मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं के बारे में प्रधानमंत्री के साथ चर्चा की Shimla Himachal News
भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार त्रिलोक जम्वाल ने बताया कि चंडीगढ़ और दिल्ली में रह रहे हिमचलवासियो को अब हिमाचल सरकार द्वारा बड़ी सुविधा प्रदान की गई है। हिमाचल सदन दिल्ली और हिमाचल भवन चंडीगढ़ में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ, मुख्यमंत्री विंडो का निर्माण किया गया है, अब जो भी हिमाचल के नागरिक चंडीगढ़ एवं दिल्ली में रह रहा है उने हिमाचल एवं शिमला के लगातार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने इन दो स्थानों पर ड्राप बॉक्स की सुविधा जनता को प्रदान की है और दो हेल्पलाइन नंबरो को भी शुरू किया है यह नंबर 01722637504 एवं 01121610380 है। यह सुविधा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 का आधार पर शुरू की गई हैं । उन्होंने बताया कि हिमाचल सरकार के अफसर इन दो स्थानों पर लगातार बैठेंगे और किसी भी प्रकार की समस्या दिल्ली एवं चंडीगढ़ के हिमचलवासियो को आ रही है उनको शिमला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाएंगे, समस्या के समाधान के उपरांत शिकायतकर्ता को समपर्क कर समस्या के समाधान हेतु अवगत भी करवाया जाएगा। इस सुविधा से हमारे प्रदेश के लाखों लोगों को दिल्ली और चंडीगढ़ में बड़ा लाभ पहुंचेगा।
एक समय था जब हमारे देश में अनाज की कमी हो गई थी। उस समय सरकार ने अपने देशी बीजों को विकसित करने की बजाए विदेशी हाइब्रिड बीजों को तवज्जो दी गई। बाहर से जो बीज आए उनके लिए भरी मात्रा में रासायनिक खाद और दवाइयों का इस्तेमाल भी किया गया। अत्यधिक पानी का दोहन किया गया। इसका दुष्परिणाम ये हुआ कि हमारे देश की मिट्टी बर्बाद हो गई, इंसानों में कई किस्म की बीमारियों को बढ़ावा मिला। इन सब बुरे परिणाम को ठीक करने की कोशिश के तहत पर्वतीय टिकाऊ खेती अभियान हिमाचल प्रदेश द्वारा पूरे हिमाचल प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। महिला मंडलों के साथ मिलकर पुराने अनाजों को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। इसको लेकर बीते दिन करसोग के राम मंदिर में मिलेट्स फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कोदरा, कौनी, बिथु, नंगा जौ, काली गेंहू, जवार, कोदो, चीना, लाल मक्की आदि दिखाई गई। इनकी खासियत ये है कि ये अनाज सौ सालों तक भी खराब नही होते। मिलिटस फेस्टिवल के दौरान विभिन्न अनाजों का का हलवा, खीर, चाय, रोटी आदि बनाकर खिलाई गई। खिलाने के लिए पत्तों से बने दौनों का इस्तेमाल किया गया। कार्यक्रम के संचालक लोक कृषि नेकराम शर्मा ने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने बहुत तपस्या के साथ हमारे लिए कृषि बीजों को विकसित किया था लेकिन नकदी फसलों के लालच में हमने नए बीज अपना कर बीमारियों को न्यौता दिया है। उपमंडल अधिकारी सनी शर्मा ने पुराने बीजों के दर्शन करते हुए कहा कि करसोग में जितने किसान इस तरह के अनाज की खेती कर रहे हैं इसका अध्यन करना चाहिए। इसकी बिक्री के लिए करसोग में एक जैविक कृषि उत्पादों के लिए बाजार बनाया जाएगा। इस के लिए सारे विभागों से बात कर युद्धस्तर पर जगह देखी जायेगी। जैविक खेती करने वाले किसानों के साथ मिलकर जल्द ही कृषि विभाग द्वारा फरामार प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन बनाया जाएगा।
मंडी जिले में हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना के तहत 61,231 परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इसके लिए 22 करोड़ 66 लाख रुपये की राशि व्यय की गई है। यह जानकारी उपायुक्त मंडी अरिंदम चौधरी ने दी । अरिंदम चौधरी ने बताया कि इसके अलावा हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना के तहत 42062 उपभोक्ताओं को निःशुल्क एलपीजी रिफिल भी वितरित किए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना के सभी लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत एक रिफिल देना सुनिश्चित करें तथा इसका व्यापक प्रचार प्रसार करें ताकि जो लोग किसी कारणवश मुफ्त रिफिल सुविधा का लाभ नहीं ले पाए हैं वह भी इस सुविधा का लाभ ले सकें। लोगों को सस्ता राशन मुहैया कराने को 5 महीने में खर्चे 78 करोड़ उपायुक्त ने बताया कि जिले में 799 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से जुलाई से नवम्बर 2021 तक 3,19,712 कार्डधारकों को 63,504 क्विंटल गंदम, 2,04595 क्विंटल आटा, 1,68,882 क्विंटल चावल, 30639 क्विंटल दालें, 22499 क्विंटल चीनी, 24,42,458 लीटर खाद्य तेल वितरित किया गया है, जिस पर लगभग 78 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिला को दिए गए कुल 536750 लाभार्थियों के लक्ष्य के प्रति कुल 439766 लाभार्थियों का चयन किया जा चुका है। जहां दूरी अधिक हो वहां खोलें और उचित मूल्य की दुकानें - पाल वर्मा वहीं, जिला परिषद मंडी के अध्यक्ष पाल वर्मा ने बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और बेहतर बनाने को लेकर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि विभाग को उन स्थानों पर और अधिक उचित मूल्य की दुकानें व विस्तार पटल खोलने चाहिए जहां की दूरी अधिक है, ताकि लोगों को उनके घरों के समीप सुविधा का लाभ मिल सके। बैठक में समस्त औपचारिकताओं को पूर्ण पाने पर 18 उचित मूल्य की दुकानें आवंटित करने का निर्णय लिया गया।
कृषि, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पशुपालन एवं मछली पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि ने कहा कि सामाजिक गतिविधियों एवं विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा उन्हें सशक्त व सक्षम बनाने के लिए प्रभावशाली योजनाएं आरंभ की गई हैं। समावेशी समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। वीरेन्द्र कंवर बीते दिनों नगरोटा बगवां विधान सभा क्षेत्र के पठियार में 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले स्वच्छता कैफे का शिलान्यास करने के उपरांत उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने पठियार में स्वच्छता कैफे बनाए जाने की लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ाने और महिलाओं द्वारा बनाये गए स्थानीय उत्पादों को विक्रय करने के लिये दो मंजिला भवन बनाया जा रहा है। राजीव गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज नगरोटा बगवां के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर द्वारा बनाये गए प्राकलन में इसका निर्माण पत्थर, बांस और स्लेट इत्यादि के प्रयोग से किया जायेगा। उन्होंने कहा कि दो मंजिला इस स्वच्छता कैफे में 5 दुकानें, 7 वाहनों के लिये पार्किंग के अतिरिक्त पहली मंजिल में ओपन थिएटर सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने आर्किटेक्ट द्वारा बनाई गई ड्राईंग की सराहना की। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि स्वयं सहायता समूह के लिए प्रदेश में इस तरह के 100 आउटलेट बनाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त मेले और सरस मेलों का आयोजन किया जा रहा है जिससे महिलाएं अपने उत्पादन बेहतर तरीके से बेच सकें। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह के बनाए गए उत्पादों को बेचने के लिए एमाजोन कंपनी से एमओयू साइन किया गया है और इस समय ऐसे 50 उत्पाद एमाजोन पर विक्रय के लिए उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि डाक विभाग से भी इन उत्पादों को बेचने के लिए एमओयू साइन किया गया है। उन्होंने कहा कि सहायता समूह को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध हो इसके लिए भविष्य में आउटलेट की संख्या 1000 तक बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित कर 1919 उन्हें सशक्त करने के प्रयास से राष्ट्रीय आजीविका मिशन चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में जिला का सबसे बड़ा पशु अस्पताल जोनल अस्पताल के रूप में दिया गया है इसके अतिरक्त चंगर क्षेत्र के लिए खंड विकास कार्यालय दिया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पठियार, मझेठली, चहाड़ी और हटवास में क्लस्टर लेवल पर गार्बेज डिस्पोजल यूनिट बनाने के लिए 50 लाख रुपए स्वीकृत करने की बात कही। उन्होंने कृषि विभाग को इस क्षेत्र में बीमारी रहित बीज उपलब्धता को सुनिश्चित करने एवं किसानों को प्रशिक्षण एवं आलू की रखरखाव की ट्रेनिंग देने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि पठियार और नगरोटा बगवां में नकदी फसल आलू है और उन्हें शुगर फ्री आलू बीज उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि आलू का बीज जो पहले पांच हजार एक सौ रुपए में दिया जाता था उसका रेट तीन हजार सात सौ रुपये क्विंटल किया गया है, जिससे किसानों को काफी राहत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा जी नगरोटा बगवां क्षेत्र में लावारिस पशुओं से राहत के लिए गौ सदन का निर्माण भी किया जा रहा है और इस गौ सदन की चारदीवारी के लिए गौवंश संवर्धन बोर्ड के माध्यम से डेढ़ करोड रुपए उपलब्ध करवाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कांगड़ा जिला के धर्मशाला में बीते दिनों हिमाचल प्रदेश गद्दी कल्याण बोर्ड की 18वीं बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पुलिस विभाग को गद्दी समुदाय की भेड़ों और बकरियों की चोरी रोकने तथा अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस ने इस विषय पर मानक संचालन प्रक्रिया एसओपी जारी की है, जिसके अनुसार समुदाय के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी तय की गई है। जय राम ठाकुर ने कहा कि गद्दी कल्याण बोर्ड में गद्दी समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश के हर क्षेत्र से गद्दी समुदाय के सदस्यों को मनोनीत किया है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं ग्रामीण परिवेश से सम्बन्ध रखते हैं और भेड़पालकों की समस्याओं से भलीभांति परिचित हैं। उनका गद्दी समुदाय से विशेष लगाव है और उन्हें भी इस समुदाय का विशेष प्रेम और सम्मान मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और महामारी के कारण गद्दी समुदाय को उनकी भेड़ तथा बकरियों के नुकसान का मुआवजा अविलम्ब मुहैया करवाया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को गद्दी समुदाय की भेड़ और बकरियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि उनके झुंड को विभिन्न गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बैठक में उठाए गए जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थान खोलने और स्तरोन्नत करने सम्बन्धी मुद्दों की अलग से निगरानी करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने सम्बन्धित विभागों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि उनके द्वारा जारी किए गए चराई परमिट किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित न किये जाएं। इस प्रकार के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। जय राम ठाकुर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कारण ही वर्ष 2003 में गद्दी समुदाय को यह विशेष जनजातीय का दर्जा दिया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी गद्दी समुदाय को पहले की तरह जनजातीय का दर्जा मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 के बाद पंजाब से विलय होने वाले क्षेत्रों के गद्दी समुदाय को जनजातीय का दर्जा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्र के लोगों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने पर विचार करेगी ताकि अनुसूचित जनजाति की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि गैर-जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय लोगों के लिए बजट का पर्याप्त प्रावधान करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा गैर-जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय लोगों के विकास के लिए पिछले तीन वर्षों के दौरान 46 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त करने में सफलता मिली है। पिछली सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान केवल 33 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए थे। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प और हथकरघा निगम को 2.40 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। उन्होंने गद्दी समुदाय का विकास और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों को योजनाएं बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग गद्दी समुदाय को नवीनतम वैज्ञानिक तकनीक उपलब्ध करवाकर उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करें। गुज्जर समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाएं की जा रहीं कार्यान्वितः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार गुज्जर समुदाय के कल्याण और विकास के लिए प्रतिबद्ध है और उनके कल्याण के लिए कई योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्य रूप से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन व्यवसाय से जुड़े होने के कारण गुज्जर समुदाय को नवीनतम वैज्ञानिक तकनीक उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि उनकी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। उन्होंने पशुपालन विभाग को गुज्जर समुदाय को बेहतर नस्ल के मवेशी उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए ताकि वे अपने पशुओं से बेहतर आय प्राप्त कर सकें। उन्होंने गुज्जर समुदाय के सदस्यों से अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में समुदाय को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने के भी निर्देश दिए ताकि इस समुदाय के बच्चे आधुनिक शिक्षा से वंचित न रहें। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के बच्चों को शिक्षा देना जरूरी है ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2003 में जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे, तब राज्य सरकार ने गुज्जर समुदाय को जनजातीय दर्जा दिया था। उन्होंने कहा कि इसके द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि गुज्जर समुदाय को विकास और प्रगति के लिए पर्याप्त अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से ही जनजातीय क्षेत्र के लोगों की स्थिति अन्य सभी राज्यों से बेहतर है।
ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने पपरोला में साढ़े छह करोड़ की लागत से 33 केवी विद्युत उपकेंद्र पपरोला और चार करोड़ 57 लाख की 33 केवी एचटी लाइन कंगैहन-चढ़ियार का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही सब स्टेशन की मांग पूरी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश एक ऊर्जा राज्य के रूप में उभरा है। प्रदेश में दस हजार 940 मेगावॉट बिजली पैदा हो रही है, जिससे हम दूसरे राज्यों की बिजली की समस्या का भी समाधान कर रहे हैं। पपरोला के 33 केवी सब स्टेशन से नगर पंचायत पपरोला समेत 15 पंचायतों के 50 हजार लोगों को लाभ मिलेगा। 33 केवी एचटी लाइन कंगैहन चढ़िया (17 किमी) से 70 गांवों के लोग लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही बड़ा भंगाल में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे। विधायक मुल्कराज प्रेमी ने कहा कि क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर अनेक ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में चार वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश के विकास के नए आयाम स्थापित हुए हैं। द्रंग चुनाव क्षेत्र भी विकास से अछूता नहीं रहा है। मुख्यमंत्री ने द्रंग में 452 करोड़ रूपए की योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन किए हैं और जो भी घोषणाएं की हैं सभी पूरी हुईं है। उन्होंंने 4 वर्ष के कार्यकाल की तूलना कांग्रेस के 4 वर्षों के कार्यकाल से भी की। पधर रेस्ट हाउस में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जवाहर ठाकुर ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने द्रंग चुनाव क्षेत्र की 21 पंचायतों में पेयजल किल्लत के स्थाई समाधान को बरिक्स योजना में मंजूरी देते हुए क्षेत्र की जनता को नायाब तोहफा दिया है। उन्होंने कहा कि एनडीबी की मंजूरी मिल जाने से इस योजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। योजना के सिरे चढऩे पर पंचायतों में आने वाले कई वर्षों तक पेयजल की कोई समस्या नहीं रहेगी। उन्होंने क्षेत्र की पंचायतों को महत्वकांक्षी योजना में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और राज्य जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर का क्षेत्र की जनता की ओर से आभार प्रकट किया है।
नागरिक चिकित्सालय करसोग की तरह क्षेत्रवासियों को आयुर्वेद हॉस्पिटल का भी लाभ जल्द ही मिलने वाला है। यहां गंभीर रोग से ग्रसित मरीजों को निशुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी। आयुर्वेद विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जमीन के आवंटन की आगामी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है संभवतः आगामी वर्ष से इसका निर्माण भी शुरू हो सकता है। वहीं पर उपमंडल अधिकारी आयुर्वेद डॉ राजेश कालिया ने बताया कि करसोग से लगे ग्राम पंचायत ममेल में 10 बिस्तर बाले अस्पताल का निर्माण करने राष्ट्रीय आयुष मिशन भारत सरकार की ओर से राशि भी आंबटित की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने के लिये प्रशासन तथा वन विभाग करसोग को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि वन विभाग की जॉइंट इंस्पेक्शन होना बाकी है, कार्यालय से सभी दस्तावेज विभागों को भेज दिए है। उन्होंने बताया कि भवन का निर्माण करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। छोटे से भवन में हो रहा संचालित वर्तमान में उपमंडल क्षेत्रीय आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी का ऑफिस स्थित ममेल के छोटे से भवन में संचालित हो रहा हैं। यहां पर अभी मरीजों को केवल जांच और दवा की ही सुविधा मिल रही है। अस्पताल के निर्माण होने से मरीजों को पूरी तरह उपचार की भी सुविधा मिलेगी।
जिला उद्योग केंद्र मंडी के महा प्रबंधक ओपी जरयाल ने बताया कि अगर किसी को अपना काम-धंधा शुरू में आर्थिक मदद की दरकार है तो हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना उनके लिए बहुत फायदेमंद है। उद्योग विभाग के सौजन्य से लागू की गई मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना में बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार लगाने के लिए सरकार की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। मंडी जिले में मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना में 2018 से अब तक करीब साढ़े चार सौ युवाओं को अपना काम धंधा शुरु करने के लिए 16 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी दी जा चुकी है। ये है योजना में सब्सिडी का प्रावधान इस योजना में 1 करोड़ रुपये लागत तक की परियोजनाओं पर महिलाओं को 30 प्रतिशत तथा पुरूषों को 25 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। साथ ही सरकार ने महिलाओं के लिए पात्रता आयु 45 से बढ़ा कर 50 साल करने का निर्णय भी लिया है। जिला उद्योग केंद्र मंडी के प्रबंधक विनय कुमार बताते हैं कि स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना में पहले की गतिविधियों के साथ अब उन्नत डेयरी विकास, दूध व दुग्ध उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की स्थापना, कृषि उपकरणों व औजारों का निर्माण तथा रेशम प्रसंस्करण इकाई जैसी 18 नई गतिविधियां भी सम्मिलित की हैं। इससे अब योजना के तहत कवर की गई स्वरोजगार गतिविधियों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। हिमाचल सरकार का इस ओर विशेष जोर है कि अधिक से अधिक युवा स्वरोजगार से जुड़ें और नौकरी मांगने के स्थान पर नौकरी देने की स्थिति में आएं। स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना युवाओं को स्वरोजगार के अनेकों अवसर बना रही है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक युवाओं को इसमें लाभ दिया जाए। अरिंदम चौधरी, उपायुक्त मंडी
पेशे से सिविल इंजीनियर आशीष कुमार की सफलता की कहानी स्वाद, सेहत, स्वरोजगार और सरकारी सहयोग के शानदार मेल से युवा उद्यम का बेहतरीन उदाहरण बन गई है। मंडी जिले की सुंदरनगर तहसील के रामपुर, कनैड़ के 32 वर्षीय आशीष ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना में सरकारी मदद से काजू की प्रोसेसिंग-पैकेजिंग में स्वरोजगार का स्वाद पाया है। वे आज सारे खर्चे निकाल के महीने के 1 लाख रुपये कमा रहे हैं। आशीष ने बताया कि यूं तो उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, पर रोजगार मांगने की बजाय रोजगार देने वाला बनने की मन में इतनी मजबूत चाह थी कि अपना काम धंधा शुरू करने की ठान ली। सेहत बनाने और दिमाग बढ़ाने के लिए ड्राई फ्रूट्स का राजा माने जाने वाले काजू के काम में अपना इंजीनियरिंग वाला दिमाग लगाया जिससे उन्हें अब जीवन में स्वरोजगार का स्वाद मिल रहा है। वरदान है मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना बता दें, अपना काम धंधा शुरु करने के चाहवान युवाओं के लिए हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना वरदान बनी है। प्रदेश के हजारों युवा इस योजना का लाभ लेकर खुद तो आत्मनिर्भर बने ही हैं, वे अब औरों को रोजगार भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना में युवाओं को अपनी पसंद का काम काज शुरू करने को सरकार की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। नवंबर 2020 में शुरू किया था ‘आरडा कैश्यू हाउस’ आशीष के इस प्रोजेक्ट को मार्च 2020 में मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना में स्वीकृति मिली थी। कोविड 19 के चलते काम शुरु करने में 6-8 महीने निकल गए। नवंबर 2020 से ‘आरडा कैश्यू हाउस’ नाम से अपना यूनिट आरंभ किया। इसके लिए योजना के तहत बैंक से 27 लाख रुपये का केस बनाया। जिस पर सरकार ने 5.11 लाख रुपये की सब्सिडी दी। रोजाना प्रोसेस किया जाता है 100 किलो काजू आशीष ने बताया कि वे साल में 4 महीने भारत के अलग अलग राज्यों से कच्चा काजू मंगाते हैं, बाकी 8 महीने अफ्रीका से काजू मंगाया जाता है। इसकी यहां प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कराते हैं। इस काजू की मंडी के साथ साथ हमीरपुर और कुल्लू में भी सप्लाई हो रही है। अलग अगल क्वालिटी के काजू की बाजार में विभिन्न दरों पर बिक्री होती है। ये 600 से लेकर 1600 रुपये तक प्रति किलो के हिसाब से बिकता है।अभी फैक्ट्री में रोजाना करीब 100 किलो काजू प्रोसेस होता है। इसके बाद पैकिंग की जाती है। आगे इसे रोजाना 500 किलो तक बढ़ाने की सोच रहे हैं। इसके लिए वे साइजिंग और ग्रेडिंग की नई मशीनरी लाने वाले हैं। बेटे की सफलता से मिला सुकून-डॉ अनिल आयुष विभाग में आयुर्वेद अधिकारी रहे आशीष के पिता डॉ.अनिल कुमार कौंडल भी सेवानिवृति के बाद अब बेटे के व्यवसाय में हाथ बंटा रहे हैं। वे बेटे की सफलता से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि युवाओं के सपने पूरा करने वाली मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का जितना आभार जताएं कम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सर्कार द्वारा चलयति जा रही यह योजना किसी वरदान से काम नहीं है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीत सत्र इस दफे भी खूब हंगामों से भरा रहा, विधानसभा के अंदर और बाहर हर तरफ हंगामा ही हंगामा बरपा। विपक्ष ने तो सरकार को घेरा ही मगर अपनी मांगों को लेकर हर दिन आगे आए संगठनों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कुछ का प्रदर्शन शांतिपूर्वक संपन्न हो गया तो कुछ ने जबरन अपनी बातें मनवाई। कहीं सरकार को झुकना पड़ा तो कहीं आश्वासन से काम चल गया । इस सत्र के दौरान विपक्ष ने समांतर विधानसभा चला कर विरोध का एक नया तरीका भी निकाला। कई एहम मुद्दों पर चर्चा हुई और कई मुद्दों को बस टाल दिया गया। 13वीं विधानसभा के 13वें सत्र के दौरान कुल 5 बैठकें हुईं है । इस बार सत्र की कार्यवाही 27 घंटे 30 मिनट चली जिसमें कुल 281 तारांकित और 138 अतारांकित प्रश्न पूछे गए है। नियम-61 के तहत 1 विषय, नियम-62 के तहत 5 विषयों और नियम 130 के अंतर्गत 7 प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इसके अलावा नियम-101 के तहत 3 गैर-सरकारी संकल्प प्रस्तुत हुए। इसके अतिरिक्त 5 सरकारी विधेयक भी सभा में फिर से स्थापित किए गए और उन पर चर्चा हुई। इनमें से 3 विधेयक पर संशोधन प्रस्ताव दिए गए, उसके बाद विधेयक सदन द्वारा पारित किया गया। कैग की रिपोर्ट ने स्पष्ट की प्रदेश की माली हालत इस शीत सत्र के दौरान प्रदेश सरकार को सबसे बड़ा झटका तो कैग की रिपोर्ट ने दिया है। विधानसभा के शीत सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन के पटल पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट रखी। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट से स्पष्ट होता है की हिमाचल सरकार ने राजकोषीय घाटा सीमित रखने का कोई प्रयास नहीं किया है। कैग के अनुसार 2019-20 में सरकार के लोक ऋण दायित्व और इसके ब्याज के भुगतान की रकम 62234 करोड़ हो गई है । इसमें 40572 करोड़ के मूलधन और 21662 करोड़ की ब्याज राशि शामिल है। इसके अलावा रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में प्रदेश का राजकोषीय घाटा 5597 करोड़ दर्ज किया गया है। 14वें वित्तायोग तथा एफआरबीएम अधिनियम के मुताबिक राजकोषीय घाटा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। परन्तु यह प्रदेश की जीडीपी का 3.38 फीसदी दर्ज किया गया। 2019-20 में सरकार की राजकोषीय देनदारियों में 14.57 फीसदी का इजाफा हुआ। उस वर्ष सरकार की देनदारियां 62,212 करोड़ थीं। राजकोषीय देनदारियां सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले अधिक होने पर कैग ने सवाल खड़े किए हैं। इससे पता चलता है कि सरकार की माली हालत क्या है और कर्ज के सहारे प्रदेश की गाड़ी चल रही है। सत्र के दौरान तो विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा ही मगर सत्र के बाद इस रिपोर्ट ने विपक्ष को एक और मुद्दा दे दिया है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि सरकार कर्ज की बैसाखी पर चल रही है। उनके अनुसार सरकार हर क्षेत्र में फेल हुई है। सत्र में उठ रही मांगों को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष ने ये एलान भी किया कि कांग्रेस सरकार बनने पर कर्मचारियों की सभी मांगे पूरी की जाएंगी, कांग्रेस सरकार बनने के बाद ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की जाएगी। ऑउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाकर उन्हें अनुंबध में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीरियड बेस्ड एसएमसी शिक्षकों के लिए नीति बनाई जाएगी और पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति के मसले भी सुलाझाएंगे।
चंबा रुमाल का नाम अचानक सुने तो लगता है कि यह महज़ एक आम सा रुमाल होगा, लेकिन "चंबा रुमाल सही मायनों में कमाल है" यह कोई मामूली रुमाल नहीं बल्कि विश्व विख्यात व कढ़ाई हस्तशिल्प से निर्मित और बेहद ख़ूबसूरत रुमाल है। अनूठी हस्तकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध चंबा रूमाल किसी पहचान का मोहताज नहीं है। चम्बा रुमाल की हस्तकला का बोलबाला रियासतकाल से चल रहा है । वैसे तो हिमाचल प्रदेश में कला की कई तकनीक हैं जो यहां की समृद्ध शैली की परिचायक हैं, लेकिन चंबा रुमाल ने हिमाचल प्रदेश को विश्व भर में एक अलग ही पहचान दिलाई है। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में भी चंबा रूमाल की बड़ी बिक्री होती है। चंबा रूमाल की ख़ास बात ये है कि इसे रेशम व सूती कपड़े पर कढ़ाई कर इसे तैयार किया जाता है। ये रुमाल कितना ख़ास है आप इस बात से समझ सकते है कि इस रूमाल को बनाने में एक सप्ताह से दो महीने का समय लग जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में चम्बा रुमाल खरीदना आसान नहीं होता है। इसे चंबा आकर खरीदना या फिर मंगवाना पड़ता है। चंबा के संपन्न परिवार बेटी की शादी में विदाई के समय इस रूमाल का प्रयोग करते हैं। वर्तमान में ही नहीं बल्कि ब्रिटिश काल में भी अधिकारियों व पड़ोसी रियासतों के राजाओं को रूमाल उपहार के रूप में दिया जाता था। इतना ही नहीं जर्मन व इग्लैंड संग्रहालयों में भी चंबा रूमाल मौजूद है।1965 में चम्बा रूमाल बनाने वाली कारीगर महेश्वरी देवी को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया और अब ऐसे कलाकारों की कमी नहीं, जो कई दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसे तैयार करते हैं। नीडल पेंटिंग’ के नाम से भी जाना जाता है चम्बा रुमाल पहाड़ी लघु चित्र और भित्ति चित्रों को अगर कपड़े पर सूई के माध्यम से बहुत ही बारीकी से कढ़ाई करके उकेरा जाए तो वह कपड़ा किसी कलात्मक तस्वीर से कम नहीं लगता है। इसका सही मायनों में उदहारण चंबा का रुमाल है। प्रसिद्ध चम्बा के रुमाल को ‘नीडल पेंटिंग’ के नाम से भी जाना जाता है। चंबा रुमाल रेशम एवं सूती कपड़े पर दोनों ओर समान कढ़ाई कर तैयार किया जाता है। विशेष तौर पर कढ़ाई का काम औरतें करती हैं और यह कला आमतौर पर रुमाल, टोपी, हाथ के पंखे, चोली आदि पर भी की जाती है। आम रुमाल नहीं ,उपहार में दिया जाता है चम्बा का रुमाल चम्बा रुमाल पर की गई कढ़ाई को चंबा साम्राज्य के पूर्व शासकों के संरक्षण में पनपने का मौका मिला था। यह अपनी अद्भुत कला और शानदार कशीदाकारी के कारण निरंतर प्रसिद्धि की नई इबारत लिखता रहा है। चंबा का रुमाल वास्तव में कोई जेब में रखने वाला रुमाल नहीं है, बल्कि कढ़ाईदार "वॉल पेटिंग " होती है। चूंकि इससे बना रुमाल चौकोर आकार में नहीं होता है , इसलिए इसे कभी वॉल पेंटिंग की तरह सजाया जाता है तो कभी उपहार में दिया जाता है। चंबा के रुमाल के बारे में एक रोचक बात यह है कि दूर से देखने पर बेशक ये बहुत आकर्षक न लगे पर जब पास से देखते हैं तो देखने वाले को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं होता है। शाही परिवार भी करता था चंबा रुमाल की कढ़ाई चंबा रुमाल को यह नाम हिमाचल प्रदेश के हिल स्टेशन चंबा से मिला है। रुमाल पर की जाने वाली इस कला का काम सदियों से चला आ रहा है। चम्बा रुमाल का वर्णन सबसे पहले सोलहवीं शताब्दी में आता है, जब बेबे नानकी ( गुरु नानक देव जी की बहन थीं) उन्होंने इसे बनाया था। वह रुमाल आज भी होशियारपुर के एक गुरुद्वारे में धरोहर के रूप में रखा हुआ है। इसके बाद 17वीं सदी में राजा पृथ्वी सिंह ने चम्बा रुमाल की कला को बहुत अधिक संवारा और रुमाल पर ‘दो रुखा टांका’ कला शुरू की। कहा जाता है कि उनके समय में चंबा रियासत में आम लोगों के साथ-साथ शाही परिवार भी चंबा रुमाल की कढ़ाई किया करता था। 18वीं शताब्दी में चंबा रुमाल की लोकप्रियता बहुत अधिक और बहुत दूर-दूर तक फैली हुई थी। बहुत से कारीगर इस कला से जुड़े हुए थे। उस समय के राजा उमेद सिंह ने इस कला और कारीगरों को संरक्षण देकर चंबा रुमाल को विदेशों तक पहुंचाया। हिमाचल के चम्बा जिला से शुरू कि गई इस कलाकारी को विदेश में पहचान मिली और इसे लंदन के विक्टोरिया अल्बर्ट म्यूजियम में रखा गया। आज भी चंबा का रुमाल अपने महान इतिहास के दर्शन करवाता है जिसे चंबा के राजा गोपाल सिंह ने 1883 में ब्रिटिश सरकार के नुमाइंदों को भेंट किया था। जिसमें कुरुक्षेत्र युद्ध की कृतियों को उकेरा गया है। 1911 में चंबा के राजा भूरी सिंह ने भी इस हुनर को बहुत सम्मान दिया और कला को उन्नत बनाने में मदद की। दिल्ली दरबार में उन्होंने ब्रिटेन के राजा को चंबा के रुमाल की कलाकृतियां तोहफे में दी थीं। चूंकि भारत में मुगलों का साम्राज्य था तो इस कढ़ाई के कार्य की विषय वस्तु मुगलों से प्रभावित थी परंतु मुगलों के पतन के साथ ही बहुत से कारीगर हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्रों में जाकर बस गए जिनकी सहायता चंबा के राजा उमेद सिंह ने की। कढ़ाई को जीवंत बनाने के लिए आकृतियां बनानी हुई शुरू स्थानीय लोगो का कहना है कि चम्बा रुमाल पर हाथ की कढ़ाई दोनों ओर से की जाती है। एक जमाने में जब शाही परिवारों में बेटी की शादी होती थी तो शगुन के थाल को इस रुमाल से ढका जाता था। उस समय इनमें लोककला ज्यादा झलकती थी, धीरे-धीरे इनमें आकृतियां और फूल-पत्तियां बनानी शुरू की ताकि कढ़ाई अधिक जीवंत लगे। रेशम के धागे से सूती कपड़े पर कढ़ाई होती थी, पर अब शॉल, दुप्पटों और सिल्क फैब्रिक पर भी ये की जाती है। इसमें डबल साटन स्टिच (दो रुख टांका) का प्रयोग किया जाता है, जिसकी वजह से कपड़े के दोनों तरफ कढ़ाई उभर आती है जो एक समान लगती है। इसके धागे को पट्टू कहा जाता है। दो तरह से की जाती है चंबा रुमाल पर कढ़ाई चंबा रुमाल मुख्यता वर्गाकार या आयताकार बनाए जाते हैं। हालांकि अभी भी दो तरह से कढ़ाई चंबा रुमाल पर हो रही है। एक में लोकशैली झलकती है, जिसके विषय सीमित हैं, रंग चटकीले और टांकों में समानता नहीं है। जबकि दूसरी शैली में एक संतुलित संयोजन है, जिसमें हलके व सौम्य रंग के धागों का इस्तेमाल किया जाता है दो रुख टांके से जिसमें एक टांका लंबा तो दूसरा छोटा होता है, जब कढ़ाई की जाती है तो कपड़े के उलटी तरफ भी समान कढ़ाई बन जाती है। चंबा रुमाल बनाने के लिए कलाकार पहले किसी भी पौराणिक दृश्य या घटना को चित्रित करता है, उसके पश्चात पेंसिल या चारकोल की सहायता से रूपरेखा तैयार करता है। इसके बाद ब्रश द्वारा वांछित रंग, जो बहुत नाम मात्र का होता है, भरता है और इस सब के बाद सिल्क के रंग-बिरंगे धागों को सुई में पिरो कर दोहरे टांके की कढ़ाई करते हुए एक अविस्मरणीय कृति का निर्माण करता है। चंबा रुमाल पर ड्राइंग कभी भी ट्रेस करके नहीं बनाई जाती है, वरन इतनी फुर्ती से की जाती है कि लाइन टूटे न। रुमाल तैयार करने में लगता है दस दिन से दो महीने का समय एक प्रशिक्षित कलाकार थीम को देखकर खादी के कपड़े पर चारकोल से एक रूपरेखा तैयार करता है। कढ़ाई के लिए रंगों का चुनाव पहले ही तय कर लेता है, फिर महिला शिल्पकार कढ़ाई के लिए रेशम के धागे के दो तारों का उपयोग करती है और बिना गांठ लगाए डबल-साटन स्टिच करती है रुमाल पर मुख्य मोटिफों की कढ़ाई करने के बाद, फिर बैक स्टीचिंग की जाती है जिसके द्वारा मोटिफ की आउटलाइन बनाई जाती है। अंत में, वे रुमाल के किनारों को एक समान करने के लिए तुरपाई करती हैं। इसकी आउटलाइन काले धागे से बनाई जाती है, जो चंबा रुमाल की एक खास विशेषता है। चंबा रुमाल को तैयार करने में दस दिन से दो महीने का समय लगता है। हर रुमाल में कि जाती है अलग कहानी चित्रित पहाड़ी चित्रकला का प्रभाव भी इन रुमालों पर बहुत गहराई से देखने को मिलता है। साथ ही गुलेर, कांगड़ा, बसोहाली, जम्मू, नूरपुर और मंडी क्षेत्रों के चित्रों व भित्ति चित्रों की झलक भी दिखती है। इन रुमालों पर पहाड़ी चित्रकला के समान ही प्रचलित कहानियों, परंपराओं व पौराणिक विषयों के दृश्यों को भी उकेरा जाता है। साथ ही कृष्ण, रामायण, महाभारत और पुराण के कहानियों, नायक-नायिकाओं के प्यार के किस्सों व राग-रागिनी जैसे विषय भी इनके आधार हैं जो इन्हे अलग बनाता है। दिलचस्प बात ये है कि हर रुमाल में एक अलग कहानी चित्रित की जाती है, जिसके कारण इस कला में अत्यधिक विविधता देखने को मिलती है। आकार में बड़े होने के कारण ये रुमाल दीवारों पर वॉल पेंटिंग की तरह सजाए जाते हैं और कपड़े की पूरी सतह पर ही कढ़ाई किए जाने के कारण ये अत्यंत सजीव लगते हैं। डंडी टांका का किया जाता था प्रयोग इसकी आउटलाइन काले धागे से बनाई जाती है, जो चंबा रुमाल की एक खास विशेषता है। आकृतियों में रंग-बिरंगे धागे भरने के बाद, फिर से काले धागे से डंडी-टांका करते हुए उसकी महीन आउटलाइन बनाई जाती है। यह तरीका पहाड़ी चित्रकला से प्रेरित होकर ही अपनाया गया है। इसी तरह क्रिस क्रॉस स्टिच द्वारा, जिसमें दो बराबर आकार के टांकों को क्रॉस का आकार देते हुए रुमालों पर उकेरा जाता है। यह टांका ज्यादातर लाल रंग के धागे से लगाया जाता है। हालांकि आजकल इस टांके का प्रयोग कम किया जा रहा है। पचास हजार से लेकर पांच लाख तक होती है कीमत चम्बा रुमाल बेहद ही ख़ास माना जाता है क्योंकि हर रुमाल पर अलग तरह का डिज़ाइन इसकी विशेषता को चार चाँद लगा देता है। प्रदेश के साथ साथ विदेश में भी चम्बा रुमाल कि बहुत अधिक डिमांड रहती है। अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेले में भी रूमाल को खरीदने के लिए कनाडा, आस्ट्रेलिया, दिल्ली, चंडीगढ़, भोपाल, पटना तथा अन्य राज्यों के लोग काफी उत्सुक रहते हैं। यही इस रुमाल की खासियत है कि इसकी कीमत पचास हजार से लेकर पांच लाख तक हो सकती है। राष्ट्रीय अवार्ड विजेता और चम्बा रुमाल बनाने वाली कलाकार दिनेश कुमारी का कहना है कि चम्बा रुमाल में ज़्यादातर वे भगवान कृष्ण से जुड़ी कलाकृतियां या कहानियां बनती है। दिनेश कुमारी 1977 से ये रुमाल बना रही है। दिनेश कुमारी बताती है कि वे रास समंदर, अष्टनायका, कृष्ण डांडिया, कृष्ण नाग संहार, चौसर खेल, शिकार रुमाल और इस तरह कि कई कहानियों पर आधारित रुमाल बनाती है जो बेहद आकर्षक और ख़ूबसूरत है। इस कला को संजोए रखने के लिए दिनेश कुमारी को भीमराव आम्बेडकर राष्ट्रीय अवार्ड जैसे कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। चंबा रुमाल पर राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित ललिता वकील का कहना है कि प्रदेश कि आगे की पीढ़ी को भी चम्बा रुमाल को बनाना सीखना चाहिए ताकि ये चम्बा रुमाल कि प्रतिभा विदशों में पहुँच पाए। उनका कहना है कि इसे बनाना बेहद कठिन है और इसे सीखना बहुत कठिन है, लेकिन हमारी सरकार ने इसे बढ़ावा दिया है।
भारतीय स्वतंत्रता की जंग-ए-आजादी में जिन महान विभूतियों का योगदान रहा, उनमें कांगड़ा जिला के डाडासीबा के बाबा कांशी राम का नाम अहम है। वो ही कांशी राम जिन्हे पंडित नेहरू ने बाद में पहाड़ी गाँधी का नाम दिया। वो ही बाबा कांशी राम जो 11 बार जेल गए और अपने जीवन के 9 साल सलाखों के पीछे काटे। वो ही बाबा कांशी राम जिन्हें सरोजनी नायडू ने "बुलबुल-ए-पहाड़" कहकर बुलाया था और वो ही बाबा कांशी राम जिन्होंने कसम खाई कि जब तक मुल्क आज़ाद नहीं हो जाता, वो काले कपड़े पहनेंगे। 15 अक्टूबर 1943 को अपनी आखिरी सांसें लेते हुए भी कांशी राम के बदन पर काले कपड़े थे और मरने के बाद उनका कफ़न भी काले कपड़े का ही था। ‘अंग्रेज सरकार दा टिघा पर ध्याड़ा’ यानी अंग्रेज सरकार का सूर्यास्त होने वाला है, जैसी कई कवितायेँ लिख पहाड़ी गाँधी ने ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लिया था। मुल्क आज़ाद हो गया लेकिन ये विडम्बना का विषय है कि सियासतगारों ने पहाड़ी गाँधी को भुला दिया। बस कभी-कभार, खानापूर्ति भर के लिए पहाड़ी गाँधी को याद कर लिया जाता है। उनका पुश्तैनी मकान भी पूरी तरह ढहने की कगार पर है, मानो एक तेज बरसात का इन्तजार कर रहा हो। अरसा बीत जाने के बाद भी बाबा का जर्जर मकान आज सरकारी ढकोसलों का भी कच्चा चिट्ठा खोलता नजर आता है, जो बेहद अचरज भरा तो है ही, बल्कि ऐसे महान क्रांतिकारी का अपमान भी है। ऐसा भी नहीं है कि सरकार को इनकी याद नहीं आयी। बता दें कि 2017 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वीरभद्र सरकार ने डाडासीबा में उनके पुश्तैनी घर को कांशीराम संग्रहालय बनाने का वादा किया, लेकिन चुनाव के बाद सरकार बदल गई और जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2018 में बाबा काशीराम की जयंती पर 11 जुलाई को जयराम ठाकुर ने भी काशीराम संग्राहलय बनाने की घोषणा की, किन्तु अब तक कुछ नहीं हुआ। परिवार ने कर दी रजिस्ट्री, पर अब तक ताला लटका है 24 जून 2020 में एसडीएम देहरा धनबीर ठाकुर के नेतृत्व में गठित टीम ने पध्याल गांव (गुरनवाड़ डाडासीबा) में पहुंचकर बाबा कांशीराम के घर की जमीन की निशानदेही की है। एसडीएम ने एसडीओ डाडासीबा को शीघ्र सर्वेक्षण कर एस्टीमेट बनाकर भेजने के निर्देश दिए है। जल्द पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम के पैतृक घर को स्मारक बनाया जाएगा। बाबा कांशीराम के पोते विनोद शर्मा बताते है इस बीच 17 दिसंबर 2020 को परिवार ने उनके पुश्तैनी मकान की रजिस्ट्री भी सम्बंधित महकमे के नाम कर दी ताकि संग्रहालय बन सके किन्तु अब तक ज़मीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हुआ है। संग्राहलय बनाना तो दूर कोई अधिकारी वहां आने की जहमत भी नहीं उठाता। बाबा का परिवार अब खुद को ठगा सा महसूस करता है। धरोहर को तो समेट लो सरकार हैरत की बात ये है कि रिकार्ड्स के मुताबिक बाबा कांशी राम ने 508 कविताएं लिखी जिनमें से सिर्फ 64 कविताएं ही छपी हैं, बाकी संदूकों में पड़ी धूल खा रही हैं। उनके पुराने घर में अब भी उनकी कई पुरानी चीज़ें रखी है, जैसे उनका चरखा, उस समय की चारपाई, खपरैल और उनके द्वारा इस्तेमाल किया अन्य सामान। राष्ट्रीय स्तर पर चमकेगा पहाड़ी के रचनाकार का घर पहाड़ी भाषा में क्रांति का बिगुल फूंकने वाले बाबा कांशीराम ने ‘अंग्रेजी सरकारा दे ढिगा पर ध्याड़े’, ‘समाज नी रोया’, ‘निक्के -निक्के माहणुआ जो दुख बड़ा भारी’, ‘उजड़ी कांगड़े देस जाणा’, ‘पहाड़ी सरगम’, ‘कुनाळे दी कहाणी’ ‘क्रांति नाने दी कहाणी कांसी दी जुबानी’ सहित कई क्रन्तिकारी रचनाओं से लोगों को आजादी के जूनून से लबरेज कर दिया था। उनकी प्रसिद्ध कविता ‘अंग्रेज सरकार दा टिघा पर ध्याड़ा’ (अंग्रेज सरकार का सूर्यास्त होने वाला है) के लिए अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया था मगर राजद्रोह का मामला जब साबित नहीं हुआ तो रिहा कर दिया गया। अपनी क्रांतिकारी कविताओं के चलते उन्हें 1930 से 1942 के बीच 9 बार जेल जाना पड़ा। बाबा कांशी राम से जुड़े और भी कई ऐसे तथ्य है जिसपर अगर शोध किया जाएं तो इतिहास के पन्नों में लिखे सुनहरे शब्दों में और चमक आ जाएं लेकिन सरकार के इस रवैये से प्रतीत होता है कि सरकार को धरोहरों की एहमियत नहीं है।
पेयजल योजनाओं को संचालित कर रहे ठेकेदार के माध्यम से रखे गए आउटसोर्स कर्मचारि वेतन न मिलने से परेशान चल रहे है। अपने मासिक वेतन का भुगतान समय पर करवाने की मांग को लेकर आउटसोर्स कर्मचारी राज्य विद्युत बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा के नेतृत्व में हमीरपुर उपयुक्त देवश्वेता बनिक से भी मिला । उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई है। इन आउटसोर्स कर्मचरियों का कहना है की इन्हें करीब आठ माह से वेतन नहीं मिला है। मात्र पांच से छह हजार वेतन पर रखे कर्मचारियों को परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। वेतन का समय पर भुगतान होने व स्थायी नीति बनने से कर्मचारियों को राहत मिलेगी। खरवाड़ा ने कहा कि विभाग प्रति कर्मचारी 12 से 14 हजार रुपये का भुगतान करता है लेकिन कर्मियों को सिर्फ पांच से छह हजार मासिक वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनानी चाहिए। वेतन विसंगति को दूर करने का भी प्रावधान हो। वेतन की अदायगी सीधे कर्मियों के बैंक खाते में की जाए। इससे जहां वेतन प्राप्त करने वालों के पास वेतन अदायगी का प्रूफ होगा वहीं ठेकेदार के पास भी अदायगी का रिकार्ड रहेगा। इससे पहले भी जल शक्ति विभाग नादौन तथा धनेटा के तहत आउटसोर्स कर्मचारी मांगों के समर्थन में उपायुक्त को ज्ञापन सौंप चुके हैं। इसके बाद इन्हें कुछ महीने के वेतन की अदायगी की गई लेकिन अभी भी कई महीनों के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। मामला प्रशासन के ध्यान में लाने के बाद ठेकेदारों ने नौकरी से निकालने तक की धमकी भी दी है।
मुख्यमंत्री ने जेसीसी की बैठक में कर्मचारियों के लिए अनुबंधकाल को तीन साल से घटाकर दो साल करने की घोषणा की थी, लेकिन सरकार द्वारा अनुबंध को घटाकर तीन साल करने के संंदर्भ में अभी तक आधिकारिक अधिूसचना जारी नहीं हुई है। प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी संगठन ने मांग उठाई है कि सरकार अनुबंधकाल को घटाने के बारे में जल्द से जल्द आधिकारिक अधिसूचना जारी करे। प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी संगठन का कहना है कि प्रदेश के वर्तमान में लगभग 6000 अनुबंध कर्मचारी चिंतित व निराश हो रहें हैं। प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ के राज्य कार्यकारिणी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार नड्डा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय पटियाल, कार्यकारी महासचिव सुनील कुमार शर्मा, वित्त सचिव अविनाश कुमार सैणी और मीडिया सचिव राकेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री तथा कार्मिक विभाग से यह अपील की है कि अधिसूचना जल्द जारी की जाए तथा वित्तीय और वरिष्ठता लाभ 30 सितंबर 2021 को दो वर्ष का अनुबंध कार्यकाल पूरा करने वाले कर्मचारियों को पहली अक्तूबर 2021 से ही दिए जाएं।
दूरदराज़ क्षेत्र से होने के बावजूद भी उन्हें अनुसूचित जनजाति के दर्जे के साथ आने वाली प्रतिष्ठित सरकारी परिलब्धियां नहीं मिल पाई है। हम बात कर रहे है सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र की 144 पंचायतों में रहने वाले हाटी समुदाय की। इस समुदाय के प्रतिनिधि कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत है। मगर हुक्मरानों को शायद हाटी समुदाय का मुद्दा सिर्फ चुनाव के दौरान ही याद आता है। हम ऐसा इसलिए कह रहे है क्यूंकि लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव यह मुद्दा हमेशा हर पार्टी का एजेंडा रहा है, मगर अब तक कोई भी सरकार इस मुद्दे का हल नहीं कर पाई है। कई दशकों से गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय के लोग जनजातीय दर्जे की मांग कर रहे है, कई सरकारें आई और कई गई मगर अब तक हल नहीं निकल पाया है। 2022 के चुनाव भी नजदीक है और चुनावी फिजा में अब नेताओं ने इस मुद्दे को फिर हवा दे दी है। परन्तु अब हाटी समुदाय के लोग किसी झांसे में आने के मूड में नहीं है। वे भी इस मुद्दे पर नेताओं से अपना स्पष्ट रुख चाह रहे हैं। केंद्र और प्रदेश, दोनों में ही भाजपा की सरकार है इसलिए उम्मीदें भी बहुत है और सरकार भी इस ओर सकारात्मक रुख अपनाए हुए है अब बस देखना ये है कि क्या जयराम सरकार के कार्यकाल में केंद्र सरकार इस मांग पर मोहर लगाती है या फिर हाटी समुदाय के लोगों को संघर्ष जारी रखना होगा । दरअसल लम्बे समय से गिरिपार का हाटी समुदाय उत्तराखंड के जौनसार बाबर क्षेत्र के जोंसारी समुदाय की तर्ज पर जनजातीय दर्जे की मांग कर रहा है। बता दें कि पूर्व में उत्तराखंड का जौनसार बाबर क्षेत्र सिरमौर रियासत का ही एक भाग था।1815 में सिरमौर रियासत से अलग होने वाला जौनसार बाबर को 1967 में केंद्र सरकार ने जनजाति का दर्जा दिया था। जौनसार बाबर और सिरमौर के गिरिपार की लोक संस्कृति, लोक परंपरा, रहन-सहन एक समान है। इनके गांवों के नामों और भाषा में भी समानता है। गिरिपार क्षेत्र में दुर्गम पहाड़ पर उत्तराखंड की सीमा से सटा एक छोटा सा गांव है शरली। बीच में टौंस नदी और सामने है उत्तराखंड के जोंसार बाबर क्षेत्र का सुमोग गांव। दोनों ही गांवों के लोगों की बोली, पहनावा, रीति-रिवाज, रहन-सहन, खान-पान, परंपराएं और जीवन स्तर भी एक जैसा है। मगर टौंस नदी के उस पार जौनसार समुदाय को एसटी का दर्जा है और इस पार हाटी समुदाय जनजातीय दर्जे के लिए करीब 49 साल से संघर्ष कर रहा है। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की 144 पंचायतों में करीब पौने तीन लाख आबादी हाटी समुदाय की है। परन्तु ये लोग उन अधिकारों से वंचित रह गए जो उन्हें जनजातीय क्षेत्र होने के कारण मिलने चाहिए थे। इतिहास : गिरीपार व् जौनसार-बावर क्षेत्र एक प्रशासनिक इकाई थे वर्ष 1833 तक हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर का गिरीपार क्षेत्र तथा उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र तत्कालीन सिरमौर रियासत की एक प्रशासनिक इकाई थे। इन क्षेत्रों में निवासी हाटी और जौनसारा नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन दोनों क्षेत्रों के निवासी एक ही पूर्वज के वंशज है। इन दोनों इलाकों के निवासियों को भौगोलिक परिस्थितियां, परंपराएं, रीति-रिवाज, भाषा, संस्कृति, आहार-व्यवहार, रहन-सहन, खान-पान तथा मान्यताएं एक समान हैं तया एक दूसरे की अनुपूरक हैं। गिरीपार क्षेत्र के निवासियों के लिए इन दुर्गम क्षेत्रों में कहीं भी बाजार उपलब्ध नहीं था। लोग समूह के रूप में आवश्यक वस्तुओं की खरीद करने तथा अपने उत्पादों को बेचने के लिए समीपवर्ती बाजारों में जाते थे (जो मैदानों में स्थित थे)। लोग अपनी पीठ पर सामान लाद कर लाते व ले जाते थे। पूरे क्षेत्र के लोग कोई एक दिन निश्चित कर लेते थे और उस दिन सभी अपनी पूरी तैयारी करके, रास्ते का भोजन तथा विक्रय योग्य सामान को पीठ पर लाद कर चल पड़ते थे। उस वक्त घोड़े-खच्चरों पर सामान ढोने का प्रचलन था। इसमें से कुछ लोग ऐसे भी होते थे जिनके पास विक्रय हेतु कुछ भी नहीं होता था। वे अपने साथ पहले से संचित सोना ले जाते थे, जिसे बेचकर आवश्यक वस्तुएं क्रय करके ले आते थे। व्यापारी इन्हें किसी स्थान अथवा जाति से सम्बंधित करने की अपेक्षा इन्हें हाटी कहकर संबोधित करते थे, जिस कारण ये ‘हाटी’ के नाम से पहचाने जाने लगे। नाहन के समीप जहां ये लोग विश्राम करते थे, उस स्थान को हाटी का विश्राम, जहां पानी पीते थे, उसे हाटी की बावड़ी कहा जाता था, जिसे आज भी प्रतीक स्वरूप देखा जा सकता है। शिरगुल देव की दिल्ली हाट की यात्रा का उल्लेख संस्कृति में मिलता है। क्या है हाटी समाज गिरिपार क्षेत्र के लोग किसी समय अपनी फसलों को पीठ पर उठाकर एक साथ नजदीकी हाट में ले जाते थे और उन फसलों के बदले में वर्ष भर के लिए गुड़, सिरा, कपडे़, नमक ले आते थे। एक साथ हाट में सामान ले जाने वालों को बाहरी लोग उस दौरान हाटी कहते थे। क्या है गिरिपार हाटियों का गिरिपार क्षेत्र प्रदेश के अन्य भागों से अलग-थलग है। गिरि नदी इसे सिरमौर के अन्य भागों से नहीं शिमला और सोलन से भी अलग करती है। उत्तर में बर्फ से ढकी चूड़धार की चोटियां है और पूर्व में टौंस नदी इसे उत्तराखंड के जोंसार बाबर से विभाजित करती है। टोंस नदी के इस पार यानी सिरमौर क्षेत्र के अंतर्गत को गिरिपार कहा जाता है और उस पार यानी उत्तराखंड क्षेत्र को जौनसार बाबर कहा जाता है। कोई भी प्रधानमंत्री जनजातीय दर्जा नहीं दिला पाया कई सरकारे आई और गई, लेकिन हाटी समुदाय को कोई भी प्रधानमंत्री जनजातीय दर्जा नहीं दिला पाया। पहले मनमोहन सिंह और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सिरमौर जिले के गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिलाने की फरियाद लगाई गई, लेकिन आज तक हाटी समुदाय अपने हक के लिए लड़ रहा है। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद जनजातीय दर्जे का मामला आरजीआई के कार्यालय में अटका हुआ है। पांच दशकों से गिरिपार के लोग जनजातीय दर्जे की मांग कर रहे है लेकिन अब तक किसी भी सरकार के प्रयास नाकाफी रहे है। 1978 से मामला लंबित क्यों? 1978 में पहली बार गिरीपार क्षेत्र के लिए जनजातीय दर्जे की मांग के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पत्र भेजा गया। 1979 में जब पहली रिपोर्ट आई तो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग जनजाति के लिए सिफारिश की गयी लेकिन उसके बाद भी मामला लंबित पड़ा रहा। इसके बाद विधानसभा में इसके तहत एक कमेटी गठित की गई जिसका नाम कन्हैया लाल कमेटी रखा गया। ट्राइबल कमीशन के सदस्य टीएस नेगी की कमेटी ने इलाके का दौरा किया और रिपोर्ट भी सौंपी। 1983 में केंद्रीय हाटी समिति बनाई गयी। वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी। राज्य सरकार ने प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय शोध एवं अध्ययन संस्थान को यह जिम्मा सौंपा। वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी। राज्य सरकार ने प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय शोध एवं अध्ययन संस्थान को यह जिम्मा सौंपा। वर्ष 2016 में इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई। जिसके बाद मामले की फाइल रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के पास लंबित थी। सितंबर 2018 में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने स्वयं हाटी मुद्दे को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा की। छह दिसंबर 2018 को सांसद वीरेंद्र कश्यप के नेतृत्व में केंद्रीय हाटी समिति का एक प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री से मिला। आरजीआई को गृहमंत्री ने जल्द कार्यवाही के निर्देश दिए गए। जनजातीय घोषित होने पर मिलेगा ये फायदा -गिरिपार के युवाओं को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलेगा, रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। -केंद्र सरकार से विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त मदद मिलेगी। -लुप्त होती जा रही हाटी लोक संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। -क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आर्थिक मदद मिलेगी। हाटी खुंबलियों का आयोजन शुरू जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिए जाने के मामले में केंद्रीय हाटी समिति ने गिरिपार क्षेत्र की सभी 144 पंचायतों में हाटी खुंबलियों (बैठकों) का आयोजन करने का निर्णय लिया है। गिरिपार क्षेत्र के साथ-साथ नाहन, सोलन, शिमला व चंडीगढ़ की इकाइयों में भी ऐसा आयोजन किया जाएगा, जिसका कार्यक्रम केंद्रीय हाटी समिति ने जारी करके सभी पदाधिकारियों से उचित प्रबंध करने का आग्रह किया है। गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र व हाटी समुदाय को जनजाति घोषित किए जाने का मामला पांच दशकों से लंबित पड़ा हुआ है। हाल ही में इस मामले में आरजीआई की आपत्तियों का प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव ने शोध करवाने के पश्चात बहुत तार्किक उत्तर प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा है, जिससे इस मामले के सिरे चढऩे की उम्मीद करीब पौने तीन लाख लोगों में जगी है। इसी क्रम में आगामी 25 दिसंबर को गिरिपार क्षेत्र की सभी 144 पंचायतों में पंचायत स्तर पर हाटी खुंबलियों के आयोजन का निर्णय लिया गया है। पंचायत हाटी समिति के पदाधिकारी पंचायत में हाटी खुंबली करने का प्रबंध करेंगे और उसमें पंचायत प्रधान व अन्य सदस्य, युवक मंडल व महिला मंडल के पदाधिकारियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा। इन खुंबलियों में हाटी समुदाय को जनजाति व गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित किए जाने के प्रस्ताव पारित करके प्रधानमंत्री को भेजे जाएंगे, जबकि गिरिपार क्षेत्र की पंचायत समितियों व नाहन, सोलन व शिमला की हाटी समिति की इकाइयों की खुंबलियों में भी ऐसे ही प्रस्ताव पारित किए जाएंगे और एसडीएम व उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे जाएंगे। इसके अतिरिक्त हाटी समिति चंडीगढ़ की इकाई यह प्रस्ताव पारित करके भाजपा प्रदेश प्रभारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भिजवाएंगे। सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में उठाया मुद्दा शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप ने हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा से मुलाकात की। सांसद ने सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई। केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि जल्द हाटी समुदाय की मांग को पूरा किया जाए। जिला सिरमौर का गिरिपार क्षेत्र उत्तराखंड के जौनसार बाबर के साथ लगता है। इसमें जिले के चार ब्लॉकों की लगभग 144 पंचायतें आती हैं। इनकी आबादी करीब 2 लाख 75 हजार है, जो हाटी समुदाय है। सांसद ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि वर्ष 1967 में जौनसार बाबर के लोगों को जनजातीय घोषित कर दिया गया था, लेकिन जिले के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को अब तक जनजातीय क्षेत्र घोषित नहीं किया गया है।उत्तराखंड का जौनसार बाबर एवं जिले का गिरिपार क्षेत्र रियासतकाल में जिला सिरमौर रियासत का ही हिस्सा था। सांसद ने बताया कि इस मांग को लेकर जिले के प्रतिनिधि 20 दिसंबर, 2011 को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं 14 फरवरी 2017 को वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिल चुके हैं। संबंधित मंत्रालय की ओर से मांगी गई सारी रिपोर्ट प्रदेश सरकार भेज चुकी है। गिरिपार क्षेत्र की हाटी समुदाय की एथनोग्राफी की आरजीआई को भी भेज दी गई है। सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने आश्वासन दिया है कि तुरंत मामले का विवरण मांगकर इस दिशा में आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आखिर सरकार को पीस मिल कर्मचारियों पर रहम आ ही गया। 20 दिन की हड़ताल और कई सालों के निरंतर संघर्ष के बाद सरकार ने पीसमील वर्करों को अनुबंध पर लाने की घोषणा की है। हिमाचल पथ परिवहन निगम के निदेशक मंडल की बैठक में पीसमील वर्कर के लिए योग्यता निर्धारित की गई है। जिस पीसमील वर्कर ने आईटीआई पास की है और पांच साल का अनुभव है और नॉन आईटीआई वालों के पास छह साल का अनुभव है उनकी योग्यता बनती है। सभी वैकेंसी के हिसाब से अनुबंध पर लिए जाएंगे। 1 दिसंबर 2021 तक पीसमील वर्कर के 663 पद खाली हैं और योग्य पीसमील वर्कर 755 हैं। 1 दिसंबर 2021 से 663 पीसमील वर्करों को अनुबंध पर लिया जाएगा। इसी के साथ ये भी फैसला लिया गया कि करूणामूलक नौकरी तीन माह के भीतर दी जाएगी। क्लास थ्री और क्लास फोर पोस्ट पर इन्हें लगाया जाएगा। बता दें कि पीस मिल वर्कर टूल डाउन हड़ताल कर रहे थे और उनके समर्थन में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के तकनीकी कर्मचारी भी उतर आए थे। इससे प्रदेश भर में एचआरटीसी की 28 वर्कशॉप में एक हजार बसें बिना मरम्मत खड़ी हो गई थी। एचआरटीसी ने कई रूटों को क्लब कर दिया था और करीब 200 रूट ठप हो गए थे, जिससे यात्रियों की दिक्कतें बढ़ गई थी। प्रदेश में परिवहन व्यवस्था चरमराने लगी थी, मगर समय रहते सरकार ने मुद्दे को सुलझाने के लिए एक पहल की। सरकार की इस पहल का कर्मचारियों ने स्वागत किया है। हिमाचल प्रदेश में साल 2008 से पीस मिल वर्करों की भर्ती की जा रही है, जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री थे। उस वक्त इन कर्मचारियों के लिए 8 साल के बाद अनुबंध पर लाने की पालिसी बनाई गई थी। यानी 8 सालों तक सेवाएं देने के बाद इन कर्मचारियों को अनुबंध पर लाया जाता था और अनुबंध काल पूरा होने के बाद इन्हें बतौर नियमित कर्मचारी नियुक्ति दी जाती थी। तदोपरांत पिछली सरकार में परिवहन मंत्री रहे जीएस बाली द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार आईटीआई डिप्लोमा धारकों को 5 साल बाद और गैर डिप्लोमा धारकों को 6 वर्षों के बाद अनुबंध पर लेने की नीति बनाई गई। कायदे से होना भी ऐसा ही चाहिए लेकिन जयराम सरकार ने अपने कार्यकाल में ये अवधि पूरी कर चुके लोगों को कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्ति नहीं दी। इसीलिए ये कर्मचारी लगातार संघर्ष कर रहे थे। सरकार ने इन कर्मचारियों को पहले भी आश्वासन दिए थे मगर मांग पूरी नहीं हो पाई थी। सरकार के साथ हुई पहले की बातचीत के दौरान आश्वासन दिया गया था कि इन कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने के लिए नीति बनाई जाएगी। इसके लिए 25 नवंबर तक का समय भी दिया गया था, लेकिन 25 नवंबर तक नीति नहीं बनी। कर्मचारियों की इस मांग के संबंध में 18 अक्तूबर 2021 को अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन के साथ हुई वार्ता में अक्तूबर 2021 के अंत तक इसके बारे में निर्णय लेने का आश्वासन मिला था। इसके उपरांत 16 नवंबर 2021 को प्रबंध निदेशक के साथ हुई बैठकमें 26 नवंबर तक मामले को अंतिम रूप देने बारे आश्वासन मिला था। परिवहन मंत्री द्वारा समय-समय पर कर्मियों के साथ बैठक इन्हें अनुबंध पर लाने का आश्वासन दिया गया। परंतु हर स्तर पर अनेक बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया था। अब घोषणा हुई है, उम्मीद है कि सरकार इसे जल्द पूरा करेगी।
प्रदेश की सियासत में तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट कई दशकों से है पर हर बार इन दावों की हवा निकलती रही है। सिर्फ 1998 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दे तो कभी भी सत्ता गठन में किसी तीसरी पार्टी की भूमिका नहीं रही। अब फिर प्रदेश में आम आदमी पार्टी ने हुंकार भरी है, ठीक वैसे ही जैसा 2017 से पहले हुआ था। हालांकि तब चुनाव आते आते पार्टी ने यू टर्न ले लिया था। फिर इस वर्ष हुए नगर निगम चुनाव में भी पार्टी ने ऐलान किया कि वो चुनाव लड़ेगी, पर जनता ने सारे जोश की हवा निकाल दी। अब विधानसभा चुनाव को एक वर्ष से भी कम वक्त बचा है और पार्टी फिर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है। बैठकें हो रही है, प्रदर्शन हो रहें है। पर हकीकत ये है कि न जमीनी स्तर पर संगठन है और न दमदार चेहरा, पर कोशिश पूरी की जा रही है। आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली में किये गए विकास से लोग प्रभावित है इसमें भी कोई संशय नहीं। फिलवक्त आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं का फोकस दिल्ली और पंजाब के साथ साथ गोवा, उत्त्तराखंड और उत्तर प्रदेश में नज़र आ रहा है। हर जगह पार्टी के परफॉरमेंस को देख कर ये कयास लगाए जा रहे है कि पार्टी हिमाचल में भी कुछ बेहतर कर सकती है। हिमाचल प्रदेश में राजनीति की बागडोर मुख्य तौर पर दो ही राजनीतिक दल संभालते आए है। यही कारण है कि प्रदेश की जनता के पास नोटा ही तीसरा और अंतिम विकल्प शेष रह जाता है। प्रदेश में लगातार बढ़ती नोटा की संख्या को देख ये स्पष्ट है कि प्रदेश की जनता को किसी तीसरे विकल्प की दरकार है। अब ये तीसरा विकल्प आम आदमी पार्टी होती है या कोई और ये तो वक्त ही बताएगा। बता दें कि आम आदमी पार्टी पहले ही 2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 68 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर चुकी है। ये घोषणा हिमाचल प्रदेश आम आदमी पार्टी के प्रभारी रत्नेश गुप्ता ने की थी। बहरहाल आम आदमी पार्टी ने हिमाचल में सदस्यता अभियान चलाया है। 68 विधानसभाओं में कार्यकारिणी बनाई जा रही है। अब पार्टी के कार्यकर्ता बूथ स्तर पर जाकर लोगों से सम्पर्क साध रहे है। जनता की समस्याएं सुनी भी जा रही है और उन्हें उजागर भी किया जा रहा है। हाल ही में आम पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पुरानी पेंशन बहाली, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में तपोवन विधानसभा का घेराव भी किया। इस दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। पार्टी की सक्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है। जनता की मांगों को उजागर करने के साथ साथ पार्टी विधायकों को घेरने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही। हिमाचल में नहीं टिका तीसरा मोर्चा कांग्रेस और भाजपा से इतर तीसरा विकल्प देने के अब तक किए गए सभी प्रयोग असफल रहे हैं। हिमाचल विकास कांग्रेस और हिमाचल लोकहित पार्टी ने तीसरा मोर्चा खड़ा करने का प्रयास किया था, लेकिन बाद में दोनों दलों का कांग्रेस और भाजपा में विलय हो गया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेश के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ने तक सीमित है। तीसरे विकल्प का प्रभावशाली दखल केवल साल 1998 में पंडित सुखराम की हिविकां के सहयोग से बनी भाजपा सरकार में ही देखा गया। 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस के रूप में पंडित सुखराम के नेतृत्व में तीसरा मोर्चा बना और हिमाचल विकास कांग्रेस के पांच विधायक बने। हिविकां के सहयोग से तब मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। हिविकां समर्थित भाजपा सरकार ने अपना कार्यकाल तो पूरा किया, मगर बाद में हिविकां का भी कांग्रेस में विलय हो गया। पंडित सुखराम अपनी पुरानी पार्टी में लौट आए। साल 2007 के चुनाव में उत्तरप्रदेश में बसपा की लहर हिमाचल तक पहुंची तो मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने बसपा को तीसरे मोर्चे के रूप में खड़ा करने का प्रयास किया, लेकिन बाद में मनकोटिया खुद ही चुनाव हार गए। बसपा के खाते में केवल कांगड़ा की एक ही सीट आई। बसपा विधायक संजय चौधरी बाद में भाजपा में शामिल हो गए। हिलोपा के रूप में भाजपा के असंतुष्ट महेश्वर सिंह का थर्ड फ्रंट बनाने का प्रयास भी असफल रहा। महेश्वर सिंह ने साल 2012 के चुनाव में नई पार्टी बनाकर 36 विधानसभा सीटों में चुनाव लड़ा था। कई सीटों पर हिलोपा के समर्थन से माकपा के प्रत्याशी चुनावों में थे, लेकिन हिलोपा को जीत सिर्फ एक ही सीट पर मिली। साल 2016 में पार्टी बनाने के चार साल बाद महेश्वर सिंह भी अपनी पुरानी पार्टी भाजपा में जा मिले। और हाल ही में हुए मंडी लोकसभा उपचुनाव के लिए महेश्वर सिंह भाजपा की टिकट के प्रबल दावेदा माने जा रहे थे। पहले भाजपा और फिर आम आदमी पार्टी को छोड़ चुके पूर्व सांसद डॉ राजन सुशांत ने भी अपनी नई पार्टी हमारी पार्टी हिमाचल पार्टी बनाई है। राजन सुशांत ने 2022 में हर विधानसभा क्षेत्र से अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने की घोषणा भी की थी। मगर हाल ही में हुए उपचुनाव में डॉ राजन सुशांत अपने गृह क्षेत्र फतेहपुर में जीत हासिल नहीं कर पाए। अब उनकी पार्टी ऐसी स्थिति में पूरे प्रदेश पर फतेह कर पाएगी ऐसा नहीं लगता।
एक कंधे पर प्रदेश की जनता की बेतहाशा उम्मीदें और दूसरी तरफ खाली सरकारी खजाने की चाबी लिए प्रदेश सरकार दिन प्रति दिन कर्ज के दलदल में धंसती जा रही है। प्रदेश में भाजपा सरकार के चार साल पूरे होने को है। सरकार से हर वर्ग की अपनी मांगे है, अपनी उम्मीदें है। कोई सवर्ण आयोग चाहता है, कोई वेतन, कोई पुरानी पेंशन की टेंशन को दूर करने की उम्मीद लगाए बैठा है, तो कुछ ऐसे भी है जिन्हें नौकरी ही नहीं मिली। बर्फबारी के बाद किसान-बागवान मुआवजा मांग रहे है और व्यापारी टैक्स में कटौती। खून चूसती महंगाई तो हर घर का मसला है। सबकी उम्मीद भरी निगाहें सरकार पर टिकी है और हो भी क्यों ना, ये वो ही है जिन्होंने सत्ता में आने से पहले प्रदेश की जनता पर वादों की बौछार की थी। अब जो वादा किया वो निभाना तो पड़ेगा। बात सिर्फ सत्ता में आने से पहले की नहीं है, हाल फिलहाल भी सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की है, कई आश्वासन दिए, जो कैग की रिपोर्ट के सामने आने के बाद तो पूरे होते नहीं दिखाई दे रहे। कैग की रिपोर्ट में पेश किये गए आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्रदेश की खराब स्थिति समझने के लिए किसी को अर्थ शास्त्री होने की जरूरत नहीं है। कोई आम आदमी भी साफ समझ सकता है कि प्रदेश की आर्थिकी किस ओर अग्रसर है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानि कैग की रिपोर्ट में ये स्पष्ट हुआ है कि पिछले वर्ष (₹53,147 करोड़) की तुलना में 14.57% की वृद्धि के साथ वित्तीय वर्ष 2019-20 में हिमाचल प्रदेश का कर्ज का बोझ बढ़कर 62,212 करोड़ हो गया है। प्रदेश का राजकोषीय घाटा 5597 करोड़ दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में प्रदेश की राजस्व प्राप्तियों में 204.92 करोड़ की कमी आई है। 2018-19 के 30,950.28 करोड़ के मुकाबले 2019-20 में राजस्व प्राप्तियां घटकर 30,745.32 करोड़ रहीं। राजस्व प्राप्तियों में भी 67 फीसदी हिस्सा केंद्रीय करों में हिस्सेदारी व केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता अनुदान राशि का है। प्रदेश के अपने संसाधनों से खजाने में सिर्फ 33 फीसदी राजस्व आया है। इसके अलावा, पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष के ₹4,583 करोड़ की तुलना में 13% (₹591 करोड़) बढ़कर ₹5,174 करोड़ हो गया और कुल व्यय में 14% का गठन किया। सिर्फ यही नहीं वित्त वर्ष 2019-20 की इस रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल सरकार ने पेयजल, सड़क, पर्यटन, ऊर्जा आदि से संबंधित 96 विकास योजनाओं पर फूटी कौड़ी तक खर्च नहीं की। इन योजनाओं पर बजट को खर्च न करने का कारण भी नहीं बताया गया है। इनमें से कोई भी योजना एक करोड़ से कम बजट की नहीं है। आमदनी अट्ठनी, खर्चा रुपया निसंदेह ये कर्ज का पहाड़ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की खिल्ली उड़ाता जा रहा है। 62 हजार करोड़ को पार कर चुके इस कर्ज के आंकड़े से स्पष्ट होता है कि बजटीय प्रावधानों और आर्थिक प्रबंधन को संयोजने में लगे सरकारी अधिकारी वक्त बर्बाद करते रहे और सरकार सोती रही। या सरकार फिजूल खर्चे करती गई और अफसर खामोश बैठे देखते रहे। ऐसी स्थिति तो तब ही पैदा हो सकती है जब महत्वकांक्षाएं व्यक्ति की आमदनी से ज्यादा बढ़ जाए। प्रदेश की आमदनी घटने का एक बड़ा कारण कोरोना काल भी रहा है। इस दौरान केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की वित्तीय व्यवस्था डगमगाई है जो अब तक पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाई है। इसी के साथ प्रदेश में राजस्व प्राप्तियां घटी है जबकि खर्च बढ़ा है। कैग के मुताबिक 2019-20 में प्रदेश की राजस्व प्राप्तियों में गिरावट दर्ज हुई और ये सिर्फ 33 फीसद प्राप्त हुआ। दूसरी ओर खर्चों में करीब साढ़े पांच फीसद की वृद्धि दर्ज हुई। ये भी स्पष्ट हुआ है कि 2019-20 में 53708 करोड़ रुपये के बजट व अनुदान प्रविधानों के मुकाबले 45528 करोड़ रुपये की रकम खर्च की गई है । इसमें 8229.36 करोड़ की बचतें भी शामिल हैं और इसके साथ ही 49.91 करोड़ का अधिक खर्च किया गया है । कैग रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सरकार ने प्रदेश के शहरी व ग्रामीण निकायों, शैक्षणिक संस्थाओं और विकास प्राधिकरण के लिए वित्तीय सहायता देना कम किया है। पांच साल की आकलन रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल से एक साल पहले 2019-20 में ग्रामीण व शहरी निकायों को 1509.61 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी है, जबकि वर्ष 2018-19 के दौरान इन निकायों को 1514.06 करोड़ की सहायता की थी। दूसरी ओर शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों एवं अन्य धर्मार्थ संस्थान व विकास प्राधिकरण को 2019-20 में 1996.87 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी है। इसके विपरीत वर्ष 2018-19 के दौरान इन क्षेत्रों को 2119.89 करोड़ की सहायता दी है। प्रदेश को आर्थिक सुधारों, सुशासन तथा सरकारी कार्यसंस्कृति में बदलाव की आवश्यकता है और विपक्ष के लिए भी जरुरी है कि बतौर ज़िम्मेदार विपक्ष पथ से भटकती सरकार को वापस ट्रैक पर लाया जाए। परन्तु सत्ता का वनवास झेलता विपक्ष उन्हीं मुद्दों को चुनता नज़र आ रहा है जिससे सरकार की स्थिति और खराब होती जाए। प्रदेश के आर्थिक हालात, स्वरोजगार और निजी निवेश के जरिए रोजगार पर चर्चा के बजाय कर्मचारी सियासत को साधने में विपक्ष मसरूफ है। इस खाली जेब के साथ मसले महज घोषणाओं से सुलझ जाएंगे ऐसा नहीं लगता। प्रदेश सरकार ने हाल ही में जेसीसी की बैठक की थी, जिसमें कई बड़ी घोषणाएं की गई। उन वादों को पूरा करने के लिए 18 से 20 हजार करोड़ रुपये की रकम जुटाना 62 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी सरकार के लिए चुनौती होगा, वहीं अब असंतुष्ट कर्मचारियों और अन्य वर्गों को न्यायोचित वित्तीय लाभ देना कैसे संभव हो पाता है ये बड़ा सवाल है। इस पर अगले वित्तीय वर्ष में केंद्र से लगभग 12 हजार करोड़ रुपये कम ग्रांट मिलने वाली है। पर्यटन को बढ़ावा देने से बदल सकती है स्थिति हिमाचल की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में पर्यटन एक अहम भूमिका निभा सकता है। कोरोना काल के दौरान पर्यटन को एक बड़ा झटका लगा है। प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज हिमाचल प्रदेश में धार्मिक व साहसिक पर्यटन की भरपूर संभावना है। पर्यटन को प्रदेश की आर्थिकी का अहम हिस्सा माना जाता है और इसे बढ़ावा देने से स्थिति बेहतर हो सकती है। अपार संभावनाओं के बावजूद पहाड़ी प्रदेश हिमाचल में पर्यटन क्षेत्र में विकास की रूपरेखा नहीं बन सकी है। यदि सरकार एक बेहतर सोच के साथ पर्यटन को बढ़ावा दे तो स्थिति बेहतर होगी। सरकार भीड़-भाड़ वाले पर्यटन स्थलों पर बोझ कम कर के कम आकर्षण वाले स्थानों का विकास सुनिश्चित करके पर्यावरण पर्यटन (ईको-टूरिज्म) के विकास की भी परिकल्पना की जा सकती है। न सिर्फ संगठित क्षेत्र में बल्कि मोटे तौर पर असंगठित क्षेत्र में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार को एक दूरगामी सोच के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। आधारभूत ढांचे और और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। अब तक धरातल पर नहीं दिखी इन्वेस्टर मीट हिमाचल प्रदेश में 2019 में हुई इन्वेस्टर्स मीट के बाद अब तक सिर्फ 13,488 करोड़ का निवेश ही धरातल पर उतरा है। बता दें कि इन्वेस्टर मीट में कुल 703 एमओयू किए गए थे, जिनमें 96720.88 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। अब तक 236 में से 96 परियोजनाओं में 2710 करोड़ का निवेश हुआ है। 104 परियोजनाओं में निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा शेष 36 परियोजनाएं कोरोना महामारी व अन्य कारणों से शुरू नहीं हो सकी हैं। दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग जल्द ही प्रस्तावित है। इन्वेस्टर मीट के बाद समझौतों में कुल 1 लाख 96 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार संभावित है। प्रदेश में इन्वेस्टर मीट करवा आर्थिकी को सुधारने की सरकार की सोच अच्छी ज़रूर थी मगर अब तक इसका खास प्रभाव नहीं दिख पाया है। प्रदेश में नए उद्योगों के आने से आर्थिक व्यवस्था सुधर सकती है। अगर इस प्रस्तावित निवेश को सरकार हिमाचल ला पाई तो निसंदेह प्रदेश में रोज़गार भी बढ़ेगा और आर्थिक स्थिति भी बेहतर होगी।
निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए जम्मू कश्मीर के बिजली कर्मचारियों के साथ बातचीत नाकाम होने के बाद प्रशासन ने रविवार शाम बिजली की आपूर्ति के लिए सेना को बुलाया है। सेना ने जम्मू के प्रमुख पावर स्टेशन पर मोर्चा संभालते हुए शहर में बिजली सप्लाई की आपूर्ति को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है। जम्मू कश्मीर में बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहे प्रदेश के 23,000 बिजली कर्मचारी शनिवार से अनिश्चित हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल का व्यापक असर शनिवार से ही जम्मू के अधिकतर हिस्सों पर पढ़ा और शहर के करीब 50% इलाकों में बिजली गुल हो गई। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर जम्मू के ग्रामीण इलाकों पर पड़ा। इसके बाद प्रशासन ने हड़ताली बिजली कर्मचारियों से कई राउंड बातचीत की और वह बातचीत विफल होने के बाद आखिरकार जम्मू के डिविजन कमिश्नर ने सेना की मदद मांगी। शहर में बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए सेना बुलाई गई।
पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी में कांगड़ा के भलाड़ गांव का एक जवान शहीद हो गया है। 51 वर्षीय शहीद सिपाही ओंकार सिंह अमृतसर के तरनतारन में 103 बीएसएफ बटालियन में तैनात थे। घने कोहरे के बीच पाकिस्तान की तरफ से की गई फायरिंग में उन्हें गोली लग गई थी। रविवार को शहीद ओंकार सिंह का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। यहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके साथ आई सैन्य टुकड़ी, पुलिस बल ने हवा में फायर दागकर उन्हें सलामी दी। इस दौरान जवाली के विधायक अर्जुन सिंह ने शहीद के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। बता दें कि शहीद ओंकार सिंह अपने पीछे तीन बच्चे और पत्नी को छोड़ गए हैं।
पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार कोई बदलाव नहीं देखने को मिल रहा है और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के सुबह 6 बजे जारी रेट के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं। 4 नवंबर के बाद से पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई चेंज नहीं आया है और आज के रेट देखने के बाद ये साफ है कि मुंबई में पेट्रोल-डीजल के कीमतें काफी ज्यादा है और देश में सबसे सस्ता पेट्रोल अंडमान और निकोबार के पोर्ट ब्लेयर में मिल रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.92 फीसदी की गिरावट के साथ 72.11 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है और नायमैक्स क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चला गया है। इसमें 2.13 फीसदी की गिरावट के बाद 69.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार हो रहा है।
गुजरात में 8,690 ग्राम पंचायतों के लिए मतदान रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया और शाम तक करीब 47 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 48,573 वार्डों में औसतन 25.11 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। गांधीनगर, आणंद, पोरबंदर आदि जिलों में मतदान प्रतिशत अधिक रहा जबकि दाहोद, डांग, देवभूमि द्वारका, नर्मदा और खेड़ा में अपेक्षाकृत कम मतदान दर्ज किया गया। गुजरात विधानसभा के लिए अगले साल दिसंबर में होने वाले चुनाव से पहले ग्राम पंचायत चुनाव को राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। ग्राम पंचायत चुनाव का उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के चिह्न पर नहीं, बल्कि अपनी निजी क्षमता पर लड़ता है। हालांकि उम्मीदवार किसी न किसी दल से संबद्ध रहता है। विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रमुखों और वार्ड सदस्यों को चुनने के लिए सुबह सात बजे से मतदाताओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं और मतदान शाम छह बजे तक चला। अब वोटों की गिनती 21 दिसंबर को होगी।
दिल्ली-एनसीआर में बीते कई दिनों से लागातर वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। दिल्ली में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 'खराब' श्रेणी में मापी गई है। दिल्ली में एक्यूआई को 290 दर्ज किया गया है। सिस्टम ऑफ एयर क्वॉलिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च ने यह जानकारी दी। SAFAR के मुताबिक, नोएडा में भी एयर क्वॉलिटी इंडेक्स खराब श्रेणी में दर्ज हुई है। यहां एक्यूआई 293 दर्ज हुई वहीं गुरुग्रम में भी एक्यूआई 225 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में मानी जाती है।
लोकसभा में आज कानून मंत्री किरण रिजिजू चुनाव सुधार संबंधी विधेयक 2021 पेश करेंगे। बिल के जरिए जन प्रतिनिधि कानून 1950 और जन प्रतिनिधि कानून 1951 में बदलाव किया जाएगा। इसे चुनाव सुधारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। पिछले हफ्ते बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने इन बदलावों को मंजूरी दी थी। सबसे बड़ा बदलाव वोटर पहचान कार्ड को लेकर किया जा रहा है। आज पेश होने वाले बिल के मसौदे में कहा गया है कि मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा। इतना ही नहीं, मतदाता सूची को भी आधार से जोड़ने का प्रस्ताव है। फिलहाल इसे ऐच्छिक या वैकल्पिक बनाया जा रहा है। मतलब ये कि लोगों को अपने वोटर कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने या न जोड़ने का विकल्प दिया जाएगा।
पूरा उत्तर भारत शीतलहर की चपेट में है। राजधानी दिल्ली में रविवार को इस मौसम का सबसे ठंडा दिन रहा। कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य ही नहीं बल्कि राजस्थान और एमपी भी कड़ाके की ठंड से हाल बेहाल हैं। आने वाले तीन दिनों तक राहत मिलने के आसार भी नहीं हैं। पहाड़ों पर जमकर बर्फबारी हो रही है और पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। मौसम ने ऐसी हैरान करने वाली करवट ली है कि लोगों के होश ही उड़ गए। 19 दिसंबर की रात को दिल्ली में 3.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। आज इसके 4 डिग्री तक रहने की संभावना है। इसकी वजह है कि देश के पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में बीते कई दिनों से जमकर बर्फबारी हो रही है। लद्दाख में लगातार दूसरी रात माइनस छह डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया. यही हाल जम्मू-कश्मीर का नजर आया। मौसम का ये हाल हैरान करने वाला है क्योंकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 21 जनवरी को 40 दिन का चिल्ले कलां शुरू होता है यानी कड़ाके की सर्दी का सीजन। लेकिन इस बार 18 और 19 तारीख को ही ऐसी सर्दी शुरू हो गई जो आमतौर पर साल के आखिरी दिनों में होती है। हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी का दौर आज भी जारी है। हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। तापमान माइनस में पहुंच गया है, जिसके बाद कई जगहों पर पानी बर्फ में तब्दील हो गया। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर पश्चिमी भारत पूरी तरह से शीत लहर की चपेट में है और अगले तीन दिनों तक इससे राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। अगले दो दिनों में उत्तराखंड के कुछ इलाकों और पंजाब व हरियाणा में 23 और 24 दिसंबर को घना कोहरा भी छाया रह सकता है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जल्द ही मुफ्त का सफर खत्म होने वाला है। 25 दिसंबर से यात्रियों को टोल देना होगा. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI सराय काले खां से मेरठ के बीच टोल वसूलना शुरू करेगा। कार-जीप और हल्के वाहन यात्रियों को अब मेरठ से सराय काले खां तक के सफर के लिए 140 रुपये देने होंगे। वहीं इंदिरापुरम तक 95 रुपये, डूंडाहेड़ा तक 75 रुपये, डासना तक 60 रुपये, रसूलपुर तक 45 रुपये और भोजपुर तक 20 रुपये का टोल देना होगा। हल्के माल वाहनों को सराय काले खां तक 225 रुपये देने हेंगे। बस या ट्रक को मेरठ से दिल्ली के सराय काले खां तक आने के लिए 470 रुपये का टोल देना होगा। टोल चार्ट के मुताबिक एक तरफ की यात्रा के लिए प्रति किलोमीटर यात्रियों को 2.34 रुपये का भुगतान करना होगा। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए सराय काले खां, इंदिरापुरम, डूंडाहेड़ा, डासना, रसूलपुर-सिकोड़, भोजपुर और काशी टोल प्लाजा पर एंट्री पॉइंट्स बनाए गए हैं। जिन वाहनों पर फास्टैग लगे हैं, उनके चालकों के बैंक खातों से टोल खुद-ब-खुद कट जाएगा। एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर्स लगाए गए हैं। जिन वाहनों पर फास्टैग नहीं होगा, उनसे एग्जिट पॉइंट्स पर दोगुना टोल वसूला जाएगा। फरवरी में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सभी वाहनों में फास्टैग सिस्टम अनिवार्य कर दिया था। इससे यात्रियों को टोल पर कैश नहीं देना होगा और जाम से भी छुटकारा मिलेगा। बता दें कि तीन कृषि कानूनों को लेकर पिछले एक साल से विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों के कारण गाजीपुर बॉर्डर बंद था, जिसकी वजह से कोई टोल नहीं लिया जा रहा था। 15 दिसंबर को किसानों के एक्सप्रेसवे के हिस्से को खाली करने के बाद पुलिस ने दिल्ली-यूपी बॉर्डर से बैरिकेड्स हटा दिए। 82 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे दिल्ली को मेरठ के परतापुर से जोड़ता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि 89 देशों में ओमीक्रोन स्वरूप की पहचान की जा चुकी है और यह उन स्थानों पर डेल्टा स्वरूपकी तुलना में तेजी से फैलता है, जहां संक्रमण का सामुदायिक स्तर पर प्रसार अधिक है। इसके मामले डेढ़ से तीन दिन में दोगुने हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को अपनी 'एनहैंसिंग रेडिनेस फॉर ओमीक्रोन (बी.1.1.529): टेक्निकल ब्रीफ एंड प्रायोरिटी एक्शन्स फॉर मेंबर स्टेट्स' रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा उपलब्ध आंकड़ों को देखते हुए आशंका है कि ओमीक्रोन उन स्थानों पर डेल्टा से आगे निकल जाएगा, जहां सामुदायिक स्तर पर संक्रमण का प्रसार अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है, '16 दिसंबर 2021 तक, डब्ल्यूएचओ के सभी छह क्षेत्रों में 89 देशों में ओमीक्रोन स्वरूप की पहचान की गई है। जैसे-जैसे अधिक डेटा उपलब्ध होगा, ओमीक्रोन स्वरूप के बारे में वर्तमान समझ विकसित होती रहेगी।" विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि ओमीक्रोन डेल्टा की तुलना में तेजी से फैलता है। यह सामुदायिक प्रसार वाले देशों में डेल्टा स्वरूप की तुलना में काफी तेजी से फैल रहा है। डेढ़ से तीन दिन में इसके मामले दोगुने हो जाते हैं।
शिमला: मंत्रिमंडल की बैठक चौथी बार टल गई है क्योंकि सीएम जयराम ठाकुर आज दिल्ली जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जयराम ठाकुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और उन्हें 27 दिसंबर को हिमाचल आने का न्योता देंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उनसे मुलाकात का समय मांगा था जो कि सोमवार को तय किया गया है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर आज दोपहर 2:30 बजे अनाडेल मैदान से हेलिकॉप्टर से दिल्ली रवाना होंगे। करीब चार बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे। यहां वे कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे। रात्रि ठहराव नई दिल्ली स्थित हिमाचल सदन में होगा। सोमवार दोपहर 1:30 बजे वे इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से शिमला के लिए रवाना होंगे और शाम को तीन बजे शिमला पहुंचेंगे। ऐसे में कैबिनेट की बैठक का समय फिर बदल गया है अब यह बैठक कल 3 बजे हो सकती है।
पंजाब के 32 किसान संगठनों ने शनिवार को कहा कि वे राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे या चुनाव में भाग नहीं लेंगे। दूसरी ओर आज ही भारतीय किसान यूनियन के एक नेता ने चुनाव लड़ने के लिए राजनीतिक संगठन बनाया। ये किसान संगठन केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल थे। लुधियाना से करीब 20 किलोमीटर दूर मुल्लांपुर दाखा में एक संयुक्त बैठक में चुनाव में किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करने या चुनाव में भाग नहीं लेने का फैसला लिया गया। उन्होंने राजनीतिक संगठन बनाने और पंजाब चुनाव लड़ने के भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी के फैसले को व्यक्तिगत फैसला करार दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के सत्तारूढ़ दल कांग्रेस ने किसानों के सभी प्रकार के कर्जों को माफ करने और कृषि कानूनों के विरूद्ध आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज किये गये मामले वापस लेने का वादा किया था लेकिन अबतक सरकार ने कोई शुरुआत नहीं की है, किसान संगठन इन दोनों मांगों से कम स्वीकार नहीं करेंगे।
राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को सर्द सुबह के साथ दिन का आगाज हुआ और न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि अधिकतम तापमान करीब 18 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग ने आसमान साफ रहने और राष्ट्रीय राजधानी में सर्द हवाएं चलने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने कहा कि दिल्ली में शनिवार को मौसम का पहला ‘‘सर्द दिन’’ रहा और पश्चिमोत्तर हवाओं के कारण शहर में न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से पांच डिग्री कम और इस मौसम का सबसे कम तापमान है। विभाग ने बताया कि जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम या इसके बराबर और अधिकतम तापमान सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया जाता है, तो उसे ‘‘सर्द दिन’’ कहा जाता है। वंही राजस्थान में बर्फ जमा देने वाली सर्दी का सितम है। मौसम विभाग के अनुसार 18 दिसंबर को पश्चिम राजस्थान के चूरू में न्यूनतम तापमान -1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर सामान्य तापमान -1.6 डिग्री सेल्सियस से -3.0 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया था।
प्रदेश सरकार द्वारा जल विद्युत के उचित दोहन के साथ-साथ ऊर्जा का सही उपयोग करने की ओर अग्रसर है। राज्य में चिन्हित स्थानों पर सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना को अधिमान दिया जा रहा है जो वैकल्पिक ऊर्जा के सर्वश्रेष्ठ स्त्रोतों में से एक है। यह जानकारी शनिवार को सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे विशेष प्रचार अभियान के अन्तर्गत हिम सांस्कृतिक दल ममलीग के कलाकारों ने सोलन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत क्वारग तथा ग्राम पंचात बीशा, पर्वतीय लोक कला मंच दाड़वां के कलाकारों द्वारा कसौली विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत टकसाल तथा अन्हेच एवं शिव शक्ति कला मंच कुनिहार के कलाकारों द्वारा अर्की विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोटली तथा दधोगी में आयोजित कार्यक्रमों में प्रदान की गई। लोगों को अवगत करवाया गया कि मुख्यमंत्री रोशन योजना के तहत 35 हजार रुपए से कम वार्षिक आय वाले बीपीएल या अन्तोदय परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं। योजना के तहत 5862 लाभार्थियों को विद्युत के निःशुल्क कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। प्रत्येक कनेक्शन पर लाभार्थी को 7500 रुपए की सहायता प्रदान की जाती है। कलाकारों ने बताया कि हिमऊर्जा द्वारा सोलर गीजर पर घरेलू उपभोक्ता को 30 प्रतिशत उपदान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिमऊर्जा द्वारा ग्रिड कलेक्टेड सोलर रूफ टाॅप चरण-2 के अन्तर्गत 3 किलोवाट तक 40 प्रतिशत व 3 से अधिक 10 किलोवाट तक 20 प्रतिशत उपदान केन्द्र सरकार तथा 4000 रुपए प्रति किलोवाट उपदान प्रदेश सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को प्रदान किया जा रहा है। कलाकारों ने समूह गान ‘विकास की राह पर क्षितिज की ओर चल रहा हिमाचल बढ़ रहा हिमाचल’ के माध्यम से मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन, सामाजिक सुरक्षा पैंशन, जनमंच, मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना, मुख्यमंत्री सहारा योजना तथा हिमकेयर योजना की विस्तृत जानकारी प्रदान की। लोगों को अवगत करवाया गया कि नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन-1100 आरम्भ की गई है। यह हेल्पलाइन रविवार को छोड़कर सप्ताह के 06 दिन सुबह 7.00 बजे से रात 10.00 बजे तक कार्य कर रही है। इस अवसर पर कलाकारों ने उपस्थित जनसमूह का आह्वान किया कि वे युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। आग्रह किया गया कि युवा अपने घर पर परिजनों तथा साथियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत करवाएं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष मंत्री डाॅ. राजीव सैजल 19 दिसम्बर, 2021 को सोलन के प्रवास पर रहेंगे। डाॅ. सैजल 19 दिसम्बर को प्रातः 11.00 बजे शूलिनी विश्वविद्यालय सोलन के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे।
राज्य में पर्यावरण संरक्षण तथा विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से विद्यार्थी वन मित्र योजना के तहत 86702 पौधे रोपित किए गए हैं। यह जानकारी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे विशेष प्रचार अभियान के अन्तर्गत पूजा कलामंच बाड़ीधार के कलाकारों ने नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कश्मीरपुर तथा ग्राम पंचायत नवांग्राम और सप्तक कला मंच कण्डाघाट के कलाकारों द्वारा दून विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत पट्टानाली तथा ग्राम पंचायत कैंडोल में आयोजित कार्यक्रमों में दी। कलाकारों ने अभियान के तहत अवगत करवाया कि वनों के प्रबन्धन में स्थानीय लोगों को सक्रिय रूप से जोड़ने के लिए सामुदायिक वन संवर्धन योजना कार्यान्वित की गई है। योजना के तहत गांव के आस-पास खाली वन क्षेत्र पर पौधरोपण किया जा रहा है तथा लोगों द्वारा स्वयं निर्धारित अन्य संवर्धन सम्बन्धित कार्य करवाए जा रहे हैं। इस अवसर पर कलाकारों द्वारा लोगों को जानकारी दी गई कि समाज में कन्याओं की सुरक्षा प्रोत्साहित करने के लिए बेटी है अनमोल योजना के अन्तर्गत गरीबी रेखा से नीचे के परिवार में जन्मी 02 बेटियों के जन्म पर 12000 रुपए की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। योजना के तहत बीपीएल परिवारों की कन्याओं को और अधिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने 12 अगस्त, 2021 से इस राशि को बढ़ाकर 21000 रुपए कर दिया है। कलाकारों ने लोगों को अवगत करवाया गया कि प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी शगुन योजना के अन्तर्गत बीपीएल परिवारों में जन्मी कन्याओं के विवाह के लिए 31000 रुपए की राशि प्रदान की जा रही है। योजना के अन्तर्गत सोलन जिला में 198 लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने पर 61.38 लाख रुपए व्यय किए गए हैं। लोगों को इस अवसर पर योजना के लाभ लेने की लिए भी जानकारी प्रदान की गई। कलाकारों द्वारा इस अवसर पर नशा निवारण के साथ-साथ कोविड-19 नियमों के विषय में भी जागरूक किया गया। कलाकारों ने बताया कि कोविड-19 का खतरा अभी बना हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का प्रयोग करें तथा आवश्यक सोशल डिस्टेन्सिग नियम का पालन करें। Solan Himachal News
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उस आदेश के खिलाफ एअर इंडिया की अपील खारिज कर दी, जिसमें 40 से ज्यादा उन पायलटों को बहाल करने और पिछले वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, जिनकी सेवाएं पिछले साल समाप्त कर दी गई थीं। जज राजीव शकधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की एक पीठ ने उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश द्वारा पायलटों को दी गई राहत बरकरार रखी और स्पष्ट किया कि जिन लोगों को अब कहीं और रोजगार मिल गया है, वे केवल पिछले वेतन के हकदार होंगे, बहाली के नहीं। पीठ ने कहा, ‘‘हमें एकल न्यायाधीश द्वारा किए गए अंतिम निर्णय को बाधित करने का कोई अच्छा आधार नहीं मिला।’’ पायलटों ने पिछले साल तब उच्च न्यायालय का रुख किया था जब एअर इंडिया ने उनके द्वारा इस्तीफा वापस लेने को स्वीकार करने और समाप्त की गई उनकी सेवाओं को बहाल करने से इनकार कर दिया था।
देश में जानलेवा कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वेरिएंट का खतरा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। आज नवी मुंबई में घनसोली के एक स्कूल के 16 छात्र कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और उन्हें स्थानीय कोविड देखभाल केन्द्र में भर्ती कराया गया है। नवी मुंबई नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि ये आठवीं से 11वीं कक्षा तक के छात्र हैं। अधिकारी ने जानकारी दी कि इनमें से एक छात्र के पिता नौ दिसंबर को कतर से लौटे थे। वह घनसोली के गोथीवली में परिवार के साथ रहते हैं और उनकी कोविड-19 जांच नेगेटिव आई थी, लेकिन जब उनके परिजन की जांच की गई तो स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ने वाला उनका बेटा संक्रमित पाया गया।’’ बता दें कि आज यूपी के गाजियाबाद में ओमिक्रोन से संक्रमित दो मरीजों की पुष्टि हुई है, जिसके बाद देश में ओमिक्रोन के मरीजों की संख्या बढ़कर 113 पहुंच गई है।
निजीकरण के विरोध में जारी हड़ताल के बीच सार्वजनिक बैंकों में सरकार अपनी न्यूनतम हिस्सेदारी घटाकर आधी करने पर विचार कर रही है। अभी सरकारी बैंकों में केंद्र की न्यूनतम हिस्सेदारी 51 फीसदी है, जिसे घटाकर 26 फीसदी तक लाने के लिए कानून में बदलाव किया जा सकता है। हिस्सा घटने के बाद बैंक के प्रबंधन में नियुक्ति का अधिकार सरकार अपने पास ही रखेगी। हालांकि, कानून में सरकार के पास प्रबंधन में नियुक्ति का अधिकार पहले की तरह बनाए रखने का प्रावधान होगा। अभी यह बातचीत प्रारंभिक स्तर पर है और संसद में पेश किए जाने से पहले केंद्रीय कैबिनेट इस पर चर्चा करेगी। बदलाव का मकसद बैंकों पर बढ़ते एनपीए के बोझ को घटाना और अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह बढ़ाना है। रिजर्व बैंक नए साल से नया नियम लागू करने जा रहा, जिसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियों, फूड डिलीवरी फर्म व कर्जदाताओं को ग्राहकों की कार्ड डिटेल इकट्डा करने पर रोक लगा दी जाएगी। 1 जनवरी, 2022 से नियम लागू होने के बाद अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां और जोमोटो-स्विगी जैसे फूड डिलीवरी फर्म अपने उपभोक्ताओं के डेबिट-क्रेडिट कार्ड की डिटेल सेव नहीं कर सकेंगी। इसका असर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कर्ज बांटने वाली फिनटेक के कारोबार पर भी दिखेगा। गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में शुक्रवार को आरबीआई के बोर्ड ने केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी व निजी क्रिप्टोकरेंसी पर चर्चा की। लखनऊ में बोर्ड की 592वीं बैठक के बाद आरबीआई ने बताया कि बैठक में सीबीडीसी के इस्तेमाल व चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने की रणनीति पर मंथन किया गया। इसके अलावा निजी क्रिप्टोकरेंसी के जोखिमों व इस पर नियंत्रण पर भी बातचीत हुई। गर्वनर दास क्रिप्टोकरेंसी के विरोध में हमेशा मुखर रहे हैं और वे कई बार अर्थव्यवस्था पर इसके जोखिम व निवेशकों पर प्रभाव को लेकर चेतावनी दे चुके हैं। आरबीआई ने हाल में सरकार को प्रस्ताव भेजा था, जिसके तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 में बदलाव कर बैंक नोट का दायरा बढ़ाने के लिए कानून बनाने का सुझाव था। इसके जरिये डिजिटल करेंसी को मंजूरी मिलनी है। वंही रिजर्व बैंक ने ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों व कर्ज बांटने वाले फिनटेक को टोकन सिस्टम अथवा विशेष कोड लागू करने को कहा है। इसकी मदद से ग्राहक बिना कार्ड डिटेल के ही ऑनलाइन खरीदारी कर सकेंगे। हालांकि, इससे हर बार खरीदारी करने के लिए ग्राहक को अपने कार्ड की डिटेल डालनी होगी। भुगतान फर्म पेयू के मुख्य उत्पाद अधिकारी मानस मिश्रा का कहना है कि अभी सारी कंपनियां इस नियम को लागू करने के लिए तैयार नहीं है और हमें करीब नौ महीने का समय और मिलना चाहिए। टोकन सिस्टम से ग्राहक बार-बार कार्ड डिटेल भरने से पीछे हट सकते हैं, जो नकदी इस्तेमाल को बढ़ावा देगा।
सरकारी तेल कंपनियों की ओर से आज 17वें दिन पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। देश कई राज्यों में अभी भी पेट्रोल के दाम 100 रुपये से ऊपर चल रहे हैं। देश में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी आम आदमी की कमाई पर असर डाल रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल का दाम 95.41 रुपये जबकि डीजल का दाम 86.67 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 109.98 रुपये व डीजल की कीमत 94.14 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल का दाम 104.67 रुपये जबकि डीजल का दाम 89.79 रुपये लीटर है। वहीं चेन्नई में भी पेट्रोल 101.40 रुपये लीटर है तो डीजल 91.43 रुपये लीटर है। बता दें कि प्रतिदिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। इन्हीं मानकों के आधार पर पर पेट्रोल रेट और डीजल रेट रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं। डीलर पेट्रोल पंप चलाने वाले लोग हैं। वे खुद को खुदरा कीमतों पर उपभोक्ताओं के अंत में करों और अपने स्वयं के मार्जिन जोड़ने के बाद पेट्रोल बेचते हैं। पेट्रोल रेट और डीजल रेट में यह कॉस्ट भी जुड़ती है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में ठंड की गतिविधियां तेज हो गई हैं, क्योंकि श्रीनगर में मौसम की अब तक की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई है। यहां आज न्यूनतम तापमान शून्य से 6.0 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.5 डिग्री कम था। स्थानीय लोगों को ठंड से कोई राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और गिरावट की भविष्यवाणी की है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इस समय तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस कम है। पिछले एक दशक में यह पहली बार है कि 21 दिसंबर से शुरू होने वाले मौसम के 40 दिनों के सबसे लंबे समय तक चलने वाले चिल्लई-ए-कलां की शुरुआत से पहले पारा शून्य से 6.0 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक गिर गया है। पिछले दस सालों में चार बार ऐसा हुआ है जब श्रीनगर में पारा शून्य से 6.0 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक गिर गया। 19 दिसंबर को पारा गिरकर माइनस 6.6 °C हो गया था, जबकि दिसंबर के महीने में सबसे कम 2019 में 30 वें दिन 6.6 °C दर्ज किया गया था। पिछले दस सालों में पारा सबसे कम 25 दिसंबर 2017 को दर्ज किया गया था, जब पारा शून्य से 7.7 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया था। दिसंबर में अब तक का सबसे कम तापमान 1934 को दर्ज किया गया था, जब पारा शून्य से 12.8 डिग्री सेल्सियस नीचे गिर गया था।
देश में किसान आंदोलन तो खत्म हो चुका है, लेकिन किसान आंदोलन की आड़ में राजनीति पारी खेलने की चाल भी चली गई। आंदोलन की अगुवाई करने वाले सड़क पर एक साल तक डटे रहने वाले किसान नेता अब राजनीति में नेतागीरी करेंगे। पंजाब चुनाव में किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी ने आज चंडीगढ़ में अपनी ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ का एलान किया। गुरनाम सिंह चढूनी भारतीय किसान यूनियन के नेता और एक साल तक आंदोलन चलाने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के अहम सदस्य हैं। चढूनी ने आज चंड़ीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी नई पार्टी का एलान कर दिया है। चढ़ूनी ने इसे मिशन पंजाब का नाम दिया है। इसी मिशन के तहत फतेहगढ़ साहिब में एक उम्मीदवार के नाम का एलान भी कर चुके हैं। बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा चढूनी के चुनाव वाले फैसले से सहमत नहीं था। इसी को लेकर गुरनाम सिंह चढूनी और संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के बीच खींचतान भी चली थी, लेकिन चढूनी अपनी बात पर अड़े रहे। हालांकि चढूनी ने साफ कर दिया है कि वो खुद चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगे, बल्कि किसानों को मैदान में उतारेंगे।
देश में आज भी महिलाओं को अपनी जगह बनाने के लिए काफी मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। खेल, बिजनेस जैसे कई क्षेत्र हैं जहां बहुत कम ही महिलाएं आगे बढ़ पाती हैं। ऐसे में गुजरात की अक्षदा दलवी ने अपनी मेहनत से समाज और दकियानूसी सोच दोनों पर तमाचा मारते हुए एक मिसाल कायम किया है। दरअसल गुजरात के वडोदरा में अख़बार बेचने वाले व्यक्ति की बेटी अक्षदा दलवी ने अंतरराष्ट्रीय किक बॉक्सिंग के लिए क्वालीफाई किया है। अक्षदा ने बताया कि उसे बचपन से ही किक बॉक्सिंग का शौक था और उसने पांचवीं कक्षा से कराटे सीखना शुरू कर दिया था। अक्षदा अपने पहले नेशनल में गोल्ड मेडल जीत पूरे देश को गौरवांवित भी कर चुकी हैं। बता दें कि किकबॉक्सिंग एरोबिक व्यायामों को एक रूप है, इसमें मिक्सड मार्शल आर्ट टेक्नीक का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक मार्शल आर्ट खेल है जिससे आपके शरीर को मजबूत बनाने का काम करता है. मार्शल आर्ट करने से इंसान कई तरह की बीमारी से भी बच सकता है साथ ही इससे शरीर में रक्त फ्लो भी बेहतर होता है। किक बॉक्सिंग की शुरूआत सबसे पहले साल 1930 में जापान में हुई थी। यह अमेरिका में 70 के दशक में पेश किया गया था। बता दें कि जापानी किकबॉक्सिंग के साथ किकबॉक्सिंग के कई अलग-अलग प्रारूप हैं, अमेरिकन किकबॉक्सिंग, मय थाई या थाई किकबॉक्सिंग।
देश में जहरीली हवा के साथ ही अब लोगों को बढ़ती सर्दी का भी सामना करना पड़ रहा है। राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत में कोहरे के साथ कंपकंपाती ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग की माने तो आने वाले 24 घंटों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में सर्दी और बढ़ सकती है। इस बीच राजधानी दिल्ली में इस ठंड के सीजन का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया है और अनुमान लगाया जा रहा है कि पारे में और भी गिरावट हो सकती है। वहीं जम्मू-कश्मीर से आ रही बर्फीली हवा ने मौसम को और भी ठंडा कर दिया है। IMD के अनुसार 19 दिसंबर से जम्मू-कश्मीर का तापमान और गिरेगा। पारा गिरने से अचल में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो जाएगी। मौसम विभाग ने बताया कि इन इलाकों में दो से तीन दिनों तक कोहरा भी छाया रह सकता है। साथ ही शीतलहर चलने के आसार बन रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले 4 दिनों के दौरान जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ के लोगों को गंभीर शीत लहर का सामना करना पड़ेगा।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक मरीज में बेहद ही अनोखा मामला सामने आया है। डॉक्टरों की एक टीम ने 50 साल के मरीज के शरीर से 156 किडनी स्टोन निकाले। रीनल केयर फैसिलिटी प्रीति यूरोलॉजी एंड किडनी अस्पताल के डॉक्टरों ने कीहोल ओपनिंग के जरिए इतनी संख्या में पथरी निकाली। डॉक्टरों का मानना है कि देश में पहली बार किसी मरीज के शरीर से इतनी संख्या में पथरी निकाली गई है। मरीज बसवराज मदीवालर पेशे से टीचर हैं और हुबली के रहने वाले हैं। मरीज को गंभीर पेट दर्द के साथ हैदराबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया था और जांच में गुर्दे की पथरी के एक बड़े समूह की उपस्थिति का पता चला था। उसके पास एक्टोपिक किडनी भी थी और वह मूत्र के रास्ते में अपनी सामान्य स्थिति के बजाय पेट के पास स्थित था। मरीज के शरीर से गुर्दे की पथरी को हटाते समय सर्जनों के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
हिमाचल प्रदेश छठे राज्य वित्त आयोग की तीसरी बैठक शुक्रवार को आयोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग की अवधि 31 अक्तूबर, 2022 तक बढ़ाने की अनुशंसा की गई। बैठक को सम्बोधित करते हुए सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि छठे राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल 31 दिसम्बर, 2021 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग की 26 मार्च, 2021 को आयोजित दूसरी बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि पंचायती राज और शहरी विकास विभाग की ओर से स्थानीय निकायों की आय व व्यय के ब्यौरे तथा अन्य जानकारियों से सम्बन्धित प्रश्नावली सभी स्थानीय निकायों को सूचना प्रदान करने के लिए प्रेषित की जाए। इन विभागों के परामर्श पर अप्रैल, 2021 के अंत तक प्रश्नावली तैयार कर ली गई थी। इस बीच कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश सहित हिमाचल प्रदेश में भी विपरीत प्रभाव डाला और पूर्णबंदी के कारण मई, 2021 में सभी कार्यालयों में कर्मचारियों की सीमित उपस्थिति में कार्य चलता रहा। उन्होंने कहा कि जून, 2021 के अन्त तक सभी स्थानीय निकायों को यह प्रश्नावली भेज दी गई थी। इसके उपरांत से आयोग द्वारा स्थानीय निकायों से वांछित सूचना प्राप्त करने के लिए लगातार सम्पर्क किया जा रहा है, लेकिन अभी तक लगभग 20 प्रतिशत स्थानीय निकायों से ही सूचना प्राप्त हो सकी है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर-नवम्बर, 2021 में हुए उप चुनावों में सम्बन्धित स्टाफ की ड्यूटी के कारण भी स्थानीय निकायों से यह सूचना प्राप्त करने में विलम्ब हुआ है। बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल 31 दिसम्बर, 2021 से बढ़ाकर 31 अक्तूबर, 2022 करने की अनुशंसा प्रदेश सरकार से की गई है। सदस्य सचिव छठा राज्य वित्त आयोग एवं सलाहकार (योजना) डाॅ. बासु सूद ने आयोग के अध्यक्ष का स्वागत एवं बैठक का संचालन किया। बैठक में आयोग के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। shimla Himachal News
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शुक्रवार को कांगड़ा जिले के शक्तिपीठ माता ज्वालामुखी मंदिर में शीश नवाया और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इसके उपरांत, मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर में की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। विधायक रमेश धवाला, उपायुक्त कांगड़ा डाॅ. निपुण जिंदल और पुलिस अधीक्षक खुशाल शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। Shimla Himachal News
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना कार्यान्वित की गई है। योजना के तहत खेतों को सुरक्षित रखने के लिए की जा रही बाड़बंदी पर इस वर्ष अभी तक 105 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं ताकि किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाया जा सके। यह जानकारी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से सम्बद्ध हिम सांस्कृतिक दल के कलाकारों द्वारा सोलन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाशा तथा सिरीनगर में आयोजित कार्यक्रमों में दी। कलाकारों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत 3873 किसानो को लाभान्वित किया गया है। सोलर फैसिंग लगाने के लिए 80 प्रतिशत तक उपदान प्रदान किया जा रहा है। योजना के तहत किसानों के खेत के चारों ओर बाड़ लगाई जाती है, जिसे सौर ऊर्जा से संचालित किया जाता है। लोगों को इन योजनाओं का लाभ उठाने के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कसौली विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोरों तथा जंगेशू पर्वतीय लोक मंच दाड़वां के कलाकारों द्वारा गीत-संगीत एवं नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में अवगत करवाया गया। कलाकारों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा पैंशन योजना के अन्तर्गत वृद्ध, एकल नारी, कुष्ठ रोगी, ट्रांसजेंडर, विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। सोलन जिला में 60 से 69 वर्ष के सामाजिक सुरक्षा पैंशन धारकों की संख्या 6747 है। 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सामाजिक सुरक्षा पैंशनरों की कुल संख्या 11896 है। कलाकारों ने बताया कि महिला सशक्तिकरण व पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से कार्यान्वित की जा रही महत्वाकांक्षी हिमाचल गृहिणी सुविधा के तहत सोलन ज़िला में अभी तक 17 हजार से अधिक लाभार्थियों को गैस कनेक्शन निःशुल्क प्रदान किए गए हैं। इस अवसर पर कलाकारों द्वारा नशा निवारण के साथ-साथ कोविड-19 नियमों के विषय में भी जागरूक किया गया। कलाकारों ने बताया कि कोविड-19 का खतरा अभी बना हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का प्रयोग करें तथा आवश्यक सोशल डिस्टेन्सिग नियम का पालन करें। कलाकारों ने उपस्थित जनसमूह को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी प्रदान की। लोगों को बताया गया कि हमारे युवाओं का पूरी तरह स्वस्थ एवं जागरूक होना आवश्यक है। यह तभी हो सकता है जब हमारे युवा नशे को न कहना सीखेंगे। कलाकारों ने बताया अभिभावकों को चाहिए वे अपने बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखें। इस अवसर पर ग्राम पंचायत बाशा के प्रधान धर्मदत्त, उप प्रधान हेमन्त कुमार, वार्ड सदस्य पदम ठाकुर, मीना, सिलाई अध्यापिका अनीता व उप प्रधान रविन्द्रा सहित काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। Solan Himachal News
मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना-2019 में संशोधन कर इसमें 18 नई गतिविधियां शामिल की गई है। योजना के तहत गतिविधियों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। यह जानकारी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे विशेष प्रचार अभियान के अन्तर्गत सप्तक कलामंच के कलाकारों द्वारा दून विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम पंचायत नालका तथा हरिपुर संडोली में आयोजित कार्यक्रमों में दी। कलाकारों ने बताया कि योजना के तहत लघु सेवा व व्यवसायिक उद्यमों की सूची में परिरक्षित चारा (साइलेज) इकाइयों की स्थापना, उन्नत डेयरी विकास परियोजना (10 गाय या भैंसों की एक इकाई), दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की स्थापना, फार्म स्टे तथा एग्रो पर्यटन व फार्म पर्यटन, कृषि के लिए खुदरा दुकानों का निर्माण, कृषि उपकरणों व औजारों का निर्माण, सब्जी नर्सरी तैयार करना, ऊत्तक संवर्द्धन प्रयोगशाला, कृषि उत्पादों का भण्डारण और परिवहन, इन्टरनेट ऑफ थिंग्ज आधारित वर्टिकल फार्मिंग, पेट्रोल पम्प, ईवी चार्जिंग स्टेशन, एम्बुलेंस, रेशम प्रसंस्करण इकाई, रेशम रीलिंग इकाइयां, ऑक्सीज़न क्रायोजेनिक टेंकर सेवाएं, सर्वेयर यूनिट और ड्रिलिंग यूनिट शामिल की गई हैं। कलाकारों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना-2019 के तहत आवेदन करने वाली महिलाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का भी निर्णय लिया गया है। योजना के तहत अभी तक 1350 मामले बैंकों द्वारा स्वीकृत किए जा चुके हैं। कलाकारों ने बताया कि ज़िला उद्योग केन्द्र सोलन लाभार्थियों को उपदान के रूप में 13.57 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम द्वारा प्रायोजित विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। लोगों को बताया गया कि निगम द्वारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से लघु अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनसे युवा स्वरोज़गार अपना सकते हैं। पूजा कलामंच बाड़ीधार के कलाकारों ने नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बैरछा तथा गोलजमाला के गांव नंगल उपरला में गीत-संगीत एवं नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की। शिव शक्ति कलामंच के कलाकारों द्वारा अर्की विधानसभा क्षेत्र में अखिल भारतीय पैंशनर्ज के कार्यक्रम में प्रदेश सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार किया गया। कलाकारों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के कर्मचारियों तथा पैंशनरों के लिए कई कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार द्वारा अनुबन्ध कर्मचारियों के लिए अनुबन्ध कार्यकाल 03 वर्ष से घटाकर 02 वर्ष किया है तथा कर्मचारियों को नया वेतनमान प्रदान करने की घोषणा की है। कलाकारों ने समूह गान ‘विकास की राह पर क्षितिज की ओर चल रहा हिमाचल बढ़ रहा हिमाचल’ के माध्यम से मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना, मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन, सामाजिक सुरक्षा पैंशन, जनमंच, मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना, मुख्यमंत्री सहारा योजना तथा हिमकेयर योजना की जानकारी प्रदान की। कलाकारों द्वारा इस अवसर पर नशा निवारण के साथ-साथ कोविड-19 नियमों के विषय में भी जागरूक किया गया। कलाकारों ने बताया कि कोविड-19 का खतरा अभी बना हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का प्रयोग करें तथा आवश्यक सोशल डिस्टेन्सिग नियम का पालन करें। Solan Himachal News
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में जवानों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई। सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया।यह एनकाउंटर कुलगाम के रेडवानी इलाके में हुई है। इस बात की जानकारी पुलिस ने दी है। एनकाउंटर के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सुरक्षाबलों की कोशिश है कि जल्द से जल्द इलाके में छिपे हुए सभी आतंकियों को किसी भी हालत में पकड़ लिया जाए. जवानों को शक है कि इलाके में और भी आतंकी छिपे हो सकते हैं। कश्मीर जोन के पुलिस ने बताया कि मारे गए दोनों आतंकियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। आतंकियों को घेरने के बाद जवानों ने उन्हें हथियार डालने को कहा। लेकिन आतंकियों ने जवानों की बातों को अनदेखा करते हुए गोलीबारी शुरू कर दी। जिसके बाद जवानों ने जवाबी कार्रवाई के लिए मोर्चा संभाला और दो आतंकियों को ढेर कर दिया। बता दें कि इससे पहले बुधवार को पुलवामा जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन (एचएम) का एक आतंकवादी मारा गया था।
पांच राज्यों में चुनाव के बीच कोरोना के नए ओमिक्रोन वेरिएंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली में ओमिक्रोन के चार नए मामले आए हैं। दिल्ली में अब ओमाइक्रोन वेरिएंट बढ़कर 10 पहुंच गए। इन 10 में से एक को छुट्टी दे दी गई है और 9 अभी भी एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि इनमें से कोई भी गंभीर मामला नहीं है। वहीं पश्चिम बंगाल भी ओमिक्रोन पहुंच गया है, केरल में चार नए केस मिले हैं, देश में ओमिक्रोन का आंकड़ा कुल 77 हो गया है। महाराष्ट्र में ओमिक्रोन के 4 और मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या 32 हो गई। आशंका है कि ओमिक्रोन के फैलने की रफ्तार डेल्टा से भी ज्यादा है। ऐसे में जनवरी में देश पर वायरस का प्रकोप हो सकता है। 2 दिसंबर को जहां देश में सिर्फ 2 केस थे। 14 दिसंबर को केस 44 हुए और 16 दिसंबर को केस 77 पर पहुंच गए हैं यानी 14 दिन में केस 36 गुना हो गए।


















































