हिमफैड अध्यक्ष गणेश दत्त ने गत दिवस शिमला के ठियोग, गुम्मा, खड़ापत्थर और सावड़ा में हिमफैड के गोदामों का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान सभी गोदामों का रिकाॅर्ड सही पाया गया। उन्होंने स्थानीय बागवानों तथा किसानों को खाद्य तथा कृषि संबंधी मशीनों तथा औजारों के बारे में जानकारी दी। इसके अतिरिक्त गणेश दत्त ने ठियोग, गाजटा, जोणी, खड़ापत्थर, अंटी, नन्दपुर, छाजपुर, पांदली, चैथला, शीलघाट तथा संतोषीनगर स्थित एमआइएस सेब एकत्रीकरण केन्द्रों का भी औचक निरीक्षण किया। सभी एकत्रीकरण केन्द्रों में सेब की बोरियां सही पाई गईं। उन्होंने स्थानीय बागवानों को हिमफैड द्वारा फलों के रख-रखाव के लिए प्रस्तावित सीए स्टोर के निर्माण की योजना के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान स्थानीय बागवानों ने गणेश दत्त से आग्रह किया कि हिमफैड भविष्य में सेब की खाली पेटियां भी उपलब्ध करवाए। गणेश दत्त ने उपस्थित बागवानों को आश्वासन दिया कि हिमफैड प्रदेश के किसानों तथा बागवानों को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास करेगा। उन्होंने अंटी में सेब नीलामी स्थल का भी निरीक्षण किया तथा यहां कार्यरत हिमफैड कर्मचारियों से मिले। निरीक्षण के दौरान हिमफैड के निदेशक भीम सिंह झौटा तथा स्थानीय प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं। इन शब्दों को समझने के लिए गुरुकुल युग में प्रवेश करना होगा। समय परिवर्तन होने के बाद गुरु शब्द को बोलने का नजरिया और गुरुओं के प्रति भावना में परिवर्तन भी हो गया। राष्ट्र निर्माण में समर्पित गुरुओं ने राष्ट्र के विकास में अहम योगदान दिया है। इस विषय पर जरुर अपने विचारो का लेख के माध्यम से सार्वजानिक करूंगा। हम शिक्षक दिवस मना रहे है। शिक्षक दिवस पर राष्ट्र को समर्पित, सभी शिक्षको को हार्दिक बधाई। शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूजनीय रहा है। कोई उसे गुरु कहता है, कोई शिक्षक कहता है, कोई आचार्य कहता है, तो कोई अध्यापक या टीचर कहता है ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित करते हैं, जो सभी को ज्ञान देता है, सिखाता है और जिसका योगदान किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है। सही मायनो में कहा जाये तो एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढ़ता है। शिक्षक ही समाज की आधारशिला है। एक शिक्षक अपने जीवन के अन्त तक मार्गदर्शक की भूमिका अदा करता है और समाज को राह दिखाता रहता है, तभी शिक्षक को समाज में उच्च दर्जा दिया जाता है। माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता, उनका कर्ज हम किसी भी रूप में नहीं उतार सकते, लेकिन शिक्षक ही हैं जिन्हें हमारी भारतीय संस्कृति में माता-पिता के बराबर दर्जा दिया जाता है क्योंकि शिक्षक ही हमें समाज में रहने योग्य बनाता है। इसलिये ही शिक्षक को समाज का शिल्पकार कहा जाता है। गुरु या शिक्षक का संबंध केवल विद्यार्थी को शिक्षा देने से ही नहीं होता बल्कि वह अपने विद्यार्थी को हर मोड़ पर उसको राह दिखाता है और उसका हाथ थामने के लिए हमेशा तैयार रहता है। विद्यार्थी के मन में उमड़े हर सवाल का जवाब देता है और विद्यार्थी को सही सुझाव देता है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदा प्रेरित करता है। एक शिक्षक या गुरु द्वारा अपने विद्यार्थी को स्कूल में जो सिखाया जाता है या जैसा वो सीखता है वे वैसा ही व्यवहार करते हैं। उनकी मानसिकता भी कुछ वैसी ही बन जाती है जैसा वह अपने आसपास होता देखते हैं। इसलिए एक शिक्षक या गुरु ही अपने विद्यार्थी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। सफल जीवन के लिए शिक्षा बहुत उपयोगी है जो हमें गुरु द्वारा प्रदान की जाती है। विश्व में केवल भारत ही ऐसा देश है जहाँ पर शिक्षक अपने शिक्षार्थी को ज्ञान देने के साथ-साथ गुणवत्तायुक्त शिक्षा भी देते हैं, जोकि एक विद्यार्थी में उच्च मूल्य स्थापित करने में बहुत उपयोगी है। जब अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति आता है तो वह भी भारत की गुणवत्तायुक्त शिक्षा की तारीफ करता है। किसी भी राष्ट्र का आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास उस देश की शिक्षा पर निर्भर करता है। अगर राष्ट्र की शिक्षा नीति अच्छी है तो उस देश को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता अगर राष्ट्र की शिक्षा नीति अच्छी नहीं होगी तो वहाँ की प्रतिभा दब कर रह जायेगी बेशक किसी भी राष्ट्र की शिक्षा नीति बेकार हो, लेकिन एक शिक्षक बेकार शिक्षा नीति को भी अच्छी शिक्षा नीति में तब्दील कर देता है। शिक्षा के अनेक आयाम हैं, जो किसी भी देश के विकास में शिक्षा के महत्व को अधोरेखांकित करते हैं। एक शिक्षक द्वारा दी गयी शिक्षा ही शिक्षार्थी के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है। शिक्षकों द्वारा प्रारंभ से ही पाठ्यक्रम के साथ ही साथ जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है। शिक्षा हमें ज्ञान, विनम्रता, व्यवहारकुशलता और योग्यता प्रदान करती है। शिक्षक को ईश्वर तुल्य माना जाता है। आज भी बहुत से शिक्षक शिक्षकीय आदर्शों पर चलकर एक आदर्श मानव समाज की स्थापना में अपनी महती भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ-साथ ऐसे भी शिक्षक हैं जो शिक्षक और शिक्षा के नाम को कलंकित कर रहे हैं, ऐसे शिक्षकों ने शिक्षा को व्यवसाय बना दिया है, जिससे एक निर्धन शिक्षार्थी को शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है और धन के अभाव से अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। शिक्षक वह पथ प्रदर्शक होता है जो हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है। आज के समय में शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण हो गया है। शिक्षा का व्यवसायीकरण और बाजारीकरण देश के समक्ष बड़ी चुनौती है। पुराने समय में भारत में शिक्षा कभी व्यवसाय या धंधा नहीं थी। गुरु एवं शिक्षक ही वो हैं जो एक शिक्षार्थी में उचित आदर्शों की स्थापना करते हैं और सही मार्ग दिखाते हैं। एक शिक्षार्थी को अपने शिक्षक या गुरु प्रति सदा आदर और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। किसी भी राष्ट्र का भविष्य निर्माता कहे जाने वाले शिक्षक का महत्व यहीं समाप्त नहीं होता क्योंकि वह ना सिर्फ हमको सही आदर्श मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं बल्कि प्रत्येक शिक्षार्थी के सफल जीवन की नींव भी उन्हीं के हाथों द्वारा रखी जाती है। हम भली भांति जानते हैं कि पुरातन काल में भारतीय गुरुकुलों में जो शिक्षा प्रदान की जाती थी, वह निश्चित रूप से बच्चों का समग्र विकास करने वाली ही थी। इतना ही नहीं वह शिक्षा विश्व स्तरीय ज्ञान का द्योतक भी थी, इसलिए विश्व के कई देश भारत के शिक्षालयों में ज्ञान और विज्ञान की उच्च स्तरीय शिक्षा ग्रहण करने आते थे। हमें अब उसी शिक्षा पद्धति की ओर कदम बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। अभी भारत सरकार ने इस दिशा में सार्थक कदम बढ़ाया है। यह शिक्षा इंडिया को भारत बनाने में सकारात्मक सिद्ध होगी, यह संकेत दिखाई देने लगे हैं। शिक्षको को भी चाहिए कि वह इस नीति को आत्मसात कर बच्चों के भविष्य को वह दिशा प्रदान करें जो विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। क्योंकि शिक्षक संस्कारों का एक प्रकाश स्तंभ है, जो विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान की किरणें फैलाता है।शिक्षा वही है, जो जीवन में नैतिक मूल्यों का विकास करे, इसके साथ ही सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति कर्तव्य पालन का बोध कराए। राष्ट्रीय दायित्व का बोध केवल इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों के अध्ययन और अध्यापन से ही हो सकता है। वर्तमान में यह देखने में आ रहा है कि हम शिक्षा तो ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन पिछले पाठों को भूलते जा रहे हैं। इसका एक मूल कारण हमारे देश की शिक्षा नीति है। आज से 73 वर्ष पूर्व जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ, तब हमारी शिक्षा नीति को भारतीय बनाने पर जितना जोर दिया जाना चाहिए, उतना नहीं दिया गया। शिक्षा के क्षेत्र में हम पूरी तरह से भटक गए। इसलिए आज की पीढ़ी में न तो भारतीय संस्कारों का बोध है और न ही नैतिकता के जीवन मूल्य ही हैं।शिक्षा वही सार्थक होती है, जो अपने देश के लिए चरित्रवान समाज और सकारात्मक सोच का निर्माण कर सके। भारत में अभी तक जो शिक्षा दी जा रही थी, उसमें भारत के मानबिन्दुओं का उपहास उड़ाया गया और विदेशियों का गुणगान किया गया। इसमें ऐसे भी विदेशी शामिल किए गए, जिन्होंने भारतीयता को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसे चरित्रों के पठन पाठन से ही आज की पीढ़ी भारत के संस्कारों से दूर होती जा रही है। लेकिन हमारे देश के शिक्षकों को भी यह समझना चाहिए कि छात्रों को क्या शिक्षा दी जाए।हमारे देश में शिक्षाविद डॉ. राधाकृष्णन के जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन आज के विद्यार्थियों को यह भी नहीं पता होगा कि डॉ. राधाकृष्णन जी के जीवन शिक्षकों के एक आदर्श है, एक पाथेय है। जिस पर चलकर हम शिक्षक की वास्तविक भूमिका का सही ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। सन 1962 में जब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ विद्यार्थी उनके पास उनका जन्मदिन मनाने की स्वीकृति लेने गए। उस समय राधाकृष्णन जी ने कहा मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाए तो मुझे अति प्रसन्नता एवं गर्व महसूस होगा। डॉ. राधाकृष्णन का शिक्षकों के बारे में मत था कि शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे। वास्तविक शिक्षक तो वह है जो छात्र को आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करे। आज की शिक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि जीवन में पैसे कैसे कमाए जाते हैं, इसे ही ध्यान में रखकर दी जा रही है। कहा जा सकता कि जो शिक्षा दे रहे हैं, वे इसे व्यवसाय मान रहे है और जो ग्रहण कर रहे वे इसे आय प्राप्त करने का साधन। ऐसी शिक्षा चरित्र का निर्माण नहीं कर सकती। इसलिए शिक्षकों को चाहिए कि वे छात्रों को ऐसी शिक्षा भी दें, जो उनके जीवन को संवार सके। क्योंकि जिस शिक्षा से संस्कारों का निर्माण होता है, वही जीवन के काम आती है जिनकी याद में हम शिक्षक दिवस मनाते हैं, वे चाहते थे कि शिक्षा विद्यार्थियों को सही और गलत का बोध कराने वाली होना चाहिए। वास्तव में डॉ. राधाकृष्णन जी भारतीय संस्कृति के संवाहक थे। उन्होंने अपने लेखों और प्रबोधन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की सुगंध को हमेशा ही प्रवाहित किया। एक बार शिकागो विश्वविद्यालय में उनको धर्म शास्त्रों पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जहां उन्होंने भारत के ज्ञान के बारे में प्रेरणास्पद उद्बोधन दिया। इस उद्बोधन के बाद डॉक्टर राधाकृष्णन जी की ख्याति वैश्विक धरातल पर और भी बढ़ती चली गई और इसी कारण उन्हें भारत एवं अन्य देशों की प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। उसके बाद विश्व में भारत का गौरव गान होने लगा। उनके भाषणों में सिर्फ भारत ही होता था। वह जब बोलते थे तब ऐसा लगता था कि यही भारत की वाणी है। वह वास्तव में भारत रत्न थे। इसलिए भारत सरकार ने सन 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। शिक्षा अत्यंत ही अनमोल एवं मूल्यवान है। जिससे विद्यार्थी अपने स्वयं के ज्ञान का विस्तार तो करता ही है, साथ ही देश को भी मजबूत करता है। डॉ. राधाकृष्णन ने अपनी पुस्तक आधुनिक भारत के राजनीतिक विचारक में भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में शिक्षकों और शिक्षा के महत्व को बताया है। डॉक्टर राधाकृष्णन के अनुसार शिक्षक देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसी वजह से अधिक सम्मान के योग्य होते हैं। भारत में सनातन काल से गुरु और शिष्य का संबंध समर्पण की भावना से परिपूर्ण रहा है। गुरु देश के भविष्य को संवारता है। वर्तमान पीढ़ी देश का भविष्य है। गुरु जैसे संस्कार युवा पीढ़ी को देंगे वैसा ही देश का चरित्र बनेगा। -डॉ मामराज पुंडीर -राजनीतिक शास्त्र प्रवक्ता
पहाड़ी भाषा एवं संस्कृति को संरक्षित रखने की बेहतरीन सोच के साथ, तेज़ी से आगे बढ़ रहा है दी मॉडर्न फोक नोट। हाल ही में रिलीज़ हुए दी मॉडर्न फोक नोट 6 को दुनिया भर में पसंद किआ जा रहा है । ए सी भरद्वाज द्वारा गाई गई इन सीरीज को प्रदेश और देश के साथ साथ विश्व के भी अन्य 35 देशों की जनता से भरपूर प्यार मिल रहा है । इस प्यार की ख़ास वजह यह भी है कि मॉडर्न फोक नोट एक नई सोच ले कर सामने आया है जिसमे उन्होंने युवाओं के बीच लोक संगीत का रुझान बढ़ाने के लिए, मॉडर्न बीट्स एवं पहाड़ी गानों का मिश्रण किया है। मॉडर्न फोक नोट की 5 सीरीज पहले ही यू ट्यूब पर आ चुकी हैं जिन्हें दुनिया भर से बहुत प्यार एवं सम्मान मिला है । मॉडर्न नोट 6 इसी सीरीज को आगे बढ़ाते हुए प्रसारित किया गया , एवं कुछ ही दिनों में 3 लाख से भी ज़्यादा लोगों द्वारा देखा जा चूका है।
हिमाचल के चंबा में दो स्वास्थ्य कर्मियों समेत तीन कोरोना पाॅजिटिव मरीज पाए गए है। इनमें एक सीआईडी यूनिट चंबा का कर्मचारी भी शामिल है। 4 सितम्बर को जाँच के लिए कुल 239 सैंपल लिए गए थे जिसमे से तीन पोसिटिव पाए गए है, वहीं 176 सैम्पल की रिपोर्ट आना अभी बाकि है। पॉजिटिव पाए गए तीन व्यक्तियों में से एक 26 वर्षीय महिला है जो की JLNMC चम्बा की स्वस्थ्य कर्मी है। DIET सरु का एक 26 वर्षीय स्वास्थ्य कर्मी जो की इंस्टीटूशनल क्वारंटाइन में था, और एक 41 वर्षीय CID यूनिट चम्बा का कर्मचारी भी कोरोना पोसिटिव पाया गया है। चम्बा जिले में संक्रमितों का आंकड़ा 478 पहुंच गया है। 112 सक्रिय मामले हैं और 361 मरीज ठीक हो चुके हैं। इसके अलावा मंडी से 12 नए मामले, काँगड़ा से 9 नए मामले और कुल्लू से 1 नया पॉजिटिव मामला सामने आया है जिनकी पूरी जानकारी आना अभी बाकी है। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा 6855 पहुंच गया है। 1823 सक्रिय मामले हैं। 4932 मरीज ठीक हो गए हैं। 45 मरीज राज्य के बाहर चले गए हैं और 51 की मृत्यु हो चुकी है।
The State Cabinet in its meeting held here today under the Chairmanship of Chief Minister Jai Ram Thakur decided to continue with registration for people entering the State till 15th September, 2020. It also decided to open big temples/religious places of the State by 10th September, 2020. Language, Art and Culture Department will prepare SOP in this regard. It was decided that the quarantine requirement be reduced from 14 days to 10 days. The District Administration would strictly enforce use of masks and social distancing in the field. The Cabinet decided to provide wheat flour and rice to the income tax payee APL Consumers under Public Distribution System as was being provided to them earlier on APL rates and provide them pulses, edible oil, salt and sugar on zero subsidy on actual rates. To address the vision of 'Aatma Nirbhar Bharat Abhiyan' significantly by creating a sustainable ecosystem of affordable rental housing solutions for urban migrants/poor and to achieve overall objective of 'Housing for All', the State Cabinet decided to request Ministry of Housing and Urban affairs, Government of India to sign Memorandum of Agreement (MoA) related to Affordable Rental Housing Complexes Scheme with the State Government. The Cabinet gave its approval to open Sub Treasury at Nagrota Bagwan in Kangra district alongwith creation of five posts of different categories to manage this Sub Treasury. It gave its consent to open Sub Tehsil at Bagachanogi in Tehsil Thunag of Mandi district alongwith creation of 12 posts of different categories. The newly created Sub Tehsil will have six patwar circles viz. Shawa, Kalhani, Kalipar, Shilhibagi, Shiwakhad and Jainshla. The Cabinet also gave its nod to open Patwar circle Jainshla under Tehsil Thunag of Mandi district keeping in view the tough geographic conditions of the area. It decided to fill up 10 posts of class IV employees in Panchayati Raj Department. It gave its approval to transfer Gram Panchayat Kot from Police Station Shimla East (Chhota Shimla) to Police Station West (Boileauganj) in district Shimla to facilitate the people. Presentations were also made by the Industries department before the Cabinet regarding proposed 'Bulk Drug Pharma Park', 'Energy Charges in the State' and on 'Brick Kiln and their related issues'.
प्रदेश में कोरोना से एक और मौत हो गई है। डॉ वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में एक 70 वर्षीय महिला ने वीरवार देर रात दम तोड़ दिया। सिरमौर में कोरोना से यह तीसरी मौत हुई है। मृतक महिला पांवटा साहिब की रहने वाली थी जिसे 1 सितंबर को पांवटा साहिब सिविल अस्पताल से डॉ वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। डायबटीज व हाईपरटेंशन रोग से ग्रसित इस महिला का नाहन मेडिकल कॉलेज में कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। 3 सितंबर को देर रात आइसोलेशन वार्ड में भर्ती इस महिला ने दम तोड़ दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सिरमौर डॉ केके पराशर ने बताया कि पांवटा साहिब में कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत मृतक का अंतिम संस्कार किया गया है। इसी के साथ प्रदेश में अब कोरोना संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा 48 हो गया है।
प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उनकी तबीयत ख़राब चल रही थी जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट हुआ और वीरवार को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उनके संक्रमित आने के बाद उनके परिवार के सदस्यों को क्वारंटाइन कर दिया गया है और उनकी कॉन्टैक्ट हिस्ट्री ली जा रही है। इससे पूर्व सरकार के ऊर्जा मंत्री भी संक्रमित पाए गए थे जो अब स्वस्थ हो चुके हैं।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन हिमाचल प्रदेश की इकाई ने प्रदेश सरकार व विश्विद्यालय प्रशासन से मांग की है कि महाविद्यालय के प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को अगली कक्षा में प्रोमोट किया जाए। एनएसयूआई के राष्ट्रीय समन्वयक व प्रदेश महासचिव बलविंदर सिंह बल्लू का कहना है कि प्रदेश सरकार व विश्विद्यालय प्रशासन महाविद्यालय में पढ़ने वाले प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों के साथ खिलवाड़ कर रही है। महाविद्यालय प्रशासन द्वारा अगली कक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। छात्र परेशान है कि वो पिछली कक्षा की परीक्षा का पढ़े या अगली कक्षा के पाठ्यक्रम का, इससे छात्रों की पढ़ाई में असमंजस का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले मंडी महाविद्यालय व धर्मशाला महाविद्यालय में भी कोरोना ने दस्तक दे दिया है, जिससे कोविड-19 के फैलने के डर से छात्र चिंता में हैं और अपनी परीक्षाओं की पढ़ाई भी अच्छी तरह से नहीं कर पा रहें हैं। कोविड-19 के बढ़ते हुए मामलों को देखतें हुये छात्रों के स्वास्थ्य व भविष्य की चिंता करते हुऐ, प्रदेश सरकार को प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को अगली कक्षा में प्रोमोट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जल्द से जल्द प्रदेश सरकार प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को अगली कक्षा में प्रोमोट करने की नोटिफिकेशन नहीं निकालता है तो एनएसयूआई पूरे प्रदेश में विश्विद्यालय प्रशासन व प्रदेश सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेगी।
शिमला में बीती रात अश्वनी खड्ड के पास एक कार दुर्घटनाग्रस्त हुई है। जानकारी के अनुसार कार में 3 लोग सवार थे। सूचना मिलते ही पुलिस चौकी जुन्गा से पुलिस कर्मचारी मौके पर पहुंचे। मौके पर घायल सचिन और शुभम को पुलिस ने आईजीएमसी इलाज के लिए भेजा जबकि अविनाश नामक युवक की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच कर रही है। इस हादसे में जान गंवाने वाले पुलिस कांस्टेबल की पहचान अविनाश के रूप में हुई है और वह राज्यपाल की पायलट गाड़ी का चालक था।
रोहडू के विधायक व हिमाचल प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव मोहन लाल ब्राक्टा और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी रोहडू के अध्यक्ष करतार सिंह कुल्ला व ब्लॉक् कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि पिछले पाँच दशक से वे राजनीति में थे, जिसमें वह कांग्रेस पार्टी के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रह कर पार्टी के लिए कार्य करते रहे। विधायक मोहनलाल ब्राक्टा ने इस मौके पर उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए कि कोविड-19 मरीजों के ईलाज में शामिल चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ खुद भी संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षा के सम्पूर्ण उपाय अपनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्षण रहित रोगियों को होम आइसोलेशन में रखा जाना चाहिए। स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित रूप से ऐसे रोगियों की स्वास्थ्य जांच करनी चाहिए। चिकित्सकों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को बेहतर क्वारंटीन सुविधा भी प्रदान की जानी चाहिए। औद्योगिक ईकाइयों को अपने कर्मचारियों की कुल संख्या के न्यूनतम 10 प्रतिशत के साथ अपनी क्वारंटीन सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए। छोटी औद्यागिक ईकाइयों को पूल के माध्यम से इस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जय राम ठाकुर ने कहा कि अब तक 2 लाख 14 हजार 182 लोगों का कोरोना संक्रमण परीक्षण किया गया है जिनमें से 6 हजार 116 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 267.7 प्रति लाख राष्ट्रीय औसत की तुलना में हिमाचल प्रदेश में कोरोना के प्रति लाख 87.3 मामले हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कोविड-19 के प्रति सौ मामलों में 0.58 मृत्यु दर है जो राष्ट्रीय औसत प्रति सौ मामलों में 1.7 की तुलना में कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कोविड-19 महामारी से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए राज्य को 500 वेंटिलेटरस, 1.60 लाख पीपीई किट और 3 लाख एन-95 मास्क प्रदान किए हैं। मरीजों के सहायक और विद्यार्थी/परीक्षार्थी जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण प्रदेश में आवागमन करने की आवश्यकता है, उन्हें क्वारंटीन नियमों से छूट की सुविधा प्रदान की जाएगी बशर्ते वे 72 घण्टों के भीतर वापस राज्य में प्रवेश करते हैं। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही राज्य में मंदिरों को खोलने पर विचार कर रही है, जिसके लिए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीघ्र ही एसओपी तैयार की जाएगी। राज्य में प्रवेश प्रक्रिया सरल बनाने के लिए उपायुक्तों को निर्देशित किया गया है, परन्तु साथ ही ई-पास की प्रक्रिया प्रदेश में लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोविड-19 महामारी के कारण राज्य की विकास गति प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में कोरोना वायरस का जीवनकाल बढ़ जाता है, इसलिए इस महामारी से बचने के लिए और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। कोरोना योद्धा जैसे चिकित्सक, पैरा-मेडिकल स्टाफ, पुलिस तथा स्वास्थ्य कर्मियों में इस वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. राजीव सैजल ने कहा कि परीक्षण सुविधाओं पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मामलों में गिरावट लोगों की सक्रिय सहभागीदारी और सामाजिक दूरी, फेस मास्क तथा सेनिटाइजर के उपयोग बारे जागरूकता से प्राप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक तथा अन्य पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए पर्याप्त क्वारंटीन सुविधा प्रदान करना जरूरी है। मुख्य सचिव अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आर.डी. धीमान, प्रधान सचिव जे.सी. शर्मा व ओंकार शर्मा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, विशेष सचिव डी.सी. राणा तथा अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने कोरोना महामारी के चलते कुलपति कप ज्ञापन सौंपा । विद्यार्थियों ने मांग की कि उनकी उपर्युक्त मांगों को उठाया जाए अन्यथा संगठन द्वारा उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। उनकी मांगें थी कि - 1) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतर्गत सभी विभागों से कोरोना महामारी के दौरान सिर्फ ट्यूशन फीस ही ली जाए। 2) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सत्र 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया में आर्थिक पिछड़ा वर्ग (EWS) के आरक्षण को सम्मिलित कर दाखिलें दिए जाएँ। 3) PG परीक्षाओं में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम के अनुसार ही परीक्षाएँ करवाई जाएँ। 4) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रणाली सुदृढ़ की जाए। 5) Hostel Continuity की फीस को इस सत्र के लिए माफ किया जाए। 6) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के Placement Cell को दुरुस्त कर श्रम एवं रोजगार विभाग हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से जोड़ा जाए, ताकि महामारी की परिस्थिति में नए Pass-out छात्रों को रोजगार उपलब्ध हो सके। 7) UG के गणित विषय के परीक्षा मूल्यांकन में आ रही अनियमितताओं को दूर किया जाए तथा UG के 2016 बैच में Math विषय के सभी पेपरों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। 8) Ph.D में Enrolled हुए शोधार्थियों के course work की परीक्षा को शीघ्र करवाया जाए। 9) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं गैर शिक्षक पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। 10) विश्वविद्यालय में research से संबंधित Plagiarism को चैक करने के लिए सॉफ्टवेयर की व्यवस्था की जाये।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री को मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता जानती है कि कौन झूठा है, कांग्रेस पार्टी ने पिछले 60 वर्षों से देश को धोखा दिया और केवल आम जनता को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। राष्ट्रीय स्तर पर या राज्य स्तर पर कांग्रेस के नेता झूठ का एक गट्ठा हैं। दशकों तक कांग्रेस ने समाज के सभी वर्गों से वादा किया कि वे राष्ट्र में समृद्ध होंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई है, समाज के सभी वर्ग समृद्ध हुए हैं। भारत सरकार ने हर स्तर पर समय-समय पर समाज के सभी वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की है। ये योजनाएँ केन्द्रीय, राज्य विशेष या केंद्र और राज्यों के बीच एक संयुक्त सहयोग हो सकती हैं। भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, कांग्रेस ने अपने शासन के दौरान घोटालों के बाद घोटाले की अनुमति दी जिसके परिणामस्वरूप पिछले 70 वर्षों में 48,20,69,00,00,000 रुपये की चौंका देने वाली क्षति हुई है। पार्टी, अपने सहयोगियों के साथ, 2 जी, बोफोर्स, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर, महाराष्ट्र सिंचाई, राष्ट्रमंडल खेल, कोयला घोटाले और कई अन्य घोटालों के एक के बाद एक कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगते रहे। कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं पर कई करोड़ों के भ्रष्टाचार के कई मामलों में करोड़ों रुपये का घोटाला करने का आरोप है। अगर कथित घोटालों में कांग्रेस की बड़ी तोपो को शामिल किया गया है, तो यह राशि 1948 के बाद से 4.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। कांग्रेस पार्टी जिसे भ्रष्टाचार की जननी के रूप में जाना जाता है, जो पार्टी अपने दुराचरण के लिए जानी जाती है, उसे किसी भी राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
इस बार यूथ कांग्रेस के चुनावों में रोहड़ू से कई उम्मीदवार मैदान है। चुनाव में सभी उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर चल रही है। यूथ कांग्रेस रोहड़ू विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में है, जिनमें अशोक डंडा ग्राम पंचायत भलाड़ा से जो मंडलगढ़ क्षेत्र से संबंध रखते है। दूसरे उम्मीदवार बलदेव सिंठीयाण है, जो छौहारा क्षेत्र के रणसार वैली से संबंध रखते है। अजय कशवाल भी छौहारा क्षेत्र से ही संबंध रखते है। इनमें बलदेव सिंठियाण और अजय कशवाल दोनों ही पहले एनएसयूआई के भी काफी सक्रीय कार्यकर्ता रहे है। वहीं अशोक डंडा भी युवा कांग्रेस के पूर्व कर्मठ कार्यकर्ता रहे है। यूथ कांग्रेस में जिला अध्यक्ष पद के लिए जिला के अन्य हिस्सों के साथ रोहडू से दो उम्मीदवार मैदान में है। रविंदर सिंह ठाकुर इससे पहले युवा कांग्रेस रोहड़ू के ब्लॉक अध्यक्ष रह चुके है। वहीं दूसरे उम्मीदवार के रूप में हंस राज जून्टा है। दोनों ही इस पद के प्रबल दावेदार मान जा रहे है। इसके अलावा इस बार यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के लिए रोहडू से एक उम्मीदवार एलोद चौहान है। एकमात्र उम्मीदवार होने के कारण व प्रदेश के कांग्रेस व यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ अच्छे संबंध के चलते इन्हे भी प्रबल दावेदार माना जा रहा है। युकां के प्रदेश प्रवक्ता विजय चौहान ने बताया कि इस बार लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत सभी उम्मीदवारों को निष्पक्ष एवं पारदर्शिता के साथ जिमेवारी देने के लिए डीजीटल तकनीक से चुनाव करवाए जा रहें हैं।
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष एल डी चौहान वे रोहडू सर्कल के अध्यक्ष नरेंदर सिंह की अध्यक्षता में जल रक्षको की मांगों को लेकर जलशक्ति विभाग मंत्री महेंदऱ सिंह ठाकुर से मिला। इस उपलक्ष्य पर मंत्री का 12 साल पूरे कर चुके जल रक्षकों को अनुबंध पर लाने व शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले जल रक्षकों की फाइल मंत्री परिषद में लाने के आदेश मौके पर करवाए गए। उन्होंने बताया कि अब जल शक्ति विभाग ने भी 12 साल पूरे कर चुके जल रक्षकों को अनुबंध पर लाने के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश के सभी जल रक्षक और अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के सभी कर्चारी जल शक्ति विभाग मंत्री एवं मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है। वहीं सचिव जल शक्ति विभाग नवीन पुरी का धन्यवाद करते है और साथ ही संघ ने मांग की है कि आने वाले कैबीनेट बैठक में शिक्षा के कारण छूटे गए जल रक्षकों को भी एक मुश्त छूट देकर अनुबंध पर लाया जाए। प्रतिनिधिमंडल में सिकंदर, विनोद, सुरेंदर, चमन लाल, गुरूदेव, संजीव शर्मा, अजय कुमार, पन्ना लाल, गुड्डू राम, जैंस राम, नानक चंद सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।
निदेशक सेना भर्ती कर्नल तनवीर सिंह मान ने बताया कि पड्डल मैदान जिला मण्डी में 6 अक्तूबर से 14 अक्तूबर, 2020 तक सेना भर्ती कार्यालय मण्डी द्वारा जिला शिमला, सोलन, सिरमौर और किन्नौर के युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह भर्ती सैनिक तकनीकी (पुरुष), सैनिक तकनीकी (गोला बारुद परीक्षक) (एटी)(पुरुष), सैनिक तकनीकी (उड्डयन) (एक्स गु्रप)(पुरुष) तथा सैनिक तकनीकी (उपचार सहायक) (एन ए) (पुरुष) पदों के लिए होगी। उन्होंने बताया कि मापदण्ड और योग्यता के लिए सेना भर्ती कार्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी 06 अगस्त, 2020 की अधिसूचना भारतीय सेना की वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर देखें। उल्लेखनीय है कि जो उम्मीदवार सेना भर्ती रामपुर बुशैहर शिमला में सैनिक तकनीकी वर्ग के लिए सेना भर्ती कार्यालय, शिमला द्वारा 16 फरवरी, 2020 को जारी अधिसूचना के तहत पहले पंजीकृत हो चुके है, उनको भी दोबारा पंजीकरण करना है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने सोमवार को पीजी परीक्षा के लिए प्रदेश में परीक्षा केंद्रों में बढ़ोतरी करने हेतू परीक्षा नियंत्रक जे एस नेगी को ज्ञापन सौंपा। इकाई उपाध्यक्ष विशाल सकलानी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पीजी परीक्षा हेतु प्रदेश में 38 परीक्षा केंद्र स्थापित किए हैं लेकिन कुछ जिलों में सिर्फ एक या दो परीक्षा केंद्र ही हैं, ऐसे में छात्रों को लम्बा सफर तय करके परीक्षा केंद्र आना होगा जिससे कोरोना फैलने का खतरा रहेगा, साथ साथ ही साथ छात्रों को रहने के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ेगी। चम्बा जिले में सिर्फ बनीखेत और चम्बा में ही परीक्षा केंद्र है। ऐसे में भरमौर, तिस्सा इत्यादि क्षेत्रों से छात्रों को चम्बा आना पड़ेगा जिससे छात्रों को कोरोना होने का खतरा भी बढ़ जाएगा और अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी छात्रों पर पड़ेगा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने मांग रखी कि कोरोना महामारी के चलते छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके नजदीक में परीक्षा केंद्र स्थापित हों ताकि सामाजिक दूरी रहे।
प्रदेश वन विभाग को सोमवार को नया प्रधान मुख्य अरण्यपाल (पीसीसीएफ) हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स मिल गया है। सविता शर्मा हिमाचल की पहली महिला पीसीसीएफ हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स बनीं हैं। मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। डॉ. सविता 1985 बैच की अधिकारी हैं। अजय कुमार सोमवार को रिटायर हो गए हैं।
Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry (UHF), Nauni has extended the last date for admissions for all its undergraduate programmes. The last date for online submission of application forms for Undergraduate Programmes- B Sc (Hons) Horticulture/ Forestry/ B Tech Biotechnology (both normal and self-financing seats) has been extended till 3rd September, 2020. The date for filling up of counselling proformas for UG programmes have also been extended till 3rd September, 2020. All the candidates who have filled online application forms have been advised to download the counselling proforma from the university website and fill it as per the instructions mentioned on it. Those students who have applied for both normal as well as self-financing seats need to fill two separate proformas. A single page pdf file must be created, containing scanned filled counselling proforma along with legible documents mentioned in the checklist as provided in the counselling proforma. For normal seats: the scanned pdf file must be sent through email to uhf.ugnormal20@gmail.com and for self-financing seats, the scanned pdf file must be sent by email to uhf.ugselffin20@gmail.com on or before 3rd September, 2020. Every candidate must submit the duly filled counselling proforma in order to be considered for the admission.
शिमला:राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय जो राज्य रेडक्रॅास सोसायटी के अध्यक्ष भी है ने आज राजभवन में राज्य रेडक्राॅस सोसायटी की ओर से अस्पताल प्रतिनिधियों, नगर निगम शिमला के श्रमिकों और सफाई कर्मचारियों को साबुन के डिब्बे वितरित किए। नगर निगम शिमला के अतिरिक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने निगम की ओर से 21 डिब्बे प्राप्त किए, जिन्हें सफाई कर्मचारियों को वितरित किया जाएगा। राज्यपाल ने मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास अस्पताल शिमला, रेडक्रॅास डिस्पेन्सरी टूटीकंडी और कमला नेहरू अस्पताल के मरीजों और सफाई कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य सामग्री के 9 डिब्बे वितरित किए। राज्यपाल के सचिव तथा राज्य रेडक्राॅस सोसायटी के महासचिव राकेश कवंर और अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मण्डी जिला के सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र में 94.14 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखीं व लोकार्पण किए। जय राम ठाकुर ने 10.4 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित राजकीय महाविद्यालय बल्दवाड़ा के भवन, 2.97 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पौंटा, पटरीघाट और तहसील बल्दवाड़ा के आस-पास के गांव की बस्तियों के लिए 99 लाख रुपये की उठाऊ जलापूर्ति योजना समर्पित की। मुख्यमंत्री ने बलद्वाड़ा, भदरोटा और गोपालपुर खण्ड के भागों के लिए 51.76 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली बहु गांव ग्रामीण पाईप द्वारा जलापूर्ति योजना, 20.35 करोड़ रुपये की लागत से सरकाघाट मसरैन बग्गी सड़क के स्तरोन्यन, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला थौना में 1.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली विज्ञान प्रयोगशाला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पौंटा में 1.32 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली विज्ञान प्रयोगशाला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिस्सा में 1.04 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले अतिरिक्त भवन, तहसील सरकाघाट की ग्राम पंचायत पिंगला के गरौर-चिम्बा-रा-बल्ह की आंशिक रूप से कवर बस्तियों के लिए 1.03 करोड़ रुपये की उठाऊ जलापूर्ति योजना, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चैक में 95 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली विज्ञान प्रयोगशाला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पटड़ीघाट में 95 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली प्रयोगशाला और बैरा (पिंगला) में 90 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले कुश्ती स्टेडियम की आधारशिला रखीं। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने वर्चुअल रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज उन्होंने 14.42 करोड़ रुपये की तीन विकासात्मक परियोजनाओं के उद्घाटन और 79.72 करोड़ रुपये की लागत की नौ परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास की गति प्रभावित न हो। इसके लिए सरकार ने उद्घाटन और शिलान्यास वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग माध्यम से करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सरकाघाट के लोगों का एसडीएमए कोविड-19 स्टेट डिजास्टर रिस्पाॅंस फंड में 22 लाख रुपये के अंशदान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अंशदान मुश्किल की घड़ी में लोगों की सहायता करने में सहायक सिद्ध हुआ है। उन्होंने लोगों को इस महामारी के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है क्योंकि यह संकट अभी समाप्त नही हुआ है। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व मंे अन्य विकसित देशों की तुलना में इस महामारी से हमारे देश को कम क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा कि भारत में इस महामारी से 60 हजार लोगों की मृत्यु हुई है, जो कि 142 करोड़ की आबादी वाले 15 सबसे विकसित देशों जहां सात लाख मृत्यु दर्ज की गई है की तुलना में बहुत कम है। यह केवल प्रधानमंत्री के समय पर लिए गए निर्णय के कारण सम्भवन हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए प्रभावशाली कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भी इस महामरी को फैलने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की गई है। जय राम ठाकुर ने कहा कि देश के विभिन्न भागों में फंसे 2.50 लाख से अधिक हिमाचलियों को प्रदेश में वापिस लाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना मरीजों का उचित उपचार सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने इस संकट से निपटने के लिए कोरोना योद्धाओं द्वारा दी जा रही सेवाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकाघाट क्षेत्र में कार्यान्वित की जा रही सभी परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीर खड्ड के तटीकरण से क्षेत्र की हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि का संरक्षण होगा। जय राम ठाकुर ने प्रधानमंत्री को इस महामारी से प्रभावशाली तरीके से लड़ने के लिए प्रदेश को 1.60 लाख पीपीई किट्स, 500 वेंटिलेटर और 3 लाख एन 95 मास्क प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1100 प्रदेश के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए वरदान साबित हुई है। प्रदेश में गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत 2.78 लाख परिवारों को मुफ्त गैस कनैक्शन प्रदान किए गए हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत 8.75 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। जलशक्ति, बागवानी और राजस्व मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकाघाट में 30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली प्रशिक्षण अकादमी से क्षेत्र के युवा लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि देश की सेवा के लिए सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वाले युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 158 करोड़ रुपये की लागत से क्षेत्र के सीर खड्ड का तटीकरण किया जाएगा और इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार की ओर से निवेश की स्वीकृति प्रदान की गई है। सांसद रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि प्रदेश के लोग भाग्यशाली है कि उन्हें मुख्यमंत्री के परिश्रमी और ईमानदार नेतृत्व में प्रदेश प्रगति और उन्नति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वृद्धावस्था पैंशन का लाभ लेने की आयु सीमा कम करने, लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए जनमंच कार्यक्रम, सहारा योजना के अन्तर्गत गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना, गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत 2.78 लाख परिवारों को निःशुल्क गैस कनैक्शन प्रदान करना इत्यादि अनेक एतिहासिक निर्णय लिए हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा गत 6 वर्षों के दौरान लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी। स्थानीय विधायक कर्नल इंद्र सिंह ने सरकाघाट क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत की विकासात्मक परियोजनाएं समर्पित तथा शिलान्यास करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा समय पर उठाए गए कदमों के कारण देश के विभिन्न भागों से 2.50 लाख लोगों की वापसी के बावजूद अन्य राज्यों की अपेक्षा हिमाचल में कोविड मरीजों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने कहा कि बल्दवाड़ा, भदरोटा तथा गोपालपुर खंड के लिए 51.76 करोड़ रुपये की पेयजल आपूर्ति योजना से क्षेत्र कीे 41 हजार आबादी को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने क्षेत्र की विकासात्मक मांगों के प्रति विचारात्मक होने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से राजकीय महाविद्यालय बल्दवाड़ा में विज्ञान कक्षाएं आरंभ करने का आग्रह भी किया। एपीएमसी अध्यक्ष एवं जिला भाजपा अध्यक्ष दलीप ठाकुर ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विधायक प्रकाश राणा, भाजपा नेता नरेश कुमार, निशा व सीमा, उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर, पुलिस अधीक्षक मंडी शालिनी अग्निहोत्री भी सरकाघाट क्षेत्र के बल्दवाड़ा में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मण्डी जिला के सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र में 94.14 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखीं व लोकार्पण किए। जय राम ठाकुर ने 10.4 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित राजकीय महाविद्यालय बल्दवाड़ा के भवन, 2.97 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पौंटा, पटरीघाट और तहसील बल्दवाड़ा के आस-पास के गांव की बस्तियों के लिए 99 लाख रुपये की उठाऊ जलापूर्ति योजना समर्पित की। मुख्यमंत्री ने बलद्वाड़ा, भदरोटा और गोपालपुर खण्ड के भागों के लिए 51.76 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली बहु गांव ग्रामीण पाईप द्वारा जलापूर्ति योजना, 20.35 करोड़ रुपये की लागत से सरकाघाट मसरैन बग्गी सड़क के स्तरोन्यन, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला थौना में 1.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली विज्ञान प्रयोगशाला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पौंटा में 1.32 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली विज्ञान प्रयोगशाला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिस्सा में 1.04 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले अतिरिक्त भवन, तहसील सरकाघाट की ग्राम पंचायत पिंगला के गरौर-चिम्बा-रा-बल्ह की आंशिक रूप से कवर बस्तियों के लिए 1.03 करोड़ रुपये की उठाऊ जलापूर्ति योजना, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चैक में 95 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली विज्ञान प्रयोगशाला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पटड़ीघाट में 95 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली प्रयोगशाला और बैरा (पिंगला) में 90 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले कुश्ती स्टेडियम की आधारशिला रखीं। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने वर्चुअल रैली को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज उन्होंने 14.42 करोड़ रुपये की तीन विकासात्मक परियोजनाओं के उद्घाटन और 79.72 करोड़ रुपये की लागत की नौ परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास की गति प्रभावित न हो। इसके लिए सरकार ने उद्घाटन और शिलान्यास वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग माध्यम से करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सरकाघाट के लोगों का एसडीएमए कोविड-19 स्टेट डिजास्टर रिस्पाॅंस फंड में 22 लाख रुपये के अंशदान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अंशदान मुश्किल की घड़ी में लोगों की सहायता करने में सहायक सिद्ध हुआ है। उन्होंने लोगों को इस महामारी के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है क्योंकि यह संकट अभी समाप्त नही हुआ है। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व मंे अन्य विकसित देशों की तुलना में इस महामारी से हमारे देश को कम क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा कि भारत में इस महामारी से 60 हजार लोगों की मृत्यु हुई है, जो कि 142 करोड़ की आबादी वाले 15 सबसे विकसित देशों जहां सात लाख मृत्यु दर्ज की गई है की तुलना में बहुत कम है। यह केवल प्रधानमंत्री के समय पर लिए गए निर्णय के कारण सम्भवन हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए प्रभावशाली कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भी इस महामरी को फैलने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की गई है। जय राम ठाकुर ने कहा कि देश के विभिन्न भागों में फंसे 2.50 लाख से अधिक हिमाचलियों को प्रदेश में वापिस लाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना मरीजों का उचित उपचार सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने इस संकट से निपटने के लिए कोरोना योद्धाओं द्वारा दी जा रही सेवाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकाघाट क्षेत्र में कार्यान्वित की जा रही सभी परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीर खड्ड के तटीकरण से क्षेत्र की हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि का संरक्षण होगा। जय राम ठाकुर ने प्रधानमंत्री को इस महामारी से प्रभावशाली तरीके से लड़ने के लिए प्रदेश को 1.60 लाख पीपीई किट्स, 500 वेंटिलेटर और 3 लाख एन 95 मास्क प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1100 प्रदेश के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए वरदान साबित हुई है। प्रदेश में गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत 2.78 लाख परिवारों को मुफ्त गैस कनैक्शन प्रदान किए गए हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत 8.75 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। जलशक्ति, बागवानी और राजस्व मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकाघाट में 30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली प्रशिक्षण अकादमी से क्षेत्र के युवा लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि देश की सेवा के लिए सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वाले युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 158 करोड़ रुपये की लागत से क्षेत्र के सीर खड्ड का तटीकरण किया जाएगा और इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार की ओर से निवेश की स्वीकृति प्रदान की गई है। सांसद रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि प्रदेश के लोग भाग्यशाली है कि उन्हें मुख्यमंत्री के परिश्रमी और ईमानदार नेतृत्व में प्रदेश प्रगति और उन्नति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वृद्धावस्था पैंशन का लाभ लेने की आयु सीमा कम करने, लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए जनमंच कार्यक्रम, सहारा योजना के अन्तर्गत गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना, गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत 2.78 लाख परिवारों को निःशुल्क गैस कनैक्शन प्रदान करना इत्यादि अनेक एतिहासिक निर्णय लिए हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा गत 6 वर्षों के दौरान लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी। स्थानीय विधायक कर्नल इंद्र सिंह ने सरकाघाट क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत की विकासात्मक परियोजनाएं समर्पित तथा शिलान्यास करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा समय पर उठाए गए कदमों के कारण देश के विभिन्न भागों से 2.50 लाख लोगों की वापसी के बावजूद अन्य राज्यों की अपेक्षा हिमाचल में कोविड मरीजों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने कहा कि बल्दवाड़ा, भदरोटा तथा गोपालपुर खंड के लिए 51.76 करोड़ रुपये की पेयजल आपूर्ति योजना से क्षेत्र कीे 41 हजार आबादी को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने क्षेत्र की विकासात्मक मांगों के प्रति विचारात्मक होने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से राजकीय महाविद्यालय बल्दवाड़ा में विज्ञान कक्षाएं आरंभ करने का आग्रह भी किया। एपीएमसी अध्यक्ष एवं जिला भाजपा अध्यक्ष दलीप ठाकुर ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विधायक प्रकाश राणा, भाजपा नेता नरेश कुमार, निशा व सीमा, उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर, पुलिस अधीक्षक मंडी शालिनी अग्निहोत्री भी सरकाघाट क्षेत्र के बल्दवाड़ा में उपस्थित थे।
पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के साथ-साथ शिमला क्षेत्र की सुदंरता को बढ़ाने तथा अन्य प्रजातियों के पौधों का विस्तार करने के लिए पौधा रोपण अति आवश्यक है, जिसके लिए सभी का सहयोग आपेक्षित है। यह बात आज हिमाचल प्रदेश विश्वविधालय समरहिल के स्थापना दिवस के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम में शहरी विकाश मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने स्थापना दिवस के दिन 22 जुलाई को विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण का कार्यक्रम राज्यपाल से शुरू किया था जिसका आज समापन हुआ। इस कार्यक्रम के तहत परिसर में 400 से ज्यादा पौधरोपण किया गया।
शिमला: SFI हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने उप कुलपति को छात्रों की मांगों को लेकर आज ज्ञापन सौंपा। SFI ने उप कुलपति के सामने मांग रखी कि हिमाचल में PG के छात्रों को लेकर विश्वविद्यालय अपना रुख स्पष्ट करें और साथ ही SFI ने UIT में ट्यूशन फीस के अलावा जो अतिरिकत फीस वसूली जा रही है उस लूट को बंद करने की मांग भी रखी। SFI ने कहा कि इस कोरोना के दौर के अंदर जहां एक तरफ संस्थान लम्बित परिणाम घोषित नही कर पा रहा है बजाय उसके वहाँ पर छात्रों का फीस के नाम पर आर्थिक शोषण किया जा रहा है । उप कुलपति ने ये आश्वासन दिया कि इस बार अतिरिक्त फीस नही ली जाएगी। SFI कैंपस अध्य्क्ष रविन्द्र चंदेल ने कहा कि जो विश्वविद्यालय को 40,000 करोड़ की ग्रांट राज्य सरकार से मिलती थी वो इस बार नही दी गयी है ये साफ दर्शाता है कि हमारी सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय उच्च शिक्षा को लेकर कितना गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार शिक्षा को गर्त की तरफ धकेल रही है। UILS में भी कमोबेश यही स्तिथि है । SFI ने उप कुलपति के सामने ये भी माँग रखी कि जो विश्वविद्यालय में covid कमिटी बनी है उसकी सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाए कि उस कमेटी ने छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर क्या सुझाव दिए उनको सार्वजनिक किया जाए। कैंपस सचिव गौरव ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रदेश के हर कोने से छात्र पढ़ता है और उसके साथ ही बहुत से छात्र हिमाचल से बाहर के भी पढ़ते है। अगर परीक्षा होगी तो होस्टल खोलना बहुत रूरी है। ताकि छात्र मानसिक तनाव से मुक्त होकर अपनी परीक्षाओ की तैयारी कर सकें। SFI ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द इन मुद्दों को लेकर कोई सकारात्मक कदम नही उठाये गए तो SFI उग्र आंदोलन करेगी जिसकी पूरी जवाबदेही विश्वविद्यालय प्रशाशन की होगी।
टूरिसम इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन सरकार द्वारा पर्यटकों के हिमाचल में आने के लिए बनाए गए नियमों को सरल बनाने का स्वागत करती है। इस सरलीकरण से आने वाले समय मे हिमाचल की ओर पर्यटकों के कदम बढ़ेंगे इसकी उम्मीद की जा सकती है। इस सरलीकरण के लिये हम माननीय मुख्यमंत्री श्री जी राम ठाकुर जी का धन्यवाद करते है। Covid 19 के बाद जब से कुछ होटल खुले थे तब से कड़े नियमों के कारण पर्यटक हिमाचल में आने में रुचि नही दिखा रहे थे।हमे पूरी उम्मीद है कि जल्द ही पर्यटन पटड़ी पर लौटेगा। यदि इस नए नियमो में यदि आगे कोई और संशोध्न की आवश्यकता होगी तो हम आने वाले अनलॉक से पहले सरकार के समक्ष उन समस्याओं को दूर करने का पुनः अग्रये करेंगे ताकि लगभग 6 महीने से बंद पर्यटन कारोबार को दुबारा से पटरी पर लाया जा सके। हमने सरकार से आग्रह किया है कि आने वाले समय मे सरकार को कई प्रकार के नियमो में ढील देने की तथा पर्यटन उधमियों को राहत देने की आवश्यकता है । रेस्टोरेंट्स,फ़ास्ट फ़ूड ,बेकरी तथा अन्य फ़ूड आउटलेट्स को सप्तह के सातों दिन रात को 10.30 बजे तक खोलने की व्यवस्था को बहाल किया जाना चाहिए, bars को पुनः खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए । सरकार द्वारा पर्यटन इकाइयों को जो सॉफ्ट लोन की व्यवस्ता का जो प्रावधान किया गया है उसमें जो शर्ते रखी गई है उनके कारण किसी भी पर्यटन इकाई को इसका लाभ नही मिल पाया है। हमने सरकार से अग्रये किया है कि सभी होटल इकाइयों को 15 लाख तक का ऋण बिना कोलेट्रॉल सिक्योरिटी के दिया जाय तथा उसमें gst के मानक को हटाया जाय तथा सभी इकाइयों को इसका लाभ दिया जाए ताकि पर्यटन इकाइयाँ फिक्स्ड खर्चो का भुगतान आसानी से कर सके क्योंकि अभी पर्यटन व्यवसाय को ब्रेक इवन पर लाने के लिए काम से कम 6 महीने का समय लगेगा।इसी तरह जिन इकाइयों की मार्च महीने से पहले दो महीने की किश्ते दय थी जिसका भुगतान नही हुआ था उन्हें भी इस ऋण का लाभ दिया जाए क्यूंकि पर्यटन सीजनल इंडस्ट्री है तथा ज्यादातर लोन की किश्तें सीजन के दौरान ही अदा की जाती हैं परंतु इस बार सीजन शुरू होने से पहले ही लॉक डाउन हो गया था।हमे उमीद है कि सरकार जल्द ही हमे राहत देगी ताकि पर्यटन उद्योग को बचाया जा सके। हम सरकार से यह भी अग्रये करेंगें की इन नियमों की FM रेडियो,सोशल मीडिया तथा अन्य प्रिंट अव इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जे माध्यम से पब्लिसिटी दूसरे राज्यों में की जाए ताकि पर्यटकों को इन नियमोंकी जानकारी मिल सके।
तीसा (चंबा), 27 अगस्त- जुनास बस योग्य संपर्क सड़क की अपग्रेडेशन और टारिंग पर 4 करोड़ 86 लाख रुपए की राशि खर्च होगी। विधानसभा उपाध्यक्ष ने यह जानकारी आज जुनास सड़क का लोकार्पण करने के बाद दी। उन्होंने कहा कि इस सड़क को आगे मलवास- सुईला तक ले जाने की कार्य योजना भी है।उन्होंने लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि सड़क परियोजना में आने वाली निजी भूमि को विभाग के नाम स्थानांतरित करने में जागरूकता का परिचय देते हुए आगे आएं। उन्होंने कहा कि समूचे चुराह विधानसभा क्षेत्र में संपर्क सड़कों के नेटवर्क में विस्तार देने का अभूतपूर्व कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों की भी जिम्मेदारी है कि वे राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर और निजी हितों को दरकिनार करते हुए सामूहिक तौर पर संपर्क सड़कों के निर्माण में अपना पूरा सहयोग दें। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि सड़कें चुराह के पूरे परिदृश्य का कायाकल्प करेंगी और क्षेत्र में तरक्की और खुशहाली का एक नया दौर शुरू होगा। विधानसभा उपाध्यक्ष ने क्षेत्र के लिए नई बस सेवा शुरू करने की भी बात कही ताकि लोग उपमंडल मुख्यालय और जिला मुख्यालय के साथ सीधे जुड़ सकें। यह बस सेवा वाया जुनास चलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि राजकीय उच्च विद्यालय जुनास के नए भवन के निर्माण की आधारशिला जल्द रखी जाएगी। आयुर्वेद डिस्पेंसरी खोले जाने की मांग पर विधानसभा उपाध्यक्ष ने बताया कि चुराह विधानसभा क्षेत्र के लिए 6 नई आयुर्वेद डिस्पेंसरियां मिली हैं जिनका शुभारंभ भी किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस क्षेत्र के लिए भी आयुर्वेद डिस्पेंसरी की सुविधा दी जाएगी। ग्रामीणों द्वारा रखी गई रसोई गैस की समस्या को लेकर उन्होंने कहा कि ये सुनिश्चित किया जाएगा कि जुनास तक रसोई गैस की आपूर्ति हो। उन्होंने कहा कि तरेला में निर्मित पुराने पुल के टूट जाने के बाद क्षेत्र की 4 पंचायतों के लोगों को आवागमन की जो दिक्कत थी उसे अब नए पुल का निर्माण करके खत्म कर दिया गया है। 33.50 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण पर 2 करोड़ 82 लाख रुपए की राशि खर्च हुई है। विधानसभा उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक देवीकोठी मंदिर के परिसर के सौंदर्यीकरण को लेकर ट्रस्ट का गठन किया जा रहा है। यह ट्रस्ट मंदिर के सौंदर्यीकरण की देखरेख के अलावा श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाने की दिशा में भी कार्य करेगी। इस ट्रस्ट में क्षेत्र की 9 पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। ग्रामीण विकास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं और स्कीमों के कार्यान्वयन में मनरेगा कन्वर्जेंस को भी जोड़ा जा रहा है। अंतरराज्यीय सीमा पर तैनात एसपीओ (स्पेशल पुलिस अधिकारी) के मानदेय में बढ़ोतरी के मुद्दे पर विधानसभा उपाध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और राज्य सरकार इसको लेकर पूरी तरह से संवेदनशील और गंभीर है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि एसपीओ के मानदेय में अवश्य बढ़ोतरी होगी। मामले को केंद्र के साथ उठाया जा चुका है। इससे पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष ने तरेला में नवनिर्मित पुल का लोकार्पण करने के अलावा लुटियास तक बनने वाले संपर्क मार्ग के निर्माण का भूमि पूजन भी किया। इस मौके पर जिला भाजपा महामंत्री वीरेंद्र ठाकुर, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण दीपक महाजन, जिला परिषद सदस्य ज्ञान चौहान, भारतीय जनता युवा मोर्चा अध्यक्ष अमन राठौर, युवा मोर्चा उपाध्यक्ष कुलवंत शर्मा, जिला आईटी सह संयोजक मनेश ठाकुर, जुनास पंचायत प्रधान राकेश और बौंदेड़ी पंचायत प्रधान जसवंत भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर कृषि विपणन बोर्ड की 198 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के शिलान्यास किए • पराला मंडी में कोल्ड चेन अधोसंरचना व खड़ापत्थर में प्री-कूलिंग चेंबर स्थापित करने पर व्यय होंगे 59.25 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां ढली सब्जी मंडी से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों व बागवानों को लाभान्वित करने के लिए प्रदेश के हिस्सों में हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड की 198 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के शिलान्यास किए। उन्होंने शिमला जिला के मेंहदली (रोहडू) और शिलारू में 20-20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई फल एवं सब्जी उप-मंडी कुल्लू जिला के बंदरोल में 12.01 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली नई फल एवं सब्जी उप-मंडी की आधारशिलाएं रखीं। उन्होंने 8.52 करोड़ की लागत से पराला फल एवं सब्जी मंडी के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण, कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति समिति के लिए पांच करोड़ रुपये की लागत से फल एवं सब्जी उप-मंडी शाट के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण, मंडी जिला में 3.21 करोड़ रुपये की लागत से फल एवं सब्जी मंडी कांगणी के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण, 5.62 करोड़ रुपये के व्यय से पांवटा-साहिब फल एवं सब्जी मंडी के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण, दो करोड़ रुपये की लागत से फल एवं सब्जी उप-मंडी पालमपुर के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण और सोलन जिला में 24.96 करोड़ रुपये की लागत से टर्मिनल मंडी परवाणु के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण के शिलान्यास किए। मुख्यमंत्री ने फल एवं सब्जी मंडी, ढली के विस्तारीकरण का शिलान्यास किया, जिस पर 18.86 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने विपणन बोर्ड परिसर खलीनी, शिमला में चार करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय से नये कार्यालय, ब्लाॅक व पार्किंग निर्माण कार्य, कुल्लू की मुख्य मंडी में 1.15 करोड़ रुपये के व्यय से इंटरलाॅकिंग कंकरीट पेवर और यू-शेप नाली के कार्य, फल एवं सब्जी उप-मंडी भुंतर में 53 लाख रुपये से 11 दुकानों के निर्माण, फल एवं सब्जी उप-मंडी खेगसू में 72 लाख रुपये की लागत से पार्किंग स्थल के निर्माण, फल एवं सब्जी उप-मंडी चैरी-बिहाल (मनाली) में 2.66 करोड़ रुपये की लागत से किसान भवन, चारदीवारी के निर्माण और सुरक्षा के लिए वायरक्रेट्स लगाने तथा पतलीकूहल फल एवं सब्जी उप-मंडी में 52 लाख रुपये की लागत से सुरक्षा दीवार एवं चारदीवारी के निर्माण और यार्ड क्षेत्र में मेटलिंग कार्य की आधारशिलाएं रखीं। जय राम ठाकुर ने फल एवं सब्जी उप-मंडी बिलासपुर में 2.84 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुमंजिला परिसर के निर्माण, 1.85 करोड़ रुपये की लागत से नई अनाज उप-मंडी मजारी के निर्माण, मुख्य मंडी सोलन में 52 लाख रुपये की लागत से कोटा स्टोन लगाने और सुरक्षा दीवार के निर्माण और टर्मिनल मंडी परवाणु में 2.74 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न कार्यों का भी शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोल्ड चेन अधोसंरचना स्थापित की जाएगी, जिसके पहले चरण में शिमला जिला की पराला मंडी के लिए योजना तैयार की गई है। इसी के अंतर्गत खड़ा पत्थर में 60 मीट्रिक टन क्षमता के प्री-कूलिंग चेंबर स्थापित किए जाएंगे और फलों व सब्जियों की ढुलाई के लिए पांच वातानुकूलित वाहन भी खरीदे जाएंगे। इस कार्य पर 59.25 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन किसानों व बागवानों के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि आज कृषि व बागवानी उत्पादों के विपणन के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगभग 200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के शिलान्यास किए गए। इससे किसानों की आर्थिकी मजबूत करने में सहायता मिलेगी, क्योंकि उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर अधोसंरचना सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान ग्रामीण आर्थिकी में प्रदेश की आर्थिकी को संबल प्रदान किया है। प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की परिकल्पना के बिना कोई भी प्रगति के बारे में नहीं सोच सकता है। इस महामारी ने यह बात फिर से साबित की है कि किसान हमारी आर्थिकी की रीढ़ है और यही कारण है कि प्रदेश सरकार कृषक समुदाय को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार ने पेटियों, ट्रे और अन्य सामग्री के पर्याप्त प्रबन्ध किए हैं, ताकि बागवानों को अपने उत्पाद बेचने में कोई असुविधा न आए। सरकार के व्यापक प्रबन्धों के कारण बागवानों को इस सीज़न में चेरी के बेहतर दाम मिले। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री ने मामला उठाकर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि प्रदेश के सेब उत्पादकों को नई दिल्ली में अपना उत्पाद बेचने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आज जिन परियोजनाओं के शिलान्यास किए गए हैं, उन्हें आगामी डेढ़ वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को भी बड़े स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है, क्यांेकि प्राकृतिक उत्पाद न केवल सेहत के लिए अच्छे हैं, बल्कि किसानों को इनके एवज में बेहतर दाम भी प्राप्त होते हैं। मुख्यमंत्री ने भू-स्खलन के कारण क्षतिग्रस्त शिमला के भट्टाकुफर विपणन यार्ड पर चिन्ता व्यक्त करते हुए इसके पुनः निर्माण का कार्य शीघ्र पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस कार्य में हर सम्भव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बागवानों की सुविधा के लिए पर्याप्त मात्रा में श्रमिकों का प्रबन्ध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपणन बोर्ड को छोटे संपर्क मार्ग निर्मित करने की मंजूरी दी जाएगी, जिससे विशेषकर किसानों को उनके उत्पादों के विपणन के लिए परिवहन सुविधा प्राप्त हो सके। जय राम ठाकुर ने इस अवसर पर कुछ वरिष्ठ आढ़तियों और व्यापारियों को भी सम्मानित किया। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से यह सुनिश्चित हो पाया है कि देश के किसान सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। इसके लिए केन्द्र सरकार प्रत्येक किसान को वर्ष में तीन बार दो हजार रुपये किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर देश के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले मुख्यमंत्री घोषित हुए हैं, जो राज्य के लोगों के लिए सम्मान की बात है। शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद और राज्य भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोविड-19 महामारी के कारण प्रदेश के विकास की गति प्रभावित न हो। इसके लिए मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन समारोह वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग भाग्यशाली हंै कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के रूप में प्रदेश को एक ईमानदार और गतिशील नेतृत्व मिला है। राज्य सरकार द्वारा आरम्भ की गई विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं ने प्रदेश के लोगों का जीवन परिवर्तित कर दिया है। हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष बलदेव भण्डारी ने एक ही दिन में 198 करोड़ रुपये लागत की 22 परियोजनाओं के शिलान्यास पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विपणन बोर्ड ने कोविड-19 महामारी के दौरान यह सुनिश्चित किया कि किसानों और बागवानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो। बोर्ड प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में विशेष भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर एपीएमसी शिमला किन्नौर के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने एपीएमसी द्वारा चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर एपीएमसी मण्डी के अध्यक्ष दलीप ठाकुर, एपीएमसी कुल्लू लाहौल-स्पीति के अध्यक्ष अमर सिंह, एपीएमसी सोलन के अध्यक्ष संजीव कश्यप और बिलासपुर के विधायक सुभाष ठाकुर ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से क्रमशः मण्डी, कुल्लू, सोलन और बिलासपुर से लोगों को सम्बोधित किया। आढ़ती संघ के अध्यक्ष हरीश ठाकुर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। विधायक बलबीर वर्मा, हिमफेड अध्यक्ष गणेश दत्त, सक्षम गुड़िया बोर्ड उपाध्यक्ष रूपा शर्मा, हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक की अध्यक्ष शशि बाला, नगर निगम शिमला की महापौर सत्या कौण्डल, उप-महापौर शैलेन्द्र चैहान, प्रधान सचिव कृषि ओंकार शर्मा, बागवानी सचिव अमिताभ अवस्थी, एचपीएमसी प्रबन्ध निदेशक देवाश्वेता बनिक और अन्य अधिकारी इस अवसर पर शिमला में उपस्थित थे। कृषि, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेन्द्र कंवर, स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल, सांसद रामस्वरूप शर्मा और इन्दु गोस्वामी, प्रदेश महिला आयोग अध्यक्ष डेजी ठाकुर और अन्य नेताओं ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग लिया।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां से वीडियो काॅन्फ्रंेसिंग के माध्यम से जिला ऊना के गगरेट विधानसभा क्षेत्र में लगभग 73.10 करोड़ रुपये की लागत की विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण किए व आधारशिलाएं रखीं। जय राम ठाकुर ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत नकरोह खड्ड पर सन्काली से गोलक नगर सम्पर्क सड़क मार्ग पर 1.67 करोड़ रुपये की लागत से बने 73 मीटर लंबे पुल, नाबार्ड के अन्तर्गत बन्ने-दी-हट्टी से शिवपुर निचला मुबारकपुर सड़क पर 1.70 करोड़ रुपये की लागत से बने 30 मीटर लंबे पुल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मुबारकपुर में 74 लाख रुपये की लागत से निर्मित विज्ञान प्रयोगशाला और 49 लाख रूपये की लागत से निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गगरेट के अतिरिक्त भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने जलजीवन मिशन के अन्तर्गत गगरेट ब्लाॅक में शेष घरों के लिए 26.81 करोड़ रूपये की पाईप लाईन जलापूर्ति योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत 12.07 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली शिवबाड़ी से ध्वाली सड़क, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत 10.62 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ब्रह्मपुर से भद्रकाली ज्लो-दी-बार चिंतपूर्णी सड़क, भद्रकाली में 8.66 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान गगरेट के भवन, नाबार्ड के अंतर्गत 6.52 करोड़ रुपये की लागत से गगरेट ऊना सड़क पर मावा सिंधियान, संघनाई, घनाड़ी और अम्बोआ खड्ड पर बनने वाले चार पुलों, घनाड़ी में 2.38 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले तहसील भवन और 1.97 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले राजकीय महाविद्यालय दौलतपुर के अतिरिक्त भवन की आधारशिलाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने समूचे विश्व की वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इस संक्रमण से विकास की गति प्रभावित न हो, इसलिए प्रदेश के विभिन्न भागों में विकासात्मक परियोजनाओं की आधारशिलाएं और लोकार्पण आरम्भ कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने इस महामारी से लड़ने के लिए प्रदेश सरकार को हर संभव सहायता प्रदान की है। केन्द्र सरकार ने इस संक्रमण से निपटने के लिए 1.16 लाख पीपीई किट, लगभग तीन लाख एन-95 मास्क और 500 वेंटिलेटर राज्य को प्रदान किए हैं। जय राम ठाकुर ने कहा कि इस महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है और परीक्षा की इस घड़ी में पूरा देश प्रधानमंत्री के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रदेश की विकासात्मक जरूरतों के प्रति हमेशा से उदार रहे हैं। उन्होंने केन्द्रीय वित्त एवं काॅरपोरेट राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का केन्द्रीय स्तर पर प्रदेश से जुड़े मामलों को प्रभावशाली तरीके से रखने के लिए आभार व्यक्त किया।
बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर को कोरोना काल में हिमाचल प्रदेश में उतपन्न हुई समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव तथा शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रान्त मंत्री राहुल राणा ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना महामारी के कारण प्रदेश में हुई तालाबंदी से शैक्षणिक प्रक्रिया में भी काफी नुकसान हुआ है। विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश ने 11,12 मई 2020 को प्रदेश क 9920 छात्रों से फोन के माध्यम से संपर्क करते हुए शिक्षा जगत के विषयों पर चर्चा की । विद्यार्थियों के माध्यम से अकादमिक जगत के सम्बंध में अनेक प्रकार के सुझाव विद्यार्थी परिषद को दिए गए । अन्य सुझाव के साथ उन छात्रों के सुझावों को ज्ञापन के रूप में हम आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे है तथा क्रियान्वयन हेतु निवेदन करते है। सुझाव निम्नलिखित है: 1. प्रदेशवासी इस समय आर्थिक तंगी से जूझ रहे है, कुछ निजी शिक्षण संस्थान एवम हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय के कुछ व्यावसायिक कोर्स(UIIT,UILS) में पूरी फीस ली जा रही है अतः सभी सरकारी एवम निजी शिक्षण संस्थानों में आने वाले सत्र में पूरा शुल्क न लेकर सिर्फ Tution fees ही ली जाए। 2. Sanitization एवं शारीरिक दूरी(physical distancing) के अनुपालन करते हुए महाविद्यालयों एवम विश्विद्यालयों में आने वाले समय मे परीक्षाएं करवाई जाए। 3. दूरस्थ शिक्षा केन्द्र एवं ऑनलाइन माध्यमो से शिक्षा को व्यापक प्रोत्साहन हेतु सभी स्तरों पर योजनाएं बनाई जाए तथा हर शिक्षण संस्थान में आधुनिक सुविधाओं से युक्त डिजिटल बैवीनार कक्ष बनाए जाए। 4. नए सत्र से पाठ्यक्रम को पूर्ण करने हेतु ई कक्षाएं, ऑनलाइन व्याख्यान में इंटरनेट सुविधा की कमी के कारण सहभागी न हो पाने वाले विद्यार्थियों हेतु पठन सामग्री डाक के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए। (उदारहण : ICDEOL) 5.हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक महाविद्यालय विश्विद्यालय में placement cell बनाया जाए और उसे श्रम और रोजगार विभाग, हि.प्र के साथ जोड़ा जाए, ताकि COVID-19 की परिस्तिथि में नए pass outs के लिए रोजगार की उपलब्धता हो पाए साथ ही, प्रत्येक महाविद्यालय के placement cell को सशक्त किया जाए ताकि रोजगार के अवसरों की जानकारी विद्यार्थियों को महाविद्याल से ही मिल पाए। 6. पिछले 2 सालों से प्रदेश के छात्रों को SC/ST छात्रवृत्ति न मिलना निराशाजनक है अतः शीघ्र लंबित पड़ी छात्रवृति को दिया जाए। 7. हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय के इक्डोल (ICDEOL) में बढ़ी हुई फीस को वापिस लिया जाए। 8. Covid-19 के चलते महाविद्यालयों एवम विश्विद्यालयों के छात्रावासों में रह रहे छात्रों का छात्रावास शुल्क माफ किया जाए । 9. क्लस्टर विश्विद्यालय(मंडी) में इसी सत्र से कक्षाएं शुरू की जाए। 10. कृषि एवं बागवानी विश्विद्यालयों में भारी भरकम फीस को कम किया जाए। 11. हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय में परीक्षा परिणामो में गड़बड़ियों को दूर कर समय पर परिणाम घोषित किए जाए। 12. प्रदेश में सभी शिक्षण संस्थानों में 2020-21 सत्र प्रवेश प्रक्रिया में आर्थिक पिछड़ा वर्ग को भी सम्मिलित कर दाखिला दिए जाएं। कोरोना वायरस के कारण उत्तपन्न हुई इस विशेष परिस्तिथि को देखते हुए अकादमिक जगत में वांछनीय परिवर्तन करने हेतु ये कुछ बिंदु हमने प्रस्तुत किए है। महामारी के समाप्ति के पश्चात प्रदेश के विद्यार्थी समुदाय के जीवन मे उत्तपन्न होने वाली समस्याओं के समाधान हेतु इन सुझावों का उपयोग किया जा सकता है।
रोहड़ू के विधायक व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव मोहन लाल ब्राक्टा ने प्रदेश सरकार को कड़घरे में खड़ा किया हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जब से भाजपा सरकार बनी है, रोहड़ू विधानसभा के साथ राजनीति द्वेष के साथ काम कर रही हैं। विकास समेत अन्य मामलों में रोहड़ू के साथ भेदभाव की भावना से काम हुआ है। यह बात विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने अपने चार दिवसीय रोहड़ू दौरे पर कही। उन्होंने बताया कि रोहडू में एक भी नया काम सरकार नहीं कर पाई है। स्वास्थ्य विभाग में अनके पद खाली चल रहे हैं। सिविल अस्पताल रोहड़ू एक साल से स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के न होने से लोगो को मजबूरी में निजी अस्पताल में जाकर इलाज करना पड़ रहा है। अप्रैल 2020 से एक्स रे मशीन खराब हुई है। पांच महीने होने जा रहे है अभी तक मशीन ठीक नही की गई है। रोहड़ू हास्पिटल की हालत दिन प्रति दिन खराब हो रही है । ब्राक्टा ने बताया कि सेब सीजन पूरे चरम पर है लेकिन सम्पर्क सड़को की हालत बहुत की दयनीय है जिसके चलते बागवानों को मंडियों तक सेब पहुचाने में बहुत भारी पेरशानी झेलनी पड़ रही हैं सरकार व प्रशासन के सेब सीजन को लेकर सारे दावे हवाहवाई हो रहे हैं। सभी विभागों में कर्मचारियों कमी चल रही है जिनको भरने की अपेक्षा उल्टे इस कोरोना काल मे यहां से अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं। हाल ही में ही वन विभाग में तैनात वरिष्ठ सहायक का तबादला चंबा किया गया है। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय चंबा से रामपुर के लिए तबादले के आदेश किए। रोहड़ू में पद अधीक्षक सहित कई पद पहले से खाली चल रहे है। ऊपर से वरिष्ठ सहायक का तबादला करना जोकि पूर्ण रूप से राजनीति द्वेष की भावना से किया गया है जिस में झूठी शिकायत व बिना किसी जांच के मुख्यमंत्री रोहड़ू भाजपा के लोगो के कहने पर कर्मचारियों व अधिकारियों के तबादले करके रोहड़ू के साथ भेदभाव करके क्षेत्र को हाशिये पर खड़ा कर दिया है।
विधृत उपमंडल रोहड़ू के तहत सीवरेज व राधास्वामी पेट्रोल पंप क्षेत्र में जरूरी मरमम्त करने के चलते 26 और 27 अगस्त को सुबह 10 बजे से सायं 5 बजे तक विद्युत् आपूर्ति बाधित रहेगी। सहायक अभियंता शुभम चौहान ने बताया कि 22 केवी फिडर लोअरकोटी में जरूरी मुरम्मत के चलते यह शटडाउन लिया जा रहा हैं। उन्होने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है।
रोहड़ू उपमंडल के तहत कुई पंचायत के उप्रधान देसराज शर्मा नें सड़क पर पड़े मिले 17,400 रुपए के एक चैक को संबधित व्यकित को लौटाकर ईमानदारी की मिसाल पेश की हैं। बात मंगलवार सुबह की जब देसराज वे एसडीएम कार्यालय की तरफ जारहे थे। तो उन्हें यह चैक सड़क पर पड़ा मिला। उन्होंने इस चैक को एसडीएम कार्यालय में एसडीएम के नीजी सहायक को लौटाना चाहा जिस पर इस चैक के जारीकर्ता संबधित आढ़ती से संपर्क किया जिन्होंने चैक के मालिक से संपर्क कर बुलाया। इस बाद चैक के मालिक अनिल कुमार निवासी गांव बशला को यह चैक सौंपा गया। अनिल कुमार ने देसराज का धन्यावाद किया।
एस.एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में फ़ीस वृद्धि के खिलाफ विश्वविद्यालय में धरना प्रदर्शन किया। एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई का मानना है आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में है और पिछले काफी लंबे समय से सभी शिक्षण संस्थान बन्द हैं और जिस कारण छात्र पढ़ाई से काफी महीने से वंचित हैं और इस विपरीत संकट में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में फ़ीस को बढ़ाना छात्रों के साथ अन्याय है क्योंकि छात्र पहले से ही विश्वविद्यालय में परीक्षा न होने के कारण मानसिक रूप से प्रताड़ित हैं। SFI का कहना है कि अभी यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजीमें छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएँ हो रही हैं वहां पर प्रशासन और निदेशक की मिलीभगत के द्वारा छात्रों पर अतिरिक्त misllaneous charges लगाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के छात्रों का कहना है कि जो पिछले सेमस्टर में छात्रों से अलग-अलग फंड लिया गया था वह कहीं भी खर्च नही किया गया है। उच्चतम न्यालय ने दिशा निर्देश दिए है की इस महामारी के समय शिक्षण शुलक को छोड़कर किसी भी प्रकार का कोई भी अतिरिक्त शुलक न लिया जाए परन्तु विश्वविद्यालय प्रशासन ने उच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन किया है। एस एफ आई ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द अगर प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं करता है तो एस एफ आई विश्वविद्यालय में आंदोलन का आगाज करेगी जिसका खामियाजा विश्वविद्यालय प्रशासन को भुगतना पड़ेगा।
प्रदेश कार्यसमिति बैठक में दो राजनीतिक प्रस्ताव लाए गए। इनमें पहला प्रस्ताव केंद्र की उपलब्धियों को लेकर मंडी से सांसद रामस्वरूप शर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्ताव का अनुमोदन प्रदेश सचिव पायल वैद्य और प्रदेश सह मीडिया प्रभारी नरेंद्र अत्री द्वारा किया गया। प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को मजबूत करने का काम कर रही है। देश में अटल पेंशन योजना देश में एक बड़ी योजना के रूप में उभर कर आई है, जिसमें हर नागरिक को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन का लाभ मिलेगा। देश के 80 करोड़ लोगों को 8 माह के लिए मुफ्त राशन केवल भारतीय जनता पार्टी की सरकार की दे सकती थी। उन्होंने ने कहा कि देश की 8 करोड़ बहनों को गैस कनेक्शन देने का काम मोदी सरकार ने किया और इस कोविड-19 के संकट काल में 3 माह तक मुफ्त सिलेंडर भी दिया। मोदी सरकार सही मायने में सभी वर्गों के लिए काम कर रही है। विकलांगों वृद्धों और विधवाओं के लिए एक लाख एक हजार करोड़ का बजट आवंटन किया गया जिसके अंतर्गत 3 माह तक सभी को 1 हज़ार मिले।
-हर वर्ष बचेंगे करोड़ों, रुकेगा भूमि कटाव और सरकारी नलों पर निर्भरता भी होगी कम -छावनी बोर्ड सुबाथू, जतोग कैंट और एमसी सोलन बचा रहे लाखों लीटर पानी प्रदेश में हर वर्ष जल संकट बढ़ता जा रहा है, लेकिन सरकार ने आज तक वर्षा जल संग्रहण के लिए कोई कारगर योजना तैयार नहीं की है। बारिश के दिनों में लाखों-करोड़ों लीटर पानी आकाश से बरसता है और यदि उसका सही तरीके से संग्रहण किया जाए तो न केवल हिमाचल में किसी भी मौसम में जल संकट समाप्त हो जाएगा, बल्कि सरकार का करोड़ों रुपये बचेगा, भूमि कटाव की समस्या कम होगी और लोगों की सरकारी पेयजल योजनाओं पर निर्भरता कम हो जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश के पारंपरिक प्राकृतिक जलस्त्रोत फिर से पुनर्जीवित हो उठेंगे। दिन-प्रतिदिन पानी की बढ़ रही समस्या को देखते हुए पिछले कई वर्षों से यह कहा जा रहा है कि अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होगा, लेकिन यदि इंसान प्रकृति से खिलवाड़ न करे और उसके विरुद्ध न चले तो इस कथित विश्वयुद्ध को टाला जा सकता है। इसके लिए सरकारों की इच्छाशक्ति का होना बेहद जरूरी है। कुछ दशकों पहले तक बरसात के मौसम में जोहड़ों और कच्चे तालाबों के माध्यम से बारिश के पानी का संग्रहण किया जाता था, जिससे साल भर तक प्राकृतिक जलस्त्रोत रिचार्ज रहते थे और उनमें पानी की कमी नहीं आती थी, लेकिन समय के बदलाव के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जोहड़ और तालाब मिट्टी से भर गए और लोगों की निर्भरता पूरी तरह से सरकारी नलों पर हो गई। शहरों की बात छोड़ दें तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग नलों के पानी पर ही निर्भर हो गए हैं, बहुत कम क्षेत्रों में लोग कुओं या बावडिय़ों से पानी ढोते हुए नजर आते हैं। केंद्र सरकार के जलशक्ति मिशन के तहत अब सरकार ने आने वाले समय में हर घर को नल देने की विस्तृत योजना तैयार की है और हर माह देश भर में लाखों पानी के कनेक्शन दिए भी जा रहे हैं, लेकिन सरकार ने यह नहीं सोचा कि जब हमारी नदियों या बड़े जलाश्यों में ही पानी नहीं बचेगा तो अरबों रुपये की यह योजनाएं किस काम की रहेंगी। सरकार को चाहिए कि बारिश के पानी का संग्रहण करने की विस्तृत योजना तैयार करे और जिन लोगों के पास अपनी भूमि है, वहां पानी के बड़े भंडारण टैंकों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए। शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक निर्माणधीन भवन का नक्शा तभी पास किया जाए जब उसमें वर्षा के जल संग्रहण टैंक के निर्माण का प्रावधान हो। टीसीपी में हालांकि यह प्रावधान तो है, लेकिन इन टैंकों को सरकारी नलों में आने वाले पानी से भर कर रेन वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही है। वर्षा के पानी को बनाया जा सकता है सौ प्रतिशत शुद्ध प्रदेश के सबसे पुराने छावनी क्षेत्र सुबाथू के अलावा शिमला के जतोग कैंट और नगर परिषद सोलन में हजारों लीटर वर्षा के पानी को संरक्षित किया जा रहा है। यह पानी मिनरल वॉटर की तरह शुद्ध हो कर हजारों लोगों की प्यास बुझा रहा है। लैबोरेटरी से इस पानी में शून्य प्रतिशत बेक्टीरिया होने की पुष्टि की गई है। हालांकि सुबाथू में तो छावनी बोर्ड ने पानी को और अधिक शुद्ध बनाने के लिए अतिरिक्त फिल्टर लगाए हैं, लेकिन मात्र 85 सौ रुपये लागत का फिल्टर लगा कर कर एक मध्यम वर्गीय परिवार भी एक वर्ष में कम से कम 100 दिनों का पानी बचा सकता है। प्रदेश में औसतन 70 से 120 सेंटीमीटर बारिश होती है और एक सेंटीमीटर बारिश होने पर एक हजार वर्ग मीटर छत से एक हजार लीटर पानी बर्बाद होता है या यूं कहें कि उसे बचाया जा सकता है। सीमित संसाधनों वाले स्वायत्त छावनी बोर्ड प्रशासन ने वर्षा जल संग्रहण में रुचि दिखाई और इसका नतीजा यह हुआ कि आज इन क्षेत्रों में पेयजल संकट दूर हो गया है। छावनी बोर्ड कार्यालय की सभी छतों का पानी पाइप के माध्मय से फिल्टर होकर बड़े भंडारण टैंक में एकत्रित किया जाता है और उसके बाद उसे लोगों को सप्लाई किया जा रहा है। किसी भी मौसम में नहीं होगी पानी की किल्लत हिमाचल सरकार भी यदि पहल करे तो किसी भी मौसम में पानी की किल्लत नहीं होगी। गर्मियों में नदियों व जलस्त्रोतों का पानी सूख जाता है, वहीं, भारी बारिश होने पर गाद से पेयजल योजनाएं बंद हो जाती हैं, जिससे सरकार को मशीनरी बर्बाद होने पर करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है। टैंकरों पर भी सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है। ऐसे में यदि हर स्कूल की छत, सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक भवनों और हर घर की छत से वर्षा जल संग्रहण किया जाए तो हर वर्ष करोड़ों रुपये बच सकते हैं, बस आवश्यकता है तो सरकार के संकल्प व इच्छा शक्ति की, क्योंकि अभी तक प्रदेश सरकार ने छावनी परिषदों की भांति वर्षा के जल संग्रहण में कोई रुचि नहीं दिखाई है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर द्वारा नई पंचायतों के गठन के लिए गैर-जनजातीय क्षेत्रों तथा जनजातीय क्षेत्रों के लिए मापदण्ड अनुमोदित कर दिये है। मंत्रिमण्डल की 11 अगस्त, 2020 को आयोजित बैठक में मापदण्ड तय करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया था। वीरेन्द्र कंवर ने बताया कि गैर-जनजातीय क्षेत्रों के लिए अनुमोदित मापदण्डों के अनुसार उन ग्राम पंचायतों से नई पंचायतों का गठन किया जाएगा, जिनकी 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 2000 तथा उससे अधिक है तथा परिवारों की संख्या 500 या उससे अधिक, ग्राम पंचायत के वर्तमान मुख्यालय से सबसे दूर वाले गांव की दूरी 5 कि.मी. या उससे अधिक, गांव की संख्या 5 तथा उससे अधिक है। इसके साथ यह शर्त भी है कि वर्तमान पंचायत तथा नव प्रस्तावित ग्राम पंचायत की जनसंख्या विभाजन के पश्चात न्यूनतम 600 होनी चाहिए। यह मापदण्ड पिछड़े क्षेत्रों के लिए भी लागू होगा। इसी प्रकार जनजातीय क्षेत्रों की उन ग्राम पंचायतों में से नई पंचायते बनाई जाएगी, जिनकी जनसंख्या 750 और उससे अधिक है। इसके साथ यह शर्त भी है कि वर्तमान पंचायत तथा नव प्रस्तावित ग्राम पंचायत की जनसंख्या विभाजन के पश्चात न्यूनतम 300 होनी चाहिए। वीरेन्द्र कंवर ने बताया कि विभाग में अब तक प्राप्त 487 से अधिक प्रस्तावनाओं का उक्त मापदण्डों के अनुसार परिक्षण किया जा रहा है, जो 230 पंचायतें उक्त मापदण्डों को पूर्ण करेगी उनके गठन की सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की जा रही है। अधिसूचना पर सम्बन्धित ग्रामसभा के सदस्य 7 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां सम्बन्धित उपायुक्तों के समक्ष दर्ज करवा सकते है। प्राप्त आपत्तियों पर उपायुक्त 3 दिनों के भीतर फैसला लेकर विभाग को अपनी संस्तुति देंगें, जिसके पश्चात सरकार द्वारा अन्तिम अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त, 2020 के पश्चात प्राप्त होने वाली किसी भी प्रस्तावना पर विचार नही करने का निर्णय लिया गया है। वीरेन्द्र कंवर ने बताया कि अनुमोदित मापदण्डों के अनुसार प्रदेश में 230 जिनमें जिला बिलासपुर में 14, चम्बा में 18, हमीरपुर में नौ, लाहौल-स्पिति में चार, किन्नौर में सात, सोलन में 17, मण्डी में 65, कांगड़ा में 33, शिमला में 35, ऊना में दो, कुल्लू में 28 तथा सिरमौर में आठ नई ग्राम पंचायतों का गठन प्रस्तावित हैं।
GNA University keeping the unprecedented moments of COVID-19 intact organized its first Virtual Convocation of 2015 batch of Engineering students of various branches- Mechatronics; Automation Engineering, Mechanical, Aerospace, Computer Science; Engineering, Automotive, Mechatronics, Civil; Electronics; Communication Engineering in the benign presence of the worthy Chief Guest cum Pro-Chancellor of the University, S. Gurdeep Singh Sihra, the renowned business tycoon spearheading the internationally established group of Gear Manufacturing Company, GNA Gears as the Director & CEO . The Vice Chancellor – Dr. VK Rattan, Dean Academics- Dr. Monika Hanspal, the Registrar – Dr. RK Mahajhan, the Dean Faculty of Design & Innovation- Dr. CR Tripathi and the Dean Faculty of Engineering- Dr. Vikrant Sharma graced the auspicious occasion of Virtual Convocation 2020. On the special and the most awaited occasion of the virtual academic event, S.Gurdeep Singh Sihra honoured 25 toppers of different Engineering programs bagging gold, silver and bronze medals. Nearly 240+ GNA University students were awarded degrees in the various programs of Engineering. Mr. Gurdeep Singh Sihra, the Pro-Chancellor, GNA University cum the Chief Guest during his Presidential Address emphasized that the degree recipients should constantly ponder over the possibilities for the application of the latest updates happening in their sector to make a positive impact on the quality of life of the people. He congratulated and encouraged them to spread their acquired knowledge across the globe and prove to be an asset to your alma mater. Dr VK Rattan, the Vice-Chancellor, GNA University in her Convocation address reminded the degree recipients the worth of education in preparing the foundation of a strong mind, hence, a strong nation, and that the responsibility to fulfill the vision of the nation lies on their young shoulders. Dr. Monika Hanspal, Dean Academics, GNA University in her Welcome address congratulated all the degree recipients for the commencement of a new phase of their life. She stated that in a situation where the country is struggling hard to solve the problem of unemployment, the students graduating today are among the few privileged to pay tribute to their ‘Gurus’ despite the unprecedented days of COVID19. Dr. RK Mhajhan, the Registrar, GNA University during his Vote of Thanks duly thanked all the Award Winners and the alumni seeking degrees for joining whole- heartedly over the virtual interface. He wished them success in their career and stressed on being honest and committed for what they aspire and keep a clear vision in life. In his thanksgiving, he lauded the role of GNA Group both in industry and education and hoped that this would provide opportunities to the local youth in having access to high quality education which will enable them to get employment across the globe. Overall the Virtual Convocation 2020 happily culminated with the National Anthem with the brimming faces of all the degree recipients.
शिमला: वन, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री राकेश पठानिया ने आज यहां डलहौजी विधानसभा के लाभार्थियों को वर्चुअल रैली के माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न विकासात्मक कल्याणकारी योजनाएं चलाई गई हैं, जिनके माध्यम से लोगों को सीधे तौर पर सरकार द्वारा लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अन्तर्गत डलहौजी विधानसभा क्षेत्र में अब तक 767 परिवारों को घर स्वीकृत किए गए हैं। योजना में प्रत्येक लाभार्थी को मकान निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास योजना में अब तक विधानसभा क्षेत्र में 220 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत भी प्रत्येक लाभार्थी को 1.50 लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान की जा रही हैं। वन मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश कामगार कल्याण बोर्ड के माध्यम से डलहौजी विधानसभा क्षेत्र में 690 लाभार्थियों को पंजीकृत किया गया है, जिन्हें अब दो हजार रुपये का अतिरिक्त भत्ता प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत भी क्षेत्र में 898 को लाभान्वित किया गया है। इसके अलावा हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत 3893 महिलाओं को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। राकेश पठानिया ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत विधानसभा क्षेत्र में 6323 किसानों को 6 हजार रुपये की राशि खाद, बीज व कीटनाशक दवाइयां इत्यादि के लिए आवंटित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत डलहौजी में 3527 परिवारों को लाभान्वित किया गया। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से भी विधानसभा क्षेत्र के 165 परिवारों को राहत प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के माध्यम से चलाई जा रही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना व राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत डलहौजी विधानसभा क्षेत्र के 225 लाभार्थियों ने लाभ उठाया है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत 447, हिमकेयर योजना में 654 लाभार्थियों को लाभ प्रदान किए गए हैं, जबकि इस योजना में गम्भीर बीमारी की स्थिति में पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार सुविधा उपलब्ध की जा रही है। वन मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अन्तर्गत डलहौजी विधानसभा क्षेत्र में 434 लाभार्थी पंजीकृत हैं और इस योजना में मात्र 12 रुपये में दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा प्रदान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज वीडियो काॅन्फ्रेंस के माध्यम से कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के लाभार्थियों को सम्बोधित व बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार सुनिश्चित कर रही है कि, राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई नीतियां, कार्यक्रम और कल्याणकारी योजनाएं लक्षित समूह तक पहुंचे ताकि राज्य में गरीबों का सामाजिक, आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की वर्चुअल रैलियों का आयोजन करने से राज्य सरकार को लाभार्थियों से सीधा संवाद स्थापित करने में मदद मिलती है और उनके कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में प्रतिक्रिया भी प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार को कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी बेहतर सुझाव मिलते हैं। वर्तमान राज्य सरकार का पहला निर्णय बिना किसी आय सीमा के वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त की आयु सीमा को 80 से घटाकर 70 वर्ष किया है। इससे परिणामस्वरूप 200 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ पड़ा है, लेकिन साथ ही राज्य के 2.90 लाख वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित भी हुए हैं। जय राम ठाकुर ने कहा कि वह स्वयं ग्रामीण क्षेत्र से होने के नाते, वे विभिन्न समस्याओं के समाधान में आम आदमी को होने वाली कठिनाई को समझते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य सरकार ने जनमंच कार्यक्रम शुरू किया है और राज्य में अब तक लगभग 190 जनमंच आयोजित किए जा चुके हैं और 91 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निवारण किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100 के माध्यम से भी जनता की शिकायतों के निवारण में मदद की है। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत लगभग 22 लाख लोगों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से बाहर रह गई राज्य की आबादी को कवर करने के लिए, राज्य सरकार ने राज्य में हिमकेयर योजना शुरू की और 90 करोड़ रुपये खर्च करके अब तक लगभग 90,000 लोगों का इस योजना के अन्र्तगत उपचार किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में क्रोनिक बीमार मरीजों के परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, सहारा योजना भी चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत, ऐसे रोगियों को प्रति माह 3000 रुपये प्रदान किए जा रहे हैं और अब तक लगभग 7000 परिवारों को लाभान्वित किया गया है। जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार ने पहली बार राज्य में विभिन्न आवास योजनाओं के तहत बेघर गरीबों को 10,000 घर देने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत, युवाओं को स्वयं का रोजगार शुरू करने के लिए 13 करोड़ रुपये के ऋण प्रदान किए गए। उन्होंने युवाओं से इस योजना का लाभ उठाने के लिए आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि नौकरी चाहने वालों के स्थान पर नौकरी प्रदाता बने। कोविड-19 महामारी ने समाज के हर वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत लगभग 8.75 लाख किसानों के खाते में लगभग 180 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मार्च से जून माह तक प्रत्येक आशा कार्यकर्ता को 1000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की है। उन्होंने कहा कि जुलाई और अगस्त माह के लिए प्रत्येक आशा कार्यकर्ता को प्रति माह 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
अपने निरंतर प्रयासों और विपरीत परिस्तिथियों पर विजय हासिल करने के उपरांत प्रदेश सरकार चामुर्थी घोड़े की नस्ल के संरक्षण और पुनःस्थापन में सफल रही है। यह उन घोड़ों की नस्ल में से एक है, जिन पर कुछ साल पहले विलुप्त होने का खतरा मंडराया था। बेहतर क्षमता और बल-कौशल के लिए विख्यात चामुर्थी नस्ल के घोड़े हिमाचल के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों, मुख्य रूप से बर्फीली स्पीति घाटी में सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता के समय से पाए जाते थे। यह नस्ल भारतीय घोड़ों की 6 प्रमुख नस्लों में से एक है, जो ताकत और अधिक ऊंचाई वाले बर्फ से आच्छांदित क्षेत्रों में अपने पांव जमाने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। इन घोड़ों का उपयोग तिब्बत, लद्दाख और स्पीति के लोगों द्वारा युद्ध और सामान ढोने के लिए किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त, हिमाचल के कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर तथा पड़ोसी राज्यों में विभिन्न घरेलू और व्यावसायिक कार्यों के लिए व्यापक रूप से इनका उपयोग किया जाता रहा है। पशुपालन विभाग ने इन बर्फानी घोड़ों को बचाने और संरक्षित करने तथा पुनः अस्तित्व में लाने के उद्देश्य से वर्ष 2002 में लारी (स्पीति) में एक घोड़ा प्रजनन केंद्र स्थापित किया। यह केंद्र स्पीति नदी से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया गया है, जो राजसी गौरव और किसानों में समान रूप से लोकप्रिय घोड़ों की इस प्रतिभावान नस्ल के प्रजनन के लिए उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में इस प्रजनन केंद्र को तीन अलग-अलग इकाइयों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक इकाई में 20 घोड़ों को रखने की क्षमता और चार घोड़ों की क्षमता वाला एक स्टैलियन शेड है। इस केंद्र को 82 बीघा और 12 बिस्वा भूमि पर चलाया जा रहा है। विभाग द्वारा इस लुप्तप्राय प्रजाति के लिए स्थानीय गांव की भूमि का उपयोग चरागाह के रूप में भी किया जा रहा है। पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर के मुताबिक, इस प्रजनन केंद्र की स्थापना और कई वर्षाें तक चलाए गए प्रजनन कार्यक्रमों के उपरांत इस शक्तिशाली विरासतीय नस्ल, जो कभी विलुप्त होने की कगार पर थी, की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में इनकी आबादी लगभग चार हजार हो गई है। लारी फार्म में इस प्रजाति के संरक्षण के प्रयासों के लिए आवश्यक दवाओं, मशीनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अलावा पशुपालन विभाग के लगभग 25 पशु चिकित्सक और सहायक कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस केंद्र में इस नस्ल के लगभग 67 घोड़ों को पाला जा रहा है, जिनमें 23 स्टैलियन और 44 ब्रूडमेयर्स दोनों युवा और वयस्क शामिल हैं। प्रत्येक वर्ष पैदा होने वाले अधिकांश घोड़ों को पशुपालन विभाग द्वारा नीलामी के माध्यम से स्थानीय खरीदारों को बेचा जाता है। चार-पांच वर्ष की आयु के एक व्यसक घोड़े का औसत बाजार मूल्य वर्तमान में 30-40 हजार रुपये है। इन घोड़ों की सबसे अधिक लागत तीन वर्ष पूर्व 75 हजार रुपये दर्ज की गई थी। जनसंख्या, जलवायु और चरागाह के आधार पर एक वर्ष में औसतन अधिकतम 15 मादाएं गर्भधारण करती हैं और गर्भाधान के 11-12 महीने बाद बच्चा जन्म लेता है, जबकि एक वर्ष की आयु तक उसे दूध पिलाया जाता है। प्रजनन भी पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में करवाया जाता है। जन्म के एक महीने के बाद घोड़े के बच्चे को पंजीकृत किया जाता है और छह महीने की आयु में उसे दूसरे शेड में स्थानांतरित कर दिया जाता है। एक वर्ष का होने पर ही इसे बेचा जाता है। इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा वृद्ध अथवा अधिक संख्या होने पर चामुर्थी मादाओं को बेच दिया जाता है। इसके अलावा, घोड़े की अन्य नस्लों की देख-रेख, पालन-पोषण और उनका प्राचीन महत्व पुनः स्थापित करने के लिए विभाग द्वारा इस केंद्र पर प्रति वर्ष लगभग 35 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। स्टैलियन घोड़ों के संरक्षण के मामले में हिमाचल प्रदेश का स्टैलियन चार्ट में अग्रणी स्थान है और निरन्तर गुणात्मक घोड़ों के उत्पादन में सफलता हासिल की है। प्रदेश की सफलता और चामुर्थी प्रजाति की लोकप्रियता का अंदाजा अंतरराष्ट्रीय लवी, लदारचा मेलों और समय-समय पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनियों के दौरान प्राप्त किए गए विभिन्न पुरस्कारों से लगाया जा सकता है।
सीपीआईएम नेता संजय चौहान ने कहा है कि उनकी पार्टी प्रदेश में बीजेपी सरकार के एक मंत्री पर तथाकथित जमीन खरीद के लगे आरोपों पर मुख्यमंत्री से इसकी निष्पक्ष जांच तथा मंत्री को तुरंत पद से हटाने की मांग करती है। उन्होंने कहा कि जब तक मंत्री पद पर आसीन है तब तक इस मामले में निष्पक्ष जांच की अपेक्षा ही नहीं की जा सकती है और न ही इस प्रकार के आरोपों के चलते मंत्री पद की गरिमा बनी रह सकती है। चौहान ने कहा कि पिछले कुछ समय से प्रदेश में बेनामी जमीन सौदों व जमीन की खरीद में राजस्व कानूनों के उलंघन के कई मामले सामने आए हैं जिनमे काफी मामले ऐसे भी है जहाँ सत्ता के करीबी व अन्य राजनीतिक पहुँच के प्रभावशाली लोग व उनके परिवार के लोगो व संबंधियों पर भी जमीन खरीद में कानूनों की उलंघना के आरोप लगें है तथा इनमे से कुछ मामलो में न्यायालय में भी मुकदमे चले हैं। परन्तु सरकार इन मामलों पर संजीदा नहीं है और प्रदेश में बेनामी जमीन के सौदों व राजस्व कानून के उलंघन के इन मामलों पर कोई भी उचित कार्यवाही नहीं कर रही है जिससे आज प्रदेश में ज़मीन व अन्य संसाधनों पर राजनैतिक व आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोगों का कब्जा हो रहा है और गरीब को दबाव या गरीबी के कारण अपनी जमीन ऐसे लोगों को बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान बीजेपी सरकार जब से बनी है वह प्रदेश में निवेश के नाम पर इन्वेस्टर मीट जैसे आयोजन कर जमीन व भू राजस्व कानूनों में संशोधन कर प्रदेश के संसाधनों जिनमें जमीन, जल व जंगल सम्मिलित हैं अमीरों व कॉरपोरेट घरानों को सौंपने का काम कर रही है। एक ओर प्रदेश की गरीब जनता यदि सरकार से अपनी रोजी रोटी के लिए ज़मीन की मांग करती हैं तो सरकार इस मांग को बिल्कुल ही नजरअंदाज कर देती है और दूसरी ओर सरकार बड़े पूंजीपतियों व अमीर लोगों को प्रदेश की जनता के संसाधन कानून में फेरबदल कर इनको सौंपने का काम कर रही है। उन्होने कहा कि सीपीएम मांग करती है कि मंत्री व अन्य सत्ता पक्ष के लोगो तथा अन्य जिन भी लोगो के विरुद्ध गैर कानूनी रूप से जमीन खरीद व अन्य भू राजस्व कानूनो के उलंघना के आरोप लगें है इनकी निष्पक्ष जांच कर इन पर कानूनी कार्यवाही की जाए।
भाषा, कला एवं संस्कृति मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक नीति के लिए गठित समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक नीति का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को संरक्षित और जीवंत रखते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाना होगा। गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि इस नीति में प्रदेश के समृद्ध इतिहास के मौखिक रूप को कलमबद्ध करने के साथ-साथ उसे प्रचारित करने का भी प्रावधान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक नीति के माध्यम से प्रदेश की बहुमुखी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नीति में हिमाचल प्रदेश की विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं, बोलियों, लोक नाट्य, लोक गीतों का युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से इन विधाओं के विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का भी प्रावधान रखा जाएगा। प्रदेश के ऐतिहासिक अभिलेखों को संरक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रदेश के हर जिले में शोध केंद्र, पांडु लिपि शोध केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इस नीति का प्रारूप समयबद्ध तैयार करने के निर्देश दिए। गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि अन्य प्रदेशों की फिल्म सिटी की तर्ज पर प्रदेश में भी फिल्म सिटी की स्थापना की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की कला संस्कृति के संवर्द्धन तथा प्रसार की दिशा में विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। प्रदेश के सभी मंदिरों को सूचिबद्ध करने के साथ-साथ, मंदिरों के जीर्णोद्धार की दिशा में विशेष कार्य किया जाएगा और इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि उनकी पुरातन काष्ठ शैली को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। प्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को पर्यटन के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि इस दिशा में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा प्रदान किया जा सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल की कला एवं संस्कृति के प्रति बच्चों में रूझान पैदा करने के उद्देश्य से हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड को भी इस कार्य में सम्मिलित किया जाएगा।
राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा (Rajinder Rana) ने कहा है कि हर फैसले पर केंद्र का मुंह ताकने वाली प्रदेश सरकार अब प्रदेश के मंदिरों को खोलने के लिए असमंजस में एक दूसरे का मुंह ताक रही है जबकि प्रदेश के मंदिरों व उसके इर्दगिर्द रहने वाली आबादी मंदिरों के बंद होने से पूरी तरह प्रभावित हो रही है। मंदिरों के आसपास हर छोटे-बड़े कारोबारी हाल-बेहाल हो चुके हैं। पंडित, पंडो व पुजारियों की रोटी-रोजी पर संकट के बादल छाए हुए हैं। मंदिरों के आसपास बैठा व्यापारी वर्ग पर कारोबार न होने के कारण कर्जे का बोझ चढ़ रहा है, लेकिन सरकार केंद्र के इशारे का इंतजार कर रही है। हालांकि भारत के सभी बड़े मंदिर अब करीब-करीब एक सेट गाइडलाईन के तहत खोल दिए गए हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इस मामले में अभी तक पूरी तरह फिसड्डी साबित हुई है। लगता है कि सरकार को न मंदिरों के आसपास बैठे व्यापारी वर्ग की चिंता है और न ही मंदिरों में पूजा करवाने वाले पंडित, पुजारियों की कोई परवाह है। हालांकि कोविड-19 में संस्थानों को खोले जाने के नियम समूचे भारत में एक जैसे हैं, जिन पर कई राज्यों ने अपने विवेकानुसार धार्मिक संस्थानों व मंदिरों को खोलने का फैसला लिया है लेकिन प्रदेश में केंद्र के रिमोट से चलने वाली सरकार को रिमोट के दबने का इंतजार है। हैरानी यह है कि केंद्र के नियंत्रण में पंगु हो चुकी सरकार अपने स्तर पर कोई भी फैसला लेने में सक्षम नहीं हो पा रही है। राणा ने कहा जब एक ओर सरकार ने बसों में पूरे यात्रियों को बिठाकर सफर की इजाजत दे दी है तो सवाल उठता है कि अब सोशल डिस्टिेंसिंग के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं को आने की इजाजत देने से क्यों हिचकिचा रही है। उन्होंने कहा कि एहतियातन शर्तों के साथ सरकार मंदिरों में श्रद्धालुओं को आने की अनुमति दे। जब वैष्णो देवी के श्राइन बोर्ड में 5 हजार श्रद्धालुओं को आने की अनुमति के साथ मंदिर दर्शनों के लिए खोला गया है तो हिमाचल के मंदिर हिमाचलियों के लिए क्यों नहीं खोले जा सकते हैं। राणा ने कहा कि सरकार कम से कम हिमाचलियों के लिए तो मंदिरों के कपाट खोले। क्योंकि यह मामला हिंदु आस्था से जुड़ा है और अब श्रद्धालु दर्शनों के लिए बेताब व बेकरार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने विवेक के अनुसार धार्मिक संस्थानों व मंदिरों को खोलने का फैसला ले। अब सवाल यह उठता है कि सरकार अपने विवेक का इस्तेमाल कब और कैसे कर पाती है? उन्होंने कहा कि हर प्रदेश और हर क्षेत्र की अपनी समस्याएं व अपनी शिकायतें होती हैं जिसे हर राज्य की सरकार अपने विवेकानुसार हल करती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में सत्तासीन बीजेपी सरकार खुद को अपने स्तर पर कोई भी फैसला लेने में लगातार नाकाम पा रही है। इस कारण से हर छोटा-बड़ा फैसला या तो अफसरशाही के दबाव-प्रभाव में होता है या फिर केंद्र के हंटर के बाद फैसला लिया जाता है।
चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (सीएसकेएचपीकेवी) के कुलपति डाॅ. एच.के. चौधरी ने शनिवार को राजभवन में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से भेंट की। यह एक शिष्टाचार भेंट थी। राज्यपाल ने उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त होने पर बधाई देते हुए आशा जताई कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने डाॅ. एच.के. चैधरी को शोध कार्य और नई पद्धति पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया तथा ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी की अपेक्षा खेतों में कृषि गतिविधियों की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करने के प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए छोटे गांव को अपनाया जाना चाहिए और स्कूल छोड़ चुके युवाओं को प्राकृतिक खेती की प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाने चाहिए, ताकि वे दूसरों को भी प्रशिक्षण प्रदान कर सके। दत्तात्रेय ने जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय पौधों पर कार्य करने के निर्देश दिए, जिसके लिए नई परियोजनाएं शुरू की जानी चाहिए। यह भौगोलिक दृष्टि से कठिन क्षेत्रों के लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगा। डाॅ. एच.के. चैधरी ने राज्यपाल को आश्वासन दिया कि कृषि विश्वविद्यालय को नए आयाम तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलवाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
The economy of the day in our Country is shattered due to the reasons not to be detailed here, as to why blame anybody, it may create another controversy. Therefore, it is better to explore the possibilities as to how and who could handle and take it in their hands to give a big boost to strengthen it through certain remedial measures and maybe, we should take our countrymen into confidence and make them understand before dealing with such harsh steps. Basically, the main objective with the Govt or the next popular Govt that comes into power with clean and dedicated people who must have that required potentials in their minds i.e. the money of the Politicians deposited into the Swiss-Banks should immediately be withdrawn and transferred back to India and be treated as Indian National property forthwith. All Banks in our Country should ensure to supply the detail of Total money deposited with them by big Guns in general and by the politicians in particular with their complete addresses and all that along with the detail of their family members, close relatives, known ones with the further clarifications to the effect that any huge amounts deposited with the Banks namelessly with an untitled mode which must create doubts in the minds of investigating agencies that certain account/amount holders can not earn or manage to have such access towards the huge amount deposited by them under their name and style in a very white way. It is because of the very hard fact that this practice was never practiced upon earlier by the fellow Politicians due to their being CHIPS OF THE SAME BLOCK. It certainly allowed to happen due to the reasons that there was no option rather THIRD option available with the people of this country, whom they could have been able to elect and sent them to Parliament. Apart from the said remedy, there are other measures to be adopted likewise first to strengthen the shattered economy that too in the sweet will of the clean and responsible people in power, otherwise, the condition of our Country as on today is clearly visible and in case it goes on like this, definitely, we may stand nowhere in the eyes of the World and we may be held responsible by our generation and the generation to come. All detail to be given here is not possible. Its a gist simply.
सेब सीजन के शुरू होते ही शिमला में ट्रक एवम दूसरी ढुलाई वाली गाड़ियों के पलटने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। हर वर्ष सेब सीजन के दौरान हजारों ट्रक बाहरी राज्यों से आते हैं और सेब लेकर मंडियों तक जाते हैं। मैदानी इलाकों में तो ड्राइवर इन ट्रकों का सुरक्षित आवागमन करवाते हैं लेकिन पहाड़ो की सर्पीली सड़कों में चालक गाड़ी का संतुलन खो बैठते हैं। शनिवार शिमला के शोघी महली बाईपास पर एक ट्राला अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे लुढ़क गया। इस हादसे में किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। News: Truck rollover over Shoghi Mheli bypass road
प्रदेश में कोरोना से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब सोलन के बद्दी से एक और कोरोना संक्रमित की मौत का मामला सामने आया है। बद्दी की रहने वाली 75 साल की एक महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी जिसे गुरुवार रात आईजीएमसी शिमला में गंभीर हालत में लाया गया था और शनिवार सुबह उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया है। आईजीएमसी के प्रिंसिपल रजनीश पठानिया ने महिला की मौत की पुष्टि की है। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 25 हो गई है।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने आगामी मॉनसून सत्र के दृष्टिगत सुरक्षा प्रबन्धों से सम्बन्धित विधान सभा सचिवालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर विपिन परमार ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते मॉनसून सत्र के आयोजन में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाये। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सत्र के दौरान विधान सभा में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की धर्मल स्क्रीनिंग की जाये तथा हर प्रवेश द्वार पर सैनिटाईजर से लैस स्वचालित मशीनें स्थापित की जायें। परमार ने कहा कि जिनकी सेवायें सत्र के आयोजन के लिए आवश्यक है केवल उन्हें ही पास जारी किये जायें। उन्होंने कहा कि आगन्तुकों को प्रवेश नहीं दिया जायेगा। भीड़ को कम करने के लिए विधान सभा परिसर में प्रवेश की अनुमति सिर्फ उन्हें ही दी जाये जिनकी सेवायें वांछित है। परमार ने सभी प्रशासनिक सचिवों व विभागाध्यक्षों से आग्रह किया कि जिनका सत्र से सम्बन्धित कार्य आवश्यक है केवल उन्हीं के पास के लिए ऑन लाईन आवेदन भेजा जाये। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सत्र के दौरान विधान सभा सचिवालय . सदन तथा मुख्य द्वारों को एक दिन में दो बार सैनिटाईज किया जायेगा ताकि किसी भी तरह के संक्रमण को टाला जा सके। बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि विधान सभा सचिवालय में ई - प्रवेश पत्र online आवेदन पर ही दिया जाएगा । ई - विधान प्रणाली के तहत विधान सभा सचिवालय इसे online तरीके से मुद्रित करेगी। यह आवेदन सभी ई - प्रवेश पत्र पाने वालों को अनिवार्य है। विधान सभा सचिवालय में ई - प्रवेश पत्र की जांच हेतु पुलिस द्वारा कम्पयुट्रीकृत जांच केन्द्र मुख्य द्वारों पर स्थापित किए जाएगें ताकि कम से कम असुविधा हो तथा जांच भी पूर्ण हो। विपिन परमार ने कहा कि पूर्व की भांति इस बार भी क्युआर कोड के माध्यम से फोटो युक्त ई - प्रवेश पत्र को लेपटॉप के माध्यम से प्रमाणित किया जाएगा। इन केन्द्रों पर हर व्यक्ति का डॉटाबेस बनेगा जिसे पुलिस नियन्त्रण कक्ष से मॉनिटर करेगी। उन्होंने कहा कि ई प्रवेश पत्र ई - विधान के अन्तर्गत बनाये जाएंगे। बैठक में सदस्यों तथा सत्र के कार्य से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को कम से कम असुविधा हो के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया कि विधान सभा सचिवालय द्वारा जारी अधिकारी दीर्घा पास , स्थापना पास तथा प्रेस संवाददाताओं को जारी किए पास प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएगें , ताकि सुरक्षा कर्मियों द्वारा फ्रिस्किंग की कम से कम आवश्यकता रहे। प्रेस संवाददाताओं की सुविधा एंव सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रेस संवाददाताओं का प्रवेश यथावत् गेट नं . 3 ,4 ,5 ,46 से ही रखा जाए । विधान सभा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अपने पहचान - पत्र प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे। इसके अतिरिक्त यह भी निर्णय लिया गया कि कोई भी सरकारी अधिकारी / कर्मचारी व अन्य पास धारक अपना शासकीय पास किसी अन्य को स्थानान्तरित नहीं करेगा , अन्यथा कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। बैठक में निर्णय लिया गया कि विधान सभा परिसर की मुख्य पार्किंग में केवल मंत्रियों , विधायकों , मुख्य सचिव , अतिरिक्त मुख्य सचिवों एवं प्रशासनिक सथियों के वाहनों को ही पार्किंग करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। प्रेस संवाददाताओं लथा विधान सभा के अधिकारियों / कर्मचारियों को कनैडीचौक तथा महालेखाकार कार्यालय के बीच माल रोड़ पर ( गेट नं . - 2 पर 30 मीटर के दायें तथा बायें को छोड़कर ) चिन्हित स्थानों पर पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी। आगे यह भी निर्णय लिया गया कि विधान सभा सचिवालय की ओर से जारी पार्किंग स्टिकरज वाहन के आगे प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि धारको को कम से कम असुविधा का सामना करना पडे । मोबाईल फोन , पेजर आदि विधान सभा के अन्दर ले जाने पूर्णतः प्रतिबन्ध रहेगा।
भारतीय पुलिस सेवा में हिमाचल प्रदेश काडर के छः नव नियुक्त प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज यहां मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से भेंट की। अधिकारियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें भारतीय पुलिस सेवा का हिस्सा बनने पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सभी युवा अधिकारियों के लिए हिमाचल प्रदेश जैसे शान्त राज्य में सेवाएं प्रदान करना सम्मान की बात है। जय राम ठाकुर ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि छः भारतीय पुलिस सेवा प्रशिक्षुओं में से तीन महिला अधिकारी हंै। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रदेश में महिला सशिक्तकरण की दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगा और राज्य की बेटियों को उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए भी प्रेरित करेगा। पुलिस महानिदेशक संजय कुण्डू ने मुख्यमंत्री को युवा पुलिस अधिकारियों का परिचय देते हुए कहा कि सभी अधिकारी विभिन्न पृष्ठभूमि और क्षेत्रों से सम्बन्ध रखते हैं और इनमें से एक महिला अधिकारी हिमाचल प्रदेश से है। भारतीय पुलिस सेवा प्रशिक्षु अभिषेक, अमित यादव, मयंक चैधरी, चारू शर्मा, जिन्ना अफरोज और कामया मिश्रा ने मुख्यमंत्री से अपने अनुभव साझा किए और भविष्य की योजनाओं से अवगत करवाया।
कोविड महामारी के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत जिला में अप्रैल से जून माह तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चयनित एक लाख 11 हजार परिवारों को 62880 क्विंटल चावल और 3234 किंवटल काला चना आबंटित किया है। जिला में महामाराी के दौरान फंसे 3045 प्रवासी मजदूर परिवारों के 6566 सदस्यों को आत्म निर्भर भारत योजना के तहत परिवारों के 641 क्विंटल चावल और 33 क्विंटल चना वितरित किया गया है। यह जानकारी उपायुक्त ऋग्वेदठाकुर ने आज यहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सर्तकता समितिक की बैठक की समीक्षा करते हुए दी। उन्होंने बताया कि जिला में इस वर्ष फरवरी से जुलाई तक कुल 74782 मुफत रिफिल वितरित किए गए हैं। जिसमें हिमाचल प्रदेश गृहिणी सुविधा योजना के तहत 18403 रिफिल और प्रधानमंत्री उज्जवल योजना के तहत 56379 रिफिल वितरित किएगए।उन्होंने कहा कि जिला मेंकुल 27 गैस एजेंसियों के माध्यम से कुल 335565 उपभोक्ताओं को एलपीजी की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला में गृहिणी सुविधा योजना के तहत जिनपरिवारों के पास एलपीजी गैस कनैक्शन नहीं थे, उन्हें मुफत गैस कनैक्शन वितरित करदिए गए हैं। योजना शुरू होने के बाद अब तक जिला में 54418 गैस कनैक्शन जारी कर दिएगए हैं। ऋग्वेद ठाकुर ने कहाकि मंडी जिला में 784 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से 3 लाख 11 हजार 033 राशन कार्ड धारकों को आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है। इनमें बीपीएल, एपीएल, अंत्योदय अन्न योजना, प्राथमिक गृहस्थियां एवं अन्नपूर्णा योजना के तहत आने वाले लाभार्थी शामिल हैं। अन्तोदय राशन कार्ड धारकों को 18 किलो 800 ग्राम गंदम 3.20 रूपये किलो और 15 किलो चावल 3 रूपये किलो की दर से प्रत्येक राशन कार्ड पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया जिला में एपीएल श्रेणी के तहत 201836 राशन कार्ड धारक, बीपीएल के 44795, अंत्योदय अन्न योजनाके तहत 27185 प्राथमिक गृहस्थियों के तहत 37217 और अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत 40 राशन कार्ड धारक हैं। बीते 6 महीनों में उपभोक्ताओं को 239807 क्विंटल आटा, 209727 क्विंटल चावल, 50883 क्विंटल दालें, 31210 क्विंटल चीनी, 28लाख 80 हजार लीटर खाद्य तेल एवं 6 लाख 93 हजार लीटर मिट्टी का तेल वितरित किया गया। 4326 औचक निरीक्षण, 160314 रूपए जुर्माना कियागया ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की वस्तुएं उपलब्ध करवाने के लिए हर संभव प्रयासकिए जा रहे हैं। इसी दिशा में बीते 6 महीनों में 4326 औचक निरीक्षण किएगए। इनमें अनियमितताएं पाए जाने पर 10 मामलों में कार्यवाही की गई जबकि 105 मामालों में चेतावनी दी गई । विभिन्न अनियमितताओं पर इस अवधि के दौरान कुल 160314 रूपये का जुर्माना किया गया। उपायुक्त ने संबधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के साथ साथ बाजार में उपलब्ध खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता की भी समय-समय पर जांच करते रहें ताकि उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गुण्वत्तापरक वस्तुएं प्राप्त हों। उन्होंने बताया कि आयकरदाताओं के राशन कार्ड विभाग द्वारा ब्लॉक किए जा रहे हैं जिसके उपरान्त उन्हें उचित मूल्य की दुकान से राशन नहीं मिलेगा। इस अवसर पर क्षेत्रीयप्रबन्धक पंकज शर्मा, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक लक्ष्मण सिंह, सहायक पंजीयकसहकारी सभाएं कमलेश कुमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी बर्षा, राजन कुमार, उपजिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र जमवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे
ग्राम पंचायत गांवसारी के तहत महिला मंडल रावसी की महिलाओं ने अपने गांव रावसी मे एक दर्जन महिलाओं के साथ सफाई एवं भांग उखाडों अभियान चलाया। इस दौरान महिलाओं ने गांव के रास्तों,नालियों व बावडियों की सफाई के साथ रास्तों मे उगी भांग के पौधों को नष्ट किया। महिला मंडल की प्रधान बेबी देवी ने बताया कि महिला मंडल समय समय पर गांव मे स्वच्छता अभियान चलाता है। वही समाजिक कुरीतियों को लेकर भी लोगों को जागरूक करने का काम करता हैं। इस अभियान मे सुबरना देबी,चंद्रकांता,बबली देवी,सीता देवी व रूपा देवी सहित सभी महिलाओं ने सहयोग किया हैं।


















































