हिमाचल में सेब सीजन के बीच कैन खाद की कमी से बागवान परेशान हैं। कैन खाद से सेब के पौधों को जरूरी पोषण मिलता है। इसका उत्पादन बंद होने के बाद बागवानों को यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट और एनपीके जैसी दूसरी खाद इस्तेमाल करनी पड़ रही है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने यह मामला केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सामने उठाया है। उन्होंने कैन खाद का उत्पादन और सप्लाई जल्द शुरू करने की मांग की है। रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब का कारोबार हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है और इससे हर साल करीब 6 हजार करोड़ रुपये का योगदान होता है। ऐसे में बागवानों को समय पर सस्ती खाद मिलना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक यूरिया इस्तेमाल करने से जमीन की गुणवत्ता और सेब के पेड़ों पर असर पड़ सकता है। जेपी नड्डा ने भरोसा दिया है कि मामले को देखा जा रहा है और बागवानों के हित में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सोलन शहर में बदमाशो के हौंसले बुलंद होते जा रहे है। दो दिन में दो बड़ी वारदात सामने आई है। शुक्रवार रात शहर के चौक बाजार में चाकुबाजी में कालका निवासी एक युवक की जान चली गई , एक युवक की उंगली कटी है और एक के सिर पर हमला हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और तफ्तीश जारी है। इससे पहले वीरवार रात शहर में मुख्य बाजार मॉल रोड पर एक शराब के ठेके पर काम करने वाले सेल्समैन पर दो युवकों ने बेलचे से हमला कर दिया था। उक्त सेल्समैन की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। इस पूरे मामले पर एसपी सोलन ने क्या कहा, आपको सुनाते है ..
हिमाचल विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के 177 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। कई जगह बच्चे पंचायत भवन, रेस्ट हाउस, सामुदायिक केंद्र और दूसरे स्कूलों के कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि 12 स्कूलों के भवन प्राकृतिक आपदा के कारण असुरक्षित हो चुके हैं। 28 स्कूलों के नए भवन बन रहे हैं, जबकि 14 के लिए पैसा जारी किया जा चुका है। बाकी स्कूलों के लिए जमीन की समस्या बड़ी अड़चन बनी हुई है। वहीं, पिछले तीन साल में बंद हुए 1,526 स्कूलों में से 1,473 भवन आज भी शिक्षा विभाग के पास हैं। इनमें से 577 भवन दूसरे विभागों और संस्थाओं को इस्तेमाल के लिए दे दिए गए हैं। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर चंबा के कुनरा स्कूल की है, जहां 99 बच्चे फिलहाल रेस्ट हाउस के महज चार कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं
दयानन्द आदर्श स्कूल द्वारा आर्य समाज भवन में श्री कृष्ण का जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान प्रिंसिपल ऊषा मित्तल के नेतृत्व में हवन आयोजित किया गया जिसको पुरोहित पवन शास्त्री द्वारा सफलता पूर्वक पूर्ण किया गया। प्रिंसिपल उषा मित्तल ने बताया की इस अवसर पर दयानंद आदर्श विद्यालय के सहमंत्री मिस्टर मलिक, जॉइंट सेक्रेटरी रत्नेश वार्ष्णेय व आर्य समाज के अन्य अधिकारी गण भी मौजूद थे। इस उपलक्ष पर पवन शास्त्री ने छात्रों को योगीराज श्री कृष्ण जी के महान व्यक्तित्व से अवगत करवाया। ऊषा मित्तल ने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि योगीराज श्री कृष्ण एक महान योद्धा, राजनीतिज्ञ, दयालु ,दूरदर्शी व सच्चे मित्र थे। एक राजा होकर भी उन्होंने अपने बचपन के गरीब मित्र सुदामा की सहायता की। श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, व उसे कर्म करने और धर्म व सत्य की रक्षा के लिए युद्ध करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर + 2 की छात्रा वंशिका ने 'इम्मोर्टल रोल ऑफ श्री कृष्णा इन हिस्ट्री' विषय पर व नयननीशा ने 'श्रीकृष्ण कर्म योगी के रूप में' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कक्षा 6 व 7के छात्र छात्राओं द्वारा एक भजन की प्रस्तुति दी गई, जिसमें अनन्य , आलिया , शिवेन , आरुष अरमान,अयान, शिवांश सुहान छात्रों ने भाग लिया। इस उपलक्ष पर कृष्ण सुदामा की मित्रता पर एक लघु नाटक के माध्यम से एक भजन भी प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम का मंचन दिव्यांश और दीपिका द्वारा किया गया।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आबकारी विभाग की बकाया वसूली को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विभाग के 558.50 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में महज 62.11 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। विधायक संजय अवस्थी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में यह आंकड़ा सदन के पटल पर रखा। सरकार अब बकायादारों पर सिर्फ नोटिस नहीं, सीधा शिकंजा कसने की तैयारी में है। बकाया नहीं चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क करने से लेकर जरूरत पड़ने पर नीलामी तक की कार्रवाई होगी। संबंधित तहसीलदारों को कुर्की वारंट भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आबकारी विभाग की NOC के बिना बकायादारों को सरकारी काम न देने और उनका भुगतान रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। कांगड़ा के शाहपुर में एक बकायादार लाइसेंसी की जमीन नीलाम कर 2.51 लाख रुपये वसूले गए, जबकि दो अन्य मामलों में 27 लाख रुपये की वसूली हुई। डीए पर भी सरकार ने खोला पत्ता इसी बीच विधानसभा में सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी। सुखराम चौधरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि डीए की दर कंपनी के हिसाब से नहीं, बल्कि कर्मचारी की पेंशन योजना के आधार पर तय होती है। NPS कर्मचारियों को 60% जबकि OPS और EPF कर्मचारियों को 45% डीए मिल रहा है। यानी विधानसभा में एक तरफ 558 करोड़ की वसूली का बड़ा सवाल गूंजा, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के डीए को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय में कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात मिली है। सचिवालय में कार्यरत 18 सीनियर असिस्टेंट को सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के पद पर पदोन्नति दी गई है। इस प्रमोशन के बाद अब ये कर्मचारी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेशों के तहत इन कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे सीनियर असिस्टेंट अब सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के तौर पर विभागीय कामकाज को आगे बढ़ाएंगे। प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों में भी खुशी का माहौल है। नई जिम्मेदारी के तहत पदोन्नत कर्मचारियों को कार्यालयी कार्यों की निगरानी, फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण काम संभालने होंगे। इससे सचिवालय के कामकाज में भी जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा होने की उम्मीद है। प्रमोशन को कर्मचारियों के अनुभव और सेवाओं की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों ने इसे अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को संपन्न हो गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक चला। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर भी सत्र की यही अवधि दर्ज है। करीब दो सप्ताह चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विभिन्न जनहित के मुद्दे सदन में उठाए गए और सरकार की ओर से कई मामलों पर जवाब दिए गए। सत्र की कुल कार्यवाही 45 घंटे 30 मिनट चली। इस दौरान विधायी कामकाज के साथ प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कई मौकों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के फैसलों और नीतियों का बचाव किया। विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर घमासान सत्र के अंतिम दिन हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन ने पारित किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक को पेश किया। भाजपा विधायकों ने इसका विरोध करते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए। सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, जबकि शैक्षणिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया जाएगा। विपक्ष ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया। मानसून सत्र की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई थी। पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी हुई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। सत्र के दौरान प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा और अन्य संसदीय कार्यवाही के जरिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाए। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर सत्र की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। 45 घंटे 30 मिनट की बहस, हंगामे और विधायी कामकाज के बाद अब विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।
धर्मपुर क्षेत्र के जाबली में गुरुवार सुबह तेज बारिश के दौरान अचानक भारी मात्रा में पानी दुकान की ओर आ गया। पानी का तेज बहाव देखकर दुकान में मौजूद दुकानदार ने बिना देर किए बाहर भागकर अपनी जान बचाई! घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दुकानदार जैसे ही दुकान से बाहर निकलता है, उसके कुछ ही सेकंड बाद दुकान के ऊपर से पानी का तेज सैलाब नीचे की ओर आता है। अचानक आए पानी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि सुबह हुई भारी बारिश के बाद जाबली और आसपास के इलाकों में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई। फोरलेन की ओर से बहकर आया बारिश का पानी दुकानों तक पहुंच गया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बारिश के कारण धर्मपुर क्षेत्र में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर पानी और मलबे के कारण आवाजाही बाधित हुई है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। जाबली की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के दौरान कुछ ही मिनटों में हालात किस तरह खतरनाक हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर जारी वित्तीय खींचतान के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि RDG नहीं मिलने के बावजूद सरकार पेंशन एरियर का भुगतान धीरे-धीरे कर रही है और कर्मचारियों को ध्यान में रखकर भुगतान या कोई फैसला नहीं रोका जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति को कर्मचारियों और पेंशनरों को भी समझना होगा। उनका कहना है कि राज्य की राजस्व स्थिति पर दबाव है, लेकिन सरकार उपलब्ध संसाधनों से कर्मचारियों के बकाया हकों का भुगतान कर रही है। सुक्खू ने पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले करीब 50 हजार सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को केवल 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया था। मौजूदा सरकार RDG नहीं मिलने के बावजूद चरणबद्ध तरीके से एरियर चुका रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों का पूरा एरियर दिया जा चुका है। वहीं सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी लंबित पेंशन एरियर का भुगतान किया गया है। ग्रुप-III कर्मचारियों को जनवरी 2016 से 31 मार्च 2022 तक के बकाया का करीब 55 से 57 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है, जबकि ग्रुप-IV कर्मचारियों को 20 हजार रुपये दिए गए हैं। ग्रुप-I और ग्रुप-II कर्मचारियों व अधिकारियों के जनवरी 2016 से देय एरियर का करीब 15 प्रतिशत भुगतान किया गया है। सुक्खू सरकार लगातार RDG बंद होने को प्रदेश की वित्तीय मुश्किलों की बड़ी वजह बता रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार RDG बंद होने से हिमाचल को हर साल करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों को जुटाकर कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को आगे भी जारी रखा जाएगा। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वित्तीय स्थिति सुधरने के साथ कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों को उनका बकाया हक दिया जाएगा।
कांगड़ा के लंबागांव खंड की तलवाड़ पंचायत के लाहड़ गांव निवासी सुभाष चंद को राज्य शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। करीब दो दशक से कंप्यूटर शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे सुभाष चंद को 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता सम्मानित करेंगे सुभाष चंद वर्तमान में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (श्रेणी-ए), मंडी में कंप्यूटर प्रशिक्षण अनुदेशक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में मंडी से अपने शिक्षण करियर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में करीब दो वर्ष तक केंद्रीय विद्यालय मंडी में विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा देने के बाद वर्ष 2006 में हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा विभाग के तहत सेवाएं शुरू कीं। लगभग 20 वर्षों की इस शिक्षण यात्रा में उन्होंने हजारों युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल प्रदान किए। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले कई विद्यार्थी आज हिमाचल प्रदेश और केंद्र सरकार, सरकारी बैंकों के अलावा निजी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। सुभाष चंद तकनीक में लगातार हो रहे बदलावों के साथ खुद को अपडेट करते रहे और विद्यार्थियों को आधुनिक कंप्यूटर तकनीक व रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले एक प्रशिक्षु ने इस साल जिला स्तरीय कौशल प्रतियोगिता में मंडी में पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी उसने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस उपलब्धि पर विभाग की ओर से सुभाष चंद को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। निर्वाचन और सामाजिक जिम्मेदारियों में भी आगे शिक्षण के साथ सुभाष चंद ने सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। मतदाता जागरूकता और निर्वाचन संबंधी कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2022 और 2024 में दो बार प्रशस्ति पत्र मिल चुका है। उन्होंने युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने में भी भूमिका निभाई। इसके अलावा मंडी में आयोजित अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया के दौरान भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई, जिसके लिए सेना भर्ती कार्यालय मंडी की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन पर राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान मंडी के प्रधानाचार्य अभियंता अजेश कुमार सहित तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और विभाग के निदेशक रोहित राठौर ने उन्हें बधाई दी है। संस्थान के स्टाफ ने भी इसे सुभाष चंद की मेहनत के साथ-साथ पूरे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया। सुभाष चंद का कहना है कि शिक्षण उनके लिए महज नौकरी नहीं, बल्कि समाज और युवा पीढ़ी की सेवा का माध्यम है। उनके राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन से लाहड़ गांव, तलवाड़ पंचायत और पूरे लंबागांव क्षेत्र में खुशी का माहौल
जिले में स्वच्छता व्यवस्था की बदहाली का एक मामला सामने आया है। सरकारी राशन के गोदाम के बाहर सीवरेज का गंदा पानी बहता नजर आ रहा है, जबकि इसी परिसर के अंदर सरकारी राशन का भंडारण किया जा रहा है। हालातों ने स्वच्छता और राशन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीवरेज के पानी और गंदगी के कारण गोदाम के आसपास बदबू और अस्वच्छ माहौल बना हुआ है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जहां आम लोगों के लिए वितरित होने वाला सरकारी राशन रखा जाता है, वहां साफ-सफाई और स्वच्छता के इंतजाम इतने बदहाल कैसे हो सकते हैं? मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि सीवरेज की समस्या का जल्द समाधान किया जाए और राशन के भंडारण स्थल की साफ-सफाई व सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। फिलहाल यह मामला सरकारी व्यवस्थाओं और स्वच्छता इंतजामों पर सवाल खड़े कर रहा है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से नाबालिग से जुड़े एक गंभीर मामले ने सनसनी फैला दी है। 14 वर्षीय नाबालिग के लापता होने और कथित यौन अपराध के मामले में महिला पुलिस थाना कुल्लू में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने नाबालिग के बयान के आधार पर मनाली निवासी 25 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, नाबालिग 26 अगस्त 2026 से घर से लापता थी। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान 1 सितंबर को नाबालिग को भुंतर स्थित एक मंदिर के पास से बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए। पुलिस को दिए बयान में नाबालिग ने आरोप लगाया कि मनाली निवासी 25 वर्षीय युवक उसे अपने साथ एक होटल में ले गया था। उसके अनुसार, वह करीब छह दिनों तक होटल में रही और इसी दौरान युवक ने उसके साथ कथित तौर पर यौन अपराध किया। नाबालिग की शिकायत और बयान के आधार पर महिला पुलिस थाना कुल्लू में भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस ने नाबालिग का क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में चिकित्सीय परीक्षण करवाया है। अब पुलिस मामले से जुड़े होटल, घटनाक्रम और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसपी कुल्लू अभिषेक एस ने मामले की पुष्टि की है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है और आरोपी से पूछताछ जारी है।
सोलन: हिमाचल प्रदेश के फार्मा हब बद्दी-नालागढ़ में नशे के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बड़ी कार्रवाई की है। NCB की चंडीगढ़ यूनिट ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 25 लाख नशीली/आदत लगाने वाली दवाओं की गोलियां और 2,000 किलोग्राम से अधिक टैपेंटाडोल बरामद किया है। यह कार्रवाई सोमवार देर रात शुरू हुई और मंगलवार शाम तक जारी रही। NCB टीम ने नालागढ़ के जगातखाना गांव में किराये पर ली गई तीन दुकानों और बद्दी स्थित एक अनधिकृत गोदाम समेत कई स्थानों की तलाशी ली। कार्रवाई में हिमाचल प्रदेश राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन के छह ड्रग इंस्पेक्टर और पंजाब पुलिस के एक विशेषज्ञ ने भी सहयोग किया। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। छापेमारी के बाद NCB ने फार्मा कंपनी के मालिक गौरव अग्रवाल को बद्दी स्थित उसके आवास से हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई के दौरान करीब 25 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए। एजेंसी अब दवाओं के निर्माण, भंडारण और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। NCB को शक है कि वैध चिकित्सा इस्तेमाल के लिए बनाई जाने वाली दवाओं को कथित तौर पर अवैध बाजार में पहुंचाने वाला बहुराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग डायवर्जन नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसी दवाओं की सप्लाई, खरीद-बिक्री, वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल को भी खंगाल रही है। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में नशीली और नकली दवाओं को लेकर पहले भी कई बड़ी कार्रवाई हो चुकी हैं। हाल के दिनों में भी बड़ी मात्रा में नशीली गोलियां और दवाएं बरामद की गई हैं। इससे फार्मा हब में दवाओं के कथित अवैध डायवर्जन को लेकर सुरक्षा और नियामक एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल NCB की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं कहां सप्लाई की जानी थीं और इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पांवटा साहिब (सिरमौर): सिविल अस्पताल पांवटा साहिब की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है जानकारी के मुताबिक, गिरिपार क्षेत्र के बाईला-गुजोन गांव की मुंगा देवी अस्पताल के फीमेल वार्ड में उपचाराधीन हैं। परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे उनका ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी स्टाफ से नया सिलिंडर लगाने का आग्रह किया, लेकिन करीब 5 बजे तक ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान वृद्धा को सांस लेने में परेशानी होती रही। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने दोबारा ऑक्सीजन लगाने की मांग की तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और पुलिस बुलाने की धमकी दी गई। एक शिकायत में तीमारदारों को वार्ड के दरवाजे से बाहर धक्का देने और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिजनों का दावा है कि कथित बदसलूकी की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उनके पास है। अस्पताल में तत्काल सुनवाई नहीं होने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और ऑक्सीजन सिलिंडर बदलकर वृद्धा को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई गई। मामले को लेकर परिजनों ने अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नाहन डॉ. राकेश प्रताप ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो इसकी जानकारी जुटाकर तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में ऑक्सीजन उपलब्द करवाने में हुई देरी और नर्स पर लगाए गए बदसलूकी के आरोपों की जांच बाकी है I सम्बंधित स्टाफ पक्ष सामने आने के बाद ही स्तिथि पूरी तरह स्पष्ट होगी I
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार ने विधेयक को विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है। विधेयक के तहत प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है। शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC के माध्यम से और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार की ओर से अधिसूचित एजेंसी के जरिए किए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की कमान वित्त सचिव को देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा। वहीं BJP ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विपक्ष का तर्क है कि विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है और सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस विधेयक के दायरे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर और अटल मेडिकल रिसर्च विश्वविद्यालय नेरचौक शामिल हैं l अब सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा खासा गरमाने के आसार हैं कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के नाम पर सरकारी निगरानी कितनी होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कैसे बरकरार रखी जाए।
धर्मशाला: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की अलग से गणना करवाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने बुधवार को धर्मशाला में जोरदार प्रदर्शन किया। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता डीसी कार्यालय के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन से पहले मोर्चा की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें केंद्र सरकार से OBC की वैज्ञानिक, प्रमाणिक और अलग गणना करवाने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में OBC की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने आना बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि सही आंकड़े मिलने के बाद शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहतर नीतियां तैयार की जा सकेंगी। मोर्चा ने मांग रखी कि जिस तरह SC और ST की जनगणना की जाती है, उसी तर्ज पर OBC की भी अलग से गणना हो। इसके साथ ही प्रत्येक जाति के लिए अलग और विशिष्ट कोड निर्धारित करने तथा ओपन कॉलम की जगह मानकीकृत व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। OBC विशेष वर्ग से महेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि जनगणना में OBC की वास्तविक संख्या दर्ज होना सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जातिवार आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की भी मांग उठाई।
धर्मशाला: तिब्बती लोकतंत्र की स्थापना के 66 वर्ष पूरे होने पर धर्मशाला में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में हुए इस कार्यक्रम में तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास और परम पावन दलाई लामा के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से मेधावी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही तिब्बती कलाकारों और बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग भर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद लोगों का खूब ध्यान खींचा। कार्यक्रम के दौरान तिब्बती संस्कृति, परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग पेपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती लोकतंत्र दलाई लामा की दूरदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक लोकतंत्र के इन मूल्यों को पहुंचाना सभी तिब्बतियों की जिम्मेदारी है। बताया गया कि 2 सितंबर 1960 को पहली तिब्बती जनप्रतिनिधि सभा के गठन के साथ तिब्बती लोकतांत्रिक सरकार की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1991 में निर्वासित तिब्बती प्रशासन को लिखित संविधान आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदला गया और वर्ष 2001 से राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के अंत में निर्वासित तिब्बती संसद ने भारत सरकार और भारतीय जनता के सहयोग के लिए आभार जताया और दलाई लामा की दीर्घायु तथा तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की कामना की।
NSP पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रवृत्ति के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पात्र विद्यार्थी एक मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के साथ-साथ पात्रता पूरी करने पर एक से अधिक कल्याणकारी छात्रवृत्तियों का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार ने मौजूदा ‘वन स्टूडेंट-वन स्कॉलरशिप’ व्यवस्था को बदलकर ‘वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप’ करने का फैसला लिया है। यानी अगर कोई विद्यार्थी पहले से कल्याणकारी छात्रवृत्ति ले रहा है और बाद में मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे मेरिट छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह मेरिट छात्रवृत्ति लेने वाला विद्यार्थी पात्रता पूरी करने पर कल्याणकारी छात्रवृत्ति भी ले सकेगा। वहीं विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी आसान की गई है। पहली बार आवेदन करते समय भरी गई सामान्य जानकारी को आगे के आवेदनों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। बाद के आवेदनों में विद्यार्थी को केवल संबंधित योजना की जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अगर आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो विद्यार्थी को योजना से जुड़ी जानकारी में सुधार का मौका दिया जाएगा। वहीं सामान्य शैक्षणिक या संस्थान संबंधी जानकारी में बदलाव करने के लिए पहले जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे। नए प्रावधान के तहत संस्थानों के नोडल अधिकारियों को भी विद्यार्थी के सभी छात्रवृत्ति आवेदनों और उनकी स्थिति दिखाई देगी। इससे आवेदन के सत्यापन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों को इन नए नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थानों से कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, प्रार्थना सभा और जागरूकता अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को जानकारी दी जाए और निर्धारित समय सीमा में आवेदन करवाए जाएं। यानी 2026-27 से विद्यार्थियों को ज्यादा छात्रवृत्ति के अवसर मिलने के साथ-साथ आवेदन प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान होने वाली है।
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में ताल कृषि सहकारी सभा में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच के बाद विजिलेंस ने मामले में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। बताया जा रहा है कि सहकारी सभा में करीब 2 करोड़ 46 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस ने जांच आगे बढ़ाई और अब छह लोगों को FIR में नामजद किया है। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद सहकारी क्षेत्र में भी हड़कंप मच गया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम में गड़बड़ी कैसे हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसे का इस्तेमाल किस तरह किया गया। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में गड़बड़ी से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में मंगलवार को मूसलाधार बारिश के बीच बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. नाहन विकासखंड की बर्मा पापड़ी पंचायत में रूण नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव में फंसे बुजुर्ग बनारसी दास को सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया. वहीं, बुजुर्ग को बचाने के लिए नदी में उतरा युवक अंशुल भी कई घंटे तक नदी के बीच फंसा रहा, जिसे बाद में रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया. सीस मामले में नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से संपर्क किया गया. इसके बाद सेना से सहायता मांगी गई और सहारनपुर से एमआई-17 हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए पहुंचा. विधायक के मुताबिक रेस्क्यू के समय अंधेरा हो चुका था, लेकिन हेलीकॉप्टर रात में भी रेस्क्यू उड़ान भरने में सक्षम था. बुजुर्ग को सुरक्षित निकाल लिया गया है और युवक अंशुल को भी रेस्क्यू टीम की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली और आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने बुधवार को शिमला के चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में बिजली बोर्ड कर्मचारी चौड़ा मैदान में जुटे और रैली निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगें जल्द पूरी करने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सरकार से ठोस फैसला लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और OPS बहाली समेत अन्य लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाए। चौड़ा मैदान में हुए इस प्रदर्शन के चलते काफी देर तक माहौल गरमाया रहा और कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के माहूंनाग के समीप बुधवार सुबह एक सड़क हादसा हुआ I जिसमे कार पलटने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताएं जा रहे है । हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है। जानकारी के अनुसार कार माहूंनाग के समीप अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसा होते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वाहन में सवार घायलों को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। हादसे में मोहन सिंह मेहरन की मौत हो गई। वहीं विनीत और चुड़ामणी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी। डीएसपी करसोग चांद किशोर ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
माैसम विभाग के अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने कहर बरपाया है। भूस्खलन से कई सड़कें बाधित है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है I सबसे दर्दनाक घटना बिलासपुर से सामने आई है। यहां पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आने से एक गौशाला क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें बंधी गाय की मौत हो गई। भारी बारिश के कारण नेशनल हाईवे-305 को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं नाहन-ददाहू सड़क पर नेहली के पास भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित हुआ है। बारिश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटों में नैना देवी में सबसे ज्यादा 186.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मलरांव में 140, कसौली में 102 और घाघस में 99 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। लगातार बारिश और भूस्खलन को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
खेतों में खड़ी फसल और जंगलों के बीच बढ़ती हाथियों की आवाजाही नई चुनौती बनती जा रही है। उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर पांवटा साहिब से नाहन तक पहुंच रहे जंगली हाथियों को सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाथियों की लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा। सिरमौर में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से यमुना नदी का जलस्तर कम होने के दौरान उत्तराखंड की तरफ से हाथी सिरमौर की सीमा में प्रवेश करते रहे हैं। पहले हाथियों की आवाजाही मुख्य रूप से बातामंडी, बहराल और सतीवाला तक सीमित रहती थी, जहां वे गन्ने और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद लौट जाते थे। अब हाथियों की आवाजाही पांवटा साहिब से लेकर नाहन सीमा तक देखी जा रही है। हाथियों की बदलती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। उनके आने-जाने के पारंपरिक रास्तों, ठहरने वाले स्थानों और पसंदीदा क्षेत्रों का डाटा जीपीएस और आधुनिक मैपिंग टूल्स की मदद से जुटाया जा रहा है। इस डाटा को डिजिटल रूप में तैयार कर हाथियों के वास्तविक मूवमेंट रूट को चिह्नित किया जाएगा। इसी आधार पर प्रस्तावित कॉरिडोर की भौगोलिक सीमाएं तय होंगी। हाथियों के संरक्षण की दिशा में हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2024 में प्रोजेक्ट एलिफेंट में नामित किया जा चुका है। इसके बाद मानव और हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क से सटे सिरमौर के जंगलों में पानी की उपलब्धता, घना वन क्षेत्र और अनुकूल वातावरण हाथियों को आकर्षित कर रहा है। पांवटा साहिब के वन मंडलाधिकारी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि एलिफेंट कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद हाथियों के संरक्षण के लिए केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है। वर्ष 2024 से अब तक हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। कोलर के समीप रात के समय हाथी के हमले में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई थी। वहीं, वर्ष 2024 में पानीवाला खाला-सैनवाला के समीप जंगली हाथी ने शिलाई क्षेत्र के एक भेड़पालक पर हमला किया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। हाथियों की बढ़ती दस्तक का सीधा असर किसानों की खेती पर भी पड़ा है। इस वर्ष बहराल, सतीवाला, बातामंडी और माजरा-सतीवाला में हाथियों द्वारा आम के बगीचों और धान की फसल को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए हैं। बातामंडी, बहराल और पातलियां क्षेत्र में पिछले करीब एक दशक से हाथियों के डर के कारण कई किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ दी है या इसका रकबा काफी कम कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती और लॉटरी शुरू करने को लेकर सियासत गरमा गई है. विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने दोनों मुद्दों को लेकर सुक्खू सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने सरकार पर घेरते हुए सवाल पूछा, "क्या सरकार चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी मांगने के बजाय भांग की खेती करे और लॉटरी खेले?" रणधीर शर्मा ने नियम 130 के तहत रोजगार के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की योजना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर रोजगार की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार भांग की खेती के जरिए रोजगार देने की बात कर रही है. उन्होंने कहा, "सरकार की योजना क्या है... वह चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी न मांगे, ये भांग की खेती करें, भांग उगाएं और रोजगार पाएं." उन्होंने भांग को नशे की ओर ले जाने वाला माध्यम बताते हुए सवाल उठाया कि भांग को वैध करने के बाद सरकार प्रदेश में चिट्टे पर कैसे रोक लगाएगी. रणधीर शर्मा ने लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि जो युवा नशे से बच जाएंगे, उन्हें अब जुए की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिवाली के मौके पर युवाओं को लॉटरी शुरू करने का तोहफा देने जा रही है. उन्होंने कहा कि लॉटरी की आदत पड़ने के बाद कई लोग अपनी कमाई गंवा सकते हैं और परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. रणधीर शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने भी प्रदेश में लॉटरी को बंद करने का फैसला लिया था. रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान रणधीर शर्मा ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल खनन ही उद्योग नहीं है. उद्योग विभाग का काम राज्य में औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करना और उन्हें स्थापित करना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज को समझना मुश्किल है और उद्योग मंत्री खनन के पीछे पड़े हुए हैं, जबकि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हिमाचल प्रदेश में जंगली भालुओं के हमलों में तीन साल की अवधि में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस दौरान प्रदेश भर में 93 लोग घायल हुए हैं. सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा व शिमला हैं. ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सामने आई है. ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में भालुओं के हमलों में घायल व जान गंवाने वाले लोगों को लेकर जानकारी मांगी थी. साथ ही वे जानना चाहते थे कि सरकार भालुओं के हमलों को रोकने के लिए क्या उपाय कर रही है? क्या सरकार भालुओं के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने व रोकथाम के उपायों पर विचार कर रही है? कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि तीन साल की अवधि में राज्य में विभिन्न जिलों में 93 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं और छह ने अपनी जान गंवाई है. जिला चंबा में तीन साल की अवधि में 35 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए और दो लोगों की जान चली गई. सिरमौर जिला में केवल दो लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए. कांगड़ा में दो लोगों की भालुओं के हमले में मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं. सिरमौर में इन हमलों में दो व जिला सोलन में एक व्यक्ति घायल हुआ है. जिला शिमला में रामपुर क्षेत्र में भालुओं का काफी आतंक है. शिमला में तीन साल में 34 लोग घायल हुए व दो की इन हमलों में मृत्यु हो गई. बिलासपुर, हमीरपुर व लाहौल-स्पीति जिला में भालुओं का आतंक नहीं है. किन्नौर में भी तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने का मामला दर्ज है. इसके अलावा जिला कुल्लू में 11 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं. सरकार की तरफ से बताया गया कि भालु प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास व उनके भोजन के स्रोतों को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे भोजन की तलाश में बस्तियों में न आएं. संवेदनशील इलाकों में बचाव व क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है. जरूरत के अनुसार इलाकों में कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की तरफ से स्मार्ट स्टिक व बजर उपलब्ध करवाए गए हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को भालुओं के हमलों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं.
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन यानी सोमवार को सदन में उठा. सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को 5 लाख रुपये तक का वेतन देने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर चंबा तो दूर हमीरपुर और नेरचौक जैसे शहरों में भी जाने के लिए तैयार नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विज्ञापन जारी होने के बावजूद कई पद खाली रह जाते हैं. दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान चंबा सदर से विधायक नीरज नैय्यर ने चंबा मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पदों पर भर्ती की स्थिति को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के नए भवन का हाल ही में उद्घाटन हुआ है. फिलहाल वहां तीन ओपीडी चल रही हैं, लेकिन अस्पताल को पूरी तरह सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न पदों पर कम से कम 150 से 200 नियुक्तियां करने की जरूरत है. विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार को अलग तरीके से सोचने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंबा में 5 लाख रुपये के वेतन पर प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पद भरे नहीं जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा प्रदेश के एक कोने में स्थित है और यहां डॉक्टरों को लाना बड़ी चुनौती है. इसलिए चंबा के लिए अलग रणनीति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज को भी सुदृढ़ करने में सरकारों को लंबा समय लगा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले 40 वर्षों से ऐसी व्यवस्था चली आ रही है, जिसमें अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हो पाती. सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयास कर रही है.
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान मंगलवार को पेंशनरों के बड़े प्रदर्शन का गवाह बना। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई आक्रोश रैली के दौरान पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण चौड़ा मैदान के आसपास यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। व्यवस्था संभालने पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों के बीच इस दौरान बहस भी हुई। पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को 40 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का लाभ देने की अधिसूचना जारी करना शामिल है। इसके अलावा पेंशनर 166 माह के पे एरियर्स और पेंशन एरियर्स का भुगतान तथा 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। 31 जुलाई तक अधिसूचना जारी करने का दिया था आश्वासन पेंशनर नेताओं के अनुसार सरकार के साथ 13 मई को हुई बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा हुई थी। नेताओं का कहना है कि बैठक में सरकार की ओर से संबंधित मांगों की अधिसूचना 31 जुलाई तक जारी करने का आश्वासन दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पेंशनरों में नाराजगी बढ़ गई। इसी के विरोध में मंगलवार को चौड़ा मैदान में आक्रोश रैली आयोजित की गई। पेंशनर नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी लंबित देनदारियों का भुगतान नहीं किया जाता और मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनरों की लंबित देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। पेंशनर नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले समय में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव का भी ऐलान किया जा सकता है।
स्मार्ट मिटर लगाने पहुंची बिजली बोर्ड की टीम से विवाद, महिला ने JE को जड़ा थप्पड़ , मौके पर मचा हंगामा
हमीरपुर जिले के उझाण पटेरा गांव में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया, जब बिजली बोर्ड की टीम उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलने पहुंची। स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते बिजली बोर्ड कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बहसबाजी शुरू हो गई। इसी दौरान एक महिला ने बिजली बोर्ड के कनिष्ठ अभियंता (जेई) को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर काफी देर तक तनाव और विवाद की स्थिति बनी रही। जानकारी के मुताबिक बिजली बोर्ड की टीम गांव में पुराने बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित करने के लिए पहुंची थी। इसी दौरान ग्रामीणों के एक वर्ग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। कर्मचारियों ने मीटर बदलने की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत धीरे-धीरे तीखी बहसबाजी में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ने के दौरान एक महिला और बिजली बोर्ड कर्मचारियों के बीच तीखी कहासुनी हुई। इसी बीच महिला ने जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद बिजली बोर्ड कर्मचारियों में भी रोष फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। र्ड के जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर हंगामा हो गया और कर्मचारियों व ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुछ उपभोक्ता मीटर बदलने की प्रक्रिया और बिजली बिल को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर बिजली बोर्ड की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जारी है। उझाण पटेरा गांव में हुई घटना ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। अब मामले में पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई पर लोगों की नजर है। एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
धर्मशाला। बोर्ड परीक्षाओं में शामिल करने के लिए विद्यार्थियों का ‘डमी एडमिशन’ करवाने वाले स्कूल अब हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के रडार पर आ गए हैं। बोर्ड ऐसे निजी व सरकारी संबद्ध स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि छात्रों को नियमित कक्षाओं में पढ़ाए बिना सीधे बोर्ड परीक्षा में बिठाने की व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं होगी। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि डमी एडमिशन की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही साबित होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का सही और अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाजिरी रजिस्टर में किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत जानकारी देने को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि पंजीकृत छात्र वास्तव में कक्षाओं में आकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में डमी दाखिले की बढ़ती प्रवृत्ति पर बोर्ड ने चिंता जताई है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र विकास के लिए नियमित कक्षा-अध्ययन, प्रायोगिक कार्य और शिक्षक मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। केवल कागजी दाखिला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने छात्रों व अभिभावकों से ऐसे संस्थानों के झांसे में न आने की अपील की।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी में विजिलेंस ने एक महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. बरोटीवाला पटवार सर्कल में तैनात महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया. जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि महिला पटवारी लैंड वेल्यू प्रमाण पत्र बनाने की एवज में रिश्वत मांग रही है.इस पर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दे दी. बाद में विजिलेंस ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से महिला पटवारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया, शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच-पड़ताल की और शिकायत को सही पाए जाने पर जाल बिछाया. विजिलेंस थाना बद्दी की टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला पटवारी को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर पकड़ लिया. टीम ने कथित रिश्वत की राशि को भी कब्जे में ले लिया है. विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी गई है. जांच में रिश्वत मांगने के कारणों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है. विजिलेंस के आईजी बिमल गुप्ता ने बताया कि आरोपी महिला से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं. विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. वही तहसीलदार सतेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी महिला पटवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
TGT शिक्षकों की वरिष्टता पर चला हथोड़ा! हाईकोर्ट के फैसले के बाद विशेष लाभ वापस, निदेशालय का बड़ा आदेश
हिमाचल के हजारों TGT शिक्षकों को बड़ा झटका, विशेष वरिष्ठता लाभ वापस; हाईकोर्ट के फैसले के बाद निदेशालय ने बदली अंतिम सूची शिमला। हिमाचल प्रदेश के हजारों टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लिया गया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2006 और 2007 में नियुक्त टीजीटी शिक्षकों को दिया गया विशेष वरिष्ठता लाभ वापस ले लिया है। ये लाभ पहले वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों के आधार पर दिए गए थे। अब हाईकोर्ट के फैसलों के अनुपालन में निदेशालय ने अंतिम वरिष्ठता सूची में आंशिक संशोधन करते हुए संबंधित शिक्षकों को दिए गए विशेष लाभ को हटा दिया है। निदेशालय की ओर से इस संबंध में बाकायदा कार्यालय आदेश जारी किया गया है। इसके बाद 2006-07 में नियुक्त उन टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता पर असर पड़ेगा, जिन्हें पूर्व में वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों के आधार पर वरिष्ठता का लाभ मिला था। मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2006-07 में नियुक्त टीजीटी शिक्षक अलग भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे। इन शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2005 में जारी किए गए अलग विज्ञापन के आधार पर हुई थी। ऐसे में उन्हें वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों में दिए गए वरिष्ठता लाभ का हकदार नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर निर्धारित समय में कोई कानूनी चुनौती नहीं दी, वे बाद में उस प्रक्रिया से जुड़े मामलों में दिए गए लाभ का दावा नहीं कर सकते। निदेशालय की यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों के अनुपालन में की गई है। विशेष रूप से एलपीए संख्या 836/2025 (कौशल चंद्र बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) में 25 फरवरी 2026 को दिए गए फैसले के बाद स्थिति स्पष्ट हुई। अदालत के निर्देशों के आधार पर निदेशालय ने अब अंतिम वरिष्ठता सूची में संशोधन किया है। वर्ष 2002 और 2012 की चयन प्रक्रियाओं से जुड़े कर्मचारियों को पूर्व में अदालत के निर्देशों के अनुसार वरिष्ठता संबंधी लाभ दिए गए थे। वहीं, वर्ष 2006-07 में नियुक्त टीजीटी शिक्षक वर्ष 2005 के अलग विज्ञापन के तहत चयनित हुए थे। इसलिए उन्हें 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विशेष वरिष्ठता लाभ से अलग रखा गया है। निदेशालय के इस फैसले से संबंधित टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता, पदोन्नति और उससे जुड़े सेवा लाभों पर असर पड़ सकता है। विशेष वरिष्ठता लाभ वापस लिए जाने के बाद अब उनकी स्थिति संशोधित अंतिम वरिष्ठता सूची के अनुसार तय होगी। शिक्षकों के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि वरिष्ठता का सीधा संबंध भविष्य की पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों से होता है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुपालन में निदेशालय की ओर से उठाए गए इस कदम को 2006-07 बैच के टीजीटी शिक्षकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कांगड़ा सहित कई जिलों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। कांगड़ा में कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 4 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और सड़कें प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों और प्रशासन को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। कांगड़ा में बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत मंगलवार को संस्थानों को बंद करने, विलय और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के साथ हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कई बार आमने-सामने नजर आए। करीब आधे घंटे तक सदन में इस मुद्दे को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही। भाजपा विधायकों ने सरकार से पिछले तीन वर्षों के दौरान बंद किए गए और नए खोले गए संस्थानों का विस्तृत ब्यौरा मांगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, नयना देवी के विधायक रणधीर शर्मा और बिलासपुर के विधायक ने संयुक्त सवाल के माध्यम से सरकार से पूछा कि 31 जुलाई 2025 तक प्रदेश में कितने संस्थान बंद, विलय या डिनोटिफाई किए गए हैं। विधायकों ने संस्थानों का विभागवार और विधानसभा क्षेत्रवार विवरण भी मांगा। इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि बंद किए गए संस्थानों में से कितने संस्थान दोबारा शुरू किए गए और उन्हें दोबारा खोलने के पीछे क्या कारण रहे। भाजपा विधायकों ने उन संस्थानों को लेकर भी सरकार से जानकारी मांगी, जिनके भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही जिन संस्थानों के भवन अभी तैयार नहीं हुए हैं, उनके निर्माण को लेकर सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर भी जवाब मांगा गया। इसी मुद्दे पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विधायकों की भावनाओं का सम्मान करेगी। जहां संस्थानों की वास्तविक जरूरत होगी, वहां उन्हें खोला जाएगा और आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत आधारित संस्थान खोलने के पक्ष में है। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर चुनाव से कुछ महीने पहले राजनीतिक लाभ के लिए संस्थान खोलने की घोषणाएं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई संस्थान खोल दिए गए, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई। मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। संस्थानों को बंद करने का मामला एक बार फिर मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है।
शिमला: तीन दिन के अवकाश के बाद हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में आज (सोमवार, 31 अगस्त को) एक बार फिर सदन की कार्यवाही शुरू होगी. सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे बाद प्रश्नकाल से शुरू होगी. इस दौरान सता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक देखने को मिल सकती है. शून्यकाल के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सप्ताह की शासकीय कार्यसूची की जानकारी सदन में रखेंगे. साथ ही कुछ कागजात भी पटल पर रखेंगे. किसानों को यूरिया की खरीद के साथ नैनो यूरिया प्लस लेने के लिए कथित तौर पर मजबूर किए जाने के मामले पर सदन मे विपक्ष हंगामा कर सकता है. वहीं, नियम-130 के तहत युवाओं के लिए रोजगार से संबंधित गारंटी के कार्यान्वयन पर भी सदन में विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है. भाजपा विधायक रणधीर शर्मा, सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल, डॉ. हंसराज और जीत राम कटवाल प्रस्ताव करेंगे कि 'युवाओं के लिए रोजगार संदर्भित गारंटी के कार्यान्वयन बारे' सदन विचार करे. सदन में प्रदेश के जल संसाधनों और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े राजस्व का मुद्दा भी उठेगा. विधायक केवल सिंह पठानिया नियम 130 के तहत रॉयल्टी, फ्री पावर और जल उपकर के बकाया भुगतान की वसूली और प्रदेश के राजस्व हितों के संरक्षण पर चर्चा का प्रस्ताव रखेंगे. तीन दिन के अवकाश के बाद लौट रहे सदन में एक ओर प्रश्नकाल के दौरान विधायकों के सवाल सरकार के सामने होंगे. वहीं, नियम 62 और 130 के तहत प्रस्तावित मुद्दे कार्यवाही को खासा महत्वपूर्ण बना सकते हैं.
शिमला: हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में करीब 300 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इन बसों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और रूटों पर चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। इन इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का मुख्य उद्देश्य डीजल बसों पर निर्भरता कम करना और हिमाचल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना है। जिन रूटों पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हो चुके हैं, वहां इन बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में पुराने डीजल वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों से बदला जाए। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, नई इलेक्ट्रिक बसें स्थानीय रूटों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार लंबी दूरी के रूटों पर भी चलाई जाएंगी। पालमपुर में हाल ही में 10 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। वहीं बिलासपुर, कांगड़ा और शिमला ग्रामीण सहित कई क्षेत्रों को भी नई ई-बसें उपलब्ध करवाई गई हैं। सरकार ने भविष्य में एचआरटीसी के बेड़े में 1,000 और इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई, एम्स बिलासपुर और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू करने की योजना है। इससे लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों पर खर्च करने के मामले को लेकर सरकार हाईकोर्ट का रुख करेगी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान उठे मामले का जवाब देते हुए कहा कि हिमाचल में जगह-जगह मंदिर हैं, जिनमें से करीब तीन दर्जन मंदिर सरकार के अधीन हैं। उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी और चामुंडा माता जैसे बड़े मंदिरों में काफी मात्रा में चढ़ावा आता है। इन मंदिरों की आय से पहले सामाजिक कार्यों और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में आर्थिक मदद दी जाती रही है। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से इस तरह चढ़ावे की राशि खर्च करने पर बंदिशें लगाई गई हैं। सरकार फिलहाल पूरे मामले का कानूनी अध्ययन कर रही है। इसके बाद सरकार इस संबंध में हाईकोर्ट में पिटीशन दायर करेगी, ताकि मंदिरों के चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों में इस्तेमाल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में कुल्लू अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला रजनी शर्मा उर्फ मंजू शर्मा की मौत का मामला जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने मामले की जांच और अस्पताल प्रशासन की भूमिका को लेकर सरकार से जवाब मांगा। जयराम ठाकुर ने पूछा कि क्या जांच में चिकित्सीय अथवा प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है? यदि लापरवाही पाई गई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में अलग-अलग जांचों के निष्कर्ष आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमएस की जांच और एसडीएम की जांच रिपोर्ट में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आखिर सही रिपोर्ट कौन सी है और जो जांच अभी विचाराधीन है, वह कब पूरी होगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि मामला गंभीर है और डॉक्टर के व्यवहार को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। उन्होंने ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार अस्पताल प्रशासन ने भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर लोगों में रोष है और मामले में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। स्वास्थ्य मंत्री बोले- जांच जारी, जिम्मेदार डॉक्टर निलंबित स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने सदन में घटना को दुखद बताते हुए मृतका के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सीय प्रणाली से जुड़ा मामला है और इसकी विवेचना जारी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मामले में दो स्तर पर जांच कराई गई है। एक जांच अस्पताल स्तर पर और दूसरी स्वतंत्र जांच के उद्देश्य से कराई गई, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से पड़ताल हो सके। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार डॉक्टर को निलंबित किया गया है और जांच अभी जारी है। ये भी पढ़ें
शिलाई की बेटी पुष्पा राणा संभालेंगी टीम इंडिया की कमान, एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान बनीं हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र की रहने वाली कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा राणा को भारतीय महिला कबड्डी टीम की नई कप्तान बनाया गया है। वह जापान में होने वाले 2026 एशियन गेम्स में टीम इंडिया की अगुवाई करेंगी। पुष्पा राणा ने लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तान रहीं हिमाचल की ही खिलाड़ी ऋतु नेगी की जगह ली है। पुष्पा राणा के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। वह 2022 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा रही थीं। 2022 के फाइनल में भारत ने चीनी ताइपे को 26-25 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। पुष्पा की कप्तानी में अब भारतीय टीम एशियन गेम्स में अपने स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरेगी। 2026 एशियन गेम्स में भारत की महिला कबड्डी टीम में हिमाचल प्रदेश की चार खिलाड़ी—पुष्पा राणा, ऋतु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर—शामिल हैं। पुष्पा राणा का भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान बनना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है। खासतौर पर शिलाई क्षेत्र के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि लगातार दो भारतीय महिला कबड्डी कप्तान इसी क्षेत्र से सामने आई हैं।
सोलन के शमलेच के समीप परमाणु-शिमला एनएच-5 पर सोमवार सुबह सड़क पर एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, मृतक की अभी पहचान नहीं हो पाई है। प्रारंभिक स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि व्यक्ति की मौत सड़क हादसे में हुई, किसी वाहन की टक्कर के बाद चालक मौके से फरार हुआ या मामला किसी अन्य कारण से जुड़ा है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास के क्षेत्र से जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मृतक कौन था और वह शमलेच के पास सड़क तक कैसे पहुंचा। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में मानसून के बीच बारिश का असर एक बार फिर सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ा है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की 31 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में प्रदेशभर में 98 सड़कें बंद हुई हैं। इसके अलावा 107 बिजली ट्रांसफार्मर (DTR) ठप हुए हैं, जबकि 37 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। जिलेवार आंकड़ों में मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां कुल 43 सड़कें बंद दर्ज की गईं। इसके बाद कुल्लू में 16 और चंबा में 15 सड़कें बंद रहीं। हमीरपुर में 37 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए, जबकि मंडी में 89 डीटीआर बंद रहे। वही सोलन जिले में चार सड़कें बंद हैं। इनमें कसौली और नालागढ़ उपमंडल की दो-दो सड़कें शामिल हैं। नालागढ़ में पांच बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं। सिरमौर के नाहन उपमंडल में पांच सड़कें बंद हैं। शिमला जिले में रामपुर और सुन्नी उपमंडल में कुल दो सड़कें बंद दर्ज की गई हैं।
हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। मौसम विभाग के 27 अगस्त को जारी बुलेटिन के अनुसार, प्रदेश में 28 और 29 अगस्त को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं 30 अगस्त से 2 सितंबर तक कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने 31 अगस्त, 1 सितंबर और 2 सितंबर को एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में इन दिनों प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 27 अगस्त को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। 30 अगस्त से बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान है और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
दयानन्द आदर्श विद्यालय के प्रांगण में कक्षा आठवीं -नौवीं के विद्यार्थियों के लिए सोलो सॉन्ग और डुएट सॉन्ग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया I प्रिंसिपल उषा मित्तल ने बताया कि इस तरह के आयोजन द्वारा बच्चों का आत्मविश्वास मजबूत होता है I कार्यक्रम का आगाज़ दीप प्रज्वलन एवं मंत्र उच्चारण द्वारा किया गया I इस प्रितियोगिता की मुख्यातिथि प्रिंसिपल उषा मित्तल रही I सोलो व डुएट प्रतियोगिता का आयोजन एक्टिविटी इंचार्ज संगीता के मार्गदर्शन में करवाया गयाI उन्होंने बताया कि सभी सॉन्ग बड़े ही मनमोहक थे I इस प्रतियोगिता के जज प्रिंसिपल उषा मित्तल , रोमिला कँवर , फुला धर , व समिति चंदेल रहे I वही क्लास आठवीं कक्षा में सोलो सॉन्ग प्रतियोगिता में पहला स्थान पर रूद्र, दूसरा स्थान पर अतुल और तीसरा स्थान पर ऋषब रहा I वही कक्षा नवमीं में पहला स्थान पर सार्थक, दूसरा स्थान पर मृदुल और तीसरा स्थान पर तेजस रहा I लड़कियों के बीच में पहला स्थान पर सनाया ,दूसरा स्थान पर महक और तीसरा स्थान पर निष्ठां रही I डुएट सॉन्ग प्रतियोगिता में एक्स्ट्रा आर्डिनरी- अरमान रूद्र .पहला स्थान पर प्रोनिमा, प्रज्ञा ,दूसरा स्थान पर वैभव, गरिमा लविश अर्णव और तीसरा स्थान पर एंजेल महक , एव शर्मिष्ठा प्रांजल रहे I
आईईसी विश्वविद्यालय में 25 अगस्त को मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में खेल महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में सोलन के जिला खेल अधिकारी भूपेंद्र वर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर खेल महोत्सव का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं के जीवन में खेल भावना, शारीरिक फिटनेस और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। खेल महोत्सव के दौरान 100 मीटर दौड़, बैडमिंटन, क्रॉस कंट्री रेस, वॉलीबॉल और रस्साकशी सहित विभिन्न रोमांचक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विश्वविद्यालय के सभी विभागों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर आईईसी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. प्रल्हाद गुप्ता सहित शिक्षक एवं गैर-शिक्षक वर्ग के सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता आईईसी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक पुरी ने की। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में डॉ. अशोक पुरी ने कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना का भी विकास करते हैं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय की खेल समिति, आयोजकों, शिक्षकों एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई दी।
लायंस क्लब सोलन वैली द्वारा हरी ओम गौशाला, कोटला बरोग में 4th पौधारोपण अभियान एवं गौ सेवा का सफल आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आयोजित इस अभियान के दौरान साई इंटरनेशनल स्कूल, सोलन के विद्यार्थियों एवं स्टाफ तथा लायंस क्लब सोलन वैली के सदस्यों द्वारा कुल 45 पौधे लगाए गए। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली के महत्व के प्रति जागरूक भी किया गया। पौधारोपण के साथ-साथ गौ सेवा भी की गई। उपस्थित सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने गायों को गुड़, चोकर, पशु आहार, केले एवं अन्य खाद्य सामग्री खिलाई। इसके अतिरिक्त गौशाला की आवश्यकताओं एवं गौ सेवा के लिए गौशाला प्रबंधन को नकद सहयोग राशि भी प्रदान की गई। इस अवसर पर लायंस क्लब सोलन वैली के अध्यक्ष MJF Lion Raminder Bawa ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति करुणा, दोनों ही समाज सेवा के महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं क्लब सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में सेवा, संवेदनशीलता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। सचिव Lion Dr. R K Sood ने कार्यक्रम में सहयोग एवं सहभागिता के लिए सभी लायंस सदस्यों, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि क्लब भविष्य में भी समाज, पर्यावरण एवं पशु कल्याण से जुड़े सेवा कार्य निरंतर करता रहेगा। कोषाध्यक्ष Lion Shakti Awasthi ने सभी सदस्यों के सहयोग एवं योगदान की सराहना करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का धन्यवाद किया। PRO Lion Vineet Rai Sood ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए 45 पौधे आने वाले समय में हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण का संदेश देंगे। उन्होंने कहा कि पौधारोपण एवं गौ सेवा जैसे कार्यक्रम समाज में सेवा भावना, पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति करुणा का संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।
पुलिस जिला नूरपुर द्वारा क्षेत्र में अवैध खनन पर अंकुश लगाने हेतु चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस थाना डमटाल की पुलिस टीम द्वारा प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई की गई है। पुलिस थाना डमटाल की टीम को सूचना प्राप्त हुई कि चक्की क्षेत्र में ठाकुर राम गोपाल मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से खनन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुँची, जहाँ एक पोकलेन ( मशीन एवं दो ट्रक टिप्पर अवैध रूप से खुदाई व खनन सामग्री भरते हुए पाए गए। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना डमटाल में मामला दर्ज किया गया है। उक्त अवैध खनन की गतिविधि पर अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 303(2), 3(5) एवं खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 21 के तहत प्राथमिकी संख्या 131/2026 पंजीकृत कर ली गई है। मामले की आगामी तफ्तीश जारी है। नूरपुर पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र में अवैध खनन तथा किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधियों में संलिप्त तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रदेश में आज और कल कुछेक हिस्सों में बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान दो जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम को देखते हुए लोकल लोगों समेत टूरिस्ट को भी सतर्क रहने और नदी-नालों व लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की एडवाइजरी दी गई है। IMD के अनुसार 10 अगस्त को कांगड़ा और सिरमौर तथा 11 अगस्त को कांगड़ा व मंडी में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इससे सड़कें बाधित होने, भूस्खलन और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए सावधानी बरतने को कहा गया है। IMD की चेतावनी के मुताबिक शिमला समेत राज्य के ज्यादातर भागों में रात से ही बारिश शुरू हो गई है। राज्य में 15 अगस्त तक बारिश जारी रहने के आसार हैं। हालांकि 12 अगस्त से वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर पड़ेगा। इससे कुछेक भागों में ही हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। हिमाचल में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से 8 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। सात जिलों में सामान्य से काफी कम, जबकि पांच जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है।
लायंस क्लब सोलन वैली द्वारा बुधवार को दुर्गा भवन, मुरारी मार्केट, सोलन में "नशा मुक्ति एवं साइबर अपराध जागरूकता कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। क्लब अध्यक्ष एमजेएफ लायन रामिन्दर बावा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों तथा बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) सोलन दिव्यांशु सिंगल ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहकर अनुशासित जीवन अपनाने और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित व जिम्मेदारी से उपयोग करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराधों और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। पुलिस विभाग की ओर से इंस्पेक्टर नवनीत सैनी (क्राइम ब्रांच) और हेड कांस्टेबल नरेंद्र (साइबर क्राइम) ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी, ओटीपी फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल मीडिया सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर प्रख्यात वक्ता मनमोहन सिंह एवं रेनुका ने भी प्रेरक व्याख्यान देते हुए विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में सोलन के विभिन्न विद्यालयों के 300 से अधिक विद्यार्थियों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने भाग लिया। इसमें एमआरए डीएवी स्कूल, सेंट ल्यूक्स स्कूल, साई इंटरनेशनल स्कूल, बी.एल. सेंट्रल स्कूल, सोलन पब्लिक स्कूल, साउथ वेल स्कूल तथा एनसीसी कैडेट्स शामिल रहे। इस दौरान आयोजित डिक्लेमेशन प्रतियोगिता में एमआरए डीएवी स्कूल की दिव्यांगनी ने प्रथम, साउथ वेल स्कूल की वाणी धीमान ने द्वितीय तथा बी.एल. सेंट्रल स्कूल की यादवी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। क्लब अध्यक्ष एमजेएफ लायन रामिन्दर बावा ने अपने संबोधन में कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने, सकारात्मक सोच अपनाने और डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, अपनी बैंकिंग एवं व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में सरकार और संगठन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने हिमाचल कांग्रेस सरकार के कामकाज को लेकर पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट भेजी है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में रजनी पाटिल ने कहा कि उनके नाम से प्रसारित की जा रही ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को हिमाचल प्रदेश की सरकार या संगठन के संबंध में किसी भी प्रकार की रिपोर्ट नहीं सौंपी है।उन्होंने मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि राजनीतिक विषयों पर समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। बिना पुष्टि के प्रसारित खबरें न केवल भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकती हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से प्रदेश कांग्रेस के भीतर सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर चर्चाएं तेज थीं। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पार्टी नेतृत्व ने रजनी पाटिल से प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर फीडबैक मांगा था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है। इन रिपोर्टों में मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन का भी जिक्र होने की बात कही गई थी। इन खबरों के बाद प्रदेश की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थीं और विपक्ष ने भी इन्हें लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, रजनी पाटिल के ताजा बयान ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया है।
जोगिन्द्रा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के चेयरमैन एडवोकेट मुकेश शर्मा ने आज अर्की में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान बैंक की विभिन्न विकासात्मक योजनाओं एवं वित्तीय उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अर्की एवं भराड़ीघाट में बैंक की नवीन शाखाओं का उद्घाटन शीघ्र ही अर्की के विधायक संजय अवस्थी द्वारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुनिहार एवं जयनगर शाखाओं को वर्तमान बाजार क्षेत्र से स्थानांतरित कर ओल्ड बस स्टैंड के समीप मुख्य सड़क पर स्थापित किया जाएगा। प्रेसवार्ता के दौरान चेयरमैन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बैंक के उत्कृष्ट वित्तीय परिणामों एवं उपलब्धियों को भी साझा करते हुए कहा कि बैंक निरंतर प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है तथा ग्राहकों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से बैंक की प्रतिष्ठा को निरंतर क्षति पहुंचाने तथा भ्रामक एवं असत्य प्रचार करने वाले अधिवक्ता मुकेश शर्मा के विरुद्ध बैंक कानूनी कार्रवाई करेगा। इस संबंध में विधिक नोटिस जारी किया जा रहा है तथा बैंक की साख एवं प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए माननीय उच्च न्यायालय में मानहानि का दावा भी दायर किया जाएगा। चेयरमैन ने बताया कि अर्की के सरयांज तथा कुनिहार की हाटकोट पंचायत स्थित बैंक की संपत्तियों की नियमानुसार नीलामी प्रक्रिया जारी है। इन परिसरों के ताले तोड़कर अवैध हस्तक्षेप करने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जबकि एक मामले में न्यायालय में चालान भी प्रस्तुत किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बैंक की संपत्ति एवं कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इस अवसर पर बैंक के निदेशक रोशन ठाकुर, प्रबंध निदेशक पंकज सूद तथा शाखा प्रबंधक मदन गोपाल भी उपस्थित रहे।


















































