दिवाली के बाद से तेंदुए की तलाश में जुटी वन विभाग की टीम को 14 दिन बाद सफ़लता हाथ लगी है। टीम ने गुरुवार रात एक तेंदुए को पकड़ा है। शहर के कनलोग इलाके में जंगल में लगाए गए पिंजरे में एक तेंदुआ कैद हुआ है। सूचना के मुताबिक बीती रात करीब साढ़े आठ बजे एक पिंजरे में तेंदुआ आ फंसा है। रात करीब नौ बजे वन विभाग के अफसर मौके पर पहुंचे। ट्रैंक्यूलाइजर गन से तेंदुए को बेहोश किया गया। बताया जा रहा है यह तेंदुआ बड़ा है और पिंजरे में लगाए गए मांस के लिए यहां आया था। हालांकि अभी ये साफ नही हो पाया है कि ये वही तेंदुआ है जिसने कनलोग और डाउनडेल से दो बच्चों को उठाया था। वन विभाग इस तेंदुए को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर टूटीकंडी ले गया है। वन विभाग का कहना है कि अभी जंगल में तेंदुए पकड़ने का ऑपरेशन जारी रहेगा। अब विभाग साक्ष्य से पता लगाने की कोशिश करेगा कि ये कौन सा तेंदुआ है।
रोहरु में एक कार हादसे में दो लोगों के घायल होने का समाचार प्रकाश में आया है। हादसे में घायल महिला और पुरुष को 108 द्वारा रोहड़ू सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया। जहाँ पर प्राम्भिक जांच के बाद उनको शिमला रेफर किया गया। मिली जानकारी के अनुसार घायलों की हालत डॉक्टर द्वारा गंभीर बताई जा रही है। पुरुष का नाम सचिन शर्मा और महिला का नाम प्रमिला शर्मा बताया जा रहा है। ये गुमा (टिकारी) के रहने वाले है। गाड़ी पर काबू ना पाने की वजह से यह हादसा पेश आया है।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गुरु नानक जयन्ती के अवसर पर प्रदेशवासियों, विशेषकर सिक्ख समुदाय के लोगों को बधाई दी है। राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि गुरु पर्व सिक्खों का पवित्र त्यौहार है, जिसे सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि गुरूजी की शिक्षाओं का अनुसरण कर हम शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बधाई संदेश में कहा कि गुरु नानक देव ने प्रेम, शांति तथा साम्प्रदायिक सद्भाव का सन्देश दिया है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव ने विश्वबन्धुत्व पर बल दिया और उनकी शिक्षाएं मौजूदा परिस्थ्तियों में और भी प्रासंगिक हैं।
भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति बैठक की तैयारियों को लेकर संचालन समिति की बैठक भाजपा मुख्यालय दीपकमल चक्कर शिमला में प्रदेश महामंत्री त्रिलोक जम्वाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। भाजपा महामंत्री त्रिलोक जम्वाल ने बताया कि भाजपा प्रदेश कार्यसमिति बैठक का आयोजन 24, 25 एवं 26 नवम्बर, 2021 को होटल पीटरहाॅफ शिमला में होने जा रहा है। उन्होनें बताया कि प्रथम दिन 24 नवम्बर, 2021 को कोर ग्रुप की बैठक का आयोजन किया जाएगा। जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप करेंगे। इस बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं क्षेत्रीय प्रभारी सौदान सिंह, प्रभारी अविनाश राय खन्ना, सह प्रभारी संजय टंडन, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रो0 प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार, केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर सहित कोर ग्रुप के सदस्य उपस्थित रहेंगे। उन्होनें बताया कि दूसरे दिन 25 नवम्बर, 2021 को प्रातः विस्तारित कोर ग्रुप की बैठक होगी जिसके बाद प्रदेश पदाधिकारी बैठक का आयोजन किया जाएगा। 26 नवम्बर, 2021 को प्रदेश कार्यसमिति बैठक होगी। बैठक में पूर्व कार्यक्रमों की समीक्षा एवं आगामी कार्यक्रमों को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। भाजपा ने कार्यसमिति के सफल आयोजन के लिए संचालन समिति के 14 विभागों का गठन किया है। संचालन समिति की बैठक में जिला अध्यक्ष रवि मेहता, मंडल अध्यक्ष राजेश शारदा, दिनेश ठाकुर, जितेंद्र भोटका, महामंत्री गगन शर्मा, अंजना शर्मा एवं संचालन समिति के सदस्यों ने भाग लिया।
शिमला में चल रहे पीठासीन अधिकारियों के दो दिवसीय सम्मेलन का आज आखरी दिन है। इस सम्मेलन में वीरवार को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी भाग लिया। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदन में बताया कि दो दिन के सम्मेलन के अंदर कुछ निर्णय व संकल्प रखे गए। सदन में जानकारी देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा की यह सम्मेलन वर्ष में दो बार आयोजित किया जाएगा। यह एक बार दिल्ली व दूसरा किसी राज्य में आयोजित किया जाएगा। दो दिन की कार्यवाही के दौरान ग्यारह संकल्प रखे गए जिन्हें सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस दौरान सदन में हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद मिला व सौ वर्षों बाद ओम बिड़ला के मार्गदर्शन मिला। उन्होंने बताया कि इस सदन में पक्ष- विपक्ष सवांद के द्वारा रखा जाता है। इस दैरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि यहीं से संसदीय परम्परा की नीवं रखी गई। संसद व राज्य विधानमंडल जनता की शिकायतों के लिए एक मंच प्रदान करने का स्थान है। उन्होंने कहा कि सदन में स्पीकर नये सदस्यों को सरक्षण देते हैं जिसको फायदा नये लोगों को मिलता है। अनुराग ने हिमाचल के संसदीय इतिहास की जानकारी दी। कोविड कि विपरीत स्थिति से प्रधानमंत्री मोदी ने किया सभी के सहयोग से 100 करोड़ वेक्सीनेशन का कार्य संभव हुआ।
शिमला: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने ब्रिगेडियर कुशल ठाकुर, मंडी एवं नीलम सरैइक, जुब्बल कोटखाई को भाजपा का प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नियुक्त किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप पुनीत शर्मा, नालागढ़ को भाजपा का सोशल मीडिया विभाग का प्रदेश संयोजक एवं अनिल डडवाल, ऊना को भाजपा आईटी विभाग का प्रदेश संयोजक नियुक्त किया है।
हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने साल-2020 के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को मंगलवार को डीजीपी डिस्क देने के निर्देश जारी कर दिए। एसपी बद्दी मोहित चावला, कमांडेंट 3 आईआरबीएन पंडोह सौम्या सांबशिवन, एसपी इंटेलिजेंस संदीप भारद्वाज समेत कुल 88 पुलिस कर्मियों को डीजीपी डिस्क मिलेगा। इसके अलावा डीएसपी कुलविंदर सिंह, डीएसपी कमल वर्मा, एचएचसी रमेश चंद, कांस्टेबल रणबीर, संदीप कुमार और संदीप ठाकुर, सिरमौर जिले के हेड कांस्टेबल रोहित कुमार और संदीप चौहान, कांस्टेबल नितीश शर्मा, सोलन से डीएसपी योगेश रोल्टा, कांस्टेबल हेमंत और नवीन कुमार, किन्नौर से कांस्टेबल भूपेंद्र कुमार, बद्दी के हेड कांस्टेबल राजेंद्र सिंह, रोहित सिंह, लाहौल-स्पीति के कांस्टेबल दीपक, प्रमोद कुमार शामिल हैं।
राजधानी शिमला में बुधवार को एक पिकअप से टक्कर लगने के कारण दो छात्र घायल हो गए है। घायलों में एक छात्रा अंजलि जबकि एक छात्र आदित्य है। छात्रा अंजली को ज्यादा चोंटे लगी है जबकी आदित्य को पैर में चोट आई है। घायल छात्रों को तुरन्त आईजीएमसी लाया गया जहाँ उनका ईलाज किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह यह छात्र जाखू स्थित केवी स्कूल जा रहे थे। जाखू की चढ़ाई में एक पिकअप जा रही थी तभी वह अचानक बन्द हो गयी और उतराई में वापिस आ कर रेलिंग के साथ खड़े दो छात्रों को लग गई। जिसमे आदित्य को पैर में चोट लगी है, जबकि अंजलि को आंख की साइड चोट लगी है। IGMC आपातकाल विभाग के सीएमओ डॉ सोमेश शर्मा ने बताया कि सुबह दो छात्र उनके पास लाए गए थे जिसमें एक को ज्यादा चोट लगीं है जबकि एक अन्य छात्र को हल्की चोट लगी है। उन्होंने कहा कि पुलिस को सूचना दे दी गयी है और घायलो का ईलाज किया जा रहा है।
शिमला में 82वें अखिल भारतीय पीठासीन सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि यह हिमाचल प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। इसके लिए प्रधानमंत्री व लोकसभा अध्यक्ष का धन्यवाद। उन्होंने कहा कि प्रदेश विधानसभा का एक गौरवमयी इतिहास रहा है। इस दौरान उन्होंने बताया कि प्रदेश की वर्तमान प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1 लाख 95 हजार हो गई है। हिमाचल स्टेटेहूड के 50 वर्ष पूर्ण हुए है जिनमे अनेक कार्यक्रम होने है। उन्होंने प्रथम डोज में देश भर में प्रथम आने पर जनता को बधाई दी। इस दौरान ओम बिड़ला ने कहा कि शिमला देश के अंदर ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी रहा है। वंही इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मेलन नए संकल्पो के साथ होता है। जो देश की संसदीय व्यवस्था को नई गति देता है। इस परंपरा को 100 साल हुए है। इसके लिए सभी देश वासियों को बधाई। लोकतंत्र भारत का स्वभाव व प्रकृति है। भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, यह कार्यक्रम हमारी जिम्मेदारी को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि भारत 100 करोड़ का वैक्सीन का आंकड़ा पूरा कर चुका है। भारत के भविष्य के सपने पूरे होंगे जो सभी राज्यों के प्रयासों से पूरे होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि देश ने वन नेशन वन राशन कार्ड जैसी व्यवस्थाएं बनाई है। वन नेशन वन नेशन लेजिसलेचर की व्यवस्था जैसी व्यवस्था आजादी के अमृत काल मे होना चाहिए। सदन के आचार व्यवहार, वाद विवाद समाधान में कर्तव्य का बोध हो। कर्तव्य को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा। 2047 तक देश कहा ले जाना है सदन इस पर चर्चा करेगा ऐसी उम्मीद है।
शिमला: भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक की तैयारियों को लेकर संचालन समिति की बैठक भाजपा मुख्यालय दीपकमल चक्कर शिमला में प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, प्रदेश महामंत्री त्रिलोक जम्वाल, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा, हिमफैड के चेयरमैन गणेश दत, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष पुरषोतम गुलेरिया, गुडि़या सक्षम बोर्ड की चेयरमैन रूपा शर्मा, प्रदेश सचिव पायल वैद्य, जिलाध्यक्ष रवि मैहता सहित संचालन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। भाजपा महामंत्री त्रिलोक जम्वाल ने बताया कि भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का आयोजन 24, 25 एवं 26 नवम्बर को होटल पीटरहाॅफ शिमला में होने जा रहा है। उन्होनें बताया कि प्रथम दिन 24 नवम्बर, को कोर ग्रुप की बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप करेंगे। इस बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं क्षेत्रीय प्रभारी सौदान सिंह, प्रभारी अविनाश राय खन्ना, सह प्रभारी संजय टंडन, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रो प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार, केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर सहित कोर ग्रुप के सदस्य उपस्थित रहेंगे। उन्होनें बताया कि दूसरे दिन 25 नवम्बर को प्रातः विस्तारित कोर ग्रुप की बैठक होगी जिसके बाद प्रदेश पदाधिकारी बैठक का आयोजन किया जाएगा। 26 नवम्बर को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी। बैठक में पूर्व कार्यक्रमों की समीक्षा एवं आगामी कार्यक्रमों को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के समरहिल परिसर में हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा 30 जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क राशन किट का वितरण किया। अक्षय पात्रा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ के प्रांत संघचालक वीर सिंह रांगड़ा के हाथों से लोगों को राशन किट दी। राशन किट प्राप्त करने वालों में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कार्यरत जरूरतमंद सफाई कर्मचारी और विवि परिसर के विभिन्न निर्माण कार्यों में कार्यरत प्रवासी मजदूर परिवार भी शामिल रहे। डॉ. वीर सिंह रांगड़ा ने कहा कि कोरोना की अवधि में गरीब व कम आय वाले परिवारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी है। ऐसे परिवारों की आर्थिकी अब भी काफी कमजोर है। इन गरीब परिवारों को मदद की दरकार है। उसी को ध्यान में रखते हुए डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति शिमला सहित पूरे प्रदेश भर में जरूरतमंद गरीब परिवारों को विभिन्न माध्यमों से मदद पहुंचा रही है। उन्होंने सक्षम लोगों व अन्य सामाजिक संगठनों से भी गरीब व जरूरतमंदों की मदद का आह्वान किया है, जिससे इन परिवारों को कोरोना जैसी महामारी के दूरगामी दुष्प्रभावों से बचाया जा सके। इस अवसर पर जिला सेवा प्रमुख कर्म सिंह सहित तिलकनगर, समरहिल क्षेत्र के स्वयंसेवक भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार को धर्मशाला में राज्य के लिए जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी के आर्थिक सहयोग से 1010.60 करोड़ रुपये की हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण संवर्धन परियोजना चरण-प्प् के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि इन क्षेत्रों में कुल जनसंख्या के 90 प्रतिशत से अधिक लोग रहते हैं और लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सीमित वित्तीय संसाधनों और कोरोना महामारी के कारण मंदी के बावजूद, वर्तमान सरकार ने राज्य के सर्वांगीण और समान विकास के लिए सिंचाई, कृषि, बागवानी, वानिकी और संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि जाइका सहायता प्राप्त फसल विविधिकरण परियोजना के दूसरे चरण को राज्य के सभी 12 जिलों में लागू किया जाएगा और इससे राज्य के किसान परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को अधिक बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना का पहला चरण 2011 से प्रायोगिक आधार पर राज्य के पांच जिलों मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना में कार्यान्वित किया जा रहा है, जिससे जिलों के किसानों की अर्थव्यवस्था बदल गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य फसल विविधिकरण के एक सफल माॅडल का प्रसार करना और 2031 तक परियोजना क्षेत्र में सब्जी उत्पादन क्षेत्र को 2500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7000 हेक्टेयर करना है। जय राम ठाकुर ने कहा कि महामारी के दौरान भी, कृषि और संबद्ध क्षेत्र ने राज्य की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का शुभारम्भ भी किया। उन्होंने इस अवसर पर परियोजना के पहले चरण की सफलता की कहानियों के बारे में कुछ प्रकाशनों का भी विमोचन किया।
अत्याधुनिक भारतीय ड्रॉप रो बॉल खेल की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का विधिवत समापन हुआ। इस समापन कार्यक्रम में मुख्यअतिथि उपमंडलाधिकारी चौपाल चेत सिंह, डीएसपी चौपाल राजकुमार, सेवानिवृत्त संघ चौपाल के अध्यक्ष सुरेश चौहान व उपप्रधान एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश घुंटा उपस्थित रहे। मुख्यातिथि ने अपने संबोधन में कहा कि इस खेल को जानने के बाद मुझे लगता है कि इस खेल के मुकाबले सस्ता और सरल खेल कोई हो ही नहीं सकता, ये बहुत मनोरंजन भरा खेल है। एक प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते यदि इस खेल के विकास के लिए मुझसे कोई मदद की आवश्यकता हो तो में सदैव आपके साथ खड़ा हूं। इस दौरान ड्रॉप रो बॉल के सचिव गोविंद सिह ने मुख्यातिथि को इस खेल के बारे में बारीकी से जानकारी दी। इस मौके ड्रॉप रों बॉल डेवलपमेंट के अध्यक्ष अमित चौहान और उपाध्यक्ष राजिंदर त्यागी ने अपने संबोधन में मुख्यातिथि और अन्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
100 साल पूरे होने पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा में अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का 7वां सम्मेलन होने जा रहा है। 16 से 19 नवंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने शिमला पहुँच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 नवंबर को वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। 100 वर्ष पहले 1921 में शिमला में प्रथम अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन शिमला से शुरू हुआ था। 36 राज्यों की विधानसभाओं, विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी, उपाध्यक्ष और प्रधान सचिव सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बताया कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन 16 से 19 नवम्बर तक हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1921 में यह सम्मेलन हुआ था। उन्होंने बताया कि किस तरह लोकतंत्र सशक्त हो संवैधानिक संस्थाए मजबूत हो इस पर चर्चा की जाएगी। हिमाचल में विधायकों की अकादमी को लेकर कहा कि चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा। एयर इंडेक्स को लेकर पूछे गए सवाल पर ओम बिड़ला ने बताया कि शिमला देश ही नही दुनिया में भी अपनी सौंदर्य व शुद्ध आवोहवा के लिए विख्यात है। सम्मेलन में 36 राज्य विधान परिषदों तथा विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी उप पीठासीन अधिकारी व प्रधान सचिव भाग ले रहे है। कुल मिलाकर एक राज्य से 4 प्रतिनिधि अपनी स्पाउस के साथ इस सम्मेलन में भाग लेंगे जिनकी संख्या 288 होगी। सम्मेलन में भाग ले रहे प्रतिनिधियों की कुल संख्या 378 होगी।
जुब्बल-नावर-कोटखाई में बाग़वानी, पर्यटन और विकास के कार्य को गति दी जाएगी। यह बात नव निर्वाचित कांग्रेस विधायक रोहित ठाकुर ने कोटखाई में आयोजित जन आभार कार्यक्रम के दौरान कोटखाई की जनता को सम्बोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि जुब्बल-नावर-कोटखाई के उप-चुनाव में कांग्रेस पार्टी का सीधा मुकाबला प्रदेश की भाजपा सरकार से था। प्रदेश की भाजपा सरकार ने पूरा कैबिनेट जुब्बल-नावर-कोटखाई में उतार दिया था और बड़े-2 विजन और घोषणाओं से जनता को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन क्षेत्र की प्रबुद्ध जनता ने अपनी बुद्धिमता और विवेकता का परिचय देते हुए, अपार स्नेह और समर्थन के साथ कांग्रेस पार्टी को जीत दिलवाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही एक समान दृष्टिकोण के साथ संतुलित और समग्र विकास करने का प्रयास किया है और रुकें पड़े विकास कार्य को गति दी जाएगी। रोहित ठाकुर ने कहा कि क्षेत्र में सीए स्टोर स्थापित करने और पर्यटन में अपार संभावनाओं को देखते हुए क्षेत्र में स्थानों को चिन्हित कर विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उप-चुनाव से पूर्व भाजपा सरकार ने दो उपमंडल, विकास खंड और उप तहसील खोलने की घोषणा की है। उसे भी अमलीजामा पहनाया जाएगा। रोहित ठाकुर ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उप चुनाव में निरंतर संघर्ष और मेहनत कर कांग्रेस पार्टी को विजयी बनाने पर आभार जताया।
आज जब देश के प्रधानमंत्री श्रीयुत नरेंद्र मोदी देश में भगवान् बिरसा मुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की परंपरा का शुभारंभ कर रहे हैं। तब स्वाभाविक ही विदेशी परंपरा व विघ्नसंतोषियों के “मूलनिवासी दिवस” का विचार हृदय में आता है। भारत में मूलनिवासी दिवस या इंडिजिनस पीपल डे एक भारत मे एक नया षड्यंत्र है। सबसे बड़ी बात यह कि इस षड्यंत्र को जिस जनजातीय समाज के विरुद्ध किया जा रहा है, उसी समाज के काँधों पर रखकर इसकी शोभायमान पालकी भी चतुराई पूर्वक निकाल ली जा रही है। वैश्विक दृष्टि से यदि देखा जाये तो जिस 9 अगस्त दिवस को जनजातीय समाज के नरसंहार दिवस के रूप मे स्मरण किया जाना चाहिए उसी दिवस को पश्चिमी शक्तियों द्वारा एक उत्सव के रूप मे स्थापित कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के एक संगठन विश्व मजदूर संगठन ILO द्वारा “राइटस आफ इंडिजिनस पीपल” नाम से एक कन्वेन्शन जारी किया गया जिसे सम्पूर्ण विश्व के मात्र 22 उन देशों ने हस्ताक्षर किया जिनकी कहीं कहीं अत्याचार पूर्ण औपनिवेशिक कालोनियां थी। इन्हीं 22 देशों ने एक “वर्किंग ग्रूप फार इंडिजिनस पीपल” नामक संगठन बनाया जिसकी प्रथम बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई और इसी दिन को बाद मे विश्व मूल निवासी दिवस या विश्व आदिवासी दिवस के रूप मे मनाया जाने लगा। भारत के तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों व वामपंथियों के सहयोग से विदेशियों की यह चाल इतनी सफल हुई कि बड़ी संख्या मे जनजातीय समाज इस वर्ल्ड इंडिजेनस डे यानि विश्व मूलनिवासी दिवस को आदिवासी दिवस के नाम से मनाने लगा। तथ्य यह है कि भारत मे जनजातीय समाज व अन्य जाति जिसे इन विघटनकारियों ने आर्य – अनार्य का वितंडा बना दिया, वैसी परिस्थितियाँ भारत मे है ही नहीं। कथित तौर पर आर्य कहे जाने वाले लोग भी भारत मे उतने ही प्राचीन हैं जितने कि जनजातीय समाज के लोग। यह तो अब सर्वविदित है कि इस्लाम व ईसाइयत दोनों ही विस्तारवादी धर्म हैं व अपने विस्तार हेतु इन्होने अपने धर्म के परिष्कार, परिशोधन के स्थान पर षड्यन्त्र, कुतर्क, कुचक्र व हिंसा का ही उपयोग किया है। अपने इसी लक्ष्य की पूर्ति हेतु पश्चिमी विद्वानों ने भारतीय जातियो मे विभेद उत्पन्न करना उत्पन्न किया व द्रविड़ों को भारत का मूलनिवासी व आर्यों को बाहरी आक्रमणकारी कहना प्रारंभ किया। ईसाइयों ने अपने धर्म की श्रेष्ठता सिद्ध करने हेतु इस प्रकार के षड्यन्त्र रचना सतत चालू रखे। विदेशियों ने ही भारत के इतिहास लेखन मे इस बात को दुराशय पूर्वक बोया कि आर्य विदेश से आई हुई एक जाति थी जिसने भारत के मूलनिवासी द्रविड़ समाज की सभ्यता को आक्रमण करके पहले नष्ट भ्रष्ट किया व उन्हे अपना गुलाम बनाया। जबकि यथार्थ है कि आर्य किसी जाति का नहीं बल्कि एक उपाधि का नाम था जो कि किसी विशिष्ट व्यक्ति को उसकी विशिष्ट योग्यताओं, अध्ययन या सिद्धि हेतु प्रदान की जाती थी। आर्य शब्द का सामान्य अर्थ होता है विशेष। पहले अंग्रेजों ने व स्वातंत्र्योत्तर काल मे अंग्रेजों द्वारा लादी गई शिक्षा पद्धति ने भारत मे लगभग छः दशकों तक इसी दूषित, अशुद्ध व दुराशयपूर्ण इतिहास का पठन पाठन चालू रखा। भारत मे इसी दूषित शिक्षा पद्धति ने आर्यन इंवेजन थ्योरी की स्थापना की व सामाजिक विभेद के बीज लगातार बोये। जर्मनी मे जन्में किंतु संस्कृत के ज्ञान के कारण अंग्रेजों द्वारा भारत बुलाये गए मेक्समूलर ने आर्यन इन्वेजन थ्योरी का अविष्कार किया। मेक्समूलर ने लिखा कि आर्य एक सुसंस्कृत, शिक्षित, बड़े विस्तृत धर्म ग्रन्थों वाली, स्वयं की लिपि व भाषा वाली घुमंतू किंतु समृद्ध जाति थी। इस प्रकार मैक्समूलर ने आर्य इंवेजन थ्योरी के सफ़ेद झूठ का पौधा भारत मे बोया जिसे बाद मे अंग्रेजी शिक्षा पद्धति ने एक बड़ा वृक्ष बना दिया। यद्द्पि बाद मे 1921 मे हड़प्पा व मोहनजोदाड़ो सभ्यता मिलने के बाद आर्यन थ्योरी को बड़ा धक्का लगा किंतु अंग्रेजों ने अपनी शिक्षा पद्धति, झूठे इतिहास लेखन व षड्यन्त्र के बल पर इस थ्योरी को जीवित रखा। सिंधु घाटी सभ्यता की श्रेष्ठता को छुपाने व आर्य द्रविड़ के मध्य विभाजन रेखा खींचने की यह कथा बहुत विस्तृत चली किंतु अभी हम मूलनिवासी दिवस तक ही सीमित रहते हैं। यदि हम भारत के जनजातीय समाज व अन्य समाजों मे परस्पर एकरूपता की बात करें तो कई कई अकाट्य तथ्य सामने आते हैं। कथित तौर पर जिन्हे आर्य व द्रविड़ अलग अलग बताया गया उन दोनों का डीएनए परस्पर समान पाया गया है। दोनों ही शिव के उपासक हैं। प्रसिद्ध एन्थ्रोपोलाजिस्ट वारियर एलविन, जो कि अंग्रेजों के एडवाइजर थे, ने जनजातीय समाज पर किए अध्ययन मे बताया था कि ये कथित आर्य और द्रविड़ शैविज़्म के ही एक भाग है और गोंडवाना के आराध्य शंभूशेक भगवान शंकर का ही रूप हैं। माता शबरी, निषादराज, सुग्रीव, अंगद, सुमेधा, जांबवंत, जटायु आदि आदि सभी जनजातीय बंधु भारत के शेष समाज के संग वैसे ही समरस थे जैसे दूध मे शक्कर समरस होती है। प्रमुख जनजाति गोंड व कोरकू भाषा का शब्द जोहारी रामचरितमानस के दोहा संख्या 320 में भी प्रयोग हुआ है। मेवाड़ में किया जाने वाला लोक नृत्य गवरी व वोरी भगवान शिव की देन है जो कि समूचे मेवाड़ी हिंदू समाज व जनजातीय समाज दोनों के द्वारा किया जाता है। बिरसा मुंडा, टंटया भील, रानी दुर्गावती, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव, अमर शहीद बुधू भगत, जतरा भगत, लाखो बोदरा, तेलंगा खड़िया, सरदार विष्णु गोंड आदि आदि कितने ही ऐसे वीर जनजातीय बंधुओं के नाम हैं जिनने अपना सर्वस्व भारत देश की संस्कृति व हिंदुत्व की रक्षा के लिये अर्पण कर दिया। जब गजनी से विदेशी आक्रांता हिंदू आराध्य सोमनाथ पर आक्रमण कर रहा था तब अजमेर, नाडोल, सिद्ध पुर पाटन, और सोमनाथ के समूचे प्रभास क्षेत्र में हिंदू धर्म रक्षार्थ जनजातीय समाज ने एक व्यापक संघर्ष खड़ा कर दिया था। गौपालन व गौ सरंक्षण का संदेश बिरसा मुंडा जी ने भी समान रूप से दिया है। और तो आर क्रांतिसूर्य बिरसा मुंडा का “उलगुलान” संपूर्णतः हिंदुत्व आधारित ही है। ईश्वर यानी सिंगबोंगा एक है, गौ की सेवा करो एवं समस्त प्राणियों के प्रति दया भाव रखो, अपने घर में तुलसी का पौधा लगाओ, ईसाइयों के मोह जाल में मत फंसो, परधर्म से अच्छा स्वधर्म है, अपनी संस्कृति, धर्म और पूर्वजों के प्रति अटूट श्रध्दा रखो, गुरुवार को भगवान सिंगबोंगा की आराधना करो व इस दिन हल मत चलाओ यह सब संदेश भगवान बिरसा मुंडा ने दिये हैं। वे जिन्हे आर्य कहा गया और वे जिन्हे आर्य कहा गया दोनों ही वन, नदी, पेड़, पहाड़, भूमि, गाय, बैल, सर्प, नाग, सूर्य, अग्नि आदि की पूजा हजारों वर्षों से पूजा करते चले आ रहें हैं। भारत के सभी जनजातीय समुदाय जैसे गोंड, मुंडा, खड़िया, हो, किरात, बोडो, भील, कोरकू, डामोर, ख़ासी, सहरिया, संथाल, बैगा, हलबा, कोलाम, मीणा, उरांव, लोहरा, परधान, बिरहोर, पारधी, आंध, टाकणकार, रेड्डी, टोडा, बडागा, कोंडा, कुरुम्बा, काडर, कन्निकर, कोया, किरात आदि आदि के जीवन यापन, संस्कृति, दैनंदिन जीवन, खानपान, पहनावे, परम्पराओं, प्रथाओं का मूलाधार हिंदुत्व ही है। अब ऐसी स्थिति मे भारत मे मूलनिवासी दिवस की अवधारणा का स्थान कहां रह जाता है? तो आइए इस नए भारत में जनजातीय गौरव दिवस का स्वागत करे। यह डॉ मामराज पुंडीर, राजनीतिक शास्त्र प्रवक्ता के लेख है।
सिर्फ वार्षिक परीक्षाओं के लिए दस दिन के लिए स्कूल खोलने के खिलाफ व वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन करने के लिए सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला के अभिभावक, छात्र अभिभावक मंच के बैनर तले स्कूल परिसर में इकट्ठा हुए व स्कूल प्रिंसिपल से मिले। उन्होंने स्कूल में वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन करवाने की मांग की जिस पर स्कूल प्रिंसिपल ने हामी भर दी। छात्र अभिभावक मंच संयोजक विजेंद्र मेहरा, मंच के सदस्य विवेक कश्यप व सत्यवान पुंडीर ने सेंट एडवर्ड स्कूल में आठवीं कक्षा तक ऑनलाइन कक्षाएं व वार्षिक परीक्षाएं करवाने के स्कूल प्रबंधन के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने शीतकालीन सत्र के तहत चलने वाले स्कूलों को सिर्फ दस से पन्द्रह दिन के लिए खोलने के प्रदेश सरकार के निर्णय पर कड़ा विरोध ज़ाहिर किया है तथा सब स्कूलों में ऑकलैंड व एडवर्ड स्कूल की तर्ज़ पर ऑनलाइन कक्षाएं व परीक्षाएं करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब पूरा वर्ष ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से ही बच्चों ने पढ़ाई की है। तो फिर वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन करने में क्या दिक्कत है। इन दस दिनों के बाद स्कूल तीन महीने के लिए बन्द रहेंगे तो फिर स्कूल सिर्फ वार्षिक परीक्षाओं के लिए खोलने का क्या तुक बनता है। उन्होंने कहा कि दस-पन्द्रह दिन की वार्षिक परीक्षाओं के बाद शिमला शहर के स्कूल शीतकालीन अवकाश के कारण फिर से तीन महीने के लिए फरवरी अंत तक बन्द हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र व ग्रीष्मकालीन सत्र में समरूपता नहीं है इसलिए सर्दियों में केवल वार्षिक परीक्षाओं के लिए दस से पन्द्रह दिन के लिए स्कूल खोलना तार्किक नहीं है। उन्होंने कहा है कि कोरोना का संक्रमण शिमला शहर जैसे भीड़-भड़ाके वाले इलाकों में बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। स्कूलों में दर्जनों छात्र कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इस तरह स्कूलों में परीक्षाओं को लेकर अभिभावक व छात्र काफी घबराए हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब छात्र व अभिभावक ही स्कूल में परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं हैं, तो फिर स्कूल प्रबंधन इन परीक्षाओं के संदर्भ में क्यों जबरदस्ती कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विवेक कश्यप, सत्यवान पुंडीर, विरोचन शर्मा, आशा शर्मा, अदिति चड्डा, ज्योतिका राणा, रुचि जिन्ना, विकास, पदमिनी शर्मा, रेणु, सोफ़िया, सीमा, ऋचा, दीपशिखा डोगर, गुरमीत कौर सेठी, हरप्रीत कौर, सीमा, रमा, रुचि, ईशान, वरदा गौतम, गिन्नी, रमा कुमारी सहित दर्जनों अभिभावक मौजूद रहे।
राजधानी में आने वाले समय में हर घर से लेकर सरकारी दफ्तरों की छत पर सौर ऊर्जा का प्लांट लगा हुआ दिख सकता है। राज्य सरकार ने इसे प्रोत्साहित करने के लिए शिमला शहर के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ये प्रावधान किया है। इसमें राजधानी में 1428 किलोवाट सौर ऊर्जा घरों की छतों पर ही पैदा हो, इसके लिए स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को लक्ष्य दिया है। इसमें से 888 किलोवाट बिजली सौर ऊर्जा लोगों के घरों के छत पर ही बनेगी। शहर में सौर ऊर्जा का उत्पादन और इस्तेमाल होने से राजधानी के पर्यावरण को फायदा होगा, साथ ही बिजली उत्पादन के स्रोतों का कम दोहन कर आने वाली पीढ़ियों के लिए बिजली को बचाया जा सकता है। शहर को ज्यादा सुंदर व आकर्षक बनाने के लिए इस दिशा में काम किया जा सकता है। शहर की स्ट्रीट लाइटें लगाने का काम भी सौर ऊर्जा के माध्यम से किया जाएगा। राजधानी में सर्दियों के दौरान लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसलिए हर वार्ड में जहां भी स्ट्रीट लाइटें लगी है, चल नहीं रही उन्हें बदलने और नई लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा। स्मार्ट सिटी के तहत सोलर लाइटों लगाने का काम भी जल्द ही पूरा करने का निर्देश दिए गए है ।
कहीं बहुत देर तो नहीं हो गई मेहरबां आते आते......चार साल के लम्बे इंतज़ार के बाद कर्मचारियों को संयुक्त सलाहकार समिति का तोहफा मिलने वाला है। दो महीने में दूसरी बार तारीख मिल गई है और 27 नवंबर की दिनांक और सुबह 11 बजे का वक्त तय हुआ है। उपचुनाव में भाजपा को लगे झटके के बाद ही सही मगर सरकार अब सही मायनों में कर्मचारी हितैषी नजर आने लगी है। कोर्ट में लटके हुए मामले हो या कर्मचारियों की लंबित मांगें, मानो अब मुख्यमंत्री सब तेजी से निपटाने में लगे है। इस जेसीसी की बैठक में कर्मचारियों से जुड़े 62 एजेंडों पर चर्चा होनी है। ये 62 एजेंडे सरकार के सामने रखने की जिम्मेदारी अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को सौंपी गई है। जयराम सरकार के कार्यकाल में चार साल बाद अब ये पहली बैठक होने जा रही है। इस बैठक के बाद सरकार नए पे-कमीशन पर भी ऐलान कर सकती है। जेसीसी बैठक से कर्मचारी वर्ग को खासी उम्मीद है। उपचुनाव के नतीजे सरकार देख चुकी है और 2022 के विधानसभा चुनाव भी अब दूर नहीं है, ऐसे में अपेक्षित है कि सरकार कई लंबित मसलों पर सकारात्मक फैसले ले। सत्ता प्राप्त करने में प्रदेश का कर्मचारी वर्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और ऐसे में जाहिर सी बात है कि सरकार पर कर्मचारी वर्ग की अपेक्षाओं का बोझ है। वहीं सरकार द्वारा अधिकृत हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से भी कर्मचारी वर्ग को उम्मीदें रहेगी। यानी दबाव दोतरफा होगा। उधर, सरकार के नज़रिए से देखा जाए तो सरकार की भी अपनी मजबूरी है। कर्मचारी उम्मीदों पर खरा न उतरे तो सत्ता खोने का डर बढ़ जाता है, और यदि कर्मचारियों को नई राहतें - सौगातें दे तो आर्थिक स्थिति खराब होती है। पहले से कर्ज़े में डूबी हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए ये बेहद मुश्किल समय है। 2022 विधानसभा चुनाव का काउंट डाउन शुरू हो चुका है और माना जा रहा है कि जेसीसी बैठक के साथ कर्मचारियों पर मेहरबानी का जो दौर शुरू होगा वो आचार सहिंता लगने तक जारी रहेगा। पर क्या हर पांच साल में निष्ठा बदलने वाला हिमाचल का कर्मचारी चुनावी वर्ष में मिलने वाली राहतों के बाद अपनी वोट रुपी कृपा सत्ता रूढ़ दल पर बनाये रखेगा, ये यक्ष प्रश्न है। सरकार ने जो इन्तजार करवाया है क्या उस लम्बे इन्तजार की टीस बरकरार रहेगी या राहतें मिलने की स्थिति में कर्मचारी बड़ा दिल दिखायेगा, ये देखना दिलचस्प होने वाला है। इन कर्मचारी मांगो पर रहेगी रहेगी नज़रें : - कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान देने की मांग - अनुबंध कार्यकाल दो साल करने की मांग - अनुबंध कार्यकाल को वरिष्ठता में शामिल करने की मांग - कर्मचारियों को 4-9-14 साल की सेवा अवधि में टाइम स्केल देना - कनिष्ठ ऑफिस सहायकों के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन - महंगाई भत्ते की पांच फीसदी किश्त जारी करने की मांग - नई पेंशन स्कीम के तहत केंद्र सरकार की 2009 की अधिसूचना के अनुसार निधन या स्थायी अपंगता पर पूरी पेंशन देने की मांग - केंद्र सरकार की तर्ज पर महिला कर्मियों को बच्चे की देखभाल के लिए दो साल का अवकाश देने का मसला - कर्मचारियों के अन्य मसले जैसे की प्रतिपूरक भत्ता, पूंजी भत्ता और मकान किराया भत्ता बढ़ाने की मांग - एनजीओ फेडरेशन के एक प्रतिनिधि को हाउस अलॉटमेंट कमेटी में शामिल करने की मांग - तीसरी और चतुर्थ श्रेणी के सभी खाली पदों को जल्द भरने की मांग - आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने की मांग - पुलिस कॉन्स्टेबल्स का अनुबंध काल घटाकर 3 वर्ष करने की मांग - दैनिक वेतन भोगियों को 5 की बजाए 4 साल में नियमित करने की मांग - आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्करों का वेतन बढ़ाने की मांग - करुणामूलक नौकरियां बहाल करने की मांग - नव नियुक्त कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18000 करने की मांग - छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करवाना नए पे कमीशन पर भी रहेगी नजर जेसीसी की बैठक में नए पे कमीशन पर भी चर्चा हो सकती है। बता दें कि राज्य में पे-कमीशन करीब 4.15 लाख कर्मचारी और पेंशनरों को दिया जाना है। नए पे-कमीशन को लागू करने से पहले इसके बारे में वित्त विभाग मुख्यमंत्री को प्रेजेंटेशन देगा। इस बारे में बीते दिनों भी प्रेजेंटेशन रखी गई थी, जो किसी कारणवश टल गई। अब यह 27 नवंबर को तय हुई जेसीसी से पहले होगी। इससे पहले वित्त विभाग ने पे स्केल वाइज स्टडी कर लिया है, लेकिन फिर भी कुछ पेचीदा मसलों पर फैंसला होना बाकी है। यही वजह है कि जेसीसी बैठक से पहले मुख्यमंत्री के साथ एक बैठक होगी। कर्मचारियों के लिए 'जिन्न' बने चन्नी, अब जयराम पर दबाव ! वेतनमान को लेकर हिमाचल प्रदेश पंजाब का अनुसरण करता है। पंजाब संशोधित वेतनमान जारी कर चुका है लेकिन प्रदेश में महंगाई भत्ते (डीए) के मामले भी नहीं सुलझ पाए हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री बनते ही चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब के कर्मचारियों के लिए 'जिन्न' बन गए है। एक नहीं चन्नी ने कर्मचारियों की कई मांगों को पूरा कर दिया है। पंजाब सरकार ने हाल ही में 36,000 कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। ये सभी कर्मचारी विभिन्न सरकारी विभागों में अनुबंध, तदर्थ, दैनिक वेतन एवं अस्थायी तौर पर काम कर रहे थे। इसी के साथ 2020 से न्यूनतम वेतन में वृद्धि को भी मंजूरी दी गई है। इसमें 415.89 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे यह अब 8776.83 रुपये से बढ़कर 9192.72 रुपये हो गया है। कुछ ही समय पहले पंजाब में 2009 की अधिसूचना को भी लागू किया गया था। यही नहीं बीते दिनों पंजाब सरकार ने दिवाली से पहले कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में भी 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। अब क्योंकि कर्मचारियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए हिमाचल पंजाब का अनुसरण करता है, तो जाहिर है मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर पर अपेक्षाओं का दबाव बढ़ गया है।
पुरानी पेंशन बहाल करने का अब वक्त आ गया है : चौहान - विडम्बना : विधायक व सांसद शपथ लेने के बाद ताउम्र - मोटी पेंशन के हकदार और कर्मचारी लाचार हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष व पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा हिमाचल प्रदेश के राज्य महामंत्री एल डी चौहान ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि कर्मचारियों की 2003 से छीनी गई उनके बुढ़ापे की लाठी यानी पुरानी पेंशन योजना को केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को पुरानी पेंशन को बहाल करना ही पड़ेगा। ये विडम्बना है कि एक विधायक व सांसद शपथ लेने के बाद ताउम्र -मोटी पेंशन के हकदार हो जाते है और कर्मचारियों को 33 साल सेवा देने के बाद भी नियमित पेंशन से वंचित कर दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर किया जा रहा है। एल डी चौहान ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर जयराम एक ईमानदार नेता है लेकिन अफसरों द्वारा जानबूझकर कर्मचारियों के मुद्दों को लटकाया जा रहा है व मुख्यमंत्री को गुमराह किया जा रहा है, जिसके चलते आज प्रदेश का कर्मचारी सरकार से नाराज है। पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री से दृष्टि पत्र की मांगों पर गौर करने का भी आग्रह किया है जिसमें 4-9-14 वेतनवृद्धि पर फैंसला, पेंशन पर कमेटी का गठन करने की बात, पिछले वेतन आयोग में विसंगतियों को दूर करने जैसी बातें कही गयी थी। पर चार वर्ष बीत जाने के बाद भी उस ओर कार्यवाही न होना दुख का विषय है और अब कर्मचारियों में रोष है। चौहान ने कहा कि एनपीएस पर केंद्र द्वारा जारी 5 मई 2009 की अधिसूचना को प्रदेश में जल्द लागू करने के बारे में स्वयं मुख्यमंत्री ने कहा था लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री समय रहते केंद्र की 2009 की अधिसूचना को प्रदेश में लागू करवाकर शीघ्र पुरानी पेंशन की बहाली हेतु कमेटी के माध्यम से कार्य प्रारंभ करें तथा प्रदेश के लगभग 80 हजार एनपीएस कर्मियों हेतु पुरानी पेंशन को बहाल करवाकर इतिहास रचे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा महंगाई भत्ता व छठे वेतन आयोग की सिफारिशें कर्मियों का कानूनी हक है, वो हर हाल में शीघ्र मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की किताब 'सनराइज ओवर अयोध्या : नेशनहुड इन ऑवर टाइम्स' में हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों से की गई है। इस किताब में हिंदुत्व को लेकर जो कुछ कहा गया है, उस पर विवाद हो गया है और खुर्शीद एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस किताब में हिन्दुत्व की तुलना आतंकी संगठन बोको हराम और आईएसआईएस से करने पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा को भी ठेस पहुंचाती है। इस मामले में खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस से शिकायत भी की गई है। यूपी समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले आई खुर्शीद की इस किताब पर उठा विवाद और ज्यादा तूल पकड़ सकता है। उधर, खुर्शीद के खिलाफ पार्टी के अंदर से भी विरोध की आवाज बुलंद होने लगी है। कांग्रेस के G-23 नेताओं की खिलाफत करने वाले सलमान खुर्शीद पर पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सीधा हमला बोला है। आजाद ने खुर्शीद की पुस्तक का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया, ‘हम भले ही हिंदुत्व को हिंदू धर्म की मिली जुली संस्कृति से अलग एक राजनीतिक विचारधारा मानकर इससे असहमति जताएं, लेकिन हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और जेहादी इस्लाम से करना तथ्यात्मक रूप से गलत और अतिशयोक्ति है। सलमान खुर्शीद की किताब के जिस अंश पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ है, वह है कट्टर जिहादी और कुख्यात आतंकी संगठनों से हिंदुत्व की तुलना। 'द सैफ्रन स्काई' नाम के खुर्शीद लिखते हैं, 'साधु-संत जिस सनातन धर्म और क्लासिकल हिंदुइज्म को जानते हैं, उसे किनारे करके हिंदुत्व के ऐसे वर्जन को आगे बढ़ाया जा रहा है। जो हर पैमाने पर आईएसआईएस और बोको हराम जैसे जिहादी इस्लामी संगठनों के राजनीतिक रूप जैसा है।' उनका कहना है कि हिंदुत्व का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जाता है। चुनावी रैलियों में इसका जिक्र होता है। पर जो भी हो सलमान खुर्शीद द्वारा हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठनों से करना देश के करोड़ों हिन्दुओं को स्वीकार्य नहीं हो सकता। ये शर्मनाक है, ये अस्वीकार्य है और कोई भी तर्क देकर इसे जायज नहीं ठहराया जा सकता। हिंदुत्व सिर्फ धर्म नहीं है, ये जीने की पद्धति है।
1947 में मिली आजादी भीख थी, असली आजादी तो 2014 के बाद मिली'...इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है। इससे भी अधिक खेदजनक बात ये है कि ये विचार पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित कंगना रनौत के है। दरअसल बीते दिनों एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कंगना रनौत ने कहा था कि 1947 में मिली आजादी भीख थी, असली आजादी तो 2014 के बाद मिली, जब देश की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में आई। कंगना रनौत के इस बयान की देशभर में निंदा हो रही है। इसमें कोई संशय नहीं है कि कंगना एक बेहतरीन अदाकारा है। लेकिन कंगना का ये बयान स्वीकार्य नहीं हो सकता। निसंदेह ये उन महान साहसी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है जिनका नेतृत्व महात्मा गांधी, नेहरू और सरदार पटेल ने किया था। हैरत की बात ये है कि तमाम विरोध के बीच भी कंगना ने अपने बयान पर अब तक खेद नहीं जताया है। ये समझना बेहद जरूरी है कि सिर्फ फिल्म में झाँसी की रानी का किरदार निभाना देश भक्ति नहीं हो सकता। जो कंगना के इस बयान पर चुप है, उन पर सवाल उठना भी लाजमी है। कंगना रनौत के बयान के बाद सोशल मीडिया के बाद अब कई नेताओं ने एकसुर में कंगना रनौत का विरोध करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति और सरकार से कंगना का पद्मश्री अवॉर्ड वापस लेने की मांग उठ रही है। सिंर्फ अन्य राज्यों के नेता ही नहीं बल्कि कंगना को हिमाचल की बेटी कहने वाले हिमाचल के कई नेताओं ने भी उनके शब्दों का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने इस बयान को चौंकाने वाला और अपमानजनक करार दिया। उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उनका पद्मश्री वापस लेने की मांग की है। शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट कर लिखा " हिमाचल की बेटी को पद्मश्री दिए जाने पर उन्हें बधाई दी थी, परंतु इस तरीके की बयानबाज़ी बहुत ही निंदनीय है। कंगना के इस बयान की प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने भी कड़ी निंदा की है। हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने शिमला में प्रैस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कंगना का बयान राष्ट्र के खिलाफ है और यह स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। राठौर ने कहा कि शायद ये बयान देने के लिए ही कंगना को पद्मश्री दिया गया। उन्होंने कंगना के बयान पर सीएम से स्पष्टीकरण मांगा और साथ ही कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी इस मसले पर जवाब देना चाहिए। हिमाचल ही नहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कंगना की बयान को बेहूदा बताया। कंगना रनौत के बयान पर भाजपा से भी प्रतिक्रिया आई है। लोकसभा सांसद वरुण गांधी ने सोशल मीडिया पर कंगना रनौत का वीडियो शेयर करते हुए पूछा, "क्या मुझे इसे पागलपन या देशद्रोह कहना चाहिए"। वरुण गांधी ने ट्वीट किया था, "कभी महात्मा गांधी के बलिदान और तपस्या का अपमान, कभी उनके (महात्मा गांधी के) हत्यारे का सम्मान, और अब लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान - शहीद मंगल पांडे से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस तक। क्या मुझे इसे पागलपन या देशद्रोह कहना चाहिए ?
उपचुनाव नतीजों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के खिलाफ उठती रही आवाजों पर फिलवक्त विराम लगा दिया है। क्यूकी जिसे सब कम आंकते थे वो अव्वल भी आ सकता है, यह किसी ने सोचा भी नहीं होगा। इसके अलावा कुछ भाजपाई तो उन्हें लेकर उल जुलूल बयान भी देते थे कि कांग्रेस के भीतर भी उन्हें बदलने को लेकर लगातार अटकलें लग रही थी। कभी सत्ता के गुरूर में चूर होकर कोई उन्हें मंद बुद्धि का मालिक कहता रहा है, तो कभी संगठन की सर्जरी के नाम पर अपने भी निशाना साधते रहे। पर अब उपचुनाव नतीजों के बाद बदली राजनैतिक फिजा में राठौर का सियासी वजन इतना बढ़ गया है कि उन्हें हिलाना मुश्किल होगा। दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, इसे लेकर कयासों का सिलसिला जारी रहा। कई बड़े नेता अपने बड़े सियासी अरमानों के साथ संगठन की सरदारी पर नजर गड़ाए दिख रहे थे। सत्ता वापसी की स्थिति में संगठन की सरदारी से सीएम की कुर्सी का फासला कम हो सकता है, ये थ्योरी कई चाहवानों को प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए प्रेरित करती रही। जाहिर है कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर रहते हुए नेता अपने निष्ठावानों को टिकट देने में भी अपनी चला सकते है। ऐसे में माना जाता रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर कई नेता नजरें जमाएं बैठे है, पर इस स्थिति में भी कुलदीप राठौर जैसे -तैसे अपनी जगह बचा कर आगे बढ़ते रहे और अब जब उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आये है तो राठौर को भी जीत का क्रेडिट मिलना जायज है। अगर कुलदीप सिंह राठौर की सबसे बड़ी ताकत उनका किसी गुट में ना होना माना जाये तो गलत नहीं होगा। उनकी अब तक की कार्यशैली से तो ऐसा ही दिखता है। जब उन्हें प्रदेश कांग्रेस की कमान मिली तो उन्हें एक बड़े नेता का करीबी माना जाता था। पर इसके बावजूद राठौर हिमाचल कांग्रेस के सबसे दमदार नेता रहे वीरभद्र सिंह की गुड बुक्स में थे। ये उनकी बड़ी सफलता है कि उनके अब तक के कार्यकाल में कांग्रेस के भीतर खुलकर उनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठी है, जबकि प्रदेश कांग्रेस कई गुटों में विभाजित रही है। बल्कि राठौर के होने से बंटी हुई कांग्रेस एकसाथ दिखने लगी है। ऐसे में शायद ही पार्टी आलाकमान उन्हें हटाकर गुटबाजी बढ़ाने का जोखिम ले।
पक्ष : शिक्षकों के साथ बेईमानी है जेसीसी बैठक का प्रारूप ! - हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा हिमाचल प्रदेश में जेसीसी बैठक की तारीख तय होने से कर्मचारियों में फिर उम्मीद की लहर जाग उठी है। कर्मचारी आस लगाए बैठे है कि चार साल बाद शायद अब उनके मसलों का निवारण होगा। परन्तु प्रदेश का एक कर्मचारी तबका अब भी नाखुश है। प्रदेश के स्कूलों कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षक अब भी सरकार से खफा नजर आ रहे है। दरससल जेसीसी की बैठक में शिक्षक संगठनों की तरफ से किसी प्रतिनिधि को शामिल न करने को लेकर कुछ शिक्षक संगठन नाराज चल रहे है। जेसीसी में शामिल न करने पर हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार अपने आप को कर्मचारी हितैषी होने का दावा तो करती है लेकिन हकीकत तो यह है कि सरकार के चार साल का कार्यकाल पूरा होने को जा रहा है और अब तक सरकार ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के किसी भी मुद्दे को हल नहीं किया है, या यूं कहें कि सरकार ने अपने 4 साल के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का कोई भी लाभ नहीं दिया है। संघ ने सरकार पर शिक्षकों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि हिमाचल में 90 हजार के आसपास शिक्षक कार्यरत है लेकिन सरकार ने उनकी मांगों को सुनने के लिए जेसीसी जैसा कोई भी उचित प्लेटफार्म नहीं बनाया है जिससे शिक्षकों एवं शिक्षार्थी हित में मांगों पर चर्चा उपरांत उसका निराकरण किया जा सके l हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ का कहना है कि जेसीसी की बैठक का प्रारूप अपने आप में एक बेईमानी है क्योंकि इसमें शिक्षकों का इतना बड़ा वर्ग समायोजित नहीं किया गया है l एनजीओ को मान्यता के स्थान पर लोकतांत्रिक तरीके से सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को चुनाव के माध्यम से जेसीसी के गठन करने की संघ लंबे समय से मांग कर रहा है, जिससे सभी कर्मचारियों के हितों का एक उचित व तार्किक प्लेटफॉर्म के माध्यम से निराकरण संभव है l इस संदर्भ में संघ ने कई मर्तबा मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को ज्ञापन देकर शिक्षकों के लिए जेसीसी बैठक की मांग उठाई जिसको सरकार नजरअंदाज कर रही हैl संघ ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के कर्मचारियों एवं शिक्षकों के भत्ते का भुगतान केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर किया जाए l प्रदेश के कर्मचारियों के लंबित 5 प्रतिशत डीए का भुगतान तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए क्योंकि केंद्र सरकार बहुत पहले इसे जारी कर चुकी है और पंजाब ने भी एकमुश्त 11 प्रतिशत डीए की किस्त जारी कर दी है इसलिए हिमाचल के कर्मचारियों को डीए की किश्त देने के लिए किसी औपचारिक बैठक का इंतजार करना प्रदेश के कर्मचारियों के साथ बेईमानी है l शिक्षक संघो की अभिव्यक्ति की आज़ादी छीनने का प्रयास : चौहान हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि शिक्षा सचिव व शिक्षा निदेशक ने अभी तक संघ के साथ एक भी एजेंडा बैठक नहीं की है, जिससे शिक्षकों के मुद्दे हल हो सके l चौहान का कहना है कि सरकार कुछ कर्मचारी नेताओं को खुश करने में लगी है और कर्मचारियों एवं शिक्षकों के मुद्दों पर मौन है l कर्मचारी वर्ग लंबे समय से आस लगाए बैठा हैं, इसी वजह से कर्मचारियों में रोष है l सरकार के प्रति कर्मचारियों की नाराजगी का अंदाजा उपचुनाव के नतीजों से लगाया जा सकता है l चौहान ने कहा कि शिक्षा निदेशक उच्च की तानाशाही का अंदाज़ा 17 .04 .2021 जारी अधिसूचना से लगाया जा सकता है जिसमें शिक्षक संघो की अभिव्यक्ति की आज़ादी को छीनने का प्रयास किया गया है l इसमें कहा गया है कि कोई भी शिक्षक नेता सरकार व विभाग के निर्णय के खिलाफ मीडिया या किसी भी माध्यम से विरोध स्वरूप अपनी आवाज उठाएगा तो उसके खिलाफ सीसीएस रूल 1964 के दायरे में अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लायी जाएगी। इसकी आड़ में संघ के तीन पदाधिकारियों पर कार्यवाही की गयी। संघ द्वारा मामला मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के ध्यान में लाने पर भी आज तक इस तुगलकी फरमान को निरस्त नही किया गया है, जो सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। चौहान का आरोप है कि उनकी आवाज़ रोकने के लिए उन पर दो - दो झूठी चार्जशीट बनाई गई है और कम से कम 10 शो कॉज नोटिस अभी तक दिए जा चुके है। आखिर कब लागू होगा छठा वेतन आयोग : हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ का कहना है कि प्रदेश का छठा वेतन आयोग 1.1. 2016 से देय है, पांच वर्ष की अवधि बीत जाने पर भी सरकार द्वारा अभी तक इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाया गया है l संघ ने सरकार से बार-बार आग्रह किया है कि जब हम सेवा नियमों पर केंद्र का अनुसरण करते हैं तो वित्त नियमों पर भी हिमाचल को केंद्रीय वित्त आयोग का अनुसरण करना चाहिए l संघ का कहना है कि अब तो पंजाब सरकार ने भी छठा वेतन आयोग लागू कर दिया है इसलिए हिमाचल में इसे लागू करने के लिए सरकार को किसी जेसीसी जैसी बैठक का इंतजार करने का कोई औचित्य नहीं है, इससे तुरंत प्रभाव से हिमाचल में लागू करने की आवश्यकता है l
द साइलेंस ऑन इनफर्टिलिटी विषय पर शिमला के होटल मरीना में इंदिराआईवीएफ फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं आयुर्वेद मंत्री डॉ राजीव सैजल ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी के विकास के साथ उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सीएमई गतिविधियां अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा भी इन गतिविधियों का चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ाने का प्रयास किया जाए ताकि विशेषज्ञों के नवीन विचारों को अपनाकर चिकित्सा विज्ञान में विकास हो सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश में निजी संस्थानों द्वारा भी विभिन्न क्षेत्रों में विकास की प्रक्रिया में सहभागिता सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक क्षेत्र में नित्य नवीनतम सूचनाओं के कारण सामयिक होने की चुनौतियों के अंतर्गत इस प्रकार के कार्यक्रम से नवीन जानकारी प्राप्त होती हैं।
चिडग़ांव के संदासु के गांव खरशाली में एक माकन आग लगने का मामला सामने आया है। दरअसल गांव खरशाली में स्थानीय निवासी राजदेव के मकान में अचानक आग लग गई। बगीचे में बना दो मंज़िला मकान जलकर राख हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस व फायर ब्रिगेड मौके पर पहुँची। वंही आग के शांत होने पर राजदेव का अधजला शव कमरे में मिला है। स्थानीय लोगो की मदद से शव को बाहर निकाला गया। वंही CHC सन्दासु में शव का पोस्मार्टम करवाया जायगा।
जिला युवा सेवा एवं खेल अधिकारी राकेश धौटा ने धामी में आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में मेगा वर्क कैंप का उदघाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि युवाओं का समाज के उत्थान में विशेष योगदान रहा है। उन्होने कहा कि हमें प्रत्येक कार्य पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से करना ही आज़ादी का सच्चा स्वरूप है। कुरीतियों से लड़ना ही आजादी के सही मायने हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न खंडों से120 प्रतिभागी इसमें भाग ले रहे है। वंही इस दौरान स्कूल और बाज़ार में स्वच्छता अभियान के अंतर्गत सफाई कार्य किया।
ठियोग हाटकोटी सड़क पर पुलों का कार्य चल रहा है। जिसमे की छोटे व बड़े 8 पुलों का कार्य निर्माणाधीन है। वंही छैला,बागड़ा निहारी लगभग तैयार हो चुके है। इस बात की जानकरी चेतन बरागटा ने दी। चेतन बरागटा ने बताया कि स्वर्गीय नरेन्द्र बरागटा के प्रयासों से पुलों व ढंगों के कार्य को गति देने के लिए लगभग 80 करोड़ की राशि का प्रावधान करवाया गया था। हाल फिलहाल निहारी, छेला व बागड़ा में पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है व वाहनों की आवाजाही इन पुलों पर आरंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि नरेंद्र बरागटा द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए किए गए विभिन्न कार्य धरातल पर नज़र आ रहे है। चेतन बरागटा ने बताया कि वर्ष 2014 नवम्बर में स्वर्गीय नरेंद्र बरागटा ने ठियोग हाटकोटी सड़क की दुर्दशा को देखते हुए सड़क संघर्ष अभियान कार्यकर्ताओं व जनता के सहयोग से आरंभ किया था। उन्होंने कहा कि हम लगातार क्षेत्र में हो रहे विकासात्मक कार्यों पर नज़र बनाए हुए है। जनसमस्याओं व क्षेत्र की उन्नति के लिए हम संघर्षरत रहेंगें व समय-समय पर सरकार के समक्ष जनहित कार्यों को भी उठाएंगे।
आंगनबाड़ी वर्करज़ एवम हैल्परज़ यूनियन सम्बन्धित सीटू की बैठक यूनियन कार्यालय शिमला में सम्पन्न हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि आंगनबाड़ी कर्मियों की मांगों को लेकर 15 फरवरी को प्रदेशव्यापी हड़ताल होगी। इस दिन प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्र बन्द रहेंगे। प्रदेशभर के पांच हज़ार से ज़्यादा आंगनबाड़ी कर्मी अपनी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार सचिवालय शिमला पर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। बैठक में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, यूनियन प्रदेश उपाध्यक्षा खीमी भंडारी, महासचिव वीना शर्मा, हिमी देवी, मीना देवी, हमिन्द्री देवी, सुदर्शना देवी, किरण भंडारी, माया देवी, लता देवी, नीलम देवी, बिमला देवी आदि ने भाग लिया। यूनियन उपाध्यक्षा खीमी भंडारी व महासचिव वीना देवी ने बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि कर्मियों की मांगों को लेकर यूनियन 15 फरवरी को प्रदेशव्यापी हड़ताल करेगी। इस दौरान आंगनवाड़ी कर्मी प्री प्राइमरी में नियुक्ति, इस नियुक्ति में 45 वर्ष की शर्त खत्म करने, सुपरवाइजर नियुक्ति के लिए भारतवर्ष के किसी भी मान्यता प्राप्त विश्विद्यालय की डिग्री को मान्य करने, वरिष्ठता के आधार पर मेट्रिक व ग्रेजुएशन पास की सुपरवाइजर में तुरन्त भर्ती करने, सरकारी कर्मचारी के दर्जे, हरियाणा की तर्ज़ पर वेतन देने, रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने की मांग तथा नन्द घर बनाने की आड़ में आईसीडीएस को वेदांता कम्पनी के हवाले करके निजीकरण की साज़िश तथा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व पोषण ट्रैकर ऐप के खिलाफ आंदोलन करेंगे। उन्होंने आंगनबाड़ी कर्मियों को वर्ष 2013 का नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत बकाया राशि का भुगतान तुरन्त करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि प्री प्राइमरी कक्षाओं व नई शिक्षा नीति के तहत छोटे बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा आंगनवाड़ी वर्करज़ को दिया जाए क्योंकि वे काफी प्रशिक्षित कर्मी हैं। इसकी एवज़ में उनका वेतन बढाया जाए व उन्हें नियमित किया जाए।
कांग्रेस पार्टी बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी के विरोध में पहले चरण में प्रदेश के पांच विधानसभा क्षेत्रों में 14 से 19 नवम्बर तक जन जागरण अभियान चलाएगी। इसका नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर करेंगे। इस दौरान प्रभात फेरियों सहित नुक्कड़ सभाओ का भी आयोजन किया जाएगा। पार्टी के एक प्रवक्ता ने बताया कि 14 नवम्बर पांवटा साहिब, 15 को कसौली, 16 को कुटलेहर, 17 को शाहपुर व 18 को झंडूता में जन जागरण पद यात्रा का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान इन स्थानों में सुबह प्रभात फेरी के साथ पद यात्रा का आयोजन होगा। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सहित ब्लॉक अध्यक्ष व पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
प्रदेश हाईकोर्ट ने जेबीटी बैचवाइज भर्ती मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने पुष्पा देवी व अन्यों द्वारा दायर याचिकाओं पर हुई सुनवाई के पश्चात फैसला सुरक्षित रख लिया। प्रार्थियों का कहना है कि वे बीएड पास हैं और 28 जून 2018 की एनसीटीई की अधिसूचना के तहत जेबीटी के इन पदों के लिए वे पात्रता रखते हैं। परन्तु सरकार उन्हें इस अधिसूचना का लाभ नहीं दे रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि उन्हें भी जेबीटी बैचवाइज भर्ती के लिए साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए व इन पदों के लिए कंसीडर किया जाए।
अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सा विज्ञानी पद्मश्री डॉ. ओमेश भारती 14 नवंबर को उमंग फाउंडेशन के सप्ताहिक वेबीनार में रोगियों के अधिकार एवं कर्तव्य विषय पर व्याख्यान देंगे। वह प्रतिभागियों के सवालों का जवाब भी देंगे। वह उमंग फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य भी हैं। उमंग फाउंडेशन की प्रवक्ता और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से वनस्पति शास्त्र में पीएचडी कर रही अंजना ठाकुर ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए हर रविवार को मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर वेबीनार किया जा रहा है। इस अभियान का यह नौवां कार्यक्रम होगा। उन्होंने बताया कि पद्मश्री से सम्मानित डॉक्टर ओमेश भारती अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सा विज्ञानी हैं। जिन्होंने जानवरों के काटने से होने वाली जानलेवा बीमारी रेबीज के इलाज की नई और सस्ती पद्धति विकसित कर विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को हैरान कर दिया था। उन्हें कई अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय सामानों के अलावा राष्ट्रपति ने पद्मश्री से भी अलंकृत किया। वह थैलेसीमिया, सर्पदंश और पशुओं की टीबी आदि जैसे जटिल रोगों पर अपने विश्वस्तरीय शोध के लिए जाने जाते हैं। अंजना ठाकुर ने कहा कि रोगियों के अधिकार और कर्तव्य विषय इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि आमतौर पर किसी मरीज को उसके अधिकार पता ही नहीं होते। इससे रोगियों को बहुत नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि इस साप्ताहिक वेबिनार में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी और प्रदेश के अनेक महाविद्यालयों के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र भी शामिल होते हैं।
शिमला नागरिक सभा के नेतृत्व में शिमला के डाउनडेल इलाके से तेंदुए द्वारा पांच वर्षीय बच्चे की जान लेने के घटनाक्रम के खिलाफ नगर निगम शिमला के अतिरिक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज से मुलाकात की व उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में विवेक कश्यप, बालक राम, किशोरी ढटवालिया, रंजीव कुठियाला, सन्नी कुमार, राजू , मीना कुमारी, मोहम्मद सलीम आदि मौजूद रहे। नागरिक सभा ने मांग की है कि आदमखोर तेंदुए के आतंक पर तुरन्त रोक लगाई जाए। शहर के जंगल से सटे इलाकों में फेंसिंग, कैमरों व स्ट्रीट लाइटों की उचित व्यवस्था की जाए। डाउनडेल व कनलोग हादसों के पीड़ित परिवारों को कम से कम दस-दस लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए। इसके साथ ही शिमला नागरिक सभा अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व सचिव कपिल शर्मा ने नगर निगम शिमला के अतिरिक्त आयुक्त से इस इलाके की झाड़ियों को काटने व रास्तों को ठीक करने की मांग की है। उन्होंने डाउनडेल इलाके में पानी की उचित व्यवस्था तथा इस इलाके के ढारों को नियमित करने व हर ढारे में उचित बिजली पानी के कनेक्शन लगाने की मांग की है। क्योंकि यहां पर रहने वाले भूमिहीन हैं व बेहद गरीब हैं। उन्होंने शिमला शहर के बीचों-बीच आदमखोर तेंदुए के जानलेवा हमलों के लिए प्रदेश सरकार, नगर निगम शिमला व वन विभाग की नाकामी करार दिया है। उन्होंने कहा कि डाउनडेल शहर के बीचों-बीच है। जब इस तरह की घटना यहां पर हो सकती है तो फिर शिमला शहर के इर्दगिर्द के इलाकों में नागरिकों की जानमाल की सुरक्षा की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इस से साफ है कि शिमला नगर निगम व इसके इर्द-गिर्द के इलाके में कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है। नगर निगम शिमला शहर के नागरिकों की सुरक्षा के प्रति ज़रा भी गम्भीर नहीं है। शहर के रिहायशी इलाकों में या तो स्ट्रीट लाइटें कई महीनों से खराब हैं, टूटी पड़ी हैं या फिर हैं ही नहीं। इन दोनों की लापरवाही का खामियाजा निर्दोष जनता को भुगतना पड़ रहा है।
राज्य बिजली बोर्ड में दिहाड़ी पर चालकों के 50 पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 25 नवंबर तक आवेदन होंगे। सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों को 400 रुपये और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को आवेदन के साथ 100 रुपये की फीस देनी होगी। महिला अभ्यर्थियों से कोई भी फीस नहीं ली जाएगी। 100 अंकों की लिखित परीक्षा सहित ड्राइविंग टेस्ट और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को 336 रुपये की दिहाड़ी मिलेगी। दसवीं कक्षा पास 18 से 45 वर्ष की आयु वाले आवेदन करने के लिए पात्र होंगे। सामान्य श्रेणी से 19, एक्स सर्विसमैन के सामान्य वर्ग से 4, सामान्य खेल कोटे से एक, अनुसूचित जाति वर्ग से 9, अनुसूचित जाति के बीपीएल वर्ग से एक, अनुसूचित जाति एक्स सर्विसमैन कोटे से एक, अनुसूचित जनजाति वर्ग से एक, अनुसूचित जाति एक्स सर्विसमैन कोटे से एक, ओबीसी वर्ग से सात, ओबीसी बीपीएल से एक, ओबीसी एक्स सर्विसमैन कोटे से एक और आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग से चार पद भरे जाएंगे। लिखित परीक्षा पास करने वालों के साक्षात्कार नहीं होंगे। दस्तावेजों के मूल्यांकन के आधार पर इन्हें अंक दिए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश से ही दसवीं या बारहवीं कक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी ही आवेदन करने के लिए पात्र होंगे। हैवी और लाइट गाड़ियों को चलाने का अभ्यर्थियों के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
पहाड़ी राज्यों के लिए सड़कें जीवन रेखा का कार्य करती हैं, क्योंकि इन राज्यों में परिवहन के साधन सीमित हैं। इसलिए राज्य में सड़कों के उचित रखरखाव और निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने वीरवार को राज्य लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नाबार्ड के अन्तर्गत तय किए गए वित्तीय लक्ष्यों और उपलब्धियों को हासिल करने में विलम्ब को गंभीरता से लेगी। क्योंकि इससे न केवल परियोजना की लागत में वृद्धि होती है, बल्कि राज्य के वित्त पोषण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। विभाग को प्रदेश के प्रमुख जिलों और गांवों की सड़कों के पैच वर्क और टारिंग के लिए एक विशेष अभियान चलाना चाहिए। ताकि यात्रियों को किसी भी असुविधा का सामना ना करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को भू-स्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के भी निर्देश दिए तथा भू-स्खलन की संभावना को कम करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अधीक्षण अभियंता एवं अन्य फील्ड अधिकारी सड़कों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित कर उच्चाधिकारियों को नियमित रूप से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री ने फील्ड अधिकारियों को हर पखवाड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने और इनकी नियमित निगरानी करने के भी निर्देश दिए। जय राम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान सीआरआईएफ के अन्तर्गत 195 करोड़ रुपये की 12 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जबकि 64 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्वीकृत परियोजनाओं को शीघ्र आवंटित करने के निर्देश दिए ताकि इन परियोजनाओं पर शीघ्र कार्य शुरू किया जा सके। जय राम ठाकुर ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री की घोषणाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए। प्रधान सचिव लोक निर्माण विभाग सुभाशीष पांडा ने मुख्यमंत्री और बैठक में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। प्रमुख अभियन्ता अर्चना ठाकुर ने विभाग की विभिन्न गतिविधियों और कार्यों के बारे में विस्तृत प्रस्तुति दी। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. धीमान, प्रबोध सक्सेना और जे.सी. शर्मा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 27 नवंबर को प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के साथ संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक तय करने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का जिला शिमला अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने आभार प्रकट किया है। महसंघ ने प्रदेश स्तरीय समस्याओं के समाधान होने की आशा व्यक्त की हैI जिला शिमला अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष गोपाल झिलटा, महासचिव विनोद शर्मा व समस्त जिला कार्यकारणी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि लगभग 4 वर्ष बाद ये जेसीसी की बैठक हो रही है। जिसमें कर्मचारियों की लंबित मामलों पर चर्चा होगी और आशा है कि अधिकांश उचित मांगों का निपटारा होगा। उन्होंने कहा है कि जिला शिमला की महत्त्वपूर्ण मांग राजधानी भत्ता को बढ़ाने की होगी। इससे 400 से 1000 रुपये किया जाना चाहिए, क्योंकि जिला शिमला में पर्यटन नगरी होने के कारण मँहगाई की मार अधिक होती है। मँहगाई को ध्यान में रखते हुए इसे बढ़ाना बहुत आवश्यक है। दोनों कर्मचारी नेता ने कहा है कि मुख्यमंत्री कर्मचारी हितैषी है। 27 नवंबर को जेसीसी में सभी उचित मांगो को मान कर कर्मचारिओं की अपेक्षाओं और भावनाओं पर खरा उतरेंगे और कर्मचारिओं का विश्वास जीतेंगे।
जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक रोहित ठाकुर ने केंद्र सरकार से घरेलू एलपीजी सिलेंडर को जीएसटी से मुक्त करने की मांग की है। रोहित ठाकुर ने प्रेस में ज़ारी ब्यान में कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल 2014 में घरेलू गैस की क़ीमत ₹410 रुपए प्रति सिलेन्डर हुआ करती थी। लेक़िन अब केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा जीएसटी वसूल करने से 2014 के मुकाबले घरेलू गैस की क़ीमत में 144% बढ़ोतरी हुई है। जिससे सिलेन्डर के दाम ₹1000 रुपये का आंकड़ा पार कर चुके है। एक ओर जहां घरेलू सिलेन्डर पर अतिरिक्त कर का बोझ बढ़ा है, वहीं ग्राहकों को मिलने वाली सब्सिड़ी में भी हेर-फेर हो रहा है। रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में अधिकतर ग्राहकों की घरेलू गैस पर मिलने वाली सब्सिडी पिछले डेढ़ वर्ष से बन्द पड़ी है और कुछ ग्राहकों को नाममात्र ₹28 से ₹32 रुपए सब्सिड़ी दी जा रहीं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से Price Index के अनुसार एलपीजी गैस पर DBT के माध्यम से अनुदान दिए जाने की मांग की हैं। डबल इंजन सरकार की जनविरोधी नीतियों से प्रदेश में बाग़वान, व्यापारी, मजदूर, पर्यटन उद्योग से जुड़े उद्यमी और पढ़े-लिखे युवा कठिन दौर से गुज़र रहे है। रोहित ठाकुर ने कहा कि डबल इंजन सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियों और जनविरोधी निर्णयों के खिलाफ़ उप-चुनाव में प्रदेश की एक तिहाई जनता के जनादेश से भाजपा को 4-0 से मिली करारी हार से स्पष्ट हैं कि प्रदेश की जनता 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार की सत्ता से विदाई करेगीं।
शहरी विकास आवास नगर नियोजन विधि संसदीय कार्य एवं सहकारिता मंत्री सुरेश भारद्वाज ने विकास नगर हॉउसिंग बोर्ड कोलोनी में हुई आगजनी से प्रभावित मकान का दौरा किया और इस घटना में मृतक के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की। उन्होनें बताया कि अग्निशमन व पुलिस व प्रशासन द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए आग पर काबू पा लिया गया तथा साथ लगते मकानों, परिवारों व कॉलोनी को आग की चपेट में आने से बचा लिया गया। उन्होनें कहा कि राहत नियमों के आधार पर मृतक के परिवार को क्षतिपूर्ति कर दी जाएगी। उन्होनें बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। क्षेत्र के अन्य लोगों से भी बातचीत कर जानकारी प्राप्त की। इस दौरान कुसुम्पटी मण्डल अध्यक्ष जितेन्द्र भोटका, उपमण्डलाधिकारी बी आर शर्मा तथा पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के 1858 अधिकारियों और कर्मचारियों को बोनस और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। बुधवार को बैंक के शिमला के सांगटी स्थित परिसर में हुई निदेशक मंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैंक के सभी नियमित, अनुबंधित, दैनिक वेतनभोगी व अंशकालिक कर्मचारियों को बोनस व प्रोत्साहन राशि के तौर पर 7.79 करोड़ का वित्तीय लाभ प्राप्त होगा। इसके तहत 25 हजार से एक लाख रुपये तक की राशि कर्मचारियों के खाते में आएगी।
हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने कनलोग में अगस्त में पांच साल की बच्ची को तेंदुए द्वारा उठाने और उसके मारे जाने पर कड़े आदेश जारी किए हैं। आयोग ने इस तेंदुए को तत्काल जिंदा पकड़ने या तुरंत मारने के संस्तुति आदेश जारी किए हैं। यह आदेश सभी पक्षों को सुनने और आयोग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट आने के बाद जारी हुए हैं। एक महीने के भीतर आसपास के सभी तेंदुओं को भी चिह्नित और टैग करने के लिए कहा है। साथ ही बच्ची की दादी को भी चार लाख रुपये की पूरी मुआवजा राशि देने के आदेश दिए हैं। यह आदेश ठीक ऐसे वक्त में आया है, जब डाउनडेल में दिवाली की रात एक और बच्चे को तेंदुआ उठा ले गया था। इससे पहले कनलोग में 5 अगस्त 2021 को पांच साल की बच्ची को तेंदुआ उठा ले गया था। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पीएस राणा और सदस्य डॉ. अजय भंडारी ने निर्णय में कहा कि यह मानवाधिकार हनन का मामला है। इस तेंदुए को मानव जीवन के लिए खतरा घोषित किया जाता है। तेंदुए ने इस छोटी बच्ची को इरादतन और पहले से ही सुनियोजित तरीके से मारा। अगर उस आदमखोर तेंदुए को पकड़ा जाना संभव नहीं है तो उसे तत्काल मारा जाना चाहिए। डीएफओ शहरी शिमला एवं वाइल्ड लाइफ वार्डन तेंदुए का तत्काल डेथ वारंट जारी करें।
स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत राज्य में कुष्ठ रोगियों के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग के मामलों का प्रारंभिक चरण में पता लगाना और रोगियों को पूर्ण मुफ्त उपचार उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि इस रोग का समय पर पता चल जाने और समय पर उपचार मिलने से प्रभावित व्यक्तियों में जहां विकलांगता आने से रोका जा सकता है वहीं इस रोग के आगे फैलने से रोकने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि इस रोग के उपचार का कोर्स समय पर पूरा किया जाए तो कुष्ठ रोग पूरी तरह से ठीक होने वाला रोग है। यह रोग छींकने और नाक बहने के दौरान बूंदों के माध्यम से संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ लोगों में फैलता है। प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश में कुष्ठ रोग के सालाना 120 से 150 मामले दर्ज किए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी कुष्ठ रोग से संबंधित सक्रिय मामलों का पता लगाया जाता है। इसके अलावा इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ रोगियों के परिवार के सदस्यों की भी कुष्ठ रोग से संबंधित लक्षणों की जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में कुष्ठ रोग के 101 सक्रिय मामले हैं। इन सभी मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा रहा है और किसी प्रकार की चोट से बचने के लिए वर्ष में दो बार एमसीआर के जूते दिए जाते हैं। कुष्ठ रोग के सभी मरीजों, जिन्हें सर्जरी की आवश्यकता होती है उन्हें सर्जरी के दौरान और सर्जरी के पश्चात मजदूरी संबंधी क्षति की पूर्ति के लिए एकमुश्त 8000 रुपये अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश के सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा सभी कुष्ठ रोगियों को प्रतिमाह 750 रुपये पेंशन दी जाती है।
मण्डी हवाई अड्डा विकास से सम्बन्धित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने मण्डी में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का आवश्यक भूमि सहित संशोधित मास्टर प्लान प्रस्तुत किया है। ताकि इसकी हवाई पट्टी (रनवे) के अभिविन्यास (ओरियंटेशन) का निर्धारण और परामर्शकर्ता द्वारा ओएलएस चार्ट तैयार किया जा सके। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नागर विमानन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सुझावों के अनुसार रनवे का संरेखण (अलाइन्मेंट) तय करने के लिए वैपकोस लिमिटिड द्वारा लेडार (लाइट डिटैक्शन एण्ड रेंजिंग) सर्वेक्षण पूर्ण कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण इसी वर्ष 21 जुलाई को पूरा हुआ था और वैपकोस लिमिटिड/मै. जियोकनो इण्डिया प्राइवेट लिमिटिड ने भारतीय विमानन प्राधिकरण को लेडार सर्वेक्षण का डाटा प्रस्तुत कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागर विमानन मंत्रालय द्वारा पूर्व में दी गई साइट क्लीयरेंस तथा जमा करवाए गए मास्टर प्लान के अनुसार यहां 2100 मीटर रनवे के निर्माण तथा दक्षिण भाग में इसके 1050 मीटर सम्भावित विस्तार के साथ योजना तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि हवाई लेडार सर्वेक्षण और केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री के साथ आयोजित बैठक के बाद यहां 3150 मीटर लम्बी हवाई पट्टी की सम्भावना तलाश करने पर सहमति बनी थी। उन्होंने कहा कि इस आधार पर विश्लेषण के उपरान्त हवाई पट्टी की लम्बाई दक्षिण भाग के बजाय उत्तरी भाग में 1050 मीटर करने पर कार्य किया गया। जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस परियोजना के वित्तपोषण के लिए मामला केन्द्र सरकार के समक्ष उठाएगी। उन्होंने कहा कि 15वें वित्तायोग ने इस बड़ी परियोजना के लिए 1000 करोड़ रुपये की सिफारिश की है। बैठक में मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और जे.सी. शर्मा, प्रधान सचिव सुभाशीष पांडा और हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबन्ध निदेशक अमित कश्यप के अतिरिक्त वर्चुअल माध्यम से उपायुक्त मण्डी अरिन्दम चौधरी और अन्य अधिकारी भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से बुधवार को हिमाचल प्रदेश सचिवालय की चतुर्थ श्रेणी ऐसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने अध्यक्ष प्रहलाद गौतम की अध्यक्षता में भेंट की। मुख्यमंत्री ने एसोसिएशन के सदस्यों को बधाई दी। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल कुमार, उपाध्यक्ष धर्मपाल, महासचिव नेकराज, विशेष सचिव शिशम और संयुक्त सचिव केवल किशोर उपस्थित थे।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर प्रदेश कांग्रेस देश मे बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी के विरोध में लोगों को जागरूक करने के लिए 14 नवंबर से 29 नवंबर तक जन जागरण अभियान शुरू करेगी। इसके तहत कांग्रेस छोटी बैठके कर पद यात्रा करेगी। कांग्रेस सचिव हरिकृष्ण हिमराल ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि कांग्रेस के प्रस्तावित जन जागरण अभियान को लेकर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में कांग्रेस प्रवक्ता और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के सचिव प्रभारियों ने भाग लिया। बैठक में जनजागरण अभियान की रूप रेखा पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कांग्रेस सचिव हरिकृष्ण हिमराल के अतिरिक्त मुख्य प्रवक्ता दीपक राज शर्मा, प्रवक्ता डॉ. राजेश शर्मा, किरण धान्टा, दिनेश आर्य, डॉ.विजय डोगरा, प्रभारी सचिव शशि शर्मा, देश राज, राज कुमार नीटू, सत्यजीत नेगी, श्रीकमल पठानिया, नवनीत शर्मा, बलदेब ठाकुर, ऋषिव पांडव उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिये अभी से अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। प्रदेश में हुए चार उप चुनाव परिणामों से उत्साहित प्रदेश कांग्रेस अपने रोडमैप को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इसकी रूपरेखा 19 नवंबर को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में होने वाली के एक अहम बैठक में तैयार कर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस संगठन महासचिव रजनीश किमटा ने दावा किया कि अगले साल होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस इन उप चुनावों की तरह शानदार जीत हासिल करेगी और प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ जन आकांक्षाओं को पूरा करने वाली लोकप्रिय कांग्रेस की सरकार बनेगी। किमटा ने कहा कि देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व.इंदिरा गांधी की जयंती पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अपना सदस्यता अभियान शुरू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य प्रदेश मामलों के प्रभारी राजीव शुक्ला विशेष तौर पर शिरकत करते हुए इस अभियान का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान कांग्रेस के सभी विधायक, कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, कार्यसमिति के सभी सदस्य, जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, सभी अग्रणी संगठनों के प्रमुख, विभागों के प्रमुख उपस्थित रहेंगे। किमटा ने कहा कि हाल ही में हुए उप चुनावों में राजीव शुक्ला के कुशल नेतृत्व व प्रबंधन से जिस प्रकार कांग्रेस ने अपनी जीत दर्ज की है उसी तरह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिये भी पार्टी की रणनीति और इसके रोडमैप के लिये शुक्ला बैठक में आवश्यक दिशानिर्देश देंगे।
पिछले दिनों शिमला में तेंदुए के आंतक से डरे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने डी एफ ओ शिमला के अध्यक्षता में एक टीम का गठन कर उन स्थानों का पता करने के निर्देश दिए, जहाँ तेंदुए का खतरा सबसे अधिक है। हॉटस्पॉट्स को चिन्हित करने के लिए इस कमेटी में जिला प्रशासन और नगर निगम शिमला के भी अधिकारी रहेंगे। भारद्वाज ने आज सचिवालय में शिमला शहर में तेंदुए के आतंक से उत्पन्न स्थिति को लेकर सम्बंधित अधिकारीयों की एक बैठक ली। बैठक में विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। भारद्वाज ने वन विभाग को सभी ज़रूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हॉटस्पॉट्स को चिन्हित कर वहां कैमरा और पिंजरे जल्द लगाए जाएं। साथ सूचना हेतु एक फ़ोन नंबर जारी करने के भी निर्देश दिए जिस पर सम्बंधित जानकरी दी जा सके और यदि जनता कि तरफ से कोई फीडबैक आना हो तो उस नंबर पर दिए जा सके। भारद्वाज ने वन एवं पुलिस विभाग को खोजी अभियान जारी रखने को कहा। मंत्री ने शिमला नगर निगम को ऐसे स्थांनो पर स्ट्रीट लाइट्स लगाने के भी निर्देश दिए जिसके लिए शहरी विकास विभाग से नगर निगम को धनराशि प्रदान की जाएगी। बैठक में प्रमुख सचिव शहरी विकास रजनीश, जिलाधीश शिमला आदित्य नेगी, वन विभाग, नगर निगम और पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार पर शिक्षकों की मांगों को अनदेखा करने का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार अपने आप को कर्मचारी हितैषी होने का दावा तो करती है, लेकिन व्यवहारिकता में सरकार के 4 साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है और अभी तक सरकार ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के किसी भी मुद्दे को हल नहीं किया है। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि हिमाचल में 90 हजार के आसपास शिक्षक कार्यरत है। लेकिन सरकार ने उनकी मांगों को सुनने के लिए जीसीसी जैसा कोई भी उचित प्लेटफार्म नहीं बनाया है। जिससे शिक्षकों एवं शिक्षार्थी हित में मांगों पर चर्चा उपरांत उसका निराकरण किया जा सके। उन्होंने कहा कि जेसीसी की बैठक का प्रारूप अपने आप में एक बेईमानी है क्योंकि इसमें शिक्षकों का इतना बड़ा वर्ग समायोजित नहीं किया गया है। एनजीओ को मान्यता के स्थान पर लोकतांत्रिक तरीके से सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को चुनाव के माध्यम से जेसीसी के गठन करने की संघ लंबे समय से मांग कर रहा है। कर्मचारियों में भारी रोष है और सरकार के प्रति कर्मचारियों की नाराजगी का अंदाजा इस चुनाव से लगाया जा सकता है। संघ सरकार से मांग करता है कि प्रदेश के कर्मचारियों एवं शिक्षकों के भत्ते का भुगतान केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर किया जाए। प्रदेश के कर्मचारियों के लंबित 5% डीए का भुगतान तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए क्योंकि केंद्र सरकार बहुत पहले इसे जारी कर चुकी है और पंजाब ने भी एक मुश्त 11% डीए की किस्त जारी कर दी है। इसलिए हिमाचल के कर्मचारियों को डीए की किस्त देने के लिए किसी औपचारिक बैठक का इंतजार करना प्रदेश के कर्मचारियों के साथ बेईमानी है l उन्होंने विभाग में खाली पड़े पदों को भरने की मांग उठाई है।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी विभागों में विभिन्न श्रेणियों के आउटसोर्स कर्मचारियों हेतु स्थायी नीति बनाने को लेकर कैबिनेट सब-कमेटी गठन का निर्णय किया गया। जलशक्ति विभाग अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एलडी चौहान ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में विभिन्न श्रेणियों के लगभग 25 हजार से ज्यादा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे है, जिनका तो वेतन कम है। दूसरा उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और इनसे काम ऊंचे वेतन वाले कर्मचारियों से कही अधिक लिया जाता है। चौहान ने कहा कि आउटसोर्स पर नियुक्त कर्मी बेहतर शिक्षा से पूर्ण है और हर कार्य मे पूर्णतया दक्ष है। प्रदेश सरकार को शीघ्र इन कर्मियों हेतु स्थायी नीति बनाकर, विभागों में मर्ज करके सरकारी कर्मचारी बनाकर इन्हें न्याय प्रदान करना चाहिए। जिसको लेकर मुख्यमंत्री ने पहल कर दी है, जो एक ऐतिहासिक कार्य होगा।
पुलिस थाना रोहड़ू के तहत पारसा गांव में चोरों ने लाखों रुपए के सोने के गहनों व नकदी सहित सामान पर हाथ साफ कर डाला है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पारसा गांव निवासी बिहारी लाल पुत्र ध्यान चंद ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 8 नवम्बर को दिन के समय परिवार के सभी लोग रोहड़ू बाजार आए थे। दोपहर बाद करीब डेढ़ बजे जब घर पहुंचे तो दरवाजे के ताले टूटे पाए गए। घर की जांच करने पर लाखों रुपए के सोने के गहने गायब मिले। इस दौरान पता चला कि उनके पड़ोसी के घर से भी करीब 40 हजार रुपए की राशि गायब है। सूचना के आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया है। डीएसपी रोहड़ू चमन लाल ने कहा कि हैड कांस्टेबल अनिल कुमार मामले की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को मिली सूचना के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में 2 साल बाद आज से फिर रौनक लौटेगी। बीती कैबिनेट की बैठक में हुए फैसले के अनुसार आज यानि बुधवार से तीसरी से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की स्कूलों में नियमित कक्षाएं लगेंगी। इसके लिए प्रदेश के सभी स्कूलों के लिए गाइडलाइन भी जारी की गयी है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, उन स्कूलों में एक दिन छोड़कर या सुबह-शाम के सत्र में कक्षाएं लगेंगी। माइक्रो प्लान के आधार पर कक्षाओं में विद्यार्थी बैठाए जाएंगे। स्कूल गेट पर विद्यार्थियों व शिक्षकों का थर्मल स्क्रीनिंग से तापमान जांचा जाएगा। अगर किसी विद्यार्थी या शिक्षक-गैर शिक्षक में बुखार के लक्षण मिले तो गेट से ही उन्हें वापिस घर भेज दिया जाएगा। स्कूलों में सभी के लिए फेस मास्क पहनना अनिवार्य रहेगा। वंही स्कूलों में लंच ब्रेक का समय अलग-अलग रहेगा। स्कूल आने और जाने के समय में भी कक्षावार पांच से दस मिनट का अंतर होगा। प्रार्थना सभा और खेलकूद सहित एकत्र होने वाली सभी गतिविधियां बंद रहेंगी। सरकारी स्कूलों में नियमित कक्षाएं शुरू होने के बावजूद हर घर पाठशाला कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन शिक्षण सामग्री भेजने की प्रक्रिया भी आगामी आदेशों तक जारी रहेगी। यदि स्कूल में कोई संक्रमित विद्यार्थी पाया जाता है तो 48 घंटे तक स्कूल बंद रखा जाएगा।


















































