◆ घिरथ ,गद्दी,गोरखा और जनरल वोट बैंक में फंसी धर्मशाला इस बार धर्मशाला, प्रदेश की दूसरी "कागजी" राजधानी है। वीरभद्र सरकार की विदाई के बाद अब इसकी घोषणा का कागज भी गायब है। अगर कोई दिखाता भी है तो उसकी सत्यता पर सवाल-बवाल बराबर होते हैं। खैर,शुक्र यह है कि धर्मशाला गायब नहीं हो पाया है। धर्मशाला के साथ पॉलिटिक्स का चलन बहुत पुराना है। पर बेचारे धर्मशाला का हाल यह है कि स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बावजूद आम आदमी के लिए कुछ स्मार्ट तो नहीं हो पाया अलबत्ता इसके अंदर की पॉलिटिक्स जरूर स्मार्ट हो चुकी है। मोबाइल तकनीक फोर-जी की तर्ज पर धर्मशाला की पॉलिटिक्स भी फोर-जी की तरह हाई स्पीड वाली हो गई है। फोर-जी फैक्टर में यहां घिरत,गद्दी,गोरखा और जनरल के बीच पॉलिटिकल रेडियेशन्स पसरी हुईं हैं। भाजपा का तो इतिहास ही रहा है कि उसने गद्दी जाति की तरंगों पर ही सफर किया। स्व मेजर बृज लाल से शुरू हुआ सफर वाया किशन कपूर होता हुआ अब विशाल नैहरिया तक पहुंच चुका है। भाजपा की टिकट कभी गैर गद्दी के हाथ नहीं चढ़ पाई। साल 2017 में जब कपूर की टिकट कटने की नौबत आई थी तब उन्होंने अश्रु धाराओं की दीवार बना कर उन्होंने पण्डित उमेश दत्त की टिकट रोक ली थी। इसके बाद साल 2019 में कपूर साहब की लॉटरी लोकसभा में लगी तो उनके जीतने के बाद फिर से टिकट की गद्दी पर गद्दी समुदाय के विशाल नैहरिया को भाजपा ने सत्तासीन कर दिया। यह तो थी फोर-जी फैक्टर के पहले अहम जी-फैक्टर गद्दी की। अब बात करते हैं कांग्रेस की। एक वक्त था, जब कांग्रेस भी गद्दी समुदाय के मूलराज पाधा के साथ अपना हाथ लेकर चलती थी। फिर कांग्रेस ने यह वर्चस्व जनरल कैटागिरी से राज परिवार की चंद्रेश कुमारी को आगे लाकर तोड़ा। कांग्रेस ने एक बार गद्दी समुदाय को छोड़ा तो फिर कभी अपना पल्लू नहीं थमाया। चंद्रेश के बाद सुधीर शर्मा को धर्मशाला से उम्मीदवार बनाया और वह जीते भी। इसके बाद जब किशन कपूर के सांसद बनने के बाद उपचुनाव हुए तो जनरल फैक्टर के सुधीर शर्मा गायब हो गए। कांग्रेस मरती क्या न करती,एक बार फिर गद्दी समुदाय वाले विजय इन्द्रकर्ण जी-फैक्टर की तरफ बढ़ गई। भाजपा-कांग्रेस दोनों गद्दी फैक्टर पर भिड़ीं और भाजपा जीत गई। मगर इसी चुनाव में तीसरे जी-फैक्टर यानि घिरथ समुदाय ने अपना जलवा दिखा दिया। कभी भाजपाई रहे राकेश चौधरी आजाद मैदान में उतरे और भाजपा की चीखें निकलवाने के साथ कांग्रेस की जमानत जब्त करवा दी। करीबन सोलह हजार वोट लेकर बता दिया कि ओबीसी बिन गति नहीं होने दी जाएगी। अब बात करते हैं चौथे और लास्ट जी-फैक्टर गोरखा समुदाय की। हालांकि यह समुदाय बहुतयात में तो नहीं है,पर किसी को भी हरवाने में यह तबका, अपना तगड़ा दबका रखता है। इस समुदाय के अरुण बिष्ट ने एक बार चंद्रेश कुमारी को घर बिठा दिया था,तो दूसरी बार रविन्द्र राणा ने सुधीर शर्मा को तगड़ी चोट दे दी थी। पर अब इस फोर-जी फैक्टर में जनरल फैक्टर पॉलिटिकल फ्रैक्चर डालने की कुव्वत बना चुका है। जनरल कैटागिरी का मत प्रतिशत एक अनुमान के मुताबिक करीबन 49 से 51 फीसदी के बीच पहुंच चुका है। इस बार भाजपा-कांग्रेस के लिए यह ट्रेडिशनल गद्दी फैक्टर खतरे का सामान बनता नजर आने शुरू हो गया है। खैर, असली फोर-जी के आगे फाइव-जी की तरफ बढ़ रही है। देखना दिलचस्प होगा कि स्ट्रेंथ ऑफ पॉलिटिकल सिग्नल कितना फलक्चुएट होता है...
मिशन रिपीट के लिए जयराम सरकार ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है। दावा है कि जो 1985 के बाद से अब तक नहीं हुआ, वो अब होगा। जो सख्त मिजाज वाले नेता कभी नहीं कर पाएं वो नरम मिजाज वाले जयराम करके दिखाएंगे। ऐसे में दबाव न सिर्फ खुद जयराम ठाकुर पर है बल्कि उनकी कैबिनेट के अन्य 11 मंत्रियों पर भी। दबाव इसलिए भी कुछ अधिक है क्यों कि काबीना मंत्रियों का चुनाव हारना हिमाचल की सियासत का पुराना रिवाज है। पांच साल बाद जब जनता का वक्त आता है तो क्या मंत्री और क्या मुख्यमंत्री, किसी की जीत की कोई गारंटी नहीं होती। वर्तमान में भी जयराम कैबिनेट के कई मंत्रियों के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे है। किसी की विभाग पर पकड़ कमजोर दिख रही है तो कोई अपने रैवये के चलते सुर्ख़ियों में है। तो कहीं मजबूत विपक्ष और हावी अंतर्कलह ने मंत्रियों की नींद उड़ाई हुई है। ग्राउंड रियलिटी की बात करें तो खुद मुख्यमंत्री और एकाध मंत्रियों को छोड़ कर शायद ही कोई ऐसा हो जो अपने निर्वाचन क्षेत्र में इक्कीस दिख रहा है। हालाँकि मौजूदा मंत्रिमंडल में कई ऐसे नेता भी है जो जीत की हैट्रिक लगा चुके, पर ये सियासत है यहां समीकरण बदलते समय नहीं लगता। हिमाचल प्रदेश में कैबिनेट मंत्री ही नहीं मुख्यमंत्री भी चुनाव हारते रहे है। सीएम रहते चुनाव हारने वालों में वीरभद्र सिंह और शांता कुमार के नाम भी शामिल है। 1990 में वीरभद्र सिंह जुब्बल कोटखाई से चुनाव हार गए, हालांकि तब वे दो निर्वाचन क्षेत्रों से मैदान में थे। वहीं 1993 में सत्ता विरोधी लहर ऐसी चली कि शांता कुमार अपनी सीट भी नहीं बचा पाएं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा तो जीत गई लेकिन सीएम फेस प्रो प्रेमकुमार धूमल खुद चुनाव हार गए। इसी तरह कैबिनेट मंत्रियों का चुनाव हारना भी हिमाचल में आम बात है। पिछले चार चुनावों पर नज़र डाले तो वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में धूमल कैबिनेट के 12 ज्यादा मंत्री चुनाव हारे थे ( तब कैबिनेट की अधिकतम संख्या 12 नहीं थी)। 2007 में वीरभद्र सरकार में मंत्री रहे सात नेता चुनाव हारे। जबकि 2012 में धूमल कैबिनेट के तीन मंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाएं। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में तो वीरभद्र सिंह कैबिनेट के पांच मंत्रियों को जनता ने नकार दिया। पहली चुनौती टिकट लाना ! आज की भाजपा में टिकट आवंटन का आधार नाम से ज्यादा जीताऊ फैक्टर है और टिकट से पहले बकायदा सर्वे कराए जाते है। हाल ही में कई ऐसे उदहारण है जहाँ पार्टी ने एंटी इंकम्बैंसी को भांपते हुए मंत्रियों और विधायकों के टिकट काटे है। ऐसे में हिमाचल में भी ये संभव है। जाहिर है फिर विधानसभा पहुँचने के लिए पहले मंत्रियों को अपना टिकट सेफ करना होगा। एंटी इंकम्बेंसी साधने को क्या होगा बदलाव ! उपचुनाव हारने के बाद से ही प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल के कयास लगते रहे है। खुद मुख्यमंत्री ने भी कभी साफ़ शब्दों में फेरबदल की संभावना से इंकार नहीं किया। पर अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। चुनाव के मुहाने पर खड़ी सरकार क्या एंटी इंकम्बैंसी साधने के लिए फेरबदल कर सकती है, ये बड़ा सवाल है।
प्रदेश में दिन प्रतिदिन आप का जनाधार बढ़ रहा है। इससे भाजपा-कांग्रेस की चिंता बढ़ गई और उन्हें हार का डर सताने लगा है। यह बात पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता गौरव शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां दलगत राजनीति करती आ रही हैं। यही कारण है कि प्रदेश की जनता अब इनसे तंग हो चुकी है। दोनों दलों के नेता इस बात को नहीं पचा पा रहे हैं। यह दल कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी का कोई वजूद ही नहीं। यदि पार्टी का कोई वजूद न होता तो क्यों ये दल डर के मारे रोज पार्टी की चर्चा कर रहे हैं। दरअसल इनको अब डर सता रहा है। महंगाई ने पहले प्रदेश की जनता की कमर तोड़ दी है। लोग अब आम आदमी पार्टी से आस लगाए बैठे हैं। इन दोनों पार्टियों का अमन-चैन ही छिन गया है। इस बार जीत का सेहरा आप के सिर ही सजेगा। ्र
राजेश कतनौरिया जवाली विधान सभा में आम आदमी पार्टी का अभियान जोर-शोर से चल रहा है। आप जवाली के अध्यक्ष निखिल महाजन ने महाराणा प्रताप भवन लव के प्रांगण में एक मीटिंग की। इसमें अलग-अलग पंचायतों के 500 लोगों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान आप के प्रदेश सदस्यता अभियान के अधयक्ष राजीव अंबिया, अभिषेक चौधरी, करनैल सिंह और भारत भूषण आदि मौजूद रहे। वहीं निखिल महाजन ने कहा कि हर वर्ग में आम आदमी पार्टी के प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है। जनता इस बार बदलाव चाहती है।
नरेंद्र डोगरा जयसिंहपुर विधान सभा में आम आदमी पार्टी का सदस्यता अभियान जोरों से चला हुआ है। इस सदस्यता अभियान के दौरान लंबागांव के रत्न चौधरी यशपाल चौधरी, विद्या देवी भूरू व अन्य लोगों ने आप का दामन थाम लिया। संगठन मंत्री लक्की पुरी व मंडलाध्यक्ष विक्रम कौंडल, प्रभात कौंडल ने पार्टी का स्मृति चिन्ह दिया। मंडल अध्यक्ष विक्रम कौंडल ने हर वर्ग आम आदमी पार्टी की ओर मुखातिव हो रहा है। आने वाले समय में पार्टी का पूरा परचम लहराएगा।
बड़सर विधानसभा क्षेत्र के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि केंद्र और प्रदेश कि भाजपा सरकार महंगाई पर काबू पाने में नाकाम रही हैं। बड़ी हैरानी है कि पिछले 9 दिनों में पैट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। महंगाई से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। लोगों को गुजारा करना मुश्किल हो गया है। मगर महंगाई रोकने को कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले प्रधानमंत्री ने दो लाख युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी, मगर कुछ भी नहीं किया गया। वहीं उन्होंने कहा मुख्यमंत्री का सरकारी कार्यालयों में बैठे अफसरों पर कोई कंट्रोल नहीं है। लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। सड़कों की हालत खस्ता है। मनरेगा के तहत रोजगार भी नहीं मिल रहा है। मगर न तो केंद्र और न ही प्रदेश सरकार का इस तरफ कोई ध्यान है।
मनोज कुमार हिमाचल करणी सेना के जिला अध्यक्ष आशुतोष चौधरी ने आप का दामन थाम लिया है। धर्मशाला सर्किट हाउस में आप पार्टी के दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सतिंद्र जैन ने आप पार्टी की टोपी पहनाई। बता दें कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सतिंद्र जैन कांगड़ा में आयोजित एक छिंज में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे हुए थे। आशुतोष चौधरी पुराना कांगड़ा के रहने वाले हैं। उनके पिता कैप्टन प्रताप चौधरी 1977 में कांगड़ा के विधायक रहे चुके हैं। उनकी माता शशि कांता भी पूर्व पार्षद भी रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी हिमाचल करणी सेना के साथ समाज सेवा कर रहे हैं। अब आप पार्टी से जुड़ कर लोगों की सेवा करूंगा। उन्होंने कहा कि आप पार्टी की नीतियां पसंद आई हैं। केजरीवाल की अच्छी नीतियों को मद्देनजर रखते हुए आज ये फैसला लिया है। वहीं उन्होंने कहा कि वे कांगड़ा विधानसभा युवा कार्यकर्ताओं के साथ आप पार्टी को मजबूत और कांगड़ा में सदस्यता अभियान की शुरूवात करेंगे। इस दौरान उनके साथ उनकी माता व धर्म पत्नी भी मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने प्रदेश कृषि विभाग द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को प्रस्तुत प्रस्तावित एकीकृत डिजिटल कृषि प्लेटफार्म परियोजना को 108 करोड़ रुपए स्वीकृत करने के लिए केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि सुधार ट्रांसफार्मेशन इन एग्रीकल्चर यूजिंग एमर्जिंग टेक्रोलॉजी पर प्रस्तावित इस परियोजना के तहत किसानों के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी आईसीटी आधारित सेवाएं प्रदान करने में आंतरिक योग्यता विकसित की जाएगी। इसमें प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भरता कम कर कार्य कुशलता को बनाया जाएगा और कृषि आधारित सेवाओं की मांग के अनुसार उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। जय राम ठाकुर ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य केन्द्र और प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न योजनाओं के लिए सिंगल साइन ऑन प्लेटफार्म स्थापित करना है, जो विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए आवेदन करने की प्रक्रियाओं को और सरल कर देगा और विभिन्न वित्तीय लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित किए जाएंगे। परियोजना के अन्तर्गत एक बाजार सूचना प्रणाली विकसित की जाएगी, जिसमें मांग एवं आपूर्ति की जानकारी, उत्पाद की कीमत और राष्ट्रीय ई. मार्केट प्लेटफार्म की जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना में एकीकृत किसान डाटाबेस, एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस एपीआई, एकीकरण, स्वचालित फार्म एक्सटेंशन सर्वर, कस्टमाइज डैशबोर्ड, डाटा एनालिटिक्स एवं केन्द्रीकृत रिपोर्ट और फार्मर फील्ड स्कूल एप्लीकेशन तैयार करने पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित परियोजना आईटी आधारित इको सिस्टम का उपयोग करेगी, जिससे किसान विभाग और अन्य हितधारक लाभान्वित होंगे।
वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने है और दोनों मुख्य राजनैतिक दल अभी से मिशन रिपीट और मिशन डिलीट की कवायद में जुट गए है। इस पर आम आदमी पार्टी की एंट्री ने चुनावी खिचड़ी में तड़का लगा दिया है। आप से इतर भी दोनों राजनैतिक दलों और सत्ता के सोलह श्रृंगार के बीच सोलह विधानसभा सीटें ऐसी है जो राह में रोड़ा बन सकती है। 2003 से लेकर 2017 तक हुए चार विधानसभा चुनाव पर नजर डाले तो इन 16 पर हर पांच वर्ष के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है। यहाँ कभी कांग्रेस, कभी भाजपा तो कभी अन्य काबिज हुए है। हालांकि इनमें से कुछ ऐसी सीटें भी है जहां दल भले ही बदले हो लेकिन चेहरा एक ही रहा है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो इन 16 सीटों में से 12 पर भाजपा काबिज है, जबकि 4 पर कांग्रेस के विधायक है। गगरेट, सुलह, धर्मशाला, बिलासपुर, आनी, नूरपुर, सुंदरनगर, चौपाल, दून, भरमौर, लाहौल स्पीति और करसोग में इस वक्त भाजपा के विधायक है, तो जुब्बल कोटखाई, कांगड़ा, कुल्लू और नालागढ़ में कांग्रेस काबिज है। 2017 विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के पास इन सोलह में से 13 सीटें थी, पर उपचुनाव में हार के बाद जुब्बल कोटखाई सीट अब कांग्रेस के पास है। वहीं 2019 में धर्मशाला सीट पर भी उपचुनाव हुआ है लेकिन उक्त सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रहा। यहाँ नालागढ़ ऐसी सीट है जहां 2003 और 2007 में भाजपा काबिज हुई लेकिन 2011 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने वापसी की। इसके बाद 2012 में भाजपा और 2017 में कांग्रेस को जीत मिली। जुब्बल कोटखाई : एक बार कांग्रेस, एक बार भाजपा जुब्बल कोटखाई प्रदेश का इकलौता निर्वाचन क्षेत्र क्षेत्र है जिसने दो मुख्यमंत्री दिए है, ठाकुर रामलाल और वीरभद्र सिंह। लम्बे समय तक इस सीट पर ठाकुर रामलाल की तूती बोलती थी और उनके निधन के बाद 2003 के विधानसभा चुनाव में उनके पोते रोहित ठाकुर को भी यहाँ की जनता का प्यारा मिला। पर 2007 में पूर्व बागवानी मंत्री रहे नरेंद्र बरागटा ने पहली बार इस सीट पर कमल खिलाया। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में फिर जनता ने कांग्रेस के रोहित ठाकुर को विजयी बनाया, जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर नरेंद्र बरागटा ने जीत हासिल की। 5 जून 2021 को नरेंद्र बरागटा का निधन हुआ और तदोपरांत 30 अक्टूबर 2021 को जुब्बल कोटखाई सीट पर हुए उपचुनाव में रोहित ठाकुर को तीसरी बार जीत मिली। इस वर्ष के अंत में फिर विधानसभा चुनाव होने है और इस दफा जुब्बल कोटखाई की कुर्सी पर कौन सा दल काबिज होता है, ये तो आने वाला समय ही बताएगा। वहीं चेतन बरागटा की भाजपा में घर वापसी और आप में जाने की अटकलों ने अभी से इस क्षेत्र में सियासत गरमा गई है। चौपाल : यहाँ निर्दलियों को भी मिलता रहा है प्यार चौपाल सीट के पिछले चार चुनावों के नतीजों का आंकलन किया जाए तो इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के साथ - साथ निर्दलियों का सिक्का भी चला है। कभी यहां बीजेपी की उम्मीदवार की जीत हुई, कभी कांग्रेस की, तो कभी निर्दलियों-बागियों ने दोनों का खेल बिगाड़ा। 2003 के विधानसभा चुनाव में सुभाष चंद मंगलेट ने इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 2007 के विधानसभा चुनाव में सुभाष चंद मंगलेट ने कांग्रेस पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 2012 में निर्दलीय बलबीर वर्मा ने सुभाष चंद मंगलेट को हराया। 2017 में बलबीर वर्मा भाजपा में शामिल हुए और पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ा और जीता भी। यानी 2003 और 2007 का चुनाव मंगलेट बतौर निर्दलीय और फिर कांग्रेस के टिकट पर जीते। इसी तरह बलबीर वर्मा ने 2012 में बतौर निर्दलीय और 2017 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की। दून : फिर दिलचस्प मुकाबला तय दून विधानसभा क्षेत्र में जनता कब किस पर मेहरबान हो ये कहना तो मुश्किल है, लेकिन पिछले चार चुनावों में इस सीट पर निरंतर सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। 2003 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस के लज्जा राम ने 17297 मतों के साथ जीत दर्ज की। 2007 के विधानसभा चुनाव में यहां सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा से विनोद कुमारी ने इस सीट पर कब्ज़ा जमाया। 2012 में कांग्रेस प्रत्याशी रामकुमार ने भाजपा के निर्दलीय रहे दर्शन सिंह को हरा कर जीत हासिल की और यह सीट कांग्रेस के नाम हुई। 2017 के चुनाव में भाजपा ने परमजीत सिंह पम्मी पर दांव खेला और यह सीट भाजपा के नाम रही। दिलचस्प बात ये है कि पम्मी कांग्रेस से भाजपा में आये थे। अब 2022 में भी यहां दिलचस्प मुकाबला तय दिख रहा है। वहीं कई नेताओं के आप में जाने की अटकलों से भी यहाँ सियासी पारा हाई है। बिलासपुर : 2003 से परिवर्तन की प्रथा कायम बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में 2003 के विधानसभा चुनाव में तिलक राज ने जीत दर्ज कर यह सीट कांग्रेस की झोली में डाली तो 2007 के चुनाव में जगत प्रकाश नड्डा इस सीट पर भाजपा को काबिज करवाने में कामयाब रहे। 2012 के चुनाव में कांग्रेस के बंबर ठाकुर ने भाजपा के सुरेश चंदेल को पटखनी देकर जीत दर्ज की थी। 2017 के लिए कांग्रेस ने फिर बंबर ठाकुर पर दांव लगाया और भाजपा ने सुभाष ठाकुर पर, लेकिन सुभाष ठाकुर इस सीट पर फ़तेह हासिल करने में कामयाब रहे। 2003 से परिवर्तन की प्रथा इस सीट पर कायम है। गगरेट : कुलदीप की हैट्रिक के बाद से लगातार परिवर्तन गगरेट सीट पर 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कुलदीप कुमार ने जीत की हैट्रिक पूरी की थी। पर इसके बाद गगरेट सीट पर समीकरण बदले और 2007 में भाजपा से बलबीर सिंह ने सत्ता का सुख भोगा। 2012 में फिर चेहरे बदले और इस सीट पर कांग्रेस के राकेश कालिया ने कब्ज़ा जमाया। 2017 के चुनाव में राजेश ठाकुर ने गगरेट सीट फिर भाजपा के नाम की। इस सीट पर निरंतर राजनैतिक दलों की चल रही अदला बदली के बीच 2022 का चुनाव रोचक होना तय माना जा रहा है। सुलह : कांग्रेस -भाजपा दोनों के खाते में दो - दो जीत सुलह विधानसभा क्षेत्र में पिछले चार चुनाव के नतीजों पर गौर करे तो दो बार भाजपा व 2 बार कांग्रेस ने इस सीट पर सत्ता का सुख भोगा है। 2003 के विधानसभा चुनाव में जगजीवन पाल ने जीत दर्ज कर ये सीट कांग्रेस के नाम की, तो 2007 के विधानसभा चुनाव में विपिन सिंह परमार ने भाजपा का झंडा लहराया। 2012 के चुनाव में फिर जगजीवन पाल ने इस सीट पर बाजी मारी और ये सीट कांग्रेस के नाम की। जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में विपिन सिंह परमार फिर भाजपा टिकट पर जीते। यानी पिछले चार चुनावो में इस सीट पर दोनों ही राजनैतिक दल बराबरी पर रहे है। धर्मशाला : उपचुनाव में भाजपा के पास ही रही सीट धर्मशाला सीट पर 1990 से लेकर 1998 तक भाजपा का ही राज रहा है। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने चंद्रेश कुमारी पर दांव खेला और लम्बे अंतराल के बाद इस सीट पर जीत दर्ज की। 2007 के विधानसभा चुनाव में फिर भाजपा ने इस सीट पर बाज़ी मारी और किशन कपूर यहाँ से विधायक बने। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सुधीर शर्मा को मैदान में उतारा और सीट अपने नाम की। 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर किशन कपूर ने फिर इस सीट को भाजपा की झोली में डाला। लोकसभा चुनाव 2019 में किशन कपूर ने बाज़ी मारी और सांसद बने जिसके बाद 2019 में धर्मशाला में उपचुनाव हुए और इस सीट पर भाजपा के ही विशाल नेहरिया ने जीत दर्ज की। दिलचस्प बात ये है कि उपचुनाव में कांग्रेस की जमानत जब्त हुई थी। वहीं तब दूसरे नंबर पर रहने वाले राकेश चौधरी अब आप में शामिल हो चुके है। काँगड़ा : लम्बे वक्त से चल रहा भाजपा का वनवास काँगड़ा विधानसभा क्षेत्र में पिछले चार चुनाव के नतीजों पर नजर डाले तो इस सीट पर निरंतर सत्ता परिवर्तन हुआ है। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सुरिंदर कुमार ने जीत दर्ज की। 2007 के चुनाव में बीएसपी पार्टी के संजय चौधरी को जनता ने स्वीकार किया और काँगड़ा सीट बीएसपी पार्टी की हुई। 2012 के विधानसभा चुनाव में चौधरी सुरेंदर कुमार को हरा कर निर्दलीय मैदान में उतरे पवन काजल ने ये सीट अपने नाम की। इस बाद काजल कांग्रेस ने शामिल हुए। 2017 के चुनाव में पवन कुमार काजल कांग्रेस में शामिल हुए और काँगड़ा सीट फिर कांग्रेस की झोली में आई। बेशक काजल लगातार दो चुनाव जीतने में कामयाब रहे हो लेकिन पार्टी सिंबल के लिहाज से देखा जाएं तो यहां पिछले चार चुनाव से परिवर्तन होता आ रहा है। भरमौर : एक चुनाव जीतने के बाद एक हारते आ रहे भरमौरी भरमौर विधानसभा गद्दी जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। इस कारण भरमौर को गद्देरण भी कहा जाता है। भरमौर विधानसभा क्षेत्र में लगातार सत्ता की कुर्सी पर राजनीतिक दलों की अदला बदली रही है। पिछले चार चुनाव की बात की जाए तो 2003 के चुनाव में ठाकुर सिंह भरमौरी ने जीत दर्ज कर सत्ता की कुर्सी पर कांग्रेस को बैठाया। 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तुलसी राम ने भरमौर सीट भाजपा के नाम की। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ठाकुर सिंह भरमौरी पर दांव खेला तो भाजपा ने जिया लाल को मैदान में उतारा। भरमौरी ने 2012 में सीट पर जीत दर्ज की। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के जिया लाल ने फिर इस सीट से चुनाव लड़ा और ये सीट भाजपा की झोली में गई। लगातार चार चुनावों में इस सीट पर सत्ता परिवर्तन रहा है। लाहौल स्पीति : कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा लाहौल स्पीति विधानसभा सीट हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है, जहां 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। इस बार लाहौल स्पीति विधानसभा सीट के परिणाम किस पार्टी के पक्ष में होंगे, यह जनता तय करेगी लेकिन पिछले चार चुनावों का आकलन किया जाये तो इस सीट पर कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा ने सत्ता का सुख भोगा है। 2003 में कांग्रेस के रघबीर सिंह ने इस सीट पर जीत दर्ज की। 2007 में डॉ राम लाल मार्कंडा ने भाजपा का झंडा लहराया तो 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने नए चेहरे रवि ठाकुर को मैदान में उतार कर लाहौल स्पीति की कुर्सी अपने नाम की। 2017 के विधानसभा चुनाव में डॉ राम लाल मारकंडा ने न केवल इस सीट पर जीत दर्ज की बल्कि मंत्री पद हथियाने में भी कामयाब रहे। हालाँकि अब कयास ये भी लग रहे है कि आप भी इस निर्वाचन क्षेत्र में कई नेताओं से संपर्क में है। कुल्लू : यहां लगातार हो रहा है परिवर्तन कुल्लू विधानसभा क्षेत्र में इस बार सत्ता का सुख किसे मिलेगा ये तो जनता तय करेगी, लेकिन पिछले कुछ चुनाव के नतीजों को देखे तो इस सीट पर निरंतर दलों की अदला बदली देखने को मिली है। 2003 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो ये सीट कांग्रेस के हाथ लगी है। 2007 में वर्तमान में शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने ये सीट भाजपा की झोली में डाली। 2012 में फिर सत्ता परिवर्तन हुआ और इस सीट को एचएलपी ने अपने नाम किया। 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर इस सीट पर कांग्रेस के सुंदर सिंह ठाकुर ने जीत दर्ज कर ये सीट कांग्रेस की झोली में डाली। आनी : बारी -बारी कांग्रेस और भाजपा आनी विधानसभा क्षेत्र में 2003 के चुनाव में कांग्रेस के ईश्वर दास इस सीट से विधायक बने। 2007 में इस सीट पर किशोरी लाल ने भाजपा का परचम लहराया। 2012 के विधानसभा चुनाव में फिर जनता ने सत्ता में कांग्रेस को बैठाया और कांग्रेस के खूब राम ने इस सीट पर जीत दर्ज की। 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर सत्ता परिवर्तन हुआ और आनी सीट पर भाजपा के किशोरी लाल ने जीत दर्ज की। अब 2022 के चुनाव में सत्ता का सुख किसे मिलता है यह देखना रोचक होगा। करसोग : 1990 से लगातार हो रहा परिवर्तन करसोग विधानसभा क्षेत्र ऐसी सीट जहाँ हर पांच वर्ष बाद जनता ने विधायक की कुर्सी पर अलग अलग राजनैतिक दलों को मौका दिया। करसोग सीट पर 1990 से लेकर अब तक ऐसी कोई पार्टी नहीं रही है जिसने लगातार दो चुनाव जीते हो। विशेष तौर पर पिछले चार चुनाव की बात करे तो 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मस्त राम ने यहाँ जीत दर्ज की, जिसके बाद 2007 के चुनाव में फिर बदलाव आया और सत्ता की कुर्सी पर निर्दलीय उम्मीदवार हीरा लाल ने राज किया। 2012 के चुनाव में मनसा राम ने फिर एक बार कांग्रेस का परचम लहराया। 2017 के विधानसभा चुनाव में हीरा लाल भाजपा में शामिल हुए और करसोग की सीट भाजपा के नाम हुई। सुंदरनगर : हर पांच में बदलाव कर रही सुंदरनगर की जनता सुंदरनगर विधानसभा सीट के पिछले कुछ चुनावों पर नज़र डाले तो जनता का हर पांच वर्ष बाद विधायक से मोह भंग हुआ है। 1990 से लेकर अब तक इस सीट पर सत्ता का सुख भोगने के लिए कोई भी पार्टी रिपीट नहीं कर पाई है। पिछले चार चुनावों की बात की जाए तो 2003 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर सोहन लाल ठाकुर ने कांग्रेस को जीत दिलाई। 2007 के चुनाव में फिर बदलाव हुआ सुंदरनगर की जनता भाजपा के रूप सिंह पर मेहरबान हुई। 2012 में फिर विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने सत्ता का सुख भोगा और 2017 में भाजपा ने इस सीट पर कब्ज़ा जमाया। इस बार सुंदरनगर की सीट पर कौन विराजमान होता है और परिणाम किस पार्टी के पक्ष में होंगे ये तो जनता ही तय करेगी। फिलवक्त इस सीट पर चली आ रही सत्ता परिवर्तन की प्रथा के अनुसार भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ सकती है। नूरपुर : लगातार जीतने में कोई कामयाब नहीं नूरपुर निर्वाचन क्षेत्र में 1996 में हुए उपचुनाव के बाद से ही इस सीट पर शासन के लिए लगातार परिवर्तन देखने को मिला है। पिछले चार चुनाव के नतीजों पर गौर फरमाएं तो यहाँ की जनता ने हर पांच वर्ष में बदलाव किया है। 2003 के विधानसभा चुनाव में सत महाजन ने कांग्रेस को इस सीट पर जीत दिलाई। 2007 के विधानसभा चुनाव में राकेश पठानिया आज़ाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे और जीत का परचम लहराया। 2012 में कांग्रेस ने अजय महाजन पर दांव खेला और जनता ने कांग्रेस पार्टी पर विश्वास जताया। 2017 के विधानसभा चुनाव में राकेश पठानिया भाजपा में शामिल हुए और मंत्री पद हासिल करने के साथ इस सीट पर भाजपा की जीत हुई लेकिन इस बार नतीजे किस पार्टी के पक्ष में होंगे ये कहना मुश्किल है। नालागढ़ : हरिनारायण सैणी के बाद कोई नहीं जीता लगातार दो चुनाव नालागढ़ हिमाचल प्रदेश की वो सीट जहाँ पर ज्यादातर कांग्रेस का ही दबदबा रहा है, लेकिन वर्ष 1998 में पहली बार यहां से भाजपा जीती। तब से तत्कालीन विधायक ने तीन बार जीत दर्ज कर यहां से लगातार जीते, लेकिन उसके बाद यह सीट फिर से कांग्रेस के हाथों में चली गई। 1998 में पहली बार भाजपा को जीत मिली और पूर्व विधायक स्व. हरिनारायण सैणी की जीत का यह रथ वर्ष 2003, 2007 में जारी रहा। हरिनारायण सैणी के निधन के बाद 2011 में नालागढ़ सीट पर उपचुनाव हुए। 2011 के उपचुनाव में समीकरण बदले और तब सत्तारूढ़ दल भाजपा इस सीट पर रिपीट नहीं कर पाई और यह सीट फिर से कांग्रेस के हाथों में आई। तब यहां से लखविंदर राणा ने जीत दर्ज की। 2012 के विधानसभा चुनाव में केएल ठाकुर ने फिर भाजपा का परचम लहराया। 2017 में कांग्रेस के लखविंदर सिंह राणा ने फिर जीत हासिल की। वहीं बीते दिनों कांग्रेस नेता और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष धर्मपाल चौहान के आप में जाने के बाद ही इस क्षेत्र के समीकरण बदलते दिख रहे है। दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही दलों के कई ने नेता भी आप के संपर्क में बताएं जा रहे है। दिग्गजों की साख भी दांव पर जिन 16 विधानसभा सीटों पर लगातार परिवर्तन हो रहा है उनमें से दो विधानसभा सीटें ऐसी भी है जहाँ मौजूदा सरकार के मंत्रियों की साख भी दांव पर है। नूरपुर विधानसभा क्षेत्र से वन मंत्री राकेश पठानिया और लाहौल स्पीति से तकनीकी शिक्षा मंत्री रामलाल मार्कंडेय के सामने अपनी सीट बरकरार रखने की चुनौती होगी। नूरपुर में 1996 से ही हर पांच वर्ष में सत्ता की कुर्सी पर कभी भाजपा, कभी कांग्रेस तो कभी निर्दलियों का राज़ रहा है। ऐसे में लम्बे समय से चले आ रहे इस सत्ता परिवर्तन के सियासी रिवाज में वन मंत्री राकेश पठानिया का बड़ा इम्तिहान होना है। लाहौल स्पीति से तकनीकी शिक्षा मंत्री रामलाल मारकंडा भी इस फेहरिस्त में शामिल है। मंडी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद कई मंत्रियों की साख दांव पर थी इसमें मंत्री रामलाल मारकंडा भी चर्चा में रहे। 1998 से लगातार लाहौल स्पीति की सीट पर दलों की अदला बदली रही है। ऐसे में मारकंडा पर निसंदेह सबकी निगाहें रहने वाली है। दो कैबिनेट मंत्रियों के अलावा विधानसभा स्पीकर व जयराम सरकार में ही स्वास्थ्य मंत्री रह चुके विपिन सिंह परमार के सामने भी खुद को साबित करने की चुनौती होगी। परमार भी उन नेताओं की लिस्ट में शामिल है जो एक चुनाव जीतने के बाद एक हारते आ रहे है।
पंजाब में अब पूर्व विधायकों को सिर्फ एक टर्म की पेंशन मिलेगी। इसके साथ-साथ पूर्व विधायकों को मिलने वाले फैमिली भत्तों में भी कटौती की जाएगी। किसी भी पार्टी का उम्मीदवार चाहे कितनी भी बार का विधायक रहा हो उसे एक ही पेंशन मिलेगी। इसी अनुपात में फैमिली पेंशन भी कम होगी। पंजाब की भगवंत मान सरकार के इस फैसले की कहीं प्रशंसा हो रही है तो कहीं निंदा। कोई इस फैसले को ऐतिहासिक फैसला बता रहा है तो किसी का मानना है कि इस फैसले से सरकार को ज्यादा लाभ नहीं मिलने वाला। बहरहाल, ये निर्णय अच्छा है या बुरा, इसे लेकर विश्लेषण जारी है। मगर ये स्पष्ट है कि पंजाब सरकार के इस फैसले के बाद बाकी राज्य सरकारों पर भी दबाव बनना शुरू हो गया है। इस फैसले का प्रभाव हिमाचल में भी देखने को मिल रहा है। यहां भी जनता कुछ ऐसा ही चाहती है, खासतौर पर प्रदेश के कर्मचारी ये मांग करने लगे है। दरअसल, पंजाब सरकार द्वारा ये फैसला पंजाब की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए लिया गया है। फिलवक्त पंजाब की आर्थिक स्थिति बदहाल है। पंजाब पर लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसका जिक्र सीएम भगवंत मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान भी कर चुके हैं। सरकार का मानना है कि इस फैसले के बाद विधायकों की पेंशन पर खर्च हो रहे पैसे को युवाओं व अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर खर्चा जा सकेगा। बता दें कि छह बार विधायक रहीं पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल, लाल सिंह, सरवन सिंह फिल्लौर को हर महीने तीन लाख 25 हजार रुपये मिलते हैं। रवि इंद्र सिंह, बलविंदर सिंह को हर महीने दो लाख 75 हजार रुपये की राशि मिलती है। वहीं 10 बार के विधायक की पेंशन छह लाख 62 हजार प्रतिमाह है। अब सभी पूर्व व मौजूदा विधायकों को सिर्फ 75 हजार रुपये पेंशन मिलेगी। मान सरकार पांच साल में 80 करोड़ रुपये की बचत करेगी और यह राशि जन कल्याणकारी कार्यों में खर्च की जाएगी। इस फैसले में एक और पेच भी अटका हुआ है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले का पंजाब को कोई वित्तीय लाभ नहीं होगा क्योंकि कोई भी व्यक्ति जब रिटायर होता है तो उसे उस समय के नियमों के मुताबिक ही पेंशन मिलती है। जब 2004 में सरकार ने नई पेंशन योजना लागू की तो यह केवल नए कर्मचारियों पर ही लागू हुई न की पुराने कमचारियों पर। यही फार्मूला विधायकों की पेंशन पर भी लागू हो सकता है। हालांकि सरकार कानून बना कर ऐसा कर सकती है और विधानसभा में बहुमत होने के चलते आम आदमी पार्टी के लिए ये बिल्कुल भी मुश्किल नहीं होने वाला। क्या ये पुरानी पेंशन बहाल न करने का संकेत है ! नेताओं को मिलने वाली एक से अधिक पेंशन को लेकर लंबे समय से देश में बहस छिड़ी हुई है। वन पर्सन वन पेंशन की मांग कई संगठन उठाते रहे है। वहीं पिछले कुछ समय से देश के कई राज्यों में नई पेंशन के विरोध में भी कर्मचारी लामबंद होते दिखे है। कर्मचारियों का अक्सर ये सवाल रहा है कि जहां उन्हें नए पेंशन सिस्टम के जरिये एक पेंशन भी ढंग से नहीं मिल पाती वहीं नेताओं को दो तीन पुरानी पेंशन आखिर क्यों दी जाती है। कर्मचारियों को मनाने के लिए राजस्थान और छत्तीसगढ़ ने तो पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा भी कर दी। ऐसे में कई राज्यों पर पुरानी पेंशन बहाली को लेकर दबाव है। इस बीच अब पंजाब ने विधायकों की पेंशन और भत्तों में कटौती कर दी है। अब एक तरफ कर्मचारी इसे बड़ा निर्णय बता खुश हो रहे है तो दूसरी तरफ कुछ का मानना है कि सरकार द्वारा उनका एक बड़ा मुद्दा खत्म कर दिया गया है और शायद ये कर्मचारियों को पुरानी पेंशन न देने का एक संकेत हो सकता है।
देश के पांच बड़े राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर पेट्रोल डीजल के दाम लगातार बढ़ने लगे हैं। इसी को लेकर अब हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस पार्टी ने इसे मुद्दा बनाते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता और विधायक आशा कुमारी का कहना है कि जब चुनाव नहीं होते हैं तो भाजपा के लोग पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा देते हैं और ठीकरा पेट्रोल और डीजल कंपनी पर फोड़ते हैं। भाजपा कहती है यह हमारे हाथ में नहीं है क्योंकि पेट्रोल कंपनियां और डीजल कंपनी ही रेट बढ़ा रही है, लेकिन जब चुनाव नजदीक होते हैं तो भाजपा पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत रोक देती है। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा लोगों को लूटने में लगी हुई है ,जिससे लोग परेशान है। आशा कुमारी का कहना है कि यह दाम ऐसे ही बढ़ते जाएंगे और लोग परेशान होते रहेंगे लेकिन भाजपा को सिर्फ सत्ता चाहिए और उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं । उनका कहना है कि जिस तरह से चुनाव होने के बाद बीजेपी ने लगातार महंगाई से लोगों को त्रस्त किया है, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ाए है उसका जवाब आगामी विधानसभा चुनाव में जनता देगी।
विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में सियासी उठापटक देखने को मिल रही है। नेता एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे हैं। इसी कड़ी में वन मंत्री राकेश पठानिया ने कांग्रेस और आप पर निशाना साधा है। पठानिया का कहना है कि आज देश कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ रहा है। कांग्रेसी नेता भी अब जान चुके हैं कि जिस कश्ती में वे सवार हैं, उस कश्ती में छेद हो गया है। यही वजह है कि कांग्रेस से हताश परेशान होकर नेता आम आदमी पार्टी का रुख कर रहे हैं। पठानिया का कहना है कि हिमाचल में आप का कोई वजूद नहीं है और ना ही आने वाले समय में होगा। हिमाचल के अलग समीकरण हैं और पंजाब के अलग। पंजाब के लोग अकाली और कांग्रेस दोनों से परेशान थे जिसकी वजह से आप पंजाब में सरकार बनाने में कामयाब हो गई ।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक है और नेताओं में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर भाजपा पर जमकर निशाना साध रहे है। उनका कहना है कि कांग्रेस इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। प्रदेश में क्षेत्रीय दलों का कोई अस्तित्व नहीं रहा है। चुनावों में कांग्रेस का मुकाबला सत्तासीन भाजपा के साथ होगा। आम आदमी पार्टी पहाड़ी प्रदेश में अपनी जड़ें नहीं जमा पाएगी। उनका कहना है कि भाजपा सरकार के पूरे हो रहे कार्यकाल में प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। प्रदेश की आर्थिक दशा पूरी तरह बिगड़ कर रह गई है। वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, जबकि करोड़ों रुपए की फिजूलखर्ची बड़े-बड़े विज्ञापन होर्डिंग लगाकर की जा रही है। उनका कहना है कि विकास जमीन पर दिखाई देता है, लेकिन विकास करने में नाकाम रही जयराम सरकार अब गांव और गली कूचों में जल जीवन मिशन के आए बजट में मितव्ययिता कर राजनीतिक मंसूबे पूरे करने के लिए अब होर्डिंग लगाने में जुटी है। कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि जनता समझदार है और जानती है कि हर घर में नल कब लगे और समुचित पेयजल कब उपलब्ध हुआ। इसका जवाब चुनावों में जनता अवश्य देगी।
यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election Result) में प्रचंड जीत के बाद गुरुवार को योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है। इसके साथ वह लगातार दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। केंद्रीय पर्यवेक्षक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और सह-पर्यवेक्षक व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस बात का ऐलान किया है। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश खन्ना ने योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद सर्वसम्मति से उनको नेता चुना गया है।
पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को दूसरी बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है । धामी के साथ आठ मंत्रियों को भी राज्यपाल ने शपथ दिलाई। नई कैबिनेट में पुराने और नए चेहरों का मिश्रण किया गया है। इसमें धामी के पुराने मंत्रिमंडल के पांच मंत्रियों को फिर से जगह मिली है। वहीं, पिछली विधानसभा के अध्यक्ष रहे प्रेमचंद्र अग्रवाल को भी धामी कैबिनेट में शामिल किया गया है। नए चेहरों के रूप में सौरभ बहुगुणा और चंदन राम दास को भी इस कैबिनेट में शामिल किया गया है। पिछली बार जब धामी ने शपथ ली थी तो उनके साथ 11 विधायक मंत्री बनाए गए थे। इनमें से पांच, रेखा आर्य, सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, सतपाल महाराज और धन सिंह रावत को दोबारा मंत्री बनाया गया है । वहीं, तीन मंत्रियों अरविंद पांडेय, बिशन सिंह चुफाल और बंशीधर भगत को नई कैबिनेट में जगह नहीं मिली। इनकी जगह तीन नए चेहरे मंत्रिमंडल का हिस्सा होंगे। धामी मंत्रिमंडल तीन नए चेहरों को मौका मिला है। इनमें पिछली विधानसभा के अध्यक्ष रहे प्रेमचंद अग्रवाल सबसे अहम हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा को भी धामी कैबिनेट में जगह मिली है। 43 साल के बहुगुणा और रेखा आर्या धामी कैबिनेट के सबसे युवा चेहरे हैं। सौरभ सितारगंज से जीतकर लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। सौरभ के दादा हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। बागेश्वर से जीते चंदन राम दास को भी कैबिनेट में जगह मिली है।
तो भाई को हटाकर भाई चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है। सोलन निर्वाचन क्षेत्र की सियासत का ताजा हाल ये ही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में यहाँ ससुर दामाद आमने -सामने थे। वहीं 2022 में भाजपा टिकट के लिए दो भाइयों में मुकाबला देखने को मिल सकता है। पिछला चुनाव लड़ चुके डॉ राजेश कश्यप जहां चुनाव के लिए तैयार दिख रहे है, वहीं उनके बड़े भाई और दो बार सांसद रहे वीरेंद्र कश्यप भी चुनाव लड़ने से इंकार नहीं कर रहे। फर्स्ट वर्डिक्ट के साथ विशेष बातचीत में वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि उनकी निजी इच्छा नहीं है किन्तु यदि पार्टी कहती है तो वे तैयार है। विदित रहे कि वीरेंद्र कश्यप के विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर काफी वक्त से कयास लग रहे है। दरअसल भाजपा का ही एक गुट डॉ राजेश कश्यप को पसंद नहीं करता। ऐसे में माहिर मानते है कि विरोधी वीरेंद्र कश्यप की एंट्री की बिसात पर डॉ राजेश कश्यप का पत्ता काटने से गुरेज नहीं करेंगे। हालांकि इसमें कोई संशय नहीं है कि फिलहाल तो भाजपा में डॉ राजेश कश्यप का ही सिक्का चल रहा है। पर पल -पल बदलती राजनीति में कुछ भी मुमकिन है। वहीं हाल फिलहाल ही वीरेंदर कश्यप को भाजपा ने एक झटका भी दिया है। दरससल राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए भाजपा ने डॉ सिकंदर कुमार को प्रत्याशी घोषित कर दिया है और इस घोषणा ने कई नेताओं के अरमानों पर पानी फेर दिया है। इनमे से एक नाम है प्रो वीरेंद्र कश्यप का भी है । प्रो वीरेंद्र कश्यप ने भी टिकट माँगा था लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वीरेंद्र कश्यप वर्ष 2009 और 2014 में शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे है लेकिन पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद कयास लग रहे थे कि वीरेंद्र कश्यप को प्रदेश की सियासत में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। 2019 में प्रदेश अध्यक्ष के पड़ के लिए भी उनका नाम चर्चा में रहा लेकिन तब कश्यप रेस में डॉ राजीव बिंदल से पिछड़ गए। इसके बाद वर्ष 2020 में जब स्वास्थय घोटाले के बाद डॉ राजीव बिंदल ने इस्तीफा दिया तब फिर प्रो वीरेंद्र कश्यप क नाम अध्यक्ष पड़ के लिए उछला लेकिन ताजपोशी हुई सुरेश कश्यप की। अब राज्यसभा के लिए भी पार्टी ने वीरेंद्र कश्यप को तवज्जो नहीं दी है। अब पार्टी विधानसभा में किस भाई को चुनती है और किसे नहीं ये देखना दिलचस्ब होगा।
- गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वालों को तवज्जो देती आ रही है आप - दल बदलने वाले नेताओं के क्या पूरे होंगे अरमान ? जिन्हें पता है कि कांग्रेस और भाजपा में दाल नहीं गलने वाली वो अब आप का रुख कर रहे है। पर सवाल ये है कि क्या आम आदमी पार्टी में इन नेताओं की दाल गलेगी। हिमाचल में अब तक जो नेता आप में गए है उनमें कांग्रेसी अधिक है, और अधिकांश ऐसे है जो विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक है। कोई पौंटा साहिब का विधायक बनना चाहता है, तो कोई फतेहपुर, नालागढ़ या अन्य किसी क्षेत्र का। इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि कांग्रेस में इन्हें टिकट मिलने की सम्भावना न के बराबर थी, सो इन्होंने मौके की नजाकत को समझते हुए आप का रुख कर लिया। ऐसा नहीं है कि भाजपा को खतरा न हो, भाजपा के भी कई नेता आप के संपर्क में बताये जा रहे है। विधायक बनने कि चाह में आगामी कुछ दिनों में कई भाजपा नेता भी आप में शामिल होते दिख सकते है। पर यक्ष प्रश्न ये है कि क्या दल बदलने वाले इन नेताओं को आप का टिकट मिलेगा ? यदि आप के दिल्ली और पंजाब मॉडल का विश्लेषण किया जाएँ तो पार्टी ने हमेशा गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि से आए लोगों को तवज्जो दी है। ऐसे में क्या आम आदमी पार्टी हिमाचल में आम आदमी पर दल बदलकर आएं नेताओं को तवज्जो देगी, ये फिलवक्त बड़ा सवाल है। जानकार मानते है कि आम आदमी पार्टी वाकिफ है कि हिमाचल में आगामी विधानसभा चुनाव में कोई चमत्कार नहीं होगा, यहाँ पार्टी की कोशिश सिर्फ पाँव मजबूत करने की होगी। पार्टी के पास न जमीनी संगठन है और न चेहरा, ऐसे में रातों -रात सिर्फ पार्टी अपनी मौजूदगी दर्ज करवा सकती है। ऐसे में मुमकिन है दल बदलने वाले कई नेताओं के टिकट का अरमान इस बार पूरा हो जाएं। सावधान कांग्रेस : कहीं खेल न बिगाड़ दे आप ! उधर आम आदमी पार्टी ने निश्चित तौर पर कांग्रेस की धड़कन बढ़ा दी है। 1990 से अब तक हर चुनाव में हिमाचल में बदलाव के लिए वोट होता आ रहा है और यदि ये वोट विभाजित होता है तो कांग्रेस का नुकसान तय है। भले ही कांग्रेस आप फैक्टर को नकार रही हो लेकिन गोवा और उत्तराखण्ड में आप व अन्य दलों ने कांग्रेस का खूब खेल बिगाड़ा है। गोवा में भाजपा और कांग्रेस गठबंधन के बीच आठ प्रतिशत वोट का अंतर रहा है। गोवा में आप ने 6 . 8 प्रतिशत और तृणमूल कांग्रेस ने 5 .2 प्रतिशत वोट हासिल किये, जो कांग्रेस की हार का बड़ा कारण बना। इसी तरह उत्तराखण्ड में कांग्रेस और भाजपा के बीच करीब साढ़े छ प्रतिशत वोट का अंतर रहा, जबकि बहुजन समाज पार्टी और आप ने मिलकर करीब आठ प्रतिशत वोट हासिल किये है। ऐसे में यदि आप हिमाचल में सात विरोधी वोट बाँट लेती है तो कांग्रेस का सत्ता वापसी का ख्वाब अधूरा रह सकता है।
सियासत में कुछ स्थायी नहीं होता, न नीति, न सिद्धांत। न कोई स्थायी मित्र होता है और न स्थायी शत्रु। यदि कुछ स्थायी है तो वो है अवसरवाद। 'पार्टी विथ डिसिप्लिन' भाजपा भी इससे अछूती नहीं है। यहाँ भी 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' का सिद्धांत ही लागू होता है। ये विचार, ये भाव विरोधियों के नहीं है, अपितु खुद भाजपाइयों के है। दरअसल जब से पुष्कर सिंह धामी को उत्तरखंड का सीएम घोषित किया गया है हिमाचल भाजपा में मानो बवाल आ गया है। पार्टी आलाकमान के इस निर्णय से मानो धूमल समर्थकों के पुराने जख्म खुरच भी गए और उन पर नमक भी छिड़क गया। धूमल के निष्ठावान खुलकर सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे है। #मनमर्जियां वायरल हो रहा है और पार्टी के डबल स्टैण्डर्ड पर सवाल उठाये जा रहे है। दरअसल, हाल ही में हुए उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड जीत मिली है। भाजपा तो जीत गई लेकिन खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनाव हार गए। इसके बाद सवाल ये था कि क्या भाजपा खुद चुनाव हार चुके नेता को मुख्यमंत्री बनाएगी। 11 दिन के इंतजार के बाद 21 मार्च को इस सवाल का जवाब मिला और आलाकमान ने धामी को ही मुख्यमंत्री बनाया। ठीक ऐसी ही स्थिति 2017 में हिमाचल प्रदेश में भी बनी थी। हालंकि तब पार्टी विपक्ष में थी लेकिन चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री प्रो प्रेमकुमार धूमल के चेहरे पर लड़ा गया था। तब अंतिम समय तक पार्टी ने सीएम फेस नहीं घोषित किया था लेकिन जब पार्टी की स्थिति बिगड़ती दिखी तो चुनाव से 10 दिन पूर्व धूमल को सीएम फेस घोषित करना पड़ा। दांव सही पड़ा और भाजपा सत्ता में लौटी, पर खुद धूमल चुनाव हार गए। तब धूमल समर्थकों ने उन्हें ही सीएम बनाने की मांग की, कई विधायकों ने अपनी सीट छोड़ने की पेशकश भी की। पर पुष्कर की तरह आलाकमान का आशीर्वाद धूमल को नहीं मिला। इसी बात की टीस धूमल समर्थकों में है। अब मौका हाथ लगा है तो समर्थक पार्टी के सिद्धांतो पर भी सवाल उठा रहे है और डबल स्टैंडर्ड्स पर भी। बहरहाल चुनाव हारने के बावजूद पुष्कर सिंह धामी को मौका मिला है और कहा जा रहा है की पुष्कर फ्लावर नहीं फायर है। तो क्या धूमल में फायर कम थी ? या सीधे कहे तो क्या धूमल में अब भाजपा को फायर नहीं दिखती ? दरअसल ऐसा बिलकुल नहीं है। बेशक खुद प्रो प्रेम कुमार धूमल इस वक्त किसी उच्च पद पर न हो लेकिन उनके पुत्र अनुराग ठाकुर मोदी कैबिनेट में ताकतवर मंत्री भी है और राष्ट्रीय सियासत का उभरता सितारा भी। ऐसे में धूमल की उपेक्षा की बात में कोई तर्क नहीं दिखता। समर्थकों को ये भी सोचना होगा कि यदि धूमल इस वक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री होते तो क्या अनुराग भी केंद्रीय मंत्री बनते ?
- कौन - कौन आप में आएगा, 6 तारीख को पता चल जायेगा ! - आप में कई बड़े नेताओं के आने के कयास आप की एंट्री ने हिमाचल की ठंडी लग रही सियासत को ताप दे दिया है। पंजाब में मिली प्रचंड जीत के बाद अमूमन रोजाना हिमाचल से कई नेताओं के आप में जाने की खबरें आ रही है, विशेषकर कांग्रेस से। हालांकि इनमें पहली पंक्ति के नेता नहीं है, लेकिन दूसरी व तीसरी पंक्ति के कई नेता आप में शामिल हो चुके है। इस बीच 6 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय आयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मंडी में रोड शो करेंगे। माना जा रहा है कि इसी दौरान खाली पड़ी पहली पंक्ति भी कुछ हद तक भर दी जाएगी। कई नेताओं के आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने के कयास लग रहे है जिनमें कांग्रेस और भाजपा दोनों के नेता शामिल है। कई विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व सांसद भी आप के कांटेक्ट में बताये जा रहे है। यदि ऐसा होता है तो संभवतः 1998 के बाद पहली बार हिमाचल में कोई तीसरी पार्टी दमदार उपस्तिथि दर्ज करवाती दिख सकती है। अरविन्द केजरीवाल और भगवंत मान के रोड शो के लिए आप ने मंडी को चुना है। वहीं मंडी जो खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गढ़ है। यहाँ जयराम ठाकुर के प्रभाव को इसी आंकड़े से समझा जा सकता है कि मंडी संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में भी भाजपा ने जिला के नौ संसदीय क्षेत्रों में से आठ में बढ़त बनाई थी। वीरभद्र सिंह के निधन के बाद सहानुभूति लहर भी यहाँ भाजपा को बढ़त लेने से नहीं रोक पाई। अब इसी मंडी में आप के रोड शो के कई मायने है। बड़ा सवाल ये है कि क्या आप मुख्यमंत्री के घर में ही भाजपा को कोई झटका देने वाली है। ऐसा इसलिए भी है क्यों कि 6 अप्रैल को भाजपा के कई नेताओं के आप में शामिल होने के कयास लग रहे है। बहरहाल इसमें कितनी हकीकत है ये तो 6 तारीख को ही पता चलेगा। पंडितजी के परिवार पर निगाहें : मंडी की सियासत का जिक्र पंडित सुखराम एंड फॅमिली के बगैर अधूरा है। पंडित जी और पोते आश्रय शर्मा फिलहाल कांग्रेस में है और उनके बेटे और मंडी सदर विधायक अनिल शर्मा भाजपा में। पर दोनों ही तरफ इस परिवार को तवज्जो मिलती नहीं दिख रही। ऐसे में सवाल ये है कि क्या आम आदमी पार्टी पंडित जी के परिवार का अगला ठिकाना हो सकता है ? हालांकि खुद अनिल शर्मा इससे इंकार कर रहे है, पर सियात में इंकार कब इकरार में बदला जाए पता नहीं चलता।
एक ऐसी राजकुमारी जो देश को आज़ाद करवाने के लिए तपस्वी बन गयी, एक प्रख्यात गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और एक सामाजिक कार्यकर्ता बनी, महात्मा गाँधी से प्रभावित हो कर आज़ादी के आंदोलन से जुडी, जेल गई। आज़ादी के बाद हिमाचल से सांसद चुनी गई और दस साल तक स्वास्थ्य मंत्री रही। देश की पहली महिला कैबिनेट मंत्री होने का सम्मान भी उन्हें प्राप्त है। वो महिला थी राजकुमारी अमृत कौर। ये बहुत कम लोग जानते है की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बनाने में राजकुमारी अमृत कौर का बड़ा हाथ है। शिमला के समर हिल में एक रेस्ट हाउस है, राजकुमारी अमृत कौर गेस्ट हाउस जो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के स्टाफ के लिए है। देशभर में सेवाएं दे रहे एम्स के डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ यहाँ आकर छुट्टियां बिता सकते है, वो भी निशुल्क। दरअसल, ये ईमारत 'मैनरविल' स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर का पैतृक आवास थी। इसे अमृत कौर ने एम्स को डोनेट किया था। आज निसंदेह एम्स देश का सबसे बड़ा और सबसे विश्वसनीय स्वास्थ्य संस्थान है। इस एम्स की कल्पना को मूर्त रूप देने में राजकुमारी अमृत कौर का बड़ा योगदान रहा रहा है। उनके स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए ही एम्स बना, वे एम्स की पहली अध्यक्ष भी बनाई गई। उस दौर में देश नया - नया आज़ाद हुआ था और आर्थिक तौर पर भी पिछड़ा हुआ था। तब एम्स की स्थापना के लिए राजकुमारी अमृत कौर ने न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम जर्मनी, स्वीडन और अमेरिका जैसे देशों से फंडिंग का इंतजाम भी किया था। एम्स की वेबसाइट पर भी इसके निर्माण का श्रेय तीन लोगों को दिया गया है, पहले जवाहरलाल नेहरू, दूसरी राजकुमारी अमृत कौर और तीसरे एक भारतीय सिविल सेवक सर जोसेफ भोरे। एम्स की ऑफिसियल वेबसाइट पर लिखा है कि भारत को स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक तकनीकों से परिपूर्ण देश बनाना पंडित जवाहरलाल नेहरू का सपना था और आजादी के तुरंत बाद उन्होंने इसे हासिल करने के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार किया। नेहरू का सपना था दक्षिण पूर्व एशिया में एक ऐसा केंद्र स्थापित किया जाए जो चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को गति प्रदान करे और इस सपने को पूरा करने में उनका साथ दिया उनकी स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने। राजपरिवार में जन्मी, करीब 17 साल रही महात्मा गांधी की सेक्रेटरी लखनऊ, 2 फरवरी 1889, पंजाब के कपूरथला राज्य के राजसी परिवार से ताल्लुख रखने वाले राजा हरनाम सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया, नाम रखा गया अमृत कौर। बचपन से ही बेहद प्रतिभावान, इंग्लैंड के डोरसेट में स्थिति शेरबोर्न स्कूल फॉर गर्ल्स से स्कूली पढ़ाई पूरी की। किताबों के साथ -साथ खेल के मैदान में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। हॉकी से लेकर क्रिकेट तक खेला। स्कूली शिक्षा पूरी हुई तो परिवार ने उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफ़ोर्ड भेज दिया। शिक्षा पूरी कर 1918 में वतन वापस लौटी और इसके बाद हुआ 1919 का जलियांवाला बाग़ हत्याकांड। इस हत्याकांड ने राजकुमारी अमृत कौर को झकझोर कर रख दिया और उन्होंने निश्चय कर लिया कि देश की आज़ादी और उत्थान के लिए कुछ करना है, सो सियासत का रास्ते पर निकल पड़ी। राजकुमारी अमृत कौर महात्मा गाँधी से बेहद प्रभावित थी। उस समय उनके पिता हरनाम सिंह से मिलने गोपालकृष्ण गोखले सहित कई बड़े नेता आते थे। उनके ज़रिए ही राजकुमारी अमृत कौर को महात्मा गांधी के बारे में अधिक जानकारी मिली। हालांकि उनके माता-पिता नहीं चाहते थे कि वो आज़ादी की लड़ाई में भाग लें, राजकुमारी अमृत कौर तो ठान चुकी थी। वे निरंतर महात्मा गांधी को खत लिखती रही। 1927 में मार्गरेट कजिन्स के साथ मिलकर उन्होंने ऑल इंडिया विमेंस कांफ्रेंस की शुरुआत की और बाद में इसकी प्रेसिडेंट भी बनीं। इसी दौरान एक दिन अचानक राजकुमारी अमृत कौर को एक खत मिला, ये खत लिखा था महात्मा गांधी ने। उस खत में महात्मा गांधी ने लिखा, 'मैं एक ऐसी महिला की तलाश में हूं जिसे अपने ध्येय का भान हो। क्या तुम वो महिला हो, क्या तुम वो बन सकती हो? ' बस फिर क्या था राजकुमारी अमृत कौर आज़ादी की लड़ाई से जुड़ गईं। इस दौरान दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने की वजह से जेल भी गईं। वे करीब 17 सालों तक महात्मा गांधी की सेक्रेटरी रही। महात्मा गांधी के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने भौतिक जीवन की सभी सुख-सुविधाओं को छोड़ दिया और तपस्वी का जीवन अपना लिया। ब्रिटिश हुकूमत ने लगाया था राजद्रोह का आरोप अमृत कौर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रतिनिधि के तौर पर सन् 1937 में पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के बन्नू गईं। ब्रिटिश सरकार को यह बात नागवार गुजरी और राजद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। उन्होंने सभी को मताधिकार दिए जाने की भी वकालत की और भारतीय मताधिकार व संवैधानिक सुधार के लिए गठित ‘लोथियन समिति’ तथा ब्रिटिश पार्लियामेंट की संवैधानिक सुधारों के लिए बनी संयुक्त चयन समिति के सामने भी अपना पक्ष रखा। अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की सह-संस्थापक महिलाओं की दयनीय स्थिति को देखते हुए 1927 में ‘अखिल भारतीय महिला सम्मेलन’ की स्थापना की गई। कौर इसकी सह-संस्थापक थीं। वह 1930 में इसकी सचिव और 1933 में अध्यक्ष बनीं। उन्होंने ‘ऑल इंडिया विमेंस एजुकेशन फंड एसोसिएशन’ के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और नई दिल्ली के ‘लेडी इर्विन कॉलेज’ की कार्यकारी समिति की सदस्य रहीं। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘शिक्षा सलाहकार बोर्ड’ का सदस्य भी बनाया, जिससे उन्होंने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 1945 में लंदन और 1946 में पेरिस के यूनेस्को सम्मेलन में भारतीय सदस्य के रूप में भेजा गया था। वह ‘अखिल भारतीय बुनकर संघ’ के न्यासी बोर्ड की सदस्य भी रहीं। कौर 14 साल तक इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की चेयरपर्सन भी रहीं। देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनी कौर जब देश आज़ाद हुआ, तब उन्होंने हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। राजकुमारी अमृत कौर सिर्फ चुनाव ही नहीं जीतीं, बल्कि आज़ाद भारत की पहली कैबिनेट में हेल्थ मिनिस्टर भी बनीं। वे लगातार दस सालों तक इस पद पर बनी रहीं। वर्ल्ड हेल्थ असेम्बली की प्रेसिडेंट भी बनीं। इससे पहले कोई भी महिला इस पद तक नहीं पहुंची थी। यही नहीं इस पद पर पहुंचने वाली वो एशिया से पहली व्यक्ति थीं। स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई संस्थान शुरू किए, जैसे इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर, ट्यूबरक्लोसिस एसोसियेशन ऑफ इंडिया, राजकुमारी अमृत कौर कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, और सेंट्रल लेप्रोसी एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट। इन सभी के अलावा नई दिल्ली में एम्स की स्थापना में अमृत कौर ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। टाइम मैगज़ीन ने दी वुमन ऑफ द ईयर लिस्ट में जगह दुनिया की मशहूर टाइम मैगज़ीन ने 2020 में बेटे 100 सालों के लिए वुमन ऑफ द ईयर की लिस्ट ज़ारी की थी। भारत से इस लिस्ट में दो नाम हैं, एक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिन्हें साल 1976 के लिए इस लिस्ट में रखा गया। लिस्ट में शामिल दूसरा नाम है राजकुमारी अमृत कौर का, जिन्हें साल 1947 के लिए इस लिस्ट में जगह दी गई है।
उत्तराखंड में सीएम पर सस्पेंस खत्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की विधायक दल की बैठक में पुष्कर सिंह धामी को नेता चुना गया। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मीनाक्षी लेखी बतौर पर्वेक्षक मौजूद रहे। ये दोनों नेता आज एक विशेष प्लेन से देहरादून पहुंचे। धामी को नेता चुने जाने पर राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं पुष्कर धामी को बधाई देता हूं और मुझे विश्वास है कि उत्तराखंड इनके नेतृत्व में प्रगति करेगा। धामी सरकार चला चुके हैं। इन्हें सरकार चलाने का अनुभव है. छह महीने में धामी ने अपनी छाप छोड़ी है। राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा, ''उत्तराखंड में बीजेपी विधायक दल की बैठक में पुष्कर सिंह धामी को नेता चुने जाने पर मैं हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देशन में और धामी जी के नेतृत्व में उत्तराखंड का बहुआयामी और बहुत तेज़ गति से विकास होगा। '' बता दें कि उत्तराखंड में बीजेपी ने शानदार बहुमत तो हासिल कर लिया लेकिन मुख्यमंत्री धामी को खटीमा से हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, इसे लेकर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसे दूर करने के लिए बीजेपी में शीर्ष स्तर पर मंथन चला और अंत में धामी के नाम पर मुहर लगी। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 70 में से 47 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की. बीएसपी को दो और निर्दलीय को दो सीटें मिली।
पंजाब में मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। हरपाल चीमा को वित्त विभाग दिया गया है। वहीं गृह और आबकारी मंत्रालय सीएम भगवंत मान के पास ही रहेगा। 19 मार्च को पंजाब में 10 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई थी। जंडियाला के विधायक हरभजन सिंह ईटीओ को बिजली विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। गुरमीत सिंह मीत हेयर को शिक्षा मंत्री बनाया गया है। हरजोत सिंह बैंस को पर्यटन विभाग सौंपा गया है। डॉ. बलजीत कौर महिला एवं बाल विकास विभाग की बागडोर संभालेंगी। लालचंद कटारूचक्क को खाद्य आपूर्ति विभाग सौंपा गया है। लालजीत भुल्लर को परिवहन मंत्री बनाया गया है। ब्रह्म शंकर जिंपा को जल आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं डॉ. विजय सिंगला को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है। पंजाब में अभी सात नए मंत्री बनने हैं। कई बड़े चेहरे अभी मंत्री पद से दूर हैं। इनमें अमृतसर से कुंवर विजय प्रताप, अमन अरोड़ा, सर्वजीत कौर माणुके, जय सिंह रोढ़ी, डॉ. रवजोत ग्रेवाल और प्रो. बलजिंदर कौर का नाम शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने आस्ट्रेलियाई समकक्ष स्काट मारिसन (Scott Morrison) के साथ शिखर वार्ता की। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ही दोनों देशों में संबंध बहुत बेहतर हुए हैं। शिखर वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, शिक्षा और इनोवेशन, साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आने वाले समय में दोनों देश मिलकर काम करने वाले हैं। मोदी ने आगे कहा कि हमारा क्षेत्र बढ़ते परिवर्तन और बहुत दबाव का सामना कर रहा है और मुझे लगता है कि हमारे क्वाड लीडर्स ने हाल ही में हमें रूस के यूक्रेन पर आक्रमण पर चर्चा करने का भी एक बड़ा अवसर दिया है। CECA का शीघ्र पूरा होना महत्वपूर्ण पीएम ने कहा कि CECA (व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता) का शीघ्र पूरा होना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि क्वाड में भी हमारे बीच अच्छा सहयोग चल रहा है और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बता दें कि शिखर सम्मेलन में भारत में ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता होने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि कैनबरा भारत में कई क्षेत्रों में 1,500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा कर सकता है। इस महीने के अंत तक दोनों देशों के बीच जल्द फसल समझौता होने की भी उम्मीद है। फसल समझौते का उद्देश्य दोनों देशों या व्यापारिक ब्लॉकों के बीच कुछ सामानों पर व्यापार शुल्क को कम करना है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा के लिए पांच उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Election 2022) में आप को 92 सीटें मिली हैं। पंजाब कोटे से अब पार्टी मशहूर क्रिकेटर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh), राघव चड्ढा (Raghav Chadha) और डॉ संदीप पाठक (Dr. Sandeep Pathak) को राज्यसभा भेजेगी। आप ने चौथे प्रत्याशी के रूप में लवली यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक कुमार मित्तल (Ashok Kumar Mittal) का नाम फाइनल किया है। संजीव अरोड़ा (Sanjiv Arora) पंजाब से पांचवें राज्यसभा प्रत्याशी होंगे। अरोड़ा कृष्णा प्राण ब्रेस्ट कैंसर केयर चैरिटेबल के फाउंडर हैं। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में बंपर जीत के बाद राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है। हरभजन सिंह का नाम तो चर्चा में था, लेकिन बाकी दो को लेकर अटकलें चल रही थी। सोमवार को पार्टी की ओर से इस पर से सस्पेंस खत्म कर दिया गया पार्टी हरभजन को राज्यसभा मे भेजने के साथ-साथ राज्य के स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी भी दे सकती है। हरभजन के जिम्मे राज्य में खिलाड़ियों को सामने लाना और उनकी प्रतिभा को मांजने का काम होगा। 5 सीटें जीत सकती है आप अभी राज्यसभा में आप के तीन सांसद हैं। पंजाब में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। माना जा रहा है कि इन सभी पांच सीटों पर आप जीत दर्ज कर सकती है और इस तरह से अप्रैल में उच्च सदन में आप के सांसदों की संख्या बढ़कर 8 हो सकती है। अभी राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के तीन सदस्य हैं और ये सभी दिल्ली से हैं। इनमें राज्यसभा सांसद संजय सिंह, सुशील गुप्ता और एन. डी. गुप्ता हैं।
- जी 23 के तेवर तल्ख, बदलाव की सुगबुगाहट तेज ( फ़ोटो साभार- कार्टूनिस्ट अरविंद ) 'घर की कांग्रेस' से 'सबकी कांग्रेस' बने पार्टी, इसी मांग को लेकर कांग्रेस का जी - 23 गुट फिर सक्रिय है। इस मर्तबा जी -23 गुट के नेताओं के तेवर भी कुछ तल्ख दिख रहे है और कुनबा भी बढ़ता दिख रहा है। नेता सामूहिक और समावेशी लीडरशिप की मांग कर रहे है। गांधी परिवार को भी खुलकर मश्वरा दिया जा रहा है कि पार्टी की कमान अब नए लोगों को सँभालने दे। निसंदेह पांच राज्यों में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस का एक बड़ा तबका बदलाव की वकालत कर रहा है। अलबत्ता, पार्टी का एक बड़ा धड़ा अब भी गाँधी परिवार की जय जयकार करने में लगा है लेकिन इसमें कोई संशय नहीं है कि जल्द पार्टी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जानकार मानते है कि सम्भवतः कांग्रेस फिर विभाजित होने की दहलीज पर है। आजादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम की धुरी रही कांग्रेस, आजादी के बाद अकेली सबसे बड़ी पार्टी थी। एक वक्त था जब इस 'ग्रैंड ओल्ड पार्टी' को केंद्र की सत्ता में पूरे 25 सालों तक कोई सीधी टक्कर देने वाला भी नहीं था। आज आलम ये है कि कांग्रेस देश के केवल पांच राज्यों तक ही सीमित रह गई है, जिनमें से तीन में वो सिर्फ गठबंधन सरकार का हिस्सा है। आजादी के बाद से अभी तक 17 लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें गैर-नेहरू-गांधी परिवार के सात लोगों ने कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला है। यूँ देश की आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी के कुल 19 अध्यक्षों में सिर्फ पांच गांधी - नेहरू परिवार से रहे हैं। पर गौर करने लायक बात ये है कि अध्यक्ष पद पर इस परिवार का कब्ज़ा 37 सालों तक रहा है। वहीँ इन 75 वर्षों में से 53 वर्ष तक कांग्रेस ने सत्ता भोगी है। दिलचस्प बात ये है कि 53 में से 36 वर्षों तक प्रधानमंत्री की गद्दी गाँधी -नेहरू परिवार के पास रही है। पर अब 2014 से गाँधी परिवार की अगुवाई में कांग्रेस का ग्राफ निरंतर गिरता जा रहा है। ये है कारण है कि पार्टी के भीतर ही गाँधी परिवार के खिलाफ विद्रोह के सुर दिख रहे है। वहीँ कुछ नेता खुलकर गाँधी परिवार के खिलाफ बोलने से तो बच रहे है, लेकिन पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का मुद्दा उठा रहे है। तीन साल से पूर्णकालिक अध्यक्ष तक नहीं ! कांग्रेस की वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी पार्टी अध्यक्ष के पद पर 1998 से 2017 तक विराजमान रही है। 19 साल तक कांग्रेस की अध्यक्ष रहने का उनका सबसे लंबा रिकॉर्ड है। कांग्रेस 2004 और 2009 में सोनिया के नेतृत्व में सत्ता पर काबिज हुई और इस दरमियान कांग्रेस के युवराज के तौर पर राहुल राजनीति में कदम रखकर पार्टी में अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहे। युवराज को महाराज बनाने का औपचारिक ऐलान साल 2017 में हुआ, जब राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। राहुल के नेतृत्व में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब में कांग्रेस की जीत हुई। किन्तु 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम में कांग्रेस की करारी शिकस्त ने राहुल को अध्यक्ष पद छोड़ने को विवश कर दिया। राहुल परंपरागत सीट अमेठी भी हार गए। तदोपरांत राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और तब से पार्टी के पास कोई पूर्ण कालिक अध्यक्ष तक नहीं है। सोनिया गाँधी ही बतौर कार्यकारी अध्यक्ष पार्टी की कमान संभाल रही है। हार का ठीकरा सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष के सर क्यों ? उधर पांच राज्यों में मिली शिकस्त के बाद जैसा अपेक्षित था कांग्रेस में बैठकें हुई और इस बार एक्शन भी हुआ। पांचो राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों का इस्तीफा माँगा गया। कहते है सीडब्लूसी की बैठक में सोनिया गाँधी ने भी इस्तीफे की पेशकश की। यहाँ सवाल उत्तर प्रदेश को लेकर भी उठ रहे है जहाँ कमान खुद प्रियंका गाँधी संभाल रही थी। पूरे चुनाव के दौरान प्रियंका गाँधी खुद को पार्टी का चेहरा बता रही थी, फिर हार का ठीकरा सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष के सर क्यों ?
ये निर्विवाद तथ्य है कि देश में इस वक्त भाजपा सबसे मजबूत राजनैतिक दल है और उसे टक्कर देने में मोटे तौर पर कांग्रेस विफल रही है। हाल ही में हुए 5 राज्यों के चुनाव में भाजपा ने अपना लोहा मनवाया है। दूसरी तरफ कांग्रेस आगे बढ़ने के बजाए एक और कदम पीछे हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के प्रदर्शन से इतर आम आदमी पार्टी भी पंजाब में शानदार जीत दर्ज कर देश के सियासी समीकरणों को बदलती नजर आ रही है। भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों का वजूद हमेशा ही रहा है, आजादी से पहले राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में भी और आजादी के बाद भी। किन्तु उनकी भूमिका सिर्फ उनसे संबंधित राज्यों तक ही सीमित रही। हालांकि अब आम आदमी पार्टी इन परिस्थितियों को बदलती नज़र आ रही है। दिल्ली में कामयाबी से अपनी सरकार चलाने के बाद आम आदमी पार्टी ने पंजाब में भी कमाल कर दिखाया है। ज़ाहिर है पार्टी अब राष्ट्रीय दल बनने के पथ पर अग्रसर है। फिलवक्त देश में आठ राष्ट्रीय दल है और आम आदमी पार्टी भी इनमें जगह बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। अलबत्ता अभी आम आदमी पार्टी के लिए मंज़िल दूर सही, मगर असंभव नहीं। आप की इस जीत से राष्ट्रीय राजनीति के साथ साथ हिमाचल के सियासी समीकरण भी बदलते नज़र आ रहे है। ये पहले से ही तय माना जा रहा था कि अगर पार्टी पंजाब में बेहतर करती है तो इसकी आवाज़ हिमाचल प्रदेश में भी गूंजेगी। पंजाब में आप की बंपर जीत से हिमाचल प्रदेश में सियासी सुगबुगाहट तेज़ हो गई है। पार्टी काफी लम्बे समय से हिमाचल में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है। सियासी माहिर मान रहे है कि हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी (आप) की दस्तक आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा की रणनीति पर भारी पड़ सकती है। ये लगभग तय है कि शिमला नगर निगम चुनाव से आप हुंकार भरेगी और विधानसभा चुनाव में दमखम से उतरेंगी। राष्ट्रीय पार्टी का टैग हासिल करना लक्ष्य : देशभर में एक तबका आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के विकल्प के तौर पर देखने लगा है। वर्तमान में कांग्रेस और आप दोनों ही दलों की सरकारें दो -दो राज्यों में है। अब निश्चित तौर पर आप का टारगेट राष्ट्रीय पार्टी का टैग हासिल करना है। राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए तीन शर्तें होती है, इन तीन शर्तों में जो पार्टी एक शर्त भी पूरा करती है तो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलता है। पहला कोई भी दल जिसे चार राज्यों में प्रादेशिक (क्षेत्रीय दल) का दर्जा प्राप्त है उस दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल होता है। दूसरा, कोई दल तीन अलग- अलग राज्यों को मिलाकर लोकसभा की 2 फीसदी सीटें जीतता है। यानी कम से कम 11 सीटें जीतना जरूरी होता है, लेकिन यह 11 सीटें किसी एक राज्य से न होकर तीन अलग- अलग राज्यों से होनी चाहिए। तीसरा, यदि कोई पार्टी 4 लोकसभा सीटों के अलावा लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में 6 फीसदी वोट हासिल करती है तो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सकता है। निकट भविष्य में बेशक ये मुश्किल हो लेकिन आप की नजर हिमाचल या गुजरात में 6 से अधिक वोट हासिल करने पर होगी ताकि 2024 लोकसभा चुनाव में बेहतर कर वो राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर सकें। हिमाचल : सत्ता विरोधी वोट बंटा तो कांग्रेस को होगी मुश्किल ! चुनाव परिणाम में वोट प्रतिशत पर गौर करें तो उत्तराखंड में आप को 3.31 प्रतिशत वोट, वहीं गोवा में आप को 6.77 प्रतिशत वोट हासिल हुए है। ये वोट प्रतिशत भले ही सत्ता पर काबिज होने के लिए नाकाफी है मगर अन्य राजनीतिक दलों के समीकरण बनाने और बिगड़ने के लिए काफी है। प्रदेश में आप भले ही बेहतर न कर पाए मगर माना जा रहा है कि आप के आने से कांग्रेस के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है। 1985 के बाद हुए सभी विधानसभा चुनावों में प्रदेश की जनता बदलाव के लिए सत्ता विरोधी वोट करती आ रही है और यदि ये सत्ता विरोधी वोट बांटने में आप कामयाब रही तो कांग्रेस के अरमानों पर पानी फिर सकता है। वहीं एक तबका ऐसा भी है जो आप के दिल्ली मॉडल का मुरीद है, ऐसे में गुड गवर्नेंस की बात करने वाली भाजपा के लिए भी चुनौती कम नहीं होने वाली। कई नेता बदल सकते है पाला : हिमाचल का वर्तमान सियासी परिवेश आम आदमी पार्टी के लिए मुनासिब सिद्ध हो सकता है। दरअसल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां यहाँ अंतर्कलह से जूझ रही है और दोनों तरफ ऐसे नेताओं की कमी नहीं है जो पाला बदल सकते है। ऐसे में संभवतः आप के लिए हिमाचल में मौजूदगी दर्ज करवाना ज्यादा मुश्किल न हो। यूँ तो पार्टी यहां 2014 से पांव जमाने की कोशिश में है लेकिन न पार्टी के पास चेहरा है और न संगठन। पर अब मन जा रहा है कि आगामी कुछ दिनों में कई नेता आप ज्वाइन कर सकते है। पंजाब के चुनाव नतीजे के बाद हिमाचल प्रदेश में आप की सदस्यता लेने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। बहरहाल, आप के सामने पहली चुनौती शिमला नगर निगम चुनाव की है।
नेतृत्व परिवर्तन अनिवार्य, अभी नहीं तो कभी नहीं हिन्दुस्तान की सबसे बुजुर्ग पार्टी कांग्रेस अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही है। पांच राज्यों में हुए चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए 440 वाट का झटका साबित हुए है। पंजाब की सत्ता भी कांग्रेस के हाथों से खिसक गई है, यानी अब देश में सिर्फ दो राज्यों में कांग्रेस सत्ता पर काबिज है। हालांकि अन्य तीन राज्यों में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। वर्तमान स्थिति ये है कि पार्टी की विश्वसनीयता और नेतृत्व, दोनों सवालों के घेरे में है। स्पष्ट दिख रहा है कि लगातार मिल रही पराजय से कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता उदास है और हौंसला पस्त। पार्टी के पास फिलवक्त न दिशा है, न मजबूत चेहरा और न ही कोई ठोस रणनीति। सर्वविदित है की पार्टी का असल मर्ज बड़े नेताओं का बड़ा अहम और सुनहरे अतीत पर टिका उनका वहम है। मंथन और मंत्रणा तो खूब होती है पर किसी नतीजे पर पहुंच पार्टी की स्थिति सुधरती नज़र नहीं आ रही। पार्टी अपनी गलतियों, कमियों को दूर करने की बजाय उन्हें दोहराती जा रही है। ये कांग्रेस के लिए अलार्मिंग सिचुएशन है, यदि परिस्थितियों को अभी पक्ष में न किया गया तो फिर ये कभी नहीं हो पाएगा। पांच राज्यों में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि जनता के फैसले को विनम्रता से स्वीकार करें। हम इस हार से सीखेंगे। यहां सवाल ये है कि आखिर कांग्रेस को और कितना सीखना बाकी है। 137 साल पुरानी बुजुर्ग पार्टी के लिए ये संकेत अच्छे नहीं है। मई 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पीएम मोदी सत्ता में आए थे तब कांग्रेस शासित राज्यों की संख्या नौ थी जो अब दो है। पार्टी 2014 के बाद से 45 में से सिर्फ पांच चुनाव जीत पाई है। लग रहा है कि कांग्रेस के साथ बुरा होना यही नहीं थमेगा। विधानसभा चुनावों में हारने वाली कांग्रेस को अब राज्यसभा में भी तगड़ा झटका लगने वाला है। कांग्रेस के हाथ से राज्यसभा में विपक्ष की नेता का दर्जा भी जा सकता है। इस साल राज्यसभा के लिए द्विवार्षिक चुनाव होने के बाद, कांग्रेस के सदस्यों की संख्या में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में विपक्ष के नेता की स्थिति को बनाए रखने के लिए वह जरूरी संख्या के काफी नजदीक आ जाएगी। अगर पार्टी इस साल के अंत में हिमाचल और गुजरात चुनावों और अगले साल कर्नाटक विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने में असमर्थ रही तो राज्यसभा में विपक्ष की नेता का दर्जा भी खो देगी। नेतृत्व पर सवाल, कब होगा बदलाव : पार्टी की परफॉरमेंस के चर्चे बाहर ही नहीं अंदर भी खूब हो रहे है। आत्ममंथन के लिए हुई पार्टी की बैठक में कुछ बड़े नेताओं ने सीधे तौर पर पार्टी के नेतृत्व को आढ़े हाथों लिया है। सम्भवतः पार्टी में आपसी अंतर्कलह अभी और अधिक बढ़ सकता है। इस बीच जी 23 के नेताओं की बैठक भी हुई है जिससे आगामी दिनों में पार्टी के भीतर ही अंतर्कलह बढ़ता दिख रहा है। वहीँ शशि थुरूर सहित कई बड़े नेताओं ने पार्टी में परिवर्तन अनिवार्य बताया है। आधे राज्यों में भाजपा सरकार : भाजपा देश के 18 राज्यों में अपनी सरकार बरकरार रखने में कामयाब रही है। इन राज्यों में देश की करीब 50 फीसदी आबादी रहती है। यानी, देश की करीब आधी आबादी वाले राज्यों में भाजपा की सरकार हैं। वहीं, कांग्रेस की सरकार अब पांच राज्यों तक ही सिमटकर रह गई है। इनमें भी केवल दो राज्य ऐसे हैं, जहां कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई जबकि तीन राज्यों में गठबंधन की सरकार है। इसी साल दो राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है, गुजरात व हिमाचल प्रदेश। गुजरात में कांग्रेस कमजोर दिख रही है और निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी की एंट्री ने उसकी चिंता और बढ़ा दी है। जबकि हिमाचल में भी आप की एंट्री कांग्रेस को भारी पद सकती है। ये है हाल -ए -कांग्रेस : माना जा रहा है की संगठनात्मक रूप से कमजोर ढांचा, आधी अधूरी चुनावी तैयारियां, राष्ट्रीय नेताओं का चुनाव प्रचार में रुचि न लेना और राज्य के नेताओं के आपसी मतभेद कांग्रेस की नैया डुबोने के अहम कारण रहे। चुनावों से पहले पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी जबकि उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी थी। इन चार राज्यों में सत्ता वापसी करने का कांग्रेस के पास मौका था। सबसे बड़े राज्य यूपी की अगर बात करें तो कांग्रेस ने यहां 399 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। 399 में से कांग्रेस को केवल दो सीटों पर जीत हासिल हुई और सिर्फ चार सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे। राज्य में कांग्रेस की सिर्फ सीट ही कम नहीं हुई है बल्कि वोट शेयर में भी बड़ी गिरावट देखी गई है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 6.25 प्रतिशत वोट मिले थे। तब कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनावी मैदान में उतरी थी। इस बार एकला चलो रे की नीति रणनीति को अपनाते हुए पार्टी सिर्फ 2.33 प्रतिशत मत ही हासिल कर पाई है।
पंजाब में बेहतरीन जीत दर्ज करने के बाद अब आम आदमी पार्टी की नज़रें हिमाचल की सत्ता पर है। अब हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस भाजपा के नेताओं का आम आदमी पार्टी में शामिल होने का सिलसिला शुरू हो गया है। भाजपा के पूर्व पार्षद के पार्टी में शामिल होने के बाद अब कॉंग्रेस को झटका लगा है। हिमाचल के प्रदेश के नालागढ़ के रहने वाले धर्मपाल चौहान जो की कांग्रेस के प्रदेश सचिव और भूतपूर्व सोलन ज़िला परिषद चेयरमैन रहे हैं, आम आदमी पार्टी का दामन थाम चुकले है । दिल्ली में आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी रत्नेश गुप्ता द्वारा उन्हें पार्टी में शामिल किया गया है । इस मौक़े पर संगठन चेयरमैन सतीश ठाकुर मौजूद रहे । धर्मपाल चौहान ने कहा कि आम आदमी पार्टी को चुनने का एकमात्र कारण यही है कि आम आदमी पार्टी मौजूदा स्थिति में एकमात्र ऐसी पार्टी है जो आम जनता के बारे में सोचती है और जो भी कहती है वह कर के दिखाती है। केजरीवाल आज पूरे देश में जनता के नायक हैं और उनके काम और सेवा भाव का में क़ायल हूँ। उन्होंने कहा वे भूतपूर्व में कांग्रेस पार्टी में विभिन्न पदों पर रह कर सचिव पद छोड़ आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए है । कांग्रेस में परिवारवादी नेता ही पार्टी और देश को खोखला करने में लगे हैं । साथ ही उन्होंने केजरीवाल और हिमाचल प्रदेश प्रभारी रत्नेश गुप्ता का आभार जताया। वहीं प्रदेश प्रभारी रत्नेश गुप्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी की नीतियों से प्रभावित हो कर हिमाचल में आम आदमी के साथ साथ भाजपा कांग्रेस के नेता पार्टी में शामिल हो रहे है और पंजाब के बाद अब हिमाचल में आम आदमी पार्टी जीत का परचम लहरायेगी। हिमाचल की जनता भाजपा कांग्रेस के शासन से दुखी हो गई है और आम आदमी पार्टी हिमाचल की जनता को विकल्प देने जा रही है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज नार्थ ब्लॉक नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से राज्य के सेब उत्पादकों के हित में सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के सेब भारतीय बाजार में आ रहे हैं, जिससे राज्य की सेब अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने औद्योगिक विकास अनुदान योजना को दो वर्ष और बढ़ाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह योजना चालू वर्ष में समाप्त हो रही है। मुख्यमंत्री ने मंडी हवाई अड्डे के निर्माण के लिए विशेष केंद्रीय सहायता उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष केन्द्रीय सहायता बढ़ाने का भी आग्रह किया।उन्होंने केंद्रीय मंत्री को आगामी वित्त वर्ष के लिए प्रस्तुत किए गए बजट में महिला सशक्तिकरण योजनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रीत करने के सम्बन्ध में भी विस्तार से जानकारी दी। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने राज्य की विकासात्मक मांगों के बारे में अवगत करवाया।केंद्रीय वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री को राज्य के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से सिरमौर जिला के ट्रांस गिरि क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र और हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के जौनसार क्षेत्र के आसपास के इलाके को पहले ही जनजातीय क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सिरमौर जिला के ट्रांस-गिरी क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करना क्षेत्र के लोगों की जायज मांग है। क्योंकि इससे 144 पंचायतों की लगभग तीन लाख आबादी लाभांवित होगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त और विशेष बजट सुनिश्चित होगा, बल्कि इस क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को भी पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने राज्य में क्रियान्वित की जा रही विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के बारे में भी चर्चा की और केंद्र के हर संभव सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बजट में प्रस्तावित कल्याणकारी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने बैठक में बहुमूल्य जानकारी दी। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य की मांगों को धैर्यपूर्वक सुना और हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
विनायक ठाकुर। जसवां परागपुर जसवां-परागपुर कांग्रेसी नेता सुरिंद्र मनकोटिया ने कहा कि राजनीति जन सेवा का बेहतरीन साधन साबित होता है। मनकोटिया ने कहा कि आम आदमी के भरोसे का सबसे ज्यादा खून बीजेपी के राज में हुआ है। मनकोटिया ने कहा कि झूठ वायदे करके जनादेश ठगना राजनीति की गलत परम्परा है, जिसको बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद लगातार स्थापित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी व महंगाई मौजूदा दौर में आम आदमी का सबसे बड़ा मुद्दा व मसला बना हुआ है, लेकिन खेदजनक यह है कि बीजेपी इस मुद्दे को लगातार नकारती हुई देश और प्रदेश में तानाशाही कायम करना चाह रही है। लगातार जनता के हितों को नजरअंदाज करके पूूंजीपतियों की पैरवी करने वाली बीजेपी ने राष्ट्रवाद के नाम पर पूंजीवाद कायम करने का काम किया है। प्रदेश में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 लाख शिक्षित बेरोजगारों की फौज रोजगार की आस में मारी-मारी फिर रही है। हालांकि हकीकत में बेरोजगारी का आंकड़ा दर्शाए गए सरकारी आंकड़े से दोगुना से ज्यादा है। बीजेपी ने अमीर और गरीब की खाई को इतना गहरा व चौड़ा कर दिया है कि आने वाले समय में समाज में समानता कायम करने के प्रयासों को एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा व समझा जा रहा है, लेकिन गरीबों से मत लेकर सत्ता में आई बीजेपी अमीरों की वकालत व उनके हितों को पोषित करने में लगी है। सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को सत्ता के दबाव में कुचला जा रहा है। ऐसे में बीजेपी का ध्यान आम आदमी के हितों से लगातार हटा है। मनकोटिया ने कहा कि आम आदमी के आक्रोश का आलम यह है कि बीजेपी की सत्ता के बावजूद प्रदेश में हुए 4 उपचुनावों में जनता ने सत्ता के खिलाफ अपना गुस्सा निकाला है और आने वाले समय में अब आक्रोशित जनता बीजेपी का सूपड़ा साफ करके ही दम लेगी, यह निश्चित है। शायद यही कारण है कि बीजेपी का सारा सिस्टम अब अपने-अपने हितों को पोषित करने में जुट चुका है। क्योंकि अब बीजेपी के लोग भी मान चुके हैं कि प्रदेश में बीजेपी जाने वाली और कांग्रेस आने वाली है।
चुनाव नजदीक आते ही भाजपा सरकार द्वारा जनहित में किए कार्याें को अपना बता कर झूठा प्रचार कर रहे वर्तमान विधायक मनाेज कुमार। कांगड़ा भारतीय जनता पार्टी कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं पूर्व विधायक संजय चौधरी, सुरेंद्र काकू, भाजपा प्रदेश सचिव वीरेंद्र चौधरी, जिला परिषद अध्यक्ष रमेश बराड़, मंडल अध्यक्ष सत प्रकाश सोनी, बबीता संधू तथा रेखा ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि कांगड़ा में भाजपा बिखरी है, विधायक के मुंगेरीलाल जैसे हसीन सपने जैसा है। कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र की भाजपा चट्टान की तरह मजबूत तथा एकजुट है। वर्तमान विधायक पवन काजल पिछले 10 वर्षाें से विधानसभा में कोई खास विकास का कार्य नहीं कर पाए। यह बजट में नौकरी की बात करते हैं, परंतु यह भूल गए कि इन्होंने युवाओं को 5000 नौकरी देने का वायदा किया था, जिसमें कि यह एक भी व्यक्ति को नौकरी नहीं दे पाए, जो कि झूठ साबित हुआ है। उन्हाेंने कहा कि विधायक जहां कहीं भी जाते हैं, वहां पहले से ही स्वागत का समान हार, पकौड़े, टेंट लगाने के पैसे तथा चाय के लिए पैसे भेज देते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा दिखावा किया जा सके, परंतु जनता बहुत समझदार है। इस बार वह विधायक को हराने के मूड़ में है। इस बार इनका तंबू जनता द्वारा उखाड़ दिया जाएगा। वैसे तो वर्तमान कांग्रेस विधायक पिछले 10 वर्षाें विधानसभा से गायव रहे, परंतु अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही लोगों को भाजपा सरकार द्वारा जनहित में किए गए कार्याें को अपना बता कर झूठ का प्रचार कर रहे हैं। इन नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक थी, एक है और एक रहेगी और विधायक यह भूल चुके हैं कि लोकसभा चुनाव में वह कांगड़ा विधानसभा से करीब 23623 वोटों से पीछे रहे थे तथा वह लोकसभा चुनाव 477685 वोटों से हारे जो कि 75 प्रतिशत होता है, पूरे हिंदुस्तान में वह अकेले ऐसे लोकसभा प्रत्याशी थे, जो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। यह सब इनकी दोगली कार्यप्रणाली से हुआ। भविष्य में भी आने वाले विधानसभा चुनावों में यह अपनी कार्यप्रणाली से हारेंगे तथा भाजपा तथा जनता एकजुट होकर चुनाव में पवन काजल को हार का मुंह दिखाएगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट। नई दिल्ली रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन के शहरों पर हमला बोला था। रूस अब तक यूक्रेन के कई शहरों को तबाह कर चुका है। युद्ध के चलते यूक्रेन के लाखों लोग अन्य देशों में शरण ले चुके हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, पीएम मोदी से युद्ध को लेकर रूस के बातचीत करने का आग्रह भी कर चुके हैं। रूस और यू्क्रेन के बीच युद्ध अभी भी जारी है। यूक्रेन पर रूस के हमले का आज 12वां दिन है। इसी बीच देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बातचीत करेंगे। सरकारी सूत्रों ने बताया कि पीएम मोदी आज दोनों देशों के राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत करेंगे। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच तीसरे दौर की बातचीत आज हो सकती है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। रूस के हमले के एलान के बाद यूक्रेन के राजदूत ने प्रधानमंत्री मोदी से पूरे मामले में हस्तक्षेप की अपील की थी। यूक्रेन के राजदूत ने कहा था कि यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे तनाव में भारत अहम भूमिका अदा कर सकता है। उन्होंने पीएम मोदी से अपील करते हुए कहा कि वो तुरंत यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस बारे में बात करें। राजदूत ने कहा था कि मोदी इस समय बहुत बड़े नेता हैं, हम उनसे मदद की अपील करते हैं, दुनिया में तनाव को भारत ही कम कर सकता है।
पांच राज्यों में भाजपा का बड़ा इम्तिहान, 10 मार्च को नतीजे 10 मार्च 2022, वो तारीख़ जो देश की मौजूदा सियासी तस्वीर बदलने में या बरकरार रखने में अहम भूमिका निभा सकती है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजे 10 मार्च को सामने आने वाले है। विपक्ष के साथ-साथ सत्तारुढ़ भाजपा के लिए भी यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे है। दरअसल, साल 2022 देश के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है। ऐसा इसलिए है कि इस वर्ष की शुरुआत में हो रहे 5 राज्यों व साल के अंत में होने वाले 2 राज्यों के चुनाव केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इनमें से 6 राज्यों में भाजपा की सरकार है। साथ ही इन 7 राज्यों के चुनाव लोकसभा की 132 सीटों को प्रभावित करेंगे। एक हजार से अधिक नए विधायक चुने जाएंगे जो 2022 में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव और राज्यसभा का शक्ति संतुलन तय करेंगे। इसीलिए हर राजनैतिक दल कोई कसर नहीं छोड़ रहा। बहरहाल पांच राज्यों के नतीजे 10 मार्च को आने है और कयासों का दौर जारी है। फिलवक्त देश के जिन जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, उनमें से चार में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। पंजाब को छोड़कर, भाजपा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में एक बार फिर से सरकार बनाने की कोशिश में है। 10 मार्च को जब चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे, तो यहां भाजपा की सफलता या असफलता की व्याख्या केवल इन राज्यों तक ही सीमित नहीं रहेगी। लोकसभा के समीकरण को ध्यान में रखते हुए भी इसके विश्लेषण किए जाएंगे। भाजपा के लिए 2014 के बाद कुछ सालों तक गवर्नेंस के स्तर पर भले ही चुनौतियां आती रही हैं, लेकिन राजनीतिक जमीन पर पार्टी धुआंधार बैटिंग करती रही। हालाँकि पिछले कुछ समय से राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। 2019 आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी को चुनावी अभियान में तमाम राज्यों में उनकी सरकार होने का लाभ मिला था। मगर 2019 के बाद से बीजेपी महाराष्ट्र, झारखंड जैसे राज्यों में सत्ता गंवा चुकी है। हरियाणा में भले पार्टी ने सरकार बनाई, लेकिन बहुमत से दूर रही। 2020 में पार्टी ने बिहार में गठबंधन की सरकार बनाई पर दिल्ली में पार्टी कुछ खास नहीं कर पाई । इसके बाद 2021 में हुए 5 राज्यों के चुनावों में से भाजपा असम और पुडुचेरी में सफल रही पर पश्चिम बंगाल चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षा अनुसार नहीं रहा। ऐसे में ये 5 राज्यों के चुनाव पार्टी के मिशन 2024 के लिहाज से भी जरूरी है। पार्टी इन चुनावों में अच्छा नहीं कर पाई तो परिस्थितियां बदल सकती है। उत्तर प्रदेश से जाता है दिल्ली का रास्ता : चुनाव प्रचार के दौरान केंद्र की सत्ता में आसीन देश के इस सबसे बड़े राजनीतिक दल का ध्यान देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर कुछ अधिक नज़र आया है। यहां भाजपा के सामने बीते 34 वर्षों की परंपरा को तोड़ने की चुनौती है। उत्तर प्रदेश में तीन दशकों से कोई भी राजनीतिक दल लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी नहीं कर सका है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश से अपार समर्थन मिला था। इस लिहाज से केंद्र में बीजेपी की सत्ता वापसी के लिए भी उत्तर प्रदेश खासे मायने रखता है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शशि दत्त एवं सह मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा पेश किए गए बजट को सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार केंद्रित करार दिया है। शशि दत्त ने कहा कि यह बजट ऐतिहासिक बजट है, इस बजट से जहां रोजगार के अवसर खोले गए हैं। वहीं, सामाजिक सुरक्षा पेंशन की आयु सीमा 60 वर्ष कर लाखों लोगों के भविष्य को सुरक्षित किया गया है। उन्होंने इस बजट को रोजगार, स्वरोजगार जनित, गरीबी उत्थान, कर्मचारी, व्यापारी, किसान-बागवान व महिलाओं का हितकर करार देते हुए कहा कि इसमें पंचायत प्रतिनिधियों का मानदेय बढ़ाया गया तथा शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़े बजट की घोषणा की है। बजट में रोजगार को लेकर सरकार ने बेरोजगारों को बड़ी राहत दी है, इसी वर्ष 30 हजार बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा इसमें विभिन्न विभागों में भी भर्तियां की जाएंगी साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, विद्युत, जल शक्ति विभाग सहित अन्य में हजारों कर्मचारियों के पद भी भरने का निर्णय लिया गया है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग 780 आशा कार्यकर्ताओं की भर्ती होगी। भाजपा नेताओं ने कहा प्रदेश में 500 डाक्टरों के पदों सहित 870 कम्युनिटी हेल्थ ऑफसिर के पदों सहित गृहरक्षकों की भर्तियां की जाएंगी। मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए बजट में आंगनबाड़ी वर्कर्स का मानदेय 1700, आशा कार्यकर्ता 1825 रुपए तक बढ़ाया है, जो आज तक का सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इसके अतिरिक्त एसएमसी व आइटी शिक्षकों के एक हजार रुपए बढ़ाए गए हैं। सिलाई अध्यापिका, जल रक्षक व मिड-डे मील वर्कर्स के 900 रुपए तथा पंचायत व राजस्व चैकीदार और नंबरदार को 900 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। 1000 नए आंगनबाड़ी केंद्र खोलने का निर्णय भी ऐतिहासिक निर्णय है। प्रदेश प्रवक्ता शशि दत्त एवं सह मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा ने कहा कि बजट में तीन एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने की घोषणा सराहनीय है। उन्होंने कहा कि अब जिला परिषद अध्यक्ष को 15,000, उपाध्यक्ष को 10,000 सदस्य को 6000, बीडीसी अध्यक्ष को 9000, उपाध्यक्ष को 6500 व सदस्य को 5500 रुपए मिलेंगे। पंचायत प्रधान को भी 5500, उपप्रधान को 3500 व वार्ड पंच को ग्रामसभा बैठक का 300 रुपए मानदेय मिलेगा। सरकार द्वारा ऐसा कर पंचायती राज को सशक्त करने की ओर एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के इस जन हितैषी बजट से 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी सशक्त रूप में उतरेगी तथा प्रदेश की जनता एक बार फिर संवेदनशील, शालीन, विकास पुरुष मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को फिर से मुख्यमंत्री बनाएगी। प्रदेश प्रवक्ता शशि दत्त ने इस ऐतिहासिक बजट के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया है।
वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी वर्गों को साधने का प्रयास किया है। ये मौजूदा सरकार के कार्यकाल का आखिरी और 5वां बजट था। 63 हजार करोड़ के कर्ज के बीच चुनावी साल में लोक लुभावना बजट पेश करना तलवार की धार पर चलने समान था। जयराम सरकार ने ही अपने चार साल के कार्यकाल में लगभग 22000 करोड़ का ऋण लिया है और हालत ये है कि पुराना कर्ज चुकाने के लिए भी ऋण लेना पड़ रहा है। जाहिर है ऐसे में इस बजट से बहुत ज्यादा उम्मीदे नहीं की जा रही थी। बावजूद इसके खजाना खाली के साथ ही जयराम ठाकुर ने संतुलित बजट देने का प्रयास किया। 3 घंटे 2 मिनट के बजट भाषण में जयराम ठाकुर ने सभी वर्गों का ख्याल रखने का प्रयास किया। उधर, जैसा अपेक्षित था नेताओं ने बजट को सियासी चश्मे से देखा। विपक्ष ने बजट की कमियां और खामियां गिनाई और सात ही सियासी पोस्टमार्टम भी किया। इस चुनावी बजट करार दिया और बढ़ते कर्ज के बीच हुई घोषणाओं पर सवाल भी उठायें। सरकार द्वारा पेश किये इस बजट को विपक्ष पूरी तरह से दिशाहीन करार दिया। बजट को लेकर क्या रहा नेताओं का पक्ष, पेश है ये विशेष रिपोर्ट ............................................... ये सरकार कर्ज की बैसाखी से ही चलेगी : मुकेश अग्निहोत्री नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का सदन में प्रस्तुत किया हिमाचल का बजट केवल दशाहीन और दिशाहीन है। इस बजट में सरकार द्वारा प्रेदश के विकास का कोई जिक्र नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार पहले ही कर्ज में डूबी है हुई है, ऐसे में इस बजट में की गयी घोषणाओं के लिए धनराशि कहां से आएगी इस बात का जवाब भी जयराम सरकार के पास नहीं है। इस बजट से साफ है कि सरकार कर्ज की बैसाखी से ही चलेगी। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि बजट में कर्मचारियों के मसलों को लेकर भी कोई जिक्र नहीं किया गया है। सभी कर्मचारी वर्ग जो इस बजट से आस लगाए बैठे थे उनके बारे में सरकार ने कोई जिक्र तक नहीं किया है। इस बजट में संशोधित वेतनमान का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर भी जो कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे थे, उस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा पेश किये गए इस बजट से प्रदेश के विकास की राशि और कम होगी। प्रदेश में 14 लाख बेरोजगार हैं, उनके बारे में कोई जिक्र नहीं है। नेशनल हाईवे का कोई उल्लेख नहीं है। प्रदेश के आउटसोर्स कर्मियों के बारे में कोई चिंता नहीं है। कुल मिलाकर ये बजट महज आंकड़ों का दस्तावेज है। बजट में अर्थव्यवस्था सुधार के कोई उपाय नहीं : प्रतिभा सिंह सासंद प्रतिभा सिंह का कहना है कि बजट को लोकलुभावन बनाने की पूरी कोशिश की गई है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि पिछले बजट में की गयी घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई है और इस बजट में की गई घोषणाओं को पूरा करने का समय अब मुख्यमंत्री के पास बचा नहीं है। प्रदेश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था किसी से छिपी नहीं है और इस बजट में अर्थव्यवस्था सुधार के कोई भी उपाय नहीं सुझाए गए हैं। ये बजट पूरी तरह से दिशाहीन है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से निपटने की भी इस बजट में कोई कारगर योजना नहीं है। यह बजट महज आंकड़ों का दस्तावेज है, जो आगामी विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत राजनीतिक लाभ लेने के लिए लोगों को लुभाने के लिए बनाया गया है। चार साल के कार्यकाल में केवल माफिया का विकास हुआ : सुखविंदर सिंह सुक्खू पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और नादौन विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट के बाद दी प्रतिक्रिया में जहां प्रदेश में हाल ही में हुए शराब प्रकरण को लेकर सरकार का घेराव किया है तो वहीँ कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी के लिए भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि वर्तमान सरकार के चार साल के कार्यकाल में केवल माफिया का विकास हुआ है। हाल ही में राज्य में शराब कांड हुआ है जिसमे कई लोगो की जान गई, लेकिन सरकार ने इस विषय पर एक बार भी चर्चा नहीं की।सुक्खू का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ 2021 में पूर्व कांग्रेस विधायक सोहन लाल शर्मा ने सुंदरनगर में आंदोलन करके अवगत भी करवाया था ,लेकिन बावजूद इसके आज खोखो में शराब बिक रही है और शराब माफिया की जांच करने के लिए गठित एसआइटी में पुलिस अफसर उसी जगह के हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि सरकार को माफिया पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून लाने की जरूरत है, जिसमें सरकार नाकाम रही है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों का प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन वर्तमान सरकार कर्मचारी विरोधी है। सुक्खू ने ऐलान किया है कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सरकारी विभागों के कर्मचारियों, निगम वार्डों के कर्मचारियों, नगर निगम सभी को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। कुल मिलाकर बजट एक रटारटाया दस्तावेज :राजेंद्र राणा चुनावी वर्ष में सरकार द्वारा की जा रही हर घोषणा पर विपक्ष हमलावर रुख इख्तियार किये हुए है। प्रदेश सरकार द्वारा पेश किये गए बजट को विधायक राजेंद्र राणा ने पूरी तरह से नीरस व संवेदनहीन बताया है। राजेंद्र राणा का कहना है कि सरकार द्वारा चुनाव की दृष्टि से पेश किए गए बजट में एक बार फिर जनता को ठगने का असफल प्रयास किया है। पिछले बजट में हुई घोषणाएं अभी तक धूल चाट रही हैं, जिन पर सरकार की न कोई जवाबदेही, न ही कोई सफाई आई है। प्रदेश कर्जे के पहाड़ में निरंतर दबा जा रहा है। यह बजट प्रदेश के लिए शिगूफा साबित हो रहा है। कुल मिलाकर यह बजट एक रटा रटाया दस्तावेज साबित हो रहा है, जिससे प्रदेश के आमजन को कोई आस नहीं बन पा रही है। राजेंद्र राणा का कहना है कि प्रदेश में 14 लाख शिक्षित बेरोजगार मारे-मारे फिर रहे हैं। इनके भविष्य को लेकर इस बजट में न तो सरकार ने कोई चिंता जताई है और न कोई सटीक बात की है। कर्मचारियों के प्रति सरकार तानाशाही रवैया अपनाकर लगातार संवेदनहीन बनी हुई है। कर्मचारियों के लिए भी इस बजट में कुछ नहीं कहा गया है। राजेंद्र राणा का कहना है कहा कि कोरोना काल में लाखों लोग जिनकी नौकरियां छूट गई हैं, गुजर बसर के लिए प्रदेश में मारे-मारे फिर रहे हैं। सरकार के पास इस वर्ग के लिए भी कोई योजना बजट में संबोधित नहीं हुई है। करुणामूलक नौकरियों की आस में लोग घर बैठे-बैठे बुजुर्ग होते जा रहे हैं लेकिन सरकार इसको लेकर भी संवेदनहीन बनी हुई है। मध्यम तबके के व्यापारी से लेकर हर आम तबके के लोगों को बजट में कोई आस नहीं दिखी है। ................................................................................................... सर्व स्पर्शी और सर्व हितकारी है बजट :प्रेम कुमार धूमल जयराम सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट की जहां विपक्ष के नेता कटाक्ष कर रहे है तो वहीं सत्तापक्ष के नेता इस बजट कि प्रशंसा कर रहे है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने इस बजट की सराहना की है। पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि यह बजट विकास की राह पर अग्रसर हिमाचल प्रदेश को गति प्रदान करेगा। बजट में वृद्धों, गृहिणियों, विधवाओं, बच्चों, किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों को बड़ी सौगात की घोषणा की गई है। धूमल का कहना है कि जयराम सरकार द्वारा पेश किया गया ये बजट प्रदेश की 70 लाख जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने वाला बजट है। पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि वर्तमान सरकार ने इस बजट को किसान, बागवान, युवाओं, महिलाओं, सीनियर सिटीजन व आम जनता को ध्यान में रख कर बनाया है। ये बजट सर्व स्पर्शी और सर्व हितकारी है जो कठिन आर्थिक परिस्थितियों में प्रस्तुत किया गया है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया बजट प्रदेश के भविष्य को उज्जवल बनाने वाला है। हिमाचल को नई दिशा व दशा देने वाला बजट : अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए 51365 करोड़ के बजट को केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल व युवा कार्यक्रम मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने एक संतुलित बजट बताया है। अनुराग ठाकुर का कहना है कि जो विपक्ष इस बजट को दिशाहीन बता रहे है उन्हें शायद ये मालूम नहीं है कि ये बजट हिमाचल को नई दिशा-दशा देने वाला बजट है। अनुराग ठाकुर का कहना है कि प्रदेश की जयराम सरकार द्वारा पेश किया गया यह बजट विकासोन्मुखी है। इस बजट में कर्मचारियों, कारोबारियों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों समेत समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखने का पूरा प्रयास किया गया है। इस बजट से हिमाचल के हर वर्ग का सशक्तिकरण होगा और प्रदेश के विकास में भागीदारी का पूरा अवसर मिलेगा। अनुराग ठाकुर का कहना है कि हिमाचल में भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने पहाड़ी प्रदेश के विकास के लिए हर संभव कदम उठाए हैं। हर बार की तरह इस बार के भी केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने हिमाचल का विशेष ध्यान रखने का काम किया था जोकि मोदी के हिमाचल के प्रति विशेष स्नेह को दिखाता है। अनुराग ठाकुर का कहना है कि जिस प्रकार केंद्रीय बजट में हिमाचल के विकास का ध्यान रखा गया उसी प्रकार हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी हिमाचल कि जनता के हित के लिए ये बजट बनाया है। ऐतिहासिक एवं आम आदमी का बजट : सुरेश भारद्वाज विपक्ष को घेरते हुए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज का कहना है कि ये कोई लोकलुभावन बजट नहीं है बल्कि आम आदमी का बजट है । सुरेश भारद्वाज का कहना है कि प्रदेश सरकार के इस बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। बजट व्यावहारिक है और सभी वर्गों को इस बजट से लाभ होगा। कोविड-19 महामारी के दौरान शहरी युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना आरम्भ की गई थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में इस योजना पर 5 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। सुरेश भारद्वाज का कहना है कि शहरी बेरोजगार युवाओं को रोजगार की गारंटी, पात्रता एवं अन्य शर्तों से संबंधित विधेयक भी विधानसभा में पेश किया जाएगा। हिमाचल देश का पहला राज्य होगा जहां मनरेगा कि तर्ज पर शहरी क्षेत्रों में आजीविका के लिए कानून बनाया जाएगा। सुरेश भारद्वाज का कहना है कि इस बजट में जो भी घोषणाएं मुख्यमंत्री द्वारा की गई है वो आम जनता के हित में है। मुख्यमंत्री का वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा 60 वर्ष की गयी है, जबकि पहले यह आयु सीमा 70 वर्ष थी। वित्तीय वर्ष 2022-23 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 40000 अतिरिक्त पात्र लोगों को पेंशन प्रदान की जाएगी। ऐसे सभी वर्ग जो वर्तमान में 850 रुपये प्रतिमाह की पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, उन सबकी पेंशन बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। दिव्यांगजनों व विधवाओं को दी जा रही पेंशन को 1000 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए प्रतिमाह किया गया है। 70 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों की पेंशन को 1500 रुपए से बढ़ाकर 1700 रुपए प्रतिमाह किया गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर 1300 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। कुल मिलाकर ये बजट हिमाचल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए बनाया गया है जयराम सरकार जनता का दर्द समझती है: सुरेश कश्यप सरकार के कार्यकाल के इस अंतिम बजट की जहाँ भाजपा के नेता सराहना कर रहे है वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने भी इस बजट को शानदार एवं जानदार बताया है। सांसद सुरेश कश्यप का कहना है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतरीन बजट प्रस्तुत किया है। यह बजट शानदार एवं जानदार है, जिसमें हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। हिमाचल के बजट में वृद्धावस्था पेंशन के लिए आयु सीमा को बड़ा कर 60 वर्ष कर दिया गया है, मुख्यमंत्री की इस घोषणा से एक बड़ा सामाजिक लाभ होगा, इस बजट में पशुपालन क्षेत्र के लिए भी 469 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस कर्मयोगी सरकार ने पहाड़ी गाय के संरक्षण हेतु उत्कृष्ट फार्म स्थापित किए जाने का प्रावधान भी किया है और कृषि क्षेत्र के लिए बजट में 583 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। सांसद सुरेश कश्यप का कहना है कि जयराम सरकार के बजट में किसानों- बागवानों की सुविधा हेतु प्रदेश में एक और फूल मंडी स्थापित की जाएगी और साथ ही उज्ज्वला और गृहिणी सुविधा योजना के तहत अब 3 निःशुल्क सिलेंडर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे महिलाओं एवं जनता को बड़ा लाभ होगा। यह सच में वो सरकार है, जो जनता का दर्द समझती है। सुरेश कश्यप का कहना है कि हिमकेयर योजना का जनता को बड़ा लाभ हुआ है, जो कि प्रत्यक्ष रूप से दिखता है, जनता के लिए यह बजट खुशखबरी लेकर आया है।
नगर परिषद नालागढ़ एवं बद्दी तथा नगर एवं ग्राम योजना विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित फर्स्ट वर्डिक्ट। साेलन शहरी विकास नगर एवं ग्राम योजना तथा आवास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि योजनाबद्ध विकास एवं नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। इस दिशा में सभी के सहयोग से प्रदेश सरकार आशातीत कार्य कर रही है। सुरेश भारद्वाज आज सोलन जिला के नालागढ़ में नगर परिषद नालागढ़ एवं नगर परिषद बद्दी के प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों तथा नगर एवं ग्राम योजना विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सफाई व्यवस्था मूल आधार है तथा इस दिशा में सभी को समन्वित होकर प्रयास करने चाहिए। उन्होंने जन प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि अपने-अपने वार्डों में समर्पित होकर कार्य करें। बैठक में विशेष रुप से औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) सहित नगर परिषद क्षेत्र बद्दी तथा नालागढ़ में सफाई की व्यवस्था विकासात्मक कार्यों तथा विकास से संबंधित विभिन्न मांगों बारे विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों ने औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में जेबीआर कंपनी द्वारा की जा रही सफाई व्यवस्था बारे और असंतोष व्यक्त किया तथा पता इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। बैठक में नालागढ़ के पूर्व विधायक केएल ठाकुर ने नगर परिषद क्षेत्र नालागढ़ में गोल मार्केट के नाम से निर्माणाधीन वाणिज्यिक परिसर के निर्माण कार्य को पुनः आरंभ करने के लिए मांग की। उन्होंने नालागढ़ नगर परिषद क्षेत्र में एक खेल परिसर के निर्माण के लिए भी मंत्री से निवेदन किया। ग्रामीण क्षेत्र के कुछ प्रतिनिधियों ने ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में टीसीपी द्वारा निर्माण के विषय में अलग-अलग नियमों पर नाराजगी व्यक्त की तथा उनमें सुधार करने की मांग की। इस अवसर पर सुरेश भारद्वाज ने सभी जनप्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों पर शीघ्र गौर किया जाएगा। इस अवसर पर नालागढ़ के पूर्व विधायक केएल ठाकुर, सोलन जिला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत, वरिष्ठ भाजपा नेता बलविंदर ठाकुर, विनोद कुमार, गुरमेल चौधरी, नगर परिषद नालागढ़ व बद्दी के कार्यकारी अधिकारी आरएस वर्मा, राजीव भल्ला व लेख राज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
फर्स्ट वर्डिक्ट। धर्मशाला धर्मशाला के विधायक विशाल नैहरिया मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किए गए हिमाचल बजट-2022-23 पर वर्चुअल जनसंवाद कार्यक्रम में धर्मशाला में विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बजट को अब तक का सबसे शानदार बजट बताया है और कहा कि इससे समाज के हर वर्ग का कल्याण होगा और इस बजट की सर्वत्र प्रशंसा की जा रही है। इस अवसर पर मीडिया कॉडिनेटर विश्व चक्षु, पार्टी कार्यकर्ताओं सहित काफी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज जिला चंबा के दिव्यांग सुनील पथिक द्वारा लिखित पुस्तक आशाओं भरा सफर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने सुनील पथिक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न चुनौतियों के बावजूद लेखक ने यह पुस्तक लिखी है, जो दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि सुनील पथिक ने यह साबित किया है कि व्यक्ति समर्पण तथा प्रतिबद्धता के साथ सभी चुनौतियों पर विजय पा सकता है। इस अवसर पर प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. हंसराज व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन समारोह के दौरान बोले रहे थे विधायक काजल मनाेज कुमार। कांगड़ा विधायक पवन काजल ने प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को इलेक्शन स्टंट करार दिया है। काजल ने बजट को युवा और बेरोजगार विरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार ने बजट में बेरोजगारों को रोजगार या बेरोजगार भत्ता देने पर कोई भी घोषणा या प्रावधान नहीं किया है। काजल रविवार को ढूगियारी पंचायत में जय शंकर क्रिकेट क्लब द्वारा आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन समारोह दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा प्रदेश के कर्मचारियों को अपनी मांगों को मनवाने के लिए सड़कों पर उतरकर संघर्ष करना पड़ रहा है और प्रदेश सरकार कर्मचारियों के धरना प्रदर्शन पर रोक लगाकर लोकतंत्र का गला गाेंट रही है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए गग्गल में आईटी पार्क के लिए भूमि और 12 करोड़ का बजट प्रावधान किया है, लेकिन मौजूदा सरकार अपने कार्यकाल में आईटी पार्क का निर्माण करवाने से हाथ खींच रही है। जिसे कांगड़ा का बेरोजगार और युवा वर्ग सहन नहीं करेगा। काजल ने कहा बजट में महिला और समाज के अन्य तबकों के लिए कोरी घोषणाएं कर जनता को गुमराह करने का प्रयास अब प्रदेश सरकार कर रही है। काजल ने कहा कि ढूगियारी पंचायत में 12 जुलाई को आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने में भी मौजूदा सरकार नाकाम रही है, वह विधानसभा के बजट सत्र में किसानों को हुए नुकसान की भरपाई की मांग को रखेंगे। उन्होंने टूर्नामेंट के आयोजकों को 5100 रुपए और विजेता व उपविजेता टीमों को रिफ्रेशमेंट के लिए तीन हजार रुपए नकद राशि भेंट की। काजल ने खिलाड़ियों को समृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया। क्लब के अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता में 64 टीमों ने भाग लिया। फाइनल मैच में नैना देवी क्लब तपोवन ने क्रिकेट क्लब ज़मानाबाद को पराजित कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। इस मौके पर राजयंती वार्ड मेंबर, नीतू, अजय कुमार, देवेश कुमार, पृथ्वी, मितल चौधरी, साहिल, सौरभ, अभिषेक व चिरंकुश भी उपस्थित रहे।
विनायक ठाकुर। देहरा ढलियारा में सुना बजट वर्चुअल जनसंवाद कार्यक्रम उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने ढलियारा महाविद्यालय में ऐतिहासिक प्रदेश बजट 2022-23 पर आयोजित वर्चुअल जनसंवाद कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहते हुए उद्योग मंत्री ने प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत जनहितैषी बजट पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के संबोधन को वर्चुअल माध्यम से सुना। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग, जनप्रतिनिधि, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के बाद उद्योग मंत्री ने जनता की समस्याओं को भी सुना, जिनमें से अधिकतम का मौके पर ही निपटारा कर दिया तथा शेष के समयबद्ध निवारण हेतु संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष संजीव शर्मा, परागपुर मंडलाध्यक्ष विनोद शर्मा, जिला परिषद् उपाध्यक्षा सनेह लता परमार, अनीता सपेहिया, विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी, महाविद्यालय के समस्त प्रध्यापक एवं कर्मचारी, विद्यार्थी एवं विद्यार्थियों के अभिभावक उपस्थित रहे।
मनोज कुमार। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 2022- 23 बजट पर मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश जयराम ठाकुर का लोगों के साथ वर्चुअल संवाद कार्यक्रम रखा गया। वर्चुअल संवाद के इस कार्यक्रम को देखने के लिए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में एलईडी स्क्रीन लगाई गई। एलईडी स्क्रीन के साथ आम लोग इस वर्चुअल कार्यक्रम के साथ जुड़ सकें इसे ध्यान में रखते हैं, आम लोगों के लिए भी लिंक शेयर किया गया। कार्यालय भवन कांगड़ा में भी इस मौके पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई। और यहां इस जनसंवाद कार्यक्रम को देखने के लिए मौके पर लोग मौजूद रहे। सरकार द्वारा जनसंवाद कार्यक्रम में लोगों को सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने जन संवाद कार्यक्रम में बताया कि इस वर्ष का बजट आम लोगों का बजट है। इस बजट का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों को कुछ ना कुछ देने वाला है। उन्होंने बजट पर जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रत्येक क्षेत्र का वर्णन करते हुए बताया कि उसे इस बजट से क्या लाभ होगा। संयुक्त कार्यालय भवन कांगड़ा में वर्चुअल जन संवाद कार्यक्रम के दौरान एसडीएम कांगड़ा अरुण शर्मा, तहसीलदार कांगड़ा प्रवीण कुमार, बास्केटबॉल प्रदेश अध्यक्ष व समाजसेवी मनीष शर्मा, जिला परिषद अध्यक्ष रमेश बराड़, विधायक सुरेंद्र काकू, मंडल अध्यक्ष सतपाल सोनी, ब्लॉक समिति अध्यक्ष बबीता संधू, नीतू दमीर, सुरेश छेछा, रेखा देवी, प्रधान जमानाबाद कुलदीप चौधरी, राजे सयाल, विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधि और आम नागरिक आदि मौजूद रहे।
बजट प्रदेश के समग्र और समावेशी विकास पर केंद्रीत : जय राम ठाकुर फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला वर्ष 2022-23 का बजट प्रदेश के समग्र एवं समावेशी विकास पर केंद्रीत है और इसमें प्रदेश में कार्यान्वित की जा रही योजनाओं में आवश्यकता आधारित सुधार तथा अनेक योजनाओं के आकार में वृद्धि को भी ध्यान में रखा गया है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज यहां पीटरहॉफ में बजट 2022-23 पर आयोजित वर्चुअल जन संवाद कार्यक्रम को संबाेधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रथम अवसर है, जब प्रदेश का वार्षिक बजट प्रस्तुत करने के उपरांत कोई मुख्यमंत्री आम जनता से सीधे तौर पर रू-ब-रू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गत चार वर्षों के दौरान प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य निर्धन तथा जरूरतमंद वर्गों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान सुनिश्चित करना रहा है। प्रदेश सरकार की सभी योजनाएं, नीतियां तथा कार्यक्रम समाज की अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को समर्पित रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार का सबसे पहला निर्णय वृद्धजनों के कल्याण तथा अन्य निर्णय निराश्रित पशुओं को उचित आश्रय सुनिश्चित करवाने के लिए लक्षित था। उन्होंने कहा कि गौ अभ्यारण्यों तथा गौ-सदनों में प्रत्येक पशु के लिए 500 रुपए प्रतिमाह प्रदान किए जा रहे थे, जिसे वर्ष 2022-23 के बजट मेें बढ़ाकर 700 रुपए प्रतिमाह प्रति पशु किया गया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार का दो वर्षो से अधिक का कार्यकाल कोरोना महामारी से प्रभावित रहा है। उन्होंने कहा कि सभी चुनौतियों के बावजूद प्रदेश ने राज्य के लोगों तथा केंद्र सरकार के सक्रिय सहयोग और समर्थन से इस महामारी से निपटने में सफलता प्राप्त की है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस माह की चार तारीख को 51,365 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तथा राज्य के प्रत्येक क्षेत्र का विकास करना है। उन्होंने कहा कि पिछली प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ऋण लिया गया। महामारी के बावजूद वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया ऋण पिछली सरकार की तुलना में काफी कम है। जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बार के बजट में सभी के लिए वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा को कम करते हुए बिना किसी आय सीमा के 60 वर्ष करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के जो लाभार्थी वर्तमान में 850 रुपए प्रतिमाह की पेंशन प्राप्त कर रहे थे, उन्हें अब 1000 रुपए प्रतिमाह, 1000 रुपए प्रतिमाह की पेंशन प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को 1500 रुपए प्रतिमाह तथा 1500 रुपए प्रतिमाह प्राप्त कर रहे पेंशनरों को 1700 रुपए प्रतिमाह प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 60 से 65 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं भी बिना किसी आय सीमा केे वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्र होंगी। उन्होंने कहा कि अब 7.50 लाख लाभार्थियों को वृद्धावस्था पेंशन योजनाओं का लाभ मिलेगा तथा इस पर कुल 1300 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रथम अवसर है, जब अन्य बजट दस्तावेजों के साथ जेंडर बजट स्टेटमेंट भी प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय में भारी बढ़ोतरी की गई है। सिलाई अध्यापिकाओं, मिड-डे मील कार्यकर्ताओं, जलवाहक (शिक्षा विभाग), जल रक्षक, बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं, पैराफिटर तथा पम्प ऑपरेटरों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह 9000 रुपए, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 6000 रुपए, आंगनबाड़ी सहायिकाओं को 4600 रुपए, आशा कार्यकर्ताओं को 4700 रुपए, सिलाई अध्यापिकाओं को 7850, मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को 3400, जलवाहक (शिक्षा विभाग) को 3800, जल रक्षक को 4400, जल शक्ति विभाग के बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं को 3800 तथा पैराफिटर व पम्प ऑपरेटरों को 5400 मानदेय प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिहाड़ीदारों की दिहाड़ी में 50 रुपए बढ़ाकर इसे 350 रुपये प्रतिदिन किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आउटसोर्स कर्मचारी को भी न्यूनतम 10,500 रुपए प्रतिमाह प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त शहरी स्थानीय निकायों तथा पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा तथा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एक अतिरिक्त निःशुल्क सिलेंडर प्रदान किया जाएगा, जिस पर 50 करोड़ रुपए की राशि व्यय की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना के तहत अब पंजीकरण वर्षभर किया जाएगा तथा इसका नवीनीकरण तीन वर्ष की अवधि के उपरांत होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले केवल दो ऑक्सीजन संयंत्र थे, जबकि आज राज्य में 48 पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 60 यूनिट तक बिजली की खपत पर जीरो बिलिंग करने का निर्णय लिया है, जिससे लगभग 4.50 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि किफायती बिजली एक रुपए प्रति यूनिट की उपदान दर पर उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे 61 से 125 यूनिट तक की खपत करने वाले 7 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। किसानों के लिए बिजली की दर 30 पैसे प्रति यूनिट होगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर द्वारा 4 मार्च को प्रस्तुत किए गए वर्ष 2022-23 के बजट की सराहना करते हुए बजट की मुख्य विशेषताओं के बारे जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा गत चार वर्ष के कार्यकाल के दौरान अपने पांच बजट में 97 नई योजनाएं शुरू की गई। इस अवसर पर सांसद एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, प्रदेश भाजपा संगठन सचिव पवन राणा, मुख्यमंत्री के राजनैतिक सलाहकार त्रिलोक जम्वाल, बाल कल्याण परिषद की महासचिव पायल वैद्य, नगर निगम शिमला की महापौर सत्या कौंडल, हिमफैड के अध्यक्ष गणेश दत्त, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुभासीष पन्डा, प्रधान सचिव सामान्य प्रशासन भरत खेड़ा, सचिव वित्त अक्षय सूद, निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क हरबंस सिंह ब्रसकोन शिमला में उपस्थित थे, जबकि अन्य सभी मंत्री, विधायक, भाजपा नेता और प्रदेश की जनता ने वर्चुअल माध्यम से जन संवाद में भाग लिया।
जिला के सभी विधानसभा क्षेत्रों सहित सभी ग्राम पंचायतों में सुना गया जनसंवाद फर्स्ट वर्डिक्ट। साेलन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा प्रदेश के जन-जन के साथ वित्त वर्ष 2022-23 के लिए प्रदेश विधानसभा में 04 मार्च, 2022 को प्रस्तुत किए गए बजट के संदर्भ में आज आयोजित वर्चुअल जनसंवाद को सोलन जिला के पांचों विधानसभा क्षेत्रों सहित सभी 240 ग्राम पंचायतों में पूर्ण तन्मयता एवं रूचि के साथ सुना गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष मंत्री डॉ. राजीव सैजल इस अवसर पर कसौली विधानसभा क्षेत्र के परवाणु में उपस्थित रहे। उन्होंने नगर परिषद परवाणु के सभागार में सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा स्थापित एलईडी स्क्रीन पर मुख्यमंत्री के संबाेधन को सुना। डॉ. सैजल ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत यह बजट गत 04 वर्षों के बजट की भांति ही ‘हिमाचल के हित का, किसान-बागवान का, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी का, छात्रों-शोधार्थियाें के हित का तथा हिमाचल की आम जनता के कल्याण का बजट है।’ ‘ऐसे ऐतिहासिक बजट के लिए मैं मुख्यमंत्री का हार्दिक धन्यवाद करता हूं और प्रदेश की जनता को ऐसे कल्याणकारी बजट प्रावधान के लिए हार्दिक बधाई देता हूं।’ आयुष मंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालते ही हिमाचल के जन-जन के कल्याण तथा राज्य के समग्र एवं संतुलित विकास को ध्येय बनाया और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए योजनाबद्ध कार्य किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इन 05 बजट में विकास एवं जन कल्याण को समर्पित 97 नवीन योजनाएं प्रदेश को दी हैं। डॉ. सैजल ने कहा कि ईमानदार सोच, समर्पित प्रयास तथा सभी के सहयोग से आज हिमाचल तीव्र विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र में की गई घोषणाएं एतिहासिक सिद्ध होंगी। हिमकेयर योजना के तहत अब जहां परिवारों का पंजीकरण पूरे वर्ष किया जा सकेगा। वहीं, नवीनीकरण की अवधि 01 से बढ़ाकर 03 वर्ष की गई है। अभी तक हिमकेयर योजना के तहत 02 लाख 40,000 लाभार्थियों को 218 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के दूर दराज क्षेत्रों में अब मुख्यमंत्री मोबाईल क्लीनिक स्वास्थ्य सुविधाएं घर-द्वार उपलब्ध करवाएंगी। वर्चुअल जनसंवाद को सोलन विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम सोलन के हॉल, अर्की विधानसभा क्षेत्र में दाड़लाघाट, दून विधानसभा क्षेत्र में नगर परिषद बद्दी के हॉल तथा नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र में ट्रक यूनियन के सभागार में सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा स्थापित एलईडी स्क्रीन पर सुना गया। इसके अतिरिक्त जिला की सभी 240 ग्राम पंचायतों में भी वर्चुअल संवाद सुनने की व्यवस्था की गई थी। इस अवसर पर दून विधानसभा क्षेत्र में विधायक परमजीत सिंह पम्मी, पूर्व विधायक विनोद चन्देल, अन्य पदाधिकारी, नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक केएल ठाकुर, जोगेंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक सोलन के अध्यक्ष योगेश भरतीय, जिला सोलन भाजपा के अध्यक्ष आशुतोष वैद्य, अन्य पदाधिकारी, उपमंडलाधिकारी महेन्द्र पाल गुर्जर, कसौली विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. डेजी ठाकुर, जिला परिषद सदस्य दर्पणा ठाकुर, बीडीसी धर्मपुर के उपाध्यक्ष मदन मोहन मेहता, एपीएमसी सोलन के अध्यक्ष संजीव कश्यप, भाजपा मंडल कसौली के अध्यक्ष कपूर सिंह वर्मा, अन्य पदाधिकारी, उपमण्डलाधिकारी डॉ. संजीव धीमान, अर्की विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रत्न सिंह पाल, जिला परिषद सदस्य हीरा कौशल, भुवनेश्वरी, भाजपा के राकेश गौतम, ओमप्रकाश गांधी,, रीता शर्मा, रीना शर्मा, जगदीश्वर शुक्ला, महेन्द्र ठाकुर, तहसीलदार अर्की रमन ठाकुर तथा सोलन विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी सदय डॉ. राजेश कश्यप, बघाट बैंक के पूर्व अध्यक्ष पवन गुप्ता, भाजपा मंडल सोलन के अध्यक्ष मदन ठाकुर, जिला भाजपा महामंत्री नंद राम कश्यप, नगर निगम सोलन के पार्षदगण, तहसीलदार सोलन गुरमीत नेगी, सभी स्थानों पर पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, अन्य गणमान्य व्यक्ति तथा बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
राजेश कतनौरिय। जवाली आरक्षण जाती के नाम पर या जाती के नाम पर आरक्षण की मांग देश को कई बार झकझाेरती आई है। भारत में मानव श्रेणी को जतियों एवं उपजातियों मे बांटने वाले पूर्वज भी इस बात के दोषी हैं की ईश्वर ने तो समस्त प्राणियों मे से एक मानव प्रजाति भी बनाई है, लेकिन मानव ने स्वयं ही इसे जतियों में बांट दिया। प्राचीन काल से ही भारतीय स्भ्यता में जातिवाद हावी रहा। कुछ जातियां अपने आप को ऊंचा दिखने की होड़ लगी रही, तो कुछ अपने को निम्न श्रेणी से ऊंचा दिखाने की होड में लग गई, जिस तरफ पलड़ा भारी दिखा, राजनीती भी उसी दिशा में चलती गई। जाती सत्ता हथियाने का हथियार बन गई। पंचायत से लेकर सांसद तक के चुनाब जातिवाद हावी रहता है, आज जिस आरक्षण को लेकर देश के कई राज्यों मे हिंसा, तनाव, उपद्रव व आगजनी से देश की करोड़ाें कि संपत्ति नष्ट हो जाती है। इसका कारण देश में जातिवाद ही है। हिंदू धर्म में अगर एक ही जाती होती `हिंदू` तो देश में आरक्षण जैसे मुद्दाें का कोई महत्व न होता। जतियों के नाम पर देश बंटता नहीं। आज देश में ऐसे कानून की जरूरत है कि अपने नाम के आगे कोई भी जातिसूचक शब्द न लगाया जाए। इस पर देश के समस्त वर्गों को सहमत होना पड़ेगा, तभी देश आंतरिक कलह से सुरक्षित रह सकता है। मात्र गरीब पहचाना जाए कोई अनुसूचित जाती, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, समान्य वर्ग नहीं रहेगा। एक वर्ग होगा और वो होगा मानव वर्ग। भारत के संविधान के अनुछेद-14 के अनुसार `कानून के समक्ष समानता` के अधिकार का उस समय उलंघन हो जाता है, जब सरकार खुद जाती आधारित कल्याण बोर्ड बना कर जातीय वयवस्था को बढ़ावा दे देती है। अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण बोर्ड, व्रहांण्ण कल्याण बोर्ड कबीर पंथी कल्याण बोर्ड, वाल्मीकि कल्याण बोर्ड, गद्दी गुज़र कल्याण बोर्ड, धीमान कल्याण बोर्ड आधी। भविष्य में खत्री कल्याण बोर्ड, घृत कल्याण बोर्ड, जात कल्याण बोर्ड आदि कि मांग शुरू हो जाएगी और फिर सबका कल्याण हो जाएगा व कल्याण करने के लिए फिर सरकार के पास कुछ भी नहीं बचेगा।ऐसे बोर्ड जो जाती विशेष समूह को महत्व देने से राष्ट्रिय एकता को खतरा उत्पन्न हो सकता है। कल्याण जाती विशेष या वर्ग विशेष का न होकर समस्त मानव वर्ग का होना चाहिए। कोई भी मानव गरीब हो सकता है, समाज को सरकार को उसके कल्याण के वारे में सोचना चाहिए। सरकारी स्तर पर जाती विशेष पर आधारित महापुरुषों के नाम कि शुटियाँ समाप्त की जानी चाहिए महापुरुषों का इतिहास भले ही किताबों में पड़ाया जाए, उनके आदेशाें का पालन किया, लेकिन सरकारी अवकाश जाती विशेष के महत्व को दर्शाने के लिए हो, यह सरकारी स्तर पर बंद होना चाहिए वैसे भी जो महापुरुष होता है, वो समस्त भारत का होता है न कि किसी एक विशेष जाती समुदाए का नहीं। कई बार देखा जाता आई कि वर्ग विशेष किसी महापुरुष पर अधिकार तो रखता है, लेकिन उनके आदर्शों उनकी शिक्षाओं का अनुसरण नहीं करता, बल्कि अन्य समुदाय उस महापुरुष कि शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाते हैं। महापुरुषों के नाम पर सरकारी अवकाश नहीं बल्कि सरकारी कम होने चाहिए। आज देश के लोगों के साथ- साथ सरकारों को भी जाती वायस्था के कारण मानवता एवं देश को हो रहे नुकसान पर चिंतन करने की आवश्यकता है। देश की सभी नागरिकों को जातिविहीन समाज के पक्ष मे अपनी समति देनी चाहिए, तभी धर्म के साथ-साथ आने वाली पीड़ियों की सुरक्षा की कल्पना की जा सकती है।
ऊर्जा मंत्री ने बीडीओ कार्यालय में देखा मुख्यमंत्री का बजट पर वर्चुअल संवाद कार्यक्रम फर्स्ट वर्डिक्ट। पांवटा साहिब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा प्रस्तुत इस वित्त वर्ष का बजट ऐतिहासिक है, जिसमें माननीय मुख्यमंत्री ने हर वर्ग की मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हर व्यक्ति को लाभान्वित किया है। यह वाक्य बहुउद्देशीय परियोजनाएं व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने जिला सिरमौर के पांवटा साहिब में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा बजट 2022-23 के संबंध में आयोजित लाइव संवाद कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों को संबाेधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार आरंभ से ही बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखती आई है, जिसने पेंशन की उम्र 80 से 60 वर्ष कर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इससे लगभग 7 लाख 50 हजार अतिरिक्त लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने अपने कार्यकाल में दिहाड़ी में 140 रूपए की बढ़ोतरी की है, जिससे अब दिहाड़ी दर को 350 रुपए प्रतिदिन प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में 1700 रुपए की बढ़ोतरी करते हुए अब उन्हें 9000 रुपए प्रतिमाह मानदेय प्रदान किया जाएगा। इसी प्रकार आशा वर्कर के मानदेय में 1825 रुपए, सिलाई अध्यापकों के मानदेय में 900 रुपए, जल रक्षक, पैरा फिटर व पंप ऑपरेटर के मानदेय में भी 900 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने बताया कि बिजली विभाग के अंतर्गत 0 से 60 यूनिट तक बिजली के इस्तेमाल को मुफ्त कर दिया गया है। इस कदम से प्रदेश के 4 लाख 40 हजार लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इसके अतिरिक्त, 61 से लेकर 125 यूनिट तक बिजली 1 रुपए प्रति यूनिट की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाई जाएगी।इस दौरान मंडल अध्यक्ष अरविंद गुप्ता, पंचायत समिति अध्यक्ष हितेंद्र कुमार, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष सुभाष चौधरी, उपमंडल दंडाधिकारी विवेक महाजन, तहसीलदार वेद प्रकाश, युवा मोर्चा अध्यक्ष राहुल चौधरी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अनिल सैनी सहित अन्य लोग भी इस संवाद कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की जिला कमेटी शिमला की बैठक पार्टी कार्यालय में आयोजित की गई और इसमें अन्य मुद्दों के साथ शिमला नगर निगम चुनाव को लेकर चर्चा की गई। पार्टी नगर निगम चुनाव में भाजपा के द्वारा जनता पर महंगाई, बेरोजगारी व आर्थिक बोझ डालने वाली नीतियों के विरुद्ध आमजन के हित की वैकल्पिक नीतियों व भाजपा को हराने के लिए वाम जनवादी व धर्मनिरपेक्ष मोर्चा बनाकर जनता के लिए एक शशक्त विकल्प के रूप में चुनाव लड़ेगी। इस चुनाव में पार्टी नगर निगम में भाजपा के 5 वर्षों के विफल कार्यकाल और ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद इस दौरान शिमला शहर के लिए कोई नई परियोजना न ला पाना तथा सीपीएम के नेतृत्व में पूर्व नगर निगम के कार्यकाल में लंबे संघर्ष के बाद लाई गई परियोजनाएं, जिसमें मुख्यतः स्मार्ट सिटी, विश्व बैंक से 125 मिलियन डॉलर की पेयजल आपूर्ति व सीवरेज की परियोजना, अम्रुत, टूटी कंडी रोप-वे, शहरी गरीब के लिए आवास व तहबाजारी करने वालों के लिए आजीविका मिशन के अतिरिक्त पार्किंग व अन्य परियोजनाओं को सही तरीके से लागू करने में विफल रहने को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा। इस बैठक में राज्य सचिव कॉ ओंकार शाद, जिला सचिव संजय चौहान के अतिरिक्त देवकी नद, जगमोहन ठाकुर, कुलदीप, बालक राम, अजय दुलटा, सत्यवान, रीना सिंह, अनिल ठाकुर, संदीप वर्मा, विजय राजटा व मदन नेगी ने भी भाग लिया। बैठक में निर्णय लिया गया कि नगर निगम शिमला चुनाव को लेकर एक चुनाव समिति का गठन होगा, जिसमें शिमला में कार्यरत सभी राज्य कमेटी, जिला कमेटी व लोकल कमेटी के सभी सदस्य शामिल होंगे। आगामी एक सप्ताह में वार्ड स्तर पर चुनाव कमेटियों का गठन कर प्रत्याशियों के चुनाव व प्रचार प्रसार के लिए कार्य किया जाएगा। पार्टी जनता के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर इस चुनाव में उतरेगी। भाजपा ने नगर निगम में 5 वर्षों के कार्यकाल में केवल जनविरोधी नीतियों को लागू किया, जिसमें पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के निजीकरण किया तथा पानी, कूड़ा उठाने की फीस, प्रॉपर्टी टैक्स, किराया व अन्य सेवाओं की दरों में वृद्धि कर महंगाई बढ़ाकर जनता पर केवल आर्थिक बोझ डालने का कार्य किया है। कोरोना काल में नगर निगम कोई भी राहत जनता को देने में विफल रही है। आज भाजपा की इन जनविरोधी नीतियों के चलते सभी वर्गों जिसमें मजदूर, कर्मचारी, कारोबारी, छात्र, महिला, युवा व अन्य सभी वर्गों में आक्रोश है। बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा अपने कार्यकाल के पेश किये गए अंतिम वर्ष के बजट पर भी चर्चा की गई तथा यह बजट केवल आगामी चुनाव को ध्यान में रख कर पेश किया गया है। सरकार द्वारा लागू की जा रही नीतियों के कारण तेजी से बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई व कृषि संकट जैसे गंभीर मुद्दों के समाधान के लिए इस बजट में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। सरकार आय के साधनों के सृजन में पूरी तरह से विफल रही है, जिससे वितीय घाटा बढ़ा है और सरकार का कर्ज आज 65000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक गम्भीर संकट की ओर अग्रसर है।सरकार द्वारा कृषि व बागवानी के क्षेत्र में प्रदान की जा रही सहायता व सबसिडी में कटौती के चलते खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है। और इनकी कीमतों में एक वर्ष में 40 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। जिससे गरीब व छोटे किसान व बागवान का संकट और गहरा हो गया है और उसका रोजी-रोटी का संकट और बड़ा है। बैठक में सरकार से बेरोजगारी, महंगाई व कृषि संकट को दूर करने के लिए तुरन्त ठोस कदम उठाने की मांग की गई। दैनिक मजदूरी को बढ़ा कर कम से कम 700 रुपए किया जाए तथा न्यूनतम वेतन 21000 रुपए सभी के लिए किया जाए। पुरानी पेंशन बहाल की जाए तथा आउटसोर्स व स्कीम वर्कर के लिए स्थाई निति बनाई जाए। कृषि व बागवानी में समाप्त की गई सबसिडी को तुरंत बहाल कर किसानों को राहत प्रदान कर खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं की कीमतों में कमी करे। प्रदेश में पैदा होने वाली सभी फसलों, सब्जियों, फलों व दुध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करें। सेब के लिए कश्मीर की तर्ज पर मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) लागू की जाए तथा सेब बागवानों का बकाया भुगतान तुरंत नकद में किया जाए। पार्टी मजदूर, कर्मचारी व किसानों के द्वारा अपनी मांगों को लेकर चलाए जा रहे आंदोलनों का समर्थन करती है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। नादाैन देश मे अराजकता के हालात इतने बढ़ चुके हैं कि जनता को ना भाजपा पर विश्वास रहा न कांग्रेस पर। इन पार्टियों में काम कर रहे पदाधिकारी भी अब इनके जनविरोधी रुख से परेशान ही चुके हैं। आज कांग्रेस में जनरल सेक्रेटरी किसान विंग के पद पर रह चुके विपन कुमार गांव कोहला ने कांग्रेस को छोड़ कर आम आदमी पार्टी की जनहित नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी के दामन को थामा औऱ जनहित के कामों में पार्टी का साथ देने का संकल्प लिया। विपन कुमार को प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट अनूप केसरी जी संगठन विस्तार मंत्री सचिन राय, स्टेट आब्जर्वर सतीश ठाकुर जोइनिंग करवाते हुए।।इस मौके पर शैंकी ठुकराल राज्य संगठन मंत्री ओबीसी, अध्यक्ष विकास डोगरा उपाध्यक्ष अनिल कुमार, संगठन मंत्री मनोज कुमार तथा अन्य सदस्य मौजूद रहे।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सिरमौर जिला के ट्रांस-गिरी क्षेत्र के लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल को आज यहां संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ट्रांस-गिरी क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र और हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से यह मामला उठाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के साथ लगते जौनसार क्षेत्र को पहले ही जनजातीय क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वे सिरमौर जिला के ट्रांस-गिरी क्षेत्र को जनजातीय दर्जा प्रदान करने का मामला एक बार पुनः केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे न केवल इस क्षेत्र के विकास के लिए अतिरिक्त एवं विशेष बजट का प्रावधान सुनिश्चित होगा, बल्कि क्षेत्र के लोगों की चिरलंबित मांग भी पूरी होगी। सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी, विधायक रीना कश्यप, हिमाचल प्रदेश राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुभासीष पन्डा और हाटी समुदाय के विभिन्न प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
-पुराने दिनों को याद करके कहा पहली बार सांसद बना था तब से मिल रहा प्रोफ़ेसर साहब से आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्रदेश के विस्तृत दौरे पर हिमाचल पहुंचे केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल शनिवार को हमीरपुर के दौरे के दौरान समीरपुर पहुंचे और उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल से आशीर्वाद भी लिया। केंद्रीय राज्यमंत्री सपरिवार समीरपुर पहुंचे थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय राज्य मंत्री का घर पहुंचने पर सहर्ष स्वागत अभिनंदन किया और काफी देर तक दोनों वरिष्ठ नेताओं में चर्चा भी हुई। हमीरपुर पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि हमीरपुर दौरे के दौरान दो प्रमुख काम जो उन्होंने किए हैं, पहला है मां ज्वालाजी के दर्शन और दूसरा प्रो. प्रेम कुमार धूमल के दर्शन करना और उनसे आशीर्वाद लेना। उन्होंने कहा कि जब पहली बार सांसद बन के लोकसभा पहुंचे थे, तब से ही उन्हें आदरणीय प्रोफेसर साहब का आशीर्वाद और मार्गदर्शन एक बड़े भाई के रूप में मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश के लोगों को हर गांव-गांव तक पेयजल पहुंचाने का काम किया था। अब इसी योजना को अब केंद्र की मोदी सरकार आगे बढ़ा रही है और हर घर जल, नल से जल योजना को अतिशीघ्र ही हिमाचल प्रदेश में शत शत शत लक्ष्य के साथ पूरा कर लिया जाएगा। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर धूमल व उनकी पत्नी शीला धूमल ने केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और उनकी पत्नी व उनके परिवार को हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक शॉल टोपी पहना कर उनका स्वागत किया। पूर्व सीएम ने कहा कि देश में मोदी सरकार बेहतरीन काम कर रही है। देश विश्व के पटल पर बड़ी शक्ति बनकर उभरा है और केंद्र की योजनाओं से हर राज्य में विकास का पहिया तीव्र गति से आगे दौड़ रहा है और आमजन खुशहाल हो रहा है। मोदी सरकार की कामयाबी की बड़ी वजह उनके साथ कैबिनेट में मौजूद उनकी बेहतरीन टीम भी है और उसी टीम के एक महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में कल पीटरहॉफ से प्रातः 11 बजे जुड़ेंगे यह बजट असंभव को संभव करने वाला बजट : बिंदल फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला भाजपा हिमाचल प्रदेश की बैठक का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया, जिसमें विशेष रूप से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश काश्यप एवं संगठन महामंत्री पवन राणा उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा पेश किया बजट आम जन मानस का बजट है। इस उपलक्ष में भाजपा 6 मार्च को प्रातः 10:30 बजे मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है, जिसमें सभी विधानसभा क्षेत्रों में जनता एलईडी पर मुख्यमंत्री का हिमाचल के बजट को लेकर संबोधन को सुनेगी। इस कार्यक्रम के मध्यम से जयराम ठाकुर सरल रूप से बजट जनता को समझाएंगे। यह कार्यक्रम भव्य होगा, कश्यप ने कहा की यह बजट चुनावी वर्ष का अंतिम बजट था और जिस प्रकार से हमारी सरकार काम कर रही है। इससे साफ है की 2023 में भाजपा फिर एक बार मजबूत सरकार के साथ बजट पेश करेगी। मुखमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा की हमारी सरकार के पांचवें बजट में गरीब तपके का विशेष ध्यान रखा गया है, इस बजट में सभी वर्गों के लिए कुछ न कुछ है। उन्होंने कहा की कोविड संकटकाल के बाद भी हमने जनहित का बजट निकाला है। इस बजट के मुख्य बिंदुओं को हम सब मिलकर जनता के बीच ले जाएंगे और बजट का लाभ हिमाचल के घर घर तक पहुंचाएंगे। बैठक में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने जयराम ठाकुर को अच्छे बजट के लिए बधाई देते हुए कहा की यह बजट असंभव को संभव करने वाला बजट है। महामंत्री त्रिलोक जम्वाल ने बताया की कल 6 मार्च को प्रादेशिक कार्यक्रम का आयोजन पीटरहॉफ शिमला में प्रातः 11 बजे किए जाएगा, यहां से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पूरे प्रदेश को संबोधित करेंगे। बैठक में 2017 के भाजपा प्रत्याशी, भाजपा प्रदेश पदाधिकारी, सभी प्रदेश मोर्चा अध्यक्ष, सभी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक, सभी पूर्णकालिक विस्तारक, भाजपा जिला प्रभारी एवं सह प्रभारी, भाजपा जिला अध्यक्ष एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष उपस्थित रहे।


















































