हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों—में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें इन चुनावों के दौरान विधायकों के मताधिकार पर रोक लगाई गई थी। शीर्ष अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों के विधायक फिलहाल नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में होने वाले चुनावों में मतदान कर सकेंगे।।
मौजूदा स्थिति में प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषदों के साथ-साथ अर्की नगर पंचायत में भाजपा को केवल एक पार्षद की बढ़त हासिल है। वहीं, इन सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कांग्रेस विधायक करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विधायकों को मतदान का अधिकार मिलने से इन निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के समीकरण बदल गए हैं। कई स्थानों पर दोनों दलों के बीच मतों की संख्या बराबर होने की संभावना बन गई है, जिसके चलते चुनाव परिणाम टॉस के जरिए तय होने की नौबत भी आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह रही कि राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि विधायकों के मताधिकार का सीधा असर कई शहरी निकायों में सत्ता के संतुलन पर पड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा को छोड़कर राज्य के अन्य 11 जिलों में नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों का शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को आयोजित किया जाएगा। कांगड़ा जिले में यह कार्यक्रम 18 जून को होगा, जहां मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu स्वयं शपथ दिलाएंगे। मुख्यमंत्री 16 जून को दिल्ली में निर्धारित बैठक के चलते सोमवार के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे।
प्रदेश सरकार ने पहले सभी 3,754 ग्राम पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों के लिए एक साथ शपथ ग्रहण का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन बाद में कांगड़ा जिले के लिए अलग से 18 जून की तिथि निर्धारित की गई। शेष 11 जिलों में आयोजित होने वाले समारोहों में राज्य सरकार के मंत्री और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
चंबा में विधानसभा अध्यक्ष Kuldeep Singh Pathania शपथ ग्रहण करवाएंगे, जबकि ऊना में उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri यह जिम्मेदारी निभाएंगे। सोलन में स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय मंत्री Dhani Ram Shandil, कुल्लू में कृषि एवं पशुपालन मंत्री Chandra Kumar तथा लाहुल-स्पीति में उप मुख्य सचेतक Keval Singh Pathania नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को शपथ दिलाएंगे।
इसी तरह सिरमौर में उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री Harshwardhan Chauhan, किन्नौर में राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री Jagat Singh Negi और शिमला में शिक्षा मंत्री Rohit Thakur शपथ ग्रहण समारोह की अगुवाई करेंगे। शिमला जिले की 441 पंचायतों के प्रधान और उपप्रधान होटल Peterhoff में दोपहर 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में शपथ लेंगे।
मंडी में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Anirudh Singh, बिलासपुर में तकनीकी शिक्षा एवं नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री Rajesh Dharmani तथा हमीरपुर में आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री Yadvinder Goma शपथ दिलाएंगे।
जिला स्तरीय समारोहों में सांसदों, विधायकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को भी प्रोटोकॉल के तहत आमंत्रित किया गया है। सभी नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी।
किस जिले में कौन दिलाएगा शपथ?
जिला
मुख्य अतिथि
चंबा
कुलदीप सिंह पठानिया
ऊना
मुकेश अग्निहोत्री
सोलन
डॉ. धनी राम शांडिल
कुल्लू
चंद्र कुमार
लाहुल-स्पीति
केवल सिंह पठानिया
सिरमौर
हर्षवर्धन चौहान
किन्नौर
जगत सिंह नेगी
शिमला
रोहित ठाकुर
मंडी
अनिरुद्ध सिंह
बिलासपुर
राजेश धर्माणी
हमीरपुर
यादविंदर गोमा
कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है।
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी।
हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट से अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे एडमिट कार्ड में दर्ज सभी जानकारियों जैसे नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग समय और अन्य विवरणों को ध्यानपूर्वक जांच लें। NTA के अनुसार, री-एग्जाम 21 जून 2026 को आयोजित किया जाएगा।
ऐसे डाउनलोड करें NEET UG 2026 एडमिट कार्ड
1. आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं।
2. होमपेज पर "NEET UG 2026 Admit Card" लिंक पर क्लिक करें।
3. अपना Application Number और Date of Birth/Password दर्ज करें।
4. स्क्रीन पर दिखाई दे रहे Security Pin (Captcha) को भरें।
5. Submit बटन पर क्लिक करें।
6. आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर खुल जाएगा।
7. इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।
परीक्षा के दिन इन बातों का रखें ध्यान
1. एडमिट कार्ड के साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र (ID) लेकर जाएं।
2. परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें।
3. एडमिट कार्ड में दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
4. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर तुरंत NTA से संपर्क करें।
महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारत ने अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 64 रन से हराकर टूर्नामेंट में शानदार आगाज किया। एजबेस्टन, बर्मिंघम में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारतीय टीम ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही, लेकिन अनुभवी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी काबिलियत साबित की। मंधाना ने 44 गेंदों में 68 रन की बेहतरीन पारी खेली, जिसमें कई शानदार चौके और छक्के शामिल रहे। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 36 रन बनाए और दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
पारी के अंतिम ओवरों में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने तूफानी अंदाज दिखाया। उन्होंने मात्र 17 गेंदों में 34 रन की नाबाद पारी खेलते हुए पाकिस्तान के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 170 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।
171 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम ने आक्रामक शुरुआत की और शुरुआती छह ओवरों में 52 रन बना लिए। सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली ने 41 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेलकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाने की कोशिश की, लेकिन उनके आउट होते ही पाकिस्तान की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में सिर्फ 10 रन देकर 5 महत्वपूर्ण विकेट झटके। उनकी सटीक गेंदबाजी के सामने पाकिस्तान की बल्लेबाज टिक नहीं सकीं। युवा स्पिनर श्री चरणी ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट हासिल किए और पाकिस्तान के मध्यक्रम को ध्वस्त कर दिया।
एक समय पाकिस्तान का स्कोर 75 रन पर 3 विकेट था, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकालते हुए पूरी टीम को 17 ओवर में मात्र 106 रन पर समेट दिया। भारत ने यह मुकाबला 64 रन के बड़े अंतर से जीत लिया।
इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने विश्व कप में अपने इरादे साफ कर दिए हैं। टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन देखने को मिला। दूसरी ओर पाकिस्तान की टीम दबाव के क्षणों में बिखरती नजर आई। भारत के लिए यह जीत अंक तालिका के साथ-साथ आत्मविश्वास के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में डाक विभाग ने डाक वितरण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रधान डाकघर मंडी से द्रंग क्षेत्र की रेहड़धार शाखा तक पहली बार ड्रोन के माध्यम से सफलतापूर्वक डाक भेजी है। चौंकाने वाली बात यह है कि ड्रोन ने यह दूरी महज छह मिनट में तय कर ली, जबकि पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सामान्य रूप से इस प्रक्रिया में कई घंटों से लेकर पूरा एक दिन तक का समय लग जाता था। इस आधुनिक सेवा की शुरुआत शुक्रवार को स्काई एयर कंपनी और डाक विभाग के संयुक्त प्रयासों से की गई, जो आने वाले समय में दूरदराज के क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी को बेहद आसान बना देगी।
इस सफल परीक्षण के दौरान ड्रोन ने एरियल रूट के जरिए एकतरफा करीब पांच से छह किलोमीटर की दूरी तय की। खास बात यह रही कि ड्रोन न सिर्फ मंडी से रेहड़धार शाखा तक डाक लेकर गया, बल्कि वहां से दिनभर की एकत्रित डाक को वापस प्रधान डाकघर मंडी भी लेकर आया। डाक विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में समय की बचत करना और आपातकालीन परिस्थितियों में भी डाक व जरूरी सामान की डिलीवरी को निर्बाध बनाए रखना है। इस सफल ट्रायल के बाद अब हिमाचल के अन्य कठिन क्षेत्रों में भी इस सेवा के विस्तार की राह आसान हो गई है।
आईपीएल के रोमांचक सफर के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला एक बार फिर बड़े धमाके के लिए तैयार है, जहां आज भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा। दोपहर 1:00 बजे होने वाले टॉस के बाद 1:30 बजे मैच की पहली गेंद फेंकी जाएगी, जिसके लिए सुबह 10:30 बजे से ही दर्शकों के लिए स्टेडियम के गेट खोल दिए जाएंगे। करीब 22 हजार की क्षमता वाले इस मैदान पर दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। जहां मेहमान टीम की कमान हशमतुल्लाह शाहिदी के हाथों में है, वहीं भारतीय टीम, कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में मैदान पर उतरेगी। सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा को छोड़कर इस टीम में ज्यादातर युवा चेहरे शामिल हैं, जो पहली बार इस खूबसूरत मैदान पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अनुभव हासिल करेंगे। पहली बार इस पिच पर आमने-सामने आ रही दोनों टीमों पर सीरीज में शुरुआती बढ़त बनाने का भारी दबाव होगा।
इस ब्लॉकबस्टर मैच पर हालांकि बारिश का साया मंडरा रहा है, लेकिन हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (HPCA) मौसम की हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। स्टेडियम में अत्याधुनिक 'एडवांस सब एयर सिस्टम' और सुपर सोपर मौजूद हैं, जो भारी बारिश के बाद भी मैदान को महज 15 से 20 मिनट के भीतर दोबारा खेल के लिए तैयार कर देते हैं। मैच को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कड़े बंदोबस्त किए हैं, जिसके तहत अंदर और बाहर 700 से अधिक पुलिस व होमगार्ड जवानों को तैनात किया गया है और आसमान से ड्रोन के जरिये भी निगरानी रखी जाएगी|ऑनलाइन टिकटों की बिक्री मैच से एक दिन पहले तक जारी रही, जिससे साफ है कि आज धर्मशाला की वादियों में क्रिकेट का जबरदस्त रोमांच देखने को मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों—में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें इन चुनावों के दौरान विधायकों के मताधिकार पर रोक लगाई गई थी। शीर्ष अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों के विधायक फिलहाल नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में होने वाले चुनावों में मतदान कर सकेंगे।।
मौजूदा स्थिति में प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषदों के साथ-साथ अर्की नगर पंचायत में भाजपा को केवल एक पार्षद की बढ़त हासिल है। वहीं, इन सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कांग्रेस विधायक करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विधायकों को मतदान का अधिकार मिलने से इन निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के समीकरण बदल गए हैं। कई स्थानों पर दोनों दलों के बीच मतों की संख्या बराबर होने की संभावना बन गई है, जिसके चलते चुनाव परिणाम टॉस के जरिए तय होने की नौबत भी आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह रही कि राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि विधायकों के मताधिकार का सीधा असर कई शहरी निकायों में सत्ता के संतुलन पर पड़ सकता है।
एमएमएमसीएच, कुमारहट्टी के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (IAGE) के सहयोग से गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपी पर एक दिवसीय द्वितीय सेंसिटाइजेशन स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को महार्षि मार्कण्डेश्वर ट्रस्ट के अध्यक्ष तरसेम गर्ग और सचिव विशाल गर्ग का संरक्षण प्राप्त रहा। मुख्य अतिथि एमएमयू के कुलपति डॉ. रवि चंद शर्मा तथा सह-अध्यक्ष के रूप में रजिस्ट्रार अजय कुमार सिंगल उपस्थित रहे। इस अवसर पर एमएमएमसीएच के प्राचार्य डॉ. मनप्रीत सिंह नंदा, उप-प्राचार्य डॉ. जसदीप सिंह संधू, एमएमसीओएन की प्राचार्य डॉ. हरप्रीत कौर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किरण कुमार सिंघल और एनएएसी समन्वयक डॉ. जय गोपाल वोहरा भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की स्थानीय संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका गुप्ता तथा परियोजना समन्वयक डॉ. पियूष वोहरा रहे। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण ऑपरेशन थियेटर से प्रसारित लाइव सर्जरी रही, जिसमें राष्ट्रीय एंडोस्कोपिक सर्जरी प्रशिक्षक डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. पियूष वोहरा और डॉ. वाणी शर्मा ने लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी, ग्रेड-4 एंडोमेट्रियोसिस में ओवेरियन सिस्टेक्टॉमी, लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टॉमी तथा फेलोपियन ट्यूब रिकैनालाइजेशन जैसी जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के उपयोग, सर्जरी के विभिन्न चरणों और महत्वपूर्ण चिकित्सीय निर्णयों की भी जानकारी दी। कार्यशाला में संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और चिकित्सकों ने भाग लिया तथा एंडोस्कोपिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट से अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे एडमिट कार्ड में दर्ज सभी जानकारियों जैसे नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग समय और अन्य विवरणों को ध्यानपूर्वक जांच लें। NTA के अनुसार, री-एग्जाम 21 जून 2026 को आयोजित किया जाएगा।
ऐसे डाउनलोड करें NEET UG 2026 एडमिट कार्ड
1. आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं।
2. होमपेज पर "NEET UG 2026 Admit Card" लिंक पर क्लिक करें।
3. अपना Application Number और Date of Birth/Password दर्ज करें।
4. स्क्रीन पर दिखाई दे रहे Security Pin (Captcha) को भरें।
5. Submit बटन पर क्लिक करें।
6. आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर खुल जाएगा।
7. इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।
परीक्षा के दिन इन बातों का रखें ध्यान
1. एडमिट कार्ड के साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र (ID) लेकर जाएं।
2. परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें।
3. एडमिट कार्ड में दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
4. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर तुरंत NTA से संपर्क करें।
महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारत ने अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 64 रन से हराकर टूर्नामेंट में शानदार आगाज किया। एजबेस्टन, बर्मिंघम में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारतीय टीम ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही, लेकिन अनुभवी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी काबिलियत साबित की। मंधाना ने 44 गेंदों में 68 रन की बेहतरीन पारी खेली, जिसमें कई शानदार चौके और छक्के शामिल रहे। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 36 रन बनाए और दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
पारी के अंतिम ओवरों में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने तूफानी अंदाज दिखाया। उन्होंने मात्र 17 गेंदों में 34 रन की नाबाद पारी खेलते हुए पाकिस्तान के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 170 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।
171 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम ने आक्रामक शुरुआत की और शुरुआती छह ओवरों में 52 रन बना लिए। सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली ने 41 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेलकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाने की कोशिश की, लेकिन उनके आउट होते ही पाकिस्तान की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में सिर्फ 10 रन देकर 5 महत्वपूर्ण विकेट झटके। उनकी सटीक गेंदबाजी के सामने पाकिस्तान की बल्लेबाज टिक नहीं सकीं। युवा स्पिनर श्री चरणी ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट हासिल किए और पाकिस्तान के मध्यक्रम को ध्वस्त कर दिया।
एक समय पाकिस्तान का स्कोर 75 रन पर 3 विकेट था, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकालते हुए पूरी टीम को 17 ओवर में मात्र 106 रन पर समेट दिया। भारत ने यह मुकाबला 64 रन के बड़े अंतर से जीत लिया।
इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने विश्व कप में अपने इरादे साफ कर दिए हैं। टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन देखने को मिला। दूसरी ओर पाकिस्तान की टीम दबाव के क्षणों में बिखरती नजर आई। भारत के लिए यह जीत अंक तालिका के साथ-साथ आत्मविश्वास के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी।
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है।
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा।
घटस्थापना की सामग्री
हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।
कलश स्थापना की विधि
पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।
यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।
कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?
यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए।
होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं।
कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों—में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें इन चुनावों के दौरान विधायकों के मताधिकार पर रोक लगाई गई थी। शीर्ष अदालत के इस अंतरिम फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों के विधायक फिलहाल नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में होने वाले चुनावों में मतदान कर सकेंगे।।
मौजूदा स्थिति में प्रदेश के कई शहरी निकायों में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। परवाणु, रामपुर और नाहन नगर परिषदों के साथ-साथ अर्की नगर पंचायत में भाजपा को केवल एक पार्षद की बढ़त हासिल है। वहीं, इन सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कांग्रेस विधायक करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विधायकों को मतदान का अधिकार मिलने से इन निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के समीकरण बदल गए हैं। कई स्थानों पर दोनों दलों के बीच मतों की संख्या बराबर होने की संभावना बन गई है, जिसके चलते चुनाव परिणाम टॉस के जरिए तय होने की नौबत भी आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह रही कि राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि विधायकों के मताधिकार का सीधा असर कई शहरी निकायों में सत्ता के संतुलन पर पड़ सकता है।
कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है।
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी।
हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई, मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।
यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा।
16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी
अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।
साहिर-अमृता की पहली मुलाकात
ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"
साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'
आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से
साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"
अमृता लिखती है-
"यह आग की बात है
तूने यह बात सुनाई है
यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगायी थी
चिंगारी तूने दी थी
ये दिल सदा जलता रहा
वक्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा
ज़िन्दगी का अब गम नहीं
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ
अब और सिगरेट जला ले "
वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।"
लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया।
अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना
अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।
इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था-
"मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी
जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के
तेरे केनवास नु वलांगी
पता नही किस तरह कित्थे
पर तेनु जरुर मिलांगी"
इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।
जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है।
उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।
हिमाचल प्रदेश एक रहस्यों से भरा राज्य है। यहां ऐसी कई चीज़ें है जिसे समझ पाना वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद मुश्किल है। ऐसे ही कई रहस्यों में से एक है हिमाचल की स्पीति घाटी में मौजूद करीब 550 साल पुरानी 'ममी'। करीब 550 साल पुरानी इस 'ममी' को स्थानीय लोग भगवान समझकर पूजते हैं। भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के लाहौल स्पीति के गयू गांव में मिली इस ममी का रहस्य आज भी बरकरार है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए देश विदेश से यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से करीब 50 किमी दूर गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण दुनिया से कटा रहता है।
कहते हैं कि यहां मिली यह ममी तिब्बत से गयू गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा संघा तेंजिन की है। कहा जाता है कि लामा ने साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 550 वर्ष से अधिक पाई गई है। आम तौर पर जब भी ममी की बात होती है तो जहन में मिस्र में पाए जाने वाली पट्टियों में लिपटी ममी याद आती है। किसी मृत शरीर को संरक्षित करने के लिए एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है, जिससे वह ममी लम्बे समय तक सरंक्षित रहती है। लेकिन इस ममी पर किसी तरह का कोई लेप नहीं लगाया गया है, फिर भी इतने वर्षों से यह ममी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इस तथ्य की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है। इस स्थान पर एक शरीर मौजूद है, जिसके सर बाल है, त्वचा है और नाखून भी पर न तो ये शरीर गलता है और न समय के साथ बदलता है। इसीलिए यहां के स्थानीय लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
बताया जाता है कि ITBP के जवानों को खुदाई के दौरान इस ममी का पता चला था। सन 1975 में भूकंप के बाद एक पुराने मकबरे में ये भिक्षु का ममीकृत शरीर दब गया था। इसकी खुदाई बहुत बाद में 2004 में की गई थी, और तब से यह पुरातत्वविदों और जिज्ञासु यात्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। खुदाई करते वक्त ममी के सर पर कुदाल लग गया था। ममी के सर पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। देखने वालों की भीड़ देखकर बाद में इस ममी को गाँव में स्थापित किया गया। खास बात यह है कि ममी प्रकृति का प्रकोप झेलने के बावजूद भी सही सलामत है।
प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम
यह ममी मिस्र के ममीकरण से बिल्कुल अलग है। इसे सोकुशिनबुत्सु नामक एक प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम कहा जाता है, जो शरीर को उसके वसा और तरल पदार्थ से दूर कर देता है। इसका श्रेय जापान के यामागाटा में बौद्ध भिक्षुओं को दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस प्रक्रिया में दस साल तक लग सकते हैं। इसकी शुरुआत साधु के जौ, चावल और फलियों (शरीर में वसा जोड़ने वाले भोजन) को खाने से रोकने के साथ होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मृत्यु के बाद वसा यानी फैट सड़ जाती है और इसलिए शरीर से वसा को हटाने से इसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह अंगों के आकार को इस हद तक कम करने में भी मदद करता है कि सूखा हुआ शरीर अपघटन का विरोध करता है। शरीर के पास एक निरोधक के साथ-मोमबत्तियां जलाई जाती है ताकि इसे धीरे-धीरे सूखने में मदद मिल सके। शरीर में नमी को खत्म करने और मांस को हड्डी पर संरक्षित करने के लिए एक विशेष आहार भी दिया जाता है। मृत्यु के बाद, भिक्षु को सावधानी से एक भूमिगत कमरे में रखा जाता है। समय के साथ भौतिक रूप सचमुच में एक मूर्ति बन जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से तीस से भी कम स्व-ममीकृत भिक्षु दुनिया भर में पाए गए हैं। उनमें से अधिकांश जापान के एक द्वीप उत्तरी होंशू में पाए गए हैं। यहां पर भी भिक्षु प्राकृतिक ममीकरण की इस प्रथा का पालन करते हैं। संघा तेनज़िन के शरीर में अवशिष्ट नाइट्रोजन (लंबे समय तक भुखमरी का संकेत) के उच्च स्तर से पता चलता है कि उन्होंने खुद को ममी बनाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया था।
दांत और बाल आज भी संरक्षित
इस ममी के दांत और बाल अभी भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं। इस मम्मी को एक छोटे से कमरे में एक कांच के बाड़े में रखा गया है, जो एक लोकप्रिय गोम्पा के करीब स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए इस ममी को एक कमरे में रखा गया है। पर्टयक खिड़की के माध्यम से उसकी एक झलक देख सकते है। इस कमरे को केवल महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान खोला जाता है। गयू आधुनिकीकरण से अछूता एक शांत स्थान है। संघा तेंजिन की ममी आज एक मंदिर में विराजमान है, उसका मुँह खुला है, उसके दाँत दिखाई दे रहे हैं और आँखें खोखली हैं। वसा और नमी से रहित, यह जीवित बुद्ध का प्रतीक माना जाता है।
गाँव के अस्तित्व के लिए दिया था बलिदान
मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि संघा तेंजिन ने गाँव के अस्तित्व के लिए खुद को बलिदान कर दिया था। कहानी यह है कि उन्होंने अपने अनुयायियों से विनाशकारी बिच्छू के संक्रमण के बाद खुद को ममीकृत करने के लिए कहा। जब उनकी आत्मा ने उनके शरीर को छोड़ दिया, तो ऐसा माना जाता है कि क्षितिज पर एक इंद्रधनुष दिखाई दिया जिसके बाद बिच्छू गायब हो गए और प्लेग समाप्त हो गया।
सिर्फ 100 लोग बस्ते है इस गांव में
गयू गांव एक बेहद शांतिपूर्ण और सुंदर गांव है। इस गांव में लगभग 100 लोग हैं। यहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर के स्थानों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस गांव की दूरी काज़ा से लगभग 80 किमी है। जबकि शिमला से लगभग 430 किमी और मनाली से कुंजुम दर्रे के माध्यम से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है। यहां आने का सबसे सही समय गर्मियों के दौरान है।
बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के बाद आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं। इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।
हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।
ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।