•   Monday Oct 12
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Foundation stone laid for ICMR research center in Keylong; Nadda performs the ceremony.
In Politics

केलांग में ICMR रिसर्च सेंटर की नींव, नड्डा ने किया शिलान्यास

लाहौल-स्पीति के केलांग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ICMR सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च (ICMR-CHAMP) का शिलान्यास किया। यह ICMR का उच्च हिमालयी चिकित्सा और जनस्वास्थ्य अनुसंधान पर केंद्रित पहला समर्पित केंद्र होगा।  इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य हिमालयी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर वैज्ञानिक शोध करना है। यहां हाई एल्टीट्यूड फिजियोलॉजी, पर्वतीय चिकित्सा, जलवायु से जुड़ी बीमारियों, संक्रामक रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा चिकित्सा जैसे विषयों पर अध्ययन किया जाएगा।  केंद्र से दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, ड्रोन के जरिए दवाओं और स्वास्थ्य सामग्री की पहुंच तथा रियल-टाइम हेल्थ सर्विलांस जैसी तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। इसका फायदा स्थानीय लोगों के साथ-साथ ऊंचाई वाले और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना के जवानों को भी मिलने की उम्मीद है। केंद्र में ऊंचाई पर शरीर में होने वाले बदलाव, अनुकूलन और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याओं पर शोध किया जाएगा। इसके लिए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।  केलांग में इस केंद्र की स्थापना से हिमाचल के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान, आपदा प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

CM Sukhu attends Congress protest in Delhi, raises questions about the election process.
In Politics

दिल्ली में कांग्रेस प्रदर्शन में पहुंचे CM सुक्खू, चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

दिल्ली में सोमवार को कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में हिमाचल से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 2,000 कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और कई मंत्री-विधायक भी प्रदर्शन में शामिल रहे।  कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के SIR और कथित वोट चोरी से जुड़े मामलों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रही है। वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए SIR को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताते हैं।  दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च भी किया। प्रदर्शन के चलते मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई और कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा गया।  कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। हिमाचल कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर पहले जिला स्तर पर प्रदर्शन कर चुकी है।

Jan Shatabdi's track changed in Una; chaos ensued at the station.
In News update

ऊना में जनशताब्दी का ट्रैक बदला, स्टेशन पर मची अफरा-तफरी

ऊना: ऊना रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह रेल स्विच पॉइंट से छेड़छाड़ के चलते दौलतपुर चौक से नई दिल्ली जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस निर्धारित प्लेटफॉर्म के बजाय दूसरे ट्रैक पर पहुंच गई। अचानक प्लेटफॉर्म बदलने से स्टेशन पर यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।  यात्री प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे और अनाउंसमेंट भी इसी प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आने की हो रही थी। इसी बीच ट्रेन मुख्य लाइन से प्लेटफॉर्म-1 की जगह प्लेटफॉर्म-2 की लूप लाइन की ओर चली गई। इसके बाद यात्रियों को फुटओवर ब्रिज के जरिए दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर भागना पड़ा।  इस दौरान कुछ यात्री ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में पटरी पार करते हुए भी नजर आए। छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रही महिलाओं और भारी सामान वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।  रेल स्विच पॉइंट से छेड़छाड़ ऊना के स्टेशन अधीक्षक विक्रम के अनुसार, असामाजिक तत्वों द्वारा रेल स्विच पॉइंट से छेड़छाड़ की गई थी। इसी वजह से ट्रेन को तत्काल दूसरे प्लेटफॉर्म की दिशा में डायवर्ट करना पड़ा। उनका कहना है कि समय रहते ट्रेन को दूसरे ट्रैक की ओर नहीं मोड़ा जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।  घटना के बाद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऊना स्टेशन से रोजाना वंदे भारत समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की आवाजाही होती है। ऐसे में रेल ट्रैक और स्विच पॉइंट जैसे संवेदनशील हिस्सों से छेड़छाड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

Panchayats' ₹300 crore accounts stuck; Centre seeks records.
In News

पंचायतों का ₹300 करोड़ का हिसाब अटका, केंद्र ने मांगा रिकॉर्ड

शिमला: हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत करवाए गए करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक जमा नहीं हो पाए हैं। केंद्र सरकार ने इन कार्यों का रिकॉर्ड और खर्च का पूरा ब्योरा मांगा है।  दरअसल, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंचायतों में किए गए विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाणपत्र के जरिए यह प्रमाणित किया जाता है कि योजना के तहत मिली राशि निर्धारित उद्देश्य पर खर्च की गई है। इसके साथ संबंधित कार्यों का विवरण, बिल और खर्च का रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होता है।  बताया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में लगे समय और विकास कार्यों में हुई देरी के कारण बड़ी राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं हो सके। अब पंचायतों को बिलों सहित रिकॉर्ड जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।  15वें वित्त आयोग की राशि का बड़ा हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना था। वहीं, शेष राशि पंचायतों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल की जा सकती थी।  पुराने फंड का हिसाब लंबित रहने से अगली वित्त आयोग की किस्तों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर मामले में राशि अपने आप रुकना तय नहीं है; इसका असर संबंधित अनुदान की शर्तों और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।  ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पाल रासु ने बताया कि पुराने वित्तीय वर्ष के करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाए जाने हैं और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए

Rationalization approved in PWD; surplus officers and staff to be shifted.
In Himachal

PWD में युक्तीकरण मंजूर, अतिरिक्त अफसर-कर्मचारी होंगे शिफ्ट

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) में अधिकारियों और कर्मचारियों के युक्तीकरण (Rationalization) को मंजूरी दे दी है। इसके तहत स्वीकृत पदों से अधिक तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को जरूरत वाले क्षेत्रों में भेजा जाएगा।  सरकार के फैसले के बाद उन मंडलों, उपमंडलों और विंग में तैनात अतिरिक्त स्टाफ का समायोजन किया जाएगा, जहां स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मचारी अधिक हैं। वहीं, जिन क्षेत्रों में तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहां इन कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी।  रिपोर्ट के अनुसार, कई जिला मुख्यालयों और सुविधाजनक मंडलों में एक ही स्वीकृत पद के मुकाबले दो से तीन अधिकारी या कर्मचारी संबद्ध हैं। इसके विपरीत चंबा, सिरमौर, कुल्लू, मंडी और शिमला के दूरदराज क्षेत्रों में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के पद खाली हैं।  NH विंग में भी होगा स्टाफ का समायोजन नेशनल हाईवे विंग में भी सड़कों की जिम्मेदारी कम होने के कारण स्टाफ का पुनर्समायोजन किया जाएगा। तीन और राष्ट्रीय राजमार्ग NHAI को सौंपे जाने के बाद PWD के NH विंग के पास अब 779 किलोमीटर सड़कों की जिम्मेदारी रह गई है। वहीं NHAI के पास 1,244 किलोमीटर और BRO के पास 569 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग हैं।  सरकार का उद्देश्य उपलब्ध मानव संसाधन का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करना और दूरदराज क्षेत्रों में तकनीकी स्टाफ की कमी को दूर करना है, ताकि सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।

Governor concerned about the voice of the youth; says nationalist mindset is essential.
In News update

युवाओं की आवाज पर राज्यपाल की चिंता, बोले- राष्ट्रवादी सोच जरूरी

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने युवाओं की भूमिका और उनकी आवाज को लेकर चिंता जताई। एनआईटी हमीरपुर में आयोजित शिक्षा महाकुंभ 6.0 में उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाना जरूरी है और राष्ट्र निर्माण में उनकी अहम भूमिका है।  राज्यपाल ने युवाओं से शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है, ऐसे में युवाओं को अपनी क्षमता का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहिए। इससे पहले भी राज्यपाल युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कह चुके हैं कि युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय हित की दिशा में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि भटके हुए युवाओं को सही मार्गदर्शन और सकारात्मक प्रेरणा की जरूरत है।  राज्यपाल ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा, कौशल, तकनीक और राष्ट्र निर्माण को साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने की अपील की।

Funding for monkey control halted; threat from rising population may increase.
In News

बंदरों पर लगाम की फंडिंग बंद, बढ़ सकता है आबादी का खतरा

हिमाचल प्रदेश: प्रदेश में बंदरों की बढ़ती समस्या पर नियंत्रण के लिए चलाया जा रहा नसबंदी अभियान अब फंडिंग की चुनौती से जूझ रहा है। वन विभाग के अनुसार, पहले बंदरों की नसबंदी के लिए CAMPA से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब विभाग को इस अभियान को जारी रखने के लिए वैकल्पिक फंडिंग की तलाश करनी पड़ रही है। नसबंदी अभियान बंद होने या इसकी रफ्तार कम होने से भविष्य में बंदरों की आबादी को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बंदरों की संख्या तुरंत बढ़ जाएगी। इसका असर नसबंदी की गति, प्रजनन दर और अन्य आबादी नियंत्रण उपायों पर निर्भर करेगा। हिमाचल में वर्ष 2007 से बंदर नसबंदी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 1.86 लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके चलते प्रदेश में रीसस मकाक की आबादी में लंबे समय में गिरावट दर्ज की गई है। 2004 में अनुमानित आबादी करीब 3.17 लाख थी, जो 2020 में घटकर 1.36 लाख रह गई।  हाल के वर्षों में अभियान की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। 2024-25 में 8,800 बंदरों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन केवल 2,284 बंदरों की नसबंदी हो सकी। इसके पीछे फंडिंग के साथ-साथ बंदरों को पकड़ने और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आई हैं। फिलहाल वन एवं वन्यजीव विभाग ने प्रदेश के सभी सात नसबंदी केंद्रों को चालू रखने का फैसला किया है। इन केंद्रों के जरिए बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने और मानव-बंदर संघर्ष को कम करने की कोशिश जारी रखने की बात कही गई है।  विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन केंद्रों और नसबंदी अभियान के लिए लगातार फंडिंग, स्टाफ और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना है। 2024 में बंदरों की आबादी का नया सर्वे भी कराया गया था, जिसके आंकड़ों का इस्तेमाल आगे की रणनीति तय करने में किया जाएगा।

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केलांग में ICMR रिसर्च सेंटर की नींव, नड्डा ने किया शिलान्यास

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Foundation stone laid for ICMR research center in Keylong; Nadda performs the ceremony.

लाहौल-स्पीति के केलांग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ICMR सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च (ICMR-CHAMP) का शिलान्यास किया। यह ICMR का उच्च हिमालयी चिकित्सा और जनस्वास्थ्य अनुसंधान पर केंद्रित पहला समर्पित केंद्र होगा।  इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य हिमालयी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर वैज्ञानिक शोध करना है। यहां हाई एल्टीट्यूड फिजियोलॉजी, पर्वतीय चिकित्सा, जलवायु से जुड़ी बीमारियों, संक्रामक रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा चिकित्सा जैसे विषयों पर अध्ययन किया जाएगा।  केंद्र से दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, ड्रोन के जरिए दवाओं और स्वास्थ्य सामग्री की पहुंच तथा रियल-टाइम हेल्थ सर्विलांस जैसी तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। इसका फायदा स्थानीय लोगों के साथ-साथ ऊंचाई वाले और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना के जवानों को भी मिलने की उम्मीद है। केंद्र में ऊंचाई पर शरीर में होने वाले बदलाव, अनुकूलन और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याओं पर शोध किया जाएगा। इसके लिए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।  केलांग में इस केंद्र की स्थापना से हिमाचल के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान, आपदा प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 8 महीने में 237 सैंपल फेल

In Health
Serious questions raised over medicine quality in Badi; 237 samples failed in 8 months.

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले आठ महीनों में बद्दी और आसपास के फार्मा उद्योगों से जुड़े 237 दवा सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए हैं। इनमें बुखार, हार्ट समेत अलग-अलग बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में लगातार हिमाचल में निर्मित दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे न उतरने के मामले सामने आते रहे हैं। हालिया ड्रग अलर्ट में भी हिमाचल की कई दवाएं फेल हुई हैं।  बद्दी की फार्मा कंपनियों से जुड़े मामलों में पहले भी हार्ट संबंधी दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल फेल होने के मामले सामने आ चुके हैं। अक्टूबर 2024 के एक ड्रग अलर्ट में बद्दी की एक कंपनी की Calcium Gluconate दवा, जिसका इस्तेमाल कैल्शियम की कमी और कुछ आपात स्थितियों में किया जाता है, गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी था I वहीं, 2025 में बद्दी की एक फार्मा यूनिट को बार-बार सैंपल फेल होने और Good Manufacturing Practices (GMP) में कमियों के चलते कुछ दवाओं का उत्पादन रोकने के निर्देश दिए गए थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कंपनियों के सैंपल लगातार फेल हो रहे हैं, उनके खिलाफ लाइसेंस सस्पेंड करने या उत्पादन रोकने की कार्रवाई के बावजूद क्या वास्तव में प्रोडक्शन पूरी तरह बंद हो रहा है? इसी को लेकर विभागीय कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, हर फेल सैंपल का मतलब यह नहीं होता कि पूरी कंपनी की सभी दवाएं खराब हैं। किसी विशेष बैच या दवा के निर्धारित गुणवत्ता पैरामीटर में कमी मिलने पर संबंधित बैच पर कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में कंपनियों को नोटिस, बाजार से बैच वापस लेने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।  बद्दी  देश  के प्रमुख फार्मा हब में शामिल है, इसलिए यहां दवाओं के गुणवत्ता मानकों को लेकर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं मरीजों की सुरक्षा और ड्रग रेगुलेशन की प्रभावशीलता से सीधे जुड़ जाती हैं। हाल के वर्षों में अधिकारियों ने कुछ इकाइयों के खिलाफ उत्पादन रोकने और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की है। 

मलबे में जिंदगी खोजेगा छात्रों का ‘प्रहरी रोबोट’

In Education
Students’ ‘Sentry Robot’ to search for life in the debris.

छात्रों ने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य को आसान बनाने के लिए एक खास ‘प्रहरी रोबोट’ तैयार किया है। यह रोबोट मलबे में दबे लोगों की सांसों और हलचल का पता लगाने में मदद करेगा। साथ ही 3D मैपिंग तकनीक के जरिए मलबे के बीच सुरक्षित रास्ता तलाशकर बचाव दल तक जानकारी पहुंचाएगा। रोबोट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उन जगहों पर भी पहुंच सके, जहां इंसानों का जाना जोखिम भरा हो सकता है। मलबे के भीतर फंसे लोगों की मौजूदगी का पता लगाकर यह राहत टीम को संभावित स्थान की जानकारी देगा। 3D मैपिंग की मदद से रोबोट आसपास के क्षेत्र का नक्शा तैयार करेगा, जिससे बचावकर्मियों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। छात्रों का यह नवाचार भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के दौरान जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

बीएल स्कूल कुनिहार में 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता, खेलों के साथ पढ़ाई में भी विद्यार्थी आगे

In Sports
BL School Kunihar organised the 32nd annual sports competition; students excelled in academics and sports.

बी.एल. वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुनिहार में आयोजित 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आज भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया । इस आयोजन  में विद्यालय के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विद्यालय परिवार ने मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया।कार्यक्रम का मंच संचालन शिवानी शर्मा ने किया। विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।विद्यालय के शारीरिक शिक्षक अमर देव एवं शारीरिक शिक्षिका अरुणा शर्मा ने बताया कि वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया था। विद्यार्थियों ने मास पी.टी. की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। शरीक शिक्षिका अरुणा ने बताया की दिनांक 9 अक्तूबर को  नर्सरी से युकेजी कक्षा तक बच्चों  तक के विद्यार्थियों के लिए,  किड्स रेस, रिंग रेस सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। दिनांक 10  अक्तूबर को पहली से पांचवीं कक्षा  के विद्यार्थियों के लिए 100 मीटर दौड़, व् अन्य रेस करवाई गई , सभी बच्चों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बी.एल. स्कूल कुनिहार के विद्यार्थी खेलकूद के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी तथा विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को गोल्ड, सिल्वर एवं ब्रॉन्ज मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। मेडल प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था । पी टी ए अध्यक्ष वी समस्त सदस्यों ने वार्षिक खेल कूद प्रतियोगिता के लिए बधाई दी । कार्यक्रम में विद्यालय के उपप्रधानाचार्य पुरशोत्तम लाल, मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा, समस्त अध्यापक वर्ग तथा विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का समापन विद्यार्थियों में खेल भावना, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करते हुए हुआ।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

पंचायतों का ₹300 करोड़ का हिसाब अटका, केंद्र ने मांगा रिकॉर्ड

In News
Panchayats' ₹300 crore accounts stuck; Centre seeks records.

शिमला: हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत करवाए गए करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक जमा नहीं हो पाए हैं। केंद्र सरकार ने इन कार्यों का रिकॉर्ड और खर्च का पूरा ब्योरा मांगा है।  दरअसल, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंचायतों में किए गए विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाणपत्र के जरिए यह प्रमाणित किया जाता है कि योजना के तहत मिली राशि निर्धारित उद्देश्य पर खर्च की गई है। इसके साथ संबंधित कार्यों का विवरण, बिल और खर्च का रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होता है।  बताया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में लगे समय और विकास कार्यों में हुई देरी के कारण बड़ी राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं हो सके। अब पंचायतों को बिलों सहित रिकॉर्ड जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।  15वें वित्त आयोग की राशि का बड़ा हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना था। वहीं, शेष राशि पंचायतों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल की जा सकती थी।  पुराने फंड का हिसाब लंबित रहने से अगली वित्त आयोग की किस्तों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर मामले में राशि अपने आप रुकना तय नहीं है; इसका असर संबंधित अनुदान की शर्तों और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।  ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पाल रासु ने बताया कि पुराने वित्तीय वर्ष के करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाए जाने हैं और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
CONGRESS-APPOINTED-32-DISTRICT-HEADS-IN-HARYANA

बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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