पीएम ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। हालांकि केंद्र के इस फैसले के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है। कृषि से जुड़ी मांगों को लेकर किसानों के आंदोलन के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। दरअसल संयुक्त किसान मोर्चा केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर आज दोपहर 2 बजे बैठक करेगा। SKM ने मंगलवार को कहा कि उसने आंदोलन को समाप्त करने का अनुरोध करने वाले सरकार के प्रस्ताव का जवाब दिया है, जिसमें कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संगठन ने कहा कि उसने किसानों पर दर्ज फर्जी मामले वापस लेने के लिये आंदोलन समाप्त करने की सरकार की पूर्व शर्त पर भी स्पष्टीकरण मांगा है। किसान नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे पर बुधवार यानी आज दोपहर 2 बजे एक और बैठक करेंगे। Farmers News | India
कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में केन्द्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को लेकर असंवेदनसील है। सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार देश की संपत्तियों को बेचने का काम कर रही है। सीमा विवाद पर बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष सीमा पर असुरक्षा को लेकर चर्चा करना चाहता है, लेकिन सरकार इसको लेकर तैयार नहीं है। उन्होंने केन्द्र सरकार की महंगाई और विनिवेश की नीति को लेकर आड़े हाथों लिया। सोनिया गांधी ने राज्यसभा में 12 सांसदों के निलंबन को अनुचित करार दिया। इसके साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों को याद कर कहा- "आइए बलिदान देने वाले 700 प्रदर्शनकारी किसानों का सम्मान करें।" कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार भारत की संपत्ति बेचती है। लगातार बढ़ रही महंगाई करोड़ों परिवार के मासिक बजट को खराब कर रही है।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि अतिरिक्त आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी दक्षिण क्षेत्र के तत्वाधान में मंगलवार को राजकीय महाविद्यालय संजौली में वस्तु एवं सेवा कर विषय पर एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को कर तथा इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं के प्रति जागरूक करना था। इस कार्यक्रम मे उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने मुख्यातिथि के रूप मे शिरकत की। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में दक्षिण क्षेत्र आबकारी एवं कराधान के अतंर्गत जिलों से विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों से वस्तु एवं सेवा करके संदर्भ मे प्रश्नोत्तरी की गई तथा उन्हें विभाग की कार्य प्रणाली के बारे में भी अवगत करवाया गया। प्रतियोगिता में राजकीय महाविद्यालय संजौली ने प्रथम स्थान, कण्डाघाट महाविद्यालय ने द्वितीय और नाहन महाविद्यालय ने तृतीय स्थान हासिल किया। आदित्य नेगी ने प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी मुख्यालय, सुनील शर्मा, सहायक आयुक्त पूनम ठाकुर, अतिरिक्त आयुक्त पंकज शर्मा, उप प्राधानाचार्य राजकीय महाविद्यालय संजौली राजेश धौल्टा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। Shimla News
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चम्बा जिला के चुवाड़ी क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना मे लोगों की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना मे दो लोगों की मृत्यु और 25 व्यक्ति घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को सरकार द्वारा हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। Shimla News
डाॅ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के 11वें दीक्षांत के अवसर पर मंगलवार को एक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजयपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर समारोह मे बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए। उन्होंने दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं को 665 डिग्रियां, 11 स्वर्ण पदक और 261 मेरिट प्रमाण पत्र प्रदान किए। राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अपने सम्बोधन मे कहा कि उपाधि धारकों को यह निर्णय लेना होगा कि वह रोजगार प्राप्त करने वाले अथवा रोजगार प्रदाता बनना चाहते है। उन्होंने युवा विज्ञानियों से आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित उच्च मानकों पर खरा उतरने का प्रयास करें क्यूंकि देश और विश्व में वे इस विश्वविद्यालय से निकले वैज्ञानिक के रूप में पहचाने जाएंगे। स्वर्ण पदक विजेताओं और उपाधी धारकों को शुभकामानाएं देते हुए उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह एक ऐसा स्मरणीय पल है जो हमें भविष्य में उन्नति और इसमें विश्वविद्यालय के विशेष योगदान की याद दिलाता रहेगा। उन्होंने आग्रह किया कि युवा अपना शोध कार्य कृषि समुदाय तक लेकर जाएं। जब तक यह शोध किसानों तक नहीं पहुंचता है, इसका कुछ भी उपयोग नहीं है। राजयपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह एक ऐसा औपचारिक आयोजन है जहां न केवल छात्रों को सम्मानित किया जाता है बल्कि विश्वविद्यालय को भी उनके प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर प्राप्त होता है। यह उपलब्धियां छात्रों के कड़े परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने इसमें शिक्षकों, गैर शिक्षकों और छात्रों के अभिभावकों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह उपाधियां तभी मूल्यवान हैं जब उनका शोध खेतों तक पहुंचेगा। जीवन मे सीखने की प्रक्रिया कभी भी समाप्त नहीं होती है बल्कि आज का यह दिन नई शिक्षा और नए लक्ष्यों को प्राप्त करने की शुरूआत का दिवस है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे अवसरों का लाभ उठाते हुए स्वयं मे समाज का नेतृत्व करने और इसे आगे ले जाने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को उद्यमिता के क्षेत्र मे परामर्श केन्द्र विकसित करने के भी निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि किसानों की रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करने की आवश्यकता है क्योंकि यह कीटनाशक प्रतिवर्ष महंगे होते जा रहे है। उन्होंने आग्रह किया कि फल-सब्जियों इत्यादि को कीटों और विभिन्न रोगों से सुरक्षित रखने के लिए रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों को अपनाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। सुरक्षित खाद्य पदार्थों का उत्पादन हमारा उद्देश्य होना चाहिए और राज्य सरकार ने हिमाचल को प्राकृतिक खेती राज्य के रूप मे विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार के यह प्रयास इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल सिद्ध होंगे। Nauni University News Solan
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष मंत्री डाॅ. राजीव सैजल 8 दिसम्बर, 2021 को सोलन के प्रवास पर रहेंगे। डाॅ. सैजल 8 दिसम्बर को प्रातः 11.00 बजे उपायुक्त कार्यालय सोलन में ज़िला कल्याण समिति की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। Solan News
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य एक स्वस्थ समाज और समृद्ध हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण है और इस बारे मे लोगों को जागरूक करने के लिए प्रदेश में एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। मुख़्यमंत्री ने मंगलवार को राज्य सरकार और नीति आयोग द्वारा पोषण और सहकारी संघवाद विषय पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पोषण को एक जन आंदोलन बनाने के लिए जमीनी स्तर पर और अधिक जागरूकता लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पोषण जागरूकता के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है और अब 18,925 आंगनबाड़ी और 5,99,643 लाभार्थियों को पोषण ट्रैक्कर पर पंजीकृत किया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि अति कुपोषित एवं मध्यम कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के लिए हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को सबसे पसंदीदा पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए कृतसंकल्प है। हिमाचल का लगभग प्रत्येक क्षेत्र प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण है, लेकिन बेहतर सम्पर्क सुविधा यहां सबसे प्रमुख चुनौती है। उन्होंनेे कहा कि 15वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार और उन्नयन के लिए 400 करोड़ रूपये, मण्डी जिला में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण के लिए एक हजार करोड़ रूपये और ज्वालामुखी मंदिर के लिए पेयजल और मल निकासी योजना के सुधारीकरण के लिए 20 करोड़ रूपये की अनुशंसा की है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक राजस्व घाटे वाला राज्य है और विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं में निवेश के लिए राज्य के पास सीमित साधन है। ऐसे में इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए उदार सहायता की आवश्यकता है। राज्य मे रेल सम्पर्क बढ़ाने पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें भू-अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस विषय पर राज्य को क्षतिपूर्ति प्रदान करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इससे हिमाचल मे रेल नेटवर्क को सुदृढ़ किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सत्त यातायात व्यवस्था को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल पाॅलिसी तैयार की है ताकि हिमाचल प्रदेश को विद्युत गतिशीलता विकास और इलैक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में वैश्विक केन्द्र बनाया जा सके और विद्युत चालित वाहनों के लिए सार्वजनिक एवं निजी चार्जिंग आधारभूत संरचना तैयार की जा सके। इसके लिए विद्युत चालित वाहन निर्माता उद्योगों को अनुदान और प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक सेवा क्षेत्र में व्यय कर रही है। खाद्य एवं फल प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसानों और बागवानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। Shimla | Himachal News
देव संस्कृति हिमाचल प्रदेश की विशेषता है और प्रदेशवासियों की देव समाज व देव-देवताओं में अगाध श्रद्धा है। प्रदेश सरकार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं परम्पराओं को संजोए रखने के लिए वचनबद्ध है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार को कुल्लू जिला के बंजार विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत सराहन गांव में श्री पुंडरिक ऋषि के नए रथ की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को शिमला से दूरभाष पर दिए अपने सन्देश में कही। मुख्यमंत्री को इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना था, परन्तु किन्हीं अपरिहार्य कारणों से वह वहां नहीं जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की देवता पुंडरिक ऋषि में असीम श्रद्धा है तथा उन्हें भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। उन्होंने कहा कि एक जनश्रुति के अनुसार ग्राम दोगली के निकट सराहरी सरोवर के पास ऋषि लम्बे समय तक तपस्या में लीन रहे और भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन देकर वैकुण्ठ धाम आने का निमंत्रण दिया तथा साथ ही साथ इस स्थान को वैकुण्ठ धाम से नाम से अभिभूत किया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आज बनोगी, सैंज में लगभग 47 लाख रुपये की लागत से निर्मित वन विभाग के विश्राम गृह का भी लोकार्पण किया गया है, जिसके लिए उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस विश्राम गृह के निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर श्री पुंडरिक ऋषि मेला मैदान में विधायक बंजार सुरेन्द्र शौरी, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर, भाजपा जिला अध्यक्ष भीम सेन, मण्डल अध्यक्ष बलदेव महन्त, प्रदेश कार्यकारणी सदस्य बनवारी लाल, जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष नवल नेगी, प्रधान बनोगी इन्दिरा देवी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे, जबकि उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग शिमला में मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे। Shimla News
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दूनी चंद ठाकुर ने प्रदेश के कर्मचारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने तकनीकी कर्मचरियों की मांगों को प्राथमिकता देते हुए उनका समय-समय पर निदान किया है। जिसमें जूनियर टी मेट व जूनियर हेल्पर की पदौन्नति समयावधि 5 वर्ष से घटा कर तीन वर्ष करना है। प्रदेश अध्यक्ष में कहा कि अभी भी अधिकारी इसकी अधिसूचना करने में जानबूझ कर विलंब कर रहा है ताकि प्रदेश सरकार की कर्मचारियों के बीच में छवि खराब हो। उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वह बोर्ड प्रबंधन को तकनीकी कर्मचरियों की अन्य मंगों को भी पूरा करें। HPSEB | HIMACHAL NEWS
कोविड-19 टीकाकरण की दूसरी डोज की लक्ष्य प्राप्ति में देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम जिला के बिलासपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान के प्रांगण में आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय चिकित्सालय रिकांगपिओ में तैनात पुरुष स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुभाष पंचारस को कोविड-19 काल में उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ मनसुख मांडविया व भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रशस्ति पत्र के साथ टोपी मफलर पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान विशेष रूप से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तथा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर उपस्थित रहे। टीकाकरण की दूसरी डोज की लक्ष्य प्राप्ति पर जहां किन्नौर पहला जिला बना, वहीं इस अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य कर्मियों का अहम भूमिका रही है।
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के शिमला (Shimla) शहर के कोटशेरा कॉलेज में छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर पर छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप लगा है। बालूगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, थाने से ही बेल भी मिल गई है। कॉलेज की सैक्सुअल हरासमेंट कमेटी ने भी आरोपी प्रोफेसर को नोटिस देकर जवाब मांगा है। पुलिस के पास दर्ज एफआईआर के अनुसार, शिमला के सरकारी डिग्री कॉलेज कोटशेरा की एक छात्रा ने अपने कॉलेज के एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया। आरोप है कि कॉलेज में मैथ्स पढ़ाने वाला एक प्रोफेसर पिछले एक सप्ताह से उसका यौन उत्पीड़न कर रहा है। आरोपी वाट्सएप के जरिए उसे मैसेज भेजता है। साथ ही आरोपी प्रोफेसर ने मिलने के लिए उसे अपने कमरे में भी बुलाया, लेकिन उसने मिलने से इनकार कर दिया। छात्रा के मुताबिक, एक दिसंबर को सुबह 11 बजे के करीब आरोपी प्रोफेसर उसे चौड़ा मैदान में मिला, जहां से वह उसे चक्कर स्थित अपने क्वार्टर ले गया और वहां उसके साथ छेड़छाड़ की। डीएसपी हेडक्वार्टर कमल वर्मा ने बताया कि कॉलेज छात्रा की शिकायत पर आरोपी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 354-ए व 354-डी के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई अमल में लाई गई है। कॉलेज की सैक्सुअल हरासमेंट कमेटी ने भी शिक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीड़िता छात्रा ने कमेटी को भी शिकायत दी थी। सोमवार को आरोपी शिक्षक ने जवाब कमेटी के सामने रखा है। वहीं, साथ ही वह थाने में भी पेश हुआ था। जहां से आरोपी को बेल मिल गई है।
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि गद्दी कल्याण बोर्ड की 18 वीं बैठक और गुज्जर कल्याण बोर्ड की 21वीं बैठक का आयोजन आगामी 12 दिसंबर, 2021 को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के सभागार में किया जाएगा उन्होंने बताया कि गद्दी कल्याण बोर्ड की बैठक 12 दिसंबर को प्रातः 10ः00 से 12ः00 बजे तक तथा गुज्जर कल्याण बोर्ड की बैठक का आयोजन दोपहर 12ः00 बजे से 1ः00 बजे तक निर्धारित किया गया है। Shimla | Himachal News
सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर एम.एस. शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को सशस्त्र सेना का झंडा लगाया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपनी ओर से अंशदान भी दिया। भारत मे हर वर्ष 7 दिसम्बर, को देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के सम्मान मे सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जाता है। Shimla | Himachal Pradesh News
प्रदेश राज्य योजना बोर्ड के अध्यक्ष एवम ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला ने मंगलवार को ब्लारडू-अधवानी में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक समित की शाखा में नए एटीएम का उद्घाटन किया। इससे पूर्व स्थानीय जनता ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष डॉ राजीव भारद्वाज एवम ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला का भव्य स्वागत किया। ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला ने विधिवत पूजा अर्चना कर नए एटीएम की ओपनिंग की। कांगड़ा कॉपरेटिव बैंक का ये 110वां एटीएम है। वहीं भाजपा मंडल ज्वालामुखी के अध्यक्ष मान सिंह राणा ने इस दौरान मांग रखी की ज्वालामुखी के विभिन्न क्षेत्रों में एटीएम सुविधा की आवश्यकता है व साथ लगती पंचायतों में लोगों की सुविधा के लिए एक काउंटर खोला जाए जिसको लेकर डॉ राजीव भारद्वाज ने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही की इस मांग को पूरा किया जाएगा। कांगड़ा सहकारी बैंक सीमित के अध्यक्ष डाॅ राजीव भारद्वाज ने इस अवसर पर कहा कि माता ज्वालामुखी के सानिध्य में कांगड़ा बैंक का ये 110वां एटीएम है और लोगों की सुविधा के लिए ही इसको खोला गया है। उन्होंने कहा कि इस एटीएम में स्थानीय वाशिंदों के सहित बाहर से आने वाले लोगों को भी इस सुविधा का फायदा मिलेगा। एटीएम के उद्घाटन के पश्चात बैंक प्रबंधन ने रमेश धवाला को शॉल पहनाकर सम्मानित भी किया। वहीं बीडीसी आरती राणा ने भी माता ज्वालामुखी की चुनरी देकर डॉक्टर राजीव भारद्वाज को सम्मानित किया। इस मौके पर कांगड़ा बैंक के चेयरमैन डाॅ राजीव भारद्वाज, बैंक मैनेजर विनय, बीडीसी चेयरमेन देहरा अर्चना धीमान, भाजपा मण्डल अध्यक्ष मान सिंह राणा, जिला महामंत्री अभिषेक पाधा राम स्वरूप शास्त्री, चमन लाला पुंडीर, महेन्द्र सिंह चौहान, अनिल कौशल इत्यादि अन्य गणमान्य मौजूद रहे। Jwalamukhi Kangra News
गुलाब का इस्तेमाल सिर्फ़ सजावट तक ही सीमित नहीं है। गुलाब के फूल में मंत्रमुग्ध करने वाली महक के अलावा औषधीय गुण भी अनगिनत हैं। यही कारण है कि अब हिमाचल में भी गुलाब की खेती शुरू करने की कवायद शुरू होने जा रही है। किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए एग्रो इंडस्ट्री ने एरोमा प्रोजेक्ट के तहत हिमालयन बॉयो रिसोर्स संस्थान पालमपुर के साथ एमओयू साइन किया है। प्रदेश में अब लोग बंजर जमीन पर गुलाब की खेती कर सकेंगे। जिला कांगड़ा के चामुंडा और खड़ीबही पंचायत में किसानो की जमीन की जांच की गई है। किसानों को प्रशिक्षित करने के बाद गुलाब के पौधे रोपे जाएंगे। दो साल बाद इनमें फूल आएंगे। एक पौधा करीब 25 साल तक चलता है। इस फूल से अर्क और गुलाब जल निकाला जाएगा। आईएचबीटी ही जमीन की जांच करने के साथ किसानों को 90 फीसदी सब्सिडी पर गुलाब का पौधा उपलब्ध करवाया जाएगा। बता दें कि गुलाब के अर्क का इस्तेमाल परफ्यूम में होता है। इसकी कीमत 9 से 12 लाख प्रति लीटर है। गुलाब की खेती करने के लिए ज्यादा मेहनत की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए एक फीट गहरी जमीन को नर्म करना है। करीब 2*2 का तौलिया बनेगा। इसमें इस पौधे को रोपा जाएगा। एक बार जड़ पकड़ने के बाद यह पौधा करीब 20 साल तक चलेगा। किसानों को गुलाब से अर्क और गुलाब जल निकालने के लिए बाहर न जाने पड़े इसके लिए इंग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन खुद प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करेगा। यदि किसान गुलाब की खेती करना चाहता है तो आईएचबीटी उन्हें पहले ट्रेनिंग देगा। मिट्टी की जांच के लिए भी टीम घर-द्वार पहुंचेगी। गुलाब में है कई औषधीय गुण गुलाब का उपयोग करने से दिल, दिमाग और आमाश्य की शक्ति में वृद्धि होती है जिससे इनकी क्रिया भी ठीक होने लगती है। इसके अलावा गुलाब की पंखुडिय़ों में लैक्सटिव और डाइयुरेटिक गुण भी होते हैं, जो पेट को साफ करने, बॉडी से टॉक्सिन को बाहर निकालने, मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने और वजन कम करने में मदद करते है। गुलाब का फूल मुंह संबंधी रोगों से निजात दिलाता है। यह सिर में होने वाले घावों को भी ठीक करता है। गुलाब से बने गुलकंद का सेवन गर्मी में फायदेमंद है। आयुर्वेद के अनुसार ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी के इलाज में भी यह लाभकारी है। किसानों को गुलाब की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसको लेकर हिमालयन बॉयो रिसोर्स संस्थान (आईएचबीटी) के साथ एमओयू साइन हुआ है। गुलाब के फूल से अर्क निकाला जाना है। कारपोरेशन खुद प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करेगी। इस पहल से जहाँ बंजर भूमि का सही इस्तेमाल होगा वहीं किसानों की आर्थिकी भी सृदृढ़ होगी। -जेएम पठानिया, एमडी, एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन MoU signed The state Himachal Pradesh will be blessed with rose cultivation
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के जिला सोलन (Solan) के परवाणू में मंडी समिति की ओर से पुष्प मंडी का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। 15 दिसंबर को परवाणू में मंडी उत्पादकों के लिए खोल दी जाएगी। जिससे प्रदेश के पुष्प उत्पादकों को सुविधा मिलेगी। मंडी समिति सोलन की ओर से कालका-शिमला एनएच पर परवाणू के समीप एक करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से पुष्प मंडी का निर्माण किया है। प्रथम चरण में मंडी में दस दुकानों का निर्माण किया गया है। जहां पर जिला सहित प्रदेश के पुष्प उत्पादक अपने फूलों को बेच सकेंगे। वर्तमान में किसान दिल्ली, करनाल, चंडीगढ़ समेत अन्य बाहरी राज्यों को फूल सप्लाई कर रहे है। जिस कारण उन्हे संबंधित राज्यों तक फूल पहुंचाना महंगा पड़ रहा है। लेकिन अब इस मंडी के खुलने से प्रदेश का फूल प्रदेश में ही बिक जाएगा। Himachal Pradesh News | Solan
सरकारी तेल कंपनियों ने आज भी पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई कटौती या बढ़ोतरी नहीं की है। एक महीने से ज्यादा समय से पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पेट्रोल के रेट की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल 95.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल 86.67 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। दिल्ली में पेट्रोल 95.41 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है जबकि डीजल का रेट 86.67 रुपये प्रति लीटर है। जबकि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 109.98 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.14 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 104.67 रुपये और डीजल 89.79 रुपये प्रति लीटर के रेट पर बिक रहा है। Petrol Diesel Prices India News Update
सोने के कारोबार में इस समय तेजी देखी जा रही है क्योंकि शादियों का सीजन चल रहा है और सोने-चांदी के गहनों-सिक्कों वगैरह की जमकर खरीदारी देखी जा रही है लेकिन आज सोने के दाम नीचे हैं। आज एमसीएक्स पर सोने के वायदा कारोबार में थोड़ी कमजोरी है और गोल्ड रेट सुस्त दिख रहे हैं। वहीं चांदी में भी आज गिरावट देखी जा रही है जबकि कल इसमें अच्छी तेजी थी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का फरवरी वायदा 0.24 फीसदी यानी 47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर ट्रेड कर रहा है। सिल्वर में मार्च वायदा में गिरावट देखी जा रही है और इसके दाम पर दबाव बना हुआ है। चांदी के दाम 0.12 फीसदी नीचे हैं और ये 61,196 रुपये प्रति किलो के भाव पर ट्रेड कर रही है। ग्लोबल बाजार में सोने-चांदी के दाम सपाट नजर आ रहे हैं और यूएस डॉलर में तेजी आने के बावजूद सोने-चांदी में ज्यादा गिरावट नहीं देखी गई। यूएस ट्रेजरी यील्ड्स के रिवाइवल के चलते सोना-चांदी सीमित दायरे में बने नजर आ रहे हैं। बुलियन मार्केट के जानकारो से बात करने के आधार पर कह सकते हैं कि सोने में अभी देश के वेडिंग सीजन के चलते तो तेजी आएगी लेकिन ग्लोबल बाजार की उठापटक के कारण गिरावट का दौर भी बन सकता है। Gold and Silver Prices - India News
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को लोकसभा में चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर स्थगन नोटिस दिया। नोटिस में कहा गया है, "चीन एलएसी के साथ भारतीय क्षेत्र में बार-बार अतिक्रमण करने के लिए आक्रामक रुख अपना रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अप्रैल, 2020 से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर झड़पें हुई हैं, जिसमें पैंगोंग त्सो झील और गलवान घाटी में घातक गतिरोध शामिल हैं।" "चीनियों ने अब भारतीय क्षेत्र में गांवों का निर्माण किया है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में त्सारी चू नदी के तट पर एक गांव भी शामिल है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश के भारतीय क्षेत्र में एक दूसरे गांव की भी खबरें हैं। चीन ने डोकलाम के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूटानी क्षेत्र में कई गांव भी स्थापित किए हैं।" कांग्रेस का आरोप है कि सरकार पूर्वोत्तर और लद्दाख में एलएसी के मुद्दे पर स्पष्ट तस्वीर पेश नहीं कर रही है।
दुनिया की 100 बड़ी आर्म्स कंपनियों में भारत की तीन कंपनियों का नाम शुमार हुआ है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में भारत की एचएएल, ओएफबी और बीईएल ने जगह बनाई है। दुनियाभर के कुल हथियारों की खरीद में भारत का 12वां स्थान है और कुल हिस्सेदारी 1.2 % है। अमेरिका 54% के साथ पहले स्थान पर है और चीन 13 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। इंग्लैंड तीसरे और रूस चौथे स्थान पर है। सिपरी की साल 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की 100 बड़ी हथियारों की कंपनियों की लिस्ट में हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड 42वें स्थान पर है तो ओएफबी यानि ओर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड 60वें नंबर पर और भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड 66वें स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल भारत ने 100 हथियारों की एक निगेटिव लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में जो भी हथियार और सैन्य साजो सामान थे, भारत अब उनका आयात नहीं करेगा।
देश में एक ओर जहां कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन को लेकर लगातार तनाव बढ़ता दिख रहा है तो वहीं दूसरी ओर राहत की बात ये है कि कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन (Vaccination) अभियान रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है। लोगों की जारूकता और सरकार के प्रसायों की वजह से वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज बनी हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को ट्वीट करते हुए बताया कि देश की 85 फीसदी योग्य आबादी को कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक डोज लग गई है। उन्होंने ये भी बताया कि देश की 50 फीसदी आबादी का पूर्ण टीकाकरण यानी कि दोनों डोज लग चुके है। स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने कहा कि, सोमवार शाम 7 बजे तक टीके की 71 लाख से अधिक डोज दिए जा चुके हैं। वहीं, देश में अब तक कुल 128.66 करोड़ से ज्यादा डोज दी जा चुकी हैं। India News
सार्स-कोवी-2 के नए स्वरूप ओमीक्रोन (Omicron) से कोरोना वायरस महामारी की तीसरी लहर फरवरी में चरम पर पहुंच सकती है, जब देश में प्रतिदिन एक लाख से डेढ़ लाख तक मामले सामने आने की संभावना है। कोविड-19 के गणितीय अनुमान में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिक मनिंद्र अग्रवाल ने यह कहा है। उन्होंने कहा कि नये अनुमान में ओमीक्रोन स्वरूप को एक कारक के तौर पर शामिल किया गया है। अग्रवाल ने कहा कि नए स्वरूप के साथ, हमारा मौजूदा अनुमान यह है कि देश में फरवरी तक तीसरी लहर आ सकती है लेकिन यह दूसरी लहर से हल्की होगी। अब तक हमने देखा है कि ओमीक्रोन से होने वाले संक्रमण की गंभीरता डेल्टा स्वरूप की तरह नहीं है। ’’हालांकि, उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में सामने आए मामलों पर करीबी नजर रखी जा रही है, जहां इस नये स्वरूप के कई मामले सामने आए हैं। अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल दक्षिण अफ्रीका में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर में वृद्धि नहीं दिखी है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दक्षिण अफ्रीका और कुछ अन्य देशों में सामने आये कोविड के नये स्वरूप को 26 नवंबर को ओमीक्रोन नाम दिया था। उसने ओमीक्रोन को चिंता पैदा करने वाला स्वरूप भी बताया था। विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई है कि वायरस में आनुवांशिकी बदलाव होने की वजह से यह कुछ अलग विशेषताओं वाला हो सकता है। भारत में ओमीक्रोन स्वरूप के अब तक 23 मामले सामने आ चुके हैं। ओमाइक्रोन के डर के बीच मुंबई के पास 100 से अधिक विदेशी रिटर्न का पता नहीं चल पाया है। India Health News Update
राज्यपाल (Governor) राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सोमवार को भारतीय किसान संघ हिमाचल प्रदेश के त्रिवार्षिक प्रदेश अधिवेशन तथा किसान-उद्यमी-वैज्ञानिक परिसंवाद की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारतीय किसान संघ सार्थक विषयों और प्रेरणा के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज हम कृषि क्षेत्र में भी पश्चिमी पद्धति को अपनाने के लिए उत्सुक रहते हैं और अपनी पारम्परिक पद्धति को भूल रहे हैं। आर्लेकर ने कहा कि मैकाले की पद्धति का आज हर क्षेत्र में प्रादुर्भाव हुआ है, जिससे प्रत्येक क्षेत्र में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हमें इससे बाहर आने तथा ज़मीन से जुड़ी सोच को आगे लेकर चलने की आवश्यकता है। किसानों को अपनी उपज की लागत कम करने के उपाय करने चाहिए। आज जमीन की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है और किसानों को गौ आधारित कृषि पद्धति को अपनाने की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और उन्हें कम करके नहीं आंका जा सकता है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश भारतीय किसान संघ का गौ आधारित कृषि के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय किसान संघ के संगठन महामंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि पिछले 42 वर्षों से संघ किसानों के बीच प्रेरणा व विश्वास जगाने का कार्य कर रहा है और उन्हें सम्मान देने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र आज पूंजी की कमी से जूझ रहा है और किसानों से संबंधित मुद्दोें में पारदर्शिता होनी चाहिए, क्योंकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में ही किसानों को लाभ होगा। बाजार व्यवस्था जितनी विकेंद्रीकृत होगी, किसानों को उतना ही लाभ होगा। उन्होंने उत्पादन के साथ किसानों को पोषण की ओर भी ध्यान देने और हिमालयी क्षेत्रोें में कृषि की समस्याओं को अलग से उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। Shimla Himachal Pradesh News
राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर सोमवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की डाॅ. बी.आर. अम्बेडकर पीठ द्वारा आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि डाॅ. अम्बेडकर द्वारा देश और समाज को दिए गए विचारों और दिशा के लिए हम सभी उनके ऋणी हैं और आज के इस दिवस पर हम सभी को बाबासाहेब अम्बेडकर की जीवनी पढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। आर्लेकर ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में हमें डाॅ. अम्बेडकर को समझने की जरूरत है क्योंकि उनका जीवन और संघर्ष हमें प्रेरित करता है। उन्होंने बाबासाहेब के जीवन से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सही मायनों में हिंदू समाज के सुधारक थे। राज्यपाल ने कहा कि डाॅ. अम्बेडकर को संविधान निर्माता के रूप में जाना जाता है। वह एक समाज सुधारक और विद्वान थे। उनके विचार और आदर्श करोड़ों लोगों को प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने देश के लिए जो सपना देखा था, उसे पूरा करने के लिए हमें प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा और यही बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस मौके पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार ने कहा कि बाबासाहेब ने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि यह विडम्बना ही है कि राजनीतिक व्यवस्था ने उन्हें एक समुदाय विशेष के नेता के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि उन्होंने समाज के हर वर्ग के लिए कार्य किया। डाॅ. अम्बेडकर ने शिक्षित होने, संगठित होने और आन्दोलन करने के लिए तीन उपाय दिए, लेकिन अगर पहले दो अमल में लाये जाएं तो तीसरे की कोई आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मन से सामाजिक कुरीतियों को दूर कर सद्भाव से रहकर ही यह देश फिर से विश्व गुरु बन सकता है। Shimla Himachal News
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को मण्डी जिले (Distt. Mandi) के द्रंग विधानसभा क्षेत्र के झटिंगरी में लगभग 32 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं के उद्घाटन किये। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-दो के अन्तर्गत 25.19 करोड़ रुपये की लागत से स्तरोन्नत घटासनी-बरोट सड़क, ऊहल नदी पर 1.96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लांजनू पुल और 4.90 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बरोट-मायोत सड़क का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र के छोटा भंगाल क्षेत्र के मुल्थान में 9.79 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले संयुक्त कार्यालय भवन का शिलान्यास किया और मुल्थान में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले राजकीय डिग्री काॅलेज भवन का भूमि पूजन भी किया। मुख्यमंत्री ने मुल्थान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए इस क्षेत्र में एक आईटीआई खोलने की घोषणा की और दोनों विधायकों को इसके लिए भूमि चयनित करने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को बीड़ से बड़ागांव सड़क का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने दोनों विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए 30-30 लाख रुपये देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बरोट में एम्बुलेंस उपलब्ध करवाई जाएगी और मुल्थान में लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह का निर्माण किया जाएगा। बैजनाथ के लोगों की सुविधा के लिए खण्ड विकास अधिकारी हर महीने मुल्थान में पांच दिन बैठेंगे और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लोहारड़ी में विज्ञान खण्ड के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बेहतर नेटवर्क सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए बरोट में एक टावर स्थापित करने के लिए एयरटेल और जियो के अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया जाएगा। लोहारड़ी सड़क पर शीघ्र ही 40 मीटर लम्बे पुल का निर्माण किया जाएगा और इस क्षेत्र में हेलीपैड भी बनाया जाएगा। इस अवसर पर जयराम ठाकुर ने कहा कि इस क्षेत्र को नई राहें नई मंजिलें योजना के तहत विकसित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक पर्यटकों को इस क्षेत्र में आने के लिए आकर्षित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बरोट क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और अगर इसका सही तरीके से दोहन किया जाए तो यह पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय गंतव्य के रूप में उभर सकता है। उन्होंने अपने काॅलेज के दिनों में बरोट क्षेत्र की अपनी पहली यात्रा की यादें भी क्षेत्र के लोगों के साथ साझा कीं। उन्होंने कहा कि गत वर्षों के दौरान क्षेत्र में बहुत परिवर्तन हुआ है और यह क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनने जा रहा है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुल्थान में काॅलेज भवन का निर्माण शीघ्र किया जाएगा ताकि क्षेत्र के विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार दुर्गम एवं दूर-दराज के क्षेत्रों के चहुंमुखी एवं संतुलित विकास के लिए कटिबद्ध है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि भुबुजोत सड़क और भुबुजोत सुरंग के निर्माण के प्रयास जारी हैं, जिससे क्षेत्र में पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा। एशियन विकास बैंक परियोजना के अन्तर्गत बीड़-बिलिंग को पैराग्लाइडिंग गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए 10 करोड़ रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एशियन विकास बैंक परियोजना के अन्तर्गत राज्य के लिए स्वीकृत 2100 करोड़ रुपये से नए पर्यटन स्थल विकसित किये जाएंगे। पर्यटन विभाग का एक दल क्षेत्र का दौरा करेगा ताकि क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के ठहरने की सुविधा के निर्माण के लिए भूमि चिन्हित की जा सके। Himachal News
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को शिमला में अम्बेडकर चौक पर भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न डाॅ. भीमराव अम्बेडकर को उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबासाहेब अम्बेडकर के विचार और आदर्श देशवासियों को प्रेरणा और शक्ति प्रदान करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि डाॅ. अम्बेडकर ने हमेशा ही गरीब व जरूरतमंदों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए कार्य किया। इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, नगर निगम शिमला की महापौर सत्या कौंडल, उप-महापौर शैलेन्द्र चैहान, पूर्व महापौर संजय चैहान, उपायुक्त आदित्य नेगी और पुलिस अधीक्षक डाॅ. मोनिका ने भी डाॅ. अम्बेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की। Shimla News | Himachal Pradesh
प्रदेश सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा 08 से 20 दिसम्बर, 2021 तक सोलन जिला में विशेष प्रचार अभियान कार्यान्वित किया जा रहा है। यह जानकारी एक सरकारी प्रवक्ता ने एक विशेष प्रचार अभियान के अंतर्गत सोमवार को दी। उन्होंने कहा कि विशेष प्रचार अभियान के अन्तर्गत सोलन जिला के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में गीत-संगीत एवं नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की जाएगी। इन कार्यक्रमों को कोविड-19 से बचाव तथा नशा निवारण के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। प्रवक्ता ने कहा कि सोलन विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में हिम सांस्कृतिक दल के कलाकारों, कसौली विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत पर्वतीय लोकमंच दाड़वां के कलाकारों, अर्की विधानभा क्षेत्र में शिव शक्ति कलामंच के कलाकारों, नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र में पूजा कलामंच बाड़ीधार के कलाकारों तथा दून विधानसभा क्षेत्र में सप्तक कला रंगमंच कण्डाघाट के कलाकारों द्वारा प्रदेश सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की जाएगी। Solan News | Himachal Pradesh
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष मंत्री डाॅ. राजीव सैजल ने कहा कि प्रदेश सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से जन-जन को समय पर लाभान्वित करने के लिए कृतसंकल्प है। डाॅ. सैजल ने सोमवार को कसौली विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जंगेशू में मसूलखाना-डुगला सम्पर्क मार्ग का लोकार्पण करने के उपरान्त उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित किया। इस सम्पर्क मार्ग से क्षेत्र के 02 गांवों की जनसंख्या लाभान्वित होगी। डाॅ. सैजल ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में संतुलित विकास को प्राथमिकता प्रदान कर रही है। प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समान रूप से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार जनमंच जैसे सशक्त कार्यक्रम और मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाईन 1100 के माध्यम से जन-जन तक पहुंचकर कर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए प्रयासरत है तथा इस दिशा में केन्द्र से भी हिमाचल को भरपूर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि गत दिवस बिलासुपर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओपीडी का शुभारम्भ हुआ। एम्स के माध्यम से प्रदेश के लोगों को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अभी तक के कार्यकाल में 1600 चिकित्सकों को नियुक्ति दी हैं ताकि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। आयुष मंत्री ने कहा कि जन-जन के सहयोग, चिकित्सकों, पैरामेडिकल कर्मियों एवं अन्य के द्वारा किए गए सत्त प्रयासों के कारण हिमाचल प्रदेश कोविड-19 महामारी का सफलतापूर्वक सामना कर पाया है। सभी के सत्त प्रयासों के कारण ही हिमाचल देश का ऐसा पहला राज्य बना है जहां कोविड-19 टीकाकरण की दूसरी डोज़ भी सभी पात्र व्यक्तियों को लग चुकी है। डाॅ. सैजल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पैंशन के लाभार्थियों की आयु सीमा 80 वर्ष से घटाकर 70 वर्ष की है तथा पैंशन को 750 रुपए से बढ़ाकर से 1500 रूपए किया गया है। महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा पैंशन की आयु 65 वर्ष की गई है। हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना के माध्यम से राज्य की हर महिला को संबल मिला है। योजना के माध्यम से प्रत्येक पात्र परिवार को निःशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किया गया है। इस अवसर पर उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र की विभिन्न मांगों को चरणबद्ध आधार पर शीघ्र पूरा किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के चाहा से बोच माता मंदिर तक रोगी वाहन मार्ग के निर्माण के लिए 2.50 लाख रुपए देने की घोषणा की। जलशक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की पेयजल सम्बन्धी समस्याओं का शीघ्र निपटारा किया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शीघ्र ही क्षेत्र के लिए 103 करोड़ रुपए की प्रस्तावित पेयजल योजना का शिलान्यास करेंगे। Solan News Updates | Himachal Pradesh
किन्नौर जिले के बेरोजगार युवक एवं युवतियों को आत्मर्निभर बानाने की दिशा में मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना के अन्तर्गत उपायुक्त कार्यालय किन्नौर स्थित रिकांगपिओ में जिला स्तरीय समिति की बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने की। उपायुक्त ने बताया कि योजना के अन्तर्गत 32 मामले प्राप्त हुए थे। जिसमें से 29 मामलों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। जिसमें स्माल गुडज कैरियर, जेसीबी व होटल की परियोजनाएं शामिल है। उन्होनें बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में 109 मामले जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदन उपरान्त विभिन्न बैंको को प्रायोजित किए गए है जिनमें से 73 मामलों को बैंको द्वारा स्वीकृत किया जा चुका है जिस से 7.36 करोड रू0 निवेश कर 86 लोगो को रोजगार उपल्बध होगा। उन्होनें बताया कि मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना में 18 से 45 वर्ष तक के युवा व 18 से 50 वर्ष तक की महिलाए 1 करोड रू की परियोजना लागत पर 60 लाख तक के बैंक ऋण क्रमःश 25 तथा 30 प्रतिशत तथा विधवाएं 35 प्रतिशत अनुदान के लिए पात्र होगे। उन्होने बताया की योजना में कृषि एवं पशुपालन से सम्बन्धित गतिविधियों को भी शामिल किया गया हैं। बैठक में जिला उद्योग केन्द्र के महापब्रन्धक जिया राम अभिलाषी ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया व बताया कि योजना सम्बन्धी अधिक जानकारी के लिए आवेदक विभाग के दूरभाष नम्बर 01786-222276 पर सम्पर्क कर सकते है। बैठक में परियोजना अधिकारी जिला गा्रमीण विकास अभिकरण जयवन्ती ठाकुर, उपनिदेश पशु पालन डॉ अशोक सैनी, जिला कृषि अधिकारी ओपी बन्सल व जिला अग्रणी बैंक प्रबन्ध केवल कृष्ण कलसी उपस्थित रहे। Reckong Peo Kinnaur News Update | Himachal Pradesh
करसोग के माहूनाग के समीप टटमो गांव में देर रात एक जेसीबी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसमें चालक की मौत हो गई। करसोग पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक रविवार को देर रात करसोग में माहूंनाग के समीप टटमो गांव में जेसीबी HP31B-5348 अचानक अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट नीचे लुढ़क कर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। चालक कार्य पूरा करने के पश्चात जेसीबी को लेकर अपने किराए के कमरे की ओर जा रहा था, लेकिन इस दौरान अचानक जेसीबी अनियंत्रित हो गई और सड़क से बाहर पलट गई।और खेत में जा गिरी। जिसमें चालक राजेंद्र कुमार पुत्र धर्मपाल गांव सताली डाकघर बल्ह चुरानी तहसील घुमारवीं जिला बिलासपुर गंभीर रूप से घायल हो गया। जिस पर स्थानीय लोगों की मदद से चालक को उपचार के लिए शिमला स्थित आईजीएमसी उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन यहां पर उपचार के दौरान चालक ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की छानबीन शुरू कर दी है। एसडीपीओ करसोग गीतांजली ठाकुर ने बताया कि देर रात करसोग के माहूंनाग के समीप टटमों में एक जेसीबी मशीन के दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसमें चालक ने आईजीएमसी में उपचाए के दौरान दम तोड़ दिया तथा आगामी कार्यवाही जारी है। Karsog Mandi News Update | Himachal Pradesh
बन कुटिया बनौणमें चल रही श्रीमद भागवत कथा में श्री कृष्ण जन्म हुआ और खुशियां मनाई गई। बाबा कुटिया बनौण टिकरू में ब्रहमलीन सदानंद गिरी की प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में भागवत ज्ञान कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान स्व.सांसद राम स्वरूप शर्मा के पुत्र शांति स्वरूप शर्मा व पत्नी खुशबु स्वरूप शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर कुटिया में शीश नवाया। कुटिया प्रबंधक कमेटी के प्रधान सुरेंद्र पराशर ने शांति स्वरूप शर्मा व खुशबु स्वरूप शर्मा को सम्मानित किया। कथावाचक पूर्ण चंद मौदगिल ने कृष्ण जन्म की बधाई दी। कथा श्रवण के उपरांत भंडारे का भी आयोजन किया गया। कथा के दौरान कुटिया के महात्मा शिव शंकर गिरी के साथ बन कुटिया बनौण के पदाधिकारी व सदस्य भी उपस्थित रहे। Jogindernager Mandi News | Himachal News
अटल शिक्षा कुञ्ज, कालूझंडा स्थित आईईसी विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग में कार्यरत प्रोफेसर जितेन्द्र सिंह को आईपीजीए, उत्तराखंड द्वारा अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में सराहनीय भागीदारी एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 'एक्सेलेंस अवार्ड' से सम्मानित किया गया। यह अवार्ड उन्हें 4 दिसम्बर को हरिद्वार में मॉडर्न एपरोचिज ऑफ रिचर्स इन बेसिक एवं अप्लाइड साइंसिज विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन पर दिया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुनील जोशी मुख्य-अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में देश एवं विदेश से ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से लगभग 300 वैज्ञानिक, अध्यापक, रिसर्च स्कोलर्स, विद्यार्थी एवं फार्मा उद्योगों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस सम्मेलन में देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वानों के अलावा कनाडा, अमेरिका, चीन, मलेशिया जैसे देशों के वैज्ञानिकों ने भी ऑनलाइन माध्यम से हिस्सा लिया। हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ में जन्मे प्रोफेसर डॉ० जितेन्द्र सिंह आईईसी विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के डीन के अलावा विश्वविद्यालय में कुलपति का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। प्रो० सिंह द्वारा की गयी रिसर्च 38 प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुकी है तथा वह बेस्ट टीचर एवं बेस्ट डीन के अवार्ड द्वारा भी सम्मानित किये जा चुके हैं। Solan News Update | Himachal Pradesh
यूको आरसेटी सोलन द्वारा आयोजित 10 दिवसीय निःशुल्क फ़ास्ट फ़ूड स्टाल उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफल समापन हुआ l इस 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 22 लोगों ने हिस्सा लिया था। जिसमें यूको आरसेटी द्वारा उन्हें फ़ास्ट फ़ूड बनाने व व्यक्तित्व विकास के अलग अलग आयामों के लिए प्रशिक्षित किया गया व स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया l इस कार्यक्रम की ट्रेनर गुरप्यारी रही l समापन दिवस मे एलडीएम केके जसवाल, वित्तीय साक्षरता अधिकारी एमपी मदान, गोपाल बंसल आदि मौजूद रहे l जानकारी देते हुए आरसेटी निदेशक रोहित कश्यप ने बताया कि स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले इस तरह के विभिन्न कार्यक्रम यूको आरसेटी द्वारा जिला सोलन के निवासियों के लिए मुफ्त चलाये जा रहे हैं। Himachal Pradesh | Solan News Update
विद्यार्थी परिषद प्रत्येक वर्ष डॉ बीआर अंबेडकर की पुण्यतिथि को "समरसता दिवस" के रूप में मनाती आई है। इसी कडी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय देहरा ईकाई ने डॉ भीम राव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर विश्वविद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ मलकीयत मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थित रहे। उन्होंने सम्बोधित करते हुए कहा कि भीम राव अम्बेडकर ने सामाजिक समानता व न्याय के लिए बहुत लम्बा संघर्ष किया है। उनके दिए गए सिद्धांत शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो पर अगर आज समाज चलता है तो स्वत: ही समाज में समरसता आ जाएगी। ईकाई अध्यक्ष चन्दन ठाकुर ने उपस्थित सभी का स्वागत किया तथा कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का समापन ईकाई मंत्री दीक्षित धलारिया के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। Dehra Kangra News | Himachal Pradesh News
हाल ही मे ब्यास नदी फेरा नामक जगह पर डूबने से एक साथ हुई दो स्कूली बच्चों की मौत के बाद अब स्थानिय ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार व जिलाधीश काँगड़ा से इस स्थल को ब्लेक सपोट घोषित करके यहां हर किसी के बचाव हेतु उचित प्रबन्ध करने की मांग उठाई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यहां उक्त दो स्कूली बच्चों की ही डूबने से मौत नही है बल्कि इससे पहले भी यहां दर्जनो युवा डूब कर अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे है। नदी किनारे एकांत जगह होने के कारण कई बार स्कूल कॉलेज के छात्रों के अलावा अन्य युवा भी यहां बैठे रहते है। लिहाजा उसके बाद कई युवा यहां नदी की शांत लहरो को देखते हुए नहाने के लिए डुबकी लगाने हेतु कूद जाते है लेकिन यहां घुमावदार गहरे पानी मे जो भी नहाने के लिए कूदते है वह वापिस बाहर नहीं निकल पाते है। वहीं इस संदर्भ में डीसी कांगड़ा निपुण जिंदल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम से यह बात पता चली थी। जानकारी मिलते ही उन्होंने उक्त स्थान पर चेतावनी बोर्ड स्थापित करने के लिए एसडीएम देहरा को कह दिया है। जल्द ही उक्त स्थान पर चेतावनी बोर्ड लगा दिए जाएंगे। जब इस बारे में एसडीएम देहरा धनबीर सिंह ठाकुर से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि इस स्थान पर चेतावनी बोर्ड लगाने के लिए पँचायत को कह दिया गया है। जल्द ही पँचायत इस स्थान पर बोर्ड स्थापित कर देगी। Kangra News | Himachal Pradesh
जेबीटी बनाम बीएड केस में उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद प्रदेश में जेबीटी प्रशिक्षुओं द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किये गए। बीएड को जेबीटी पदों के लिए योग्य करार देने पर जेबीटी प्रशिक्षु भड़क उठे। हाल ही में प्रदेश हाईकोर्ट शिमला ने जेबीटी भर्ती मामलों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई की ओर से निर्धारित नियम एलिमेंटरी शिक्षा विभाग के साथ अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग पर भी लागू होते हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने याचिकाओं को स्वीकारते हुए प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वह 28 जून, 2018 की एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार जेबीटी पदों की भर्ती के लिए नियमों में जरूरी संशोधन करे। कोर्ट के इस फैसले से अब जेबीटी पदों के लिए बीएड डिग्री धारक भी पात्र होंगे। कोर्ट के इस फैसले से जेबीटी डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ बेहद खफा है। संघ का कहना है कि बीएड को जेबीटी का लाभ देना उनके हकों के साथ खिलवाड़ है। यदि ऐसा ही करना था तो इनकी दो साल की पढ़ाई का क्या औचित्य रहेगा। अपने हकों के लिए जेबीटी प्रशिक्षु प्रदेश के हर कोने में जमकर गरज रहे है। इन प्रशिक्षुओं की मांग है की बीएड वालों को जेबीटी का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो जेबीटी को समय पर इनके प्रशिक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रदेश में 40 हजार युवाओं ने जेबीटी और डीएलएड डिप्लोमा किया हुआ है। भर्ती में देरी की वजह से उन्हें अभी तक नौकरी नहीं मिली है। यदि बीएड भी जेबीटी भर्ती के लिए पात्र माने जाते हैं, तो उनका नंबर ही नहीं आएगा। भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव होने से जिला के डाइट संस्थान व निजी शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसके साथ ही बीएड अभ्यर्थी भी जेबीटी पदों में आएंगे, तो उनका नंबर कई सालों बाद आएगा। ऐसे में मांग की जा रही है कि आरएंडपी रूल्स से कतई छेड़छाड़ न की जाए। पिछले तीन सालों से यह विवाद चलता आ रहा है और इस कारण कमीशन और बैचवाइज दोनों प्रकार से भर्तियां रुकी हुई है। प्रदेश सरकार इस मसले पर जेबीटी के प्रशिक्षुओं के साथ नज़र आ रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जेबीटी प्रशिक्षुओं को आश्वासन दिया है कि जेबीटी के भर्ती नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। वर्तमान नियमों से ही भर्ती होगी। अब तय हुआ है कि सरकार जेबीटी प्रशिक्षुओं के हक़ की लड़ाई लड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट में सीधे जाने के बजाय राज्य हाईकोर्ट में ही रिव्यू पेटिशन फाइल की जाएगी। इस पुनर्विचार याचिका में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के कंटेंट को प्रयोग किया जाएगा। यदि फिर भी बात नहीं बनी तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, लेकिन इतना तय है कि जेबीटी के भर्ती नियम नहीं बदले जाएंगे। पर समस्या यहां हल नहीं हुई। जेबीटी प्रशिक्षुओं का समर्थन करने से बीएड प्रशिक्षु सरकार से नाराज़ हो गए है। बीएड डिग्री धारक संगठन इस विषय पर सरकार का विरोध करने लगा है। संगठन के मंडी जिलाध्यक्ष भूपिद्र पाल ने कहा कि एनसीटीई के मानदंडों के अनुरूप 28 जून 2018 की अधिसूचना को प्रदेश सरकार आज तक लागू नहीं कर पाई है और अब कोर्ट के आदेश पारित होने के बाद भी सरकार बीएड डिग्री धारकों के हकों के खिलाफ कदम उठाने जा रही है, जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बीएड डिग्री धारकों का मानना है कि हाइकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते वक्त तमाम पहलुओं पर सुनवाई की है। कोर्ट के आदेश के बाद इसका जेबीटी डिग्री धारकों पर ज्यादा असर भी नहीं पड़ने वाला है क्योंकि फैसले में कहीं भी जेबीटी अभ्यर्थियों को प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मना भी नहीं किया है। सरकार लगभग 2000-3000 जेबीटी टेट पास लोगों के हित के लिए अगर हजारों बीएड डिग्री धारकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जा रही है तो इसका संगठन मुंह तोड़ जवाब देगा। बीएड डिग्रीधारक लता शर्मा, रूपाली शर्मा, शेखर, रजनीश शर्मा, अंजना ठाकुर, रश्मि शर्मा, प्रोमिला, विजय, आशा सोनी, माया, कांता इत्यादि का कहना है कि सरकार को जब एनसीटीई की सब शर्तें मान्य है तो बीएड वाली शर्त क्यों मान्य नहीं। Himachal Pradesh News | JBT Teachers
एचआरटीसी को हिमाचल प्रदेश की जीवन रेखा माना जाता है। आज हिमाचल के लगभग हर कोने तक एचआरटीसी की बसें पहुँचती है। हिमाचल के दूर दराज़ क्षेत्रों तक पहुँचने वाली इन बसों को सड़क तक पहुँचाने में पीस मिल कर्मचारियों का बड़ा योगदान रहता है। ये पीस मिल वर्कर एचआरटीसी में मकैनिक, कारपेंटर, इलेक्ट्रिशियन, टायर मैन, कुशन मेकर्स, बसों की सीटें बनाने वाले, वेल्डर एवं पेंटर के रूप में कार्य करते हैं। प्रदेश की जनता की सहायक एचआरटीसी बसों को सड़कों तक पहुँचाने वाले ये कर्मकारी सरकार से खूब खफा है। पीस मील कर्मचारियों का कहना है की सरकार उन्हें लगातार आश्वासन के झूले झूला रही है मगर उनकी मांगे पूरी नहीं कर रही। कर्मचारियों की सरकार के साथ हुई पहले की बातचीत के दौरान आश्वासन दिया गया था कि उन्हें अनुबंध पर लाने के लिए नीति बनाई जाएगी। इसके लिए 25 नवंबर तक का समय भी दिया गया था, लेकिन 25 नवंबर तक नीति न बनने के बाद अब पीस मील वर्करों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। एचआरटीसी पीस मील कर्मचारी संघ धर्मशाला डिवीजन प्रधान संजीव कुमार ने बताया कि पांच व छह सालों के बाद भी उन्हें अनुबंध में नहीं लाया जा सका है। पीस मील वर्कर को अनुबंध में लाने की उम्मीद जेसीसी की बैठक में थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। लंबे समय से पीस मील कर्मचारी अपनी मांगों को उठा रहे हैं। कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन मांग को नहीं माना गया है। अंत में करीब एक हजार पीस मील कर्मचारियों को हड़ताल का सहारा लेना पड़ा। सुनील कुमार बताते है कि कर्मचारियों कि इस मांग के संबंध में 18 अक्तूबर 2021 को अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन के साथ हुई वार्ता में अक्तूबर 2021 के अंत तक इसके बारे में निर्णय लेने का आश्वासन मिला था। इसके उपरांत 16 नवंबर 2021 को प्रबंध निदेशक के साथ हुई बैठक जिसमें 26 नवंबर तक मामले को अंतिम रूप देने बारे आश्वासन मिला था। परिवहन मंत्री द्वारा समय-समय पर कर्मियों के साथ बैठक में सितंबर 2021 तक इन्हें अनुबंध पर लाने का आश्वासन दिया गया है। जबकि पूर्व में लगभग 450 पीसमील कर्मचारियों को अनुबंध पर लिया जा चुका है और शेष बचे 950 पीसमील कर्मचारि अब भी इंतज़ार कर रहे है। परंतु हर स्तर पर अनेक बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं निकाला जा रहा जिस कारण पीस मील कर्मचारी अनिश्चितकालीन काम छोड़ो आंदोलन पर चले गए, जिससे कर्मशालाओं में बसों के रखरखाव व मरम्मत का कार्य प्रभावित हो रहा है तथा आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। संयुक्त समन्वय समिति भी साथ एचआरटीसी कर्मचारियों की संयुक्त समन्वय समिति भी पीस मील कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन कर रही है। संयुक्त समन्वय समिति के सचिव खेमेन्द्र गुप्ता ने एचआरटीसी प्रबंधन व सरकार को चेताया है कि अगर एचआरटीसी में कार्यरत कर्मचारियों को पीस मील से अनुबंध पर लाने की घोषणा जल्द नहीं की जाती है तो फिर एचआरटीसी के सभी कर्मचारियों द्वारा सरकार और एचआरटीसी प्रबंधन के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष प्यार सिंह ठाकुर भी मानते है कि सरकार व निगम प्रबंधन एचआरटीसी पीस मील कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए गंभीर नहीं है। बार-बार आश्वासनों का झुनझुना इन कर्मचारियों को दिया जा रहा है। परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति द्वारा पीस मील कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने के लिए बहुत लंबे समय से मांग की जा रही है। संयुक्त समन्वय समिति ने सरकार व निगम प्रबंधन से अनुरोध किया है कि पीस मील कर्मचारियों को पूर्व निर्धारित नीति अनुसार ही शीघ्र अनुबंध पर लाने की औपचारिकताएं पूरी कर इन्हें अनुबंध पर लाया जाए अन्यथा निगम का प्रत्येक कर्मचारी इनके पक्ष में एक बड़े आंदोलन करने के लिए विवश होगा, जिससे होने वाली किसी भी प्रकार की हानि के लिए सरकार व निगम प्रबंधन जिम्मेदार होंगे। जयराम सरकार ने नहीं दी अब तक कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति हिमाचल प्रदेश में साल 2008 से पीस मील वर्करों की भर्ती की जा रही है, जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री थे। उस वक्त इन कर्मचारियों के लिए 8 साल के बाद अनुबंध पर लाने की पॉलिसी बनाई गई थी। यानी 8 सालों तक सेवाएं देने के बाद इन कर्मचारियों को अनुबंध पर लाया जाता था और अनुबंध काल पूरा होने के बाद इन्हें बतौर नियमित कर्मचारी नियुक्ति दी जाती थी। तदोपरांत पिछली सरकार में परिवहन मंत्री रहे जीएस बाली द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार आईटीआई डिप्लोमा धारकों को 5 साल बाद और गैर डिप्लोमा धारकों को 6 वर्षों के बाद अनुबंध पर लेने की नीति बनाई गई। कायदे से होना भी ऐसा ही चाहिए लेकिन समस्या यह है कि जयराम सरकार ने अपने कार्यकाल में ये अवधि पूरी कर चुके लोगों को अब तक कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति नहीं दी है। पीस मिल कर्मचारी की आवाज़ लगातार हुक्मरानो तक पहुंचाने वाले संगठन पीस मिल कर्मचारी संघ द्वारा सरकार से इन कर्मचारियों को अविलंब अनुबंध में शामिल करने की मांग लगातार उठाई जा रही है। एचआरटीसी पीस मिल कर्मचारी संघ का कहना है कि एचआरटीसी के 28 डिपुओं में कार्यरत पीस मिल कर्मचारियों की दुर्दशा पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा। संघ का कहना है कि सरकार द्वारा इन कर्मचारियों को प्रति कार्य के आधार पर वेतन दिया जाता है जो नाममात्र वेतन है और उस आय से कर्मचारियों के लिए परिवार चलाना बहुत मुश्किल हाे जाता है। इसके कारण कर्मचारियों को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। 8 से 10 घंटे ड्यूटी, पर सुविधा नाममात्र पीस मिल कर्मचारी संघ का कहना है कि इनके लिए कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ये रेगुलर कर्मचारियों की तरह ही 8 से 10 घंटे ड्यूटी दे रहे है मगर रेगुलर कर्मचारियों की तरह सरकारी नौकरी के कोई भी लाभ इन्हें नहीं दिए जाते। कोरोना काल में भी इन कर्मचारियों ने अपनी पूरी सेवा दी है। बसों का मैकेनिकल कार्य किया और उनको रोड पर पहुंचाया। ये कर्मचारी अपनी नौकरी से नाखुश है क्योंकि इन्हें इनका मासिक वेतन भी कई बार पूरा नहीं दिया जाता। Himachal Pradesh News | Himachal Government Employee's News
हाल ही में हुई जेसीसी कि बैठक में कर्मचारियों का अनुबंध काल एक बार फिर घट गया है परन्तु अब भी अनुबंध सेवा काल को नियमित सेवा काल से जोड़ने की मांग पूरी नहीं हो पाई है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि अन्य मांगों के साथ उनकी इस मांग को भी मुख्यमंत्री पूरा करेंगे परन्तु इनके हाथ निराशा लगी। मांग तो पूरी नहीं हुई बस इसे जल्द पूरा करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी के गठन की बात कही गई और वो भी अब तक नहीं हो पाया है। नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता लाभ नहीं मिलने पर अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के तेवर कड़े हो गए हैं। संघ ने दो टूक कहा कि अनुबंध सेवाकाल दो वर्ष करने से भाजपा के वोट बैंक में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी बल्कि प्रदेश के 70 हजार से अधिक कर्मचारियों को वरिष्ठता लाभ नहीं देने पर सरकार को वर्ष 2022 के चुनावों में नुकसान उठाना पड़ेगा। संघ ने सरकार से पूछा है कि आठ से तीन वर्षों तक अनुबंध पर रहने वाले कर्मचारियों को किस बात की सजा दी जा रही है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुनीष गर्ग और महामंत्री अनिल सेन का कहना है कि अनुबंध सेवाकाल से वरिष्ठता का लाभ देने के लिए अगर कमेटी का गठन करना ही था तो एक महीने पहले ही इसका गठन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि करीब 3 वर्ष पहले धर्मशाला के जोरावर मैदान में एनपीएस की रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने ओपीएस पर कमेटी गठित करने की बात कही थी, लेकिन उस कमेटी का गठन आज तक नहीं हो पाया है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि कहीं वरिष्ठता के मसले पर भी ऐसा ही न हो। संघ का कहना है कि एक ईमानदार कर्मचारी के लिए मानदेय से ज़्यादा मान सम्मान मायने रखता है, बस इसी मान सम्मान को ठेस पहुंचती है जब कोई जूनियर कर्मचारी सरकार की ढुलमुल और भेदभावपूर्ण नीतियां के कारण सीनियर हो जाए l पैमाना यदि कार्य कुशलता हो तो कोई आपत्ति नहीं पर यदि सरकार की नीति के चलते ऐसा हो, तो आपत्ति जायज है l संघ का कहना है कि सरकारें अनुबंध काल 8 से 6, 6 से 5, 5 से 3 और 3 से 2 वर्ष तो करती रहीं और वरिष्ठता नियमितीकरण की तारीख से देती रहीं। पर इसमें उन कर्मचारियों का क्या कसूर जिन्होंने 8 वर्ष, 6 वर्ष, 5 वर्ष और 3 वर्ष का लंबा अनुबंध काल काटा है। यह कर्मचारी वरिष्ठता न मिलने से सरकार से नाराज हैं। संघ के अनुसार इनकी संख्या करीब 70 हजार है। इसका खामियाजा प्रदेश सरकार को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में उठाना पड़ सकता है। इनकी मांग है कि सरकार को अति शीघ्र अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को वरिष्ठता देने की घोषणा करनी चाहिए। ये है पूरा मसला दरअसल ये मसला शुरू हुआ 2008 में, जब बैचवाइज और कमीशन आधार पर लोकसभा आयोग और अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग द्वारा कर्मचारियों की नियुक्तियां अनुबंध के तौर पर की जाने लगी l पहले अनुबन्ध काल 8 साल का हुआ करता था जो बाद में कम होकर 6 फिर 5 और फिर 3 साल हो गया। ये अनुबन्ध काल पूरा करने के बाद यह कर्मचारी नियमित होते है। अनुबंध से नियमित होने के बाद इन कर्मचारियों की अनुबंध काल की सेवा को उनके कुल सेवा काल में नही जोड़ा जाता, जो संगठन के अनुसार सरासर गलत है। इनका कहना है कि अनुबंध काल अधिक होने से पुराने कर्मचारियों को वित्तीय नुकसान के साथ प्रमोशन भी समय पर नहीं मिल पातीl अब मांग है कि उनको नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान की जाए ताकि उन्हें समय रहते प्रमोशन का लाभ मिल सके। अनुबंध काल की सेवा का वरिष्ठता लाभ ना मिलने के कारण उनके जूनियर साथी सीनियर होते जा रहे हैं। मौलिक और समानता के अधिकार का हनन अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन का कहना है कि कुछ अनुबंध कर्मचारी 8 वर्ष के बाद नियमित हुए, कुछ 6 वर्ष के बाद, कुछ 5 वर्ष के बाद और वर्तमान में 3 वर्ष के बाद नियमित हो रहे हैं और अब आने वाले समय में 2 वर्ष में कर्मचारी नियमित होंगे। ऐसे में ये नीति कर्मचारियों के मौलिक और समानता के अधिकार का हनन है। भारत के संविधान में समानता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। कर्मचारियों को अलग अलग अंतराल में नियमित करने से असमानता फैली है। सरकार को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान करके इस असमानता को तुरंत खत्म करना चाहिए। संघ की मांग है कि नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द कमेटी का गठन किया जाए। Himachal Pradesh News | JCC Meeting News Updates
प्रदेश में बढ़ती महंगाई को लेकर विपक्ष लगातर सरकार का घेराव कर रहा है। पूर्व विधायक अजय महाजन ने महंगाई व बेरोजगारी पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। अजय महाजन का कहना है कि बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी से आम आदमी त्रस्त हो गया है। महंगाई कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। इससे साबित होता है कि प्रदेश सरकार की नीतियां जन विरोधी हैं। जनता त्रस्त है पर सरकार कोई भी जनकल्याण का फैसला नहीं ले रही है। अजय महाजन का कहना है कि जनता ज्यादा परेशान न हो यह सरकार अब कुछ ही दिनों की मेहमान है। कांग्रेस सत्ता में आते ही आम आदमी की परेशानी को दूर करने के लिए जन कल्याण की नीतियां बनाएगी और लोगों को महंगाई व बेरोजगारी की समस्याओं से निजात दिलाएगी। अजय महाजन का कहना कि हाल ही में हुई जेसीसी की बैठक में कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं हुआ है। जिस छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। उसमें तो पहले ही पांच साल का विलंब हो चुका है। मुख्यमंत्री ने ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू न कर सिर्फ 2009 की नोटिफिकेशन को मानकर कर्मचारियों के हितों के साथ कुठाराघात किया है, 2009 की नोटिफिकेशन तो ओल्ड पेंशन स्कीम का ही एक हिस्सा है। हजारों आउटसोर्स कर्मचारी जो सरकारी कर्मचारी के बराबर काम करते हैं, इसके लिए कोई नीति न लाकर सरकार ने कर्मचारी हितैषी न होने का प्रमाण दिया है। अजय महाजन का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जनकल्याण के कार्य किए जिस कारण वह लोगों के दिलों में आज भी राजा की तरह राज करते हैं। जबकि भाजपा ने 2017 के विजन डॉक्यूमेंट में जो वादे कर्मचारियों से किए थे उन्हें ही पूरा करने में चार साल का विलंब कर दिया है। यही कारण है कि जनता ने उपचुनाव में चारों सीटें कांग्रेस को दिलवाकर बता दिया है कि सरकार की मशीनरी हांफ गई है। महंगाई व बेरोजगारी पर कोई लगाम नहीं है। Himachal Pradesh News | Himachal Politics
जेसीसी की बैठक के बाद पुलिस विभाग लगातार सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने के लिए आवाज़ उठा रहा है। इसी बीच पुलिस विभाग की समस्याओं को नजरअंदाज करने को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सुजानपुर विधायक राजेंद्र राणा ने सरकार पर निशाना साधा है। राजेंद्र राणा का कहना है कि प्रदेश की जनता को हर तरफ से न्याय देने की जिम्मेदारी उठाए पुलिस विभाग की समस्याओं को सरकार नजरअंदाज न करे। अगर पुलिस विभाग को ही न्याय नहीं मिल रहा है तो यह सिस्टम की खामी नहीं, सरकार की नाकामी है। 7 रुपए प्रतिदिन की डाईट मनी देकर सरकार पुलिसकर्मियों से क्रूर मजाक कर रही है जो कि पुलिस कर्मियों के लिए न तर्कसंगत है न न्याय संगत और न ही सहन करने के काबिल है। लेकिन बीजेपी सरकार पुलिस की इस जायज मांग को लगातार नजरअंदाज कर रही है। राजेंद्र राणा का कहना है की पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भी सरकार की घोर उपेक्षा को लेकर खासे नाराज हैं। सरकार पुलिस अधिकारियों की प्रमोशन को लेकर उपेक्षित व अडियल रुख अपनाए हुए है। राणा का कहना है कि पुलिस में एचपीएस स्तर के अधिकारियों की प्रमोशन 11 साल से लगातार रुकी है। पुलिस प्रमुख संजय कुंडू की अध्यक्षता में सिस्टम में चल रहे असंतुलन को लेकर सरकार को गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद भी सरकार मूक और मौन बनी हुई है। आलम यह है कि डीएसपी व एडिशनल एसपी स्तर के 189 अधिकारी वर्षों से अपनी प्रमोशन की राह देख रहे हैं। इनमें डायरेक्ट भर्ती हुए डीएसपी, एडिशनल एसपी व प्रमोट होकर आए कांस्टेबल व सब-इंस्पेक्टर से डीएसपी बने अधिकारियों की फौज सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए देख रही है। राणा का कहना है कि विजिलेंस, सीआईडी, स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल सेंटर में अनुभव प्राप्त अधिकारियों की दरकरार है लेकिन सरकार इस समस्या से अनजान बनकर नई पोस्ट क्रिएट नहीं कर रही है। इस कारण से जुगाड़ व सिफारिश के आधार पर अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है, जबकि लम्बा अनुभव रखने वाली पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की फौज सरकार की इस घोर उपेक्षा से कुंठित व प्रताड़ित महसूस कर रही है। मौजूदा दौर में 34 एडिशनल एसपी के पदों की जरूरत है और जब यह पोस्टें क्रिएट होंगी तो इनकी प्रमोशन का रास्ता खुलेगा। इसलिए सरकार पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की इस मांग व जरूरत को ध्यान में रखते हुए तुरंत कार्रवाई अमल में लाए। वहीं राजेंद्र राणा ने सवर्ण समाज की समस्या का भी सरकार को घेरते हुए कहा है कि इस मसले को जल्द हल करें अन्यथा सवर्ण समाज का बढ़ता आक्रोश समूचे समाज को तनावग्रस्त कर रहा है। सरकार अपनी जवाबदेही व जिम्मेदारी से लगातार भाग रही है। राणा का कहना है कि सवर्ण आयोग की मांगों को लेकर सरकार ने इस वर्ग से वायदा किया था लेकिन अब सरकार वायदा खिलाफी कर रही है। Himachal Pradesh News | Himachal Politics
उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस पार्टी लगातार सरकार के खिलाफ हल्ला बोल रही है। खाद्य सामान, पेट्रोल डीजल में लगातार हो रही वृद्धि और बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस ने जन जागरण अभियान के तहत प्रदेश भर में हल्ला बोल है। इसी बीच कांग्रेस के नेता लगातार सरकार पर तंज कस रहे है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर का कहना है की जीत से उत्साहित होकर कांग्रेस चुप नहीं बैठी है और कांग्रेस पूरे प्रदेशभर में जन जागरण यात्रा के माध्यम से जनता को सरकार की गलत नीतियों से अवगत करवा रहे हैं। साथ ही सरकार के दुष्प्रचार से भी बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। राठौर का कहना है कि पूरे प्रदेश में 22 विधानसभा क्षेत्रों को चुना गया है और जल्द ही जन जागरण अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा। कांग्रेस का सदस्यता अभियान भी जोरों शोरों से चल रहा है। भाजपा सरकार की ओर से कर्मचारियों के लिए की जा रही घोषणाओं पर भी कुलदीप राठौर ने तंज कसा है। कुलदीप राठौर का कहना है कि अंतिम वर्ष में सरकार द्वारा कर्मचारियों और दूसरे वर्ग को खुश करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन प्रदेश की जनता समझदार है और जनता समझती है कि इन घोषणाओं को जमीनी स्तर पर अमल में नहीं लाया जाएगा। यह सिर्फ लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है। कुलदीप राठौर का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के लिए पूरा प्रदेश एक है लेकिन भाजपा ने प्रदेश को बांटने का काम किया है। राठौर का कहना है कि पुलिसकर्मियों के साथ जयराम राज में नाइंसाफी हुई है और सरकार को चाहिए था कि पुलिस की समस्याओं पर गौर किया जाता, क्योंकि इस तरह की घटनाओं से जनता का मनोबल भी गिरता है। Himachal Pradesh News | Himachal Politics
अपनी मांगों को लेकर कई कर्मचारी वर्ग लगातार सरकार से गुहार लगा रहे है। कर्मचारिओं की मांगों को मुद्दा बनाकर विपक्ष भी सरकार को घेरने में लगा है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव केवल सिंह पठानिया का कहना है कि आज प्रदेश के हर वर्ग के कर्मचारी अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और प्रदेश सरकार की नजर इन कर्मचारियों पर नहीं बल्कि अपनी नाकामी को छुपाने के लिए पुलिस बल का प्रयोग करके इन कर्मचारियों की आवाज को दबाने में लगी है। केवल सिंह पठानिया का कहना है कि प्रदेश सरकार को प्रदेश के आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मान देना चाहिए था जिन्होंने कोरोना काल में आगे आकर अपने और अपने परिवार को जोखिम में डाल कर जनता की सेवा की थी, लेकिन प्रदेश सरकार ने अपनी घटिया मानसिकता का परिचय देकर सम्मान देने के बजाय लाठियां बरसाई। इस सरकार को अब सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। पठानिया का कहना है कि सचिवालय के घेराव को पहुंचे भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं को लाठियां खानी पड़ी, मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस कर्मियों ने धक्कामुक्की की और इस दौरान महासंघ के महासचिव और एक महिला आशा वर्कर कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल भी हो गए। प्रदेश के नौजवान बेरोजगारों को भी परीक्षा देने के लिए सरकार की नाकामी से भारी तकलीफों का सामना करना पड़ा। अगर सरकार ने समय रहते इन कर्मचारियों की मांगों पर गौर किया होता तो किसी को भी किसी भी प्रकार की तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ता। इस धरने से प्रदेश की आम जनता भी अछूती नहीं रही कही न कही आम जनमानस को भी धरने की वजह से कई लोगों को परेशान होना पड़ा है। केवल सिंह पठानिया का कहना है कि प्रदेश के कर्मचारी वर्ग अपने हक के लिए आवाज उठा रहा है और सरकार पुलिस द्वारा मजदूर संघ के पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करने में लग गई। एफआईआर तो उन लोगों पर होनी चाहिए जिनके द्वारा ये सब हुआ इसकी जिम्मेवार सरकार में बैठे सीएम, मंत्री और विधायक हैं। himachal Pradesh News | Himachal Politics
उपचुनाव में चारो सीटों पर मिली जीत के बाद प्रदेश में कांग्रेस (Congress) की जन जागरण अभियान के तहत निकाली पदयात्रा को लेकर उद्योग एवं परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ने कांग्रेस पर जुबानी हमला बोला है। बिक्रम सिंह का कहना है कि कांग्रेस ने इस तरह की पदयात्रा यूपी में भी की थी लेकिन वहां पर एक भी सीट कांग्रेस को नहीं मिल पाई थी। हिमाचल में उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस अति उत्साहित है। बिक्रम सिंह का कहना है कि 2022 के चुनावों में भाजपा सुधार करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुवाई में सरकार बनाएगी। उपचुनावों में मिली हार से उन्हें सुधार करने का मौका मिला है और वह इसमें निश्चित तौर पर सुधार करेंगे। वहीं बिक्रम सिंह का कहना है कि इन्वैस्टर मीट की ग्राऊंड ब्रेकिंग सेरेमनी को लेकर भी विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इन्वैस्टर मीट जैसा इवेंट हिमाचल में इससे पहले हुआ ही नहीं है। उद्योग मंत्री का कहना है कि जो लोग आलोचना कर रहे हैं उनकी सरकार लंबे समय तक प्रदेश में रही हैं, क्या कभी वह इस तरह का इवेंट करवा पाए हैं। आलोचना करने वाले लोग 5 से 10 लोग भी इकट्ठा नहीं कर पाए हैं। विधानसभा में जब सवाल उठाए गए तो तथ्यों के साथ सरकार ने जवाब दिया है कि इन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से कितने लोगों को लाभ मिला है। बिक्रम सिंह का कहना है कि हिमाचल में पहली बार प्राइवेट सेक्टर में हिमाचल के युवाओं को तवज्जो मिली है। प्रदेश में प्रस्तावित इस ग्राऊंड ब्रेकिंग सेरेमनी में 15000 करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट होगी। Himachal News | Himachal Politics
कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने जो बुरी यादें लोगो को दी वो धुंधलाई भी नहीं थी कि कोरोना का नया और अधिक संक्रामक वैरिएंट सामने आ गया। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) ने एक बार फिर दुनिया में सनसनी फैला दी है। अब तक 20 से अधिक देशों में इसके मामले पाए जाने की पुष्टि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कन्सर्न की लिस्ट में रखा गया है। बताया जा रहा है कि ओमिक्रॉन डेल्टा वैरिएंट से भी ज्यादा संक्रामक है। एक्सपर्ट्स का कहना है की ओमिक्रॉन मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज थैरेपी, वैक्सीनेशन या नेचुरल इंफेक्शन से होने वाले इम्यून रिस्पॉन्स को भी बेअसर कर सकता है। अब तक हुए अध्ययनों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कोरोना के इस वैरिएंट में 32 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट बनाते हैं। सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में देखे गए कोरोना के इस वैरिएंट ने तेजी से अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इस नए वेरिएंट को B.1.1.529 यानी ओमिक्रॉन नाम दिया है। सबसे पहले कहाँ मिला ओमिक्रोन सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने अपने देश में इस नए वेरिएंट के होने की पुष्टि की थी। बाद में इजराइल और बेल्जियम में भी यह नया वेरिएंट पाया गया। इसके अलावा बोत्सवाना और हांगकांग ने भी अपने यहां वेरिएंट के मौजूद होने की पुष्टि की। भारत में भी इस वैरिएंट के मामले सामने आ चुके है। वैज्ञानिकों को ऐसे मिला ओमिक्रॉन दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी निजी टेस्टिंग लैब लांसेट की विज्ञान प्रमुख रकेल वियाना के लिए वह जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था। उनके सामने कोरोनावायरस के आठ नमूनों के विश्लेषण थे, और इन सभी में अत्याधिक म्यूटेशन नजर आ रहा था, खासकर उस प्रोटीन की मात्रा तो बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी जिसका इस्तेमाल वायरस इंसान के शरीर में घुसने के लिए करता है। रकेल वियाना के अनुसार उसे देखकर उन्हें बड़ा झटका लगा था। उन्होंने पूछा भी कि कहीं प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई है लेकिन जल्दी ही वो झटका एक गहरी निराशा में बदल गया क्योंकि उन नमूनों के बहुत गंभीर नतीजे होने वाले थे। इसके बाद वियाना ने जोहानिसबर्ग स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्यूनिकेबल डिजीज (NICD) स्थित अपने एक सहयोगी वैज्ञानिक डेनियल एमोआको को फोन किया। एमोआको जीन सीक्वेंसर हैं। 20-21 नवंबर को एमोआको और उनकी टीम ने वियाना के भेजे आठ नमूनों का अध्ययन किया। उन सभी में समान म्यूटेशन पाई गई। कितना घातक है ओमिक्रोन वैज्ञानिक अध्ययनों में इस बात का खुलासा हुआ है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट सबसे घातक डेल्टा वेरिएंट से भी खतरनाक है। चिंता की बात यह है कि जो लोग कोविड टीकाकरण की दोनों खुराक ले चुके हैं, वह भी इस वेरिएंट की चपेट में आ सकते हैं। अब तक के वैज्ञानिक विश्लेषण से यह भी पता चला है कि नया वेरिएंट डेल्टा सहित किसी भी अन्य वेरिएंट की तुलना में तेजी से फैल रहा है। ओमिक्रॉन वेरिएंट में अब तक K417N, E484A, P681H और N679K जैसे म्यूटेशनों का पता चला है जो रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को पूरी तरह से तोड़ देते हैं। ऐसे में लोगों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने इसे 'वैरिएंट ऑफ कन्सर्न' माना है और पिछले सभी वेरिएंट से ज्यादा तेजी से फैलने वाला बताया है। उन लोगों को भी यह संक्रमित कर सकता है जो पहले संक्रमित हो चुके हैं या वैक्सीन लगवा चुके हैं। हो सकता है कि स्थिति गंभीर भी कर दे। साइंटिस्ट भी अभी इस बात को लेकर दुविधा में है कि इस नए वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कितना असर करेगी। ओमीक्रोन के स्पाइक प्रोटीन में 32 से ज्यादा म्यूटेशन्स हैं और ACE2 रिसेप्टर, जिसके रास्ते संक्रमण व्यक्ति को संक्रमित करता है, उसमें 10 से ज्यादा म्यूटेशन्स हैं। डेल्टा वेरिएंट के महज 2 म्यूटेशन थे। कम म्यूटेशन के बाद भी डेल्टा ने सेकंड वेव के दौरान कहर बरपाया था। ऐसे में ओमीक्रोन 10 वैरिएंट के साथ स्थिति को और खराब कर सकता है। WHO के अनुसार, शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से लोगों में रीइंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है। यानी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके लोग भी इस नए वैरिएंट की चपेट में आ सकते हैं। इस पर अभी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। अधिक जानकारी मिलने में थोड़ा समय लग सकता है। तब तक लोगों को संभलकर रहने की सलाह दी गयी है। कैसे होता है वायरस का म्यूटेशन? एक वायरस का पहला काम किसी के शरीर में प्रवेश के बाद खुद को जीवित रखना होता है और नेचर के हिसाब से वो शरीर में जाकर अपने आकार को बदलता है। वायरस अपना स्वरूप बदलते रहते हैं, जिसके कारण उनके नए-नए वेरिएंट बनते रहते हैं। आमतौर पर नए स्ट्रेन या वेरिएंट के काम करने के तरीके में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आता। एक बार होस्ट यानी किसी शरीर में पहुंचने के बाद वायरस तेजी से अपने आरएनए की कॉपी बनाने लगता है, जिससे कि उसकी संख्या बढ़ती रहती है। कई बार जब वायरस अपनी संख्या बढ़ा रहा होता है तो उसमें गलती से या रेंडमली आरएनए के कॉपी ने गड़बड़ी आ जाती है, इसे ही वैज्ञानिक म्यूटेशन कहते हैं। इसके कारण उसका स्वरूप बदल जाता है और एक नया स्ट्रेन सामने आ जाता है। SARS-CoV-2 पहली बार पहचाने जाने के बाद से लगातार खुद को बदल रहा है। ओमीक्रोन जिसे पहले B.1.1.1.529 के रूप में जाना जाता है। ये इस वायरस का तेरवां प्रकार है। वायरस के आनुवंशिक कोडिंग में कुछ त्रुटियों के कारण म्यूटेशन होता है। आमतौर पर यह स्थिति तब आती है जब वायरस रेप्लीकेट कर रहा होता है। कभी-कभी आनुवंशिक कोड में ये परिवर्तन वायरस में एक प्रोटीन को बदल देते हैं जिससे वायरस की प्रकृति में बदलाव आ जाता है। यही कारण है कि म्यूटेशन के बाद वायरस अधिक संक्रामक और घातक हो जाते हैं। वैज्ञानिक मानते है कि ओमिक्रॉन के मामले में भी संभवत: ऐसा ही कुछ हुआ होगा। इसलिए पड़ा ओमीक्रोन नाम कोरोना वायरस में अब तक कई म्युटेशन हो चुके है और ओमीक्रोन SARS-CoV-2 का 13वां वैरिएंट है। कोरोना के वैरिएंट्स का नाम आसान बनाने के लिए उन्हें ग्रीक लेटर्स के हिसाब से बुलाया जाता है। जैसे अल्फा, बीटा, गामा व डेल्टा। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट का नाम ओमिक्रॉन रखा गया है। ग्रीक अक्षरों में यह 15वें नंबर पर आता है। कोरोना के 12 वैरिएंट मौजूद हैं। यानी ये 13वां होना चाहिए था। मू (Mu) वैरिएंट के बाद 13वें नंबर पर नू (Nu) या 14वें नंबर पर शी (Xi) नाम देना चाहिए था। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दक्षिण अफ्रीका से निकले नए वैरिएंट का नाम 15वें ग्रीक अक्षर ओमिक्रॉन (Omicron) पर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता तारिक जसारेविक के अनुसार नू (Nu) और शी (Xi) बेहद कॉमन अक्षर हैं। कई देशों में इनका उपयोग नाम के आगे या पीछे होता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि शी (Xi) अक्षर का उपयोग इसलिए नहीं किया गया क्योंकि यह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) का नाम है। WHO का नियम है कि वायरस का नाम किसी व्यक्ति, संस्था, संस्कृति, समाज, धर्म, व्यवसाय या देश के नाम पर नहीं दिया जाता है, ताकि किसी की भावना आहत न हो। जहां तक बात रही नू (Nu) अक्षर इंग्लिश के न्यू (New) शब्द से मिलता-जुलता है। इनका उच्चारण भी लगभग एक जैसा है। लोग उच्चारण के समय कन्फ्यूज न हो इसलिए इस 13वें ग्रीक अक्षर का उपयोग कोरोना के नए वैरिएंट का नाम देने में नहीं किया गया,क्योंकि लोग न्यू वैरिएंट और नू वैरिएंट में कन्फ्यूज हो सकते हैं। कितनी असरदार है वैक्सीन? लैंसेट की एक हालिया रिसर्च में सामने आया है कि अप्रैल-मई 2021 में भारत में कोविड की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा वेरिएंट पर कोविशील्ड वैक्सीन काफी प्रभावी रही थी। इस रिसर्च के मुताबिक पूरी तरह वैक्सीनेटेड लोगों पर वैक्सीन की एफिकेसी 63 फीसदी रही, जबकि डेल्टा से होने वाली मध्यम से गंभीर बीमारी के खिलाफ वैक्सीन की एफिकेसी 81 फीसदी रही। वहीं, ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीनों के असर को लेकर फिलहाल कोई रिसर्च मौजूद नहीं है, लेकिन इस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन की वजह से इस पर मौजूदा वैक्सीनों के बहुत कम प्रभावी रहने की आशंका है। अधिकतर वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ ही एंटीबॉडीज तैयार करती हैं, लेकिन ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में तेज म्यूटेशन की क्षमता से मौजूदा वैक्सीन इसके खिलाफ बेअसर हो सकती हैं। हालांकि ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीन की एफिकेसी के आकलन को लेकर रिसर्च जारी है और इस नए वैरिएंट पर वैक्सीन कितनी कारगर होगी, इसके बारे में कुछ दिनों में पता चल पाएगा। क्या RT-PCR से पता चला पाएगा? वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने बताया है कि इस वैरिएंट को लेकर एक अच्छी बात ये है कि दुनिया में इस्तेमाल किए जा रहे RT-PCR टेस्ट के जरिए इसका पता लगाया जा सकता है। हालाँकि कई वैज्ञानिकों का मानना है की RT-पीसीआर से इसका पता लगा पाना बेहद कठिन है। वैज्ञानिकों के मुताबिक आरटी-पीसीआर टेस्ट से ही इस बात की पुष्टि हो सकती है कि व्यक्ति को संक्रमण है या नहीं, लेकिन ये टेस्ट यह पता नहीं लगा सकता कि रोगी को कोरोना वायरस का कौन सा वेरिएंट है। इसका पता लगाने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग स्टडी करनी होगी। लेकिन यहां पर भी एक पेंच है। सभी संक्रमित नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए नहीं भेजा जाता है, क्योंकि यह एक धीमी, जटिल और महंगी प्रक्रिया है। आम तौर पर सभी सकारात्मक नमूनों का केवल एक बहुत छोटा सा हिस्सा लगभग 2 से 5 प्रतिशत ही जीनोम के लिए भेजा जाता है। ये है लक्षण ओमिक्रॉन के लक्षण के बारें में WHO का कहना है कि अभी तक किसी तरह के खास लक्षण सामने नहीं आए हैं, लेकिन साउथ अफ्रीका की डॉ. एंजेलिक कोएट्जी जिसने सबसे पहले COVID-19 ओमीक्रोन वैरिएंट को रिपोर्ट किया था उनके अनुसार ओमिक्रॉन के “असामान्य लेकिन हल्के” लक्षण देखे जा रहे हैं। डॉ. एंजेलिक कोएट्जी का कहना है कि ओमिक्रॉन के लक्षण डेल्टा से अलग हैं। कोरोना के दूसरी वैरिएंट से इंफेक्ट होने पर स्वाद और सूंघने की क्षमता पर असर पड़ता था, लेकिन ओमिक्रॉन के मरीजों में ये लक्षण नहीं देखा जा रहा है। साथ ही गले में खराश तो रहती है, लेकिन कफ की शिकायत देखने को नहीं मिल रही है। बचाव वैक्सीनेशन जरूर करवाएं जरूरी है कि हर कोई अपना वैक्सीनेशन करवाएं। भारत में बड़ी ही तेजी से वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में जरूरत है कि हर कोई कोरोना वैक्सीन लगवाए और अपने घर-परिवार या दोस्तों को इस बारे में बताए। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है। ऑमिक्रोन से दूरी, मास्क है जरूरी कोरोना की पहली लहर के साथ ही विशेषज्ञों और डॉक्टर्स ने ये साफ कर दिया था कि मास्क बेहद जरूरी है। घर से बाहर जाते समय, दफ्तर में, बाजार में, किसी से मिलते समय आदि। मतलब हमें खुद भी मास्क पहनना है और बच्चों को भी पहनाना है। हो सके तो एक सर्जिकल और दूसरा कपड़े वाला मास्क पहनकर आप डबल मास्किंग भी कर सकते हैं। सामाजिक दूरी बनाकर रखें कोरोना के इस नए वैरिएंट से बचना है, तो हर किसी को पहले की तरह ही एक-दूसरे से सामाजिक दूरी बनाकर रखनी पड़ेगी। बेवजह घर से बाहर जाने से बचें, भीड़ वाली जगहों से खुद को दूर रखें, दुकान पर भीड़ करने से बचें, दफ्तर जा रहे हैं तो अलग रहें आदि। हैंड हाइजीन का ख्याल रखें हमें अपने हाथों को साबुन और सैनिटाइजर से साफ करते रहना चाहिए। पानी और साबुन से 20 मिनट तक अपने हाथों को धोएं, घर में जाते समय सैनिटाइजर करें, घर जाकर नहाना भी एक बेहतर विकल्प है आदि। India News | Corona Update | Himachal Pradesh
2022 विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और दोनों राजनैतिक दलों के साथ -साथ टिकट के चाहवान भी मैदान में डटे है। यूं तो हर सीट पर रोचक घमासान तय है और अभी से खींचतान भी चरम पर है, पर सोलन निर्वाचन क्षेत्र की कहानी अलग भी है और अजब भी। यहां कांग्रेस के पास 80 पार कर चुके कर्नल का कोई विकल्प नहीं दिखता तो भाजपा के डॉक्टर अपनों के मर्ज का ही सबब बने हुए है। कर्नल के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार अच्छा कर रही है, बावजूद इसके उनके विरोधियों की खासी तादाद है। पर वर्तमान में कोई ऐसा नहीं दिखता जो कर्नल के टिकट को चुनौती दे रहा हो। उधर भाजपा में डॉ राजेश कश्यप को अपने ही पूरी तरह नहीं स्वीकार रहे। विरोधी इसी ताक में है कि कोई मौका हाथ लगे और डॉक्टर को चित कर दे। पार्टी इसका खामियाजा भी उठा रही है। सोलन की वर्तमान सियासत को समझने के लिए बीते दो दशक पर नज़र डालना जरूरी है। वर्ष 2000 में सोलन विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था और उस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ राजीव बिंदल ने जीत दर्ज की थी। ये पहली बार था जब बिंदल विधानसभा पहुंचे थे, यानी ये प्रदेश की सियासत में बिंदल की एंट्री थी। इसके बाद 2003 और 2007 में भी बिंदल जीते और सोलन निर्वाचन क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ बना गया। बिंदल ने आते ही तमाम विरोधी भी साइडलाइन कर दिए और इस दौरान सोलन में कांग्रेस भी कमजोर होती गई। फिर बदले परिसीमन के बाद सोलन निर्वाचन क्षेत्र आरक्षित हो गया और 2012 के विधानसभा चुनाव में बिंदल चेहरा नहीं रहे। बिंदल ने नाहन को कर्मभूमि बनाया और पार्टी ने कुमारी शीला को चेहरा। वहीं कांग्रेस ने दो बार शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे कर्नल धनीराम शांडिल को मैदान में उतारा। नतीजे आये और शांडिल की जीत के साथ ही कांग्रेस ने जीत का सूखा खत्म किया। तब से अब तक सोलन निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा लगातार कमजोर होती दिखी है। बिंदल के बाद जिस एक अदद चेहरे की जरुरत पार्टी को है उसे लेकर अब भी संशय की स्थिति है। 2017 के विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस ने फिर कर्नल धनीराम शांडिल पर भरोसा जताया था तो भाजपा ने आईजीएमसी में बतौर चिकित्सक सेवाएं देते रहे डॉ राजेश कश्यप को मैदान में उतारा। तब कुमारी शीला और तरसेम भारती भी दावेदार थे लेकिन डॉ राजेश कश्यप की पैराशूट लैंडिंग ने सबके अरमानो पर पानी फेर दिया। माना जाता है कि टिकट के लिए उनकी राह प्रशस्त करने में तब डॉ राजीव बिंदल की भी अहम भूमिका रही थी। हालांकि बिंदल के करीबी ही टिकट आवंटन को लेकर नाराज़ थे। खेर नजदीकी मुकाबले में डॉ राजेश कश्यप हार गए और कर्नल धनीराम शांडिल लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव के बाद सोलन भाजपा में बहुत कुछ बदला और पार्टी दो धड़ों में बंटी दिखी है। चुनाव के बाद कश्यप आहिस्ता-आहिस्ता सोफट गुट के नजदीक हो गए। वहीं महेंद्र नाथ सोफत जिन्हे बिंदल का धुर विरोधी माना जाता है। इसी गुटबाजी का नतीजा है कि इसी वर्ष हुए जिला परिषद और सोलन नगर निगम चुनाव भी भाजपा के लिए प्रतिकूल रहे है और वर्तमान स्थिति में पार्टी के लिए 2022 की राह भी आसान होने वाली नहीं है। शीला और तरसेम, सक्रियता और पकड़ दोनों बढ़ाने होंगे ! भले ही सोलन भाजपा में एक बड़ा तबका डॉ राजेश कश्यप के विरोध में दिख रहा हो लेकिन सवाल ये है कि 2022 में यदि डॉ राजेश कश्यप नहीं तो कौन ? जिला परिषद् चुनाव में सलोगड़ा वार्ड से कुमारी शीला भाजपा उम्मीदवार थी। लगातार तीन चुनाव जीत चुकी कुमारी शीला जीत का चौका लगाने का दावा कर रही थी लेकिन जनता का आशीर्वाद उन्हें नहीं मिला। ये हार कुमारी शीला के लिए बड़ा झटका है। शीला अगर जीत जाती तो 2022 के लिए उनका दावा भी मजबूत होता, किन्तु ऐसा हुआ नहीं। शीला अधिक सक्रीय भी नहीं दिख रही है। ऐसी ही स्थिति 2017 तक पार्टी में प्रो एक्टिव दिखते रहे तरसेम भारती की है। पहले ख़राब स्वास्थ्य ने तरसेम को सक्रिय राजनीति से दूर रखा। अब भी वे अधिक सक्रिय नहीं दिखते और न ही पार्टी के जमीनी संगठन में उनकी स्वीकार्यता और पकड़ दिखती है। इन दोनों नेताओं को यदि 2022 के लिए अपना दावा मजबूत करना है तो सक्रियता भी बढ़ानी होगी और दमखम भी दिखाना होगा। वर्तमान स्थिति में तो ये डॉ राजेश कश्यप को ज्यादा टक्कर देते नहीं दिखते। क्या दो भाइयों में होगा टिकट के लिए मुकाबला ? भाजपा के सामने एक अन्य विकल्प पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप भी हो सकते है। कश्यप दो बार शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे है। रोचक बात ये है कि डॉ राजेश कश्यप और वीरेंद्र कश्यप भाई है। पर वीरेंद्र कश्यप 2019 लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से ही लगभग साइलेंट है। जानकार मानते है कि सियासत महाठगिनी है और 2022 में टिकट के लिए दो भाई भी अगर दौड़ में दिखे तो शायद किसी को हैरानी न हो। कश्यप फेस, पर तालमेल बैठाने में फेल सोलन की सियासत में फिलवक्त डॉ राजेश कश्यप ही भाजपा का प्राइम फेस है। सरकार में कामकाज करवाने का रसूख कश्यप का ही माना जाता है लेकिन जमीनी संगठन में ही उन्हें लेकर स्वीकार्यता नहीं दिखती। दरअसल भाजपा के संगठन में बिंदल के निष्ठावानों की भरमार है। ऐसे में डॉ कश्यप के साथ संगठन पूरी तरह कदमताल करता नहीं दिखता। वहीँ कश्यप भी अब तक संगठन में उस तरह की जमीनी पैठ नहीं बना पाए जैसी समर्थकों को उनसे उम्मीद थी। इसी तालमेल की कमी का खामियाजा पार्टी जिला परिषद और नगर निगम चुनाव में भुगत चुकी है। हालात नहीं बदले तो निजी तौर पर डॉ राजेश कश्यप के लिए भी आगे की राह बेहद मुश्किल होगी। शांडिल का विकल्प नहीं 81 पार कर चुके डॉ कर्नल धनीराम शांडिल इस वक्त सोलन कांग्रेस का सबसे बड़ा और मजबूत चेहरा है। 2012 में शांडिल ने ही सोलन में कांग्रेस की वापसी करवाई थी और अब भी वे ही सोलन निर्वाचन क्षेत्र में एकछत्र नेता है। 2022 में भी संभवतः शांडिल ही कांग्रेस का चेहरा होंगे क्यों कि उनका विकल्प पार्टी के पास नहीं दिखता। वीरभद्र सरकार में मंत्री रहे शांडिल को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है और यदि पार्टी की सत्ता वापसी होती है तो उन्हें कोई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी भी दी जा सकती है। पर ये जहन में रखना भी जरूरी है कि 2022 विधानसभा चुनाव के वक्त शांडिल की उम्र 82 पार होगी और उनका विकल्प न होना पार्टी के अच्छी स्थिति नहीं है। गिले शिकवे मिटाकर होगी राह आसान वीरभद्र सरकार में मंत्री रहते हुए कर्नल धनीराम शांडिल ने साढ़े चार सौ करोड़ से अधिक के काम करवाए थे, हालांकि इसके बावजूद शांडिल प्रभावशाली जीत दर्ज नहीं कर सके। कई मौकों पर शांडिल पार्टी के एक गुट पर 2017 में उनके विरोध में काम करने की बात कह चुके है। जिला परिषद् चुनाव में सिरिनगर वार्ड के टिकट के लिए वरिष्ठ नेता रमेश ठाकुर और कर्नल में खुलकर ठनी और उस दौरान शांडिल ने रमेश ठाकुर की पत्नी लीला देवी का टिकट कटवाया। बावजूद इसके लीला देवी जीत दर्ज करने में कामयाब रही। रमेश ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी मानते जाते है, पर अब वीरभद्र सिंह के निधन के बाद बदली स्तिथि में राजनैतिक समीकरण भी बदल सकते है। कंडाघाट ब्लॉक में ठाकुर का अच्छा प्रभाव है और 2022 में यदि पार्टी को बेहतर करना है तो कर्नल और ठाकुर को साथ आना होगा। बेदाग़ भी और गुटबाजी से भी दूर है शांडिल डॉ कर्नल धनीराम शांडिल, हिमाचल की सियासत का वो बेदाग़ नाम जिस पर विरोधी भी कभी कीचड़ नहीं उछाल पाएं। वीरभद्र सरकार के खिलाफ वर्ष 2016 में भाजपा एक चार्जशीट लाई जिसमे कांग्रेस के मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे। तब भाजपा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, बेटे विक्रमादित्य सिंह, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू, 10 मंत्रियों, 6 सीपीएस और 10 बोर्ड-निगम-बैंकों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों समेत कुल 40 नेताओं और एक अफसर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। पर उस चार्जशीट में भी कर्नल धनीराम शांडिल का नाम नहीं था। यानी विपक्ष भी कभी उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा पाया। एक बात और कर्नल शांडिल की खूबी है, वो है उनकी गुटबाजी से दुरी। प्रदेश कांग्रेस में कई धड़े है, पर शांडिल किसी भी गुट में शामिल नहीं है। ऐसे में शांडिल से पार पाने को भाजपा को संगठित भी होना होगा और पूरी ताकत भी झोंकनी होगी। Himachal Pradesh | Solan News | Himachal Politics
इशारों इशारों में एलान हो चूका है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर 2022 विधानसभा चुनाव के समर में उतरने को तैयार है। राठौर अपनी सियासी जमीन तलाशने में जुटे है और दो निर्वाचन हलकों में उनके चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है, पहला ठियोग और दूसरा शिमला शहरी सीट। विरोधी कभी मजबूर कहकर जिन कुलदीप राठौर का उपहास उड़ाते थे वो अब बेहद मजबूत दिख रहे है। चुनाव लड़ने के सवाल पर कुलदीप कहते है कि जिस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई थी वहां से ही चुनाव लड़ेंगे। अब दिलचस्प बात ये है कि 2017 में ठियोग और शिमला शहर, दोनों जगह कांग्रेस की जमानत जब्त हुई थी। ठियोग से कांग्रेस प्रत्याशी दीपक राठौर, तो शिमला शहर से हरभजन सिंह भज्जी की जमानत जब्त हुई थी। यानी राठौर ने दोनों विकल्प खुले रखे है। ठियोग विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस की कद्दावर नेता विद्या स्टोक्स का चुनावी क्षेत्र रहा है। पर पिछले चुनाव में पार्टी आलाकमान ने यहाँ से मैडम स्टोक्स का टिकट काटकर दीपक राठौर को उम्मीदवार बनाया था। कहते है राठौर पार्टी आलकमान के नजदीकी है जिसके बुते ही उन्हें टिकट मिला था। तब दीपक राठौर टिकट तो ले आये पर जीत नहीं सके। ख़ास बात ये है की उस चुनाव में राठौर की जमानत जब्त हुई थी। ठियोग की जनता ने कम्युनिस्ट राकेश सिंघा को अपना विधायक चुना था। हालांकि राठौर पिछले चुनाव हारने के बाद से ही क्षेत्र में सक्रिय जरूर है। पर यदि कुलदीप सिंह राठौर ठियोग से चुनाव लड़ने का मन बनाते है तो दीपक राठौर को दूसरा मौका मिलना मुश्किल होगा। पर यहाँ कुलदीप राठौर को ये भी जहन में रखना होगा कि यदि माकपा विधायक राकेश सिंघा फिर से मैदान में उतरते है तो मुकाबला आसान नहीं होने वाला। जानकार मान कर चल रहे है कि सिंघा के अगले कदम पर ही कुलदीप की चुनावी चाल निर्भर करेगी। शिमला शहर की बात करें यहां पिछले चुनाव में पार्टी ने हरीश जनारथा की दावेदारी को नकार हरभजन सिंह भज्जी को टिकट दिया था। नतीजन पार्टी के एक गुट में नाराजगी थी और भज्जी की जमानत भी नहीं बच सकी। अब भी शिमला शहर में कांग्रेस कई गुटों में बंटी है और ये अंतर्कलह शिमला शहर में पार्टी का पुराना मर्ज रहा है। शिमला शहर में बीते कई चुनाव में कांग्रेस के अपने ही बतौर बागी पार्टी प्रत्याशी का खेल बिगाड़ते आ आ रहे है। ऐसे में राठौर के लिए भी शिमला शहर आसान सीट नहीं रहने वाली। हाँ टिकट के लिए उनका दावा जरूर मजबूत रहेगा क्यों की बतौर प्रदेश अध्यक्ष उनके योगदान के बुते उनका सियासी कद निसंदेह बढ़ा है। Himachal Politics | Shimla News | Theog News |
सरकार को उम्मीद थी कि जेसीसी की बैठक के बाद स्थिति बेहतर होगी। आर्थिक व्यय ज़रूर बढ़ेगा पर कर्मचारियों को साधने में कामयाबी मिलेगी। कर्मचारी भी खुश होंगे और विरोधी भी खामोश हो जाएंगे। पर हुआ कुछ और। जिन कर्मचारियों को सरकार ने सौगातें दी वो तो आधे अधूरे संतुष्ट हुए पर जिनके लिए सरकार कुछ नहीं कर पाई उनका गुस्सा दोगुना हो गया। प्रदेश में चार साल के लम्बे अंतराल के बाद भाजपा सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए जेसीसी की बैठक का आयोजन किया गया। कर्मचारियों की उम्मीदें आसमान छू रही थी। कर्मचारियों को लगा कि जो पिछले चार साल में नहीं हो पाया वो शायद अब हो जाए। उनकी सभी मांगे शायद सरकार पूरी कर दे। सरकार ने कोशिश भी की। कई मांगों को पूरा करने की घोषणा की गई। जेसीसी बैठक में मुख्यमंत्री ने पंजाब की तर्ज पर कर्मचारियों के लिए बहुप्रतीक्षित नए वेतनमान की घोषणा की, अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की अवधि भी तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष करने की घोषणा हुई, सभी पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को एक जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन और अन्य संबंधित लाभ की घोषणा जैसी कई अन्य छोटी बड़ी मांगें पूरी करने की घोषणाएं हुई। पर कर्मचारी पूरी तरह संतुष्ट हुए ऐसा बिलकुल नहीं कहा जा सकता। तर्क दिए गए की जिस छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की बात सरकार ने कही है उसमें तो पहले ही पांच साल का विलंब हो चुका है। ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू न कर सिर्फ 2009 की नोटिफिकेशन की घोषणा करना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है और अनुबंध काल घटाने की घोषणा तो भाजपा अपने 2017 के दृष्टि पत्र में ही कर चुकी थी। जेसीसी की बैठक से लम्बे समय से नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग कर रहे कर्मचारी निराश घर लौटे, करुणामूलक आश्रितों का अनशन भी नहीं टूटा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी नीति नहीं बन पाई। बड़ा बवाल तो उनकी तरफ से किया गया जिनकी मांगों का ज़िक्र तक मुख्यमंत्री करना भूल गए। बैठक के बाद सरकार के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले प्रदेश के आशा वर्करों, आंगनबाड़ी वर्करों और कई संगठनों ने शिमला में विशाल रैली निकाली और सचिवालय गेट पर घंटों जमकर प्रदर्शन किया। पीस मिल कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए और यहां तक की पुलिस कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर लिया। यानी की मोटे तौर पर देखा जाए तो सरकार की मुश्किलें कम होने के बजाए और अधिक बढ़ गई। अब मुख्यमंत्री द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पीस मिल वर्कर समेत असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों व अन्यों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए सभी विभागों को इन मांगों को अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। पुलिस के कर्मचारियों की समस्या का हल निकालने की बात भी मुख्यमंत्री द्वारा कही गई है। पर असल सवाल ये है कि इन समस्याओं के हल के लिए सरकार आखिर वित्तीय सहायता लाएगी कहां से। आर्थिक तंगी बड़ी चुनौती कर्मचारियों की नाराज़गी मात्र ही सरकार की मुख्य समस्या नहीं है। सरकार ने कर्मचारियों की जेसीसी बैठक तो करवा ली, लेकिन बैठक में लिए गए फैसलों को धरातल पर उतारने के लिए 18 से 20 हजार करोड़ रुपये की रकम जुटाना 62 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी सरकार के लिए चुनौती होगा। इन फैसलों से इतर सड़कों पर उतर चुके असंतुष्ट कर्मचारियों और कामगारों को न्यायोचित वित्तीय लाभ देना भी आसान नहीं होगा। अगले वित्तीय वर्ष में केंद्र से लगभग 12 हजार करोड़ रुपये कम ग्रांट मिलेगी। राजस्व घाटा अनुदान, जीएसटी प्रतिपूर्ति आदि में कटौती हो रही है। नए वेतन अगर छह हजार करोड़ रुपये चाहिए तो इसके एरियर के लिए 12 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रकम देनी होगी। एरियर की ज्यादा किश्तें बनाई तो भी कर्मचारी संतुष्ट नहीं होंगे। चुनावी साल से पहले पंजाब के बाद हिमाचल को नए वेतनमान देने की बाध्यता है। ऐसे में सरकार ये सब कैसे मैनेज करती है ये भी बड़ा सवाल है। सरकार कर्मचारियों की मांगें पूरी करनी की कोशिश कर रही है मगर इन मांगों को पूरा करने के लिए सरकार के पास संसाधनों की कमीं है ये स्पष्ट है। हर कर्मचारी को संतुष्ट कर पाना संभव भी नहीं लगता। सरकार नहीं कर्मचारी हितेषी कर्मचारियों की बढ़ती नाराज़गी के चलते विपक्ष को सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस के नेताओं के अनुसार मुख्यमंत्री कर्मचारी हितैषी नहीं है और जेसीसी की बैठक से कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं हुआ है। कर्मचारियों को ये यकीन दिलाने की कोशिश की जा रही है की जो अब तक नहीं हुआ वो आगे भी नहीं होगा। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता व शिलाई से विधायक हर्षवर्धन चौहान ने तो ये तक कह दिया की जेसीसी की बैठक के बाद अराजकता फ़ैल गई है। कर्मचारियों के मुद्दों पर अपनी सियासी रोटियां खूब सेकी जा रही है। खैर वजह कोई भी हो मगर कर्मचारियों की बात हो रही है ये बड़ी बात है । उम्मीद्द है कि अब इस सियासी दबाव के बीच कर्मचारियों का बेड़ा पार हो जाए। मुख्य लंबित मांगे -पुरानी पेंशन बहाल की जाए - नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता प्रदान की जाए - करुणामूलक आश्रितों को वन टाइम सेटलमेंट के तहत नौकरियां दी जाए - पुलिस कॉन्स्टेबलों के प्रोबेशन पीरियड को घटाने की मांग - एचआरटीसी के पीस मिल कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने की मांग - आशा वर्करों, आंगनबाड़ी, आउटसोर्स, सिलाई-कढ़ाई कर्मचारियों को सरकार के नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर वित्तीय लाभ देने की मांग | Himachal News Updates | Himachal Pradesh Govt. Employees News
कौन डटा रहेगा और किसे कुर्सी का मोह त्याग आगे बढ़ना होगा कुछ कह नहीं सकते। पर बदलाव होगा ये निश्चित है। स्वयं मुख्यमंत्री भी ये कह चुके है कि उपचुनाव की उस करारी शिकस्त के बाद अब वो होगा जो मंज़ूर-ए-आलाकमान होगा। कयासों की सुई अब संगठन और मंत्रिमंडल पर आकर टिक गई है। हालांकि कौन रहेगा और किसकी विदाई होगी अभी कुछ कह नहीं सकते। नगर निगम चुनाव और उपचुनाव में मिली हार के बाद, प्रेशर पॉलिटिक्स का दंश झेल रही भाजपा और भी कई मुसीबतों से गुज़र रही है। पार्टी विद डिसिप्लिन में व्यापक बदलाव की दरकार भी है और सुगबुगाहट भी। पहले तो मुख्यमंत्री तक बदलने के कयास लग रहे थे मगर अब माहौल थोड़ा ठंडा है तो ऐसा कुछ होता नहीं दिखाई दे रहा। पर मंत्रिमंडल के नॉन परफार्मिंग मंत्रियो पर अब भी बदलाव की तलवार लटक रही है। इस पर मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा भी खूब चर्चा में है। प्रदेश मंत्रिमंडल के कई मंत्री ऐसे है जो खुद को साबित करने में विफल रहे है। कई मौकों के बावजूद भी जो न तो अपना दमखम दिखा पाए और न ही अपनी साख बचा पाए। कई अपने शब्दों को लेकर विवादों में रहते है और कई अपने बर्ताव को लेकर। उपचुनाव में पार्टी ने जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को मंडी संसदीय सीट के लिए, बिक्रम ठाकुर को फतेहपुर के लिए, और मंत्री सुरेश भारद्वाज को जुब्बल कोटखाई उपचुनाव के लिए प्रभारी नियुक्त किया था। इनके आलावा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर और मंत्री राम लाल मारकंडा पर भी अपने -अपने क्षेत्रों से लीड दिलवाने का जिम्मा था। पर ये सभी असफल रहे। हार मिली या जीत कम से कम उपचुनाव में ये मंत्री फील्ड पर दिख रहे थे। इनके अलावा कुछ ऐसे मंत्री भी है जिनका उपचुनाव के दौरान कोई ख़ास प्रभाव देखने को नहीं मिला। जैसे की मंत्री राजेंदर गर्ग, सरवीण चौधरी, और मंत्री सुखराम चौधरी। भाजपा की तीन दिवसीय कार्यसमिति की बैठक के बाद ये तर्क दिया गया भाजपा के कार्यकर्ता व नेताओं में अतिआत्मविश्वास था और इसीलिए भाजपा उपचुनाव हारी। हालाँकि असल में आत्मविश्वास वाली स्थिति भी सिर्फ मंडी में देखने को मिल रही थी। लग रहा था मानों कार्यकर्ताओं को केवल मुख्यमंत्री पर भरोसा है। परिणाम भी कुछ ऐसे ही बाहर आए। शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर के जिला कुल्लू की चारों सीटों पर भाजपा पिछड़ी। मंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी पार्टी को लीड नहीं मिली। यानि मंडी संसदीय उपचुनाव के इम्तिहान में गोविन्द सिंह ठाकुर पूरी तरह फेल हो गए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि मंत्री के जिला में पार्टी अच्छा करती तो जीत हार का अंतर खत्म किया जा सकता था। तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. रामलाल मारकंडा के क्षेत्र में भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। मंत्री अपने हलके व गृह जिले में भाजपा की साख नहीं बचा पाए। लाहौल स्पीति में कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त मिली। लाहुल स्पीति के विधायक एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. रामलाल मारकंडा जिला परिषद के चुनाव में भी कुछ अच्छा नहीं कर पाए थे। जिला परिषद् के चुनाव में भी भाजपा को हार मिली थी। इस पर मंत्री का लड़ाई वाला वायरल वीडियो भी एक ऐड ऑन फैक्टर है। बात विवादों की हो तो ज़िक्र मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और मंत्री सुरेश भारद्वाज का भी ज़रूरी है। अपने बयानों को लेकर दोनों ही खूब चर्चा में रहते है। मंत्री महेंद्र ठाकुर को मंडी संसदीय उपचुनाव का प्रभारी बनाया गया था। पर वे भी चुनाव प्रचार प्रसार में अधिक प्रभावशाली नहीं दिखे। वहीं मंत्री सुरेश भारद्वाज के हलके में जो हुआ उसे तो भूलना भी असंभव है। जुब्बल कोटखाई की हार को भाजपा के इतिहास का काला अध्याय कहा गया। यहां देश की सबसे बड़ी पार्टी के प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। यहां संगठन भी टूटा और कार्यकर्त्ता भी पार्टी से रूठ गया। स्थिति सुधरने के बजाए दिन प्रति दिन बिगड़ती चली गई। चुनाव प्रभारी सुरेश भारद्वाज अपने कार्यकर्ताओं को मनाने में पूरी तरह विफल रहे और नतीजा अब सभी के सामने है। फतेहपुर के चुनाव प्रभारी, उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर व सेह प्रभारी वन मंत्री राकेश पठानिया ने भी फेल हुए है। विशेषकर बिक्रम ठाकुर के लिए ये बड़ी हार है। इससे पहले पालमपुर नगर निगम चुनाव में भी मंत्री प्रभारी थे और भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। अब इन मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर क्या रिपोर्ट आती है इसपर सबकी निगाहें टिकी हुई है। बिंदल की वापसी के पक्ष में एक तबका कई मंत्रियों के एग्ज़िट के साथ साथ कुछ की मंत्रिमण्डल में एंट्री होने की सुगबुगाहट भी है। एक बड़ा तबका चाहता है कि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व नाहन से विधायक डॉ राजीव बिंदल ककी संगठन या मंत्रिमंडल में वापसी हो। इसको लेकर प्रेशर पॉलिटिक्स की शुरुआत भी हो चुकी है। बिंदल के समर्थकों के इस्तीफे आना भी शुरू हुए है। ये सच है कि बिंदल भी बतौर प्रभारी अर्की उपचुनाव और सोलन नगरनिगम चुनाव में अच्छा नहीं कर पाए पर उनकी ज़मीनी पकड़ पर कोई संशय नहीं है और उनके समर्थकों का दबाव तो है ही। अब बिंदल की एंट्री होती है तो किसके स्थान पर होगी ये बड़ा सवाल है और अगर नहीं होती तो उन्हें मैनेज कैसे किया जाए ये भी बड़ा सवाल है। | Himachal Politics | Himachal News
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मंडी-धर्मशाला, कुल्लू-मंडी, मंडी-शिमला और शिमला-रामपुर के लिए सोमवार से हेली टैक्सी सेवाएं शुरू हो रही हैं। इससे प्रदेश में पर्यटन भी रफ्तार पकड़ेगा। ये चारों रूट पहली बार शुरू किए गए हैं। हेली टैक्सी (Heli - Taxi) की सेवा से अब मंडी और रामपुर को भी जोड़ दिया गया है। गगल पवन हंस स्टेशन मैनेजर नैंसी धीमान ने कहा कि हेली टैक्सी के लिए रविवार से बुकिंग शुरू हो गई है। पवन हंस ने अपनी सेवाओं से अब मंडी-कुल्लू व रामपुर को भी जोड़ा है। धर्मशाला-शिमला आने वाली उड़ान अब वाया मंडी होकर आएगी। हेली टैक्सी वापसी भी इसी रूट से करेगी। कुल्लू-शिमला उड़ान के साथ ही अब मंडी जिला को भी जोड़ा गया है। Heli taxi service will start on these routes of the state from today | Himachal Pradesh
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के करीब 300 रेजिडेंट डॉक्टर आज 2 घंटे की हड़ताल पर है। जिसके कारण प्रदेशभर से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों में न तो सुबह मरीजों की जांच को लेकर डॉक्टरों का राउंड हुआ और न ही ओपीडी में समय पर उपचार हुआ। हालांकि आईजीएमसी की ओपीडी में वरिष्ठ डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे। डॉक्टर नीट पीजी की काउंसलिंग को अस्थायी तौर पर आगे बढ़ाने के बाद देशभर में फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के समर्थन में आईजीएमसी की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन भी हड़ताल कर रही है।अस्पताल के 300 रेजिडेंट डॉक्टर आज सुबह साढ़े नौ से साढ़े ग्यारह बजे तक हड़ताल पर रहे। वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ रेजिडेंट डॉक्टर हेल्प करते हैं। ऐसे में उनके 2 घन्टे तक ड्यूटी में न होने से दूर दराज से आए मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांग न मानी गई तो हड़ताल बढ़ाई जा सकती है। Shimla News


















































