जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के वहादान इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के एक सक्रिय आतंकवादी को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार आतंकी के पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक ऑपरेशन गुप्त और विशेष जानकारी पर आधारित था, और सुबह के समय पुलिस और सेना के 3RR के संयुक्त बलों द्वारा ऐश्मुक़ाम के वहादान इलाके में एक तलाशी अभियान शुरू किया गया था। सुरक्षाबलों की तलाशी अभियान के दौरान गंजीपोरा निवासी हाफिज अब्दुल्ला मलिक के रूप में पहचाने गए एक सक्रिय आतंकवादी को गिरफ्तार किया गया है। अब्दुल्लाह इस साल सितंबर के महीने में टीआरएफ में शामिल हुआ था। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से एक पिस्टल और सात गोलियां बरामद कीं, हालांकि पूछताछ के दौरान वह तलाशी दलों को काट्सू के जंगल में ले गया, जहां सुरक्षा बलों ने 40 राउंड के साथ एक AK47 और 02 मैगज़ीन बरामद की है। गिरफ्तार आतंकी से पूछताछ जारी है और भी छापेमारी और गिरफ्तारियों की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि TRF लश्कर के फ्रंट ऑर्गनाइजेशन के रूप में काम करता है और कश्मीर घाटी में होने वाली कई आतंकी वारदात में शामिल है। बताया जाता है कि आम लोगों और सुरक्षाबलों के जवानों पर हमले करने वाले "पिस्टल गैंग" भी इसी का हिस्सा है।
चार दिन तक मनाए जाने वाले छठ महापर्व की शुरुआत सोमवार से हो गई है। इस पर्व में पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे और चौथे दिन क्रमश: अस्त होते और उदय होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं। नहाए-खाए की पूजन विधि और कुछ खास बातों के बाद सुबह स्नान कर नई साड़ी या अन्य वस्त्र पहन कर महिलाएं माथे पर सिंदूर लगाकर साफ सफाई करके छठ के प्रसाद और पकवान के लिए मिट्टी लेपकर चूल्हा या गैस चूल्हे को साफ कर व्रत की शुरुआत करती है।
चार उपचुनाव में शानदार जीत के बाद कांग्रेस में जश्न का माहौल है और पार्टी में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। जिस अदद जीत के टॉनिक की पार्टी को जरुरत थी वो आखिरकार मिल गया। इस जीत में कई नेताओं की बड़ी भूमिका रही है और सभी उक्त नेताओं के निष्ठावान भी अपने-अपने चहेते नेताओं को जीत का श्रेय दे रहे है। पर कांग्रेस में एक कद्दावर नेता ऐसे भी है जो चुपचाप उपचुनाव में अपना काम करते रहे और जीत के बाद भी क्रेडिट लेने के लिए ज्यादा हाथ पाँव नहीं मारते दिखे। ये नेता है सोलन विधायक डॉ कर्नल धनीराम शांडिल। शांडिल अर्की उपचुनाव के लिए प्रभारी थे और पार्टी के स्टार प्रचारक भी। उपचुनाव में संजय अवस्थी को टिकट देने के बाद अर्की में खुलकर बगावत हुई, ब्लॉक कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया और भाजपा ने पूरी ताकत लगाईं, बावजूद इसके कांग्रेस को शानदार जीत मिली। इस जीत में शांडिल की भी बड़ी भूमिका है। जब राजेंद्र ठाकुर ने खुलकर संजय अवस्थी के खिलाफ मोर्चा संभाला तो शांडिल वो नेता है जो राजेंद्र ठाकुर को मनाने कुनिहार पहुंच गए। हालांकि ठाकुर माने नहीं लेकिन शांडिल ने पूरा प्रयास किया और मतदान के दिन तक ठाकुर के समर्थकों को भी साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सोलन निर्वाचन क्षेत्र के साथ लगते अर्की के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी शांडिल अच्छा प्रभाव रखते है और उक्त क्षेत्रों में भी इसका लाभ अवस्थी को मिला। प्रचार के बीच भाजपा के पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा के साथ शिमला में कर्नल शांडिल की मुलाकात को लेकर भी खूब चर्चे हुए। कर्नल धनीराम शांडिल जुब्बल कोटखाई उपचुनाव में भी पार्टी के लिए निरंतर प्रचार करते दिखे। अपनी चिर परिचित शैली में कर्नल ने यहाँ मुद्दों की बात की और निसंदेह पार्टी को इसका लाभ भी मिला। कर्नल की खूबी ये है कि वे न तो हवा हवाई वादे करते है और न बिना तर्क के कोई मुद्दा उठाते है। अलबत्ता वे बहुत अच्छे वक्ता नहीं है लेकिन बदलते दौर की सियासत और जागरूक होते मतदाताओं के बीच शांडिल अच्छा प्रभाव छोड़ते है। मंडी संसदीय सीट के उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी प्रतिभा सिंह का कारगिल युद्ध को लेकर दिया गया एक बयान पार्टी की मुश्किलें बढ़ता दिख रहा था। हालांकि उन्होंने इस पर अपना स्पष्टीकरण दे दिया था, फिर भी विशेषकर सैनिक वोट पार्टी से नाराज़ न हो ये बड़ी चिंता थी। ऐसे में पार्टी के थिंक टैंक को याद आये कर्नल शांडिल। कर्नल ने प्रतिभा सिंह के समर्थन में कई जनसभाएं की और राजनीति में सेना के नाम के इस्तेमाल पर भाजपा पर जबरदस्त अटैक किया। कर्नल ने 1965 और 1971 के युद्ध में मिली जीत भी याद दिलाई और ये भी याद दिलाया कि कांग्रेस ने कभी इसके नाम पर वोट नहीं मांगे। वो बेदाग नाम जिसपर विरोधी भी कीचड़ नहीं उछाल पाएं डॉ कर्नल धनीराम शांडिल हिमाचल की सियासत का वो बेदाग़ नाम है जिस पर विरोधी भी कभी कीचड़ नहीं उछाल पाएं। वीरभद्र सरकार के खिलाफ वर्ष 2016 में भाजपा एक चार्जशीट लाई जिसमे कांग्रेस के मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे। तब भाजपा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, बेटे विक्रमादित्य सिंह, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू, 10 मंत्रियों, 6 सीपीएस और 10 बोर्ड-निगम-बैंकों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों समेत कुल 40 नेताओं और एक अफसर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। पर उस चार्जशीट में भी कर्नल धनीराम शांडिल का नाम नहीं था। यानी विपक्ष भी कभी उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा पाया। एक बात और कर्नल शांडिल की खूबी है, वो है उनकी गुटबाजी से दुरी। प्रदेश कांग्रेस में कई धड़े है, पर शांडिल किसी भी गुट में शामिल नहीं है।
चेन्नई में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। सड़कों से लेकर घर तक जल मगन हो गए है। इस बीच मौसम विभाग ने चेन्नई में अगले 2 दिन तक भारी बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते तमिलनाडु के कई जिलों में आज और कल स्कूल-कॉलेज भी बंद रहेंगे। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु तट के पास पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी पर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। जिसके प्रभाव से एक कम दबाव का क्षेत्र विकसित होने की उम्मीद है, जो उत्तर-पश्चिम दिशा में तमिलनाडु तट की ओर बढ़ेगा। बंगाल की खाड़ी से तमिलनाडु के समंदर तक साइक्लोनिक प्रेशर के कारण मौसमी गतिविधियां बदल रही हैं। जिसका असर आंध्र प्रदेश एवं पुडुचेरी में भी दिखाई दे रहा है। साइक्लोनिक प्रेशर के प्रभाव से तमिलनाडु समेत दक्षिण के कई राज्यों में नवंबर के महीने में भारी बारिश के साथ चेन्नई में बाढ़ जैसे स्थिति बन गई है। चेन्नई में बीते दो दिन से हो रही बारिश से हालात इतने बिगड़ गए कि शहर के कई हिस्से पानी-पानी हो गए हैं। जिसके चलते यातायात भी प्रभावित है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से बाचतीत की और राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश के के मद्देनजर स्थिति पर चर्चा की है। साथ ही पीएम मोदी ने बचाव एवं राहत कार्य में केंद्र से सभी संभव सहायता का आश्वासन भी दिया। मौसम विभाग की ओर से कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए एनडीआरएफ की टीमों को तैयार रखा गया है वहीं, भारी बारिश के चलते शिक्षा विभाग ने प्रभावित जिलों के स्कूलो-कॉलेजों में दो दिन की छुट्टी की घोषणा कर दी है। वहीं, पुडुचेरी में भी बारिश से बिगड़े हालात को देखते हुए दो दिन यानी 8-9 नवंबर को स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे।
जुब्बल-कोटखाई सीट पर कांग्रेस ने फिर परचम लहराया और एक बार फिर रोहित ठाकुर का दमखम दिखा। रोहित ठाकुर 6293 मतों से विजयी हुए हैं। मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशी और भाजपा के बागी चेतन बरागटा के साथ था। चेतन के साथ सहानुभूति भी थी और उनका चुनाव प्रबंधन भी शानदार था लेकिन रोहित की क्षेत्र में लगतार सक्रियता और जमीनी पकड़ के तिलिस्म को चेतन भेद नहीं पाएं। जानकार मान कर चल रहे थे कि जीत हार का अंतर नजदीकी होगा लेकिन 6293 वोट का अंतर रोहित का असल दम बताता है। उपचुनाव में जहाँ भाजपा और चेतन एक दूसरे पर आरोप -प्रत्यारोप लगाने में उलझे रहे वहीं रोहित ख़ामोशी के साथ जनसम्पर्क में जुटे रहे। भाजपा की कोशिश शुरू से जमानत बचाने से ज्यादा नहीं दिखी तो चेतन का फोकस भी कुछ हद तक भाजपा को काउंटर करने का रहा। दोनों की लड़ाई ने रोहित की राह आसान कर दी। 2017 के विधानसभा चुनाव में रोहित ठाकुर नजदीकी मुकाबले में हार गए थे। तब मुकाबला खुद नरेंद्र बरागटा से था, भाजपा भी एकजुट थी और कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी थी। सो नतीजा रोहित के विरुद्ध में गया। पर उपचुनाव में बंटे हुए प्रतिद्वंदी रोहित के आगे नहीं टिके। 2003 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ने वाले रोहित का ये पांचवा चुनाव था और तीसरी बार उन्हें जीत मिली। अपने पहले चुनाव से अब तक जनता ने उन्हें चाहे विधानसभा भेजा हो या नहीं, रोहित ठाकुर हमेशा क्षेत्र में सक्रिय रहे है। इसी सक्रियता और मजबूत पकड़ का इनाम उन्हें मिला है। 2022 में यदि कांग्रेस की सत्ता वापसी होती है और रोहित फिर जीत दर्ज करने में कामयाब रहे तो ये तय है कि उन्हें सरकार में कोई महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी। पर अगले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने में एक वर्ष से भी कम वक्त है और उम्मीदें ज्यादा, सो रोहित को डे वन से मैदान में डटना होगा। इस उपचुनाव में बेशक रोहित ठाकुर ने शानदार जीत दर्ज की है लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार चेतन बरागटा हारने के बावजूद सबका दिल जरूर जीत गए। जुब्बल-कोटखाई में कुल 56,612 मत पड़े जिनमें से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर ने 29,955 मत हासिल किए और चेतन बरागटा को 23662 मत पड़े। पर यक़ीनन तौर पर 20 दिन में जिस तरह से चेतन ने चुनाव लड़ा वो हैरान करने वाला है, विशेषकर उनका चुनाव प्रबंधन। बाकायदा वॉर रूम बनाया गया, कार्यकर्ताओं की पूरी ब्रिगेड तैयार की गई, जिम्मेदारियों का निर्धारण हुआ और रैलियों व चुनाव आयोजनों के लिए बेहतर क्राउड मैनेजमेंट भी दिखा। चेतन को बतौर निर्दलीय प्रत्याशी जितने मत प्राप्त हुए वो आज से पहले किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को नहीं मिले। चेतन अभी से 2022 के लिए ऐलान कर चुके है और जिस सहजता के साथ उन्होंने अपनी हार स्वीकार की है वो भी तारीफ के काबिल है। अलबत्ता चेतन के लिए चुनावी राजनीति की शुरुआत हार के साथ हुई हो लेकिन इतना तय है कि चेतन अब थमने वाले नहीं है।
जुब्बल कोटखाई उपचुनाव में जो हुआ वो भाजपा को अर्से तक याद रहेगा। ऐसी करारी हार भुलाई भी नहीं जा सकती। सत्तासीन भाजपा के लिए भी ये हार झटका भी है और सबक भी। इससे बुरी स्थिति क्या होगी कि भाजपा उपचुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई है। भाजपा प्रत्याशी के मतों का आंकड़ा 2644 में सीमट कर रह गया जो किसी राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवार की ओर से लिए गए अब तक सबसे कम मतों का रिकॉर्ड है। जिस सीट पर भाजपा का कब्जा था वहां भाजपा की इतनी बुरी हालत होगी ये तो उन नेताओं ने भी नहीं सोचा होगा जिनकी मनमानी ने पार्टी की लुटिया डुबाई। दरअसल उपचुनाव में भाजपा टिकट आवंटन के बाद से ही अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी झेल रही थी। टिकट आवंटन के बाद मानों जुब्बल कोटखाई में भाजपा का पूरा संगठन ही ध्वस्त हो गया। जब अपना कार्यकर्ता ही साथ नहीं था तो नतीजा कैसे अनुकूल आता ? खुद मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री सुरेश भारद्वाज ने पूरा दमखम लगाया लेकिन इन कार्यक्रमों में जनता तो दूर की बात पार्टी कार्यकर्ता तक नहीं पहुंच रहे थे। कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर के कार्यक्रम के लिए भी आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे लेकिन स्थानीय लोग वहां भी नहीं दिखे। पार्टी की स्थिति का अंदाजा इसी से लगा लीजिये कि टिकट आवंटन से प्रचार बंद होने तक भाजपा में निष्कासन का दौर ही चलता रहा। अंत तक पार्टी अपने ही कार्यकर्ताओं को निष्कासित करती रही। जिला शिमला के एकमात्र मंत्री सुरेश भारद्वाज को भाजपा ने जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में चुनाव प्रभारी बनाया था। चुनाव प्रचार की पूरी कमान सुरेश भारद्वाज के हाथों में रही। पर भारद्वाज पूरी तरह बेअसर रहे। चेतन का टिकट काटने के बाद कार्यकर्ताओं में खूब रोष था और चेतन के समर्थक तो इसका जिम्मेदार मंत्री को ही बताते रहे। हालांकि भाजपा में टिकट का निर्णय पार्टी आलाकमान करता है और चेतन का टिकट काटने का तर्क परिवारवाद पर लगाम लगाना बताया गया पर समर्थक ऐसा नहीं मानते। दरअसल अतीत में स्व नरेंद्र बरागटा और सुरेश भारद्वाज के बीच का मतभेद कई मौकों पर सामने आता रहा, जिसके चलते बरागटा परिवार के समर्थकों की धारणा है कि चेतन के टिकट की राह भारद्वाज ने ही मुश्किल की। कारण जो भी हो लेकिन उपचुनाव में भाजपा की खूब किरकिरी हुई। करारी हार, उम्मीद से बदतर रहा प्रदर्शन जुब्बल कोटखाई उपचुनाव में भाजपा मात्र 2644 मतों में सीमट कर रह गई। जबकि भाजपा को जमानत बचाने के लिए करीब 9414 मत चाहिए थे। भाजपा प्रत्याशी नीलम जमानत बचाने के लिए आवश्यक मतों के एक तिहाई वोट भी नहीं ले सकीं। हालांकि ऐसा नहीं है कि नीलम की जमीनी पकड़ नहीं है या निजी तौर पर उन्हें लेकर लोगों में कोई रोष हो लेकिन भाजपा की खराब रणनीति ने उनकी भी फजीहत करवाई। माना जा रहा था कि नीलम की जमानत बचना मुश्किल होगा लेकिन इतनी बुरी स्थिति तो विश्लेषकों ने भी नहीं सोची होगी। जब अनुराग स्वीकार है तो चेतन क्यों नहीं ? परिवारवाद के जिस अजब तर्क के नाम पर भाजपा ने चेतन का टिकट काटा वो न जनता को हजम हुआ और न भाजपा कार्यकर्ताओं को। जो व्यक्ति करीब डेढ़ दशक से पार्टी में सक्रिय हो, लम्बे वक्त से पार्टी के प्रदेश आईटी सेल का प्रमुख हो, परिवारवाद के नाम पर उसका टिकट काटे जाना समझ से परे है। चेतन पैराशूटी नेता नहीं है जो अपने पिता के निधन के बाद टिकट लेने आ गए, वो निरंतर पार्टी में सक्रिय थे। एक आम कार्यकर्त्ता की तरह ही अपने कई वर्ष पार्टी को दे चुके है। अगर उनके टिकट की राह में परिवारवाद रोड़ा था तो पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के पुत्र अनुराग ठाकुर भी तो वर्तमान में केंद्रीय मंत्री है। समर्थक तो उन्हें भावी मुख्यमंत्री तक मानते है। जब अनुराग स्वीकार है तो चेतन क्यों नहीं ? अब ठेके कौन देगा माना जा रहा है कि भाजपा की स्थिति बदतर करने में बड़े नेताओं के बयानों ने भी खासी भूमिका अदा की है। जुब्बल कोटखाई में प्रचार के दौरान मंत्री सुरेश भारद्वाज का एक बयान भी खूब चर्चा में रहा। भारद्वाज का ठेकेदारों को लेकर दिया विवादित बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। एक जनसभा में भारद्वाज इस वीडियो में कहते नजर आये कि यहां विकास के हर काम और ठेके भाजपा प्रत्याशी नीलम सरैईक और भाजपा सरकार के माध्यम से ही मिलेंगे। बहुत से ठेकेदार सोचते हैं कि वे उधर से आ जाएंगे और उनका चलता रहेगा। वैसे ठेके नहीं मिलेंगे।
सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र का विकास करने के लिए कई प्रयास किये गए है। प्रदेश के हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन सब लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही है जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण अच्छी स्वास्थ्य सेवा वहन नहीं कर सकते हैं। सरकार की इस मुहीम को सफल बनाने में हिम केयर योजना ने बड़ी भूमिका अदा की है। इस योजना के तहत अक्तूबर के दूसरे सप्ताह तक 144 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च कर 1 लाख 51 हजार 157 लोगों का निःशुल्क इलाज किया जा चुका है। हिमकेयर योजना का लाभ लेने के लिए प्रदेश के लगभग 5 लाख 21 हजार 698 लोग अपना पंजीकरण करवा चुके है। इस योजना के तहत एक हजार 579 उपचार प्रक्रियाएं कवर की जा रही हैं, जिसमें डे-केयर सर्जरी भी शामिल हैं। अस्पताल में भर्ती होने पर इस योजना के अंतर्गत आने वाले लोगों का इलाज हिमकेयर के माध्यम से ही होता है। इस दौरान इलाज के लिए किसी प्रकार का खर्च नहीं करना पड़ता। हिमकेयर कार्ड प्रदेश और प्रदेश के बाहर कुल मिलाकर 201 पंजीकृत अस्पतालों में स्वीकार किया जाता है। इनमें से 64 प्राइवेट अस्पताल भी शामिल हैं। विदित रहे कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के बाद हिमाचल सरकार ने हिमकेयर योजना शुरू की। भारत सरकार द्वारा देश के नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत योजना आरंभ की गई थी। यह एक स्वास्थ्य बीमा योजना है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत केवल SECC-2011 में शामिल नागरिक ही आवेदन कर सकते है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे सभी नागरिक जो आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, जो कि SECC-2011 के दायरे में नहीं है उनके लिए हिम केयर योजना आरंभ की गई। प्रदेश में एक बड़ा वर्ग आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित रह गया था, और इसीलिए हिमाचल सरकार ने उस वर्ग को नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए हिमकेयर योजना की शुरुआत की। यह योजना 1 जनवरी 2019 को आरंभ की गई थी। हिम केयर योजना के अंतर्गत ₹500000 तक का स्वास्थ्य बीमा लाभार्थी परिवार को प्रदान किया जाता है। इस योजना का लाभ एक परिवार के सभी 5 सदस्य उठा सकते हैं। यदि किसी परिवार में 5 से ज्यादा सदस्य हैं तो शेष सदस्यों को अलग से नामांकन किया जा सकता है। यह योजना सह भुगतान के आधार पर कार्यान्वित की जाती है एवं इस योजना के अंतर्गत श्रेणियों के आधार पर प्रीमियम दरें तय की गई है। स्मार्ट कार्ड केवल एक वर्ष के लिए ही वैलिड हिम केयर योजना को हिमाचल प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने के लिए आरंभ किया गया था। इस योजना के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को ₹500000 तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत स्मार्ट कार्ड बनवाने की प्रक्रिया 15 अप्रैल 2021 को बंद कर दी गई थी। अब केवल पुरानी कार्डो का नवीकरण ही करवाया जा सकता है। इस योजना के अंतर्गत स्मार्ट कार्ड केवल एक वर्ष के लिए ही वैलिड होता है। इसके पश्चात लाभार्थियों को प्रीमियम जमा करके नवीकरण करवाना होता है। वह सभी नागरिक जिनके स्मार्ट कार्ड की अवधि समाप्त हो गई है उन सभी को 30 दिन के भीतर अपने कार्ड का नवीकरण करवाना अनिवार्य है। यदि लाभार्थी द्वारा 30 दिन तक नवीकरण नहीं करवाया जाता तो इस योजना का लाभ आगामी वर्ष के लिए प्रदान नहीं किया जाता। इस योजना के माध्यम से आमजन कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। लाभार्थी का इलाज मुफ्त, सीधे अस्पताल को होता है भुगतान हिम केयर योजना 2021 के अंतर्गत लाभार्थियों को ई- कार्ड प्रदान किया जाता है। यह कार्ड लाभार्थी को अपना इलाज करवाते समय अस्पताल में दिखाना होता है। अस्पताल द्वारा लाभार्थी से इस कार्ड को देखने के बाद इलाज के लिए किसी भी प्रकार की राशि नहीं ली जाती। इस कार्ड के माध्यम से लाभार्थी का इलाज मुफ्त में किया जाता है। हिम केयर योजना के अंतर्गत लाभार्थी के इलाज का खर्च हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाता है। वह सभी अस्पताल जो आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत भी पंजीकृत है वह इस योजना के अंतर्गत भी पंजीकृत है। क्लेम की राशि सीधे अस्पताल के बैंक अकाउंट में पहुंचाई जाती है। यह राशि क्लेम पेपर चेक करने के बाद पहुंचाई जाती है। प्रति परिवार प्रति वर्ष मात्र 1000 रुपए प्रीमियम हिमकेयर कार्ड बनवाने के लिए एकल नारी, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग, 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं, आशा, मिड डे मील कार्यकर्ता, दिहाड़ीदार, अंशकालिक व आउटसोर्स कर्मचारियों और अनुबंध कर्मचारियों के लिए प्रीमियम मात्र 365 रुपए प्रतिवर्ष निर्धारित किया गया। अन्य व्यक्ति जो नियमित सरकारी या सेवानिवृत्त कर्मचारी नहीं उनके लिए प्रीमियम की दर प्रति परिवार प्रति वर्ष 1000 रुपए निर्धारित की गई है। नि:शुल्क होते हैं 56 टेस्ट इस योजना के तहत हिमाचल के सरकारी अस्पतालों की लैब के अलावा अस्पताल परिसरों में स्थापित निजी लैब में भी मरीजों के 56 प्रकार के टेस्ट नि:शुल्क होते हैं। प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेजों, जोनल अस्पताल, सिविल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एसआर लैब स्थापित हैं। इनमें सरकारी रेट पर ही हर तरह के टेस्ट होते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की अपनी भी लैब हैं, लेकिन इनमें 12 बजे तक टेस्ट होते हैं। उसके बाद इनकी जांच की जाती है। ऐसे में लोग निजी लैब में टेस्ट करवाते हैं। क्लीनिक पैथोलॉजी में 17, बायो केमिस्ट्री में 20 तरह के टेस्ट फ्री होंगे। इनमें ब्लड शुगर, एचबी, यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल आदि के टेस्ट शामिल हैं। सिरियोलॉजी में 9 तरह के टेस्ट होते हैं। इनमें एचआईवी, डेंगू, मलेरिया आदि के टेस्ट शामिल हैं। माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी में ब्लड कल्चर, यूरिन कल्चर, यूरिन एनालिसिस में यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट, यूरिन माइक्रोस्कोपी, स्टूल एनालिसिस में 1 टेस्ट, रेडियोलॉजी में एक्सरे और कार्डियोलॉजी में ईसीजी नि:शुल्क होता है। इसमें अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन भी शामिल हैं। हर जिले में लोगों को मिला लाभ अक्तूबर माह तक हिमकेयर के तहत बिलासपुर जिले के करीब 8,987 लोगों के इलाज पर 7 करोड़ 28 लाख 85 हजार रुपए, जिला चंबा में 5,922 मरीजों पर 5 करोड़ 34 लाख, जिला हमीरपुर में 14,554 लोगों के लिए करीब 9 करोड़ 21 लाख, जिला कांगड़ा में 35,430 लोगों के लिए करीब 34 करोड़ 95 लाख , जिला किन्नौर में 1,541 लोगों के लिए एक करोड़ 89 लाख, जिला कुल्लू में 12,382 लोगों के लिए आठ करोड़ 48 लाख 71 हजार रुपए, लाहौल-स्पीति जिले में 391 लोगों के लिए 34 लाख 58 हजार रुपए, जिला मंडी में 19,639 लोगों के लिए 18 करोड़ 29 लाख 85 हजार रुपए, जिला शिमला में 13,266 लोगों के लिए करीब 19 करोड़ 86 लाख, जिला सिरमौर में 13,756 लोगों के लिए करीब 9 करोड़ 45 लाख, जिला सोलन में 13,433 व्यक्तियों के लिए 10 करोड़ 50 लाख रुपए, ऊना जिले में 9,684 व्यक्तियों के लिए करीब पांच करोड़ 79 लाख रुपए खर्च किए गए। इसके अलावा पीजीआई चंडीगढ़ में 2,172 प्रदेशवासियों के निःशुल्क इलाज के लिए करीब 12 करोड़ 57 लाख रुपए हिमकेयर के माध्यम से अदा किए गए। हिम केयर योजना 2021 के लाभ तथा विशेषताएं -हिम केयर योजना को हिमाचल प्रदेश के उन सभी नागरिकों के लिए आरंभ किया गया है जो आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत नहीं आते हैं। -यह योजना एक स्वास्थ्य बीमा योजना है। -इस योजना के अंतर्गत ₹500000 तक का स्वास्थ्य बीमा लाभार्थी परिवार को प्रदान किया जाता है। -इस योजना का लाभ परिवार के 5 सदस्य उठा सकते हैं और यदि किसी परिवार में 5 से ज्यादा सदस्य हैं तो शेष सदस्यों का अलग से नामांकन किया जाता है। -यह योजना सह भुगतान के आधार पर कार्यान्वित की जाती है। -इस योजना के अंतर्गत प्रीमियम दरें श्रेणी के आधार पर तय की गई है। -HP Him Care Yojana 2021 के अंतर्गत ई कार्ड प्रदान किया जाता है। -इस ई कार्ड को लाभार्थी अस्पताल में दिखा कर अपना इलाज मुफ्त में करवा सकता है। - योजना को 1 जनवरी 2019 को आरंभ किया गया था। -हिम केयर योजना के अंतर्गत इलाज का पूरा खर्च हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। -वह सभी अस्पताल जो आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पंजीकृत है वह इस योजना के अंतर्गत भी पंजीकृत है। -इस योजना के अंतर्गत क्लेम की राशि अस्पताल के बैंक अकाउंट में पहुंचाई जाती है। -इस योजना के सफलतापूर्वक कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत आईटी प्रणाली को भी विकसित किया गया है। -हिम केयर योजना के अंतर्गत लाभार्थी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से खुद भी आवेदन कर सकते हैं तथा कॉमन सर्विस सेंटर या फिर लोकमित्र सेंटर पर ₹50 की शुल्क जमा कर कर भी आवेदन कर सकते हैं। -इस योजना के अंतर्गत केवल 3 महीने ही आवेदन किए जाते हैं जो कि जनवरी से मार्च है। -हिम केयर योजना के अंतर्गत रिन्यूअल की प्रक्रिया पूरे साल चलती है। -इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी को अपनी श्रेणी के अंतर्गत ही आवेदन करना अनिवार्य है।
फतेहपुर उपचुनाव में हार के साथ ही मंत्री बिक्रम ठाकुर के चुनाव प्रबंधन की पोल फिर खुल गई। एक बार फिर मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर चुनावी इम्तिहान में फेल हो गए। अभी तो पालमपुर नगर निगम में हार की टीस भी कम नहीं हुई थी और फतेहपुर ने फिर बड़ा झटका दे दिया। बढ़ती महंगाई, भीतरघात और जमीनी स्तर पर कार्यकर्तओं की नाराजगी के बीच बलदेव ठाकुर की नैय्या पार लगाने के लिए मैदान में डटे प्रभारी बिक्रम ठाकुर के लिए ये उपचुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। फिर भी उम्मीद थी कि मंत्री जी के प्रबंधन का कमाल यहाँ दिखेगा, पर ऐसा हुआ नहीं। रणनीतिक तौर पर भी भाजपा पुरे चुनाव में पिछड़ी दिखी। बड़े नेताओं के आयोजनों से आम जन की दुरी और नाराज दिख रहे कार्यकर्ता पहले ही हार के संकेत दे रहे थे, और हुआ भी ऐसा ही। जयराम सरकार में बिक्रम ठाकुर वो चेहरा है जिनका कद और पद लगातार बढ़ा है। 2019 में जयराम कैबिनेट के कुछ मंत्रियों का डिमोशन हुआ,पर बिक्रम ठाकुर को उद्योग मंत्रालय के साथ- साथ परिवहन जैसा अहम महकमा भी दे दिया गया। फिर उन्हें पालमपुर नगर निगम चुनाव की ज़िम्मेदारी सौंपी गई जिसमें भाजपा बुरी तरह परास्त हुई। इस हार के बाद अब फतहपुर उपचुनाव की ज़िम्मेदारी भी बिक्रम सिंह ठाकुर को दी गई थी जहाँ वे फिर नाकामयाब रहे है। कांगड़ा जैसे बेहद महत्वपूर्ण ज़िले में मिली इन दो हारों की कसक जरूर भाजपाई खेमे में होगी। जाहिर है फतेहपुर के बाद अब पार्टी आलाकमान भी विस्तृत विश्लेषण करेगा। ऐस में ये मंत्री बिक्रम सिंह के सियासी बहीखाते में जुड़ी एक और हार उनके लिए परेशानी का कारण है। वन मंत्री राकेश पठानिया फतेहपुर उपचुनाव में सह प्रभारी थे। कभी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर के खिलाफ बयान को लेकर तो कभी सभी को मास्क पहनने वाले डंगर बताकर पठानिया लगातार चर्चा में रहे और अब हार को लेकर चर्चा में है। नूरपुर के साथ लगते क्षेत्रों में उनके प्रभाव से भाजपा को बड़ी आस थी पर वे भी बलदेव को जीत नहीं दिला सके। यहाँ जीत मिलती तो निसंदेह पठानिया का असर भी बढ़ता, पर ये हार कई सवाल छोड़ गई। एक सवाल ये भी है कि क्या भाजपा के बड़े चेहरे अति आत्मविश्वास से ग्रस्त है ? कांग्रेस के बनिस्पत फीका जमीनी प्रचार फतेहपुर में कांग्रेस ने पूर्व विधायक स्व सुजान सिंह पठानिया के पुत्र भवानी पठानिया को टिकट दिया था। भाजपा के हाथ में परिवारवाद एक बड़ा मुद्दा था लेकिन खुद से ही झूझती दिखी पार्टी आक्रामक तरीके से मतदातों के बीच इस मुद्दे को लेकर नहीं पहुंची। किसी तरह रैलियों में क्राउड मैनेजमेंट कर पार्टी जीत की उम्मीद में थी लेकिन जमीनी स्तर पर पार्टी प्रचार कांग्रेस के बनिस्पत फीका ही दिखा। कांग्रेस के कई नेता भवानी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे, बावजूद इसके भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाने में कामयाब नहीं रही। कांगड़ा के मतदाता नामों का लिहाज नहीं करते 2017 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सरकार के बड़े बड़े चेहरे कांगड़ा में धराशाई हुए थे। इनमें सुधीर शर्मा और स्व. जीएस बाली भी थे। कांगड़ा के मतदाताओं ने कभी बड़े नामों का लिहाज नहीं किया है। जिस कांगड़ा में कभी खुद मुख्यमंत्री रहते हुए शांता कुमार चुनाव हार सकते है वहां भाजपा की दूसरी पंक्ति के नेताओं का अति आत्मविश्वास समझ से परे है। फिलहाल कांगड़ा से बिक्रम सिंह ठाकुर, राकेश पठानिया और सरवीण चौधरी मंत्री है जबकि विपिन सिंह परमार विधानसभा अध्यक्ष है। बावजूद इसके पहले नगर निगम चुनाव में भाजपा को झटका लगा और अब फतेहपुर उपचुनाव में भी। वर्ष 2017 में इसी कांगड़ा ने भाजपा पर भरपूर प्यार बरसाया था, अगर कांगड़ा की हवा बदली तो 2022 में भाजपा की राह वहां मुश्किल होगी।
रतन सिंह पाल के साथ-साथ अर्की निर्वाचन क्षेत्र में वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ राजीव बिंदल की साख भी दांव पर लगी थी। दरअसल बिंदल अर्की में भाजपा के प्रभारी थे, पर अर्की में बिंदल का जादू नहीं चला। संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी पार्टी की कमजोरी खुलकर सामने आई। जिस 'बिंदल मैनेजमेंट' का राग उनके समर्थक गाते थे वो फिर एक बार फ्लॉप सिद्ध हुआ। इससे पहले बिंदल सोलन नगर निगम चुनाव में भी बिंदल प्रभारी थे पर नतीजा पार्टी के पक्ष में नहीं रहा था। सोलन बिंदल का गृह क्षेत्र था बावजूद इसके तब न सिर्फ भाजपा हारी बल्कि बिंदल के कई करीबियों को भी जनता ने नकार दिया। अब अर्की में भी बिंदल बेअसर रहे। अर्की में चुनाव प्रचार के दौरान हुए कार्यक्रमों में प्रबंधन की खामियां लगातार उजागर हुई। नामांकन के दिन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर अर्की पहुंचे थे। तब अनुराग के स्वागत के लिए काफी संख्या में उनके समर्थक और चाहवान विभिन्न क्षेत्रों से अर्की पहुंचे थे सो कार्यक्रम जैसे-तैसे ठीक ठाक हुआ। किन्तु अनुराग के दूसरे दौरे में भाजपा के चुनाव प्रबंधन की पोल खुल गई। उसी दिन देवभूमि क्षत्रिय संगठन की कुहिनार में रैली थी जिसमें काफी संख्या में लोग पहुंचे जबकि अनुराग के कार्यक्रम में तुलनात्मक तौर पर काफी कम लोग थे। यानी डॉ राजीव बिंदल की अगुवाई में भाजपा के चुनाव प्रबंधक केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के कार्यक्रमों में इतनी भीड़ भी नहीं जुटा पाए जितनी एक नए संगठन ने एकत्र कर ली। इसके बाद 25 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के कुनिहार में आयोजित कार्यक्रम में उचित प्रबंध करना भाजपा के लिए नाक का सवाल था। पर हकीकत ये है कि चप्पे -चप्पे पर पोस्टर बैनर की भरमार होने के बावजूद पुरे प्रचार अभियान में भाजपा आम जनता से कनेक्ट करने में नाकामयाब रही। साथ ही पार्टी के आम कार्यकर्त्ता की बॉडी लैंग्वेज भी वैसी नहीं थी जिसके लिए भाजपा जानी जाती है। स्वास्थ्य घोटाले के बाद इस्तीफा, अब हाशिये पर ! डॉ राजीव बिंदल लम्बे वक्त से पार्टी के कद्दावर नेता रहे है। वर्ष 2000 में हुए सोलन उपचुनाव को जीतकर बिंदल पहली बार विधानसभा पहुंचे थे और इसके बाद 2003 और 2007 में भी सोलन निर्वाचन क्षेत्र से जीते। 2012 में जब सोलन सीट आरक्षित हो गई तो बिंदल ने नाहन का रुख किया और वहां जीतकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। 2017 में बिंदल दूसरी बार नाहन से जीते और एक वक्त पर प्रो धूमल के हारने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी माना जा रहा था। पर समय के फेर में मुख्यमंत्री की रेस में शामिल बिंदल मंत्री तक नहीं बने। उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया। जैसे तैसे 2019 के अंत में बिंदल प्रदेश अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे लेकिन कोरोना काल में हुए स्वास्थ्य घोटाले की वजह से 2020 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। तब बिंदल ने इसे नैतिकता के आधार पर दिया गया इस्तीफा बताया था और बाद में उन्हें क्लीन चिट भी मिल गई। पर इसके बाद से बिंदल एक किस्म से हाशिए पर दिख रहे है, न उन्हें मंत्री पद मिल रहा है और न ही संगठन में कोई अहम् भूमिका। समर्थकों को आस, परिवर्तन हो तो शायद कुछ बेहतर हो ! डॉ राजीव बिंदल के समर्थक निरंतर इसी आस में है कि या तो बिंदल को कबिनेट में एंट्री मिल जाएं या फिर संगठन में कोई बड़ी भूमिका। पर ऐसा हो नहीं रहा। अब प्रदेश में हुए चार उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त मिली है जिसके बाद सरकार संगठन में फेरबदल के कयास है। बिंदल समर्थक इसी उम्मीद में है कि इस बारे डॉ बिंदल को भी कहीं बेहतर स्थान मिलेगा पर ये नहीं भुलाया जा सकता कि सोलन नगर निगम चुनाव और अर्की उपचुनाव की हार भी बिंदल के खाते में है। जिला संगठन में बदलाव की दरकार अर्की में भाजपा के संगठन की बात करें तो यहाँ संगठन में बदलाव की दरकार है। अर्की मंडल के पदाधिकारी इस उपचुनाव में जमीनी स्तर पर प्रभाव छोड़ने में नाकामयाब रहे है। न सिर्फ अर्की बल्कि भाजपा के जिला संगठन का भी ऐसा ही हाल है। पिछले कई सालों में सोलन जिला में भाजपा का संगठन कभी इतना कमजोर नहीं दिखा है। अमूमन ये ही हाल जिला भाजयुमो का है। जो भाजयुमो युवा शक्ति के सहारे पार्टी के आयोजनों में जोश भरता था वो भी अब फीका सा दिख रहा है। यूँ तो भाजयुमो का वन बूथ ट्वेंटी यूथ कार्यक्रम हर माह जारी है लेकिन सवाल ये है कि क्या यह अभियान केवल युवाओं को कागजों में जोड़ना मात्र ही साबित हो रहा है। फिलवक्त जिला सोलन में मिल रही हार के बाद संगठन में फेरबदल की जरुरत को भाजपा नकार नहीं सकती।
फतेहपुर में बीते चार चुनाव में चार चेहरे बदल चुकी भाजपा अब लगातार चार चुनाव हार चुकी है। 2009 के उपचुनाव से शुरू हुआ हार का ये सिलसिला 2021 के उपचुनाव में भी कायम रहा। कांगड़ा जिला से होकर ही शिमला की गद्दी का रास्ता जाता है, ऐसे में सत्ता के इस सेमीफाइनल में ये हार पार्टी के लिए करारा झटका है। इस जीत ने जहाँ कांग्रेस के नेताओं-कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर दी है, वहीँ भाजपा अब सकते में है। यहाँ जयराम सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों की साख भी दांव पर थी, बिक्रम सिंह ठाकुर और राकेश पठानिया। पर ये दोनों ही मंत्री भाजपा की नैया पार नहीं लगा सके। विशेषकर बिक्रम ठाकुर के लिए तो ये बड़ा झटका है, बिक्रम ठाकुर ही यहाँ चुनाव प्रभारी थे। इससे पहले ठाकुर पालमपुर नगर निगम चुनाव में भी प्रभारी थे लेकिन वहां भी भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। फतेहपुर उपचुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी, पर न तो मुख्यमंत्री के दौरे भाजपा की हार टाल सके और न ही कैबिनेट मंत्री अनुराग ठाकुर की रैलियां काम आईं। हिमाचल प्रभारी अनिवाश राय खन्ना के जीत के दावे भी नतीजे के बाद हवा हवाई सिद्ध हुए। इसमें कोई संशय नहीं है कि इस चुनाव में टिकट आवंटन से लेकर नतीजे आने तक हर मोर्चे पर भाजपा की सांगठनिक योजना भी धराशायी हुई। दरअसल इस वर्ष फरवरी में पूर्व विधायक सुजान सिंह पठानिया का निधन हुआ था और उसके बाद से ही भाजपा उपचुनाव के लिए एक्शन में थी। लगातार मुख्यमंत्री और संगठन की विभिन्न इकाइयों के आयोजन हो रहे थे। गौर करने लायक बात ये है कि इन सभी आयोजनों में पार्टी पूर्व में प्रत्याशी रहे कृपाल परमार को आगे रखकर चलती दिखी। जिस तरह की तवज्जो कृपाल को दी जा रही थी उससे मोटे तौर पर ये तय माना जा रहा था कि कृपाल ही चेहरा होंगे। पर अंतिम समय में पार्टी ने बलदेव ठाकुर को टिकट दिया। नतीजन कृपाल के समर्थन में कई प्राधिकारियों ने इस्तीफे दिए, कई नाराज़ हुए। हालांकि बाहरी तौर पर मुख्यमंत्री ने कृपाल को मना लिया लेकिन इस स्थिति को ठीक से पार्टी मैनेज नहीं कर पाई। पार्टी के एक तबके ने प्रचार नहीं किया और भीतरघात से भी इंकार नहीं किया जा सकता। लगातार तीसरी बार हार के साथ ही भाजपा प्रत्याशी बलदेव ठाकुर के राजनीतिक भविष्य भी सवाल उठने लगने है। इससे बलदेव 2012 में पार्टी प्रत्याशी थे और 2017 में बतौर बागी चुनाव लड़े थे। हार की हैट्रिक बना चुके बलदेव के लिए आगे की राह आसान नहीं होनी। यहाँ दिलचस्प बात ये भी है की 2017 के चुनाव में बलदेव की बगावत ने पार्टी की लुटिया डुबाई थी, तब पार्टी ने उन्हें निष्कासित भी किया था। बावजूद इसके खुद को पार्टी विथ डिफरेंस एंड डिसिप्लिन कहने वाली भाजपा ने बलदेव को टिकट दिया। दोनों साथ थे तो मजबूत थे ! फतेहपुर क्षेत्र में डॉ राजन सुशांत एक समय में भाजपा के तेज तर्रार नेता माने जाते थे। दोनों साथ थे तो मजबूत थे, पर जब से दोनों की राह जुदा हुई है, दोनों का हाल खराब है। स्व सुजान सिंह पठानिया को 2007 के विधानसभा चुनाव में हारने वाले नेता भी डॉ राजन सुशांत ही थे। इस उपचुनाव में भी डॉ राजन सुशांत करीब 13 हजार वोट ले गए और भाजपा की हार का कारण बने। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार राजन सुशांत के प्रदर्शन में ख़ासा सुधार दिखा। हालांकि उनकी इस हार के बाद उनकी पार्टी 'हमारी पार्टी हिमाचल पार्टी' के भविष्य पर भी संशय की स्थिति है।
3219 वोट से कांग्रेस प्रत्याशी संजय अवस्थी अर्की उपचुनाव जीतने में कामयाब रहे। उन्हें राजेंद्र ठाकुर की बगावत से भी झूझना पड़ा और भीतरघात से भी इंकार नहीं किया जा सकता, इस पर संजय अवस्थी ने चुनाव भी बेहद कमजोर तरीके से लड़ा। ऐसा लचर चुनाव प्रबंधन कम ही देखने को मिलता है, बावजूद इसके अवस्थी जीत गए। इसमें कोई संदेह नहीं है की अगर अवस्थी ने मजबूती से ये चुनाव लड़ा होता तो उनकी जीत का अंतर कहीं ज्यादा होता। पर जीत तो आखिर जीत है। वहीं भाजपा के लिए शायद ये हार पचाना अधिक मुश्किल नहीं रहा होगा क्योंकि जमीनी स्थिति कभी भाजपा के पक्ष में दिखी ही नहीं। बल्कि कांग्रेस की कमजोरी की वजह से पार्टी का प्रदर्शन अनुमान से बेहतर ही रहा है। दरअसल पार्टी प्रत्याशी रतन पाल के खिलाफ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक गुट खुलकर मुखालफत करता रहा है जिसकी अगुवाई पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा करते रहे। हालांकि चुनाव से पहले गोविन्द राम शर्मा को मना लिया गया लेकिन तब तक उनके समर्थकों में रतन पाल विरोधी माहौल चरम पर था। ये लोग भाजपा के साथ होने का तो दावा करते रहे लेकिन रतन पाल इन्हे मंजूर नहीं थे। 2017 में जयराम राज आने के बाद से अर्की में भाजपा ने सिर्फ रतन पाल को ही तव्वज्जो दी और जमीनी पकड़ रखने वाले कई मजबूत नेता दरकिनार कर दिए गए। इस पर रतन पाल से पार्टी का एक बड़ा तबका कभी खुश नहीं दिखा, इनमें आम कार्यकर्त्ता भी शामिल है। जब कार्यकर्त्ता ही रतन पाल के पक्ष में एकजुट नहीं था तो जीत सिर्फ चमत्कार से ही हो सकती थी। इस जमीनी स्थिति से पार्टी यदि वाकिफ नहीं थी तो ये संगठन की बड़ी नाकामयाबी है। और यदि इससे वाकिफ होने के बावजूद उचित कदम नहीं उठाये गए तो बड़ा सवाल ये है कि क्या पार्टी चुनाव हारने के लिए लड़ रही थी ? जिला परिषद चुनाव के बाद लामबंद हुए रतन पाल विरोधी रतन सिंह पाल के खिलाफ अर्की में इस साल की शुरुआत से ही खुलकर विरोध के स्वर उठने लगे थे। तब जिला परिषद् चुनाव में पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के टिकट काटे गए। कुनिहार वार्ड से अमर सिंह ठाकुर और डुमहेर वार्ड से आशा परिहार का टिकट काटा गया। इन्होंने इसके पीछे रतन पाल का हाथ बताया। इन दोनों नेताओं ने चुनाव लड़ा भी और जीता भी। जिला परिषद् पर कब्जे के लिए भाजपा को इन दोनों की जरुरत पड़ी और दोनों ने पार्टी का साथ भी दिया। पर अर्की में जमीनी स्तिथि नहीं बदली। अर्की नगर पंचायत चुनाव में भी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी थी। जब अनदेखी से आहत गोविंद राम ने खोला मोर्चा ! 1993 से 2003 तक भाजपा की लगातार तीन शिकस्त के बाद लगातार दो बार पार्टी को जीत दिलाने वाले पूर्व विधायक गोविन्द राम शर्मा का 2017 में टिकट काटा गया था। उस चुनाव में गोविंदराम शर्मा पूरी तरह पार्टी के लिए प्रचार करते दिखे थे और भाजपा एकजुट थी। तब रतन पाल तो चुनाव हार गए लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। उम्मीद थी गोविन्द राम को या किसी बोर्ड निगम में ज़िम्मेदारी मिलेगी या संगठन में अहम दायित्व मिलेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। नतीजन उनके समर्थकों की नाराजगी बढ़ती रही और इस वर्ष पंचायत चुनाव के बाद उन्होंने खुलकर मोर्चा खोल दिया। 2022 में नोटा भी बड़ी चुनौती ! अर्की उपचुनाव में 1626 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया, जबकि 2017 में ये आंकड़ा 530 था। सवर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे देवभूमि क्षत्रिय संगठन ने नोटा दबाने का आग्रह किया था जिसके बाद इसकी संख्या में करीब तीन गुना बढ़ोतरी हुई। यदि मुकाबला नजदीकी होता तो ये जीत हार का कारण बन सकता था। माहिर मानते है कि इसमें से अधिक हिस्सा सत्ता के विरोध में जा सकता था। ऐसे में 2022 में नोटा को सभी प्रत्याशियों को ध्यान में रखना होगा। 2022 में नहीं होगी गलती की गुंजाइश ! संजय अवस्थी ने 2012 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था और नजदीकी मुकाबले में हार गए थे। पर उसके बाद से ही अवस्थी लगातार अर्की में सक्रीय थे। नौ साल की ये मेहनत ही अवस्थी को बचा गई अन्यथा जिस लचर तरीके से कांग्रेस ने ये उपचुनाव लड़ा है वो चौकाने वाला रहा। बंटी हुई भाजपा और रतन पाल को लेकर पार्टी के एक तबके में विरोध ने भी उनकी स्थिति बेहतर की। अगर 2022 में भाजपा इन गलतियों से सबक लेकर लड़ती है तो कांग्रेस को भी मजबूती से चुनाव लड़ना होगा। तब गलती की शायद कोई गुंजाइश नहीं रहे। कांग्रेस को जहाँ में रखना होगा कि जीत का जो अंतर आठ से दस हज़ार का हो सकता था वो महज तीन हज़ार ही रहा है। क्या नया चेहरा लाना ही विकल्प है ? अर्की में भाजपा की वर्तमान स्थिति बेहद पेचीदा है। रत्न पाल और गोविन्द राम, ये दोनों ही चेहरे आगे भी क्या पार्टी को जीत दिला सकते है इस पर अभी से मंथन करना होगा। ये तय है कि दोनों के चलते पार्टी बंट चुकी है और इस स्थिति में 2022 में भी परिणाम अनुकूल आना मुश्किल होगा। ऐसे में मुमकिन है कि कोई नया चेहरा लाकर पार्टी सबको एक साथ ला सकती है? दो चुनाव हारने के बाद रतन पाल पर फिर दांव खेलना मुश्किल ही लगता है। बाकी सियासत में सब संभव है।
'बुलंदी देर तक किस शख़्स के हिस्से में रहती है, बहुत ऊँची इमारत हर घड़ी खतरे में रहती है'...मुनव्वर राणा का शेर मंडी में भाजपा की स्थिति पर सटीक बैठता है। 2014 में जो मंडी करीब चालीस हज़ार के अंतर से भाजपा की हुई थी, 2019 में चार लाख के अंतर से भाजपा की हुई। इस बीच 2017 भी आया जहाँ भाजपा ने जिला मंडी की दस में से नौ सीटें जीती और संसदीय क्षेत्र की 17 में से 13। इस साल हुए पंचायत और शहरी निकाय चुनाव में भी नगर निगम मंडी सहित अधिकांश क्षेत्रों में भाजपा का ही डंका बजा। पर 2021 जाते जाते भाजपा को आइना दिखा गया। मुख्यमंत्री लगातार कहते रहे की मंडी हमारी थी है और रहेगी लेकिन मंडी वालों ने सारा भ्रम तोड़ दिया। मंडी लोकसभा उपचुनाव में पूरा दमखम दिखाने के बावजूद भी मुख्यमंत्री भाजपा को जीत नहीं दिलवा पाए। राष्ट्रवाद और देशभक्ति के नारों के साथ मैदान में उतरी भाजपा इस दफे चूक गई। ये हार बड़ी इसलिए है क्योंकि मंडी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गढ़ है। दो मंत्री रामलाल मारकंडा और गोविन्द सिंह ठाकुर भी इसी संसदीय क्षेत्र से आते है। भरपूर संसाधन और ज़बरदस्त प्रचार प्रसार के बावजूद भी भाजपा को हार का मुँह देखना पड़ा। अंतर बेशक कम रहा हो लेकिन भाजपा की इस हार की आवाज दिल्ली तक गुंजी है और अब गहन चिंतन मंथन के बाद समीक्षा भी दिल्ली दरबार में ही होगी। मंडी संसदीय हलके के 17 निर्वाचन क्षेत्रों में से कई जगह पार्टी के विधायक पार्टी की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। 9 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को बढ़त मिली। जिला मंडी के 9 में से आठ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिली पर नाचन में कांग्रेस आगे रही। जिला कुल्लू कि सभी चार, शिमला की एक, चम्बा की एक, लाहौल स्पीति और किन्नौर में कांग्रेस को लीड मिली। सुंदरनगर, बल्ह, करसोग विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को लीड तो मिली लेकिन अपेक्षा से कम। यहाँ भाजपाई विधायक अपनी जमीनी पकड़ साबित नहीं कर पाए। विशेषकर सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल से भाजपा अच्छी लीड की उम्मीद कर रही थी। विनोद कुमार, कर्नल इंद्र सिंह ठाकुर, जवाहर ठाकुर जैसे कई विधायक उपचुनाव में अपना दमखम नहीं दिखा पाए। जबकि मंडी सदर से यानि अनिल शर्मा के गढ़ से ब्रिगेडियर को 3 हजार से अधिक मतों की बढ़त प्राप्त हुई। भाजपा के विधायक ही नहीं शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर व तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय अपने-अपने हलके व गृह जिले में भाजपा की साख नहीं बचा पाए। दोनों के हलकों व जिलों में कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त मिली। लाहुल स्पीति के विधायक एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ रामलाल मार्कडेंय ने जिला परिषद के चुनाव में भाजपा को मिली हार से भी कोई सबक नहीं सीखा। प्रतिभा सिंह को मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर के गढ़ मनाली में भी 1841 मत अधिक प्राप्त हुए है। मंडी संसदीय सीट पर चुनाव के लिए भाजपा ने मंत्री महेन्दर सिंह को चुनाव प्रभारी बनाया था। पर लग रहा था मानो मंत्री जी को प्रचार प्रसार में बोलने के बजाए चुप रहने के लिए कहा गया था। दरअसल बीते कुछ समय में मंत्री जी के कई बयानों से भाजपा को काफी नुक्सान झेलना पड़ा है। शायद इसीलिए मंत्री प्रचार प्रसार से दूर दूर नज़र आए। तो भाजपा के टिकट पर लड़ेंगे राणा जोगिंद्र नगर में निर्दलीय विधायक प्रकाश राणा भी भाजपा के साथ ही है और उनके क्षेत्र में भाजपा को अच्छी लीड मिली है। यहाँ सात हज़ार से अधिक की लीड लेकर राणा ने अपनी काबिलियत सिद्ध की है। संभावित है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व राणा भाजपा में शामिल हो और अगली बार भाजपा टिकट पर चुनाव लड़े। विधानसभा क्षेत्र भाजपा कांग्रेस अंतर भरमौर 5893 21150 5257 लाहौल स्पिति 5588 7734 2147 मनाली 21251 23092 1841 कुल्लू 21778 25675 3897 बंजार 19713 21591 1878 आनी 20922 27965 7043 रामपुर 11552 31507 19555 किन्नौर 12566 17543 4977 नाचन 24422 26933 2511 करसोग 20643 19230 1413 सुंदरनगर 23761 21849 1912 सराज 38394 18735 21659 द्रंग 26352 23731 2621 जोगिंद्रनगर 27993 20849 7144 मंडी 22073 18827 3246 बल्ह 22875 21919 956 सरकाघाट 21109 19260 1849
लोकसभा के नतीजे सामने आने के बाद स्पष्ट हो गया की मंडी सबकी है और सबकी रहेगी। जिस तरह मुख्यमंत्री के गढ़ को कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह ने भेदा है मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का 'मंडी हमारी है, हमारी थी और हमारी ही रहेगी' का नारा भी हवा हवाई हो गया। मंडी लोकसभा का उपचुनाव जीतकर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने ज़बरदस्त वापसी की है। इस जीत से प्रदेश की राजनीति में प्रतिभा सिंह का कद और भी बढ़ गया है। विक्रमादित्य सिंह की गिनती भी अब प्रदेश के बड़े नेताओं में होने लगी है। स्पष्ट है कि वीरभद्र के जाने के बावजूद भी होली लॉज के तिलिस्म में कोई कमी नहीं आएगी। होली लॉज अब भी प्रदेश की सियासत की धुरी बना रहेगा। सिर्फ वीरभद्र परिवार ही नहीं इस जीत के बाद मंडी लोकसभा में लगभग हाशिये पर जा चुकी कांग्रेस भी मानों दोबारा जीवित हो उठी है। संगठन और कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।भाजपा के लिए ये हार जितनी बड़ी है उतनी ही बड़ी ये जीत कांग्रेस को मिली है। पर इसमें कोई संशय नहीं है कि यदि यहाँ उम्मीदवार प्रतिभा सिंह नहीं होती तो नतीजा भी संभवतः अलग होता। यानि मोटे तौर पर ये जीत प्रतिभा सिंह की जीत है, होली लॉज की जीत है। कारगिल युद्ध पर दिए गए बयान को छोड़ दिया जाएं तो जिस तरह उन्होंने इस चुनाव को लड़ा है वो भी काबिल ए तारीफ है। प्रतिभा सिंह ने वीरभद्र सिंह द्वारा किये गए विकास कार्यों के साथ- साथ महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को मुख्य तौर पर उठाया और सीधे जनता से कनेक्ट करने में कामयाब रही। इस जंग में उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह का सबसे बड़ी भूमिका रही। खास बात ये है कि मां - बेटे ने एकसाथ प्रचार न करके अलग -अलग मोर्चा संभाला और इस दोतरफा सियासी आक्रमण के आगे भाजपा परास्त हुई। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के गढ़ रहे रामपुर और जनजातीय क्षेत्रों से प्रतिभा सिंह को मिली बढ़त ने भी कांग्रेस की जीत की राह आसान कर दी। रामपुर के लोगों ने बंपर वोटिंग करते हुए प्रतिभा सिंह को 20000 मतों की बढ़त देकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह विधानसभा क्षेत्र सराज से भाजपा को मिली लीड को न्यूट्रलाइज कर दिया। किन्नौर जिले से करीब 5000, लाहौल स्पीति से 2100 और भरमौर से कांग्रेस को 4100 की लीड प्रतिभा को मिली। बाकी की कसर कुल्लू जिले के कुल्लू, मनाली, बंजार और आनी विधानसभा क्षेत्र ने पूरी कर दी। यहां से कांग्रेस को चौदह हजार से ज्यादा की बढ़त मिली जो ब्रिगेडियर कुशल चंद ठाकुर कवर नहीं कर पाए। सियासी क्षितिज पर बिखेरी काबिलियत की चमक पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के उपरांत सबकी निगाहें विक्रमादित्य सिंह पर टिकी थी और आलोचकों का मानना था कि विक्रमादित्य के लिए अकेले दम पर खुद को साबित करना मुश्किल होने वाला है। कहा जा रहा था की वीरभद्र विरोधी गुट उन्हें टिकने नहीं देगा और अपनों की महत्वकांक्षाएं उनके सियासी कद को बौना ही रखेगी। पर जिस तरह विक्रमादित्य सिंह ने सियासी क्षितिज पर अपनी काबिलियत की चमक बिखेरी है वो कई माहिरों को भी हैरान कर रही है। लोगों से सीधा संवाद उन्हें लोकप्रिय बना रहा है, खासतौर से सोशल मीडिया का उन्होंने बेहद उम्दा इस्तेमाल किया है। पर सियासत महाठगिनी है और विक्रमादित्य सिंह का असल इम्तिहान अभी बाकी है। अपनी ही अलग तरह की सियासत कर रहे विक्रमादित्य के हर कदम पर इस वक्त हर सियासी अपने बेगाने की नजर होगी। उनकी जरा सी चूक का इंतज़ार कई विरोधियों को होगा। पर उन्हें हल्के में लेने की गलती शायद ही कोई कर रहा हो।
संगठन ही शक्ति, संगठन ही सर्वोपरि भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी राजैनतिक पार्टी बनाने का मूल आधार ये ही मंत्र रहा है। पर हिमाचल में पार्टी का संगठन लचर नजर आ रहा है जो पार्टी को लाचार बनाता दिख रहा है। हालहीं में हुए उपचुनाव में भाजपा संगठन का नेटवर्क काम नहीं आया। चाहे त्रिदेव हों या बूथ प्रभारी, कोई तंत्र पार्टी की हार नहीं टाल पाया। न मुख्य संगठन में माहिरों का अनुभव दिखा और न ही भाजयुमो की युवा ब्रिगेड में पहले सा जोश। वास्तविक स्थिति ये है कि बूथ स्तर से ऊपर तक यानी बॉटम टू टॉप पार्टी का संगठन कमजोर दिखने लगा है। यूँ तो कागजों में हजारों -लाखों कार्यकर्त्ता है यानी लाखों परिवार पार्टी से जुड़े है, लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सक्रीय है या फिर महज कागजी आंकड़ा। या फिर नेतृत्व में ही कोई खामी है ? इन सवालों से इस वक्त भाजपा झूझ रही है। 2022 के सत्ता संग्राम से पहले भाजपा को इन सवालों का जवाब तलाशना होगा और खामियों को दूर भी करना होगा। ये ही हाल रहा तो मिशन रिपीट में पार्टी का पीटना तय होगा। पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष सुरेश कश्यप को 2020 में डॉ राजीव बिंदल के इस्तीफे के बाद पार्टी की कमान सौंपी गई थी। कश्यप युवा और इमानदार चेहरा है और लगातार खुद को साबित भी करते रहे है, पर जब नेतृत्व करने का मौका आया तो ज्यादा प्रभावशाली नहीं दिखे। दिलचस्प बात ये है कि उन्हें कमान मिलने के बाद से अब तक जमीनी स्तर पर पार्टी संगठन में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। अधिकांश नियुक्तियां डॉ राजीव बिंदल के अध्यक्ष रहते हुए थी और वे तमाम लोग अब भी संगठन में मौजूद है। इनमें बिंदल के कई खास सिपहसालार भी है। सुरेश कश्यप ने संगठन में न तो ज्यादा बदलाव दिया और न ही जमीनी संगठन को धार देने में अब तक कामयाब दिखे है। मोटे तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुसार ही एक तरह से संगठन अपना कर्तव्य पूरा करने की औपचारिकता करता दिखा है। भाजपा के लिए एक और बड़ी परेशानी है, अमूमन हर जिले में जमीनी कार्यकर्ता में नाराजगी भी है और इसका कारण है वर्ग विशेष को मिल रही तवज्जो। मसलन कई शहरी निकायों में आम कार्यकर्ता की अनदेखी कर पैराशूट से पार्टी में उतरे लोगों को मनोनीत किया गया। जाहिर है ऐसे में पार्टी का झंडा बुलंद रखने वाला आम कार्यकर्ता हतोत्साहित हुआ है। ऐसे और कई मसले है। पार्टी के जिला संगठनो की बात करें तो कई जिलों में नेतृत्व ऐसे नेता कर रहे है जिनकी न तो जमीनी पकड़ दिख रही है और न ही वे प्रभावशाली दिख रहे है। कांग्रेस में तो इस तरह चहेतों को पद लाभ देने का रिवाज रहा है लेकिन भाजपा में भी अब स्थिति ऐसी ही है। कॉर्पोरेट कल्चर वाली भाजपा में भी अब नॉन परफॉर्मर्स को लादा जाना सवाल तो खड़े करता ही है। बहरहाल उपचुनाव में क्लीन स्वीप के बाद प्रदेश संगठन में व्यापक फेरबदल की बहस भी छिड़ गई है। एक बड़ा तबका इसका हिमायती दिख रहा है। ये तो तय है की पार्टी इस हार से सबक लेगी और आवश्यक बदलाव भी करेगी। सवाल ये भी है क्या संगठन में व्यापक बदलाव होने जा रहा है ? दरअसल अध्यक्ष पद संभालने के बाद सुरेश कश्यप का पहला बड़ा इम्तिहान पार्टी सिंबल पर हुए नगर निगम चुनाव थे जहाँ पार्टी कांग्रेस के मुकाबले उन्नीस ही दिखी थी। अब उपचुनाव में पार्टी को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सुरेश कश्यप पर भी सबकी निगाहें टिकी है।
राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता लगातार दो दिन गंभीर श्रेणी में रहने के बाद तीसरे दिन सोमवार को खतरनाक स्तर पर पहुंच गई। दिल्ली की हवा लगातार बिगड़ती चली जा रही है। दिल्ली में सुबह वायु गुणवत्ता 626 दर्ज किया गया। वही अगर गाजियाबाद की बात की जाये तो यह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया। एक दिन पहले यह देश के प्रदूषित शहरों में पहले नंबर पर था। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटना दिल्ली के प्रदूषण मुख्य कारण रहा है। उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर से चलने वाली तेज हवाओं के कारण पराली का धुआं तेजी से दिल्ली की हवा में घुलकर इसे जहरीला बना रहा है।
कन्नौज में जीका वायरस से संक्रमित पहले मरीज की पुष्टि हुई है। इससे पहले कानपुर में रविवार को जीका वायरस के 10 और मामले आने के बाद जिले में इस वायरस से संक्रमितों की कुल संख्या 89 हो गई है। कानपुर में रविवार को लगातार दूसरे दिन भारतीय वायुसेना के तीन जवानों सहित 10 और लोगों के जीका वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। शनिवार को जीका वायरस से 13 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य टीमों ने बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को लगातार तीन दिनों में 525 व्यक्तियों के रक्त के नमूने एकत्र किए थे और उन्हें लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा गया था। शनिवार और रविवार को लगातार दो दिनों में जीका वायरस के कुल 23 मामलों की पुष्टि हुई। कानपुर में 23 अक्टूबर को जीका वायरस का पहला मामला वायु सेना के एक अधिकारी में मिला था। जिलाधिकारी ने बताया कि कुल 89 संक्रमित लोगों में 55 पुरुष हैं और 34 महिलाएं हैं। इन संक्रमितों में से 12 भारतीय वायु सेना के कर्मी हैं। जीका वायरस मच्छर के जरिये फैलने वाली बीमारी है, इसलिए मच्छरों से छुटकारा पाना ही सुरक्षित तरीका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जीका वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के सियासी क्षितिज पर जगमगा रहे कई तारे उपचुनाव नतीजों के बाद जमीन पर आते दिख रहे है। नगर निगम चुनाव के बाद उपचुनाव में भाजपा को जोर का झटका लगा है वो भी जोर से। कई आत्ममुग्ध नेता और दिग्गज जनता दरबार में धराशाई हो गए। खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर समेत कई कैबिनेट मंत्रियों और पार्टी संगठन को जनता ने आइना दिखा दिया। उपचुनाव में मुख्यमंत्री समेत कई मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की साख दाव पर थी। कई नेताओं को प्रभारी बनाया गया था तो कई पर अपने -अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लीड दिलवाने का जिम्मा था। पर अधिकांश खरे नहीं उतरे। ऐसा ही हाल पार्टी संगठन का भी है, नगर निगम चुनाव के बाद दूसरे बड़े इम्तिहान में भी संगठन बेअसर दिखा। भाजपा पार्टी विद डिसिप्लिन है, और प्रदेश में जो भी हाल हो मगर राष्ट्रीय स्तर पर इसे अनदेखा नहीं किया जाने वाला। सवाल तो पूछे ही जायेंगे, जवाबदेही भी तय होगी और निश्चित तौर पर सुधार भी होगा। बीते कुछ महीनों में पार्टी ने जिस तरह कई राज्यों में परिवर्तन किया है उसे देखते हुए अभी से सियासी पंडित कयास लगाने लगे है। किन्तु ये नहीं भूलना चाहिए कि जयराम ठाकुर का बचाव न सिर्फ उनकी स्वच्छ छवि की ढाल कर रही है बल्कि मंडी के नौ में से आठ निर्वाचन क्षेत्रों में मिली बढ़त भी उनके पक्ष में गई है। सही मायनों में उपचुनाव में वे अकेले ही भाजपा की तरफ से लोहा लेते दिखे है, बाकी तो मानो फर्ज अदायगी चल रही थी। भाजपा ये दावा करती है कि चुनाव में प्रत्याशी तय करने से पहले ग्राउंड सर्वे होता है, फिर गहन मंथन के बाद प्रत्याशी तय किये जाते है। इसमें चुनाव प्रभारियों से लेकर आम कार्यकर्ताओं के फीडबैक को तवज्जो दी जाती है। सब कुछ पूरी प्लांनिग के साथ होता है परन्तु जो नतीजे सामने आए है उनसे तो भाजपा के सर्वे पर भी सवाल उठ रहे है। ये सर्वे और फीडबैक पार्टी की जीत के लिए हुए थे या कोई इनसाइड स्टोरी है, ये भी बड़ा सवाल है। भाजपा का कोई एक प्रभारी भी अपनी साख नहीं बचा पाया। पार्टी ने जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को मंडी संसदीय सीट के लिए, बिक्रम ठाकुर को फतेहपुर के लिए, डॉ राजीव बिंदल को अर्की के लिए और मंत्री सुरेश भारद्वाज को जुब्बल कोटखाई उपचुनाव के लिए प्रभारी नियुक्त किया था। इनके आलावा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर और मंत्री राम लाल मारकंडा पर भी अपने -अपने क्षेत्रों से लीड दिलवाने का जिम्मा था। पर ये सभी असफल रहे। थम गया जयरथ जयराम ठाकुर सरकार के मुखिया है और जाहिर है जीत का श्रेय और हार का जिम्मा दोनों उनके खाते में ही दर्ज होने थे। ये चार- शून्य से मिली हार निसंदेह उनके लिए बड़ा झटका है। उपचुनाव में मुख्यमंत्री ने करीब 70 जनसभाएं की लेकिन सब व्यर्थ गया। मंडी में तो मुख्यमंत्री ने स्वयं मोर्चा संभाला था। इससे मुकाबला कड़ा जरूर हुआ परन्तु भाजपा को जीत नहीं मिल पाई। पर जिला के नौ में से आठ निर्वाचन क्षेत्रों में मिली लीड जरूर बताती है कि जिला मंडी में जयराम ठाकुर की पकड़ जबरदस्त है। ये जगजाहिर है कि भाजपा का एक गुट जयराम ठाकुर का विरोधी है, पर अब तक ये गुट खुलकर उनके खिलाफ मुखर नहीं हो पा रहा था। दरअसल चुनावी विजय रथ पर सवार जयराम ठाकुर ने कभी उन्हें ऐसा मौका ही नहीं दिया। पर इस हार के बाद दबे हुए विरोध के सुर बुलंद हो सकते है, जिन्हें थामना जयराम ठाकुर के लिए बड़ी चुनौती होगी। दमखम दिखा पाते तो मंडी भाजपा की होती शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर के जिला कुल्लू की चारों सीटों पर भाजपा पिछड़ी। मंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी पार्टी को लीड नहीं मिली। यानि मंडी संसदीय उपचुनाव के इम्तिहान में गोविन्द सिंह ठाकुर पूरी तरह फेल हो गए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि मंत्री के जिला में पार्टी अच्छा करती तो जीत हार का अंतर खत्म किया जा सकता था। यदि गोविन्द ठाकुर अपना दमखम दिखा पाते तो मंडी भाजपा की होती। प्रतिभा सिंह को मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर के गढ़ मनाली में भी 1841 मत अधिक प्राप्त हुए है। भाजपा ने कुल्लू जिले का दायित्व भी शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर को सौंपा था। बता दें की कुल्लू जिले के चारों हलकों में कांग्रेस ने 14,659 मतों की बढ़त प्राप्त की है। मार्कण्डेय फिर विफल तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. रामलाल मारकंडा भी उपचुनाव में नाकाम रहे। मंत्री अपने हलके व गृह जिले में भाजपा की साख नहीं बचा पाए। लाहौल स्पीति में कांग्रेस प्रत्याशी को बढ़त मिली। लाहुल स्पीति के विधायक एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डा. रामलाल मारकंडा ने जिला परिषद के चुनाव में भाजपा को मिली हार से भी कोई सबक नहीं सीखा। वह क्षेत्र के 23,790 मतदाताओं की नब्ज टटोलने में पूरी तरह विफल रहे। 23,790 से 13,547 ने मतदान किया था। कांग्रेस यहां 2147 मतों की बढ़त ले गई। बेअसर दिखे मंत्री महेंद्र उपचुनाव में मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर भी अपना प्रभाव नहीं दिखा पाए। महेंद्र ठाकुर को मंडी संसदीय उपचुनाव का प्रभारी बनाया गया था। पर वे भी चुनाव प्रचार प्रसार में अधिक प्रभावशाली नहीं दिखे। जिला मंडी के बाहर हर जगह भाजपा पिछड़ी जो हार का कारण सिद्ध हुआ। लगातार अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले मंत्री कहने को चुनाव प्रभारी जरूर थे पर चुनाव पूरी तरह जयराम ठाकुर के इर्दगिर्द ही घूमता दिखा। हालांकि मंत्री का अपना निर्वाचन क्षेत्र धर्मपुर मंडी संसदीय क्षेत्र में नहीं आता लेकिन कुछ अन्य क्षेत्रों से महेंद्र सिंह दूर ही दिखे। बतौर प्रभारी दूसरी हार, उठेंगे कई सवाल फतेहपुर में उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर व वन मंत्री राकेश पठानिया ने कमान संभाल रखी थी। यहां भी दोनों ही मंत्री फेल हो गए। विशेषकर बिक्रम ठाकुर के लिए ये बड़ी हार है। इससे पहल पालमपुर नगर निगम चुनाव में भी मंत्री प्रभारी थे और भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। बिक्रम ठाकुर जिला कांगड़ा में भाजपा के सबसे मजबूत मंत्री है और उद्योग व परिवहन जैसे महत्वपूर्ण महकमे उनके पास है। बतौर प्रभारी उनका लगातार विफल होना पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है। सत्ता का रास्ता कांगड़ा से होकर ही जाता है। अर्की में नहीं हुई जीत वाली नाटी अर्की में भी लोग बस इंतज़ार करते रह गए और बिंदल का जादू नहीं चला। लगा था जीत की नाटी करने का जो मौका सोलन नगर निगम चुनाव के बाद नहीं मिला वो शायद अर्की में मिल जाए, पर ऐसा जनादेश आया नहीं। बिंदल को संगठन का डॉक्टर भी कहा जाता है लेकिन उनके प्रभारी रहते पार्टी को फिर हार मिली है। आमतौर पर अपने संवाद से ही कार्यकर्ताओं में जोश भर देने वाले बिंदल को जो लोग करीब से जानते है, जो उनकी कार्यशैली को जानते है उन्हें भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर हुआ क्या है। भुलाएं नहीं भूलेगी ये हार बाकि हलकों में जो हुआ उसे भुलाया जाना उतना कठिन नहीं है परन्तु जुब्बल कोटखाई की हार को भाजपा के इतिहास का काला अध्याय कहा जाने लगा है। यहां देश की सबसे बड़ी पार्टी के प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। यहां संगठन भी टूटा और कार्यकर्त्ता भी पार्टी से रूठ गया। स्थिति सुधरने के बजाए दिन प्रति दिन बिगड़ती चली गई। चुनाव प्रभारी सुरेश भारद्वाज अपने कार्यकर्ताओं को मनाने में पूरी तरह विफल रहे और नतीजा अब सभी के सामने है। सवाल ये भी है कि उपचुनाव के दौरान परिवारवाद को लेकर भाजपा का जो जमीर जागा है क्या वो आगे भी जाएगा रहेगा। दूसरा क्या चेतन बरागटा का निष्कासन 6 वर्ष तक बरकरार रहेगा या पार्टी को 2022 आते -आते फिर उनकी याद आएगी।
बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को एनसीबी की एसआईटी ने समन भेजा है। एसआईटी ने आर्यन खान को आज ही ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है। एनसीबी विशेष जांच टीम जिन 6 मामलों की जांच कर रही है, उनमें जितने भी आरोपी हैं, सभी को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा. इसी कड़ी में आज आर्यन खान को समन किया गया है। एनसीबी की एसआईटी ने नवाब मलिक के दामाद समीर खान को भी पूछताछ के लिए समन भेजा है। जिन छह मामलों की जांच एसआईटी कर रही है, उनसे जुड़े सभी लोगों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। एनसीबी की ये टीम क्रूज़ पर भी गई थी और क्राइम सीन को रीक्रिएट किया गया था। ड्रग्स मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी अरबाज़ मर्चेंट को भी एनसीबी की एसआईटी ने समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है।
हिमाचल प्रदेश में हुए उपचुनावों में जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस के तीन नवनिर्वाचित विधायकों को सोमवार 8 नवम्बर को विधानसभा में शपथ दिलाई जाएगी। राज्य विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार अर्की से विजयी संजय अवस्थी जुब्बल-कोटखाई से विजयी रोहित ठाकुर और फतेहपुर से विजयी भवानी सिंह पठानिया को शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण करने के बाद यह तीनों प्रदेश विधानसभा के विधिवत तौर पर विधायक बन जाएंगे। शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या 19 से बढ़कर 21 हो जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, पूर्व मंत्री सुजान सिंह पठानिया और पूर्व मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा के निधन के चलते प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्रों में 30 अक्तूबर को मतदान हुआ था और 2 नवम्बर को परिणाम निकला था।
राजधानी शिमला सहित धर्मशाला और मनाली की हवा दिवाली पर कम दूषित हुई है। बीते वर्ष के मुकाबले प्रदेश के कई शहरों में इस बार प्रदूषण का स्तर कम रहा है। हालंकि बद्दी, नालागढ़ और ऊना में इस बार भी कोई सुधार नहीं हुआ है। इन तीनों शहरों में प्रदूषण की मात्रा बीते वर्ष की अपेक्षा और अधिक बढ़ी है। शनिवार को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है। एयर क्वालिटी इंडेक्स को शून्य से 50 तक अच्छा माना जाता है। 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक सीमित, 201 से 300 तक घटिया, 301 से 400 तक बहुत घटिया और 401 से अधिक मात्रा को खतरनाक माना जाता है। इस वर्ष दिवाली के अवसर पर राजधानी शिमला सहित परवाणू, धर्मशाला, डमटाल, सुंदरनगर, पांवटा साहिब, कालाअंब और मनाली का एयर क्वालिटी इंडेक्स बीते वर्ष की दिवाली के मुकाबले बेहतर रहा है।
प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा के सरकारी स्कूलों में सीधी भर्ती से शिक्षकों के करीब 1300 पद भरे जाएंगे। प्रदेश में चुनाव आचार संहिता हटते ही प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने लिखित परीक्षा लेने के लिए कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को पद भरने की संस्तुति भेज दी है। आयोग को जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए विज्ञापन जारी करने के निदेश दिए गए है। गौरतलब है कि इस सीधी भर्ती के तहत जेबीटी, टीजीटी नॉन मेडिकल, शास्त्री, शारीरिक और कला शिक्षकों के पद भरे जाने हैं। बता दें कि कुछ समय पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षकों की विभिन्न श्रेणियों के 4000 पद भरने का फैसला लिया है। वंही इस कड़ी में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को 2640 पद आवंटित किए गए हैं। इनमें शारीरिक शिक्षकों के 870, कला शिक्षकों के 820, जेबीटी के 810, टीजीटी नॉन मेडिकल के 87 और शास्त्री के 53 पद आवंटित किए गए हैं। कुल 2640 पदों में से आधे पद बैचवाइज और शेष आधे पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं। बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया बीते दिनों ही शुरू हो गई है। अब बैचवाइज काउंसलिंग का जिला शिक्षा अधिकारी शेड्यूल जारी करेंगे। सीधी भर्ती के लिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने संस्तुति हमीरपुर आयोग को भेज दी है। नए शैक्षणिक सत्र से पहले प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इन शिक्षकों की नियुक्तियां हो जाएंगी।
दिवाली के दो दिन बाद दिल्ली की हवा में बिल्कुल भी सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। रविवार को भी राजधानी की हवा 'गंभीर श्रेणी' में है। आज भी दिल्ली का AQI 436 है, जो कि 'खतरनाक' श्रेणी' में आता है। हालांकि मौसम विभाग की ओर से कहा गया है कि आज दिल्ली में तेज हवा चलने का अनुमान है, जिसकी वजह से प्रदूषण से लोगों को राहत मिलेगी और हवा की क्वालिटी बेहतर होगी। पहले से ही प्रदूषण की मार सह रहे दिल्ली को दिवाली की पटाखों ने बुरी तरह से प्रदूषित कर दिया है,जिसकी वजह से यहां हवा की क्वालिटी काफी खराब हो गई है। दिल्ली के अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन के साथ आने वाले रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में पटाखोंके साथ-साथ पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटना ने इस साल स्थिति और खराब कर दी है। बता दें कि डार्क रेड जोन में केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे एनसीआर की हवा इस वक्त प्रदूषित है। शनिवार को गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा समेत एनसीआर के कई शहर डार्क रेड जोन में दर्ज किए गए है। कल गाजियाबाद का AQI 466, ग्रेटर नोएडा का AQI 414, नोएडा में AQI 461, फरीदाबाद में AQI 449, बल्लभगढ़ का AQI 431 और गुरुग्राम में AQI 456 दर्ज किया गया, जो कि अच्छा संकेत नहीं है। गौरतलब है कि AQI वह संख्या है जिसका इस्तेमाल सरकारी एजेंसियां वायु प्रदूषण के आंकलन के लिए करती हैं।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में तेजी से बढ़ रही गरीबी की एक सर्वे रिपोर्ट शेयर करते हुए केंद्र पर एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो पहले मध्यवर्ग में थे, अब ग़रीब हैं जो पहले ग़रीब थे, अब कुचले जा रहे हैं, कहां गए जो कहते थे अच्छे दिन आ रहे हैं? इस ट्वीट को शेयर करते हुए राहुल जिस खबर का हवाला दे रहे हैं उसमें एक सर्वेक्षण रिपोर्ट है जिसमें कहा गया है कि भारत में बीते आठ साल में जितनी तेजी से गरीबी की संख्या बढ़ी है, उतनी तेज वृद्धी आजतक नहीं देखी गई। दरअसल देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर आमजनता काफी परेशान है। सरकार चाहे महंगाई पर लगाम कसने के लाख दावे कर रही है, लेकिन यह दावे सच्चाई से कोसों दूर हैं। आसमान छूती जा रही महंगाई के कारण लोगों के घरों का बजट बिगड़ चुका है और बाजार में दाल, सब्जियों, सरसों तेल, दूध, कपड़ा, रसोई गैस के लगातार बढ़ रहे दाम ने आमजन की कमर तोड़ दी है। बता दें कि पिछले कई दिनों से राहुल गांधी लगातार देश में बढ़ रही महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर केंद्र को निशाने पर ले रहे हैं। कल ही उन्होंने रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था और आरोप लगाया था कि PM मोदी के विकास की गाड़ी रिवर्स गियर में है और ब्रेक भी फेल है। उन्होंने एक खबर का हवाला देते हुए यह दावा भी किया था कि LPG के दाम बढ़ने से लाखों ऐसे परिवार हैं जिन्हें चूल्हा फूंकने को मजबूर होने पड़ रहा है।
महाराष्ट्र के पूर्व ग्रह मंत्री अनिल देशमुख की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय के बाद अब केंद्रीय जांच ब्यूरो अनिल देशमुख की कस्टडी लेने की तैयारी कर रही है। जल्दी सीबीआई इस बाबत कोर्ट के सामने प्रार्थना पत्र देगी। सीबीआई ने अप्रैल में देशमुख के खिलाफ करप्शन का मुकदमा दर्ज किया था और मिडिल मेन संतोष शंकर जगताप को ठाणे से गिरफ्तार किया था। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह की शिकायत के आधार पर पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, हालांकि इस मामले में पूर्व पुलिस कमिश्नर भी कथित आरोपी बताए गए हैं, लेकिन वह अभी तक जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर हैं। संतोष शंकर जगताप मिडिलमैन का नाम ट्रांसफर पोस्टिंग की सीबीआई की जांच के दौरान सामने आया था और लोकल कोर्ट से डेढ़ महीने पहले इसके खिलाफ एनबीडब्ल्यू वारेंट जारी किया गया था और महाराष्ट में मुंबई और पुणे में 12 जगह छापेमारी की गई थी। जांच एजेंसियों ने इस ट्रांसफर पोस्टिंग मामले में आईपीएस रश्मि शुक्ला के भी बयान दर्ज किए थे। हाल ही में ईडी ने मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत की जा रही जांच के तहत अनिल देशमुख को गिरफ्तार किया था और कस्टडी में लेकर पूछताछ की थी। बाद में कोर्ट ने देशमुख को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में अनिल देशमुख के बेटे को भी पूछताछ के लिए सम्मन जारी किए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता चुने गए हैं। मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से जारी ग्लोबल लीडर अप्रूवल रेटिंग में पीएम मोदी 70 फीसदी अप्रूवल के साथ टॉप पर हैं। पीएम मोदी को दुनिया भर में वयस्कों के बीच सबसे ज्यादा रेटिंग मिली है। मॉर्निंग कंसल्ट ने साल 2019 में डेटा जुटाना शुरू किया था। मैक्सिकन राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर 66 फीसदी रेटिंग के साथ दूसरे नंबर पर हैं। इसके बाद इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी 58 फीसदी के साथ तीसरे नंबर पर, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल 54 फीसदी के साथ चौथे नंबर पर और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन 47 फीसदी के साथ पांचवें नंबर पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन 44 फीसदी के साथ छठे स्थान पर हैं। कनाडा के जस्टिन ट्रूडो 43 फीसदी के साथ सातवें स्थान पर हैं जबकि यूनाइटेड किंगडम के बोरिस जॉनसन 40 फीसदी के साथ दसवें स्थान पर हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में आतंकी और दूसरे गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना आज से तीन दिवसीय गोवा मेरिटाइम कॉनक्लेव का आयोजन करने जा रही है। यह कॉनक्लेव 9 नवंबर तक चलेगा। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में इंडीयन ओसियन रिजन के 12 देशों के नौसेना प्रमुख हिस्सा लेने जा रहे हैं। गोवा मेरिटाइम कॉनक्लेव का इस साल की थीम 'मेरिटाइम सिक्योरिटी एंड इमरजिंग नॉन ट्रेडेशनल थ्रेट्स: ए केस फॉर प्रोएक्टिव रोल फॉर आईओआर नेवीज़' है। सम्मेलन को नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह के अलावा रक्षा सचिव, अजय कुमार और विदेश सचिव, हर्ष श्रृंगला मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित करेंगे। बता दें कि साल 2008 में मुंबई में हुआ 26/11 आतंकी हमला समंदर के रास्ते ही हुआ था। अभी भी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन समंदर के रास्ते आतंकी हमला करने की साजिश रचते रहते हैं। कमांडर मधवाल के मुताबिक, गोवा कॉनक्लेव भारतीय नौसेना की आउटरीच पहल है जो समुद्री सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाले नौसैनिकों और शिक्षाविदों के सामूहिक ज्ञान का उपयोग करने के लिए परिणाम उन्मुख समुद्री विचार प्राप्त करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय मंच है। सम्मेलन के दौरान हिस्सा लेने वाले देशों के प्रतिनिधियों को भारतीय नौसेना के मेक इन इंडिया कार्यक्रम से रूबरू कराया जाएगा। इसके अलावा प्रतिनिधियों को डीप सबमर्जेंस रिस्कयू वैसेल की क्षमताओं के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। भारतीय नौसेना दुनिया की उन चुनिंदा नौसेनाओं में शामिल है जो समंदर के नीचे 750 मीटर तक किसी सबमरीन के दुर्घटना होने की स्थिति में इस डीएसआरवी का उपयोग किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को भाई दूज की शुभकामनाएं दी हैं। आज के दिन देशभर में धूमधाम से भाई दूज का पावन पर्व मनाया जा रहा है। ये पर्व भाई-बहनों को समर्पित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘सभी देशवासियों को भाई दूज की ढेरों शुभकामनाएं। रक्षाबंधन के बाद, ‘भाई दूज’ ऐसा दूसरा त्योहार है, जो भाई-बहन के बीच स्नेह को समर्पित है।’’ वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''समस्त देशवासियों को "भाई दूज" के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।''
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में केदारनाथ यात्रा पर थे जहां उन्होंने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का भी लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री की इस उत्तराखंड यात्रा को आम आदमी पार्टी ने एक चुनावी यात्रा बताया है। पार्टी ने कहा है कि भगवान शंकर के मंदिर से प्रधानमंत्री का दिया गया वक्तव्य कोई सामान्य वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर दिया गया एक चुनावी भाषण था। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को चुनावी यात्रा कहा जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पूर्व कर्नल अजय सिंह कोठियाल ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री से पांच सवाल भी पूछे हैं। आम आदमी पार्टी नेता पूर्व कर्नल अजय सिंह कोठियाल ने शुक्रवार को कहा कि उत्तराखंड की सरकार ने पिछले 5 साल के दौरान कोई काम नहीं किया है। वह अपने काम के बदले सत्ता में दोबारा वापसी करने की हिम्मत नहीं कर पा रही है। यही कारण है कि अब चुनावी स्टंट करके चुनाव में अपनी जीत तय करने की कोशिश की जा रही है। आम आदमी पार्टी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के पुजारियों पुरोहितों धर्म आचार्यों की भूमिका को स्वीकार किया है, लेकिन इसके बाद भी उनके अधिकारों को चोट करने वाली देवस्थानम बोर्ड को भंग करने पर कोई वादा नहीं किया। इसी से उनकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। कोठियाल ने ट्वीट के माध्यम से प्रधानमंत्री से 5 सवाल पूछे : 1. देवस्थानम बोर्ड पर पीएम ने कुछ क्यों नहीं कहा? 2. कोठियाल ने पूछा,आपके स्वागत में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी शामिल थे, जिन्होंने इस बोर्ड को ऐतिहासिक बताते हुए उसका विरोध कर रहे तीर्थ-पुरोहितों को स्वार्थी कहा है। क्या यह भाषा भाजपा की आधिकारिक लाइन है? 3. मंदिर परिसर के गर्भगृह के अंदर के दृश्यों को कैमरे के जरिए लाइव दिखाकर हजारों साल पुरानी परंपरा तोड़ी गई। क्या यह अपराध आपको स्वीकार्य है? 4. उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा पर अब तक केंद्र ने कोई राहत क्यों नहीं प्रदान की? 5. बीजेपी ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन आदि क्षेत्रों मे जो चुनावी वादे किए थे, धरातल पर उन वादों की हकीकत क्या है?
मशहूर गायिका मारिलिया मेंडोंका का विमान हादसे में निधन हो गया। मारिलिया मेंडोंका ब्राजील के देसी संगीत के सबसे लोकप्रिय युवा सितारों में से एक थी। अग्निशमन कर्मचारियों ने कहा कि 26 साल की "सर्टेनजो" की गायिका की उस वक्त मौत हो गई, जब वह एक छोटे विमान में यात्रा कर रही थी और विमान मिनस गेरैस राज्य में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना के कारणों के बारे में फिलहाल पता नहीं चल सका है। दुर्घटना में ग्रैमी अवॉर्ड जीतने वाले उनके निर्माता के साथ ही मेंडोका के एक अंकल की भी मौत हो गई है। साथ ही इस दुर्घटना में विमान के दो पायलटों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है। स्थानीय टीवी की ओर से विमान से शवों को बाहर निकालने के लिए काम कर रहे अग्निशमनकर्मियों के फुटेज दिखाए गए हैं। मेंडोका का विमान पहाड़ी इलाके में एक झरने के नजदीक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। मेंडोंका ने साल 2019 में सर्वश्रेष्ठ एल्बम सर्टेनजो के रूप में ग्रैमी अवॉर्ड जीता था। मेंडोका न सिर्फ ब्राजील बल्कि उसके बाहर भी बेहद लोकप्रिय थीं। उनके यूट्यूब पर करीब 2.2 करोड़ फॉलोअर्स थे. इसके साथ ही स्पॉटीफाई पर 80 लाख से अधिक लोग उन्हें हर महीने सुनते थे।
बिहार के गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण में पिछले दो दिन में जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मौत हो गई। बीते 15 दिनों में जहरीली शराब से 40 लोगों की जान चली गयी। वहीं, इन घटनाओं पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सख्ती दिखाते हुए दोषियों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। नीतीश कुमार ने शुक्रवार को जहरीली शराब से हो रहीं मौतों को लेकर हाई लेवल मीटिंग बुलाई। नीतीश कुमार ने संबंधित अधिकारियों इस मामले में कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए, साथ ही रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए।
बीते 24 घंटो में देश में कोरोना के 10,929 मामले सामने आए हैं। इसी के साथ पिछले 24 घंटे में 392 लोगों की कोविड-19 के कारण जान चली गई। इसके साथ ही देश में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके बाद रिकवरी रेट बढ़कर 98.23 फीसद तक पहुंच गया है। मार्च 2020 के बाद यह सर्वाधिक रिकवरी रेट है। पिछले 24 घंटे में देश में 12,509 लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हुए हैं। इसके साथ ही कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 3,37,37,468 तक पहुंच गई है। देश में अब कुल 1,46,950 सक्रिय मामले रह गए है।
बीते 24 घंटो में देश में 12729 नए मामले सामने आये है। कोरोना का खतरा थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटों में देश में कोरोना से 221 लोगो कि मौत हुई है। देश में कोरोना से हुई कुल मौतों का आंकड़ा 4,59,873 पहुंच गया है। वहीं अब तक कुल 3,37,24,959 लोग ठीक भी हुए है। देश में कोरोना वैक्सीनेशन का कुल आंकड़ा 1,07,70,46,116 (1.07 करोड़) हो चूका है। देश में फिलहाल कोरोना रिकवरी रेट 98.23 फीसदी है, जो मार्च 2020 के बाद से सबसे अधिक है। देश में रोज़ाना पॉजिटिविटी रेट 1.90 फीसदी है, जो पिछले 32 दिनों से 2 प्रतिशत से कम है। वहीं कोरोना का साप्तहिक पॉजिटिव रेट 1.25 प्रतिशत है, जो 42 दिनों से 2 फीसदी से कम है। देश में अब तक 61.30 करोड़ कोरोना सैंपल टेस्ट किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ने शुक्रवार को केदारनाथ में पूजा-अर्चना और आदि गुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल एवं प्रतिमा का अनावरण किया। इसके पश्चात प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि अयोध्या और अन्य तीर्थस्थलों के विकसित होने से भारत की संस्कृति, विरासत और आस्था के केंद्रों का गौरव सदियों के बाद वापस मिल रहा है। हमारी संस्कृति, विरासत और आस्था के केंद्रों को उसी गौरव भाव से देखा जा रहा है, जैसे देखा जाना चाहिए था। आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर पूरे गौरव के साथ बन रहा है। अयोध्या को उसका गौरव सदियों के बाद वापस मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अभी दो दिन पहले अयोध्या में दीपोत्सव का भव्य आयोजन हुआ, जिसे दुनिया ने देखा। इसका प्राचीन सांस्कृतिक स्वरूप कैसा रहा होगा, आज हम इसकी कल्पना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम से जुडे सभी तीर्थ स्थानों को जोड़कर एक पर्यटन सर्किट बनाने का काम चल रहा है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में काशी का भी कायाकल्प हो रहा है, जहां विश्वनाथ धाम का कार्य पूर्णता की ओर बढ़ रहा है। बनारस में सारनाथ, उसके पास स्थित कुशीनगर और बोधगया आदि स्थानों को जोड़कर विश्व भर में बौद्ध धर्म के अनुयायियों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन सर्किट बन रहा है तथा मथुरा और वृदांवन में भी वहां की शुचिता और पवित्रता को बरकरार रखते हुए विकास कार्य चल रहे हैं । प्रधानमंत्री ने कहा कि केदारनाथ से हर श्रद्धालु एक नई ऊर्जा लेकर जाता है और आदि गुरु शंकराचार्य की इस विरासत को देश अपने लिए एक प्रेरणा के रूप में देखता है। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के मद्देनजर देशवासियों से आग्रह किया कि वे स्वाधीनता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों के साथ-साथ केदारनाथ जैसे पवित्र स्थानों पर भी ज्यादा से ज्यादा जाएं, नई पीढ़ी को भी उनसे परिचित कराएं और हजारों साल की महान चेतना की अनुभूति करें।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिवाली से पहले कारोबारियों को खास तोहफा दिया है। अरविंद केजरीवाल ने एक नए पोर्टल का ऐलान किया है, जिस पर दिल्ली का सामान बिकेगा। दिल्ली के हर मार्केट की जानकारी इस पोर्टल पर होगी। इससे फायदा यह होगा कि पूरी दुनिया में दिल्ली का सामान बिकेगा। इस पोर्टल का नाम दिल्ली बाजार होगा। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के कारोबारी, उद्योगपतियों, व्यापारियों का कारोबार बढ़ाने के लिए नई पहल करने जा रहे है। दिल्ली बाजार नाम से नई वेबसाइट/पोर्टल तैयार कर रहे हैं। इसमें हर दुकान को हर प्रोफेशनल को हर संस्थान को जगह मिलेगी। अगर किसी की दुकान है तो उस वेबसाइट पर वह उस प्रोडक्ट को डिस्प्ले कर सकता है। सीएम ने आगे ऐप के फायदे गिनवाते हुए कहा कि सभी कारोबारी देश के अलावा दुनिया के लोगों तक पहुंचा सकते हैं। इस पोर्टल पर वर्चुअल बाजार तैयार किए जा रहे हैं जैसे दिल्ली में खान मार्केट है इस पोर्टल पर वर्चुअल खान मार्केट बन जाएगा। जैसे लाजपत नगर मार्केट है, ऐसे ही इसमें वर्चुअल लाजपत नगर मार्केट बनेगा। छोटी-बड़ी सभी मार्केट इसमें होंगी। इस पोर्टल के अंदर जाकर मार्केट के अंदर जाकर दुकान में शॉपिंग करके आ सकते हैं।
नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA को आज एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। एनआईए ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले से जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि एनआईए के दल ने एक गुप्त सूचना के आधार पर मंगलवार को सुभासग्राम इलाके में तलाशी अभियान चलाया और बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया। आतंकी के पास से फर्जी मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड जब्त किए गए हैं। उससे पूछताछ की जा रही है। एनआईए पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह कब और कैसे भारत में घुसा। जानकारी के मुताबिक संदिग्ध के पास से आतंकवादी संगठन से जुड़े कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कोरोना को लेकर मोदी सरकार की नीति पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने एक लेख के जरिए कोविड-19 से निपटने के लिए मोदी सरकार की पॉलिसी पर सवाल खड़े किए और कहा कि अगर पीएम मोदी के जन्मदिन पर एक करोड़ टीके लग सकते हैं तो फिर रोज क्यों नहीं लग सकते हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि पहली लहर के बाद दूसरी लहर के लिए सरकार की तैयारी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑक्सीजन के लिए तड़पते मरीजों, असहाय परिवारजनों का दर्द सरकार ने नहीं समझा, उसे नहीं भूल सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक एक तिहाई से भी कम आबादी को टीके के दोनों डोज लगे हैं। सोनिया ने बच्चों के टीकाकरण को लेकर कहा कि कोई योजना फिलहाल सरकार की नहीं दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि विपक्ष लगातार केन्द्र सरकार पर कोरोना मैनेजमेंट को लेकर निशाना साधता रहा है। हालांकि, कोरोना महामारी को खत्म करने की दिशा में सरकार का अभियान जो-शोर के साथ चल रहा है और लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने 29 विधानसभा सीटों के लिए हाल में हुए उपचुनावों में मंगलवार को 14 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस ने आठ सीटें जीती है। इस उपचुनाव के परिणाम हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में सत्तारूढ़ दलों के पक्ष में रहे है। हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ा झटका देते हुए विपक्षी दल कांग्रेस ने तीनों विधानसभा सीटों फतेहपुर, अर्की और जुबल-कोटखाई और प्रतिष्ठित मंडी लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को राज्य में हुए उपचुनावों में मतदाताओं का जोरदार समर्थन मिला। टीएमसी में राज्य की सभी चार विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की, जिसमें वे दो सीटें भी शामिल हैं जो उसने भाजपा से छीनी है। तृणमूल कांग्रेस को 75.02 प्रतिशत वोट मिले। देश के 13 राज्यों में हुए उपचुनावों के परिणाम भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के लिए भी मिलेजुले रहे। कांग्रेस ने राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में बढ़त हासिल की और भाजपा से सीटें छीनी, लेकिन कांग्रेस को असम, मध्य प्रदेश और मेघालय में नुकसान हुआ।
पाबंदी के बावजूद पटाखे बेचने या फोड़ने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस की तरफ से कई भीड़भाड़ वाली जगहों पर पेट्रोलिंग की जाएगी। आउटर दिल्ली के डीसीपी परविंदर सिंह ने दिल्ली में पटाखे बेचने और फोड़ने को लेकर सख्त चेतावनी दी है। दीवाली से पहले दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग जगह से दो लोगों को गिरफ्तार किया और उनके पास से 40 किलोग्राम से ज्यादा अवैध पटाखे बरामद किये। दिल्ली में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पुलिस की ओर से ये प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पडोसी राज्य में पराली जलने से प्रदूर्षण का स्तर पहले ही काफी बढ़ गया है।
मंगलवार को धनतेरस का त्यौहार पूरे देश में जोर शोर से मनाया जा रहा है। इस दिन से दिवाली के महापर्व का आरंभ होता है और आज जो भी शुभ मुहूर्त निकलता है उसी में सारी खरीदारी की जाती है। इस पर्व पर देश के कई बड़े नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं भी दी है। गृहमंत्री अमित शाह ने धनतेरस के मौके पर लोगों को शुभकामनाएं देते हुए सबके स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की है। उन्होंने अपने एक ट्विट में कहा, "समस्त देशवासियों को धनतेरस के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान धन्वंतरि सभी को जीवन में सुख, समृद्धि व उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।" इसी के साथ केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी देश के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हुए लोगों से स्वदेशी सामान खरीदने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर लिखा, "धनतेरस पर्व पर सभी देशवासियों को मेरी शुभकामनायें। आपके परिवार में यह त्योहार हर्ष और उल्लास लेकर आये और आपका जीवन धन धान्य से पूर्ण करे। उत्सवों की इस श्रंखला में हम स्वदेशी उत्पाद खरीद कर स्थानीय कारीगरों की खुशियों का हिस्सा बनें, और देश को आत्मनिर्भर बनायें।
नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस कि लिए दिन प्रतिदिन गले कि फांस बनते जा रहे है। कांग्रेस ना सिद्धू को मना पा रही है ना उनको हटा पा रही है और सिद्धू की शर्तों का सिलसिला ख़त्म होना तो दूर रोज़ लंबा हो रहा है। असल में सिद्धू सेल्फ स्टॉल्ड पॉलिटिक्स कर रहे हैं। कांग्रेस की सबसे बड़ी मजबूरी सिद्धू का चेहरा और छवि है वर्ना उनके हठ की सज़ा पार्टी उनको दे चुकी होती। अभी सिद्धू कैप्टन के बाद चन्नी सरकार की कारगुजरियों से भी नाखुश हैं। जिसका पत्ता सोमवार को चंडीगढ़ की एक सभा के दौरान हुआ और सबूत भी मिल गया। सिद्धू ने खुले मंच से कहा ''नवजोत सिधु पंजाब के साथ खड़ा है। पोने पांच साल तो कोई नहीं पूछता। आखिरी दो महीने में ये भी लो वो भी लो। उस से पूछो कहां से देगा। सिद्धू यहीं नहीं रुके और उन्होंने आगे कहा, ''राजनीति एक धंधा बन चुकी है। वो लोग खत्म हो गए जिनके पीछे पूरा देश चल पड़ता था। पंजाब को पिछले 25 साल मे गिरवी रख दिया गया है। ये जो कर्ज है पंजाब की जनता ने उतारना है। पैट्रॉल कि कीमतें 100 रुपए से पार हो चुकी हैं। सिद्धू ने अपनी दावेदारी पेश करने का मौका हाथ से जाने नहीं दिया। उन्होंने कहा, ''इस बार पंजाब में सरकार नैतिका पर बनेगी।
हिमाचल प्रदेश में उपचुनाव में बीजेपी चरों खाने चित हुई है। एक लोकसभा और 3 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने कब्ज़ा किया है। सीएम जयराम के गढ़ मंडी में प्रतिभा सिंह ने बाज़ी मारी है। मंडी लोकसभा सीट पर प्रतिभा सिंह ने 8766 मतों से जीती हासिल की है। उन्हें कुल 365650 मत पड़े। वंही बीजेपी प्रत्याशी कुशल ठाकुर की झोली में 356884 मत गए। इस उपचुनाव में कुल 742771 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया जबकि 12626 लोगों ने नोटा दबाया। फतेहपुर सीट से कांग्रेस उमीदवार भवानी सिंह पठानिया 5789 वोटों से चुनाव जीते। यहाँ 24 चरणों में मतगणना हुई थीं। 24 वीं चरण की मतगणना में भाजपा प्रत्याशी बलदेव ठाकुर को 18660, भवानी सिंह पठानिया को 24449, जनक्रांति पार्टी के पंकज दर्शी 375, अशोक सोमल को 295 और निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राजन सुशांत को 12927 वोट मिले। वहीं उपचुनाव में 389 ने नोटा दबाया। हिमाचल प्रदेश के जुब्बल-कोटखाई विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की शानदार जीत हुई। बता दें जुब्बल कोटखाई में 4 प्रत्याशी मैदान में थे। इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर ने 6293 मतों से चुनाव जीत लिया है। उन्होंने कुल 29955 वोट हासिल किए। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी चेतन बरागटा को 23662 वोट मिले। भाजपा की नीलम सरैइक को 2644 और निर्दलीय प्रत्याशी सुमन कदम को 175 वोट मिले। उपचुनाव में 176 ने नोटा दबाया है। अर्की में कांग्रेस के प्रत्याशी संजय अवस्थी ने जीत हासिल की है। उपचुनाव में उन्होंने 30493 वोट हासिल किए। वंही भाजपा के प्रत्याशी रतन सिंह पल को 27216 वोट मिले। इसी तरह निर्दलीय उम्मीदवार जीत राम को 1622 वोट मिले। बता दें कि अर्की विधानसभा की यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र के निधन के बाद रिक्त हुई थी।
राजधानी दिल्ली में डेंगू का प्रकोप जारी हैं। पांच लोगों की मौत के बाद इस बीमारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई हैं। अभी तक 1530 से अधिक मामले रिकॉर्ड किये जा चुके हैं। नगर निकाय की ओर से सोमवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। दिल्ली में इस साल सामने आए कुल मामलों में से अक्टूबर में ही 1196 मामले सामने आए। दिल्ली में 30 अक्टूबर तक डेंगू से छह लोगों की मौत हुई और कुल 1537 मामले सामने आए है, जोकि 2018 में इस अवधि में सामने आए मामलों के बाद से सर्वाधिक है। इस साल, सितंबर में डेंगू के 217 मामले सामने आए थे, जो कि पिछले तीन साल में इस महीने में सामने आए सर्वाधिक मामले थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया राष्ट्रीय राजधानी में डेंगू की स्थिति की समीक्षा करने के लिए सोमवार को दिल्ली सरकार के साथ एक बैठक करेंगे। इस दौरान वह इस पर चर्चा करेंगे कि डेंगू के मामलों में वृद्धि पर नियंत्रण पाने में केंद्र किस प्रकार दिल्ली सरकार की सहायता कर सकता है। बैठक में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
धनतेरस से पहले गोल्ड के एमसीएक्स के प्राइस में 0.07 फीसदी यानि 35 रुपये की तेजी के साथ सोने चांदी की कीमतों में हल्का बदलाव देखा जा रहा है। इसके साथ वहीं अंतर्राराष्ट्रीय बाजार में एमसीएक्स पर गोल्ड में 0.04 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। बाजार के भाव के अनुसार आज 24 कैरेट सोना 47,975 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। वहीं 22 कैरेट गोल्ड प्रति 10 ग्राम का दाम 47,783 रुपये है। चांदी की बात करें तो यह 64,508 प्रति किलो बिक रहा है। हालांकि सोने की कीमत देश भर में अलग-अलग होते है। हर राज्य में एक्साइज ड्यूटी, स्टेट टैक्स और मेकिंग चार्जेज लगाता है। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक सोने की कीमत मोबाइल पर भी चेक कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दे दी है। अब कोवैक्सीन ले चुके 12 साल या इससे ज्यादा उम्र के यात्रियों को बिना रोक टोक के ऑस्ट्रेलिया में एंट्री मिल सकेगी। कौवेक्सीन प्राप्त यात्री को पूर्ण टीकाकरण प्राप्त माना जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के थैरेप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन ने कोवैक्सीन को 'मान्यता' देने का फैसला किया है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन से कोवैक्सीन को हरी झंडी अभी तक नहीं मिली है। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बैरी ओ'फेरेल एओ ने कहा, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यात्रियों के टीकाकरण की स्थिति स्थापित करने के उद्देश्य से भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को मान्यता दी है।
तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन लगभग साल भर से सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। बीते एक साल से किसानों ने राजधानी दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर की सड़कों पर लगे तंबुओं और ट्रॉलियों को अपना घर बना लिया है। इस विरोध प्रदर्शन को भारत का सबसे बड़ा और लंबा किसान आंदोलन कहा जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि वो किसानों के आंदोलन को तब तक जारी रखेंगे जब तक केंद्र उनकी समस्या का समाधान नहीं कर देती। उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा, "केंद्र सरकार के पास 26 नवंबर तक का समय है, उसके बाद 27 नवंबर से किसान गांवों से ट्रैक्टरों से दिल्ली के चारों तरफ आंदोलन स्थलों पर बॉर्डर पर पहुंचेगा और पक्की किलेबंदी के साथ आंदोलन और आंदोलन स्थल पर तंबूओं को मजबूत करेगा।"
टी20 वर्ल्ड कप 2021 में भारतीय टीम का सफर लगभग समाप्त हो गया है। रविवार को भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी गौतम गंभीर ने टीम पर कड़ा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अहम मुकाबलों में टीम का प्रदर्शन कमजोर दिखा। उन्होंने टीम की मानसिक दृढ़ता पर भी सवाल उठाए है। गौतम गंभीर ने कहा, 'टैलंट एक अलग चीज है और आप द्विपक्षीय सीरीज में अच्छा खेल सकते हैं लेकिन जब बात इस तरह के मैचों और इस तरह के टूर्नमेंट की आती है तो आपको अच्छा प्रदर्शन करना होता है। बात सीधी सी है।' गंभीर ने आगे कहा, 'बात अगर इस तरह के टूर्नमेंट्स की जाए तो मुझे नहीं लगता कि भारतीय टीम के पास कोई मानसिक दृढ़ता थी। हां उनके पास प्रतिभा है। द्विपक्षीय सीरीज में भारत एक बहुत खतरनाक टीम है।' टी20 वर्ल्ड कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 रन की पारी खेलने वाले गंभीर ने माना कि टीम द्विपक्षीय सीरीज में तो अच्छा खेलती है लेकिन आईसीसी टूर्नमेंट्स में उसके प्रदर्शन पर सवाल उठते हैं। गंभीर ने कहा कि यह मैच काफी अहम था किसी एक खिलाड़ी को आगे बढ़कर टीम के लिए दमदार खेल दिखाना चाहिए था। किसी को तो जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी।
राजधानी दिल्ली में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिसके चलते डेढ़ साल बाद पहली नवंबर यानि आज फिर से सभी स्कूल, कॉलेज खोले जाएंगे। हालांकि स्कूलों को ध्यान रखना होगा कि एक बार में 50 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति ना हो। यह निर्णय देश में कोरोना के कम हो रहे मामलों को देखते हुए लिया गया है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आज से सभी कक्षाओं के लिए स्कूल और कॉलेज खुलने के मद्देनजर दिशानिर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा गया कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कक्षाएं ‘हाइब्रिड’ तरीके से चलाई जाए, जिसका मतलब है कि ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन कक्षाएं भी जारी रहेंगी। स्कूल खुलने पर किसी भी पेरेंट्स को अपने बच्चे को स्कूल भेजने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। साथ ही स्कूल सुनिश्चित करेगा कि उसके सारे स्टाफ को वैक्सीन लग चुकी हो। बता दें कि प्रदेश में करीब 98 फीसदी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी टीके की कम से कम एक खुराक ले चुके हैं। इसके अलावा आज से ही सिनेमाघरों को पूरे क्षमता से खोले जाने की घोषणा भी की गई है। दिल्ली में 100 प्रतिशत सीटिंग कैपेसिटी के साथ सिनेमाघर, थियेटर और मल्टीप्लेक्स खुल सकेंगे। इससे पहले सिनेमाघरों को सिर्फ 50 प्रतिशत सीटिंग कैपेसिटी के साथ ही खुलने की इजाजत थी। इससे पहले अभी तक शादी समारोह में 100 लोगों के शामिल होने की अनुमति थी। लेकिन नए दिशानिर्देश के अनुसार शादी समारोह या किसी गैदरिंग में 200 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी गई है।
सोमवार सुबह राजधानी शिमला के उपनगर संजौली में एक ट्रांसफार्मर में आग लग गई। जैसे ही लोगों ने ट्रांसफार्मर में आग लगती देखी तो तुरंत इस संबंध में अग्निशमन विभाग को सूचित किया। अग्निशमन विभाग ने समय पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और आग को आगे बढ़ने से रोक दिया। वहीं, इस दौरान मौके पर लोगों में हड़कंप मच गया। शार्ट सर्किट के चलते आसपास के इलाकों की बिजली भी गुल हो गई, जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्टेशन फायर अधिकारी टेक चंद चौहान ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि समय पर आग पर काबू पा लिया गया है, जिससे कोई नुकसान की घटना सामने नहीं आई है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। देशभर में एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए है। लगातार छठी बार दाम बढ़कर दिल्ली में पेट्रोल पहली बार 110 रुपये प्रति लीटर के नजदीक पहुंच गया। सोमवार सुबह जारी रेट लिस्ट के मुताबिक पेट्रोल 35 पैसे और डीजल 35 पैसे महंगा हो गया है। दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत अब 109.69 रुपये और डीजल 98.42 रुपए प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 115.50 रुपये और डीजल की कीमत 106.62 रुपये प्रति लीटर है। वंही कोलकाता में पेट्रोल अब 110.15 और डीजल 101.56 रुपये प्रति लीटर है। इसके अलावा चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल के भाव 106.35 रुपये और डीजल 102.59 रुपये प्रति लीटर हो गया है। तेल की कीमतों में लगातार छठे दिन बढ़ोतरी हुई है। डीजल की कीमतें अब पिछले 38 दिनों में से 30 बार बढ़ी हैं, जिससे दिल्ली में इसकी खुदरा कीमतों में इस दौरान 9.90 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। डीजल की कीमत तेजी से बढ़ने के साथ, देश के कई हिस्सों में तेल अब 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक पर मिल रहा है। बता दें कि ट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति दिन सुबह छह बजे बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नए रेट्स लागू हो जाते हैं। पेट्रोल व डीजल की कीमत में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है।
आम जनता महंगाई से पहले ही पेरशान है, तेल की बढ़ती कीमतों के साथ अब कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में भी बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है। कमर्शियल सिलेंडर के लिए एलपीजी की कीमतों में आज से 266 रुपये की बढ़ोतरी हो गई। दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 2000.50 रुपये होगी। इससे पहले यह कीमत 1734 रुपये थी। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बता दें कि इससे पहले 1 अक्टूबर को 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। दिल्ली में 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1693 रुपये से बढ़कर 1734 रुपये हो गया था। कोलकाता में 1805.50 रुपये, मुंबई में 1685.00 रुपये और चेन्नई में 1867.50 रुपये हो गया था। 6 अक्टूबर को सरकारी तेल कंपनियों ने नॉन-सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलेंडर के रेट्स में इजाफा किया था। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने पहले ही जनता की जेब पर बोझ डाला है। आवाजाही से लेकर, रोजमर्रा की हर चीज महंगी होती जा रही है।


















































