्टा, विधायक हरीश जनारथा, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची, हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम, मुख्यमंत्री के ओएसडी रितेश कपरेट, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, एडीजीपी अभिषेक त्रिवेदी, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजभवन परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। लेडी गवर्नर जानकी शुक्ल भी इस मौके पर उपस्थित रहीं। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए उनके सुखमय एवं समृद्ध जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है जब देश को विदेशी साम्राज्य की बेड़ियों से आजादी मिली। उन्होंने कहा कि असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और वीर सपूतों के संघर्ष ने हमें आजादी दिलाई है। शुक्ल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर, हम उन सभी देशभक्तों और वीर सपूतों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने आजादी के बाद देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने प्रदेश की प्रगति एवं सर्वांगीण विकास की कामना करते हुए कहा कि हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हम और अधिक समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ देश एवं प्रदेश की प्रगति के लिए अपने कर्तव्य का निर्वहन करेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल ने राजभवन कर्मियों को राष्ट्रीय ध्वज भी प्रदान किए। इस मौके पर राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा भी उपस्थित थे।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने 15 अगस्त को अपने कॉर्पोरेट कार्यालय ऋषिकेश के साथ-साथ अपने विभिन्न परियोजनाओं और यूनिट कार्यालयों में 77वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरके विश्नोई ने संगठन के सभी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के उल्लेखनीय योगदान को याद करते हुए निगम के कर्मचारी वे प्रसन्नता और अटूट देशभक्ति की गहन भावना से ओत-प्रोत थे। इस प्रतिष्ठित दिन पर जे. बेहरा, निदेशक (वित्त) ने ऋषिकेश में कॉर्पोरेट कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया, उसके बाद सभी एकत्रित कर्मचारियों को संबोधित किया। टेहरी एचपीपी में, शल्लिंदर सिंह, निदेशक (कार्मिक) ने समान गर्व और उत्साह के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया, जबकि खुर्जा एसटीपीपी में निदेशक (तकनीकी) भूपेंद्र गुप्ता ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने का सम्मान किया। प्रबंधन द्वारा टीएचडीसीआईएल की विभिन्न परियोजनाओं/कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने से न केवल स्वतंत्रता दिवस की भावना बरकरार रही, बल्कि टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को परिभाषित करने वाली एकता और समर्पण का भी उदाहरण मिला। जे. बेहरा ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर जोर दिया और इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने देश के विद्युत क्षेत्र के विकास में टीएचडीसी की भूमिका को भी रेखांकित किया। बेहरा ने कहा कि जब भारत को आजादी मिली तो हमारी जीडीपी केवल 2.7 लाख करोड़ रुपये थी, जो आज बढ़कर प्रभावशाली 3.38 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है और भारत 2030 से पहले 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने विकास पथ पर है। श। बेहरा ने बताया कि अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के अनुरूप, भारत सरकार 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अतिरिक्त, 2030 तक, हमारी संचयी विद्युत स्थापित क्षमता का लगभग 50त्न गैर-से आना चाहिए। जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधन। श। बेहरा ने कहा कि टीएचडीसी इंडिया भी इसी के अनुरूप नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपने निरंतर प्रयास जारी रखे हुए है। खुर्जा एसटीपीपी परियोजना के कर्मचारियों और उनके परिवारों को संबोधित करते हुए भूपेंद्र गुप्ता, निदेशक (तकनीकी) ने राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय रूप से योगदान देने वाले समर्पित टीम के सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया और इस बात पर जोर दिया कि अब तक हासिल की गई प्रगति न केवल कर्मचारियों सहित बल्कि प्रत्येक हितधारकों के समर्पण और विशेषज्ञता का प्रमाण है। उनके परिवार भी, जिनका समर्थन अमूल्य है। इस अवसर पर टीएचडीसीआईएल की सभी परियोजनाओं और इकाई कार्यालयों में 'पंच प्राणÓ प्रतिज्ञा भी ली गई।
राजधानी शिमला के समरहिल में सोमवार की सुबह हुए भूस्खलन के कारण निचली ओर बने शिव मंदिर और ढारे मलबे में दब गए। सोमवार को नौ शव निकाले गए। मंगलवार को फिर एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया। मंगलवार सुबह को तीन और शवों को निकाल लिया गया है। अभी तक 12 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। समरहिल में अभी भी कम से कम 20 लोग दबे हुए हैं। दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। एनडीआरएफ की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी आ गई है। दरअसल, सावन का सोमवार होने के कारण सुबह से ही समरहिल के शिव मंदिर में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। भारी बारिश के चलते सुबह करीब 7:15 बजे धमाके के साथ भारी मलबा पेड़ों समेत मंदिर पर जा गिरा। इससे यह मंदिर पूरी तरह से मलबे में दब गया। जो लोग मंदिर पहुंचे थे, उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला। आसपास के लोगों को जैसे ही इसका पता चला तो सभी मौके की ओर भागे। प्रशासन को भी सूचना दी गई। प्रशासन, पुलिस, दमकल समेत एसडीआरएफ की टीमें तो मौके पर पहुंच गईं लेकिन सड़कें बंद होने के कारण मशीनरी कई घंटे बाद मौके पर पहुंची। जवानों ने हाथों से ही मलबे को हटाने का काम शुरू किया।
हिमाचल प्रदेश में 72 घंटों से लगातार जारी भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। सावन के सोमवार को भारी बारिश के रेड अलर्ट के बीच राज्य में जगह-जगह बादल फटने और भूस्खलन से 51 लोगों की मौत गई। करीब 30 लोग मलबे में दबने और बहने से लापता हैं। मंडी जिले में 18, राजधानी शिमला में 14, सोलन में 11, कांगड़ा-हमीरपुर में 3-3, चंबा और सिरमौर में 1-1 लोगों की जान गई है। शिमला, सोलन, कांगड़ा में एक-एक और मंडी में दो जगह बादल फटे हैं। शिमला में 15, मंडी में 3, हमीरपुर में दो और सिरमौर में एक व्यक्ति लापता है। मंडी में छह लोग घायल हुए हैं। प्रदेश सरकार ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। केवल रस्मी तौर पर ही तिरंगा फहराया जाएगा। प्रदेश में रविवार रात को सामान्य से 357 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। सूबे में आठ नेशनल हाईवे और 621 सड़कें बंद हो गईं हैं। मंडी के पराशर रोड पर 250 पर्यटक फंसे हैं। इन्हें सुरक्षित निकालना चुनौती बन गया है। शिमला में भी पर्यटक होटलों में ही कैद हैं।
अधिक से अधिक जवानों को बचाव कार्यों में तैनात करने के निर्देश दिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पिछले दो दिन से हो रही भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक दिन में सबसे अधिक 41 लोगों की बहुमूल्य जान गई है, जबकि 13 लोग अभी भी लापता हैं। भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए शिमला में बुलाई गई एक आपात बैठक में उन्होंने कहा कि इस भीषण त्रासदी के दृष्टिगत इस बार स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा। कार्यक्रम में सिर्फ ध्वजारोहण, परेड और मुख्य अतिथि का संबोधन ही होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि परेड में स्थानीय पुलिस और एसडीआरएफ के जवान शामिल नहीं होंगे। वह बचाव कार्यों में ही शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश से लोगों को हो रही परेशानियों को दूर करना सरकार की पहली प्राथमिकता है और परेड को भी स्केल डाउन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में जवान राहत और बचाव कार्यों में तैनात किए जाएंगे और लोगों को राहत पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि नालागढ़ से एनडीआरएफ की टुकड़ी शिमला पहुंच गई है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1200 सड़कें प्रभावित हुई हैं, जिन्हें बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंनेे कहा कि 600 सड़कों को आज शाम तक खोल दिया जाएगा और 300 सड़कों को कल तक बहाल कर दिया जाएगा। उन्होंने इस बारिश के कारण जिला सोलन, शिमला, मंडी और हमीरपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावितों की हरसंभव मदद प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने शिमला शहर में बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलने के निर्देश दिए और कहा कि गिरे हुए पेड़ों को तुरंत हटा कर सड़कों को बहाल किया जाए। खतरनाक हो चुके पेड़ों को चिन्हित कर सुबह तक उसकी रिपोर्ट उन्हें प्रदान करने के निर्देश दिये। उन्होंने प्रभावित पेयजल योजनाओं को जल्द से जल्द बहाल कर लोगों को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश भर में बहुत से स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसका सम्बन्धित विभाग को अध्ययन करना चाहिए, ताकि इनके कारणों के बारे में पता चल सके। उन्होंने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के उपायुक्तों से विद्युत, जलापूर्ति योजनाओं और सड़कों की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए ताकि लोगों की परेशानियों को कम किया जा सके। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विवेक भाटिया, एडीजीपी सतवंत अटवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने जिला शिमला, जिला सोलन तथा प्रदेश के अन्य कई हिस्सों में भारी वर्षा के कारण हुए जानमाल के नुकसान पर गहरा दख प्रकट किया है। पठानिया ने कहा कि कुदरत के कहर के आगे सभी बेबस है, लेकिन प्रदेश सरकार हिमाचल की जनता के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सभी प्रभावितों की मदद के लिए तत्पर है तथा बचाव व राहत कार्य में दिन रात जुटी है। इस अवसर पर पठानिया ने हिमाचल प्रदेश सरकार के उन सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रशंसा की है, जो जान की परवाह किए बगैर राहत व बचाव कार्य में जुटे हंै। पठानिया ने समरहिल के समीप शिव बाउडी हादसे में जहां अभी तक 4 लोग अपनी जान गवां चुके हंै तथा 20 से 25 लोग मलबे में फंसे हैं, के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना की है तथा मलबे में दबे लोगों के जीवित बाहर आने की कामना की है। पठानिया ने फागली हादसे पर भी अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है, वहां 3 लोगों ने अपनी जान गंवाई है तथा 5 बुरी तरह से घायल है। पठानिया ने मृतकों के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की है तथा घायलों के शिघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश में हो रही भारी बारिश व बाढ़ से हो रहे जानमाल के नुकसान पर दुख प्रकट करते हुए लोगों से सुरक्षित रहने का आग्रह किया हैं। राठौर ने प्रदेश में भूस्खलन से हो रहे जानमाल पर प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हुए कहा है कि इस दु:ख की घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने प्रदेश में कई जगहों पर बादल फटने व उसमें हुए जानमाल के नुकसान पर दुख प्रकट करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति भी अपनी संवेदना प्रकट की हैं। आज सुबह शिमला के बालूगंज इलाके में भूस्खलन से एक मंदिर में पूजा करने गए लोगों के मरने पर गहरा दुख व्यक्त किया हैं। उन्होंने इस हादसे में मारे गए लोगों की आत्मा की शान्ति की प्रार्थना भगवान से करते हुए शोक संतप्त परिवारों से अपनी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने सायरी ममलीग में भी एक घर के गिरने व उसमें पांच लोगों के मरने पर भी गहरा दुख जताया हैं। राठौर ने प्रदेश में भारी बारिश से हो रहें जानमाल के नुकसान से लोगों को राहत देने के लिये केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक सहायता की मांग की हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में इस बार भारी बारिश व बाढ़ से हजारों करोड़ों का नुकसान हुआ हैं। 200 से अधिक लोगों ने अपनी जान,गंवाई है,जबकि हजारों घर मलवे में तबदील हो गए है। इसके अलावा करोड़ो रुपये की सरकारी संपति ध्वस्त हो चुकी हैं। किसानों बागवानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। प्रदेश सरकार अपने सीमित साधनों से राहत व पुनर्वास कार्यों को कर रही हैं। राठौर ने केंद्र सरकार से प्रदेश को राहत व पुनर्वास कार्यो के लिए विशेष आर्थिक पैकेज देने की मांग करते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग भी की हैं।
राहत कार्यों का जायजा लिया और सोलन के जादौन का दौरा भी किया राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज प्रात: शिमला के उपनगर समरहिल में शिव बावड़ी का दौरा कर बचाव कार्यों का जायजा लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल और मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल ब्राक्टा भी उपस्थित थे। आज प्रात: सूचना मिलते ही राज्यपाल बालूगंज चौक से पैदल घटनास्थल पर पहुंचे और वहां की स्थिति देखकर भावुक हो गये। अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि शिव बावड़ी में बादल फटने से हुई आपदा हृदय विदारक है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्सों से जान-माल के नुकसान की जानकारी मिल रही है, लेकिन इस घटना से हर कोई स्तब्ध है। उन्होंने वहां मौजूद प्रशासन को बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया, ताकि मलबे में दबे लोगों को बचाया जा सके। इसके बाद राज्यपाल सोलन जिला की ममलीग पंचायत के अंतर्गत जड़ोन गांव गये। यहां बीती रात भारी भूस्खलन से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई। राज्यपाल ने दो किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए प्रभावित परिवार के सदस्यों से भेंट की। राज्यपाल ने वहां उपस्थित पूरे गांव वालों को सांत्वना देते हुए कहा कि इस विपदा की घड़ी में पूरा प्रदेश उनके साथ है। राज्यपाल के सचिव भी उनके साथ उपस्थित थे। राज्यपाल ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। राज्य में भारी बारिश के कारण जान-माल के नुकसान को देखते हुए उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राजभवन में आयोजित होने वाले 'ऐट होमÓ कार्यक्रम को भी रद्द करने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि प्रदेश में भारी बारिश तथा बाढ़ के कारण हुए भारी नुकसान के दृष्टिगत १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में किसी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह समारोह केवल सेरेमोनियल होगें। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण प्रदेश में जानमाल की भारी क्षति हुई है। प्रदेश सरकार आपदा की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ है। मुख्यमंत्री ने आज इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय शिमला का दौरा भी किया तथा शिमला शहर के विभिन्न स्थानों में भूस्खलन से घायल हुए लोगों का कुशलक्षेम पूछा तथा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
लाल कोठी में भी भूस्खलन से कुछ लोगों के दबने की आशंका हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भूस्खलन में एक मंदिर ढह गया। इसमें कई लोगों के दबे होने की आशंका है। कई लोगों को निकाला गया है। मौके पर बचाव अभियान जारी है। सावन के सोमवार की वजह से मंदिर में कई लोग पहुंचे थे। शिमला के लाल कोठी में भी भूस्खलन से कुछ लोगों के दबने की आशंका है। शिमला के एसपी संजीव कुमार गांधी ने बताया कि भूस्खलन में एक मंदिर ढह गया। इससे आसपास की इमारतों को भी खतरा है। कई लोग फंसे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मौके पर लैंड स्लाइड भी हो रहा है। सावन के सोमवार की वजह से सुबह मंदिर में कई लोग पहुंचे थे। जानकारी मिली है कि शिव मंदिर में मोंटू पुत्र जयंत, नीरज पुत्र शांति स्वरूप, संजू पुत्र मोहन, हरीश वकील और पवन शर्मा के परिवार के सात लोग दब गए। इनके अलावा, शंकर नेगी, पंडित राजेश समेत कई लोग शामिल हैं।
भारी बारिश के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर लिया निर्णय सभी जिलों के डीसी से फोन पर बात कर बारिश से हुए नुकसान का लिया फीडबैक हिमाचल प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थान (स्कूल, कॉलेज) 14 अगस्त को बंद रहेंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारी बारिश के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के आदेश पर शिक्षा सचिव ने सभी सरकारी, निजी स्कूलों, कॉलेजों को १४ अगस्त को बंद रखने की अधिसूचना जारी कर दी है। मुख्यमंत्री ने जिलों में भारी बारिश से हो रहे नुकसान की फीडबैक सभी डीसी से ली। उन्होंने सड़क मार्गों के बंद होने की जानकारी भी हासिल की। भूस्खलन और मकानों के क्षतिग्रस्त के कारण हुए नुकसान के बारे में भी उन्होंने जाना। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, गृह सचिव के साथ ही सभी डीसी को निर्देश दिए हैं कि भारी बरसात के कारण बने हालात पर पूरी नजर बनाए रखें। प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहे और सड़क मार्ग, बिजली, पानी की व्यवस्था सुचारू बनाए रखें।
प्रदेश में शुक्रवार रात से लगातार हो रही बारिश के बाद जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही है। राजधानी शिमला के दुधली में भारी बारिश के बाद आज तड़के लैंडस्लाइड होने से सड़क पर पार्क तीन गाड़ियां चपेट में आ गईं। गाड़ियों के मालिक व स्थानीय लोगों ने बताया कि यह घटना आज सुबह के समय हुई है। लैंडस्लाइड से सड़क के किनारे पार्क की गई 3 गाड़ियां मलबे में दब गई हैं। दबी हुई गाड़ियों को निकालने के लिए जेसीबी व क्रेन को लाया गया है।
मंडी जिले के नाचन के चुनाहन में बादल फटा बल्ह घाटी में सबसे ज्यादा तबाही पहाड़ी राज्य हिमाचल में भारी बारिश का कहर जारी है। पिछले 35 घंटे से अधिक समय से भारी बारिश हो रही है। इससे 500 से ज्यादा सड़कें वाहनों की आवाजाही के लिए अवरुद्ध हो गई हैं। चंडीगढ़-मनाली, कालका-शिमला और शिमला-बिलासपुर नेशनल हाईवे जगह-जगह बंद पड़ा है। शनिवार रात से हो रही बारिश हसे मंडी जिले की बल्ह घाटी में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। पूरी घाटी जलमग्न होने से 300 से ज्यादा घरों, 35 से ज्यादा गाड़ियों को नुक़सान पहुंचा है। किसानों की फसलें तबाह हुई हैं। मंडी जिले के नाचन के चुनाहन में भी बादल फटने से घर खेत और पशु बह गए। लोगों का कहना है कि पहली बार उन्होंने ऐसी तबाही देखी है। पंचायत घर, पशु चिकित्सालय, क्क॥ष्ट, हटगढ़ स्कूल जलमग्न है। सलवाहन का गोसदन भी खतरे में है। 75 पशु कभी भी बह सकते हैं। 8 जिलों में फ्लैश फ्लड की चेतावनी मौसम विभाग ने आज प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में भारी बारिश होने का ऑरेंज अलर्ट जारी कर रखा है। इसे देखते हुए 8 जिलों शिमला, कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और सोलन में फ्लैश फ्लैड की चेतावनी दी गई है। बिलासपुर के डीब में भारी नुकसान बिलासपुर जिला में डीब नामक स्थान पर बारिश से बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। यहां पर बारिश के कारण आई बाढ़ और मलबे में 2 ट्राले, एक कार, गाय भैंस और बकरियां बह गईं। गनीमत रही कि कोई जानी नुक़सान नहीं हुआ। यहां पर पहाड़ी में दरारें आ जाने से मकानों को खतरा पैदा हो गया है। लोगों घरों से बाहर निकल गए हैं।
बारिश ने हिमाचल में एक बार फिर भारी तबाही मचाई है। सोलन जिले में चक्की मोड़ के पास मलबा आने से कालका शिमला एनएच फिर बंद हो गया है। इसके अलावा शिमला शहर का सर्कुलर रोड और कई सड़कें पेड़ गिरने एवं भूस्खलन से बंद हो गई हैं। बिलासपुर में दगसेच के पास पहाड़ी धंसने से शिमला-धर्मशाला हाईवे पूरी तरह से बंद हो गया है। शिमला से आने वाले वाहनों को नवगांव से बैरी वाली सड़क से सफर करना होगा। पहाड़ी धंसने से चार-पांच मकान भी जमींदोज हो गए हैं। सड़क समेत तीन-चार वाहन धंस गए हैं। शिमला में हिमलैंड होटल के पास भूस्खलन हिमलैंड होटल के पास भूस्खलन के कारण सड़क पूरी तरह से बंद कर दी गई है। भूस्खलन की वजह से खलीनी से टुटीकंडी मार्ग कनलोग के पास बंद हो गया है। हाईकोर्ट गेस्ट हाउस के पास पुलिस लाइन कैंथू रोड बंद हो गया है। शिमला में संस्कृत कॉलेज के पास सड़क धंस गई है। इसक वजह से फागली नाभा रोड यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। एनएच 205 हीरानगर ढाहड़ा के बीच भूस्खलन के कारण दोनों ओर से बंद कर दी गई है। ब्यूलिया रोड के पास शोघी मेहली बाईपास भूस्खलन के कारण दोनों ओर से बंद हो गया है। धर्मपुर में दुकानें और घर जलमग्न धर्मपुर में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। दुकानों और घरों तक पानी पहुंच गया है। बिजली और मोबाइल सिग्नल की कनेक्टिविटी बंद है। धर्मपुर और सरकाघाट का अन्य जिला से संपर्क कट गया है। निर्माणाधीन एनएच जालंधर-मंडी वाया कोटली दर्जनों स्थानों पर पूरी तरह से बंद है।
राजधानी शिमला के साथ लगते कांती गांव में हत्या का मामला सामने आया है। शातिरों ने गांव में स्थित मंदिर के पुजारी की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को वहीं झाड़ियों के बीच फेंक दिया, ताकि इसकी भनक किसी को न लगे। मृतक की पहचान सुनील दास (59) के तौर पर की गई है। यह मूलत: महाराष्ट्र का रहने वाला बताया जा रहा है।कांती गांव के भूतेश्वर मंदिर में यह पुजारी था। यह गांव कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के तहत आता है। पुजारी बीते दो सालों से अधिक समय से मंदिर में रह रहा था। हत्या की इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। शिमला पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर अपराधियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए आईजीएमसी भेजा है। मृतक पुजारी के शरीर पर चोट के निशान थे। फोरेंसिक टीम ने भी मौके का मुआयना किया। अंदेशा जताया जा रहा है कि डंडों के वार से पुजारी को हत्या की गई है। ये मंदिर सुनसान जगह पर है और एक किलोमीटर तक कोई भी रिहायश नहीं है, ना ही मंदिर परिसर में सीसीटीवी लगा है। पुलिस से प्राप्त सूचना के अनुसार महाराष्ट्र निवासी सुनील दास मार्च 2021 से भूतेश्वर मंदिर में रह रहा था। बीते आठ अगस्त को अनुयायियों ने सुनील दास से संपर्क साधा था, लेकिन उसका मोबाइल बंद था। भूतेश्वर मंदिर में भी पुजारी मौजूद नहीं मिला। संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने पर अनुयायियों ने पुजारी की तलाश शुरू की। शनिवार को उसका शव मंदिर से 15 मीटर फासले पर झाड़ियों में पड़ा हुआ मिला। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया। शिमला के एसपी संजीव गांधी ने पुष्टि करते हुए बताया कि अज्ञात अपराधियों ने पुजारी को मौत के घाट उतारा है। इस सिलसिले में ढली थाने में आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की जिला शिमला इकाई के चुनाव काली बाड़ी हॉल में प्रभारी शमशेर सिंह और सहप्रभारी सत्य देव रतूड़ी की अध्यक्षता में संपन्न हुए। इनमें अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला शिमला अध्यक्ष के पद पर सर्वसम्मति से भरत शर्मा पशु पालन विभाग को जिला अध्यक्ष, अरविंद मेहता भूव्यवस्था विभाग को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, नारायण हिमराल जल शक्ति विभाग को महासचिव, बबिता गरेवाल आयकर विभाग अतिरिक्त सचिव, अंकित पीडब्ल्यूडी को कोषाध्यक्ष, मोहित शर्मा बागवानी विभाग उपाध्यक्ष, धनसुख शिक्षा विभाग उपाध्यक्ष, अमरदेव संगठन सचिव, राकेश जिलाधीश कार्यालय संयुक्त सचिव, बलबीर, टेकचंद पशु पालन विभाग को संयुक्त सचिव चुना गया। इस चुनाव के दौरान विशेष अतिथि के रूप में प्रदीप ठाकुर तथा अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के राज्य संयोजक सौरभ वैद तथा राज्य मुख्य प्रवक्ता नित्या नंद शदाट तथा जिला शिमला नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के ज़िला शिमला के अध्यक्ष कुशाल शर्मा जी उपस्थित रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिभा सिंह ने चंबा जिला में एक सड़क हादसे में मारे गए छह पुलिस कर्मियों व एक अन्य के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया हैं। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना भगवान से की हैं। प्रतिभा सिंह ने जिला सिरमौर के पौंटा साहिब में बादल फटने और उसमें एक परिवार के पांच लोगो की दर्दनाक मौत पर भी गहरा दुख प्रकट किया हैं। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना भगवान से की हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिभा सिंह 13 अगस्त कल से अपने संसदीय क्षेत्र मंडी के दौरे पर रहेंगी। कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव कांग्रेस महासचिव अमित पाल सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिभा सिंह कल सुबह 10 बजे शिमला से मंडी के लिये प्रस्थान करेंगी। इस दौरान दोपहर बाद 1 बजे सुंदरनगर विश्राम गृह में अल्प विश्राम के बाद बल्ह विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभाभित झोर के लोहखर,रिवालसर,रत्ती व डडोर का दौरा करेंगी। रात्रि विश्राम मंडी में लोक निर्माण विभाग का परिधि गृह रहेगा।
भारत में कोरियाई समुदाय के अध्यक्ष इयू डान पार्क के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने भारत-कोरिया मैत्री की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक व्यापार सम्मेलन और गोल्फ कप के आयोजन का प्रस्ताव रखा। इस वर्ष सितंबर या अक्तूबर माह में इसके आयोजन पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमण्डल का स्वागत किया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के प्रस्ताव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और विशेषतौर पर हरित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने पहले बजट में पर्यावरण-अनुकूल कई पहलें शामिल की हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन और जल विद्युत उत्पादन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर रही है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि वर्तमान सरकार कांग्रेस पार्टी की सरकार, सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार के मंत्री जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वह लोकतंत्र में अवांछनीय है, अनापेक्षित हैं। मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा भाजपा के वरिष्ठ विधायक बलवीर वर्मा पर की गई टिप्पणी अमर्यादित है और लोकतंत्र के उपर सीधा हमला है। अनिरुद्ध सिंह का यह कहना कि बलवीर वर्मा भीख का कटोरा लेकर मुख्यमंत्री के साथ घूमते रहे, यह अपमानजनक शब्द है। भाजपा इन शब्दों की कड़ी निंदा करती है। बलवीर वर्मा को चैपाल की जनता ने बहुमत देकर चुना है और चैपाल की जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ना उनका धर्म है और वह अपने धर्म का पालन कर रहे हैं और इसी नाते मुख्यमंत्री जी के प्रवास के दौरान जनता की भलाई के लिए वे मुख्यमंत्री के साथ गए और उन्हें जाना भी चाहिए। डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सवाल किया है कि क्या वे सिर्फ कांग्रेसियों के मुख्यमंत्री हैं? क्या कांग्रेसी विधायकों के विधानसभा क्षेत्र ही हिमाचल के हिस्से हैं? क्या भाजपा व अन्य दलों के विधायक जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के वह मुख्यमंत्री नहीं हैं? यदि कोई राशि सरकारी खजाने से विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री या सरकार आबंटित करती है तो वो जनता के लिए भीख है? डॉ. बिंदल ने कहा कि उक्त स्पष्टीकरण निश्चित अवधि में जनता को प्राप्त होना चाहिए। बिंदल ने अनिरुद्ध सिंह की इस ओछी हरकत पर उन्हें सलाह दी कि वे बलवीर वर्मा के प्रति की गई अवांछनीय, अभद्र टिप्पणी के लिए खेद व्यक्त करें।
लोक निर्माण और ग्रामीण विकास विभाग को अतिरिक्त 11 करोड़ रुपये आवंटित मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के तीन दिवसीय दौरे के बाद शिमला जिला के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों के पुनर्निर्माण के प्रयासों में तेजी आई है। उनके इस दौरे से लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण विकास विभाग नई ऊर्जा के साथ दिन-रात सड़क बहाली के कार्यों में जुट गए हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत तथा सेब परिवहन निर्बाध रूप से सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी विकल्प भी तैयार किए जा रहे हैं। दौरे के दौरान ही मुख्यमंत्री के निर्देशों पर दोनों विभागों को लगभग 11 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है ताकि किसानों के उत्पाद को समयबद्ध परिवहन सुविधा मिल सके। आपदाग्रस्त क्षेत्रों के नुकसान के आकलन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार दु:ख की इस घड़ी में उनके साथ है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर उन्होंने आपदा प्रभावित व्यक्तियों से संवाद किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सेब और अन्य नकदी फसलें समयबद्ध बाज़ार तक पहुंचाना है ताकि बागवानों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। मुख्यमंत्री ने सेब सीजन के दृष्टिगत 15 अगस्त तक पंचायत स्तर तक सड़कें सुचारू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बुरी तरह से प्रभावित परिवहन नेटवर्क को पुनर्जीवित करने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है और सेब उत्पादक क्षेत्रों में सड़कों की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग को 110 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री के स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने के बाद लोक निर्माण विभाग ने भी अपने प्रयास तेज़ किए हैं और लगभग 250 जेसीबी और भारी मशीनरी बहाली कार्यों के लिए तैनात की गई है। ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से दोनों ही विभाग निर्धारित समय अवधि के भीतर पंचायत स्तर की सड़कों को बहाल करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सेब उत्पादक क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था की बहाली एवं निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित कर रही है और सेब पर आधारित यहां की आर्थिकी को संरक्षित एवं मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्यों में धन की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
बैठक में आगामी आंदोलनों व गतिविधियों पर होगा गहन मंथन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने जानकारी दी है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक 19 व 20 अगस्त को ऊना में कृषि विज्ञान केंद्र में होने जा रही है। इस प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में प्रदेश के 135 प्रतिनिधि भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश कि इस प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में पूर्व में किए गए कार्यक्रमों, आंदोलनों व गतिविधियों की विस्तारपूर्वक चर्चा कर समीक्षा की जाएगी व आगामी प्रदेश में किए जाने वाले कार्यक्रमों, आंदोलनों व गतिविधियों की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की इस प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में अभाविप के 18 संगठनात्मक जिलों से प्रतिनिधि इस बैठक में भाग लेंगे।इस बैठक में प्रदेश स्तर पर आने वाले समय में किए जाने वाली संगठनात्मक, आंदोलनात्मक व रचनात्मक गतिविधियां पर गहन मंथन करके रणनीति तैयार की जाएगी। आकाश नेगी ने बताया कि इस बैठक को आयोजित करने के लिए ऊना जिला के कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। तेज़ धूप में कार्यकर्ता बैठक में व्यवस्थाएं जुटाने के लिए घर घर जाकर व दुकानों में जाकर समाज से धन संग्रह के माध्यम से सहयोग ले रहे।
शिमला-कालका फोरलेन पर सोलन के चक्की मोड़ के पास फिर से लैंडस्लाइड हुआ, जिसके बाद हाईवे पर यातायात ठप हो गया है। अब वाहनों की आवाजाही अल्टरनेटिव सड़कों से की जा रही है। चक्की मोड़ के पास हाईवे 2 रोज पहले ही 8 दिन के बाद बहाल किया गया था। बसों की आवाजाही गुरुवार को शुरू हुई थी। हैवी व्हीकल्स के लिए हाईवे को आज खोला जाना था। इससे पहले ही रात में लैंडस्लाइड हुआ। अभी भी मौके पर लैंडस्लाइड का खतरा बरकरार है। वहीं प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में रात से ही मूसलाधार बारिश हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने भी अगले 3 घंटे तक तेज बारिश होने की चेतावनी दी है। इस दौरान लोगों को नदी-नालों के आस-पास और लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी है। उधर, चौपाल में स्कूल जाते वक्त एक बच्ची पर लैंडस्लाइड हो गया है। इससे बच्ची दलदल में फंस गई। उसके सहपाठियों ने परिजनों को इसकी जानकारी दी और तब जाकर बच्ची को मलबे से सुरक्षित निकाला गया।
राहुल गांधी जल्द ही हिमाचल दौरे पर आएंगे। ऐसे में राहुल गांधी मनाली भी आ सकते हंै। राहुल गांधी का मनाली दौरा फाइनल बताया जा रहा है, लेकिन अभी दिल्ली से फाइनल शेड्यूल न आने के चलते कोई भी अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। बता दें कि बीते दिनों जब मुख्यमंत्री दिल्ली दौरे पर थे तो उस दौरान वह राहुल गांधी से मिले थे। वहां हिमाचल में हुए नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को अवगत करवाया था और राहुल गांधी ने हिमाचल आने की बात कही थी। ऐसे में राहुल गांधी का मनाली आने का कार्यक्रम बन रहा है। इसको लेकर चर्चा चली हुई है। प्रदेश सरकार ने आपदा को देखते हुए कुल्लू के मनाली उपमंडल में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने का फैसला लिया है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के राशन कार्डों में उनकी आधार संख्या पंजीकृत करने व ई-केवाईसी करवाने की तिथि को ३१ अगस्त, २०२३ तक बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा राशन वितरण कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए उपभोक्ताओं के राशन कार्डों में उनकी आधार संख्या पंजीकृत की जा रही है। ई-केवाईसी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राशन कार्ड में दर्ज व्यक्ति का नाम, जन्मतिथि तथा लिंग की जानकारी आधार में दर्ज डेटा के अनुरूप हो। उन्होंने आग्रह किया कि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं करवाया है, वे अपनी नजदीकी उचित मूल्य की दुकान पर जाकर इस प्रक्रिया को ३१ अगस्त, २०२३ से पहले पूर्ण करवा लें। उन्होंने कहा कि निर्धारित तिथि तक यह प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने पर राशन कार्ड अस्थाई रूप से बंद कर दिया जाएगा तथा आधार उपलब्ध करवाने के बाद ही इसे पुनः शुरू किया जाएगा। प्रवक्ता ने कहा कि उपभोक्ता अपना नवीनतम सक्रिय मोबाइल नम्बर विभाग से सांझा कर खाद्यान्नों से सम्बंधित सूचना भी प्राप्त कर सकते हैं। वे विभागीय वेबसाइट/पारदर्शिता पोर्टल द्धह्लह्लश्चह्य://द्गश्चस्रह्य.ष्श.द्बठ्ठ पर राशन कार्ड में स्वयं अपना मोबाइल नम्बर अपडेट कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें द्धह्लह्लश्चह्य://द्गश्चस्रह्य.ष्श.द्बठ्ठ पर अपडेट मोबाइल नम्बर विकल्प के अधीन अपना १२ अंकों का आधार कार्ड नम्बर दर्ज करने के उपरांत अपना मोबाइल नम्बर अपडेट करना होगा। .०.
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं को सुचारू किए जाने की आवश्यकता है। प्रदेश में कई जगहों से लोगों द्वारा जांच में असुविधा का सामना किए जाने की सूचना आ रही है। आईजीएमसी में पहले से ही एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए महीनों बाद की अपॉइंटमेंट मिल रही थी। अब फिर से सीटी स्कैन और मैमोग्राफी की मशीनें ख़राब होने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे लोगों को बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और इसमें धन और समय कि बर्बादी हो रही है। दूसरी तरफ़ जांच में देरी की वजह से लोगों को समय से उचित इलाज नहीं मिल पा रहा हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश भर में लोगों को तमाम चिकित्सा सुविधाओं को प्राप्त करने में असुविधा हो रही है। छोटी-छोटी जांचो के लिए भी लोगों को लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है। इससे लोगों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। अत: सरकार इस बात का ध्यान रखे कि मरीज़ों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा सरकार यह व्यवस्था बनाए कि सामान्य जांचों के लिए मरीज़ों को बार-बार अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ें। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में स्क्रब टायफ़स और पीलिया के मरीज़ों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसलिए सरकार स्क्रब टाइफ़स और पीलिया से निपटने के इंतज़ाम करे। इसके साथ ही पीलिया की रोकथाम की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने कहा कि पीलिया एक जल जनित रोग है, अत: आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की निरंतर जाँच की जानी चाहिए, जिससे पीलिया समेत किसी भी जल जनित रोग से बचाव हो सके।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभी वैधानिक अधिकारी, डीन, निदेशक, अध्यक्ष और विभागों के प्रमुख उपस्थित थे। कुलपति ने इस महीने के तीसरे सप्ताह से शुरू होने वाले नए सत्र से पहले तैयारियों का जायजा लिया। एनईपी-2020 और मान्यता और रैंकिंग की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए एक विस्तृत रोड मैप की योजना बनाई गई और उस पर चर्चा की गई। प्रोफेसर बंसल ने संकाय और छात्रों के लिए इंडक्शन कार्यक्रम, व्याख्यान श्रृंखला, परामर्श सेवाएं, संकाय विकास कार्यक्रम सहित विभिन्न गतिविधियों पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल आधार पर डीन रिसर्च का एक पद सृजित करने का निर्देश दिया, जो विश्वविद्यालय और आईपीआर के सभी अनुसंधान मामलों की देख रेख करेगा। कुलपति ने अधिकारियों को विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीयकरण और एमओयू मामलों के लिए निदेशकों के अलग-अलग पद रखने का भी निर्देश दिया। उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कैंपस में अच्छी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र होने चाहिए। प्रो.बंसल ने प्लेसमेंट सेल को मजबूत करने का निर्देश दिया और इस सेल को छात्रों के प्लेसमेंट में विभागों को सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागों को छात्रों को अच्छे पैकेज के साथ अच्छी कंपनियों में नौकरी दिलाने के लिए विभिन्न प्लेसमेंट ड्राइव और पूर्व छात्र बैठकें आयोजित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने विभागों को अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार करने का निर्देश दिया और विभागों से थीसिस की मध्यावधि समीक्षा करने को भी कहा ताकि विषय की नवीनता सुनिश्चित की जा सके। आचार्य बंसल ने डीन ऑफ स्टडीज से उन्नत और धीमी गति से सीखने वाले छात्रों की पहचान करने के लिए एक संपूर्ण योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने विभागों से अतिरिक्त पाठ्यक्रम शुरू करने को कहा ताकि ये पाठ्यक्रम छात्रों के बीच अतिरिक्त मूल्यों को विकसित कर सकें। प्रोफेसर बंसल ने उद्योग अकादमी संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से दोहरी डिग्री, संयुक्त डिग्री और ट्विनिंग कार्यक्रमों की पेशकश की संभावनाएं तलाशने को कहा। उन्होंने विभागों को आश्वस्त किया कि विभागों में शोध को बढ़ने के लिए प्रोत्साहन राशी दी जायेगी। इस अवसर पर प्रति कुलपति, प्रो. राजिंदर वर्मा, डीन ऑफ स्टडीज, प्रो. बीके शिवराम, कुलसचिव वीरेंद्र शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी, डीन प्लानिंग प्रो. अरविंद भट्ट, डीन सीडीसी प्रो. एसएस नर्टा, डीएसडब्ल्यू प्रो. एसएलकौशल के अतिरिक्त निदेशक, आंतरिक गुणवत्ता एवं विश्वश्नियता प्रोकष्ठ डॉ. रमेश ठाकुर भी मौजूद थे।
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी की भेंट हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के बिलासपुर, धर्मपुर व देहरा, जसवां परागपुर के 18 जिला परिषद सदस्य केंद्रीय सूचना प्रसारण व युवा कार्यक्रम व खेल मंत्री के आमंत्रण पर नई दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने मानसून सत्र के दौरान संसद भवन का अवलोकन किया व कई मंत्रियों व सदस्यों से मिलकर परिचर्चा की। सभी सदस्यों ने कर्तव्य पथ का भी भ्रमण किया। केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर सांसद अनुराग ठाकुर ने सभी सदस्यों की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी व समेत कई सांसदों व अन्य गणमान्यों से भेंट करवाई। संसद भवन में गणमान्यों से भेंट को बेहद ज्ञानवर्धक बताते हुए हिमाचली जिला परिषद सदस्यों ने कहा कि सभी मंत्रियों ने मानसून सत्र के दौरान अपना अमूल्य समय हमें दिया, हमसे अपने निजी अनुभव साझा किए। इसके लिए हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। हम सभी को बहुत कुछ सीखने को मिला है जो आगे सार्वजनिक जीवन में हमारे बहुत काम आएगी।
देश में शहीदों के सम्मान के लिए विशेष अभियान 'मेरी माटी, मेरा देश' शुरू किया गया। नेहरू युवा केंद्र शिमला द्वारा आज शिमला की ग्राम पंचायत रझना में इस कार्यक्रम का आगाज किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता स्स्क्च के कमांडेंट पीएन चौरसिया व एसिस्टेंट कमांडेंट अजय शर्मा ने की। इनके साथ एसएसबी के 15 जवानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत रझना की प्रधान रीना ठाकुर और नेहरू युवा केंद्र शिमला की स्वयंसेवी किरण भी शामिल हुईं। कार्यक्रम में आजादी के अमृत महोत्सव पर पंच प्रण की शपथ दिलाई गई और पोधारोपण किया। इसमें गांव के 20 लोगों ने अपना सहयोग दिया। गौर रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम मन की बात में कहा था कि देश में अमृत महोत्सव की गूंज के बीच एक और बड़े अभियान की शुरुआत होने जा रही है। देश के गांव-गांव के कोने कोने से 7,500 कलशों में मिट्टी लेकर यात्राएं दिल्ली पहुंचेगी। ये अपने साथ देश के अलग-अलग हिस्से से पौधे भी लेकर आएंगी। कलशों में आई माटी और पौधों को मिलाकर नेशनल वॉर मेमोरियल पास अमृत वाटिका का निर्माण किया जाएगा। यह 'एक भारत, श्रेष्ठ भारतÓ का भव्य प्रतीक बनेगी। यह कार्यक्रम 9 अगस्त से 15 अगस्त तक चलेगा। इसमें पंच प्रण की शपथ भी ली जाएगी और सभी देशवासी देश की पवित्र मिट्टी को हाथ मे लेकर शपथ के साथ अपनी सेल्फी को 4ह्व1ड्ड.द्दश1.द्बठ्ठ पर अपलोड करेंगे। यह जानकारी प्रेस को नेहरू युवा केंद्र शिमला की जिला युवा अधिकारी मनीषा शर्मा ने दी।
मंडियों के बाहर ही सेब बेचने को मजबूर हो गए बागवान प्रदेश में सेब सीजन पीक पर है ऐसे में प्रदेश में सियासत भी गर्म है। भाजपा प्रवक्ता और चौपाल विधानसभा क्षेत्र से विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि प्रदेश के बागवानों में भय की स्थिति उत्पन्न हो गई है और बागवान सहमा हुआ है। उन्होंने कहा कि सेब के ऊपर प्रदेश सरकार प्रदेश में दादागिरी कर रही है और लोगों को धमकाने का काम कर रही है। बलबीर वर्मा ने कहा कि एक तरफ मौसम की मार से सेब मंडियों तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है तो वहीं दूसरी ओर बागवान मंडियों के बाहर ही सेब बेचने को मजबूर हो गया है। उन्होंने पराला मंडी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि पराला जैसी बड़ी मंडी में भी बगवानों को मंडी के बाहर सेब बेचने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश में ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि लोग सेब बेचने बाहरी राज्यों का रुख कर रहे हैं। प्रदेश की मंडियों के बंद होने का संशय बना हुआ है, जिससे बागवान भयभीत हैं। बलवीर वर्मा ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने बिना तैयारी के बागवानों पर यह फैसला थोप दिया और यूनिवर्सल कार्टन समेत मूलभूत व्यवस्था नहीं की। बलवीर वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों को इस निर्णय के बारे में समझा नहीं पाई और स्थिति ये है कि प्रदेश में मंडियों के बंद होने का संशय बना हुआ है।
पांवटा साहिब के सिरमौरी ताल में बादल फटने से घर में मलबे में दबे दो बच्चों समेत लापता हुए पांच लोगों में से 65 वर्षीय कुलदीप का शव बरामद हुआ है, जबकि चार अन्य की तलाश जारी है। एलएनटी मशीन से मलबा हटाया जा रहा है। बता दें कि पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के मुगलावाला पंचायत के सिरमौरी ताल में बुधवार को बादल फटने से भारी तबाही हुई है। बादल फटने से कुलदीप सिंह का मकान मलबे में दब गया था। सिरमौरी ताल के लगभग 70 परिवारों के लोग रात को ही अपना घर छोड़ नेशनल हाईवे पर आ गए। हालांकि आसपास के गांवों के लोग बचाव कार्य में जुटे रहे।
मलबे तले लोगों के दबने की भी संभावना, प्रशासन मौके की और रवाना एडवाइजरी: शिलाई-पांवटा सड़क मार्ग पर सफर करने से बचें लोग जिला सिरमौर के पांवटा साहिब के सिरमौरी ताल में बादल फटने से भारी तबाही की सूचना मिली है। देर शाम गांव के उपर जंगल में अचानक बादल फटा, जिसके सैलाब ने जंगल, सड़क और सिरमौरी ताल गांव को अपनी चपेट में ले लिया है। सूचना पर पांवटा साहिब का प्रशासन और विधायक मौके पर रवाना हुए हंै, लेकिन राजबन कांटा से थोड़ा आगे बाबा पत्थर नाथ मंदिर के पास से बड़े बड़े पेड़ सैलाब के साथ सड़क पर आए हैं, जिस कारण समाचार लिखे जाने तक प्रशासन मौके पर नहीं पंहुचा था। उधर, ग्रामीणों ने प्रशासन को सूचना दी है कि बादल फटने से गांव में भारी तबाही हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव मे एक मकान मलबे तले दब गया है जिसके नीचे लोंगों के होने की संभावना है। एनएच को भी भारी नुकसान हुआ है। उधर, भारी आपदा को देखते हुए प्रशासन ने शिलाई-पांवटा एनएच पर सतौन से राजबन तक सफर न करने की सलाह दी है। उधर, एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा ने कहा कि जगह जगह पेड़ गिरे हुए है। मशीने लगाई गई है। गांव तक पंहुचने के प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि फिलहाल शिलाई-पांवटा साहिब एनएच पर सतौन और राजबन के बीच कोई सफर न करें। नुकसान की पूरी जानकारी मौके पर पंहुचकर ही बताई जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास अस्पताल शिमला का किया दौरा राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज हिमाचल प्रदेश राज्य रेडक्रॉस सोसायटी एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शिमला के समीप बाग में देवदार का पौधा रोपित कर 74वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर लेडी गवर्नर जानकी शुक्ल ने भी पौधरोपण किया। जानकी शुक्ल राज्य रेडक्रॉस अस्पताल कल्याण शाखा की अध्यक्ष भी हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को अपार प्राकृतिक सौंदर्य से नवाजा है। लेकिन, जब हम प्रकृति से छेड़छाड़ करते हैं तो इसके गंभीर परिणाम भी होते हैं। उन्होंने कहा कि विकास समय की मांग है और यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना किया जाना चाहिए और साथ ही, हमारा वन क्षेत्र कायम रहना चाहिए। पौधरोपण अभियान में रेडक्रॉस और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवी छात्रों ने भी भाग लिया। इस अवसर पर राष्ट्रीय रेडक्रॉस प्रबंधन समिति की सदस्य डॉ. साधना ठाकुर, प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल राजीव कुमार, पीसीसीएफ (प्रशासन) अमिताभ गौतम, मानद सचिव राज्य रेडक्रॉस डॉ. किमी सूद और सदस्य भी उपस्थित थे। इसके उपरांत, राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास अस्पताल, शिमला का भी दौरा किया और वहां उपचाराधीन लोगों से संवाद किया तथा उन्हें फल भी वितरित किये। इस अवसर पर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हिमाचल प्रदेश में क्रियान्वित किए जा रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य में नशे के खिलाफ हर स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं और ऐसे मरीजों को और प्रभावी तरीके से मनोचिकित्सकों और परामर्शदाताओं की सेवाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए और उनका पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए। निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ.गोपाल बेरी ने राज्य में क्रियान्वित किये जा रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्सा अधीक्षक, मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास अस्पताल शिमला डॉ. सुरेखा चोपड़ा और अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने की राज्य स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने आज यहां मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोष के तहत गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और उनके समग्र विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही निर्णय में इन बच्चों को 'चिल्ड्रन ऑफ स्टेटÓ के रूप में अपनाने का संकल्प लिया। इसके बाद इन बच्चों के कल्याण के लिए 'मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजनाÓ और 'मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोषÓ शुरू की गई। मंत्री ने अधिकारियों को योजना का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र बच्चे को इस कल्याणकारी योजना का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि नि:शुल्क शिक्षा, कौशल विकास के अवसर, करियर परामर्श, विवाह अनुदान, घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता और अन्य सुविधाएं प्रदान करने से इन बच्चों को जीवन में उपयोगी कार्य करने में मदद मिलेगी जिससे समाज को लाभ होगा। इस बैठक में सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता एम. सुधा देवी, निदेशक महिला एवं बाल विकास रूपाली ठाकुर, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत के. शर्मा, विशेष सचिव तकनीकी शिक्षा संदीप कुमार, निदेशक (अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम का सशक्तिकरण) प्रदीप कुमार, अतिरिक्त निदेशक महिला एवं बाल विकास मोहन दत्त एवं अतिरिक्त सचिव वित्त विनय कुमार उपस्थित थे।


















































