एसवीएन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कुनिहार ने एक बार फिर उत्कृष्ट शिक्षा का प्रदर्शन करते हुए कक्षा 12वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम में 100 प्रतिशत सफलता हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विद्यालय के कला, वाणिज्य और विज्ञान तीनों संकायों में विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिससे पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम में विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया।
विज्ञान संकाय में सलोनी ठाकुर ने 455/500 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। जानवी 454/500 अंकों के साथ द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं विधि पंवर और हरमिंदर ने 427/500 अंक लेकर संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विद्यालय अध्यक्ष टीसी गर्ग ने बताया कि तीनों संकायों का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है, जो विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का प्रतिफल है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और अभिभावकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और विश्वास जताया कि विद्यालय भविष्य में भी ऐसे ही उत्कृष्ट परिणाम देता रहेगा।
विद्यालय की प्रधानाचार्य नीति चौधरी, पीटीए अध्यक्ष हेमंत शर्मा तथा समस्त अध्यापक वर्ग ने भी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उन्होंने कहा कि विद्यालय के विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
बी.एल. सेंट्रल पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, कुनिहार ने एक बार फिर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता को साबित करते हुए कक्षा 12वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम में 100 प्रतिशत सफलता दर्ज की है। विद्यालय के तीनों संकाय- कला, वाणिज्य और विज्ञान- में विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिससे पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
विद्यालय प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित परिणाम में विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया।
कला संकाय में वैशाली ने 92.2% अंक लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। दक्ष ठाकुर (91%) दूसरे, सोनम (89.6%) तीसरे स्थान पर रहे। पलक वर्मा (88.3%) चौथे तथा पियूष (87.2%) पांचवें स्थान पर रहे।
वाणिज्य संकाय में तन्मय ने 89.6% अंक के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। अंशुमन और दिशिता (84.2%) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। दिव्या (83.4%) चौथे तथा निहारिका और अमन वर्मा (82.2%) पांचवें स्थान पर रहे।
विज्ञान संकाय में अविका ने 89% अंक के साथ विद्यालय में पहला स्थान प्राप्त किया। सौम्या ठाकुर और उर्वशी (85.4%) संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। अंजलि (85%) तीसरे, वैभव (84.2%) चौथे तथा पल्लवी पाल (83.6%) पांचवें स्थान पर रहीं।
विद्यालय अध्यक्ष ने बताया कि तीनों संकायों का परिणाम 100 प्रतिशत रहा, जो विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय पिछले 31 वर्षों से लगातार उत्कृष्ट परिणाम दे रहा है और प्रदेश में ‘A ग्रेड’ का दर्जा प्राप्त कर चुका है। विद्यालय के विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्यालय की मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा, पीटीए अध्यक्ष रतन तंवर और समस्त अध्यापक वर्ग ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सदर थाना बिलासपुर की टीम ने लखनपुर स्थित एक निजी होटल में छापेमारी कर तीन युवकों और दो युवतियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 15.85 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया गया है।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि होटल बालाजी के कमरा नंबर 205 में कुछ संदिग्ध लोग ठहरे हुए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत दबिश दी। अचानक हुई कार्रवाई से कमरे में मौजूद आरोपियों में हड़कंप मच गया।
तलाशी के दौरान पुलिस ने मौके पर मौजूद पांचों आरोपियों को काबू किया और उनके पास से 15.85 ग्राम चिट्टा बरामद किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वीरभा (जिला ऊना), धीरज कुमार (ऊना), अनुज संधु उर्फ अक्षु (बिलासपुर), अंजली शर्मा (शिमला) और पूजा (किन्नौर) के रूप में हुई है।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
एसपी बिलासपुर संदीप धवल ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी न केवल नशे का सेवन कर रहे थे, बल्कि इसे स्थानीय स्तर पर बेचने की भी योजना बना रहे थे।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सोमवार को 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। इस वर्ष कुल परीक्षा परिणाम 92.02 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर रहा है।
बोर्ड ने आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स तीनों संकायों का रिजल्ट एक साथ जारी किया है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने रोल नंबर के माध्यम से अपना परिणाम देख सकते हैं।
मेरिट लिस्ट में साइंस संकाय की सायला कश्यप ने 99 फीसदी अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। दूसरे स्थान पर संचिता धीमान और कांशी शर्मा रही हैं, दोनों ने 98.6 फीसदी अंक हासिल किए। तीसरे स्थान पर तमन्ना शर्मा, नितिन कुमार और वैशाली ठाकुर ने जगह बनाई है।बोर्ड के नियमों के अनुसार, पास होने के लिए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। एक या दो विषयों में कम अंक आने पर छात्रों को कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा।
इसके अलावा, जो छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं, वे री-चेकिंग या पुनर्मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अंक बढ़ने पर मार्कशीट अपडेट की जाएगी, जबकि कम होने की स्थिति में पहले वाले अंक ही मान्य रहेंगे।
पिछले वर्ष 12वीं कक्षा का कुल परीक्षा परिणाम 83.16 प्रतिशत रहा था, ऐसे में इस बार बेहतर रिजल्ट से छात्रों में उत्साह देखने को मिल रहा है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) कल यानी 4 मई 2026 को कक्षा 12वीं का रिजल्ट जारी करेगा। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स तीनों स्ट्रीम के नतीजे एक साथ सुबह 11 बजे धर्मशाला स्थित बोर्ड मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषित किए जाएंगे।
छात्र अपना रिजल्ट ऑनलाइन चेक कर सकेंगे, जिसके लिए रोल नंबर तैयार रखना जरूरी है। रिजल्ट जारी होते ही पास प्रतिशत, टॉपर्स की लिस्ट और कुल परीक्षार्थियों का आंकड़ा भी सामने आएगा।
इस बार परीक्षाएं 3 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक आयोजित हुई थीं और तब से छात्र बेसब्री से नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) नॉर्दन रेंज कांगड़ा ने नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने संतोषगढ़ क्षेत्र में एक कार से 1 किलो 5 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया है, जिसे अब तक की सबसे बड़ी खेप बताया जा रहा है।
यह कार्रवाई संतोषगढ़ के वार्ड नंबर 1 स्थित शिव मंदिर के पास की गई, जहां STF टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर नाका लगाया था।
नाकेबंदी के दौरान टाहलीवाल की ओर से आ रही एक कार (HP 20A 6570) को जांच के लिए रोका गया। तलाशी लेने पर वाहन से भारी मात्रा में चिट्टा बरामद हुआ।
पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान गुरमुख सिंह (40) निवासी बरनोह, रमन कुमार (41) निवासी समूरकलां और सर्वजीत सिंह (28) निवासी अपर देहलां के रूप में हुई है।
तीनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
एसपी ऊना सचिन हिरेमठ के अनुसार, पुलिस अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बरामद चिट्टा कहां से लाया गया था और इसके पीछे कौन-सा नेटवर्क सक्रिय है।
पुलिस को आशंका है कि आरोपी किसी बड़े नशा तस्करी गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वे कब से इस अवैध धंधे में संलिप्त थे।
हिमाचल के कांगड़ा में नशे के खिलाफ अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। Himachal Road Transport Corporation (HRTC) की अमृतसर से बैजनाथ जा रही बस से 130.48 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है, मामले में 13 साल के नाबालिग को हिरासत में लिया गया है।
गगल के बनोई पुल के पास चेकिंग के दौरान पुलिस ने बस को रोका और तलाशी ली। नाबालिग के बैग से हेरोइन बरामद हुई। पूछताछ में सामने आया कि नशा अमृतसर में एक रिश्तेदार ने दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की तलाश जारी
संगठन सृजन अभियान के तहत नियुक्त जिला अध्यक्षों के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दिशा-निर्देशों पर धर्मशाला में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 30 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और जम्मू-कश्मीर के जिला अध्यक्ष भी भाग लेंगे। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी मुख्य रूप से शामिल होंगे। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार ने बुधवार को शिमला स्थित प्रदेश पार्टी मुख्यालय राजीव भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
प्रशिक्षण के दौरान जिला अध्यक्ष विभिन्न गांवों का दौरा कर लोगों से संवाद भी करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शिमला ग्रामीण और किन्नौर के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कार्यक्रम से पहले कर दी जाएगी, ताकि वे भी इसमें शामिल हो सकें। उन्होंने आगे बताया कि कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हो चुका है और एक-दो दिनों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियां भी कर दी जाएंगी। इसके बाद जिला कमेटियों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर विनय कुमार ने कहा कि ये चुनाव पार्टी के लिए सेमीफाइनल की तरह हैं, क्योंकि अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी इन्हें गंभीरता से ले रही है। जिला परिषद के लिए उन्हीं उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पार्टी की विचारधारा से जुड़े हों। यदि किसी क्षेत्र में एक से अधिक दावेदार सामने आते हैं, तो उनके बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल है। मुख्यमंत्री द्वारा पेश बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। साथ ही, आगामी नगर निगम चुनावों के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, जिसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की थी। मोदी के नेतृत्व में ही 2021-2022 से 2025-2026 तक 5 वर्षों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया था। इसकी वजह से पीएम मोदी के गारंटी का भी असर देखने को साफ मिला और इस योजना के तहत 29 फरवरी, 2024 तक 56.67 करोड़ लोगों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। 29 फरवरी, 2024 तक, 27.73 करोड़ महिलाएं और 29.11 करोड़ पुरुषों को आभा कार्ड से लाभ हुआ है। वहीं 34.89 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दस्तावेजों को इससे जोड़ा गया है।
क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में यूनिफाइड डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की मदद करने के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इससे सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता खोलने के लिए ऑफलाइन मोड को मदद पहुंचती है। इसके अलावा भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा के लिए आभा ऐप और आरोग्य सेतु जैसे विभिन्न एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो आम लोगों को मदद पहुंचाती है। आभा ऐप एक प्रकार का डिजिटल स्टोरेज है, जो किसी भी व्यक्ति के मेडिकल दस्तावेजों का रखने का काम आता है। इस ऐप के जरिए मरीज रजिस्टर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क भी कर सकते हैं।
भारत में बीजेपी की मोदी सरकार ने बीते 10 सालों के अपनी सरकार में कई सारे मील के पत्थर हासिल किया है। इन 10 सालों में पीएम मोदी के विजन ने भारत को अगले 23 साल बाद यानी साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के ओर मजबूती से कदम भी बढ़ा लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने देश के हित में जो भी फैसले लिए है, उनमें से हेल्थ सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।
एसवीएन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कुनिहार ने एक बार फिर उत्कृष्ट शिक्षा का प्रदर्शन करते हुए कक्षा 12वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम में 100 प्रतिशत सफलता हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विद्यालय के कला, वाणिज्य और विज्ञान तीनों संकायों में विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिससे पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम में विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया।
विज्ञान संकाय में सलोनी ठाकुर ने 455/500 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। जानवी 454/500 अंकों के साथ द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं विधि पंवर और हरमिंदर ने 427/500 अंक लेकर संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विद्यालय अध्यक्ष टीसी गर्ग ने बताया कि तीनों संकायों का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है, जो विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और अभिभावकों के सहयोग का प्रतिफल है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और अभिभावकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और विश्वास जताया कि विद्यालय भविष्य में भी ऐसे ही उत्कृष्ट परिणाम देता रहेगा।
विद्यालय की प्रधानाचार्य नीति चौधरी, पीटीए अध्यक्ष हेमंत शर्मा तथा समस्त अध्यापक वर्ग ने भी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उन्होंने कहा कि विद्यालय के विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में आज मैच होने वाला है। भारत-पाकिस्तान के बीच मैच का मुकाबला हमेशा से रोमांचक रहा है। इसे देखने के लिए लोगों में बहुत उत्साह देखा जाता था। लेकिन इस बार इस मैच को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोग भी भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर गुस्से में है। सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस मैच का जोरो से बहिष्कार किया जा रहा है। साथ ही पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिवारों ने भी इस मैच पर कड़ा विरोध जताया है। अब तो भाजपा के कई सहयोगी भी इस मैच के विरोध में हैं। हालांकि क्रिकेट फैंस इसे लेकर अलग बंटे हुए हैं। इस मैच का कहीं विरोध किया जा रहा है, तो कहीं टीम इंडिया की जीत के लिए पूजा भी हो रही है।
नई खेल नीति के मुताबिक
सरकार की नई खेल नीति के मुताबिक भारत ने फैसला किया है भारत पाकिस्तान के साथ कोई भी द्विपक्षीय मैच नहीं खेलेगा पर बहुपक्षीय टूर्नामेंट जैसे कि एशिया कप या ICC प्रतियोगिता में पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा।
विरोध की वजह
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच यह पहला इंटरनेशनल मैच है। आपको बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों द्वारा पहलगाम हमला हुआ था जिसमें कई भारतीय मरे थे और कहा जा रहा था कि इस हमले के पीछे पकिस्तान का हाथ है। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर किया। इसी वजह से भारत के लोगों में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर नाराजगी और गुस्सा है।
ओवैसी की पार्टी AIMIM ने किया प्रदर्शन
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से पूछा है कि क्या मैच से कमाया जाने वाला मुनाफ़ा पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों की जान से ज्यादा कीमती है। अहमदाबाद में AIMIM ने भारत-पाकिस्तान मैच के खिलाफ प्रदर्शन किया।
AAP कार्यकर्ताओं ने किया बहिष्कार
चंडीगढ़ में AAP कार्यकर्ताओं ने भी 'BCCI शर्म करो' के नारे लगाए
शिंदे शिवसेना नेता ने किया विरोध
शिंदे शिवसेना के नेता संजय निरूपम ने इस मैच के विरोध में कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत को क्षति पहुंचाने वाली नीति अपनाई है, पाकिस्तान ने आतंकियों को पाला पोषा है और इन आतंकियों ने भारत के निर्दोष लोगों पर हमले किए हैं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहिए।
शिवसेना उद्धव गुट ने मैच के विरोध में तोड़ डाले टीवी
पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने किया बहिष्कार
पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा कि वे भारत-पाकिस्तान मैच के साथ पूरे एशिया कप का बहिष्कार कर रहे हैं हूं। उन्होंने कहा कि पुलवामा, पहलगाम, पठानकोट जैसे आतंकी हमलों को भुलाया नहीं जा सकता।
पीड़ित परिवारों ने जाहिर किया गुस्सा
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए पुणे के संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने कहा कि यह मैच नहीं होना चाहिए था। यह बहुत ही शर्मनाक है। अभी हाल में पहलगाम हमला हुआ और फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ। तो इसके बाद यह मैच नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा यह भी कहा कि इन्हें परवाह नहीं कि कोई मर गया।
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी।
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है।
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा।
घटस्थापना की सामग्री
हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।
कलश स्थापना की विधि
पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।
यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।
कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?
यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए।
होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं।
कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के हक में एक एतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब बच्चा गोद लेने पर भी मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि गोद लिए गए बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, मां को पूरे 12 हफ्ते की छुट्टी दी जाएगी। कोर्ट ने उस कानूनी प्रावधान को निरस्त कर दिया है, जिसमें सिर्फ तीन महीने तक की उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मैटरनिटी लीव की अनुमति थी, लेकिन अब ऐसी कोई शर्त नहीं है। मौजूदा समय में यह नियम है कि बच्चा गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव तभी मिलेगी जब गोद लिया गया बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एक बायोलॉजिकल मां की तरह ही गोद लिए गए बच्चे की मां को भी मैटरनिटी लीव मिलने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि मैटरनिटी का अधिकार और बच्चे की देखभाल की जरूरत उम्र पर निर्भर नहीं करती। कोर्ट ने तीन महीने की उम्र सीमा को हटाते हुए कहा कि ये भेदभाव करता है। कोर्ट ने माना कि बच्चे को गोद लेने वाली मां को भी बच्चे के साथ इमोशनल तालमेल बिठाने और उसकी देखभाल के लिए समय की जरूरत होती है। इसके अलावा कोर्ट ने इस प्रक्रिया में पिताओं की भूमिका पर भी बात की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो पितृत्व अवकाश पर भी एक ठोस नीति बनाने पर विचार करे। कोर्ट का मानना है कि बच्चे के पालन पोषण में पिता की भागीदारी भी उतनी अहम है। इसलिए इसे सामाजिक सुरक्षा लाभ के दायरे में लाना चाहिए
खाड़ी देश के 'पर्शियन गल्फ' में फंसे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कैप्टन रमन कपूर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि अमेरिका-इजरायल और इरान युद्ध के कारण 20 हजार नाविकों में दहशत का माहौल है। इनमें करीब 2000 भारतीय नाविक हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध के कारण 500 से 700 समुद्री जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं। कैप्टन रमन ने कहा कि किसी भी शिप पर कभी भी अटैक हो रहा है। स्पेशियली उन शिप पर, जिनका कोई भी लिंक अमेरिका और इजरायल के साथ है, अगर वो मूवमेंट शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि इरान चाहता है कि पर्शियन गल्फ से (भारत और चीन को छोड़कर) अन्य देशों को कोई भी ऑयल टैंकर बाहर न जाए।
कैप्टन रमन ने कहा कि उनका शिप पर्शियन गल्फ में फंसा हुआ है। वह कुछ दिन पहले ही ईराक से कार्गो लोड करके आए हैं। उनकी स्थिति ऐसी है कि वह न तो बाहर जा सकते हैं और न ही रह सकते हैं। उनके पास शिप में अलर्ट रहने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। एयरपोर्ट और समुद्री रास्ते बंद हैं। कैप्टन कपूर ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण इन जहाजों को फिलहाल आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे सभी जहाज समुद्र में एक ही जगह पर रुके हुए हैं और नाविक लगातार तनाव में हैं, जो लगातार अपने परिवारों से संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। अनिश्चित हालात के बीच नाविकों को अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।
साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई, मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।
यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा।
16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी
अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।
साहिर-अमृता की पहली मुलाकात
ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"
साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'
आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से
साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"
अमृता लिखती है-
"यह आग की बात है
तूने यह बात सुनाई है
यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगायी थी
चिंगारी तूने दी थी
ये दिल सदा जलता रहा
वक्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा
ज़िन्दगी का अब गम नहीं
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ
अब और सिगरेट जला ले "
वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।"
लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया।
अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना
अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।
इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था-
"मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी
जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के
तेरे केनवास नु वलांगी
पता नही किस तरह कित्थे
पर तेनु जरुर मिलांगी"
इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।
जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है।
उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।
हिमाचल प्रदेश एक रहस्यों से भरा राज्य है। यहां ऐसी कई चीज़ें है जिसे समझ पाना वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद मुश्किल है। ऐसे ही कई रहस्यों में से एक है हिमाचल की स्पीति घाटी में मौजूद करीब 550 साल पुरानी 'ममी'। करीब 550 साल पुरानी इस 'ममी' को स्थानीय लोग भगवान समझकर पूजते हैं। भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के लाहौल स्पीति के गयू गांव में मिली इस ममी का रहस्य आज भी बरकरार है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए देश विदेश से यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से करीब 50 किमी दूर गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण दुनिया से कटा रहता है।
कहते हैं कि यहां मिली यह ममी तिब्बत से गयू गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा संघा तेंजिन की है। कहा जाता है कि लामा ने साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 550 वर्ष से अधिक पाई गई है। आम तौर पर जब भी ममी की बात होती है तो जहन में मिस्र में पाए जाने वाली पट्टियों में लिपटी ममी याद आती है। किसी मृत शरीर को संरक्षित करने के लिए एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है, जिससे वह ममी लम्बे समय तक सरंक्षित रहती है। लेकिन इस ममी पर किसी तरह का कोई लेप नहीं लगाया गया है, फिर भी इतने वर्षों से यह ममी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इस तथ्य की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है। इस स्थान पर एक शरीर मौजूद है, जिसके सर बाल है, त्वचा है और नाखून भी पर न तो ये शरीर गलता है और न समय के साथ बदलता है। इसीलिए यहां के स्थानीय लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
बताया जाता है कि ITBP के जवानों को खुदाई के दौरान इस ममी का पता चला था। सन 1975 में भूकंप के बाद एक पुराने मकबरे में ये भिक्षु का ममीकृत शरीर दब गया था। इसकी खुदाई बहुत बाद में 2004 में की गई थी, और तब से यह पुरातत्वविदों और जिज्ञासु यात्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। खुदाई करते वक्त ममी के सर पर कुदाल लग गया था। ममी के सर पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। देखने वालों की भीड़ देखकर बाद में इस ममी को गाँव में स्थापित किया गया। खास बात यह है कि ममी प्रकृति का प्रकोप झेलने के बावजूद भी सही सलामत है।
प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम
यह ममी मिस्र के ममीकरण से बिल्कुल अलग है। इसे सोकुशिनबुत्सु नामक एक प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम कहा जाता है, जो शरीर को उसके वसा और तरल पदार्थ से दूर कर देता है। इसका श्रेय जापान के यामागाटा में बौद्ध भिक्षुओं को दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस प्रक्रिया में दस साल तक लग सकते हैं। इसकी शुरुआत साधु के जौ, चावल और फलियों (शरीर में वसा जोड़ने वाले भोजन) को खाने से रोकने के साथ होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मृत्यु के बाद वसा यानी फैट सड़ जाती है और इसलिए शरीर से वसा को हटाने से इसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह अंगों के आकार को इस हद तक कम करने में भी मदद करता है कि सूखा हुआ शरीर अपघटन का विरोध करता है। शरीर के पास एक निरोधक के साथ-मोमबत्तियां जलाई जाती है ताकि इसे धीरे-धीरे सूखने में मदद मिल सके। शरीर में नमी को खत्म करने और मांस को हड्डी पर संरक्षित करने के लिए एक विशेष आहार भी दिया जाता है। मृत्यु के बाद, भिक्षु को सावधानी से एक भूमिगत कमरे में रखा जाता है। समय के साथ भौतिक रूप सचमुच में एक मूर्ति बन जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से तीस से भी कम स्व-ममीकृत भिक्षु दुनिया भर में पाए गए हैं। उनमें से अधिकांश जापान के एक द्वीप उत्तरी होंशू में पाए गए हैं। यहां पर भी भिक्षु प्राकृतिक ममीकरण की इस प्रथा का पालन करते हैं। संघा तेनज़िन के शरीर में अवशिष्ट नाइट्रोजन (लंबे समय तक भुखमरी का संकेत) के उच्च स्तर से पता चलता है कि उन्होंने खुद को ममी बनाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया था।
दांत और बाल आज भी संरक्षित
इस ममी के दांत और बाल अभी भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं। इस मम्मी को एक छोटे से कमरे में एक कांच के बाड़े में रखा गया है, जो एक लोकप्रिय गोम्पा के करीब स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए इस ममी को एक कमरे में रखा गया है। पर्टयक खिड़की के माध्यम से उसकी एक झलक देख सकते है। इस कमरे को केवल महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान खोला जाता है। गयू आधुनिकीकरण से अछूता एक शांत स्थान है। संघा तेंजिन की ममी आज एक मंदिर में विराजमान है, उसका मुँह खुला है, उसके दाँत दिखाई दे रहे हैं और आँखें खोखली हैं। वसा और नमी से रहित, यह जीवित बुद्ध का प्रतीक माना जाता है।
गाँव के अस्तित्व के लिए दिया था बलिदान
मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि संघा तेंजिन ने गाँव के अस्तित्व के लिए खुद को बलिदान कर दिया था। कहानी यह है कि उन्होंने अपने अनुयायियों से विनाशकारी बिच्छू के संक्रमण के बाद खुद को ममीकृत करने के लिए कहा। जब उनकी आत्मा ने उनके शरीर को छोड़ दिया, तो ऐसा माना जाता है कि क्षितिज पर एक इंद्रधनुष दिखाई दिया जिसके बाद बिच्छू गायब हो गए और प्लेग समाप्त हो गया।
सिर्फ 100 लोग बस्ते है इस गांव में
गयू गांव एक बेहद शांतिपूर्ण और सुंदर गांव है। इस गांव में लगभग 100 लोग हैं। यहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर के स्थानों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस गांव की दूरी काज़ा से लगभग 80 किमी है। जबकि शिमला से लगभग 430 किमी और मनाली से कुंजुम दर्रे के माध्यम से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है। यहां आने का सबसे सही समय गर्मियों के दौरान है।
बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के बाद आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं। इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।
हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।
ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।