हिमाचल का ग्लैडियोलस फूल अब विदेशों में भी अपनी खुशबु बिखेरेगा। जिला मंडी के थुनाग स्थित उद्यानिकी, वानिकी महाविद्यालय एवं रिसर्च सेंटर ने फूलों की पांच अंतरराष्ट्रीय प्रजातियां मंगला, एचबी 15-11, एचबी 1-27, एचबी 9-16 और एचबी 2-52 को तैयार करने में कामयाबी मिली है। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद वैज्ञानिको को इस प्रोजेक्ट में सफलता मिली है व फूलों की प्रजातियां इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के पूरे मानकों पर खरी उतरी हैं। बता दें की ग्लैडियोलस प्रजाति मूलतया अफ्रीका की है। इस फूल की जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात में भारी मांग है, इसके साथ ही देश में भी इस फूल की काफी डिमांड रहती है। ग्लैडियोलस फूल की ज्यादा मांग पांच सितारा होटलों और बड़े आयोजनों में रहती है। इसके साथ ही डिमांड आने पर इसे विदेशों में भी भेजा जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार मंडी जिला की सराजघाटी की आबोहवा, जलवायु, उपजाऊ मिट्टी, कम तापक्रम, अधिक जल, गुणवत्ता और प्रवर्धन अंतरराष्ट्रीय स्तर की ग्लैडियोलस किस्मों के लिए उपयुक्त है। सरकार ने भी इस संस्थान के वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाई है। ग्लैडियोलस की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। इसके लिए मृदा जिसका पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच हो। भूमि के जल निकास का उचित प्रबंध हो, वह सर्वोत्तम मानी जाती है। खुले स्थान जहां सूरज की रोशनी सुबह से शाम तक रहती हो, ऐसे स्थान पर ग्लैडियोलस की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 1685 हजार टन खुले फूल और 472 हजार टन कट फ्लावर का उत्पादन हुआ। क्या है ग्लैडियोलस फूल -- ग्लैडियोलस एक प्रमुख कट फ्लावर है। यह छोटे फूल बाली पर क्रम से एवं धीरे-धीरे खिलते हैं, जिससे कटे हुए फूलों को ज्यादा समय तक रख सकते हैं। ग्लैडियोलस विभिन्न रंगों में पाए जाते हैं। एक फूल स्टिक की कीमत 25 से 30 रुपये तक होती है।
प्रदेश सरकार हर विभाग को हाईटैक करने के प्रयास में जुटी हुई है । इसी के चलते अब सरकार पंचायती राज विभाग में कुछ बदलाव करने जा रही है । जानकारी के अनुसार सरकार ने परिवार रजिस्टर को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। इस सन्दर्भ में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने परिवार रजिस्टर ऑनलाइन करने के निर्देश विभाग को जारी किये है। बताया जा रहा है की ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर आईटी विभाग सॉफ्टवेयर बनाएगा। तीन महीने में इसका डाटा बेस तैयार किया जाएगा। खास बात यह है की परिवार रजिस्टर ऑनलाइन होने से विभिन्न कार्यों के लिए पंचायत सचिव के कार्यालय से नकल लेने के लिए लोगों को चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रदेश सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने परिवार रजिस्टर ऑनलाइन करने के निर्देश दिए । इस कार्य के लिए मुख्य सचिव रामसुभग ने ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित की है। बता दें की रजिस्टर में परिवार के सभी सदस्यों की एक पंजीकृत इकाई होती है। इसमें परिवार के सभी लोगों का विवरण दर्ज होता है। यह पंचायत सचिव के कार्यालय में होता है। इसमें उस ब्लॉक के तहत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों के परिवारों की जानकारी और सदस्यों का विवरण होता है। परिवार रजिस्टर की नकल की जरूरत सरकार की ओर से दी जा रही विभिन्न सुविधाओं को प्राप्त करने में पड़ती है। इसकी नकल लेने के लिए ब्लॉक सेक्रेटरी के पास आवेदन देना पड़ता है। इस दस्तावेज के माध्यम से कोई भी सरकारी कागजात आसानी से बनवा सकते हैं। यह सुविधा शुरू होने से अब लोगों को पंचायत के चक्कर नहीं काटने होंगे। अभी पंचायतों में सेक्टरी द्वारा यह दस्तावेज लोगों को दिया जाता है।
देवभूमि की प्राकृतिक फिजा में जल्द ही विदेशी नस्ल के बुल्गारिया गुलाब की खुशबू महकेगी । कश्मीर के बाद बुल्गारिया गुलाब अब चंबा जिले के सेईकोठी में तैयार होगा । पुष्प उत्पादक लोभीराम ने ट्रायल के तौर पर एक बीघा जमीन में इसकी नर्सरी तैयार की है। ख़ास बात ये है कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बुल्गारिया गुलाब कि अधिक मांग है इस कारण एक किलोग्राम इत्र का मूल्य करीब आठ लाख रुपए है। बुल्गारिया गुलाब को इत्र बनाने वाली कंपनियां अच्छे दामों पर खरीदती हैं। चम्बा जिले में बुल्गारिया गुलाब के उत्पादन से यहाँ के लोगों की तकदीर बदल जाएगी। अब ग्रामीण कृषि और बागवानी के साथ पुष्प उत्पादन कर भी अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकेंगे। चुराह के सेईकोठी निवासी लोभीराम ने भी इस दिशा में प्रयास शुरू किए हैं। हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर से कलमें लेकर उन्होंने एक बीघा जमीन में नर्सरी में 25 हजार पौध तैयार की है। इसे बाद में एक हेक्टेयर जमीन में रोपित किया जाएगा। लोभी राम का कहना है कि हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर से बुल्गारिया गुलाब से कलमें लेकर एक बीघा जमीन में ट्रायल पर 25 हजार पौध तैयार की है। इसे एक हेक्टेयर में रोपित किया जाएगा। लोभी राम का कहना है कि महाराष्ट्र व दिल्ली से मांग आनी शुरू हो चुकी है इसके अलावा दुबई से भी ऑर्डर आया है। एक्सपोर्ट संबंधी लंबी औपचारिकताओं के चलते उसे फिलहाल टाल दिया गया है। बुल्गारिया गुलाब की विशेषता बुल्गारिया गुलाब की विशेषता है कि इसकी स्टिक, पौधे, फूल और ड्राई फ्लावर तक बिक जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो एक आम गुलाब के पौधे पर एक फूल तोड़ने पर दूसरा फूल आने में कई दिन लगते हैं, जबकि बुल्गारिया गुलाब के एक पौधे से फूल तोड़ने पर दूसरे ही दिन अन्य फूल अंकुरित होने शुरू हो जाते हैं। एक पौधा 100 से 150 फूल देता है। बुल्गारिया गुलाब में अन्य गुलाब कि किस्मों की अपेक्षा तेल और इत्र ज्यादा मात्रा में मिलता है। इससे गुलाब जल भी तैयार किया जाता है। इत्र, क्रीम और तेल बनाने में होता है उपयोग बुल्गारिया गुलाब से इत्र, क्रीम और तेल बनाया जाता है। इसकी मांग अरब के देशों, दुबई सहित भारत के विभिन्न राज्यों में अधिक है। बुल्गारिया गुलाब की पौध 70 से 80 रुपये में मिलती है। इसकी कलमें 15 से 20 रुपये में मिल जाती हैं। इसे नर्सरी, पी-बैग में तैयार किया जा सकता है। डॉ. राजीव चंद्रा, उद्यान विभाग उपनिदेशक उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजीव चंद्रा का कहना है कि प्रगतिशील पुष्प उत्पादक लोभी राम का ट्रायल सफल होने पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा और विभाग अपने स्तर पर भी पुष्प उत्पादकों के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित कर रहा है।
चुनाव आयोग ने बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद को मोगा में मतदान केंद्रों पर जाने से रोक दिया, जहां से उनकी बहन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। सोनू सूद पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। सोनू सूद एक पोलिंग बूथ के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान उनकी कार ज़ब्त की गई और उन्हें घर भेजा गया। अगर वह घर से बाहर निकलेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पंजाब में 117 विधानसभा सीटों के लिए सुबह आठ बजे से मतदान शुरू हो गया, जबकि उत्तर प्रदेश की 59 सीटों के लिए तीसरे चरण का मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगा। पंजाब में मुकाबला कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन और राज्य के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह के संगठन पंजाब लोक कांग्रेस के बीच है। दूसरी ओर, यूपी में करहल विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भाजपा के एसपी सिंह बघेल के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।
पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज है। इस बीच सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के तीन पार्षदों समेत कई नेताओं ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। अमृतसर कांग्रेस पार्टी के पार्षद प्रियंका शर्मा, मंदीप अहूजा और गुरजीत कौर ने आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में शामिल हुए। इससे पहले अमृतसर के मेयर करमजीत सिंह रिंटू आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस एक-दूसरे पर हमलावर हैं। केजरीवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि व्यापारियों का डर दूर करने के लिए हम इंस्पेक्टर राज, रेड राज खत्म करेंगे, ताकि कारोबार को सुरक्षित माहौल मिले। जैसे हमने दिल्ली के व्यापारियों का दिल जीता है, उसी तरह हम आपका भी दिल जीतेंगे। आप सरकार बनने के बाद यदि हमारा कोई विधायक या मंत्री किसी भी व्यापारी से शेयर मांगेगा, तो हम उस नेता के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई करेंगे। गौरतलब है कि सूबे की 117 सीटों पर 20 फरवरी को मतदान होगा। जबकि 10 मार्च को चुनाव परिणाम सामने आएंगे
अमेरिका ने बुधवार को कहा कि भारत नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने उम्मीद जताई कि अगर रूस यूक्रेन पर आक्रमण करता है, तो भारत अमेरिका का साथ देगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि चार देशों (क्वाड) के विदेश मंत्रियों के बीच हाल में ऑस्ट्रेलिया की राजधानी मेलबर्न में हुई बैठक में रूस और यूक्रेन के मुद्दे पर चर्चा हुई। भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्री इस बैठक में शामिल हुए थे। प्राइस ने कहा, ‘‘बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि इस मामले के राजनयिक-शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत है। क्वाड नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने का पक्षधर है।
भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 30,757 नए मामले सामने आए, जिसके बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर, 27,54,315 हो गई। इसके साथ ही बीमारी से ठीक होने की दर एक बार फिर 98 प्रतिशत से ज्यादा हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बृहस्पतिवार को अद्यतन आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में 541 और मरीजों की मौत हो गई जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 5,10,413 हो गई। देश में लगातार 11 दिनों तक संक्रमण के दैनिक मामले एक लाख से कम दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 3,32,918 रह गई है, जो कि संक्रमण के कुल मामलों का 0.78 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्तर पर कोविड-19 के मरीजों के ठीक होने की दर 98.03 प्रतिशत है। इस वर्ष पांच जनवरी को यह दर 98 प्रतिशत से अधिक 98.01 प्रतिशत दर्ज की गई थी। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 37,322 की गिरावट दर्ज की गई है। मंत्रालय के अनुसार, दैनिक संक्रमण दर 2.61 प्रतिशत है जबकि साप्ताहिक संक्रमण दर 3.04 प्रतिशत है। देश में संक्रमित होने के बाद अब तक 4,19,10,984 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि महामारी से मौत की दर 1.19 प्रतिशत दर्ज की गई है। अब तक कोविड रोधी टीके की 174.24 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं।
मगंलवार रात 11:45 बजे बप्पी दा इस दुनिया को छोड़ गए । 69 वर्ष में उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन के अगले दिन यानि बुधवार को बप्पी दा का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका, क्योंकि उनके बेटे बप्पा लहरी अमेरिका में थे और वह बुधवार देर रात मुंबई पहुंचे। बप्पी लहरी की बेटी रीमा की बाहों में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली थी। उस दौरान वह मुंबई के जुहू स्थित क्रिटी केयर हॉस्पिटल में थे। सोने से लदे रहते थे बप्पी लहरी बप्पी दा को पहली फिल्म सफल होने के बाद मां से सोने की चेन मिली थी. इसके बाद उनके गाने लगातार हिट होते गए तो उन्होंने सोने को अपने लिए लकी मान लिया. इसके बाद तो वह हमेशा ही गहनों से लदे रहने लग गए थे। पहली फिल्म के बाद मां से मिली थी चेन लहरी अपने म्यूजिक के साथ ही सोना-चांदी और गहनों के शौक के लिए भी खूब चर्चा बटोरते थे, उन्हें गहनों से इतना लगाव था कि पत्नी को मिलाकर उनके पास करीब 1 करोड़ की ज्वेलरी थी । अंतिम पोस्ट में भी गोल्ड का जिक्र महज 2 दिन पहले अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक पोस्ट किया था. अपने आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट में भी वे गोल्ड को याद कर रहे थे. उन्होंने अपनी एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, 'ओल्ड इज ऑल्वेज गोल्ड.' उस पुरानी तस्वीर में भी वे गहनों से लदे नजर आ रहे हैं. बप्पीलहरी जवानी के दिनों की उस तस्वीर में सनग्लासेज लगाए हुए हैं और गले में सोने की चेन है. हाथों में भी उन्होंने सोने के गहने पहने हुए हैं ।
अभिनेता अमिताभ बच्चन के अंगरक्षक के रूप में अगस्त 2021 तक काम करने वाले मुंबई पुलिस के एक सिपाही को सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सिपाही जितेंद्र शिंदे को निलंबित करने के आदेश मंगलवार को जारी किए गए और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। शिंदे इससे पहले मुंबई पुलिस की सुरक्षा शाखा में तैनात थे. जितेंद्र शिंदे ने 2015 से अगस्त 2021 तक अमिताभ बच्चन के अंगरक्षक के रूप में काम किया था। यह सामने आने के बाद कि शिंदे की वार्षिक कमाई 1.5 करोड़ रुपये तक हो गयी है, मुंबई के पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले ने शिंदे को वहां से हटा दिया था। अगस्त 2021 के बाद जितेंद्र शिंदे को मुंबई के डीबी मार पुलिस थाने में तैनात किया गया था। शिंदे के निलंबन का सही कारण पूछे जाने पर, मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सिपाही ने अपने वरिष्ठों को बताए बिना कम से कम चार बार दुबई और सिंगापुर की यात्रा की थी। सेवा नियमों के अनुसार, शिंदे को विदेश यात्रा करने के लिए अपने वरिष्ठों से अनुमति लेनी चाहिए थी।
पंकज सिंगटा। फर्स्ट वर्डिक्ट शहरी विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज भाजपा के वरिष्ठ नेता है और उन चंद नेताओं में शामिल है जिन्हें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव से पहले शिमला नगर निगम के चुनाव होने है जिन्हें सत्ता का सेमिफाइनल कहा जा रहा है। भारद्वाज शिमला शहरी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक है और ऐसे में जाहिर है शिमला नगर निगम का चुनाव उनके लिए निजी तौर पर बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है। इसके साथ ही इन दिनों प्रदेश में नए जिलों की मांग जोरों पर है और कहीं न कहीं सरकार में शामिल कई नेताओं का भी इस ओर एक सकारात्मक रवैया रहा है। ऐसे ही कई मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने सुरेश भारद्वाज से खास चर्चा की। भारद्वाज ने हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। वहीं कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह के साथ उनकी सियासी नोक झोंक के प्रश्न पर उन्हें अपने ही चिर परिचित अंदाज में अपनी बात रखी। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश .... सवाल : विधानसभा चुनाव से पहले शिमला नगर निगम चुनाव होने है। आप शिमला शहर से विधायक है और कहीं न कहीं निजी तौर पर भी आपके लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण रहने वाला है। उपचुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। किस तरह से शिमला नगर निगम चुनाव को लेकर तैयारियां है ? उत्तर : हिंदुस्तान में चुनाव आते रहते है। 2017 से भी हम अगर देखे तो हमने पहले नगर निगम का चुनाव लड़ा। उसके बाद हमने विधानसभा का चुनाव लड़ा, 2019 में लोकसभा के चुनाव हुए, उसके बाद 2019 में ही उन सीटों पर चुनाव हुए जो खाली हुई थी। इसके बाद 2021 में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निगम के चुनाव हुए। फिर उपचुनाव हुए। कुछ ही समय में अब शिमला नगर निगम का चुनाव है और उसके साथ ही विधानसभा का चुनाव आएगा। आजकल भी कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे है और हमारे बहुत सारे कार्यकर्त्ता उसमें व्यस्त है। कुल मिलाकर चुनाव एक सतत प्रक्रिया है और इसमें हार जीत चलती रहती है, तो इसमें कोई बहुत बड़ा मसला नहीं है। शिमला नगर निगम ने इस बार बहुत अच्छे काम किये है और मैं समझता हूँ कि उसके आधार पर भाजपा वहां पर विजय हासिल करेगी। सवाल :क्या इस बार भी नगर निगम के चुनाव पार्टी चिन्हों पर करवाए जायेंगे ? उत्तर : पहले नगर निगम चुनाव बिना पार्टी सिंबल के होते थे लेकिन पिछले नगर निगम के चुनाव पार्टी सिंबल पर हुए है। अब इस पर सरकार में विचार किया जाएगा कि ये पार्टी सिंबल पर हो या इन्हें फ्री सिंबल कर दिया जाये। अभी इस पर चर्चा नहीं हुई है। इस पर मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल से चर्चा की जाएगी और उसके बाद तय किया जाएगा। सवाल : शिमला नगर निगम में कुछ नए वार्डों बनाये गए है और कांग्रेस इसे लेकर विरोध भी जता रही है। क्या कहेंगे ? उत्तर : डीलिमिटेशन एक क़ानूनी प्रक्रिया है और जनसंख्या के अनुसार वार्ड बनते है। कांग्रेस के समय में 2017 में डीलिमिटेशन की गयी लेकिन वो एक तरफ़ा की गयी और इर्रेशनल थी। प्रशासन ने प्रयास किया है कि जो बहुत बड़े वार्ड है उनको दूसरों के बराबर किया जाए और जो छोटे वार्ड है उनकी जनसंख्या इधर उधर से डाल कर बड़ा किया जाए। ये सब प्रशासन ने किया है और उनका निर्णय है। सच कहूं तो अभी तक डीलिमिटेशन में क्या किया है वो मैंने विस्तार पूर्वक नहीं देखा है क्यूंकि जिस दिन इसका नोटिफिकेशन आया था मैं उस दिन से टूर पर हूँ। डीलिमिटेशन की प्रोसेस में अभी ओब्जेक्शन्स का टाइम है। यदि किसी को उसमे आपत्ति हो और वह आपत्ति दर्ज़ कर सकता है और प्रशासन उसे ठीक करेगा। सवाल : कांगड़ा के अंदर नए जिलों को बनाने की मांग जोरों पर उठ रही है और भाजपा का भी एक सकारात्मक रवैया इसकी ओर दिख रहा है। बीते दिनों तो एक फेक न्यूज़ भी वायरल हुई थी कि नए जिले बना दिए गए है। तो क्या नए जिले बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ? उत्तर : मैं मानता हूँ कि प्रशासनिक दृष्टि से जो छोटी इकाइयां है वो विकास कार्यों में लाभकारी रहती है। जयराम ठाकुर की सरकार में हमने बहुत स्थानों पर उपमंडल बनाये है। जिन्हें कांग्रेस की सरकारें अनदेखा करती थी, उन स्थानों पर हमने नए उपमंडल बनाए है। इसी तरह कई स्थानों पर तहसील यूनिट बनाए गए है। जिलों को लेकर भी विचार जब होगा, मन्त्रिमण्डल के समुख आएगा तो हम अपनी राय उसमे देंगे, लेकिन ये मुख्यमंत्री के ऊपर निर्भर करता है कि उनके आंकलन में जिला बनाना उपयोगी है या नहीं है। जब वह विषय को मन्त्रिमण्डल में लाएंगे तो हम सब विचार करेंगे पर अभी तक सीधे तौर पर यह विषय चर्चा के लिए नहीं आया है। फेक न्यूज़ मैंने भी देखी है, उसमे तो जिले बना दिए गए है, अब किसने बनाए है यह मुझे मालूम नहीं है। सवाल : 2022 विधानसभा के चुनाव बहुत नज़दीक है और भाजपा मिशन रिपीट को लेकर बात कर रही है और कांग्रेस कह रही है कि वो 2022 में सत्ता में फिर वापसी करेगी। विधानसभा चुनाव को किस तरह से देखते है? उत्तर : देखिये अगर आप हिंदुस्तान की बात करे तो आज कांग्रेस बिलकुल हाशिये पर है और आपको कांग्रेस मुक्त भारत बनता दिखाई दे रहा होगा। जो अभी 5 राज्यों के चुनाव भी हो रहे है उसमें उत्तर प्रदेश जैसा बहुत बड़ा राज्य है, वहां पर कांग्रेस कभी थी, अब तो उसकी गिनती ही नहीं होती है। तो कांग्रेस का जो भविष्य है वो बहुत सुखद नहीं है। केवल मात्र एक माता है, एक बेटी है, एक बेटा है उसके इर्दगिर्द सारी कांग्रेस चलती है। हिमाचल प्रदेश में भी यदि देखा जाए तो इनके पास न कोई पॉलिसी है ना कोई विज़न है और न कोई लीडरशिप है। तो ऐसे में कांग्रेस का भविष्य बहुत ज्यादा नहीं है। हम आंकलन केवल एकाध चुनाव के जीतने हारने पर करेंगे तो उससे पूरी विधानसभा के चुनाव के रुख का अंदाज़ा नहीं लगा सकते है। इस बार जयराम ठाकुर की सरकार ने गरीब हितेषी सरकार बन कर दिखाया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस बार रिपीट करेगी और हिमाचल प्रदेश में इतिहास बनेगा, कांग्रेस कहीं देखने को नहीं मिलेगी। सवाल : आप वरिष्ठ नेता है और मुख्यमंत्री के करीबी भी माने जाते है। प्रदेश भर में पुरानी पेंशन का मुद्दा गूंज रहा है जिसको लेकर कर्मचारी संघर्षरत है। इन दिनों डॉक्टर्स भी हड़ताल कर रहे है, और भी कई कर्मचारी मसले है। आपको नहीं लगता कि विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ सकता है ? उत्तर : जो ऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर होता है, जो सरकार से वेतनमान प्राप्त करता है उनमे अपने वेतन विसंगतियों को लेकर इस प्रकार की नाराज़गी और प्रसन्नता चलती रहती है। हिमाचल प्रदेश ऐसा राज्य है जहाँ पर पंजाब वेतनमान प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के बावजूद भी जारी किया गया है। आगे भी जो विसंगतियां है उनको भी दूर किया जा रहा है। अब आपको इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि 2015 में जब स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की सरकार थी, तब पुलिस कर्मचारियों के साथ एक अन्याय किया था, उनको 8 साल तक इनिशियल स्टेज पर रखा गया बल्कि जो उनके साथ के कर्मचारी थे उनको 2 साल में पूरा हो जाता था। उस अन्याय को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दूर किया है। इसी प्रकार से और भी बहुत सारे ऐसे मसले है जिनको ये सरकार दूर कर रही है। हिमाचल प्रदेश का कर्मचारी जानता है कि कौन सी सरकार उनके हित में है। जयराम सरकार कर्मचारियों की हित चिंतक सरकार है इसलिए कर्मचारी मांग भी इसी सरकार से करते है। जयराम ठाकुर की सरकार ने पैट, पेरा, पीटीए इन सबको नियमित कर दिया है और बाकी जो हमारे आउटसोर्स के कर्मचारी है उनके लिए कैबिनेट सब कमेटी बनाई है। उसके लिए विचार विमर्श हो रहा है कि किस प्रकार से उनको राहत दी जाएगी। बाकि भी जो कर्मचारियों के मसले है समय-समय पर वह उठते भी रहते है और उनका निदान भी होता रहता है। मैं समझता हूँ कि ये कोई ऐसे मसले नहीं है कि जिन पर हिमाचल प्रदेश की सरकार के ऊपर असर पड़ेगा। जयराम सरकार कर्मचारियों के हित में हरसंभव कदम उठा रही है। सवाल : पिछले सत्र में सवर्ण आयोग की मांग रखी गयी थी और जमकर हंगामा हुआ था। सरकार ने मांग तो मान ली थी लेकिन फिलहाल क्या स्थिति है सवर्ण आयोग को लेकर ? सवर्ण आयोग का यदि गठन नहीं होता है तो बजट सत्र के दौरान घेराव की चेतावनी भी दी गई थी। उत्तर : देखिये हिमाचल सरकार ने उस दौरान मांग में ली थी लेकिन यह तय नही है कि आयोग का नाम क्या होगा। जरूरी नही है कि उसका नाम सवर्ण आयोग ही रखा जाए। उसका नाम कुछ भी हो सकता है। जितना मेरी जानकारी है धर्मशाला में ही सेशन के दौरान इस हेतु नोटिफिक्शन जारी कर दिया गया था। बाकि प्रक्रिया मुख्यमंत्री के संज्ञान में है, वो इस पर उचित समय पर निर्णय लेंगे और उसके अनुसार काम होगा। सवाल : आजकल सोशल मीडिया पर आपकी और विक्रमादित्य की नोंक झोंक या कह लीजिये वार पलटवार लगातार चल रहा है, उसको लेकर क्या कहेंगे ? उत्तर : मेरा विक्रमादित्य के साथ नोंक झोंक का प्रश्न ही पैदा नहीं होता है। कोई वार या पलटवार नहीं है। विक्रमादित्य अपने शिमला ग्रामीण से विधायक है, वह अपनी बात कर सकते है। शायद पार्टी में वो और ज्यादा आगे बढ़ने की कोशिश करते है तो शायद इस लिए बहुत सारे मसलों पर वो बात करते है। हमारी उनके साथ कोई बराबरी नहीं है क्यूंकि वो राजा है, अब आजकल राजा तो रहते नहीं है लेकिन फिर भी राजा बने है। इसलिए हमारी उनके साथ किसी प्रकार की कोई बराबरी नहीं है। मैं शिमला शहर से विधायक हूँ वो शिमला ग्रामीण में अपने पिता की सीट खाली करके वहां से विधायक बने है। तो वो अपना काम करते है और मैं अपना काम करता हूँ, तो वार - पलटवार का कोई सवाल पैदा नहीं होता।
फर्स्ट वर्डिक्ट । धर्मशाला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता विप्लव ठाकुर हर मसले पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती है। पूर्व में मंत्री रही विप्लव राज्यसभा सांसद भी रही है और अपने लंबे राजनीतिक जीवन में एक सच्चे सिपाही की तरह कांग्रेस के लिए डटी रही है। इन दोनों विप्लव ठाकुर कांग्रेस की डिसिप्लिनरी कमिटी की अध्यक्ष भी है। कांग्रेस में दिख रही गुटबाजी, भाजपा का मिशन रिपीट का दावा, और विधानसभा चुनाव में उनकी दावेदारी को लेकर फर्स्ट वर्डिक्ट ने विप्लव ठाकुर से विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश .... सवाल : धर्मशाला में हाल ही में कांग्रेस नेताओं के बीच हुई आपसी नोक-झोंक के कारण अनुशासनहीनता देखने को मिली है, इसे लेकर आप क्या कहेंगी ? आप पर तो पूरे प्रदेश में पार्टी को अनुशासन में रखने का दायित्व है। उत्तर : यह कांग्रेस नेताओं की नोक-झोंक नहीं है बल्कि दो 2 भाइयों की आपसी मतभेद है। मेरा मानना है कि इस सम्बन्ध में कोई भी बात कहना अनुचित है। इनके झगड़े का कारण कम्युनिकेशन गैप या आपस में मन मुटाव हो सकता है, जो बाहर आ गया हो। इस पूरे परिदृश्य में पार्टी के खिलाफ दोनों गुटों में से कोई नहीं बोला और जब तक पार्टी के खिलाफ न बोले या पार्टी की पॉलिसी की निंदा न करे तब तक ये अनुशानहीनता में नहीं आता। मेरा मानना है कि किसी के निजी जीवन के बारे में टिप्पणी करना गलत होगा। सवाल - इस पूरे प्रकरण को देख कर आपको ऐसा नहीं लगता कि धर्मशाला में कांग्रेस दो गुटों में बंट गयी है। 2017 और 2019 के चुनाव में भी पार्टी इसका खामियाजा भुगत चुकी है, क्या कहेंगी आप ? उत्तर : मैं अगर बात करूं 2019 उपचुनाव की तो मेरा मानना यह है कि उस वक़्त जो सरकार सत्ता में होती है उसका प्रभाव जनता पर होता है और जनता उसके साथ ही चली जाती है। धर्मशाला की जनता को मालूम था कि अभी इनका समय है और हम लोगों को काम करवाने है। यदि विपक्ष का विधायक ले भी आए तो वह कुछ ज्यादा कर नहीं पाएगा। लोग विकास को प्राथमिकता देते है और उसी के मुताबिक वोट डालते है, खास कर उपचुनाव में ऐसा ही होता है। जहाँ तक गुटों का सवाल है तो ये बताइये कि कौन सी पार्टियों में गुटबाजी नहीं है, आप भाजपा में ही देख लीजिये, सांसद किशन कपूर और वर्तमान विधायक नैहरिया के बीच मतभेद दिखता है। ये हर पार्टी में होता है, असल बात तब सामने आती है जब चुनाव वर्ष नजदीक होते है। गुटबाज़ी की यदि बात करें तो अलग-अलग राय हो सकती है लेकिन विचारधारा से सब बंधे होते है, उसे मैं गुटबाजी नहीं कहती। अब परिवार में भी मतभेद हो जाते है, इसे गुटबाजी नहीं कहते। मैं इतना ही कहूंगी कि कांग्रेस में मनभेद नहीं है। सवाल : प्रदेश सरकार दावा कर रही है कि इन चार सालों में अथक विकास कार्य हुए है, भाजपा सरकार की नीतियों के बारे में आप क्या कहेंगी। उत्तर : भाजपा सरकार की कोई नीतियां ही नहीं है। मुझे अफ़सोस होता है कि प्रधानमंत्री जिस तरह से बोल रहे है, जिस तरह से वह बात कर रहे है, वो कोई विचारधारा की बात नहीं है, कोई विकास की बात नहीं है। वो केवल कटाक्ष करना जानते है। प्रदेश की बात की जाये तो विकास के दावे करने और घोषणाएं करने मात्र से विकास नहीं होते, इसके लिए धरातल पर काम करना पड़ता है। भाजपा का एक ही मकसद है और इनके लिए राजनीति का एक ही पर्याय है, घोषणाएं कीजिये और मंच से वाहवाही लूटिए। इनकी कोई भी नीति नहीं है। महंगाई चरम पर है , युवा बेरोजगार है और किसान भी परेशान है। सवाल : ओपीएस बहाली का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है। इसी बीच भाजपा लगातार कह रही है कि प्रदेश में नई पेंशन कांग्रेस सरकार के समय लागू हुई। इसे लेकर क्या कहेगी ? उत्तर : देखिये भाजपा पार्टी की एक नीति है कि जिन मसलों का हल करने में भाजपा के हाथ पैर फूल जाते है, उसका सारा ठीकरा वो कांग्रेस पर फोड़ते है। ये इनकी पुरानी और अहम नीति है। ये हर चीज के लिए कांग्रेस सरकार को कह देते है कि अगर ये खराब हो गया तो नेहरू जी कर गए, बारिश नहीं आ रही तो नेहरू का कसूर है, बाढ़ आ गई तब नेहरू का कसूर है। सात साल से तो भाजपा सत्ता में है, उसी के साथ वाजपेयी भी पीएम रहे है, हिमाचल में भी भाजपा की सरकार काफी वर्ष रही है। जरा इनसे पूछिए कि इन्होंने क्या किया है, आप अपने दादा को ही कोसते रहोगे और पोता ये कहेगा कि मैं अगर कुछ नहीं कर पाया तो ये दादा का कसूर है। यह तो बात नहीं बनती है, आप अपना बताइये कि आपका क्या रिकॉर्ड है, आपने क्या किया है, आपकी क्या नीति है। अगर कांग्रेस सरकार की तरफ से गलत हुआ है तो आप उसे सॉल्व कीजिये, आप इसका समाधान कीजिये। किसलिए लोगों ने आपको चुना है। आपको दो टर्म्स दे दी और बहुमत दिया। इसके बावजूद भी आप कांग्रेस को ही कोसते हो तो इसका मतलब है कि कमी आप में है। अब इसी कमी को दुरुस्त तो भाजपा को स्वयं करना होगा, थोड़ा कार्यशैली में सुधार कीजिये और कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ना छोड़ दीजिये। सवाल : उपचुनाव में कांग्रेस चारों सीटों पर काबिज हुई लेकिन भाजपा लगातार कह रही है कांग्रेस की जीत का कारण सहानुभूति फैक्टर है, इस बात को लेकर आपकी क्या राय है। उत्तर : देखिये सहानुभूति का फैक्टर कोई नहीं है, आप मंडी सीट हार रहे है, वहां से आप मुख्यमंत्री है, महेंद्र सिंह एक ताकतवर मंत्री है, आपने सारी सीटें विधायक की वहां जीती है, उसके बावजूद हार रहे है, इसकी क्या वजह है। कोई तो कारण है, अगर सहानुभूति की ही बात होती तो फिर तो हम लाखों सीटें जीत चुके होते। लोगों के दिलों में भाजपा के लिए सब कुछ खत्म हो चुका है क्यूंकि जितना ये झूठ बोलते है, जितनी ये बाते करते है वो ग्राउंड पर तो है ही नहीं। लोग इस बात को समझने लग गए है कि भाजपा की कथनी और करनी के बीच कोई मेल नहीं है। भाषण देने के लिए आप तैयार है और मंडी में सबसे बड़ी बात है कि, महेंद्र देख रहे है और जयराम अपना देख रहे है, बाकि सारा सफा है। सवाल : कांगड़ा में नए जिले बनाने की मांग लगातार उठ रही है और कहीं न कहीं भाजपा का एक सकारात्मक रवैया भी इस ओर देखने को मिल रहा है। आप कैसे देखती है ? उत्तर : सकारात्मक रवैया नहीं है, ये केवल राजनीतिक स्टंट है, चार साढ़े चार साल ये क्या करते रहे। शुरू में इन्होंने जिले क्यों नहीं बना दिए। भाजपा के लोग चुनाव के नजदीक आते ही जनता के हर मुद्दे का जवाब हाँ में हाँ कर के देते है। प्रदेश की भोलीभाली जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा, चुनाव के बाद इनको यह नहीं पता होता कि किसने इन्हें वोट दिया। सवाल : यदि भाजपा चुनाव से पहले ये जिले बना लेती है तो आपको नहीं लगता कांग्रेस को इसका नुक्सान हो सकता है ? उत्तर : नहीं, नुक्सान कैसे होगा। इतनी ज्यादा तहसीलें वीरभद्र सिंह के समय पर खुली है, इतने एसडीएम दफ्तर खुले है, इतने कॉलेज खुले थे , लोगों ने क्यों नहीं वोट दिया हमें। कांगड़ा में ही मेरी जानकारी अनुसार बहुत ज्यादा कालेज खोले गए, तहसीलें खोली गई, एसडीएम के दफ्तर खोले गए और विकास के इतने कार्य किये गए। जब चुनाव आता है तो जनता के मुद्दे और होते है। आज सबसे बड़े मुद्दे है बेरोज़गारी, महंगाई, सड़कों की बुरी हालत, इस ओर जनता न देखे, न सोचे, इसलिए इन्होंने जिलों का शगूफा छेड़ दिया। अगर जिले बनाने थे तो 4 साल क्या सोचते रहे। क्यों नहीं बना दिए जिले, चुनाव के समय पर ही भाजपा को जिले बनाने का ख्याल आता है। आपका शिमला भी इतना बड़ा है, क्यों वहां नया जिला नहीं बना रहे। मंडी में 10 विधानसभा है, कांगड़ा में 15 है , क्यों मंडी में नया जिला नहीं बना रहे। ये तो हम कांगड़ा वालों की नालायकी है कि हम एकत्र नहीं होते, नहीं तो आज मुख्यमंत्री कौन होता और कौन नहीं होता, यह सब हमारे हाथ में होता। सवाल : 2022 का चुनाव नज़दीक है, क्या तैयारियां है और जरूर जानना चाहेंगे कि क्या आप 2022 में चुनाव लड़ेगी ? उत्तर : मेरा तो कोई विचार नहीं है चुनाव लड़ने का। पिछली बार भी मैं नहीं लड़ना चाहती थी, हाईकमान ने कहा तो मैंने चुनाव लड़ा लेकिन अभी मेरा कोई विचार नहीं है। वहीं 2022 को लेकर हमारी ब्लॉक स्तर पर मेम्बरशिप हो रही है, हर कोई ब्लॉक में जा रहा है। जो विधायक है वो अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में जा रहे है। भाजपा की जो कमियां है उनको उभारा जा रहा है। युवा कांग्रेस अलग लगी हुई है, महिला कांग्रेस अलग है, सेवा दल अलग है, हर कांग्रेस कार्यकर्ता इसके लिए कार्य कर रहा है और जो हमारे सीएलपी लीडर है वो भी काम कर रहे है। प्रदेश अध्यक्ष राठौर भी पूरे हिमाचल का दौरा कर रहे है, काम कर रहे है। हर कोई कांग्रेस के लिए कार्य कर रहा है। अगर हम ये 4 उपचुनाव जीते है तो सहानुभूति हो सिर्फ वजह नहीं है, कांग्रेस में जो एकता थी, जो कांग्रेस ने एकता दिखाई है, इसलिए हम 4 सीटें जीते है। इस वर्ष होने वाले चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी एकता का प्रमाण नतीजों से देगी और मुझे पूरी उम्मीद है जनता का साथ कांग्रेस को मिलेगा। सवाल : विप्लव जी लेकिन भाजपा तो मिशन रिपीट का दावा कर रही है और लगातार कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पास न दिशा है न ही कोई मुख्य चेहरा। उत्तर : मुझे एक नया प्रोजेक्ट बता दीजिये जो ये लाये हो। कोई भी नया काम नहीं किया है, सड़कों का, नेशनल हाईवे का, गडकरी घोषणाएं कर के गए थे, कोई बना? फोरलेन की बात चल रही है, कहाँ है वो फोरलेन। जो लोग बेचारे बेघर हो रहे है उनको अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। आप धर्मशाला में ही ले लीजिए, स्मार्ट सिटी की बात कर गए, धरातल पर क्या किया ? जो पहले का बजट था वही लगा है। पालमपुर वाले रो रहे है कि निगम तो बना दी है लेकिन न तो स्टाफ है न बजट है। क्रिएट करने के लिए आपको इंफ्रास्ट्रक्चर तो देना चाहिए। टनल की बात करते है, टनल तो कांग्रेस के समय पर ही शुरू हो गई थी। उसका डीपीआर बन गई थी, सब कुछ बन गया था। हम इनकी तरह तो नहीं घोषणा कर देते कि बुलेट ट्रैन आ रही है, वन्दे भारत ट्रेनें आ रही है, हम ये दे रहे है वो दें रहें है। एक एम्स तक तो बिलासपुर का बना नहीं है इनसे समय पर। कांग्रेस पार्टी संगठित है और दमदार तरीके से चुनाव भी लड़ेंगे। इन लोगों को मेरी नसीहत है कि मुंगेरी लाल के हसीं सपने देखना बंद कीजिये और देश प्रदेश में जो आपकी बदहाली की स्थिति है उस वास्तविकता को समझिये और खुद को सक्षम कीजिये। सवाल : देहरा से 2017 में आपने चुनाव लड़ा था और देहरा में कांग्रेस अध्यक्ष ने हाल ही में नए साल का कैलेंडर जारी किया था जो काफी विवादों में रहा था, उन्होंने कैलेंडर में कांग्रेस को देश की माँ कहा था। क्या इसको लेकर कहेंगी ? उत्तर : ठीक किया है, अगर वो करते है तो ये भी ठीक है। वो ठीक कर रहा है, ब्लॉक प्रधान ने निजी तौर पर उसे बनाया है। माँ ही है, आज़ादी की आप लड़ाई से देख लीजिये, अगर आज इस देश को आजादी मिली है, इस देश की ये तस्वीर बनी है तो ये कांग्रेस पार्टी ने ही दी है। कांग्रेस पार्टी ने इस देश को माँ की तरह सींचा है। चाहे नेहरू थे, पटेल थे, मौलाना आज़ाद थे, सभी कांग्रेसी थे। माँ का काम होता है, वो बच्चे को सींचती है, बच्चे का भविष्य बनाती है, बच्चे को संस्कार देती है, कांग्रेस ने यही किया है। मैं इसको बिलकुल सही मान रही हूँ। मुझे बता दीजिए किस तरह से नहीं सिचा, आज जो 70 साल में आप सारा इंफ्रास्ट्रक्चर देख लीजिए कि क्या हमारे बुज़ुर्गों का था और आज क्या है। गाड़ियां देख लीजिए, कारें देख लीजिए, क्या ये सात साल में मोदी ले कर आये है। कांग्रेस ने आजादी की लड़ाइयां भी लड़ी, विकास भी किया, टेक्नोलॉजी भी लाई। आज जितने भी ये चंद्रयान जा रहे है या बाकि सब है उसकी फाउंडेशन किसने रखी, भामा को कौन लाया, सारा भाई को कौन लाया, तो ये माँ का ही काम होता है।
- पदनाम बदलने की मांग भी कर रहा हिमाचल प्रदेश अस्पताल फार्मासिस्ट संघ हिमाचल प्रदेश अस्पताल फार्मासिस्ट संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि फार्मासिस्टों का 2 साल का प्रोबेशन समय समाप्त किया जाए। फार्मासिस्ट लगभग साढ़े 9 वर्ष का अनुबंध काल पूरा कर नियमित हुए हैं। इसके अलावा इन फार्मासिस्टों को सितंबर 2012 से 16290 बेसिक के हिसाब से वेतन दिया जाना चाहिए। वहीं पंजाब की तर्ज पर पे फिक्सेशन के लिए तीनो गुणांक भी दिए जाए ताकि रिकवरी से बचा जा सके। इनकी मांग है कि इनका पदनाम भी फार्मासिस्ट से फार्मेसी अफसर और चीफ फार्मासिस्ट से चीफ फार्मेसी अफसर किया जाए। संघ के अध्यक्ष चमन ठाकुर व महासचिव मनोज शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में सितंबर 2002 में अनुबंध आधार पर 71 फार्मासिस्टों की भर्ती हुई थी जो कि अब 50 ही रह गए हैं। इनकी भर्ती हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड हमीरपुर से 4550 रुपये प्रतिमाह वेतन पर हुई थी। लगभग साढ़े नौ साल बाद जनवरी 2012 में नियमित हुए। इनको 11470 बेसिक पर नियमित किया गया। सितंबर 2012 में पंजाब की तर्ज पर वेतन आयोग की सिफारिशों का हिमाचल प्रदेश में पुन: निर्धारण किया गया था। इसमें इनिशियल वेतन पंजाब की तर्ज पर 16290 न देकर 14500 रुपये दो साल के राइडर के बाद मिला। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने जो पंजाब पे कमीशन के हिसाब से अधिसूचना जारी की है, उस तर्ज पर दोनों गुणांकों 2.25 और 2.59 से इन फार्मासिस्टों को लगभग दो लाख की रिकवरी देनी पड़ जाएगी और यदि 15 फीसदी वेतन वृद्धि का विकल्प भी होता है तब भी इस बेसिक के हिसाब से रिकवरी देनी होगी। संघ ने सरकार से मांग की है कि इनकी मांगों का निवारण जल्द से जल्द किया जाए।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल प्रदेश समस्त विभाग लिपिक वर्ग कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लिपिक वर्ग को हो रहे सीधे-सीधे नुकसान व परेशानियों को देखते हुए जल्द इस वर्ग के वेतन निर्धारण बारे संशोधन की मांग की है। संगठन के राज्याध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा व महासचिव एल डी चौहान ने संयुक्त ब्यान में कहा कि सचिवालय, न्यायालय सहित हर विभाग की लिपिक वो श्रेणी है जो एक प्रशासनिक अधिकारी, नेता, शिक्षक से लेकर हर छोटी- बड़ी सभी श्रेणियों का रिकॉर्ड, स्थापना सहित लेखा-जोखा रखती है। बावजूद इसके पिछले वेतन आयोगों की सिफारिशों से लेकर वर्तमान तक इस श्रेणी को वेतन लाभ के मामले में चतुर्थ श्रेणी से भी नीचे लाया जा रहा है ,जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। बात चाहे न्यायालय के केस रिप्लाई की हो, कैबिनेट के लिए एजेंडा तैयारी की हो, किसी भी श्रेणी की भर्ती या पदोन्नति की हो, विधानसभा सत्रों की हो या मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री की विशेष स्पीच की तैयारी की हो, एक लिपिक वर्ग ही पूरी फ़ाइल तैयार करके पटल तक पहुंचाता है लेकिन अफसोस इससे सम्बंधित संगठनों के कर्मचारी नेताओं की लापरवाही व सुस्त कार्यप्रणाली की वजह से आज ये श्रेणी बैकफुट पर है। जबकि दूसरी श्रेणियों के कर्मचारी संगठनों ने अपनी एकता के दम पर पूर्व में सरकारों को वोटबैंक के दबाव में लेकर अपने वेतनों में लिपिक वर्ग से कहीं ऊपर की बढ़ोतरी करवाई है। चौहान ने कहा कि दो वर्ष पूर्व इस श्रेणी के उत्थान हेतु संगठन का गठन किया गया था तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस संगठन को तवज्जो दी थी और इस संगठन द्वारा रखी गयी मांग लिपिक से वरिष्ठ सहायक पदोन्नति हेतु कार्यकाल 10 से 7 साल करने को पूरा किया था। वर्तमान में लिपिक वर्ग के प्रोबेशन पीरियड सहित अन्य मसलों पर वेतन आयोग की सिफारिशों से हो रहे नुकसान बारे संगठन द्वारा मांग पत्र मुख्यमंत्री व अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त को दिया जा चुका है और आवश्यक संशोधन बारे आश्वस्त किया गया है। चौहान ने कहा कि उनसे सम्बंधित हर संगठन सदैव सरकार के साथ खड़ा रहा है, और दूसरे संगठनों की तरह छोटी-छोटी बातों पर विरोध की बात नहीं करता है। प्रदेश सरकार जल्द वेतन आयोग में लिपिक वर्ग को हो रहे घाटे पर आवश्यक संशोधन कर अधिसूचित करें, यदि सरकार फिर भी हर विभाग की इस महत्वपूर्ण श्रेणी को अनदेखा करती है तो मजबूरन संगठन को हजारों लिपिकों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध करना पड़ेगा, जिसकी लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट. सोलन हिमाचल प्रदेश को चार नए जिलों की सौगात मिल चुकी है, बीते दिनों ये 'फेक न्यूज़' सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। कोई इसे गलत करार देता रहा तो किसी ने इसे अंदर की खबर मान लिया। बहरहाल न सरकार ने कोई ऐसा ऐलान किया है और न इस सम्बन्ध में चर्चा की कोई पुष्ट खबर सामने आई, पर सुगबुगाहट जरूर है कि चुनावी साल में सरकार नए जिलों के गठन को हरी झंडी दे सकती है। हालांकि ये निर्णय मिशन रिपीट में कितना कारगर सिद्ध होता है इसे लेकर माहिरों की राय बंटी हुई है। कुछ मानते है कि यदि ऐसा हुआ तो ये मिशन रिपीट में भाजपा का मास्टर स्ट्रोक सिद्ध हो सकता है। वहीं कुछ इसे दोधारी तलवार मान रहे है। दरअसल माजरा ये है कि इस वक्त प्रदेश में करीब आठ नए जिले बनाने की मांग है। अकेले जिला कांगड़ा में नूरपुर, पालमपुर और देहरा को नया जिला बनाने की मांग उठ रही है। जिला मंडी से करसोग और सुंदरनगर, जिला सोलन से बीबीएन और जिला शिमला से रोहड़ू व रामपुर को अलग जिला बनाने की मांग उठ रही है। बहरहाल इतना भी तय हैं कि सियासी ठाठ के लिए आठ नए जिले बनाना मुमकिन नहीं हैं और न ही सरकार किसी को नाराज करने की स्थिति में हैं। सो ऐसे में यदि सिर्फ कुछ नए जिले बनते है तो मुमकिन है बात बनेगी कम और बिगड़ेगी ज्यादा। यूँ तो चुनावी मौसम में नए जिलों का जिन्न अक्सर बाहर निकल आता है, पर 1972 के बाद प्रदेश में कोई नया जिला नहीं बना है। यानी पचास वर्ष में किसी नए जिले का गठन नहीं हुआ, जबकि विशेषकर बीते दो दशक से कई नए जिलों के गठन की मांग जोर शोर से उठी है। हाल ही में हुए उपचुनावों के दौरान भी ये मुद्दा खूब गूंजा था। खबरें तो ये तक थी कि हिमाचल में नए जिलों के गठन के लिए भाजपा संगठन व सरकार में अंदर खाते मंथन हो रहा है। हालांकि अंत में ये सिर्फ और सिर्फ चुनावी शगूफा ही साबित हुआ। पॉलिटिकल माइलेज के लिए यदि वर्तमान सरकार नए जिलों के गठन की मांग को मान भी लेती है तो भी असल सवाल ये है कि क्या प्रदेश सरकार नए जिलों के वित्तीय व्यय का प्रबंधन करने में सक्षम है ? प्रदेश पर लगातार बढ़ता कर्ज का बोझ किसी से छिपा नहीं है, ऐसे में नए जिलों के गठन का खर्च कहाँ से आएगा ? संभवतः यदि ऐसा हुआ तो नया कर्ज लेना ही सरकार के सामने एकमात्र विकल्प होगा। कांगड़ा : या तो तीन या कोई नहीं ! वर्ष 1985 से अब तक प्रदेश में उसी की सरकार बनी है जिसने कांगड़ा फतेह किया है। 15 विधानसभा सीटों वाला ये जिला ही हिमाचल में सत्ता की राह प्रशस्त करता है। अब इसी कांगड़ा में तीन नए जिले बनाने की मांग उठा रही है। यहां नूरपुर, पालमपुर और देहरा को जिला घोषित करने की मांग हो रही है। नूरपुर विधायक व वन मंत्री राकेश पठानिया जहां नूरपुर को जिला घोषित करवाने के पक्ष में है, तो वहीं पालमपुर विधायक आशीष बुटेल भी लगातार पालमपुर को जिला घोषित करने की मांग कर रहे है। वहीं धरातल स्थिति ये है कि देहरा का दावा भी नकारा नहीं जा सकता। कांगड़ा के विभाजन में सरकार के समक्ष दो चुनौतियां है। एक, अगर कांगड़ा का विभाजन होता है तो निसंदेह इसका सियासी दम भी कम होगा और इसी के चलते एक वर्ग इसके विरोध में है और इस तबके का गुस्सा सरकार को भोगना पड़ सकता है। दूसरा, सरकार या तो तीनों नए जिले बनाये अन्यथा जो भी कृपा से वंचित रहेगा उस क्षेत्र की कोप दृष्टि निसंदेह सरकार पर बनी रहेगी। ऐसे में सियासी नुक्सान तय होगा। माहिर मानते हैं कि या तो जयराम सरकार तीन नए जिले बनाये या फिर चुपचाप इस मुद्दे पर बचती रहे। " यदि नए जिलों का गठन होता हैं काँगड़ा का विभाजन होगा और क्षेत्रफल के साथ -साथ वोटर्स भी बटेंगे। यहां कुछ को नए जिले की ख़ुशी होगी तो कुछ को जिले के छोटा हो जाने का मलाल भी होगा। ज़ाहिर है ये दोधारी तलवार है। ध्यान इस बात का भी रखना ज़रूरी है की यहां मांग तीन नए जिलों की है। वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए यदि सरकार एक या दो नए जिले बना भी दे तो शेष की नाराज़गी भी सरकार को झेलनी पड़ सकती है। " करसोग से मंडी और रामपुर से शिमला बहुत दूर : मंडी जिले के करसोग और सुंदरनगर क्षेत्र के लोग भी कठिन भौगौलिक परिस्थितियों का तर्क देकर इन दोनों क्षेत्रों को जिला बनाने की मांग कर रहे है। विशेषकर करसोग की जनता का कहना है कि करसोग क्षेत्र जिला हेडक्वार्टर मंडी से कुल 120 किलोमीटर दूर है। छोटे बड़े कार्यों के लिए क्षेत्रवासियों को 120 किलोमीटर का लम्बा सफर तय करना पड़ता है। वहीं सुंदरनगर से मंडी की दूरी तो कम है मगर तर्क है की सुंदरनगर एकमात्र ऐसा स्थान है, जिसे जिला बनाने की सूरत में सरकार पर अधिक आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा। आज़ादी के बाद हिमाचल प्रदेश की लगभग सभी बड़ी रियासतों को जिलों का दर्जा मिला लेकिन केवल पूर्व की सुकेत रियासत जो वर्तमान में सुंदरनगर के नाम से जानी जाती है, जिला बनने से रह गई थी। ये भी एक कारण है की सुकेत रियासत के लोग इसे जिला बनाने की मांग कर रहे है। इसी तरह जिला शिमला के रोहड़ू व रामपुर को भी जिला बनाने की मांग है। यहाँ महासू के रूप में एक नए जिले की मांग भी हैं ताकि ऊपरी क्षेत्रों को इस नए जिले में शामिल किया जा सकते। रोहड़ू व रामपुर सहित ऊपरी शिमला के कई क्षेत्र जिला मुख्यालय से काफी दूर है। ऐसे में यदि एक नया जिला भी बनता है तो ऊपरी शिमला के लोगों को सहूलियत होगी। बीबीएन को लेकर भी उठती रही हैं मांग : एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब और प्रदेश के सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया बद्दी -बरोटीवाला - नालागढ़ यूँ तो जिला सोलन के अधीन आता हैं लेकिन यहाँ का रहन -सहन, बोली -भाषा, खान -पान सबकुछ जिला के अन्य क्षेत्रों से अलग हैं। प्रदेश के राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान ये ही क्षेत्र देता हैं। सोलन के पांच में से दो विधानसभा क्षेत्र बीबीएन में आते हैं, दून और नालागढ़। इस क्षेत्र को अलग जिला बनाने की मांग काफी वक्त से उठती रही हैं। हालांकि इस मांग ने कभी आंदोलन का रूप नहीं लिया लेकिन बीच -बीच में इसे लेकर सुगबुगाहट जरूर होती हैं। ऐसे में यदि चुनावी समां में प्रदेश में नए जिलों का जिन्न बाहर निकलता हैं तो बीबीएन में भी ये चुनावी मुद्दा बन सकता हैं।
पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की रैलियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रदेश कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को अपना भाई बताया। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि भगवंत मान 12वीं पास है, उसमें भी उसने 3 साल लगाए हैं। कोई क्वालिफिकेशन भी तो चाहिए। कल को कितनी फाइलें देखनी हैं। केजरीवाल हरियाणा से हैं और दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं और हमारा हरियाणा से पानी का विवाद है। उन्होंने कहा कि साल 2002 से मैंने कुछ प्रॉपर्टी का काम किया था और 2006 में 10 एकड़ बना लिया था। मैंने तीन चुनाव लड़े हैं और सब बेच दिया है। अब मेरे पास एक एकड़ भी नहीं है। हर चुनाव में प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी है, यह लोग हर चुनाव में बनाते हैं और मुझे बेचना पड़ा है। मैंने तीन चुनाव विधानसभा के लड़े हैं, तीन एमसी के लडे हैं, स्कूल और कॉलेज में चुनाव लड़ा है। मेरे पास प्रॉपर्टी कम हुई है ज्यादा नहीं हुई है। गोलकीपर रहे हैं चन्नी हिन्दी न्यूज चैनल आज तक के चुनावी कार्यक्रम 'पंचायत पंजाब' में कहा कि चन्नी ने कहा कि मैं हैंडबॉल का प्लेयर रहा हूं और गोलकीपर था। तीन बार हमने पंजाब विश्वविद्यालय की तरफ से 3 बार गोल्ड मेडल जीता और नेशनल भी खेला। गोलकीपर हैंडबॉल में गोल भी बचाता है औऱ टीम को आगे खेलने का मौका देता है और पीछे से बॉल फेंककर हर किसी जगह को जगह देता है जिससे गोल हो सके। ऐसे में हम गोल करना भी जानते हैं और रोकना भी।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री ने हिजाब विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिजाब का मामला बेवजह ही उछाला जा रहा है. जब से स्कूलों की शुरुआत हुई है यूनिफार्म का प्रचलन तभी से है । उन्होने कहा कि जानबूझकर चुनावी समय में इसे विवाद का रूप दिया जा रहा है। इसका कोई औचित्य नहीं है। वहीं उन्होने चुनावी मतदान पर कहा कि मैं खुद उत्तर प्रदेश जाकर आया हूं और वहां देखा है कि वहां एक तरफा भाजपा की लहर चल रही है. वहां बीजेपी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी । क्योंकि जनता समझ चुकी है कि ये ही एक ऐसी पार्टी है जो सिर्फ कहने में नहीं बल्कि करने में विश्वास रखती है। उन्होने कहा कि उत्तराखंड में भी भारतीय जनता पार्टी की स्थिति अच्छी है। और वहां भी सरकार बनेगी । विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि वो बोखला कर तरह-तरह के ऐलान कर रहे हैं । जिस तरह केजरीवाल ने पंजाब में महिलाओं को 1 हजार रुपए देने की घोषणा कि तो कांग्रेस ने दो हजार रुपए देने की घोषणा कर दी ये सिर्फ ढकोसला बाजी है। पंजाब में कांग्रेस की असलियत यह है कि उनके पास सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे तक नहीं है।
विश्व रेडियो दिवस के प्रसंग पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने बताया है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को विशनखेड़ी में नवनिर्मित परिसर में सामुदायिक रेडियो 'कर्मवीर' की स्थापना के लिए नियति पत्र प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय की ओर से सामुदायिक रेडियो स्टेशन के लिए आवश्यक प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यह सामुदायिक रेडियो न केवल विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण होगा बल्कि विशनखेड़ी क्षेत्र में विकास संचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कुलपति प्रो. सुरेश ने रीवा में तैयार हुए नवनिर्मित परिसर में भी सामुदायिक रेडियो स्थापित करने की बात कही है। एमसीयू का नया परिसर विशनखेड़ी में 50 एकड़ में बनकर तैयार है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने और विकास संचार का बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन ने नये परिसर में सामुदायिक रेडियो की स्थापना के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय में आवेदन किया था। जिस पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए विश्वविद्यालय को 'नियति पत्र' प्रदान कर दिया है। विश्वविद्यालय में स्थापित होनेवाले सामुदायिक रेडियो का नाम स्वतंत्रता सेनानी एवं महान संपादक पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के सुप्रसिद्ध समाचारपत्र 'कर्मवीर' पर रखा गया है। इस कम्युनिटी रेडियो के प्रारंभ होने से विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रेडियो के कार्यक्रम निर्माण से लेकर उसके प्रसारण एवं व्यवहारिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।
जय श्रीराम के नारों के जवाब में अल्लाह हू अकबर जैसे नारे देने के बाद मौलाना से लेकर मुस्लिम संगठन की पहली पसंद बनीं बीबी मुस्कान खान ने कहा कि मैंने सांप्रदायिक आधार पर अल्लाह-हू अकबर नहीं चिल्लाया। अगली बार हिंदुस्तान जिंदाबाद बोलूंगी। मुस्कान ने कहा कि मैंने सांप्रदायिक आधार पर अल्लाह-हुअकबर नहीं चिल्लाया। मैं हिंदू-मुस्लिम विभाजन पैदा नहीं करना चाहती। भले ही पूरे देश में लोग उसके शब्दों को लेकर बहस कर रहे हों वाणिज्य द्वितीय वर्ष की छात्रा और जिम मालिक की बेटी 19 वर्षीय मुस्कान कानून की पढ़ाई करना चाहती हैं। उसके पास कोई तत्काल रोल मॉडल नहीं है, लेकिन वह अपने विश्वास और अल्लाह के सिद्धांत में ताकत मिलती है।
कर्नाटक हिजाब विवाद तब भड़क उठा जब युवा मुस्लिम छात्रों के एक समूह को हिजाब पहनने के कारण उडुपी जिले में उनके कॉलेज में प्रवेश नहीं करने दिया गया। यह मुद्दा पूरे राज्य में फैल गया क्योंकि कॉलेजों और स्कूलों ने इसी तरह के फरमान जारी किए। हिजाब विवाद के बीच कर्नाटक के उडुपी जिले के सभी हाई स्कूलों में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निषेधाज्ञा 14 फरवरी सोमवार को सुबह 6 बजे से प्रभावी होगी और 19 फरवरी शनिवार को शाम 6 बजे तक लागू रहेगी। यानी शनिवार तक जिले के हाईस्कूलों के आसपास के इलाके में सभी के जमा होने और आंदोलन पर रोक लगा दी गई है। पुलिस अधीक्षक द्वारा उडुपी में उपायुक्त कूर्मा राव से अनुरोध करने के बाद धारा 144 लागू की गई थी। उन्होंने अनुरोध किया कि जिले के उच्च विद्यालयों के आसपास 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की जाए। इससे पहले, बेंगलुरु में अधिकारियों ने शहर के स्कूलों और कॉलेजों के आसपास किसी भी तरह के जमावड़े को प्रतिबंधित करने के लिए निषेधाज्ञा लागू की थी। आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 बेंगलुरु के स्कूलों, पीयू कॉलेजों, डिग्री कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास लागू की गई थी। निषेधाज्ञ 22 फरवरी तक प्रभावी रहेगी।
भोपाल मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के मामलों में आ रही कमी के बीच राज्य सरकार ने जेल के कैदियों को उनके परिजन से मुलाकात करने की स्वीकृति फिर से दे दी है। मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि राज्य सरकार ने कोरोना वायरस बीमारी से बचाव हेतु कैदियों की परिजन से मुलाकात पर 31 मार्च 2022 तक रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा, ‘‘जेल विभाग ने 12 फरवरी से कैदियों की उनके परिजन से मुलाकात को प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की है।’’ अधिकारी ने बताया कि बंदियों को उनके परिजनों से मुलाकात के दौरान जेल मेन्युअल एवं जेल मुख्यालय के परिपत्र में दिये गये निर्देशों तथा कोविड-19 संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करवाना होगा।
गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर से करीब 200 किलोमीटर दूर जिले के सिहोर कस्बे के पास स्थित अरिहंत फर्नेस रोलिंग मिल में रविवार रात विस्फोट हो गया।विस्फोट में नौ कर्मचारी घायल हो गए है। विस्फोट के समय कर्मचारी फैक्टरी में काम कर रहे थे। विस्फोट में घायल हुए सभी नौ लोगों को भावनगर स्थित एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विस्फोट के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रचार पर कोविड-19 के कारण लगे प्रतिबंधों में शनिवार को ढील देते हुए सीमित संख्या में लोगों के साथ पदयात्राओं की अनुमति दे दी और साथ ही प्रचार अभियान के लिए एक दिन में चार घंटे का समय बढ़ा दिया।आयोग के अनुसार, चुनाव प्रचार अब सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक के बजाय सुबह छह बजे से रात 10 बजे के बीच किया जा सकता है, जिसमें कोविड उपयुक्त व्यवहार और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इससे उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को एक दिन में प्रचार करने के लिए चार घंटे और मिलेंगे। निर्वाचन आयोग ने आठ जनवरी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के चलते प्रत्यक्ष रैलियों, रोड शो और पदयात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। आयोग समय-समय पर महामारी की स्थिति की समीक्षा कर रहा है और कुछ छूट दे रहा है। निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि राजनीतिक दल और उम्मीदवार निर्धारित खुले स्थानों की क्षमता के अधिकतम 50 प्रतिशत या राज्य आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा निर्धारित सीमा, जो भी कम हो, के साथ खुले क्षेत्रों में प्रचार कर सकते हैं। अभी तक सभा और रैलियों जैसे बाहरी आयोजनों की सीमा खुली जगह या मैदान की क्षमता का 30 प्रतिशत थी। पदयात्राओं पर निर्वाचन आयोग ने कहा कि इस तरह के जमावड़े में राज्य आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा अनुमत संख्या से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकते तथा इसके लिए जिला अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी। विधानसभा चुनाव 10 फरवरी को शुरू हुए और सात मार्च को समाप्त होंगे। परिणाम 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे।
बजाज ग्रुप के पूर्व चेयरमैन और बजाज मोटर्स के संस्थापक राहुल बजाज का 83 साल की उम्र में निधन हो गया है। वो पिछले काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे। राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को कोलकाता में हुआ था। राहुल बजाज मारवाड़ी बिजनेसमैन परिवार से थे। राहुल बजाज ने एक लंबे वक्त तक बजाज ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली थी। साल 1965 में उन्होंने बजाज की कमान अपने हाथ में ली। राहुल बजाज करीब 50 साल तक बजाज ग्रुप के चेयरमैन रहे। साल 2001 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राहुल बजाज स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज के पोते थे। उनकी पढ़ाई दिल्ली के ही सेंट स्टीफेंस कॉलेज से हुई थी, हालांकि लॉ की डिग्री हासिल करने के लिए वो मुंबई पहुंचे। उनके नेतृत्व में बजाज ऑटो का टर्नओवर 7.2 करोड़ से 12 हजार करोड़ तक पहुंच गया और देश की अग्रणी स्कूटर और दोपहिया वाहन बेचने वाली कंपनी बन गई थी।
छत्तीसगढ़ में पुटकेल के जंगल में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की खबर सामने आई है। आईजी बस्तर पी सुंदरराज ने बताया है कि इस मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल 168 बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट शहीद हो गए हैं। वहीं एक जवान भी घायल है। घटना जिले के तिम्मापुर में उस वक्त हुई, जब सीआरपीएफ की 168वीं बटालियन का एक गश्ती दल सड़क मार्ग खुलवाने और सफाई की ड्यूटी के लिए निकला था। अधिकारियों ने बताया कि सहायक कमांडेंट एस बी टिर्की को गोली लगी और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। राजधानी रायपुर से करीब 440 किलोमीटर दूर इलाके में फिलहाल तलाश अभियान जारी है।
मुंबई के अंबोली इलाके में शुक्रवार सुबह एक व्यक्ति को उसकी पत्नी और बेटे ने कथित तौर पर इस वजह से मार डाला क्योंकि वो अपने लड़के को न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने जाने के लिए पैसे नहीं दे रहा था। दोनों ने उसे पीट-पीट कर पहले मारने की कोशिश की और जब वो नहीं मरा तो दोनों आरोपियों ने मृतक को इमारत के 7वे मंजिले से नीचे फेंक दिया जिसके बाद शख्स की मौत हो गई। मृतक का नाम संतान शेषाद्री है जिसकी उम्र 55 साल है। अंबोली पुलिस स्टेशन को जब इस मौत की जानकारी मिली तो वो घटनास्थल पर गए और तब समझ में आया की ये आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या हो सकती है। पुलिस ने पाया कि उसके बेडरूम में खून के दाग थे और कुछ कपड़ों में भी खून लगा हुआ था। मृतक की पत्नी जयशिला से जब पूछताछ की गई तो उसने पुलिस को बयान में बताया कि उसके पति ने 2 बार आत्महत्या की कोशिश की है। पहली कोशिश साल 2005 में की थी, जब वे मुंबई में थे। उस समय वो कूदकर आत्महत्या करना चाहते थे पर किसी ने देख लिया और उसे बचा लिया था। इसके बाद दूसरी कोशिश साल 2011 में की थी जब वो हैदराबाद में रहते थे। उस समय उसने अपने हाथ काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में जयशिला और उसके लड़के अरविंद को गिरफ्तार किया है क्योंकि दोनों का जब बयान लिया जा रहा था, तब दोनों ने अलग-अलग कहानी बताई थी। पुलिस अधिकारी शेख ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि परिवार में अक्सर झगड़े होते थे और संतोष अलग कमरे में रहता था। उसकी पत्नी और बेटा अलग रहते थे। एक ने बयान में बताया कि संतोष उन्हें पैसे भी नहीं देता था। महीने के 10 हजार रुपये मुश्किल से देता था। ऐसे तमाम झगड़ों के चलते इनके बीच कुछ ठीक से नहीं चल रहा था। उन्हें पता था कि वो शुगर का मरीज है और वो दवा खाने के बाद गहरी नींद में सो जाता है जिसके बाद मां बेटे ने सुबह 4 बजे का अलार्म लगाया और उठाकर उसे मारना शुरू किया। पहले उसका सिर बेड की लकड़ी पर कई बार पटका और फिर उसके हाथ की नस काटी ताकि इसे आत्महत्या का रूप दिखा सके। इसके बावजूद जब वो नहीं मरा तब उन लोगों ने उसे 7वीं मंजिल से नीचे फेंक दिया। बेटे ने अपने बयान में बताया कि उसका पिता बार-बार यह धमकी देता था कि वो आत्महत्या कर लेगा और इन लोगों को उसकी आत्महत्या के आरोप में फंसा देगा। इतना ही नहीं, मृतक के घरवालों ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी उसे किसी से मिलने नही देती थी। मृतक का एक भाई BARC में वैज्ञानिक रह चुका है। एक और बात पुलिस के सामने आई है कि मृतक को उसकी पत्नी पसंद नहीं थी। उसे इसके साथ शादी नहीं करनी थी और वो जिस तरह से अकेले रहता था उसे देख उन्हें शक होता था कि उसका किसी और के साथ प्रेम संबंध हो सकता है। पुलिस आज इन दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी।
NCB के पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की तरफ से बड़ी राहत मिली है। बीते शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए SC आयोग ने ये मान लिया कि समीर वानखेडे अनुसुचित जाति के ही हैं और इसके साथ ही काफी महीनों से चल रहे इस मामले में समीर वानखेड़े ने राहत की सांस ली है। बता दें कि महाराष्ट्र कैबिनेट के मंत्री नवाब मलिक ने नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े पर फर्जी सर्टिफिकेट से मौकरी पाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वानखेडे मुस्लिम थे, वे अनुसूचित जाति महार समुदाय के नहीं थे। मलिक का कहना था कि वानखेडे ने नकली जाति सर्टिफिकेट के जरिए UPSC की परीक्षा पास की थी। नवाब मलिक ने अपने आरोप को साबित करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने ट्विटर पर साझा किए सर्टिफिकेट को वानखेड़े का असली बर्थ सर्टिफिकेट बताया था। दरअसल महाराष्ट्र कैबिनेट के मंत्री नवाब मलिक ने साल 2021 के ऑक्टूबर महीने में अपने सोशल मीडिया पर दो ट्वीट किए थे। पहले ट्वीट में उन्होंने वानखेडे की एक फोटो शेयर की। इस फोटो को शेयर करते हुए मलिक ने लिखा पहचान कौन? जबकि एक अन्य ट्वीट में उन्होंने नगर निगम के प्रमाण पत्र की तस्वीर साझा की। इस प्रमाण पत्र में समीर के पिता का नाम 'दाउद क. वानखेडे' लिखा है। वहीं धर्म की जगह पर 'मुस्लिम' लिखा है। हालांकि इस मामले में वानखेडे के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने मलिक पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था मैंने कभी भी धर्म नहीं बदला। उन्होंने कहा कि ये सारे आरोप गलत है। उनकी इंटरकास्ट शादी हुई थी, लेकिन उन्होंने या उनकी पत्नी ने कभी अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया था।
गुरग्राम के बाद अब दिल्ली में एक बिल्डिंग गिरने की घटना सामने आई है। दिल्ली के बवाना इलाके में जेजे कॉलोनी की ये घटना बताई जा रही है। जिसमें चार लोगों की मलबे में दबने से मौत हो चुकी है। इससे पहले पुलिस ने बताया था कि तीन लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया है, वहीं बाकी लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी था। हालांकि अब भी लोगों की तलाश की जा रही है। डीसीपी आउटर नॉर्थ ब्रिजेंद्र यादव ने इस घटना की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि, कुल 6 लोगों के बिल्डिंग के मलबे में फंसे होने की जानकारी मिली थी, जिनमें से 3 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बाकी फंसे लोगों को निकालने की कोशिश भी की जारी है। पुलिस के मुताबिक दोपहर करीब 2:45 पर एनआईए थाने की पुलिस को जानकारी मिली कि दिल्ली जल बोर्ड के पास एक बिल्डिंग गिरी है। जिसमें कुछ लोग दब गए हैं, मलबे में बच्चों के दबे होने की भी जानकारी मिली। तुरंत पुलिस मौके पर पहुंची और राहत बचाव कार्य शुरू किया गया। ये बिल्डिंग राजीव रतन आवास में बनी थी। जहां करीब 300-400 फ्लैट हैं।
हिमाचल प्रदेश के राशन कार्ड धारकों के लिए अच्छी खबर निकल कर सामने आई है। मार्च के महीने में हिमाचल प्रदेश के बीपीएल व राशन उपभोक्ताओं को मार्च से रिफाइंड तेल 11 रुपये और एपीएल को 13 रुपये सस्ता मिलेगा। खाद्य आपूर्ति निगम ने रिफाइंड का टेंडर फाइनल कर दिया है। एपीएल उपभोक्ताओं को रिफाइंड 122 रुपये, जबकि गरीब परिवारों को 104 रुपये तक मिलेगा। गौरतलब है कि अभी एपीएल उपभोक्ताओं को डिपो में रिफाइंड 135 रुपये और बीपीएल को 115 रुपये प्रति लीटर दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार हिमाचल के राशनकार्ड परिवारों को तीन दालें (मलका, माश और दाल चना), दो लीटर तेल (रिफाइंड और सरसों), 500 ग्राम प्रति व्यक्ति चीनी और एक किलो आयोडीन नमक सब्सिडी पर दे रही है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को एमपी कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया गया है। वीडियो में सीएम शिवराज से एक शख्स यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी की स्थिति के बारे में बता रहे हैं। इस वीडियो को कांग्रेस समर्थक सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं। दरअसल वायरल वीडियो में शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि मुझे तो लगता है कि यूपी में कोई संदेह नहीं, उत्तराखंड में बीजेपी ही है, लेकिन थोड़ा मुकाबला है। वीडियो को शेयर करते हुए एमपी कांग्रेस ने लिखा है कि यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी की बेहद कमजोर स्थित की जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते बीजेपी तो गई। वहीं इससे पहले मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की गुरुवार को जुबान फिसल गई थी। उन्होंने 5 राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनवा दी थी। मंत्री से 5 राज्यों में हो रहे चुनाव को लेकर सवाल किया गया। इस पर गोविंद ने कहा कि राम मंदिर पीएम मोदी के सहयोग से और सीएम योगी के विशेष प्रयास से बना रहा है, तो चाहे उत्तरांचल हो चाहे गोवा हो, चाहे पंजाब हो या उत्तर प्रदेश हो सब जगह कांग्रेस का बहुमत होगा और कांग्रेस बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
राजधानी भोपाल में लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाही की है। लोकायुक्त टीम ने नगर निगम जोन-4 के सफाई अधिकारी सतीश टांग को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सतीश ने रिश्वत नगर निगम जोन-5 के स्वास्थ्य अधिकारी अजय श्रवण के लिए मांगी। दरअसल भोपाल के नगर निगम जोन-5 के स्वास्थ्य अधिकारी अजय श्रवण पर लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाही की है। टीम ने अजय श्रवण के अलग अलग ठिकानों पर गुरुवार देर रात छापेमार कार्रवाही की। वहीं अधिकारी ने एक प्लास्टिक व्यापारी से 10 हजार रूपए की मांग की गई थी। जिसकी शिकायत फरियादी पंकज खूबचंदानी ने लोकायुक्त से की। इस मामले की जांच के दौरान हेल्थ ऑफिसर अजय श्रवण को दोषी पाया गया । आपको बता दें कि टीम ने अधिकारी के सहयोगी नगर निगम जोन-4 के सफाई अधिकारी सतीश टांग को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोचा है। इसी के साथ ही लोकायुक्त ने श्रवण को भी आरोपी बनाया है। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। टीम ने सतीश को भोपाल रेलवे स्टेशन के पास गुरुवार रात ट्रैप किया। लोकायुक्त अजय श्रवण की तलाश में जुटी है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बृहस्पतिवार को 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर 60.17 प्रतिशत मतदान हुआ। कोविड प्रोटोकॉल के कारण एक घंटे के विस्तार के बाद शाम छह बजे मतदान बंद हुआ। कुछ स्थानों पर ईवीएम में मामूली तकनीकी खराबी के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने ट्वीट कर कहा, उप्र विधानसभा 2022 का प्रथम चरण आज शांतिपूर्वक सम्पन्न हो गया। लोकतंत्र के महोत्सव में अपने अमूल्य मत का प्रयोग कर सहभागिता करने वाले सभी सम्मानित मतदाताओं का हार्दिक धन्यवाद। आपका मतदान नए उत्तर प्रदेश की नींव को मजबूती प्रदान करेगा। भारत माता की जय। अपर मुख्य चुनाव अधिकारी (एसीईओ) बीडी राम तिवारी ने बताया, कुछ जगहों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी की खबरें आई हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद उन ईवीएम को बदला जा रहा था। समाजवादी पार्टी के इस आरोप पर कि कैराना विधानसभा क्षेत्र के दुंदुखेड़ा गांव मेंमतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करने दिया गया, तिवारी ने कहा कि संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को मामले को देखने के लिए कहा गया था। निर्वाचन आयोग कार्यालय के मुताबिक मतदान कार्य कोविड प्रोटोकॉल के तहत सुबह सात बजे शुरू हुआ जो शाम छह बजे तक चलेगा।
शहर के एक मोहल्ला निवासी 22 वर्षीय युवती आठ दिसंबर 2021 को रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी। लड़की की मां की ओर से पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह के बेटे पर इसको लेकर आरोप लगाया गया था। एक ओर जहां उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज है, वहीं दूसरी और उन्नाव में एक दलित युवती की हत्या मामला अब गर्म होता दिखाई दे रहा है। हत्या का आरोप किसी और पर नहीं बल्कि पूर्व मंत्री के बेटे पर है। यही कारण है कि मामला अब पूरी तरीके से राजनीतिक होता जा रहा है। मायावती ने भी समाजवादी पार्टी के नेता पर सवाल उठा दिए हैं। मायावती ने अपने ट्वीट में कहा कि उन्नाव जिले में सपा नेता के खेत में दलित युवती का दफनाया हुआ शव बरामद होना अति-दुःखद व गंभीर मामला। परिवार वाले पहले से ही उसके अपहरण व हत्या को लेकर सपा नेता पर शक कर रहे थे। राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों के खिलाफ तुरन्त सख्त कानूनी कार्रवाई करे। उन्नाव जिले में सपा नेता के खेत में दलित युवती का दफनाया हुआ शव बरामद होना अति-दुःखद व गंभीर मामला। परिवार वाले पहले से ही उसके अपहरण व हत्या को लेकर सपा नेता पर शक कर रहे थे। राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों के खिलाफ तुरन्त सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
सॉलिस्टर जनरल की बात पर सीजेआई ने आगे कहा कि, राज्य की स्थिति और हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर रखी जा रही हैं। यह देखना होगा कि, यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहिए या नहीं। हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देने का वक्त सही है या नहीं यह देखना भी जरूरी होगा। कर्नाटक हिजाब विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। बता दें कि, कर्नाटक हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई अब जारी है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में हिजाब का समर्थन कर रहे कांग्रेस नेता और वकील देवदत्त कामत ने कहा कि, इस ममाले पर सोमवार को सुनवाई की जाए। सीजेआई ने कहा कि, इस मामले को बड़े स्तर में न फैलाएं। सॉलिस्टर जनरल ने कहा कि, हिजाब विवाद पर हाई कोर्ट को फैसला देना चाहिए और इसपर कोई राजनीति न की जाए।सॉलिस्टर जनरल की बात पर सीजेआई ने आगे कहा कि, राज्य की स्थिति और हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर रखी जा रही हैं। यह देखना होगा कि, यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहिए या नहीं। कर्नाटक सरकार ने राज्य में कर्नाटक एजुकेशन एक्ट 1983 की धारा 133 लागू कर दी है। जिसके कारण सभी स्कूल और कॉलेज में यूनिफॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके तहत सरकारी स्कूल और कॉलेज में तय की गई यूनिफॉर्म पहनी जाएगी। वहीं प्राइवेट स्कूल में अपने यूनिफॉर्म का चयन खुद कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज है। इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ ने कुछ ऐसा बयान दिया जिसकी वजह से अब विरोधी उन पर हमलावर हो गए हैं। दरअसल, गुरुवार को उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए पहले चरण के वोट डाले गए। पहले चरण के लिए मतदाताओं से वोट डालने की अपील करते हुए योगी आदित्यनाथ ने उन्हें आगाह भी कर दिया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर इस बार मतदाता चूक गए तो उत्तर प्रदेश को कश्मीर, बंगाल और केरल बनते देर नहीं लगेगी। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने यह भी बता दिया कि उनकी सरकार ने दंगाइयों और आतंकवादियों पर अंकुश लगाया है। योगी ने अपने टि्वटर हैंडल के जरिये साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि आज मुझे कोई चिंता है तो केवल एक है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रदेश में जिन-जिन दंगाइयों और आतताइयों पर अंकुश लगा है, वे सब मचल रहे हैं। आतंकी बार-बार धमका रहे हैं कि एक बार सरकार आने दीजिए। आप सावधान रहिए। आप चूके, तो पांच साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा और इस बार उत्तर प्रदेश को कश्मीर, बंगाल और केरल बनते देर नहीं लगेगी। योगी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान आपने किसी घोटाले के आरोप नहीं सुने। मैं एक योगी हूं और मेरे भगवे पर कोई दो पैसे के भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा सकता, लेकिन इस बात के लिए भी मैं आपसे अपना वोट नहीं मांगूंगा। यह मुझे शोभा नहीं देता। मुझे सबसे बड़ा संतोष इस बात का है कि आज हमारा उत्तर प्रदेश गुंडों, बदमाशों, दंगाइयों, उगाही गिरोह, पेशेवर अपराधियों और माफियाओं के आतंक से मुक्त है। उन्होंने कहा कि पलायन कर गए हिंदू अब अपने घरों को लौट चुके हैं। उन्हें धमकाने और प्रताड़ित करने वाले लोग या तो जेलों में बंद हैं या फिर सहम कर कहीं दुबक गए हैं। पुलिस भी अब बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के काम करती है। अब इसी को लेकर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है
फर्स्ट वर्डिक्ट केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि हम एक ऐसे बजट के लिए गए,जो निरंतरता के लिए खड़ा होगा, जो अर्थव्यवस्था में स्थिरता और कराधान में भविष्यवाणी और भारत के लिए 100 पर एक दृष्टि लाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में बजट पर अपना बयान दे रही हैं। सीतारमण ने शुक्रवार सुबह राज्यसभा में बजट बहस का जवाब दिया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री गति शक्ति से मिलने वाला मार्गदर्शन आवश्यक था क्योंकि हमें विभिन्न बुनियादी ढांचे के खर्च के बीच अधिक तालमेल, अधिक पूरकता लाने की जरूरत थी, जो हम कर रहे हैं। राज्यसभा निर्मला सीतारमण कहा कि ड्रोन लाकर, हम उर्वरकों, कीटनाशकों के उपयोग में दक्षता लाने में सक्षम हैं और फसल घनत्व का एक अच्छा प्रौद्योगिकी-संचालित मूल्यांकन भी कर सकते है। संभवतः उत्पादन के आकार की भविष्यवाणी भी कर सकते हैं। भारत की कृषि में सुधार और आधुनिकीकरण के लिए बहुत ही प्रभावी उपकरण के रूप में ड्रोन लाना है। जब आप ड्रोन लाते हैं, तो उसके कई रूपांतर होते हैं।
एक ओर जहां उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान जारी है, तो दूसरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सहारनपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने किसानों के लिए किए जा रहे कामों का जिक्र किया और बताया कि भाजपा क्यों जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सहारनपुर क्षेत्र के लोगों ने ठान लिया है, जो यूपी को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाएगा उसको ही वोट देंगे। जो यूपी को दंगा मुक्त रखेगा, उसे ही वोट देंगे। जो हमारी बहन-बेटियों को भय मुक्त रखेगा, हम उसे ही वोट देंगे। जो अपराधियों को जेल भेजेगा, हम उसे ही वोट देंगे। इसके साथ ही मोदी ने प्रथम चरण के मतदाताओं से क्षमा मांगते हुए कहा कि मेरा ये फर्ज बनता था कि चुनाव घोषित होने के बाद उनके बीच जाऊं, लेकिन मैं जा नहीं पाया था, चुनाव आयोग ने कुछ मर्यादाएं रखी थी। वर्चुअल रूप से तो उनसे मिल लिया था। मोदी ने कहा कि भाजपा ने यूपी चुनावों के लिए अपना जो घोषणा पत्र जारी किया है, ये घोषणा पत्र लोक कल्याण का संकल्प पत्र है। डबल इंजन की सरकार जो काम कर रही है, उसके लिए यूपी में भाजपा सरकार बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि गरीबों को कोरोना की वैक्सीन मुफ्त लगने में दिक्कत न हो, इसके लिए यूपी में भाजपा सरकार जरूरी है। क्योंकि ये घोर परिवारवादी लोग सरकार में होते तो वैक्सीन रास्ते में ही कहीं बिक जाती। किसानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के खाते में पीएम किसान का पैसा सीधे उनके खाते में पहुंचता रहे, इसके लिए यूपी में भाजपा सरकार बहुत जरूरी है। गरीबों को इस महामारी के समय मुफ्त राशन मिलता रहे, इसके लिए यूपी में भाजपा सरकार बहुत जरूरी है। मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार का ये इतिहास है, ये परंपरा है कि भाजपा सरकार जो संकल्प लेती है उसे पूरा करके दिखाती है। ये हमारी ही सरकार है, जिसने गन्ना किसानों को पहले के मुकाबले कई ज्यादा का भुगतान किया है।
बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाडी’ सेंसर बोर्ड से पास हो गई है। हालांकि यूए सर्टिफिकेट देने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने फिल्म के कुछ सीन्स को हटवा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड ने फिल्म में 4 मॉडिफिकेशन और 2 सीन्स को फिल्म से हटवाया है। इसके साथ ही दो डायलॉग्स में भी बदलाव करवाए हैं। फिल्म में एक सीन ऐसा भी था जिसमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू गंगूबाई के बालों में गुलाब लगा रहे थे। सेंसर बोर्ड ने इस सीन को भी मॉडीफाय करवाया है। संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गंगूबाई काठियावाडी' असल कहानी पर आधारित है। यह कहानी ‘माफिया क्वीन ऑफ मुंबई’ नामक किताब से उठाई गई है। इस फिल्म में काठियावाडी की एक साधारण लड़की के गंगूबाई बनने तक का सफर दिखाया गया है। संजय लीला की फिल्म में अभिनेत्री आलिया भट्ट के अलावा अभिनेता अजय देवगन और विजय राज भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म 25 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसके अलावा आलिया भट्ट की 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी', 'डार्लिंग्स', 'आरआरआर' और 'ब्रह्मास्त्र' भी रिलीज होने के लिए तैयार है। हाल ही में आलिया भट्ट ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फिल्म के कई पोस्टर साझा किए हैं। इन पोस्टर्स में आलिया माथे में लाल बिंदी और मुंह में पान चबाती नजर आ रही हैं। बता दें कि आलिया ने फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए फिल्म के ट्रेलर लॉन्च का एलान किया था। फिल्म को ट्रेलर 4 फरवरी को लॉन्च हो गया है। जिसके दर्शकों से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। वहीं एक अन्य पोस्ट में अजय देवगन का गंभीर लुक उभर कर आ रहा है।
दिल्ली सरकार ने डीजेबी के 700 संविदा कर्मचारियों की नौकरी को स्थायी बनाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अन्य विभागों में भी संविदा कर्मचारियों की नौकरी को स्थायी बनाना चाहती है, लेकिन केंद्र सरकार पर प्रशासनिक निर्भरता के कारण उसके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त शक्तियां नहीं है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के 700 संविदा कर्मचारियों की नौकरी को स्थायी कर दिया गया है और इस फैसले की गूंज देश के अन्य हिस्सों में भी सुनाई देगी। स्थायी बनाए गए डीजेबी कर्मियों को प्रमाण पत्र देने के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केजरीवाल ने कहा, ‘‘यह एक मिथक है कि ‘कच्चे’ (संविदा) कर्मी को ‘पक्का’ (स्थायी) नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे वे आलसी हो जाते हैं और अधिक काम नहीं करते, लेकिन 2015 में पहली बार हमारी सरकार बनने के बाद जब हम शिक्षा विभाग में क्रांति लेकर आए या जब हमने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सुधार किया, तो यह काम केवल सरकारी शिक्षकों, चिकित्सकों और नर्स ने ही किया। उन्होंने कहा कि इस कदम ने इस मिथक को भी तोड़ दिया और अब सुरक्षा की भावना होने के कारण वे पहले से दोगुना काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने डीजबी में जो बड़ा फैसला किया है, उसकी गूंज देश को अन्य हिस्सों में भी सुनाई देगी और अन्य राज्यों के लोग भी सवाल करने लगेंगे कि यदि यह दिल्ली में किया जा सकता है, तो अन्य राज्यों में क्यों नहीं किया जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अन्य विभागों में भी संविदा कर्मचारियों की नौकरी को स्थायी बनाना चाहती है, लेकिन केंद्र सरकार पर प्रशासनिक निर्भरता के कारण उसके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त शक्तियां नहीं है। उन्होंने कहा कि डीजेबी एक स्वायत्त संस्था है, इसलिए इसमें ऐसा करना संभव था
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोगों से घरों से निकलकर मतदान करने और देश को हर तरह के भय से मुक्त करने का आह्वान किया। आज सुबह राज्य के पश्चिमी भाग के 11 जिलों में 58 विधानसभा सीटों पर मतदान प्रारंभ हुआ। गांधी ने ट्वीट किया, “देश को हर डर से आजाद करो। बाहर आओ, वोट करो।” बृहस्पतिवार को शामली, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा में मतदान हो रहा है।
कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर लगी रोक का मामला अब देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच रहा है। फिलहाल इस मामले को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है, लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने देश के मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष यह मामला उठाया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि 9 जजों की पीठ इस मामले की सुनवाई करे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब विवाद से संबंधित याचिकाओं को कर्नाटक उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय आज मामले पर सुनवाई कर रही है और इसमें हस्तक्षेप करना सही नहीं। कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने से रोके जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ आज सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी ने इस मामले की सुनवाई के लिए पूर्ण पीठ गठित की, जिसमें उनके अलावा न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित और न्यायमूर्ति के जे मोहिउद्दीन शामिल हैं। सरकारी महाविद्यालयों में पढ़ने वाली कुछ मुस्लिम लड़कियों ने हिजाब के साथ कक्षाओं में प्रवेश पर रोक के खिलाफ याचिका दायर की है। मामलों की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित ने कहा कि पर्सनल लॉ के कुछ पहलुओं के मद्देनजर ये मामले बुनियादी महत्व के कुछ संवैधानिक प्रश्नों को उठाते हैं।
खंडवा के गांव गुलाई माल में मंगलवार रात एक 19 साल की युवती को गांव का ही मुस्लिम युवक भगा ले गया। जिसके बाद परिवार वालों को इसकी जानकारी लग गई। यह मामला हिंदू-मुस्लिम का होने से लोग लव जिहाद से जोड़ने लगे है। इसके चलते मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है। जिले के लोगों ने लव जिहाद के शक में मुस्लिम युवक की दुकान और मकान में जमकर तोड़फोड़ की है। घटना के बाद वहां पुलिस फोर्स तैनात की गई है। वहीं पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाकर मामला शांत किया। बुधवार को उपद्रव की आशंका पर रिजर्व पुलिस और आसपास थानों से पुलिस बल बुलाया गया। गांव में भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। बताया जा रहा है कि युवती के घर के रास्ते पर मुस्लिम युवक का ऑटो गैरेज है। फिलहाल परिजनों की ओर से लड़की की गुमशुदगी दर्ज कराई गई है।
उत्तराखंड़ विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार जोर-शोर पर है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा रुद्रप्रयाग पहुंचे थे जहां उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर जबरदस्त तरीके से हमले भी किए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव में लोग हर तरह से अपनी बात रखने का प्रयास करते हैं। आज चुनाव है तो नेता आएंगे और कहेंगे कि मैं ये करूंगा, मैं वो करूंगा। जनता के बीच जाते समय आप एक बात जरूर कहिए कि कभी किसी को वो क्या करेगा इसके आधार पर वोट मत दो। क्योंकि चुनाव में 4 दिन के लुभावने नारे तो सब दे देंगे। किसी को भी तय करने का आधार यह होना चाहिए कि उस नेता और उस पार्टी ने पीछे क्या किया है, वही तय करेगा कि वो आगे क्या करने वाला है। प्रधानमंत्री जी जितना प्यार इस इलाके को करते हैं और जितना अपने आपको यहां से जोड़कर देखते हैं।
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हिंदुओं और मुसलमानों को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया और लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने गाजियाबाद के सदरपुर इलाके में पार्टी के एक प्रत्याशी के लिए प्रचार करते हुए कहा कि अगर समाजवादी पार्टी (सपा)-रालोद गठबंधन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आता है तो किसानों और श्रमिकों की प्रगति के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। चौधरी ने कहा कि साम्प्रदायिक राजनीति की कोई जगह नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हिंदुओं और मुसलमानों को बांटने की कोशिश कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार कर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। मिली जनकारी के अनुसार इन आतंकियों के पास से हथियार और गोला बारुद समेत आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गयी है। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की अनंतनाग के श्रीगुफवाड़ा/बिजबेहरा इलाकों, विभिन्न स्थानों पर बनाई गई कई जांच चौकियों पर पुलिस/सुरक्षा बलों पर हमला करने की साजिश थी।’’ प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने खुलासा किया कि वे जैश-ए-मोहम्मद के साथी हैं और पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के सीधे संपर्क में हैं तथा उन्हीं के कहने पर वे पुलिस/सुरक्षाबलों पर हमले करने जा रहे थे। उनके खुलासे के बाद दो और आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया।’’ उन्होंने बताया कि पुलिस ने बिजबेहरा इलाके में छह आतंकवादियों को गिरफ्तार कर एक अन्य आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया।
हिजाब को लेकर विवाद के चलते कर्नाटक में शुरू हुआ प्रदर्शन मंगलवार को पूरे राज्य में फैल गया। कॉलेज परिसरों में पथराव की घटनाओं के कारण पुलिस को बल प्रयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जहां ‘टकराव-जैसी’ स्थिति देखने को मिली। इस बीच, सरकार और उच्च न्यायालय ने शांति बनाये रखने की अपील की। अदालत, हिजाब पहनने के छात्राओं के अधिकार के लिए उनकी एक याचिका पर विचार कर रही है। इस मुद्दे के एक बड़े विवाद का रूप धारण कर लेने के बाद, राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में शैक्षणिक संस्थानों में तीन दिनों के अवकाश की घोषणा की। वहीं, हिजाब पहनने के पक्ष और विरोध में देश भर से बयान आए। हिजाब विवाद में कूदी मलाला शिक्षा और समाजक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने वाली मलाला यूसुफजई ने भारत में हुए हिजाब विवाद पर सोशल मीडिया पर अपनी राय दी हैं। मलाला यूसुफजई ने ट्वीट कर लिखा, ‘’हिजाब पहने हुई लड़कियों को स्कूलों में एंट्री देने से रोकना भयावह है। कम या ज्यादा कपड़े पहनने के लिए महिलाओं का वस्तुकरण किया जाता है। भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं को हाशिए पर जाने से रोकना चाहिए।' आपको बता दे कि कोर्ट नें एक स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते वक्त यह फैला किया था कि स्कूल और कॉलेज में हिजाब पहनकर नहीं आया जा सकता हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में तमिलनाडु हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले हरियाणा निवासी स्वर्गीय ब्रिगेडियर लखविंदर सिंह लिड्डर के परिवार के सदस्यों को 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने के एक प्रस्ताव को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की। रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र के तहत ऑप्रेशनल क्षेत्र, युद्ध , आतंकवादी गतिविधियों और प्राकृतिक आपदाओं आदि में हरियाणा राज्य से संबंधित सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना और वायु सेना) के मारे गए/निशक्त कर्मियों, जो कमीशनिंग के समय हरियाणा के निवासी थे, तथा उनके परिवारों के अनुग्रह अनुदान के मामलों पर हरियाणा सरकार की नीति के तहत विचार किया जाता है। सशस्त्र बलों के उन कर्मियों को अनुग्रह अनुदान दिया जाता है जो सेवा में रहते हुए ऑप्रेशनल क्षेत्रों/युद्ध/आतंकवादी या सैन्य हमला, सीमा पर झड़पों और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना आदि में अपने वास्तविक आधिकारिक कत्र्तव्यों का निर्वहन करते हुए मारे या विकलांग हो जाते हैं। रक्षा प्राधिकरणों दोबारा घोषित ‘युद्ध हताहत’ चाहे वो किसी भी ऑपरेशन या ऑपरेशन के किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में हो, के सभी मामलों में नीति/निर्देश के तहत स्वीकार्य अनुग्रह अनुदान दिया जाता है। 8 दिसंबर, 2021 को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी धर्मपत्नी और ब्रिगेडियर लखविंदर सिंह लिड्डर सहित सशस्त्र बलों के कई अन्य कर्मियों ने अपनी बोनाफाइड सैन्य ड्यूटी के दौरान कुन्नूर, वेलिंगटन (तमिलनाडु) के पास एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में अपनी जान गंवा दी थी। मृत्यु को ‘अनंतिम युद्ध हताहत’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अंतिम वर्गीकरण बाद में किया जाएगा। मंत्रिमण्डल की बैठक में ऐसी जन सुविधाएं, जो 20 वर्षों से अस्तित्व में हैं, के लिए बिल की प्रयोज्यता को सीमित करने के लिए एक खंड शामिल करने के उपरांत ‘हरियाणा जनसुविधापरिवर्तन निषेध बिल,2022 तैयार करने के संबंध में प्रशासनिक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भावुक होते हुए कहा कि आज इस महाविद्यालय में मुख्यातिथि के तौर पर पधारकर उन्हें खुशी हुई है। उन्होंने 50 वर्ष पूर्व की यादे ताजा करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1970 में इस महाविद्यालय में प्रवेश लिया था। उन्होंने कहा कि वह महाविद्यालय का पूर्व छात्र होने के नाते अपनी पूरी भूमिका निभायेंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय महाविद्यालय, रोहतक के भवन के नवीनीकरण के लिए 78 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय के भवन को लोक निर्माण विभाग दोबारा कंडम घोषित किया गया है। सरकार दोबारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक कदम उठाये गए हैं । गत 7 वर्ष के दौरान 68 नए राजकीय महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं। जिनमें से ज्यादातर महिलाओं के महाविद्यालय है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को 10 किलोमीटर से दूर शिक्षा ग्रहण करने के लिए न जाना पड़े। मुख्यमंत्री मनोहर लाल रोहतक में पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय महाविद्यालय के परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी के समापन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि उपस्थितगण को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा प्रदर्शनी के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की। विद्यार्थी के रूप में इसी प्रांगण में खेले और एनसीसी की परेड में लिया था। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि जहां मैं कभी पढ़ा आज वहाँ मुख्यातिथि के रूप पर पहुँचा हूं। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय की शिक्षा व संस्कारों की वजह से ही शायद आज इस पद पर रहकर जन सेवा कर रहे हैं । शिक्षण संस्थाएं विद्यार्थी को आगे बढऩे के लिए मार्ग दर्शन करती है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे जीवन में विशेष कार्य करने का लक्ष्य बनाये। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं जीवन में विशेष कार्य करने का संकल्प लिया था और आज वे जनसेवा का कार्य कर रहे है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आज अपना मेनिफेस्टो जारी कर दिया है. बीजेपी ने अपने घोषणापत्र को लोक कल्याण संकल्प पत्र २०२२ नाम दिया है. पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सीएम योगी के साथ बीजेपी का घोषणापत्र जारी किया अमित शाह ने कहा कि ये सिर्फ घोषणापत्र नही है, ये संकल्पपत्र है, उत्तरप्रदेश को नए भविष्य की ओर ले जाने का संकल्पपत्र है. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष यही घोषणा पत्र लहराते हुए पूछते हैं कि कितने पूरे हु। मैं उनको बता देना चाहता हूं कि 212 संकल्प पूरे हुए| बीजेपी के घोषणापत्र के अन्य बड़े ऐलान - सभी 18 मंडलों में एंटी करप्शन ऑर्गनाइजेशन यूनिट स्थापित करेंगे - मेरठ में कोतवाल धन सिंह गुर्जर अत्याधुनिक - लव जेहाद पर 10 साल की जेल और 1 साल का जुर्माना - मेरठ, रामपुर, आजमगढ़, कानपुर और बहराइच में एंटी-टेररिस्ट कमांडो सेंटर बनाएंगे - प्रत्येक पुलिस स्टेशन में साइबर हेल्प डेस्क - 5 विश्व स्तरीय एक्जीबिशन और अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनाएंगे - 3 अत्याधुनिक डाटा सेंटर पार्क - कानपुर में मेगा लेदर पार्क - 10 लाख रोजगार और स्वरोजगार के मौके दिए जाएंगे - बाबूजी कल्याण सिंह ग्राम उन्नत योजना - वाराणसी, मिर्जापुर और चित्रकूट मे 2000 नई बसों के माध्यम से सभी गांवों में बस की सुविधा - पूरे प्रदेश में अन्नपूर्णा कैंटिन - काशी, मेरठ, गोरखपुर, बरेली, झांसी और प्रयागराज में मेट्रो - महर्षि वाल्मीकि का चित्रकूट में, संत रविदास का बनारस में, निषादराज गुह्रा का श्रृंग्वेरपुर में और डॉ भीम राव अम्बेडकर की स्मृति में सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना
प्रधानमंत्री ने कहा कि COVID19 एक महामारी है, मानव जाति ने पिछले 100 वर्षों में ऐसा संकट कभी नहीं देखा था। यह संकट अपना रूप बदलता है और लोगों के लिए परेशानी पैदा करता है, पूरा देश और दुनिया इसके खिलाफ लड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में जवाब दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार में गरीबों के सशक्तिकरण के लिए काम किया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि जब COVID19 की शुरुआत हुई थी, तब चर्चा हो रही थी कि भारत का क्या होगा। इस बात पर भी चर्चा हुई कि भारत की वजह से दुनिया पर क्या असर पड़ेगा। लेकिन देश के 130 करोड़ लोगों की इच्छाशक्ति और अनुशासन के कारण भारत के प्रयासों की दुनिया भर में सराहना हो रही है। आज देश आज़ादी के 75 साल - आज़ादी अमृत महोत्सव मना रहा है। राष्ट्र को दिशा देने के लिए कई प्रयास और प्रयास किए गए हैं। नई पहल की गई है, जबकि अच्छी पहल जारी है। उन्होंने कहा कि यह सदन COVID के दौरान हमारे स्वास्थ्य सेवा और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करता है। यह उन्हें और प्रेरित करेगा। COVID के दौरान 80 करोड़ गरीब लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराना एक प्रमुख उदाहरण है जिसे भारत ने दुनिया के सामने स्थापित किया है। COVID के दौरान, बहुत सारी बाधाओं के बावजूद, हमने गरीबों और जरूरतमंदों को घर उपलब्ध कराने के लिए काम करना जारी रखा। मोदी ने कहा कि हमारे युवाओं ने वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप्स की संख्या के मामले में भारत को टॉप-3 में पहुंचा दिया है, वह भी कोविड के दौरान। COP-26 से G20 तक, सामाजिक क्षेत्र से लेकर COVID के दौरान दुनिया भर के 150 देशों की सहायता करने तक, भारत ने नेतृत्व की भूमिका निभाई है और दुनिया ने हमारी भूमिका की सराहना की है। मोदी ने कहा कि COVID के दौरान 5 करोड़ ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ नल के पानी के कनेक्शन प्रदान किए गए हैं - एक नया रिकॉर्ड है। लॉकडाउन के दौरान हमारे किसानों को उसकी सीमा से बाहर रखा गया। उन्होंने अभूतपूर्व संख्या में उत्पादन किया और हमने उनसे रिकॉर्ड स्तर पर खरीदारी की। COVID के दौरान, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी जारी रखा गया और पूरा किया गया।
पंजाब आम आदमी पार्टी के नेता एवं नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से जानना चाहा है कि क्या वह अब माफिया के साथ खड़े होंगे और उनके लिए प्रचार करेंगे? क्या वह पंजाब के लोगों से माफिया को वोट देने के लिए कहेंगे? सिद्धू इसपर अपना रुख स्पष्ट करें। पंजाब में कांग्रेस पार्टी की ओर से चराण्जीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करने को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। एक ओर कांग्रेस पार्टी इसे अपने मास्टर स्टरोक बता रही है। तो विरोधी इस पर सवाल उठा रहे हैं। कि पार्टी मजबूरी में है। और इसका कोई लाभ पार्टी को चुनावों में नहीं होगा। खासकर आम आदमी ने तो चन्नी को प्रोजेक्ट करने के बाद सिद्धू के कांग्रेस में होने पर सवाल उठाया है। पंजाब आम आदमी पार्टी के नेता एवं नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से जानना चाहा है कि क्या वह अब माफिया के साथ खड़े होंगे और उनके लिए प्रचार करेंगे? क्या वह पंजाब के लोगों से माफिया को वोट देने के लिए कहेंगे? सिद्धू इसपर अपना रुख स्पष्ट करें। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पजाब का हर व्यक्ति जानता है कि सिद्धू किसी के दोस्त नहीं हैं। वे हमेशा से सत्ता के पक्षधर रहे हैं और हर दल की सत्ता में किसी न किसी रुप में शामिल रहे। सिद्धू कभी भी पंजाब के लोगों के साथ नहीं खड़े हुए। चीमा ने कहा, “2004 से 2016 तक नवजोत सिद्धू भारतीय जनता पार्टी के नेता थे और पंजाब में उस समय शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार थी। उसके बाद 2017 से वह कांग्रेस के विधायक हैं और कैप्टन करकार में मंत्री बने। आज पंजाब की जनता के मन में नवजोत सिद्धू से बस एक ही सवाल है कि 15 साल सत्ता में रहते हुए उन्होंने पंजाब, पंजाब की जनता और अपने निर्वाचन क्षेत्र अमृतसर के लोगों के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग नवजोत सिंह सिद्धू के गैर जिम्मेवार स्वभाव से अच्छी तरह वाकिफ हैं। हम सभी जानते हैं कि वह सिर्फ बातें ही करते है। अपनी कही बातों पर कोई अमल नहीं करते। पिछले 15 साल से सत्ताधारी सरकार का हिस्सा होने के बावजूद भी उन्होंने सिर्फ बातें ही की हैं। उन्होंने कहा कि लोग नवजोत सिंह सिद्धू पर इसलिए भरोसा नहीं करते हैं क्योंकि एक दिन वह कहते हैं कि पंजाब के लोगों के लिए लड़ेंगे और माफिया को पंजाब पर शासन नहीं करने देंगे। अगले दिन वह भ्रष्टाचार-माफिया के आरोपों से घिरे कांग्रेसियों के साथ मंच साझा कर रहे होते हैं और उसी माफिया के लिए प्रशंसा के गीत गा रहे होते हैं। चीमा ने दावा किया कि पंजाब के लोग नवजोत सिद्धू के सभी नाटकों को देख चुके हैं। लोग अब सिद्धू और कांग्रेस के लिए अपना कीमती वोट बर्बाद नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी पंजाब में भ्रष्टाचार और माफिया मुक्त सरकार बनाएगी और लोगों को परेशानियों से मुक्ति दिलाएगी। इस बार पंजाब की जनता भारी बहुमत से ’आप’ की सरकार बनाएगी।


















































