जुब्बल कोटखाई से उप चुनाव में रहे प्रत्याशी चेतन सिंह बरागटा ने आज कोटखाई जोन के बाघी, रत्नाडी, कलबोग, क्यारवी, चोगन कुल्टी, रामनगर व चमेरा बूथ में जन आभार कार्यक़म में पहुंचे। इस दौरान जनता व कार्यकर्ताओं ने चेतन बरागटा का हर्षोल्लास से ढोल नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। गौरतलब है कि पिछले कल जुब्बल जोन के पंदराणु, हाटकोटी और मंढोल बुथों पर हुई बैठको में भी सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बूथ की बैठको में भारी भीड़ का इकट्ठा होना इस बात का परिचायक है कि चेतन बरागटा पर जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। चेतन ने कहा कि कलबोग में उप तहसील कार्यालय खोलने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का धन्यवाद करते हैं। स्व. नरेन्द्र बरागटा के प्रयासों वो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आशीर्वाद से गुम्मा बाघी 30 किलोमीटर सड़क को पक्का किया गया। आज उबादेश की सभी पंचायतों को जोड़ने वाली सभी सड़कें चका- चक है जिसका पुरा श्रेय प्रदेश सरकार जाता है। चेतन बरागटा ने कहा कि कलबोग से बखरेल, चूईला,मेल फर्स्ट और मेल सैकेंड की टायरिग आजकल युद्ध स्तर पर चल रही है जिसके लिए वो मुख्यमंत्री के आभारी हैं। स्व नरेंद्र बरागटा का जुब्बल नावर कोटखाई को आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाने का स्वप्न था। जिसके लिए उन्होंने कोविड काल के बावजूद जुब्बल शावर कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की लागत से विकासात्मक कार्यों को आरम्भ करवाया था। एस.डी. एम. कोटखाई की स्थायी नियुक्ति के लिए क्षेत्र की जनता की ओर से चेतन सिंह बरागटा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया तथा जुब्बल में भी एस.डी.एम. की स्थाई नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया। चेतन बरागटा ने कहा कि कांग्रेस के मित्रो को कोटखाई में एस. डी.एम. की नियुक्ति से शायद प्रसन्नता नही हुई, शायद इसीलिए अभी तक प्रदेश सरकार का विधायक रोहित ठाकुर ने आभार तक व्यक्त नही किया है। बल्कि इसके उल्ट एस. डी. एम. की नियुक्ति पर हुई अटकलों पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया में जरूर दिखे। लेकिन अब एस डी एम कोटखाई की नियुक्ति पर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। चेतन सिंह बरागटा ने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हमे सकारात्मकता अपनाते हुए विकासात्मक कार्यों का स्वागत करना चाहिए। कार्यक्रमो में जिला परिषद सदस्य अनिल काल्टा, क्यारवी पंचायत प्रधान मंतीश चौहान, चौगन कुल्टी के प्रधान अंकुश,उप प्रधान संजीव किष्टा,कलबोग पंचायत उप प्रधान महेंद्र चौहान,रतनाडी पंचायत उप प्रधान प्रितम सिंह नेगी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जिला किन्नौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग -5 पर स्पीलो के पास रविवार देर शाम एक इनोवा गाडी के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक पर्यटक की मौत हो गई है जबकि इस हादसे में दो पर्यटक गम्भीर रूप से घायल हो गए हैं जिनका उपचार पी एच सी स्किबा में चल रहा है । मृतक की पहचान विनोद कुमार पुत्र स्वर्गीय राजकुमार गांव व डाकघर झांग तहसील जयसिंहपुर जिला कांगड़ा के रूप मे हुई जबकि घायलों में कमल कुमार पुत्र मस्त राम निवासी सेक्टर 14 बेस्ट चंडीगढ़ व सत्यवीर पुत्र जगराम निवासी अलकर (राजस्थान) शामिल हैं। जानकारी के अनुसार रविवार देर शाम चालक सत्यवीर अपने दो साथियों विनोद कुमार व कमल कुमार के साथ इनोवा गाड़ी एच आर 30 आर 4260 में पंचकुला से पूह की ओर घूमने जा रहे थे कि राष्ट्रीय उच्च मार्ग -5 पर स्पीलो के पास चालक गाड़ी से नियंत्रण खो बैठा,जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क से लगभग दो सो मीटर नीचे सतलुज नदी मे जा गिरी, जिससे विनोद कुमार की मौके पर ही मौत हो गई । हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची व स्थानीय लोगो की सहायता से घायलों को वहां से निकालकर उपचार के लिए पी एच सी स्किबा ले जाया गया तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए क्षेत्रीय चिकित्सालय ले जाया गया। दुर्घटना के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है तथा पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। वहीं उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि इस हादसे में कांगड़ा जिले के एक पर्यटक की मौत हो गई है जबकि दो अन्य घायल हुए हैं । उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है तथा मृतक व घायलों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है तथा पोस्टमार्टम होने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
मंडी/अजय सूर्या प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों को विडियो कांफेंस के माध्यम से संबोधित किया । इस अवसवर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री केयर फंड के तहत दी जा रही सेवाओं व सहायता को जिला प्रशासन के माध्यम से बच्चों एवं उनके अभिभावकों को सुपुर्द किया गया । जिला मंडी में कोरोना महामारी के दौरान 6 बच्चों ने अपने माता-पिता खोए हैं, जिन्हें अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अश्वनी कुमार तथा एसडीएम सदर रितिका जिंदल ने प्रधानमंत्री केयर की सहायता कीट भेंट की। इस अवसर पर पर अश्वनी कुमार ने बताया कि पीएम केयर में इन बच्चों को निःशुल्क स्कूली शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा ऋण की सहायता, शिक्षा ऋण के ब्याज का भुगतान पीएस केयर्स द्वारा, 23 वर्ष की आयु तक आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, बीमा के प्रीमियम का भुगतान पीएम केयर्स द्वारा, पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए 20 हजार रूपये प्रति वर्ष की छात्रवृति, तकनीकी शिक्षा के लिए स्वानाथ छात्रवृति इत्यादि प्रदान की जाती हैं । इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी कल्याण चंद तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी डीआर नायक उपस्थित थे ।
पंजाब में कल की घटना की शिवसेना कड़े शब्दों में निंदा करती है एक नौजवान गायक सिद्दू मूसेवाला का दिन दिहाड़े कत्ल सोच का विषय है। मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में है और जब से आप की सरकार पंजाब में आयी है तब से पंजाब के हालात बद से बदतर होते जा रहे है आये दिन दिन- दिहाड़े क़त्ल हो रहे है और असमाजिक तत्व बेखौफ घटनाओ को अंजाम दे रहे है जब से आप की सरकार पंजाब में आयी है तब से खालिस्तानी आतंकी भी बेखौफ घटनाओं को अंजाम दे रहे है कभी मुख्य्मंत्री जयराम ठाकुर जी को धमकी देते है कभी विधानसभा भवन पर खालिस्तान के झंडे फहराते है,कभी जज को धमकी,कभी हरियाणा के नेताओं को धमकी | इस सारे घटना क्रम से लगता है की पंजाब में आप की सरकार फेल है और केंद्र सरकार को चाहिए की जल्द से जल्द आप की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। आप के शासन में गन और गैंग कल्चर को बढ़ावा मिला है और पंजाब में गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा कम करना भी इस घटनाक्रम की वजह रही है। आप के इस फैसले से सभी की जान खतरे में है और सिद्धू मूसेवाला को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को तुरंत फांसी पर लटका देना चाहिए। आप नेता पहले पंजाब के हालात सुधारे फिर हिमाचल की चिंता करें और बड़े बड़े झूठे बयान देने बंद करें।
सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश के आह्वान पर सीटू के 53वें स्थापना दिवस पर प्रदेशभर में झंडारोहण के साथ ही सेमिनार व शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किये गए। इस दौरान मजदूरों ने हलवा व मिठाईयां वितरित करके स्थापना दिवस का जश्न मनाया। मजदूरों ने केंद्र व प्रदेश सरकार की मजदूर,कर्मचारी व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने की शपथ ली। जिला व ब्लॉक मुख्यालयों में हुए विभिन्न कार्यक्रमों में डॉ कश्मीर ठाकुर,विजेंद्र मेहरा,प्रेम गौतम,जगत राम,अजय दुलटा,बिहारी सेवगी,कुलदीप डोगरा,एन डी रणौत,राजेश शर्मा,भूपिंद्र सिंह,राजेश ठाकुर,रविन्द्र कुमार,नीलम जसवाल,सुदेश ठाकुर,केवल कुमार,अशोक कटोच,जोगिंद्र कुमार,सुरेश राठौर,रंजन शर्मा,पदम् प्रभाकर,वीना देवी,बलबीर सिंह,ब्रिज लाल,हिमी देवी,संगीता ठाकुर,मदन नेगी,बालक राम,गुरदास वर्मा,नरेंद्र विरुद्ध,गुरनाम सिंह,विजय शर्मा,लखनपाल शर्मा,सर चंद,भूप सिंह,ओमदत,मोहित वर्मा,राजेन्द्र ठाकुर,लाल सिंह,आशीष कुमार,रामप्रकाश,पूर्ण चंद,राकेश कुमार,विकास कंवर,अंकुश कुमार,देवराज,सतपाल बिरसांटा व रंजीव कुठियाला आदि मौजूद रहे। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि इस दौरान मजदूरों के चबालिस कानूनों को खत्म करके चार लेबर कोड बनाने,सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश व निजीकरण,ओल्ड पेंशन स्कीम बहाली,आउटसोर्स नीति बनाने,स्कीम वर्करज़ को नियमित कर्मचारी घोषित करने,मनरेगा मजदूरों के लिए 350 रुपये दिहाड़ी लागू करने,करुणामूलक रोज़गार देने,छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने,सेवाओं के निजीकरण,मोटर व्हीकल एक्ट में मालिक व मजदूर विरोधी संशोधनों व नेशनल मोनेटाइजेशन पाइप लाइन आदि मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार मजदूर,कर्मचारी,किसान,महिला,नौजवान,छात्र,दलित विरोधी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है व मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। पिछले सौ सालों में बने चौबालिस श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं अथवा लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कोरोना काल का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश जैसी कई राज्य सरकारों ने आम जनता,मजदूरों व किसानों के लिए आपदाकाल को पूंजीपतियों व कॉरपोरेट्स के लिए अवसर में तब्दील कर दिया है। यह साबित हो गया है कि यह सरकार मजदूर,कर्मचारी व जनता विरोधी है व लगातार गरीब व मध्यम वर्ग के खिलाफ कार्य कर रही है। सरकार की पूँजीपतिपरस्त नीतियों से अस्सी करोड़ से ज़्यादा मजदूर व आम जनता सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। सरकार फैक्टरी मजदूरों के लिए बारह घण्टे के काम करने का आदेश जारी करके उन्हें बंधुआ मजदूर बनाने की कोशिश कर रही है। आंगनबाड़ी,आशा व मिड डे मील योजनकर्मियों के निजीकरण की साज़िश की जा रही है। उन्हें वर्ष 2013 के पैंतालीसवें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार नियमित कर्मचारी घोषित नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 26 अक्तूबर 2016 को समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स,ठेका,दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है। केंद्र व राज्य के मजदूरों को एक समान वेतन नहीं दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के मजदूरों के वेतन को महंगाई व उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ नहीं जोड़ा जा रहा है। सातवें वेतन आयोग व 1957 में हुए पन्द्रहवें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार उन्हें इक्कीस हज़ार रुपये वेतन नहीं दिया जा रहा है। मोटर व्हीकल एक्ट में मालिक व मजदूर विरोधी परिवर्तनों से वे रोज़गार से वंचित हो जाएंगे व विदेशी कम्पनियों का बोलबाला हो जाएगा। मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के कारण कोरोना काल में करोड़ों मजदूर बेरोज़गार हो गए हैं। मजदूरों को नियमित रोज़गार से वंचित करके फिक्स टर्म रोज़गार की ओर धकेला जा रहा है। वर्ष 2003 के बाद नौकरी में लगे कर्मचारियों का नई पेंशन नीति के माध्यम से शोषण किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग की है कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन इक्कीस हज़ार रुपये घोषित किया जाए। केंद्र व राज्य का एक समान वेतन घोषित किया जाए। आंगनबाड़ी,मिड डे मील,आशा व अन्य योजना कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। मनरेगा में दो सौ दिन का रोज़गार दिया जाए व उन्हें राज्य सरकार द्वारा घोषित साढ़े तीन सौ रुपये न्यूनतम दैनिक वेतन लागू किया जाए। श्रमिक कल्याण बोर्ड में मनरेगा व निर्माण मजदूरों का पंजीकरण सरल किया जाए। निर्माण मजदूरों की न्यूनतम पेंशन तीन हज़ार रुपये की जाए व उनके सभी लाभों में बढ़ोतरी की जाए। कॉन्ट्रैक्ट,फिक्स टर्म,आउटसोर्स व ठेका प्रणाली की जगह नियमित रोज़गार दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार समान काम का समान वेतन दिया जाए। नई पेंशन नीति(एनपीएस) की जगह पुरानी पेंशन नीति(ओपीएस) बहाल की जाए। सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश व निजीकरण बन्द किया जाए। मोटर व्हीकल एक्ट में परिवहन मजदूर व मालिक विरोधी धाराओं को वापिस लिया जाए। चबालिस श्रम कानून खत्म करके मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं(लेबर कोड) बनाने का निर्णय वापिस लिया जाए। सभी मजदूरों को ईपीएफ,ईएसआई,ग्रेच्युटी,नियमतित रोज़गार,पेंशन,दुर्घटना लाभ आदि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। भारी महंगाई पर रोक लगाई जाए। पेट्रोल,डीज़ल,रसोई गैस की कीमतें कम की जाएं। रेहड़ी,फड़ी तयबजारी क़े लिए स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए। सेवाकाल के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को बिना शर्त करूणामूलक आधार पर नौकरी दी जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिमला आगमन के दौरान जिला किन्नौर में आयोजित कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। यह जानकारी आज यहां उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।उन्होंने कहा कि देश की आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 31 मई, 2022 को हिमाचल प्रदेश आगमन पर शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान से केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई विभिन्न महत्वकांशी योजनाओं के कुछ लाभार्थियों के साथ वर्चुअल माध्यम से संवाद स्थापित किया जाएगा। माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण लाभार्थियों तथा अन्य तक पहुंचाने के लिए रिकांग पिओ स्थित बचत भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसके लिए एक बड़ी एल.ई.डी स्क्रीन लगाई गई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी करेंगे। इसके अलावा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कृषि विज्ञान केंद्र रिकांग पिओ में भी एक बड़ी स्क्रीन के माध्यम से किया जाएगा। यहां पर भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख सकेंगे।उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई विभिन्न योजनाओं जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी), प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण व शहरी), जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री स्वानिधी योजना व एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान भारत हैल्थ एवं वैलनेस सैंटर व प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जिले से संबंधित लाभार्थी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में सासंद, स्थानीय विधायक, जिला परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, पंचायत समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों सहित अन्य को भी आमंत्रित किया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष अभी भी रजवादशाही में विश्वास करती हैं। भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने भाजपा मुख्यालय दीपकमल चक्कर शिमला में मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के हॉली लॉज में निमंत्रण पत्र देने पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह द्वारा दी गई टिप्पणियों को सुनकर काफी दुख हुआ है। भाजपा एक ऐसी संस्कृति का पालन करती है ,जो पार्टी लाइन से ऊपर है और प्रधानमंत्री के समारोह के लिए किसी विपक्षी दल के अध्यक्ष को आमंत्रित करना हमारे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रीय अखंडता में विश्वास करते हैं जबकि कांग्रेस समाज के विभाजन में विश्वास करती है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एक सच्चे भाजपा कार्यकर्ता हैं और पार्टी की विचारधारा का पालन करते हैं ,जयराम एक कार्यकर्ता थे, फिर विधायक, मंत्री और अब एक मुख्यमंत्री और उन्हें पता है कि एक सच्चा कार्यकर्ता क्या है। खन्ना ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष में रानी की तरह काम करने की प्रवृत्ति है, वे एक आम आदमी के बारे में क्या जानते हैं। ऐसा लगता है कि कांग्रेस अभी भी रजवादशाही के पुराने जमाने और परंपरा से उबर नहीं पाई है और वे आम जनता से दूर रहना चाहती हैं। मैंने खुद देखा है कि जयराम ठाकुर आम आदमी के मुख्यमंत्री हैं जब बच्चे उनके साथ सेल्फी लेने के लिए हमेशा उत्साहित रहते हैं। कांग्रेस को छोटे मुद्दे पर राजनीति बंद कर देनी चाहिए और खुले दिल से हिमाचल की प्रगति को देखना चाहिए।
विनायक ठाकुर/ज्वालामुखी चंडीगढ़ में हुई ताइक्वांडो प्रतियोगिता में हिमाचल मार्शल आर्ट्स अकैडमी खुंडिया के बच्चों ने हिमाचल का नाम रोशन किया। 29 मई रविवार को चंडीगढ़ में हुई एमराल्ड ताइक्वांडो चैंपियनशिप प्रतियोगिता में हिमाचल मार्शल आर्ट्स एकेडमी के बच्चों ने गोल्ड सिल्वर और ब्राउंस मेडल जीतकर हिमाचल का नाम अपने कोच और माता-पिता का नाम रोशन किया। इनमें से गर्ल्स कैटेगरी में अंशिका गोल्ड, मानवी गोल्ड, वर्णिका गोल्ड, वंशिका राणा गोल्ड और खुशी सिल्वर , वंशिका सिल्वर , प्रांजल सिल्वर, भैरवी सिल्वर, और साइना ने ब्राउंस मेडल जीते और लड़कों की कैटेगरी में अथर्व गोल्ड, ऋषभ सिल्वर , करिश्मन सिल्वर, आदी कुमार सिल्वर, निशांत ने सिल्वर , मेडल जीते तथा बोर्ड ब्रेकिंग में जिसमें लकड़ी के बोर्ड को किक या पंच से तोड़ना होता है उसमें प्रांजल धीमान ने गोल्ड मेडल जीता l इस खुशी के मौके पर हिमाचल मार्शल आर्ट एकेडमी के प्रेसिडेंट सुनील कुमार और कोच मीना कुमारी का कहना है कि हमारी एकेडमी के बच्चे बहुत ही मेहनत करते हैं और ताइक्वांडो प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करके आते हैं हमें बहुत ही खुशी की बात है l हम सब लोगों से निवेदन करते हैं कि कृपया अपने बच्चों को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग जरूर दें और उन्हें हर ताइक्वांडो प्रतियोगिता में जरूर भेजें ताकि आपके बच्चों को इसका नालेज हो और उन्हें पता लगे की बाहर जाकर बच्चे कैसे खेलते हैं l हमारा मकसद है बच्चों को ओलंपिक तक लेकर जाना और खासकर गर्ल्स को ट्रेनिंग देना , जिससे खुद की रक्षा कर सकें l
भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने शिमला के ढली वार्ड में आम जनमानस से रैली में आने के लिए निमंत्रण दिया लोगों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा यह बड़े सौभाग्य की बात है कि केंद्र सरकार के 8 साल पूर्ण होने पर राष्ट्रीय कार्यक्रम शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में होने जा रहा है। इस मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को मोदी सरकार के 8 साल पूर्ण होने पर छोटी पत्रिका का वितरण भी किया। इस रैली को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। कुछ स्थानों से लाभार्थी सुबह 3:00 बजे इस कार्यक्रम को का हिस्सा बनने के लिए अपने घरों से निकलना शुरू हो जाएंगे ताकि वह समय पर पहुंचकर इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सके। उन्होंने कहा की इस समारोह से देश के किसानों को किसान सम्मान निधि का वितरण देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा और लगभग आधे घंटे तक पूरे देश के किसानों और लाभार्थियों के साथ वर्चुअल माध्यम से बातचीत की जाएगी। उन्होंने सभी से आग्रह किया है जब प्रधानमंत्री जी वर्चुअल माध्यम से लाभार्थियों के साथ बातचीत करेंगे सभी लोग शांति बनाए रखें ताकि सभी लाभार्थियों के साथ ठीक से बातचीत हो सके।
पुलिस पेपर लीक भर्ती मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस क्रमिक भूख हड़ताल पर लगातार 15 दिनों से सभी जिला मुख्यालय कार्यालय के बाहर बैठे थे, आज शिमला जिलाधीश कार्यालय के बाहर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी संजय दत्त जी और प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष नेगी निगम भंडारी जी की मौजूदगी में क्रमिक भूख हड़ताल पर फिलहाल विराम लगाकर अशन को तोड़ दिया गया है,सह प्रभारी संजय दत्त ने कहा के युवा कांग्रेस और कांग्रेस हिमाचल के सौहार्द को खराब नहीं करना चाहती है,हम नहीं चाहते कि देश के प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान प्रदेश का सौहार्द पूर्ण वातावरण खराब हो इसलिए हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने अपने क्रमिक अनशन को 15 दिन में समाप्त कर दिया है, यह भी कटु सत्य है कि प्रदेश में जब भी प्रधानमंत्री जी का दौरा हुआ है प्रदेश के लोगों को निराशा ही हाथ में लगी है,लेकिन हमारी यह अटल मांग है कि प्रदेश के 74000 युवाओं के साथ जो कुठाराघात हुआ है, और पात्र युवाओं को दरकिनार कर सरेआम नौकरियों को बेचा गया है इसमें जो भी लोग दोषी हैं वह सभी लोग सलाखों के पीछे होने चाहिए संजय दत्त ने कहा कि प्रधानमंत्री जी प्रदेश में आ रहे हैं और सीबीआई उनके अधिकार क्षेत्र में आती है युवा कांग्रेस की ये मांग है कि प्रधानमंत्री जी तुरंत हस्तक्षेप करें और सीबीआई को निर्धारित समय अवधि के अंदर इस जांच को पूरा करने के लिए आदेश दिए जाए। हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस माननीय प्रधानमंत्री जी को प्रदेश के 12 जिलों के मुख्यालय में जिलाधीश के माध्यम से इस संदर्भ में ज्ञापन सौंपेगी , बाकी और अन्य 11 जिलों में आज क्रमिक भूख हड़ताल जारी रहेगी और कल दोपहर तक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के सहयोग से इसे भी तोड़ा जाएगा,अगर दोषियों पर कार्यवाही नही की जायेगी तो युवा कांग्रेस और सभी वरिष्ठ कांग्रेस के साथी आने वाले दिनों में जनता के सहयोग से इस आंदोलन को विधानसभा स्तर पर और उग्र करेगी और युवाओं को न्याय दिलवा कर रहेगी।
विनायक ठाकुर/देहरा संस्कृत भारती हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रतिवर्ष ग्रीष्मकाल में प्रान्तस्तरीय प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन प्रति वर्ष किया जाता है। इस वर्ष भी यह प्रशिक्षण वर्ग 10 जून 2022 से 21 जून 2022 तक हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर में ग्राम टिप्पर, तहसील गलोड़ में आयोजित हो रहा है । इस वर्ग में भाग लेने वाले इच्छुक इस प्रशिक्षण वर्ग हेतु पूर्व पंजीयन कर रहे हैं । जानकारी देते हुए प्रांत सह प्रचार प्रमुख डा सत्यदेव ने बताया कि जिसने पूर्व मे प्रबोधन वर्ग, आवासीय वर्ग, नियमित रूप से साप्ताहिक मेलन, संघटन योजनानुसार विविधकार्यों व कार्यक्रमों में भाग ग्रहण किया हो, साथ ही भविष्य में संभाषण शिबिर चलाने हेतु समयदान का निश्चय किया हो, वह इस प्रशिक्षण वर्ग में भाग ले सकता है । उक्त जानकारी प्रांत सह प्रचार प्रमुख डा सत्यदेव ने दी।
नौणी विश्वविद्यालय की शिमला स्टूडेंट एसोसियेशन के द्वारा नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए स्वागत समारोह (गेट टुगेदर) जेष्ठ का आयोजन होटल शगुन में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ सुनील चौहान जी के द्वारा दीप प्रज्वलित करने के साथ हुई। इसके बाद कई सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ नृत्य-संगीत प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। जिसमे नवागंतुक विद्यार्थियों ने बढ चढ़ के हिस्सा लिया और प्रतिभागियों में से प्रदर्शन के अनुसार मिस शिमला और मिस्टर शिमला का चयन किया गया। कार्यक्रम में डॉ गोपाल, डॉ एनसी शर्मा, एवम चंदर मोहन चौहान मौजूद रहे उन्होंने विद्यार्थीयो का मार्गदर्शन किया। मौके पर डॉ बीएस डिल्टा ने नवागंतुक विद्यार्थियों का उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से विद्यार्थी सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किताबी ज्ञान में निपुण होना नहीं है, बल्कि देश, समाज व संस्कृति को भी समझना होता है। सांस्कृतिक गतिविधियां हमें एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती हैं। कार्यक्रम में श्वेत सुनान्टा, विशांत सिंह मेहता, ईशान चौहान, एवम आश्रय वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने सभी को कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
केंद्र में सरकार के आठ वर्ष पुरे होने पर 31 मई को ऐतिहासिक रिज मैदान पर होने वाली पीएम मोदी की रैली के लिए भाजपा ने निमंत्रण अभियान शुरू कर किया है।भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, भाजपा के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज और महासचिव त्रिलोक जमवाल ने शिमला के मॉल रोड से निमंत्रण अभियान की। इस अभियान के तहत आम जनताऔर दुकानदारों को पीएम की रैली में आने के लिए इनिवेटशन कार्ड दिए गए। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि पीएम मोदी के लिए जनता से जो प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं वो अद्भुत हैं। शिमला और हिमाचल के लोग नरेंद्र मोदी को अपने शहर और राज्य में पाकर बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि हमारी युवा शक्ति भाजयुमो ने शिमला को भगवा शहर बनाने में बहुत अच्छा काम किया है।
रामपुर बुशहर के ठियोग उपमंडल के तहत सैंज में चोरों ने आभूषण की दुकान से 1.80 लाख रुपये की नगदी चुरा ली। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।पुलिस के मुताबिक घटना 24 मई रात की बताई जा रही है जब चोरों ने जितेंद्र वर्मा की दुकान का ताला तोड़कर 1.80 लाख रुपये की नगदी को चुरा लिया।अगले दिन जितेंद्र वर्मा दुकान में पहुंचे तो उन्हें वारदात की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी।दुकान मालिक ने पुलिस को सीसी टीवी फुटेज भी सौंपी है।दुकान में लगे सीसीटीवी में यह वारदात कैद हो गई।वह आभूषणों की दुकान के साथ-साथ मिनी बैंक भी चलाते हैं। यहाँ लोग रूपये भी जमा करते है। थाना प्रभारी कुलबीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर छानबीन में शुरू कर दी है। जल्द ही चोर पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
हिमाचल प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का प्रश्नपत्र चार गिरोहों ने लीक करवाया है। गिरोह के किंगपिन ने अलग-अलग जिलों में प्रश्नपत्र लीक करवाए। पुलिस पूछताछ में यह खुलासा हुआ है।अभी तक दो गिरोह के किंगपिन सामने आए हैं।सूत्रों के अनुसार गिरोह के सदस्यों को पकड़ने के लिए हिमाचल से चार टीमें अलग-अलग राज्यों में गई हैं। यह टीमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और यूपी के इलाकों मेें दबिश दे रही हैं। एसआईटी का दावा है कि सप्ताह के भीतर इस मामले से पर्दा उठ जाएगा। पुलिस अब तक इस मामले में 93 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। 10 एजेंट बाहरी राज्यों से दबोचे गए हैं।अब तक की जांच में यह सामने आया है कि हिमाचल प्रदेश के आठ जिलों में यह पेपर बंटा है। जब तक सीबीआई केस को नहीं संभालती है, तब तक एसआईटी जांच जारी रखेगी।जिला सोलन में राजस्थान के जिला सीकर के शांतिनगर निवासी सरकारी कर्मचारी आरोपी संदीप टेलर ने पेपर लीक करवाया था।आरोप है कि उसने दो बिचौलियों वीरेंद्र कुमार और देवराज के माध्यम से सोलन और अर्की क्षेत्र के सात अभ्यर्थियों को पेपर रटाने के बदले तीन लाख रुपये लिए थे। दोनों बिचौलिये पहले से गिरफ्तार हैं।आरोपी संदीप ने अपनी पत्नी के खाते में भी पैसा जमा करवाया है।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं-हमीरपुर नेशनल हाईवे में शनिवार सुबह एक सड़क हादसा हुआ है। जानकारी के अनुसार कार विपरीत दिशा में जाकर ट्रक से टकरा गयी और कार चालक की मौके पर मौत हो गयी। कार चालक की पहचान कमलेश चंद्र निवासी भरेटा, सदर, हमीरपुर के रूप में हुई हैं। शुरुआती जानकारी में पता चला है कि कमलेश बद्दी में नौकरी करता था और घुमारवीं से हमीरपुर की ओर जा रहा था। बताया जा रहा है कि ड्राइविंग करते हुए अचानक उसे नींद आ गई और इससे वजह से वह सामने से आ रहे ट्रक में विपरीत दिशा से जाकर टकरा गया हालांकि अभी तक हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया हैं। बिलासपुर पुलिस ने हादसे की पुष्टि की है और कारणों की जांच कर रही है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. मंडी विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और अमूमन हर क्षेत्र में विभिन्न राजनैतिक दलों से टिकट के चाहवान प्रो एक्टिव है। जिला मंडी का नाचन हलका भी इससे इतर नहीं है। टिकट की रस्साकशी के बीच नाचन का सियासी आंगन भी फिलवक्त टेढ़ा दिख रहा है। यहाँ जीत की हैट्रिक लगा चुकी भाजपा के सामने जहाँ सीट बचाने की चुनौती है तो कांग्रेस पर बेहतर करने का दबाव। मौजूदा विधायक विनोद कुमार लगातार दो जीत दर्ज कर चुके है और इस बार भी टिकट के प्रबल दावेदार है। किन्तु मंडी लोकसभा उपचुनाव में नाचन से कांग्रेस को मिली लीड उनकी राह का काँटा बन सकती है। लोकसभा सीट के तहत आने वाली जिला की नौ सीटों में से सिर्फ नाचन ही ऐसी सीट थी जहाँ भाजपा पिछड़ी। डॉ ललित चंद्रकांत भी भाजपा टिकट के प्रबल दावेदार है। डॉ चंद्रकांत आईजीएमसी में सहायक प्रोफेसर हैं और सक्रिय राजनीति में उतरने के लिए उन्होंने सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी है। वह लम्बे वक्त से संघ से जुड़े हुए हैं। डॉ चंद्रकांत के अलावा कमलकांत भी टिकट की रेस में शामिल है। नाचन हलका अप्पर व लोअर नाचन में बंटा है। विनोद कुमार मूलतः अप्पर नाचन से संबंध रखते हैं। ऐसे में लोअर नाचन के विकास कार्यो की अनदेखी के आरोप उन पर लगते है। 2012 में पहली बार विधायक बने विनोद कुमार ने क्षेत्र में अपनी अच्छी पैठ बनाई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह करीब 17 हजार मत से विजयी हुए थे। ऐसे में उनका दावा इस बार भी मजबूत होने वाला है। कांग्रेस की बात करें तो यहां एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है। पूर्व प्रत्याशी लाल सिंह कौशल के अलावा टिकट की दौड़ में बीडी चौहान, दामोदर चौहान, शिवानी चौहान, नरेश चौहान, जसबीर, संजू डोगरा, प्रेम लाल गुड्डू व सीएल चौहान भी शामिल हैं। सभी लोगों ने क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान छेड़ रखा है। टिकट को लेकर अपने आकाओं के यहां हाथ पैर पार रहे हैं। सभी ने अलग-अलग नेताओं की डोर पकड़ रखी है। पर लोकसभा उपचुनाव की तरह अगर सभी नेताओं ने एकजुटता दिखाई तो भाजपा की मुश्किल बढ़ना तय है। उधर, देश की सबसे युवा प्रधान रही जबना चौहान को भी यहां कम नहीं आंका जा रहा है। जबना 2016 में 21 वर्ष की उम्र में देश की सबसे युवा पंचायत प्रधान बनी थीं। अब जबना आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुकी है। भाजपा का मजबूत किला रहा है नाचन : जिला मंडी का नाचन निर्वाचन क्षेत्र को भाजपा का मजबूत किला माना जाता है। वर्ष 1980 में भाजपा का गठन हुआ था और उसके बाद 1982 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में ही नाचन में भाजपा का खाता खुल गया। तब भाजपा टिकट पर दिलेराम ने जीत दर्ज की थी, जो 1977 में भी जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे। इसके बाद 1990 और वर्ष 2007 में भी दिलेराम ने ये सीट भाजपा की झोली में डाली। इसके बाद 2012 और 2017 में मौजूदा विधायक विनोद कुमार ने भाजपा टिकट पर यहाँ से जीत दर्ज की। वहीँ कांग्रेस यहाँ से लगातार तीन चुनाव हार चुकी है। कांग्रेस के लिए टेक चंद डोगरा लम्बे वक्त तक यहाँ मुख्य चेहरा रहे है। डोगरा ने पार्टी को 1985, 1998 और 2003 में जीत दिलाई, जबकि 1993 में वे बतौर निर्दलीय चुनाव जीते।
- रामपुर में घटता जा रहा कांग्रेस की जीत का अंतर फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला जिला शिमला का रामपुर निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस का अभेद गढ़ है। देश में आपातकाल के बाद हुए 1977 के चुनाव को छोड़ दिया जाएँ तो यहाँ हमेशा कांग्रेस का परचम लहराया है। वहीँ भाजपा की बात करें तो 1980 में पार्टी की स्थापना के बाद से 9 विधानसभा चुनाव हुए है ,लेकिन पार्टी को कभी जीत का सुख नहीं मिला। पर बीते कुछ चुनाव के नतीजों पर नजर डाले तो कांग्रेस और वीरभद्र परिवार के इस गढ़ में पार्टी की जीत का अंतर कम जरूर हुआ है। 1990 की शांता लहर में भी कांग्रेस के सिंघीराम यहाँ से 11856 वोट से जीते थे, लेकिन 2017 आते -आते ये अंतर 4037 वोटों का रह गया। 1993 में कांग्रेस यहाँ 14478 वोट से जीती तो 1998 में जीत का अंतर 14565 वोट था। जबकि 2003 के चुनाव में ये अंतर बढ़कर 17247 हो गया। तीनों मर्तबा यहाँ से सिंघी राम ही पार्टी प्रत्याशी थे। 2007 में कांग्रेस ने यहाँ से प्रत्याशी बदला और नंदलाल को मैदान में उतारा। नंदलाल को जीत तो मिली लेकिन अंतर घटकर 6470 वोट का रह गया। 2012 में नंदलाल 9471 वोट से जीते तो 2017 में अंतर 4037 वोट का रहा। रामपुर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह का गृह क्षेत्र है। वीरभद्र सिंह यहां के राजा थे और राज परिवार के प्रति यहाँ की जनता हमेशा निष्ठावान रही है। उनके निधन के बाद उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह को भी जनता का उतना ही प्यार मिलता रहा है, जैसा वीरभद्र सिंह को मिलता था। यहाँ से चेहरा कोई भी हो पर यहाँ प्रभाव राजपरिवार का ही है। अलबत्ता ये क्षेत्र आरक्षित होने के चलते यहाँ से कभी भी राज परिवार खुद चुनाव नहीं लड़ सका लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि वोट उन्हीं के चेहरे पर पड़ते है। 6 बार यहाँ से चुनाव जीत चुके सिंघीराम भी कभी वीरभद्र सिंह के करीबी थे, लेकिन दोनों में दूरियां बढ़ी तो राज परिवार का आशीर्वाद नंदलाल को मिला। इस बार भी कांग्रेस यहाँ से फिर नंदलाल को मौका दे सकती है, जो राजपरिवार के करीबी माने जाते है। भाजपा की बात करें तो 1990, 1993 और 1998 में भाजपा ने यहाँ से निन्जूराम को मैदान में उतारा, पर कांग्रेस ने एकतरफा जीत दर्ज की। 2003 में भाजपा ने उम्मीदवार बदला और बृजलाल को मौका दिया लेकिन बृजलाल रिकॉर्ड 17247 मतों से हारे। 2007 में भी भाजपा ने बृजलाल पर ही भरोसा जताया। तब हार का अंतर कम जरूर हुआ लेकिन जीत का सूखा कायम रहा। 2012 में भाजपा ने यहाँ से प्रत्याशी बदला और प्रेम सिंह धरैक को मौका दिया, पर प्रेम सिंह भी करीब साढ़े नौ हज़ार वोट से चुनाव हार गए। हालांकि 2017 में प्रेम सिंह का प्रदर्शन बेहतर रहा और हार का अंतर करीब चार हज़ार वोट रहा। कौल सिंह भी दावेदार : रामपुर में इस बार भाजपा टिकट के कई चाहवान है। बीते दो चुनाव लड़ चुके प्रेम सिंह धरैक के अलावा कौल सिंह नेगी को भी टिकट का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। कौल सिंह को हाल ही में हिमको फेडरेशन का चेयरमैन भी बनाया गया है। वहीं 6 बार कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीतने वाले सिंघी राम भी अब भाजपा में शामिल हो चुके है। सिंघी राम ने लगाया छक्का, तो नंदलाल की हैट्रिक : 1977 में जनता दल के टिकट पर निन्जु राम ने यहां से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1982 से लेकर 2003 तक हुए लगातार 6 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सिंघी राम ने जीत दर्ज की। जबकि 2007, 2012 और 2017 में जीत दर्ज कर कांग्रेस के ही नंदलाल भी जीत की हैट्रिक बना चुके है।
फस्र्ट वर्डिक्ट । सिरमौर हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी किसी से छिपी नहीं है। शिक्षकों की इसी कमी से निजात दिलाएगा 20 फीट लंबा और एक फीट चौड़ा एक ऐसा पेन जो स्कूल में बच्चों की क्लास लेगा। सिरमौर जिले की नाहन विधानसभा के दुर्गम क्षेत्र में स्थित राजकीय उच्च विद्यालय नौरंगाबाद स्कूल के मुख्याध्यापक एवं विज्ञान के शिक्षक डॉ. संजीव अत्री ने एक ऐसा ही पेन तैयार किया है। लोहे और लकड़ी से तैयार स्याही वाले 41 किलोग्राम वजनी इन पेन में साउंड सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। कोई शिक्षक यदि अगले दिन अवकाश करने वाला है तो एक दिन पहले ही उससे बच्चों को पढ़ाई जाने वाली विषयवस्तु (चैप्टर) तैयार करवाकर पेन में डिलीवर कर दी जाएगी। अगले दिन बच्चों को पेन के समीप बिठाकर छुट्टी पर गए शिक्षक की आवाज में पढ़ाकर सेंसर अपना काम शुरू कर देगा। पेन के ढक्कन वाले हिस्से पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिसका नियंत्रण स्कूल प्रबंधन के पास रहेगा। कार्यालय में बैठकर स्कूल प्रबंधन परिसर में बच्चों पर नजर रख सकेगा और साउंड सेंसर के जरिए बच्चों का नाम भी पुकारा जा सकेगा। यह पेन रात के समय रोशनी भी बिखेरेगा। इस स्कूल में पीईटी नहीं है तो स्कूल में प्रार्थना सभा भी पेन करवाएगा। खाली पीरियड में पेन बच्चों को कहानी सुनाएगा। इस पेन से बच्चे गीत भी सुन सकते हैं। एक तरह से यह खोज शिक्षकों की कमी से निपटने में सहायक होगी। मुख्याध्यापक डॉ. संजीव अत्री ने बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस के मौके पर 31 मई को पेन स्थापित किया जाएगा। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए ऐसा पेन तैयार किया गया है। यह पेन स्कूल में किसी भी शिक्षक के अनुपस्थित होने पर उस शिक्षक का विषय पढ़ा सकता है। गौर हो कि यह वही स्कूल है, जहां मिनी सिनेमाघर तैयार किया गया है। पिछले साल इस स्कूल में बच्चों की संख्या 64 थी। इस बार यहां 115 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल में की जा रही नई खोजों से बच्चों की इस स्कूल में रुचि बढ़ती जा रही है। मुख्याध्यापक ने बताया कि पेन तैयार करने में 45,000 रुपए लागत आई है। इस पेन को बिजली या सौर ऊर्जा से चार्ज किया जा सकेगा। इसे तीन हिस्सों में बनाया है। पहला ढक्कन, दूसरा बीच का हिस्सा और तीसरे हिस्से में आठ इंच लंबी इसकी निब है, जिससे लिखा भी जा सकता है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला बेदाग़ छवि वाले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार पर अब पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले का दाग लगा है। जयराम सरकार की चुनरी में लगे इस दाग के धब्बे गहरे है और निश्चित तौर पर विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष इन्हें हल्का पड़ने नहीं देगा। तंत्र की इस नाकामी का ठीकरा सरकार के सर फूटना लाजमी है। हालांकि सरकार ने हरसंभव एक्शन लिया है लेकिन ये प्रकरण अब सियासी रंग ले चूका है। कोरोना काल में हुए स्वास्थ्य घोटाले के बाद ये पहला ऐसा बड़ा मामला है जिसने सरकार की छवि को तार -तार कर दिया है। स्वास्थ्य घोटाले की आंच मंद करने के लिए तब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल को कुर्सी की बलि देनी पड़ी थी, तो अब सरकार ने मामला सीबीआई को सौप कर अपनी स्वच्छ छवि बचाये रखने का प्रयास किया है। पर असल बात ये है कि इस प्रकरण में सरकार की खासी छीछा लेदर हो चुकी है। व्यवस्था पर सवाल उठ रहे है और सवाल न सिर्फ विरोधी राजनैतिक दल उठा रहे है अपितु आम जनता भी सोशल मीडिया पर जमकर भड़ास निकाल रही है। व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी भी है क्यों कि सरकार और पुलिस प्रशासन की नाक तले पुलिस कांस्टेबल परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया। जिस पुलिस भर्ती परीक्षा के आयोजन पर हिमाचल पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही थी, वही लिखित परीक्षा खाकी पर दाग बन गई है। यहां बड़ा सवाल ये भी है की जब पुलिस महकमा ही अपनी परीक्षा पारदर्शिता के साथ नहीं करवा पा रहा है तो दूसरे विभागों में इसकी उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस मामले के सामने आते ही बेरोज़गारी के मसले पर सरकार को पहले से घेर रहा विपक्ष भी और अधिक सक्रीय हो गया है। ज़ाहिर है चुनाव से पहले यह मुद्दा सत्तारूढ़ भाजपा के लिए गले की फांस बन गया है। यह मामला हजारों परिवारों से जुड़ा है। पुलिस कांस्टेबल की भर्ती 70 हजार से अधिक युवाओं ने दी है। खासकर जिन युवाओं ने अपनी मेहनत से पेपर पास कर मेरिट में जगह बनाई है, उनके सपनों पर पानी फिर गया है। यही वजह है कि कांग्रेस के साथ -साथ आम आदमी पार्टी और माकपा भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रही है। जयराम सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच का दावा ज़रूर कर रही है मगर आलोचनाओं का दौर थम नहीं रहा। हिमाचल में पुलिस भर्ती का लिखित पेपर पहली बार लीक हुआ है। दरअसल पुलिस ने पहली बार पेपर तैयार और प्रिंट करने का सिस्टम बदला था। अब आरोपों के घेरे मेें पुलिस भी है, इसलिए अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। जेओए भर्ती भी सवालों के घेरे में : इस मामले ने सिर्फ सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल ही खड़े नहीं किये बल्कि बीते कुछ सालों में सफल न हो पाई उन भर्ती प्रक्रियाओं की याद भी दिला दी जिनसे प्रदेश के बेरोज़गार युवा अब तक परेशान है। पुलिस भर्ती के आलावा जेओए भर्ती भी सवालों के घेरे में है। अन्य महकमों में भी भर्तियां अभी लंबित चल रही हैं। शिक्षा विभाग में आठ हजार मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती अभी तक पूरी नहीं हुई है। जेबीटी भर्ती भी लटकी हुई है। दिन प्रति दिनप्रदेश में बेरोज़गार युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। बेरोज़गारी एक ऐसा मसला बन चूका जिसका निवारण सरकार के पास नहीं दिखाई देता। इस पर भर्ती परीक्षाओं के पेपर लेक होने से युवाओं में रोष है।
कृषि विभाग ने प्रस्तुत की रिपोर्ट फस्र्ट वर्डिक्ट । शिमला आज के समय में किसानी एक चुनौती सी बनती जा रही है। किसानों की फसल के कई दुश्मन बने हुए हैं। आवारा पशुओं और बंदरों ने तो नाक में दम कर रखा है। इसके अतिरिक्त हिमाचल की ज्यादातर कृषि पर निर्भर है। कहीं-कहीं सिंचाई के साधन तो उपलब्ध हैं मगर हर जगह ऐसा नहीं है। यही कारण है कि बरसात हो जाए तो फसल अच्छी होती है और न हो तो किसानों को भारी नुक्सान होता है। इस बार भी किसानों को सूखे की मार झेलनी पड़ी है। बताया जा रहा है कि इस बार सूखे से किसानों को 200 करोड़ रुपए से अधिक का नुक्सान हुआ है। कृषि विभाग ने फील्ड से आई नुक्सान की रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। जिला हमीरपुर, शिमला और सिरमौर के किसानों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। दूसरी ओर प्रदेश में सूखे और ओलावृष्टि से बागवानी फसलों खासकर सेब को हुई 34 करोड़ की क्षति हुई है। सरकार को भेजी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 4,13,057.60 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसमें 86,556.60 भूमि में कृषि फसलों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा 53,107.56 हेक्टेयर भूमि में 33 फीसदी से कम और 33,449.04 हेक्टेयर भूमि में 33 फीसदी से अधिक फसलों को नुकसान हुआ है। कृषि फसलों को कुल 207.14 करोड़ का नुकसान हुआ है। राज्य कृषि निदेशक नरेश कुमार ने कहा कि फसलों की 207 करोड़ के कृषि फसलों के नुकसान की रिपोर्ट फील्ड से मिल चुकी है। इसे सरकार को भेजा गया है।
फस्र्ट वर्डिक्ट । शिमला लोगों को घरद्वार के समीप बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए सर्वोच्च प्राथमितकता के साथ कार्य करत हुए प्रदेश सरकार ने जहां ग्रामीण क्षेत्रों में नए स्वास्थ्य संस्थान खोलने को अधिमान दिया है, वहीं स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए भी विशेषतौर पर प्रयास किए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों और पैरा-मेडिकल स्टाफ के खाली पड़े पदों को भरने के लिए नई नियुक्तियां की गई हैं। इन संस्थानों में बेहतर जांच सुविधाएं प्रदान करने के लिए आधुनिक मशीनों और उपकरणों की व्यवस्था की गई है। दूर-दराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं घरद्वार पर उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री मोबाइल क्लीनिक योजना आरम्भ करने का निर्णय लिया गया है। इस वर्ष प्रत्येक स्वास्थ्य खंड में मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विकसित किया जाएगा। मरीजों की सुविधा के लिए 50 नई एंबुलेंस खरीदने का भी निर्णय लिया गया है। आईजीएमसी, शिमला में 103.18 करोड़ रुपए लागत से निर्मित भवन का लोकार्पण किया गया है। इस भवन के निर्माण कार्य पर 73 करोड़ रुपए की राशि वर्तमान प्रदेश सरकार के कार्यकाल में उपलब्ध करवाई गई। इस अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जिसके आरम्भ होने से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को उपचार की बेहतर सुविधा प्रदेश के अंर ही उपलब्ध होगी।कोविड महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूती प्रदान की है, ताकि भविष्य में किसी महामारी की स्थिति का सफलतापूर्वक सामना किया जा सके। आज प्रदेश में 48 ऑक्सीजन संयंत्रों, 1000 से अधिक वेंटिलेटर्स की सुविधा उपलब्ध है। उप-स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक 5000 से अधिक ऑक्सीजन कंसट्रेटर उपलब्ध हैं तथा 10 हजार से अधिक ऑक्सीजनयुक्त बिस्तरों की क्षमता सृजित की गई है। प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने के लिए 33 नए उप-स्वास्थ्य केंद्र, 46 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आठ स्वास्थ्य उप-केंद्र खोले हैं। वहीं, 31 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को नागरिक अस्पताल के रूप में स्तरोन्नत किया गया है। इसके अलावा, विभिन्न अस्पतालों में बिसतरों की क्षमता बढ़ाई गई है और कई स्थानों पर नए शिक्षण संस्थान खोलने की मंजूरी प्रदान की गई है।वर्तमान राज्य सरकार ने 1654 चिकित्सा अधिकारियों, 975 स्टाफ नर्सों, 76 जूनियर ऑफिस असिस्टेंट, 199 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, 194 प्रयोगशाला सहायकों, 35 ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट, 462 फार्मासिस्ट, 111 रेडियोग्राफर, 11 ऑपथेल्मिक अधिकारियों के पदों को भरा है। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष चिकित्सा अधिकारियों के 500 नए पद भरने का फैसला लिया है। इसके अलावा, आयुष विभाग में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के 200 पद भरे जाएंगे जिनमें से 100 पद सीधी भर्ती और शेष बैचवार आधार पर भरे जाएंगे। आयुष विभाग में अनुबंध आधार पर आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के 100 पद भरने का भी निर्णय लिया गया है। इनमें से 52 पद सीधी भर्ती और 48 बैचवार भरे जाएंगे। पिछले चार वर्षों में 10 आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र खोले गए और तीन आयुर्वेद अस्पतालों को स्तरोन्नत किया गया है। कांगड़ा जिले के पपरोला में 8.37 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सैंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर जेरीएट्रिक हैल्थ का शुभारम्भ किया जा चुका है। केंद्र सरकार के सहयोग से बिलासुपर में एम्स और ऊना में पीजीआई के सेटेलाइट सेंटर और तीन मेडिकल कॉलेजों की सौगात मिली है। भारत सरकार ने प्रदेश के लिए एक मेडिकल डिवाइस पार्क स्वीकृत किया है, जिसका कार्य इस वर्ष नालागढ़ में आरंभ हो जाएगा। इस पार्क से प्रदेश में 5 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा और 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।प्रदेश सरकार राज्य के मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक तकनीकों की सुविधा प्रदान करने पर विशेष ध्यान दे रही है। डा. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज, नाहन में वायरोलॉजी लैब, ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र और एमजीएमएस संयंत्र को कार्यशील बनाया गया है। आईजीएमसी, शिमला में किडनी टांसप्लांट की सुविधा आरंभ की गई है।
फस्र्ट वर्डिक्ट । शिमला हालांकि प्रदेश में बेरोजगारी का ग्राफ अधिक है, मगर सरकार भी इसके लिए सतत प्रयासरत है। इसके लिए सरकार ने कई प्रयास किए हैं। इनमें मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना, रोजगार मेले और समय-समय सरकारी नौकरियों का भी प्रावधान किया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा बेरोजगारी पर काबू पाया जा सके और बेरोजगार अपने रोजगार के साधन जुटा सकें। हिमाचल प्रदेश में 476.35 करोड़ के निवेश को मंजूरी मिली है। इससे 1379 लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग की अध्यक्षता में आयोजित सिंगल विंडो बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह निवेश 38 इकाइयों के माध्यम से आएगा। इनमें 25 औद्योगिक इकाइयां हैं। इसके अलावा 11 पर्यटन इकाइयों एवं 2 पावर प्रोजेक्टों में भी निवेश होगा। बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि केंद्रीय पूंजी निवेश प्रोत्साहन के तहत निवेश करने वालों को सबसिडी मिलेगी। सबसिडी के लिए 478 इकाइयों को प्री-रजिस्टर किया गया है। अब तक 168.65 करोड़ रुपए की सबसिडी स्वीकृत हो गई है, जिसमें से केंद्र से 69.28 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। सबसिडी के रूप में 56 करोड़ रुपए प्लांट एवं मशीनरी के लिए मिलेंगे। बैठक में केंद्रीय पूंजी निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत 118 दावों का निपटारा किया गया। हिमाचल प्रदेश में अब खनन से संबंधित स्वीकृति ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। अब तक उद्योग विभाग का खनन विंग ऑनलाइन नहीं जुड़ा था। इसको लेकर 1 माह के भीतर ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। इसके बाद वर्ष के अंत तक खनन विंग को ऑनलाइन किया जाएगा। इससे खनन लीज लेने, पुन: आबंटित करने, क्रशर के लिए आवेदन करने, नालों, खड्डों, व नदियों से खनिज रेत, पत्थर व रोड़ी निकालने संबंधी आवेदन भी ऑनलाइन हो सकेंगे। खनन के लिए ऑनलाइन स्वीकृतियां मिलने से अब जहां सरकारी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, वहीं काम करवाने के लिए रिश्वत देने के मामलों पर भी विराम लग सकेगा।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला केंद्र की मोदी सरकार ने अपने आठ साल की वर्षगांठ मनाने के लिए शिमला को चुना है। 31 मई को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिमला आ रहे है। मोदी रिज मैदान से एक जनसभा को संबोधित करेंगे। सियासी चश्मे से देखे तो जाहिर है चुनावी वर्ष है इसीलिए इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम की मेजबानी का मौका शिमला को मिला है। पर कारण जो भी हो, हिमाचल प्रदेश के लिए ये एक उपलब्धि जरूर है। जाहिर है मोदी सरकार शिमला में आठ साल मनाएगी तो देश भर में इसकी चर्चा भी खूब होगी। मेजबानी हिमाचल प्रदेश कर रहा है तो हिमाचल का विशेष जिक्र भी होगा और सम्भवतः प्रदेश को कोई विशेष सौगात भी मिल जाएं। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी को बुलाने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने खास प्रयास किये है और उनके निमंत्रण को स्वीकार कर पीएम मोदी ने भी जयराम को आशीर्वाद दे दिया है। हिमाचल प्रदेश में मिशन रिपीट को सफल करने के लिए 'मोदी मैजिक' भाजपा का सहारा है। दरअसल संगठनात्मक बदलाव के बाद प्रदेश कांग्रेस भी प्रोएक्टिव नज़र आ रही है और कांग्रेस में ज़मीनी स्तर पर बदलाव की भी उम्मीद है। कांग्रेस लगातार प्रदेश सरकार को महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर घेर रही है और अब पुलिस कांस्टेबल पेपर लीक मामले के बाद ये हमले और भी तेज़ होते दिखाई दे रहे है। वहीं इस बार आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। भले ही आम आदमी पार्टी अब तक प्रदेश में संगठनात्मक तौर पर कुछ बड़ा न कर पाई हो मगर पार्टी को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसीलिए पार्टी विद डिसिप्लिन भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। ऐसे में पीएम मोदी का चेहरा आगे रखकर ही पार्टी मैदान में उतरने जा रही है। भाजपा ने साल 2017 का चुनाव प्रो प्रेम कुमार धूमल के चेहरे पर लड़ा था। तब अंतिम समय तक पार्टी ने चेहरा घोषित नहीं किया था। तब भाजपा तो चुनाव जीत गई मगर खुद धूमल सफल नहीं हो पाए थे। पर इस बार अभी से ये लगभग स्पष्ट किया जा चुका है कि चुनाव में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ही पार्टी को लीड करेंगे। हालांकि उपचुनाव में भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ही लीड कर रहे थे, मगर परिणाम अनुकूल नहीं रहे थे। बावजूद इसके पार्टी जयराम ठाकुर के चेहरे पर भरोसा जताती दिख रही है। उपचुनाव से सबक लेते हुए पार्टी कोई रिस्क नहीं ले रही है, इसीलिए अभी से भाजपा पूरी तरह चुनावी मोड में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में भाजपा ने 50 हजार कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस आयोजन के जरिये प्रदेश में भाजपा माहौल बदलने की तैयारी में है। खुद मुख्यमंत्री की देखरेख में आयोजन की रूपरेखा को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। क्या विधानसभा चुनाव में चलेगा मोदी मैजिक : मोदी मैजिक की बात करें तो ये ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है कि लोकसभा चुनाव में तो हिमाचल के लोग पीएम मोदी के नाम पर वोट करते है, लेकिन विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं होता। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की चुनावी रैलियों के बावजूद पार्टी ऊना, फतेहपुर, कुल्लू और पालमपुर जैसे विधानसभा क्षेत्रों में अपना झंडा नहीं लहरा पाई थी।
- कांग्रेसी नेता भाजपा में जाकर बन रहे मुख्यमंत्री - परिवर्तन की जगह चिंतन मंथन के दौर में ही अटकी है पार्टी असम के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री मानिक साहा, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, नागालैंड में नेफियू रियो, अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, ये तमाम वो नेता है जो कांग्रेस से भाजपा में गए और मुख्यमंत्री बन गए। सेवन सिस्टर कहे जाने वाले नार्थ ईस्ट के साथ राज्यों में से इस वक्त पांच में भाजपा की सरकार है और इन पांचो राज्यों में मुख्यमंत्री वो नेता है जो कांग्रेस से भाजपा में गए। कांग्रेस आलाकमान की इससे बड़ी नाकामी भला और क्या हो सकती है। हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्य अब तक अपवाद जरूर है लेकिन बाकी देश में हाल बेहाल है। बीते कुछ समय में कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके है, तो कई हाशिए पर है और कभी भी इनकी रवानगी का समाचार मिल सकता है। बावजूद इसके नेतृत्व परिवर्तन की जगह पार्टी में अब तक चिंतन - मंथन का दौर ही चला हुआ है। 'ये खेल है कब से जारी, बिछड़े सभी बारी बारी'. कैफ़ी आजमी के लिखे गीत के ये अल्फ़ाज़ आज कांग्रेस की स्थिति बयां करने के लिए बिलकुल उपयुक्त है। जैसा कैफ़ी साहब ने लिखा था, वैसा ही कुछ कांग्रेस के साथ घट रहा है। एक - एक कर नेता -कार्यकर्त्ता पार्टी का साथ छोड़ते जा रहे है। हालहीं में उदयपुर में तीन दिन तक नव संकल्प शिविर में कांग्रेस का चिंतन -मंथन हुआ और इसके तीसरे ही दिन गुजरात से नतीजों का पहला रुझान आ गया। हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। साल के अंत में गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने है, इससे ठीक पहले हार्दिक का पार्टी से रुक्सत होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। ये अचानक नहीं हुआ, कांग्रेस क्या पुरे देश को पता था कि पार्टी आलाकमान की लचर कार्यशैली से उकता चुके हार्दिक ऐसा कदम उठा सकते है। पर कांग्रेस को मानो इस बात का ही इन्तजार था, शायद हार्दिक पार्टी के लिए गैर जरूरी लग रहे होंगे। बहरहाल कारण जो भी हो हार्दिक का जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। इससे पहले कांग्रेस के नव संकल्प शिविर के दौरान ही पंजाब से पार्टी के दमदार नेता सुनील जाखड़ ने गुड बाय कह दिया था। उनके जाने के कुछ दिन पहले ही पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार ने पार्टी को अलविदा कहा था। वहीँ कैप्टेन अमरिंद्र सिंह को हटाकर और नवजोत सिंह सिद्धू को संगठन की कमान थमाकर पंजाब में हार की पटकथा तो पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले ही लिख चुकी थी। ये बेफिजूल के परिवर्तन नहीं किये गए होते तो संभवतः पार्टी पंजाब में बेहतर करती। कई दिग्गज भाजपा में हुए है शामिल : बीते एक दशक पर नज़र डाले तो कांग्रेस के कई दिग्गज भाजपा में शामिल हुए है। मध्यप्रदेश में युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधियां तो अपने साथ -साथ कांग्रेस की सरकार भी ले गए थे। यूपी में एक दिन के मुख्यमंत्री रहे जगदंबिका पाल 2014 में बीजेपी में शामिल हुए थे। वह लगातार दो बार से बीजेपी के टिकट पर डुमरियागंज से सांसद हैं। इसी तरह कांग्रेस की पूर्व दिग्गज नेता रीता बहुगुणा जोशी 2016 में बीजेपी में शामिल हुई थीं। उन्होंने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ा था। पार्टी का ब्राह्मण चेहरा जितेन प्रसाद भी पिछले साल भाजपा में शामिल हो गए। हरियाणा में चौधरी बीरेंद्र सिंह 2014 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। पीएम नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हें इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह भी 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसी तरह महाराष्ट्र में कांग्रेस के दिग्गज नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल 2019 में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे भी अब भाजपा में शामिल हो चुके है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा भी अब भाजपा में है। ऐसी सैकड़ों उदहारण है जहाँ कांग्रेस के अच्छे जनाधार वाले नेताओं ने भाजपा में शामिल होकर पार्टी का जनाधार बढ़ाया है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. कांगड़ा 'गुरु गुड़ रहे चेला हो गए शक्कर' , 2017 के विधानसभा चुनाव में नगरोटा बगवां निर्वाचन क्षेत्र में हाल ऐसा ही था। तब कभी स्व. जीएस बाली के समर्थक रहे अरुण कुमार 'कूका' ने चुनावी मैदान में बाली को पटकनी देकर अपना लोहा मनवाया था। अब खुद बाली दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनके पुत्र रघुवीर बाली कांग्रेस की अगुवाई करते दिख रहे है। वहीँ अरुण कुमार 'कूका' भाजपा का प्राइम फेस बने हुए है। ऐसे में आगामी चुनाव में संभवतः जूनियर बाली और कूका के बीच टक्कर देखने को मिले। नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र का विकास प्रदेश भर में चर्चा का विषय रहा है। टांडा मेडिकल कॉलेज, राजीव गांधी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, परिवहन निगम का डिपो व आरएम कार्यालय, सिविल अस्पताल और ऐसे अन्य कई बड़े काम स्वर्गीय जीएस बाली की फेहरिस्त में शामिल हैं जिनके माध्यम से क्षेत्र की जनता को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं मिली हो। अब उनके पुत्र रघुवीर अपने पिता द्वारा कराए गए कार्यों के सहारे उनकी सियासी विरासत सँभालते दिख रहे है। उधर भाजपा की बात करे तो अरुण कुमार 'कूका' ही भाजपा का प्राइम फेस है। एक समय कूका भी जीएस बाली के समर्थक थे। 2012 में कूका ने जीएस बाली के खिलाफ निर्दलीय मैदान में थे तब जीएस बाली ने कूका को 2743 वोटों से हराया था। फिर 2017 में कूका ने बाजी पलटी और भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ बाली को पटकनी दी। गुटबाजी बड़ी चुनौती : स्व. जीएस बाली और स्व वीरभद्र सिंह के बीच हमेशा खट्टे मीठे संबंध रहे है। 2017 में कांग्रेस की हार का बड़ा कारण गुटबाजी को भी माना जाता है। इस बार कांग्रेस रघुवीर को मैदान में उतारती है तो उनके लिए भी गुटबाज़ी साधना बड़ी चुनौती होगा। बाली का रहा है दबदबा : जीएस बाली1998 में पहली बार नगरोटा बगवां के विधायक चुने गए थे। उसके बाद 2003 व 2007 में उन्होंने चुनाव जीता। 2003 से 2007 के बीच वे परिवहन मंत्री रहे। 2012 में चौथी बार नगरोटा से उन्होंने चुनाव जीता और एक बार फिर परिवहन मंत्री बने। वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी माने जाते थे।
अरविन्द शर्मा। फर्स्ट वर्डिक्ट आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र बढ़ते सियासी तपन की जद में जिला चंबा का भटियात निर्वाचन क्षेत्र भी आ चुका है। बीते कुछ वक्त में दूसरी बार विधायक बन विधानसभा पहुँचे विक्रम जरियाल ने ख़ुद अपनी लोकप्रियता को खासा नुकसान पहुँचाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह कई मौक़ों पर दिखने वाले विधायक के कड़े तेवर हैं, जो उनकी अपनी शालीन एवं सौम्य छवि के विपरीत हैं। साथ ही प्रदेश की अपनी ही सरकार होने के बावजूद भटियात क्षेत्र के लिए कोई बड़ी उपलब्धि लाना भी उनके लिए दूर की कौड़ी साबित हुआ है। पिछले साढ़े चार वर्ष में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी भटियात में एक मर्तबा पहुंचे हैं, जबकि बाकि समूचे चंबा में अक्सर मुख्यमंत्री के दौरे होते रहते हैं। कांगड़ा और चंबा की सीमा से लगते इस विधानसभा क्षेत्र के बाबत अगर बुनियादी सुविधाओं की बात की जाए तो अच्छे स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए यहाँ के बाशिंदों को टाँडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा और धर्मशाला का रुख करना पड़ता है। अगर इस क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों, आयुर्वेदिक डिस्पेंसरियो, प्लस टू किए गए स्कूलों की उद्घाटन पट्टिकाओं पर नज़र डालें तो ज्यादातर पर कुलदीप पठानिया का नाम दर्ज है। हालांकि पिछले दिनों कैबिनेट में भटियात को लेकर चवाड़ी में पीडब्ल्यूडी डिवीजन खोले जाने की घोषणा जरूर जरियाल के लिए हर्ष का विषय हो सकता है, पर अभी तक यह घोषणा ही है। मौजूदा संभावित प्रत्याशियों के परिपेक्ष में पूर्व के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भटियात विधानसभा में राजपूत व अनुसूचित जाति के मतदाताओं की बहुलता है। अगर 2012 के विधानसभा को देखें तो जरियाल यह चुनाव भारी मतों से जितने में सफल रहे थे, जबकि चार बार के विधायक रहे पठानिया आसानी से हार गए थे। इसका कारण था यहाँ से निर्दलीय उम्मीदवार रहे भूपिंदर सिंह चौहान जिन्होंने दस हज़ार के आस-पास मत प्राप्त किये थे। साफ़ तौर पर मतों का विभाजन यहाँ दिखता है। 2017 में फिर जरियाल को यहाँ के लोगों ने विधानसभा पहुँचाया। तब विक्रम सिंह जरियाल ने कुलदीप सिंह पठानिया को 6885 वोटों के मार्जिन से हराया था। इस बार यूँ तो दोनों ही मुख्य राजनीतिक दलों से टिकट के कई दावेदार है पर संभवतः जरियाल और पठानिया फिर आमने -सामने होंगे। आज के इस सूचना -क्रांति वाले आधुनिक दौर में भी कोई चाहे लाख ख़ुद को समझदार मान कर चलें लेकिन सियासी शतरंज की बिसात पुराने तरीके से ही बिछाई जाती हैं। भटियात में भी ये ही कहानी है। यहाँ भी जातीय ध्रुवीकरण और मत विभाजन फैक्टर पर आधारित वोट बैंक की राजनीति को नज़र अन्दाज़ नहीं किया जा सकता। इस सीट पर गुज्जर, गद्दी और पिछड़े वर्ग के मतदाता जिसके पक्ष में एकजुट होकर वोट करेंगे, उसकी राह आसान होगी। बाकि पिछले दो -एक महीनों से प्रदेश में सक्रिय हुई आम आदमी पार्टी का ऊँट इस विधानसभा क्षेत्र में किस करवट बैठता है यह देखना भी दिलचस्प होगा। शांता ने गोद लिया, पर हालात नहीं बदले ... दत्तक पुत्र नाम से जाने वाले लाहड़ू के साथ लगते गांव परछोड़ को सांसद रहते हुए शांता कुमार ने गोद लिया था, लेकिन शांता भी इस गांव को गोद लेने की घोषणा ही कर पाए थे और कभी इस गाँव में जा नहीं सके। परछोड़ गांव में फिन्ना सिंह नहर का निर्माण पिछले कई वर्षों से चल रहा है और उस नहर के निर्माण कार्य को शुरू करवाने के श्रेय का दावा कांग्रेसी और भाजपाई दोनों करते आए हैं। पर हकीकत ये है कि अब तक कार्य अधर में लटका है। जरियाल का प्रधान से विधायक तक का सफर : विक्रम सिंह जरियाल राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना में रहे। इसके बाद वे टुंडी पंचायत के प्रधान रहे। तदोपरांत दो बार जिला परिषद सदस्य चुने गए, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें ज़िला सचिव बनाया। 2012 के चुनावों में जरियाल पहली बार विधायक चुने गए।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला यूजीसी पे-स्केल जारी न करने के विरोध में अब प्रदेश विश्वविद्यालय का शिक्षक कल्याण संघ भी आंदोलन पर उतर आया है। प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के महासचिव डा. जोगिंद्र सकलानी ने प्रदेश सरकार से यूजीसी के सातवें वेतन आयोग को जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि सात वर्षों के बाद भी इसे लागू न करना शिक्षक समुदाय के साथ धोखा है। इस बारे में प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने कई बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के समक्ष अपनी बात रखी हैं, परंतु हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा। सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को नया वेतनमान लागू कर दिया है केवल विश्वविद्यालय व कालेज प्राध्यापक वर्ग को इस से वंचित रखा गया है, जो इस समुदाय के सरासर अन्याय है। संघ की मांग है कि यदि जल्द से जल्द नए वेतनमान को लागू नहीं किया जाता है तो आने वाले समय में शिक्षक आंदोलन करने पर विवश होंगे और इसकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से सरकार की होगी। डा. जोगिंद्र सकलानी ने कहा है कि जल्दी ही प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ की आम सभा बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ड्राइवर यूनियन ने निगम प्रबंधन के खिलाफ फिर मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि 29 मई तक सरकार व निगम प्रबंधन ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वे 30 मई को बसें नहीं चलाएंगे। यानी हिमाचल प्रदेश में एक दिन के लिए 4000 सरकारी बसों के पहिए थम जाएंगे। शिमला में प्रदर्शन करते हुए एचआरटीसी ड्राइवर यूनियन ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 'काम छोड़ों' आंदोलन का ऐलान किया है। ड्राइवर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने बताया कि 29 मई की रात 12 बजे से 30 मई की रात 12 बजे तक एचआरटीसी का कोई भी चालक बस नहीं चलाएगा। उन्होंने बताया कि यूनियन ने 25 अप्रैल को ही एचआरटीसी प्रबंधन को मांगे पूरी करने के लिए 12 मई तक का अल्टीमेटम दे दिया था, लेकिन एचआरटीसी प्रबंधन ने मांगे मानना तो दूर अब तक वार्ता के लिए भी नहीं बुलाया है। दरससल एचआरटीसी कर्मचारी राज्य सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर छठे वेतनमान के लाभ की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार अपने लगभग सभी कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ दे चुकी है लेकिन एचआरटीसी कर्मचारियों को अब तक इसके लाभ नहीं दिए गए। इसी तरह एचआरटीसी कर्मचारी 36 महीनों के लंबित पड़े ओवर टाइम के भुगतान, डीए का 2006 से लंबित पड़े एरियर के भुगतान और वरिष्ठ चालकों के पद सृजित करने की मांग कर रहे हैं। वरिष्ठ चालकों के पद सृजन की मांग को एचआरटीसी की निदेशक मंडल बैठक में भी पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। जाहिर है कि एचआरटीसी चालकों की हड़ताल से प्रदेशभर में आम आदमी को आवाजाही में कठिनाईयां झेलनी पड़ेगी क्योंकि प्रदेश में आवाजाही का एकमात्र साधन सड़कें ही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इससे लोगों को कठिनाईया झेलनी पड़ेगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला प्रदेश के स्कूलों में प्री-प्राइमरी में भर्ती को लेकर चल रही देरी पर प्रशिक्षत अध्यापिका संघ ने नाराजगी जताई है। लम्बे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रही एन.टी.टी. अध्यापिकाओं ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोप लग रहे है कि नर्सरी टीचर की भर्तियां न करने के लिए सरकार अलग-अलग बहाने ढूंढ रही है। प्री प्राइमरी स्कूलों में भर्ती न होने से ये अध्यापिकाएं काफी परेशान है। हिमाचल में राज्य सरकार ने 4000 से ज्यादा स्कूलों में प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इनमें 700 स्कूल और जोड़े जा रहे हैं। अब तक 55,000 बच्चों का एनरोलमेंट यहां हो चुका है, लेकिन इन्हें संभालने और पढ़ाने के लिए टीचर की भर्ती अब तक नहीं हो पाई है। वर्तमान में सरकार ने जेबीटी को ही ये काम दे रखा है। प्री नर्सरी कक्षाएं अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्सा हैं, इसके बावजूद अब तक शिक्षकों की भर्ती के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है। इसके लिए समग्र शिक्षा अभियान ने बजट भी दे रखा है, लेकिन भर्ती नीति फाइनल नहीं हो पा रही। एन.टी.टी. अध्यापिकाएं इस देरी से काफी परेशान है और सरकार से खफा भी। एन.टी.टी. प्रशिक्षित अध्यापिका महासंघ का कहना है कि पूरे भारत में प्री-प्राइमरी कक्षाएं सरकारी स्कूलों में चलाई जा रही हैं और हिमाचल प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में भी प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की गई हैं, पर हिमाचल में अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही। उनका कहना है कि एनरोलमेंट नंबर की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों की नियुक्ति करने में सरकार रूचि नहीं दिखा रही। महासंघ का कहना है की पूरे प्रदेश में 15000 से ज्यादा नर्सरी ट्रेंड टीचर पिछले 23 वर्षों से रोजगार की राह ताक रहे हैं, परंतु सरकार इनकी कोई सुध नहीं ले रही। एनटीटी प्रशिक्षित महासंघ की महासचिव कल्पना शर्मा का कहना है कि इन महिलाओं ने नर्सरी अध्यापिका का प्रशिक्षण यह सोचकर प्राप्त किया था कि भविष्य में उन्हें रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इनमें से अधिकतर महिला गरीब परिवार से संबंधित है और कुछ महिलाएं विधवा है। सभी महिलाओं ने मिलकर बार-बार हिमाचल सरकार से रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए आग्रह किया हैं, लेकिन प्रदेश सरकार सुध लेने को तैयार नहीं। यहां 1997 के बाद इन नर्सरी ट्रेन्ड टीचर्स की कोई भर्ती आज तक नहीं की गई है। ये है एन.टी.टी. की मुख्य मांगे : - प्री प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं को नियुक्त किया जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं की नियुक्ति आरएंडपी रूल्स बनाकर की जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं की नियुक्ति नियमित आधार पर की जाए। - आयु सीमा में छूट दी जाए। - योग्यता प्लस टू पास हो व नर्सरी का विशेष प्रमाण पत्र रखा जाए। - वार्ड ऑफ़ एक्स सर्विस मैन का कोटा दिया जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं की नियुक्ति बैच वाइज की जाए। - उच्च शिक्षा प्राप्त प्रार्थी को शिक्षा योग्यता के अनुसार प्राथमिकता दी जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिका की नियुक्ति बिना किसी शर्त के की जाए।
अरविन्द शर्मा। फर्स्ट वर्डिक्ट ज्वाली विधानसभा हलके में भाजपा के टिकट के लिए दो सशक्त दावेदार मैदान में है। एक फूल और दो माली वाली ये स्थिति भाजपा की चिंता बढ़ाती दिख रही है। 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में चुनाव न लड़ने वाले संजय गुलेरिया तब से न सिर्फ भाजपा संगठन में बने हुए है, बल्कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने ख़ुद को इस विधानसभा क्षेत्र में और मज़बूत किया है। जबकि अर्जुन ठाकुर विधायक तो है पर अपने कामकाज से कोई विशिष्ट पहचान स्थापित करते नहीं दिखते। मौजूदा दौर में जो राजनीतिक माहौल बनता दिख रहा है और जिस तरह के सियासी एक्सपेरिमेंट सत्ता प्राप्ति के लिए भाजपा द्वारा किए जा रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं कि एंटी इनकम्बेंसी वाले क्षेत्रों में पार्टी चेहरे बदलने से गुरेज न करे। हालांकि ज्वाली में अर्जुन ठाकुर के लिए यह कार्यकाल एक सुनहरा मौका था, लेकिन अर्जुन के तीर इस विधानसभा क्षेत्र में गढ़ी संजय की नज़रों को नहीं भेद पाए है। ज्वाली में भाजपा के दो गुटों का विभाजन इस तरह से किया जा सकता है, एक देहर के इस पार नगरोटा सूरियां -हरसर -घाड़ जरोट वाला इलाका जो कि संजय गुलेरिया का गुट है। इक्का -दुक्का लोगों को छोड़ दें तो ज़्यादातर यहाँ संजय समर्थक हैं। दूसरा देहर के उस पार ज्वाली -गुगलाड़ा वाला इलाका जिसमें ज्यादातर अर्जुन समर्थक हैं। पिछले चुनाव में अर्जुन का साथ देने वाले संजय गुलेरिया से उनकी दूरियों के मुख्य कारणों पर नज़र दौड़ाएँ तो सबसे बड़ी वजह गुलेरिया समर्थकों की उपेक्षा है। गुलेरिया समर्थकों का आरोप है कि अर्जुन ठाकुर पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं को जो कि हरबंस राणा के समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं, उनको पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाते। बुलाना तो दूर की बात अर्जुन उनको प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। उनका ये भी आरोप है कि अर्जुन ने भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं को नज़र अन्दाज़ कर अपने इर्द -गिर्द उन ठेकेदारों की फ़ौज जमा कर रखी है जिन्होंने पिछले साढ़े चार सालों में करोड़ों रुपए कमाए हैं। ये स्थिति निसंदेह भाजपा के लिए बेहतर नहीं हैं। अब बात करते हैं ग्राउंड रियलिटी की। ज्वाली में कई ऐसे मुद्दे है जो अर्जुन के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी का सूत्रधार बन सकते है। मसलन पिछले साढ़े चार साल से नगरोटा सूरियां कालेज में प्रिंसिपल की ख़ाली पड़ी पोस्ट, चार महीने पहले सीएम द्वारा नगरोटा को उप तहसील का दर्जा दिए जाने की घोषणा के बाद वहाँ तहसीलदार को ना ला पाना, पिछले साढ़े चार सालों से नगरोटा सूरियां में बीएमओ की ख़ाली पोस्ट, नगरोटा -देहरा चौक के पास सात वर्ष पूर्व शुरू किए गए टूरिज्म सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने पर भी उद्घाटन नहीं कर पाना, अर्जुन खब्बल में टूरिज्म के तैयार हट्स का उद्घाटन नहीं करवा पाना ( फलस्वरूप उनको वाइल्ड लाइफ़ वालों को देना पड़ा लेकिन फिर भी क्रियान्वित नहीं हो पाए), लम्बे अरसे से गज खड्ड पर प्रस्तावित जरोट -नगरोटा सूरियाँ पुल के लिए शिलान्यास का एक भी पत्थर तक न लगवा पाना इत्यादि। इन मुद्दों को लेकर न केवल विपक्ष हमलावर है बल्कि भाजपा के अंदर से भी आवाज उठ रही है। पिछले लम्बे समय से संजय गुलेरिया की ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में निरंतर सक्रियता उनकी हर हाल में चुनावी मैदान में उतरने की मंशा को स्पष्ट ही नहीं करती बल्कि अर्जुन ठाकुर को भाजपा टिकट पाने की राह को और भी मुश्किल कर सकती है। इस बार ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के परिणाम तो ख़ैर भविष्य के गर्भ में छिपे हैं लेकिन फ़िलवक्त दो -दो प्रत्याशियों के चलते ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की राह जरूर मुश्किल हो सकती है। पहले गुलेर अब ज्वाली, चौधरी चंद्र कुमार का रहा दबदबा : ज्वाली विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया। ये निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। इससे पहले फतेहपुर और ज्वाली दोनों एक हुआ करते थे। फ़तेहपुर को ज्वाली से अलग किया गया और पहले का गुलेर विधानसभा क्षेत्र अब ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। ज्वाली ( पहले गुलेर ) परंपरागत रूप से कांग्रेस के दबदबे वाली सीट रही है। हरबंस राणा ने यहां बीजेपी से तीन बार सफलता हासिल की है। इसके अलावा यहाँ ज़्यादातर चौधरी चंद्र कुमार ही जीतते आए हैं। परिसीमन के बाद पहली बार 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में चौधरी चंद्र कुमार के पुत्र नीरज भारती ने जीत दर्ज की। इससे पहले नीरज भारती 2007 में भी विधायक चुने गए थे। अगर पिछले चुनाव यानी 2017 की बात की जाए तो यहाँ भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। गुलेरिया के साथ आने से चंद्र कुमार का गढ़ भेद पाएं थे अर्जुन : 2017 के हुए चुनाव में भाजपा के अर्जुन ठाकुर ने चंद्र कुमार को 8213 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी। तब अर्जुन ठाकुर को कुल 36,999 मत मिले जबकि चौधरी चंद्र कुमार ने 28,786 वोट हासिल किए थे। 2017 के परिणामों का विश्लेषण करें तो अर्जुन ठाकुर की जीत का मुख्य कारण संजय गुलेरिया का उनके पक्ष में आना था। ज्वाली विधानसभा क्षेत्र तथा भाजपा में अपनी ख़ूब पैठ रखने वाले संजय गुलेरिया गज़ पार यानी नगरोटा सूरियाँ से ताल्लुक रखते हैं। पिछली बार अगर संजय गुलेरिया बतौर आजाद प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में उतरे होते तो भाजपा की इस सीट पर हार तय मानी जा रही थी, लेकिन भाजपा संगठन संजय गुलेरिया को मनाने में कामयाब रहा।
2017 के विधानसभा चुनाव नतीजों में भाजपा का आंकड़ा 44 पहुंच गया था, पर जीते हुए उम्मीदवारों की सूची में खुद तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती का नाम नदारद था। ऊना सदर की जनता ने सत्ती की उम्मीद पर पानी फेर दिया और पांच साल के लिए सियासी जायदाद कांग्रेस के सतपाल रायजादा के नाम कर दी। लगातार तीन चुनाव जीतने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती का चुनाव हार जाना तब बड़ा घटनाक्रम था। दरअसल, भाजपा के सीएम उम्मीदवार प्रो प्रेम कुमार धूमल भी चुनाव हार चुके थे और जाहिर है अगर सत्ती चुनाव जीते होते तो सीएम पद की दौड़ में उनका नाम भी शामिल होता। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उनका दावा निसंदेह मजबूत रहने वाला था, मगर ऐसा हो न सका। अब इस वर्ष के अंत में फिर विधानसभा चुनाव होने है और एक बार फिर भाजपा के सतपाल का मुकाबला कांग्रेस के सतपाल से होना तय माना जा रहा है। यूँ तो दोनों तरफ टिकट के अन्य दावेदार भी है लेकिन फिलवक्त ऐसा कोई नहीं दिखता जो टिकेट की दौड़ में इन दोनों दिग्गजों को पछाड़ सके। ऊना के बढ़ते तापमान के साथ -साथ सियासी ताप भी प्रखर है और दोनों ही मुख्य उम्मीदवार अभी से दमखम सहित मैदान में टिके है। ऊना के सियासी अतीत की बात करें तो ऊना भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। भाजपा के गठन के बाद 1982 में हुए पहले ही विधानसभा चुनाव में ऊना में पार्टी का खाता खुल गया था। 1977 में जनता दाल के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले देशराज 1982 में भाजपा के उम्मीदवार थे और दोबारा जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। 1985 में कांग्रेस के वीरेंद्र गौतम ने ये सीट पार्टी की झोली में डाली लेकिन 1990 फिर एक बार भाजपा के देशराज यहाँ से विधायक बने। इसके बाद 1993 में कांग्रेस के ओपी रतन और 1998 में फिर कांग्रेस के वीरेंदर गौतम ने यहाँ से जीत दर्ज की। पर 2003 में भाजपा ने सतपाल सिंह सत्ती को मैदान में उतारा और सत्ती ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2007 और 2012 में भी सत्ती ही जीते। पर 2017 में जनता का साती से कुछ मोहभंग हुआ और कांग्रेस को जीत मिली। पर हार के बावजूद सत्ती निरंतर सक्रिय है और संभवतः इस बार भी पार्टी प्रत्याशी होंगे। तीसरी बार आमने -सामने हो सकते है सत्ती और रायजादा : ऊना में पिछले दो मुकाबले सतपाल रायजा और सतपाल सत्ती के बीच हुए है। 2012 में सतपाल सत्ती करीब 4700 वोट से जीते तो 2017 में सतपाल रायजादा करीब तीन हज़ार वोट से जीते। रायजादा कांग्रेस के सीएम पड़ा के प्रबल दावेदार सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाते है। बतौर विधायक उनका कामकाज ठीक ठाक है लेकिन सतपाल सिंह सत्ती की जमीनी पकड़ पर भी कोई संशय नहीं है। ये तय है कि इस बार भी यहाँ कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। ऊना में आम आदमी पार्टी पर भी नज़र रहने वाली है। ये क्षेत्र पंजाब से लगता हुआ है जहाँ आप की सरकार है। ऐसे में आप यहाँ कैसा करती है और किसके समीकरण बनाती -बिगाड़ती है , ये देखना भी रोचक होगा ।
कांग्रेस, कहीं नहीं जाऊंगा छोड़ कर - कहा पार्टी में पुराने लोगों को तवज्जो दिए जाने की जरूरत पंकज सिंगटा। धर्मशाला जिला कांगड़ा के ज्वाली विधानसभा क्षेत्र से पूर्व में विधायक रहे और पूर्व में सीपीएस रहे नीरज भारती का विवादों से पुराना नाता रहा है। अपनी बेबाकी के चलते नीरज भारती अक्सर चर्चा में रहते है। नीरज भारती के बोल विपक्ष को तो चुभते ही है, लेकिन कई बार अपनी पार्टी को भी कठघरे में ला खड़ा करते है। पर नीरज भारती ताल ठोक कर कहते है कि कांग्रेस उनके खून में है। इस पर भी कोई सवाल नहीं है कि नीरज भारती के समर्थकों की खासी तादाद है। आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका, पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के साथ उनकी तल्खियां और कांग्रेस की वर्तमान स्थिति जैसे कई विषयों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने नीरज भारती से खास चर्चा की। पेश है इस चर्चा के मुख्य अंश .... सवाल : हो सकता है आप इस सवाल से ऊब गए हो परन्तु हम सर्व प्रथम ये ही जानना चाहते है कि आपके सुधीर शर्मा के साथ क्या मतभेद है ? जवाब : इस सवाल से मैं तो नहीं ऊबा हूँ लेकिन हो सकता है जो लोग मुझे सुनते है, वो इस बात से ऊब गए हो, लेकिन आपने यह सवाल किया है तो मैं जरूर जवाब दूंगा। ऐसी कोई गंभीर घटना नहीं थी, लेकिन छोटा मोटा मन मुटाव है और वह आगे भी रहेगा, क्योंकि मुझसे धोखेबाज़ी बर्दाश्त नहीं होती है। मैं यारी दोस्ती में जान देने और लेने के लिए भी तैयार हूँ। ऐसी ही धोखेबाज़ी धर्मशाला के पूर्व विधायक सुधीर शर्मा ने भी की थी। मैं फेसबुक पर बहुत सारी ऐसी चीजें लिखता रहता हूँ जो मुझे पसंद नहीं आती क्योंकि फेसबुक खुद ही पूछता है कि " व्हाट्स ऑन योर माइंड"। तो मैं लिख देता हूँ। उस समय जब धर्मशाला में यह घटना हुई थी उसका कारण यह था कि मैंने सुधीर के लिए कुछ लिखा था, लेकिन उनके जो समर्थक थे उन्हें वह बात पसंद नहीं आई। इस वजह से उनके साथ थोड़ा मन मुटाव हो गया था। उन लोगों से मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं है, सुधीर शर्मा से है और वह आगे भी जारी रहेगी। सवाल : आपने कहा कि सुधीर शर्मा ने धोखेबाज़ी की है, धर्मशाला में जो भी घटना हुई वह सबके सामने है। उस घटना से आपके निजी मतभेद सबके सामने आए। कांग्रेस में एक डिसीप्लेनेरी कमेटी बनाई गयी है, क्या इस घटना के बारे में वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई? जवाब : इस घटना में पार्टी के खिलाफ कोई भी बात नहीं हुई है। यह मेरा और सुधीर का निजी मामला है, हालाँकि वह कुछ नहीं बोलता क्योंकि उसे मंद मंद मुस्कुराने की आदत है। वह दूसरों के कन्धों पर बन्दुक रख कर चलाने वाला इंसान है, लेकिन मैं खुद सामने खड़ा होता हूँ। मेरे साथ कोई गलत करेगा तो मैं उससे खुद निपटना जानता हूँ। पार्टी में डिसीप्लेनेरी कमेटी है लेकिन वह तभी बोलती है, यदि हम पार्टी के खिलाफ कुछ बोलेंगे या पार्टी के खिलाफ कुछ गलत करें। सुधीर के साथ मेरी जो निजी रंजिश है वह तो रहेगी ही, फिर चाहे पार्टी मुझे स्वीकार करे या न करे। सवाल : आगामी चुनावों की बात करे तो यह बातें निकल कर आ रही है कि आपके पिता चौधरी चंद्र कुमार ज्वाली से चुनाव लड़ने वाले है, आप नहीं। यदि आपके पिता चुनाव लड़ते है तो आपने अपने लिए किस तरह की भूमिका तय की है? जवाब : ज्वाली, चौधरी चंद्र कुमार की कर्म भूमि रही है। पिछले दो चुनावों से ही हमें ज्वाली नाम सुनने को मिल रहा है, उससे पहले इस विधानसभा क्षेत्र का नाम गुलेर हुआ करता था। चौधरी चंद्र कुमार ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत इसी क्षेत्र से की है। हालांकि मैंने वहां से 3 चुनाव लड़े है। जब चौधरी चंद्र कुमार जी ने शांता कुमार को हराकर लोकसभा चुनाव जीता, उस समय 2004 में उपचुनाव हुआ। मैंने वह चुनाव लड़ा था लेकिन उस समय मैं जीत नहीं पाया था। इसके बाद 2007 में पार्टी ने मुझ पर विश्वास जताया और मुझे फिर से टिकट दिया और मैं वहां से चुनाव जीत गया। 2012 में एक बार फिर मुझे चुनाव लड़ने का मौका मिला और स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की सरकार बनी और मुझे मुख्य संसदीय सचिव के रूप में कार्य करने का मौका मिला और मुझे शिक्षा विभाग में जिम्मेवारी सौंपी गयी थी। मैंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए कई कार्य किये थे। अपने क्षेत्र के स्कूलों के विकास के लिए मैंने कई कार्य किये थे। जहाँ तक बात है 2017 के विधानसभा चुनावों की, तो मेरी ख्वाईश थी की मेरे पिता यहाँ से चुनाव लड़े और जीते और उसके बाद रिटायरमेंट ले ले, लेकिन 2017 का चुनाव हम नहीं जीत पाए। ज्वाली मेरे पिता की कर्मभूमि है और मैं चाहता हूँ कि वह यहाँ से विधायक बने और उसके बाद वह रिटायरमेंट ले। सवाल : हाल ही में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ है। नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए है और चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए है। ऐसे में यदि इस बार कांग्रेस की सरकार बन कर आती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा। इस बारे में आप अपनी निजी राय क्या रखते है ? जवाब : मुख्यमंत्री बनने के लिए सबसे पहले तो अपनी अपनी सीटें जितनी पड़ेगी और सरकार बनानी पड़ेगी। अगर आप अपनी सीटें जीत भी जाते हैं और दूसरों को हराने की कोशिश करते हैं और सरकार नहीं बना पाते हैं तो मुख्यमंत्री बनने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के जाने के बाद कांग्रेस पार्टी में एक बड़ा रिक्त स्थान आ गया है और उनके जैसा नेता हिमाचल को मिलना बहुत ही मुश्किल है। सभी लोग कोशिश कर रहे है कि वह मुख्यमंत्री बने और सरकार बनाएं, लेकिन सबसे पहली बात यह है कि यदि जीतेंगे तभी सरकार बना पाएंगे। सबसे पहले अपनी सीटें जितनी होगी और उसके साथ साथ दूसरों की सीटें जितवानी होगी, तभी सरकार बनाएंगे। फिलहाल नाम तो मैं नहीं ले सकता क्योंकि जितने भी लोग इस दौड़ में है, सभी माननीय सम्मानीय है और सभी लोग योग्य भी है, लेकिन इसके बारे में आने वाला वक्त ही फैसला करेगा। सवाल : कांग्रेस को एक छोटे से राज्य में 4 कार्यकारी अध्यक्ष बनाने पड़े है। कांगड़ा जिला से भी पवन काजल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। आपको क्या लगता है कि यह फार्मूला कितना सही साबित हो सकता है ? जवाब : ऐसा फार्मूला तब बनाया जाता है जब कोई भाग रहा हो और उस पर बेड़ियाँ डालनी हो। ऐसी किसी पोस्ट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि आखिर में फैसले तो अध्यक्ष ही करता है। आज कल तो वैसे भी पार्टियों को छोड़ने का रिवाज़ सा ही चल पड़ा है। इतने लोग कपड़े नहीं बदलते है जितनी लोग आज कल पार्टियां बदल रहे है। मैं बस यही कहना चाहूंगा कि जिन्हें भी पार्टी द्वारा कार्यकारी अध्यक्ष या अन्य जिम्मेवारियां दी गयी है, वह इसे अच्छे से निभाएं और अच्छा कार्य करें। मैं बस आलाकमान से एक आग्रह करना चाहूंगा कि पुराने लोगो को नज़रअंदाज़ न किया जाएं और उनके साथ विश्वासघात न किया जाएं। पुराने लोगों ने अपनी पूरी जवानी, अपनी पूरी उम्र पार्टी को बनाने में लगाई है और पार्टी के साथ स्तम्भ की तरह खड़े रहे है। आप पंजाब का ही हाल देख लीजिए, सुनील जाखड़ बीते दिनों पार्टी छोड़ कर चले गए और अब वह भाजपा में शामिल हो गए है। इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी छोड़ गए है और इनके जैसे कई नेता पार्टी को छोड़ कर जा चुके है। मैं बस चाहता हूँ कि पुराने लोगों को नज़रअंदाज़ न किया जाए और उन्हें तवज्जो दी जाए। पुराने लोगों ने ही पार्टी के लिए कार्य किया है और पार्टी के लिए हमेशा आगे खड़े रहे है। सवाल : क्या आप मानते है कि चूक वहां हो रही है जहाँ पुराने लोगों को मौका नहीं दिया जा रहा है ? जवाब : बिल्कुल मैं यह बात मानता हूं क्योंकि पुराने लोग पार्टी के स्तंभ है। पुराने लोग पार्टी को इतना आगे लेकर आए है। हालांकि यह कहना भी गलत नहीं होगा कि उन लोगों को भी पार्टी की वजह से ही सम्मान मिला है, लेकिन पार्टी भी उन्हीं लोगों की वजह से मजबूत हुई है। मैं कुछ दिन पहले सुन रहा था, राहुल गांधी बोल रहे थे कि हम अपनी विचारधारा की लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन विचारधारा की लड़ाई तो आप तब लड़ेंगे जब आपके पास अपनी विचारधारा रहेगी। कांग्रेस पार्टी की विचारधारा भाजपा, जनसंघ और आरएसएस से बिल्कुल अलग है। वह लोग कट्टरपंथी है लेकिन कांग्रेस सब को एक साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। लेकिन भाजपा, आरएसएस और जनसंघ के कट्टरपंथी लोग पार्टी में आएंगे तो विचारधारा को कैसे बचाएंगे। पार्टी में पुराने लोगों को पूछे बिना पार्टी के अंदर फैसले लिए जाएंगे, और ऐसे लोगों की बातों पर फैसले लिए जाएंगे जो आज यहाँ है और कल वहां है तो विचारधारा कैसे बचेगी। सवाल : आरोप लगाने के बावजूद भी आप कांग्रेस पार्टी में टिके है, ऐसा क्या लगाव है पार्टी के साथ ? जवाब : मेरे तो खून में कांग्रेस पार्टी है। मेरे पिताजी कांग्रेस विचारधारा, गांधीवादी विचारधारा के आदमी है। उस समय इस विधानसभा क्षेत्र का नाम गुलेर हुआ करता था और उस वक्त दूर-दूर के इलाकों के विधायक बनते थे। भाजपा के हो या कांग्रेस के हो ज्वाली से कोई भी विधायक नहीं बनता था। मेरे पिता सरकारी नौकरी में थे और हमारे इलाके की नज़रअंदाजगी को लेकर उन्होंने सरकारी नौकरी का त्याग कर दिया। वह कांग्रेस विचारधारा के थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 1977 में पहला चुनाव बतौर आजाद उम्मीदवार लड़ा और वह बहुत ही कम अंतर से चुनाव हार गए। इसके बाद जनता पार्टी के लोगों ने मेरे पिता को पार्टी में शामिल होने और टिकट देने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने जनता दल का टिकट लेने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि मैं एक बार कांग्रेस पार्टी के टिकट के लिए फिर से कोशिश करूंगा यदि मुझे टिकट मिलती है तो मैं चुनाव लडूंगा, और यदि नहीं मिलती है तो मैं चुनाव नहीं लडूंगा। नौकरी से इस्तीफा देने के बाद वे शिमला के मशहूर कॉलेज सेंड बीट्स में बतौर जियोग्राफी के प्रोफेसर के रूप में नौकरी करने लगे। इसके बाद 1982 में उन्हें कांग्रेस का टिकट मिला और उन्होंने चुनाव लड़ा। तब से लेकर मेरे पिता कांग्रेस में है। मेरे खून में कांग्रेस है, हमने कांग्रेस पार्टी ही देखी है। यदि कांग्रेस पार्टी नज़रअंदाज़ करेगी तो, मैं भाजपा में या कहीं और नहीं जा सकता। मैं अपना विरोध दर्ज करता रहूंगा लेकिन कांग्रेस छोड़ किसी और पार्टी में नहीं जाऊंगा। अगर ज्यादा नज़रअंदाज किया जाता है तो पहला चुनाव भी पिता जी ने बतौर आज़ाद उमीदवार लड़ा था और अगला भी ऐसे ही लड़ लेंगे, लेकिन भाजपा या आम आदमी पार्टी में जाने का कोई मतलब नहीं बनता है। आम आदमी पार्टी ने तो वैसे भी ड्रामा बना के रखा है। उनसे दिल्ली अभी संभाली नहीं जा रही है |
मानव भारती विश्वविद्यालय की ओर से बेची गई फर्जी डिग्रियों का जाल देश के कई राज्यों में फैला है। अब तक करीब चालीस हज़ार से अधिक फर्जी डिग्रियां भी बरामद की गई हैं। मानव भारती विश्वविद्यालय वर्ष 2010 से इस फर्जीवाड़े को चला रहा था, पर सवाल ये उठता है की आखिर इतने वर्षों में निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग क्या करता रहा। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है और अब इस जांच की जद में निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के कर्मचारियों और अधिकारीयों का आना भी तय माना जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में देर रात बस और ट्रक में टक्कर हो गई। हादसे में बस ड्राइवर घायल हो गया, जबकि ट्रक ड्राइवर फरार हो गया है। यह हादसा चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर पांवटा साहिब में अग्रसेन चौक पर हुआ। यह हादसा उस वक्त हुआ जब देहरादून से एचआरटीसी की बस चंडीगढ़ की ओर जा रही थी। अचानक पांवटा साहिब के अग्रसेन चौक के समीप दूसरी ओर से आ रहे ट्रक ने बस को टक्कर मार दी। बस ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। ट्रक चालक भाग गया। गनीमत रही कि इस टक्कर में अन्य सवारियों को ज्यादा चोटें नहीं आईं, लेकिन कुछ देर तक सड़क पर जाम लगा रहा। आसपास के लोग इकट्ठा हुए और जाम खुलवाया। घायल बस ड्राइवर को अस्पताल पहुंचाया।
पंजाब में कांग्रेस का हाथ छोड़ने वाले सुनील जाखड़ ने भाजपा का दामन थाम लिया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थामा। बता दें कि सुनील जाखड़ ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए 14 मई को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने सुनील जाखड़ का पार्टी में स्वागत करते हुए उन्हें एक अनुभवी राजनीतिक नेता बताया। इस अवसर पर मौजूद जेपी नड्डा ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि जाखड़ पंजाब में पार्टी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। वहीं, भाजपा में शामिल होने के बाद सुनील जाखड़ ने कहा कि मैं सभी का आभारी हूं। ये आसान काम नहीं होता। मेरी तीन पीढ़ी कांग्रेस में रही है। मैंने राजनीति को निजी स्वार्थ और तोड़ने का काम नहीं किया। पंजाब साधु पीर की धरती है। यहीं से राष्ट्रीयता की शुरुआत होती है। कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं था बल्कि कुछ मुद्दा था। पंजाब में अभी तक कोई बदलाव नहीं आया। मुझे इस बात के लिए कठघड़े में किया गया कि पंजाब को आप किसी भी जाति और धर्म मे नहीं बांट सकते।
जाब कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 34 साल पुराने रोड रेज मामले में सिद्धू को एक साल जेल की सजा दी गई है। कारावास सश्रम होगा। सिद्धू को पंजाब पुलिस हिरासत में लेगी। इससे पहले सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ रोडरेज मामले में दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करने का अनुरोध किया था। सिद्धू ने पुनर्विचार याचिका के जवाब में कहा कि यह घटना 33 साल पहले की है और याचिका विचारणीय नहीं है। सिद्धू ने अपनी स्वच्छ प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले में उनकी सजा में बदलाव नहीं करने का आग्रह भी किया था। वहीं सिद्धू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें फैसला मंजूर है। यह मामला करीब 34 साल पुराना है। जब नवजोत सिद्धू और उनके दोस्त का पटियाला में पार्किंग को लेकर झगड़ा हो गया था। इसमें 65 साल के बुजुर्ग की मौत हो गई थी। सिद्धू को इस मामले में हाईकोर्ट से सजा हुई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या के आरोप को खारिज कर दिया था। इसके बाद 2 साल पहले परिजनों ने रिव्यू पिटीशन दायर की थी। सिद्धू के वकीलों ने इस याचिका का विरोध किया। 27 दिसंबर 1988 को हुआ था बुजुर्ग से झगड़ा सिद्धू के खिलाफ रोडरेज का मामला साल 1988 का है। सिद्धू का पटियाला में पार्किंग को लेकर 65 साल के गुरनाम सिंह नामक बुजुर्ग व्यक्ति से झगड़ा हो गया। आरोप है कि उनके बीच हाथापाई भी हुई। जिसमें सिद्धू ने कथित तौर पर गुरनाम सिंह को मुक्का मार दिया था। बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गई। पुलिस ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह सिद्धू के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया।
पिछले कई दिनों से असम में लगातार भारी बारिश देखी जा रही है, जिसके चलते बुधवार को बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी । इस बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित असम का जिला कछार हुआ है। भारी बारिश के चलते असम में बहने वाली कॉपीली और बोरापानी जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भारी बारिश के चलते कई इलाकों में भूस्खलन हुआ है। न्यू कुंजंग, फियांगपुई, मौलहोई, नामजुरंग, दक्षिण बगेतार, महादेव टीला, कालीबाड़ी, उत्तरी बगेतर, सिय्योन और लोदी पंगमौल गांवों से भूस्खलन की सूचना मिली है। रेलवेलाइन के ब्लॉक होने की खबर भी सामने आई है। बताया जा रहा है की कछार प्रशासन ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए अगले 48 घंटो तक सरकारी और निजी संस्थानों को बंद रखने का फैसला लिया है। असम में हुई इस बाढ़ की स्थिति में 27 जिलों के लाखों लोग प्रभावित हुए है।
नेरचौक अजय सूर्या नगर परिषद नेर चौक में गड़बड़ घोटाला,स्थानीय ठेकेदारों ने लगाया भाई भतीजावाद का आरोप नेर चौक नगर परिषद में रातोरात मनमर्जी से ही सुविधानुसार नियम बदले जा रहे है, जिसमे कुछ स्वयंभू नेता अपने खास लोगों को मनचाहा काम दिलवाने के लिए खूब मशक्कत कर रहे है। आलम ऐसा हो गया है कि अपनी सुविधा अनुसार इन टेंडरों का खेल कभी ऑनलाइन तो कभी ऑफ लाइन चल रहा है।हालात ऐसे हैं कि टेंडर आवेदन करने के अंतिम तारीख को कार्यालय का कोई अधिकारी आवेदन फार्म तक नहीं ले रहे और बेरोजगार ठेकेदारों को एक टेबल से दूसरे टेबल पर घुमाया जा रहा है।कल बुधवार को कुछ 10 कार्यों के आफ लाइन टेंडर फार्म खरीदने का अंतिम दिन था और कुछ स्थानीय ठेकेदार जो अखबार में टेंडर विज्ञापन पढ़कर आये थे, वो सभी दिनभर नेर चौक नगर परिषद कार्यालय में चक्कर लगाते रहे पर मज़ाल हो कि दफ्तर के किसी बाबू ने इनका आवेदन स्वीकार्य किया हो। आइये जानते है कि टेंडरों के गड़बड़ घोटाले का पूरा मामला आखिर है क्या ? गत 31 मार्च के टेंडर विज्ञापन के अनुसार कुल 28 टेंडर जिन सबकी अनुमानित लागत करीब एक करोड़ रुपये है , उनके ऑनलाइन टेंडरों के लिए 25 अप्रेल तक का समय दिया जाता है, परंतु सूत्रों के अनुसार ऑनलाइन टेंडर में भाई भतीजावाद को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता था और पारदर्शी तरीके से कार्य करना ही पड़ता है , तो टेंडर आवेदन करने से एक दिन पहले ही गत 23 अप्रैल को यह सभी टेंडरों को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए जाते हैं।उपरोक्त प्रक्रिया के कुछ दिन बाद कार्यालय और स्वयम्भू नेताओ की मिलीभगत से उपरोक्त 28 टेंडरों से 18 टेंडर ही ऑनलाइन आवेदन के लिए रखे जाते है और बाकी 10 गोल मोल करने के प्रयास शुरू कर दिए जाते है जिनकी अनुमानित लागत करीब 35 लाख रु है ताकि अपने कुछ खास लोगो को लाभ दिया जा सके। जिनके ऑफलाइन टेंडरों को 19 मई तक आवेदन के लिए रखा जाता है। जब कुछ ठेकेदार जिसमे गुलशन ठाकुर, सुनील, भीम।सिंह, वालिया, अभिषेक, आदि ने कल उपरोक्त कार्यो के टेंडर फार्म खरीदने के लिए आवेदन करने के लिए नप कार्यालय जाते है, तो उन्ही स्वंयभू नेताओ के इशारे पर कार्यालय में कोई भी अधिकारी या क्लर्क यह आवेदन लेने के लिए तैयार तक नहीं होता और तकनीकी अधिकारियों का बहाना बनाकर अपनी नौकरी को बचाने की कोशिश करता है।स्थानीय ठेकेदारों ने आरोप लगाए है कि नेर चौक नगर परिषद के कुछ पार्षद अपने परिजनों को काम दिलवाना चाहते है जहाँ से उनको मोटी कमीशन मिलती रहे और सूत्रों की माने तो कुछ काम तो ऐसे है जिनको स्वयम्भू नेतागण पहले से ही पूर्ण करवा चुके है और अब उनके टेंडर की कागज़ी प्रक्रिया काम पूरा होने के बाद में लगाई जा रही है, जो कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा। आम आदमी पार्टी ने नेता एवं पूर्व पार्षद रजनीश सोनी ने भाजपा के नेतृत्व में नेर चौक नप कार्यालय में चल रहे गड़बड़ घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए विजिलेंस में शिकायत दर्ज करवाई है और विजिलेंस अधिकारियों से निवेदन किया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कौन कौन से ऐसे काम है जो पहले से बिना टेंडर प्रक्रिया के पूर्ण किये जा रहे थे तथा ऐसे जुड़े भृष्ट ठेकेदारों को तुरतं प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाए और जो जनप्रतिनिधियों ने यह भ्रस्टाचार फैलाया है उनको उनके पदों से बर्खास्त किया जाए।
केंद्र सरकार के आठ वर्ष के कार्यकाल पुरे होने पर 31 मई को राष्ट्रीय कार्य्रक्रम शिमला में होने जा रहा हैं , जिसके चलते लैपटॉप आवंटन जून के पहले सप्ताह तक स्थगित कर दिया हैं। स्कूल - कॉलेज में पढ़ने वाले मेधावियों को पहली बार आधुनिक तकनीक वाले 41 ,550 रुपए की कीमत वाले लैपटॉप लगभग प्रदेश के 20 हज़ार मेधावियों को दिए जायेगे। प्रदेश सरकार ने डैल कंपनी के लैपटॉप देने का फैसला लिया है। कोरोना के चलते बीते दो वर्षों से सरकार द्वारा मेधावियों को लैपटॉप नहीं दिए गए थे। शैक्षणिक सत्र 2018-19 और 2019-20 के 20 हजार मेधावियों को लैपटॉप दिए जाने हैं। मेरिट सूची में शामिल दसवीं और बारहवीं कक्षा के 18,019 और कॉलेजों के 1,828 मेधावियों को लैपटॉप दिए जाने है।
राज सोनी। फर्स्ट वर्डिक्ट करसोग की जनता के लिए पार्टी का चिन्ह बाद में, अपनी पसंद पहले आती है। बीते 12 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नज़र डाले तो यहाँ तीन बार निर्दलीय उम्मीदवार जीते है। भाजपा के गठन से पहले यहाँ 1977 में जनता पार्टी जीती, तो 1998 में पंडित सुखराम की हिमाचल विकास कांग्रेस को भी करसोग का प्यार मिला। वर्तमान में यहाँ भाजपा का कब्ज़ा है और कांग्रेस भी मैदान में डटी दिख रही है। यक़ीनन यहाँ आगामी चुनाव बेहद रोचक होने वाला है। पहले बात कांग्रेस की करें तो पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अंतर्कलह को साधना है। क्षेत्र में मनसा राम के बेटे महेश राज अभी से टिकट की कतार में है तो दूसरी ओर पूर्व में दो बार विधायक रहे मस्त राम तथा काफी समय से कांग्रेस पार्टी में कार्य कर रहे जगत राम, अधिवक्ता रमेश कुमार, निर्मला चौहान, हिरदाराम तथा उत्तम चंद चौहान भी ग्राउंड में डटे हुए है। अतीत में झांके तो 1993 व 2003 में कांग्रेस ने मस्त राम को मैदान में उतारा था, और दोनों बार मस्त राम ने करसोग सीट कांग्रेस की झोली में डाली। 2017 के चुनाव में मस्त राम पार्टी से टिकट की मांग कर रहे थे लेकिन तब कांग्रेस ने मनसा राम को मैदान में उतारा। टिकट बंटवारे को लेकर मस्त राम ने कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़ा और निर्दलीय मैदान में उतरे। इसका लाभ भाजपा को हुआ और ये सीट भाजपा की झोली में गई। उधर, भाजपा की बात करें तो वर्तमान में हीरा लाल विधायक है। वर्ष 2007 में उन्होंने ही मनसा राम के विजयरथ पर लगाम लगाई थी, लेकिन जनता ने अगले चुनाव में फिर से मनसा राम को कमान सौंप दी। 2017 में भाजपा ने हीरा लाल को दोबारा से मौका दिया था और तब कांग्रेस की बगावत के चलते वे जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। मनसा राम का रहा है दबदबा करसोग की सियासत में मनसा राम का दबदबा रहा है। मनसा राम कुल 9 बार चुनावी संग्राम में उतरे और पांच बार करसोग से विधायक बने जिसमें 4 बार कैबिनेट मंत्री तथा एक बार सीपीएस रहे। पिछले कई चुनावों के नतीजों पर नज़र डाले तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि करसोग की जनता ने पार्टी चिन्ह के बिना भी मनसा राम पर अपना प्यार बरसाया है। 1967 में मनसा राम ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता भी। दूसरी बार 1972 में कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़े और जीते लेकिन 1977 में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। मनसा राम ने 1982 में फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस और 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर मनसा राम इस क्षेत्र से विधायक बने। अब उनके पुत्र भी कांग्रेस से टिकट मांग रहे है। अब आने वाले विधानसभा चुनावों में देखना यह होगा की जनता किसको चुनेगी और किसके भाग्य का सितारा चमकेगा।
अरविंद शर्मा। फर्स्ट वर्डिक्ट शाहपुर विधान सभा क्षेत्र, नाम इतना शाही है कि जुबाँ पर आते ही इसके शाही होने का आभास होता है! सियासत में शाहपुर के हिस्से जो शाही नाम आते हैं वह भी काफ़ी शाही रसूख़ रखते हैं, कांग्रेस से पहले एक नाम ‘चलता’ था मेजर विजय सिंह मनकोटिया तो भाजपा की तरफ़ से सरवीन चौधरी का नाम सामने आता है, मेजर का पॉलिटिकल करेक्टर ऐसा रहा है कि जनता दल के बाद जब उनका नाम बहुजन समाज पार्टी की कसौटी पर कसा था तो जनता को इसमें खोट ही नज़र आया बस कांग्रेस के टिकट की कसौटी पर मेजर खरा सोना साबित हुए थे, कांग्रेस छोड़ने के बाद जब भी मेजर ने कोई पारी खेली तो वह सरवीन की तेज़ गेंदों पर अपनी विकेट को उखड़ते देखने पर मजबूर हो गए, यहाँ इन दोनो के बाद तीसरा नाम आता है कांग्रेस के केवल पठानिया का, मेजर के कांग्रेस से बाहर होने के बाद केवल कांग्रेस के ‘हाथ’ पर भाग्य आज़माते हुए बीते नौ वर्षों से अपनी ही क़िस्मत से लड़ रहे हैं, सियासी तौर पर अगर शाहपुर की कुर्सी के ग्रह-गोचर देखे जाएँ तो यूँ कहना ग़लत ना होगा कि मेजर मनकोटिया -केवल पठानिया दोनो एक दूसरे की सियासी कुंडलियों में साढ़सत्ती लिए बैठे हैं जो कि हर बार पिछले कई वर्षों से सरवीन के लिए शाहपुर के सिहाँसन का योग बनाते आए है। हर बार एक दूसरे के लिए धूमकेतु सिद्ध होते आए मेजर और केवल सरवीन के लिए कुर्सी -सेतु साबित हुए हैं, इस फेर में केवल एक बार अपनी ज़मानत ज़ब्त करवा बैठे तो फिर दोबारा हार के हार पहनने को मजबूर हो गए, अगर सियासतन शाहपुर की फ़िज़ाओं की स्वरलहरियों की बात की जाए तो सरवीन के सुरमई सियासी संगीत की बीण पर कांग्रेस के हालात साँप की तरह नाचते नज़र आए हैं और जिनकी फुँकार ने कांग्रेस को ही फूँका है ! मेजर शांत नहीं हुए और केवल से भिड़ते रहे नतीजा यह हुआ ना मेजर ख़ुद जीत पाए ना केवल को जीतने दिया, एक बार मेजर जब बसपा की टिकेट पर धर्मशाला भी शिफ़्ट हुए तो अपनी जगह अपने अनन्य भक्त ओंकार राणा को केवल के सामने छोड़ गए, मेजर ख़ुद तो धर्मशाला से हार गए मगर शाहपुर में ओंकार राणा दूसरे नम्बर पर रहे! शाहपुर में कांग्रेस मत-भिक्षुओं के रोल में जितनी ख़ाली कटोरा लेकर घूमती है, भाजपा अकेले अपने कटोरे को शाहपुर में भारी रूप से भरने में कामयाब रहती है, अगर सामान्य लहजे में कहें तो शाहपुर में कांग्रेस की साँझी हार में भाजपा अपनी अकेली जीत सुनिशिच्त करती आ रही है जबकि यह भी हक़ीक़त है की इतने बड़े-बड़े नामों के बावजूद शाहपुर का वजूद बहुत छोटा बन के रह जाता है, विकास के नाम पर शाहपुर को वही मिलता आ रहा है जो साथ लगते विधान सभा क्षेत्रों से बचा-खुचा रह जाता है, शाहपुर के रहनुमाओं के बिना किसी संघर्ष के चलते किराए की कोख में पल रहे कुपोषित केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्थाई कैंपस जिसे ना जाने कब कौन छीन ले जाए के अलावा शाहपुर की झोली में कोई सौग़ात नहीं नज़र आती , सड़कों के नाम पर जर्जर रास्तों से रोज़ गुज़रने वाले बोह -दरिणी -कनोल -सल्ली -नोहली -करेरी-घेरा -चमियारा के बाशिंदे अभी तक सही सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं ! ज़्यादा चर्चा में ना जाया जाए तो वर्षों से तीन की तिकड़ी के तिकड़मों में पिसती और मूलभूत सुविधाओं तक से वंचित शाहपुर की जनता इस बार आने वाले चुनावों में क्या हेर-फेर करती है ! ख़ैर ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा ! लेकिन इस बार मेजर और केवल का हाथ बँटाते हुए आम आदमी पार्टी भी कहीं सरवीन के सियासी हालात फिर से बेहतरीन ना कर दे !
फर्स्ट वर्डिक्ट । धर्मशाला भारत सरकार द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत वर्ष 2015 से बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुकन्या समृधि योजना की शुरुआत की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ की गई। इस योजना का मुख्य लक्ष्य बेटियों के अभिवावकों को बेटियों के उज्ज्वल व सुरक्षित भविष्य के लिए उच्चतर ब्याज दर के साथ-साथ एक लोकप्रिय निवेश विकल्प उपलब्ध करवाना है। सुरेन्द्र पाल शर्मा अधीक्षक डाकघर धर्मशाला द्वारा सुकन्या समृधि योजना के बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया गया कि इस योजना के माध्यम से लाभार्थी द्वारा निवेश करके एकमुश्त राशि बेटी की शिक्षा या फिर शादी के लिए प्राप्त की जा सकती है। इस योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए बेटी की 10 वर्ष की आयु होने से पहले अकाउंट खुलवाना होगा। इस अकाउंट में निवेश की न्यूनतम सीमा 250 रुपए है तथा अधिकतम सीमा 1.5 लाख रुपए हैं। यह निवेश बेटी की उच्च शिक्षा या फिर शादी के लिए किया जा सकता है। इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा निवेश पर वर्तमान में 7.6 प्रतिशत की दर से ब्याज प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा इस योजना के अंतर्गत निवेश करने पर टैक्स में छूट भी प्रदान की जाती है। इस योजना को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ स्कीम के अंतर्गत लांच किया गया है। इस योजना के अंतर्गत अकाउंट किसी भी डाकघर की शाखा में खुलवाया जा सकता है। सुकन्या समृद्धि खाते का संचालन बेटी की आयु 21 वर्ष की होने या फिर 18 वर्ष की आयु के बाद शादी होने तक किया जा सकता है। बेटी की उच्च शिक्षा के लिए 18 वर्ष की आयु के बाद 50 प्रतिशत की रकम की निकासी की जा सकती है। इस योजना में डाकघर द्वारा डिजिटल माध्यम से रकम जमा करवाने की भी सुविधा दी जा रही है। सुरेन्द्र पाल शर्मा द्वारा बताया गया कि इस योजना के आरम्भ से अब तक धर्मशाला डाक मण्डल में लगभग 49876 खाते खोले जा चुके हैं। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत एक बेटी के लिए केवल एक ही खाता खुलवाया जा सकता है तथा खाता खुलवा आते समय बेटी का जन्म प्रमाण पत्र पोस्ट ऑफिस में जमा करना होगा। इसी के साथ साथ अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे कि पहचान पत्र तथा पते का प्रमाण भी जमा करना होगा।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला नेपाल में 490 मेगावाट अरुण-4 जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तथा नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की गरिमामयी उपस्थिति में लुंबिनी में हस्ताक्षरित हुआ है। इस ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर नंद लाल शर्मा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन तथा कुलमन घीसिंग, प्रबंध निदेशक, नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर बोलते हुए नंद लाल शर्मा ने कहा कि 490 मेगावाट, अरुण-4 जल विद्युत परियोजना एसजेवीएन और नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) द्वारा संयुक्त उद्यम (जेवी) के रूप में विकसित की जाएगी और इस संयुक्त उद्यम में, एसजेवीएन की बहुमत हिस्सेदारी होगी। अरुण-3 एचईपी के अपस्ट्रीम में इस परियोजना का निर्माण इस संयुक्त उद्यम द्वारा किया जाएगा, जिसके पूरा होने पर प्रति वर्ष लगभग 2100 मिलियन यूनिट ऊर्जा का उत्पादन होगा। नेपाल के संखुवासभा जिला प्रांत-1 में स्थित इस परियोजना की अनुमानित विकास लागत 4900 करोड़ है। नंद लाल शर्मा ने आगे इस बात पर जोर देते हुए कहा कि इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, बिजली क्षेत्र में भारत-नेपाल संयुक्त विजन को प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। उन्हाेंने अवगत कराया कि यह एसजेवीएन द्वारा नेपाल में निर्मित होने वाली तीसरी मेगा परियोजना होगी। इसके अलावा पहले से निर्माणाधीन 900 मेगावाट अरुण-3 और 669 मेगावाट लोअर अरुण की परियोजना सर्वेक्षण और जांच के चरण में है। इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के साथ, एसजेवीएन के पास अब नेपाल में कुल 2059 मेगावाट की तीन परियोजनाएं हैं। शर्मा ने 2030 तक नेपाल में 5000 मेगावाट की परियोजनाओं को लक्षित करने संबंधी एसजेवीएन के अपने संकल्प को दोहराया। एकीकृत नदी बेसिन विकास दृष्टिकोण की मौलिक अवधारणा नंद लाल शर्मा की है, जिसकी वकालत वह लंबे समय से करते आए हैं। नंद लाल शर्मा ने लंबे समय से विभिन्न राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपने इस दृष्टिकोण का पालन करने पर जोर दिया था। परिणामस्वरूप नेपाल में भी जलविद्युत परियोजनाओं के आबंटन के दौरान एक डेवलपर को, एकल नदी बेसिन में आबंटित किया गया। यह दृष्टिकोण जनशक्ति, बुनियादी ढांचे और वित्तीय संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सक्षम बनाता है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इस नवीन अवधारणा को नेपाल सरकार के साथ-साथ भारत में भी हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकारों द्वारा स्वीकार किया गया है। शर्मा ने आगे कहा कि नेपाल में एसजेवीएन द्वारा विकसित की जा रही परियोजनाओं से समग्र विकास होगा और भारत और नेपाल में पारस्परिक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन परियोजना गतिविधियों से संबंधित ढांचागत विकास क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास भी सुनिश्चित होगा। नेपाल में इन तीन जलविद्युत परियोजनाओं के अलावा, एसजेवीएन बिजली की निकासी के लिए 217 किमी 400 केवी के संबद्ध पारेषण प्रणाली का निर्माण भी कर रहा है। नंद लाल शर्मा ने कहा कि लगभग 31500 मेगावाट के कुल पोर्टफोलियो के साथ, एसजेवीएन के पास अब संचालन और विकास के विभिन्न चरणों के तहत 30 गीगावाट से अधिक क्षमता की विद्युत परियोजनाएं हैं। नई परियोजनाओं के क्षेत्र में ये वर्तमान अतिरिक्त एडिशन ही कंपनी को वर्ष 2023 तक 5000 मेगावाट, 2030 तक 25000 मेगावाट और वर्ष 2040 तक 50000 मेगावाट की स्थापित क्षमता को साकार करने की दिशा में ले जा रहा है। नंद लाल शर्मा ने एसजेवीएन पर अपना विश्वास व्यक्त करने और अरुण-4 एचईपी के विकास कर्त्ता पर विचार करने के लिए दोनों राष्ट्रों के प्रधानमंत्रियों, विद्युत मंत्रालय और विदेश मंत्रालय, नेपाल में भारतीय दूतावास के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
सुनैना कश्यप. फर्स्ट वर्डिक्ट रतन पाल, तेजवंत नेगी, बलदेव शर्मा, बलदेव ठाकुर जैसे नेताओं की डगर होगी मुश्किल पार्टी विद डिफरेंस भाजपा मिशन रिपीट के लिए कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। संगठन, संसाधन और संतुलन के साथ -साथ पार्टी ये भी सुनिश्चित करना चाहती है कि उपचुनाव की तर्ज पर विधानसभा चुनाव में कोई रणनीतिक चूक न हो। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में पार्टी कई निर्वाचन क्षेत्रों में चेहरे बदलने वाली है। इसके लिए बाकायदा ग्राउंड फीडबैक लिया जाएगा, जिसका आधार न सिर्फ इंटरनल सर्वे होगा बल्कि बाहरी एजेंसियों से भी सर्वे करवाया जा सकता है। वहीँ लगातार दो या अधिक चुनाव हारने वाले नेताओं के टिकट भी आगामी विधानसभा चुनाव में कटना तय माना जा रहा है। प्रदेश में ऐसे 6 निर्वाचन क्षेत्र है जहाँ पार्टी टिकट पर एक ही उम्मीदवार लगातार दो चुनाव हार चूका है। इनमें अर्की से रतन सिंह पाल, बड़सर से बलदेव शर्मा, हरोली से प्रो राम कुमार, रामपुर से प्रेम सिंह धरैक और किन्नौर से तेजवंत नेगी लगातार दो चुनाव हार चुके है। वहीँ ठियोग से पार्टी सिंबल पर दो चुनाव हारने वाले राकेश वर्मा का स्वर्गवास हो चूका है। अर्की से रत्न सिंह पाल 2017 का विधानसभा चुनाव और 2021 में हुआ उपचुनाव हार चुके है तो अन्य सभी नेता 2012 व 2017 का विधानसभा चुनाव हार चुके है। फतेहपुर निर्वाचन क्षेत्र से बलदेव ठाकुर भी लगातार तीन चुनाव हार चुके है, किन्तु 2017 में वे बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव हारे थे जबकि 2012 और 2021 का उपचुनाव पार्टी सिंबल पर हारे है। जाहिर है इन सभी उम्मीदवारों का दावा टिकट के लिए कमजोर जरूर हुआ है। हालांकि स्थिति -परिस्थिति के लिहाज से इनमें से एकाध अपवाद जरूर हो सकते है। क्षेत्रवार बात करें तो रामपुर और हरोली में भाजपा की बनिस्पत कांग्रेस बेहद मजबूत है, इस बार से इंकार नहीं किया जा सकता। इन दोनों सीटों पर टिकट बदले या न बदले, नतीजा बदलना बेहद मुश्किल है। वहीँ ठियोग में भी कांग्रेस - सीपीआईएम का मैच अगर फिक्स सा होता है तो भाजपा के लिए उम्मीद कम ही होगी। सही मायनों में अगर त्रिकोणीय मुकाबला हुआ तो ही भाजपा इस सीट पर बेहतर कर पायेगी। पर अन्य चार सीटें ऐसी है जहाँ भाजपा दमखम से लड़े और कोई रणनीतिक चुन न हो तो जीत की सम्भावना भी प्रबल होगी। बड़सर में भी दो चुनाव हारने के बाद बलदेव शर्मा की राह मुश्किल हो सकती है। हालांकि यहां बलदेव में समकक्ष कोई अन्य चेहरा अब भी नहीं दिखता। बलदेव के पक्ष में एक बात और जा सकती है, 2012 में जहाँ वे करीब ढाई हज़ार के अंतर से हारे थे तो 2017 में ये अंतर करीब 400 वोट का था। पर एक खेमा चाहता है कि इस बार यहाँ से पार्टी नए चेहरे को मौका दें। अर्की की बात करें तो रतन सिंह पाल के अतिरिक्त पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा भी दावेदारों की फेहरिस्त में है। यहाँ पार्टी किसी नए उम्मीदवार को भी मैदान में उतार सकती है। बीते दिनों ही पार्टी ने प्रतिभा कंवर को प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा का प्रवक्ता नियुक्त किया है। प्रतिभा भी सक्रीय है और टिकट की दावेदार है। वहीँ एक अन्य पत्रकार का नाम भी टिकट की रेस में है, जिनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। वहीँ फतेहपुर में जानकार मान कर चल रहे है की इस बार फिर पार्टी कृपाल परमार को मौका दे सकती है। लगातार तीन चुनाव हार चुके बलदेव को एक और मौका मिलना मुश्किल है। वहीँ जनजातीय जिला किन्नौर में ठाकुर सेन नेगी के बाद तेजवंत नेगी ही भाजपा का चेहरा रहे है। पर पिछले दो चुनाव हार चुके तेजवंत की राह इस बार मुश्किल होगी। बीते कुछ वक्त में पार्टी में सूरत नेगी के बढ़ते कद ने तेजवंत का तेज जरूर कुछ कम किया है। टिकट के लिए भी सूरत का दावा मजबूत है। यहाँ भाजपा के लिए उम्मीदवार का चयन बड़ी चुनौती है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. मंडी हिमाचल की सियासत के चाणक्य पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम अब नहीं रहे। हिमाचल प्रदेश उनके जाने से गमगीन है। पंडित सुखराम का इस दुनिया से रुक्सत होना हिमाचल के सियासत के एक अध्याय का खत्म होना है। पंडित जी सिर्फ सियासत के चाणक्य ही नहीं बल्कि किंग मेकर भी कहलाए जाते थे। वो पंडित सुखराम ही थे जिनकी बदौलत 1998 में वीरभद्र दूसरी बार सरकार रिपीट करने में असफल हुए और प्रो प्रेम कुमार धूमल पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। पंडित सुखराम प्रदेश के वो एकमात्र नेता थे जिन्होंने अपने दम पर प्रदेश में तीसरी पार्टी बनाकर भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े राजनैतिक दलों को दिन में तारे दिखाए। बतौर केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम ने जो काम हिमाचल के विकास या खास तौर पर मंडी के लिए किये, उन्हें भुलाया नहीं जा सकता।पंडित सुखराम का जन्म 27 जुलाई 1927 को हिमाचल के कोटली गांव में रहने वाले एक गरीब परिवार में हुआ था। पंडित जी ने दिल्ली लॉ स्कूल से वकालत की और फिर अपने करियर की शुरूआत बतौर सरकारी कर्मचारी की। उन्होंने 1953 में नगर पालिका मंडी में बतौर सचिव अपनी सेवाएं दी। इसके बाद 1962 में मंडी सदर से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते। 1967 में इन्हें कांग्रेस पार्टी का टिकट मिला और फिर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद पंडित सुखराम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पंडित सुखराम के परिवार ने मंडी सदर विधानसभा क्षेत्र से 13 बार चुनाव लड़ा और हर बार जीत हासिल की। केंद्र की सियासत में भी था रसूख : केंद्र की सियासत में भी पंडित सुखराम बड़ा नाम थे। सांसद रहते उन्होंने केंद्र में विभिन्न मंत्रालयों का कार्यभार संभाल। 1984 में सुखराम ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और प्रचंड जीत के साथ संसद पहुंचे। 1989 के लोकसभा चुनावों में उन्हें भाजपा के महेश्वर सिंह से हार का सामना करना पड़ा। 1991 के लोकसभा चुनावों में सुखराम ने महेश्वर सिंह को हराकर फिर से संसद में कदम रखा। 1996 में सुखराम फिर से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। उन्होंने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। सुखराम पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में टेलीकॉम मिनिस्टर भी रहे। उन्हें भारत में संचार क्रांति का जनक भी कहा जाता है। वीरभद्र सिंह के मिशन रिपीट पर फेरा था पानी : 1998 के विधानसभा चुनाव में पंडित सुखराम ने कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई जिसने वीरभद्र सिंह के मिशन रिपीट के अरमान पर पानी फेर दिया था। पंडित सुखराम के पांच विधायक जीतकर आये थे। भाजपा और कांग्रेस को 31-31 सीटें मिली, लेकिन सुखराम की हिविकां ने प्रो धूमल को समर्थन देकर वीरभद्र के नेतृत्व वाली कांग्रेस को सरकार बनाने से रोक दिया। तब कांटे के मुकाबले में 23 सीटें ऐसी थी जहाँ जीत - हार का अंतर दो हज़ार वोट से कम था। इनमें से 14 सीटें कांग्रेस हारी थी और तीन सीटों पर तो उसे हिमाचल विकास कांग्रेस से सीधे मात दी थी। इसके अलावा कई सीटें ऐसी थी जहाँ कांग्रेस की हार का अंतर बेशक दो हज़ार वोट से अधिक था, लेकिन पार्टी का खेल हिमाचल विकास कांग्रेस ने ही बिगाड़ा था। 2017 में दिया कांग्रेस को झटका : पंडित सुखराम ने 2003 में अपना आखिरी विधानसभा का चुनाव लड़ा और फिर 2007 में सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। 2012 में उनके बेटे अनिल शर्मा ने सदर से चुनाव लड़ा और सरकार में मंत्री बने। इसके बाद से सुखराम परिवार वर्ष 2017 तक कांग्रेस में रहा। पर पंडित जी चुनाव से पूर्व सपरिवार भाजपा में शामिल हो गए। माना जाता है कि उनके इस सियासी पैंतरे ने ऐसी हवा बिगाड़ी कि कांग्रेस का जिला मंडी में खाता भी नहीं खुला। 2019 में हुई कांग्रेस में वापसी : पंडित सुखराम का अपने पोते आश्रय शर्मा को सियासत में स्थापित होते देखना चाहते थे। कई मौकों पर खुद पंडितजी ने इसका जिक्र भी किया। पोते को सांसद बनाने की चाहत में ही पंडित जी 2019 में वापस कांग्रेस में आएं। आश्रय को टिकट भी मिला लेकिन जीत नहीं मिल सकी। बहरहाल पंडित जी दुनिया से रुक्सत कर चुके है। पंडित सुखराम ने एक लम्बी उम्र काटी, सत्ता सुख भोगा, विवादों में भी रहे, पर 95 साल की उम्र तक भी उनका सियासी रसूख ऐसा था कि उन्हें हल्के में लेने की भूल कोई नहीं कर सकता था। इसलिए पंडित सुखराम हिमाचल की सियासत के चाणक्य कहलाएं। मंडी तो पंडित सुखराम की ही थी ! 'मंडी हमारी है और हमारी ही रहेगी ' सियासत में अक्सर नेता इस तरह के बयान देते है। मंडी को लेकर तरह -तरह के दावे होते है। पर अगर कोई ऐसा है जिसे सही मायने में मंडी ने बाहें फैलाकर स्वीकार किया तो वो थे पंडित सुखराम। कुल 13 मर्तबा मंडी सदर हलके से पंडित जी या उनके पुत्र अनिल शर्मा विधायक बने, पार्टी चाहे कोई भी रही हो। पंडित जी सियासत में किसी भी मुकाम पर रहे हो, किसी भी ओहदे पर रहे हो लेकिन उन्होंने मंडी का विशेष ख्याल रखा। आज भी मंडी के सेरी मंच पर जाकर पता लगता है कि किसी सोच के साथ उस शहर को विकसित किया गया है, वो भी उस दौर में। इसीलिए मंडी के लोग पंडित जी को विकास का मसीहा मानते है। कोई किसी भी राजनैतिक विचारधारा का क्यों न हो, दबी जुबान में ही सही लेकिन ये जरूर स्वीकार करता है कि मंडी के विकास में पंडित सुखराम का योगदान अमिट है। नब्बे के दशक में पंडित सुखराम केंद्र में दूरसंचार मंत्री थे और उस दौर में बड़े शहरों में भी टेलीफोन का कनेक्शन लेने के लिए महीनों -सालों इंतजार करना पड़ता था। पर पंडित जी के राज में मंडी में टेलीफोन की घंटी खूब बजी। जिसने चाहा उसे कनेक्शन मिला, मंडी वालों के लिए विभाग का सिर्फ एक ही नियम था,वो था जल्द से जल्द कनेक्शन देना। केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी पंडित सुखराम लोगों की पहुंच में थे, बिल्कुल सरल और जमीन से जुड़े हुए। छोटी -छोटी समस्याएं लेकर भी लोग पंडित जी के पास पहुंच जाते और हर छोटी समस्या को भी पंडित सुखराम पूरी तल्लीनता से सुनते और हरसंभव हल करते। सिंबल कोई भी रहा पर मंडी वालों ने दिया साथ : इसे मंडी वालों का पंडित सुखराम के प्रति स्नेह ही कहेंगे कि उन्होंने या उनके पुत्र अनिल शर्मा ने चाहे किसी भी सिंबल पर चुनाव क्यों न लड़ा हो, मंडी वालों ने हमेशा साथ दिया। पहली बार बतौर निर्दलीय चुनाव जीतने वाले पंडित सुखराम लम्बे वक्त तक कांग्रेस में रहे और हमेशा विधानसभा चुनाव जीते। इसके बाद जब 1998 में उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई तो भी मंडी ने उनका साथ दिया। 2017 में जब पंडित जी और उनका परिवार भाजपाई हो गए तो भी मंडी वालों का साथ उन्हें मिला। और मुख्यमंत्री बनते -बनते रह गए पंडित सुखराम सर्वविदित है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम की तमन्ना थी कि वे बतौर मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश की भागदौड़ संभाले। पर वीरभद्र सिंह के होते ऐसा हो न सका। कई ऐसे मौके आए जब पंडित सुखराम मुख्यमंत्री बनते -बनते रह गए। पहला मौका आया साल 1983 में। तत्कालीन मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल का नाम टिम्बर घोटाले में आया तो पार्टी आलाकमान ने उनसे इस्तीफा ले लिया। नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कयास लग रहे थे और इनमें से एक प्रमुख नाम था पंडित सुखराम का जो ठाकुर रामलाल की कैबिनेट में मंत्री भी थे। पर इंदिरा गांधी का आशीर्वाद मिला वीरभद्र सिंह को जो उस वक्त केंद्र में सियासत कर रहे थे। इस तरह वीरभद्र सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने और पंडित सुखराम मुख्यमंत्री बनते -बनते रह गए1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ होने के बाद वीरभद्र सिंह के नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे थे। 1993 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। कहते ही तब 20 से अधिक विधायक पंडित सुखराम के पक्ष में थे लेकिन जिला मंडी के ही कुछ नेता उनकी राह का रोड़ा बने और तीसरी बार वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बने। इस तरह दूसरी बार पंडित जी मुख्यमंत्री बनते -बनते रह गए। वीरभद्र के मिशन रिपीट पर फेरा पानी 1998 के विधानसभा चुनाव से पहले पंडित सुखराम ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी, नाम था हिमाचल विकास कांग्रेस। विधानसभा चुनाव में पंडित जी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरे लेकिन उनके खाते में पांच सीटें ही आई। ऐसे में पंडित जी का मुख्यमंत्री बनने का सपना तो पूरा नहीं हुआ लेकिन जिस कदर उन्होंने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई जिससे वीरभद्र सिंह भी मुख्यमंत्री नहीं बन सके। पंडित जी ने भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनाई और ये पहला मौका था जब कोई गठबंधन सरकार पांच साल चली भी। इसके बाद ही उन्हें हिमाचल की सियासत का चाणक्य कहा जाने लगा। वो स्कैंडल जिसने बदल कर रख दी पंडित सुखराम की सियासत तारिख थी 8 अगस्त 1996 । पंडित सुखराम का नाम टेलीकॉम घोटाले में सामने आया था। सीबीआई ने सुखराम, रुनु घोष और हैदराबाद स्थित एडवांस रेडियो फॉर्म कंपनी के मालिक पर केस दर्ज कर लिया था। 16 अगस्त को सीबीआई की एक टीम उनके दिल्ली के सफदरजंग स्थित आवास पर पहुंची और छापेमारी की। 80 के दशक में बोफोर्स घोटाले की वजह सत्ता खोने वाली कांग्रेस 90 के दशक में संचार घोटाले की वजह से फिर विवादों से घिर गई। नरसिम्हा राव सरकार में सुखराम के संचार मंत्री रहते हुए ये घोटाला हुआ। इस घोटाले ने न सिर्फ कांग्रेस की सरकार को हिला दिया बल्कि पंडित सुखराम को मंत्री और कांग्रेस पार्टी का साथ दोनों ही खोने पड़े। ये घोटाला पंडित सुखराम के जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनकर रह गया। इस 5 करोड़ 91 लाख के घोटाले की वजह से विपक्षी भाजपा ने तब 1996 में 10 दिनों तक संसद नहीं चलने दी थी। उस वक्त पंडित सुखराम के घर से 2.45 करोड़ रुपये बरामद हुए थे। इसके अलावा सीबीआई की एक टीम ने सुखराम के हिमाचल के मंडी स्थित बंगले पर भी छापेमारी की थी। टीम को वहां से 1.16 करोड़ रुपये मिले थे। पैसे दो संदूकों और 22 सूटकेस में रखे थे, जिनमें से अधिकांश सूटकेस पूजा वाले घर में रखे हुए थे।सीबीआई की जांच में पता चला था कि केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम ने पद का इस्तेमाल करते हुए हैदराबाद की एक निजी फर्म को ठेका दिया और बदले में तीन लाख रुपये की रिश्वत ली। सुनवाई के दौरान सुखराम ने अदालत में दलील दी कि उनके आवास से बरामद रुपए कांग्रेस पार्टी के हैं। उन्होंने दावा किया कि ये पैसा जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी फंड के रूप में इस्तेमाल करने के लिए भेजा गया। हालांकि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने सीबीआइ की पूछताछ में बरामद राशि के पार्टी फंड होने से इनकार कर दिया था ।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला प्रदेश के विज्ञान अध्यापक टीजीटी से मुख्याध्यापक पदोन्नति के नियमों में बदलाव के खिलाफ है। प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ ने सरकार से मांग की है कि टीजीटी से मुख्याध्यापक पदोन्नति के नियमों में कोई छेड़छाड़ न करते हुए माननीय न्यायालय के निर्णय को यथावत रखा जाए। प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ का मानना है कि इससे टीजीटी से मुख्याध्यापक बनने के लिए लगभग 22 वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अध्यापकों के साथ अन्याय नहीं होगा। संघ का मानना है कि यदि नियमों में कोई बदलाव किया जाता है तो मुख्याध्यापक के पद पर पदोन्नति का इंतजार कर रहे प्रदेश भर के टीजीटी शिक्षक, टीजीटी पद से ही सेवानिवृत्त होने को मजबूर हो जाएंगे। प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुधीर चंदेल, प्रदेश महामंत्री अवनीश कुमार, कोषाध्यक्ष लवलीन, मीडिया प्रभारी सुनील का कहना है कि इस मांग को पहले भी कई बार मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव प्रदेश के समक्ष उठाया जा चुका है। मुख्यमंत्री द्वारा अपने बजट भाषण में 26 अप्रैल 2010 के बाद टीजीटी से पदोन्नत लेक्चरर की ऑप्शन एकमुश्त बहाल कर मुख्याध्यापक बनाने की घोषणा की है, इसके लागू होने से टीजीटी काडर के एक बहुत बड़े वर्ग के साथ अन्याय न हो, इसलिए जो पदोन्नति की स्थिति लगभग 10 वर्षों से चली आ रही है, उसी को यथावत रखा जाए।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला "मैं प्रखर राष्ट्रवादी हूँ। खालिस्तानियों के साथ सम्बन्ध रखने वालों के साथ मेरा दूर- दूर तक कोई लेना देना नहीं हो सकता। मैं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानता हूं। एकात्मवाद व राष्ट्रवाद मेरी आत्मा में बसा है। उप चुनाव में हमारा झंडा भगवा ही था और भविष्य में भी भगवा ही लहराएगा, यही हमारा संकल्प है ", ये शब्द है जुब्बल कोटखाई से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके चेतन बरागटा के। चेतन बरागटा ने खुद ये स्पष्ट कर दिया की वो किसी भी हालात में आम आदमी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। चेतन ये सन्देश हल्के अंदाज में भी दे सकते थे लेकिन उन्होंने कठोर शब्दों का चयन किया, जाहिर है उनका इरादा अटकलों पर विराम लगाना नहीं अपितु पूर्ण विराम लगाने का है। दरअसल अब भी जुब्बल कोटखाई भाजपा का एक बड़ा धड़ा चेतन के साथ खड़ा है और चेतन अपने इन निष्ठावानों को हर हाल में साध कर रखना चाहते है। उधर, भाजपा ने अब तक चेतन की घर वापसी में प्रत्यक्ष तौर पर कोई रूचि नहीं दिखाई है। हालांकि पार्टी के भीतर अधिकांश लोगों का उन्हें लेकर सकारात्मक रवैया है। ऐसे में उनकी घर वापसी तो लगभग तय है , पर सवाल ये है कि आखिर कब ? जुब्बल कोटखाई में भाजपा की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। उपचुनाव में पार्टी जमानत तक नहीं बचा सकी थी और तब से अब तक भी जमीनी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखता। फिर भाजपा किस बात का इन्तजार कर रही है, यह समझना फिलवक्त कठिन है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ने केंद्र सरकार पर आईसीडीएस विरोधी कार्य करने का आरोप लगाया है। यूनियन अध्यक्ष नीलम जसवाल व महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि यूनियन केंद्र सरकार की आंगनबाड़ी व जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करेगी। यूनियन अपनी मांगों को लेकर 10 से 17 जून के मध्य हिमाचल प्रदेश के सातों लोकसभा व राज्यसभा सदस्यों को मांग-पत्र सौंपेगी। साथ ही अपनी मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कर्मी 11 जुलाई को प्रदेशभर में मांग दिवस मनाएंगे। यूनियन अपनी मांगों को लेकर 25 से 29 जुलाई तक दिल्ली में महापड़ाव भी करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार आईसीडीएस विरोधी कार्य कर रही है व उसका निजीकरण कर रही है। इसे वेदांता कम्पनी के हवाले किया जा रहा है। नंद घर भी निजीकरण की प्रक्रिया का ही हिस्सा है। उन्होंने निजीकरण पर तुरन्त रोक लगाने की मांग की। उन्होंने भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार आंगनबाड़ी कर्मियों को नियमित करने की मांग की। साथ ही हरियाणा की तर्ज़ पर वेतन देने व माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार ग्रेच्युटी देने की मांग की। उन्होंने कर्मियों को प्री प्राइमरी में सौ प्रतिशत नियुक्ति देने,सेवानिवृति आयु 65 वर्ष करने,वर्ष 2013 की एनएचआरएम की बकाया राशि का भुगतान करने व मिनी आंगनबाड़ी कर्मियों को बराबर वेतन देने की भी मांग की।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पीईटी की बैचवाइज भर्ती पिछले पांच सालों से नहीं हो पाई है जिससे बेरोजगार शारीरिक शिक्षक खासे नाराज है। अब इन शिक्षकों ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है। शिक्षक संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि 30 मई से पहले यदि भर्ती प्रक्रिया को शुरू नहीं की गई तो विधानसभा के बाहर हजारों बेरोजगार आमरण अनशन पर बैठेंगे। इसके लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगी। शारीरिक शिक्षक संघ ने प्रदेश भाजपा सरकार से शारीरिक शिक्षकों के 870 पदों को 30 मई तक भरने की प्रक्रिया पूर्ण करने का आग्रह किया है, ताकि स्कूली बच्चे शारीरिक शिक्षा विषय पढ़ने से वंचित न रहें और साथ ही इन शिक्षकों को भी रोज़गार मिल पाए। शारीरिक अध्यापक संघ के प्रधान सतीश शर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर सहित मंत्रिमंडल की ओर से पहली बार सीएंडवी के पदों को भरने की पहल की गई। इसमें कला अध्यापकों के 820 पदों को भर कर बेरोजगारों को सरकार ने न्याय प्रदान किया है। उन्होंने कहा की कला अध्यापकों के पदों को भरने के बाद अब शारीरिक शिक्षकों के स्कूलों में खाली पड़े पदों को शीघ्र भरा जाए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर 870 शारीरिक शिक्षकों के पदों को भरने के निर्देश शिक्षा निदेशक प्रारंभिक व प्रदेश भर के सभी प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशकों को जारी करें। शारीरिक शिक्षक कई वर्षों से सरकार से स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने की गुहार लगा रहे हैं और अब कई बेरोजगार शारीरिक शिक्षक 47 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। शर्मा ने कहा कि अधिकतर बेरोजगार शारीरिक शिक्षक अब हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा में बैठने के लिए अधिक उम्र के कारण पात्र नहीं रहे हैं। ज्यादा उम्र के इन बेरोजगारों को भाजपा सरकार से एक ही आशा बची है कि उन्हें बैचवाइज भर्ती के आधार पर शीघ्र स्कूलों में नियुक्ति प्रदान की जाए।


















































