मौसम वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने कहा पश्चिमी विक्षोभ हाे रहे सक्रिय... फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला हिमाचल प्रदेश में फिर से मौसम करवट बदलने वाला है। प्रदेश में दो फरवरी से बारिश और बर्फबारी का दौर फिर से शुरू हो जाएगा। मौसम विभाग ने दो फरवरी से ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी, जबकि निचले भागाें में बारिश की आशंका जताई है। प्रदेश में चार फरवरी तक मौसम खराब बना रहेगा। सोमवार को राजधानी शिमला में दिनभर मौसम साफ बना रहा, जबकि शाम के समय आसमान में हल्के बादल उमड़ आए। मौसम साफ बने रहने से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। बीते तीन दिन से मौसम साफ बना हुआ है, लेकिन सुबह शाम ठंड से लोगों को राहत नहीं मिल रही है। मौसम वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने कहा कि प्रदेश में दो फरवरी से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इससे हिमाचल में मैदानी व निचलने पर्वतीय क्षेत्र में बारिश, जबकि मध्य पर्वतीय व उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर बर्फ़बारी व वर्षा की संभावनाएं है। प्रदेश में तीन फरवरी को लाहुल स्पीति किन्नौर कुल्लु चबा ओर शिमला में बर्फबारी होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीते कुछ दिन से मौसम साफ बना हुआ है, जिससे तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई और ठंड से भी कुछ हद तक लोगों को राहत मिली है, लेकिन आगामी दिनों में मौसम खराब रहने से तापमान में फिर से कमी आएगी। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी के बाद मैदानी क्षेत्रों में मौसम साफ होने की संभावना है। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम 7 फरवरी तक खराब रहने की संभावना जताई गई है।
हिमाचल प्रदेश में बीते चार दिनों से खिल रही धूप के बाद अब फिर से मौसम बिगड़ने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने सोमवार को प्रदेश के मध्य और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी के आसार जताए हैं। एक फरवरी को मौसम साफ जबकि दो फरवरी को पूरे प्रदेश में बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान है। तीन फरवरी को मध्य और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कई क्षेत्रों में गर्ज के साथ ओलावृष्टि की भी चेतावनी जारी की गई है। शिमला, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल स्पीति के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। पर्यटकों और आम लोगों को बर्फीले क्षेत्रों में न जाने की हिदायत दी गई है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बीते सप्ताह भारी बारिश और बर्फबारी के चलते अभी भी कई सड़कें बाधित हैं। खासकर किन्नौर, लाहौल स्पीति के कई क्षेत्रों में जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है।
हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में रुटीन आपरेशन पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा दी है। कोरोना के चलते एक सप्ताह तक के लिए यह व्यवस्था की गई है। हालाँकि हादसों में घायल व गंभीर रोगियों के ऑपरेशन चलते रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एक्टिव मामलों में कमी आई है, लेकिन अभी भी प्रतिदिन कोरोना के मामले दो हजार आ रहे हैं। अस्पतालों में भीड़ होने पर ही लोग ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार ने अस्पताल परिसरों और ओपीडी में भीड़ न एकत्र करने और वार्डों में भी मरीजों के पास एक से ज्यादा तीमारदार न होने के लिए कहा है। हिमाचल प्रदेश के आईजीएमसी शिमला, कांगड़ा के टांडा, हमीरपुर, चंबा, नाहन और मंडी नेरचौक में मेडिकल कॉलेज हैं। बता दें कि अब तक प्रदेश में 3969 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। अस्पतालों में 40 मरीज ऐसे हैं, जिनकी हालत गंभीर है। इन्हें आईसीयू पर रखा गया है, जबकि ऑक्सीजन बेड पर भी 50 के करीब मरीज हैं। स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या में कमी आई है, लेकिन लोग लापरवाह हो रहे हैं। अस्पतालों में रूटीन ऑपरेशन को अभी बंद रखा गया है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही सभी पार्टियों ने अपनी प्रचार की रफ्तार भी तेज कर दी है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक वर्चुअल रैली के माध्यम से उत्तर प्रदेश के पांच जिलों के लोगों को संबोधित करेंगे। यूपी के चुनाव के प्रचार के दौरान ये पीएम की पहली रैली होगी। वहीं इस रैली के बारे में जानकारी देते हुए पीएम ने ट्वीट कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने 29 जनवरी को ट्वीट करते हुए कहा, 'जन भागीदारी और जन विश्वास में ही लोकतंत्र की ताकत निहित है। 31 जनवरी को यूपी के 5 जिलों के लिए होने वाली वर्चुअल रैली में आपकी हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। मेरा आग्रह है कि इस रैली के लिए आप अपने सुझाव नमो ऐप पर जाकर अवश्य साझा करें।'
संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। साल का पहला सत्र होने के कारण परंपरा के अनुसार सत्र की शुरूआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से होगी। कोरोना के लगातार बढ़ रहे खतरे के बीच कई तरह की पाबंदियों के साथ संसद का यह बजट सत्र शुरू होने जा रहा है। यहां तक कि पहले दो दिनों को छोड़कर संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा को दो शिफ्टों में चलाने का फैसला किया गया है। कोरोना काल के साथ-साथ यह सत्र चुनावी माहौल में भी शुरू होने जा रहा है। 2 फरवरी से कोविड प्रोटोकॉल के तहत लोक सभा और राज्य सभा की कार्यवाही दो शिफ्टों में चलेगी। संसद के उच्च सदन राज्य सभा की कार्यवाही सुबह 10 बजे से शुरू होकर दोपहर बाद 3 बजे तक चलाने का फैसला किया गया है। इसके एक घंटे बाद यानि शाम 4 बजे लोक सभा की कार्यवाही शुरू होगी, जिसे रात 9 बजे तक चलाने का फैसला किया गया है। फिलहाल यह व्यवस्था बजट सत्र के पहले चरण यानि 11 फरवरी तक के लिए ही की गई है। संसद सत्र को लेकर सरकार के साथ-साथ विपक्ष ने भी अपनी तैयारी कर ली है। विपक्ष के पास मुद्दों की भरमार है जिसके सहारे वो सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे। संसद सत्र से ठीक पहले पेगासस सौदे को लेकर एक विदेशी अंग्रेजी अखबार द्वारा किए गए खुलासे को लेकर विपक्षी दल सरकार के खिलाफ दोनों सदनों में मोर्चा खोलते नजर आएंगे। पांच राज्यों में हो रहे चुनाव और किसान संगठनों की सक्रियता का असर भी बजट सत्र के पहले चरण में पड़ना तय माना जा रहा है। बता दें कि संसद का यह बजट सत्र दो चरणों में चलेगा। पहले चरण में सदन का सत्र 31 जनवरी से शुरू होकर 11 फरवरी तक चलेगा और दूसरे चरण के अंतर्गत यह 14 मार्च से शुरू होकर 8 अप्रैल तक चलेगा।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में रविवार रात बड़ी घटना घटी है। दरअसल घंटाघर से टाटमिल चौराहे की ओर जा रही एक इलेक्ट्रिक बस बेकाबू हो गई और कई गाड़ियों को टक्कर मारते हुए आगे निकल गई। घटना टाट मिल चौराहे के पास रात करीब 11:30 बजे की है। वहीं हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा तफरी मच गई। पूर्वी कानपुर के डीसीपी ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस और एंबुलेंस भेजी गई। इस दुर्घटना में कम से कम 5 लोगों की मौत हुई है और कई लोग घयल हुए। उन्होंने बताया कि घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि पुलिस बस चला रहे ड्राइवर की तलाश और राहत कार्य में जुटी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस पूरे घटना में बस ड्राइवर से गलती हुई है। फिलहाल पुलिस वहां लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है। वहीं इस घटना पर राष्ट्रपति रामनाथ केविंद ने दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से कहा, 'कानपुर में हुई बस दुर्घटना में कई लोगों के हताहत होने की खबर से अत्यंत दुःख हुआ है। इस घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहन शोक-संवेदनाएं। मैं घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हू।'
जिला शिमला में आगजनी की घटनाएं थम नहीं रही है। आए दिन आगजनी होने से भारी नुकसान हो रहा है। ताजा मामले में मशोबरा के बलदेया में एक निजी होटल में आग लग जाने का मामला सामने आया है। इस घटना में एक व्यक्ति धुंए से बेहोश हो गया उसकी हालत गम्भीर बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यरात्रि बल्देया में सिमरन भोजनालय में आग लगने की सूचना मिलने पर छोटा शिमला से फायर टेंडर ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। इस आगजनी में भोजनालय के अंदर सो रहा दिल्लू राम पुत्र गोरिया राम गांव तगैणी डाकखाना बल्देया उम्र 45 साल आग में झुलस गया थ, जिसे भोजनालय के कर्मचारी अंदर से बाहर निकाल कर इलाज के लिए पीएचसी मशोबरा ले गए। आगजनी से करीब 1 लाख का नुकसान आंका गया है। वही जिला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत ननहार में खाद्य आपूर्ति विभाग की उचित मूल्य की दुकान में आज प्रातः आग लग गई l जिसमें लाखो का नुकसान हुआ है वंही आगजनी से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है l जिला अग्निशमन अधिकारी डीसी शर्मा ने मामले की पुस्टि की है।
जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से होने वाले आतंकवाद पर सुरक्षाबलों ने कड़ा प्रहार किया है। IGP कश्मीर ने जानकारी दी है कि पिछले 12 घंटों में दो मुठभेड़ में पाकिस्तान प्रायोजित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादी मारे गए है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया है कि पिछले 12 घंटों में पुलवामा में चार और बडगाम में एक आतंकी मारा गया है। मारे गए लोगों में जैश कमांडर आतंकवादी जाहिद वानी और एक पाकिस्तानी आतंकवादी शामिल है। वहीं, कल अनंतनाग में आतंकवादियों ने एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल अली मोहम्मद गनी को अनंतनाग के बिजबेहरा के तबला इलाके में हसनपोरा स्थित उनके आवास के पास आतंकवादियों ने गोली मार दी। उन्होंने बताया कि गनी को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज यहां ऐतिहासिक गेयटी थियटर में हिमाचल प्रदेश कला, संस्कृति तथा भाषा अकादमी द्वारा आयोजित शिखर सम्मान, कला सम्मान, साहित्य पुरस्कार, स्वैच्छिक संस्था सम्मान, चम्बा रूमाल पहाड़ी चित्रकला सम्मान पुरस्कार वितरण समारोह, 2022 की अध्यक्षता करते हुए कहा कि साहित्य महत्वपूर्ण है क्योकि यह बौद्धिक क्षमता को बढ़ाता है तथा समाज को इस दुनिया को देखने का एक अलग नज़रिया प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य की समृद्ध संस्कृति, धरोहर तथा साहित्य के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा सरकार द्वारा लेखकों, कलाकारों, कारीगरों तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं आरंभ की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019, 2020 तथा 2021 के लिए साहित्य पुरस्कार सभी विजेताओं को समय पर दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कलाकार राज्य के समृद्ध सांस्कृतिक संग्रह के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा तथा भाषा, कला एवं संस्कृति मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने नंद लाल ठाकुर को सरदार सोभा सिंह ललित कला पुरस्कार-2017 तथा खीमी राम को सरदार सोभा सिंह ललित कला पुरस्कार-2018 प्रदान किया। ज्वाला प्रसाद शर्मा को मनोहर सिंह निष्पादन कला सम्मान-2016, संजय सूद को मनोहर सिंह निष्पादन कला सम्मान-2017 तथा एस.डी.कश्यप को मनोहर सिंह निष्पादन कला सम्मान-2018 से सम्मानित किया गया। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को 51 हजार रुपए का नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी स्कूल और कॉलेजों को 6 फरवरी तक बंद रखने का निर्देश जारी किया है। हालांकि ऑनलाइन क्लासेस पहले की तरह चलती रहेंगी। इससे पहले सरकार ने 30 जनवरी तक सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया था। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने पहले सभी शिक्षण संस्थानों को 23 जनवरी तक बंद करने का आदेश दिया था, फिर यह प्रतिबंध 30 जनवरी तक बढ़ा दिया और अब 6 फरवरी तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड समेत कई राज्यों में कोरोना की वजह से स्कूल और कॉलेज बंद हैं। जबकि कुछ राज्यों ने कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद शिक्षण संस्थानों को खोलने का फैसला किया है।
पश्चिम बंगाल में बर्दवान मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में सुबह आग लगने से कोविड-19 से पीड़ित 1 महिला मरीज की मौत हो गई। हालांकि फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है लेकिन पेशेंट की मौत से अन्य मरीजों और रिश्तेदारों में दहशत का माहौल है। अधिकारियों ने बताया कि आग किस वजह से लगी है इसका पता लगाने और मामले की जांच के लिए 5 सदस्य गठित की गई है। फिलहाल कोविड वार्ड को सील कर दिया गया है। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि हॉस्पिटल के राधारानी वार्ड में शनिवार तड़के आग लग गई। कोरोना महामारी फैलने के बाद से इस वार्ड को कोविड के इलाज के लिए एक विशेष वार्ड में बदल दिया गया था। उन्होंने बताया कि आग देखकर शुरुआत में तो मरीजों के परिजनों ने आग बुझाने का प्रयास किया। लेकिन जल्द ही एक फायर टेंडर को बुलाया गया और पुलिस मौके पर पहुंची। वहीं एक घंटे की मशक्कत के बाद लोगों ने आग पर काबू पाया गया। हालांकि अस्पताल ने अपनी ओर से किसी भी विफलता को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, लेकिन कारण का पता लगाने के लिए पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है। बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राचार्य प्रबीर सेनगुप्ता ने इंडिया टुडे को बताया कि एक फोरेंसिक जांच भी की जाएगी।
पेगासस स्पाईवेयर से संबंधित अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा है कि मोदी सरकार ने ‘देशद्रोह’ किया है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि साल 2017 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल गए थे तो दो अरब डॉलर का रक्षा सौदा हुआ था। इस सौदे में पेगासस को लेकर भी डील हुई थी। इस खबर को लेकर राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी सरकार ने हमारे लोकतंत्र की प्राथमिक संस्थाओं, राजनेताओं व जनता की जासूसी करने के लिए पेगासस ख़रीदा था। फ़ोन टैप करके सत्ता पक्ष, विपक्ष, सेना, न्यायपालिका सब को निशाना बनाया है। ये देशद्रोह है।’’
देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्य कोहरे, बारिश और शीत लहर की चपेट में हैं। मौसम विभाग की माने तो उत्तर भारतीय राज्यों में अगले 24 घंटे शीत लहर का प्रकोप जारी रहेगा। आईएमडी ने कई क्षेत्रों में भारी बारिश का भी अनुमान जाहिर किया है। वहीं, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 2 से 4 फरवरी तक बारिश समेत भारी बर्फबारी होने की आशंका जताई है। दिल्ली की बात करें तो मौसम विभाग का मानना है कि इस पूरे सप्ताह राजधानी में बारिश नहीं होगी। लेकिन हवा की वजह से ठिठुरन बढ़ने की संभावना है। IMD ने कहा कि यहां पूरे सप्ताह मौसम साफ रहने के साथ सुबह-शाम अधिक ठंड होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, दिल्ली में 3 फरवरी को हल्की बारिश होने की संभावना है।
हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को राज्य में कोविड-19 से संबंधित कुछ प्रतिबंधों में ढील दी और सीटों की 50 प्रतिशत क्षमता के साथ सभी सिनेमा हॉल, थिएटर और मल्टीप्लेक्स खोलने की अनुमति दी। एक सरकारी आदेश में यह जानकारी दी गई। इससे पहले राज्य में कोरोना वायरस की वजह से कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे। हरियाणा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी सिनेमा हॉल, थिएटर, मल्टीप्लेक्स को 50 प्रतिशत सीटों की क्षमता के साथ खोलने की अनुमति दे दी गयी है। इस दौरान ये भी निर्देश दिए गए है कि आवश्यक सामाजिक दूरी, नियमित साफ-सफाई और कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार मानदंडों का पालन करना अनिवार्य होगा। बता दें कि हरियाणा में अब तक 9 लाख से ज्यादा कोरोना वायरस के केस आ चुके हैं और 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। कोविड19 की वजह से राज्य में सिनेमा हॉल, थिएटर, मल्टीप्लेक्स, जिम और स्कूल लंबे समय तक बंद रहे। हालांकि केस कम होने के बाद धीरे-धीरे सभी चीजों में ढील दी गई है।
मानव भारती विश्व विद्यालय में फर्जी डिग्री मामले के बाद विश्व विद्यालय के सभी विद्यार्थियों के रिकॉर्ड पुलिस के पास है। वर्तमान में विश्व विद्यालय में पढ़ाई कर रहे और पढ़ाई पूरी कर चुके करीब 3000 विद्यार्थियों में डिग्रियां न मिलने से खासा रोष है। ऐसे में डिग्रियां न मिलने के विद्यार्थियों ने आंदोलन का रुख अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी के चलते सात फरवरी को विवि प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बाद एसपी कार्यालय सोलन के बाहर विद्यार्थियों ने एक दिन अनशन करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को विद्यार्थी संघ ने बैठक का आयोजन भी किया। जानकारी के अनुसार पुलिस ने वर्ष 2009 से 2019 तक तमाम रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया था। इसी वजह से विद्यार्थियों की डिग्री समेत मार्कशीट न मिलने के कारण नौकरी सहित उनके अन्य कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। मानव भारती विवि के स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमन आनंद ने कहा कि सभी विद्यार्थियों ने निर्णय लिया है कि वह एक दिन अनशन पर बैठेंगे। पिछले दो वर्षों से विद्यार्थी अपने रिकॉर्ड बहाल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि सभी विद्यार्थी मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। विद्यार्थी डिग्री के बिना न तो कोई काम कर सकते हैं, न ही आगे की पढ़ाई के लिए वह किसी शिक्षण संस्थान में अप्लाई कर सकते हैं।
31 जनवरी को बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से होगी. राष्ट्रपति दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को सेंट्रल हॉल में सम्बोधित करेंगे राष्ट्रपति के अभिभाषण में आम तौर पर सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का ब्योरा दिया जाता है। ऐसे में इस साल के अभिभाषण में भी मोदी सरकार अपनी भावी योजनाओं और उपलब्धियों का खाका दिखाई पड़ेगा। कहा जा रहा है कि इस बजट में सरकार किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकती है। 31 जनवरी को ही राष्ट्रपति का अभिभाषण ख़त्म होने के बाद सरकार की ओर से संसद के दोनों सदनों में इस साल का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। कोरोना की त्रासदी के बावजूद पिछले साल देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिले थे। आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था को लेकर पैदा हुई चुनौतियों और उससे निपटने के लिए सरकार की तैयारियों का लेखा जोखा पेश किया जाएगा। बजट सत्र का सबसे अहम पहलू 1 फरवरी को पेश होने वाला आम बजट होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में सुबह 11 बजे आम बजट पेश करने से जुड़ा अपना भाषण शुरू करेंगी। बजट की दिशा कैसी होगी, इसकी एक बानगी आर्थिक सर्वेक्षण में भी ज़रूरी दिखाई पड़ेगी। पांच राज्यों में जारी चुनावी घमासान के बीच पेश हो रहे बजट में कुछ बड़ी घोषणाओं की संभावना है। बजट में जहां आम वेतन भोगी टैक्स में छूट की उम्मीद लगाए बैठा है वहीं कोरोना महामारी से परेशान व्यापारी वर्ग को भी राहत की आस है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि किसानों को लेकर बजट में कोई महत्वपूर्ण घोषणा की जा सकती है। तय कार्यक्रम के मुताबिक़, दो भागों में होने वाले बजट सत्र का पहला भाग 11 फरवरी तक चलेगा। आम बजट के अलावा इस भाग का एक और अहम हिस्सा होता है। इस बार लोकसभा में प्रस्ताव पर बहस के लिए चार दिनों का समय आवंटित किया गया है जो 2 फरवरी को शुरू होगी। बहस की समाप्ति पर 7 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब देंगे जिसपर सबकी निगाहें होंगी।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख एल. मंडाविया से भेंट की। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से पहाड़ी क्षेत्रों में प्रतिक्रिया समय कम करने के लिए 50 एम्बुलेंस स्वीकृत करने का आग्रह किया। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को राज्य में आशा कार्यकर्ताओं की कमी के बारे में अवगत करवाया और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) के तहत 58 आशा कार्यकताओं तथा राज्य के शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में और गुणवत्ता लाने के लिए गैर एनयूएचएम घटक के तहत 176 आशा कार्यकर्ताओं के पद स्वीकृत करने का आग्रह किया। जयराम ठाकुर ने राज्य को बल्क ड्रग पार्क प्रदान करने का भी आग्रह किया, जिससे औद्योगिकरण को बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने भी राज्य के विभिन्न मुद्दों पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह और प्रधान आवासीय आयुक्त सुशील कुमार सिंगला भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। घटते कोरोना केस के बीच गुरुवार को डीडीएमए की बैठक में वीकेंड कर्फ्यू को खत्म करने समेत ये महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इसके साथ ही, बाजारों में दुकानों से Odd-Even नियम हट जाएगा। हालांकि अभी नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। इसका अभी औपचारिक एलान होना बाकी है। इसके साथ ही, बैठक में दिल्ली के अंदर 50 फीसदी क्षमता के साथ सिनेमा हॉल खोलने की भी इजाजत दी गई है। शादी समारोह में भी 200 लोगों के शामिल होने पर छूट मिलेगी। इसके अलावा, दिल्ली के सरकारी ऑफिस 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे। हालांकि, एजुकेशन इंस्टीट्यूट और स्कूल अभी बंद रहेंगे। स्कूलों को खोलने पर फैसला अगली बैठक में किया जाएगा। इसके साथ ही, रेस्टोरेंट्स और बार भी पचास फीसदी क्षमता के साथ खुल सकेंगे। गौरतलब है कि दिल्ली में लगातार कोरोना के नए मामलों में कमी देखी जा रही है। सत्येन्द्र जैन ने गुरुवार को कहा कि कोविड-19 के लगातार केस कम आ रहे हैं और आज इसके करीब पांच हजार नए केस आने की संभावना है। इससे पहले, बुधवार दिल्ली में कोरोना के 7 हजार 498 मामले सामने आए थे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने नई दिल्ली में केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बैठक की। बैठक में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रेल मंत्री से राज्य में रेल नेटवर्क के विस्तार का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाईन के कार्य को गति देने के लिए हर प्रयास कर रही ताकि इसे शीघ्र पूरा किया जा सके। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से इस रेलवे लाईन के कार्य में तेजी लाने का आग्रह करते हुए कहा कि इस लाईन का लेह तक विस्तार करना सामरिक दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने अवगत करवाया कि इस लाईन का पूर्ण सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और इस मामले में आगामी कार्यवाही का आग्रह किया। जयराम ठाकुर ने बद्दी-चंडीगढ़ रेल लाईन पर शीघ्र कार्य आरम्भ करने का भी आग्रह किया और बताया कि हिमाचल प्रदेश की ओर से भूमि अधिग्रहण का कार्य किया जा चुका है। यह बद्दी-अमृतसर-कोलकाता गलियारे से जुड़ने और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक होगा। उन्होंने बद्दी की ओर से कार्य शुरू करने का आग्रह किया क्योंकि यहां सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं। उन्होंने जगाधरी-पांवटा साहिब रेल लाईन के सर्वेक्षण का भी आग्रह किया जो कि काला अम्ब औद्योगिक क्षेत्र को बद्दी-अमृतसर-कोलकाता गलियारे से जोड़ने में सहायक होगा। उन्होंने रेल मंत्री से कालका-शिमला रेल ट्रैक को स्तरोन्नत करने का आग्रह किया क्युकी इस टेªन की गति बहुत धीमी है। उन्होंने कहा कि टेªन में नए कोच जोड़े जाने चाहिए, क्योंकि मौजूदा कोच बहुत पुराने हैं। केन्द्रीय रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाईन को शीघ्र पूरा करने के लिए राशि बढ़ाने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्टेट-ऑफ आर्ट ट्रेन को पीपीपी मोड पर आरम्भ करने का प्रस्ताव भेजने को भी कहा। उन्होंने कहा कि राज्य की मांगों को पूरा करने के लिए सम्भावनाएं तलाशी जाएंगी। उन्होंने बताया कि मंत्रालय शीघ्र ही ऊना-हमीरपुर रेल लाईन के लिए राज्य को प्रस्ताव भेजेगा। बैठक में अनुराग सिंह ठाकुर ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए और ऊना हमीरपुर रेल लाईन पर शीघ्र कार्यवाही करने का आग्रह किया। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह और प्रधान आवासीय आयुक्त सुशील कुमार सिंगला भी बैठक में उपस्थित थे।
गणतंत्र दिवस के मौके पर बीएसएफ को एक बड़ी सौगात मिली है। पाकिस्तान से सटे सर क्रीक एरिया और बांग्लादेश से सटे सुंदरबन में सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए बीएसएफ को तीन नई फ्लोटिंग-बीओपी मिल गई हैं। कोच्चिन शिपयार्ड ने इन जहाज-नुमा फ्लोटिंग बीओपी का निर्माण किया है और 26 जनवरी को शिपयार्ड ने इन बीओपी को बीएसएफ सौंप दिया। बीएसएफ के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने कोच्चिन शिपयार्ड को कुल नौ फ्लोटिंग-बीओपी यानी पानी में तैरने वाली बॉर्डर आउट पोस्ट बनाने का ऑर्डर दिया था। तीन-तीन के खेप में इन बीओपी का निर्माण होना था। 26 जनवरी को शिपयार्ड ने दूसरी खेप बीएसएफ को सौंप दी। 26 जनवरी को मिली खेप के बाद बीएसएफ के पास अब कुल 12 फ्लोटिंग बीओपी हो गई हैं। जल्द ही तीन और फ्लोटिंग बीओपी मिलने की उम्मीद है। ये सभी 12 फ्लोटिंग बीओपी सुंदरबन और सर क्रीक एरिया में तैनात करने के लिए तैयार कराई गई थीं। इनमें से 6 सुंदरबन के लिए हैं और छह ही सर क्रीक एरिया के लिए।
हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी दौर लगातार 4 दिन तक जारी रहा हैं। बुधवार शाम तक प्रदेश में 417 सड़कें और 253 बिजली ट्रांसफार्मर ठप रहे। वहीं 106 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित चल रही हैं। बर्फबारी के चलते प्रदेश के जिला कुल्लू, किन्नौर, लाहौल, चंबा और शिमला में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बता दें कि सबसे ज्यादा 152 सड़कें लाहौल-स्पीति जिले में बंद हैं। वहीं शिमला में 115 और चंबा जिले में 53 सड़कें ठप हैं। बुधवार को रोहतांग समेत प्रदेश के अन्य उच्च पर्वतीय भागों में फिर बर्फबारी हुई है। राजधानी शिमला में बीते दिन भी हल्की बारिश-बर्फबारी दर्ज की गई है। लगातार जारी बर्फबारी से पूरा प्रदेश शीतलहर की चपेट में है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश में 27 से 30 जनवरी तक मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। ऐसे में लोगों को ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि कुछ मैदानी भागों में 27 जनवरी को कोहरा छाने का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी वैसे तो सुर्खियों में अपनी खूबसूरती और एक्टिंग को लेकर रहती हैं लेकिन इस बार वो अपने दिए एक बयान को लेकर विवाद में फंस गई हैं। श्वेता ने बीते दिन एक प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान आपत्तिजनक बयान दिया है। इसके बाद मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक्ट्रेस के विवादित बयान पर सख्त रवैया दिखाते हुए कहा कि इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि श्वेता तिवारी का बयान बेहद आपत्तिजनक है। भोपाल पुलिस कमिश्नर से कहा गया है कि मामले की जांच कर चौबीस घंटे में रिपोर्ट दें। उन्होंने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि, ये बात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल, श्वेता बीते दिन भोपाल में अपनी आगामी वेब सीरीज की अनाउंसमेंट के लिए पहुंची थी। श्वेता ने अपनी टीम के साथ एक प्रेस कॉफ्रेंस में भाग लिया था। श्वेता ने यहां मीडिया से बात करते हुए आपत्तिजनक बयान दिया था। वहीं, उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अर्जुन अवार्डी और पदमश्री चरणजीत सिंह का गुरुवार को निधन हो गया। उन्होंने ऊना में अपने घर पर सुबह पांच बजे अंतिम सांस ली। बता दें कि शाम चार बजे स्वर्गधाम में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। भारतीय हॉकी टीम की कमान संभालते हुए ऊना के मैड़ी के रहने वाले चरणजीत सिंह ने देश को ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलवाया था। उनके निधन पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शोक प्रकट किया है। उन्होंने ट्ववीट कर कहा, "ऊना से संबंध रखने वाले पूर्व हॉकी खिलाड़ी और 1964 ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे, पद्मश्री व अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित चरणजीत सिंह जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। हिमाचल का गौरव बढ़ाने में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकग्रस्त परिवार को संबल प्रदान करें।" गौरतलब है कि ऊना के मैड़ी में 3 फरवरी 1931 को जन्मे चरणजीत सिंह ने टोक्यो ओलंपिक 1964 में इतिहास रचा था। उनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने इस ओलंपिक में स्वर्ण जीता था। चरणजीत सिंह हिमाचल के एक ही ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने ने भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी संभाली है। टोक्यो ओलंपिक 1964 में ऊना के चरणजीत सिंह को टीम इंडिया की कप्तानी मिली थी। टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए इस ओलंपिक में देश को गोल्ड मेडल दिलाया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को खत लिखकर इस मीडियम पर उनकी आवाज को दबाने का आरोप लगाया। राहुल ने आरोप लगाया था कि सरकार के दबाव में उनकी आवाज को दबाने के लिए ट्विटर पर फॉलोअर्स की संख्या को कम किया जा रहा है। इस पर अब ट्विटर ने जवाब दिया है। ट्विटर स्पॉक्स ने कहा, फॉलोअर्स काउंट्स विजिबल फीचर है और हम चाहते हैं कि हर किसी को इसका विश्वास रहे कि ये आंकड़े सही और तथ्यात्मक हैं। ट्विटर की हेरफेर और स्पैम को लेकर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। फॉलोअर्स की संख्या गिराने के राहुल गांधी के आरोप को लेकर ट्विटर ने आगे कहा, हम मशीन लर्निंग टूल्स के साथ रणनीतिक रूप से और बड़े पैमाने पर स्पैम से लड़ते हैं और एक स्वस्थ तरीके और विश्वसनीय अकाउंट्स को सुनिश्चित करने के लिए लगातार और चल रहे प्रयासों के हिस्से के तौर पर फॉलोअर्स की संख्या में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
झारखंड के गिरिडीह में नक्सलियों ने उत्पात मचाया है। नक्सलियों ने नई दिल्ली-हावड़ा रेल खंड पर विस्फोट किया है। यह विस्फोट सरिया थाना इलाके के चिचाकी व चौधरीबांध रेलवे स्टेशन के बीच किया गया। अप और डाउन दोनों ट्रैक पर विस्फोट हुआ है। बता दें कि प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के टॉप लीडर प्रशांत बोस व उनकी पत्नी शीला की रिहाई की मांग को लेकर नक्सली गुस्से में हैं। ऐसे में नक्सलियों ने 21 से 26 जनवरी तक प्रतिरोध दिवस मनाया तो 27 जनवरी को उन्होंने बंद की घोषणा की है। दरअसल नक्सली देश की आजादी का पर्व 15 अगस्त और 26 जनवरी गणतंत्र दिवस को काला दिवस के रूप में मनाते हैं। इसके पीछे नक्सल संगठन यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि उनका संगठन देश के संविधान को नहीं मानता है। इसलिए जब 26 जनवरी के दिन जब पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा होता है तब नक्सल प्रभावित इलाकों में सब कुछ बंद होता है। नक्सली अपने बंद के दौरान अंदरूनी क्षेत्रों में उत्पात मचाने के साथ ही जवानों को निशाना बनाने, पुलिस कैंपों में हमला करने, सड़क मार्ग को अवरुद्ध करने साथ ही रेल मार्ग को नुकसान पहुचाने की फिराक में होते हैं।
केंद्र सरकार द्वारा विमानन कंपनी एयर इंडिया को गुरुवार को टाटा समूह सौंपने के बाद वह गुरुवार से ही संचालित होने वाली अपनी उड़ानों में कुछ परिवर्तन करने जा रही है। उनमें से वह सबसे पहले अच्छा नाश्ता देने की शुरुआत करेगी निजी कंपनी के अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि टाटा समूह ने गुरुवार को मुंबई से संचालित होने वाली चार उड़ानों में ‘उन्नत भोजन सेवा’ शुरू करके एयर इंडिया में अपना पहला कदम उठाया है। हालांकि अभी फिलहाल एयर इंडिया की उड़ानें गुरुवार से ही टाटा समूह के बैनर तले उड़ान नहीं भरेंगी। गौरतलब है कि करीब 69 साल पहले समूह से विमानन कंपनी लेने के बाद उसे अब फिर टाटा समूह को सौंपा जा रहा है अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी है। सरकार ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के बाद आठ अक्टूबर को 18,000 करोड़ रुपये में एयर इंडिया को टैलेस प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया था। यह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की अनुषंगी इकाई है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के करीब हैं। एयर इंडिया को बृहस्पतिवार को समूह को सौंप दिए जाने की संभावना है।
73वां गणतंत्र दिवस समारोह पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास व उत्साह के साथ मनाया गया। राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शिमला के ऐतिहासिक रिज पर राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर तिरंगा फहराया और मार्च पास्ट की सलामी ली। राज्यपाल ने इस अवसर पर परेड का निरीक्षण किया और परेड कमांडर 2 नागा रेजिमेंट जतोग के कैप्टन गुरदेव सिंह के नेतृत्व में भव्य मार्च पास्ट की सलामी ली। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और उनकी धर्मपत्नी डाॅ.साधना ठाकुर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। मार्च पास्ट में सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, हिमाचल प्रदेश सशस्त्र पुलिस, राज्य पुलिस, गृह रक्षक, अग्निशमन सेवाएं और हिमाचल प्रदेश डाक सेवाएं, आपदा प्रबन्धन, पूर्व सैनिक, एनसीसी व एनएसएस इत्यादि के कैडेट्स शामिल थे। गणतंत्र दिवस समारोह में विभिन्न विभागों की विकासात्मक गतिविधियों को दर्शाती झांकियां भी प्रस्तुत की गईं। नागा रेजिमेंट की ओर से प्रस्तुत ड्रिल भी सराहनीय रही। बर्फबारी और खराब मौसम के चलते सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शिमला के गेयटी थियेटर में किया गया। सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कलाकारों ने कोविड महामारी से संबंधित एक जागरूकता कार्यक्रम और लघु नाटिका प्रस्तुत की। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (पंजाब) के कलाकारों ने भांगड़ा और जिन्दुआ की प्रस्तुती दी, जोकि सभी के आकर्षण का केन्द्र रही। ग्रामीण विकास विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की झांकियों को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। नगर निगम शिमला को दूसरा और शिक्षा विभाग की झांकी को तीसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की उपस्थिति में पुरस्कार प्रदान किए। राज्यपाल ने सरकारी क्षेत्र में महात्मा गांधी स्वास्थ्य सेवा संस्थान खनेरी रामपुर को तथा लाॅयन रियोन डायलेसिस एवं हेल्थ केयर सेंटर न्यू शिमला को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के बेहतर संचालन के लिए सम्मानित किया।
छात्रों के हंगामे के बाद रेलवे की ग्रुप डी की परीक्षा रोक दी गई है। रेलवे ने धांधली के आरोपों को लेकर जांच के लिए एक समिति बनाई है, लेकिन हंगामा अभी जारी है। छात्रों ने बिहार में गया रेलवे जक्शन के आउटर सिग्नल पर खड़ी एमटी ट्रेन के कोच में आग लगा दी है। आग इतनी भयंकर है कि धुएं का गुबार दूर से देखा जा सकता है। परीक्षा को लेकर बिहार से शुरू हुआ हंगाा यूपी भी पहुंच गया। प्रयागराज में भी छात्रों ने हंगामा किया उसके बाद पुलिस हंगामा करने वाले छात्रों की तलाश में हॉस्टल पहुंच गई, इसको लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने हमला भी बोला है। रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि रेलवे ने एक समिति भी बनाई है, जो विभिन्न रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की ओर से आयोजित परीक्षाओं में सफल और असफल होने वाले परीक्षार्थियों की शिकायतों की जांच करेगी। प्रवक्ता के मुताबिक, दोनों पक्षों की शिकायतें और चिंताएं सुनने के बाद समिति रेल मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपेगी।
पूरे देश में 73वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों से भारतीय सेना के जवानों के साहस और उनकी ओर से गणतंत्र दिवस मनाने के वीडियोज़ सामने आने लगे हैं। इस बीच लद्दाख में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने 15 हजार फीट की ऊंचाई पर भारत का 73वां गणतंत्र दिवस मनाया। इसका वीडियो सामने आया है। लद्दाख में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के हिमवीर जवानों ने 15000 फीट की ऊंचाई पर -35 डिग्री सेल्सियस तापमान में भारत का 73वां गणतंत्र दिवस मनाया। दूसरी ओऱ उत्तराखंड के कुमाओं क्षेत्र में भी आईटीबीपी के जवानों ने 12000 फीट की ऊंचाई पर गणतंत्र दिवस का जश्न मनाया और तिरंगा लहराया।
रेल मंत्रालय ने गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों और रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की लेवल 1 की परीक्षाओं पर रोक लगा दी है। इसी के साथ पास हुए या फेल अभ्यर्थियों की सुनवाई के लिए एक कमिटी का गठन किया गया है जो रेलवे मंत्रालय को रिपोर्ट देगी। छात्रों के विरोध के मद्देनजर रेलवे ने ये फैसला लिया है। रेलवे ने अपनी भर्ती परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया को लेकर परीक्षार्थियों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद एनटीपीसी और लेवल-1 की परीक्षाएं स्थगित करने का फैसला किया है। रेलवे के एक प्रवक्ता ने आज ये जानकारी दी है। प्रवक्ता ने बताया कि रेलवे ने एक समिति भी बनाई है, जो विभिन्न रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से आयोजित परीक्षाओं में सफल और असफल होने वाले परीक्षार्थियों की शिकायतों की जांच करेगी।बता दें कि RRB-NTPC का रिजल्ट जारी होने के बाद लाखों छात्रों ने इसके विरोध में बिहार और उत्तर प्रदेश के साथ अन्य जगहों पर भी प्रदर्शन किया है। बिहार में दो दिन से इसे लेकर भारी हंगामा बरपा है। छात्रों ने रेल ट्रैक पर ट्रेनें रोकी और रेलवे स्टेशनों पर भी कब्जा किया। छात्रों की मांग थी कि रिजल्ट पर रेलवे को दोबारा विचार करना चाहिए। गौरतलब है कि RRB-NTPC परीक्षा का रिजल्ट 14-15 जनवरी को जारी किया गया था जिसके बाद से ही कैंडिडेट्स का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। इन परीक्षाओं में 1 करोड़ 40 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे और रिजल्ट आने के बाद से ही छात्रों के बीच असंतोष का मुद्दा छाया हुआ है।
भारत आज अपना 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर अटारी वाघा बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच मिठाइयों का आदान प्रदान हुआ। इस दौरान पाक रेंजर्स ने बीएसएफ अधिकारियों को 73वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी। इससे पहले दिवाली पर भारत-पाकिस्तान के अधिकारियों ने एक-दूसरे को मिठाई दी थी। बता दें कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस के अलावा ईद, होली, दिवाली पर भारत और पाकिस्तान के बीच मिठाइयों के आदान-प्रदान की परंपरा रही है। पिछले बार गणतंत्र दिवस के मौके पर बीएसएफ ने पाकिस्तान रेंजर्स के अधिकारियों के साथ मिठाई का आदान-प्रदान नहीं किया था। दोनों देशों के बीच खराब हुए द्विपक्षीय सबंधों के कारण बीएसएफ ने ये कदम उठाया था।
भारत में आज 73वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। देशभर में इस खास मौके पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। लेकिन राजधानी दिल्ली के राजपथ में मानों देश का हर रंग उतर आया हो। राजपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में कई राज्यों और उनकी संस्कृति कि अनोखी झलक देखने को मिली। जिसमें लोगों ने एक ही जगह बैठकर काशी विश्वनाथ से लेकर हेमकुंठ साहिब तक के दर्शन कर लिए। उत्तराखंड स्थित हेमकुंठ साहिब की झांकी देखने लायक थी, जिसमें डोबरा चंटी ब्रिज और बद्रीनाथ मंदिर को भी दिखाया गया। इतना ही नहीं यूपी की एक विशेष झांकी ने काशी विश्वनाथ के दर्शन भी लोगों को करवाए। इस दौरान राजपथ पर बैठे लोग इस झांकी को देख मंत्रमुग्ध हो गए। साथ ही करोड़ों लोगों ने टीवी पर इसका लुत्फ उठाया। हरियाणा का झांकी में खेलों को सबसे ऊपर दिखाया गया, क्योंकि हर बार खेलों में हरियाणा नंबर वन रहा है। हरियाणा की झांकी का थीम 'खेल में नंबर वन' था। इसमें हरियाणा के कुछ बड़े खिलाड़ी भी नजर आए। गणतंत्र दिवस की इस परेड में मेघालय की भी खूबसूरत झांकी दिखाई गई। इस झांकी में एक महिला को बांस की टोकरी और कई बांस के उत्पादों को बुनते हुए दिखाया गया। इसी तरह खूबसूरत और भव्य दिखने वाली इन झांकियों ने हर किसी का मन मोह लिया और राजपथ को अपने रंगों से भर दिया। लोगों को लग रहा था कि वो पूरे भारत की सैर एक ही जगह बैठकर कर रहे है।
गणतंत्र दिवस' के खास मौके पर हर साल वीरता पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। इस बार भी ऐलान कर दिया गया है। 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार ने ITBP को 18 पदक प्रदान किए। वीरता के लिए 3 पुलिस पदक, विशिष्ट सेवा के लिए 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए 12 पुलिस पदक घोषित किए गए। राष्ट्रपति का वीरता मेडल (PMG) कुल 189 पुलिसकर्मियों को प्रदान किए गए। इनमें सबसे ज्यादा मेडल 114 जम्मू कश्मीर पुलिस को मिले। इसके अलावा सीआरपीएफ को 20, छत्तीसगढ़ पुलिस को 10, ओडिसा पुलिस को 9, महाराष्ट्र पुलिस को 8, आईटीबीपी को 3, एसएसबी को 3, दिल्ली पुलिस को 3, बीएसएफ को 2 और यूपी को 1 मेडल मिला। यूपी में ये मेडल एडीजी प्रशांत कुमार को मिला है।
पंजाब में 20 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन करने की प्रक्रिया मंगलवार यानी 25 जनवरी से शुरू होगी और एक फरवरी तक चलेगी। नामांकन पत्रों की जांच दो फरवरी को की जाएगी और नाम वापस लेने की अंतिम तिथि चार फरवरी होगी। नामांकन भरने के दौरान उम्मीदवार के साथ जाने वाले लोगों की संख्या पांच से घटाकर दो कर दी गई है जबकि वाहनों की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में मंगलवार यानी 25 जनवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ ही मैनपुरी, इटावा सहित 16 जिलों की 59 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। तीसरे चरण के लिए मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के सिंबल पर इटावा की जसवंतनगर सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल करेंगे।
हिमाचल प्रदेश के 51वें पूर्ण राज्यत्व दिवस के उप्लक्ष पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सोलन के ठोडो मैदान में आयोजित पूर्ण राज्यत्व दिवस के राज्यस्तरीय समारोह में बतौर कार्यक्रम में मुख्यातिथि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने संशोधित वेतनमान के लिए कर्मचारियों को दो विकल्प दिए गए हैं, अब इसके अलावा उन्हें एक अन्य विकल्प दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त यदि कोई कर्मचारी वर्ग इससे वंचित रहता है तो पुनर्विचार करके समाधान किया जाएगा। वंही हिमाचल के पेंशनरों को पंजाब के वेतन आयोग के आधार पर पेंशन लाभ दिए जाएंगे। इससे लाखों पेंशनरों को लाभ मिलेगा। इस दौरान सीएम जयराम ने घोषणा की कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर 31 फीसदी डीए दिया जाएगा। वंही 2015 के बाद नियुक्त पुलिस कांस्टेबलों को अन्य श्रेणियों की तरह समान वेतनमान दिया जाएगा। इसके लिए विस्तृत निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे। इस उप्लक्ष पर सीएम जयराम ने हिमाचल प्रदेश के निर्माता एवं प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार को याद करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश को पूर्व राज्य का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सीएम ने कहा कि हिमाचल की जनता के सहयोग से कोविड के कठिन दौर को पार करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। कोविड काल में 108 स्वास्थ्य संस्थान खोले और स्तरोन्नत किए गए। प्रदेश की भाजपा सरकार ने चार साल के कार्यकाल में 4525 सड़कें पक्की कीं, जोकि अब तक किसी सरकार में नहीं हुआ। चार वर्षों में 412 नए पंचायतें बनाई गईं। जब हिमाचल को पूर्ण राज्यत्व का दर्जा मिला तो सिर्फ 34 उपमंडल थे, लेकिन आज इनकी संख्या 78 है। तहसील और सब तहसील की संख्या 182 हो चुकी है। आज हिमाचल साक्षरता दर में केरल के बाद दूसरे स्थान आता है। 1971 में प्रति व्यक्ति आय 651 रुपये थी, जो आज 183286 रुपये हो गई है। जीडीपी 223 करोड़ थी, जो आज 156533 करोड़ है। स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या आज 4320 है। विद्युत की आपूर्ति आज शतप्रतिशत गांवों में है। 1971 में 10617 किलोमीटर तक सड़कें थीं, जो आज 38 हजार किलोमीटर हो गई हैं। वहीं अब प्रदेश में 2192 पुलों का जाल बिछा है। 1971 में 4693 शिक्षण संस्थान थे और आज इनकी संख्या 16067 पहुंच गई है। प्रदेश सरकार ने हिमकेयर योजना के तहत 2 लाख 17 हजार लोगों का मुफ्त इलाज किया और 200 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए। अटल टनल के साउथ व नार्थ पोर्टल पर पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के राज्यत्व दिवस पर राज्य के लोगों को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, 'मैं कामना करता हूं कि प्रकृति की गोद में बसा राज्य प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़े और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए'। पर्वतीय क्षेत्र 1971 में आज ही के दिन एक राज्य बना था। हिमाचल प्रदेश का पूर्ण राज्यत्व दिवस का राज्यस्तरीय समारोह आज सोलन के ठोडो मैदान में किया गया। प्रदेश के लिए इस महत्वपूर्ण दिन के समारोह के आयोजन में सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बतौर मुख्यथिति शिरकत की। ईद दौरान पुलिस, होमगार्ड, ट्रैफिक, एनसीसी समेत 10 टुकड़ियो ने सलामी दी।
दिल्ली में सर्दी के मौसम का डबल अटैक हुआ है। जनवरी महीने में रिकॉर्डतोड़ बारिश के बाद ठंड ने लेगों को परेशान कर रखा है। इस बीच मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अगले पांच दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। तापमान में गिरावट की वजह से दिल्ली में ठंड और बढ़ सकती है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कई इलाके में शीतलहर चलने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान, पश्चिमी हिमालय पर हल्की से मध्यम बारिश और हिमपात भी हो सकती है। पंजाब के उत्तरी हिस्सों, हरियाणा के कुछ हिस्सों, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी हल्की से मध्यम पारिश का अनुमान लगाया गया है। वहीं उत्तर पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के न्यूनतम तापमान में और गिरावट आ सकती है। तेलंगाना के न्यूनतम तापमान में भी 3 से 4 डिग्री की गिरावट आ सकती है। जम्मू कश्मीर की बात करें तो यहां जबरदस्त बर्फबारी का दौर जारी है। कुलगाम के उंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात ने लोगों को परेशान कर रखा है तो वही जम्मू-कश्मीर के मैदानी इलाकों में बारिश से ठंड बढ़ गई है। वहीं हिमाचल में बर्फबारी का दौर जारी है। 23 जनवरी को शिमला में सीजन का दूसरा हिमपात हुआ। बर्फबारी के कारण दो नेशनल हाइवे और 147 सड़कें बंद कर दिए गए हैं। मौसम विभाग ने पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश-बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
गणतंत्र दिवस समारोह पर मंडराते आतंकी खतरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। विजय चौक से लेकर लालकिले तक के परेड के रास्ते को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। गणतंत्र दिवस समारोह की सुरक्षा के लिए ही करीब 30 हजार जवानों को तैनाती की गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद देश के 73वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यानी कि आज शाम राष्ट्र को संबोधित करेंगे। गणतंत्र दिवस के खास मौके पर हर साल वीरता पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। इस बार भी इसका ऐलान कर दिया गया है। देश की सुरक्षा में अदम्य साहस का प्रदर्शन कर सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। गणतंत्र दिवस 2022 के अवसर पर वीरता पुरस्कार से जवानों को सम्मानित किया जाएगा। इसकी सूची मंगलवार को जारी की जा सकती है। 'वीरता पुरस्कार' के अलावा पद्म पुरस्कारों जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं इनका एलान भी आज संभवत: हो जाएगा। ये पुरस्कार भारत सरकार द्वारा हर साल भारतीय नागरिकों को उनके असाधारण कार्यों के लिए प्रदान किए जाते हैं। पद्म पुरस्कार देने की शुरुआत साल 1954 में की गई थी।
महाराष्ट्र के वर्धा जिले से मंगलवार की सुबह एक बेहद ही दर्दनाक हादसे की खबर मिली है। बीती रात पुल से नदी में कार गिरने से 7 मेडिकल छात्रों की दर्दनाक मृत्यु हो गई है। जानकारी के मुताबिक मेडिकल छात्र महाराष्ट्र के दवेली से महाराष्ट्र के वर्धा जिले में जा रहे थे। मरने वाले छात्रों में ज्यादातर 20 से 35 साल के लोग बताए जा रहे हैं। घायलों को वर्धा के जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। फिलहाल सभी शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा। वर्धा के एसपी प्रशांत होल्कर ने बताया कि सोमवार रात करीब साढ़े 11 बजे सेलसुरा के पास एक पुल से कार गिर गई। कार में सवार छात्र वर्धा जा रहे थे। हादसा कैसे हुआ इसके बारे में जांच जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए PMNRF से 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। मृतक छात्रों में महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के तिरोड़ा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक विजय रहांगदाले के बेटे आविष्कार रहांगडाले का भी नाम शामिल है। घटना में सभी की मृत्यु हुई है। हादसा देर रात यवतमाल वर्धा मार्ग पर सेलसुरा नामक जगह पर हुआ। पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि चालक ने कार से नियंत्रण खो दिया था, जिस वजह से 40 फुट गहरी खाई में छात्रों की कार आधी रात को गिर गई थी जिसकी वजह से यह बड़ा हादसा हुआ।
कोरोना की देशभर में बेकाबू रफ्तार लगातार जारी है। हालांकि, नए मामलों में कुछ कमी जरूर देखने को मिल रही है। देश में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना के 2 लाख 55 हजार 874 नए मामले आए और 614 लोगों की मौत हो गई। सोमवार की तुलना में कोरोना के नए मामलों में 16 फीसदी की कमी है। इसके साथ ही, पॉजिटिविटी रेट 20.75 फीसदी से घटकर 15.52 हो गया है। हालांकि, पिछले चौबीस घंट के दौरान 2 लाख 67 हजार 753 लोग ठीक हुए हैं। इसके बाद कोरोना से ठीक हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 70 लाख 71 हजार 898 हो गई है। देश में कोरोना के एक्टिव मरीजों का आंकड़ा बढ़कर अब 22 लाख 36 हजार 842 हो गया है। इससे पहले, सोमवार को कोविड-19 के 3 लाख 6 हजार 64 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,95,43,328 हो गई थी। देश में अब तक 71.88 करोड़ लोगों का टेस्ट हो चुका है। पिछले 24 घंटे के दौरान 16 लाख 49 हजार 108 लोगों का कोरोना टेस्ट कराया गया।
हिमाचल में बन रहा रेशम भारतीय सभ्यता का प्रतीक माने जानी वाली सिल्क साड़ियों में इस्तेमाल हो रहा है। इतना ही नहीं हिमाचल में तैयार रेशम का इस्तेमाल पूरी दुनिया की महिलाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी बनारसी साड़ियों में भी हो रहा है। बीते कुछ समय में हिमाचल में सेरीकल्चर ( रेशम कीट पालन व निर्माण प्रक्रिया ) को लेकर रुझान बढ़ा है। राज्य के सैकड़ों परिवार इस कार्य से जुड़े हैं और इनमें लगभग 90 फीसदी महिलाएं हैं। प्रदेश के रेशम केंद्रों में रेशम के कीट से कोकून को तैयार कर यह महिलाएं प्रदेश में मौजूद रिलिंग यूनिट तक पहुंचाती हैं। उक्त यूनिटों में कोकून से धागा तैयार कर इसे अन्य प्रदेशों में भेजा जाता है। जबकि कई रेशम केंद्रों से कोकून को सीधे अन्य राज्यों में भी भेजा जा रहा है। सेरीकल्चर से प्रदेश के सैकड़ों परिवारों की आर्थिकी बदल गई है। प्रदेश में तैयार धागा लगभग एक हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक की दर से अन्य राज्यों में बिक रहा है।रेशम आज दुनिया में बनने वाले सबसे मुलायम, चमकदार वस्त्रों में से एक है। आज के इस मशीनी युग में भी गुणवत्ता और श्रेष्ठता में रेशम का कोई मुकाबला नहीं है l पूरी तरह से प्राकृतिक यह कपड़ा सिल्क वर्म यानी की रेशम के कीड़ों द्वारा तैयार किया जाता है। वैश्विक बाजार में रेशम की बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें रोजगार की काफी संभावना हैं। आज के फैशन युग में इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में यह व्यवसाय एक अच्छी आमदनी का स्त्रोत बनता जा रहा है। ऐसे में रेशम कीट पालन व्यवसाय को यदि और ऊंचे स्तर पर विकसित किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व आमदनी के अवसर प्राप्त हो सकते है। गौरतलब है कि हिमाचल का कोकून सबसे बेहतर माना जाता है, जिससे बढ़िया रेशम का उत्पादन किया जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश भर में कुल 79 केंद्रों में रेशम कीट पालन हो रहा है तथा सिरमौर, कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर के कांगू व नादौन में इस व्यवसाय से सैकड़ों परिवार जुड़े हैं। इसके साथ-साथ प्रदेश के ऊना, सिरमौर, बिलासपुर, कांगड़ा इत्यादि जिलों में रिलिंग यूनिट कार्य कर रहे हैं। रेशम पालक शहतूत के पत्तों से कीट के माध्यम से कोकून को रिलिंग यूनिट तक पहुंचाते हैं। इन इकाइयों में कोकून से धागा तैयार करके अन्य राज्यों में स्थापित सिल्क उद्योगों को भेजा जाता है। इन उद्योगों में सिल्क के विश्व स्तरीय परिधान तैयार किए जाते हैं। ऐसे बनता है रेशम रेशम के मादा कीट शहतूत की पत्तियों पर गुच्छों में लगभग 300 से 400 अंडे देती है। अंडा-बिछाने 1-24 घंटे में पूरा हो जाता है। अंडे देने के 3-4 दिन बाद मादा मर जाती है। अंडे से दिनों में लार्वा में बदल जाते हैं। लगभग 10 दिन के भीतर हर एक अंडा एक कीड़े को जन्म देता है जिसे लार्वे के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद, तीन से आठ दिनों तक यह रेशम का कीड़ा अपने मुंह से एक तरल प्रोटीन का स्त्राव करता है l वायु से संपर्क में आने पर यह तरल प्रोटीन कठोर होकर धागे का रूप ले लेता हैl इस प्रोटीन के फलस्वरूप कीड़े के चारों ओर एक गोला जैसा बन जाता है जिसे हम कोकून के नाम से जानते हैंl रेशम का कीड़ा कोकून का निर्माण अपने रहने के लिए करता है। रेशम प्राप्त करने के लिए इस गोले को गर्म पानी में डाल दिया जाता है l इससे रेशम का कीड़ा मर जाता है और उस गोले का उपयोग रेशम का धागा बनाने के लिए किया जाता है l एक गोले रेशम से 500 से 1300 मीटर लंबा रेशम का धागा प्राप्त होता है l भारत में सिर्फ तीन बीज केंद्र, एक पालमपुर में सेरीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए भारत में ऐसे तीन ही केंद्र स्थापित है जहाँ से पूरे देश के किसानों को रेशम कीट के बीज मुहैया करवाए जाते है। इन तीन केंद्रों में उत्तराखंड का देहरादून, कर्नाटक का मैसूर व हिमाचल का पालमपुर शामिल हैं। रेशम कीट के बीज से लेकर प्रदेश में ऐसे कई स्थान है जहां रेशम कीट का उत्पादन भी किया जाता है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर ,मंडी, हमीरपुर ,काँगड़ा, ऊना सिरमौर जिला में रेशम का उत्पादन किया जाता है। रेशम उत्पादन में जिला बिलासपुर के बाद मंडी जिला पुरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर आता है। बिलासपुर के करीब 3 हजार परिवार रेशम कीट पालन से जुड़े कोरोना काल में प्रदेश में रेशम का 60 फीसदी उत्पादन बिलासपुर में ही हुआ। कोरोना काल में रेशम कीट पालन हजारों परिवारों की रोटी का सहारा बना। आपदा में जब कई युवाओं का रोजगार छिन गया तो यह व्यवसाय इनके काम आया। बिलासपुर जिले में तैयार हो रहा रेशम का धागा बाहरी राज्यों में भी निर्यात हो रहा है। दो रिलिंग यूनिटों में हर वर्ष करीब एक करोड़ रुपये का धागा रिलिंग कर बेंगलुरु, कोलकाता और मुंबई भेजा जा रहा है। जिला बिलासपुर के करीब 3 हजार परिवार रेशम कीट पालन से जुड़े हैं। 1287.51 बीघा में हो रही शहतूत की खेती प्रदेश के 1287.51 बीघा में शहतूत की खेती की जाती है। प्रदेश में वर्ष 2021-22 के दौरान अब तक 2 लाख 23 हजार शहतूत के पौधे वितरित किए गए हैं और 238 मीट्रिक टन कोकून का उत्पादन किया गया। 79 कीट पालन केंद्र व 11 रिलिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 11 रिलिंग यूनिट हैं। इन यूनिट्स में धागा तैयार किया जाता हैं। जिला बिलासपुर, ऊना, कांगड़ा व सिरमौर में ये सभी रिलिंग यूनिट स्थित है। जबकि सेरीकल्चर का अधिकांश कार्य जिला हमीरपुर में होता है। खासतौर से हमीरपुर के नादौन व कांगू में काफी परिवार रेशम कीट पालन से जुड़े है। प्रदेश में कुल 79 केंद्रों में रेशम कीट पालन हो रहा है। शहतूत रोपण के कई फायदे शहतूत रोपण से रेशम कीट पालन तो संभव है ही, ये पर्यावरण के लिए भी संजीवनी है। शहतूत रोपण द्वारा पशुओं के लिए अतिरिक्त चारा, इंधन व टोकरियां बनाने के लिए कच्चा माल भी प्राप्त होता है। इससे स्वंय सहायता समूह, महिला मण्डल व युवा क्लब सदस्य इस व्यवसाय को अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त गति पैदा कर सकते हैं। नौणी विवि के नेरी कॉलेज में हो रहा शोध डॉ यशवंत सिंह परमार वानिकी एवं डॉ यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विवि द्वारा भी सेरीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए आवशयक कदम उठाये जा रहे है। विवि के उप कुलपति डा.परविंदर कौशल ने बताया कि विवि के नेरी स्थित बागवानी एवं वानिकी कॉलेज में रेशम कीट पालन को लेकर शोध किया जा रहा है। साथ ही यहां सेरीकल्चर कोर्स भी शुरू किया गया है। प्रदेश में रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। सेरीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में भी तकनीकी जानकारी दी जा रही है। किसानों को बीमारी की रोकथाम के टिप्स व मलबरी प्लांटेशन पर व्यापक फोकस किया जा रहा है। रेशम कीट पालन को प्रोत्साहित कर रही प्रदेश सरकार प्रदेश के विभिन्न मण्डलों के अन्तर्गत रेशमकीट बुनाई बुनकरों को लाभान्वित करने के लिए रेशमकीट प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण केन्द्र, रेशमकीट सामुदायिक केन्द्र, कोकून विपणन केन्द्र और सिल्क वाॅर्म सीड उत्पादन केन्द्र आदि स्थापित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मण्डी जिला के बालीचैकी में 494 लाख रुपये की लागत से सेरी एंटरप्रिन्योरशिप डवेल्पमेंट एंड इनोवेशन सेंटर (एसईडीआईसी) भवन का निर्माण किया जा रहा है। इस भवन के निर्मित होने से प्रदेश के और अधिक रेशम बुनकरों को प्रशिक्षित करने की सुविधा प्राप्त होगी और रेशम से जुड़े उत्पाद निर्मित किए जाएंगे। मंडी जिला के थुनाग में 318 लाख रुपये की लागत से रेशम बीज उत्पादन केन्द्र के भवन का निर्माण किया जा रहा है। बीते दिनों उद्योग विभाग के रेशम अनुभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि प्रदेश में रेशम कीट पालन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे रेशम कीट पालन किसानों को केंद्र और राज्य सरकार के रेशम उद्योग विकास के लिए आरम्भ की गई विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपलब्ध होगी। सरकार ! आखिर क्यों छीन लिया गया क्षेत्रीय रेशम अनुसंधान केंद्र ? प्रदेश का पहला क्षेत्रीय रेशम अनुसंधान केंद्र घुमारवीं में प्रस्तावित था। प्रदेश में रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए यह प्रोजेक्ट पूर्व सीपीएस एवं घुमारवीं विस क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेश धर्माणी ने घुमारवीं के लिए स्वीकृत करवाया था। इस अनुसंधान केंद्र के माध्यम से रेशन कीट पालन पालकों को लाभ तय था। किन्तु सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा के सत्ता में आते ही यह अनुुुसंधान केंद्र छीन लिया गया। अब यह केवल रिजनल एक्सटेंशन सेंटर बनकर रह गया है। पालमपुर के बाद दूसरा एक्सटेंशन सेंटर है। इसके अलावा जिला बिलासपुर के हटवाड़, ऊना व हमीरपुर के नादौन में कार्यरत रेशम अनुसंधान प्रसार केंद्र भी घुमारवीं व पालमपुर में मर्ज कर दिए गए हैं। बहरहाल, अब महज एक्सटेंशन सेंटरों के माध्यम से ही विभाग का लाभ मुहैया करवाया जा रहा है। जबकि रेशम कीट अनुसंधान केंद्र में इस व्यवसाय से जुड़े कई रिसर्च यहां पर होने थे जिसका लाभ प्रदेश के सैकड़ों रेशम कीट पालकों को मिलना तय था। उल्लेखनीय है कि पूर्व यूपीए सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत क्षेत्रीय रेशम अनुसंधान केंद्र के लिए करीब 200 बीघा जमीन की आवश्यकता थी। इसके लिए करीब 400 करोड़ की राशि खर्च की जानी थी। वहीं, करीब 400 कर्मचारियों की तैनाती भी अनुसंधान केंद्र में होनी थी। लेकिन केंद्र सरकार इसके लिए जमीन ही नहीं मुहैया करवा पाई। हालांकि घुमारवीं विस क्षेत्र में जमीन नहीं मिलने के चलते इस अनुसंधान केंद्र के लिए बिलासपुर जिला के बरठीं के पास जमीन मुहैया करवाने का आग्रह भी केंद्र से किया गया था लेकिन फिर केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके चलते इस रेशम पालन अनुसंधान केंद्र का कद कम कर महज एक्सटेंशन सेंटर कर दिया गया है। भाजपा ने छीना क्षेत्रीय रेशम अनुसंधान केंद्र : धर्माणी क्षेत्रीय रेशम अनुसंधान केंद्र को मैंने अपने कार्यकाल में स्वीकृत प्रदान करवाई थी। बकायदा इसे शुरू भी किया गया लेकिन भाजपा की सरकार आते ही इसे बंद किया गया। ये विडम्बना का विषय है कि हिमाचल प्रदेश के लिए स्वीकृत पहले क्षेत्रीय रेशम अनुसंधान केंद्र को भाजपा सरकार निगल गई है। इस सेंटर से न केवल घुमारवीं क्षेत्र के बल्कि आसपास के कई किसान लाभान्वित हो रहे थे लेकिन भाजपा की डबल इंजन की सरकार के आते ही कीट पालकों के रोज़गार पर इन्होने संकट पैदा कर दिया। प्रदेश सरकार को सेंटर खोल कर लोगों को रोज़गार के अवसर मुहैया करवाने चहिये ताकि ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ किया जा सके लेकिन भाजपा को केवल राजनीति करनी आती है। -राजेश धर्माणी, पूर्व विधायक घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र
केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) कसौली जीवन रक्षक दवाओं का उत्पादन कर मानव जीवन के कल्याण में अहम भूमिका निभा रहा है। न केवल भारत में बल्कि दुनिया में (सीआरआई) कसौली टीकों के क्षेत्र में अग्रणी है। एंटी रैबीज वैक्सीन का आविष्कार भी इसी संस्थान में किया गया था। देश की एकमात्र सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (सीडीएल) 1940 में यहां स्थापित की गई थी। 1906 में सीआरआई ने देश में पहली बार सर्पदंश के इलाज के लिए सीरम और टायफायड बुखार के लिए वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया गया था। आज सीआरआई सरकारी क्षेत्र में जीएमपी (गुड मेन्यूफेक्चरिंग प्रेक्टिस) के तहत दवा उत्पादन करने वाला पहला संस्थान बन चुका है। संस्थान में करोड़ों की राशि से बना जीएमपी भवन तमाम उन आधुनिक सुविधाओं से लैस है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप है। संस्थान में मुख्य रूप से एंटी सिरा, एंटी रैबीज वैक्सीन, डीटी वैक्सीन, टीटी वैक्सीन, डीपीटी ग्रुप ऑफ वैक्सीन, यलो फीवर वैक्सीन, जैपनीज एनसेफालिटिस वैक्सीन, डायग्नोस्टिक रीजेंट, एंटी डॉग बाइट व एंटी स्नेक बाइट वैक्सीन, एकेडी वैक्सीन, एंटी वेनम सीरम, टोकसाइड सीरम यहां के मुख्य उत्पादन हैं। वर्तमान में सभी तरह के टीकों की टेस्टिंग केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल), कसौली में होती है। देश में किसी भी वैक्सीन को बाजारों में उतारने से पहले देश की एकमात्र केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) कसौली से अनुमति लेना जरूरी होता है। इसके लिए वैक्सीन की गुणवत्ता जांचने व परखने के लिए बैच सीडीएल में भेजे जाते हैं। सीडीएल कसौली अभी तक विभिन्न कंपनियों की कोरोना वैक्सीन डोज का परीक्षण करने के बाद जारी कर चुका है। इसमें कोविशील्ड, कोवैक्सीन, माडरना वैक्सीन, जानसन एंड जानसन वैक्सीन, स्पुतनिक वी वैक्सीन, जायकोव-डी आदि वैक्सीन के डोज शामिल है। इसमें कोविशील्ड व कोवैक्सीन के ज्यादा डोज शामिल हैं। कोरोना काल में सीडीएल के कर्मचारियों व अधिकारियों की मेहनत का नतीजा है कि आज देश में एक अरब, 35 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज का सफल परीक्षण किया जा चुका है व उसका लाभ देश के लोगों को मिल रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के समीप पलासड़ा में प्रस्तावित बल्क ड्रग यूनिट में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआइ) यानी दवा उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल बनाने का उद्योग लगेगा। सितंबर 2022 तक ट्रायल आधार पर इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा। मुंबई की किनवान कंपनी को उद्योग विभाग ने पलासड़ा में 350 बीघा भूमि आवंटित कर दी है। यहां उत्पादन शुरू होने के बाद बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) सहित देशभर के फार्मा उद्योगों को एंटीबायोटिक दवाओं का कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा। वर्तमान में फार्मा उद्योग एपीआइ के लिए चीन पर निर्भर हैं और करीब 80 फीसद एपीआइ चीन से ही आपूर्ति हो रहा है। पलासड़ा में लगने वाले इस उद्योग की उत्पादन क्षमता 400 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। यह देश का पहला एपीआई उद्योग होगा। यहां 576.12 बीघा भूमि विभाग के नाम हो चुकी है और मौजूदा समय में चयनित भूमि की डिमार्केशन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र पलासड़ा में उद्योग लगाने के लिये कई कंपनियों ने इच्छा जाहिर की है, जिनमें से एक कंपनी को पलासड़ा में 342 बीघा भूमि प्रदान भी कर दी गई है। बद्दी एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब है। पूरे प्रदेश में 750 फार्मा इकाइयां हैं, जिन्हें कच्चा माल दूसरे देशों से मंगवाना पड़ रहा है। अगर यहां पर दवा कंपनियों के लिए कच्चे माल का उद्योग खुल जाता है, तो एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब बद्दी की दवा कंपनियों को फायदा होगा। देश की 30 फीसदी दवाओं का उत्पादन हिमाचल प्रदेश में होता है। देश का यह पहला उद्योग होगा, जिसमें एंटीबायोटिक दवाइयों का सॉल्ट तैयार होगा और प्रदेश का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। अभी तक दवा उद्योग के लिए कच्चा माल चीन से आता था, लेकिन अब यहां पर एपीआई उद्योग खुलने से जहां बीबीएन के दवा निर्माताओं को सीधा लाभ होगा, वहीं देश के अन्य दवा निर्माता कंपनियों को भी बाहर से कच्चा माल नहीं मंगवाना पड़ेगा। नालागढ़ के पलासड़ा में बड़े-बड़े औद्योगिक घराने आने शुरू हो गए हैं। 850 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से दो हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। चीन पर निर्भरता खत्म होगी : गुप्ता बीबीएन में निवेशकों के रुझान को मद्देनजर रखते हुए विभाग ने नालागढ़ के प्लासड़ा में नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया है, जहां कई कंपनियों ने निवेश कर कारखाना स्थापित करने की इच्छा जाहिर की है। नालागढ़ के इस पहले औद्योगिक क्षेत्र में विकास रफ्तार पकड़ेगा और कई बड़े उद्योग स्थापित होंगे। नालागढ़ के पलासड़ा में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआई) उद्योग स्थापित होने से दवा कंपनियों के लिए सबसे जयादा फायदा होगा। पूरे प्रदेश में 750 फार्मा इकाइयां हैं, जिन्हें कच्चा माल दूसरे देशों से मंगवाना पड़ता है। ऐसे में यदि (एपीआई) उद्योग स्थापित किया जाता है तो एंटीबायोटिक दवाओं का कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा। वर्तमान में फार्मा उद्योग एपीआइ के लिए चीन पर निर्भर हैं और करीब 80 फीसद एपीआइ चीन से ही आपूर्ति हो रहा है।इसके अलावा आर्थिकी रूप से भी हमे काफी रिलीफ मिलेगा। -विनोद गुप्ता ,अध्यक्ष फार्मास्युटिकल एसोसिएशन सोलन
बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ न केवल प्रदेश बल्कि देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक हैं। हिमाचल में यदि उद्योगों की बात करें तो हज़ारों की संख्यां में कई छोटे-बड़े उद्योग हैं। प्रदेश में औद्योगिक निवेश 21 हजार करोड़ से भी ज्यादा है। राज्य सरकार के पास भी 250 करोड़ के निवेश के प्रस्ताव विचाराधीन हैं, लेकिन कई कमियों के कारण औद्योगिक क्षेत्र का विकास तेजी से नहीं हो पा रहा है। कच्चे माल की कमी के चलते हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े फार्मा हब बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) में उत्पादन प्रभावित हो रहा है। दाम दोगुना होने के बावजूद भी दवा निर्माताओं को कच्चा माल नहीं मिल रहा। प्रदेश में 750 दवा उद्योग हैं। अकेले बीबीएन में 350 दवा उद्योग हैं, लेकिन दवा उद्योगों में कच्चे माल की कमी होने से इसका सीधा असर छोटे दवा उद्योगों पर पड़ता है। यातायात बड़ी चुनौती औद्योगिक क्षेत्र के विकास में रुकावट का सबसे बड़ा कारण है ट्रांसपोर्ट। किसी भी उद्योग के फलने फूलने के लिए सुगम यातायात बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। परिवहन के द्वारा ही कच्चा माल कारखानों तक पहुँच पाता है और कारखानों से उत्पाद ग्राहकों तक पहुँच पाते है। लेकिन खराब सड़कें और रेलवे का न होना उद्योगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है। आधारभूत ढांचे की कमी से प्रदेश में नए निवेशक नहीं आ पा रहे हैं। आधारभूत ढांचे की कमी के चलते कई बड़े उद्योग हिमाचल से पलायन कर चुके हैं। कुछ उद्योगों ने उत्तराखंड में अपनी यूनिट स्थापित कर दी हैं। बिना रेलवे चल रहा कंटेनर डिपो बद्दी के मलपुर में 92 बीघा भूमि पर कंटेनर डिपो तैयार तो हो गया, लेकिन बिना रेलवे की सुविधा से ही यह कंटेनर डिपो चल रहा है। इस कंटनेर डिपो के लिए केंद्र सरकार की ओर से 14.42 करोड़ रुपये मुहैया करवाए थे, लेकिन कंटेनर डिपो का असल लाभ तो तभी मिल पाएगा, जब यह क्षेत्र रेलवे से जुड़ेगा।
इस समय भारत दुनिया की नई फार्मेसी बनने की डगर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस समय भारत का फार्मा उद्योग करीब 42 अरब डॉलर का है। माना जा रहा है कि यह 2026 तक 65 अरब डॉलर और 2030 तक 130 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। निःसंदेह कोरोना संक्रमण की आपदा भारत के लिए फार्मा और कोरोना वैक्सीन का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का अवसर लेकर आई है। फार्मा उद्योग की इस प्रतिस्पर्धा में हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन का बीबीएन क्षेत्र भी तेज़ी से भाग रहा है। बीबीएन की पहचान एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब के तौर पर की जाती है। कोरोना के समय में इस एरिया की अहमियत और भी बढ़ी है। बता दें कि कोरोना महामारी की पहली लहर में दुनिया जब वैक्सीन के लिए रिसर्च कर रही थी तब ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई (DCGI) ने रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी (Sputnik-V) बनाने के लिए हिमाचल के बद्दी में स्थित पैनेशिया बायोटेक को मंजूरी दी। पैनेशिया बायोटेक पहली कंपनी है, जिसने स्पूतनिक-वी का निर्माण भारत में किया। स्पूतनिक-वी बनाने के लिए कुल 6 कंपनियों ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ एग्रीमेंट किया था, जिनमें पैनेशिया बायोटेक भी शामिल थी। वैश्विक महामारी कोविड-19 से उपजे संकट के इस दौर में जहां हिमाचल का फार्मा उद्योग देश व प्रदेश की दवा जरूरतों को प्राथमिकता से पूरा कर रहा है, वहीं कोरोना के उपचार से संबंधित आवश्यक दवाओं के उत्पादन में अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर है। बता दें कि देश में बिकने वाली हर तीसरी दवा का निर्माण हिमाचल के फार्मा उद्योगों में हुआ है। इसके अलावा सालाना 15 हजार करोड़ से ज्यादा की दवाओं का निर्यात यह से किया जा रहा है। कोरोना काल में अमेरिका को भेजी गई यहां बनी दवा दुनिया में जिस समय वैश्विक महामारी कोरोना का संकटपूर्ण दौर आया, सबसे पहले चर्चा में आने वाला शब्द हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन था। पहली लहर में उक्त दवा के लिए दुनिया की नजरें भारत पर थीं। दुनिया भर में जितनी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन तैयार होती है, उसका सत्तर फीसदी भारत में बनता है। देश में भी अधिकांश हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन बीबीएन में बनती है। अमेरिका को भी यहीं से सप्लाई दी गई थी। हिमाचल में करीब 700 दवा उद्योग स्थापित हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा ईयू से, इतने ही डब्ल्यूएचओ व जीएमपी से तथा अन्य इकाइयां यूएसएफडीए से मंजूर हैं। ऐसे में यदि बीबीएन में और अधिक फार्मा इकाइयों को लाइसेंस मिल जाए तो देश भर की दवाइयों की जरूरत अकेले बीबीएन पूरी कर सकता है। हिमाचल में मात्र चार से पांच फीसदी दवा निर्माताओं के पास क्लोरोक्वीन व एंटीबॉयोटिक एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट का लाइसेंस है। यदि प्रदेश के हर फार्मा उत्पादक को लाइसेंस मिल जाता है तो पूरे देश के लिए यह दवा यहां से उपलब्ध करवाई जा सकती है। सिंगल विंडो क्लियरिंग एजेंसी उद्यमियों की सुविधा के लिए हिमाचल सरकार ने बद्दी में सिंगल विंडो क्लियरिंग एजेंसी ऑफिस खोला है। यदि कोई निवेशक पांच करोड़ रुपए तक की मशीनरी का प्लांट लगाता है तो उसे कहीं भटकने की जरूरत नहीं है। मंजूरी से संबंधित सभी औपचारिकताएं इसी कार्यालय से पूरी हो जाती हैं। इससे ऊपर की मशीनरी लागत वाली इकाइयां मुख्य कार्यालय शिमला से मंजूर होती हैं। प्लांट व मशीनरी पर पचास फीसदी उपदान यानी सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा सेंट्रल ट्रांसपोर्ट सब्सिडी की सुविधा है। उधमियों के लिए प्लांट व भूमि नो प्रॉफिट-नो लॉस के आधार पर उपलब्ध है।
" वन विभाग में 35 साल सेवाएं देने के बाद मंडी के अमर सिंह वर्ष 2020 में रिटायर हुए। लगा पेंशन के सहारे बुढ़ापा स्वाभिमान के साथ गुजर जायेगा, पर जब हाथ में 1128 रुपये की पेंशन आई तो मानों पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। ये ही कारण है कि अमर सिंह जैसे हजारों -लाखों मुलाजिम नई पेंशन योजना का विरोध करते है। वर्ष 1986 में डेली वेज पर भर्ती हुए अमर सिंह 2007 में नियमित हुए थे। नई पेंशन योजना का विरोध अमूमन देश के हर राज्य में हो रहा है और ये एक बड़े आंदोलन में तब्दील होता दिख रहा है। सरकारी मुलाजिमों को शिकवा ये भी है कि उन पर नई पेंशन थोपने वाले नेता खुद पुरानी पेंशन का सुख भोग रहे है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कालजयी पंक्ति है कि 'सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें आगे क्या होता है'...इसी भावना और आशावाद के साथ लाखों मुलाजिम देश के अलग -अलग हिस्सों में पुरानी पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे है। " बेरोजगारी, महंगाई, बिजली, किसान, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, भ्रष्टाचार और राष्ट्रवाद; ये तमाम वो मुद्दे है जिनकी बिसात पर दशकों से देश में चुनाव लड़े जाते रहे है। पर बीते कुछ वक्त में इस फेहरिस्त में एक नए मुद्दे की एंट्री हुई है। अब पुरानी पेंशन की बहाली भी चुनाव के दौरान बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। देश के 5 राज्यों में इस वक्त चुनाव का माहौल है और अन्य मुद्दों के साथ-साथ पुरानी पेंशन का मुद्दा भी खूब गूँज रहा है। कहीं राजनैतिक दल पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा कर रहे है, तो कहीं इस आंदोलन को आगे बढ़ा रहे संगठन मुखर है। पंजाब में तो मुलाजिमों द्वारा बाकायदा घरों के बाहर तख्ती लटकाकर नेताओं को स्पष्ट सन्देश दिया जा रहा है कि 'मेरे घर वही वोट मांगने आएं, जो पुरानी पेंशन बहाल करवाएं।' यूँ तो ये मुद्दा सभी राजनैतिक दलों के गले की फांस बनता दिख रहा है लेकिन यदि ये आंदोलन प्रखर होता है तो मुमकिन है कि सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को हो। दरअसल केंद्र में तो भाजपा की सरकार है ही, देश के अधिकांश राज्यों में भी भाजपा ही सत्ता में है। साल 2004 में केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों की पेंशन योजना में एक बड़ा बदलाव करते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लॉन्च किया। उन सभी सरकारी मुलाजिमों के लिए इस स्कीम को अनिवार्य कर दिया गया जिनकी नियुक्ति 1 जनवरी 2004 के बाद हुई थी। केंद्र की तर्ज पर राज्यों ने भी सरकारी क्षेत्र में नियुक्त होने वाले कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम बंद कर नई पेंशन स्कीम लागू कर दी। सिर्फ पश्चिम बंगाल ही देश में एकमात्र अपवाद है। शुरुआती दौर में कर्मचारियों ने इस स्कीम का स्वागत किया, लेकिन जब नई पेंशन स्कीम के नुकसान समझ आने लगा तो विरोध शुरू हो गया। धीरे- धीरे सभी राज्यों में कर्मचारी लामबंद होने लगे और संगठन बनाकर नई पेंशन स्कीम का विरोध शुरू हो गया। अब आहिस्ता- आहिस्ता ये विरोध आंदोलन का स्वरूप लेता दिख रहा है। फिलहाल देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन बहाली का मसला गूंजता दिख रहा है। कहते है दिल्ली की गद्दी का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, जाहिर है हर राजनैतिक दल उत्तर प्रदेश में बेहतर करने को प्रयासरत है। यहाँ भी मुलाजिमों का वोट हथियाने के लिए राजनैतिक दल पुरानी पेंशन की बहाली के ख्वाब दिखा रहे है। यूँ तो उत्तर प्रदेश में जाति -धर्म, विकास और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे सरकार बनाते -गिराते रहे है लेकिन अगर कर्मचारी फैक्टर चला तो समीकरण बन-बिगड़ सकते है। यूपी के अलावा पंजाब और उत्तराखंड में पुरानी पेंशन की बहाली एक बड़ा मुद्दा है। लगातार कर्मचारी पुरानी पेंशन की गुहार राजनीतिक दलों से लगा रहे है। यदि यहां भी राजनीतिक दल पेंशन का समर्थन करते है तो सत्ताधारी पार्टी को बैक फुट पर लाने का काम पुरानी पेंशन कर सकती है। हालांकि ये पहली बार नहीं जब राजनीतिक दलों ने अपने मेनिफेस्टो में पुरानी पेंशन बहाली को शामिल किया हो। इससे पहले भी कई बार इसे मुद्दा बनाया गया मगर विडंबना ये है कि अब तक पश्चिम बंगाल के अलावा किसी भी अन्य राज्य में पुरानी पेंशन नहीं दी जाती। कई राज्यों में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद भाजपा पुरानी पेंशन को बहाल नहीं करवा पाई जिसकी टीस कर्मचारियों में है। उधर, पंजाब में कांग्रेस की चन्नी सरकार हर वर्ग के लिए दिल खोलकर घोषणाएं करती दिखी है लेकिन पुरानी पेंशन पर खामोश है। यदि आम आदमी पार्टी या कोई अन्य दल इस मुद्दे पर मुलाजिमों को आश्वस्त करता है तो इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। गोवा और मणिपुर में भले ही पुरानी पेंशन को लेकर आंदोलन संगठित न हो, पर कम ही सही इसका असर जरूर देखने को मिल सकता है। पंजाब : कांग्रेस ने किया था वादा, पर पूरा नहीं किया पिछले कई साल से पंजाब में कर्मचारी पुरानी पेंशन की मांग कर रहे है। पेंशन की मांग करने वाले एक संगठन, एनपीएस मुलाजिम पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष कमेटी ने तो एनपीएस वोटर जागरूकता पोस्टर अभियान की शुरुआत कर दी है। पंजाब के कर्मचारियों का कहना है कि अब तक किसी राजनीतिक दल ने चुनाव मेनिफेस्टो में पुरानी पेंशन की मांग को शामिल नहीं किया है और इसलिए यह पोस्टर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर पोस्टर में लिखा है कि " मैं साल 2004 के बाद भर्ती नई पेंशन स्कीम से पीड़ित सरकारी मुलाजिम हूँ। मेरे घर वही वोट मांगने आए, जो पुरानी पेंशन बहाल करवाए।" ये अभियान पंजाब चुनाव पर भी खासा असर डाल सकता है। पंजाब में सिर्फ कर्मचारी ही नहीं आम आदमी पार्टी के नेता भी पुरानी पेंशन को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे है। आप का कहना कि पंजाब सरकार पेंशन भोगियों की कमाई पर सांप की तरह बैठी हुई है। आप के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता हरपाल सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस ने 2017 में कांग्रेस सरकार बनने पर पंजाब में पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने का वादा किया था और राजनीतिक लाभ के लिए कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के इस मुद्दे का इस्तेमाल किया। मगर अब तक पुरानी पेंशन कर्मचारियों को दी नहीं। स्पष्ट है कि पंजाब चुनाव में भी ओपीएस पर खूब सियासत हो रही है। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के पंजाब राज्य के अध्यक्ष सुखजीत सिंह का कहना है कि पंजाब चुनाव में ओपीएस की मांग एक बड़ा मुद्दा साबित होगी। यहां कर्मचारी सिर्फ ये नहीं चाहते कि राजनीतिक दल इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल करे बल्कि जो पार्टी इस मांग को 6 महीने में पूरा करने का दम रखेगी ,ताजपोशी उसी की होगी। सुखजीत सिंह ने बताया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी तो पहले ही सत्ता मिलने के बाद पुरानी पेंशन बहाली का वादा कर चुकी थी मगर अब सुखबीर सिंह बादल भी कर्मचारियों को ये आश्वासन दे चुके है। कांग्रेस भी कहीं न कहीं इस मांग से इत्तेफ़ाक़ रखती है पर वे अपने कार्यकाल में इस मांग को पूरा नहीं कर पाए। उत्तराखंड : खोखला आश्वासन नहीं, ठोस वादा चाहिए उत्तराखंड में भी पुरानी पेंशन लागू करने की मांग को लेकर कर्मचारी लंबे समय से संघर्षरत हैं। सड़कों से लेकर सरकार के दर तक कर्मचारी लगातार आंदोलन करते आए हैं। यहां अब आधुनिकता के साथ कर्मचारी आवाज बुलंद कर रहे हैं, इंटरनेट मीडिया को हथियार बनाकर हजारों कर्मचारी आंदोलन को धार दे रहे हैं। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा यहां कर्मचारी की इस मांग को लेकर लामबंद है। हालांकि यहां सरकार के पास मुख्यमंत्री बदलते रहने का एक बहाना मौजूद है। उधर, कांग्रेस कर्मचारियों की नाराज़गी भुनाने को प्रयासरत है, पर कर्मचारियों को खोखला आश्वासन नहीं बल्कि ठोस वादा चाहिए। उत्तर प्रदेश : सपा ने किया वादा, देखना होगा भाजपा का इरादा उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा किया है। पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुलाजिमों से वादा किया है कि सपा सरकार बनने पर कर्मचारी-शिक्षकों की लंबे समय से चल रही मांग पुरानी पेंशन को बहाल किया जाएगा। इसके लिए जरूरत पड़ी तो कार्पस फंड बनाया जाएगा। जाहिर है यूपी में पुरानी पेंशन एक ऐसा मुद्दा है, जिससे प्रदेश के लगभग 28 लाख कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनर्स जुड़ते हैं। यह ऐसा वर्ग है, जो समाज को दिशा देने का काम करता है, अगर यह वर्ग समाज न सही अपने परिवार की सहमति बना लेता है तो यह संख्या लगभग एक करोड़ की हो जाएगी। निसंदेह ऐसा हुआ तो सपा को फायदा हो सकता है। उधर सत्तारूढ़ भाजपा पर भी अब कर्मचारी वर्ग को साधने का दबाव है। हिमाचल में भी सियासी ताप बढ़ा सकता है ओपीएस का मुद्दा पुरानी पेंशन का मुद्दा हिमाचल की सियासत में भी भरपूर दमखम रखता है। इसका ट्रेलर बीते 10 दिसंबर को दिखा जब धर्मशाला के दाड़ी मैदान में कर्मचारियों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन सरकार के सामने किया। एक नहीं अनेक संगठन पेंशन की मांग के लिए एकत्र हुए और अंत में सरकार को झुकना पड़ा और पुरानी पेंशन बहाली के लिए एक कमेटी गठन करने का आश्वासन दिया। अलबत्ता कमेटी अब तक गठित नहीं हो पाई है, लेकिन कर्मचारियों में कम से कम एक उम्मीद जगी है कि शायद संभावित सियासी नुक्सान को भांपते हुए प्रदेश सरकार उनके इस सबसे बड़े मसले को हल कर दे। हिमाचल प्रदेश में भी इस वर्ष के अंत में चुनाव होने है और कर्मचारी पहले ही पुरानी पेंशन की इस मांग को एक आंदोलन का रूप दे चुके है। कांग्रेस भी पूरी तरह पेंशन की मांग का समर्थन कर रही है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में भी ये मुद्दा सियासी ताप बढ़ा सकता है। सत्ता में तो वो ही आएगा जो पुरानी पेंशन बहाल करवाएगा : बंधू पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में नई पेंशन का दर्द झेल रहे कर्मचारियों का बड़ा असर रहने वाला है। कई राजनीतिक दल हमें हल्के में लेने की गलती कर रहे है, क्यूंकि उन्हें लगता है कि हमारी संख्या कम है। मैं बता दूँ कि ऐसा समझना उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी बेवकूफी साबित होगी। आज पुरानी पेंशन एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है और इन चुनावों में भी ये मुद्दा टर्निंग पॉइंट साबित होगा। सत्ता में तो वो ही आएगा जो पुरानी पेंशन बहाल करवाएगा। -विजय कुमार बंधू, राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम
हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के चलते बदला मौसम का मिजाज। मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनी के चलते पहाड़ों की रानी शिमला में बर्फबारी शुरू हो गई है। मौसम विभाग ने आज और कल के लिए प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी तथा मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। हिमाचल प्रदेश में बिगड़ते मौसम की सूचना जैसे ही मैदानी क्षेत्रों में सैलानियों को मिली वैसे ही उन्होंने पहाड़ों की रानी शिमला की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। इसी बीच शिमला घूमने आए सैलानियों का कहना है कि इस तरह का नजारा आज से पहले कभी नहीं देखा है। बर्फबारी में बहुत खूब आनंद ले रहे हैं। बर्फबारी से सैलानियों के चेहरे चहक उठे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के विभिन्न आकांक्षी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ संवाद किया। प्रधानमंत्री ने इन जिलों में सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की प्रगति और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने अधिकारियों के साथ बातचीत की और उन्हें सभी हितधारकों के साथ मिलकर जिलों में विभिन्न विभागों द्वारा मिशन मोड में योजनाओं को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर वर्चुअल माध्यम से शिमला से बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने राज्य के चंबा जिले द्वारा सामान्य सेवा केन्द्रों के दायरे को लगभग 67 प्रतिशत से बढ़ाकर 97 प्रतिशत से अधिक करने की उपलब्धि की सराहना करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनवरी 2018 में देश के लिए आकांक्षी जिला कार्यक्रम की शुरुआत की थी और इस योजना के अन्तर्गत चंबा जिले का भी चयन किया गया था। नीति आयोग ने स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेश और कौशल विकास तथा बुनियादी अधोसंरचना जैसे समग्र मानकों के आधार पर कुल 112 आकांक्षी जिलों को चयन किया गया था, जिनका मानव विकास सूचकांक पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम का उद्देेश्य अनिवार्य रूप से सतत विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर हासिल करना है, जिससे राष्ट्र की प्रगति हो सके। जल शक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर, ऊर्जा मंत्री सुख राम, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और जे.सी. शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे
अमर जवान ज्योति की लौ को लेकर हुए विवाद पर अब केंद्र सरकार ने सफाई दी है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि तरह-तरह की भ्रांतियां फैल रही हैं, इनको दूर करना जरूरी है। अब सरकार ने इस पर तथ्यों को सामने रखा है। सरकार ने कहा है कि अमर जवान ज्योति की लौ बुझ नहीं रही है। इसे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में जलने वाली ज्योति में विलीन किया जा रहा है। अब ये ज्वाला राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में प्रज्वलित रहेगी। गौरतलब है कि अमर जवान ज्योति की लौ ने 1971 और अन्य युद्धों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी, लेकिन उनका कोई नाम-पता वहां मौजूद नहीं है। इंडिया गेट पर अंकित नाम केवल कुछ शहीदों के हैं, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध और एंग्लो-अफगान युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ाई लड़ी थी और इस प्रकार यह हमारे औपनिवेशिक अतीत का प्रतीक है।
देश में कोरोना के मामले बेतहाशा बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटों में फिर 3 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इस बीच दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए वीकेंड कर्फ्यू हटाने का फैसला किया है। बाजारों में दुकान खोलने के लिए लागू ऑड-ईवन सिस्टम हटाया जाएगा। प्राइवेट दफ्तर भी 50% क्षमता पर चल सकेंगे। राजधानी दिल्ली में कोरोना के घटते मामलों के मद्देनजर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रस्ताव को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने यह प्रस्ताव उपराज्यपाल को भेजा है। दिल्ली में गुरुवार को कोविड-19 के 12,306 नए मामले सामने आए और 43 और लोगों की मौत हो गई थी। जबकि संक्रमण दर घट कर 21.48 प्रतिशत हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, 10 जून 2021 के बाद से एक दिन में कोविड से मौत की यह सर्वाधिक संख्या है। दिल्ली में पिछले साल 10 जून को 44 लोगों की संक्रमण से मौत हुई थी। इस साल जनवरी में संक्रमण से अब तक 396 लोगों की मौत हो चुकी है।


















































