गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 'अंतरसदनीय बास्केटबॉल मैच' का आयोजन किया गया।मैच में चारों सदन के वरिष्ठ वर्ग के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।विद्यालय की प्रधानाचार्या गुरप्रीत माथुर ने खेल का शुभारंभ किया।चारों सदन के प्रतिभागी उत्साहपूर्वक खेले।खेल के अंत में अर्थव वेद सदन के खिलाड़ियों ने जीत हासिल की।प्रधानाचार्या ने सभी छात्रों की प्रशंसा की।इस मौक़े पर विद्यालय के निदेशक पीयूष गर्ग भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विद्यालय इस तरह की खेल प्रतिस्पर्धा समय-समय पर करवाता रहता है जिससे विद्यार्थी के भीतर छिपे खिलाड़ी को बाहर निकाला जा सके। उन्होंने छात्रों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।मैच में वेदांत ठाकुर, कनिष्क, हिमांशु, आर्यन, जितेश,रिणुल, पारस, अनीश, तेजस्वी, एलक्सि,ध्रुव नेगी,प्राश और दीक्षित ने भाग लिया।
Visionary Budget for Tourism Industry- Bharadwaj Included amongst the apex travel companies of the country, Colors of India called the Union Budget a visionary one for the tourism Industry. According to the Managing Director of the company, Narendra Bharadwaj "Decision to develop world-class 17 iconic tourism sites will pull domestic as well as inbound tourist. It is a great move by the government." He also appreciates the decision to create a digital tribal repository, in which photos, videos, details of origin, education, lifestyle, skill sets, traditional arts, and other anthropological information pertaining to tribal culture will be stored. Bhardwaj added " These initiatives will also boost the MICE industry ” added Mudras. No reduction in GST for coaching institutes- Bachchan Mr. Anurag Bachchan, Managing Director of Dronacharya IAS Academy, Chandigarh said that Union Budget 2019-20 has the provision of Rs 400 crore for world-class higher education institutions. The finance minister also announced that the government will launch a 'Study in India' scheme to encourage International Student exchange programs. The idea is simply to attract foreign students to India. However, no reduction in GST has been announced by the Finance Minister for the coaching institutions. Presently coaching institutions fall under the category of 18 percent GST, which is unfair. As far as the overall Budget is concerned it has more focused on boosting the rural economy, which is appreciable. Budget will benefit the entire economy in the long run- Arora Pharma Industrialist KD Arora, Managing Director of Instant Remedies says that it is a great decision to made PAN card and Aadhaar card interchangeable for filing tax returns. Arora said, now business establishments with annual turnover more than rupee 50 crores will need to offer low-cost digital modes of payments, it is a remarkable move by the government. He also welcomed the decision to levy corporate tax at a lower rate of 25 percent from companies with turnover up to Rs 400 crore. KD Arora believes that budget has the vision and will benefit not just the pharma industry but the entire economy in the long run. Truly a Jet Budget for Real Estate Sector- Mittal 'It is an amazing budget for real estate sector. Additional tax deduction of Rs 1.50 lakh on interest paid on home loans taken up to March 2020 will benefit the real estate sector in a great way," says Ashish Mittal, Managing Director of Royal Garden Premium, Chandigarh. The government has increased the tax deduction benefit against interest on home loans for affordable housing, with a value of up to Rs 45 lakhs by 75 percent, earlier it was two lakhs and now it is 3.5 lakhs, it is truly a jet move for real estate, he added. He believes that after this announcement, it is highly expected to attract fence-sitters back into the market, within the financial year 2019-20.
मोदी सरकार भाग दो का पहला बजट शुक्रवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश कर दिया है। बजट में पेट्रोल-डीजल पर एक रूपया सेस बढ़ाने की घोषणा की गई है जिससे आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई पर आने वाला खर्च बढ़ जाएगा, जिसका प्रभाव लगभग हर सामान की कीमत पर होना तय माना जा रहा है।बजट में सोना पर शुल्क 10 फीसद से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया है। साथ ही ये भी घोषणा की गई है कि आने वाले दिनों में तंबाकू पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया हैं। बजट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर जीएसटी रेट 12 पर्सेंट से घटाकर 5 पर्सेंट कर दिया गया। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने हेतु लिए गए लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त इनकम टैक्स छूट भी देने का एलान किया है। मुख्य बिंदु... ''हर घर जल, हर घर नल'' के तहत 2024 तक हर घर में नल से होगी जल की आपूर्ति। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण में 1,25,000 किलोमीटर लंबी सड़क को अगले पांच सालों में अपग्रेड किया जाएगा। मार्च 2020 तक 45 लाख रुपये तक की घर खरीद पर ब्याज के पुनर्भुगतान पर 1.5 लाख की अतिरिक्त छूट मिलेगी। 114 दिनों में जरूरतमंदों को घर बनाकर देने का लक्ष्य। 1.95 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य। सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक की नकदी निकासी पर अब दो फीसदी टीडीएस। सोने के आयात शुल्क पर 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी की है। सालाना 2-5 करोड़ रुपये की कमाई वाले व्यक्तियों के सरचार्ज में 3 फीसदी व 5 करोड़ रुपये से अधिक की आय पर सरचार्ज में सात फीसदी का इजाफा। 400 करोड़ रुपये तक के रेवेन्यू वाले कंपनियों को अब 30 फीसदी के मुकाबले 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना होगा। ये हुआ सस्ता - साबुन, शैंपू, हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, डिटरजेंट वाशिंग पाउडर, बिजली का घरेलू सामानों पंखे, लैम्प, ब्रीफकेस, यात्री बैग, सेनिटरी वेयर, बोतल, कंटेनर, रसोई में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों के अलावा गद्दा, बिस्तर, चश्मों के फ्रेम, बांस का फर्नीचर, पास्ता, मियोनीज, धूपबत्ती, नमकीन, सूखा नारियल, सैनिटरी नैपकिन, ऊन खरीदना सस्ता हुआ।
साई इंटरनेशनल स्कूल सोलन ने बच्चों के लिए शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया। इस दौरान बच्चों को जटोली स्थित शिव मंदिर ले जाया गया। मंदिर के पुजारी ने बच्चों को मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी दी। बच्चों ने मंदिर का यह सफर सड़क से मंदिर तक पैदल चल कर किया। मंदिर परिसर में पहुँच कर बच्चों ने भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में बच्चों ने अध्यापकों के साथ मिलकर भजन भी गाए। साई इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक रमिन्द्र बाबा ने बताया कि साई इंटरनेशनल स्कूल समय-समय पर इस तरह के आयोजन स्कूल में करवाता रहता है जिससे बच्चों के अंदर धार्मिक व नैतिक मूल्यों को विकसित किया जा सके।
कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह रहा सोलन का दरबार हॉल आज उचित संरक्षण के लिए तरस रहा है। इसे विडम्बना ही कहेंगे कि जिस ईमारत में कभी बघाट रियासत का दरबार सजता था, वहां आज लोक निर्माण विभाग सोलन के अधीक्षण अभियंता का दफ्तर है। इसी दरबार हॉल में हिमाचल का नामकरण हुआ था और इसी दरबार हॉल में बघाटी राजा दुर्गा सिंह ने 28 रियासतों के राजाओं को राज -पाट छोड़ प्रजामण्डल में विलय होने के लिए मनाया था। बावजूद इसके किसी भी हुकूमत ने अब तक इसे हेरिटेज तक घोषित करने की जहमत नहीं उठाई । हालांकि वर्ष 2015 में बघाटी सामाजिक संस्था सोलन की मांग पर तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दरबार हॉल को धरोहर संग्रहालय बनाने की घोषणा की थी। योजना थी कि इसे संग्रहालय के तौर पर विकसित किया जाएगा तथा बघाट व आसपास के क्षेत्रों की संस्कृति से संबंधित दुर्लभ वस्तुओं को इस हॉल में प्रदर्शित किया जाएगा। जिला भाषा अधिकारी के अनुसार इस हेतु जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग को योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। आदेशानुसार विभाग ने रिपोर्ट भी बनाई और सरकार को भेजी भी। किंतु इसके बाद इस संदर्भ में कुछ नहीं हुआ। दरबार हॉल को हेरिटेज घोषित करने की आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी ही नहीं हुई। आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा ने सुझाया था नाम ... बघाट रियासत के राजा दुर्गा सिंह संविधान सभा के चेयरमैन थे और उन्हें प्रजामण्डल का प्रधान भी नियुक्त किया गया था। उनकी अध्यक्षता में 28 जनवरी 1948 को दरबार हॉल में हिमाचल प्रदेश के निर्माण हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में डॉ यशवंत सिंह परमार व स्वतंत्रता सैनानी पदमदेव की उपस्तिथि को लेकर भी तरह-तरह की कहनियां है। कहा जाता है कि डॉ परमार वर्तमान उत्तराखंड का कुछ हिस्सा भी हिमाचल प्रदेश में मिलाना चाहते थे, किन्तु राजा दुर्गा सिंह इससे सहमत नहीं थे। साथ ही डॉ परमार प्रदेश का नाम हिमालयन एस्टेट रखना चाहते थे जबकि राजा दुर्गा सिंह की पसंद का नाम हिमाचल प्रदेश था। ये नाम संस्कृत के विद्वान आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा ने सुझाया था जो राजा दुर्गा सिंह को बेहद भाया। अंत में राजा दुर्गा सिंह की चली और नए गठित राज्य का नाम हिमाचल प्रदेश ही रखा गया।
सोलन से करीब 12 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है निर्मल ग्राम पंचायत नौणी जो किसी परिचय की मोहताज नहीं है। स्वच्छता और विकास के नए आयाम स्थापित कर रही नौणी हिमाचल प्रदेश की वो पंचायत है जो अन्य पंचायतों के लिए एक मिसाल बन चुकी है। ग्राम पंचायत नौणी अब तक सैकड़ों पुरस्कार जीत चुकी है। आंकड़ों के अनुसार अब तक इस पंचायत ने करीब तीस लाख राशि बतौर पुरस्कार जीती हैं। वर्ष 2006 से नौणी पंचायत अस्तित्व में आई और बलदेव ठाकुर इसके प्रधान चुने गए। तब से अब तक बलदेव ठाकुर ही इस पंचायत के प्रधान है और काम के बुते आज उनकी छवि एक विकास पुरुष की है। उन्होंने सुनिश्चित किया है कि पंचायत के लोगों की मूलभूत जरूरतों को आधुनिक तकनीक के साथ पूरा किया जाए और पर्यावरण से भी कोई खिलवाड़ न हो। जानिये निर्मल ग्राम पंचायत नौणी को ... वर्ष 2006 में अस्तित्व में आई नौणी पंचायत वर्ष 2007 में प्रदेश की पूर्ण खुला शौच मुक्त पंचायत बनी। वर्ष 2007 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित होने वाली प्रदेश की पहली पंचायत बनी। महर्षि वाल्मीकि राज्य स्वच्छता पुरस्कार (ब्लॉक, जिला, डिवीज़न व प्रदेश विजेता) राज्य पर्यावरण लीडरशिप अवार्ड 2018 पंचायत के सभी परिवार एम्बुलेंस सड़क से जुड़ चुके हैं। नौणी गांव में करीब एक हज़ार वाहनों के लिए फ्री पार्किंग सुविधा उपलब्ध है। किसानों की बेहतर उपज का ध्यान रखते हुए 50 सिंचाई टैंको का निर्माण किया गया है। पंचायत में वर्षा जल संग्रहण टैंक बनाए गए हैं। पंचायत में दुधारू पशुओं की चिकित्सा के लिए पशु चिकित्सालय मौजूद हैं। किसानों के लिए कई ग्रीन हाउस बनाये गए हैं। नौणी स्थित डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय से पंचायत को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। लोगों की सुविधा के लिए पक्के रास्ते, पर्याप्त शौचालय, हाई टेक पंचायत घर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, , पटवारखाना, कई बैंक, डाकघर सहित कई आवश्यक संस्थान है। पंचायत में एक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, दो निजी स्कूल, एक प्राइमरी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र भी मौजूद हैं। पर्यटन बढ़ने के लिए नौणी गांव में पंचायत द्वारा निर्मित नौणी ताल, बाग ताल, दो सुंदर पार्क, निर्मल वाटिका नौणी सहित कई निर्माण कार्य करवाए गए हैं। अत्याधुनिक सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा हैं। अब ये है बलदेव का इरादा...... नौणी गांव स्थित पुलिस बूथ को चौकी में तबदील करने की जरूरत है। बच्चों को तकनीकी पढ़ाई के लिए यहां एक आईटीआई की भी दरकार है। धारों की धार स्थित किले को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की आवशयकता है। नौणी के नजदीक गिरी नदी है जिसे भी नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता हैं । पर्यटन विभाग क्षेत्र में कुछ फ्लड लाइटें लगा दे तो इस खूबसरत क्षेत्र की सुंदरता और भी बढ़ सकती है।
With the flowering time of Gladiolus, Chinese Aster and Marigold in the month of July, farmers are gearing up for the upcoming harvest season. The harvest time of Alstroemeria, Gerbera and Lilium has just passed in June and now it is time to prepare for new income. The preparations would require the gathering of packaging material, take care of the buds, pinching of the unwanted shoots and support the shoots. Some areas and varieties of carnation are also expected to flower in July. The crop is expected to get a good price in the major megacities of India. Farmers with forward marketing skills can avail from their agile efforts. Aside from the crop, it is also time for pinching of Chrysanthemum heads to prepare more buds and dividing Gerbera plants. Marigold seeds are to be spread into the nurseries and fields for germinations. Bulbs of daffodils are also to be collected and stored. Opportunities in Floriculture in Himachal Pradesh The Pushp Kranti Yojna with a budget of 10 crores was flagged last year by CM Jai Ram Thakur with the objective of providing training and facilities to farmers for the commercial production of flowers. Apart from generating awareness, the scheme will also encourage farmers to deploy hi-tech poly houses. This will open better opportunities and earnings for farmers. Presently, there are six floriculture nurseries and two model centres and laboratories in the state. The topography and climatic conditions of Himachal Pradesh allow floriculture to thrive in the region. The state observes extremely hot, extremely cold to moderate climates. Overall, the state of Himachal Pradesh has best agro-climatic conditions for floriculture to sustain through even off-season and produce export quality flowers. Advanced farmers can also introduce new flowers to the market such as Gypsophila, Bird of Paradise, Limonium, Freesia, Tulips, Orchid, Iris and Zantedeschia.
The three-day ‘National Seminar on Doubling Income through Sustainable and Holistic Agriculture (DISHA)’ concluded at the Dr. YS Parmar University of Horticulture and Forestry (UHF), Nauni on Friday. The seminar was jointly organized by the Society for Advancement of Human and Nature (SADHNA), Solan and UHF Nauni with the Indian Council of Agricultural Research and the Central Potato Research Institute, Shimla as technical collaborators. The seminar saw highly successful deliberations on various topics and 218 abstracts were received. The participants covered a wide range of topics through poster and oral presentations. Several new crops, technologies and tools for production, protection and dissemination of technology were presented and discussed in the technical sessions of the seminar. There was a consensus among all the scientists on the need to develop eco-friendly technologies and improved cultivars. Many presentations also emphasized on the need to diversify through new crops and value addition. In addition, there were several new ideas for reducing the cost of farm inputs, plant protection, reduction of post-harvest losses, improvement of market access and infrastructure for enhancing farmers' income. Exciting presentations on nutritional quality enhancement and innovative products were also given by the participants. Founder of SADHNA Sh. Roshan Lal was the Chief Guest for the valedictory session of the seminar. While congratulating the participants, he spoke about the journey of the society and the work done by it in the field of education to the underprivileged. Dr. Amit Vikram presented the report of the seminar. Dr. Rakesh Gupta, Advisor of DISHA shared that the society has grown to over 2000 members from all over the country in a short period. He hoped that the recommendations coming out of this seminar will be received positively by the policymakers, researchers and other stakeholders and can play a role in developing sustainable agriculture and improving farmers’ income. Nine research papers; six in the oral and three in the poster category were awarded under various categories. Dr. Rakesh Sharma, MS Kanwar, Urvashi, Preeti Sagar Negi, Vipasha and Dhanapriya were awarded under the best oral research presentation category. In the poster category, research papers presented by Pooja Bhardwaj, Debasis Golui and Sakshi Sharma bagged the award.
हिमाचल प्रदेश में डोर टू डोर गार्बेज एकत्रित करने को लेकर एनजीटी सख्त हो गया है। एनजीटी ने स्थानीय शहरी निकायों को पन्द्रहअप्रैल तक सभी क्षेत्रों में घर-घर से ठोस एवं तरल कचरा अलग-अलग उठाने का कार्य शुरू करने के निर्देश जारी किए है। ऐसा न करने पर और सख्त कार्रवाई के साथ जुर्माना करने की भी चेतावनी दी है। शिमला जिला के शहरी स्थानीय निकायों तथा विभिन्न विकास खंडों द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2016 की अनुपालना के संबंध में बचत भवन में बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की ठोस कचरा प्रबंधन नियम कार्यान्वयन संबंधी राज्य समिति की अध्यक्ष राजवंत संधू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। संधू ने कचरे के निपटारे के लिए आवास स्तर पर कचरा तरल व ठोस अलग-अलग एकत्र करने के निर्देश दिए और कहा कि इससे कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि ठोस एवं तरल कचरा विभिन्न खड्डों एवं नदियों तक न पहुंचे। उन्होंने जिला के सभी स्थानीय शहरी निकायों एवं विकास खंडों को निर्देश दिए कि कचरे के उचित निपटारे के लिए विज्ञान एवं तकनीकी प्रोद्योगिकी विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करें।समिति की अध्यक्ष ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि विभिन्न अस्पतालों में बायो वेस्ट के शत्-प्रतिशत निपटारे के लिए योजनाबद्ध कार्य करें। उन्होंने जिला के विभिन्न मंदिरों में पूजा के उपरांत एकत्र हो रहे फूल इत्यादि से धूप बनाने के लिए विभिन्न स्वयं सहायता समूहों को इस कार्य के साथ जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कचरा प्रबंधन को सही दिशा प्रदान करने एवं नियमों की अनुपालना के लिए उनकी समिति अब तक सोलन, ऊना, हमीरपुर तथा कांगड़ा जिला में बैठकें आयोजित कर व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर चुकी हैं।
Solan is still waiting for writers home, the promise made by one of the world's richest novelists, Salman Rushdie. When Salman Rushdie visited Solan on April 13, 2000 he had told his attorney and leading Supreme Court lawyer Vijay ST Shankardas that he wish to convert his ancestral property 'Anees Villa' into a writer's home. The idea was to provide stay to five to six writers by converting one of the rooms into a library, but till now nothing has been done. Though before two years District Administration tried to approach Mr Rushdie for the same reason but they failed. Instead representatives of Rushdie are now trying to sell this Heritage property. The surprising fact is that one of the richest novelists, Salman Rushdie is even not able to repair his ancestral home which is built over an area of 2,934-sq yard in the typical British style. As the result Anees Villa is losing its charm as the unchecked construction in and around the heritage building has blocked its view. This is the same home for which he fought legal battle with the then government of Himachal Pradesh. It was gifted to him by his father Maulvi Anees Ahmed in 1969. Anees Villa was built in 1927, and was purchased by Salman Rushdie's grandfather Mohammad Uldin. As per the revenue records of 1953-69, this building was declared an evacuee property by the state government after partition. Later in 1992 Rushdie staked claim on the property and moved the court. After five years of legal fight he finally won the case and the property was restored back to him in 1997. Interestingly, Rushdie never spend even a single night in this house.
सोलन में प्राकृतिक सुंदरता की कमी नही है। हिमालय रेंज की सबसे पुरानी और लंबी 28 किमी गुफा का इतिहास आज भी रहस्यमय है। हम ज़िक्र कर रहे है कालका-शिमला हाईवे के समुद्र तल से 7 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित करोल गुफा की। इस गुफा को करोल टिब्बा के नाम से भी जाना जाता है। करोल पर्वत का सौंदर्य इतना है कि हर कोई यहां आने की चाहत रखता है। करोल पर खड़े होकर एक तरफ हिमालय तो दूसरी ओर मैदानी राज्यों के दर्शन होते है। यहां से शिमला, चायल, कसौली, अपर हिमाचल की बर्फ से ढ़की पहाड़ियां और धौलाधार रेंज भी नजर आती है। वहीं चंडीगढ़ व अन्य मैदानी क्षेत्रों को भी देखा जा सकता है. करोल पर खड़े होकर एक तरफ हिमालय तो दूसरी ओर मैदानी राज्यों के दर्शन होते है। यहां से शिमला, चायल, कसौली, अपर हिमाचल की बर्फ से ढ़की पहाड़ियां और धौलाधार रेंज भी नजर आती है। वहीं चंडीगढ़ व अन्य मैदानी क्षेत्रों को भी देखा जा सकता है। गुफा के बारे में और अधिक जानने के लिए फर्स्ट वर्डिक्ट टीम ने यंहा के स्थानीय लोगो से बात की तो बहुत सी बातें सामने आयी, यहाँ के लोगो की माने तो गुफा के अंदर अलौकिक शक्तियां हैं, जिनका रहस्य अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं। गुफा 50 फ़ीट तक ही पाया जाता है, गुफा में पानी होने के कारण गुफा में जाने का रास्ता काफी जटिल है व फिसलन भरा है। लोगो का मानना ये भी है कि यह गुफा पांडव काल की है और इस स्थान से शुरू होकर 28 किमी दूर कालका के पिंजोर पार्क निकलती है। एक जर्मनी के साइंटिस्ट ने जब इस गुफा के अंदर प्रयोग के तौर पर रंगीन पानी डाला तो यह पिंजौर गार्डन के पानी के प्राकृतिक चश्मों में निकला। इससे ये प्रमाण होता है कि गुफा पिंजौर में ही निकलती है। इस के बाद भी कई वैज्ञानिको ने इस गुफा का मुआयना किया और हर बार वैज्ञानिको के सामने नई बातें आती है। स्थानीय लोगो को इस गुफा से काफी आस्था है। मान्यता है कि इस गुफा में भगवान शिव ही नहीं बल्कि पांडवों ने भी यहां तपस्या की थी। किवदंती के मुताबिक महाभारत में जब शकुनि ने पांडवों को लाक्ष्य गृह में जिंदा जलाने की योजना तैयार की तो भीष्म पितामह ने पांडवों को भगाने के लिए इस गुफा का निर्माण किया था। पांडव यहां पर पांच वर्ष तक रहे थे। गुफा के अंदर कई अजीबोगरीब चीजें हैं जिन्हें देखने के बाद किसी की अंदर जाने की हिम्मत नहीं पड़ती। एक अन्य मान्यता ये भी है कि इस गुफा में भगवान शिव और उनका परिवार रहता था। गुफाके अंदर कई शिवलिंग भी बने हुए हैं। जो ऐसे में अनेकों रहस्य समेटे हुए हैं।जामवंत से भी सम्मलित है कहानी, इस गुफा का संबंध जामवंत से भी रहा है। कहते हैं कि लंका युद्ध के बाद जब श्रीराम ने सबकी विदाई की तो जामवंत ने कहा था कि लंका में इतने बडे योद्धाओं के साथ मलयुद्ध करके भी मेरी भुजाएं संतुष्ट नहीं हुई हैं तो श्रीराम ने उन्हें जामवंत की यह इच्छा द्वापर युग में पूरी होने की बात कही थी। उसके बाद से जामवंत इसी गुफा में रहने लगे थे। द्वापर युग के अंत में श्रीकृष्ण के साथ जामवंत का युद्ध हुआ तो फिर श्रीकृष्ण ने उन्हें त्रेता युग में उनकी इच्छा के बारे में बताया। उसके बाद जामवंत को अपनी कागलती का एहसास हुआ था। संस्कृत के शब्दकोष में करोली शब्द का अर्थ 'रीछ की गुफा' है। गुफा के मुहाने पर प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर व आषाढ़ माह के पहले रविवार को लगने वाला मेला सिद्ध बाबा करोल इस घटना से जुड़े हैं। बताते हैं कि आषाढ़ माह के पहले रविवार को ही श्रीकृष्ण का जामवंती से इसी गुफा में विवाह हुआ था। ऐसे पहंच सकते है गंतव्य करोल खुम्ब सिटी के नाम से मशहूर सोलन शहर करोल पर्वत की गोद में बसा हुआ है। जनवरी माह में बर्फबारी के दौरान पूरा पहाड़ बर्फ की सफेद चादर में लिपट जाता है। करोल पर्वत जाने के लिए सोलन के चंबाघाट से भी रास्ता जाता है। सोलन शहर से आगे कालका शिमला एनएच पर डेडघराट क्षेत्र के पास से पांडव गुफा के लिए रास्ता जाता है। इसमें करीब साढ़े पांच किलोमीटर की चढ़ाई बान व देवदार के घने जंगलों के बीच से तय करनी पड़ती है। अन्य राज्यों से आने वाले सोलन तक रेलगाड़ी के माध्यम से भी आ सकते हैं। उसके आगे बस या गाड़ियों के माध्यम से भी जा सकते हैं।
विश्व धरोहर कालका -शिमला रेलवे रूट खतरे में है। लालफीताशाही और हुकूमत में इच्छाशक्ति की कमी के चलते आज यह विरासत बदहाली के दौर से गुजर रही है। कहीं डंगे टूटे पड़े है तो कही ट्रैक से सट कर निर्माण हो रहा है। इसे विडम्बना ही कहेगे कि जिस 100 किलोमीटर लंबे बेहद दुर्गम रेलवे रूट का निर्माण ब्रिटिश हुकूमत ने महज तीन वर्ष में कर दिखाया था , देश की चुनी हुई लोकतान्त्रिक सरकारें आज उसकी देख रेख भी ठीक से नहीं कर पा रही । हालांकि वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार ने इसे हेरिटेज घोषित किया और वर्ष 2008 में इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज की फेहरिस्त में शामिल किया गया। लेकिन बावजूद इसके इस विश्व धरोहर की बदहाली जस की तस कायम है। बल्कि दिन ब दिन बदतर होती जा रही है । आलम यह है कि ट्रैक का जो हिस्सा वर्तमान में काम नहीं आ रहा , वहां तो कबाड़ियों ने पटरियों के नट बोल्ट तक खोल डाले । लेकिन सुध लेने को कोई तैयार नहीं है। न विश्व का सबसे बड़े विभागों में शुमार भारतीय रेलवे सेवा और न ही सरकार। बस कभी कभार एनक्रोचमेंट की एवज में विभाग नोटिस थमा अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। ब्रिटिश व्यवस्था से ले सबक वर्ष 1903 में तत्त्कलीन ब्रिटिश वाइसराय लार्ड कर्ज़न ने ट्रैक का औपचारिक उद्घटान किया था। 11 दशकों से अधिक के सफर के बाद हम आज इस विषय धरोहर के निर्माण से सबक ले या इसकी बदहाली पर चिंतन करे ,ये मंथन का विषय है । ब्रिटिश राज में अफसरों की जवाबदेही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन ब्रिटिश इंजीनियर बरोग ने टनल संख्या 33 के निर्माण में असफल होने पर शर्मिंदगी के चलते आत्महत्या कर ली थी। हुकूमत ने उन पर एक रुपए का जुर्माना भी ठोका था। और आज आज़ाद भारत में अफसरशाही इस कदर हावी है कि किसी ब्रिज के गिरने से भीषण हादसा पेश आने पर भी अधिकारी ज़िम्मेदारी से भागते है। ब्रिटिश इंजीनियरों ने टेके घुटने , बल्खु ने थामी कमान कालका -शिमला रेलवे ट्रैक के निर्माण की कहानी बेहद दिलचस्प है। वर्ष 1898 में इस नैरो गेज रेलवे ट्रैक की नींव रखी गई । लेकिन निर्माण शुरू हुआ वर्ष 1900 में। और महज 3 वर्षो में ब्रिटिश हुकूमत ने 100 किलोमीटर लंबे इस दुर्गम ट्रैक का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया। जो आज के तकीनीक दौर में भी आसान नहीं है। उस दौरान मार्ग पर 20 स्टेशन व 107 टनल का निर्माण किया गया था। जिनमे से 18 स्टेशन और 102 टनल वर्तमान में कार्यरत है। निर्माण के दौरान टनल नंबर 33 ब्रिटिश हुकूमत के सामने सबसे बड़ी चुनोती थी। इसी टनल में इंजीनियर बरोग आत्महत्या कर चुके थे। जिसके बाद निर्माण कार्य इंजीनियर एचएस हेर्रिन्ग्टन ने संभाला। लेकिन सभी विशेषज्ञों ने घुटने टेक दिए । जिसके बाद हेर्रिन्ग्टन ने स्थानीय चरवाहे बल्खु को इसका दायित्व सौपा। और नतीजा सबके सामने है। जिस टनल को निकालने में नामी ब्रिटिश इंजीनियर घुटने टेक चुके थे उसे बल्खु ने निकाल अपना लोहा मनवाया।













