हिमाचल प्रदेश के 19.50 लाख राशनकार्ड धारकों को डिपुओं में अगले माह आटा आधा किलो ज्यादा और चावल आधा किलो कम मिलेंगे। खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने मई के लिए राशन की अलाटमेंट जारी कर दी है। अप्रैल में उपभोक्ताओं को प्रति राशनकार्ड 13.5 किलो आटा और छह किलो चावल मिले थे। मई में 14 किलो आटा और साढ़े पांच किलो चावल मिलेंगे। अन्य सस्ते राशन में तीन दालें मलका, माश और दाल चना, दो लीटर तेल (रिफाइंड और सरसों), 500 ग्राम प्रति व्यक्ति चीनी और एक किलो नमक शामिल है। उपभोक्ताओं को यह राशन प्रदेश सरकार, जबकि आटा और चावल केंद्र सरकार सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है। प्रदेश सरकार ने डिपो होल्डरों को महीने की पहली तारीख को गोदामों से राशन उठाने के निर्देश दिए हैं। खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री राजेंद्र गर्ग ने बताया कि मई में उपभोक्ताओं के लिए राशन का कोटा जारी किया गया है। खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने जिला नियंत्रक अधिकारियों को डिपो से खाद्य वस्तुओं के सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं। खाद्य आपूर्ति निगम की आगामी निदेशक मंडल की बैठक में अधिकारियों से सैंपल रिपोर्ट के बारे में पूछा जाएगा।
भारत के कई राज्यों में तापमान की मार जारी है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अप्रैल का तापमान साल 1900 के बाद से सबसे ज्यादा था और मई में भी उत्तर और पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के बाकी हिस्सों में तापमान मार्च और अप्रैल के स्तर नहीं छू पाएगा। मौसम विभाग ने एक बयान में शनिवार को बताया कि मई के दौरान, उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से कम न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। आईएमडी के डीजी मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मई के महीने में राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में गर्म हवाएं चलती रहेंगी। साल 1901 के बाद से इस साल अप्रैल का महीना भारत में चौथा सबसे गर्म रहा। जबकि भारत के उत्तर पश्चिम और मध्य क्षेत्र में अप्रैल 122 साल में सबसे गर्म रहा है। एक से 28 अप्रैल तक उत्तर पश्चिम भारत में औसत तापमान 35.9 डिग्री सेल्सियस था जबकि मध्य भारत में 37.78 डिग्री सेल्सिय। जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ऊपर होता है, तब हीटवेव घोषित कर दी जाती है। आईएमडी के अनुसार, अगर सामान्य तापमान से डिपार्चर 6.4 डिग्री ज्यादा है, तो एक गंभीर हीटवेव घोषित की जाती है। वहीं खतरनाक हीटवेव तब घोषित की जाती है जब कोई क्षेत्र अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज करता है। अधिकतम तापमान 47 डिग्री को पार करने पर भीषण लू की घोषणा की जाती है। उत्तर और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान नियमित रूप से 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है। हालांकि आईएमडी का मौसम मॉडल कहता है कि उभरते हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण मई के मध्य से गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। महापात्र ने कहा, 'अप्रैल में पांच पश्चिमी विक्षोभ बने थे, लेकिन उनमें से कोई भी उतना मजबूत नहीं था और इसलिए बारिश नहीं हुई.' उन्होंने कहा कि ला नीना की स्थिति के बावजूद भारत पर हीटवेव की स्थिति का होना अपेक्षाकृत असामान्य था। उन्होंने कहा कि मई में दक्षिण, मध्य और पूर्वी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होगी, लेकिन इस महीने में बेस रेनफॉल कम होगी। जबकि मध्य और पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में बेहद कम। आईएमडी ने 'सामान्य' मानसून या 87 सेंटीमीटर के 99% लॉन्ग पीरियड एवरेज का अनुमान लगाया है और उम्मीद है कि मई के आखिर में केरल में मॉनसून आ सकता है।
पटियाला हिंसा के मास्टरमाइंड बरजिंदर सिंह परवाना को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उसे आज कोर्ट में पेश करेगी। पुलिस ने शनिवार को कहा था कि बरजिंदर सिंह परवाना की पहचान मुख्य आरोपी और शुक्रवार की घटना के मास्टरमाइंड के रूप में हुई है। पंजाब पुलिस ने शनिवार को खालिस्तान विरोधी मार्च को लेकर हुई झड़प में कथित रूप से शामिल दो और लोगों को गिरफ्तार किया और घटना के पीछे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले राजपुरा निवासी की पहचान की थी। पुलिस ने दलजीत सिंह और कुलदीप सिंह के रूप में पहचाने गए दो और आरोपियों की गिरफ्तारी की थी। शुक्रवार की झड़प के कुछ घंटे बाद पुलिस ने बिना अनुमति के जुलूस निकालने और हिंसा भड़काने के आरोप में हरीश सिंगला को गिरफ्तार किया था।
मई महीने की पहली तारीख के दिन आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। तेल कंपनियों ने एलपीजी गैस के दौम में 102.50 रुपये की बढ़ोतरी की है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर पर ये दाम बढ़ाए गए हैं। दाम बढ़ने के बाद अब इस सिलेंडर की कीमत 2355.50 रुपये हो गई है जो पहले 2253 रुपये हुआ करती थी। वहीं, 5 किलो का एलीपीजी सिलेंडर की कीमत इस वक्त 655 है। बता दें कि इससे पहले अप्रैल महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 250 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। दरअसल, कमर्शियल सिलेंडर का अधिकतर इस्तेमाल रेस्टारेंट और हलवाई करते हैं। 102.50 रुपये की बढ़ोतरी से उनका जाहिर तौर पर मासिक बजट बिगड़ेगा। वहीं, आने वाले महीनों में शादियों का दौर शुरू होने वाला है जिसमें इन सिलेंडरों की खास जरूरत पड़ती है। जिस कारण कैटरिंग सर्विस वाले भी अपने दामों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
GNA University with great pomp and grandeur organized its Convocation of 2015-2019 batches in the benign presence of the worthy Chief Guest Mr. VipinSondhi, the renowned business tycoon, Mr. Sarvjit Singh Samra, the Founder & MD of Capital Small Finance Bank as the Guest of Honour. S. Gursaran Singh Sihra, the Chancellor of GNA University presided over the Convocation ceremony. The Pro-Chancellor - Mr. Gurdeep Singh Sihra, the Vice-Chancellor – Dr. VK Rattan, Dean Academics- Dr. Monika Hanspaland the Registrar –Dr. RK Mahajangraced the occasion with the Guest of Honour. On the special and the most awaited occasion of the academic event, Mr.VipinSondhi, the Chief Guest honored 72 toppers of various academic programs bagging gold medals, 66 silver medals and 34 bronze medals. Nearly 1000 GNA University students were awarded degrees in the Faculty of Engineering Design & Automation, Hospitality, Business Studies, Computer Science, Animation, Liberal Arts, Natural Sciences, and Physical Education & Sports. Mr. AmritSagar Mittal, spearheading the internationally established group of tractors, Sonalika Ltd, and the Vice-Chairman of Punjab State Planned Board in the rank and status of the Cabinet Minister was bestowed with a degree of Doctor of Literature- the HonorisCausafor his exemplary contribution in the area of Business, Education and Humanity Mr.VipinSondhi, the Chief Guest congratulated the Award Winners and the alumni seeking degrees in the various faculties. He wished them success in their career and stressed being honest and committed to what they aspire to and keep the vision in life. He lauded the role of GNA Group both in industry and education and hoped that this would provide opportunities to the local youth in having access to high-quality education which will enable them to get employment across the globe. S. Gursaran Singh, the Chancellor, of GNA University congratulated all the degree recipients for the commencement of a new phase of their life. He stated that in a situation where the country is struggling hard to solve the problem of unemployment, the students graduating today are among the few privileged to pay tribute to their ‘Gurus’. S. Gurdeep Singh Sihra, the Pro-Chancellor, GNA University emphasized that the degree recipients should constantly ponder over the possibilities for the application of the latest updates happening in their sector to make a positive impact on the quality of life of people. He congratulated and encouraged them to spread their acquired knowledge across the globe and prove to be an asset to their alma mater. Dr. VK Rattan, the Vice-Chancellor, GNA reminded the degree recipients of the worth of education in preparing the foundation of a strong mind, hence, a strong nation, and that the responsibility to fulfill the vision of the nation lies on their young shoulders. Dr. Monika Hanspal, Dean of Academics, GNA University congratulated all the degree recipients for the commencement of a new phase of their life pay tribute to their ‘Gurus’ for all the care.” Dr. RK Mahajan, the Registrar, GNA University during his Vote of Thanks duly thanked all the Award Winners and the alumni seeking degrees for joining whole-heartedly over the virtual interface. He wished them success in their career and stressed being honest and committed to what they aspire to and keeping a clear vision in life. In his thanksgiving, he lauded the role of GNA Group both in industry and education and hoped that this would provide opportunities to the local youth in having access to high-quality education which will enable them to get employment across the globe. Overall the Convocation 2022 happily culminated with the National Anthem with the brimming faces of all the degree recipients along with their proud parents.
--मुख्यमंत्री ने दिए 3 पुलिसकर्मियों के तबादले के आदेश, मोबाइल इंटरनेट सेवा निलंबित पंजाब के पटियाला में बीते शुक्रवार दो गुटों में जुलूस के दौरान हिंसा भड़क गई। इसके बाद शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक क्षेत्र में कर्फ्यू लगाया गया। जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके बाद पंजाब सरकार ने कई अधिकारियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। सीएम के निर्देश पर पटियाला के IG, SP और SSP का ट्रांसफर किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि मुखविंदर सिंह चिन्ना को नया आईजी पटियाला नियुक्त किया गया है, जबकि दीपक पारिक और वजीर सिंह को क्रमशः पटियाला का नया एसएसपी और एसपी नियुक्त किया गया है। जिले में सुबह साढ़े नौ बजे से शाम छह बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद रखी गयी। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं (2जी/3जी/4जी/सीडीएमए) , सभी एसएमएस सेवाएं और वॉयस कॉल को छोड़कर मोबाइल नेटवर्क पर प्रदान की जाने वाली सभी डोंगल सेवाएं आदि" शनिवार शाम 6 बजे तक के लिए बंद कर दी गई हैं। साथ ही श्री फतेहगढ़ साहिब में धारा 144 लगायी गयी। पटियाला हिंसा के बाद शिव सेना हिंदुस्तान, शिव सेना बाल ठाकरे और अन्य हिंदू संगठनों ने पटियाला में बंद का ऐलान किया।
देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। देश के कई राज्य लू की चपेट में हैं। कई प्रदेशों में तापमान 46 डिग्री तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग की ओर से कई राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी महानिदेशक डॉ. एम महापात्र के मुताबिक अप्रैल 2022 में उत्तर पश्चिमी और मध्य भारत में औसत अधिकतम तापमान पिछले 122 सालों में क्रमशः 35.90 डिग्री सेल्सियस और 37.78 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे अधिक है। पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों और उत्तर-पूर्व भारत के उत्तरी हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान की संभावना है। दिल्ली में भीषण गर्मी की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर चिलचिलाती धूप में तप रहा है। लोग गर्मी से राहत पाने के लिए तरस रहे हैं। शनिवार को दोपहर 12 बजे तक दिल्ली का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। सफदरजंग वेधशाला ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया था। वही इससे पहले 18 अप्रैल, 2010 को दिल्ली में अधिकतम तापमान 43.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। वही उत्तर प्रदेश के इलाकों में पारा 46 डिग्री के पार पहुंच गया है। राजस्थान के गंगानगर में पारा 46.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में पारा 4.2 डिग्री दर्ज किया गया है। इस साल मार्च महीने की शुरूआत से ही गर्मी ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भीषण गर्मी की वजह से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। वहीं, मौसम विभाग ने भीषण गर्मी को लेकर आज कई राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी जारी की है। इसके अलावा महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र और झारखंड के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है।
देश में कोरोना एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। तेजी से बढ़ते मामले प्रशासन और लोगों की चिंता को बढ़ा रहे हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 3 हजार 688 नए मामले दर्ज हुए हैं जो कल के मुकाबले ज्यादा है। वहीं, इस दौरान 50 लोगों की महामारी के चलते मौत हुई है। इन नए मामलों के बाद अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 18 हजार 684 हो गई है। वहीं, देश में कुल आंकड़े की बात करें तो ये संख्या 4 करोड़ 30 लाख 75 हजार 862 तक जा पहुंची है। इसके साथ ही देश भर में मरने वालों का आंकड़ा 5 लाख 23 हजार 803 हो गया है। 29 अप्रैल के कोरोना बुलेटिन के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे में 1607 नए कोरोना केस दर्ज हुए है। जानकारी के मुताबिक, 4 फरवरी के बाद से आंकड़ा सबसे ज्यादा दर्ज हुआ है। इस दौरान 2 मरीजों ने दम तोड़ा है। वहीं, अब दिल्ली में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5609 हो गई है।
Lieutenant General Baggavalli Somashekar Raju will take over as the Vice Chief of the Army Staff on May 1, 2022. An alumnus of Sainik School Bijapur and National Defence Academy, he was commissioned in the Jat Regiment on December 15, 1984. Prior to taking over as the Vice Chief of the Army Staff, the Lieutenant General was tenanting the appointment of Director General Military Operations during the standoff on the LAC. This is a rare incidence where an officer who has not been an Army Commander will be taking over as the Vice Chief. He commanded his Battalion during 'Operation Parakram' in the Western Theatre and in Jammu & Kashmir. He also holds the distinction of commanding the Uri brigade along the Line of Control, a Counter Insurgency Force, and the Chinar Corps in the Kashmir Valley. The officer also served as the Commandant, of the Indian Military Training Team in Bhutan. During his illustrious career spanning 38 years, he has tenanted many important regimental, staff, and instructional appointments in the Army Head Quarters and in field formations, including, Colonel Military Secretary Legal in the Military Secretary branch, Brigadier General Staff of the operationally active White Knight Corps, Deputy Director General Military Operations & Director General Staff Duties.
जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक खूबसूरती को हमेशा से सराहा गया है। लेकिन इस बार कश्मीर की एक खास तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है। कश्मीर में तंदूर पर कबाब बनाते एक दुकानदार की तस्वीर ने फूड से जुड़ी तस्वीरों की एक नामी प्रतियोगिता में पहला अवॉर्ड हासिल किया है। धुएं के बीच तंदूर पर कबाब बनाते दुकानदार की तस्वीर को फोटोग्राफर देवदत्त चक्रवर्ती ने खींचा है। स्ट्रीट फूड विक्रेता की इस तस्वीर के लिए देवदत्त को पिंक लेडी फूड फोटोग्राफर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिला है। ये तस्वीर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में ली गई थी। देवदत्त चक्रवर्ती ने इस तस्वीर को एक अलग कबाबियाना नाम दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने ये तस्वीर रात को ली थी। ये तस्वीर उस जगह की है जहां काफी भीड़ भाड़ रहती है। पिंक लेडी फूड फोटोग्राफर ऑफ द ईयर अवार्ड की संस्थापक और निदेशक कैरोलाइन केन्योन ने इस खास तस्वीर को लेकर अपनी टिप्पणी करते हुआ कहा कि इस तस्वीर में खूबसूरती से लिया हुआ धुआं जो लहरा रहा है, सुनहरी रोशनी, खाना बनाते समय व्यक्ति की अभिव्यक्ति हमें आश्वस्त करने के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में पहले से कहीं ज्यादा हम प्यार के लिए आराम की जरूरत को महसूस करते हैं। उधर, फोटोग्राफर देवदत्त चक्रवर्ती ने अवॉर्ड मिलने पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह तस्वीर मुझे फोटोग्राफर ऑफ द ईयर बना देगा। उन्होंने बताया कि वो पिछले साल फरवरी की सर्द शाम में खयाम फूड स्ट्रीट पर कुछ तस्वीरें लेने के लिए पहुंचे थे। जहां इस तस्वीर को ली थी। उनका कहना था कि तस्वीर लेने के बाद स्ट्रीट फूड विक्रेता मुस्कुरा रहा था। बता दें कि इस प्रतियोगिता में 60 देशों से हजारों लोगों ने अपनी खींची गई तस्वीरें भेजी थी।
The recruitment process of constables for Himachal Pradesh Police is going to be completed shortly, which will be followed by medical and verification, said an official. He informed that the training of fresh recruits would tentatively start from 4th July 2022 and the Recruit Training Course (RTC) will run at 3 different centers simultaneously, due to a large number of recruits. The General Entry recruits will be trained at Police Training College, Daroh, District Kangra. These include both male and female recruits. The ex-servicemen recruits will be given training at the 1st Indian Reserve Battalion, Bangarh, District Una. The recruits of the driver cadre will be imparted training at the 4th Indian Reserve Battalion Jangalberi, District Hamirpur. All these training centers are well equipped to provide the most modern and contemporary training to the fresh recruits.
The Himachal Pradesh government has made important changes in the State Industrial Policy, 2019 to promote growth in the sector in the state, an official of the Industry department said on Friday. He said that the State Government had notified the Himachal Pradesh Industrial Investment Policy, 2019 on 16th August 2019 to provide incentives, concessions, and facilities for the Promotion of Investment in the State. Major incentives include 50 percent subsidy towards the cost of detailed project report, 3 percent interest subvention, 50 percent assistance for transportation of Plant and Machinery, 3.5 percent Transport subsidy, 50 percent assistance for quality certification, 25 percent assistance for setting up of Effluent Treatment Plant, 50-90 percent Net SGST reimbursement, etc. for MSME, Large and anchor enterprises. He said that on the basis of demand raised by Industrialists and field offices, the State Government today made some major changes in the State Industrial Policy. It redefined anchor enterprises as the first industrial enterprise in a notified industrial area or the first such unit outside an industrial area in a particular development block of a district with a minimum fixed capital investment. Enterprises with a minimum fixed capital investment of Rs. 200 crores and employing a minimum of 200 bonafide Himachalies would fall under Category A. Enterprises with a minimum fixed capital investment of Rs. 150 crores and employing minimum of 150 Bonafide Himachalies would fall under Category B. Enterprises with a minimum fixed capital investment of Rs. 100 crore and employing a minimum of 100 Bonafide Himachalies would fall under Category C. He said that Cost accountants were also included in the definition of consultant. Sunset clause for providing incentives under Policy extended from 31st December 2022 up to 31st December 2025. The eligible enterprise for availing SGST reimbursement who could not claim due to pending assessment of net SGST by the State Taxes & Excise Department could apply up to 31st December 2022. He said that a 5 percent reservation of land/plots/sheds shall be done where such land is to be used for the purpose of setting up of enterprise by the person(s) with Disability either individually or collectively in new notified Industrial Areas. Existing, as well as new Enterprises providing 5 percent employment to the persons with benchmark disability in the total workforce, would be eligible for an additional incentive of Rs.1000 per month per such employee for a period of 03 years, he added. The spokesperson said that new development blocks Shri Naina Devi Ji, Bali Chowki, Dhanotu, Nihri, Churag, Totu, Kupvi, Kothkhai, Tilordhar added to category B areas of the state. Skill Development Centre, Health Infrastructure, Hospital, Common Effluent Treatment Plant, Sewage Treatment Plant, Distribution of universal design, consumer product and accessories for general use of persons with disabilities also included in the list of specified category of service activities, he added.
पटियाला मामले में शिवसेना ने अपने ही नेता को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताते हुए बर्खास्त कर दिया है। शिवसेना ने पार्टी के नेता हरीश सिंगला को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पंजाब में शिवसेना प्रमुख योग राज शर्मा की तरफ से जारी किए गए प्रेस नोट में इस संबंध में जानकारी शेयर की गई है। इसके साथ ही पटियाला में हुई हिंसा के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। ये कर्फ्यू शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक के लिए लगाया गया है। पटियाला पुलिस ने कहा है कि हिंसा के मामले में FIR भी दर्ज होंगी और गिरफ्तारियां भी की जाएंगी। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच पीस कमेटी की मीटिंग करवाने की कोशिश की जा रही है। वहीं हिंसा के बाद सीएम ने एक बैठक भी की थी। पटियाला में हुई हिंसा की घटना पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पटियाला में झड़प की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने डीजीपी से बात की, इलाके में शांति बहाल कर दी गई है। सीएम ने कहा कि हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और किसी को भी राज्य में अशांति पैदा नहीं करने देंगे। पंजाब की शांति और सद्भाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने स्थिति की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं घटना पर पटियाला जोन के आईजी राकेश अग्रवाल ने बताया कि कुछ शरारती तत्वों और अफवाहों की वजह से ये घटना हुई है। हम शहर में फ्लैग मार्च कर रहे हैं। लोगों से अपील है कि अफवाहों से बचें। पुलिस और सिविल प्रशासन ने सब कंट्रोल कर लिया है। कल पीस कमेटी की मीटिंग बुलाई है वो हम कल कर रहे हैं. लोगों से अपील है कि शांति बना कर रखें।
पिछले 2 महीने से रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। इन 2 महीनों में रूस ने युक्रेन के कई बड़े शहरों को तबाह कर दिया है। लाखों लोग अपने देश छोड़ पड़ोसी देशों में पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। अब सेटेलाइट इमेज से जानकारी सामने आ रही है कि रूस ने इस जंग के मैदान में डॉल्फिन को उतार दिया है। दरअसल रूस ने काला सागर के नौसैनिक मिलिट्री अड्डे पर ट्रेंड मिलिट्री डॉल्फिन को तैनात किया है। इस तस्वीर के बाद क्यास लगाये जा रहे हैं कि रूस नौसेना के बेड़े पर पानी के भीतर से होने वाले हमले को रोकने के लिए डॉल्फिन का इस्तेमाल कर रहा है। बता दें कि यूएस नेवल इंस्टीट्यूट (USNI) ने सैटेलाइट इमेज की जांच की। जांच से पता चला की फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर अटैक की शुरुआत की थी तभी दो डॉल्फिनों को सैन्य अड्डे पर ले जाया गया था। वहीं सैन्य कार्यों के लिए डॉल्फिनों को ट्रेंड करवाने का पुराना इतिहास रहा है। रूस इन डॉल्फिन्स का इस्तेमाल समुद्र के नीचे मौजूद चीजों को खोजने और दुश्मन के गोताखोरों का पता लगाने के लिए करता है।
उत्तर भारत समेत देश की राजधानी में गर्मी का कहर लगातार चरम पर बना हुआ है। इन दिनों अधिकतम तापमान 40 डिग्री के पार मापा जा रहा है जिसके चलते कई राज्यों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। आईएमडी के अनुसार दिल्ली में मौसम साफ रहेगा और तेज धूप निकलेगी, जिसकी वजह से अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आस-पास दर्ज होने की संभावना है। दिल्ली में आज जहां अधिकतम तापमान 44 रहने का अनुमान है तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 रह सकता है। इससे पहले गुरुवार को सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तामपान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो पिछले 12 साल में अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा है। मौसम विभाग ने बताया कि दिल्ली में रविवार को आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश हो सकती है। साथ ही 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे अस्थायी रूप से गर्मी से राहत मिल सकती है। राज्य के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है लेकिन कही भी भारी बारिश होने का अनुमान नहीं है। राज्य में अगले कुछ दिन बादल छाए रहेंगे। अधिकतर जिलों में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री रह सकता है तो वहीं अधिकतम तापमान 26 डिग्री के रहने का अनुमान है। हालांकि राज्य में हीट वेव वाली गर्मी नहीं रहेगी।
देश में कोरोना के मामने दिन पर दिन अपनी रफ्तार पकड़ते दिख रहे हैं। तेजी से बढ़ते मामलों को देख प्रशासन और लोग चिंता में आ गए हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 3,377 नए मामले दर्ज हुए हैं तो वहीं 66 लोगों की इस दौरान मौत हुई है। कोरोना के इन नए मामलों के दर्ज होने के बाद अब आंकड़ा 4 करोड़ 30 लाख 72 हजार 176 तक जा पहुंचा है। देश में एक्टिव मामलों की संख्या पर नजर डालें तो इस वक्त 17 हजार 801 मरीज सक्रिय हैं। वही, अब तक 4 करोड़ 25 लाख 30 हजार 622 लोग इस महामारी से ठीक हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामले फिर से हर दिन बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कोरोना के 258 नए मामले सामने आए हैं। ये लगाातार दूसरा दिन है जब राज्य में कोरोना के 250 से ज्यादा मामले सामने आए है। गुरुवार को भी राज्य में कोरोना के 261 मामले सामने आए थे। हालांकि पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कोरोना से एक की मौत हुई है।
कर्नाटक में एक ऐसा मामला सामने आया है जो काफी दर्दनाक है। कर्नाटक में लुका-छिपी खेलने के दौरान फ्रीजर में छिपने से 2 लड़कियों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक कर्नाटक के मैसूर जिले में मासेज गांव है। यहां नागराजू और चिक्कदेवम्मा की बेटी भाग्या (12 साल) पड़ोस में ही रहने वाले राजनायक और गोरम्मा की बेटी काव्या (7 साल) के साथ लुका-छिपी खेल रही थी। इनके साथ कुछ और बच्चे थे। काफी देर तक ये लोग लुका-छिपी खेलते रहे। जब भाग्या और काव्या का छिपने का नंबर आया तो इन्होंने जगह की तलाश शुरू की। इस दौरान इन्हें छिपने के लिए आइसक्रीम बॉक्स यानी फ्रीजर नजर आया। दोनों बच्चियां उसमें जाकर छिप गईं। उन्होंने उसका ढक्कन भी लगा दिया। दम घुुटने से इन दोनों की मौत हो गई।
देश में एक तरफ से जहां लगातार भीषण गर्मी पड़ रही है और कई राज्यों में तापमान 40 के पार है तो वहीं दूसरी तरफ पावर प्लांट्स में कोयले की कमी ने इस संकट को और गहरा दिया है। इसको लेकर जहां दिल्ली सरकार ने केन्द्र को आगाह करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के मेट्रो और अस्पतालों की सेवा पर असर इसका पड़ सकता है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष बिजली संकट को लेकर केन्द्र सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस प्रवक्त रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए मोदी सरकार से सवाल किए और उसका उन्होंने जवाब मांगा। उन्होंने लिखा है कि आज 29 अप्रैल को 11 बजे तक देश में बिजली की मांग 12 हजार मेगावाट है। आज एनर्जी एक्सचेंज में बिजली खरीद की कीमत 12 रुपये प्रति यूनिट है। अगर केन्द्र सरकार आगे बढ़ मदद नहीं करेगी तो राज्य मंहगी बिजली कैसे खरीदेंगे? अब तक 12 रुपये में भी बिजली नहीं मिलती है।
बिजली संकट का असर देश की राजधानी पर भी पड़ता दिख रहा है। कोयले की किल्लत से गहराते बिजली संकट के बीच दिल्ली सरकार ने मेट्रो, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निर्बाध (बिना बाधित) बिजली आपूर्ति मुहैया कराने में असमर्थता जताई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में बिना बाधित बिजली सप्लाई करना बहुत लंबे समय तक संभव नहीं है और इसमें दिक्कत आ सकती है। दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने स्थिति का आकलन करने के लिए गुरुवार को एक आपातकालीन बैठक की और केंद्र को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वह दिल्ली को बिजली की आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करे।
महाराष्ट्र से शुरू हुआ लाउडस्पीकर विवाद अब धीरे-धीरे दूसरे राज्यों में जाता दिख रहा है। कई राज्यों में सरकार इसे लेकर दिशा निर्देश जारी कर चुकी है। इस दिशा निर्देश के बाद लोकल स्तर पर प्रशासन ने भी इन्हें लागू कराना शुरू कर दिया है। इन सबके बीच वहां की सियासत भी गरमाने लगी है। महाराष्ट्र से चलकर लाउडस्पीकर विवाद सबसे पहले उत्तर प्रदेश पहुंचा। यहां पिछले दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर कई दिशा निर्देश दिए और बिना अनुमति के लगे लाउडस्पीकरों को हटाने के आदेश दिए। 23 अप्रैल को इस संबंध में आदेश का नोटिफिकेशन भी जारी हो गया। इस आदेश के बाद ही पुलिस एक्शन में आ गई और लगातार यूपी के अलग-अलग जिलों में अभियान चलाकर धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं। अगर यूपी के गाजियाबाद की बात करें तो यहां गुरुवार को ही पुलिस ने करीब 250 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए। पूरे प्रदेश की बात की जाए तो अब तक यहां 37002 लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं। 54593 लाउडस्पीकर से आवाज कम की जा चुकी है। लाउडस्पीकर विवाद का ही नतीजा है कि इस बार यूपी सरकार ने अलविदा जुमे की नमाज के मौके पर भी रोड पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी है। लाउडस्पीकर विवाद मध्य प्रदेश तक भी पहुंच चुका है। यहां खारगोन में राम नवमी के दौरान हुई हिंसा के बाद से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव की स्थिति है। वहां अब भी कर्फ्यू लगा है। टेंशन के बीच लाउडस्पीकर विवाद यहां भी पहुंचा गया है।
एंटी ड्रग्स एजेंसी NCB की दिल्ली यूनिट ने शाहीन बाग के जामिया नगर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 50 किलो हेरोइन और 47 किलो संदिग्ध नार्को बरामद किया है। इस दौरान 30 लाख कैश और नोट गिनने की मशीन भी एक घर से मिली है। DDG दिल्ली उत्तरी क्षेत्र ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि ये सारा सामान जूट के बैग और अन्य बैग में बांधा हुआ था। ड्रग्स की बरामदगी आवासीय परिसर से बुधवार को की गई। उन्होंने कहा कि अभी हमने 1 व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है। अभी तक की कार्रवाई से यह लगता है कि इसके पीछे एक अंतराष्ट्रीय संगठन का हाथ है और हम जल्द ही इसका पर्दाफाश करेंगे। एनसीबी के मुताबिक, अफगानिस्तान से ये हेरोइन आई थी, वहीं कैश हवाला के जरिये लाया गया था। ड्रग्स समंदर के रास्ते और बॉर्डर के रास्ते से लाई गई थी। फ्लिपकार्ट की पैकिंग में हेरोइन को पैक करके लाया जाता था।
तेल कंपनियों की तरफ से आज भी पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 105.41 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 96.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 120.51 रुपये व डीजल की कीमत 104.77 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल का दाम 115.12 रुपये जबकि डीजल का दाम 99.83 रुपये प्रति लीटर है। वहीं चेन्नई में भी पेट्रोल 110.85 रुपये प्रति लीटर तो डीजल 100.94 रुपये प्रति लीटर है। बता दें कि पिछले वर्ष 4 नवंबर के बाद से इन दोनों ईंधन के मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई थी। सरकार के राजनीतिक विरोधियों का आरोप था कि पांच राज्यों के चुनाव के कारण मोदी सरकार ने तेल कंपनियों को मूल्य बढ़ाने से रोक रखा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 112 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने के बाद रविवार को तेल कंपनियों ने डीजल के थोक खरीदारों के लिए मूल्य में 25 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। तेल डीलरों का कहना है कि खुदरा मूल्य में धीरे-धीरे वृद्धि की जाएगी। बता दें कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पेट्रोल का भाव 100 रुपये से ऊपर चल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत सबसे अधिक है।
प्रदेश में गर्मी का पारा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में अप्रैल में सामान्य से 4 से 5 डिग्री तापमान ज्यादा दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 28 से 30 मई तक ऊंचाई व मध्यवर्ती इलाको में अंधड़ व हल्की बारिश की चेतावनी जारी की है। जिससे झुलसाने वाली गर्मी से कुछ राहत मिलने के आसार है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेन्द्र पाल ने कहा कि शिमला का तापमान 27.1 दर्ज किया गया है जो सामान्य से ज्यादा है। इससे पूर्व 2016 में अप्रैल में 27.5 दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अन्य निचले इलाकों में 40 डिग्री तक तापमान पहुंच गया है। प्रदेश में आज से दो दिन ऊंचाई व मध्यवर्ती ऊंचाई वाले इलाकों में अंधड़ चलने की चेतावनी जारी की गई है। जिससे तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 296 अंक या 0.52 फीसदी की उछाल के साथ 57,115 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी सूचकांक ने 93 अंक या 0.55 फीसदी की तेजी लेते हुए 17,132 के स्तर पर कारोबारी की शुरुआत की। बाजार खुलने के साथ ही लगभग 1525 शेयरों में तेजी आई है, 398 शेयरों में गिरावट आई है और 78 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे पहले बुधवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुलकर दिनभर के कारोबार के बाद अंत में लाल निशान पर बंद हुआ था। बीएसई का सेंसेक्स सूचकांक 538 अंक फिसलकर 56,819 के स्तर पर, जबकि एनएसई का निफ्टी सूचकांक 162 अंक की कमी के साथ 17,038 के स्तर पर बंद हुआ था।
Gold Silver Price: गुरुवार को एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। सोने की कीमत 0.40 फीसदी की कमी के साथ 50,994 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गई, जबकि चांदी के दाम में 0.88 फीसदी की गिरावट आई और इसका भाव कम होकर 64,111 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। बता दें कि आभूषण बनाने के लिए ज्यादातर 22 कैरेट का ही इस्तेमाल होता है। कुछ लोग 18 कैरेट सोने का भी इस्तेमाल करते हैं। आभूषण पर कैरेट के हिसाब से हॉल मार्क बना होता है। 24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999 लिखा होता है, जबकि 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है।
Weather: देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत में दिन पर दिन गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राज्यथान समेत कई राज्य हीट वेव की चपेट में रहेंगे। मध्य प्रदेश में हीट वेव लगातार अगले कुछ दिनों तक परेशान करती रहेगी। राज्य के अधिकतर जिलों में आज यानि वीरवार को न्यूनतम तापमान 27 डिग्री तो वहीं अधिकतम तापमान 42 डिग्री तक रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज से अगले पूरे हफ्ते तक मौसम का हाल कुछ ऐसा ही बना रहेगा। साथ ही अगले दो दिन के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। वंही राजस्थान में भी लू का कहर देखने को मिल रहा है। राज्य में आज से 1 मई से लू से थोड़ी राहत मिलते दिखेगी। कुछ जिलों में हल्की बारिश होने का भी अनुमान जाहिर किया गया है। हालांकि तापमान 40 डिग्री के पार ही बना रहेगा। आज की अगर बात करें तो राज्य के अधिकतर जिलों में आज अधिकतम तापमान 43 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 31 डिग्री रह सकता है। मौसम विभाग ने तापमान की स्थिति को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया हुआ है। यूपी में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। राज्य में 2 मई के बाद गर्मी से थोड़ी राहत देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के अधिकतर सभी जिलों में 2 मई से पहले अधिकतम तापमान 40 के पार ही बना रहेगा। वंही, 2 मई के बाद ये पारा गिरकर 36 डिग्री तक आ सकता है। आज की अगर बात करें तो राज्य के अधिकतर हिस्सों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री रह सकता है तो वहीं न्यूनतम तापमान 26 डिग्री रह सकता है। वंही उत्तराखंड राज्य के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है लेकिन कही भी भारी बारिश होने का अनुमान नहीं है। राज्य में अगले कुछ दिन बादल छाए रहेंगे। अधिकतर जिलों में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री रह सकता है तो वहीं अधिकतम तापमान 27 डिग्री के रहने का अनुमान है। हालांकि राज्य में हीट वेव वाली गर्मी नहीं रहेगी।
Booster Dose: भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अब सरकार जल्द ही कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक और बूस्टर डोज के बीच के अंतराल को कम कर सकती है। जानकारी के मुताबिक, टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह यानी NTAGI इस अंतराल को कम करने की सिफारिश कर सकता है जिसपर 29 अप्रैल को बैठक होने वाली है। दरअसल ICMR की जांच में पता चला है कि प्रारंभिक टीकाकरण से करीब छह महीने बाद एंटीबॉडी का स्तर कम होने लगता है। बूस्टर खुराक देने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। जिस कारण जांच के आधार पर अब वैक्सीनेशन की दूसरी डोज और बूस्टर डोज के बीच का अंतर 9 महीने से घटा कर 6 महीने करने की पूरी संभावना है।
देश के कई हिस्सों में बिजली संकट पैदा हो गया है और बिजली में कटौती देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्य बिजली संकट से जूझ रहे हैं वहीं इसके पीछे कोयला की भारी कमी बतायी जा रही है। बिजली घरों में कोयले की कमी को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे ने कोयला ले जाने वाली मालगाड़ियों को यात्री गाड़ी से पहले ग्रीन सिग्नल देने का निर्देश दिया है। रेलवे ने इसके अलावा, 28 अप्रैल यानी आज से 8 पैसेंजर गाड़ियों को अगले आदेश तक रद्द भी कर दिया है। वहीं, इस सब के बीच बिजली संकट को लेकर विपक्ष मोदी सरकार पर तीखा प्रहार कर रहा है।
The Uniform Civil Code is back in the news again. On Tuesday, the All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) called attempts by various state governments and the Centre to introduce a Uniform Civil Code in India “an unconstitutional and anti-minorities move”. The Muslim law board’s comment came a day after Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami said that his government was preparing the first draft of a Uniform Civil Code to be implemented in the state. Before the Uttarakhand Assembly election, Dhami had said that a UCC would be implemented in the state if BJP is voted back to power and his government now seems to be working on its promise. But what is a Uniform Civil Code? Will Uttrakhand be the first state to introduce a UCC? Which other states are planning to bring in a UCC? How will it affect the citizens of India and why is there so much opposition to it? India Today dives deep into the issue and tries to explain it. WHAT IS A UNIFORM CIVIL CODE? The Uniform Civil Code, which comes under Article 44 of the Constitution of India, proposes to introduce personal laws that would apply to all citizens equally, irrespective of their religion, gender, caste, etc. Uniform Civil Code essentially refers to a common set of laws governing personal matters such as marriage, divorce, adoption, inheritance, and succession. Article 44 states, “The State shall endeavour to secure for the citizens a uniform civil code throughout the territory of India”. However, since the article comes under the directive principles of state policy, they are regarded as only guidelines and it is not mandatory to use them. At present, the personal laws of various communities are largely governed by their religion
While virtually interacting with the Chief Ministers of several States today, Prime Minister Narendra Modi warned that the Covid challenge has not yet been over. Despite managing the Covid crisis we can see an uptick in cases in the States now. We have to stay alert, Shri Modi said. Chief Minister Jai Ram Thakur also attended the meeting virtually from Shimla. Union Home Minister Amit Shah conducted the proceedings of the meeting. During this Secretary Health made a detailed presentation regarding Covid situation in the country. Health Minister Dr. Rajiv Saizal, Chief Secretary Ram Subhag Singh, Principal Secretary to Chief Minister Subhasish Panda, Director NHM Hemraj Bairwa also attended the meeting with the Chief Minister at Shimla.
तमिलनाडु के तंजावुर में एक बड़ा हादसा हुआ है। तंजावुर जिले में बुधवार सुबह मंदिर उत्सव के दौरान यह हादसा हुआ है जिसमें करंट लगने से 11 लोगों की जान चली गई है। जानकारी के मुताबिक जुलूस के वक्त रथ ऊपर से गुजर रहे हाई टेंशन तार के कॉटैक्ट में आ गया जिसके बाद पूरे रथ पर करंट फैल गया और आग लग गई। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु सड़क से गुजर रहे थे तभी किसी तरह ऊपर से गुजर रहा बिजली का तार रथ के संपर्क में आ गया और करंट फैल गया। इस हादसे में कई लोगों के घायल होने और झुलसने की भी खबर है। मौके पर उच्च अधिकारियों ने पहुंचकर राहत और बचाव का काम किया। हादसे के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया गया है। इलाके के आईजीवी बालकृष्णन ने बताया कि इस हादसे में 15 लोग घायल है। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान रथ बिजली के नंगे तार के संपर्क में आ गया था जिसके बाद यह हादसा हुआ है। जावुर जिले में बुधवार सुबह मंदिर उत्सव के दौरान यह हादसा हुआ है जिसमें करंट लगने से 11 लोगों की जान चली गई है। जानकारी के मुताबिक जुलूस के वक्त रथ ऊपर से गुजर रहे हाई टेंशन तार के कॉटैक्ट में आ गया जिसके बाद पूरे रथ पर करंट फैल गया और आग लग गई।
देश में बढ़ते हुए कोरोना के मामलों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्रियों से बातचीत की है। इस बातचीत का उद्देश्य राज्यों में कोविड के नियमों को फिर से लागू करने पर था जिससे कोरोना के बढ़ते मामलों को समय रहते रोका जा सके। प्रधानमंत्री के साथ हुई इस मीटिंग के बाद महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि अगर हम महाराष्ट्र की बात करें तो अभी यहां पर कोरोना के मामले उतने नहीं बढ़ रहे हैं। इसलिए चिंता की बात नहीं है, लेकिन हम सबको समय रहते जरूरी कदम उठाये जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य के सभी जिलों के जिला अधिकारियों से बात करने वाले हैं। इस बातचीत पर कोरोना की स्थिति और उसके रोकथाम को लेकर कदम उठाने पर बात की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इस बात की संभावना जताई कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे मास्क फिर से अनिवार्य करने को लेकर विचार विमर्श कर रहे हैं, लेकिन अभी उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आपको बता दें कि देश के कई राज्यों में मास्क अनिवार्य कर दिया गया है साथ ही मास्क ना लगाने वालों पर दंड भी लगाया गया है। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र में भी मास्क लगाने को लेकर सरकार जल्द ही निर्णय ले सकती है।
मोदी सरकार देश में बड़े कानून बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार ने नामी लॉ यूनिवर्सिटीज, सांसदों, कानूनविदों और पूर्व जजों से सुझाव भी मांग लिए है। सुझाव मिलने के बाद मोदी सरकार कानूनों में बड़े बदलाव करेगी। जानकारी के मुताबिक, पहले चरण में आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट में बदलाव किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि गृह मंत्रालय ने इसे लेकर सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि बहुत से कानून अब अप्रासंगिक हो चुके हैं, जबकि बहुत से नए नेचर के मामले आ चुके हैं, जिसमें पॉलीग्राफ टेस्ट, डीएनए टेस्ट आदि की धाराएं नहीं हैं। इसलिए गृहमंत्री अमित शाह ने देश की नामी लॉ यूनिवर्सिटी, कानूनविद, सांसदों, पूर्व आईपीएस अधिकारियों और पूर्व जजों से कानूनों में बदलाव को लेकर सुझाव मांगे हैं। साथ ही एसपी सिंह बघेल ने ये भी कहा कि इनका यूनिफॉर्म सिविल कोड से कोई लेना-देना नहीं है।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज नई दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में प्रदेश मीडिया केन्द्र का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज नई दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में प्रदेश मीडिया केन्द्र का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मीडिया कर्मियों के साथ नियमित संवाद को एक प्रभावी मंच प्रदान करने के लिए यह मीडिया केन्द्र स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस सेन्टर का निर्माण 16.5 लाख रुपये की लागत से किया गया है और यहां पत्रकारों को मूलभूत सुविधाएं तथा कार्यस्थल की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इस अवसर पर राष्ट्रीय मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सामाजिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है तथा पिछली सरकार के 400 करोड़ रुपये तुलना में इस पर 1300 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वृद्धजनों को अधिक संख्या में लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा 70 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष किया गया है। प्रदेश में 6,35,375 व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत 20 लाख लोगांे को लाभान्वित किया जा रहा है जबकि इस योजना से छूटे पात्र लाभाथर््िायों कोे मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत अब तक लगभग 2.40 लाख लोगों ने निःशुल्क उपचार सुविधा का लाभ उठाया है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी घरों को गैस कुनैक्शन प्रदान करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि लगभग एक लाख लोगों को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अन्तर्गत लाया गया है तथा प्रदेश सरकार ने शेष व्यक्तियों को कवर करने के लिए मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना शुरू की है जिसके अन्तर्गत 3.25 लाख गैस कुनैक्शन प्रदान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों लाभान्वित करने के लिए शुरू की गई अभिनव योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री सहारा योजना, मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना, मुख्यमंत्री शगुन योजना इत्यादि के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के लिए जन मंच शुरू किया गया है। हर माह, हर जिले में मंत्रियों की उपस्थिति में जन मंच का आयोजन किया जाता है और लोगों की शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया जाता है। जन शिकायतों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री सेवा हेल्पलाइन-1100 भी एक और प्रभावी मंच है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और दो ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के परिणामस्वरूप 41000 करोड़ का निवेश आया है। मुख्यमंत्री ने कोविड प्रबंधन के लिए किए गए प्रभावी उपायों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य कोविड टीकाकरण की पहली और दूसरी खुराक लगाने वाला देश में पहला राज्य है। हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, प्रधान अवासीय आयुक्त एस.के. सिंगला, निदेशक पर्यटन अजित कश्यप, निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क हरबंस सिंह ब्रसकोन सहित अन्य इस अवसर पर उपस्थित थे।
सशक्त और जीवंत समाज के निर्माण में महिलाएं महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समाज के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा कई सार्थक कदम उठाए गए हैं। महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक दशा सुधारने के उद्देश्य से अनेक कल्याणकारी योजनाएं आरम्भ की गई हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री शगुन योजना के अन्तर्गत बीपीएल परिवारों की कन्याओं के विवाह के लिए दी जाने वाली 31000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि इन परिवारों के लिए खुशियों का शगुन साबित हो रही है। इस योजना का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के द्वारा किया गया है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के बीपीएल परिवार की कन्याओं को विवाह अनुदान के रूप में 31000 की धनराशि प्रदान की जा रही है। इस योजना को 1 अप्रैल 2021 से प्रदेश भर में संचालित किया गया है। इस योजना को आरंभ करने की घोषणा बजट 2021-22 की घोषणा करते समय की गई थी। मुख्यमंत्री शगुन योजना के अन्तर्गत प्रदेश में अब तक 13 करोड़ 75 लाख 78 हजार रुपये व्यय कर 4,437 कन्याओं को लाभान्वित किया गया है। कांगड़ा जिला में 4,86,39000 रुपये व्यय कर 1,569 कन्याओं, सोलन जिले में 94,24000 रुपये व्यय कर 304 कन्याओं, ऊना जिले में 58,90000 रुपये व्यय कर 190 कन्याओं, शिमला जिले में 91,76000 रुपये व्यय कर 296 कन्याओं, सिरमौर जिले में 78,43000 रुपये व्यय कर 253 कन्याओं, कुल्लू जिले में 34,41000 रुपये व्यय कर 111 कन्याओं, मंडी जिले मेें 1,81,04000 रुपये व्यय कर 584 कन्याओं, हमीरपुर जिले में 91,76,000 रुपये व्यय कर 296 कन्याओं, चम्बा जिले में 1,47,56000 रुपये व्यय कर 476 कन्याओं, बिलासपुर जिले में 1,09,74000 रुपये व्यय कर 354 कन्याओं और किन्नौर जिले में 1,55,000 रुपये व्यय कर 4 कन्याओं को लाभान्वित किया गया है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए लड़की तथा उसका परिवार शादी से दो महीने पहले अथवा शादी के छः महीने के भीतर आवेदन कर सकता है। अनुदान राशि सीधा संबंधित आवेदक के बैंक खाते में जमा की जाती है। हिमाचल प्रदेश शगुन योजना 2022 का लाभ उठाने के लिए कन्या के माता-पिता या अभिभावक द्वारा एवं बेसहारा होने की स्थिति में कन्या द्वारा नजदीकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, बाल विकास परियोजना कार्यालय अथवा जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में सम्पर्क कर निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन किया जा सकता है। आवेदन करने के पश्चात अधिकारी द्वारा आवेदन का सत्यापन किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत स्वीकृति जिले के कार्यक्रम अधिकारी द्वारा प्रदान की जताई है। इस योजना के लिए लड़की की आयु 18 वर्ष या इससे अधिक और लड़के की आयु 21 वर्ष या इससे अधिक होनी चाहिए। लड़की हिमाचल प्रदेश की स्थाई निवासी होनी चाहिए तथा हिमाचल से बाहर रहने वाले लड़के से शादी करने पर भी वह इस योजना का लाभ उठा सकती है। हिमाचल प्रदेश शगुन योजना 2022 का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश शगुन योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली कन्याओं के विवाह पर आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश की कन्या सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनेगी तथा उनके जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। हिमाचल प्रदेश शगुन योजना को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा घोषित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली राशि अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी। यह राशि कन्या के माता पिता द्वारा प्राप्त की जा सकती है। यदि कन्या के माता-पिता या अभिभावक नहीं है तो कन्या खुद भी इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकती है। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में कारगर साबित होगी। हिमाचल प्रदेश शगुन योजना 2022 की पात्रता -आवेदक कन्या हिमाचल प्रदेश की स्थाई निवासी होनी चाहिए। -इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए वर की आयु 21 वर्ष एवं वधु की आयु 18 वर्ष या फिर उससे ज्यादा होनी चाहिए। -कन्या का नाम e-district पोर्टल पर पंजीकृत होना चाहिए। -आवेदक बीपीएल परिवार से होनी चाहिए। -विधवा महिला भी इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र हैं। महत्वपूर्ण दस्तावेज -आधार कार्ड -आयु प्रमाण पत्र -निवास प्रमाण पत्र -बीपीएल कार्ड -जाति प्रमाण पत्र -पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ -मोबाइल नंबर जिला कुल्लू की तहसील निरमंड के गांव नरकू की रंगीला देवी को मुख्यमंत्री शगुन योजना के रूप में मिले 31000 रुपये के शगुन से बहुत संबल प्राप्त हुआ। रंगीला देवी के पिता प्रकाश चंद का कहना है कि उनका परिवार कृषि व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रधान से मिली जानकारी के माध्यम से उन्होंने संबंधित अधिकारी के पास इस योजना के लिए आवेदन किया। इस योजना की राशि सीधे बैंक खाते मेें हस्तांतरित की गई। इस आर्थिक सहायता से उन्हें बेटी की शादी में बहुत सहारा मिला है। जिला शिमला के शिवपुरी की निवासी रेनू देवी का कहना है कि उन्होंने इस योजना से मिली आर्थिक सहायता का उपयोग बेटी की खुशियों को साकार करने में किया। उनकी बेटी चारू नेगी ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस धनराशि के माध्यम से उन्हें बहुत सहायता मिली। रेनू देवी ने बताया कि उनके पति बीमार रहते हैं और उनकी नियमित आय का कोई साधन नहीं है। इस स्थिति में जब उनकी बेटी का विवाह निश्चित हुआ तो उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। मुख्यमंत्री शगुन योजना उनके लिए एक आशा की किरण बनकर आई। उन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से इस योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना का लाभ उठान के लिए उन्होंने निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन किया और कुछ ही समय पश्चात 31000 रुपये की राशि उनके बैंक खाते में आ गई। शगुन की यह राशि उनकी बेटी के भविष्य को सहारा प्रदान करने में मददगार साबित होगी।
देश में महंगाई और बेरोजगारी ये वो दो समस्याएं है जो घटने के बजाए निरंतर बढ़ती हुई नजर आती है। अथाह प्रयासों के बावजूद देश और प्रदेश के युवा रोजगार के लिए भटक रहे है। चाहे सरकारी क्षेत्र हो या प्राइवेट, इन दोनों ही क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार का अभाव हैं। ऐसी स्थिति में स्व-रोजगार ही इकलौता विकल्प दिखाई देता है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में कदम उठाते हुए राज्य के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की शुरुआत की गई है। ये प्रोजेक्ट न केवल स्व-रोजगार की संभावनाओं को तलाशने में युवाओं की मदद कर रहा है बल्कि इससे सम्बन्धित सभी लोगों को प्रोत्साहन भी दे रहा है। इस योजना का आरंभ हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है। रोजगार की तलाश में भटकते युवाओं को अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार नही मिल पाता या कई बार तो सम्भावना ही नहीं बनती, लेकिन स्व-रोजगार अपनाकर युवा खुद तो सक्षम बन ही सकते है और साथ में अन्य लोगों को रोज़गार के अवसर भी प्रदान कर सकते है। इस योजना से राज्य के युवाओं को अपना बिजनेस सेट करने में सहायता मिल रही है। इस योजना के अंतर्गत वह सभी नागरिक जो उद्योग, सर्विस सेक्टर, व्यापार स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें ऋण पर सब्सिडी हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी राशि 25 प्रतिशत से लेकर 35 प्रतिशत रहती है। योजना में पुरुष लाभार्थियों को 25 प्रतिशत तथा महिलाओं को 30 प्रतिशत की दर से अनुदान देने का प्रावधान है जबकि विधवा महिलाओं के लिए अनुदान राशि 35 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इस योजना के अंतर्गत 40 लाख रुपए तक के ऋण पर सरकार द्वारा 3 वर्ष तक ब्याज में 5 प्रतिशत की दर से ब्याज पर अनुदान के साथ-साथ क्रेडिट गारंटी योजना के अन्तर्गत बैंक द्वारा लिया जाने वाले शुल्क को भी माफ किया जाता है। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना में एक परिवार से एक व्यक्ति को ही लाभ मिलता है। 18 से 45 वर्ष की आयु के लोग योजना के तहत ऋण लेने के लिए पात्र हैं। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना 2019 के तहत आवेदन करने वाली महिलाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का भी निर्णय लिया है। कैपिटल सब्सिडी की अधिकतम सीमा पुरुषों के लिए 15 लाख तथा महिलाओं के लिए 18 लाख की गई है। ये आते है योजना के दायरे में : योजना के अन्तर्गत औद्योगिक इकाइयां, दुकान, सूचना प्रौद्योगिकी कार्य, सर्विस स्टेशन, जेसीबी, छोटे गुड्स कैरियर, होटल, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, इको पर्यटन इकाइयां, धर्मकांटा, जिम, बैंक्वेट हॉल, मेडिकल लैब, मोबाइल फूड वैन, साइबर कैफे, फोटोकॉपी मशीन, भण्डारण यूनिट, डेयरी उत्पादन युनिट, कृषि उत्पाद वितरण दुकान, नर्सरी, टिशू कल्चर लैब, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित खेती, पेट्रोल पंप, बोरवेल, ड्रिलिंग रिंग मशीन इत्यादि के लिए ऋण प्रदान किया जाता है। पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना 2019 में संशोधन कर इसमें 18 नई गतिविधियां शामिल की हैं। अब इस योजना के तहत गतिविधियों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। योजना के तहत लघु सेवा व व्यावसायिक उद्योग की सूची में परिरक्षित चारा इकाइयों की स्थापना, उन्नत डेयरी विकास परियोजना (10 गाय या भैंस की एक इकाई), दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की स्थापना, फार्म स्टे/एग्रो पर्यटन व फार्म पर्यटन, कृषि के लिए खुदरा दुकानों का निर्माण, कृषि उपकरणों व औजारों का निर्माण, सब्जी नर्सरी तैयार करना, कृषि उत्पादों का भंडारण और परिवहन, इंटरनेट ऑफ थिंग्ज आधारित वर्टिकल फार्मिंग, पेट्रोल पंप, ईवी चार्जिंग स्टेशन, एंबुलेंस, रेशम प्रसंस्करण इकाई, रेशम रीलिंग इकाइयां, ऑक्सीजन क्रायोजेनिक टैंकर सेवाएं, सर्वर यूनिट और ड्रिलिंग यूनिट शामिल की गई हैं। ऐसे करें आवेदन : इस योजना के लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है जिसके लिए आधार कार्ड, हिमाचली बोनाफाइड, जन्म तिथि प्रमाण पत्र, भूमि के दस्तावेज व रेंट डीड अपलोड करना अनिवार्य है। इसके अलावा महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र से भी सम्पर्क किया जा सकता है। सफल साबित हुई है योजना हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के माध्यम से पिछले तीन सालों में 2021 तक प्रदेश में 1452 नए उद्योग स्थापित किए गए है। इन उद्योगों में 1228.12 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इन उद्योगों में 10 हजार 455 लोगों को रोजगार प्रत्यक्ष रूप से मिला है। सबसे अधिक 282 उद्योग सोलन जिले में स्थापित किए गए, जिनमें 5,561 लोगों को रोजगार मिला। -राकेश प्रजापति, उद्योग निदेशक, हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का उद्देश्य : स्वावलंबन योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश में बेरोजगारी को ख़त्म करके सभी नागरिकों को रोजगार प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके। योजना के माध्यम से जो नागरिक खुद का व्यापार शुरू करना चाहते है, परन्तु जिनके पास पैसे नहीं है और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है उन नागरिको को सरकार लोन प्रदान करती है और लोन पर निर्धारित सब्सिडी भी प्रदान करती है। यदि सरकार या फिर वित्तीय संस्थान द्वारा यह पता लगता है कि योजना के अंतर्गत लाभार्थी ने सब्सिडी गलत जानकारी देकर प्राप्त की है तो इस स्थिति में सरकार तथा वित्तीय संस्थान के पास यह अधिकार है कि वह सब्सिडी की राशि लाभार्थी से वापस ले सकती है। योजना के तहत इस तरह कर सकते हैं आवेदन : आवेदक हिमाचल प्रदेश का स्थाई निवासी होना अनिवार्य है। आवेदक की आयु 18 वर्ष से लेकर 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उद्योग विभाग व ऑनलाइन माध्यम से भी योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदक को इसके लिए अपना आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर दर्ज करवाना होगा।
' हिमाचल में तीसरे मोर्चे या पार्टी का कभी कोई अस्तित्व नहीं रहा'..जब से आम आदमी पार्टी मैदान में उतरी है, भाजपा -कांग्रेस के कई नेता एक सुर में ये ही सियासी राग अलाप रहे है। पर ये सत्य नहीं है। 1998 के चुनाव में तीसरी पार्टी ही किंगमेकर थी। तब हिमाचल विकास कांग्रेस की वजह से भाजपा सरकार बनी और कांग्रेस ने पांच साल सत्ता विरह भोगा। 1998 के बाद अब पहली बार हिमाचल प्रदेश में कोई तीसरी पार्टी दमखम से मैदान में उतरती दिख रही है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि सरकार उनकी बनेगी, सियासत में ऐसे दावे सभी करते है सो आप भी कर रही है। ये अलग बात है कि आप के पास फिलवक्त वो जमीनी संगठन नहीं दिख रहा जो उसे कांग्रेस -भाजपा के मुकाबले में लाकर खड़ा कर दें। पर असल सवाल ये है कि 'किंग' न सही क्या आम आदमी पार्टी 'किंग मेकर' बन सकती है। क्या जो 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस ने किया था वैसा आप कर पायेगी। इसका जवाब तो आने वाला समय ही देगा लेकिन ये तय है कि आप को हल्के में लेना कांग्रेस -भाजपा दोनों को भारी जरूर पड़ सकता है। ऐसे किंग मेकर बने थे पंडित सुखराम : 1993 में प्रचंड बहुमत के साथ कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में लौटी और वीरभद्र सिंह ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सरकार का कामकाज ठीक ठाक था और प्रदेश में वीरभद्र सिंह सरकार के खिलाफ कोई एंटी इंकम्बेंसी नहीं थी, अपितु कुछ हद तक प्रो इंकम्बैंसी जरूर दिख रही थी। पर कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं था। दरअसल पंडित सुखराम और वीरभद्र सिंह की महत्वकांक्षाएं पहले से ही टकराती आ रही थी। 1982 में जब ठाकुर राम लाल को बदलने का वक्त आया था तो पार्टी में वीरभद्र सिंह को पंडित सुखराम पर तवज्जो दी गई थी। फिर 1990 में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में पार्टी हारी तो पंडित सुखराम को आस थी कि अगली मर्तबा मुख्यमंत्री का ताज उनके सिर सजेगा। पर ऐसा हुआ नहीं और 1993 में भी वीरभद्र सिंह ही मुख्यमंत्री बने। हालांकि तब सांसद रहे पंडित सुखराम को केंद्र की नरसिम्हा राव सरकार में टेलीकॉम मंत्री का पद दिया गया था। मंत्री रहते पंडित जी ने मंडी का खूब विकास किया लेकिन 1996 में उन पर टेलीकॉम घोटले का आरोप लगा और उसके बाद कांग्रेस से उनकी राह जुड़ा हो गई। 1998 आते - आते पंडित सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन किया और उनकी पार्टी में कई कांग्रेसी विधायक और नेता भी जुड़े गए जिनमें महेंद्र सिंह और रामलाल मारकंडा सहित कई बड़े नाम थे। पार्टी पुरे दमखम से लड़ी और माहौल कुछ ऐसा बना कि विधासभा कि लड़ाई त्रिकोणीय हो गई। जब नतीजे आएं तो पंडित जी की पार्टी सत्ता में तो नहीं आई पर किंगमेकर की भूमिका में जरूर आ गई। त्रिशंकु विधानसभा में पांच सीटें हिमाचल विकास कांग्रेस ने जीती और उनके बगैर सरकार का गठन मुमकिन नहीं था। पंडित जी ने वीरभद्र सिंह के साथ न जाकर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा गठबंधन सरकार को समर्थन दिया। गठबंधन की ये सरकार बनी भी और पहली बार हिमाचल में पांच साल गठबंधन की सरकार चली भी। 23 सीटों पर तह कांटे का मुकाबला : 1998 के विधानसभा चुनाव में काँटे के मुकाबले में 23 सीटें ऐसी थी जहाँ जीत - हार का अंतर दो हज़ार वोट से कम था। इनमें से 14 सीटें कांग्रेस हारी थी जिसमें तीन सीटों पर तो उसे हिमाचल विकास कांग्रेस ने सीधे मात दी थी। इसके अलावा कई सीटें ऐसी थी जहाँ कांग्रेस की हार का अंतर बेशक दो हज़ार वोट से अधिक था लेकिन पार्टी का खेल हिमाचल विकास कांग्रेस ने ही बिगाड़ा था। तब यदि हिमाचल विकास कांग्रेस न होती तो 1998 में वीरभद्र दूसरी बार रिपीट कर जाते। इससे पहले 1985 में उन्हीं के नेतृत्व में आखिरी बार हिमाचल में कोई सरकार रिपीट हुई थी। बगैर चेहरे के नहीं बनेगी 'आप' की बात ! पंडित सुखराम हिमाचल की सियासत का वो नाम है जो किसी परिचय का मोहताज नहीं। हिमाचल विकास कांग्रेस का चेहरा खुद पंडित सुखराम थे। जबकि आम आदमी पार्टी अब तक अरविन्द केजरीवाल के चेहरे पर आगे बढ़ रही है। प्रदेश का कोई ऐसा चेहरा पार्टी के साथ नहीं है जो पंडित सुखराम जैसा सियासी वजन रखताहो। मज़बूत हिमाचली चेहरे का न होना आप की सबसे बड़ी कमजोरी है और जानकार मानते ही कि यदि चेहरा न मिला तो इस बार के चुनाव में आप की भूमिका "वोट कटवा" से ज्यादा शायद न रहे। पंजाब में पार्टी दस साल की मेहनत के बाद सत्ता में लौटी है, पर हिमाचल में ढंग से काम करते अभी जुमा - जुमा चार दिन हुए है।
बैठकों का दौर जारी है और उम्मीद कायम। रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री पर राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले तमाम लोगों की निगाहें टिकी है, विशेषकर कांग्रेस के निष्ठावान अब आशावान दिख रहे है। उम्मीद है कि अगर प्रशांत की एंट्री हो गई तो शायद आवश्यक बदलाव की राह भी खुल जाएं। दरअसल ये सर्वविदित है कि कांग्रेस में टॉप टू बॉटम बदलाव जरूरी है, पर पार्टी आलाकमान मानो वक्त काट रहा है। ऐसे में खबरें सामने आ रही है कि प्रशांत किशोर ने पार्टी को पुर्नजीवित करने का ब्लूप्रिंट पेश किया है और जल्द पार्टी इस पर आगे बढ़ सकती है। खासबात ये है कि इसमें उन राज्यों को लेकर भी विशेष योजना है जिनमें इस साल के अंत में या अगले साल विधानसभा चुनाव है। इसी वर्ष के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव है, तो अगले साल कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में चुनाव है। हिमाचल प्रदेश में पार्टी संगठन में बदलाव के कयासों के बीच पार्टी आलाकमान और रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच हो रही मैराथन बैठकों पर सबकी निगाहें टिकी है। अब प्रशांत और कांग्रेस के बीच बात बनी तो ये तय है कि हिमाचल में भी संभावित बदलाव प्रशांत किशोर के हिसाब से होंगे। शायद ये ही कारण है कि अब तक हिमाचल में पार्टी ने कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया है जबकि चुनाव में मात्र कुछ माह ही शेष है। वीरभद्र फैक्टर अब भी असरदार : उपचुनाव में कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन का एक बहुत बड़ा कारण स्व. वीरभद्र सिंह के प्रति सहानुभूति भी था। वीरभद्र सिंह के निधन के बाद जिस तरह का जनसैलाब उमड़ा था वैसे शायद ही कभी देखने को मिला हो। अब भी वीरभद्र सिंह के नाम का असर प्रदेश में दिखता है। वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में विधायक है, तो वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सांसद है। कुछ क्षेत्र विशेष में तो इस परिवार के प्रति लोगों का लगाव स्पष्ट दिखता है। ऐसे में जानकार मानते है कि सत्ता वापसी के लिए होलीलॉज को विशेष तवज्जो मुमकिन है। पर वंशवाद इसमें रोड़ा है। अब इसे लेकर प्रशांत किशोर की क्या सोच रहती है ये देखना रोचक होगा, बशर्ते पहले प्रशांत किशोर की एंट्री तो हो।
एंटी इंकम्बेंसी साधने के लिए चेहरे बदल देना भाजपा की सियासी प्रयोगशाला का नया पैंतरा है। पिछले वर्ष गुजरात के निकाय चुनाव से शुरू हुआ ये प्रयोग बदस्तूर जारी है। इसके बाद एंटी इंकम्बेंसी भांपते हुए पार्टी ने गुजरात में मुख्यमंत्री सहित समस्त कैबिनेट बदल दी, तो उत्तराखंड में चुनाव से पूर्व दो बार मुख्यमंत्री को बदल डाला। बेशक हिमाचल प्रदेश में जयराम सरकार को लेकर प्रत्यक्ष तौर पर कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं दिख रही है और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरल और ईमानदार छवि अब तक उनकी ढाल बनी हुई है, लेकिन कई मंत्रियों और विधायकों के लिए जमीनी स्तर पर असंतोष की स्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जानकार मानते है कि पार्टी कई मंत्रियों और विधायकों के टिकट काटने से भी गुरेज नहीं करेगी। टिकट आवंटन से पहले बकायदा कई सर्वे होंगे और जिसकी रिपोर्ट ठीक नहीं, उसे टिकट नहीं। ऐसे में कई मंत्रियों और विधायकों को झटका लग सकता है। माना जा रहा है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी नए चेहरों पर दाव खेल सकती है। उपचुनाव में गलत टिकट आवंटन का खामियाजा भुगत चुकी भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में फूंक - फूंक कदम रखेगी। तब तीनों विधानसभा क्षेत्र हो या मंडी संसदीय क्षेत्र, पार्टी के टिकट आवंटन पर हर जगह सवाल उठे। अर्की में पार्टी का बड़ा खेमा रतन सिंह पाल के विरोध में था लेकिन पार्टी इसे भाप नहीं पाई। फतेहपुर में 2017 में बगावत कर चुनाव लड़ने वाले बलदेव ठाकुर को टिकट देकर कृपाल परमार को नाराज किया, तो जुब्बल कोटखाई में परिवारवाद के नाम पर दस साल पार्टी में लगा चुके चेतन का टिकट काटने की भूल कर दी। वहीँ मंडी संसदीय क्षेत्र में तो ऐसा लगा मानो चुनाव खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ही लड़ रहे हो। ऐसे में विधानसभा चुनाव में पार्टी सुनिश्चित करना चाहेगी कि टिकट वितरण में कोई चूक न हो। अधिकारी - पत्रकार भी कतार में : आगामी विधानसभा चुनाव में कई अधिकारी और पत्रकार भी सियासत में किस्मत आजमाते दिख सकते है। विशेषकर भाजपा टिकट के लिए इनमें से कई चाहवान है। कई अधिकारी - पत्रकार तो अब ग्राउंड में भी दिखने लगे है। वहीँ चुनावी बेला में कई और चेहरे पैराशूट से मैदान में उतर सकते है। 2017 में भाजपा ने आईजीएमसी के डॉक्टर राजेश कश्यप को सोलन से मैदान में उतारा था, अब फिर आईजीएमसी के एक डॉक्टर को लेकर कयास लग रहे है।
6 अप्रैल को मंडी में हुए हिट रोड शो के बाद 23 अप्रैल का दिन कांगड़ा में रैली के लिए मुकर्रर था। स्थान चुना गया शाहपुर। आप का दावा था कि इस बार रैली सुपरहिट होगी। माहौल ऐसा जमेगा कि भाजपा -कांग्रेस के पैर के नीचे से जमीन खिसक जाएगी। हालांकि आप के तरकश में न तो हिमाचल प्रदेश का कोई बड़ा सियासी चेहरा था और सच कहे तो जमीनी स्तर पर भी प्रबंधन बेहतर नहीं दिख रहा था। फिर भी तीर निशाने पर लगा। हालाँकि शुरूआती दौर में खाली कुर्सियां दिखी तो लगा कि आप को अति आत्मविश्वास ले बैठा। पर सूरज चढ़ते चढ़ते माहौल भी बनने लगा और पंडाल खचाखच भर गया। इससे एक दिन पहले यानी 22 अप्रैल को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने भी कांगड़ा के नगरोटा बंगवा में रोड शो व रैली कर चुनावी हुंकार भरी थी। सियासी नजर से परखे तो नड्डा के कार्यक्रम की टीआरपी एवरेज थी, न कमाल और न बुरा। ऐसे में जाहिर है आप पर भी दबाव था। पर बगैर मजबूत जमीनी संगठन के भी आप का आयोजन बेहतर रहा। ये न सिर्फ भाजपा के लिए, बल्कि कांग्रेस के लिए भी आई ओपनर है। अलबत्ता अभी तो आप के पास प्रदेश में मजबूत चेहरा नहीं हैं, यदि चेहरा मिल गया तो दोनों दलों के लिए मुश्किल तय होगी। नेताओं को केजरीवाल का निमंत्रण : हिमाचल में आप के पास चेहरा नहीं है और कांगड़ा की रैली में भी कोई बड़ा सियासी चेहरा पार्टी में शामिल नहीं हुआ। ये आप के सामने बड़ी चुनौती है। केजरीवाल भी इस बात को जानते है और इसीलिए मंच से भाजपा-कांग्रेस के नेताओं को आप ज्वाइन करने का निमंत्रण दे गए। टू दी पॉइंट बोले केजरीवाल : मंडी के कार्यक्रम की तरह ही कांगड़ा में भी अरविन्द केजरीवाल टू दी पॉइंट बोले। शिक्षा,स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, भ्रष्टाचार और बिजली के मुद्दों पर दिल्ली मॉडल की खूबियां बताई और फ्री बिजली के मुद्दे पर जयराम ठाकुर को नकलची बताकर सीधा निशाना भी साध गए।
आगाज ठीक है, पर बेहतर हो सकता था। जानकार मान रहे है कि हिमाचल की सियासत के दुर्ग कहे जाने वाले कांगड़ा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का चुनावी उद्घोष पूरे शबाब में नहीं दिखा। विशेषकर जब अगले ही दिन अरविंद केजरीवाल की जनसभा में भी कमोबेश उतनी ही भीड़ उमड़ी, तो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के प्रबंधन पर सवाल उठना तो लाजमी है। हिमाचल प्रदेश में कुल 7792 बूथ है और हर बूथ पर भाजपा के त्रिदेव ( बूथ पालक, बूथ अध्यक्ष, पन्ना प्रमुख) है। जमीनी संगठन भी मजबूत है और संसाधनों के लिहाज से भी पार्टी ताकतवर। दूसरी तरफ हिमाचल में जुम्मा -जुम्मा चार दिन पहले आई आम आदमी पार्टी, जिसके पास न संगठन है और न ही प्रदेश में गहरी सियासी जड़ें। अब राजनैतिक आयोजनों के बाद अगर दोनों की तुलना करनी पड़े तो भाजपा के लिए ये सोचने का संदर्भ जरूर है। यहाँ ये जहन में रखना जरूर आवश्यक है कि एक माह के अंदर हिमाचल में ये नड्डा का दूसरा रोड शो था और इसके बाद भी उनके दौरे हिमाचल में जारी रहेंगे। स्पष्ट है भाजपा मिशन रिपीट में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। वहीँ जगत प्रकाश नड्डा के लिए तो हिमाचल प्रदेश जीतना प्रतिष्ठता का सवाल भी है क्यों कि ये उनका गृह राज्य है। बहरहाल इस बात के लिए भाजपा की तारीफ जरूर करनी होगी कि पार्टी प्रो एक्टिव दिख रही है और ये खूबी ही भाजपा को सम्भवतः अन्य पार्टियों से अलग बनाती है। नड्डा के अलावा मई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्री हिमाचल प्रदेश का रुख करेंगे। वहीं जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर में एम्स का उद्घाटन करने आएंगे। कांग्रेस को बदलना होगा गियर : कांगड़ा की सियासत में अगर बात कांग्रेस की करें तो अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में फिलहाल पार्टी की गतिविधियां लगभग शून्य ही है। इसे कांग्रेस की विफलता ही कहेंगे कि मौजूदा समय में वो चर्चा से भी गायब है। पर कांग्रेस के काडर को हल्का लेने की भूल नहीं की जा सकती। हाल फिलहाल तो हिमाचल प्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही संभावित है, बाकी राजनीति में कुछ भी मुमकिन है।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कसौली निर्वाचन क्षेत्र के समीकरण बदल चुके है । दरअसल लंबे अरसे तक भाजपा में विभिन्न दायित्व संभाल चुके हरमेल धीमान अब आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुके है। हरमेल धीमान जाने - माने समाजसेवी है और कई वर्षों के जमीनी स्तर पर काम कर रहे है। हरमेल भाजपा में भी टिकट के दावेदार थे और जानकार ये तय मान रहे है कि आगामी चुनाव में वे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार होंगे। उनके साथ उनके काफी समर्थक भी अब आप में शामिल हो रहे है। पर दिलचस्प बात ये है कि बीते दिनों कई कांग्रेसी विचारधारा के लोग भी आप में शामिल हुए है। इनमे युवा इंटक के नेता भी शामिल है। वहीँ माना जा रहा है कि आगामी दिनों में भाजपा -कांग्रेस से और कई लोग आप का दामन थाम सकते है। यानी दोनों पार्टियों से खफा असंतुष्ट नेता - कार्यकर्ताओं का मेल हरमेल के साथ मुमकिन है। इनके साथ आने का कितना लाभ आप और हरमेल को मिलता है, ये देखना रोचक होने वाला है। बहरहाल ये तय है कि कसौली में इस बार मुकाबला आमने -सामने का नहीं बल्कि त्रिकोणीय होने जा रहा है। कसौली वीआईपी निर्वाचन क्षेत्र है क्यों कि यहाँ से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजीव सैजल विधायक है। डॉ सैजल पिछले दो चुनाव हारते- हारते बचे है और लाज़मी है कि अब मंत्री होने के चलते क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाएं भी उनसे बढ़ी है। ऐसे में ये बदले समीकरण उनकी परेशानी में इजाफा कर सकते है। वहीँ पिछले दो चुनाव में डॉ सैजल को कड़ी टक्कर देने वाले विनोद सुलतानपुरी इस बार प्रो एक्टिव जरूर है लेकिन क्या वे इस बार भीतरघात साध पाते है या नहीं, ये देखना भी रोचक होगा। फिलवक्त हरमेल धीमान लाइम लाइट में है। उनका चुनाव लड़ना भी तय है और जिस आक्रमकता के साथ वे मैदान में उतर चुके है वो डॉ सैजल और सुल्तानपुरी दोनों के लिए खतरे की घंटी है। दोनों नेताओं को ये जहन में रखना होगा कि हरमेल के साथ न सिर्फ आप के समर्थक होंगे बल्कि दोनों तरफ के असंतुष्ट भी उन्हें मजबूत कर सकते है। बहरहाल चुनाव में काफी वक्त है और हर दिन नए समीकरण बनते बिगड़ते रहेंगे।
दल कोई भी हो लेकिन जीत हमेशा मिली। कभी अंतर कम रहा तो कभी ज्यादा, पर महेंद्र सिंह ठाकुर का परचम निरंतर धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में लहराता रहा है। ठाकुर अब तक सात चुनाव जीते है, तीन भाजपा से, एक कांग्रेस से, एक हिमाचल विकास कांग्रेस से, एक लोकतांत्रिक मोर्चा से और एक बार निर्दलीय। दल बेशक बदलते रहे लेकिन जनता का भरोसा अब तक महेंद्र सिंह पर बरकरार रहा है। हालांकि पिछले तीन चुनाव वे भारतीय जनता पार्टी से ही जीते है। अब विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें लेकर फिर कयासों का बाजार गर्म है। बहरहाल सियासत में कयास लगते रहते है लेकिन ठाकुर फिलवक्त भाजपा में ही है और जयराम सरकार के शक्तिशाली मंत्रियों में शुमार है। पर इस मर्तबा उनके लिए टिकट की राह शायद आसान न रहे। दरअसल बीते कुछ समय से महेंद्र सिंह बेवजह के विवादों से घिरे रहे है। परसेप्शन पॉलिटिक्स के पैमाने पर ये विवाद उनकी राह का रोड़ा बन सकते है। चर्चा वैसे ये भी है कि महेंद्र सिंह अपने बेटे रजत ठाकुर को आगे करने की इच्छा रखते है किन्तु वंशवाद के नाम पर दस साल पार्टी में लगा चुके चेतन बरागटा का टिकट काटने वाली भाजपा रजत को टिकट दें, ऐसा मुश्किल लगता है। इस पर भाजपा के युवा नेता नरेंद्र अत्री भी टिकट के दावेदारों में है। अत्री के साथ भाजपा का एक बड़ा तबका दिख रहा है और निश्चित तौर पर टिकट की दौड़ में वे महेंद्र सिंह को टक्कर देते दिख रहे है। उधर कांग्रेस को इस सीट पर अंतिम बार 1993 में जीत मिली थी और दिलचस्प बात ये है कि तब कांग्रेस उम्मीदवार थे महेंद्र सिंह ठाकुर। इसके बाद हुए पांच चुनाव में कांग्रेस ने महेंद्र सिंह के आगे पानी नहीं मांगा। बीते तीन चुनाव पर नज़र डाले तो 2007 में पार्टी यहाँ दस हज़ार वोट से हारी। 2012 में पार्टी ने बेहतर किया और ये अंतर करीब एक हजार वोट का रह गया, पर 2017 में फिर बढ़कर करीब दस हजार पहुंच गया। तीनों मर्तबा पार्टी के कैंडिडेट थे चंद्रशेखर। अब चंद्रशेखर की हार की हैट्रिक के बाद मुमकिन है कि पार्टी यहाँ से उम्मीदवार बदलने पर मंथन करें। कई दावेदार मैदान में दिख भी रहे है, पर कोई ऐसा नहीं जो फिलवक्त मजबूत स्थिति में हो। हालाँकि चुनाव में अभी वक्त है और समीकरण बदलते देर नहीं लगती। भूपेंद्र और आप को लेकर कयास : भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरा मोर्चा भी धर्मपुर में कई मर्तबा कामयाब रहा है। 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस यहाँ से चुनाव जीती तो 2003 में लोकतांत्रिक मोर्चा को जीत मिली। हालांकि दोनों बार महेंद्र सिंह ही प्रत्याशी थे। 2017 के विधानसभा चुनाव नतीजों पर नजर डाले तो यहाँ करीब दस प्रतिशत वोट सीपीआईएम को मिला था और उम्मीदवार थे तब जिला परिषद सदस्य रहे भूपेंद्र सिंह। बीते जिला परिषद चुनाव में सज्जाओपिपलू वार्ड से मंत्री महेंद्र की बेटी वंदना गुलेरिया मैदान में थी और उनके सामने कांग्रेस और सीपीआईएम ने भूपेंद्र सिंह को साझा उम्मीदवार बनाया था। हालाँकि भूपेंद्र जीत न सके पर टक्कर कड़ी दी। अब आम आदमी पार्टी के मैदान में आने के बाद इन्हीं भूपेंद्र सिंह पर निगाहें टिकी है। कयास लग रहे है कि भूपेंद्र आप का दामन थाम सकते है, हालांकि उनकी तरफ से अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है। पर जानकार मानते है कि यदि ऐसा होता है तो यहाँ त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा।
बीते दिनों मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इंदौरा निर्वाचन क्षेत्र में पहुंचे। जाहिर है चुनावी फिजा है तो खुद मुख्यमंत्री मोर्चे पर है और हर निर्वाचन क्षेत्र में पहुंच कर नब्ज टटोल रहे है। जैसे भाजपा के कार्यक्रमों में होता है इंदौरा में भी रंग खूब जमा, हर तरफ भगवा और खचाखच भरे पंडाल। तस्वीर तो कुछ ऐसी ही थी। मंच संचालन में हुई छोटी मोटी चूक और कुछ नेताओं के फीके भाषणों को छोड़ दिया जाएं, तो आयोजन अच्छा था। स्थानीय नेताओं के फीके भाषणों की कमी भी मुख्यमंत्री ने अपने सम्बोधन में विकास कार्यों की चाशनी डालकर पूरी कर दी। करीब 160 करोड़ के लोकार्पण और शिलान्यास का मुख्यमंत्री ने बखूबी जिक्र किया। पर सियासी नजर से देखे तो भाजपा की राह इस बार इंदौरा में मुश्किल ही दिख रही है। वर्तमान विधायक रीता धीमान और पूर्व विधायक रहे मनोहर धीमान में से किसी एक को चुनना भाजपा के मुश्किल होने वाला है। विधानसभा चुनाव से पहले का ये चुनाव पार्टी के लिए असल परीक्षा होगा। पिछली मर्तबा मनोहर धीमान भाजपा से टिकट की मांग कर रहे थे, पर तब पार्टी के कई बड़े नेताओं ने उन्हें मना कर जैसे तैसे भगवां लहराया। अब मनोहर धीमान फिर टिकट की कतार में है और पार्टी का एक तबका भी उनके साथ दिख रहा है। ऐसे में रीता धीमान की मुश्किलें बढ़ सकती है। यदि भाजपा फिर रीता धीमान को टिकट देती है तो मनोहर धीमान का क्या रुख होता है, ये देखना रोचक होगा। वैसे टिकट आवंटन में जरूर महिला फैक्टर का कुछ लाभ रीता को मिल सकता है। पर जानकार मानते है कि मनोहर भी इस बार चुनाव लड़ने के मूड में है, ये अलग बात है कि अब तक इस विषय पर खुलकर नहीं बोल रहे है। 2012 में मनोहर धीमान निर्दलीय जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और कांग्रेस के एसोसिएट विधायक थे। पर चुनाव से कुछ माह पहले मनोहर भाजपा में शामिल हो गए। जब टिकट वितरण की बारी आई तो भाजपा ने मनोहर धीमान की जगह पर रीता धीमान को वरीयता दी। तब आलम ये था की मनोहर के साथ समर्थकों का हुजूम दिख रहा था, पर भाजपा के शीर्ष नेताओं के मनाने पर मनोहर मान गए। अब पांच साल बाद फिर मनोहर एक्शन में है। क्या भाजपा उन्हें इस बार टिकट देती है या नहीं, ये देखना दिलचस्प होने वाला है। यदि मनोहर इस बार भी टिकट न ले पाए तो उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी प्रश्न उठना लाजमी होगा।
विधानसभा चुनाव नजदीक है और सियासी हलचल तेज। कसौली निर्वाचन क्षेत्र में सियासी रस्साकशी शुरू हो चुकी है। यहां एक तरफ मिस्टर क्लीन इमेज वाले वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजीव सैजल के साथ भाजपा की पूरी टीम जीत का चौका लगाने के लिए मैदान में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस जीत का सूखा खत्म करने की फिराक में। और इन दोनों का खेल बिगाड़ने की जुगत में मैदान में आम आदमी पार्टी की एंट्री भी हो चुकी है। कसौली निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में से है जो हमेशा आरक्षित रहे है। ऐसे में इस क्षेत्र के कई कद्दावर नेताओं की विधायक - मंत्री बनने की हसरत कभी पूरी नहीं हुई। कुछ की उम्र संगठन की सेवा में बीत गई, तो कुछ को सत्ता सुख के नाम पर बोर्ड - निगमों में एडजस्ट कर दिया गया। ऐसे भी माना जाता है कि सामान्य वर्ग से आने वाले कई नेताओं ने कई मौकों पर अपनी पार्टी प्रत्याशी की राह में ही कांटे डाले ताकि उनकी कुव्वत बनी रहे। यानि यहां की राजनीति बेहद दिलचस्प है। कसौली निर्वाचन क्षेत्र लम्बे अरसे तक कांग्रेस का गढ़ रहा। 1982 से 2003 तक हुए 6 विधानसभा चुनावों में से पांच कांग्रेस ने जीते और पांचों बार प्रत्याशी थे रघुराज। सिर्फ 1990 की शांता लहर में एक मौका ऐसा आया जब रघुराज भाजपा के सत्यपाल कम्बोज से चुनाव हारे। 2003 में प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार बनी और वीरभद्र सरकार में रघुराज मंत्री बने। मंत्री बनने के बाद कसौली के लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ी और शायद इसी का खामियाजा रघुराज को 2007 में उठाना पड़ा, जब वे चुनाव हार गए। तब जमीनी स्तर पर रघुराज के खिलाफ नाराजगी दिखी थी। उन्हें हराने वाले थे भाजपा के डॉ राजीव सैजल से। 36 साल के सैजल का ये पहला चुनाव था, पर कसौली की जनता ने रघुराज पर युवा सैजल को वरीयता दी और वे चुनाव जीत गए। तब पहला चुनाव जीतने वाले सैजल वर्तमान में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री है। अब तक सैजल जीत की हैट्रिक लगा चुके है और अब जीत का चौका लगाने की तैयारी में है। हालांकि उनकी राह जरा भी आसान नहीं दिख रही। इसमें कोई संशय नहीं है कि मामूली अंतर से बीते दो चुनाव जीतने वाले सैजल को इस बार भी एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। कोई गलती नहीं दोहराना चाहते सुल्तानपुरी : लगातार तीन चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के लिए ये चुनाव काफी महत्वपूर्ण है और शायद यही कारण है कि विनोद सुल्तानपुरी अभी से प्रो एक्टिव दिख रहे है। सुल्तानपुरी बीते एक साल से जनता के बीच है भी और उनकी सुन भी रहे है। अगर परवाणु को छोड़ दिया जाए तो बीते साढ़े तीन साल में कांग्रेस हर जगह बैकफुट पर दिखी है। जाहिर है पिछले दो चुनाव में मामूली अंतर से हारने वाले सुल्तानपुरी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। माना जाता है कि कांग्रेस का भीतरघात पिछले चुनावों में उन पर भारी पड़ा, पर अब सुल्तानपुरी सक्रिय भी है और निरंतर लोगों के बीच भी। वहीं ऐसा तो नहीं कहा जा सकता कि पार्टी अब पूरी तरह एकजुट हो लेकिन कांग्रेस में विनोद सुल्तानपुरी विरोधी खेमे का दमखम अब पहले से कुछ कम जरूर दिखता है। ये सुल्तानपुरी के लिए राहत की बात जरूर होगी। यहाँ ये बताना भी जरूरी है कि टिकट दावेदारों में भी विनोद सुल्तानपुरी के समकक्ष कोई मजबूत दावेदार नहीं दिखता। हालांकि अभी चुनाव में वक्त है लेकिन फिलहाल तो वे ही कांग्रेस के संभावित फेस दिख रहे है। पिछले दो चुनाव हारते -हारते बचे है सैजल : 2007 में अपने पहले चुनाव में डॉ राजीव सैजल ने 6374 वोट से शानदार जीत दर्ज की थी। पर अगले दोनों चुनाव में डॉ राजीव सैजल बमुश्किल अपनी सीट बचा पाए। 2012 में वे महज 24 वोट से जीते तो 2017 में अंतर 442 वोट का रहा। इन दोनों ही मौकों पर कांग्रेस की अंतर्कलह उनके लिए संजीवनी सिद्ध हुई। मंत्री बनकर हार गए थे रघुराज : 2003 में पहली बार कसौली का कोई नेता मंत्री बना था, वो थे स्व. रघुराज। पर 2007 में वे चुनाव हार गए। माना जाता है कि मंत्री बनने के बाद लोगों की रघुराज से अपेक्षाएं काफी बढ़ गई थी और जब वो उन पर खरे नहीं उतरे तो जनता ने नए और कम अनुभवी डॉ राजीव सैजल पर वोटों का प्यार बरसाया। जाहिर है अब डॉ सैजल से भी लोगों को खूब उम्मीद रही है। ऐसे में उनका कामकाज ही अगले चुनाव में जीत-हार तय करेगा। बहरहाल अभी वोटर खामोश है, लेकिन जैसे जैसे चुनाव नजदीक आएगा सम्भवतः सियासी हवा का पता भी चल जायेगा। हरमेल धीमान ने दिया भाजपा को झटका : सिर्फ कांग्रेस ही नहीं भाजपा के लिए कसौली में और भी कई चुनौतियां रहने वाली है। बीते दिनों कसौली भाजपा के वरिष्ठ नेता व भाजपा एससी मोर्चा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष हरमेल धीमान ने भाजपा छोड़ आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। वह पिछले चुनाव के दौरान टिकट की मांग कर रहे थे लेकिन टिकट राजीव सैजल को ही मिला। पिछली बार भी पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के मनाने पर उन्होंने डॉक्टर राजीव सैजल के लिए चुनाव में काम किया था । परन्तु इस बार भी स्थिति कुछ वैसी ही देख कर हरमेल धीमान ने भाजपा से किनारा कर लिया। हरमेल धीमान खुद तो आप में गए ही लेकिन साथ ही वे भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष देवराज ठाकुर व मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष व जिला परिषद सदस्य जगदीश पंवर समेत अन्य समर्थकों को भी आम आदमी पार्टी में ले गए। ज़ाहिर है इन निष्ठावान सिपाहियों की निष्ठा में परिवर्तन का नुक्सान भाजपा को भारी पड़ सकता है। बेशक भाजपा इसे खुले तौर पर नुक्सान न माने लेकिन हकीकत ये है कि ये चुनाव में बड़ा फैक्टर होगा।
हिमाचली सेब दुनिया भर में अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है, पर अब हिमाचल प्रदेश न सिर्फ सेब उत्पादक प्रदेश के तौर पर जाना जाता है अपितु हिमाचल हिंदुस्तान का फ्रूट बास्केट बन गया है। हिमाचल प्रदेश में बागवानी क्षेत्र आय के स्तोत्र उत्पन्न कर न सिर्फ लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हो रहा है बल्कि प्रदेश की प्रगति में भी इसका बड़ा हाथ है। हिमाचल में करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि पर 25 से भी अधिक किस्म के फलों का उत्पादन होता है। इसमें आधी भूमि पर तो अकेले सेब का उत्पादन होता है। इसके अतिरिक्त चेरी, स्ट्रॉबेरी, आम, किन्नू, माल्टा, कीवी, अखरोट, बादाम, अनार, अमरूद, आडू, खुमानी, लीची, नाशपाती का उत्पादन भी होता है। अब तो प्रदेश के ऊना में ड्रैगन फ्रूट को भी सफल तौर पर उगाया जाने लगा है। हॉर्टिकल्चर प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ है और चार लाख से अधिक लोग इससे जुड़े हैं। गत चार साल में प्रदेश में 31.40 लाख मीट्रिक टन फल उत्पादन हुआ है। इस अवधि में बागवानी क्षेत्र की वार्षिक आय औसतन 4,575 करोड़ रही। बागवानी के ज़रिये नौ लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। हिमाचल की जलवायु और उपजाऊ ज़मीन के कारण यहां पैदा होने वाले फल यहां के लोगो के लिए वरदान है। ईरान और तुर्की का सेब चुनौती हिमाचल की खुशहाली की तकदीर कहे जाने वाली सेब बागबानी वैश्विक प्रतिस्पर्धा से कदमताल नहीं कर पा रही है। सेब पैदावार से लेकर बाजार पहुँचने तक की हर प्रक्रिया अव्यवस्थित है और इसमें व्यापक सुधार की दरकार है। कभी मौसम की मार सेब की गुणवत्ता पर असर डालती है, तो कभी निजी कंपनियों द्वारा दिए जा रहे कम दाम। इस पर कम दामों पर आयात हो रहे सेब से भी बाजार के सेंटीमेंट बिगड़ रहे है। हिमाचल की करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की सेब की आर्थिकी के लिए ईरान और तुर्की का सेब चुनौती बन गया है। बाजार में इस बार ईरान का सेब हिमाचली सेब को पछाड़ रहा है। ईरान का सेब रंग और स्वाद में श्रीनगर और किन्नौर की सेब की बराबरी करता है। बागवानों के अनुसार भारत में अफगानिस्तान के रास्ते ईरान और तुर्की से सेब का अनियंत्रित और अनियमित आयात होता आ रहा है जो परेशानी का कारण है। बागवान चाहते है कि ईरान और तुर्की से सेब आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। अफगानिस्तान साफ्टा (SAFTA) दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र का हिस्सा है और यहां से सेब के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ईरान इस समझौते का हिस्सा नहीं है और माना जा रहा है कि इसलिए ईरान अपना सेब अफगानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते अटारी बॉर्डर से भारत भेजता हैं। ऐसा हो रहा है तो एक कंटेनर पर आठ लाख के करीब आयात शुल्क की चोरी हो रही है। इसके कारण ईरान का सेब सस्ता बिकता है। यदि ये सेब ईरान के रास्ते आए तो इसमें पंद्रह प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी और 35 प्रतिशत सेस लगेगा। लॉन्ग टर्म प्लानिंग की दरकार : सेब के दामों पर नियंत्रण के लिए एक लॉन्ग टर्म प्लानिंग की जरुरत है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और सीए स्टोर्स की उपलब्धता के साथ ही सेब की प्रोडक्शन में गुणवत्ता का ध्यान रखने की ज़रूरत है। जानकार मानते है कि तीन क्षेत्रों में ध्यान देने की ज़रूरत है। पहला है सेब की प्रोडक्शन, दूसरा है सप्लाई चेन और तीसरा है मार्केटिंग। इन तीनों में ही बहुत सी खामियां है जिन्हें दुरुस्त किया जाना चाहिए। चिलगोजा : किन्नौर के लोगों के लिए वरदान है ये सूखा मेवा जनजातीय क्षेत्र किन्नौर बेहतरीन गुणवत्ता वाले सेब उत्पादक के तौर पर जाना जाता हैं, लेकिन ये ही किन्नौर उत्कृष्ट गुणवत्ता का एक मेवा भी उत्पादित करता है, जिसे चिलगोजा के नाम से जाना जाता है। चिलगोजा भारत के उत्तर में हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में 1800-3350 मीटर की ऊंचाई वाले इलाके में फैले जंगलों में चीड़ के पेड़ पर लगता है। पर्सियन में चिलगोजा का अर्थ होता है 40 गिरी वाला शंकु के आकार का फल। चिलगोजा को अंग्रेजी में पाइन नट कहा जाता है। किन्नौर तथा उसके समीपवर्ती क्षेत्रों में विवाह के अवसर पर मेहमानों को सूखे मेवे की जो मालाएं पहनाई जाती हैं, उसमें अखरोट और चूली के साथ चिलगोजे की गिरी भी पिरोई जाती है। चिलगोजा स्थानीय आबादी के लिए नकदी फसलों में से एक है, क्योंकि बाजार में यह काफी ऊंचे दाम पर बिकता है। चिलगोजा के पेड़ों के फलदार होने में 15 से 25 वर्ष का समय लगता है और इसके फल को परिपक्व होने में करीब 18-24 महीने लगते हैं। पीच वैली को एक नियोजित योजना की दरकार जिला सिरमौर का राजगढ़ व आसपास लगता क्षेत्र पीच वैली के नाम से जाना जाता है। राजगढ़ क्षेत्र में फागू, भणत, हालोनी ब्रिज, बठाऊधार और शावगा आदि क्षेत्रों में आडू की खासी पैदावार होती है। इस क्षेत्र में आडू की कई किस्में उगाई जा रही है, जिनकी खासी डिमांड है। पहले यह आडू एनसीआर मार्किट में खूब धूम मचा रहा था, मगर बीते कुछ वक्त में इसके रेट कम हुए है। लिहाजा उत्पादकों का भी इससे कुछ मोह भंग हुआ है। इस पर कृषि रोगों ने भी इसके उत्पादन को प्रभावित किया है। बहरहाल, पीच वैली को एक विशेष योजना की दरकार है जिससे आडू उत्पादन का बीता हुआ सुनहरा वक्त फिर लौट आएं। हिमाचल में सेब का विकल्प बन रही चेरी, इस साल मिल रहे दोगुने दाम हिमाचल में सेब के अतिरिक्त चेरी भी बागवानों के लिए एक अहम नकदी फसल बनती जा रही है। बागवानों के सेब के बगीचों में पिछले कुछ सालों से चेरी की भी बड़ी पैदावार होने लगी है। एक तरफ जहां सेब की फसल लेने में बागवानों को साल भर कमरतोड़ मेहनत करनी पड़ती है, वहीं दूसरी तरफ कम मेहनत वाली चेरी की फसल अब बागवानों के लिए वरदान साबित हो रही है। हिमाचल प्रदेश में करीब 400 हेक्टेयर भूमि में चेरी का उत्पादन किया जाता है। राज्य में सेब बगीचों के साथ ही चेरी के पौधे भी लगाए जाते हैं लेकिन चेरी 15 मार्च के बाद तैयार होती है और सिर्फ एक माह तक चेरी का सीजन चलता है। हिमाचल में चेरी की प्रमुख किस्में रेड हार्ट, ब्लैक हार्ट, विंग, वैन, स्टैना, नेपोलियन, ब्लैक रिपब्लिकन हैं। स्टैना परागण किस्म है और इसके बिना चेरी की अच्छी पैदावार नहीं ली जा सकती। चेरी के अच्छे रूट स्टॉक नहीं हैं। अगर चेरी के रूट स्टॉक अच्छे हो तो फसल और बेहतर हो सकती है। प्रदेश में चेरी की सबसे अधिक पैदावार शिमला जिले के ननखड़ी, कोटगढ़ और नारकंडा क्षेत्रों में होती है। इस बार भी हिमाचल की रसीली चेरी ने बाजार में दस्तक दे दी है। इस साल चेरी का सीजन करीब 10 दिन पहले शुरू हो गया है। समय से पहले तापमान बढ़ना इसका कारण बताया जा रहा है। सीजन की शुरुआत में ही बागवानों को 300 रुपये प्रति किलो तक रेट मिल रहे हैं, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने हैं। ढली मंडी में चेरी 200 से 300 रुपये प्रति किलो के रेट पर बिकी। पिछले साल एक मई को चेरी बाजार में पहुंची थी और कीमत अधिकतम 150 रुपये थी। सीजन की शुरुआत में चेरी लोकल मार्केट में ही खप रही है। आने वाले दिनों में शिमला से चेरी बंगलूरू, महाराष्ट्र और गुजरात तक भेजी जाएगी। आम की बंपर फसल हिमाचल प्रदेश में इस बार आम की फसल बंपर होने की उम्मीद है। आम के पेड़ों पर आया फूल इसी ओर इशारा कर रहा है कि इस बार बागवानों को आम की फसल मालामाल करने वाली है। हालांकि, अभी भी मौसम पर काफी कुछ निर्भर करेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2021 में आम की फसल का ऑफ़ सीज़न रहा था। इस बार सीजन के ऑन होने की संभावनाएं पहले ही जता दी गई थी। नूरपुर, इंदौरा, ऊना व हिमाचल के अन्य निचले क्षेत्रों में आम की दशहरी, आम्रपाली, रामकेला, लंगडा चौंसा, तोता, अल्फेंजो, ग्रीन, फजली आदि किस्में पाई जाती है। जिनमें मुख्य दशहरी अगेती किस्म है। इसकी जून के मध्य माह में फसल तैयार हो जाती है।
फर्स्ट वर्डिक्ट । शिमला प्रदेश में चिकित्सा सुविधाएं दिन प्रतिदिन मजबूत हो रही हैं। यही कारण है कि अब मरीजों को किसी भी बड़ी बीमारी के लिए अन्य राज्यों और विदेश में नहीं भागना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। नित्य ही अस्पतालों की दशा सुधारने के अहम प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी दिशा में एक और सार्थक कदम माना जा रहा है। इसके तहत रिपन दीन दयाल चिकित्सालय में अब दो मॉड्यूलर आपरेशन थियेटर तैयार किए गए हैं। इनके बनने से अब रिपन अस्पताल में सुरक्षित व सुविधाजनक सर्जरी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यह ऑपरेटशन थियेटर अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। अस्पताल प्रबंधन के लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि आने वाले 15 दिनों के अंदर इन ओटी को शुरू भी किया जाएगा। इस कारण अब आपरेशन थियेटर में सर्जरी की सुविधाजनक और सुरक्षित होगी। बताया जा रहा है कि आपरेशन थियेटर पर एक करोड़ दो लाख की लागत आई है। इस सुविधा से अब सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, ईएनटी, प्लास्टिक, और न्यूरो विभाग के आपरेशन किए जा सकते हैं। इस नए आपरेशन थियेटर से न केवल सुपर स्पेशियलिटी सर्जरी संभव हो सकेगी बल्कि इससे रिकवरी रेट भी बेहतर होगी। आईजीएमसी की सीटीवीएस विभाग की तरह यह आपरेशन थियेटर काफी आधुनिक होगा। इसमें हवा अंदर तथा बाहर जाने के लिए विशेष उपकरन लगे होंगे। साथ ही इन ओटी मेें आधुनिक आपरेशन थियेटर टेबल भी लगेें होगे। इससे चिकित्सक को आसानी से इधर से उधर व ऊपर नीचे कर सकेंगे। वहीं डा. लोकेंद्र शर्मा एमएस रिपन अस्पताल ने बताया कि रिपन अस्पताल में दो मॉडयूलर आपरेशन थियरेटर बनकर तैयार हो चुके हैं। आने वाले दो हफ्तों के अंदर इनका उद्घाटन कर दिया जाएगा। मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर नार्मल थियेटर से बेहतर होता है और इसके शुरू होने से विशेषकर सर्जरी करवाने वाले रोगियों को बड़ी राहत मिलेगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट । शिमला हवाई सफर के यात्रियों और पर्यटकों के लिए एक राहत भरी खबर है। क्योंकि पर्यटन सीजन में कुल्लू-मनाली के भुंतर हवाई अड्डे से दिल्ली का सफर अब 22434 रुपए में होगा। एलायंस एयर ने किराए में करीब साढ़े तीन हजार रुपए की कमी की है। पहले प्रति सीट दिल्ली का किराया करीब 26 हजार रुपए था। हालांकि, किराया कम होने के बाद भी पर्यटन कारोबारी इसे पर्यटन के लिए बड़ी राहत नहीं मान रहे हैं। अमर उजाला ने 13 अप्रैल के अंक में दुबई से महंगा हो गया कुल्लू से दिल्ली तक का हवाई सफर शीर्षक से यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद एलायंस एयर कंपनी को किराया बढ़ाने के फैसले को पलटना पड़ा। पुराने किराए पर टिकट देना शुरू कर दिया है। उधर, जिले के पर्यटन कारोबारी इस राहत से संतुष्ट नहीं हैं। पूर्व होटल एसोसिएशन मनाली के प्रधान अनूप राम ठाकुर, होटलियर गौतम ठाकुर, अनिल कुमार, मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर और ललित कुमार ने कहा कि दिल्ली-भुंतर की इतनी महंगी उड़ान में कौन सफर करेगा। एक तरफ का किराया साढ़े 22 से 26 हजार रुपए देना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए वह पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर इस फ्लाइट को उड़ान योजना में शामिल करे। कहा कि इस साल कुल्लू-मनाली में पर्यटन सीजन अच्छा चलने की उम्मीद है। ऐसे में प्रदेश और केंद्र सरकार को 48 सीटर के साथ 19 सीटर डोर्नियर की अतिरिक्त सेवा शुरू करनी चाहिए। उधर, भुंतर हवाई अड्डे में तैनात एलायंस एयर के स्थानीय मैनेजर अमित नंदा से फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
A spokesperson of the State Taxes and Excise Department informed here today that the revenue collection in Financial Year 2021-22 by the department under all heads was Rs. 8403.70 crores despite Covid-19, which is 19.30 percent more than the revenue collection of Rs. 7044.24 crore in the Financial Year 2020-21. The spokesperson said that the increase in revenue collection was possible due to the constant efforts of the department and timely implementation of the directions of the state government by the officers. The officers of the department were facilitated with laptops and tablets by the government due to which the officers were able to timely complete the online works such as verification of e-way bills, ITC imbalance, refund of GST, and other GST related works and were able to generate an increase in revenue collection in 2021-22 despite Covid-19 pandemic.
There is a possibility of change in the weather due to the activity of Western Disturbance in Himachal Pradesh. According to the Meteorological Center Shimla, there is a possibility of rain from April 20 to 22 in eight central and high mountain districts of the state. On the other hand, rain may occur in some parts of the plains districts of Una, Bilaspur, Hamirpur, and Kangra. There is a possibility of light snowfall on the higher peaks. A yellow alert has also been issued in many parts of the plains, middle and high mountainous areas for thunderstorms and lightning. On April 20, an alert has been issued in these parts of wind speed reaching 30 to 40 km per hour. The weather is forecast to remain clear in the plains on the 23rd. While one or two places in the middle and high hills may receive rain. On the other hand, the weather has remained clear in Shimla and other parts since this morning.


















































