हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में फर्जी इनवॉइस के जरिए करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और GST रिफंड के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। CGST आयुक्त कार्यालय शिमला के प्रिवेंटिव विंग ने कार्रवाई करते हुए करीब 6.55 करोड़ रुपये के अपात्र ITC का मामला पकड़ा है। इस मामले में त्रिलोकपुर स्थित समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गौरव जैन को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान सामने आया कि समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ड्यूल हेल्थकेयर ने कथित तौर पर कई फर्जी और गैर-मौजूद सप्लायर फर्मों के बिलों के आधार पर ITC का लाभ लिया। जांच में करीब 5.55 करोड़ रुपये का ITC 10 गैर-मौजूद फर्मों से जुड़े इनवॉइस के जरिए लेने की बात सामने आई है। अधिकारियों को ऐसे बिल भी मिले, जिनमें माल की सप्लाई दिखाई गई थी, लेकिन ई-वे बिल और टोल प्लाजा के रिकॉर्ड में उस माल की वास्तविक आवाजाही की पुष्टि नहीं हो सकी। आरोप है कि फर्जी तरीके से हासिल ITC को GST रिफंड के दावों में शामिल कर सरकारी खजाने से नकद रिफंड लेने का प्रयास किया गया शेल कंपनी बनाकर चल रहा था खेल जांच में फर्जी फर्मों, बिना वास्तविक माल की सप्लाई के इनवॉइस, संदिग्ध अकाउंटिंग एंट्री और शेल इकाइयों के इस्तेमाल के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। अधिकारियों ने कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं और डिजिटल साक्ष्यों, व्हाट्सऐप चैट तथा बैंकिंग लेन-देन की भी जांच की गई। जांच एजेंसी के अनुसार ड्यूल हेल्थकेयर का इस्तेमाल कथित तौर पर शेल इकाई के रूप में किया जा रहा था और इसके संचालन में गौरव जैन की सक्रिय भूमिका सामने आई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 69(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है। ITC का मतलब: Input Tax Credit यानी कारोबार में खरीदे गए सामान या सेवाओं पर दिए गए GST का क्रेडिट, जिसे नियमों के तहत टैक्स देनदारी में समायोजित किया जा सकता है।
सोलन के रबौण क्षेत्र में एक पिकअप वाहन पलटने से हादसा हो गया। हादसे में पिकअप सवार दो लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रबौण के तीखे मोड़ पर पिकअप अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में दो लोगों को चोटें आई हैं। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू की। हादसा किस वजह से हुआ, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार हादसे में बड़ा नुकसान टल गया।
हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन के बीच बागवानों ने CA (कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर) स्टोरेज) कंपनियों की कार्यप्रणाली और भुगतान व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। बागवानों का कहना है कि सेब की फसल तैयार करने में वे पूरे साल मेहनत और पैसा लगाते हैं, लेकिन फसल बेचने के बाद भुगतान को लेकर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बागवानों ने मांग उठाई है कि CA कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाई जाए और सेब की बिक्री के बाद भुगतान हाथों-हाथ किया जाए। उनका कहना है कि फसल का पैसा समय पर मिलने से वे अगले सीजन की तैयारी और अन्य जरूरी खर्च आसानी से कर सकेंगे। बागवानों का आरोप है कि कुछ मामलों में भुगतान प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती और उन्हें अपनी ही फसल की रकम के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से इस व्यवस्था की निगरानी करने की मांग की है। बागवानों ने साफ कहा कि सेब कारोबार में पारदर्शिता जरूरी है। कंपनियों की शर्तों, सेब की कीमत और भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि बागवानों के हितों से किसी तरह का समझौता न हो। बागवानों की मांग है कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और CA कंपनियों के साथ ऐसा नियम तय किया जाए, जिससे सेब की बिक्री और भुगतान की प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और समयबद्ध हो।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि सिर्फ स्टांप पेपर पर आपसी सहमति से तैयार किया गया तलाकनामा विवाह को कानूनी रूप से खत्म नहीं करता। तलाक को वैध बनाने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत की मंजूरी जरूरी है। कोर्ट ने साफ किया कि पति-पत्नी के बीच समझौता या स्टांप पेपर पर तैयार दस्तावेज अपने आप में तलाक की डिक्री का विकल्प नहीं हो सकता। यानी केवल यह लिख देना कि दोनों पक्ष अलग हो गए हैं, पर्याप्त नहीं है। अदालत की इस टिप्पणी का सीधा मतलब है कि विवाह संबंध खत्म करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। निजी तौर पर तैयार किए गए दस्तावेज के आधार पर कोई व्यक्ति खुद को कानूनी रूप से तलाकशुदा नहीं मान सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में वैवाहिक स्थिति तय करने के लिए सक्षम अदालत की भूमिका अहम है। इसलिए पति-पत्नी को सिर्फ स्टांप पेपर या आपसी समझौते के भरोसे तलाक की कानूनी स्थिति मान लेने से बचना चाहिए।
बिलासपुर एम्स में उपयोग किए जाने वाले डायलिसिस फ्लूइड का सैंपल गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा। यह सप्लाई थाईलैंड से प्राप्त हुई थी। सैंपल के असफल पाए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बैच की आपूर्ति और उपयोग को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। डायलिसिस फ्लूइड मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित बैच की सप्लाई की समीक्षा की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि फ्लूइड निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर क्यों खरा नहीं उतरा। सैंपल के असफल पाए जाने के बाद अस्पताल में डायलिसिस सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों और सप्लायर से आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। थाईलैंड से प्राप्त इस सप्लाई के सैंपल की जांच में सामने आई खामी के बाद इसके उपयोग और उपलब्ध स्टॉक का भी सत्यापन किया जा रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के निर्णय के आधार पर की जाएगी।
तकनीकी विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर छात्र पिछले 23 दिनों से धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के बीच छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़कर विरोध जताया। छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति (VC) की नियुक्ति समेत कई मुद्दे शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को लेकर उचित कदम नहीं उठाया गया है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मुख्य गेट पर ताला लगाने के बाद विश्वविद्यालय में माहौल गरमा गया है। छात्रों का आरोप है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। अब छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है। वहीं, छात्रों के लगातार प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय में स्थायी VC समेत सभी लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए।
शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अपने हालिया दिल्ली दौरे को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका दिल्ली जाना व्यक्तिगत कार्यक्रम से जुड़ा था। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात संयोगवश हुई। वहीं, शिमला जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन को लेकर रोहित ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने माना कि चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी को गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है। शिक्षा मंत्री के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस संगठन और नेतृत्व को लेकर समीक्षा और सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और संगठन को अधिक सक्रिय बनाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। रोहित ठाकुर ने दिल्ली दौरे को लेकर लग रही अटकलों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे किसी राजनीतिक बैठक या विशेष रणनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, जिला परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन पर चिंता जाहिर की है।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) शिमला में विद्यार्थियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छात्राओं के लिए नए हॉस्टल के निर्माण, कम वोल्टेज की समस्या दूर करने और पीने के पानी की व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए हैं। छात्राओं के लिए नया हॉस्टल बनने से उन्हें रहने की बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं, विश्वविद्यालय परिसर में लो वोल्टेज की समस्या का समाधान होने से बिजली व्यवस्था में सुधार होगा। इसके साथ ही पीने के पानी की समस्या को भी दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर माहौल उपलब्ध करवाने पर जोर दिया। वहीं, NLU के कुलपति ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार जताया। उन्होंने विश्वविद्यालय की जरूरतों को गंभीरता से लेने और विद्यार्थियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से दिए गए सहयोग के लिए धन्यवाद किया।
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 30 जून से 10 सितंबर 2026 तक प्रदेश में 1,63,882.59 लाख रुपये यानी करीब 1,638.83 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी संचयी रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब तक 116 लोगों की मौत हुई है। इनमें भूस्खलन से 18, डूबने से 15, बिजली गिरने से 12 और पेड़ या बड़ी चट्टान गिरने से 40 लोगों की मौत शामिल है। इसके अलावा 10 मौतें सड़क हादसों में दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में 172 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में भी दर्ज होने का उल्लेख है। कांगड़ा में सबसे ज्यादा नुकसान जिला स्तर पर सबसे अधिक नुकसान कांगड़ा में 447.17 लाख रुपये दर्ज किया गया है। इसके बाद मंडी में 297.57 लाख, चंबा में 294.10 लाख, शिमला में 376.65 लाख और सोलन में 164.88 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। 70 सड़कें बंद लगातार बारिश के कारण प्रदेश में 70 सड़कें बंद हैं। इनमें सबसे ज्यादा मंडी में 30 सड़कें, कुल्लू में 11, शिमला में 11, कांगड़ा में 10, सिरमौर में 4, ऊना में 3 और लाहौल-स्पीति में 1 सड़क बंद है। इनमें मंडी के सराज की 25, सुंदरनगर की 1, सरकाघाट की 3 और थलौट की 1 सड़क शामिल है। कुल्लू में कुल्लू उपमंडल की 4, बंजार की 2, आनी की 3 और निरमंड की 2 सड़कें प्रभावित हैं। बिजली-पानी की सप्लाई भी प्रभावित बारिश का असर बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। शिमला जिले में 2 बिजली ट्रांसफार्मर और 2 पेयजल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से बंद मार्गों को खोलने और प्रभावित क्षेत्रों में सुविधाएं बहाल करने के प्रयास जारी हैं। बारिश से बचाव और बहाली की चुनौती लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन बंद मार्गों को खोलने के साथ बिजली और पेयजल व्यवस्था बहाल करने में जुटा है। लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
पालमपुर: हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकालकर जमकर प्रदर्शन किया। महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार को चुनाव के दौरान किए गए 1500 रुपये देने के वादे की याद दिलाई और सरकार से जवाब मांगा। प्रदर्शन के दौरान भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले महिलाओं से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद उन वादों को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। महिला मोर्चा ने कहा कि 1500 रुपये देने का वादा महिलाओं के सम्मान और आर्थिक मदद से जुड़ा था, लेकिन लंबे समय बाद भी महिलाएं इस वादे के पूरा होने का इंतजार कर रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया। रैली के दौरान भाजपा नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावी वादों को याद रखना चाहिए और जनता से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। भाजपा महिला मोर्चा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने महिलाओं से किए वादों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज शिक्षा विभाग की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड, विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म तथा स्कूल भवनों के लिए रंग योजना को अंतिम रूप देने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थियों की विशिष्ट यूनिफॉर्म हरे रंग की थीम पर आधारित होगी। इन स्कूलों की महिला शिक्षिकाएं हल्के लाइलैक (बैंगनी) रंग की पोशाक पहनेंगी, जबकि पुरुष शिक्षक हल्के नीले रंग की पैंट और शर्ट पहनेंगे। इन स्कूलों के भवनों को ऑलिव ग्रीन और सैंड बेज रंगों से रंगा जाएगा। शिक्षकों का ड्रेस कोड साफ-सुथरा, औपचारिक, शालीन और पेशेवर होगा तथा इसमें न्यूनतम सहायक वस्तुओं का प्रयोग किया जाएगा। डयूटी के दौरान शिक्षकों को अपना पहचान पत्र पहनना भी अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को उनके घरों के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के लिए अतिरिक्त 5 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए जाएंगे।
नशे के कारोबार से कथित तौर पर कमाई कर बनाई गई संपत्ति पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। नूरपुर में एक आरोपी की करीब 3.32 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई आरोपी की नशे से जुड़ी गतिविधियों और उससे अर्जित संपत्ति के मामले में की गई है। जांच के दौरान सामने आई संपत्तियों पर कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग ने इन्हें जब्त कर लिया। सरकार और पुलिस की ओर से नशे के कारोबार पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। अब नशे के कारोबार से कमाई करने वालों की सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनकी अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। नूरपुर में हुई इस कार्रवाई को नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। 3.32 करोड़ की संपत्ति जब्त होने से नशे के कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के रहने वाले तलवारबाज विश्वजीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और हिमाचल का नाम रोशन किया है। थाईलैंड में आयोजित तलवारबाजी प्रतियोगिता में विश्वजीत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए मेडल जीता। विश्वजीत की इस उपलब्धि से उनके परिवार, कोच और पूरे सिरमौर में खुशी की लहर है। उन्होंने कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। विश्वजीत का सफर यहीं खत्म नहीं हुआ है। उनका अगला बड़ा सपना ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। इसके लिए वह लगातार अपनी फिटनेस, तकनीक और खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने में जुटे हैं। विश्वजीत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतना उनके लिए गर्व का पल है। अब वह ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का सपना पूरा करना चाहते हैं। सिरमौर के इस युवा खिलाड़ी की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हिमाचल की प्रतिभाएं मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती हैं।
हिमाचल प्रदेश की धरती एक बार फिर देश की महिला भारोत्तोलन प्रतिभाओं के दमखम की गवाह बनेगी। जनवरी 2027 में कांगड़ा के इंदौरा में महिला राष्ट्रीय लीग का आयोजन होने जा रहा है। इस लीग में देश की नामी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी ताकत का लोहा मनवा चुकी महिला भारोत्तोलकों के उतरने की उम्मीद है। ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू समेत कई दिग्गज खिलाड़ी प्रतियोगिता में दम दिखाएंगी। पहले भी आयोजित हो चुकी इस लीग की मेजबानी इस बार कांगड़ा को मिली है। इससे प्रदेश के खेल प्रेमियों को राष्ट्रीय स्तर के रोमांचक मुकाबले देखने का मौका मिलेगा। महिला राष्ट्रीय लीग में देश के अलग-अलग हिस्सों से शीर्ष महिला भारोत्तोलक हिस्सा लेंगी। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वालों में मीराबाई चानू के अलावा पूनम यादव, हरजिंदर कौर, रेणुबाला चानू और मोनिका देवी जैसी अनुभवी खिलाड़ियों के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि खिलाड़ियों की अंतिम सूची आयोजन के नजदीक तय होगी। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं इन खिलाड़ियों की मौजूदगी से प्रतियोगिता का स्तर और रोमांच दोनों बढ़ने की उम्मीद है। इंदौरा में राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता के आयोजन से हिमाचल के उभरते भारोत्तोलकों को भी बड़ा मंच मिलेगा। खासकर प्रदेश की युवा महिला खिलाड़ियों को देश की शीर्ष खिलाड़ियों को करीब से देखने और उनके खेल से सीखने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खेल विशेषज्ञों और चयनकर्ताओं की भी नजर रहेगी। भारतीय भारोत्तोलन महासंघ के कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि महिला राष्ट्रीय लीग का इंदौरा में आयोजन हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह प्रतियोगिता पहले भी आयोजित हो चुकी है और इस बार कांगड़ा को इसकी मेजबानी मिली है। लीग में देश की प्रमुख महिला भारोत्तोलकों को शामिल करने का प्रयास रहेगा।
मंडी हेड पोस्ट ऑफिस में पैसों से जुड़ी गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। मामले में एक महिला कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति की शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की। जांच में पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी सामने आने के बाद महिला कर्मचारी पर कार्रवाई की गई। मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए विभाग ने जांच कमेटी बनाई है। कमेटी यह पता लगाएगी कि कितने रुपये की गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल विभाग ने गबन की सही रकम का खुलासा नहीं किया है। सस्पेंड महिला कर्मचारी की नई तैनाती सुंदरनगर हेड पोस्ट ऑफिस में की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
गोपी जैक्स ने आरोप लगाया कि प्रदेश में होने वाले कई बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाहरी राज्यों से कलाकारों को बुलाकर उन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि स्थानीय कलाकारों को नाममात्र का मानदेय दिया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिमाचल की लोक संस्कृति को स्थानीय कलाकार ही अपनी कला के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं तो उन्हें उचित आर्थिक सम्मान क्यों नहीं दिया जाता.
हिमाचल राज्य चयन आयोग हमीरपुर ने राजनीतिक शास्त्र शिक्षक के 95 पदों के लिए आयोजित कंप्यूटर आधारित स्क्रीनिंग टेस्ट का परिणाम घोषित कर दिया है। पोस्ट कोड 26028 के तहत शिक्षक राजनीतिक शास्त्र के इन पदों के लिए कुल 3650 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 3002 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 648 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। आयोग ने परीक्षा में प्रदर्शन और निर्धारित अनुपात के आधार पर 239 अभ्यर्थियों को आगामी चयन प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन के लिए अस्थायी रूप से शॉर्टलिस्ट किया है। इन पदों के लिए कंप्यूटर आधारित स्क्रीनिंग टेस्ट 29 जुलाई 2026 को आयोजित किया गया था। 95 पदों में सामान्य वर्ग के 36, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 12, स्वतंत्रता सेनानी वार्ड के एक, अन्य पिछड़ा वर्ग के 16, अन्य पिछड़ा वर्ग बीपीएल के तीन, अनुसूचित जाति के 18, अनुसूचित जाति बीपीएल के तीन, अनुसूचित जाति स्वतंत्रता सेनानी वार्ड का एक, अनुसूचित जनजाति के चार और अनुसूचित जनजाति बीपीएल का एक पद शामिल है।
भारत में डाक और लॉजिस्टिक सेवा का इतिहास सदियों पुराना है एक समय था, जब डाकिया पैदल या साइकिल से मीलों का सफर तय कर गांवों तक चिट्ठियां और जरूरी दस्तावेज पहुंचाता था, लेकिन बदलते भारत में तकनीक ने इस पारंपरिक व्यवस्था को भी पंख दे दिए हैं. देश के सबसे बड़े सार्वजनिक डाक नेटवर्क इंडिया पोस्ट और टेक्नोलॉजी आधारित ड्रोन कंपनी Sky Air के सहयोग से शुरू हुई ड्रोन डिलीवरी व्यवस्था अब हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में डाक पहुंचाने के तरीके को बदल रही है. हिमाचल प्रदेश के मंडी के रेहड़धार से सबसे पहले 12 जून 2026 से ड्रोन के माध्यम से डाक सेवा शुरू की गई थी. मंडी में शुरू हुई इस ड्रोन डाक सेवा का लगातार विस्तार किया जा रहा है. 17 अगस्त 2026 को इस नेटवर्क में चार और शाखा डाकघरों को जोड़ा गया. ये जानकारी मंडी पोस्ट ऑफिस के सीनियर सुपरिटेंडेंट संजय ने दी. संजय ने कहा कि 'मंडी मुख्य डाकघर मंडी से रेहड़धार, पधियूं, जोगिंद्रनगर, ब्यू, रंधाडा, अलाथू, टिल्ली, मझवाड़ तक ड्रोन डाक लेकर उड़ान भर रहे हैं, इन सभी स्थानों की दूरी मंडी हेड पोस्ट ऑफिस से 9 से 15 किलोमीटर के बीच है. पहले इन इलाकों तक सड़क मार्ग से पहुंचने में दो से तीन घंटे लग जाते थे, वहीं ड्रोन अब इन स्थानों तक महज 5 से 10 मिनट में डाक पहुंचा रहा है, सुबह 9 से 10 बजे के बीच मंडी से संबंधित शाखा डाकघरों के लिए रोजाना ड्रोन के माध्यम से 7 से 10 किलो ग्राम डाक भेजी जाती है, जिनके माध्यम से विभिन्न शाखा डाकघरों तक डाक पहुंचाई जा रही है. इसके अतिरिक्त मंडी डिवीजन के केलांग को भी जल्द ही ड्रोन व्यवस्था से जोड़ा जाएगा.' खास बात यह है कि ड्रोन से ब्रांच ऑफिस तक पहुंचने वाली डाक का वितरण भी उसी दिन कर दिया जाता है. इससे लोगों को डाक और जरूरी सेवाओं के लिए पहले की तुलना में काफी कम इंतजार करना पड़ रहा है. हालांकि बरसात के दौरान खराब मौसम के चलते यह सेवा दो से तीन दिन तक प्रभावित हुई है. मौसम की स्थिति को देखते हुए ड्रोन की उड़ान का समय भी बदला जाता है. इसके बावजूद पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों तक डाक पहुंचाने की दिशा में ड्रोन डाक सेवा तकनीक के इस्तेमाल की एक नई पहल साबित हो रही है. Sky Air संस्थान के मुख्य कार्यालय गुरुग्राम से मैनेजमेंट सदस्य सुभाष दुबे ने बताया कि 'ड्रोन की रेंज करीब 15 से 20 किलोमीटर तक है, हिमाचल प्रदेश में ड्रोन आधारित डाक सेवा के नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है. वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 15 ड्रोन संचालित किए जा रहे हैं, जबकि ड्रोन सेवा से करीब 110 डाकघरों को जोड़ा गया है. इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसका फिजिकल एआई और मशीन लर्निंग से लैस होना है तेज हवाओं, घने बादलों और अचानक बदलते मौसम का ये रियल टाइम में आकलन कर सकता है. जरूरत पड़ने पर ड्रोन अपना रूट खुद बदलने में सक्षम है. यही तकनीक इसे हिमाचल जैसे दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए खास बनाती है. ड्रोन माइनस 10 से 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम करने में सक्षम है. यानी पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ड्रोन डाक सेवा न सिर्फ समय और दूरी को कम कर रही है. बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों तक तेज और आधुनिक डाक सुविधा पहुंचाने की दिशा में एक नई मिसाल भी पेश कर रही है. तकनीक के इस इस्तेमाल से आने वाले समय में हिमाचल के और भी दुर्गम इलाकों तक डाक सेवा को पहुंचाना आसान हो सकता है.
मंडी: नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार चलाने के बजाय पूरा मंत्रिमंडल दिल्ली में डेरा डाले हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय सरकार के मंत्री दिल्ली की राजनीति में व्यस्त हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल में आम लोग कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता अपनी समस्याओं को लेकर सरकार की ओर देख रही है, लेकिन मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल के सदस्य दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सरकार की जरूरत है, तब मंत्री दिल्ली में क्यों बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को दिल्ली की राजनीति के बजाय हिमाचल के लोगों और प्रदेश के विकास पर ध्यान देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें शासन चलाने की जिम्मेदारी दी है, न कि लगातार दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने की। उन्होंने सरकार से जनता की समस्याओं का समाधान करने और प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने की मांग की।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण हिमाचल की नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की पानी ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है और आसपास की मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आपदा के जोखिम को कम करने के लिए ऐसे संवेदनशील नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र से एक विवाहिता के साथ कथित यौन उत्पीड़न और धमकी का गंभीर मामला सामने आया है। 28 वर्षीय महिला ने पुलिस को दी शिकायत में एक व्यक्ति पर जबरदस्ती करने और बाद में उसके विरोध करने पर महिला, उसके पति तथा दो छोटे बच्चों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए चौपाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुख्य आरोपी दिला राम शर्मा और उसके दो बेटों संतोष तथा नारायण दत्त के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल में एक ही विभाग के कर्मचारियों को क्यों दिया जा रहा अलग-अलग डा? हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाहीI सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है.
जिला शिमला के रामपुर उपमंडल में बीपीएल श्रेणी के तहत चयनित लोगों को जारी किए गए आय प्रमाण पत्रों की अब दोबारा जांच की जाएगी. उपमंडल अधिकारी (नागरिक) रामपुर बुशहर की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. आदेश के अनुसार 50 हजार और 75 हजार तक की वार्षिक आय दर्शाने वाले उन सभी आय प्रमाण पत्रों का पुनः सत्यापन किया जाएगा, जो बीपीएल श्रेणी में चयनित व्यक्तियों को जारी किए गए हैं.पुनः सत्यापन के दौरान संबंधित तहसीलदार और नायब तहसीलदार प्रत्येक मामले में जांच करेंगे. यह जांच संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, पटवारी, ग्राम पंचायत प्रधान और संबंधित वार्ड सदस्य की समिति के साथ परामर्श कर की जाएगी. जांच में संबंधित व्यक्ति और परिवार की वास्तविक आय, आर्थिक स्थिति और आय प्रमाण पत्र जारी करने के आधार की पड़ताल की जाएगी. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रमाण पत्र उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के अनुरूप है या नहीं.प्रत्येक आय प्रमाण पत्र की सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि जांच के बाद प्रमाण पत्र सही पाया गया है अथवा नहीं. एसडीएम कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को यह पूरी प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. मामले को अति आवश्यक और समयबद्ध बताया गया है.
हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, उनकी कैबिनेट के कुछ मंत्री और बड़े अफसर इस समय दिल्ली में हैं. सीएम सुक्खू के अलावा तीन कैबिनेट मंत्री दिल्ली दौरे पर हैं. सीएम के साथ राज्य के टॉप ब्यूरोक्रेट्स भी राजधानी में डेरा डाले हुए हैं. मुख्य सचिव केके पंत के अलावा अन्य बड़े अफसर सीएम के साथ हैं. दिल्ली में हिमाचल को लेकर कुछ बड़े घटनाक्रम देखने को मिलेंगे. सीएम सुक्खू केंद्रीय नेताओं से मिलेंगे और साथ ही अपनी पार्टी के नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है. सीएम दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान एवं कृषि और पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार भी दिल्ली में हैं. शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर दिल्ली में साक्षरता दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. वहीं, सोमवार देर शाम दिल्ली पहुंचे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू आज यानी मंगलवार (8 सितंबर) सुबह केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात करेंगे. मीटिंग का एजेंडा कुल्लू-मनाली एवं मंडी में ब्यास नदी की ड्रेजिंग को लेकर तय है. हिमाचल प्रदेश का एक कंसर्न मानसून सीजन में आपदा से प्रभावित लोगों को वन भूमि का आवंटन सुनिश्चित करना भी है. सीएम सुक्खू ने इस मामले में ऐलान किया है कि आपदा प्रभावितों को जरूरत के अनुसार वन भूमि दी जाएगी. इसके लिए केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है. मंगलवार शाम को ही सीएम सुक्खू की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात तय है. निर्मला सीतारमण के साथ मीटिंग में सीएम एवं मुख्य सचिव सहित अन्य अफसर भी रहेंगे. इस दौरान हिमाचल प्रदेश के वित्तीय मसलों पर चर्चा होगी. साथ ही हिमाचल प्रदेश प्राईड ऑफ हिल्स नाम से शुरू किए गए फंड में केंद्र से और अधिक रकम प्रदान किए जाने की मांग करेगा. इस दौरान हिमाचल प्रदेश पिछले सीजन में पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से घोषित किए गए पैकेज को लेकर भी अपना पक्ष रखेगा. सीएम सुक्खू का दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिलने का संभावित कार्यक्रम है. विभिन्न केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान राज्य के मुख्य सचिव केके पंत, दिल्ली में सीएम के ऊर्जा सलाहकार रामसुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम, शिक्षा सचिव और सीएम के सचिव का कार्यभार देख रहे आईएएस राकेश कंवर आदि मौजूद रहेंगे.
शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू का एक और मामला सामने आया है। आईजीएमसी शिमला में छह माह की बच्ची की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बच्ची कुल्लू जिले की रहने वाली है। तेज बुखार के बाद परिजन उसे उपचार के लिए आईजीएमसी लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने बच्ची के लक्षणों को देखते हुए स्वाइन फ्लू की जांच कराने की सलाह दी। सैंपल जांच के लिए भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बच्ची को आईजीएमसी में ही उपचार और निगरानी में रखा गया I मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। अस्पतालों में वायरल संक्रमण जैसे लक्षणों वाले मरीजों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर रैंडम सैंपलिंग करने को भी कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को अलर्ट रहने और संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने छह माह की बच्ची के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने की पुष्टि की है। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है। स्वाइन फ्लू में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। बच्चों में सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या दूध-पानी कम पीना गंभीर संकेत हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने, हाथ साफ रखने और फ्लू जैसे लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। गौरतलब है कि प्रदेश में हाल के दिनों में स्वाइन फ्लू के कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग पहले से ही निगरानी बढ़ा चुका है।
शिमला। कभी देश के सबसे कम साक्षर राज्यों में शामिल हिमाचल प्रदेश ने अब साक्षरता के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 1951 में प्रदेश की साक्षरता दर सिर्फ 7.98 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 99.5 फीसदी हो गई है। इस उपलब्धि के साथ हिमाचल देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। 99.7 फीसदी साक्षरता के साथ गोवा पहले नंबर पर है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर 8 सितंबर को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि शामिल होंगे। प्रदेश की ओर से साक्षरता अभियान की उपलब्धियों और काम करने के तरीके की प्रस्तुति भी दी जाएगी। आजादी के बाद हिमाचल के सामने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी चुनौती थी। 1951 में प्रदेश की कुल साक्षरता दर केवल 7.98 फीसदी थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1961 में यह 21.03 फीसदी, 1971 में 31.71 फीसदी, 1981 में 42.33 फीसदी, 1991 में 63.75 फीसदी, 2001 में 76.48 फीसदी और 2011 में 82.80 फीसदी पहुंची। इसके बाद लगातार चलाए गए शिक्षा और साक्षरता अभियानों से प्रदेश ने तेजी से प्रगति की। कठिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों तक स्कूल और शिक्षा की सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया गया। साक्षरता अभियान के तहत वर्ष 2023-24 में 94,930 निरक्षरों की पहचान की गई थी। इनमें से दो वर्षों में 66 हजार से ज्यादा लोगों को साक्षर बनाया गया। अब प्रदेश में करीब 28,480 निरक्षर लोग शेष हैं। अभियान में केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को बुनियादी गणना, डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि साक्षरता की बड़ी चुनौती पार करने के बाद अब सरकार का फोकस शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी स्कूलों-कॉलेजों को मजबूत करने पर है। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, तबादलों में पारदर्शिता और स्कूलों में बेहतर व्यवस्था पर जोर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले कई शिक्षण संस्थानों को लेकर सरकार को नए सिरे से विचार करना होगा। सरकारी स्कूलों में पिछले 15 वर्षों में करीब चार लाख छात्रों की कमी को उन्होंने बड़ी चुनौती बताया। यानी 1951 में 7.98 फीसदी से शुरू हुआ हिमाचल का साक्षरता सफर आज 99.5 फीसदी तक पहुंच चुका है। अब प्रदेश की अगली चुनौती हर व्यक्ति तक शिक्षा की पहुंच के साथ-साथ सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना है।
IEC विश्वविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया शिक्षक दिवस, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से छात्रों ने जीता गुरुओं का दिल अटल शिक्षा कुंज, कालू झंडा। अटल शिक्षा कुंज, कालू झंडा स्थित IEC विश्वविद्यालय में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस बेहद उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने अपने प्राध्यापकों और गुरुजनों के सम्मान में कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. प्रल्हाद गुप्ता और वरिष्ठ संकाय सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलित कर तथा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इनमें शास्त्रीय नृत्य, संगीत और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने वाली लघु नाटिकाएं शामिल रहीं। छात्रों ने अपने शिक्षकों को स्मृति चिह्न भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूरे परिसर में उत्साह और खुशी का माहौल रहा। समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. प्रल्हाद गुप्ता ने कहा कि एक शिक्षक का दायित्व केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करना और उन्हें समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने सभी प्राध्यापकों को उनके निरंतर मार्गदर्शन और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए धन्यवाद दिया।
कांग्रेस कमेटी महासचिव विवेक कुमार ने किया खेलों का आगाज, 11 पाठशालाओं की करीब 147 छात्राएं ले रही हैं भाग बरठी, 7 सितंबर। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बरठी में सोमवार को बरठी जोन की अंडर-19 छात्रा खेलकूद प्रतियोगिता का विधिवत शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता का आगाज प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव विवेक कुमार ने किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न पाठशालाओं से पहुंची खिलाड़ी छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए खेलों को खेल भावना के साथ खेलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेलों से जहां विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है, वहीं आपसी भाईचारे एवं सहयोग की भावना भी मजबूत होती है। उन्होंने छात्राओं से प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के साथ-साथ खेल भावना को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया। प्रतियोगिता में बरठी जोन की 11 पाठशालाओं से करीब 147 खिलाड़ी छात्राएं विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। प्रतियोगिता को लेकर छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस झंडूत्ता अध्यक्ष विजय कौशल, ग्राम पंचायत गंढीर के प्रधान राजकुमार कौशल, पंचायत प्रधान बरठी उमा शर्मा, उपप्रधान राकेश मेहता, वासुदेव गौतम, परमजीत धीमान, कैप्टन वेद प्रकाश, यशपाल कौशल, सीपीएस प्रधानाचार्य स्वदेश कुमारी, नरेश धीमान, विशन दास, सूबेदार अनिल कुमार, रिंकू, उपप्रधान बड़गांव ओम प्रकाश, एसएमसी प्रधान कुलदीप धीमान, उपप्रधान दिनेश कौशल, टूर्नामेंट प्रभारी संजय कुमार, डीपी हरीश कुमार, संजय कालिया, किशोरी लाल, महेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, पीईटी रविंद्र सिंह सहित दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कंगना ने मंडी में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों से विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर कड़े सवाल किए थे। उन्होंने पूछा था कि मंजूरी और पैसा मिलने के बावजूद कई काम जमीन पर क्यों नहीं उतर रहे। कंगना के इसी तेवर पर पलटवार करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सिर्फ आवाज ऊंची करने से आदेश सख्त नहीं बन जाते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासनिक कामकाज में कलम की एक स्याही ही काफी होती है। उनके बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई है। विक्रमादित्य सिंह ने कंगना की अधिकारियों के साथ बातचीत के तरीके पर भी सवाल उठाए। वहीं कंगना का फोकस मंडी संसदीय क्षेत्र में केंद्र की योजनाओं और सांसद निधि से जुड़े विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर है। बैठक के बाद संबंधित अधिकारियों ने इन परियोजनाओं की समीक्षा भी शुरू कर दी है। यानी मुद्दा विकास कार्यों की रफ्तार से शुरू हुआ, लेकिन अब मामला कंगना और विक्रमादित्य के बीच सियासी तकरार तक पहुंच गया है।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर दयोड़ से हणोगी के बीच बनी टनलों को लेकर बड़ी राहत की खबर है। NHAI अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने टनल का निरीक्षण किया और ट्रायल लिया। NHAI ने एक टनल को अगले कुछ दिनों में ट्रायल बेस पर यातायात के लिए खोलने की तैयारी की है। शुरुआत में इसी एक टनल से दोनों तरफ के वाहन चलाए जाएंगे। दूसरी टनल का काम बाद में पूरा किया जाएगा। हणोगी के पास पहाड़ी खिसकने से टनल के करीब 24 मीटर हिस्से को नुकसान पहुंचा था। इसकी मरम्मत पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। टनल खुलने से कुल्लू-मनाली जाने वाले लोगों को पुराने खतरनाक और भूस्खलन वाले हाईवे से काफी राहत मिलेगी। साथ ही सफर भी आसान और सुरक्षित होने की उम्मीद है। दशहरे से पहले टनल शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कांगड़ा: जसवां-परागपुर के चलाली में सोमवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां HRTC बस और बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में 20 वर्षीय कॉलेज छात्र दीपक भारद्वाज की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दीपक रोज की तरह बाइक पर ढलियारा स्थित शिक्षण संस्थान जा रहा था। चलाली के एक तीखे मोड़ पर उसकी बाइक सामने से आ रही HRTC बस से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक की मौके पर ही जान चली गई। सूचना मिलते ही मोइन पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए देहरा अस्पताल भेजा। पुलिस ने हादसे में शामिल HRTC बस को भी कब्जे में ले लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस जगह पर पहले भी हादसे हो चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से स्पीड ब्रेकर और चेतावनी वाले साइन बोर्ड लगाने की मांग की है, ताकि आगे ऐसे हादसे रोके जा सकें।
मंडी: पधर के गवाली कस्बे में शनिवार रात एक रेस्टोरेंट में बहस के बाद मारपीट हो गई। इसमें 32 वर्षीय अजय कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे पधर अस्पताल ले गए। वहां से हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे मंडी अस्पताल भेज दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता शेर सिंह ने तीन युवकों पर अजय के साथ मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने पिता की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज कर तीनों युवकों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अब घटना की पूरी वजह और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
धर्मशाला: घनियारा में करीब 84 कनाल सरकारी जमीन को कथित तौर पर इंतकाल के जरिए निजी लोगों के नाम कर दिया गया। बाद में जमीन के टुकड़े कर इन्हें दूसरे लोगों को बेच दिया गया। मामले में अब 42 खरीदार और लाभार्थी विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं। जांच के मुताबिक, करीब 3.24 हेक्टेयर जमीन मई 2019 में अलग-अलग इंतकाल के जरिए निजी नामों पर दर्ज की गई थी। इनमें 29 शुरुआती लाभार्थी और 13 बाद के खरीदार शामिल हैं। विजिलेंस को मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के संकेत मिले हैं। जमीन के रिकॉर्ड, इंतकाल और खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। मामले की शिकायत फरवरी 2025 में विजिलेंस को मिली थी। इसके बाद जनवरी 2026 में FIR दर्ज की गई। अब जांच आगे बढ़ाते हुए 42 लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है
शिमला: हिमाचल में कृषि उपकरणों पर सब्सिडी लेने वाले किसानों के लिए व्यवस्था बदल दी गई है। अब सिर्फ आवेदन करने से सब्सिडी मिलना तय नहीं होगा। अगर तय लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं तो कृषि विभाग लॉटरी के जरिए किसानों का चयन करेगा। पहले सब्सिडी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलती थी। नई व्यवस्था से किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि अब सब्सिडी मिलना किस्मत पर निर्भर हो गया है। एक किसान एक साल में अधिकतम दो कृषि उपकरणों के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद पांच साल तक दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा। योजना के तहत ट्रैक्टर, पावर टिलर, पावर वीडर, क्रॉप रीपर और रोटावेटर जैसे उपकरणों पर सब्सिडी दी जाती है। पात्र किसानों को उपकरणों पर 40 से 50 फीसदी तक अनुदान मिलता है। किसान नेताओं ने लॉटरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि सब्सिडी का लाभ आवेदन और जरूरत के आधार पर मिलना चाहिए, लॉटरी के भरोसे नहीं।
हिमाचल के कुछ जिलों में आज हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, ज्यादातर इलाकों में मौसम साफ रहेगा या आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। राहत की बात यह है कि आज किसी भी जिले में भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने बताया कि अगले कुछ दिनों में मानसून की गतिविधियां कम होने के आसार हैं। राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश होती रह सकती है। ऐसे में लोगों को पिछले दिनों के मुकाबले मौसम से राहत मिलने की उम्मीद है। शनिवार को राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य के करीब रहा। भुंतर में राज्य का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। वहीं, सुंदरनगर में 30.5, मंडी में 30.8, बिलासपुर में 32 डिग्री और ऊना में 30.8 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान रहा। राजधानी शिमला में अधिकतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, आज निचले और मध्यम पहाड़ी इलाकों में कुछ जगहों पर बारिश और गरज-चमक हो सकती है। हालांकि, भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं दी गई है। आने वाले दिनों में भी ज्यादातर इलाकों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। राज्य में पिछले दिनों हुई भारी बारिश के कारण कई जगहों पर सड़कें, बिजली और दूसरी सेवाओं पर असर पड़ा था। ऐसे में मौसम में सुधार से लोगों को राहत मिली है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में अचानक मौसम बदलने के आसार को देखते हुए लोगों को बारिश के दौरान सावधान रहने की सलाह दी गई है।
हिमाचल में सेब सीजन के बीच कैन खाद की कमी से बागवान परेशान हैं। कैन खाद से सेब के पौधों को जरूरी पोषण मिलता है। इसका उत्पादन बंद होने के बाद बागवानों को यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट और एनपीके जैसी दूसरी खाद इस्तेमाल करनी पड़ रही है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने यह मामला केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सामने उठाया है। उन्होंने कैन खाद का उत्पादन और सप्लाई जल्द शुरू करने की मांग की है। रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब का कारोबार हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है और इससे हर साल करीब 6 हजार करोड़ रुपये का योगदान होता है। ऐसे में बागवानों को समय पर सस्ती खाद मिलना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक यूरिया इस्तेमाल करने से जमीन की गुणवत्ता और सेब के पेड़ों पर असर पड़ सकता है। जेपी नड्डा ने भरोसा दिया है कि मामले को देखा जा रहा है और बागवानों के हित में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सोलन शहर में बदमाशो के हौंसले बुलंद होते जा रहे है। दो दिन में दो बड़ी वारदात सामने आई है। शुक्रवार रात शहर के चौक बाजार में चाकुबाजी में कालका निवासी एक युवक की जान चली गई , एक युवक की उंगली कटी है और एक के सिर पर हमला हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और तफ्तीश जारी है। इससे पहले वीरवार रात शहर में मुख्य बाजार मॉल रोड पर एक शराब के ठेके पर काम करने वाले सेल्समैन पर दो युवकों ने बेलचे से हमला कर दिया था। उक्त सेल्समैन की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। इस पूरे मामले पर एसपी सोलन ने क्या कहा, आपको सुनाते है ..
हिमाचल विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के 177 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। कई जगह बच्चे पंचायत भवन, रेस्ट हाउस, सामुदायिक केंद्र और दूसरे स्कूलों के कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि 12 स्कूलों के भवन प्राकृतिक आपदा के कारण असुरक्षित हो चुके हैं। 28 स्कूलों के नए भवन बन रहे हैं, जबकि 14 के लिए पैसा जारी किया जा चुका है। बाकी स्कूलों के लिए जमीन की समस्या बड़ी अड़चन बनी हुई है। वहीं, पिछले तीन साल में बंद हुए 1,526 स्कूलों में से 1,473 भवन आज भी शिक्षा विभाग के पास हैं। इनमें से 577 भवन दूसरे विभागों और संस्थाओं को इस्तेमाल के लिए दे दिए गए हैं। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर चंबा के कुनरा स्कूल की है, जहां 99 बच्चे फिलहाल रेस्ट हाउस के महज चार कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं
दयानन्द आदर्श स्कूल द्वारा आर्य समाज भवन में श्री कृष्ण का जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान प्रिंसिपल ऊषा मित्तल के नेतृत्व में हवन आयोजित किया गया जिसको पुरोहित पवन शास्त्री द्वारा सफलता पूर्वक पूर्ण किया गया। प्रिंसिपल उषा मित्तल ने बताया की इस अवसर पर दयानंद आदर्श विद्यालय के सहमंत्री मिस्टर मलिक, जॉइंट सेक्रेटरी रत्नेश वार्ष्णेय व आर्य समाज के अन्य अधिकारी गण भी मौजूद थे। इस उपलक्ष पर पवन शास्त्री ने छात्रों को योगीराज श्री कृष्ण जी के महान व्यक्तित्व से अवगत करवाया। ऊषा मित्तल ने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि योगीराज श्री कृष्ण एक महान योद्धा, राजनीतिज्ञ, दयालु ,दूरदर्शी व सच्चे मित्र थे। एक राजा होकर भी उन्होंने अपने बचपन के गरीब मित्र सुदामा की सहायता की। श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, व उसे कर्म करने और धर्म व सत्य की रक्षा के लिए युद्ध करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर + 2 की छात्रा वंशिका ने 'इम्मोर्टल रोल ऑफ श्री कृष्णा इन हिस्ट्री' विषय पर व नयननीशा ने 'श्रीकृष्ण कर्म योगी के रूप में' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कक्षा 6 व 7के छात्र छात्राओं द्वारा एक भजन की प्रस्तुति दी गई, जिसमें अनन्य , आलिया , शिवेन , आरुष अरमान,अयान, शिवांश सुहान छात्रों ने भाग लिया। इस उपलक्ष पर कृष्ण सुदामा की मित्रता पर एक लघु नाटक के माध्यम से एक भजन भी प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम का मंचन दिव्यांश और दीपिका द्वारा किया गया।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आबकारी विभाग की बकाया वसूली को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विभाग के 558.50 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में महज 62.11 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। विधायक संजय अवस्थी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में यह आंकड़ा सदन के पटल पर रखा। सरकार अब बकायादारों पर सिर्फ नोटिस नहीं, सीधा शिकंजा कसने की तैयारी में है। बकाया नहीं चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क करने से लेकर जरूरत पड़ने पर नीलामी तक की कार्रवाई होगी। संबंधित तहसीलदारों को कुर्की वारंट भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आबकारी विभाग की NOC के बिना बकायादारों को सरकारी काम न देने और उनका भुगतान रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। कांगड़ा के शाहपुर में एक बकायादार लाइसेंसी की जमीन नीलाम कर 2.51 लाख रुपये वसूले गए, जबकि दो अन्य मामलों में 27 लाख रुपये की वसूली हुई। डीए पर भी सरकार ने खोला पत्ता इसी बीच विधानसभा में सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी। सुखराम चौधरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि डीए की दर कंपनी के हिसाब से नहीं, बल्कि कर्मचारी की पेंशन योजना के आधार पर तय होती है। NPS कर्मचारियों को 60% जबकि OPS और EPF कर्मचारियों को 45% डीए मिल रहा है। यानी विधानसभा में एक तरफ 558 करोड़ की वसूली का बड़ा सवाल गूंजा, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के डीए को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय में कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात मिली है। सचिवालय में कार्यरत 18 सीनियर असिस्टेंट को सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के पद पर पदोन्नति दी गई है। इस प्रमोशन के बाद अब ये कर्मचारी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेशों के तहत इन कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे सीनियर असिस्टेंट अब सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के तौर पर विभागीय कामकाज को आगे बढ़ाएंगे। प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों में भी खुशी का माहौल है। नई जिम्मेदारी के तहत पदोन्नत कर्मचारियों को कार्यालयी कार्यों की निगरानी, फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण काम संभालने होंगे। इससे सचिवालय के कामकाज में भी जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा होने की उम्मीद है। प्रमोशन को कर्मचारियों के अनुभव और सेवाओं की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों ने इसे अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को संपन्न हो गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक चला। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर भी सत्र की यही अवधि दर्ज है। करीब दो सप्ताह चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विभिन्न जनहित के मुद्दे सदन में उठाए गए और सरकार की ओर से कई मामलों पर जवाब दिए गए। सत्र की कुल कार्यवाही 45 घंटे 30 मिनट चली। इस दौरान विधायी कामकाज के साथ प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कई मौकों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के फैसलों और नीतियों का बचाव किया। विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर घमासान सत्र के अंतिम दिन हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन ने पारित किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक को पेश किया। भाजपा विधायकों ने इसका विरोध करते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए। सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, जबकि शैक्षणिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया जाएगा। विपक्ष ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया। मानसून सत्र की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई थी। पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी हुई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। सत्र के दौरान प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा और अन्य संसदीय कार्यवाही के जरिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाए। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर सत्र की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। 45 घंटे 30 मिनट की बहस, हंगामे और विधायी कामकाज के बाद अब विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।
धर्मपुर क्षेत्र के जाबली में गुरुवार सुबह तेज बारिश के दौरान अचानक भारी मात्रा में पानी दुकान की ओर आ गया। पानी का तेज बहाव देखकर दुकान में मौजूद दुकानदार ने बिना देर किए बाहर भागकर अपनी जान बचाई! घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दुकानदार जैसे ही दुकान से बाहर निकलता है, उसके कुछ ही सेकंड बाद दुकान के ऊपर से पानी का तेज सैलाब नीचे की ओर आता है। अचानक आए पानी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि सुबह हुई भारी बारिश के बाद जाबली और आसपास के इलाकों में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई। फोरलेन की ओर से बहकर आया बारिश का पानी दुकानों तक पहुंच गया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बारिश के कारण धर्मपुर क्षेत्र में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर पानी और मलबे के कारण आवाजाही बाधित हुई है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। जाबली की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के दौरान कुछ ही मिनटों में हालात किस तरह खतरनाक हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर जारी वित्तीय खींचतान के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि RDG नहीं मिलने के बावजूद सरकार पेंशन एरियर का भुगतान धीरे-धीरे कर रही है और कर्मचारियों को ध्यान में रखकर भुगतान या कोई फैसला नहीं रोका जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति को कर्मचारियों और पेंशनरों को भी समझना होगा। उनका कहना है कि राज्य की राजस्व स्थिति पर दबाव है, लेकिन सरकार उपलब्ध संसाधनों से कर्मचारियों के बकाया हकों का भुगतान कर रही है। सुक्खू ने पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले करीब 50 हजार सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को केवल 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया था। मौजूदा सरकार RDG नहीं मिलने के बावजूद चरणबद्ध तरीके से एरियर चुका रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों का पूरा एरियर दिया जा चुका है। वहीं सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी लंबित पेंशन एरियर का भुगतान किया गया है। ग्रुप-III कर्मचारियों को जनवरी 2016 से 31 मार्च 2022 तक के बकाया का करीब 55 से 57 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है, जबकि ग्रुप-IV कर्मचारियों को 20 हजार रुपये दिए गए हैं। ग्रुप-I और ग्रुप-II कर्मचारियों व अधिकारियों के जनवरी 2016 से देय एरियर का करीब 15 प्रतिशत भुगतान किया गया है। सुक्खू सरकार लगातार RDG बंद होने को प्रदेश की वित्तीय मुश्किलों की बड़ी वजह बता रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार RDG बंद होने से हिमाचल को हर साल करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों को जुटाकर कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को आगे भी जारी रखा जाएगा। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वित्तीय स्थिति सुधरने के साथ कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों को उनका बकाया हक दिया जाएगा।
कांगड़ा के लंबागांव खंड की तलवाड़ पंचायत के लाहड़ गांव निवासी सुभाष चंद को राज्य शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। करीब दो दशक से कंप्यूटर शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे सुभाष चंद को 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता सम्मानित करेंगे सुभाष चंद वर्तमान में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (श्रेणी-ए), मंडी में कंप्यूटर प्रशिक्षण अनुदेशक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में मंडी से अपने शिक्षण करियर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में करीब दो वर्ष तक केंद्रीय विद्यालय मंडी में विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा देने के बाद वर्ष 2006 में हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग के तहत सेवाएं शुरू कीं। लगभग 20 वर्षों की इस शिक्षण यात्रा में उन्होंने हजारों युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल प्रदान किए। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले कई विद्यार्थी आज हिमाचल प्रदेश और केंद्र सरकार, सरकारी बैंकों के अलावा निजी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। सुभाष चंद तकनीक में लगातार हो रहे बदलावों के साथ खुद को अपडेट करते रहे और विद्यार्थियों को आधुनिक कंप्यूटर तकनीक व रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले एक प्रशिक्षु ने इस साल जिला स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में मंडी में पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी उसने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस उपलब्धि पर विभाग की ओर से सुभाष चंद को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। निर्वाचन और सामाजिक जिम्मेदारियों में भी आगे शिक्षण के साथ सुभाष चंद ने सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। मतदाता जागरूकता और निर्वाचन संबंधी कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2022 और 2024 में दो बार प्रशस्ति पत्र मिल चुका है। उन्होंने युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने में भी भूमिका निभाई। इसके अलावा मंडी में आयोजित अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया के दौरान भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई, जिसके लिए सेना भर्ती कार्यालय मंडी की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन पर राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान मंडी के प्रधानाचार्य अभियंता अजेश कुमार सहित तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और विभाग के निदेशक रोहित राठौर ने उन्हें बधाई दी है। संस्थान के स्टाफ ने भी इसे सुभाष चंद की मेहनत के साथ-साथ पूरे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया। सुभाष चंद का कहना है कि शिक्षण उनके लिए महज नौकरी नहीं, बल्कि समाज और युवा पीढ़ी की सेवा का माध्यम है। उनके राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन से लाहड़ गांव, तलवाड़ पंचायत और पूरे लंबागांव क्षेत्र में खुशी का माहौल
जिले में स्वच्छता व्यवस्था की बदहाली का एक मामला सामने आया है। सरकारी राशन के गोदाम के बाहर सीवरेज का गंदा पानी बहता नजर आ रहा है, जबकि इसी परिसर के अंदर सरकारी राशन का भंडारण किया जा रहा है। हालातों ने स्वच्छता और राशन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीवरेज के पानी और गंदगी के कारण गोदाम के आसपास बदबू और अस्वच्छ माहौल बना हुआ है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जहां आम लोगों के लिए वितरित होने वाला सरकारी राशन रखा जाता है, वहां साफ-सफाई और स्वच्छता के इंतजाम इतने बदहाल कैसे हो सकते हैं? मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि सीवरेज की समस्या का जल्द समाधान किया जाए और राशन के भंडारण स्थल की साफ-सफाई व सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। फिलहाल यह मामला सरकारी व्यवस्थाओं और स्वच्छता इंतजामों पर सवाल खड़े कर रहा है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से नाबालिग से जुड़े एक गंभीर मामले ने सनसनी फैला दी है। 14 वर्षीय नाबालिग के लापता होने और कथित यौन अपराध के मामले में महिला पुलिस थाना कुल्लू में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने नाबालिग के बयान के आधार पर मनाली निवासी 25 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, नाबालिग 26 अगस्त 2026 से घर से लापता थी। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान 1 सितंबर को नाबालिग को भुंतर स्थित एक मंदिर के पास से बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए। पुलिस को दिए बयान में नाबालिग ने आरोप लगाया कि मनाली निवासी 25 वर्षीय युवक उसे अपने साथ एक होटल में ले गया था। उसके अनुसार, वह करीब छह दिनों तक होटल में रही और इसी दौरान युवक ने उसके साथ कथित तौर पर यौन अपराध किया। नाबालिग की शिकायत और बयान के आधार पर महिला पुलिस थाना कुल्लू में भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस ने नाबालिग का क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में चिकित्सीय परीक्षण करवाया है। अब पुलिस मामले से जुड़े होटल, घटनाक्रम और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसपी कुल्लू अभिषेक एस ने मामले की पुष्टि की है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है और आरोपी से पूछताछ जारी है।
सोलन: हिमाचल प्रदेश के फार्मा हब बद्दी-नालागढ़ में नशे के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बड़ी कार्रवाई की है। NCB की चंडीगढ़ यूनिट ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 25 लाख नशीली/आदत लगाने वाली दवाओं की गोलियां और 2,000 किलोग्राम से अधिक टैपेंटाडोल बरामद किया है। यह कार्रवाई सोमवार देर रात शुरू हुई और मंगलवार शाम तक जारी रही। NCB टीम ने नालागढ़ के जगातखाना गांव में किराये पर ली गई तीन दुकानों और बद्दी स्थित एक अनधिकृत गोदाम समेत कई स्थानों की तलाशी ली। कार्रवाई में हिमाचल प्रदेश राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन के छह ड्रग इंस्पेक्टर और पंजाब पुलिस के एक विशेषज्ञ ने भी सहयोग किया। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। छापेमारी के बाद NCB ने फार्मा कंपनी के मालिक गौरव अग्रवाल को बद्दी स्थित उसके आवास से हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई के दौरान करीब 25 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए। एजेंसी अब दवाओं के निर्माण, भंडारण और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। NCB को शक है कि वैध चिकित्सा इस्तेमाल के लिए बनाई जाने वाली दवाओं को कथित तौर पर अवैध बाजार में पहुंचाने वाला बहुराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग डायवर्जन नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसी दवाओं की सप्लाई, खरीद-बिक्री, वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल को भी खंगाल रही है। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में नशीली और नकली दवाओं को लेकर पहले भी कई बड़ी कार्रवाई हो चुकी हैं। हाल के दिनों में भी बड़ी मात्रा में नशीली गोलियां और दवाएं बरामद की गई हैं। इससे फार्मा हब में दवाओं के कथित अवैध डायवर्जन को लेकर सुरक्षा और नियामक एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल NCB की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं कहां सप्लाई की जानी थीं और इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पांवटा साहिब (सिरमौर): सिविल अस्पताल पांवटा साहिब की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है जानकारी के मुताबिक, गिरिपार क्षेत्र के बाईला-गुजोन गांव की मुंगा देवी अस्पताल के फीमेल वार्ड में उपचाराधीन हैं। परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे उनका ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी स्टाफ से नया सिलिंडर लगाने का आग्रह किया, लेकिन करीब 5 बजे तक ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान वृद्धा को सांस लेने में परेशानी होती रही। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने दोबारा ऑक्सीजन लगाने की मांग की तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और पुलिस बुलाने की धमकी दी गई। एक शिकायत में तीमारदारों को वार्ड के दरवाजे से बाहर धक्का देने और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिजनों का दावा है कि कथित बदसलूकी की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उनके पास है। अस्पताल में तत्काल सुनवाई नहीं होने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और ऑक्सीजन सिलिंडर बदलकर वृद्धा को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई गई। मामले को लेकर परिजनों ने अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नाहन डॉ. राकेश प्रताप ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो इसकी जानकारी जुटाकर तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में ऑक्सीजन उपलब्द करवाने में हुई देरी और नर्स पर लगाए गए बदसलूकी के आरोपों की जांच बाकी है I सम्बंधित स्टाफ पक्ष सामने आने के बाद ही स्तिथि पूरी तरह स्पष्ट होगी I
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार ने विधेयक को विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है। विधेयक के तहत प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है। शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC के माध्यम से और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार की ओर से अधिसूचित एजेंसी के जरिए किए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की कमान वित्त सचिव को देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा। वहीं BJP ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विपक्ष का तर्क है कि विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है और सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस विधेयक के दायरे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर और अटल मेडिकल रिसर्च विश्वविद्यालय नेरचौक शामिल हैं l अब सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा खासा गरमाने के आसार हैं कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के नाम पर सरकारी निगरानी कितनी होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कैसे बरकरार रखी जाए।


















































