राज्य रेडक्रॉस सोसायटी के प्रदेश स्तरीय वन महोत्सव का शुभारंभ आज राज्य रेडक्रॉस सोसायटी की अस्पताल कल्याण शाखा की अध्यक्षा डॉ. साधना ठाकुर ने जाखू मंदिर परिसर के मुख्य द्वार पर अखरोट का पौधा रोपित कर किया। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में चिन्हित 73 स्थानों पर लगभग 107.6 हैक्टेयर भूमि पर 1 लाख 10 हजार पौधे रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा रोपित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सामाजिक कार्यों के साथ-साथ राज्य रेडक्रॉस सोसायटी पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाएगी। उन्होंने बताया कि जिला शिमला के विभिन्न क्षेत्रों में आज रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा 11 हजार पौधे रोपित किए गए। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रेडक्रॉस सोसायटी के कार्यकर्ता, युवक मण्डल, महिला मण्डल व चुने हुए प्रतिनिधि पौधा रोपण कर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश सम्प्रेषित करेंगे। उन्होंने बताया कि पौधा रोपण के उपरांत इनका संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए रेडक्रॉस एवं जुड़े हुए कार्यकर्ता निश्चित तौर पर अपनी जिम्मेदारी का निवर्हन करेंगे। उन्होंने बताया कि आज जाखू क्षेत्र में अखरोट, बान, देवदार और खनोर के 100 पौधे लगाए गए। प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन डॉ. सविता ने बताया कि विभाग द्वारा 20 और 21 जुलाई, 2021 तक 10 लाख पौधे रोपित किए जाएंगे। रेडक्रॉस के 1 लाख 10 हजार पौधों को शामिल कर यह संख्या 11 लाख 10 हजार की होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष वन विभाग द्वारा प्रदेश में 14 हजार हैक्टेयर भूमि पर 1 करोड़ 40 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अवसर पर राज्य रेडक्रॉस सोसायटी अस्पताल कल्याण शाखा की उपाध्यक्षा फिरोजा विजय सिंह, सदस्य अनुराधा सक्सेना, पार्षद डॉ. किमी सूद, अर्चना धवन, दीपक शर्मा, पूर्व सांसद बिमला कश्यप, सचिव राज्यपाल प्रियतु मण्डल, उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी, अतिरिक्त उपायुक्त किरण बड़ाना, उपमण्डलाधिकारी शिमला मंजीत शर्मा, सेजिज संस्था के अध्यक्ष आर.एल. जैन, पूर्व अध्यक्ष एस.एन. जोशी तथा वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने भाजपा के प्रांत स्तरीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए कहा की हम सबको पता है कि 2014 तक हमारी विदेश नीतियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव था और जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं तब से विदेश नीतियों में व्यापक बदलाव आया है जिसके कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिली है। आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अथक मेहनत से दुनिया का नजरिया भारत की ओर बदला है। उन्होंने कहा की नरेंद्र मोदी ने प्रथम दिन से ही विदेश नीति पर काम करना शुरू कर दिया था जब उन्होंने पड़ोसी देशों को शपथ ग्रहण समारोह में न्योता दिया जहां पाकिस्तान एवं बांग्लादेश को भी बुलाया गया यह हमारे देश की बदलती हुई सोच की पहचान थी। उन्होंने कहा कि एक समय था जब हमारे देश के प्रधानमंत्री को दूसरे देश वीजा नहीं देना चाहते थे पर आज मोदी के स्वागत के लिए इंतजार करते हैं और जब मोदी किसी देश में जाते हैं तो मोदी मोदी के नाम के नारे लगते हैं। यह मोदी के अथक प्रयास है जब योगा को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जाता है, भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद ,कालाधन ,क्लाइमेट चेंज एवं ग्लोबल वार्मिंग जैसे बड़े मुद्दों पर कार्य कर रहा है। आज हमारा देश कोर्स-बोडर टेररिज्म के खिलाफ एक जंग लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय भी भारत ने सभी राष्ट्रों की मदद करने के लिए अग्रिम भूमिका निभाई, भारत ने कई देशों को इस महामारी से लड़ने के लिए दवाइयां भेजी और जब तक संभव था तब तक कई देशों को भारत ने कोविड-19 की वैक्सीन भी प्रदान की। कश्यप ने कहा अन्य देशों में लगभग 3.50 करोड़ देशवासी ऐसे हैं जो भारत मूल के हैं और सभी के लिए भारत ने एक नीति बनाई जिससे भारत के लोगों को एक पहचान मिली। वंदे भारत मिशन के तहत संकट काल के समय 70 लाख देशवासियों को सुरक्षित भारत पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी पड़ोसी देश पर संकट आता है तो भारत अग्रिम भूमिका में रहकर उनकी मदद करता है जब नेपाल में भूकंप आया तो भारत ने अपनी एनडीआरएफ की टीम भेज नेपाल की मदद की। उन्होंने कहा कि जब चीन ने भारत की भूमि में अतिक्रमण करने की कोशिश की तब भी हमारी विदेश नीति काम आयी, सेना बल के दृढ़ निश्चय और विदेश नीति के बल पर चीन को वापस हटना पड़ा। आज रूस इजराईल एवं अमेरिका जैसे कई राष्ट्रों से हमारे मधुर संबंध है, पिछले 7 वर्षों में सारी दुनिया से भारत को भरपूर सहयोग मिल रहा है। हम सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले तीसरे राष्ट्र बने। आज कई देश भारत में एफडीआई के माध्यम से कार्य कर रहे हैं, जापान हमारे देश में बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट बना रहा है तो नमामि गंगे को लेकर अमेरिका कार्य कर रहा है इससे हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। आने वाले समय में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनेगा और जिस प्रकार से हम कार्य कर रहे हैं भारत का एक सुपर पावर बनना निश्चित है।
छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश ने विधानसभा के जल्द ही शुरू होने वाले मानसून सत्र में ही निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए ठोस कानून बनाने की मांग की है। मंच ने 22 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में इस की प्रक्रिया पर मोहर लगाने की मांग की है। मंच ने सरकार को चेताया है कि अगर उसने कानून बनाने के लिए पहलकदमी न की तो मंच विधानसभा घेराव करेगा। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, सदस्य भुवनेश्वर सिंह, योगेश वर्मा, विवेक कश्यप, फालमा चौहान, राकेश रॉकी व जय चंद ने कहा है कि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों के साथ मिलीभगत के कारण प्रदेश में निजी स्कूलों के संचालन के लिए न तो ठोस कानून बना रही है और न ही प्रदेश में नियामक आयोग का गठन किया जा रहा है। मंच के प्रतिनिधि पांच मार्च 2021 को मुख्यमंत्री से मिले थे व उन्होंने मंच को आश्वासन दिया था कि मार्च के विधानसभा सत्र में ही कानून बना दिया जाएगा। परन्तु 19 मार्च की मंत्रिमंडल बैठक में इस कानून को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मंच के निरन्तर आंदोलनों के कारण बाद में प्रदेश सरकार ने कानून के प्रारूप पर 23 जून तक सभी स्टेकहोल्डरज़ से सुझाव मांगे थे। इसमें 22 जून को मंच ने भी इक्कीस सुझाव उच्चतर शिक्षा निदेशक को दिए थे। इन सुझावों की अंतिम तिथि गुजरने के बाद पूरा एक महीना बीत चुका है परन्तु सरकार कानून बनाने को लेकर चुप है। विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि 22 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में निजी स्कूलों के संचालन के सन्दर्भ में कानून को अंतिम रूप दिया जाए व विधानसभा के मानसून सत्र में इसे हर हाल में पारित किया जाए। उन्होंने प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग साढ़े छः लाख छात्रों व उनके दस लाख अभिभावकों को न्याय प्रदान किया जाए तथा निजी स्कूलों की भारी फीसों व मनमानी लूट पर रोक लगाई जाए। उन्होंने हैरानी व्यक्त की है कि कोरोना काल में भी निजी स्कूलों ने पन्द्रह से लेकर पचास प्रतिशत तक की फीस बढ़ोतरी की है। निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग द्वारा कोरोना काल में फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के संदर्भ में निकाली गईं आधा दर्जन अधिसूचनाओं को ठेंगा ही दिखाया है। इस से साफ पता चलता है कि निजी स्कूल प्रदेश सरकार के आदेशों की कोई परवाह नहीं करते हैं। इसलिए कानून बनने से ही निजी स्कूलों की तानाशाही रुक सकती है।
आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को पेगासस जासूसी कांड में बेतुके बयानों से बचने की सलाह दी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर निशाना साधा है जिसमें उन्होंने जासूसी कांड को लेकर विपक्ष पर आरोप लगाए है। पार्टी ने एक बयान जारी करते हुए कहा की मुख्यमंत्री क्या यह कर बच सकते हैं कि कांग्रेस के शासन में कई हजार फोन और ईमेल की निगरानी की गई। क्या लोकतंत्र में सिर्फ में निजता का हनन करने का तर्क ये दिया जा सकता है कि पहले की सरकारों में यह होता था। विपक्ष के आरोपो को बेबुनियाद बताने वाले मुख्यमंत्री शायद भूल रहे है कि प्रदेश में उनकी ही पार्टी की सरकार पर पहले भी ऐसे आरोप लग चुके है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उन मामलों में अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। तो मुख्यमंत्री जासूसी से अनजान बनने का ढोंग न ही करे । पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा, इसरायली कंपनी से सीख ले जो अपने 'ग्राहकों' की निजता ज्यादा ध्यान उनसे ज्यादा रख रही है। इस गंभीर मसले पर मुख्यमंत्री को ऐसे बयानों से बचना चाहिए। पार्टी मांग करती है जासूसी कांड में निष्पक्ष जांच की जाए ताकि सच सबके सामने आ सके।
सेब बागवानों को महंगाई का एक और झटका दिया गया है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने की दलील देकर ट्रकों से सेब ढुलाई पांच फीसदी महंगी कर दी गई है। ठियोग से दिल्ली के लिए प्रति पेटी न्यूनतम 67.40 और अधिकतम 77.40 रुपये जबकि कोटखाई के विभिन्न क्षेत्रों से न्यूनतम 72.40 रुपये और अधिकतम 81.40 रुपये भाड़ा तय किया गया है। पहली बार लिंक रोड से मुख्य मार्ग तक सेब पहुंचाने के लिए छोटे वाहनों का भाड़ा भी तय किया गया है। लोकल लिंक रोड पर पिकअप के लिए दस किलोमीटर तक प्रति पेटी प्रति किलोमीटर भाड़ा 1.12 रुपये तय किया गया है। दस किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर 85 पैसे प्रति पेटी प्रति किलोमीटर अतिरिक्त जोड़े जाएंगे। टाटा 407 और आईशर चार व्हीलर का भाड़ा प्रति पेटी प्रति किलोमीटर 1.71 रुपये तय किया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत बाल विकास परियोजना शिमला शहरी द्वारा लॉगवुड व कृष्णानगर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक व जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। यह जानकारी देते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी शिमला शहरी ममता पॉल ने बताया कि लोक गीतों, पहाड़ी नाटी व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बेटियों के जन्म को अभिशाप न समझकर इसे जन्मोहत्सव के रूप में मनाने के लिए आहवान किया गया। उन्होंने बताया कि बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच रख बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही साथ बालिकाओं की गर्भ से लेकर किशोरावस्था तक पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के प्रति सजग किया गया। नुक्कड़ नाटक का आयोजन सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के सांस्कृतिक दल के माध्यम से किया गया। उन्होंने बताया कि शिशु लिंगानुपात, लिंग भेद व लिंग चयन रोकने जैसे विषयों पर भी नाटक के माध्यम से मंथन किया गया। बाल विकास परियोजना अधिकारी व वृत पर्यवेक्षिकाओं द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं जैसे विधवा पुनर्विवाह, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, स्वयं रोजगार, मदर टेरेसा व बेटी है अनमोल योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि परियोजना द्वारा शिक्षा, सेवा, खेल, संस्कृति व अन्य क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाली बेटियों व महिलाओं के लिए होर्डिंग, लॉगो पेस्टिंग व अनुशंसा पत्र द्वारा सम्मान दिया जा रहा है तथा नई जन्मी बेटियों के जन्म पर बधाई पत्र, पौधा रोपण व भेंट भी दी जा रही है। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी ने गुड़िया हेल्पलाइन व शक्ति वहन एप के बारे में जानकारी भी प्रदान की। इस दौरान बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर शपथ भी दिलवाई गई व प्रतिभागियों को फल भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में कृष्णानगर से स्थानीय पार्षद बिटू कुमार, लॉगवुड में श्रीमती तनुजा चौधरी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी उपस्थित थी।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने प्रदेशवासियों, विशेष तौर पर मुस्लिम भाई-बहनों को बुधवार को देश में मनाई जा रही ईद-उल-जुहा के शुभ अवसर पर बधाई दी। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संदेश में सभी मुस्लिम भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके खुशहाल एवं समृद्ध जीवन की कामना की। उन्होंने सभी के लिए खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईद-उल-जुहा सर्वोच्च बलिदान की भावना का प्रतीक है और यह त्यौहार समाज में शांति, प्रेम और करुणा को बढ़ावा देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से राज्य की प्रगति, समृद्धि और शांति के लिए मिल-जुलकर कार्य करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि ईद-उल-जुहा ईश्वर के प्रति त्याग और निष्ठा का त्यौहार है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह त्यौहार प्रेम और भाईचारे के बंधन को अधिक मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने त्यौहार मनाने के दौरान कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए प्रदेशवासियों से कोविड उपयुक्त व्यवहार जैसे सामाजिक दूरी के नियमों का पालन और मास्क पहनना सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
Governor Rajendra Vishwanath Arlekar and Chief Minister Jai Ram Thakur have felicitated the people of the State particularly the Muslim brethren on the occasion of Id-ul-Zuha being celebrated on Wednesday in the country. The Governor has conveyed his greetings and best wishes to all Muslim brothers and sisters. He prayed for happiness, peace and prosperity of all sections of the society. CM Jai Ram Thakur said that Id-ul-Zuha symbolizes sacrifice, faith, devotion, the spirit of universal love and brotherhood. He appealed the people to work for peace, progress and prosperity of the State. He said that Id-ul-Zuha was a festival of sacrifice and devotion to the God. He hoped that this festival would further strengthen the bond of love and brotherhood. The Chief Minister has urged the people to celebrate this festival while ensuring Covid appropriate behaviour by wearing masks and maintaining social distancing etc. to avoid the spread of Covid-19 pandemic.
हिमाचल प्रदेश राज्य तकनीकी कर्मचारी संघ का धरना प्रदेश अध्यक्ष दूनी चंद ठाकुर की अध्यक्षता में विद्युत भवन शिमला में 19 जुलाई को हुआ। जिसमें प्रदेश के सभी इकाइयों से तकनीकी कर्मचारी निर्धारित संख्या मैं उपस्थित हुए। सभी इकाइयों के प्रधान व सचिवों ने विद्युत बोर्ड प्रबंधन के तकनीकी कर्मचारियों की मांगों को न मानने पर कड़ा विरोध जताया व प्रदेश नेतृत्व को आश्वाशन दिया कि अगर प्रबंधन तकनीकी कर्मचरियों की मांगों को नहीं मानता है तो प्रदेश के सभी तकनीकी कर्मचारी फिर से बिजली बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ धरना करेंगे व तब तक मुख्यालय को नहीं छोड़ेंगे जब तक उनकी मांगों का निराकरण न हो। प्रदेश अध्यक्ष ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बोर्ड प्रबंधन से चार बार सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई व प्रबंधन ने 31 मई तक सभी बिषयों पर निर्णय लेने का आश्वाशन दिया। तकनीकी कर्मचारी संघ ने कोरोना की परिस्थितियों को मध्य नजर रखते हुए बोर्ड को जून माह में औऱ समय दिया उसके बाद 8 जुलाई को प्रबंधन के साथ पुनः संवाद स्थापित किया मगर बोर्ड के प्रबंध निदेशक का रवैया तकनीकी कर्मचारियों की समस्यायों के प्रति सकारात्मक नहीं था जिस को देखते हुए बोर्ड को 10 दिन का एक समयबद्ध नोटिस दिया गया जिसके लिए प्रबंध निदेशक की हठधर्मिता जिम्मेवार है।दूनी चंद ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रबंधक वर्ग सर्विस कमेटी की बैठक नहीं करवा पाया है जो उनकी नाकामी को दर्शाता है व कर्मचारियों के प्रति उनकी मानसिकता को भी दर्शाता है। ठाकुर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि तकनीकी कर्मचारी रात दिन लाखों उपभोक्ताओं को सुचारू बिजली उपलब्ध करवा रहा है उसके विपरीत मौजूदा प्रबंधन उनकी जायज मांगों को नहीं मान रहा जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है तकनीकी कर्मचारी संघ तकनिकी कर्मचरियों की मांगों को मनवाने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है प्रदेश अध्यक्ष ने बोर्ड प्रबंधन को चेताया कि वह तकनिकी कर्मचारियों का इम्तहान न लें व उनकी मांगों को तुरंत मानकर उनके आदेश जारी करें नहीं तो आने वाले समय में तकनिकी कर्मचारी संघ प्रदेश में एक बहुत बड़ा आंदोलन करेगा जिसकी रणनीति आगामी पदाधिकारी बैठक में तय की जायेगी जो कि शिमला में 27 जुलाई को रखी गई है। दूनी चंद ठाकुर ने प्रदेश सरकार से यह भी मांग की है कि बोर्ड में सेवा विस्तार की प्रथा को बंद किया जाये। इसके साथ ही तकनिकी कर्मचारी संघ बोर्ड के निजीकरण का भी विरोध करता है अगर केंद्र सरकार बोर्डो का निजीकरण करती है तो तकनीकी कर्मचारी संघ पूरे प्रदेश भर में आंदोलन शुरू करेगी ।
प्रदेश के छह बार के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह की स्मृति में प्रदेश कांग्रेस कमेटी वृक्षारोपण सप्ताह का आयोजन करेगी। प्रदेश के हर जिले में कांग्रेस पार्टी के सभी नेता, पदाधिकारी व कार्यकर्ता इस वृक्षारोपण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। इस वृक्षारोपण का नाम वीरभद्र सिंह वृक्षारोपण सप्ताह रखा गया है जो उनकी पुण्य स्मृति के प्रति समर्पित होगा। कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने मंगलवार को कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी हर साल अपने सामाजिक दायित्व के प्रति वन महात्सव के तहत प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करती रही है।उन्होंने कहा कि चूंकि इस बार प्रदेश ने अपना एक महान नेता वीरभद्र सिंह को खोया है इसलिए उनकी स्मृति में 25 जुलाई से 31 जुलाई तक वृक्षारोपण सप्ताह उनके लिए कांग्रेस की श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में उनके बहुमूल्य योगदान को कभी नही भुलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह हमेशा ही कांग्रेस पार्टी के प्रेरणास्रोत रहेंगे। उनके आदर्शों और उनकी समग्र विकास की सोच के साथ प्रदेश में कांग्रेस आगे बढ़ेगी।तय कार्यक्रम के अनुसार शिमला में यह वृक्षारोपण 25 को जिला शिमला शहरी व 26 को शिमला ग्रामीण में आयोजित किया जाएगा। इसी तरह 27 जुलाई को ऊना और सिरमौर जिला, 28 को कांगड़ा व सोलन, 29 को हमीरपुर व कुल्लू, 30 को बिलासपुर व मंडी, 31 को लाहुल स्पीति व किन्नौर में यह वन महात्सव आयोजित किए जाएंगे।
क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी शिमला राजेश शर्मा ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लाईफ इंश्योरेंस शिमला यूनिट में डवल्पमेंट मैनेजर, फाईनेशियल एडवाईजर, उत्कर्ष पदों को भरने के लिए 24, 26 व 27 जुलाई, 2021 को कैम्पस इंटरव्यू का आयोजन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लाईफ इश्योरेंस छोटा शिमला में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 12वीं, ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमबीए शैक्षणिक योग्यता तथा 21 से 50 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार अपने अनिवार्य दस्तावेजों सहित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लाईफ इंश्योरेंस छठी मंजिल छोटा शिमला में प्रातः 10 बजे पहुंचकर कैम्पस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 86290-79666 पर सम्पर्क कर सकते हैं। इसी के साथ उन्होंने जानकारी दी की मैसर्ज सॉफ्ट ऐज इन्फोरमेशन टैक्नोलॉजी लिमिटिड शिमला यूनिट में डिलवरी एसोशिएट के 50 पदो को भरने हेतु 28 जुलाई, 2021 को कैम्पस इंटरव्यू का आयोजन सॉफ्ट ऐज इन्फोरमेशन टैक्नोलॉजी लिमिटिड शांति भवन, सैक्टर-6, फेस-3 शिमला में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त पदों के लिए 8वीं, 10वीं पास एवं इससे अधिक वाले शैक्षणिक योग्यता तथा आयु सीमा 18 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार 28 जुलाई, 2019 को प्रातः 10 बजे पहुंचकर कैम्पस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 96430-57976 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा की भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस द्वारा राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए लगाए गए तथ्यहीन, निराधार और बेबुनियाद टिप्पणियों का पुरजोर खंडन करते हुए निंदा करती है। यह कांग्रेस की एक नई किस्म की निम्नतम स्तर की राजनीति है जिसने 50 से अधिक वर्षों से भारत पर शासन किया है। उन्होंने कहा यह पेगासस की फर्जी कहानी मानसून सत्र से ठीक पहले क्यों गढ़ी गई? क्या इसे मानसून सत्र से ठीक पहले लाना कुछ लोगों की पूर्व नियोजित रणनीति थी? जानबूझकर मानसून सत्र के समय सदन को बाधित करने और देश में बेबुनियाद एजेंडा खड़ा करने की कोशिशें की जा रही है और इसका कारण यह है कि कांग्रेस पार्टी अब सिमट रही है और हार रही है। कश्यप ने कहा इस फर्जी कहानी से भारत सरकार को जोड़ने वाले साक्ष्य का एक भी सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह फर्जी रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र और इसकी सुस्थापित संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास प्रतीत होती है। उन्होंने कहा क्या हम इस बात से इनकार कर सकते हैं कि एमनेस्टी जैसी संस्थाओं का कई मायनों में भारत विरोधी घोषित एजेंडा रहा है? जब हमने उनसे कानून के अनुसार उनके विदेशी फंडिंग के बारे में पूछा तो वे भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया। इस रिपोर्ट में संदिग्ध लोगों के साथ सांठगांठ चलाने वाले विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भी संलिप्तता है। यह शर्मनाक है कि कांग्रेस जैसी पार्टियां ऐसे संगठनों की लाइन को तोते की तरह दुहरा रही हैं! यदि हमारे विपक्षी दल ' सुपारी ' एजेंटों के रूप में शामिल हैं तो यह भारत के लिए एक नया निम्न स्तर है। उन्होंने कहा की 2013 के एक आरटीआई जवाब से पता चला कि उस समय कांग्रेस की यूपीए सरकार द्वारा हर महीने लगभग 9,000 फोन और 500 ईमेल खातों की निगरानी की जाती थी। यह भी सर्वविदित है कि हरियाणा के दो सिपाही राजीव गांधी के आस पास देखे गए तो उन्होंने केंद्र में चंद्रशेखर की सरकार गिरा दी थी । यही कांग्रेस का चरित्र है ।
छह दफे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस में ऐसा कोई कद्दावर नेता नहीं दिख रहा है, जो उनके निधन के बाद उपजे शून्य को भर सके। ये पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। आज विरोधी दल ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के अपने नेता भी यही मान रहे हैं कि हिमाचल में वीरभद्र सिंह जैसा नेता कोई नहीं हाे सकता। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी राजीव शुक्ला खुद भी यही मानते हैं। निसंदेह वीरभद्र सिंह का जाना हिमाचल कांग्रेस की राजनीति काे करारा झटका है। उनके बाद ऐसा कोई नेता नहीं दिख रहा जो सबको स्वीकार्य हो, यानी कांग्रेस राह बहुत कठिन होने वाली है। वीरभद्र सिंह के बगैर कांग्रेस स्थिति, पार्टी नेतृत्व, आगामी चार उपचुनाव, 2022 की तैयारी और पार्टी संगठन और हावी गुटबाजी जैसे कई अहम मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला से चर्चा की, पेश है उसके अंश... सवाल: वीरभद्र सिंह नहीं रहे, ताे ऐसे में उनके बाद प्रदेश कांग्रेस के पास क्या विकल्प है ? ऐसा कोई नेता आप मानते है जो पार्टी में दम भर सके, जो उनका स्थान ले सके ? जवाब: वीरभद्र सिंह के जाने से हिमाचल ही नहीं पूरे देश की राजनीति काे क्षति हुई है। हिमाचल में कोई दूसरा वीरभद्र सिंह नहीं हाे सकता है। पूर्व में वे हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में कई बार मंत्री रहे, लेकिन आज पूरे देश ने विकास पुरुष खो दिया। हालांकि कई नेता तैयार होते हैं, लेकिन वीरभद्र जैसे नेक, विकासशील नजरिये वाला, सबको साथ लेकर चलने वाला नेता हिमाचल में कोई हाे नहीं सकता। वीरभद्र सिंह के चले जाने से प्रदेश कांग्रेस में जो शून्य उपजा है उसे भरने में समय लग सकता हैं। हिमाचल में कई वरिष्ठ नेता हैं, अब उन्हें साथ मिलकर संगठन काे और मजबूत करने की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। मुझे अभी तक याद है कि वीरभद्र सिंह के फैसले काे पार्टी हाईकमान भी इनकार नहीं करता था। उन जैसा मजबूत और ताकतवर शायद कोई दूसरा न हो। राजनीति से लेकर अफसरशाही को काबू में रखने वाला ऐसा बेमिसाल नेता शायद ही कोई मिलेगा। फिलहाल उनके बगैर हमें संगठन काे और सशक्त करने के लिए एकजुट होकर काम करना पड़ेगा। सवाल: अब तक वीरभद्र सिंह खुद ही एक चेहरा थे, उनके बगैर प्रदेश कांग्रेस अगले चुनाव में भाजपा काे कैसे टक्कर देगी? जवाब: यह बात बिलकुल सही है कि प्रदेश कांग्रेस में अब तक वीरभद्र सिंह ही अकेले चेहरा थे, जिन्होंने अपने दम पर भी पार्टी काे सत्ता तक पहुंचाया। उनकी कमी प्रदेश की राजनीति में जरूर खलेगी, मगर हमें विरोधी राजनीतिक दलों काे पराजित करने एवं मुंह तोड़ जवाब देने के लिए वीरभद्र सिंह द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलना हाेगा। अगले साल चुनाव भी है और उससे पहले हिमाचल में चार उपचुनाव होने हैं। इसके लिए हमें दिन -रात मेहनत करनी हाेगी। वीरभद्र सिंह किस तरह से काम करते थे, उसी तर्ज पर सभी वरिष्ठ नेताओं काे काम करना पड़ेगा। सिर्फ भाजपा काे टक्कर देने की बात नहीं, बल्कि उसे पराजित करने के लिए कांग्रेस के पास पूरा तंत्र है। आज पूरा देश आहत है कि मोदी सरकार क्या कर रही है? सात साल से लाेगाें ने अच्छे दिन नहीं देखे। प्रदेश सरकार भी पूरी तरह विफल है। सवाल: कांग्रेस में पहले से ही गुटबाजी हावी रही है, ये कैसे शांत होगी ? जवाब: पूर्व में क्या रहा, क्या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मगर वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता एकजुट हैं और आगामी रणनीति के लिए हर राेज रूपरेखा तैयार की जाती है। कांग्रेस में गुटबाजी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश भाजपा में यह परंपरा चरम सीमा पर है। आज भाजपा के दूसरे गुट के नेता सीएम जयराम ठाकुर से खुश नहीं हैं। उनकी सरकार में कुछ मंत्री भी गुटबाजी का शिकार हाे चुके हैं। मैं साफ कहना चाहूंगा कि हिमाचल कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं हैं। हाईकमान के आदेशों का पालन हाे रहा है और सभी संगठन की मजबूती के लिए मेहनत कर रहे हैं। सवाल: हिमाचल में 4 उपचुनाव होने हैं, इस वक्त कांग्रेस कहां पर खड़ी है? जवाब: हिमाचल में होने वाले 4 उपचुनाव के लिए कांग्रेस पूरी तरह से तैयार हैं। पहले ताे तीन ही उपचुनाव तय थे, लेकिन दुर्भाग्य से वीरभद्र सिंह जी के निधन के बाद अब अर्की विधानसभा क्षेत्र में भी उपचुनाव होना है। मंडी संसदीय क्षेत्र समेत फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई और अर्की में जब भी उपचुनाव की तिथि घोषित होगी कांग्रेस अपने प्रत्याशियों काे मैदान में उतार देगी। 2019 के लाेकसभा चुनाव में हम किन कारणाें से हारे उन सभी खामियों काे ध्यान में रखते हुए मेहनत कर रहे हैं। कांग्रेस पूरी ताकत के साथ खड़ी है और मंडी संसदीय क्षेत्र के साथ तीनों विधानसभा उपचुनाव पर कांग्रेस की ही जीत तय है। काश वीरभद्र सिंह जी हाेते ताे संगठन में और जान आ जाती। सवाल: भाजपा ने मिशन रिपीट के लिए अभी से ही ताकत झोंक दी, कांग्रेस ने कोई रोडमैप तैयार किया है? जवाब: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा मिशन रिपीट का सपना ही देख रही है, जाे कभी साकार नहीं हाे सकता। इस वक्त भाजपा सत्ता में हैं ताे ताकत झोंकेंगी, लेकिन कांग्रेस कभी दिखावा नहीं करती है। हमने जमीनी स्तर पर रूपरेखा तैयार कर दी है। बीते दिनों धर्मशाला, कांगड़ा और ऊना में बैठक हुई जिसमें सभी पदाधिकारियों से फीडबैक लिया। जल्द ही मंडी संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में भी बैठक की जाएंगी। इसके साथ-साथ जुब्बल-कोटखाई, फतेहपुर और अर्की विधानसभा क्षेत्र के लिए सशक्त प्रत्याशियों की तलाश भी जारी है। उपचुनाव की घोषणा होते ही हम उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर देंगे। फतेहपुर और अर्की विधानसभा सीट कांग्रेस के पास ही थी। जबकि जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र और मंडी संसदीय क्षेत्र में हम और अधिक मेहनत करेंगे। जहां तक उपचुनाव के लिए टिकट का सवाल है, पार्टी हाईकमान ही इस पर फैसला करेगा। हिमाचल की जनता उपचुनाव में भाजपा को आईना दिखाएगी और 2022 के चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।
प्रदेश में होने वाले चार उप चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा में हाई वोल्टेज ड्रामा शुरु हाे चुका है। यह संगठन के लिए खतरे की घंटी है। बताया जा रहा है कि भाजपा महिला माेर्चा के भीतर ये खींचतान और अंतर्कलह पिछले साल से ही शुरु हाेने लगी थी, जाे अब खुलकर उजागर हो रही है। बहरहाल महिला माेर्चा की पदाधिकारियाें के बीच बहस और संगीन आरोपों का ऑडियो वायरल हुआ ताे खुन्नस की राजनीति भी सामने आ गई। हालांकि भाजपा में गुटबाजी बहुत कम सामने आती है, लेकिन महिला माेर्चा की पदाधिकारियाें की ऑडियो लीक होने के बाद अब गुटबाज़ी खुल कर सामने आ रही है। गौरतलब है की प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कभी पत्र बम ताे अब महिला मोर्चा का ऑडियो वायरल होने से संगठन काे भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। महिला मोर्चा की जिन दाे पदाधिकारियाें के बीच ऐसा सब कुछ हुआ उनमें से एक महामंत्री और एक साेशल मीडिया एवं आईटी सेल की प्रभारी थी। दोनों ही अपने समय में छात्र राजनीति का जाना माना नाम रही हैं। वहीँ ऑडियो सामने आने के बाद प्रदेश संगठन ने दाेनाें पदाधिकारियाें के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी प्राथमिक सदस्य्ता रद्द कर दी है, लेकिन मामला अभी शांत होगा, ऐसा लगता नहीं है। प्रदेश में हाेने वाले चार उपुचनावाें से पहले महिला माेर्चा में चल रही इस खींचतान से संगठन काे कहीं न कहीं नुकसान उठाना पड़ सकता है। निसंदेह इससे भाजपा की अनुशासित पार्टी की छवि धूमिल हुई है। संगठन में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी : कश्यप प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि संगठन में अनुशासनहीनता बिलकुल बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हाल में सोशल मीडिया में वायरल हुए भाजपा महिला मोर्चा के कथित ऑडिओ का कड़ा संज्ञान लेते हुए महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री शीतल व्यास तथा सोशल मीडिया एवं आईटी प्रभारी डॉ. अर्चना ठाकुर की प्राथमिक सदस्यता को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही दोनों पदाधिकारियों को संगठन के सभी दायित्वों से भी तुरंत प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासित राजनीतिक दल है और यहां पर किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कदमताल शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा लगाना चाहती है। इस संदर्भ में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अनुमति मांगी है। सीएम को लिखे पत्र में राठौर ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश के जन नायक हम सबके लोकप्रिय नेता वीरभद्र सिंह 8 जुलाई 2021 की सुबह अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर इस दुनिया को अलविदा कह गए। प्रदेश के नव निर्माण में उनके योगदान को कभी न तो भुलाया जा सकता है और न ही कम आंका जा सकता है। उनके अंतिम संस्कार में उमड़े जन सैलाब से साफ है कि वीरभद्र सिंह कितने लोकप्रिय व जन मानस के नेता थे। पीसीसी चीफ कुलदीप सिंह राठौर कहते हैं कि हमारे बीच से एक ऐसा लोकप्रिय नेता चला गया जो सबके दिलों में वास करता था। अब हमारे पास उनकी स्मृतियां शेष रह गई हैं। उन स्मृतियों को याद रखना हमारा नैतिक कर्तव्य ही नहीं है, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी भी है। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार आती है जाती हैं। किसी भी राजनीतिक दल के कुछ ही नेता लोगों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ पाते है ,जो लोगों के दिलो में बस जाती है। वीरभद्र सिंह उनमें से एक हैं जो लोगों के दिलों में बस गए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां प्रदेश के निर्माण में डॉ.यशवंत सिंह परमार के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, वहीं प्रदेश के नव निर्माण में राजा वीरभद्र सिंह को भी कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। पहाड़ी राज्यों के विकास में आज हिमाचल प्रदेश एक विशेष स्थान रखता है जिसका श्रेय वीरभद्र सिंह को ही जाता है। रिज पर स्मारक के लिए मांगा उपयुक्त स्थान पीसीसी चीफ कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की यह इच्छा है कि वीरभद्र सिंह की याद में शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में उनकी स्मृति में कोई स्मारक बने। अतः प्रदेश कांग्रेस उनकी एक प्रतिमा रिज मैदान में स्थापित करना चाहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि रिज मैदान पर कांग्रेस को कोई उपयुक्त स्थान उपलब्ध करवाया जाए, जिससे वह अपने जन नायक और आधुनिक हिमाचल के निर्माता स्व. वीरभद्र सिंह की प्रतिमा को स्थापित कर सकें। साथ ही सीएम यह भी आग्रह किया है कि सरकार किसी बड़े सरकारी संस्थान का नाम स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नाम पर रखे, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रिज मैदान पर अटल बिहारी वाजपेयी के अलावा इंदिरा गांधी व डा. वाईएस परमार की प्रतिमा भी लगी हुई है।
चुनाव के आगोश में, जीत की खातिर नेता न जाने क्या क्या वादें कर देते है। उस वक्त न तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति का ख्याल रखा जाता है और न ही संसाधनों का। बस जनता को लुभाने के लिए वादों की बरसात होती है, ऐसे वादे जो सत्ता में आने के बाद भुला दिए जाते है l ऐसा ही एक वादा पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अनुबंध कर्मचारियों से किया था। 2017 की एक चुनाव रैली में उन्होंने कहा था कि जैसे ही उनकी सरकार सत्ता में आएगी वे अनुबंध काल को 3 से घटा कर दो वर्ष कर देंगे। सत्ता में आने के बाद भाजपा तो ये वादा भूल गई पर हताश कर्मचारी अब भी इंतज़ार में है की आज नहीं तो कल सरकार अपना चुनावी वादा पूरा करेगी। कर्मचारियों से किया ये वादा भाजपा के 2017 के चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल था। सरकार को सत्ता में आए साढ़े तीन वर्ष का समय बीत चुका है, मुख्यमंत्री अपना चौथा बजट पेश कर चुके है पर आज तक अनुबंध काल को कम करने हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया। हिमाचल प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ पिछले तीन वर्षों से अनुबंध काल को दो वर्ष करने की मांग उठा रहा है, महासंघ लगातार संघर्ष काट रहा है, मगर हुआ कुछ नहीं। महासंघ के कर्मचारी कभी मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते है तो कभी बाकि मंत्रियों के दफ्तर के चक्कर काटते है, मगर सरकार की तरफ से बस कोरोना काल और आर्थिक संकट का हवाला देकर आश्वासन ही दिया जाता है। कर्मचारियों के इस मसले को लेकर फर्स्ट वर्डिक्ट ने बात की हिमाचल प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अरुण भारद्वाज से, पेश है बातचीत के कुछ अंश .... सवाल : अपने संगठन के बारे में थोड़ी जानकारी हमें दें और इस संघ से कितने कर्मचारी जुड़े है ये भी स्पष्ट करें ? जवाब : हमारा संगठन यानी हिमाचल प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ जैसा कि नाम से स्पष्ट है अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठित किया गया एक संगठन है। इस संगठन में किसी विशेष विभाग के कर्मचारी ही शामिल नहीं हैं बल्कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों में अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों का ये संगठन है और यह संघ अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से मान्यता प्राप्त है। इस समय प्रदेश में लगभग 19000 कर्मचारी अनुबंध आधार पर विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं तथा पूरी ईमानदारी व कर्तव्य निष्ठा से अपनी सेवाएं दूर दराज के इलाकों में दे रहे हैं। ये सभी कर्मचारी हमारे इस संगठन से जुड़े है। सवाल : आपके संघ की मुख्य मांग क्या है ? जवाब : देखिये हमारे संघ की मुख्य मांग है अनुबंध अवधि को 2 वर्ष करवाना। हमारा मानना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में अनुबंध प्रथा होनी ही नहीं चाहिए, क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां काफी अलग हैं। हमारे पड़ोसी राज्य पंजाब की अगर बात करें तो वहां पर इस तरह की अनुबंध प्रथा नहीं है। हिमाचल के कई जिलों में अति दुर्गम क्षेत्र भी हैं और वहां पर जो कर्मचारी अनुबंध आधार पर नियुक्त है उनके लिए अपने वेतन से तो अपने परिवार का भरण पोषण करना भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए अनुबंध प्रथा बंद होनी चाहिए लेकिन यदि कोरोना महामारी के चलते सरकार अनुबंध प्रथा को फिलहाल समाप्त नहीं कर सकती तो कम से कम अपने वादे के अनुसार अनुबंध अवधि को घटा कर 2 वर्ष तो करे। सवाल : कॉन्ट्रैक्ट पीरियड पहले 8 साल हुआ करता था अब ये घटकर तीन साल हो गया है। पहले के मुकाबले सहूलियत बेहतर है तो अब कॉन्ट्रैक्ट पीरियड दो साल करने की मांग क्यों ? जवाब : जी बिलकुल, पहले अनुबंध 8 साल का होता था फिर कांग्रेस सरकार के समय में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.राजा वीरभद्र सिंह ने इसे घटा कर 3 वर्ष तक कर दिया था। सहूलियतों के साथ-साथ महंगाई भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और जो कर्मचारी अपने घरों से 300 से 500 किलोमीटर दूर अति दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं उन्हें अपने अनुबंध वेतन से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है। यदि ऐसा कोई कर्मचारी जो अपने घर से 500 किलोमीटर दूर कार्यरत है और महीने 2 महीने में भी यदि घर आता है तो आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि उसका आने जाने का बस किराया ही लगभग 2500 रुपए बन जाता है। और मान लीजिये यदि किसी कर्मचारी को लॉक डाउन जैसी परिस्थिति में किसी आपात स्थिति में प्राइवेट वाहन से घर आना पड़ा तो एक माह का वेतन तो किराए में ही चला जायेगा। इस स्थिति में परिवार के अन्य खर्चे कैसे चलेंगे। दिन रात सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का ये शोषण नहीं तो और क्या है। सवाल : क्या सरकार आपकी सुनती है ? अब तक आपके संघर्ष को कितनी कामयाबी मिली ? जवाब : बात ये नहीं है कि सरकार हमारी सुनती है या नहीं। क्योंकि अगर नही सुनते तो मुख्यमंत्री हमें हर बार आश्वस्त नहीं करते। बजट सत्र से पहले हमारी राज्य कार्यकारिणी मुख्यमंत्री से उनके आवास ओक ओवर में मिली थी और उन्होंने उस वक्त साफ शब्दों में कहा था कि हमारी सरकार ने आपके लिए कुछ खास सोचा है और हम जल्द ही आपकी इस मांग को एक खास मौके पर पूरा करने वाले हैं। इसीलिए समस्त अनुबंध कर्मचारी देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर अनुबंध अवधि 2 वर्ष होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सवाल : बीते विधानसभा सत्र के दौरान आपने सरकार पर ये आरोप लगाए थे कि इस सरकार को ये तक नहीं मालूम की हिमाचल में कितने अनुबंध कर्मचारी है। क्या अब ये गिनती पूरी हो पाई है ? जवाब : जी सरकार ने खुद यही जवाब दिया था कि वास्तविक आंकड़े उपलब्ध नहीं है और आगामी सत्र में इसकी पूरी जानकारी दी जाएगी तो आशा करते हैं कि आने वाले मानसून सत्र में स्थिति स्पष्ट हो जायेगी। सवाल: आपका संगठन 15 अगस्त तक मांगें पूरी करने के लिए आवाज़ उठा रहा है, यदि आपकी मांगें पूरी नहीं होती है तो संगठन की आगामी रणनीति क्या होगी ? जवाब : जी, क्योंकि मुख्यमंत्री ने बजट सत्र से पहले वादा किया था कि सितंबर से पहले पहले आपकी मांग को पूरा कर दिया जायेगा। अब देखना है कि भाजपा सरकार अपना वादा निभाती है या फिर अपने वादों को सिर्फ चुनावी स्टंट ही बनाना चाहती है। क्योंकि यदि घोषणा मार्च 2022 में की जाती है तो किसी को भी इसका फायदा नहीं होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि वर्तमान सरकार के सत्तासीन होने के बाद जनवरी 2018 से सितंबर 2018 तक जो भी नियुक्तियां हुई हैं उनका अनुबंध कार्यकाल गत मार्च 2021 में और आने वाले सितंबर 2021 में पूरा होने वाला है। वर्ष 2019 में नियुक्त होने वालों के भी 2 साल से अधिक हो चुके हैं और कोविड के चलते वर्ष 2020 में भर्तियां नही हो पाई हैं। इस प्रकार यदि इस मांग को अभी पूरा नहीं किया गया तो कर्मचारियों में सरकार के प्रति एक नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा हो सकता है जिस से न तो सरकार को कोई फायदा होगा और न ही कर्मचारियों को और यदि सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो तो ये मांग आंदोलन का रूप ले लेगी। मैं सरकार से ये ही कहूंगा कि सब्र अब टूटने लगा है, ख्याल रहे देर न हो जाएं। सवाल : हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी नेताओं को लेकर ये धारणा बनी हुई है कि कर्मचारी नेता कर्मचारियों की मांग उठाने से ज्यादा अपनी राजनीति चमकाने में विश्वास रखते है, क्या आपके इरादे भी कुछ ऐसे ही है ? क्या आप आने वाले समय में किसी राजनैतिक दल में शामिल होंगे ? जवाब : हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी नेताओं को लेकर सबकी अपनी अपनी सोच और धारणा हो सकती है लेकिन मेरे लिए सिर्फ कर्मचारियों की मांग सर्वोपरि है। इस संगठन की कमान संभालने से पहले ही मैंने कर्मचारियों के इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया था और इसमें हमारे साथ जुड़े हमारी राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों और सभी जिला कार्यकारिणी के सदस्यों ने मेरा पूरा सहयोग किया। इसके लिए मैं आपके माध्यम से सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं और आशा करता हूं कि सभी साथियों का सहयोग आगे भी मिलता रहेगा। बाकी रही बात राजनीति चमकाने की तो आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है और न ही मैं सक्रिय राजनीति में आना चाहता हूं। सवाल : आप इस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष है मगर बीते कुछ समय से आपके और आपके संगठन के बीच तालमेल नज़र नहीं आ रहा इसके पीछे क्या कारण है ? क्या आपका संगठन आपके नेतृत्व से संतुष्ट नहीं ? जवाब : जी ऐसी कोई बात नहीं है, सभी साथी एकजुट हैं और सभी की एक ही मांग है और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारी यूनियन तो एक अल्पकालिक यूनियन है। आज मैं हूं कल कोई और होगा । जैसा कि आप जानते हैं कि मेरी नियुक्ति भी मेरे घर से लगभग 350 किलोमीटर दूर अति दुर्गम क्षेत्र में है और यहां पर नेटवर्क और बिजली की भी समस्या रहती है इसलिए कई बार साथियों से संपर्क नहीं हो पाता लेकिन इसका मतलब ये नही की तालमेल नहीं है। हमारी टीम एक है और हमेशा एक रहेगी। बाकी रही बात कर्मचारियों की , तो इस मांग के लिए मैंने और मेरी पूरी राज्य टीम तथा जिला टीमों ने ऐसा कोई मंच नहीं छोड़ा जिस के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक नहीं पहुंचाई। मुख्यमंत्री को ही लगभग 50 से ज्यादा ज्ञापन विभिन्न जिला टीमों द्वारा भेजे गए है। अभी हाल ही में जिला शिमला के जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में हमने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है। इसके साथ ही विभिन्न मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को भी ज्ञापन देकर इस मांग को पूरे जोरों शोर से उठाया है।
रुझान आने शुरू हो गए है। मुख्यमंत्री पद पर जिला कांगड़ा का दावा आ चुका है। बाकी भी पूरी तैयारी में दिख रहे है। वीरभद्र सिंह का निधन प्रदेश कांग्रेस के लिए बड़ी आपदा है, और राजनीति में आपदा में अवसर तलाशना कोई नई बात नहीं है। ये अलग बात है कि सिर्फ तलाशने से कुछ नहीं मिलता। ये अलग बात है कि मुख्यमंत्री बनने के लिए पहले पार्टी को सत्ता में लाना होगा। पर फिलवक्त, तो डर यही है कि नेताओं की निजी महत्वकांक्षाएं कहीं इतनी हावी न हो जाएं कि न खुदा मिले, न विसाल-ए-सनम। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बेशक बीते दो-तीन साल से अधिक सक्रिय नहीं थे फिर भी पार्टी का चेहरा वीरभद्र सिंह ही रहे। उनके रहते कई नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा दबी सी रही, कोई सियासी शूरवीर ऐसा नहीं दिखा जो उनके वर्चस्व के आगे ठहर पाया हो। यानी बेशुमार गुटबाजी के बावजूद वीरभद्र सिंह पार्टी के सर्वमान्य नेता बने रहे। पर अब पुराने निष्ठावानों का महत्वाकांक्षी होना तो जायज है, पर कई दूसरी -तीसरी पंक्ति के नेता भी सीएम बनने का ख्वाब संजोये बैठे है। वीरभद्र सिंह के निधन से उपजे शून्य में ये गुटबाजी पार्टी की नैया डुबाने के लिए काफी है। अगर समय रहते आलाकमान ने पार्टी की दशा सुधारने हेतु उचित दिशा तय नहीं की तो 2022 में डगर बेहद मुश्किल होने वाली है। दरअसल, कांग्रेस में ऐसे कई चेहरे है जो सीएम बनने के इच्छुक माने जाते है या जिनके समर्थक अभी से उन्हें बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करना शुरू कर चुके है। 2017 से ही इनमें से कुछ के सितारे अच्छे चल रहे है तो कुछ हाशिए पर है, पर वीरभद्र सिंह के निधन के उपरांत सारा गुणा भाग बदल गया है। वीरभद्र के बाद कौन, फिलवक्त ये ही यक्ष प्रश्न है। संगठन मेक ओवर नहीं हुआ तो सत्ता का टेक ओवर मुश्किल : बीते कुछ वक्त में कांग्रेस का जनाधार तेजी से घटा है। इस पर गुटबाजी और अंतर्कलह ने पार्टी की परेशानी में और इजाफा किया है। इसका सबसे बड़ा कारण है लचर और प्रभावहीन नेतृत्व। प्रदेश नेतृत्व से लेकर जिला और ब्लॉक तक नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे है। ऐसे में समय रहते संगठन का मेक ओवर नहीं होता है तो 2022 में सत्ता का टेक ओवर मुश्किल होगा। वैसे जानकार मानते है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को अब तक वीरभद्र सिंह की गुड बुक्स में होने का लाभ मिलता रहा, पर अब उन्हें बदले जाने को लेकर सुर तेज हो सकते है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से सीएम की कुर्सी तक का सफर आसान हो सकता है, ऐसे में माना जा रहा है कि कई चाहवानों की नजर राठौर की कुर्सी पर टिकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के चाहवान उन्हें फिर से प्रदेश संगठन की कमान दिए जाने की मांग करने लगे है। वीरभद्र सिंह उन्हें ख़ास पसंद नहीं करते थे और ये ही सुक्खू के अपदस्थ होने का मुख्य कारण भी था। पर अब बदले समीकरण में सुक्खू का दावा कमतर नहीं होगा। पहला दावा कांगड़ा का, पर बाली या सुधीर ! सीएम पद के लिए खुलकर पहला दावा जिला कांगड़ा का आया है। या यूं कहे कि जिले के नाम पर ही सही पर पूर्व मंत्री जीएस बाली ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा ठोक दिया है। बीते दिनों बाली ने कहा कि जिला कांगड़ा का मुख्यमंत्री की सीट पर पूरा अधिकार है। सूबे की सियासत की गाड़ी यहीं से निकलती है, तभी वह शिमला पहुंचती है। बाली की बात ठीक भी है, इतिहास तस्दीक करता है कि हिमाचल प्रदेश में सत्ता सुख उसी राजनैतिक दल का नसीब होता हैं जिसपर जिला कांगड़ा की कृपा बरसती हैं। जो कांगड़ा फ़तेह नहीं कर पाता उसे सत्ता विरह ही मिलता है। वर्ष 1985 से ऐसा ही ट्रेंड है। 1985, 1993, 2003 और 2012 में कांग्रेस पर कांगड़ा का वोट रुपी प्यार बरसा तो सत्ता भी कांग्रेस को ही मिली। वहीं 1990, 1998, 2007 और 2017 में कांगड़ा में भाजपा इक्कीस रही और प्रदेश की सत्ता भी भाजपा को ही मिली। असल सवाल तो ये है कि अगर कांगड़ा को सीएम पद मिल भी जाता है तो क्या बाली ही सर्वमान्य चेहरा है ? दरअसल कांगड़ा में एक और कांग्रेसी पंडित भी है जो फिलवक्त अपनी सियासी जमीन समतल करने की जद्दोजहद में लगे है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाने वाले सुधीर शर्मा पिछली सरकार में नंबर दो माने जाते थे और सीएम फेस के लिए उनका दावा भी बाली से कम नहीं होने वाला। ये भी जगजाहिर है कि कांगड़ा के ये दोनों दिग्गज एक दूसरे की जमीन खोदते आ रहे है। इसी खींचतान का नतीजा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में ये दोनों ही धराशाई हो गए थे। अब इन दोनों में से कोई भी एक दूसरे के नाम पर सहमत होगा, ऐसा नहीं लगता। और इन दोनों के बिना कांगड़ा फ़तेह हो सकता है, ऐसा भी नहीं लगता। बाकी राजनीति में कुछ भी मुमकिन है, दूरियां कब नजदीकियों में बदल जाए मालूम नहीं। मंडी भी कम नहीं, कौल सिंह का दावा तय ! जिला कांगड़ा के बाद सबसे ज्यादा सियासी वजन जिला मंडी का है जिसमें 10 विधानसभा सीटें आती है। यहां का सियासी मिजाज भी जिला कांगड़ा जैसा ही है, जिस भी राजनैतिक दल ने मंडी जीता वही सत्ता पर काबिज हुआ। मंडी में अगर कांग्रेस की बात करें तो कौल सिंह ठाकुर इस वक्त सबसे बड़ा चेहरा है। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले भी वे सीएम पद के दावेदार थे, हालांकि तब उनके अरमान अधूरे रहे। फिर 2017 में वे खुद भी चुनाव हारे और उनकी बेटी चंपा ठाकुर भी, जो कौल सिंह ठाकुर के लिए बड़ा झटका था। पर बीते कुछ समय से कौल सिंह ठाकुर की सक्रियता बढ़ी है और उनके समर्थक वीरभद्र सिंह के जीवित रहते भी उन्हें बतौर सीएम प्रोजेक्ट करते रहे है। अलबत्ता वे 2017 में हार गए थे लेकिन उनकी जमीनी पकड़ पर कोई संशय नहीं है। जानकार मानते है कि सीएम पद के लिए कौल सिंह ठाकुर का दावा भी तय है। कौल सिंह ठाकुर बीते वर्ष लंच डिप्लोमेसी को लेकर भी चर्चा में रहे थे। तब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू के साथ उनके सहभोज ने नए समीकरणों को हवा दी थी। अब माहिर मानते है कि सत्ता शीर्ष पर पहुंचने के लिए कौल सिंह ठाकुर व कुछ अन्य नेता एक साथ आ सकते है। माना जा रहा है कि आगामी कुछ वक्त में कांग्रेस में कई आंतरिक गठबंधन बनते बिगड़ते दिखेंगे। संगठन की कमान मिली तो आसान हो सकती है राह ! 2017 में सत्ता गंवाने के बाद मुकेश अग्निहोत्री नेता प्रतिपक्ष बने। वास्तव में तब कौल सिंह ठाकुर, जीएस बाली, सुधीर शर्मा सहित कई नेता जीतकर सदन में ही नहीं पहुंचे थे, सो अग्निहोत्री की नेता प्रतिपक्ष बनने की राह ज्यादा कठिन नहीं थी। इस पर उन्हें वीरभद्र सिंह की कृपा भी प्राप्त रही। समर्थक लगातार उन्हें भावी सीएम प्रोजेक्ट करते आ रहे है और अग्निहोत्री एक मंझे हुए नेता की तरह नाप तोल कर सियासत कर रहे है। पर अग्निहोत्री की स्वीकार्यता अब तक पूरे प्रदेश में नहीं दिखी है। उनकी राजनीति शिमला और ऊना तक ही सीमित रही है, बाकी जिलों में न तो उनके निष्ठावानों की ब्रिगेड दिखती है और न ही उनकी खास दखल। अब वीरभद्र सिंह के निधन के बाद अग्निहोत्री की डगर भी मुश्किल होगी। माना जाता है कि मुकेश अग्निहोत्री भी उन नेताओं में है जो संगठन की कमान अपने हाथ में चाहते है। निसंदेह यदि ऐसा करने में अग्निहोत्री सफल हुए तो समीकरण उनके पक्ष में बनने लगेंगे, पर फिलवक्त तो उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। आशावान है आशा के समर्थक : आशा कुमारी भी उन नेताओं में से है जिन्हें सत्ता वापसी की स्थिति में सीएम पद का दावेदार माना जाता है। समर्थक अभी से उन्हें प्रदेश की भावी सीएम और प्रदेश की होने वाली पहली महिला मुख्यमंत्री करार देने लगे है। आशा कुमारी निसंदेह तेजतर्रार भी है और अच्छी वक्ता भी। सदन में भी सक्रिय दिखती है और जब शिमला में होती है तो सरकार को घेरने में भी पीछे नहीं रहती। इस पर गांधी परिवार से उनकी नजदीकी भी उनका दावा जरूर मजबूत करेगी। पर अतीत के कई विवाद आशा कुमारी का पीछा आसानी से नहीं छोड़ेगे। इस पर पार्टी में व्याप्त अंतर्कलह भी उनके रास्ते में आएगी। उनकी स्तिथि भी मुकेश अग्निहोत्री जैसी है, शिमला और अपने जिले में तो ठीक है पर पूरे प्रदेश में उन्हें अपनी स्वीकार्यता सिद्ध करनी होगी। गुटबाजी से दूर, डार्क हॉर्स है कर्नल शांडिल कर्नल धनीराम शांडिल; दो बार सांसद, दो बार विधायक, पूर्व मंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के पूर्व सदस्य रहे है । शांडिल गांधी परिवार के करीबी है और बेदाग़ छवि उनका दावा और मजबूत करती है। विपक्ष में रहते हुए जब भाजपा कांग्रेस के मंत्रियों के खिलाफ चार्जशीट लाई थी तो उसमें भी कर्नल शांडिल का नाम नहीं था। यानी कह सकते है कि भाजपा भी उन्हें ईमानदार मानती रही है। पर कर्नल शांडिल का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ये है कि वे किसी गुट में नहीं है। गुटबाजी से ये दूरी उन्हें सीएम की रेस में डार्क हॉर्स साबित कर सकती है। हालांकि राजनीति के लिहाज से शांडिल बहुत बेहतर वक्ता नहीं है और न ही उनकी पकड़ सोलन के बाहर दिखती है, पर विरोधी भी अक्सर कर्नल धनीराम को किस्मत का धनी कहते है।
हिमाचल प्रदेश में आज भी मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में 25 जुलाई तक मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने अगले तीन घंटों के दौरान प्रदेश के कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, चंबा और मंडी में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। जबकि इस दौरान शिमला, कुल्लू, सोलन और सिरमौर में हल्की बारिश की संभावना है। खराब मौसम के चलते हुई तबाही के कारण हाईवे पर वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित है। वहीं, चंबा-तीसा मार्ग भारी बारिश के बाद भूस्खलन से नकरोड बाजार के पास बंद हो गया। सूचना मिलने के बाद विभागीय मशीनरी मौके के लिए रवाना हुई। उधर, चंबा में भरमौर-पठानकोट नेशनल हाईवे गैहरा के पास भूस्खलन से बाधित हो गया है। सैलानियों और स्थानीय लोगों से नदी-नालों से दूर रहने की अपील की गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि जहां भी सड़क अवरुद्ध होती है, उसे रिस्टोर किया जाए। उन्होंने पर्यटकों से आग्रह किया है कि वे नदी, नालों और पानी वाली जगहों पर न जाएं। भारी बारिश से नदी-नाले ऊफान पर हैं। ऐसे में इनके नजदीक जाना खतरनाक साबित हो सकता है। इसको देखते हुए प्रशासन ने एहतियात बरतने की सलाह दी है।
यह सर्व विधित है की हिमाचल व उत्तराखंड को देव भूमि कहा और माना जाता है । इस घोर कलयुग में भी देव भूमि मे आए दिन देव शक्तियां अपने होने का प्रमाण दिखाया करती है । ऐसा ही एक प्रमाण गांव कलोटी रोहडू हिमाचल प्रदेश मे देखने को मिला है जहां खुदाई के दौरान साड़े 4 फीट का एक शिवलिंग व शिव परिवार की मूर्तियां जमीन से प्रकट हुई है । जिस स्थान पर यह मूर्तियां मिली है उस स्थान का नाम देवरा है। जिस का अर्थ होता है देवी देवताओं के बैठने का चिन्हित स्थान । यूं तो इस गांव मे यह थान पहले से ही पूजित था व इस शिवलिंग का थोड़ा सा हिस्सा कई वर्षो से दिखाई पड़ता था लेकिन यह भेत नही था की यह दिखने वाला पत्थर एक विशालकाय शिवलिंग है बल्कि इसे स्थानीय लोग भीम की गदा समझा करते थे । मान्यता अनुसार यह माना जाता था की इस स्थान पर पुराना कोई मंदिर भी हुआ करता था । ऐसा कहा जाता था की इस स्थान पर धान की खेती हुआ करती थी तब यहां पर लोग जब रात के समय रहते थे, बारिश के समय पनाह लेते थे या राह चलते आराम करते थे तो यहां पर शक्तियां अपने यहां होने का प्रमाण निरंतर दिया करती थी व गांव के लोगो को निरंतर स्वप्न मे यह दिखता रहता था की इस स्थान पर कई शक्तियों का वास है । समय के साथ गांव के लोगो ने इस जगह का पुनर्निर्माण करने की सोची तो गुडारू महारान गांव गवास को इस संदर्भ में पूछा गया तो महाराज ने तुरंत इस स्थान पर खुदाई के आदेश दिए जिस के बाद यहां से शिव परिवार प्रकट हुआ जिस से की पूरे क्षेत्र में एक खुशी की लहर दौड़ गई । इस खुदाई के दौरान 1. साड़े 4 फीट का एक शिवलिंग 2. शिव की एक पत्थर पर गढ़ित प्राचीन मूर्ति 3. शिवलिंग के विराजित होने की शक्ति की पिंडी 4. भगवान गणेश की पत्थर पर बनी मूर्ति 5. कार्तिकेय महाराज की पिंडी मिली यह भी बताते चले की यह क्षेत्र श्री गुडारू महाराज गवास के अधीन आता है व महाराज के आदेश अनुसार ही आज दिनाक 19 जुलाई 2021 को इस शिवलिंग को पुनः स्थापित किया गया है जिस के बाद पूरे क्षेत्र में भारी वर्षा शुरू हो चुकी है जिस से ऊपरी हिमाचल प्रदेश में पड़ा हुआ सूखा खत्म हुआ है ।
जिला दण्डाधिकारी एवं उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने सोमवार को बताया कि कोविड महामारी की सुरक्षा के दृष्टिगत माल रोड एवं रिज मैदान के बैंचों पर आम जनता एवं पर्यटकों के बैठने पर पाबंदी लगाई गई है। उन्होंने बताया कि यह आदेश वरिष्ठ नागरिकों एवं बीमार लोगों पर लागू नहीं होंगे तथा यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदित्य नेगी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक शिमला इन आदेशों की अनुपालना करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इन आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि ये आदेश सुरक्षा के दृष्टिगत लागू किए गए हैं, क्योंकि पर्यटकों द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा था तथा कोविड महामारी की रोकथाम के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाए हैं। जिला दण्डाधिकारी ने लोगों से सहयोग की अपील की है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों के घरों में पीने के पानी के लिए जल कनैक्शन की सुविधा प्रदान कर जल जीवन मिशन के अंतर्गत राहत पहुंचाई जा रही है। जलशक्ति मंडल रामपुर के तहत पानी की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन में 29 हजार 346 कनैक्शन अप्रैल, 2021 तक प्रदान किए जा चुके हैं। मिशन के तहत शेष बचे 6938 नलों में से इस वर्ष 4432 कनैक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक घर को नल में जल देने की 85 परियोजनाएं स्वीकृत हुई थी, जिनमें से 64 परियोजनाओं का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जिसके अनुमानित लागत 31 करोड़ रुपये है। अन्य क्षेत्रों के तहत 4 योजनाएं अनुसूचित जाति, जनजाति घटक के तहत मंडल में चल रही है, जिनकी लागत 7 करोड़ रुपये है। इस योजना में इस वर्ष एक करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। नाबार्ड के तहत स्वीकृत 8 योजनाओं पर लगभग 32 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित योजनाओं के लिए इस वर्ष 5 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया गया है। 6 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत की 5 सिंचाई योजनाएं भी स्वीकृत हुई है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 3 योजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 2 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं तथा एक का कार्य गति पर है। इन योजनाओं पर 4 करोड़ 90 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा पोषित 7 योजनाएं क्रियान्वित हैं, जिनकी अनुमानित लागत 2 करोड़ 24 लाख रुपये है। शहरी क्षेत्र की एक योजना पूर्ण हो चुकी है जिस पर 19 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। नगर परिषद रामपुर के तहत वार्ड नंबर 8 और 9 ढकोलर और खनेरी के लिए 17 करोड़ रुपए की सीवरेज योजना का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 8 प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं, जिनकी अनुमानित लागत 77 करोड़ रुपए है।
वनों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने और पौधरोपण में उनकी सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रदेश में हर वर्ष वन महोत्सव आयोजित किया जाता है। इस वर्ष राज्य स्तरीय वन महोत्सव 20 जुलाई, 2021 को कुल्लू जिला के निरमंड में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर करेंगे। वन विभाग के एक प्रवक्ता ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान प्रदेश में 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जाएंगे। विभाग द्वारा नगर परिषदों और पंचायतों के प्रत्येक सदस्य को स्थानीय लोगों की सहायता से पौधरोपण के लिए 51 पौधे प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 20 एवं 21 जुलाई को दो दिवसीय बृहद पौधरोपण अभियान आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों और संस्थाओं द्वारा 10 लाख पौधे रोपित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य रेड क्राॅस सोसाइटी द्वारा स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से एक लाख पौधे भी रोपित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व के स्वर्ण जंयती वर्ष के अवसर पर वन विभाग द्वारा प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्वर्णिम वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य के विभिन्न भागों में 34 स्वर्णिम वाटिकाएं तैयार की जा चुकी हैं। इस वर्ष 3500 हेक्टेयर क्षेत्र को लैंटाना से मुक्त कर वहां पौधरोपण की योजना भी तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2018 से वन महोत्सव के दौरान वन विभाग द्वारा चिन्हित स्थानों पर स्थानीय समुदायों के सहयोग से विशेष पौधरोपण अभियान आयोजित किए जा रहे हैं। वर्ष 2018 में तीन दिनों तक आयोजित अभियान के दौरान प्रदेश में लगभग 600 स्थानों पर सरकारी विभागों, स्थानीय समुदायों, आम लोगों, महिला मंडलों, पंचायती राज संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों और स्कूलों के विद्यार्थियों की मदद से लगभग 26 लाख 50 हजार पौधे रोपित किए गए। वर्ष 2019 में वन महोत्सव के दौरान आयोजित 5 दिवसीय अभियान के दौरान 1 लाख 35 हजार लोगों की सहभागिता से 31 लाख 60 हजार पौधे रोपित किए गए। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यावरण संरक्षण में वनों का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान है। राज्य के 37,948 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को वन क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें से 4.96 प्रतिशत आरक्षित वन क्षेत्र, 33.87 प्रतिशत सीमांकित वन, 42.25 प्रतिशत गैर सीमांकित संरक्षित वन और 18.87 प्रतिशत अन्य वन हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में 27.72 प्रतिशत हरित आवरण है। वन विभाग ने वर्ष 2030 तक हरित आवरण को 30 प्रतिशत और बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग द्वारा अनेक पहल की गई हैं। पौधरोपण बढ़ाने और वनों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय समुदायों के सहयोग से एक बूटा बेटी के नाम, वन समृद्धि जन समृद्धि योजना, सामुदायिक वन संवर्धन योजना, विद्यार्थी वन मित्र योजना सहित अनेक महत्त्वकांक्षी कार्यक्रम आरम्भ किए गए हैं।
प्रदेश में हाेने वाले चार उपचुनावाें के लिए भाजपा ने पहले ही तैयारियां शुरु कर दी है। इसी तर्ज पर अब संगठन का फाेकस अर्की विधानसभा क्षेत्र हाेगा। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह विधायक रहे। अब उनके निधन से यहां भी उपचुनाव हाेना हैं। इसके मद्देनजर भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना कल यानी 20 जुलाई को अर्की मंडल की होने जा रही मंडल की बैठक के समापन सत्र को दोपहर 2 बजे संबोधित करने जा रहे हैं। यह बैठक अर्की स्थित गाै सदन में होगी। भाजपा प्रभारी कल चंडीगढ़ से 11 बजे अर्की के लिए आगमन करेंगे और बैठक को संबोधित करने के बाद वापस चंडीगढ़ जाएंगे।
पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीएस बाली की सियासती चाल अब दिल्ली पहुंच गई है। वे पिछले दाे दिनों से पार्टी के केंद्रीय नेताओं से मिशन 2022 के लिए मंथन कर रहे हैं। सूत्राें से मिली जानकारी के मुताबिक जीएस बाली अभी कुछ दिन दिल्ली में ही डटे रहेंगे। गाैरतलब है की बीते दिनों जीएस बाली ने मीडिया में सीएम पद पर जिला कांगड़ा का जिक्र किया था और वे कुछ दिन बाद दिल्ली दाैरे पर निकल गए। हालांकि अगले साल चुनाव हाेने के लिए अभी समय हैं, लेकिन उससे पहले तीन विधानसभा सीटाें और मंडी संसदीय सीट पर उपचुनाव भी हाेना है। जिला कांगड़ा का फतेहपुर, शिमला का जुब्बल-काेटखाई और साेलन जिले का अर्की विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हाेना है। साथ ही 17 विधानसभा सीटाें वाला मंडी संसदीय क्षेत्र भी है।
हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की राज्य स्तरीय वर्चुअल बैठक रविवार को महासंघ के प्रान्तीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर कि अध्यक्षता में सम्पन हुई बैठक का संचालन महासंघ के प्रान्त महासचिव गोपाल झिलटा ने की। जिसमे प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रान्त अध्यक्ष एन आर ठाकुर कि 31जुलाई को हो रही सेवनिवृत्ति पर पूर्व प्रदेश महासंघ द्वारा सम्मानित करने का निर्णय लिया गया कोरोना नियमो का पालन करते हुए 25 जुलाई को ठीक 10 बजे बिलासपुर में प्रदेश अध्यक्ष एन आर ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय फेडरल हाउस होगा जिसमें महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एन आर ठाकुर का प्रदेश महासंघ की ओर से कोविड नियमो का पालन कर सादगी से पर गरिमा पूर्ण सेवनिवृती सम्मान समारोह होगा, नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन व राज्य कार्यकारणी का विस्तार, सरकार के साथ सयुंक्त सलाहकार समिति की अब तक बैठक न होने पर सरकार के प्रति महासंघ की आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। जिसमे प्रदेश कार्यकारणी पदाधिकारी सहित हर जिला से अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष महासचिव सहित प्रदेश स्तरीय विभागीय इकाइयों के अध्यक्ष महासचिव व प्रबुद्ध कर्मचारी नेता भाग लेंगे। आज की बैठक में प्रान्त वरिष्ठ उपाध्यक्ष व जिला बिलासपुर अध्यक्ष इंदर सिंह ठाकुर, प्रान्त महासचिव व जिला शिमला अध्यक्ष गोपाल झिलटा, प्रान्त उपाध्यक्ष व जिला अध्यक्ष हमीरपुर अरविंद मोदगिल, प्रान्त उपाध्यक्ष व जिला किन्नौर अध्यक्ष जगत सिंह नेगी, प्रान्त सचिव व जिला सोलन अध्यक्ष जे के ठाकुर, जिला कुल्लू अध्यक्ष आशु गोयल, जिला चम्बा अध्यक्ष रमेश राणा, जिला मंडी अध्यक्ष तेज राम, जिला कांगड़ा महासचिव अजमेर ठाकुर, मिलाप शर्मा, तिलक राज सूरज नेगी देश राज, पवन आदि के अलावा अन्य जिलों के प्रतिनिधियों ने बैठक मे भाग लिया।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर तंज कसते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा है कि वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी दो कदम आगे निकल चुके हैं। पार्टी ने कहा है जहाँ योगी आदित्यनाथ सड़को और स्टेशनों का नाम बदल देते हैं वही जयराम ठाकुर ने तो बदहाली का नाम बदल कर विकास रख दिया है। आम आदमी पार्टी ने सरकार के उस बयान पर निशाना साधा है जहां ये कहा गया है कि विपक्ष सूबे के विकास को अनदेखा कर अपनी राजनीति कर रहा है। आप ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि विपक्ष विकास को अनदेखा नहीं कर रहा है बल्कि जयराम ठाकुर सरकार अपनी नाकामयाबी को अनदेखा कर रही है। पार्टी ने अपने बयान जारी करते हुए कहाँ की हम सरकार का ध्यान उनकी कुछ ऐसी ही नाकामियों की तरफ खींचना चाहते है। बेरोजगारी पर बात करते हुए पार्टी ने कहा कि प्रदेश में लगभग हर 5 में से एक युवा बेरोजगार है। प्रदेश बेरोजगारी दर के लिहाज से टॉप तीन की गिनती में आता है। बेरोजगारी के दर्द का सबसे बड़ा उदाहरण है की साल 2019 में पटवारियों के 1195 पदों की भर्ती के लिए तीन लाख युवाओं ने आवेदन किया था जिनमे से कई बीटेक (Btech), एमफिल (MPhil), और पीएचडी (Phd) डिग्री होल्डर थे। महंगाई पर सरकार को घेरते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने के बाद दो बार बसों के किराए में वृद्धि की है। जो न्यूनतम किराया ₹3 होता था वह आज ₹7 का है। साथ ही 125 यूनिट से ज्यादा का उपयोग करने वालो घरों की बिजली सब्सिडी खत्म करके 400000 उपभोक्ताओं झटका दिया है। पार्टी ने आगे कहा कि कोरोना से लड़ाई के मोर्चे पर जयराम ठाकुर सरकार पूरी तरह से विफल रही है। स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को तरजीह नही दी जा रही है। शिमला मनाली की भीड से पटी सड़कें इस बात की गवाही देती है। आम हिमाचल निवासी आज डरा हुआ है कि न जाने ये भीड़ कौन सा खतरा उसके दरवाजे तक ले आये। एक लंबे इंतजार के बाद आज से 18 वर्ष की आयु से ऊपर वाले युवाओं को वैक्सीन देने का काम शुरू किया जा रहा है। पार्टी ने आगे कहा जब पूरा देश कोरोना वायरस से जूझ रहा था तब बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले में शामिल पाए गए, इससे ज्यादा असंवेदनशील और क्या हो सकता है। पार्टी ने आगे कहा कि आर्थिक मोर्चे पर भी आंकड़े डराने वाले है। इकनोमिक सर्वे 2021 के मुताबिक प्रदेश की विकास दर माइनस 6.2 होगी पर इस चुनौती से लड़ने का कोई रोडमैप सरकार ने आज तक नही दिया है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे पर आम आदमी पार्टी ने निशाना साधते हुए कहा है की हाल के दिनों में भाजपा ने अपनी नाकामियों का ठीकरा अपने ही मुख्यमंत्रियों पर ही फोड़ा है। उत्तराखंड में लोगो के हालात बीते साढ़े चार साल से बदले न बदले लेकिन मुख्यमंत्री लगातार बदले जा रहे है। कर्नाटक से भी ऐसी ही खबर आ रही है। ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह द्वारा प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करना और मुख्यमंत्री का बार बार दिल्ली जाना मन मे संशय पैदा करता है की मुख्यमंत्री की नाकामियों का संज्ञान केंद्र में लिया गया है और यहां भी नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है।
पर्यटकों की आमद को देखते हुए नायब तहसीलदार ग्रामीण एच एल गैजटा की अगुवाई में मशोबरा, हसन वैली ,छराबरा तथा कुफरी क्षेत्र में निरीक्षण व निगरानी की गयी। नायब तहसीलदार ने बताया की इस दौरान मासक ना पहनने वाले 9 पर्यटकों के चालान किए गए। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में निरीक्षण दल द्वारा कोविड-19 मानक संचालन की पालना के प्रति लोगों को जागरूक भी किया गया। मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखें, हाथों को सैनिटाइज करने तथा अनावश्यक रूप से भीड़ ना बढ़ने के प्रति जानकारी व जागरूकता प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि ढल्ली थाना के पुलिस कर्मचारी इस दौरान जांच प्रक्रिया में शामिल हुए।
शिमला के डीएफओ सुशील राणा ने कहा है कि वृक्षारोपण, वन संरक्षण और पर्यावरण को बचाने में युवक मंडल और पंचायतें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आज स्थानीय युवक मंडल व पंचायतों द्वारा राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों- लक्कड़ बाजार - क्यार कोटी सड़क के किनारे भोटड़ू गावं से नेरी गावं तक आयोजित वन महोत्सव का उद्घाटन किया इसके अंतर्गत लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में देवदार के 250 और बान के 50 पौधे लगाए। वन महोत्सव के संयोजक विनोद योगाचार्य ने बताया कि पौधारोपण में लगभग 70 ग्रामीणों ने पौधे लगाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत चैड़ी के प्रधान भुवनेश्वर दत्त शर्मा ने की। डीएफओ सुशील राणा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और पंचायतों की पहल अत्यंत सराहनीय है। भुवनेश्वर दत्त शर्मा ने बताया की पंचायतों और युवक मंडलों के माध्यम से नए लगाए गए पौधों का संरक्षण भी किया जाएगा। संयोजक विनोद योगाचार्य ने कहा कि भविष्य में भी युवाओं को पर्यावरण के साथ जोड़ने के लिए वन महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का संचालन फॉरेस्ट गार्ड द्रोपदी वर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि आदर्श महिला मण्डल क्यार कोटी की प्रधान सुमन, सचिव रीना एवं आशा वर्मा, युवा मंडल क्यार कोटी, युवक मण्डल चैड़ी, ग्राम पंचायत चैड़ी, ग्राम पंचायत कोहलू जुब्बड़, जन कल्याण विकास समिति चैड़ी, गोवर्धन धाम जनकल्याण समिति के सदस्यों ने पौधारोपण में हिस्सा लिया। फॉरेस्ट गार्ड पम्मा, उपप्रधान सुमित ठाकुर, वार्ड सदस्य अणु -बत्ती देवी, वार्ड सदस्य मूंगर- रमा देवी, वार्ड सदस्य चैड़ी -ललित ठाकुर, प्रधान ग्राम पंचायत कोहलू जुब्बड़ मोहन ठाकुर, कट्टली वार्ड सदस्य देवेंदर, कोषाध्यक्ष जन कल्याण विकास समिति चैड़ी मोहन ठाकुर ने भी वन महोत्सव के आयोजन में योगदान किया।
स्व. राजा वीरभद्र सिंह के देहांत के बाद हिमाचल कांग्रेस ने जो उनकी अस्थियों को पूरे प्रदेश की नदियों और संगमों पर विसर्जित करने का निर्णय लिया है, वह निश्चित तौर पर कांग्रेस को लाभ देगा। एक ऐसी विभूति की अस्थि का प्रदेश के हर इलाके में जाने से उस पार्टी को लाभ देगा। ऐसा मानना है जाने-माने अंक ज्योतिषाचार्य एवं वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष पं. शशिपाल डोगरा का। उन्होंने यह आंकलन अंक गणना के आधार पर किया है। पं. डोगरा कहते हैं कि अंकों की विडबना देखो, 16 अगस्त 2018 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्वर्गवास हुआ था। उनके मुताबिक 1+6+8+2+0+1+8=26=2+6=8 अंक शनि का अंक है। वाजपेयी की अस्थि का विसर्जन देश के 22 राज्यों में किया गया। 2+2=4 राहु का अंक है। राहु शमशान का कारक है और शमशान की भस्म पूरे देश में प्रवाहित की, जिस कारण भाजपा को लाभ मिलने का योग बना। उनका कहना है कि ज़ब किसी बड़ी विभूति का आशीर्वाद पूरे देश को मिला तो भाजपा को 2019, यानी 2+0+1+9=12=1+2=3 अंक गुरु का है और इस अंक ने सत्ता दिला दी। पं. शशिपाल डोगरा कहते हैं कि उसी प्रकार का योग आज हिमाचल प्रदेश में राजा वीरभद्र सिंह के इस संसार को छोड़ के चले जाने से बना है। वीरभद्र सिंह ने 8 जुलाई को अपने प्राण त्याग दिए। 8 शनि का अंक है। 2021 का 5 अंक है। 8+5=13=1+3=4 राहु का अंक है जो शमशान योग बनाता है।10 जुलाई 2021को अंतिम संस्कार किया गया। 10=1+0=1 अंक सूर्य का अंक है और सूर्य ग्रहों का राजा है। राजा की तरह अंतिम विदाई हुए।17 जुलाई 2021 को राजा वीरभद्र सिंह का अस्थि विसर्जन किया गया। 1+7=8 शनि के अंक पर और शनि बहुत कुछ देता भी है और लेता भी है। उनका मानना है कि शनि न्याय का कारक है। झूठ और फरेब को नहीं मानता है। हिमाचल कांग्रेस द्वारा पूरे प्रदेश में उनकी अस्थि का विसर्जन करने का निर्णय लिया गया। एक ऐसी विभूति की अस्थि का प्रदेश के हर इलाके में जाने से उस पार्टी को लाभ देगा। पं. डोगरा कहते हैं कि अंक ज्योतिष के हिसाब से अगर देखें तो हिमाचल कांग्रेस को जहां राजनितिक लाभ मिलने का योग है, वहीं यह एकजुटता का योग बनाता है। जो 2018 में वाजपेयी के वक्त में बना था। वहीं, विरोधी दल के लिए नुकसान देता है। जैसे 2019 में कांग्रेस को हुआ था। वे कहते हैं कि भाजपा का 1 अंक है और 1 अंक सूर्य का है। सूर्य व शनि आपस में शत्रु है। इस कारण भाजपा को नुकसान होने का योग बन रहा है, बाकि सर्वज्ञ तो ईश्वर है।
भाजपा के प्रवक्ता ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया की प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जब भी आधिकारिक दौरे पर दिल्ली गए हैं तो वे वापस कभी खाली हाथ नहीं लौटे। एक समय था जब केंद्र में कांग्रेस पार्टी की अपनी सरकार होने के बाबजूद उनके मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कार्यालय मिलने तक का समय नहीं देते था लेकिन 2014 के बाद जब से देश की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाली है तब से पी.एम.ओ. के द्वार हर किसी के लिए खुले हैं। चाहे पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह हो या वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी हों, दोनों से प्रधानमंत्री गर्मजोशी से मिलते रहे हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर जब भी दिल्ली गए हैं तो प्रदेश के लिए कोई न कोई बड़ी खेप लेकर ही लौटे हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं की फीडबैक लेकर उनके क्रियान्वयन से भी संतुष्ट होकर मुख्यमंत्री की पीठ थपथपा चुके हैं। यही कारण है कि जब भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलते हैं तो उन्हें उनका अपार स्नेह मिलता रहा है और मुख्यमंत्री जो भी निवेदन प्रदेश की तरक्की और विकास के लिए प्रधानमंत्री से करते हैं वो उन्हें खुले मन से मिलता है जिससे प्रदेश भी विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। गत दिन भी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और उन्हें राज्य सरकार द्वारा अपनाए जा रहे कोविड प्रोटोकाॅल और टीकाकरण कार्यक्रम के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना की दूसरी लहर से सफलतापूर्वक निपटने संबंधी जानकारी देते हुए संभावित तीसरी लहर से निपटने के प्रबंधों के बारे में जानकारी दी, जिस पर प्रधानमंत्री ने टीकाकरण कार्यक्रम को तेजी से निष्पादित करने के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य को बल्क ड्रग एवं मेडिकल डिवाइसेज पार्क स्वीकृत करने का आग्रह किया है, जिससे प्रदेश में न केवल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार सृजन भी होगा। हमें पूरी उम्मीद है कि ये सौगात भी हमें मुख्यमंत्री प्रयासों से जल्द मिलेगी। इसके अलावा प्रदेश में हवाई संपर्क सदृढ़ करने के लिए मंडी जिला के नागचला में प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने की भी मुख्यमंत्री ने मांग की है और प्रदेश में सड़क नेटवर्क सुदृढ़ करने के बारे में भी चर्चा हुई है। पर्यटन अधोसंरचना विकास परियोजना के अन्तर्गत केन्द्र सरकार को भेजे गए वित्त पोषण दस्तावेज को स्वीकृति देने, 111 मेगावाट क्षमता की सावड़ा-कुड्डू जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन करने तथा सतलुज जलविद्युत निगम द्वारा निर्मित 210 मेगावाट लुहरी स्टेज-1 तथा 66 मेगावाट धौलासिद्ध परियोजनाओं के शिलान्यास करने का भी मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में पहाड़ी प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर हुआ है।
जिला प्रशासन द्वारा पर्यटकों की आमद को देखते हुए सामाजिक दूरी बनाए रखने, मास्क पहनने, तथा अन्य विशेष मानक संचालन की अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोगों को जागृत किया गया । सूचना एवं जनसंपर्क विभाग जिला शिमला के कर्मचारी किशोर कुमार द्वारा रविवार को शिमला नगर के रिज मैदान, माल रोड, लक्कड़ बाजार , सी टी ओ, लोअर बाजार आदि क्षेत्रों में घोषणाएं की गई। इस दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखने ,सही रूप से मासक पहनने रिज और माल रोड पर ना बैठने अनावश्यक भीड ना करने की उद्घोषणाएं की गई। पर्यटकों व स्थानीय नागरिकों को इन उद्घोषणा के माध्यम से कोविड-19 प्रोटोकाल की अनुपालन करने की अपील की गयी ताकि कोविड से बचाव किया जा सके।
उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी के आदेश अनुरूप जिला पर्यटन विकास अधिकारी द्वारा गठित दल ने रविवार को शिमला नगर के तारा हॉल से लककड़ बाजार क्षैत्र तक विभिन्न होटलों में कोविड-19 के तहत विशेष मानक संचालन की अनुपालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 11 होटलों का औचक निरीक्षण किया। जिला पर्यटन विकास अधिकारी जी डी कालटा ने बताया की निरीक्षण के लिए विशेष दल का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा पर्यटकों एवं होटल कर्मचारियों द्वारा मास्क ना पहनने के प्रति 22 लोगों का चालान किया गया। 11000 रूपए चालान राशि वसूली गयी है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त 4 होटलों में अनियमितताएं पाई गई जिनके प्रति पर्यटन विकास एवं पंजीकरण अधिनियम के तहत कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। उन्होने बताया कि पिछले कल फिंगास्क क्षेत्र के 13 होटलों का औचक निरीक्षण किया गया था जिसमें से 8 होटलों मैं कोविड प्रोटोकॉल की अनियमितताएं पाई गई इनके प्रति भी अधिनियम के तहत कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान होटलों में कॉविड 19 के प्रोटोकॉल को अमल में लाने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। होटलों में पर्याप्त सैनिटाइजर तथा थर्मल स्कैनिंग की उपलब्धता व अन्य प्रोटोकॉल की सुनिश्चिता को देखा जा रहा है। होटल मालिकों अथवा प्रबंधकों द्वारा कॉविड 19 के तहत जारी आदेशों व मानकों के अनुपालन अमल में लाई जा रही है इस बात की जांच निरीक्षण दल द्वारा विभिन्न होटलों में की जा रही है। उन्होंने बताया कि आज होटल कपिल, वाइट, डिप्लोमेट, आशीर्वाद, ऑकलैंड, ध्रुव, ग्रीनलैंड, फोर सीजन b&b, सत्कार, स्टैंडर्ड बीएनबी, अमर सिरी b&बी, होटलों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि यह जांच व निरीक्षण कार्य निरंतर जारी रहेगा ताकि शिमला नगर के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी होटल मालिकों व प्रबंधकों द्वारा कोविड-19 के संबंध में जारी आदेशों व विशेष मानक संचालन की अनुपालन सुनिश्चित की जा सके तथा कोविड के फैलाव को रोका जा सके। प्रक्रिया के दौरान होटल निरीक्षक दिलीप ठाकुर पर्यटन सूचना अधिकारी विक्रम तथा पुलिस विभाग के कर्मचारी जांच दल में शमिल थे।
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के समान एवं संतुलित विकास और जनजातीय लोगों के कल्याण के प्रति अपने दृढ़संकल्प पर कार्य करते हुए प्रदेश सरकार ने कई पहले की है जिसके परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों का तेजी के साथ विकास हो रहा है। प्रदेश में जनजातीय समुदाय की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 5.71 प्रतिशत है और इस समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत कुल राज्य योजना राशि का 9 प्रतिशत भाग चिन्हांकित है। जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम का आकार वर्ष 2018-19 में 567 करोड़ रुपये, वर्ष 2019-20 में 639 करोड़ रुपये जबकि वर्ष 2020-21 में 711 करोड़ रुपये किया गया। वर्ष 2021-22 के लिए सरकार ने 846.49 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सीमा क्षेत्र विकास योजना के अन्तर्गत वर्ष 2018-19 में 25.95 करोड़ रुपये केन्द्रीय हिस्से व 2.88 करोड़ रुपये राज्य के हिस्से के रूप में, 2019-20 में 27.50 करोड़ रुपये केन्द्रीय व 3.05 करोड़ रुपये राज्य की हिस्सेदारी के रूप में प्रदान किये गए। वर्ष 2021-22 के लिए 25 करोड़ रुपये केन्द्रीय हिस्से और 2.78 करोड़ रुपये का राज्य के अंश के रूप में प्रावधान किया गया है। जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत परिवहन, सड़कों एवं पुलों और भवन निर्माण पर वर्ष 2018-19 के दौरान 127.69 करोड़ रुपये, 2019-20 में 147.33 करोड़ रुपये, 2020-21 के दौरान 195.90 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि वर्ष 2021-22 के लिए 244.06 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। 20 सूत्रीय कार्यक्रम- 2006 के प्रावधानों के अन्तर्गत वर्ष 2018-19 में निर्धारित 7095 लक्ष्यों के विरुद्ध 8669 जबकि वर्ष 2020-21 के लिए निर्धारित 6829 लक्ष्यों के मुकाबले 7509 लक्ष्यों की प्राप्ति हुई। वर्ष 2018-19 के दौरान जनजातीय क्षेत्र पांगी व भरमौर में टैलीमेडिसन की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया गया जिसके अन्तर्गत वर्ष 2018-19 में 200 लाख रुपये, 2019-20 में 174 लाख रुपये और 2020-21 में 193 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। वर्ष 2021-22 में 84 लाख रुपये प्रस्तावित किए जा रहे हैं। भारत सरकार ने 2018-19 के दौरान तीन नए एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल भरमौर, पांगी ओर लाहौल में खोलने की स्वीकृति प्रदान की जिन्हें शैक्षणिक सत्र 2019-20 से आरम्भ कर किया दिया है। केंद्र सरकार से इन आवासीय विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए अब तक 32 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। वर्तमान में प्रदेश में चार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय कार्यशील हैं जिनमें 554 अनुसूचित जनजातीय छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 को जनजातीय क्षेत्रों व गैर-जनजातीय क्षेत्रों में तीव्र गति से क्रियान्वित करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति गठित की गई है। प्रदेश के पंचायत चुनावों के उपरान्त जिला व उप-मंडल स्तरीय समितियों के गठन की प्रक्रिया प्रगति पर है। अब तक पांच जिला स्तरीय एवं 35 उप-मण्डल स्तरीय समितियों का गठन किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, ग्राम स्तर पर 17,503 वन अधिकार समितियों का गठन किया गया है। प्रदेश में अभी तक 1918.9369 हेक्टेयर वन भूमि पर सामुदायिक वन अधिकारी और 2.4129 हेक्टेयर वन भूमि पर व्यक्तिगत अधिकार चिन्हित व निहित किए गए हैं। जनजातीय क्षेत्र लाहौल व पांगी के लिए रोहतांग अटल टनल का निर्माण कर राष्ट्र को समर्पित किया गया है जो इस क्षेत्र के लोगांे के लिए वरदान साबित हो रही है और प्रदेश में पर्यटन विकास को भी नया आयाम मिला है। स्पिति (काजा) में समुद्र तल से 12040 फीट की ऊंचाई पर युवा सेवाएं एवं खेल विभाग और लद्दाख वुमेन आइस हाॅकी फाउंडेशन द्वारा प्रथम बुनियादी आइस हाॅकी प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया।
शिमला के अंतर्गत नेरवा के 'गुमनाल्टा' पर एक पिकअप गाड़ी हादसे का शिकार हो गई। हादसे में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। इसमें सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो चुकी है। जानकारी के अनुसार मृतकों की पहचान भुपेंद्र चमनाईक उर्फ काकू 28 साल और कमलेश बनाईक 30 साल गांव दियालडी डाकघर और तहसील नेरवा जिला शिमला के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक़ पिकअप गाड़ी सेब से लदी थी ओर नेरवा से विकासनगर की और जा रही थी कि अचानक चालक गुम्मा लोहाणा मार्ग पर गुमनाल्टा के पास टक्कर में नियंत्रण खो बैठा। गाड़ी सड़क से बाहर होकर लगभग 500 मीटर नीचे टौंस नदी में जा गिरी।
किसानों एवम मजदूरों के 25 जुलाई से 9 अगस्त तक होने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन को सफल बनाने के लिए हिमाचल किसान सभा व सीटू के प्रदेश नेतृत्व की संयुक्त बैठक डॉ ओंकार शाद की अध्यक्षता में शिमला में सम्पन्न हुई। बैठक में डॉ कश्मीर ठाकुर, डॉ कुलदीप तंवर, विजेंद्र मेहरा, प्रेम गौतम, जगत राम व सत्यवान पुंडीर आदि किसान-मजदूर नेता शामिल रहे। हिमाचल किसान सभा प्रदेशाध्यक्ष डॉ कुलदीप तंवर, महासचिव डॉ ओंकार शाद, सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि 25 जुलाई से 9 अगस्त तक तीन कृषि कानूनों, चार लेबर कोडों, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य व महंगाई आदि मुद्दों पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन के आह्वान पर हिमाचल किसान सभा व सीटू द्वारा प्रदेश भर में किसान-मजदूर अभियान आयोजित किया जाएगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी जिलों व ब्लॉकों में हिमाचल किसान सभा व सीटू की संयुक्त बैठकें की जाएंगी। इस अभियान के तहत केंद्र सरकार की मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए एक लाख पर्चे बांटे जाएंगे। इस अभियान के समापन पर 9 अगस्त को अंग्रेजो भारत छोड़ो दिवस के उपलक्ष्य पर मोदी-शाह गद्दी छोड़ो, अम्बानी-अडानी भारत छोड़ो दिवस मनाया जाएगा। इस दिन शिमला, ठियोग, रामपुर, रोहड़ू, निरमण्ड, टापरी, सोलन, नालागढ़, अर्की, पौण्टा साहिब, कुल्लू, आनी, बंजार, बालीचौकी, मंडी, जोगिंद्रनगर, सरकाघाट, धर्मशाला, चम्बा, भरमौर, ऊना व हमीरपुर सहित बाईस स्थानों पर प्रदर्शन किये जाएंगे। डॉ ओंकार शाद ने कहा है कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए दोनों संगठनों ने जिम्मेवारियां तय कर दी हैं। नाहन में 21 जुलाई को कॉमरेड विजेंद्र मेहरा, डॉ कुलदीप तंवर, मंडी में 21 जुलाई को डॉ कश्मीर ठाकुर, कॉमरेड कुशाल भारद्वाज, हमीरपुर में 24 जुलाई को डॉ कश्मीर ठाकुर, डॉ ओंकार शाद, चम्बा में 24 जुलाई को कॉमरेड प्रेम गौतम, डॉ ओंकार शाद, सोलन में 25 जुलाई को कॉमरेड जगत राम, डॉ कुलदीप तंवर, कांगड़ा में 25 जुलाई को कॉमरेड विजेंद्र मेहरा, डॉ ओंकार शाद, कुल्लू में 25 जुलाई को कॉमरेड प्रेम गौतम, कॉमरेड होतम सोंखला व शिमला में 27 जुलाई को कॉमरेड विजेंद्र मेहरा व डॉ ओंकार शाद की अध्यक्षता में बैठकें की जाएंगी। उन्होंने कहा है कि इस अभियान के तहत प्रदेश के किसानों व मजदूरों के बहुत बड़े हिस्से तक पहुंचने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा है कि 9 अगस्त को प्रदेश के बाईस स्थानों पर किसानों मजदूरों द्वारा जबरदस्त संयुक्त प्रदर्शन किए जाएंगे।
परिवहन विभाग के एक प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं यातायात नियमों का उल्लंघन रोकने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत जुर्माने की राशि में परिवर्तन किया गया है। इस संशोधित अधिनियम में बढ़ी हुई जुर्माना राशि के साथ गंभीर अपराधों के लिए कारावास का प्रावधान भी शामिल है। उन्होंने कहा कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के प्रावधान की अनुपालना में प्रदेश सरकार द्वारा संशोधित जुर्माने की राशि के निर्धारण को प्रदेश मंत्रीमंडल ने पहले ही स्वीकृति प्रदान कर दी है और इसे आवश्यक औपचारिकताओं को पूर्ण कर शीघ्र ही अधिसूचित किया जा रहा है, जो पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगे। उन्होंने प्रदेश की जनता से आग्रह किया कि वे सड़क पर सुरक्षा एवं यातायात नियमों का गंभीरता से पालन कर सरकार के सुरक्षा संबंधी प्रयासों में पूर्ण सहयोग करें, ताकि नियमों की उल्लंघना से होने वाली क्षति पर अंकुश लग सके और ट्रैफिक नियमों की अनुपालना न करने पर होने वाली जुर्माने की राशि से असुविधा न हो।
प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि इन्साकाॅग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार कोरोना का नया रूप डेल्टा, भारत के विभिन्न हिस्सों में कोविड-19 के मामलों में पाया गया एक प्रमुख वेरिएंट है जो विश्वभर में तेजी से फैल रहा है। नए आंकड़ों के अनुसार कोरोना से बचाव के लिए लगाई जा रही वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट पर भी प्रभावी है। जन स्वास्थ्य इंग्लैंड द्वारा वैक्सीन के प्रभाव को लेकर जारी रिपोर्ट के अनुसार कोविशील्ड की दो खुराक 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु के खिलाफ 94 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि लोगों को वायरस के खिलाफ टीका लगवाने के लिए स्वयं आगे आना चाहिए। प्रवक्ता ने बताया कि 1 से 16 जुलाई, 2021 तक हिमाचल प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों में दाखिल कोरोना रोगियों के संबंध में किए गए विश्लेषण के अनुसार पिछले 16 दिनों में आईजीएमसी शिमला में कोरोना के सबसे अधिक मरीज दाखिल हुए हैं। गत 16 दिनों में आईजीएमसी में एक दिन में अधिकतम 20 कोविड मरीज भर्ती हुए हैं। उन्होंने बताया कि डाॅ. वाईएस परमार राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय नाहन में 11 जुलाई, 2021 तक 43 कोविड रोगियों को भर्ती किया गया था और तब से 16 जुलाई 2021 तक कोई भी कोविड मरीज भर्ती नहीं हुआ है। प्रवक्ता ने लोगों से हाथ धोने, मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करने का आग्रह किया।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशानुसार प्रदेश में कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए गठित जिला स्तरीय समिति ने शनिवार को शिमला के आईएसबीटी ,पुराना बैरियर, संकट मोचन ,तारा देवी मंदिर, संकट मोचन मंदिर, गोयल मोटर्स शोघीबाजार तथा तारा देवी बाजार आदि का औचक नीरिक्षण किया और आम जन मानस व दुकानदारों को कोविड नियमों के बारे में जागरूक करने के साथ साथ लापरवाही बरत रहे 15 लोगों व दुकानदारों के चालान भी किए। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रमणीक शर्मा ने आज यहां जानकारी देते हुए बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह कार्यवाही अमल में लाई जा रही है । उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कोविड नियमों की पालना करते हुए मास्क आवश्यक पहने, उचित दूरी बनाए रखे एवं समय पर सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा दी गई हिदायतों का आवश्यक रूप से पालन करें। उन्होंने नीरिक्षण के दौरान अंतर राज्य बस अड्डे पर सरकारी एवं निजी बसों में सवारियों को जागरूक व जानकारी प्रदान की तथा बस अड्डा परिसर में भी निरीक्षण किया। पुराना बैरियर के साथ लगती दुकानों और आसपास के क्षेत्रों मैं भी निरीक्षण किया तथा लोगों को मास्क पहनने और कॉविड प्रोटोकॉल के अनुपालन सुनिश्चित करने के संबंध में जागरूक किया। संकट मोचन तथा तारा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं को कोविड-19 मानक संचालन के अनुपालन के प्रति जागरूक किया तथा मास्क लगाने और सैनिटाइजेशन के संबंध में भी जांच व निरीक्षण की। तारा देवी व शोधी क्षेत्र में दुकानों में मासक ना लगाने वालों के चालान भी किए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोघी में जाकर स्थिति का जायजा लिया तथा कोविड-19 से संबंधित विभिन्न सामग्री की उपलब्धता के संबंध में डॉक्टर सूरज से जानकारी भी प्राप्त की। वहां कोविड से सम्बन्धित अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए किए गए उपायों को देखने के उपरान्त अधिकारियों से वैक्सीनेशन की स्तिथि का जायजा भी लिया तथा कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता भी जांची। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लोगों की वैक्सीनेशन करवाने के दौरान कोरोना महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए। उन्होंने शाेघी के समीप मजदूरों एवं कर्मचारियों को जागरूक करते हुए बताया कि वैक्सीन के साथ साथ मास्क एवं सामाजिक दूरी आवश्यक है, तभी हम कोरोना महामारी से बच सकते है। इस दौरान कोविड नियमों की अवहेलना करने वाले तथा मास्क न पहनने वाले लोगों के 15 चालान किए गए। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए बताया कि देश में कोरोना के बढ़ते मामलों से तीसरी लहर का अंदेशा जताया जा रहा है। सभी लोग वैक्सीनेशन के उपरांत भी मास्क का सही से प्रयोग करे, सामाजिक दूरी बनाए रखे, भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में मत जाए एवं सरकार द्वारा समय समय पर जारी निर्देशों का पालन करे ताकि कोरोना महामारी से जिला शिमला, प्रदेश तथा देश को बचाया जा सके। इस अवसर पर नायब तहसीलदार एच एल गैज़टा, पुलिस एवं प्रशासन के कर्मचारी एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने शनिवार को यहां हिमाचल प्रदेश गौ सेवा आयोग की चैथी बैठक की अध्यक्षता की और आयोग की प्रगति की समीक्षा की। पंचायती राज मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बेसहारा गौवंश के संरक्षण के लिए प्रदेश में गौ सदनों और गौ अभ्यारण्यों को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में छोड़े हुए पशुओं को संरक्षण, पुनर्वास और आश्रय प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार अनेक प्रयास कर रही है। अब तक सरकार ने 17407 बेसहारा गौवंश को आश्रय प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि बेसहारा गौवंश को आश्रय प्रदान करने के मामले में हिमाचल को आदर्श राज्य बनाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने गौ सेवा आयोग के सरकारी व गैर सरकारी सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहली अप्रैल, 2021 से 13 जुलाई, 2021 से लगभग 12 करोड़ 44 लाख, जिसमें से आठ करोड़ 71 लाख व्यय किए जा चुके हैं। वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि गौ सदन, गौशाला, गौ अभ्यारण्य सहायता योजना के अंतर्गत जो मार्च, 2021 से जून 2021 तक दो करोड़ 85 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है, जिसमें गौ सदन, गौशाला, गौ अभ्यारण्य को प्रत्येक गौवंश के भरण-पोषण के लिए हर महीने 500 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि गौ सेवा आयोग द्वारा लोगों को सूचना प्रदान करने के लिए शीघ्र एक वेबसाईट आरम्भ की जाएगी जिसमें अंशदान की सुविधा भी उपलब्ध होगी।गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अशोक शर्मा, सचिव पशुपालन डाॅ. अजय शर्मा, सचिव ग्रामीण विकास संदीप भटनागर, निदेशक पशुपालन डाॅ. अजमेर सिंह और गौ सेवा आयोग के सरकारी व गैर सरकारी सदस्य भी बैठक में उपस्थित थे।
महामारी के प्रभाव के कारण देश में शिक्षा क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। ऐसे समय में हिमाचल प्रदेश में भी काफी दिक्कतों का सामना छात्रों को करना पड़ रहा है। पिछले लगभग 2 वर्षों से शिक्षण संस्थान बंद है ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा का संचालन हो रहा है, लेकिन ऐसे समय में शोधार्थी छात्रों को शोध कार्य को लेकर खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के प्रांत सह मंत्री विक्रांत चौहान ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि शोधार्थी छात्रों का शोध कार्य रुका है जिसमे खासकर विज्ञान विषय से संबंधित छात्रों को प्रयोगशाला और छात्रावास की सुविधा न मिलने के कारण शोध कार्य और शिक्षा को भारी असर पड़ रहा है। विक्रांत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शोध कार्यों को बढ़ाव दिया जाना चाहिए ताकि देश का गौरव विश्वपटल पर नए कीर्तिमानों के साथ स्थापित हो जिसके लिए शोधार्थी छात्रों को शोध कार्यों हेतु विश्वविद्यालयों और सरकार को उचित सुविधाएं मुहैया करवानी चाइए। लेकिन यदि वर्तमान समय के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो एकदम विपरीत परिस्थितियां चल रही है। उन्होंने कहा कि रोजाना छात्र अनेकों विश्वविद्यालयों से संपर्क करते है कि छात्रावासों को खोला जाए ताकि शोधार्थी छात्रों का पिछले डेढ़ वर्षों से लंबित शोध कार्य पूरा हो सके। अभाविप ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग को छात्रों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है विक्रांत ने कहा कि शोधार्थियों के लिए छात्रावास शीघ्र खोलें जाने चाइए ताकि किसी भी छात्र को सुविधा के अभाव के कारण शोध कार्य में दिक्कत का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों में भी इस दिक्कत का सामना अनेकों छात्रों को करना पड़ रहा है। छात्र जब विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क कर रहे है तो निक्कमे प्रशासन द्वारा नियामक आयोग और प्रदेश सरकार के आदेशों की इंतजारी और नियमों का हवाला दिया जा रहा है जिस कारण लाखों शोधार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विक्रांत ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेश सरकार से मांग करती है कि बचाव के सभी मापदंडों को मद्देनजर रखते हुए शीघ्र अति शीघ्र शोधार्थी छात्रों के लिए छात्रावास खोलें जाए और प्रयोगशालाओं की सुविधा को मुहैया करवाया जाए ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके, उन्होंने कहा कि यदि यह मांग जल्द से जल्द पूरी नहीं की गई तो विद्यार्थी परिषद आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेगी।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने लेडी गवर्नर अनघा आर्लेकर के साथ शनिवार को शिमला में हनुमान मंदिर जाखू के दर्शन किए और वहां पूजा-अर्चना की। राज्यपाल सुबह रोप-वे से जाखू मंदिर गए। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में राजभवन सेे बाहर यह उनका पहला दौरा था। राज्यपाल ने मंदिर परिसर का दौरा भी किया और यहां की भव्यता, प्राकृतिक सौंदर्य और वातावरण की सराहना की। राज्यपाल ने भगवान हनुमान से प्रदेशवासियों को आशीर्वाद व अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करने तथा राष्ट्र को कोरोना महामारी से मुक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थन की।राज्यपाल ने कहा कि यह धार्मिक स्थल न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यहां श्रद्धालुओं के लिए बेहतरीन सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। उपमंडलाधिकारी शिमला मंजीत शर्मा ने राज्यपाल को मंदिर के इतिहास और इसकी धार्मिक मान्यताओं से अवगत करवाया।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा कार्य एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर से भेंट की। मुख्यमंत्री ने अनुराग सिंह ठाकुर को कैबिनेट मंत्री बनने पर बधाई दी और कहा कि यह राज्य के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने राज्य में खेलों के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, विशेषकर इंडोर स्टेडियम के निर्माण के बारे में भी चर्चा की, जिससे राज्य के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में मदद मिल सके। अनुराग सिंह ठाकुर ने राज्य को हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप और उप-आवासीय आयुक्त पंकज शर्मा भी मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे।
भाजपा महामंत्री एवं सुंदरनगर से विधायक राकेश जमवाल ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से शिमला राजभवन में भेंट की, भाजपा महामंत्री ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त होने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की विकासात्मक गतिविधियों को लेकर विस्तृत चर्चा भी की और राजपाल को सभी गतिविधियों से अवगत करवाया। राकेश जमवाल ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ को हिमाचल में राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में अवगत करवाया और साथ ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सरकार की उपलब्धियों के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से हिमाचल सरकार ने कोविड-19 महामारी की मुश्किल परिस्थिति को संभाला और जिस प्रकार से महामारी से निपटने की तैयारियां धरातल पर की उससे हिमाचल प्रदेश की जनता को बड़ी राहत मिली। आज भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार जन सेवा के लिए तत्पर है।
शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए 16 जुलाई, 2021 एक स्मरणीय दिन रहेगा क्योंकि आज मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने खड़ापत्थर में जिला स्तरीय स्वर्ण जंयती ग्राम स्वराज सम्मेलन के दौरान पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए जुब्बल और कोटखाई में उपमंडलाधिकारी कार्यालय (नागरिक) खोलने के साथ-साथ मण्डी मध्यस्थता योजना के अन्तर्गत सेब खरीद के मूल्य में एक रूपया प्रति किलो वृद्धि की घोषणा की। जय राम ठाकुर ने कोटखाई में खण्ड विकास कार्यालय, टिक्कर में अग्निशमन उपकेंद्र, कलबोग में उप-तहसील खोलने और उप-तहसील सावड़ा (सरस्वती नगर) और पुलिस स्टेशन सावड़ा को एचपी पावर काॅरपोरेशन के नए भवन में स्थानातंरित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रोहड़ू और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्रों में सृजित 9 नई पंचायतों के भवन निर्माण के लिए 20 लाख प्रति पंचायत की राशि प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थानों के लिए धन की पर्याप्त उपलब्धता है और निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी-अपनी पंचायतों के विकास के लिए नवीन सुझाव और योजनाएं सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है लेकिन कोरोना महामारी के कारण इन संस्थानों की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। जय राम ठाकुर ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है और हमारा प्रदेश व देश भी इससे अछूता नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय पर लिए गए प्रभावी निर्णयों के फलस्वरूप देश को न्यूनतम नुकसान हुआ और अब राष्ट्र इस विकट स्थिति से धीरे-धीरे उबर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महामारी के कारण प्रदेश का विकास बाधित न हो। राज्य सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान भी चार हजार करोड़ रूपये की विकासात्मक परियोजनाओं के वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण और शिलान्यास किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल के साढ़े तीन साल पूर्ण कर लिए हैं, जो उपलब्धियोंपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश कोविड-19 के प्रबंधन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में कोविड-19 मरीजों के लिए प्रदान की जाने वाली सुविधाओं जैसे ऑक्सीजन, बिस्तर, वेंटिलेटर इत्यादि की कोई कमी नहीं है। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के 3.15 लाख परिवारों को गृहिणी सुविधा योजना के अंतर्गत मुफ्त गैस कनैक्शन प्रदान किए गए हैं। सहारा योजना के अंतर्गत 15 हजार ऐसे परिवारों को तीन हजार प्रति परिवार की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिनका कोई सदस्य गंभीर बीमारी से पीड़ित है। उन्होंने पूर्व मंत्री नरेन्द्र बरागटा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रदेश के सेब क्षेत्र में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया। जय राम ठाकुर ने इस अवसर पर विभिन्न गैर सरकारी संगठनों और विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि यह राज्य का सौभाग्य है कि प्रदेश का नेतृत्व जयराम ठाकुर के रूप में ऊर्जावान और युवा मुख्यमंत्री कर रहे हैं जो स्वयं विनम्र पृष्ठभूमि से हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रथम निर्णय गरीबों और कमजोर वर्गों का उत्थान सुनिश्चित करने पर केन्द्रित था। उन्होंने कहा कि देश की विभिन्न मंडियों में कमीशन एजेंटों द्वारा किसानों के साथ धोखाधड़ी की जाती थी, पर अब राज्य में प्रदेश की भाजपा सरकारों और पूर्व मंत्री नरेन्द्र बरागटा के द्वारा किए गए प्रयासों से राज्य में कई मंडियां खोली गई हैं। उन्होंने कहा कि रोहडू के मेहंदली और शिमला के भट्टाकुफर में फल एवं सब्जी मण्डियों के निर्माण के लिए इस वर्ष 20 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से बागवानों की सुविधा के लिए एमआईएस के तहत सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का आग्रह किया। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं लोकतंत्र की जमीनी स्तर की संस्थाएं हैं और राज्य सरकार उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार बागवानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पराला स्थित फल मंडी का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री से क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए कोटखाई में खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय (बीडीओ) खोलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायत घरों के निर्माण के लिए पर्याप्त राशि प्रदान की जाएगी। बहुद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा मंत्री सुख राम चैधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के सशक्त नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में कम वोल्टेज की समस्या का समुचित रूप से समाधान सुनिश्चित किया है। उन्होंने गरीब और समाज के कमजोर वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं आरम्भ करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। निदेशक ग्रामीण विकास और पंचायती राज ऋग्वेद ठाकुर ने प्रदेश सरकार द्वारा पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए आरम्भ की गई विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं के नव निर्वाचित सदस्यों को प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों को सूचना प्रौद्योगिकी टूल्स का प्रभावी उपयोग करने सम्बन्धी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भाजपा मण्डलाध्यक्ष अनिल कालटा ने क्षेत्र की विभिन्न विकासात्मक मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। इससे पहले, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व मंत्री नरेन्द्र बरागटा के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया।विधायक बलबीर वर्मा, लैंड माॅर्टगेज बैंक की अध्यक्षा शशिबाला, एपीएमसी के अध्यक्ष नरेश शर्मा, भाजपा के जिला अध्यक्ष अजय श्याम, राज्य भाजपा के आईटी संयोजक चेतन बरागटा, उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी और भाजपा के अन्य प्रमुख नेता भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों की समय-2 पर अनेकों मांगे सरकार से रहती है। यदि इस समय कर्मचारियों की मांगो पर गौर करें तो सबसे शोषित समुह आउटसोर्स कर्मचारियों का है। ऐसे कर्मचारी जो किसी मैनपावर एजेंसी के माध्यम से सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों तथा केन्द्र की योजनाओं में कार्य कर रहे है। ये कर्मचारी सरकारी कार्यालय के दूसरेे नियमित कर्मचारियों की भांति कंधा से कंधा मिलाकर काम करते है लेकिन वेतन के नाम पर इनकी झोली हमेशा से ही खाली रहती है क्योंकि वेतन का एक बडा हिस्सा तो मैनपावर एजेंसी की कमीशन, सर्विस चार्ज तथा जी0 एस0 टी के रूप में कर्मचारियों से छिन्न लिया जाता है। उदाहरण के लिए एक 25000 रूपये वेतन का मैनपावर एजेंसी द्वारा केवल 15000 ही दिया जाता है। 30 दिन तक कार्यालय में लगातार काम करने के उपरांत 40 प्रतिशत वेतन कट जाता है। आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्यांए यहीं खत्म नहीं होती, एक ओर नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है कि कब तक है वहीं दूसरी ओर नाममात्र का वेतन वो भी कई कर्मचारियों को 2-3 महिने बाद मिन्नते करने के बाद मुश्किल से मिलता है। ई0 पी0 एफ0 में भी अनियमिततांए बरती जा रही है जिसकी कटौती कई कर्मचारियों को 5 महिने देरी से भी चल रही है जिस वजह से कर्मचारी ब्याज से वंचित रह जाता है। ई0 पी0 एफ0 का एक हिस्सा जो मैनपावर एजेंसी द्वारा जमा किया जाना होता है उसकी कटौती भी कर्मचारी के वेतन से ही की जाती है। ई0 एस0 आई0 सी0 के नाम पर भी कटौती की जाती है लेकिन इसका नंबर सभी को नहीं दिया जाता। सालाना इंक्रीमैंट से भी बहुत से कर्मचारी वंचित है। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए लगाातार काम कर रहा है चाहे हिमाचल प्रदेश के लगभग 35000 कर्मचारियों में से कोई भी कर्मचारी किसी समस्या से जुझ रहा हो। हमेशा से ही सभी सरकारों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगो को उनकी समस्याओं को मुख्य धारा से अलग समझा है। गत दिनों भी आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा ने फतेहपूर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हिमाचल सरकार में उद्योग मंत्री विक्रम सिंह, पंचायती राज मंत्री विरेन्द्र कंवर तथा स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल को कर्मचारी महासंघ की मांगो को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में महासंघ ने कहा :- -कर्मचारियों के लिए एक स्थायी नीति बनाई जाए जिसमें उनकी नौकरी की सुरक्षा हो -सम्मानजनक तथा समय पर वेतन मिले -ई पी एफ को सही तरह के काटा जाए -वार्षिक वेतन वृद्धि मिले तथा सरकारी भर्तियों में आरक्षण मिले जिससे आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण रूक सके। प्रदेश के मुख्यमंत्री को इन मांगों को पूरा करने का प्रयास अवश्य करना चाहिए क्योंकि किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के लगभग 35000 परिवारों की मांग है। यदि सरकार इन मांगों को मानती है तो यह हिमाचल के इतिहास में एक महत्वपुर्ण निर्णय होगा। साथ ही साथ मुख्यमंत्री ने बज़ट सत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए माड्ल टेंडर डाक्यूमेंट को तैयार करने की बात कही थी जो आज तक तैयार नहीं हुआ है कम से कम सरकार को बजट की घोषणाओं को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि हजारों लोगों को इस डाक्यूमेंट का इंतजार है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रदेश मंत्री विशाल वर्मा ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि 15 अगस्त, 2022 को देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् 15 अगस्त, 2021 से स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को याद करते हुए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। इसी कड़ी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने तय किया है कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा आम जनमानस को साथ लेते हुए 15 अगस्त, 2021 को हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक गांव में तिरंगा झंडा फहराया जाएगा। इस अभियान हेतु विद्यार्थी परिषद् ने प्रांत स्तर पर टीम का गठन किया है, जिसके प्रदेश संयोजक के नाते अभिषेक कुमार रहेंगे तथा प्रदेश सह-संयोजक के नाते प्रदीप कुमार, शक्ति शर्मा, नैंसी अटल, आकाश नेगी, गौरव अत्री, अभिलाष शर्मा, गौरव कुमार और अनिल कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रांत मंत्री विशाल वर्मा ने कहा कि देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए असंख्य वीरों ने स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष किया, अपने प्राणों की आहुतियां तक दे दी जिसके परिणामस्वरूप ही स्वतंत्र भारत का स्वप्न साकार हुआ था। इन सब बलिदानों को याद करते हुए आजादी के 75 वर्षों का एहसास देश के लिए ऐतिहासिक पर्व है। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में अलग-अलग आंदोलनों, बलिदानों तथा घटनाओं की अपनी-अपनी अहमियत और प्रेरणा है, जिन्हें याद करते हुए ही हमें आगे बढ़ना चाहिए। आजादी के पश्चात कुछ इतिहासकारों द्वारा देश की स्वतंत्रता के इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मात्र कुछ लोगों के ही आंदोलन के संघर्ष को ही दर्शाया गया। परंतु वास्तव में स्वतंत्रता संग्राम के अंदर असंख्य वीरों ने संघर्ष किया है अपने प्राणों की आहुतिया तक दी है। जिनका जिक्र हमें इतिहास में कहीं पर भी दिखाई नहीं पड़ता। स्वतंत्रता के आंदोलन में हिमाचल प्रदेश का भी विशेष योगदान रहा है। क्योंकि गुलामी के कालखंड में हिमाचल प्रदेश में भी अंग्रेजों की कई छावनीया विद्यमान थी। देश में प्रतिरोध रूपी घटित घटनाओं का दिग्दर्शन करते हुए हिमाचल प्रदेश में भी अनेकों वीर पुरुष स्वाधीनता आंदोलन के यज्ञ में कूदे थे। जिसमें से यदि ध्यान करें तो सूबेदार भीम सिंह, दरोगा बुद्धि सिंह, रामप्रसाद बैरागी, मानदास, सूरतराम, सरदुल, केशवराम जैसे असंख्य नाम निकल कर हमारे सामने आते हैं जो हिमाचल प्रदेश से संबंध रखते थे और जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। परंतु विडंबना यह रही कि ऐसे महान पुरुषों की गाथाओं को इतिहासकारों ने सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। हम सभी का यह दायित्व बनता है कि हम अपने राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास, स्वाभिमान तथा बलिदान की परंपराओं से अपनी नई पीढ़ी को अवगत करवाएं। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के लिए "भारत माता की जय" यह केवल एक नारा नहीं है बल्कि एक प्रतिबद्धता है भारत माता के लिए जीने की। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने 15 अगस्त के उपलक्ष्य पर हिमाचल प्रदेश के 7500 गांव में तिरंगा फहराने का जिम्मा उठाया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक गांव में वहां के स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता एक सार्वजनिक स्थान तय करते हुए वहां पर तिरंगा फहराएंगे और साथ ही सामूहिक राष्ट्रीय गान गाया जाएगा तथा भारत मां के जयघोष के साथ महान बलिदानों को याद करते हुए भारत माता के वीर सपूतों को याद किया जाएगा। यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश के 7500 गांवों में एक ही समय पर शुरू होगा जिसका समय 10:00 बजे प्रातः निर्धारित किया गया है। एक कार्यक्रम में प्रत्येक गांव के पूर्व सैनिकों, शहीद सैनिकों के परिवार तथा प्रत्येक आम नागरिक को आमंत्रित किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले जरूरतमंद बच्चों को एक क्लिक से स्मार्ट फोन देने की योजना शुरू हो गई है। शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने सचिवालय से स्मार्ट फोन डोनेट करने की वेबसाइट का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम वर्चुअल तौर पर जुड़े। योजना शुरू होने से पहले ही उद्योगपतियों और बैंकर्स ने शिक्षा विभाग को 1150 स्मार्ट फोन दे दिए हैं। कोरोना संकट के चलते प्रदेश में मार्च 2020 से बंद चल रहे स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। कमजोर वर्ग के कई विद्यार्थियों की स्मार्ट फोन न होने के चलते पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसको देखते हुए समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय ने समाज की सहभागिता से ऐसे विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट फोन एकत्र करने को योजना शुरू की है। योजना को डिजिटल साथी-बच्चों का सहारा, फोन हमारा अभियान का नाम दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश पुलिस अब राज्य की सीमा में दाखिल होने से पहले पर्यटकों के वाहनों की तलाशी लेगी। डीजीपी संजय कुंडू ने हाल के दिनों में पर्यटकों के हंगामा करने और लाठी व तलवारों से लोगों को नुकसान पहुंचाने के मामलों के सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों को पर्यटकों की तलाशी लेने के निर्देश जारी कर दिए हैं। नाकों पर तैनात अधिकारियों को कोई संदिग्ध लगता है तो उसकी तलाशी लिए बिना प्रदेश में प्रवेश न करने दें। इन घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। कुंडू ने बताया कि चेकिंग के लिए अतिरिक्त फोर्स भी जिलों को मुहैया कराई जा चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने वीरवार को कहा कि श्रेणी अ यानी 45 वर्ष से अधिक के आयु वर्ग के व्यक्तियों, भारत सरकार द्वारा नामित सभी स्वास्थ्य देखभाल कार्यकताओं, सभी फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं, और सभी प्राथमिकता समूहों को कोविशील्ड की प्रथम व द्वितीय खुराकें प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्ययोजना को 14 जुलाई, 2021 तक कार्यान्वित किया जाना था, लेकिन अब यह निर्णय लिया गया है कि टीकाकरण की यह कार्ययोजना 22 जुलाई, 2021 तक जारी रहेगी। इसके अनुसार श्रेणी-बी के लिए 22 जुलाई, 2021 तक कोई भी टीकाकरण सत्र आयोजिन नहीं किया जाएगा। उन्होंने श्रेणी-ए के लाभाथियों से टीकाकरण की प्रथम व द्वितीय खुराक लेने का आग्रह किया ताकि उन्हें कोविड-19 से सुरक्षा मिल सके। इसके अतिरिक्त, कोविड के प्रसार को रोकने के लिए लोगों को कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने डिजिटल साथी- बच्चों का सहारा, फोन हमारा अभियान के तहत वीरवार को शिमला में आयोजित कार्यक्रम को मण्डी जिला के बालीचौकी से वर्चुअल माध्यम द्वारा सम्बोधित करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के कारण लाॅकडाउन के दौरान नई तकनीक बच्चों के लिए वरदान साबित हुई है, क्योंकि वह इसके द्वारा ऑनलाइन माध्यम से अध्ययन जारी रख पाए। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2014 में आरम्भ किए गए डिजिटल इंडिया अभियान से महामारी के दौरान लाॅकडाउन में आम जन-जीवन को सुगम बनाए रखने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी नई तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया और राज्य में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों में वर्चुअल माध्यम से चार हजार करोड़ रुपये लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया और आधारशिलाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महामारी के दौरान छात्रों की सुविधा के लिए हर घर पाठशाला कार्यक्रम आरम्भ किया। इस कार्यक्रम के तहत 80 फीसदी विद्यार्थियों को कवर किया गया और अब सरकार का प्रयास है कि इस कार्यक्रम में शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को सम्मिलित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में विद्यार्थियों को व्हाट्सऐप के माध्यम से वीडियो और वर्कशीट प्रदान करने के साथ-साथ विद्यार्थियों के माता-पिता तक ईपीटीएम के माध्यम से जुड़ने के प्रयास किये गये। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के अलावा शिक्षकों द्वारा लाइव कक्षाओं के साथ-साथ फोनकाॅल भी आरम्भ की गई हैं। जय राम ठाकुर ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा डिजिटल साथी-बच्चों का सहारा फोन हमारा अभियान समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करेगा, ताकि वह बिना किसी बाधा से अपना अध्ययन जारी रख सकें। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक घरानों से जरूरतमंद विद्यार्थियों को उदारता के साथ स्मार्ट फोन प्रदान करने के लिए आगे आने का आग्रह किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने समग्र शिक्षा के डिजिटल साथी-बच्चों का सहारा, फोन हमारा अभियान का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि यह देश भर में ऐसा पहला अभियान है कि जिसके माध्यम से दानकत्र्ता जरूरतमद बच्चों के लिए मोबाइल प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि इस अभियान के लिए अब तक विभिन्न हितधारकों द्वारा 1100 से अधिक मोबाइल प्रदान किए जा चुके हैं।गोविन्द सिंह ठाकुर ने डिजिटल साथी पोर्टल का भी शुभारम्भ किया। इस पोर्टल के माध्यम से लोग और अन्य हितधारक मोबाइल प्रदान कर सकेंगे। इस अवसर पर उन्होंने इस अभियान के लिए स्वयं 100 मोबाइल फोन प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण बच्चों की शिक्षा बाधित न हो इसलिए शिक्षकों ने हर घर पाठशाला कार्यक्रम में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। शिक्षकों का संवाद बच्चों और अभिभावकों के साथ स्थापित करने के लिए ईपीटीएम जैसे कार्यक्रम संचालिए किए गए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह इस अभियान को सफल बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इस अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न सोशल, प्रिंट और इलैक्ट्राॅनिक मीडिया का सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने इस अभियान से जुड़ने के लिए फिल्म अभिनेत्री यामी गौतम का भी आभार व्यक्त किया। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक वीरेन्द्र शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा पंकज ललित ने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर सहित अन्य गणमान्यों का आभार व्यक्त किया। बैठक में विभिन्न बैंको के प्रतिनिधि, अध्यापक और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


















































