सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश में विभाग के 10 वन प्रमंडलों में सरकारी वन भूमि पर खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति दी है। जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने अदालत में मामले की पैरवी की थी और उसने वन विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, नालागढ़ और कुटलैहड़ सहित पांच वन प्रमंडलों में खैर के पेड़ों की कटाई के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है और इन वन प्रमंडलों में प्रति वर्ष 16500 पेड़ निर्धारित किए गए हैं और जल्द ही खैर की निकासी शुरू हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेष पांच वन प्रमंडलों नाहन, पांवटा साहिब, धर्मशाला, नूरपुर और देहरा के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी वनों का निरीक्षण करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे और इन पांचों वन प्रमंडलों के लिए कार्य योजना तैयार करने के लिए खैर के पेड़ों की गिनती की जाएगी। सुक्खू ने कहा कि खैर के पेड़ों की सिल्वीकल्चर कटाई वन प्रबंधन और कायाकल्प के अलावा सरकारी खजाने के लिए राजस्व सृजन के लिए बेहतर है। उन्होंने कहा कि समय से लकड़ी का निष्कर्षण नहीं होने के कारण अधिकांश खैर के पेड़ सड़ रहे हैं और यह बेहतर वन प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य के हित को ध्यान में रखते हुए इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में उठाया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में खैर के पेड़ों की कटाई के परिणामों को जानने के लिए प्रयोगात्मक आधार पर खैर के पेड़ों की कटाई की अनुमति दी थी।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड 12वीं कक्षा का वार्षिक परिणाम शनिवार सुबह 11 बजे घोषित करेगा। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. विशाल शर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी कारणों के चलते आज परिणाम घोषित नहीं किया जा सका। शनिवार सुबह 11 बजे परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। रिजल्ट घोषित करने के लिए लगभग सारी औपचारिक्ताएं पूरी की जा चुकी हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने आए दिनों देश प्रदेश बनने वाली दवाओं के सैंपल फेल होने की खबरों पर चिंता जताते हुए सरकार से दोषी दवा कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा हैं। उन्होंने कहा है कि दवाइयों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता सहन नही किया जा सकता। प्रतिभा सिंह ने मीडिया में आई उन सूचनाओं पर जिसमें प्रदेश की 11 दवाओं के सैंपल फेल होने की बात कही गई है पर अपनी गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि बार बार घटिया दवा निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में इन दवा कंपनी की दवाओं की जांच भी की जानी चाहिए। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में दवाओँ की आपूर्ति पर भी विशेष निगरानी रखने की जरूरत पर बल देते हुए कहा है कि उन्हें भी समय समय पर दवाओं की निम्न गुणवत्ता की सूचनाएं मिलती रही हैं,जो बहुत ही चिंता की बात हैं। प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉक्टर धनीराम शांडिल से प्रदेश के सभी अस्पतालों विशेष तौर पर दूरदराज के ग्रमीण इलाको में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ करने व आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा हैं। उन्होंने कहा है कि लोगों को घर द्वार ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो इसमें किसी भी प्रकार की ढ़िलाई नही बरती जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि कांगड़ा चाय यूरोपीय संघ में संरक्षित भौगोलिक संकेत (जीआई) के रूप में पंजीकृत होने वाला देश का दूसरा उत्पाद बन गया है। उन्होंने कहा कि इससे कांगड़ा चाय के उत्पादकों के लिए यूरोपीय देशों में बिक्री का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय बाजारों में उत्पाद की गुणवत्ता, वास्तविकता और प्रतिष्ठा को पहचानने के लिए कांगड़ा चाय का यूरोपीय संघ के तहत पंजीकरण महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि इसके पंजीकरण से कांगड़ा चाय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, जो कि इसकी बिक्री के लिए वरदान साबित होगा। इस निर्णय से कांगड़ा जिले के पालमपुर, बैजनाथ, कांगड़ा व धर्मशाला, मंडी जिले के जोगिंदर नगर और चंबा जिले के भटियात क्षेत्र के ‘कांगड़ा चाय’ उत्पादकों को लाभ होगा। कांगड़ा चाय अपने अनूठे स्वाद के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। इसमें प्रचुर मात्रा में मौजूद पाइराजिन इसे अलग सुगंध प्रदान करता हैै। इसके अतिरिक्त, इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं जोकि एंटीऑक्सिडेंट्स, फेनोलिक कम्पाउंड, ट्रिप्टोफैन, अमीनो एसिड्स, थीनाइन ग्लूटामाइन और कैटेचिन से मिलते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा चाय को वर्ष 2005 में पंजीयक भौगोलिक संकेतक, चेन्नई, द्वारा जीआई का दर्जा दिया गया था और अब यूरोपीय संघ के साथ पंजीकरण के बाद कांगड़ा चाय की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है जिससे राज्य के कांगड़ा चाय उत्पादकों को लाभ होगा। ब्रिटिश काल में कांगड़ा चाय का निर्यात यूरोपीय बाजारों में किया जाता था। इसकी गुणवत्ता के कारण एम्स्टरडेम और लंदन के बाजारों द्वारा वर्ष 1886 से 1895 के बीच कांगड़ा चाय को विभिन्न पुरस्कार दिए गए। आज से पहले यूरोपरीय संघ में पंजीकृत न होने के कारण कांगड़ा चाय की यूरोपीय बाजारों मंे बिक्री संभव नहीं थी, लेकिन अब पंजीकरण के बाद इस हिमाचली उत्पाद के लिए यूरोपीय देशों के बाजार भी खुल गए हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल के पारंपरिक उत्पादों को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को लाभ पहुंचाने के लिए कई नवीन पहल की गयी हैं। उन्होंने कहा कि कुल्लू शॉल, चंबा रुमाल, किन्नौर शॉल, कांगड़ा पेंटिंग, लाहौल के ऊनी मोजे और दस्ताने इत्यादि सहित राज्य के करीब 400 से अधिक पारंपरिक उत्पादों को आज जीआई का दर्जा प्राप्त है। इसके अतिरिक्त हिमाचली टोपी, सिरमौरी लोईया, मंडी की सेपुबड़ी, चंबा धातु शिल्प, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषणों को जीआई का दर्जा देना पंजीयक भौगोलिक संकेतक, चेन्नई के पास विचाराधीन है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यूरोपीय संघ के साथ कांगड़ा चाय के पंजीकरण की कठिन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस उपलब्धि में योगदान के लिए कृषि विभाग, हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर और कांगड़ा वैली स्मॉल टी प्लांटर्स एसोसिएशन को भी बधाई दी।
कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने कहा कि राजनीति कोई पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने के लिए जनसेवा का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए इसके लिए उन्हें अच्छी पढ़ाई लिखाई के साथ साथ अच्छे संस्कारों को अपनाना होगा। आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा डिजिटल बाल मेले में देश प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्कूली बच्चों के साथ हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र में बोलते हुए प्रतिभा सिंह अपने छात्र जीवन से राजनीति में प्रवेश की जानकारी देते हुए कहा कि वह सोभग्यशाली है जो उन्हें प्रदेश के छह बार के मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह का मार्गदर्शन मिला। उन्होंने राजनीति में अपने अनुभव की जानकारी देते हुए कहा कि आज राजनीति के द्वार सबके लिए खुले हैं। देश के लोकतंत्र में देश के लोगों को अपने मत के द्वारा अपने प्रतिनिधि व नेता को चुनने का अधिकार हैं। यह अधिकार हमें देश के संविधान ने सभी नागरिकों को बगैर किसी लिंग भेद के दिया है। उन्होंने कहा कि यह कहना की राजनीति में राज घरानों का ही प्रभाव रहा है सही नही हैं। प्रतिभा सिंह ने इस डिजिटल बाल मेले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा जुड़े देश प्रदेश के विभिन्न स्कूली बच्चों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि आज राजनीति में बहुत सी चुनौतियां हैं। देश की बढ़ती समस्याओं जैसे बेरोजगारी, महंगाई, बढ़ती जनसंख्या ऐसी जटिल समस्याएं है जो देश के सामने खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को दूर करने के लिये देश मे बेहतर शिक्षा का होना बहुत ही जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्व वीरभद्र सिंह ने इस दिशा में बहुत ही श्रेष्ठ कार्य किया। आज प्रदेश में शिक्षा,स्वास्थ्य, सड़कों व अन्य आवश्यक आधारभूत ढांचा बना हैं। उन्होंने कहा कि विकास एक निरंतर प्रक्रिया है जो निरंतर समयानुसार आगे बढ़ती रहती हैं। प्रतिभा सिंह ने इस डिजिटल बाल मेले में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को उनके सफल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह सब देश का भविष्य है इसलिए उन्हें अपनी पढ़ाई लिखाई के साथ साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी की एक दिवसीय कार्यसमिति बैठक शिमला पीटर हॉफ में 20 मई को प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की अध्यक्षता में होगी, जिसकी व्यवस्था के लिए आज भाजपा कार्यालय दीपकमल में 17 प्रबंधन समितियों की बैठक हुई। इस व्यवस्था बैठक में मुख्यत नवनियुक्त संगठन महामंत्री सिद्धार्थन और प्रदेश महामंत्री त्रिलोक जम्वाल का मार्गदर्शन कार्यकर्ताओं को प्राप्त हुआ। भारतीय जनता पार्टी की विशेष कार्यसमिति बैठक केंद्र सरकार के सफल 9 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम की रुपरेखा के बनाने के निमित्त रखी गई है। केंद्र सरकार के नौ वर्ष के कार्यकाल पूरा होने पर प्रदेश भर में महा जनसमपर्क अभियान के तहत 1 जून से 30 जून तक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। जिसकी विस्तृत रुपरेखा को इस एक दिवसीय कार्यसमिति में अंतिम रूप दिया जाएगा। इस माह भाजपा महा जनसंपर्क अभियान बूथ स्तर पर चलाएगी । प्रबंधन समितियां जहाँ विभिन्न व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करेगी, वहीँ युवा मोर्चा साज-सज्जा के माध्यम से सभा स्थल, प्रांगण व् झंडे-डंडे लगाकर प्रदेश कार्यसमिति के दौरान शहर को भगवामय बनायेंगे। इस प्रदेश कार्यसमिति बैठक में प्रदेश भर से लगभग 300 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाग लेंगे। इस बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, सह प्रभारी संजय टंडन, पूर्व मुख्यमंत्री प्रो प्रेम कुमार धूमल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, केद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद संगठन महामंत्री सिद्धार्थन इंदु गोस्वामी, सिकंदर कुमार, किशन कपूर, सुरेश कश्यप विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। आज की बैठक में मुख्यत संगठन महामंत्री सिद्धार्थन जी, प्रदेश उपाध्यक्ष पुरषोतम गुलेरिया, रतन पाल, पायल वैद्य, 2022 भाजपा के प्रत्याशी संजय सूद, रवि मेहता, अजय श्याम, करण नंदा, चेतन बरागटा, विजय परमार, प्यार सिंह अंजना शर्मा उपस्थित रहे।
कृषि मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार एवं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां जारी एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि नेता विपक्ष जयराम ठाकुर केवल अपने विधानसभा क्षेत्र सराज तक ही सिमित हैं। दोनों मंत्रियों ने कहा कि जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री रहते केवल मात्र सराज विधानसभा क्षेत्र के विकास को ही प्राथमिकता प्रदान की और मंडी जिला सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की लगातार अनदेखी करते रहे। आज भी विपक्ष के नेता के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेवारी होने के बावजूद वे केवल सराज क्षेत्र से जुड़े मुद्दे ही उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर बतौर नेता विपक्ष अपनी सोच का दायरा विस्तृत करें और समूचे प्रदेश के हितों की पैरवी के लिए आगे आएं। कहा कि अपने कार्यकाल में जयराम ठाकुर ने शिक्षकों सहित विभिन्न विभागों में खाली पदों को भरने पर कभी कोई ध्यान नहीं दिया, जिससे राज्य में कर्मचारियों की कमी बनी रही। इसके विपरित वर्तमान प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। मंत्रिमंडल की बैठक में शिक्षा विभाग में विभिन्न श्रेणियों के शिक्षको के लगभग 5300 पद भरने को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार अन्य विभागो में भी कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्हांेेने कहा कि इसके लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी होते ही सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की कमी को काफी हद तक पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को वित्तीय घाटे से उबाारने के लिए राज्य सरकार इसमें व्यापक सुधार लाएगी। वे बुधवार देर सायं यहां परिवहन विभाग की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सुधारों से निगम को आत्मनिर्भर बनाने और बेहतर वित्तीय संसाधन उपलब्ध करवाने, कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार निगम में चालकों और परिचालकों के रिक्त पद भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी जिसके माध्यम से राज्य के लोगों को सुगम और बेहतर परिवहन सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि टाइप-1 की 75 ई-बसें खरीदने की योजना पर काम चल रहा है, जिसकी निविदाएं पहले ही जारी कर दी गई हैं। इसके लिए लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) अगले माह तक जारी होने की उम्मीद है। इन 75 ई-बसों के लिए मार्गों की पहचान कर ली गई है और चार्जिंग स्टेशनों सहित आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा, निगम ने 225 डीजल बसों को टाइप-2 ई-बसों से बदलने के लिए मार्गों की पहचान की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम में चरणबद्ध तरीके से डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों (ई-बसों) में बदला जा रहा है। वर्तमान में निगम के बेड़े में पहले से ही 95 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं और निकट भविष्य में इनकी संख्या में और वृद्धि की जाएगी। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने हरित बजट पेश किया है और 31 मार्च, 2026 तक हिमाचल प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य का लक्ष्य ई-वाहनों के संचालन में आदर्श स्थापित करना है और इन वाहनों के संचालन के लिए प्रदेश में छह ग्रीन कॉरिडोर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में ई-वाहनों के संचालन को बढ़ावा देना सरकार की रणनीति का हिस्सा है। बैठक के दौरान हमीरपुर में प्रस्तावित बस पोर्ट की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश बस स्टैंड प्रबंधन एवं विकास प्राधिकरण (एचपीबीएसएमडीए) द्वारा अगले दो वर्षों के भीतर इसे तैयार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त हमीरपुर जिले के नादौन में ई-बस डिपो के निर्माण के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने निगम की सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताते हुए परिवहन क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में बहुमूल्य सुझाव भी दिए।
शिमला नगर निगम के चुनाव के बाद मेयर व डिप्टी मेयर मिल गए हैं। मेयर व डिप्टी मेयर ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। ऐसे में मेयर व डिप्टी मेयर से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडलों का भी रूटीन में आना-जाना शुरू हो गया। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल नगर निगम शिमला के कार्यालय में मेयर सुरेंद्र चौहान व डिप्टी मेयर उमा कौशल को मिला। भाजपा के पार्षदो में अप्पर ढली से कमलेश मेहता, फागली से कल्याण धीमान, पंथाघाटी से कुसुम ठाकुर, रुल्दुभट्टा से सरोज ठाकुर, कृष्णा नगर से बिट्टू कुमार पाना, कसुम्पटी से रचना शर्मा, पटयोग से आशा शर्मा, न्यू शिमला से निशा ठाकुर व भराड़ी से मीना चौहान शामिल रही। पार्षदों ने पुष्पगुच्छ व मिठाई के साथ अभिनंदन किया व शुभकामनाएं दीं। वहीं मेयर सुरेंद्र चौहान व डिप्टी मेयर उमा कौशल ने भाजपा के पार्षदों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान भाजपा के पार्षदों ने मेयर व डिप्टी मेयर से विकास में सहयोग मांगा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल कसुम्पटी की पार्षद रचना शर्मा ने बताया कि सभी पार्षदों ने मेयर व डिप्टी मेयर को बधाई दी और पार्षदों को भी मेयर व डिप्टी मेयर ने शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि नगर निगम का कार्य बेहतर आगे बढ़े, विकास के काम हो और जो वायदे हुए हैं, उनको पूरा किया जाए और विशेष रूप से हम सब अपने अपने वार्ड में जनता के साथ वादे करके आए हैं, उन वादों को पूरा करने में नगर निगम सहयोग करें, इसके लिए आज शिष्टाचार भेंट मेयर व डिप्टी मेयर से हुई है। मेयर व डिप्टी मेयर ने हरसंभव सहयोग देने का विश्वास दिया है। उन्होंने कहा कि हम पार्षद भी विकास में पूर्ण सहयोग करेंगे, शिमला आगे बढ़े, बेहतर बने ,सुंदर बने इसके लिए बेहतर निर्णय का समर्थन होगा। वहीं शिमला की आवाज को भी बुलंद किया जाएगा, विकास लक्ष्य हैं और विकास को आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी भी अनेक ऐसी समस्याएं हैं वार्डों में जिनका हल होना है ,इसके लिए नगर निगम के सभी विभाग बेहतर सहयोग देकर के काम करें, ऐसी उम्मीद जताई गई है। मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पार्षद मिले हैं। उन्होंने स्वागत किया है उनका आभार है। हर पार्षद को हर संभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सभी वार्ड एक समान है और पार्षदों का सम्मान बरकरार रहेगा। पार्षदों के कार्य प्राथमिकता पर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौधारोपण का कार्यक्रम और उसके अलावा शिमला को हरा भरा बनाने का जो सोच है, जो समस्याएं कम करने की बात है। लोगों को राहत देने की बात है उस सब पर काम करेंगे और सब पार्षदों का सहयोग भी लेंगे और सब पार्षदों को भी सहयोग करेंगे।
कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने आज यहां कृषि एवं संबद्ध विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश अनुकूल जलवायु, समृद्ध मृदा और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। राज्य में विभिन्न प्रकार की फसलों के उत्पादन के लिए उपयुक्त परिवेश विद्यमान है। प्रदेश सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए महत्वाकांक्षी योजना ‘हिम उन्नति’ शुरू की है। योजना के तहत प्रदेश में एकीकृत एवं समग्र कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत प्रदेशभर में 2603 कलस्टर बनाए जाएंगे। वर्तमान में प्रदेशभर में 889 कलस्टर चिन्हित किए गए हैं। प्रथम चरण में इस वर्ष 286 कलस्टर में कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि एवं अन्य संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े लोगों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से एकीकृत कार्य योजना बनाकर कार्य करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि में प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को ‘चलो गांव की ओर’ नीति को अपनाने तथा फील्ड में जाकर किसानों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के लिए कहा। कृषि मंत्री ने पोषक अनाज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने विभिन्न घटकों को शामिल करते हुए विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। इसके अन्तर्गत परम्परागत कृषि विकास योजना, आतमा, भारतीय प्राकृतिक किसान पद्धति व राष्ट्रीय सत्त खेती मिशन के तहत संगठित किसान समूहों को इस योजना में शामिल किया जाएगा। राज्य में पोषक अनाज उगाने के लिए तकनीक का उपयोग कर लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उनके उत्पादों को बेहतर बाज़ार उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जलवायु अनुकूल पोषक अनाजों की ज़िलेवार पहचान कर इनका स्थानीय तथा वैज्ञानिक डाटाबेस भी तैयार किया जाएगा। चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पद्धति अपना रहे हैं। हिमाचल इस खेती में अन्य राज्यों के समक्ष आदर्श के रूप में उभरा है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 2 लाख किसानों के लिए 6693 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करवाए जा चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश के 165221 किसान सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और प्रदेश की 3611 पंचायतों में इस पद्धति के माध्यम से खेती की जा रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि करने में संबद्ध क्षेत्र विशेष भूमिका निभाते हैं। प्रदेश सरकार पशुपालकों के पशुधन की देखरेख के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। इस दिशा में शीघ्र ही मोबाइल वेटेनरी यूनिट लॉन्च की जाएगी। इसके सुचारू क्रियान्वयन के लिए कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है। पशुपालकों को एक फोन कॉल के माध्यम से उनके घरद्वार के निकट दवाई एवं लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने कृषि आधारित प्रचार-प्रसार सामग्री का विमोचन भी किया। बैठक में विभिन्न कृषि गतिविधियों तथा हिमगंगा योजना पर प्रस्तुति भी दी गई। कृषि सचिव राकेश कंवर, निदेशक कृषि डॉ. राजेश कौशिक, निदेशक पशुपालन डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा, हिमफैड के प्रबंध निदेशक भूपेन्द्र अत्री और विभिन्न जिलों से आए विभागीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश में बागवानी के क्षेत्र में कलस्टर विकास कार्यक्रम नए आयाम स्थापित करेगा। प्रदेश सरकार इस कार्यक्रम को राज्य में सफलतापूर्वक कार्यान्वित करने के लिए विचार कर रही है। यह जानकारी बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड तथा हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बागवानी के क्षेत्र में विभिन्न फलों का उत्पादन किया जाता है, जिसमें सेब, पलम, आड़ू, नाशपति तथा नींबू प्रजाति के फल इत्यादि प्रमुख हैं। प्रदेश के बागवानी उत्पाद देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। किन्नौरी सेब एक ब्रांड के रूप में जाना जाता है। प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के उत्पादों की गुणवत्ता के अनुसार इनकी ब्रांडिंग तथा विपणन पर बल दिया जा रहा है। बागवानी मंत्री ने कहा कि कलस्टर विकास कार्यक्रम के तहत किसानों की सभी जिज्ञासाओं तथा समस्याओं का निवारण कलस्टर विकास एजेंसी करेगी। इस कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन के लिए प्रदेश में हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड को कलस्टर विकास एजेंसी बनाया गया है। प्रदेश में इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए बागवानी विभाग को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के साथ समन्वय स्थापित करेगी। कार्यक्रम के लिए हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम को कार्यान्वयन एजेंसी बनाया गया है। कार्यक्रम के तहत नर्सरी, पैक हाउस, शीत भण्डारण, प्रसंस्करण इकाई तथा एकत्रण केन्द्र के माध्यम से बागवानी क्षेत्र का विकास किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत विभिन्न अन्य कार्यक्रमों व योजनाओं को शामिल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसानों को आधुनिक तकनीक तथा प्रचलनों से भी अवगत करवाया जाएगा और उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी। इस अवसर पर कार्यक्रम प्रबंधन इकाई ग्रांट थोर्नटन के पार्टनर चिराग जैन ने कलस्टर विकास कार्यक्रम से संबंधित प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से हिमाचल प्रदेश को बहुत लाभ होगा तथा प्रदेश में इस कार्यक्रम की सफलता की संभावना बेहतर है। कार्यक्रम के तहत सीडीपी सुरक्षा ऑनलाइन मॉनिटरिंग पोर्टल पर किसानों को अपने लाभ से संबंधित सभी जानकारी प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) के उप प्रबंध निदेशक बी.जे. ब्रह्मा तथा संयुक्त निदेशक आर.के. अग्रवाल, हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम के प्रबंध निदेशक सुदेश कुमार मोक्टा, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक नरेश ठाकुर, हिमाचल प्रदेश उष्ण कटिबंधीय बागवानी, सिंचाई एवं मूल्य संवर्द्धन परियोजना (एचपी शिवा) के परियोजना निदेशक देवेंद्र ठाकुर, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, एचपीएमसी तथा हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण कपटा की अध्यक्षता में विद्युत बोर्ड के प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने संघ की ओर से बोर्ड में प्रबंध निदेशक बनने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। संघ के महामंत्री नेक राम ठाकुर ने प्रबंध निदेशक को तकनीकी कर्मचारी संघ की मांगों से अवगत करवाया। इसमें मुख्य मांग तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती करना है। इसके अलावा सहायक लाइनमैन के लगभग 2700 पद जो खाली पड़े है टीमेट के आर एंड पी नियमों में बदलाव करके एकमुश्त प्रमोशन देना, हेल्पर से SSA, हेल्पर पावर हाउस को इलेक्ट्रिशियन, हेल्पर हाइड्रोमेक्निक को फिटर, हेल्पर M&T को इलेक्ट्रीशियन M&Tऔर हेल्पर P&T को इलेक्ट्रिशियन P&टी जल्द प्रमोट करना, बोर्ड में 200 जूनियर इंजीनियर इलेक्ट्रिकल के फीडिंग केडर से खाली पड़े पदों को आईटीआई लाइनमैन व इलेक्ट्रिशियन सेजल्द प्रमोट करना आदि मुख्य मांगें थीं। संघ ने बोर्ड प्रबंधन के साथ 22 सितंबर 2022 को हुई बैठक के संबंध में भी मानी हुई मांगों को लागू न करने पर भी रोष व्यक्त किया है और कहा है कि बोर्ड प्रबंधन जल्द इन मांगों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई जाए। बोर्ड प्रबंधन ने तकनीकी कर्मचारी संघ को आश्वासन दिया है कि उनकी मुख्य मांगों को सर्विस कमिटी में पूरा कर दिया जाएगा इसके अलावा अन्य मांगों को लेकर जल्द संघ को वार्ता के लिए बुलाया जाएगा।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, जो राज्य रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं, ने आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य रेडक्रॉस भवन में फिजियोथैरेपी केंद्र का शुभारंभ किया। इस केंद्र के खुलने से रोगियों को यहां ऑर्थोपीडिक फिजियोथैरेपी, न्यूरोलॉजीकल फिजियोथैरेपी और दर्द प्रबंधन से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध होंगी। लेडी गवर्नर एवं राज्य रेडक्रॉस अस्पताल कल्याण शाखा की अध्यक्ष जानकी शुक्ल भी इस अवसर पर उपस्थित थीं। रेडक्रॉस के सदस्यों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि रेडक्रॉस एक ऐसी पवित्र संस्था है, जिसके लिए समाज की सेवा ही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समाज को कुछ देने के भाव से ही लोग इस संस्था से जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम समाज के लिए कार्य करते हैं तो यह उन्नति करता है। जब समाज आगे बढ़कर कुछ देता है तो इससे राष्ट्र आगे बढ़ता है। राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान यहां की देव संस्कृति एवं स्वच्छ वातावरण से है और इसी कारण राज्य में बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए पहुंचते हैं। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्यों को नशामुक्ति में अपना सक्रिय सहयोग देना चाहिए। उन्हें ऐसे बच्चों के माता-पिता एवं अभिभावकों के साथ मिलकर इन युवाओं को नशामुक्ति के लिए प्रेरित करना चाहिए और सही मायने में समाज के लिए यही उनकी सेवा होगी। उन्होंने सदस्यों से हिमाचल को टी.बी. मुक्त बनाने में सहयोग देने का भी आग्रह किया। राज्यपाल ने राज्य रेडक्रॉस को निर्देश दिए कि रेडक्रॉस भवन में सदस्यों के नाम एवं मोबाइल नंबर अंकित किए जाने चाहिए ताकि आपसी संपर्क एवं सहयोग से सोसायटी के कार्य को और प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। उन्होंने अधिक से अधिक रक्तदान शिविर लगाने पर भी बल दिया। इस अवसर पर रोगियों के लिए मैमोग्राफी स्क्रीनिंग और एक्यूपंक्चर थैरेपी का भी शुभारंभ किया गया। इससे पूर्व राज्यपाल के सचिव एवं राज्य रेडक्रॉस सोसायटी के महासचिव राजेश शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया और केन्द्र की गतिविधियों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री की पत्नी एवं राज्य रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्य कमलेश ठाकुर, राष्ट्रीय रेडक्रॉस प्रबंधन समिति की सदस्य डॉ. साधना ठाकुर, राज्य रेडक्रॉस की मानद सचिव डॉ. किम्मी सूद सहित रेडक्रॉस के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे।
शिमला में हार्मनी ऑफ द पाइंस, हिमाचल प्रदेश पुलिस ऑर्केस्ट्रा ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को दो लाख रुपये का चेक किया भेंट।
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के विधायक और पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष व पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष (कैबिनेट रैंक) आरएस बाली ने आज शिमला में प्रदेश पर्यटन विभाग निगम की बैठक की अध्यक्षता निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ की। बाली ने कहा कि वह हिमाचल के पर्यटन को देश भर में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने भी बार-बार कहा है कि कांगड़ा जिले को हिमाचल की पर्यटन राजधानी बनाना है और हम ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने आगे कहा कि रोजगार उपलब्ध कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हम हिमाचली सिर्फ हिमाचल में रहते नहीं हैं, हम इसे जीते हैं। हिमचालियत हमारे लिए जीवन जीने का एक तरीका है और हमें यह अनुभव देश-विदेश के सभी पर्यटकों को देना चाहते हैं। अपनी रोज़गार संघर्ष यात्रा के बारे में बात करते हुए उनका कहना है कि लोगों को रोज़गार देना सुक्खू सरकार की प्राथमिकता है और बाली का पर्यटन विभाग इसमें अपनी पूरी क्षमता से योगदान देगा। बाली होटल, आइस स्केटिंग रेंज, गोल्फ कोर्स और अन्य चीजें बनाने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि इससे न केवल प्रदेश में पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि रोजगार भी पैदा होगा।
मंगलवार सुबह 11:00 बजे बिहार विधानसभा की याचिका समिति तथा झारखंड विधानसभा की आवास समिति हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय पहुंची। इस अवसर पर उप निदेशक (लोक सम्पर्क एवं प्रोटोकॉल) विधानसभा हरदयाल भारद्वाज ने समितियों को अवगत करवाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा उच्च तकनीक युक्त पेपरलेस विधानसभा है। उन्होंने कहा कि अब हम ई-निर्वाचन क्षेत्र प्रबंधन तथा ई-समिति व विधायकों के लिए मोबाईल ऐप जैसी आधूनिक ई-प्रणाली पर कार्य कर रहे है। समितियों ने सदन का अवलोकन भी किया तथा सदन मे स्थापित देश की सर्वप्रथम ई-विधान प्रणाली की जानकारी हासिल की। समितियों ने ई-विधान प्रणाली तथा ई-निर्वाचन क्षेत्र प्रबंधन के लिए हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को बधाई दी तथा सदन के रख रखाव की भरपूर प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां जगत एंटरटेनमेंट कंपनी द्वारा निर्मित एल्बम 'जोगिया' का विमोचन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने एलबम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हिमाचली कलाकारों की कला और प्रदर्शन को दुनियाभर में सराहा जा रहा है और उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। उन्होंने कहा कि एल्बम में शामिल सभी कलाकार हिमाचल प्रदेश के हैं और इस अवसर ने उन्हें अपनी असाधारण प्रतिभा दिखाने का मौका दिया। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संगीत में हिमाचली परंपराओं और मूल्यों को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया, क्योंकि यह युवा पीढ़ी को हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा देने के अलावा 'देवभूमि' की सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने में सक्षम बनाता है। उन्होंने किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को जीवन में चुनौतियों का सामना करने और आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे पहले कंपनी के सीएमडी जगत गौतम ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री, अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव, संजय अवस्थी, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री, दीपा दास मुंशी, विधायक, केवल सिंह पठानिया, मुख्यमंत्री के ओएसडी, गोपाल शर्मा, कांग्रेस नेता, विवेक शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त इस अवसर पर शिमला शिवम प्रताप सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
निदेशक परिवहन विभाग, अनुपम कश्यप, ने आज यहां बताया कि परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के लिए अपनी पसंद के विशेष फैंसी नंबर (पंजीकरण चिन्ह) जारी करने के लिए संशोधित ई-ऑक्शन प्रणाली 16 मई, 2023 से पुनः आरंभ कर दी गई है। उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विभाग को ई-ऑक्शन प्रणाली में संशोधन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे, ताकि भविष्य में कोई भी शरारती तत्व संशोधित प्रणाली के साथ छेड़छाड़ न कर सके। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में संशोधित प्रणाली को बैजनाथ और शिमला पंजीकरण प्राधिकरण में आरंभ किया जाएगा। इसके सफल परीक्षण के उपरांत आगामी दिनों में संशोधित प्रणाली को प्रदेश के अन्य सभी प्राधिकरणों में शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के विशेष नंबर जारी करने के लिए अपनाई गई ई-ऑक्शन प्रणाली में कुछ त्रुटियां सामने आयी थीं, जिसमें कुछ मामलों में सफल बोलीदाता द्वारा लगाई गई बोली की राशि जमा नहीं करवाई जाती थी और ये विशेष नंबर निचले बोलीदाता द्वारा कम राशि में प्राप्त किए जाते थे। ऐसे कारणों से विभाग द्वारा ई-ऑक्शन प्रणाली को निलंबित कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार देर सायं यहां ऊर्जा विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से नई ऊर्जा नीति बनाने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति के तहत भविष्य में मुफ्त बिजली रायल्टी में मोहलत का प्रावधान पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और पूर्व में दी गई छूट को समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पहले 12 वर्ष तक 15 फीसदी, अगले 18 वर्ष तक 20 फीसदी और इससे अगले 10 वर्ष तक 30 फीसदी हिस्सा देने का प्रावधान होगा। अभी तक पहले 12 वर्ष के लिए 12 फीसदी, अगले 18 वर्ष के लिए 18 फीसदी और इससे अगले 10 वर्ष के लिए 30 फीसदी का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की लागत वसूल हो गई है, उनमें राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे तथा इसके लिए केंद्र सरकार और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों से पत्राचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए सरकार की नीति के अनुसार जमीन चालीस वर्ष के पट्टे पर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना के लिए पूर्व-कार्यान्वयन और कार्यान्वयन समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं करने के लिए केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को गंभीरता से लिया और ऊर्जा विभाग को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया को सरल बनाने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 11149.50 मेगावॉट क्षमता की 172 जलविद्युत परियोजनाएं कार्यशील हो चुकी हैं, जबकि 2454 मेगावाट क्षमता की 58 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के विभिन्न उपक्रमों के माध्यम से निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो और ऊर्जा विभाग को इनकी निगरानी के लिए तंत्र विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के निर्माण में देरी से प्रदेश के राजस्व को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा निदेशालय को सुदृढ़ किया जाएगा और विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का भी इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव ऊर्जा राजीव शर्मा, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, निदेशक ऊर्जा हरिकेश मीणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर शुक्ल ने उन्हें हिमाचली टोपी, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार देर सायं जिला ऊना के गगरेट विधानसभा क्षेत्र के जीतपुर बेहरी में प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट के निर्माण की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार परियोजना में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी निवेश करने के लिए तैयार है और आश्वस्त किया कि इस संयंत्र को स्थापित करने के लिए सरकार निष्पादन कंपनी को पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। कंपनी ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया। गौर रहे कि हिंदुस्तान पैट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा 30 एकड़ भूमि पर लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से यह संयंत्र स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को भंजल से सम्पर्क सड़क के लिए 10 दिनों के भीतर भूमि अधिग्रहण कार्य शुरू करने का भी निर्देश दिया। साथ ही प्लांट के निर्माण में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने का भी आश्वासन दिया। कहा कि यह प्लांट स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करेगा और कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर जिला तथा पंजाब के निकटवर्ती जिलों के किसान अनाज आधारित इथेनॉल प्लांट से लाभान्वित होंगे। कंपनी के अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को संयंत्र के लिए 20 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिये। विधायक चैतन्य शर्मा ने अपने विधानसभा क्षेत्र में इथेनॉल परियोजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे गगरेट क्षेत्र के लोगों को लाभ होगा और परिवहन उद्योग के लिए भी यह वरदान साबित होगा। बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधायक सुरेश कुमार, इंद्रदत्त लखनपाल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, प्रधान सचिव उद्योग आरडी नज़ीम, निदेशक उद्योग राकेश कुमार प्रजापति, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त ऊना महेंद्र पाल गुर्जर, एचपीसीएल के कार्यकारी निदेशक श्रीधर गौड़ उपस्थित थे।
भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से उनके दिल्ली निवास पर भेंट की। इस दौरान संजय टंडन और जगत प्रकाश नड्डा के बीच हिमाचल, हरियाणा, पंजाब एवं उत्तर क्षेत्र की राजनीतिक स्थितियों पर विस्तृत चर्चा की गई। संजय टंडन ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को अपनी पुस्तक सनरेज फॉर वेडनेसडे भी भेंट की। टंडन ने कहा यह हम सबके लिए हर्ष का विषय है कि 30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा सरकार अपने 9 वर्ष पूर्ण कर रही है। 1 जून से 30 जून तक भाजपा संगठन द्वारा विभिन्न कार्यक्रम सभी जिला, मंडल, शक्ति केंद्र एवं बूथ पर आयोजित किए जाएंगे तथा विशेष महा जनसंपर्क अभियान लोकसभा क्षेत्रों में चलाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार गरीब, शोषित एवं वंचितों के कल्याण हेतु समर्पित है। जहां देश का गौरव विश्व पटल पर लगातार बढ़ रहा है, वहीं सांस्कृतिक विरासत को प्राथमिकता के आधार पर प्रतिस्थापित होते हुए हम सब देख रहे हैं, आधारभूत संरचना को मजबूत करते हुए नए भारत के सपने को साकार कर रही है। इस अभियान के अंतर्गत पूरे देश में व्यापक जनसंपर्क, लाभार्थी संपर्क, समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क, वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क जैसे लोकसभा, विधानसभा एवं बूथ स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनके माध्यम से "मोदी सरकार" की नीतियों एवं उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाया जाएगा।
स्कूल ऑफ फिजियोथेरेपी द्वारा बाहरा यूनिवर्सिटी शिमला हिल्स में दो दिवसीय हैंड्स ऑन विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला काइन्सियोलॉजी टेपिंग के बारे में थी जो बाल चिकित्सा, जराचिकित्सा, आर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजिकल, ऑन्कोलॉजी और अन्य जैसे सभी कार्यक्रमों में पुनर्वास विशेषज्ञों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक उपकरण है और देखभाल के स्तर जैसे क्यूट केयर, इनपेशेंट रिहैबिलिटेशन, आउट पेशेंट, होम केयर और डे रिहैब। यह ज्यादातर फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा उपयोग किया जाता है। काइन्सियोलॉजी टेपिंग पद्धति पशुओं के उपचार में भी प्रभावी है। कार्यक्रम का उद्घाटन यूनिवर्सिटी के कुलसचिव विनीत कुमार ने किया। कार्यशाला का आयोजन फिजियोथेरेपी विभाग के एचओडी डॉ. कनिका सिंह (पीटी) के मार्गदर्शन में किया गया था, आयोजक डॉ. मेघा शर्मा (पीटी) क्लिनिकल थेरेपिस्ट थीं, और रिसोर्स पर्सन डॉ. बासुदेव राजभोर (पीटी) सहायक प्रोफेसर और एक प्रमाणित क्लिनिकल काइन्सियोलॉजी थे। कार्यक्रम में विभिन्न छात्रों ने भाग लिया और सीखा कि इस तकनीक का उपयोग करके अपने रोगियों को कैसे उपचार प्रदान किया जाए। यह हिमाचल प्रदेश के छात्रों को गुणवत्ता उपचार प्रदान करके फिजियोथेरेपी के भीतर विभिन्न क्षेत्रों का पता लगाने और समाज में एक बड़ा प्रभाव डालने में मदद करेगा।
सिरमौर जिला के संगडाह उपमंडल में मंगलवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा पेश आया है। हादसे में 4 की मौत हो गई है, जिनमें दो महिलाएं व दो पुरुष शामिल हैं। बताया जा रहा है कि हादसा सुबह करीब 5:00 बजे पेश आया है। मृतकों में एक दंपती भी शामिल है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक लानाचेता- राजगढ़ मार्ग पर पबौर के समीप मारुती कार 800 (HP 16 A 1721), जो कि राजगढ़ की तरफ जा रही थी, अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान कमल राज (40), जीवन सिंह (63) व उसकी पत्नी सुमा देवी (54) निवासी गांव फागू दाहन (राजगढ़) व रेखा (25) गांव थनोगा राजगढ़ के रूप में हुई है। मृतकों में से 3 लोग एक ही गांव के रहने वाले हैं। उधर, संगडाह के डीएसपी मुकेश कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि सुबह करीब 5:30 बजे हादसा होने की सूचना मिली थी। इसके बाद नौहराधार चौकी व संगडाह थाने से पुलिस मौके के लिए रवाना हुई। पुलिस द्वारा मृतकों के शवों को रेस्क्यू करने का कार्य शुरू कर दिया है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा।
शिमला नगर निगम के महापौर पद पर निर्वाचित सुरेंद्र चौहान और उप-महापौर उमा कौशल के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से आज सचिवालय में भेंट की। मुख्यमंत्री ने महापौर और उप महापौर को बधाई देते हुए कहा कि सभी पार्षदों को जनता की आशाओं एवं आकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। उन्हांेने कहा कि वह पार्षदों की विकासात्मक योजनाओं व समस्याओं के निवारण के लिए सदैव तत्परता से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि वह भी शिमला नगर निगम में 10 वर्ष तक पार्षद रहे हैं तथा इस शहर की समस्याओं से भली-भांति परिचित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला शहर की सड़कों के रखरखाव के लिए 10 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं और लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार यूवी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की योजना तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि शिमला शहर में बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए कार्य किया जाएगा। प्रदेश के विकास के दृष्टिगत तकनीक का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज शिमला जिला के आदर्श केंद्रीय कारागार कांडा में बंदियों के लिए ‘हिमकेयर योजना’ का शुभारंभ किया। उन्होंने बंदियों को हिमकेयर कार्ड भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने जेलों और अन्य संस्थानों के बंदियों के लिए एकीकृत एसटीआई, एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस (आईएसटीएचटी) अभियान के शुभारंभ की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस योजना के तहत बंदियों का पंजीकरण शुरू किया गया है और शीघ्र ही शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जेल बंदियों के कल्याण के लिए उनके प्रीमियम की किस्त अदा करेगी। इसके अतिरिक्त, राज्य के बाल सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से एक योजना शुरू करने पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हर नागरिक, विशेष तौर पर वंचित वर्गों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना को कानूनी रूप प्रदान किया है जिसके तहत 27 वर्ष तक के अनाथ बच्चों को सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अतंर्गत उनकी शिक्षा और छात्रावास का व्यय, चार हजार रुपये जेब खर्च और घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कारावास के बंदी हिमकेयर योजना के लाभ से वंचित थे और उन्हें बीमारी के दौरान उपचार के लिए धन अभाव का सामना करना पड़ता था। इसी बात को ध्यान मंे रखते हुए राज्य सरकार ने जेल के बंदियों को इस योजना के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। सुक्खू ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 14 जून, 2023 तक राज्य की 14 जेलों के 3218 बंदियों और राज्य भर के किशोर गृह, नारी निकेतन और नशा मुक्ति केंद्र के 1278 आवासियों की जांच और उपचार करना है। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी, आईसीटीसी, एआरटी काउंसलर, लैब टेक्नीशियन, फ्रीजर पीयर मोबिलाइजर और पैरामेडिकल स्टाफ जैसे विभिन्न चिकित्सा पेशेवरों को समायोजित कर जिला स्तर पर टीमों का गठन किया गया है। इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग जेल बंदियों को एचआईवी, टीबी, एसटीआई और हेपेटाइटिस के लिए निःशुल्क परामर्श, उपचार और दवाएं प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि बंदियों की रिहाई के बाद अन्य लोगों मंे बीमारी के संक्रमण को फैलने का खतरा बना रहता है इसे रोकने के लिए उनका समय पर उपचार अति आवश्यक है।
प्रदेश कांग्रेस संगठन महामंत्री रजनीश किमटा ने कहा है कि शिमला नगर निगम चुनावों में प्रचंड जीत का श्रेय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व को ही जाता है, क्योंकि उनके मार्गदर्शन में पहले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की और उसके बाद 10 सालों बाद शिमला नगर निगम में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत के साथ अपनी जीत का परचम लहराया। किमटा ने आज यहां कहा कि प्रदेश से कांग्रेस की जीत का सिलसिला अब दक्षिण भारत में प्रवेश कर चुका है, जो जल्द ही अन्यों राज्यों से होता हुआ नई दिल्ली की सत्ता तक पहुंचेगा। उन्होंने इसके लिये कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि कुशल नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं की एकजुटता से यह सब संभव हो सका है। किमटा ने कहा कि प्रदेश में पहली बार किसी ऐसे नेता को प्रदेश की बागडोर सौंपी गई है, जो जमनी स्तर से उठकर आज इस मुकाम पर पहुंचा है। शिमला नगर निगम से पार्षद से जिस व्यक्ति का राजनीतिक सफर शुरू हुआ हो वह लोगों की जमनी समस्याओं को भली भांति समझता हैं। यही बजह है कि सुखविंदर सिंह सुक्खू ने टीसीपी के तहत आने वाले लोगों के घरों की छतों, एटिक की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय लेकर लोगों को एक बड़ी राहत दी हैं। लोगों की आवासीय समस्याओं को दूर करने की दिशा में प्रदेश कांग्रेस सरकार का यह एक बहुत ही बड़ा सराहनीय व ऐतिहासिक कदम है। किमटा ने प्रदेश में कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन बहाल करने के निर्णय को भी कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण गारंटी को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा है कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जो भी अपनी गारंटी लोगों को दी है, उसे कांग्रेस सरकार चरणबद्ध तरीके से हर हाल में पूरा करेगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां 43.07 करोड़ की लागत से निर्मित हिमाचल प्रदेश सचिवालय आर्म्सडेल भवन चरण-3 का लोकार्पण किया। इस आठ मंजिला भवन में आधुनिक सुविधाएं और 123 चार पहिया और 60 दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। इसमें डिजास्टर मैनेजमेंट सेल, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, जनजातीय विकास कार्यालय, सम्मेलन कक्ष, मीटिंग हॉल, अधिकारियों और वाहन चालकों के लिए कमरे और एसबीआई और पीएनबी की शाखाओं के विभिन्न कार्यालय हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय का पुराना भवन एक विरासत भवन है, जहां जन कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नया भवन आधुनिक तकनीक के साथ सामंजस्य से कार्य करने की सरकार की कार्य प्रणाली को प्रदर्शित करता है। उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से कार्यन्वित करने में कर्मचारियों के सहयोग के महत्व पर भी विशेष बल दिया। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आगामी चार वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार आर्थिक रूप से विवेकपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के कल्याणकारी निर्णयों में कर्मचारियों का सहयोग भी वांछित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने के लिए कई निर्णय लिए हैं और आने वाले समय में कई कड़े निर्णयों के साथ प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण सुधार किए जाएंगे। प्रदेश को विकास पथ पर तेजी से अग्रसर करने के लिए कार्यों के निष्पादन में तेजी लानी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने में सचिवालय के अधिकारी व कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सभी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर राज्य सरकार का सहयोग करना चाहिए। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और आर्थिक तंगी के बावजूद राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि एनपीएस का पैसा केंद्र सरकार के पास है और राज्य सरकार की हिस्सेदारी वापस लाने में कर्मचारियों को सहयोग करना होगा। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पूजा अर्चना भी की।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की गतिविधि विकासार्थ विद्यार्थी शिमला ने आज से पूरे शिमला में "पंछी हमारे मित्र" नाम का एक अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत विकासार्थ विद्यार्थी शिमला, सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट के साथ मिलकर शिमला के 15 से ज्यादा स्थानों में पक्षियों के लिए जल-पात्र रखकर छात्र समुदाय में प्रकृति व उसके जीव-जंतुओं के प्रति अपने कर्तव्यों आह्वान का शुरुआत की। विकासार्थ विद्यार्थी शिमला के जिला सयोंजक ने कहा कि गर्मियां आ रही है। इस दौरान पक्षियों को किसी भी प्रकार अन्न और जल की कमी न हो इसलिए एक सकोरा एक प्राण, सेल्फी विद सकोरा नाम से अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत शिमला में जगह 15 मिट्टी से निर्मित सकोरे लगाए हैं और इन सकोरों में अन्न और जल रखा है। उन्होंने कहा कि विकासार्थ विद्यार्थी ने यह अभियान पूरे देश भर में चलाया है। इस अभियान के माध्यम से पक्षी मित्र, सकोरा इंचार्ज जैसे प्रयोगों के नाम से SFD केवल सकोरा लगाने का नहीं उन्हें गर्मियों तक नियमित भरने और उनकी साफ सफाई के लिए भी विद्यार्थियों को नियुक्त कर रही है। एसएफडी के कार्यकर्ताओं ने देशभर में छात्रों के साथ मिलकर इस मुहिम की इन गर्मियों के आने के साथ ही शुरुआत की है। बढ़ते हुए तापमान और प्राकृतिक जल स्रोतों के सुख जाने के कारण पक्षियों और पशुओं को पीने के पानी की समस्या होती है जिससे इनकी मृत्यु तक हो जाती है एसएफडी ने इस पहल के माध्यम से परिसरों में छात्र समुदाय को पुनः जागृत करने का बीड़ा उठाया है, और कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि विभिन्न माध्यमों से हम समुदाय के बीच पहुंचकर इस कार्य को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करते रहेंगे। ज्ञात हो कि स्टूडेंट फॉर डेवलपमेंट या विकासार्थ विद्यार्थी (एसएफडी), प्रतिवर्ष शैक्षणिक परिसरों में गर्मियां आते ही पक्षियों के लिए पानी के सिकोरे रखने की मुहीम वर्षों से चलता आ रहा हैं, जिसमें अनेकों की संख्या में प्रतिवर्ष छात्र उनके साथ जुड़ते हैं। इसके अलावा पर्यावरण से अन्य महत्वपूर्ण कार्य कारण की भी जिम्मेदारी वर्षों से एसएफडी लेता आया है। भारत देश में सभी प्राणियों के प्रति अपनत्व का भाव यहाँ की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा। इसका जीता-जागता उदाहरण हमारे साहित्य लेखन में स्पष्टरुप से दिखाई पड़ता है। खासतौर से पक्षियों में चातक (पपीहा) नामक जीव का मनोहक वर्णन पक्षियों के प्रति हमारे प्रेम देखभाल की परंपरा को दर्शाता है। अब ये भाव जनमानस में कहीं धुंधला होता जा रहा है जिसका परिणाम आज इन जीवों की कम होती संख्या के रूप में देखा जा सकता है। एक सकोरा एक प्राण और सेल्फी विद सकोरा के नाम से यह अभियान देश के अलग अलग प्रांतों में जनमानस के बीच लोकप्रिय हो रहा है।
समृद्ध हिमाचल विविधताओं का राज्य है। यहाँ अलग-अलग जगहों पर परंपराएं, प्रथाएं और रीति-रिवाज सब भिन्न हैं। यहाँ एक ही धर्म और यहां तक की एक जाति में भी स्थान के आधार पर रीति रिवाज बिलकुल अलग होते हैं। इन रीति रिवाजों को अगर जानना है तो आप किसी त्यौहार, मेले और किसी शादी में पहुंच जाएं। यहाँ त्यौहार-मेले और शादियों में कुछ रिवाज़ अदा किये जाये है जिसको देख कर या जानकर आप भी चौंक जाएंगे। ऐसे ही कुछ रीति रिवाज़ो को लेकर पेश है फर्स्ट वर्डिक्ट की यह विशेष रिपोर्ट..... यहाँ बहन बनती है दूल्हा ! हिमाचल प्रदेश के जनजातीय इलाके लाहौल-स्पीति में बहन अपने भाई के लिए दूल्हा बनती है। इसके बाद बड़े धूम धूमधाम से बारात लेकर बहिन दूल्हे के रूप धारण कर भाई की ससुराल पहुंचती है। इसके बाद बहन ही भाभी के साथ 7 फेरे लेती है और नई दुल्हन को ब्याह कर घर ले आती है। जी हाँ, आप बेशक यह पढ़कर चौंक गए होंगे लेकिन ये वास्तविक है और इस रिवाज़ का वर्षों से निर्वहन किया जा रहा है। अगर किसी लड़के की बहन ही न हो तो ऐसी स्थिति में उसका छोटा या बड़ा भाई दूल्हा बनकर जाता है। फिर शादी की सभी रस्में निभाकर दुल्हन को घर ले आता है। यह परम्परा शुरू क्यों हुई यह कह पाना काफी जटिल है लेकिन कहा जाता है कि यह परंपरा लड़के के किसी कारण शादी के दिन घर पर नहीं होने की स्थिति के लिए शुरू किया गया था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक परंपरा बन गई। अब तो बहन ही सिर सजाकर दूल्हा बनती है और दुल्हन को घर में लाती है। ब्याह में जोगी रस्म की अदायगी जनेऊ को काफी पवित्र सूत माना जाता है। पुराने समय की बात की जाए तो पहले कम उम्र में ही जनेऊ धारण करवा दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि बचपन में जनेऊ धारण किया जाए। हालांकि हर जगह जनेऊ धारण करने का अलग तरीका होता है। हिमाचल प्रदेश में जनेऊ धारण करने का तरीका काफी अलग है। कुछ लोगों के घरों में जनेऊ संस्कार बचपन में ही संपन्न हो जाता है जबकि कुछ लोग इसे विवाह से पहले संपन्न कराते हैं। कहा जाता है कि जब तक कोई पुरुष जनेऊ धारण नहीं करता तब तक वह विवाह नहीं कर सकता है। ऐसे में इस रस्म को शादी समारोह के दौरान ही संपन्न करा दिया जाता है और अगर घर में बड़े भाई का विवाह होता है तो कुछ लोग बड़े भाई के साथ ही छोटे भाई को भी जनेऊ धारण करा दिया जाता है। इस रस्म में लड़के को पहले महंदी लगाई जाती है और फिर उस पर हल्दी का लेप लगाया जाता है. इसके बाद उसे स्नान कराकर भिक्षा दी जाती है, जिस व्यक्ति को जनेऊ पहनाया जाता है उसे जोगी बनाकर कानों में कुंडल की जगह भल्ले, हाथ में एक चिमटा, सोठी और कांधे पर एक थैली टांगकर घर से थोड़ा दूर भेजा जाता है। इस दौरान उसकी मां, बहने और परिवार की बुजुर्ग महिलाएं उसकी झोली में भिक्षा डालती हैं। इसके साथ ही घर की महिलाएं जनेऊ धारण करने वाले पुरुष गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर उसे निभाने की कसम देकर उसे घर वापस लाती हैं। हिमाचल प्रदेश की इस अनोखी जोगी रस्म को शादी ब्याह के अवसर पर हंसी-मजाक के साथ निभाया जाता है। यहाँ शादी में फेरे नहीं लिए जाते... हिमाचल में सबसे अद्भुत शादी किन्नौर की मानी जाती हैं। यहां का विवाह आम शादियों से बिल्कुल अलग होता हैं। यहाँ दूल्हा और दुल्हन न अग्नि के फेरे लेते है और न ही मांग भरना अनिवार्य होता है। यहाँ शादी में बलि दी जाती है। यहां देवी-देवता की मर्जी से ही शादी होती है। शादी से पहले यहां मंदिर में बलि दी जाती है। इसके बाद देवता को घर लाया जाता है। दुल्हन के घर जाने से पहले पुजारी नदी और नालों के पास बुरी शक्तियों को भगाने की पूजा करते हैं। शादी से ठीक पहले दूल्हा-दुल्हन मंदिर में पूजा के लिए जाते हैं। दहेज लेने और देने दोनों पर रोक है, लेकिन वर पक्ष नई नवेली दुल्हन के भविष्य के लिए कुछ सम्पति देने का कागजी वादा करते है, जिसे "पिठ" कहा जाता है। जिला किन्नौर की एक और रिवाज़ काफी प्रचलित है वो है बहु पति विवाह यानि Polyandrous marriage। जिला किन्नौर में महिलाओं को 4 शादियां करने की आजादी है। ज्यादातर मामलों में महिलाएं एक ही परिवार भाइयों से शादी करती हैं। इस विवाह के बारे में स्थानीय लोग बताते है कि महाभारत काल के दौरान पांडव जब अज्ञातवास पर थे, तब वे यहां आए थे। सर्दियों के दौरान गांव की एक गुफा में द्रौपदी और कुंती के साथ उन्होंने कुछ वक्त बिताया था। बाद में यहां के स्थानीय लोगों ने भी कई पतियों वाली परंपरा को अपना लिया। शादी के बाद अगर कोई भाई पत्नी के साथ कमरे में है, तो वह कमरे के दरवाजे के बाहर अपनी टोपी रख देता है। जिससे इस बात का अंदाज़ा लगाया जाता है कि पति-पत्नी एकांत चाहते हैं। ऐसे में उसके दूसरे पति कमरे में नहीं जा सकते। पत्थर मार कर मनाया जाता है मेला राजधानी शिमला से करीब 30 किलोमीटर दूर धामी के हलोग में दीपावली के अगले दिन पत्थर मारने का अनोखा मेला लगता है। सदियों से मनाए जा रहे इस मेले को पत्थर का मेला या खेल कहा जाता है। दीपावली से दूसरे दिन मनाए जाने वाले इस मेले में दो समुदायों के बीच पत्थर मारे जाते हैं। ये सिलसिला तब तक जारी रहता है जब तक कि एक पक्ष लहूलुहान नहीं हो जाता। वर्षों से चली आ रही इस परम्परा को आज भी निभाया जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि माना जाता है कि पहले यहां हर वर्ष भद्रकाली को नर बली दी जाती थी, लेकिन धामी रियासत की रानी ने सती होने से पहले नर बली को बंद करने का हुकम दिया था। इसके बाद पशु बली शुरू हुई। कई साल पहले इसे भी बंद कर दिया गया। इसके बाद पत्थर का मेला शुरू किया गया। मेले में पत्थर से लगी चोट के बाद जब किसी व्यक्ति का खून निकलता है तो उसका तिलक मां भद्रकाली के चबूतरे में लगाया जाता है। ऐसी दो रातें जब लोग नहीं निकलते है रात को घर से बाहर हिमाचल प्रदेश में साल में 2 दिन ऐसे भी आते हैं जब यहां काली शक्तियों का साया रहता हैं। हिमाचल की ऐसी मान्यता है जिसपर यकीन करना आम इंसान के बस में नहीं हैं, लेकिन प्रदेश के कुछ एक जिलों में इसका खासा प्रभाव देखने को मिलता है। लोगों की माने तो साल के दो दिन ऐसे होते हैं जब शिव के गणों, भूत प्रेत सभी को अपनी मन मर्जी करने की पूरी आजादी होती हैं। तांत्रिक काली शक्तियों को जागृत करने के लिए साधना करते हैं। इस रात को डगयाली (चुड़ैल) की रात का पर्व भी कहा जाता है। राजधानी शिमला में तो लोग अपने दरवाजे में टिम्बर के पत्ते लगाते हैं और अपने देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना भी करते हैं। माना जाता है कि इन 2 रातों में काली शक्तियां पूरे चरम पर होती हैं। इस माह सभी देवी-देवता सृष्टि छोड़ असुरों के साथ युद्ध करने अज्ञात प्रवास पर चले जाते हैं। इस माह की अमावस्या की रात को ही डगयाली या चुड़ैल की रात कहा जाता है। इनसे बचने के लिए ऊपरी शिमला में देवता रात भर खेलते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। इस दौरान देवता बुरी शक्तियों से लड़ाई करने चले जाते हैं जिस डर के कारण लोग अपने घरों के बाहर दिए या मशाल जलाकर रखते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस रात देवताओं और बुरी शक्तियों के बीच की लड़ाई में यदि देवता जीत जाते हैं तो पूरा साल सुख-शांति रहती है। इस दौरान लोगों को रात में बाहर निकलने से परहेज करने की भी बात करते है। बेहद अजीब परम्परा: यहाँ महिलाओं को पहनने पड़ते है कम कपड़े हिमाचल प्रदेश में कुल्लू में पीणी गांव में एक अजीबोगरीब परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। यहां हर वर्ष अगस्त माह में पांच दिन तक काला माह मनाया जाता है और इन दिनों में पति-पत्नी एक दूसरे से हंसी-मजाक भी नहीं करते। ये परंपरा पूर्वजों के समय से ही निभायी जा रही है। ऐसी मान्यता है कि अगर कोई महिला इस परंपरा का पालन नहीं करती है तो उसके घर कुछ अशुभ हो सकता है। अजीब बात ये भी है कि पिणी गांव की महिलाएं हर साल सावन के महीने में 5 दिन कपड़े बेहद कम पहनती हैं। कहा जाता है कि इस परंपरा का पालन नहीं करने वाली महिला को कुछ ही दिन में कोई बुरी खबर सुनने को मिल जाती है। इस दौरान पति-पत्नी एक दूसरे से पूरी तरह दूर रहते हैं। पुरुषों के लिए भी इस परंपरा को निभाना बहुत जरूरी माना जाता है। हालांकि, उनके लिए नियम कुछ अलग बनाए गए हैं। पुरुषों को सावन के पांच दिनों के दौरान शराब और मांस का सेवन करना वर्जित है । कहा जाता है कि बहुत समय पहले पिणी गांव में राक्षसों का बहुत आतंक था। इसके बाद ‘लाहुआ घोंड’ नाम के एक देवता पिणी गांव आए। देवता ने राक्षस का वध किया और पिणी गांव को राक्षसों के आतंक से बचाया। बताया जाता है कि ये सभी राक्षस गांव की सजी-धजी और सुंदर कपड़े पहनने वाली शादीशुदा महिलाओं को उठा ले जाते थे। देवताओं ने राक्षसों का वध करके महिलाओं को इससे बचाया। इसके बाद से देवता और राक्षस के बीच 5 दिन तक महिलाओं के कपड़े नहीं पहनने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि अगर महिलाएं कपड़ों में सुंदर दिखेंगी तो आज भी राक्षस उन्हें उठाकर ले जा सकते हैं। निसंदेह इस परम्परा को सुन कर या जानकर कर हर कोई चकते में आ सकता है।
एचआरटीसी को हिमाचल प्रदेश की जीवन रेखा माना जाता है। आज हिमाचल के लगभग हर कोने तक एचआरटीसी की बसें पहुँचती है जो हिमाचल की कठिन भौगौलिक परिस्थितयों के बावजूद भी जन-जन को मुख्यधारा से जोड़ती है। मगर हिमाचल के दूर दराज़ क्षेत्रों तक पहुँचने वाली इन बसों को सड़क तक पहुँचाने में जिन लोगों ने हम भूमिका निभाई आज वो ही सड़को पर उतरने को मजबूर हो गए है। हम बात कर रहे एचआरटीसी के 8000 सेवानिवृत कर्मचारियों की। पूरी उम्र सरकार के लिए जिन कर्मचारियों ने काम किया, आज बुढ़ापे में उन्हीं का साथ सरकारों ने छोड़ दिया। यह हालात है हर महीने अपनी पेंशन का इंतज़ार करने को मजबूर हुए एचआरटीसी के पेंशनरों का। हिमाचल पथ परिवहन के सेवानिवृत कर्मचारी अक्सर सरकार से गुहार लगाते हैं कि उन्हें समय पर उनकी पेंशन नहीं मिल रही। इन सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए ये एक या दो नहीं बल्कि हर महीने की कहानी बनकर रह गई है। अपना पूरा जीवन एचआरटीसी को समर्पित करने वाले ये कर्मचारी अब बुढ़ापे में अपने एक मात्र सहारे पेंशन को लेकर हर महीने परेशान रहते हैं। इन पेंशनर्स का कहना हैं कि समय पर पेंशन न मिलने के कारण इनके लिए जीवन यापन तक करना मुश्किल हो गया है। ये पेंशनर इस बुढ़ापे में अपनी दवाई का खर्चा भी नहीं उठा पा रहे हैं। हालात ये है कि जब ये सेवानिवृत कर्मचारी अपनी मांगो के लिए सड़कों पर उतरे तो पिछली सरकार द्वारा इन पर एफआईआर दर्ज की गई। नई सरकार भी इनपर कुछ ख़ास मेहरबान नहीं दिखती, न तो इन पर दर्ज मामले वापस लिए गए और न ही इनके मसले हल किए गए। एचआरटीसी पेंशन कल्याण संगठन के अध्यक्ष सत्याप्रश शर्मा का कहना है कि फाइनेंसियल क्राइसिस के नाम पर हर बार उनकी पेंशन में विलम्ब कर दिया जाता है। जो पैसा आता है उससे पहले बाकि काम निपटाए जाते है, कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है और फिर कहीं जाकर सेवानिवृत कर्मचारियों की बारी आती है। उन्होंने कहा कि ऐसा एक भी महीना नहीं गुज़रता जब इन्हें बिना एमडी ऑफिस के चक्कर काटे पेंशन मिल जाए। समय पर पेंशन न मिलना तो महज़ एक समस्या है मगर इसके अलावा भी ये सेवानिवृत कर्मचारी कई परेशानियां झेल रहे है। सरकार ने अब तक उन्हें उनके एरिअर का भी भुगतान नहीं किया है। 2015 से डीए का एरियर पेंडिंग है। रिवाइज्ड पे स्केल भी इन कर्मचारियों को सात महीने बाद मिला और बीते सात महीनों का जो एरियर बना वो भी पेंडिंग है। रिवाइज्ड ग्रेचुटी और रिवाइज्ड लीव एकाश्मेंट जैसे और भी कई भुगतान बाकी है। रोडवेज बनाने की मांग : सेवानिवृत कर्मचारियों का मानना है कि यदि सरकार चाहे तो उनकी समस्या हल हो सकती है। उनके पेंशन के भुगतान के लिए एक अलग ट्रस्ट बनाया जा सकता है जो ये सुनिश्चित करे कि सेवानिवृत कर्मचारियों को समय पर उनकी पेंशन मिले। साथ ही कर्मचारियों की ये भी मांग है की एचआरटीसी को रोडवेज बनाया जाए ताकि प्रदेश सरकार के बाकि कर्मचारियों की तरह ही इन्हें सभी लाभ मिल पाए। सीएम की माता की पेंशन भी डिले ! एचआरटीसी पेंशनर कल्याण संगठन का कहना है कि खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के पिता एचआरटीसी में ड्राइवर रह चुके हैं, मगर इसके बावजूद भी एचआरटीसी पेंशनर्स के बारे में कोई सुध नहीं ले रहा। स्थिति इतनी खराब है कि मुख्यमंत्री की माता को मिलने वाली पेंशन भी समय पर नहीं आती है। हिमाचल पथ परिवहन निगम की सेवा में जिन लोगों ने पूरी जिंदगी लगा दी, उन्हें अब पेंशन के लिए तरसना पड़ रहा है। पेंशनरों की मुख्य मांगें : - महीने के पहले हफ्ते में जारी हो पेंशन - मेडिकल बिलों का समय पर भुगतान - 5, 10 और 15 फीसदी पेंशन वृद्धि का लाभ - 2015 से ग्रेच्युटी सहित अन्य भत्तों का भुगतान
कर्नाटक में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और पार्टी ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर भी माथपच्ची शुरू हो गई है। सीएम पद की रेस में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार सबसे आगे हैं और इन दोनों में से किसी एक नेता का चुनाव पार्ट के लिए सरदर्द साबित हो सकता है। सिद्धारमैया ज्यादा अनुभवी और वरिष्ठ नेता हैं और उनके पास सरकार चलाने का अनुभव है, जबकि डीकेएस चुनौती देने वाले नेता हैं और सोनिया गांधी करीबी हैं। ऐसे में आलाकमान के लिए फैसला मुश्किल होने वाला है। वैसे माहिर मान रहे है कि अगर सभी विधायकों के बहुमत के साथ भी फैसला लिया जाता है तो सिद्धारमैया अधिक स्वीकार्य मुख्यमंत्री चेहरा हो सकते है। सिद्धारमैया : बड़ा कद, लम्बा राजनैतिक अनुभ राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता सिद्धारमैया को फिर से मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। सिद्धारमैया साल 2013 से लेकर साल 2018 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं। ऐसे में सिद्धारमैया पार्टी की पहली पसंद हो सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने कार्यकाल के दौरान कई सामाजिक-आर्थिक सुधार योजनाएं शुरू की थी जिन्होंने उन्हें आर्थिक कमजोर वर्ग के बीच ख़ासा लोकप्रिय बनाया। पर अपनी पिछली सरकार के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे फैसले भी लिए थे जिनसे लिंगायत, विशेष रूप से हिंदू वोटरों के बीच में उनकी लोकप्रियता घटी, मसलन टीपू सुल्तान को इतिहास से हटाकर उनका महिमामंडन करना, जेल से आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे पीएफआई और एसडीपीआई के कई कार्यकर्ताओं को रिहा करना इत्यादि। 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी उनके नेतृत्व में रिपीट करने में कामयाब नहीं रही थी जिसके बाद कांग्रेस ने जेडीएस के साथ गठबंधन सरकार बनाई। हालाँकि वो सरकार महज एक साल ही चल सकी। अब दोबारा बहुमत मिलने पर क्या कांग्रेस फिर सिद्धारमैया को सीएम पद सौपेंगी, ये देखना रोचक होगा। डीके शिवकुमार: प्रदेश अध्यक्ष, कमतर नहीं दावा चुनाव नतीजे के एक दिन पहले ही डीके शिवकुमार ने एक ट्वीट किया है, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि डीके शिवकुमार की दावेदारी कम नहीं है। दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक एक दिन पहले डीके शिवकुमार ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी तीन सालों की मेहनत का ट्रेलर का वीडियो साझा करते हुए, एक किस्म से अप्रत्यक्ष तौर पर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश कर दी है। डीके शिवकुमार कनकपुरा सीट से लगातार 9वीं बार विधायक हैं। इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराने में शिवकुमार की अहम् भूमिका है। हालाँकि मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के आरोप में उन्हें साल 2019 में दिल्ली के तिहाड़ जेल में दो महीने बिताने पड़े थे। शिवकुमार कई बार कह चुके है कि जेल में रहने के दौरान उनके साथ नियम पुस्तिका के खिलाफ सबसे कठोर व्यवहार किया गया था क्योंकि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध थी। अब कांग्रेस क्या राज्य के सबसे अनुभवी नेता माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर उन्हें वरीयता देगी, इस पर सबकी निगाह टिकी है। सरप्राइज की सम्भावना भी खारिज नहीं ! कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी कर्नाटक से आते है और खरगे के नाम को लेकर भी कयास लगते रहे है। कर्नाटक कांग्रेस में दो ताकतवर गुट यानी सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुट आमने- सामने है और दोनों नेताओं के समर्थक खुलकर एक दूसरे पर वार करते नजर आए हैं। दोनों नेताओं के बीच खींचतान बनी हुई है, ऐसे में क्या खरगे सरप्राइज हो सकते है, ये देखना रोचक होगा। हालाँकि इसकी संभावना कम है पर राजनीति में कुछ भी मुमकिन होता है। लोग बदलाव चाहते थे और बदलाव हुआ - सीएम सुक्खू मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम में कांग्रेस की जीत का श्रेय सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दिया। सुक्खू ने कहा कि कर्नाटक के लोग बदलाव चाह रहे थे और बदलाव हो गया है। कर्नाटक में लंबे समय से 40 हजार सरकारी नौकरी के पदों पर भर्ती नहीं हो सकी थी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में गवर्नेंस नाम की चीज ही नहीं थी। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी बतौर स्टार प्रचारक कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रचार किया था। कर्नाटक की जीत ने दिए 2024 के संकेत : प्रतिभा सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लोगों ने भाजपा की धुव्रीकरण की राजनीति को पूरी तरह ठुकरा दिया हैं। हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक में कांग्रेस की शानदार जीत से साबित हो गया है कि देश में भाजपा के खिलाफ हवा चल रही हैं। उन्होंने कहा कि देश मे अब भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई हैं, और 2024 में केंद्र में कांग्रेस की लोकप्रिय सरकार बनेगी।
हिमाचल प्रदेश में सत्ता गवाने के करीब पांच महीने बाद भाजपा को कर्नाटक में भी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा सरकार की कर्नाटक से विदाई हो गई है और निसंदेह ये पार्टी के लिए बड़ा झटका है। उधर कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की है और 130 प्लस के आंकड़े के साथ सत्ता में वापसी की है। कर्नाटक की जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है और ऐसे में 'किंगमेकर' बनने का ख्वाब देख रही जेडीएस को भी बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक में कांग्रेस ने कई मुद्दों पर भाजपा को पीछे छोड़ दिया। फिर चाहे वो भ्रष्टाचार का मुद्दा हो या ध्रुवीकरण का। बजरंग दल पर बैन की बात करके मुस्लिम वोटों को अपने पाले में कर लिया। वहीं, 75 प्रतिशत के आरक्षण का दांव चलकर भाजपा के हिंदुत्व के कार्ड को फेल कर दिया। कांग्रेस ने कर्नाटक में दलित, ओबीसी, लिंगायत, हर तबके वोटर्स को अपने पाले में करने में कामयाबी हासिल की। कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को रिकॉर्ड 73.19 प्रतिशत मतदान हुआ था ,जिसे सत्ता विरोधी लहर के साथ जोड़ कर देखा जा रहा था। हुआ भी ऐसा ही और कर्नाटक की जनता ने भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया। इसके साथ ही राज्य में चला आ रहा सत्ता परिवर्तन का रिवाज भी कायम रहा। उधर, देशभर में राजनीतिक संकट से जूझ रही कांग्रेस के लिए कर्नाटक जीत बड़ी है। एक के बाद एक लगातार हार रही देश की सबसे पुरानी पार्टी के लिए पहले हिमाचल प्रदेश और अब कर्नाटक चुनाव संजीवनी साबित हो सकते है। इसी वर्ष के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव भी है, ऐसे में कर्नाटक की जीत पार्टी का मनोबल बढ़ानी वाली है। वहीँ लोकसभा में भी कर्नाटक की 28 सीटें है, उस लिहाज से भी कांग्रेस के लिए ये सुखद संकेत जरूर है। वहीँ भाजपा के लिए कर्नाटक की हार आत्ममंथन का संदर्भ जरूर है। पार्टी को ये समझना होगा कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर राज्यों के चुनाव नहीं जीते जा सकते है। भाजपा को स्थानीय नेतृत्व और स्थानीय मुद्दों की अहमियत भी समझना होगा। पीएम मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ जैसे पार्टी के बड़े चेहरों ने कर्नाटक में पूरी ताकत झोंकी और इनके कार्यक्रमों में भीड़ भी उमड़ी, लेकिन ये भी वोटों में तब्दील नहीं हुई। नतीजे बयां करते है कि कर्नाटक चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण पर जमीनी मुद्दे भारी पड़े है। 'बजरंगबली' और 'दी केरल स्टोरी' जैसे मुद्दों पर जनता ने आम मुद्दों को तरजीह दी और इसी की बिसात पर कांग्रेस को सत्ता नसीब हुई। बहरहाल कांग्रेस के लिए ये पिछले 6 महीने में दूसरी बड़ी जीत है और पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल निसंदेह इस जीत से बढ़ेगा। कर्नाटक में भी रिवाज बरकरार : कर्नाटक में 38 साल से सत्ता रिपीट नहीं हुई है। आखिरी बार 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व वाली जनता पार्टी ने सत्ता में रहते हुए चुनाव जीता था। वहीं, पिछले पांच चुनाव (1999, 2004, 2008, 2013 और 2018) में से सिर्फ दो बार (1999, 2013) सिंगल पार्टी को बहुमत मिला। भाजपा 2004, 2008, 2018 में सबसे बड़ी पार्टी बनी। उसने बाहरी सपोर्ट से सरकार बनाई। रिकॉर्ड मतदान, पिछले चुनाव से 1% ज्यादा 10 मई को 224 सीटों के लिए 2,615 उम्मीदवारों के लिए 5.13 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले। चुनाव आयोग के मुताबिक, कर्नाटक में 73.19% मतदान हुआ है। यह 1957 के बाद राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा है। भाजपा ने ऐसी बनाई थी सरकार : 2018 में भाजपा ने 104, कांग्रेस ने 78 और जेडीएस ने 37 सीटें जीती थी। किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। भाजपा से येदियुरप्पा ने 17 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन सदन में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 23 मई को इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार बनी। 14 महीने बाद कर्नाटक की सियासत ने फिर करवट ली। कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायकों की बगावत के बाद कुमारस्वामी को कुर्सी छोड़नी पड़ी। इन बागियों को येदियुरप्पा ने भाजपा में मिलाया और 26 जुलाई 2019 को 119 विधायकों के समर्थन के साथ वे फिर मुख्यमंत्री बने, लेकिन 2 साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। भाजपा ने बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया। ये रहे भाजपा की हार के 6 कारण : ' चुनाव प्रचार के दौरान ही कर्नाटक चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई थी। इस बार चुनाव में भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही थी और कांग्रेस काफी आक्रामक थी। ऐसे में भाजपा की इस हार का मतलब साफ है। 1 मजबूत चेहरा न होना: कर्नाटक में बीजेपी की हार का बड़ा कारण मजबूत चेहरे का न होना माना जा रहा रहा है। दरअसल पार्टी ने येदियुरप्पा की जगह बसवराज बोम्मई को आगे बढ़ाया लेकिन वे कोई कमाल नहीं कर सके। दूसरी तरफ कांग्रेस में कई दमदार चेहरे है जो फ्रंट फुट से पार्टी को लीड करते दिखे। 2 भ्रष्टाचार के आरोपों ने पहुंचाया नुकसान : ये मुद्दा पूरे चुनाव में हावी रहा। चुनाव से कुछ समय पहले ही भाजपा के एक विधायक के बेटे को रंगे हाथों घूस लेते हुए पकड़ा गया था। इसके चलते भाजपा विधायक को भी जेल जाना पड़ा। एक ठेकेदार ने भाजपा सरकार पर 40 प्रतिशत कमिशनखोरी का आरोप लगाते हुए फांसी लगा ली थी। कांग्रेस ने इस मुद्दे को पूरे चुनाव में जोरशोर से उठाया। 3 नहीं चला ध्रुवीकरण का दांव : कर्नाटक में एक साल से बीजेपी के नेता हलाला, हिजाब से लेकर अजान तक के मुद्दे उठाते रहे। चुनाव के दौरान बजरंगबली और दी केरल स्टोरी मुद्दे बनाये गए, लेकिन जनता ने जमीनी मुद्दों पर वोट किया। 4 . आरक्षण का मुद्दा पड़ा भारी : कर्नाटक में भाजपा ने चार प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण खत्म करके लिंगायत और अन्य वर्ग में बांट दिया। पार्टी को इससे फायदे की उम्मीद थी, लेकिन ऐन वक्त में कांग्रेस ने बड़ा पासा फेंक दिया। कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में आरक्षण का दायरा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 फीसदी करने का ऐलान कर दिया। 5 . टिकट बंटवारे ने बिगाड़ा बाकी खेल : भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर भी बड़ी चूक हुई। पार्टी के कई दिग्गज नेताओं का टिकट काटना भाजपा को भारी पड़ा। पार्टी नेताओं की बगावत ने भी कई सीटों पर भाजपा को नुकसान पहुंचाया है। करीब 15 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा के बागी नेताओं ने चुनाव लड़ा और पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाया। 6. दक्षिण बनाम उत्तर की लड़ाई का भी असर : इसे भी एक बड़ा कारण मान सकते हैं। इस वक्त दक्षिण बनाम उत्तर की बड़ी लड़ाई चल रही है। भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है और मौजूदा समय केंद्र की सत्ता में है। ऐसे में भाजपा नेताओं ने हिंदी बनाम कन्नड़ की लड़ाई में मौन रखना ठीक समझा। वहीं, कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने मुखर होकर इस मुद्दे को कर्नाटक में उठाया। कांग्रेस की जीत के 6 बड़े कारण 'कर्नाटक में 2004, 2008 और फिर 2018 में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। 2013 में कांग्रेस ने 122 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। सूबे में मुख्य लड़ाई लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रही है। कांग्रेस ने कई बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई है, जबकि भाजपा को कभी भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। कांग्रेस की इस जीत के पीछे कई बड़े कारण है। 1. आरक्षण का वादा दे गया फायदा : कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने चार प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण खत्म करके लिंगायत और अन्य वर्ग में बांट दिया। पार्टी को इससे फायदे की उम्मीद थी, लेकिन ऐन वक्त में कांग्रेस ने बड़ा पासा फेंक दिया। कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में आरक्षण का दायरा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 फीसदी करने का एलान कर दिया। आरक्षण के वादे ने कांग्रेस को बड़ा फायदा पहुंचाया। 2. खरगे का अध्यक्ष बनना : ये भावनात्मक तौर पर कांग्रेस को फायदा दे गया। कांग्रेस ने चुनाव से पहले मल्लिकार्जुन खरगे को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। खरगे कर्नाटक के दलित समुदाय से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस ने खरगे के जरिए भावनात्मक तौर पर कर्नाटक के लोगों को पार्टी से जोड़ दिया। 3. राहुल गांधी की यात्रा : राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से जम्मू कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा निकाली थी। इस यात्रा का सबसे ज्यादा समय कर्नाटक में ही बीता। ये राहुल गांधी की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा रहा। इस यात्रा के जरिए राहुल ने कर्नाटक में कांग्रेस को मजबूत किया। 4 नहीं बंटा मुस्लिम वोट : एक वजह ये भी मानी जा रही है कि कर्नाटक चुनाव में मुस्लिम वोट बीजेपी के खिलाफ पीएफआई और बजरंग बली के मुद्दे पर एकजुट हो गया। एकमुश्त मुस्लिम वोट कांग्रेस को मिला। 5 प्रियंका गाँधी रही हिट : कर्नाटक में राहुल गांधी से ज़्यादा प्रियंका गांधी ने प्रचार किया। प्रियंका ने 35 रैलियां और रोड शो किए। दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस ने प्रियंका को उतारकर नया प्रयोग किया और उनको इंदिरा गांधी से जोड़कर प्रेजेंट किया, इसका फायदा मिला। 6 मजबूत स्थानीय नेतृत्व : इस चुनाव में कांग्रेस का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट रहे हैं रीजनल लीडर और लोकल मुद्दे। कांग्रेस ने चुनाव में क्षेत्रीय नेताओं को आगे रखा और जमीनी मुद्दों को अपने एजेंडे में रखा, जो वोटों में परिवर्तित हुआ। कांग्रेस को बड़े मार्जिन से जीत मिली है।
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में आज जल शक्ति विभाग के अधिकारियों की एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। मुकेश अग्निहोत्री ने विभागीय अधिकारियों को प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में विभाग के अंतर्गत किए जाने वाले विभिन्न कार्यों का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग हर विधानसभा क्षेत्र के लिए एक वृहद योजना (मास्टर प्लान) तैयार करेगा ताकि विभिन्न स्तर पर जारी कार्यों का विस्तृत विवरण प्राप्त होने के साथ ही इन कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने जल जनित रोगों से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रदेश भर में जागरूकता अभियान आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इसके लिए सोशल मीडिया, फोक मीडिया, विज्ञापन जैसे माध्यमों का अधिकाधिक प्रयोग सुनिश्चित किया जाए। इससे आगामी वर्षा ऋतु में होने वाले जल जनित रोगों से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सकेगा। वर्षा एवं हिम जल संचय, भू-जल पुनर्भरण एवं स्रोत स्थिरता की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता और जल संरक्षण के लिए जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पेयजल के साथ-साथ सिंचाई व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं इसमें सुधार की दिशा में कार्य कर रही है। बेहतर एवं सुलभ सिंचाई सुविधा से प्रदेश के किसानों कीे आर्थिकी में भी बढ़ोतरी सुनिश्चित हो सकेगी। बैठक में निर्माणाधीन विभिन्न विकासात्मक कार्यों की वृतवार चर्चा की गई। उप-मुख्यमंत्री ने सभी विकासात्मक परियोजनाओं को गति प्रदान करने तथा इन्हंे समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए। इस बैठक में जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता संजीव कौल, सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के निदेशक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव हरिकृष्ण हिमराल ने कहा है कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ लेना चाहिए। आज सुन्नी में आदर्श महिला मंडल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नारी जन चेतना उत्सव के दूसरे दिन मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए हिमराल ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से आपसी मेलजोल भी बढ़ता हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई है। हिमराल ने इस आयोजन के लिए विशेष तौर पर लोक निर्माण मंत्री शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से उनका यह क्षेत्र विकास के मामले में निरंतर आगे बढ रहा हैं। हिमराल ने प्रदेश के छह बार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व वीरभद्र सिंह को याद करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह प्रदेश सदैव उनका ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा चूंकि शिमला ग्रामीण उनका निर्वाचन क्षेत्र भी था इसलिए उनके प्यार व स्नेह का दिखाया पथ हमें निरन्तर आगे बढ़ने को प्रेरित करता रहेगा। हिमराल ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बैंकों ने अनेक योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि स्वम् सहायता समूह इसमें एक प्रमुख हैं। उन्होंने कहा इसके अतिरिक्त उन्हें अपना कारोबार शुरू करने व उद्योग स्थापित करने के लिए भी रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध करवाया जाता हैं। उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं को इन योजनाओं का लाभ लेना चाहिए। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य चुन्नी लाल गर्ग, रमेश ठाकुर, भीष्म हिमराल मोहिंदर वर्मा मोनिका नेगी, कला, उर्मिला, अनु सोनी, कृतिका हिमराल, कार्तिक शर्मा, आदि मौजूद रहे।
परिवहन कर्मचारी महासंघ इंटक ने पूर्व की भारतीय जनता पार्टी की सरकार से समय से चालक-परिचालकों के अधिक समय भत्ते एवम् रात्रि भत्ते का भुगतान वर्तमान सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से प्रदान किए जाने का स्वागत किया है l परिवहन कर्मचारी महासंघ इंटक, चालक संगठन द्वारा दिनांक 15 मई 2023 से रात्रि बस सेवाओ के संचालन को बंद करने की मांग का समर्थन नहीं करता है। महासंघ इंटक का मानना है की पूर्व की सरकार में जब वेतन तथा रात्रि एवम् अधिक समय भत्ते के समय पर नहीं मिल रहे थे तो उस समय महासंघ इंटक ने समन्वय समिति के साथ मिलकर कर्मचारियों की आवाज को उठाने का प्रयास किया तो उक्त संगठन ने पूर्व सरकार के इशारे पर कभी भी निगम के कर्मचारियों की लंबित मांगों को सिरे नहीं चड़ने दिया था। महासंघ इंटक शीघ्र ही माननीय उप मुख्यमंत्री से चर्चा करके निगम कर्मचारियों के रुके हुए भत्तों एवम् अन्य मांगों पर भी चर्चा करके उन मांगो का भी समाधान करवाएगा। परिवहन कर्मचारी महासंघ इंटक के प्रदेश अध्यक्ष उमेश शर्मा,महामंत्री देश राज, नासिर मोहम्मद,उपाध्यक्ष चेत राम नायक, रणजोध सिंह, केलांग इकाई के प्रधान जीवन सिंह,महामंत्री हुक्म चंद,कुल्लू इकाई के प्रधान अजय कुमार,महामंत्री खेम सिंह चंद,मंडी इकाई के प्रधान प्रवीण जमवाल,कार्यकारी प्रधान मोहिंदर कुमार,महामंत्री महेश कुमार,सुंदरनगर इकाई महामंत्री धनी राम,धर्मशाला इकाई प्रधान मदन लाल,महामंत्री सुरेश कुमार, जस्सूर इकाई अध्यक्ष सुदर्शन कुमार,पठानकोट के महामंत्री कपिल देव,कार्यकारी प्रधान रणदीप कुमार,नगरोटा के प्रधान अनिल चौधरी,देहरा के प्रधान ओम कुमार,अध्यक्ष नवीन कुमार,प्रदेश प्रचार सचिव संजीव सिंह,शिमला मंडल प्रभारी समर चौहान,धर्मशाला मंडल प्रधान राय सिंह,तारादेवी इकाई के महासचिव निक्का राम,सरकाघाट के प्रधान जग्रेश्वर सिंह,धर्मपुर के प्रधान अमृत कुमार, सहित संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों सर्व श्री संजय कुमार,अब्दुल रफीक,विजय राम,भूपेंद्र कुमार,संजय राणा,डिंपल डोगरा,नरेंद्र कुमार,पीतांबर लाल, बृज लाल,विजय कार्की,संतोष कुमार,सतीश कुमार,जमील खान,रूपेंद्र घंडवाल,अमित कुमार,मनोहर लाल,पवन सेन,राजेश सागर,मनमोहन शर्मा,यश पाल ने भी प्रदेश के उप मुख्यमंत्री से निगम की अन्य लम्बित मांगों को भी शीघ्र निराकरण करने हेतु संगठन को वार्ता के लिए बुलाए जाने का भी अनुरोध करता है।
[2:51 pm, 14/05/2023] Bhawna Fv: हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड इम्प्लॉइज यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष ने बिजली बोर्ड प्रबंधन वर्ग पर प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारी हित में लिए गए राजनीतिक फैसलों के कार्यन्वयन व धरातल तक पहुंचाने में देरी का आरोप लगाया है। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कामेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाल करना प्रदेश सरकार का कर्मचारी हित मे लिया गया एक राजनीतिक फैसला है। इसमें अफसरशाही द्वारा अगर और लेकिन करना न तो प्रदेश सरकार चाहेगी और न ही यह कर्मचारियों की भावनाओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा जिन प्रदेश के सरकारी उपक्रमों में वर्ष 2003 से पहले पेंशन रुल 1972 थे और उसके बाद के कर्मचारी नई पेन्शन प्रणाली में NSDL(नेशनल सेक्युरिटी डिपोजिटरी लिमिटेड) में नई पेंशन शेयर को जमा कर रहे है, उन सब उपक्रमों के कर्मचारी प्रदेश सरकार की पुरानी पेंशन बहाली की अधिसूचना में अन्तनिर्हित है। हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड व हिमाचल पथ परिवहन निगम ऐसे राज्य सरकारी उपक्रम है जहां पेंशन रुल 1972 पहले से लागू है और वर्ष 2003 के बाद लगे कर्मचारी पुरानी पेंशन के हकदार है। लेकिन दोनों निगमों के प्रबंधन वर्ग में सरकार के इस बारे जारी आदेश की अवहेलना करते हुए कर्मचारियों के वेतन से न्यू पेन्शन शेयर की कटौती करी है जबकि प्रदेश सरकार ने यह इस माह से बंद कर दी है। उन्होंने कहा बिजली बोर्ड में वर्ष 2003 के बाद नियुक्त हुए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को मिलाकर लगभग 9000 कर्मचारी प्रदेश सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से लाभान्वित होंगे लेकिन बिजली बोर्ड के प्रबंधन वर्ग द्वारा इसके लागू करने में की जा रही देरी से कर्मचारियों में अभी संशय बना है। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष ने बोर्ड प्रबंधन से मांग की है कि अप्रैल माह के कर्मचारियों के वेतन से कटा गया न्यू पेंशन शेयर को आगे NSDL में जमा न किया जाए और बिजली बोर्ड़ में भी शीघ्र पुरानी पेंशन की अधिसूचना जारी कर कर्मचारियों से प्रदेश सरकार की तर्ज पर ऑप्शन लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए। [2:55 pm, 14/05/2023] Bhawna Fv: अनेकों को जीवन देने में सक्षम अंगदान - डाॅ. कर्नल धनीराम शांडिल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा श्रम एवं रोज़गार मंत्री डाॅ. कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि अंगदान श्रेष्ठदान है और इसलिए यह महादान की श्रेणी में आता है। डाॅ. शांडिल आज सोलन शहर स्थित चिल्ड्रन पार्क में लायंस क्लब सोलन द्वारा अंगदान जागरूकता विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बतौर मुख्यातिथि उपस्थित लोगों का सम्बोधन कर रहे थे। डाॅ. शांडिल ने कहा कि मृत्यु के उपरांत अंगदान करने से जहां बहुमूल्य मानवीय जीवन बचाए जा सकते है। वहीं पीड़ित मानवता की अनंत सेवा भी की जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अंगदान जागरूकता के लिए व्यापक कार्य करने की आवश्यकता है, क्योंकि मृत्य का आंकड़ा बताता है कि अगर शत प्रतिशत अंगदान किया जाए तो अंग की कमी से होने वाली मृत्य पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। डाॅ. शांडिल ने कहा कि परिवार से एक व्यक्ति के चले जाने का दुःख असहनीय होता है लेकिन उसके अंग से मिलने वाले नए जीवन से वह स्वयं और अपने परिवार को गौरवान्वित महसूस करा सकता है। उन्होंने लायंस क्लब सोलन के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से जहां युवा पीढ़ी को एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर मिला वहीं मानव जीवन के लिए अंगदान की अहमियता के बारे में जानकारी भी मिली। उन्होंने भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम करने के लिए लायंस क्लब सोलन को प्रोत्साहित भी किया। इस अवसर पर 30 लोगों ने अंगदान के लिए अपना पंजीकरण करवाया। जोगिन्द्रा केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, ज़िला कांग्रेस समिति के महासचिव एवं ज़िला सोलन कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष जतिन साहनी, खण्ड कांग्रेस सोलन के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शहरी कांग्रेस सोलन के अध्यक्ष अंकुश सूद, उपाध्यक्ष रजत थापा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जगमोहन मल्होत्रा, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी, लायंस क्लब सोलन के अध्यक्ष विशाल सूद, परियोजना अध्यक्ष विकास दत्ता, सह अध्यक्ष कमल वीग और नवदीप थरेजा, आईजीएमसी से एस.ओ.टी.टी.ओ की टीम के ट्रांसप्लांट को ऑर्डिनेटर नरेश कुमार, कार्यक्रम अधिकारी भारती कश्यप, मेट्रन हरिप्रिया सहित प्रतिभागी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा श्रम एवं रोज़गार मंत्री डाॅ. कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि अंगदान श्रेष्ठदान है और इसलिए यह महादान की श्रेणी में आता है। डाॅ. शांडिल आज सोलन शहर स्थित चिल्ड्रन पार्क में लायंस क्लब सोलन द्वारा अंगदान जागरूकता विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बतौर मुख्यातिथि उपस्थित लोगों का सम्बोधन कर रहे थे। डाॅ. शांडिल ने कहा कि मृत्यु के उपरांत अंगदान करने से जहां बहुमूल्य मानवीय जीवन बचाए जा सकते है। वहीं पीड़ित मानवता की अनंत सेवा भी की जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अंगदान जागरूकता के लिए व्यापक कार्य करने की आवश्यकता है, क्योंकि मृत्य का आंकड़ा बताता है कि अगर शत प्रतिशत अंगदान किया जाए तो अंग की कमी से होने वाली मृत्य पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। डाॅ. शांडिल ने कहा कि परिवार से एक व्यक्ति के चले जाने का दुःख असहनीय होता है लेकिन उसके अंग से मिलने वाले नए जीवन से वह स्वयं और अपने परिवार को गौरवान्वित महसूस करा सकता है। उन्होंने लायंस क्लब सोलन के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से जहां युवा पीढ़ी को एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर मिला वहीं मानव जीवन के लिए अंगदान की अहमियता के बारे में जानकारी भी मिली। उन्होंने भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम करने के लिए लायंस क्लब सोलन को प्रोत्साहित भी किया। इस अवसर पर 30 लोगों ने अंगदान के लिए अपना पंजीकरण करवाया। जोगिन्द्रा केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, ज़िला कांग्रेस समिति के महासचिव एवं ज़िला सोलन कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष जतिन साहनी, खण्ड कांग्रेस सोलन के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शहरी कांग्रेस सोलन के अध्यक्ष अंकुश सूद, उपाध्यक्ष रजत थापा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जगमोहन मल्होत्रा, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी, लायंस क्लब सोलन के अध्यक्ष विशाल सूद, परियोजना अध्यक्ष विकास दत्ता, सह अध्यक्ष कमल वीग और नवदीप थरेजा, आईजीएमसी से एस.ओ.टी.टी.ओ की टीम के ट्रांसप्लांट को ऑर्डिनेटर नरेश कुमार, कार्यक्रम अधिकारी भारती कश्यप, मेट्रन हरिप्रिया सहित प्रतिभागी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का मुख्य औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। संभावित उद्यमियों को उद्योग अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएं आरंभ की गई हैं जिनके फलस्वरूप ‘व्यापार में सुगमता’, सूचकांक में प्रदेश की वरीयता भी सुधरी है। राज्य में उद्योग-मित्र वातावरण प्रदान करना तथा निवेश को बढ़ावा देना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देश के पसंदीदा निवेश गंतव्य रूप में विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने कई नई नीतियां अपनाई हैं जिनके तहत नए उद्योग स्थापित करने के लिए सस्ती दरों पर बिजली, राज्य वित्त निगम तथा राष्ट्रीय बैंकों के माध्यम से आसान ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। कम दरों पर पट्टे पर भूमि उपलब्ध करवाई जा रही है तथा नए उद्योगों को बिक्री या खरीद कर पर छूट भी दी जा रही है। प्रदेश के बाहर निकटतम रेलवे स्टेशन से कच्चे माल के परिवहन भाड़े पर रियायत के अलावा अन्य सीमांत लाभ भी प्रदान किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के तहत डेंटल क्लिनिक के लिए मशीनरी एवं उपकरण, ई-टैक्सी की खरीद, एक मेगावाट तक सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना, मत्स्य पालन परियोजना तथा अन्य उद्यमों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। ई-टैक्सी की खरीद पर सभी पात्र वर्गों को 50 प्रतिशत का उपदान प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार विनिर्माण, पर्यटन, ऊर्जा, निर्माण, आवासीय इत्यादि क्षेत्रों में लगभग 20 हजार करोड़ का निवेश आकर्षित करने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है जिससे लगभग 40 हजार लोगों को प्रत्यक्ष तथा 50 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित 99 प्रतिशत उद्यम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी में शामिल हैं। उद्योग विभाग इन उद्यमों का विस्तृत सर्वेक्षण आयोजित करवाएगा जिससे इनकी समस्याओं का पता लगाया जाएगा तथा उनका उचित निवारण होगा। एक जिला एक उत्पाद की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में यूनिटी मॉल स्थापित किया जाएगा। यह ब्यूरो संभावित निवेशकों को एक छत तले सभी स्वीकृतियां प्रदान करने की सुविधा देगा। निवेशकों को ‘आओ और काम शुरू करो’ की सुविधा मिलेगी। इससे प्रदेश के स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और प्रदेश आदर्श निवेश हितैषी राज्य बनकर उभरेगा। प्रदेश सरकार एच.पी. टिनैंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट, 1972 के अनुच्छेद-118 के संबंधी मामलों की स्वीकृतियों के विलंब पर भी ध्यान देगी। उद्योगपतियों को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर अधोसंरचना स्थापित की जाएगी। औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति के संचालन को और सुदृढ़ किया जाएगा और औद्योगिक इकाइयों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में सामाजिक और शैक्षणिक अधोसंरचना को सुदृढ़ करने पर कार्य कर रही है ताकि उन क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में गत शनिवार को कीरतपुर-मनाली फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई , जिसमे मुख्यमंत्री ने कहा कि कीरतपुर से मनाली तक लगभग 191 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क का लगभग 182 किलोमीटर भाग प्रदेश के तीन जिलों बिलासपुर, मंडी तथा कुल्लू से होकर गुजरेगा। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेहतर यातायात व्यवस्था एवं सड़क सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए प्रदेश की सरकार तीन नए ट्रैफिक-कम-टूरिस्ट-पुलिस स्टेशन स्थापित करेगी। यह पुलिस स्टेशन बिलासपुर, मंडी व कुल्लू जिला में खोले जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को इन थानों के कार्यक्षेत्र के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फोरलेन सड़क पर ट्रामा सेंटर चिन्हित किए जाएंगे, जिनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय नेरचौक, मंडी तथा तीनो जिलों के क्षेत्रीय अस्पताल शामिल हैं। इससे आपात स्थिति में प्रभावितों को शीघ्र उपचार सुनिश्चत हो सकेगा। इस राजमार्ग पर निश्चित स्थानों पर एंबुलेंस, रिकवरी वाहन इत्यादि की व्यवस्था भी होगी। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात के सुचारू संचालन तथा दुर्घटना इत्यादि की संभावनाएं न्यून करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं प्रदेश पुलिस के समन्वय से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है। इसके तहत सीसीटीवी कैमरा, वीडियो इंसीडेंट डिटेक्शन सिस्टम, वैरिएबल मैसेज साईन, स्वचालित यातायात पटल सह वर्गक, सड़क किनारे एवं ओवरहैड वाहन गति को दर्शाते डिस्प्ले पटल, ऑप्टिक फाइबर कनेक्टिविटी सहित आपात सहायता कॉल बॉक्स भी स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने गति सीमा से संबंधित डिस्प्ले पटल की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए। साथ ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से एकीकृत कमांड केंद्र के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने का आग्रह भी किया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित ने अवगत करवाया कि यह फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग आगामी 15 से 20 जून, 2023 तक पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों एवं राहगीरों की सुरक्षा के दृष्टिगत घाटी की तरफ को क्रैश बैरियर, पैदल पथ तथा ओवर ब्रिज तैयार किए गए हैं। बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव, गृह, भरत खेड़ा , प्रधान सचिव, परिवहन, आर.डी. नज़ीम, , सचिव, स्वास्थ्य, एम. सुधा देवी, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय गुप्ता, निदेशक, परिवहन अनुपम कश्यप सहित संबंधित विभागों एवं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस महासचिव एवं जिला पार्षद संजय राणा ने कर्नाटक में कांग्रेस को मिली ऐतिहासिक जीत को लेकर कहा कि देश में तेजी के साथ परिवर्तन की लहर चल पड़ी है तथा 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों में केंद्र से मोदी सरकार का भी सुपड़ा साफ होना तय हो गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान देश की जनता का जो समर्थन कांग्रेस को मिला, उसका रुझान कर्नाटक विधान सभा चुनाव में साफ देखा जा रहा है। संजय राणा ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्टार प्रचारक के तौर पर अपनी भूमिका निभाई है, तथा सभी ने मिलकर जनता के बहुमुल्य समर्थन से कर्नाटक में भाजपा को चारों खाने चित कर अपनी जीत दर्ज की है। उन्होंने कहा कि हिमाचल विधान सभा चुनावों में कांग्रेस की हुई जीत का असर भी कर्नाटक चुनावों में देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि जनता ने नफरत की राजनीति को भी नकार दिया है तथा जनता ने भाजपा तथा मोदी सरकार को उसका सही आईना दिखाया है। संजय राणा ने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों से अब देश की जनता पूरी तरह से तंग हो चुकी है तथा सत्ता से भाजपा को पुरी तरह से बाहर करना चाहती है। राणा ने कहा कि भाजपा की जनविरोधी नीतियों के साथ ही जनता की सोच भी बदल रही है तथा यह बदलाव अब लोकसभा चुनावों में भी भाजपा देखेगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ चुके युवाओं के लिए नशा मुक्ति एवं पुनर्वास नीति तैयार करेगी। इस नीति के प्रारूप प्रस्ताव पर आज यहां आयोजित बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी अकेलेपन एवं मोबाइल में सिमटती गतिविधियों के कारण आसानी से नशे की गिरफ्त में आ रही है, विशेष तौर पर पिछले 4-5 सालों में प्रदेश में नशाखोरी के मामलांे में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इन युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से बाहर निकालने तथा उनके पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठा रही है। प्रदेश में इसके लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और स्नायु विज्ञान संस्थान (एनआईएमएचएएनएस) के सहयोग से एक स्टेट ऑफ द आर्ट नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए लगभग 50 बीघा भूमि का चयन करने के लिए उन्होंने सम्बन्धित विभागों को उचित निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्र एक समग्र सोच के साथ गुरुकुल पद्धति पर आधारित होंगे जहां पर नशे की गिरफ्त में आये व्यक्तियों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए कार्य किया जाएगा और एक सादे जीवन एवं सामुदायिक सहयोग के लिए उन्हें प्रेरित किया जाएगा। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशा मुक्त करने के साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। साथ ही नशा मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे व्यक्तियों की मदद कर उन्हें व्यापक एवं बेहतर उपचार उपलब्ध करवाना है। इस केंद्र के माध्यम से उन्हें शैक्षणिक एवं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने में भी मदद की जाएगी, ताकि वे दोबारा सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें। इस केन्द्र में उनमें खोया आत्म विश्वास पुनः जागृत करने और जीवन में उन्नति के लिए उचित सलाह के साथ ही उपचार उपरान्त उनकी समुचित निगरानी भी की जाएगी। उन्हें परिवार एवं समाज से दृढ़ नैतिक एवं अन्य सहयोग उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि वे समग्र रूप से सामान्य जीवन में लौट सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए दीर्घावधि के लिए योजना बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए प्रस्तावित नीति के प्रथम चरण में नशा मुक्ति के लिए पुलिस व स्वास्थ्य विभाग तथा सलाहकार बोर्ड की मदद ली जाएगी, द्वितीय चरण में इनके पुनर्वास के लिए स्वास्थ्य, युवा सेवाएं एवं खेल, शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, कृषि और बागवानी विभाग के समन्वय से कार्य किया जाएगा। तृतीय चरण में समाज में इनके पुनः संयोजन के लिए शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास तथा सहकारी बैंकों एवं समितियों का सहयोग लिया जाएगा। चौथे चरण में निगरानी एवं मूल्यांकन के लिए पुलिस, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास एवं स्थानीय निकायों का सहयोग लिया जाएगा। बैठक में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सतवंत अटवाल ने प्रस्तावित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास नीति पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव गृह भरत खेड़ा, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त यूनुस सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
आज नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल प्रियंका गांधी से शिमला में मिला l संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने कहा कि प्रियंका गांधी क्रमिक अनशन के दौरान सोलन में आई थी और उन्होंने हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली की गारंटी कर्मचारियों को दी थी, जिसके बाद उन्होंने जनसभा में भी अपने संबोधन में कर्मचारियों को हिमाचल प्रदेश की पहली कैबिनेट की बैठक में पुरानी पेंशन बहाली का वादा किया थाl उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा पुरानी पेंशन बहाली के लिए प्रियंका गांधी का धन्यवाद किया गया । पुरानी पेंशन बहाली को पहली गारंटी के रूप में रखने के लिए प्रियंका गांधी ने कर्मचारियों से जो वादा किया था उसे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल सरकार ने पहली कैबिनेट की बैठक में पूरा किया। आज कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल हुई है, जिसके लिए कर्मचारी सदैव उनके ऋणी रहेंगे । इस मौके पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, लोकसभा सांसद एवं कांग्रेस पार्टी प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह व अन्य नेताओं का भी धन्यवाद किया गया । इस मौके पर संगठन महासचिव भरत शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सौरभ, जिला कांगड़ा अध्यक्ष राजेंद्र मिन्हास, जिला चंबा अध्यक्ष सुनील जरियाल, जिला सिरमौर के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, जिला शिमला के अध्यक्ष कुशाल शर्मा, जिला हमीरपुर अध्यक्ष राकेश कुमार, उपाध्यक्ष सफी मोहम्मद, राज्य उपाध्यक्ष उत्तमचंद, जिला चंबा महासचिव विजय, जिला कांगड़ा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष, राज्य मुख्य प्रवक्ता अनिरुद्ध गुलेरिया, राज्य अतिरिक्त महासचिव अंकुर शर्मा, राज्य उपाध्यक्ष अजय राणा, अमर, जयकिशन, राजूराम शर्मा, रामलाल सूर्या, उमेश राणा इत्यादि कर्मचारी उपस्थित रहे ।
हिमाचल पथ परिवहन निगम कंडक्टर यूनियन ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को शुक्रवार देर सायं यहां मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक लाख ग्यारह हजार रुपये का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री ने यूनियन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के अंशदान और समाज के योगदान से जरूरतमंदों की सहायता की जा सकती है। इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण चंद व अध्यक्ष रामलोक चौधरी व यूनियन के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।
बागवानी क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। प्रदेश सरकार किसानों और बागवानों के कल्याण के लिए कई अभिनव कदम उठा रही है। इस कड़ी में राज्य सरकार बागवानी क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता और उत्पादकता वाले पौधों को विकसित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की कृषि-जलवायु विविधता बागवानी क्षेत्र के विस्तार और सेब, नींबू प्रजाति के फलों, आम, खुमानी और नाशपती जैसे फलों की पैदावार के लिए वरदान है। राज्य सरकार किसानों की आय में वृद्धि और बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष फलों के पौधे रोपे जाते हैं। प्रदेश में विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित बागवानी विकास परियोजना के अंतर्गत लाखों पौधे आयातित किए जाते हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बागवानी उत्पादों तथा फल-फसलों की उत्पादकता, गुणवत्ता और विपणन के लिए आधारभूत संरचना को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार रोपित किए गए पौधों को विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाने के प्रति संवेदनशील है। इस समस्या से निपटने और बागवानी क्षेत्र में सुधार के लिए प्रदेश सरकार नई तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दे रही है। इसके लिए कई फल उत्पादक राज्यों के पौधरोपण मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है और किसानों को नवीनतम तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि पौधरोपण की अधिक-से-अधिक जीविता दर बनाई रखी जा सके। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्तपोषित एचपी शिव परियोजना के तहत ऑस्ट्रेलिया में पौध स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में अपनाई जा रही स्क्रीनिंग, टैस्टिंग, साफ-सफाई व रख रखाव इत्यादि की आधुनिक तकनीक का अवलोकन एवं अध्ययन किया। दल ने एलिजाबेथ कृषि संस्थान और स्ट्रॉबेरी इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन अथॉरिटी का भी दौरा किया। इस दौरान संतरे के उत्पादन मंे माईक्रो ग्राफ्टिंग तकनीक का अवलोकन करने के साथ-साथ सिट्रस पैथेलोजी कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय सिट्रस रिपोजीटरी कार्यक्रम इत्यादि पर चर्चा की। प्रदेश मंे शिवा परियोजना के अतंर्गत लगभग 1800 हेक्टेयर भूमि को संतरा उत्पादन के अन्तर्गत लाना प्रस्तावित है, जिसमंे लगभग 20 लाख पौधों की आवश्यकता होगी। बागवानी क्षेत्र में सुधार के लिए आस्ट्रेलिया से तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर प्रदेश मंे इसे प्रयोग मंे लाने की दिशा मंे यह प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण नवोन्मेषी पहल है। इससे प्रदेश में उच्च गुणवता वाले संतरे के पौधे तैयार करने में सहायता मिलेगी और बागवान लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दौरा राज्य सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र में विस्तार तथा बागवानों के कल्याण और उत्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता हैं। सरकार के नवीन और ठोस प्रयासों के सुखद परिणाम शीघ्र ही दृष्टिगोचर होंगे।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जुब्बल-नावर-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र को आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाया जाएगा और क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स और धार्मिक पर्यटन को विकसित किया जाएगा जिससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके। शिक्षा मंत्री आज जुब्बल उपमंडल की ग्राम पंचायत सारी में 3 करोड़ 26 लाख रुपए की लागत से बनने वाली उठाऊ सिंचाई योजना और 2 करोड़ 44 लाख रुपए से निर्मित होने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सारी भवन का शिलान्यास करने के उपरांत उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित कर रहे थे। रोहित ठाकुर ने बताया कि अनु और खड़ा पत्थर में उचित भंडारण क्षमता के सीए स्टोर स्थापित किए जाएंगे जिससे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बागवानों एवं किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस उठाऊ सिंचाई योजना से मडकादली, मघारा,अस्तांदली व सारी के बागवानों और किसानों की आर्थिकी मजबूत होगी और प्रति व्यक्ति आय में इजाफा होगा। वर्तमान राज्य सरकार हर वर्ग और क्षेत्र के विकास के लिए कटिबद्ध है और इस दिशा में सरकार द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार घर द्वार पर ही शिक्षा की सुविधा उपलब्ध करवा रही है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक सुधार किया जाएगा और युवाओं को प्रतिस्पर्धा के दौर में रोजगार परक शिक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी। इस दौरान कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाली छात्राओं को शिक्षा मंत्री ने 20000 रुपए देने की घोषणा भी की। इससे पूर्व स्थानीय प्रधान अनु रांगता ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और क्षेत्र की समस्याओं से उन्हें अवगत करवाया। रोहित ठाकुर ने इस अवसर पर जन समस्याएं भी सुनी और उनका त्वरित निवारण भी किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित किया। इस अवसर पर जिला परिषद सरस्वती नगर वार्ड के सदस्य कौशल मुंगता, पंचायत समिति उपाध्यक्ष जुब्बल यशवंत जस्टा, उपमंडल दण्डाधिकारी चेतना खड़वाल, अधीक्षण अभियंता जल शक्ति विभाग अरविन्द सूद, खण्ड विकास अधिकारी जुब्बल कर्ण सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने मिशन ‘लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) पर सभी संगठनों, विभागों और गैर सरकारी संगठनों से पूरे राज्य में जन सहभागिता सुनिश्चित कर प्रमुख आउटरीच एवं विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने का आग्रह किया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य व्यवहारवादी परिवर्तन के कारण पर्यावरण पर प्रभाव को लेकर लोगों को जागरूक बनाना है। इस कार्य में सभी विभागों को समयबद्ध सूचना उपलब्ध करवानी चाहिए। उन्होंने वन विभाग को राष्ट्रीय उद्यानों के प्रवेश टिकटों के माध्यम से मिशन लाइफ की सह-ब्रांडिंग के साथ वन क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में और उसके आसपास प्लास्टिक सफाई अभियान आयोजित करने, साइकिल मार्गों को बढ़ावा देने और साइकिल रैलियों का आयोजन करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग स्थानीय समुदाय के साथ मिट्टी और नमी संरक्षण पहल भी आयोजित करेगा। शिक्षा विभाग हिमकोस्टे के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने के लिए इको-क्लबों के नेटवर्क को भी सक्रिय करेगा। पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन विभाग (डीईएसटी और सीसी) के निदेशक डी.सी. राणा ने मिशन लाइफ पर पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभाग व क्षेत्रवार सांकेतिक कार्य योजना (पीओए) तैयार की गई है। उन्होंने पर्यावरण विभाग, एसएंडटी, एसपीसीबी, शिक्षा, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, कार्मिक विभाग, पीआरआई, युवा और खेल, जल शक्ति, महिला एवं बाल विकास विभाग, ऊर्जा, कृषि-बागवानी, परिवहन, पर्यटन, जनसंपर्क, भाषा, कला और संस्कृति को मिशन जीवन के लिए विभिन्न गतिविधियों को करने में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। - ईको-विलेज अभियान चलाया जायेगा उन्होंने बताया कि विभाग ईको-गांवों को एलआईएफई गांवों में बदलने के लिए मॉडल ईको-विलेज अभियान चलाएगा। उन्होंने राज्य पर्यावरण प्रदूषण कन्ट्रोल बोर्ड को उद्योगों सेे पर्यावरण प्रदूषण में सुधार लाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश भी दिए ।
प्रदेश में लोगों को उनके घरद्वार के निकट विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा प्रत्येक चिकित्सा खंड में सभी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक अस्पताल स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि लोगों को उपचार के लिए बड़े शहरों और प्रदेश से बाहर की ओर रुख न करना पड़े। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में प्रदेश के इंदिरा गांधी राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (आईजीएमसी) में लगभग 30.90 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित ट्रॉमा ब्लॉक लोगों को समर्पित किया। ट्रॉमा ब्लॉक में फिजियोथैरेपी वार्ड, स्पेशल वार्ड, आपातकालीन चिकित्सा इकाई, गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) बेड, आईसोलेशन वार्ड सहित सीटी स्कैन, एक्स-रे, सैंपल एकत्रीकरण केंद्र तथा पैथोलॉजी प्रयोगशाला की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही हैं। घायलों व गंभीर रोगियों के उपचार संबंधी वरीयता के लिए यहां अलग व्यवस्था की गई है। इस ब्लॉक के निर्मित होने से लोगों को गुणवत्तापूर्वक स्वास्थ्य सेवाएं मिलने के साथ साथ यहां सेवाएं देने वाले डॉक्टरों एवं अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को कार्य करने के लिए उचित वातावरण उपलब्ध हो रहा है। आईजीएमसी में मशीनरी तथा उपकरणों के लिए 12 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। यह उपकरण व मशीनरी, संस्थान के सर्जरी, ऑर्थोपीडिक्स, न्यूरो-सर्जरी, रेडियोलॉजी तथा एनस्थिसिया विभाग में उपयोग में लाए जाएंगे। इस सेंटर के साथ 175 बिस्तरों वाली चिकित्सा आपातकालीन सुविधा स्थापित करने के लिए सरकार ने 11 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अतिरिक्त टांडा मेडिकल कॉलेज में पैट स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। प्रदेश के जिला ऊना में 38 एकड़ के परिसर पर 450 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं वाले 300 बिस्तरों की क्षमता वाले पीजीआई सैटेलाइट केंद्र निर्मित किया जाएगा। यह सैटेलाइट सेंटर जिला ऊना में स्थापित होने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस केंद्र में 283 करोड़ रुपये से भवन निर्माण और शेष राशि का उपयोग उपकरण खरीदने के लिए किया जाएगा। प्रदेश सरकार के अथक प्रयासों के फलस्वरूप इस सेंटर के निर्माण के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय द्वारा वन स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस केंद्र के स्थापित होने से जिला ऊना, कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर जिलों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं उपलब्ध होंगी। राज्य सरकार विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की वन स्वीकृति के मामले प्राथमिकता के आधार पर केन्द्र सरकार के समक्ष उठाती रही है। मुख्यमंत्री ने कैंसर रोगियों की सुविधा के लिए हमीरपुर में केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना के लिए पैरवी की है। प्रदेश सरकार ने सरकारी उपकरणों की खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन गठित किया है। शिमला, टांडा, नेरचौक, हमीरपुर चिकित्सा महाविद्यालयों में रोबोटिक्स सर्जरी जैसे अत्याधुनिक कोर्स शुरू करवाए जाएंगे जिससे स्वास्थ्य अधोसंरचना सुदृढ़ होगी।
शिमला नगर निगम के महापौर व उप महापौर के चयन के लिये कांग्रेस ने 14 मई को सांय 5 बजे मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओक ओवर में सभी नव निर्वाचित पार्षदों की एक बैठक बुलाई हैं। बैठक में महापौर व उप महापौर के चयन के लिए सभी पार्षदों की अलग अलग राय के साथ उनके विचारों को सुना जाएगा। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रदेश मामलों के सह प्रभारी व शिमला नगर निगम चुनावों के लिये अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से बनाये गये पर्यवेक्षक तजेंद्र पाल सिंह बिट्टू विशेष तौर पर उपस्थित रहेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अतिरिक्त उद्योग मंत्री हर्षबर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर,ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, शिमला शहर के विधायक हरीश जनारथा भी उपस्थित रहेंगे। कांग्रेस महासचिव अमित पाल सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में कांग्रेस के सभी नव निर्वाचित पार्षदों को बुलाया गया है जिससे उनकी राय के बाद महापौर व उप महापौर का चयन सर्वसम्मति से किया जा सकें। ---
लोक निर्माण विभाग तथा युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न निर्माण कार्यों को गति प्रदान कर उपलब्ध धनराशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित बनाया जाए। विक्रमादित्य सिंह कल सांय सोलन में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।उन्होंने इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के सोलन वृत्त के कार्यों की समीक्षा भी की। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सोलन ज़िला हिमाचल का प्रवेश द्वार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सहित यहां भी विभिन्न सड़कों को हर समय ठीक रखा जाना ज़रूरी है ताकि पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों और प्रदेशवासियों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ज़िला में सड़कों का उचित रखरखाव सुनिश्चित बनाएं। उन्होंने कहा कि सोलन ज़िला बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन के साथ-साथ प्रदेश के बागवानीबहुल ज़िलों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सेब का अधिकांश विक्रय सोलन और परवाणु स्थित मण्डियों में हो रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी सेब सीज़न के दृष्टिगत ज़िला की सड़कों को दुरूस्त रखा जाए। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं के लिए समुचित धन की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न परियोजनाओं को समय पर पूर्ण करने का प्रयास करें ताकि परियोजना लागत में वृद्धि और अनावश्यक देरी से बचा जा सके। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने के कार्य में तेजी लाने और वन संबंधी स्वीकृतियों के मामलों को शीघ्र निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने उपायुक्त सोलन को निर्देश दिए कि वन संबंधी मामलों की स्वीकृतियों के विषय में नियमित बैठक आयोजित करें ताकि योजनाओं के निर्माण में देरी न हो और केन्द्रीय स्तर पर मामले स्वीकृति के लिए शीघ्र प्रेषित किए जा सकें। उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, प्रमुख अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग सुरेश कपूर, लोक निर्माण विभाग सोलन वृत्त के अधिशाषी अभियंता अजय शर्मा, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी, सोलन वृत्त के सभी अधीक्षण अभियंता, एस.डी.ओ और कनिष्ठ अभियंता बैठक में उपस्थित थे।


















































