हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ ही बारिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। मंगलवार देर रात से शिमला में लगातार भारी बारिश का क्रम जारी है। भारी बारिश के चलते शिमला के ढली इलाके में भूस्खलन हुआ। भूस्खलन की वजह से सड़क किनारे सो रही एक युवती की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हैं। घायलों का इलाज आईजीएमसी में चल रहा है। जानकारी के मुताबिक यह युवतियां मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं और सड़क किनारे दवा बेचने का काम करती हैं। मृतिका की पहचान 14 वर्षीय करीना के रूप में हुई है, जबकि 16 वर्षीय आशा और 14 वर्षीय कुलविंदर भूस्खलन की चपेट में आने से घायल हुई हैं।
हिमाचल के बेरोजगार युवाओं के लिए नौकरी पाने का सुनहरा मौका मिलने जा रहा है. हिमाचल सिलेक्शन एसोसिएशन लिमिटेड शिमला ने विभिन्न श्रेणियों के (634) पदों को भरने के लिए ऑनलाइन माध्यम द्वारा आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं. आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2022 निर्धारित की गई है. एसोसिएशन के एचआर निदेशक अश्वनी कुमार ने जानकारी देते हुए बताया, कि इसमें ब्रांच सेल्स ऑफिसर (18), बैंक कैश हैंडलिंग एग्जीक्यूटिव (19), एडमिनिस्ट्रेशन एग्जीक्यूटिव (20) , कस्टमर सपोर्ट रिप्रेजेंटेटिव (15), बैंक कैश कस्टोडियन (17), बैक एंड एग्जीक्यूटिव (12), रिलेशनशिप मैनेजर (50), सुरक्षा गार्ड (59), डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर (17), फॉर्म सेल्स एग्जीक्यूटिव (73),अकाउंटेंट फीमेल (22), वेल्डर (29), फिटर (32), टर्नर (39),इलेक्ट्रिशियन (35), कस्टमर सर्विस एग्जीक्यूटिव (20), बैंक लोनिंग एजेंट (19), ऑफिस क्लर्क (18), कार्यालय सहायक (22), स्टाफ नर्स एएनएम,जीएनएम (26), सिक्योरिटी सुपरवाइजर (16), एरिया मैनेजर (13) , बैंक एमआई रिकवरी एग्जीक्यूटिव (16), ड्राइवर (10), पीएन कम हेल्पर (17) पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की गई है. इन पदों के लिए आयु सीमा 18 वर्ष से लेकर 45 वर्ष तक निश्चित की गई है. उम्मीदवार यहां करें, आवेदन :- प्रदेश के इच्छुक महिला व पुरुष उम्मीदवार आवेदन करने के लिए एसोसिएशन के व्हाट्सएप नंबर 62304-06027 पर अपना बायोडाटा साधारण फोन नंबर सहित, आधार कार्ड, पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र लेटेस्ट, पैन कार्ड, हिमाचली बोनाफाइड, रोजगार कार्यालय पंजीकरण प्रमाण पत्र ,एवं शैक्षणिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्रों की छाया प्रति स्कैनड पीडीएफ (PDF) बनाकर निर्धारित तिथि 12 जुलाई 2022 तक अपना आवेदन भेज सकते हैं. एसोसिएशन द्वारा उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया छटनी परीक्षा/ लिखित परीक्षा (140) क्रमांक एवं इंटरव्यू (30) क्रमांक द्वारा ही किया जाएगा. लिखित परीक्षा में हिमाचल सामान्य ज्ञान, एवरीडे साइंस, कंप्यूटर न्यूमेरिकल एटीट्यूट, गणित, जनरल इंग्लिश, जनरल हिंदी ,समाजशास्त्र विषय से संबंधित ऑब्जेक्टिव टाइप (140) MCQ प्रश्न पूछे जाएंगे. संगठन द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा 30 जुलाई 2022 को उम्मीदवारों के व्हाट्सएप नंबर पर ऑनलाइन ही ली जाएगी. उम्मीदवार पदनाम एवं शैक्षणिक योग्यता की महत्वपूर्ण जानकारी एसोसिएशन की अधिकारिक वेबसाइट www.hpussa.in पर देख सकते हैं. यह सभी पद हिमाचल प्रदेश के लिए ही आरक्षित किए गए हैं. एसोसिएशन द्वारा लिखित परीक्षा का परिणाम 28 अगस्त 2022 को घोषित किया जाएगा. लिखित परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क सभी श्रेणियों के वर्गों की कैटेगरी जनरल ,एससी, एसटी, ओबीसी, फ्रीडम फाइटर, एपीएल, बीपीएल, फिजिकली डिसेबिलिटी, स्वतंत्रता सेनानी को (1770) रुपए आवेदन शुल्क जमा/चुकता करना होगा, जो कि नॉन रिफंडेबल रहेगा. यह सभी पद (2) वर्ष के लिए (कॉन्ट्रैक्ट) अनुबंध आधार पर भरे जाएंगे, जिन्हें बाद में रेगुलर किया जाएगा. असफल उम्मीदवारों को भी एसोसिएशन द्वारा (F.S.E) के पद पर तैनात किया जाएगा. एसोसिएशन द्वारा चयनित उम्मीदवारों का मासिक वेतनमान ग्रेड-पे 10,500/- से लेकर 32,810/- तक सीटीसी ग्रेड-पे दिया जाएगा. इसके अलावा प्रोविडेंट फंड ,जनरल प्रोविडेंट फंड, मेडिकल इंश्योरेंस, ओवरटाइम, प्रमोशन ,इंसेंटिव, बोनस की सुविधा भी मिलेगी. यह सभी पद (एमएनसी) मल्टीनेशनल कंपनियों , हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक , इंडस बैंक, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, रिलायंस बीपीओ कॉल सेंटर, चेकमेट, एचडीबी फाइनेंस, सतलुज मोटर्स, सिग्मा,गोदरेज, कैडबरी ,डावर इंडिया, मणिपुरम फाइनेंस, एलआईसी कॉरपोरेशन, सेक्टरों में भरे जाएंगे. इच्छुक उम्मीदवार अधिकतर जानकारी के लिए कार्यालय के दूरभाष नंबर 01907292034 एवं प्लेसमेंट अधिकारियों (एचआर) के मोबाइल नंबर 94181-39918, 62305-90985 ,94184-17434 पर संपर्क कर सकते हैं. नोट:( यह विज्ञापन सामग्री है)
हिमाचल प्रदेश में बीते साल के मुकाबले इस साल पहले ही कार्टन के दाम 18 फीसदी बढ़ गए है। सेब सीजन के आते ही पैकिंग ट्रे के दाम बढ़ गए है। बीते साल 700 रूपये बिक रहा पैकिंग ट्रे का बंडल इस साल 45 रूपये महंगा हो गया है।कुछ क्षेत्रो में इसके दाम 780 रुपये प्रति बंडल तक पहुँच गया है। सेब की प्रति पेटी लागत बढ़ने से बागवान खासे परेशान हैं। सेब की पैकिंग के लिए बागवान मोहन फाइबर की ट्रे का इस्तेमाल करते है। इस महीने दामों में अधिक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। मोहन फाइबर के एरिया मैनेजर का कहना है कि रद्दी की कीमत 18 से 34 रुपये किलो पहुंच गई है, रशिया यूक्रेन से रद्दी का आयात बंद हो गया है। ट्रांसपोर्टेशन भी महंगा हो गया है। जिसके कारण इसके दामों में बढ़ोतरी हुई है।
देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक कहे जाने वाले तिरुपति बालाजी में इस बार 6.18 करोड़ रुपये का दान हुआ है। यह एक रिकॉर्ड है। तिरुमला तिरुपति देवेस्थनाम के इतिहास में श्रिवारी को हुंडी राजस्व में रिकॉर्ड राशि मिली है। सोमवार को श्रीवारी हुंडी की आय 6.18 करोड़ रुपये दर्ज की गयी। तिरुमला तिरुपति देवास्थानम के अनुसार स्वामी की हुंडी आय पहली बार 6 करोड़ के पार हुई है। पिछली बार 1 अप्रैल 2012 को टीटीडी ने 5.73 करोड़ आय दर्ज की थी। आंध्रप्रदेश के तिरुपति में 7 पर्वत श्रंखलाओं से घिरी भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर तिरूमाल पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर को देश का सबसे प्रतिष्ठित और अमीर मंदिर माना जाता है। यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है और समुद्र तल से 2800 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में स्वयं भगवान वेंकटश्वर निवास करते हैं, जो विष्णु के अवतार हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर की कुलसंपत्ति लगभग 50,000 करोड़ है।
कर्नाटक पुलिस ने सब इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले के आरोप में 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी ADGP अमृत पॉल को गिरफ्तार किया है। CID ने चार बार पूछताछ के बाद अमृत पॉल को गिरफ्तार किया। वहीं 545 सिलेक्टेड कैंडिडेट्स में से 40 को भी गिरफ्त में लिया गया है। आरोप है कि ओएमआर शीट से टैंपर करने के लिए प्रत्येक कैंडिडेट से 30 से 80 लाख रुपए तक लिए गए थे। कर्नाटक सरकार ने भी कार्रवाई करते हुए एडीजीपी अमृत पॉल को किया निलंबित कर दिया है। ये स्कैम जब सामने आया तब एडीजीपी अमृत पॉल रिक्रूटमेंट सेल के हेड थे और उन्हें बाद में इंटरनल सिक्योरिटी डिवीजन में ट्रांसफर कर दिया गया। आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में 545 पुलिस सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें 54,041 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। कर्नाटक के 93 केंद्रों पर परीक्षा ली गई थी। वहीं रिजल्ट इस साल जनवरी में जारी किया गया। जिसके बाद कुछ छात्रों ने नंबर में गड़बड़ी की शिकायत की थी।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। मुंबई में मॉनसून की बारिश से एकदम बुरा हाल है। मुंबई समेत कई जगहों पर भारी बारिश और जलजमाव से आफत बनी हुई है। भारी बारिश की वजह से मुंबई की सड़कों पर जगह जगह जल भराव देखने को मिल रहा है। मुंबई के दहिसर में तेज बारिश की वजह से चेकनाका के पास की सड़क पानी में डूब गई तो वहीं नवी मुंबई से लेकर कल्याण और नालासोपारा तक लोगों को बारिश की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। महाराष्ट्र में अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश के मद्देनजर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्य सचिव मनुकुमार श्रीवास्तव के साथ बैठक की और सभी संबंधित जिलों के संरक्षक सचिवों को निगरानी रखने और स्थिति को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है।
असम में बाढ़ का कहर लगातार जारी है। बाढ़ से अबतक 179 लोगों की मौत हो गई है। कई लोग बेघर हो गए हैं। असम में बाढ़ का सबसे अधिक कहर कछार जिले में देखने को मिला है। कछार जिले में बाढ़ के पानी ने सबसे अधिक तबाही मचाई है। पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) की टीम राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है। इस बीच असम पुलिस ने कछार जिले में बराक नदी के तटबंध के टूटने के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनपर आरोप है कि उन्होंने बराक नदी पर बने तटबंध को जानबूझकर तोड़ा, जिसके कारण सिलचर शहर में बाढ़ आ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनकी पहचान मिठू हुसैन लश्कर और काबुल खान के रूप में हुई है। कछार के पुलिस अधीक्षक ने आईएएनएस को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की है। लेकिन पुलिस ने घटना में दोनों की भूमिका के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है।
बीते दस वर्षों में सोलन निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस और कर्नल डॉ धनीराम शांडिल का वो अभेद किला बन चुका है जिसे भेद पाने में भाजपा नाकामयाब रही है। दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद इस बार फिर पुरानी कहानी रिपीट न हो, इसके लिए भाजपाई रणनीति तैयार करने में जुटे है। पर मौजूदा हाल और हालात दोनों भाजपा के पक्ष में नहीं दिखते। दरअसल डॉ राजीव बिंदल के नाहन जाने के बाद से ही सोलन में भाजपा के पास वो दमदार चेहरा नहीं दिखता जो कर्नल की स्वच्छ और बेदाग़ छवि के कवच को भेदने का सामर्थ्य रखता हो। कोई सामना करने को खड़ा होता भी है तो कांग्रेसियों से पहले भाजपाई ही बंदोबस्त कर देते है। ये गुटबाजी ही सोलन भाजपा का असल मर्ज है। रही सही कमी भाजपा आलाकमान पूरी करता आ रहा है, कभी गलत टिकट देकर तो कभी एक गुट को साइडलाइन करके। अब विधानसभा चुनाव से पहले चंद महीनों में क्या भाजपा इस तस्वीर को बदलकर अपनी तकदीर बदल पायेगी, ये फिलवक्त बड़ा सवाल है। सोलन भाजपा की वर्तमान सियासी तस्वीर को समझने के लिए शुरुआत करते है 2012 के विधानसभा चुनाव से। 2008 के परिसीमन के बाद सोलन सीट आरक्षित हो गई और जीत की हैट्रिक लगा चुके डॉ राजीव बिंदल नाहन का रुख कर गए। बिंदल के बाद उन्हीं के आशीर्वाद से टिकट मिला कुमारी शीला को। जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद कर्नल धनीराम शांडिल को मैदान में उतारा। शांडिल के सामने कुमारी शीला टिक नहीं सकी और लम्बे समय बाद कांग्रेस की वापसी हुई। कांग्रेस की सरकार बनी और शांडिल मंत्री भी बन गए। उधर भाजपा में कुमारी शीला ही प्राइम फेस बनी रही। हालांकि कोशिश तरसेम भारती ने भी की, लेकिन बिंदल गुट ने उन्हें कभी स्थापित होने नहीं दिया। पर असली ट्विस्टआया 2017 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले। न कुमारी शीला को फिर मौका मिला और न तरसेम भारती के अरमान पूरे हुए, और टिकट ले गए पैराशूट से लैंड हुए डॉ राजेश कश्यप। यहां दिलचस्प बात ये है कि डॉ राजेश कश्यप को टिकट दिलवाने वाले थे डॉ राजीव बिंदल, और उनके टिकट का विरोध करने वाले भी उन्हीं के शागिर्द थे। भीतरखाते क्या हुआ ये तो चंद भाजपाई ही जानते होंगे लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि सत्ता विरोधी लहर के बावजूद कर्नल शांडिल फिर चुनाव जीत गए। उधर हार के बाद डॉ राजेश कश्यप मौके की नजाकत को समझते हुए डॉ बिंदल की सरपरस्ती से दूर हो गए और बिंदल विरोधी खेमे के सरदार बन गए। प्रदेश में जयराम राज आया तो बिंदल कमजोर हुए और सोलन में डॉ राजेश कश्यप मजबूत होते रहे। जयराम राज में डॉ राजेश कश्यप ही सोलन में प्राइम फेस रहे है। पर इन साढ़े चार सालों में भी डॉ कश्यप सबको साथ लाने में कामयाब नहीं दिखते और ये ही उनकी कमजोरी है। भाजपा दो गुटों में विभाजित है और इसका खामियाजा नगर निगम और जिला परिषद् चुनाव में भुगत चुकी है, बावजूद इसके भाजपा ने कोई सबक नहीं लिया। वर्तमान में एक तरफ डॉ राजेश कश्यप ताल थोक रहे है, तो दूसरी तरफ कभी तरसेम भारती की राह का रोड़ा बनने वाले ही उन्हें आगे बढ़ा रहे है ताकि कश्यप को रोका जा सके। यहां जिक्र कुमारी शीला का भी जरूरी है जो निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय है, लेकिन फिलहाल अलग- थलग दिख रही है। हालांकि इसमें कोई संशय नहीं है कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से जो जुड़ाव कुमारी शीला का दिखता है वैसा किसी अन्य नेता का नहीं है। ये तीन नेता फिलहाल प्रत्यक्ष तौर पर टिकट के दावेदार है। इस बीच सुगबुगाहट है कि भाजपा से 2017 की तरह ही एक नए उम्मीदवार को मैदान में उतारा जा सकता है। सूत्रों की माने तो एक अधिकारी से चर्चा भी हो चुकी है और उक्त अधिकारी जल्द वीआरएस लेकर सियासत में एंट्री कर सकता है। मसला अटका है टिकट की गारंटी को लेकर। दरअसल डॉ राजेश कश्यप मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के करीबी माने जाते है और ऐसे में वो टिकट की दौड़ में आगे भी है। अब किसी नए चेहरे की एंट्री होती है या नहीं, इसके लिए फिलहाल थोड़ा इन्तजार करना होगा। कांग्रेस में कर्नल के समकक्ष कोई नहीं : कांग्रेस में कर्नल धनीराम शांडिल एकलौते दावेदार है। यूँ तो टिकट के अन्य चाहवान भी है लेकिन उनका कद कर्नल के समकक्ष नहीं दिखता। खास बात ये है कि दस साल विधायक रहने के बावजूद कर्नल की छवि बेदाग है। पिछली सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने साढ़े चार सौ करोड़ से अधिक के विकास कार्य करवाएं तो मौजूदा कार्यकाल में भी अमूमन सभी क्षेत्रों में उनकी विधायक निधि पहुंची है। कहीं कम दिया तो कहीं ज्यादा, लेकिन कर्नल ने किसी को निराश नहीं किया। वहीं प्रदेश कांग्रेस में मुकेश अग्निहोत्री, सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रतिभा सिंह के अलावा कर्नल शांडिल भी एक ऐसा चेहरा है जिन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जाता है। कर्नल पार्टी आलाकमान के नजदीकी है और जानकार मानते है कि यदि गुटबाजी के चलते किसी के नाम पर सहमति नहीं बनती तो कर्नल के सिर भी सीएम का ताज सज सकता है। सरकार ने पैसा दिया, फिर भी मंद है विकास की रफ्तार : सोलन में विकास की मंद रफ्तार भी भाजपा के गले की फांस है। बीते साढ़े चार साल में भाजपा सरकार पहले से निर्माणधीन शामती बाईपास का लोकार्पण तक नहीं कर पाई है। पिछले साल अप्रैल में मुख्यमंत्री ने ऐलान किया था कि शूलिनी मेले में वे शामती बाईपास का लोकार्पण करेंगे, अगला मेला भी निकल गया लेकिन लचर कार्यशैली के चलते मुख्यमंत्री को अब तक ये सौभाग्य नहीं मिल पाया। इसी तरह अप्रैल 2018 में हुए ट्रांसपोर्ट नगर के शिलान्यास की तो पट्टिका भी टूट गई है लेकिन सरकार से एक ईंट तक नहीं लगी। फूड प्रोसेसिंग प्लांट का वादा भी हवा हवाई है। सोलन के ओल्ड बस स्टैंड पर प्रस्तावित पार्किंग की दिशा में कुछ नहीं हुआ। पेयजल और बिजली आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी लोग त्रस्त है। करीब 15 करोड़ के परक्युलेशन वेल के बावजूद पेयजल समस्या का हल नहीं हुआ है। वहीँ ओवरलोड बिजली विभाग की मुख्य समस्या है जिसके आगे अधिकारी भी बेबस है। ऐसा नहीं है कि जयराम सरकार ने सोलन के विकास को पैसा नहीं दिया, दरअसल लचर कार्यशैली के चलते कोई भी कार्य समस्य पर नहीं होता। इसका बड़ा कारण कमजोर और विभाजित स्थानीय नेतृत्व और अधिकारीयों की मनमानी भी है। अफसरशाही की मनमानी और नेताओं की कमजोर पकड़ की झलक बीते दिनों हुए शूलिनी मेले में भी दिखी जहाँ अव्यवस्था हावी रही। कथेड़ में हॉस्पिटल का निर्माण इस सरकार की बड़ी उपलब्धि जरूर है लेकिन फंड आवंटित होने के बावजूद काम ने रफ्तार नहीं पकड़ी। वहीँ कोठो में इंडोर स्टेडियम जरूर अब बनकर तैयार है। माना जा रहा है कि जल्द मुख्यमंत्री सोलन का दौरा करेंगे जहाँ सैकड़ों करोड़ के लोकार्पण और शिलान्यास होंगे। लोकार्पण तो ठीक है, पर अंतिम वर्ष के शिलान्यासों का भाजपा को कितना चुनावी लाभ होगा, ये देखना रोचक होगा।
पहाड़ी जिले किन्नौर में सियासी ताप हमेशा हाई रहता है। यूँ तो इस जिले में सिर्फ एक विधानसभा सीट है, लेकिन बावजूद इसके ये हमेशा चर्चा में रहा है। हल्के सियासी वजन वाले इस जिला में गुटबाजी हमेशा भारी रही है। गुटबाजी और अंतर्कलह की ये आग किसी एक दल में नहीं, अपितु दोनों तरफ बराबर लगी है। इस बार भी विधानसभा चुनाव से पहले ही दोनों ओर से अंतर्कलह से रुझान आने शुरू हो गए है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी काे कांग्रेस के जगत सिंह नेगी से पराजित हाेना पड़ा। अब प्रदेश में एक बार फिर विधानसभा चुनाव की हलचल शुरू हो चुकी है और जिला किन्नौर में भी सियासत परवान पर है। बीते दो चुनाव में यहाँ कांग्रेस विजयी हुई है और दोनों मर्तबा जगत सिंह नेगी ही कांग्रेस का चेहरा रहे है। अब जगत सिंह नेगी और कांग्रेस दोनों की निगाहें हैट्रिक पर है, तो वहीं भाजपा वापसी के लिए जद्दोजेहद कर रही है। दोनों ही राजनीतिक दल किन्नौर की एकमात्र विधानसभा सीट पर अपना कब्ज़ा जमाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। चुनावी रैलियां, प्रचार, प्रसार, जन सम्पर्क अभियान, किसी में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही। पर दोनों ही राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच चल रहे आपसी मतभेद और मनभेद अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजानिक मंच तक पहुँच चुके है। ज़ाहिर है किन्नौर में जीत का मंत्र सिर्फ और सिर्फ आपसी अंतर्कलह को साधना ही होगा। जिसने भी अंतर्कलह को साध लिया उसकी नैया पार समझो। जगत सिंह का टिकट लगभग तय, अंतर्कलह से पार पाना चुनौती कांग्रेस के दिग्गज लगातार दोहरा रहे है कि कांग्रेस में न टिकट को लेकर कलह है और न मुख्यमंत्री की कुर्सी का मोह, बस फिक्र है कि पहले सत्ता का वनवास खत्म हो। हाथ का निशान सबसे ऊपर होगा और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जायेगा। मगर जनता के सामने एकजुटता के कसीदे पढ़ने वाली कांग्रेस की असल स्थिति क्या है, इसकी झलकी हाल ही में किन्नौर में ही देखने को मिली थी। बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जब किन्नौर पहुंची तो स्थानीय विधायक और युवा कांग्रेस के समर्थक उनके सामने ही आपस में लड़ पड़े। लड़ाई इतनी ज्यादा बढ़ गई पुलिस को बीच में दखल देना पड़ा। किन्नौर विधायक जगत सिंह नेगी ने मंच से अपने संबोधन में यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष निगम भंडारी और यूथ किन्नौर कांग्रेस को जमकर खरी खोटी सुनाई, उन्हें भाजपा की 'बी' टीम तक कह दिया, उन्हें फर्जीवाड़े का अध्यक्ष बताया। दरअसल जगत सिंह होलीलॉज के करीबी है, तो निगम भंडारी सुक्खू गुट के। निगम भंडारी की बढ़ती सक्रियता जगत सिंह नेगी और उनके समर्थकों को खूब खटक रही है। जगत सिंह का मानना है कि निगम और उनके समर्थक कांग्रेस के होने के बावजूद भी उनके खिलाफ काम करते रहे है। बेहद कम समय में निगम भंडारी एक प्रभावशाली युवा नेता के तौर पर उभरे है और पार्टी का एक तबका चाहता है कि निगम ही आगामी चुनाव में पार्टी प्रत्याशी हो। हालाँकि निगम भंडारी किन्नौर में जगत सिंह नेगी सा रुतबा रखते हो, ऐसा बिलकुल नहीं कहा जा सकता। पर उनकी मौजूदगी को नकारा भी नहीं जा सकता। जाहिर है ये दो गुटों का ये मनभेद कांग्रेस की राह मुश्किल कर सकता है। जहाँ तक टिकट का सवाल है तो जगत सिंह नेगी को कोई चुनौती मिलती नहीं दिखती। साथ ही होलीलॉज से उनकी करीबी भी उनके और कांग्रेस टिकट के बीच की दूरी को कम कर देती है। सूरत में ही दिख रही भावी प्रत्याशी की 'सूरत', क्या फीका पड़ेगा तेजवंत का 'तेज' ! किन्नौर में भाजपा की स्थिति भी कांग्रेस से इतर नहीं है। यहां भी टिकट को लेकर दो मज़बूत दावेदार मैदान में है। एक पूर्व विधायक तेजवंत सिंह नेगी और दूसरे है सूरत नेगी। 2017 के चुनाव में भी किन्नौर सीट से ये दाे नेता ही टिकट के चाहवान थे। सूरत नेगी ने पिछले चुनाव में टिकट के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन पार्टी हाईकमान ने पूर्व विधायक तेजवंत नेगी पर ही भराेसा जताया। पर सूरत का टिकट कटने के बाद तेजवंत नेगी को हार का मुंह देखना पड़ा। बताया जाता है कि भाजपा में गुटबाजी नहीं हाेती ताे शायद तेजवंत सिंह नेगी इस वक्त विधायक होते। मगर 2017 के बाद से तेजवंत के लिए सियासी समीकरण बदल गए है दरअसल 2017 में विधानसभा में चुनाव लड़ने के बाद तेजवंत सिंह नेगी काे जयराम सरकार ने साइडलाइन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सीएम का फेस बदलने के साथ -साथ किन्नौर भाजपा का फेस भी बदल गया है। जब भाजपा सत्ता में आई ताे तेजवंत समर्थकों को काफी उम्मीदें थी कि बाेर्ड या किसी निगम में उन्हें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद मिलेगा, मगर उन्हें मायूस होना पड़ा। दरअसल तेजवंत नेगी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समर्थक हैं, जबकि सूरत नेगी को जयराम समर्थक माना जाता है। इसी वजह से ही सूरत नेगी काे वन विकास निगम में उपाध्यक्ष की कुर्सी मिली और तेजवंत की झोली खाली रही। अब भी तेजवंत को ज़्यादा तवज्जो नहीं दी जा रही। इस बार भी तेजवंत और सूरत दोनों ही टिकट की दावेदारी पेश कर चुके है, मगर सियासी माहिर मानते है कि इस बार भाजपा दो बार हार चुके तेजवंत को नहीं बल्कि सूरत नेगी को प्रत्याशी बना सकती है। ऐसे में जाहिर है कि मिशन -2022 से पहले भी भाजपा की गुटबाजी समाप्त होती नजर नहीं आ रही है। सिर्फ ठाकुर सेन नेगी लगा सके है हैट्रिक : किन्नौर के चुनावी इतिहास पर नज़र डाले तो अब तक सिर्फ ठाकुर सेन नेगी ही जीत की हैट्रिक लगा सके है। ठाकुर सेन नेगी 1967 से 1982 तक लगातार चार चुनाव जीते। दिलचस्प बात ये है कि वे तीन बार निर्दलीय और एक बार लोकराज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। फिर वे भाजपा में शामिल हो गए और एक बार 1990 में भाजपा टिकट से भी जीतने में कामयाब हुए। ठाकुर सेन नेगी के अलावा जगत सिंह नेगी ही इकलौते ऐसे नेता है जिन्होंने लगातार दो चुनाव जीते हो। पर क्या जगत सिंह नेगी हैट्रिक लगा पाएंगे या क्लीन बोल्ड होंगे, ये देखना रोचक होगा।
अमरावती उमेश कोल्हे की हत्या के पहले जितने लोगों ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में व्हाट्सएप स्टेटस लगाने वाले लोगों को धमकी दिए जाने के कई मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने नूपुर शर्मा के बयान को समर्थन देने वाले पोस्ट को व्हाट्सएप पर स्टेटस के रूप में लगाया था जिसके बाद उन्हें कई बार धमकी भरे फ़ोन आए है।धमकी भरे फ़ोन के बाद धमकी देने वालों ने माफ़ी मांगने का वीडियो भी बनवाया और उसे व्हाट्सएप पर स्टेट्स लगावाया। ऐसी ही एक धमकी डॉक्टर राठी को आई थी जिसके बाद अब पुलिस ने अमरावती के निवासी डॉक्टर राठी का बयान दर्ज किया है। डॉक्टर राठी ने नूपुर शर्मा के बयान के समर्थन में व्हाट्सएप स्टेट्स लगाया था। बताया जा रहा है कि व्हाट्सएप स्टेट्स लगाए जाने के उन्हें फ़ोन पर धमकी मिली और धमकी देने वाले ने खुद को रहबर हेल्पलाइन का सदस्य बताया था। धमकी भरे फ़ोन के बाद डॉक्टर राठी ने माफ़ी मांगते हुए एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था।
गुड़िया मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बयान पर राजनीति लगातार गरमा रही हैं। शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा महिला मोर्चा पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। पिछले दिनों से ही भाजपा महिला मोर्चा पूरे प्रदेश में इस मामले पर सड़कों पर है और प्रतिभा सिंह से माफ़ी की मांग कर रही है। हालांकि प्रतिभा सिंह का ये कहना है उनका बयान जोड़ तोड़ कर पेश किया गया है। हाल ही में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्षा रश्मिधर सूद गुड़िया के अभिभावकों से मिलने तक पहुंच गई। इस पर शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा महिला मोर्चा पर निशाना साधते हुए कहा ये तब कहा सोयी थी जब एक इनके नेता एक महिला को रात को अपने पास बुलाते है, और जब जोगिंदरनगर में एक महिला की हत्या कर दी जाती है। साढ़े चार साल ये नेत्रियां कुम्भकरण की नींद सोयी रही। इलेक्शन नजदीक देख इस बयान पर राजनीति कर रही है, जबकि उस वक़्त के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तुरंत जांच को सीबीआई को सौंपा था। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ये नेत्रियां मात्र असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है, इससे प्रदेश के असली मुद्दे दबने वाले नहीं है।
जयराम कैबिनेट के मंत्री डॉ राम लाल मार्कण्डेय उन नेताओं में से एक है जिनका जयराम राज में डिमोशन हुआ है। दरअसल 2017 में सरकार गठन के बाद डॉ मार्कण्डेय के पास तकनीकी शिक्षा और जनजातीय विकास के साथ -साथ कृषि जैसा महत्वपूर्ण महकमा भी था, पर 2020 में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उनका पोर्टफोलियो हल्का कर दिया गया। डॉ मार्कण्डेय जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के वर्तमान में विधायक है और फिलवक्त बड़ा सवाल ये ही है कि क्या कैबिनेट में डिमोट हुए डॉ मार्कण्डेय को लाहौल स्पीति की जनता फिर प्रमोट करके विधानसभा भेजेगी ? लाहाैल-स्पीति की ठंडी फिजाओं में हर पांच साल बाद सियासत गर्मा जाती है। इस जिला में विधानसभा की महज एक ही सीट है, जो हर पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन की साक्षी रही है। जाे भी राजनीतिक दल सत्ता में आता है उसी दल काे यहां जीत मिलती रही है,1993 से ऐसा ही चला आ रहा है। लाहाैल-स्पीति विधानसभा सीट पर 1993 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की और सरकार भी कांग्रेस की बनी। 1998 में जब पंडित सुखराम ने कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई तो उनकी पार्टी से लड़े डॉ रामलाल मारकंडा यहाँ से जीते। इसके बाद 2003 में कांग्रेस और 2007 में भाजपा को यहाँ जीत मिली। 2012 के चुनाव में यहाँ कांग्रेस के रवि ठाकुर काे जीत मिली थी और प्रदेश में भी कांग्रेस की ही सरकार बनी। इसी तरह से 2017 के चुनाव में फिर भाजपा के डा.रामलाल मारकंडा काे जीत मिली और वो प्रदेश में जयराम सरकार के कैबिनेट मंत्री भी बने। फिलवक्त तकनीकी शिक्षा और जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ही यहाँ भाजपा के प्राइम फेस है, जबकि कांग्रेस में रवि ठाकुर के अतिरिक्त भी कई नए चेहरे उभर कर आये है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने लाहौल-स्पिति विधानसभा सीट से रवि ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारा था। कांग्रेस के रवि ठाकुर को भाजपा के रामलाल मारकंडा ने 1478 मतों से हराया। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में रवि ठाकुर ने डॉ रामलाल मार्कण्डेय को शिकस्त दी थी। पूर्व विधायक रवि ठाकुर के पिता निहाल चंद भी प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे चुके हैं। वहीं कैबिनेट मंत्री डॉ रामलाल मारकंडा लाहाैल-स्पीति से तीन बार चुनाव जीत चुके है। 1998 में वो हिमाचल विकास कांग्रेस के टिकट पर जीते, जबकि 2007 और 2017 में भाजपा टिकट पर। डा.रामलाल मारकंडा का राजनीतिक सफर एनएसयूआई यानी कांग्रेस के छात्र संगठन से शुरु हुआ था। वे हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में एनएसयूआई के छात्र नेता रह चुके हैं। धीरे-धीरे कांग्रेस में बात नहीं बनी ताे उन्हाेंने 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस से चुनाव लड़ा और जीत भी गए और भाजपा-हिविकां गठबंधन सरकार में मंत्री की कुर्सी भी मिली गई। उसके बाद जब हिमाचल विकास कांग्रेस में बिखराव शुरु हुआ ताे उन्हाेंने भाजपा का दामन थाम लिया। लाहौल स्पीति में पिछड़ी है भाजपा : पिछले साल लाहौल स्पीति में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन फीका रहा था। हालाँकि जैसे -तैसे निर्दलियों की सहायता से पंचायत समिति में अल्पमत में होने के बाद भी भाजपा ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। पर नतीजों के बाद मंत्री राम लाल मारकंडा पर सवाल जरूर उठे। इसके बाद मंडी संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में भी वे भाजपा को लीड नहीं दिलवा पाए थे। इसे भी मंत्री की बड़ी नाकामी के तौर पर देखा गया। अटल टनल पर श्रेय की लड़ाई : अटल टनल राेहतांग के निर्माण से लाहाैल-स्पीति का नाम टूरिज्म सेक्टर में चमक गया है। निसंदेह इससे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। हालांकि राेहतांग टनल निर्माण का प्रस्ताव और शिलान्यास पूर्व की यूपीए सरकार के समय का था, लेकिन ये माेदी सरकार के समय में बन कर तैयार हुई। ऐसे में दोनों राजनैतिक दल इसका श्रेय ले रहे है। श्रेय की ये लड़ाई इस चुनाव में भी देखने को मिल रही है। हाल ही मैं अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने लाहौल में कहा था की कि रोहतांग टनल कांग्रेस की देन है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने पहली किस्त के तौर पर 1355 करोड़ रुपए इसके लिए जारी किए थे, न की वर्तमान प्रधानमंत्री ने। मनमोहन सरकार में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा इसकी आधारशिला रखी गई थी। उन्होंने कहा था कि भाजपा की सरकार ने जहां रोहतांग टनल का नाम बदलकर अटल रोहतांग टनल किया वहीं, सरकार के नुमाइंदों ने कांग्रेस कार्यकाल में हुए टनल की शिलान्यास पट्टिका को भी हटा दिया है, जो शर्म की बात है।
देश में हेट स्पीच के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब सख्त नजर आ रही है। केंद्र सरकार जल्दी ही हेट स्पीच को लेकर सख्त कानून लेकर आने वाली है। सरकार ने इसकी तैयारी भी कर ली है। इस कानून के तहत हेट स्पीच की परिभाषा तय की जाएगी। कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। अब हेट स्पीच को लेकर पैमाना तय होगा। एंटी हेट स्पीच कानून बनाने की तैयारी केंद्र सरकार ने कर ली है इससे हेट स्पीच की परिभाषा तय होगी, केंद्र सरकार सोशल मीडिया पर नफरती कंटेंट रोकने के लिए एंटी हेटस्पीच कानून बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। हेटस्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, अन्य देशों के कानूनों और अभिव्यक्ति की आजादी के तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, इसे जल्द ही सार्वजनिक राय के लिए पेश किया जाएगा, इसमें हेटस्पीच की परिभाषा स्पष्ट होगी, ताकि लोगों को भी यह पता रहे कि जो बात वे बोल या लिख रहे हैं, वह कानून के दायरे में आती है या नहीं। कानून के दायरे में आएगी ये चीज़े विधि आयोग ने हेटस्पीचर अपने परामर्श पत्र में साफ किया है कि यह जरूरी नहीं कि सिर्फ हिंसा फैलाने वाली स्पीच को हेटस्पीच माना जाए, इंटरनेट पर पहचान छिपाकर झूठ और आक्रामक विचार आसानी से फैलाए जा रहे हैं, ऐसे में भेदभाव बढ़ाने वाली और नस्ली भाषा को भी हेटस्पीच के दायरे में रखा जाना चाहिए, इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुलेगा, हेट स्पीच की परिभाषा साफ होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर्स द्वारा फैलाई गईं फेक न्यूज या नफरत भरी बातों से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी, सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भ्रामक फैलाई जाती हैं अब इनके खिलाफ सख्त कानून बनने से कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल जाएगा।
चुनाव नजदीक है और कसौली निर्वाचन क्षेत्र में फिर पुरानी कहानी दोहराने की तैयारी चल रही है। बीते दो चुनाव के नतीजों पर नजर डाले तो कांग्रेस का हाल एक कहावत से समझा जा सकता है, 'हाथ को आया पर मुँह न लगा'। दोनों मौकों पर कांग्रेस जीतते -जीतते हार गई और दोनों ही बार कारण रहा गुटबाजी और भीतरघात। इन दोनों ही मौकों पर प्रत्याशी थे विनोद सुल्तानपुरी। अब फिर चुनाव से पहले कांग्रेस का एक खेमा सुल्तानपुरी को पटकनी देने की तैयारी कर चूका है। हालांकि विनोद निरंतर सक्रिय भी है और अब उनकी पकड़ भी पहले से ज्यादा मजबूत दिखती है, पर विरोधी भी इस बार नए पैंतरे को आजमाते दिख रहे है। कोशिश है कि टिकट वितरण के स्तर पर ही सुल्तानपुरी को पटकनी दे दी जाएं। इसके लिए बकायदा चेहरा तैयार कर लिया गया है। एक अधिकारी वीआरएस के लिए आवेदन कर चुके है और जुलाई के दूसरे सप्ताह में सेवानिवृत होने जा रहे है। माना जा रहा है कि कांग्रेस का एक धड़ा इन्हीं के नाम को आगे बढ़ाएगा। सुलतानपुरी दो मौकों पर चूक चुके है, इस तथ्य को आलाकमान के समक्ष रखा जायेगा और प्रयास रहेगा कि उन्हें टिकट के स्तर पर ही सेटल कर दिया जाएं। उधर विनोद सुल्तानपुरी भी तैयार है। पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए विनोद इस बार कोई चूक नहीं करना चाहते। जाहिर है विनोद का इरादा चुनाव लड़ने का है और वो पीछे हटने के मूड में नहीं है। दिल्ली दरबार में उनकी सीधी पहुंच है सो टिकट पर उनकी दावेदारी फिलहाल इक्कीस है। माहिर भी ये ही मानते है कि विरोधियों के तमाम प्रयासों के बावजूद विनोद फिर टिकट लाने में कामयाब होंगे, फिलहाल तो स्थिति कुछ ऐसी ही है। असल सवाल ये है कि क्या तमाम अंतर्कलह और संभावित भीतरघात के बावजूद विनोद चुनाव जीत पाएंगे, या इस बार फिर इसका लाभ डॉ राजीव सैजल को होगा। तो फिर कमल खिलाएंगे सैजल : 2012 में सुल्तानपुरी महज 24 वोट से हारे तो 2017 में अंतर 442 वोट का रहा। इन दोनों ही मौकों पर कांग्रेस की अंतर्कलह डॉ राजीव सैजल के लिए संजीवनी सिद्ध हुई। अब डॉ सैजल तीन बार से विधायक है और प्रदेश में भी भाजपा सरकार है, ऐसे में सत्ता विरोधी लहर से उन्हें खतरा हो सकता है। पर यदि कांग्रेस एकजुट नहीं रहती है तो सैजल फिर कमल खिलाने में कामयाब होते दिख रहे है।
लाहुल स्पिति में आज भी बुछेन परम्परा करीब छह सौ वर्षो से मनाई जा रही है। स्पिति घाटी के पिन घाटी में इस परम्परा का निर्वहन करने के लिए पांच से छह समूह पीढ़ी दर पीढ़ी लगे हुए है। यह एक धार्मिक मान्यता पर आधारित परम्परा है जो एक थाड0 तोड0 ज्ञालवो नाम के सिद्ध पुरूष पर समर्पित है। कुछ दशकों पूर्व इस परम्परा का निर्वहन करने वाले समूहों की संख्या 20 से अधिक थी,लेकिन अब कई समूहों ने इस परम्परा का अनुसरण करना बंद कर दिया है। स्पिति के पिन घाटी के सगनम गांव में रहने वाले छेतन गटुक ने बताया कि बुछेन का अर्थ होता है बड़ा अध्यात्मिक पुत्र। ये पत्थर तोड़ने की परम्परा है। ज्ञालवो कागयुद परम्परा के स्काॅलर थे। इन्होंने महामुद्रा और महासम्पन्न में शिक्षा हासिल की हुई थी। भोट रवजंग पंचाग के अनुसार थाड0 तोड0 ज्ञलवो का जन्म तिब्बत के उपरी सांग प्रांत ल्हसे में 1385 में हुआ था, जो पंचाग के अनुसार बुड ऑक्स साल का छठा चक्र था। थाड0 तोड0 ज्ञालवो सिद्ध पुरूष होने के साथ साथ एक बहुत ही अच्छे इंजीनियर भी थे। उन्होंने अपने हुनर से कई पुल, नांव और कई स्तूपों का भी निर्माण स्वयं किया था। भवन निर्माण निपुणता के कारण ही थाड0 तोड0 ज्ञालवो को चांग सेम पा कहा जाता था। उस दौर में आसानी से लोग एकत्रित नहीं होते थे तो थाड0 तोड0 ज्ञालवो लोगों को मनोरंजन करने के कार्यक्रम आयोजित करते थे। जब लोग इन कार्यक्रमों को देखने आते थे तो थाड0 तोड0 ज्ञालवो पुल निर्माण के लिए आवश्यक चीजों को चंदे के तौर पर देने की मांग करते थे, जैसे की लोहा, कोयला, लकड़ी आदि दें। थाड0 तोड0 ज्ञलवो रिद्धी बल में काफी मजबूत थे। उन्होंने अपनी अध्यात्मिक शक्तियों का प्रयोग तब किया जब तिब्बत के ल्हासा में भंयकर महामारी फैली थी और इस महामारी को नियंत्रित किया था। जानकार छेतन गटुक ने बताया जाता है कि जब महामारी फैली थी तो कोई भी चिकित्सक वैद्य इसका इलाज नहीं ढूंढ पा रहा था। लोग घरों में ही मर रहे थे। यही रिन्पोछे तत्कालीन राजा थे। उन्हें किसी प्रसिद्ध व्यक्ति ने बताया कि इस बीमारी का इलाज केवल थाड0 तोड0 ज्ञालवो ही कर सकते है। राजा ने अपने दरबार से कुछ लोग थाड0 तोड0 ज्ञालवो के पास भेजे। लेकिन जब लोग थाड0 तोड0 ज्ञालवो के पास पहुंचे और राजा के बुलावे के बारे में बताया। ज्ञालवो ने कहा कि आप चलिए मैं स्वयं राज महल पहुंच जाउंगा। थाड0 तोड0 ज्ञलवो खुद एक गिद्ध पर सवार होकर महामारी को नियंत्रित करने के ल्हासा ल्हासा पहुंच गए। ज्ञालवो को राजा रे रिन्पोछे ने महामारी के बारे में विस्तृत रूम से बताया। ज्ञालपो ने कहा कि इस महामारी का इलाज मैं करता हूं। आप चिंता न करें। इसके बाद थाड0 तोड0 ज्ञालवो महल से बाहर खुले मैदान में चले जाते है। लेकिन कोई भी व्यक्ति घरों से बाहर निकल नहीं रहा था। ज्ञालपो का मानना था जब तक लोगों के दिलों में बैठा हुआ डर नहीं निकलेगा। इस बीमारी से कोई निजात नहीं दिलवा पायेगा। उन्होंने लोगों को घरो से बाहर निकालने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन कोई आ ही नहीं रहा था। फिर ज्ञालपो ने अपनी रिद्धि सिद्धि बल का इस्तेमाल करते हुए एक बार फिर उन्होंने अपनी अध्यात्मिक शक्ति से अपने हाथ की पांच उंगलियों के आधार पर स्वंय को छोड़ चार अँगुलियों से चार अन्य कलाकार बनाए। ऐसे वे पांच कलाकार बनाए और कार्यक्रम पेश किया। जब इन पांचों ने मैदान में कार्यक्रम पेश करके लेागों को हंसाना शुरू किया तो लोगों घरों की खिड़कियों से देख रहे थे कि इन पांच को तो कुछ हो नहीं रहा है। फिर धीरे धीरे लोग अपने घरों से बाहर निकल कर बाहर आने लगे और कार्यक्रम देखने लगे। कुछ मिनटों में सारे लोग घरों से बाहर निकल मैदान में पहुंच गए। यहीं वजह थी कि आज भी बुछेन में पांच ही कलाकार होते। फिर जब भीड़ बढ़ती गई तो थाड0 तोड0 ज्ञालवो ने लोगों को मणी जाप करवाया जो उस वक़्त पूजा पाठ का अहम हिस्सा था। पूरी मान्यता यह है कि कोई भी महामारी या आपदा होती है तो उसके पीछे कोई कारक होता है। थाड0 तोड0 ज्ञालवो महामारी के कारण को निकालना चाहते थे। भोटी भाषा में कारक को नेदक कहते है। फिर उन्होंने लोगों को कहा कि जो लोग महामारी की चपेट में उनमें नेदक भी होगा। मुझे नेदक चाहिए। उन्होंने अपनी सिद्धी बल से एक पत्थर ढूंढा। इसके बाद उन्होंने उस नेदक को उक्त पत्थर में मंत्रों के साथ समा दिया। थाड0 तोड0 ज्ञालवो के पास एक आयु और फुरवा नमक दो अस्त्र से उक्त पत्थर को तोड़ दिया। यही वजह है कि बुछेन में लोग आज भी पत्थर तोड़ते है। अब बुछेन में छाती पर पत्थर तोड़ते है। जैसे जैसे समय बीतने लगा कि बड़े से बड़ा पत्थर बुछेन में इस्तेमाल होने लगा। अब भी बुछेन परम्परा को इसलिए मनाया जाता है कि गांव में कुछ होने वाला हो या फिर कुछ अप्रिय घटित हो गया हो तो मंत्रो उच्चारण से उस पत्थर में समा देते है। बुछेन में पांच सदस्य होते है इनमें सेदो उन्पा जोकि हंसाने का कार्यक्रम पेश करते है। एक मुख्य सदस्य होता है जिसे मुख्य बुचेन यानि मेमे बुचेन। इसके साथ ही णांवा भी होते है जो हेल्पर की तरह होते है। जब यह बुचेन का प्रर्दशन करते है तो काफी लाभप्रद प्रवचन देते है।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मैदान में अब सिर्फ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा ही रह गए हैं। चुनाव के लिए कुल 96 लोगों का नॉमिनेशन अलग-अलग कारणों से रद्द कर दिया गया है। द्रौपदी मुर्मू और यशवंत सिन्हा के नॉमिनेशन को ही वैध माना गया है। राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को चुनाव होना है। 21 जुलाई को इसके नतीजे आएंगे। दरअसल भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को ख़त्म हो रहा है और संविधान के मुताबिक़ नए राष्ट्रपति का चुनाव उससे पहले पूरा हो जाना चाहिए। राष्ट्रपति को चुनने वाले इलेक्टोरल कॉलेज में संसद के दोनों सदनों के अलावा विधानसभा और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य होते हैं। सत्ताधारी एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा उम्मीदवार हैं। दोनों ने अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में बीते दिनों द्रोपदी मुर्मू ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया। बद्दी के किशनपुरा स्थित एक निजी होटल में उन्हें अपना समर्थन देने के लिए प्रदेश भाजपा विधायक दल ने बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में मुर्मू विशेष रूप से पहुंची थीं। यहां उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पार्टी विधायकों, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने अपना समर्थन दिया। अब तक अधिकतम पार्टियों ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। अकाली दल ने भी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। अब तक भाजपा के अलावा बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर, शिरोमणि अकाली दल, जेडीयू, एआईएडीएमके, लोक जन शक्ति पार्टी, अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले), एनपीपी, एनपीएफ, एमएनएफ, एनडीपीपी, एसकेएम, एजीपी, पीएमके, एआईएनआर कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी, यूडीपी, आईपीएफटी, यूपीपीएल जैसी पार्टियों ने समर्थन दे दिया है। विपक्ष में होने के बाद भी बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर, अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिया है। इन सभी के पास 6 लाख वैल्यू से ज्यादा के वोट हैं। मुर्मू के साथ संख्या बल ज़रूर दिख रहा है मगर यशवंत सिन्हा के आत्मविश्वास में भी कमी नज़र नहीं आ रही। उन्हें अब भी उम्मीद है कि अंत तक उनके समर्थन में और लोग भी आगे आएंगे। यूँ तो राष्ट्रपति चुनाव के लिए ज्यादातर बड़ी पार्टियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन अभी भी कुछ दलों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। पंजाब और दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि उनका समर्थन किसे मिलेगा। आप के 10 राज्यसभा सांसद भी हैं। इसके अलावा टीडीपी, झामुमो ने भी अब तक कुछ साफ नहीं किया है। शिवसेना में भी आंतरिक कलह के चलते अब तक किसी भी उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि, भाजपा के साथ सरकार बनाने वाले विधायक और ज्यादातर सांसद एनडीए के उम्मीदवार को सपोर्ट कर सकते हैं। ऐसे में यशवंत सिन्हा को आम आदमी पार्टी, टीडीपी और झामुमो से बड़ी उम्मीदें हैं। अगर ये दल सिन्हा को समर्थन दे देते हैं तो वह द्रौपदी मुर्मू के कुछ हद तक करीब पहुंच सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सोमवार सुबह बड़ा सड़क हादसा पेश आया है। हादसे में अभी तक 12 लोगों की मौत होने की सुचना प्राप्त हुई है। वहीं 3 लोग घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। आसपास के लोगों के साथ मिलकर बचाव अभियान चलाया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है। तहसीलदार सैंज हीरालाल ने बताया कि राहत कार्य जारी है। जानकारी के अनुसार, कुल्लू जिले के सैंज के शैंशर में एक निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। बस जांगला गांव से करीब 200 मीटर दूर सड़क से नीचे खाई में गिर गई। बताया जा रहा है कि शव बस के अंदर फंसे हुए हैं। जिन्हें निकालने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद ही मृतकों का सही आंकड़ा सामने आएगा। यह हादसा सोमवार की सुबह करीब 8:45 बजे हुआ। बस शैंशर से औट जा रही थी। बस में कुल 15 से अधिक लोग सवार थे। वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बस हादसे पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि पूरा प्रशासन मौके पर है और बचाव कार्य में लगा है।
'कुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है' 2017 में प्रो प्रेम कुमार धूमल की हार ने हिमाचल भाजपा की तस्वीर तो बदली ही, कई नेताओं की तकदीर भी बदल कर रख दी। एकाध अपवाद छोड़ दें तो धूमल निष्ठावान जयराम राज में हाशिए पर है। कुछ निष्ठा बदल चुके है तो कुछ हालात से समझौता करते दिख रहे है। हालांकि प्रो साहब के सियासी रसूख में कोई कमी नहीं दिखती। समीरपुर में अरदास लेकर पहुंचे लोगों का हुजूम बयां करता है कि अलबत्ता सीएम न सही पर प्रोफेसर अब भी भाजपा की सियासत के हेडमास्टर जरूर है। इस पर उनके सुपुत्र और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का बढ़ता कद भी निष्ठावानों को ठंडक देता है। पर जो सुकून प्रदेश की सत्ता में है वो भला और कहाँ ? प्रो धूमल वो शख्स है जिनकी पकड़ प्रदेश के हर हलके में है। अब भी धूमल हमीरपुर से निकलकर कहीं और जाते है तो एक अदद मुलाकात के लिए उमड़ी भीड़ ये साबित करने के लिए काफी है कि उनका अब भी कोई सानी नहीं है। पर माहिर मानते है कि बेटे अनुराग की ऊँची सियासी उड़ान ने धूमल साहब को अब जमीन पर ही रहने को मजबूर कर दिया है। यानी अब प्रोफेसर की मुख्यधारा की राजनीति से विदाई तय है। अब वर्तमान भी अनुराग है और भविष्य भी अनुराग। उधर विरोधी खेमे ने उपेक्षा का दंश झेल रही धूमल ब्रिग्रेड को पूरी तरह सेटल करने की तैयारी कर ली है। जहाँ -जहाँ धूमल के निष्ठावान ताकतवर है, वहां - वहां समानांतर गुट तैयार है। माहिरों के अनुसार योजना ये है कि टिकट वितरण के स्तर पर ही इन्हें दौड़ से बाहर कर दिया जाएं। मसलन रविंद्र रवि, तेजवंत नेगी, ठाकुर गुलाब सिंह सहित कई नेताओं का टिकट काटने की बिसात तैयार है। धूमल गुट के कई नेताओं को तो बोर्ड निगमों तक में एडजस्ट नहीं किया गया है। पर प्रश्न ये ही है कि क्या ऐसा करके मिशन रिपीट मुमकिन हो पायेगा ? ईमानदारी से कहे तो शायद नहीं। बेशक धूमल गुट कुछ कमजोर हुआ है लेकिन इतना भी नहीं कि उसे दरकिनार कर चुनाव जीता जा सके। वहीँ उपेक्षित धूमल निष्ठावान इसी उम्मीद में है कि धूमल न सही अनुराग ही प्रदेश में लौट आएं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या ऐसा होना मुमकिन है ? माहिर मानते है कि ऐसा हो सकता है। दरअसल हिमाचल विधानसभा चुनाव जीतना जितना भाजपा के लिए जरूरी है उतना ही जगत प्रकाश नड्डा के लिए भी। राष्ट्रीय अध्यक्ष के गृह राज्य में पार्टी हारी तो सवाल उठना लाज़मी होगा, ऐसे में हमेशा जयराम ठाकुर की ढाल बनने वाले नड्डा क्या अनुराग पर भी मेहरबान हो सकते है, ये ही यक्ष प्रश्न है। जानकार मान रहे है कि यदि चुनाव से पहले भाजपा को मिशन रिपीट खतरे में दिखा तो पार्टी 'असम फार्मूला' के साथ मैदान में उतर सकती है, यानी बिना सीएम फेस। इस फॉर्मूले से जाहिर है दोनों गुटों को सीएम पद की आस रहेगी और भीतरघात और अंतर्कलह को कम किया जा सकेगा। और नतीजे अगर पार्टी के पक्ष में आएं तो बदलाव भी मुमकिन होगा। हिमाचल की सियासत में प्रो प्रेम कुमार धूमल निसंदेह असरदार है और अनुराग ठाकुर का सियासी वजन लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में बाप -बेटे की ये जोड़ी भाजपा के मिशन रिपीट के लिए बेहद अहम है। चुनाव से पहले अभी हिमाचल भाजपा की सियासत में कई उतार चढ़ाव आने बाकी है। अपने हर निर्णय से चौकाने वाले पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी न जाने हिमाचल में कौन सा दांव खेल दे।
हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में गुड़िया निर्मम हत्या और दुष्कर्म मामला 5 साल बाद फिर गर्म आता हुआ नजर आ रहा है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह द्वारा गुड़िया मामला को छोटा मामला बताने पर भाजपा महिला मोर्चा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन किए जा रहे हैं वहीं रविवार को भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रशिम धर सूद गुड़िया के गांव शिवगिरि पहुंच गई और वहां पर उनके माता-पिता से बात की उनसे बात करते हुए एक वीडियो जारी किया गया जिसमें गुड़िया के पिता ने प्रतिभा सिंह के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है । साथ ही प्रतिभा सिंह पर झूठ बोलने के आरोप लगाए हैं। गुड़िया के पिता ने कहा कि प्रतिभा सिंह ने गुड़िया मामले को मामूली घटना का बयान दिया है जिससे उन्हें दुख हुआ है प्रतिभा सिंह ने यह गलत बात की है उनकी बेटी हो या किसी की हो भी ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए उनकी इस तरह की बातें सुनकर दुख और परेशान होते हैं प्रतिभा सिंह झूठ बोल रही थी कि जब गुड़िया की मौत हुई तो उनके घर वे दूसरे दिन पैदल पहुंचे जबकि वह 7 दिन बाद आई थी। वहीं भाजपा अध्यक्ष रश्मि धर सूद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह झूठ पर झूठ बोल रही है और आज वह गुड़िया के परिजनों से दोबारा से मिलने के लिए उनके घर आई है प्रतिभा सिंह ने गुड़िया मामले को एक छोटी सी घटना कहा था अगर यह मामूली सी बात होती तो पूरा प्रदेश में चक्का जाम नहीं होता लोग सड़कों पर नहीं उतरते और सीबीआई से इस मामले की जांच ना होती। उन्होंने कहा कि प्रतिभा सिंह आप कह रही है कि मैं यहां पर मिलने पहुंची थी लेकिन गुड़िया के पिता कह रहे हैं। कि 7 दिन बाद वह यहां पर आई है जबकि भाजपा शुरू से ही गुड़िया के ऊपर परिवार वालों के साथ खड़े हैं और उम्मीद है कि जल्द गुड़िया के परिवार वालों को न्याय भी मिले।
विवादों में रही हिमाचल पुलिस भर्ती परीक्षा का फिर से आज प्रदेश भर में आयोजित की गई है। परीक्षा के लिए शिमला शहर में 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए है।जहा अभ्यर्थी सुबह 10 बजे से पहुचने शुरू हो गए है और पुलिस द्वारा चेकिंग के बाद ही परीक्षा केंद्रों में भेजा गया। परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है । और किसी भी तरह की चीजें अंदर अभ्यार्थियों नहीं ले जा सकते हैं यहां तक कि फोन भी बाहर ही रखे जा रहे हैं ।डीएसपी शिमला कमल वर्मा ने कहा कि पुलिस भर्ती परीक्षा का आयोजन आज करवाया जा रहा है और शिमला शहर में 11 केंद्र इसके लिए बनाए गए हैं कुल अभ्यार्थी 5144 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे अभ्यार्थियों को पहले ही रोल नंबर भेज दिए गए हैं और कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा का आयोजन किया जाएगा परीक्षा केंद्रों के अंदर सीसीटीव कैमरे से नजर रखी जा रही है इसके अलावा वीडियोग्राफी भी की जा रही है। दोपहर 1 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद परीक्षार्थी बाहर आये तो उन्होंने कहा कि पिछली बार पेपर लीक होने से वह काफी मायूस हैं क्योंकि पिछली बार उन्होंने परीक्षा उतीर्ण कर ली थी। लेकिन पेपर लीक होने के चलते यह परीक्षा रद्द कर दी गई और आज दोबारा से परीक्षा आयोजित की गई इस बार पिछले बार के मुकाबले पेपर काफी कठिन था इस बार पेपर लीक होने का डर नहीं सता रहा है अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा को लेकर काफी ज्यादा तैयारियां की थी। लेकिन पेपर लीक हो गया और अब दोबारा से पेपर लीक होने की संभावना नही लग रही।अभ्यर्थियों ने पिछली बार उनका चयन हो गया था और पिछले कल से ट्रेनिंग आरम्भ हो जानी थी लेकिन अब दुबारा से परीक्षा दे रहें है।अब पता नही है कि इस बार परीक्षा में उतीर्ण होंगे य नही पता नही।वहीं कुछ अभ्यर्थियों ने कहा कि वह आहत हैं कि पिछली बार की परीक्षा रद्द हो गयी अब इस बार चयन का पता नही।उन्होंने कहा काफी मेहनत और कोचिंग के बाद परीक्षा उतीर्ण की थी परन्तु वहीं अब दो माह बाद फिर परीक्षा दी है चयन का कह नही सकते।
भीम आर्मी भारत एकता मिशन के राष्ट्रीय संयोजक चंद्रशेखर रावण की राजस्थान में गिरफ्तारी पर हिमाचल भीम आर्मी भड़क गई है ओर राजस्थान की कांग्रेस सरकार को उन्हें जल्द रिहा करने की चेतावनी दी है और उन्हें रिहा नही किया जाता है तो हिमाचल में कांग्रेस के खिलाफ भी मोर्चा खोलने की बात कही है। चन्द्रशेखर की रिहाई को लेकर शिमला में भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेश अध्यक्ष रवि कुमार दलित ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्पति को ज्ञापन भेजा। और जल्द रिहाई की मांग की है। रवि कुमार दलित ने कहा कि राजस्थान के अंदर कांग्रेस सरकार निरंकुश हो गई है। पिछड़े लोगों की आवाज उठाने वाले चंद्रशेखर रावण को गिरफ्तार किया गया है जबकि वह शांतिपूर्वक सी एच ए कर्मचारियों के समर्थन में वहां पर पहुंचे थे । गहलोत सरकार ने वादा किया था कि उन्हें पक्का किया जाएगा लेकिन अब उन्हें नौकरी से निकालने की पूरी तैयारी कर चुके हैं इसी बात को लेकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया जिस का कड़ा विरोध जताते हुए एसडीएम शिमला शहरी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया है और जल्द से जल्द बिना शर्त चंद्रशेखर रावण को छोड़ने की मांग की गई है अगर जल्द से जल्द उन्हें नहीं छोड़ा गया तो यह लड़ाई राजस्थान में ही नहीं पूरे हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का विरोध कर लड़ी जाएगी पूरी तरह से कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया जाएगा।
एंकर।। शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के परिणाम हिमाचल कर्मचारी आयोग द्वारा सात माह पहले घोषित कर दिया गया है लेकिन सात माह बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति नही मिल पाई है। जिसके चलते अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान कर दिया है। रविवार को शिमला में पत्रकार वार्ता कर सरकार को जल्द नियुक्तियां देने की मांग की।आचार्य हीरा शर्मा ने कहा कि शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 का परिणाम निकले 7 महीने बीत गए है लेकिन अभी तक नियुक्ति नही दी गई है। पहले ही इसका परिणाम 1 साल बाद निकाला गया।और अब नियुक्ति में 7 महीने बीत गए हैं ऐसे में शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के अभ्यार्थी मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य भी मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये मामला कोर्ट में है और अब 7 जुलाई को सुनवाई है। जिसमें सरकार को अपना पक्ष रखना है। शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के कुछ अभियार्थी ने R&P नियम को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की है ।ओर R&P नियम को गलत बताया है । लेकिन इसमें सरकार से जवाब तलब किया गया है। अब 7 जुलाई वाली सुनवाई में सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखे ।और इसमें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कोई ऐसा ठोस कदम उठाए ।ताकि जो 7 महीने से नियुक्तियां नहीं हुई है वह इसी महीनें में हो। यदि नियुक्तियां जल्दी नहीं हुई तो शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के अभ्यार्थी आने वाले समय में सड़कों पर उतर कर उग्र धरना प्रदर्शन करेंगे।
शिमला के संजोली कॉलेज में स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) हिमाचल प्रदेश व युवाह (YOUVAH) संस्था की ओर से अंगदान के विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 60 प्रतिभागियो ने अंग दान करने की शपथ ली।इस मौके पर स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) हिमाचल प्रदेश के नोडल अधिकारी व आईजीएमसी के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ पुनीत महाजन ने अंगदान के विषय में प्रतिभागियों को अवगत करवाया।उन्होंने बताया कि मरने के बाद भी व्यक्ति अपने आप को दूसरे के शरीर में जिंदा रख सकता है यह अंगदान से संभव हो सकता है । अंगदान से व्यक्ति एक नहीं बल्कि 8 लोगों का जीवन बचा सकता है।वहीं दूसरी ओर देश में हर साल करीब दो लाख लोगों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। बदलती जीवन शैली के चलते ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय की बीमारी, ब्रेन स्ट्रोक व फेफड़े की बीमारियां बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से किडनी हॉर्ट और लीवर बड़ी संख्या में फेल हो रहे हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए कहां अस्पताल में इलाज करने वाले डॉक्टर मरीज को हर संभव मेडिकल इलाज उपलब्ध करवाते हैं। इसके बावजूद अगर मरीज में इंप्रूवमेंट नहीं होती है और मरीज ब्रेन डैड की स्थिति में पहुंच जाता है तभी अंगदान के बारे में तीमारदारों को अवगत करवाया जाता है। तीमारदारों की रजामंदी के बाद ही मरीज के शरीर से अंग निकाले जाते हैं। साथ ही कई बार तीमारदारों की धारणा होती है कि ब्रेन डेड होने के बाद भी मरीज वापस जिंदा हो सकता है, उन्होंने बताया कि मरीज कोमा से वापस आ सकता है लेकिन ब्रेन डेड होने के बाद उसका रिकवर होना असंभव है। वही लोगों को लगता है कि अमीर मरीजों की जान बचाने के लिए ब्रेन डेड की स्थिति में चल रहे मरीज से अंग लिए जाएंगे जबकि निकाले गए अंगों को दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित करने से पहले कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। अंग दाता और अंग लेने वाले मरीज के ब्लड सैंपल मैच के जाते हैं, टिशु टाइपिंग, ऑर्गन साइज, मेडिकल अर्जेंसी, वेटिंग टाइम और भौगोलिक स्थिति के आधार पर दान किए गए अंग दूसरे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट किए जाते हैं।अस्पताल के किसी भी वार्ड के आईसीयू में अगर कोई मरीज ब्रेन डेड की स्थिति में पहुंचता है तो ब्रेन डेथ कमेटी एक्टिवेट हो जाती है।यह कमेटी आगामी 36 घंटे के भीतर मरीज की पूरी तरह से मॉनिटरिंग करती है पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही मरीज को ब्रेन डेड डिक्लेअर किया जाता है। उन्होंने कहा की युवा अवस्था में जहां आजकल के युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं वही इस संस्था के युवा स्वस्थ समाज बनाने में अपनी भागीदारी दे रहे हैं। कार्यक्रम में युवा संस्था के अध्यक्ष सुमित ठाकुर, कार्यकारी निदेशक ललित कुमार डोगरा, संयोजक सुधांशु ठाकुर, महासचिव कपिल देव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सिद्धांत चौहान, उपाध्यक्ष साक्षी धीमान, संयुक्त सचिव हर्षदीप कौर व व रवीना खत्री, कोषाध्यक्ष भार्गव तोमर, सहयोगी कोषाध्यक्ष नेहा शर्मा, मीडिया प्रभारी दीक्षित, कार्यक्रम प्रभारी जय राज, सहयोगी कार्यक्रम प्रभारी रितु सहित सोटो के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार और प्रोग्राम असिस्टेंट भारती कश्यप मौजूद रही।
--बैठक में शामिल होंगे भाजपा के शीर्ष नेता भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, सह प्रभारी संजय टंडन और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा ने शनिवार को हैदराबाद में शुरू हुई दो दिवसीय भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लिया। हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, 19 राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कश्यप ने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर में हुए विधानसभा चुनावों, कुछ निकाय चुनावों, रामपुर, आजमगढ़ के लोकसभा उपचुनावों और त्रिपुरा के विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को भारी जीत मिली है। उन्होंने कहा कि अभी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, आज पूरी दुनिया की आर्थिक विकास दर औसतन 6% है। वहीं, भारत की अर्थव्यवस्था 8.7% की दर से आगे बढ़ रही है। यह भी हमारी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। बूथ को मजबूत करना बहुत जरूरी है। बूथ अध्यक्ष और बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क हमारे लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि वे कार्यकर्ता हैं जो क्षेत्र में हमारी बात घर घर पहुंचा सकते हैं और अपनी बात सबके सामने रख सकते हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हमारे लिए एक बड़ी सीखने की प्रक्रिया है। यह 2022 विधानसभा चुनावों में हमारी जीत का मार्ग प्रशस्त करेगी।
मणिपुर के नोनी जिले में 29 जून को हुए भूस्खलन में अब तक 81 लोग लापता हैं। जबकी 18 टेरिटोरियल आर्मी जवानों के शवों का रेस्क्यू किया गया है। यहां फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव का काम जारी है। इस बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने मंत्रियों के साथ घटनास्थल का दौरा किया और बचाव अभियान की समीक्षा की। सीएम एन बीरेन सिंह ने मरने वालों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। गौरतलब है कि मणिपुर में बुधवार यानी 29 जून को देर रात नोनी जिले में तुपुल रेलवे स्टेशन पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। घटना बुधवार आधी रात के करीब उस वक्त हुआ जब जिरीबाम से राजधानी इंफाल तक बनने वाली रेलवे लाइन की सुरक्षा के लिए टेरिटोरियल आर्मी का एक कैंप वहां तैनात था। दरअसल जिरीबाम को इंफाल से जोड़ने के लिए एक रेलवे लाइन का निर्माण हो रहा था जिसकी सुरक्षा के लिए 107 टेरिटोरियल आर्मी के जवानों को तैनात किया गया था. इस भूस्खलन में कई जवान दब गए। सेना ने फंसे लोगों के बारे में बात करते हुए जानकारी दी की फिलहाल बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू अभियान के तहत मलवे में फंसे लोगों को बचाया जा रहा है। वहीं इस भूस्खलन में घायल हुए लोगों का इलाज नोनी आर्मी मेडिकल यूनिट में किया जा रहा है। भारतीय सेना द्वारा गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को निकालने का कार्य जारी है।
कन्हैलाल हत्याकांड में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उदयपुर के टेलर कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच कर रही NIA ने इस मामले में नया खुलासा किया है। NIA की पूछताछ में सामने आया कि इस हत्याकांड में मोहम्मद गौस और रियाज के अलावा कुल पांच लोग शामिल थे। टेलर कन्हैयाला की हत्या को पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया था। वहीं वारदात के दौरान किसी गड़बड़ी से बचने के लिए एक बैकअप प्लान भी बनाया गया था, जिसमें तीन लोग शामिल थे। हत्या को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने मीटिंग की थी। कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच कर रही NIA ने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपियों मोहम्मद गौस और रियाज के दो साथियों मोसिन और आसिफ को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की। इन दोनों ने NIA की टीम को बताया कि हत्या के बाद मोहम्मद गौस और रियाज को एक सेफ पैसेज देने के लिए बैकअप प्लान भी तैयार था। इस बैकअप प्लान में तीन लोग शामिल थे। प्लान के मुताबिक, मोसिन और उसका साथी आसिफ कन्हैयालाल की दुकान से थोड़ी दूरी पर खड़े थे। वहीं उनका एक अन्य साथी स्कूटी पर नजदीक मौजूद था।
दिल्ली से जबलपुर जा रहे स्पाइसजेट के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है। बताया गया कि जब विमान ने उड़ान भरी तो कुछ ही देर बाद विमान के अंदर काला धुंआ दिखाई देने लगा। धुंआ देखने के बाद सभी पैसेंजर पैनिक में आ गए और पायलट ने वापस मुड़कर दिल्ली में लैंड करने का फैसला लिया। सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। बताया गया है कि स्पाइसजेट के इस विमान में 50 से अधिक यात्री सवार थे। जब प्लेन करीब 5 हजार फीट की ऊंचाई पर गया तो अचानक स्मोक नजर आने लग। यात्रियों को पहले तो समझ नहीं आया कि ये सब क्या हुआ, लेकिन जैसे ही धुआं बढ़ता गया, लोग परेशान होने लगे। लेकिन जब पायलट ने सुरक्षित विमान की लैंडिंग दिल्ली एयरपोर्ट पर कराई तो लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान लोगों को विमान में हाथ वाले पंखों की मदद से धुएं को दूर करते हुए भी देखा गया। फिलहाल विमान को रनवे में खड़ा किया गया है, जहां उसकी जांच की जा रही है।
हिमाचल में लगातार बारिश का कहर जारी रहा। जिला चम्बा के साथ लगती ग्राम पंचायत सरोल तथा हरिपुर में बारिश के कारण भरी मात्रा में पानी व मलबा लोगों के घरो में घुस गया। लोगो को जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। इसके अलावा खेतो में भी पानी व मालवा आने से मक्की की फसलों को काफी नुकसान हुआ। इससे पहले लोग कुछ समझ पाते वे पहाड़ी की ओर भागने लगे। इस हादसे में अभी तक किसी तरह का जानी नुक्सान होने की कोई सुचना नहीं है। वीरवार को हुई बारिश के कारण चम्बा - पठानकोट एनएच् पर चनेड , उदयपुर तड़ोली में मालवा सड़को पर आ गया। जिस कारण मार्ग पर करीब आधा घंटा वाहनों की आवाजाही बंद रही। इसके अलावा चम्बा-सुंडला-सलूणी मार्ग पर कैला मोड़ पर डंगा गिर गया। जिसके कारण वहां से गुजर रही कार का एक हिस्सा लटक गया। इसके अलावा शहर के कई क्षेत्रो में भी काफी नुक्सान हुआ।
दिल्ली में भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए मॉनसून की बारिश राहत लेकर आ गया है। राजधानी में मॉनसून की शुरुआत के साथ ही भारी बारिश हो रही है। शहर के जिन हिस्सों में आज बारिश हुई उसमें ईस्ट ऑफ कैलाश, बुराड़ी, शाहदरा, पटपड़गंज, आईटीओ क्रॉसिंग और इंडिया गेट शामिल हैं। इन इलाकों में आज तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। IMD की मानें को राजधानी में कल रात यानी 29 जून से ही मौसम में बदलाव नजर आ गया था और आज यानी 30 जून की सुबह दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में बादल छाए हुए हैं। राजधानी में गुरुवार सुबह से कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हो रही है। फिलहाल दिल्ली के द्वारका से लेकर गाजियाबाद में झमाझम बारिश हो रही है, वहीं दूर के कईं इलाकों में बादल छाए हुए हैं और किसी भी वक्त बादल बरस सकते हैं। शहर के कुछ हिस्सों से लगातार हुई बारिश के कारण जलमग्न सड़कें दिखाई दे रही हैं, वहीं बारिश के कारण ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी यात्रियों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. बता दें कि मौसम विभाग ने आज सुबह एक ट्वीट में शहर में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की पुष्टि की है। IMD ने गुरुवार को शहर के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और शुक्रवार को हल्की बारिश की चेतावनी भी दी है।
अमेरिकी करेंसी डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 13 पैसे मजबूत होकर 78.90 प्रति डॉलर पर खुला है। इंटरबैंक फॉरेन करेंसी बाजार में रुपया ऊंचाई में 78.90 और नीचे में 78.94 तक गया। पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 79.03 के निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशों में डॉलर में आई मजबूती और विदेशी पूंजी की सतत निकासी से रुपये में गिरावट जारी बनी हुई है। रुपये में इस महीने में अभी तक 1.97 फीसदी की गिरावट आ चुकी है जबकि इस साल की शुरुआत से रुपये का मूल्य 6.39 फीसदी घट चुका है। इस बीच, छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.13 फीसदी की तेजी के साथ 104.64 पर आ गया है।
भारत सरकार ने देशभर की पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में दूरदर्शी निर्णय किया है। इसके तहत भारत सरकार ने हर पंचायत में अगले आम चुनाव से पहले प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटी (पैक्स) का गठन करने और उसे एक सॉफ्टवेयर के जरिये उसका डिजिटलाइजेशन करने की योजना बनाई है। इसी क्रम में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने देशभर के 63000 पैक्स का कम्प्यूटरी करण किए जाने को मंजूरी दे दी है। इसके तहत भारत सरकार करीब 2516 करोड़ खर्च करेगी। जिसे 2024 तक बढ़ाकर प्रत्येक पंचायत तक ले जाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल आम किसानों को फायदा होगा बल्कि इससे देश कि अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अनुराग ठाकुर के मुताबिक देश की समस्त सहकारी संस्थाओं को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। जिससे घपला और धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सकेगी। वहीं भारत सरकार सहकारिता सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम कर रही है जिसके तहत सरकार राष्ट्रीय सहकारिता विश्वविद्यालय बनाने की योजना तैयार कर रही है। फिलहाल सरकार इसके लिए विशेषज्ञयों की राय ले रही है। इसमें सहकारी क्षेत्र को लेकर ही पढ़ाई होगी। कृभको और अमूल और अन्य सहकारी संसथाओं को आटा सहित कई अन्य उत्पाद बेचने की इजाजत दी जाएगी। ये संस्थाएं जैविक उत्पाद बेचेग। इससे अमूल या अन्य सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों की कमाई बढ़ेगी।
दिल्ली सरकार ने गांवों के विकास को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवालने कहा कि एक विधानसभा के अंदर जितने गांव हैं, उन सभी के बजट को मिलाकर विकास कार्य किए जा सकेंगे। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के गांवों का विकास करने के लिए हर गांव में दो करोड़ रुपए के विकास कार्य करने की योजना की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस योजना के तहत ऐसी संपत्ति जो कई गांव की है, उनका इस स्कीम के तहत रखरखाव नहीं हो पा रहा थ। लेकिन अब उन गांवों के बजट को मिलाकर खर्च किया जा सकेगा। केजरीवाल सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर इस समस्या को दूर कर दिया है। अब अगर गांव मिलकर कोई मांग करते हैं तो बजट उनको दे दिया जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के गांवों का विकास करने के लिए हमने कुछ साल पहले स्कीम निकाली थी कि हर गांव में दो करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए जाएंगे। वहां के लोग बताएंगे कि यहां पर सड़क बना दो, यहां नल लगा दो और यहां चौपाल बना दो। इसका मतलब जो लोग बताएंगे, हम वह काम करेंगे।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद से उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद बीजेपी खेमे में हलचल और तेज हो गई है। उद्धव के सीएम की कुर्सी खाली करने के साथ ही बीजेपी खेमे में खुशी की लहर है। इस बीच सरकार बनाने की भी तैयारी की जा रही है। आज बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक ( होगी जिसमें सरकार बनाने की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। 2 जुलाई से पहले सरकार गठन को लेकर तैयारी की जा रही है। बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में आगे की रणनीति तय होगी। जानकारी के मुताबिक 1 या 2 जुलाई को बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। गौरतलब है कि शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की बगावत से बने सियासी संकट के बीच उद्धव ठाकरे की कुर्सी जा चुकी है। कल तक उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के सीएम थे लेकिन अब वो कार्यवाहक सीएम बन गए हैं। ऐसे में अब बीजेपी सरकार बनाने की कवायद में पूरी तरह से जुट गई है। आज सुबह 11 बजे देवेंद्र फडणवीस के घर कोर ग्रुप की बैठक होगी। महाराष्ट्र बीजेपी प्रभारी सीटी रवि बैठक में मौजूद रहेंगे। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बैठक में चर्चा होगी।
महाराष्ट्र में बड़े सियासी बदलाव के साथ उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सियासी संकट के दौरान राज्यपाल और पार्टी नेताओं के बीच तकरार जैसी स्थिति भी बनी। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने जब उद्धव ठाकरे को फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया तो शिवसेना के नेता के तेवर कड़े हो गए। हालांकि पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी लेकिन फ्लोर टेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। बुधवार को पार्टी के नेता संजय राउत भी भड़क उठे थे। उन्होंने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक तक करार दिया था। दरअसल, महाराष्ट्र के राज्यपाल ने बुधवार 29 जून को कहा था कि उद्धव सरकार गुरुवार सुबह 11 बजे फ्लोर टेस्ट का सामना करें, जिसके बाद शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा था कि संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खुद सीएम ने भी इस फैसले को लेकर अप्रत्यक्ष तौर पर नाराजगी जताई थी।
कुल्लू में आप के शक्ति प्रदर्शन ने भाजपा और मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर की नींद जरूर उड़ा दी होगी। जिस तरह का जनसैलाब आप की तिरंगा यात्रा में दिखा अगर वो वोटों में तब्दील हो पाया तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती है। दरअसल जिला की चार विधानसभा सीटों में से तीन पर भाजपा का कब्जा है और मनाली विधायक गोविन्द सिंह ठाकुर वर्तमान में मंत्री भी है। जबकि कुल्लू सदर सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। पिछले साढ़े चार सालों में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद कुल्लू में भाजपा कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पाई है। मंडी संसदीय उपचुनाव में भाजपा की हार का प्रमुख कारण भी जिला कुल्लू में पार्टी का लचर प्रदर्शन था। तब चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को बढ़त मिली और ये ही भाजपा की हार का कारण बना। नतीजों की कसौटी पर मंत्री गोविन्द फेल हो गए। ये ही कारण है कि उपचुनाव नतीजों के बाद जब मंत्रिमंडल फेरबदल के कयास लग रहे थे तब गोविन्द सिंह ठाकुर का मंत्रिमंडल से पत्ता काटने की चर्चा जोरों पर थी। हालांकि तब फेरबदल नहीं हुआ। इससे पहले शहरी निकाय चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन ठीक ठाक ही था। तब कुल्लू नगर परिषद पर कांग्रेस कब्जा करने में कामयाब रही थी। सीएम जयराम ठाकुर बेशक मिशन रिपीट का दावा कर रहे हो लेकिन अकेले जयराम ऐसा नहीं कर सकते। विशेषकर उनके कैबिनेट मंत्रियों को भी अपना जादू और ताकत साबित करनी होगी। जिन मंत्रियों पर इस वक्त सबसे ज्यादा दबाव है उनमें से एक गोविन्द ठाकुर भी है। दरअसल जिला कुल्लू में दशकों तक महेश्वर सिंह भाजपा का मुख्य चेहरा है और खुद को साबित भी करते रहे। पर महेश्वर की भाजपा से दुरी बढ़ी तो पार्टी की कृपा गोविन्द सिंह ठाकुर पर बरसी। उनके पिता की सियासी विरासत ने भी उनकी राह आसान की। अब गोविन्द को खुद को साबित करना होगा।
2008 में परिसीमन बदलने के बाद अस्तित्व में आए इस विधानसभा क्षेत्र में फिलवक्त भाजपा का कब्ज़ा है। बीते चुनाव में यहां से भाजपा सरकार में मंत्री सुखराम चौधरी ने कांग्रेस उम्मीदवार किरनेश जंग को करीब 12 हजार वोटों से हराया था। इससे पहले साल 2012 में किरनेश जंग बतौर निर्दलीय चुनाव लड़े थे और उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवारों को पटकनी दी थी। दरअसल 2012 के चुनाव में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था व भाजपा प्रत्याशी सुखराम चौधरी को 790 मतों से हराया था। पर इस बार मंत्री सुखराम चौधरी के क्षेत्र पांवटा साहिब में भी भाजपा को आसानी से सत्ता सुख मिलता नहीं दिख रहा। भीतर खाते मंत्री की मुखालफत की झलकियां अभी से दिखने लगी है। पिछले वर्ष हुए निकाय चुनाव में भी भाजपा को मनमाफिक नतीजे नहीं मिले थे। उधर कांग्रेस संभवतः फिर करनेश जंग को मैदान में उतारे। हालांकि कई कांग्रेसी अब आप में गए है जिससे भाजपा जरूर उत्साहित होगी। आप में जाने वाले कांग्रेसियों में से एक युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मनीष ठाकुर भी शामिल है। पच्छाद: कांग्रेस की अंतर्कलह से होगी आस 2019 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने एक युवा महिला नेता को टिकट के काबिल समझा और रीना कश्यप को पच्छाद उपचुनाव में जीत मिली। हालांकि भाजपा से बागी उम्मीदवार दयाल प्यारी भी मैदान में थी, पर यहां भी सुरेश कश्यप ने जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर अपनी काबिलियत सिद्ध की। भाजपा ने दयाल प्यारी को टिकट नहीं दिया और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा व 11698 मत लेकर अपनी ताकत का अहसास भी करवाया। इसके बाद नाराज़ होकर भाजपा की निष्ठावान दयाल प्यारी कांग्रेस में चली गई। लगा जैसे दयाल प्यारी के कांग्रेस में शामिल होते ही सिरमौर के पच्छाद में पिछले तीन चुनाव हार चुकी कांग्रेस को संजीवनी मिल गई। लगने लगा की 2022 में कांग्रेस की उम्मीदवार दयाल प्यारी हो सकती है, मगर वर्तमान परिवेश में ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा। दयाल प्यारी को कांग्रेस प्रदेश सचिव नियुक्त करने के बाद से ही गंगूराम मुसाफिर और उनके समर्थक खुल कर विरोध करने लगे थे। परन्तु अब एक बार फिर कमान गंगू राम मुसाफिर के हाथ में जाती हुई दिखाई दे रही है। तीन चुनाव हारने के बावजूद भी जिले में संगठनात्मक मामलों को देखने का निर्देश दिए गए है। सिरमौर की सियासत में एक बार फिर मुसाफिर का उदय होता दिखाई दे रहा है। जानकार मानते है की ये सब होली लॉज की कृपा के कारण संभव हुआ है। अगर ये कृपा बनी रही तो एक बार फिर गंगूराम को ही टिकट मिल सकता है। दरअसल पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में गंगूराम मुसाफिर कांग्रेस का एक अनुभवी चेहरा है। गंगूराम मुसाफिर ने 1982 से लेकर 2007 तक के विधानसभा चुनाव में लगातार सात बार जीत दर्ज की। 1982 में मुसाफिर ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीता, लेकिन 1985 से वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। वह मंत्री के अलावा हिमाचल विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं। पर 2012 के विधानसभा चुनाव में मुसाफिर को भाजपा के सुरेश कश्यप से 2805 वोटों से हार मिली। 2017 में कांग्रेस ने फिर मुसाफिर को मैदान में उतारा लेकिन जनता ने उन्हें फिर नकार दिया। इसके बाद 2019 के उपचुनाव में भी कांग्रेस ने मुसाफिर पर भरोसा जताया लेकिन मुसाफिर जीतने में असफल रहे। अब मुसाफिर और दयाल प्यारी में से किसी एक को चुनना कांग्रेस के सामने असल समस्या है। उधर भाजपा में रीना कश्यप की राह भी आसान नहीं दिख रही। उपचुनाव में आश्वासन के बाद पीछे हटने वाले आशीष सिक्टा का दावा भी इस बार मजबूत है। जानकार मान रहे है कि भाजपा में भी टिकट के लिए जंग तय है।
रेणुकाजी और शिलाई में फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है और 2022 के लिए अभी से भाजपा को यहां कड़ी तैयारी करनी होगी। दोनों ही क्षेत्रों में भाजपा के लिए हाटी समुदाय को विशेष दर्जे का मुद्दा भी सरदर्द बनता दिख रहा है। पार्टी में टिकट दावेदारों की लम्बी फेहरिस्त भी परेशानी बढ़ा सकती है। उधर कांग्रेस में सम्भवतः दोनों ही वर्तमान विधायकों को फिर मौका मिले। इन दोनों ही विधायकों को कांग्रेस न बड़ी ज़िम्मेदारियां सौंपी है। शिलाई से विधायक हर्षवर्धन चौहान को उपनेता प्रतिपक्ष तो रेणुका विधायक को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं भाजपा में शिलाई में बलदेव तोमर का टिकट तय माना जा रहा है लेकिन रेणुका जी में पार्टी के लिए उम्मीदवार का चयन सिरदर्द होगा। पिछले चुनाव में पार्टी ने हृदयराम पर बलबीर सिंह को वरीयता दी थी लकिन हृदयराम ने निर्दलीय ताल ठोक पार्टी की हार का बंदोबस्त कर दिया। ऐसे में इस बार भाजपा को फूंक -फूंक कर कदम रखना होगा। बिंदल साइडलाइन, बाकी में वो बात नहीं ! सिरमौर में भाजपा के वर्तमान सियासी आउटलुक की बात करें तो तेजतर्रार नेता और नाहन विधायक डॉ राजीव बिंदल एक किस्म से साइडलाइन है। न सरकार में उन्हें अहमियत दी गई है और न ही संगठन में कोई अहम ज़िम्मेदारी। नगर निगम सोलन और अर्की उपचुनाव का प्रभारी जरूर उन्हें बनाया गया, किन्तु दोनों जगह पार्टी परास्त हुई। उन्हें साइडलाइन रख कई नेताओं की ताकत बढ़ाई गई जिससे समीकरण संतुलित रह सके। पर इसमें कोई संशय नहीं कि बिंदल जैसा जादू अन्य नेता नहीं दिखा पा रहे। तो भाजपा को भुगतना होगा खामियाजा... पिछले दिनों हुई हाटी समुदाय की महाखुमली में जुटे लोगों ने स्पष्ट कहा कि 2014 में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नाहन के चौगान मैदान में गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने का वादा किया था। तदोपरांत 2019 में तत्कालीन केंद्रीय जनजातीय मंत्री ने हरिपुरधार में इस क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। वर्तमान में शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप भाजपाई है और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है। ऐसे में यदि प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्ज नहीं मिलता है, तो उसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में भाजपा को भुगतना होगा। दरअसल गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने का मसला 144 पंचायतों से सीधे जुड़ा है और इसके दायरे में चार विधानसभा क्षेत्र आते है। शिलाई के अतिरिक्त, श्रीरेणुकाजी, पच्छाद व पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्रों में भी ये मुद्दा निर्णायक भूमिका निभा सकता है। जाहिर है फिलवक्त भाजपा सत्ता में है तो नाराजगी का कोप भी भाजपा को भुगतना पड़ा सकता है। ऐसे में निसंदेह सत्तारूढ़ भाजपा अब इस मुद्दे पर कोई सार्थक पहल कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो पार्टी को इसका लाभ भी मिलना तय है। नाहन : फिर लगने लगा धरतीपुत्र का नारा 2012 में परिसीमन बदल गए और सोलन निर्वाचन क्षेत्र आरक्षित हो गया। फिर डॉ राजीव बिंदल ने नाहन को कर्मभूमि बना लिया। नाहन को अपना गढ़ बनाना बिंदल के लिए आसान नहीं था, मगर धीरे =धीरे बिंदल नाहन में अपने पैर जमाने में कामयाब हुए। 2017 में बिंदल ने फिर नाहन से चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की। नाहन में जरूर डॉ राजीव बिंदल खुद को साबित करते आ रहे है लेकिन मौजूदा स्थिति में वे भी सहज नहीं दिख रहे है। यहाँ अभी से धरतीपुत्र का नारा बुलंद होता दिख रहा है। साल 2017 में भी डॉ. राजीव बिंदल की घेराबंदी के लिए कांग्रेस ने धरती पुत्र का नारा बुलंद किया था। कांग्रेस लगातार बिंदल को बाहरी बताती रही है। बाहरी फैक्टर चला और कांग्रेस संगठित होकर चुनाव लड़ी, तो बिंदल को भी मुश्किल होती दिख रही है। इसके अलावा सवर्ण आंदोलन फैक्टर भी भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है। उधर कांग्रेस में अजय सोलंकी टिकट के मुख्य दावेदार जरूर है लेकिन अन्य प्रत्याशी भी उनसे पीछे नहीं दिखते। गुटों में बंटी दिख रही कांग्रेस के लिए यहाँ राह आसान नहीं होगी। पार्टी बंटी रही तो एक बार शिकस्त तय है।
रफ्ता -रफ्ता आम आदमी पार्टी प्रदेश में अपनी सियासी जमीन मजबूत करती दिख रही है। संगठन को दोबारा सशक्त करने के बाद आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर से हिमाचल फ़तेह करने को लेकर कदमताल शुरू कर दी है। पार्टी को बीते कुछ वक्त में बड़े झटके जरूर लगे, मगर आप ने अब कमबैक किया है। हालांकि अब भी पार्टी के पास हिमाचल में कोई दमदार चेहरा नहीं दिखता, लेकिन अब पार्टी ने इन्तजार करने की बजाय जो है उसी के साथ हरसंभव प्रयास करने शुरू कर दिए है। मोर्चा खुद अरविन्द केजरीवाल ने संभाला हुआ है। बीते एक पखवाड़े में केजरीवाल हिमाचल के दो दौरे कर चुके है और करीब बीते दो माह में चार। ख़ास बात ये है कि केजरीवाल के हर दौरे में, हर आयोजन में भरपूर भीड़ उमड़ी है और उनके आने से निसंदेह पार्टी में जोश का संचार भी हुआ है।पिछले शनिवार को अरविन्द केजरीवाल और भगवंत मान ने एक बार फिर हिमाचल का रुख किया और हिमाचल की जनता से एक मौका माँगा। इस बार जगह थी कुल्लू, जो हिमाचल के शिक्षा मंत्री गोविन्द ठाकुर का गढ़ है। केजरीवाल ने कुल्लू में शिक्षा को ही प्रमुख मुद्दा बनाया। दिल्ली के शिक्षा मॉडल से हिमाचल की तुलना की और दो टूक कहा "बस एक मौका दे दीजिये अगर हम काम न करें तो लात मार कर बाहर निकाल देना"। इससे पहले आप ने हमीरपुर में एक शिक्षा संवाद का भी आयोजन किया था। इस तरह का चुनाव प्रचार या यूँ कहे मुद्दों पर चुनाव लड़ना हिमाचल में नई और सुखद पहल है और निसंदेह देर सवेरे आप को इसका लाभ भी मिल सकता है। हालांकि आगामी चुनाव में आप से किसी चमत्कार की उम्मीद बेमानी होगी लेकिन आप बाकी दोनों पार्टियों का खेल जरूर बिगाड़ सकती है। नेताओं की जेब में गया है पैसा : केजरीवाल अरविंद केजरीवाल लगातार कह रहे है कि वो हिमाचल में भी भ्रष्टाचार खत्म करने आए है। केजरीवाल सरकार से कई सवाल कर रहे है। वो पूछ रहे है कि हिमाचल का कई हज़ार करोड़ का बजट है, तो फिर वो पैसा कहाँ जा रहा है ? प्रदेश आर्थिक संकटों से क्यों जूझ रहा है। केजरीवाल का कहना है कि भाजपा सरकार कुछ भी नया नहीं बना रही। न तो स्कूल नए बन रहे है, न सड़कें और न अस्पताल, तो पैसा कहां जा रहा है ? वो आरोप लगा रहे है की ये सब पैसा इन नेताओं की जेब में गया है। एक बार कांग्रेस वालो की जेब में जाता है, एक बार बीजेपी वालो की जेब में। केजरीवाल अपने नेताओं की ईमानदारी के कसीदे पढ़ने से भी पीछे नहीं हट रहे। भ्रष्टाचार , शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर आम आदमी पार्टी आगे बढ़ रही है। किसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी आप, अभी कहना जल्दबाजी माहिरों का मानना है कि आम आदमी पार्टी हमेशा कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। दिल्ली और पंजाब में आप ने कांग्रेस से सत्ता छीनी। पर ये कहना जल्दबाजी होगा कि आगामी चुनाव में आप ज्यादा नुक्सान कांग्रेस को ही पहुंचाएगी। दरअसल प्रदेश में कई जगह भाजपा के नेता आप में शामिल हुए है और अब भी कतार में कई नेता बताये जा रहे है। मसलन कसौली में हरमेल धीमान ने आप का दामन थाम स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजीव सैजल के समीकरण बिगाड़ दिए है। जानकार मान रहे है कि टिकट आवंटन के बाद भाजपा - कांग्रेस दोनों तरफ अंसतोष तय लग रहा है और माना जा रहा है तब दोनों तरफ से कई नेता आप में जा सकते है। सो जो पार्टी अपने कुनबे को न संभाल पाई, उसका नुकसान ज्यादा होगा।
प्रधानमंत्री पोषण अभियान में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्वस्थ रखने के मिड-डे मील मेन्यू में पोषक आहार के साथ अब फलों को भी शामिल किया जाएगा। प्री-प्राइमरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को उचित पोषण आहार दिया जाएगा।हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को दोपहर भोजन के साथ अब फल भी दिए जाएंगे। प्रधानमंत्री पोषण अभियान में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्वस्थ रखने के मिड-डे मील मेन्यू में पोषक आहार के साथ अब फलों को भी शामिल किया जाएगा। प्री-प्राइमरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को उचित पोषण आहार दिया जाएगा। स्कूलों में दोपहर भोजन में दाल-चावल, खिचड़ी, मीठा भात परोसा जाता है। मिड-डे मिल के मेन्यू में केला, आम, तरबूज सहित अन्य फलों को शामिल किया जाएगा। स्कूलों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद बच्चों के दोपहर के भोजन के मेन्यू में फल शामिल होंगे।
हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के द्रंग वैली में पाए जाने वाले जंगली गेंदे के फूल से निकलने वाले टैगेट तेल की डिमांड अब विदेशों में भी बढ़ गई है। बीते दिनों यूके की खश कॉस्मेटिक्स कंपनी ने 500 लीटर तेल का ऑर्डर दिया है। आईआईटी मंडी, जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर, नाबार्ड और इनेबलिंग वूमन ऑफ कमांद वैली सोसायटी के संयुक्त इंडस्ट्री बायोटेक प्रोडक्ट नामक प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय किसान उत्पादक कंपनी को यह आर्डर मिला है। इस तेल से कई उत्पाद तैयार कर यूके की मार्केट में उतारे जाएंगे। कंपनी ने पूरे भारत के उत्पादकों से टैगेट तेल के सैंपल मंगवाए थे और टेंडर भी आमंत्रित किये गए थे। करीब 200 से अधिक सैंपल में द्रंग वैली के जंगली गेंदे से निकले टैगेट के तेल को सबसे उत्तम पाया गया। यह प्रोजेक्ट 2019 में शुरू किया गया था। 2021 तक इस प्रोजेक्ट में आईआईटी मंडी और जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के वैज्ञानिकों ने संबंधित एजेंसियों के साथ काम किया। गेंदे की खेती व्यापक स्तर पर की गई। जब फूल निकलने लगा तो अरोमा मिशन-2 के तहत टैगेट तेल निकालने की यूनिट सालगी गांव में लगाई गई। यह तेल बंजर भूमि पर जंगली गेंदे के फूल को उगाकर निकाला गया है। दक्षिण-पश्चिम हिमालय में 1,000 से 2,500 मीटर तक की ऊंचाई में यह प्रमुखता से पाया जाता है। टैगेट तेल का कई उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। इस तेल को कोल्ड ड्रिंक के फ्लेवर में इस्तेमाल किया जाता है। आंख की बीमारी और अलसर की दवाओं में इस तेल का इस्तेमाल होता है। विभिन्न कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। पक्ष आईआईटी कमांद मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बोहरा का कहना है कि एक बीघा जमीन में दो क्विंटल जंगली गेंदे का फूल उगाकर एक लीटर तेल निकल सकता है। इसकी बाजार में कीमत 9,000 से 12,000 रुपये प्रति लीटर है। 500 से 1,000 बीघा जमीन पर इसकी खेती हो रही है। -आईआईटी कमांद मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बोहरा
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बेटियों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। बेटियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन व्यतीत करने में किसी भी बाधा का सामना ना करना पड़े, इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा बेटी है अनमोल योजना का शुभारंभ किया गया है। राज्य सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश बेटी है अनमोल योजना केंद्र सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को देखते हुए आरंभ की गई है। "हिमाचल प्रदेश बेटी है अनमोल योजना 2022" के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश की बेटियों को उनकी पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत बेटी का जन्म होने पर हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ₹10000 की छात्रवृत्ति पोस्ट ऑफिस या फिर बेटी के बैंक खाते में जमा की जाती है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की बेटियों को पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक ₹300 से लेकर ₹12000 तक की आर्थिक सहायता किताबें तथा यूनिफॉर्म खरीदने के लिए प्रदान की जाती है। यदि बेटी बारहवीं कक्षा के बाद स्नातक के पाठ्यक्रम में अपनी पढ़ाई जारी रखती है तो उसे ₹5000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। एक परिवार की केवल 2 बेटियां ही उठा सकती है लाभ इस योजना के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को प्रत्येक बालिका की दर से ₹12000 प्रदान करने का प्रावधान है। इस योजना का लाभ एक परिवार की केवल 2 बेटियां ही उठा सकती हैं। इस योजना का आरंभ लिंगानुपात में सुधार करने के लिए एवं लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता प्रदान करने के लिए किया गया है। इस योजना के अंतर्गत बालिका को प्रदान की गई धनराशि बालिका 18 वर्ष की आयु पूरी होने के पश्चात बैंक खाते से निकाल सकती है। ऑनलाइन और ऑफलाइन कर सकते हैं आवेदन इस योजना के तहत आप ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं। इस योजना का फायदा लेने के लिए आवेदक को गरीबी रेखा से नीचे होना चाहिए। साथ ही आवेदक को हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। हिमाचल प्रदेश बेटी है अनमोल योजना में आवेदन के लिए आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की कॉपी, बीपीएल राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, स्कूल के प्रधानाचार्य के द्वारा प्रदान किया हुआ लेटर दस्तावेज के रूप में दिया जा सकता है। योजना के तहत सरकार द्वारा 32.81 करोड़ रुपए अब तक खर्च किए गए हैं। इससे 98193 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया गया है।
टाइडमैन अर्ली वर्सेसटर नाम की सेब की वैरायटी ने बाजार में दी दस्तक बागवानों को मिल रहे हैं अच्छे दाम
बदलते हुए परिवेश और विकास की वृद्धि दर के साथ हिमाचल प्रदेश सेब राज्य के नाम से जाना जाता है। विकास की अनेक मंजिलें तय करने के बाद आज हम देखते हैं कि हिमाचल के सुदूरवर्ती क्षेत्र सेब की विभिन्न प्रजातियों से भरे पड़े हैं तथा लोगों की आमदनी के अच्छे स्रोत बने हैं। करसोग क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान डॉक्टर जगदीश शर्मा, सुमित गुप्ता, हेमराज गुप्ता, हीरालाल महाजन, नरेश गुप्ता, मनोज शर्मा, नानकचंद का कहना है कि इन नवीन सेब प्रजातियों के कारण सेब जून जुलाई महीने में ही प्रदेश व देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुंच जाता है। सेब बागवानी के कारण सर्द वायु वाले गांव-गांव के लोग इतने बुरे पहाड़ो के निवासी न रह कर हर दिशा में समृद्धि की ओर अग्रसर है। सेब बागवानी के कारण गरीब वर्ग से लेकर हर आयु वर्ग के लोगों को रोजगार मिलने से सेब उत्पादक क्षेत्र व गर्म वायु क्षेत्र में आम व अन्य प्रकार के फल उत्पादन के कारण हिमाचल प्रदेश के निवासी एक गौरवशाली पहाड़ी राज्य के निवासी हैं। हिमाचल प्रदेश बागवानी निदेशालय में सेवारत बागवानी विशेषज्ञ डॉक्टर शरद गुप्ता का कहना है कि उद्यान विभाग लोगों को बागों का विकास करने के लिए हर प्रकार की सहायता प्रदान करता है।टाइडमैन अर्ली वर्सेसटर नाम की सेब की वैरायटी बाजार में दस्तक दे चुकी है। थोड़ा चपटा सा दिखने वाला यह सेब रैड जून वैरायटी के बाद सबसे पहले भारी मात्रा में मंडियों में दस्तक दे देता है। इसे एक अच्छी परागकण किस्म के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है । जिसके चलते इस वैरायटी के पेड़ में अधिक मात्रा में फल लगते हैं और बागवान अच्छा मुनाफा अर्जित कर लेते हैं ।हिमाचल प्रदेश बागबानी निदेशालय में सेवारत बागबानी विशेषज्ञ डाक्टर शरद गुप्ता का कहना है कि इस वैरायटी को एच एम टाइडमैन नामक वैज्ञानिक द्वारा वर्ष 1929 में इंग्लैंड में तैयार किया गया था। यह "वरसेस्टर पियरमैन तथा मैकिंटोश" की संकर किस्म है। लाल छिलका, खुशबूदार स्वादिष्ट गुदे वाला यह फल 90 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है।
बीते 24 घंटे में प्रदेश में विभिन्न सड़क हादसों में एक आठ वर्षीय बच्ची सहित तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। मंडी जिला के जोगिंद्रनगर में एक आठ वर्षीय बच्ची की कार की चपेट में आने से मौत हो गई जबकि एक 6 वर्षीय बच्ची घायल हो गई। वहीं मनाली में वीरवार सुबह एक सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई। जबकि जिला कांगड़ा के कांगड़ा-शिमला मार्ग बाईपास पर बुधवार रात को एक बाइक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार जोगिंद्रनगर के ढेलू गांव के पास सड़क पर कार की चपेट में आने से एक आठ साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन जख्मी हो गई। जानकारी के मुताबिक रात के समय दोनों बहनें घर से कुछ दूरी पर दुकान से चॉकलेट लेकर वापस लौट रही थीं। इसी बीच यह हादसा हो गया। हादसे के बाद दोनों को वहां मौजूद लोग जोगिंद्रनगर अस्पताल लाए, जहां बड़ी बहन आठ वर्षीय सावनी पुत्री जसविंदर वासी ढेलू को मृत घोषित कर दिया गया। छह वर्षीय वंशिका को प्राथमिक उपचार के बाद टांडा रेफर कर दिया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस ने कार को कब्जे में ले लिया है। चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया गया है। जोगिंदर नगर अस्पताल के एसएमओ डॉ. रोशन लाल कौंडल ने बताया कि सावनी के सिर पर गहरी चोट लगी थी। उसे अचेत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत चुकी थी। छोटी बहन को गंभीर चोटें आई हैं। उसे टांडा रेफर कर दिया है। मामले की पुष्टि करते हुए थाना प्रभारी प्रीतम जरियाल ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। एक अन्य हादसा मनाली में वीरवार सुबह पेश आया है। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई। दरअसल मनाली में बीएसएनएल कार्यालय से होकर गुजरने वाले बाईपास मार्ग पर एक ट्रक बैक करते वक्त राह पर चल रहा युवक ट्रक की चपेट में आ गया। हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। इस पर गुस्साए लोगों ने कुछ देर के लिए हंगामा किया। वे ट्रक चालक को उनके हवाले करने की मांग कर रहे थे। वहीं मामला दर्ज कर पुलिस आगामी कार्रवाई में जुट गई है। जिला कांगड़ा के कांगड़ा-शिमला मार्ग बाईपास पर बुधवार रात को एक बाइक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
निरमंड की सगोत कैंची से खनोटा सड़क मार्ग की खस्ता हालत होने के चलते खनोटा के स्थनीय लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि पिछले कई महीनों से इस सड़क मार्ग की दुर्दशा के चलते इस सड़क पर छोटे वाहन चालकों को भी आवाजाही के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं गांव की महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों का इस सड़क पर चलना दुर्भर हो गया है। इसके चलते गुरूवार को ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन कर लोक निर्माण विभाग के प्रति अपना रोष प्रकट किया। ग्रामीणों ने विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द इस सड़क की मुरमत का काम शुरू नहीं किया गया तो उन्हें मजबूरन सड़क पर उतर कर आंदोलन का रुख अपनाना पड़ेगा। वहीं स्थानीय पंचायत के प्रधान अमर सिंह ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मुख्य अधिशाषी अभियंता को ग्राम सभा का प्रस्ताव दिया है और जल्द सड़क को दुरुस्त करने की मांग की है। वहीं इस मामले में लोक निर्माण विभाग निरमंड के सहायक अभियंता ईश्वर चंद ने कहा कि इस सड़क के टेंडर जिस ठेकेदार को आवंटित किए गए थे और उस ठेकेदार ने काम छोड़ दिया है। जल्द ही फिर से किसी अन्य ठेकेदार को टेंडर आवंटित किए जायेंगे और सड़क मार्ग को जल्द दुरुस्त किया जायेगा।
जिला चंबा के होली मार्ग पर ज्यूरा मंदिर के पास गुरूवार सुबह अचानक पहाड़ी दरक गई। पहाड़ी दरकने से मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही ठप्प हो गई जिसके चलते लोगों काफी देर तक सड़क में फंसे रहना पड़ा। हादसे की सुचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग ने सड़क को यातायात हेतू बहाल करने का कार्य आरंभ कर दिया, लेकिन सड़क पर भारी भरकम चट्टानें होने के कारण जेसीबी मशीनें भी इन्हें हटा नहीं पाई है। नतीजतन सड़क को बहाल करने के लिए ब्लास्टिंग का उपयोग किया जा रहा है। मामले की पुष्टि करते हुए पुलिस थाना भरमौर ने बरसात के चलते यात्रियों को आगाह किया है। पुलिस ने कहा है कि बरसात के मौसम में पहाड़ों में दरारें आ जाती है, जिसकी वजह से स्लाइडिंग होती है। पुलिस ने अपील की है कि बिना वजह घर से बाहर ना निकले, जरूरी हो तभी घर से निकले। वहीं भरमौर आने वाले पर्यटकों से भी पुलिस ने सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सफर करने की अपील की है।
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के पतीकूहल स्थित उझी घाटी के नथान में सड़क की कटिंग कर रही जेसीबी पर अचानक पहाड़ गिर गया है। इस हादसे से क्षेत्र में हाहाकार मच गया। हालांकि इस दौरान जेसीबी चालक की जान बाल -बाल बची, लेकिन जेसीबी क्षतिग्रस्त होने से काफी ज्यादा नुकसान हुआ है। वहीं, पहाड़ दरकने से बस्तोरी मार्ग भी यातायात के लिए बंद हो गया है। जानकारी के अनुसार भेखली-बस्तोरी-नाथन में बस्तोरी से नथान तक करीब ढाई किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जाना है। इसके लिए पहाड़ की कटिंग का काम चल रहा था। गुरुवार को नालियों के निर्माण के लिए जेसीबी से खोदाई की जा रही थी। इस दौरान अचानक पहाड़ दरक गया और बड़ी-बड़ी चट्टानें जेसीबी के ऊपर आ गिरी। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। वहीं पुलिस ने भी घटना स्थल पर पहुंच कर मौके का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की जयंती पर प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। उनके जन्मदिन को कांग्रेस ने विकास दिवस के रूप में मनाया। इसी कड़ी में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम शिमला के कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में आयोजित किया गया। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री व अन्य नेताओं ने वीरभद्र सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित किये और उनके द्वारा किए गए कार्यो को याद किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि आज स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का जन्मदिन है और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए प्रदेश भर से यहां लोग आए उनका आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने पूरे प्रदेश में विकास करवाया है और आज उनके जन्मदिन को विकास दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। वहीं नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश में जो विकास राजा वीरभद्र ने करवाया है उसे कभी नहीं भूला जा सकता है। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आते ही रिज पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने जो शिक्षण संस्थान और भवन बनाए हैं, उनके नाम भी वीरभद्र सिंह के नाम पर रखे जाएंगे। इस मौके पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के निधन के बाद ये उनकी पहली जयंती है। उनका जन्मदिन पूरे प्रदेश भर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता था और होलीलोज में बधाई देने के लिए गाजे बाजे के साथ लोग पहुचते थे, लेकिन अब वह हमारे बीच में नहीं है। वीरभद्र सिंह ने पूरे प्रदेश को एक माला में पिरोने का काम किया। उनके द्वारा किए गए विकास को पूरा प्रदेश हमेशा याद रखेगा। वहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सभी वरिष्ठ नेताओं-कार्यकर्ताओं ने वीरभद्र सिंह को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। सोलन में डॉ कर्नल धनीराम शांडिल की अगुवाई में कांग्रेस ने स्व वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर क्षेत्रीय अस्पताल में फल भी वितरित किये गए। जिला के अन्य स्थानों पर भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर राजा वीरभद्र सिंह को याद किया गया। सिरमौर के पांवटा साहिब में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वीरभद्र सिंह के जन्मदिवस पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। पूर्व विधायक किरनेश जंग और मंडल अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश में एक समान विकास किया है। वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। उनके द्वारा किये गए कार्यों को पूरा प्रदेश हमेशा याद रखेगा। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सिविल अस्पताल में मरीजों को फल वितरित किए। जयसिंहपुर के खैरा में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के जन्म दिवस पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कांग्रेस के कार्यकर्ता और अन्य लोगों ने रक्तदान किया। इस दौरान जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र के सोशल मीडिया कांग्रेस प्रदेश सचिव राज वर्मा को 15 वीं बार रक्तदान करने पर सम्मानित किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री स्व राजा वीरभद्र सिंह की जयंती पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा सिविल अस्पताल हमीरपुर में फल वितरित किए गए। इस दौरान कामगार कर्मचारी कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव राणा ने कहा कि राजा वीरभद्र सिंह हमेशा हिमाचल की जनता के दिलों में रहेंगे, जिस तरह से उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री हिमाचल के जन-जन का विकास किया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
हिमाचल प्रदेश में अब मानसून जल्द दस्तक देने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के पूर्वानुसार 26 या 27 जून को मानसून हिमाचल में दस्तक दे देगा। बहरहाल, मानसून की पहली बारिश जुलाई पहले सप्ताह में होने के आसार है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी एक दो दिनों में प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बारिश की हल्की बौछारें गिर सकती हैं। वहीं अगर प्री मानसून की बात करें तो मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जून महीने में भी हिमाचल में सामान्य से कम बारिश हुई है। जून माह के पहले और दूसरे सप्ताह में बारिश दर्ज नहीं की गई है। हालांकि तीसरे हफ्ते में प्री मानसून की बौछारों ने काफी हद तक सूखे से राहत दिलाई। विभाग के अनुसार प्रदेशभर में 22 जून तक कुल 39.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह बारिश सामान्य से बारिश 37 प्रतिशत कम है। 22 जून तक प्रदेश में 63 मिलीमीटर बारिश सामान्य मानी जाती है। सिरमौर में सूखे की मार सबसे कम बारिश सिरमौर जिला में हुई है। सिरमौर में कुल 36.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह बारिश सामान्य से 62 प्रतिशत कम है। वहीं लाहौल स्पीति जिला में 49 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। चंबा जिला में 23 प्रतिशत कम बारिश, कांगड़ा में 46 प्रतिशत कम बारिश, कुल्लू जिला में सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। किन्नौर में 59 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। शिमला जिला में 22 प्रतिशत कम बारिश, सोलन जिला में 28 प्रतिशत, ऊना में 23 प्रतिशत, मंडी में 39 प्रतिशत, बिलासपुर में 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है। प्रदेश में सिर्फ हमीरपुर जिला में कम सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। यहां पर सामान्य से 12 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के एम पुथुर गांव में पटाखा उत्पादन में आग लगने से 3 लोगो की मौत हो गयी है ,जबकि 2 अस्पताल में भर्ती है। पुलिस अधिकारी ने यह बताया हैं की 24 घंटे के अंदर आग लगने की यह दूसरी घटना है। बुधवार को दिंडीगुल जिले में एक पटाखा दुकान में आग लग गई थी। हादसा जिला कलक्टर कार्यालय के सामने चेन्नामनायकनपट्टी के अरुणाचलम नगर स्थित अर्जुन फायरक्रैकर्स नामक पटाखा दुकान में हुआ। इसमें व्यापारियों को भी काफी नुक्सान हुआ।
हिमाचल प्रदेश में इस साल मक्की के बीज पर सरकार ने 1 करोड़ रूपये का उपदान घटा दिया है। सरकार इसपर 6.09 करोड़ रूपये का उपदान दे रही है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा 63 लाख की राशि उपदान में दी है। बाकि की राशि राज्य सरकार ने जुटाई है। पिछले साल सरकार ने इसपर 7 करोड़ की राशि दी थी। इस बार केंद्र से मक्की के बीज पर उपदान काम आया है। इस कारण सब्सिडी घट गयी है। कृषि विभाग के अधिकारियो के अनुसार सरकार किसानों को 40 रूपये प्रति किलो के हिसाब से उपदान दे रही है। प्रदेश में 279 हैक्टेयर क्षेत्र में मक्की की बिजाई की जाती है। सरकार ने किसानों को हाइब्रिड मक्की का बीज उपलब्ध करवाया है। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिकों ने कहा कि इस बीज से किसान 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मक्की का उत्पादन सकते है। वंही कृषि मंत्री वीरेंदर कंवर ने कहा कि मक्की के बीज पर उत्पादन केंद्र सरकार देती है। इस बार उत्पादन कम आया है।


















































