जून माह में हिमाचल प्रदेश में बनीं 14 समेत देश की 48 दवाओं के सैंपल फेल हो गए। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने जून के ड्रग अलर्ट में ये दवाएं मानकों पर सही नहीं पाई हैं। प्रदेश में निर्मित जिन 14 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें सोलन की आठ, कांगड़ा-सिरमौर की दो-दो और ऊना जिले में बनी एक दवा शामिल है। ड्रग कंट्रोलर नवनीत मारवाह ने बताया कि दवाओं के कुल 1,273 सैंपल लिए थे, जिनमें 1,225 सैंपल खरे उतरे, जबकि 48 फेल हुए हैं। इनमें एनजाइना की दवा, खून के थक्के रोग, संक्रमण रोकने, बाल झड़ने, एनिमिया, अस्थमा, त्वचा संक्रमण, उच्च रक्तचाप, आंख की रोशनी और एलर्जी की दवा के अलावा एसिड के सैंपल फेल हो गए हैं। ड्रग कंट्रोलर नवनीत मरवाह ने बताया कि सैंपल फेल होने वाले उद्योगों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
इस वर्ष छह माह के अंदर ही करीबन 1.06 करोड़ सैलानियों ने हिमाचल प्रदेश में विजिट किया है । प्रदेश में पहली बार जून तक ही सैलानियों की संख्या एक करोड़ पार हो गई है। इससे पहले साल 2019 में जनवरी से जून तक सबसे अधिक 90.61 लाख सैलानी देवभूमि हिमाचल पहुंचे थे। अप्रैल से जून तक प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों में आने वाले सैलानियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल में करीब 15 लाख, मई में 21 लाख और जून में 25 लाख सैलानी हिमाचल प्रदेश पहुंचे। जनवरी से मार्च तक प्रतिमाह 12 से 13 लाख सैलानियों का आना हुआ। विदित है कि सुक्खू सरकार प्रदेश का राजस्व बढ़ाने के लिए पर्यटन क्षेत्रों की ओर फोकस कर रही है। सरकार ने कांगड़ा को पर्यटन राजधानी का दर्जा दिया है और राजस्व बढ़ाने की दिशा में प्रयत्नों क्षेत्रों को विकसित भी किया जा रहा है। आंकड़ों की ओर देखे तो वर्ष 2018 में 88,98,620, 2019 में 90,61,269 और 2020 में 22,05,634 सैलानियों ने प्रवेश किया है। वहीं 2021 में 19,76,091, वर्ष 2022 में 86,42,390 जबकि 2023 में अब तक तकरीबन 1,0006,743 सैलानी प्रदेश की वादियां निहारने पहुंचे है।
कहा- 70 करोड़ रुपये से होगा छैला-यशवंत नगर वाया नेरी सड़क का सुदृढ़ीकरण मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सेब उत्पादकों को सुविधा प्रदान करने और उनकी उपज के लिए एक सुचारू परिवहन सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारी बारिश से आई आपदा के बाद राज्य सरकार सेब उत्पादक क्षेत्रों में सड़कों की बहाली पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि बागवानों को सुचारू परिवहन सुविधा सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने यह बात वीरवार सायं आढ़ती संघ के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों की शीघ्र बहाली के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिवहन संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए, राज्य सरकार नेरी पुल के माध्यम से छैला से यशवंत नगर सड़क को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रही है। सेब सीजन के दौरान बागवानों के सामने आने वाली किसी भी परिवहन बाधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) के तहत इसके लिए 70 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की परियोजना का एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि भंडारण सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार राज्य भर में प्रमुख स्थानों पर नियंत्रित वातावरण (सीए) स्टोर स्थापित करने की योजना बना रही है। ये सीए स्टोर भावानगर (किन्नौर), संदासू (चिड़गांव), अणु (जुब्बल), चौपाल (शिमला), जाबली (सोलन), सुंदरनगर (मंडी), दत्तनगर (रामपुर बुशहर) और खड़ापत्थर (शिमला) में स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, दिल्ली में कुंडली सीमा पर राज्य सरकार की भूमि पर एक और सीए स्टोर बनाने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एक डिस्टिलरी स्थापित करने पर भी विचार कर रही है ताकि निम्न गुणवत्ता के सेब से भी बागवान लाभ अर्जित कर सकें। इस पहल का उद्देश्य उन सेबों का उपयोग करना है जो बाजार के ताजा उपज मानकों को पूरा नहीं कर सकते हैं। डिस्टिलरी की स्थापना से सरकार निम्न गुणवत्ता वाले बागवानी उत्पादों को मूल्यवान संसाधन के रूप में प्रसंस्कृत करेगी ताकि उत्पादकों की आय में वृद्धि हो सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सेब उत्पादकों को शोषित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ अपने रुख पर कायम है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आढ़ती संघ ने बागवानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुरानी व्यवस्था के आधार पर सेब तोलने या खरीदने पर सहमति जताई। संघ ने बागवानों को समर्थन एवं फल खरीद में हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रदेश की प्रतिबद्धता के अनुरूप अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करने का विश्वास जताया।
हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम ने आज यहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ठाकुर को आपदा राहत कोष-2023 के लिए बैंक की ओर से 7,06,18,702 रुपये का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस राशि से प्रभावित परिवारों को सहायता मिलेगी। समाज का हर वर्ग इस कठिन समय में मदद के लिए आगे आ रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार उनकी आभारी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के ओएसडी रितेश कपरेट, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, बैंक के प्रबंध निदेशक शरवन मांटा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता एम. सुधा देवी की अध्यक्षता में आज यहां प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों की वर्चुअल बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। एम. सुधा देवी ने कहा कि इस योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मार्गदर्शन और करियर परामर्श, वस्त्र भत्ता, त्यौहार और विवाह अनुदान, मकान निर्माण के लिए भूमि और अनुदान का आवंटन, राज्य के बाहर वार्षिक शैक्षणिक दौरे, कोचिंग, उच्च शिक्षा व व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास पाठ्यक्रमों को प्रायोजित करने, अनाथ बच्चों व देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को स्वरोज़गार, स्टार्ट-अप के लिए सहायता प्रदान करने जैसे लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यवेक्षकों तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित सभी क्षेत्रीय पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में अनाथ बच्चों की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए सर्वेक्षण 21 दिनों के भीतर पूरा करें। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों को मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अन्तर्गत लाने के लिए अनाथ बच्चों का विवरण संबंधित उपायुक्त को प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण एक अभियान के रूप में चलाया जाना चाहिए ताकि कोई भी पात्र बच्चा लाभ पाने से वंचित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि आवेदन पत्र खंड स्तरीय कार्यालयों में आसानी से उपलब्ध करवाएं ताकि आवेदक के लिए यह सुलभ उपलब्ध हों। सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के गतिशील नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना शुरू की है। इस योजना के तहत बच्चों और एकल नारी की उच्च शिक्षा और कौशल विकास प्रशिक्षण की सुविधा के लिए प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष भी स्थापित किया गया है। उन्होंने योजना के तहत प्राप्त आवेदनों को मिशन मोड में प्राप्त करने तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार संसाधित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रूपाली ठाकुर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की सशक्त महिला ऋण योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत हिमाचल की स्थायी निवासी महिलाओं को अपने उद्यम स्थापित करने, आजीविका गतिविधियों को आरंभ करने, रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने तथा अपने परिवारों के उत्थान के लिए उपभोग्य सुरक्षा (कोलेटरल) मुक्त ऋण प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए बैंक के प्रयासों की सराहना करतेे हुए कहा कि यह ऋण सुविधा प्रदान कर बैंक ने प्रदेश की महिलाओं को सशक्त करने तथा उन्हें कठिन समय में पुनर्भुगतान न कर पाने की स्थिति में अपनी संपत्ति खोने के डर से मुक्त किया है। उन्होंने कहा कि उपभोग्य सुरक्षा मुक्त ऋण इस योजना की अनूठी विशेषता है और इसके तहत ऋण के लिए आवेदन करने वाली पात्र महिलाओं को ऋण राशि के विरूद्ध जमानत के रूप में कोई संपत्ति या संपाशर््िवक प्रदान करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि उपभोग्य सुरक्षा की शर्त हटाने से महिलाओं विशेषकर जिनके पास ऋण लेने के लिए जमानत के रूप में मूल्यवान संपत्ति नहीं होती है, उनकी मुख्य बाधा दूर होगी। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान देगी और उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत बैंक 8.51 प्रतिशत की कम ब्याज़ दर पर 21000, 51000 तथा 1,01000 रुपये की ऋण सुविधा प्रदान कर रहा है। इसके अलावा यह योजना पात्र महिलाओं को आसानी से ऋण प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। योजना में मार्जिन मनी की आवश्यकता नहीं है और आवेदन प्रक्रिया भी सरल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंक की इस नई पहल के माध्यम से ऋणी महिलाएं आत्मविश्वासी व आत्मनिर्भर बनेंगी और राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में सार्थक योगदान देंगी। उन्होंने कहा कि यह योजना समय पर पुनर्भुगतान करने पर पुरस्कृत करने और ऋणी महिलाओं को समय पर ऋण राशि चुकाने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी केंद्रित है। इस अवसर पर बैंक के अध्यक्ष देवेन्द्र श्याम, मुख्यमंत्री के ओएसडी रितेश कपरेट, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, बैंक के प्रबंध निदेशक शरवन मांटा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
सतलुज जल विद्युत निगम के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा ने निगम की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने के दृष्टिगत आपदा राहत कोष-2023 के लिए आज यहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को 2,55,00,000 रुपये की राशि के चेक प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस राशि से संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने में मदद मिलेगी।
माता श्री छिन्मस्तिका धाम चिंतपूर्णी मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत आधुनिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा तथा मास्टर प्लान के तहत विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस कड़ी में सबसे पहले माता श्री चिंतपूर्णी का एक भव्य मंदिर बनाया जाएगा। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए रोपवे तथा एस्कालेटर बनाने के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने हरोली विधानसभा क्षेत्र के गांव बीटन स्थित छोटी कुटिया में 15 लाख, गांव हीरा नगर में 15 लाख रुपए व ग्राम पंचायत गोंदपुर जयचंद के गांव बैहली में 21 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित सामुदायिक भवनों के लोकार्पण के उपरांत उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा कि देव भूमि हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत का प्रमुख पर्यटन राज्य है जहां पर देश-विदेश के पर्यटक सैर सपाटे के अलावा यहां के देवी देवताओं के प्रसिद्ध मंदिरों के प्रति आस्था के कारण खींचे चले आते हैं। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों में आधुनिक सुविधाओं के विकास के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार कृत संकल्प है तथा इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बीटन-सिंगां में 15 ट्यूबवेलों का निर्माण किया जा रहा है जिससे निकट भविष्य में इस क्षेत्र में पानी की कमी दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि हरोली विधानसभा क्षेत्र के अमराली में 25 लाख लीटर क्षमता का एक ओवरहेड जल भंडारण टैंक बनाया जा रहा है, क्षमता के अनुसार यह हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा जल भंडारण टैंक होगा जिसके बनने के उपरांत पेय जलापूर्ति योजना बाधित होने के 1 सप्ताह बाद तक भी क्षेत्रवासियों को जलापूर्ति उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा को और सुदृढ़ करने के लिए 70 करोड़ रूपये की लागत से बीत सिंचाई योजना का निर्माण किया जा रहा है जिससे आने वाले समय में इस क्षेत्र में सभी किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने बताया कि हरोली विस क्षेत्र में 35 पानी के टैंकों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा विधायक प्राथमिकता के तहत 12 करोड़ रूपये की लागत से 12 टयूबवैलों का निर्माण किया जा रहा है। हरोली विस क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 11 करोड़ रूपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में हरोली विस क्षेत्र देश व प्रदेश में जल उपलब्धता के मामले में पहला आत्मनिर्भर क्षेत्र होगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विपरीत परिस्थितयों के बावजूद प्रदेश के चहुमुखी विकास के लिए प्रयासरत है तथा सरकार द्वारा जनता को दी गई दस गारंटियां प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से पूर्ण की जा रही है। उन्होंने कहा कि हरोली विस क्षेत्र निर्णायक विकास की ओर अग्रसर है तथा इस क्षेत्र में सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य के अलावा बडे़ स्तर की परियोजना पर कार्य किया जा रहा है।मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हाल ही में प्रदेशभर में हुई मूसलाधार बारिश के कारण उत्पन्न आपदा से हिमाचल प्रदेश की अनेक पेयजल तथा सिंचाई योजनाओं को भारी क्षति हुई है तथा जल शक्ति विभाग में ही करीब 1,500 करोड़ का नुक्सान हुआ है। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर दिन-रात कार्य करते हुए प्रदेशवासियों के लिए रिकॉर्ड अवधि में जलापूर्ति बहाल की है जिसके लिए जल शक्ति विभाग के सभी अधिकारी व कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। बीटन में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 10 लाख देने की घोषणा बीटन स्थित छोटी कुटिया के प्रमुख श्री 1008 स्वामी नित्यानंद रमता राम जी महाराज, स्वामी अतुल बिशन जी महाराज के अलावा परिवहन विभाग के निदेशक मंडल के सदस्य व जिला कांग्रेस प्रधान रणजीत सिंह राणा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव व आरटीए के सदस्य अशोक ठाकुर, जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव प्रमोद कुमार, जिला परिषद सदस्य नरेश कुमारी, पंचायत प्रधान बलजीत कौर व उप प्रधान हरमेश धीमान, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
किलो के हिसाब से सेब खरीदने का आदेश देने के बाद अब हिमाचल प्रदेश की मंडियों में आढ़तियों ने गुरुवार को हड़ताल कर दी। भट्टाकुफर फल मंडी में करसोग, कोटखाई ठियोग से बागवान अपना सेब लेकर पहुंचे, लेकिन आढ़ती ही मौजूद नहीं थे। करीब 15 गाड़ियां फल मंडी में पहुंची हैं। वहीं, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने साफ कर दिया है कि सरकार अपना आदेश वापस नहीं लेगी। उन्होंने आढ़तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। राज्य के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने गुरुवार को साफ कर दिया कि सरकार वजन के हिसाब से सेब खरीदी के फैसले को किसी भी सूरत में वापस नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई नियम का उल्लंघन करता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। सरकार किसी के दवाब में आने वाली नहीं है। इस मुद्दे पर बागवानों और आढ़तियों से भी कई बार बैठकें हो चुकी हैं। वहां पर इसका विरोध नहीं किया गया, लेकिन अब बिना सूचना के ही आढ़तियों ने बिना सूचना के हड़ताल शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल आढ़तियों को भड़काने का काम कर रहे हैं, जिसका समय आने पर खुलासा किया जाएगा। वहीं, बागवानों का कहना है कि पहले ही बारिश से सड़कें प्रभावित हुई हैं। सेब पर भी मौसम की मार पड़ी है। बड़ी मुश्किल से मंडी तक सेब की गाड़ियां लेकर पहुंचे हैं, लेकिन यहां पर आढ़ती सेब नहीं खरीद रहे हैं। सुबह से यहां पर गाड़ियां लेकर पहुंचे हैं। सरकार ने वजन के हिसाब से सेब बेचने का स्वागत योग्य फैसला किया है। लेकिन आढ़ती आनाकानी कर रहे हैं। बागवानों ने सरकार से आढ़तियों की मनमानी पर नकेल कसने की गुहार लगाई है।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर उन्हें हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने से राष्ट्रीय राजमार्गों को हुए नुकसान से अवगत करवाया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को प्रदेश में विभिन्न सड़कों एवं पुलों को हुए भारी नुकसान से भी अवगत करवाया। उन्होंने आग्रह किया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलों के बारे में दी गई नुकसान के आकलन की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय राशि शीघ्र उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने पंडोह, भुंतर, कुल्ल रायसन, कटराईं और मनाली क्षेत्र के पुलों के अलावा मनाली-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग, नालागढ़ पुल और प्रदेश लोक निर्माण विभाग के अन्य पुलों और सड़कों की शीघ्र बहाली और मरम्मत करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यातायात को सुचारू करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाली सड़कों एवं पुलों तथा चक्की पठानकोट पुल को तत्काल बहाल करने और मरम्मत की आवश्यकता है। लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाले राज्य लोक निर्माण विभाग के क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण के लिए सेतु भारतम योजना के तहत 300 करोड़ रुपये प्रदान करनेे का आश्वासन दिया है। केन्द्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर ब्लैक स्पॉट की पहचान कर समस्या का स्थायी समाधान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने राज्य लोक निर्माण विभाग के पुलों की बहाली एवं मरम्मत के लिए धन उपलब्ध करवाने के भी अधिकारियों को निर्देश दिए ताकि राज्य लोक निर्माण विभाग की सड़कों को वैकल्पिक सड़कों के रूप में राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ा जा सके। बैठक में मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह भी उपस्थित थीं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अपने संसदीय क्षेत्र की सड़कों की स्थिति से अवगत करवाया और उदारता से सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह व प्रदेश लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश में भारी बारिश व बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई करने का केंद्र सरकार से आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि समूचे प्रदेश में इस बार भारी बारिश बाढ़ से लाखों करोड़ों की सरकारी व निजी संपत्ति नष्ट हो गई है। किसानों व बागवानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। प्रदेश में इस प्राकृतिक आपदा ने जन जीवन बुरी तरह प्रभावित किया है। आज नई दिल्ली में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से विशेष मुलाकात के दौरान प्रतिभा सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र मंडी में भारी बारिश व बाढ़ से हुए नुकसान की ओर उनका ध्यान आकर्षित करते हुए क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिये सीआईआरएफ, केंद्रीय सड़क ढांचागत फंड से धन उपलब्ध करवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते यहां सड़कें ही लोगों की जीवन रेखा हैं। सभी प्रकार के खाद्यान्न व आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही इन्हीं सड़कों पर निर्भर करती हैं। इसलिए इन सड़कों की बहाली और पुननिर्माण के लिए केंद्रीय सहायता की बहुत जरूरत है। प्रतिभा सिंह ने नितिन गडकरी को दिए एक ज्ञापन में मंडी संसदीय क्षेत्र में हुए भारी नुकसान का विस्तृत विवरण देते हुए कहा है कि किरतपुर मनाली फोर लेन प्रोजेक्ट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ हैं। यह सड़क न केवल जन मानस के लिए ही उपयोगी नहीं है, बल्कि यह सेना की आवाजाही व देश के सीमावर्ती लेह लद्दाख को भी जोड़ती है, इसलिए इसे जल्द बहाल किया जाना चाहिए। प्रतिभा सिंह ने गडकरी से टिक्कर-जड़ोल- गाहन-ननखड़ी- खमाड़ी सड़क जो उनके संसदीय क्षेत्र मंडी के रामपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत 52 किलोमीटर है के अपग्रेडेशन का भी आग्रह किया हैं। उन्होंने कहा कि इसकी 108.33 करोड़ की डीपीआर उनके मंत्रालय को पहले ही भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने चैलचोक- गोहर- पंडोह सड़क 30 किलोमीटर व नेरचौक-रत्ती-कलखर सड़क 13 किलोमीटर के सुधार व अपग्रेडेशन का भी आग्रह किया। इस दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश में हुए लोक निर्माण विभाग से संबंधित सड़कों, पुलों व भवनों के नुकसान की जानकारी देते हुए नितिन गडकरी से इसके पुननिर्माण के लिए उदारता से धन उपलब्ध करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पहले ही वित्तीय संकट से गुज़र रही है, और अब इस प्राकृतिक आपदा ने प्रदेश पर एक बहुत बड़ा अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को प्रभावित लोगों व राहत कार्यो में दिन रात जुटी हैं। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मंडी मनाली फोर लेन मार्ग के साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रो को जोड़ने वाले अनेक पुल या तो टूट गए है या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। उन्होंने गडकरी से आग्रह किया कि इन पुलों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण से बनाया जाए। नितिन गडकरी ने इस दौरान सांसद प्रतिभा सिंह व लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार इस आपदा से निपटने के लिए प्रदेश की हरसंभव मदद करेंगी। उन्होंने कहा केंद्रीय आपदा टीम प्रदेश का दौरा कर रही है उनकी रिपोर्ट आने के बाद सड़को,पुलों व सरकारी भवनों के पुननिर्माण के लिये उनका विभाग हरसंभव मदद देगा। उन्होंने क्षतिग्रस्त पुलों को सेतु भारतम परियोजना योजना के तहत बनवाने का आश्वासन दिया।
रामपुर क्षेत्र में हुई भारी बारिश से गुरुवार सुबह राष्ट्रीय उच्च मार्ग 5 किंगल से पवारी बंद हो गया है। यहां नाले में बाढ़ आने और भूस्खलन के चलते कई स्थानों पर सड़क बंद है। झाकड़ी के पास बरोनी खड्ड में उफान से रामपुर-किन्नौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग का लगभग 700 मीटर भाग छतिग्रस्त हुआ है। यातायात बहाल करने के लिए विभाग ने मशीनें लगाई हैं। रामपुर मंडल के अधिशासी अभियंता के अनुसार यह भाग शाम तक यातायात के लिए खुल जाएगा। यहां अभी भी कई जगह ऊपर से पत्थर आ रहे हैं, जिस कारण काम करना मुश्किल हो रहा है। उधर राज्य विद्युत परिषद रामपुर मंडल के उपमंडल तकलेच और ननखड़ी में भूस्खलन के कारण विद्युत् लाइनों पर पेड़ गिरने से दर्जनों गांवों में बिजली सप्लाई ठप है। इसके अतिरिक्त नारकंडा के टांगरी नाले में दो गाड़ियां बह गई हैं। सूचना मिलते ही पुलिस चौकी नारकंडा से पुलिस स्टाफ की घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने पूर्व विधायक खूब राम के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। पठानिया ने कहा कि खूब राम एक प्रखर वक्ता थे तथा सीधे तौर पर गरीबों, असहायों तथा समाज में पिछड़े लोगों से जुड़े नेता थे। पठानिया ने कहा कि खूब राम जिला कुल्लू स्थित आनी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के एक सम्मानीय नेता थे। खूब राम का व्यक्तित्व तथा स्वभाव एक मिलनसार व्यक्ति का था तथा विशेषकर अपने समुदाय के लोगों के प्रति सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। खूब राम वर्ष 1982, 1990 व 2012 में विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। कुलदीप सिंह पठानिया ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है तथा दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है। प्रदेश विधानसभा के सचिव ने भी खूब राम के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है तथा शोक सतंप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी सवेंदना प्रकट की हैं।
9 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री, 7 सचिव, 10 प्रवक्ता, 1 मीडिया प्रभारी, 7 सह मीडिया प्रभारी किए नियुक्त भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रदेश पदाधिकारियों, युवा मोर्चा एवं महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। डॉ. राजीव बिंदल ने प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, विधायक पवन काजल, विधायक हंसराज, पूर्व मंत्री डॉ. राजीव सैजल, पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष रश्मिधर सूद, पायल वैद्य, संजीव कटवाल और राजीव भारद्वाज को नियुक्त किया है। प्रदेश महामंत्री के रूप में डॉ. राजीव बिंदल ने राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार, त्रिलोक कपूर और बिहारी लाल शर्मा को दायित्व सौंपा गया है। प्रदेश सचिव के रूप में विधायक विनोद कुमार, विशाल चौहान, डॉ. संजय ठाकुर, नरेंद्र अत्री, सुमित शर्मा, डेजी ठाकुर और मुनीश चौहान को दायित्व प्रदान किया गया है। प्रदेश कोषाध्यक्ष के रूप में कमलजीत सूद कार्य करेंगे। प्रदेश प्रवक्ता के रूप में राकेश शर्मा, महेंद्र धर्माणी, उमेश शर्मा, बलदेव तोमर, अजय राणा, बलवीर वर्मा, संदीपनी भारद्वाज, विवेक शर्मा, चेतन बरागटा और विनोद ठाकुर कार्य संभालेंगे। प्रदेश मीडिया प्रभारी का दायित्व कर्ण नंदा संभालेंगे। प्रदेश सह मीडिया प्रभारी के रूप में प्यार सिंह, संजय शर्मा, अमित सूद, राज्य ठाकुर, विश्व चक्षु, सुदीप महाजन और रमा ठाकुर दायित्व संभालेंगे। युवा मोर्चा अध्यक्ष पूर्व प्रदेश सचिव तिलक राज और महिला मोर्चा अध्यक्ष के रूप में वंदना योगी को तैनात किया गया। कार्यालय सचिव प्रमोद ठाकुर, कार्यालय सह सचिव किरण बावा और सपना कश्यप नियुक्त किए गए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां डिजिटल प्रौद्योगिकी और गवर्नेंस विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी सरकारी विभागों में ई-गवर्नेंस प्रणाली लागू करने के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि यह पहल फाइल कार्य में तेजी लाने और दक्षता सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने सभी सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों और उपमंडलाधिकारियों को ई-ऑफिस प्रणाली अपनाने और तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी सचिवों से संचार के लिए अब तक प्रचलित भौतिक पत्रों की जगह ई-मेल अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सचिवालय की 50 प्रतिशत शाखाएं और 24 निदेशालय अपने दैनिक कामकाज के लिए ई-ऑफिस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने 31 अगस्त, 2023 तक शिक्षा विभाग को पूरी तरह डिजिटल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आई.जी.एम.सी. शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों और मरीजों का डाटा डिजिटल टेक्नोलॉजी और गवर्नेंस विभाग के सहयोग से समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जाना चाहिए। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य के लोगों को उनके घर-द्वार पर नागरिक केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकी को अपनाना समयोचित मांग है। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से राज्य सरकार को निर्णय लेने के लिए बेहतर डाटा विश्लेषण की सुविधा मिलेगी। युवाओं को बेहतर करियर अवसर प्रदान करने के लिए हिमाचल ऑनलाइन सेवा, सीएम हेल्पलाइन और शिक्षा में भी एआई को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के तहत 34 विभागों की 184 नागरिक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। लोक मित्र केंद्रों को मजबूत करने के महत्त्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इन केंद्रों द्वारा प्रदेशभर में लोगों को 71 ऑनलाइन सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला जिला के स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों की जीआईएस मैपिंग पायलट आधार पर की जाएगी। उन्होंने चंबा जिले में सभी घरेलू और वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन के लिए आधार सीडिंग लागू करने के भी निर्देश दिए। इसके पश्चात उन्होंने 'हिम परिवारÓ की प्रगति की समीक्षा की और कहा कि इससे सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों का डाटा इस मंच पर उपलब्ध होगा। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन के संचालन को विनियमित करने के लिए एक ड्रोन नीति तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि ड्रोन को पायलट आधार पर कृषि, बागवानी और स्वास्थ्य क्षेत्रों में नियोजित किया गया है जिसके उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100 की भी समीक्षा की और एक केन्द्रित कॉल सेंटर की आवश्यकता पर बल दिया। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, घुमारवीं से विधायक राजेश धर्माणी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस अभिषेक जैन, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, सचिव बहुद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा राजीव शर्मा, सचिव जल शक्ति विभाग अमिताभ अवस्थी, सचिव ग्रामीण विकास प्रियतु मंडल, निदेशक सूचना एवं जन संपर्क किरण भड़ाना और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज नई दिल्ली में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव से भेंट की। उन्होंने प्रदेश में लगातार भारी वर्षा होने के कारण बाढ़ तथा बादल फटने से राष्ट्रीय राजमार्गों को हुए नुकसान से उन्हें अवगत करवाया। उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों तथा पुलों के पुनर्निर्माण के लिए एनएचएआई को प्रेषित किए गए अनुमानों के अनुसार निधि के आवंटन का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे और अनुमान प्रेषित किए जा रहे हैं। विशेष रूप से मनाली में ब्यास नदी के बाएं किनारे, चक्की-पठानकोट पुल तथा मनाली-मण्डी राष्ट्रीय राजमार्ग तथा अन्यों के लिए प्रेषित अनुमानों के लिए निधि आवंटन में उनसे व्यक्तिगत हस्तक्षेप का आग्रह भी किया। विक्रमादित्य सिंह ने मनाली-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग, नालागढ़ पुल के साथ-साथ प्रदेश के अन्य पुलों तथा सड़कों की तीव्र बहाली तथा मरम्मत का आग्रह किया जो राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े हैं। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग पर मनाली-मण्डी-स्वारघाट सड़क के साथ-साथ पंडोह, भुंतर, कुल्लू, रायसन, कटराईं तथा मनाली क्षेत्र के समीप स्थित पुल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चक्की-पठानकोट पुल पर यातायात को पुन: बहाल करने के लिए तुरन्त मरम्मत कार्य किया जाना चाहिए। श्री यादव ने लोक निर्माण मंत्री को प्रदेश में सड़कों की बहाली तथा मरम्मत कार्य के लिए शीघ्र निधि जारी करने का आश्वासन देते हुए कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए केन्द्र सरकार से एक दल हिमाचल प्रदेश भेजा गया। इसके अतिरिक्त विक्रमादित्य सिंह ने भारत सरकार के सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव अनुराग जैन से भी भेंट की तथा केन्द्रीय सड़क अधोसंरचना निधि के अंतर्गत विभिन्न सड़कों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है जो जल्द ही मंत्रालय को प्रेषित की जाएगी। इनमें रंगस-बड़सर सड़क वाया मैहरी के विस्तारीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य, नेरचौक-रत्ती-कलखड़ सड़क, छैला-नेरीपुल-यशवंतपुर-ओच्छघाट, कुम्हारहट्टी सड़क, टिक्कर-जरोल-गाहन-ननखड़ी-कमादी सड़क के स्तरोन्नयन कार्य तथा चायल-गोहर-पंडोह सड़क और शाहपुर-सिहुंता-चुवाड़ी सड़क के सुधार तथा सुदृढ़ीकरण कार्य शामिल हैं। श्री जैन ने प्रदेश के लोगों को सुविधा प्रदान करने के लिए सड़कों तथा पुलों के पुनर्निर्माण के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पुराना परिसर में बीते दिनों हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में एबीवीपी के तीन छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के बाद छात्र संगठन एनएसयूआई की हिमाचल राज्य इकाई ने इस घटना की कड़ी भर्त्सना करते हुए इसके खिलाफ एचपीयू कैंपस के पिंक पेटल स्थान पर धरना प्रदर्शन किया। एनएसयूआई राज्य अध्यक्ष छत्तर ठाकुर ने मांग की है कि नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप करने वाले दरिंदे आरोपियों को फाँसी की सजा दी जाए। परिसर अध्यक्ष योगेश यादव ने कहा कि ऐसी घटनाओं से बीजेपी आरएसएस और एबीवीपी का असली चरित्र और चेहरा उजागर हो गया है। एनएसयूआई ने सरकार से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें फांसी की सजा दिलाई जाए।
भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने आज भाजपा के 17 संगठनात्मक जिलों के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है। उन्होंने बताया कि चंबा जिला के अध्यक्ष के रूप में धीरज नरयाल, कांगड़ा सचिन शर्मा, नूरपुर रमेश राणा, देहरा संजीव शर्मा, पालमपुर हरिदत्त शर्मा, लाहौल स्पीति राजेंद्र बोद्ध, कुल्लू अरविंद चंदेल, मंडी निहाल चंद, सुंदरनगर हीरा लाल, हमीरपुर देशराज शर्मा, ऊना बलबीर चौधरी, बिलासपुर स्वतंत्र संख्यान, सोलन रत्न सिंह पाल, सिरमौर विनय गुप्ता, महासू अरुण फाल्टा, शिमला प्रेम ठाकुर, किन्नौर यशवंत नेगी को जिला अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सभी नवनियुक्त जिला अध्यक्षों को शुभकामनाएं दीं। इसके अतिरिक्त डॉ. राजीव बिंदल ने निवर्तमान जिला अध्यक्ष चंबा जसवीर सिंह नागपाल, निवर्तमान जिलाध्यक्ष कांगड़ा चंद्रभूषण नाग, निवर्तमान जिला अध्यक्ष कुल्लू भीम सेन, निवर्तमान जिला अध्यक्ष मंडी रणवीर सिंह, निवर्तमान कार्यकारी जिला अध्यक्ष हमीरपुर हरीश शर्मा, निवर्तमान जिला अध्यक्ष ऊना मनोहर लाल शर्मा, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सोलन आशुतोष विद्य, निवर्तमान कायकारी जिला अध्यक्ष शिमला विजय परमार, निवर्तमान जिला अध्यक्ष किन्नौर संजीव हारा को प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य नियुक्त किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि यह सभी नियुक्तियां तत्कालीन प्रभाव से लागू होगी।
चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे को यातायात के लिए अस्थायी तौर पर बहाल कर दिया गया है। पिछले कल सुबह ६ मील के पास पहाड़ी से हुए भूस्खलन के कारण यहां पर हाईवे फिर से बंद हो गया था। प्रशासन ने सारे मलबे को हटाकर हाईवे को पूरी तरह से यातायात के लिए बहाल करने की बात कही थी और दो दिनों तक हाईवे के बंद रहने की सूचना जारी की थी। लेकिन इतने में मंडी से कुल्लू वाया कटौला मार्ग भी यातायात के लिए बंद हो गया। ऐसे में प्रशासन को हाईवे को अस्थायी तौर पर यातायात के लिए बहाल करना पड़ा। हालांकि हाईवे से सभी प्रकार के छोटे बड़े वाहन गुजारे जा रहे हैं। जो बड़ी गाड़ियां फंसी हुई थी उन्हें अब यहां से जाने दिया जा रहा है। अभी भी यहां पर ९० प्रतिशत मलबा हटाने को है जिसे अब आने वाले समय में हटाया जाएगा। हालांकि हाईवे बहाल करने के साथ-साथ मलबा हटाने का कार्य भी जारी रखा गया है।
राजधानी शिमला के माल रोड में बीते दिन ब्लास्ट की घटना को शक के दायरे से देखा जा रहा है। आज डीजीपी संजय कुंडू खुद मौके पर पहुंचे। इस दौरान डीजीपी संजय कुंडू ने कहा कि शिमला ब्लास्ट को लेकर एसआईटी गठित की गई है, वह अपने नजरिए से जांच करेगी। उन्होंने एसपी शिमला को एसआईटी गठित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही बम स्क्वायड की टीम भी तैनात की गई है। संजय कुंडू ने कहा की शिमला एक पर्यटक स्थल भी है। इस घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि कल शाम सवा सात बजे के करीब यह धमाका हुआ। एक व्यक्ति की इसमें मौत हुई है। ब्लास्ट किस वजह से हुआ इसकी जांच चल रही है। शुरुआती जांच में यही पता चल पाया है कि गैस रिसाव से वैक्यूम से यह धमाका हुआ है। एरिया को पुलिस ने खाली करवा लिया है। लोगों को भी इस एरिया में आने से रोका जा रहा है। जांच की जा रही है जिसके बाद ही धमाके की असली वजह सामने निकलकर आयेगी। डीजीपी ने उस स्पॉट की भी निरीक्षण किया जहां ब्लास्ट हुआ है। साथ ही उन्होंने उन दुकानों का भी जायजा लिया , जिनको ब्लास्ट से नुकसान पहुंचा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गत सांय डॉ. ओम प्रकाश कौल द्वारा लिखी पुस्तक 'राग प्रकाशÓ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने डॉ. कौल के प्रयासों की सराहना की और उनके अकादमिक भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं। 'राग प्रकाशÓ में संगीत के क्षेत्र में विशेष प्रकार के रागों को एक पुस्तक में संग्रहित करने का प्रयास किया गया है। शिक्षा जगत से जुड़े शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं संगीत प्रेमियों के लिए यह पुस्तक उपयोगी साबित होगी। डॉ. कौल राजकीय महाविद्यालय संजौली, शिमला में संगीत (गायन), सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने गज़ल गायकी में भी अपनी पहचान बनाई है और हाल ही में उनके द्वारा रचित संजौली महाविद्यालय का कुलगीत भी काफी सराहा गया।
प्रदेश में सरकार द्वारा डीजल के दाम बढ़ाने के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने सरकार पर निशाना साधा है। डाॅ राजीव बिन्दल ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार जो सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चल रही है, आये दिन हिमाचल की जनता के उपर नए बोझ डाल रही है। डीजल के दाम बढ़ाने से सारे हिमाचल प्रदेश में एकदम से मालभाड़े में वृद्धि हो गई है। सारी ट्रक यूनियन्स ने, सारी माल वाहक गाडि़यों ने, टैक्सियों ने सभी ने अपने रेटों में बढ़ौतरी कर दी है, जिसका सीधा-सीधा दुष्प्रभाव सामान्य जनमानस के उपर पड़ रहा है। डाॅ बिन्दल ने कहा कि रेट बढ़ाने के पहले दिन ही हमने चेताया था कि इससे डायरेक्ट और इन डायरेक्ट दोनों प्रकार से महंगाई बढ़ेगी परन्तु वर्तमान कांग्रेस की सरकार आम जनता की कमर तोड़ने के लिए पूरी तरह से जुटी हुई है। डाॅ बिन्दल ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी जिद छोड़नी चाहिए और 6 रू की डीजल में जो बढ़ौतरी की है उसे जनहित में वापिस लेना चाहिए। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस की वर्तमान सरकार महंगाई हटाने और 10 गारंटियां पूरी करने के वायदे के उपर सत्ता में आई है। महंगाई हटाना तो दूर की बात, महंगाई बढ़ाने का काम तेज गति से किया है और गारंटियां वाला धोखा जो जनता को दिया है उसका बदला तो जनता लेने ही वाली है। डाॅ बिन्दल ने कहा कि नकदी फसलें टमाटर, शिमला मिर्च, बिन्स, गोभी, पत्ता गोभी, सेब, पलम, आडू सब आजकल निकल रहा है। वर्तमान सरकार की नाकामयाबी से न तो सडकें खुल रही है और उपर से ढुलान का किराया बढ़ गया है। किसानो को अपने जेब खर्च से जे0सी0बी0 लगाकर सड़कें खोलनी पड़ रही है और जे0सी0बी0 का किराया भी बढ़ गया है। इस प्रकार किसान-बागवान व सामान्य जनमानस कांग्रेस सरकार की करनी के कारण दुखों को झेल रहा है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर पेट्रोल पंप खोलने के लिए 27 सितंबर तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इनमें जिला हमीरपुर के आठ स्थान भी शामिल हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के मंडल रिटेल सेल्स प्रमुख इंद्र लाल नेगी ने कहा कि पेट्रोल पंप के लिए आवेदन से संबंधित पूरी जानकारी वेबसाइट पेट्रोल पंप डीलर चयन डॉट इन पर उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए शिमला के कसुम्पटी में स्थित मंडल रिटेल सेल्स प्रमुख के कार्यालय में या दूरभाष नंबर 0177-2626667 पर भी संपर्क किया जा सकता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के मंडल रिटेल सेल्स प्रमुख ने पेट्रोल पंप चलाने के इच्छुक लोगों से 27 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है।
कालका-शिमला धरोहर रेलवे ट्रैक पर 6 अगस्त तक के लिए सभी ट्रेनें स्थगित कर दी गई हैं। सोलन और कालका के बीच रेल ट्रैक पर जगह-जगह भूस्खलन, पेड़ और पत्थर गिरने से ट्रैक प्रभावित होने के चलते यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, शिमला से सोलन तक ट्रैक को ट्रेनों के संचालन के लिए दुरुस्त कर दिया गया है। उत्तर रेलवे की शिमला और सोलन के बीच लोकल ट्रेन चलाने की भी योजना है। बता दें कि 9 जुलाई से कालका-शिमला हैरिटेज रेल ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन बंद है। रेल लाइन पर सोलन और कालका के बीच जगह-जगह हुए भूस्खलन के चलते गाड़ियों का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा। रेल लाइन को गाड़ियों के संचालन के लिए ट्रैक को दुरुस्त करने का काम 9 जुलाई से चल रहा है और मौजूदा समय में शिमला से सोलन तक ट्रैक को गाड़ियों के लिए फिट घोषित कर दिया गया है। रेल सेवा बहाल करने के लिए शिमला और सोलन के बीच बकायदा इंजन का ट्रायल भी हुआ है। लेकिन, सोलन से कालका तक अभी भी ट्रैक गाड़ियों के लिए ठीक नहीं हुआ है। सोलन से धर्मपुर के बीच पेड़ गिरने, कोटी और सोलन के बीच दो जगह भूस्खलन, धर्मपुर और कुमारहट्टी के बीच भूस्खलन और जल जमाव, सोलन और धर्मपुर स्टेशनों के बीच जल जमाव और भूस्खलन, धर्मपुर सलोगड़ा और कोटी के बीच रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन और पेड़ गिरने से रेल की आवाजाही बंद है। कुछ जगहों पर रेल ट्रैक को भी नुकसान पहुंचा है जिसके कारण रेल सेवा बहाल करने के लिए अगले 3 हफ्तों के लिए गाड़ियों की आवाजाही रोकने का फैसला लिया गया है। 21 दिन बाद 6 अगस्त को ट्रैक का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण में यदि ट्रैक गाड़ियों के संचालन के लिए सही पाया गया तो रेल सेवा बहाल की जाएगी। फिलहाल, शिमला और सोलन के बीच लोकल ट्रेन चलाने की योजना है। उत्तर रेलवे अंबाला मंडल को इस पर फैसला लेना है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा प्रभावितों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए मुआवजे की राशि में बढ़ौतरी करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के तहत 7 जुलाई, 2023 से 15 जुलाई, 2023 के दौरान आई बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन से प्रभावित हुए परिवारों को विशेष राहत पैकेेज के अन्तर्गत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राहत मैनुअल के तहत पक्के घर को आंशिक क्षति पर 12500 रुपये तथा कच्चे मकान को आंशिक नुकसान होने पर 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती थी। वर्तमान प्रदेश सरकार ने अभूतपूर्व त्रासदी को देखते हुए इसे बढ़ाकर एक लाख रूपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि दुकानों और ढाबों को नुकसान होने पर पहले सिर्फ सामान की एवज़ में 10 हजार रुपये की मामूली आर्थिक सहायता मिलती थी, जिसे राज्य सरकार ने दस गुणा बढ़ाकर एक लाख रूपये कर दिया है। इसके अतिरिक्त किरायेदार के सामान को नुकसान होने पर पहले 25 हजार रुपये की मद्द दी जाती थी, जिसे दोगुना करके 50 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं कृषि और बागवानी योग्य भूमि में बाढ़ से सिल्ट आने पर पहले जहां लगभग 1400 रूपये प्रति बीघा मुआवजा दिया जाता था, इसे बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति बीघा कर दिया गया है। इसके साथ ही कृषि और बागवानी योग्य भूमि को क्षति होने पर पहले 3600 रूपये प्रति बीघा की आर्थिक सहायता दी जाती थी, जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रति बीघा कर दिया गया है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्राकृतिक आपदा में किसानों व बागवानों की फसल को नुकसान होने पर 300 से 500 रुपये प्रति बीघा मुआवजा प्रदान किया जाता था, जिसे बढ़ाकर राज्य सरकार ने 2000 रुपये प्रति बीघा कर दिया है। वर्तमान राज्य सरकार ने गाय, भैंस तथा अन्य दुधारू पशुओं की जान जाने पर 55 हजार रुपये प्रति पशु की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जो पहले 37500 रुपये थी। उन्होंने कहा कि भेड़, बकरी और सुअर की जान जाने पर, मिलने वाली आर्थिक मदद को 4000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये कर दिया गया है। साथ ही पहले यह मुआवजा अधिकतम 30 भेड़, बकरी और सुअर के लिए ही दिया जाता था, लेकिन राज्य सरकार ने इस शर्त को भी खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखकर काम कर रही है और हिमाचल प्रदेश के इतिहास में मुआवजा राशि को पहली बार इतना अधिक बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावितों के दु:ख-दर्द से भली-भांति परिचित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रभावितों के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज यहां आयोजित हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के निदेशक मंडल की 280वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नालागढ़ में निगम के पास उपलब्ध भूमि पर व्यावसायिक परिसर बनाने की अनुमति प्रदान की गई ताकि यह भूमि आय सृजन का स्रोत बन सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने परवाणु में निगम की अप्रयुक्त भूमि के उपयोग के निर्देश भी दिए। उद्योग मंत्री ने निगम की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि निगम प्रदेश के आय अर्जित करने वाले उपक्रमों में से एक है। उन्होंने कहा कि निगम प्रतिवर्ष लाभ अर्जित कर रहा है। वर्ष 2020-21 में निगम ने आयकर अदायगी के पश्चात् 7.67 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2021-22 में 7.50 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। बैठक के दौरान उन्होंने राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा वर्ष 2019-20 व 2020-21 के लिए प्रदेश सरकार को देय 3.08 करोड़ के लम्बित लाभांश का अनुमोदन किया। निगम द्वारा वर्ष 2022-23 का सरकार को देय लाभांश 1.54 करोड़ रुपये है। इससे पूर्व, हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक राजेश्वर गोयल ने निगम से सम्बंधित विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक में हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के उपाध्यक्ष विशाल चम्बयाल, प्रधान सचिव उद्योग आर.डी. नज़ीम, सचिव कृषि राकेश कंवर, निदेशक उद्योग विभाग राकेश प्रजापति, विशेष सचिव उद्योग विभाग किरन भड़ाना व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
रोजगार मेले राज्य भर में बेेरोजगार युवाओं के लिए नौकरी के शानदार अवसर प्रदान करते हैं और नौकरी के इच्छुक तथा नौकरी प्रदाताओं को जोड़ने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यह बात श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने आज यहां श्रम एवं रोजगार विभाग की एक बैठक के दौरान कही। उन्होंने इन मेलों तक पहुंच बढ़ाने के लिए अधिकारियों को रोजगार मेले का आयोजन हर 45 दिनों में कम से कम एक बार अवश्य करने के निर्देश दिए। विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों, नीतियों और विभिन्न अन्य गतिविधियों के बारे में मंत्री ने कहा कि अधिकांश विभागीय कार्य और कार्यक्रम, जैसे पंजीकरण प्रक्रिया अब ऑनलाइन हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से अब कोई भी अपना पंजीकरण करवा कर विभाग के माध्यम से संचालित राज्य सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों से लाभ उठा सकता है। नौकरी चाहने वाले अपने नजदीकी लोक मित्र केंद्र से भी अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। यह विशेष रूप से दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए फायदेमंद होगा और इससे समय और धन की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया जाएगा। श्रम एवं रोजगार मंत्री ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि इन श्रमदानियों को अच्छी और सुरक्षित काम करने की स्थिति प्रदान की जाए। उन्हें उचित हेडगियर, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरण इत्यादि की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में श्रम आधारित उद्योग हैं और श्रमिकों के कल्याण और प्रबंधन पर ध्यान देना और सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियां प्रदान करना सरकार की प्रतिबद्धता है। श्रम एवं रोजगार के सचिव अक्षय सूद, श्रम एवं रोजगार की श्रमायुक्त-सह-निदेशक मानसी सहाय ठाकुर और अन्य विभागीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज यहां राज भवन से राज्य रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से जिला मण्डी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत सामग्री से भरे दो वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में इस प्राकृतिक आपदा के कारण जान व माल का भारी नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई करना कठिन है, लेकिन राहत के रूप में हम अपना योगदान दे सकते हैं जो प्रभावित लोगों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस आपदा में प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन तथा पुलिस के प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा के दौरान सेना, वायु सेना, अर्धसैनिक बलों तथा सभी अन्य एजेंसियों द्वारा राहत व बचाव कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय प्रदेश में आई इस आपदा पर नजर बनाए हुए है तथा इसके लिए फौरी राहत प्रदान कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि नुकसान के पूर्ण आकलन के पश्चात प्रदेश को और अधिक राहत प्रदान की जाएगी। राज्यपाल ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में समाज के सभी वर्गों ने सहयोग प्रदान किया है तथा लोगों ने भी अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने आपदा प्रभावितों की मदद के लिए सभी से आपदा राहत कोष में स्वेच्छा से योगदान करने का आग्रह किया है। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने स्वयं राहत कोष में अपने एक माह के वेतन का अंशदान करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राज्य तथा जिला स्तर पर रेडक्रॉस के माध्यम से भी सहायता प्रदान की जा रही है। इससे पूर्व राज्य रेडक्रॉस के माध्यम से 13 जुलाई को तीन वाहनों में मण्डी तथा कुल्लू जिलों के लिए राहत सामग्री भिजवाई गई थी। राष्ट्रीय रेडक्रॉस सोसायटी से अधिक राहत सामग्री प्रदान करने का आग्रह भी किया गया है तथा रेडक्रॉस के माध्यम से शीघ्र ही प्रभावित क्षेत्रों में यह राहत सामग्री उपलब्ध करवाई जाएगी। राज्यपाल के सचिव संदीप कदम तथा राज्य रेडक्रॉस के अन्य पदाधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज शिमला में वर्चुअल माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में ड्रग तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने ड्रग माफिया से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्यों को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त ड्रग माफिया पर प्रभावी ढंग से नकेल कसने के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टांसिस (एनडीपीएस) अधिनियम में संशोधन की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने नशीली दवाओं के तस्करों की संपत्ति जब्त करने के लिए एनडीपीएस अधिनियम में एक प्रावधान जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हिमाचल प्रदेश से प्रवर्तन निदेशालय को नशीली दवाओं से संबंधित स्थानांतरित किए गए १० मामलों में प्रगति धीमी रही है। ऐसे में उन्होंने जब्त करने की शक्तियां राज्यों को सौंपने को कहा। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं से संबंधित अपराध में सजा ५ वर्ष से बढ़ाकर आजीवन कारावास की जाए और नशीले पदार्थों की मात्रा की परवाह किए बिना इस अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाने के साथ-साथ पांच लाख जुर्माने और संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी किया जाए। उन्होंने नशीली दवाओं के अत्याधिक सेवन से होने वाली मौतों को रोकने के महत्त्व पर बल दिया और इस संबंध में अधिनियम में आवश्यक बदलाव करने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से प्रदेश के कुल्लू जिले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का क्षेत्रीय कार्यालय और आधुनिक हाई-टेक जेल स्थापित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए राज्य में आधुनिक फोरेंसिक प्रयोगशाला और मोबाइल लैब की स्थापना का भी अनुरोध किया। उन्होंने नशीली दवाओं से संबंधित मामलों में तेजी लाने के लिए हिमाचल प्रदेश में एनडीपीएस अधिनियम के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट के महत्त्व पर बल दिया। उन्होंने राज्य में नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन के लिए केंद्र सरकार से उदार वित्तीय सहायता का भी आग्रह किया। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या को देखते हुए राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश विधानसभा में नशाखोरी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने राज्य के भीतर नशीली दवाओं से संबंधित मामलों में एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) की संख्या में ४० प्रतिशत, गिरफ्तारी में ३४ प्रतिशत और बरामदगी में ५० प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के संकेत देने वाले आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने कहा कि हिमाचल देश के उन चुनिंदा राज्यों में शुमार है जो नशीली दवाओं की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए निवारक उपाय अपना रहा है और इस संबंध में एक सलाहकार बोर्ड का भी गठन किया गया है। बैठक में विभिन्न राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी जुड़े तथा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त यूनुस, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सतवंत अटवाल और अभिषेक त्रिवेदी, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विवेक भाटिया और विशेष सचिव राज्य कर एवं आबकारी हरबंस सिंह ब्रस्कॉन और प्रदेश सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शिमला में मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे।
व्यवस्था परिवर्तन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने राज्य में फील्ड दौरों के दौरान सामान्य तौर पर विभिन्न माननीयों को पुलिस द्वारा दिए जाने वाले 'गार्ड ऑफ ऑनरÓ (सलामी) को 15 सितंबर तक स्थगित कर दिया है। हालांकि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इन आदेशों में छूट रहेगी। यह निर्णय प्रदेश में हाल ही में आई आपदा से वृहद स्तर पर जारी राहत व बचाव कार्यों के दृष्टिगत लिया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में संचालित किए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों में पुलिस बल की तैनाती में वृद्धि पर बल देते हुए इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों को गार्ड ऑफ ऑनर जैसे कार्यों में संलग्न करने के बजाए इस संकट के समय में प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आपदा के प्रभावों से निपटने के लिए प्रदेश के संसाधनों के सही उपयोग के उद्देश्य से लिया गया है। बचाव कार्यों के दृष्टिगत पुलिस बल द्वारा प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। सीएम सुक्खू ने कहा कि गार्ड ऑफ ऑनर स्थागित करने से सरकार प्रदेश में आपदा से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य के संसाधनों तथा श्रम शक्ति का और बेहतर उपयोग करेगी। इस निर्णय से सरकार की आपदा प्रभावित क्षेत्रों को तुरंत राहत पहुंचाने तथा इस कठिन समय में प्रभावी प्रशासन की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में राहत तथा बचाव कार्य जारी है और प्रदेश सरकार इस आपदा से प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए मज़बूती से कार्य कर रही है। यह निर्णय प्रदेश के लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च अधिमान देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने कहा है कि वे केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश का विशेष दर्जा बहाल करने की मांग करेंगी, जिसके तहत प्रदेश में विकास योजनाओं के कार्यन्वयन के लिए 90 प्रतिशत ग्रांट का प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वे इस मांग को संसद में भी उठाएंगी। प्रतिभा सिंह ने आज यहां कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र मंडी का चार दिवसीय दौरा कर लौटी हैं। उनके संसदीय क्षेत्र मंडी में भारी बारिश व बाढ़ से बहुत ही जानमाल का नुकसान हुआ हैं। इस क्षेत्र में अनेक सड़के,पुल व कई भवन बह गए। करोड़ों की निजी व सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान हुआ हैं।उन्होंने कहा है कि भारी बारिश व बाढ़ से किसानों बागवानों की फसलें भी बर्बाद हो चुकी है उन्हें भी राहत देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस आपदा ने जो जख्म दिए है उन्हें भरने में बहुत समय लगेगा। उन्होंने कहा कि आपदा के इस समय में सरकार लोगों को राहत देने व उनके पुनर्वास के हरसंभव प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का राहत कार्यो के लिये राहत कोष में कुछ न कुछ अंशदान देने की अपील की हैं। उन्होंने कहा है कि यह समय आपदा प्रभावित लोगों के साथ देने का है जिन्होंने इस आपदा में अपनों के साथ साथ अपनी संपत्ति को खोया है। प्रतिभा सिंह ने आम जन मानस से भी राहत कोष में अंशदान देने का आग्रह किया है, जिससे पुनर्वास कार्यो में तेजी लाई जा सके।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा में डीजल के दाम बढ़ाने के तानाशाही फैसले का असर अब पूरे प्रदेश में दिखने लगा है। आपदाग्रस्त लोगों पर सरकार के इस फैसले की दोहरी मार पड़ी है। हर चीजें महंगी हो रही हैं। माल ढुलाई के महंगे होने से खाने पीने से लेकर पुनर्वास और पुनर्निर्माण से जुड़ी चीजें भी महंगी हो रही हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर भी पड़ेगा और आपदाग्रस्त लोगों पर भी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर अभी तक किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं पहुंची हैं। लोग मदद के लिए सरकार की राह देख रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों तक लोगों को तत्काल राहत पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनका सब कुछ बर्बाद हो गया, उनके पास सरकारी राहत में देरी नहीं होनी चाहिए थी। इसके साथ ही सरकार उन लोगों को भी राहत पहुंचाए जिनका घर ख़तरे की जद में हैं और वे अपना घर छोड़कर किसी और जगह पर शरण लिये हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब आपदा प्रभावित और इंतज़ार नहीं कर सकते हैं। इसलिए सरकार धरातल तक पहुंचे और प्रभावितों को राहत पहुंचाए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का हर नेता और कार्यकर्ता बाढ़ प्रभावितों के साथ खड़ा है और उनका सहयोग कर रहा हैं। भाजपा के विधायक दल ने भी अपने एक माह का वेतन आपदा प्रभावितों को देने का निर्णय लिया हैं। अभी बहुत सी जगहें ऐसी हैं, जहां पर नेटवर्क, लेकर पानी और बिजली जैसी सुविधाएं भी बहाल नहीं हुई हैं। सड़कें बंद हैं किसी प्रकार की सप्लाई उनतक नहीं पहुंच पास रही हैं। आपातस्थिति में मरीज़ों के लिए एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पा रही है। सरकार को राहत और पुनर्वास कार्यक्रमों में भी तेज़ी लानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ आये एक हफ़्ता बीत चुका है, ऐसे बहुत से बाढ़ प्रभावित हैं जिनका बाढ़ में सब कुछ बह गया है। उनके पुनर्वास लिए भी तेज़ी से कार्य करने की आवश्यकता है क्योंकि लंबे समय तक इनके बिना रहना संभव नहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब राहत और पुनर्वास के कार्यक्रमों को गंभीरता के साथ आगे बढ़ाने की ज़रूरत हैं। यह आपदा की घड़ी हैं, ऐसे मौक़े पर बिलकुल राजनीति नहीं की जानी चाहिये अत: दौरे पर गए मंत्री राजनीति के बजाय राहत कार्यों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आपदा के समय राहत और पुनर्वास के कार्यक्रमों में सरकार का कई विभागों के आपस में समन्वय की आवश्यकता होती है, जिससे राहत के कार्य युद्ध स्तर पर संचालित हो सके। इसलिए मैं मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूं कि वह मंत्रालयों और मंत्रियों के परस्पर समन्वय पर ध्यान दें। जिसके आपदा प्रभावित हमारे प्रदेश के लोगों को राहत मिल सके। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आपदा के समय में सरकार का सारा ध्यान सिफ़र् राहत और बचाव कार्यों पर होना चाहिए, लेकिन सरकार में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो आपदा में बचाव के लिए आये हेलीकॉप्टर में भी सेल्फ़ी लेने में मशगूल थे। उन्होंने कहा कि आपदा के मौके पर संसाधनों का इस्तेमाल आपदा प्रभावितों की मदद के लिए होना चाहिए।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा एवं खेल मामलों के मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर पिछले 4 दिनों से हिमाचल के दौरे पर हैं। भारी वर्षा से उत्पन्न आपदा के आकलन व राहत व पुनर्वास कार्यक्रमों के निरीक्षण हेतु अनुराग ठाकुर पूरे क्षेत्र में सघन दौरे कर रहे हैं। अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के ज़िला ऊना में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा कमेटी की बैठक के दौरान वर्षा व बाढ़ से उपजे हालातों व ज़िले में चल रहे विकास कार्यों पर अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की व इसके समुचित क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। अपने दौरे के दौरान ऊना में स्वां नदी के पास संवाददाताओं से वार्तालाप करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि स्वां नदी को कभी रिवर ऑफ सॉरो कहा जाता था। यहां बाढ़ के कारण करोड़ों रुपए का नुकसान होता था। 1988 में पुल बह गए थे। आज हम उसी जगह पर खड़े हैं। पुल भी ठीक है। इसका कारण भारतीय जनता पार्टी की सरकार (केंद्र व राज्य दोनो में) में शुरू हुआ स्वां चैनलाइजेशन है, अन्यथा स्वां नदी का भयावह रूप हिमाचल देख चुका है। ये नदी बारिश और बाढ़ आने पर दोनों ओर कई किलोमीटर तक फैली जाती थी। चैनलाइजेशन के कारण जान-माल की भी बचत हुई और जमीनों के दाम भी बढ़े। इस बार नुकसान की तीव्रता काफी कम देखने को मिली व ऊना का बेहद बड़े नुकसान से बचाव हुआ है। हिमाचल में भारी वर्षा से हुए नुकसान व केंद्र द्वारा मदद नहीं दिए जाने के आरोपों का खंडन करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहते मगर मैं बताना चाहूंगा कि केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में राहत व बचाव कार्य हेतु एनडीआरएफ की 13 टीमें तैनात कर रखी हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि पिछले चार दिनों से आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों से मिल रहा हूँ। आपदा से प्रभावित विभिन्न ज़िलों में जगह-जगह पर जाकर नुकसान का जायजा ले रहा हूं। लोगों का दर्द मेरा अपना दर्द है और मेरी पूरी संवेदनाएं आपदा प्रभावित लोगों के साथ हैं। विभिन्न विभागों को जरूरी दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। अधिकारियों को लोगों को त्वरित राहत देने हेतु प्राथमिकता पर कार्य करने को कहा गया है। भारी वर्षा के कारण हिमाचल में आपदा आई है पर राज्य सरकार लोगों पर रहम करने की बजाय वैट में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। आपदा के समय लोग पहले से कष्ट में हैं। इससे उन पर और बोझ बढ़ेगा। वैट के बढ़ने से केवल पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ते बल्कि महंगाई का एक पूरा चक्र शुरू हो जाता है। यह राज्य सरकार द्वारा उठाया गया बिल्कुल गलत कदम है। इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार एक नहीं बल्कि दो बार टैक्स कम कर चुकी है पर गैर भाजपा शासित राज्यों में वहां की सरकार टैक्सों में बेतहाशा वृद्धि कर रही हैं। कांग्रेस जनता के लिए सोचे, हिमाचल के हित के लिए सोचे, यह बढ़ी वृद्धि वापस लेकर देवभूमि को राहत देने का काम करे। आज केंद्र सरकार के प्रयासों के कारण होलसेल प्राइस इंडेक्स काफी कम है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने एक ब्यान जारी करते हुए कहा है कि देवभूमि हिमाचल को शर्मसार करने वाली घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कोटखाई में हैवान चाचा द्वारा अपनी चार साल की भतीजी के साथ दुष्कर्म करने के बाद उस मासूम बच्ची की हत्या कर दी जाती है। ऐसे आपराधिक मामले हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार में बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान सरकार के राज में ऐसी घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। उन्होंने कहा कि हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए उस मासूम बच्ची से उसके चाचा ने पहले दुष्कर्म किया, फिर उसकी हत्या कर उसका शव बगीचे में छुपा कर रख दिया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ऐसी निंदनीय घटना का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसी अपराधिक घटनाओं पर मौन धारण करके बैठी हुई है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि उस आरोपी को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। हिमाचल प्रदेश में कानून व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाए।ताकि भविष्य में कोई ऐसी हरकत करने के बारे में सोच भी ना सके। अन्यथा विद्यार्थी परिषद उग्र से उग्र आंदोलन करेगी।
भाजपा प्रदेश महामंत्री त्रिलोक कपूर ने आज मुख्य सचिव प्रमोद सक्सेना, डीसी लाहौल-स्पीति से फिर यह आग्रह किया है लाहौल-स्पीति के बातल के समीप समुद्र स्तर से लगभग 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहुत से भेड़पालक भारी बर्फबारी के बीच में फंसे हैं, उनको जनजीवन में तो जूझना पड़ रहा है, लेकिन खाने-पीने की वस्तुएं भी खत्म हो गई हैं। आज सुबह बंदला निवासी डागू राम जी द्वारा सूचना मिली है कि 3 भेड़पालक ईश्वर दास, फिन्ना राम, जगदी चंद भेड़पालकों की सूचना मिली है, जो समस्या से जूझ रहे हैं। कपूर ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है तुरंत सरकार हेलीकॉप्टर कि व्यवस्था करके सबंधित क्षेत्र में जाकर आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाएं और सारी चारगाहों की रेकी करवाएं, ताकि वास्तव स्थिति में घुमंतू भेड़पालक किस तरह से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्य सचिव प्रमोद सक्सेना और डीसी लाहौल ने आश्वस्त किया आज ही हम हेलिकॉप्टर की व्यवस्था करके यथासंभव सहायता करने का प्रयास करेंगे और ऐसी चारगाहों की भी रेकी करेंगे, ताकि भेड़पालकों के परिवार जो की चिंता में डूबे हुए हैं, उनको सही जानकारी दी जा सके।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश की आपदा में पूरा सहयोग कर रही हैं। चाहे आर्थिक सहायता की बात हो या अन्य ज़रूरी संसाधनों की, जिस भी संसाधन की ज़रूरत पड़ी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह ने तुरंत उपलब्ध करवाई। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ़ की टीमें भेजी, वायुसेना और सेना को लगाया, हेलीकॉप्टर से लेकर बीआरओ पूरे जी जान से जुटे रहे। हफ़्ते भर के भीतर आपदा राहत के तहत 364 करोड़ रुपये की दो किश्तें जारी कर दी। बहुत जल्दी तीसरी किश्त भी जारी हो रही है। सोमवार को केंद्र की टीम आपदा से हुए नुक़सान का जायज़ा लेने आ रही है। आपदा नुक़सान के आंकलन के आधार पर ही केंद्र सरकार भावी मदद की योजना बनाती है। सेना, एनएचएआई आज भी अपने काम में जुटी हुई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह 'सुक्खूÓ का यह कहना कि केंद्र सरकार कि तरफ़ से अभी तक कोई वित्तीय राहत नहीं मिली है, शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बयान है। हर काम करने की एक प्रक्रिया होती नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हर काम करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती हैं। आर्थिक मदद देने के पहले विशेषज्ञों द्वारा नुक़सान का आँकलन किया जाता है और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती हैं। इसके बाद की योजनाएं तैयार की जाती हैं। आपदा से निपटने की प्रक्रिया हैं। सबसे पहले राहत और बचाव कार्य। इसके बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण। आपदा आते ही राहत और बचाव के लिए केंद्र ने कुशलतम संस्था एनडीएफ़आर को लगाया गया, वायुसेना और सेना को लगाया गया। नुक़सान का जायज़ा लेने के लिए सोमवार को टीमें आ रही हैं। केंद्र सरकार ने त्वरित सहायता के तौर पर दो हफ़्ते के भीतर ही 364 करोड़ की 2 किश्तें जारी कर दी गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने हर प्रकार की मदद करने का भरोसा दिया है। हमारी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं से लेकर बूथ लेवल के कार्यकर्ता और सरकार के सभी विभाग काम पर लगे हैं फिर भी मुख्यमंत्री ऐसी ग़ैरजीमेदाराना टिप्पणी कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में हुई भारी बारिश से जल शक्ति विभाग को 1411 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जिनके पास जल शक्ति विभाग भी है मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह नुकसान काफी बड़ा है, जिससे उबरने में समय लगेगा। मुकेश ने कहा कि विभागीय अमला टीम में फील्ड में है। उन्होंने कहा कि अभी तक 4623 योजनाएं रिस्टोर कर दी गई हैं, जिनसे लोगों को पानी मिल रहा है। यह कर्मचारियों के जनूनी एवं फौलादी हौसलों की बदौलत हम बहाल कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि मैं इस समय विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा की जा रही कठिन परिस्थितियों में पेयजल व सीवरेज की योजनाओं की बहाली के कार्यों की सराहना करता हूं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से नदी नालों के बीच जाकर कठिन काम जान जोखिम में डाल कर्मचारी फील्ड में कर रहे हैं उससे भावुक हूं। उन्होंने कहा कि हिमाचल इन कर्मचारियों का ऋणी है, जो जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जल प्रलय में योजनाओं को बहाल करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी दिन रात काम कर रहे हैं ,उनके परिवार हैं उनके बच्चे हैं, पत्नी हैं ,माता-पिता हैं। उन्होंने दिन-रात नहीं देखा, टॉर्च की लाइट में, मोबाइल की लाइट में लगातार काम कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि हमने विभाग के अधिकारियों को फील्ड में पूरी तरह शक्तियां दे रखी है कि पानी की बहाली के लिए चाहे सिंचाई की योजना का प्रयोग करें, चाहे खराब हुई योजनाओं को ठीक करें,कोई मशीनरी लेनी है, कोई उपकरण लेना है तो तुरंत लिया जाए। उन्होंने कहा कि हर शक्ति दी गई है, ताकि राहत जल्द हो। उन्होंने कहा कि जनता की तकलीफों को हम समझते है ऐसे में हम तत्परता से काम कर रहे हैं, जनता भी संयम व धैर्य रखें। विभाग के इन कर्मचारियों अधिकारियों का हौसला बढ़ाएं जो जान पर खेलकर 24 & 7 काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि पेयजल व सीवरेज की योजनाएं जल्द चालू हो ताकि लोगों को राहत मिले। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से नुकसान हुआ है यह अपने आप में बड़ी त्रासदी है , उन्होंने कहा कि पेयजल की अधिकतर योजनाओं को नुकसान हुआ है, ऐसे में पेयजल योजनाओं को जल्द रिस्टोर करना अपने आप में चुनौती है, यह काम विभाग के अधिकारी व कर्मचारी छुट्टियां रद्द कर कर रहे हैं, संडे को भी दफ्तर लगे हुए हैं ,काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाएं जल शक्ति विभाग की अधिकतर नदी नालों के समीप हैं या बीच में है ऐसे में मलवा आ गया है,रेत आ गया है, योजनाएं चोक हो गई है, योजनाएं सब को ठीक करने के लिए समय तो लगेगा लेकिन अधिक से अधिक जल्दी इनको ठीक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग की 5203 योजनाएं पेयजल की प्रभावित हुई हैं। 1237 सिंचाई की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। 55 सीवरेज की योजनाएं प्रभावित हुई है, 101 बाढ़ नियंत्रण के कार्यों को नुकसान हुआ है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जनता को राहत देना और जल्द योजनाओं को ठीक कर चालू करना हमारी प्राथमिकता है । उन्होंने कहा कि इस भयंकर विनाश में हर संभव काम फील्ड में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित लोगों की सहायता के उद्देश्य से एक डिजिटल प्लेटफार्म का शुभारम्भ करते हुए आपदा राहत कोष-2023 वेबसाइट लॉन्च की। उन्होंने कहा कि दानी सज्जन डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, क्यूआर कोड और यूपीआई जैसी विभिन्न भुगतान विधियों का उपयोग करके कहीं से भी इस आपदा राहत कोष-2023 में अंशदान कर सकते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में भारी बारिश के कारण आई विपदा से प्रदेश को उबारने के लिए देश और विदेश से लोगों ने सहायता करने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोग सुविधाजनक तरीके से सहायता राशि उपलब्ध करवा सकें, इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग ने एक पारदर्शी वेब लिंक विकसित किया है। इस लिंक के माध्यम से कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन अंशदान कर सकता है और अपने मोबाइल डिवाइस पर रसीद प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि निर्बाध लेन-देन सुनिश्चित करने के लिए इस प्रणाली को कई भुगतान गेटवे के साथ एकीकृत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले कुछ दिनों के भीतर विदेशी दानकर्ताओं के लिए ऑनलाइन दान की सुविधा उपलब्ध करवाने का कार्य प्रगति पर हैै। मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कोष-2023 में योगदान करने के लिए विभिन्न कर्मचारी संगठनों और व्यक्तियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं, मंत्रिमण्डल के सहयोगियों व कांग्रेस के सभी विधायकों ने इस कोष के लिए अपना एक माह का वेतन दान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने 50 वर्षों में आई भीषण आपदा की स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को भारी वर्षा के कारण अत्याधिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। उन्होंने सभी से प्रदेश को इस तबाही से उबारने में मदद के लिए अधिक से अधिक अंशदान करने का आह्वान भी किया। इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन, निदेशक मुकेश रेपस्वाल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि कोविड काल के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्स पर भर्ती किए गए 1844 कर्मचारियों की सेवाएं 30 सितंबर, 2023 तक बढ़ा दी गई हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के समय विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्स पर स्टाफ नर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित अन्य श्रेणियों के 1844 कर्मचारी भर्ती किए गए थे, जिनकी सेवा अवधि 30 जून को समाप्त हो रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस अवधि को 1 जुलाई से 30 सितंबर, 2023 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश सरकार को लगभग 15 करोड़ रुपये अतिरिक्त वहन करने होंगे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के कार्यकर्ता बाढ़ से प्रभावित लोगों की लगातार मदद कर रहे हैं व सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के मंडी व कुल्लू में आई बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए रास्ते जिसके कारण सभी ट्रकों की आवाजाही मंडी से आगे बंद है। मंडी मनाली नेशनल हाईवे की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई है, जिसकी वजह से सभी बड़े वाहनों की आवाजाही मंडी से आगे बंद है। पिछले कल विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा नागचला के करीब फोरलेन पर फंसे लगभग 300 ट्रक चालकों व परिचालकों को खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। इस दौरान विद्यार्थी परिषद के उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीमान विजय प्रताप व प्रदेश संगठन मंत्री गौरव अत्री ने भी कार्यकर्ताओं का सहयोग किया। उन्होंने ट्रक चालकों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए उनका हाल चाल जाना व जरूरत होने पर हर सहायता करने का विश्वास दिलाया। आकाश नेगी ने बताया कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाढ़ प्रभावितों के लिए पूरे हिमाचल प्रदेश में आम जनमानस से धन संग्रह भी किया है। उन्होंने बताया कि इकत्रित किए हुए धन को विद्यार्थी परिषद आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री राहत कोष में सौंपेगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद ने जो हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं उन पर किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री वह किसी भी अन्य प्रकार की सहायता की जरूरत हो तो विद्यार्थी परिषद से संपर्क कर सकते है इस संकट की घड़ी में प्रदेश में रहने वाला हर एक व्यक्ति एक दूसरे का सहारा वह एक दूसरे के सहयोग में लगा है इसी कड़ी में विद्यार्थी परिषद भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा रहा है वह प्रदेश के किसी को कोने से किसी भी सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्य सरकार को आपदा राहत के तहत केंद्र सरकार की ओर से 400 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान किए जाने के केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आज यहां जारी एक प्रेस वक्तव्य में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश से आई आपदा के लिए केंद्र सरकार की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार की मदद प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) में प्रतिवर्ष 360 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाती है, जो केंद्रीय बजट से राज्य को मिलने वाला त्रैमासिक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ में 90:10 के अनुपात में प्रतिवर्ष हिमाचल प्रदेश को अपने हिस्से की 360 करोड़ रुपये की धनराशि जून और दिसंबर के महीने में दो किस्तों में मिलती है। केंद्र सरकार ने यह दोनों किस्तें इस बार जुलाई माह में ही राज्य सरकार को जारी की हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी किस्त राज्य को दिसंबर में बर्फबारी के दौरान होने वाले नुकसान की एवज में जारी की जाती है, जो इस बार केंद्र सरकार ने पहले ही जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के तहत हिमाचल प्रदेश की 315 करोड़ रुपये की बकाया धनराशि अभी भी केंद्र सरकार के पास पड़ी है, जिसे जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए। राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश को इस मानसून के मौसम में आपदा के कारण पैदा हुए हालात के लिए केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई राशि जारी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अनुराग सिंह ठाकुर केंद्र सरकार में मंत्री हैं और जय राम ठाकुर पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं और ऐसे में उन्हें तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए तथा प्रदेश की जनता के सामने झूठ नहीं बोलना चाहिए। जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस त्रासदी के दौरान हिमाचल प्रदेश में सरकारी और निजी संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है। बिजली, सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं के साथ-साथ सड़कों को भी भारी क्षति पहुंची है और इन सभी को पुन: स्थापित करने के लिए एक साल से अधिक का समय लगने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य सरकार ने 2000 करोड़ की अंतरिम राहत राशि तुरन्त जारी करने के लिए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है और केंद्र सरकार इस राशि को जल्द से जल्द जारी करे। राजस्व मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक भयंकर त्रासदी के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर को राजनीतिक हितों को परे रखते हुए केंद्र सरकार से इस राशि को दिलाने में प्रदेश सरकार की मदद करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सृदृढ़ीकरण के लिए मत्स्य पालन को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। हिमाचल की समृद्ध नदियां अपार जल संपदा से सम्पन्न हैं। हिमाचल प्रदेश में मत्स्य पालन क्षेत्र में अपार संभावनाओं के दृष्टिगत इससे लोगों की आर्थिकी को सुदृढ़ किया जा सकता है। इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार, मत्स्य पालन में नवीनतम तकनीकों का समोवश कर राज्य में 'नीली क्रांतिÓ लाने के लिए प्रयासरत है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य पालन को व्यावसायिक स्तर पर बढ़ावा प्रदान करना है ताकि ग्रामीण आर्थिकी को संबल प्रदान किया जा सके। मुख्य रूप से प्रदेश के गोविंद सागर, पौंग, चमेरा, रणजीत सागर और कोलडैम क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्राउट मछली उत्पादन की अच्छी सम्भावनाएं हैं। प्रदेश में ट्राउट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस वित्त वर्ष 120 ट्राउट इकाइयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत 106 ट्राउट इकाइयों के निर्माण के लिए कुल 202.838 लाख रुपये की राशि विभिन्न मण्डलों को प्रदान की जा चुकी है। इस योजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए ज़िला और मण्डल स्तर पर लाभार्थियों के चयन तथा उपदान राशि प्रदान करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए प्रदेश में दो ट्राउट हैचरी निर्मित करने के लिए 60 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई जा चुकी है। मछली पालन की आधुनिकतम तकनीकों में से एक बायोफ्लॉक को भी प्रदेश में बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यावरणीय अनुकूल यह तकनीक प्रदेश में 'नीली क्रांति' का मार्ग प्रशस्त करेगी। मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रदेश में पांच लघु बायोफ्लॉक इकाइयां निर्मित की जाएंगी। इसके लिए विभिन्न मण्डलों को 19.50 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में तीन मत्स्य आहार संयंत्र स्थापित करने के लिए 42 लाख रुपये की राशि विभिन्न मण्डलों को प्रदान की जा चुकी है। मत्स्य पालकों और उद्यमियों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करवाया जाता है। इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए जिला ऊना के कार्प फार्म गगरेट में 5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। इसमें प्रदेश के 600 मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रदेश में इस क्षेत्र की आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने के लिए सरकार प्रयासरत है। मछलियों को लम्बे समय तक संरक्षित रखने के लिए प्रदेश में 48 लाख रुपये की लागत से एक बर्फ के कारखाने का भी निर्माण किया जाएगा। प्रदेश सरकार मत्स्य पालन के माध्यम से रोज़गार व स्वरोज़गार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। युवाओं को मत्स्य पालन गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रदेश में अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। प्रदेश सरकार के प्रथम बजट में ही वर्ष 2023-24 में 500 युवाओं को मत्स्य पालन क्षेत्र में स्वरोज़गार के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मई, 2023 तक विभाग द्वारा प्रदेश के 247 व्यक्तियों को स्वरोज़गार के अवसर प्रदान किए जा चुके हैं। प्रदेश में मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। वर्ष 2021-22 के दौरान कुल 16015.81 मीट्रिक टन और वर्ष 2022-23 में 17026.09 मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया गया। गोविंद सागर जलाशय में वर्ष 2022-23 में 182.85 मीट्रिक टन तथा पौंग बांध में 313.65 मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया गया।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने अवैध शराब के कारोबार को पनपने न देने के लिए पूरे प्रदेश में अभियान को और तेज कर दिया है। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों की गठित टीमें अलग-अलग जगह कारवाई कर रही हैं, वहीं विभाग की एक विशेष टीम ने भी पूरे प्रदेश में अवैध शराब के कारोबारियों पर शिकंजा कसा है। आबकारी आयुक्त यूनुस ने आज यहां जानकारी दी कि इस विशेष अभियान में टीम ने जिला बिलासपुर में गुप्त सूचना के आधार पर अलग-अलग जगह छापेमारी कर लगभग 408 पेटी अंग्रेजी व देशी अवैध शराब अपने कब्जे में ली। उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में आबकारी अधिनियम 2011 की धारा 43 के अन्तर्गत 20 मामले तथा धारा 39 के अंतर्गत एक मामला दर्ज किया गया। विभाग ने धारा 39 के अंतर्गत दर्ज किए गए मामले में पुलिस थाना झंडूता जिला बिलासपुर में प्राथमिकी भी दर्ज कर दी है। इस मामले में टीम ने एक अवैध गोदाम में रखी 210 अंग्रेजी व देसी शराब की पेटियों को जब्त कर पुलिस के हवाले कर दिया। आबकारी आयुक्त ने बताया कि अवैध शराब की इस धरपकड़ में सभी जिलों की टीमों द्वारा अलग-अलग 196 मामलों में लगभग 750 पेटियां अवैध शराब पकड़ी गई है। इसके अतिरिक्त 47087.00 लीटर लाहन भी पकड़ी गई तथा आबकारी अधिनियम के अंतर्गत करवाई कर नष्ट की गई। उन्होंने कहा कि सभी जिलों को अवैध शराब की बिक्री तथा परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के और कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आमजन से भी अनुरोध किया कि किसी भी तरह के अवैध शराब से संबंधित मामले नजर में आते ही विभाग के ध्यानार्थ लाएं। उन्होंने यह भी बताया कि आबकारी विभाग के कार्यों को ऑनलाइन कर दिया गया है जिस के तहत सभी प्रकार के लाइसेंस, परमिट व पास ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं। इससे विभाग के कार्य में और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज जिला मंडी में भारी बारिश, भूस्खलन तथा बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र पंडोह तथा ओट का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बात की तथा प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों के बारे में जानकारी ली। राज्यपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए लगभग 100 वर्ष पुराने पुल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने लोअर पंडोह में प्रभावित परिवारों के घरों का दौरा किया तथा उन्हें सांत्वना देते हुए राहत प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने लारजी जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस तथा ओट में दवाडा क्षेत्र का भी दौरा किया। उन्होंने ओट में क्षतिग्रस्त पुल का भी निरीक्षण किया। इसके उपरांत राज्यपाल ने पंडोह में तीसरी भारतीय रिजर्व कॉर्पस में आयोजित कार्यक्रम में जिला रेडक्रॉस मण्डी के माध्यम से बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। इस अवसर पर राज्यपाल ने केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश को फौरी राहत के तौर पर साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की राहत राशि प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रभावितों को अधिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि राहत तथा बचाव कार्यों के प्रति जिला प्रशासन के अधिकारियों की प्रतिबद्धता सराहनीय रही। उन्होंने बचाव कार्यों में भारतीय वायु सेना तथा अर्ध-सैनिक बलों के योगदान की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है तथा पूर्ण आकलन के पश्चात ही कुछ कहना उचित होगा। उन्होंने जिला प्रशासन को नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के आधार पर वह केन्द्र सरकार से प्रदेश को अधिक राहत प्रदान करने के लिए बात करेंगे। राज्यपाल ने कहा कि हमें प्रकृति से सबक सिखना चाहिए तथा भविष्य में नुकसान से बचने के प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने आपदा राहत कोष में अपने एक माह के वेतन का अंशदान देने की घोषणा भी की। राज्यपाल ने मण्डी के प्राचीन पंचवक्त्र महादेव मंदिर के दर्शन किए तथा मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यों की समीक्षा की। ब्यास नदी में पानी की अधिक मात्रा के कारण लगभग आधा मंदिर जलमग्न हो गया था। इसके बावजूद मंदिर सुरक्षित रहा। राज्यपाल ने मंदिर में माथा टेका तथा भगवान शिव से सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर स्थानीय विधायक अनिल शर्मा भी उपस्थित थे। इससे पूर्व भारतीय राष्ट्रीय उच्चमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित और परियोजना कार्यान्वयन इकाई मण्डी के परियोजना निदेशक वरूण चारी ने सुन्दरनगर में राज्यपाल से भेंट की तथा उन्हें क्षेत्र में हुए नुकसान के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि 26 किलोमीटर लम्बे पंडोह-नेरचौक राष्ट्रीय उच्चमार्ग 154 व 3 कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा भूस्खलन के मलबे को हटाने का कार्य प्रगति पर है। इस अवसर पर विधायक द्रंग पूरन चंद, राज्यपाल के सचिव संदीप कदम, उपायुक्त अरिंदम चौधरी, पुलिस अधीक्षक सौम्या सांबसिवन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज सोलन के समीप शामती क्षेत्र का दौरा किया और क्षेत्र में भूस्खलन से हुए नुकसान की समीक्षा की तथा प्रभावित परिवारों से बातचीत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों के साथ है और प्रभावितों को नुकसान की भरपाई के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने उपायुक्त सोलन को प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक-एक लाख रुपये की अंतरिम राशि जारी करने और शेष धनराशि अंतिम मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से बहाली कार्य में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा। शामती क्षेत्र में भारी बारिश के कारण 30 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए, जबकि 50 अन्य घरों को आंशिक क्षति हुई, जिससे क्षेत्र के लगभग 108 परिवार प्रभावित हुए है। प्रभावित परिवारों के लिए जटोली में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं जिनमें वर्तमान में 50 परिवार परिवारों को आश्रय प्रदान किया गया है। इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सभी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से कई लोगों की जान बचाने में सफलता मिली और बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यक सेवाएं 48 घंटों के भीतर अस्थायी रूप से बहाल की गई है। उन्होंने कहा कि 70,000 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया। उन्होंने कहा कि एक चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान में शून्य से चार डिग्री नीचे तापमान में लाहौल-स्पीति जिला के चंद्रताल से 250 व्यक्तियों को बचाया सुरक्षित निकाल गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की एक टीम सोमवार को नुकसान का आकलन करेगी। लेकिन अभी तक कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य के सेब बाहुल्य क्षेत्रों में सड़कों की बहाली को प्राथमिकता दे रही है और जिसके लिए लोक निर्माण विभाग को 50 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने शिमला-चण्डीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धर्मपुर का भी दौरा किया जहां राष्ट्रीय राजमार्ग का बड़ा हिस्सा भूस्खलन में ढह गया है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग से मलबे को शीघ्र हटाने के निर्देश दिए और अधिकारियों को सड़क के पुनर्निर्माण के लिए कहा ताकि यात्रियों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने जटोली में राहत शिविरों का भी निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों को प्रदान की जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक विनोद सुल्तानपुरी, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, सोलन नगर निगम की महापौर पूनम ग्रोवर, उप महापौर राजीव कौड़ा, बघाट बैंक के अध्यक्ष अरुण शर्मा, जोगिन्द्रा सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, कांग्रेस नेता दयाल प्यारी, सुरेंद्र सेठी, शिव कुमार, राहुल ठाकुर, उपायुक्त मनमोहन शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्ति और अधिकारी भी मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे।
राजस्व, बागवानी व जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज जिला किन्नौर के भाबा घाटी में गत दिनों हुई मूसलाधार बारिश व बादल फटने के कारण हुई क्षति का निरीक्षण किया। इस दौरान भाबा घाटी में जिन तीन मकानों को पूर्ण क्षति हुई है उन्हें 10-10 हजार रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की गई। इसके अलावा पांच परिवारों के सामान का नुकसान हुआ है, जिन्हें 5-5 हजार रुपए की फौरी राहत राशि प्रदान दी गई तथा 17 परिवारों को आंशिक क्षति हुई है जिन्हें 5-5 हजार रुपये की राहत राशि प्रदान की गई। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को भाबा घाटी में बारिश के कारण असुरक्षित हुए मकानों को तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकानों को नुकसान होने का खतरा है उन्हें विश्राम गृह में टहराने के प्रबंध किए जाएं। उन्होंने शांगो गांव के 7 बेघर हुए लोगों को स्थानांतरित करने को कहा। उन्होंने होमत्ते गांव में बाड़ से हुए नुकसान का जायजा भी लिया। उन्होंने राजस्व विभाग को भावा घाटी में नुकसान का आंकलन तैयार कर रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि भाबा घाटी की पंचायतों को भविष्य में इस प्रकार की आपदा से बचाने के लिए यांगपा, काफनू, कटगावं आदि पंचायतों में भूमि कटाव को रोकने के लिए आपदा शमन के तहत क्षेत्र के ततीकरण का कार्य किया जाएगा जिसके लिए संबंधित विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त किन्नौर तोरूल रवीश ने भी इस दौरान मंत्री महोदय के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया तथा प्रभावित परिवारों का कुशलक्षेम जानकर उनके प्रति सहानुभूति प्रकट की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक विवेक चाहल, उपमंडलाधिकारी निचार बिमला वर्मा, अधिशाषी अभियन्ता विद्युत टाशी नेगी, अधिशाषी अभियन्ता लोक निर्माण प्रमोद ओपरेती व अधिशाषी अभियन्ता जल शक्ति अभिषेक शर्मा सहित अन्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज ओकओवर, शिमला से विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने इस अवसर पर 58.67 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों से संबंधित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नए बैच भी लॉंच किए। इसी वर्ष अप्रैल से जून माह के बीच यह समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किए गए हैं जिनके तहत रोबोटिक्स, कृत्रिम मेधा (एआई), वीआर, एविएशन, आतिथ्य इत्यादि विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के 15 हजार युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम इन उच्च मूल्यों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिला उम्मीदवारों की समुचित भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर रबड़ केमिकल एवं पैट्रो केमिकल कौशल विकास परिषद का एक अन्य कौशल रथ भी रवाना किया। इसका उद्देश्य टायर फीटर सेवाओं से जुड़े मकैनिक जिनका वृहद अनुभव तो रहता है मगर औपचारिक प्रमाणिकरण नहीं हो पाता, ऐसे उम्मीदवारों का मूल्यांकन एवं सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि यह कौशल रथ ऐसे युवाओं को लघु अवधि के प्रशिक्षण के उपरान्त मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र भी उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने कहा कि यह कौशल रथ आगामी दो से तीन माह तक प्रदेश के विभिन्न स्थानों की यात्रा करेगा और लक्षित टायर फीटर सेवाओं से संबंधित मकैनिकों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करेगा। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कौशल रथ चलाने का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के अंतर्गत संचालित किए जा रहे विभिन्न पूर्णतया प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में युवाओं को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि इस अभिनव पहल के तहत सभी जिलों के युवाओं तक पहुंच बनाते हुए उनके कौशल विकास से संबंधित महत्वपूर्ण सूचना और उपलब्ध संसाधनों के बारे में जागरूक किया जाएगा। यह कौशल रथ कौशल विकास संबंधी अत्याधुनिकतम सुविधाओं और संसाधनों से सुसज्जित है। यात्रा के दौरान यह रथ विभिन्न जिलों, विधानसभा क्षेत्रों, पंचायत एवं खण्ड स्तर, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, पाठशालाओं, महाविद्यालयों, मुख्य बाजारों, निजी प्रशिक्षण संस्थानों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कौशल रथ व्यावसायिक पाठयक्रमों, प्रशिक्षणों, उद्यमिता संबंधी अवसरों और कौशल निर्माण संबंधी अन्य पहलों से भी अवगत करवाएगा। उन्होंने कहा कि कौशल रथ में प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित ब्रॉशर, पैम्फलेट, दृश्य-श्रव्य सामग्री रखी गई है जिससे युवाओं को अपने भविष्य के कार्यक्षेत्र को चुनने में सहायता मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि कौशल रथ के माध्यम से मौके पर ही नामांकन की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह प्रशिक्षण रथ जिला समन्वयकों के साथ मिलकर कार्यशालाएं, सेमिनार तथा परस्पर संवाद सत्र आयोजित कर युवाओं की सीधी भागीदारी भी सुनिश्चित करेंगे। विभिन्न क्षेत्रों एवं उद्योगों से संबंधित अनुभवी प्रशिक्षक एवं पेशेवर कौशल संबंधी प्रस्तुतिकरण भी देंगे ताकि युवाओं को इन विविध क्षेत्रों के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त हो सके। इन सत्रों के आयोजन का उद्देश्य युवाओं को उनकी क्षमताओं के विस्तार के बारे में प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना है। साथ ही उन्हें उनकी रूचि के क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि यह कौशल रथ जागरूकता की कमी, पहुंच और सूचना की अनुपलब्धता जैसी कठिनाइयों से पार पाते हुए प्रत्येक युवा को अपने कौशल एवं क्षमता विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध होंगे। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरूद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी रितेश कपरेट, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के सचिव अभिषेक जेन, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के प्रबन्ध निदेशक जतिन लाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक विभाग का परफॉर्मेंस इंडेक्स तैयार किया जाएगा। सीएम ने आज यहां राज्य स्तरीय 'दिशाÓ बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में तेजी लाई जानी चाहिए, ताकि लोगों को इनके लाभ समय पर सुनिश्चित बनाए जा सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी ही भ्रष्टाचार की जड़ है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास योजनाओं पर अगले छह माह में पुरजोर कार्य करें और सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुट जाएं। उन्होंने कहा कि नई सोच और नए विचार राज्य सरकार के सामने रखें और सरकार अच्छे विचारों को धरातल पर उतारेगी। उन्होंने हर विभाग का 'परफॉर्मेंस इंडेक्सÓ तैयार करने के निर्देश भी दिए। सरकार की प्रमुख योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए एफआरए और एफसीए मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए शिमला-परवाणु राष्ट्रीय राजमार्ग की अलाइनमेंट में आवश्यक बदलाव एवं इसका नवीनीकरण करने और सेब सीजन के लिए इस सड़क को खुला रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए बन रहे राष्ट्रीय राजमार्गों में सुरंगों एवं पुलों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने भूस्खलन की घटनाओं को कम करने के लिए विभाग को ढलानों की सुरक्षा (स्लोप प्रोटेक्शन) की दिशा में काम करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि तारादेवी बाइपास की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। शिमला से मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरा फोरलेन बनेगा। उन्होंने कहा कि शालाघाट से नौणी के बीच दो सुरंगें बनाई जाएंगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग का एक लेन ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत वर्ष 2022-23 में राज्य में 1290 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और 81.15 लाख कार्य दिवस सृजित किए गए। उन्होंने मनरेगा में बायोमैट्रिक हाजिरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत 3727 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 26 मई, 2023 तक 3485 कार्य पूरे कर लिए गए हैं तथा 2512 बस्तियों को सड़क सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने योजना के अंतर्गत सड़कों की लैंथ ऑडिट करवाने के निर्देश भी दिए। वहीं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की दूरगामी सोच, पिछड़े वर्ग और महिलाओं के उत्थान पर केंद्रित है, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न होने के कारण प्रतिवर्ष आपदाएं आती हैं, जिनसे जान और माल की भारी हानि होती है। राज्य के संसाधन सीमित हैं, ऐसे में केंद्रीय योजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पहले, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग प्रियतु मंडल ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। विधायक मलेंद्र राजन, विभिन्न विभागों के सचिव और विभागाध्यक्षों ने भी बैठक में भाग लिया।
कुल्लू जिले की लगवैली में शनिवार को बादल फटने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। बादल फटने के बाद सरवरी खड्ड में बाढ़ आ गई। गांव के लोगों ने घटना की सूचना प्रशासन को दी और एहतियातन कुल्लू जा रही बस को तुरंत खाली करवाया गया। अन्य वाहनों को भी सड़क के एक तरफ किया गया। कुल्लू में सुबह से मौसम खराब चल रहा है। उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि आज सुबह लगवैली के गोरु डुग, फाटी, पिछली पतवार में बादल फटने के कारण छोरक पुल के पास दो मकान के अलावा पांच गौशाला बहने की सूचना है। उन्होंने बताया कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जानमाल व पशुधन को नुकसान नहीं हुआ है। एसडीएम कुल्लू विकास शुक्ला ने कहा कि सुबह लगभग सात बजे लगवैली के समालंग में बादल फटने की सूचना मिली थी। जानकारी के मुताबिक सरवरी खड्ड का पानी जरूर बढ़ा है, लेकिन खतरे वाली बात नहीं है।
हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा के कारण आई आपदा में फंसे लोगों और पर्यटकों को निकालने का अभियान पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार ने लगभग 70 हजार पर्यटकों को सुरक्षित रवाना कर दिया है और अब लगभग 500 पर्यटक ही हिमाचल प्रदेश में स्वेच्छा से रुके हैं। उन्हें खाने पीने और अन्य जरूरी चीजों उपलब्ध करवाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बचाव कार्य आरंभ किए गए और सभी के सहयोग से इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश से लगभग 15000 गाड़ियों को सुरक्षित वापस भेजा गया है। उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी और मोबाइल सेवाओं को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बचे हुए क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों, एनडीआरएफ, भारतीय सेना आदि द्वारा इस आपदा में राहत एवं बचाव कार्यों को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए उनके प्रयासों की प्रशंसा भी की। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आपदा बहुत बड़ी है और बाढ़ से राज्य में लगभग 8000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। राज्य के लोग इसका मजबूती के साथ सामना कर रहे हैं और राज्य सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने पुन: आग्रह किया कि केंद्र सरकार को भी राज्य सरकार की उदारता के साथ मदद करनी चाहिए।


















































