•   Thursday Sep 03
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The atmosphere in the Assembly heated up over the University Bill! BJP attacks: Amendments threaten university autonomy.
In Politics

विधानसभा में यूनिवर्सिटी बिल पर गरमा गया माहौल! BJP का हमला—संशोधन से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खतरे में

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार ने विधेयक को विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है।  विधेयक के तहत प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है। शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC के माध्यम से और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार की ओर से अधिसूचित एजेंसी के जरिए किए जाने का प्रावधान है।  इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की कमान वित्त सचिव को देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा।  वहीं BJP ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विपक्ष का तर्क है कि विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है और सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है।  इस विधेयक के दायरे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर और अटल मेडिकल रिसर्च विश्वविद्यालय नेरचौक शामिल हैं l अब सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा खासा गरमाने के आसार हैं कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के नाम पर सरकारी निगरानी कितनी होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कैसे बरकरार रखी जाए।

OBC Morcha rallies in Dharamshala! Massive protest outside the DC office demanding a separate headcount in the census.
In News

धर्मशाला में गरजा OBC मोर्चा! जनगणना में अलग गिनती की मांग पर DC ऑफिस के बाहर जोरदार प्रदर्शन

धर्मशाला: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की अलग से गणना करवाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने बुधवार को धर्मशाला में जोरदार प्रदर्शन किया। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता डीसी कार्यालय के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।  प्रदर्शन से पहले मोर्चा की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें केंद्र सरकार से OBC की वैज्ञानिक, प्रमाणिक और अलग गणना करवाने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में OBC की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने आना बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि सही आंकड़े मिलने के बाद शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहतर नीतियां तैयार की जा सकेंगी।  मोर्चा ने मांग रखी कि जिस तरह SC और ST की जनगणना की जाती है, उसी तर्ज पर OBC की भी अलग से गणना हो। इसके साथ ही प्रत्येक जाति के लिए अलग और विशिष्ट कोड निर्धारित करने तथा ओपन कॉलम की जगह मानकीकृत व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।  OBC विशेष वर्ग से महेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि जनगणना में OBC की वास्तविक संख्या दर्ज होना सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जातिवार आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की भी मांग उठाई। 

A 66-year democratic journey! Tibetan democracy celebrated in Dharamshala; tribute paid to the Dalai Lama's contribution.
In News update

66 साल का लोकतांत्रिक सफर !धर्मशाला में तिब्बत लोकतंत्र का जशन, दलाई लामा के योगदान को किया नमन

धर्मशाला: तिब्बती लोकतंत्र की स्थापना के 66 वर्ष पूरे होने पर धर्मशाला में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में हुए इस कार्यक्रम में तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास और परम पावन दलाई लामा के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से मेधावी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही तिब्बती कलाकारों और बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग भर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद लोगों का खूब ध्यान खींचा। कार्यक्रम के दौरान तिब्बती संस्कृति, परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग पेपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती लोकतंत्र दलाई लामा की दूरदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक लोकतंत्र के इन मूल्यों को पहुंचाना सभी तिब्बतियों की जिम्मेदारी है। बताया गया कि 2 सितंबर 1960 को पहली तिब्बती जनप्रतिनिधि सभा के गठन के साथ तिब्बती लोकतांत्रिक सरकार की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1991 में निर्वासित तिब्बती प्रशासन को लिखित संविधान आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदला गया और वर्ष 2001 से राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के अंत में निर्वासित तिब्बती संसद ने भारत सरकार और भारतीय जनता के सहयोग के लिए आभार जताया और दलाई लामा की दीर्घायु तथा तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की कामना की।  

Major change in scholarship rules: a student can now receive more than one scholarship.
In Education

छात्रवृत्ति नियमों में बड़ा बदलाव, अब एक विद्यार्थी को मिल सकती है एक से ज्यादा स्कॉलरशिप

NSP पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रवृत्ति के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पात्र विद्यार्थी एक मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के साथ-साथ पात्रता पूरी करने पर एक से अधिक कल्याणकारी छात्रवृत्तियों का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार ने मौजूदा ‘वन स्टूडेंट-वन स्कॉलरशिप’ व्यवस्था को बदलकर ‘वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप’ करने का फैसला लिया है। यानी अगर कोई विद्यार्थी पहले से कल्याणकारी छात्रवृत्ति ले रहा है और बाद में मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे मेरिट छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह मेरिट छात्रवृत्ति लेने वाला विद्यार्थी पात्रता पूरी करने पर कल्याणकारी छात्रवृत्ति भी ले सकेगा। वहीं विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी आसान की गई है। पहली बार आवेदन करते समय भरी गई सामान्य जानकारी को आगे के आवेदनों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। बाद के आवेदनों में विद्यार्थी को केवल संबंधित योजना की जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अगर आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो विद्यार्थी को योजना से जुड़ी जानकारी में सुधार का मौका दिया जाएगा। वहीं सामान्य शैक्षणिक या संस्थान संबंधी जानकारी में बदलाव करने के लिए पहले जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे। नए प्रावधान के तहत संस्थानों के नोडल अधिकारियों को भी विद्यार्थी के सभी छात्रवृत्ति आवेदनों और उनकी स्थिति दिखाई देगी। इससे आवेदन के सत्यापन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों को इन नए नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थानों से कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, प्रार्थना सभा और जागरूकता अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को जानकारी दी जाए और निर्धारित समय सीमा में आवेदन करवाए जाएं। यानी 2026-27 से विद्यार्थियों को ज्यादा छात्रवृत्ति के अवसर मिलने के साथ-साथ आवेदन प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान होने वाली है।

हमीरपुर की ताल कृषि सहकारी सभा में 2.46 करोड़ की गड़बड़ी! विजिलेंस का बड़ा एक्शन, छह लोगों पर FIR
In News

हमीरपुर की ताल कृषि सहकारी सभा में 2.46 करोड़ की गड़बड़ी! विजिलेंस का बड़ा एक्शन, छह लोगों पर FIR

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में ताल कृषि सहकारी सभा में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच के बाद विजिलेंस ने मामले में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। बताया जा रहा है कि सहकारी सभा में करीब 2 करोड़ 46 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस ने जांच आगे बढ़ाई और अब छह लोगों को FIR में नामजद किया है। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद सहकारी क्षेत्र में भी हड़कंप मच गया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम में गड़बड़ी कैसे हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसे का इस्तेमाल किस तरह किया गया। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में गड़बड़ी से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

River turns into a peril, Mi-17 becomes a savior! Elderly man stranded in Himachal rescued by helicopter; young man also saved safely.
In News update

नदी बनी मुसीबत, MI-17 बना मसीहा! हिमाचल में फंसे बुजुर्ग का हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू, युवक को भी सुरक्षित बचाया

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में मंगलवार को मूसलाधार बारिश के बीच बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. नाहन विकासखंड की बर्मा पापड़ी पंचायत में रूण नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव में फंसे बुजुर्ग बनारसी दास को सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया. वहीं, बुजुर्ग को बचाने के लिए नदी में उतरा युवक अंशुल भी कई घंटे तक नदी के बीच फंसा रहा, जिसे बाद में रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया.  सीस मामले में नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से संपर्क किया गया. इसके बाद सेना से सहायता मांगी गई और सहारनपुर से एमआई-17 हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए पहुंचा. विधायक के मुताबिक रेस्क्यू के समय अंधेरा हो चुका था, लेकिन हेलीकॉप्टर रात में भी रेस्क्यू उड़ान भरने में सक्षम था. बुजुर्ग को सुरक्षित निकाल लिया गया है और युवक अंशुल को भी रेस्क्यू टीम की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

Electricity Board employees raise their voices in Shimla for the restoration of OPS; hold a rally at Chaura Maidan and shout slogans fiercely against the government.
In News

OPS बहाली के लिए शिमला में गरजे बिजली बोर्ड कर्मचारी, चौड़ा मैदान में निकाली रैली; सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी

पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली और आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने बुधवार को शिमला के चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में बिजली बोर्ड कर्मचारी चौड़ा मैदान में जुटे और रैली निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगें जल्द पूरी करने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सरकार से ठोस फैसला लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और OPS बहाली समेत अन्य लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाए। चौड़ा मैदान में हुए इस प्रदर्शन के चलते काफी देर तक माहौल गरमाया रहा और कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं।  

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विधानसभा में यूनिवर्सिटी बिल पर गरमा गया माहौल! BJP का हमला—संशोधन से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खतरे में

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The atmosphere in the Assembly heated up over the University Bill! BJP attacks: Amendments threaten university autonomy.

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार ने विधेयक को विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है।  विधेयक के तहत प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है। शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC के माध्यम से और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार की ओर से अधिसूचित एजेंसी के जरिए किए जाने का प्रावधान है।  इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की कमान वित्त सचिव को देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा।  वहीं BJP ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विपक्ष का तर्क है कि विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है और सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है।  इस विधेयक के दायरे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर और अटल मेडिकल रिसर्च विश्वविद्यालय नेरचौक शामिल हैं l अब सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा खासा गरमाने के आसार हैं कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के नाम पर सरकारी निगरानी कितनी होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कैसे बरकरार रखी जाए।

महूनाग में कार हादसे से मचा हड़कंप! अनियंत्रित होकर सड़क पर पलटी कार, एक की मौत और दो गंभीर घायल

In Health
Panic ensues following a car accident in Mahunag! Car overturns on the road after going out of control; one dead, two critically injured.

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के माहूंनाग के समीप बुधवार सुबह एक  सड़क हादसा हुआ I जिसमे  कार पलटने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गयी  जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताएं जा रहे है । हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है। जानकारी के अनुसार कार माहूंनाग के समीप अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसा होते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वाहन में सवार घायलों को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। हादसे में मोहन सिंह मेहरन की मौत हो गई। वहीं विनीत और चुड़ामणी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी। डीएसपी करसोग चांद किशोर ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

विधानसभा में यूनिवर्सिटी बिल पर गरमा गया माहौल! BJP का हमला—संशोधन से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खतरे में

In Education
The atmosphere in the Assembly heated up over the University Bill! BJP attacks: Amendments threaten university autonomy.

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार ने विधेयक को विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है।  विधेयक के तहत प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है। शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC के माध्यम से और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार की ओर से अधिसूचित एजेंसी के जरिए किए जाने का प्रावधान है।  इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की कमान वित्त सचिव को देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा।  वहीं BJP ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विपक्ष का तर्क है कि विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है और सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है।  इस विधेयक के दायरे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर और अटल मेडिकल रिसर्च विश्वविद्यालय नेरचौक शामिल हैं l अब सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा खासा गरमाने के आसार हैं कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के नाम पर सरकारी निगरानी कितनी होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कैसे बरकरार रखी जाए।

आयरलैंड की हार भुलाने उतरेगा भारत, इंग्लैंड के खिलाफ जीत से करना होगा आगाज़

In Sports
India will look to put the loss against Ireland behind them and kick off with a win against England.

आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज में नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला बुधवार को इंग्लैंड के चेस्टर-ली-स्ट्रीट में खेला जाएगा। टीम इंडिया इस सीरीज में जीत दर्ज कर पिछली हार को भुलाना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह सीरीज काफी अहम होगी। आयरलैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था, ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ वह कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों से अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। इस बीच भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पहले ही टी-20 मुकाबले में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया जाना चाहिए। आयरलैंड दौरे पर वैभव को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी, लेकिन अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू का मौका मिलता है। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम भी हाल के दिनों में शानदार फॉर्म में नहीं रही है। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में उसे हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि वह रेड बॉल क्रिकेट था, लेकिन अपने घर में मिली हार के बाद इंग्लैंड भी वापसी के इरादे से मैदान पर उतरेगा। ऐसे में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टी-20 मैचों के बाद तीन वनडे मुकाबले भी खेले जाएंगे। दोनों टीमों में कई युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण मौजूद है, जिससे इस दौरे के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें पहले मुकाबले पर हैं कि क्या टीम इंडिया जीत के साथ सीरीज का आगाज़ करती है और क्या युवा वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलता है।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

धर्मशाला में गरजा OBC मोर्चा! जनगणना में अलग गिनती की मांग पर DC ऑफिस के बाहर जोरदार प्रदर्शन

In News
OBC Morcha rallies in Dharamshala! Massive protest outside the DC office demanding a separate headcount in the census.

धर्मशाला: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की अलग से गणना करवाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने बुधवार को धर्मशाला में जोरदार प्रदर्शन किया। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता डीसी कार्यालय के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।  प्रदर्शन से पहले मोर्चा की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें केंद्र सरकार से OBC की वैज्ञानिक, प्रमाणिक और अलग गणना करवाने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में OBC की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने आना बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि सही आंकड़े मिलने के बाद शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहतर नीतियां तैयार की जा सकेंगी।  मोर्चा ने मांग रखी कि जिस तरह SC और ST की जनगणना की जाती है, उसी तर्ज पर OBC की भी अलग से गणना हो। इसके साथ ही प्रत्येक जाति के लिए अलग और विशिष्ट कोड निर्धारित करने तथा ओपन कॉलम की जगह मानकीकृत व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।  OBC विशेष वर्ग से महेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि जनगणना में OBC की वास्तविक संख्या दर्ज होना सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जातिवार आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की भी मांग उठाई। 

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
CONGRESS-APPOINTED-32-DISTRICT-HEADS-IN-HARYANA

बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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