हमीरपुर की डिडवी टिक्कर पंचायत के अभिषेक कुमार का चयन सहायक अभियंता पद के लिए हुआ है। इससे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। अभिषेक कुमार के पिता विजय कुमार आर्मी में अपनी सेवाएं देने के बाद वर्तमान में बिजली बोर्ड में फोर मैन के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। अभिषेक कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा होली हर्ट पब्लिक स्कूल डिडवीं टिक्कर से की पूरी की है। छठी से प्लस टू की पढ़ाई एसडी पब्लिक स्कूल हमीरपुर से पूरी की। इसके बाद एनआईटी हमीरपुर से बीटैक की पढ़ाई पूरी की। कड़ी मेहनत से अभिषेक ने प्रथम प्रयास में ही सहायक अभियंता की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व अध्यापकों को दिया है।
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन राजगढ़ इकाई की कार्यकारिणी की त्रैमासिक बैठक सोमवार को राज्य के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिदत्त शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में राज्य कार्यकारिणी सदस्य रविदत्त भारद्वाज, खंड के अध्यक्ष विजय भारद्वाज एवं महासचिव कृष्ण दत्त शर्मा उपस्थित रहे। बैठक में पेंशनर्ज की मांगों व समस्याओं पर चर्चा की गई। बैठक में सरकार से छठे वेतन आयोग का एरियर एकमुश्त जारी करने, वर्ष 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए पेंशनर्ज को ग्रेच्यूटी, लीव इनकेशमेंट देने की मांग की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एसोसिएशन में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा। बैठक में हरिदत्त शर्मा, रविदत्त भारद्वाज, विजय भारद्वाज, परसराम गालिब, कृष्ण दत्त शर्मा, रत्तन कश्यप, गरजाराम,अयोध्या अरोड़ा, इंदिरा देवी, तारा देवी, प्रदीप शर्मा, घलुता राम, दुर्गा सिंह, गोपाल सिंह सहित काफी पेंशनर्ज उपस्थित रहे।
14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 132वीं जयंती डाडासीबा के पब्बल होटल में मनाई जाएगी। जयंती के उपलक्ष्य में आज डॉ. भीमराव अंबेडकर सोशल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा डाडासीबा में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता सभा के अध्यक्ष रजिंदर (गोगा) द्वारा की गई। बैठक के दौरान कार्यक्रम से संबंधित हर पहलू पर चर्चा की गई। बैठक में पूर्व प्रधान धर्मचंद, मिल्खी राम, सेवानिवृत्त हेड मास्टर गुरदास राम, सेवानिवृत्त हेड मास्टर रतन चंद, मास्टर गुरवतन सिंह, सरदार जसविंदर सिंह, मास्टर गिरधारी लाल, मास्टर यशवंत, अशोक कुमार, नरेश कुमार, भजन दास, जोगिंदर सिंह, डॉ. राम किशन, सुरेश कुमार, विजय पाल, नवजीत भाटिया, गुरमीत, पवन कुमार, सोहन लाल, गुरदेव सिंह व कमल शिवा अमित सुभाष सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 से 20 अप्रैल तक शिमला आ रही हैं। इस प्रस्तावित दौरे के दौरान वे शिमला स्थित राष्ट्रपति निवास दी रिट्रीट में रुकेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जिला दंडाधिकारी शिमला आदित्य नेगी ने अधिकारियों के साथ बैठक की तथा उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को सभी तैयारियां समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 20 अप्रैल को राष्ट्रपति के जाने के बाद दी रिट्रीट को आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा और यह पूरा वर्ष खुला रहेगा
जिला लोक संपर्क अधिकारी सिम्पल सकलानी ने आज जिला लोक संपर्क अधिकारी शिमला का कार्यभार संभाला लिया है। इससे पूर्व वह बतौर जिला लोक संपर्क अधिकारी सिरमौर व किन्नौर में सेवाएं दे चुके हैं। सिंपल सकलानी ने सितंबर 2019 में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में बतौर जिला लोक संपर्क अधिकारी भर्ती हुए थे।
महिला एवं बाल विकास विभाग प्रागपुर के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण पखवाड़ा के तहत चलाई गई गतिविधियों का 3 अप्रैल को समापन किया गया। यह गतिविधियां 20 मार्च से लेकर 3 अप्रैल तक सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में चलाई गईं। इस अभियान के अंतर्गत लोगों को पोषण पर जानकारी देते हुए यह बताया गया कि मोटे अनाज का प्रयोग करने से अनेक प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही मोटे अनाज के प्रयोग करने के फायदों के बारे में भी बताया गया। 3 अप्रैल को पोषण पखवाड़ा का समापन वृत्त चनौर में किया गया। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी अनिल कुमार, ब्लॉक कॉर्डिनेटर राकेश, वृत्त पर्यवेशक रीता देवी, वृत्त पर्यवेशक कमलेश कुमारी व अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
एसएफआई पिछले लंबे समय से पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट को लेकर लगातार प्रदेश भर में आंदोलनरत थी, परंतु इसके बावजूद भी प्रशासन अभी तक आधे अधूरे परिणाम ही घोषित कर पाया है, जिसकी वजह से प्रदेशभर के अनेक छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। जो रिजल्ट घोषित भी हुए हैं, उनमें ईआरपी की खामियों के चलते अनेक अनियमितताएं पाई गई हैं। परंतु प्रशासन इस ओर भी कोई सुध लेने को तैयार नहीं है। 4 अप्रैल से यूजी के एग्जाम शुरू होने वाले हैं। इसके साथ साथ कई छात्र इसे है जिनके अभी एडमिट कार्ड नहीं आए हैं। ऐसे में छात्रों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वो अगली क्लास की परीक्षा दे या पिछली परंतु प्रशासन इस ओर भी कोई सुध लेने को तैयार नहीं है। एसएफआई विश्वविद्यालय ईकाईअध्यक्ष हरीश ने कहा कि यूजी परीक्षाओं के परिणाम को आए 100 से अधिक दिन हो गए हैं, लेकिन हालात यह है कि विश्वविद्यालय 100 दिनों के अंदर भी पुनर्मूल्यांकन के परिणामों को घोषित कर पाने में नाकाम है। एसएफआई ने प्रदेश भर के कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों से आह्वान किया है कि सभी छात्र इस घटिया ERP सिस्टम व टालमटोल करने वाले प्रशासन के खिलाफ मजबूती के साथ मोर्चा खोलें, अन्यथा आने वाले समय में छात्रों को ओर ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
सोमवार को देहरा विकास मंच के अध्यक्ष पवन बजरंगी ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि देहरा को जल्द से जल्द जिला बनाया जाए। देहरा अगर जिला बनता है तो इससे विभिन्न क्षेत्रों को फायदा होगा। आज भी यहां के लोगों को कोई भी जिलास्तरीय कार्य करवाना हो तो धर्मशाला जाना पड़ता है। कई बार प्रशासन वहां मिलता है और कई बार विभिन्न कारणों की वजह से नहीं भी मिल पाता है। पवन बजरंगी ने कहा कि संग़ठन के तौर पर सभी हिमाचल के दोनों राजनीतिक दलों ने इसे जिला घोषित किया है। पवन ने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार में भी हम लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे और अब सरकार सुखविंदर सुखु की है तो उनसे भी यह मांग करते हैं कि जल्द से जल्द देहरा को जिला बनाया जाए। बजरंगी ने कहा कि वे क्षेत्र में जल्द ही जनजागरण अभियान की शुरुआत कर लोगों को जागरूक करेंगे।
पुनर्मूल्यांकन का रिजल्ट न आने से स्टूडेंटस असमंजस में हैं, ऐसे में यदि कोई स्टूडेंट गलत कदम उठाता है तो इसकी पूरी जिम्मेवारी एचपीयू की होगी। यह बात एबीवीपी के जिला कांगड़ा संयोजक अभिनव चौधरी ने कही। उनके नेतृत्व में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने डीसी कार्यालय के बाहर एचपीयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। अभिनव चौधरी ने कहा कि एचपीयू ने अभी तक पुनर्मूल्यांकन का रिजल्ट घोषित नहीं किया है। यह एचपीयू की नाकामी है। पिछले वर्ष का ही रिजल्ट नहीं आया है जबकि मंगलवार से इस वर्ष के फाइनल एग्जाम शुरू हो रहे हैं। ऐसे में स्टूडेंटस असमंजस की स्थिति में हैं कि पिछले वर्ष में रोलबैक करवाएं या आगे की तैयारी करें। यदि स्टूडेेंटस कोई अनचाहा कदम उठाते हैं तो क्या एचपीयू प्रशासन इसकी जिम्मेवारी लेगा। इसी कड़ी में एबीवीपी की ओर से डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। एबीवीपी ने पहले भी पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट के लिए धरना प्रदर्शन किया है। धर्मशाला से उठने वाली स्टूडेंटस हित की आवाज शिमला तक भी जा सकती है और उग्र आंदोलन भी हो सकता है। पुनर्मूल्यांकन का रिजल्ट न आने से स्टूडेंटस के 2-2 साल बर्बाद हो जाएंगे, ऐसे में स्टूडेंटस गलत कदम उठाते हैं तो पूरी जिम्मेवारी एचपीयू की होगी तथा रिजल्ट का इंतजार कर रहे स्टूडेंटस के साथ एबीवीपी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
वन रैंक, वन पेंशन पार्ट 2 के तहत पेंशन में आई विसंगतियों को लेकर पूर्व सैनिकों ने संघर्ष का रास्ता अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में सोमवार को जिलाभर के पूर्व सैनिकों ने डीसी कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर नारेबाजी की और जिला प्रशासन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। पूर्व सैनिकों का कहना है कि सेना में दिव्यांगता, विधवा या इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अनहोनी होने पर जो पेंशन सैनिकों को दी जाती है। उसमें अफसरों से लेकर जवानों तक भारी अंतर है। यदि एक अधिकारी दिव्यांगता को प्राप्त होता है तो सेना की तरफ से उसे 2.41 लाख पेंशन के रूप में दिए जाते हैं, लेकिन यदि एक जवान दिव्यांग हो जाए तो उसे महज 15 हजार रुपए पेंशन दी जा रही है। दूसरी तरफ पूर्व सैनिक राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन मुद्दे को लेकर जो संघर्ष यहां पर शुरू हुआ है यह दिल्ली तक जाने वाला है। पूर्व ऑनरेरी कैप्टन कपूर सिंह गुलेरिया ने कहा कि अधिकारी ज्यादा डिसेबिलिटी लेकर आ रहे हैं, ऑफिसर और जवान दोनों गोली खाते हैं, लेकिन इसमें भी अधिकारियों को ज्यादा भत्ता दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के ध्यान में हम इन सभी मांगों को लाना चाहता हैं। वर्ष 2024 में लोकसभा का चुनाव आ रहा है, हमारी मांगें पूरी न हुई तो हम सरकार गिराना भी जानते हैं और उठाना भी जानते हैं। हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं, हमारी मांगें न मानी गई तो जो भी सरकार केंद्र में बैठी है, उसे सबक दिखाएंगे। पूर्व सैनिक सुनील खनका ने कहा कि 1965 और 1971 की लड़ाई में जिन सैनिकों ने अपनी जान लगाई है, उनकी पेंशन कुछ भी नहीं है। एक ओआर की पत्नी को 9 हजार पेंशन मिलता है और एक अधिकारी की पत्नी को 72 हजार पेंशन मिलता है, सैनिकों व अधिकारियों की पत्नियों में भी रैंक होता है क्या, उनके पति रैंक में आए थे, उनकी पत्नियां रैंक में नहीं है। अधिकारियों की पेंशन बढ़ाई गई, जबकि निचले स्टाफ की पेंशन को कम किया गया है। पे-कमीशन में जेएसओार को भी रखा जाए। पीएम ने रेवाड़ी में पूर्व सैनिकों से वादा किया था कि मैं फौजी के साथ हूं। हर दीपावली पर पीएम बॉर्डर पर सैनिकों से मिलने जाते हैं, लेकिन वेल्फेयर के मामले में जीरो हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह को गरीबों का मसीहा कहा जाता था और जो भी जरूरतमंद होलीलोज फरियाद लेकर आते थे, वे कभी भी खाली हाथ नहीं जाते थे। अब उनकी राह पर उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह भी चल पड़े हैं। उनकी विधानसभा क्षेत्र से 11 साल की सोनाक्षी, जो कि चलने-फिरने में पूरी तरह से अक्षम है, के परिजन बच्ची को लेकर विक्रमादित्य सिंह के पास पहुंचे तो विक्रमादित्य ने बच्ची को इलेक्ट्रिक व्हील चेयर देने का वादा किया। उन्होंने सोमवार को इस 11 साल की बच्ची को इलेक्ट्रिक चेयर सौंप भी दी। यह इलेक्ट्रिक चेयर 75 हजार की है और विक्रमादित्य ने अपनी ओर से इसे भेंट किया है। वहीं, इलेक्ट्रिक व्हील चेयर पर बैठकर सोनाक्षी काफी खुश नजर आई। सोनाक्षी चनोग में छठी कक्षा में पढ़ती है। परिजनों को उसे स्कूल ले जाने और वहां से लाने में काफी मुश्किल आ रही थी। सोनाक्षी अब इस इलेक्ट्रिक चीयर पर बैठकर स्कूल जाएगी। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि राजनीति के साथ-साथ समाजसेवा और दलगत राजनीति से उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने अन्य लोगों से भी जरूरतमंदों की मदद करने के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सुख आश्रय योजना शुरू की है, जिसमें दिव्यांग व अनाथ बच्चों की मदद के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। उनसे ही सीख कर वे भी आगे बढ़ रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में मौसम के करवट बदलने से लोग परेशान हो रहे है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में आज सुबह से ही हल्की बारिश हो रही है। कई ऊंचाई वाले इलाकों में शीतलहर चल रही है। मौसम विभाग ने आज और कल भी बारिश होने का येलो अलर्ट जारी कर रखा है। इस दौरान कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। इससे किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। शिमला समेत अधिक ऊंचे क्षेत्रों में ठंडी हवाएं चलने से प्रदेश में ठंड में भी महसूस हुई है। मौसम का रुख बदलते देख कई गर्मी वाले क्षेत्रों में भी लोगों ने दोवारा गर्म कपडे निकाल लिए है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बीते 3 दिन से हो रही बारिश-बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। शिमला का न्यूनतम तापमान नॉर्मल से 2 डिग्री गिरकर 7.2 डिग्री पहुंच गया। नाहन का तापमान 4.5 डिग्री की गिरावट के बाद 12.5 डिग्री, धर्मशाला का 2.9 डिग्री की गिरावट के बाद 10.2 डिग्री, मनाली का 6 डिग्री, कल्पा का 2 डिग्री, मंडी का 11.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। प्रदेश में ठंड का प्रकोप बढ़ने से सेब और दूसरे फल उत्पादकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। फलों की फ्लावरिंग व सेटिंग को नुकसान होगा। बेमौसम बारिश गेहूं की फसल के लिए भी अच्छी नहीं है। वहीं मौसम विभाग की मानें तो प्रदेश में 6 अप्रैल तक मौसम खराब बना रहेगा।
हमीरपुर कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के सदस्य डॉक्टर पुष्पेंद्र वर्मा के नेतृत्व और कैप्टन रंजीत सिंह की अध्यक्षता में एडीसी हमीरपुर से मिले। उन्होंने वन रैंक वन पेंशन, मिलिट्री सर्विस पे और सीएसडी में पूर्व सैनिकों को मिल रही सुविधाओं की विसंगतियों के बारे में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष हमीरपुर कैप्टन रंजीत ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन में बहुत सारी वेतन विसंगतियां हैं, जिनको आज तक ठीक नहीं किया गया है। अफसरों को मिलने वाले वेतनमान को 2.81 से गुणा करके दिया जा रहा है, जबकि सैनिकों को जेसीओ को 2.57 के गुणांक से यह दिया जा रहा है, जो कि एक बहुत बड़ा भेदभाव है। इसके अलावा मिलिट्री सर्विस पे में ऑफिसर और अन्य सैनिकों के बीच में भी भारी अंतर है, जिसको तुरंत दूर किया जाना चाहिए। डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि आर्मी जैसी सेवाओं में भी अगर केंद्र सरकार इस तरह का भेदभाव करेगी तो उस के क्या मायने रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि मिलिट्री सर्विस पे, जो कि एक रिस्क अलाउंस की तरह है, उसमें इतना भारी अंतर तर्कसंगत नहीं है। ऑफिसर्स को 15500 और वसैनिकों को 5200 दिया जा रहा है, जो कि बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि आर्मी का टोटल 3% ही ऑफिसर है, बाकी 97% प्रतिशत हमारे सैनिक हैं। इसलिए इनके साथ न्याय होना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने के विरोध में युवा कांग्रेस जिला कांगड़ा भी मुखर हो गई है है। रविवार शाम कांगड़ा विधानसभा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष इशांत चौधरी के नेतृत्व में युवा कांग्रेस ने कांगड़ा में मशाल जुलूस निकाला, जिसमें मुख्य रूप से कांगड़ा जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पंकज कुमार पंकू शामिल हुए। जिलाध्यक्ष पंकज कुमार ने कहा कि राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता भाजपा को रास नहीं आ रही। यही वजह है कि भाजपा संसद में राहुल के सवालों के जवाब देने से भी कतरा रही है, जिस कारण राहुल गांधी की विचारों को अभिवयक्ति की आड़ में उनकी संसद सदस्यता को रद्द कर दिया गया। कहा कि राहुल के खिलाफ केंद्र सरकार की इस कार्रवाई को युवा कांग्रेस सहन नहीं करेगी तथा इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। केंद्र सरकार ने हमारे नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल नहीं की तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इस अवसर पर अरुण मनकोटिया उपाध्यक्ष युवा कांग्रेस कांगड़ा, निखिल जमवाल एनएसयूआई डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट, अभिषेक डोगरा, रोहित कुमार, सौरभ जानी, सागर चौधरी, सिद्धांत मोगरा, ऋषभ चौधरी, पार्थ, अमन, अतुल, पवन राणा, रितिक समीर, अभिषेक सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर पहुंचने वाले सातवें शख्स है। प्रथम मुख्यमंत्री डॉ वाईएस परमार से लेकर पिछले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तक तमाम मुख्यमंत्रियों की अपनी एक अलग शैली, एक अलग दृष्टिकोण रहा है। सभी ने अपने अपने अंदाज में हिमाचल को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। कोई सड़कों वाला मुख्यमंत्री कहलाया, कोई पानी वाला, तो किसी ने शिक्षा को तवज्जो दी। अलबत्ता सुखविंदर सिंह सुक्खू को कार्यकाल संभाले अभी चार माह भी नहीं बीते है लेकिन सुक्खू के कई ऐसे निर्णय है जो अभी से उन्हें एक अलग कतार में खड़ा करते है। मसलन प्रदेश के यतीम अब 'चिल्ड्रन ऑफ़ स्टेट' है और हिमाचल देश का एक ऐसा राज्य है जो 'ग्रीन स्टेट' बनने के मिशन पर ईमानदार प्रयास करता दिख रहा है। बहरहाल सफर लम्बा है और चुनौतियां बेशुमार, निर्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी हो सकता है लेकिन इसमें कोई डॉ राय नहीं है कि बतौर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली से छाप छोड़ रहे है।" 'पूत के पाँव पालने में दिख जाते है', बेशक प्रदेश की सुक्खू सरकार को सत्ता में आएं अभी चार महीने भी नहीं बीते हो लेकिन सरकार नीति और नियत को लेकर एक सकारात्मक माहौल जरूर है। चुनौतियां भरपूर है और आर्थिक स्थिति पतली, बावजूद इसके बेतहाशा कर्ज और सीमित संसाधनों के साथ भी सुख की सरकार प्रदेश को उन्नति के पथ पर बढ़ाने के लिए अग्रसर दिखती है। अपने अल्प कार्यकाल में सरकार कई अहम फैसले ले चुकी है और कई सरकार की नीतियों में एक दूर्गामी सोच साफ़ देखने को मिल रही है। चाहे ग्रीन हिमाचल की राह पर आगे बढ़ने का फैसला हो या पर्यटन के लिए आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में कदम, इसमें कोई संशय नहीं है कि सुक्खू सरकार सही राह पर आगे बढ़ती दिख रही है। सुक्खू कैबिनेट की बैठकों में लिए गए सरकार के फैसलों हो या बजट में किए गए प्रावधान, कहीं न कहीं ये उम्मीद जरूर जगी है कि ये सरकार सिर्फ बातें नहीं करती बल्कि उन पर अमल करने को भी प्रतिबद्ध है। निसंदेह सीमित वित्तीय संसाधन बड़ी बाधा है पर सरकार की नियत को लेकर कोई शक ओ शुबा नहीं दिखता। प्रभावित करती ही सीएम की साफगोई और सादगी : सीएम सुक्खू की एक बात बेहद प्रभावित करती है और वो है प्रदेश की आर्थिक स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री का खुलकर जनता को बताना। सीएम सुक्खू प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति की बात स्वीकार भी कर रहे है और जनता का समर्थन भी मांग रहे है। नए मुख्यमंत्री की इस स्पष्टवादिता से लोग खासे प्रभावित भी दिख रहे है। बहरहाल आगाज अच्छा है पर निसंदेह सुक्खू सरकार को उन सभी अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा जो जनता उनसे बांधे बैठी है। इसी तरह आल्टो कार से विधानसभा पहुंचना हो या फिर लाव लश्कर को छोड़कर शिमला माल रोड पर सुबह की सैर के लिए साधारण व्यक्ति की तरह निकल जाना, मुख्यमंत्री सुक्खू अपनी सादगी से जनता पर छाप छोड़ रहे है। मुख्यमंत्री से मिलने जो भी आता है, ये सुनिश्चित किया जाता है कि खाली हाथ वापस नहीं लौटे। सामान्य व्यक्ति की तरह रहते हुए सीएम सुक्खू ने विधायक रहते हुए कभी अपने साथ पीएसओ नहीं रखा था। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी उनकी सादगी बरक़रार है। लिए कई बड़े अहम फैसले : अपने छोटे से कार्यकाल में सुक्खू सरकार ने ऐसे कई बड़े फैसले लिए है जो हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2032 तक भारत का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के सरकार के सपने को सींचता दिखाई देते है। गुड गवर्नेंस को लेकर सरकार संजीदा है। सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया, जहां पेपर में गड़बड़ी पाई गई, वहां पेपर को कैंसल किया गया। इसके चलते कर्मचारी चयन आयोग को भंग किया गया ओर आरोपियों की गिरफ्तारी भी जारी है। इसके अलावा सरकार प्रदेश हरित राज्य बनाने की ओर भी आगे बढ़ रही है। सुक्खू सरकार ने साल 2026 तक हिमाचल को ग्रीन स्टेट बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश में वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा। इसके लिए सीएम ने ई-बस, ई-ट्रक की खरीद पर 50 लाख तक और ई-टैक्सी की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी देने का ऐलान किया है। वहीं जिन 10 गारंटियों के सहारे कांग्रेस सत्ता में आई थी उनमें से दो को पूरा करती हुई भी सरकार दिखाई दी है। प्रदेश के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दे दी गई और महिलाओं को 1500 चरणबद्ध तरीके से देने पर भी काम किया जा रहा है। दिल छू रहा सरकार का मानवीय चेहरा : यहाँ सुक्खू सरकार के उस मानवीय चेहरा का जिक्र भी जरूरी है जिसने हरआम और ख़ास व्यक्ति के मन को छुआ है। सीएम बनने पर सुखविंदर सिंह सुक्खू सबसे पहले अनाथ बच्चों, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बड़ी योजना लेकर आए, जिसे सुखाश्रय कोष का नाम दिया गया है। सुखाश्रय योजना का लाभ प्रदेश के करीब 6 हजार अनाथ बच्चों को होगा। वहीं 27 साल तक सरकार इन बच्चों की पढ़ाई से लेकर दूसरी हर जरूरतों को पूरा करेगी। आय बढ़ाने को बढ़ाये कदम : प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए सरकार ने आय बढ़ाने पर भी काम किया है। नई एक्साइज पालिसी के तहत शराब के ठेकों की नीलामी की गई। वहीं सरकार ने बजट में शराब की हर बोतल पर दूध सेस लगाने का ऐलान किया है जिससे 120 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस वसूलने का निर्णय लिया है इससे सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा।
हिमाचल प्रदेश में हुए 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सत्ता में तो आई मगर पार्टी के कई दिग्गज नेता चुनाव हार गए। हारने वाले इन दिग्गजों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर का नाम भी शामिल था। कौल सिंह ठाकुर चुनाव से पहले लगातार मुख्यमंत्री पद पर भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे मगर वो चुनाव तक नहीं जीत पाए और कौल सिंह ठाकुर को चुनाव हराने वाले नेता थे भाजपा की ओर से पहली बार चुनाव लड़े पूर्ण चंद ठाकुर। द्रंग की जनता ने पूर्ण चंद ठाकुर को चुनाव जीता कर विधानसभा भेजा और अब वे सदन में लगातार अपने क्षेत्र की जनता की आवाज़ उठा रहे है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान द्रंग के किन मुद्दों को पूर्ण चंद ठाकुर ने सदन में उठाया, इस पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने उनसे ख़ास बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ मुख्य अंश ..................... सवाल : सदन में आपने आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर सवाल उठाए, क्या आपके विधानसभा क्षेत्र में भी आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति खराब है? जवाब : देखिए आउटसोर्स पूरे प्रदेश से सम्बंधित मुद्दा है लेकिन मैंने द्रंग चुनाव क्षेत्र का विधायक होने के नाते अपने क्षेत्र की ही बात की। जयराम सरकार ने द्रंग क्षेत्र में जल शक्ति और पीडब्ल्यूडी विभाग में आउटसोर्स के माध्यम से कुछ कर्मचारी लगाए थे। इसके बाद 2022 में सत्ता का परिवर्तन हुआ और जल शक्ति विभाग से आउटसोर्स कर्मचारियों को हटा दिया गया। इससे संबंधित मैंने सवाल विधानसभा में लगाया था। इसके सम्बन्ध में मुझे जो जवाब आया उसमे मुझे बताया गया कि जो कर्मचारी हटाए गए है वह प्राइवेट कंपनी के जरिये लगाए गए थे और उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका है। मैंने यह मांग की थी कि जो कर्मचारी निकाले गए है या तो उन्हें वापिस नौकरी पर रखा जाये या किसी और को उनके स्थान पर भर्ती किया जाए। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी विभाग में भी जो आउटसोर्स पर कर्मचारी लगाए गए थे उन्हें भी 30 से 40 किलोमीटर दूर लगाया गया है। कई कर्मचारी तो ऐसे है जिनके राजनैतिक द्वेष की भावना से तबादले किये जा रहे है। इन कर्मियों को 3 से 4 हज़ार रूपए मिलता है और उन्हें 30 से 40 किलोमीटर भेजा गया है। मैंने सरकार के समक्ष यह बात रखी है कि जिन्हें पंचायत स्तर पर रखा गया था उन्हें पंचायत में ही रखा जाए ताकि ये लोग अपने लोगों की सेवा भी कर सके। यह लोग इतना दूर जाएंगे तो मानदेय से ज्यादा पैसा इनके आने-जाने में ही लग जायेगा या इतना दूर जाकर रहेंगे तो इतना खर्च केवल किराये के कमरे में लग जाएगा। सरकार ने मुझे आश्वासन दिया है कि इस पर विचार किया जाएगा। सवाल : द्रंग विधानसभा क्षेत्र में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी काफी गरमाया है, इस पर आप क्या कहेंगे ? जवाब : द्रंग विधानसभा क्षेत्र में कुल 300 प्राथमिक पाठशाला है जिसमें 365 पद शिक्षकों के स्वीकृत है। यहाँ 365 पद स्वीकृत होने के बावजूद 178 जेबीटी की पोस्टें खाली है और इसके बावजूद भी शिक्षकों के तबादले किये जा रहे है जो बच्चों के साथ खिलवाड़ है। इसके अलावा 7 से 8 पाठशाला ऐसी है जो बिना शिक्षकों के चल रही है जिनमे प्रत्येक पाठशाला में करीब 20 से 30 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है। द्रंग के हमारे कांग्रेस पार्टी के नेता एक ओर कहते है कि शिक्षा को सुदृढ़ करना है और दूसरी ओर शिक्षकों के तबादले कर रहे है। यह भेदभाव की राजनीति कर रहे है और यदि ऐसा चलता रहा तो लोग सड़कों पर धरने पर बैठ जायेंगे और हम भी उनके साथ इसमें हिस्सा लेंगे। मैंने सरकार से आग्रह किया है कि यदि किसी शिक्षक का तबादला हो रहा है तो उसके स्थान पर किसी दूसरे शिक्षक की नियुक्ति भी की जाए। सवाल : द्रंग दूरदराज का क्षेत्र है, इस क्षेत्र के और किन-किन मुद्दों को आप विधानसभा के अंदर और बाहर उठा रहे है ? जवाब : द्रंग के ज्वलंत मुद्दों को लेकर मैंने विधानसभा में बात रखी है। चाहे वह शिक्षा है, स्वास्थ्य है या अन्य मुद्दे है। पिछली सरकार में द्रंग विधानसभा क्षेत्र में बहुत काम हुए है लेकिन अभी भी वहां पर बहुत काम किया जाना बाकी है। द्रंग चुनाव क्षेत्र का क्षेत्रफल 900 वर्ग किलोमीटर है जो पूरे हमीरपुर जिले के बराबर है। कई ऐसे गाँव है जो अभी तक सड़कों से नहीं जुड़े है और जो सड़कें है उनकी भी हालत ठीक नहीं है। इसके साथ ही कई लिंक रोड है जिनका काम होना है, ऐसे कई कार्य है जो क्षेत्र में अभी होने है। मैं अपनी समझ के अनुसार कहता हूँ कि इन सभी छोटे कार्यों को मनरेगा के अंदर डाला जाना चाहिए क्यूंकि मनरेगा में बहुत पैसा है। इससे लोगों को भी काम मिलेगा और सड़कों का कार्य पूरा होने से लोगों को सुविधाएँ भी मिलेगी। इसके अलावा हमारे क्षेत्र में डॉक्टरों के पद खाली चले हुए है हमने इसके बारे में भी सरकार से बात की है। लेकिन द्रंग के कांग्रेस नेता शायद द्रंग का विकास नहीं चाहते है। मैं उन नेताओं से कहना चाहूंगा कि यदि आपको संस्थान नहीं चाहिए, अध्यापक, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ नहीं चाहिए तो आप लिख कर दे दीजिए कि हमें इन सब की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद हम देखेंगे कि जनता उन नेताओं का क्या हश्र करेगी। सवाल : हिमाचल प्रदेश की नई सरकार के पहले बजट पर आपकी क्या राय है ? जवाब : सरकार ने अपने हिसाब से बजट को बनाया है और इसके बारे में बेहतर होगा कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही बात करे । सवाल : अंत में जनता को क्या सन्देश देना चाहेंगे ? जवाब : द्रंग की जनता को मैं यह सन्देश देना चाहूंगा कि मैं पिछले 30 से 40 सालों से चाहे किसी भी पद पर रहा हूँ मैंने केवल जनता की सेवा की है। आगे भी मैं जनता से यही कहना चाहूंगा जो भी मेरे क्षेत्र की, जनता की समस्याएं या कार्य होंगे मैं सरकार से उन्हें पूरा करवाने के लिए हमेशा तत्पर रहूँगा।
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के चुनाव में अर्से से कांग्रेस की पराजय का दौर जारी है। दो उपचुनावों सहित पिछले 11 लोकसभा चुनावों में भाजपा यहाँ 10 बार जीती है। जबकि 1996 में आखिरी बार कांग्रेस को यहाँ जीत नसीब हुई थी। अब 2024 लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और अर्से बाद कांग्रेस हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में बेहतर करने को लेकर आशावान है या यूँ कहे कि अर्से बाद यहाँ कांग्रेस से अपेक्षाएं बढ़ी है। इसका कारण है पिछले विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की 17 विधानसभा सीटों में से 10 पर जीत मिली है। वहीँ न केवल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हमीरपुर से आते है, बल्कि उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी इसी संसदीय क्षेत्र से है। ऐसे में इन दो सियासी दिग्गजों की मौजूदगी में कांग्रेस की उम्मीद तो लाजमी है। अलबत्ता कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव के नतीजे दोहराना चाहती है, लेकिन यहाँ ये भी जहन में रखना होगा कि कांग्रेस की राह आसान जरा भी नहीं है। पार्टी के सामने कई बड़ी चुनौतियां रहने वाली है। जाहिर है चुनाव के लिए टिकट के तो कई तलबगार होंगे, लेकिन कांग्रेस को ऐसे दमदार चेहरे की दरकार है जो हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में पार्टी को जीत दिला सके। उधर भाजपा से चार बार के सांसद अनुराग ठाकुर अब केंद्रीय मंत्री बन चुके है और ये लगभग तय है कि 2024 में अनुराग ही फिर मैदान में हो। ऐसे में कांग्रेस के लिए ये चुनाव ज़रा भी आसान नहीं होने वाला है। यहाँ कांग्रेस ही नहीं बल्कि प्रदेश के सीएम और डिप्टी सीएम की साख भी दांव पर होने वाली है। निसंदेह हमीरपुर संसदीय क्षेत्र भाजपा का मजबूत किला है। अब भाजपा के इस अभेद किले को भेदने के लिए कांग्रेस किस दिग्गज को मैदान में उतारती है, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई है। दरअसल पिछले चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार रहे वरिष्ठ नेता राम लाल ठाकुर हमीरपुर सांसदीय क्षेत्र से चार दफा चुनाव लड़ चुके है। 1999, 2004, 2019 और 2007 के उपचुनाव में राम लाल ठाकुर ही कांग्रेस के उम्मीदवार रहे है, लेकिन हर बार राम लाल ठाकुर को शिकस्त ही मिली। वहीँ कांग्रेस के तेज़ तरार नेताओं में शुमार राजिंदर राणा भी 2014 में पार्टी टिकट पर हमीरपुर लोकसभा चुनाव लड़ चुके है, लेकिन राणा भी पार्टी को जीत दिलाने में असफल साबित हुए। हालांकि राणा की हार का अंतर एक लाख के भीतर था, और ऐसे में वे एक बार फिर पार्टी की पसंद हो सकते है। बहरहाल हमीरपुर में हार का सिलसिला थामने को कांग्रेस किस पर भरोसा करेगी, ये देखना रोचक होगा। धूमल परिवार का दबदबा : हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के इतिहास पर निगाह डाले तो 1996 के अलावा 1989 से 2019 तक हुए हर चुनाव में भाजपा ने मोर्चा मारा है। 1989 में पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने यहां से जीत हासिल कर पहली बार बीजेपी का परचम लहराया था। इसके बाद वह 1991 में भी जीते। फिर 1996 में कांग्रेस के विक्रम सिंह ने बाजी मारी, लेकिन 1998 के बाद फिर से बीजेपी के ही सुरेश चंदेल जीत गए। 1999 और 2004 में भी वह जीते। इसके बाद 2007 में उनके इस्तीफे के बाद पूर्व सांसद प्रेम कुमार धूमल यहां से तीसरी बार सांसद बने, लेकिन प्रदेश के सीएम बनने के बाद उन्होंने सीट खाली कर दी। इसके बाद 2008 के उपचुनाव, 2009, 2014 और 2019 के आम चुनाव में अनुराग ठाकुर यहाँ से लगातार चार दफा सांसद बने है। पांच जिलें आते है जद में : हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के तहत 17 विधानसभा क्षेत्र आते है। इनमे जिला हमीरपुर के पांच विधानसभा क्षेत्र, जिला बिलासपुर के चार विधानसभा क्षेत्र, जिला ऊना के पांच विधानसभा क्षेत्र, जिला मंडी का धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र और जिला कांगड़ा के देहरा और जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। राष्ट्रीय मुद्दों पर होगा मतदान : विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते है और प्रदेश की जनता दोनों चुनावों में अलग नजरिये से मतदान करती है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यदि बेहतर करना है तो न सिर्फ प्रदेश कांग्रेस को बेहतर करना होगा अपितु राष्ट्रिय स्तर पर भी कांग्रेस को दमदार वापसी करनी होगी। बहरहाल तो राहुल गाँधी की सदस्यता रद्द होने के बाद कांग्रेस किस रणनीति पर आगे बढ़ेगी, ये भी स्पष्ट नहीं है। जाहिर है ऐसे में कांग्रेस की डगर कठिन जरूर होगी।
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के चुनाव में अर्से से कांग्रेस की पराजय का दौर जारी है। दो उपचुनावों सहित पिछले 11 लोकसभा चुनावों में भाजपा यहाँ 10 बार जीती है। जबकि 1996 में आखिरी बार कांग्रेस को यहाँ जीत नसीब हुई थी। अब 2024 लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और अर्से बाद कांग्रेस हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में बेहतर करने को लेकर आशावान है या यूँ कहे कि अर्से बाद यहाँ कांग्रेस से अपेक्षाएं बढ़ी है। इसका कारण है पिछले विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की 17 विधानसभा सीटों में से 10 पर जीत मिली है। वहीँ न केवल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हमीरपुर से आते है, बल्कि उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी इसी संसदीय क्षेत्र से है। ऐसे में इन दो सियासी दिग्गजों की मौजूदगी में कांग्रेस की उम्मीद तो लाजमी है। अलबत्ता कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव के नतीजे दोहराना चाहती है, लेकिन यहाँ ये भी जहन में रखना होगा कि कांग्रेस की राह आसान जरा भी नहीं है। पार्टी के सामने कई बड़ी चुनौतियां रहने वाली है। जाहिर है चुनाव के लिए टिकट के तो कई तलबगार होंगे, लेकिन कांग्रेस को ऐसे दमदार चेहरे की दरकार है जो हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में पार्टी को जीत दिला सके। उधर भाजपा से चार बार के सांसद अनुराग ठाकुर अब केंद्रीय मंत्री बन चुके है और ये लगभग तय है कि 2024 में अनुराग ही फिर मैदान में हो। ऐसे में कांग्रेस के लिए ये चुनाव ज़रा भी आसान नहीं होने वाला है। यहाँ कांग्रेस ही नहीं बल्कि प्रदेश के सीएम और डिप्टी सीएम की साख भी दांव पर होने वाली है। निसंदेह हमीरपुर संसदीय क्षेत्र भाजपा का मजबूत किला है। अब भाजपा के इस अभेद किले को भेदने के लिए कांग्रेस किस दिग्गज को मैदान में उतारती है, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई है। दरअसल पिछले चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार रहे वरिष्ठ नेता राम लाल ठाकुर हमीरपुर सांसदीय क्षेत्र से चार दफा चुनाव लड़ चुके है। 1999, 2004, 2019 और 2007 के उपचुनाव में राम लाल ठाकुर ही कांग्रेस के उम्मीदवार रहे है, लेकिन हर बार राम लाल ठाकुर को शिकस्त ही मिली। वहीँ कांग्रेस के तेज़ तरार नेताओं में शुमार राजिंदर राणा भी 2014 में पार्टी टिकट पर हमीरपुर लोकसभा चुनाव लड़ चुके है, लेकिन राणा भी पार्टी को जीत दिलाने में असफल साबित हुए। हालांकि राणा की हार का अंतर एक लाख के भीतर था, और ऐसे में वे एक बार फिर पार्टी की पसंद हो सकते है। बहरहाल हमीरपुर में हार का सिलसिला थामने को कांग्रेस किस पर भरोसा करेगी, ये देखना रोचक होगा। धूमल परिवार का दबदबा : हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के इतिहास पर निगाह डाले तो 1996 के अलावा 1989 से 2019 तक हुए हर चुनाव में भाजपा ने मोर्चा मारा है। 1989 में पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने यहां से जीत हासिल कर पहली बार बीजेपी का परचम लहराया था। इसके बाद वह 1991 में भी जीते। फिर 1996 में कांग्रेस के विक्रम सिंह ने बाजी मारी, लेकिन 1998 के बाद फिर से बीजेपी के ही सुरेश चंदेल जीत गए। 1999 और 2004 में भी वह जीते। इसके बाद 2007 में उनके इस्तीफे के बाद पूर्व सांसद प्रेम कुमार धूमल यहां से तीसरी बार सांसद बने, लेकिन प्रदेश के सीएम बनने के बाद उन्होंने सीट खाली कर दी। इसके बाद 2008 के उपचुनाव, 2009, 2014 और 2019 के आम चुनाव में अनुराग ठाकुर यहाँ से लगातार चार दफा सांसद बने है। पांच जिलें आते है जद में : हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के तहत 17 विधानसभा क्षेत्र आते है। इनमे जिला हमीरपुर के पांच विधानसभा क्षेत्र, जिला बिलासपुर के चार विधानसभा क्षेत्र, जिला ऊना के पांच विधानसभा क्षेत्र, जिला मंडी का धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र और जिला कांगड़ा के देहरा और जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। राष्ट्रीय मुद्दों पर होगा मतदान : विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते है और प्रदेश की जनता दोनों चुनावों में अलग नजरिये से मतदान करती है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यदि बेहतर करना है तो न सिर्फ प्रदेश कांग्रेस को बेहतर करना होगा अपितु राष्ट्रिय स्तर पर भी कांग्रेस को दमदार वापसी करनी होगी। बहरहाल तो राहुल गाँधी की सदस्यता रद्द होने के बाद कांग्रेस किस रणनीति पर आगे बढ़ेगी, ये भी स्पष्ट नहीं है। जाहिर है ऐसे में कांग्रेस की डगर कठिन जरूर होगी।
हिमाचल प्रदेश की सियासत में जिला कांगड़ा का सियासी वजन सबसे ज्यादा है। शिमला की गद्दी का रास्ता कांगड़ा से होकर ही गुजरता है। जो राजनैतिक दल कांगड़ा फ़तेह करता है, सत्ता भी उसी को नसीब होती है। ये ही कारण है कि सरकार किसी की भी हो, कांगड़ा के मान-मनौव्वल और अधिमान का पूरा ख्याल रखा जाता है। इस बार भी कांग्रेस को जिला की 15 में से 10 सीटें मिली और सत्ता भी उसी को मिली। पर सरकार में कांगड़ा को अब तक वो अधिमान नहीं मिला, जिसकी अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री सहित कुल 9 मंत्रियों में से अब तक कांगड़ा के खाते में सिर्फ एक मंत्रिपद आया है और वो है वरिष्ठ नेता और ज्वाली विधायक चौधरी चंद्र कुमार। हालांकि इसके अलावा कांगड़ा को आशीष बुटेल और किशोरी लाल के रूप में दो सीपीएस भी मिले है और युवा नेता रघुबीर बाली और गोकुल बुटेल को कैबिनेट रैंक दिए गए है। पर मंत्रीपद तो आखिर मंत्रिपद होता है और कांगड़ा को फिलवक्त नए मंत्रियों का इन्तजार है। सुक्खू कैबिनेट में अभी तीन मंत्री पद रिक्त है और इन्हीं तीन पदों पर चाहवानों की निगाहें टिकी है। इस फेहरिस्त में कांगड़ा के कई चेहरे शामिल है। ज्वालामुखी से संजय रतन, धर्मशाला से सुधीर शर्मा ,जयसिंहपुर से यादविंदर गोमा ,फतेहपुर से भवानी पठानिया मंत्री पद के दावेदारों में शामिल है। पहले बात उस चेहरे की करते है जो पहले विस्तार में ही मंत्रिपद की दौड़ में आगे माने जा रहे थे, लेकिन सियासत में कब समीकरण बदल जायें, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ अब तक होता दिखा है धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा के साथ। वीरभद्र सरकार में सुधीर शर्मा को नंबर दो माना जाता था और कहते है तब सुधीर की रज़ा में ही वीरभद्र सिंह की रज़ा होती थी। फिर सियासी फिजा कुछ यूँ बदली कि 2017 में सुधीर विधानसभा भी नहीं पहुंच पाएं। 2019 के उपचुनाव से भी उन्होंने खुद को दूर कर लिया। इस बार सुधीर शर्मा जीतने में कामयाब ज़रूर रहे है लेकिन पहले मंत्रिमंडल विस्तार में सुधीर शर्मा को जगह नहीं मिली। अब दूसरे चरण में उनका नाम शामिल होता है या नहीं ये तो समय ही तय करेगा। पर निसंदेह उनका दावा कमतर बिलकुल नहीं है। दूसरा नाम जो सबसे ज़्यादा चर्चा में है वो नाम है ज्वालामुखी से विधायक संजय रतन का। संजय रतन के राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई है। 2003 और 2007 में संजय रतन ने ज्वालामुखी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। फिर 2012 में जब प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आयी तो संजय रतन भी पहली दफा चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2017 में सत्ता परिवर्तन हुआ तो संजय रतन भी चुनाव हार गए। इस बार संजय रतन ने जीत हासिल की है और दूसरी बार विधायक बने है। संजय रतन ब्राह्मण चेहरा है और जिला काँगड़ा से है। ऐसे में क्षेत्रीय समीकरण बैठाने और जातीय संतुलन साधने के लिए संजय रतन का नाम भी मंत्रिपद की दौड़ में आगे माना जा रहा है। यादविंदर गोमा भी मंत्रीपद की फेहरिस्त में शामिल माने जा रहे है। दरअसल यादविंदर गोमा एससी चेहरा है और जानकार मान रहे है कि एक मंत्री एससी कोटे से हो सकता है और दूसरा ब्राह्मण। ऐसे में जाहिर है जो एससी चेहरा चर्चा में है वो जयसिंहपुर से दूसरी बार विधायक बने यादविंदर गोमा हो सकते है। अब यदि ऐसा होता है तो संभव है कि गोमा कई वरिष्ठ नेताओं को पछाड़ कर मंत्री पद ले जाएं। एक और नाम की चर्चा जरूरी है। कॉर्पोरेट करियर को अलविदा कहकर सियासी दंगल में उतरने वाले भवानी सिंह पठानिया का नाम भी मंत्रीपद के चेहरों में शामिल माना जा रहा है। दरअसल स्वर्गीय सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे भवानी सिंह पठानिया ने जीत दर्ज कर प्रदेश की सियासत में एंट्री ली और इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्व में मंत्री रहे राकेश पठानिया को मात देकर भवानी विधानसभा पहुंचे। अब भवानी पठानिया को भी सुक्खू मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी इसको लेकर कयासों का सिलसिला जारी है। जानकार मानते है कि भवानी कई दिग्गजों को पछाड़ कर बाजी मार सकते है। हर सरकार में मिलती है तवज्जो : कांग्रेस को सत्ता की चाबी देने में जिला कांगड़ा का बड़ा योगदान रहा है। पिछली कई सरकारों की बात की जाए तो ज़िला काँगड़ा को हर बार तीन से चार मंत्री मिलते रहे है। पिछली जयराम सरकार में कांगड़ा को विधानसभा अध्यक्ष के अलावा तीन मंत्री पद मिले थे। इस बार भी सुक्खू कैबिनेट में कांगड़ा को लगभग तीन मंत्री मिलना के कयास लगाए जा रहे है। अब दूसरे कैबिनेट विस्तार का इन्तजार है। कांगड़ा के लिए हुई कई घोषणाएं : हाल ही में बजट सेशन के दौरान सुक्खू सरकार ने जिला काँगड़ा के लिए कई बड़ी घोषणाएं की है। जिला काँगड़ा को टूरिज्म कैपिटल बनाने के साथ-साथ अन्य कई बड़े फैसले लिए गए है। जाहिर है सुक्खू सरकार जिला काँगड़ा को तवज्जों देने की पूरजोर कोशिश कर रही है, लेकिन अब भी मंत्री पद को लेकर जिला काँगड़ा आस लगाए बैठा है।
विधानसभा बजट सत्र के दौरान विधायकों द्वारा अपने क्षेत्र के विभिन्न मुद्दे सदन में उठाये जा रहे है। कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक चंद्रशेखर द्वारा भी विभिन्न मुद्दों को सदन में उठाया गया और वह भाजपा की पूर्व सरकार पर भी हमलावर रहे। फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया द्वारा मंडी जिला के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर से ऐसे ही विषयों को लेकर चर्चा की गई, पेश है चर्चा के मुख्य अंश........................... सवाल : धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के किन मुद्दों को आपने सदन में उठाया है ? जवाब : धर्मपुर दूर दराज़ क्षेत्र है और लोगों की आर्थिकी मुख्य तौर पर मनरेगा पर निर्भर करती है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को हाशिये पर धकेलने का प्रयास किया जा रहा है, वह दुखद है। इस विषय को लेकर मैं भी मुखर हूँ और मैंने सदन में भी इस विषय पर चर्चा की मांग की है और प्रश्न भी उठाये है। दिहाड़ीदार महिलाओं की 3 बार दिन की हाज़री असहनीय है। इसके अलावा भी कई मसलें है जिनको लेकर हम सदन में अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे है। पिछले मंत्री तो हमारे लिए वहां बहुत कुछ अधूरे कार्य छोड़ कर चले गए लेकिन हम सभी कार्यों को साथ में लेकर आगे बढ़ेंगे और जनता के लिए कार्य करेंगे। सवाल : विधायकों के अधिकारों को लेकर सदन में मुद्दा गूंजा था जिसपर आपने भी सहमति जताई थी, हम आपसे जानना चाहेंगे कि आपके अनुसार विधायकों के किन मुद्दों का हनन हो रहा है ? जवाब : विधायकगण इस बात से बड़ा आहत हुए जब विधायकों का चालान काटने का एक रिवाज़ ही पड़ गया। इसी सत्र के दौरान 3 विधायकों का चालान हो गया। यह बात किसी पार्टी विशेष की नहीं है बल्कि सभी पार्टी के विधायकों के चालान किये जा रहे है। मुझे स्वयं परवाणू बॉर्डर पर पुलिस ने पार्टी का झंडा लगाने पर चालान के लिए रोका हालाँकि चालान नहीं हुआ। इसके अलावा दूसरा प्रश्न यह था कि सब डिवीज़न स्तर पर जैसे एसडीएम या अन्य अधिकारियों के लिए चैम्बर्स या रूम्स है तो विधायकों के लिए वहां चैम्बर का प्रावधान किया जाए ताकि विधायक जनता से मिल सके और उनकी समस्यों को सुन सके। इसके साथ ही जिला मुख्यालय में भी किसी चैम्बर या रूम का प्रावधान हो ताकि जब हम अपने क्षेत्र के लोगों की आवाज़ लेकर जाए तो एक सम्मान जनक स्थिति में हम उनका निपटारा अधिकारियों से करवा सके। इसके साथ ही जो तीसरा प्रश्न था कि विधायकों के लिए यदि एक झंडी मिल जाये तो विधायकों की भी एक गरिमा बनी रहेगी क्यूंकि लाखो जनता के सामने हम भी नतमस्तक हो कर यहाँ पहुँचते है तो विधायकों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए। सवाल : क्या आप मानते है कि मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर कुछ बदलाव होने चाहिए ? जवाब : मुख्यमंत्री ने इस विषय को लेकर दरियादिली दिखाई है। उन्होंने कहा है कि हम कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्यों में व्यवधान ना डालें और इसके साथ ही विधायकों की गरिमा को भी बरकरार रखा जाना चाहिए। इसको लेकर मुख्यमंत्री द्वारा कमेटी को बनाने का आश्वासन दिया है। मुझे पूरी आशा है कि इसी सत्र के दौरान इस कमेटी का गठन किया जायेगा और इसके साथ ही न्यायपालिका के जो लोग होंगे उनके साथ भी चर्चा करने के बाद एक सकारात्मक कदम इस ओर उठाया जायेगा। सवाल : सदन में जनमंच का मुद्दा गूंजा था। कांग्रेस ने सत्ता में आते ही जनमंच को बंद कर दिया लेकिन भाजपा का तर्क है की जनमंच के जरिए दूरदराज़ के क्षेत्रों के लोगों कि समस्याओं को सुलझाया जा सकता था। इस मसले पर आपकी व्यक्तिगत राय क्या है ? क्या जनमंच को बंद किया जाना चाहिए था ? जवाब : हर सरकार में इसके नाम बदले जाते है लेकिन प्रयास, मंशा और इच्छा वही रहती है। जब वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे तो हमारी सरकार में प्रशासन जनता के द्वार कार्यक्रम चलता था, भाजपा ने उसे बदल कर जनमंच कर दिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी आश्वासन दिया है कि हम भी बहुत जल्द अपने कार्यक्रम लांच करेंगे और जनता की समस्याओं को सुनेंगे, लेकिन भाजपा के जनमंच में कई खामियां थी, जैसे अधिकारियों को बेइज़्ज़त किया गया, जो सरासर गलत था। इसके अलावा 3 करोड़ रूपए लंच पर खर्च कर दिया गया और इतना ही पैसा टेंट पर भी खर्च कर दिया गया जो किसी भी सूरत में तर्कसंगत नहीं था। इस पर सुक्खू सरकार अपने तरीकों से आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री हमेशा जनता के पक्ष को तरजीह देते है और मेरा मानना है कि आने वाले समय में इससे भी बेहतर कार्यक्रम मुख्यमंत्री ले कर आएंगे। सवाल : क्या आपका मानना है कि कांग्रेस ऐसे कार्यक्रमों पर खर्च नहीं करेगी ? जवाब : जन आकांक्षाओं पर यदि खरा उतरना है तो साधारण तरीकों से भी ऐसे कार्यक्रमों को किया जा सकता है। करीब साढ़े 5 करोड़ रूपए लंच और टेंट पर भाजपा द्वारा खर्च किया गया जो केवल एक फिजूल खर्ची थी। जनता की समस्याओं को सुनने के कार्यक्रमों को और भी आसान और साधारण तरीकों से किया जा सकता है। हमे केवल जनता का पक्ष सुनना है और उसमे अधिकारियों का पक्ष रखना है तो उसमे फिजूलखर्ची करना तर्कसंगत नहीं है। सवाल : सुक्खू सरकार के पहले बजट को लेकर आपकी क्या राय है? जवाब : यह एक लोक प्रिय बजट है। कांग्रेस द्वारा ओपीएस दिए जाने के बाद विपक्ष पहले ही बैकफुट पर चला गया था, इसके अलावा 2 लाख 31 हज़ार महिलों को 1500 रूपए प्रतिमाह देना भी आसान कार्य नहीं था। मनरेगा जैसी स्कीम में पिछली सरकार ने 5 सालों में कुल 23 रूपए बढ़ाये और इस सरकार ने पहले ही साल में 28 रूपए बढ़ा दिए। मनरेगा में करीब 9 लाख महिलाएं कार्यरत है और उनके लिए यह एक हर्ष का विषय है। हम मनरेगा को और मजबूत करना चाहते है यह हमारे घोषणा पत्र का भी हिस्सा है। इसके अलावा मुख्य्मंत्री ने हर पक्ष को फायदा दिया है। ग्रीन कॉरिडोर वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बना है और यह हम नहीं कह रहे है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह घोषणा हुई है और प्रधानमंत्री मोदी ने उस पर हस्ताक्षर किये है। हिमाचल प्रदेश को ग्रीन कॉरिडोर में नंबर एक आँका गया है। इसके साथ ही ई-व्हीकल को बढ़ाने की बजट में बात की गई है, 1500 इलेक्ट्रिक बसों को लेने की भी बात की गई है। इसके साथ ही सरकार ने 25 हज़ार नौकरियां देने की बात कही है और गैर सरकारी क्षेत्र को मिला कर एक लाख नौकरियां देने की बात कही गई है। पिछली सरकार में बेरोज़गारों के साथ जो छल हुआ है उसका भी हमारी सरकार ने पर्दाफाश किया है। एसएससी को भंग करना पड़ा है, यदि वह फैसला सही नहीं होता तो उसके खिलाफ आवाज़ उठती, लेकिन उसके खिलाफ एक भी आवाज़ नहीं उठी जिसका मतलब था कि वह फैसला एक दम सही था। मंडी के सरदार पटेल विश्वविधालय, हिमाचल प्रदेश विश्वविधालय, पुलिस भर्ती में अनियमितताएं हुई है, जेओए के 4 टेस्ट अभी भी लंबित पड़े है और सैकड़ों युवा शिमला और सचिवालय के चक्कर काट रहे है। यह वही लोग है जो अपनी मेहनत से टेस्ट क्लियर करने के लिए तैयारियां कर रहे है लेकिन इनकी बातों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। केवल राजनीति की जाती है लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण मसलों पर भाजपा क्यों चुप है। आने वाले लम्बे समय के लिए इस बजट की गूंज रहेगी। यह बजट आने वाले पांच वर्षों की दिशा तय कर रहा है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, यह एक मुद्दा विहीन विपक्ष है। क्यूंकि यह विपक्ष है इस लिए बजट को ऑप्पोज कर रहे है। सवाल : मंडी जिला से आप एक मात्र कांग्रेस विधायक है, क्या मंडी को तरजीह दी जाएगी या भेदभाव होगा ? जवाब : मंडी के साथ पिछली सरकार में भेदभाव हुआ है, मंडी में बड़े बड़े प्रोजेक्टों को लाने की बात हुई, कहाँ है वह हवाई अड्डा ? नेरचौक से मंडी ऊना को जोड़ने वाला एक रोड बनना था वह भी नहीं बन पाया, सरदार पटेल विश्वविधालय क्लस्टर विश्वविधालय बनना था जिसके लिए भाजपा ने केंद्र के पैसे को ठुकरा दिया और कहा कि हम अपना पैसा लाएंगे। क्या प्रदेश इतना आमिर हो गया कि अपना पैसा लगा कर अपनी यूनिवर्सिटी लॉन्च की और बैक डोर से सारे नियमों को ताक पर रख कर अपने लोगों को उसमे भर्ती करवाया। टूरिज्म के नाम पर क्या विकसित हुआ ? मात्र 40 करोड़ रूपए आप एडीपी से लाए जबकि शिवधाम को बनाने में करीब 200 से 250 करोड़ तक पैसा लगना था। मंडी से पिछली सरकार ने वोट तो लिए लेकिन मंडी को क्या दिया यह आज तक मंडी के लोग समझ नहीं पाए है। मंडी शिवरात्रि को लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार चलना था वह कार्य भी पिछली सरकार नहीं कर पायी तो पिछली सरकार ने किया क्या। सवाल : इससे पहले जब कांग्रेस विपक्ष में थी तो कांग्रेस भाजपा पर आरोप लगाती थी कि पूरे प्रदेश से सब कुछ उठा कर जयराम मंडी ले गए है लेकिन अब आप कह रहे है कि मंडी को भाजपा ने कुछ नहीं दिया? जवाब : कांग्रेस जिस नज़रिये से कह रही थी वह अब सामने आ रहे है। 20 रेस्टहाउस जयराम ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र में बन गए, 14 रेस्टहाउस हमारे विधानसभा क्षेत्र में बन गए, लेकिन वह किसने मांगे यह बड़ा सवाल है। जयराम ठाकुर अपने विधानसभा क्षेत्र में अटल स्कूल तक नहीं बना पाए। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में स्कूल का केवल 60 प्रतिशत कार्य हुआ और नाचन विधानसभा क्षेत्र में केवल 30 प्रतिशत कार्य हुआ। जयराम ठाकुर अपनी महत्वकांशी योजना को अपने ही जिला में लागू नहीं कर पाए तो उन्होंने मंडी जिला को दिया ही क्या है। मंडी पर केवल मुख्यमंत्री का एक फट्टा लगा दिया गया और मंडी की जनता को भाजपा ने उसी में गोलबंद कर दिया जिसमे जनता इस बार भी फंस गई, लेकिन अब सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार है और बिना किसी भेदभाव के कार्य करने वाली सरकार है। मैं मानता हूँ कि मैं पूरे जिला से कांग्रेस का एक मात्र विधायक चुन कर आया हूँ लेकिन आने वाले समय में आपके सामने हम एक एक प्रमाण लेकर आएंगे कि पिछले 5 वर्षों में मंडी के साथ क्या क्या हुआ है। भाजपा के हल्ले का जवाब हम आने वाले समय में देंगे और आगामी चुनावों में भाजपा के मंडी किले को हम भेद कर दिखाएंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के देश के 100 दमदार नेताओं में शामिल होने पर जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष अजय शर्मा ने इसे बड़ी उपलब्धि करार दिया है। उन्होंने कहा कि सौ दिन के कार्यकाल में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना हिमाचल के लिए गौरव की बात है। जिस तरह से मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कड़े, बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए, उसको देखते हुए उन्हें यह उपलब्धि मिली है। अजय शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ठाकुर अपनी नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शी सोच और सबको साथ लेकर प्रदेश को नई ऊंचाईयों तक ले जाएंगे।
पंचरुखी तहसील के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव मकोल के एक साधारण से परिवार से आने वाली डॉ. नेहा कटोच का चयन हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा उच्च शिक्षा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर फिजिक्स के पद पर किया गया है। डॉ. नेहा कटोच के पिता नरेंद्र चंद्र अपना प्राइवेट काम करते हैं तथा माता राज कटोच एक गृहिणी हैं। नेहा कटोच ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई मकोल में ही पूरी की। उसके बाद बीएससी शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा राजकीय महाविद्यालय पालमपुर से की। एमएससी फिजिक्स तथा एमफिल हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से की। इसके बाद पीएचडी फिजिक्स की उपाधि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला से प्राप्त की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग से फिजिक्स में सेट की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। उनके चयन से पूरे गांव में खुशी की लहर है। नेहा कटोच ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त फिजिक्स के प्रोफेसर पीके आहलूवालिया, सेंट बीड्स कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सपना शर्मा, अपनी पीएचडी के पर्यवेक्षक और वर्तमान में केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जगदीश कुमार, डॉ. नागेश ठाकुर तथा प्रोफेसर अशोक कुमार को दिया है।
हिमाचल प्रदेश के बागवान सुक्खू सरकार से खफा खफा दिख रहे है। सरकार को चार माह भी नहीं हुए और यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए संयुक्त किसान मंच ने सात दिन के भीतर सरकार को विधानसभा सत्र में विधेयक लाने का अल्टीमेटम दे दिया है। ऐसा न होने की स्थिति में एक बार फिर आंदोलन पर उतरने की चेतावनी भी दी गई है। बागवानों ने सरकार से मांग की कि, इसी विधानसभा सत्र में यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए विशेष कानून बनाया जाए। बागवानों का मानना है, बीते कई दिनों से प्रदेश सरकार का बजट सत्र चल रहा है, लेकिन बागवानों के मुद्दे पर सरकार गंभीर नहीं है। बागवानी मंत्री सत्र से पहले यूनिवर्सल कार्टन लागू करने को लेकर मुखर थे, लेकिन सत्र में अब तक यूनिवर्सल कार्टन पर कोई चर्चा नहीं हुई। अगर इस बाबत विधेयक लाकर कानून नहीं बनाया गया तो किसानों-बागवानों को लामबंद कर आंदोलन खड़ा किया जाएगा। हालांकि इस पर मुख्यमंत्री ने ब्यान जारी कर कहा है कि बागवानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और प्रदेश सरकार यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सीए स्टोर स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं, ताकि बागवानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके और उन्हें बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके। इसके अलावा सेब आधारित डिस्टिलरी स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बागवान कम गुणवत्ता वाले सेबों को भी बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। यानी बागवान तल्ख़ जरुरी है, लेकिन सरकार उन्हें आश्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। बहरहाल, आगामी कुछ वक्त में ये तय होगा कि क्या बागवान सरकार को सेटल होने का वक्त देते है या नहीं। यहाँ ये भी जहन में रखना होगा कि लोकसभा चुनाव को करीब एक वर्ष का वक्त है और प्रदेश की दो संसदीय सीटों, शिमला और मंडी में बागवानों का वोट निर्णायक सिद्ध हो सकता है। जाहिर है ऐसे में सरकार भी बागवानों को साधे रखना चाहेगी। समझे : टेलीस्कोपिक से कैसे अलग यूनिवर्सल कार्टन यूनिवर्सल कार्टन में सिर्फ 20 किलो सेब ही भरा जा सकेगा, जबकि टेलीस्कोपिक में बागवान 25 से 40 किलो तक सेब भरते हैं। इतना सेब भरने के बावजूद भी बागवानों को दाम औसत 20 से 25 किलो के हिसाब से ही दिए जाते हैं। इस तरह प्रति पेटी बागवान 5 से 15 किलो अतिरिक्त सेब दे रहे हैं। इस लिहाज से बागवानों को प्रति पेटी कई बार 200 से 700 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ता है। इसका फायदा लदानी उठा जाते हैं, जो हिमाचल में खरीदे गए सेब को देश के बाजारों में किलो के हिसाब से बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। अगर यूनिवर्सल कार्टन लागू किया जाता है तो बागवान किलो के हिसाब से ही एक पेटी में सेब भरेंगे। यह है सेब पैकिंग का इंटरनेशनल स्टैंडर्ड दुनियाभर में सेब 4 लेयर में भरा जाता है। यह सेब पैकिंग का अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड है। दुनिया के किसी भी मुल्क से भारत में सेब आयात किया जाता है तो भी किलो के हिसाब से खरीदा जाता है, लेकिन हिमाचल में बागवान टेलीस्कोपिक कार्टन में 6 से 8 तह में सेब भर रहे हैं। कुछ बागवान ऐसा कमीशन एजेंट के दबाव में आकर तो कुछ सबसे महंगा सेब बेचने की चाहत में कर रहे हैं। वीरभद्र सरकार 2 बार लाई थी विधेयक पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार ने भी यूनिवर्सल कार्टन को लेकर 2 बार विधेयक पेश किया, लेकिन बिना तैयारियों के लाया गया विधेयक बागवानों के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। उस दौरान यूनिवर्सल कार्टन तो अनिवार्य कर दिया गया, मगर बाजार में इसकी उपलब्धता नहीं कराई गई। कार्टन बनाने वाली कंपनियों से पहले संपर्क नहीं साधा गया। हालांकि यूनिवर्सल कार्टन इस्तेमाल न करने वाले बागवानों को पेनल्टी लगाने इत्यादि का प्रावधान अध्यादेश में कर लिया गया था। तब यूनिवर्सल कार्टन के साइज इत्यादि तैयार करने पर पूर्व सरकार ने तकरीबन 11 लाख रुपए खर्च किए थे।
ग्रामीण सड़कों पर लोगों की यातायात को आसान बनाने के लिए और परिवहन सुविधा बेहतर देने के लिए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के निर्देश पर परिवहन विभाग ने हरोली विधानसभा क्षेत्र में टेंपो ट्रैवलर सुविधा की शुरुआत की है। यहां दो टेंपो ट्रैवलर चलेंगी। फिलहाल एक टेंपो ट्रैवलर चलाई गई है, जो ऊना बस स्टैंड से हरोली रामपुर पुल से होते हुए धर्मपुर, रोड़ा, हरोली, जननी, पोलीया, दुलैहड़, गोंदपुर जयचंद, झुंगिया, सिंगा, बीटन कॉलेज, लालुवाल तक जाएगी और वापसी पर दुलैहड़ से इसी रूट से वापस आएगी। यह टेंपो ट्रैवलर 17 सीटर है और सामान्य बस कराया ही इसमें लगेगा,जो कि कम होगा क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में दूरी कम हो रही है। इस टैंपो ट्रैवलर के चलने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा और आसानी से यात्रा कर पाएंगे। बीटन कॉलेज की छात्र छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा, जो समय पर कॉलेज पहुंच पाएंगे और जो पंजाब से इस कॉलेज में पढ़ने आते हैं, उनके लिए भी राहत भरा सफर होगा। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेश धीमान ने इस टेंपो ट्रैवलर को हरी झंडी देकर रवाना किया। उन्होंने बताया कि यह ट्रेवलर अपना सफर 2 बार करेगी सुबह 7:30 बजे चलेगी और दोपहर को 2:45 पर चलेगी ऊना और वापसी पर यह से दोनों समय चलेगी दुलैहड़ से। इस टैंपो ट्रैवलर सेवा के शुरू होने पर जिला परिषद सदस्य नरेश कुमारी, हरोली कांग्रेस के प्रधान विनोद बिट्टू ,युवा कांग्रेस के अध्यक्ष प्रशांत राय, युवा नेता नीतीश ,महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुमन ठाकुर, ट्रक यूनियन टाहलीवाल के अध्यक्ष सतीश बिट्टू, जोगराज जोगा सहित अन्य कांग्रेस के नेताओं ने उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का आभार व्यक्त किया है।
हिमाचल प्रदेश को नई बसों का फ्लीट मिल रहा है। दो नई यूरो सिक्स बस ऊना डिपो को मिली हैं। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के निर्देश पर मिली यह बस सुविधा अब जल्द ही सड़क पर दिखेगी। 30 सीटर यूरो सिक्स बस को वंदेभारत ट्रेन के साथ जोड़कर चलाने की योजना परिवहन विभाग ने बनाई है। वंदे भारत ट्रेन में हमीरपुर व सुजानपुर से अधिक यात्री रहते हैं। ऐसे में नई 30 सीटर बस को ऊना से सुजानपुर वाया हमीरपुर चलाने का प्रपोजल बनाया गया है। इसके लिए ऊना परिवहन निगम ने परमिट के लिए भी अप्लाई कर दिया है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सुरेश धीमान ने बताया कि 2 बस से मिली है। इन बसों को ऊना- सुजानपुर वाया हमीरपुर रोड पर चलाने की प्रपोजल है। परमिट मिलते ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वंदेभारत ट्रेन के समय के साथ जोड़कर इनको चलाया जा रहा है। एक बस ऊना से सुजानपुर के लिए चलेगी तो दूसरी बस सुजानपुर से ऊना को चलेगी। उन्होंने कहा कि एनआईआईटी के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ होगा। जैसे ही परमिट मिलेगा, उसके बाद बस चलाने की औपचारिकताओं को पूरा कर दिया जाएगा।
खालिस्तान समर्थक पंजाब से भागे अमृतपाल से ताल्लुक रखने वाले कुछ लोगों को हमीरपुर पुलिस ने डिटेन किया हुआ है। उनसे पूछताछ की जा रही है। ये चार युवक बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में पकड़े गए हैं। इन्हें इलाके की विझड़ी स्थित पुलिस चौकी में ले जाया गया है, जहां पर इनसे पुलिस गहन पूछताछ कर रही है। सूत्रों के हवाले से यह पता चला है कि इनका अमृतपाल से करीबी संबंध है और जिस अवस्था में इन्हें पकड़ा गया है, उससे पुलिस को उन पर शक हुआ। गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से हिमाचल पुलिस को मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रखने की विशेष हिदायतें दी गई थीं। बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में पंजाब प्रांत से आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद अच्छी खासी रहती है। शनिवार और रविवार को यहां पर लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसलिए पुलिस ने जगह-जगह नाके लगाकर अमृतपाल के मामले में कड़ी नजर रखी हुई है। आने जाने वाली गाड़ियों और उनमें सवारियों से पूछताछ भी हो रही है। वहीं एसपी डॉ. आकृति शर्मा ने कहा कि चार लोगों को शक के आधार पर पुलिस चौकी पूछताछ के लिए लाया गया था। पूछताछ करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश में ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव से लगातार पुलिस को दोषियों को पकड़ने के लिए कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस की शक्ति कानून व्यवस्था बनाने के साथ-साथ अब अधिकतर नशे के केसों को सुलझाने में उन्हें पकड़ने में लग रही है। हिमाचल प्रदेश को सिंथेटिक ड्रग फ्री कैसे किया जाए, इसके लिए पुलिस यहां सख्त अभियान चला रही है, वहीं नौजवान पीढ़ी को साथ कैसे जोड़ा जाए, इसको लेकर सीआईडी विंग ने एक अभियान तैयार किया है, जिसको "प्रधाव" का नाम दिया गया है। इसके माध्यम से 16 से 25 वर्ष के युवाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाकर इन युवाओं से नशे पर चोट करने के लिए टिप्स भी लिए जाएंगे और इस अभियान को सफल व आकर्षक बनाने के लिए इनाम भी रखे गए हैं। पुलिस ने इसके लिए डेढ़ लाख, 1लाख 75 हज़ार का इनाम रखा है। पुलिस का यह अभियान जिला, रेंज व स्टेट लेवल पर होगा और 26 जून को पुलिस नशा मुक्ति दिवस पर राज्य स्तरीय इनाम देगी। पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने कहा कि यह अभियान सीआईडी में बहुत बेहतर तरीके से तैयार किया है और इसको लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे समाज के बीच से ही टिप्स आएंगे कि कैसे न पर रोक लगाई जा सकती है और यह टिप्स सहायक होंगे नशे के विरुद्ध कारगर कार्यवाही करने के लिए ।उन्होंने कहा कि यह एक बेहतर कंसेप्ट है कि युवा वर्ग को इस में जोड़ा जाए और उनकी राय के साथ आगे बढ़ा जाए। उन्होंने कहा कि आज के समय में ड्रग बहुत बड़ी समस्या हो गई है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि जेल में जितने कैदी बंद हैं उनमें 50% ऐसे कैदी हैं जो नशे को लेकर जेल में है। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में बड़ी तादाद है और यह लगातार बढ़ती जा रही है ,ऐसे में इस पर बहुत तेजी के साथ अंकुश लगे यह प्रयास है। उन्होंने कहा कि कानून को सख्त किया गया है, सजा बढ़ाई गई है ,प्रॉपर्टी को अटैच किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 20 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी को अटैच किया जा चुका है, बावजूद इसके नशे के कारोबारी रुक नहीं रहे हैं ,तस्करी हो रही है, सिंथेटिक ड्रग आ रहा है ,यह अपने आप में चुनौती है और इसमें युवाओं को बचाना बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग एक तो कूल बनने के लिए अपने सर्कल के प्रभाव में नशा कर लेता है फिर उसको इसकी आदत हो जाती है ।दूसरा परिवार का व समाज का एक प्रेशर होता है सफलता का जिस में असफल होने पर दर्द जो नशा एक लत के रूप में लग जाता है ।उन्होंने कहा कि यह दोनों स्थितियां हैं जिसमें युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आता है और अगर समय पर पता ना लगे तो उसे इस दलदल से निकालना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि परिवार की कड़ी बहुत मजबूत होनी चाहिए ,परिवार बेसिक इकाई है, जो युवा वर्ग को नशे के प्रभाव से दूर रखने में मददगार हो सकती है, उनका परिवार आज तालमेल की कमी में है ,जिसके चलते यह समस्या और बढ़ती जा रही है। 14 अप्रैल तक इस अभियान के लिए पंजीकरण किया जा सकता है पुलिस की वेबसाइट पर जाकर के और गूगल पर लिंक दिया गया है जिसके माध्यम से फार्म भरा जा सकता है पंजीकरण होने के बाद अभियान की शुरुआत की जाएगी । अभियान के तहत पांच प्रश्न या थीम रखे गए हैं, इन पर युवाओं को अपने अनुभव से 350 से 500 शब्दों के बीच लिखना होगा और सबसे बेहतर जिसने लिखा होगा उसे पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा। इसमें खास बात यह है कि ओरिजिनल कंटेंट पर फोकस किया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सोलन जिले की उन सभी ग्राम पंचायतों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, जहां उप चुनाव आयोजित होना है। यहां जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त सोलन कृतिका कुलहरी ने दी। कृतिका कुलहरी ने कहा कि इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। आदर्श आचार संहिता प्रथम अप्रैल से चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने तक लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि जि़ला के कुनिहार विकास खंड की ग्राम पंचायत धुन्धन, कोटली, बखालग, डुमैहर तथा समोग, कंडाघाट विकास खंड की ग्राम पंचायत मही, धर्मपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत कसौली गढ़खल, सोलन विकास खंड की ग्राम पंचायत काबाकलां तथा नालागढ़ विकास खंड की ग्राम पंचायत मलहैनी, कोईडी एवं बधोखरी में पंचायती राज संस्थाओं के लिए उप चुनाव आयोजित किया जाना है। उन्होंने जि़ला के सभी उप मंडलाधिकारियों, तहसीलदारों और खंड विकास अधिकारियों को आदर्श आचार संहिता की अनुपालना सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए हैं।
कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र के हरनी छिंज मेले में कुश्ती की बड़ी माली सरवन डेरा बाबा नानक ने जस्सा पहलवान को हराकर जीती। वहीँ छोटी माली विकास ने जीती। विजेता पहलवानों को विधायक पवन काजल ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। बड़ी माली के विजेता को मेला कमेटी द्वारा 21 हजार और छोटी माली के विजेता को 11 हजार रुपये की नकद राशि व स्मृति चिन्ह दिए गए। इस दौरान विधायक पवन काजल ने कहा कि मेले हमारी धरोहर हैं और युवा पीढ़ी का मेलों के आयोजन में योगदान महत्वपूर्ण है। विधायक ने कहा कि मेले हमारी सभ्यता, संस्कृति और आपसी भाईचारे के परिचायक हैं। उन्हाेंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मेलों का आयोजन एक चुनौती बन गया है। बावजूद इसके ग्रामीण स्तर पर मेलों का आयोजन एक सराहनीय ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा मेलों के आयोजन से जहां समाज में भाईचारा बढ़ता है। वहीं, लोगों को ग्रामीण परिवेश की अपनी संस्कृति से रू-ब-रू होने का मौका भी मिलता है। उन्होंने मेला कमेटी को सफल आयोजन के लिए 11 हजार रुपये की राशि भेंट की। हरनी छिंज मेला रवि कांत प्रधान मेला कमेटी नहीं विधायक पवन काजल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और मेला ग्राउंड के विकास के लिए विधायक निधि से धन की मांग रखी। इस मौके पर संजीव, रजनीश कुमार, राजेश कुमार, स्वरूप, कुमार सैनी, अशोक, अजीत, अजय, मदन, देव राज भी उपस्थित रहे।
कांगड़ा : सीवरेज सिस्टम से जुड़ेंगे मटाैर, घुरकड़ी, कच्छियारी, वीरता, जोगीपुर, ललहेड़ व नटहेड़ : काजल
कांगड़ा शहर के साथ लगते लगभग 6 गांवों को 60 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। विधायक प्राथमिकता में शुमार रहे इस कार्य को 4 साल में पूरा किया जाएगा। मटाैर, घुरकड़ी, कच्छियारी, वीरता, जोगीपुर, ललहेड़ व नटहेड़ आदि गांवाें काे इस सीवरेज परियोजना में शामिल किया गया है। इस परियोजना से करीब 25 हजार की आबादी को लाभान्वित हाेगी। यह बात आज स्थानीय विधायक पवन काजल ने पत्रकाराें को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कांग्रेस सरकार के 3 माह के कार्यकाल को हनीमून पीरियड की संज्ञा दी। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान जो 10 गारंटी देने का वादा किया गया था, वह पूरा नहीं हो पाया। महिलाएं 1500 रुपये महीना पेंशन का इंतजार कर रही हैं और युवा स्टार्टअप के लिए सरकार की राह देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिला कांगड़ा प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है, लेकिन इसकी अनदेखी सरकार को महंगी पड़ेगी। उन्होंने कांगड़ा जिला के विधायकों से भी अपील की कि वे जिला की विकास योजनाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि कांगड़ा जिले को तवज्जो मिले। उन्होंने अफसोस प्रकट किया कि कांगड़ा को एक मंत्री ही मिल पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में हालात खराब हैं। डॉक्टरों को स्थानांतरित किया जा रहा है। सुविधाओं का भी अभाव है।
कुनिहार-नालागढ़ मार्ग पर जेपला के पास इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप बेमौसम बरसात की भेंट चढ़ गया। ढलान में आरसीसी डंगे लगाकर मिट्टी से की गई भराई पेट्रोल पंप मालिक को भारी पड़ गई और उसका लाखों रुपये का नुकसान हो गया। पिछले दो-तीन दिनों से क्षेत्र में हो रही बारिश से कुनिहार से करीब 9 किलोमीटर दूर बढलग के पास जेपला में करीब 8 से 10 माह पहले स्थापित किया गया यह पंप धंस गया। इंडियन ऑयल के टैंक मिट्टी धंसने से जमीन से ऊपर निकल आए। अभी भी पंप के साथ लगती जमीन खाई की ओर धंस रही है।
33 केवी सब स्टेशन राजगढ़ में आवश्यक मरम्मत के चलते कल प्रातः दस बजे से सायं छह बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। सहायक अधिशासी अभियंता आदर्श वर्मा ने यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि आवश्यक मरम्मत के चलते 33 केवी मच्छेर, चाड़ना, पनोग व कुपवी में आवश्यक मरम्मत व यंत्रों के निरीक्षण कार्य के चलते इन क्षेत्रों सहित राजगढ़ के आधीन आने वाले 11 केवी राजगढ़, खैरी व हाब्बन क्षेत्रों में भी बिजली बाधित रहेगी
12वीं सब जूनियर राष्ट्र स्तरीय ड्रॉप रोबॉल खेलकूद प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश ने मिक्स डबल में स्वर्ण पदक और सिंगल महिला में सिल्वर मेडल जीता है। वहीँ महिला ट्रिपल में भी हिमाचल ने सिल्वर जीता है। ऑलओवर महिला प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश को दूसरा और सुपर इवेंट एंड सिंगल में हिमाचल प्रदेश को कांस्य पदक मिला है। यह जानकारी हिमाचल प्रदेश टीम के टेक्निकल निर्देशक धनीराम शर्मा ने दी और उन्होंने इस जीत के लिए प्रदेश के ड्रॉप रोबॉल के सभी लोगों को बधाई दी। वहीँ इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ड्रॉप रोबॉल फेडरेशन के महासचिव गोविंद सिंह चाइंक ने हिमाचल प्रदेश ड्रॉप रोबॉल के सभी पदाधिकारियों व खिलाड़ियों को बधाई दी है।
हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा ने रविवार को हमीरपुर में पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा हमीरपुर के लिए बजट में की गई घोषणाओं व अन्य सौगातों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हमीरपुर की चिरलंबित मांग आधुनिक बस अड्डा के लिए बजट में दस करोड़ का प्रावधान किया है। यहां बाईपास पर आधुनिक बस अड्डा बनेगा और अगामी समय में इसके लिए जितने भी बजट की जरूरत होगी, सरकार उपलब्ध करवाएगी। 2 सालों में इस बस अड्डे का कार्य पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हेलिपोर्ट के लिए अमरोह चौक-नेरी रोड किनारे भूमि का प्रावधान कर लिया गया है। यहां से चंडीगढ़ और शिमला के लिए हेलीटैक्सी की सुविधा लोगों को मिलेगी। हमीरपुर में ट्रांसपोर्ट एपिटेट अथॉरटी का प्रदेश स्तरीय कार्यालय खुलेगा। जहां पर ट्रांसपोर्टर्स की समस्याओं व शिकायतों का समाधान किया जाएगा। हमीरपुर के कल्लर या जसौर में डे बोर्डिंग स्कूल के लिए जगह का प्रावधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तलासी गांव के लिए सड़क सुविधा भी जल्द ही दी जाएगी। यह शहीद अमित शर्मा का गांव है और इसे जल्द सड़क से जोड़ा जाएगा। एफआरए और एफसीए के केस अब निर्धारित समयावधि में हल होंगे, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी, जिसके लिए मुख्यमंत्री बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने इन केसों को हल करने के लिए अलग से समिति बनाई है। जो ऐतिहासिक निर्णय मुख्यमंत्री ले रहे हैं, वे प्रदेश को विकास की नई दिशा की ओर लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना, विधवाओं को मकान बनाने के लिए डेढ़ लाख, मेधावी बच्चियों को इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए पच्चीस हजार की सब्सिडी, खिलाड़ियों की डाइट मनी बढ़ाने और गरीब बच्चों को पढ़ाई एक लिए एक फीसदी ब्याज पर राशि उपलब्ध करवाने के निर्णय सराहनीय है। उन्होंने विकास को सौगातें देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है।
प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में अरोमा मिशन पर कार्य करेगी। अरोमा मिशन लैवेंडर की खेती की एक पहल है और यह जम्मू-कश्मीर में किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। हिमाचल प्रदेश में जिला चम्बा सहित कई क्षेत्रों की जलवायु परिस्थितियां जम्मू-कश्मीर के समान होने के कारण प्रदेश सरकार राज्य के कई क्षेत्रों में लैवेंडर की खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने की योजना तैयार कर रही है। सरकार की इस पहल से राज्य के किसानों को आय का एक नया लाभदायक स्रोत प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ अरोमा मिशन के बारे में दूरभाष पर विस्तार से बातचीत की। जनवरी माह में नई दिल्ली में भी मुख्यमंत्री ने डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ इस विषय पर चर्चा की थी। केंद्रीय मंत्री ने इस परियोजना के लिए प्रदेश के किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से लैवेंडर की खेती से किसानों के जीवन में सार्थक बदलाव आएगा। अरोमा मिशन कृषि क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को इस मामले को सम्बंधित मंत्रालय के समक्ष उठाने और परियोजना को जमीनी स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देश दिये हैं। प्रदेश सरकार खेती के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की योजना भी बना रही है। इसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार से तकनीकी मदद प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। केंद्र सरकार राज्य के किसानों और बागवानों के लिए प्रशिक्षण शिविर और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। इससे किसानों को कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों की जानकारी उपलब्ध होगी तथा वह अपनी उपज की गुणवत्ता में सुधार लाकर अधिक आय अर्जित करने में सक्षम होंगे।लैवेंडर की खेती जिसे बैंगनी क्रांति (पर्पल रिवॉल्यूशन) के रूप में भी जाना जाता है, राज्य के किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प साबित हो सकती है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनकर उभरा है। प्रदेश में विभिन्न राजमार्गों के विकास व विस्तार से राज्य की आर्थिकी को बढ़ावा मिल रहा है। विगत एक माह के दौरान प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अंतर्गत राजमार्गों के निर्माण एवं विस्तारीकरण के लिए भू-अधिग्रहण मुआवज़ा के रूप में लोगों को रिकॉर्ड धनराशि वितरित की गई है। इस अवधि के दौरान प्रदेश में 1226 करोड़ रुपये की धनराशि भूमि मुआवजा के रूप में प्रदान की गई है। उपायुक्त कांगड़ा के माध्यम से इस अवधि के दौरान 593 करोड़ रुपये, उपायुक्त हमीरपुर द्वारा 182 करोड़ रुपये, उपायुक्त सोलन द्वारा 32 करोड़ रुपये, उपायुक्त मंडी द्वारा 242 करोड़ रुपये, उपायुक्त शिमला द्वारा 170 करोड़ रुपये और उपायुक्त चंबा द्वारा 7 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि लोगों को वितरित की गई है। भू-अधिग्रहण मुआवज़ा राशि प्रदान करने के मामले लम्बे अरसे से लंबित थे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन मामलों को निपटाने में तत्परता से कार्य करते हुए लोगों को राहत प्रदान की है। इससे प्रशासन में संवेदनशीलता के साथ समयबद्धता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है। प्रदेश की आर्थिकी में एक माह के दौरान 1226 करोड़ रुपये की धनराशि आने से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को भी संबल मिलेगा। इससे हितधारकों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ राज्य में रोज़गार व स्वरोज़गार के जुड़े कार्यों को भी बल मिलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा प्रशासनिक कार्यों को समयबद्ध पूर्ण करने के ध्येय के साथ किए जा रहे प्रयासों से विकास को गति मिली है। व्यवस्था परिवर्तन के साथ-साथ यह वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीटीसीएल) की ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है। शनिवार देर सायं यहां आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉरपोरेशन अपनी टेंडर प्रक्रिया की अवधि को कम कर निर्माण कार्य में तेजी लाये ताकि राज्य को अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त हो सके और लोगों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि राजस्व में बढ़ौतरी के लिए एक तकनीकी कमेटी का गठन किया जाएगा, जो एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तथा वर्तमान राज्य सरकार संसाधन बढ़ाने की दिशा में अनेक प्रयास कर रही है, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एचपीपीटीसीएल की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि कॉरपोरेशन के पास 15 सब स्टेशन तथा 964 सर्किट किमी लाइने हैं तथा अनेक परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में कॉरपोरेशन को 166.99 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई है। वर्ष 2025 तक कॉरपोरेशन की आय बढ़कर 455 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने 6 किलोमीटर शोंगटोंग-बास्पा ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण कार्य को अगले डेढ़ साल तक पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया क्योंकि यह 450 मेगावाट विद्युत निकासी के लिए महत्वपूर्ण है। शोंगटोंग-कड़छम विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य जुलाई, 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस लाईन के निर्माण कार्य में देरी से राज्य के राजस्व को नुकसान होगा, इसलिए कॉरपोरेशन को इस लाईन के निर्माण कार्य को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि एसपीपीटीसीएल भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्य करे। उन्होंने कहा कि जिला ऊना में बनने वाले बल्क ड्रग पार्क तथा लमलैहड़ी और पेखुबेला में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उचित ट्रांसमिशन की व्यवस्था की जाए। इसके लिए नैहरियां से ऊना के लिए 220/132 केवी सब-स्टेशन और 41 किमी ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेशन जिला सोलन के नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क तथा जिला सिरमौर के काला अंब में औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए भी ट्रांसमिशन की उचित व्यवस्था करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार जिला कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए दृढ़ प्रयास कर रही है। इसके साथ-साथ देहरा में केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है और फतेहपुर क्षेत्र में सौर परियोजनाओं के निर्माण की काफी सम्भावनाएं हैं, इसलिए एचपीपीटीसीएल यहां भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ट्रांसमिशन लाइनें बिछानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने में कॉरपोरेशन की भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी अधिकारी सकारात्मक सोच के साथ इसके लिए दृढ़ प्रयास करें। बैठक में मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव वित्त अक्षय सूद, प्रबंध निदेशक एचपीपीटीसीएल ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेला जोगिंद्र नगर की प्रथम सांस्कृतिक संध्या में हारमनी ऑफ पाइन्स पुलिस बैंड सहित प्रदेश के सुप्रसिद्ध गायक इंशांत भारद्वाज, राखी गौतम, मांडव्य कला मंच मंडी के कलाकारों व स्थानीय कलाकारों ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। हालांकि मेले की जलेब के समय मौसम साफ रहा पर जैसे ही सांस्कृतिक संध्या का आगाज़ हुआ रिमझिम बारिश शुरू हो गई। पुराने मेला मैदान में प्रशासन द्वारा बारिश के मिजाज को भांपते हुए वाटर प्रूफ डॉम को भी स्थापित किया गया है, जिसमें बैठकर लोगों ने सांस्कृतिक संध्या का लुत्फ उठाया। हारमनी ऑफ पाइन्स पुलिस बैंड के कलाकारों ने देशभक्ति के गीतों से अपने कार्यक्रम की शुरूआत की तथा उसके बाद पुराने व नए फिल्मी गानों सहित पहाड़ी गीतों द्वारा लोगों का मनोरंजन किया। इसके बाद इंशांत भारद्वाज ने शिवा रे कैलाशा, सिमलो, जिंदड़ी नमाणी, कान्हा री मुरली, बिन्द्रा बणा ओ खेरी गोजरिए व निक्की जिन्नी गोजरी गाकर मेले में आए लोगों को झृूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं, राखी गौतम ने तारे हैं बाराती, तेरी आखया का यो काजल, ले जाएं जाने कहां हवांए, ओ मेरे सोना रे, पतली कमरिया आदि गीत गाकर जनता का भरपूर मनोरंजन किया। मांडव्य कला मंच मंडी के कलाकारों ने मंडी का सुप्रसित्र लोकनृत्य लुड्डी प्रस्तुुत कर दर्शकों को मंत्रमुगध किया। इससे पूर्व दीपिका बंसल, दिनेश गुप्ता व मनीश पराशर व चमन कौशल ने नृत्य तथा सौरभ शर्मा, संदीप शर्मा, सुभाष राणा, संदीप शर्मा, गोपाल सिंह, देवी सिंह ठाकुर, राज कुमार व परीक्षित ने लोगों का मनोरंजन किया।
आनी स्कूलों में बिना शिक्षकोंके बच्चों के बेहतर भविष्य की कल्पना नामुमकिन है। आनी खंड के बहुत से विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के चलते बच्चे व अभिभावक परेशान हैं। ऐसा ही हाल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोठी का है, जहां शिक्षकों की कमी पढ़ाई में बाधा बनती जा रही है। शिक्षकों की कमी से करीब 300 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे कई बच्चें पलायन करने को मजबूर हैं। विद्यालय में हमेशा से ही शिक्षकों की कमी रही है। पूरे टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ़ की तैनाती यहां कभी नहीं हो पाई। यहां प्रधानाचार्य, प्रवक्ता अंग्रेज़ी, हिंदी, इतिहास समेत भाषा अध्यापक, शारीरिक शिक्षक समेत लिपिक, लैब अटेंडेंट के पद खाली चल रहे हैं । एसएमसी अध्यक्ष खेम चंद ने बताया कि विद्यालय जब 2011 में अपग्रेड हुआ, तब से लैब अटेंडेंट का पद नहीं भरा गया, जबकि प्रवक्ता अंग्रेज़ी पिछले 5, इतिहास 6 सालों से खाली है। हिंदी के प्रवक्ता की तैनाती तो हुई लेकिन उनका भी तबादला हो गया। ऐसे में अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि जल्द इन पदों को भरा जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।
भाजपा के पूर्व मंत्री, विधायक और नगर निगम शिमला के चुनाव प्रभारी सुखराम चौधरी ने शिमला नगर निगम चुनावों की दृष्टि से प्रवासी सह प्रभारियों की नियुक्ति की है। इनमें भराड़ी संजीव देष्टा किसान मोर्चा, रुल्दूभट्टा अमर ठाकुर आनी, कैथू रविंद्र चौहान कोटखाई, अन्नाडेल शशि भूषण, समरहिल सुनील ठाकुर संयोजक एनजीओ प्रकोष्ठ, टूटू रतन पाल भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष, मज्याठ गोविंद शर्मा प्रत्याशी अर्की, बालूगंज अशोक ठाकुर, कच्चीघाटी ईश्वर रोहल प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, टूटीकंडी सीमा ठाकुर प्रदेश सचिव, नाभा गगन शर्मा जिला महामंत्री शिमला, फगली कृष्ण वर्मा, कृष्णानगर नंदराम कश्यप सोलन, राम बाजार सुमित शर्मा सह प्रभारी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र, लोअर बाजार राकेश चौधरी प्रत्याशी धर्मशाला, जाखू रवि धीमान प्रत्याशी जयसिंहपुर, बेनमोर पायल वैद्या प्रदेश उपाध्यक्ष, इंजनघर अंकुश चौहान जिला महासू, संजौली चौक रजत ठाकुर प्रत्याशी धरमपुर, अप्पर ढली अजय श्याम प्रत्याशी ठियोग, लोअर ढली कौल नेगी प्रत्याशी रामपुर, शांति विहार छविंदर पाल, भट्टाकुफर उमेश शर्मा मंडल अध्यक्ष जुब्बल कोटखाई, संगटी अमर ठाकुर पूर्व मंडल अध्यक्ष कसुंपटी, मल्याणा बलदेव तोमर प्रदेश प्रवक्ता, पंथाघाटी राजेश कश्यप प्रत्याशी सोलन, कसुंपटी अरुण फाल्टा जिलाध्यक्ष महासू, छोटा शिमला नरोत्तम ठाकुर प्रत्याशी कुल्लू, विकास नगर तिलक राज प्रदेश सचिव, कंगनाधार महिंदर काल्टा, पत्योग शशि दत्त प्रदेश प्रवक्ता, न्यू शिमला बलदेव रांटा मंडल अध्यक्ष रोहडू, खालिणी सुशांत देष्टा और कंलोग शशि बाला प्रत्याशी रोहडू शामिल हैं।
भाजपा मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने कहा वर्तमान सरकार ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी की है और यह एक जनविरोधी फैसला है। उन्होंने कहा कि भाजपा बिजली की दरों में बढ़ोतरी का विरोध करती है। शर्मा ने कहा कि जब विधानसभा चुनाव चल रहे थे तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने जनता को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की गारंटी हिमाचल की जनता के समक्ष रखी थी, पर इस गारंटी की तो हवा निकल गई है और बदले में बिजली की दरों को बढ़ा दिया गया है। पहले सरकार ने डीजल की दरों में 3 रुपये की बढ़ोतरी की थी और अब बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर जनता पर बोझ डालने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंत्री जगत नेगी कह रहे हैं कि इसमें सरकार कुछ नहीं कर सकती, यह रेगुलेटरी कमीशन का फैसला है। लेकिन हम बता दें कि सरकार अपनी ग्रांट देकर जनता को इस बोझ से बचा सकती थी। भाजपा की सरकार के दौरान भी कई बार इस प्रकार की बढ़ोतरी का मामला सामने आया था, पर भाजपा की सरकार ने हमेशा रेगुलेटरी कमिशन को ग्रांट दी है। इससे जनता को राहत मिलती रही है। इस मुद्दे को हम विधानसभा में भी उठाएंगे और इस जनविरोधी फैसले का कड़ा विरोध करेंगे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश प्रभारी सतपाल जैन ने कहा कि राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट के जज ने सजा सुनाई है, इसमें भाजपा या अडानी का कोई भी लेना-देना नहीं है। कहा कि ट्रायल जज ने राहुल गांधी को कोर्ट में तीन बार माफी मांगने का मौका दिया, पर उन्होंने कोर्ट में माफी नहीं मांगी। अगर वह माफी मांग लेते तो आज उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं के खिलाफ भी कोर्ट में केस हुई है और हमारे नेताओं की सदस्यता को भी रद्द किया गया है, पर कोर्ट जाने पर सदस्यता को बहाल भी किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक राहुल गांधी या कांग्रेस के नेता कोर्ट क्यों नहीं गए उन्हें कोर्ट जाना चाहिए था न कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप-प्रत्यारोप लगाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या सोनिया गांधी ने अयोग्य घोषित नहीं किया पर भारत के संविधान ने किया। अगर संविधान के मुताबिक किसी भी कोर्ट में एक व्यक्ति को सजा सुनाई जाती है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान पर सवाल उठाना गलत है, इससे पहले भी कई बार कोर्ट द्वारा नेताओं के खिलाफ निर्णय सुनाए गए हैं। इलहाबाद के एक सिंगल जज की कोर्ट ने सेटिंग प्राइम मिनिस्टर का इलेक्शन सेट एसाइड किया था। सतपाल जैन ने इंदिरा गांधी द्वारा वीर सावरकर के बारे में जो चिट्ठी लिखी थी, उसको भी सार्वजनिक किया और उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस चिट्ठी को पढ़ना चाहिए कि इंदिरा गांधी ने वीर सावरकर के लिए अपनी चिट्ठी में क्या लिखा है।
उच्च न्यायालय के न्यायधीश एस बेदी ने पत्नी के साथ आज प्राचीन व ऐतिहासिक काठगढ़ मंदिर में शिवलिंग के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने पूजा-अर्चना भी की। न्यायधीश ने मंदिर सुधार सभा द्वारा मंदिर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उनके अलावा चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश राजीव शर्मा ने भी मंदिर में माथा टेका। प्रधान ओम प्रकाश कटोच, कार्यालय सचिव जोगिंदर पाल भारद्वाज, सचिव सुरिंदर शर्मा व मैनेजर देवेंद्र गौतम द्वारा उन्हें सिरोपा व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
न्यायालय के आदेशों के बाद जल्दबाजी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करना लोकतंत्र की हत्या है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में जनता के मिले समर्थन से भाजपा बौखला गई है, जिस कारण जल्दबाजी में राहुल की सदस्यता जल्दबाजी में रद्द कर दिया। शनिवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान ब्लॉक कांग्रेस धर्मशाला के अध्यक्ष विनीत धीमान ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की सदस्यता को रद्द करना लोकतंत्र के खिलाफ है। इस दौरान कांग्रेस ओबीसी सेल के प्रदेशाध्यक्ष विक्रम चौधरी ने कहा कि पहली बार हुआ है कि जब संसद में अडानी पर सवाल पूछने पर सत्ता पक्ष को कार्रवाई रोकनी पड़ी। राहुल गांधी ने केवल अडानी कंपनी का लेखा जोखा मांगा था जिस पर सत्ता पक्ष बौखला गया। हिडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया था कि अडानी की कंपनी धोखाधड़ी कर रही है, जिस पर ही संसद में राहुल ने जवाब मांगा था, लेकिन सत्ता पक्ष इसका जवाब नहीं दे पाई। जनता द्वारा लोकतांत्रित तरीके से चुने गए प्रतिनिधि ने सवाल पूछे तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा कि अडानी की प्रधानमंत्री के साथ मित्रता है, लेकिन मित्रता का बोझ देश की साख पर नहीं पडऩा चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 15-15 लाख और रोजगार के नाम पर चुनाव लड़ा गया, उसके बाद धर्म के आधार पर और अब भाजपा जाति के आधार पर चुनाव लडऩा चाहती है। ओबीसी वर्ग को जितने भी लाभ दिए गए हैं, वह कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दिए गए हैं। भाजपा सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
विकास खंड कांगड़ा के तहत पड़ते गांव पैहग में आज दाे दिवसीय चफड़ छिंज मेले का समापन हाे गया। जानकारी देते मेला कमेटी प्रधान सुनील दत्त ने कहा कि गांव पैहग में दाे दिसवीय चफड़ छिंज मेला का आयाेजना 30 व 31 मार्च काे किया जाता है, मगर 31 मार्च काे भारी बारिश के चलते छिंज मेले काे स्थगित कर दिया था, जिसका आयाेजन आज पहली अप्रैल काे किया गया। इस माैके पर भाजपा प्रदेश सचिव वीरेंद्र चाैधरी, जिला परिषद अध्यक्ष रमेश बराड़, जिला परिषद सदस्य कुलभाष चौधरी आदि ने बताैर मुख्यातिथि शिकरत की। मेला कमेटी के प्रधान सुनील दत्त ने उपस्थित आतिथियाें काे पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यातिथियाें ने कहा कि मेले हमारी सभ्यता, संस्कृति और आपसी भाईचारे के परिचायक हैं। उन्हाेंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मेलों का आयोजन एक चुनौती बन गया है। बावजूद इसके ग्रामीण स्तर पर मेलों का आयोजन एक सराहनीय ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा मेलों के आयोजन से जहां समाज में भाईचारा बढ़ता है। वहीं, लोगों को ग्रामीण परिवेश की अपनी संस्कृति से रू-ब-रू होने का मौका भी मिलता है। इस मौके पर जिला परिषद अध्यक्ष रमेश बराड़, जिला परिषद सदस्य कुलभाष चौधरी, भाजपा नेता वीरेंद्र चौधरी, मेला कमेटी प्रधान सुनील दत्त, राकेश कुमार व जसवीर चौधरी सहित सभी मेला कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त यूनुस ने आज यहां बताया कि विभाग ने वित्त वर्ष 2022-23 में 5130 करोड़ रुपये के राजस्व एकत्रित करने के लक्ष्य को पार कर इस अवधि के दौरान 19 प्रतिशत वृद्धि के साथ 5343 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जो 2021-22 की तुलना में 846 करोड़ अधिक है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष जीएसटी संग्रह में यह शानदार वृद्धि विभाग द्वारा कड़ी सर्तकता और कर अधिकारियों की कार्यकुशलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रिर्टन फाईलिंग में सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा जांच एवं निगरानी में दक्षता से 13 लाख ई-वे बिल सत्यापित किए हैं। ई-वे बिल के सत्यापन से 8 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर प्राप्त किए गए हैं। विभाग ने वर्ष के दौरान विभिन्न आयामों को पार करते हुए 400 अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने नियमों के अनुपालन में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की है। इन उपायों से रिटर्न फाइलिंग और रिटर्न जांच में सुधार हुआ है। राज्य मुख्यालय ने जीएसटी से जुड़े 257 करोड़ रुपये के 89 मामलों का पता लगाया है। उन्होंने बताया कि विभाग अपने प्रदर्शन में और सुधार करने की दृष्टि से रिटर्न फाइलिंग, रिटर्न की त्वरित जांच, जीएसटी ऑडिट को समय पर पूरा करने और कर अधिकारियों की क्षमता निर्माण के लिए निरन्तर प्रयास करता रहेगा।
प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला द्वारा घोषित बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के नतीजों में लॉर्ड महावीरा नर्सिंग संस्थान की बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष की छात्रा सोनिया ने 700 में से 617 अंक लेकर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसी तरह अंकिता नड्डा ने 700 में से 612 अंक लेकर प्रदेश में दूसरा स्थान, वर्षा ने 601 अंक लेकर प्रदेश में सातवां और आंचल शर्मा ने 598 अंक लेकर प्रदेश में दसवां स्थान हासिल किया है। इसके अलावा गत दिवस हिमाचल प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल शिमला द्वारा घोषित जीएनएम द्वितीय वर्ष के नतीजों में भी लॉर्ड महावीरा नर्सिंग संस्थान की छात्रा अंजलि ने प्रदेश में 600 में से 558 अंक लेकर सातवां स्थान हासिल किया। संस्थान के चेयरमैन डॉ. अजीत पाल जैन, डॉक्टर आशिमा जैन, संस्थान की प्रिंसिपल डॉक्टर संतोष शर्मा और वाइस प्रिंसिपल एन चंद्रलेखा ने छात्राओं की इस उपलब्धि पर उनको और उनके अभिभावकों को बधाई दी। संस्थान के चेयरमैन डॉ. अजीत पाल जैन ने बताया कि संस्थान की छात्राएं हर वर्ष पूरे प्रदेश में अव्वल रहती हैं। पिछले 4 साल में संस्थान की करीब 50 छात्राएं देश के सबसे बड़े संस्थान एम्स में अपनी सेवाएं दे रही हैं, जो बहुत ही गर्व की बात है। संस्थान की छात्राएं लगातार इसी तरह प्रदेश का अपने संस्थान का और अभिभावकों का नाम रोशन करती रहें, ऐसी हम कामना करते हैं।
डीएवी कॉलेज कांगड़ा के लोअर गर्ल्स हॉस्टल में आज अंतिम वर्ष की छात्राओं के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इसमें नैंसी शर्मा को मिस फेयरवेल, प्रिया को मिस चार्मिंग और छवि को मिस पर्सनैलिटी के खिताब से नवाजा गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिंदु पटियाल ने शिरकत की। इसके अतिरिक्त न्यू बॉयज हॉस्टल के चीफ वार्डन डॉ. नरेश शर्मा तथा डॉ. यांचन डोलमा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। हॉस्टल में पहुंचने पर चीफ वार्डन प्रो मंजू पार्ती ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि का पुष्पगुच्छ प्रदान करके औपचारिक स्वागत किया। समारोह के दौरान छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि ने सभी छात्राओं को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की और कहा कि छात्रावास के जीवन से भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में प्रेरणा मिलती है। इसके साथ ही प्रो मंजू पार्ती और डॉ. नरेश शर्मा ने भी छात्राओं को आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को उनके जन्मदिवस की बधाई दी। उन्होंने राज्यपाल के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। इस अवसर पर, लेडी गर्वनर जानकी शुक्ल भी उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री के साथ लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और स्थानीय विधायक हरीश जनारथा भी उपस्थित रहे। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य गणमान्य लोगों ने दूरभाष से राज्यपाल को शुभकामनाएं दीं। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी राज्यपाल से भेंट कर उन्हें जन्मदिवस की बधाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि शिव प्रताप शुक्ल दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वह इसी समर्पण भाव से समाज, प्रदेश और देश की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने ईश्वर से उनकी दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की है। इससे पहले, राज्यपाल ने प्रातः राजभवन में अपने परिवार के सदस्यों के साथ यज्ञ किया और राजभवन परिसर में पारिजात एवं अन्य प्रजाति के पौधे रोपे। उन्होंने राजभवन के कर्मचारियों सहित दीप जलाकर अपना जन्मदिवस मनाया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। राज्य के बागवानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने आज यहां हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम के नेतृत्व में ठियोग विधानसभा क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सीए स्टोर स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए हैं, ताकि बागवानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके और उन्हें बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके। इसके अलावा सेब आधारित डिस्टिलरी स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि बागवान कम गुणवत्ता वाले सेबों को भी बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत इस बार प्रदेश सरकार ने ग्रीन बजट प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि बजट में ई-बस, ई-ट्रक और ई-टैक्सी की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है तथा 250 किलोवाट से 2 मैगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने पर 40 प्रतिशत अनुदान देने का भी प्रावधान किया गया है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कृषि, मत्स्य पालन और बागवानी क्षेत्रों के लिए बैंक किसानों को उदारतापूर्वक ऋण उपलब्ध करवाए, ताकि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में 7000 एकल नारियों को आवास निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया है। इसके अलावा मेधावी गरीब विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण भी उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रदेश सरकार ने राजस्व में बढ़ौतरी के लिए शराब की दुकानों की नीलामी की और राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं पर जल उपकर लगाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार में पार्टी कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान दिया जा रहा है और ठियोग क्षेत्र को विशेष अधिमान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह राठौर ठियोग विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। ठियोग के देवेंद्र श्याम को हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि इसी विधानसभा क्षेत्र के केहर सिंह खाची को वन विकास निगम का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम ने उन्हें बैंक का अध्यक्ष नियुक्त करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करेंगे।


















































