इंटर कॉलेज वूमेन हैंडबॉल चैंपियनशिप पीजी कॉलेज बिलासपुर के खेल मैदान में आरंभ हुई दो दिवसीय प्रतियोगिता का शुभारंभ विधायक सुभाष ठाकुर ने किया प्रतियोगिता में 8 कालेजों की महिला खिलाड़ी भाग ले रही हैं। उन्होने युवाओं से आग्रह किया कि अपनी असिमित ऊर्जा को देश हित में लगाने के लिए खेलकूद गतिविधियों को अपनाएं। उन्होने कहा कि वर्तमान समय में नशा समाज के लिए सबसे बडी समस्या बनकर उभर रहा है। नशे से बचने के लिए पढाई के साथ-साथ किसी न किसी खेल गतिविधि में भाग लें। उन्होने प्रतिभागियों को खेल को भावना से खेलने का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि साहसिक खेलों के लिए यदि कोई स्थान है तो वह जिला बिलासपुर का लूहणु मैदान है। उन्होने कहा कि जिला को टूरिज़म से जोडने के लिए आने वाले समय में राष्ट्रीय तथा अन्र्तराष्ट्रीय पैराग्लाईडिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन करने के प्रयास किए जा रहे है। जिसके लिए खेल मंत्री से भी आवश्यक चर्चा की गई है। उन्होने काॅलेज प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि काॅलेज हाॅकी मैदान के साथ जो बास्केट बाल कोर्ट है उसे भी खेल के योग्य बनाएं और यदि इसके लिए धन की आवश्यकता होगी तो धन राशि भी उपलब्ध करवाई जाएगी। इस अवसर पर काॅलेज प्रधानाचार्य रामकृष्ण ने मुख्यातिथि तथा अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए इंटर कॉलेज वूमेन हैंडबॉल चैंपियनशिप की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर राज्य सचिव हैण्डबाल नंदकिशोर शर्मा,आयोजक सचिव डा.प्रवेश शर्मा,पीटीए,अध्यक्ष विक्रम ठाकुर,पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष आशीष ढिल्लों,भाजयुमों,जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर के अतिरिक्त अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
दाड़लाघाट क्षेत्र के अन्तर्गत कोठी गांव की रहने वाली सीमा शुक्ला अपनी गायकी से पूरे प्रदेश में संगीत को नया रूप देकर,एक अलग पहचान बना रही है। सीमा शुक्ला द्वारा फिल्मांकित वीडियो एल्बम जन्माष्टमी के पावन दिवस पर "जय गोविंदा जय गोपाला" के नाम से रिलीज हुई, जो संगीत तथा भजन प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इस एल्बम में सीमा शुक्ला ने मधुर संगीत तथा मनमोहक अभिनय द्वारा अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय दिया है। शुक्ला एक निजी विद्यालय में अध्यापिका है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने स्कूल समय से ही छोटी मोटी गायिकी शुरू की थी, लेकिन लोगों द्वारा निरंतर प्रोत्साहन मिलने एवं अथाह स्नेह मिलने के कारण उन्होंने अपनी गायकी जारी रखी और धीरे-धीरे यह क्रम छोटे मंच से बदलकर बड़े मंचों में परिवर्तित हो गया। जैसे-जैसे श्रोताओं का प्यार मिलता गया वैसे-वैसे उनकी गायकी में भी निखार आता गया। धीरे-धीरे बड़े मंचों पर उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा का जादू बिखेरा। ऐसी के चलते शुक्ला को राज्यस्तरीय सम्मान से भी सम्मानित किया गया। जो इस क्षेत्र के लिए एक गर्व की बात है। सीमा शुक्ला ने भैरवी स्टूडियो बिलासपुर म्युजिकल डायरेक्टर परमजीत पम्मी तथा इस फिल्म को शूट करने वाले लाघु एस कुमार, सुरेश वर्मा, राकेश शुक्ला तथा अन्य सभी मार्ग दर्शकों का धन्यवाद किया है। सीमा शुक्ला सामाजिक कार्य में भी बढ़-चढ़कर भाग लेती है। उन्होंने अपने संदेश में युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने का आह्वान किया है तथा लोगों को बेटा और बेटी में अंतर न करने की गुजारिश की है।
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त राजेश्वर गोयल ने मतदाता सत्यापन कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उन्होेने बताया कि यह कार्यक्रम 1 सितम्बर से 15 अक्तूबर तक प्रत्येक मतदान केन्द्र स्तर पर चलेगा। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एसडीएम.) झण्डूता,घुमारवीं,बिलासपुर तथा श्री नैना देवी जी) द्वारा भी इस कार्यक्रम का विधिवत रूप से शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर जिला के सभी 414 मतदान केन्द्रों पर बूथ लेवल अधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के दौरान नागरिक स्वयं भी वोटर हैल्पलाईन मोबाईल एैप,एनवीएसपी,पोर्टल,लोक मित्र केन्द्र तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एसडीएम.) के कार्यालयों में स्थापित मतदाता सहायता केन्द्र पर जाकर अपनी प्रविष्टियों को सत्यापित कर सकता है। कि यदि विद्यमान मतदाता सूची में कोई त्रुटी हो तो उसे भी अंकित करने के लिए आधार कार्ड,ड्राईविंग लाईसैंस, सरकारी एवं अर्धसरकारी कर्मचारियों के लिए जारी पहचान पत्र, कृषक पहचान पत्र, भारतीय पासपोर्ट,बैंक पास बुक,पैन कार्ड,राशन कार्ड,स्मार्ट कार्ड जो भारत के महापंजीयक द्वारा राष्ट्रीय परिवार रजिस्टर के अन्र्तगत जारी किया गया होना चाहिए, इसके अतिरिक्त नवीनतम पानी,टैलीफोन,बिजली तथा गैस के बिल में से किसी एक दस्तावेज को अपलोड कर सकते है।उन्होने बताया कि सभी बूथ लेवल अधिकारी 1 सितम्बर, से 15 अक्तूबर तक अपने-अपने मतदान केन्द्र के अन्तर्गत घर-घर जाकर सभी मतदाताओं की प्रविष्टियों को बीएलओ,मोबाईल एैप के माध्यम से सत्यापित करेंगे। उन्होने जिला के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदाता सूची में विद्यमान अपना विवरण जैसे फोटो,पता व जन्म तिथि की शुद्धि बारे मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के तहत सुविधाओं का लाभ उठाएं। उन्होने सभी राजनैतिक दलों/पंचायत प्रतिनिधियों/महिला/युवक मण्डलों से भी आग्रह किया है कि इस कार्यक्रम की जानकारी समस्त मतदाताओं तक पहुंचाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दें।
अर्की उपमंडल ग्राम पंचायत हनुमान बड़ोग में महिला ग्राम सभा की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता वार्ड पंच रीता वर्मा ने की। इस बैठक में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिला मंडल रनोह खालसा, मनलोग, कोटला, हनुमान बड़ोग के सदस्यों की समस्याएं अध्यक्ष के माध्यम से पंचायत प्रधान कृष्ण सिंह कंवर के समक्ष रखी गई। पंचायत प्रधान ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा वर्कर के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के युवा भांग,चिट्टा की और आकर्षित हो रहे हैं जो उनके लिए जानलेवा है, उन्होंने महिलाओं से अनुरोध किया कि गांव में युवा शक्ति को नशे से दूर रखें। उन्होंने विभिन्न योजनाओं जैसे जल संरक्षण, सफाई योजना, व स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की।
जिला दंडाधिकारी सोलन विवेक चंदेल ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण अभियान की सफलता के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग अपेक्षित है। विवेक चंदेल आज यहां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सौजन्य से आयोजित पोषण माह के शुभारंभ के अवसर पर उपस्थित अधिकारियों,कर्मचारियों एवं अन्य को संबोधित कर रहे थे। विवेक चंदेल ने कहा कि सभी को पोषण की मूल अवधारणा से अवगत करवाने तथा लक्षित वर्गों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पोषण माह में राष्ट्रीय पोषण मिशन के लक्ष्यों को पूर्ण करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस अभियान का मूल उद्देशय किशोर-किशोरी,गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को निर्धारित पोषण के विषय में जगरूक बनाना, तथा उन्हें उचित पोषण उपलब्ध करवाना है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने कहा कि कुपोषण के अभिशाप को पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिए इस वर्ष पोषण माह को ‘हर घर पोषण व्यवहार’ के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सोलन जिला के सभी निवासियों को पोषण के महत्व से अवगत करवाना है। उन्होंने कहा कि पोषण माह के तहत आज ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण दिवस आयोजित किया जा रहा है। जिला में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आज 6 वर्ष तक के बच्चों व 11 से 18 वर्ष तक की किशोरियों का स्वास्थ्य संबंधी विश्लेषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी आयोजन निश्चित रूप से लक्षित समूहों में पोषण की उचित जानकारी पहुंचाएंगे। इस कार्यक्रम की सफलता मे जहां जन-जन का सहयोग आवश्यक है,वहीं जन प्र्रतिनिधियों,पंचायत प्रतिनिधियों,स्कूल प्रबंधन समितियों,सरकारी विभागों,सामाजिक सगंठनों तथा समस्त सार्वजनिक एंव निजि क्षेत्र की समावेशी भागीदारी भी अपेक्षित है।विवेक चंदेल ने इस अवसर पर सभी को पोषण शपथ दिलाई। तथा इस अभियान को जन आंदोलन के रूप में चलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि,शिक्षण सस्ंथान तथा अन्य सस्ंथाओ को भागीदार बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह समय-समय पर पोषण अभियान से संबंधित आयोजित कार्यक्रमों का मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इस अवसर पर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राजेंद्र शर्मा,जिला कार्यक्रम अधिकारी वंदना चौहान,आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ.अरविंद गुप्ता,तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। ।
एनपीएस कर्मचारी संघ खंड दाड़लाघाट का चुनाव मुख्य पर्यवेक्षक राजेंद्र ठाकुर व सह पर्यवेक्षक ललित कुमार की देखरेख में संपन्न हुआ। इसमें पूर्व कार्यकारिणी को भंग करके नई कार्यकारिणी का संवैधानिक पद्धति से चुनाव किया गया। इस अवसर पर प्राथमिक शिक्षक संघ खंड धुंदन के पूर्व प्रधान बृजलाल पंवर, केंद्र अध्यक्ष दाड़लाघाट कुलदीप सिंह चौहान, प्रदीप चंदेल और प्राथमिक शिक्षक संघ के वर्तमान प्रधान नरेंद्र शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। एनपीएसए खंड दाड़लाघाट की नई कार्यकारिणी में अनमोल शर्मा को अध्यक्ष, जितेंद्र कुमार को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, गोपाल सिंह को महासचिव, अनिल कुमार कोषाध्यक्ष, संजय कुमार संयुक्त सचिव,अमरदेव कपिला मुख्य सलाहकार,रविंद्र शर्मा महालेखाकार, मेहरचंद मुख्य योजनाकार,राजेश कुमार उपाध्यक्ष,ललित कुमार संगठन सचिव,सुखराम मुख्य संरक्षक के पद पर चयनित किए गए। खंड दाड़लाघाट की इस चुनाव प्रक्रिया में शिक्षा विभाग,वन विभाग,लोक निर्माण विभाग,स्वास्थ्य विभाग,पशुपालन विभाग,आयुर्वेद,सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य,विद्युत एवं राजस्व विभाग के लगभग 85 कर्मचारियों ने भाग लिया। सभी पदाधिकारियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ लेते हुए प्रण किया कि वे एनपीएसईए कर्मचारियों के हितों की लड़ाई को तन मन धन से लड़ेंगे और जिला तथा राज्य सर की कार्यकारिणी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस लड़ाई को अंजाम तक पंहुचाने हेतु तत्पर रहेंगे।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन विवेक चंदेल ने सोलन जिला के सभी पात्र मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे प्रथम सितंबर से 15 अक्तूबर, 2019 तक भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे मतदाता सत्यापन कार्यक्रम (ईवीपी) में अपनी तथा अपने परिवार की मतदाता जानकारी को सत्यापित करें ताकि पूर्ण रूप से त्रुटिरहित मतदाता सूचियां तैयार की जा सकें। विवेक चंदेल मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के विषय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। विवेक चंदेल ने कहा कि मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के तहत मतदाता सूचियों में मतदाताओं की प्रविष्टियों में पाई गई विसंगतियों को दूर किया जाएगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए केन्द्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा विभिन्न माध्यम सुनिश्चित बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश के साथ-साथ सोलन जिला में भी मतदाता सत्यापन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। यह मोबाइल ऐप सुगमता से मोबाइल फोन पर उपलब्ध प्ले स्टोर से डाउनलोड की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मतदाता अपने मोबाइल पर दअेचण्पद के माध्यम से ऑनलाइन मतदाता सत्यापन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त वोटर हेल्पलाइन मोबाइल ऐप, लोकमित्र केंद्र, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के कार्यालय में स्थापित मतदाता सहायता केंद्र पर मतदाता सत्यापन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग मतदाता, मतदाता हेल्पलाइन 1950 के माध्यम से भी यह सत्यापन कर सकते हैं। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने कहा कि मतदाताओं को अपनी मतदाता सत्यापन की प्रविष्टि की प्रमाणिकता के लिए एक वैध दस्तावेज को अपलोड करना होगा। उन्होंने कहा कि मतदाता का भारतीय पासपोर्ट, ड्राईविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक, किसान पहचान पत्र, सरकारी या अर्ध सरकारी कर्मचारियों जारी किए गए पहचान पत्र, पैन कार्ड, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के तहत जारी स्मार्ट कार्ड अथवा भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा अनुमोदित कोई अन्य दस्तावेज मान्य होगा। उन्होंने कहा कि मतदाता अपने परिवार के अन्य सदस्यों का ब्यौरा तथा उनसे संबंधित मतदाता सूची में विद्यमान प्रविष्टियों का सत्यापन भी कर सकता है। विवेक चंदेल ने कहा कि मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के तहत परिवार के उन सदस्यों का ब्यौरा भी उपलब्ध करवाया जा सकेगा जिनका नाम मतदाता सूची में विद्यमान है, परंतु वह अन्यत्र चले गए हैं अथवा जिनकी मृत्यु हो गई है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत पात्रता अनुसार नए मतदाताओं का पंजीकरण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 15 अक्तूबर, 2019 तक की अवधि में बूथ स्तर तक के अधिकारी मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के तहत सभी मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। उन्होंने मीडिया के माध्यम से जिला के सभी नागरिकों, राजनीतिक दलों, गैर सरकारी स्वयंसेवी संगठनों, महिला मंडलों तथा युवक मंडलों से आग्रह किया कि वे मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों के नाम मतदाता सूचियों में दर्ज करने, विद्यमान प्रविष्टियों में संशोधन करने तथा अपात्र व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें। इस अवसर पर उपमंडलाधिकारी सोलन रोहित राठौर, सहायक आयुक्त भानु गुप्ता, तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा, नायब तहसीलदार निर्वाचन महेंद्र ठाकुर उपस्थित थे।
शख्सियत: कुल भूषण गुप्ता ... वर्ष 1962 में एक युवक रोजगार की तलाश में सोलन पहुँचता है। सामान्य कद काठी पर आसमान सा हौसला। शुरूआती वर्षों में तो दो वक्त की रोटी जुटाना भी उसके लिए अपने आप में संघर्ष था। इस पर वर्ष 1967 में एक दुर्घटना के कारण उस युवक को चोटें आती है, पर हौंसला नहीं डगमगाता। वर्ष 1967 में वो युवक स्वरोजगार को चुनता है और एक आटा चक्की स्थापित करता है। और आज शायद ही सोलन में ऐसा कोई घर होगा जहां उस चक्की के आटा का स्वाद न पहुंचा हो। ये कहानी है भूषण परिवार के मुखिया कुलभूषण गुप्ता की। कुलभूषण गुप्ता सादे व्यक्तित्व व आदर्श जीवन के कारण जनमानस के हृदय में विशेष जगह बनाए हुए हैं। अपने मेहनत के बुते उन्होंने आगामी पीढ़ियों को इस योग्य बनाया कि आज भूषण परिवार किसी पहचान का मोहताज नहीं है। गुप्ता सयुंक्त परिवार को अपनी सफलता का आधार मानते है और यही संस्कार उनके पुत्रों में भी है जो वर्तमान में पिता के शुरू किये व्यवसाय को क्षितिज पर ले जाने का कार्य कर रहे है। राजनीति को बनाया जनसेवा का माध्यम: कुलभूषण गुप्ता राजनीति में भी सक्रिय एवं लोकप्रिय रहे हैं। कुल भूषण गुप्ता वर्ष 2000 से 2010 तक नगर परिषद सोलन में पार्षद रहें। इसके उपरांत इनकी छोटी पुत्रवधु रुचि गुप्ता भी वर्ष 2010 से 2014 तक नगर परिषद की पार्षद चुनी गई, जो भूषण परिवार की जन मानस में लोकप्रियता का परिचायक है । आभूषण जगत के क्षितिज पर विराजमान भूषण ज्वेलर्स: भूषण परिवार की तीन महिलाएं वर्ष 2007 में घर की चारदीवारी से आभूषण का व्यवसाय आरम्भ किया था। परिवार की तीन महिलाओं मीना गुप्ता, रीमा गुप्ता और रुचि गुप्ता ने राह बनाई तो परिवार के बाकी सदस्य भी धीरे- धीरे उनके स्वप्न को साकार करने में जुट गए। नतीजन, तब मेहनत और भरोसे की नीव पर, महज एक लाख की लागत से शुरू किया गया वो व्यवसाय आज भूषण ज्वेलर्स का प्रारूप ले चूका है। परिवार की मेहनत और भूषण नाम की प्रतिष्ठा के बुते भूषण के आभूषणों की चमक न सिर्फ सोलन अपितु समस्त प्रदेश में बिखरने लगी है। घर से शुरू किये गए व्यवसाय के उपरांत वर्ष 2014 में राम बाजार में भूषण ज्वेलर्स की नींव रखी गई थी और अब तक के अपने पांच वर्ष के अल्प सफर में ही भूषण ज्वेलर्स विश्वसनीयता और भरोसे का पर्याय बन चुका है। आलम ये है कि प्रदेश में जब भी स्वर्ण आभूषणों की बात होती है तो भूषण ज्वेलर्स का नाम खुद ही जुबां पर आ जाता है।
नगर परिषद सोलन के सभी 15 वार्डों एवं नगर परिषद परवाणू के सभी 9 वार्डों की मतदाता सूचियां तैयार कर ली गई हैं। यह जानकारी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी नगर परिषद एवं उपमंडलाधिकारी सोलन रोहित राठौर ने दी। रोहित राठौर ने कहा कि नगर परिषद सोलन तथा नगर परिषद परवाणू के सभी वार्डों की मतदाता सूचियों को हिमाचल प्रदेश नगर निर्वाचन नियम,2015 के अंतर्गत तैयार किया गया है। नगर परिषद सोलन के सभी वार्डों की मतदाता सूचियां उपमंडलाधिकारी कार्यालय सोलन, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद सोलन या तहसीलदार सोलन के कार्यालय समय में निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं। यदि मतदाताओं को मतदाता सूची में प्रविष्टि के संदर्भ में कोई भी दावे व आपत्तियां दर्ज करवानी हैं तो वे 9 सितंबर,2019 तक आवश्यकतानुसार पत्र 4,5 व 6 भरकर इन्हें सही करवा सकते हैं। रोहित राठौर ने कहा कि नगर परिषद सोलन के लिए सभी दावें व आपत्तियां निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी नगर परिषद सोलन एवं उपमंडलाधिकारी सोलन के कार्यालय में, तथा नगर परिषद परवाणू के लिए उपमंडलाधिकारी सोलन एवं कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद परवाणू के कार्यालय में निर्धारित तिथि तक प्रेषित की जा सकती हैं। मतदाता स्वयं या किसी एजेंट के माध्यम से भी निर्धारित तिथि तक इन्हें प्रस्तुत कर सकते हैं।
ग्राम पंचायत सन्याडी मोड़ के स्थान दाड़लामोड़ में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सोमवार 2 सितम्बर से गणपति उत्सव कमेटी दाड़लामोड द्वारा गणपति उत्सव का आयोजन किया जा रहा हैं। यह आयोजन यहां पर लगातार 5 वर्षों से किया जा रहा है। गणेश उत्सव कमेटी के प्रधान बलदेव शर्मा व सचिव विजय शर्मा ने बताया कि स्थानीय पंचायत के लोगों में बड़ी धूमधाम से गणेश उत्सव का स्वागत करने के लिए बड़ा उत्साह है। गणपति उत्सव कमेटी के सदस्यों ने लोगों से निवेदन किया है कि सोमवार 2 सितम्बर प्रातः 8:00 बजे से पूर्व गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल के समीप गणपति पूजन को गणपति विराजित होंगे। ओर सोमवार से प्रतिदिन प्रातः 8:00 गणपति पूजन व शाम 8:00 बजे से लेकर रात्रि 12:00 बजे तक जागरण का आयोजन किया जाएगा। सभी गणपति पूजन में अपनी अपनी हाजिरी अवश्य लगाएं व गणपति का आशीर्वाद ले। गणपति जी का विसर्जन बिलासपुर के गोविंद सागर झील में किया जायेगा। इस उत्सव में क्षेत्र की जनता रात्रि जागरण व पूजन विसर्जन के दिन सपरिवार सादर आमंत्रित है। कमेटी के सदस्यों में प्रेम अग्रवाल, राकेश शर्मा, मनीराम शर्मा, ग्राम पंचायत सन्याडी मोड़ के प्रधान हरीश ठाकुर,अमर शर्मा,प्रकाश शर्मा, राकेश ठाकुर,वीरेंद्र शर्मा, राजेश कुमार, राजेश गौतम, कमलेश कुमार, वीरेन्द्र कुमार, मनसाराम शर्मा, महेंद्र कंवर, महेन्द्र पाल शामिल हैं।
In the beautiful woods of a small town in Himachal Pradesh resides the heavenly deity, Maa Tara. Himachal Pradesh is well known for its mesmerizing beauty, lush green forests and of course it is land of splendid mountains, a pristine place which feeds and provides solace to the mind and soul, a pious land which is associated with the supernatural . The enigma of a place which attracts people from every nook and corner of the world . Along being praised for its natural beauty Himachal is also referred as the "Dev-Bhoomi" which means the "abode of God." One can say that Himachal is the smaller and diversified version of India because various deities residing in this heavenly place . One of the most praised deity of Himachal is Maa Tara Devi. Tara devi temple is located in the mid of the thick forest of oak and rhododendron on Tarab hills in Shimla Himachal Pradesh. This temple is famous for its divine beauty and spiritual peace. Tara Devi Temple is situated at a height of 1851 meters above sea level. It is about 11 kilometers away from Shimla. Tara Devi Temple is accessible by rail, bus and car, but the best way to enjoy the magnificent beauty of the place is to follow the path of the Tarab trek . HISTORY The history of tara devi temple dates back about 250 years ago. It is believed that Maa Tara Devi was brought to Himachal from West Bengal. A King from the sen dynasty of Bengal once visited Himachal. He was in the habit of carrying the idol of his family in the upper torso of his arm. One day while hunting in the dark and dense forests of Juggar, Raja Bhupendra Sen fell asleep and had a dream; in the dream he saw his family deity Ma Tara and her consorts Dwarpal Bhairav and Lord Hanuman requesting him to unveil them before the common economically dis- empowered populace. Inspired by his dream, Raja Bhupendra Sen donated 50 bighas of land and sponsored the construction of a temple in the land. The first Idol was made of wood which was installed in accordance with Vaishnav traditions. Later generations of the Sen Dynasty gradually improved the structure. Raja Balbir Sen commissioned the 'Ashtadhatu' deity which is still seen today. THE TUNNEL WAY The trek start from taradevi railway station and runs up to the temple. You may continue the trek from the jungle above the railway station or from the railway track which will include tunnel 91 of the Kalka Shimla railway line. This is the second longest tunnel of the track 992 meters. There is a long story behind this tunnel too It is believed that as this tunnel was being built under the residence of a powerful goddes , the workers were scared of working there as they didn’t want to face the goddess’ wrath. Work had to be stopped for a little while when a breathing pipe was mistaken for a large snake sent by the goddess herself. The tunnel is very long and a bit narrow so its tough to cross it. You must ask station master before crossing it to assure that there is no train coming and you have plenty of time to cross it . According to locals many people committed suicide in that tunnel and some got accidently killed by the train while they passing through the tunnel . That tunnel is a bit haunted but would give you plenty of thrill for sure . After passing the tunnel the path continues along the railway trek and then you have to climb the hill covered by dense forest of oak and rhododendron to reach your destination . THE JUNGLE WAY This way totally involve a narrow path through a dense forest . One has to hike for about two hours to reach the temple . Through the dense forest of the pinewood, oak, Rhododendron , rich in flora and fauna, passing through the green meadows on the way, it is one of the most beautiful walks around Shimla. The meandering foot path, climbs gently to the top of the hill and it turns to be a tireless climb. On the way to the top there are various places which offer wide panoramic views of Shimla town with the Himalayas at back. Atmosphere of the hike rejuvenates the nature lovers and common tourists visiting this sacred temple, which provides excellent views. Pine – scented mild breeze on the way refreshes people beyond expectations. The trek starts from tara devi bus stand that is base of the mountain when you reach their you will realize that the world might have taken a leap of ten years, but the trees and the jungle still stand just the same. They stand tall, proud, looking down on all of us . The jungle beckons you . The total distance of the trek is 4 kms and most of it is uphill, and through a jungle trail. This trek can be undertaken around the year. Just be careful of the running streams in monsoon and the snowy trails in winter. On the whole trail will just see a handful of people otherwise it will just be the jungle and you . Not a soul around and almost pin drop silence. The first stretch of half an hour or so is a gradual slope that circles the mountain. Before you reach the half way mark the trail becomes more steeper, and a little tiresome . After you will complete half way , you will see the remains of a rain shelter with a broken hand pump . After walking a bit you will soon reach a place where you will see four mobile towers on the top of mountain . The view from that point will take you to another world , from there you can get the glimpse of whole Shimla . The jungle in this last stretch is mesmerizing, there are pockets which get very little sun and have huge ferns, in deep greens growing here . After this a walk of few more minutes through the woods and you will reach your destination . The jungle is fierce and interesting so definitely a place to visit . SHIV KUTIYA After visiting tara devi temple and tasting the divinity in the air you may now move further to Shiv Kutiya . A small temple of lord shiva located under the tara devi temple in the dense forest gives you the feel of Lord Shiva actually residing in Kailash. The temperature of the temple is naturally lower than other parts of the jungle. It is believed that many years ago a saint who used to meditate here He stayed here even at the worst of temperature , be it deepest of winters he could be found only in a langot with ash smeared all over him. He was believed to be from South India, and a qualified engineer from Merchant Navy. The only thing you will sense there is the extreme peace and divinity in the air .Temple has the Samadhi of one more saint who meditated here. There is a small room along the temple where you will see a log burning continuously most probably called baba g ka dhoona . It is believed that the babaji is in mediation here, and the ash from the log is supposed to be prasad for his followers. This temple is a feast for all the Lord Shiva bhakt .
हिमाचल प्रदेश ज़िला कुल्लू में रविवार को कुछ लोगों ने एक शर्मनाक घटना को अंजाम दे दिया। कुल्लू के गैमन ब्रिज के पास लोगों ने एक बेकसूर कंडक्टर को बच्चा चोर समझकर पूरी बेरहमी के साथ पीटा। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए मारपीट करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। एसपी कुल्लू गौरव सिंह ने बताया कि रविवार सुबह कुल्लू थाने पर सूचना मिली के गैमन पुल के पास कुछ लोग एक अनजान व्यक्ति को बच्चा चोर समझ कर उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। इस पर पुलिस थाना कुल्लू की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और व्यक्ति को पुलिस थाने लाकर उससे पूछताछ की। पूछताछ में पता चला कि यह व्यक्ति बिलासपुर का रहने वाला है और एक ट्रक कंडक्टर है, जो वहां पानी की टंकी से पानी पीने गया था। जहां पर एक बच्चा भी मौजूद था। इस व्यक्ति ने उस बच्चे से हंसकर नमस्ते बोला और पानी की टंकी के बारे में पूछा जिस पर वह बच्चा डर गया और चिल्लाने लगा। बच्चे से पूछने पर पता चला कि वह इसलिए चिल्लाया क्योंकि उसे उसके माता-पिता ने बताया था कि आजकल यहां बच्चा चोर घूम रहे हैं। वहां मौजूद व्यक्तियों ने उस व्यक्ति के पास इत्र की शीशी को बेहोशी की दवा बता कर कंडक्टर के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। इस पर उन सभी व्यक्तियों जिन्होंने बिना पुलिस से मदद लिए अपने हाथ में कानून लेने की कोशिश की, के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज़ किया है। पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जिन लोगो ने उसके साथ मारपीट की है उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। वहीं पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने आम जनता से भी अपील की है कि अफवाहों से बचें। यदि ऐसा कोई मामला लगता है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें और कानून को अपने हाथ में न ले।
दो बच्चो व तीन अध्यापको के साथ शुरू हुआ था विद्यालय, आज है करीब 900 छात्र कठोर परिश्रम करना एक ऐसा जज्बा है जिसके आधार पर मनुष्य मनचाही सफलता प्राप्त कर सकता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। अंतरनिर्भर होने के साथ साथ अगर उसमे सामाजिक कल्याण की भावना निहित हो तो निश्चित वह एक असाधारण व्यक्तित्व का स्वामी होता है। ऐसे ही धेर्यवान व विवेकी व्यक्तित्व की अनकही गाथा ब्यान कर रहा है कुनिहार क्षेत्र के अंतर्गत स्थित बी एल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनिहार जो अपने स्थापना वर्ष 1995 से लेकर अब तक निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इस विद्यालय की शुरुआत प्रबन्धक गोपाल शर्मा द्वारा महज दो बच्चो व तीन अध्यापको के साथ की गई। आज आलम यह है कि विद्यालय ही हर राह मंजिल पाने को आतुर है। 250 की फीस आधी तो 25 को निशुल्क शिक्षा: समाज के हर तबके का ध्यान रखते हुए ही विद्यालय में लगभग 250 विद्यार्थियों की फीस आधी और 25 से अधिक को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है जो प्रधानमंत्री के विचार “सब पढ़े सब बढ़े “ को प्रतिपादित करता है। इतना ही नही ग्रामीण क्षेत्रो के बच्चो को घर द्वार पर बस सेवा कम दरो पर उपलब्ध कराई जाती है ताकि उन्हें भी अच्छी शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिले। यहाँ के छात्र हर क्षेत्र में अव्वल: इस विद्यालय के विद्यार्थियो को शैक्षणिक गुणों के विकास के साथ साथ बहुमुखी प्रतिभा निखारने के अवसर प्रदान किए जाते है। पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लेकर यह स्कूल नैतिक मूल्यों के विकास, अनुशाशन और कर्मठता जैसे गुणों के विकास पर भी ध्यान देता है। व्यवहार वह दर्पण है जिसमे मनुष्य अपना अक्श झलकाता है। अतः इस का उद्देश्य एक ऐसी शिक्षा प्रदान करना है जो विद्यार्थियों का सर्वागीण विकास करें और जीवन की व्यवहारिकता पर भी खरी उतरें। वरन यह उसी का परिणाम है की यहाँ पढ़ चुके विद्यार्थी डॉक्टर, वकील, इंजिनियर, आर्मी व नेवी अफसरों जैसे उच्च पदों पर आसीन होकर न सिर्फ विद्यालय व अभिभावकों का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि एक अच्छे नागरिक व प्रशासक के रूप में समाज के कल्याण में अपनी सहभागिता निभा रहे है।
प्रदेश के सबसे शिक्षित जिला हमीरपुर का 1 सितंबर 1972 में गठन हुआ था जिसके बाद इस जिले ने शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। 1972 से लेकर 2019 तक के सफर की बात करें तो इस दौरान हमीरपुर के लोगों ने यहां बहुत बड़ा बदलाव देखा। वहीं एक छोटा सा कस्बा देखते ही देखते शिक्षा का हब के रूप में पूरे प्रदेश में मशहूर हो गया। इसके साथ ही जब एनआईटी हमीरपुर में आया तो शिक्षा के जगत में एक बहुत बड़ा मुकाम हमीरपुर को हासिल हुआ। 1998 के बाद हमीरपुर में विकास की रफ्तार तो बढ़ी ही वहीं इसके साथ हमीरपुर में कई तरह के नए शिक्षा संस्थान खुले जिससे स्वरोज़गार और रोज़गार दोनों तरह के कई नए दरवाजे़ भी हमीरपुर के लिए खुल गए। आज की बात करें तो हमीरपुर जिला में इस समय मेडिकल कॉलेज, होटल मैनेजमेंट कॉलेज, एनआईटी टेक्निकल यूनिवर्सिटी, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के अलावा शिक्षा से जुड़ी कई ऐसी एकेडमी चल रही हैं जिनका नाम पूरे प्रदेश में जाना जाता है। इसके साथ ही खेलों में विजय कुमार के रूप में ओलंपियन फौज में बड़ी संख्या में हीरो, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉक्टर डीएस राणा, शिक्षा के क्षेत्र में हिम एकैडमी, फिल्म इंडस्ट्री में हमीरपुर के लोगों का नाम और राजनीतिक के क्षेत्र में काफी जाना जाता है।
कलराज मिश्र के स्थान पर बंडारू दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक रविवार को पांच राज्यपालों की नियुक्ति और तबादले किए गए हैं। राष्ट्रपति भवन कार्यालय द्वारा रविवार को जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र का तबादला कर उन्हें राजस्थान की कमान सौंपी गयी है। इसी के साथ भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र के राज्यपाल, आरिफ मोहम्मद खान केरल के राज्यपाल, और डा . तमिलिसाई सुंदरराजन तेलंगाना के राज्यपाल के पद की जिम्मेदारी संभालेंगे । बता दें कि अभी कुछ ही समय पहले कलराज मिश्र को हिमाचल का राज्यपाल बनाया गया था और अब फिर उन्हें बदल दिया गया है।
किसी महानुभव ने कहा है कि विपक्ष को नसीहत देना सत्ता पक्ष का जन्मजात गुण होता हो और उसे न मानना ही विपक्ष को विपक्ष बनाता है। सही या गलत, पर भई हिंदुस्तान की राजनीति तो ऐसे ही चलती है। यहाँ विपक्ष का काम विरोध करना है और ये विरोध सिर्फ विरोध करने के लिए ही होता है, और सत्ता पक्ष अक्सर उन्हें बेवजह विरोध न करने की नसीहत देता है। पर बेचारा विपक्ष भी क्या करें, आखिर धरना-प्रदर्शन और सत्ता विरोधी स्वर उठाकर ही नेता का पोर्टफोलियो मजबूत जो होता है। पर लगता है अपनी दुर्गति से तंग आ चुकी कांग्रेस अब इस परिपाटी को बदलना चाहती है। पार्टी की हालत वैसे भी डायनासौर की आखिर पीढ़ी जैसी है, ऐसे में कोंग्रेसियों ने निर्णय लिया है कि विकास के लिए वे सत्ता के कंधे से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ेंगे। देर आयद दुरुस्त आयद ! इस बदलाव के नायक हिमाचल के कांग्रेसी विधायक है और दिलचस्प बात ये है इसकी शुरुआत भी उन्होंने अपने घर से की है। जब जयराम सरकार विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पेंशन संशोधन विधेयक, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन संशोधन विधेयक और मंत्रियों के वेतन और भत्ता संशोधन विधेयक सदन में लाई, तो बेवजह गरजने वाले कांग्रेसी शेरों ने चू तक नहीं की।आवाज निकली जरूर पर ध्वनि मत से बिल पास करने के लिए और विधानसभा में मंत्रियों, विधायकों और पूर्व विधायकों के यात्रा भत्ता बढ़ाने को लेकर तीनों बिल फटाक से पास हो गए। पर एक आदमी इस बात को नहीं समझ रहा, पता नहीं क्यों हल्ला मचाया हुआ है ? ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने को पता नहीं आपत्ति क्यों है ? सिंघा को समझना चाहिए कि भई जनता के टैक्स से इन जनता के सेवकों के लिए इतना तो किया ही जा सकता है। खेर राकेश सिंघा कर भी क्या लेंगे ! अकेला चना भाड़ नहीं भोड़ता। कितना भी चिल्ला लो सिंघा महोदय पर अब इन जनसेवकों का यात्रा भत्ता मौजूदा 2.50 लाख रुपये वार्षिक से बढ़ाकर 4 लाख होने जा रहा है। इस व्यवस्था से राजकोष पर वार्षिक 2.20 करोड़ का अतिरिक्त भार जरूर पड़ेगा, पर आखिर जनता भी कोई फर्ज होता है !
सोलन ज़िला के अंतर्गत परवाणु पुलिस ने चिट्टे सहित तीन व्यक्तियों को कब्ज़े में लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह परवाणु पुलिस ने राष्ट्रीय उच्च मार्ग 05 के नज़दीक, पंचकूला की तरफ से धर्मपुर की और जा रही करेटा कार न. HP 74- 9869 से चेकिंग के दौरान 27.23 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया। आरोपियों की पहचान संजीव भारद्वाज पुत्र प्यारे लाल निवासी गांव सूजी डाकखाना जावली तहसील कसौली जिला सोलन आयु करीब 40 वर्ष, सुरिंद्र कुमार पुत्र राम चंद निवासी गांव वझोडू डाकखाना जोवडी तहसील अर्की जिला सोलन आयु करीब 33 वर्ष तथा रवि कुमार पुत्र राजिन्द्र कुमार निवासी मकान न० 03 गली न० 01 अरमान नगर डकोआ जालंधर कैंट पंजाब आयु करीब 32 वर्ष के तौर पर हुई है। परवाणु पुलिस द्वारा आगामी कार्यवाही की जा रही है।
तहसील जुब्बल कोटखाई में मां हाटेश्वरी का प्राचीन मंदिर है। यह शिमला से लगभग 110 किमी की दूरी पर समुद्रतल से 1370 मीटर की ऊंचाई पर पब्बर नदी के किनारे समतल स्थान पर है। मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण 700-800 वर्ष पहले हुआ था। मंदिर के साथ लगते सुनपुर के टीले पर कभी विराट नगरी थी, जहां पर पांडवों ने अपने गुप्त वास के कई वर्ष व्यतीत किए। माता हाटेश्वरी का मंदिर विशकुल्टी,राईनाला और पब्बर नदी के संगम पर सोनपुरी पहाड़ी पर स्थित है । मूलरूप से यह मंदिर शिखराकार नागर शैली में बना हुआ था,बाद में एक श्रद्धालु ने इसकी मरम्मत कर इसे पहाड़ी शैली के रूप में परिवर्तित कर दिया। मंदिर के दक्षिण पश्चिम में चार छोटे शिखर शैली के मंदिर देखने को मिलते हैं। यह मुख्य अर्धनारिश्वरी मंदिर के अंग माने जाते हैं। मां हाटकोटी के मंदिर में एक गर्भगृह है जिसमं मां की विशाल मूर्ति विद्यमान है। यह मूर्ति महिषासुर मर्दिनी की है। इतनी विशाल प्रतिमा न केवल हिमाचल में ही बल्कि भारत के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में भी देखने को नहीं मिलती। प्रतिमा किस धातु की है इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। यहां के स्थायी पुजारी ही गर्भगृह में जाकर मां की पूजा कर सकते हैं। कहा जाता है की यहाँ आने पर माता बीमारियों को दूर करती है। मंदिर के बाहर प्रवेश द्वार के बाई ओर एक ताम्र कलश लोहे की जंजीर से बंधा है जिसे स्थानीय भाषा में चरू कहा जाता है। चरू के गले में लोहे की जंजीर बंधी है। यहां की मान्यता है कि सावन भादों में जब पब्बर नदी अत्यधिक बाढ़ से ग्रसित होती है, तब हाटेश्वरी मां का यह चरू सीटियां भरता है और भागने का प्रयास करता है। मंदिर के दूसरी ओर बंधा चरू नदी के वेग से भाग गया था, जबकि पहले को मंदिर पुजारी ने पकड़ लिया था। चरू पहाड़ी मंदिरों में कई जगह देखने को मिलते हैं। इनमें यज्ञ में ब्रह्मा भोज के लिए बनाया गया हलवा रखा जाता है। एक लोकगाथा के अनुसार इस देवी के संबंध में मान्यता है कि बहुत वर्षो पहले एक ब्राह्माण परिवार में दो सगी बहनें थीं उन्होंने अल्प आयु में ही सन्यास ले लिया और घर से भ्रमण के लिए निकल पड़ी। उन्होंने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों के दुख दर्द सुनेंगी और उसके निवारण के लिए उपाय बताएंगी। दूसरी बहन हाटकोटी गांव पहुंची जहां मंदिर स्थित है। उसने यहां एक खेत में आसन लगाकर ईश्वरीय ध्यान किया और ध्यान करते हुए वह लुप्त हो गई। वो जिस स्थान पर वह बैठी थी वहां एक पत्थर की प्रतिमा निकल पड़ी। इस आलौकिक चमत्कार से लोगों की उस कन्या के प्रति श्रद्धा बढ़ी और उन्होंने इस घटना की पूरी जानकारी तत्कालीन जुब्बबल रियासत के राजा को दी। जब राजा ने इस घटना को सुना तो वह तत्काल पैदल चलकर यहां पहुंचा और इच्छा प्रकट की कि वह प्रतिमा के चरणों में सोना चढ़ाएगा जैसे ही सोने के लिए प्रतिमा के आगे कुछ खुदाई की तो वह दूध से भर गया। उसके उपरांत खोदने पर राजा ने यहां पर मंदिर बनाने का निश्चय लिया। लोगों ने उस कन्या को देवी रूप माना और गांव के नाम से इसे 'हाटेश्वरी देवी' कहा जाने लगा।
अंबुजा सीमेन्ट फाउंडेशन प्राईवट आईटीआई दाड़लाघाट ने दावटी गांव में एक स्पोर्ट कैम्प का आयोजन किया। इसमें सिलाई मशीन की जानी मानी कम्पनी सिंगर के मैकेनिक्स ने आकर गांव के लोगो की खराब पड़ी मशीनों को निःशुल्क ठीक किया।साथ ही संस्थान के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा मनीष कुमार के निर्देशन में गांव के लोगों की खराब पड़ी मशीनों को भी ठीक किया।इस कैम्प के दौरान पंचायत प्रधान दावटी रीता देवी,महिला मण्डल प्रधान निशा देवी,महिला मण्डल सचिव गीता देवी एवं लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की प्रधान प्रेमलता उपस्थित रहे।इस कैम्प से गांव के लगभग 53 परिवार लाभान्वित हुए।इस कैम्प की महता को देखते हुए पंचायत प्रधान रीता देवी ने कहा कि इस तरह के कैम्प का आयोजन इस पंचायत के दूसरे वार्ड में भी किया जाए ताकि लोगों को अधिकत फायदा मिल सके।इस कैम्प में दलीप शर्मा,चन्द्रकान्ता एवं मोनिका चन्देल ने संस्थान में चल रहे विभिन्न व्यवसायों की जानकारी स्थानीय लोगो को दी।
बीडीसी सदस्य राकेश कुमार ने कहा विधायकों के वेतन वृद्धि से प्रदेश पर पड़ रहा आर्थिक बोझ कुनिहार-विकास खण्ड कुनिहार के समिति सभागार में पंचायत समिति कुनिहार की विशेष बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष प्रेम चन्द चोपड़ा ने की। वहीँ बैठक में बीडीओ कुनिहार विवेक पॉल विशेष रूप से उपस्थित रहे।बैठक में गत बैठक की आय व्यय की अभिपुष्टि की। इसके साथ ही बैठक में लोक निर्माण विभाग,सिंचाई एवम जन स्वास्थ्य विभाग,वन विभाग व स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों से सम्बंधित मदों पर विचार विमर्श किया गया। इनमे से लोक निर्माण विभाग से सम्बंधित अधिकतर मदों पर कार्य होने से उन्हें बन्द कर दिया गया। इसके साथ ही बैठक में पंचायत समिति सदस्य जमना दास ने सरकारी व निजी हेंडपप्प को न लगवाने के लिए अपने सुझाव दिया वही उन्होंने समिति की तरफ से प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजने को कहा। उन्होंने कहा कि निजी व सरकारी हैडपम्प व ट्यूवेल लगाने से प्राकृतिक जल स्त्रोत सुख रहे है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में हेंडपप्प लगाने से मालिक पानी को बेच रहे है, जो कि सरासर गलत है। समिति सदस्य राकेश कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा मंत्रियों व विधायकों का वेतन बढ़ाया जाना प्रदेश की जनता पर बोझ है। उन्होंने कहा कि सरकार विधायकों के वेतन-भते बढ़ाने के बजाय जनहित के लिए कोई कल्याणकारी योजनाएं बनाकर उस पर यह राशि खर्च करे, ताकि आम लोगों को कुछ फायदा हो सके। इसको लेकर समिति प्रस्ताव पास करके सरकार को भेजे। राकेश कुमार के इस प्रस्ताव का अन्य सदस्यों ने भी पुरजोर समर्थन किया । बैठक में पथ परिवहन निगम के अधिकारी नदारद रहे जिसको लेकर समिति सदस्यों ने रोष व्यक्त किया । इस मौके उपाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा,पंचायत इंस्पेक्टर रतन कुमार,पंचायत समिति सदस्य राकेश कुमार,हीरा पाल,जगदीश ठाकुर,सुरेश कुमार,पवन,बिमला ठाकुर,नीलम रघुवंशी,सावित्री देवी,जमना दास, हीरालाल,सतु देवी,बिमला वर्मा,हरीश कुमार, कांता वर्धन सहित पदाधिकारी मौजूद रहे ।
हिमाचल गृहणी सुविधा योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत दाड़लाघाट में 16 पंचायतों के 212 लाभार्थियों को मुफ्त गैस कनेक्शन वितरित किये गए।इंडेन गैस एजेंसी के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में तहसीलदार अर्की संतराम शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।इस मौके पर खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक सुनील कुमार गुंटा ने सर्वप्रथम मुख्यातिथि एवं विशेष अतिथियों और उपस्थित लोगों का इस कार्यक्रम में स्वागत किया।उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा गरीब परिवारों के लिये इस योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन देने का निर्णय पिछले वर्ष लिया गया था और इस योजना से गरीब परिवार लाभान्वित हो रहे है।इसके बाद तहसीलदार संत राम शर्मा द्वारा सभी लाभार्थियों को गैस कनेक्शन वितरित किये गए।इस अवसर पर उन्होनें उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि गृहणी सुविधा योजना प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गरीब लोगों के लिये वरदान साबित हो रही हैं। इस दौरान ग्राम पंचायत दाड़लाघाट के प्रधान सुरेन्द्र शुक्ला व प्रदेश भाजयुमो कार्यकारिणी सदस्य राकेश गौतम ने भी उपस्थित लोगों को सम्बोधित किया।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बधाई के पात्र है जिन्होंने ये कल्याणकारी योजना गरीब परिवारों के लिये शुरू की।उन्होंने आगे कहा कि इस योजना से जहां गृहणियों को रसोई घर मे धुंए से निजात मिलेगी वहीं उस धुंए से उत्पन्न होने वाली बीमारियों से भी निजात मिलेगी।इस अवसर पर तहसीलदार अर्की संतराम शर्मा,खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक सुनील कुमार गुंटा,इंडेन गैस एजेंसी के प्रभारी हरीश शर्मा,दाड़लाघाट पंचायत के प्रधान सुरेन्द्र शुक्ला,ओबीसी के जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह चौधरी,भाजपा नेता राकेश गौतम,जगदीश्वर शुक्ला,नवगांव पंचायत की प्रधान सुनंदा गौतम,बेरल पंचायत के प्रधान श्याम लाल,पंचायत सचिव धनी राम,पुष्पेंद्र शर्मा,पवन शर्मा सहित अन्य पंचायतों के प्रतिनिधि व सभी लाभार्थी परिवार भी उपस्थित रहे ।
शनिवार को कुनिहार में आरम्भ हुई जिला स्तरीय अंडर 19 छात्रा खेलकूद प्रतियोगिता में पहले दिन हॉकी के मुकाबले हुए जिसमे पहला मुकाबला सोलन व धर्मपुर के मध्य खेला गया। इसमें सोलन ने धर्मपुर को 2 - 0 से हराया। दूसरे मुकाबले में कुनिहार स्कूल (छात्रा) को कसौली ने 4- 0 से मात दी। तीसरा मुकाबला छात्र स्कूल कुनिहार व कण्डाघाट स्कूल की टीमो के मध्य खेला गया इस रोमांचक मैच में कण्डाघाट की टीम ने बाजी मारी व 3- 0 से इस मुकाबले को जीतकर अगले दौर में प्रवेश किया। प्रतियोगिता का पहला सेमीफाइनल जगातखाना व कसौली के मध्य हुआ। इस शानदार मुलाबले में जगातखाना की टीम ने कसौली को 4 - 0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। प्रतियोगिता का दूसरा सेमीफाइनल सोलन व कण्डाघाट के मध्य खेला गया जिसमे सोलन की टीम ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कण्डाघाट की टीम को 6 -0 के बड़े अंतर से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
बिलासपुर के घुमारवी मे हर साल की भांति मनाया जाने वाला गणेश उत्सव 2 तारीख को मूर्ति की स्थापना के साथ ही शुरू होगा। इस बार यह विशाल गणेश उत्सव अपना दसवा वार्षिक उत्सव मनाएगा। घुमारवी बस स्टैंड, सैनिक विश्राम गृह के साथ ही यह उत्सव मनाया जा रहा है। उत्सव को लेकर इस बार भी भक्तो का खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यह गणेश उत्सव सभी लोगो के सहयोग से मनाया जाता है। इस उत्सव को ऊं साईं ज्यूलर्ज के मालिक विशाल सोनी के द्वारा लोगो की सहायता के साथ मनाया जाता है। जानकारी देते हुए विशाल सोनी ने बताया कि गणेश उत्सव की तैयारियों को लेकर लोगो से चर्चा की गई तो हर कोई अपनी इच्छा अनुसार,कोई टैंट का खर्चा दे रहा है ,कोई भण्डारे मे सहयोग करेगा ,तो कोई बैंड बाजे का खर्चा दे रहा है। इस बार उत्सव की खास बात यह रहेगी कि बैंड पार्टी मुम्बई से आएगी। जो नृत्य का प्रदर्शन कर लोगो को मंत्रमुग्ध करेगी। उत्सव मे सुबह और शाम प्रतिदिन आरती व भजन कीर्तन किए जाएंगे तथा 7 तारीख को विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाएगा ,तथा मूर्ति विसर्जन 10 तारीख को किया जाएगा। 10 तारीख को शोभा यात्रा घुमारवीं से भगेड़,कंदरौ,चांदपुर से होते हुए लुहणू मैदान तक जाएगी और तत्पशचात विसर्जन किया जाएगा।
Work towards becoming job providers: ICAR ADG Dr PS Pandey, Assistant Director-General of the Education Planning and Home Science division of the Indian Council of Agricultural Research urged the students to become job providers instead of job seekers. He was addressing the new students during the orientation programme held at Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry (UHF), Nauni. The students also got a chance to listen to the views of Yogacharya Sri Nivas Murthy, coordinator of Yog Bharti, Solan, who gave tips on improving fitness and food habits. Speaking on occasion, Dr Pandey gave an overview of the accreditation process of ICAR. He praised the university for securing 12th rank among all agricultural universities in the country. Dr Pandey exhorted that quality faculty was important for rankings. He suggested that the course curriculum should be made more vibrant so that it fits the needs of the industry and should promote entrepreneurship among students. Dr Pandey called for designing one-week duration orientation programmes where new students not only get a chance to listen and interact with young entrepreneurs and gurus from the industry but are also engaged in social activities like plantation drives.Stressing the importance of Experiential Learning Programme (ELP), Dr Pandey said that it was an important component of agricultural education where students not only ‘earn and learn’ but also ‘learn and return’ to the society. He suggested that the university should expand its ELP on quality planting material. During the function, Yogacharya Sri Niwas Murthy addressed the students on the topic of Yoga and health. He explained several yoga exercises and health tips with the staff and students and urged them to adopt yoga for a happy and disease-free life. Addressing the gathering, Vice-Chancellor Dr Parvinder Kaushal thanked the ICAR and Dr Pandey for supporting the university in providing a stimulating educational environment to the students. He said it was a matter of great privilege that the ADG of Education Planning division chose UHF to address the new students. Dr Kaushal sought the support of ICAR in improving the infrastructure and educational facilities to make the university a world-class institution. Natraj Boys Hostel Inaugurated Dr PS Pandey, inaugurated the ‘Natraj Boys Hostel’ built at the University on Friday evening. The four-storeyed building has been constructed at a cost of Rs 2.5 crore. The ICAR has provided financial support for the construction of the hostel which will house 98 students. Dr Pandey also visited the various experimental farms of the university and appreciated the work of the university scientists and students.
तीन दिवसीय योग शिविर संपन्न पुलिस अधीक्षक सोलन मधुसूदन शर्मा ने कहा कि योग एवं व्यायाम निरोग रहने का बेहतरीन माध्यम है तथा आज की इस तनावपूर्ण जीवनशैली में प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन योग नियमित रूप से करना चाहिए। मधुसूदन शर्मा आज यहां पुलिस ग्राउंड सोलन में जिला आयुर्वेद विभाग सोलन द्वारा ‘योग एवं जीवन शैली’ विषय पर आयोजित जागरूकता शिविर के समापन अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।इस तीन दिवसीय शिविर में 80 पुलिस जवानों व उनके परिजनों ने हिस्सा लिया। मधुसूदन शर्मा ने कहा कि युवा पीढ़ी को नियमित रूप से योग क्रियाएं करनी चाहिएं तभी वे मानसिक व शारीरिक रूप से सुदृढ़ बन सकते हैं। उन्हांेने कहा कि विभिन्न प्रकार के योगासनों का शरीर के प्रत्येक अंग से किसी न किसी तरह से संबंध होता है तथा योग के माध्यम से शरीर को हृष्ट-पुष्ट किया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस कर्मियों एवं उनके परिजनों से आग्रह किया कि वे अपनी कार्यशैली को देखते हुए नियमित रूप से योग करें। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास अनेक बीमारियों का समूल नाश करता है। कार्यक्रम में जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. राजेंद्र शर्मा ने कहा कि सोलन जिला के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों के साथ-साथ पंचायत स्तर पर इस प्रकार के योग शिविरों का आयोजन समय-समय पर किया जाएगा ताकि एक स्वस्थ व नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए नागरिकों को तैयार किया जा सके। आयुर्वेदिक विभाग की वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं योगगुरू डॉ. अनीता गौतम, डॉ. मंजेश शर्मा, प्रशिक्षित योग शिक्षिका आशा रानी द्वारा प्रतिभागियों को योग की विभिन्न मुद्राओं, आसनों एवं आवाहर-विहार की जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पुलिस उपाधीक्षक परवाणू योगेश रोल्टा, पुलिस उपाधीक्षक सोलन (एलआर) रमेश शर्मा, अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित थे। .0.
पोषण अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सितम्बर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी आज यहां अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन विवेक चंदेल ने दी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पोषण माह का उद्देश्य ‘चलो अपनाएं पोषण व्यवहार’ निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से जन-जन को पोषण के महत्व के विषय में अवगत करवाना है। उन्होंने कहा कि पोषण माह-2019 पांच मुख्य घटकों पर आधारित है। इसके तहत शिशु के प्रथम एक हजार दिवस, रक्तालपता, डायरिया, हाथ धोना एवं स्वच्छता तथा पौष्टिक आहार पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। अभियान के तहत पोषण के विषय में सभी की भागीदारी बढ़ाना, पोषण पर चर्चा तथा पोषण चौपाल को प्रोत्साहित करना उद्देश्य रहेगा। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने कहा कि पोषण भागीदारी को प्रोत्साहित कर समाज के प्रत्येक वर्ग को इस विषय में जागरूक किया जाएगा और यह प्रयास किया जाएगा कि सभी पोषण को भलीभांति समझें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए चिन्हित दिवस पर आंगनबाड़ी केंद्रों में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि पोषण पर चर्चा के तहत ‘चलो अपनाएं पोषण व्यवहार’ को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्राम सभा बैठकों, जनमंच, जागरूकता अभियानों इत्यादि में पोषण पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में लोगों को जागरूक बनाने के लिए पोषण चौपाल आयोजित की जाएगी। विवेक चंदेल ने कहा कि 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण स्तर को सुधारने के उद्देश्य से 8 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के झूंझुनु से पोषाहार कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। कार्यक्रम का उद्देश्य कम भार वाले शिशुओं के जन्म में कमी लाना, पोषण की कमी तथा खून की कमी जैसी गंभीर बीमारी को दूर करना है। इस उद्देश्य को 3 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने जिले के सभी उपमंडलाधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक, जिला आयुर्वेद अधिकारी, उपनिदेशक उच्च एवं प्रारंभिक शिक्षा, जिला पंचायत अधिकारी, जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक, जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा नगर परिषद सोलन, परवाणू, बद्दी, नालागढ़ एवं नगर पंचायत अर्की के कार्यकारी अधिकारियों, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सहित सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ राष्ट्रीय पोषाहार माह को सफल बनाएं। भारतीय प्रशासनिक सेवा की परिवीक्षाधीन अधिकारी डॉ. निधि पटेल, जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक मनोज चौहान, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राजेंद्र शर्मा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनके गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी वंदना चौहान सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सरकार के महत्वकांक्षी कार्यक्रम जनमंच का लाभ सभी वर्गों को मिल रहा है। अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को सरकारी दफतरों के चक्कर न लगाने पडें इसके लिए सरकार और प्रशासन के द्वारा लोगों के घर पर पंहुचकर उनकी समस्याओं और शिकायतों को सुन रही है तथा उनका निवारण कर रही है। यह बात एडीएम विनय धीमान ने कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि प्रचार वाहन चिन्हित पंचायतों में प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों के बारे में जागरूक करेगा,तथा लोगों को इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित भी करेगा। विनय धीमान ने चिन्हित पंचायतों के लोगों से आग्रह किया है कि प्री-जनमंच शिविरों में उपस्थित होकर अपनी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करके प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रम का लाभ उठाएं।
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार प्रथम सितंबर, 2019 से 30 सितंबर 2019 तक कार्यान्वित किए जा रहे ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ (ईवीपी) के संबंध में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन विवेक चंदेल की अध्यक्षता में जिला के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे 1 से 30 सितंबर तक इस संबंध में लोगों को जागरूक करें ताकि त्रुटि रहित मतदाता सूचियां तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों एवं आमजन के सहयोग से जिला प्रशासन इस कार्य को पूर्ण रूप से निश्चित समय में पूरा करेगा। इस अवसर पर भाजपा के चंद्रकांत शर्मा, कांग्रेस के शिवदत्त ठाकुर, तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा, नायब तहसीलदार निर्वाचन महेंद्र ठाकुर उपस्थित थे।
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार सोलन जिला के पांचों विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों 50-अर्की,51-नालागढ़,52-दून,53-सोलन (अनूसूचित जाति) तथा 54-कसौली (अनुसूचित जाति) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्र प्रथम सितंबर को खुले रहेंगे। यह जानकारी आज यहां इस संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन विवेक चंदेल ने दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ (ईवीपी) के दृष्टिगत लिया गया है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रथम सितंबर, 2019 से 30 सितंबर 2019 तक मतदाता सत्यापन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। विवेक चंदेल ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शत-प्रतिशत त्रुटिरहित मतदाता सूचियां तैयार करने में मतदाताओं की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित बनाना है। कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020 तक मतदाता सूची एवं पंजीकरण में सुधार लाना तथा सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ना और मतदाता सूची में किसी भी प्रकार के त्रुटि को सही करना है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने कहा कि जिला के पांचों निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्र इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रथम सितंबर, 2019 को खुले रहेंगे। इस दिन सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर उपस्थित होकर ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ के तहत मतदाताओं की सहायता करेंगे। विवेक चंदेल ने कहा कि मतदाता नैशनल वोटर्ज सर्विस पोर्टल (एनवीएसपी) पर ऑनलाइन अपने वोट से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं की सुविधा के लिए निर्वाचन आयोग ने एनवीएसपी का मोबाइल वर्जन ऐप भी आरंभ किया है। विवेक चंदेल ने आग्रह किया कि सभी इस मोबाइल वर्जन को ऑनलाइन डाउनलोड करें और इसका लाभ उठाएं। उन्होंने जिला के सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के लिए ऐप के माध्यम से अपने कार्यालय तथा अपने परिवार के सदस्यों की मतदाता सूची का सत्यापन करें ताकि कार्यक्रम के लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल किया जा सके।कार्यक्रम के तहत,संबंधित बूथ स्तर के अधिकारी द्वारा मतदाताओं के घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन किया जाएगा। प्रथम जनवरी,2020 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं को मतदाता सूची में सम्मिलत किए जाने के लिए पत्र -6 भरा जाएगा। जो मतदाता, मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं है उन्हें भी मतदाता सूची में पंजीकृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त इस अवधि में मतदाता सूची की अन्य त्रुटियों को दूर किया जाएगा एवं आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। विवेक चंदेल ने सभी नागरिकों तथा पंजीकृत मतदाताओं से आग्रह किया कि इस कार्यक्रम के दौरान संबंधित बूथ लेवल अधिकारी को अपना भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार, राशन कार्ड, सरकारी या अर्ध सरकारी कर्मचारियों का पहचान पत्र, बैंक पासबुक, किसान पहचान पत्र की छाया प्रति उपलब्ध करवाएं ताकि बूथ स्तर के अधिकारी सभी मतदाताओं का सत्यापन करना सुनिश्चित कर सकें। मतदाता, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (उपमंडलाधिकारी) कार्यालय में जाकर भी उपरोक्त दस्तावेजों को जमा करवा कर मतदाता सूची में विद्यमान अपनी तथा अपने परिवार की जानकारी सत्यापित कर सकता है। इस अवसर पर जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक मनोज चौहान, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनके गुप्ता, तहसीलदार निर्वाचन राजेंद्र शर्मा, खंड विकास अधिकारी सोलन ललित दुल्टा, नायब तहसीलदार निर्वाचन महेंद्र ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
पूर्व मंत्री व विधायक श्री नैना देवी जी विधानसभा क्षेत्र रामलाल ठाकुर ने शनिवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहां की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में नेशनल हाईवे बनाने के कार्य को बंद करने के आदेश नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को दे रहे हैं। वही सदन में मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हिमाचल में नेशनल हाईवे बनाने का कार्य जोरों पर चला है। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री को याद दिलाना चाहते हैं कि विधानसभा व देश की संसद लोकतंत्र का मंदिर होते है, तो कम से कम मंदिर में झूठ नहीं बोला जाता है। उन्होंने कहा जितने भी फोरलेन का काम हिमाचल प्रदेश में चल रहे है उनमें सेंट्रल डेविएशन की भारी कमी पाई जा रही है और जब भूमि अधिग्रहण हुआ तब भी यह अटैंडीफाई नहीं किया गया की रोड की सेंट्रल लाइन कौन होगी और कहां से होगी। इतने बड़े पैमाने पर किसानों की जमीनों को लेकर जो धांधलिया भूमि अधिग्रहण कार्यालय के माध्यम से की गई है उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। रामलाल ठाकुर ने कहा कि जो कंपनियां फोरलेन का कार्य पूर्व में छोड़कर गई है उन्होंने पुराने ठेकेदारों के भुगतान नहीं किए। सिर्फ बिलासपुर में 40 से 42 करोड़ की देनदारी संभावित मानी जा रही है। अब जो नई कंपनी काम करने आ रही है वह पैसा कहां से लाएगी? इसका नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने अभी तक कोई प्रावधान नहीं किया है।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोलन द्वारा सैनिकों के,आश्रितों के, उम्मीदवारों के लिए भाषा अध्यापकों के 7 पद भरे जाएंगे। यह जानकारी आज यहां उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा,सोलन श्रवण कुमार ने दी। उन्होंने कहा कि इस भर्ती के लिए काउंसलिंग 17 सितंबर को उनके कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इनमें से 2 पद सामान्य वर्ग, 2 पद अनुसूचित जाति एवं 3 पद अनुसूचित जनजाति के लिए है। इन पदों के लिए सोलन जिला के विभिन्न रोजगार कार्यालयों से नाम प्राप्त हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए पत्र भेज दिए गए हैं। यदि किसी पात्र उम्मीदवार का नाम रोजगार कार्यालय द्वारा छूट गया है तो ऐसे उम्मीदवार अपने समीप के रोजगार कार्यालय से 15 सितंबर, 2019 तक अपना नाम उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा सोलन को भिजवा सकते हैं। जो उम्मीदवार निर्धारित तिथि व समय पर उपस्थित नहीं होंगे तो वे भविष्य में इन पदों के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत नहीं कर सकेंगे।उपनिदेशक ने कहा कि काउंसलिंग में उम्मीदवारों को अपने साथ आवश्यक योग्यता प्रमाण पत्र, अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण प्रमाण पत्र, रोजगार कार्यालय प्रमाण पत्र, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी हिमाचली प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, सैनिकों के आश्रित प्रमाण पत्र, संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र एवं नवीनतम सत्यापित फोटो साथ लाना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि अधिक जानकारी के लिए उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोलन के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोलन द्वारा शास्त्री अध्यापकों की बैचवाईज भर्ती के लिए काउंसलिंग 18 सितंबर, 2019 को की जाएगी। यह जानकारी एक सरकारी प्रवक्ता ने दी। उन्होंने कहा कि शास्त्री अध्यापकों के 13 पदों के लिए यह काउंसलिंग उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोलन के कार्यालय में की जाएगी।काउंसलिंग में उम्मीदवारों को अपने साथ शैक्षणिक व व्यवसायिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्र,अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण प्रमाण पत्र,रोजगार कार्यालय प्रमाण पत्र,हिमाचली प्रमाण पत्र,चरित्र प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र,संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र एवं नवीनतम सत्यापित फोटो साथ लाना जरूरी होगा। उमीदवारो की सूची सोलन जिला के विभिन्न रोजगार कार्यालयों से प्राप्त की गई है। सभी पात्र उम्मीदवारों को काउंसलिंग के लिए पत्र भेज दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र उम्मीदवार का नाम रोजगार कार्यालय द्वारा छूट गया है तो ऐसे उम्मीदवार अपने समीप के रोजगार कार्यालय से 16 सितंबर, 2019 तक अपना नाम उपनिदेशक,प्रारंभिक शिक्षा सोलन को भिजवा सकते हैं।और अधिक जानकारी के लिए उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा सोलन के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
प्राचीन शिवमंदिर दाड़लाघाट में 1 सितंबर से 11 सितंबर तक शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा में आचार्य भगत राम नड्डा शिव महापुराण की अमृतमयी कथा का गुणगान एवं व्याख्यान करेंगे। बाबा महन्त श्री जयदेव गिरी जी महाराज ने बताया कि शिव मंदिर में आयोजित हो रही शिवकथा के महायज्ञ में अपनी आहुति डालने एवं पुण्य के भागी बनने हेतु दाड़लाघाट व आसपास के सभी क्षेत्र के श्रद्धालु सादर आमंत्रित हैं।
बी एल सेंट्रल पब्लिक स्कूल कुनिहार में बड़ी धूमधाम से छोटे बच्चो का 24वां वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह मनाया गया I अमर सिंह ठाकुर निर्देशक HPMC ने इस समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की I इस मौके पर सोनिया ठाकुर मेम्बर महिला मोर्चा हिमाचल प्रदेश, सुनीता ठाकुर प्रधान ग्राम पंचायत हाटकोट, कौशल्या कँवर अध्यक्ष सम्भव समिति कुनिहार विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकित की I मंच का संचालन करते हुए शिवानी शर्मा ने सर्वप्रथम अतिथि महोदय का भव्य स्वागत किया, और कार्यक्रम की शुरुवात माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई I उसके बाद एन एस एस की छात्राओं ने स्वागत गीत पेश किया I नर्सरी से दूसरी कक्षा के बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया I इसमें मुख्य रूप से हिमाचल दर्शन, देश भक्ति, हिमाचली नाटी, नृत्य आदि आकर्षण का केंद्र रहे I स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने मुख्यअतिथि, विशिष्ट अतिथियों और अभिभावकों का स्वागत किया और समृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया I मुख्यातिथि ने अपने संबोधन में विद्यालय को इस वार्षिक समरोह के लिए बधाई दी और कहा की ये शिक्षण संस्थान एक मंदिर है I उन्होंने विद्यालय के सभी बच्चों को शुभकामनाये दी व उज्जवल भविष्य की कामना की I मुख्यातिथि ने नर्सरी से दूसरी कक्षा तक के छात्रों को, पिछले सत्र में A ग्रेड प्राप्त करने वाले सभी बच्चों को और सांकृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी छात्रों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया I कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य पदम् नाभम ,मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा ने मुख्यातिथि ,विशिष्ट अतिथियों, सभी अभिभावकों का इस समारोह में आने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया I इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य किरण जोशी, पीटीए अध्यक्ष रंत्तन तंवर, जय पाल, पीटीए सदस्य रंजना , भीमा, तेग राम, कनिष्ट अभियन्ता बिजली विभाग विकास ठाकुर, प्रोफ़ेसर नूतन कँवर, प्रतिभा कँवर, विद्यालय मुख्य सलाहकार रोशन लाल, अमर सिंह परिहार, हंस राज ठाकुर, सुरेश जोशी, राजेंद्र जोशी ,ओम प्रकाश भारद्वाज ,विद्यालय का समस्त अध्यापक वर्ग व् सभी बच्चे मौजूद रहे I
पंजाबी महासभा सोलन ने बैठक का आयोजन किया I संस्था के अध्यक्ष विजय पूरी ने बैठक की अध्यक्षता की I इस मौके पर संस्था द्वारा निकट भविष्य में आयोजित किए जाने वाले समाजिक कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई | वहीँ संस्था के विस्तार के लिए कई नए सदस्यों को संस्था के साथ जोड़ा गया I नए सदस्यों में ग्रीन हिल्स इंजिनीयरिंग कॉलेज के चेयरमैन किरपाल सिंह पसरीचा ,डा अशोक हांडा,रमिंदर बावा,अनिल बाली,इंदु साहनी,राजेश स्तेजा,गौरव साहनी और अमित आनंद को पुष्प कर संस्था में शामिल किया गया I सभी नए सदस्यों ने संस्था का सदस्य बनने पर ख़ुशी जताई और आश्वासन दिया कि वह भविष्य में संस्था द्वारा समाज की भलाई के लिए किए जा रहे कार्यों में बढ़ चढ़ कर भाग लेंगे I इस मौके पर संस्था के चेयरमैन मनोज साहनी,महासचिव विकास जेठी,भरत साहनी,अमन सेठी,विक्रम बेदी,जतिन साहनी,शोभित बहल कमल विग,जय नंदा,शोभित बहल,गगन सूरी,अनुज सूरी,कीर्ति कौशल और नितिन भसीन मौके पर मौजूद रहे | .
हिडिम्बा देवी मंदिर उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश राज्य के मनाली में स्थित है। यह एक प्राचीन गुफा मंदिर है, जो भारतीय महाकाव्य महाभारत के भीम की पत्नी हिडिम्बी देवी को समर्पित है। यह मनाली में सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। इसे ढुंगरी मंदिर (Dhungiri Temple) के नाम से भी जाना जाता है। मनाली घूमने आने वाले सैलानी इस मंदिर को देखने जरूर आते हैं। यह मंदिर एक चार मंजिला संरचना है जो जंगल के बीच में स्थित है। स्थानीय लोगों ने मंदिर का नाम आसपास के वन क्षेत्र के नाम पर रखा है। हिल स्टेशन में स्थित होने के कारण बर्फबारी के दौरान इस मंदिर को देखने के लिए भारी संख्या में सैलानी यहां जुटते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर में देवी की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है बल्कि हिडिम्बा देवी मंदिर में हिडिम्बा देवी के पदचिह्नों की पूजा की जाती है।’हिडिम्बा देवी मंदिर का निर्माण हिमालय पर्वतों के कगार पर डुंगरी शहर के पास एक पवित्र देवदार के जंगल के बीच में कराया गया है। माना जाता है कि भीम और पांडव मनाली से चले जाने के बाद हिडिम्बा राज्य की देखभाल के लिए वापस आ गए थे। ऐसा कहा जाता है कि हिडिम्बा बहुत दयालु और न्यायप्रिय शासिका थी। जब उसका बेटा घटोत्कच बड़ा हुआ तो हिडिम्बा ने उसे सिंहासन पर बैठा दिया और अपना शेष जीवन बिताने के लिए ध्यान करने जंगल में चली गयी। हिडिम्बा अपनी दानवता या राक्षसी पहचान मिटाने के लिए एक चट्टान पर बैठकर कठिन तपस्या करती रही। कई वर्षों के ध्यान के बाद उसकी प्रार्थना सफल हुई और उसे देवी होने का गौरव प्राप्त हुआ। हिडिम्बा देवी की तपस्या और उसके ध्यान के सम्मान में इसी चट्टान के ऊपर इस मंदिर का निर्माण 1553 में महाराजा बहादुर सिंह ने करवाया था। मंदिर एक गुफा के चारों ओर बनाया गया है। मंदिर बनने के बाद यहां श्रद्धालु हिडिम्बा देवी के दर्शन पूजन के लिए आने लगे। हिडिम्बा मंदिर पांडवों के दूसरे भाई भीम की पत्नी हिडिम्बा को समर्पित है। हिडिम्बा एक राक्षसी थी जो अपने भाई हिडिम्ब के साथ इस क्षेत्र में रहती थी। उसने कसम खाई थी कि जो कोई उसके भाई हिडिम्ब को लड़ाई में हरा देगा, वह उसी के साथ अपना विवाह करेगी। उस दौरान जब पांडव निर्वासन में थे, तब पांडवों के दूसरे भाई भीम ने हिडिम्ब की यातनाओं और अत्याचारों से ग्रामीणों को बचाने के लिए उसे मार डाला और इस तरह महाबली भीम के साथ हिडिम्बा का विवाह हो गया। भीम और हिडिम्बा का एक पुत्र घटोत्कच हुआ, जो कुरुक्षेत्र युद्ध में पांडवों के लिए लड़ते हुए मारा गया था। देवी हिडिम्बा को समर्पित यह मंदिर हडिम्बा मंदिर के नाम से जाना जाता है। हिडिम्बा देवी मंदिर की खासियत यह है कि इस मंदिर का निर्माण पगोडा शैली (Pagoda Style) में कराया गया है जिसके कारण यह सामान्य मंदिर के काफी अलग और लोगों के आकर्षण का केंद्र है। यह मंदिर लकड़ी से बनाया गया है और इसमें चार छतें हैं। मंदिर के नीचे की तीन छतें देवदार की लकड़ी के तख्तों से बनी हैं और चौथी या सबसे ऊपर की छत का निर्माण तांबे एवं पीतल से किया गया है। मंदिर के नीचे की छत यानि पहली छत सबसे बड़ी, उसके ऊपर यानि दूसरी छत पहले से छोटी, तीसरी छत दूसरे छत से छोटी और चौथी या ऊपरी छत सबसे छोटी है, जो कि दूर से देखने पर एक कलश के आकार की नजर आती है। हिडिम्बा देवी मंदिर 40 मीटर ऊंचे शंकु के आकार का है और मंदिर की दीवारें पत्थरों की बनी हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार और दीवारों पर सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर में एक लकड़ी का दरवाजा लगा है जिसके ऊपर देवी, जानवरों आदि की छोटी-छोटी पेंटिंग हैं। चौखट के बीम में भगवान कृष्ण की एक कहानी के नवग्रह और महिला नर्तक हैं। मंदिर में देवी की मूर्ति नहीं है लेकिन उनके पदचिन्ह पर एक विशाल पत्थर रखा हुआ है जिसे देवी का विग्रह रूप मानकर पूजा की जाती है। मंदिर से लगभग सत्तर मीटर की दूरी पर देवी हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच को समर्पित एक मंदिर है।हर साल श्रावण के महीने में मंदिर में हिडिम्बा देवी मंदिर में एक उत्सव का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि यह उत्सव राजा बहादुर सिंह की याद में मनाया जाता है जिसने इस मंदिर का निर्माण कराया था। इसलिए स्थानीय लोगों ने इस मेले का नाम रखा है- बहादुर सिंह रे जातर (Bahadur Singh Re Jatar)। इसके अलावा यहां 14 मई को हिडिम्बा देवी के जन्मदिन के अवसर पर एक अन्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान स्थानीय महिलाएं डूंगरी वन क्षेत्र में संगीत और नृत्य के साथ जश्न मनाती हैं। कहा जाता है कि मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। श्रावण मास में आयोजित होने वाले मेले को सरोहनी मेला (Sarrohni Mela) के नाम से जाना जाता है। यह मेला धान की रोपाई पूरा होने के बाद आयोजित होता है। इसके अलावा नवरात्र के दौरान भी मंदिर में दशहरा महोत्सव का आयोजन होता है जिसमें दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगती है।
वो 1 सितम्बर 1972 का दिन था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ यशवंत सिंह परमार उस दिन सोलन में मौजूद थे। डॉ परमार ओल्ड डीसी ऑफिस चौक या क्रांति चौक पर जैसे ही पहुंचे तो उपस्थित लोगों ने जबरदस्त नारेबाजी और तालियां बजाकर डॉ परमार का अभिनन्दन किया। तब डॉ परमार ने कहा था 'ये स्वागत मेरा है या नए ज़िले का।' जी हाँ उस दिन सोलन को ज़िले का दर्जा दिया गया था और आज सोलन 47 वर्ष का हो चूका है। 47 वर्षों के इस सफर में सोलन ने बहुत कुछ हासिल किया है तो बहुत लम्बा सफर तय करना फिलहाल शेष है। जानते है सोलन के इस सफर के बारे में : मशरूम सिटी ऑफ़ इंडिया: जिला मुख्यालय सोलन को मशरूम सिटी ऑफ़ इंडिया का तमगा भी प्राप्त है। सोलन में मशरूम अनुसन्धान निदेशालय भी जहाँ मशरूम पर शोध होता है। बीत कुछ दशकों में मशरूम उत्पादन से यहाँ के किसानो की तकद्दीर बदल गई है। सिटी ऑफ़ रेड गोल्ड: हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख मेट्रिक टन टमाटर का उत्पादन होता है। इसका करीब 40 फीसदी उत्पादन सिर्फ सोलन में होता है। सोएं में उगने वाला हिम सोना टमाटर न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी एक्सपोर्ट होता है। एजुकेशन हब ऑफ़ हिमाचल: सोलन की पहचान प्रदेश के एजुकेशन हब के तौर पर होती है। यहाँ 9 विवि है। देश के जाने माने स्कूल लॉरेंस सनावर और पाइनग्रोव भी सोलन में ही स्थित है। इसके अतिरक्त यहाँ प्रदेश की इकलौती सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी और उर्दू भाषा एवं प्रशिक्षण संस्थान भी है। इसके अतिरक्त जिला में 9 विवि, 769 प्राथमिक विधालय, 142 माध्यमिक विधालय, 60 उच्च विधालय व 127 वरिष्ठ माध्यमिक विधालय है। देश का फार्मा हब है सोलन: हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया बीबीएन सोलन में आता है। इस क्षेत्र में छोटे बड़े करीब ढाई हज़ार उद्योग है। इसके अलावा परवाणू में भी करीब 500 उद्योग है। कुल जीडीपी में एक चौथाई योगदान सोलन का: प्रदेश की कुल जीडीपी में सोलन का योगदान 25 प्रतिशत से भी अधिक है। सोलन का पर कैपिटा इनकम भी तीन लाख 90 हज़ार से अधिक है, जो प्रदेश में अव्वल है। अनुसूचित जाति / जनजाति का प्रदेश स्तरीय कार्यालय सोलन में स्थित है। वादे, जिन्हें पूरा होने का इंतज़ार है ... जिला मुख्यालय सोलन प्रदेश की सबसे बड़ी नगर परिषद् है। अब तक सरकार ने इसे नगर निगम बनाने की जहमत नहीं उठाई। इससे पहले स्मार्ट सिटी के चयन में भी सोलन को तरजीह नहीं दी गई थी। टमाटर आधारित फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट और कोल्ड स्टोरेज की मांग कई दशकों से लंबित है। परवाणू और बीबीएन क्षेत्र को रेलमार्ग से जोड़ने का वादा किसी भी सरकार ने पूरा नहीं किया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कभी भी जरूरी कदम नहीं उठाये गए। जिला सोलन में पर्यटन सिर्फ कसौली और चायल तक ही सिमट कर रह गया है। जबकि अन्य क्षेत्रों में भी पर्यटन की अपार संभावनाएं है। जिला सोलन का क्षेत्रफल 1935 वर्ग किलोमीटर है। सोलन में 4 मंडल, 5 तहसीलें व 211 पंचायतें है। 2011 सेन्सस के अनुसार सोलन की आबादी 5 लाख 77 हज़ार है।
-अब तक 6 नेता बने है हिमाचल के मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने अब तक के अपने सफर में 6 मुख्यमंत्री देखे है। वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जहाँ पहली दफा मुख्यमंत्री बने है तो पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह 6 बार ये पद संभाल चुके है। जो 6 नेता अब तक मुख्यमंत्री बने है उनमें से तीन कांग्रेस से तो दो भजपा से रहे। जबकि शांता कुमार एक मर्तबा जनता पार्टी से मुख्यमंत्री बने तो दूसरी मर्तबा भारतीय जनता पार्टी से। एक और इत्तेफ़ाक़ है कि जहाँ कांग्रेस के तीनों मुख्यमंत्रियों का ताल्लुख ऊपरी हिमाचल से रहा है तो भाजपा के तीन मुख्यमंत्री निचले हिमाचल से चुनकर आये। एक और दिलचस्प बात है।प्रदेश के तीन मुख्यमंत्री ऐसे है जो मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा का चुनाव हारे है। 1990 के चुनाव में वीरभद्र सिंह ने जुब्बल कोटखाई और रामपुर सीटों से चुनाव लड़ा था। वीरभद्र रामपुर से तो जीत गए पर जुब्बल कोटखाई में उनसे पहले सीएम रहे ठाकुर रामलाल ने उन्हें पटखनी दे दी। इस बाद 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में तब के मुख्यमंत्री शांता कुमार को भी जनता ने नकार दिया। वहीँ 2017 में दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रो प्रेम कुमार धूमल सीएम कैंडिडेट होने के बावजूद चुनाव नहीं जीत सके। सुजानपुर की जनता ने सीएम प्रत्याशी को ही घर बैठा दिया। पहले आम चुनाव से लेकर 1977 तक प्रदेश निर्माता डॉ यशवंत सिंह परमार सीएम रहे। उनके बाद ठाकुर रामलाल मुख्यमंत्री बने। रामलाल सरकार सिर्फ तीन माह में बर्खास्त कर दी गई और इसके बाद शांता कुमार के रूप में प्रदेश को पहला गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री मिला।1980 में तिगड़मबाज़ी के बुते ठाकुर रामलाल फिर मुख्यमंत्री बने। पर 1983 आते- आते भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे ठाकुर रामलाल को इस्तीफा देना पड़ा और हिमाचल की सियासत में एंट्री हुई वीरभद्र सिंह की। तब से अब तक जब भी कांग्रेस को सत्ता मिली सीएम वीरभद्र ही बने। इस दरमियान 1990 में एक बार फिर शांता कुमार सीएम बने। पर 1998 में जब भाजपा सत्ता में आई तो चेहरा शांता नहीं प्रो प्रेम कुमार धूमल थे। इसके बाद धूमल 2007 से 2012 तक भी सीएम रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भजपाईयों की बरात के दूल्हे धूमल ही थे, पर जनता ने उन्हें जीत का नेक नहीं दिया। भाजपा तो चुनाव जीत गई पर धूमल हार गए। इसके बाद एंट्री हुई वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की। ये सभी नेता जो हिमाचल का मुख्यमंत्री बन सके, इनके राजनैतिक सफर के बारे में रोचक पहलु जानने के लिए पढ़ते रहे हमारी ख़ास श्रंखला हिमाचल के मुख्यमंत्री।
सरकार ने पब्लिक सेक्टर 10 बैंकों के विलय की घोषणा की है। इन 10 बैंको के विलय से 4 बैंक बनेंगे। साथ ही सरकार ने इन सभी 10 बैंकों को 55,250 करोड़ रुपये दिये जाने की भी घोषणा की है , जिसमे से अकेले पंजाब नेशनल बैंक को 16,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। जिन बैंकों का विलय हो रहा है, वे समान तकनीकी प्लेटफॉर्म पर ऑपरेट होंगे। पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का एक में विलय होगा। इस तरह ये बैंक मिलकर देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बनाएंगे और इनका बिजनेस 17.95 लाख करोड़ होगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक मिलकर एक बैंक का गठन होगा, जो देश का पांचवां सबसे बड़ा पीएसयू बैंक होगा। इसका बिजनेस 14.59 लाख करोड़ होगा। इंडियन बैंक का विलय इलाहाबाद बैंक के साथ किया जाएगा और इस तरह यह देश का सातवां सबसे बड़ा पीएसयू बैंक बन जाएगा। इसका बिजनेस 8.08 लाख करोड़ होगा। केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक का भी विलय किया जाएगा, जो देश का चौथा सबसे बड़ा पीएसयू बैंक होगा। इसका बिजनेस 15.20 लाख करोड़ होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन दस बैंकों के कर्मचारियों को आश्वस्त किया है कि विलय के कारण उनकी नौकरी नहीं जाएगी। इस तरह बंटेगा 10 बैंकों में कुल 55,250 करोड़ : पंजाब नेशनल बैंक- 16,000 करोड़ रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया- 11,700 करोड़ रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा- 7,000 करोड़ रुपये केनरा बैंक- 6,500 करोड़ रुपये इंडियन बैंक- 2,500 करोड़ रुपये इंडियन ओवरसीज बैंक- 3,800 करोड़ रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया- 3,300 करोड़ रुपये यूको बैंक- 2,100 करोड़ रुपये यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया- 1,600 करोड़ रुपये पंजाब एंड सिंध बैंक- 750 करोड़ रुपये
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार जिला की 53-सोलन (अनूसूचित जाति) तथा 54-कसौली (अनुसूचित जाति) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्रों में ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ प्रथम सितंबर, 2019 से से 30 सितंबर 2019 तक चलाया जाएगा। यह जानकारी निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं उपमंडलाधिकारी सोलन रोहित राठौर ने दी। उन्होंन कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2020 तक मतदाता सूची एवं पंजीकरण में सुधार लाना तथा सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ना है। उन्होंने कहा निर्वाचन क्षेत्रों के सभी मतदान केन्द्र प्रथम सितंबर, 2019 को खुले रहेंगे इस दिन सभी बूथ लेवल अधिकारी अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर उपस्थित होकर ‘मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ का शुभारम्भ करेंगे। उन्होंने कहा कि इन 30 दिनों कि अवधि में बूथ स्तर के अधिकारी अपने मतदान केन्द्र की मतदाता सूची में पंजीकृत सभी मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों का सत्यापन करने के साथ-साथ अपात्र मतदाताओं का अपमार्जन, छूटे हुए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण तथा भावी मतदाताओं के सम्बन्ध में भी जानकारी एकत्र करेंगे। निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ने सभी नागरिकों तथा पंजीकृत मतदाताओं से आग्रह किया जाता है कि इस कार्यक्रम के दौरान संबंधित बूथ लेवल अधिकारी को भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार, राशन कार्ड, सरकारी या अर्ध सरकारी कर्मचारियों का पहचान पत्र, बैंक पासबुक, किसान पहचान पत्र की छाया प्रति उपलब्ध करवाएं ताकि बूथ स्तर के अधिकारी सभी मतदाताओं का सत्यापन करना सुनिश्चित कर सकें। मतदाता निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (उपमंडलाधिकारी) कार्यालय में जाकर भी उपरोक्त दस्तावेजों को जमा करवा कर मतदाता सूची में विद्यमान अपनी तथा अपने परिवार की जानकारी सत्यापित कर सकता है।
यद्यपि...! कुछ बातें तार्किक न लगे लेकिन आस्था और लोकगाथाओं को चुनौती नहीं दी जाती। ऐसी ही एक लोककथा है नाहन के आम बागों की। संत-महात्माओं की तपोस्थली रहा नाहन शहर ‘आम’ के लिए मशहूर है। पर यहाँ स्थित आम के बागीचों के पीछे भी एक रहस्य है, एक किद्वंतीके अनुसार कालिस्थान मंदिर में तपस्या करने वाले एक महान तपस्वी ने नाहन के आसपास नौ लाख आम के वृक्षों की उत्पति अपने कमंडल के जल छिड़काव से कर दी थी। एक लोकगाथा के अनुसार नाहन स्थित कालिस्थान मंदिर के एक तपस्वी आम के आचार के बड़े शौकीन थे। अनुयायी महाराज के लिए शहर में जाकर भिक्षा में आचार की मांग करते थे। इसी दौरान एक दिन अनुयायी, एक घर में आचार की मांग करने पहुंचा। इस पर उस घर में मौजूद महिला ने गुस्से में आकर कहा कि ‘रोज आचार मांगने आ जाते हो। इतना आचार कहां से लाएं। यदि तुम्हारे महाराज को आम के आचार का इतना ही शौक है, तो क्यों नहीं वे अपने आम के पेड़ उगा लेते ?’’ अनुयायियों ने घटना का वृतांत अपने गुरू महाराज को सुनाया। इस पर गुरू महाराज ने प्रण किया कि वे अपने आम के पेड़ों का ही आचार खाएंगे। उन्होंने अपनी तपस्या के बल पर कमंडल से जल छिड़क दिया और जहाँ- जहाँ तक जल की बूंदे गिरी वहां पर आम के वृक्ष उग आए। कहा जाता है पूरे नौ लाख आम के वृक्ष उग गए। नाहन के आसपास कई आम के बाग हैं, जैसे जाबल का बाग, विक्रम बाग, खद्दर का बाग इत्यादि। अब इनकी उत्पति कैसे हुई ये तो अतीत में छिपा है, वर्तमान है तो बस इन वृक्षों पर लगे मीठे आम।
पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा ने बिलासपुर जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय उच्च मार्ग-205 तथा साथ लगते कुछ अन्य राज्य मार्ग पर जाम की समस्या का मिनटों में हल करने का ऐलान किया है। एसपी साक्षी वर्मा द्वारा तैयार किए गए खाके के अनुसार कैंचीमोड़ से लेकर सलापड़ पुल तक नेशनल हाईवे को छह बीटस में बांटा गया है तथा इसमें पुलिस विभाग के कर्मचारी मोटर साइकिलों पर सदा तैयार रहेंगे। यदि किसी भी वजह से सड़क बाधित होती है या जाम की समस्या उत्पन्न होती है तो सूचना मिलते ही पुलिस कर्मचारी मौके पर पहुंचेगे तथा समस्या का निदान करेंगे। ऐसे में यातायात में फंसे लोगों को कुछ ही क्षणों में राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा इसी मार्ग में विभिन्न जगह पर स्थानीय फोन नंबरों का डिस्पले ,बोर्डों के माध्यम से किया जाएगा। जिससे पर्यटक या अन्य बाहरी राज्यों से आने वाले लोग भी सड़क की समस्या को तुरंत पुलिस विभाग के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचा सकेंगे। और गरामोड़ा से सलापड़ तक बीटस के हिसाब से पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इन बीटस में नौणी से ब्रम्हपुखर,सलापड़ से घागस, घागस से नौणी, नौणी से कल्लर, कल्लर से गंभर और गंभर से कैंची मोड़ शामिल है। नौणी से लेकर कल्लर तक दुर्घटनाओं के मामले में यह मार्ग संवेदनशील है। लिहाजा यहां पर विभाग का विशेष फोक्स रहेगा। मौके पर पुलिस कर्मी त्वरित प्रभाव से पहुंचे, इसके लिए विभाग की ओर से नई मोटर साईकिल खरीदी जाएंगी। . .
नाहन कोठी, पंचकुला शहर में स्थित एक ऐतिहासिक और प्राचीन ईमारत है। पंचकुला के सैक्टर 12-ए में स्थित है नाहन कोठी, एक रियासतकालीन ईमारत। इसका निर्माण करीब 160 वर्ष से पूर्व किया गया था। लाल रंग की यह कोठी महाराजा सिरमौर फतह प्रकाश के पुत्रों सुरजन सिंह और बीर सिंह द्वारा बनवाई गई थी। यह कोठी पंचकुला के ‘राइल्ली’ नामक गांव में स्थित है जो वर्तमान में पंचकुला के सैक्टर 12-ए में पड़ता है। लंबे समय से इस भवन को हैरिटेज भवन घोषित करने और इसके संरक्षण के प्रयास चले रहे हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त राजेश्वर गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है। उन्होने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत 1 सितम्बर से 30 सितम्बर तक बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर बीएलओ. एप्प के माध्यम से प्रत्येक मतदाता की प्रिविष्टियो की जांच-पडताल करेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत कोई भी नागरिक भारतीय पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/आधार/राशन कार्ड/सरकारी/अर्ध-सरकारी पहचान पत्र/बैंक पासबुक/ किसान पहचान पत्र की प्रति सम्बन्धित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एसडीएम.) कार्यालय में जमा करवा कर मतदाता सूची में विद्यमान विंसगतियों को ठीक करवा सकता है। और ये भी बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान नागरिक स्वंय भी मतदाता हेल्पलाइन मोबाईल एप्प/एनवीएसपी. पोर्टल/ लोकमित्र केन्द्र पर जाकर प्रविष्टियों को सत्यापित कर सकता है। जिला के सभी बूथ लेवल अधिकारी 1 सितम्बर को अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर उपस्थित रहेंगे तथा बीएलओ. मोबाईल एप्प के माध्यम से मतदाताओं के नामों की प्रविष्टियों को सत्यापित करेंगें। उन्होने बताया कि सभी विभागों, जिनके भवनों में मतदान केन्द्र स्थापित हैं, को 1 सितम्बर को कार्यालय/पाठशाला खुली रखने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिला के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदाता सूची में अपना विवरण जैसे फोटो, पता व जन्म तिथि जरूर दर्ज़ करवाए । उन्होने सभी राजनैतिक दलों/पंचायत प्रतिनिधियों/महिला/युवक मण्डलों से भी आग्रह किया कि इस कार्यक्रम की जानकारी समस्त मतदाताओं तक पहुंचाने में अपना सहयोग दें।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत डाहड के गांव वाला मे जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विषय वाद विशेषज्ञ अशोक चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना में किसानों को 60 साल की आयु पूरी करने पर 3 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलेगी। उन्होंने बताया कि किसान की मृत्यु होने की स्थिति में उसकी पत्नी को 15 सौ रुपए की मासिक पेंशन मिलेगी और जिस किसान के पास दो हेक्टेयर तक कृषि भूमि होगी वे इस योजना के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि 18 से 40 वर्ष की आयु के किसानों के लिए यह एक स्वैच्छिक और योगदान आधारित पेंशन योजना है। इस योजना को छोटे किसानों के लिए बनाया गया है । इसलिए इसमें जमीन की सीमा है। उन्होंने किसानों से आवेदन किया कि इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना का नामांकन लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष की आयु से योजना में शामिल होने वाले किसान को 55 रुपए और 40 वर्ष की उम्र में योजना में आने वाले किसान को 200 रुपए की मासिक किस्त देनी होगी। इस योजना में तिमाही या छमाही किस्त देने का भी प्रावधान है। उन्होने बताया कि किसान के योगदान के बराबर ही सरकार भी अपनी ओर से योगदान देगी। उन्होंने इस योजना की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसान की 60 वर्ष की आयु के बाद मृत्यु हो जाती है, तो पति या पत्नी को पारिवारिक पेंशन के रूप में 50 प्रतिशत यानी 1,500 रुपए की मासिक पेंशन मिलेगी। इस योजना में जो किसान किसी प्रकार की पेंशन ले रहे है या अन्य किसी प्रकार की पेंशन से जुड़े हुए है। वह यह योजना के लिए पात्र नही है। इस शिविर में सौ किसानों के अतिरिक्त पंचायत प्रतिनिधि भी उपस्थिति रहे। .
वो 14 फरवरी 1980 का दिन था। तब तक शांता कुमार के 22 विधायक ठाकुर रामलाल के खेमे में जा चुके थे और शांता कुमार समझ चुके थे कि अब हाथ पैर मारने का फायदा नहीं है। सो उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया था। अपने कार्यालय से उन्होंने अपनी पत्नी को फ़ोन किया, उन्हें बुलाया और दोनों सिनेमा देखने चले गए। फिल्म थी जुगनू। इस्तीफा देकर फिल्म देखने जाने वाला मुख्यमंत्री हिन्दुस्तान के इतिहास में शायद ही दूसरा कोई हो। दूसरा कोई हो भी नहीं सकता, शांता सिर्फ एक ही हो सकते है। शांता के राजनैतिक करीयर का आगाज़ वर्ष 1964 में हुआ। शांता ने पंचायत चुनाव लड़ा और पंच बन गए। ये बस शुरुआत थी। वर्ष 1967 आया और शांता ने जिला कांगड़ा के पालमपुर से अपना पहला चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव हार गए। पर इसके बाद धीरे धीरे शांता विपक्ष का चेहरा बनते गए। 1972 का साल आया और शांता एक बार फिर विधानसभा चुनाव के रण में उतरे। इस बार क्षेत्र था जिला कांगड़ा का खेरा। इस मर्तबा शांता चुनाव जीत गए और विधानसभा में विपक्ष की आवाज़ के तौर पर उन्हकी पहचान स्थापित हो गई। कुछ समय बाद देश में इमरजेंसी लगी और राजनैतिक हालात बदल गए। शांता कुमार को भी नाहन जेल में बंद कर दिया गया जहाँ उनका साहित्यकार अवतार देखने को मिला। जेल में रहते हुए शांता कुमार ने कई उपन्यास लिखे, जिसका श्रेय वे कांग्रेस को देते है। 1977 का साल आया और हिमाचल में एक बार फिर विधानसभा चुनाव हुए। जनता पार्टी को 53 सीटों पर प्रचंड जीत मिली और शांता कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने। इस मर्तबा वे जिला कांगड़ा की सुलह सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे थे। बतौर मुख्यमंत्री अपने पहले कार्यकाल में शांता कुमार ने कई महत्वपूर्ण कार्य किये। अंत्रोदय योजना के जरिये उन्होंने गरीबों के बीच अपनी पैठ बनाई। गांव- गांव तक पानी के हैंडपंप पहुंचाए और पानी वाला मुख्यमंत्री कहलाये। सब कुछ ठीक चल रहा था, पर पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल भला चुप बैठने वाले कहाँ थे। रामलाल की तिगड़मबाज़ी रंग लाई और फरवरी 1980 में शांता के 22 विधायकों ने उनका साथ छोड़ दिया। अतः शांता कुमार को इस्तीफा देना पड़ा। वर्ष 1980 में ही भारतीय जनता पार्टी का गठन भी हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, भैरों सिंह शेखावत के साथ शांता कुमार ने उस दौर में पार्टी में मुख्य चेहरों में शुमार थे। इसके बाद 10 वर्षों तक शांता कुमार ने भाजपा को हिमाचल में खड़ा करने का काम किया। 1989 में वे संसद भी पहुंचे और उसके बाद 1990 के विधानसभा चुनाव में भजपा का सीएम फेस रहे। चुनाव में भाजपा को प्रचंड जीत मिली और शांता एक बार फिर मुख्यमंत्री शांता हो गए। दिसंबर 1992 में बावरी काण्ड के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव ने शांता की सरकार को बर्खास्त कर दिया जिसके बाद 1993 में फिर चुनाव हुए। 1990 में जिस भाजपा को प्रचंड जीत मिली थो वो 1993 में मजह 8 सीटों पर सिमट कर रह गई। खुद शांता कुमार भी चुनाव हार गए। हार का कारण ये नहीं था कि उन्होंने काम नहीं किया, बल्कि शांता अपने काम की वजह से ही हारे। कांग्रेस के रोटी-कपडा- मकान के घिसे पीटे नारे को लोगों ने शांता के आत्मनिर्भर हिमाचल के नारे पर तरजीह दी। इसका कारण था कर्मचारियों की नाराज़गी। हिमाचल में आज भी सत्ता का रास्ता कर्मचारियों के वोट तय करते है। शांता कुमार ने बतौर मुख्यमंत्री निजी क्षेत्र को प्रदेश में हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने की अनुमति दी थी। तब किन्नौर के बापसा में एक हाइड्रो प्लांट लगा था। इसी के विरोध में सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। शांता भी उसूलों के पक्के थे सो नो वर्क नो पे का फ़रमार जारी कर दिया। 29 दिन चली इस हड़ताल का पैसा कर्मचारियों को नहीं दिया गया। साथ ही इस दौरान करीब 350 कर्मचारियों को उन्होंने बर्खास्त कर दिया। सो जब अगला चुनाव आया तो कर्मचारियों ने भी शांता कुमार से बराबर बदला लिया। हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष करीब दो हज़ार करोड़ रुपये पानी की रॉयल्टी से मिलते है। ये शांता कुमार की ही देन है। जब पहली बार उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था तो विपक्ष ने जमकर खिल्ली उड़ाई थी। पर कांग्रेस की केंद्र सरकार को ये बात समझ आ गई और हिमचाल को उसका हक़ मिला। मोदी की पसंद नहीं थे शांता 1993 चुनाव की हार के बाद शांता कुमार प्रदेश की सियासत में वापसी नहीं कर सके।1998 चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी हिमाचल के प्रभारी थे जिनसे शांता की बनती नहीं थी। मोदी की पसंद प्रो प्रेम कुमार धूमल थे और चुनाव से पहले भाजपा ने धूमल को सीएम फेस घोषित कर दिया। इसके बाद पंडित सुखराम के समर्थन से धूमल ने पांच वर्ष सत्ता सुख भोगा। शांता कुमार और नरेंद्र मोदी के बीच हमेशा एक लकीर रही है। गोधरा दंगों के बाद शांता कुमार ने नरेंद्र मोदी के बारे में कहा था कि अगर मैं गुजरात का मुख्यमंत्री होता तो त्यागपत्र दे देता।
डीएवी अंबुजा विद्या निकेतन दाड़लाघाट में राष्ट्रीय खेल दिवस बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान बच्चों के लिए विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया। बच्चों ने खेल दिवस के मौके पर विभिन्न खेलों में अपने हुनर को दिखाया। इन खेलों में हर्डल रेस आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही स्कूल में चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस 2019 में ऑनलाइन पंजीकरण हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिला सोलन के 72 से अधिक स्कूलों के शिक्षकों ने भाग लिया।इस में मुख्य रूप से राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल मंजयाट के प्रधानाचार्य डॉक्टर हेतराम वर्मा व दाड़लाघाट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्य इंदु शर्मा तथा डीएवी अंबुजा के प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर और सोलन जिला के विज्ञान समन्वयक अमरीश उपस्थित रहे। अन्य गतिविधियों में स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया मूवमेंट का लाइव टेलीकास्ट सुबह 10:00 बजे से विभिन्न कक्षा के विद्यार्थियों को दिखाया गया। स्कूल प्रबंधन समिति के चेयरमैन अनुपम अग्रवाल तथा प्रधानाचार्य मुकेश ठाकुर ने विभिन्न गतिविधियों के सफलतापूर्वक संचालन हेतु विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को शुभकामनाएं दी।
राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट में एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा एचआईवी और एड्स पर एक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली को प्रधानाचार्य जनेश कपूर, ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान रैली में छात्रों ने एचआईवी जागरूकता के बारे में नारे लगाए और लोगों को एचआईवी एड्स के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न पोस्टर प्रदर्शित किए। रैली की अगुवाई एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी मनीला गुप्ता और संदीप कुमार की देखरेख में आयोजित की गई। इसके अलावा,छात्रों को आशा कार्यकर्ता अनीता कुमारी और रीना ठाकुर द्वारा एचआईवी,व्यक्तिगत स्वच्छता और सहरसा योजना के बारे में बताया गया। इस मोके पर महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों सहित बच्चे उपस्थित रहे।
राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अशोक शर्मा की अध्यक्षता में आज उपमंडलाधिकारी कार्यालय नालागढ़ में गौवंश संवर्धन तथा बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़(बीबीएन) क्षेत्र को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए बैठक आयोजित की गई। उपमंडलाधिकारी नालागढ़ प्रशांत देष्टा इस बैठक में विशेष रूप से उपस्थित रहे। अशोक शर्मा ने कहा कि बीबीएन क्षेत्र को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों का सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी विभागों को उचित दायित्व सौंपे गए हैं। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए आम लोगों को भी प्रशासन को सहयोग प्रदान करना होगा। उन्होंने स्थानीय प्रशासन व निकायों को निर्देश दिए कि विभिन्न मार्गों पर लावारिस अवस्था में प्राप्त पशुओं को गौशालाओं में पहुंचाना सुनिश्चित करें।उन्होंने कहा कि गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए गौशाला संचालक गौवंश के गोबर, मूत्र एवं दूध से बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है तथा पहाड़ी गाय का इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बैठक में हांडाकुंडी में एचपीएसआईडीसी द्वारा 114 बीघा भूमि पर निर्मित की जा रही गौशाला परियोजना की भी समीक्षा की। उपमंडलाधिकारी प्रशांत देष्टा ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह हांडाकुंडी में बनने वाली गौशाला और बीबीएन को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने के लिए समर्पित होकर कार्य करें ताकि लक्षित कार्य को तय समय के भीतर पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशु सभ्य समाज की पहचान नहीं है। इनसे जहां सड़क दुर्घटनाएं हो रही है वहीं ये पशु किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हांडाकुंडी में फेसिंग का कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में तहसीलदार नालागढ़ ऋषभ शर्मा, खंड विकास अधिकारी राजकुमार, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय पाठक, डॉ. राजीव वालिया, पुलिस उप निरीक्षक शिवराम किशन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, गौशालाओं के संचालक उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश पुलिस का नशा तस्करों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। वहीं वीरवार रात को लगभग 3 बजे के करीब पुलिस ने जिला सोलन के कुठाड़ में 16.6 ग्राम चिट्टा व इलेक्ट्रॉनिक तराजू बरामद किया है। मामले की पुष्टि करते हुए परवाणू के डीएसपी योगेश रोल्टा ने बताया कि आरोपी की पहचान 29 वर्षीय कनैता के रहने वाले विक्रम सिंह के तौर पर की गई है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि युवक के पास इतना चिट्टा कहां से पहुंचा।


















































