अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सोमवार को हिमाचल प्रदेश में 50 हजार से अधिक लोगों ने एक साथ सूर्य नमस्कार समेत कई आसन किए। यह मुख्य कार्यक्रम शिमला में राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कोरोना के चलते पीटरहॉफ में ज्यादा लोग एकत्र नहीं किए गए। जिला स्तर पर भी योग करने के लिए लोग वर्चुअली जुड़े। यह कार्यक्रम सुबह 7 बजे से शुरू हुआ। आयुष विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में तनाव एवं व्यस्त जीवनशैली के कारण हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसके निवारण के लिए योग एवं आयुर्वेद वरदान हैं। आयुष विभाग द्वारा आर्ट ऑफ लिविंग संस्था, योग भारती संस्था, विवेकानंद योग केंद्र आदि के समन्वय से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम में होम आइसोलेशन में रह रहे कोविड संक्रमित व्यक्तियों और सामान्य जनता को व्हाट्सऐप व जूम के माध्यम से प्रतिदिन योग एवं प्राणायाम करवाया जाता है ताकि वे मानसिक तनाव से बचकर शीघ्र स्वस्थ हो सकें और बेहतर जीवन जी सकें। इस कार्यकम के माध्यम से लगभग 1327 व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर लगभग 53 हजार लोगों को योग एवं प्राणायाम का अभ्यास करवाया गया तथा योग का चिकित्सकीय महत्व समझाया गया।
अकसर विधायकों को मिलने वाली पेंशन को लेकर कई तरह की खबरें, किस्से सामने आते है। हिमाचल में विधायकों को वर्तमान में करीब 85 हज़ार रुपये पेंशन मिलती है, पर जब ये व्यवस्था शुरू हुई थी तब महज 300 रुपये पेंशन का प्रावधान था। इस पेंशन व्यवस्था के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। वर्ष 1974 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार हमीरपुर में एक मेले में बतौर मुख्यातिथि भाग लेने पहुंचे थे। मेले के शुभारंभ के दौरान विभिन्न दुकानों का अवलोकन करते हुए उनकी नजर पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी पर पड़ी। वे विधानसभा क्षेत्र मेवा (वर्तमान में भोरंज) से 1967 से 1972 तक जनसंघ के टिकट पर विधायक रह चुके थे। अमर सिंह उस मेले में एक दुकान लगाकर चूड़ियां बेच रहे थे। डॉ परमार उनके पास पहुंचे और उनसे बात की। अमर सिंह ने उन्हें बताया कि अब वे विधायक नहीं है सो अब आय का कोई साधन नहीं बचा है। परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेवारी के चलते वे मेलों में दुकानदारी चलाते हैं। शिमला पहुंचते ही डॉ यशवंत सिंह परमार ने प्रदेश सरकार की अगली कैबिनेट बैठक में सभी पूर्व विधायकों को 300 रुपये पेंशन देने का निर्णय लिया, ताकि पूर्व विधायक सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें। इस वाक्ये के बाद अमर सिंह चौधरी एक बार और विधायक बने। वह जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर 1977 से 1980 तक विधायक रहे। बीते दिनों अमर सिंह चौधरी का निधन हुआ तो उनसे ये जुड़ा ये किस्सा फिर ताजा हो गया।
मंडी संसदीय सीट पर जीत बरकरार रखने के लिए अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और सीएम जयराम ठाकुर की सियासी परीक्षा शुरू हाे गई है। हालांकि अभी उप चुनाव का शेड्यूल तैयार नहीं हुआ है, लेकिन उसके पहले भाजपा ने भीतर खाते प्रत्याशी पर मंथन शुरू कर दिया है। मंडी सीट से पूर्व सांसद स्व. रामस्वरूप शर्मा के निधन के बाद यहां अब उप चुनाव होना है। लगातार पिछले दो चुनावों में भाजपा की जीत हुई है ताे अब उसे कायम रखने के लिए दिल्ली से लेकर राजधानी शिमला तक भाजपा पूरी तरह से सक्रिय हाे चुकी है। यह सीट दाेनाें नेताओं के लिए साख का सवाल भी बन चुकी है। जगत प्रकाश नड्डा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, तो मंडी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का अपना गृह जिला है। जाहिर है ऐसे में उप चुनाव की ये सियासी परीक्षा किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। बीते दिनों भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में उपचुनाव पर रणनीति बनी। हालांकि अभी निर्वाचन आयोग की तरफ से उप चुनाव के लिए शेड्यूल जारी नहीं किया गया है, मगर प्रदेश भाजपा पहले ही अपनी तैयारियों में हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर दिल्ली प्रवास पर निकले। इस दौरान हालांकि उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों से तुफानी मुलाकात कर हिमाचल के हित एवं लंबित प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा की, लेकिन दूसरा मकसद मंडी संसदीय सीट, जुब्बल-कोटखाई और फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उप चुनाव पर मंथन करना था। बताया जा रहा है कि सीएम जयराम ठाकुर और जेपी नड्डा की मुलाकात के समय तीनों उपचुनाव पर लंबी चर्चा की। जाहिर है टिकट मसले पर भी मंथन हुआ। मंडी संसदीय सीट से पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक और सैनिक कल्याण बाेर्ड के चेयरमैन ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर के नाम चर्चा मेँ है। साथ ही उड़ती -उड़ती खबर यह भी हैं कि सरकार में दाे मंत्रियाें में से किसी एक काे मंडी संसदीय सीट से उपचुनाव लड़वाने के लिए मनाया जा सकता है। मगर सरकार किसी मंत्री काे संसद पहुंचा कर उपचुनाव का रिस्क शायद ही ले। इनके अलावा कर्मचारी नेता एन आर ठाकुर व राजेश शर्मा, तथा त्रिलोक जम्वाल के नाम भी चर्चा में है। वहीँ स्व. रामस्वरूप शर्मा के पुत्र शांति स्वरूप भी अब टिकट के इच्छुक बताये जा रहे है। हालांकि वे राजनीति में सक्रिय नहीं है। 17 में से 13 विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी, कांग्रेस 3 ताे 1 निर्दलीय विधायक मंडी संसदीय क्षेत्र के 17 विधानसभा क्षेत्रों पर गाैर करें ताे वर्तमान में 13 विधानसभा सीटों पर भाजपा, 3 पर कांग्रेस और एक सीट पर निर्दलीय विधायक हैं। यानी किन्नौर, कुल्लू और रामपुर सीट पर कांग्रेस, जबकि जोगिंदर नगर सीट पर निर्दलीय विराजमान हैं। शेष अन्य 13 सीटों पर भाजपा काबिज है। इस संसदीय क्षेत्र के पांच हलके बल्ह, नाचन, करसोग, आनी व रामपुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। जबकि किन्नौर, लाहौल-स्पीति और भरमौर सीट एसटी के लिए आरक्षित हैं। मंडी का समीकरण, लगातार दो चुनाव जीतकर रामस्वरूप ने बनाया था रिकॉर्ड पहली बार 1952 के चुनाव में राजकुमारी अमृत कौर व गोपी राम निर्वाचित हुए थे, उस दौरान मंडी से दो सांसद चुने गए थे। इसके बाद मंडी रियासत के राजा जोगिंद्र सेन ने 1962 तक प्रतिनिधित्व किया। फिर सुकेत रियासत के राजा ललित सेन विजयी रहे थे। कांग्रेस ने फिर रामपुर रियासत के वीरभद्र सिंह को यहां से मैदान में उतारा। 1977 से 1979 की अवधि में जनता पार्टी के गंगा सिंह ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। तब पहली बार यहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। 1980 के चुनाव में फिर वीरभद्र सिंह विजयी हुए। 1985 में पंडित सुखराम संसद पहुंचे। 1989 के आम चुनाव में यहां से भाजपा ने कुल्लू के महेश्वर सिंह को मैदान में उतारा और लोकसभा में पहुंचे। 1991 के चुनाव में पंडित सुखराम ने फिर से जीत हासिल की। 1998 में महेश्वर सिंह ने कांग्रेस की प्रतिभा सिंह को पराजित किया था। 2004 में कांग्रेस की प्रतिभा सिंह ने महेश्वर सिंह को हराया। 2009 में वीरभद्र सिंह ने महेश्वर सिंह को हराया। 2013 के उपचुनाव में कांग्रेस की प्रतिभा सिंह विजयी रही। 2014 और 2019 के चुनाव में लगातार दो बार भाजपा के रामस्वरूप शर्मा विजयी रहे। अब उनके निधन से यहां उपचुनाव होना है। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस काे भी उपचुनाव की घोषणा का इंतजार है। ये हैं मंडी संसदीय क्षेत्र के हमारे विधायक विस क्षेत्र विधायक पार्टी सराज जयराम ठाकुर बीजेपी धर्मपुर महेंद्र सिंह ठाकुर बीजेपी मंडी अनिल शर्मा बीजेपी सुंदरनगर राकेश जम्वाल बीजेपी द्रंग जवाहर ठाकुर बीजेपी बल्ह इंद्र सिंह गांधी बीजेपी सरकाघाट कर्नल इंद्र सिंह बीजेपी करसोग हीरालाल बीजेपी नाचन विनोद कुमार बीजेपी जोगिंदर नगर प्रकाश राणा निर्दलीय कुल्लू सुंदर सिंह ठाकुर कांग्रेस मनाली गाेविंद सिंह ठाकुर बीजेपी बंजार सुरेंद्र शौरी बीजेपी आनी किशोरी लाल बीजेपी लाहौल-स्पीति रामलाल मार्कंडेय बीजेपी भरमौर जिला लाल बीजेपी किन्नौर जगत सिंह नेगी कांग्रेस
इतिहास गवाह है कि हिमाचल में किसी विधायक के निधन के बाद जब भी उनके परिवार के सदस्य काे टिकट मिला ताे अधिकांश मौकों पर हार ही मिली। बीते तीन दशकों में हुए उप चुनाव पर नजर डाले तो सिर्फ 2017 के उप चुनाव में भोरंज सीट से आईडी धीमान के बेटे को जीत नसीब हुई, अन्य मौकों पर दिवंगत विधायकों के पुत्र जीत दर्ज नहीं कर पाए। अब फिर हिमाचल प्रदेश में मंडी संसदीय क्षेत्र और दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं। इसके लिए दाेनाें प्रमुख राजनीतिक दलों ने तैयारियां भी शुरू कर दी है। अब बस चुनाव आयोग से घोषणा का इंतजार है। अब तक हिमाचल में हुए उपचुनाव पर गौर करें ताे पहाड़ के लोग भी मौके को देखते हुए व्यक्ति विशेष को भूलकर नए सिरे से इबारत लिखने में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि जगदेव चंद हों या संतराम, इनके निधन के बाद उपचुनाव में जनता सहानुभूति में नहीं बही। स्व. जगदेव चंद भाजपा के नामी नेताओं में पहचान रखते थे, मगर उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे नरेंद्र ठाकुर चुनाव हार गए। उस समय अनीता वर्मा ने कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा और जीती थीं। इसी तरह प. संतराम कांग्रेस के एक ऐसे नेता थे जिन्हें बैजनाथ की जनता कभी नहीं बूल सकती। वर्ष 1998 में संतराम के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे सुधीर शर्मा को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। तब जनता ने दूलो राम को जितवाकर विधानसभा भेजा था। वर्ष 2011 में नालागढ़ सीट से हरिनारायण सिंह सैणी के निधन के बाद उनकी पत्नी गुरनाम कौर भी चुनाव हारी। इसी तरह सिरमौर जिला के रेणुका विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस नेता डा. प्रेम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र विनय कुमार को हार का मुंह देखना पड़ा था। यहां से प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़कर हिरदा राम भाजपा टिकट पर विधायक चुने गए थे। इनके अतिरिक्त भी कई ऐसे उदहारण है जहाँ उपचुनाव में जनता ने दिवंगत विधायक के परिवार से ज्यादा सहानुभूति नहीं दिखाई। उपचुनाव में भी होगी विरासत की सियासत मंडी लोकसभा उपचुनाव के लिए जहां स्व रामस्वरूप शर्मा के पुत्र शांति स्वरुप टिकट की दौड़ में है, तो वहीँ जुब्बल कोटखाई विधानसभा उप चुनाव के लिए स्व नरेंद्र बरागटा के पुत्र चेतन बरागटा टिकट के प्रबल दावेदार है। इसी तरह फतेहपुर में कांग्रेस भी सुजान सिंह पठानिया के पुत्र भवानी पठानिया को टिकट दे सकती है। भवानी का टिकट भी जानकार पक्का मान रहे है। यानी आगामी तीनों उपचुनाव में दिवंगत नेताओं के पुत्र टिकट के दावेदार है, विशेषकर दोनों विधानसभा उप चुनाव में सहानुभूति फैक्टर को जहन में रखते हुए पार्टियां विरासत की सियासत को तवज्जो दे सकती है। अब यदि दिवंगत नेताओं के इन पुत्रों को टिकट मिला तो क्या जनता की वोट रुपी सहानुभूति भी इन्हें मिलेगी, यह देखना रोचक होगा। उपचुनाव: जयराम राज में भाजपा अपराजित किसी विधायक के निधन के अतिरिक्त ज्यादातर किसी मौजूदा विधायक के सांसद बनने की स्थिति में हिमाचल में उपचुनाव होते आये है।1993 से 2017 तक हिमाचल की सत्ता बारी- बारी वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के पास ही रही। पर सत्ता में रहते हुए लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा उपचुनाव में इन दोनों दिग्गजों का प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं रहा। मसलन वर्ष 2004 में वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे और लोकसभा चुनाव मैदान में तत्कालीन वन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार को उतारा गया। उनकी जगह गुलेर सीट से चंद्र कुमार के पुत्र नीरज भारती ने चुनाव लड़ा और पराजय का मुंह देखना पड़ा था। वहीँ 2009 में जब राजन सुशांत लोकसभा पहुचं गए तो फतेहपुर उप चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को हार का मुँह देखना पड़ा। इसी तरह वर्ष 2014 में कांग्रेस सत्ता में थी और निर्दलीय चुनाव जीतकर आए राजेंद्र राणा ने विधायक पद छोड़कर कांग्रेस टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा। बाद में हुए उपचुनाव में सुजानपुर से उनकी पत्नी अनीता राणा को कांग्रेस ने टिकट दिया। सुजानपुर की जनता ने अनीता राणा को पराजित करने के साथ हमीरपुर सीट से राजेंद्र राणा को भी हरा दिया। वहीं वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की बात करें तो इनके कार्यकाल में 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद दो उपचुनाव हुए। तब पच्छाद विधायक सुरेश कश्यप और धर्मशाला विधायक किशन कपूर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद हुए उपचुनाव में दोनों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की।
पिछले दिनों हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार सत्ता में आई लेकिन खुद सीएम ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से चुनाव हार गई। कांटे की टक्कर के बाद ममता बनर्जी बीजेपी प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी से 1736 वोटों से हार गई। बावजूद इसके ममता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि कोई मुख्यमंत्री पहली बार चुनाव हारा हो और कोई हारा हुआ नेता पहली बार मुख्यमंत्री बना हो। यही नहीं बिना चुनाव लड़े ही मुख्यमंत्री बनने की परम्परा भी नई नहीं हैं। दरअसल संविधान में ऐसा प्रावधान है। ऐसी स्थिति में उक्त नेता को 6 माह में चुनाव जीतकर आना होता है। ममता बनर्जी भी अब भवानीपुर सीट से उपचुनाव के रास्ते विधानसभा पहुंचने की तैयारी में है। पर अगर ममता बनर्जी उप चुनाव हार जाए तो ? क्या कोई नेता मुख्यमंत्री बनने के बाद उपचुनाव भी हार सकता है ? खेर, मुमकिन नहीं लगता कि ममता बनर्जी के मामले में तो ऐसा चमत्कार होगा पर देश के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो दो मुख्यमंत्रियों के साथ ऐसा हो चुका है। खुद पीएम इंदिरा उतरी उपचुनाव प्रचार में और त्रिभुवन हार गए मुख्यमंत्री के उप चुनाव हारने का सिलसिला उत्तर प्रदेश में त्रिभुवन नारायण सिंह के साथ शुरू हुआ। त्रिभुवन नारायण सिंह बिना चुनाव लड़े 10 अक्टूबर 1970 को संयुक्त विधायक दल का नेता चुने गए और मुख्यमंत्री बने। मगर संविधान के अनुच्छे 164(4) की बाध्यताओं के चलते जब मार्च 1971 में गोरखपुर जिले के मनीराम विधानसभा क्षेत्र से उप चुनाव लड़े तो हार गये। दरअसल, 1969 में जब कांग्रेस में विभाजन हुआ तो उत्तर प्रदेश के कमलापति त्रिपाठी ग्रुप ने इंदिरा गुट को समर्थन दिया। दूसरे बड़े नेता रघुनाथ सिंह सिंडिकेट ग्रुप में शामिल हुए जिनमें चंद्रभानु गुप्ता त्रिभुवन नारायण सिंह भी शामिल थे। जैसे-तैसे चंद्रभानु गुप्ता मुख्यमंत्री बन गए लेकिन फरवरी 1970 में चंद्रभानु गुप्ता को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना। तब इंदिरा समर्थित कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह को समर्थन दे दिया और चौधरी चरण सिंह सीएम बन गए। पर सितंबर आते-आते कांग्रेस ने चरण सिंह को समर्थन देना बंद कर दिया जिसके बाद उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया। पर इसके बाद एक बार फिर सिंडिकेट ग्रुप ने जोड़ तोड़ कर अक्टूबर 1970 में त्रिभुवन नारायण सिंह को सीएम बना दिया। किन्तु इंदिरा को ये अखर रहा था। मुख्यमंत्री बने त्रिभुवन नारायण सिंह विधायक नहीं थे सो उन्हें 6 माह में उपचुनाव जीतना जरूरी था। उन्होंने उप चुनाव के लिए सीट चुनी गोरखपुर की मणिराम सीट। मणिराम से 1962, 1967 और 1969 में हिंदू महासभा के महंत अवैद्यनाथ विधायक चुने गये थे, पर जब अवैद्यनाथ लोकसभा के लिए चुन लिये गये तो उन्होंने यह सीट छोड़ दी। उप-चुनाव में उन्होंने त्रिभुवन सिंह को अपना समर्थन दिया। इसके अलावा मुख्यमंत्री को त्रिभुवन नारायण सिंह को कई दलों का समर्थन हासिल था। उन्होंने ऐलान भी कर दिया कि वे उपचुनाव में खुद प्रचार नहीं करेंगे, यानी जीत को लेकर वे पूरी तरह आश्वस्त थे। पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नजर में त्रिभुवन नारायण सिंह खटक रहे थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस उप चुनाव में खुद प्रचार किया। रामकृष्ण द्विवेदी को इंदिरा ने प्रत्याशी बनाया और बनारस गोलीकांड की बिसात पर ऐसा सियासी चक्रव्यूह रचा कि त्रिभुवन नारायण सिंह चुनाव हार गये। सीएम शीबू सोरेन चुनाव हारे और राष्ट्रपति शासन लग गया त्रिभुवन नारायण के बाद उपचुनाव हारने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बने झारखंड मुक्ति मोर्चा के शीबू सोरेन। शीबू सोरेन मुख्यमंत्री रहते हुए 29 दिसंबर 2008 को झारखंड विधानसभा की तमार सीट पर हुए उप चुनाव में झारखंड पार्टी के राजा पीटर से 9,062 मतों से हार गए। वे कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे।तब चुनाव हारने के बाद वह अपना कार्यकाल 6 माह बढ़ाने के लिए पुनर्नियुक्ति चाहते थे ताकि चुनाव जीतने का एक मौका और मिल जाए, लेकिन सहयोगी दल कांग्रेस सहमत नहीं हुई और सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा। उनके इस्तीफे के बाद झारखण्ड में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।
सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हिमाचल की अति प्राचीन किन्नर जनजाति की पहचान के साथ जाने -अनजाने खिलवाड़ जारी है। देश में आज थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का प्रयोग आम हो चला है। भारतवर्ष के सांस्कृतिक और साहित्यिक ग्रंथों में कहीं भी थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का उल्लेख नहीं है। हमारे प्राचीन धार्मिक ग्रंथ, वेद-पुराण, उपनिषद, साहित्य-कृतियों में भी किन्नर का यह अर्थ नहीं है। फिर भी न जाने कब और कहां से थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का प्रचलन शुरू हुआ और निरंतर किन्नौर के गौरव को खंडित करता आ रहा है। अज्ञानतावश आम लोग भी थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का इस्तेमाल करने लगे है, जो किन्नौर की किन्नर जनजाति को अस्वीकार्य है। असल भय तो ये है कि यदि इस शब्द के गलत प्रचलन पर विराम न लगाया गया तो आने वाली पीढ़ियां भूलवश गौरवशाली किन्नर जनजाति को भी थर्ड जेंडर ही मानेंगी। जिला किन्नौर प्राचीन किन्नर देश के इतिहास और संस्कृति के आधार पर गठित हुआ है और वहां निवास करने वाली जनजाति 'किन्नौरा' और 'किन्नर' के नाम से जानी जाती है। भारत के संविधान में भी जनजातियों के रूप में ‘किन्नर’ और ‘किन्नौरा’ दर्ज हैं। जिला किन्नौर के निवासियों को जब जनजाति प्रमाण पत्र दिया जाता है तो उसमें स्पष्ट लिखा जाता है 'दि पीपल ऑफ किन्नौर डिस्ट्रिक्ट बिलोंग्स टू किन्नौरा और किन्नर ट्राइब', विच इज रिकगनाइज्ड एस शेड्यूल ट्राइब अंडर दि शेड्यूल ट्राइब लिस्ट ऑर्डर 1956 एंड दि स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश एक्ट 1970।' बावजूद इसके जाने -अनजाने इस जनजाति की अस्मिता से खिलवाड़ हो रहा है। किन्नर/किन्नौरा जनजाति की अस्मिता पर संकट : एसआर हरनोट जाने माने लेखक एसआर हरनोट ने इस विषय को लेकर लम्बी लड़ाई लड़ी है। प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र तक एसआर हरनोट इस विषय को उठाते रहे है। उनका कहना है कि थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का प्रयोग किन्नर/किन्नौरा जनजाति की अस्मिता पर संकट है। किसी भी प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ, वेद-पुराण, उपनिषद, शब्द कोष, साहित्य-कृतियों में 'किन्नर' शब्द 'थर्ड जेंडर' के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ है। जो लोग इस शब्द का गलत संदर्भ में प्रयोग कर रहे हैं, वह अज्ञानतावश है। हरनोट मानते है कि यह संकट पिछले कुछ साल से मीडिया में हिजड़ा या थर्ड जेंडर के लिए ईजाद किए गए ‘किन्नर‘ शब्द के कारण उत्पन्न हुआ है। ये विडम्बना का विषय है कि आज मीडिया भी थर्ड जेंडर के लिए भूलवश ‘किन्नर’ शब्द का प्रयोग करती हैं, जो संवैधानिक रूप से गलत है। एसआर हरनोट के मुताबिक देश की पहली थर्ड जेंडर विधायक शबनम मौसी ने खुद माना था कि किन्नर शब्द मीडिया ने दिया है। विधानसभा ने पास किए निंदा प्रस्ताव, पर निष्कर्ष क्या ? हिमाचल विधानसभा में दो बार भाजपा और कांग्रेस के कार्यकालों में किन्नर शब्द के गलत इस्तेमाल को लेकर निंदा प्रस्ताव भी पारित हो चुके हैं। पर ये निंदा प्रस्ताव किसी खानापूर्ति से ज्यादा सिद्ध नहीं हुए। किन्नर शब्द के गलत प्रचलन को लेकर जिस जोश से मुद्दा उठा था वह अब लगभग शांत है। आज भी बदस्तूर किन्नर शब्द हिजड़ों के लिए प्रयोग हो रहा है। जाने -अनजाने हम सभी ऐसा कर रहे है। फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया भी 31 मई 2021 के संस्करण में ये भूल कर चूका है, जिसके लिए हम क्षमाप्रार्थी है। पर अब जरूरी है कि किन्नौर की अस्मिता से जुड़े इस अति संवेदनशील मुद्दे पर महज खानापूर्ति न हो बल्कि एस आर हरनोट व उनके साथियों ने जो अभियान शुरू किया था उसे मंजिल मिले। ‘ट्रैफिक सिग्नल’ नहीं हुई थी रिलीज़, पर असर क्या हुआ ? वर्ष 2007 में मधुर भंडारकर की एक फिल्म आई थी ‘ट्रैफिक सिग्नल’। फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर ने अपनी फिल्म के रिलीज होने से पहले जितने भी साक्षात्कार दिए थे उनमें प्रमुखता से हिजड़ा समुदाय को किन्नर कह कर पुकारा गया था। जाहिर है ऐसे में हिमाचल में फिल्म रिलीज होने से पहले ही इस बात को लेकर बवाल मचना ही था। ऐसे में प्रदेश सरकार ने किन्नौर वासियों और संस्कृति के साथ इस तरह का खिलवाड़ होते देख इस फिल्म के हिमाचल में रिलीज होने पर प्रतिबंध लगा दिया था। ये फिल्म बेशक हिमाचल में रिलीज़ नहीं हुई लेकिन आज भी टीवी सिनेमा जगत में थर्ड जेंडर के लिए खुलकर किन्नर शब्द का इस्तेमाल जारी है। शायद व्यावसायिक दृष्टिकोण से हिमाचल एक बड़ा बाजार नहीं है, इसलिए फिल्म और सिनेमा जगत ने हिमाचल की आवाज़ को सुनी अनसुनी कर दिया। 'किन्नर' एक उपनाम भी है किन्नौर के लोगों द्वारा 'किन्नर' उपनाम भी लिखा जाता रहा है। हालांकि अब किन्नर उपनाम देखकर लोग हिजड़ा समझने की भूल कर बैठते हैं। इसलिए लोग इस पहचान से कतराने लगे हैं। ऐसी में कई वाक्ये हुए है जहाँ बुद्धिजीवियों ने भी किन्नर उपनाम को थर्ड जेंडर समझने की बड़ी भूल कर दी। विडम्बना : तमाम साहित्य और शोध पर भी प्रश्नचिन्ह किन्नर शब्द का गलत इस्तेमाल एक ऐसा सांस्कृतिक मुद्दा है जिस पर न केवल अकेले किन्नौर वासियों की अस्मिता दांव पर है बल्कि उस तमाम साहित्य और शोध पर भी प्रश्नचिह्न है जो इस सन्दर्भ में उपलब्ध है। पंडित राहुल सांकृत्यायन ने किन्नर जाति के सांस्कृतिक महत्व पर 'किन्नर देश में' पुस्तक लिखी है। उनके अनुसार यह किन्नर देश है। इसी तरह हिमाचल कला, भाषा और संस्कृत अकादमी के सचिव रहे डा. बंशी राम शर्मा ने किन्नौर और किन्नर जनजाति पर शोध किया और उनका यह शोध ग्रन्थ ‘किन्नर लोक साहित्य' शीर्षक से प्रकाशित है। इसे किन्नौर पर प्रमाणिक ग्रन्थ माना जाता है। इस पुस्तक में अनेक प्रमाण देकर यह सिद्ध किया गया है कि वर्तमान किन्नौर में रहने वाले निवासी किन्नर जाति से सम्बन्धित हैं। महाकवि भारवि ने अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के हिमालय वर्णन खण्ड के पांचवे सर्ग में किन्नर, गन्धर्व, यक्ष तथा अप्सराओं आदि देव-योनियों के किन्नर देश में निवास होने का वर्णन किया है। इसी प्रकार कई संस्कृत ग्रंथों में किन्नरी वीणा का उल्लेख हुआ है। चन्द्र चक्रवती ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘लिटरेरी हिस्टरी ऑफ़ एन्शियंट इंडिया' में लिखा है कि किन्नर कुल्लू घाटी, लाहुल और रामपुर में सतलुज के पश्चिमी किनारे पर तिब्बत की सीमा के साथ रहते हैं। ऐसे अनेक साहित्य उपलब्ध है जहाँ किन्नर जाती का जिक्र है। पर आज किन्नर शब्द का गलत इस्तेमाल इस तमाम साहित्यिक विरासत पर भी प्रश्न चिन्ह है। देखते -देखते किन्नर अखाड़ा भी स्थापित हो गया हिजड़ा समुदाय द्वारा 2018 में एक अखाड़ा स्थापित किया गया जिसे किन्नर अखाड़ा का नाम दिया गया। यह जूना अखाड़ा (श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा) के अधीन है। हालहीं में धर्मनगरी हरिद्वार में हुए महाकुम्भ में भी पहली बार किन्नर अखाड़ा शामिल हुआ। थर्ड जेंडर या हिजड़ा समुदाय के संवैधानिक अधिकारों के प्रति पूरा मुल्क एक है, सबकी संवेदनाएं इस समुदाय के साथ है। पर ये मसला शायद जाने -अनजाने एक ऐसी भूल का है जिससे आज किन्नौर वासी आहत है। हिमाचल में बीते दो दशक से इस मुद्दे पर चर्चा होती आ रही है, विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पास होने से लेकर प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखे गए है, बावजूद इसके देखते -देखते जिस तरह थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का इस्तेमाल आम हुआ है, उसके लिहाज से ये तय है कि इस मुद्दे की लड़ाई अभी लम्बी है। यक़ीनन इस मसले में राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी आड़े आ रही है। यक़ीनन जरुरत है एक सशक्त संवाद स्थापित करने की, ताकि हिजड़ा समुदाय के साथ भी तार्किक मंथन किया जा सके। यक़ीनन जरुरत है प्रसार की, ताकि जाने -अनजाने किसी से ये भूल न हो। थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द पर लगे प्रतिबन्ध : जगत सिंह नेगी विधायक किन्नौर जगत सिंह नेगी कहते है कि थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का प्रयोग करना सरासर गलत है। किन्नौर वासियों को किन्नर और किन्नौरा के उपनाम से भी जाना जाता है। इस शब्द पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। इसके लिए आंदोलन भी किये गए, लेकिन सरकार ने कोई ठोस नीति नहीं बनाई। किन्नौर वासियों की भावनाएं इस शब्द से आहत हो रही है। थर्ड जेंडर काे किन्नर शब्द से जोड़ना असहनीय : तेजवंत नेगी किन्नौर के पूर्व विधायक तेजवंत नेगी का कहना है कि थर्ड जेंडर काे किन्नर नाम देना बिल्कुल गलत है। इस तरह शब्द का प्रयोग करना सरासर गलत है। इस मसले पर कई बार आवाज भी उठाई, लाेगाें ने आंदोलन भी किया था। यहां तक कि किन्नौर में किन्नर कैलाश है, जो आस्था का प्रतीक है। ऐसे में थर्ड जेंडर काे किन्नर शब्द से जोड़ना असहनीय हाेगा। किन्नौर की जनता के साथ मजाक न हो : फारका हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव वीसी फारका का कहना है कि थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द का प्रयोग कहीं-कहीं पर किया जाता है, जो गलत है। केंद्र सरकार काे सुनिश्चित करना चाहिए कि किन्नौर की जनता के साथ मजाक न हाे, थर्ड जेंडर के लिए किन्नर शब्द के प्रयोग करने पर रोक लगा देनी चाहिए।
शिमला में तीन दिन चले भाजपा के चिंतन और मंथन के बाद औपचारिक तौर पर ऐलान हो गया है कि पार्टी जयराम ठाकुर के चेहरे पर ही 2022 का चुनाव लड़ेगी। न सरकार का चेहरा बदलेगा और न ही संगठन का। अब तस्वीर साफ हाे चुकी है कि जयराम ठाकुर ही भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे और इसी के साथ नेतृत्व परिवर्तन के तमाम कयासों पर औपचारिक तौर पर विराम लगा दिया गया है। यूं तो बीते दिनों शिमला के लौटते ही मुख्यमंत्री ने दो टूक कह दिया था की वे है और रहेंगे, अब उनके इसी दावे पर तीन दिवसीय बैठक के बाद पार्टी ने भी मुहर लगा दी है। दरअसल, हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव में करीब डेढ़ साल का वक्त रह गया है। इसे देखते हुए भाजपा ने बीते दिनों शिमला में लगातार 3 दिनों तक बैठक की। सरकार, कोर कमेटी और संगठन के मध्य हुए गहन मंथन के बाद ये तय हो गया है कि आगामी चुनाव में सीएम जयराम ठाकुर ही भाजपा के फेस होंगे। राज्य अतिथि गृह यानी होटल पीटरहॉफ में कोर कमेटी, कार्य योजना सहित हर मोर्चे ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर अगली बार के लिए भी भरोसा जताया। इस दौरान विधायकों, 2017 के चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों, बोर्ड और निगम के नुमाइंदों, और संगठन पदाधिकारियों ने पार्टी को मजबूत करने और मिशन रिपीट को साकार करने के लिए इनपुट दिया। तीन दिवसीय इस चिंतन -मंथन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित 2017 के सभी प्रत्याशी एवं विधायकों ने अपना रिपोर्ट कार्ड संगठन को सौंपा है और उसमें अपनी 3 वर्ष की उपलब्धियों एवं विकास कार्यों का वर्णन किया है। साथ ही सभी ने अपने विधानसभा क्षेत्र की कमियां भी सरकार के समक्ष रखी हैं, ताकि उन्हें दूर कर मिशन रिपीट को मजबूती दी जा सके। बहरहाल, अगले साल चुनाव तक सरकार और संगठन में कोई बदलाव नहीं हाेगा। जयराम ठाकुर के फेस पर ही पार्टी मैदान में उतरेंगी। फिलहाल उपचुनाव में 'लोटस' खिलाने पर 'फोकस' अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को तीन उपचुनावों के इम्तिहान से गुजरना होगा। 17 विधानसभा क्षेत्रों वाले मंडी संसदीय क्षेत्र के साथ जुब्बल-कोटखाई तथा फतेहपुर विधानसभा में उपचुनाव होना है। यानी अप्रत्यक्ष तौर पर 19 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। इस परीक्षा के लिए भाजपा ने मंत्री, विधायकों सहित पदाधिकारियों के दायित्व निर्धारित कर मोर्चा संभाल लिया है। मंडी संसदीय क्षेत्र का दारोमदार जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के पास रहेगा। जबकि फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा उपचुनाव के लिए शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज काे प्रभार सौंपा गया है। महेंद्र सिंह ठाकुर काे चुनाव प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद यह लगभग साफ है कि उन्हें मंडी लोकसभा सीट से उपचुनाव के लिए मैदान में नहीं उतारा जाएगा। धूमल हुए शामिल, शांता को स्वास्थ्य ने रखा दूर शिमला में संपन्न हुई बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी मौजूद रहे। धूमल पर सबकी निगाहें टिकी थी। 2017 का चुनाव हारने के बावजूद धूमल संगठन की हरेक गतिविधि में सक्रियता से भाग लेते रहे है। चाहे 2019 का लोकसभा चुनाव हो या फिर पंचायती राज चुनाव, धूमल ने हमेशा उपस्थिति दर्ज करवाई है। दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार चिंतन बैठक में शामिल नहीं हाे सके। इसके पीछे उनका स्वास्थ्य ठीक न हाेना बताया जा रहा है। उधर, भाजपा ने संगठनात्मक ज़िलाें में मंत्रियाें काे प्रभारी नियुक्त किया है। जयराम ठाकुर का राजनीतिक सफर 1986 में एबीवीपी की प्रदेश इकाई में संयुक्त सचिव बने 1993 के विधानसभा चुनाव में पहली बार चच्चोट हलके से मैदान में उतरे और कांग्रेस दिग्गज मोतीराम ठाकुर को टक्कर दी लेकिन चुनाव हार गए। 1989 से 93 तक एबीवीपीली की जम्मू- कश्मीर इकाई में संगठन सचिव रहे। 1993 से 95 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव व प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। 1998 में फिर इसी हलके से मैदान में उतरे और विधायक चुने गए और खाद्य एवं आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बने। 2003 के चुनाव में दूसरी बार जीत हासिल की। 2000 से 2003 तक वह मंडी जिला भाजपा अध्यक्ष रहे। 2004 से 2005 तक भारतीय जनता पाटी के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। 2006 में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने। 2007 में बतौर अध्यक्ष पाटी को सत्ता दिलाई 2007 जीत की हैट्रिक बनाई और सरकार में मंत्री बने। 2012 में पुर्नसीमांकन के बाद चव्योट हलके का नाम बदल कर सराज यहां से चौथी बार विधायक चुने गए। 2017 में कांग्रेस के चैत राम को 11254 से पराजित किया। इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
59 साल के राजनीतिक जीवन में 6 बार मुख्यमंत्री, तीन बार केंद्रीय मंत्री और पांच बार सांसद रहे वीरभद्र सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं है। बिरले ही ऐसे नेता जन्म लेते है। वीरभद्र सिंह के अतिरिक्त हिंदुस्तान की सियासत में शायद प्रकाश सिंह बादल ही ऐसे नेता है जिन्होंने इतनी लम्बी राजनीतिक पारी खेली हो। 23 जून को वीरभद्र सिंह 87 वर्ष के हो जायेंगे। बीते कुछ समय से उनकी सेहत नासाज है। दो बार कोरोना संक्रमित हो चुके है पर वीरभद्र सिंह तो फाइटर है। पूरा प्रदेश उनकी अच्छी सेहत की दुआ मांग रहा है और समर्थकों का भरोसा है कि उनके राजा एक बार भी चुस्त - दुरुस्त होकर दमदार वापसी करेंगे। 83 की उम्र में कांग्रेस को बनाना पड़ा सीएम फेस साल था 2017 का। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका था। भाजपा में सीएम फेस को लेकर दुविधा थी और अंतिम क्षण तक पार्टी सीएम फेस घोषित करने से बचती रही। उधर, कांग्रेस के सामने कोई दुविधा नहीं थी। 83 वर्ष के वीरभद्र सिंह पार्टी के सीएम कैंडिडेट थे और अकेले भाजपा से लोहा ले रहे थे। संभवतः इससे पहले और इसके बाद भी इतने उम्रदराज नेता को हिंदुस्तान में कभी भी, किसी भी चुनाव में सीएम फेस घोषित नहीं किया गया। दिलचस्प बात ये है कि इस निर्णय को लेकर शायद ही कांग्रेस आलाकमान के मन में कोई दुविधा रही हो, क्यों कि हिमाचल में कांग्रेस की जड़े इतनी गहरी नहीं है, जितनी वीरभद्र सिंह की है। खेर, कांग्रेस चुनाव हार गई पर हिमाचल में वीरभद्र का जलवा अब भी बरकरार है। अब उम्र 87 की हो चुकी है, सेहत भी नासाज रहती है पर वीरभद्र का तिलिस्म बरकरार है। हिमाचल में वीरभद्र की लोकप्रियता का अंदाज़ा बस इस बात से लगाया जा सकता है की उनका हर ब्यान सुर्ख़ियों में रहता है फिर चाहे वो चुनाव लड़ने को इंकार करें या वे अगली बार फिर मुख्यमंत्री बनने की बात कहें। 1962 में हुई चुनावी राजनीति में एंट्री प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की प्रेरणा से उन्होंने राजनीति में आने का निर्णय लिया था। नेहरू की बेटी और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष इंदिरा गांधी भी तब वीरभद्र से खासी प्रभावित थी। इंदिरा के कहने पर 1959 में वीरभद्र सिंह दिल्ली से हिमाचल लौटे और लोगों के बीच जाकर उनके लिए काम करना शुरू किया। वीरभद्र का ताल्लुक तो रामपुर- बुशहर रियासत से है, लेकिन जल्द ही वे शिमला क्षेत्र में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा बन गए। नतीजन 1962 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें महासू ( वर्तमान शिमला ) सीट से उम्मीदवार बनाया। 28 वर्ष के वीरभद्र आसानी से चुनाव जीत गए और पहली मर्तबा लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 1967 और 1972 में वीरभद्र मंडी से चुनाव लड़ लोकसभा पहुंचे। हालांकि इमरजेंसी के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में वीरभद्र को हार का मुँह देखना पड़ा। पर उन्होंने अपनी निष्ठा नहीं बदली और इंदिरा गांधी के वफादार बने रहे। 1980 में फिर चुनाव हुए और वीरभद्र सिंह एक बार फिर जीत कर लोकसभा पहुँच गए। 1982 में इंदिरा सरकार में उन्हें उद्योग राज्य मंत्री भी बना दिया गया। 1983 में हुई हिमाचल की सियासत में एंट्री वीरभद्र वर्ष 1962 से चुनावी राजनीति में है पर हिमाचल प्रदेश की सियासत में उनका आगमन हुआ वर्ष 1983 में। तब टिम्बर घोटाले के आरोप के चलते ठाकुर रामलाल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और बतौर मुख्यमंत्री एंट्री हुई वीरभद्र सिंह की। वही वीरभद्र सिंह जो 6 बार सीएम बने और जिनके बगैर हिमाचल की हर राजनीतिक चर्चा अधूरी है। वहीँ वीरभद्र सिंह, हिमाचल में जिनका मतलब कांग्रेस है और कांग्रेस का पर्याय वीरभद्र। 1983 से अब तक यानी 2021 तक तक 38 वर्षों में वीरभद्र सिंह करीब 22 वर्ष सीएम रहे है। वीरभद्र के बाद कोई नहीं कर पाया रिपीट हिमाचल में हर पांच वर्ष में सत्ता परिवर्तन का रिवाज सा है। पर 1983 में सत्ता में आए वीरभद्र सिंह 1985 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर सत्ता में लौटे और दूसरी बार सीएम बने। इसके बाद से हिमाचल में कभी सरकार रिपीट नहीं हुई। 1993 में फिर की वापसी 1990 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। खुद वीरभद्र सिंह भी जुब्बल कोटखाई से चुनाव हार गए थे। ऐसा लगने लगा था कि शायद ही वीरभद्र इसके बाद कभी सीएम बने। ऐसा इसलिए भी था क्योकि तब पंडित सुखराम और विद्या स्ट्रोक्स का भी हिमाचल और कांग्रेस में खासा दबदबा था। पर जो आसानी से हार मान ले, वो वीरभद्र सिंह नहीं बनते। हार के बाद वीरभद्र ने संगठन में अपनी जड़ें और मजबूत की और विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा बने रहे। शांता सरकार की गिरती लोकप्रियता को भी उन्होंने जमकर भुनाया। 1993 में शांता सरकार गिरने के बाद जब चुनाव हुए तो वीरभद्र सिंह तीसरी बार प्रदेश के सीएम बने। 1998 में भी कांग्रेस प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन पंडित सुखराम के सहयोग से सरकार भाजपा की बनी। 2003 में फिर वीरभद्र सिंह की वापसी हुई और वे दिसंबर 2007 तक हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे। 2007 में सत्ता से बाहर होने के बाद वीरभद्र सिंह ने केंद्र का रुख किया और 2009 से 2012 तक केंद्र में मंत्री रहे। 2012 में कई नेताओं के मंसूबों पर फेरा पानी 2012 विधानसभा चुनाव के वक्त वीरभद्र सिंह की आयु 78 के पार थी। केंद्र में मंत्री होने के चलते शायद ही किसी को वीरभद्र के लौटने की उम्मीद रही हो। कांग्रेस में भी कई चाहवान सीएम की कुर्सी पर आंखें गड़ाए बैठे थे। पर वीरभद्र को तो अभी दिल्ली से शिमला वापस लौटना था। चुनाव से पहले वीरभद्र ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और हिमाचल लौट आये। कहते है कि वीरभद्र ने दिल्ली दरबार को स्पष्ट कर दिया था कि सीएम तो वे ही होंगे, चाहे पार्टी कोई भी हो। तब भी हिमाचल में माइनस वीरभद्र कांग्रेस की ख़ास हैसियत नहीं थी। सो आलाकमान झुका और वीरभद्र सिंह की लीडरशीप में चुनाव लड़ा गया। सत्ता परिवर्तन का सिलसिला भी बरकरार रहा और वीरभद्र सिंह रिकॉर्ड छठी बार सीएम बन गए।
छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने वाले वीरभद्र सिंह इन दिनों स्वास्थ्य के मोर्चे पर कठिन समय से जूझ रहे है। शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में दाखिल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के स्वस्थ होने की कामना पूरा हिमाचल कर रहा है। बुशहर रियासत के अंतिम राजा और हिमाचल के 6 बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह एक ऐसे नेता है जिन्हें समूचे हिमाचल का प्यार मिला है। उनकी सेहत को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक खबरें आई तो पूरे प्रदेश में उनके समर्थक विचलित हो उठे। इस हफ्ते वीरभद्र सिंह का 87वां जन्मदिन है। आपको बताते है उनके जुड़े कुछ रोचक किस्से... इतिहास पढ़ाना चाहते थे, इतिहास बना दिया शिमला का बिशप कॉटन स्कूल हिमाचल का ही नहीं अपितु देश के प्रतिष्ठित स्कूलों में शुमार है। स्कूल के दाखिला रजिस्टर में नंबर 5359 के आगे नाम लिखा है वीरभद्र सिंह। उस दौर में जब रामपुर- बुशहर रियासत के राजकुमार वीरभद्र ने बिशप कॉटन स्कूल में दाखिला लिया था तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि स्कूल का नाम उस शख्सियत से जुड़ने जा रहा है जो आगे चलकर 6 बार हिमाचल का सीएम बनेगा। स्कूल पास आउट करने के बाद वीरभद्र ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में हिस्ट्री होनोर्स में बीए और एमए की। हसरत थी हिस्ट्री का प्रोफेसर बन छात्रों को पढ़ाने की। पर देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। जो वीरभद्र छात्रों को इतिहास पढ़ाना चाहते थे, उन्होंने खुद इतिहास बना दिया। सबसे अधिक समय तक हिमाचल का सीएम रहना का रिकॉर्ड वीरभद्र सिंह के ही नाम है। वे करीब 22 वर्ष और कुल 6 बार हिमाचल के सीएम रहे है। श्री कृष्ण परिवार की 122 वीं पीढ़ी होने का दावा वीरभद्र सिंह का परिवार बागवान श्री कृष्ण के वंशज होने का दावा करता है। दरअसल,रामपुर बुशहर रियासत में एक स्थान आता है सराहन। राज परिवार का दावा है कि ये सराहन पहले सोनीपुर के नाम से जाना जाता था और भगवान् श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न की रियासत का हिस्सा था। पत्नी व पुत्र भी राजनीति में सक्रिय वीरभद्र सिंह का विवाह दो बार हुआ। 20 साल की उम्र में जुब्बल की राजकुमारी रतन कुमारी से उनकी पहली शादी हुई। किन्तु कुछ वर्षों बाद ही रतन कुमारी का देहांत हो गया। इसके बाद 1985 में उन्होंने प्रतिभा सिंह से शादी की। प्रतिभा सिंह भी मंडी से सांसद रह चुकी है। वीरभद्र और प्रतिभा के पुत्र विक्रमादित्य सिंह भी वर्तमान में शिमला ग्रामीण से विधायक है। राजनीति से संन्यास की खबर से मच गई थी हलचल बीते दिनों सामने आए वीरभद्र सिंह के चुनावी राजनीति से संन्यास के बयान मात्र से कांग्रेस में खलबली मच गई थी। ऐसा हो भी क्यों न बेशक उम्र 87 वर्ष हो लेकिन अब भी कांग्रेस वीरभद्र सिंह के दायरे में ही है। न कोई विकल्प दीखता है और न ही किसी अन्य नेता में इतनी कुव्वत दिखती है कि कांग्रेस को एकजुट रखकर सत्ता वापसी करवा सके। ये सन्देश वीरभद्र गुट के बड़े नेता पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के कई ख्याली रामों को दे चुके है। निसंदेह अब वीरभद्र सिंह न तो पहले की तरह सक्रीय है और न ही उनकी सेहत साथ है। 2022 चुनाव में उनकी उम्र 88 पार होगी पर अब भी वीरभद्र सिंह का नाम ही कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है इसमें कोई संशय नहीं। अगर कांग्रेस में कोई ऐसा नेता है जिसका जनाधार सभी 12 जिलों में है तो वे वीरभद्र सिंह ही है। ऐसे में माइनस वीरभद्र सिंह कांग्रेस से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद फिलहाल बेमानी सी है। किस्सा : जिंदगी और मौत के बीच के वो 50 कदम " साहब रहने दो गांव का दौरा...पेड़ से पांव फिसला तो नीचे पानी का बहाव पता नहीं कहां से कहां पहुंचा दे। पदम तू रहने दे, मैं खुद चला जाऊंगा। कहकर साहब ने पेड़ पर पांव रख दिया तो मेरी हवाइयां उड़ने लग गईं कि अगर थोड़ा सा भी बैलेंस बिगड़ा तो उफनती वास्पा नदी सीधे करछम बांध में फेंकेगी। " पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जुड़ा ये किस्सा सांझा किया है उनके मुख्य सिक्योरिटी गार्ड पद्म ठाकुर ने। पदम बताते हैं कि किन्नौर में आई बाढ़ से बहुत से पुल बह गए, जिससे कई गांव शेष दुनिया से कट गए थे। प्रशासन उन पीड़ितों तक पहुंचने में असफल था इसलिए राहत पहुंचाने का कोई रास्ता नहीं था। पर मख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उस तरफ जाने की जिद्द पकड़ ली। पदम कहते है "राजा साहब को कौन समझाता कि पार गांवों तक पहुंचने के लिए उफनती नदी कैसे पार करनी है ? प्रशासन के हाथ पांव फूल गए पर वीरभद्र सिंह शिमला से उन गांवों का दौरा करने निकल पड़े।" पदम बताते है कि आनन फानन में मीटिंग बुलाई गई कि राजा साहब को कैसे रोका जाए। अंत में यह फैसला हुआ कि नदी के इस तरफ ही कोई जनसभा करवा दी जाए। पर पेच वहीं फंसा था कि वीरभद्र सिंह न माने तो ? लेकिन सभी अधिकारी इस बात से सहमत थे कि जब आगे जाने का रास्ता नहीं मिलेगा तो वे खुद मान जाएंगे। वीरभद्र सिंह का काफिला जा पहुंचा। आगे कुछ किलोमीटर पैदल चलने के बाद उन्हें बताया गया कि यहां पुल बह गया है आगे नहीं जाया जा सकता। इस पर वीरभद्र सिंह ने कुछ स्थानीय लोगों से पूछ लिया कि फिर वहां से लोग कैसे आ जा रहे हैं। तब उन्हें बताया गया कि एक देवदार के पेड़ को नदी के आर पार डाला गया है और उसी पर चल कर कुछ लोग नदी पार कर रहे हैं। सुनते ही वीरभद्र सिंह ने उस तरफ चलने का इशारा किया। वो जगह ऊंचाई पर थी।उन्होंने ने हाथ मे लकड़ी का डंडा पकड़ा, चढ़ गए सारी चढ़ाई और पहुंच गए उफनती नदी के छोर पर। पदम बताते है " बड़ा ही डरावना दृश्य था। नीचे तेज़ बहती नदी और ऊपर देवदार के कटे पेड़ का जुगाड़ू पुल। कुछ लोग उस पार से पेड़ से होकर इस पार आ गए, तो राजा साहब ने जिद्द पकड़ ली की पार जाना है तो जाना है। मैंने समझाया कि साहब यह बड़ा खतरनाक होगा, तो साहब बिफर गए और मुझे डांट कर हाथ छुड़ाकर पेड़ पर पांव रख दिया। सभी हाथ जोड़कर विनती करने लग गए कि यह जान हथेली पर रखने वाली बात होगी, पर वे नहीं माने।" पदम के अनुसार फिर एक रस्सी आर पार फेंकी गई जिसके सहारे पार जाना था। पानी की आवाज़ इतनी खतरनाक थी कि कलेजा बाहर आ रहा था। वीरभद्र सिंह ने उन्हें पीछे धकेला ओर चल पड़े। एक एक कदम जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष था। पर बिना डर भय के वे कदम बढ़ाते जा रहे थे और पदम के दिल की धड़कनें नीचे बहते पानी से भी तेज थी। सांसें फूली हुई थी और किसी की हिम्मत नहीं हुई कि पीछे चलें। पदम कहते है "वो पचास कदम मुझे जिंदगी में कभी नहीं भूलेंगे। एक - एक कदम मौत की तरफ बढ़ रहा था। पर साहब को पता नहीं क्या हो गया था। ऐसे चल रहे थे जैसे वो यहां हर घंटे आर पार जाते हों। पार गांवों के लोग सांस रोके हम एकटक नदी पार करते देख रहे थे और राजा साहब जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।पुल पार करते ही राजा साहब लोगों से मिले और प्रदेश के मुखिया को इन विषम परस्थितियों में अपने बीच पाकर हर चेहरा अपना दुख दर्द भूल गया पर मुझे फ़िक्र वापस जाने की थी।"
आज दुनिया सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। 21 जून की तारीख ने पिछले कुछ ही बरस में इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है। भारत की पहल पर शुरू हुए इस खास दिन को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में खासा उत्साह है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह देशवासियों को संबोधित किया और योग के माध्यम से बीमारियों से दूर रहने का फॉर्मूला दिनचर्या में शामिल करने की बात कही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान योग दुनिया के लिए ‘‘उम्मीद की किरण’’ और इस मुश्किल समय में आत्मबल का स्रोत बना रहा ह। पीएम मोदी ने सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अपने संबोधन में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अब दुनिया को ‘एम-योग’ ऐप की शक्ति मिलने जा रही है, जिस पर सामान्य नियमों पर आधारित योग प्रशिक्षण के कई वीडियो दुनिया की अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध होंगे। इससे ‘एक विश्व, एक स्वास्थ्य’ का लक्ष्य पूरा होगा। उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था, तो उसके पीछे यही भावना थी कि यह योग विज्ञान पूरे विश्व के लिए सुलभ हो। आज इस दिशा में भारत ने संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मोदी ने कहा कि आज जब पूरा विश्व कोविड-19 वैश्विक महामारी का मुकाबला कर रहा है, तो योग उम्मीद की एक किरण बना हुआ है।
शिमला। स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि राज्य में 21 जून, 2021 से चलाएं जाने वाले कोविड टीकाकरण अभियान में अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशानुसार राज्य के सभी कोविड टीकाकरण केंद्रों में 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों का निःशुल्क टीकाकरण किया जाएगा, जिसके लिए पूरे प्रदेश में टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि टीकाकरण योजना के अन्तर्गत स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं, अग्रिम पंकित के कार्यकर्ताओं, राज्य प्राथमिकता समूह और 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए टीकाकरण की पहली व दूसरी खुराक वीरवार, शुक्रवार और शनिवार के दिन लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के वह लोग जो स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं, अग्रिम पंकित के कार्यकर्ताओं, राज्य प्राथमिकता समूह की श्रेणी में शामिल नहीं है उनके लिए टीकाकरण सत्र सोमवार, मंगलवार और बुधवार के दिन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य ने पिछले एक सप्ताह में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के अब तक 2.92 लाख लोगों का टीकाकरण किया हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कोविड वैक्सीन के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लगभग 55 लाख पात्र लाभार्थी है और में लगभग 42 प्रतिशत पात्र आबादी को टीकाकरण की पहली खुराक लगाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण राज्य में लगभग 809 टीकाकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 724 केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों और 85 टीकाकरण केंद्र शहरी क्षेत्रों में बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 21 जून, 2021 को 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लगभग एक लाख पात्र लाभार्थियों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय, दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण पंजीकरण आॅनसाइट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र नगर निगम, एनएसी और नगर परिषद व नगर पंचायतों में स्थापित किए गए टीकाकरण केंद्रों में केवल उन्हीं लोगों के लिए टीकाकारण सत्र आयोजित किए जाएंगे जिन्होंने पूर्व में ही आॅनलाइन माध्यम से टीकाकरण अप्वाइंटमेंट ली है। उन्होंने शहरी क्षेत्रों के पात्र लाभार्थियों से आग्रह किया कि असुविधा से बचने के लिए वह अपनी अप्वाइंटमेंट पूर्व में बुक करवाने के बाद ही टीकाकरण केंद्रों में आए। उन्होंने कहा कि सरकारी कोविड टीकाकरण केंद्रों में निःशुल्क कोविड टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध होगी जबकि निजी अस्पतालों में वैैक्सीन उत्पादकों द्वारा वैैक्सीन के निर्धारित मूल्य के अतिरिक्त अधिकतम 150 रुपये प्रति डोज सेवा शुल्क लिया जा सकता है।
The state government has set a target to vaccinate 60 thousand people daily in Himachal Pradesh. The central government will now provide free vaccines to Himachal. Its supply is likely to reach Himachal by June 20. This program will start on June 21. Apart from hospitals, primary health centers, now vaccine centers will be set up in schools, colleges, offices, and Panchayat Bhawan as well. The government is going to build one thousand more vaccination centers in the state. Regarding the vaccine campaign, Health Secretary Amitabh Awasthi has asked the principals, CMOs, BMOs of medical colleges to vaccinate more and more people. The government has set a target to vaccinate people above 18 years of age by October. Under the new vaccination policy, the beneficiaries are divided into two categories for applying the vaccine. Category-A all beneficiaries above 45 years of age for the first dose, all beneficiaries of the same age group eligible for the second dose of Covishield, all healthcare workers, frontline workers, while beneficiaries in the age group 18 to 44 Placed in B-category.
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए अपना फॉर्मूला तैयार कर लिया है। बोर्ड ने सीबीएसई के पांच अंकों के फॉर्मूले में तीन नए बिंदुओं को शामिल किया है। अप्रैल में आयोजित अंग्रेजी विषय की परीक्षा सहित प्रथम व द्वितीय सत्र की परीक्षाओं के अंक भी वार्षिक परिणाम में शामिल होंगे। इसके अलावा सीबीएसई द्वारा तय किए गए इंटरनल असेसमेंट, प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट वर्क, दसवीं और दसवीं कक्षा के प्रदर्शन सहित कक्षा १२वीं के अंक शामिल होंगे। शनिवार को स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष व सचिव ने मनाली जाकर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर से इस प्रस्ताव को साझा किया। इस संबंध में अगले सप्ताह अधिसूचना जारी की जाएगी। 12वीं से पहले 10वीं के नतीजे जारी किए जाएंगे। इसके बाद बारहवीं कक्षा का परिणाम घोषित किया जाएगा। सीबीएसई ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को 12वीं कक्षा के अंक निर्धारित करने का फॉर्मूला दिया था। सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश में भी इस फॉर्मूले पर मंथन शुरू हो गया है। इसी कड़ी में शनिवार को शिक्षा मंत्री को इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश सोनी और सचिव अक्षय सूद ने कहा कि शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा परिणाम से जुड़े तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा फॉर्मूला तैयार किया है ताकि छात्रों का संपूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके।
हिमाचल पथ परिवहन निगम ने शनिवार को 222 रूटों पर बस सेवा बंद की है। सवारियां न मिलने के कारण यह फैसला लिया गया है। इसमें लोकल 195 और 27 लांग रूट शामिल हैं। रविवार को भी परिवहन निगम कम रूटों पर बसें भेजेगा। बीते शुक्रवार की बात करे तो निगम ने 1639 रूटों पर बसें चलाई थीं। शनिवार को 1417 रूट पर सेवाएं दी गई। परिवहन निगम का मानना है कि शनिवार और रविवार में बाजार बंद रहते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग घरों में रहते हैं। इस कारण सवारियां नहीं मिलती हैं। हालांकि, परिवहन निगम ने दावा किया है कि शनिवार को बसों में 40 फीसदी ऑक्यूपेंसी रही है। परिवहन निगम इस समय एक हजार के करीब बसें रूटों पर चला रहा है।
There has been an influx of tourists on the weekends in the hotels of Shimla, the capital of Himachal Pradesh. The occupancy in the city's hotels reached 70 to 90 percent on Saturday. Some hotels are 100% packed. Up to 50 percent bookings have already been done in some hotels for next week's weekend. On Saturday, the city's biggest lift car parking got packed at 2.30 pm, after which the operators had to close the entry point by chain. On Saturday, there was a lot of movement of tourists on Ridge Maidan and Mall Road. Apart from Shimla, tourists are also visiting Mashobra, Naldehra, Kufri and Narkanda. The occupancy is expected to reach 95 percent by Saturday evening, said Sanjay Sharma, Manager, Hotel Willow Bank Front Office. Hotel Marina manager Sunil Chandel said that 90 percent of the hotels are booked for Saturday. Vikas Kapoor, Vice President, Hotel Radisson said that the occupancy of hotels on weekends is 75 percent.
Himachal Pradesh School Education Board has prepared its formula to prepare the 12th class exam result. The board has included three new points in the CBSE's formula of five points. The marks of the first and second term examinations including the English subject examination held in April will also be included in the annual result. Apart from this, the marks of class 12th including internal assessment, practical/project work, performance of class X and Xl as decided by CBSE will be included. On Saturday, the Chairman and Secretary of the Board of School Education went to Manali and shared this proposal with Education Minister Govind Singh Thakur. A notification in this regard will be issued next week. Before the 12th, class 10th results will be released. After this, the result of class XII will be declared. CBSE had recently given the Supreme Court the formula for determining the marks of class 12th. After getting approval from the Supreme Court, the churning of this formula started in Himachal Pradesh too. In this episode, on Saturday, the Education Minister was given detailed information in this regard. Board President Suresh Soni and Secretary Akshay Sood said that the Board of Education has prepared such a formula keeping in mind all the aspects related to the examination results so that the complete evaluation of the students is ensured.
प्रदेश की राजधानी शिमला में कोरोना कर्फ्यू में ढील के बाद सैलानियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। शहर के अधिकतर होटलों में शनिवार को 70 से 80 फीसदी ऑक्यूपेंसी पहुंच गई। जबकि कुछ होटल 100 फीसदी ऑक्यूपेंसीके साथ बुक हो गए। शनिवार को शहर की सबसे बड़ी लिफ्ट कार पार्किंग दोपहर ढाई बजे पैक हो गई, जिसके बाद संचालकों को एंट्री प्वाइंट चेन लगाकर बंद करना पड़ा। शनिवार को रिज मैदान और मालरोड पर सैलानियों की खूब चहलपहल रही। शिमला के अलावा सैलानियों ने मशोबरा, नालदेहरा, कुफरी और नारकंडा का भी रुख किया। वंही आने वाले वीकेंड के लिए शहर के 50 प्रतिशत होटल पहले से ही बुक हो गए है। गौरतलब है कि बीते 36 घंटों में शहर के प्रवेशद्वार शोघी बैरियर से करीब 8000 वाहनों की शहर में एंट्री हुई है।
प्रदेश में 21 जून से सभी आयु वर्ग के लोगों को फ्री वैक्सीन लगाई जाएगी। केंद्र सरकार हिमाचल को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवा रही है। 20 जून तक हिमाचल में इसकी सप्लाई पहुंचने की संभावना है। 21 जून से यह कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा अब स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों और पंचायत घरों में वैक्सीन सेंटर बनाए जाएंगे। राज्य सरकार ने हिमाचल में प्रतिदिन 60 हजार लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है। सरकार प्रदेश में एक हजार और वैक्सीनेशन सेंटर बनाने जा रही है। सरकार ने 18 साल से अधिक आयु वर्ग के लोगों को अक्तूबर तक वैक्सीन लगाने का टारगेट रखा है। टीकाकरण की नई नीति के तहत वैक्सीन लगाने के लिए लाभार्थियों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी-ए में पहली खुराक के लिए 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी लाभार्थी, इसी आयु वर्ग के कोविशील्ड की दूसरी खुराक के लिए पात्र सभी लाभार्थी, सभी स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता, अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता, जबकि 18 से 44 आयु वर्ग के लाभार्थियों को बी-श्रेणी में रखा गया है।
कोरोना से मरने वाले सभी लोगों के परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा देने में केंद्र ने असमर्थता जताई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने बताया है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड से होता है। अगर राज्यों को हर मृत्यु के लिए 4 लाख रुपए के भुगतान का निर्देश दिया गया तो उनका पूरा फंड खत्म हो जाएगा। इससे कोरोना से निपटने की तैयारी के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में कोविड से होने वाली मौतों पर 4 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग को लेकर एक याचिका दाखिल हुई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और 2015 में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की तरफ से गाइडलाइंस जारी की गई थी, जिसमें आपदा की वजह से होने वाली मौतों पर पर 4 लाख रुपए मुआवजा देने की बात है। इस पर केंद्र की ओर से कहा गया है कि ये नियम भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर ही लागू होता है। वंही, केंद्र ने कहा है कि इस वित्त वर्ष में राज्यों को 22,184 करोड़ रुपए SDRF में दिए गए इसका एक बड़ा हिस्सा कोरोना से लड़ने में खर्च हो रहा है। केंद्र ने 1.75 लाख करोड़ का प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज घोषित किया है। इसमें गरीबों को मुफ्त राशन के अलावा वृद्ध, दिव्यांग, असमर्थ महिलाओं को सीधे पैसे देने, 22.12 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वर्कर्स को 50 लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर देने जैसी कई बातें शामिल हैं। इस समय केंद्र और राज्यों को राजस्व की कम प्राप्ति हो रही है। ऐसे में कोरोना से हुई 3 लाख 85 हज़ार मौतों के लिए 4-4 लाख रुपए का भुगतान करना आर्थिक रूप से बहुत कठिन है। राज्यों को इसके लिए बाध्य किया गया तो आपदा प्रबंधन के दूसरे अनिवार्य कार्य प्रभावित होंगे।
Covid-19 claimed ten more lives in Himachal Pradesh, taking the death toll due to the disease to 3,423, while 239 fresh cases pushed the infection count to 2,00,282, according to the information provided by department of health and family welfare Himachal Pradesh . The active cases have now dipped to 2990. The overall recoveries so far has reached 1,93,850 with 432 patients getting cured of the infection in the past 24 hours .
A presentation was made here today before Chief Minister Jai Ram Thakur regarding proposed alignment on Shimla bypass four-laning project from Kaithlighat to Dhalli section and construction of highway tunnel parallel to the Dhalli tunnel under the Shimla Smart City Mission. The Chief Minister was apprised that five tunnels were required to be constructed on the Kaithlighat to Dhalli section. The present proposal of twin tunnels/viaducts from Bhattakufar to Dhalli would completely bypass the urban area and bare minimum forest area/structures would be impacted during the construction of this four lane project. Jai Ram Thakur said that the present proposal of this four-lane bypass must have negligible disturbance on the lives of the residents of the area. He expressed hope that separate twin tunnel proposed to connect the Sanjauli bypass and connectivity with the city roads would ensure better connectivity to the people of Shimla town. He also felt the need for improvement of Dhalli junction and Dhalli bypass. He suggested that since the construction of tunnels involves huge muck generation, efforts must be made for creating facilities like stadium etc. on these dumping sites for best utilization of the land. He directed the officers of National Highway Authority of India (NHAI) to ensure time bound completion of this project so that benefits could be derived in time. Jai Ram Thakur said that Dhalli tunnel was over 175 years old and had outlived its design life. This tunnel has become a bottleneck as it connects upper Shimla area, Mandi, Kullu as well as Kinnuar districts. He said that the government has decided to construct a parallel two lane tunnel along this tunnel to ensure smooth plying of vehicles at an estimated cost of Rs. 55 crore and would be completed by the month of August next year. The Chief Minister directed the officers to take into confidence all the stakeholders particularly the owners of the houses situated above the proposed tunnel. He said that meetings should be held with them assuring them that the project would cause no damage to their properties. Principal Secretary, PWD Subhashish Panda assured the Chief Minister that all efforts would be made to ensure time bound completion of these projects. Chief Secretary Anil Khachi, Additional Chief Secretary J.C. Sharma, Special Secretary Arindam Chaudhary, Regional Officer, NHAI G.S Sangha and other senior officers attended the meeting.
Director General of Police Himachal Pradesh Sanjay Kundu said that there is no threat to the 48 villages of Himachal situated on the border with China. Last year there was an encounter between India and China army in Galwan Valley. Five IPS officers were sent to these border areas after Governors concern . DGP said this while talking to reporters in Paonta on Saturday. He further said that the police are reaching to the roots of the drug mafia. During the last one year, in one and a half dozen cases of the state drug mafia assets worth 11.37 crore have been attached. During the Corona period, the State Police has done commendable work by serving day and night. Today, complaints against police behavior have come down from 16 per cent to 10 per cent.
स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि प्रदेश में कोविड महामारी से अब तक 1,93,418 लोग स्वस्थ्य हो चुके है। उन्होंने कहा कि कोविड की जांच के लिए राज्य में अब तक कुल 22,67,297 टेस्ट किए गए है, जिनमें से 200043 लोग कोरोना पाॅजिटिव पाए गए है। उन्होंने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान 13 मई, 2021 को पाॅजिटिव मामलों की संख्या 40,008 तक पहुंच गई थी, जो महामारी का पीक रहा है। प्रदेश में पाॅजिटिव मामलों में अब निरंतर गिरावट आ रही है। प्रदेश में अब पाॅजिटिव मामलों की संख्या 3193 रह गई है। उन्होंने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 मामलों के अतिरिक्त 21 मामलें ब्लैक फंगस के भी दर्ज किए गए है। राज्य में कोविड-19 से कुल 3413 लोगों की मृत्यु हुई है, जिनमें 7 लोगोें में ब्लैंक फंगस पाया गया था। उन्होंने कहा कि जिला कांगड़ा में तीन, जिला हमीरपुर में दो, जिला शिमला व सोलन में एक-एक व्यक्ति की मृत्यु ब्लैक फंगस के कारण हुई है। प्रवक्ता ने कहा कि जिला कांगड़ा कोविड महामारी से सबसे अधिक प्रभावित हुआ हंै। जिला में कोरोना महामारी के कुल 45,593 पाॅजिटिव मामले दर्ज किए गए है जिनमें से 43775 लोग स्वस्थ्य हो चुके हैं और 1018 लोगों की इस महामरी से मृत्यु हुई है। जिला मंडी में 26850 पाॅजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें से 381 की मृत्यु हुई है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से जिला शिमला में 591 मृत्यु दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी 20 हजार से अधिक कोविड पाॅजिटिव मामले पाए गए हैं जिनमें जिला शिमला में 24869, जिला सोलन में 22111 पाए गए हंै। जिला बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, सिरमौर और ऊना में 10 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हंै। इसी प्रकार जिला किन्नौर में 3192 और जिला लाहौल स्पीति में 2690 दर्ज किए गए है। उन्होंने कहा कि राज्य में कुल 3193 सक्रिय पाॅजिटिव मामलों में से जिला कांगड़ा में 796, जिला शिमला में 366, जिला मंडी में 362 और जिला चंबा में 322 मामले हंै जबकि अन्य जिलों में 300 से कम मामले हंै। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर का प्रभाव कम हुआ है लेकिन यह वायरस अभी भी विश्व में मौजूद है। इसलिए अभी भी कोविड अनुरूप व्यवहार अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें मास्क पहनना, परस्पर दूरी बनाए रखना और हाथों की स्वचछता आदि शामिल है।
Former Indian cricket skipper MS Dhoni is in Shimla along with his family and friends. Dhoni has been staying at a homestay called White Heaven in Mehli near Kasumpti. In all, there are 12 persons in the group, and they haven't stepped out of the homestay since last night. Sources said Dhoni and his group may visit Ratnari, an apple belt in the higher reaches of Shimla district, on Sunday. This is Dhoni’s second visit to Shimla in the past three years. The Chennai Super Kings captain had last visited Shimla in August 2018 for the shooting of an ad film.
Chief Minister Jai Ram Thakur said here today that Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) has decided to set up a grain based ethanol plant in Una district with a capacity of 125 KL per day. He said that the state government would provide about 70 acres of land for setting up this plant and rail-fed POL terminal of higher capacity. Jai Ram Thakur said that major raw materials for producing ethanol like rice and maize would be procured from Kangra, Hamirpur, Bilaspur and Una districts besides Hoshiarpur and Rupnagar districts of neighbouring State Punjab. The Chief Minister said that these projects would be set up at a cost of Rs. 400 crore and would provide direct and indirect employment to about 300 persons. Besides, it would also accelerate the pace of development in the State and earn annual revenue of Rs. 20 to Rs. 25 crore to the State exchequer in the form of SGST. Jai Ram Thakur said that during his recent visit to New Delhi, he had taken up issue with the Union Petroleum and Natural Gas Minister Dharmendra Pradhan to set up an ethanol plant through Hindustan Petroleum in the State. The ethanol plant produces ethanol from grains for mixing the same in petrol and diesel which in turn will help in reducing pollution due to vehicular emissions in the State. This will also help in protecting the environment in the State, he added.
Governor Bandaru Dattatraya here today released a book titled “My Experience during Covid-19” authored by Dr. Avinash Rai Khanna, the Vice President of National Red Cross Society, who is also the state in-charge of BJP at Raj Bhavan. Chief Minister Jai Ram Thakur was also present on the occasion. The book highlights author's experiences during Covid period besides various write-ups published in various dailies. He explains that the inspirational ideas and views have been shared through sensitive solutions, experiences, respect to the corona warriors and struggle with Covid pandemic. He writes that Prime Minister of India Narendra Modi has been acclaimed as a world level Corona warrior and an able leader to spearhead fight against this pandemic. The Central government under his leadership has made concerted efforts to deal the corona pandemic. He has also shared his personal experiences how he emerged out of Covid-19. Dr. Khanna has been a former Member of Punjab Human Rights Commission and former MP of Rajya Sabha and Lok Sabha. The Governor appreciated the efforts of Dr. Khanna and said that this book was truly inspiring which speaks about how to face adverse conditions in our lives. The author has also described how we can face difficult challenges with patience and little efforts, he said. Urban Development Minister Suresh Bhardwaj, State BJP President Suresh Kashyap, BJP Sangathan Mantri Pawan Rana, BJP General Secretary Trilok Jamwal and Secretary to the Governor Rakesh Kanwar were also present on the occasion.
कोरोना संकट के दौरान पहले से ही बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के लोगों को उचित मूल्य की दुकानों में बांटे जा रहे महंगे सरसों तेल से जुलाई महीने में भी राहत नहीं मिलेगी। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से सरसों तेल और रिफाइंड तेल की कीमतों में फिलहाल कोई कमी नहीं की गई है। हालांकि दालों के दाम कम करने की तैयारी कर ली गई है। खाद्य आपूर्ति निगम ने दालों पर मिलने वाली सब्सिडी को 15 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये प्रति किलो करने का प्रस्ताव तैयार किया है। कैबिनेट की अगली बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जाएगा। एक जून से बीपीएल परिवारों समेत सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को सरसों का तेल 57 रुपये प्रति लीटर महंगा हो रहा है। पहले एक लीटर सरसों का तेल 98 रुपये से 117 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, अब वही 155-175 रुपये प्रति लीटर के बीच मिल रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत आने वाले परिवारों को सरसों का तेल मिल रहा है। तेल 152 रुपये प्रति लीटर, एपीएल कार्डधारक 158 रुपये प्रति लीटर और एपीएल आयकर दाता कार्ड धारक 178 रुपये प्रति लीटर पर सरसों का तेल प्राप्त कर रहे हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक विजय शर्मा ने कहा कि जुलाई तक, सरसों तेल और रिफाइंड के दाम पहले से ही तय हैं। खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग ने कहा कि दालों में सब्सिडी बढ़ाने का मामला कैबिनेट में लाया जा रहा है।
उत्तराखंड में मानसून शुरुआत से ही खौफनाक रूप दिखा रहा है। कई घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं। बरसाती नालों में भी पानी बढ़ गया है। ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। जिस कारण अलर्ट जारी किया गया है गंगा, गोरी, शारदा, अलकनंदा, मंदाकिनी और नंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बदरीनाथ, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा हाईवे सहित कई मार्ग बंद हैं। ऋषिकेश में लगातार बारिश जारी है। गंगा का जलस्तर 340.34 आरएल मीटर पर पहुंच गया है। गंगा खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम, त्रिवेणी और लक्ष्मण झूला के लगभग सभी गंगा घाट डूब गए हैं। मायाकुण्ड, चंद्रेश्वर नगर में पानी भर गया है। परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम का कथा स्थल भी जलमग्न हो गया है।
Delhi deputy chief minister Manish Sisodia announced on Saturday the Aam Aadmi Party (AAP)-led government will provide an ex-gratia of ₹1 crore to the families of six security forces personnel who lost their lives in the line of duty. Of these, three belonged to the Indian Air Force (IAF), two were Delhi Police personnel and one was a part of the civil defence. “Although loss of a soldier is irreparable, the Kejriwal government after coming to power launched the scheme to provide ex gratia to families of such personnel so it could become a source for them to live with dignity,” Sisodia said while addressing a press briefing. The Delhi deputy chief minister then went on to announce the names of the martyr’s whose families will receive the financial assistance: 1. ACP Sanket Kaushik (Delhi Police) 2. NC(E) Rajesh Kumar (Indian Air Force) 3. Flight Lieutenant Sunit Mohanty (Indian Air Force) 4. Squadron leader Meet Kumar (Indian Air Force) 5. Constable Vikas Kumar (Delhi Police) 6. Pravesh Kumar (Civil Defence)
Chief Minister Jai Ram Thakur has expressed grief over the sad demise of Milkha Singh popularly known as 'the Flying Sikh', who passed away at PGI Chandigarh today morning. He was 91. Jai Ram Thakur said that Milkha Singh won many Asian gold medals and finished fourth in the 400m final at the 1960 Rome Olympics. He said that his passion for athletic and fitness would remain source of inspiration for not only young generation but also for the people of all age groups. Chief Minister prayed the Almighty to give peace to the departed soul and strength to the bereaved family members to bear this irreparable loss.
एक महीने तक कोरोना से जूझने के बाद शुक्रवार देर रात पूर्व ओलंपियन पद्मश्री मिल्खा सिंह 91 वर्ष कि उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। देर रत पीजीआई चंडीगढ़ में उनका निधन हो गया था। फ्लाइंग सिख के नाम से दुनिया भर मे मशहूर मिल्खा सिंह का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए उनके सेक्टर-8 स्थित आवास पर रखा गया है। पंजाब सरकार की तरफ से स्वर्गीय मिल्खा सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। मिल्खा सिंह की याद में पंजाब में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। सेक्टर-25 के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शाम करीब पांच बजे सेक्टर 8 स्थित निवास से मिल्खा सिंह की अंतिम यात्रा शुरू होगी।
फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर धावक मिल्खा सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। पूरा देश उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहा है। सोशल मीडिया पर लोग उनके साथ अपनी यादें और फोटो साझा कर रहे हैं। तो वहीं कुछ लोग उनसे जुड़ा कोई यादगार लम्हा बता रहे हैं। मिल्खा सिंह हमेशा सभी के दिलों में याद बनकर जिंदा रहेंगे। बॉलीवुड में यूं तो तमाम बायोपिक फिल्में बनी हैं। लेकिन मिल्खा सिंह पर जब फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' बनी थी तो लोगों में अजीब सा उत्साह देखने को मिला था। युवा पीढ़ी ने इस फिल्म को काफी पसंद किया था और शायद इसी फिल्म के जरिए लोगों ने मिल्खा सिंह को और करीब से जाना था। 'भाग मिल्खा भाग' में एक्टर फरहान अख्तर ने मिल्खा सिंह का किरदार निभाया था। फरहान अख्तर ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है। ऐसे तो मिल्खा सिंह से जुड़े तमाम किस्से सुनने को मिल रहे हैं लेकिन हम आपको इस फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' और खास धावक से जुड़ा एक किस्सा बताने जा रहे हैं। दरअसल, मिल्खा सिंह की बेटी सोनिया सांवलका ने अपने पिता के जीवन पर 'रेस ऑफ माई लाइफ' नाम से किताब लिखी, जो साल 2013 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब के प्रकाशित होने के बाद निर्देशक राकेश ओम प्रकाश मेहरा ने मिल्खा सिंह के जीवन पर फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ बनाने का फैसला लिया। फिल्म को लेकर जब वो फ्लाइंग सिख से मिले तो मिल्खा सिंह ने डायरेक्टर के सामने आजीब सी शर्त रख दी। मिल्खा सिंह ने फिल्ममेकर से सिर्फ एक रुपये का नोट लिया था। इस एक रुपये की खास बात यह थी कि एक रुपये का यह नोट साल 1958 का था, जब मिल्खा ने राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार स्वतंत्र भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। एक रुपये का यह नोट पाकर मिल्खा भावुक हो गए थे। यह नोट उनके लिए किसी बेशकिमती यादगार की तरह था।
फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह का हिमाचल प्रदेश से भी गहरा नाता रहा है। उनका सोलन के कसौली में अपना बंगला है, जहां वह अकसर आया करते थे। यहां के ऐतिहासिक कसौली क्लब के भी वह सदस्य थे। मिल्खा सिंह गर्मियों में खासकर इन दिनों कसौली क्लब में होने वाले कसौली वीक में भाग लेने आते थे। लेकिन देश मे कोरोना फैलने के बाद वह यहां नहीं आ पाए। मिल्खा सिंह व उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह दोनों ही कसौली में आम मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। आज दोनों के ही दुनिया से रुख्सत होने से कसौली स्थित उनका घर भी वीरान हो गया है, जहां उनको अक्सर देखा जाता था। वंही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि यह खेल जगत के लिए यह अपूर्णीय क्षति है। उनका जीवन खिलाड़ी वर्ग के लिए सदैव प्रेरणादायक रहेगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार 12वीं कक्षा का रिजल्ट तैयार करने के लिए सीबीएसई द्वारा दिए गए फॉर्मूले में बदलाव करेगी। हिमाचल में सिर्फ 10वीं, 11वीं और 12वीं के अंकों के आधार पर ही रिजल्ट तैयार नहीं होगा। इसमें अप्रैल में हुई 12वीं कक्षा की एक विषय की परीक्षा के अंक भी शामिल होंगे। प्री बोर्ड परीक्षा और प्रथम-द्वितीय टर्म में प्राप्त अंकों पर भी विचार किया जाएगा। सरकार ने राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड से अंक निर्धारण को लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। शिक्षा विभाग छात्रों के हित में नया फॉर्मूला बनाएगा और फिर कैबिनेट से मंजूरी लेगा। सीबीएसई ने गुरुवार को बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए बनाए गए फॉर्मूले की जानकारी दी है। राज्य का शिक्षा विभाग इस फॉर्मूले से पूरी तरह सहमत नहीं है। कक्षा 12वीं के परिणाम में 11वीं के तीस प्रतिशत अंक शामिल करने पर शिक्षकों व अभिभावकों ने आपत्ति जताई है। शिक्षकों का तर्क है कि बारहवीं कक्षा में विद्यार्थी अधिक मेहनत करे, इसके लिए ग्यारहवीं कक्षा की परीक्षाओं में विद्यार्थियों की पेपर चैकिंग में बहुत अधिक सख्ती बरती जाती है। ऐसे में 11वीं में कई विद्यार्थियों के अंक कम हो सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश में प्री बोर्ड की परीक्षाएं भी करवाई गई हैं। सीबीएसई ने प्री बोर्ड परीक्षाएं नहीं ली हैं। ऐसे में इस परीक्षा के अंक भी वार्षिक परिणाम में शामिल करना आवश्यक है। हिमाचल में फर्स्ट और सेकेंड टर्म की परीक्षाएं भी हुई हैं। अप्रैल में 12वीं कक्षा का एक पेपर भी हो चुका है। ऐसे में सीबीएसई के फार्मूले पर विचार करते समय प्रदेश की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा। आने वाले दिनों में स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से दिए जाने वाले प्रस्ताव में इन सब बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने परिवार के साथ शिमला आए हैं। महेंद्र सिंह धोनी परिवार और रिश्तेदारों के साथ शिमला आए हैं, जो कुल 12 लोग हैं। सभी शिमला के हैवन होम-स्टे मैहली में रूके हैं। बताया जा रहा है कि वे देर शाम करीब नौ बजे यहां पहुंचे हैं। जिला प्रशासन की ओर से उनकी सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए गए हैं। होम स्टे के बाहर पुलिस भी तैनात की गई है। धोनी के पहुंचने की खबर सुनते ही आज उनके प्रंशसकों और स्थानीय लोगों की भीड़ मैहली में उमड़ पड़ी और धोनी की एक झलक पाने को स्थानीय लोग और उनके प्रशंसक बेताब दिखे। धोनी ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया और ऑटोग्राफ दिए और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाई। धोनी 4 दिन शिमला में रुकेंगे। गौरतलब है कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला जा रहा है। यह मैच इंग्लैंड के साऊथ हैम्पटन शहर में चल रहा है। महेंद्र सिंह धोनी शिमला में इस फाइनल का लुत्फ उठाएंगे। बता दें कि इससे पहले महेंद्र सिंह धोनी अगस्त 2018 में शिमला आए थे। तब वे एक विज्ञापन फिल्म की शूटिंग करने के लिए शिमला आए थे। अब दूसरी बार धोनी शिमला आए हैं।
A six-year-old innocent girl died on the spot after she was hit by a truck on the Nadaun-Hamirpur National Highway in Rangas village of Hamirpur district. The migrant girl was on her way to Rangas Bazar with her mother at around 10 am on Saturday. During this, she was hit by a truck on the road, the girl died on the spot. The accident was so horrific that the front and rear tires of the truck trampled over the girl and her body was scattered on the road. On the spot, the weeping mother collected the parts of her child's body from the road and covered it with a sheet and kept it on the side of the road. Everyone was shocked to see this accident. The police reached the spot and took possession of the truck and started the investigation. Police station in-charge Nadaun Neeraj Rana said that the police has registered a case and started action against the driver and sent the body of the girl to the Medical College and Hospital Hamirpur for postmortem.
हमीरपुर जिला से एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। हमीरपुर जिले के रंगस गांव में नादौन-हमीरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रक के नीचे आ जाने से एक छह वर्षीय मासूम बच्ची की मौके पर मौत हो गई। प्रवासी बच्ची अपनी मां के साथ शनिवार सुबह करीब 10 बजे रंगस बाजार की ओर जा रही थी। इस दौरान वह सड़क से गुजर रहे एक ट्रक की चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयंकर था कि ट्रक का आगे व पीछे वाले टायर बच्ची को रौंदते हुए उसके ऊपर से निकल गए और सड़क पर शरीर के चिथड़े बिखर गए। मौका पर ही रोती विलखती मां ने अपनी बच्ची के शरीर के हिस्सों को सड़क से इकट्ठा करके एक चादर से ढक कर सड़क के किनारे पर रख दिया। इस हादसे को देख हर कोई सहम गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी नादौन नीरज राणा ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर चालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और बच्ची के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर भेज दिया है।
कोरोना वायरस के कम होते मामलों के बाद राज्यों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में दोबारा केस बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है। इसमें कोरोना से जुड़ी गाइडलाइंस के सख्ती से पालन करने की बात कही गई है। गृह मंत्रालय के सेक्रेटरी अजय भल्ला ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चीफ सेक्रेटरी को लेटर लिखकर निर्देश दिया है कि लॉकडाउन खोलते समय कोविड अनुकूल व्यवहार, टेस्टिंग-ट्रैकिंग-इलाज और टीकाकरण के लिए रणनीति अपनाना बहुत जरूरी है। गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करें कि लॉकडाउन खोलने की प्रक्रिया सावधानीपूर्वक और व्यवस्थित हो।
People of Himachal Pradesh and Gudiya's parents are not accepting the decision taken by the court. Once again there is an uproar on social media related to Gudiya rape and murder case. A local court found Anil alias Nilu guilty in the four-year-old Gudiya rape and murder case and sentenced him to life imprisonment on Friday. The Court had held Kumar, a Chirani (woodcutter), guilty of rape and murder of a minor girl and convicted him under sections 376 (2)(i), 376 (A), and 302 of the Indian Penal Code and Section 4 of the POCSO Act. District and Sessions Judge, Shimla, Rajiv Bharadwaj, who is also Special Judge of CBI Court said that out of the 14 crucial points of evidence produced by the CBI, 12 were found to be against Nilu. The conviction was based on the fact that DNA from a blood sample of Nilu matched with the semen on the private parts and clothes of the victim and soil samples from clothes matched with the soil samples taken from the spot where the body of the deceased was found. The bite marks on the body of the deceased were also found to be of Nilu's in forensic investigations. At the same time, Gudiya's parents are unhappy with this decision of the court. Both of them questioned the CBI probe saying it would be impossible for Chirani Neelu to do such cruality alone. Gudiya's parents have alleged that the real culprits are still roaming free and they are not even satisfied by the punishment. Gudiya's parents said that their daughter has not got justice even after four years. After the CBI investigation started, they were confident that justice would be done now. The culprits will be caught, but the CBI has also broken their trust. Gudiya's mother said, "Now we will take the matter to the High Court. We will keep on fighting the legal battle until our daughter gets justice". There were 59 witnesses, including students, teachers of the school where Gudiya was studying, villagers, doctors, forensic experts, police and eyewitnesses who saw the accused in the area before and after the crime was committed. The judge observed that the crime was committed in a spur of the moment, with Nilu making up his mind to rape and kill the victim when he encountered her on a passage in the forest while she was returning home from school. As per the CBI charge sheet, the accused spotted Gudiya, about 1.5 km from Dandi on the mud path on Dandi-Bankufar road in Kotkhai on July 4, 2017. He had an altercation with the victim after she spat on him following which he caught hold of her and dragged her down in the forest. He then raped and strangulated her and dumped her body in a ditch, about 32 metres away from the road. Two days later on July 6, her body was found in the nearby forest in Haliailla in the Kotkhai area of Shimla district. On July 7 Postmortem reports confirmed rape and murder. On July 10 the special investigation team was constituted in the case and on July 13, 2017 a special investigation team of the state police led by IG Zahur H Zaidi arrested six men residing in the area on charges of raping and killing of the minor. On July 19 one of the suspects Suraj 29-year-old labourer from Nepal, died while being interrogated at the Kotkhai police station . The police alleged that he was murdered by one of his co-accused. The custodial death aggravated the ongoing public protests and speculations of an unfair investigation, triggering an outburst in Kotkhai and Theog the next morning. A mob burnt down the Kotkhai police station and vandalised police vehicles. The same day, the Himachal Pradesh High Court ordered the CBI to take over the case. CBI arrests the SIT head. A few days later, the CBI was also tasked with investigating Suraj’s custodial death, in connection with which it arrested eight police officials, including IG Zaidi, in August 2017. The case against them was eventually shifted to the CBI court in Chandigarh, where it is currently underway against nine people. Some of the police officials were granted bail by the Supreme Court in 2019, including IG Zaidi who was reinstated in the state police. Last year, however, an SP from Himachal told the court that she was being pressured by Zaidi to change her statement. The court cancelled Zaidi’s bail, and he’s back behind bars in Burail jail, Chandigarh. Other accused are all out on bail presently. The rape-murder: Investigation 2.0 On July 22 CBI registered two cases under Sections 302, 376 of IPC and Section 4 of POCSO Act relating to rape and murder of a minor girl and another case under section 302 of IPC relating to the custodial death of Suraj. The CBI found that the DNA of those already arrested did not match the reference DNA extracted from samples taken from the crime spot and the victim’s body in the rape and murder case, according to the agency’s chargesheet filed in the trial court. The accused also underwent scientific tests such as polygraph, narco analysis and brain mapping at a forensic lab in Gujarat. According to the CBI, the involvement of the six people could not be established, and the five surviving accused were eventually discharged from the case. On April 13, 2018 – CBI arrests woodcutter Anil Kumar alias Nilu in Kotkhai minor rape and murder case. On May 29– CBI submits charge sheet in court against Nilu, the lone accused in the case. On Oct 15, 2020 Family members of Gudiya filed petition in High Court seeking re-investigation into the case. On April 28, 2021 Lone Accused Nilu convicted in Gudiya rape and murder case and on 18th June, 2021 local court sentenced him life imprisonment.
The people of Himachal Pradesh, who are already battling unemployment and inflation during the Corona crisis, will not get relief from the expensive mustard oil being distributed in fair price shops, even in the month of July. There is no reduction in the prices of mustard oil and refined oil by the Food Supplies Department at present. However, preparations have been made to reduce the price of pulses. The Food Supply Corporation has prepared a proposal to increase the subsidy on pulses from Rs 15 to 25 per kg. The proposal regarding this will be brought up in the next cabinet meeting. From June 1, all categories of consumers, including BPL families, are getting mustard oil costlier by Rs 57 per litre. Earlier, a one-litre pack of mustard oil was being sold for Rs 98-Rs 117 per litre, now the same is available between Rs 155-175 per litre.The households covered under the National Food Security Act (NFSA) are getting mustard oil at Rs 152 per liter, APL card holders are getting it at Rs 158 per liter and APL income tax payer card holders getting mustard oil at Rs 178 per litre.The Regional Manager of Food Supplies Department, Vijay Sharma said that till July, the prices of mustard oil and refined are already fixed. Food Supplies Minister Rajendra Garg said that the matter of increasing the subsidy in pulses is being brought to the cabinet.
'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर भारत के महान धावक मिल्खा सिंह का कल देर रात दुनिया को अलविदा कह गए। 91 वर्षीय मिल्खा सिंह को कोरोना होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां गुरुवार को उनकी रिपोर्ट निगेटिव तो आ गई थी, लेकिन कल उनकी हालत नाजुक हो गई और उन्होंने जिंदगी का साथ छोड़ दिया। मिल्खा सिंह भारत के खेल इतिहास के सबसे सफल एथलीट थे। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु से लेकर पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान तक सब मिल्खा के हुनर के मुरीद थे। पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सताता रहा। भारत के विभाजन के बाद हुए दंगों में मिल्खा सिंह ने अपने मां-बाप और कई भाई-बहन को खो दिया। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। मिल्खा सिंह को मिले 'फ्लाइंग सिख' के खिताब की कहानी बेहद दिलचस्प है और इसका संबंध पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। 1960 के रोम ओलिंपिक में पदक से चूकने का मिल्खा सिंह के मन में खासा मलाल था। इसी साल उन्हें पाकिस्तान में आयोजित इंटरनेशनल एथलीट कम्पटिशन में हिस्सा लेने का न्योता मिला। मिल्खा के मन में लंबे समय से बंटवारे का दर्द था और वहां से जुड़ी यादों के चलते वो पाकिस्तान नहीं जाना चाहते थे। हालांकि बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समझाने पर उन्होंने पाकिस्तान जाने का फैसला किया। पाकिस्तान में उस समय एथलेटिक्स में अब्दुल खालिक का नाम बेहद मशहूर था। उन्हें वहां का सबसे तेज धावक माना जाता था। यहां मिल्खा सिंह का मुकाबला उन्हीं से था। अब्दुल खालिक के साथ हुई इस दौड़ में हालात मिल्खा के खिलाफ थे और पूरा स्टेडियम अपने हीरो का जोश बढ़ा रहा था, लेकिन मिल्खा की रफ्तार के सामने खालिक टिक नहीं पाए। रेस के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने मिल्खा सिंह को 'फ्लाइंग सिख' का नाम दिया और कहा 'आज तुम दौड़े नहीं उड़े हो। इसलिए हम तुम्हें फ्लाइंग सिख का खिताब देते हैं।' इसके बाद से ही वो इस नाम से दुनिया भर में मशहूर हो गए। खेलों में उनके अतुल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया है। पदकों की बात करें तो उन्होंने एशियाई खेलों में चार स्वर्ण और 1958 राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा जीता। इसके बावजूद उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि वह दौड़ थी, जिसे वह हार गए। रोम ओलंपिक 1960 के 400 मीटर फाइनल में वह चौथे स्थान पर रहे। उनकी टाइमिंग 38 साल तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड साल रही। उन्हें 1959 में पद्मश्री से नवाजा गया था। वह राष्ट्रमंडल खेलों में व्यक्तिगत स्पर्धा का पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे। उनके अनुरोध पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उस दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की थी। मिल्खा ने अपने करियर में 80 में से 77 रेस जीती लेकिन रोम ओलंपिक में चूकने का मलाल उन्हें ताउम्र रहा। हाथ की लकीरों से जिंदगी नहीं बनती, अजम हमारा भी कुछ हिस्सा है, जिंदगी बनाने में...’ जो लोग सिर्फ भाग्य के सहारे रहते हैं, वह कभी सफलता नहीं पा सकते। एक साक्षात्कार में मिल्खा सिंह की कही ये बातें उनके संघर्ष के दिनों से सफलता के शिखर तक पहुंचने की कहानी को बयां करती हैं।
इस साल हिमालय के अमरनाथ शिखर पर विराजमान भगवान शंकर के प्रसिद्ध शिवलिंग दर्शन हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस बात के संकेत दिए हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि सरकार जल्द ही वार्षिक अमरनाथ तीर्थयात्रा आयोजित करने पर फैसला करेगी। हालांकि मनोज सिन्हा ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी तरह लोगों की सुरक्षा की समीक्षा नहीं की जाएगी, तब तक इस पर फैसला नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बचाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हिमालय के ऊंचाई वाले हिस्से में 3880 मीटर ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव की गुफा के लिए 56-दिवसीय यात्रा 28 जून को पहलगाम और बालटाल मार्गों से शुरू होनी है। यह यात्रा 22 अगस्त को समाप्त होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या इस साल अमरनाथ तीर्थयात्रा होगी, सिन्हा ने कहा, मैं पहले ही कह चुका हूं कि लोगों की जान बचाना ज्यादा जरूरी है। कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए हम जल्द ही इस पर फैसला करेंगे। गौरतलब है कि 2020 में महामारी के कारण तीर्थयात्रा रद्द कर दी गई थी।
Prime Minister Narendra Modi has called an all-party meeting on Jammu and Kashmir on Thursday, sources say amid reports that the Centre may discuss restoration of statehood and other important issues concerning the union territory. This is the PM's first major outreach to end the political impasse over the scrapping of Article 370 in 2019. Union Home Minister Amit Shah on Friday met National Security Adviser Ajit Doval, Jammu and Kashmir Lieutenant Governor Manoj Sinha and top security and intelligence officers. In August 2019, the centre cancelled Article 370 that gave special status to Jammu and Kashmir and also bifurcated the state into two union territories - Jammu and Kashmir and Ladakh.
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज शरल म्यूजिक मुम्बई द्वारा निर्मित म्यूजिक एल्बम ‘मीठियां मीठियां गल्लां’ का पोस्टर जारी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कलाकार और गायक प्रिया शक्तावत के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास राज्य की समृद्ध संस्कृति और परम्परा को देशभर में प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संजोए रखने में महत्वपूर्ण साबित होते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस एल्बम से लोगों का भरपूर मनोरंजन होगा। प्रिया शक्तावत हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा से सम्बन्ध रखती हैं। देहरा के विधायक होशियार सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में कोर्ट ने आज दोषी अनिल उर्फ नीलू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। शुक्रवार यानि आज जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर चक्कर में विशेष अदालत में सुनवाई हुई। इस पूरे मामले में दोषी खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए एक ही गवाह पेश कर पाया। गौतलब है कि विशेष अदालत ने अनिल को 28 अप्रैल को दोषी करार दिया था। करोना कर्फ्यू की बंदिशों के चलते आरोपी को न्यायालय लाना मुश्किल हो रहा था। इससे पहले बीते मंगलवार को नीलू की सजा पर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। बता दें कि जिला शिमला के कोटखाई की एक छात्रा 4 जुलाई, 2017 को लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में पीड़िता का शव मिला। जांच में पाया गया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।
शिमला के रामपुर के तकलेच में चलाड़ी ढांक में सड़क हादसा सामने आया है। जिसमें ऑल्टो कार नंबर(HP-06A-8733) खाई में जा गिरी है। सूचना के अनुसार कार में चार लोग सवार थे। जिनमें दो महिलाएं एक व्यक्ति और एक छोटी बच्ची सवार थी। इन चारों की हालत गंभीर बताई जा रही है। फिलहाल घायलों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार गाड़ी गिरने के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। फिलहाल घायलों को सीएचसी तकलेच में ईलाज़ के लिए ले जाया गया है। पुलिस मौके पर है और हादसे की जांच कर रही है।
कोरोना काल के दौरान मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियम और कायदे केवल आम जनता के लिए हैं। हिमाचल पुलिस आम जनता के मास्क ना पहनने पर चालान काटती है लेकिन बात जब खुद पर आती है तो चुपी साध लेती है। ऐसा हम नहीं, तस्वीर बयान कर रही है। बुधवार को बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर चंडीगढ़ से शिमला पहुंचे। शिमला में अनुपम ने डीजीपी संजय कुंडू समेत कई अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान पुलिस अधिकारी और अनुपम खेर बिना मास्क के नजर आए। जानकारी के अनुसार, बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर बुधवार शाम को अपनी मात जी के साथ शिमला आए हैं। गुरुवार को अनुपम खेर पुलिस मुख्यालय पहुंचे जहाँ उन्होंने डीजीपी के अलावा, अन्य पुलिस अफसरों से मुलाकात और बातचीत की। डीजीपी संजय कुंडू ने उन्हें शॉल और पहाड़ी टोपी देकर सम्मानित किया। इसकी तस्वीरें शाम को पुलिस ने जारी की तो सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या नियम कायदे काम आम लोगों के लिए ही हैं? सवाल उठने लगे तो शिमला पुलिस भी एक्टिव हुई और हिमाचल प्रदेश पुलिस के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर पोस्ट पर किए कमेंट्स डिलीट कर दिए। बता दें कि तस्वीर में नजर आ रहे 19 लोगों में डीजीपी संजय कुंडू, शिमला के एसपी मोहित चावला, शिमला की पूर्व एसपी सौम्या सांबशिवम, अनुपम खेर के अलावा, कई पुलिस अफसर है।
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति होकर स्पीति के समदो स्थित चीन सीमा को जोडऩे वाले ग्रांफू-काजा हाईवे 505 फिर भूस्खलन से बंद हो गया है। पहाड़ी से चट्टाने गिरने से हाईवे पर कुछ वाहन भी फंसे होने की सूचना भी मिली है। बीआरओ अपनी मशीनरी के साथ हाईवे को बहाल करने में जुटा है। सुरक्षा की दृष्टि से यातायात के लिए यह मार्ग अति संवेदनशील है। खासकर कोकसर से कुछ दूर से यह मार्ग चंद्रनदी होकर निकलता है। वहीं इस क्षेत्र में पहाड़ी दरकने के साथ डोहनीनाला समेत कई ऐसे स्थान है जहां भूस्खलन का खतरा बना रहता है। मौसम साफ रहने पर भी इस हाईवे पर सफर करना आसान नहीं है। वहीं रोहतांग दर्रा के साथ बारालाचा, कुंजुम दर्रा सहित लाहौल की ऊंची पहाडिय़ोंं में ताजा बर्फबारी हुई है। मनाली-लेह मार्ग भी अभी यातायात के लिए नहीं खुला है। मनाली से लेह जाने वाले वाहन अभी दारचा के आसपास फंसे है। गुरुवार रात को जिला कुल्लू में भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। वंही ब्यास के साथ नदी नालों का जलस्तर भी बढ़ गया है।
केंद्र सरकार के साथ चल रही तनातनी के बीच ट्विटर के अधिकारी आज संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश होंगे। समिति की बैठक आज शाम 4 बजे संसद भवन में बुलाई गई है। समिति की बैठक का एजेंडा तो नागरिक अधिकार और महिला सुरक्षा के आलोक में सोशल मीडिया प्लेटफार्म का दुरुपयोग है लेकिन मौजूदा हालात में समिति की बैठक अहम हो गई है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़ी स्थायी समिति की बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी भी शरीक होंगे। गौरतलब है कि पिछले दिनों में ट्विटर और मोदी सरकार के बीच नए आईटी नियमों के पालन को लेकर तक़रार लगातार जारी है। ट्विटर द्वारा नए नियमों के पालन में हो रही देरी और हीलाहवाली के चलते सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय ने इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म को मिले थर्ड पार्टी का दर्जा समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही ट्विटर को थर्ड पार्टी होने के नाते क़ानूनी हस्तक्षेप से मिली छूट भी वापस ले ली गई है। दरसल थर्ड पार्टी दर्ज़े का मतलब होता है कि ट्विटर पर किसी भी यूजर की ओर से किए गए पोस्ट की ज़िम्मेदारी ट्विटर की नहीं होती थी। छूट हटने के साथ ही फेक न्यूज फैलाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने ट्विटर के अधिकारियों पर मामला भी दर्ज किया है।
स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां कि राज्य में अब तक 21,88,947 व्यक्तियों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक लगाई जा चुकी है, जिनमें 4,38,750 लोग दूसरी खुराक भी ले चुके हैं। राज्य में 85650 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं और 178047 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को वैक्सीन की पहली खुराक लगाई गई है। प्रवक्ता ने कहा कि 17 मई, 2021 को प्रदेश में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान आरम्भ होने के बाद, एक माह के अंदर 2,03,487 लोगों का टीकाकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में टीकाकरण अभियान आरम्भ होने से राज्य में अब तक 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के कुल 9,84,687 और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 7,37,076 लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक लगाई जा चुकी है। प्रवक्ता ने कहा कि जिला बिलासपुर में 3805 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 3294 को दूसरी खुराक, 10498 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 2148 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 10679 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 112372 लोगों को पहली खुराक व 29665 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 45.6 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। जिला चंबा में 5972 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 4832 को दूसरी खुराक, 10780 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 3036 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 14092 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 116974 लोगों को पहली खुराक व 18649 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 39.2 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। जिला हमीरपुर में 5631 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 4654 को दूसरी खुराक, 8737 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 2312 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 12066 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 150613 लोगों का पहली खुराक व 27197 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 49.5 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। कांगड़ा जिला में 16779 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 13700 को दूसरी खुराक, 25970 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 7317 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 43877 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 391513 लोगों का पहली खुराक व 66213 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 39.4 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। किन्नौर में 1104 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 978 को दूसरी खुराक, 6085 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 2191 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 3797 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 22076 लोगों का पहली खुराक व 5637 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 46.0 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। कुल्लू जिला में 5722 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 4085 को दूसरी खुराक, 9537 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 2722 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 13052 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 100379 लोगों का पहली खुराक व 21605 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 36.6 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। लाहौल स्पीति में 612 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 449 को दूसरी खुराक, 1840 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 451 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 968 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 7603 लोगों का पहली खुराक व 2510 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 42.3 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। मंडी जिला में 12859 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 11421 को दूसरी खुराक, 17829 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 4860 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 26930 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 260215 लोगों का पहली खुराक व 57935 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 39.4 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। शिमला जिला में 13077 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 10333 को दूसरी खुराक, 31850 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 8530 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 25601 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 202886 लोगों का पहली खुराक व 35389 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 40 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। सिरमौर जिला में 6861 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 5158 को दूसरी खुराक, 14124 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 2706 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 14524 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 84200 लोगों का पहली खुराक व 15665 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 30.5 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। सोलन जिला में 8398 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 5989 को दूसरी खुराक, 31764 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 3168 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 23149 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 132079 लोगों का पहली खुराक व 14236 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 41.1 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि ऊना जिला में 4830 स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की पहली खुराक और 4164 को दूसरी खुराक, 9033 अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को पहली खुराक व 3055 को दूसरी खुराक, 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 14752 लाभार्थियों को पहली खुराक, 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 140853 लोगों का पहली खुराक व 32476 लोगों को दूसरी खुराक लगाई गई है। जिला में 18 व इससे अधिक आयु वर्ग की 36.3 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया गया है। प्राथमिकता रणनीति के आधार पर विभिन्न आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि जब भी लाभार्थी वैक्सीनेशन सत्र की योजना बनाएं और शेड्यूल निर्धारित करे तब वे यह टीकाकरण के लिए आना अवश्य सुनिश्चित करे। इससे वैक्सीन की कम से कम वेस्टेज और अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।


















































