मुख्यमंत्री ने कनाडा के कैलगरी में आयोजित हिमाचली धाम कार्यक्रम को वर्चुअली किया संबोधित मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज शिमला से वर्चुअल माध्यम से कनाडा में हिमाचली एसोसिएशन ऑफ अल्बर्टा, कैलगरी द्वारा आयोजित 'हिमाचली धामÓ कार्यक्रम को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विदेशों में रह रहे हिमाचलियों को अपनी समृद्ध विरासत और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जीवंत संस्कृति के अग्रदूत के रूप में प्रवासी हिमाचली विश्व भर में प्रशंसनीय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को राज्य की परंपराओं और संस्कृति से परिचित करवाने में इस प्रकार के आयोजन महत्वपूर्ण हैं और इससे युवा अपनी संस्कृति के प्रति और अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन विश्व भर में रह रहे हिमाचलियों और उनकी मातृभूमि के मध्य अटूट बंधन का भी प्रतीक हैं। उन्होंने प्रदेश से दूर रहने के बावजूद हिमाचल की संस्कृति के संरक्षण में एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना की। हिमाचली एसोसिएशन ऑफ अल्बर्टा के अध्यक्ष, अमित शर्मा ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से एसोसिएशन हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत के संवर्द्धन के साथ-साथ भौगोलिक दूरियों को कम करते हुए हिमाचल के प्रवासियों और निवासियों के मध्य संबंधों को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कैलगरी में वार्षिक हिमाचली धाम के आयोजन ने हिमाचलियों को राज्य की समृद्ध परंपराओं, स्वादिष्ट व्यंजनों, मधुर संगीत और मनमोहक नृत्य के प्रदर्शन ने एकजुट किया है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कनाडा के अल्बर्टा प्रांत से बड़ी संख्या में प्रवासी हिमाचली कैलगरी में एकत्र हुए।
सिरमौर के जिला मुख्यालय नाहन के 12 और औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के एक एटीएम से 24.65 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। हैरानी इस बात की है कि पैसे गायब करने वाला और कोई नहीं, बल्कि एटीएम में पैसे डालने वाला यानी बैंकों की ओर से अधिकृत कंपनी का एक एग्जीक्यूटिव अफसर निकला। फिलहाल, बैंक प्रबंधकों की ओर से शिकायत के बाद सदर पुलिस थाना नाहन में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी से पुलिस सात लाख रुपये की रिकवरी भी कर चुकी है। इस मामले में पुलिस आगामी कार्रवाई में जुटी है। बता दें कि नाहन में एसबीआई, एचडीएफसी समेत अन्य बैंकों के एटीएम हैं। एसबीआई के जिला मुख्यालय नाहन में जगह-जगह एटीएम हैं। वहीं, कालाअंब में भी कई एटीएम चल रहे हैं, जहां से कंपनी का अधिकारी बैंकों की ओर से दिए गए कोड से एटीएम में बची राशि की निकासी करता रहा। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंकों की ओर से आडिट किया गया। खुलासा हुआ कि एटीएम में पड़े कैश और उपभोक्ताओं की ओर से निकाली गई राशि में काफी अंतर है। बताया जा रहा है कि एटीएम में कैश डालने वाला अधिकारी दूसरी बार कैश डालने से पहले ही कुछ राशि को बाहर निकाल लेता था। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। यह राशि एसबीआई और एचडीएफसी बैंकों के एटीएम से निकाली गई। जब बैंक प्रबंधन ने आरोपी के खिलाफ नाहन पुलिस सदर थाना में शिकायत दर्ज करवाई तो आरोपी दीपचंद निवासी रामाधौन, जिला सिरमौर ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली। मामला दर्ज होते ही आरोपी ने सात लाख रुपये जमा करवा दिए हैं। पुलिस अधीक्षक सिरमौर रमन कुमार मीणा ने बताया कि बैंक प्रबंधकों की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ है। पुलिस आगामी कार्रवाई में जुटी है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में विद्युत वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के दृष्टिगत एक प्रभावी नीति बनाएगी। यह जानकारी उन्होंने रविवार देर सायं यहां आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने कहा कि इस नीति में चार्जिंग स्टेशन में सुलभता, सुविधा और रोजगार सहित विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निजी ऑपरेटरों को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए 50 प्रतिशत की दर से उपदान भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रदेश में स्थापित और वर्तमान में निर्माणाधीन चार्जिंग स्टेशनों के बारे में विस्तृत जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश को विद्युत वाहनों के लिए आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से राज्य में निजी एवं सरकारी क्षेत्र के सहयोग से विद्युत वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश में प्रथम चरण में राष्ट्रीय एवं राज्य उच्च मार्गों को विद्युत वाहनों के माध्यम से छह ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन मार्गों की लंबाई 2137 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम में चरणबद्ध तरीके से विद्युत बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है ।उन्होंने हिमाचल पथ परिवहन निगम को विद्युत बसों के परिचालन के लिए रूट चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को विद्युत परिवहन के रूप में विकसित करने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए विकसित किए जाने वाले आधारभूत ढांचे के लिए चिह्नित की जाने वाली भूमि, संरचना निर्माण के लिए उपयुक्त होनी चाहिए। भूमि का मौके पर अध्ययन कर ही निर्माण कार्य आरंभ किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन नितांत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण की वस्तु स्थिति की समीक्षा भी की। उन्होंने इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन अमोनिया और बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की संभावना तलाश करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने इसके लिए पायलट आधार पर संयंत्र स्थापित करने के लिए 31 अक्तूबर, 2023 तक एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है। यह पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से पर्यावरण को बिना किसी नुकसान तथा प्रदूषण रहित ढंग से बनती है ।हिमाचल प्रदेश को ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देगी । उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा के रूप में जल ऊर्जा के दोहन में भी तेजी लाई जाएगी। वर्ष 2023-24 में 1000 मेगावाट क्षमता की पन- विद्युत परियोजनाओं को पूर्ण कर लिया जाएगा। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव भरत खेड़ा एवं आर. डी. नजीम, मनीष गर्ग, विभिन्न सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
साकिचरंग मंदिर के निर्माण के लिए उचित राशि प्रदान करने का दिया आश्वासन राजस्व, बागवानी एवम जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने गत दिवस किन्नौर जिला के निचार उपमंडल स्थित विकासनगर में 25 लाख 50 हजार रुपए की राशि से निर्मित रावा से विकासनगर स्पेन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा की इस स्पेन के बनने से क्षेत्र के किसान व बागवान सेब तथा अन्य नकदी फसलों को मंडी तक और अधिक शीघ्रता से पहुंचा सकेंगे। इसके उपरांत राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने सुंगरा पंचायत के बारो-भादो मेले में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने इस अवसर पर जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय जिला किन्नौर समृद्ध एवं पारंपरिक संस्कृति के लिए पूरे देश भर में जाना जाता है। यहां की वेश-भूषा, खान-पान, मेले एवं त्यौहार अपने आप में एक अलग पहचान रखते हैं जिससे जिला किन्नौर की एक अलग पहचान कायम है। उन्होंने जिला के सभी नौजवानों से किन्नौर की समृद्ध संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया तथा जिला में आयोजित होने वाले मेले एवं त्यौहारों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने बारो-भादो मेले के सफल आयोजन के लिए उचित राशि का प्रावधान करने का भी आश्वासन दिया। राजस्व मंत्री ने साकिचरंग मंदिर के निर्माण के लिए उचित राशि प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने महिला मण्डल बारो-साकिचरंग की महिलाओं द्वारा रखी गई सभी उचित मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने जनसभा को संबोधत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार जनजातीय जिलों का समग्र विकास सुनिश्चित कर रही है तथा लोगों को हर प्रकार की सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा की वर्तमान प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालते ही विकास के हर एक क्षेत्र में कार्य किया है तथा प्रदेश को विकास की दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य बनाने की और अग्रसर है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि पूरे प्रदेश ने भारी बारिश व बाढ़ से हुई तबाही का मंजर देखा है, परंतु इसके बावजूद भी प्रदेश अपने पैरों पर खड़ा होने की और अग्रसर है और प्रदेश सरकार क्षति की भरपाई का भरसक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावितों को उचित राशि प्रदान कर पुन: स्थापित किया जा रहा है। इससे पूर्व जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने बरी पंचायत के विकासनगर में भी जनसभा को संबोधित किया तथा प्राप्त हुए सभी उचित मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण करने का आश्वासन दिया। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी का बरी पंचायत पहुंचने पर ग्राम पंचायत प्रधान छूनित डोलमा व स्थानीय ग्रामवासियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष उमेश नेगी, किनफैड चेयरमेन चंद्रगोपाल नेगी, हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के निदेशक बिक्रम सिंह, जिला कांग्रेस समिति के महा सचिव जगदीश नेगी, सुंगरा पचंायत के प्रधान राकेश नगी, पूर्व उपप्रधान सुंगरा पंचायत अमृत लाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सुबह के वक्त सरकारी आवास ओकओवर से पैदल ही सचिवालय के लिए निकले। इस दौरान बीच-बीच में मुख्यमंत्री ने रास्ते में पैदल चलते हुए लोगों से बातचीत की। इससे पहले भी मुख्यमंत्री कई बार ओक ओवर से सचिवालय पैदल आते रहे हैं। सचिवालय में मुख्यमंत्री सुक्खू कुछ देर बाद सभी विभागों के सचिवों की मीटिंग ले रहे हैं। इसमें सरकार की प्रमुख योजनाओं और बजट घोषणाओं की प्रोग्रेस रिव्यू की जा रही है। इसी तरह 2023-24 के बजट भाषण की घोषणाओं का भी मुख्यमंत्री स्टेट अधिकारियों से पूछ रहे हैं और सभी अधिकारियों को योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र 18 सितंबर से शुरू हो रहा है। इसमें विपक्ष सुक्खू सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। लिहाजा सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री केंद्र व राज्य की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने, प्रदेशभर में आपदा के कारण तबाह हुए इन्फ्रॉस्ट्रक्चर को बहाल करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के सचिवों को मीटिंग में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। दोपहर बाद नादौन जाएंगे सुक्खू सचिवालय में मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू अपने गृह चुनाव क्षेत्र नादौन जाएंगे। यहां पर मुख्यमंत्री सबल योजना को लांच करेंगे और डाईट हमीरपुर में विशेष बच्चों को विभिन्न उपकरण देंगे। इसके बाद हमीरपुर के सेरा रेस्ट हाउस में स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनेंगे और रात को भी यहीं रुकेंगे।
केंद्र सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सोमवार भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई है। यह बैठक सर्किट हाउस शिमला में शुरू होने वाली है। हिमाचल में विधानसभा का मानसून सत्र 18 सितंबर से शुरू हो रहा है। इसलिए अब ये अटकलें हैं कि इस बैठक को बुलाने का मकसद क्या है? एक तरफ भाजपा नेता लोकसभा के चुनाव जल्दी होने की संभावनाओं के अनुसार तैयारी कर रहे हैं, दूसरी तरफ संसद के विशेष सत्र को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। भाजपा विधायकों की ड्यूटी इस बार राजस्थान चुनाव में भी लगेगी। ऐसे में संभव है कि मानसून सत्र की रणनीति को लेकर ही आज कोई चर्चा फाइनल हो। अभी विधायक मानसून सत्र के लिए अपने सवाल दे रहे हैं। विधायक दल की बैठक में विपक्ष विधानसभा सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए भी रणनीति तैयार करेगा। हिमाचल में कांग्रेस की सरकार के नौ महीने पूरे हो चुके है। इसके अलावा हिमाचल में भारी बारिश के कारण आई आपदा के कारण प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर भी विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हंै। विधानसभा सत्र के दौरान इस पर ज्यादा गहमागहमी होने के आसार है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कई सडक़ें काफी समय से बंद हैं। इन सडक़ों को खोलने के जब विपक्ष के लोगों ने अपनी जेसीबी लगाई तो फिर सरकार ने भाजपा की जेसीबी हटाने के आदेश जारी किए। हिमाचल प्रदेश में बंद पड़ी सडक़ों को ठीक करने की बजाए, सरकार कांग्रेस के ठेकेदारों की लिस्ट बना रही है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता चेतन बरागटा ने कहा की महंगाई हटाने का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस ने आते ही डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी। उसके तीन महीने बाद दोबारा 3.50 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी।जिस कारण जनता पर भारी बरसात के साथ-साथ कांग्रेस सरकार की मार भी पड़ रही है। उन्होंने ने कहा कि पिछले 8 महीने में खाद्य तेलों के दाम राशन डिपुओं में दो बार बढ़ गए। डिपुओं में दाल पर 16 रुपये किलो का दाम बढ़ना प्रदेश की जनता के साथ धोखा है। भारी बरसात के कारण गरीब जनता का वैसे ही परेशान है, उपर से दालों और डीजल का रेट बढ़ा कर प्रदेश सरकार ने जनता पर दोहरी मार की है। उन्होंने कहा की प्रदेश सरकार की इस कार्यप्रणाली से प्रदेश की जनता परेशान है। चेतन बरागटा ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार हिमाचल की जनता पर अतिरिक्त बोझ ढ़ालकर उनके जीवनयापन में कठिनाई पैदा कर रही है, वहीँ दूसरी ओर केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की जनता के बोझ को कम करने मे प्रयासरत्त है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 200 रुपये की कटौती की गई है। जिससे दिल्ली में अब घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटकर 903 रुपये हो गए हैं जो पहले 1103 रुपये थे। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में भी अब 200 रुपये की कटौती की गई है और जिन महिलाओं के पास उज्ज्वला योजना के गैस सिलेंडर है। उन्हें अब सिलेंडर भरने के लिए 400 रुपये कम अदा करने होंगे। जिससे उज्जवला योजना के तहत सिलेंडर लेने वालों को दोहरा फायदा होगा। मोदी सरकार ने LPG सिलेंडर की कीमतों में 200 रुपये की कटौती करने का जो फैसला लिया है। इससे करीब 30 करोड़ ग्राहकों को फायदा होगा वहीं, 75 लाख महिलाओं को उज्जवला के तहत नए कनेक्शन भी दिए जाएंगे।
शिक्षा का उद्देश्य पूर्ण रूप से विकसित और शांतिप्रिय व्यक्तित्व रखने वाले व्यक्तियों का निर्माण करना है, जिनका पोषण विश्व और उनके आसपास के समाज के लिए कुछ बड़ी सोच रखने के लिए किया गया हो। एक बालक को केवल सूचनाएं प्रदान करने की प्रक्रिया के द्वारा नहीं बल्कि समग्र रूप से शिक्षित किया जाना चाहिए। गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर का मानना है, 'कक्षा में बैठने से ही कोई शिक्षित हो रहा है, हम ऐसा नहीं मान सकते। हमें बच्चे के मन और शरीर के संपूर्ण विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ उसमें अपनापन, साझा करने और दूसरों की देखभाल करने की भावना, प्रेम, अहिंसा और शांति जैसे मानवीय मूल्यों को विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा।Ó एक सुंदर विचार है, जो प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा का हिस्सा था, जिसे आज पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। एक अच्छा शिक्षक सदा यही चाहेगा कि उसका छात्र विजयी हो और एक अच्छा छात्र उस शिक्षक की जीत की कामना करेगा, जिसका ह्रदय विशाल है। छात्र जानता था कि उसके अल्प ज्ञान की विजय केवल दुख लाएगी, जबकि गुरु के महान ज्ञान की जीत केवल अच्छाई लाएगी। इस सोच ने छात्र और शिक्षक के मध्य एक स्वस्थ संबंध बनाया, जहां छात्र और शिक्षक अपनी वृद्धि और विकास की यात्रा पर एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करते थे। अच्छे शिक्षक का धैर्यवान होना जरूरी एक अच्छे शिक्षक को बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है। एक शिक्षक का धैर्य छात्रों के जीवन में चमत्कार पैदा कर सकता है, भले ही वे सीखने में थोड़े धीमे हों। माता-पिता को घर पर केवल एक या दो बच्चों को संभालना होता है, जबकि शिक्षकों को छात्रों से भरे कक्ष को संभालना होता है। यह स्पष्ट रूप से शिक्षकों के लिए अधिक तनावपूर्ण और कठिन है। इसलिए शिक्षकों को अधिक केंद्रित होने की जरूरत है। ध्यान और श्वास अभ्यास जैसी विधियाँ शिक्षकों को शांत और केंद्रित रहने के लिए तैयार करने में काफी मदद कर सकती हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चे हर समय शिक्षकों को देख रहे होते हैं और उनसे सीख रहे होते हैं। शिष्य को प्रत्येक कदम पर मार्गदर्शन की आवश्यकता आज शिक्षकों के लिए यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि छात्र कहां खड़े हैं और उन्हें वहां से अंतिम लक्ष्य तक जाने में प्रत्येक कदम पर मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यहां हम भगवान कृष्ण से सीख सकते हैं कि किस तरह वे कदम दर कदम धैर्य और प्रेम के साथ अर्जुन को अंतिम मंजिल तक ले जाते हैं। आरंभ में अर्जुन भ्रमित थे और उनके मन में बहुत सारे सवाल थे। जैसे-जैसे एक छात्र बड़ा होता है, उसे बहुत अधिक भ्रम होना स्वाभाविक है क्योंकि उसकी अवधारणाएं टूटती रहती हैं। उदाहरण के लिए, हम सीखते हैं कि सूर्य पूर्व में उगता है, बाद में हमें पता चलता कि वास्तव में ग्रह कैसे गति करते हैं। इसलिए एक अच्छा शिक्षक छात्र के मन में उठने वाले इन सवालों के दौरान मार्गदर्शन करने के लिए उपलब्ध होता है। एक अच्छा शिक्षक जानकार होता है और छात्र को इन भ्रमों को दूर करने के लिए मार्गदर्शन करता है। साथ ही कई बार जरूरत पड़ने पर शिक्षक भ्रम पैदा भी कर सकते हैं। विद्रोही लोगों को प्रोत्साहन और पीठ थपथपाने की जरूरत शिक्षकों को एक नाजुक संयोजन के लिए प्रयास करना चाहिए जो है प्रेम के साथ दृढ़ता। ऐसे शिक्षक हैं, जो बहुत प्रेम करते हैं और कुछ अन्य केवल कठोर हैं। ऐसे बच्चे हैं जो विद्रोही हैं और ऐसे बच्चे हैं जो भीरु और शर्मीले हैं। विद्रोही लोगों को प्रोत्साहन और पीठ थपथपाने की जरूरत है। आपको उन्हें प्यार और उनकी देखभाल का एहसास कराना चाहिए और यह एहसास दिलाना चाहिए कि वे आपके अपने हैं। लेकिन जो बच्चे शर्मीले और डरपोक हैं, उन्हें खुलकर आगे आने और बोलने में सक्षम बनाने के लिए आप थोड़ा दृढ़ हो सकते हैं। उनके साथ सख्ती से पेश आएं और प्रेम भी करें। अक्सर हम इसका विपरीत करते हैं। शिक्षक विद्रोही बच्चों के साथ सख्ती से पेश आते हैं और शर्मीले बच्चों के साथ उदार बन जाते हैं। तब उनका व्यवहार का क्रम बेहतरी के लिए नहीं बदलेगा। आपको कठोर और कोमल दोनों होने की आवश्यकता है, अन्यथा आप छात्र का मार्गदर्शन उस दिशा की ओर नहीं कर पाएंगे जहां आप उन्हें ले जाना चाहते हैं।
कहा- केवल एक व्यक्ति के अहम की तुष्टि के लिए खोली गई सरदार पटेल यूनिवर्सिटी शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर पलटवार करते हुए कहा है कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय (एसपीयू) का मुद्दा उठाकर वह केवल राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। केवल मात्र अपने अहम की तुष्टि के लिए जयराम ठाकुर हजारों युवाओं के भविष्य को अंधकार में झोंकने पर अमादा है। सत्ता में रहते हुए जयराम ठाकुर ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय को केवल एक कॉलेज के भवन में शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यहां पर गुणात्मक शिक्षा तो दूर, न विद्यार्थियों के लिए कक्षा लगाने की सही व्यवस्था थी और न ही उनकी परीक्षाएं करवाने में विश्वविद्यालय सक्षम हो पाया। श्री जय राम ठाकुर ने सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक लाभ को देखते हुए सरदार पटेल यूनिवर्सिटी खोली और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। प्रेस वक्तव्य में रोहित ठाकुर ने कहा कि सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में पर्याप्त टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ भी नहीं है। ऐसे में वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों को उचित सुविधाएं कैसे मिल सकती हैं। इन हालात को देखते हुए कुछ कॉलेजों ने स्वयं लिख कर दिया था कि उन्हें सरदार पटेल यूनिवर्सिटी से हटाकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के साथ जोड़ा जाए, ताकि उनके यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 500 से ज्यादा टीचिंग स्टाफ है और नॉन टीचिंग स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार का सरदार पटेल विश्वविद्यालय को बंद करने का कोई इरादा नहीं है और न ही इस विश्वविद्यालय को बंद किया जा रहा है। लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए श्री जय राम ठाकुर ने एक बार फिर सरदार पटेल विश्वविद्यालय का राग छेड़ दिया है और वह क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। अच्छा होता कि सत्ता में रहते हुए वे विश्वविद्यालय खोलने के लिए पहले आधारभूत ढांचा विकसित करते। लेकिन, खेद की बात है कि उन्हें केवल अपने राजनीतिक लाभ की चिंता थी, बच्चों के भविष्य से उनका कोई लेना देना नहीं है। रोहित ठाकुर ने कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय की बात छेड़ कर वह लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन राज्य के लोग भाजपा की इस छल की राजनीति से अच्छी तरह से वाकिफ हैं।
जब पुलिस के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं माफिया तो आम आदमी कैसे करेगा खनन की शिकायत नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांगड़ा के लंज में अवैध खनन कर रहे माफिया को जब पुलिस ने रोका तो वह पुलिस से ही उलझ गया और उनसे ही अभद्रता करने लगे। यह कोई पहला मामला नहीं है, जब खनन माफिया ने पुलिस के साथ ही दुर्व्यवहार किया हो। इसके पहले प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से इस तरह की खबरें आए दिन सामने आ रही है। सरकार को यह बताना होगा कि आखिर खनन माफियाओं में इतना हौसला कहां से आ रहा है। उनकी इतनी हैसला अफजाई कौन कर रहा है। कौन इन खनन माफ़ियाओं को शह दे रहा है कि वह पुलिस से उलझने से भी बाज़ नहीं आ रहे है। उन्होंने कहा की प्रदेश में माफियाओं का इस तरह मन बढ़ जाना प्रदेश के लिए सही नहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस तरह के माफ़ियाओं पर सरकार गंभीरता से कार्रवाई करे। जल्दी से जल्दी कड़ी से कड़ी सजा दिलवाए। जिससे माफ़ियाओं के हौसले टूटे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि खनन से एक तरफ़ पेयजल और सिंचाई वाली इन परियोजनाओं को जहां नुक़सान हो रहा है तो दूसरी तरफ़ स्थानीय लोगों के खेतों, फसलों और घरों को ख़तरा बढ़ रहा हैं। ऐसे में सरकार द्वारा अवैध खनन रोकने की दिशा में सख़्त से सख़्त कदम उठाए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि प्रदेश में आपदा प्रभावित इलाक़ों में खनन का काम पूरी तरह से बंद है लेकिन खनन माफिया मान नहीं रहे हैं। वह खनन भी कर रहे हैं और लोगों की शिकायत के बाद उन्हें रोकने के लिए आने वाली पुलिस के साथ भी दुर्व्यवहार कर रहे हैं। कांगड़ा के लंज स्थित पेयजल योजना हरिपुर और सिंचाई योजना लंज के पास अवैध खनन करने की सूचना पर जब पुलिस माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने पहुंची तो खनन माफिया पुलिस के जवानों से ही भिड़ गये। खनन कर रही जेसीबी और ट्रैक्टर को सीज करने का जमकर विरोध किया, मामले को बढ़ता देख कार्रवाई करने गई पुलिस ने और फ़ोर्स बुलाई तब जाकर खनन कर रहे माफिया को क़ाबू में किया जा सका। जयराम ठाकुर ने कहा कि अख़बारों की मानें तो कि कांगड़ा थाने के अन्तर्गत आने वाली लंज चौकी में ही दो महीनें में खनन माफ़ियाओं द्वारा, मार-पीट, डराने-धमकाने के चार मामले पेश आ चुके हैं। बाक़ी प्रदेश के हाल का अंदाज़ा इससे भी आसानी लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खनन के मामले में स्थानीय लोगों भी पुलिस को सूचनाएं भी देते हैं, जिससे खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाती है। जब पुलिस के साथ माफिया इस तरह का से बदसलूकी करेंगे तो आम जनता माफ़ियाओं के खिलाफ आवाज कैसे उठाएगी।
प्राकृतिक आपदा में राज्य पुलिस के योगदान की सराहना, नशे पर अंकुश लगाने पर बल दिया राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज यहां ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में आयोजित डीजीपी डिस्क पुरस्कार समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। तीन वर्ष बाद आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने वर्ष 2020, 2021 और 2022 के लिए 334 पुलिस कर्मियों को डीजीपी डिस्क अवार्ड प्रदान किए। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रदेश में हाल ही की प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए बचाव कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार प्रभावित क्षेत्रों से देश-विदेश के पर्यटकों सहित अन्य सभी लोगों को सुरक्षित निकालने का कार्य किया गया, उससे आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान बढ़ा है। राज्यपाल ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि राज्य पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल ने अकेले कुल्लू जिला से विदेशी पर्यटकों सहित 70,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला। उन्होंने नशे के बढ़ते अवैध कारोबार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे निपटना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अवैध नशीली दवाओं के कारोबार पर रोक के दृष्टिगत गंभीर प्रयास किए हैं। नशे के नियंत्रण और इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए भी सरकार बेहतरीन कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबारियों पर पुलिस की निगरानी बेहद आवश्यक है और ऐसे असामाजिक तत्वों को कानून के दायरे में नियंत्रित कर हम युवा शक्ति को इस सामाजिक बुराई से बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस ने अपने निरंतर प्रयासों से मादक पदार्थ के तस्करों को गिरफ्तार किया है तथा अवैध रूप से अर्जित उनकी 13 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की कुर्की के 23 मामले भी सक्षम प्राधिकारी को भेजे गए हैं। इसके अलावा, नारकोटिक्स अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वित्तीय जांच के लिए 10 मामलों को प्रवर्तन निदेशालय को भेजा गया है। राज्यपाल ने एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली जैसी तकनीक के उपयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस के इस प्रयास से वर्ष 2023 में सड़क दुर्घटनाओं, चोटों और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस के नाम कई उपलब्धियां हैं, जिनमें पासपोर्ट सत्यापन में भारत में पहला स्थान, वर्ष 2022 में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के कार्यान्वयन में तीसरा स्थान और वर्ष 2020-2021 में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम के कार्यान्वयन में 11वां स्थान प्राप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस भारत की 8वीं राज्य पुलिस है जिसे 'प्रेसिडेंट कलरÓ सम्मान का गौरव प्राप्त हुआ है और इसने पहाड़ी और उत्तर पूर्वी राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य पुलिस साइबर अपराध की समस्या से निपटने में भी तकनीकी रूप से सक्षम है। पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश पुलिस में अनेक नवोन्मेषी प्रयास किए गए हैं, जिन्हें अन्य राज्यों की पुलिस भी अपना रही है। विभाग द्वारा नशीली दवाओं पर रोक, सड़क दुर्घटनाओं में कमी, संगठित अपराध की रोकथाम और पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक पुलिसकर्मी पूरी लगन से काम कर रहा है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था, अभिषेक त्रिवेदी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पुलिस बैंड 'हार्मनी ऑफ पाइन्सÓ ने भी प्रस्तुति दी। नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उप महापौर उमा कौशल, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार देर सायं यहां 'हम ना हारेंगे-वादियों में लम्हें फिर से मुस्कुराएंगेÓ शीर्षक से एक गीत जारी किया। आशा का संदेश देता यह गीत जगत गौतम द्वारा निर्देशित और धमाका रिकॉर्ड्स द्वारा निर्मित किया गया है। इस गीत में गीतकार, संगीतकार और गायक प्रशांत मेहता ने अपनी कलात्मक क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री ने इस वीडियो गीत के निर्माण के लिए जगत गौतम और धमाका रिकॉर्ड्स के निर्माताओं की रचनात्मक योग्यता की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकजुट प्रयासों और अटूट संकल्प से हिमाचल प्रदेश न केवल वर्तमान परिस्थितियों से उबरेगा बल्कि विकास पथ पर भी अग्रसर होगा। यह प्रेरक गीत हिमाचली लोगों के अदम्य साहस को चित्रित करता है, जिन्होंने अटूट विश्वास के साथ विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है। इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, केवल सिंह पठानिया और अजय सोलंकी, मुख्यमंत्री के ओएसडी रितेश कपरेट, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, निर्देशक जगत गौतम, धमाका रिकॉर्ड्स के निर्माता प्रियांक शर्मा और पारस के. मेहता और गीतकार प्रशांत मेहता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
आपदा राहत कोष में 163 करोड़ रुपए से अधिक का अंशदान सोमा देवी शिमला शहर के पंथाघाटी में रहने वाली एक वरिष्ठ नागरिक हैं। गत दिनों वे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से विशेष तौर पर मिलने पहुंचीं और अपनी एक माह की पेंशन 61 हजार रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए अंशदान के रूप में प्रदान की। इसी तरह अवनि सिंह ने अपने 15वें जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री से भेंट की और उन्हें 51 हजार रुपए राहत कोष के लिए प्रदान किए। यह राशि उन आपदा प्रभावितों को सहारा देने के लिए स्वेच्छा से प्रदान की गई जिन्होंने भारी बारिश, बाढ़ एवं भूस्खलन के कारण चंद पलों में ही जिंदगी को बिखरते हुए देखा है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोग हमेशा के लिए अपनों से बिछुड़ गए और सैकड़ों ने अपनी जीवन भर की मेहनत से बनाये आशियाने खो दिए। सोमा देवी, अवनि सिंह जैसे हजारों लोग विपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों की मदद के लिए प्रदेश सरकार के हमराह व सहयोगी बन रहे हैं, ताकि पहाड़ों का वह जज्बा कायम रहे कि संकट को सीने पर सहते भी हैं और इससे उबर कर पुन: खड़े होने का हौसला भी रखते हैं। इस बरसात जुलाई और अगस्त माह में बहुत भारी बारिश के कारण प्रदेश भर में तबाही का एक ऐसा दौर शुरू हुआ जिसमें 330 से अधिक लोग असमय काल का ग्रास बने हैं। इसके अलावा निजी एवं सार्वजनिक सम्पत्ति को भी भारी नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा से मिले जख्मों को भरने व प्रभावितों की मदद के लिए अनेक लोग एवं संस्थाएं प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग कर रही हैं और हजारों की संख्या में सहायता के लिए हाथ बढ़े हैं। इस वर्ष बरसात में बादल पिछले 50 वर्षों की तुलना में सर्वाधिक बरसे हैं जिस कारण सड़क अधोसंरचना, जल आपूर्ति परियोजनाएं, विद्युत लाईनें, भवन, निजी एवं सार्वजनिक सम्पत्ति बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त हुई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के संवेदनशील नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने अवरूद्ध मार्गों तथा बाढ़ के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लगभग 80 हजार लोगों को सकुशल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। प्रदेश सरकार ने आपदा के प्रथम दिन से ही राहत एवं बचाव सहित पुनर्वास कार्यों के लिए प्रभावी एवं ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कोष-2023 स्थापित करने का सराहनीय निर्णय लिया और लोगों से इसमें सामर्थ्य अनुसार अंशदान करने की अपील की ताकि केंद्र से सीमित सहायता के बीच ऐसी कठिन स्थिति में इस कोष के माध्यम से अधिक से अधिक प्रभावितों को सहायता प्रदान की जा सके। कोष की स्थापना से अब तक समाज के सभी वर्गों की ओर से सहयोग मिला है और 2 सितम्बर तक इसमें 163 करोड़ रुपये से अधिक का अंशदान प्राप्त हो चुका है। प्रदेश में स्थित शक्तिपीठों ने भी आपदा प्रभावितों की सहायता के लिए इस कोष में अंशदान दिया है। श्री ज्वालामुखी मंदिर न्यास ने 5 करोड़ रुपये, मां श्री चिंतपूर्णी ट्रस्ट ने दो करोड़ रुपये प्रदान किए, वहीं तारा देवी मंदिर, संकटमोचन मंदिर शिमला अन्य न्यास व संस्थान भी इसमें सहयोग राशि प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न स्वयं सेवी व सामाजिक संगठनों, सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों सहित अन्य संस्थाओं, परियोजना प्रबंधन, उद्योग वर्ग इत्यादि ने भी राहत कोष में उदारतापूर्ण योगदान किया है। प्रदेश ही नहीं, अपितु बाहरी राज्यों से भी इस कोष में राशि प्रदान की जा रही है। विभिन्न राज्य सरकारों ने इसमें अपना योगदान दिया है। राजस्थान व कर्नाटक सरकार ने 15-15 करोड़ रुपये, छतीसगढ़ ने 11 करोड़ रुपये, तमिलनाडू ने 10 करोड़ रुपये और हरियाणा सरकार ने 5 करोड़ रुपये की सहयोग राशि प्रदान की है। मुख्यमंत्री, उनके मंत्रिमण्डलीय सहयोगियों, मुख्य संसदीय सचिवों और सभी विधायकों ने अपने एक माह का वेतन इस कोष में दान दिया है। प्रदेश की प्रगति में सदैव कर्तव्यनिष्ठ रहने वाले कर्मचारी वर्ग ने भी अपने एक दिन का वेतन इस कोष में दान दिया है। विभिन्न कर्मचारी संगठन अपने स्तर पर भी राशि एकत्र कर इसमें दान कर रहे हैं। आपदा प्रभावितों की मदद के लिए इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं आपदा राहत कोष-2023 पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से अंशदान कर सकती हैं। इसके अलावा नेट बैंकिंग, क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड, यूपीआई, क्यूआर कोड, चेक अथवा डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से भी कोष में सहायता राशि प्रदान की जा सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा की इस घड़ी में अतुलनीय योगदान के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अंशदान प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने और उनके पुनर्वास में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासियों के समन्वित प्रयासों से हिमाचल इस आपदा से उबर कर पुन: और मजबूती के साथ उठ खड़ा होकर प्रगति पथ पर आगे बढ़ेगा।
रोहड़ू उपमंडल के नावर टिक्कर क्षेत्र में शनिवार की देर रात को आग ने तांडव मचा दिया है। रात्रि करीब 12:30 बजे टिक्कर के दरोटी गांव में एक मकान में आग लग गई। सभी मकान लकड़ी के बने हुए थे और आग तेज़ी से फैलती गई। देखते ही देखते एक दर्जन से ज्यादा मकान आग की चपेट में आ गए। इन मकानों में 21 परिवार रह रहे थे। आगजनी प्रदीप रांटा की चौथी मंजिल से शुरू हुई और बगल के कई घरों को अपनी जद में ले लिया। प्रारम्भिक आंकलन के मुताविक इस आगजनी में करीब दो करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। इस आगजनी की घटना में छह लोगों के मकान (10 परिवार) पुरी तरह से जल चुके है तथा 11 लोगों के मकानों को आंशिक नुकसान हुआ है। मुताविक उप प्रधान सुशील रांटा के अनुसार कोई भी जानी नुक्सान न हुआ है मौका पर फायर ब्रिगेड, तहसीलदार महोदय, एसडीएम साहब, स्वयं प्रभारी थाना भी मौजूद रहे। अभी तक के हालात व गांव वासियों के ब्यानात से उक्त घटना बिजली के शॉट सर्किट से होना पाया जा रहा है। घटना की आगामी जाँच जारी है । घटना स्थल का जायजा लेने । रोहड़ू के एसडीएम शनी शर्मा ने बताया कि इस घटना में नौ (तीन व चार मंजिला मकान) पूरी तरह जल गए हैं। इसके अलावा पांच अन्य मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि अग्निकांड में 21 परिवारों के 74 लोग प्रभावित हुए हैं। इन्हें ठहराने का प्रबंध किया जा रहा है। घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। इस घटना में बड़े पैमाने पर संपत्ति नष्ट हो गई है। रोहड़ू पुलिस अग्निकांड के कारणों को खंगाल रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अग्निकांड की वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का प्रदेश के लोगों और देव समाज को बेसब्री से इंतजार है। 24 अक्तूबर से शुरू होने वाले कुल्लू दशहरा के लिए समिति ने जिला कुल्लू के 332 देवी-देवतओं को उत्सव में आने के लिए निमंत्रण भेज दिए हैं। यह निमंत्रण पत्र सभी कारदारों को उपमंडल अधिकारियों, तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों की मदद से पहुंचाए जाएंगे। आपदा के चलते रास्ते व सड़कों के अवरुद्ध होने से निमंत्रण पत्र 15 सितंबर तक सभी कारदारों तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद देव समाज दशहरा की आगामी तैयारियों में जुट जाएगा। उल्लेखनीय है कि विश्वविख्यात कुल्लू दशहरा में बाह्य सराज आनी-निरमंड से लेकर मनाली तक के देवी-देवता भाग लेते हैं। भगवान रघुनाथ की अगवाई में मनाए वाले कुल्लू दशहरा में माता हिडिंबा, बिजली महादेव के साथ बाह्य सराज के अधिष्ठाता खुडीजल, टकरासी नाग, ब्यास ऋषि, कोट पझारी,चोतरू नाग, देवता चंभू, सप्त ऋषि समेत 300 देवी-देवता अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। दशहरा उत्सव में साल दर साल देवी देवताओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। खास बात है कि बाह्य सराज के देवी देवता 150 से 200 किलोमीटर का पैदल सफर कर दशहरा उत्सव में पहुंचते हैं। 2021 में रिकॉर्ड 283 देवताओं ने उत्सव में भाग लिया था। जबकि 2022 में 304 देवी देवताओं ने दशहरा की शोभा को बढ़ाया था, जो दशहरा के इतिहास में सबसे अधिक मौजूदगी थी। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि दशहरा उत्सव समिति की ओर से भेजे निमंत्रण पत्र देवी-देवताओं को अगले दो सप्ताह तक मिलना शुरू हो जाएंगे। कहा कि जिला मुख्यालय के आसपास के कई देवताओं को निमंत्रण पत्र मिलना शुरू हो गए हैं। सहायक आयुक्त कुल्लू शशिपाल शर्मा ने कहा कि दशहरा उत्सव समिति कुल्लू ने जिला के 332 अधिक माफीदार और गैर माफीदार देवी-देवताओं को निमंत्रण पत्र भेजा है।
त्योहारी सीजन से पहले ही हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन ने दुग्ध उत्पादों के दाम बढ़ाकर उपभोक्ताओं को झटका दे दिया है। फेडरेशन ने अलग-अलग उत्पादों के 2.50 से 50 रुपये तक दाम बढ़ा दिए हैं। फेडरेशन का हिम देसी घी 50 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 650 रुपये प्रतिकिलो मिलेगा। हालांकि दूध के दामों में बढ़ोतरी नहीं हुई। फेडरेशन ने देसी घी के अलावा पनीर के 200 ग्राम पैकेट के दाम में छह रुपये बढ़ोतरी की है। हिम खोया में प्रतिकिलो के हिसाब से 20 रुपये बढ़ोतरी की गई है। हिम बटर में 25 रुपये आधा किलो के हिसाब से बढ़ाए गए हैं। मिल्क फेडरेशन के चक्कर स्थित प्लांट के यूनिट प्रभारी शुभम ने बताया कि दुग्ध उत्पादों के बढ़े हुए दाम 1 सितंबर से लागू हो गए हैं।
आईआईटी रुड़की, आईआईडी मंडी, सीयू धर्मशाला और एनआईटी हमीरपुर से चल रही बात हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते जगह-जगह भूस्खलन से हुई भारी तबाही के बाद चार संस्थानों को आपदा के कारणों को तलाशने का जिम्मा सौंपा गया है। आईआईटी रुड़की, आईआईडी मंडी, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और एनआईटी हमीरपुर से इस संबंध में बातचीत चल रही है। अध्ययन रिपोर्टों के आधार पर ही तय किया जाएगा कि भूस्खलन के पूर्वानुमान के लिए किस तरह की पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की जाए। इस बार मानसून में हुई भारी तबाही के बाद राज्य सरकार जहां आपदा राहत कार्यों में जुटी है, वहीं भूस्खलन के कारणों पर अब एक विस्तृत अध्ययन करवाया जा रहा है। राज्य में शिमला, मंडी, कुल्लू समेत अन्य आपदा प्रभावित जिलों में पिछले दिनों बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। भूस्खलन में दबने व नदी-नालों में बहने से बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हो गईं। हजारों लोगों के घर ढह गए और बेघर हो गए। राज्य सरकार के प्रधान सचिव राजस्व व आपदा प्रबंधन ओंकार शर्मा ने बताया कि राज्य में जिस तरह से भारी बारिश के बाद आपदा आई, उसके बाद यह तय किया गया है कि आईआईटी रुड़की, आईआईटी मंडी, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और एनआईटी हमीरपुर से इस संबंध में एक विस्तृत अध्ययन करवाया जाएगा कि भूस्खलन के क्या-क्या कारण हैं। अध्ययन पर होने वाला खर्चा प्रदेश सरकार वहन करेगी। इस अध्ययन के बाद ही पूर्व चेतावनी प्रणाली लगाई जाएगी, जिससे कि भूस्खलन का पता लग जाए। 50 स्थानों पर लगाई पूर्व चेतावनी प्रणाली नहीं आई काम आईआईटी मंडी की ओर से तैयार की गई पूर्व चेतावनी प्रणाली राज्य में करीब 50 स्थानों पर लगाई गई थी, लेकिन यह प्रणाली भी काम नहीं आई। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में सदी की यह इस तरह की सबसे बड़ी तबाही है। राज्य में कंक्रीट के कई भवन भरभराकर ढह गए, कई सड़कें और पुल बह गए।
मुख्य सचिव एवं राज्य कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना ने आज यहां राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा 24 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य में निर्माण गतिविधियों के संबंध में आदेश जारी किए हैं। इन आदशों के अनुसार आपदा प्रभावित इमारतों और सड़कों के पुनर्निर्माण कार्यों को छोड़कर किसी भी प्रकार के निजी विकास और निर्माण गतिविधि के लिए पहाड़ियों के कटान पर पूरे राज्य में 16 सितंबर तक प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अतिरिक्त शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, सोलन और चंबा जिलों में वाणिज्यिक, पर्यटन इकाइयों के निर्माण के संबंध में 16 सितंबर तक नई योजना अनुमति एवं भवन अनुमति पर प्रतिबंध रहेगा।यह निर्णय प्रदेश में भारी बरसात के कारण आई प्राकृतिक आपदा के दृष्टिगत मानवीय जीवन, आधारभूत संरचना, पारिस्थितिकी की सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भारत के प्रथम सौर मिशन, आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक और आयाम जोड़ा है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए स्वर्णिम दिन है, जब संपूर्ण मानवता की सेवा के उद्देश्य से यह प्रतिष्ठित अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह मिशन पूरी मानवता के कल्याण के लिए कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि इससे संपूर्ण विश्व में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा और बढ़ी है। इसरो के वैज्ञानिकों ने दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारत के सौर मिशन आदित्य-एल1 के सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने यह उपलब्धि हासिल कर सम्पूर्ण विश्व में देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान में सदैव ही नए आयाम स्थापित किए हैं। वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि उभरते हुए युवा विज्ञानियों को इस क्षेत्र में और बेहतर करने की प्रेरणा प्रदान करेगी।
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैनब चंदेल ने केंद्र सरकार द्वारा एलपीजी घरेलू गैस सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी को मात्र चुनावी स्टंट करार दिया हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने 2014 से लगातार एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी कर लोगों विशेष तौर पर गृहिणियों का जीना मुहाल किया था, अब जब 2024 के आम चुनाव सामने आ रहे हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को एक झुंझना थमा दिया है, जिस पर अब जनता विश्वास करने वाली नहीं है। जैनब चंदेल ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 9 साल के इस कार्यकाल में महंगाई व बेरोजगारी के सारे रिकार्ड टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के जनविरोधी नीतियों की बजह से हर वर्ग परेशान हैं। जैनब चंदेल ने यहां जारी एक बयान में कहा है कि पिछले 9 साल में केंद्र की सरकार ने एलपीजी के दाम बढ़ा कर 31.37 करोड़ लोगों से लूटा हैं। उन्होंने जनता की जेब से 8,33,640.76 करोड़ रुपये कमाएं। उज्वला बहनों से ही 2017 से अबतक केंद्र सरकार ने 68,702,76 करोड़ लूट लिए। इतनी बड़ी लूट के बाद 200 रुपये घटाकर कोई एहसान नहीं किया है। जैनब चंदेल ने आरोप लगाया है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने कुछ साथी पूंजीपतियों के कर्ज माफ कर जनता के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है। जनता को कोई राहत नहीं दी। उन्होंने कहा है कि अगर भाजपा सरकार सचमुच में महिला हितेषी है तो उन्हें एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम 500 रुपये कर देने चाहिए, जिससे गृहिणियों को बढ़ती महंगाई से कुछ राहत मिल सकें।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने मौसम पूर्वानुमान एवं किसानों को खेतीबाड़ी के दृष्टिगत दिए जाने वाले परामर्श को और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से मेघदूत ऐप्लीकेशन को उन्नत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह महत्त्वपूर्ण निर्णय तेज़ी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण लिया गया है क्योंकि यह कृषि और बागवानी क्षेत्रों के लिए खतरा बन कर उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा इस वर्ष भारी बारिश के कारण हिमाचल में भारी क्षति और जान-माल को काफी नुकसान हुआ है, साथ ही कृषि और बागवानी क्षेत्रों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। बारिश, बाढ़ एवं भूस्खलन के कारण प्रदेश भर में जगह-जगह पर खेत व बागीचे बह गए और करोड़ों रुपये की फसलें बर्बाद हो गईं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मेघदूत ऐप्लिकेशन मौसम की जानकारी और पांच दिनों का मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है, जिसमें ब्लाक स्तर तक बारिश, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा संबंधी डेटा शामिल है। ये कारक कृषि कार्यों, जैसे कि बुआई एवं कटाई से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन विभाग को प्रदेश में अधिक से अधिक किसानों और बागवानों को ऐप से जोड़ने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि ऐप द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं में सुधार लाने के लिए रूपरेखा भी तैयार की गई है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मेघदूत ऐप में किए जाने वाले प्रमुख सुधारों में किसानों को प्रतिकूल मौसम के प्रति सचेत करने और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, एप्लिकेशन फसलों की बुआई एवं कटाई आदि प्रक्रियाओं से संबंधित सटीक विशेषज्ञ जानकारी प्रदान करेगी। इसके इस्तेमाल से किसान आसन्न चुनौतियों के प्रति उचित कदम उठाने में सशक्त होंगे। इसके अलावा, प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लाभ प्राप्त कर रहे राज्य के किसानों को मेघदूत ऐप्लिकेशन के साथ एकीकृत कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही की आपदाओं ने राज्य सरकार को कृषि क्षेत्र में चल रही मौजूदा नीतियों के पुनर्मूल्यांकन एवं पुनर्गठन के प्रति प्रेरित किया है। इसके अलावा प्रदेश सरकार भविष्य की चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए निर्माण गतिविधि नियमों में संभावित संशोधन पर भी गम्भीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषकों और बागवानों के लिए जलवायु संबंधी अनिश्चितताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे उनकी आजीविका में आशातीत सुधार सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य की लगभग 90 प्रतिशत आबादी कृषि संबंधी गतिविधियों से जुड़ी है और मेघदूत ऐप को उन्नत कर इसके इस्तेमाल को सुलभ बनाना किसानों के लिए वरदान साबित होगा।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड़ तकनीकी कर्मचारी संघ की बैठक 1 सितंबर को बिजली बोर्ड मुख्यालय कुमारहाउस में प्रबंंधन वर्ग के साथ हुई। संघ के धरने के नोटिस में जवाब में प्रबंधन द्वारा यूनियन को 21 सूत्रीय मांगों व 7 अन्य अतिरिक्त मांगों पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। इस बैठक में सर्वप्रथम प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण कपटा के संबोधन से बैठक की शुरुआत हुई उसके पश्चात तकनीकी कर्मचारियों के फील्ड में कार्य करते हुए गत 5 वर्षों में शहीद होने वाले 125 कर्मचारियों के लिए बैठक में शामिल सभी ने पदाधिकारियों व प्रबंधन वर्ग ने 2 मिनट का मौन रखा और उनकी आत्मा को शांति के लिए प्रार्थना की गई । तकनीकी कर्मचारी संघ ने सर्वप्रथम टी मेट व हेल्पर सभी विंग के पदोन्नति नियमों को तकनीकी कर्मचारी संघ के सुझाव के अनुसार संशोधित करने पर प्रबंधन वर्ग का धन्यवाद किया। इस संशोधन के उपरांत लगभग 2200 कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिलने जा रहा है। बोर्ड से आने वाले समय में सेवानिवृत्त होने जा रहे कर्मचारियों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे उनके पेंशन संबंधी सभी दस्तावेज सेवानिवृत होने से पूर्व ऑनलाइन माध्यम से बोर्ड में आ जाएंगे और और पेंशन में हो रही अनावश्यक देरी से छुटकारा मिलेगा। कर्मचारियों के सभी सर्विस रिकॉर्ड व एसीआर ऑनलाइन किए जायेंगे जिसमें आने वाले समय में प्रमोशन में देरी नहीं होगी। प्रबंधन वर्ग ने आश्वस्त किया कि फ्यूज वायर की खरीद बोर्ड स्तर पर बड़ी मात्रा में की जायेगी, जिससे की फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों को फ्यूज वायर की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। तकनीकी कर्मचारियों के वाहन भता मांग पर प्रबंधन वर्ग ने कहा कि अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल विद्युत बोर्ड में भी वाहन भता दिया जाएगा। तकनीकी कर्मचारियों की मोबाइल भत्ते से वंचित श्रेणियों को जल्द मोबाइल भत्ता दिए जाने पर भी सहमति बनी है। बोर्ड के सभी फील्ड सेक्शन में फर्नीचर व अन्य आवश्यक सामान जल्दी उपलब्ध करवाए जायेंगे व बोर्ड कॉलोनी के उचित रखरखाव व लिए उचित बजट दिया जाएगा। फील्ड सेक्शन व कंट्रोल रूम में शिफ्ट ड्यूटी दे रहे सभी तकनीकी कर्मचारियों को शिफ्ट अलाउंस दिया जाएगा। फील्ड तकनीकी कर्मचारियों के साथ फील्ड में हो रही लगातार दुर्घटनाओं से बचने के लिए हाई वोल्टेज डिटेक्टर की खरीद करने पर भी सहमति बनी है। सरकार द्वारा में हाल ही में संशोधित हुए टीए बिल नियमों को विद्युत बोर्ड में लागू करने पर संघ ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है जिसमें टीए बिल 30 किमी के उपरांत देने का नियम था, इस पर प्रबंधन ने सरकार के साथ वार्ता करके इसे पूर्व की भांति यथावत रखने की बात कही गई हैं। इलेक्ट्रिशियन, स्टोरकीपर एवं फिटर को लाइनमैन व एसएसए के समान लेवल 7, हेल्पर को लेवल 1 में रखने पर भी अनौपचारिक सहमति बनी है। कर्मचारियों के वेतन संशोधन से जुड़े बकाया राशि को शीघ्र प्रदान करने की मांग भी रखी गई। इस बैठक में टीमेट व हेल्पेर्ज की एक डिवीज़न से दूसरे डिवीज़न में वन टाइम सेटलमेंट से ट्रांसफर पर सहमति बनी है और भर्ती प्रकिया आरंभ होने से पूर्व कर्मचारियों से ऑप्शन मांगी जाएगी। फील्ड में जूनियर इंजीनियर (विद्युत) की 200 खाली पड़े पदों को लाइनमैन और इलेक्ट्रिशियन से एकमुश्त प्रमोट करने की भी सहमति बनी है। कंप्यूटर आपरेटर बोर्ड में पिछले 10 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, उनके लिए अभी तक कोई भी प्रमोशन पॉलिसी नहीं है उनके लिए जल्द पॉलिसी बनाकर एकमुश्त प्रमोट करने पर सहमति बनी है। आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थाई नीति बनाने के लिये भी संघ ने बोर्ड प्रबंधन से अनुरोध किया है। इसके अलावा अन्य भी मांगें हंै, जिनको लेकर प्रबंधन ने विचार करने के उपरांत ही फैसला लेने की बात की है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार देर सायं यहां एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य में प्रति वर्ष पांच करोड़ पर्यटकों के आवागमन के लक्ष्य की पूर्ति के लिए हवाई सेवा की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्य में हवाई सेवा को सुदृढ़ करने के लिए चरणबद्ध तरीके से सभी ज़िला मुख्यालयों और जनजातीय क्षेत्रों में 16 हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले चरण में जिला हमीरपुर के जसकोट, जिला कांगड़ा के रक्कड़ और पालमपुर, जिला चंबा के सुल्तानपुर, जिला कुल्लू के मनाली, जिला लाहौल-स्पीति के जिस्पा, सिस्सू और रंगरीक तथा जिला किन्नौर के शारबो में नौ हेलीपोर्ट विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सुल्तानपुर, रक्कड़, पालमपुर और जसकोट में हेलीपोर्ट निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्राप्त हो गई है, जबकि अन्य हेलीपोर्ट के लिए प्रक्रिया चल रही है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि दूसरे चरण में शेष 7 हेलीपोर्ट स्थापित किए जाएंगे। यह हेलीपोर्ट जिला चंबा के पांगी और होली, जिला बिलासपुर के औहर, जिला सिरमौर के धारकियारी, जिला शिमला के चांशल पास, जिला ऊना के जनकौर हार और जिला के जिला सोलन के गनालग में निर्मित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रक्कड़ हेलीपोर्ट की स्थापना के लिए एफसीए स्वीकृति प्राप्त हो गई है और जसकोट, मनाली, जिस्पा, सिस्सू, रंगरिक, पांगी और होली सहित 6 हेलीपोर्ट के एफसीए मामले पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई सेवा राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी। बेहतर हवाई सेवा की सुविधा से पर्यटक कम समय में गंतव्यों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। पर्यटन स्थलों में आसान पहुंच से देश-विदेश के अधिक पर्यटक इन स्थानों में घूमने आएंगे जिससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख अंग है। यह क्षेत्र स्थानीय युवाओं को रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर भी प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण और पर्यटकों के लिए सुविधाओं में सुधार पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी बनाने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत आगामी समय में कई नई परियोजनाएं क्रियान्वित की जाएंगी और राज्य सरकार पर्यटकों की यात्राओं को अधिक मनोरंजक, सुलभ एवं अविस्मरणीय बनाने के लिए क्षेत्र में पर्यटन विकास के लिए 3000 करोड़ रुपये व्यय करेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की सुविधा के लिए कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार भी किया जा रहा है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विवेक भाटिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
एक माह में मांग पूरी नहीं करने पर सयुंक्त संघर्ष शुरू करने की दी चेतावनी हिमाचल प्रदेश श्रमिक कल्याण बोर्ड द्धारा गत सप्ताह जारी पत्रों पर विरोध दर्ज करने के लिए आज सभी मजदूर यूनियनों के सयुंक्त प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड के सचिव से मुलाकात की और गत सप्ताह बोर्ड द्धारा जारी दो पत्रों पर विरोध व्यक्त किया और इन्हें रद्द करने की मांग उठाई। सीटू से सबंधित निर्माण मज़दूर की यूनियन के राज्य महासचिव की मांग पर बोर्ड के सचिव राजीव कुमार ने आज ये बैठक बुलाई थी। जिसमें पंजीकृत मज़दूर यूनियनों के साथ राज्य व जिला स्तर पर तालमेल न करने और उन्हें नजरअंदाज करने पर कड़ी आपत्ति जताई गई और भविष्य में इस कार्यप्रणाली पर तुरन्त रोक लगाने की मांग उठाई गई, जिसके चलते कई जिलों में श्रम कल्याण अधिकारी मज़दूर यूनियनों के माध्यम आने वाले प्रपत्र लेने से इंकार कर रहे हैं जो बोर्ड के नियमों के विपरीत है। इसके अलावा पंजीकरण कार्ड को अपडेट करने के लिए बोर्ड दफ़्तर में मजदूरों को न बुलाने और नवीनीकरण के समय इन्हें बोर्ड कर्मचारी ही करने की मांग उठाई। ग्रामीण इलाकों में भवन व अन्य निर्माण करने वाले मज़दूरों के रोजगार प्रमाण सचिव के बजाये भविष्य में नियोक्ता द्धारा जारी करने और उसे कल्याण अधिकारी द्धारा सत्यापित करके पारित किया जायेगा। पिछले तीन साल के आवेदनों की पुन: जांच करवाने का भी विरोध किया गया और उन्हें जल्दी स्वीकृत करने की मांग की गई। सभी मजदूरों के बजाए उन्हीं मज़दूरों के आधार नंम्बर लिए जाएंगे जिनके नंम्बर बोर्ड में उपलब्ध नहीं है, लेकि़न निचले स्तर पर इस कार्य को 15 दिनों से बजाय अगले छह महीने में चरणबद्ध तरीके से पूर्ण किया जायेगा। लंबित लाभों को ला विभाग से निर्देश आ जाने पर जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सभी यूनियन प्रतिनिधियों ने बोर्ड नियमावली के नियम 266 से सेस की शर्त हटाने और यूनियनों को रोजगार प्रमाण पत्र जारी करने के अधिकार को तुरंत बहाल करने की मांग की गई। मजदूरों का पंजीकरण व नवीनीकरण कार्य तुरंत शुरू करने की भी मांग उठाई। बोर्ड सदस्य व सीटू के भूपेंद्र सिंह के प्रस्ताव पर ये निर्णय लिया गया कि अगर यदि एक महीने पर इन सब मांगों को नहीं माना जाता है तो सभी मजदूर संगठन मिलकर संघर्ष छेड़ेंगे। बैठक में सीटू के कश्मीर सिंह ठाकुर, विजेंद्र मेहरा, भूपेंद्र सिंह और जोगिंदर कुमार इंटक के प्रेम चंद भाटिया और पूर्ण चंद बीएमएस के प्रदीप कुमार,मंगत राम नेगी और सुरेंद्र ठाकुर निर्माण मजदूर यूनियन के रविंद्र सिंह रवि ग्रामीण कामगार संघटन के संत राम और डोले राम सहित 15 सदस्यों ने भाग लिया।
स्नेह यात्रा पर्व के तीन दिन ऐतिहासिक रहे हिमाचल में वंदना योगी की अध्यक्षता व रश्मिधर सूद की देखरेख में सफल हुए कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा अपने आप में समाज को जोड़ने का काम कर रहा है। समाज को जोड़ने के लिए सेवा के कार्य हो, चाहे जनहित में मुद्दे उठाने की बात हो, महिला सशक्तिकरण की बात हो, महिला मोर्चा ने सदैव अग्रणीय रहकर के काम किया है और पार्टी द्वारा तय कार्यक्रमों को सफलता के साथ जमीन पर उतार कर जिस प्रकार संगठन की शक्ति बढ़ाने का काम किया गया है, यह अपने आप में अद्भुत है। हिमाचल प्रदेश में महिला मोर्चा लगातार मजबूत हो रहा है, जहां वैचारिक दृष्टि से महिलाओं को जोड़ा जा रहा है, वहीं धरातल पर रहकर महिलाओं के सुख-दुख को बांटने का कार्य भी किया जा रहा है। रक्षाबंधन का पर्व देश को जोड़ने का पर्व लगातार तीन दिन 29, 30 व 31 अगस्त को उत्साह पूर्वक हिमाचल प्रदेश के हर मंडल में मनाया गया। राज्य अध्यक्ष वंदना योगी जी की अध्यक्षता व नेतृत्व में सभी स्थानों पर इस पर्व को स्नेह यात्रा के रूप में मनाया गया ,विशेष रूप से हर क्षेत्र में कार्यरत चालकों को रक्षा का सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना की गई । यह अपने आप में एक बेहतर परिकल्पना का कार्यक्रम रहा कि हमने उसे वर्ग को चुना जो वर्ग समाज के लिए काम करता है, परिवार से दूर रहता है, बहनों से दूर रहता है। इस पर्व को मनाने के लिए ऐसे भाइयों के साथ महिला मोर्चा की बहने खड़ी हुई, उनका हौसला बढ़ाया, उनके उत्साह को बढ़ाया और उनकी सेवा उनके कार्य को सलाम किया ।इसी के साथ पुलिसकर्मी, सेना, पैरामिलिट्री,सफाई कर्मियों सहित विभिन्न वर्गों को भी रक्षा का सूत्र बांधा गया। यह अपने आप में हिमाचल प्रदेश में महिला मोर्चा को सशक्त करता हुआ कार्यक्रम दिखाई दिया है, जिसे सफलता से पूर्ण किया गया है ।महिला मोर्चा की अध्यक्ष वंदना योगी ने जिस प्रकार से इस कार्यक्रम को लेकर महिलाओं को सक्रिय किया, पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार कार्यक्रम कराया, उसके लिए वह बधाई की पात्र हैं ।वहीं इस कार्यक्रम की प्रभारी, महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान में भाजपा की राज्य उपाध्यक्ष रश्मि धर सुद ने मार्गदर्शन दिया जिसके चलते कार्यक्रम सफल हुआ है । भाजपा के राज्य अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ,नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ,संगठन मंत्री सिद्दार्थन सहित समस्त भाजपा नेतृत्व व महिला मोर्चा का नेतृत्व इस बड़े कार्यक्रम में शामिल रहा है और सब की भूमिका अहम रही है। इसीलिए मैं इस लेख के माध्यम से यह बताना चाह रही हूं की राजनीति के अंदर जहां राजनीतिक विषयों को उठाने संगठन का काम है। वही राजनीति से ऊपर उठकर समाज की सेवा समाज के लिए काम करना, सेवा के कार्य करना, यह महिला मोर्चा की विशेषता है। कोरोना काल में बहुत बड़ा सेवा का कार्य महिला मोर्चा द्वारा हर क्षेत्र में किया गया ,तो वहीं बारिश से हुए नुकसान के बीच महिला मोर्चा ने हर स्थान पर यथा संभव सेवा ,मदद व राहत के कार्य करने के लिए कदम बढ़ाए है , इसलिए राजनीति में जनहित के मुद्दे उठाने उनकी आवाज उठाना ,महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बात करना यह संगठन करता है और भविष्य में और तेजधार ढंग से करेगा लेकिन सेवा के कार्यों को सर्वप्रथम रखते हुए आगे बढ़ाना है, यह राज्य अध्यक्ष वंदना योगी जी का संकल्प है, बह सबको सम्मान देते हुए जिस प्रकार से महिला मोर्चा को सक्रिय करने के लिए अपनी भूमिका अदा कर रही है ,निश्चित रूप से महिला मोर्चा सशक्त होकर महिलाओं को सक्रिय करके समाज को बेहतर दिशा देने का काम करेगा ।हमें रक्षाबंधन के कार्यक्रम की सफलता के बाद भविष्य के कार्यक्रमों पर रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना होगा, समाज से जुड़े विषयों पर बात करनी है और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए धरातल पर रहकर के उचित कदम उठाते हुए समस्याओं का समाधान भी करना है।केंद्र ने रसोई गैस के दाम में कटौती कर महिला वर्ग को बड़ा लाभ दिया है,वही 75 लाख नए उज्जवला कनेक्शन भी स्वीकृत किये है , जिसका देश के साथ साथ हिमाचल को भी लाभ होगा। इसके लिए केंद्र सरकार के अच्छे निर्णय का आभार भी है । महिला शक्ति रचनात्मक कार्यों से समाज को दिशा दे और नशे पर जागरूकता का प्रहार करे यह समय की जरूरत है। रचना शर्मा स्वतंत्र लेखिका है| शिमला नगर निगम की पार्षद भी है
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मंडी संसदीय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान पर चर्चा करते हुए लोक निर्माण विभाग के सेंट्रल जोन मंडी को अतिरिक्त धन जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मंडी संसदीय क्षेत्र में भारी बारिश व भूस्खलन की बजह से सड़कों को बहुत नुकसान पहुंचा है इसलिए यहां पुनर्निर्माण कार्यो में तेजी लाने के लिये अतिरिक्त धन की बहुत आवश्यकता है। आज ओक ओवर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भेंट के दौरान प्रतिभा सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र मंडी के दौरे की जानकारी देते हुए बताया की भूस्खलन से मण्डी संसदीय क्षेत्र में बहुत ही नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि पंडोह से कुल्लू के बीच भारी भूस्खलन की बजह से राष्ट्रीय राज मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ हैं। संपर्क सड़कें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई जगह तो सड़कंे पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं, जिनका जल्द पुननिर्माण किया जाना बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों विशेष तौर पर स्कूल आने जाने वाले बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्कूल भवन भी इस आपदा के चलते खतरे की जद में आ गए हैं। प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री को मंडी संसदीय क्षेत्र में हुए भारी नुकसान की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से मंडी पंडोह कुल्लू राष्ट्रीय राज मार्ग को जल्द बहाल करने की मांग की हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार को कुल्लू के लिये बैकल्पिक मार्ग कमाद कटिंडी, कटौला बजौरा व चैलचोक से पंडोह सड़क के विस्तार व सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव भी दिया है, जिससे कुल्लू का सड़क संपर्क पूरा साल बना रहे। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्होंने सीआईआरएफ, केंद्रीय सड़क ढांचागत फंड उपलब्ध करवाने की मांग की हैं। प्रतिभा सिंह ने इस दौरान संगठन से जुड़े अनेक मसलों पर भी विचार विमर्श करते हुए कहा कि संगठन से जुड़े कर्मठ कार्यकर्ताओं को सरकार में जल्द कोई जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संगठन बहुत ही मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि इस आपदा के समय भी संगठन एकजुटता के साथ प्रभावित लोगों की भरपूर मदद कर रहा हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजीव भवन में एक आपदा प्रबंधन केंद्र की स्थापना भी की है जो प्रदेश भर में हुए नुकसान का सभी ब्लॉकों से फीडबैक ले रहे हैं व प्रशासन से उन्हें हरसंभव सहायता में सहयोग कर रहे हैं।
हिमाचल कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं सुजानपुर से विधायक राजेंद्र राणा ने अपनी ही सरकार पर सवाल दागे हंै। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर भंग किए गए हिमाचल प्रदेश स्टाफ सिलेक्शन कमीशन को बहाल करने, भर्ती परीक्षाओं के लटके हुए रिजल्ट घोषित करने और पूर्व सरकार में हुए पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती स्कैब में दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है। सीएम के नाम लिखे पत्र में राजेंद्र राणा ने कहा कि लंबे समय से भर्तियों के परिणाम रुके हुए हैं। जिन युवाओं ने परीक्षा उत्तीर्ण की है, वे अब बेचैन हैं और बड़ी बेसब्री से रिजल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। देरी के कारण कुछ युवा ओवर-एज हो रहे हैं। युवा इस बात से चिंतित हैं कि आयु सीमा लांघने के कारण कहीं वे सरकारी नौकरी के लिए अपात्र ना हो जाएं। उन्होंने मुख्यमंत्री से लटके हुए रिजल्ट जल्द घोषित करने का आग्रह किया है। एचपीएसएससी को बनाया जाए क्रियाशील कांग्रेस विधायक ने कहा कि एचपीएसएससी लंबे समय से बंद पड़ा है। उन्होंने सीएम से आग्रह कि में एचपीएसएससी ईमानदार अधिकारी की तैनाती करके इसे फिर से क्रियाशील बनाया जाए, क्योंकि हजारों युवाओं की उम्मीद इसके साथ जुड़ी हुई जुड़ी हुई हैं। पुलिस भर्ती स्कैम के दोषियों के खिलाफ की जाए कार्रवाई राजेंद्र राणा ने कहा कि पूर्व सरकार में पुलिस भर्ती स्कैम हुआ था। इससे हज़ारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। तब इस मामले को विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने सदन में जोर शोर से उठाया था। मगर, अब इस स्कैम पर संजीदगी दिखाने की जरूरत है और प्रदेश के युवाओं की उम्मीदें आप पर हैं। इस भर्ती स्कैम में जो अधिकारी संलिप्त थे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने हिमाचल प्रदेश में बीते दिनों हुई भारी बारिश, बाढ़ और बादल फटने से आई प्राकृतिक आपदा को देखते हुए सरकार को अनियोजित भवन निर्माण और अत्यधिक खनन पर रोक लगाने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को लिखे दो पत्रों में राज्यपाल ने आपदा के इन दो बड़े कारणों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी मांगी है। राज्यपाल ने पत्र में लिखा कि हाल ही में राज्य में हुई अतिवृष्टि से जानमाल के भारी नुकसान का एक संभावित कारण पहाड़ों पर और नदियों के किनारे नियम दरकिनार कर भवन निर्माण और अवैध खनन भी हो सकता है। सरकार भवन निर्माण की अनुमति नियमानुसार देती है, लेकिन नियमों के अनुसार लोग भवन निर्माण नहीं करते हैं। अनियोजित तरीके से भवन निर्माण न हो और भविष्य में नियमों के अनुसार भवन निर्माण हो, इसके लिए सरकार को सख्ती से नियमों का पालन करना व करवाना सुनिश्चित करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि कई भवन 70 से 80 डिग्री ढलानों पर भी बनाए गए हैं, जो अपने आप में खतरनाक हैं। भवन निर्माण से पूर्व संबंधित स्थल का भूमि परीक्षण भी नहीं करवाया जाता। इससे भूमि के खिसकने व धंसने से भवनों के ढहने का खतरा रहता है। राज्यपाल ने लिखा कि सरकार मामले में संबंधित विभागों को उचित दिशा-निर्देश जारी करे। राज्यपाल ने कहा कि पहाड़ों और नदियों के किनारे खनन के लिए लाइसेंस दिए जाते हैं, जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता है। कुछ एक सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ और ऊना में पाया गया है कि अत्याधिक खनन से इन क्षेत्रों में भू-क्षरण व भूस्खलन अधिक बढ़ गया है। गौर हो कि बीते दिन राज्यपाल चक्कीमोड़ पर बंद कालका-िशमला एनएच का निरीक्षण करने भी पहुंचे थे।
हिमाचल प्रदेश में बेशक भाजपा सत्ता में नहीं है, लेकिन भाजपा के विधायक जनप्रतिनिधि हैं। जनता की भावना का प्रतिनिधित्व केवल सरकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र में विपक्ष भी करता है। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आज पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा, 'हिमाचल की मदद के लिए, लोगों की मदद करने के लिए, उनकी जान बचाने के लिए केंद्र की जो मदद मिली है उसके लिए मैं केंद्र का धन्यवाद करना चाहूंगा, केंद्र द्वारा मिली मदद अप्रत्याशित है। केंद्र अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन बड़े ही अच्छे तरीके से कर रहा है। हिमाचल को केंद्र से जो सहयोग मिला है, इसके संदर्भ में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि प्रदेश सरकार की ओर से नुकसान का प्रस्तुतिकरण जिस प्रकार से किया गया, उसके अनुरूप केंद्र द्वारा जो किया जा सकता था, वह पर्याप्त था।Ó केंद्र की टीम जो नुकसान का आकलन करने के लिए प्रदेश आई थी, उसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है। जयराम ने कहा कि वे गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे और उनसे कहा था कि प्रदेश की जनता केंद्र से मदद की आस लगाए बैठी है तो प्रदेश की और मदद करे। व्यक्तिगत रूप से अमित शाह को पत्र भी लिखा है, जिसमें हिमाचल में हुए नुकसान की जानकारी दी गई। हिमाचल में कांग्रेस सरकार का 9 महीने का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार ने बहुत सारा वक्त इस बात पर जाया कर दिया कि पूर्व की सरकारों ने ऋण लिया, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। करीब 3 से 4 महीने प्रदेश सरकार का यही राग चलता आ रहा है।
राजस्थान के जेबीटी भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट से बीएड धारकों के खिलाफ फैसला आने के बाद प्रदेश हाईकोर्ट में ऐसे ही मुद्दे को लेकर लंबित पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई 11 सितंबर के लिए टल गई। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की उस अधिसूचना को अवैध करार दिया था, जिसके तहत बीएड डिग्री धारकों को जेबीटी टेट के लिए योग्य किया गया था। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 25 नवंबर 2021 को एनसीटीई की 28 जून 2018 की अधिसूचना को रद्द कर दिया था। याचिकाकर्ता देवेश शर्मा ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हिमाचल हाईकोर्ट ने भी बीएड डिग्री धारकों को जेबीटी टेट के लिए योग्य करने के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद निर्धारित की थी। हिमाचल हाईकोर्ट के समक्ष स्कूल शिक्षा बोर्ड की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इसमें बीएड डिग्री धारकों को जेबीटी टेट के लिए योग्य किया गया था। 26 नवंबर 2021 को हिमाचल हाईकोर्ट ने जेबीटी भर्ती मामलों पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया था कि शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई के नियम प्रारंभिक शिक्षा विभाग के साथ-साथ अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग पर भी लागू होते हैं। कोर्ट ने आदेश दिए थे कि एनसीटीई की 28 जून 2018 को जारी अधिसूचना के अनुसार जेबीटी पदों की भर्ती के लिए नियमों में जरूरी संशोधन किया जाए। हाईकोर्ट के इस फैसले से जेबीटी पदों के लिए बीएड डिग्री धारक भी पात्र हो गए थे। बाद में हाईकोर्ट ने जेबीटी यूनियन की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका में पारित आदेशों से इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के संवदेनशील नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने राज्य में भारी बारिश और भू-स्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में ऋणधारकों की कठिनाइयों को कम करने के दृष्टिगत ऋण पुन:संरचना के लिए निर्णायक कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने 18 अगस्त को प्रदेश को 'प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र' घोषित किया था। इस निर्णय के पश्चात मुख्यमंत्री ने बैंकों के साथ परामर्श कर आवश्यक उपायों को अंतिम रूप दिया। राज्य सरकार की यह पहल कृषि और संबद्ध गतिविधियों से संबंधित अग्रिमों को छोड़कर, सभी प्रकार के मौजूदा ऋणों की पुन:संरचना पर केंद्रित है, जिनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), खुदरा और अन्य के लिए प्रदत्त ऋण शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के परिपत्र के अनुसार राज्य सरकार द्वारा फसल के नुकसान के आकलन के बाद कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए दिए गए ऋणों के लिए राहत उपाय प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस महत्त्वपूर्ण निर्णय का उद्देश्य उन लोगों को राहत प्रदान करना है जिनकी आर्थिक स्थिरता आपदा के कारण विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान और संपत्ति के नुकसान के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। राहत उपायों के लिए पात्रता निर्धारित करने की मूल्यांकन तिथि 24 जून, 2023 निर्धारित की गई है। केवल वे खाते जो इस तिथि तक अतिदेय नहीं थे, ऋण पुन:संरचना के लिए पात्र होंगे। संपूर्ण पुन:संरचना प्रक्रिया सरकार द्वारा प्रदेश को प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की तारीख 18 अगस्त, 2023 से तीन महीने के भीतर पूरी की जाएगी। पात्र लोगों के लिए एक स्थगन अवधि लागू की जाएगी जिससे मामले-दर-मामले आधार पर मूल्यांकन किए गए आवश्यकता-आधारित पुन:संरचना उपायों को लागू करने की तारीख से 12 महीने तक मूल किस्त के भुगतान को स्थगित करने की अनुमति मिलेगी।
पार्टी कार्यालय जाकर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से भी की शिष्टाचार भेंट मंडी जिला के नव नियुक्त पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जिला मंडी के जिलाध्यक्ष निहाल चंद शर्मा कर रहे थे। उनके साथ जिला मंडी के सभी महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, प्रवक्ता और सचिव भी उपस्थित रहे। नेता प्रतिपक्ष ने सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं और पार्टी के दायित्वों के निर्वहन के लिए जी जान से लगने का आग्रह किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सभी पदाधिकारियों को अपने अपने क्षेत्रों में डटकर काम करने, केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में प्रदेश के एक-एक व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए काम करे। उन्होंने कहा कि आगामी लोक सभा चुनाव में हर बूथ पर बीजेपी को सबसे आगे लेकर चलने का लक्ष्य हर पदाधिकारी और कार्यकर्ता लेकर चले। बाद में यह प्रतिनिधिमंडल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से भी मिला। डॉ. बिंदल ने सभी को शुभकामनाएं दी और हर बूथ से बीजेपी को सबसे मज़बूत करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने को कहा। इस प्रतिनिधि मंडल में मंडी ज़िला अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा, उपाध्यक्ष शेर सिंह, मोहन सिंह, रणवीर सिपाहिया, पंकज शर्मा, धर्मपाल, रोशन ठाकुर, महामंत्री सुमेश उपाध्याय, संजय ठाकुर, कोषाध्यक्ष दीपक गुलेरिया, प्रवक्ता पंकज कपूर, सिराज मंडल अध्यक्ष भगीरथ शर्मा, बल्ह के राजेंद्र राणा, दरंग मंडल अध्यक्ष भारती, सचिव ममता भाटिया, भारती शर्मा, सुकन्या, ख़िमीराम, चूड़ामणि, शिवराम और बल्ह मीडिया प्रभारी राकेश वालिया आदि मौजूद रहे। सभी पदाधिकारियों ने पार्टी द्वारा दिये गये दायित्वों का पूरी निष्ठा और लगन से निर्वहन करने का आश्वासन दिया।
पार्टी कार्यालय जाकर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से भी की शिष्टाचार भेंट मंडी जिला के नव नियुक्त पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जिला मंडी के जिलाध्यक्ष निहाल चंद शर्मा कर रहे थे। उनके साथ जिला मंडी के सभी महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, प्रवक्ता और सचिव भी उपस्थित रहे। नेता प्रतिपक्ष ने सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं और पार्टी के दायित्वों के निर्वहन के लिए जी जान से लगने का आग्रह किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सभी पदाधिकारियों को अपने अपने क्षेत्रों में डटकर काम करने, केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में प्रदेश के एक-एक व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए काम करे। उन्होंने कहा कि आगामी लोक सभा चुनाव में हर बूथ पर बीजेपी को सबसे आगे लेकर चलने का लक्ष्य हर पदाधिकारी और कार्यकर्ता लेकर चले। बाद में यह प्रतिनिधिमंडल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल से भी मिला। डॉ. बिंदल ने सभी को शुभकामनाएं दी और हर बूथ से बीजेपी को सबसे मज़बूत करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने को कहा। इस प्रतिनिधि मंडल में मंडी ज़िला अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा, उपाध्यक्ष शेर सिंह, मोहन सिंह, रणवीर सिपाहिया, पंकज शर्मा, धर्मपाल, रोशन ठाकुर, महामंत्री सुमेश उपाध्याय, संजय ठाकुर, कोषाध्यक्ष दीपक गुलेरिया, प्रवक्ता पंकज कपूर, सिराज मंडल अध्यक्ष भगीरथ शर्मा, बल्ह के राजेंद्र राणा, दरंग मंडल अध्यक्ष भारती, सचिव ममता भाटिया, भारती शर्मा, सुकन्या, ख़िमीराम, चूड़ामणि, शिवराम और बल्ह मीडिया प्रभारी राकेश वालिया आदि मौजूद रहे। सभी पदाधिकारियों ने पार्टी द्वारा दिये गये दायित्वों का पूरी निष्ठा और लगन से निर्वहन करने का आश्वासन दिया।
एचपीयू में जल्द स्थाई कुलपति की नियुक्ति करने की भी उठाई मांग हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एनएसयूआई इकाई के द्वारा छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सक्खू से उनके निवास स्थान ओकओवेर में भेंट कर ज्ञापन सौंपा। एनएसयूआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के प्रभारी परवीन मिन्हास व परिसर अध्यक्ष योगेश यादव की अगवाई में छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने एचपीयू सहित सभी कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों की बहाली को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष मांग रखी। एनएसयूआई के छात्रों ने विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की जल्द नियुक्ति की भी मांग उठाई। छात्र नेता मिन्हास और यादव ने जानकारी दी कि एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री से हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व स्कूलों में रिक्त पड़े शिक्षक व गैर शिक्षक के पदों को जल्द भरने की भी मांग प्रमुखता से उठाई। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नये छात्रावासों के जल्द निर्माण सहित हर वर्ष नियमित सेट की परीक्षा आयोजित करने की भी मांग उठाई। प्रदेश के हज़ारों लाखों बेरोज़गार युवाओं को अवसर प्रदान करने के लिए प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों को जल्द से जल्द भरने की भी मांग की गई। एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री से मांग की कि स्टेट कमीशन में भर्ती परीक्षाओं के लिए महिला कैंडिडेटों की तर्ज पर पुरुष कैंडिडेटों को भी नि:शुल्क आवेदन की सुविधा दी जाए। एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की कि हमीरपुर कमीशन में पूर्व में हुई परीक्षाओं के लंबित भर्ती परीक्षा परिणामों को जल्द से जल्द घोषित किया जाए और जो पूर्व में भरे गए परीक्षा फॉर्म उनकी जल्द से जल्द परीक्षा करवाई जाए। साथ ही हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को केंद्रीय विश्वविद्यालय के तर्ज पर फेलोशिप के प्रावधान करने की मांग भी छात्र संगठन एनएसयूआई ने प्रमुखता से मुख्यमंत्री के समक्ष रखी। वहीं, मुख्यमंत्री ने एनएसयूआई के छात्रों को विश्वास दिलाया है कि सरकार जल्द ही छात्रों की मांगों को प्राथमिकता से पूरा करेगी। इस अवसर पर एनएसयूआई राज्य महासचिव परवीन मिन्हास, महासचिव अरविंद ठाकुर, राज्य सचिव डैनी पंगवाल, एचपीयू कैंपस प्रेसिडेंट योगेश यादव, परिसर उपाध्यक्ष पवन नेगी, चंदन महाजन, अक्षिता भरोटा, परिसर महासचिव राकेश सिंगटा, रणदीप ठाकुर, सह सचिव सचिन, विक्रांत, गौरव नेगी, ईशान शर्मा, हसीना, गिरीश, कुलदीप वर्मा, हर्षित, सतीश आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय में आज रिपोर्टर्ज एसोसिएशन के आम चुनाव हुए। इसमें सर्वसम्मति से रिपोर्टर्ज एसोसिएशन के निम्न पदाधिकारियों/कार्यकारिणी को वर्ष 2023 हेतु चयनित किया गया। इसमें कल्पना शर्मा को एसोसिएशन का प्रधान, अंजुला वर्मा को महासचिव, टीसी वर्मा को उप प्रधान, अरविंद शर्मा को संयुक्त सचिव व युगल किशोर को वित्त सचिव चुना गया। वहीं, संतोख सिंह, अनित गुप्ता, राजेश सकलानी को कार्यकारिणी सदस्य चुना गया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ सोशल मीडिया पर की जा रही बयानबाजी को लेकर पुलिस के पास एक और शिकायत पहुंच गई है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव बलदेव ठाकुर ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक शिमला संजीव गांधी को शिकायत पत्र सौंपा है। शिकायत में उन्होंने कहा कि बीते दिनों सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की खबरें चलाई गई है। प्रदेश के मुखिया के खिलाफ सोची समझी साजिश के तहत जनता को गुमराह करने की नियत से इन खबरों को सुनियोजित तरीके से चलाया गया। बलदेव ठाकुर ने शिकायत में कहा कि एक सोशल मीडिया पोर्टल ने यह खबर चलाई की मुख्यमंत्री ईलाज के लिए विदेश जा रहे हैं। जबकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। बलदेव ठाकुर ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि मुख्यमंत्री आपदा में बेहतर कार्य कर रहे हैं। रोजाना 16-16 घंटे जनता की समस्याओं का समाधान करने का कार्य कर रहे हैं। आपदा में किया जा रहे कार्यों को लेकर नीति आयोग विश्व बैंक उनके कार्यों की सराहना कर चुका है। यही नहीं भाजपा के दिग्गज नेता शांता कुमार भी मुख्यमंत्री के द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ शरारती तत्व जानबूझकर इस तरह की खबरें चला रहे हैं ताकि जनता को गुमराह किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार बेहतर तरीके से कार्य कर रही है।हर वर्ग को राहत देने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि जिन भी सोशल मीडिया पोर्टल पर यह खबर चली है उनका पता लगाया जाए। इस षड्यंत्र के पीछे कौन लोग शामिल है किसने यह षड्यंत्र रचा है इसका पता करके आरोपियों पर सख्त कारवाई की जाए।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) 3 सितंबर को मंडी जिला मुख्यालय में एनडीए, एनए-2 तथा सीडीएस-2 की परीक्षा आयोजित करने जा रहा है। सदर मंडी में इस परीक्षा के लिए राजकीय वल्लभ महाविद्यालय मंडी, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान मंडी, राजकीय विजय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, मंडी, डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, मंडी, कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, मंडी तथा इंडस ग्लोबल स्कूल जरल, मंडी में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा को शांतिपूर्वक व सुचारू रूप से सम्पन्न करवाने के लिए 3 सितंबर को सदर मंडी मुख्यालय के संबंधित परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा-144 लागू रहेगी। इस बारे एसडीएम सदर मंडी ओम कांत ठाकुर ने शुक्रवार को आदेश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि 3 सितंबर को संबंधित परीक्षा केंद्रों के आसपास किसी भी सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक कार्यक्रम, जुलूस, रैलियों, नारेबाजी, धरना प्रदर्शन आदि पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दिन यानी 3 सितंबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक संबंधित परीक्षा स्थलों के आसपास लाउड स्पीकरों के उपयोग, परीक्षा स्थलों के आसपास निर्माण, टेंट स्टेज लगाने, तोड़ने आदि के काम पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने बताया कि इस दिन परीक्षा केंद्रों में किसी प्रकार के हथियार, लाठियां, गोला बारूद, तलवार, घातक उपकरण आदि ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
राजस्व मंत्री ने 'विस्थापन का दंश' पुस्तक का किया विमोचन राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्ष की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के प्रति संवेदनशील है तथा उनकी उचित मांगों को राजस्थान सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। राजस्व मंत्री ने कहा कि पौंग बांध परियोजना के कारण प्रदेश के जिला कांगड़ा में 20722 परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस परियोजना से विस्थापितों को भूमि आवंटित करवाने के लिए प्रयासरत है। इसके अलावा शेष विस्थापितों को एकमुश्त राहत उपलब्ध करवाने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में समय-समय पर बैठकें आयोजित की जाएं ताकि विस्थापितों की मांगों का समय पर समाधान किया जा सकें। इस अवसर पर जगत सिंह नेगी ने उपायुक्त (राहत एवं पुनर्वास) राजा का तालाब तलवाड़ा, डॉ. संजय कुमार धीमान द्वारा विस्थापितों के जीवन तथा राहत व पुनर्वास प्रक्रिया पर लिखित पुस्तक 'विस्थापन का दंशÓ का विमोचन भी किया। यह पुस्तक भारत में विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं को समय पर पूर्ण करने के लिए विस्थापितों के त्याग को समर्पित है। राजस्व मंत्री ने प्रधान सचिव राजस्व ओंकार चंद शर्मा से भी विस्थापितों के पुनर्वास के संबंध में चर्चा की। बैठक में शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया ने विस्थापितों से संबंधित विभिन्न मांगों से अवगत करवाया। संयुक्त सचिव राजस्व बलवान चंद तथा सहायक आयुक्त कांगड़ा सुभाष गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने प्रतिभाशाली युवा लेखिका, पाइनग्रोव स्कूल धर्मपुर की कक्षा सातवीं ए की छात्रा रेवा कश्यप द्वारा लिखित 'ड्रीम कैचरÓ नामक लघु कहानियों के एक आकर्षक संग्रह का अनावरण किया। विमोचन कार्यक्रम प्रतिष्ठित राजभवन में हुआ, जहां राज्यपाल शुक्ला ने रेवा की उल्लेखनीय रचनात्मकता और कहानी कहने की क्षमता की सराहना की। 'ड्रीम कैचरÓ ऐसा काव्य है, जिसमें 18 लघु कथाएं शामिल हैं, जो अपने पाठकों को कल्पना के एक आकर्षक क्षेत्र में ले जाता है। ड्रीम कैचर के साथ रेवा कश्यप ने मनोरम कहानियों को गढ़ने की क्षमता प्रदर्शित की है, जो न केवल वास्तविकता और कल्पना के बीच की खाई को पाटती है, बल्कि उम्र की बाधाओं को भी पार करती है। वह सभी उम्र के पाठकों को अपने अनूठे सपनों की खोज के लिए प्रेरित करती है, जो धीरे-धीरे हमें जीवन जीने का सबक सिखाते हैं। सात वर्षीय रेवा दिन में देखती और पढ़ती थी और रात में सपना देखती थी। उसकी सुबहें उसके सपनों की ओस से छलकी हुई थीं। उसने यादें बनाने के लिए उन्हें शब्दों में व्यक्त करना शुरू कर दिया, इस बात से अनजान कि सात साल की उम्र में वह अपनी पहली किताब लिख रही थी। यह दस साल की उम्र तक चलता रहा। कहानियां एकत्र की गईं और उसके सपने दिन की रोशनी देखने के लिए तैयार थे। अत: 'ड्रीम कैचरÓ पुस्तक रैक पर आ गई। उनकी कहानियों की मासूमियत मूल्यों को उजागर करती है और बच्चों की दुनिया को समझाती है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने रेवा कश्यप की उनके उत्कृष्ट प्रथम कार्य के लिए सराहना की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे उनकी कहानियां हास्य, रहस्य और मानवीय भावनाओं का समृद्ध मिश्रण हैं, जो उन्हें सभी के लिए दिलचस्प बनाती हैं। रेवा की निर्जीव वस्तुओं, फलों और सब्जियों को संबंधित मानवीय गुणों से जोड़ने की अद्वितीय क्षमता उनके असाधारण लेखन का परिचायक है। राज्यपाल शुक्ल ने साहित्य जगत में रेवा की शुरुआती उपलब्धि की सराहना की और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रेवा की रचनात्मक यात्रा में सहयोग देने में उनकी मां शालिनी शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका को सराहा एवं उन्हें बधाई ज्ञापित की। यह पुस्तक चंडीगढ़ में प्रमुख बुकस्टोर्स और ऑनलाइन अमेज़न पर खरीदने के लिए उपलब्ध है। पाइनग्रोव स्कूल के कार्यकारी निदेशक कैप्टन ए जे सिंह, प्रबंधन प्रमुख मिस समीक्षा सिंह, स्पेशल एजुकेटर मिस श्रिया, प्रधानाचार्य संजय चौहान, हैड एलीमेंट्री डॉ किरण अत्री एवं अन्य अधिकारियों नें भी रेवा एवं उनकी माता शालिनी शर्मा को बधाई दी।
जिला परिषद सदस्य सरस्वती नगर जुब्बल व अध्यक्ष कृषि बागवानी व उद्योग कमेटी जिला शिमला कौशल मुंगटा ने हाटकोटी में क्षेत्र की पहली लाइब्रेरी का शुभारंभ किया, जिसमें पचास से साठ बच्चों के बैठने की व्यवस्था की गई है। मुंगटा का कहना है कि रोहित ठाकुर के सहयोग व जिला परिषद निधि से क्षेत्र में बनने वाला ये पहला पुस्तकालय है, जो की शिक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति ले कर आएगा। उन्होंने कहा कि चुनावों में केवल पुस्तकालय खोलने का वादा किया था, जिसको पूरा कर दिया गया है और कुछ अन्य पंचायतों को भी 50-50 हजार की प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों के लिए भी जिला परिषद निधि दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब छात्र व छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तके उपलब्ध हो सकें व वो भी सभी के साथ मिलकर आगे बढ़ सकें। मुंगटा ने आगे कहा कि ये पुस्तकालय तो केवल शुरआत है, अगर जगह मिली तो आने वाले समय में ऐसे और पुस्तकालय बनाने का प्रयास किया जाएगा और युवाओं के प्रोत्साहन के लिए कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को पुस्तकालय की सुविधा न होने की वजह से शिमला या चंडीगढ़ का रुख करना पड़ता था, जिस वजह से गरीब छात्र पीछे रह जाता था जो कि अब नहीं होगा। मुंगटा का कहना है कि इस पुस्तकालय के अलावा उन्होंने युवाओं के लिए दो वर्षों में अपनी निधि से विभिन्न पंचायतों में मैदानों के लिए भी 10 लाख से ऊपर की राशि खर्च की है तथा सरकार के विभिन्न उपक्रमों से शिक्षा मंत्री के माध्यम से लाखों की राशि क्षेत्र के प्रदान की है। उन्होंने आगे कहा कि जिला परिषद सदस्य की जितनी शक्तियां हैं, उस लिहाज से युवाओं के लिए समर्पित हो कर कार्य किया जा रहा है और आगे भी प्रयास जारी रहेंगे,आने वाले समय में शिक्षा मंत्री जी से क्षेत्र में स्वर्गीय रामलाल ठाकुर के नाम से एक भव्य राज्य पुस्तकालय खोलने का भी आग्रह किया जाएगा। उन्होंने अपने कार्यों का ब्योरा देते हुए आगे कहा है कि उनके माध्यम से क्षेत्र में दो वर्षों में 50 लाख से ऊपर के कार्य मात्र जिला परिषद निधि से हो चुके हैं तथा अन्य विभागों के माध्यम से भी लाखों के काम चल रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने ब्लॉक के बीडीओ व पंचायत के सभी प्रतिनिधियों का आभार जताया, जिन्होंने इस कार्य में उनकी मदद की। इस मौके पर बीडीओ जुब्बल करण सिंह, पूर्व जिला परिषद सदस्य व बीडीसी अध्यक्ष मोती लाल सिथटा, पूर्व बीडीसी उपाध्यक्ष जुब्बल कोटखाई संदीप सेहटा, पंचायत समिति सदस्य प्रेम लता गांगटा, प्रधान सरस्वती नगर दीपना राजटा, उप प्रधान हरीश चांजटा, सचिव धन दास व ब्लाक के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज राजभवन में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याग्निक द्वारा स्वरबद्ध किए 'हिमाचली स्वैग-पाणी री टंकीÓ गीत जारी किया। हिमाचली गायक दिलीप चौहान ने भी इसमें अपनी आवाज दी है। इस अवसर पर राज्यपाल ने दिलीप चौहान को बधाई देते हुए कहा कि हिमाचली संस्कृति, बोली, रीति-रिवाज और पहनावा अति समृद्ध है। उन्होंने कहा कि संस्कृति के संवर्द्धन में उनके प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति को संरक्षित रखते हुए भावी पीढ़ियों को इससे अवगत करवाना आवश्यक है। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार देर सायं सभी उपायुक्तों के साथ एक वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की और उन्हें अपने जिलों में भारी बारिश से हुए नुकसान का तीन दिन के भीतर आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने आपदा प्रभावितों की सहायता के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए अधिकारियों को राहत व पुनर्वास कार्यों मेें तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों से क्षति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपायुक्त जिलों में क्षति का मूल्यांकन कर सम्बंधित क्षेत्रों को आपदा प्रभावित क्षेत्र का दर्जा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को राहत राशि के उचित वितरण के लिए एसडीएम और उपायुक्तों सहित राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण हुई तबाही के दृष्टिगत राज्य सरकार ने एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है। इसमें प्रभावितों की सहायता के लिए दस गुणा तक बढ़ा मुआवजा प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में पक्के मकान को आंशिक क्षति पर 12,500 रुपये और कच्चे घर को आंशिक क्षति होने पर 10,000 रुपये की राहत राशि दी जाती थी। लेकिन प्राकृतिक त्रासदी के कारण हुए नुकसान को देखते हुए सरकार ने इसे बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले दुकानों और ढाबों को हुए नुकसान के मुआवजे के रूप में सामान के बदले केवल 10 हजार रुपये की आंशिक आर्थिक सहायता मिलती थी जिसे अब राज्य सरकार ने दस गुना बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। इसके अलावा, नए प्रावधानों के अनुसार दुधारू और भारवाहक मवेशियों की मृत्यु पर प्रति पशु 55,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी और भेड़, बकरी और सुअर की मृत्यु की स्थिति में वित्तीय सहायता को 4000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये कर दिया गया है। प्रदेश में धंसते क्षेत्रों के संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न स्थितियों का गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिन प्रभावितों की सम्पत्ति पूर्ण रूप से नष्ट हो गई है, उन्हें पर्याप्त सहायता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ईमारती लकड़ी और ईंधन की लकड़ी की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश से बाहर इनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस आदेश की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने आपदा के दौरान उपायुक्तों द्वारा किए गए त्वरित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता के फलस्वरूप 48 घंटों के भीतर विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति बहाल की गई। उन्होंने कहा कि अब विभाग सड़कों की मरम्मत पर विशेष ध्यान दे ताकि किसान अपनी उपज समयबद्ध बाजार तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि सड़कों को बहाल करने के लिए मशीनें किराये पर लेने में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। बैठक में प्रधान सचिव राजस्व ओंकार चंद शर्मा, प्रधान सचिव लोक निर्माण भरत खेड़ा, प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक डीसी राणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
आपदा के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार फिर नया कर्ज लेने जा रही है। राज्य सरकार 500 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेगी। इसे आगामी 15 वर्षों में चुकता किया जाएगा। यह ऋण प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर लिया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार की प्रतिभूतियों को गिरवी रखा जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक इन प्रतिभूतियों को 5 सितंबर को नीलाम करेगा। यह उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में करीब 78 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। आर्थिक तंगहाली के बीच प्रदेश की स्थिति पहले से ही खराब चल रही है। बरसात ने हिमाचल को पहुंचाया 8657.80 करोड़ का नुकसान उधर, मानसून सीजन में अब तक हिमाचल प्रदेश को 8657.80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। लोक निर्माण विभाग को सबसे ज्यादा 2932.94 करोड़ रुपये नुकसान का आकलन किया जा चुका है। बाढ़ से प्रदेश में 2527 मकान ढह गए, जबकि 10799 क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 5607 गोशालाएं और 314 दुकानें ढही हैं।
धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत हुई गिरफ्तारियां हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत की गई हैं। इनमें एएसएएमएस एजुकेशन ग्रुप के पार्टनर राजदीप जोसन और कृष्ण कुमार, केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पंडोगा के उपाध्यक्ष हितेश गांधी और प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय की छात्रवृत्ति शाखा के तत्कालीन अधिकारी अरविंद राजटा शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों को विशेष न्यायालय पीएमएलए शिमला में पेश किया गया। न्यायालय ने चारों को पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया। ईडी ने सीबीआई शिमला की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। आरोप है कि राज्य शिक्षा विभाग, निजी संस्थान और बैंक अधिकारी करीब 250 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति निधि के वितरण में बड़े पैमाने पर गलत विनियोजन में शामिल थे। ईडी की जांच से पता चला कि राजदीप जोसन और कृष्ण कुमार ने मैसर्स एएसएएमएस एजुकेशन ग्रुप एंड स्किल डेवलपमेंट सोसायटी के माध्यम से फर्जी दस्तावेज पेश करके अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक योजना के तहत छात्रवृत्ति घोटाला किया। इसी तरह हितेश गांधी की अध्यक्षता वाले केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पंडोगा ने छात्रवृत्ति के लिए फर्जी दावे किए, जिन्हें अरविंद राजटा ने सत्यापित किया। हितेश गांधी ने विद्यार्थियों के बैंक खाते में वितरित छात्रवृत्ति को केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया। इससे पहले 31 अगस्त को चार राज्यों में 24 स्थानों पर तलाशी ली गई थी। इसमें 4.42 करोड़ रुपये की अंतिम कुर्की आदेश दिया गया था। हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के 24 स्थानों पर पड़े थे छापे प्रवर्तन निदेशालय ने छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में 29 अगस्त को हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के 24 स्थानों पर इस मामले में छापे मारे थे। ईडी ने इन छापों के दौरान बैंक खातों में 2.55 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी जब्त की थी। छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त आरोपियों ने खोल दिए होटल और शराब के ठेके हिमाचल में सामने आए 250 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त कुछ निजी शिक्षण संस्थानों के मालिकों ने होटल और शराब के ठेके भी खोल दिए हैं। इन्होंने इसी बीच जमीन की भी खरीद-फरोख्त की है। सीबीआई की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इनके पास आय से अधिक संपत्ति है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय जब्त कर रहा है। सीबीआई ने अब तक की जांच के तहत करीब 28 निजी संस्थानों को छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त पाया है। इनमें से 15 संस्थानों की जांच पूरी हो चुकी है। इनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। 13 निजी शिक्षण संस्थानों की जांच चल रही है। यह घोटाला 2013 से 2019 के बीच हुआ है। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति हुई जारी सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर हर स्तर पर अनियमितताएं बरती गईं। आपसी मिलीभगत से निजी संस्थानों को पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति के लिए बजट जारी हुआ। यही कारण रहा है कि छात्रवृत्ति का 80 प्रतिशत बजट निजी और 20 प्रतिशत बजट सरकारी संस्थानों को जारी हुआ।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर से भाजपा विधायक डॉ. जनक राज के जन्मदिन पर आईएएस अफसर के खिलाफ वायरल पत्र बम मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। यह पत्र शिमला डाकघर से पोस्ट कर भाजपा विधायक के शिमला स्थित आवास के पते पर भेजा गया। 15 अगस्त को विधायक का जन्मदिन था। अपने विधानसभा क्षेत्र भरमौर में विधायक कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ जन्मदिन मनाने पहुंचे। वहां पुलिस की गिरफ्त में आए एक आरोपी ने मोबाइल से पत्र की फोटो खींची और वायरल कर दी। उधर, विधायक ने पुलिस का सहयोग करते हुए पत्र के लिफाफे को एक जानकार के माध्यम से शिमला के बालूगंज थाना को सौंप दिया। अब यह लिफाफा केस प्रॉपर्टी के तौर पर पुलिस ने रख लिया है। लिफाफे पर विधायक का नाम और उनकी रिहायश का पता लिखा है। इस पर डाक विभाग की मुहर भी लगी है। शुरुआती जांच में अंदेशा जताया जा रहा है कि पत्र शिमला में लिखा गया और चंबा से वायरल किया गया। कंप्यूटर पर पत्र लिखा, बाद में इसका प्रिंट लिया और लिफाफे पर नाम व पता पेन से लिखा गया है। सारे सबूत मिलने पर अब पुलिस हैंडराइटिंग के सैंपल लेगी। शिमला शहर में 29 लेटर बॉक्स हैं। इनमें कुछ लेटर बॉक्स ही ऐसे हैं, जिनके आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पुलिस जांच कर रही है कि यह पत्र कहां से पोस्ट किया होगा। इसमें सीसीटीवी फुटेज का भी सहारा लिया जाएगा। पुलिस इस मामले में करीब 70 फीसदी जांच पूरी कर चुकी है। उधर, एसपी शिमला संजीव गांधी ने कहा कि हर पहलू पर तफ्तीश की जा रही है। सीएम सुक्खू से मिले विधायक बीते दिन विधायक जनकराज सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिले और कहा कि पत्र से उनका लेना-देना नहीं है। यह पत्र उनके पते पर डाक से आया। इसे वायरल करने में उनका हाथ नहीं है। विधायक ने अमर उजाला को बताया कि भाजपा और उनको मामले में जबरदस्ती घसीटा जा रहा है। वह विपक्ष में हैं, अगर कोई मुद्दा उठाना होगा तो वह छिपकर नहीं, बल्कि सामने आकर सवाल उठाएंगे। वह चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं। यह कांग्रेस के असंतुष्ट लोगों का काम है, जो छिपकर अपनी ही सरकार के खिलाफ लामबंद हैं और ठीकरा भाजपा पर फोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वक्त आने पर पूरा जवाब देंगे। पत्र बम मामला बीते दिनों वायरल पत्र में एक निजी कंपनी से करोड़ों के लेनदेन के आरोप लगे थे। पत्र में हाईप्रोफाइल पार्टी और कॉल गर्ल्ज तक का उल्लेख है। पत्र में एक आईएएस अफसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र सीबीआई निदेशक को प्रेषित करने का दावा किया गया। पत्र अनमोल सिंह ठाकुर के नाम से जारी हुआ, जबकि इस नाम का कोई अधिकारी व कर्मचारी नहीं है। आईएएस अफसर ने थाना बालूगंज में एफआईआर दर्ज करवाई। उसके बाद पुलिस ने पत्र वायरल करने वाले मुख्य आरोपी को जिला चंबा से हिरासत में लिया।
वीरवार को SFI हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने कुछ छात्र मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के प्रधानाचार्य को एक ज्ञापन सौंपा। SFI इकाई ने विश्वविद्यालय में पीजी कक्षाओं को शीघ्र शुरू करने की मांग की ताकि जो शैक्षणिक सत्र पहले से ही लेट है उसको वापिस सही समय पर शुरू किया जा सके। कोरोना महामारी के कारण शैक्षणिक सत्र काफी लेट हो गया था और इसको वापिस लाने के लिए शीघ्र से शीघ्र कक्षाओं को शुरू करना जरूरी है। निर्माण कार्यों में तेज़ी लाने की मांग दूसरी मुख्यमांग में SFI इकाई ने विश्वविद्यालय में व विश्वविद्यालय के छात्रावासों में जितने भी नवीकरण के कार्य पिछले लंबे समय से चल रहे हैं फिर चाहे वह भवन निर्माण के कार्य हो या लिफ्ट निर्माण के हो इन सभी निर्माण कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने की बात कही है। विश्वविद्यालय में पिछले लंबे समय से जगह-जगह लिफ्ट निर्माण के कार्य चले हुए हैं उसमें से कई लिफ्ट बन चुकी है परंतु अभी भी कुछ एक लिफ्ट बंद पड़ी है। आर्ट्स ब्लॉक की लिफ्ट जब से बनी है तब से ये लिफ्ट सुचारु नहीं है। उस लिफ्ट को भी शीघ्रता से चलाया जाने की मांग गई है। B.Ed के काउंसलिंग शेड्यूल को जारी करने की मांग तीसरी मुख्य मांग में SFI इकाई का कहना था कि B.Ed की प्रवेश परीक्षा बहुत पहले हो चुकी है, परंतु उसका काउंसलिंग शेड्यूल अभी तक जारी नहीं किया गया है। B.Ed के काउंसलिंग शेड्यूल को जल्द से जल्द जारी करने की मांग के साथ साथ उन्होंने कहा कि समय पर कक्षाएं शुरू होंगी तो शैक्षणिक सत्र में भी देरी नहीं होगी। SFI इकाई ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रधानश्चार्य ने आश्वासन दिया है कि इन सब मांगों पर प्राथमिकता से कार्रवाई की जाएगी और कुछ दिनों में ही इन सभी मांगों को पूरा किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार निर्वाचक नामावली को शुद्ध एवं त्रुटिरहित व अद्यतन बनाए रखने के उदेश्य से बी.एल.ओ. द्वारा 21-07-2023 से अपने मतदान क्षेत्र के अन्तर्गत घर-घर जाकर फोटोयुक्त मतदाता सूचियों में विद्यमान प्रविष्टियों के सत्यापन का कार्यक्रम आरम्भ किया गया था जो कि दिनांक 21-08-2023 तक चला। इस दौरान 01-10-2023 की अहर्ता तिथि के आधार पर 18 वर्ष से अधिक आयु प्राप्त कर चुके 32,403 मतदाताओं की पहचान कर प्रारूप 6 पर आवेदन प्राप्त कर लिये गये है। सत्यापन के दौरान 18,445 मतदाता अनुपस्थित व 41,488 स्थानान्तरित मतदाता चिन्हित किये गये। इसके अतिरिक्त मतदाता सूची में 3,335 दोहरे रूप से पंजीकृत, व 40,939 मृत मतदाताओं की पहचान की गई तथा फोटो मतदाता सूची में 21,723 मतदाताओं की खराब व धुन्धली फोटो को रंगीन फोटो से परिवर्तित करने हेतु पहचान की गई। इसके अतिरिक्त उन्होने यह भी बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश के समस्त 68 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान केन्द्रों के भौतिक सत्यापन का कार्यक्रम भी समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों, समस्त निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों एवं उप-मण्डलाधिकारी की देख रेख में दिनांक 22-08-2023 से 31-08-2023 तक चलाया गया था। उन्होंने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 25 के प्रावधानुसार 2 से 8 सितम्बर, 2023 तक मतदान केंद्रों की सूचियां प्रारूप में प्रकाशित की जायेंगी। यह सूचियां समस्त जिला निर्वाचन कार्यालयों, समस्त निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी एवं उप-मण्डलाधिकारी (नागरिक), समस्त तहसीलों व उप-तहसीलों के कार्यालयों में जनसाधारण के निःशुल्क निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेेंगी। इस दौरान यह सूचियां https://ceohimachal.gov.in पर भी देखी जा सकती हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रदेशवासी मतदान केंद्रों के युक्तिकरण के सम्बंध में अपनी कोई आपत्ति अथवा परामर्श 2 से 8 सितम्बर, 2023 तक अपने जिले से सम्बंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (जिलाधीश), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एडीएम/एसडीएम) के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष बोले-सरकार बने बीत चुका 9 माह का समय, लेकिन कब पूरी होगी कांग्रेस की गारंटी नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार को बने नौ माह से ज्यादा का समय हो गया है और कांग्रेस ने अब तक एक भी गारंटी को पूरा नहीं किया है। रक्षा बंधन आ गया है, तो मुख्यमंत्री महोदय प्रदेश की माताओं-बहनों से किए गए वादे को ही पूरा कर दें। रक्षा बंधन में हर भाई अपनी बहन को तोहफे देते हैं। ऐसे में मौका और दस्तूर दोनों हैं जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश की माताओं बहनों को रक्षाबंधन के तोहफे के रूप में हर महिला को 1500 रुपये प्रति महीना देने की गारंटी पूरी करें। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे किए थे। प्रदेश के लोगों को दस गारंटिया भी दी थी। जिसमें से एक गारण्टी प्रदेश की 18 से 60 साल की महिलाओं को हर महीनें 1500 रुपए देने की गारण्टी भी थी। कांग्रेस के सभी नेता जनता के बीच जाकर अपनी अपनी भाषा में 'घर में एक महिला होगी तो डेढ़ हजार, दो होगी तो तीन हजार, चार होगी तो छह हजार का नारा भी दिया था। हद तो तब हो गई थी जब कांग्रेस के नेताओं ने इसके लिए महिलाओं से फर्जी फॉर्म भी भरवा लिए थे। हिमाचल की राजनीति में प्रदेश की जनता से इस तरह का छल आज तक किसी ने नहीं किया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश की राजनीति में जनता के साथ ऐसा धोखा आज तक किसी ने नहीं किया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव में गारंटी देकर चुनाव जीतने के बाद उसे भूल जाने वालों को प्रदेश के लोग माफ नहीं करने वाले हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने के बाद अपने सारे वादे, सारी गारंटियां भूल गई, लेकिन प्रदेश के लोग नहीं भूले और आज भी उनकी राह देख रहे हैं। इसलिए मैं मुख्यमंत्री से आग्रह करता हूं कि वह रक्षा बंधन के पवित्र मौके पर प्रदेश की माताओं-बहनों से किए हुए वादे को पूरा करें। महिला सम्मान राशि की शुरुआत के लिए रक्षा बंधन से बेहतर कोई अवसर नहीं हो सकता है। महिला सम्मान की राशि पूरी ईमानदारी के साथ प्रदेश की हर मां-बहनों के खाते में डालें। नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश वासियों को दी रक्षा बंधन की बधाई नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश के लोगों को रक्षा बंधन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भाई बहन के असीम प्यार और अटूट बंधन को समर्पित यह त्यौहार लोगों के जीवन में सौहार्द और सद्भावना को और प्रगाढ़ करे। सब सुखी और स्वस्थ्य रहें।
कहा, उभरते डिजिटल परिदृश्य के अनुरूप ढल रहा हिमाचल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का नाम बदलकर 'डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभागÓ करने एवं विभाग की नई वेबसाइट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश संभवत: देश का पहला राज्य है जिसने डिजिटल रूप से उन्नत और आधुनिक राज्य बनने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और विभाग का यह नया नाम इसके कार्यों के अनुरूप प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन में उभरती प्रौद्योगिकी के व्यापक दायरे को देखते हुए विभाग का नाम डिजिटल प्रौद्योगिकी और गवर्नेंस विभाग किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग को उभरते डिजिटल परिदृश्य और बदलती आवश्यकताओं के साथ जोड़ना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आमजन तक सरकारी सेवाओं के लाभ शीघ्रता से पहुंचाने के लिए प्रौद्योगिकी संचालित शासन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सभी सेवाओं का डिजिटलीकरण कर तेज और सर्वसुलभ डेटा कनेक्टिविटी के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाना आवश्यक है ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग एक क्रांतिकारी कदम है। इससे सूचना और सेवाएं प्राप्त करने के लिए आम लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग से सरकार द्वारा शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। सुक्खू ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं शासन विभाग विभिन्न विभागों में डिजिटल क्षमता के अनुरूप चार मुख्य क्षेत्रों डिजिटल प्रौद्योगिकी, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं डेटा गवर्नेंस, डिजिटल ट्रांसफॉरर्मेशन तथा सूचना प्रौद्योगिकी निवेश एवं औद्योगिक प्रोत्साहन को सुदृढ़ करेगा। इन क्षेत्रों के माध्यम से डिजिटल प्रौद्योगिकी, टेली-संचार, ई-गवर्नेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, साइबर-सुरक्षा, कृत्रिम मेधा, ड्रोन और ड्रोन-आधारित सेवाएं, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉक चेन, और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए नीतियां विकसित कर कार्यान्वित की जाएंगी। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों के लिए प्रभावी मैपिंग, डेटा प्रबंधन और विश्लेषण के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली प्रौद्योगिकी का एकीकरण एवं कार्यान्वयन तथा सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन सहित विभिन्न उभरती प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना शामिल है। इस अवसर पर प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, सचिव डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस डॉ. अभिषेक जैन और निदेशक मुकेश रेपसवाल भी उपस्थित थे।


















































