सोलन शहर से लगभग पांच किलोमीटर स्थित जटोली में ना केवल हिमाचल और भारत बल्कि एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर है। कोरोना काल के दो साल बाद इस साल जटोली शिव मंदिर में धूमधाम से शिवरात्रि हर वर्ष के भांति मनाई जाएगी। एक मार्च को हर साल के भांति रात्रि भजन संध्या होगी तथा अगले दिन बुधवार को विशाल भंडारा आयोजित किया जायेगा। भंडारा सुबह 9 बजे से शुरू होकर रात्रि तक चलता है। जटोली शिव मंदिर में इस बार शिवरात्रि पर्व पर हिमाचल पुलिस विभाग के महानिदेशक संजय कुंडू मुख्य तिथि के तौर पर उपस्थित होंगे। जानकारी देते हुए मंदिर के सचिव डॉ उपेंद्र कॉल ने कहा कि दो साल के बाद अब त्योहारों को मानाने की अनुमति सरकार ने दी है। मंदिर कमेटी ने हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हिमाचल के बेह्तरीन भजन मण्डली को शिवरात्रि पर्व पर मंदिर बुलाया गया है। उन्होंने बताया की पहले दिन जागरण व् दूसरे दिन शिव भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा जो सुबह से रात्रि तक चलता रहेगा। इस दौरान उन्होंने सोलन तथा सोलन के आस -पास की जनता को भगवान शिव के मंदिर में लोगो को हाज़री लगाने के लिए आमंत्रित किया।
फाल्गुन उम्मीद, उल्लास और उत्साह का माह है। चार मार्च को हिमाचल प्रदेश का बजट आना है, चार उपचुनाव हारने के बाद प्रदेश सरकार उल्लास की स्थिति में तो नहीं दिख रही किन्तु निसंदेह जयराम सरकार इस बजट को उत्साह का जरिया जरूर बनाना चाहेगी। योजना एक ऐसा सबरंग और फाल्गुनी बजट पेश करने की होगी, जिससे हर वर्ग, हर तबके को साधा जा सके। ये इस सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट है सो लाजमी है कि चुनावी वर्ष में सरकार किसी भी वर्ग की अनदेखी का जोखिम नहीं उठायें। पर कर्ज के बोझ से झुकते कंधे अपेक्षाओं का बोझ कहाँ तक संभाल पाएंगे, ये देखना दिलचस्प होगा। इस बजट में जल, परिवहन, एडवेंचर पर्यटन, प्राकृतिक खेती और रोपवे को विशेष तरजीह मिल सकती है। उम्मीद है कि भाजपा के स्वर्णिम दृष्टिपत्र में बची कई घोषणाएं भी इस बजट के माध्यम से साधी जाएं। पर्यटन कारोबारी, किसान, बागवान, उद्यमी, कर्मचारी और आम आदमी भी सरकार की तरफ टुकटुकी लगाएं बैठे है, मानों कह रहे हो कि कर्मचारी ही नहीं हमारा साथ भी जरूरी है सरकार। उधर, कर्मचारी भी आशावान है। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति का प्रावधान हो, ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग, एसएमसी शिक्षकों की नीति में बदलाव का मसला, या पंचायत तकनीकी सहायकों, मिड-डे मील, आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी वर्कर्स, सिलाई-कढ़ाई अध्यापकों के मानदेय में बढ़ोतरी का मामला, सब जयराम ठाकुर की तरफ देख रहे है। मसले और भी है, उम्मीदें बेतहाशा है, सिमित संसाधनों के साथ जयराम ठाकुर के फाल्गुनी बजट पर कई निगाहें टिकी है।
- संगठित और मजबूत होता दिख रहा गिरिपार को जनजातीय दर्जा देने का मुद्दा मौसम का मिजाज बेशक खराब था लेकिन हाटी समुदाय का इरादा मजबूत। तेज बारिश के बावजूद भी बीते दिनों शिलाई में आयोजित हाटी महाखुमली में हज़ारों लोग जुटे। 144 पंचायतों के युवा, महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे खासी तादाद में पहुंचे और एक स्वर में जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलाने के लिए हुंकार भरी। राजनैतिक निष्ठाओं से इतर सबने एक आवाज में आह्वान किया कि जब तक हमें हमारा हक नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। सन्देश स्पष्ट था कि महाखुमली तो महज झांकी है और पिक्चर अभी बाकी है। इस खुमली में शिमला लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान, श्री रेणुका जी के विधायक विनय कुमार, शिलाई के पूर्व विधायक एवं राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर और पूर्व जिला परिषद सिरमौर के अध्यक्ष दलीप चौहान सहित कई नेता भी पहुंचे थे। आश्वासनों से तंग आ चुके हाटी समुदाय के तेवर इसी बात से समझ लीजिये कि करीब तीन घंटे ये नेता अपने बोलने की बारी का इंतजार करते रहे, फिर जाकर इन्हें मंच मिला। हजारों की भीड़ के सामने इन तमाम नेताओं ने गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलवाने के लिए अपना समर्थन दिया। उधर, हाटी समुदाय ने भी दो टूक सन्देश दिया कि अगर जुलाई तक उन्हें न्याय नहीं मिला तो बड़े स्तर पर आंदोलन होगा। हाटी समुदाय का नेतृत्व कर रहे वक्ताओं ने मंच से खुलकर चेताया कि हाटी समाज अब आर -पार की लड़ाई को तैयार है। बहरहाल इतना तय है कि हाटी समुदाय का आंदोलन फिलहाल संगठित भी दिख रहा है और मजबूत भी, और समाधान न निकला तो इनकी नारजगी का खामियाजा सियासतगरों को भुगतना पड़ सकता है। कई सरकारें आई और गई, लेकिन हाटी समुदाय को कोई भी सरकार जनजातीय दर्जा नहीं दिला पाई। पहले मनमोहन सिंह और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से सिरमौर जिले के गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिलाने की फरियाद लगाई गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद नतीजा सिफर रहा। पर क्षेत्र के लोगों को नेताओं का हर वादा, हर आश्वासन याद है। महाखुमली में हाटी समुदाय ने ये याद दिलाने से भी गुरेज नहीं किया कि हाटियों का खूब नरम भी है और गरम भी। किसी ने कहा 'अब तक समुदाय खूब बेवकूफ बन चूका है पर अब नहीं बनेगा', तो किसी ने 'हक़ नहीं तो वोट नहीं' का उद्घोष कर नेताओं की धुकधुकी बढ़ा दी। तो भाजपा को भुगतना होगा खामियाजा ... महाखुमली में जुटे हाटी समुदाय के लोगों ने स्पष्ट कहा कि 2014 में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नाहन के चौगान मैदान में गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने का वादा किया था। तदोपरांत 2019 में तत्कालीन केंद्रीय जनजातीय मंत्री ने हरिपुरधार में इस क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। वर्तमान में शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप भाजपाई है और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है। ऐसे में यदि प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्ज नहीं मिलता है, तो उसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में भाजपा को भुगतना होगा। दरअसल गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने का मसला 144 पंचायतों से सीधे जुड़ा है और इसके दायरे में चार विधानसभा क्षेत्र आते है। शिलाई के अतिरिक्त, श्रीरेणुकाजी, पच्छाद व पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्रों में भी ये मुद्दा निर्णायक भूमिका निभा सकता है। जाहिर है फिलवक्त भाजपा सत्ता में है तो नाराजगी का कोप भी भाजपा को भुगतना पड़ा सकता है। ऐसे में निसंदेह सत्तारूढ़ भाजपा अब इस मुद्दे पर कोई सार्थक पहल कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो पार्टी को इसका लाभ भी मिलना तय है। हाटी नेताओं की दो टूक : केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डा अमीचंद कमल व महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री का कहना है कि हाटी समुदाय ने दस्तावेजों सहित सभी औपचारिकताएं पूरी कर प्रदेश व केंद्र सरकार को कई बार दी है। अब हाटी समुदाय को केवल अपना हक चाहिए। अब वादों और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। जरुरत पड़ी तो आंदोलन को प्रखर किया जाएगा। वहीं केंद्रीय हाटी समिति के सलाहकार जेलदार प्रताप सिंह तोमर ने कहा कि जो भी चुने हुए जन प्रतिनिधि है वो इस मुद्दे को उठाये और डबल इंजन की भाजपा सरकार में ये कार्य पूरा होना चाहिए। अब कोई भी बहाना नहीं चलेगा। सिरमौर हाटी विकास मंच के अध्यक्ष प्रदीप सिंगटा ने कहा कि यह मांग पांच दशक पुरानी है और अब केंद्र में और प्रदेश में दोनों ही भाजपा की सरकार है। ऐसे में उम्मीद है जल्द से जल्द इसे पूरा किया जायेगा। जुलाई तक यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को उग्र किया जायेगा। विडम्बना : उत्तराखंड में एसटी, हिमाचल में नहीं इसे विडंबना ही कहेंगे कि दूरदराज क्षेत्र से होने के बावजूद भी गिरिपार के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के दर्जे के साथ आने वाली प्रतिष्ठित सरकारी परिलब्धियां नहीं मिल पाई है। इस समुदाय के प्रतिनिधि कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत है। मगर हुक्मरानों को शायद हाटी समुदाय का मुद्दा सिर्फ चुनाव के दौरान ही याद आता है। गिरिपार का हाटी समुदाय उत्तराखंड के जौनसार बाबर क्षेत्र के जोंसारी समुदाय की तर्ज पर जनजातीय दर्जे की मांग कर रहा है। बता दें कि पूर्व में उत्तराखंड का जौनसार बाबर क्षेत्र सिरमौर रियासत का ही एक भाग था। जौनसार बाबर को 1967 में केंद्र सरकार ने जनजाति का दर्जा दिया था। जौनसार बाबर और सिरमौर के गिरिपार की लोक संस्कृति, लोक परंपरा, रहन-सहन एक समान है। इनके गांवों के नामों और भाषा में भी समानता है। बावजूद इसके जिला सिरमौर की 144 पंचायतों को आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
- अधिसूचना जारी होने के बाद भी असंतुष्ट, अधिनियम बनाने की मांग विलियम शेक्स्पीयर ने कहा था कि 'नाम में क्या रखा है'। पर देवभूमि क्षत्रिय संगठन का मानना है कि 'सब कुछ नाम में ही रखा है', शायद इसीलिए प्रदेश सरकार द्वारा सामान्य वर्ग आयोग के गठन के बावजूद प्रदेश का सवर्ण समाज संतुष्ट नज़र नहीं आ रहा। हिमाचल प्रदेश में सामान्य वर्ग आयोग के गठन के बाद अब उसका संविधान और पूरी कार्यप्रणाली निर्धारित कर दी गई है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। सामान्य वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना के बावजूद क्षत्रिय संगठनों का गुस्सा शांत होता नहीं दिखाई दे रहा। देवभूमि क्षत्रिय संगठन एवं देवभूमि सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों का मानना है कि सरकार ने ये अधिसूचना जारी कर प्रदेश के सबसे बड़े समाज को धोखा दिया है। सवर्ण आयोग के नाम पर सामान्य वर्ग आयोग गठित किया गया है। उनका कहना है कि सवर्ण आयोग गठित किया जाना चाहिए था लेकिन सरकार ने सामान्य वर्ग आयोग गठित किया है, जिसका सवर्ण वर्ग विरोध करता है। विरोध कर रहे संगठनों को नाम के अलावा एक अन्य आपत्ति भी है। देवभूमि क्षत्रिय संगठन के अध्यक्ष रुमीत सिंह ठाकुर का मानना है कि सरकार द्वारा सामान्य वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की गई है जबकि प्रदेश भर के लोग इसे अधिनियम बनाने की मांग कर रहे हैं। रुमीत ने कहा की शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने तपोवन में इस बात की घोषणा की थी। इसमें सामान्य वर्ग आयोग को अधिनियम के दायरे में लाने का आश्वासन दिया गया था। इसके लिए सरकार ने तीन माह की मोहलत मांगी थी और अब तीन माह का समय पूरा होने वाला है तो सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों की बात कही गई है। अध्यक्ष की मर्जी से आयोग की बैठक होगी। आयोग का अध्यक्ष यदि पूरा साल बैठक नहीं करता है तो प्रदेश भर के सामान्य वर्ग के लोगों को इस आयोग का कोई लाभ नहीं होगा। उनका मानना है की प्रदेश सरकार ने यह अधिसूचना 16 मार्च से प्रस्तावित आंदोलन को टालने के लिए की है। पर मांग अब भी बरकरार है और चेतावनी भी दी गई है कि यदि सरकार सामान्य वर्ग आयोग ( सवर्ण आयोग ) को अधिनियम के दायरे में नहीं लाती है तो 16 मार्च को उग्र प्रदर्शन होगा।
बच्चों मेें आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक योग्यता विकसित करने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत निपुण हिमाचल मिशन का शुभारम्भ किया गया। इस मौके पर शिक्षा मंत्री गोविन्द ठाकुर ने कहा कि निपुण भारत योजना, केन्द्र सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचार पहल है। हिमाचल के विद्यार्थियों के लिए निपुण हिमाचल मिशन का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। आधारभूत साक्षरता भविष्य में शिक्षा प्राप्त करने का आधार बनती है। इस मिशन के माध्यम से छोटे बच्चों को भविष्य में शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मिशन के अन्तर्गत कक्षा एक से तीन के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय में सक्षम वातावरण का निर्माण किया जाएगा तथा उन्हें आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता का ज्ञान प्रदान किया जाएगा। इस मिशन के अन्तर्गत कक्षा एक से तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों में पढ़ने, लिखने तथा अंक गणित की शिक्षा का विकास किया जाएगा। यह योजना बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत कारगर सिद्ध होगी। इससे बच्चे समय पर आधारभूत साक्षरता तथा संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनका मानसिक एवं शारीरिक विकास होगा। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों की स्कूली शिक्षा, शिक्षक क्षमता निर्माण, उच्च गुणवत्ता तथा विद्यार्थी की आधारभूत आवश्यकतानुसार शिक्षण सामग्री को भी तैयार किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मिशन के अन्तर्गत निपुण लक्ष्य भी रखे जाएंगे, जिन्हें प्राप्त करने के प्रयास किए जाएंगे। मिशन के अन्तर्गत बेहतर कार्य करने वाले विद्यालयों को निपुण विद्यालय घोषित कर उस विद्यालय के मुख्याध्यापक और अध्यापकों को सम्मानित किया जाएगा। निष्ठा कार्यक्रम के अन्तर्गत अध्यापकों की ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियांें के लिए पाठ्य पुस्तकें तैयार की गई हैं और बच्चों की पाठ्य कुशलता को जॉंचने के लिए शीघ्र ही ओरल रिडिंग फल्यूएंसी ऐप भी तैयार किया जाएगा।
- सतपाल सिंह सत्ती ने किया शिलान्यास छठे राज्य वित्तायोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने ऊना शहर की महत्वाकांक्षी वर्षा जल निकासी योजना के तहत 1.85 करोड़ से बनने वाले सब्जी मंडी नाला का शिलान्यास किया। सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि शहर की ड्रेनेज परियोजना के तहत 5 प्रमुख नालों का चैनलाइजेशन किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने 22.48 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। उन्होंने कहा कि बरसाती पानी की उचित निकासी न होने के चलते बरसात शहर में जनजीवन प्रभावित होता है। मिनी सचिवालय सहित कई सरकारी कार्यालय, स्थानीय लोगों के आवास सहित आसपास का काफी क्षेत्र जलमग्न हो जाता है। उन्होंने कहा कि इन पांचों नालों का तटीकरण करके शहर का सारा बरसाती पानी लालसिंगी खड्ड और ऊना खड्ड में मिलाया जाएगा। नगर परिषद के पुराने भवन के स्थान पर बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर तैयार करके जनता को समर्पित किया जाएगा। जिसकी धरातल मंजिल पर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके अतिरिक्त पुराना बस अड्डे के स्थान पर अंडरग्राउंड पार्किंग के साथ शॉपिंग मॉल तैयार किया जाएगा। सतपाल सिंह सत्ती ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इसके अलावा हड्डी रोग से पीड़ित रोगियों की सुविधा के लिए 28 लाख रुपये लागत की सीआरएम मशीन, 22 लाख रुपये से लेप्रोस्काॅपी मशीन और 28 लाख रुपये से आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन स्थाापित की गई है। इससे लोगो को काफी राहत मिली हैं। सत्ती ने बताया कि 2ं0 करोड़ रुपये से मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 75 लाख रुपये की लागत से अस्पताल परिसर में आॅक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया जिससे 200 बैड को आॅक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। अस्पताल परिसर में लोगों की सुविधा के लिए 10 लाख रुपये खर्च करके भव्य पार्क जनता को समर्पित किया गया है। सत्ती बताया कि नगर परिषद के पुराने भवन के स्थान पर बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर तैयार करके जनता को समर्पित किया जाएगा जिसकी धरातल मंजिल पर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। इसके अतिरिक्त पुराना बस अड्डा के स्थान पर अंडरग्राउंड पार्किंग के साथ शाॅपिंग माॅल तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र की सड़कों को 90 करोड़ रुपये व्यय करके डबल किया गया है।
- डेढ़ लाख पेंशनरों की 2.57 फीसदी बढ़ेगी पेंशन हिमाचल प्रदेश में न्यूनतम पेंशन व पारिवारिक पेंशन को बढ़ाकर पेंशनभोगिओं को बड़ी राहत प्रदान की है। सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। अब पहली जनवरी, 2016 से न्यूनतम पेंशन व पारिवारिक पेंशन को 3,500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त पहली जुलाई 2021 से पेंशनभोगियों को 31 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्रदान करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार वर्ष 2016 के पेंशनरों की नई पेंशन को अब 31 दिसंबर 2015 की बेसिक पेंशन या पारिवारिक पेंशन की तर्ज पर तय किया जाएगा। राज्य में एक जुलाई 2016 से न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये प्रति माह होगी। संशोधित पेंशन या पारिवारिक पेंशन को अगले उच्चतम रुपये पर संशोधित किया जाएगा। समय-समय पर अंतरिम राहत दी जाती रही है, जो 21 फीसदी दी गई है। इसे पेंशन या पारिवारिक पेंशन के एरियर में समायोजित किया जाएगा। संशोधित पेंशन मार्च में फरवरी के देय वेतन में दी जाएगी। राज्य में एक जुलाई 2016 से न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये प्रति माह होगी। इसमें ओल्ड पेंशनर को दी जाने वाली अतिरिक्त पेंशन शामिल नहीं होगी। पेंशन और पारिवारिक पेंशन के लिए ऊपरी सीलिंग उच्चतम वेतनमान यानी 2,24,100 रुपये की 50 से 30 फीसदी होगी। इसके अनुसार अब पहली जनवरी 2016 से ग्रेच्युटी की सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख किया गया है। राज्य के 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को संशोधित पेंशन और पारिवारिक पेंशन पर देय अतिरिक्त पेंशन लाभ प्रदान किए जाएंगे। इस निर्णय से 1.73 लाख पेंशनभोगियों को पहली फरवरी, 2022 से संशोधित पेंशन व पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसके साथ ही 1.30 लाख पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को पहली जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन व पारिवारिक पेंशन मिलेगी।
- मंडी आईआईटी के शोधकर्ताओं ने किया कमाल आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने संतरे के सूखे छिलकों से बायो डीजल बनाने में सफलता हासिल की है। खास बात यह है की भविष्य में इसका उपयोग कारखाने चलाने वाली उर्जा से लेकर वाहनों दौड़ने के लिए इस्तेमाल होने ईंधन के रूप में किया जा सकेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने यह कमाल कर दिखाया है। आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेंकट कृष्णन, उनकी छात्रा तृप्ति छाबड़ा और प्राची द्विवेदी शामिल हैं। शोध के बारे में डॉ. वेंकट कृष्णन का कहना है कि पानी के साथ बायोमास, संतरे के छिलकों को गर्म करके प्राप्त होता है. इसे हाइड्रो थर्मल कार्बोनाइजेशन प्रक्रिया कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने बायोमास से प्राप्त रसायनों को बायोफ्यूल प्रीकर्सर में बदलने के लिए बतौर उत्प्रेरित संतरे के छिलके से प्राप्त हाइड्रोचार का उपयोग किया है. इसमें सूखे संतरे के छिलके के पाउडर को साइट्रिक एसिड के साथ हाइड्रोथर्मल रिएक्टर में कई घंटों तक गर्म किया। इससे उत्पन्न हाइड्रोचार को अन्य रसायनों के साथ ट्रीट किया गया ताकि इसमें एसिडिक सल्फोनिक, फॉस्फेट और नाइट्रेट फंक्शनल ग्रुप आ जाएं. इसी प्रकार से इन्होंने बायो डीजल का निर्माण किया है जो कि ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जैव ईंधन ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। जिसका देश के कुल ईंधन उपयोग में एक-तिहाई का योगदान है और ग्रामीण परिवारों में इसकी खपत लगभग 90 प्रतिशत है। जैव ईंधन का व्यापक उपयोग खाना बनाने और उष्णता प्राप्त करने में किया जाता है। उपयोग किए जाने वाले जैव ईंधन में कृषि अवशेष, लकड़ी, कोयला और सूखे गोबर आदि शामिल हैं। भारत में जैव ईंधन की वर्तमान उपलब्धता लगभग 120-150 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। गौरतलब है कि आईआईटी मंडी का यह शोध देश में जैव ईंधन उद्योग के लिए शुभ संकेत है। यहां यह भी उल्लेख करना होगा कि हाल के वर्षों में भारत बायोमास से बिजली बनाने में अग्रणी देश बन गया है. 2015 में भारत ने बायोमास, छोटे जल विद्युत संयंत्र और कचरे से ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से 15 जीडब्ल्यू बिजली पैदा करने के लक्ष्य की घोषणा की। बता दें कि पांच वर्षों के अंदर हमारे देश ने 10 जीडब्ल्यू बायोमास बिजली उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
फर्स्ट वर्डिक्ट, कुल्लू दिल्ली से भुंतर और शिमला के बीच अब पर्यटकों को अधिक पैसे ख़र्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब सैलानियों और अन्य लोगों को सस्ती हवाई सेवा मिलेगी। मई-जून माह में दिल्ली से भुंतर के लिए 72 सीटर की जगह 48 सीटर विमान उड़ान भरेगा। छोटा जहाज चलने से सवारियों को भारी भरकम किराये से राहत मिलेगी और एलायंस कंपनी को भी फायदा होगा। दिल्ली से कुल्लू-मनाली स्थित भुंतर हवाई अड्डे पर दस साल बाद एटीआर-42 की वापसी होगी। इससे पहले दिल्ली से भुंतर के लिए 2009 से 2012 तक 48 सीटर जहाज ही उड़ान भरता था। बताया जा रहा है कि देश में जो भी छोटे रनवे हैं, उनमें एटीआर-42 को चलाने की योजना है। ऐसे में सूबे के दो हवाई अड्डों को भी इसमें शामिल किया गया है। उड़ानों को जल्द आरंभ करने के लिए एलायंस एयर ने नए जहाजों की खरीद के लिए ऑर्डर जारी कर दिए हैं।यह जहाज न केवल नए होंगे, बल्कि आधुनिक तकनीक से लेस होंगे। इसे लेकर डीजीसीए ने पहल तेज कर दी है और संबंधित हवाई अड्डों में तैनात एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों से जानकारी हासिल की जा रही है। वहीं, पिछले साल नवंबर माह में कुल्लू दौरे पर आए केंद्रीय परिवहन एवं सड़क राजमार्ग राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने भी दिल्ली से भुंतर के लिए 48 सीटर जहाज चलाने की बात कही थी। भुंतर एयरपोर्ट के निदेशक नीरज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि एटीआर-42 जहाज को चलाने की प्रक्रिया चल रही है।
- धारटीधार क्षेत्र को जयराम सरकार की बड़ी सौगात प्रदेश की जय राम सरकार ने नाहन विधानसभा क्षेत्र के धारटीधार क्षेत्र को पेजयल योजना की बड़ी सौगात दी है। धारटी क्षेत्र की दूसरे चरण की पेयजल योजना के लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। नाहन के विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने बताया कि धारटीधार क्षेत्र की दूसरे चरण की पेयजल योजना के लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस योजना के कार्यान्वयन के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। डा. बिंदल ने कहा कि भाजपा सरकार में धारटीधार क्षेत्र के पेयजल संकट को दूर करने के प्रथम प्रयास के कामयाब होने के बाद अब दूसरा प्रयास शुरू किया गया है। पहले प्रयास में गिरि नदी में एक बोरवैल लगार कर चार इंच पानी उठाया गया। इस पानी को नैहली धीड़ा, पंजाहल, धगेड़ा, नवनी व देवका पुडला पंचायतों के सभी टैंकों में डाला गया व सेन की सेर और बनेठी के कुछ हिस्से को भी इसमें शामिल किया गया। दूसरे चरण में 25 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल योजना के तहत 2 टयूबवैल गिरि नदी में लगाए जा रहे है। साथ ही आठ इंच पानी इन टयूबवैल से उठाया जाएगा। इस पानी को नेहली धीड़ा, धगेड़ा, पंजाहल, नवनी देवका पुड़ला, के अलावा रामा धौण का कुछ भाग और बनेठी के कुछ भागों को पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। डा. बिंदल ने बताया कि इस योजना में लगभग 10 किमी की राइजिंग मैन बनेगी, 27 नये वाटर सप्लाई टैंक बनेंगे व लगभग 150 किमी की लाईन बिछाई जाएगी। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की लागत से यह योजना तैयार होने पर धारटी के क्षेत्र को लंबे समय तक पानी की तंगी नहीं झेलनी पड़ेगी। कभी सूखी धारटी के नाम जाने जाने वाली हमारी धारटी पेयजल किल्लत से पूरी तरह मुक्त हो जाएगी। डा. बिंदल ने कहा 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस पेयजल योजना के टैंडर हो गए हैं। धारटी क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण पेयजल योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार जताया है।
- 19.50 लाख से निर्मित राजकीय उच्च पाठशाला नेरटी के अतिरिक्त भवन का किया उद्घाटन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीन चौधरी ने सरवीन चौधरी नेरटी में 19.50 लाख रुपये की लागत से निर्मित राजकीय उच्च पाठशाला नेरटी के अतिरिक्त भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिये निरन्तर प्रयासरत है। प्रदेश में शिक्षण संस्थानों के मूलभूत ढांचे को विकसित करने पर बल दिया गया है। सरकार ने राज्य के ग्रामीण एवं दूरवर्ती क्षेत्रों में बच्चों को घर-द्वार पर बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। सरवीन ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि पहले बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए लम्बा सफर तय करना पड़ता था लेकिन आज विद्यार्थियों को उनके घर-द्वार के समीप बुनियादी एवं उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रदेश में नये स्कूल व कॉलेज खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान दूरदराज के क्षेत्रों में नये कालेज खोले गये हैं और आज लड़कियां उच्च शिक्षा के मामले में अधिकांश संस्थानों में लड़कों को पीछे छोड़ रही हैं। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वह जीवन में आगे बढने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें तथा उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, इसलिए छात्रों को चाहिए कि वह शिक्षा के साथ-साथ हर प्रकार की स्कूली गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर भाग लें। उन्होंने अध्यापकों से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर बल देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश की बहुमूल्य सम्पदा है और युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा एवं क्षमता का सदुपयोग कर एवं उनमें अनुशासन की भावना का विकास कर सुदृढ़ समाज, विकसित प्रदेश व सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। इस अवसर पर मुख्याध्यापक संजय कुमार जांवला ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और स्कूल द्वारा चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। सरवीन चौधरी ने बताया कि ग्राम पंचायत रजोल में नया 33 के वी विद्युत उपकेंद्र बनकर तैयार हो चुका है जिसको बनाने में लगभग 3.50 करोड़ की लागत आई है। आने वाले कुछ दिनों में ग्राम पंचायत नेरटी व इसके साथ लगती सभी पंचायतों को 33 केवी विद्युत उपकेंद्र रजोल के साथ जोड़ा जाएगा जिस पर 15 लाख रुपये की राशि खर्च होगी। गांव नेरटी में 100 केवीए ट्रांसफार्मर को 250 केवीए ट्रांसफार्मर में अपग्रेड किया जाएगा जिस पर पांच लाख रुपए की राशि खर्च की जाएगी।
-13 बीघा भूमि पर पिछले 4 वर्षों से कर रहे प्राकृतिक खेती नाहन विधानसभा क्षेत्र के प्रगतिशील किसान नरोत्तम सिंह ने बिना उर्वरक और रसायनिक दवाइयों के इस्तेमाल किए बिना प्राकृतिक खेती के माध्यम से अच्छा उत्पादन कर अपने आसपास के लोगों के लिए एक मिसाल कायम की है। सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के अंतर्गत जिला सिरमौर जहर मुक्त उत्पादन करने में प्रदेश का अग्रणी जिला बनने जा रहा है। नाहन विधानसभा क्षेत्र के गांव डाक वाला के रहने वाले किसान नरोत्तम सिंह अपनी 13 बीघा जमीन में पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती करके अच्छा उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने शिमला के कुफरी से प्राकृतिक खेती करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। तब से वह अपने परिवार के साथ प्राकृतिक खेती कर रहे हैं हालांकि शुरुआती वर्ष में गेहूं के उत्पादन में थोड़ी कमी आई थी परंतु वर्तमान समय में उन्हें अच्छा उत्पादन मिल रहा है। नरोत्तम सिंह का कहना है कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती करने से जहां उनके उत्पादन में वृद्धि हुई है वही भूमि की उर्वरा शक्ति में भी सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि वह अपनी फसलों में प्रत्येक 21 दिन के बाद जीवामृत घनजीवामृत का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी भूमि से विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनकी भूमि की उर्वरक शक्ति में भी आश्चर्यजनक वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि वह गेहूं, लहसुन, प्याज, आलू, सरसों, मेथी, मटर, धनिया, अलसी तथा मूली इत्यादि फसलों की मिश्रित रूप से खेएती करते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने आम, नींबू, कटहल व चीकू का बगीचा भी लगाया है। उन्होंने अपनी एक बीघा भूमि पर 100 चन्दन के पौधे भी रोपित किए हुए हैं। उन्होंने बताया की जहां पहले एक क्विंटल लहसुन का उत्पादन होता था। अब वहीं उतनी ही जमीन से वह 5 क्विंटल तक लहसुन का उत्पादन ले रहे हैं। उनके द्वारा उगाई जा रही फल तथा सब्जियों की बाजार में अच्छी मांग है। जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रत्येक फसल के बाद उन्हें खेतो की जुताई करनी पड़ती थी। वहीं अब जमीन की उर्वरक शक्ति बढ़ने से वह साल में केवल एक बार ही जुताई करते हैं जिससे धन तथा समय दोनों की बचत होती है। नरोत्तम सिंह सरकार का धन्यवाद करते हुए कहते हैं कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती योजना किसानों तथा उपभोक्ताओं के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इसमें किसानों को किसी प्रकार के खाद व दवाइयों पर कोई व्यय नहीं करना पडता और उपभोक्ताओं को भी जहर मुक्त उत्पाद मिल रहे हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती द्वारा उत्पादन करने का आह्वान किया है। परियोजना निदेशक कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण सिरमौर डा साहिब सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सुभाष पालेकर द्वारा इजाद प्राकृतिक खेती प्रणाली से चाहे कोई भी खाद्यान्न, सब्जियां, बागवानी की फसल हो उसका लागत मूल्य लगभग शून्य होगा।
यूक्रेन में रूसी सैन्य हमले के बीचे फंसे हुए भारतीय नागरिकों को निकालना शुरू किया, पहली उड़ान के साथ शाम को बुखारेस्ट से 219 लोगों को मुंबई वापस लाया गया। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि 250 भारतीय नागरिकों को लेकर दूसरी निकासी उड़ान रविवार सुबह करीब तीन बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन 250 भारतीय नागरिकों का गर्मजोशी से स्वागत किया, जो यूक्रेन से स्वदेश लौटे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्विटर पर लिखा कि भारतीयों की घर वापसी से बेहद खुशी है। मेरे सहयोगी वी मुरलीधरन के साथ हमने युक्रेन से लौटे 250 भारतीयों का स्वागत किया।
हिमाचल प्रदेश की गगरेट विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले समाजसेवी और दिल्ली में बतौर प्रशासनिक अधिकारी सेवाएं देने वाले स्वर्गीय ठाकुर रोशन लाल जसवाल के नाम पर दिल्ली में सड़क का नाम रखा गया है जिससे ऊना जिला के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश का भी गौरव बड़ा है। यह बात आज गगरेट विधानसभा क्षेत्र में स्व. ठाकुर रोशनलाल जसवाल के घर कलोह पहुंचकर समाजसेवी मनीष शारदा ने कही। इस मौके पर उन्होंने स्व. ठाकुर रोशन जसवाल के बेटे मधुसूदन जसवाल को उनके पिता द्वारा समाजसेवा में किए गए कार्यों के लिए सम्मानित भी किया,वहीं उनके नाम पर पूर्वी दिल्ली में सड़क का नाम रखे जाने पर बधाई भी दी। इस मौके पर समाजसेवी मनीष शारदा ने कहा कि दिल्ली की शकरपुर मुख्य मार्केट में सड़क का नाम समाजसेवी स्व. ठाकुर रोशनलाल जसवाल के नाम रखने से गगरेट के लोगों में काफी उत्साह है। उन्होंने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि हमें ऐसे बुजुर्ग मिले, जिन्होंने हमारे गांव, क्षेत्र व प्रदेश का नाम भी रोशन किया। बता दे कि स्व. ठाकुर रोशन लाल का जन्म गांव कलोह तहसील घनारी में हुआ था। वर्ष 1955 में वह पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली चले गए थे। वहां दिल्ली सरकार में अलग-अलग विभागों में सेवाएं देते रहे। साथ-साथ दिल्ली मे अनेक सामाजिक सरोकारों के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। 1992 में प्रथम श्रेणी अधिकारी सेवानिवृत्त हुए। उनका परिवार कलोह में ही रह रहा है। इस मौके पर मनीष शारदा के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता पंडित रामलुभाय करण ठाकुर, संजय शर्मा, ओमपाल ठाकुर,नरेंद्र पिंटू और शम्मी कालिया मौजूद रहे।
चलो गांव की ओर जनसमर्थन जन आर्शीवाद लेने व विकास यात्रा करते हुए कांगड़ा विधान सभा क्षेत्र के गांव ढीन्नु में महिला मंडलों व ग्रामीणों नौजवानों बजुर्गों से रूबरू हुए पूर्व विधायक चौधरी सुरेंद्र काकू ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बारह महिला मंडलों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी । महिला मंडलों को प्रोत्साहन राशि के साथ साथ ठाकुर जय राम सरकार ने नरेली खड्ड पर अढ़ाई करोड़ रुपए का पुल बना कर तैयार कर दिया है यह पुल बन जाने से दौलतपुर नगरोटा विधानसभा क्षेत्र आपस मे जुड़ जायेंगे सीधा नेशनल हाईवे से जुड़ जायेंगे दौलतपुर, धमेड,तकीपुर, जलाड़ी, जन्यानकड, कुलथी,समेला,तरसुह गांव में प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री हर घर में जल नल योजना के तहत इन गांव में 18 करोड़ रुपए की पानी पीने का योजना दी गई है जिसका काम जोरो शोरो से चला हुआ है । इस के साथ अलग से गांव दौलतपुर में 8 करोड़ रूपए की लागत से 33 केवी का बिजली स्टेशन खोला जा रहा है आई.टी.आई दौलतपुर में दिया गया है तकीपुर भारत रत्न गवर्नमेंट अटल बिहारी वाजपेई कॉलेज को 11 करोड़ रुपए देकर बनाया गया है जलाड़ी में 3 करोड़ 42 लाख से बंडेर खड्ड पर पुल बनाकर खर्ट गांव से जोड़ा जा रहा है काम प्रगति पर है मेरे समय काल में 10 नई सड़के निकली गई थी, लेकिन पिछले पांच साल में इन पर कोई काम नही किया गया अब इन सड़को को वन विभाग से मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने इजाजत ली गई है । इनका सुधार करके इन्हें पक्का किया जाएगा। कई नई सड़को का निर्माण किया जाएगा नई पानी की योजनाओं का निर्माण किया जा रहा है हम विकास में विश्वास रखते है और विकास के नाम पर वोट लेंगे हमारी विकास यात्रा जारी रहेगी।
राजकीय उच्च विद्यालय खरड़हट्टी से 6 विद्यार्थियों ने अर्की में आयोजित चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस में भाग लिया। जिसमें साइंस क्विज में भावना ,पूजा कक्षा दसवीं,जूनियर क्विज में मनीष, रितिका कक्षा आठवीं वही मैथ्स ओलंपियाड जूनियर भावना कक्षा आठवीं और मैथ ओलंपियाड साइंस में निशांत कक्षा दसवीं ने भाग लिया। जिसमें निशांत ने अर्की सब डिवीजन में तीसरा स्थान प्राप्त किया है! मुख्याध्यापिका ममता गुप्ता ने बताया कि निशांत को इस उपलब्धि के लिए गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल अर्की में डिप्टी डायरेक्टर एलिमेंट्री एजुकेशन द्वारा सम्मानित किया गया। वही विद्यालय मुख्य अध्यापिका द्वारा इन सभी बच्चों को मेडल पहनाकर व सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। साथ ही आने वाली प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। मुख्य अध्यापिका ने विद्यालय अध्यापकों, एसएमसी व सभी विद्यार्थियों को इस कार्य के लिए बधाई दी।
स्काउट एंड गाइड के स्थापना दिवस के मौके पर डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल दाड़लाघाट की अध्यापिका एवं बच्चों को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा सम्मानित किया गया। भारत स्काउट एंड गाइड की शुरुआत डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल दाड़लाघाट में प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर के मार्गदर्शन में सन् 2020 में की गई। इसमें बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।स्काउट्स एंड गाइड में छात्रों को स्काउट्स और छात्राओं को गाइडस कहा जाता है और इनके मेंटोर्स स्काउट मास्टर तथा गाइड कैप्टन कहलाते हैं। कोरोना महामारी के दौरान भारत स्काउट्स एंड गाइड्स द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। जिसमें डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियो ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई। हिमाचल प्रदेश स्काउट एंड गाइड द्वारा आयोजित “फाइट अगेंस्ट कोरोना 2.0” परियोजना पर आधारित गतिविधियों में डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल के अध्यापकों तथा बच्चों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।इन गतिविधियों में अध्यापिका (गाइड कैप्टन) अंजू कटवाल और सातवीं कक्षा की छात्राएं (गाइड्स) अंशु कुमारी और गुंजन ठाकुर को राज्यपाल द्वारा कोटशेरा कॉलेज शिमला में सम्मानित किया गया।प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर ने कहा कि डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल के स्काउट्स एवं गाइड्स समूह ने बहुत कम समय में मेहनत और लग्न से प्रदेश भर में स्कूल का नाम रोशन किया है। उधर,अध्यापकों तथा छात्रों की इस उपलब्धि पर स्कूल प्रबंधन समिति के चेयरमैन मनोज कुमार श्रीवास्तव,क्षेत्रीय अधिकारी अनुराधा शर्मा,स्कूल प्रबंधक मासूमा सिंघा एवं प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर ने बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
एसआईयू टीम ने बेचड़ का बाग के समीप की छापेमारी डीएसपी संगड़ाह शक्ति सिंह के नेतृत्व में सिरमौर पुलिस की टीम द्वारा रेणुकाजी थाना क्षेत्र के बेचड़ का बाग मे एक शख्स को तेंदुए की खाल के साथ गिरफ्तार किया। ठाकुर भोजनालय के समीप खड़े श्रीनगर, उत्तराखंड के उक्त शख्स के कैरी बैग की तलाशी लिए जाने पर इससे तेंदुए की खाल बरामद हुई। बुधवार रात पुलिस अथवा एसआईयू टीम ने यह छापेमारी की। गौरतलब है कि, तेंदुआ एक दुर्लभ है और इसे वाइल्ड लाइफ संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत शेड्यूल- 1 रखा गया है। पुलिस द्वारा वन विभाग के संबंधित अधिकारी से घटनास्थल पर खाल की पहचान करवाई गई। क्षेत्र मे तेंदुए द्वारा आए दिन पालतू पशुओं को अपना निवाला बनाए जाने के मामले भी सामने आते हैं। कुछ अरसा पहले खादरी के समीप जहां कुत्तों ने एक तेंदुए को मार डाला था, वहीं शिवपुर गांव मे बैलों ने बाड़े मे घुसा एक तेंदुआ मार दिया था। उपमंडलीय पुलिस अधीकारी संगड़ाह एंव एसओ एसआईयू सिरमौर शक्ति सिंह ने बताया कि, आरोपी के खिलाफ की वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा- 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है ओर मामले की तहकीकात जारी है।
एसडीएम अर्की मयंक शर्मा ने वीरवार को कुनिहार विकास खण्ड के अंतर्गत प्रस्तावित सब तहसील भवन,छात्र वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनिहार के साइंस ब्लॉक भवन व खण्ड विकास कार्यालय सहित विद्यालय व वार्ड नम्बर 1 के लिए, दिन प्रति दिन खतरा बने हुए खटनाली नाले के भूमि कटाव के रोकथाम के लिए खण्ड विकास अधिकारी तारा शर्मा,नायब तहसीलदार पूर्ण चन्द शर्मा,विद्यालय प्रधानाचार्य बीएस ठाकुर, हाटकोट पंचायत उप प्रधान रोहित जोशी, लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता पुनीत शर्मा, रमेश योगिराज व इंद्रपाल शर्मा आदि के साथ मौके पर निरक्षण कर इनका हल करने बारे चर्चा की गई। इस दौरान जंहा सब तहसील के लिए चयनित भूमि पर विकास खण्ड के पुराने जर जर हो चुके भवन को गिराने, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बच्चो के बैठने की समस्या को देखते हुए प्रस्तावित साइंस ब्लॉक के भवन के निर्माण के लिए जल्द बजट के प्रावधान की व्यवस्था के बारे में चर्चा की गई। वहीं खटनाली नाले में हर एक बरसात में हो रहे भूमि कटाव की वजह से विद्यालय, खण्ड विकास कार्यालय कुनिहार व वार्ड नम्बर 1 के बाशिंदों के लिए खतरा बने नाले के बारे में भी चर्चा की गई। नाले के मुहाने तक पहुंच कर एसडीएम अर्की मयंक शर्मा ने विद्यालय, खण्ड विकास कार्यालय व वार्ड नम्बर एक के लिए खतरा बने नाले के निरीक्षण के बाद बात करते हुए कहा कि नाले में हो रहे भूमि कटाव के बारे में सॉयल कंज़र्वेशन विभाग के अधिकारियों से बात करके इस समस्या का हल निकालने का प्रयास किया जाएगा,ताकि भूमि कटाव को रोक कर लोगो की समस्या का समाधान हो सके।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही आज 11 बजे शुरू हुई। कार्यवाही में दिवंगत विधानसभा सदस्य कश्मीरी लाल जोशी और चमन लाल के निधन पर शोकोदगार प्रस्तुत किया गया . मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कश्मीरी लाल के निधन पर शोक व्यक्त किया और बताया कि कश्मीरी लाल का निधन 28 जनवरी 2022 को हुआ था। उनका जन्म 1938 को हरोली में हुआ था। दो बार संतोषगढ़ से विधायक भी रहे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूर्व में विधानसभा सदस्य रहे चमन लाल के निधन पर भी दुख व्यक्त किया और बताया कि उनका निधन 77 वर्ष की आयु में 13 जनवरी 2022 को हुआ। चमन लाल 6 जनवरी 1945 को सोलन में हुआ हुआ था। 1977 में पहली बार जनता दल से विधायक बने थे। मुख्यमंत्री ने दोनों दिवंगत नेताओं के निधन पर संवेदनाएं व्यक्त की। शोकोदगार में भाग लेते हुए विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि कश्मीरी लाल सेवा भाव में समर्पित रहे और कुछ वर्षों से राजनीति छोड़कर आध्यात्म में चले गए थे। जबकि चमन लाल भी जन सेवा के लिए समर्पित रहे। वह भी दोनों नेताओं के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। शोकोदगार में सदस्य डॉ. राजीव बिंदल, राकेश सिंघा, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल, सतपाल रायजादा, बलबीर चौधरी, लखविंदर सिंह, कर्नल धनी राम शांडिल ने भी अपने आप को सम्मलित किया। विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने भी दोनों दिवंगत नेताओं को याद करते हुए इनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर, अपने पड़ोसी देश पर हमला करना शुरू कर दिया है। हाल ही में अद्यतन रूस यूक्रेन संघर्ष पर, आईएफएक्स रिपोर्ट के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के हवाई अड्डे और सैन्य बुनियादी ढांचे को निष्प्रभावी कर दिया गया है। इस बीच, यूक्रेन की सेना ने कहा कि लुहान्स्क क्षेत्र में पांच रूसी विमानों और एक रूसी हेलीकॉप्टर को मार गिराया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार तड़के यूक्रेन में सैन्य अभियान की घोषणा की। पुतिन ने कहा कि कीव, खार्किव और यूक्रेन के अन्य क्षेत्रों में बड़े विस्फोटों की आवाज सुनी दी गई थी जिसके बाद, कीव में हवाई सायरन बज गए, जो दर्शाता है कि शहर पर हमला हो रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने देश में मार्शल लॉ की घोषणा की और कहा कि रूस ने यूक्रेन के बुनियादी ढांचे और देश के सीमा रक्षकों पर मिसाइल हमले कर दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से रूस-यूक्रेन सीमाओं पर रूसी सैन्य स्तंभों की बड़ी तैनाती देखी गई है। पुतिन द्वारा यूक्रेन में दो अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र के रूप में मान्यता देने के बाद तनाव बढ़ गया था और उन्होंने शांति सैनिकों को तैनात करने का आदेश दिया था।
पुलिस थाना दाड़लाघाट के अंर्तगत मलेथी गांव में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा घर के ताले तोड़कर चोरी करने का प्रयास करने को लेकर मामला दर्ज हुआ है। पुलिस ने मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस को दी शिकायत में नरेश वर्मा सुपुत्र जीत राम ठाकुर,गांव मलेथी (नवगांव) ने कहा है कि 23 फरवरी को उसके पड़ोसी डीआर गांधी ने फोन करके बताया कि उसके रिहायशी मकान के दरवाजे खुले हुए है। जब वह अपने घऱ पहुँचा तो,देखा कि घऱ में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा पांच दरवाजे व उनके ताले टूटे हुए पाये गए। शिकायतकर्ता ने चैक करने पर पाया कि मकान से कोई भी सामान चोरी नहीं हुआ है।उसके मकान में सिर्फ चोरी करने की कोशिश की गई है।शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसका मकान काफी दिनों से बन्द पड़ा हुआ था व मकान में कोई भी व्यक्ति नहीं रह रहा था।पुलिस द्वारा कार्रवाई करते हुए आईपीसी की धारा 380,511 के तहत मामला दर्ज किया है।मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी दाड़लाघाट प्रताप सिंह ठाकुर ने बताया कि मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।
विनायक ठाकुर/डाडा सीबा आगामी 15 मार्च 2022 से लिंक रोड रोड़ी-कोड़ी से टिप्परी सड़क व कोटला से अमरोह सड़क पर गाडी लेकर जाना भूल जाएं क्योकिं विभाग वाहन चालको व पैदल राहगीरो की सुविधा हेतु उक्त सडक को कंकरीट रेता बजरी सिमेंट आदि से पक्का करने जा रहा है । जिसके लिए विभाग ने उक्त रोड को 24 फरवरी से आगामी 15 मार्च तक बन्द करने जा रहा है वही खबर की पुष्टि करते हुए पीडब्लूडी विभाग डाडा सीबा मे तैनात एसडीओ नवदीप सिंह ने बताया कि इस सडक से निकलने वाले तमाम वाहन चालक निर्माण कार्य की समाप्ती तक वैकल्पिक रास्ते पर आवाजाही रखे। वही एसडीओ नवदीप सिंह ने इस निर्माण कार्य को सफल बनाने के लिए तमाम लोगो से सहयोग के लिए अपील की है।
शिमला के नारकंडा में बतनाल के पास ग्लेशियर गिरने की घटना सामने आई है। ग्लेशियर गिरने के कारण वहां से गुजर रही एक कार नंबर HP-06A- 6203 चपेट में आ गई। जिस समय ये हादसा पेश आया है उस समय कार में करीब तीन लोग सवार थे। हिमस्खलन की चपेट में आने से कार सवार चमन लाल निवासी गांव बाईकुमारसैन, स्पीटी पुत्री चमन लाल और चमल लाल की पोती इनाया को हल्की चोटें आई हैं। पुलिस चौकी नारकंडा के कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। नारकंडा अस्पताल में उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई है।
शिमला के नारकंडा में बतनाल के पास ग्लेशियर गिरने की घटना सामने आई है। ग्लेशियर गिरने के कारण वहां से गुजर रही एक कार नंबर HP-06A- 6203 चपेट में आ गई। जिस समय ये हादसा पेश आया है उस समय कार में करीब तीन लोग सवार थे। हिमस्खलन की चपेट में आने से कार सवार चमन लाल निवासी गांव बाईकुमारसैन, स्पीटी पुत्री चमन लाल और चमल लाल की पोती इनाया को हल्की चोटें आई हैं। पुलिस चौकी नारकंडा के कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। नारकंडा अस्पताल में उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई है।
प्राचीन शिव तांडव गुफा कुनिहार में शिवरात्रि के उपलक्ष्य पर आयेजित शिव महापुराण कथा के छठे दिन कथावाचक नागेश कपिल ने अपनी मधुर वाणी से प्रवचन रूपी अमृत ज्ञान गंगा को प्रवाहित करते हुए सृष्टि की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला , जिसमे मानव, देवता और दैत्य की उत्पत्ति पर विस्तार से विवरण किया गया। आचार्य द्वारा सनातन धर्म की श्रेष्ठता, महता,और आत्मीयता पर भी विस्तार से गुणगान किया गया। उन्होंने कहा कि राजा दक्ष की पुत्री सती द्वारा भगवान शंकर की आराधना करना व उनके श्री चरणों की पूजा करना तथा स्त्री धर्म का व्याख्यान भी किया गया। माता सती ने किस तरह शंकर भगवान को पाने के लिए पांच सांसारिक सुखों का जिसमें ,नींद, दूसरों पर हंसना,फिजूल का लोगों से मिलाप छोड़ दिया था। कथा वाचक ने श्रोताओं से आह्वाहन किया कि समस्त सुखों को पाने के लिए हमेशा भगवान शंकर के सामने प्रभु श्री राम का नाम जपना चाहिए जो शंकर महादेव को अति प्रिय है।इस अवसर पर प्राचीन शिव तांडव गुफा के अध्यक्ष रामरतन तनवर, सचिव जोगिंदर कंवर, गुमान, रितु,और समस्त सदस्य गण उपस्थित रहे।
केंद्रीय युवा सेवाएं, खेल व सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर के सौजन्य से हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के देहरा विधानसभा में आयोजित किए जा रहे सांसद खेल महाकुंभ को एक बार फिर से शुरू कर दिया गया है, जिसमे देहरा क्षेत्र के युवा बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। देहरा में आयोजित हो रहे सांसद खेल महाकुंभ की जानकारी देते हुए सांसद खेल महाकुम्भ देहरा के सह संयोजक एवम भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ सुकृत सागर ने बताया कि कोविड के कारण खेल-महाकुंभ के आयोजन को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन हालात ठीक होने के बाद बीते दिन राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश ध्वाला ने बतौर मुख्यातिथि देहरा के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री रविंदर रवि की उपस्थिति में वॉली बॉल प्रतियोगिता के साथ शुरू करबाया । उन्होंने बताया कि अभी सांसद खेल महाकुम्भ के अंर्तगत देहरा के भुवनेश डोगरा स्टेडियम में वॉली बॉल व कबड्डी के मुकाबले चल रहे है। डॉ सुकृत ने कहा कि सांसद खेल महाकुम्भ में देहरा के हज़ारों युवाओं की भागीदारी अनुराग ठाकुर के प्रयास को सार्थक बना रही है देहरा के युवाओं का सांसद खेल महाकुंभ के प्रति जोश प्रशंसनीय है।डॉ सुकृत ने कहा कि देश के युवा सेवाएं व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर की इस पहल से देहरा क्षेत्र के गांवों में छुपी युवा प्रतिभाओं को उचित स्थान पाने के लिए एक बहुत ही उपयोगी माध्यम मिला है। उन्होंने ने कहा कि सांसद खेल महाकुम्भ हमारे अनुकरणीय नेता व प्रिय सांसद अनुराग ठाकुर की दूरगामी सोच है।
रा.व.मा.पा.बढलग में एनएसएस का सात दिवसीय शिविर का बुधवार को समापन हुआ। कार्यक्रम अधिकारी डॉ.पूरण चंद तथा सरिता ने शिविर की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि इस शिविर में 14 छात्राओं तथा 16 छात्रो सहित कुल 30 स्वयंसेवीयो ने भाग लिया। इस दौरान विद्यालय परिसर की सफाई,जल स्त्रोतों की साफ सफाई, रास्तों की मुरम्मत तथा जागरूकता , रैली आदि विभिन्न गतिविधियो आयोजित की गई । इस दौरान विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा, एच. आई.वी. एड्स, बाल्य अवस्था, खेलों का महत्व तथा महिला सशक्तिकरण आदि समसामयिक विषयों पर जानकारी दी गई। समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अशोक शर्मा ने मुख्य अतिथि सतीश कुमार का स्वागत व धन्यवाद किया तथा शिविर की गतिविधियों की जानकारी दी। प्रधानाचार्य तथा मुख्य अतिथि ने स्वयंसेवियो के प्रयासों की सराहना की तथा उनसे समाजसेवा और राष्ट्रसेवा में निरंतर भाग लेने का आव्हान किया । समापन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियों ने सभी को प्रभावित किया। विद्यालय के समस्त अध्यापकों एवं कर्मचारियों ने शिविर के सफल आयोजन में भरपूर सहयोग किया ।
मनीष ठाकुर, भरमौर ज़िला चंबा में किसानों को केसर की खेती से जोड़ने के लिए हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान और कृषि विभाग के संयुक्त सहयोग से उपमंडल भरमौर के तहत कुठेड़ पंचायत में एक दिवसीय किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान ने की। उन्होंने होली घाटी के लोगों को केसर की खेती बारे में अवगत करवाया। इस मौके पर विशेषज्ञों द्वारा केसर के उत्पादन संबंधित विभाग द्वारा किसानों को केसर की खेती के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यशाला में हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक व परियोजना समन्वयक डॉ. राकेश कुमार राणा और भरमौर के कृषि प्रसार अधिकारी नवीन ठाकुर भी विशेष तौर पर उपस्थित रहे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जनजातीय क्षेत्र भरमौर केसर की खेती के लिए उपयुक्त स्थान है। उच्च गुणवत्ता युक्त पैदावार के लिए यहां का वातावरण फूलों के खिलने और उत्पादन बढ़ाने के लिए मददगार हैं। उन्होंने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा केसर के उत्पादन को लेकर प्रशिक्षण उपलब्ध करवाती है, तथा निशुल्क में बीज वितरण का भी प्रावधान करवाती है। कार्यशाला में हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिक डॉ विजय ध्यानी, डॉ सेजल जाम्बल, डॉ. नेहा चौधरी व कृषि विभाग से विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. करतार सिंह, कृषि प्रसार अधिकारी के अलावा स्थानीय पंचायत के प्रधान सिरमौरी राम व अन्य ग्रामीण लोग भी उपस्थित रहे। इस संवाद कार्यशाला में होली घाटी के अलग अलग गांव के लगभग 50 किसानों ने भाग लिया ।
राज सोनी, करसोग पंडार में मंगलवार देर शाम एक कार के खाई में गिरने से पति पत्नी की मौत हो गई। जबकि इस हादसे में अन्य तीन घायलों का उपचार सिविल अस्पताल सुन्दरनगर में चल रहा है। जानकारी के अनुसार मंगलवार शाम को निहरी क्षेत्र के पंडार में कार के खाई में गिरने पाँच लोग घायल हो गए थे जिन्हे तुरंत उपचार के लिए सीएचसी रोहांड़ा लाया गया। लेकिन 33 वर्षीय इंद्र सिंह ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। वहीं अन्य लोगों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें सुंदरनगर स्थित नागरिक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया है। लेकिन उपचार के दौरान देर रात इंद्र सिंह की 27 वर्षीय पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। वहीं डीएसपी सुंदरनगर दिनेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि हादसे में पति पत्नी की मौत हो गई है और अन्य तीन घायलों का नागरिक अस्पताल सुंदरनगर में इलाज चल रहा है. उन्होंने बताया पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरु कर दी है। वहीं आज मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम करवा परिजनों के हवाले कर दिया जायेगा। वहीं इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
प्रेम ठाकुर, धर्मपुर सहारा संस्था के प्रमुख धर्मपुर के युवा नेता युवराज रजत ठाकुर द्वारा महिला मंडलों को सम्मानित करने का सिलसिला जारी है। संधोल क्षेत्र में हुए महिला सम्मान समारोह के बाद बुधवार को सयोह में आयोजित महिला सम्मान समारोह में सयोह , खनोड,सकलाना पंचायतों के 27 महिला मंडलों को समानित करते हुए रजत ठाकुर ने कहा कि सहारा संस्था का ये सम्मान समारोह कार्यक्रम तब तक चलता रहेगा जब तक हम अपने इस धर्मपुर क्षेत्र की उन सभी माताओं बहनों तक नहीं पहुंच जाते जिन्होंने समाज के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया है हमारे इन महिला मंडलों की माताओं बहनों ने वर्षो से कष्टों में रहते हुए अपना योगदान दिया कारोना काल में भी हमारी इन माताओं बहनों ने अपने घरों में बैठकर मास्क बनाकर निःषुल्क बांटने में समाज की मदत की है साथ ही कारोना काल में ही जब सभी तरह की आमदनी बन्द हो गई थी तो इन्ही महिला मंडलो की सदश्यो ने अपने अपने गांव में लोगों की सहायता की है जो सराहनीय है। रजत ठाकुर ने मातृ शक्ति से आह्वान किया कि समाज के निर्माण में मातृशक्ति का अहम रोल है जिसे निभाने के लिए आगे भी तैयार रहना होगा आने वाली पीढ़ी को बचपन से ही ऐसे शिक्षित करने की जरूरत है ताकि हमारे समाज के बच्चे नसे से दूर रह सके और हमारी बेटियां भी अछि शिक्षा ग्रहण करके अपना भविष्य निर्माण करके समाज में नाम रोशन करने में कामयाब हो ।ये तभी हो सकता है जब हमारी मातृशक्ति आगे आकर पहल करे। रजत ठाकुर ने तीनों पंचायतों के 27 महिला मंडलो को पांच पांच गद्दे बतौर सम्मान दिए ताकि अपने अपने मण्डल की बैठकों के दौरान आराम से बैठकें कर सकें। इस अवशर पर नन्हे नौनिहालों ने रंगारंग कार्यक्रम भी किए गए जिससे नई प्रतिभाएं भी देखने को मिली। रजत ठाकुर ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की सफलता के लिए सयोह सकलाना व खनोड पंचायत के महिला मंडलों व लोगों का धन्यवाद किया। इस मौके पर खनोड पंचायत की प्रधान आशा देवी, समौड के प्रधान प्रताप सकलानी, सकलाना पचायत प्रधान सुरेन्द्र ठाकुर सयोह के प्रधान प्रीति देवी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
युवा क्रिकेट कमेटी भयूँखरि द्वारा क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। इसमें भयूंखरी में पलोन और महाकाल इलेवन के बिच मुकाबला हुआ, जिसमे मुख्यातिथि के रूप में अशोक भारद्धाज अध्यक्ष युवा कांग्रेस अर्की व् साथ में बीडीसी सदस्य शशि कांत मौजूद रहे। इस मोके पर अध्यक्ष द्वारा क्रिकेट प्रेमिओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी और खेल को खेल की भावना से खेलने का आग्रह किया व समय आने पर अपने क्षेत्र का नाम रोशन करने का भी आवाहन किया। इस मैच में महाकाल एलेवेन ने जीत हासिल की वही पलोन टीम 3 रन से हारी जिसमे की111 रनो का टारगेट रखा गया था था। युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने कमेटी को अपनी और से 5100 की राशि दी। इस मोके पर हंसराज विक्रम प्रशांत ज्ञानचंद ताराचंद नीमचन्द संतराम अनु आदि मौजूद रहे।
राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय धुंदन में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत पॉलीथीन हटाओ पर्यावरण बचाओ अभियान चलाया गया। यह अभियान प्रधानाचार्य सरताज सिंह राठौर की अध्यक्षता में चला। इस दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारियों जय प्रकाश मिश्रा और अनिता कौंडल के दिशानिर्देशों द्वारा स्वयंसेवियों ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय परिसर की साफ सफाई की।इस अभियान के अन्तर्गत विद्यालय परिसर से पॉलिथीन को हटाया गया।इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारियों व स्वयंसेवियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी ली।इस मौके पर विद्यालय के स्वयंसेवकों सहित समस्त अध्यापक मौजूद रहे।
राजकीय माध्यमिक पाठशाला पंजपीपलू के दो होनहार विद्यार्थियों को प्राथमिक उप शिक्षा निदेशक दीवान चंदेल द्वारा सम्मानित किया गया। बता दें की जिला स्तरीय समारोह सम्मान समारोह में विज्ञान प्रश्नोत्तरी में द्वितीय स्थान प्राप्त करने के लिए आठवीं कक्षा के छात्र जतिन गौतम व विश्वेश कौंडल को यह सम्मान दिया गया है। इस मोके पर बच्चों को सम्मान स्वरूप मेडल व प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। बच्चों की इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। इस अवसर पर पाठशाला की मुख्य अध्यापिका ने अपने संबोधन में बच्चों की इस उपलब्धि के लिए बधाई दी व अन्य बच्चों को भी इनसे प्रेरणा लेने का आव्हान किया। इस अवसर पर विशेष रूप से विज्ञान स्नातक के सुरेंद्र कुमार को इनके कार्य के लिए सराहना की यह कार्यक्रम राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अर्की में आयोजित किया गया।
Massive fire broke out in the fire cracker packing factory in Una's Gurpalah in the Tahliwal Industrial Area. In the incident, 6 workers were caught on fire and charred to death. Also, according to the SP reports, around 12 people were injured and immediately rushed to the Una regional hospital. SP Una Arjit Sen along with the fire department officials were present on the spot soon after the incident took place. He said the cause of the fire is being investigated.
डाडा सीबा के 25 वर्षीय आशीष भाटिया ने यूजीसी नेट परीक्षा पास करके क्षेत्र में अपने रिजल्ट का लोहा मनवाया है। आशीष भाटिया ने बताया कि हाल ही में उनका यह रिजल्ट आया जिसमें वह पास हुए हैं। आशीष भाटिया ने अपनी 10वीं एवं 12वीं की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डाडा सीबा से की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई ढलियारा कॉलेज से की है। इस परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की जिसकी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता धर्म चन्द और माता चम्पा देवी को दिया है। 25 वर्षीय आशीष की इस सफलता से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ उठी है।
बाबा बैद्यनाथ धाम की भूमि विश्वभर में प्रसिद्ध है लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस स्थान पर शिव-शक्ति का मिलन भी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवघर में शिव से पहले शक्ति का वास है। 52 शक्तिपीठों में इसे हाद्र पीठ के रूम में जाना जाता है। इस स्थान को चिता भूमि के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि जब राजा दक्ष ने अपने यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, तो सती बिना शिव की अनुमति लेकर मायके पहुंच गई और पिता द्वारा शिव का अपमान किए जाने के कारण उन्होंने मृत्यु का वरण किया। सती की मृत्यु सूचना पाकर भगवान शिव गुस्सा हो गए और सती के शव को कंधे पर लेकर भगवान शिव तांडव करने लगे। उस वक्त भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर को 52 टुकड़ों में बांट दिया था। उस समय देवी सती का हृदय देवघर में ही गिरा था। मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं ने देवी सती के हृदय का यहाँ अंतिम संस्कार किया था, तभी से इसे चिता भूमि के नाम से भी जाना जाता है। कहा तो ये भी जाता है कि जहां पर देवी सती का हृदय गिरा था, वहीं पर बाबा बैद्यनाथ की स्थापना की गई है। यहां के श्मशान को महाश्मशान का दर्जा दिया गया है। तंत्र मार्ग में भी देवघर को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। बताया जाता है कि आज तक कोई भी तांत्रिक यहां अपनी साधना पूरी नहीं कर सका है। शक्तिपीठ होने के कारण इसे भैरव स्थान भी माना गया है। ऐसे स्थापित हुआ शिवलिंग: पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने हिमालय पर कठोर तप किया। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए वह एक-एक करके अपने सिर को काटते जा रहा था। जैसे ही उसने 10वां सिर काटना चाहा, भगवान शिव प्रकट हो गये और उससे वर मांगने को कहा। कथा के अनुसार, रावण ने भगवान शिव से कामनालिंग लंका ले जाने का वर मांगा। भगवान शिव ने रावण को 'कामनालिंग' ले जाने का वर दे दिया लेकिन साथ में ये भी शर्त रख दी कि वह रास्ते में कहीं पर भी उस शिवलिंग को जमीन पर नहीं रखेगा। यदि वह शिवलिंग जमीन पर रख दिया तो वे वहीं विराजमान हो जाएंगे। दूसरी ओर भगवान विष्णु नहीं चाहते थे कि यह ज्योतिर्लिंग लंका पहुंचे। इसे देखते हुए उन्होंने गंगा को रावण के पेट में समाने को कहा। वहीं, रावण के पेट में गंगा के आने के बाद रावण को लघुशंका की इच्छा हो उठी। इसके बाद वह ज्योतिर्लिंग रावण ने एक बैजू नामक ग्वाला को पकड़ने के लिए दे दिया और वह लघुशंका करने चला गया। कहा जाता है कि रावण कइ घंटों तक लघुशंका करता रहा, जो आज भी वहां एक तालाब के रुप में मौजूद है। इधर, ग्वाले के रूप खड़े भगवान विष्णु ने शिवलिंग वहीं पर रखकर स्थापित कर दिया। रावण जब लौटा तो देखा कि शिवलिंग जमीन पर रखा हुआ है। उसके बाद रावण ने शिवलिंग को उठाने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह उसे उठा नहीं सका। उसके बाद रावण ने गुस्से में शिवलिंग को अंगूठे से धरती के अंदर दबा दिया और लंका चला गया। बताया जाता है कि तब से ही यहां पर शिवलिंग स्थापित है, जिसे 'कामनालिंग' के नाम से जाना जाता है। ऐसे पड़ा बैद्यनाथ नाम : मान्यता है कि सतयुग में ही इस स्थान का नामकरण कर बैद्यनाथ रख दिया गया था। शिवपुराण के शक्ति खंड में इस बात का उल्लेख है कि माता सती के शरीर के 52 खंडों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने सभी जगहों पर भैरव को स्थापित किया था। देवघर में माता का हृदय गिरा था। इसलिए इसे हृदय पीठ या शक्ति पीठ भी कहते हैं। माना जाता है कि माता के हृदय की रक्षा के लिए भगवान शिव ने यहां जिस भैरव को स्थापित किया था, उनका नाम बैद्यनाथ था। इसलिए जब रावण शिवलिंग को लेकर यहां पहुंचा, तो भगवान ब्रह्मा और बिष्णु ने भैरव के नाम पर उस शिवलिंग का नाम बैद्यनाथ रख दिया। जानकारों की माने तो यहां के नामकरण के पीछे एक और मान्यता है। त्रेतायुग में बैजू नाम का एक शिव भक्त था। उसकी भक्ति से भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि अपने नाम के आगे बैजू जोड़ किया। इसी से यहां का नाम बैजनाथ पड़ा। कालातंर में यही बैजनाथ, बैद्यनाथ में परिवर्तित हुआ। सावन में यहाँ लगता है कांवड़ियों का तांता : वैसे तो साल भर इस मंदिर में शिव भक्तों की भीड़ रहती है, पर सावन महीने में यह पूरा क्षेत्र शिव भक्तों से भर जाता है। तब कांवड़ियों द्वारा सुल्तानगंज की गंगा से दो पात्रों में जल लाया जाता हैं। एक पात्र का जल बैद्यनाथ धाम देवघर में चढ़ाया जाता है, जबकि दूसरे पात्र से बासुकीनाथ में भगवान नागेश को जलाभिषेक करते हैं। बासुकीनाथ मंदिर परिसर में अलग-अलग देवी-देवताओं के बाईस मंदिर हैं। सावन में यहां प्रतिदिन करीब एक लाख भक्त जलाभिषेक करते हैं। यहाँ पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने के भी दो अलग तरीके है। जो लोग किसी समय सीमा में बंधकर शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाते उन्हें 'साधारण बम' कहा जाता है। लेकिन जो लोग कावड़ की इस यात्रा को 24 घंटे में पूरा कर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं उन्हें 'डाक बम' कहा जाता है। कुछ भक्त दंड प्रणाम करते हुए या दंडवत करते हुए सुल्तानगंज से बाबा के दरबार में आते हैं। यह यात्रा काफी कष्टकारी मानी जाती है। 105 किमी पैदल चलकर भक्त करते हैं जलाभिषेक : बैद्यनाथ धाम देश के बारह पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल है। यहां साल भर बाबा पर जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता ह। सावन में भक्त सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की कष्टप्रद पैदल यात्रा कर बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और बाबा पर जलाभिषेक करते हैं। यह सिलसिला पूरे एक महीना चलता है। भगवान शिव के इस रूप को यहां मनोकामना शिव भी कहते है। माना जाता है कि शिवलिंग के केवल दर्शन मात्र से भक्तों की साडी इच्छाऐ यहाँ पूरी हो जाती है। मंदिर के शीर्ष पर लगा है पंचशूल : बाबा बैद्यनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके शीर्ष पर त्रिशूल नहीं पंचशूल है, जिसे सुरक्षा कवच माना गया है। धर्माचार्यो का इस पंचशूल को लेकर अलग-अलग मत है। मान्यता है कि पंचशूल के दर्शन मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि भगवान शंकर ने अपने प्रिय शिष्य शुक्राचार्य को पंचवक्त्रम निर्माण की विधि बताई थी, जिससे फिर लंकापति रावण ने इस विद्या को सिखा था और पंचशूल की अजेय शक्ति को प्राप्त किया। कहा जाता है कि रावण ने लंका के चारों कोनों पर पंचशूल का निर्माण करवाया था, जिसे तोड़ना भगवान श्रीराम के लिए भी आसान नहीं था। बाद में विभीषण द्वारा इस रहस्य की जानकारी भगवान राम को दी गई और तब जाकर अगस्त मुनि ने पंचशूल ध्वस्त करने का विधान बताया था। रावण ने उसी पंचशूल को इस मंदिर पर लगाया था, जिससे इस मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंचा सके। कई धर्माचार्यों का मानना है कि पंचशूल मानव शरीर में मौजूद पांच विकार-काम, क्रोध, लोभ, मोह व ईर्ष्या को नाश करने का प्रतीक है। कहा जाता है कि पंचशूल पंचतत्वों-क्षिति, जल, पावक, गगन तथा समीर से बने मानव शरीर का द्योतक है। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालु अगर बाबा के दर्शन किसी कारणवश न कर पाए, तो मात्र पंचशूल के दर्शन से ही उसे समस्त पुण्य फलों की प्राप्ति हो जाती है। मुख्य मंदिर में स्वर्ण कलश के ऊपर लगे पंचशूल सहित यहां बाबा मंदिर परिसर के सभी 22 मंदिरों पर लगे पंचशूलों को साल में एक बार शिवरात्रि के दिन पूरे विधि-विधान से नीचे उतारा जाता है और सभी को एक निश्चित स्थान पर रखकर विशेष पूजा कर फिर से वहीं स्थापित कर दिया जाता है।
धौलाधार की वादियों में लम्बे समय बाद लगेंगे चौके-छक्के सुनील समियाल. फर्स्ट वर्डिक्ट देश दुनिया में अपनी खूबसूरती के चलते धौलाधर पहाड़ियों की गोद में बसा और समुद्र तल से 1317 मीटर की उंचाई पर स्थित धर्मशाला का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम काफी प्रख्यात हो चुका है। आईपीएल के चलते भी धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम की खूबसूरती दुनिया के 190 देशों ने देखी है। धर्मशाला का क्रिकेट स्टेडियम दुनिया के सबसे खूबसूरत मैदानों में से एक है। धौलाधार की वादियों के ठीक नीचे बना हुआ है। मैदान को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में सैलानी भी आते हैं। धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य 2003 में शुरू हुआ था। इसकी भौगोलिक परिस्थिति के कारण इस स्टेडियम को बनाने में काफी दिक्कतें आई। 2004-2005 तक ये स्टेडियम बन कर पूरी तरह तैयार हो गया। उसके बाद यहां घरेलू क्रिकेट और रणजी ट्रॉफी जैसे मैच ही करवाए जाते थे। कई वर्षों के इंतज़ार के बाद 27 जनवरी, 2013 में पहली बार यह एक दिवसीय क्रिकेट मैच करवाया गया, जो कि भारत बनाम इंग्लैंड की टीम के बीच हुआ। इसके बाद 2 अक्टूबर 2015 को पहला टी 20 मैच भारत बनाम साउथ अफ्रीका हुआ था। इस स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया खेला गया था। 26 व 27 फरवरी को होंगे टी-20 मुकाबले : लम्बे समय बाद धौलाधार की पहाड़ियों के बीच धर्मशाला के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में एक बार फिर दर्शकों को चौके -छक्के देखने को मिलेंगे। बता दें की हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के खूबसूरत स्टेडियम धर्मशाला में लंबे समय बाद इंटरनेशनल मैच होने जा रहा है। धर्मशाला में 26 व 27 फरवरी को भारत और श्रीलंका के बीच दो टी-20 मुकाबले खेले जाएंगे। प्रस्तावित मैचों के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। तीन टी-20 मैचों की सीरीज का आगाज लखनऊ में 24 फरवरी से होगा। धर्मशाला में शाम सात बजे से होने वाले मैचों में दर्शकों को आने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, इस बारे में कोविड स्थितियों को देखते हुए बाद में विचार किया जा सकता है। भारत-श्रीलंका के बीच खेले जाने वाली तीन मैचों की टी-20 सीरीज के दो मैच अब एचपीसीए के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में खेले जाएंगे। बीसीसीआई द्वारा श्रीलंका के 24 फरवरी से शुरू हो रहे भारत दौरे के तीन टी-20 मैचों की सीरीज को अब रि-शेड्यूल किया गया है। इससे पूर्व 15 मार्च को एक मात्र मैच धर्मशाला में होना था लेकिन नए कार्यक्रम के मुताबिक अब धर्मशाला में 26 व 27 फरवरी को दो मैच खेले जाएंगे। उधर सीरीज के रि-शेड्यूल होने के बाद 26 व 27 फरवरी को होने वाले दो टी-20 मैचों की तैयारी को लेकर एचपीसीए युद्ध स्तर पर जुट गया है। स्थानीय व्यापारियों को होता है फायदा : धर्मशाला स्टेडियम में पहला अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच 27 जनवरी, 2013 को भारत-इंग्लैंड के बीच खेला गया था। उसके बाद 20 अक्तूबर, 2015 में भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच और 18 मार्च, 2016 को न्यूजीलैंड-ऑस्ट्रेलिया के बीच टी-20 वर्ल्ड कप का मैच खेला गया था। एचपीसीए स्टेडियम में बड़ा मैच होने से सैकड़ों कारोबारियों को फायदा होता है। इसमें टैक्सी चालक, होटल मालिक, रेस्तरां, होम स्टे, रेहड़ी संचालक आदि शामिल हैं। इसमें कोई संशय नहीं है की क्रिकेट ने धर्मशाला को पर्यटन के मानचित्र पर विशिष्ठ जगह दिलवाने में व्यापक भूमिका निभाई है। धर्मशाला में अब तक तीन मैच हुए हैं रद्द : धर्मशाला स्टेडियम में वर्ष 2016 से लेकर 2020 तक तीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच रद्द हो चुके हैं। वर्ष 2016 में धर्मशाला में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला टी-20 वर्ल्ड कप का मैच राजनीतिक कारणों से रद्द हुआ था। इसके बाद सितंबर 2019 और 12 मार्च, 2020 को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच बारिश के कारण रद्द हुआ। मार्च में अकसर धर्मशाला में ठंड होती है और बारिशों का दौर भी जारी रहता है। इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में 2016 का विश्व कप टी-20 के ग्रुप-ए के क्वालिफायर मैच को बारिश ने धो डाला था। यह मैच 2016 में नीदरलैंड और ओमान के बीच होने वाला था जोकि बारिश के कारण मैच रद्द कर दिया गया था। मैच से पहले की इंद्रूनाग भगवान पूजा : धर्मशाला में मैच के आयोजकों को किसी भी मैच से पहले बारिश के देवता की शरण में जाना पड़ता है और बारिश न हो इसके लिए बाकायदा मंदिर में पूजा अर्चना व हवन करवाना पड़ता है। ऐसा न हो, तो बारिश ऐसा कहर बरपाती है कि बारिश के आगे सब प्रबंध भी फीके पड़ जाते है। यह स्टेडियम धर्मशाला शहर में स्थित है और धर्मशाला में सर्वाधिक बारिश के लिए प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। शुरूआती दौर में यहां होने वाले मैचो में बारिश ने काफी कहर बरपाया। जब भी यहां मैच का आयोजन होना, उसी दौरान बारिश शुरू हो जाती है। बारिश से बचने के सभी प्रबंध भी बारिश के आगे फीके पड़ जाते थे। इसके बाद किसी ने आयोजकों यानी हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को धर्मशाला के ही खन्यारा गांव में भगवान इंद्रूनाग की शरण में जाने की सलाह दी।यह स्टेडियम हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में समुद्र तल से 1457 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इंद्रूनाग का यहां काफी पुराना मंदिर है और इंद्रूनाग को यहां बारिश का देवता कहा जाता है। यानी जब भी यहां सूखा पड़ा हो या फिर बारिश नहीं थम रही हो यहां के लोग इंद्रूनाग देवता की ही शरण में जाते है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां के लोगों में भगवान इंद्रूनाग के प्रति गहरी आस्था है और जब भी बारिश या सूखे से लोग तंग हुए है यहीं समस्या का समाधान हुआ है। एचपीसीए के प्रवक्ता संजय शर्मा का कहना है कि हर बार मैच से पहले यहां मंदिर में पूजा की जाती है। वर्ष 2005 में बने इस स्टेडियम में कई अंतरराष्ट्रीय मैच व आईपीएल का आयोजन हो चुका है। 2019 में हटाई गई थी पाकिस्तानी खिलाड़ियों की फोटो : कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों ने हमला हुआ था जिसमें 40 से ज्यादा जवानों के शहीद हुए थे। यह एक आत्मघाती हमला था। काफिले में सीआरपीएफ की करीब दर्जनभर गाड़ियों में 2500 से अधिक जवान सवार थे। आतंकियों ने सुरक्षाबलों की दो गाड़ियों को निशाना बनाया था। इसके चलते 2019 में एचपीसीए यानी हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में पुलवामा में जवानों पर हुए हमले पर बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम से पाकिस्तान के 13 खिलाड़ियों की फोटो हटा दी थी।
स्मार्ट सिटी के तहत 315 करोड़ रुपये की परियोजनाएं कार्यान्वित फर्स्ट वर्डिक्ट, धर्मशाला धर्मशाला शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। स्मार्ट सिटी के तहत करोड़ों रूपए की राशि विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च की जा रही है । बता दें की धर्मशाला शहर को और अधिक सुन्दर बनाने के लिए स्मार्ट सिटी के द्वारा 315 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है । स्मार्ट सिटी योजना के तहत कुछ दिनों पहले शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने धर्मशाला में अधिकारीयों से बैठक की। इस दौरान उन्होंने बताया की धर्मशाला में स्मार्ट सिटी के तहत 115 करोड़ के 19 प्रोजेक्ट का कार्य पूर्ण हो चुका है। जिसमें तीन करोड़ की लागत से रूट जोन ट्रीटमेंट प्लांट, दो करोड़ नौ लाख की लागत से रूफ टॉप सोलर प्लांट, तीन करोड़ 55 लाख की लागत से स्मार्ट क्लास रूम, 23 करोड़ की लागत स्ट्रीट का निर्माण, छह करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड डस्टबिन, एक करोड़ 37 लाख की लागत से ई-नगरपालिका सुविधा, 26 लाख की लागत से पार्क, 36 लाख की लागत से वेबसाइट तथा एक करोड़ 29 लाख की लागत से जीआईएस वेब पोर्टल का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी के तहत अन्य विभागों के साथ मिलकर 19 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटिड हाउसिंग प्रोजेक्ट, 57 लाख की लागत से आश्रयहीनों को आवासीय सुविधा, तीन करोड़ 43 लाख की लागत से डीसी परिसर पार्किंग, 29 करोड़ से पेयजल सुधार परियोजना, तीन करोड़ 70 लाख भागसूनाग क्षेत्र के विकास पर, चार करोड़ 44 लाख से पैन सिटी सड़कों की अपग्रेडेशन, एक करोड़ 55 लाख से एलईडी स्ट्रीट लाइट, चार करोड़ से सिटी कनवेंशन सेंटर, दो करोड़ की लागत से स्किल डिवल्पमेंट सेंटर तपोवन इत्यादि प्रोजेक्ट्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। 165 करोड़ की 27 परियोजनाओं का कार्य किया जा रहा है, जबकि 150 करोड़ की 19 नई परियोजनाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि धर्मशाला पर्यटन की दृष्टि से अहम स्थान रखता है। धर्मशाला राज्य के सबसे जीवंत शहर के रूप में उभरा है, जो हर साल न केवल देश बल्कि विदेशों से भी लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट इस शहर को विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा और स्थानीय लोगों को आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होगी।
मनाली-लेह मार्ग पर अब आधुनिक तकनीक से बर्फ को हटाया जाएगा। इसके लिए बीआरओ ने अब अमेरिकन स्नो कटर कोडिएक को सड़कों पर उतार दिया है। इस कटर की ख़ास बात यह है की यह बर्फ को दोगुनी स्पीड से बर्फ को साफ़ करेगा। बता दें की मनाली -लेह मार्ग पर अधिक बर्फ गिरने से मार्ग को खोलने में बीआरओ को काफी मुशकत करनी पड़ी है , लेकिन अब बीआरओ ने आधुनिक मशीनों से बर्फ को हटाने का कार्य शुरू कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकन स्नो कटर एक घंटे में पांच हजार टन बर्फ हटाने की क्षमता रखता है। जानकारी के अनुसार जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में करीब 300 किलोमीटर सड़क का दायरा बीआरओ के अधीन है। इसे समय-समय पर बहाल करना पड़ता है। इसमें सामरिक महत्व का 427 किलोमीटर लंबा मनाली-लेह मार्ग और ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग भी शामिल है। सीमा सड़क संगठन ने इस बार मार्च के बजाए फरवरी में लाहौल के अंतिम गांव दारचा से आगे बारालाचा और सरचू की तरफ बर्फ हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। इस बार अधिक बर्फ गिरने के चलते बीआरओ को बर्फ हटाने के लिए काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है की यातायात के लिए मनाली-लेह मार्ग मई तक बहाल हो सकता है। 15 दिसंबर 2021 से बंद है मार्ग -- मनाली-लेह मार्ग यह मार्ग 15 दिसंबर 2021 से बंद है। अब मौसम खुलते ही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने दारचा से लेह मार्ग को बहाल करने का काम शुरू कर दिया है। दारचा से बारालाचा की तरफ बर्फ हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। मनाली-लेह मार्ग के अलावा लाहौल घाटी के भीतर सड़कों के किनारे लगे बर्फ के ढेरों को भी हटाया जा रहा है।
40 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने की तैयारी कर रहा हमीरपुर डिपो फर्स्ट वर्डिक्ट , हमीरपुर हिमाचल में प्रदूषण न फैले इसके लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम ने योजना तैयार की है । इसके लिए एचआरटीसी के हमीरपुर डिपो ने सरकार से 40 रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें चलने की मांग की है। बताया जा रहा है की डिपो ने इन बसों को चलाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भी भेजा है। बता दें की प्रदेश के कुछ ज़िलों में अभी ये इलेक्ट्रिक बसें चल रही है। एचआरटीसी हमीरपुर डिपो ने जिले के 40 विभिन्न रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना तैयार की है। इस बारे में हमीरपुर एचआरटीसी प्रबंधन ने प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा है। यदि सरकार से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो शीघ्र ही जिले की सड़कों पर धुआं और ध्वनि रहित इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती हुई नजर आएंगी। इन इलेक्ट्रिक बसों की सबसे खास बात यह है की इन बसों को चलने से प्रदूषण नहीं फैलेगा व डीजल वाहनों की तुलना में एचआरटीसी को भी मुनाफा होगा। इसके लिए हमीरपुर में चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाने की योजना है । बता दें वर्तमान में हमीरपुर डिपो के पास कुल 149 बसें हैं। जो 186 विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। इसमें 49 बसें जेएनयूआरएम की भी शामिल हैं। इसके अलावा दो इलेक्ट्रिक मैक्सी कैब हैं, जो लोकल रूटों पर सेवाएं दे रही हैं।
सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने सड़क हादसे रोकने के लिए हिमाचल प्रदेश के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश के नाहन में रोलर क्रैश बैरियर लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। ख़ास बात यह है की देश के पहले रोलर क्रैश बैरियर के ट्रायल जिला सिरमौर के नाहन में हो रहे है। पहले चरण में विभाग ने 500 मीटर एरिया में रोलर क्रैश बैरियर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है. बता दें की 3 करोड़ 67 लाख की लागत से पहले चरण में एनएच 503 पर 300 मीटर, जबकि NH 907A पर 200 मीटर एरिया में सड़क किनारे रोलर क्रैश बैरियर का कार्य जोरों पर है। देश में सड़क हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को स्वकृति प्रदान की है। माना जा रहा है की इन रोलर क्रैश बैरियर के लगने से सड़क हादसों में कमी आएगी। मिली जानकारी के अनुसार पहली मर्तबा देश के भीतर यह ट्रायल किया जा रहा है इसकी खासियत यह है कि गाड़ी के रोलर क्रैश बैरियर में टकराने से गाड़ी को नुकसान नही होगा, गाड़ी सड़क से बाहर जाने की बजाए वापिस सड़क की तरफ आएंगी और अपनी स्पीड पकड़ेंगी जिससे दुर्घटना होने की संभावना है बिल्कुल कम हो जाएगी। जहां यह रोलर क्रैश बैरियर लगाए गए हैं यहां पर बकायदा सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएंगे जिसके बाद देखा जाएगा कि दुर्घटना को रोकने में यह क्रैश बैरियर कितने कारगर है। क्या कहते है इंजीनियर-- कंपनी के साईट इंजीनियर राजन्त कुमार ने बताया कि उनके द्वारा देश में पहली बार ट्रायल के तौर पर रोलर क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं जो सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में कारगर साबित है। उन्होंने कहा कि इन क्रैश बैरियर में जब स्पीड से आ रही गाड़ी टकराती है तो केनेटिक एनर्जी को रोटेशन एनर्जी में बदल देता है जिससे गाड़ी की गति कम हो जाती है और गाड़ी वापिस अपने पाथ पर आ जाती हिअ जिससे दुर्घटना की सम्भावना नही रहती।
देश विदेश से पर्यटन नगरी मनाली घूमने आने वाले पर्यटकों को अब ग्रीन टैक्स बैरियर पर कई घंटों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब मनाली पर्यटन विकास परिषद के साथ मिलकर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने फास्टैग से ग्रीन टैक्स भुगताने की सुविधा शुरू कर दी है। इससे इस बैरियर पर लंबे जाम से राहत मिलेगी और वाहन चालकों और पर्यटकों का समय भी बचेगा। खास बात यह है की फास्टैग का उपयोग करके ग्रीन टैक्स का भुगतान सुविधा शुरू करने वाला मनाली देश का पहला शहर है। देश में अब तक फास्टैग बैलेंस का इस्तेमाल टोल, ईंधन और पार्किंग शुल्क के भुगतान के लिए किया जाता रहा है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को पर्यटन विकास परिषद मनाली ने अधिग्रहणकर्ता बैंक के रूप में चुना है।बता दें कि हिमाचल प्रदेश में हर महीने 50 लाख पर्यटक देश विदेश से घूमने के लिए आते है, यह सुविधा मिलने के बाद अब पर्यटकों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। जाम से मिलेगी राहत -- ग्रीन टैक्स बैरियर पर फास्टैग से ग्रीन टैक्स का भुगतान होने से अब लोगों को जाम से निजात मिलेगी। बता दें की अभी तक मनाली आने वाले अन्य राज्यों में रजिसट्रर्ड वाहनों से ग्रीन टैक्स लिया जाता है। पर्ची सिस्टम होने से पहले इसमें काफी समय लगता था। इससे इस ग्रीन टैक्स बैरियर पर जाम लग जाता था। दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड मोटरसाइकिल पर 100 रुपये, कार पर 200, स्कॉर्पियो पर 300 और बसों पर 500 रुपये ग्रीन टैक्स लगता है। 60 लाख फास्टैग जारी -- आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 400 से अधिक टोल प्लाजा को सेवा देने वाला सबसे बड़ा अधिग्रहणकर्ता है और उसने करीब 60 लाख फास्टैग जारी किए हैं। इनकी मदद से प्रतिदिन औसतन लगभग 20 लाख का लेन-देन किया जाता है। फास्टैग प्रोग्राम को संयुक्त रूप से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा सभी राष्ट्रीय राजमार्ग प्लाजा पर टोल किराया स्वीकार करने के माध्यम के रूप में लॉन्च किया गया था।
प्रदेश में विलुप्त होती जड़ी बूटियों की पहचान करना अब आसान होगा , इसके लिए मंडी के जंजैहली घाटी के भूलाह में एक करोड़ की लागत से राज्य का पहला जैव विविधता पार्क तैयार किया गया है। ख़ास बात यह है की वादी-ए-भूलाह में प्रदेश के साथ-साथ देश-विदेश के शोधकर्ताओं, पर्यटकों और हिमालय की विलुप्त होती जड़ी-बूटियों के संरक्षण में अपना योगदान देंगे । प्रदेश का पहला बायोडायवर्सिटी पार्क (जैव विविधता उद्यान) हिमालय की विलुप्त होती जड़ी-बूटियों के संरक्षण के साथ-साथ शोधकर्ताओं व पर्यटकों के लिए भी वरदान साबित होगा। बता दें की राज्य के इस पहले जैव विविधता पार्क को हिमाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा नेशनल मिशन आन हिमालयन स्टडीज प्रोजेक्ट के अन्तर्गत बनाया गया है। यह राज्य का पहला पार्क है जिसमें विलुप्त होती जड़ी-बूटियों को संरक्षित करने पर बल दिया गया है। पार्क को पयर्टन गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ शोधकर्ताओं के लिए हिमालय में पाई जाने वाली विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों (हर्बल प्लांट्स) पर शोध करने के नए मौके देने के लिए भी तैयार किया गया है जो विलुप्त होने के कगार पर है। पार्क में प्रदर्शन के लिए पहाड़ों में विलुप्त हो रही जड़ी-बूटियों की हर्बल नर्सरी तैयार की गई है। इस नर्सरी में नाग छतरी, धूप, कडू, सर्पगंधा, चिरायता, टैक्स, बर्बरी, चैरा, पठानबेल, पत्थर चटा, भूतकेसी, न्यार, मुश्कवाला, वण, अजवायण, कूठ व वर्रे, संसरपाली, डोरी घास, रतन जोत, अतीश पतीश, वन ककड़ी, शिंगली मिगली, जगली लहसुन, डुंगतली, इत्यादि जड़ी बूटियां प्रदर्शित की गई है। यहां देश-विदेश का कोई भी शोधकर्ता इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर अपना शोध कार्य कर सकता है। इसके अतिरिक्त हर उस जड़ी बूटी पर भी खोज कार्य किया जा सकेगी, जिनकी अभी तक कोई पहचान नहीं हो पाई है। इस हर्बल नर्सरी में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 1200 पौधे शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र में स्थापित गए राज्य के पहले इस अनूठे पार्क को 5 हेक्टेयर यानि 60 बीघा से अधिक भूमि पर तैयार किया गया है। यहां शोधकर्ताओं के लिए विभिन्न मूलभूत सुविधाएं भी जुटाई गई हैं। भूलाह की सुंदर वादियों में स्थापित इस पार्क को चारों ओर से बाड़बंदी कर सुरक्षित बनाया गया है। एनएमएचएस प्रोजेक्ट के विभिन्न कार्य लगभग 15 हेक्टेयर भूमि पर किए गए है। शोधकर्ताओं व पर्यटकों के लिए एम्फी थियेटर--- यहां आने वाले शोधकर्ताओं व पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्क में एम्फी थियेटर भी बनाया गया है, जहां पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाली जड़ी बूटियों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकेगी। पार्क में देश-विदेश से आने वाले शोधकर्ताओं के लिए रहने खाने की व्यवस्था के लिए दो लाॅग हट भी निर्मित किए गए है। इसके अलावा दो लाॅग्स हट, वाॅटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, इंटरनल टैंक, 5 किलो वाट बिजली तैयार करने वाला प्रोजेक्ट, एम्फी थिएटर, पक्षियों के घोंसले, हर्बल नर्सरी, फूट ब्रिज व बिक्री केंद्र इत्यादि तैयार किया गया है। पर्यटकों के लिए पार्क में दो ट्री-हट भी तैयार किए गए हैं, जहां से वे पार्क सहित अन्य रमणीक स्थलों को निहार सकते हैं। इसके अलावा लगभग 2 किमी की दूरी तक नेचर ट्रेल्स बनाई गई हंै। 25 फीट ऊंची व 160 मीटर लंबी ट्री-वाॅक तैयार की गई है। इसके अलावा सात फुट ब्रिज बनाए गए हैं। पार्क के साथ लगते टैक्सस के जंगल में शोधकर्ताओं के लिए इंटरनल ट्रैक बनाया गया है, जिसमें वे आसानी से घूम कर अपना रिसर्च कार्य कर सकते हैं।
भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन पर्व महाशिवरात्रि विश्व भर में मनाया जाता है, मगर छोटी काशी मंडी शहर की शिवरात्रि का अंदाज ही अनूठा है। यहां सात दिवसीय महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेले का तमगा प्राप्त है। ये सात दिन श्रद्धा और भक्ति से सराबोर होते है और लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में भाग लेने पहुँचते है। शिवरात्रि के साथ ही हिमाचल प्रदेश में साल भर चलने वाले मेलों की शुरुआत होती है। मंडी नगरी में पावन शिवरात्रि पर्व से जुड़ी एक कथा भी है। इसके अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती को विदा कर ले जाते समय भगवान शिव को संसार का ध्यान आया तो वे बारातियों के साथ ही नई नवेली दुलहन को वहीं छोड़ कर तपस्या में लीन हो गए। शिव के न लौटने पर माता पार्वती विलाप करने लगी, जिसे सुनकर एक पुरोहित आगे आया। फिर भगवान शिव का आह्वान करने के लिए मंडप की स्थापना कराई गई। मंडप में प्रकट होकर भगवान शिव ने पूछा कि उन्हें क्यों बुलाया गया है, तो पुरोहित ने कहा कि आपकी याद में रोते-रोते पार्वती सो गई हैं। तभी से इस स्थान का नाम मंडप से मांडव्य और फिर मंडी पड़ा। माना जाता है कि पंद्रहवीं शताब्दी में राजा अजबर सेन ने बटोहली से अपनी राजधानी ब्यास नदी के उस पार स्थापित की थी। संभवत: इसी दौरान महाशिवरात्रि के पर्व का शुभारंभ हुआ। प्रारंभ में इसे दो दिन के लोकोत्सव के रूप में मनाया जाता था, जिसमें मंडी जनपद के लोक देवताओं की भागीदारी रहती थी। फिर सोलहवीं सदी के दौरान राजा सूरज सेन ने मंडी शिवरात्रि में जनपद के देवी-देवताओं को आमंत्रित करने और एक सप्ताह तक मेहमान बनाकर रखने की परंपरा भी डाली। तब से ये परंपरा चली आ रही है। सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से जुड़ा है मंडी का इतिहास : मंडी रियासत का इतिहास सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से प्रारंभ होता है, जब राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहूसेन ने अपने भाई से रूष्ट होकर कुछ विश्वास पात्र सैनिकों को साथ लेकर लोहारा को छोड़कर बल्ह के हाट में अपनी राजधानी बसाई थी। इसी के साथ मंडी रियासत की स्थापना हुई थी। बाहूसेन ने ही हाटेश्वरी माता के मंदिर की स्थापना की थी। इसके बाद वे मंगलौर में जा बसे थे। 1280 ई.में बाणसेन ने मंडी शहर के भियूली में मंडी रियासत की राजधानी स्थपित की, जो बटोहली होते हुए 1527 ई. में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ के मंदिर के साथ ही आधुनिक मंडी शहर की स्थापना की थी। राज देवता माधोराय, बड़ादेव कमरुनाग और बाबा भूतनाथ से है नाता : मंडी शिवरात्रि में शैव मत का प्रतिनिधित्व जहां शहर के अधिष्ठदाता बाबा भूतनाथ करते हैं, तो वैष्णव का प्रतिनिधित्व राज देवता माधोराय और लोक देवताओं की अगुआई बड़ादेव कमरूनाग और देव पराशर करते हैं। इस लोकोत्सव में देवी देवताओं के साथ जनपद के लोगों की भागीदारी भी रहती थी, जो मंडी नगर में माधोराय के अलावा अपने राजा के दर्शन भी करते थे। मेले के दौरान जनपद के देवी-देवता राजदेवता माधोराय के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। यह परंपरा भी राजा सूरज सेन के समय से ही है। शिवरात्रि का शुभारंभ बाबा भूतनाथ और माधोराय के मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ होता है। इसमें सबसे पहले बड़ा देव कमरूनाग मंडी नगर में पहुंचते हैं। इसके पश्चात ही शिवरात्रि के कार्य शुरू होते हैं। राजतंत्र के जमाने से ही राजदेवता माधोराय की जलेब निकलती है। देखने को मिलता है देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम : शिवरात्रि मेले के दौरान जनपद के सौ से अधिक देवी-देवता एक सप्ताह तक मंडी नगर में मेहमान बनकर रहते हैं। इस वर्ष 2 से 8 मार्च तक मनाए जाने वाले इस अन्तर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए भी 210 देवी-देवताओं को न्योता प्रशासन के माध्यम से भेजा जा रहा है। इसमें 190 के शिरकत करने की उम्मीद है। मंडी शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। इस देव समागम में हिमाचल में पाई जाने वाली देव रथ शैलियों का अवलोकन करने को मिलता है। देव समागम में बैठने वाले देवताओं की वरिष्ठता का विशेष ध्यान रखा जाता है। लोक विश्वास के अनुसार जिस देवता की पालकी पहले बनी है वही वरिष्ठ होता है। राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में होता था शामिल : राजशाही के जमाने में राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में शामिल होता था। शिवरात्रि की जलेब के कुछ चित्र प्राचीन हवेलियों में देखने को मिलते हैं। सेरी चानणी और घंटाघर के आसपास लगे मेले के दृश्य चित्रित हैं। वहीं पर जलेब देखने उमड़ी भीड़ और रनिवास के झरोखों से रानियों और राजपरिवार से जुड़ी महिलाओं के उत्सुकता से इस भव्य जलेब को देखने के दृश्य भी चित्रित हैं। वहीं इस बार 2 से 8 मार्च तक मनाए जाने वाले इस मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। वे 2 मार्च को प्रथम जलेब की अगवानी करेंगे। मध्य जलेब 5 मार्च को निकाली जाएगी। तीसरी और अंतिम जलेब में 8 मार्च को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शामिल होंगे। 50 साल के सफर को दिखाया जायेगा : दो मार्च से आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी का स्वरूप इस वर्ष कुछ अलग देखने को मिलेगा। शिवरात्रि मेले में आने वाले लाखों लोग शिवरात्रि मेले के सफर से भी रूबरू होंगे। फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से जहां शिवरात्रि मेले के 50 साल के सफर को प्राचीन चित्रों से दिखाया जाएगा। इस वर्ष जत्थों में निकलेगी जलेब : इस वर्ष शिवरात्रि महोत्सव में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों की टीमें भाग लेंगी। वहीं, सांस्कृतिक संध्याएं बहुत ही सीमित होंगी। इनमें केवल स्थानीय कलाकार बुलाए जाएंगे। बॉलीवुड या पंजाब से इस बार कलाकारों को नहीं बुलाया जाएगा। मेले के दौरान लगने वाली देश-विदेश की प्रदर्शनियां और स्टॉल भी नहीं लगेंगे। यहां पर केवल हिमाचली प्रदर्शनियां और स्टॉल ही लगाए जाएंगे। इस वर्ष शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं की पहचान पगड़ियों के रंगों से हो सकेगी। हर देवी-देवता के 10 कारदारों को विशेष रंग की पगड़ियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही पड्डल में देवी-देवताओं के बैठने के लिए विशेष प्रबंध किया जाएगा। कोविड नियमों की पालना के लिए इस वर्ष जलेब जत्थों (टुकड़ियों) में अलग-अलग चलेंगी। तारा रात्रि से होता है शिवरात्रि का आगाज : पुरातन काल से चली आ रही परंपराओं के अनुसार तारारात्रि से शिवरात्रि का आगाज माना जाता है। तारा रात्रि की रात को मंडी शहर के प्राचीन बाबा भूतनाथ मंदिर के शिवलिंग पर माखन का लेप चढ़ाने की परंपरा रही है। शिवरात्रि वाले दिन माखन को उतारकर इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इस वर्ष के शिवरात्रि महोत्सव में तारा रात्रि 29 जनवरी को मनाई गई। बाबा भूतनाथ को 40 किलो मक्खन का लेप लगाया गया। पहले दिन माखन के लेप पर गसोता महादेव की आकृति बनाई गई। यह प्रसिद्ध मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में स्थित है।
आगामी बजट सत्र से हिमाचल प्रदेश में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को काफी उम्मीदें है। ये कर्मचारी एक लम्बे समय से स्थाई नीति की मांग कर रहे है, मगर अब तक आश्वासनों के सिवा कुछ खास हाथ नहीं आया। अब बजट सत्र इनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया है। ये बजट इस सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट है और इसीलिए कर्मचारियों को इससे खूब उम्मीदें है। बीते 18 सालों से आउटसोर्स कर्मचारी प्रदेश के विभिन्न विभागों में ड्यूटी दे रहे हैं लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली कोई भी सुविधाएं नहीं मिलती। हालांकि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कैबिनेट की सब कमेटी का गठन जरूर किया गया परन्तु इस कमेटी की बैठक के बाद भी कर्मचारियों को बजट तक इंतजार करने का आश्वासन दिया गया। दरससल लम्बे समय से इन कर्मचारियों का ब्यौरा सरकार एकत्र करने का प्रयास कर रही है और इसी को विलम्ब का बड़ा कारण भी बताया जा रहा है। अब उम्मीद तो है परन्तु कर्मचारी पूरी तरह आश्वस्त हो ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसीलिए सरकार के आश्वासन के बाद भी आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने राज्य स्तरीय बैठक कर प्रदेश के 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग फिर दोहराई है। शिमला में आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि जुटे और समस्याओं पर मंथन किया। हिमाचल आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ की मांग है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बजट सत्र में किसी ठोस नीति का प्रावधान किया जाए। इन कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस दफे भी इन कर्मचारियों को लटकाया गया तो ये सब मिलकर सरकार के खिलाफ संघर्ष का रास्ता अपनाएंगे। महासंघ का कहना है कि प्रदेश में विभिन्न कंपनियों व ठेकेदारों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई फैसला नहीं लिया है । हर बार आश्वासन ही दिए गए। आउटसोर्स कर्मचारी सोसाइटी और कंपनियों के माध्यम से लगे हैं। ये कर्मी पिछले 18 साल से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इन्हें स्थायी करने के बारे में सोचा नहीं जा रहा है। महासंघ का कहना है कि सोसाइटी या कंपनी विभाग की मांग के अनुसार पैनल बनाकर विभाग के पास नाम भेजती है। इसके बाद विभागीय कमेटी इंटरव्यू लेकर आउटसोर्स पर रखती है। पर इसके बाद भी इनको नियमित नहीं किया जा रहा। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा गया है लेकिन सरकार द्वारा इनके नियमितीकरण के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई है और न ही इनके शोषण को कम करने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। इनका कहना हैं कि कोरोना काल जैसी विकट परिस्थिति में भी सरकार इनकी सेवाएं लेती रही, मगर जब बात इनकी मांगो को पूरी करने की आती हैं तो ये ही कर्मचारी सरकार की आंखों में चुभने लगते हैं। मुश्किल में कोई साथ नहीं देता : शैलेन्द्र हिमाचल आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा के अनुसार कुछ दिन पहले ही एक मामला सामने आया था जिसमें बिजली विभाग में नियुक्त एक आउटसोर्स कर्मचारी की करंट लगने से हालत गंभीर हो गई। उसे आईजीएमसी तक रेफर कर दिया गया मगर न तो ठेकेदार ने उसकी कोई सहायता की और न ही सरकार ने। इसी तरह आउटसोर्स पर तैनात नर्सेज, अध्यापक और जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों के शोषण की खबर भी आये दिन सामने आती रहती है। कमीशन काटकर वेतन देते हैं ठेकदार : आउटसोर्स कर्मचारी वे कर्मचारी हैं जिनको सरकारी विभागों में अनुबंध आधार पर रखा जाता है। यानी कि ये सरकारी विभाग में तो हैं पर सरकारी नौकरी में नहीं हैं। इनकी नियुक्तियां या तो ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है या किसी निजी कंपनी के माध्यम से। ये कर्मचारी काम तो सरकार का करते है मगर इन्हें वेतन ठेकेदार या कंपनी द्वारा मिलता है। न तो इन्हें सरकारी कर्मचारी होने का कोई लाभ प्राप्त होता है न ही एक स्थिर नौकरी। इन्हें जब चाहे नौकरी से निकाला जा सकता है। सरकार द्वारा वेतन तो दिया जाता है मगर ठेकेदार की कमिशन के बाद ही इन तक तक पहुंच पाता है। .......................................................................... मांग : वेतनमान में विसंगतियां दूर हो - हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने की सरकार से मांग फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ (एचपीएसएलए) ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि नए वेतनमान में विसंगतियों को दूर किया जाएं। संघ का कहना है कि हिमाचल सरकार का 1972 से कर्मचारियों से करार है कि पंजाब पे कमीशन को हिमाचल के कर्मचारियों पर यथावत रूप में लागू किया जाएगा, उसे सरकार पूरा करे। साथ ही संघ ने चेताया है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी जाती तो जल्द ही एसोसिएशन जनरल हाउस बुलाकर सबकी सहमति से अगली रणनीति तैयार करेगी और सरकार को इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ का कहना है कि पंजाब में 2016 के बाद जितने भी नियमित कर्मचारी हैं उन सबको नियुक्ति की तिथि से गुणांक 2.59 और 2.25 दिए जा रहे हैं, जिनसे क्रमश: उनकी इनिशियल स्टार्ट 43000 और 47000 रुपए बनती है। इनकी मांग है कि जिस प्रकार पंजाब में बढ़े हुए ग्रेड पे 5400 के साथ 2016 में नियुक्त हुए नए प्रवक्ताओं को 47000 से इनिशियल स्टार्ट दिया है, इसी तरह हिमाचल में भी दिया जाए। संघ के प्रदेश महासचिव संजीव ठाकुर ने कहा कि पंजाब पे कमीशन को हिमाचल के कर्मचारियों पर यथावत रूप में लागू किया जाएं। ........................................................................................ पदोन्नति में समय अवधि कम करने पर जताया आभार फर्स्ट वर्डिक्ट . शिमला हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुनी चंद ठाकुर एवं प्रदेश महामंत्री नेकराम ठाकुर ने बिजली बोर्ड में कार्यरत जूनियर टी मेट एवं जूनियर हेल्पर की पदोन्नति के लिए समय अवधि 4 वर्ष से 3 वर्ष करने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है। उन्हें 14 फरवरी 2022 की बिजली बोर्ड की बीओडी की बैठक में स्वीकृति दी गई है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने अपने प्रेस संबोधन में की है। तकनीकी कर्मचारी संघ ने भारतीय मजदूर संघ का भी धन्यवाद प्रकट किया है क्योंकि 8 फरवरी 2022 को भारतीय मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में ये मुद्दा उजागर किया था। इस बैठक में तकनीकी कर्मचारी संघ ने भी जूनियर टी मेट और जूनियर हेल्पर के विषय को बड़ी गंभीरता से रखा था जिस पर मुख्यमंत्री ने बिजली बोर्ड को उनकी घोषणा के अनुरूप आदेश करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने हिमाचल सरकार वह बिजली बोर्ड प्रबंधन से यह भी मांग की है कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को भी संशोधित वेतनमान तुरंत प्रभाव से दिए जाएं क्योंकि हिमाचल सरकार ने अन्य विभागों के कर्मचारियों को इस माह के वेतन को संशोधित वेतनमान के अनुसार वेतन देने के आदेश किए हैं जिस पर बिजली बोर्ड के कर्मचारी भी स्वभाविक तौर पर नए वेतन की आस लगाए हुए हैं। ............................................................................ पुरानी पेंशन : इंतजार की इन्तेहां हो गई, फिर विधानसभा घेराव की तैयारी फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला इंतजार की इन्तेहां हो गई है और अब कर्मचारी बात मानने के मूड में बिलकुल भी नजर नहीं आ रहे। पुरानी पेंशन बहाली के लिए कर्मचारियों की अनगिनत याचनाएं धरी की धरी है पर सुनवाई होती नहीं दिख रही। सुनवाई होती भी है तो कच्चे पक्के आश्वासन कर्मचारियों को थमा दिए जाते है, पर मांग को पूरी तरह मानने से सरकार बचती हुई दिखाई दे रही है। प्रदेश के हर विधायक, हर मंत्री के दर पर दस्तक देने के बावजूद कुछ ठोस होता नहीं दिख रहा। इसी बीच विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा हैं और संभवतः एक बार फिर कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिले। बस धर्मशाला के तपोवन की जगह कर्मचारी शिमला के चौड़ा मैदान में डेरा डालेंगे और पुरानी पेंशन के लिए विधानसभा का घेराव होगा। पुरानी पेंशन बहाली के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ अब प्रदेश सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए महासंघ ने प्रदेश के बजट सत्र के दौरान 3 मार्च को सरकार का घेराव करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मंडी में आयोजित न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ की राज्य स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में महासंघ के साथ जुड़े प्रदेश भर के पदाधिकारी व कर्मचारी पहुंचे और तय किया गया कि अब याचना नहीं रण होगा। रणनीति विधानसभा के घेराव की बनाई गई है। प्रदेश के हज़ारों कर्मचारियों से शिमला आने की दरख्वास्त की जा रही और महासंघ की माने तो अधिकतर की सहमति मिलती भी दिखाई देने लगी है। यानि एक बार फिर विधानसभा के शीतसत्र के दौरान दिखा दृश्य शिमला में बजट सत्र के दौरान देखने को मिल सकता हैं। अब तक गठित नहीं हुई कमेटी : 10 दिसंबर को धर्मशाला के दाड़ी मैदान में भी कर्मचारियों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन सरकार के सामने किया था। एक नहीं अनेक संगठन पेंशन की मांग के लिए एकत्र हुए थे और अंत में सरकार को झुकना पड़ा और पुरानी पेंशन बहाली के लिए एक कमेटी गठन करने का आश्वासन दिया गया। अलबत्ता कमेटी अब तक गठित नहीं हो पाई है जिससे कर्मचारियों में नाराज़गी है। महासंघ का कहना है कि सरकार अब कमेटी के गठन को छोड़ पुरानी पेंशन बहाल करें। 2009 की अधिसूचना लागू ,पर कर्मचारी मांगे पुरानी पेंशन : हाल ही में सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक के दौरान 2009 की अधिसूचना लागू करने को मंजूरी दी गई है। मगर उससे भी कर्मचारी पिघलते हुए नजर नहीं आ रहे। कैबिनेट के अप्रूवल के बाद एनपीएस के तहत आने वाले सभी कर्मचारियों के लिए मृत्यु व अपंगता पर फैमिली पेंशन का प्रावधान किया गया है, मगर कर्मचारी अपनी एक मात्र मांग पुरानी पेंशन बहाली पर अटके हुए है। सरकार को कोई वित्तीय घाटा नहीं होगा : प्रदीप न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर का कहना हैं कि बजट सत्र के दौरान शिमला में प्रदेश भर से एक लाख से अधिक कर्मचारी एकत्रित होंगे। पुरानी पेंशन के लिए मंडी से शिमला तक पैदल यात्रा निकाली जाएगी और फिर विधानसभा पहुंचकर बजट सत्र के दौरान सरकार का घेराव किया जाएगा। ठाकुर का कहना है कि धर्मशाला में रैली के बाद महासंघ की प्रदेश के सरकार के साथ बैठक भी हुई थी। बैठक में प्रदेश सरकार को सुझाव दिया गया था कि यदि सरकार पुरानी पेंशन बहाल करती है, तो सरकार को 2009 की अधिसूचना लागू की वृद्धि होगी। परन्तु 2 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने अभी तक कमेटी तक का गठन नहीं किया है नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन का 10 प्रतिशत पैसा जबरदस्ती कंपनी को दिया जा रहा है और सरकार अपना 14 प्रतिशत पैसा भी कंपनी को दे रही है जिससे सरकार और कर्मचारी दोनों को नुकसान हो रहा है। नई पेंशन स्कीम से सिर्फ और सिर्फ कंपनी को ही फायदा हो रहा है जो सही नहीं है l पुरानी पेंशन पर सियासत भी भरपूर : पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सियासत भी तेज है। विपक्ष कर्मचारियों को आश्वासन देकर सत्ता वापसी की स्थिति में पेंशन बहाल करने के सपने दिखा रहा है और भाजपा कर्मचारियों को याद दिला रही है कि प्रदेश में एनपीएस लाने वाली कांग्रेस ही थी जो आज इसे कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बता रही है। पेंशन के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है कि इस वक्त कोई भी प्रदेश पुरानी पेंशन देने की स्थिति में नहीं है। जहां कांग्रेस की सरकार है वहां भी पुरानी पेंशन कर्मचारियों को नहीं मिल रही। ऐसे में पहले से वित्तीय घाटे में चल रहे हिमाचल प्रदेश के लिए भी पुरानी पेंशन की वापसी करवाना आसान नहीं होगा।
2020 में हुए कैबिनेट फेरबदल के बाद जयराम कैबिनेट में बतौर वन, युवा एवं खेल मंत्री एंट्री हुई थी फायर ब्रांड नेता राकेश पठानिया की। उसी समय से कांगड़ा की सियासत में पठानिया ही भाजपा का प्राइम फेस बने हुए है। पठानिया नूरपुर से विधायक हैं और हर मसले पर बेबाक अंदाज में अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। विधानसभा में भी सत्ता पक्ष के बचाव में पठानिया की बुलंद आवाज खूब गूंजती रही हैं। फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया ने राकेश पठानिया से विशेष बातचीत की। वन विभाग में अनियमितताओं का मुद्दा हो या नई खेल नीति का विजन, नए ज़िलों के गठन का मुद्दा हो या कर्मचारियों की लंबित मांगो का प्रश्न, पठानिया ने खुलकर हर सवाल का अपने अंदाज में जवाब दिया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश .... पंकज सिंगटा। फर्स्ट वर्डिक्ट सवाल : सांसद खेल महाकुम्भ प्रदेश में फिर से शुरू हो गया है। जो युवा इसमें हिस्सा ले रहे है उनके लिए आगे क्या स्कोप रहेंगे ? उत्तर : लगभग पौने दो साल से कोरोना के चलते कई प्रतिबन्ध रहे हैं। स्कूल, स्टेडियम, जिम सब कुछ बंद था। पर अब लगता है कि तीसरी लहर जा चुकी है और हमारी इम्युनिटी भी ठीक है और बच्चों को भी टीके लग चुके है। कुछ ही समय में हम सांसद खेल महाकुम्भ को पूरे प्रदेश में लांच करेंगे। हमने 22 साल के बाद अपनी स्पोर्ट्स पॉलिसी भी लांच की है जो एक बैलेंस्ड स्पोर्ट्स पॉलिसी है। यह खेल महाकुम्भ टैलेंट सर्च का भी माध्यम हैं। मैं बिलासपुर, ऊना और अन्य क्षेत्रों के सांसद खेल महाकुम्भ के कार्यक्रमों में गया, जहां मैंने अचंभित करने वाली प्रतिभाएं देखी। पहले यह सांसद खेल महाकुम्भ था लेकिन अब इसके साथ प्रदेश सरकार ने इसे अपना लिया है। इससे फर्क ये पड़ा है कि अब हमने इवेंट्स बढ़ा दिए और टैलेंट स्पॉट शुरू कर दिया है। हमे बास्केटबॉल के टूर्नामेंट में 6 सवा 6 फुट की बेटियां मिली, जो शायद गांव से आती थी, अपना एक मैच खेलती थी और गांव चली जाती थी। अपना 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन कर के शादी कर लेती थी। हिमाचल में इतना ज्यादा रिच टैलेंट है कि हम इस खेल महाकुम्भ के माध्यम से उन्हें आगे लेकर जा सकते है। हम स्पोर्ट्स पॉलिसी में लेकर आये है कि हर जिले में हम अकादमियां तैयार करेंगे। अब केंद्र में भी हमारी सरकार है और केंद्र में हमारा हिमाचल का ही एक नौजवान केंद्रीय मंत्री भी है। अनुराग ठाकुर से बहुत सी उम्मीदें है, निश्चित तौर पर हमें उनकी सहायता मिलेगी। सवाल : आप युवा सेवाएं मंत्री भी है, हाल ही में मंडी के अंदर नकली शराब कांड सामने आया था। प्रदेश में नशे का कारोबार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। किस तरह के कार्य उसे रोकने के लिए किये जा रहे है ? उत्तर : मैं कहूंगा नशा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। रातों रात अमीर बनने के लिए जो लोग ये धंधा करते है वो समाज के सबसे बड़े दुश्मन है और इनका पोलिटिकल बैकग्राउंड कहाँ है वो आप सब को पता चल गया है। मैं समझता हूँ कि यदि हमारा युवा ही नशे में चला गया तो हमारा प्रदेश और देश दोनों का भविष्य ही खतरे में है। सरकार इसे लेकर संजीदा हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। सवाल : आप वन मंत्री है, वन विभाग के अंदर किस तरह के नए रिफॉर्म्स लाये गए है और किस तरह वन विभाग कार्य कर रहा है कि आर्थिकी को और ज्यादा मजबूत किया जाए ? उत्तर : वन विभाग में हम बहुत सारे रिफॉर्म्स लाये है और बहुत सारे काम अभी करने को है। अभी मुझे कुछ ज्यादा समय नहीं हुआ है पर उसके बावजूद भी हमने खेर के ऊपर भी बहुत सारा काम करना शुरू किया है। खेर की अगर बात करें तो हमारे पास यह एक बहुत बड़ी फारेस्ट वेल्थ है जिसका अगर ठीक से उपयोग किया जाये तो हम प्रदेश के रेवेन्यू में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन दे सकते है। इसी तरह इसकी प्रोसेसिंग में बहुत सी त्रुटियां थी जिसको हम ठीक करके प्रदेश के युवाओं को इस काम में लगाना चाहेंगे। हमारा जो माल है वो बाहर जाना बंद हो और हमारे लोग यही पर इसका प्रोसेस कर पाए, इसको लेकर हम बहुत जल्द कदम उठाएंगे। अन्य कई महत्वपूर्ण रिफॉर्म्स पर भी हम काम कर रहे हैं। पौधरोपण की बात करें तो इस साल हमने 15 हजार हेक्टेयर में पौधरोपण किया है और लगातार हमारा यह काम आगे बढ़ रहा है। वन विभाग में हमने 400 गार्ड भर्ती किये है और जो हमारी स्टाफ की कमी थी उसको भी हमने काफी हद तक पूरा किया है। आने वाले वक्त में भी आवश्यक निर्णय लिए जायेंगे। सवाल : वन विभाग में बहुत सारी अनियमितताएं है। कई स्थानों में कर्मचारी केवल रजिस्टर में ड्यूटी पर तैनात है लेकिन वह वहां मौजूद नहीं है। इसके अलावा और भी बहुत सारी अनियमितताएं है, उन्हें किस तरह से दूर किया जायेगा। उत्तर : मैं इस बात को मानता हूँ कि बहुत सारी अनियमितताएं है और इसमें समय लगेगा। हम लोग इस पर काम कर रहे है। मुझे उम्मीद है हमने जिस तरह से शिकंजा कसा है, जिस तरह से हम लोग पॉलिसी पर काम कर रहे है, सब ठीक होगा। हमें कोरोना काल में बहुत नुक्सान हुआ है जिस कारण हम अपने काम पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाए। इस दौरान हमारा हेल्थ सेक्टर प्राथमिकता बन गया और हमारा सारा फोकस जो था वो हिमाचल के लोगों को बचाने पर लग गया था। हमको समय थोड़ा कम मिला, लेकिन मुझे आशा है कि नतीजे अच्छे ही होंगे। सवाल : 2022 विधानसभा चुनाव बहुत नजदीक है और कांग्रेस लगातार कह रही है कि फिर से सत्ता में वापसी करेगी। आप भी मिशन रिपीट की बात कह रहे हैं। किस तरह होगा मिशन रिपीट ? उत्तर : कांग्रेस का यह एक बहुत बड़ा ख्वाब है, बहुत बड़ा सपना है जो बहुत जल्द टूटने वाला है। ये चार उपचुनाव में जो फैसले आये है, उसके बाद इनका जोश बढ़ा हुआ है। पर आज इनके पास दूल्हा कौन है ये भी इन्हें नहीं पता, किसकी बारात में इनको जाना है ये भी नहीं पता, कौन राज्य को लीड करने वाला है ये भी इनको नहीं पता। एक बिल्कुल कन्फ्यूज्ड और डिवाइडेड कांग्रेस है। देश के लोगों ने मन बना लिया है कि अब कांग्रेस के अलावा कुछ और सोचना पड़ेगा और उसका एक विकल्प केवल और केवल भाजपा है। एक समय था जब हमारे पास देश में एक मुख्यमंत्री नहीं होता था आज हमारे पास 16 है। कहाँ इनके पास 26 मुख्यमंत्री हुआ करते थे अब दो रह गए है। पंजाब वाला तो 4 दिन के बाद जाने वाला है। हमारी सरकार रिपीट करेगी इसकी हम आपको गारंटी देते है। सवाल : कर्मचारी सरकार से लगातार नाराज़ दिख रहे है। पुरानी पेंशन बहाली की बात हो, करुणामूलक संघ, एनएचएम कर्मचारी या अन्य कर्मचारी, सब लगातार नाराज दिख रहे है। आपको नहीं लगता कि इस तरह से भाजपा के लिए 2022 का चुनाव मुश्किल होने वाला है ? उत्तर : देखिये कर्मचारी अगर अब भी नाराज होंगे तो फिर अब कभी खुश नहीं हो सकते। जितना जयराम सरकार ने उन्हें दिया है उतना किसी भी सरकार ने उन्हें नहीं दिया है। साढ़े सात सौ करोड़ के बेनिफिट्स तो हमने अभी उनको दिए है। पुलिस के बच्चों की बात थी, उनके साथ इतना बड़ा धोखा हुआ था। ये 2015 में हुआ था और तब कांग्रेस की सरकार थी। हमने उसे सही किया। नई पेंशन स्कीम 2003 में कांग्रेस लेकर आई। जयराम ठाकुर ने कर्मचारियों को इतना दिया हैं कि गिनाने लगा तो शायद कोई अंत न हो। मैं यही कहूंगा कि जयराम सरकार कर्मचारी हितेषी सरकार हैं और कर्मचारी हित में हमने कई बड़े निर्णय लिए हैं और आगे भी हम सकारात्मक रुख रखते हैं। सवाल : नए जिलों को बनाने की मांग जोरों पर है और भाजपा सरकार का भी सकारात्मक रवैया इस मुद्दे को लेकर दिख रहा है। किस तरह से देखते है। उत्तर : मैं यह व्यक्तिगत तौर पर महसूस करता हूँ कि हिमाचल को और जिलों की जरुरत है। मैं यदि नूरपुर की ही बात करूँ तो हर काम के लिए लोगों को कांगड़ा जाना पड़ता हैं। हमने इस बात को उठाया है और मैं तो पिछले 17 सालों से इस बात की लड़ाई लड़ रहा हूँ। हमने धरने प्रदर्शन भी दिए है, हमने जुलुस भी निकाले है, हमने बहुत कुछ किया है। अब मैं मंत्री हूँ इसलिए मैं खुलकर कुछ नहीं बोल सकता, लेकिन मैंने अपने हाईकमान के आगे ये बात रखी है। मुख्यमंत्री से भी हमने निवेदन किया है। फैसला ये लोग करेंगे और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हिमाचल के हक में और नूरपुर के हक में ये फैसला होगा। सवाल : नूरपुर की यदि बात करे तो यहां पिछले कई सालों से ये देखने को मिल रहा है कि एक बार राकेश पठानिया जीत कर आते है और एक बार कांग्रेस के प्रत्याशी जीत कर आते है। क्या कहेंगे ? उत्तर : देखिये जब मैं 2007 में जीता था तो आज़ाद जीता था और मुझे 29900 वोट पड़े थे और भाजपा को 4 हजार और कांग्रेस के प्रत्याशी को 24000 वोट पड़े थे। 2012 में मैं फिर से आज़ाद था, मुझे 24000 के करीब वोट पड़े थे, भाजपा को 6400 के करीब और कांग्रेस को 26000 वोट पड़े थे। उस समय यदि टिकट मिली होती तो चुनाव हारने का कोई मतलब ही नहीं था। अब कोई टिकट की लड़ाई नहीं है। मैंने जब भी आजाद लड़ा है तो पूरी की पूरी भाजपा मेरे साथ रही है लेकिन बीच में कोई ऐसा एलिमेंट होता है जिनका नेशनल पार्टी के साथ थोड़ी सी एफिलेशन रहती है। विकास की अगर बात करें तो मैंने यहाँ के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जबकि कांग्रेस के राज में यहाँ फूटी कौड़ी का काम नहीं हुआ। जनता विकास को प्राथमिकता देंगी और फिर एक एक बार मौका देगी। सवाल : नूरपुर में भाजपा के अंदर अंतर्कलह देखने को मिल रही है। आपकी पार्टी के ही एक नेता है जो साफ तौर पर कह रहे है की वह 2022 में चुनाव लड़ने वाले है। इसी के साथ वह ये भी लगातार आरोप लगा रहे है की नूरपुर में कोई विकास नहीं हुआ है। यदि इस तरह की अंतर्कलह चलती रही तो आपको नहीं लगता कि कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा ? उत्तर : देखिये कोई अंतर्कलह नहीं है, जो लोग केवल भाजपा का ठप्पा लगा कर ये सब बोल रहे है उन लोगों ने आज तक किसी मंडल की बैठक में भाग नहीं लिया है। कभी जिले की बैठक में भाग नहीं लिया है। इन लोगों का भाजपा से कुछ भी लेना देना नहीं है। केवल एक माफिया है, यहाँ पर जिसके खिलाफ मैं कई सालों से लड़ाई लड़ रहा हूँ और आगे भी मेरी लड़ाई जारी रहेगी। माफिया को मैं परमिशन नहीं देने वाला हूँ कि वह खुल के हमारे खड्डों का बेडागर्क कर दे, खुल के यहाँ पर नशे का कारोबार हो। ये सारा काम हमने रोका है और इस काम को हम आगे भी रोकेंगे। मुझे और भाजपा को यहां कोई चिंता नहीं है। बेतहाशा विकास हुआ है, आप एक पंचायत मुझे गिनवाइये जहाँ काम नहीं हुआ है। मैं आपकी टीम के साथ हर पंचायत में चलने के लिए तैयार हूँ। आप खुद जनता से पूछियेगा। हर पंचायत , हर गांव, हर गली में काम हो रहा हैं, निरंतर विकास हो रहा हैं और आगे भी जारी रहेगा। चुनाव में काम बोलता हैं और मुझे यकीन मेरा काम बोलेगा।
सब कुछ बोल भी दिया जाएं और चुप्पी भी बरकरार रहे, ऐसी सियासी अदा कम ही नेताओं में देखने को मिलती है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेमकुमार धूमल एक ऐसे ही सियासतगर है। नपे तुले अंदाज में अपनी बात रखने का उनका हुनर बेजोड़ है और उन्हें दूसरे से अलग बनाता है। यूँ ही कुछ भी बोल देना प्रो. धूमल का मिजाज नहीं है, वो जो भी बोलते है उसके गहरे मायने होते है। फर्स्ट वर्डिक्ट के लिए नेहा धीमान ने प्रो. प्रेम कुमार धूमल से एक्सक्लूसिव बातचीत की। सवालों का दौर चला तो मिशन रिपीट के दावों से लेकर उपचुनाव के जख्मों तक हर विषय पर चर्चा हुई। उनके निष्ठावानों की उपेक्षा पर भी बात हुई और जिक्र हावी अफसरशाही का भी हुआ। प्रोफेसर ने हर सवाल पर अपनी बात रखी। कहीं उनके जवाब में टीस और शिकायत झलकी तो कहीं व्यक्ति विशेष पर चर्चा न कर उन्होंने बता दिया कि क्यों उन्हें सियासत का भी प्रोफेसर कहा जाता है। जहां बोलना था वहां प्रो धूमल खुलकर बोले, नसीहत भी दी और अनुभव भी साझा किया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश ... ............................................................................. उपचुनाव हार के तीन कारण : -टिकट का आवंटन गलत हुआ -कार्यकर्ताओं की कम भागीदारी भी कारण -नोटा फैक्टर भी बना वजह ............................................................................... नसीहत : - रवैये में बदलाव हो, याद रहे शासन नहीं सेवा के लिए है सत्ता - शिकायत की ही शिकायत आना दुर्भाग्यपूर्ण ................................................ Defeat is Orphan उपचुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होने के बाद जाहिर है पार्टी के मिशन रिपीट के दावों पर सवाल उठे है। भाजपा को तीन बार सत्ता में लाने वाले प्रो. धूमल ने इस हार पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि Defeat is Orphan, सियासत में पराजय अनाथ होती है , कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। वहीं, उपचुनाव प्रचार से उनकी दूरी के प्रश्न पर प्रो. धूमल ने खुलकर कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का फोन आया था और उन्होंने कहा की अर्की में एक दिन लगा देना। किन्तु करीबी रिश्तेदार के देहांत के चलते वे जा नहीं सके। अपनी ही चिर परिचित शैली में धूमल ये बताने से भी नहीं चूके कि अन्य स्थानों पर उन्हें प्रचार के लिए बुलाया ही नहीं गया था। धूमल कहते हैं कि शायद लगा होगा की कम लोगों से काम चल जायेगा। ........................................................... जरूरी नहीं सबको टैग मिले : प्रो. प्रेमकुमार धूमल को सड़कों वाला मुख्यमंत्री कहा जाता है। धूमल कहते है कि इस तरह के टैग लोग लगाते है । जब कार्यकाल पूरा होता है तो जनता कोई एक टैग दे देती है, उन्होंने हर क्षेत्र में बहुत काम किया लेकिन जनता ने सड़कों वाला मुख्यमंत्री कहा। जब हमने उनसे पूछा, उनके अनुसार जयराम ठाकुर को कौनसा टैग मिलना चाहिए तो प्रो. धूमल ने कहा कि ये जनता तय करेगी। आगे धूमल कहते है " वैसे जरूरी नहीं है कि सबको टैग मिले। " .......................................................... घर नया हो तो भी काम का सामान रखा जाता है : 1998 से लेकर 2017 तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रो. प्रेमकुमार धूमल के चेहरे पर आगे बढ़ी। धूमल का फेस ही पार्टी का ग्रेस बढ़ाता रहा। इनमें से तीन बार भाजपा सत्ता कब्जाने में कामयाब रही। माना जाता हैं की 2017 में पार्टी आलाकमान बिना चेहरे के चुनाव में जाना चाहता था, लेकिन स्थिति ठीक न देखकर चुनाव से दस दिन पहले प्रो प्रेम कुमार धूमल को सीएम फेस बनाना पड़ा। दांव ठीक पड़ा और भाजपा सत्ता में आई, हालाँकि खुद धूमल चुनाव हार गए। 2017 में जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने। इसके बाद से ही सियासी गलियारों में चर्चा आम रही है कि धूमल गुट उपेक्षा का शिकार हैं। इस मसले पर हमने प्रो. धूमल से सीधा सवाल किया। जवाब भी सीधा मिला, प्रो धूमल ने कहा कि " जब नेतृत्व बदलता हैं तो नया नेता अपने हिसाब से बदलाव करता हैं। पर पुराने काम के लोगों की उपेक्षा गलत हैं। नया भवन बनाइये लेकिन काम का सामान भी रखिये।" ........................................................................ वृक्ष हैं संगठन तो जड़ हैं कार्यकर्ता प्रो. प्रेमकुमार धूमल का राजनैतिक सफर किसी सियासी ग्रंथ से कम नहीं हैं। सरकार और संगठन दोनों पर उनकी समझ बेजोड़ हैं। चर्चा जब संगठन की चली तो प्रो. धूमल ने एक किस्सा साझा किया। पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद वे ठियोग जा रहे थे तभी रास्ते में एक कार्यकर्ता ने उन्हें एक पत्र दिया। गाड़ी में उन्होंने पत्र पढ़ा तो उसमें उक्त कार्यकर्ता ने लिखा था कि एक आम कार्यकर्ता संघर्ष करता हैं, जैसे -तैसे कर सरकार बनती हैं और फिर ढाई साल में गिर जाती है। ( 1977 और 1990 में शांता कुमार के नेतृत्व में बनी सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई थी) प्रो. धूमल घर पहुंचे, देर रात 12 बजे तक काम निपटाया और फिर खुद उक्त खत के जवाब में एक पत्र लिखा। धूमल ने लिखा कि पार्टी एक वृक्ष है। कार्यकर्ता जड़े, मंत्री और पदाधिकारी फल और फूल। जब जड़े मजबूत होती है तो ही वृक्ष पनपता है। फल और फूल को लगता है कि वृक्ष की शोभा उनसे है लेकिन हकीकत ये हैं कि बिन जड़ वृक्ष ही नहीं हैं। जब जड़ को तरजीह नहीं मिलती तब अस्तित्व भी नहीं रहता। इस बीच एक माली आता है और उस वृक्ष को हटाकर दूसरा वृक्ष लगा देता है। ....................... सवाल : मौजूदा सरकार के कार्यकाल को 4 साल पूरे हो चुके है। ये वर्ष चुनावी वर्ष है और सियासत भी तेज़ हो गई है। 1985 के बाद से अब तक प्रदेश में कोई सरकार रिपीट नहीं कर पाई है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ये दावा कर रहे है कि सरकार रिपीट करेगी। आप भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेता है, हम आपसे जानना चाहेंगे कि क्या ये सरकार रिपीट करने की स्थिति में है ? जवाब : मैं व्यक्तियों पर चर्चा नहीं करता। मैं ये कहना चाहूंगा की भारतीय जनता पार्टी हमेशा इतिहास बनाती रही है। 1984 श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हमदर्दी की लहर चली और हमारे सिर्फ दो सांसद जीते थे, और पांच वर्ष के बाद 1989 में हम दो से 86 हो गए। इसी प्रकार से 77 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार अनेकों पार्टियों का गठबंधन था। जब 1990 में हमने सरकार बनाई तो हमारा गठबंधन जनता दल के साथ था। 1998 में हमारा गठबंधन हिमाचल विकास कांग्रेस के साथ था, लेकिन साल 2007 में पहली बार विशुद्ध भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाई। वो भी एक रिकॉर्ड था। अब 2022 में हम चाहते है कि फिर रिकॉर्ड बनें। एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने और हम फिर जनता की सेवा करें। सवाल : जो नतीजे बीते नगर निगम चुनाव और उपचुनाव में भाजपा के लिए रहे है क्या उन्हें देखने के बाद भी आप यही कहेंगे कि भाजपा रिपीट करेगी ? और अगर रिपीट करना है तो उसके लिए क्या करना होगा ? जवाब : हमारा संगठन सक्रीय है और सरकार के लेवल पर भी नगर निगम चुनाव और उपचुनाव के वक्त काम किया गया है। जब ठोकर लगती है तो इंसान संभालता है। सरकार ने भी हार के बाद अपने सबक लिए होंगे। जो लोग सत्ता में है, जो लोग सरकार चला रहे है वो देखेंगे कि क्या कमियां रही और उन कमियों को दूर कर पुनः चुनाव लड़ेंगे। सवाल : आज प्रदेश की सियासत में रूचि रखने वाला हर व्यक्ति ये जानना चाहता है कि क्या प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल इस बार के चुनाव के मैदान में उतरेंगे ? जवाब : यदि आप मेरा राजनैतिक जीवन देखे तो मैंने कभी पार्टी टिकट की मांग नहीं की। 1984 में जब इंद्रा जी का मर्डर हुआ तब बड़े- बड़े नेता मैदान छोड़ गए। कोई लड़ने के लिए तैयार नहीं था और उस वक्त मुझे कॉलेज से बुलाया गया और कहा की तुम लड़ोगे , तुम्हें लड़ना है और हम लड़े भी और हारे भी। उसके बाद से लगातार लोगों के बीच रहे। मैं तीन बार सांसद बना, दो बार मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश की सेवा की। जब पार्टी ने बोला मैंने चुनाव लड़ा, जो बोला वो किया और आगे भी जो भी पार्टी हाईकमान का आदेश होगा वो मैं करूंगा। सवाल : आपके समर्थक ये चाहते हैं कि यदि आप चुनाव लड़े तो मुख्यमंत्री का चेहरा भी आप ही हो। इस पर आप क्या कहेंगे ? जवाब : मुख्यमंत्री का चेहरा तो मुझे पिछली बार भी हाईकमान ने बनाया था, लेकिन लोगों ने मुझे नहीं चुना। फिर जयराम जी मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री का चेहरा हाईकमान और चुने हुए विधायक तय करते है। जो वो तय करेंगे वो होगा। सवाल : तो अपने निर्णय हाईकमान पर छोड़ दिया है ? जवाब : मेरी तो पूरी जिंदगी उन्ही के सहारे बीती है, अब इस पड़ाव पर आकर क्या करना हैं। सवाल : जयराम सरकार का यदि आप आंकलन करें , तो आप क्या बड़ी उपलब्धियां मानते है इस सरकार की ? जवाब : सरकार का दो साल का कार्यकाल कोरोना में गया और प्रधानमंत्री जी की अगुवाई और मार्गदर्शन में हम कोरोना से निपटने में कामयाब रहे। लोगों का भी सहयोग मिला। सामजिक क्षेत्र में सरकार ने अच्छा किया मसलन बुढ़ापा पेंशन की उम्र जताई गई। उद्योग की बात करें तो करीब 96 हजार करोड़ का निवेश आया। कई बार कुछ कार्य दूरगामी सोच के साथ भी किये जाते है जिनका परिणाम बाद में दिखता है। सवाल : ये सामान्य बात है कि जनता तुलना करती है। आप दस साल मुख्यमंत्री रहे और अब जयराम जी मुख्यमंत्री है । कई बार ये कहा जाता है कि जयराम सरकार की अफसरशाही पर पकड़ नहीं है। आप क्या मानते है ? जवाब : मैं शिमला बहुत कम जाता हूँ। सवाल : चलिए आपने बताया कि आप शिमला कम जाते है, तो अगले सवाल पर आते है । आप मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे और कई ऐसे वादे हैं जो कहा जाता है आपने किए थे लेकिन सरकार ने पुरे नही किए। दृस्टि पत्र में भी ये वादे शामिल थे। मसलन नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता हो या पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा। जो वादे आपने किए थे और पुरे नहीं हुए, उस पर आप क्या कहेंगे ? जवाब : मैं आपके माध्यम से स्पष्ट कर दूँ कि मैंने कोई वादा अलग से नहीं किया ताकि कोई गलतफहमी न रहे। चुनाव घोषणा पत्र व्यक्ति नहीं पार्टी जारी करती हैं। जो दृस्टि पत्र जारी हुआ उसके कन्वीनर रणधीर शर्मा थे और श्री जयराम जी खुद उसके मेंबर थे, जिस पर हस्ताक्षर है उनके। मैंने जो भी घोषणा की है उसके अनुसार ही की है। जहां तक पुरानी पेंशन बहाली की बात है मैंने तो कॉर्पोरेशन और बोर्ड के कर्मचारियों को भी पेंशन दी थी। नई पेंशन स्कीम 2004 में लागू हुई और इसके बाद जब 2007 से 2012 तक मैं मुख्यमंत्री था तो इसे हटाने की कोई मांग नहीं थी। अब ये बात सामने आई है। मुझे विश्वास है सरकार इस पर विचार कर रही होगी। सवाल : आप मानते हैं कि पुरानी पेंशन बहाल होनी चाहिए ? जवाब : मैं ये नहीं कह रहा कि बहाल होनी चाहिए, ये तो सरकार तय करेगी। पर जिस कर्मचारी ने सारी उम्र ईमानदारी से नौकरी की, बुढ़ापे में आकर उसको सम्मानजनक पेंशन मिलनी चाहिए। इस पर विचार करना चाहिए और संसाधन हो तो इसे बहाल करें। जिन्हें नुकसान हो रहा हैं, जीवन यापन मुश्किल हैं उनका पालन पोषण हमारा सामाजिक दायित्व हैं। सवाल : वर्तमान में प्रदेश में नए जिलों की मांग भी उठ रही हैं। आपको क्या लगता है क्या नए जिले बनने चाहिए ? जवाब : हमने तो बना दिए थे। नूरपुर, देहरा, पालमपुर, सुंदरनगर और जुब्बल कोटखाई में हमने एडीएम बिठा दिए थे। उसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ हुआ निर्णय पलट दिया गया। मैं मानता हूँ कि छोटी प्रशासनिक इकाइयां बेहतर काम करती हैं। पर चुनाव के दिनों में नए जिलों का गठन करना उचित नहीं है, ये योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए। सवाल : अनुभव का कोई पर्याय नहीं होता और बेहद अनुभवी नेता है। आप प्रदेश सरकार को क्या सुझाव देना चाहेंगे ? जवाब : पहला तो ऐटिटूड का बदलाव होना चाहिए। हम शासन नहीं सेवा करने के लिए सत्ता में आएं है। दूसरा सरकार और सामान्य नागरिक में कोई दुरी नहीं होनी चाहिए। बात सुनो , हर काम नहीं होंगे लेकिन यदि व्यक्ति कि शिकायत भी कोई सुन लेता है तो मन हल्का हो जाता है। उसे लगता है कि वो अपनी ही सरकार से बात कर रहा है । ईमानदरी से प्रयास होना चाहिए कि जो मुमकीन है वो हम करें। जो शिकायत आती है उसकी उलटी शिकायत नहीं आनी चाहिए। शिकायत की भी शिकायत आये ये दुर्भाग्यपूर्ण होता है। सवाल : क्या आपको लगता हैं की जनता से सरकार की दूरी ज्यादा हैं, शायद इसीलिए आप ऐटिटूड में बदलाव की बात कर रहे हैं ? जवाब : मैंने कहा शिमला तो मैं जाता नहीं और दूरी की बात मैं करता नहीं।
हिमाचल सरकार प्रदेश के किसानों व् बागवानों को अब कृषि करने की नयी सुविधा प्रदान करने जा रही है । प्रदेश के खेतों और बगीचों में जल्द ही ड्रोन खाद और दवाओं का स्प्रे करते नजर आएंगे। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने ड्रोन की खरीद और किराये पर सुविधा देने के लिए नौ कंपनियों का चयन किया है।अब कोई भी विभाग या व्यक्ति शुल्क चुका कर यह सेवा ले सकेगा। ड्रोन को कृषि, बागवानी, मेलों, दवाइयां पहुंचाने, सुरक्षा दृष्टि के साथ अन्य आयोजनों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। सुविधा लेने के लिए आईटी विभाग से संपर्क करना होगा। विभाग की ओर से चयनित कंपनियों की सेवा लेने के लिए दाम तय किए गए हैं। दाम चुकाने के बाद इसकी सुविधा ले सकेंगे। विभाग के माध्यम से ड्रोन की खरीद भी की जा सकेगी। इस नई सुविधा से किसानों व बागवानों का समय भी बचेगा व किसानों को नई तकनीक से खेती करने का मौका भी मिलेगा। ख़ास बात यह है की प्रदेश सरकार ने कांगड़ा जिले के शाहपुर आईटीआई में ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल खोलने का फैसला लिया है। यहां किसानों व् बागवानों को ड्रोन चलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शाहपुर आईटीआई में शुरू होने वाले ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल में दसवीं पास कोई भी व्यक्ति सात दिनों के कोर्स के लिए प्रवेश ले सकेगा। तमिलनाडु और तेलंगाना में हुआ ट्रायल -- केंद्र सरकार द्वारा आम बजट में फसलों पर दवा स्प्रे करने के लिए भी ड्रोन के इस्तेमाल करने का ज़िक्र किया गया था। बता दें की इस के चलते अब प्रदेश सरकार ने भी इस ओर कदम बढ़ाया है। अभी तक देश में तमिलनाडु और तेलंगाना में ड्रोन से खाद व स्प्रे करने का सफल ट्रायल किया गया है , जिसके बाद अब देश के अन्य प्रदेशों में भी इस नई सुविधा को शुरू करने की कवायद तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बीते दिनों कुटलेहड़ और हरोली विधानसभा क्षेत्रों के लिए लगभग 67 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किए । मुख्यमंत्री ने समूर कलां में 16.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कला केंद्र ऊना का लोकार्पण किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने थानाकलां में. राज्य विद्युत बोर्ड मंडल, बंगाणा में ग्रामीण विकास मंडल, बसाल में कृषि विभाग का एसएमएस कार्यालय, टयूरी बडोली और कियारियां में पटवार वृत्त, बीहरू में फील्ड कानूनगो कार्यालय खोलने, हरोट, चारड़ा, बल्ह खालसा और बोहरू में पशु चिकित्सा उपकेंद्र खोलने की भी घोषणा की।जयराम ठाकुर ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धमांदरी एवं रैंसरी में वाणिज्य कक्षाएं आरंभ करने तथा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय समूर कलां में विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित करने की भी घोषणा की। मुख्य मंत्री ने कहा कि शीघ्र हि नाबार्ड के अन्तर्गत जिले की तीन प्रमुख सड़कों के क्रियान्वयन के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऊना जिला पिछले चार वर्षों में चहुंमुखी विकास का गवाह बना है। जिले के विभिन्न भागों में 1600 करोड़ रुपये के विकासात्मक कार्यों को समर्पित व पूरा किया जा रहा है।


















































